A wedding ceremony in village - SexBaba
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A wedding ceremony in village

थिस इस माय फर्स्ट स्ट्रोय जिसे मई पहले सोस्सिप पर लिख रहा था पर अचानक से वो साइट बंद हो जाने की वजह से ये स्टोरी बीच में hi बंद हो गई. काफी खोजने बाद मुझे ये साइट मिली जहा स्टोरी को थ्रेड के रूप में लिखा जा सकता है. एक दो पुराने रीडर्स भी मिले जिनके प्रोत्साहन से मई दुबारा यहाँ उस स्टोरी को चालू कर रहा हु.

पर यहाँ स्टोरी को कंटिन्यू करने से पहले सोस्सिप पर लिखी जा चुकी स्टोरी का संक्षिप्त परिचय देना जरूरी है ताकि यहाँ के नए रीडर्स स्टोरी के साथ कनेक्ट कर सके. पूरी स्टोरी को फिर से दुबारा लिखना तो पॉसिबल नहीं क्युकी सोस्सिप में ये स्टोरी 178 पेज तक पहुंच गई थी और इतने पेज दुबारा लिखना पॉसिबल नहीं इसलिए जहा से वह स्टोरी ख़तम हुई थी वही से यहाँ चालू करूँगा. पर चालू करने से पहले एक दो अपडेट में पिछले part को बताने की कोशिश करूँगा.

सोस्सिप पर लिखे जा चुके पार्ट्स का सारांश

स्टोरी की शुरुआत होती है एक वेडिंग सेरेमनी से जो की गाँव में थी वह के दो गाँवों के रसूखदार ज़मीदार लखन सिंह और मलखान सिंह के बच्चो की. लखन सिंह के बीटा विक्रम और मलखान सिंह की बेटी शोभा.

विक्रम और शोभा की शादी में शामिल होने दूर दूर से उनके नाते रिश्तेदार दोस्त आए थे. और उन्ही दोस्तों में थी शोभा की 6 सहेलिया.

गरिमा

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उम्र 32 साल जो शादीशुदा थी और एक बच्चे की माँ थी और खुशहाल मैरिड लाइफ जी रही थी. और गद्रे जिस्म की मालकिन थी जिसकी उभरी हुई गांड उसके जिस्म की ुस्प थी.

विनीता

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उम्र 29 साल कहने को तो शादीशुदा थी पर सुहागरात पर सुहागसेज पर hi उसके पति ने उसे कह दिया था की उसने ये शादी अपने पिता के दबाव में की है वो किसी और को चाहता है और विनीता से किसी तरह का कोई रिश्ता नहीं बनाना चाहता है. इसलिए शादीशुदा होते हुए भी वो आज भी कुंवारी थी और अब ससुर के देहांत के बाद उसे अपने पति से तलाक़ का अल्टीमेटम भी मिल चूका था.

शबाना

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उम्र 32 साल एक निहायत ज़हीन म*** महिला जिसकी लाइफ संघर्षो से भरी हुई थी. बेपनाह हुस्न हद से ज्यादा उभरे हुए उभर दूध से गोरा बदन उसके जिस्म को सभी सहेलियों में सबसे आकर्षक बनाते थे पर उसकी ज़िन्दगी की एक कड़वी सच्चाई भी थी. उसका पति अंदर से नामर्द था जो शबाना को माँ नहीं बना सकता था पर टिपिकल मर्दो की तरह वो दुनिया के सामने इस सच को नहीं मन सकता था और इस बात का ब्लामे भी शबाना पर दाल रहा था और दुनिया में अपनी मर्दानगी को बनाए रखने के लिए शबाना को बलि का बकरा बनाकर उसे तलाक़ देने की धमकी दे चूका था.

नेहा

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उम्र 24 साल इन सहेलियों में सबसे छोटी पर सबसे ज्यादा बोल्ड एंड स्टाइलिश लगली कुंवारी पर अब तक कितने मर्दो के साथ सेक्स कर चुकी उसे खुद याद नहीं पेशे से एयरहोस्टेस एंड नेचर से नै नै फंतासी की शौक़ीन नए नए तरीको से सेक्स करना में उसे बहुत मज़ा अत था. फिगर ऐसा की मर्द उसे गॉड में उठा कर मन मर्ज़ी से भोग ले और ड्रेसिंग ऐसी की गाँव के बुथो का बम्बू भी तम्बू बन जाए. शबाना की सबसे पक्की सहेली.

नीतू

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आरती

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तवो बेस्ट फ्रेंड्स जो हमेशा एक दुसरे के साथ कड़ी रही उम्र 28 बोथ. नीतू एक बंगाली गर्ल जिसकी तीन महीने बाद राज नाम के लड़के से शादी होने वाली है. रंग सावला बड़ी बड़ी आँखे तीखे नैन नक्शा पेशे से बैंकर ब्लैक ब्यूटी. वही आरती रंग में गोरी पर काफी गरीब पर बाला की खूबसूरत पर चश्मे के पीछे अपने रूप को छुपा कर रखती ताकि दुनिया के भेडियो की नज़र उसपर न पद जाए.

नाउ ब्राइड शोभा

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उम्र 29 साल फिगर में बेहद हॉट किसी बॉलीवुड हेरोइन जैसी पर स्वाभाव किसी लड़के से कम नहीं इस ग्रुप की बॉडीगार्ड जिसकी वजह से कॉलेज में कभी किसी लड़के की हिम्मत नहीं हुई इस ग्रुप को छेड़ने की जिसने आज तक किसी मर्द को भाव नहीं दिया पर विक्रम से बेइंतिहा प्यार करने वाली.

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फीमेल चैरेक्टर के बाद मेल चैरेक्टर का भी हल्का परिचय देदू.

लखन सिंह

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दूल्हे का बाप उम्र 54 साल गाँव का सबसे दबंग सबसे रौबदार शिक्षा चरित्र का बेहद मजबूत. गाँव में ऐसा कोई नहीं जो लखन सिंह की इज़्ज़त न करता हो. जिसके परिवार को कन्या भ्रूड़ हत्या के कारन एक श्राप सहना पड़ा की उस घर की कोई भी बहु शादी के तीन साल के अंदर ख़तम हो जाती थी जिनके घर में लड़का पैदा नहीं होता था और अगर गलती से पैदा हो गया तो अपांग अपाहिज या मंदबुद्धि. जिस वजह से उसकी बीवी शादी के तीन साल बाद hi ख़तम हो गई. डील डॉल ऐसा की जवान लड़के भी शर्मा जाए.

मलखान सिंह

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शोभा का बाप उम्र 58 साल बगल के गाँव का ज़मीदार पर पर्सनल्टी में लखन सिंह जैसा बिलकुल नहीं टिपिकल ज़मीदारो की तरह मोटा ताज़ा शराब शबाब का शौक़ीन. एक चीज़ hi लखन और मलखान में कॉमन थी की दोनों की बीविया ख़तम हो चुकी थी.

विक्रम

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थे ग्रूम उम्र 32 साल लखन सिंह का बीटा सागा नहीं गॉड लिया हुआ क्युकी लखन सिंह के परिवार में तो ठीक लड़का पैदा hi नहीं हो सकता था, बेहद स्मार्ट और हत्ता कट्टा पर बेहद गुस्सैल पर अपने पिता का आज्ञाकारी पर नेचर में बिलकुल अपने ससुर जैसा शराब और शबाब का शौक़ीन. गाँव की नै नै लौंडियो को चखके का शौक़ीन जिसकी नज़र शादी के जैसे में नेहा पर जैम गई. नेहा का बोल्ड अवतार इसके दिल में उतर गया और वो उसे अपने गॉड में लेकर अलग अलग पोज़ में छोड़ने को बेताब हो उठा.

धामु

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लखन सिंह का बड़ा बीटा सागा बीटा जो उस श्राप के प्रभाव के कारन शरीर और दिमाग दोनों से कमजोर रह गया. उम्र से 38 साल का था पर दिमाग से किसी 10 साल के बच्चे जैसा था. जिसके मन में कही न कही इस बात की तैसे भी थी की विक्रम से बड़ा होने के बावजूद उसकी शादी नहीं हुई और विक्रम की शादी हो रही. और उसकी यही तैसे उसके जीवन में उथल पुथल पैदा करने वाली थी उसे एक बड़े षड़यंत्र का हिस्सा बनाने वाली थी.

लालू एंड कंपनी ( कुंदन देव प्रताप)

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विक्रम के चार लफंगे दोस्त काफी पैसे वाले पर स्वाभाव से बेहद ठरकी टाइप जिनका लीडर था लालू. इन चारो की शुरू से शहर से शोभा की सहेलियों पर जैम गई और ये चारो उन्हें फ़साने की जुगत लगाने लगे स्पेशलय लालू जिसकी नियत शबाना पर ख़राब हो गई. वो उस बुरका नशीन ज़हीन म**** महिला को अपने बिस्तर पर रौदने को बेताब हो उठा.

हरिया

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लखन सिंह का ड्राइवर एक गबरू जवान मर्द जो शादी का सामान घर से शादी वाली जगह पहुंचने का काम कर रहा था जिसकी बीवी दुसरे गाँव में रहती थी जिससे वो कभी कभी मिलने जाता था.

अघोरी

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इस कहानी का एक अहम् किरदार जिसके इर्द गिर्द ये कहानी गाड़ी गई. एक अफ्रीकन मूल का नीग्रो हब्सी मर्द जिसकी पर्सनल्टी देख गाँव की औरतो की आह निकल जाती थी और मर्द जलभुन कर रख हो जाते थे. तंत्र मंत्र का शातिर खिलाडी पर चरित्र में एकदम उत्तम ये जानते हुए भी की गाँव की कोई भी औरत ख़ुशी ख़ुशी उससे चुद जाए उसने किसी औरत को हाथ तक नहीं लगाया. एक बाल ब्रह्मचारी का जीवन जिया. लखन सिंह के परिवार पर जो श्राप है उसके निवारण के लिए अघोरी को बुलाया गया था ताकि शादी के बाद शोभा के जीवन पर कोई संकट न ऐ.

बिहारी काका लखन सिंह का रसोइया उम्र 60 साल जो लखन सिंह की हवेली की देखरेख के लिए शादी के जैसे में शामिल होने नहीं जा पाए और अपने 17 साल के बेटे जीतू के साथ वही रुक गए. इनकी बीवी को भी ख़तम हुए सालो हो गए.

जीतू उम्र 18 साल जवानी की देहलीज़ पाए अभी अभी कदम रखा एक लड़का जिसने सेक्स सिर्फ मोबाइल पर पोर्न वीडियोस में hi देखा. जो एक औरत को भोगने के लिए बेहद एक्ससिटेड था.

भीमा

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उम्र 34 साल गाँव के सबसे हट्टे काटते मर्दो में से एक जबान से गूंगा पेशे से लखन सिंह का जमादार जो गाँव की गन्दगी साफ़ करता था. भीमा और विक्रम का अपना एक कला इतिहास है जो बाद में खुलेगा. भीमा को लखन सिंह ने शादी की हवेली में साफ़ सफाई के लिए बुला लिया था और जो हवेली के बहार एक छापर की झोपडी बनाकर उसमे रहता था जिसके पीछे घाना जंगल था और जंगल के पीछे नदी और नदी के उस पार मलखान सिंह का पर्सनल कॉटेज.

कल्लू उम्र 38 साल गाँव का एक ठरकी आदमी जो औरतो को छेड़ने के लिए कई बार पिट चूका था और शादी में एक वेटर के रूप लोगो को चाय कफ सर्वे करने के लिए बुलाया गया था.

छोटू उम्र 18 साल एक सीधा साधा लड़का इसे भी शादी में वेटर के रूप में बुलाया गया.

रामु काका उम्र 58 साल शादी के हेड रसोइया हो शादी में खाने का काम देख रहा था और छोरतु का दूर का रिश्तेदार.

भूरा उम्र 42 साल लखन सिंह का ट्रक ड्राइवर हत्ता कट्टा गबरू मर्द जो लखन सिंह के ट्रक चलता था और हरिया का चचेरा भाई भी था.

भोला उम्र 40 साल शादी में लेबर का काम करने वाला.

कन्हैया उम्र 35 साल शादी में बिल्जी का काम देखने वाला.

अभिलेख सिंह उम्र 49 साल मलखान सिंह का छोटा भाई और शोभा का चाचा. रीना और मंगल सिंह विक्रम का बेहेन और जीजा.

अभी तक यही किरदार वह ओपन हुए दो और किरदार ओपन हुए पर उन्हें समरी में ओपन करूँगा. अभय रायचंद एंड अजय स्टार जिनके बारे में स्टोरी के पुराने रीडर अच्छी तरह जानते है. जो खुद स्टोरी के दो एक्टिव रीडर रहे है जिन्हे बाद में मैंने इस स्टोरी का part बना लिया.
 
मलखान सिंह की कोठी से गाड़िया उनकी एक हवेली की तरफ जाना शुरू हो चुकी थी. जिसे जिस गाड़ी में जगह मिली वो उससे निकल गया. मलखान सिंह की हवेली यहाँ से 50-60 कम दूर गहनें जंगलो के बीच थी जहा शादी की व्यवस्था की गई थी और वह तक जाने के लिए गाड़ियों को एक नदी को पार करना था. शहर से दूर होने और सर्कार से मदद न मिलने की वजह से लखन सिंह और मलखान सिंह ने अपने खर्चे पर उस नदी पर गाँव वालो के सहयोग से लकड़ी का एक पल बनवा दिया ताकि गाँव वाले नदी पार कर सके. पर पल इतना मजबूत नहीं था की कई गाड़िया एक साथ पार हो सके इसलिए गाड़िया ओने बी ओने पार होती थी.

गाँव वाले नेहा के सेक्सी ड्रेससुप को घूर घूर कर देख रहे सेक्सी तो शोभा की सभी सहेलिया पर नेहा की बात कुछ और थी. उसका ड्रेससुप एकदम शहर की हेरोइन जैसा था. नेहा अपने नेचर के मुताबिक विक्रम से साली होने के बहाने फ़्लर्ट कर रही थी और विक्रम और उसके दोस्त भी मज़े ले रहे थे. विक्रम तो नेहा पर फुलटू फ़िदा हो चूका था.

शोभा की गाड़ी में तीन लोगो की जगह थी उसने नेहा से चलने को कहा पर नेहा ने चुहलबाज़ी करते हुए विक्रम के साथ जाने का फैसला करा. फाइनली शोभा के साथ नीतू आरती और शबाना चली गई और नेहा विक्रम और उसके दोस्तों के साथ रवाना हो गई. बची विनीता और गरिमा जो आखरी बची बस से रवां हो गई. बस में काफी लोग थे इनहीमे से एक था कल्लू जो शादी में वेटर के काम से जा रहा था और काफी ठरकी था. वो गरिमा के बगल में hi बैठा था और भीड़ का फायदा उठा कर उसने गरिमा के साथ छेड़खानी करना शुरू कर दिया. गरिमा कुछ देर तो सेहती रही जब बर्दाश्त के बहार को गया तो उसने विनीता को इशारे से ये बताया.

विनीता ने आव देखा न ताव और कल्लू के गाल पर एक तमाचा रसीद कर दिया. गरिमा को तो लगा की वो अनजान लोगो के बीच अनजान जगह पर है शोभा भी साथ नहीं पता नहीं ये लोग कैसे रियेक्ट करे पर लखन सिंह जो उस वक़्त उसी बस थे ने मामले को समझते हुए कल्लू के गाल पर तमचो की बौछार करदी. पूरी बस में सन्नाटा छ गया. बस उस पल को पार करके काफी आगे आ गई थी. लखन सिंह ने बस को वही रुकवा कर कल्लू को धक्के देकर नीचे उतर दिया. कल्लू माफ़ी मांगने लगा गरिमा को भी दया आ गई और उसने भी लखन जी रेक करि की उसे माफ़ करदे. तब कही लखन ने उसे माफ़ करा.

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बस दुबारा चलने hi वाली थी की गरिमा को याद आया की वो शादी में पेहेन्ने के लिए लाए गए अपने गहने शोभा की कोठी में hi छोड़ आई है और गहने काफी मेंहगे है इसलिए वापस जाकर लाना होगा. लखन सिंह ने समझाया की वो किसी नौकर से मंगवा देगा पर गरिमा को दर था की कोई गहना गायब न हो जाए इसलिए वो खुद वापस जाना चाहती थी. सामने से लखन सिंह का एक लोडर हवेली में कुछ सामन उतर कर वापस आ रहा था जिसे लखन सिंह का सबसे भरोसेमंद ड्राइवर हरिया चला रहा था.

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गरिमा की बात मानते हुए लखन सिंह ने उसे हरिया के साथ वापस भेज दिया और खुद बस में बैठकर शादी की जगह के लिए निकल गए. गरिमा अब अपनी सभी सहेलियों से अलग एक अनजान आदमी के साथ थी पर लखन जी के भरोसे के कारन उसे हरिया पर विश्वास था. हरिया लोडर लेकर वापस पल तक पहुंच गया और पल के बीच hi पहुंच पाया था की सामने से एक तेज़ रफ़्तार सुव पल की तरफ आती दिखी हरिया ने उसे हाथ के इशारे से रुकने को कहा पर वो इतनी अनियंत्रित थी रस्सियों से बंधे पल को तोड़ती हुई सीधा नदी में जा गिरी. इस तेज़ झटके को वो लकड़ी का पल बर्दाश्त न कर सका और भरभरा कर टूट गया हरिया और गरिमा भी लोडर सहित नदी में समां गए.

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हरिया तो इस तेज़ झटके से बेहोश हो गई पर हरिया ने खुद पर काबू रखा और गरिमा को गाड़ी से निकल कर तैरते हुए किसी तरह किनारे ले आया. उस दूसरी गाड़ी का अत पता नहीं था शायद तेज़ गति के कारन नदी में डूब गई और उसमे बैठे लोग. दोनों गाँवों को जोड़ने वाला वो एकमात्र जरिया पल टूट चूका और हरिया बेहोश गरिमा को गॉड में उठाए नदी के दूसरी तरफ था.

मलखान सिंह की कोठी तो काफी दूर थी पर लखन सिंह की कोठी भी बीच रस्ते में थी पर वो भी काफी दूर थी अँधेरा काफी हो चूका था और ऐसी हालत बेहोश गरिमा को उठाकर वह तक जाना संभव था. बस्ती वह से काफी दूर थी और इस हालत में गरिमा को वह तक लेकर जाना संभव नहीं था. इसलिए हरिया ने वो रात वही पेड़ो के बीच काटने का फैसला करा.

यहाँ बढ़ती सर्दी और ठण्ड की वजह से जब स्थिति हरिया के काबू से बहार होती दिखी और गरिमा के गीले कपड़ो की वजह से जान पर बन आई तब हरिया ने एक कड़ा फैसला लेते हुए वो करा जो इस स्थिति में कोई भी करता.

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उसने बेहोश गरिमा के जिस्म को उन गीले कपड़ो से आज़ाद कर दिया और अपने गीले कपडे भी उतर दिए और अपने शरीर की गर्मी से गरिमा की ठण्ड को दूर करने की कोशिश करने लगा. पर आखिर वो भी एक मर्द एक गद्रे बदन की औरत नंगी हालत में उससे जिस्म से चिपक कर लेती थी इस हालत में उसका बहकना लाज़मी था.

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पर साथ hi साथ उसे ये भी दर था की अगर गरिमा होश में आ गई या सुबह उसे शक हो गया और उसने लखन सिंह को सब बता दिया तो उसकी खैर नहीं. पर वो अपने लिंग का क्या करता जो तन कर बम्बू बन चूका था. फाइनली उसने अपना लुंड गरिमा की जांघो के दबा दिया और जांघो के बीच hi रगड़ रगड़ कर उसने अपने माल बहार निकल दिया इससे उसे संतुष्टि भी मिल गई और गरिमा की चुदाई भी नहीं करनी पड़ी.

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माल निकलने के बाद हरिया वही ज़मीन पर गरिमा से चिपक कर सो गया.
 
इधर सब शादी की जगह पहुंच चुके थे और शादी की चेहेल पहल में उनके दिमाग से hi उतर गया की गरिमा उनके साथ नहीं है. नेहा के नॉटी डबल मीनिंग सेंटेंस बदस्तूर जारी थी. इधर लालू की नज़रे बेहद शालीन ज़हीन शबाना पर जैम गई जिसके 38बी साइज के भरी स्तन किसी को भी अपनी तरफ आकर्षित करले. लालू को ऐसे परदे में कैद फूलो को रौंदने में बड़ा मज़ा अत था और यही वो शबाना के साथ करना चाहता था. और इसकी प्लानिंग उसने अपने दिमाग में बना ली थी.

शादी में विनीता की नज़र कल्लू पर पड़ी जो लोगो को चाय कॉफ़ी सर्वे कर रहा था. उसने अपनी सभी सहेलियों को उसके बारे में बताया. सबने शादी के माहौल को न बिगड़ते हुए चुप रहना hi ठीक समझा. पर नै नै फंतासी की शौक़ीन नेहा को इसमें भी एक फंतासी नज़र आ गई. गाँव के ठरकी देहाती को छेड़ने की फंतासी. नेहा अपनी सहेलियों से अलग होकर कल्लू के पीछे पीछे हवेली से बहार आ गई और कल्लू को हाथ के इशारे से रुकने को कहा.

कल्लू दर गया की कही अब नेहा भी उसे गरिमा को छेड़ने के लिए खरी खोटी न सुनाए. पर इसके उलट नेहा ने कल्लू की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाया. कल्लू तो समझ hi नहीं पाया वो कैसे रियेक्ट करे पर उसने भी नेहा के दोस्ती के हाथ को थम लिया. फिर कल्लू ने नेहा का परिचय हवेली के सभी नौकरो से कराया. नेहा जैसी बोल्ड स्टाइलिश सेक्सी लड़की को अपने बीच पाकर सबके लोडे खड़े हो गए. शराब के नशे धुत्त भोला ने तो आगे बाद कर नेहा को किश hi कर लिया भूरा ने तमाचा मार कर उसे नेहा से अलग करा. सबको लगा की नेहा गुस्सा होगी पर ये किसिंग स्मूचिंग नेहा के लिए आम बात थी.

वापस लौटते पे नेहा की नज़र बाकि नौकरो के टेंट से अलग छप्पर की झोपडी में हाथ तपते भीमा पर पड़ी. कल्लू ने उसे बताया की वो यहाँ का जमादार है हवेली की गंदगी साद करता है. नेहा हवेली में वापस जाने लगी तो पीछे से कल्लू ने गुड नाईट विश करा. और नेहा ने पलट कर मुस्कुराते हुए आगे बाद कर अपने होंठ कल्लू के होंठो पर रख दिए.

नेहा: हमारे शहर में विश ऐसे करते है

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कल्लू को तो समझ hi नहीं आया की अचानक से ये क्या हो गया. नेहा ने इठलाती हुई हवेली के अंदर चली गई पर पीछे छोड़ गई बेताब कल्लू को जिसके मन में अब एक आस जग गई की जल्द hi वो शहरी चिड़िया की छूट में अपना लुंड डालेगा. नेहा के हुस्न ने हवेली के सभी मर्द नौकरो को दीवाना कर दिया उस रात सबने नेहा को इमेजिन करते हुए अपनी चांदी को अपने वीर्य से गीला कर दिया.

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गरिमा की बेहोशी हरिया के डिस्चार्ज और नेहा की मस्त हरकतों के साथ ये दिन ख़तम हुआ. जयमाला और फेरो के साथ विक्रम और शोभा की शादी संपन्न हुई दोनों एक दुसरे के पति पत्नी बन गए और अगली रात उनकी फर्स्ट नाईट होनी थी पर कल की सुबह कहानी में एक नया मोड़ लेन वाली थी. कहानी में उस अघोरी का आगमन होने वाला था जिसकी वजह से शादीशुदा होते हुए भी शोभा विक्रम को कुंवरो की ज़िन्दगी जीने पर मजबूर होना था. और सिर्फ शोभा hi नहीं विनीता की ज़िन्दगी एक नया मोड़ लेने वाली थी.

एन्ड ऑफ़ डे ओने

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कहानी दुसरे दिन में प्रवेश कर गई सहेलिया जिस शादी के लिए गाँव आई थी वो तो हो चुकी थी फिर आगे क्या. जैसा की इंट्रो में बताया की लखन सिंह के परिवार पर जो श्राप था उसकी वजह से कोई भी अपनी लड़की की शादी उनके परिवार में करने को तैयार नहीं था. पर लखन मलखान की दोस्ती और शोभा का विक्रम के प्रति आकर्षण इस शादी की वजह बना.

पर श्राप का निवारण हरेक के बस की बात नहीं इसके लिए लिए शादी की अगली सुबह बुलाया गया उसे जो इस कहानी का सबसे अहम् किरदार था अघोरी.

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जिसके बारे में मई पहले hi बता चूका हु. अघोरी ने बताया की लखन सिंह के परिवार से जुड़े श्राप के निवारण के लिए नवग्रह यानि सूर्य मंगल बुध बृहस्पति शनि शुक्र Arun/Varun पृथ्वी और चंद्र की पूजा करनी होगी वो भी तांत्रिक तरह से ग्रहो के गुड़ व्यव्हार के मुताबिक कुछ विशेष क्रियाओं के माध्यम से. यह पूजा लखन सिंह को अपनी पत्नी के साथ करनी थी पर लखन सिंह की पत्नी को तो मरे कई साल हो चुकी फिर वो कैसे......?

इसका जवाब भी अघोरी ने बताया की एक ऐसी स्त्री इस पूजा में लखन सिंह की पत्नी का स्थान ले सकती है जो न लखन सिंह के परिवार की हो न उन पर आश्रित, न किसी धन के लालच में हो न किसी दबाव या दर में, और सबसे बड़ी बात उसका पहले से विवाहित होना जरूरी है भले hi शारीरिक रूप से वो कुंवारी मतलब उसने सम्भोग न करा हो पर '. रूप से उसका विवाहित होना जरूरी था. और उसे अपने पूर्ण पति को 7 दिन के लिए भूलकर अगले 7 दिन के लिए लखन सिंह के साथ पुरे रीती रिवाज़ के साथ विवाह बंधन में बांधना होगा. और यहाँ से 400 कम दूर काकातुआ के जंगल में तै की गई जगह पर लखन सिंह के साथ अकेले रहकर इस पूजा की सभी रस्मो को पूरा करना था. यानि किसी और की बीवी को इस पूजा में लखन सिंह की बीवी बनना था और अगले 7 दिन एक सुनसान जगह पर उनकी पत्नी के रूप बिताने थे.

लखन सिंह का ऐसी औरत का इंतज़ाम का पहले से कर रखा था अपने एक दूर के दोस्त की बीवी जो शहर से विशेष रूप से इस पूजा में शामिल होने hi गाँव आ रही थी. पर काफी इंतज़ार के बाद भी उसका कोई अत पता नहीं था. लखन सिंह ने पता करवाया तो पता चला ये वही गाड़ी थी जिसका हरिया की गाड़ी के साथ आमना सामना हुआ था और जो नदी में डूब गई. पल टूटने की खबर मिलते hi सहेलियों को गरिमा का ख्याल आया की रात भर से गायब है अब उन्हें गरिमा की भी चिंता हुई.

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इधर जंगल में जब गरिमा को होश आया तो उसने खुद को पूरा नंगी हालत में ज़मीन पर लेता पाया और कोई मर्द पीछे से उसे आलिंगन में भरे सो रहा था उसके लिंग के एहसास से साफ़ था वो भी नंगा था. गरिमा हड़बड़ा कर उठ बैठी और हरिया को इस हालत में अपने पीछे लेता देख इसे तेज़ झटका लगा. उसे यही लगा की हरिया ने उसकी बेहोशी का फायदा उठा कर उसके साथ गलत हरकत कर डाली. गरिमा के उठने से हरिया की भी नींद खुल गई वो भी हड़बड़ा कर उठ बैठा और रोटी हुई गरिमा को कल रात के हालत समझने की कोशिश करने लगा. पर गरिमा कुछ सुनने को तैयार नहीं थी उसने एक डंडी उठाई और बेतहाशा उसे हरिया पर बरसाना शुरू कर दिया. हरिया चुपचाप वह खड़ा गरिमा की मार झेलता रहा. एक डंडी टूटने के बाद हरिया खुद गरिमा को दूसरी डंडी दे देता. काफी देर तक गरिमा यही हरिया पर अपना गुस्सा निकलती रही.

हरिया को मार मार कर जब वो शांत हुई तब हरिया ने उसे कल की स्थिति समझे की उसने उसने अंदर अपना लुंड नहीं डाला और बस उसकी जान बचने के लिए उसके साथ चिपक कर सोया. गरिमा को गुस्सा भी कुछ ठंडा हुआ और उसकी नज़रे अपने सामने नंगे खड़े हरिया पर गई जिसका लुंड उसके पति से भी काफी लम्बा था और शांत हालत में भी काफी लम्बा था. हालत को समझते हुए दोनों अपने गीले कपडे पेहेन कर लखन सिंह की कोठी की तरफ चल दिए. लखन सिंह की कोठी में पहुंचकर हरिया ने गरिमा का परिचय बिहारी काका और उनके बेटे जीतू से करवाया जो यहाँ की देखरेख करते है और खाना बनाते है. कोठी से हरिया ने लखन सिंह को कल रात की घटना के बारे में फ़ोन करके सब बता दिया और ये भी गरिमा पूरी तरह सुरक्षित है. गरिमा के सेफ होने की खबर सुन थोड़ा रिलैक्स हुए.

गरिमा के पास तो अब अपने कोई कपडे नहीं थे क्युकी उसका बैग तो शादी की हवेली में जा चूका था और पल टूट जाने की वजह अगले कुछ गरिमा का वह जाना पॉसिबल नहीं था. और ऊपर से उसके पहने हुए कपडे भीग चुके थे. हरिया ने कहा की उसकी बीवी के कुछ कपडे यहाँ है जो वो यहाँ आने पर पहनती है पर वो देहाती स्टाइल के है मतलब खली चोली और घाघरा अगर गरिमा को ऐतराज़ न हो तो वो ले आए. कुछ नहीं से तो कुछ भला गरिमा तैयार हो गई. हरिया एक अपनी बीवी के कपडे लेने चला गया. जीतू ने गरिमा को उसके रुकने का कमरा दिखा दिया.

गरिमा कमरे में जाते hi नहाने चली गई और अपने गीले कपडे उतर कर अपनी जांघो पर लगे हरिया के वीर्य को साफ़ करने लगी और कल रात की घटनाओ को याद करने की कोशिश करने लगी. हरिया ने उसकी छूट में लुंड नहीं डाला और उसके अंदर पानी नहीं निकला ये चेक करने के लिए उसने अपनी छूट में ऊँगली दाल कर देखा. कल की घटनाओ को याद करते करते और छूट में ऊँगली डाले डाले उसकी आँखों के सामने हरिया का नंगा जिस्म उसका झूलता हुआ लुंड ताज़ा हो गया. हरिया की मर्दानगी की वो झलक और छूट के अंदर गरिमा की ऊँगली ने गरिमा को उत्तेजित कर दिया और बिना सोचे hi गरिमा की उंगलिया अपनी छूट में तेज़ तेज़ चलने लगी. फैंगरिंग करते करते गरिमा कब स्खलित हो गई उसे पता hi नहीं चला.

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स्खलन के बाद उसके बाद का पछतावा भी अब गरिमा पर हावी हो गया उसे एहसास हुआ की उसने अभी अभी हरिया और उसके लुंड को इमेजिन करके अपनी छूट में ऊँगली डाली है. इससे उसे पछतावा भी हुआ और साथ में ये एहसास भी हुआ की शायद हरिया कही न कही सही था. शायद कल रात में सर्दी से बचने के लिए उसने ये सब करा और जब उसके नंगे शरीर को देख कर वो उत्तेजित हो गई तो रात में उससे चिपक कर हरिया का उत्तेजित होना और उसकी जांघ पर स्खलित हो जाना स्वाभाविक था.

बाथरूम से तौलिया लपेट कर गरिमा बहार आ गई. तौलिया उसके आधे शरीर को hi ढके थी उसके उभारो से लेकर उसकी 38 साइज की गांड के थोड़ा नीचे तक. अचानक बहार कुण्डी खटकी बहार जीतू था जो हरिया की बीवी के कपड़ो से भरा बैग लाया था. गरिमा को ध्यान hi नहीं रहा की वो तौलिया में थी और उसने जीतू को अंदर आने को कह दिया. गरिमा को यु तौलिया में देखना जीतू जैसे तीनगर के लिए अनएक्सपेक्टेड था. वो बड़ी मुश्किल से वह अपनी उत्तेजना को दबाए रहा पर कमरे से बहार आते hi सीधा अपने कमरे में जाकर गरिमा के उस उत्तेजक रूप की कल्पना करके मुठ मार कर अपने अंदर की गर्मी को शांत कर दिया.

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कमरे में गरिमा ने कपडे देखे वो काफी देखती थी बस चोली और वो भी ज्यादातर बैकलेस और घाघरा गाँव में ज्यादातर औरते ऐसे कपडे hi पहनती होगी. और चोली भी काफी टाइट हरिया की बीवी काफी दुबली पतली होगी और गरिमा का सीना काफी भरी था. जिस वजह से चोली उसके उभारो पर काफी कास गई थी जिस वजह से उसके उभर और आकर्षक हो गए. उन्देर्गर्मेन्ट्स तो गरिमा के लिए पेहेनना भी मुश्किल था ब्रा तो गरिमा के छोटी पद गई और कच्ची भी कसवत के कारन पहनना मुश्किल था. काफी संकोच और झिझक के साथ गरिमा बिना अंदर उन्देर्गर्मेन्ट्स पहने बस ऊपर से घाघरा चोली पेहेन कर कमरे से बहार आई.

नीचे हरिया उसका इंतज़ार कर रहा था. गरिमा के गद्रे बदन को अपनी बीवी के कैसे कपड़ो में देख हरिया भी उत्तेजित हो गया पर खुद पर काबू रखा. हरिया ने गरिमा को बताया की आज वो यहाँ आराम करे कल वो गाड़ी से गरिमा को मलखान सिंह की कोठी ले जाएगा जहा से गरिमा को अपने गहने लेने थे. इतना कह कर वो भी अपनी उत्तेजना की आग को ठंडा करने के लिए अपने घर चला गया और गरिमा को अपनी बीवी के कपड़ो में देख अपनी बीवी के रूप में इमेजिन करके जीतू की तरह गरिमा के नाम का मुठ मार कर अपने अंदर की उत्तेजना को ठंडा कर लिया.

18 साल के जीतू और 35 साल के हरिया के बाद अब बरी थी गरिमा के इर्द गिर्द मौजूद तीन मर्दो में तीसरे और सबसे उम्रदराज़ मर्द बिहारी काका. काका किचन में खाना बना रहे थे तहज़ीब को देखते हुए गरिमा भी उनका हाथ बताने के लिए किचन में चली गई. काका ने उसे मन भी करा पर गरिमा अपनी सभ्यता की वजह से नहीं मणि. काका की मदद के लिए गरिमा सब्जी काटने लगी. सब्जी काटते काटते गरिमा थोड़ा आगे की और झुक गई और काका पीछे खड़े थे.

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आगे झुक जाने से गरिमा की एक्स्ट्रा साइज गांड पीछे उभर आई और कैसे हुए घाघरे और अंदर चड्डी भी न पहने होने के कारन उसके चूतड़ की दरार एकदम साफ़ नज़र आने लगी. पीछे खड़े 58 साल के काका भी इस उभरी हुई गांड को देख कर उत्तेजित हुए बिना न रह पाए और वही किचन में गरिमा के पीछे खड़े खड़े अपनी धोती में हाथ डालकर मुठ मारना शुरू कर दी. गरिमा की नज़र अचानक सामने खीड़की के कांच पर पड़ी और उसने अपने पीछे खड़े मुठ मारते बिहारी काका को कांच में देख लिया. इतने उम्रदराज़ अपने बाप की उम्र के आदमी को इस तरह मुठ मारते देखना गरिमा के लिए बेहद शॉकिंग था पर गरिमा को समझ नहीं आ रहा था वो कैसे रियेक्ट करे इसलिए वो वैसे hi कड़ी रही. मुठ मारकर काका ने भी अपना माल अपनी धोती में hi निकल दिया. और अब गीली धोती पेहेन कर वो वह खड़े नहीं रह सकते थे इसलिए बहाना बनाकर वह से अपने कमरे में चले गए.

पहले हरिया फिर जीतू अब काका तीन अलग उम्र के मर्द गरिमा की वजह से उत्तेजित हो गए और गरिमा तीन अनजान मर्दो के बीच इस घर में अकेली थी और परिस्थिति वाश उसे अगले कुछ दिन इन्हीके बीच बिताने थे. गरिमा को टेंशन की पता नहीं आने वाले दिनों में उसे और क्या क्या फेस करना पड़ेगा.
 
इधर शादी की हवेली में सब गरिमा की वजह से तो रीलैक्स हो गए पर जो महिला पूजा के लिए आ रही थी उसके लापता होने और पूजा का महूरत न बीत जाए इस बात की चिंता सबको सत्ता रही थी. बातो बातो में नेहा के मुँह से निकल गया की पूजा की सभी शर्तो पर तो विनीता दी एकदम फिट बैठती है. वो लखन जी न रिश्तेदार है न आश्रित न उन्हें पैसे का लालच है न कोई दर या दबाव और वो शादीशुदा भी है. सबको विनीता में एक उम्मीद की किरण नज़र आई पर विनीता को नेहा पर बहुत गुस्सा आया और विनीता वह से गुस्सा में अपने रूम में चली आई.

रूम में विनीता बे बहुत सोचा की उसकी शादीशुदा लाइफ का कोई वजूद नहीं वैसे भी वो टूटनी hi है और ये बस एक पूजा है और लखन जी चैरेक्टर से अच्छे आदमी लग रहे है तो वो कोई ऐसी वैसी हरकत नहीं करेंगे. अगर उसके इस फैसले से शोभा की शादीशुदा ज़िन्दगी बच सकती है तो उसे ये करना चाहिए. यही सोच कर वो तैयार हो गई. बहार सब उसके फैसले से बहुत खुश हुए पर नीतू उसे समझा रही थी की उसे तो ये बाबा फ्रॉड लग रहा है और पूजा एक ढकोसला पर दूर बैठे बाबा ने अपनी तंत्र शक्तियों से उसकी बात सुन ली और नीतू के पास आकर उसे बताया की उसका प्रेमी राज जिससे उसकी शादी होने वाली है अभी अभी उसका एक्सीडेंट हुआ वो चाहे तो फ़ोन करके पता करले. नीतू ने राज को फ़ोन लगाया और बस कुछ मं पहले hi राज की बाइक एक ट्रक के नीचे आती आती बची. ये सुन विनीता और नीतू शॉक रह गए की यहाँ बैठे बैठे अघोरी मिलो दूर की बात कैसे बता दी अब विनीता को यकीन हो गया की अघोरी सच में सही कह रहा और वो इस पूजा के लिए पूरी तरह तैयार हो गई.

अघोरी ने उन्हें बताया की एक बार पूजा के लिए संकल्प करने के बाद वो पीछे नहीं हैट सकती. अपनी शादीशुदा ज़िन्दगी से पूरी तरह उदासीन ने नहीं सोचा की पूजा में उसे क्या क्या करना पड़ेगा और उसने संकल्प कर लिया. कुछ ने विनीता की तारीफ की कुछ लखन सिंह की किस्मत से जल गए. संकल्प के बाद पूजा की प्रथम विधि के अंतर्गत लखन और विनीता को विवाह बंधन में बांधना था.

नवग्रहों के स्वामी सूर्य की अग्नि को साक्षी मान कर रात में जिस हवन कुंड के सामने विक्रम ने शोभा के साथ शादी की अब उसी मंडप में उसका बाप उसकी बीवी की हमउम्र सहेली से शादी कर रहा था. कल से थोड़ा बोर महसूस कर रही नेहा को एक्ससिटेमेंट करने का सोचा उसकी नज़र कल रात वाले वेटर कल्लू पर पड़ी और वो कल्लू को हाथ से इशारा कर हवेली से बहार निकल गई.

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कल्लू भी पीछे पीछे निकल गया. नेहा भीमा की झोपडी के पीछे घनी झाड़ियों में अंदर घुस गई और पीछे पीछे कल्लू भी.

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झाड़ियों में घुसते hi कल्लू नेहा पर टूट पड़ा और उसके होंठो को किश कर लिया. पर मर्द का डोमिनेशन नेहा को पसंद नहीं आया उसे खुद डोमिनेशन की आदत थी उसने कल्लू को तमाचा मार कर अलग कर दिया. कल्लू तो एकदम शॉक हो गया. किश के बदले नेहा ने कल्लू से अपने जुटे चटवाए और फिर एक पेड़ के सहारे खड़े होकर कल्लू को अपनी छूट चाटने को कहा.

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कल्लू को तो मनमांगी मुराद मिल गई. उसने नेहा की लेग्गी और उसकी पंतय को नीचे सरका कर नेहा की छूट पर अपने होंठ रख दिए. कल्लू से छूट चतवते चतवते नेहा की नज़र भीमा पर पड़ी जो एक पेड़ के पीछे से छिपा ये सब देख रहा था और अपनी गन्दी सी धोती से अपना लुंड निकल कर मुठ मार रहा था.

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नेहा के लिए तो ये डबल एक्ससिटेमेंट था एक मर्द उसके घुटनो में बैठा उसकी छूट चाट रहा था तो दूसरा बस देख देख के hi मुठ मार रहा था. भीमा गाँव के सबसे हट्टे काटते मर्दो में से एक था और उसके शरीर की तरह उसका लुंड भी बेहद बड़ा और नसों से भरपूर था जो नेहा की नुत्तेजना को और बड़ा रहा था. भीमा को मुठ मारते देख नेहा वही कल्लू के मुँह में झाड़ गई और नेहा को झड़ते देख भीमा ने भी अपना वीर्य वही पेड़ पर निकल दिया.

अचानक बहार कुछ हलचल हुई और नेहा और कल्लू झाड़ियों से बहार आ गए. कल्लू की नेहा को छोड़ने की इच्छा अधूरी रह गई पर उसने सोचा आज छूट चाट ली कल छोड़ भी लूंगा. उधर भीमा के मन में भी नेहा घर कर गई आज तक औरतो से दूर रहे भीमा के मन में दबी सेक्स की इच्छा नेहा की छूट देखकर बहार आ गई पर जमादार होने के नाते उसे दर भी था.

हवेली के अंदर आकर नेहा अपने लेग्गी पर छूट के हिस्से पर लगे दाग छुपाने अपने कमरे जा hi रही थी की उसका सामने विक्रम से हो गया. विक्रम ने नेहा के वो दाग देख लिए और अपना रुमाल नेहा की तरफ बड़ा दिया. नेहा ने भी अपने फ्लिर्टिंग नेचर के मुताबिक रुमाल को अपनी लेग्गी के अंदर दाल कर अपनी छूट को अच्छे से साफ़ करके रुमाल वापस से विकार की तरफ बड़ा दिया. विक्रम ने भी हाज़िर जवाबी करते हुए उस रुमाल को ऐडा के साथ सूंघकर अपनी ज़बान से चाटकर नेहा के सामने अपनी इच्छा ज़ाहिर करदी. नेहा इठलाकर आँख मरते हुए वह से निकल गई और कल्लू भीमा के बाद अब विक्रम के मन में भी चुदाई की एक उम्मीद सी जगा गई.

इधर लखन और विनीता की शादी हो गई. लखन ने विनीता की मांग में सिन्दूर भर उसे मंगलसूत्र पहना कर उसे अपनी पत्नी बना लिया. पूजा का प्रथम चरण पूरा हुआ.

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गरिमा के मादक शरीर की उत्तेजना की वजह से हरिया जीतू बिहारी काका के मुठ मर्दन. नेहा की मादक अदाओ की वजह से कल्लू भीमा और विक्रम की चुदाई की इच्छाओ की उम्मीद और विनीता लखन की शादी के साथ ये दूसरा दिन भी ख़तम हुआ.

अब अगले दिन गरिमा को हरिया के साथ अपने गहने लेने मलखान सिंह की कोठी जाना था. विनीता लखन की नवग्रह पूजा के अगले गृह की पूजा होनी थी. और साथ में शबाना की ज़िन्दगी धामु नाम के एक तूफ़ान का प्रवेश होने वाला था जो शबाना की लाइफ उथल पुथल करके रख देने वाला था जिसका सूत्रधार था मास्टरमाइंड लालू. गरिमा के उस सफर और विनीता की नवग्रह पूजा पता नहीं क्या क्या होना था ये तो सिर्फ समय hi जनता था या मेरे पुराने रीडर्स.

क्या किसी रीडर को याद है की डे 3 में किस गृह की पूजा होनी थी. और गरिमा का सफर कैसा जाने वाला था. और कौनसा षड़यंत्र रचा था लालू ने शबाना के लिए जिसका मोहरा था धामु.

बताए ताकि मुझे भी पता चले की मेरे रीडर्स ने मेरी स्टोरी को सिर्फ पड़ा नहीं पुरे ध्यान से पड़ा और दिल से पसंद करा.
 
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तीसरे दिन गरिमा काफी देर से सोकर उठी ये बात उसके लिए अजीब थी क्युकी नोर्मल्ली वो जल्दी उठती थी पर आज उसका सर कुछ भरी भरी सा था शायद ज्यादा सोने की वजह से. उसके पेट पर कुछ सफ़ेद पपड़ी सी जमी थी. वो ये सोच hi रही थी की क्या है की बहार से जीतू की आवाज़ ै की हरिया भैया गाड़ी लेकर आ रहे आप 12 बजे तक तैयार हो जाइये. गरिमा का ध्यान उस सफ़ेद पपड़ी से हैट गया और वो नहाने चली गई.

फिलहाल तो गरिमा के पास केवल एक सदी थी वो भी गीली पड़ी थी. इसलिए उसने हरिया की बीवी के कपड़ो में से एक पीले रंग का घाघरा चोली पेहेन लिया. ब्रा पहना तो पॉसिबल नहीं था पर बिना अंदर चड्डी पहने गरिमा बहार नहीं जाना चाहती थी इसलिए गरिमा ने हरिया की बीवी की एक चड्डी जैसे तैसे खींच तान कर पेहेन ली जो बस नाम के लिए गरिमा की गांड धक् प् रही थी. असलियत में तो वो सिकुड़ कर गरिमा के चूतड़ों की दरार में घुस गई थी. और आगे से भी गरिमा को छूट को hi धक् प् रही थी. पर और कोई कपडा न होने की वजह से यही कपडे पेहेनना गरिमा की मज़बूरी थी.

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गरिमा इन्ही कपड़ो नीचे आ गई. नीचे सब उसे देखते hi रह गए जीतू काका हरिया तीनो के लोडे झोड़े हो गए. हरिया गाड़ी ले आया था और बिना देर किये हरिया और गरिमा मलखान की कोठी को निकल गए. कुछ घंटो के सफर के बाद वो मलखान की कोठी में पहुंच भी गए. मलखान सिंह के नौकर चाकर जिन्होंने शादी वाली रात गरिमा को सजे धजे शहरी लिबाज़ में देखा था आज गरिमा को इस रूप में देख सन्न रह गए. गरिमा अंदर अपने गहने लेने चली गई और हरिया ने उन्हें शादी वाली रात में घाटी साडी घटनाए डिटेल में बताना शुरू करदी रात की वो नंगे सोने वाली बात को छोड़कर.

अंदर गरिमा ने अपने गहने तो ले लिए पर उसने सोचा शायद यहाँ उसे शोभा के कुछ कपडे मिल जाए अगले कुछ दिन पहनने के लिए. उसने वही के लैंडलाइन से शोभा को फ़ोन लगाया पर शोभा ने बताया की उसके कपडे तो उसकी कबोर्ड में है जो लॉक है जीके चाबी उसके पास है पर उसके कुछ पुराने कपडे जो वो कॉलेज टाइम में पहनती थी वो बैग स्टोररूम में है गरिमा वो बैग ले जाए शायद उसमे कुछ कपडे उअके काम आ जाए. मलखान की कोठी का नौकर गरिमा को स्टोर से वो बैग लेकर दे देता है और गरिमा और हरिया वो बैग गाड़ी में रखकर वापस लखन सिंह की कोठी के लिए निकल पड़े.

अभी वो रास्ता hi पार कर पाए होंगे की एक पथरीले रास्ता जो दोनों तरफ से पेड़ो से घिरा था और कम चलता था पर हरिया की कार का एक टायर पंक्चर हो गया और गाड़ी रुक गई. हरिया गाड़ी से उतारकर स्टेफ़नी चेंज करने लगा गरिमा भी हरिया गाड़ी से बहार आ गई. हरिया ने गरिमा को मन भी करा की वो आराम से गाड़ी में बैठे यहाँ काफी जंगली कीड़े घुमते रहते पर गरिमा को लग रहा था की यही सही वक़्त है हरिया से उस कल की मार के लिए माफ़ी मांगने का क्युकी उस दिन के बाद से हरिया के अच्छे व्यव्हार से कही न कही गरिमा को भी यकीन हो गया था की उस दिन जो हुआ वो उसकी जान बचने के लिए hi हुआ.

हरिया गाड़ी का टायर चेंज कर रहा था और गरिमा उससे उस दिन के लिए माफ़ी मांग रही थी पर उस रात की बातो ने कही न कही दोनों के ज़हन में उस रात की यादे ताज़ा कर दी थी जब गरिमा का नंगा बदन हरिया की बहो में था और हरिया का झूलता हुआ लुंड गरिमा की आँखों के सामने. हरिया ने भी उस रात के लिए गरिमा को माफ़ कर दिया दोनों बातो में खोए हुए थे की अचानक गरिमा को अपने घाघरे के अंदर कुछ रेंगता हुआ महसूस हुआ जो गरिमा की जांघो में रेंगता हुआ उसके घुटनो के ऊपर तक आ गया था.

गरिमा ने तुरंत हरिया को बताया, हरिया ने कहा की यहाँ काफी ज़हरीले कीड़े है मैंने इसीलिए गाड़ी में बैठने को कहा था उस कीड़े को हटाना होगा और उसके आपको अपना घाघरा ऊपर उठाना होगा. गरिमा को लगा की हरिया तो वैसे भी उसे पूरा नंगा देख चूका है तो अब घाघरा उठा कर क्या हो जाएगा कीड़ा कही उसकी चड्डी के अंदर घुस गया तो पता नहीं क्या कर डेल. इसलिए गरिमा काफी झिझक और शर्म के साथ अपना घाघरा ऊपर कमर तक ऊपर उठा दिया.

हरिया आगे बाद कर गरिमा की जांघो के पास आ गया और गरिमा की जांघ पर चिपके कीड़े को खींच कर बहार निकल दिया. पर कीड़े के काटने के निशान गरिमा की जांघ पर बन गए थे और कही कीड़ा ज़हरीला न हो इसलिए उसका ज़हर चूस कर निकलना ज़रूरी था. इसलिए गरिमा से पेर्मिसों लेकर हरिया ने अपने होंठ गरिमा के गदराई चिकनी जांघ पर रख दिए. गरिमा ने उत्तेजना में अपना निचला होंठ अपने दांतो में दबा लिया. ज़हर तो कबका चूस करा बहार निकल चूका था पर हरिया के होंठ अब भी गरिमा की जांघो को चूस रहे थे.

गरिमा की जांघो की गर्माहट से अलग होना हरिया के लिए मुश्किल था तो अब हरिया को अपनी जांघो से अलग करना गरिमा के बस में भी नहीं रहा था. उत्तेजना के मारे गरिमा के हाथो में थमा उसका घाघरा उसके हाथो से छूट गया और उसने हरिया को अपने आगोश में भर लिया. अब बीच सड़क पर बैठ कर हरिया शहर से आई गरिमा की जांघो को चाट कर अपने थूक से गीला कर रहा था. इतनी उत्तेजना गरिमा को अपने पति के साथ भी नसीब नहीं हुई थी आज वो उत्तेजना वासना के एक अलग संसार में पहुंच गई थी और इसी उत्तेजना में गरिमा झाड़ गई.

गरिमा के छूट से निकले मादक पदार्थ की महक हरिया को भी महसूस हो गई और और उसने होंठ ऊपर ले जाकर गरिमा पंतय के ऊपर गरिमा की छूट पर रख दिए. और पंतय के ऊपर से हु गरिमा की छूट को चेतना शुरू कर दिया. गरिमा और हरिया उत्तेजना और वासना में ये भूल hi गए थे की वो कहा खड़े है और क्या कर रहे है वासना का नशा ऐसा नशा है जो इंसान की सोचने समझने की छमता को शून्य कर देता है. गरिमा भी उत्तेजना में हरिया के सर को घाघरे के ऊपर से hi अपनी पंतय पर रगड़ने लगी. गरिमा इतनी ज्यादा उत्तेजित थी की दुबारा झाड़ गई.

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पर हरिया की काम पिपासा अभी भी शांत नहीं हुई थी वो गरिमा की उत्तेजना को चरम पर ले जाना चाहता था ताकि आने वाले दिनों गरिमा खुद बा खुद अपने आप उसके सुपुर्द करदे. हरिया ने गरिमा की पंतय को उसकी छूट के सामने से हटाया और अपनी जीभ की नोक को गरिमा की छूट के मुहाने से टच कर दिया. गरिमा का उत्तेजना के एक तीव्र झटका लगा और उसने अपनी जांघ उठाकर हरिया के कंधो पर रखड़ी जिस वजह से गरिमा की छूट हरिया के होंठो के और नज़दीक आ गई. हरिया ने गरिमा की उस उत्तेजना का लाभ उठाते हुए अपनी जीभ गरिमा की छूट के अंदर तक दाल दी. अपनी जीभ से गरिमा की छूट की चुदाई करने लगा.

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ये पहली बार था जब कोई मर्द गरिमा की छूट में जीभ दाल कर उसे मज़ा दे रहा हो. ऐसा मज़ा तो उसे अपने पति से भी नहीं मिला था. गरिमा उत्तेजना के उस चरम पर पहुंच गई की तीसरी बार सीधा हरिया के मुँह में hi झाड़ गई. हरिया ने भी गरिमा को पूरा मज़ा देने के लिए अपनी मुँह गरिमा की छूट से नहीं हटाया और और गरिमा का सारा कामरुस चाट गया. तीन बार झाड़ जाने के बाद गरिमा भी अब शांत पद चुकी थी और बीच सड़क पर ज्यादा देर ऐसे खड़े रहना हरिया के लिए भी ठीक नहीं था.

हरिया गरिमा के घाघरे में से निकल आया. गरिमा अंदर hi अंदर बहुत शर्मिंदा थी की वो इस तरह कैसे बहक गई हरिया उसके बारे में क्या सोचेगा. वो हरिया से नज़रे भी नहीं मिला प् रही थी और चुपचाप गाड़ी में बैठ गई. हरिया ने जहतपत गाड़ी का बोल्ट कैसे और गाड़ी कोठी की तरफ बड़ा दी. रस्ते भर दोनों एक दुसरे से कुछ न बोले पर गरिमा को कही न कही समझ आ गया था की उस रात हरिया का बहकना स्वाभाविक था जब अब आज पुरे होशोहवास में वो बहक गई तो हरिया तो मर्द है.

हरिया ने गरिमा को कोठी पर छोड़ दिया और आज की घटना के लिए माफ़ी मांगी पर आज बजाए गुस्सा होने के गरिमा के सुर बदले हुए थे. उसने इसमें खुद को भी बराबर का दोषी मन क्युकी वो भी पुरे होशोहवस में थी वो चाहती तो हरिया को रोक सकती थी पर उत्तेजना के नशे में वो इस कदर अंधी हो गई की ये भूल गई की क्या कर रही किसके साथ कर रही. हरिया भी खुश था की गरिमा धीमे धीमे उसके साथ खुल रही है और अगर ऐसा hi चला तो जल्द hi ये शहरी बुलबुल उसके बिस्तत पर उसके नीचे होगी.

हरिया अपने घर चला गया और गरिमा भी अपने कमरे में आकर आज की घटनाओ का सोचते सोचते तीन बार झड़ने की थकावट के कारन सो गई.

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इधर हवेली में अघोरी ने बताया की आज मंगल यानि मार्स की पूजा होनी है. मंगल एक उग्र स्वाभाव का गृह है जिसे युद्ध बहुत प्रिय है इसलिए मंगल को खुश करने के लिए आज हवेली से कुछ दूर बने काली मंदिर के मैदान में एक दंगल का आयोजन होगा. ये दंगल को लखन सिंह को खुद लड़ना था और वो भी अघोरी द्वारा चुने गए एक पहलवान के साथ. पर दंगल मंदिर में होने की वजह से कोई गैरहिंदू वह नहीं जा सकता और दंगल में हिंसक डाव पेचो के प्रयोग की वजह से कोई बच्चा भी वह नहीं जा सकता था. इसलिए सब बच्चे वही हवेली में रुके और लखन सिंह का बड़ा बीटा विक्रम का बड़ा भाई धामु जो मंदबुद्धि था उसका दिमाग भी एक 10 साल के बच्चे जैसा होने की वजह से वो भी हवेली में hi रुका. इनके अलावा शबाना जो _ यानि गैरहिंदू होने की वजह से हवेली में hi रुकी. बाकि हवेली के सब लोग सब नौकर चाकर दंगल वाली जगह के लिए चल पड़े.

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यही से लालू ने अपने उस षड़यंत्र का प्रारम्भ किया जो उसने शबाना के इर्द गिर्द रचा था. अपनी शादी न होने की वजह से खफा मानसिक रूप से कमजोर धामु के मन में उसने ये बात बिठा दी की शोभा की जो सहेलिया शहर से आई है उनमे जो सबसे गोरी चिट्टी सबसे सुन्दर औरत यानि शबाना उसकी होने वाली दुल्हन है. शबाना का दूधिया रंग और सुंदरता देख धामु तो ख़ुशी से फूला न समाया. दंगल के लिए रवां होने से पहले लालू ने धामु को एक खास तरह की ड्रग्स पाउडर दिया जिसे घोलकर पीने से इंसान का दिमाग सुन्न सा हो जाता है वो अर्ध बेहोशी में चला जाता है. पूरी तरह से बेहोश न होते हुए भी उसे ये पता नहीं चलता की वो इस हालत में क्या क्या कर गया. इसके अलावा लालू ने धामु को वियाग्रा की दो गोली दी जो इंसान के अंदर के सेक्स हार्मोन को कई गुना बड़ा देती है और इंसान सेक्स के लिए उतावला हो जाता है. लालू ने धामु को कहा की वो शबाना की ड्रिंक में वो पाउडर और एक विग्रा पिल मिला दे और खुद भी एक पिआग्रा पिल ड्रिंक के साथ जातक जाए. धामु ने पुछा क्यों तो लालू ने उसे मिसगिदे कर दिया की पति अपनी पत्नी को प्यार करने से पहले ऐसा करता है उसने कभी शादी की रस्मे देखि नहीं इसलिए पता नहीं. बेचारा मंदबुद्धि धामु लालू की हर बात को सच मान रहा था क्युकी लालू ने उसे वडा करा था की वो शबाना से उसकी शादी करवा देगा. लालू ने धामु से ये भी कह दिया की इस बारे में किसी को न कहे वर्ण शबाना गुस्सा हो जाएगी और उससे शादी नहीं करेगी.

लालू और हवेली में मौजूद सब लोग दंगल वाली जगह के लिए चले गए वह रह गए केवल शबाना धामु और कुछ बच्चे. दंगल वाली जगह पर अघोरी पहले से सबका इंतज़ार कर रहा था. अघोरी के बगल एक आदमकद मूर्ति थी जिस पर कपडा ढाका था और दूसरी तरफ एक हत्ता कट्टा लंगोट धरी पहलवान था. सबके आ जाने के बाद अघोरी ने विनीता और लखन को मैदान के बीच बुलाया और आज की इस दंगल पूजा के बारे में सबको बताया. अघोरी ने उस मूर्ति से कपडा हटाया वो मूर्ति एक बख्तरबंद योद्धा की थी जिसके एक हाथ में भला दुसरे में ढाल थी.

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अघोरी ने सबको बताया की ये मूर्ति ग्रीक गॉड एरेस की है जिसे मंगल यानि मार्स का मानव रूप भी कह सकते है. मंगल एक उग्र स्वभाव का गृह जिसे युद्ध अति प्रिय जो उसके मानव रूप एरेस को देख कर साफ़ पता चल जाता है. इसीलिए आज उसे खुश करने के लिए इस दंगल का आयोजन किया गया है ताकि लखन सिंह के परिवार से मंगल दोष मिट जाए.

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अघोरी ने बताया की ये दंगल लखन सिंह को लड़ना है इस पहलवान से पर पत्नी होने के नाते इस दंगल का परिणाम विनीता को भुगतना होगा. जो भी ये दंगल जीतेगा वो अपनी इच्छा अनुसार विनीता के शरीर के किसी भी हिस्से का चुम्बन ले सकता है और और दूसरा विनीता को हारने वाले का मूत्र पीना होगा. विनीता के तो पैरो टेल ज़मीन निकल गई क्युकी लखन सिंह की उम्र और उस पहलवान की बॉडी देख कर इस दंगल का परिणाम एक तरह से सबको पता था और उस परिणाम का असर विनीता पर पड़ने वाला था. लखन सिंह भी शर्मिंदा थे की उनकी वजह से विनीता को इतना सब सहना होगा. पर उन्होंने तै कर लिया की वो पूरी हिम्मत से उस पहलवान का मुकाबला करेंगे.

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अब अघोरी ने दंगल की शर्ते बताई की ये दंगल 5 चरण में लड़ा जाएगा और जो भी प्रतियोगी 3 चरण जीत जाएगा वो ये दंगल भी जीत जाएगा.

दंगल प्रारम्भ हो गया

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पहला चरण मुष्टिभंजन यानि पंजा लड़ाई की प्रतियोगिता थी दोनों प्रतियोगियों ने बैठकर एक दुसरे को पंजे को थम लिया और पंजा लड़ाई चालू हुई. लखन सिंह ने अपनी उम्र के बावजूद काफी प्रयास किया पर उस पहलवान के आगे टिक नहीं सके और पहले चरण में उससे हार गए.

दूसरा चरण था भारवर्जन जिसमे दोनों प्रतियोगियों को 10/20/50 और 100 किलो के चार वजन मैदान के एक हिस्से से उठाकर दुसरे कोने तक ले जाने थे जो प्रतियोगी ये चारो वजन पहले दुसरे छोर तक पंहुचा देगा वो जीतेगा. लखन सिंह ने इस बार अपनी छमता से बाद कर प्रदर्शन करा पर 52 साल के आदमी 30 साल के पहलवान से क्या मुकाबला जितनी देर में लखन सिंह ने तीन वजन दुसरे छोर तक पहुंचाए उतने समय में उस पहलवान ने चारो वजन दुसरे चोर पर पंहुचा कर दंगल का ये दूसरा चरण भी अपने नाम कर लिया.

दो चरण हार कर लखन सिंह दंगल प्रतियोगिता में बुरी तरह पिछड़ चुके थे एक और चरण की हार और 5 चरण की प्रतियोगिता 3 चरण में hi ख़तम हो जाने के करीब थी. विनीता के साथ वो पहलवान क्या करेगा उसे उसका उस पहलवान का मूट पीना पड़ेगा सरे गांववालों के सामने ये सोचकर विनीता परेशां थी गांववाले एक्ससिटेड लखन सिंह खुद से गुस्सा और वो पहलवान अंदर से पुरे जोश में. देखना ये था की प्रतियोगिता अब कितनी देर और चलनी थी.
 
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