- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 84,650
सुबह सूरज की पहली किरण के साथ विनीता और लखन की आँखे खुल गई. कल की थकावट भरी यात्रा के बाद आज इस नै जगह नए माहौल में एक नए रिश्ते ( पति पत्नी ) के रूप में ये उनका पहला दिन था. हलाकि ये बस एक सांकेतिक रिश्ता था पर रिश्ता तो रिश्ता था जिसे झुटलाया नहीं जा सकता था और बहरी दुनिया से पूरी तरह कटे विनीता लाख के लिए ये रिश्ता hi अगले कुछ दिन उनके जीवन की एकमात्र सच्चाई था. कुछ hi देर बाद लखन के फ़ोन पर वो फ़ोन आ गया जिसका उन्हें इंतज़ार था अघोरी का. अघोरी ने उन्हें बताया की सुन मार्स और मरकरी के बाद बरी है अब बरी है अगले गृह की और आज उन्हें एक नहीं दो ग्रहो की पूजा करनी है वो भी एक साथ.
जुपिटर
जिसे हम बृहस्पति भी कहते है और ग्रीक माइथोलॉजी में इसे हम ज़ीउस के नाम से जानते है. जो बिजली और आकाश का देवता है.
और
सैटर्न
ग्रहो में सबसे सुन्दर सबसे उग्र जिसे हम शनि कहते है और ग्रीस में इसे क्रोनस नाम से जानते है. जो फसलों और हरियाली का देवता है.
इन दोनों के पूजन के साथ होने का एक विशेष कारन है क्युकी दोनों का इतिहास काफी कुछ एक जैसा है और हो भी क्यों न दोनों पिता पुत्र जो है. ज़ीउस क्रोनस की hi संतान है. क्रोनस के पिता थे यूरेनस जिनका तीनो लोको पर कब्ज़ा था जो बेहद अत्याचारी और क्रूर थे पर अपने पुत्र से बहुत प्रेम करते थे. क्रोनस ने अपने पिता की क्रूरता के खिलाफ आवाज़ उठाई और पिता का वध करके उनके क्रूर शासन का अंत करा पर अपने hi बेटे के विश्वासघात से गुस्सा होकर मरते मरते यूरेनस ने उसे श्राप दिया की जिस तरह उसने अपने पिता जिसकी जान उसके लिंग में थी के अंडकोष काटकर उसका वध करा वैसे hi उसकी संतान उसका वध करेगी तब उसे इस तकलीफ का एहसास होगा.
क्रोनस के मन में अपने पिता के ये शब्द अंदर तक बैठ गए और जब भी उसकी पत्नी गया बच्चे को जन्म देती वो उससे वो बच्चा छीन कर साबुत निगल जाता. ऐसा करते हुए वो अपने 5 बच्चो हेरा हदीस पोसिएदोन डेमेटर चीरों को निगल चूका था जब छटा बीटा ज़ीउस पैदा हुआ तो गया ने अपने बेटे को बचने के लिए अपने एक पालतू बैल की पीठ में बांधकर उसे भगा दिया और एक पत्थर को कपडे में लपेट कर क्रोनस को दे दिया. क्रोनस उसे hi अपना बीटा समझ कर निगल गया. ज़ीउस वराहो तक उस बैल के सरक्षण में एक गुफा में छुपा रहा और जब बड़ा हुआ और अपने पिता से लड़ने में सक्षम हो गया तब उसने अपने hi पिता के हासिये से अपने पिता का पेट पहाड़ कर उसका अंत करा और भाइयो को आज़ाद करा.
एक जैसा अतीत होने के कारन और पिता पुत्र होने के कारन आपको इनकी पूजा एक साथ करनी है पहले आपको पिता यानि शनि ( सैटर्न ) उर्फ़ क्रोनस की पूजा करनी है उसके बाद बृहस्पति ( जुपिटर ) उर्फ़ ज़ीउस की पूजा करनी है. पहले शनि की साधना की विधि सुन ले. आपके शयन कक्षा में कुछ बक्से रखे है जिनमे हर दिन के पूजन के हिसाब से सामग्री राखी है प्रथम बक्से में आज के दिन की सामग्री है.
1- क्रोनस का अस्त्र हसिया है इसलिए उनकी साधना का आरम्भ हासिये की पूजा से होगा जो आपको बक्से से मिल जाएगा.
2- शनि का वहां कौआ है इसलिए आप दोनों को भोजन बनाकर घर के बहार कौवो को भोग लगाना है.
3- क्रोनस ने अपने पिता यूरेनस के अंडकोष यानि यूरिनरी बॉल्स काटकर उनका वध करा था और उनके लिंग से निकले वीर्य को अपने शरीर पर मलकर उनकी श्री शक्ति अपने अंदर ले ली थी. यहाँ पत्नी होने के नाते विनीता को ये काम करना है. लखन को एक डिब्बी में अपना वीर्य निकलकर विनीता को देना है और विनीता को बाथरूम में जाकर उसे अपने शरीर पर मलना होगा. ये सुन विनीता शर्म से पानी पानी हो गई.
4- शनि को तेल चढ़ाया जाता है इसलिए आप दोनों को भी आज दिन में और रात में सोने से पहले अपने शरीर पर तेल चुपड़ना होगा. दिन में तेल से स्नान के बाद आप पानी से भी स्नान कर सकते पर रात आपको तेल चुपड़ कर hi सोना है. जिनकी शीशी बक्से में है दिन और रात की अलग अलग.
5- शनि अनाज और हरियाली के देवता है इसलिए उन्हें खुश करने के लिए आपको आज पूरा दिन एक विशेष तरह की पोषक पहनी होगी. पत्तो से बानी हरी भरी पोषक आज पूरा दिन आपको उसी में बिताना होगा जो बक्से में मिल जाएगी.
ये है शनि साधना की 5 विधिया अब बात करते है बृहस्पति साधना की.
1- ज़ीउस ने कई साल जंगल में विपरीत परिस्थितियों में जंगली फलो के सहारे गुज़ारे आपको भी शनि साधना के बाद पूरा दिन और पूरी रात जंगल में गुज़ारना है खुले आकाश के नीचे जंगली फलो लकड़ियों को जलाकर एक दुसरे के सहारे.
2- ज़ीउस को कई साल एक बैल ने पला इसलिए बैल उन्हें बहुत प्रिय है जुगल में आपको एक बैल ढूंढ़ना है जो एक चट्टान में बंधा होगा आपको उसे आज़ाद करना उसे भोजन करना है.
3- ज़ीउस ने अपने पिता का पेट पहाड़ कर अपने भाई बहनो को आज़ाद कराया आपको उस चट्टान को पेट मन्ना है और उस चट्टान के पास hi रखे एक हथोड़े से उस चट्टान को खंड खंड करना और उस चट्टान के अंदर मौजूद 5 गेंद को मुक्त करके उन्हें पास hi बह रही नदी में प्रवाहित करना है.
4- रात में आपको नदी में नग्न होकर स्नान करके बृहस्पति मंत्र ॐ बृहस्पतियाय नमः का जाप करना है वो भी 1000 बार और वो भी विनीता को लखन की गॉड में बैठकर जिसमे विनीता का चेहरा लखन की और होगा. गॉड में बैठने की बात सुन विनीता को जिओसबमबप्स होने लगे.
5- इसके बाद पांचवा चरण है आलिंगनबद्ध निद्रा अपने जिस्म पर तेल चुपड़ कर आपको साडी रात खुले आकाश के नीचे गुज़ारनी है वो भी एक दुसरे को आलिंगन में भर कर ताकि इस ठंडी रात में आपदोनो को एक दुसरे के शरीर से गर्मी भी मिल सके और रात भी पार हो जाए. ये आखरी बात सुन तो विनीता और लखन के पैरो टेल ज़मीन hi निकल गई पर वो कर भी क्या सकते ये सब तो करना hi था.
उन्होंने शनि पूजा की विधि के अनुरूप बक्से से हसिया निकला उसका पूजन करके पहली विधि पूरी की. उसके बाद विनीता ने थोड़ा खाना बनाया और लखन के साथ बहार जाकर कौवो को भोजन कराया. ये दो चरण तो आसान थे पर तीसरा चरण लखन विनीता दोनों के लिए शर्मिंदगी भरा पर करना तो था hi. लाख ने बक्से से अपने वस्त्र का पैकेट निकला जो उन्हें आज पेहेनना था और तेल की शीशी और एक छूती डिब्बी लेकर बाथरूम चले गए. विनीता जानती थी वो बाथरूम में क्या कर्नेगे वो सोच रही थी की क्या मुठ मार कर अपना वीर्य निकलते वक़्त वो उसके बारे में सोचेंगे जिसे सोचकर कही न कही रोमांचित भी हो रही थी और शर्मिंदा भी. और उसका सोचना कही न कही सच भी था लखन ने अंदर मुठ मारना शुरू कर दिया था शुरू में तो वो मुठ मारते वक़्त अपनी दिवंगत पत्नी के बारे में hi सोच रहे थे पर अचानक से न चाहते हुए भी उनके सामने उनकी पत्नी की जगह विनीता का चेहरा घूमने लगा. शायद मुठ मारते समय उनका खुद पर काबू न रहा विनीता के मादक जिस्म और पत्नी के रूप में उसे एक्सपेक्ट कर उनके हाथ अपने लुंड पर तेज़ तेज़ चलने लगे और कुछ hi पल में लुंड ने अपना प्रसाद बहार उगलना शुरी कर दिया.
लखन ने अपना पूरा वीर्य उस डिब्बी में भर दिया कई सालो बाद आज झड़ने की वजह से उनका वीर्य बहुत सारा और बहुत गाड़ा था. लखन को खुद पर गुस्सा भी आ रहा था की उनके परिवार के लिए इतना कुछ करने वाली उस भली महिला के बारे में वो ऐसा कैसे सोच सकते है पर सोच पर कोई काबू नहीं कर सकता. उसके बाद लखन ने अपने जिस्म पर तेल चुपड़ कर तेल से स्नान करा और फिर पानी से खुद को अच्छी तरह साफ़ कर वो पैकेट खोल कर देखा. उसमे पत्तो से बना एक घेरदार ड्रेस था जिसे केवल कमर पर लपेट कर अपने लिंग को hi ढाका जा सकता है. अंदर पहने के लिए कोई चड्डी भी नहीं था इसलिए नीचे से अति हवा से लुंड खुला खुला सा एहसास दे रहा था. वो तो अच्छा था की लुंड के आते के पत्ते घने और मोठे थे वर्ण शायद उन्हें भेद कर बहार आ जाता. ऊपर लखन का सीना पूरी तरह खुला था. इन कपड़ो में लखन को बहार विनीता के सामने जाते बड़ा अजीब लग रहा था पर और कोई ऑप्शन भी नहीं था. लखन अपने वीर्य से भरी डिब्बी वही छोड़ बाथरूम से बहार आ गया.
बहार लखन को उस पोषक में देख विनीता की सास हलक में अटक गई इस उम्र में भी लखन का जिस्म काफी कसरती था. साथ hi विनीता ये भी सोच रही थी की जब उनके कपडे ऐसे है तो उसके कैसे होंगे. लखन ने बड़े झेपते हुए शर्मिंदगी के साथ विनीता को डिब्बी के बारे में बता दिया. विनीता अपना पैकेट लेकर बाथरूम में आ गई. बाथरूम में सामने hi एक डिब्बी राखी थी जिसमे सफ़ेद सफ़ेद कुछ भरा था ये साफ़ था उसमे क्या था. विनीता ने अपने कपडे उतर कर उस डिब्बी को उठाया उसके हाथ काँप रहे थे. आज तक जो पुरुष के संपर्क से अनजान रही आज वो अपने सहेली के ससुर का वीर्य अपने शरीर पर मलने वाली थी. पुरुष के वीर्य से उसका प्रथम संपर्क था. विनीता ने वो डिब्बी खोली उसमे भरा वीर्य काफी गाड़ा था उसने नेहा से सुना था की जिस पुरुष में मर्दानगी और सेक्स पावर चरम पर होती है उसका वीर्य उतना hi ज्यादा गाड़ा होता है और उम्र के साथ साथ वीर्य पतला होता जाता है. उसे आश्चर्य था की इस उम्र में लखन जी का वीर्य इतना गाड़ा है. पहले तो उसके मन में आया की वीर्य को नाली में बहा दे और बहार जाकर कह दे की उसने वीर्य मॉल लिया था पर फिर उसे ख्याल आया की कही उसकी एक गलती से पूजा अधूरी न रह जाए और शोभा पर कोई मुसीबत न आए वैसे भी यहाँ कोई है नहीं तो वो ये कर सकती है.
विनीता ने हिम्मत करके उस डिब्बी में ऊँगली दाल कर थोड़ा वीर्य बहार निकला और उसे अपने पैरो पे मलने लगी. पैरो के बाद हाथ फिर पेट फिर अपने स्तनों पर मलने लगी. स्तनों पर वीर्य का संपर्क उसके अंदर की दागी वासना की आग को भड़का रहा था. उसकी आँखे बंद हो गई और पता नहीं कब उसके वीर्य से भरी उंगलिया उसके चेहरे तक पहुंच गई. अपनी उंगलियों को नाक के पास ले जाकर वो उस पुरुष वीर्य की मादक सुगंध को अपने महसूस कर रही थी. पहली बार उसे इस मादक सुगंध का एहसास हुआ था. ये मादक सुगंध उसे दीवाना बना रही थी और उसे बहक जाने को मजबूर कर रही थी. विनीता की उंगलिया अपने चेहरे पर चलने लगी चेहरे को मलते मलते विनीता को पता hi नहीं चला की कब उसकी उंगलिया उसके होंठो तक पहुंच गई और होंठो पर वीर्य मलते मलते कब उसके होंठ खुल गए और वो उंगलिया उसके होंठो के अंदर दाखिल हो गई. शायद ये उसकी उत्तेजना थी जो बरसो से दबी थी और आज ज़रा सा मौका मिलने पर बहक गई थी और उससे ये सब करवा रही थी. पहली बार विनीता को वीर्य का स्वाद मिला था नेहा से उसने बहुत बार सुना था की वो अपने बॉयफ्रैंड्स का लुंड चूसती है और वीर्य का टास्ते उसे मदहोश कर देता है पर उसने खुद पहली बार इस मदहोशी को अनुभव करा था क्युकी उसके तो अपने पति ने hi सुहागरात में उसका तिरस्कार कर दिया था. डिब्बी में बस थोड़ा hi वीर्य बचा था और बस एक जगह बाकि थी विनीता की छूट. अपने इस कदर वासना में डूब चुकी थी की बिना खुद को शांत करे वो अब पीछे नहीं हैट सकती थी. अपने एक हाथ की उंगलियों को चूसते हुए उसके दुसरे हाथ की उंगलिया उस बचे हुए वीर्य को समेत कर उसकी छूट तक पहुंच गई और लखन सिंह के वीर्य को अपनी छूट पर मलने लगी और छूट पर बहार से मलते मलते विनीता की उंगलिया उसकी छूट के अंदर दाखिल हो गई. लखन ने उत्तेज्त होकर विनीता के बारे में hi सोच कर अपना वीर्य निकका था और अब सयोग देखिये विनीता भी लखन के बारे में hi सोच कर उनके वीर्य को अपनी छूट के अंदर मॉल रही थी. बिना सम्भोग किये hi लखन ने जिसकी छूट के नाम से वीर्य निकला वो अपनी मज़िल तक पगुच गया. विनीता की आँखों के सामने लखन सिंह का मरदाना जिस्म hi घूम रहा अपनी उंगलियों को चूसते हुए उसे ये hi एहसास हो रहा था जैसे वो लखन सिंह का लुंड चूस रही हो और छूट के अंदर उसकी उंगलिया तेज़ तेज़ चल रही जैसे लखन सिंह खुद उसे छोड़ रहे हो. कुछ hi मींचते में विनीता की उत्तेजना शांत हो गई मुँह और छूट दोनों जगह मौजूद उसकी उंगलिया ढीली पद गई. ऐसा नहीं था ये विनीता का पहला ओर्गास्म था अपनी पति का तिरस्कार झेलती विनीता ने पहले भी इस तरह अपनी उत्तेजना को शांत करा था पर तब उसके सामने कोई चेहर नहीं था जिसे इमेजिन करके वो खुद शांत करले पर आज उसकी बंद आँखों को एक चेहरा मिल गया था आज वो जितना झड़ी इतना पहले कभी न झड़ी.
पर वो कहते है न इंसान गुस्से और उत्तेजना में जो काम कर जाता है उसका एहसास उसे तब होता है जब उसका गुस्सा या उसकी उत्तेजना शांत होती है उसकी भावनाए संयत होती है. लखन सिंह ने विनीति के नाम पर अपना वीर्य निकला था पर झड़ने के बाद उसे अपनी गलती का एहसास हुआ और कुछ ऐसी hi हालत विनीता की थी. उसे यकीन नहीं हो रहा था की उत्तेजना में क्या कुछ कर गई जिस वीर्य को छूने में भी उसके हाथ कांप रहे थे उस वीर्य को अपने होंठो के अंदर लिया उसे चख कर देखा अपने से उम्र में इतने बड़े अपनी बाप की उम्र की आदमी का वीर्य उंगलियों में भर कर अपनी छूट के अंदर माला अपनी सहेली के ससुर से छोड़ने के बारे में सोचकर अपनी उत्तेजना को ठंडा करा ये सोच सोच कर उसे खुद पर घिन आ रही थी. बेशक उसे उसके पति से प्यार न मिला पर सिर्फ सेक्स की इच्छा में वो इस हद कैसे गिर सकती है उसे खुद पर काबू रखना होगा और ये ध्यान रखना होगा की वो यहाँ सिर्फ लखन सिंह की सांकेतिक पत्नी बन कर आई है सिर्फ पूजा करने उनसे छोड़ने नहीं. वो यहाँ पूजा पर आई है हनीमून पर नहीं. उसे खुद पर बहुत गुस्सा आ रहा था. उसने पहले तो थूक थूक कर लखन सिंह के वीर्य के एहसास को अपने मुँह से दूर करने की कोशिश की फिर अपने जिस्म पर तेल चुपड़ कर उसे वीर्य को हटाने की कोशिश की फिर पानी से अच्छे से नाहा धो कर वीर्य का कटरा कटरा अपने शरीर से हटाकर वो पैकेट खोल कर देखा.
ड्रेस देखकर तो उसके रोंगटे खड़े हो गए वो एक बेहद बोल्ड बेहद हॉट पत्तो से बानी ड्रेस थी जिसमे उसकी नाभि पूरी तरह खुली थी और वो ड्रेस बमुश्किल उसके नितम्बो से कुछ नीचे hi थी इसलिए उसकी उसकी पूरी जांघो का नंगा रहना निश्चित था. विनीता ने जब वो ड्रेस पहनी तो उसके उभर काफी खुले थे इस ड्रेस में विनीता इस कदर उत्तेजक लग रही थी की शायद अगर उसका पति भी उसे देख लेता तो शायद सब कुछ भूल कर उसके साथ अभी सुहागदिन मन लेता. विनीता को बहार आते बहुत शर्म आ रही थी पर हिम्मत करके वो बहार आ गई.
जब लखन सिंह की नज़र विनीता पर पड़ी तो उनकी खुली की खुली रह गई. न चाहते हुए भी उनका लुंड झटके खाने पर मजबूर हो गया. लखन सिंह की कमर पर बंधे पत्तो की सरसराहट से विनीता पता चल गया था की अचानक से ये पत्ते क्यों हिलने लगे उसने शर्म से अपनी नज़रे झुका ली इस तरह अधनंगी हालत में उनके सामने खड़े होना उसे बड़ा अजीब लग रहा था. लखन सिंह भी अपने लिंग की इस हरकत पर झेप गए और विनीता की तरफ पीठ कर्ली ताकि उनका ध्यान विनीता से हैट जाए.
शनि पूजा की साडी विधिया पूर्ण करके वो उन्ही कपड़ो में अधनंगी हालत बृहस्पति पूजा की विधिया पूर्ण करने के लिए निकल पड़े जो उन्हें अब साड़ी रात खुले आकाश के नीचे बिता कर पूरी करनी थी और जिसके लिए सबसे पहले उस जगह को खोजना था जहा एक बैल बंधा हो क्युकी वही वो स्थान था जहा उन्हें साडी रात गुज़ारनी थी. उन्हें जंगल में भटकते काफी समय हो गया पर बैल का कही अत पता नहीं था. भूक भी काफी लगी थी रस्ते में कुछ फल के पेड़ मिले जिन्हे खा कर उन्होंने अपनी भूक शांत और रात के लिए भी कुछ फल साथ बांध लिए. विनीता को अघोरी की बात याद आई की उसने कहा था की रात में बृहस्पति मंत्र के जाप से पहले पास बहती नदी में स्नान कर लेना मतलब उस स्थान के पास एक नदी है. जंगल में एक बैल ढूंढ़ना मुश्किल पर नदी ढूंढ़ना नहीं. नदी से आती ठंडी हवाओ की दिशा में चलते हुए वो नदी तक पहुंच गए और फिर नदी के किनारे चलते चलते वो उस जगह पहुंच गए जहा एक चट्टान से एक बैल बंधा था. वह पहुंच कर उन्होंने बैल का बंधन खोल कर उसे मुक्त कराया उसकी पूजा की बैल के लिए लाया गया भोजन और फल खिलाए और बैल को जंगल में छोड़ दिया. जल्द hi बैल उनकी आँखों से ओझल हो गया उसके बाद लखन ने उस चट्टान के पास रखा हथोड़ा उठाया और उस चट्टान पर प्रहार करना शुरू कर दिया. चट्टान तोड़ते तोड़ते लखन सिंह पसीना पसीना हो गया. लखन के गठीले बदन से बहकर अत पसीना बहुत आकर्षक लग रहा था विनीता बैठे बैठे लखन को प्रहार करते देख रही थी और सोच रही थी की इस उम्र में इनके अंदर इतना स्टैमिना है की बिना रुके ये हथोड़ा चलाए जा रहे तो जवानी में तो केहर ढाते होंगे. कुछ घंटो की जी तोड़ म्हणत के बाद लखन ने उस चट्टान को दो टुकड़ो में तोड़ दिया. उस चट्टान में पांच अलग अलग रंगो की ताम्बे की पांच गेंद थी जो ज़ीउस के भाई बहनो का प्रतीक थी. उन पांच गेंदों की पूजा करके विनीता ने उन्हें पास बहती नदी में विसर्जित कर दिया. हथोड़ा चला चला कर लखन सिंह काफी थक चुके थे और विनीता भी इतनी देर चल कर थक गई थी इसलिए वो दोनों वही एक पेड़ की छाव में कुछ देर के लिए सो गए. बृहस्पति पूजा के दो चरण उन्होंने पुरे कर लिए थे अब उन्हें शेष तीन चरण नग्न स्नान मंत्र जाप और आलिंगनबद्ध होकर रात कटनी थी.
जुपिटर
जिसे हम बृहस्पति भी कहते है और ग्रीक माइथोलॉजी में इसे हम ज़ीउस के नाम से जानते है. जो बिजली और आकाश का देवता है.
और
सैटर्न
ग्रहो में सबसे सुन्दर सबसे उग्र जिसे हम शनि कहते है और ग्रीस में इसे क्रोनस नाम से जानते है. जो फसलों और हरियाली का देवता है.
इन दोनों के पूजन के साथ होने का एक विशेष कारन है क्युकी दोनों का इतिहास काफी कुछ एक जैसा है और हो भी क्यों न दोनों पिता पुत्र जो है. ज़ीउस क्रोनस की hi संतान है. क्रोनस के पिता थे यूरेनस जिनका तीनो लोको पर कब्ज़ा था जो बेहद अत्याचारी और क्रूर थे पर अपने पुत्र से बहुत प्रेम करते थे. क्रोनस ने अपने पिता की क्रूरता के खिलाफ आवाज़ उठाई और पिता का वध करके उनके क्रूर शासन का अंत करा पर अपने hi बेटे के विश्वासघात से गुस्सा होकर मरते मरते यूरेनस ने उसे श्राप दिया की जिस तरह उसने अपने पिता जिसकी जान उसके लिंग में थी के अंडकोष काटकर उसका वध करा वैसे hi उसकी संतान उसका वध करेगी तब उसे इस तकलीफ का एहसास होगा.
क्रोनस के मन में अपने पिता के ये शब्द अंदर तक बैठ गए और जब भी उसकी पत्नी गया बच्चे को जन्म देती वो उससे वो बच्चा छीन कर साबुत निगल जाता. ऐसा करते हुए वो अपने 5 बच्चो हेरा हदीस पोसिएदोन डेमेटर चीरों को निगल चूका था जब छटा बीटा ज़ीउस पैदा हुआ तो गया ने अपने बेटे को बचने के लिए अपने एक पालतू बैल की पीठ में बांधकर उसे भगा दिया और एक पत्थर को कपडे में लपेट कर क्रोनस को दे दिया. क्रोनस उसे hi अपना बीटा समझ कर निगल गया. ज़ीउस वराहो तक उस बैल के सरक्षण में एक गुफा में छुपा रहा और जब बड़ा हुआ और अपने पिता से लड़ने में सक्षम हो गया तब उसने अपने hi पिता के हासिये से अपने पिता का पेट पहाड़ कर उसका अंत करा और भाइयो को आज़ाद करा.
एक जैसा अतीत होने के कारन और पिता पुत्र होने के कारन आपको इनकी पूजा एक साथ करनी है पहले आपको पिता यानि शनि ( सैटर्न ) उर्फ़ क्रोनस की पूजा करनी है उसके बाद बृहस्पति ( जुपिटर ) उर्फ़ ज़ीउस की पूजा करनी है. पहले शनि की साधना की विधि सुन ले. आपके शयन कक्षा में कुछ बक्से रखे है जिनमे हर दिन के पूजन के हिसाब से सामग्री राखी है प्रथम बक्से में आज के दिन की सामग्री है.
1- क्रोनस का अस्त्र हसिया है इसलिए उनकी साधना का आरम्भ हासिये की पूजा से होगा जो आपको बक्से से मिल जाएगा.
2- शनि का वहां कौआ है इसलिए आप दोनों को भोजन बनाकर घर के बहार कौवो को भोग लगाना है.
3- क्रोनस ने अपने पिता यूरेनस के अंडकोष यानि यूरिनरी बॉल्स काटकर उनका वध करा था और उनके लिंग से निकले वीर्य को अपने शरीर पर मलकर उनकी श्री शक्ति अपने अंदर ले ली थी. यहाँ पत्नी होने के नाते विनीता को ये काम करना है. लखन को एक डिब्बी में अपना वीर्य निकलकर विनीता को देना है और विनीता को बाथरूम में जाकर उसे अपने शरीर पर मलना होगा. ये सुन विनीता शर्म से पानी पानी हो गई.
4- शनि को तेल चढ़ाया जाता है इसलिए आप दोनों को भी आज दिन में और रात में सोने से पहले अपने शरीर पर तेल चुपड़ना होगा. दिन में तेल से स्नान के बाद आप पानी से भी स्नान कर सकते पर रात आपको तेल चुपड़ कर hi सोना है. जिनकी शीशी बक्से में है दिन और रात की अलग अलग.
5- शनि अनाज और हरियाली के देवता है इसलिए उन्हें खुश करने के लिए आपको आज पूरा दिन एक विशेष तरह की पोषक पहनी होगी. पत्तो से बानी हरी भरी पोषक आज पूरा दिन आपको उसी में बिताना होगा जो बक्से में मिल जाएगी.
ये है शनि साधना की 5 विधिया अब बात करते है बृहस्पति साधना की.
1- ज़ीउस ने कई साल जंगल में विपरीत परिस्थितियों में जंगली फलो के सहारे गुज़ारे आपको भी शनि साधना के बाद पूरा दिन और पूरी रात जंगल में गुज़ारना है खुले आकाश के नीचे जंगली फलो लकड़ियों को जलाकर एक दुसरे के सहारे.
2- ज़ीउस को कई साल एक बैल ने पला इसलिए बैल उन्हें बहुत प्रिय है जुगल में आपको एक बैल ढूंढ़ना है जो एक चट्टान में बंधा होगा आपको उसे आज़ाद करना उसे भोजन करना है.
3- ज़ीउस ने अपने पिता का पेट पहाड़ कर अपने भाई बहनो को आज़ाद कराया आपको उस चट्टान को पेट मन्ना है और उस चट्टान के पास hi रखे एक हथोड़े से उस चट्टान को खंड खंड करना और उस चट्टान के अंदर मौजूद 5 गेंद को मुक्त करके उन्हें पास hi बह रही नदी में प्रवाहित करना है.
4- रात में आपको नदी में नग्न होकर स्नान करके बृहस्पति मंत्र ॐ बृहस्पतियाय नमः का जाप करना है वो भी 1000 बार और वो भी विनीता को लखन की गॉड में बैठकर जिसमे विनीता का चेहरा लखन की और होगा. गॉड में बैठने की बात सुन विनीता को जिओसबमबप्स होने लगे.
5- इसके बाद पांचवा चरण है आलिंगनबद्ध निद्रा अपने जिस्म पर तेल चुपड़ कर आपको साडी रात खुले आकाश के नीचे गुज़ारनी है वो भी एक दुसरे को आलिंगन में भर कर ताकि इस ठंडी रात में आपदोनो को एक दुसरे के शरीर से गर्मी भी मिल सके और रात भी पार हो जाए. ये आखरी बात सुन तो विनीता और लखन के पैरो टेल ज़मीन hi निकल गई पर वो कर भी क्या सकते ये सब तो करना hi था.
उन्होंने शनि पूजा की विधि के अनुरूप बक्से से हसिया निकला उसका पूजन करके पहली विधि पूरी की. उसके बाद विनीता ने थोड़ा खाना बनाया और लखन के साथ बहार जाकर कौवो को भोजन कराया. ये दो चरण तो आसान थे पर तीसरा चरण लखन विनीता दोनों के लिए शर्मिंदगी भरा पर करना तो था hi. लाख ने बक्से से अपने वस्त्र का पैकेट निकला जो उन्हें आज पेहेनना था और तेल की शीशी और एक छूती डिब्बी लेकर बाथरूम चले गए. विनीता जानती थी वो बाथरूम में क्या कर्नेगे वो सोच रही थी की क्या मुठ मार कर अपना वीर्य निकलते वक़्त वो उसके बारे में सोचेंगे जिसे सोचकर कही न कही रोमांचित भी हो रही थी और शर्मिंदा भी. और उसका सोचना कही न कही सच भी था लखन ने अंदर मुठ मारना शुरू कर दिया था शुरू में तो वो मुठ मारते वक़्त अपनी दिवंगत पत्नी के बारे में hi सोच रहे थे पर अचानक से न चाहते हुए भी उनके सामने उनकी पत्नी की जगह विनीता का चेहरा घूमने लगा. शायद मुठ मारते समय उनका खुद पर काबू न रहा विनीता के मादक जिस्म और पत्नी के रूप में उसे एक्सपेक्ट कर उनके हाथ अपने लुंड पर तेज़ तेज़ चलने लगे और कुछ hi पल में लुंड ने अपना प्रसाद बहार उगलना शुरी कर दिया.
लखन ने अपना पूरा वीर्य उस डिब्बी में भर दिया कई सालो बाद आज झड़ने की वजह से उनका वीर्य बहुत सारा और बहुत गाड़ा था. लखन को खुद पर गुस्सा भी आ रहा था की उनके परिवार के लिए इतना कुछ करने वाली उस भली महिला के बारे में वो ऐसा कैसे सोच सकते है पर सोच पर कोई काबू नहीं कर सकता. उसके बाद लखन ने अपने जिस्म पर तेल चुपड़ कर तेल से स्नान करा और फिर पानी से खुद को अच्छी तरह साफ़ कर वो पैकेट खोल कर देखा. उसमे पत्तो से बना एक घेरदार ड्रेस था जिसे केवल कमर पर लपेट कर अपने लिंग को hi ढाका जा सकता है. अंदर पहने के लिए कोई चड्डी भी नहीं था इसलिए नीचे से अति हवा से लुंड खुला खुला सा एहसास दे रहा था. वो तो अच्छा था की लुंड के आते के पत्ते घने और मोठे थे वर्ण शायद उन्हें भेद कर बहार आ जाता. ऊपर लखन का सीना पूरी तरह खुला था. इन कपड़ो में लखन को बहार विनीता के सामने जाते बड़ा अजीब लग रहा था पर और कोई ऑप्शन भी नहीं था. लखन अपने वीर्य से भरी डिब्बी वही छोड़ बाथरूम से बहार आ गया.
बहार लखन को उस पोषक में देख विनीता की सास हलक में अटक गई इस उम्र में भी लखन का जिस्म काफी कसरती था. साथ hi विनीता ये भी सोच रही थी की जब उनके कपडे ऐसे है तो उसके कैसे होंगे. लखन ने बड़े झेपते हुए शर्मिंदगी के साथ विनीता को डिब्बी के बारे में बता दिया. विनीता अपना पैकेट लेकर बाथरूम में आ गई. बाथरूम में सामने hi एक डिब्बी राखी थी जिसमे सफ़ेद सफ़ेद कुछ भरा था ये साफ़ था उसमे क्या था. विनीता ने अपने कपडे उतर कर उस डिब्बी को उठाया उसके हाथ काँप रहे थे. आज तक जो पुरुष के संपर्क से अनजान रही आज वो अपने सहेली के ससुर का वीर्य अपने शरीर पर मलने वाली थी. पुरुष के वीर्य से उसका प्रथम संपर्क था. विनीता ने वो डिब्बी खोली उसमे भरा वीर्य काफी गाड़ा था उसने नेहा से सुना था की जिस पुरुष में मर्दानगी और सेक्स पावर चरम पर होती है उसका वीर्य उतना hi ज्यादा गाड़ा होता है और उम्र के साथ साथ वीर्य पतला होता जाता है. उसे आश्चर्य था की इस उम्र में लखन जी का वीर्य इतना गाड़ा है. पहले तो उसके मन में आया की वीर्य को नाली में बहा दे और बहार जाकर कह दे की उसने वीर्य मॉल लिया था पर फिर उसे ख्याल आया की कही उसकी एक गलती से पूजा अधूरी न रह जाए और शोभा पर कोई मुसीबत न आए वैसे भी यहाँ कोई है नहीं तो वो ये कर सकती है.
विनीता ने हिम्मत करके उस डिब्बी में ऊँगली दाल कर थोड़ा वीर्य बहार निकला और उसे अपने पैरो पे मलने लगी. पैरो के बाद हाथ फिर पेट फिर अपने स्तनों पर मलने लगी. स्तनों पर वीर्य का संपर्क उसके अंदर की दागी वासना की आग को भड़का रहा था. उसकी आँखे बंद हो गई और पता नहीं कब उसके वीर्य से भरी उंगलिया उसके चेहरे तक पहुंच गई. अपनी उंगलियों को नाक के पास ले जाकर वो उस पुरुष वीर्य की मादक सुगंध को अपने महसूस कर रही थी. पहली बार उसे इस मादक सुगंध का एहसास हुआ था. ये मादक सुगंध उसे दीवाना बना रही थी और उसे बहक जाने को मजबूर कर रही थी. विनीता की उंगलिया अपने चेहरे पर चलने लगी चेहरे को मलते मलते विनीता को पता hi नहीं चला की कब उसकी उंगलिया उसके होंठो तक पहुंच गई और होंठो पर वीर्य मलते मलते कब उसके होंठ खुल गए और वो उंगलिया उसके होंठो के अंदर दाखिल हो गई. शायद ये उसकी उत्तेजना थी जो बरसो से दबी थी और आज ज़रा सा मौका मिलने पर बहक गई थी और उससे ये सब करवा रही थी. पहली बार विनीता को वीर्य का स्वाद मिला था नेहा से उसने बहुत बार सुना था की वो अपने बॉयफ्रैंड्स का लुंड चूसती है और वीर्य का टास्ते उसे मदहोश कर देता है पर उसने खुद पहली बार इस मदहोशी को अनुभव करा था क्युकी उसके तो अपने पति ने hi सुहागरात में उसका तिरस्कार कर दिया था. डिब्बी में बस थोड़ा hi वीर्य बचा था और बस एक जगह बाकि थी विनीता की छूट. अपने इस कदर वासना में डूब चुकी थी की बिना खुद को शांत करे वो अब पीछे नहीं हैट सकती थी. अपने एक हाथ की उंगलियों को चूसते हुए उसके दुसरे हाथ की उंगलिया उस बचे हुए वीर्य को समेत कर उसकी छूट तक पहुंच गई और लखन सिंह के वीर्य को अपनी छूट पर मलने लगी और छूट पर बहार से मलते मलते विनीता की उंगलिया उसकी छूट के अंदर दाखिल हो गई. लखन ने उत्तेज्त होकर विनीता के बारे में hi सोच कर अपना वीर्य निकका था और अब सयोग देखिये विनीता भी लखन के बारे में hi सोच कर उनके वीर्य को अपनी छूट के अंदर मॉल रही थी. बिना सम्भोग किये hi लखन ने जिसकी छूट के नाम से वीर्य निकला वो अपनी मज़िल तक पगुच गया. विनीता की आँखों के सामने लखन सिंह का मरदाना जिस्म hi घूम रहा अपनी उंगलियों को चूसते हुए उसे ये hi एहसास हो रहा था जैसे वो लखन सिंह का लुंड चूस रही हो और छूट के अंदर उसकी उंगलिया तेज़ तेज़ चल रही जैसे लखन सिंह खुद उसे छोड़ रहे हो. कुछ hi मींचते में विनीता की उत्तेजना शांत हो गई मुँह और छूट दोनों जगह मौजूद उसकी उंगलिया ढीली पद गई. ऐसा नहीं था ये विनीता का पहला ओर्गास्म था अपनी पति का तिरस्कार झेलती विनीता ने पहले भी इस तरह अपनी उत्तेजना को शांत करा था पर तब उसके सामने कोई चेहर नहीं था जिसे इमेजिन करके वो खुद शांत करले पर आज उसकी बंद आँखों को एक चेहरा मिल गया था आज वो जितना झड़ी इतना पहले कभी न झड़ी.
पर वो कहते है न इंसान गुस्से और उत्तेजना में जो काम कर जाता है उसका एहसास उसे तब होता है जब उसका गुस्सा या उसकी उत्तेजना शांत होती है उसकी भावनाए संयत होती है. लखन सिंह ने विनीति के नाम पर अपना वीर्य निकला था पर झड़ने के बाद उसे अपनी गलती का एहसास हुआ और कुछ ऐसी hi हालत विनीता की थी. उसे यकीन नहीं हो रहा था की उत्तेजना में क्या कुछ कर गई जिस वीर्य को छूने में भी उसके हाथ कांप रहे थे उस वीर्य को अपने होंठो के अंदर लिया उसे चख कर देखा अपने से उम्र में इतने बड़े अपनी बाप की उम्र की आदमी का वीर्य उंगलियों में भर कर अपनी छूट के अंदर माला अपनी सहेली के ससुर से छोड़ने के बारे में सोचकर अपनी उत्तेजना को ठंडा करा ये सोच सोच कर उसे खुद पर घिन आ रही थी. बेशक उसे उसके पति से प्यार न मिला पर सिर्फ सेक्स की इच्छा में वो इस हद कैसे गिर सकती है उसे खुद पर काबू रखना होगा और ये ध्यान रखना होगा की वो यहाँ सिर्फ लखन सिंह की सांकेतिक पत्नी बन कर आई है सिर्फ पूजा करने उनसे छोड़ने नहीं. वो यहाँ पूजा पर आई है हनीमून पर नहीं. उसे खुद पर बहुत गुस्सा आ रहा था. उसने पहले तो थूक थूक कर लखन सिंह के वीर्य के एहसास को अपने मुँह से दूर करने की कोशिश की फिर अपने जिस्म पर तेल चुपड़ कर उसे वीर्य को हटाने की कोशिश की फिर पानी से अच्छे से नाहा धो कर वीर्य का कटरा कटरा अपने शरीर से हटाकर वो पैकेट खोल कर देखा.
ड्रेस देखकर तो उसके रोंगटे खड़े हो गए वो एक बेहद बोल्ड बेहद हॉट पत्तो से बानी ड्रेस थी जिसमे उसकी नाभि पूरी तरह खुली थी और वो ड्रेस बमुश्किल उसके नितम्बो से कुछ नीचे hi थी इसलिए उसकी उसकी पूरी जांघो का नंगा रहना निश्चित था. विनीता ने जब वो ड्रेस पहनी तो उसके उभर काफी खुले थे इस ड्रेस में विनीता इस कदर उत्तेजक लग रही थी की शायद अगर उसका पति भी उसे देख लेता तो शायद सब कुछ भूल कर उसके साथ अभी सुहागदिन मन लेता. विनीता को बहार आते बहुत शर्म आ रही थी पर हिम्मत करके वो बहार आ गई.
जब लखन सिंह की नज़र विनीता पर पड़ी तो उनकी खुली की खुली रह गई. न चाहते हुए भी उनका लुंड झटके खाने पर मजबूर हो गया. लखन सिंह की कमर पर बंधे पत्तो की सरसराहट से विनीता पता चल गया था की अचानक से ये पत्ते क्यों हिलने लगे उसने शर्म से अपनी नज़रे झुका ली इस तरह अधनंगी हालत में उनके सामने खड़े होना उसे बड़ा अजीब लग रहा था. लखन सिंह भी अपने लिंग की इस हरकत पर झेप गए और विनीता की तरफ पीठ कर्ली ताकि उनका ध्यान विनीता से हैट जाए.
शनि पूजा की साडी विधिया पूर्ण करके वो उन्ही कपड़ो में अधनंगी हालत बृहस्पति पूजा की विधिया पूर्ण करने के लिए निकल पड़े जो उन्हें अब साड़ी रात खुले आकाश के नीचे बिता कर पूरी करनी थी और जिसके लिए सबसे पहले उस जगह को खोजना था जहा एक बैल बंधा हो क्युकी वही वो स्थान था जहा उन्हें साडी रात गुज़ारनी थी. उन्हें जंगल में भटकते काफी समय हो गया पर बैल का कही अत पता नहीं था. भूक भी काफी लगी थी रस्ते में कुछ फल के पेड़ मिले जिन्हे खा कर उन्होंने अपनी भूक शांत और रात के लिए भी कुछ फल साथ बांध लिए. विनीता को अघोरी की बात याद आई की उसने कहा था की रात में बृहस्पति मंत्र के जाप से पहले पास बहती नदी में स्नान कर लेना मतलब उस स्थान के पास एक नदी है. जंगल में एक बैल ढूंढ़ना मुश्किल पर नदी ढूंढ़ना नहीं. नदी से आती ठंडी हवाओ की दिशा में चलते हुए वो नदी तक पहुंच गए और फिर नदी के किनारे चलते चलते वो उस जगह पहुंच गए जहा एक चट्टान से एक बैल बंधा था. वह पहुंच कर उन्होंने बैल का बंधन खोल कर उसे मुक्त कराया उसकी पूजा की बैल के लिए लाया गया भोजन और फल खिलाए और बैल को जंगल में छोड़ दिया. जल्द hi बैल उनकी आँखों से ओझल हो गया उसके बाद लखन ने उस चट्टान के पास रखा हथोड़ा उठाया और उस चट्टान पर प्रहार करना शुरू कर दिया. चट्टान तोड़ते तोड़ते लखन सिंह पसीना पसीना हो गया. लखन के गठीले बदन से बहकर अत पसीना बहुत आकर्षक लग रहा था विनीता बैठे बैठे लखन को प्रहार करते देख रही थी और सोच रही थी की इस उम्र में इनके अंदर इतना स्टैमिना है की बिना रुके ये हथोड़ा चलाए जा रहे तो जवानी में तो केहर ढाते होंगे. कुछ घंटो की जी तोड़ म्हणत के बाद लखन ने उस चट्टान को दो टुकड़ो में तोड़ दिया. उस चट्टान में पांच अलग अलग रंगो की ताम्बे की पांच गेंद थी जो ज़ीउस के भाई बहनो का प्रतीक थी. उन पांच गेंदों की पूजा करके विनीता ने उन्हें पास बहती नदी में विसर्जित कर दिया. हथोड़ा चला चला कर लखन सिंह काफी थक चुके थे और विनीता भी इतनी देर चल कर थक गई थी इसलिए वो दोनों वही एक पेड़ की छाव में कुछ देर के लिए सो गए. बृहस्पति पूजा के दो चरण उन्होंने पुरे कर लिए थे अब उन्हें शेष तीन चरण नग्न स्नान मंत्र जाप और आलिंगनबद्ध होकर रात कटनी थी.