A wedding ceremony in village - Page 19 - SexBaba
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A wedding ceremony in village

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भूरा ने छोटू को इशारा करा की वो गेट के बहार जाकर पहरा की कही कोई इधर आ न जाए अचानक से क्युकी वो समझ गया था की अब यहाँ मौजूद मर्दो में से कोई भी नेहा को अच्छे से रगड़ के चोदे बिना नहीं रुकने वाला और ये चुदाई का खेल काफी लुम्बा चलने वाला है, ऐसे में अगर कोई अंदर की आवाज़े सुनकर गलती से इधर आ गया तो उनकी खैर नहीं, क्युकी भले hi नेहा खुद से यहाँ आई और यहाँ जो भी हो रहा कही न कही उसकी खुद की मर्ज़ी से हो रहा पर है तो वो शादी में आई एक मेहमान और यहाँ सब नौकरो को hi गलत मानेगे इसलिए फॉर थे सेफ्टी भूरा ने छोटू को बहार पहरा देने के लिए भेज दिया. हलाकि छोटू का मन तो नहीं था पर वो उन्हें मन भी नहीं कर सकता था वर्ण नेहा के साथ साथ उसकी भी गांड मर ली जाती इसलिए मन मसोस कर चुपचाप बहार चला गया. अब अंदर कमरे में 10 लोग एक नेहा और 9 मर्द जिनमे जिसका नंबर पहला था और फिलहाल नेहा जिसका लुंड मसल रही थी वो थो पहलवान जोगिन्दर.

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जोगिन्दर का झटके खता नंगा लुंड नेहा की छोटी छोटी हथेलियों में बड़ा आकर्षक लग रहा था. नेहा की हथेलियों उसके लुंड की नुस नुस को छूकर उत्तेजित कर रही थी. शायद नेहा खुद भी हद से ज्यादा उत्तेजित थी क्युकी उसने आज तक जितने भी लुंड अपने अंदर लिए उनमे ये सबसे बड़ा था.

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जोगिन्दर के अंदर की हवस की आग भी पूरी तरह चरम भिण्डू पर पहुंच चुकी थी और फाइनली उसके अंदर का डोमिनेटिंग मर्द बहार आ hi गया जिसे औरत पर हावी होने में hi मज़ा अत है. जोगिन्दर ने नेहा के बालो को अपनी मुट्ठी में भींच लिया और उसके चेहरे को आगे करके अपने होठो को उसके होठो पर रख दिया और जानवरो की तरह उसके होंठो को चूमने लगा.

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एक पहलवान से आप फ्रेंच किश की उम्मीद तो नहीं कर सकते उसकी किश में भी उसका पहलवानी स्वाभाव साफ़ नज़र आ रहा था. नीचे उसने नेहा की एक तंग उठाकर अपनी कमर में लपेट ली जिससे नेहा की छूट की दरार पूरी तरह खुल के सामने आ गई. जोगिन्दर का झटके खता लुंड नेहा की छूट की दरार में यहाँ वह टच कर रहा था जैसे अंदर घुसने का रास्ता खोज रहा हो. सब दिल थामे जोगिन्दर के लोडे के नेहा में बुर में दाखिल होने का इंतज़ार कर रहे थे. जोगिन्दर भी ज्यादा फोरप्ले करने वाला मर्द नहीं था उसे सेक्स में मज़ा लेना नहीं अत था उसे तो केवल औरत की बुर को अपने मूसल लुंड से पेलना hi अत था फिर चाहे वो गांव की कोई देहाती औरत हो या नेहा जैसी हाई क्लास शहरी मॉडर्न बेब. उसके लिए तो चुदाई का मतलब बस इतना था की बुर में लुंड पेल कर तब तक धक्के पे धक्के मरे जाए जब तक बुर का भोसड़ा न बन जाए.

जोगिन्दर ने अपना हाथ नीचे लेजाकर अपना मोटा लुंड नेहा की छोटी सी छूट की दरार के मुहाने पर सेट करा और अपनी कमर से आगे की तरफ एक इतना ज़ोरदार धक्का मारा की एक hi धक्के में उसका मूसल पहलवानी लुंड नेहा की बुर की दीवारों को चीरता हुआ आधे से ज्यादा अंदर चला गया. एक पल को तो नेहे भी दर्द से बिलबिला उठी पर वो जोगिन्दर की बहो में इस कदर जकड़ी हुई थी की और नशे में इस कदर सराबोर थी की धीमे धीमे उसका दिरद कम हो गया. इसके बाद जोगिन्दर ने एक और झटका मारा और बचा हुआ लुंड भी नेहा की छूट के अंदर दाखिल कर दिया. नेहा की कराह निकली पर वो कराह भी जोगिन्दर के मुँह के अंदर hi घुट कर रह गई. नीचे जोगिन्दर ने धक्के पे धक्के मरना शुरू कर दिया.

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कमरे के बीचो बीच नेहा जोगिन्दर का चुदाई का खेल चालू हो चूका था. और इस खेल में बस वो दो hi शामिल नहीं थे बल्कि वह मौजूद बाकि मर्द भी शामिल हो चुके थे. सभी अपने लुंड को मसलने में लगे थे. किसी ने खुलेआम अपना लुंड बहार निकल लिया था जैसे भोला और भूरा तो पंत के ऊपर से hi उसके उत्तेजना को ठंडा करने में तल्लीन था तो कोई जो थोड़ा शर्म लिहाज वाला था वो चुपके से सबसे नज़र बचा कर पंत या धोती के अंदर हाथ डालकर अपने लुंड की गर्मी को शांत कर था. पर हालत सबकी एक सामान थी सभी अपने अपने खयालो में नेहा को छोड़ने में लगे थे.

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नेहा पूरी तरह जोगिन्दर की बहो में झूल रही थी और जोगिन्दर की कमर लगातार आगे पीछे होते हुए तेज़ तेज़ धक्के मार रही थी, उसका लुंड नेहा की बुर की फको में रगड़ खता हुआ तेज़ तेज़ अंदर बहार हो रहा था. और उसके होंठ नेहा को होंठो को जकड़े हुए थे. जितनी तेज़ गति से जोगिन्दर की कमर चल रही थी उतनी hi तेज़ गति से वह कई लगो के हाथ चल रहे थे अब कहा चल रहे थे ये बताने की ज़रूरत नहीं वही जहा इस वक़्त आप सबके चल रहे है. कई लोग जो नेहा की छूट में झड़ना चाहते थे खुद पर काबू करे हुए थे पर कुछ लोग जिनके लिए सामने चल रही चुदाई काफी उत्तेजनापूर्ण थी उनके लुंड बिना मज़ा लिए hi झड़ने के करीब आ गए थे उन्हीमे से एक थे रामु काका और दुसरे थे घनश्याम उन्हें पता भी नहीं चल की कब उनकी धोती और पतलून आगे से गीली हो गई, वो इस इरोटिक चुदाई को बर्दाश्त नहीं कर पाए और उनके अपने हाथो ने hi मसल मसल कर उनके लुंड की स्खलित होने पर मजबूर कर दिया. पर अब अपना माल निकलने के बाद उन्हें संतुष्टि तो मिल गई उनकी हवस की आग भी शांत हो गई पर अब उन्हें अफ़सोस भी हो रहा था की जो माल वो नेहा की छूट के अंदर निकल सकते वो माल उनका यही बर्बाद चला गया और अब इस अधेड़ उम्र में दुबारा लुंड से खड़ा होने की उम्मीद करना बेमानी सा है. पर अब वो कुछ नहीं कर सकते थे उनके लुंड बिना नेहा को चोदे hi सुषुप्त अवस्था में जा चुके थे.

इधर जोगिन्दर के धक्के लगातार बिना रुके जारी थे. नेहा भी जोगिन्दर के धक्को के साथ रीतुम मिलते हुए अपनी कमर हिला रही थी. जोगिन्दर के लुंड की नसे पूरी तरह फूल चुकी थी जो इस बात का संकेत था की उनके अंदर का वीर्य उसके लुंड के मुहाने तक पहुंच गया है. और अगले hi पल वो वीर्य जोगिन्दर के लुंड से निकल कर नेहा की छूट के आखिरी छेड़ से होता हुआ उसकी बच्चेदानी तक जाने लगा. नेहा और जोगिन्दर दोनों के शरीर शिथिल पद गए. जो गर्मी जो तूफ़ान उनके बदन में भरा हुआ था वो जोगिन्दर के गाड़े वीर्य के साथ साथ नेहा के अंदर समता चला गया. बाकि सब भी समझ गए थे की पहलवान ने इस लौंडिया को पूरी तरह पेल कर अपना माल उसके अंदर छोड़ दिया है और अब जल्द hi उन सबका नंबर भी आने वाला है. आज की चुदाई का ये पहला सेशन समाप्त होने के बाद जोगिन्दर ने नेहा को खुद से अलग करा और उसका लुंड भी सिकुड़ कर नेहा की छूट से बहार आ गया. पर सिकुड़ने मुरझाने के बाद भी उस पहलवान का लुंड अच्छे अच्छे मर्दो के उत्तेजित लुँडो से ज्यादा बड़ा था उस नेहा की छूट का पानी और जोगिन्दर के निकले माल का मिक्सचर लिस्ट हुआ था.

सब समझ रहे थे की शायद अब ये नेहा को हमारे लिए छोड़ कर पीछे हैट जाए पर अभी जोगिन्दर का मन पूरी तरह नहीं भरा था अभी एक चीज़ और थी जो इसे करनी थी जो वो उस दंगल वाले दिन विनीता के साथ नहीं कर पाया था जिस बात की खिसियाहट उसे अब भी थी और उसकी कसक वो आज नेहा के साथ पूरी करने वाला था. उसने नेहा को अपने सामने घुटनो के बल बिठा लिया, नेहा के सर को बालो से पकड़ कर खींचा और अपना वीर्य से सराबोर लुंड नेहा के होंठो पर रख दिया. नेहा भी कोई ऐसी लड़की तो थी नहीं जिसके लिए ये सब एकदम नया हो वो भी जोगिन्दर का इशारा समझ गई की वो क्या चाहता है. नेहा ने बड़ी ऐडा के साथ अपनी जीभ बहार निकली और जोगिन्दर के लुंड को ऊपर से नीचे तक चेतना शुरू कर दिया.

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बाकि मर्दो को अपनी आँखों पर यकीन नहीं हो रहा था की नेहा अंदर से इतनी ठरकी है की लुंड पर लगी गंदगी चाटने में भी उसे मज़ा आ रहा है. रामु काका जो बेचारे नेहा को छोड़ने का अरमान लिए अपनी धोती में hi झाड़ गए थे उन्हें मन hi मन थोड़ा गुस्सा भी आ रहा था की उस दिन किचन में इसने मेरा लुंड तो मुँह में लेने से साफ़ मन कर दिया था और यहाँ देखो कैसे इस पहलवान का लुंड चाट चाट कर साफ़ कर रही है.

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नेहा ने जोगिन्दर का लुंड चाट चाट कर पूरी तरह साफ़ कर दिया था और सबको लगा की शायद अब जोगिन्दर पीछे हैट जाए पर नहीं जोगिन्दर ने नेहा के गलो को हलके से दबाया अपना लुंड नेहा के खुले होंठो के अंदर दाल दिया. नेहा को भी लगा की शायद ये पहलवान चाहता की मई इसका लुंड मुँह में लेकर चूसो. लुंड चूसने नेहा के लिए कोई नै बात तो थी नहीं इसलिए उसने भी जोगिन्दर के लुंड को चूसना शुरू कर दिया, पर उसे झटका तब लगा जब उसे अपने मुँह में कुछ गरम गरम पानी अपने हलक में नीचे उतरता हुआ महसूस हुआ. नेहा को ये समझने में ज़रा भी देर न लगी की ये क्या है, जोगिन्दर नेहा के मुँह के अंदर मूट रहा था. नेहा ने जोगिन्दर को पीछे धकेलने की कोशिश करि पर जोगिन्दर नेहा के इस तरह के रिएक्शन के लिए पहले से तैयार था उसने नेहा के सर कास कर अपने लुंड पर भींच दिया ताकि वो अपना मुँह पीछे न कर सके. नेहा जोगिन्दर को पीछे धकेलने की कोशिश कर रही थी पर कहा नेहा जैसी दुबली पतली लड़की और कहा जोगिन्दर जैसा हत्ता कट्टा पहलवान, इसलिए मजबूरन नेहा को उसकी पेशाब पीने को मजबूर होना पड़ा. वह मौजूद लोगो को भी यकीन नहीं हो रहा था की जोगिन्दर नेहा जैसी हाई क्लास लड़की को अपनी पेशाब पीला रहा है पर कही न कही ये उनकी हवस को और भड़का रहा था.

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दूसरी तरफ जोगिन्दर दंगल वाले दिन लखन सिंह के ज़बरदस्त डाव पेंचो की वजह से विनीता को अपनी पेशाब नहीं पीला पाया था और अपने से ज्यादा उम्र के बुड्ढे आदमी से हार जाने की वजह से पुरे गांव के सामने उसकी बेज़्ज़ती भी हुई थी जिसका सारा बदला आज नेहा से ले रहा था उसे अपनी पेशाब पीला कर. कुछ देर नेहा ने भी विरोध करा पर फिर आखिरकार उसने भी हथियार दाल दिए. जोगिन्दर का बदबूदार मूट नेहा के हलक से होता हुआ नीचे जा रहा था. पता नहीं कितना पेशाब भरा था जो ख़तम होने का नाम hi नहीं ले रहा था. पर कुछ देर बाद नेहा के मुँह पेशाब आना बंद हो गया, जोगिन्दर ने भी उसके सर पर अपने हाथो की पकड़ ढीली कर दी. शायद उसका पेशाब ख़तम हो चूका था. नेहा ने गहरी सास लेते हुए हफ्ते हुए अपना चेहरा पीछे कर लिया उसके मुँह में अब भी जोगिन्दर का थोड़ा पेशाब भरा हुआ था जो उसके होंठो से बहकर बहार आ रहा था. उसे लगा की अब जो होना था हो गया पर नहीं जैसे hi उसने जोगिन्दर को देखने के लिए अपना चेहरा ऊपर करा जोगिन्दर के लुंड से पेशाब की एक तेज़ मोती धार नेहा के डायरेक्ट चेहरे पर पड़ी और उसके चेहरे को भिगोती हुई वो नीचे उसके बदन को भिगोने लगी.

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नेहा को यकीन नहीं हुआ की अभी भी जोगिन्दर ने अपना पेशाब बचा कर रखा था उसे भिगोने के लिए. नेहा ने उठने की वह से हटने की कोशिश करि पर जोगिन्दर ने उसे कंधे से दबा कर उठने hi नहीं दिया और अपना लुंड हिला हिला कर अपने पेशाब की धार से नेहा के पुरे बदन को तर बतर कर दिया. नेहा जैसी हाई क्लासी मॉडर्न लड़की एक देहाती पहलवान की पेशाब से नाहा रही थी ये दृश्य अपने आप में बेहद कामुक और उत्तेजनापूर्ण था. नेहा ने अब अपने आप को पूरी तारा जोगिन्दर के हवाले कर दिया की बेवाज की माज़ीहत से कोई फायदा नहीं वो करेगा वही जो उसे करना है. जोगिन्दर ने अपने लुंड की पूरी पेशाब नेहा के बदन पर खली कर दी. नेहा जो कुछ देर पहले उस रेड ड्रेस और भड़कीले मेकअप में बड़ी हुस्नपरी सी लग रागी थी अब उस कमरे के बीचो बीच एक गवर देहाती पहलवान के पेशाब से नहीं हुई बैठी हुई थी. जोगिन्दर ने अपना पूरा मज़ा ले लिया उसे नेहा को फिलहाल जितना भोगना था जितना रगड़ना था उसने भोग और रगड़ लिया था इसलिए नेहा को छोड़ने उसे अपना मूट पिलाने और उससे नहलाने के बाद वो नेहा को वही फर्श पर बैठा छोड़कर अपने बिस्तर पर वापस चला गया और चद्दर ोड कर लेट गया जैसे एक ग्राहक किसी बाज़ारू रंडी को छोड़ने के बाद कमरे से बहार चला जाता है. मतलब काम ख़तम पैसा हज़म.

पर क्या वाकई काम ख़तम पैसा हज़म हो गया था जी नहीं ये तो तो नेहा के इस कनही के बिग्गेस्त फंतासी अपडेट की शुरुआत भर थी अभी तो सिर्फ एक मर्द ने नेहा को रगड़ा था अभी तो बाकि कई मर्द क़तर में खड़े थे और आज की रात नेहा के लिए बहुत लुम्बी होने वाली थी.
 
नेहा गैंगबैंग

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जैसे शेरो के झुण्ड में जब शिकार होता है तो सबसे पहले झुण्ड का मुखिया उस शिकार का अच्छे से भोग लगता और बाकि सरे झुंड के छोटे शेर बस उसे ऐसा करते देखते रहते है इस उम्मीद में की कब उसका मन भर जाए और वो ये शिकार उनके लिए छोड़ दे ताकि वो भी अपनी अपनी भूक शांत कर सके वैसे hi जब तक जोगिन्दर नेहा को छोड़ रहा था बाकि सभी नौकर उसे ललचाई नज़रो से ऐसा करते देख रहे थे और उम्मीद कर रहे थे की कब वो नेहा से अलग हो ताकि वो भी नेहा के जिस्म से अपनी अकनि हवस की आग को शांत कर सके. नेहा को अच्छे से भोगने छोड़ने और शहरी अप्सरा को अपनी पेशाब से नहलाने के बाद जोगिन्दर तो वापस अपनी जगह पर जाकर चद्दर तन कर सो गया जो ये सिग्नल था की झुण्ड के राजा की भूक शांत हो चुकी है और अब वो शिकार (नेहा) उन बाकि लोगो के लिए खुला है.

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जोगिन्दर के हटने की देरी भर थी की भोला, घनश्याम, कन्हैया, हरबक्स, कल्लू और भूरा नेहा के ऊपर टूट पड़े. ऐसा नहीं था की नेहा को इससे कुछ प्रॉब्लम थी वो थो खुद इसीलिए यहाँ आई थी उसके लिए तो ये उसकी एक नै फंतासी थी पर ये उसके लिए भी एक नया एक्सपीरियंस था अपना गैंगबैंग करवाना वो भी गाँव के इन देहाती हसद नौकरो के हाथो जिन्हे कामुक रोमांस का अबकड भी नहीं पता. दुबली पतली नेहा उन जंगली देहातियों के बीच ऐसी लग रही थी जैसे कोई नाज़ुक सी हिरणी लकड़बग्घों के झुंड में फंस गई हो वो अलग बात है की ये हिरणी तो खुद से आई थी इन लकड़बग्घों के बीच. जिसे नेहा के नंगे बदन में जो जगह मिल रही थी वो चूम चाट रहा था.

सर्वेन्ट्स बाथरूम में नेहा की गांड मरने वाला भूरा एक बार फिर नेहा की गांड और चूतड़ काटने चाटने लगा. नेहा की चड्डी उतरने वाला हरबक्स जो नेहा की चड्डी से अति महक से hi मदहोश हो गया था उसने इस बार सीधा अपनी नाक नेहा की छूट पर रख दी उसकी भीनी भीनी खुशबू को सूंघने लगा. भोला को तो हमेशा से नेहा के होंठ चूमना hi पसंद था तो उसने इस बार भी नेहा के होठो पर कब्ज़ा कर लिया और उसे इस जंगली तरीके से चूमने लगा की नेहा से सांस लेना भी मुश्किल हो रहा था. जंगल में नेहा के कदमो को चाटने वाला कल्लू एक बार फिर नेहा के पैरो के पास आकर बैठ गया और उसके पैरो को तलवे से लेकर जांघो तक अपने थूक से गीला करने लगा. घनश्याम और कन्हैया ने नेहा के एक एक स्तन पर धावा बोल दिया था और उसे जीभ से छेड़ते हुए चूस और चाट रहे थे. छोटू से अपना लुंड चुसवाने वाले रामु काका आज अपना लुंड इस शहरी अप्सरा से चुसवाना चाहते थे पर इस वक़्त नेहा के होंठो के ख़ज़ाने पर तो भोला नाम के कालिया नाग ने कब्ज़ा कर रखा था जो फिलहाल तो बिलकुल भी हटने को तैयार नहीं था इस लिए वो अपनी धोती खोलकर कच्चे के ऊपर से hi अपना लुंड सहलाते हुए नेहा के सिरहाने पहुंच गए और नेहा का हाथ उठाकर अपने कच्चे के अंदर दाल लिया, नेहा को भी जब अपने हाथो में किसी के लुंड का एहसास हुआ तो इतने लोगो के बीच दबी होने की वजह से उसे ये तो समझ नहीं आया की ये कौन है पर जो भी है नेहा ने उसे निराश नहीं करा और अपने मुलायम नाज़ुक हाथो से रामु काका के लुंड को रगड़ना आगे पीछे करना शुरू कर दिया.

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एक अकेली नेहा एक साथ 7-7 मर्दो के साथ हवस का खेल खेल रही थी और अपनी कामुकता से उसने इन सातो मर्दो को उत्तेजना से सराबोर कर दिया था. और सिर्फ सात कहना ठीक नहीं था क्युकी कमरे के कोने में खड़े इन नौकरो में सबसे शरीफ और सीधेसादे गोपी काका का तना हुआ पजामा उनकी उत्तेजना की गवाही दे रहा था. बस बेचारा छोटू hi था बहार खड़ा पहरा दे रहा था की पर उसे ख़ुशी भी थी जो कुछ अभी अंदर हो रहा है वो तो वो सब पहले hi कर चूका है, इस तरह से अगर देखा जाए तो नेहा को भोगने के मामले में वो इन सभी नौकरो में सबसे सीनियर था. पर उस दिन नेहा के कमरे में उसके और नेहा के बीच जो कुछ हुआ था वही सब याद करते करते उसके हाथ भी बरबस अपनी जांघो के बीच के हथियार पर पहुंच गए और वो भी असंख्य बंद करके नेहा को इमेजिन करते हुए चरमसुख प्राप्त करने की तरफ बढ़ने लगा.

इस तरह नेहा एक साथ एक hi वक़्त में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से 9-9 मर्दो को चरमसुख की तरफ ले जाने का रीज़न बन गई थी, पर सिर्फ ये 9 मर्द hi क्यों वो सरे मर्द भी गईं ले जो इस अपडेट को पड़ते हुए नेहा को इमेजिन करते करते हुए अपना अपना हथियार मसल रहे होंगे, उनकी उत्तेजना की वजह भी तो नेहा hi थी.

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काफी देर यही नेहा के बदन के अलग अलग हिस्सों से खेलने के बाद फाइनली भूरा ने सबको अलग हटाकर नेहा को उनकी पकड़ से आज़ाद करा पर उसे आज़ाद करने के लिए नहीं बल्कि इस हवस के खेल को नेक्स्ट लेवल पर ले जाने के लिए. उसने नेहा को घोड़ी की पोजीशन में झुका दिया ऐसा करते hi नेहा के बदन में उसका फेवरेट हिस्सा भूरा के सामने पूरी तरह खुल गया यानि नेहा की गांड का छेड़. अब इन नौकरो के सामने शर्माने से कोई फायदा नहीं था और एक एक करके नेहा को भोगने को भी तैयार नहीं होने वाला क्युकी सबको जल्द से जल्द नेहा को भोगना था. इसलिए भूरा ने बाकि नौकरो को इग्नोर करते हुए सीधा अपना पंत और चड्डी नीचे सरका दी. ऐसा करते hi भूरा का लुंड फनफनाता हुआ बहार आ गया. बेशक भूरा का लुंड जोगिन्दर जितना बड़ा नहीं था पर फिर भी काफी बड़ा और मोटा था.

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बाथरूम वाली घटना के बाद आज एक बार फिर नेहा की गांड भूरा के सामने थी और उसके लुंड को अपनी गांड की गहराई समां जाने को आमंत्रित कर रही थी. भूरा ने भी बिना देर किये इस निमंत्रण को स्वीकार करते हुए अपना लुंड नेहा की गांड के छेड़ पर और एक hi ज़ोरदार धक्के में आधे से ज़ादा लुंड नेहा की गांड के अंदर उतर दिया. नेहा की तो चीख hi निकलने वाली थी पर रामु काका ने हाथ बढ़ाकर उसका मुँह बंद कर दिया.

रामु : अबे ी भूरा आराम से कर देखता नहीं इतनी दुबली पतली है और तूने एक hi बार में अपना मुसल इसके पिछवाड़े में उतर दिया. सोचना तो चाहिए की ये शहरी छोरी इसे झेल भी पाएगी की नहीं.

भूरा : अबे ू बूड़ौ मुझे न बताओ की मुझे क्या करना है और कैसे करना है, जिस शहरी छोरी की बात कर रहे हो वो कई दिन पहले hi मेरा पूरा लुंड अपनी गांड में ले चुकी है अभी तो उसका सीजन 2 चल रहा है.

रामु : क्या कहा तू पहले भी इसकी गांड मार चूका है. (हैरानी से नेहा को देखते हुए)

नेहा ने भी भूरा की बात सुनकर रामु काका की तरफ देखते हुए सहमति में अपना सर हिला दिया. जितना हैरान रामु काका थे उससे भी ज्यादा हैरान तो कल्लू था जो अब तक यही समझ रहा था की अब तक वही इस शहरी अप्सरा के इतने करीब जा पाया था पर भूरा के गांड मरने वाली बात पता चलते hi उसका सारा भरम टूट गया.

रामु : साली ये तो पूरी छिनार है जाने किस किसका लुंड ले चुकी है. साली ने रसोई में मेरा लुंड मसल मसल कर धोती में hi मेरा पानी निकल दिया था. तभी से सोच लिया था की एक बार अपना ये पानी इसके मुँह के अंदर निकलूंगा.

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अब तो कल्लू को काटो तो खून नहीं रामु काका जैसा बुद्धा रसोइया भी इस शहरी तितली के साथ मज़ा कर चूका है और वो अब तक इसके तलवे छूट चाटकर hi खुद को बड़ा तुर्रम खान समझ रहा था.

भूरा : तो रोका किसने है काका ये कुटिया तो खुद से हम कुत्तो से मरवाने आई है मज़ा करने आई है तो तुम भी अपनी इच्छा पूरी करलो न.

नेहा ने भी भूरा की बात सुनकर अपनी नशीली आँखों से देखते हुए अपनी मुँह खोलकर अपनी जीभ बहार कर दी जो इस बात का सिग्नल थी की नेहा भी रामु काका का लुंड अपने मुँह में लेने को पूरी तरह तैयार थी.

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रामु काका ने भी अब बाकि नौकरो का लिहाज छोड़ते हुए अपने कच्चे के नाडा खोलकर उसे नीचे सरका दिया. लुंड का साइज बेशक छोटा था पर मोटाई में इतना मोटा था की पतली कलाई भी उसके सामने पतली थी.

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रामु काका के लुंड के आस पास बालो का एक घाना जंगल था और ज्यादा उम्र होने की वजह से वह के बाल भी सफ़ेद हो चुके थे, उन सफ़ेद बालो के बीच एक कला झुर्रीदार लुंड इस कदर बदसूरत लग रहा था की कोई बाज़ारू रुंडी भी शायद दुगने पैसे लेने के बाद भी उसे चूमे तक को तैयार न हो और रामु काका ऐसा बदसूरत लुंड नेहा जैसी बाला की खूबसूरत कमसिन लड़की से चुसवाना चाहते थे.

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कन्हैया : ये क्या गंदगी निकल ली इतना बदसूरत लुंड इस पर तो कोई थूकना भी पसंद न करे और तुम इसे इस अप्सरा से चुसवाना चाहते हो दिमाग ख़राब है क्या काका.

घनश्याम : कुछ तो होश का चूरन खाओ काका कहा ये गोरी चिट्टी अप्सरा और कहा तुम्हारा ये गन्दा कला झुर्रीदार kela.Ise पास से देखकर तो मुझे उलटी आ जाए और तुम छह रहे की ये शहरी मैडम तुम्हारा लुंड चूसे, वो ये लुंड कभी नहीं चूसेंगी और तुम्हारे ज़बरदस्ती चुसवाने के चक्कर में अगर उनका मूड ख़राब हो गया तो हम सबका भी कलपद हो जाएगी.

कल्लू : मुझे पता है तुम उस छोटू से लुंड चुसवाते हो जाओ वो बहार बैठा है उसी से जाकर अपना लुंड चुसवाओ और हमारा मज़ा ख़राब मत करो.

सबको नेहा की चिंता नहीं थी बस इस बात की टेंशन थी की कही रामु काका का लुंड देखकर नेहा का मूड ऑफ न हो जाए और वो ये हवस का खेल बीच में hi रोक दे क्युकी ये सब तभी हो रहा था जब तक नेहा की मर्ज़ी थी क्युकी कुछ भी हो थी तो वो लखन सिंह और विक्रम सिंह की मेहमान इसलिए उसकी मर्ज़ी के खिलाफ उसका बंग करने की तो उनमे से किसी की हिम्मत नहीं थी. उनकी सबकी ऐसी बाते सुनकर रामु काका का भी सारा जोश ठंडा पद गया वो बेचारे अनमना सा मुँह लेकर पीछे को हटने लगे पर अचानक hi किसी ने उनका हाथ पीछे से पकड़ लिया. उन्होंने नज़रे घुमाकर देखा तो वो और कोई नहीं बल्कि नेहा hi थी. नेहा ने उनका हाथ पकड़ कर उन्हें अपने करीब खींचा उनके मुरझा चुके लुंड को अपने हाथो में पकड़ा और सबके देखते देखते रामु के काळा कुरूप झुर्रीदार लुंड को अपने होंठो में भर लिया.

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सबको अपनी आँखों पर यकीन नहीं हो रहा था की नेहा जैसी अप्सरा रामु काका के बदसूरत झुर्रीदार लुंड को अपने मुँह में भरकर उसे इतनी कामुकता के साथ चूस रही है. नेहा की इस कामुकता का अंदाजा तो खुद रामु काका को भी नहीं था, जो लुंड कुछ देर पहले अपनी बदसूरती का मज़ाक उड़ता देख पूरी तरह मुरझा सा गया था नेहा के होंठो की गर्माहट और उस पर तेज़ी से हरकत करती नेहा की जीभ की सरसराहट ने उसकी नसों में एक बार फिर खून का दौडान तेज़ कर दिया और रामु काका का लुंड नेहा के मुँह के अंदर अपना अकार बड़ा करने लगा.

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रामु काका और भूरा के अपने अपने ठिकाने पर कब्ज़ा करने और नेहा का भरपूर समर्थन के कारन मिल रहे मज़े ने बाकि सबका जोश और उत्तेजना भी बड़ा दी और एक एक कर कल्लू कन्हैया हरबक्स और भोला ने भी अपने अपने हथियार को कपड़ो के बंधन से आज़ाद कर लिया है घनश्याम अभी भी चड्डी पहने हुए था. कल्लू जो कबसे नेहा को छोड़ने का अरमान दिल में पीला हुए था जोगिन्दर पहलवान के चलते आज रात नेहा की छूट का उद्घाटन तो न कर पाया था पर अब वो ये मौका किसी और को नहीं देना चाहता था इसलिए इससे पहले की कोई और नेहा की छूट प् कब्ज़ा करे ज़मीन पर लेट कर सरककर घोड़ी बानी नेहा के नीचे की जगह में फिट हो गया. रामु काका के लुंड को चूसने में बिजी नेहा ने एक नज़र अपने नीचे को आते कल्लू को देखा वो भी जानती थी की कल्लू के उसके नीचे आने का मकसद क्या है. और कल्लू ने भी बिना देर किये अपने लुंड का सूपड़ा नेहा की छूट के मुहाने पर रख दिया. और नीचे से अपनी कमर के ज़ोरदार धक्के के साथ अपना लुंड नेहा की छूट की गहराई में अंदर तक उतर दिया.

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जोगिन्दर के वीर्य से भरी नेहा की छूट इस क़दर अंदर से चिकनी हो चुकी थी की एक hi धक्के में कल्लू का लुंड अंदर तक सरकता चला गया. कल्लू की लुंड की हरकत देख भूरा ने भी नेहा की गांड में अपना लुंड अंदर बहार करना तेज़ कर दिया. और इधर रामु काका का लुंड अपने पुरे आकर में आकर नेहा के हलक में अंदर तक टकरा रहा था. नेहा का दुबला पतला शरीर तीन तीन देहाती लुंड से एक साथ चुद रहा था पर इस देहाती चुदाई में भी नेहा को एक अलग hi मज़ा आ रहा था. रामु काका, भूरा और कल्लू तीनो नेहा को एक साथ पर अलग अलग तरह से छोड़ रहे थे. भोला घनश्याम और कन्हैया सामने खड़े दारू की बोतल खली कर रहे थे और इन तीनो के झड़ने और अपनी बरी आने का वेट कर रहे थे. हरबक्स से तो इन्तेज़ाआर करना भी मुश्किल हो रहा था इसलिए वो घोड़ी बानी नेहा के लटकते स्तनों के करीब आकर बैठ गया और अपने चेहरा नेहा के स्तनों के करीब ले गया. नेहा कक जब अपने स्तनों पर किसी की गरम गरम साँसों का एहसास हुआ तो उसने हाथ बढ़ाकर हरबक्स के चेहरा अपने स्तनों पर खींच लिया और उसे भी इस वासना के खेल में शामिल कर लिया.

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हरबक्स ने भी एक ाग्यकारी बच्चे की तरह नेहा का आदेश मानते हुए मुँह खोल कर नेहा के एक लटकते दूध को अपने मुँह में भर लिया जैसे कोई बछड़ा गए के थान चूस रहा हो. नेहा का एक्ससिटेमेंट और बाद गया नेहा अपना हाथ हरबक्स के बदन पर फिरते हुए उसकी जांघो के बीच ले गई और उसके तने हुए लुंड को अपने हाथो में भर लिया और अपने हाथो को तेज़ तेज़ चलते हुए हरबक्स के लुंड की खाल को आगे पीछे करने लगी. हरबक्स के तो आनंद का परिवार hi नहीं था परमानन्द के कारन उसकी आँखे बंद और मुँह खुल गया और उससे बहती लार नेहा के स्तनों को गीला कर रही थी. उसने जीवन में कई बार कई औरतो को इमेजिन करके मुठ मारी थी पर ऐसा आनंद उसे आज तक नहीं मिला था. शायद ये नेहा के बदन की गर्माहट उसका सेक्स एक्सपीरियंस और उसकी कलाइयों का का जादू hi था जिसने हरबक्स की हालत पतली करदी थी. नेहा के स्तनों को चूसना तो वो पूरी तरह भूल गया और नेहा के हाथो मुठ मरवाने में पूरी तरह डूब गया.

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पीछे से भूरा का लुंड नेहा की गांड के छेड़ को चीरता हुआ तेज़ तेज़ अंदर बहार हो रहा था. भूरा अपना लुंड पूरा बहार निकलता और फिर एक झटके में पूरा लुंड नेहा की गांड की गहराई तक उतर देता. भूरा के ज़ोरदार धक्को नेहा का पूरा शरीर कपकपा जाता. नेहा की ये कपकपाहट भूरा को एक अलग hi मज़ा दे रही थी. नेहा के चिकने चिकने चूतड़ भूरा की आँखों के सामने थे और भूरा नेहा की गांड मरते हुए नेहा के चूतड़ों को हौले हौले सेहला रहा था. अचानक पता नहीं भूरा को क्या सूझी उसने एक ज़ोरदार झापड़ नेहा के चूतड़ों पर रसीद कर दिया. झापड़ इतना ज़ोरदार था की भूरा के हाथ की पांचो उंगलियों के निशान नेहा के चूतड़ पर साफ़ नज़र आ रहे थे.

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अचानक पड़े इस झापड़ से नेहा दर्द से बिलबिला उठी. उसकी चीख निकलने को हुई पर उसके मुँह तो रामु काका अपना लुंड ठूसे हुए थे जिस वजह से उसकी चीख उसके हलक में हु घुट कर रह गई. रामु काका का झुर्रीदार लुंड नेहा की झीभ से रगड़ता हुआ नेहा के हलक में अंदर तक टकरा रहा था. रामु काका के लुंड की मोटाई के कारन नेहा का छोटा सा मुँह पूरी तरह ब्लॉक हो गया था. पर नेहा के लिए रामु काका के लुंड से ज्यादा परेशानी का सबब उस लुंड के आस पास उगी घनी सफ़ेद झांटे थी. लुंड के साथ साथ रामु काका की झांटो के सफ़ेद बाल भी नेहा के मुँह में अंदर तक जा रहे थे. जो नेहा को कभी कभी उबकाई आने पर मजबूर कर रहे पर रामु काका का लुंड ठूसा होने के चलते उसकी उबकाई भी हलक तक आकर वापस लौट जाती. पर इतना झेलने के बाद भी न नेहा ने रामु काका को पीछे धकेलने की कोई कोशिश की और न रामु काका ने उसपर कोई तरस खाया क्युकी किसी भी हालत में नेहा के मुँह के अंदर hi झड़ना था. और नेहा को तो इन देहाती मर्दो के इस जंगली रवैये में hi मज़ा आ रहा था. क्युकी नेहा को तो केवल एक चीज़ का ओबसेशन था और वो चीज़ थी उसकी फंतासी.

और इधर नीचे कल्लू भी कमर को ऊपर नीचे करके नेहा की छूट में अपना लुंड अंदर बहार कर रहा था. पहले गरिमा पर चांस मरने और फिर नेहा के कई दिन तलवे चाटने के बाद आज फाइनली उसे इन शहरी मदमो में से एक सबसे हॉट मैडम की छूट में अपना लुंड पेलने का सुख प्राप्त हो रहा था और वो इस पल का भरपूर मज़ा ले रहा था. उसका लुंड है है की आवाज़ करता हुआ नेहा की छूट में अंदर बहार हो रहा था. नेहा की गांड में आलरेडी एक लुंड होने के कारन नेहा की छूट में जगह थोड़ी कम हो गई थी जिस वजह से कल्लू का नेहा की छूट की दीवारों से रगड़ता हुआ अंदर जा रहा था जो दोनों के hi मज़े और उत्तेजना को और भी ज्यादा बड़ा रहा था.

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और इसी मज़े और उत्तेजना में नेहा के हाथो की रफ़्तार हरबक्स के लुंड पर और भी ज़ादा तेज़ हो चुकी गई. नेहा हरबक्स के लुंड की खाल को पूरी तरह आगे पीछे कर रही थी. हरबक्स तो पूरी तरह निढाल सा हो गया था उसने अपना सर नेहा के कंधे पर टिका दिया था. उसका मुँह पूरी तरह खुला और जीभ पूरी तरह बहार थी. जैसे वो एक कुत्ते की तरह अपने तेज़ होती सांसो को अपनी जीभ के सहारे कण्ट्रोल करने की कोशिश कर रहा ho.Pura कमरा सिसकारियों से गूँज रहा था. गोपी काका अवाक से खड़े अपने सामने चल रहे हवस के नंगे नाच को देख रहे थे. उन्हें यकीन नहीं हो रहा था की शहर की ये पड़ी लिखी हाई क्लास औरते तो बाज़ारूपन में तो रुंडियो को भी मात दे दे. भोला कन्हैया घनश्याम तो अपनी बारी का इन्तेज़ाआर करते अब तक दो बोतल ख़तम कर चुके थे.

नेहा के कोमल कोमल हाथो का कामुक स्पर्श उसके हाथो की तेज़ रफ़्तार और पहली बार किसी औरत के साथ ये सब करने की उत्तेजना को हरबक्स का लुंड ज्यादा देर बर्दाश्त नहीं कर सका और काफी संघर्ष के बाद उसने अपना हथियार दाल दिया. नेहा का पूरा हाथ हरबक्स के लुंड से निकले वीर्य से भर गया और हरबक्स गहरी गहरी सासे लेता हुआ वही घोड़ी बानी नेहा के बगल में ज़मीन पर निढाल सा लेट गया. एक खिलाडी ढेर हो चूका था पर तीन अब भी मैदान में डेट थे. हरबक्स के ढेर होने के बाद घनश्याम और कन्हैया का एक बार तो मन हुआ की वो भी आगे बढ़कर अपने लुंड नेहा के हाथो में थमा दे पर नेहा ने जिस तरह अपने हाथो से रगड़ रगड़ कर hi हरबक्स का पानी निकल दिया था वो ऐसा नहीं चाहते थे. वो तो पानी नेहा के अंदर निकलना चाहते थे इसलिए अभी रुकना hi ठीक समझा.

हरबक्स के झड़ने के कुछ पल बाद नेहा की छूट के घर्षण ने कल्लू के लुंड की नसों में भी वेररया का दौडान तेज़ कर दिया और उसने भी अपना वीर्य नेहा की छूट में छोड़ दिया.

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वो भी हरबक्स की hi तरह नेहा के नीचे hi अचेत सा लेट गया. कल्लू और हरबक्स के झड़ने के बाद नेहा ने अपना पूरा ध्यान अपने मुँह में लुंड अंदर बहार करते रामु काका पर लगाया और अपनी से जीभ से चाट चाट कर रामु काका के लुंड को भी उत्तेजना के चरम तक ले जाने लगी. इधर कल्लू का लुंड बहार निकल जाने से नेहा की गांड और भी खुल गई अब भूरा का लुंड नेहा की गांड में और भी अंदर तक जा रहा था जहा उसकी कसावट और भी ज्यादा थी. नेहा के एक्सपर्ट ब्लोजॉब को रामु काका का लुंड और ज्यादा बर्दाश्त न कर पाया और नेहा का मुँह रामु काका के वीर्य से भर गया पर रामु काका भी एक नंबर के हरामी और लौंडियाबाज़ आदमी थे उन्होंने अपना लुंड तब तक बहार नहीं निकला जब तक नेहा ने उनके वीर्य की आखिरी बूँद तक को अंदर जातक नहीं लिया.

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रामु काका को आज परम आनंद मिल गया था की उन्होंने नेहा जैसी जवान कमसिन शहरी लड़की को अपने लुंड का पानी पीने को मजबूर कर दिया. रामु काका के झड़ने के कुछ पालो बाद भूरा ने भी पीछे से नेहा की गांड के छेड़ को अपने पानी से सरबओर कर दिया.

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नेहा के शरीर का कोई हिस्सा नहीं बचा जहा पर वीर्य का अंश न दिख रहा हो. उसके हाथ हरबक्स के वीर्य से चिपचिपा रहे थे तो गांड से भूरा का वीर्य बहकर बहार आ रहा था, छूट से कल्लू का वीय टपक रहा था तो मुँह में अब भी रामु काका वीर्य के साथ उनकी झाटो के कुछ बाल भी मौजूद थे. नेहा को अच्छे से भोगने के बाद ये चारो भी अलग हैट गए. नेहा भी बहुत थक गई थी पर अभी तो रात भी बाकी थी और लोग भी.

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उन चारो के परे हटने के बाद घनश्याम और कन्हैया ज़मीन पर लेती नेहा के अगल बगल आकर बैठ गए.

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घनश्याम 40 साल का एक अधेड़ उम्र आदमी था जो इस हवेली का केयरटेकर भी था और स्वभाव से इस कदर ठरकी था की अपनी शादी के बाद से hi सिर्फ अपनी बीवी के सेक्स लाइफ को कामुक बनाने के लिए hi उसने हर तरह की सेक्स की गोलिया और नुस्खे तरय कर डेल पर आप दवाओं का हद से ज्यादा इस्तेमाल करोगे तो वही होगा जो घनश्याम के साथ हुआ, उसके औजार ने काम करना बंद कर दिया. शायद इसीलिए उसने अब तक अपनी चड्डी नहीं उतरी थी क्युकी वो सबके सामने शर्मिंदा नहीं होना चाहता था.

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पर कन्हैया का औजार पूरी तरह तना तन हालत में था और नेहा की चुआड़ै करने को बेक़रार था. वैसे भी इन देहाती नौकरो को ज्यादा फोरप्ले टाइप सेक्स में मज़ा नहीं अत था इनके लिए तो सेक्स का केवल एक hi मतलब था अपना लुंड औरत की छूट में डालकर धक्के मार कर झाड़ जाना.

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कन्हैया ने भी नेहा को बहो से पकड़ कर खड़ा करा, उसकी एक तंग उठाकर अपने बहो में थाम ली और सीधा मुद्दे पर आते अपने लुंड का सूपड़ा नेहा की छूट के अंदर दाखिल कर दिया. इधर घनश्याम नेहा को छोड़ तो नहीं सकता था पर मज़ा तो ले सकता था अपना पानी तो निकल hi सकता था इसलिए वो नेहा की पीठ के पीछे आकर खड़ा हो गया और पीछे से hi उसकी गर्दन और पीठ चाटने लगा. नेहा में एक बार फिर जोश का संचार होने लगा एक हाथ से तो वो कन्हैया को थामे हुए थी दूसरा हाथ पीछे ले जाकर वो घनश्याम का लुंड पकड़ने की कोशिश करने लगी पर घनश्याम बार बार उसे ऐसा करने से रोक रहा था क्युकी वो अपना छोटा सा लुंड नेहा के हाथो में देकर अपनी इज़्ज़त का जनाज़ा नहीं निकलवाना चाहता था. क्युकी अगर उसके छोटे लुंड की बात इन बाकि नौकरो को पता चल गई तो ये पुरे गांव में बात फैला देंगे और वो किसी को मुँह दिखने लायक नहीं रहेगा. पर वो नेहा जैसी अप्सरा के साथ मज़ा करने का मौका भी नहीं गवाना चाहता था. इसलिए नेहा को हाथ को अपने लुंड तक पहुंचने से रोकते हुए hi वो जितना मज़ा कर सकता था का रहा था. नेहा बार बार घनश्याम कज चड्डी खींचने की कोशिश कर रही थी पर वो उसे हर बार रोक देता था.

भूरा : अरे ो घनश्याम भाई देखो न कैसे मैडम जी तुम्हारा लुंड पकड़ने को मचल रही है क्या तुम भी लौंडियो की तरह चड्डी पहने खड़े हो उतरो इसे.

घनश्याम : मई तुम लोगो की तरह बेशरम नहीं जो कही भी नंगा हो जाऊ कोई इज़्ज़त नाम की भी चीज़ होती है की नहीं.

भूरा : आए है चड्डी पेहेन कर एक नंगी लड़की से चिपके खड़े हो बड़ी शर्मा हाय और िज़ात की बात कर रहे हो.

घनश्याम : अपनी औकात में रह कर बात कर भूल मत तू एक आम नौकर और मई इस आलीशान हवेली का केयरटेकर हु, तुम सबका बॉस हु समझा.

घनश्याम का इस तरह औकात की बात करना भूरा से बर्दाश्त नहीं हुआ. और उसने आगे बाद कर घनश्याम की चड्डी नीचे खींच दी. चड्डी उतारते hi घनश्याम का सूखे छुआरे जैसा लुंड सबकी आँखों के सामने आ गया.

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घनश्याम एकदम समझ hi नहीं पाया ये क्या हुआ उसे यही लगा की नेहा के खींचने से hi उसकी चड्डी उतर गई. भूरा की तो उसका मूंगफली जैसा लुंड देख कर हसी hi निकल गई.

भूरा: अरे रे रे केयरटेकर जी के लुंड का साइज तो देखो ज़रा बाते और घमंड इतना बड़ा और लुंड का साइज मूंगफली जैसा. आदमी की औकात उसके औजार की नाप से मापी जाती है सेल घनश्याम और उस मामले में तेरी औकात बहुत ज्यादा छोटी है. और तेरे तो तीन तीन बच्चे भी है वो भी तेरे hi है या किसी और के औजार की धार से निकले है. तेरा साइज देखकर तो नहीं लगता की तू कुछ कर पाया होगा. घनश्याम गुस्से से तिलमिला रहा था: सेल बहुत बोल रहे हो तुम सब मई अभी जाता हु और हवेली वालो को यहाँ बुलाकर लता हु और उन्हें बताऊंगा की तुम सबने मिलकर इस शहरी मेमसाब का बंग करा है तब पता चलेगा की किसकी क्या औकात है.

घनश्याम अपने कपडे दुबारा पेहेन कर दरवाज़े की तरफ बड़ा पर पीछे से एक मज़बूत हाथ ने उसे गर्दन से पकड़ लिया. ये मज़बूत हाथ और किसी का नहीं जोगिन्दर का था.

जोगिन्दर: सेल भोस्डिके तू जाकर हमारी चुगली करेगा खुद में कुछ करने का गुदा नहीं तो दूसरो को बोलने लगा. सेल मादरचोद नामर्द तू अगर केयरटेकर है तो मई अंडरटेकर हु ज्यादा टीपीर टीपीर करि न तो यही तेरा केयर अलग और टेकर अलग कर दूंगा.

जोगिन्दर को देख घनश्याम की सिटी पित्ती गम हो गई, जोगिन्दर को कुछ बोलने की हिम्मत उसमे भी नहीं थी क्युकी जोगिन्दर के हाथ का एक झापड़ hi उसकी जान निकलने के लिए काफी था. जोगिन्दर ने घनश्याम को पकड़ कर कमरे के अंदर ज़मीन पर भूरा और कल्लू के सामने फ़ेंक दिया. भूरा उसे देख कर है रहा था जो घनश्याम के लिया बर्दाश्त के बफर था, पर फिलहाल वो कुछ नहीं कर सकता था इसलिए चुपचाप अपने बिस्तर पर दुबक कर बैठ गया.

किसी आदमी को सबसे ज़ादा गुस्सा तब अत है जब उसकी मर्दानगी पर सवाल उठाया जाए और आज वही सब घनश्याम के साथ हुआ था सरेआम सब नौकरो के सामने उसकी इज़्ज़त को तार तार कर दिया गया था. चुदाई तो नेहा की हो रही थी पर असल गैंगबैंग तो आज घनश्याम का हुआ था. अब तक जो बात ढकी छुपी थी वो आज सबके सामने आ गई. घनश्याम मन hi मन सोच रहा था की काश ये शहरी छोरी यहाँ ये सब करने न आती तो आज उसकी यु जगहसाई न होती, अगर उसकी नामर्दानगी की बात बहार लोगो को पता चल गई तो वो समाज में किसी से नज़रे नहीं मिला पाएगा उसकी बच्चो की पैदाइश पर शक किया जाएगा, समाज में उसके परिवार की साडी इज़्ज़त मिटटी में मिल जाएगी. उसने नज़र उठाकर एक बार नेहा की तरफ देखा जो इन सबसे बेखबर अब भी अपनी चुदाई में मस्त थी, कन्हैया लगातार नेहा की छूट में लुंड पेले जा रहा था. घनश्याम को नेहा पर बहुत गुस्सा आ रहा क्युकी कही न कही उसके अपमान की असल वाहह नेहा hi थी, न वो यहाँ आती न उसके साथ ये सब होता और इतना होने के बावजूद उसपर तो कोई असर hi नहीं पड़ा वो अब भी अपने हवस के नशे में चूर थी.

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इधर कन्हैया लगातार नेहा की छूट में घपाघप लुंड पेलने में मस्त था. उसका ध्यान भी नहीं था की कमरे में क्या क्या हो गया, कमरे का माहोल कितना गरम हो गया उसके लिए तो असली नेहा की छूट से रगड़ कहते लुंड में थी. इधर नेहा की भी एक टांग कन्हैया के कंधे पर थी और वो काफी देर से एक टांग पर कड़ी थी जिस वजह से उसकी ताकत भी जवाब दे रही थी और शराब का भी नशा जिस वजह से उसका खड़ा रहना मुश्किल हो रहा था. पर नेहा की किस्मत अच्छी थी की उसे और ज़ादा खड़ा नहीं रहना पड़ा कन्हैया के लुंड ने भी अपना पानी नेहा को छूट के अंदर छोड़ दिया.

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नेहा बुरी तरह थक चुकी थी और निढाल सी वही ज़मीन पर लेट गई जहा चारो तरफ वीर्य की महक hi भरी तह. नेहा आँख बंद करे गहरी गहरी सासे ले रही थी की अचानक किसी ने उसे बालो से पकड़ कर खींच कर उठाया और इससे पहले नेहा कुछ समझ पति एक झन्नाटेदार झापड़ नेहा के गाल पर पड़ा. नेहा की आँखे हड़बड़ा कर खुल गई सामने भोला खड़ा था. भोला की आँखे शराब और अफीम के नशे में सुर्ख लाल हो रही थी वो अपने होश में नहीं था और आज अपना सदा जंगलीपन नेहा पर उतरने वाला था.

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भोला: साली छिनार सबसे मरवा लिया अब मेरी बरी आई तो आराम कर रही है. चल नाच कर दिखा मटका अपने कूल्हे दूध हिला अपने चल मूड बना साली मेरा.

नेहा से अब ढंग से खड़ा तो हुआ जा नहीं रहा था नाचना तो बड़ी दूर की बात थी. भोला उसे बालो से खींचता हुआ कमरे में यहाँ वह दौड़ा रहा पता नहीं उसे इसमें क्या मज़ा आ रहा था.

गोपी काका: ऐ भोला सेल जाहिल ये क्या कर रहा है बड़े साहब की मेहमान है ये कोई गाँव बाज़ारू रुंडी नहीं है जो तू उसके साथ ये सब कर रहा.

भोला: अबे चुप सेल भोस्डिके आज मई hi इसका बड़ा मालिक हु ज्यादा बोलै तो तुझे भी नंगा करके ऐसे hi दौडाऊंगा.

भोला पूरी तरह नशे में था उसे कुछ भी कहने से कोई मतलब नहीं था उसे पता नहीं था की वो क्या अबाब शनाब बाके जा रहा था और क्या ूल जलूल हरकते कर रहा था. और नेहा भी कोई चीखम चिल्ली नहीं कर रही थी शायद उसे इस सबमे भी मज़ा आ रहा था इसलिए गोपी काका भी आगे कुछ नहीं बोले.

भोला नेहा को बालो से खींचता हुआ अपने गद्दे तक ले गया और नेहा को धक्का देकर अपने गद्दे पर गिरा दिया. और खुद भी चढ़कर नेहा के ऊपर लेट गया और नेहा की जो चीज़ उसे सबसे ज़ादा पसंद थी यानि नेहा के होंठ उन पर जानवरो की तरह टूट पड़ा. भोला नेहा को वेह्शी पागलो की तरह किश कर रहा था उसके मुँह से आती शराब और गुटखे की बदबू नेहा की सांसो में अंदर तक समय जा रही थी. किश करते करते भोला ने नेहा के बालो को खास कर मूठी में गुच्छा बना कर कास लिया और नेहा के निचले होंठ को अपने दांतो में भरकर काटने लगा. भोला का पागलपन इस कदर बाद चूका था की नेहा के होंठो में खून उतर आया था. आखिरकार नेहा ने भी भोला के बालो को पकड़ा और उसे पीछे को खींचा और अब नेहा भोला के होंठो पर टूट पड़ी और उसने भोला के दातो में इतना कास कर कटा की भोला के होंठो से खून बहने लगा. पर भोला को जैसे दर्द का एहसास hi नहीं हुआ उसे उल्टा और मज़ा आया. भोला ने नेहा की टांगो को उठाकर उसके सर तक ऊपर मोड़ दिया और अपना लुंड नेहा की छूट के मुहाने पर रखा और एक hi धक्के में अपना पूरा लुंड नेहा की छूट के अंदर गहराई तक उतर दिया.

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नेहा की छूट में अपना लुंड दाल कर भोला अपना पूरा वज़न नेहा पर डालते हुए उसके मुड़ी टांगो के ऊपर hi लेट गया. और उछाल उछाल कर ज़ोरदार धक्के मरते हुए अपना लुंड नेहा की छूट में अंदर बहार करने लगा. यु तो नेहा काफी थक चुकी थी पर भोला के जोश ने उसकी कामाग्नि को दुबारा देहका दिया. भोला का जोश शायद यहाँ मौजूद सभी मर्दो में सबसे ज्यादा और उसका पागलपन इस जोश को और हवा दे रहा था और शराब के नशे ने तो इसमें चार चाँद लगा दिए थे. भोला को कोई फोरप्ले फीविलाय नहीं अत था उसके लिए सेक्स का मतलब केवल औरत की छूट में अपना औजार डालकर हब्सी पागल की तरह तेज़ तेज़ धक्के मरना और अपना सारा माल औरत की छूट में अंदर खली कर देना और वो अपने इसी काम में लगा हुआ था. वो ताबड़तोड़ नेहा की छूट में धक्के मरे जा रहा था जब तक की उसके लुंड ने ापबंनि साडी गर्मी नेहा की छूट के अंदर खली नहीं करदी.

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नेहा की छूट को अपने वीर्य से भरने के बाद वो भी लुढ़क कर नेहा के बगल में लेट गया. शराब और अफीम के नशे कब उसकी आँखे बंद हुई और वो नींद के आगोश में चला गया पता hi नहीं चला. नेहा का पूरा बदन पसीने वीर्य शराब और पेशाब से सराबोर tha.Neha जिस फंतासी की तलाश में आज यहाँ आई थी वो उसे मिल गई थी इन देहाती नौकरो ने उसके बदन का पुर्ज़ा पुर्ज़ा ढीला कर दिया था. पूरा कमरा शराब वीर्य और पेशाब की दुर्गन्ध से महक रहा जो चीख चीख कर इस बात की गवाही दे रहा था की आज रात यहाँ हवस का क्या नंगा नाच हुआ है. नेहा सहित सरे नौकर शराब और शबाब का भरपूर सेवन करने के बाद बेसुध से यहाँ वह औंधे पड़े थे. बचे थे तो केवल तीन लोग छोटू जो अब भी कमरे के बहार खड़ा चौकीदारी कर रहा था, घनश्याम जो अपने अपमान का कड़वा घुट पीकर एक कोने में दुबका बैठा था और गोपी काका जो अब तक इस हवस के नंगे खेल से खुद को अलग थलग रखे थे. गोपी ने एक नज़र कमरे का अस्त व्यस्त माहोल देखा घडी को देखा जिसमे रात के तीन बज रहे थे. फिर आगे बाद कर ज़मीन पर पड़े नेहा के कपडे उठाए अपने कंधे का सहारा देकर नेहा को उठाया और नेहा को लेकर कमरे के बहार निकल आए.

बहार छोटू ने जब नेहा का ये हाल देखा तो वो भी चौंक उठा.

छोटू: इनको क्या हुआ

गोपी काका: तुझे क्या लगता है अगर एक नाज़ुक हिरणी जंगली लकड़बग्घों के बीच फास जाए.

छोटू: पर ये फांसी थी या खुद से फसने आई थी.

गोपी काका: जो भी है इसे इस हालत में तो हवेली नहीं ले जा सकते मई इसे बाथरूम ले जाकर इसके सर पर पानी डालकर इसका नशा उतरता हु इसे नेहला धुला कर हवेली छोड़ आऊंगा जा तू भी अब अंदर जाकर सजा.

छोटू: काका मई भी औ क्या आपके साथ

गोपी काका: नहीं मई देख लूंगा जितने ज्यादा लोग होंगे लोगो की नज़र में आने का खतरा भी उतना ज्यादा होगा, तू जा सजा अंदर जाकर काफी देर से खड़ा है यहाँ जा मई देख लूंगा.

छोटू: जी ठीक है

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गोपी काका नेहा को सहारा देकर सर्वेंट क्वार्टर के पीछे बने बाथरूम की तरफ चल पड़े और जीतू अंदर चला गया.
 
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गोपी काका नेहा को सर्वेंट क्वार्टर के पीछे बने बाथरूम में ले आए और उसे वही दीवार का सहारा देकर बिठा दिया. नेहा अब भी पूरी तरह नंगी hi थी और उसके बदन से पेशाब वीर्य शराब की मिली जुली दुर्गन्ध आ रही थी. गोपी काका ने नेहा की वो लाल ड्रेस वही एक खूँटी में तंग दी. नेहा के शरीर पर लगी गंदगी गोपी काका के कपड़ो में भी लग गई थी और नेहा को नहलाते हुए उनके खुद के कपडे गीले न हो जाए शायद इसलिए भी उन्होंने अपने कपडे भी उतर कर वही खूटी में तंग दिए. पर चुकी गोपी काका एक चरित्रवान व्यक्ति थे इसलिए उन्होंने अपना नाड़े वाला अंडरवियर नहीं उतरा. उन्होंने वही पास राखी एक बाल्टी से पानी उठाकर नेहा के सर से डालना शुरू कर दिया. जहा ठंडा ठंडा पानी नेहा के सर पर पड़ा नेहा का आधा नशा तो पल में उतर गया. गोपी काका ने पूरी बाल्टी नेहा के ऊपर खली करदी.

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उसके बाद गोपी काका ने एक साबुन की टिकिया उठाई और उसे नेहा के बदन पर रगड़ना शुरू कर दिया. सच में गोपी काका किस मिटटी के बने थे इतने छरहरे बदन की अप्सरा जैसी सुन्दर लड़की बिना कपड़ो के उनके सामने थी और उनका चरित्र बिलकुल नहीं दोल रहा था. या तो वो भी घनश्याम जैसे अंदर से फुसकी थे या सच में उनका चैरेक्टर इतना ज़बरदस्त था की नेहा का रूप सौंदर्य भी उसे हिला नहीं सकता था. नेहा का नशा भी अब हल्का हल्का उतर रहा था उसे समझ आ रहा थी की कोई उसके शरीर पर लगी गंदगी साफ़ कर रहा है उसे नेहला रहा है पर उसकी आँखे अब भी पूरी तरह खुल नहीं प् रही थी की वो उसका चेहरा देख सके. नेहा के पुरे शरीर पर साबुन मलने के बाद काका ने एक और बाल्टी उठाई और मग्गे से धीरे से नेहा के पुरे बदन पर लगा साबुन धोने लगे. उन्होंने थोड़ा पानी नेहा की छूट पर भी डाला और उसे भी अच्छी तरह धोकर साफ़ कर दिया. और वही बाथरूम में राखी एक तौलिया से नेहा के बदन को अच्छे से पोछ दिया.

नेहा को अच्छे से साफ़ करने के बाद गोपी काका खूटी पर टंगे नेहा के कपड़ो की तरफ बड़े पर वह पहुंच कर ठिठक गए, एक नज़र नेहा की उस लाल ड्रेस को देखा फिर नज़र घुमाकर एक नज़र नच्चे ज़मीन पर नंगी बैठी नेहा को देखा. फिर हाथ बड़ा कर नेहा की ड्रेस अपने हाथ से छूकर उसकी कोमलता को महसूस करने लगे, फिर उस ड्रेस को अपनी नाक के करीब लेकर उसे सूंघ कर उसमे से अति नेहा के बदन की खुशबू को अपने अंदर महसूस करने लगे. ऐसा करते करते उनके हाथ अपने जांघिये के ऊपर से अपने लुंड तक पहुंच गए और वो उसे होल होल दबाने सहलाने लगे. और अगले hi पल उन्होंने अपना नाडा खोल दिया और उनका पटरे वाला अंडरवियर वही बाथरूम की फर्श पर नीचे गिर गया.

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जिस शिक्षा ने अब तक खुद को नंगा नहीं करा था उनका बदन भी अब बिना कपड़ो के था अब गोपी काका भी मादरजात पूरी तरह नंगे थे. मोटा थुलथुला पेट वजन करीब 80-90 कग शरीर पर हर जगह घने घने बाल बहो और कूल्हों के बीच भी और लुंड के ऊपर जो बालो का घाना गुच्छा था उसका तो कहना hi क्या. पर उस घने गुच्छे में से भी गोपी काका का मोटा मूसल लुंड अलग hi नज़र आ रहा था और उसके नीचे लटकते दो बड़े बड़े गोते जो खुद भी पूरी तरह बालो से भरे थे. बालो का कोटा शरीर में hi इतना ज्यादा था इसलिए चाँद पर पर बालो के नाम पर गिनती के चार पांच बाल hi थे. अपने अंडरवियर को पैरो से निकलकर एक तरफ सरकने के बाद वो धीमे धीमे आहिस्ता आहिस्ता चलते हुए नेहा के करीब आए, अपना चेहरा नेहा के कान के एकदम करीब ले आए और फुसफुसा कर नेहा के कान में बस एक शब्द बोले.

"मेरी किशमिश"

ये शब्द सुनते hi नेहा की आँखे जो अब तक नशे के चलते खुल भी नहीं प् रही थी यकायक पूरी तरह खुल गई और वो गोपी काका का चेहरा hi देखे जा रही थी. उसे यकीन नहीं हो रहा था की इतने सालो बाद वो फिर से ये शब्द सुनेगी.

नेहा: क्या आप

नेहा बस इतना hi बोल पाई थी की गोपी काका ने अपना कला मोटा लुंड नेहा के चेहरे के सामने कर दिया. नेहा ने भी बिना कुछ कहे चुपचाप अपना मुँह खोल दिया. गोपी काका अपना लुंड के नीचे लटकते गोते नेहा के खुले मुँह में दाल दिए और गोपी काका के बल्लो से भरे गोते मुँह में भरकर चूसने चाटने लगी. नेहा गोपी कटे के गोते इस तरह चाट रही थी जैसे जाने कितने दिनों बाद उसे उसका कोई मनपसंद खिलौना वापस मिला हो. नेहा को गोपी काका के गोते पर उगे घने बालो से भी कोई परहेज़ नहीं था.

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गोते चटवाने के बाद गोपी काका पीछे की ओर घूम गए और आगे झुक कर अपने दोनों कूल्हों को खोलकर अपनी गांड का छेड़ नेहा के सामने कर दिया. नेहा ने भी चुपचाप बिना कुछ कहे या सवाल करे काका की गांड के छेड़ को चेतना शुरू कर दिया. नेहा गोपी काका की गांड के बीच की दरार को ऊपर से नीचे तक चाट रही थी. और बीच बीच में अपनी जीभ काका की गांड के छेड़ में दाल कर उसे अंदर से भी चाट ले रही थी. ऐसा करने में नेहा को खुद से अंदर से कितना मज़ा आ रहा था वो उसके चेहरे को देख कर hi समझ आ रहा था. और गोपी काका उनके आनंद की तो कोई सीमा hi नहीं थी. गांड चटवाने के बाद गोपी काका दुबारा से नेहा की तरफ घूमे और नेहा की तरफ देखते हुए अपना लुंड मसलने लगे.

गोपी काका: मेरी किशमिश उस पहलवान की पेशाब तो बड़े मज़े से पी रही थी अपनी काका की नहीं पीयेगी. बोल पीयेगी?

नेहा ने किसी छोटी मासूम बच्ची की तरह बस हां में सर हिला दिया और चुपचाप अपना मुँह खोल दिया. नेहा के मुँह खोलते गोपी काका के लुंड से पेशाब की एक मोती पीली धार सीधा नेहा के मुँह में जाकर गिरने लगी. क्या साधा हुआ निशाना था पेशाब की धार सीधा नेहा के मुँह में hi गिर रही थी, और नेहा भी किसी प्यासी हिरणी की तरह उस पेशाब के कतरे कतरे को अपने हलक से नीचे उतरती जा रही थी.

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साडी पेशाब की धार नेहा के मुँह में खली करने के बाद कुछ आखिरी बूंदे काका की जांघो तलवो और ज़मीन पर गिर गया. साडी पेशाब पीने के बाद काका ने उन इधर उधर गिरी बूंदो की तरफ भी इशारा करा और नेहा ने किसी पालतू गुलाम की तरह पहले ज़मीन पर गिरी पेशाब की बूंदो की किसी कुटिया की तरह चाट liya.Phir काका के तलवो को चाटने लगी. इसके बाद काका के पैरो को छत्ते छत्ते ऊपर की तरफ आते हुए काका की जांघो पर बहती पेशाब की बूंदो को भी चाट गई. काका ने भी अपनी जांघो को खोल दिया और नेहा ने काका की दोनों जांघो के बीच बहते पसीने को अपनी जीभ से चाट कर साफ़ कर दिया.

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इसके बाद गोपी काका नेहा को कंधे से पकड़ कर पास hi बने एक शौचालय में ले आए जहा वेस्टर्न कोड लगी थी. गोपी काका खुद उस कोड पर टांगो को फैला कर बैठ गए उनका लुंड पूरी तरह तना हुआ छत की तरफ सलामी दे रहा था.

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गोपी काका अपना लुंड सहलाते हुए अपने जांघो को थपकते हुए नेहा को अपनी जांघो पर बैठने का इशारा करा. नेहा भी चुपचाप अपनी टांगो फैलाकर काका की टांगो के इर्द गिर्द करके अपनी छूट को काका के लुंड के ऊपर करके नीचे की ओर बैठती चली गई. जैसे जैसे नेहा नीचे की ओर बैठती चली गई गोपी काका का लुंड नेहा की छूट के अंदर गहरा और गहराई तक उतरता चला गया. बेशक गोपी काका का लुंड जोगिन्दर के जितना लुम्बा नहीं था पर मोटाई में उससे 21hi था. इसलिए अंदर जाने में गोपी काका के लुंड ने नेहा की छूट की दीवारों को काफी स्ट्रेच कर दिया था.

इसके बाद नेहा ने गोपी काका के कंधे को थम लिया और ऊपर नीचे होने लगी. नेहा के हर उठान गिराव के साथ गोपी काका का कला मोटा बालो से भरा लुंड नेहा की छूट से घर्षण खता हुआ अंदर बहार हो रहा था. पता नहीं नेहा भी किस उन्माद में गोपी काका से चुद रही थी, जिस लड़की को अभी अभी 7 मर्दो ने हर तरह से रगड़ा था उसे न जाने कितनी बार चरमसुख दिला कर झड़ने को मजबूर कर दिया था जो कुछ देर पहले थक कर चूर थी अब अपने से दुगनी से भी ज्यादा उम्र के एक गंजे देहाती की बहो इतना ज्यादा कामुकता से क्यों भर उठी थी. और दूसरी तरफ वो गोपी काका जो उस कमरे बेहद सभय चरित्रवान पुरुष नज़र आ रहे थे अब इस सर्वेंट बाथरूम के शौचालय के अंदर उनके चरित्र का एक अलग hi रूप नज़र आ रहा था.

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सर्वेंट भटटूम का वो तंग शौचालय उन सन्नाटे में धप धप की आवाज़ से गूँज रहा था. नेहा तेज़ गति से गोपी काका की गोड़ में ऊपर नीचे उठ बैठ रही थी. और अचानक गोपी काका ने नेहा को कास कर अपनी बहो की गिरफ्त में जकड लिया उन्होंने अपना चेहरा नेहा के कंधे पर टिका दिया जिसमे से बह कर आयति लार नेहा के कंधे को गीला कर रही थी, गोपी काका की सासे तेज़ तेज़ और गहरी गहरी चल रही थी. उनका लुंड अब भी नेहा की छूट के अंदर था पर अब उसके अंदर का तनाव ख़तम हो चूका था. नेहा का ऊपर नीचे उठना बैठना रुक चूका था. नेहा को अपने अंदर गोपी काका के गाड़े गरम का वीर्य का एहसास हो रहा था. आज नेहा की छूट ने कितना वीर्य अपने अंदर लिया था इसका कोई हिसाब नहीं था पर उन सभी वीर्य में गोपी काका का वीर्य सबसे ज्यादा गाड़ा था जो इस बात का भी सबूत था की गोपी काका ने जाने कितने साले से किसी औरत से सम्बन्ध नहीं बनाए और नहीं हस्तमैथुन करा तभी उनके वीर्य में इतना ज्यादा गाढ़ापन था.

नेहा और गोपी काका काफी देर तक वही उस कोड पर एक दुसरे को बहो में जकड़े बैठे रहे. फिर जब दोनों की सासे थोड़ी काबू हुई तब दोनों एक नज़र एक दुसरे की आँखों में देखा, इतनी ताबड़तोड़ चुदाई के बाद भी उन दोनों की आँखों में वासना के लाल डोरे साफ़ नज़र आ रहे थे, ऐसा लग रहा था की वो दोनों कबसे प्यासे थे और आज एक दुसरे को पाकर उनकी बरसो की प्यास आज बुझी थी. "मेरी किशमिश" इतना बोल कर गोपी काका ने नेहा को होठो पर चूम लिया, जवाब में नेहा ने गोपी काका को एक लुम्बा पैशनेट किश दिया जिसमे उसने अपनी किसिंग टेक्निक्स की साडी महारत दिखा दी.

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एक लम्बे पैशन से भरे चुम्बन के दोनों आखिरकार एक दुसरे से अलग हुए. गोपी काका ने नेहा के कपडे नेहा की तरफ बड़ा दिए और खुद भी अपने कपडे पेहेन्ने लगे. दोनों के कपडे पेहेन्ने के बाद नेहा ने पीछे से गोपी काका को अपनी बहो में भर लिया.

नेहा: कहा चले गए थे आप इतने सालो तक आपको कभी मेरी याद नहीं आई. क्यों नहीं मिलने आए मुझे कभी.

गोपी काका: उस वक़्त मेरा चले जाना hi ठीक था.

नेहा: पर जब आप यहाँ थे और मुझे पहचान गए थे तो अब तक सामने क्यों नहीं आए.

गोपी काका: पहले नहीं पहचान पाया था पर मुझे लगा ज़रूर था की तू वही है पर उस दिन जश्न वाली रात तेरे पर्स से एक फोटो गिर गई थी जिसमे तू अपनी माँ के साथ थी तब मुझे पक्का हो गया की तू नूपुर शर्मा की बेटी है यानि मेरी किशमिश. पर फिर भी मई तेरे सामने नहीं आना चाहता था. पर आज जब तुझे इस तेरा हवस और कामुकता से भरा ये रूप देखा तो मई समझ गया की मैंने जिस किशमिश को मैंने अपने पानी से सींचा था अब वो पूरी तरह से पानी से लबरेज़ अंगूर बन चुकी है. पर अब तुम जाओ सुबह होने वाली है और मई नहीं चाहता कोई हमे इस हालत में देखे.

नेहा: पर क्या आप मुझे मिलने शहर आएँगे.

गोपी काका: आऊंगा आज तेरे बदन को महसूस कर बरसो की आग भड़क उठी है इसलिए अब तो आना hi पड़ेगा. क्युकी अंगूर में किशमिश से ज्यादा रूस होता है.

नेहा ने गोपी काका के फ़ोन में अपना नंबर सेव कर दिया वो भी किशमिश नाम से.

नेहा: आपकी किशमिश आपका इंतेज़्ज़र करेगी.

गोपी काका: किशमिश नहीं अंगूर.

जाते जाते उनके होठो पर एक और किश दी और कमर मटका हवेली की तरफ चल पड़ी. जाते जाते गोपी काका नेहा के बदन के हर कटान हर घुमाव को निहारते रहे. पर ये तो तै था की अपनी सभी सहेलियों में नेहा शर्मा का कोई सांई नहीं tha,Ek रात में आठ आठ मर्दो से छोड़ने और न जाने कितनी बार झड़ने के बाद भी नेहा के अंदर कोई थकन नहीं थी और कामुकता तो इतनी की अभी भी वो न जाने कितने मर्दो को झड़ने को मजबूर कर सकती थी. पर सोचने वाली बात ये थी की जिस नेहा ने कल्लू से अपने जुटे चटवाए थे जो मर्दो को अपनी ऊँगली पर नाचना अच्छे से जानती थी आज वो खुद एक गवर देहाती के तलवे चाट रही पर क्यों वो ऐसा क्यों कर रही थी कौन था ये गोपी काका क्या वो नेहा को पहले से जनता था अगर नहीं तो वो नेहा को किशमिश क्यों बुला रहा था और नेहा भी चुपचाप उसकी हर बात मन रही थी. क्या किस्सा था नेहा का गोपी काका का और किशमिश का.

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शायद अब इस साइट पर रीडर्स कम हो गए है या फिर इस स्टोरी के रीडर्स कम हो गए क्युकी इधर मैंने काफी जल्दी जल्दी लम्बे उपदटेस डाले पर उस हिसाब से रेपोंसे ये रिलीज नहीं मिले न उपदटेस को ज्यादा लाइक्स मिले अगर कोई अपडेट पसंद आए तो उसे लिखे ये रिप्लाई देकर अपने फीडबैक दे ताकि पता तो चलता रहे की लोग इस स्टोरी से जुड़े है भी की नहीं.
 
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जिस वक़्त नेहा विक्रम का इंतज़ार कर रही थी जबकि विक्रम लालू से लड़कर शबाना को बचा रहा था गरिमा बिहारी काका की एक रात की पत्नी बन रही थी विनीता लखन सिंह की गया की पूजा संपन्न हो चुकी थी और नीतू अघोरी के साथ हदीस की साधना की प्रक्रिया को सुन और समझ रही थी उसी वक़्त अजय स्टार वेग गति लोगन के लेकर उस जगह पहुंच चूका था जहा पहली बार उसका और अभय रायचंद का आमना सामना हुआ था. लोगन को वह पहुंचते hi अभय रायचंद के अंदर की काली ऊर्जा का आभास होने लगा था.

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लोगन: अद्भुत इतनी ज़बरदस्त काली ऊर्जा का एहसास बड़े दिनों बाद हुआ निश्चित hi वो जो भी है बेहद ताकतवर है. पर मेरे हाथ से निकलने वाले ये दिव्या खंजर उसे चीयर कर रख देंगे. पर वो है कहा.

अजेस्टर: शायद मई जनता हु की वो उस लड़की को लेकर कहा गया होगा.

अजय लोगन को लेकर उसी खँडहर के पास पहुंच गया जिसके बारे में ओसका ने उसे बताया था.

लोगन: तुम सच कह रहे हो वो यही है क्युकी मुझे भी उसकी यहाँ उसकी ऊर्जा का एहसास और भी तीव्र हो रहा है.

अजेस्टर: तो हमे अंदर चलना चाहिए और मंजरी को बचाना चाहिए.

लोगन: हमे नहीं केवल मुझे मई अकेला अंदर जाऊंगा और उसे लड़ाई में उलझाउंगा इसी बीच तुम उस लड़की को लेकर ओसका तक जाओगे.

अजेस्टर: पर आपने कहा वो बहुत ताकतवर है फिर आप अकेले उसे कैसे रोकोगे.

लोगन अजेस्टर को तिरछी नज़रो से देखते हुए: ये मत भूलो की मई कौन हु. तुम सिर्फ एक बिना शरीर की आत्मा हो और मई एक दिव्यांश हु. मेरे हाथ से निकलने वाले खंजारो में दिव्या शक्ति है तुम्हे लगता है मुझे एक आत्मा की मदद की ज़रूरत होगी.

अजेस्टर: ठीक है जैसा आप कहे.

लोगन: चलो इस अभय रायचंद नाम के किस्से को यही ख़तम करते है.

लोगन ने अपनी मुथियो को कास कर भीचा और उस खँडहर की तरफ फुल कॉन्फिडेंस से बाद चला. दो विनाशक शक्तिया एक दुसरे से भिड़ने जा रही थी काली ऊर्जा से भरा महाखलनायक अभय रायचंद और दिव्या अंश लोगन.

इतस लोगन वस अभय रायचंद

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जैसे जैसे लोगन के कदम उस खँडहर के करीब बाद रहे थे अंदर मौजूद अभय को भी एक बेहद तीव्र दिव्या ऊर्जा का आभास होने लगा था. और इससे पहले की लोगन उस खँडहर के अंदर दाखिल होता अभय वेग गति से लोगन के पीछे आकर खड़ा हो गया. लोगन को भी अभय के अपने पीछे होने का आभास हो गया. और लोगन ने तेज़ गति पीछे पलट कर अभय के चेहरे की तरफ एक मुक्का बड़ा दिया पर वो भी अभय रायचंद था उसने भी बीच में उसके मुक्के को अपनी हथेली से रोक दिया.

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पर अभय को लोगन के हाथो से निकलने वाले खंजारो का पता नहीं थी. जैसे hi उसने लोगन के मुक्के को रोका लोगन के खंजर उसकी हथेली को चीरते हुए उसके चेहरे के ठीक सामने जाकर रुके. अभय रायचंद का खून से लाल हो उठा. लोगन ने सच hi कहा था उसके खंजर सच में दिव्या थे जिनका अभय के पास भी कोई तोड़ नहीं था. अभय को यहाँ इतनी दिव्या शक्ति के होने की उम्मीद नहीं थी शायद इसीलिए वो इसके लिए पूरी तरह तैयार नहीं था.

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अभय के एक बार घायल होने के बाद लोगन ने उसे वाणी का दूसरा मौका नहीं दिया. लोगन के खंजर अभय रायचंद के शरीर को जगह जगह से चीरते जा रहे थे. अभय रायचंद का पूरा शरीर खून से तरबतर था उसके अंदर खड़े रहने की ताकत नहीं बची थी. छुपकर ये सब देख रहा अजेस्टर बेहद खुश था की अभय रायचंद की कहानी का अंत होने जा रहा था. वो लोगन के कहे मुताबिक पीछे की तरफ से खँडहर के अंदर गया और आरती उर्फ़ मार्जारी को उठा कर वापस आ गया. वैसे तो लोगन ने उसे कहा था की उस लड़की को लेकर ओसका के पास चले जाना पर शायद वो उस लड़ाई के परिणाम के प्रति पूरी तरह आश्वस्त था की क्या होने वाला है और शायद वो उसे देख कर hi जाना चाहता था इसलिए वो वही खड़ा लोगन के हाथो अभय रायचंद का अंत होते देखने लगा.

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इसी बीच आसमान में तेज़ बिजल्ज कड़की हवाई तेज़ हो गई कुत्तो सियारो के भौकने की आवाज़े तेज़ हो गई. वरवरण में काली ऊर्जा का प्रवाह यकायक बेहद तीव्र हो उठा, ये वही पल था जब अघोरी और नीतू की साधना अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गई थी जब हदीस ने अघोरी के शरीर में प्रवेश करा था.

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हदीस जो अन्धकार और पातळ की दुनिया का स्वामी था उसके आगमन ने वातावरण में काली ऊर्जा का प्रवाह तीव्र कर दिया था. और ये एहसास अभय रायचंद को भी हो रहा था उसने वातावरण में फैली काली ऊर्जा को सोखना शुरू कर दिया. वो काली ऊर्जा को सोख्ता गया सोख्ता गया, लोगन के विध्वंसक वारो ने उसे पूरी तरह तोड़ दिया था पर उसने अपने अंदर बची खुची सरे ताकत को अपने हाथो में केंद्रित करा और अपने द्वारा सोखी गई साडी काली ऊर्जा को अपने उस एक मुक्के में इकठ्ठा करके हदीस की उस काली ऊर्जा से भरा एक महाविनाशक प्रहार सीधा लोगन के दिल के ऊपर करा और लोगन के दिल ने धड़कना बंद कर दिया.

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अजेस्टर को अपनी आँखों पर एक्पाल को यकीन hi नहीं हुआ की ये एक पल में अचानक क्या हुआ, एकदम से वक़्त बदल दिए हालत बदल दिए जज़्बात बदल दिए, जो लोगन अब तक पूरी तरह डोमिनाते कर रहा था वो अब बेजान सा ज़मीन पर पड़ा था. पर उस एक प्रहार को करने में अभय रायचंद भी अंदर से पूरी तरह निचुड़ गया था उसके अंदर आँखे खुली रखने भर की ताकत नहीं बची थी और लोगन के धराशाई होने के बाद वो भी बगल में निढाल होकर गिर पड़ा. अजेस्टर समझ गया की फिलहाल यहाँ से मंजरी को लेकर ओसका तक जाना बहुत ज़रूरी है क्युकी अगर अभय रायचंद को होश आ गया तो पता नहीं वो क्या करेगा. वो तेज़ गति से लोगन तक गया उसने एक कंधे पर लोगन को उठाया और तेज़ गति से दौड़ता हुआ सीधा ओसका के सामने जा पंहुचा.

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ओसका भी वातावरण में फैली काली ऊर्जा की बढ़ती तीव्रता को महसूस कर रहे थे. और जब अजेस्टर के कंधो पर लटका लोगन का बेजान शरीर देखा तो सब कुछ समझ आ गया.

अजेस्टर: महागुरु वह लोगन अभय रायचंद पर हावी था पर फिर पता नहीं अचानक ऐसा क्या हुआ कैसे उसके अंदर अचानक से इतनी ताकत आ गई की उसने एक मुक्के में hi लोगन का ये हाल कर दिया.

ओसका: उसने नहीं वातावरण में फैली इस काली ऊर्जा ने. कही कुछ तो ऐसा हुआ है जिसकी वजह से वातावरण में काली ऊर्जा का प्रवाह बहुत बाद गया और किसी काली ऊर्जा से ताकत लेकर अभय रायचंद नाम के उस शिक्षा ने इस पहाड़ को भी घुटनो पर ला दिया. पर कोई बात नहीं लोगन को तो मई वापस ले hi आऊंगा वो एक चिरंजीवी है पर फिलहाल Tumhari,Abhay रायचंद और इस लड़की के अतीत के अनजान रहस्यों से पर्दा हटाने का और अब मई ऐसा कर भी सकता हु क्युकी इस कहानी के तीनो किरदार मेरे पास है जिनपर एक विशेष प्रक्रिया के माधयम से तुम तीनो का अतीत जान सकता हु.

अजेस्टर: तीनो किरदार पर यहाँ तो सिर्फ मई और ये लड़की है अभय कहा है.

ओसका: है बिलकुल है

ओसका लोगन की तरफ इशारा करता है

ओसका: इसके हाथ के खंजारो में अभय रायचंद का खून लगा है और उस खून के माधयम से हम तुम्हारी इस लड़की और अभय की यादो की गहराई में जाकर तुम तीनो के अतीत को समझ सकते है और शायद हमे वह अभय नाम की उस काली शक्ति से लड़ने और उसे ख़तम करने का कोई तरीका मिल जाए.

अजेस्टर: तो फिर देर किस बात की शुरू करिये इससे पहले वो इस लड़को को ढूंढ़ता हुआ यहाँ आ जाए.

ओसका: ये विधि इतनी आसान और छोटी नहीं है इसमें समय लगेगा लगभग 24 घंटे यानि पूरा एक दिन तभी हम तुम तीनो के अतीत में प्रवेश कर पाएंगे है तब तक मई ऐसा प्रबंध कर दूंगा की 24 घंटे तक अभय हमे ढून्ढ नहीं पाएगा.

लोगन और आरती के मूर्छित शरीरो को दो तंत्र घेरो के अंदर रख दिया और अजय भी ओसका के कहने पर आत्मिक रूप में तीसरे तंत्र घेरे के अंदर आकर खड़ा हो गया और महागुरु ओसका ने अतीत के रहस्यो से पर्दा हटाने की ये विधि आरम्भ कर दी.

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सूरज की पहली किरण के साथ hi कहानी के नैव और नवग्रह पूजा के आखिरी दिन का आरम्भ हो चूका था. अथवा दिन जो की काफी उतर चढ़ाव भरा था और कई बड़ी बड़ी घटनाओ का साक्षी बना जैसे नीतू अघोरी की कामसाधना संपन्न हुई, अजेस्टर लोगन की मदद से आरती को अभय के चंगुल से छुड़ाकर ओसका तक पहुंचने में कामयाब हुआ, विक्रम की वजह से फाइनली शबाना को लालू नाम के बुरे सपने से आज़ादी मिली, शबाना की बातो से प्रेरित होकर विक्रम ने शोभा से मन hi मन माफ़ी मांगी और नेहा से अपने रिश्ते को ख़तम कर लिया जिसके गुस्से में नेहा ने अपने जीवन का अब तक का सबसे ज़बरदस्त सामूहिक सेक्स करा, गरिमा ने पहले बेटे (जीतू) को सडके करा और फिर रात में बाप (बिहारी काका) की एक रात की पत्नी बनकर उनका बीज अपने अंदर लेकर एक पत्नी होने की शर्म और मर्यादा की देहलीज़ को पूरी तरह लांघ दिया हरिया के साथ जो हुआ उसे फिर भी एक जवान स्त्री पुरुष का आपसी आकर्षण समझा जा सकता था पर न जीतू गरिमा के उम्र का था न उसका बाप बिहारी पर ये गरिमा के अंदर की दबी कामवासना hi थी जिसने उसे एक घरेलु हाउसवाइफ से एक छिनार में तब्दील कर दिया और इस आठवे दिन की सबसे बड़ी घटना घाटी लखन और विनीता के बीच जब गया Puja(Earth) की विधियों को संपन्न करते विनीता और लखन के सरे कपडे उतर चुके थे यूरेनस पूजा के दौरान विनीता तो पहले hi लखन का वीर्य पी चुकी थी कल रात गया पूजा की विधियों ने लखन सिंह के होंठो को भी विनीता की योनि तक पहुंच कर उसके कामरुस का पान करने को मजबूर कर दिया, वो तो गनीमत थी उनकी आँख पर बंधी पत्तियों की जिसने अब तक उनके बीच मर्यादा और शर्म की बारीक दीवार को बनाए रखा था.

और अब आठवे दिन में इन सब घाटी घटनाओ का परिणाम मिलने वाला था. नीतू की कहानी तो उसके अंजाम तक पहुंच चुकी थी पर उसकी बेस्ट फ्रेंड आरती के अतीत में क्या था अभय और अजय से उसका क्या सम्बन्ध था वो पता लग्न बाकी था. शोभा और विक्रम की आज सुहागरात थी, शोभा तो पहले hi अनजाने में पहले अपने पिता मलखान सिंह और फिर हवेली के जमादार भीमा के साथ अपना पति समझ कर सम्भोग कर चुकी थी और विक्रम ने भी बार बार नेहा के साथ सेक्स करके शोभा को धोका दिया था क्या इस सबका परिणाम आज उनकी सुहागरात पर पड़ने वाला था या ये सब यही छुपा रहने वाला था. नेहा क्या विक्रम को यही छोड़ देगी या फिर विक्रम की ज़िन्दगी में घुसने का प्रयास करने वाली थी, और वो स्ट्रेंजर जिसने नेहा विक्रम की कहानी बनाने में कही न कही एक सहारे की भूमिका ऐडा करि क्या उसके रहस्य से पर्दा उठेगा. शबाना किस तरह धामु का सामना करेगी और उसके दिल में बेस अपने प्रति प्यार को ख़तम कर पाएगी. गरिमा तो पहले hi बहुत कुछ कर चुकी थी अब इस बचे हुए दिन में और क्या करने वाली थी. और विनीता लखन जो बंद आँखों से तो एक दुसरे के लिए नंगे हो चुके थे अब इस नैव गृह की पूजा उनसे और क्या क्या क्या करवाने वाली थी इन सभी सवालो के जवाब इस नैव दिन में मिलने वाले थे.

शायद है या शायद.........

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कल रात की गया पूजा की कामुक विधियों को संपन्न करने के बाद काफी देर तक तो विनीता और लखन को नींद hi नहीं आई थी. बड़ी मुश्किल से तो उन्हें नींद आई पर सूरज की पहली किरण के साथ hi उनके दरवाज़े पर होती दस्तक से उनकी नींद खुल गई. दोनों ने एक पल को एक दुसरे को देखा फिर उठकर दरवाज़े की तरफ बाद चले. जैसे hi उन्होंने दरवाज़ा खोला सामने बेहद सुन्दर स्त्री सफ़ेद कपड़ो और आभूषणों में काफी अच्छे श्रृंगार में उनके सामने कड़ी थी,

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और उसके हाथ में एक सन्देश था. लखन विनीता समझ गए ये निश्चित hi उनकी आज की गृह पूजा से सम्बंधित सन्देश था पर अब तक जब भी कोई संदेशवाहक आया वो कोई पुरुष था पहली बार एक स्त्री वो भी इतनी सुन्दर संदेशवाहक के रूप में आई थी, जिससे एक बात तो निश्चित थी की आज की पूजा सौंदर्य पर काफी निर्भर होने वाली थी.

लखन विनीता ने उस महिला को प्रणाम करा और उनसे उनके आने का प्रयोजन पुछा.

महिला: मई यहाँ अघोरी महाराज का सन्देश लेकर आई हु. कल को वो एक कठिन साधना में शामिल हुए थे इसलिए वो खुद आज आपसे संपर्क नहीं कर पाएंगे इसलिए उन्होंने पहले से hi आज की पूजा की समस्त विधि इस पत्र में लिख कर आपके पास भेज दी है. आपको इसके अनुसार आज की पूजा की साडी विधिया संपन्न करनी है. और....

लखन: और क्या

महिला: और अब विनीता जी को मेरे साथ जाना होगा अब आप दोनों की मुलाकात सीधे रात को होगी. पूजा के जो चरण विनीता जी को करने है वो मई उन्हें समझा दूंगी और जो चरण आपको करने है उसके बारे में इस पत्र में लिखा है.

महिला ने वो पत्र लखन जी की तरफ बड़ा दिया.

महिला: विनीता तो क्या आप तैयार है मेरे साथ चलने के लिए.

लखन ने एक नज़र पीछे कड़ी विनीता की तरफ देखा और फिर वो पत्र ले लिया. विनीता ने भी चलने के लिए सहमति में सर हिला दिया.

विनीता ने एक नज़र लखन जी को देखा और फिर आँखों hi आँखों में उनसे विदा लेकर उस महिला के साथ बहार निकल गई. और विनीता और वो महिला सामने कड़ी एक बघहि में सवार हो गए और लखन सिंह के देखते hi देखते वो बघहि विनीता को लेकर उनकी आँखों से ओझल हो गई. बग्घी के हट्टे hi लखन जी को बग्घी के पीछे की तरफ रखा एक पिंजरा दिखाई दिया जिसमे एक सफ़ेद kabootar(dove) बंद था. लखन सिंह आगे बाद कर उस पिंजरे के नज़दीक गए और उस सफ़ेद कबूतर को निहारने लगे और उसकी सुंदरता को निहारने लगे. वो सफ़ेद कबूतर बेहद सुन्दर और एकदम दूधिया सफ़ेद था.

लखन सिंह तो उस कबूतर की सुंदरता में एकदम मुग्ध से हो गए अचानक उन्हें अपने हाथ में थामे पत्र का ध्यान आया और उन्होंने वो पत्र खोलकर पड़ना आरम्भ करा.

अघोरी की कलम से: लखन जी आपको बहुत बहुत बधैया की अपने पूजा की साड़ी विधिया कुशलतापूर्वक पूरी करि अब बस ये एक आखिरी पड़ाव बाकि रह गया. पर आखिरी पड़ाव भी बेहद मुश्किल होने वाला है मई सिर्फ आपके और विनीता जी के लिए प्रार्थना कर सकता हु की आप ये आखिरी पड़ाव भी पार कर ले. एक विशेष साधना की वजह से शायद आज मई आपसे बात न कर पाव इसलिए पूजा की साड़ी विधि इस पत्र में लिखकर भेज रहा हु. पूजा का आज आखिरी दिन है और आपको और विनीता जी को पूरा दिन अलग अलग रहना और आज की गृह पूजा की साडी विधिया अलग अलग पूरी करनी है.

अब आप दोनों की मुलाकात सीधा रात में होगी जहा आप दोनों को मिलकर गया यानि धरती पूजा का वो सातवा चरण पूरा करना है जिसके बारेमे मैंने कल आपको बताया था. और जैसा की मैंने कहा था की वो आपकी इन 9 दिनों की पूजा का सबसे मुश्किल कार्य होगा पर फिलहाल हम उसके बारे में बात नहीं करेंगे उसके बारे में आपको बाद में बता दिया जाएगा और हो सकता है तब तक शायद मई भी अपनी साधना से मुक्त हो जाऊ तो उसके बारे में मई स्वयं आपको रात में विस्तार से बता दू वर्ण फिर मेरे शिष्य आपको समझा देंगे . फिलहाल हम वीनस यानि शुक्र गृह की पूजा पर बात करते है.

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तो वीनस जिसे ग्रीक सभ्यता में एफ्रोडाइट देवी के नाम से पूजा जाता जाता. एफ्रोडाइट को प्रेम, सौंदर्य और कामलालसा की देवी मन जाता है. और यहाँ मेरा प्रेम से तात्पर्य प्रेम का विराट रूप नहीं जो किसी भी रिश्ते में होता है, यहाँ मेरा प्रेम से मेरा अर्थ है सेक्स से है जो एक स्त्री और पुरुष के बीच होता है और जिसमे एक स्त्री पुरुष के आपसी समागम से एक नए जीवन की उत्पत्ति होती है.

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पौराणिक मान्यताओं के अनुसार उरुस के जननांग से निकले झाग जिन्हे उनके बेटे Cronus(Jupiter) ने एक समुद्र में फ़ेंक दिया और वह वो झाग एक सेअशेल के अंदर गिरा और उसी सेअशेल से एफ्रोडाइट का जन्म हुआ. एफ्रोडाइट को श्रृंगार का बेहद शौक था उनका काफी समय खुद को आईने में निहारते हुए बीतता था. उन्हें गहनों का भी विशेष शौक था ज्यादातर जगह उनके चित्रों में उन्हें स्वर्ण कमरबंद बंधे दिखाया जाता है जिसमे उनका रूप सौंदर्य और भी ज्यादा बाद उठता था. एफ्रोडाइट के बदन से मेहँदी की मादक सुगंध आती थी जिसकी महक जब भी किसी की नाक में जाती तो बरबस hi काम वासना की इच्छा से आसक्त हो जाता था. उन्हें गुलाब पुष्प बेहद प्रिय थे उनके शयनकक्ष के समीप hi विशाल बाघ था जो अनगिनत गुलाब पुष्पों से भरा हुआ था.

आपको ये पत्र बड़े ध्यान से पड़ना है और इसमें Aphrodite(Venus) से जुडी जो भी बाते है उन्हें याद रखना है क्युकी ये बाते आगे आपके बहुत काम आने वाली है. और पड़ने के बाद पिंजरे में बंद उस सफ़ेद कबूतर को आज़ाद करके ये पत्र उसके सामने रख देना है. वो सफ़ेद कबूतर ये पत्र लेकर उड़ जाएगा और आपको आपकी मंज़िल तक ले जाएगा जहा आपको आगे के कार्य करने है. सफ़ेद कबूतर देवी एफ्रोडाइट को सबसे अधिक प्रिय है इसीलिए इस पूजा की शुरुआत इस श्वेत कबूतर से होगी. अपनी मंज़िल तक पहुंचने लिए एक अश्व की व्यवस्था कर दी गई जिसमे बैठकर आपको इस श्वेत कबूतर का पीछा करते हुए अपनी मंज़िल तक पहुंचना है. आशा है आप ये अंतिम पड़ाव भी सफलतापूर्वक पार कर लेंगे आपका दिन शुभ हो.

लखन सिंह ने आस पास नज़र दौड़ाई तो उन्हें एक सफ़ेद घोडा बंधा दिख गया. लखन सिंह ने एक बार फिर उस पत्र को बड़े ध्यान से पड़ा और फिर उस पत्र को पिजरे के सामने रख कर पिंजरा खोल दिया और खुद घोड़े को खोल कर उस पर सवार होकर उस कबूतर के उड़ने का इंतज़ार काटने लगे. वो श्वेत कबूतर पिंजरे से बहार निकला उसने वो पत्र अपने पंजो में दबाया और उसे लेकर उत्तर दिशा की तरफ उड़ चला और लखन सिंह ने भी सरपट अपना घोडा उस कबूतर के पीछे दौड़ा दिया.

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इधर काफी लम्बे सफर के बाद विनीता एक बेहद सुंदर भवन के सामने पहुंच गई जहा से इत्र और गुलाब बहुत मादक सुगंध आ रही थी.

विनीता: ये हम कहा आए है

महिला: सौंदर्य भवन जिसे अंग्रेजी भाषा में कहे तो ब्यूटी पारलर.

विनीता: पारलर पर क्यों हम तो पूजा के लिए निकले थे.

विनीता के इस सवाल पर उस महिला ने अपनी कमर में खुसा एक पत्र निकल कर विनीता की तरफ बड़ा दिया.

अघोरी की कलम से: विनीता जी पूजा के आगे के चरणों के बारे में विस्तार से मेरी शिष्य आपको बाद में बताएगी आगे के चरणों के बारे में मई उसे बता चूका हु तो वो आपको समझा देगी अगर मई उस वक़्त तक अपनी साधना से मुक्त हो गया तो मई भी आपसे बात करने की कोशिश करूँगा पर फिलहाल के लिए मई आपको इस पत्र के माधयम से बता रहा हु की आज आपको वीनस यानि शुक्र गृह जिसे ग्रीक माइथोलॉजी में एफ्रोडाइट देवी के रूप में पूजा जाता है, और जिन्हे सौंदर्य यानि सुंदरता की देवी भी मन जाता क्युकी एक तो वो खुद भी बेहद सुन्दर थी और उन्हें साज श्रृंगार अति प्रिय था ज्यादातर प्रतिमाओं में उन्हें हाथ में दर्पण पकडे खुद को निहारते हुए hi प्रदर्शित किया जाता है. और आज आपको अपने प्रथम चरण में वही कार्य करना है जो न सिर्फ देवी एफ्रोडाइट को बल्कि लगभग हर स्त्री को अति प्रिय है साज श्रृंगार.

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मेरी शिष्य आपको लेकर एक सौंदर्य भवन है जहा साज श्रृंगार की हर सुविधा मौजूद है और आपका श्रृंगार करने के लिए कई सेविकाए भी है जो इस कार्य में बेहद कुशल है वो आज आपके रूप सौंदर्य को निखारने में आपकी सहायता करेंगी. तो संछिप्त में कहु तो आपको अभी कुछ नहीं करना है जो कुछ करना है वो सब यहाँ मौजूद सेविकाए कर लेगी बस आपको उनका सहयोग करना है.

आगे की विधियों के बारे बाद में बताया जाएगा तब तक आप सिर्फ आराम करते हुए इस सौंदर्य भवन में अपनी सेवा का आनंद ले.

पत्र पढ़कर एक पल को तो विनीता के चेहरे पर हलकी सी मुस्कान आ गई क्युकी भला आराम करते हुए अपनी सेवा करवाना भला किसे अच्छा नहीं लगता फिर उसने वो पत्र वापस उस महिला की तरफ बड़ा दिया. महिला ने वो पत्र लेकर विनीता से अंदर भवन में चलने का इशारा करा और विनीता और महिला इस भवन के अंदर चल दिए.

अंदर उस भवन में अंदर जाकर एक विशाल कमरा था जहा चारो तरफ दर्पण hi दर्पण लगे थे. और वह कई साडी सुन्दर सुन्दर लड़किया अलग अलग सीट्स के पास कड़ी थी.

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वह ब्यूटी परलोर में इस्तेमाल किया जाने वाला हर सामान था. ब्यूटी पारलर में होने वाले हर काम के लिए अलग अलग लड़की और अलग अलग सीट्स थी जैसे pedicure,manicure, sauna,hair स्टीम, आयल मस्सगे, एएब्रोस थ्रेडिंग, नैलकुटिंग, फेसिअल, बट मस्सगे यहाँ तक की ब्रैस्ट मस्सगे और वैजिनल शेविंग के लिए भी. पूरा कमरा इत्र और गुलाब की सुगंध से महक रहा था. काम करने के लिए अटेंडेंट्स बहुत थे और कस्टमर केवल एक विनीता. सभी लड़किया विनीता के सामने हाथ बंधे कड़ी थी और अपने आस पास का माहौल देख कर तो विनीता को रानियों वाली फीलिंग आ रही थी.

अपने आस पास का बेहद शानदार माहौल देख कर विनीता कुछ पल को पूजा और अब तक घाटी साडी घटनाओ को भूल गई और बरबस hi उसके मुँह से आह निकल गई. विनीता को वह खड़ा मन्त्रमुघ्द सा सब निहारते देख उस महिला ने बोलै.

महिला: मैडम आप थोड़ा रिलैक्स करेंगी या शुरू करे.

अपने लिए इतनी नज़ाकत से मैडम सुनकर तो विनीता सातवे आसमान पर hi पहुंच गई और वो इस मज़े का पूरा लुत्फ़ उठाना चाहती थी यहाँ बैठकर तरह ततः से अपनी सेवा करवाने से ज्यादा रिलैक्सेशन भला और कहा.

विनीता: नहीं चालू करते है.

महिला: तो आप वह चंगीन रूम में जाकर अपने कपडे उतर कर टॉवल लपेट कर आ जाइये.

विनीता उस महिला से टॉवल लेकर चेंजिंग रूम में जाकर अपने सारे कपडे उतर कर टॉवल लपेट कर आ गई.

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महिला: मैडम तो आपके पेडीक्योर, मैनीक्योर से शुरू करे.

विनीता ने हां में सर हिला दिया और आगे बाद कर पेडीक्योर मैनीक्योर वाली सीट पर जाकर बैठ गई. एक लड़की उसके पैरो के पास बैठ गई और दूसरी उसके हाथ को थम कर उसके बगल में बैठ गई और नेलकटर से उसके नाखुनो को शेप देने लगी.

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इधर लखन सिंह उस सफ़ेद कबूतर के पीछे चले जा रहे थे और उधर उस सौंदर्य भवन में विनीता अपनी सेवा के मज़े उठा रही थी. पर ये तो बस शुरुआत थी अभी तो आगे बहुत कुछ होना बाकी थी, वीनस उर्फ़ देवी एफ्रोडाइट आज उनसे और क्या क्या करवाने वाली थी ये तो आगे hi पता चलने वाला था.
 
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इधर हवेली में कल रात की ताबड़तोड़ गैंग चुदाई के बाद आज नेहा अंगड़ाइयां लेती हु बहुत देर से उठी. आंखे मलते हुए जैसे hi उसने आँखे खोली सामने कुर्सी पर बैठी शबाना उसे बड़ी तीखी नज़रो से घूर रही थी.

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नेहा: अरे शबाना दी आप उठ गई वो कल रात आपके जाने के बाद मई ऊपर छत पर कुछ देर टहलने चली गई थी, फिर वही बैठे बैठे आँख लग गई. जब देर रात कमरे में आई तो आप सो रही थी. आप बताओ आपकी कल रात कैसी गुज़री.

शबाना (तीखी नज़रो से घूरते हुए): तो कल रात तुम छत पर गई थी.

नेहा ( हिचकिचाते हुए): वो है वो मई है, हम्म मई छत पर hi गई थी.

शबाना: कितना झूट बोलोगी नेहा, और कितना झूट बोलोगी.

नेहा: झूट कैसा झूट.

शबाना: कल रात में तुम छत पर गई थी या अपनी जिस सहेली की शादी में तुम मेहमान बनकर आई हो उसीके नए नवेले पति पर डोरे डालने गई थी. उसके साथ सेक्स करने गई थी. तुम्हे ऐसा करते हुए ज़रा भी शर्म नहीं आई.

नेहा के तो चेहरे की हवइया hi उड़ गई की शबाना को ये सब कैसे पता चल गया, कही उसने उसे और विक्रम को साथ में देख तो नहीं लिया पर कल रात तो वो मिले hi नहीं और अगर पहले कभी देखा होता तो तब क्यों नहीं पुछा.

नेहा: ये आप क्या बोल रही है, ऐसा कुछ नहीं है. आपको कोई ग़लतफहमी हुई है.

शबाना: कुछ तो डरो नेहा, ऊपर वाले से कुछ तो डरो कितना झूट बोलोगी, जिस वक़्त तुम विक्रम को फ़ोन करके बुला रही थी उस वक़्त वो मेरे साथ था.

नेहा का मुँह शॉक में खुला का खुला रह गया पर अब उसे विक्रम पर कल रात से भी ज्यादा गुस्सा आ रहा था.

नेहा (गुस्से में): अच्छा तो ये वजह थी उसके न आने की क्युकी अब उसका मुझसे मन भर गया, अब उसका दिल आप पर आ गया है. और आपको तो बच्चा चाहिए hi था एक पागल आदमी से बच्चा लेने से अच्छा है विक्रम जैसे गबरू जवान मर्द से बच्चा लिया जाए.

नेहा का इतना बोलना भर था की एक झन्नाटेदार झापड़ नेहा के कान के नीचे आकर लगा, कुछ पल को तो नेहा की आँख के आगे तारे नाच गए. शबाना ने नेहा के गाल पर एक झापड़ रसीद कर दिया था.

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शबाना: अपनी फैंटसीज के नशे में तुम इस कदर अंधी हो चुकी हो की तुम्हे सही गलत कुछ नज़र नहीं अत. और अब तुम मुझे भी अपने जैसा समझ रही हो, विक्रम मेरे लिए मेरे भाई जैसा है और कल रात उसने मेरे लिए वो करा जो एक भाई को अपनी बेहेन के लिए करना चाहिए.

नेहा: आपने भी विक्रम के भाई जो दजमाग से बीमार है उसे अपने स्वार्थ के लिए इस्तेमाल करा उसका फायदा उठाया वो गलत नहीं था क्या. अगर मैंने एक्स्ट्रा माररिटल अफेयर कर लिया तो मई गलत. और पहली बार तो नहीं करा मैंने ये सब मेरे पहले भी कई अफेयर्स रह चुके है तो इस बार ऐसा क्या हो गया. और वो विक्रम वो भी कोई दूध का धुला नहीं है अफेयर तो उसने भी करा न मैंने अकेले ने तो नहीं करा न.

शबाना: मैंने जो कुछ भी धामु के साथ करा वो सभ मजबूरी में गलती से करा और उसका मुझे पछतावा है और विक्रम ने भी यही कहा की उसे पछतावा है की उसने शोभा को उसीकी सहेली के साथ मिलकर धोका दिया और अब वो दुबारा ऐसा नहीं करेगा पर तुम तुम्हारी बातो से तो लग hi नहीं रहा की तुम्हे इस बात का रत्ती भर भी पछतावा है. बल्कि तुम तो बेफिज़ूल के तर्क देकर इस बात को जस्टिफाई करने की कोशिश कर रही हो. क्या तुमने कभी सोचा है शोभा को इस बारे में पता चल जाए तो क्या होगा. बेशक तुम्हारे बहुत सरे अफेयर रहे होंगे तो तुम्हारे लिए ये सब नार्मल बात है पर शोभा उसने बचपन से लेकर अब तक सिर्फ और सिर्फ विक्रम को चाहा है और अगर उसे पता चले की उसकी शादी होने के सात दिन के अंदर विक्रम उसीकी सहेली के साथ सुहागरात मन रहा है जबकि वो खुद पूजा की कुछ विधियों की वजह से अब तक अपनी सुहागरात नहीं मन पाई. कैसा लगेगा उसे, जान दे देगी वो अपनी टूट जाएगी, क्या अगर ऐसा हुआ तो खुद को माफ़ कर पाओगी तुम.

नेहा की जुबां खामोश हो गई अब उससे कोई और तर्क नहीं दिया जा रहा था, शबाना की बातो ने उसे कही न कही निरुत्तर सा कर दिया था, उसे एहसास हो रहा था की अपनी फंतासी के उन्माद में उसने कही न कही शोभा के साथ तो गलत करा hi था शायद उसे ये नहीं करना चाहिए था वो भी तब जब शोभा की खुद की सुहागरात अब तक नहीं हो पाई hai,par विक्रम के लिए उसके मन में अभी भी गुस्सा था क्युकी इस सबके लिए वो अकेले ज़िम्मेदार नहीं थी बल्कि ये सारा स्ट्रेंजर वाला तमाशा तो विक्रम का hi चालू करा हुआ था( नेहा को तो यही लगता था की विक्रम hi वो नक़ाब वाला स्ट्रेंजर था). बल्कि शुरू में तो उसे पता भी नहीं था की जो इंसान उसके साथ सेक्स कर रहा है वो है कौन और जब पता चला तो आलरेडी काफी कुछ हो चूका था और वो भी खुद को कण्ट्रोल नहीं कर पाई. पर विक्रम ने वो सब नहीं बताया की उसने क्या क्या करा कैसे नेहा को सडके करा उसके साथ बड़सम का खेल खेला, उसे अपनी स्लेव बनाया. और अब सारा दोष नेहा के ऊपर माध दिया जैसे खुद बड़ा शरीफ हो. पर नेहा ये सब शबाना को नहीं बताना चाहती थी वर्ण इतनी सी बात पता चलते तो उसने ऐसा रियेक्ट करा अगर और पता चला और वो ओपन हो गया तो पता नहीं कितना बड़ा बवाल खड़ा हो जाए. और शायद विक्रम ने इसीलिए ये सब शबाना को नहीं बताया.

नेहा: दी मई शर्मिंदा हु आप सही कह रही हो शायद मुझे ये सब नहीं करना चाइये था. मई वडा करती हु की अब आगे ऐसा कुछ नहीं करुँगी आप भी प्लीज ये सब किसी को मत बताना.

शबाना: नहीं बाटूंगी, गलत हम दोनों ने करा तुमने शोभा के साथ मैंने धामु के साथ और अब हमे hi ये सब सही करना होगा.

नेहा: मई खुद विक्रम से फेस तो फेस मिलकर इस सबको हमेशा हमेशा के लिए ख़तम कर दूंगी और फिर दुबारा कभी विक्रम और शोभा की ज़िन्दगी में नहीं आउंगी.

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शबाना: मुझे भी धामु से मिलकर उसके मन में मेरे लिए जो भी फीलिंग्स है उन्हें ख़तम करना होगा ताकि मेरे जाने का बाद वो न टूट जाए मुझे उसे समझाना होगा की मई उसकी दुल्हन नहीं हु.

नेहा: आप धामु से शाम को मिल लीजियेगा जब सब बिजी हो पर मुझे विक्रम से अभी मिलना होगा शाम को उनकी सुहागरात की तैयारी शुरू हो जाएगी तब मुझे मौका नहीं मिल पाएगा.

शबाना: हम्म ठीक है पर इस मुलाकात में सब कुछ ख़तम करके hi लौटना और प्लीज बात बिगड़ना मत जो कुछ हुआ उसे तुम दोनों गलती समझ कर भूल जाने पर hi कंसन्ट्रेट करना.

नेहा: हम्म ऐसा hi होगा

नेहा इतना बोलकर विक्रम से मिलने के लिए कमरे से निकल गई. पर नेहा को विक्रम की इस बात पर बहुत गुस्सा आ रहा था की अगर विक्रम को ये सब ख़तम hi करना था तो सीधा आकर उससे भी बात कर सकता था ये सब शबाना को बताकर उसे शबाना की नज़रो में बुरा दिखने की ज़रूरत क्या थी. और विक्रम ने उसके साथ ये स्ट्रेंजर स्लेव वाला बड़सम गेम क्यों खेला. उसे ये दोनों बाते विक्रम से पूछनी hi थी.

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