कहानी दुसरे दिन में प्रवेश कर गई सहेलिया जिस शादी के लिए गाँव आई थी वो तो हो चुकी थी फिर आगे क्या. जैसा की इंट्रो में बताया की लखन सिंह के परिवार पर जो श्राप था उसकी वजह से कोई भी अपनी लड़की की शादी उनके परिवार में करने को तैयार नहीं था. पर लखन मलखान की दोस्ती और शोभा का विक्रम के प्रति आकर्षण इस शादी की वजह बना.
पर श्राप का निवारण हरेक के बस की बात नहीं इसके लिए लिए शादी की अगली सुबह बुलाया गया उसे जो इस कहानी का सबसे अहम् किरदार था अघोरी.
जिसके बारे में मई पहले hi बता चूका हु. अघोरी ने बताया की लखन सिंह के परिवार से जुड़े श्राप के निवारण के लिए नवग्रह यानि सूर्य मंगल बुध बृहस्पति शनि शुक्र Arun/Varun पृथ्वी और चंद्र की पूजा करनी होगी वो भी तांत्रिक तरह से ग्रहो के गुड़ व्यव्हार के मुताबिक कुछ विशेष क्रियाओं के माध्यम से. यह पूजा लखन सिंह को अपनी पत्नी के साथ करनी थी पर लखन सिंह की पत्नी को तो मरे कई साल हो चुकी फिर वो कैसे......?
इसका जवाब भी अघोरी ने बताया की एक ऐसी स्त्री इस पूजा में लखन सिंह की पत्नी का स्थान ले सकती है जो न लखन सिंह के परिवार की हो न उन पर आश्रित, न किसी धन के लालच में हो न किसी दबाव या दर में, और सबसे बड़ी बात उसका पहले से विवाहित होना जरूरी है भले hi शारीरिक रूप से वो कुंवारी मतलब उसने सम्भोग न करा हो पर '. रूप से उसका विवाहित होना जरूरी था. और उसे अपने पूर्ण पति को 7 दिन के लिए भूलकर अगले 7 दिन के लिए लखन सिंह के साथ पुरे रीती रिवाज़ के साथ विवाह बंधन में बांधना होगा. और यहाँ से 400 कम दूर काकातुआ के जंगल में तै की गई जगह पर लखन सिंह के साथ अकेले रहकर इस पूजा की सभी रस्मो को पूरा करना था. यानि किसी और की बीवी को इस पूजा में लखन सिंह की बीवी बनना था और अगले 7 दिन एक सुनसान जगह पर उनकी पत्नी के रूप बिताने थे.
लखन सिंह का ऐसी औरत का इंतज़ाम का पहले से कर रखा था अपने एक दूर के दोस्त की बीवी जो शहर से विशेष रूप से इस पूजा में शामिल होने hi गाँव आ रही थी. पर काफी इंतज़ार के बाद भी उसका कोई अत पता नहीं था. लखन सिंह ने पता करवाया तो पता चला ये वही गाड़ी थी जिसका हरिया की गाड़ी के साथ आमना सामना हुआ था और जो नदी में डूब गई. पल टूटने की खबर मिलते hi सहेलियों को गरिमा का ख्याल आया की रात भर से गायब है अब उन्हें गरिमा की भी चिंता हुई.
इधर जंगल में जब गरिमा को होश आया तो उसने खुद को पूरा नंगी हालत में ज़मीन पर लेता पाया और कोई मर्द पीछे से उसे आलिंगन में भरे सो रहा था उसके लिंग के एहसास से साफ़ था वो भी नंगा था. गरिमा हड़बड़ा कर उठ बैठी और हरिया को इस हालत में अपने पीछे लेता देख इसे तेज़ झटका लगा. उसे यही लगा की हरिया ने उसकी बेहोशी का फायदा उठा कर उसके साथ गलत हरकत कर डाली. गरिमा के उठने से हरिया की भी नींद खुल गई वो भी हड़बड़ा कर उठ बैठा और रोटी हुई गरिमा को कल रात के हालत समझने की कोशिश करने लगा. पर गरिमा कुछ सुनने को तैयार नहीं थी उसने एक डंडी उठाई और बेतहाशा उसे हरिया पर बरसाना शुरू कर दिया. हरिया चुपचाप वह खड़ा गरिमा की मार झेलता रहा. एक डंडी टूटने के बाद हरिया खुद गरिमा को दूसरी डंडी दे देता. काफी देर तक गरिमा यही हरिया पर अपना गुस्सा निकलती रही.
हरिया को मार मार कर जब वो शांत हुई तब हरिया ने उसे कल की स्थिति समझे की उसने उसने अंदर अपना लुंड नहीं डाला और बस उसकी जान बचने के लिए उसके साथ चिपक कर सोया. गरिमा को गुस्सा भी कुछ ठंडा हुआ और उसकी नज़रे अपने सामने नंगे खड़े हरिया पर गई जिसका लुंड उसके पति से भी काफी लम्बा था और शांत हालत में भी काफी लम्बा था. हालत को समझते हुए दोनों अपने गीले कपडे पेहेन कर लखन सिंह की कोठी की तरफ चल दिए. लखन सिंह की कोठी में पहुंचकर हरिया ने गरिमा का परिचय बिहारी काका और उनके बेटे जीतू से करवाया जो यहाँ की देखरेख करते है और खाना बनाते है. कोठी से हरिया ने लखन सिंह को कल रात की घटना के बारे में फ़ोन करके सब बता दिया और ये भी गरिमा पूरी तरह सुरक्षित है. गरिमा के सेफ होने की खबर सुन थोड़ा रिलैक्स हुए.
गरिमा के पास तो अब अपने कोई कपडे नहीं थे क्युकी उसका बैग तो शादी की हवेली में जा चूका था और पल टूट जाने की वजह अगले कुछ गरिमा का वह जाना पॉसिबल नहीं था. और ऊपर से उसके पहने हुए कपडे भीग चुके थे. हरिया ने कहा की उसकी बीवी के कुछ कपडे यहाँ है जो वो यहाँ आने पर पहनती है पर वो देहाती स्टाइल के है मतलब खली चोली और घाघरा अगर गरिमा को ऐतराज़ न हो तो वो ले आए. कुछ नहीं से तो कुछ भला गरिमा तैयार हो गई. हरिया एक अपनी बीवी के कपडे लेने चला गया. जीतू ने गरिमा को उसके रुकने का कमरा दिखा दिया.
गरिमा कमरे में जाते hi नहाने चली गई और अपने गीले कपडे उतर कर अपनी जांघो पर लगे हरिया के वीर्य को साफ़ करने लगी और कल रात की घटनाओ को याद करने की कोशिश करने लगी. हरिया ने उसकी छूट में लुंड नहीं डाला और उसके अंदर पानी नहीं निकला ये चेक करने के लिए उसने अपनी छूट में ऊँगली दाल कर देखा. कल की घटनाओ को याद करते करते और छूट में ऊँगली डाले डाले उसकी आँखों के सामने हरिया का नंगा जिस्म उसका झूलता हुआ लुंड ताज़ा हो गया. हरिया की मर्दानगी की वो झलक और छूट के अंदर गरिमा की ऊँगली ने गरिमा को उत्तेजित कर दिया और बिना सोचे hi गरिमा की उंगलिया अपनी छूट में तेज़ तेज़ चलने लगी. फैंगरिंग करते करते गरिमा कब स्खलित हो गई उसे पता hi नहीं चला.
स्खलन के बाद उसके बाद का पछतावा भी अब गरिमा पर हावी हो गया उसे एहसास हुआ की उसने अभी अभी हरिया और उसके लुंड को इमेजिन करके अपनी छूट में ऊँगली डाली है. इससे उसे पछतावा भी हुआ और साथ में ये एहसास भी हुआ की शायद हरिया कही न कही सही था. शायद कल रात में सर्दी से बचने के लिए उसने ये सब करा और जब उसके नंगे शरीर को देख कर वो उत्तेजित हो गई तो रात में उससे चिपक कर हरिया का उत्तेजित होना और उसकी जांघ पर स्खलित हो जाना स्वाभाविक था.
बाथरूम से तौलिया लपेट कर गरिमा बहार आ गई. तौलिया उसके आधे शरीर को hi ढके थी उसके उभारो से लेकर उसकी 38 साइज की गांड के थोड़ा नीचे तक. अचानक बहार कुण्डी खटकी बहार जीतू था जो हरिया की बीवी के कपड़ो से भरा बैग लाया था. गरिमा को ध्यान hi नहीं रहा की वो तौलिया में थी और उसने जीतू को अंदर आने को कह दिया. गरिमा को यु तौलिया में देखना जीतू जैसे तीनगर के लिए अनएक्सपेक्टेड था. वो बड़ी मुश्किल से वह अपनी उत्तेजना को दबाए रहा पर कमरे से बहार आते hi सीधा अपने कमरे में जाकर गरिमा के उस उत्तेजक रूप की कल्पना करके मुठ मार कर अपने अंदर की गर्मी को शांत कर दिया.
कमरे में गरिमा ने कपडे देखे वो काफी देखती थी बस चोली और वो भी ज्यादातर बैकलेस और घाघरा गाँव में ज्यादातर औरते ऐसे कपडे hi पहनती होगी. और चोली भी काफी टाइट हरिया की बीवी काफी दुबली पतली होगी और गरिमा का सीना काफी भरी था. जिस वजह से चोली उसके उभारो पर काफी कास गई थी जिस वजह से उसके उभर और आकर्षक हो गए. उन्देर्गर्मेन्ट्स तो गरिमा के लिए पेहेनना भी मुश्किल था ब्रा तो गरिमा के छोटी पद गई और कच्ची भी कसवत के कारन पहनना मुश्किल था. काफी संकोच और झिझक के साथ गरिमा बिना अंदर उन्देर्गर्मेन्ट्स पहने बस ऊपर से घाघरा चोली पेहेन कर कमरे से बहार आई.
नीचे हरिया उसका इंतज़ार कर रहा था. गरिमा के गद्रे बदन को अपनी बीवी के कैसे कपड़ो में देख हरिया भी उत्तेजित हो गया पर खुद पर काबू रखा. हरिया ने गरिमा को बताया की आज वो यहाँ आराम करे कल वो गाड़ी से गरिमा को मलखान सिंह की कोठी ले जाएगा जहा से गरिमा को अपने गहने लेने थे. इतना कह कर वो भी अपनी उत्तेजना की आग को ठंडा करने के लिए अपने घर चला गया और गरिमा को अपनी बीवी के कपड़ो में देख अपनी बीवी के रूप में इमेजिन करके जीतू की तरह गरिमा के नाम का मुठ मार कर अपने अंदर की उत्तेजना को ठंडा कर लिया.
18 साल के जीतू और 35 साल के हरिया के बाद अब बरी थी गरिमा के इर्द गिर्द मौजूद तीन मर्दो में तीसरे और सबसे उम्रदराज़ मर्द बिहारी काका. काका किचन में खाना बना रहे थे तहज़ीब को देखते हुए गरिमा भी उनका हाथ बताने के लिए किचन में चली गई. काका ने उसे मन भी करा पर गरिमा अपनी सभ्यता की वजह से नहीं मणि. काका की मदद के लिए गरिमा सब्जी काटने लगी. सब्जी काटते काटते गरिमा थोड़ा आगे की और झुक गई और काका पीछे खड़े थे.
आगे झुक जाने से गरिमा की एक्स्ट्रा साइज गांड पीछे उभर आई और कैसे हुए घाघरे और अंदर चड्डी भी न पहने होने के कारन उसके चूतड़ की दरार एकदम साफ़ नज़र आने लगी. पीछे खड़े 58 साल के काका भी इस उभरी हुई गांड को देख कर उत्तेजित हुए बिना न रह पाए और वही किचन में गरिमा के पीछे खड़े खड़े अपनी धोती में हाथ डालकर मुठ मारना शुरू कर दी. गरिमा की नज़र अचानक सामने खीड़की के कांच पर पड़ी और उसने अपने पीछे खड़े मुठ मारते बिहारी काका को कांच में देख लिया. इतने उम्रदराज़ अपने बाप की उम्र के आदमी को इस तरह मुठ मारते देखना गरिमा के लिए बेहद शॉकिंग था पर गरिमा को समझ नहीं आ रहा था वो कैसे रियेक्ट करे इसलिए वो वैसे hi कड़ी रही. मुठ मारकर काका ने भी अपना माल अपनी धोती में hi निकल दिया. और अब गीली धोती पेहेन कर वो वह खड़े नहीं रह सकते थे इसलिए बहाना बनाकर वह से अपने कमरे में चले गए.
पहले हरिया फिर जीतू अब काका तीन अलग उम्र के मर्द गरिमा की वजह से उत्तेजित हो गए और गरिमा तीन अनजान मर्दो के बीच इस घर में अकेली थी और परिस्थिति वाश उसे अगले कुछ दिन इन्हीके बीच बिताने थे. गरिमा को टेंशन की पता नहीं आने वाले दिनों में उसे और क्या क्या फेस करना पड़ेगा.