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अपनी गांड में अंदर बहार होती ऊँगली ने गरिका को चरमसुख के बेहद करीब पंहुचा दिया था पर बिहारी काका ने उसकी छूट पर अपना लुंड रगड़ना बंद कर दिया था क्युकी गरिमा की उत्तेजनापूर्ण अवस्था को देखकर उन्हें आभास हो रहा था की क्या पता आज रात इस गद्रे बदन वाली औरत को छोड़ने का मौका मिल जाए इसलिए वो अभी यही अपना वीर्य बर्बाद नहीं करना चाहते थे क्युकी एक रात में एक बार्स झड़ने के बाद इस उम्र में अपना लुंड दुबारा खड़ा करना उनके लिए आसान नहीं था तो ऐसे में अगर वो अभी रगड़ रगड़ कर hi झाड़ जाते और बाद में अगर मौका मिलता भी तो शायद वो उस मौके का भरपूर लाभ न उठा पाते इसीलिए उन्होंने अपने लुंड के चरमसुख को थोड़ा ताल दिया. पर गरिमा की गांड में उंगली करना उन्होंने बंद नहीं करा और गरिमा ने उन्हें चूमना बंद नहीं करा. ऐसे में गरिमा हर घडी अपने चरमसुख के करीब और करीब आती जा रही थी और एक सिसकारी भरते हुए गरिमा बिहारी काका की छाती निढाल होकर लेट गई. ज़िन्दगी में वो कई बार झड़ी थी अपनी छूट में उंगली करके भी बहुत बार चरमसुख हासिल करा था पर गांड में ऊँगली करवाकर चरमसुख प्राप्त करने का उसका ये पहला अवसर.
गरिमा निढाल सी बिहारी काका के सीने पर लेती थी और बिहारी काका भी उसे बड़े प्यार से अपनी बहो में जकड़े लेते थे. झड़ने के बाद गरिमा की सासे तेज़ तेज़ चल रही थी और बिहारी काका आगे बढ़ने से पहले उसे शांत होने का पूरा अवसर दे रहे थे और शायद अपने लुंड को भी थोड़ा शांत होने का अवसर देना चाहते थे ताकि चुदाई के समय वो धोका न देदे. गरिमा की छूट से बहकर अत पानी बिहारी काका के जांघिये पर आ रहा था और उसे आगे से गीला कर दिया था. काका को भी अपने जांघिये पर गरिमा कामरुस की चिपचिपाहट का एहसास हो रहा था. कुछ पल लेते रहने के बाद गरिमा काका के सीने से हटकर उनके बगल में ले गई. गरिमा को मज़ा तो बहुत आया पर अब भी उसकी छूट एक लुंड चाहती थी जो उसकी अंदर गहराई तक उतर के उसे पूरी तरह तृप्त करदे.
गरिमा गहरी गहरी सासे लेते हुए: जीतू के बाबू क्या आप खुश है आज बड़े दिनों बाद अपनी निर्मला के साथ यु रात गुज़र कर.
काका: है लगभग लगभग आपने वो सब करा और मुझे करने दिया जो मई निर्मला के साथ करता था.
गरिमा: अब भी आप लगभग कर रहे है.
काका: है इसके आगे की चीज़े करने में शायद आप असहज महसूस करे.
गरिमा: जब तक आप बताएंगे नहीं मुझे कैसे पता चलेगा मई कैसा महसूस करुँगी.
काका: नहीं जाने दीजिये इतना hi बहुत मेरे लिए.
गरिमा: बताइये न ये मुझे तै करने दीजिये मई वो कर सकती हु या नहीं.
काका: ठीक है अगर आप यही चाहती है तो सुनिए. जब मई निर्मला के पीछे यु ऊँगली करता था तो वो भी आपकी तरह उत्तेजना से भर उठती थी और गहरी गहरी सासे लेते हुए ऐसे hi झाड़ जाती थी. पर........
काका: पर हमारी रात यही ख़तम नहीं होती थी बल्कि यहाँ से तो हमारी रात शुरू होती थी.
गरिमा: क्या करते थे आप इसके बाद.
काका: आप वो नहीं कर पाएंगी क्युकी अपने गलत के लिए मन करा है हुए शायद वो भी आपकी नज़र में गलत हो.
गरिमा: मैंने सिर्फ आपका वो अपने अंदर लेने के लिए मन करा अगर आप उसकी बात कर रहे है तो रहने दीजिये अगर कुछ और हो तो आप मुझे बता सकते है.
काका: है है तो कुछ और पर शायद वो भी आपको गलत लगे.
गरिमा: ये मुझे तै करने दीजिये आप बताइये क्या करते थे आप दोनों इसके बाद.
काका: ठीक है बताता हु, उसका चिपचिपा पानी मेरे जांघिये में लग जाता था जैसे अभी लग गया तो ऐसे में मई अपना जांघिया उतर देता था.
गरिमा: तो मैंने तो आपसे कहा की कपडे आपके है आप अगर असहज हो और उतरना चाहते है तो उतर सकते है.
काका: पर मुझे बिना कपड़ो के देख कर आपको असहज तो नहीं लगेगा.
गरिमा: मई सुबह hi आपको बिना कपड़ो के देख चुकी हु तो इसमें नया कुछ नहीं होगा आप उतर लीजिये.
काका: पर........
गरिमा: पर क्या.
काका: पर बात सिर्फ मेरे कपडे उतरने की नहीं है जब मर्द अपने कपडे उतर दे तो भला उसकी औरत उसके बगल में लेट कर कैसे कपडे पेहेन कर रख सकती है. नीचे उसके चूतड़ तो पहले hi नंगे होते थे अपना जांघिया उतरने के बाद मई उसे फिर से अपनी बहो में भर लेता था और उसके मोठे मोठे स्तनों को अपने मुट्ठी में भर लेता था और उसके स्तनों को मसलते मसलते उसके ब्लाउज को उतर कर उसे ऊपर से भी नंगा कर देता था और फिर जी भर पर उसके स्तनों को अपने होंठो में भर कर चूसता था और वो भी मेरा सर अपनी छाती में दबा दबाकर मेरा भरपूर साथ देती थी.
बिहारी काका के इन शब्दों को सुनते सुनते hi गरिमा एक बार फिर उत्तेजना से भर उठी. वो खुद भी अपने स्तन उनसे चुसवाना चाहती थी और ये ज़ाहिर भी नहीं करना चाहती थी की ये सब वो चाहती थी और बिहारी काका ने उसे खुद ये मौका दे दिया था. दूसरी तरफ बिहारी काका ने इस उम्मीद से ये बाटे कही थी की गरिमा ने जब इतना कुछ करवा लिया है तो क्या पता इसके लिए भी मान जाए. इधर गरिमा अंदर hi अंदर तो तैयार थी पर अब ये सोच रही थी की ये बात काका से कैसे कहे अगर यही कह देगी तो काका को ऐसा लगेगा की वो भी अपने दूध चुसवाने के लिए मरी जा रही है. इसीलिए ज़रूरो था की उन्हें परमिशन दी जाए पर संस्कार के शब्दों में लपेट कर.
गरिमा सोचते हुए: आपकी बात सच में कठिन है.
गरिमा के ये शब्द सुनकर काका थोड़े विचलित हो गए की कही गरिमा मन तो नहीं करने वाली है.
गरिमा: पर मैंने आपको वडा करा था की उस काम के अलावा मई वो सब कर सकते है जो आप अपनी बीवी के साथ करते थे तब मैंने सोचा नहीं था की ये भी हो सकता है पर अब मई वडा कर चुकी हु. और अगर देखा जाए तो ये उतना गलत भी नहीं है अब आप मुझे बिना कपड़ो के देख hi चुके है और आज मैंने अपने कूल्हों को खुद से आपके सामने बेपर्दा करा तो अगर वो गलत नहीं था तो अगर मेरे स्तन बेपर्दा हो जाएंगे तो उसमे क्या गलत हो जाएगा. और रही स्तन चुसवाने की बात तो है ये थोड़ा कामुक है हुए आज तक अपने होश हवस में सिर्फ मेरे मेरे पति ने स्तानक को चूसा है पर सिर्फ स्तन चुसवाना सम्भोग काना तो नहीं होता है अब अगर आपकी ख़ुशी के लिए मई आपके होंठो पर किश कर सकती हु तो अपने स्तन भी आपके होंठो में दे सकती है. बस हमे इतना ख्याल रखना है की इस कामुकता के आवेश में इतना न खो जाए की वो सब कर बैठे जो हमे नहीं करना है.
बिहारी काका को यकीन नहीं हो रहा था की गरिमा इतनी जल्दी अपने दूध छुडवाने को भी तैयार हो गई अब उन्हें कही न कही यकीन हो गया था की दूध चूसते चूसते यदि वो उसे छोड़ भी दे तो वो मन नहीं करेगी.
काका: क्या सच में आप ये करना चाहती है.
गरिमा: अगर आपकी ख़ुशी इसमें है तो है मई यहाँ से जाने से पहले आपको ये ख़ुशी भी देकर जाना चाहती हु बशर्ते आप ये वडा करे की आप बहक नहीं जाएंगे.
काका: है मई इस बात का पूरा ख्याल रखूँगा वडा करता हु.
इतना कह कर बिहारी काका ने गरिमा को अपनी बहो में जकड लिया और बेतहाशा उसके चेहरे पर चुम्बनों की बौछार करदी.
पर अब उन्हें इस बात का ध्यान रखना था की छोड़ने से पहले उसकी रज़ामंदी लेना ज़रूरी था क्युकी उसने बहकने से बचने की ज़िम्मेदारी उन पर भी दाल दी थी. गरिमा के चेहरे को चूमते हुए उन्होंने उसके बड़े बड़े उभारो को अपने हाथो में भर लिया और उन्हें हौले हौले दबाने लगे. यु तो कल भी उन्होंने इन स्तनों से खेला था पर आज की बात hi अलग थी क्युकी आज इसमें गरिमा की रजामंदी भी शामिल थी. गरिमा इस कामुक क्रिया में बिहारी काका का भरपूर साथ दे रही थी. बिहारी काका गरिमा के स्तनों को ब्लाउज के ऊपर से दबाते सहलाते अपने हाथ गरिमा की पीठ की तरफ ले गए और एक एक करके पीछे लगे ब्लाउज के हुक खोलते चले गए. हुक खुलते hi ब्लाउज आगे से ढीला हो गया और गरिमा की पीठ पीछे से पूरी नंगी हो गई.
बिहारी काका को कबसे इसी पल का इंतज़ार था गरिमा के बड़े बड़े नंगे स्तनों को अपनी मुट्ठी में भरने का. इसलिए एक हाथ से गरिमा की नंगी पीठ को सहलाते सहलाते वो अपना दूसरा हाथ आगे ले आए और उसे आगे से ढीले हो चुके गरिमा के ब्लाउज के अंदर सरका दिया और गरिमा की एक चुकी को अपनी मुट्ठी में भर लिया.
कितने बड़े बड़े दूध थे जैसे किसी दुधारू गए के थान हो उनको मसलने मात्रा से उनका लुंड उत्तेजना में फिर झटके खाने लगा. बिहारी काका भी भी लुंड की मौन जबान को समझ गए वो उन्हें इन थानों का दूध पीने को उत्तेजित कर रहा था. और बिहारी काका ने भी अपने लुंड की उत्तेजना को समझते हुए गरिमा के उरोजों को नाम के लिए ढके उसके ब्लाउज को उसके शरीर से अलग कर दिया और गरिमा ने भी अपना ब्लाउज उतरने में मदद करके काका को आगे बढ़ने की स्वीकृति देदी. गरिमा के स्तनों को नंगा करने के बाद बिहारी काका ने अपने होंठ गरिमे के गले पर रख दिए और उसकी गर्दन को चूमते चूमते अपनी जीभ निकल कर वह चेतना शुरू कर दिया.
गर्दन हर औरत का वीक स्पॉट होता है और गरिमा भी अपनी गर्दन पर बिहारी काका की सासो की गर्माहट को महसूस कर उत्तेजित हुए बिना न रह सकीय और बिहारी काका के बदन पर अपनी बहो की पकड़ को और कास लिया.
गरिमा की टाइट होती पकड़ से बिहारी काका उसकी उत्तेजना को समझ रहे थे और उन्हें अपनी मंज़िल यानि गरिमा की छूट अपने करीब और करीब आती नज़र आ रही थी. उस छोटे से किचन एक जवान औरत और एक बुद्धा मर्द एक दुसरे को अपने आगोश में भरे चटाई पर लेते थे. किचन में पंखा चल रहा था इसके बावजूद दोनों के बदन के पसीना पसीना हो रहे थे. शायद ये उनके अंदर उफान मार रही उत्तेजना की गर्मी थी जो पसीना बनकर उनके जिस्म से बहार आ रहा था. गरिमा की गर्दन को चूमते छत्ते बिहारी काका अपने होंठ नीचे लेन लगे. वो गरिमा के उन दोनों ुचे पर्वतो के बीच के समतल हिस्से को अपने होंठो से चूम रहे थे. और उसे चूमते चूमते hi उन्होंने उसकी एक उभरी छाती को अपने होंठो में भर लिया. अपने स्तनों पर बिहारी काका के खुरदुरे होंठो की छुअन और उनकी सासो की गरमाहट ने गरिमा को कामुकता से सराबोर कर दिया और बिहारी काका के बालो को अपनी मुट्ठी मै भींच लिया हुए पागलो की तरह उनके सर के ज्यादा से ज्यादा अपने स्तन पर दबाने लगी जैसे उनसे रिक्वेस्ट कर रही हो की वो उसकी पूरी छाती को ज्यादा से ज्यादा अपने होंठो में समां ले और बिहारी काका ने भी एक सच्चे पति की तरह अपना मुँह और चौड़ा खोल कर उसकी ज्यादा से ज्यादा चुकी को अपने मुँह में भर लिया और ऊसर लोल्लयपोप की तरह चूसने लगे.
बिहारी काका किसी पागल कुत्ते की तरह गरिमा के स्तनों को चूस रहे थे. जैसे कोई सिगरेट पीने वाला धुआँ निकलते वक़्त अपने होंठो को गोल कर लेता है वैसे hi वो होंठो को गोल करके कुछ अलग hi अंदाज़ में गरिमा के स्तन चूस रहे थे और चूसते चूसते होंठो क्र अंदर hi अपनी जीभ गरिमा के निप्पल पर घुमा रहे थे. उनके चूसने में एक अलग hi जूनून अलग hi आनद था जैसे एक बरसो के भूके शिक्षा को एकदम से लज़ीज़ खाना मिल गया हो और वो बावला सा हो गया हो. गरिमा को उनकी चूसै में बहुत मज़ा आ रहा था और वो मादक सिसक्रिया लेने को मजबूर हो गई थी उसे उम्मीद नहीं थी की एक 56 साल का बुद्धा उसे उस कदर उत्तेजना से भर देगा.
गरिमा: ममम ाः ाआममम आह जीतू का बापू.
काका: है निर्मला मज़ा आ रहा है.
गरिमा: बहुत.... ममममम
इधर नीचे काका का लुंड पूरी तरह तना हुआ बार बार उस जांघिये की दीवारों पर दस्तक दे रहा था जिसके भीक मांग रहा हो की उसे भी इन कपड़ो की कैद से आज़ाद कर दिया जाए.