A wedding ceremony in village - Page 3 - SexBaba
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A wedding ceremony in village

सुबह सूरज की पहली किरण के साथ विनीता और लखन की आँखे खुल गई. कल की थकावट भरी यात्रा के बाद आज इस नै जगह नए माहौल में एक नए रिश्ते ( पति पत्नी ) के रूप में ये उनका पहला दिन था. हलाकि ये बस एक सांकेतिक रिश्ता था पर रिश्ता तो रिश्ता था जिसे झुटलाया नहीं जा सकता था और बहरी दुनिया से पूरी तरह कटे विनीता लाख के लिए ये रिश्ता hi अगले कुछ दिन उनके जीवन की एकमात्र सच्चाई था. कुछ hi देर बाद लखन के फ़ोन पर वो फ़ोन आ गया जिसका उन्हें इंतज़ार था अघोरी का. अघोरी ने उन्हें बताया की सुन मार्स और मरकरी के बाद बरी है अब बरी है अगले गृह की और आज उन्हें एक नहीं दो ग्रहो की पूजा करनी है वो भी एक साथ.

जुपिटर

जिसे हम बृहस्पति भी कहते है और ग्रीक माइथोलॉजी में इसे हम ज़ीउस के नाम से जानते है. जो बिजली और आकाश का देवता है.

और

सैटर्न

ग्रहो में सबसे सुन्दर सबसे उग्र जिसे हम शनि कहते है और ग्रीस में इसे क्रोनस नाम से जानते है. जो फसलों और हरियाली का देवता है.

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इन दोनों के पूजन के साथ होने का एक विशेष कारन है क्युकी दोनों का इतिहास काफी कुछ एक जैसा है और हो भी क्यों न दोनों पिता पुत्र जो है. ज़ीउस क्रोनस की hi संतान है. क्रोनस के पिता थे यूरेनस जिनका तीनो लोको पर कब्ज़ा था जो बेहद अत्याचारी और क्रूर थे पर अपने पुत्र से बहुत प्रेम करते थे. क्रोनस ने अपने पिता की क्रूरता के खिलाफ आवाज़ उठाई और पिता का वध करके उनके क्रूर शासन का अंत करा पर अपने hi बेटे के विश्वासघात से गुस्सा होकर मरते मरते यूरेनस ने उसे श्राप दिया की जिस तरह उसने अपने पिता जिसकी जान उसके लिंग में थी के अंडकोष काटकर उसका वध करा वैसे hi उसकी संतान उसका वध करेगी तब उसे इस तकलीफ का एहसास होगा.

क्रोनस के मन में अपने पिता के ये शब्द अंदर तक बैठ गए और जब भी उसकी पत्नी गया बच्चे को जन्म देती वो उससे वो बच्चा छीन कर साबुत निगल जाता. ऐसा करते हुए वो अपने 5 बच्चो हेरा हदीस पोसिएदोन डेमेटर चीरों को निगल चूका था जब छटा बीटा ज़ीउस पैदा हुआ तो गया ने अपने बेटे को बचने के लिए अपने एक पालतू बैल की पीठ में बांधकर उसे भगा दिया और एक पत्थर को कपडे में लपेट कर क्रोनस को दे दिया. क्रोनस उसे hi अपना बीटा समझ कर निगल गया. ज़ीउस वराहो तक उस बैल के सरक्षण में एक गुफा में छुपा रहा और जब बड़ा हुआ और अपने पिता से लड़ने में सक्षम हो गया तब उसने अपने hi पिता के हासिये से अपने पिता का पेट पहाड़ कर उसका अंत करा और भाइयो को आज़ाद करा.

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एक जैसा अतीत होने के कारन और पिता पुत्र होने के कारन आपको इनकी पूजा एक साथ करनी है पहले आपको पिता यानि शनि ( सैटर्न ) उर्फ़ क्रोनस की पूजा करनी है उसके बाद बृहस्पति ( जुपिटर ) उर्फ़ ज़ीउस की पूजा करनी है. पहले शनि की साधना की विधि सुन ले. आपके शयन कक्षा में कुछ बक्से रखे है जिनमे हर दिन के पूजन के हिसाब से सामग्री राखी है प्रथम बक्से में आज के दिन की सामग्री है.

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1- क्रोनस का अस्त्र हसिया है इसलिए उनकी साधना का आरम्भ हासिये की पूजा से होगा जो आपको बक्से से मिल जाएगा.

2- शनि का वहां कौआ है इसलिए आप दोनों को भोजन बनाकर घर के बहार कौवो को भोग लगाना है.

3- क्रोनस ने अपने पिता यूरेनस के अंडकोष यानि यूरिनरी बॉल्स काटकर उनका वध करा था और उनके लिंग से निकले वीर्य को अपने शरीर पर मलकर उनकी श्री शक्ति अपने अंदर ले ली थी. यहाँ पत्नी होने के नाते विनीता को ये काम करना है. लखन को एक डिब्बी में अपना वीर्य निकलकर विनीता को देना है और विनीता को बाथरूम में जाकर उसे अपने शरीर पर मलना होगा. ये सुन विनीता शर्म से पानी पानी हो गई.

4- शनि को तेल चढ़ाया जाता है इसलिए आप दोनों को भी आज दिन में और रात में सोने से पहले अपने शरीर पर तेल चुपड़ना होगा. दिन में तेल से स्नान के बाद आप पानी से भी स्नान कर सकते पर रात आपको तेल चुपड़ कर hi सोना है. जिनकी शीशी बक्से में है दिन और रात की अलग अलग.

5- शनि अनाज और हरियाली के देवता है इसलिए उन्हें खुश करने के लिए आपको आज पूरा दिन एक विशेष तरह की पोषक पहनी होगी. पत्तो से बानी हरी भरी पोषक आज पूरा दिन आपको उसी में बिताना होगा जो बक्से में मिल जाएगी.

ये है शनि साधना की 5 विधिया अब बात करते है बृहस्पति साधना की.

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1- ज़ीउस ने कई साल जंगल में विपरीत परिस्थितियों में जंगली फलो के सहारे गुज़ारे आपको भी शनि साधना के बाद पूरा दिन और पूरी रात जंगल में गुज़ारना है खुले आकाश के नीचे जंगली फलो लकड़ियों को जलाकर एक दुसरे के सहारे.

2- ज़ीउस को कई साल एक बैल ने पला इसलिए बैल उन्हें बहुत प्रिय है जुगल में आपको एक बैल ढूंढ़ना है जो एक चट्टान में बंधा होगा आपको उसे आज़ाद करना उसे भोजन करना है.

3- ज़ीउस ने अपने पिता का पेट पहाड़ कर अपने भाई बहनो को आज़ाद कराया आपको उस चट्टान को पेट मन्ना है और उस चट्टान के पास hi रखे एक हथोड़े से उस चट्टान को खंड खंड करना और उस चट्टान के अंदर मौजूद 5 गेंद को मुक्त करके उन्हें पास hi बह रही नदी में प्रवाहित करना है.

4- रात में आपको नदी में नग्न होकर स्नान करके बृहस्पति मंत्र ॐ बृहस्पतियाय नमः का जाप करना है वो भी 1000 बार और वो भी विनीता को लखन की गॉड में बैठकर जिसमे विनीता का चेहरा लखन की और होगा. गॉड में बैठने की बात सुन विनीता को जिओसबमबप्स होने लगे.

5- इसके बाद पांचवा चरण है आलिंगनबद्ध निद्रा अपने जिस्म पर तेल चुपड़ कर आपको साडी रात खुले आकाश के नीचे गुज़ारनी है वो भी एक दुसरे को आलिंगन में भर कर ताकि इस ठंडी रात में आपदोनो को एक दुसरे के शरीर से गर्मी भी मिल सके और रात भी पार हो जाए. ये आखरी बात सुन तो विनीता और लखन के पैरो टेल ज़मीन hi निकल गई पर वो कर भी क्या सकते ये सब तो करना hi था.

उन्होंने शनि पूजा की विधि के अनुरूप बक्से से हसिया निकला उसका पूजन करके पहली विधि पूरी की. उसके बाद विनीता ने थोड़ा खाना बनाया और लखन के साथ बहार जाकर कौवो को भोजन कराया. ये दो चरण तो आसान थे पर तीसरा चरण लखन विनीता दोनों के लिए शर्मिंदगी भरा पर करना तो था hi. लाख ने बक्से से अपने वस्त्र का पैकेट निकला जो उन्हें आज पेहेनना था और तेल की शीशी और एक छूती डिब्बी लेकर बाथरूम चले गए. विनीता जानती थी वो बाथरूम में क्या कर्नेगे वो सोच रही थी की क्या मुठ मार कर अपना वीर्य निकलते वक़्त वो उसके बारे में सोचेंगे जिसे सोचकर कही न कही रोमांचित भी हो रही थी और शर्मिंदा भी. और उसका सोचना कही न कही सच भी था लखन ने अंदर मुठ मारना शुरू कर दिया था शुरू में तो वो मुठ मारते वक़्त अपनी दिवंगत पत्नी के बारे में hi सोच रहे थे पर अचानक से न चाहते हुए भी उनके सामने उनकी पत्नी की जगह विनीता का चेहरा घूमने लगा. शायद मुठ मारते समय उनका खुद पर काबू न रहा विनीता के मादक जिस्म और पत्नी के रूप में उसे एक्सपेक्ट कर उनके हाथ अपने लुंड पर तेज़ तेज़ चलने लगे और कुछ hi पल में लुंड ने अपना प्रसाद बहार उगलना शुरी कर दिया.

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लखन ने अपना पूरा वीर्य उस डिब्बी में भर दिया कई सालो बाद आज झड़ने की वजह से उनका वीर्य बहुत सारा और बहुत गाड़ा था. लखन को खुद पर गुस्सा भी आ रहा था की उनके परिवार के लिए इतना कुछ करने वाली उस भली महिला के बारे में वो ऐसा कैसे सोच सकते है पर सोच पर कोई काबू नहीं कर सकता. उसके बाद लखन ने अपने जिस्म पर तेल चुपड़ कर तेल से स्नान करा और फिर पानी से खुद को अच्छी तरह साफ़ कर वो पैकेट खोल कर देखा. उसमे पत्तो से बना एक घेरदार ड्रेस था जिसे केवल कमर पर लपेट कर अपने लिंग को hi ढाका जा सकता है. अंदर पहने के लिए कोई चड्डी भी नहीं था इसलिए नीचे से अति हवा से लुंड खुला खुला सा एहसास दे रहा था. वो तो अच्छा था की लुंड के आते के पत्ते घने और मोठे थे वर्ण शायद उन्हें भेद कर बहार आ जाता. ऊपर लखन का सीना पूरी तरह खुला था. इन कपड़ो में लखन को बहार विनीता के सामने जाते बड़ा अजीब लग रहा था पर और कोई ऑप्शन भी नहीं था. लखन अपने वीर्य से भरी डिब्बी वही छोड़ बाथरूम से बहार आ गया.

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बहार लखन को उस पोषक में देख विनीता की सास हलक में अटक गई इस उम्र में भी लखन का जिस्म काफी कसरती था. साथ hi विनीता ये भी सोच रही थी की जब उनके कपडे ऐसे है तो उसके कैसे होंगे. लखन ने बड़े झेपते हुए शर्मिंदगी के साथ विनीता को डिब्बी के बारे में बता दिया. विनीता अपना पैकेट लेकर बाथरूम में आ गई. बाथरूम में सामने hi एक डिब्बी राखी थी जिसमे सफ़ेद सफ़ेद कुछ भरा था ये साफ़ था उसमे क्या था. विनीता ने अपने कपडे उतर कर उस डिब्बी को उठाया उसके हाथ काँप रहे थे. आज तक जो पुरुष के संपर्क से अनजान रही आज वो अपने सहेली के ससुर का वीर्य अपने शरीर पर मलने वाली थी. पुरुष के वीर्य से उसका प्रथम संपर्क था. विनीता ने वो डिब्बी खोली उसमे भरा वीर्य काफी गाड़ा था उसने नेहा से सुना था की जिस पुरुष में मर्दानगी और सेक्स पावर चरम पर होती है उसका वीर्य उतना hi ज्यादा गाड़ा होता है और उम्र के साथ साथ वीर्य पतला होता जाता है. उसे आश्चर्य था की इस उम्र में लखन जी का वीर्य इतना गाड़ा है. पहले तो उसके मन में आया की वीर्य को नाली में बहा दे और बहार जाकर कह दे की उसने वीर्य मॉल लिया था पर फिर उसे ख्याल आया की कही उसकी एक गलती से पूजा अधूरी न रह जाए और शोभा पर कोई मुसीबत न आए वैसे भी यहाँ कोई है नहीं तो वो ये कर सकती है.

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विनीता ने हिम्मत करके उस डिब्बी में ऊँगली दाल कर थोड़ा वीर्य बहार निकला और उसे अपने पैरो पे मलने लगी. पैरो के बाद हाथ फिर पेट फिर अपने स्तनों पर मलने लगी. स्तनों पर वीर्य का संपर्क उसके अंदर की दागी वासना की आग को भड़का रहा था. उसकी आँखे बंद हो गई और पता नहीं कब उसके वीर्य से भरी उंगलिया उसके चेहरे तक पहुंच गई. अपनी उंगलियों को नाक के पास ले जाकर वो उस पुरुष वीर्य की मादक सुगंध को अपने महसूस कर रही थी. पहली बार उसे इस मादक सुगंध का एहसास हुआ था. ये मादक सुगंध उसे दीवाना बना रही थी और उसे बहक जाने को मजबूर कर रही थी. विनीता की उंगलिया अपने चेहरे पर चलने लगी चेहरे को मलते मलते विनीता को पता hi नहीं चला की कब उसकी उंगलिया उसके होंठो तक पहुंच गई और होंठो पर वीर्य मलते मलते कब उसके होंठ खुल गए और वो उंगलिया उसके होंठो के अंदर दाखिल हो गई. शायद ये उसकी उत्तेजना थी जो बरसो से दबी थी और आज ज़रा सा मौका मिलने पर बहक गई थी और उससे ये सब करवा रही थी. पहली बार विनीता को वीर्य का स्वाद मिला था नेहा से उसने बहुत बार सुना था की वो अपने बॉयफ्रैंड्स का लुंड चूसती है और वीर्य का टास्ते उसे मदहोश कर देता है पर उसने खुद पहली बार इस मदहोशी को अनुभव करा था क्युकी उसके तो अपने पति ने hi सुहागरात में उसका तिरस्कार कर दिया था. डिब्बी में बस थोड़ा hi वीर्य बचा था और बस एक जगह बाकि थी विनीता की छूट. अपने इस कदर वासना में डूब चुकी थी की बिना खुद को शांत करे वो अब पीछे नहीं हैट सकती थी. अपने एक हाथ की उंगलियों को चूसते हुए उसके दुसरे हाथ की उंगलिया उस बचे हुए वीर्य को समेत कर उसकी छूट तक पहुंच गई और लखन सिंह के वीर्य को अपनी छूट पर मलने लगी और छूट पर बहार से मलते मलते विनीता की उंगलिया उसकी छूट के अंदर दाखिल हो गई. लखन ने उत्तेज्त होकर विनीता के बारे में hi सोच कर अपना वीर्य निकका था और अब सयोग देखिये विनीता भी लखन के बारे में hi सोच कर उनके वीर्य को अपनी छूट के अंदर मॉल रही थी. बिना सम्भोग किये hi लखन ने जिसकी छूट के नाम से वीर्य निकला वो अपनी मज़िल तक पगुच गया. विनीता की आँखों के सामने लखन सिंह का मरदाना जिस्म hi घूम रहा अपनी उंगलियों को चूसते हुए उसे ये hi एहसास हो रहा था जैसे वो लखन सिंह का लुंड चूस रही हो और छूट के अंदर उसकी उंगलिया तेज़ तेज़ चल रही जैसे लखन सिंह खुद उसे छोड़ रहे हो. कुछ hi मींचते में विनीता की उत्तेजना शांत हो गई मुँह और छूट दोनों जगह मौजूद उसकी उंगलिया ढीली पद गई. ऐसा नहीं था ये विनीता का पहला ओर्गास्म था अपनी पति का तिरस्कार झेलती विनीता ने पहले भी इस तरह अपनी उत्तेजना को शांत करा था पर तब उसके सामने कोई चेहर नहीं था जिसे इमेजिन करके वो खुद शांत करले पर आज उसकी बंद आँखों को एक चेहरा मिल गया था आज वो जितना झड़ी इतना पहले कभी न झड़ी.

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पर वो कहते है न इंसान गुस्से और उत्तेजना में जो काम कर जाता है उसका एहसास उसे तब होता है जब उसका गुस्सा या उसकी उत्तेजना शांत होती है उसकी भावनाए संयत होती है. लखन सिंह ने विनीति के नाम पर अपना वीर्य निकला था पर झड़ने के बाद उसे अपनी गलती का एहसास हुआ और कुछ ऐसी hi हालत विनीता की थी. उसे यकीन नहीं हो रहा था की उत्तेजना में क्या कुछ कर गई जिस वीर्य को छूने में भी उसके हाथ कांप रहे थे उस वीर्य को अपने होंठो के अंदर लिया उसे चख कर देखा अपने से उम्र में इतने बड़े अपनी बाप की उम्र की आदमी का वीर्य उंगलियों में भर कर अपनी छूट के अंदर माला अपनी सहेली के ससुर से छोड़ने के बारे में सोचकर अपनी उत्तेजना को ठंडा करा ये सोच सोच कर उसे खुद पर घिन आ रही थी. बेशक उसे उसके पति से प्यार न मिला पर सिर्फ सेक्स की इच्छा में वो इस हद कैसे गिर सकती है उसे खुद पर काबू रखना होगा और ये ध्यान रखना होगा की वो यहाँ सिर्फ लखन सिंह की सांकेतिक पत्नी बन कर आई है सिर्फ पूजा करने उनसे छोड़ने नहीं. वो यहाँ पूजा पर आई है हनीमून पर नहीं. उसे खुद पर बहुत गुस्सा आ रहा था. उसने पहले तो थूक थूक कर लखन सिंह के वीर्य के एहसास को अपने मुँह से दूर करने की कोशिश की फिर अपने जिस्म पर तेल चुपड़ कर उसे वीर्य को हटाने की कोशिश की फिर पानी से अच्छे से नाहा धो कर वीर्य का कटरा कटरा अपने शरीर से हटाकर वो पैकेट खोल कर देखा.

ड्रेस देखकर तो उसके रोंगटे खड़े हो गए वो एक बेहद बोल्ड बेहद हॉट पत्तो से बानी ड्रेस थी जिसमे उसकी नाभि पूरी तरह खुली थी और वो ड्रेस बमुश्किल उसके नितम्बो से कुछ नीचे hi थी इसलिए उसकी उसकी पूरी जांघो का नंगा रहना निश्चित था. विनीता ने जब वो ड्रेस पहनी तो उसके उभर काफी खुले थे इस ड्रेस में विनीता इस कदर उत्तेजक लग रही थी की शायद अगर उसका पति भी उसे देख लेता तो शायद सब कुछ भूल कर उसके साथ अभी सुहागदिन मन लेता. विनीता को बहार आते बहुत शर्म आ रही थी पर हिम्मत करके वो बहार आ गई.

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जब लखन सिंह की नज़र विनीता पर पड़ी तो उनकी खुली की खुली रह गई. न चाहते हुए भी उनका लुंड झटके खाने पर मजबूर हो गया. लखन सिंह की कमर पर बंधे पत्तो की सरसराहट से विनीता पता चल गया था की अचानक से ये पत्ते क्यों हिलने लगे उसने शर्म से अपनी नज़रे झुका ली इस तरह अधनंगी हालत में उनके सामने खड़े होना उसे बड़ा अजीब लग रहा था. लखन सिंह भी अपने लिंग की इस हरकत पर झेप गए और विनीता की तरफ पीठ कर्ली ताकि उनका ध्यान विनीता से हैट जाए.

शनि पूजा की साडी विधिया पूर्ण करके वो उन्ही कपड़ो में अधनंगी हालत बृहस्पति पूजा की विधिया पूर्ण करने के लिए निकल पड़े जो उन्हें अब साड़ी रात खुले आकाश के नीचे बिता कर पूरी करनी थी और जिसके लिए सबसे पहले उस जगह को खोजना था जहा एक बैल बंधा हो क्युकी वही वो स्थान था जहा उन्हें साडी रात गुज़ारनी थी. उन्हें जंगल में भटकते काफी समय हो गया पर बैल का कही अत पता नहीं था. भूक भी काफी लगी थी रस्ते में कुछ फल के पेड़ मिले जिन्हे खा कर उन्होंने अपनी भूक शांत और रात के लिए भी कुछ फल साथ बांध लिए. विनीता को अघोरी की बात याद आई की उसने कहा था की रात में बृहस्पति मंत्र के जाप से पहले पास बहती नदी में स्नान कर लेना मतलब उस स्थान के पास एक नदी है. जंगल में एक बैल ढूंढ़ना मुश्किल पर नदी ढूंढ़ना नहीं. नदी से आती ठंडी हवाओ की दिशा में चलते हुए वो नदी तक पहुंच गए और फिर नदी के किनारे चलते चलते वो उस जगह पहुंच गए जहा एक चट्टान से एक बैल बंधा था. वह पहुंच कर उन्होंने बैल का बंधन खोल कर उसे मुक्त कराया उसकी पूजा की बैल के लिए लाया गया भोजन और फल खिलाए और बैल को जंगल में छोड़ दिया. जल्द hi बैल उनकी आँखों से ओझल हो गया उसके बाद लखन ने उस चट्टान के पास रखा हथोड़ा उठाया और उस चट्टान पर प्रहार करना शुरू कर दिया. चट्टान तोड़ते तोड़ते लखन सिंह पसीना पसीना हो गया. लखन के गठीले बदन से बहकर अत पसीना बहुत आकर्षक लग रहा था विनीता बैठे बैठे लखन को प्रहार करते देख रही थी और सोच रही थी की इस उम्र में इनके अंदर इतना स्टैमिना है की बिना रुके ये हथोड़ा चलाए जा रहे तो जवानी में तो केहर ढाते होंगे. कुछ घंटो की जी तोड़ म्हणत के बाद लखन ने उस चट्टान को दो टुकड़ो में तोड़ दिया. उस चट्टान में पांच अलग अलग रंगो की ताम्बे की पांच गेंद थी जो ज़ीउस के भाई बहनो का प्रतीक थी. उन पांच गेंदों की पूजा करके विनीता ने उन्हें पास बहती नदी में विसर्जित कर दिया. हथोड़ा चला चला कर लखन सिंह काफी थक चुके थे और विनीता भी इतनी देर चल कर थक गई थी इसलिए वो दोनों वही एक पेड़ की छाव में कुछ देर के लिए सो गए. बृहस्पति पूजा के दो चरण उन्होंने पुरे कर लिए थे अब उन्हें शेष तीन चरण नग्न स्नान मंत्र जाप और आलिंगनबद्ध होकर रात कटनी थी.

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गाँव में लखन की कोठी में गरिमा की आँख आज भी देर से खुली. ये लगातार तीसरा दिन था जब गरिमा इतना लेट उठी और रोज की तरह आज भी उसका सर कुछ भरी भरी था उसकी पेट पर वही सफ़ेद पपड़ी सी थी उसने उस पपड़ी को खुरच कर उसे सूंघ कर देखा उसकी महक पुरुष के वीर्य जैसी थी पर उसके पेट पर पुरुष वीर्य कैसे कमरे के दरवाज़े की कुंडली अंदर से लगी है तो अंदर कोई आ नहीं सकता. अचानक उसे अपने और हरिया के बीच हुई कल की घटना याद आ गई शायद ये वीर्य हरिया का hi होगा जिसे वो साफ़ करना भूल गई. कल की घटना याद कर उसका मन फिर रोमांच और उत्तेजना से सराबोर हो गया. अचानक उसे याद आया की हरिया कल उसके अंदर hi स्खलित हुआ था जिस वजह से प्रेग्नेंट हो सकती है और आज हरिया उसे गाँव के किसी अस्पताल ले जाने वाला है दवा दिलाने. हरिया के साथ एक बार फिर जाने के ख्याल से hi उसका रोए खड़े हो गए. हरिया के साथ हुआ हर सफर ने उसे एक नया अनुभव दिया और उसकी काम वासना को क्रमबद्ध तरीके से बढ़ाया है. अब आज एक बार फिर उसे हरिया के साथ अकेले जाना है पता नहीं आज क्या होने वाला है. गरिमा ये सोच hi रही थी की बहार से जीतू ने आवाज़ लगाई की हरिया भैया आए थे आपको तैयार होने को बोल के गए है गाड़ी लेने आपको उनके साथ कही जाना है. गरिमा तैयार होने नीचे आ गई उसने आज भी अपनी कल वाली साडी हो पहनी थी क्युकी उसे अस्पताल जाना था वो भी गरबनीरोधक दवाई लेने इसलिए वो हरिया की बीवी के वो चुस्त कैसे कपडे नहीं पेहेनना चाहती थी और उसके कपडे भी अभी साफ़ थे. वो नाश्ता करके हरिया का वेट करने लगी और हरिया के आते hi दोनों सरकारी अस्पताल के लिए निकल गए.

रस्ते भर न हरिया कुछ बोलै न गरिमा जैसे उन्हें समझ न आ रहा हो की वो एक दुसरे से क्या बोले कहने सुनने या करने को उनके बीच अब बाकि क्या था उनके बीच. सरकारी अस्पताल एक गाँव छोड़कर तीसरे गाँव में था और वही बड़ी दवाई की दूकान थी जहा अच्छी कंपनी की गरबनीरोधक दवाई मुलती थी क्युकी गाँव में तो औरते ये दवाई इस्तेमाल नहीं करती थी इसलिए गाँव की छोटी मोती दवाई की दुकान में ये दवाई नहीं मिलती थी. और उस बड़ी दुकान का दूकानदार हरिया की ससुराल के पहचान वाला था वह से अगर हरिया दवा खरीदने जाता तो बात उसकी बीवी तक पहुंच जाती और फिर एक झूट छुपाने के लिए दस झूट बोलने पड़ते इसलिए वो गरिमा को साथ लाया ताकि गरिमा खुद जाकर दवा ले आए क्युकी यहाँ उसे कोई जनता नहीं था. कुछ घंटो के सफर के बाद उनकी गाडी सरकारी अस्पताल के गेट पर पहुंच गई हरिया ने गरिमा को साडी बात समझा कर रूपए देकर दुकान पर भेज दिया. अंदर जब गरिमा ने दूकानदार से िपिल्ल गोली मांगी तो पहले तो दुकानदार ने एक नज़र गरिमा को ऊपर से नीचे तक देखा क्युकी गरिमा को उसने यहाँ पहली बार देखा और वो भी गरबनीरोधक दवाई खरीदते. वो हल्का सा मुस्कुराया और गरिमा को एक िपिल्ल का पैकेट दे दिया गरिमा ने उसे रस दिए पर उसके पास छुट्टे नहीं थे. उसने कहा की मैडम एक पैकेट और ले लो छुट्टे नहीं है 20 रस कम दे देना. पता नहीं गरिमा को क्या लगा उसने दो पैकेट ले लिए. और पैकेट लेकर बहार की और आ गई दूकानदार पीछे से गरिमा की हिलती हुई गांड को देख अपना लुंड सहलाता रह गया.

बहार गरिमा ने एक पैकेट अपने पास रख लिया और दुसरे पैकेट को खोलने को हुई पर हरिया ने उसे रोक दिया की पहले हमे यहाँ से चलना चाहिए गोली तो घर जाकर भी खाई जा सकती है. हरिया गाड़ी स्टार्ट करके चल दिया पर गाँव के रस्ते न जाकर दुसरे रस्ते पर मुद गया गरिमा ने पुछा तो कह दिया की ये छोटा रास्ता है जो गाँव तक जाता है. वो रास्ता एकदम सुनसान था आदमी तो दूर जानवर तक का कोई नामोनिशान नहीं था न कोई घर बस दूर एक खंडहरनुमा ईमारत नज़र आ रही थी.

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उस ईमारत के पास पहुंच कर हरिया ने गाड़ी रोक दी हरिया न कहा की गाड़ी गरम हो गई है इसमें पानी दाल दू. हरिया गाड़ी में पानी डालने लगा तब तक गरिमा उतारकर उस ईमारत के अंदर दाखिल हो गई. वो ईमारत देखने में बहुत पुराणी काफी खंडहरनुमा थी. गरिमा के पीछे पीछे हरिया भी अंदर आ गया. हरिया ने बताया की ये ईमारत 300 साल से ज्यादा पुराणी अंग्रेजो के ज़माने की है सुना है यहाँ कोई फारेस्ट अफसर रहता था जिसे उसकी बीवी ने सुहागरात के दिन hi ज़हर देकर मार डाला था. इसलिए इधर कोई आता जाता नहीं तभी ये रास्ता सुनसान रहता है. हरिया गरिमा को लेकर उस खँडहर के आखरी हिस्से में लाया देखने में ये एक कमरे जैसा था पर दीवारे टूटी हुई थी बीच में पत्थर का एक बीएड था जिस पर धुल मिटटी जैम चुकी थी और उस बीएड के पीछे की दीवार किसी आदमी की बड़ी सी फोटो बानी थी पर काई जमने से वो फोटो धुंदली पद गई थी उस फोटो के नीचे कुछ इंग्लिश अल्फाबेट्स लिखे थे शायद उसका नाम ा आय र स न डी जिसके आधे से ज्यादा अक्षर मिट चुके थे. हरिया ने बताया की गाँव के बड़े बूढ़े बताते है की ये उस अफसर का बैडरूम है और पत्थर का उसका बीएड है जहा उसकी सुहागरात के दिन उसकी बीवी ने उसे मार दिया दीवार पर ये उसी फारेस्ट अफसर की फोटो है और ये नीचे उसका नाम लिखा है.

गरिमा ने हरिया से चलने को कहा तो हरिया उदास हो गया. गरिमा ने उससे उदासी का कारन पुछा तो हरिया ने बताया की आज वो उसका बच्चे की माँ बनने से बचने के लिए ये गोली खा रही है और आज hi उसे पता चला की उसकी बीवी पेट से है आज उसे उसके मइके छोड़ने जाना होगा. हरिया के जाने की बात सुन पता नहीं क्यों गरिमा को अंदर से अच्छा नहीं लगा शायद उसे भी कही न कही के साथ वक़्त बिताना अच्छा लगने लगा था.

गरिमा: तुम जा रहे हो वापस कब आओगे.

हरिया: कुमसे कम 3 दिन तो लग hi जाएंगे मेमसाब वैसे आप कुछ उदास हो गई.

गरिमा: नहीं ऐसा कुछ नहीं है.

हरिया: मेमसाब जाने से पहले आपसे कुछ मांगू तो बुरा तो नहीं मांगेगी हलाकि कोई हक़ तो नहीं बनता पर पता नहीं क्यों इन कुछ दिनों में आपसे अजीब सा रिश्ता बन गया है.

गरिमा: क्या मांगना चाहते हो इस वक़्त मेरे पास है hi क्या.

हरिया: जाने से पहले कुछ वक़्त आपके साथ बिताना चाहता हु क्या कुछ देर आप यही रुक सकती है मेरे साथ.

गरिमा पता नहीं क्यों उसे मन नहीं कर पाई और वही कड़ी अपने सदी के पल्लू से खेलने लगी हरिया के लिए है का सिग्नल था उसने उस पत्थर के बीएड पर जमी धुल को हाथ से हटाया और गरिमा को वह बैठने का इशारा करा. गरिमा मन्त्रमुघ्द सी चुपचाप उस पत्थर के बीएड पर बैठ गई हरिया भी उसके बगल में बैठ गया. कुछ पल दोनों यही खामोश बस सर झुकाए ज़मीन को देखते रहे फिर हरिया ने hi पहल करते हुए बात शुरू की.

हरिया: मेमसाब हो सकता है जब तक मई वापस औ आप शहर वापस जा चुकी हो तो हो सकता है ये हमारी आखरी मुलाकात हो. मेमसाब इन कुछ दिनों में हमारे बीच जो कुछ भी हुआ अगर उसे लेकर आपके मन में मेरे लिए कोई भी गिला शिकवा हो कोई भी गुस्सा हो तो आप अभी निकल लीजिये मई उफ़ तक नहीं करूँगा.

गरिमा: नहीं ऐसा कुछ नहीं है पहली रात जो हुआ वो परिस्थितिवश हुआ और बाद के दिनों में जो हुआ उसमे जितनी गलती तुम्हारी है उतनी मेरी भी है मई भी बहक गई थी.

हरिया: मेमसाब जाने से पहले क्या हम एक बार और नहीं बहक सकते.

गरिमा बीएड से उठते गई: क्या कह रहे हो मई किसी की बीवी हु किसी की माँ हु ये नहीं हो सकता.

हरिया भी खड़े होकर: मई जनता हु मेमसाब मई भी किसी का पति हु और अब एक बाप भी बनने वाला हु पर जो एक बार हुआ वो अगर एकबार और हो जाएगा तो उसमे क्या हो जाएगा गोली तो आप खाओगी hi न.

हरिया ने गरिमा के कंधो पर दबाव डालते हुए उसे फिर बिठा दिया और खुद भी बैठ गया.

गरिमा: नहीं पर ये गलत होगा गलती से बहक जाना और जानबूझ कर वो सब करना अलग बात है.

हरिया ने गरिमा की हथेली को अपने हाथो में भर लिया और उसे हौले हौले सहलाने लगा. और एक हाथ से गरिमा के चेहरे को अपनी तरफ घुमाया और अपना चेहरा गरिमा के पास ले जाने लगा और पास और पास इतना की हरिया की ससो की गर्माहट गरिमा को महसूस होने लगी. गरिमा के होठ तारघरा रहे थे और आँखे वासना में सुर्ख लाल हो गई थी पर फिर भी उसके अंदर की मर्यादा अभी भी कुछ ज़िंदा थी.

गरिमा: नहीं हरिया नहीं प्लीज ये गलत होगा.

हरिया: कुछ गलत नहीं होगा आप एक औरत हो मई एक मर्द और अगर आप बहकी तो ये इस बात का सबूत है की आपकी शादीशुदा ज़िन्दगी में कही न कही उस पैशन की उस उत्तेजना की कमी है जो आपको मेरे साथ मिला जिसने आपको बहकने पर मजबूर कर दिया.

हरिया की ये बात गरिमा के दिल में अंदर तक उतर कही न कही वो सच कह रहा था शायद अपनी बोरिंग शादीशुदा ज़िन्दगी की बोरियत ने hi उसे बहकने पर मजबूर कर दिया था और वैसे भी जो काम कल हो चूका है अगर आज आज दुबारा हो जाएगा तो कौन सा पहाड़ टूट पड़ेगा. गरिमा खुद को मन hi मन इसके लिए तैयार कर चुकी थी बस ऊपरी मन से दिखावा कर रही थी.

गरिमा: पर......

हरिया: पर वॉर कुछ नहीं बस कुछ पल के लिए मेरे साथ बहक जाओ कुछ पल के लिए अपनी शादीशुदा ज़िन्दगी को भूल जाओ वडा करता हु जिस मुकाम पर रुकने को कहोगी रुक जाऊंगा.

हरिया के होंठो और गरिमा के होंठो के बीच बस इंच भर का फैसला था. गरिमा ने मदहोशी में अपनी आँखे बंद कर्ली और गरिमा की बंद आँखे हरिया के लिए खुली सीहमंती थी और हरिया ने अपने होंठ गरिमा के होंठो से जोड़ दिए. गरिमा की सासे तेज़ तेज़ चलने लगी और उसने भी हरिया को अपनी बहो में भर लिया और हरिया के होंठो में भर कर चूसने लगे. गरिमा के होंठो को चूमते हुए hi हरिया ने गरिमा साड़ी को उसके सीने से हटा दिया नीचे कमर से खींचकर उसे निकल कर नीचे फ़ेंक दिया. दोनों काफी देर यही एक दुसरे के होंठो में डूबे रहे फिर हरिया अपने होंठ नीचे लेकर गरिमा की गर्दन को चूमने और चाटने लगा.

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गरिमा की गर्दन को चूमते हुए उसने हाथ पीछे ले जाकर गरिमा की ब्लाउज और ब्रा के हुक खोल दिए और उन्हें एक साथ गरिमा की बहो से बहार निकल कर वही साडी के पास ज़मीन पर फ़ेंक दिया. अब गरिमा ऊपर से पूरी नंगी थी और हरिया की बहो में कैसे होने के कारन उसके स्तन हरिया की बालो से भरी छाती में घिस रहे थे. गरिमा के साथ तीन बार इंटिमेट होने के बावजूद हरिया अब तक उसके उभारो को मुँह में भरने से महरूम रहा था पर आज उसके सामने कोई बढ़ा नहीं थी आज न गरिमा बेहोश थी न वो बीच सड़क पर थी और जो कुछ हो रहा था उसकी अपनी मर्ज़ी से हो रहा था इसलिए गरिमा के जिस्म के हर हिस्से का जी भर कर मज़ा ले सकता था. गरिमा के गले से नीचे आकर हरिया ने एक नज़र गरिमा के एक्स्ट्रा साइज स्तन को एक नज़र देखा उनके ऊपर भूरे रंग के आकर्षक निप्पल को जीभ से टच करा और आगे बाद कर गरिमा के एक उभर को पूरा अपने मुँह में भर लिया. गरिमा की सिसकारी निकल गई और हरिया के सर को बालो से कसकर पकड़ लिया और उसे अपनी छाती पर दबाने लगी. गरिमा का समर्थन पाकर हरिया का जोश भी बाद गया और वो गरिमा के उभर को पुरे जोश में चूसने लगा चूसते चूसते वो बीच में उन्हें दातो के बीच दबाकर मसल देता जिससे गरिमा चिहुँक सी जाती पर हरिया के इस खेल में गरिमा को भी मज़ा आ रहा था और वो भी हरिया का भरपूर साथ दे रही थी.

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गरिमा के स्तन चूसते चूसते हरिया ने गरिमा की टाँगे उठाकर बीएड पर रख दी और अपने हाथ गरिमा की नाभि पर जाकर रख दिए और ऊँगली से उसे सहलाने लगा. गरिमा की नाभि को सहलाते हु वो अपने हाथ गरिमा के पेटीकोट पर ले आया और उसके नाड़े से खेलते खेलते एक झटके में उसका नाडा खोल दिया और गरिमा के पेटीकोट और चड्डी में ऊँगली दाल उन्हें नीचे खींचने लगा. गरिमा ने भी मौन समर्थन के रूप में अपने कूल्हे उचका दिए और हरिया ने जिस्म के बचे हुए कपडे भी उसके शरीर से जुड़ा कर उसे पूरी तरह नंगा कर दिया. गरिमा को पूरी तरह नंगा कर हरिया बिस्तर से उठ कर खड़े होकर गरिमा को निहारने लगा. अपने जिस्म पर हरिया के सपरह को न महसूस कर गरिमा ने अपनी आँखे खोली तो हरिया को खड़े खड़े खुद को देख कर मुस्कुराते हुए पाया. हरिया को यु खुद को देखते गरिमा शर्म से पानी पानी हो गई उसे एहसास हुआ की वो किस तरह उस आदमी के सामने नंगी बैठी है जिसे 5 दिन पहले वो जानती भी नहीं थी. शर्म से गरिमा अपनी टांगो को समेत कर अपने उभारो को अपनी टैंगो से ढकने की नाकाम कोशिश करने लगी और अपने चेहरे को अपने हथेली से धक् लिया.

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औरत की ये शर्म हाय मर्द के अंदर की हवस को और भड़का देती है हरिया ने भी अपने जिस्म को कपड़ो की कैद से आज़ाद करा और खुद भी पूरा नंगा होकर गरिमा के बगल में आकर बैठ गया और गरिमा की हथेली को उसके चेहरे से जुड़ा करा. गरिमा की पलके शर्म के मरे बंद थी. हरिया ने गरिमा के पैरो को खींच कर सीधा करा और उसके कंधे पर दबाव दाल कर गरिमा को पीठ के बल बिस्तर पर लिटा दिया. अब गरिमा नंगी उस पत्थर के बिस्तर जो किसीकी अधूरी सुहाग सेज था पर पलके बंद करे नंगी लेती थी और हरिया उसके बगल में बैठा उसके गद्रे यौवन को निहार रहा था. हरिया ने अपने होंठ गरिमा की पैरो पर रख दिए और गरिमा के पैरो को नीचे से चूमते हुए ऊपर की तरफ आने लगा. गरिमा की जांघो को चूमते हुए हरिया गरिमा की छूट के करीब तक पहुंच गया. गरिमा अपनी दोनों जांघो को कास के चिपकाए अपनी छूट को छुपाए हुए थी हरिया ने हाथो का दबाव दाल गरिमा की जांघो को एक दुसरे से अलग किया. अलग होते hi गरिमा की उभरी हुई हलके हलके बालो ऐ ढकी छूट हरिया की आँखों के सामने थी. हरिया अपनी चेहरा गरिमा की छूट के नज़दीक ले गया और एक तेज़ सांस लेकर उसकी छूट की मदहोश कर देने वाली महक को महसूस करने लगा. अगले hi पल हरिया ने अपने होंठ गरिमा की छूट पर रख दिए गरिमा का जिस्म थरथरा गया और उसकी कमर खुद बा खुद ऊपर उठ गई.

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हरिया ने भी गरिमा को निराश न करते हुए उसकी पहली hi छूट के दोनों सिरों को अपने होंठो में भर लिया और हौले हौले उन्हें चूसने लगा. उत्तेजना के मरे गरिमा का शरीर अकड़ने लगा उसने अपनी मुट्ठी भींच ली और अपने निचले होंठ को दांतो में कास के दबा लिया. गरिमा की छूट को चूसने के बाद हरिया अपने होंठो को ऊपर लेट हुए जीभ निकल कर गरिमा के पेट को छत्ते हुए गरिमा के ऊपर आ गया.

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अब हरिया का जिस्म गरिमा के जिस्म को पूरी तरह ढके हुए था और नीचे उसका पूरी तरह तन चूका लुंड झटके कहते हुए गरिमा की छूट में यहाँ वह टच कर रहा था. हरिया के जिस्म की गर्माहट और उसके लुंड के स्पर्श को महसूस कर गरिमा ने पहली बार अपनी आँखे खोली और अपने ऊपर लेते हरिया की आँखों में आँखे दाल कर मुस्कुराते हुए देखा और हरिया के सर को अपने तरफ खींच कर हरिया को होंठो को अपने होंठो में भर लिया.

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गरिमा का ये बदला हुआ रूप देख हरिया भी जोश से भर उठा उसने नीचे गरिमा की टांगो फैलाया अपने लुंड को गरिमा की छूट के मुहाने पर सेट करा और एक ज़ोरदार झटका आगे को मारा. हरिया का लुंड गरिमा को छूट को फांको को खोलता हुआ आधे से ज्यादा अंदर दाखिल हो गया. गरिमा ने हरिया को अपनी बहो में कास कर जकड लिया और उसके चेहरे पर बेतहाशा चुम्बन लेने लगी.

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हरिया ने नीचे से कमर हिला हिला कर तेज़ तेज़ झटके मारना शुरू कर दिया. हरिया अपने लुंड को पूरा बहार निकलता और और तेज़ झटके के साथ गरिमा की छूट में गहराई तक उतर देता था. गरिमा अपने पति से भी कई बार चूड़ी थी पर जो चुदाई आज उसकी हरिया ने की थी उसने उसे असली चुदाई का एहसास कराया था. खँडहर की ख़ामोशी में ाः आह और घप्प घप्प की आवाज़े साफ़ सुनाई दे रही थी. 20 मं से हरिया गरिमा की छूट में लुंड अंदर बहार कर रहा था गरिमा तो एक बार झाड़ चुकी थी और दूसरी बार झड़ने के करीब थी गीली हो चुकी छूट में लुंड और तेज़ी से आगे पीछे जा रहा था कुछ पल की चुदाई के बाद हरिया के लुंड ने अभी अपने हथियार दाल दिए और उससे निकला वीर्य गरिमा की छूट में अंदर तक बेहटा चला गया. हरिया के वीर्य की गर्माहट से गरिमा की दुबारा झाड़ गई.

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दोनों ने एक दुसरे को कास कर अपनी बहो में जकड लिया और काफी देर तक यही एक दुसरे को बहो में भरे वही उस पत्थर के बीएड पर रहे. हरिया का लुंड सिकुड़ कर गरिमा की छूट से बहार आ गया था और गरिमा की छूट में भरा वीर्य बेहटा हुआ उसकी चूतड़ों की बीच की दरार से बेहटा हुआ उस अधूरी सुहागसेज को गीला कर रहा था. करीब आधा घंटा वो यही पड़े रहे फिर थोड़ा शांत हुए तो एक दुसरे से अलग हुए हरिया गरिमा के ऊपर से हैट कर उसके बगल में लेट गया गरिमा भी अपने बालो को ठीक करती उठ कर बैठ गई. कल छोड़ने के बाद फिर भी गरिमा के मन में एक ग्लानि का भाव था पर आज वो भी गायब हो चुकी और एक सेडक्टिव हाउसवाइफ पूरी तरह से सेडक्टिव की दुनिया दाखिल हो चुकी थी. हरिया अपने बगल में नंगी बैठी गरिमा की पीठ सेहला रहा था.

हरिया: मेमसाब मज़ा आ गया इतना मज़ा तो आज तक अपनी बीवी के साथ भी नहीं आया. मेमसाब बस एक इच्छा और पूरी कार्डो तो मन तृप्त हो जाए.

गरिमा बड़ी ऐडा के साथ: अभी भी कोई इच्छा बाकि रह गई है तुम्हारी इतना सब कर लेने के बाद.

हरिया: है मेमसाब एक छोटी सी इच्छा.

गरिमा: क्या बोलो.

हरिया: एक बार मेरे इस पप्पू को अपने होंठो से टच कार्डो.

गरिमा: छी ये भी कोई बात है वीर्य से साणे हुए इसको मई मुँह से टच करू कभी नहीं.

हरिया: अरे मेमसाब मुँह में लेने को तो नहीं कह रहा बस ज़रा सा टच करने को कह रहा.

गरिमा: नहीं

हरिया: मेमसाब मैंने भी कई बार आपकी छूट को छठा है आप भी एक बार कार्डो बस एक सेक् को टच कर दो प्लीज.

गरिमा: नहीं अपनी बीवी से मिल कर मेरे जाने से पहले आ जाना अगर आ गए तब तुम्हारी ये इच्छा भी पूरी कर दूंगी तब तक इंतज़ार करो.

हरिया: पक्का तब तो आना hi होगा इंतज़ार करना मैडम आपके जाने से पहले ज़रूर वापस आऊंगा और तब सिर्फ टच से काम नहीं चलेगा मुँह के अंदर दलवाऊंगा.

गरिमा: ठीक है जब आ जाओगे तब का तब देखेंगे अभी अब चलो यहाँ से.

गरिमा ने कड़ी होकर अपनी जांघो से बहकर आ रहा वीर्य ज़मीन से एक पत्ता उठा कर पोछ कर सामने दीवार पर पोछ दिया और दोनों अपने कपडे पेहेन लिए और निकलने से पहले एक दुसरे एक और पैशन से भरपूर किश जैसे एक दुसरे को शुक्रिया कह रहे हो इस मज़ेदार चुदाई के लिए.

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गाड़ी में बैठकर गरिमा ने एक िपिल्ल की गोली तुरंत खा ली और एक अपने पास रख ली शायद उसे कही न कही अनुमान था इसकी दुबारा ज़रूरत पद सकती है. फिर वो दोनों लखन की कोठी के लिए वह से वापस चल पड़े. हरिया ने गरिमा को लखन की कोठी पर छोड़ दिया और गरिमा को अलविदा कह कर उसके जाने से पहले वापस आने का वडा कर अपने गाँव के लिए निकल गया. गरिमा सीधा अपने कमरे में आ गई ये तो अच्छा हुआ उस वक़्त वह कोई नहीं था वर्ण उसके कपड़ो पर लगी धुल देखकर पता नहीं क्या सोचते. अपने कमरे में आकर गरिमा सीधा बाथरूम में गई और तौलिया से खुद को साफ़ करने लगी खुद को साफ़ करते करते उसकी नज़र अपने गीले उन्देर्गर्मेन्ट्स पर पड़ी जिन्हे जाने से पहले वो वही टांग कर गई थी पर इस वक़्त उसकी पंतय वह से गायब थी उसे अच्छे से याद था की वो उसे यही तंग कर गई थी मतलब किसी ने उसकी पंतय को वह से उठाया था. वो उतर कर नीचे आई काका किचेन में खाना बना रहे थे हुए काका से ये पूछते शर्म आ रही थी वो जीतू को ढूंढ़ने लगी. जीतू को ढूँढ़ते ढूँढ़ते वो कोठी के पीछे उनके कमरे तक आ गई. कमरे में तो बहार से कुण्डी लगी थी तभी उसे किसी की सिसकारी की आवाज़ आई वो आवाज़ पीछे बने बाथरूम से आ रही थी. गरिमा बाथरूम के करीब गई अंदर कोई उसका नाम लेकर सिसकारी ले रहा था.

ऊह्ह्ह्ह... गरिमा .....अह्ह्ह्ह .....गरिमा janeman....Aaajjjaaàaaa....ekbaar......mmmmmm

आवाज़ से ये अंदाज़ा लगाना आसान था की ये जीतू की आवाज़ है. बाथरूम के दरवाज़े पर एक छोटा सा छेड़ था गरिमा ने उस छेड़ से अंदर झांक कर देखा और का सन देख उसे अपने आँखों पर यकीन नहीं हुआ. अंदर जीतू पूरी तरह नंगा खड़ा गरिमा का नाम लेकर मुठ मार रहा था और सबसे ज्यादा शॉकिंग ये था की उसने लुंड पर कोई कपडा लपेट रखा था. उस कपडे को ध्यान से देखते hi गरिमा को पहचानते देर न लगी की ये हरिया की बीवी की वो पंतय जो उसने आज सुबह धो कर तंगी थी और जीतू उसकी चड्डी को अपने लुंड में लपेट कर उसे इमेजिन करके उसके नाम पर मुठ मार रहा था. उसे ये समझते देर न लगी की कल पंतय धो देने के बावजूद जो आज सुबह उसने अपनी पंतय पर वीर्य देखा था वो उसका नहीं जीतू का वीर्य था जो उसने निकला होगा. जीतू को अपनी पंतय पर मुठ मारते देख गरिमा जड़ सी हो गई थी. गरिमा ने एक नज़र जीतू के नंगे सुडौल शरीर को ऊपर से नीचे तक देखा बेशक वो अभी 18 साल का लड़का था पर उसका लुंड एकदम ताज़ा और नसों से भरपूर था.

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कुछ मं के तेज़ तेज़ झटको के बाद जीतू का लुंड ठंडा पद गया उसने ढेर सारा गदा सफ़ेद वीर्य गरिमा की पंतय में भर दिया. खुद को ठंडा करने के बाद जीतू ने गरिमा की पंतय में भरा वीर्य पानी से बहा दिया और अपने कपडे पेहेन्ने लगा. गरिमा भी वह से हटकर वापस आ गई तब तक काका ने खाना बना लिया था तो उन्होंने गरिमा को खाना खा कर जाने को कहा गरिमा खाने लगी पर उसके दिमाग में जीतू का अपनी पंतय में मुठ मरना hi घूम रहा था. इतने में जीतू भी वह आ गया उसने गरिमा को स्माइल दी और नज़र बचाकर ऊपर सीडिया चढ़ता हुआ गरिमा के कमरे में चला गया उसकी जेब में कुछ फूला हुआ था गरिमा जानती थी उसकी जेब उसकी पंतय है जिसे शायद वो गरिमा के बाथरूम वापस टांगने गया है. खाना खा कर जब गरिमा अपने कमरे में गई तो वह कोई नहीं था वो तुरंत बाथरूम गई और जैसा उसने सोचा था वैसा hi हुआ उसकी पंतय उसी जगह उसी तरह तंगी थी. गरिमा ने उस पंतय को हाथ में लेकर अच्छे से देखा उसमे अब भी जीतू के वीर्य के चिपचिपे अंश चिपके हुए साफ़ नज़र आ रहे थे. गरिमा उसे वैसे hi टेंगा छोड़ वापस अपने कमरे में आकर लेट गई और लेते लेते आज अपने और हरिया के बीच जो कुछ और अब जीतू के मन में उसके लिए में जो हवस भरी है उसके बारे में सोचती रही. उसके मन में तरह तरह के ख़यालात आ रहा थे की हरिया यहाँ है नहीं और उसके साथ जो उसे मज़ा आया क्या वो अपने से आधी उम्र के लड़के के साथ भी वो मज़ा ले या दांत काट जीतू को दुबारा ये हिमाकत न करने को साफ़ साफ़ कह दे. पुरे दिन गरिमा अपने कमरे में hi रही और उसके दिमाग में यही कश्मकश चलती रही कमरे से निकल कर जीतू का सामना करने की उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी गरिमा ने रात का खाना भी अपने कमरे में hi करा खाने के बाद भी लेते लेते उसके दिमाग में आज दिन भर की घटनाए hi घूम रही थी सोचते सोचते उसका सर भरी भरी हो गया था और कब उसकी आँख लग गई उसे पता hi न चला.

गरिमा और हरिया तो उस खण्डारा में हवस और धोके का नंगा नाच करके वह से चले गए थे पर अपने पीछे एक पत्नी के धोके के जो अंश जो वीर्य उस अधूरी सुहागसेज उस दीवार पर छोड़ गए थे वो अनहोनी के आगमन का कारन बनने वाला था. उस बीएड पर पड़ी वो वीर्य की बूंदे बहकर उस पत्थर के बीएड के अंदर समाती जा रही थी और दीवार पर जो वीर्य गरिमा ने अनजाने में hi पोछ दिया था वो दीवार पर एक आकर लेकर उस तस्वीर के नीचे लिखे अधूरे नाम को पूरा कर रहा था. दीवार पर बानी उस धुंदली पद चुकी तस्वीर में उस शक्स का अक्सा साफ़ उभर कर आ रहा था. अचानक एक तेज़ विस्फोट के साथ वो पत्थर का बीएड पहात पड़ा और एक हाथ उसमे बहार आ गया. दीवार पर बानी वो तस्वीर और उसके नीचे लिखा नाम भी अपना पूरा रूप ले चुके थे और जो नाम दीवार पर उभर आया था वो था अभय रायचंद. और जिस शक्स की वो तस्वीर थी वो खुद उस अधूरी सुहागसेज को पहाड़ कर सशरीर बहार आ गया था. बरसो पहले एक पत्नी के धोके ने इस कब्र में जाने पर मजबूर कर दिया था और बरसो बाद एक दूसरी पत्नी के धोके ने उसे इस दुनिया में वापस ला दिया था. पर कौन था ये अभय रायचंद और क्या असर पड़ने वाला उसके आगमन का और कौन थी वो पत्नी जिसने अपनी hi सुहाग की सेज पर अपने नए नवेले पति को ज़हर देकर मार डाला और अगर ये मर चूका था तो अब सशरीर जीती जागती हालत में अब वापस कैसे आ गया था कोई इतने सालो तक किसी कब्र में ज़िंदा कैसे रह सकता था उसका शरीर अबतक गाला क्यों नहीं.

अभय रायचंद

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अभय: मंजरी मंजरी 200 साल पहले तू मेरे प्यार को पहचान hi नहीं पाई थी की किस तरह दीवानो की हद तक प्यार करता था मई तुझे अपनी शादी के दिन hi तूने मुझे मेरी ज़िन्दगी का वो ज़ख्म दिया जिसने मुझे 200 साल की नींद में सोने पर मजबूर कर दिया पर अब मई वापस आ गया हु. और अब तू इस दुनिया के किसी भी कोने में क्यों न हो किसी भी रूप में क्यों न हो मई तुझे ढून्ढ लूंगा. जो कहानी तूने 200 साल पहले अधूरी छोड़ दी थी उसे मई अब पूरा करूँगा और ये वडा है तुझसे की अब हमारे बीच कोई नहीं आ पाएगा वो भी नहीं जो 200 साल पहले हमारे बीच आ गया था और जिसकी वजह से हमे अलग होना पड़ा था. मंजरी मंजरी.........

उस खंडहर में अभय रायचंद के रूप में जो शक्शियत 200 साल की नींद से जाग कर इस दुनिया में वापस आई थी उसकी वापसी का मकसद क्या था. और ये मंजरी कौन थी शायद उसकी वो बीवी जिसने उसे ज़हर देकर मार दिया पर अगर उसे मार दिया था तो अब 200 साल बाद वो दुबारा ज़िंदा कैसे क्या वो कोई रूह पर रूह का शरीर नहीं होता. और जिस मंजरी को इस तरह दीवानो की हद तक चाहता था उसने क्यों मार दिया इतना प्यार करने वाले अपने hi पति को. क्या कहानी थी मंजरी और अभय की और जिस तीसरे शिक्षा का वो ज़िक्र कर रहा था वो कौन था. क्या हुआ था 200 साल पहले.

कौन था ये अभय रायचंद?

इससे भी बड़ा सवाल था

क्या था ये अभय रायचंद?
 
काकातुआ में विनीता और खँडहर में गरिमा की घटनाओ के बाद उसी टाइम पीरियड में हवेली में जहा बाकि पाछो सहेलिया शोभा शबाना नेहा नीतू आरती अब भी एक साथ थी.

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विक्रम देर रात लौट कर आया इस लिए देर से सोकर उठा वो अभी फ्रेश होकर तैयार हुआ hi था की उसके दरवाज़े पर कोई लगातार खटखटाए जा रहा था उसने आवाज़ लगाई बहार शोभा थी. उसने दरवाज़ा खोला तो शोभा सीधा अंदर आ गई और अंदर आते hi दरवाज़ा बंद कर लिया.

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दरवाज़ा बंद करते hi वो विक्रम से आकर लिपट गई. विक्रम हैरान था क्युकी शोभा का ये रूप वो पहली बार देख रहा था. पर ये शायद कल भीमा का लुंड देखने की वजह से जगी उत्तेजना का परिणाम जिसने शोभा के अंदर की औरत को जगा दिया था. पर नवग्रह पूजा के अनुसार उन्हें लखन विनीता की पूजा ख़तम होने तक एक दुसरे से अलग अलग रहना था पर शोभा का इरादा तो कुछ और hi था. विक्रम ने शोभा को समझने की कोशिश की बस 5 दिन की बात है पर शोभा तो कुछ सुनने को तैयार hi नहीं थी उसका कहना था की अब लखन पापा यहाँ नहीं है तो डरने की कोई बात किसी को पता नहीं चलेगा और इस तरह लोगो से छुपकर सेक्स करने का अपना अलग मज़ा है वो किसी भी हालत में आज रात को अपनी सुहागरात मानाने के लिए डेस्परेट थी. शोभा ने विक्रम को साफ़ कह दिया की उसे आज रात को उसके कमरे में आना होगा और उनकी सुहागरात आज रात hi होगी. पर विक्रम अपने पिता को किसी कीमत पर धोका नहीं देना चाहता था पर शोभा को भी नाराज़ नहीं करना चाहता था उसे समझ नहीं आ रहा था क्या करे.

तब तक बहार किसी ने दरवाज़ा खटखटाया और विक्रम ने शोभा को टालने के लिए उसकी बात मानते हुए आज रात आने का वडा कर उसे अभी जाने को कहा. शोभा ने दरवाज़ा खोला तो बहार लालू था. लालू शोभा को इतनी सुबह सुबह विक्रम के कमरे में बंद दरवाज़े के पीछे देख चौक गया. शोभा बिना कुछ बोले वह से चली गई. अंदर विक्रम ने लालू को पूरी बात बता दी की शोभा को नाराज़ भी नहीं करना चाहता और पिताजी की बात भी नहीं टालना चाहता जो उसके लिए इतना कुछ सेह रहे. लालू ने उसे कहा की उसकी प्रॉब्लम का इलाज उसके पास है डांस पार्टी. आज रात एक डांस पार्टी करते है जिसमे नाच गण होगा दारू शरू भी चलेगी विक्रम उस पार्टी में शोभा को कोल्ड्रिंक के बहाने 4-5 पेग दारू पिलदे शोभा को इसकी आदत नहीं है वो टल्ली हो जाएगी और ऊसर उसके कमरे में लेजाकर सुला दे. न वो होश में रहेगी न सुहागरात मन पाएगी. कल का कल देखेन्हि आज की रात तो पार हो जाएगी. विक्रम को भी लालू की बात सही लगी की आज की रात पहले पार की जाए कल का कल देखेंगे. रात की डांस पार्टी दोने हो गई लालू ने इसकी पूरी तेरे का जिम्मा ले लिया और विक्रम से सबको मश्ग करके इन्फॉर्म करने को कह दिया. पर असलियत में तो ये डांस पार्टी लालू की hi प्लांनिग का एक हिस्सा थी जो उसने शबाना के खिलाफ रची थी. विक्रम ने भी लालू के कहे मुताबिक शोभा और हवेली में मौजूद बाकि लोगो को रात की डांस पार्टी के लिए इन्फॉर्म कर दिया. लालू की शतरंज की बिसात बिछ चुकी थी जिसमे धामु और नेहा के बाद विक्रम और शोभा भी उसका अह्ड्यन्त्र के मोहरे बन गए थे.

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और ये साडी साज़िश जिसके लिए रची गई थी उस शबाना को लालू के मंसूबे का कुछ पता hi नहीं वो तो बेचारी बस एक बच्चे की माँ बनने की चाहत में चुपचाप नेहा के बताए रस्ते पर चलती चली जा रही थी.

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कल की घटना के बाद नीतू और आरती भी देर से उठे उन्हें भी शोभा का मश्ग मिल गया आज रात की डांस पार्टी के बारे में. डांस पार्टी देर रात तक चल सकती थी इसलिए नीतू ने अघोरी को कॉल किया और आज रात क्या करना है कितने बजे मिलना है उस बारे में पुछा. अघोरी ने उन्हें बताया की आज रात उन्हें अघोरी के निवास नहीं जाना है आज रात उन्हें उस शिव मंदिर जाना है जो उन्होंने कल रात रस्ते में देखा था. क्युकी ये साधना राज को काल का ग्रास बनने से बचने के लिए है इसलिए काल को हारने के लिए आज हम महाकाल को प्रसन्न करेंगे. आज रात हम शिव का रुद्राभिषेक करेंगे और राज की लम्बी उम्र के लिए साडी रात राज के नाम से महामृत्युंजय मंत्र का जाप करेंगे. अघोरी ने ये भी बताया की आज आरती भी चाहे तो उनके साथ पूजा में बैठ सकती है और उनके साथ मंत्र जाप का हिस्सा भी बन सकती है क्युकी ये शिवजी की पूजा इसमें शामिल होने में कोई रोक नहीं है. अघोरी ने उन्हें रात में हवेली के बहार उसी कल वाली जगह मिलने को कहा. अघोरी ने उस ब्रह्मचारी के बारे में भी पुछा की क्या ऐसा कोई शिक्षा उन्हें मिला. नीतू ने उन्हें बताया की अब तक नहीं. अघोरी ने नीतू को आगाह करा की उसके पास बस दो दिन का समय है मतलब आज का और कल का क्युकी परसो रात को उस ब्रह्मचारी को भी उनके साथ पूजा में शामिल होकर अपने ब्रह्मचर्य के समर्पण का संकल्प लेना होगा और अगले दिन उन्हें एक दुसरे की बीच प्रेम जाग्रत करना होगा क्युकी इस साधना में उनके बीच प्रेम होना ज़रूरी है खली सेक्स कर लेने भर से काम नहीं चलेगा. इसलिए ज़रूरी है नीतू जल्द से जल्द ऐसा कोई ब्रह्मचारी पुरुष ढून्ढ ले चाहे तो इसमें शोभा की मदद ले ले क्युकी वो इसी गाँव की है पर उसी इस साधना की बात गुप्त रखे. अघोरी से बात करने के बाद नीतू और आरती मदद के लिए शोभा के पास गई और वह शोभा को साडी बात बता दी. शोभा भी अघोरी को बहुत मानती थी वो जानती थी की अघोरी ने ऐसा करना को कहा है तो ये ज़रूरी है उसने नीतू की पूरी मदद करना का भरोसा दिया और वडा करा की वो कल तक ऐसा कोई न कोई शिक्षा ज़रूर ढून्ढ लेगी. शोभा से आश्वाशन पाकर नीतू थोड़ा रिलैक्स हुई आरती ने उसे हिम्मत दी की हर कदम पर उसके साथ है. इस मुसीबत की घडी में आरती हर कदम पर अपनी दोस्त के साथ कड़ी थी और वो रूहानी साया जो कब्रिस्तान से उनके पीछे था बिना अपनी मौजूदगी का कोई एहसास कराए उनकी हर हरकत पर नज़र रखे था पर ये अब भी एक सवाल था की वो क्यों उनके साथ आया था उसकी नियत साफ़ थी या उसमे कोई खोट था ये तो तब hi ज़ाहिर होता जब वो उन्हें अपनी मौजूदगी का एहसास करता पर अभी शायद उसका ऐसा कोई इरादा नहीं था.

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इधर नेहा जब सो कर उठी तो शबाना आलरेडी उठ चुकी थी और कमरे में नहीं थी. नेहा ने अपना मोबाइल चेक करा उसमे शोभा और नीतू दोनों के मश्ग पड़े थे जिसमे शोभा ने उसे रात की डांस पार्टी का मश्ग करा था और नीतू का अघोरी के यहाँ से वापस आ जाने का मश्ग था. मश्ग से नेहा को उस खत वाले स्ट्रेंजर का ख्याल आया और पार्सल का भी जो वो सर्वेंट बाथरूम से अपनी गांड मरवा कर ले थी. अभी शबाना भी वह नहीं थी तो उसने झट से दरवाज़ा बंद करके अपने बैग में से वो पार्सल निकला और बिना देर किये उसे खोला. उस पार्सल में जो था उसे देख उसके होश उड़ गए उस पार्सल में एक लाल शादी का जोड़ा था. नेहा सोच में पद गई की आखिर उस स्ट्रेंजर का इरादा क्या है एक तरफ वो मुझे अपनी स्लेव बनाना चाहता है दूसरी तरफ ये शादी के जोड़ा भेज कर क्या मुझसे शादी करने के बारे में सोच रहा है. नेहा ने वो जोड़ा उठा कर देखा तो उसके नीचे एक एंड्राइड फ़ोन उसका चरगेट और एक चिट्ठी भी थी. नेहा ने चिट्ठी खोल कर पड़ना शुरू की.

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मास्टर

हाउ र ु माय स्लेव. तो तू ये पार्सल ले hi आई मतलब तू मुझे मिलने के लिए काफी डेस्परेट है. ये शादी का जोड़ा देखकर तू सोच रही होगी की मई करने क्या वाला हु ज्यादा अपना दिमाग मत चला भूल मत तू मेरी कुत्तिया है गुलाम है. घबरा मत तुझसे शादी करने का कोई इरादा नहीं मेरा तू तो मेरी रंडी है मुझे तो तुझे अपनी रखैल बनाना है तेरे जैसी लड़किया किसी की बीवी नहीं बनती तू तो बस अलग अलग मर्दो का बिस्तर गरम करने की चीज़ है. एक हाई क्लास धनदेवाली है तू. अब सुन तुझे क्या करना है इस मोबाइल में एक फेसबुक मैसेंजर अप्प है जिसमे स्लेव के नाम से तेरी ईद बानी है और उसमे मास्टर के नाम से तेरी ईद जुडी है. अब खत हुए पुराने अबसे तुझे आगे के सरे इंस्ट्रक्शन मई तुझे इस मोबाइल से दूंगा और इसे सबसे बचाकर रखना कही लोगो को पता न चल जाए की तू मेरी रखैल बनने वाली है. अगर अब भी इस गेम से पीछे हटने का इरादा है तो ये मोबाइल तोड़कर अपने कमरे के बहार फ़ेंक देना और हिम्मत है आगे बढ़ने की तो इस मोबाइल को ों करके इससे मुझे मश्ग कर देना आगे के िसमन्स्ट्रक्शन मई तुझे उसके बाद दूंगा.

लेटर पद कर नेहा जैसी बोल्ड लड़की का भी रोम रोम रोमांच से भर उठा. अपने लिए ऐसी गन्दी और घटिया बाते उसने किसी से पहली बार सुनी थी पर ये सब पढ़कर भी उसे अंदर से बुरा नहीं लगा बल्कि उसके गूसबम्प्स खड़े हो गए और इस स्लेव मास्टर गेम को खेलने का एक्ससिटेमेंट उसमे और बाद गया.

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उसने झट से मोबाइल ों करा और उसमे इनस्टॉल मैसेंजर अप्प ों करा उसमे स्लेव नाम से उसकी ईद पहले लॉगिन थी और उस ईद के फ्रेंड्स ग्रुप में केवल एक ईद सेव थी मास्टर नाम से. नेहा ने कंपते हाथो से मश्ग टाइप करा ी ऍम रेडी फॉर थिस गेम और मास्टर को सेंड कर दिया कुछ hi मं बाद उसे उसका रिप्लाई भी आ गया.

मास्टर- तो तूने मोबाइल खोल लिया बड़ी देर लगा दी पार्सल कल सुबह लेकर आई और मश्ग आज करा मुझे तो लगा तेरा इरादा बदल गया.

स्लेव- कल पार्सल खोलने का समय नहीं मिल पाया.

मास्टर- तुझे मुझे इंतज़ार नहीं करना चाहिए था इसकी तो सजा मिलेगी तुझे.

स्लेव- कैसी सजा.

मास्टर- वो तुझे आज रात पता चल जाएगी अब तक तो तुझे पता चल गया होगा की इस हवेली में रात में एक डांस पार्टी होने वाली है.

स्लेव- है अभी पता चली.

मास्टर- तो अब सुन रात में डांस पार्टी ख़तम होने के बाद आधी रात में जब सब सो जाए तब तुझे ये शादी का जोड़ा पेहेन कर खुद को एक दुल्हन की तरह सजा कर वही आना है जहा तूने उस वेटर से अपनी छूट छतवई थी और ध्यान रहे की सबसे छुपकर आना किसी को तेरे आने का पता न चले. आगे तुझे क्या करना है वो मई तुझे रात में बताऊंगा वो भी पर्सनली मिलकर. बोल तैयार है रात में मेरे पास आने के लिए.

स्लेव- हम्म

मास्टर- दर तो नहीं लग रहा सोच ले अभी भी वक़्त है.

स्लेव- नहीं मई तैयार हु.

मास्टर- शबशह हिम्मत वाली है तू तुझे अपनी रखैल बनाकर मज़ा आ जाएगा तो चल रात में मई जब सन्नाटा हो जाएगा तब मई तुझे मश्ग करूँगा तब तू वह आ जाना. वेटिंग फॉर ु माय स्लेव.

नेहा और उस स्ट्रेंजर आज रात मिलने का प्रोग्राम फिक्स हो गया. उस स्ट्रेंजर की कही एक एक बात ने नेहा को अंदर तक एक्ससिटेमेंट से भर दिया था. वो हर हालत में इस वक़्त अपने जिस्म की इस गर्मी को किसीसे ठंडा करवाना चाहती थी पर फिलहाल यही कोई नहीं था जिससे वो ये करवा सके इसलिए वो खुद hi अपनी लेग्गी सरका कर बिस्तर पर लेट गई और अपनी ऊँगली से अपनी छूट को सहलाने लगे.

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वो अपने मज़े में खोई थी की उसे पता hi न चला की कोई 4-5 मं से दरवाज़ा खटका रहा. नेहा हड़बड़ा कर उठ बैठी बहार शबाना थी. नेहा ने वो पार्सल छुपकर दरवाज़ा खोला और शबाना से पुछा वो कहा गई थी तो शबाना ने बताया की कल रात की घटना से उसका मन उदास था तो छत पर टहलने चली गई गहि. शबाना की बात से नेहा को कल रात की घटना याद आ गई की उसने आज शबाना को एक मर्द को उत्तेजित करने की ट्रेनिंग देने का वडा करा था इससे नेहा को शबाना की समस्या और अपनी उत्तेजना दोनों का इलाज एक साथ मिल गया. उसे याद आ गया की उसने आज शबाना को सेक्स ट्रेनिंग देने के लिए जो सोच रखा है उससे उसकी हवस की आग भी शांत हो जाएगी. नेहा को शबाना को अपना प्लान समझाया की वो अभी एक शकसा को यहाँ कमरे में बुलाएगी और शबाना के सामने उसे उत्तेजित करके उसके लुंड को खड़ा करेगी और शबाना को बाथरूम से छुपकर उसे ऐसा करते देखना है और सीखना है औरत के पास क्या क्या हथियार होते है जिनसे वो किसी भी मर्द को उत्तेजित करके उसके मुरझाए से मुरझाए लुंड को खड़ा कर सकती है. पहले तो शबाना को यकीन नहीं हुआ की नेहा ऐसा कैसे कर सकती है ऐसे hi किसी के भी साथ पर कही न कही वो नेहा का नेचर जानती थी इसलिए थोड़ी झिझक के बावजूद वो इसके लिए तैयार हो गई. पर उसके मन में एक दुविधा थी की नेहा अगर किसी मर्द को उत्तेजित करेगी भी तो वो एक नार्मल मर्द होगा जिसे शायद पहले से सेक्स का अनुभव होगा पर धामु एक मनबुद्धि कमज़ोर मर्द है और सेक्स का उसे कोई अनुभव नहीं इसलिए नार्मल मर्द के अनुभव को धामु पैट कैसे प्रयोग कर सकते है. नेहा ने इसका इलाज पहले hi सोच रखा था उसने शबाना को बताया की उसने इस काम के लिए ऐसा मर्द चुना है जिसे सेक्स का कोई अनुभव नहीं जो दिमाग से धामु जैसा hi कच्चा है और शरीर से भी धामु जैसा hi कमज़ोर. शबाना ने नेहा से पुछा की वो किसी बात कर रही तो नेहा ने शबाना को छोटू के बारे में बताया जिससे वो कल रात मिली. नेहा ने शबाना को बताया की छोटू अभी 18 साल का नया लड़का है धामु जैसा hi सूखा पखा है और एकदम सीधा सदा है जिसे सेक्स का कोई अनुभव नहीं. पहले तो शबाना एक नाबालिग को इसमें इन्वॉल्व नहीं करना चाहती थी पर नेहा की ज़िद्द के आगे वो मान गई. नेहा छोटू को लेने बहार चली गई.

बहार थोड़ा खोजने पर नेहा को छोटू दिख गया. नेहा को अपनी तरफ अत देख छोटू को कल रात वाली घटना और नेहा के साथ अपनी पहली किश याद आ गई. नेहा ने छोटू के पास आ कर उसे कहा उसे उससे थोड़ा काम है वो कुछ देर के लिए उसके कमरे में आ जाए. छोटू सोचने लगा की नेहा आखिर उसे अपने कमरे में क्यों बुला रही है पर कल रात की किश के बाद वो उसे मन कैसे कर सकता था पर था तो वो अभी 18 साल का hi और सीधा सदा उसे समझ नहीं आ रहा था की नेहा उसे किस काम से बुला रही है उसे यही लग रहा था की शायद नेहा को वाकई कोई काम हो. छोटू को अपने साथ लेकर नेहा ये ध्यान रखते हुए की कोई उन्हें देख न ले छुपते छुपाते अपने कमरे के गेट तक आ गई रस्ते में hi उसने शबाना को मश्ग कर दिया की वो छोटू को लेकर आ रही है. मश्ग मिलते hi शबाना भागकर तुरंत बाथरूम में चली गई और नेहा को मश्ग कर दिया की वो बाथरूम में जा चुकी है. नेहा दरवाज़ा खोल कर छोटू को लेकर अंदर आ गई और छोटू के अंदर आते hi दरवाज़ा बंद कर लिया. छोटू ने नेहा से पुछा की क्या काम है तो नेहा ने उसे कुछ देर बिस्तर पर बैठ कर इंतज़ार करने को कहा और खुद अपने बैग से कपड़ो का एक पैकेट लेकर बाथरूम में चली गई जहा शबाना पहले से छुपी नेहा के सिग्नल का इंतज़ार कर रही थी.

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अब नेहा और शबाना दोनों बाथरूम में थी और बहार बैठा 18 साल का छोटू तो यही सोच रहा था की नेहा ने वाकई उसे किसी काम से बुलाया है उसे अंदाज़ा hi नहीं था की वो नेहा की फंतासी और शबाना की ट्रेनिंग का हिस्सा बनने वाला है. उसे पता hi नहीं था की उसे आज इस बंद कमरे जीवन का एक नया अनुभव मिलने वाला है और औरत मर्द के बीच के असली सम्बन्ध का एहसास होने वाला है. क्या करने वाली थी नेहा उस अबोध लड़के के साथ जिससे उसकी फंतासी और शबाना की ट्रेनिंग दोनों पुरे हो जाने थे.
 
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नेहा और शबाना दोनों बाथरूम में थी और 18 साल का छोटू बहार असमंजस में बैठा था उसे तो पता भी नहीं था की नेहा ने उसे बुलाया क्यों है और इस वक़्त इस कमरे में दो लोग नहीं बल्कि तीन लोग है. बहार छोटू असमंजस में था और बाथरूम में शबाना दोनों को समझ नहीं आ रहा था की नेहा अब करने क्या वाली है. शबाना ने उसे इशारे से पुछा की वो करने क्या वाली है तो नेहा ने भी इशारे से उसे साबरा रखने को कहा. नेहा ने अपने साथ लाए पैकेट में से एक ड्रेस निकला ये ब्लैक कलर की बेहद सेक्सी शार्ट निघ्त्य थी.

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शबाना फुसफुसा कर: तू अपने साथ ये भी ले है वो भी एक गाँव में गाँव में किसे दिखने ले थी ये.

नेहा: अरे मेरी जान गाँव में hi ये दिखने का असली मज़ा है जिन्होंने ये कभी देखा नहीं शहर में तो ये कॉमन है अब देख मेरी ये ड्रेस बहार बैठे उस लड़के का बिना कुछ करे hi हाल बुरा कर देगी. तो अपना पहले सबक सीख ले सेक्स में कुछ करने से भी ज्यादा इम्पोर्टेन्ट होता बिना कुछ करे HI सामने वाले को उत्तेजित कर देना. सेक्स में तुम कैसे कपडे पहनकर सामने जाती हो ये भी जातुरी है. बेशक सेक्स में औरत को नंगा होना HI है पर नंगे होने से पहले भी ऐसा बहुत कुछ है जिससे मर्द का खड़ा करा जा सकता है. औरत जितने ज्यादा उत्तेजक और सेक्सी कपडे पहनेगी मर्द उसकी तरफ उतना hi आकर्षक होगा तू धामु के सामने सलवार सूट पहनकर सेक्स करने पहुंच गई क्या खाक उसका खड़ा होगा. इसलिए आज रात को कब धामु के सामने जाना तो अच्छे से तैयार होकर सेक्सी कपडे पहनकर उसके सामने जाना उसका बिना कुछ करे hi खड़ा हो जाएगा.

शबाना नेहा की हर बात को बड़े ध्यान से एक अच्छे स्टूडेंट की तरह सीख रही थी. नेहा वही बाथरूम में शबाना के सामने अपने कपडे उतरने लगी. नेहा अब सिर्फ ब्रा और पंतय में शबाना के सामने कड़ी थी. नेहा शबाना की तरफ पीठ करके घूम गई और शबाना को इशारा करा की वो उसकी ब्रा का हुक खोल दे पहले तो शबाना ने इंकार करा पर नेहा ने रेकेट की तो शबाना ने नेहा के करीब आकर उसकी ब्रा का हुक खोल दिया. नेहा ने बड़ी नज़ाकत के साथ अपनी ब्रा उतर कर वही नीचे दाल दी. फिर बड़ी ऐडा के साथ धीमे धीमे अपनी पंतय भी अपने पैरो से नीचे निकल दी.

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नेहा अब शबाना के सामने एकदम नंगी थी ऐसा नहीं था की नेहा के पास ऐसा कुछ था जो शबाना के पास नहीं थी बल्कि शबाना का जिस्म नेहा से 10 गुना ज्यादा आकर्षक था पर जो बात नेहा को शबाना से ज्यादा सेक्सी बना देती थी वो थी नेहा की अदाए. नेहा का ये रूप शबाना ने पहली बार देखा था पर नेहा की ये अदाए देख शबाना का तन बदन रोमांच से भर गया था. नेहा ने उस पैकेट से एक ब्लैक सेमि ट्रांसपेरेंट ब्रा पंतय का सेट निकला जिनसे अंदर का हल्का हल्का दीखता था बस नाम के लिए hi वो ब्रा पंतय थी बिना उतरे hi सामने वाले को नज़ारा दिख जाए. नेहा ने वो सेमि ट्रांसपेरेंट पंतय अपने पैरो से डालकर ऊपर तक चढ़ा ली बस नाम के लिए उसके चूतड़ ढके थे चूतड़ों के बीच की दरार तक साफ़ दिख रही थी. फिर नेहा ने अपनी ब्रा भी बहो से चढ़ा ली और शबाना से रिक्वेस्ट करि की वो उसका हुक बंद करदे. शबाना ने नेहा की ब्रा का हुक बंद कर दिया. फिर नेहा ने वो ब्लैक शार्ट निघ्त्य भी ऊपर से दाल ली पीछे से वो निघ्त्य बमुश्किल उसके आधे चूतड़ hi कवर कर प् रही थी उसकी सेक्सी गोरी गोरी टाँगे पूरी तरह से खुली थी. अपना ड्रेस पहनकर नेहा शबाना की तरफ पलटी और पलटते hi उसने कुछ ऐसा कर दिया जो शबाना ने सपने में भी एक्सपेक्ट नहीं करा था. नेहा ने शबाना के चेहरे को अपने हाथो में भर के उसे अपने तरफ खींचते हुए अपने होंठ सीधा शबाना के होंठो पर रख दिए. शबाना के लिए अनएक्सपेक्टेड था उसने धक्का देकर नेहा को खुद से अलग कर दिया. शबाना नेहा की इस हरकत पर नेहा को गुस्से में घूर रही थी पर नेहा तो बिंदास थी वो तो दांत निकल कर हंस रही थी.

नेहा फुसफुसा कर: अभी धक्का देकर अलग कर रही हो वडा करती हु ये ट्रेनिंग सेशन ख़तम होते होते तुम खुद मेरे पास आकर मेरे होंठो किश करोगी वो भी पुरे पैशन के साथ

शबाना: ऐसा कभी नहीं होगा.

नेहा: देखते है आप अब तक नेहा के इस रूप से वाकिफ नहीं है. नेहा वो बाला है जिसे देख बुद्धो की भी जवानी वापस आ जाती. मई बिना हाथ लगाए आप को इतना उत्तेजित कर दूंगी की आप मजबूर हो जाएगी मेरे पास आकर मुझे किश करने के लिए. वैसे ये बताइये मई कैसी लग रही हु.

शबाना ने नेहा को सामने से ऊपर से नीच तक देखा नेहा सच hi कह रही थी की ऐसे कपड़ो में औरत की मादकता और ज्यादा बाद जाती है. नेहा सच में इस ड्रेस में बेहद हॉट और सेक्सी लग रही थी सामने से ये ड्रेस नेहा की छूट के hi पास जाकर ख़तम हो जाती थी बल्कि नेहा की पंतय का कुछ हिस्सा भी इसमें दिखाई दे रहा था. नेहा को इस ड्रेस में देख शबाना का दिल ज़ोर से धक् धक् कर रहा था. शबाना सोच रही थी की जब औरत होते हुए नेहा को इस ड्रेस में देखकर वो इतना उत्तेजित हो रही है तो बहार उस 16 साल के लड़के का क्या हाल होगा जब वो नेहा को इस ड्रेस में देखेगा.

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नेहा: क्या हुआ जवाब नहीं दिया जा रहा रहने दीजिये आपकी चुप्पी ने hi आपका जवाब दे दिया. तैयार हो जाइये आज रात आपको भी धामु के सामने ऐसी hi ड्रेस में जाना होगा.

ये सुनकर तो शबाना की धड़कने और तेज़ हो गई. क्युकी नेहा जो बोलती है वो करती है उसके सामने तो शबाना की एक न चलती थी.

नेहा: अब मई बहार जाने वाली हु पर जाने से पहले इस ट्रेनिंग का दूसरा सबक भी सुनती जाइये. मर्द को उत्तेजित करने के लिए सेक्सी कपड़ो के बाद जो दूसरी चीज़ सबसे ज्यादा ज़रूरी है वो है औरत की कातिलाना अदाए उसकी रसीली बाते. औरत चाहे तो फ़ोन पर बात करते करते hi सिर्फ अपनी उत्तेजक बातो से hi मर्द का लुंड खड़ा कर सकती है. बातो के साथ साथ औरत की अदाए उसका अपनी कमर को बलखाते हुए मर्द की तरफ आना अपनी ज़ुल्फो से खेलना अपने निचले होंठ को दांतो में दबाना ये सब बाते मर्दो का खून गरम कर देती है. सेक्स में सिर्फ कपडे उतरना hi काफी नहीं है उन कपड़ो कितनी अदाओ के साथ उतारते हो या उतरवाते हो ये भी ध्यान देने वाली चीज़ है. मई जानती हु अपने कल रात ऐसा कुछ नहीं किया होगा आप बस टूट की तरह धामु के साथ बिस्तर पर बैठ गई होगी और बस उस बेचारे का लुंड दबा दबा कर उसका खड़ा करने की कोशिश करती रही होगी.

शबाना ने कल रात का सोचा की जैसा नेहा कह रही है एक्साक्ट्ली उसने वैसा hi किया था उसने अपनी तरफ से कोई खास इनिशिएटिव नहीं लिया था लुंड खड़ा करने का पूरा बोझ उस बेचारे मंदबुद्धि आदमी पर दाल दिया था.

नेहा: आपको सोच में डूबा देखकर मुझे समझ आ रहा है की आपने ऐसा hi किया था. वैसे डोंट वोर्री डिअर व्हेन नेहा इस हेरे. आज मई इस तरह त्रिनेड कर दूंगी की आपके नामर्द पति का मुरझाया लुंड भी तन कर खड़ा हो जाएगा. सोस्सिप पर ये ट्रेनिंग थोड़ी लम्बी और बोझिल कर दी थी पारा यहाँ इसे मई शार्ट और ज्यादा हॉट बना दूंगी. अब मई बहार जा रही हु.

शबाना को वही छोड़ कर नेहा ने वही बाथरूम में टेंगा एक रेड साटन टॉवल अपनी उस हॉट ड्रेसस के ऊपर लपेट लिया ताकि एकदम से उसे एंटी हॉट ड्रेस में देख वो 16 साल का बच्चा शॉकेड न हो जाए. वो टॉवल भी बस इतना hi बड़ा था की नेहा की ड्रेस उसमे छुप जाए बाकि उसकी पूरी टंगे जस की तस खुली थी. वो टॉवल लपेट कर नेहा बाथरूम से बहार आ गई. बाथरूम खुलने की आवाज़ पर छोटू ने उस तरफ पलट कर देखा तो उसकी आँखे फटी की फटी रह गई. नेहा उसके सामने बेहद छोटी टॉवल में अपना बदन लपेटे कड़ी थी. बहार आकर नेहा ने छोटू की आँखों एकटक देखते हुए अपनी टॉवल की क्नॉट खोल दी.

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क्नॉट खुलती hi नेहा की टॉवल के पैट खुल गए और उसके बीच पहनी नेहा की सेक्सी निघ्य और नीचे से झांक रही नेहा की छोटी सी पंतय टॉवल के अंदर से छोटू को नज़र आने लगी. नेहा हाथ पीछे कर अपनी टॉवल उतर कर वही छोटू के बगल में बिस्तर पर रख दी. अब नेहा का उजला दूधिया चिकना बदन उस बेहद हॉट निघ्त्य में कैसा हुआ छोटू की आँखों के सामने था. उस शार्ट निघ्त्य और उसकी नीचे से हलकी हलकी नज़र आ रही नेहा की नोकदार पंतय ने नेहा के जिस्म की कामुकता को 10 गुना बड़ा दिया था. उस स्किन टाइट निघ्त्य की कसावट में नेजा के जिस्म का हर एक घुमाव हर एक उभर साफ़ नज़र आ रहा था.

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छोटू का 16 साल का एकदम कुंवारा लुंड जीवन में पहली बार वो भी इतनी कामुक बाला को अपने सामने देख अभी से हरकत करने लगा था और अफ़सोस की छोटू का उस पर काबू भी नहीं था. छोटू का लुंड शॉर्ट्स के अंदर hi उप डाउन उप डाउन कर रहा था जो नेहा को भी दिख रहा था और मन hi मन उसे मज़ा भी आ रहा था एक 16 साल के लड़के को तैसे करने में. क्युकी एक टीनएज बॉय के साथ नेहा का भी ये पहले अनुभव था तभी ये मामला अब तक तैसिंग तक था वर्ण नेहा को इस रूप में देख अब तक तो मर्द उसे अपनी बहो में भर कर उसे नंगा करने में जुट जाते थे ये तो एक टीनएज बॉय की पहली झिझक थी जो उसे नेहा की तरफ बढ़ने से रोक रही थी और नेहा को छोटू की इस झिझक में अलग hi मज़ा आ रहा था. उस चिट्ठी को पढ़कर नेहा किसी का स्लेव बनने का सोच कर जितना उत्तेजित हो गई थी छोटू की झिझक और एक तीनगर को सडके करने की उसकी फंतासी ने उसे और भी ज्यादा उत्तेजित कर दिया. बहार जितना उत्तेजित नेहा और छोटू थे बाथरूम से उन्हें देख रही शबाना भी काफी रोमांचित थी और नेहा की अगली हरकत का इंतज़ार कर रही थी और अब इस रोमांच में एक और शिक्षा की एंट्री होने वाली थी जो इस घटना का साक्षी बनने वाला था.

अपने कमरे में मौजूद लालू ने यही बस देखने के लिए की शबाना नेहा क्या कर रहे है अपने मोबाइल से उनके कमरे में लगा स्पिकम ों करा और सामने नेहा इस छोटी सी निघ्त्य में उस 16 साल के वेटर लड़के के सामने खड़ा देख एकदम शॉकेड रह गया. उसने तो यही कसुआलय स्पिकम ों करा था और यहाँ तो ब्लॉकबस्टर मूवी शुरू होने वाली थी. उसने मन hi मन सोचा की साला विक्रम का दिल भी आया तो इस छिनार पर साली हाई क्लास कॉलगर्ल है ये तो इसे तो मई भी अगर कुछ रुपया ऑफर करू तो मुझसे भी छोड़ने को तैयार हो जाए पर साला विक्रम को पता चला तो नाराज़ हो जाएगा. खैर छोडो अपने को अपनी जानेमन शबाना को छोड़ना उस भरे बुरे शरीर वाली शरीफ औरत को जो मज़ा उस बुर्कानशीं मुसलमान औरत को बिस्तर पर अपने नीचे लिटकर रौदने में आएगा वो इस रंडी में कहा. ऐसी कॉलगर्ल तो मुंबई में हर ट्रैफिक सिग्नल पर कड़ी मिल जाएगी. बेशक लालू मन में नेहा की बुराई कर रहा था पर वो भी जनता था की नेहा पर विकर्म की नज़र है इसलिए ये अंगूर खट्टा है नेहा पर नज़र डालना विक्रम से पन्गा मोल लेना है पर फिलहाल जो सन शुरुर होने वाला था उसे इग्नोर करने भी लालू के लिए मुश्किल था. लालू ने कमरे का गेट बंद कर लिया मोबाइल में रिकॉर्डिंग ों करदी और अपनी पंत उतर कर नेहा को देखते हुए अपने लुंड को चड्डी के ऊपर से hi मसलने लगा. लालू शबाना और छोटू तीनो hi अलग अलग जगहों से बस नेहा पर नज़रे जमाए थे और नेहा की अगली हरकत के इंतज़ार में थे.

नेहा ने अपने बैग से अपनी मेकअप किट निकली उसमे से एक इरोटिक सेंट अपने ऊपर डाला और उसमे से शीशा और लिपस्टिक निकल कर बिस्तर पर छोटू के बगल में उससे एकदम सात कर बैठ गई. उसने शीश छोटू को थमा दिया और खुद शीशे में देख कर अपने होंठो पर लिपस्टिक लगाने लगी.

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छोटू मुँह खोले शीशा थामे नेहा को अपने इतने करीब बैठ कर लिपस्टिक लगते देख रहा था. नेहा की लिपस्टिक रेड ग्लॉसी जिसने उसके होंठो को और आकर्षक बना दिया था. नेहा के बदन से उठ रही इरोटिक महक और इतने करीब बैठकर उअका यु लिपस्टिक लगाना छोटू के अलग hi एक्सपीरियंस था उसने पहले भी औरतो देखा था पर जो फीलिंग आज उसके मन में उठ रही थी वो उसने आज से पहले कभी महसूस नहीं की थी. नेहा ने बिना कुछ करे बिना कुछ कहे hi उस तीनगर पर अपनी अदाओ का जलवा दिखाना शुरू कर दिया था और बाथरूम से शबाना नेहा की हर हरकत सीख रही थी की किस तरह सेक्स से पहले hi मर्द की अपने हुस्न का दीवाना बनाया जाता hai.Neha बड़ी ऐडा से: आए क्या देख रहे हो मुझे.

छोटू झेपते हुए: कककक कुछ नहीं मममम मई कुछ नहीं देख रहा.

नेहा ने लिपस्टिक और शीशा नीच रख दिया और थोड़ा सरक कर छोटू के नज़दीक आ गई: घबराते क्यों हो मई कौनसा तुम्हे दांत रही हु मई जानती हु की मई तुम्हे अच्छी लगती हु लगती हु न.

छोटू ने है में सर हिला दिया.

नेहा: तो बताओ न क्या देख रहे थे बताओ मई गुस्सा नहीं करुँगी.

छोटू: आपकी लिपस्टिक.

नेहा: लिपस्टिक या होंठ.

छोटू शरमाते हुए: जी दोनों आपके होंठो पर ये लाल लाल लिपस्टिक बहुत अच्छी लग रही.

नेहा: ये लिपस्टिक टास्ते में भी बहुत टेस्टी है जरा जीभ से चाट कर देखो ये लिपस्टिक.

छोटू बिस्तर पर राखी वो लिपस्टिक उठाने को हुआ पर नेहा ने उसे रोक दिया.

नेहा: क्या कर रहे हो लिपस्टिक ऐसे नहीं चाहते ऐसे तो ये ख़राब हो जाएगी इसका स्वाद तो लेने के तो दुसरे तरीके भी है.

छोटू हकलाते हुए: ज ज ज जी

नेहा: मेरे होंठो पर भी तो यही लिपस्टिक लगी है तुम चाहो तो अपने जीभ से मेरे होंठो पर लगी लिपस्टिक भी टास्ते कर सकते हो. अपनी जीभ निकालो और मेरे होंठो पर लगी लिपतिक को चाटकर देखो.

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नेहा ने अपनी आँखे बंद करके अपने होंठ छोटू के लिए आगे कर दिए. छोटू भी अब खुद पर काबू नहीं रख सकता था जब नेहा ने खुद उसे अपने होंठ चाटने की छोट दे दी थी. छोटू अपने होंठ नेहा के होंठो के करीब ले आया और जीभ निकल कर नेहा के के होंठो पर फिरने लगा.

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छोटू इत्मीनान से बिना किसी दर के नेहा को होंठो को चाट रहा था क्युकी उसके हिसाब से यहाँ वो नेहा के साथ कमरे में अकेला था और उसे देखने वाला कोई नहीं था. उसे क्या पता था की उसे एक नहीं बल्कि दो लोग देख रहे थे. छोटू ने नेहा के होंठो से पूरी लिपस्टिक चाट चाट कर साफ़ करदी. 5 मं की किसिंग के बाद नेहा ने बड़ी नज़ाकत से अपने होंठ छोटू के होंठो पर रगड़ दिए और अपना चेहरा पीछे कर लिया.

नेहा: लगता है तुमने मेरी लिपस्टिक का टास्ते कुछ ज्यादा hi पसंद आ गया पूरी चाट कर साफ़ करदी. तो बस मुझमे तुम्हे मेरी लिपस्टिक और होंठ hi अच्छे लगे और कुछ नहीं.

छोटू: ऐसा नहीं है आप तो ऊपर से नीचे तक मस्त हो आपकी स्किन कितनी मुलायम और गोरी है.

नेहा: तुमने तो अभी हमे ढंग से छुआ भी नहीं फिर तुम्हे कैसे पता हमारी स्किन सॉफ्ट है.
 
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नेहा ने छोटू का हाथ अपनी जांघो पर रख लिया और उसके हाथ से अपनी जांघ को सहलाने लगी. सहलाते सहलाते छोटू के हाथ नेहा की पंतय से टच हो जाते थे. छोटू का लुंड पंतवके अंदर hi झटके खा रहा था.

नेहा: कैसी है मेरी स्किन.

छोटू: बहुत मुलायम एकदम रेशम जैसी.

नेहा: अभी तो तुमने बस पेअर की स्किन छुई और जगह की भी छुओ.

नेहा अपनी निघ्त्य की ज़िप आगे से खोलती चली गई जैसे जैसे ज़िप खुलती गई वैसे वैसे अंदर पहनी हुई ट्रांसपेरेंट ब्रा छोटू के सामने अति चली गई. नेहा ने अपनी निघ्त्य उतर कर वही बिस्तर पर रख दी और बिस्तर पर पूरी तरह ऊपर आकर तक लेकर टंगे फैला कर बैठ गई. नेहा एक सेमि ट्रांसपेरेंट ब्रा पंतय में अपनी टंगे फैले बिना किसी शर्म के एक 16 साल के लड़के के सामने बैठी थी. अपने मोबाइल से नेहा की ये अदाए देख लालू वही से अपना लुंड मसले जा रहा था कुछ यही हाल शबाना का था वो तो पलके झपकना तक भूल गई थी.

नेहा: वही बैठे रहोगे क्या इधर आओ न मेरे पास मेरे बगल में मेरे करीब आओ और छू कर देखो क्या वाकई मेरा बदन मुलायम है की नहीं.

छोटू भी नेहा के बगल में आकर बैठ गया नेहा ने छोटू का हाथ अपने पेट पर रखा लिया और उसके हाथ से अपना पेट सहलाने लगी. धीमे धीमे वो छोटू का हाथ सरकते हुए ऊपर लती जा रही थी. छोटू की न उसे रोकने की हिम्मत थी न इच्छा. छोटू का नेहा की ब्रा के नीचे तक पहुंच चूका था.

नेहा: अब मई तुम्हे अपने जिस्म सबसे गुदगुदा हिस्सा टच करौंगी करना चाओगे टच.

छोटू ने बस है में सर हिला दिया.

नेहा ने छोटू के दोनों हाथ ब्रा के ऊपर से hi अपने छोटे छोटे उभराओ पर रख दिए और धीमे धीमे छोटू की हथेली से अपने स्तनों दबाने लगी. उत्तेजना छोटू पर पूरी तरह हावी हो गई थी वो मुँह खोले नेहा की हर बात चुपचाप मान रहा था वो ये तो भूल hi गया था की नेहा उसे कोई काम बोल कर ले थी और अब यहाँ बिस्तर पर अधनंगी होकर अपने दूध दबवा रही है.

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नेहा: कैसे लगे ये.

छोटू: बहुत गुदगुदे है एकदम रुई जैसे.

नेहा: अंदर से छूकर देखोगे.

छोटू: हम्म्म्म

नेहा ने हाथ पीछे करके अपनी ब्रा का हुक खोल दिया. हुक खुलते hi ब्रा आगे से ढीली हो गई. नेहा ने छोटू को अंदर हाथ डालने का इशारा करा. अब तक छोटू भी थोड़ा खुल गया था उसने धीमे धीमे अपने कापते हाथ नीचे से नेहा की ब्रा के अंदर दाल दिए और नेहा के दोनों स्तन अपने हाथ में भर लिए और उन्हें हलके हलके स्पॉन्ज की तरह दबाने लगा.

नेहा: कैसे लगे मेरे दूध मज़ा आया इन्हे छूकर.

छोटू: हम्म्म

नेहा: अभी एक जगह और बाकि है जहा की स्किन सबसे कोमल होती है और हर मर्द उसे छूने के लिए उतावला रहता है छुओगे वो जगह.

छोटू: हम्म्म

नेहा ने छोटू का एक हाथ अपनी ब्रा से निकला और नीचे अपने पंतय के अंदर दाल दिया.

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छोटू का तो मुँह खुला का खुला रह गया. छोटू का एक हाथ नेहा की ब्रा के अंदर उसके स्तनों पर और दूसरा अब उसकी पंतय के अंदर उसकी छूट पर था. पर िम्मातुरित्य के कारन उसे समझ नहीं आ रहा था की वो क्या करे.

नेहा: अंदर तुम्हे एक छेड़ महसूस हो रहा है.

छोटू: हम्म्म

नेहा: उसके अंदर अपनी दो ऊँगली दाल दो.

छोटू ने नेहा की छूट के अंदर अपनी दो ऊँगली दाखिल करदी.

नेहा: अब अपनी ऊँगली तेज़ तेज़ अंदर बहार करो.

छोटू अपनी ऊँगली नेहा की छूट में तेज़ तेज़ अंदर बहार करने लगा नेहा का उत्तेजना के मरे बुरा हाल था. उसने अपनी खींच कर उतर फेंकी अब नेहा की नुकीली चुकी छोटू के सामने एकदम नंगी थी.

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नेहा: और ज़ोर से चलाओ और तेज़ करो प्लीज करो na......aaaahhhhh मममम.... करो

नेहा की ये मादक आवाज़ छोटू के जोश को और ज्यादा बड़ा रही थी उसने अपनी ऊँगली की गति बड़ा दी. नेहा ने बिस्तर पर लेते लेते छोटू का चेहरा अपने हाथो में भरके अपने स्तनों के करीब कर दिया.

नेहा: हाथ से दबा कर तो देख लिया अब इन्हे मुँह में भर कर देखो चूसे इन्हे. छोटू ने एक आज्ञाकारी बच्चे की तरह अपना मुँह खोल दिया और नेहा ने 32 साइज की चुकी उसके मुँह में ठूस दी.

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छोटू बड़े आहिस्ता आहिस्ता नेहा की चुकी चूसने लगा क्युकी उसे पता नहीं था औरत को मर्दो के जंगलीपन में मज़ा अत है क्युकी ये उसका फर्स्ट टाइम था. छोटू अपनी ऊँगली नेहा की छूट में तेज़ तेज़ चला रहा था और ऊपर धीमे धीमे एक बच्चे की तरह नेहा की चुकी चूस रहा था जैसे उनसे दूध पीने की कोशिश कर रहा हो. नेहा भी जोश में छोटू का चेहरा अपनी छाती पर दबा रही थी. कुछ यही हाल बाथरूम में शबाना और मोबाइल पर लालू का था दोनों के हाथ अपने अपने गुप्तांगो पर पहुंच गए थे. लालू तो पहले भी मुठ मार चूका था पर शबाना के लिए ये उत्तेजना एकदम नया अनुभव था. उस स्ट्रेंजर के मश्ग से पहले से उत्तेजित नेहा छोटू की उंगलियों और बर्दाश्त न कर पाई और उसने अपने अंदर की गर्मी को बहार निकलना शुरू कर दिया. नेहा के साथ शबाना और लालू भी ये सब देख कर hi झाड़ गए. नेहा का शरीर निढाल पद गया था पर छोटू नहीं समझता था की झड़ने के बाद औरत शांत पद जाती है वो अब भी अपनी उंगलिया नेहा की छूट के अंदर डेल हुए था पर उसे अपनी उंगलियों पर कुछ चिपचिपे और गीलेपन का एहसास हो रहा था. नेहा ने खुद छोटू का हाथ अपनी पंतय से निकल दिया और गहरी सास लेते हुए अपनी आँखे बंद कर्ली.

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नेहा गहरी गहरी सासे लेते हुए: छोटू तुमने मेरे जिस्म का हर हिस्सा छू कर देख लिया तो कैसा लगी मेरी स्किन छूकर मज़ा आया.

छोटू: है आपकी स्किन सच में बहुत चिकनी और मुलायम है.

नेहा: मई इस पर एक खास तरह की क्रीम लगाती हु उससे स्किन बहुत मुलायम हो जाती है तुम्हे पता है मैंने तुम्हे क्यों बुलाया था.

छोटू: नहीं

नेहा: मुझे तुमसे वो क्रीम चाहिए थी वो क्रीम मर्द के अंदर बनती है और उसके शरीर के एक खास हिस्से से बहार निकलती है. मेरे पास जितनी क्रीम थी वो ख़तम हो गई और मुझे अपने शरीर पर चुपड़ने के लिए वो क्रीम चाहिए थी क्या तुम मुझे वो क्रीम दे सकते हो.

छोटू: मेरे पास कौनसी क्रीम है.

नेहा: वो क्रीम एक औरत hi निकल सकती है तुम हां करो मई निकल लुंगी.

छोटू: ठीक है लेलो.

नेहा: पर उसके लिए तुम्हे भी अपने कपडे उतरने होंगे.

छोटू अपने कपडे उतरने को हुआ पर नेहा ने उसे रोक दिया और खुद उसके कपडे उतरने लगी. नेहा ने छोटू की शर्ट बनियान और शॉर्ट्स उतर दिए पर अंडरवियर नहीं उतरा. छोटू ने अपना हाथ अंडरवियर के ऊपर से hi छोटू के लुंड पर रख दिया था जो पहले से काफी हार्ड था.

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नेहा: वो क्रीम तुम्हारी इस चीज़ से निकलती है तुम्हे इसका नाम पता है.

छोटू: हम्म पता है लुंड पर इससे कौनसी क्रीम निकलती है इससे तो बस पेशाब निकलती है.

नेहा: वो मई निकल के दिखा दूँगी.

नेहा ने अपना हाथ छोटू के अंडरवियर के अंदर दाल दिया और छोटू के 18 साल के कुंवारे लुंड को अपनी मुट्ठी में भर लिया.

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अब आँखे बंद करने की बरी छोटू की थी नेहा के हाथो की गर्माहट से छोटू की आँखे खुद बा खुद बंद हो गई. नेहा पहले हौले हौले छोटू की लुंड की खाल को आगे पीछे करने लगी छोटू की इतने में hi हालत ख़राब हो गई ये उसके जीवन का प्रथम हस्तमैथुन था वो भी इतनी हॉट लड़की के हाथो. छोटू की उत्तेजना और लुंड दोनों बढ़ते जा रहे थे उत्तेजना में छोटू ने नेहा का कन्धा कास कर पकड़ लिया और उसका मुँह भी खुल गया सासे तेज़ तेज़ तेज़ चलने लगी. इन सबकी पक्की खिलाडी नेहा समझ गई थी सेक्स से अब तक अनजान रहा ये 16 साल का लड़का अपने पहले स्खलन के करीब है. और कुछ सेकण्ड्स के बाद hi छोटू ने लुंड ने ढेर सारा गदा गदा वीर्य नेहा के हाथो में hi छोड़ दिया.

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प्रथम वीर्य स्खलन होने के कारन ये बेहद गदा और मात्रा में भी काफी ज्यादा था हाथ अंदर होने के बावजूद नेहा को आभास हो गया था की उसकी पूरी हथेली छोटू के वीर्य से भर गई है. छोटू आँख बंद करे तेज़ तेज़ आहे भर रहा था और नेहा भी उसके आँखे खोलने तक अपना हाथ अब भी उसके अंडरवियर में hi डाले हुए थी. थोड़ा रिलैक्स होने के बाद जब छोटू ने अपनी आँखे खोल कर नेहा की तरफ देखा तो वो उसे देख कर मुस्कुरा रही थी.

नेहा: तुम्हारी क्रीम निकल आई.

नेहा ने छोटू के अंडरवियर से हाथ निकल कर अपना हाथ बहार निकला. नेहा का पूरा हाथ एक सफ़ेद गाड़े क्रीम जैसे पदार्थ से भरा था छोटू भी ये देख हैरान था की उसके अंदर क्रीम बनाने की ताकत है. लालू और शबाना तो ये समझ रहे थे की ये क्या है पर बेचारा छोटू तो इसे क्रीम hi मान रहा था. पर क्या वाकई नेहा इस वीर्य को क्रीम की तरह अपने चेहरे या बदन पर लगाएगी इस बात पर न लालू को यकीन था न शबाना को. पर नेहा किस बाला का नाम है वो दोनों हो इससे अनजान थे नेहा ने बाथरूम की ततफ अपना चेहरा कर हाथ में भरा अपना वीर्य अपने चेहरे पर मलना शहरु कर दिया. शबाना का तो मुँह खुला का खुला रह गया उसे यकीन hi नहीं हो रहा था की सेक्स में नेहा इस लेवल तक जा सकती थी कुछ यही ेसोरेशन मोबाइल के सामबे बैठे लालू के थे उन दोनों ने नेहा को ुँडेरेस्तिमाते करा था. नेहा ने वो वीर्य अपने पुरे चेहरे पर माला छोटू भी उसे ऐसा करते देख रहा वो तो यही समझ रहा था की ये वाकई एक क्रीम है. चेहरा वीर्य से मलने के बाद नेहा ने दुबारा छोटू के अंडरवियर में हाथ डाला और लुंड के इर्द गिर्द चिपका बाकि वीर्य भी अपने हाथो में समेत लिया और उसे अपने स्तनों अपने पेट अपनी जांघो तक में मॉल दिया. शबाना और लालू नेहा की इस दीरतिनेस्स पैट हैरान रह गए पर नेहा के लिए ये किंकिनीस आम बात थी.

नेहा: छोटू थैंक ु फॉर थे क्रीम.

छोटू: जी क्या बोलै.

नेहा: क्रीम के लिए शुक्रिया.

छोटू: शुक्रिया की क्या बात मुझे तो अब तक पता hi नहीं था की मई क्रीम भी बना सकता हु. मेरी ये क्रीम तो अब तक बेकार चली जाती थी अच्छा हुआ आपके काम आ गई आगे भी आपको क्रीम चाहिए हो तो मेरे अंदर से निकल लेना. मई सबको बताऊंगा की मई क्रीम बना लेता हु.

नेहा घबरा गई की कही इसने बहार ये बात बता दी तो समझ जाएंगे मैंने इसकी कौन सी क्रीम निकली है.

नेहा: नहीं नहीं छोटू ऐसा गलती से भी मत करना ये क्रीम सबसे नहीं ली जाती जिस पर हम बहुत भरोसा करते है उससे hi लेते है. मुझे तुम भरोसे लायक लगे तभी तुमसे ये क्रीम मांगी बाकि बहार किसी को मत बताना इस बारे में वर्ण लोग गलत सोचेंगे.

छोटू: अच्छा

नेहा: वडा करो तुम बहार किसीको नहीं बताओगे.

छोटू: ठीक है नहीं बताऊंगा.

नेहा: अभी नहीं छोटू अभी तो बस आधा काम hi हुआ अभी तो आधा काम बाकि है.

छोटू: बाकि है उसके लिए क्या करना होगा अब.

नेहा: पहले ये बताओ मेरे हाथो से क्रीम निकलवा कर तुम्हे मज़ा आया की नहीं.

छोटू शरमतर हुए: है आया.

नेहा: तो अब इससे ज़ादा मज़ा आएगा पर उसके लिए जैसा मई कहु वैसा तुम्हे करना होगा करोगे की नहीं.

छोटू: करूँगा.

नेहा: शाबाश थॉट्स लिखे ा गुड़ बॉय.

नेहा की होंठो में शरारती मुस्कान आ गई उसने चेहरा घुमाकर एक नज़र बाथरूम की तरफ देखा जहा शबाना झरोको से उसे hi देख रही थी. शबाना की दिलो दिमाग में यही चल रहा था की नेहा एक बार इस लड़के का वीर्य निकल चुकी अब ये क्या करने वाली है. इस पुरे वाकये को अपने मोबाइल में रिकॉर्ड कर रहा लालू भी नेहा की अगली हरकत का बेसब्री से इंतज़ार कर रहा था क्युकी अपने शरीर पर वीर्य मलकर नेहा ने उसकी एक्सपेक्टेशन भी बड़ा दी थी और वो अब समझ चूका था की नेहा अब आगे जो भी करेगी वो इससे भी ज्यादा उत्तेजक और किंकी होगा.

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झड़ने बाद छोटू का लुंड पूरी तरह मुरझा गया था और उसका पूरा अंडरवियर से निकले ढेर सारे वीर्य से पूरी तरह भीग कर गीला हो गया था. कपडे के नाम पर छोटू के शरीर पर बस एक अंडरवियर hi था वो भी वीर्य से सराबोर और दूसरी तरफ नेहा के शरीर पर तो अब वो भी नहीं था वो तो पूर्ण नंग्न अवस्था में पूरी तरह बेशरम होकर अपने से 6 साल छोटे नए नए बालिग हुए लड़के के सामने नंगी बैठी थी. और दो अलग जगह से इस घटना के लाइव गवाह बन रहे लालू और शबाना भी अपनी अपनी उत्तेजना के ज्वर को कुछ हद तक ठंडा करके नेहा के अगले कदम का इंतज़ार कर रहे थे. नेहा ने भी उन्हें निराश नहीं करा और बिस्तर पर अपनी चद्दर के नीचे से एक सिल्करोब (रेशमी पट्टी) निकली और छोटू के पीछे आकर बैठ गई. इससे पहले की छोटू कुछ समझ पता उसने वो पट्टी छोटू की आँखों की पर रख दी और सर के पीछे लेजाकर उसकी गाँठ बांध दी.

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छोटू: ये क्या कर रही है आप मैडमजी मुझे कुछ दिखाई नहीं दे रहा.

नेहा: सस्शह्ह्हह्ह कुछ मत बोलो तुमने प्रॉमिस करा था की जैसा मई कहूँगी वैसा करोगे कोई सवाल नहीं करोगे. अभी जो हुआ उसमे तुम्हे मज़ा आया न और मज़ा चाहिए न. चाहिए की नहीं.

छोटू: चाहिए

नेहा: तो जैसा मई केहती हु चुपचाप करते जाओ जो मई करू बिना सवाल किए मुझे करने दो वडा करती हु अभी जितना मज़ा आया उसे भी ज़ादा मज़ा आएगा तुम्हे जिसे तुम अपनी पूरी लाइफ तक भुला नहीं पाओगे.

नेहा ने छोटू का हाथ पकड़ कर उसे बिस्तर से नीचे उतर लिया और हाथ पकडे पकडे गाइड करते हुए सीधा बाथरूम की तरफ लेन लगी जहा शबाना पहले से छुपी थी. शबाना शॉकेड रह है की नेहा उस लड़के को लिए सीधा वही चली आ रही है जहा वो छुपी थी उसे वह से निकलने का समय भी नहीं दिया अगर उस लड़के ने उसे वह देख लिया तो नेहा को तो अपनी इज़्ज़त की परवाह नहीं पर उसका क्या होगा. शबाना कुछ सोचती समझती या करती उससे पहले नेहा छोटू का हाथ थामे बाथरूम में दाखिल हो गई और अंदर आते hi उसने बाथरूम की कुण्डी बंद करदी. बाथरूम का दरवाज़ा बंद होते hi लालू के इस एडल्ट शो पर ब्रेक लग गया क्युकी बाथरूम में कोई छुपाने लायक जगह न होने की वजह से वह स्पाई सीएएम नहीं लगाया जा सका था इसलिए अब बह्रूम में नेहा और उस लड़के के बीच क्या होगा ये लालू नहीं देख सकता था और शबाना भी उसी बाथरूम में है ये बात तो अब तक लालू को पता hi नहीं थी वो तो यही समझ रहा था की शबाना कही बहार है इसीलिए मौके का फायदा उठा कर नेहा उस लड़के के साथ मज़ा कर रही है. पर फिर भी लालू अपना मोबाइल ों रखे रहा की शायद उसे फिर कुछ मज़ेदार देखने को मिल जाए.

बाथरूम के अंदर शबाना एक कोने में दुबक कर कड़ी हो गई ताकि कही छोटू को उसकी मौजूदगी का एहसास न हो जाए. पर वो नेहा को गुस्से में घूर रही थी पर नेहा को तो शबाना के गुस्से पर हसी आ रही थी. छोटू को वही दरवाज़े के पास खड़ा कर नेहा चुपचाप शबाना के पास पहुंच गई.

शबाना: इसे अंदर क्यों ले आई तेरा दिमाग तो ठीक है अगर इसने मुझे यहाँ देख लिया और बहार किसी को बता दिया तो.

नेहा: रिलैक्स जस्ट टेक चिल बता तो ये मेरे बारे में भी सकता है पर मई तो टेंशन नहीं ले रही.

शबाना: तुझमे और मुझमे फ़र्क़ है तेरे लिए ये भले hi एक नार्मल बात है पर मेरे लिए बहुत बड़ी बात है मई क्यों तेरी बातो में आ गई.

नेहा: रिलैक्स करिये शबाना दी मई जानती हु की आपकी इज़्ज़त आपके लिए बहुत मैने रखती है तभी इसकी आँखों में पट्टी बांध कर ले हु ये कुछ नहीं देख सकता इसलिए निश्चिन्त रहिये आप यहाँ है ये किसी को पता भी नहीं चलेगा.

शबाना: पर तू इसे यहाँ ले क्यों है बहाए तो तूने इसका वो निकलवा दिया था.

नेहा शरारती लहज़े में: वो क्या, क्या निकलवा दिया मैंने इसका.

शबाना: ज्यादा अनजान मत बन तू जानती है मई किस बारे में कह रही.

नेहा: जानती हु पर आपके मुँह से सुन्ना चाहती हु. आपकी झिझक खोलने के लिए पहले आपका खुद खुलना ज़रूरी है. वैसे मतलब अपने सब देखा तो ये बताइये मज़ा आया लाइव पोर्न मूवी देखकर.

शबाना: कुछ भी मत बोल मुज्जे कुछ मज़ा नहीं आया.

नेहा: वो तो आपकी गाउन पर बने धब्बे से साफ़ पता लग रहा है आपको मज़ा आया की नहीं.

शबाना झेपते हुए: वो छोड़ तू इसे यहाँ क्यों ले.

नेहा: आपको आपकी ट्रेनिंग का आखरी और सबसे अचूक दांव सीखने के लिए इस. इस दांव के आगे नामर्द से नामर्द मर्द का लुंड खड़े हुए बिना नहीं रह सकता. ये दांव कभी फ़ैल नहीं होता.

शबाना: कैसा दांव

नेहा: बस देखते जाइये आपकी झिझक और शर्म दोनों एक साथ ख़तम हो जाएगी इसके बाद बस ध्यान से देखिएगा मुझे पूरी तरह डूबकर.

नेहा दुबारा छोटू के करीब पहुंच गई.

छोटू: आप मुझे कहा ले आई और अपने मेरी आँखों में पट्टी क्यों बांध दी.

नेहा: स्स्स्सह्ह्हह्ह सवाल नहीं बस तुम इस एक्सपीरियंस का भरपूर मज़ा उठाओ और आँख तुम्हारी इसलिए बंद करि है क्युकी जब हमारी आँखे बंद होती है तब हमारा ध्यान एक जगह केंद्रित होना आसान हो जाता है. तो बंद आँखों से तुम्हारा मज़ा दोगुना हो जाएगा भरोसा करो.

नेहा छोटू का हाथ पकड़ कर उसे बाथरूम में लगे शावर के नीचे ले आई. और इससे पहले छोटू कुछ सोचता या समझता नेहा ने शावर ों कर दिया. शावर से बरसता पानी छोटू के जिस्म को तरबतर करने लगा. नेहा ने अपना नंगा बदन छोटू के जिस्म से सत्ता दिया और अपने होंठ छोटू की गर्दन पर रख दिए और जीभ निकल कर छोटू की गर्दन चैहटन लगी.

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गर्दन को छत्ते छत्ते नेहा अपने होंठ नीचे लती गई छोटू की छाती पर पहुंच कर उसने छोटू के निप्पल को अपने दांतो में भर लिया और उन्हें हौले हौले अपने दांतो से तैसे करने. उस नए नए जवान हुए बच्चे के लिए तो ये एक अलग तरह की फीलिंग थी. उत्तेजना में भर कर उसने तो नेहा के कंधे को कास कर पकड़ लिया. छोटू के निप्पल से खेलते हुए नेहा शबाना को भी तिरछी आँखों से देख लेती जो एक बार फिर उत्तेजना के रस्ते पर अपने कदम रख दिए थे.

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छोटू के निप्पल से खेलते हुए नेहा धीमे धीमे और नीचे बैठती चली गई छोटू के पेट फिर कमर से होते होते नेहा का चेहरा अब छोटू के अंडरवियर के करीब पहुंच चूका था. छोटू के अंडरवियर से अब भी उसके वीर्य की कहुआभू आ रही थी बल्कि भीगने के बाद ये सुगंध और मादक हो गई थी. नेहा ने बड़ी ऐडा के साथ शबाना को देखा और छोटू के वीर्य और पानी से भीगे हुए अंडरवियर पर लुंड वाले हिस्से को अपने दांतो टेल दबा लिया.

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छोटू और शबाना दोनों का मुँह एकदम से खुल गया. छोटू का उत्तेजना में की इतनी सुन्दर और हॉट लड़की ने उसके सुसु करने वाली जगह को चड्डी के ऊपर से hi सही अपने दांतो में दबा लिया और शबाना का आश्चर्य में की वीर्य से भरे होने के बाद नेहा इस लड़के की चड्डी को कैसे अपने मुँह में ले सकती है. नेहा कुछ देर तो यही छोटू के लुंड को चांदी के ऊपर चाहत्ती रही चड्डी में छोटू के वीर्य के साथ साथ उसकी पिशाब का भी हल्का खट्टा खट्टा स्वाद मिला हुआ था. पर आज नेहा पूरा एन्जॉय करने के मूड थी शायद सामने शबाना की मौजूदगी ने उसकी परफॉरमेंस में और निखार ला दिया था. नेहा को छोटू की चड्डी को उस तरह उत्तेजक ढंग से छत्ता देख शबाना के अंदर की टहना भी एक बार फिर आग पकड़ने लगी. कुछ देर यही छोटू की चड्डी को चैहटन के नाद नेहा ने छोटू के अंडरवियर को ऊपर से अपने दातो में दबा लिया दातो में दबाए दबाए hi उसने एक बार फिर शबाना की तरफ देखा जो गहरी सासे भर रही थी और शबाना को देखते हुए hi दातो से hi खींचते हुए उसके पैरो के नीचे तक ले आई और बिना वक़्त गवाए उसे उसके पैरो से निकल दिया. पर पैरो से निकल कर यहाँ वह फेकने की बजाए उसने वो अंडरवियर सीधा शबाना की तरफ उछाल दिया. अचानक से ऐसा करने पर शबाना ने भी रिएक्शन के रूप में उस अंडरवियर को कैच कर लिया और नेहा की इस हरकत पर उसे घूर कर देखा पर नेहा तो दांत निकल कर है रही थी. शबाना उस अंडरवियर को फेकने को हुई पर नेहा ने हाथ के इशारे से उसे रोक दिया. नेहा ने अपनी जीभ निकल कर शबाना को इशारा करा की वो छोटू के अंडरवियर को कहते. शबाना ने इंकार में सर हिला दिया पर नेहा जो एक बार थान लेती उससे पीछे नहीं हटती. उसने शबाना को गुस्से में घूरा और इशारे से कहा की वो छोटू को की आँख की पट्टी खोल देगी. चलो चाट नहीं सकती तो बस सूंघ ले. शबाना सूंघने पर मन गई और वो छोटू की चड्डी अपनी नाक के करीब ले आई और बड़ा बुरा सा मुँह बनाते हुए उसकी चड्डी को सूंघ कर देखा पहले तो उसे बदबू सी लगी पर फिर उसमे से अति वीर्य की महक महसूस होते hi उसकी आँखे खुद बा खुद बंद हो गई शबाना को पहली एक पुरुष के वीर्ये की महक का एहसास हुआ था उस दिन धामु के साथ नशे की हालत में वो ये एहसास ले hi नहीं पाई थी और कल रात तो धामु का खड़ा hi नहीं हुआ और उसके पति से तो कभी ये सुख मिला hi नहीं.

शबाना को यु धामु का अंडरवियर सूंघते देख नेहा को भी मज़ा आ रहा था वो शबाना की शर्म और झिझक आहिस्ते आहिस्ते खोल रही थी. छोटू के अंडरवियर को सूंघने में खोई शबाना ने जब आँखे खोली तो नेहा की सेक्स ट्रेनिंग का सबसे रोमांचक पथ उसका इंतज़ार कर रहा था. नेहा ने छोटू का मुरझाया हुआ लुंड अपने हाथो में भर लिया और शबाना को हिलाकर दिखाया की वो झड़ने के बाद पूरी तरह मुरझा गया है. पर शबाना को समझ नहीं आ रहा था उस लड़के का मुरझाया हुआ लुंड दिखा कर नेहा क्या करना चाहती है छोटू को भी अपने लुंड पर नेहा के हाथो का एहसास हो रहा था उसे यही लग रहा था की नेहा एक बार फिर हिला हिला कर उसकी क्रीम निकलने वाली है. पर उन दोनों की उमीदो के विपरीत नेहा ने वो करा जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी. नेहा ने अपनी जीभ निकली और छोटू के लुंड को ऊपर से नीचे तक चेतना शुरू कर दिया. शबाना की आँखे फटी और मुँह खुला रह गया. आज तक कोई पोर्न वीडियो भी न दलहन वाली शबाना ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था की कोई लड़की मर्द की मूतने वाली जगह को अपनी जीभ से भी चाट सकती है. छोटू को भी नेहा की जीभ की सरसराहट अपने लुंड पर साफ़ महसूस हो रही थी जिसने उसके तन बदन को उत्तेजना से भर दिया. उसने अपनी मुट्ठिया भींच ली और उसके मुरझाए हुए लुंड की नसों में एक बार फिर खिचाव आना शुरू हो गया. सेक्स की माहिर खिलाडी नेहा जानती थी की औरत की मुँह की गर्मी के सामने कमजोर से कमजोर लुंड भी सलामी दिए बिना नहीं रह सकता शायद यही नेहा का अमोघ अस्त्र था जिसका एहसास नेहा आज शबाना को करना चाहती थी. पर नेहा के लिए तो ब्लोजॉब आम बात थी पर शबाना और छोटू के लिए तो ये फर्स्ट टाइम एक्सपीरियंस था इसलिए उत्तेजित होना स्वाभाविक था. चाट चाट कर नेहा ने छोटू के लुंड में उत्तेजना का संचार कर दिया था उसका आकर बढ़ना शुरू हो गया था और वो इतना फूल गया था की नेहा उसे अपने मुँह की गर्मी का एहसास करा दे.

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नेहा ने बिना देर करे छोटू के लुंड को अपने होठो में भर लिया और अपने होंठो को उसके लुंड पर पूरी तरह कास कर आगे पीछे करने लगी. नेह की मुँह की गर्माहट मिलते hi छोटू के लुंड एक बार फिर उफान में आना शुरू हो गया जैसे जैसे लुंड अपना आकर बढ़ाता गया नेहा की चूसने का आवेश भी बढ़ता गया. नेहा के होठो से रगड़ खा कर छोटू के लुंड की खाल आगे पीछे हो रही थी जिस वजह से उसका लुंड नेहा के मुँह के अंदर hi झटके खा रहा था छोटू ने उत्तेजना के नशे में नेहा के बालो को कास कर पकड़ लिया पर नेहा जानती थी इस अवस्था में एक 16 साल के लड़के से ये उत्तेजना स्वाभाविक है. उत्तेजना की आग शबाना में भी एक बार फिर भड़क उठी उसने गाउन के ऊपर से hi अपनी छूट सहलाना शुरू कर. छोटू का लुंड जब नेहा के मुँह के अंदर पूरी तरह तन कर खड़ा हो गया तो नेहा ने उसे अपने मुँह से निकल कर हाथ में लेकर शबाना को दिखाया की किस तरह उसने अपने होंठो की गर्माहट से उस मुरझाए हुए लुंड में एक बार फिर जान दाल दी. शबाना की उत्तेजना नेहा को और एक्ससिटेड कर रही थी और उसने शबाना की तरफ नशीली नज़रो से देखते हुए बड़े उत्तेजक ढंग से छोटू के लुंड को ऊपर से नीचे तक चेतना शुरू कर दिया छत्ते छत्ते वो छोटू की बॉल्स को भी मुँह में भर कर छोस लेती और कभी छोटू के लुंड की नसों को अपने दांतो से रगड़ देती. नेहा के ये कामुक लुंड चूसै ने छोटू और शबाना दोनों की hi हालत ख़राब कर दी थी छोटू अपनी नेहा के बालो पर उतर रहा था तो शबाना गाउन के ऊपर से अपनी मुट्ठी में भींचकर खुद को ठंडा करने की कोशिश कर रही थी.

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नेहा के होंठो की गर्माहट उस 18 साल के लड़के के लिए बहुत थी वो तो एक बार झड़ने की वजह से वो उसे इतनी देर झेल गया पर अब उसके लुंड दुबारा झड़ने के करीब पहुंच गया था और नेहा भी ये समझ गई थी. और नेहा ने छोटू के लुंड को दुबारा अपने मुँह में भर लिया. कुछ पल की चूसै और नेहा की गरम गरम सासो के आगे छोटू के लुंड ने अपने हथियार दाल दिए छोटू ने नेहा के बालो कास कर अपनी मुट्ठी में भींच लिया और उसके लुंड से एक बार फिर गाड़ा गाड़ा सफ़ेद वीर्य नेहा के मुँह में भरने लगा. नेहा ने एक बूँद भी बहार नहीं गिरने दी पूरा वीर्य अपने मुँह के अंदर hi ले लिया.

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नेहा ने तब तक उसके लुंड को अपने मुँह से नहीं निकला जब तक उसके वीर्य की आखिरी बूँद तक उसके मुँह में नहीं आ गई. दुबारा झड़ने के बाद छोटू का लुंड पूरी तरह मुरझा गया एक 18 साल के लड़के के लिए दो बार झड़ना बहुत होता है. पर शबाना की उत्तेजना अभी शानत नहीं हुई थी और लुंड चूस काट नेहा भी काफी उत्तेजित हो चुकी थी. झड़ने के बाद नेहा ने छोटू के लुंड को अपने मुँह से निकल दिया और शबाना की तरफ चेहरा घुमाकर अपना मुँह खोल कर उसमे भरा वीर्य शबाना को दिखाया. शबाना को यकीन नहीं हो रहा था की नेहा उस लड़के का वीर्य भी पी सकती है पर कुछ भी हो ये सब देखने में बहुत कामुक था और फर्स्ट टाइमर शबाना के लिए तो और भी ज्यादा कामुक था. उसके हाथ अब भी अपनी छूट को मसल रहे थे जिसे देख नेहा को भी उसकी उत्तेजना का एहसास हो रहा था. नेहा ने अपनी और उसकी उत्तेजना को साथ शांत करने का एक आईडिया सोच लिया.

नेहा ने छोटू का हाथ पकड़ कर उसे भी ज़मीन पर अपने बगल में बिठा लिया और हाथ का धक्का देकर उसे ज़मीन पर पीठ के बल लिटा दिया और खुद ने डोगग्य पोजीशन में अपनी गांड शबाना की तरफ कर ली और पीछे होती होती अपने छूट छोटू के चेहरे के एकदम ऊपर ले आई और अपनी कमर हिला हिला कर अपनी छूट छोटू के होंठो पर रगड़ने लगी. नेहा की छूट से अति मादक सुगंध और इस रगड़ से छोटू को एहसास हो गया था की ये क्या है पर नेहा ने भी उसकी सुसु वाली जगह को मुँह में लिया था तो वो मन कैसे कर सकता था इसलिए वो चुपचाप लेता रहा. इस ख़ामोशी नेहा ने hi अपनी आवाज़ से तोडा.

नेहा: छोटू अपनी जीभ निकालो और छतो इसे.

छोटू: पर ये तो आपकी सुसु वाली जगह है.

नेहा: तो क्या हुआ मैंने भी तो तुम्हारी सुसु वाली जगह को मुँह में लिया था तुम्हे मज़ा आया था न उसमे तुम मेरे लिए इतना नहीं कर सकते.

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अब छोटू कैसे इंकार कर सकता था छोटू ने अपनी जीभ निकल कर नेहा की छूट टच करा पहली बार तो उसे अजीब लगा पर धीमे धीमे उसने पूरी लगन से नेहा की छूट पर जीभ फिरना शुरू कर दिया. अपनी आँखों के सामने शबाना नेहा की छूट छत्ते देख रही थी जिसे देख कर उसे अपनी छूट पर चीटिया रेंगती सी महसूस हो रही थी. नेहा ने अपना चेहरा घुमा कर शबाना को देखा जो शर्म के मरे अपना गाउन उठा नहीं प् रही थी बस ऊपर से hi अपनी छूट रगड़ कर खुद को संतुष्ट करने की कोशिश कर रही थी. नेहा ने शबाना को इशारे से अपनी तरफ बुलाया पहले तो शबाना ने मन करा पर नेहा के ज्यादा ज़ोर देने पर देने पर बड़ी सावधानी से बिना आवाज़ करे नेहा के सामने पहुंच गई. डोगग्य पोजीशन में झुकी नेहा ने उसे बैठने का और अपने चेहरा करीब लेन का इशारा करा जैसे hi शबाना अपना चेहरा नेहा के नज़दीक ले नेहा अपने होंठ शबाना के होंठो से जोड़ दिए.

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अब तक पूरी तरह से उत्तेजित शबाना के लिए नेहा को रेसिस्ट करना आसान नहीं था. शबाना की आंखे भी मदहोशी में बंद हो गई वो ज़िन्दगी में पहली बार एक पैशनेट किश में खो गई थी वो भी अपनी hi सहेली के साथ. कुछ पल एक दुसरे को होंठो से खेलने के बाद नेहा ने शबाना के होंठो के बीच से अपनी जीभ अंदर दाखिल कर दी इस पल शबाना को अपने मुँह में कुछ गदा गदा खट्टा खट्टा सा तरल द्रव्य सा महसूस हुआ. शबाना को ये समझते देर न लगी की ये छोटू के वीर्य का hi कुछ अंश है जो नेहा इतनी देर से अपने मुँह में रोके हुए थी शायद उसके मुँह में डालने के लिए hi. शबाना ने अपना मुँह पीछे करने की कोशिश करि पर नेहा उसे कास कर पकडे हुए थी और छोटू की मौजूदगी में ज्यादा आवाज़ करना या ज़ोर लगाना पॉसिबल नहीं था नहीं तो उसे शबाना की मौजूदगी का एहसास हो जाता. इसलिए शबाना ने नेहा के आगे हथियार दाल दिए या शायद उसके मन में वीर्य का स्वाद लेने का एक्ससिटेमेंट था. नेहा ने अपने मुँह में भरा सारा वीर्य शबाना के मुँह में उड़ेल दिया और न चाहते हुए भी शबाना को उसे अपने हलक़ के अंदर उतरना पड़ा. शबाना के वीर्य पी लेने के बाद hi नेहा अपने होंठ उससे अलग करे. शबाना नेहा को गुस्से में घूरने लगी पर नेहा को तो इसमें बड़ा मज़ा आ रहा था पीछे छोटू उसकी छूट चाट रहा था तो सामने से वो शबाना के होंठो का रास पी रही थी. शबाना ने वह से उठने की कोशिश की पर नेहा को इरादा तो अभी कुछ और था. उसने शबनान को वह से उठने बल्कि हाथो दबाव दाल कर शबाना को भी अपने सामने पीठ के बल लिटा लिया. और हौले हौले उसके गाउन को जांघ में ऊपर की तरफ चढ़ाने लगी शबाना ने उसे रोकने की कोशिश करि नेहा ने उसके गाउन को उसकी पंतय तक ऊपर कर दिया.

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शबाना की गोरी मखमली मांसल जंघे नेहा के सामने नंगी थी. नेहा ने बिना देर किये अपने होंठ शबाना की जांघो पर रख दिए और अपनी जीभ निकल कर उसकी जांघ चेतना शुरू करदी. जांघ छत्ते छत्ते hi नेहा अपनी उंगलिया शबाना की पंतय में कास दी और उसके समझने से पहले उसकी पंतय नीचे सरका दी.

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पंतय नीचे सरकते hi नेहा ने अपने होंठ शबाना की छूट पर रख दिए. शबाना को एकदम से ज़ोर का झटका सा लगा धामु ने जब उसकी छूट छाती थी तब वो नशे में थी पर होशोहवास में पहली बार कोई उसकी छूट चाट रहा था वो भी उसकी अपनी पक्की सहेली. शुरू में तो शबाना ने नेहा को पीछे धकेलने की कोशिश करि पर धीमे धीमे उसे भी मज़ा आने लगा वो भी कमर ुचकर अपनी छूट नेहा के होंठो पर रगड़ने लगी. नेहा ने भी उसे निराश न करते हुए अपनी जीभ उसकी छूट के अंदर तक दाल दी और अपनी जीभ अंदर बहार करके उसकी छूट को रगड़ने लगी.

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नेहा तो एक परफेक्ट खिलाडी की तरह शबाना की छूट को अंदर से बहार तक मज़ा दे रही पर पीछे उसके नीचे लेता पहली बार किसीकी छूट चाट रहा छोटू नेहा की छूट को बहार से चाट चाट कर गीला कर रहा था पर आगे और पीछे दोनों तरफ से मज़ा ले रही नेहा के लिए ये एक अलग hi एक्सपीरियंस था उसने मर्दो के लुंड तो कई बार मुँह में लिए था पर किसी औरत की चाटने का ये उसका पहला एक्सपीरियंस था.

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काफी देर से उत्तेजित शबाना की छूट को चाट चाट कर नेहा बड़ी जल्दी चरम बिंदु पर पंहुचा दिया था और इस नै फंतासी को अनुभव कर नेहा भी अपने चरम बिंदु पर पहुंच चुकी थी. और कुछ hi पाप बाद नेहा ने अपनी छूट का पूरा भर छोटू के मुँह पर दाल दिया और नेहा की छूट का जूस छोटू के होंठो से होता हुआ उसके मुँह के अंदर जाने लगा.

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खुद झाड़ जाने के बाद नेहा अपनी गरम गरम सासे शबाना की छूट में छोड़ने लगी और अपनी जीभ उसकी छूट में डालकर गोल गोल घूमने लगी. नेहा की सासो की गर्माहट को शबाना भी ज्यादा देर बर्दाश्त न कर पाई और उसने भी अपना जूस नेहा के मुँह में hi छोड़ दिया.

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आज बिना कोई सेक्स करे hi शबाना दूसरी बार झाड़ गई थी.

नेहा और छोटू के नंगे जिस्म और शबाना का अधनंगा बदन बाथरूम की फर्श पर निढाल सा पड़ा था. जब कुछ देर वो वापस अपनी सेंस में आए तो सबसे पहले नेहा उठ कर कड़ी हुई उसके सामने आँख पर पट्टी बंधे नंगा छोटू खड़ा था और आँखे बंद करे अपनी छूट खोले शबाना लेती थी एक बार तो उसके मन में ख्याल आया की इन दोनों का hi सम्बन्ध बनवा दे पर नेहा और शबाना के शरीर में ज़मीन आसमान का अंतर था कोई भी उन्हें छू कर बता सकता था की ये नेहा नहीं शबाना है. नेहा ने हाथ का सहारा देकर छोटू को खड़ा करा और शबाना को वही छोड़ छोटू को लेकर बहार आ गई. नेहा और छोटू पूरी तरह नंगा कमरे से बहार अत देख बड़ी देर मोबाइल में हाथ में थामे बैठे लालू के मन में एक नै उम्मीद जगी शायद अब कुछ देखने को मिले पर बहार आकर नेहा ने छोटू की आँख में बंधी पट्टी खोल दी.

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नेहा: कैसा लगा अंदर मज़ा आया.

छोटू: बहुत

नेहा: तो अगर दुबारा ये मज़ा चाहिए तो वडा करना होगा की ये बाते इस कमरे से बहार नहीं जाएगी.

छोटू: मई किसीको कुछ नहीं बताऊंगा और जब तक आप यहाँ आपको कभी भी मेरी क्रीम की ज़रूरत पड़े आप मुझे बुला लेना.

नेहा उस बच्चे की मासूमियत पर है पड़ी. नेहा अपने कपडे पहनने लगी छोटू ने अपनी अंडरवियर मांगी पर वो तो अंदर गीली हो चुकी थी इसलिए नेहा के कहने पर छोटू नीचे शॉर्ट्स पेहेन कर चला गया. जाते जाते नेहा ने उसे गुद्बई किश दी और दुबारा मिलने का वडा भी करा जो वो कल्लू भूरा से भी कर चुकी थी.

छोटू तो फाइनली चला गया और छोटू के जाने के बाद लालू अपना मोबाइल ऑफ करने hi वाला था की उसे बाथरूम का गेट खुलता दिखा और शबाना को बाथरूम से बहार अत देख लालू शॉक रह गया. वो तो अब तक यही मान कर चल रहा था की कमरे में छोटू के साथ नेहा hi थी पर शबाना भी तबसे कमरे थी और बाथरूम के अंदर पता नहीं शबाना और छोटू के बीच क्या होगा. अब तक शबाना की जो सीढ़ी साधी छवि उसके दिमाग में थी वो उसे अब झूट लग रही थी. उसे लग रहा था की बेवजह उसे बिस्तर पर लेन के लिए इतना प्लान बनाया शायद डायरेक्ट पूछता तो भी मान जाती. उसे खुद पर बहुत गुस्सा आ रहा था की जिस फूल की वो अब तक महक भी न ले पाया उसे एक 16 साल का नौकर मसल कर चला गया.

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पर अब उसने तै कर लिया की अब वो और ज्यादा टाइम वास्ते नहीं करेगा आज रात की डांस पार्टी में शबाना को डायरेक्ट एप्रोच करेगा. लालू ने अपने सामने के दृश्य देखकर शबाना के बारे में अपनी hi राइ बना ली थी वो ये भूल गया था की हर बार जो चीज़ जैसी दिखती है जरुरी नहीं वैसी hi हो. उसने इस बात पर भी गौर नहीं करा की नेहा छोटू की आँख में पट्टी बांधकर बाथरूम ले गई और बहार लेकर पट्टी खोली. गुस्से और हवस ने उसके दिमाग को अँधा कर दिया था और पता नहीं वो आज रात की डांस पार्टी में क्या करने वाला था और उसका शबाना की लाइफ पर क्या असर पड़ने वाला था. अब लालू विक्रम शोभा नेहा शबाना नीतू कई लोगो अपनी अपनी वजह से सिर्फ एक चीज़ का इंतज़ार था और वो थी डांस पार्टी.

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डांस पार्टी

शाम ढल आई थी सब आज रात की डांस पार्टी के लिए तैयार हो रहे थे. शबाना ने अपनी तहज़ीब के मुताबिक एक बंद गले का फुल स्लीव्स कश्मीरी लंहगा तो नेहा एक सेक्सी बैकलेस टॉप एंड जीन्स शोभा ने परियो जैसी एक वाइट ड्रेस तो नीतू ने अपने बंगाली ट्रेडिशन की एक बंगाली ड्रेस और आरती को भी अपने जैसा hi तैयार किया था. सब हवेली के पीछे खुले मैदान में लगे शामियाने में पहुंच गए जहा लालू ने डांस पार्टी का बहुत बेहतरीन इस्तेमाल करा था तेज़ आवाज़ स्त्रीओ सिस्टम दज खाने के साथ पीने का भी पूरा बंदोबस्त था कोल्डड्रिंक के साथ शराब का भी एक काउंटर लगा था बारात में लखन सिंह की मौजूदगी में शराब नहीं चल सकीय थी उसकी कुमी आज पूरी करि जा रही थी. शोभा के पिता मलखान सिंह तो एक नंबर के दारुबाज थे वो तो सीधा दारू वाले काउंटर पर पहुंच गए और पेग पपे पेग पीकर बोतल खली करने लगे. सबके आ जाने पर लालू ने पार्टी शुरू की और डांस के लिए सबसे पहले ब्राइड और ग्रूम यानि शोभा और विक्रम को दज पर बुलाया और शरारत में रामलीला मूवी का एक सुशुअस सेक्सी सा गण बजा दिया

"अंग लगा दे रे मोहे अंग लगा दे रे

मई हु तेरी जोगणिया मोहे रंग लगा दे रे"

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गण काफी हॉट था मूवी में दीपिका रणवीर ने काफी सेक्सी परफॉर्म करा था पर यहाँ शोभा को अपने घरवालों के सामने इस गाने में नाचने में झीखक लग रही थी खासकर अपने पिता के सामने. उसने लालू से गण चेंज करने को कहा की सामने पापा बैठे है. पर लालू ने तेज़ आवाज़ में मलखान को ये बात बता दी शराब के डूबे मलखान ने डांस की इज़ाज़त दे दी की वो विक्रम की बीवी है जैसे चाहे जिस गाने पे चाहे उसके साथ नाच सकती है. मलखान से इज़ाज़त मिलने के बाद शोभा की भी झिझक कम हो गई. और शोभा विक्रम ने गाने के बोल के मुताबिक एक दुसरे को बहो में भर कर अंग से अंग लगा लिया. दोनों डांस में इतना खो गए की गण बढ़ने के साथ साथ उनका डांस भी और ज्यादा पैशनेट होता गया. शोभा इतनी ज्यादा सुन्दर लग रही थी की विक्रम भी एक पल के लिए भूल गया की उसे कुछ दिन शोभा को खुद से दूर रखना था. डांस करते करते विक्रम कभी शोभा को अपनी बहो में उठा लेता तो कभी उसके हाथो या गलो को चूम लेता. उनका डांस इतना ज्यादा कामुक था की मूवी में दीपिका रणवीर भी फ़ैल थे उनके सामने. उनका डांस देख वह मौजूद लोगो के मुँह खुले के खुले रह गए यहाँ तक की शोभा के अपने बाप मलखान सिंह का भी अपनी बेटी को अपने पति के साथ यु नाचता देख आज उसे अपनी मरहूम बीवी सरला की बहुत याद आ रही थी शोभा के नाक नख्शा रूप रंग आवाज़ फिगर सब सरला पर गए थे. शराब के नशे में उसे शोभा में अपनी बीवी सरला और विक्रम में अपना खुद का अक्सा नज़र आ रहा था और एक हाथ में शराब का गिलास पकडे पकडे वो दुसरे हाथ से अपना लुंड मसल रहा था. खली मलखान hi नहीं वह मौजूद कई लोगो के हाथ अपने अपने लुंड पर पहुंच गए थे विक्रम के दोस्तों कुंदन और प्रताप के भी.

देव: सालो अगर विक्रम को पता चल गया की तू उसकी बीवी को देख कर लुंड मसल रहा था तो तेरा ये लुंड तेरे शरीर से उखड देगा.

लालू: विक्रम की छोडो अगर शोभा को पता चल गया तो लुंड नहीं वो सीधा मुंडी उखाड़ेगी. इसलिए भावनाओ पर काबू रखो.

कुंदन: भाई नहीं रखा जाता यार लालू तू जल्दी से जल्दी उस बुर्के वाली को बिस्तर पर ला न भाई बड़ी तालाब लगी है.

कुंदन की बात ने एक बार लालू के मन में आज सुबह वाली बात याद आ गई और वो भी शबाना को वासना भरी नज़रो से घूरता हुआ शराब के पेग पीने लगा.

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विक्रम और शोभा नाचते नाचते एक दुसरे के काफी करीब आ गए थे पर विक्रम ने किसी तरह खुद पर काबू रखा और गण ख़तम हुआ उनकी परफॉरमेंस भी. उनकी परफॉरमेंस के बाद नेहा ने नीतू और आरती को डांस के लिए पुकारा नीतू और आरती जो पूरी तरह बंगाली ऑउटफिट में थी अपनी ड्रेस को सूट करते हुए गाने पर hi उन्होंने डांस करा.

"रे डोला रे डोला रे डोला

तन डोला मन रे डोला रे डोला"

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नीतू को एक जबरदस्त बंगाली डांसर थी पर आरती ने भी उसे कांटे की टक्कर दी विक्रम शोभा की सिज़्ज़्लिंग डांस परफॉरमेंस के बाद नीतू और आरती ने अपनी परफॉरमेंस से चार चाँद लगा दिए. इधर विक्रम ने प्लान के मुताबिक शोभा की ड्रिंक में नशे की गोली मिला दी और कोल्डड्रिंक के बहाने से उसे दो तीन पेग व्हिस्की पीला दी.

उनके बाद नेहा ने खुद मोर्चा संभाला उसने दज पर अपने मिजाज़ का गण बजवाया.

"मेरी शेम अवध से आई है

राते बम्बई से मंगाई है

दिल्ली के छोरे भी पिंडी के मूंदे भी

कहते कहा से आए शकीरा शकीरा"

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गाने के बोल के मुताबिक नेहा ने शकीरा की तरह जो कूल्हे हिला हिला कर जो डांस करा जो जलवे दिखाए जवान कुंवारे तो कुंवारे शादीशुदा भूढो के दिलो के अरमान भी जवान कर दिए. पूरा पंडाल नेहा के हर ठुमके पर सीटियों और तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठा. ऐसा कोई मर्द नहीं था जिसका दिल ज़ोर ज़ोर से नहीं धड़क रहा था.

नेहा की परफॉरमेंस ख़तम हुई नेहा की परफॉरमेंस ख़तम होने के बाद विक्रम के दोस्त कुंदन देव प्रताप हाथ में दारू की बोतल लेकर दज पर आ गए और अपना गण बजवाया.

" उनके नशे में जलते रहे

लड़खड़ाए कभी कभी सँभालते रहे"

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उन्होंने लालू को भी बुलाया पर लालू के दिमाग में इस वक़्त बस शबाना hi चल रही. उन तीनो कूल्हे हिला हिला कर भोदी hi सही पर ठीक थक परफॉरमेंस दी.

उनके बाद कुछ और लोगो ने भी अपनी अपनी परफॉरमेंस दी. नेहा ने शबाना को डांस के लिए इन्विते करा पर शबाना को झिझक हो रही थी. शादी से पहले वो कॉलेज फेस्ट में काफी अच्छा डांस करती थी पर शादी के बाद उसने अपनी ज़िन्दगी को काफी नीरस बना लिया था सबके बहुत रिक्वेस्ट करने पर वो डांस करने को मन गई.

" नज़र जो तेरी लगी मई दीवानी हो गई

दीवानी मई दीवानी मस्तानी हो गई"

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क्या डांस करा उसने सच में दीपिका पादुकोणे भी फ़ैल थी उसके आगे ऊपर से उसका संगमरमरी बदन किसी अप्सरा से कम नहीं था. अब तक लालू भी नशे में फुल टाइट हो गया था और शबाना नाचती शबाना में उसे एक रंडी का रूप नज़र आ रहा था जो हाथ के इशारो से उसे बुला रही थी और लालू भी खींचा हुआ स्टेज पर पहुंच गया और इससे पहले कोई कुछ समझता या कुछ करता लालू ने शबाना को अपनी बहो में भर लिया और अपने होंठ उसके होंठो की तरफ ले जाने लगा. इस अचानक से हुए हमले से शबाना एकदम चौंक गई उसने पूरी ताकत से लालू को अपने से दूर धकेल दिया और एक तेज़ झापड़ लालू के गाल पर रसीद कर दिया. नशे में टुन्न लालू लड़खड़ा कर मुँह के बल वही ज़मीन पर गिर. वह मौजूद लोग एक लड़की से झापड़ खाए लालू को देख उसकी हसी उड़ने लगे लालू का सारा नशा एक पल काफूर हो गया और उसकी आँखे गुस्से और क्रोध से लाल हो गई. वह मौजूद औरते लालू की इस हरकत पर उसे फटकारने लगी गुस्से और नशे में चूर लालू खड़ा हुआ पर देव कुंदन प्रताप ने उसे संभल लिया और मामले को शांत करने के लिए एक्सक्यूज़ दिया की इसने ज्यादा पी ली और खींचते हुए लालू को वह से ले गए. पर पार्टी का मूड स्पोइल हो चूका था. नशे की गोली और दारु का असर अब तक शोभा पर भी हो चूका था उसका सर भी घूम रहा था. विक्रम ने नेहा से रिक्वेस्ट करि की वो शोभा को उसके कमरे तक छोड़ दे.

नेहा: शबाना दी आप रूम में चलो मई शोभा दी को उनके रूम में छोड़ कर अति हु फिर धामु को आपके रूम तक ले आउंगी और आज रात शोभा दी के रूम में hi रुक जाउंगी.

नेहा ने जानबूझ कर शोभा के रूम में रुकने की बात कही क्युकी उसे रात में उस अजनबी से मिलने जाना था. पर लालू की हरकत ने शबाना का भी मूड ख़राब कर दिया पर नेहा के बार बार कहने पर वो मान गई और अपने रूम में चली गई. नेहा शोभा को लेकर उसके रूम में जाने लगी तभी नीतू आरती ने भी नेहा को इशारा कर दिया की वो जा रही है और सुबह तक आएंगी और सबसे नज़र बचा कर हवेली से निकल गई. शोभा नशे में पूरी तरह टल्ली थी वो जाते hi अपने बिस्तर पर निढाल होकर पसर गई. शोभा को वही छोड़ नेहा वापस शबाना के रूम में आ गई और रात में पहनने के कपडे कहकर वो शादी के जोड़े वाला पैकेट अपने साथ ले लिया और शबाना को को एक सेक्सी निघ्त्य दी पहनने के लिए जैसा की उसने उसे आज सिखाया था.

नेहा: आप तैयार रहना मई सन्नाटा हो जाने पर धामु को ले कर अति हु.

इतना कहकर नेहा वह से निकल गई पर शोभा के रूम में जाने की बजाए नीतू आरती के रूम में चली गई क्युकी उसे तो तैयार होकर उस स्ट्रेंजर से मिलने जाना था. पैकेट को वही रख वो बहार बस मलखान सिंह और विक्रम को शराब पीटा देख धामु के लेने उसके रूम की तरफ बाद गई पर उसे नहीं पता था की हर मवमनट पर नज़र राखी जा रही थी. गुस्से में पागल लालू बस एक मौके के इंतेज़्ज़र में था. नेहा धामु को लेकर शबाना के रूम तक पहुंच गई और धामु अंदर जाने को कहकर वापस नीतू और आरती के रूम में चली गई. धामु ने दरवाज़ा खटखटाया क्युकी वो अंदर से बंद था शायद शबाना अंदर नेहा की दी हुई निघ्त्य पेहेन रही थी. निघ्त्य पेहेन कर शबाना ने जैसे hi दरवाज़ा खोला उसकी आँखे फटी की फटी रह गई क्युकी बहार धामु की जगह लालू था क्युकी जब तक वो दरवाज़ा खोलती तब तक लालू ने अपने साथियो की मदद से धामु को ज़बरदस्ती वह से हटा दिया था. इससे पहले की शबाना कुछ समझ पति या दरवाज़ा बंद करती लालू ने उसे तेज़ धक्का दिया और शबाना मुँह के बल अंदर की और गिरी और लालू भी पीछे से अंदर आ गया और अंदर से दरवाज़ा बंद कर लिया. कुंदन और प्रताप धामु का मुँह बंद करके उसे वापस उसके कमरे में छोड़ आए और देव वही बहार खड़ा पहरेदारी देने लगा.

नेहा तो धामु को अपनी सहेली के दरवाज़े पर छोड़ कर बेखबर थी इस बात से अनजान की आज की रात तो उसकी सहेली पर कितनी भरी गुजरने वाली थी. वो खुद को एक दुल्हन के रूप में तैयार करने लगी उस स्ट्रेंजर से होने वाली आज रात की मुलाकात के लिए पता नहीं वो स्ट्रेंजर कौन होगा एक्ससिटेमेंट के साथ उसे थोड़ा दिर भी था की पता वो स्ट्रेंजर उसके साथ क्या करेगा पर फंतासी की उसकी आदत उसे पीछे हटने नहीं दे रही उसकी बिना सोचे समझे नै नै फंतासी जीने की ये आदत न सिर्फ उसकी बल्कि शबाना लालू और न जाने जाने कितनी ज़िन्दगियों को प्रभावित करने वाली थी इस बात का उसे अंदाज़ा भी नहीं था.

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बहार मलखान अब भी अपनी बीवी के खयालो में दारू पीने में व्यस्त था और विक्रम उसे कंपनी दे रहा था और रोकने की कोशिश भी कर रहा था. इधर नीतू और आरती भी अघोरी की तै की गई जगह पर पहुंच गए और साथ में वो साया भज जहा आज अघोरी पहले से मौजूद उनका इंतज़ार कर रहा था. अघोरी को वह देख वो रूहानी साया वह से हैट गया ताकि अघोरी को उसकी मौजूदगी का एहसास न हो जाए. वह से अघोरी नीतू और आरती जंगल में बने उस शिव मंदिर की तरफ चल पड़े जहा उन्हें आज रात शिवलिंग का रुद्राभिषेक करना था.

शोभा नशे में धुत्त थी नेहा उस अनजान मिलान को लेकर एक्ससिटेड थी शबाना अपने कमरे में लालू की मौजूदगी से दर में थी नीतू उस ब्रह्मचारी की तलाश को लेकर चिंतित थी तो उसकी सहेली आरती अपने साथ मौजूद उस से से और अपनी तरफ बाद रहे एक नए खतरे से पूरी तरह अनजान और काकातुआ के जंगल जहा हो रही पूजा एक नै प्रेम सम्बन्ध के बीज को अंकुरित करने वाली थी. रात तो बस एक थी पर अलग अलग जगह अलग अलग लोगो पर एक hi समय में अलग अलग प्रभाव डालने वाली थी पर पता नहीं किनके लिए ये रात अच्छी थी किनके लिए बुरी पर शबाना के लिए तो निश्चित hi ये रात बहुत बुरा सपना बनने वाली थी.

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इधर काकातुआ के जंगल में विनीता और लखन ने बृहस्पति पूजन के दो चरण बैल मुक्ति और चट्टान विखंडन उन्होंने पहले hi पुरे कर लिए और अब दिन ढलने के साथ उन्हें शेष बचे तीन चरण पुरे करने और वास्तव में ये तीन चरण hi सबसे मुश्किल थे नग्न स्नान, मंत्र जाप, और आलिंगनबद्ध निद्रा. खासकर आलिंगनबद्ध निद्रा पर अघोरी ने कहा है तो करना तो था hi अगर वो दोनों असलियत के पति पत्नी होते तो ये उनके लिए बहुत एक्सकियेमेंट वाली चीज़ थी खुले आकाश के नीचे एक दुसरे को बहो में भरकर सोना पर वो सिर्फ 7 दिन के पति पत्नी और 5 दिन पहले मिले है ऐसे में इन अधनंगे कपड़ो में एक दुसरे को आलिंगन में भरकर सोना बहुत बड़ी बात थी पर न कहने की कोई गुंजाईश hi नहीं थी. सबसे पहले खुद को मंत्र जाप के लिए पूरी तरह शुद्ध करना था जिसके लिए उन्हें पूरी तरह निवस्त्र होकर पास बहती नदी में स्नान करना था पर खुले में यु लखन सिंह के सामने नंगे होकर स्नान करना विनीता के लिए असंभव पर लखन भी चरित्र के अच्छे और नेक इंसान थे वो विनीता के मन की हालत समझ रहे थे उन्होंने इसका समाधान भी कर लिया.

लखन: अघोरी बाबा ने हमे नग्न स्नान के लिए बोलै है एक साथ स्नान के लिए नहीं आप यहाँ नाहा लीजिये मई थोड़ा आगे चला जाता हु जहा से मई आपको देख न सकू पर आपकी आवाज़ मुझ तक पहुँचती रहे. अगर आपको कोई परेशानी हो तो आप आवाज़ लगा देना मई तुरंत यहाँ आ जाऊंगा.

विनीता को लखन का सुझाव सही लगा और अब तक लखन के व्यव्हार से वो इतना तो समझ गई थी की लखन सिंह एक अच्छे चरित्र के व्यक्ति है वो कभी भी उसका गलत फायदा नहीं उठाएंगे. लखन सिंह विनीता को वही छोड़ कुछ दूर चले गए वह से विनीता को आवाज़ लगाकर उन्होंने विनीता को आश्वस्त कर दिया की विनीता जब चाहे उन्हें आवाज़ देकर बुला सकती है. बेशक लखन वह से चले गए थे पर फिर भी यु खुले आकाश के नीच नंगे होकर नहाना भी विनीता के लिए एक नया अनुभव था. विनीता ने एक नज़र इधर उधर देखा की कही कोई उसे देख तो नहीं रहा फिर सकुचाते हुए अपने पत्तो के बने कपडे उतर कर वही एक पत्थर पर रख दिए और नंगी hi पास बहती नदी में घुस गई.

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पानी उम्मीद से ज्यादा ठंडा था और नेहा की योनि को अंदर तक ठंडा कर रहा था. पर एक जंगल में खुले आकाश में चांदनी रात नंगे होकर नदी में नहाने का अपना अलग रोमांच था जो शब्दों में बया करना मुश्किल था. विनीता ने पानी में चार पांच डुबकी मरी और अच्छे से नाहा कर पानी से बहार आ गई.

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विनीता ने अपने वो पत्तो के कपडे वापस पेहेन लिए. कपडे पेहेन कर विनीता ने लखन जी को आवाज़ लगा और कुछ hi देर में लखन झाड़ियों की ूत से बहार आते नज़र आए पर वो हाथ में कुछ पकडे थे उनके हाथ केले के बड़े बड़े कई पत्ते थे.

लखन जी के करीब आने पर विणनीता ने इन पत्तो को लेन की वजह पूछी तो लखन ने बड़ा सकुचाते हुए पूजा के अगले चरण का जिक्र कर दिया जो था मंत्रजाप और जिसमे विनीता लखन की गोड़ में कमल मुद्रा यानि विनीता का चेहरा लखन की ओर और पेअर लखन की कमर के इर्द गिर्द लपटे हुए होने चाहिए.

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पर विनीता अब भी इस मंत्रजाप की मुद्रा में इन पत्तो की भूमिका समझ नहीं आई तो लखन ने कम शब्दों बड़े झेपते हुए विनीता को समझाया की ये पत्तो का बंडल वो अपनी टांगो के ऊपर रख लेंगे और विनीता सीधे उनकी गोड़ में बैठने की बजाए इन पत्तो पर बैठ जाए इससे शायद उसे उनकी गोड़ में बैठने में थोड़ा कम असहज महसूस. अब विनीता को भी अपने सवाल पर शर्म आ रही थी लखन जी का कहना सही था न विनीता और न hi लखन इन पत्तो के नीचे चड्डी पहने थे इसलिए कमल मुद्रा में बैठने पर उनके गुप्तांगो यानि योनि और लिंग का थोड़ा बहुत संपर्क और घर्षण अवश्य होता और ये स्थिति विनीता के लिए निश्चित hi काफी असहज करने वाली होती इसलिए लखन का ये पत्तो वाला उपाय विनीता को भी काफी अच्छा लगा की किस तरह लखन बिना कहे hi उसमे मन की दुविधा को समझ गए.

लखन वही मौजूद एक शिला पर आसान की मुद्रा में पालथी मार कर बैठ गए और केले के पत्तो का वो बंडल अपने पैरो पर रख लिया जिससे उनकी जंघे एवं उनके बीच का यानि लिंग स्थान भी पूरी तरह धक् गया. पर फिर भी विनीता के मन में यु उनकी गोड़ में बैठने में अब भी कुछ संकोच था पर लखन ने विनीता को भरोसा दिलाया की बस 1001 मंत्र जाप है हम बहुत शीघ्रत से ये 1001 मंत्र जाप पूरा कर लेंगे. विनीता को अब ताज लखन पर पूरा भरोसा हो चूका था की वो इस स्थिति का कभी भी अनुचित लाभ नहीं उठाएंगे. अपने मन की दुविधा को कण्ट्रोल करते हुए विनीता उन पत्तो के ऊपर लखन की गोड़ में आकर बैठ गई और अपने टाँगे लखन की कमर के इर्द गिर्द लपेट कर कमल मुद्रा में बैठ गई जिसमे उनका चेहरा एक दुसरे के सामने था और विनीता के नितम्ब सीधा लखन के लिंग के ऊपर थे पर बीच में पत्तो की परत होने के बावजूद लखन को अपने लिंग पर विनीता के नितम्ब का दबाव साफ़ महसूस हो रहा था.

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कमल मुद्रा मि सबसे बड़ी खासियत यही थी की इसमें स्त्री पुरुष के जननांग एक दुसरे के बेहद करीब आ जाते है जिस वजह उत्तेजना का बढ़ना स्वाभाविक है और चेहरा एक दुसरे की तरफ और बेहद करीब होने की वजह से वो दुसरे के अंदर उमड़ते घुमड़ते उत्तेजना के भावो को भी स्पष्ट देख सकते है. विनीता लखन ने उस उत्तेजक अवस्था में hi मंत्रजाप प्रारम्भ कर दिया. विनीत पीछे गिर न जाए इसलिए लखन को विनीता को कमर से पकड़ना पड़ा और अपने हाथ विनीता की नंगी कमर पर रखने. लखन के हाथ अपनी कमर पर स्पर्श होना hi विनीता के लिए अत्यंत उत्तेजक था और विनीता के शरीर में कम्पन हिना स्वाभाविक था और इस कम्पन के कारन विनीता के कूल्हे भी कम्पित होने लगे जिस वजह से वो लखन के लिंग पर घर्षण कर रहे थे और एक्शन के अपोजिट रिएक्शन के रूप में लखन के लिंग में भी हरकत प्रारम्भ हो गई और वो और नीचर से झटके खाने लगा जीवन में पहली बार विनीता के अपनी योनि के इतना करीब किसी पुरुष के लिंग का एहसास हो रहा था. विनीता के हाथ खुद बा खुद लखन के पीठ पर कास गए और लखन विनीता दोनों की सासे तीव्र चलने लगी मंत्र जाप करते उनके होंठ भी लड़खड़ाने लगे पर जल्द hi लखन को विनीता की उत्तेजना का एहसास हो गया उसने विनीता को झकझोर कर पुनः संयत करने का प्रयास करा विनीता को भी अपनी उत्तेजना पर अब बड़ी शर्म आ रही थी. विनीता लखन ने पुनः मंत्र जाप पर ध्यान केंद्रित करते हुए कुछ hi घंटो में 1001 मंत्र जाप करके बृहस्पति पूजा का ये चौथा चरण भी पूरा कर लिया.

अब उन्हें अनंत आकाश के देवता ज़ीउस उर्फ़ बृहस्पति के उस खुले आकाश के नीचे एक दुसरे को आलिंगनबद्ध करके ये पूरी रात कटनी थी. कुछ घंटो के मंत्र जाप में एक दुसरे को आलिंगन में लेने में hi उत्तेजना के मरे उनकी हालत ख़राब हो गई थी अब तो उन्हें पूरी रात कटनी थी. पर इतनी देर विनीता के नितम्बो के घर्षण ने लखन के लिंग को पूरी तरह उत्तेजित कर दिया था और नीचे लखन को भी अब उसे शांत करना मुश्किल था और विनीता को भी लखन की कमर पर लिपटे पत्तो के उठान से इस बात का आभास हो रहा था. अब इस स्थिति को कण्ट्रोल करने का एक hi उपाय था की उस लिंग की गर्मी को बहार निकल दिया जाए और इसके लिए लखन को एक एकांत जगह की ज़रूरत थी इसलिए विनीता को वही छोड़ लखन झड़ियो के पीछे चला गया. कही न कही विनीता को भी आभास था की लखन सिंह झाड़ियों के पीछे क्यों गया अपने लिंग की गर्मी को शांत करने उसकी सहेली का ससुर उसके जिस्म की गर्मी से उत्तेजित होकर झाड़ियों के पीछे हस्तमैथुन कर रहा होगा वो भी शायद उसके बारे में सोच सोच कर और विनीता ये जानते हुए भी लखन के बारे गलत नहीं सोच सकती थी क्युकी कही न कही वो भी उनकी मजबूरी को समझती थी. विनीता का सोचना सही था लखन सच में झाड़ियों के पीछे अपने लुंड को बहार निकल कर उसे अपने हाथो ने लेकर तेज़ तेज़ झटके देकर उसे शांत करने का प्रयास करने लगा. अपनी पत्नी के मरने के बाद आज पहली बार वो उत्तेजित हुआ था वो भी अपनी बहु की सहेली को स्पर्श करके ये विचार लखन के लिए बहुत hi घृणित था पर मन पर तो किसी वाश नहीं होता तो लखन का क्या होता. उसने मुठ मरते हुए अपनी पत्नी के साथ बिताए अपने अंतरंग पालो को याद करने की कोशिश करि पर अचानक उसे अपनी पत्नी के चेहरे की बजाए विनीता का चेहरा नज़र आने लगा और न चाहते हुए भी वो विनीता के शरीर के आकर्षण में अपने लिंग को तेज़ तेज़ हियलता चला गया इस वक़्त लखन सिंह का अपनी भवबाव पर कोई काबू न था कई सालो बाद आज वो स्खलन के करीब था और अपने खयालो में hi विनीता के साथ प्रेमक्रिया में दुबे लखन ने उत्तेजना के चरमसुख को प् लिया उसके लिंग से निकलता गदा गदा वीर्य वही झाड़ियों की पत्तियों पर गिरने लगा.

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झड़ने के पश्चात् लखन कुछ देर यही तेज़ तेज़ सासे भरता वह खड़ा रहा पर जब वो थोड़ा रिलैक्स हुआ तो उसे कुछ देर पूर्व के अपने विचारो पर घिन आने लगी की एक भली महिला उसके परिवार के लिए इतना सब कर रही है वो उसके बारे में ये सब सोच रहा है ये सब सोच सोच कर उसे पछतावा होने लगा पैट उत्तेजना पर किसी का कोई बस नहीं रहता पर लखन को अब ये भी चिंता थी की यदि ऐसी क्रियाये आगे भी हुई तो वो कैसे खुद पर काबू करेगा और कैसे आज पूरी रात उस महिला को आलिंगन में भर कर सोएगा. उसने खुद को शांत करा अपने कपड़ो को ठीक करा और झाड़ियों से बहार आ गया. झाड़ियों से बहार आते लखन को देख विनीता की नज़रे अपने आप उनके जगहों के बीच चली गई वह कुछ देर पहले मौजूद उभर अब गायब हो गया था इसका मतलब साफ़ था उन्होंने झाड़ियों के पीछे क्या करा है बेशक विनीता ने सम्भोग न करा हो पर उसका ज्ञान तो है hi अब वो करते वक़्त उनके मन में क्या ख्याल आए होंगे ये तो सिर्फ लखन जी hi जानते है. वो दोनों hi एक दुसरे से नज़रे मिलाने में सकुचा रहे थे. रात काफी गहरा आई थी पास बहती नदी की वजह से हवा भी काफी ठंडी थी और विनीता लखन के कपडे भी ऐसे नहीं थे जो उन्हें ठण्ड से बचा सके. ये रात काटने के लिए उन्हें गर्मी का बंदोबस्त करना hi था और ये गर्मी उन्हें एक दुसरे के जिस्म की गर्मी से मिल सकती थी पर अभी कुछ देर पहले की उत्तेजना को संभाला उनके लिए मुश्किल हो गया साडी रात कैसे काटते. विनीता ौड लखन दोनों किये साडी रात एक दुसरे को आलिंगनबद्ध करके सोना बहुत असहज था. उन्होंने एक विचार करा की रात्रि का एक प्रहर यानि 12 से 3 वो लड़की जलाकर एक दुसरे से बात करते हुए जाग कर बिता देंगे और एक दो घंटे के लिए एक दुसरे को आलिंगन में लेकर सो लेंगे इससे उन्हें ज्यादा वक़्त उस अवस्था में भी नहीं रहना होगा और पूजा की विधि भी पूरी हो जाएगी.

लखन कुछ लकडिया बीन लाया और पत्थर को रगड़ रगड़ कर लकड़ियों में आग भी लगा ली. विनीता वही बैठी उन्हें लकड़ियों में आग लगते देख रही थी और उनके बारे में सोच रही थी

"उनके बदन की कसावट उनका मरदाना व्यक्तिवा उनका हर काम में निपुण होना औरतो को इतना सम्मान देना किसी को उनकी तरफ मोहित कर देता फिर भी अपनी पत्नी के जाने के बाद उन्होंने शादी नहीं की और एक मेरा पति है जिसने शादी की पहली hi रात मुझे ठुकरा दिया मुझे जीवन भर का धोका दिया मेरी ज़िन्दगी बर्बाद कर दी. काश मेरे पति में भी लखन जी के व्यक्तिवा का चौथाई अंश भी होता तो मेरा जीवन कितना अच्छा होता काश लखन जी जैसा hi कोई मेरा पति होता काश लखन जी hi मेरे पति होते छी छी ये मई क्या सोच रही hi वो मेरी सहेली के ससुर है मई उनकी तरफ कैसे आकर्षित हो सकती हु लोग क्या कहेंगे. मई यहाँ बस एक पूजा के लिए आई हु मुझे खुद पर काबू रखना होगा. पर जब उन्होंने मुझे स्पर्श करा था तो मेरा रोम रोम हिल गया था मेरा जिस्म उत्तेजना से भर उठा था पता नहीं ये पूजा मुझसे और क्या क्या कराएगी. वो तो लखन जी अच्छे इंसान है उनकी जगह कोई और होता तो मेरी उत्तेजना का लाभ उठाकर पता नहीं मेरे साथ क्या क्या कर देता."

विनीता सोच में hi डूबी थी की लखन ने उसे आवाज़ देकर आग के नज़दीक आने को कहा. लखन जी ने लकड़ियों में आग लगा ली थी और वो दोनों वही आग के करीब बैठ कर ठंडी हवाओ में खुद को गर्म रखने का प्रयास करने लगे. वक़्त काटने के लिए वो यहाँ वह की बाते करने लगे ताकि उन्हें नींद न आए और दो तीन घंटे वो यही बात करते करते hi काट ले. लखन विनीता को अपने परिवार के बारे में बताने लगे की पहले उनका परिवार कितना रूढ़िवादी था परिवार में पैदा हुई कन्याओ को मार देता था शायद यही वजह थी जो उनके परिवार को ये श्राप भुगतना पद रहा है. वो विनीता का शुक्रिया भी कर रहे थे की आज अगर वो इस पूजा के लिए तैयार न होती तो पता नहीं कब तक उनके परिवार को ये श्राप भुगतना पड़ता. अपने बार में काफी देर बाते करने के बाद बातो बातो में लखन ने विनीता से उसके परिवार के बारे में पूछा उसकी शादीशुदा ज़िन्दगी कैसी उसके पति कैसे है क्या करते है और वो क्या उन्हें इस पूजा के बारे में बताएगी. अपनी शादीशुदा लाइफ को सोच विनीता भावुक हो गई एक तरफ वो लखन जी से उनकी बीवी के साथ बिताए खुशनुमा पल सुन रही थी और दूसरी तरफ शादी की रात अपने पति के धोके को याद करके उदास हो जाती. विनीता को उदास देख लखन ने उसकी उदासी का कारन जानना चाहा.

लखन: आप कुछ उदास लग रही क्या बात है.

विनीता: नहीं कोई बात नहीं है.

लखन: कुछ तो है गम बाटने से कम तो नहीं हो जाता पर दिल हल्का हो जाता है और सहने की ताकत आ जाती है.

विनीता: कुछ गम ऐसे होते है जो हमारी ज़िन्दगी का अटूट हिस्सा बन जाते है और हम छह कर उन्हें किसी के साथ नहीं बात सकते.

लखन: ठीक है अगर आप नहीं बताना चाहती तो मई आपको फाॅर्स नहीं कर सकता मई इतना हक़ नहीं रखता.

लखन की बात विनीता के दिल को छुप और वो बिना रुके शादी की रात से अब तक की अपनी सच्चाई लखन को बताती चली गई: शादी की पहली रात हमारी सुहागरात को hi मेरे पति ने मुझे एक सौतन का तोहफा दे दिया था की वो किसी और को चाहते है और उन्होंने ये शादी बस अपने पिता के दबाव में करि है.

लखन: अपने उनसे कहा नहीं की अपने पिता को खुश करने के लिए उन्होंने आपकी ज़िन्दगी बर्बाद क्यों करि.

विनीता: कहा बहुत भला बुरा कहा पर उससे हासिल क्या होने वाला था सोचा शायद वक़्त के साथ मेरे प्यार के कारन ये उसे भूल जाएंगे और मुझे अपना लेंगे पर...... दो महीने पहले मेरे ससुर का देहांत हो गया और यहाँ आने से कुछ दिन पहले hi इन्होने मुझे बताया की इन्होने हमारे डाइवोर्स के लिए कोर्ट में अप्लाई कर दिया है अब पिताजी नहीं रहे तो हमे साथ रहने की भी ज़रूरत नहीं है 6 महीने बाद हमारे डाइवोर्स पर कोर्ट की मुहर लग जाएगी.

लखन: क्या शादी की रात से आज तक उन्होंने कभी आपको छुआ भी नहीं कभी आपसे प्यार नहीं जताया.

विनीता: उन्हें कई बार मुझसे अपने किये की माफ़ी मांगी पर शादी की रात से आज तक मई कुंवारी हु बस नाम के लिए ये मंगलसूत्र और मांग में सिन्दूर है.

ये कहते हुए विनीता की आँखे आंसुओ से भर गई अब तक विनीता की सरे बाते ध्यान से सुन रहे लखन सिंह से विनीता का रोना बर्दाश्त न हुआ और विनीता के बगल में आकर बैठ गए और विनीता के आंसू पोछते हुए उसे दिलासा देने की कोशिश करने लगे.

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लखन: आप क्यों रो रही है इसमें आपकी कोई गलती नहीं है ये उनका दुर्भाग्य है जो वो आप जैसी इतनी अच्छी महिला का महत्व न समझ सके. आपकी लाइफ में इतना कुछ होने के बावजूद आप मेरे परिवार के संकट को दूर करने के लिए इतना कुछ कर रही है. जिस दिन अपने इस पूजा के लिए है करि थी उस दिन मेरे दिल में आपके लिए बहुत सम्मान था पर आज ये सब जानकर वो सम्मान कई गुना बाद गया. आप सच में एक महँ महिला है जो अपने से ज्यादा दूसरो के बारे में सोचती है. और ज़िन्दगी कभी किसी के लिए रूकती नहीं बस पहाड़ी रास्तो की तरह घुमाव लेती है ये समझ लीजिये आपकी ये शादीशुदा ज़िन्दगी भी ज़िन्दगी का एक घुमाव है और 6 महीने बाद डाइवोर्स के बाद आपकी नै ज़िन्दगी शुरू होगी आपको उससे भी ज्यादा अच्छा ज्यादा बेहतर जीवनसाथी मिलेगा जो आपको चाहेगा.

विनीता: दुबारा शादी इस शादी से hi दिल इतना टूट गया की अब दुबारा शादी करने की हिम्मत नहीं.

लखन: ऐसा मत सोचिये उस इंसान के लिए आंसू बहा कर खुद को तकलीफ देकर क्या फायदा जजसे आपके आंसुओ आपकी तकलीफ की फिक्र hi न हो. हर इंसान एक जैसा नहीं होता और वक़्त भी एक जैसा नहीं रहता मेरा दिल कहता है आपको उससे कही बेहतर जीवनसाथी मिलेगा.

लखन की दिल को छू लेने वाली ये बाते विनीता के मन में उतर गई जीवन में पहली बार कोई उसे अपना सा लग रहा था जो उसे महत्व दे रहा था. पति के तिरस्कार ने उसका खुद पर से विश्वास डगमगा दिया था पर लखन की बातो से वो एक बार फिर खुद पर भरोसा जाग उठा जीवन में फिर खुशिया लौटने की उम्मीद जाग उठी. यही सब सोचते सोचते विनीता ने अपना सर लखन के कंधे पर टिका दिया लखन ने भी विनीता की हालत को समझते हुए उसे नहीं टोका. काफी देर वो यही चुपचाप बैठे रहे.

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रात काफी गहरी हो चुकी थी लकडिया भी ख़तम होने को आई थी और दिन भर के थके हुए उन्हें नींद भी बहुत आ रही थी पर प्रश्न अभी भी वही क्या बचे हुए कुछ घंटे वो एक दुसरे को आलिंगन में भर कर बिना उत्तेजित हुए काट पाएंगे. पर लखन के साथ गुज़ारे आज के लम्हो ने विनीता और लखन को एक दुसरे के और करीब ला दिया था और अब विनीता ने पूरी तरह से दर्द निश्चय कर लिया था की वो इस पूजा के हर चरण को हर कीमत पर पूरा करेगी लखन जी की इस पूजा को किसी कीमत पर भांग नहीं होने देगी चाहे उसे खुद इसकी कोई भी कीमत क्यों न चुकानी पड़े. पर वो अब भी अपने मन के इन भावो को समझ नहीं प् रही थी की ये भाव उसके अपनी सहेली शोभा के प्रति है या लखन जी के लिए. लखन जी के लिए ये सिर्फ उसका आदर भाव है या किसी तरह का कोई और भाव. पर लखन जी भी अब नींद के झोंके खा रहे थे.

विनीता: आपको भी नींद आ रही है अब हमे सोना चाहिए.

लखन: नहीं नहीं मई ठीक हु हम अभी कुछ देर और जाग सकते है.

विनीता: नहीं पूजा का ये चरण आलिंगनबद्ध निद्रा भी पूरा करना है उसके लिए हमे सोना तो होगा hi.

लखन: नहीं जब आप तैयार हो हम तब सो लेंगे ऐसी कोई बात नहीं है.

विनीता: नहीं दरअसल मुझे भी अब नींद आ रही है हम दोनों कोशिश करेंगे की लेटते hi सो जाए ताकि हमे असहज महसूस hi न हो वैसे भी रात के तीन बज चुके होंगे दो घंटो में hi सुबह हो जाएगी इतनी देर तो सो लेना चाहिए.

लखन: ठीक है जैसा आप ठीक समझे अगर आपको भी नींद आ रही है तो हम सो जाते. आप मेरी तरफ पीठ कर के लेट जाइये मई पीछे से आपको आलिंगन में भर लूंगा इस अवस्था में मंत्रजाप वाली अवस्था से कम असहज महसूस होगा.

विनीता: हम्म यही सही रहेगा.

विनीता लखन की तरफ पीठ करके ज़मीन पर लेट गई बेशक कुछ देर पहले एक दुसरे के स्पर्श से उनके मन जो उत्तेजना जगी थी पर अब वो इन बातो से अब एक दुसरे के प्रति सम्मान में बदल चुकी थी. लखन भी झिझकते हुए विनीता के पीछे आकर लेट गया और अंतिम बार विनीता से अनुमति लेकर पीछे से उसे अपने आलिंगन में भर लिया पता नहीं क्यों पर विनीता ने भी इस बार बिना झिझक खुद को उनकी बहो में समर्पित कर दिया.

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लखन विनीता को इस तरह आलिंगन में जकड़े थे की उनका लिंग विनीता के नितम्ब से दूर रहे और दुबारा उत्तेजित न हो जाए. लखन विनीता की कही हर बात सोच रहे थे "एंटी अच्छी महिला होने के बावजूद भाग्य ने इनके साथ कितना बुरा करा काश मई इनके लिए कुछ कर पता काश मई इनका दुःख दूर कर पता. गजब का आकर्षण है इस महिला में पता नहीं इनका पति कैसे इनकी तरफ आकर्षित नहीं हुआ अपनी पत्नी के जाने के बाद पहली बार मेरे मन में किसी महिला ने इतना अच्छा स्थान पाया पर मुझे खुद की भावनाओ पर काबू रखना होगा. मेरी और इनकी उम्र में बहुत अंतर है मई किसी सूरत में इनकी तरफ अपने आकर्षण को ज़ाहिर नहीं कर सकता ये क्या सोचेगी मेरे बारे में माँ इनकी हर संभव मदद करने की कोशिश करूँगा पर मर्यादा के दायरे में रहकर."

दूसरी तरफ लखन के आगोश में लेते हुए विनीता को भी बड़ा अच्छा लग रहा था वो दीं दुनिया समाज अपनी शादीशुदा ज़िन्दगी को जैसे कुछ पल के लिए पूरी तरह भूल सी गई थी. विनीता ने लखन जी की बहो में सर रख लिया और अपनी आँखे बंद करके लखन जे व्यक्तिवा और अभी कही उनकी बातो के बारे में सोचने लगी " सच hi तो कहा लखन जी ने मई किसी ऐसे शिक्षा के लिए आंसू क्यों बहु जिसे मेरे आंसुओ की परवाह hi नहीं जब वो अपनी ज़िन्दगी नए सिरे से शुरू करने जा रहा है तो मई क्यों अपनी ज़िन्दगी को रोक दू कितना फ़र्क़ है समीर और लखन जी में हुनरी उम्र में इतना फ़र्क़ न होता और ये मेरी सहेली के ससुर न होते तो क्या ये संभव था की मई लखन जी को अपना जीवनसाथी बना पति क्या अब भी ये संभव है नहीं नहीं विनीता ये क्या सोच रही है वो तेरे बाप की उम्र के है तेरी सहेली के ससुर है तू कैसे उनके साथ नहीं लोग क्या कहेंगे समाज क्या कहेगा तेरी सहेली शोभा क्या सोचेगी तुम अपनी hi सहेली की सास बनने का सोच भी कैसे सकती है. लखन जी एक अच्छे चरित्र के व्यक्ति है वो तेरे बारे में कुछ गलत नहीं सोचते तेरा सम्मान करते है यदि उन्हें तेरे मन में जन्मे इस भाव का पता चल जाएगा तो उनकी नज़रो में मई गिर जाउंगी क्या सोचेंगे वो मेरे बारे में मुझे अपनी भावनाओ पर काबू रखना होगा.

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विनीता लखन की बहो में सर रखे आँखे बन करे सोचते हुए कब नींद के आगोश में समां गई उसे पता hi नहीं चला. नींद में भी अपने हसीं भविष्य के सपने देख रही थी जिसमे एक राजकुमार घोड़े में बैठ कर उसे लेने आ रहा है और वो दुल्हन के लिबास में उसका इंतज़ार कर रही है जब वो राजकुमार करीब अत है तो उसके सर पर सेहरा पड़ा था जिस वजह वो उसका चेहरा नहीं देख सकती थी सपनो में hi उनकी शादी की रस्मे शुरू हो गई. विनीता अपने ख्वाबो में hi अपने सपनो के राजकुमार से शादी कर रही थी उसके पीछे लेते लखन सिंह भी उसके बारे में सोचते सोचते उसे अपनी बहो में भरे नींद के पहलु में समां गए थे. कहने को आज की रात में उनके बीच कुछ नहीं हुआ था पर आज जंगल में बीते ये रात उन्हें जितना एक दुसरे के करीब ले आई थी उतना करीब आने में लोगो को सालो बीत जाते. अब देखना ये था की ये नज़दीकी उन्हें किस मुकाम पर ले जाने वाली थी उन्हें आने वाले भविष्य में क्या उथल पुथल लेन वाली थी.
 
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