A wedding ceremony in village - Page 2 - SexBaba
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A wedding ceremony in village

दंगल वाली जगह पर जब दंगल जारी था लालू ने फ़ोन जो उसने धामु को दिया था द्वारा धामु को गाइड करा. और लालू के कहे मुताबिक धामु ने दो गिलास जूस बनाया जिसमे एक में उसने नशे की ड्रग और एक गोली वियाग्रा की मिला दी और दुसरे गिलास में केवल वियाग्रा. और खली वियाग्रा वाला गिलास खुद पी लिया और दूसरा गिलास शबाना को पीला दिया. शबाना उसे धामु का भोलापन समझ कर पी गई. पीने के कुछ देर बाद hi शबाना का सर भरी भरी सा हो गया और वो आराम करने अपने कमरे में चली गई.

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धामु से हर घडी की अपडेट ले रहा लालू दूर बैठे बैठे hi ये षड़यंत्र रच रहा था. उसने धामु को पूरी तरह मिसगिदे करके शादी करवाने के लालच में शबाना के कमरे में दाखिल करवाया. वह मिसगिदे करके पति अपनी पत्नी को कैसे प्यार करता है शबाना को खुश करने के नाम पर अर्धबेहोशी की हालत में वियाग्रा की उत्तेजना में अंगड़िया ले रही शबाना की उत्तेजना को उसका दर्द बताकर धामु को उसका दर्द दूर करने को कहा.

धामु को गाइडेंस के नाम पर उसने धामु से वीडियो कॉल करा और मोबाइल को ऐसे एंजेल पर रखवाया ताकि वो सब देख सके और देखने के साथ साथ रिकॉर्ड भी कर सके. शबाना का दर्द दूर करने के नाम पर उसने धामु से शबाना का गाउन उसने कमर तक ऊपर करवाया और धामु को शबाना की छूट चाटने को कहा. इन सब बातो से अनजान धामु तो यही समझ रहा था की लालू उसे सही गाइडेंस कर रहा है और वो शबाना का दर्द दूर कर रहा है. लालू के कहे मुताबिक उसने शबाना की पंतय के ऊपर से उसकी छूट चेतना शुरू कर दिया.

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ड्रग के कारन पूरी तरह से बेहोश न होते हुए भी शबाना धामु को अपना पति hi समझ रही थी और वियाग्रा की गोली के प्रभाव के कारन उसकी उत्तेजना कई गुना बाद गई थी जिस वजह से वो धामु का सर खुद से अपनी छूट में दबा रही थी. दंगल में भीड़ से अलग हटकर अपने मोबाइल में ये सब देख रहा लालू भी ये सब देख इतना उत्तेजित हो गया की उसने भी अपना लुंड निकल कर तेज़ तेज़ हिलना शुरू कर दिया. धामु इस वक़्त लालू के लिए उसकी बिछाई शतरंज का एक प्यादा था जिसे वो अपने हिसाब से चला रहा था. वह कर तो बेशक धामु रहा था पर करवाने वाला लालू था.

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लालू के कहे मुताबिक धामु ने शबाना की पंतय को उसकी झांघो से निकल दिया और अपनी जीभ शबाना की छूट के अंदर दाखिल करदी. शादी की इच्छा इसकदर धामु की दिमाग पर हावी थी की लालू जो कह रहा था धामु सब कर रहा था. पर धामु की जीभ की छुअन ने शबाना की उत्तेजना को चरम पर पंहुचा दिया. वो अपनी गांड उठा उठा कर धामु की जीभ को ज्यादा से ज्यादा अंदर लेने की कोशिश करने लगी. शबाना की ये उत्तेजना देख लालू को भी बहुत मज़ा आ रहा था क्युकी शबाना की इस उत्तेजना से ये साफ़ था की अपनी पति से सुख न मिलने के कारन शबाना में सेक्स की कितनी भूक है जो लालू के प्लान के लिए बहुत अच्छी बात थी.

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धामु की चूसै के कारन शबाना धामु के मुँह में hi झाड़ गई. धामु ने अपना मुँह हटाने की कोशिश करि पर शबाना ने अपनी जांघो क्र बीच धामु का मुँह इतना कास के दबाया था की वो अपना सर पीछे न हटा सका. झड़ने के बाद शबाना की पकड़ भी ढीली पद गई. पर लालू का प्लान अभी ख़तम नहीं हुआ था. अभी तो जो कुछ करा धामु ने करा अब शबाना से भी कुछ करवाना था जिसे होश में आने के वो बतदाशत न कर सके. लालू के इशारे पर धामु भी अपने कपडे उतर कर केवल छड़ी पहने हुए शबाना के ऊपर आ गया वासना की आग में जल रही शबाना के लिए तो इस वक़्त वो अपने पति के साथ थी जिसने आज तक अपनी नामर्दगी के कारन उसे सम्भोग का कोई सुख नहीं दिया. इसलिए उसने धामु को कास कर अपने सीने से लगा लिया.

शबाना की हर हरकत लालू बड़ा मज़ा लेकर रिकॉर्ड कर रहा था. वियाग्रा का असर अब धामु पर भी होने लगा था उसका लुंड चड्डी के अंदर से झटके खाने लगा था और झटके खा खा कर चड्डी के अंदर से hi शबाना की छूट में यहाँ वह घिस रहा था जिसने शबाना की उत्तेजना को दुबारा तीव्र कर दिया. शायद अगर शबाना की छूट और धामु के लुंड के बीच धामु की चड्डी की दीवार न होती तो धामु का लुंड शबाना की छूट में दाखिल हो गया होता. पर लालू ने जानबूझ कर लालू की चड्डी नहीं उतरवाई थी क्युकी लालू सिर्फ शबाना को उत्तेजित करना चाहता उसकी चुदाई तो उसने अपने लिए बचा कर राखी थी.

हद से ज्यादा उत्तेजित शबाना मर्द के लुंड के लिए तड़प रही थी वो अपना हाथ नीचे ले जाकर धामु को लुंड को टटोलने लगी और जल्द hi उसके हाथ धामु के लुंड पर पहुंच गए. और उसने चड्डी के ऊपर से धामु के लुंड को मसलना शुरू कर दिया. धामु के लिए तो ये एकदम नया अभाव था. उसका लुंड चड्डी के अंदर पूरी तरह अकड़ चूका था. उसकी अकड़न को अच्छे से महसूस करने के लिए शबाना ने अपने हाथ धामु की चड्डी के अंदर दाल दिए. और विगरा के कारन पहले से उत्तेजित धामु के कुंवारे लुंड को मसल मसल कर उसके प्रथम स्खलन तक ले जाने लगी.

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स्खलन के करीब पहुंच कर शबाना ने अपने हाथ धामु की चड्डी से निकल लिए और दोनों हाथो से धामु को भींच कर अपने जिस्म से चिपका लिया और धामु के होठो को अपने होठो में भर लिया और नीचे अपनी नंगी छूट को धामु की चड्डी के ऊपर से उसके लुंड पर रगड़ने लगी. मोबाइल से ये सब देख रहे लालू के लिए भी अब अपनी उत्तेजना को रोकना मुश्किल था अपने लुंड को तेज़ तेज़ हिलाते हुए उसने वही झाड़ियों के बीच अपना वीर्यपात कर दिया. इधर धामु ज्यादा देर शबाना की छूट की गरम रगड़ को बर्दाश्त न कर सका और अपने पहले स्खलन को हासिल कर लिया. शबाना भी उस अर्धचेतना की हालत में hi अपने दुसरे ओर्गास्म को प् कर संतुष्ट होकर निढाल होकर लेट गई.

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धामु और शबाना दोनों पूरी तरह बेदम हो चुके थे और एक दुसरे से चिपके हुए सो गए. लालू भी वह से वापस दंगल वाली जगह पर आ गया जहा दंगल अभी भी जारी था और दो प्रतियोगिताओ के बाद कुछ छान के विश्राम के बाद तीसरी प्रतियोगिता आरम्भ होने को थी.
 
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दंगल में दो प्रतियोगिताओ में लखन सिंह की हार के बाद सबने दंगल का परिणाम तै मान लिया तय. सबने मान लिया था की ये तीसरी प्रतियोगिता जीतकर ये पहलवान ये दंगल भी जीत जाएगा और फिर विनीता को कहा चुम्बन लेगा सब इस बार को लेकर एक्ससिटेड थे. विनीता एक हाथ पाँव फूले थे क्युकी पहलवान बार बार विनीता को देख कर अपना लुंड मसल रहा था जिससे उसके ज़ाहिर थे और विनीता यु भरी महफ़िल में रुसवा नहीं होना चाहती थी.

लोगो के मन चल रही अलग अलग भावनाओ के साथ दंगल की तीसरी और हो सकता था आखरी प्रतियोगिता आरम्भ हुई. तीसरी प्रतियोगिता चलित्तचलक बन्धनं थी जिसमे दोनों प्रतियोगियों को दो वाहनों का चुनाव दिया और उन्हें अपने वहां से अपना बंधन साबित करना था उन्हें अपने वहां पर सवार होकर पहाड़ के दूसरी तरफ जाकर वह पहले से मौजूद अघोरीबके शिष्य के हाथ में मौजूद दो मालाओ में से एक एक माला लेकर पहले आकर वो माला एरेस की प्रतिमा के गले में डालनी थी.

जो दो वहां दिए गए थे उसमे एक तरफ आधुनिक वहां रॉयल एनफील्ड बाइक और दूसरी तरफ था बदल लखन सिंह का पालतू घोडा जिसे लखन सिंह ने बचपन से पल पास कर बड़ा करा था. वहां चुनाव का पहला मौका लखन सिंह को दिया गया सबको लगा की लखन सिंह बाइक चुनेगे और आसानी से ये प्रतियोगिता जीत लेंगे पर सबकी अपेक्षाओं के विपरीत उन्होंने बदल का चुनाव करा. वो पहलवान भी खुश था और वह मौजूद गांववाले दबी ज़ुबान में लखन सिंह को मूर्ख कह रहे थे जो बाइक की बजे घोडा चुना भला बाइक का और घोड़े का आपस में क्या मुकाबला.

अघोरी की कड़क आवाज़ के साथ प्रतियोगिता आरम्भ हुई उम्मीद के मुताबिक पहलवान बाइक पर तेज़ गति से दौड़ पड़ा सीधे रस्ते से पहलवान को हराना मुश्किल था इसलिए लखन सिंह ने बदल के साथ पहाड़ पर चढाई कर दी. तेज़ गति से दौड़ता हुआ बदल अपने मालिक को लिए पहाड़ चढ़ गया और दूसरी तरफ उतरने लगा तब तक बाइक उस शिष्य तक पहुंच गई जो माला लिए था. पहलवान अपनी माला लेकर वापस लौट पड़ा उसके बाद लखन सिंह ने भी वह पहुंच कर अपनी माला लेकर वापस चढाई शुरू कर दी. झाड़ियों के बीच से गुज़रते बदल के पेअर लहूलुहान हो गए पर बिना हिम्मत हरे वो अपनी पूरी ताकत समेटे दौड़े जा रहा था.

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लखन सिंह पहाड़ से उतर रहे थे जबकि दंगल वाली जगह पर पहुंच hi गई थी. पहलवान माला लेकर एरेस की मूर्ति की तरफ दौड़ पड़ा पर लखन सिंह पहाड़ से उतारते उतारते माला को हवा में तेज़ी से उछाल कर फेका माला सीधा एरेस के गले में जाकर गिरी. और लखन सिंह और बदल ये प्रतियोगिता जीत गए.

दंगल अब 2-1 हो गया था. वक़्त था चौथी प्रतियोगिता का चौथी प्रतियोगिता थी बल वृत्तम. जिसमे एक वृत्ताकार घेरा था और दोनों प्रतियोगियों के हाथ में एक लकड़ी की ढाल थी जिससे बल लगाकर उन्हें सामने वाले को उस घेरे के बहार करना था. बल के मामले लखन उस पहलवान के आगे नहीं टिक सकते थे उस पहलवान को हारने का एक hi तरीका था बुद्धि. वो पहलवान बड़ी आसानी से लखन सिंह को धकेलता हुआ किनारे तक ले आया और ें मौके पर लखन सिंह खुलती लेकर उस पहलवान के पीछे आ गर और उसीकी ताकत और गति का लाभ लेकर उसे घेरे के बहार कर दिया और ये प्रतियोगिता भी जीत ली.

सबकी उमीदो के विपरीत शुरुआती दो प्रतियोगिता हरने के बाद अगली दो प्रतियोगिता जीत कर लखन सिंह ने मुकाबला बराबरी पर ला दिया. अब बरी थी पांचवी और आखरी प्रतियोगिता की जिसे जीतने वाला इस दंगल का विजेता बन जाता. पांचवी प्रतियोगिता थी शक्ति विजयम जो पुरे दंगल था जिसमे दोनों दोनों प्रतियोगियों को सामने वाले को चित्त करना था. पहलवान ने लखन सिंह को पटक पटक कर बेदम कर दिया लखन सिंह निढाल से ज़मीन पर पड़े थे और पहलवान टहल टहल कर अपनी भुजाए उठाकर अपनी ताकत का प्रदर्शन कर रहा था. वो लखन की तरफ से निश्चिन्त था तभी उसके वरकॉन्फिडेन्स का लाभ लेते हुए लखन सिंह तेज़ी से उठे उसके कंधे पर चढ़ के अपनी कोहनी का एक तेज़ प्रहार उसके कंधे पर करा वो लेदम करहटा हुआ ज़मीन पर धराशाई हो गया.

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लखन सिंह ये पांचवी प्रतियोगिता जीतकर ये दंगल भी जीत गए. अब बरी थी दंगल के पतीनां की जिसमे जीतने वाले को विनीता का चुम्बन लेना था और विनीता को जीतने वाले का मूत्र पीना था. लखन सिंह ने आगे बाद कर विनीता के हाथ को अपने हाथ में लिया और उनके हाथ का चुम्बन लेकर चुम्बन की शर्त को पूरा कर दिया.

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फिर एक कटोरे में मुता और विनीता से पहले खुद उसे पीकर कटोरे को खली कर दिया नाम के लिए कटोरे में बस एक बूँद थी जिसे अपने होंठो से लगाकर लखन बिना विनीता की बेज़्ज़ती हुए बिना दंगल की शर्तो को पूरा कर दिया. सब लखन सिंह की जीवटता और बुद्धिमानी की तारीफ कर रहे थे. विनीता के मन में लखन सिंह के लिए आदर और बाद गया.

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दंगल की समाप्ति के बाद मार्स यानि एरेस की पूजा के बाद इस गृह की पूजा समाप्त हुई अब कल बरी थी अगले गृह मरकरी यानि बुध की जिसके लिए लखन सिंह और विनीता को अजीबो गरीब यात्रा पर निकलना था और एक ऐसी जगह जाना था जहा अगले कुछ दिन रहकर उन्हें बाकि के ग्रहो की पूजा करनी थी. सब लोग वापस हवेली की तरफ चल दिए. वापसी में लालू ने देव को इशारा करा और देव तेज़ गाड़ी से जल्दी हवेली पहुंच गया. और अंदर जाकर उसने शबाना के कमरे के अंदर रखा लालू का मोबाइल वह से उठा लिया शबाना धामु उस वक़्त भी अधनंगी हालत में थे. लालू के प्लान के मुताबिक देव ने शबाना के कमरे में एक स्पाई सीएएम फिट कर दिया जिससे शबाना का बीएड साफ़ दीखता था.

फिर बहार आकर उसने थोड़ी आवाज़ करि ताकि शबाना धामु उठ जाए और ऐसा hi हुआ भी. उठते hi शबाना ने धामु को अपने ऊपर से धक्का दिया और धामु पर गुस्से में बरस पड़ी उसे इन सबमे धामु की गलती लग रही थी. शायद धामु लालू का नाम ले लेता पर बहार देव खड़े ऐसे आवाज़ करि की शबाना को लगे की सब वापस आ गए और शबाना ने धामु को कपडे पेहेन कर कमरे से बहार निकल जाने को कहा.

अब बरी थी लालू के प्लान के दुसरे part जिसके लिए वो रस्ते में नेहा के थोड़ा अलग होने का इंतज़ार कर रहा था. बीच रस्ते में नेहा को टॉयलेट लगी और वो झाड़ियों में चली गई. इसी मौके के इंतेज़्ज़र में खड़ा लालू कुंदन के साथ उसी झड़ी के पास खड़े होकर नेहा को सुना सुनकर बात करने लगे. वो आपस में ये बात करने लगे की कुंदन की बेहेन के बच्चा नहीं हो रहा क्युकी उसका पति नामर्द है और उसका पति अपनी गलती छुपाने के लिए उसने तलाक़ देने की सोच रहा तो वो किसी और से सेक्स करके बच्चा करले और ऐसे सख्श से सेक्स करे की उसका राज़ राज़ रहे. पर असलियत में नेहा के दिमाग अपनी चल का बीज बो रहे थे ताकि वो शबाना को इसी बात के कन्विंस करे और हुआ भी यही.

हवेली आकर जब नेहा ने शबाना को ये सब बताया तभी बहार देव चिल्ला चिल्ला कर ये कहने लगा की मैंने जूस में भांग मिले थी कोई वो जूस पी गया ताकि शबाना को धामु पर शक न हो. शबाना को भी यही लगा की धामु ने गलती से उसे जूस पीला दिया और भांग ने नशे में उसने धामु के साथ वक सब करा क्युकी धामु तो दिमाग से मंदबुद्धि है वो ये सब नहीं सोच सकता फिर नेहा ने शबाना को कन्विंस करा की वो जब तक यहाँ है रोज धामु के साथ सेक्स करे और प्रेग्नेंट हो जाए ताकि उसके बच्चे वाली प्रॉब्लम सोल्वे हो जाए और उसका पति उसे तलाक़ न दे पहले तो शाबान गुस्सा हुई पर फाइनली मान गई.

रात में नेहा को अपनी पर्स में खत मिला जो पता नहीं कब कौन उसके पर्स में दाल गया शायद दंगल वाली जगह पर जिसमे एक अनजान स्ट्रेंजर का पैगाम था जो नेहा की फंतासी की इच्छाओ से परिचित थी जिसने नेहा को कल्लू से चतवते हुए भी देखा था और कल्लू को नेहा की सांडले छत्ते हुए भी. और जो अब नेहा को खुलेआम चैलेंज कर रहा था की अगर वो एक नै फंतासी जीना चाहती है तो उसकी सेक्स स्लेव बन कर दिखाए. अगर नेहा को उसका चैलेंज मंजूर है तो जो सेक्सी ड्रेस नेहा ने शादी वाली रात पहनी थी वही ड्रेस पहनकर कल सुबह सुबह 5 बजे जब ज्यादातर लोग सो रहे हो अपने कमरे से बहार आ जाए. अगर नेहा ये चैलेंज एक्सेप्ट करती है तो वो उसे बटेगा की उसे क्या करना है. नेहा को भी इस नै फंतासी में नया रोमांच लग रहा था पर हल्का दर भी की पता नहीं वो कौन है कही वो किसी मुसीबत में न फस जाए.

इस तरह लालू ने परदे के पीछे से अपनी चले चलते हुए बिना शबाना के सामने ऐ शबाना को कन्विंस कर दिया की धामु के साथ सेक्स करके प्रेग्नेंट हो जाए. लालू के इस मास्टर स्ट्रोक और दंगल की उस रोमांचक प्रतियोगिता और गरिमा हरिया के बीच उठे वासना में तूफ़ान और नेहा के मन की दुविधा के साथ तीसरा दिन भी ख़तम हुआ.

अब चौथे दिन घटनाए एक नया मोड़ लेने वाली थी लखन विनीता को एक दुर्गम यात्रा पर निकलना था. शबाना को धामु के साथ सम्भोग का एक मुश्किल फैसला करना था. गरिमा जिसके अंदर की दबी इच्छाओ को हरिया ने हवा देदी थी वो बहार आने का रास्ता खोज रही थी. शोभा के सामने एक ऐसी जटिल परिस्थिति आने वाली थी जो उसे सारे गाँव के सामने आकर्षण की वस्तु बना देने वाली थी. नै नै फंतासी के लिए एक्ससिटेड रहने वाली नेहा की ये नै फंतासी उसे नए नए अनुभव देने वाली थी. अपने प्रेमी राज की खैरियत के लिए नीतू अघोरी की शरण में जाने वाली थी जिसने यहाँ बैठे बैठे राज के एक्सीडेंट की भविष्यवाणी कर दी. और कहानी में आगमन होने वाला था एक अधूरी प्रेम कहानी के आधे अधूरे किरदार कर मौत भी जिसे अपने प्यार तक आने से न रोक पाई थी.
 
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चौथे दिन नेहा बहुत जल्दी उठ गई क्युकी उसके दिमाग रात की वो स्ट्रेंजर वाली चिट्ठी hi घूमती रही. उसने फैसला कर लिया की वो ये एक्ससिटिंग चैलेंज पूरा करके रहेगी जो होगा देखा जाएगा. नेहा शादी की रात वाली रेड ड्रेस पेहेन ली और कमरे के बहार आ गई. सुबह के 5 बजे ज्यादा लोग नहीं उठे थे इसलिए नेहा थोड़ी रिलैक्स थी. नेहा बहार आई hi थी की एक पत्थर उसके पेअर के पास आकर गिरा जिसपर एक कागज़ लिप्त था. नेहा ने वो कागज़ पड़ा जिसमे उसे ऊपर छत पर आने को कहा गया था जब नेहा छत पर पहुंची तो वह मुंडेर पर एक और कागज़ रखा था जिसमे उसका पहला टास्क लिखा था. और पहला टास्क ये था की उसे भीमा की झोपडी के पीछे बने घने जुगल में जाकर एक पेड़ जहा अगला लेटर टेंगा है पर अपनी पंतय जो वो अभी पहने है वो उतर कर टंगणी होगी.

नेहा बिना देर किये हवेली से बहार निकल कर भीमा की झोपडी की तरफ बाद गई भीमा उस वक़्त झोपडी में नहीं था. नेहा ने जंगल के अंदर जाकर वो पेड़ धूड़ा जहा लेटर टेंगा था जिसमे लिखा की उसके लिए पार्सल है जो उसे नौकरो के तम्बू के पास बने बाथरूम में रखे डस्टबिन में मिलेगा. वो अपनी पंतय उतर कर यही तंग दे और वो पार्सल कलेक्ट करके अपने कमरे वापस चली जाए और अकेले में उस पार्सल को खोले आगे का मैसेज उसे उस पार्सल में मिल जाएगा. नेहा अपनी पंतय ुटटने hi वाली थी की अचानक झाड़ियों के पीछे से निकल रहा भीमा उसके सामने पद गया जो शायद सुबह सुबह जंगल में डेली वाले काम के लिए आया था.

भीमा को अपने सामने देख जितना शॉक नेहा उससे कही ज्यादा शॉक भीमा था इतनी सुबह सुबह इतने सेक्सी कपड़ो में नेहा को अपने सामने अकेला खड़े देख कर. एक पल के लिए तो नेहा दर गई उसे समझ नहीं आया की वो क्या करे उसे ये भी लगा की कही भीमा hi तो वो स्ट्रेंजर नहीं. पर लेटर में प्रयोग इंग्लिश वर्ड्स का उसे भीमा जैसे अनपढ़ के बस का नहीं था. नेहा को अपना पंतय वाला टास्क याद आया और साथ में कल की कल्लू वाली छूट चटाई भी जिसे भीमा ने अपनी आँखों से देखा था और भीमा को अपना लुंड झड़ते नेहा ने देखा था. इसने नेहा को एक्ससिटेड कर दिया और नेहा बड़ी ऐडा के साथ बीमा के सामने hi अपनी डबल स्ट्रिप ड्रेस के खुले हुए हिस्से से अपने हाथ अंदर डालकर अपनी पंतय को अपनी टांगो से निकल कर उस पेड़ पर टांग दिया.

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नेहा की ऐसी मादक अदाओ को देख भीमा का हाथ खुद बा खुद अपने लुंड पर पहुंच गया और वो धोती के ऊपर से hi अपना लुंड मसलने लगा. पर आगे बढ़कर नेहा को अपनी बहो में भरने की हिम्मत उसमे नहीं थी क्युकी नेहा शहर से आई लखन सिंह की मेहमान थी और वो एक जमादार. नेहा भी भीमा को सेक्सुअली तैसे तो कर रही थी पर एक जमादार के सेक्स का उसका भी कोई इरादा नहीं था इसलिए इससे पहले की भीमा उसकी तरफ आगे बढ़ने की हिम्मत करता नेहा अपनी पंतय को वही टांग तेज़ी से झाड़ियों से निकल गई. भीमा ने आगे बाद कर नेहा की पंतय को उस पेड़ से उतर लिया और अपनी झोपडी में आकर अपना लुंड निकल कर उसमे नेहा की पंतय को लपेट कर नेहा की सेक्सी अदाओ उसकी नंगी छूट को इमेजिन करके मुठ मरकर उसकी पंतय को अपने वीर्य से तरबतर कर दिया.

नेहा झाड़ियों से निकल कर सीधा सर्वेन्ट्स के तम्बू के पास पहुंच गई वह ज्यादातर लोग अभी भी सो रहे थे. नेहा तम्बू के पीछे बने सर्वेन्ट्स के बाथरूम के अंदर गई सर्वेन्ट्स के लिए बड़े कमरे में लाइन से 5 छोटे छोटे बाथरूम बने थे जिसमे एक आदमी आराम से नाहा सकता था और वह लास्ट कोने में डस्टबिन रखा था. नेहा ने डस्टबिन का ढक्कन उठा कर देखा उसमे एक फुल्ली व्राप्पेड पैकेट था. नेहा उसे उठाने hi वाली थी बहार से किसी के आने की आहत हुई. नेहा ने तुरंत डस्टबिन का ढक्कन बंद कर दिया और इससे पहले वो कुछ समझ पति या कर पति वो शिक्षा बाथरूम के अंदर आ गया. वो भूरा था लखन सिंह का ट्रक ड्राइवर और हरिया का का बड़ा भाई जिससे नेहा शादी वाली रात कल्लू के साथ मिली थी और जिसने भोला को मुक्का मारा था जब उसने शराब के नशे में नेहा को किश कर लिया था.

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नेहा को इस तरह शादी के दिन वाली उस उत्तेजक मादक सेक्सी रेड ड्रेस में देख भूरा एक पल को दरवाज़े पर hi ठिठक गया नेहा को भी समझ नहीं आया वो कैसे रियेक्ट करे. भूरा ने नेहा के पास आकर नेहा से इस तरह इन कपड़ो में यहाँ आने का कारन पुछा पहले तो नेहा को कुछ समझ नहीं आया फिर बात बनाते हुए उसने कह दिया की सुबह सुबह टहलने निकली थी बाथरूम लगी इसलिए यहाँ आ गई पर इन उत्तेजक कपड़ो को पेहेन्ने का जवाब उसके पास भी नहीं था. अचानक बहार से किसी के आने की आहत हुई बचने के लिए नेहा एक बाथरूम के अंदर घुस गई और किसी को शक न हो की अंदर कौन है इसलिए भूरा भी अंदर घुस गया और अंदर से कुण्डी लगा ली. बहार कल्लू था जो बगल के बाथरूम में घुस चूका था और बाकि नौकर भी आ जा रहे थे इसलिए नेहा का अब निकलना मुश्किल था.

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अंदर तंग से बाथरूम में नेहा और भूरा एक दुसरे से पूरी तरह सटे खड़े थे. नेहा दरवाज़े की तरफ मुँह करे थी और भूरा नेहा के पीछे नेहा की तरफ मुँह करे खड़ा था जिस वजह से नेहा की बिना पंतय की गांड भूरा के लुंड पर घिस रही थी. ऐसे इरोटिक माहौल में नेहा जैसी सेक्सी लड़की के इन उत्तेजक कपड़ो में ढके बदन की रगड़ में किसी का भी लुंड खड़ा होना स्वाभाविक था. नेहा को भूरा के झटके कहते लुंड की अनुभूति अपनी गांड पर साफ़ महसूस हो रही थी जिसने उसे भी उत्तेजित कर दिया था. लुंड की अकड़ के कारन भूरा ने अपना लुंड बहार निकल लिया जो सीधा कपडे के ऊपर से नेहा की चूतड़ों की दरार में गाड़ने लगा. नेहा ने हाथ पीछे ले जाकर उसे अलग करने की कोशिश करि पर नसों से भरी एक मस्त मूसल देहाती लुंड के स्पर्श ने उसकी काम वासना को जगा दिया उसके मन में एक नै फंतासी को जन्म दे दिया. एक तंग जगह पर एक अजनबी से चोरी छुपे मज़ा लेने की फंतासी. बजाए उसके लुंड को दूर करने के वो भूरा के लुंड को हाथ में लेकर घिसने लगी. भूरा के लिए भी ये रेड सिग्नल था आगे बढ़ने का. उसने पीछे से नेहा को कास कर अपनी बहो में भर लिया और एक हाथ से नेहा के नुकीली चूचियों को मसलने लगा और दुसरे हाथ से पीछे से नेहा की ड्रेस को धीमे धीमे ऊपर उठाने लगा. उत्तेजना में पूरी तरह पागल नेहा काम वासना में पूरी तरह मदहोश थी. नेहा की ड्रेस उसके गांड से ऊपर तक उठ चुकी थी और उसके चूतड़ अब भूरा के सामनेब नंगे थे. भूरा के मूसल लुंड और नेहा की गांड के छेड़ के बीच अब कोई पर्दा न बचा था. नेहा अपने ओर्गास्म को हासिल कर चुकी थी पर अब भी मदहोशी में भूरा की बहो में अंगड़ाइयां ले रही इस बात से अनजान की भूरा का लुंड उसकी गांड पर हमला करने उसके मुहाने तक पहुंच गया था.

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नेहा की मदहोशी तब टूटी जब भूरा के लुंड का आगरा भाग उसकी गांड के छेड़ में हल्का सा अंदर घुसा और नेहा को हल्का सा दर्द हुआ. नेहा को तब समझ आया की भूरा क्या करने वाला है वो इस तंग बाथरूम में उसकी गांड मारने जा रहा है वो भी बिना तेल लगाए वो भी खड़े खड़े इस वीयर्ड पोजीशन में जिसमे इतना मूसला लुंड झेलने में उसे बहुत दर्द झेलना होगा. नेहा ने छटपटाते हुए आगे बढ़ने की कोशिश करि पर भूरा की पकड़ बेहद मज़बूत थी जिससे छूटना नेहा जैसी दुबली पतली लड़की के लिए असंभव था.

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और नेहा आवाज़ भी नहीं निकल सकती थी क्युकी बगल के बाथरूम में मौजूद बाकि नौकर अगर सुन लेते तो यही सर्वेंट बाथरूम में सुबह सवेरे उसका गैंगबैंग हो जाता. नेहा ने अपना चेहरा पीछे घुमाकर बड़ी उम्मीद से भूरा को देखा और गर्दन हिला कर भूरा से रेक करि की वो इस वक़्त उसकी गांड न मारे पर भूरा पर हवस पूरी तरह हावी हो चुकी थी वो इस मौके को किसी कीमत पर जाने नहीं देना चाहता था. भूरा ने अपने होंठ नेहा के होंठो पर रख कर उन्हें अपने होंठो से बंद कर दिया और एक तेज़ झटका आगे को मारा भूरा का आधा लुंड नेहा की गांड के छेड़ को चीरता हुआ अंदर चला गया नेहा चीखना चाहती थी पर उसकी कराह भूरा के मुँह में घुट कर रह गई.

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दर्द नेहा की बरदहस्त के बहार था पर नेहा कुछ करने की हालत में भी नहीं थी भूरा धक्के मरता रहा और हर धक्के पर नेहा की आह निकलती जो नेहा के मुँह में hi घुट कर अपना दम तोड़ देती. भूरा ने खड़े खड़े hi अपना पूरा लुंड नेहा की गांड के अंदर तक उतर दिया फिलहाल उसे नेहा के दर्द से कोई लेना देना नहीं था. नेहा की गांड में धक्के मरते मरते भूरा नेहा की गांड के अंदर hi झाड़ गया.

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भूरा का वीर्य नेहा के चूतड़ों की दरार से बेहटा हुआ नेहा के पैरो के नीचे तक आ रहा था. दर्द के मारे नेहा से खड़ा भी नहीं हुआ जा रहा था. बहार भी अब सन्नाटा हो गया सरे नौकर नाहा धो कर जा चुके थे. भूरा ने दरवाज़ा खोलकर बहार झाका और तसल्ली होने पर नेहा को भी बहार बुला लिया. नेहा लड़खड़ाते हुए बहार आ गई उससे ढंग से चला भी नहीं जा रहा ये फंतासी उसे काफी मंहगी पड़ी थी. खैर जो होना था वो हो गया वो अब जल्द से जल्द अपने कमरे में जाकर आराम करना चाहती थी. पर जिस काम से वो इस सर्वेंट बाथरूम में आई थी वो भी करना था वो पार्सल उठाना जो डस्टबिन में पड़ा था पर भूरा को पता लगे बिना. नेहा ने कराहते हुए भूरा से कहा की बहार जाकर देखे की कोई है तो नहीं ताकि वो बहार जा सके. भूरा ने जाते जाते एक बार फिर नेहा को किश कर लिया इसी बीच वो 18 साल का वेटर छोटू बाथरूम में आ गया और नेहा भूरा को इस हालत में देख लिया. नेहा तो दर गई पर भूरा ने उसे कहा टेंशन न ले वो देख लेगा. भूरा छोटू को लेकर बहार निकल गया. नेहा भी वो पार्सल उठाया और लड़खड़ाते हुए सबकी नज़रो से बचते हुए अपने कमरे में पहोच गई और पार्सल अपने सामान में छुपा दिया और अपनी गांड को आराम देने के लिए बिस्तर पर लेट गई.

सब बहार बिजी थे क्युकी बहार अघोरी आ चूका था और आज मरकरी की पूजा के लिए लखन सिंह और विनीता को एक कठिन सफर पर रवाना होना था और बहार उनकी रवानगी की विधि पूरी की जनि थी.
 
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बहार अघोरी आ चूका था और मुर्सुरी पूजन की विधि के अनुसार विनीता और लखन की रवानगी की विधि होनी थी. अघोरी विधि के बारे में बताने लगा अघोरी के बगल में एक मूर्ती थी जो लगभग नग्न थी जिसका लिंगा खुला हुआ था उसके हाथ में खास तरह का अस्त्र था. अघोरी ने बताया ये मूर्ति हरमेस की है जो मरकरी यानि बुद्ध गृह का मानव रूप है

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जो यात्रा का देवता है लोग यात्रा पर निकलने से पहले हरमेस का ाहिरवाद लेते थे ताकि उनकी यात्रा अच्छी रहे. इसलिए आज हरमेस को प्रसन्न करने के लिए लखन और विनीता को एक दुर्गम यात्रा पर जाना होगा यहाँ से 400 कम दूर काकातुआ के जंगल की तरफ जहा आगे के ग्रहो के पूजन की विधियों के लिए और उनके रहने के लिए व्यवस्था करि गई है. हरमेस को 5 चीज़े अति प्रिय है घोडा, कछुआ, मुर्गा, उनका राजदंड जो वो हाथ में पकडे है और पांचवी चीज़ है पुरुष का लिंग उन्हें अपने लिंग से बहुत प्रेम है इसलिए यात्रा पर रवाना होने से पहले लखन सिंह की पत्नी को उनके लिंग की पूजा करनी होगी.

विनीता ने पूजा की जिसमे विनीता ने हरमेस की मूर्ति के लिंग का दूध से अभिषेक करा उस पर कुमकुम का टिका लगाया और उसके बाद विनीता को उस मूर्ति के लिंग का चुम्बन लेना था चुकी वो केवल एक पत्थर की मूर्ति थी इसलिए विनीता उस मूर्ति में हरमेस के लिंग का चुम्बन भी ले लिया. पर अभी ये लिंग पूजा का आधा भाग hi था और अब लखन के परिवार की किसी स्त्री को परिवार का दंड भुगतना था जिसमे उसमे किसी छोटी जाट के साफ़ सफाई करने वाले के लिंग की पूजा उसी तरह करनी थी जैसे विनीता ने हरमेस के लिंग की करि थी वो भी अपनी मर्यादा को तार तार करके मतलब अपने शरीर से साड़ी जो औरत की मर्यादा होती है उसे अलग करके. इस वक़्त लखन के परिवार में केवल एक hi महिला थी शोभा इसलिए ये लिंग पूजा उस नै नवेली दुल्हन को hi करनी थी वो भी पुरे गाँव के सामने. छोटी जाट के व्यक्ति के रूप में भीमा को बुलाया गया क्युकी वह यहाँ साफ़ सफाई का काम करता था.

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शोभा के लिए बेहद शर्मिंदगी का पल था पुरे गाँव यहाँ तक अपने पिता पति और ससुर के सामने एक जमादार के लिंग को न सिर्फ स्पर्श करना था बल्कि चुम्बन भी लेना था पर जब विनीता उसके लिए इतना कुछ कर रही थी तो वो भी पीछे नहीं हैट सकती थी. शोभा ने पुरे गाँव के सामने अपने बदन से साड़ी उतर ज़मीन पर फ़ेंक दी. उसे चौड़े अनछुए उभर पुरे गाँव के सामने थे. पुरे गाँव के मर्दो के लुंड पंत और धोती में बम्बू बन गए कोई अपने उभर को मसल रहा था कोई छुपाने की कोशिश कर रहा था. शोभा ने भीमा के आगे घुटनो के बल बैठ कर भीमा की धोती खोल कर उसका लुंड बहार निकल लिया.

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भीमा के लुंड का विशाल आकर देख शोभा और वह मौजूद सभी औरतो की आँखे फटी की फटी रह गई. शोभा भी उत्तेजित हो गई पर अपनी उत्तेजना को दबाते हुए शोभा ने भीमा की लिंग का दूध से अभिषेक करा फिर उस दूध को पानी में दाल कर पुरे गाँव के सामने वो जल अपने ऊपर डाला.

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भीग जाने के कारन शोभा का ब्लाउज और उसका पेटीकोट उसके जिस्म से चिपक गया और उसके स्तनों का उभर और नितम्बो की गोलाई कपड़ो के ऊपर से भी साफ़ नज़र आ रही थी. लखन सिंह की इस अनछुई बहु का ये जोबन देख आधे गाँव का वीर्य उनकी धोती ख़राब कर चूका था और बाकियो का भी जल्द निकलने वाला था. भीमा भी बड़ी मुश्किल से अपनी उत्तेजना पर काबू करे था. शोभा ने भीमा के लिंग पर टिका करा और फिर भीमा के लिंग के अपने हाथ में लेकर पुरे गाँव के सामने उसके लिंग का चुम्बन ले लिया.

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भीमा का मन करा की वो यही झाड़ जाए पर लखन सिंह की बहु के नाम पर झड़ने की उसमे हिम्मत न थी.

पूजा की विधि के बाद विनीता और लखन काकातुआ के जंगल की तरफ रवाना हुआ भूरा को उन्हें जंगल से पहले पड़ने वाले अघोरी के आश्रम तक छोड़ना था और फिर बाकि दिन वही उनका इंतज़ार करना था. भूरा ने तो नेहा के साथ काफी कुछ सोच लिया था पर अनमने मन से वो विनीता लखन को लेकर रवाना हुआ. विक्रम और लालू भी दूसरी गाडी से उन्हें आश्रम तक छोड़ने के लिए साथ चले गए. आश्रम पहुंच कर लखन ने विकर्म और लालू को वापस भेज दिया और विक्रम को जगह भी किया की आज जो शोभा और भीमा के बीच हुआ उसकी वजह से वो भीमा पर गुस्सा नहीं होगा और भीमा के साथ कुछ गलत नहीं करेगा जो सालो पहले उसके और भीमा के बीच हुआ वैसा कुछ दुबारा नहीं होना चाहिए. विक्रम ने अपने पिता को वचन दिया और वापस हवेली की चल दिए. भूरा को वही आश्रम में छोड़ लखन विनीता पैदल hi काकातुआ के जंगलो के अपने सफर पर रवाना हो गए.

जंगल में कुछ दूर चलने पर उन्हें घोड़े वाला दिखा जिसके पास एक सफ़ेद घोडा था और हाथ में वैसा hi राजदंड जैसा हरमेस की मूर्ति के हाथ में था. लखन सिंह को इस घोड़े को काबू करना था और इसी पर आगे जाना था. लखन सिंह ने उसे काबू करने की कोशिश की पर वो घोडा उन्हें बार बार अपनी पीठ से पटक देता.

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विनीता को अचानक उस राजदंड का ख्याल आया और विनीता ने उस आदमी के हाथ से वो दंड चीन कर घोड़े के सामे लेकर कड़ी हो गई. उस दंड को देख घोडा शांत हो गया. लखन और विनीता उस घोड़े पर बैठ कर आगे रवाना हुए और नदी के करीब पहुंचे जिसे पार करके उन्हें आगे जाना था. वही उन्हें एक नाववाला दिखा जिसके हाथ में एक कछुए की मूर्ति थी. उससे नाव और वो कछुए की मूर्ति लेकर लखन और विनीता आगे रवाना हुए बीच रस्ते में एक छेड़ जो शायद पहले से जानबूझ कर करा गया था से नाव में पानी भरने लगा विनीता ने दिमाग से काम लेते हुए वो कछुए की मूर्ति उस छेड़ में फिट करदी पानी भरना बंद हो गया वो नदी पार कर गए.

अब आगे का सफर उन्हें पैदल तै करना था आगे दो रस्ते थे इनमे से एक उनकी मंज़िल को जाता था और दूसरा पता नहीं किस तरफ दोनों रास्तो पर एक एक झंडा लगा था एक पर उगते सूरज बना था और दुसरे में ढलता सूरज. शाम होने को ै थी लखन सिंह ने ये ढलते सूरज का रास्ता सही होगा क्युकी इस वक़्त सूरज ढल रहा है पर विनीता ने हरमेस के पसन्दीदा चीज़ो को याद लिंग घोडा राजदंड और कछुआ के पड़ाव वो पार कर ऐ ये पड़ाव हो न हो मुर्गे से जुड़ा और मुर्गा उगते सूरज से जुड़ा है वो उगते सूरज वाले रस्ते पर बाद चले और जल्द hi उस जगह पहुंच गए जहा अगले कुछ दिनों तक उनके रहने के लिए घर बना था. घर के बहार अघोरी का एक शिष्य उनका इंतज़ार कर रहा था. उसने उन्हें बताया की घर में उनकी ज़रूरत का सारा सामान कपडे राशन ईधन पलंग सब कुछ है साथ में उसने उन्हें एक छोटा मोबाइल भी दिया जिससे वो सिर्फ अघोरी के संपर्क रहेंगे और पूजा की हर विधि के बारे में उनसे जानकारी लेते रहेंगे.

इसके अलावा उन्हें अपने साथ लाइ हर चीज़ यही घर के बहार त्यागनी होगी अपने कपडे भी अंदर वो सिर्फ बिना सिले हुए शुद्ध कपडे पहनेगे. लखन के लिए कपडे का एक लंगोट जिससे वो अपना लिंग धक् सकते थे और ऊपर एक अंगोछा जो बस उनकी आधी छाती को ढकता और विनीता के लिए भी कपडे की एक पतली पट्टी थी जिससे ब्रा के रूप में वो अपने उभारो को धक् कर पीछे गांठ बांध सकती थी और एक पतला लंगोट भी था जिससे वो अपनी योनि को धक् सकती थी इसके अलावा बस एक लम्बा कपडा था जिसे अपने शरीर पर लपेट कर वो अपने आप को धक् सकती थी. विनीता लखन दोनों ने झाड़ियों के पीछे जाकर अपने पेहेन कर आए हुए कपडे उतर उन शुद्ध कपड़ो को धारण कर लिया. लखन के लंगोट से उन्हें लिंग का आकर साफ़ नज़र अत था जो इस एकांत माहौल में किसी के भी मन काम वासना जगा देता और विनीता ने पहली बार एक लंगोट से अपनी योनि को ढाका था बदन पर लिप्त वो कपडा मुश्किल से उसके घुटनो तक जा प् रहा था

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और बिना ब्रा के इन कपड़ो में उसके उभर के ऊपर के चूचक भी उभर कर ऊपर आ गए थे इन कपड़ो में विनीता काम की जीती जगती प्रतिमा लग रही थी जो किसी ऋषि मुनि की तपस्या भी भांग कर दे और इसी तरह के कपड़ो में उन्हें अगले कुछ दिन एक डूडसरे के साथ इस एकांत जगह पर बिताने थे.

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वो शिष्य उनके पहने हुए कपडे अपने साथ ले गया और विनीता लखन उस घर में गृह प्रवेश कर गए जहा उनके शयन के लिए बस एक कमरा था और एक hi पलंग था जो क्युकी ये पूजा एक पति पत्नी की थी इसलिए व्यवस्था भी एक पति पत्नी जैसी थी. लखन ने विनीता के मन की दुविधा को समझते हुए उन्हें बिस्तर पर सोने को कहा दिन भर के थकावट भरे सफर के बाद विनीता ने वह मौजूद राशन से थोड़ा खाना बनाया और खा कर विनीता बिस्तर पर सो गई लखन खुद चद्दर बिछा कर नीचे ज़मीन पर सो गए.

लखन सिंह इस जेंटलमैन नेचर ने विनीता के मन में लखन की इज़्ज़त को और ज्यादा बड़ा दिया विनीता को रह रह कर अपनी सुहागरात वाली रात याद रही थी जब उसके पति ने उसकी भावनाओ की क़द्र न करते हुए उसे त्याग दिया था और दूसरी तरफ लखन जी है जो उसके कुछ न होते हुए भी उसकी भावनाओ का कितना सम्मान करते है उसका कितना सम्मान करते है हे इस ट्रू जेंटलमैन. ये सब सोचते सोचते दोनों सो गए.

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हवेली में विनीता और लखन सिंह के रवाना होने के बाद जब अघोरी वापस जाने लगा तो नीतू ने उसका पीछा करा और हवेली से कुछ दूर आवाज़ देकर उन्हें रोक लिया. नीतू को अघोरी से राज के ऊपर आई मुसीबतो का हल ढूंढ़ना था जैसा की ागजोरी ने बताया था की अगले 7 दिन राज पर बहुत भरी है उसकी जान भी जा सकती है. अघोरी ने नीतू को बताया की राज की ये अलप की दशा चल रही है अगर ये 7 दिन बीत गए तो उसे कोई खतरा नहीं. पर इसके लिए नीतू को तंत्र साधना करनी होगी वो भी एकांत में अघोरी के निवास पर और अपनी एक कीमती चीज़ का बलिदान देना होगा. नीतू ने पुछा की क्या चीज़ तो अघोरी ने बताया उसका कौमार्य नीतू को अपना कुंवारेपन का बलिदान करना होगा राज से शादी करने से पहले उसे किसी और के साथ सम्बन्ध बनाने होंगे और जिसके साथ उसे सम्बन्ध बनाने वो शिक्षा भू कुंवारा होना चाहिए मतलब उसने भी किसी से आज तक सम्बन्ध न बनाया हो वो मानसिक रूप से पूरी तरह ठीक हो और उम्र से पूरी तरह बालिग.

ये नीतू के लिए बड़ी दुविधा का प्रश्न था पर राज को बचने के लिए नीतू कुछ भी कर गुजरने को तैयार थी. अघोरी ने नीतू रात के 12 बजे के बाद का समय दिया और कहा की वो 12 बजे के बाद उसका यही इसी जगह इंतज़ार करेगा आज रात नीतू इस साधना का संकल्प लेना होगा अगले दो दिन में एक ऐसे अखंड ब्रह्मचारी को खोजना होगा जिसे वो अपना कौमार्य सौप सके. इस दुविधा को लेकर नीतू हवेली में वापस आ गई वापस आकर उसने अपनी बेस्ट फ्रंड आरती को साडी बात बता दी आरती जो इन सब अंधविश्वासों के खिलाफ थी पर राज की ज़िन्दगी पर आए संकट की वजह से नीतू को मन भी नहीं कर पाई पर उसने तै किया की वो भी रात में नीतू के साथ जाएगी वो इस तरह नीतू को अकेले नहीं जाने देगी और इस बारे में हवेली में किसी को बता कर जाएगी की वो कहा जा रहे है ताकि अगर उनके साथ कुछ गलत हो तो किसी को तो पता हो वो कहा है उनके दिमाग में इसके लिए नेहा का नाम आया की वो उनके राज़ को राज़ रखेगी अगर वो कही फांसी तो मदद लेकर उनतक पहुंच जाएगी. अब नीतू और आरती रात होने का इंतज़ार करने लगी.

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हवेली में हुई इस लिंग साधना ने शोभा के मन के दबे हुए अरमानो की चिंगारी को हवा देदी थी उसकी आँखों के सामने भीमा का झूलता हुआ लुंड hi बार बार आ रहा था पर वो बचपन से विक्रम को hi चाहती थी विक्रम और उसकी शादी बचपन में hi तै कर दी गई थी और उसने बचपन से hi बस विक्रम को hi अपने प्रेमी के रूप में देखा आज बंद आँखों से भीमा के लुंड को देखते हुए भी वो अपने और विक्रम के मिलान की कल्पनाओ के संसार में जूते लगा रही थी और यही सोचते सोचते जीवन में पहली बार उसकी उंगलिया उसकी छूट के अंदर दाखिल हो गई और पहली बार वो फिंगर फूकिंग के आनंद को महसूस करने लगी पर बेशक वो अपने और विक्रम के बारे में सोच रही थी पर इसकी वजह कही न कही भीमा का लिंग का वो प्रथम स्पर्श था जिसने उसकी काम वासना को हवा दे दी.

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कुछ ऐसा hi हाल इस वक़्त भीमा का भी था सुबह सुबह नेहा का मादक रूप कातिलाना अदाए नेहा का वो पंतय उतरना और उसके पुरे गाँव के सामने अपने लखन सिंह की नै नवेली कुंवारी बहु शोभा का उसके लिंग को छूना उसके लिंग को अपने होंठो से चूमना उस वक़्त तो भीमा ने बड़ी मुश्किल खुद को स्खलित होने से रोके रखा पर अब अपनी झोपडी में लिंग की रोकना उसके लिए मुश्किल था. भीमा की आँखों के सामने बार बार पानी से भीगा शोभा का मादक बदन उसके लाल रसभरे होंठ और उनसे उनके लिंग की वो छुअन के दृश्य आ रहे थे जो उसके लिंग में बार झटके पे झटके दे रहे थे. पर शोभा उसके मालिक लखन सिंह की बहु है जिनकी वो बाप से बढ़कर इज़्ज़त करता था इसलिए शोभा के बारे में ये सब सोचना भी उसके लिए गलत था पर नेहा ने पिछले कई दिनों से उसकी हालत ख़राब कर राखी थी और नेहा की तरफ से मिल रहे सिग्नल पे सिग्नल से उसे लगने लगा था की शायद नेहा भी उससे छोड़ने को तैयार हो जाएगी उसने मन नेहा को छोड़ने को ख्वाब सजा लिया. एक बार फिर नेहा की वो रेड पंतय को अपने लुंड पर लपेट लिया और अपने लुंड पर अपने हाथ तेज़ तेज़ चलने लगा. उसके मन में नेहा को छोड़ने की प्रबल इच्छा जन्म ले चुकी थी पर इसकी वजह कही न कही शोभा के साथ हुई आज की घटना थी.

विक्रम और नेहा के बारे में सोचकर अप्रत्यक्ष रूप से कही न कही एक दुसरे के बारे में सोचते हुए कही न कही नेहा और विक्रम का नाम लेकर कल्पनाओ में एक दुसरे को छोड़ते हुए शोभा और भीमा अलग अलग जगहों पर होते हुए भी एक साथ झाड़ गए शोभा का तो ये जीवन का पहला ओर्गास्म था और भीमा का आज का डूयसरा पर पहले से कही ज्यादा उत्तेजना पूर्ण. अपने अपने पार्टनर्स के साथ सम्भोग की कल्पना करते करते सो गए.

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लखन सिंह की गाँव की कोठी में गरिमा आज भी देर से सोकर उठी आज भी उसका सर कुछ भरी भरी था अपने घर में जल्दी उठने वाली गरिमा के लिए ये बहुत अजीब था की गाँव में ामे के बाद अचानक से काफी देर तक सोने लगी उसके पेट पर आज भी कुछ सफ़ेद पपड़ी सी जमी थी. वो ये सब सोच hi रही थी की बहार से जीतू की आवाज़ आई जो उसे नाश्ते के लिए बुला रहा था. गरिमा का ध्यान इन सबसे हैट गया और वो बाथरूम में नहाने चली गई. बाथरूम में उसकी कल की पंतय जो तीन बार झड़ने के कारन गरिमा की छूट से निकले जूस से भीग कर पूरी तरह अकड़ गई थी. गरिमा ने उसे अच्छे से धोया और नाहा धो कर बाहरवा गई. आज गरिमा के अपने कपडे जो उसने शादी वाली रात पहने थे जो नदी में गिरने से भीग गए थे अब सूख गए थे. दो दिन से किसी और के कैसे कपडे पेहेन कर गरिमा को बड़ा अजीब लग रहा था उसने आज अपनी वही साडी पेहेन ली. उस साडी को पेहेनते हुए गरिमा को कल अपने और हरिया के बीच सड़क पर हुई घटना याद आ गई और उसमे एक बार उत्तेजना की लेहेर दौड़ गई साथ hi उसे ये भी याद आया की हरिया का हाथ दर्द कर रहा था शायद दो रात पहले उसने जो उसे छड़ी से मारा था.

गरिमा नाश्ता करने नीचे आ गई नीचे आज गरिमा को शादी वाली रात की तरह सजा देख काका और जीतू दोनों की आह निकल गई. काका की नज़रे गरिमा की गांड पर जैम गई और जीतू की गरिमा की चूचियों पर. पर नाश्ता करते हुए भी गरिमा के मन में बस हरिया का ख्याल था उसके हाथ का दर्द. गरिमा ने काका से एक छोटी बोतल में थोड़ा से तेल लिया मालिश के लिए और खुद से हरिया के घर के लिए निकल पड़ी उसके हाथो की मालिश के लिए पर कही न कही ये मन में दबज उत्तेजना की आग थी जो उसकी मर्ज़ी के बिना उसे हरिया के तरफ खींचे लिए जा रही थी. गाँव में इतने गद्रे बदन की शहरी औरत देख गाँव के मर्दो के लुंड पतलून के अंदर से गरिमा के जिस्म को सलामी देने लगे. कई मर्दो ने सलामी देते देते अपनी टोपे चला भी दी. गाँव के लोगो से पूछते हुए गरिमा हरिया के घर के दरवाज़े तक पहुंच गई. गरिमा ने दरवाज़ा खटखटाया गरिमा को इस तरह अपने दरवाज़े पर देख हरिया शॉक रह गया साथ साथ हरिया के अगल बगल के गाँव वाले भी.

गरिमा हरिया के घर के अंदर आ गई तो हरिया ने दरवाज़ा बंद कर लिया तब गरिमा ने अपने आने का रीज़न बताया की वो ये तेल लेकर आई हरिया की मालिश के लिए क्युकी हरिया की ब्याह में दर्द है. हरिया को एक पल के लिए तो अपने कानो पर यकीन न हुआ की वो जो सुन रहा है वो सच है. पर दर्द हरया की पीठ तक था जहा हरिया खुद से तो मालिश कर नहीं सकता था इसलिए गरिमा ने तै करा की वो खुद हरिया की पीठ पर मालिश करेगी. हरिया ने ऊपरी मन से तो गरिमा को मन करा पर गरिमा के ज़ोर देने पर मान गया. पर मालिश के लिए तो हरिया को अपने कपडे उतरने होंगे तो हरिया ने अपनी शर्ट और पंत उतर दी बीएड पर उल्टा होकर पेट के बल लेट गया.

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गरिमा ने खड़े खड़े hi हरिया के हाथो की मालिश शुरू कर दी पर खड़े खड़े मालिश करने की वजह से मालिश में दबाव नहीं लग प् रहा था. हरिया ने गरिमा को आईडिया दिया की वो उसके ऊपर बैठ जाए और ऊपर बैठ कर मालिश करदे इससे दबाव ज्यादा लगेगा. पर ऊपर बैठने से गरिमा की साड़ी ख़राब हो जाती उसमे दाग लग जाते और दाग लगी साड़ी बहार पेहेन कर जाने लोग पता नहीं क्या क्या सोच लेते. इसलिए हरिया ने गरिमा को सुझाव दिया की गरिमा अपने कपडे उतर ले उसकी एक शर्ट पेहेन ले इससे उसके कपडे ख़राब नहीं होंगे. नार्मल कंडीशन में शायद गरिमा ऐसा न करती पर कही न कही गरिमा की उत्तेजना उसे ऐसा करने के लिए उकसा रही थी. गरिमा ने बाथरूम में जाकर अपनी साड़ी ब्लाउज पेटीकोट और ब्रा तो उतर दी पर पंतय उतरने में उसे शर्म आ रही थी क्युकी हरिया की पंत उसके नाप की नहीं थी और बेल्ट हरिया पहनता नहीं था इसलिए गरिमा को बस हरिया की शर्ट पहनकर hi बहार जाना था. गरिमा पंतय के ऊपर से hi हरिया की शर्ट पहनकर बहार आ गई.

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खुली टांगो में अधनंगी हालत में यु गरिमा को अपने सामने खड़ा देख हरिया का लुंड छड़ी पहाड़ कर बहार आने को उतावला हो गया पर हरिया ने अपनी भावनाओ पर काबू रखा. गरिमा ने हरिया से पुछा की उसकी बीवी की कोई पंतय तो नहीं राखी इस वक़्त उसके पास पर हरिया तो साडी पंतय गरिमा को पहले hi दे चूका था. हरिया ने गरिमा को समझाया की पंतय पेहेन कर ऊपर बैठने से उसमे दाग लग सकते है और उससे गरिमा की साडी भी दागदार हो सकती है तो वो मालिश रहने दे या पंतय उतर दे शर्ट घुटनो तक लम्बी तो है hi और वैसे भी हरिया गरिमा को बिना कपड़ो के देख चूका है तो इस वक़्त उतरने में क्या हर्ज है. गरिमा को ये बात सही लगी की हरिया तो उसकी छूट तक चाट चूका है तो अभी पंतय उतरने से क्या हो जाएगा. फाइनली ने गरिमा ने अपनी पंतय उतर दी और हरिया के ऊपर बैठ कर उसकी पीठ की मालिश करने लगी.

अपनी जांघो पर गरिमा की नंगी गांड के स्पर्श ने हरिया की उत्तेजना को चरम पर पंहुचा दिया. उसका लुंड धीमे अपना आकर बढ़ाने लगा. पीठ की अच्छी तरह मालिश हो जाने के बाद हरिया सीधा हो गया अब हरिया का चेहरा गरिमा के ऊपर था अब गरिमा को फिर से हरिया के ऊपर बैठ कर उसकी छाती की मालिश करनी थी. उलटे लेते हरिया पर बैठना अलग बात थी और सीढ़ी तरफ से बैठना अलग क्युकी इस तरफ से गरिमा की नंगी छूट का संपर्क सीधा हरिया के लुंड से होता बीच में थी तो बस हरिया की एक अदद चड्डी. पर कही न कही गरिमा के अंदर जल रही एक्ससिटेमेंट की आग उसे आगे बढ़ने के लिए उकसा रही थी वो खुद को hi इस बात से जस्टिफाई कर रही थी की ये सब तो वो बस हरिया की मालिश करने के लिए कर रही उस दर्द को दूर करने के लिए जो उसीने दिया तो इतना करना तो उसका फ़र्ज़ है. अपनी हवस को उसने नया नाम दे दिया था फ़र्ज़.

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गरिमा बिस्तर पर सीधे लेते हरिया के ऊपर बैठ गई. बैठते hi गरिमा की नंगी छूट का संपर्क सीधा हरिया के लुंड से हुआ. अगर बीच में चड्डी की वो दीवार न होती तो शायद हरिया का लुंड सीधा गरिमा की छूट में अंदर तक उतर जाता. गरिमा की छूट और अपने लुंड के इस संपर्क ने हैया की आह निकल दी उसने बिस्तर की चद्दर को कास कर पकड़ लिया. आह तो गरिमा की भी निकली पर उसने अपने दांतो को दबा कर उसे अंदर hi घोंट दिया. और हरिया की छाती पर तेल डालकर मालिश करना शुरू करदी. छाती की मालिश की वजह से गरिमा आगे पीछे हो रही थी जिस वजह से गरिमा की छूट हरिया के लुंड आगे पीछे घिस रही थी. कही न कही गरिमा को भी इसमें परमसुख मिल रहा था इसलिए वो सब कुछ भूल कर अपनी छूट को तेज़ तेज़ हरिया के लुंड पर घिस रही थी. ये कहना मुश्किल था की उसके हाथ आगे पीछे होने की वजह से उसकी छूट हरिया के लुंड पर आगे पीछे घिस रही है या उसकी छूट हरिया के लुंड आगे पीछे घिसने की वजह से उसके हाथ हरिया की छाती पर आगे पीछे चल रही है. उत्तेजना के मरे हरिया का लुंड भी झटके पे झटके खाए जा रहा था अगर कुछ देर और गरिमा यही अपनी छूट हरिया के लुंड पर घिसती रहती तो उसका वीर्य उसकी चड्डी के अंदर hi निकल जाता और शायद गरिमा भी बैठे बैठे hi झाड़ जाती और शायद इस चरमसुख पर भी ब्रेक लग जाता.

इसलिए हरिया ने खुद को झड़ने से बचने के लिए नया डाव फेका पैरो की मालिश का. हरिया ने गरिमा से कहा की वो उसके पेट पर उसके चेहरे की तरफ पीठ कर के बैठ जाए और उसके पैरो की भी मालिश करदे. गरिमा तो उत्तेजना के नशे जैसे अपने होशो हवस hi खो बैठी थी वो चुपचाप हरिया के कहने पर हरिया के पेट उसकी तरफ करके बैठ गई और हरिया की जांघो को मालिश करना शुरू करदी. चड्डी के अंदर हरिया का लुंड बुरी तरह से अकड़ चूका उसका उठान गरिमा को साफ़ नज़र आ रहा था जो उसकी उत्तेजना को दोगुना कर रहा था और हरिया के लिए भी अब अपनी चड्डी पेहेनना मुश्किल हो रहा था. हरिया ने फैसला कर लिया की अब उसे थोड़ा रिस्क लेना hi होगा और थोड़ी पहल करनी होगी आर या पार. हरिया ने गरिमा को अपनी हालत से अवगत कराया की कैसे उसका लुंड गरिमा के घिसने की वजह से बुरी तरह अकड़ चूका है और उसका चांदी पहने रहना मुश्किल हो रहा है तो अगर गरिमा बुरा न मने तो उसकी चड्डी उतर दे. अपनी नंगी छूट पर हरिया के झटके कहते लुंड की रगड़ ने गरिमा को भी उत्तेजित कर दिया था और वो भी कही न कही हरिया के लुंड को देखने के लिए बुरी तरह तड़प रही थी. इसलिए हरिया की बात का hi सहारा लेकर उसने हरिया की चड्डी को उसके पैरो से निकल कर ज़मीन पर नीचे फ़ेंक दिया.

चड्डी उतारते hi पहले से बुरी तरह तना हुआ हरिया का लुंड एकदम सत्तर सीढ़ी हालत में गरिमा की नज़रो के सामने आ गया जैसे उसे सलामी दे रहा हो और उससे रिक्वेस्ट कर रहा हो की वो उसकी गर्मी को शांत करे. गरिमा ये भूल गई थी की वो किसी की बीवी है एक बच्चे की माँ है इस वक़्त वो बस एक औरत थी जिसके अंदर की वासना की आग ने उसके सोचने समझने की छमता को शुन्य कर दिया था. वो आगे झुक कर हरिया की जांघो की मालिश कर रही थी आगे झुकने की वजह से गरिमा की छूट पीछे से दिखने लगी थी. गरिमा एक पल को आगे जाती और फिर पीछे आती. जितनी बार वो पीछे आती गरिमा की छूट हरिया के होंठो के नज़दीक आ जाती. हरिया ने भी अपनी जीभ निकल कर गरिमा की छूट को टच करना शुरू कर दिया. हरिया की जीभ की छुअन ने गरिमा के मन में कल वाली यादे ताज़ा कर दी और वो खुद से पीछे खिसक कर अपनी छूट हरिया के होंठो के ऊपर ले आई. हरिया ने भी गरिमा को निराश करते हुए एक पालतू कुत्ते की तरह जीभ निकल निकल कर गरिमा की छूट चेतना शुरू करदी.

गरिमा भी कमर हिला हिला कर अपनी छूट को हरिया के होंठो पर दबा रही थी मालिश तो फिलहाल कही पीछे छूट गई थी. फिलहाल तो हरिया की जीभ गरिमा की छूट की मालिश कर रही थी. गरिमा झड़ने के करीब पहुंच चुकी थी और हरिया ये बात जनता था की इस वक़्त उनके बीच जो भी हो रहा है वो इसिलए हो रहा है क्युकी गरिमा अपनी उत्तेजना को काबू नहीं कर प् रही है एक बार गरिमा की उत्तेजना की ये आग ठंडी हो गई तो गरिमा इसके आगे कुछ नहीं करेगी और इतना सुनेहरा मौका शायद उसे दुबारा न मिले. इसलिए हरिया ने गरिमा की छूट चेतना बंद कर दिया. गरिमा की सासे तेज़ तेज़ चल रही उसका सीना ऊपर नीचे हो रहा था होंठ थरथरा रहे थे. अब बरी थी हरिया के आखरी डाव की अगर ये डाव काम कर जाए तो हरिया का लुंड गरिमा की छूट दाखिल होने से कोई नहीं रोक पाएगा. हरिया गरिमा की उत्तेजना को कही न कही समझ रहा था उसने गरिमा से रिक्वेस्ट करि की वो उसके लुंड की उत्तेजना को शांत कर दे उसका लुंड बुरी तरह अकड़ चूका है वो एक बार झड़ने में उसकी मदद कर दे. गरिमा भी हरिया के लुंड की तरफ आकर्षित थी पर उसे हाथ में लेने में अभी भी उसे झिझक थी और हरिया भी यही चाहता था की वो उसका लुंड हाथ में न ले.

हरिया ने गरिमा से कहा की अगर वो इसे हाथ में लेने में झिझक रही है तो अपनी जांघो को इस पर कुछ देर घिस दे वो खुद बा खुद झाड़ जाएगा. गरिमा को भी ये सुझाव सही लगा हरिया की चल के मुताबिक वो उसके बगल में लेट गई और अपनी जांघ हरिया के लुंड पर रख दी और हौले हौले उसे हरिया के लुंड पर रगड़ने लगी.

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हरिया का लुंड एक बार फिर झटके खाने लगा और ये झटके गरिमा को भी उत्तेजित करने लगे चुकी वो अब तक झाड़ नहीं पाई थी और वो भी हरिया की तरह झड़ने को बेताब थी शायद इसिलए उसने हरिया की बात आसानी से मान ली. हरिया भी जनता था की इस पोजीशन में औरत की छूट में अपना लुंड दाखिल करना सबसे आसान होता है क्युकी उसकी छूट पूरी तरह खुल जाती है बस उसे गरिमा का ध्यान उस तरफ नहीं जाने देना जब उसका लुंड छूट में दाखिल हो.

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हरिया अपना चेहरा गरिमा के चेहरे के एकदम करीब ले आया जहा से उसकी सासो की गर्माहट गरिमा के चेहरे को छू रही थी. गरिमा की आँखे तो पहले hi अपनी जांघो पर हरिया के लुंड के स्पर्श की वजह से बंद थी. दोनों के लैब हल्का हल्का एक दुसरे को टच कर रहे थे हरिया ने कमर हिला कर हल्का सा पैन लुंड गरिमा की चूर से टच करा और रिमोट की तरह गरिमा के हाथो की पकड़ हरिया के बालो पर कास गई और खुद बा खुद गरिमा के होंठ हरिया के होंठो से जुड़ गए. दोनों आँखे बंद करे सब कुछ भूल कर एक दुसरे को आलिंगन में भर कर कर एक दुसरे के चुम्बन में बिजी हो गए.

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यही वक़्त था हरिया के अंतिम प्रहार लोहा पूरी तरह गरम था बस ज़रूरत थी हथोड़ा मरने की. हरिया ने कमर हिला कर अपना लुंड गरिमा की छूट के मुहाने पर सेट करा और एक hi झटके में आधा लुंड गरिमा की छूट के अंदर दाखिल कर दिया. गरिमा तो अंदर से इतनी ज्यादा गरम हो चुकी थी की जैसे उसने भी मन hi मन खुद को इस हमले के लिए तैयार कर लिया हो. हरिया ने एक और झटका मारा और उसका पूरा लुंड गरिमा के छूट के अंदर गहराई तक उतर गया दोनों के होंठ अब भी आपस में जुड़े हुए थे. गरिमा की छूट में दाखिल हो जाने के बाद हरिया नीचे से धक्के पे दाहकके लगता रहा हर धक्के के साथ उनकी किश और भी ज्यादा कामुक होती चली गई. और आखरी धक्के के साथ सब कुछ शांत हो गया गरिमा की छूट हरिया के वीर्य से सराबोर हो गई दोनों एक साथ झाड़ कर शांत हो गए.

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कुछ मं यही एक दुसरे को बहो में भरे हुए पड़े रहे.

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पर सेक्स से ज्यादा खतरनाक होता उसके बाद का अनुभव जब हमे एहसास होता है हम उत्तेजना के नशे में क्या कर गए. जब गरिमा की उत्तेजना भी शांत हुई तो उसे भी एहसास हुआ की वो क्या कर गई ग्लानि और अपराधबोध उस पर हावी हो गया. हरिया भी इस बात को जनता था की ऐसा होगा वो इसके लिए तैयार था उसने गरिमा को ये एहसास कराया की एक औरत और मर्द के बीच ये सामान्य बात है उत्तेजना में ऐसा हो जाता है शायद गरिमा के मन की दबी इच्छा थी जो उसके पति से पूरी नहीं हो पाई थी तभी आज गरिमा ये सब कर बैठी और वैसे भी वो यहाँ गाँव में है यहाँ कोई उसे नहीं जनता न ये बात उसके घर तक पहुंचेगी तो वो इतना टेंशन न ले. गरिमा भी थोड़ा शांत हुई और सोचने लगी की वैसे भी पहले भी हरिया के साथ नंगे होकर रात गुज़र चुकी है हरिया से अपनी छूट चटवा चुकी और यहाँ उसे कोई जनता नहीं उसकी सहेलिया भी नहीं है यहाँ तो वो इस बारे में इतना न सोचे पर उसे टेंशन थी प्रेगनेंसी की कही वो पेट से न हो जाए. हरिया ने इसका भी सलूशन उसे बता दिया की पड़ोस के गाँव में सरकारी अस्पताल है जहा गर्भनिरोधक गोली मिल जाती है वो कल उसके साथ वह चले. गरिमा भी थोड़ा रिलैक्स हुई और कल अस्पताल का प्रोग्राम फिक्स करके अपने कपडे पेहेन कर वापस लखन की कोठी आ गई.

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उसने कोठी आकर बाथरूम में जाकर खुद को पानी से अच्छी तरह साफ़ करा हरिया के साथ अपने मिलान को याद कर एक बार फिर अपनी छूट में ऊँगली चला चला कर अपनी गर्मी को शांत करा. रिलैक्स होने के बाद उसकी नज़र अपने कल की पंतय पर पड़ी जिसे वो जाने से पहले धो कर गई थी उसमे कुछ कुइपचिपा सफ़ेद सफ़ेद सा कुछ लगा था. उसने सोचा शायद जल्दी जल्दी में वो अपनी पंतय अच्छे से साफ़ करना भूल गई होगी उसने पंतय को दुबारा धो दिया. और हरिया से हुई अपनी भरपूर चुदाई की थकावट को दूर करने के लिए खाना खा कर सोने चली गई.
 
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हवेली में नेहा ने शबाना को कही न कही कन्विंस कर लिया था धामु के साथ सम्बन्ध बनाने के लिए और उससे बच्चा पाने के लिए. उनके कमरे में लगे स्पाई सीएएम से लालू एंड कंपनी भी ये बात जान गई थी. और लालू मन hi मन खुश था अपनी शतरंज के हर मोहरे के उसके हिसाब से बढ़ने पर. लालू खुद तो इस वक़्त विकर्म के साथ था रस्ते में था वो दोनों लखन सिंह और विनीता को काकातुआ के जंगल छोड़ कर वापस आ रहे थे इसलिए लालू ने मश्ग के थ्रू अपने साथियो को आगे का प्लान समझाया की उन्हें अब धामु को शबाना के पास जाने से पहले एक गोली खिलानी है. ये गोली वियाग्रा की अपोजिट थी जहा वियाग्रा शरीर में उत्तेजना को कई गुना बड़ा कर लुंड में तनाव ला देती है वही ये गोली शरीर में उत्तेजना को कम कर देती है और जब तक इस गोली का असर रहता है तब तक लाख कोशिश के बाद भी लुंड खड़ा नहीं हो सकता. देव कुंदन प्रताप कंफ्यूज हो गए की लालू के दिमाग में चल क्या रहा है एक तरफ वो शबाना के धामु के साथ सम्बन्ध बनवाने के लिए इतनी चले चल रहा और अब जब सम्बन्ध बनाने का टाइम आया तो धामु की उत्तेजना को ख़त्म कर रहा. तब लालू ने बताया की शबाना कोई चैरेक्टरलेस लेडी नहीं जो अपने मज़े के लिए धामु से सम्बन्ध बना रही है वो धामु से सम्बन्ध बना रही है एक बच्चे के लिए और अगर उसका ये मकसद धामु से पूरा हो गया तो हम उसके साथ वो कैसे करेंगे जो हमने सोचा है. सबको लालू का प्लान समझ आ गया.

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इधर नीतू और आरती रात में अघोरी के साथ जाने के लिए खुद को मेंटली तैयार कर रही थी पर जाने से पहले नेहा को इस बारे बताना जरुरी था ताकि वो अगर किसी मुसीबत में फेज तो नेहा उन तक मदद पंहुचा सके. नेहा रात के बारे में धामु को बताने के लिए धामु के कमरे की तरफ चल दी और नीतू और आरती नेहा की तरफ रायते में तीनो की मुलाकात हो गई और नीतू आरती ने नेहा अघोरी राज और साधना के बारे में सब बता दिया की उन्हें रात में उस अघोरी के साथ जाना है. नेहा पहले तो घबराई और शकभा को इस बारे में बताने को कहा पर नीतू अभी इस बारे में किसीको कुछ बताना नहीं चाहती थी इसलिए उसने नेहा को अभी ये बात अपने तक रखने को कहा और कहा की अगर सुबह तक वो दोनों वापस न आए तो वो शोभा को इस बारे में बता दे और मदद लेकर उन तक पहुंच जाए. नेहा मान गई और वापस धामु के कमरे के पास पहुंच गई और धामु के कमरे में जाकर धामु को कवीनेन्स करा की वो रात में उसके साथ शबाना के कमरे में चले वो भी सबसे छुप कर बिना किसी को बताए शबाना को उससे कुछ बात करनी है. मंदबुद्धि धामु अब भी यही समझ रहा था की शबाना अब भी उससे गुस्सा है क्युकी पिछली बार शबाना ने उसे दांत दिया था जब वो उसका दर्द दूर कर रहा था. पर नेहा ने धामु को समझाया की शबाना उससे गुस्सा नहीं बल्कि उस दिन के सॉरी बोलना चाहती है. धामु खुश हो गया और रात में शबाना के कमरे में जाने के लिए मान गया. नेहा ने धामु को कहा की वो रात में तैयार रहे वो खुद रात में उसे लेने आएगी. नेहा को नहीं पता की लालू के दोस्त दरवाज़े पर कान लगाए उनकी साडी बाते सुन रहे है.

रात गहरा गई आधी रात का समय नज़दीक आ गया हवेली में ज्यादातर लोग सोने जा चुके थे. नीतू आरती अघोरी की बताई जगह पर उससे मिलने जाने को तैयार थे. नेहा धामु को लेने जाने को तैयार थी. जीवन में पहली बार अपने पुरे होशो हवस में अपनी शौहर के इलावा किसी गैर मर्द वो भी मानसिक रूप से कमजोर के साथ सम्बन्ध बनाने का सोच सोच कर शबाना के पसीने छूट रहे थे उसका रोया रोया खड़ा हो गया था. विक्रम के साथ वापस लौट रहे लालू की नज़रे अपने मोबाइल पर थी वो इस पुरे गजटनक्रम पर नज़र रखे था. नेहा के कमरे से निकलते hi उसने देव को मश्ग कर दिया की वो जाकर धामु को वो गोली खिला दे. देव तुरंत भाग कर नेहा से पहले धामु तक पहुंच गया और अपनी बातो से धामु से कबुलवा लिया की वो शबाना के पास जा रहा है और ताकत की गोली के नाम पर धामु को वो गोली खिला दी की शबाना को ताकतवर आदमी पसंद है. गोली खिलाकर देव वह से निकल गया. नेहा को रस्ते में नीतू और आरती मिल गई जो अघोरी से मिलने जा रही थी नेहा ने उन्हें सावधान रहने को कहा और कोई भी दिक्कत होने पर उसे तुरंत फ़ोन करने को कहा. नेहा को अलविदा कह नीतू आरती छुपते छुपाते हवेली से निकल गई.

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नेहा धामु के कमरे में पहुंच और सबसे छुपते हुए धामु को शबाना के कमरे तक ले आई पर नेहा की हर हरकत पर बारीकी से नज़र राखी जा रही है. नेहा धामु को शबाना के कमरे में ले आई और धामु को वही छोड़ खुद कमरे के बहार निकल गई. शबाना ने उससे पुछा की वो रात में कहा जाएगी किसी के कमरे में जाएगी तो वो पूछेगा नेहा ने उसे कह दिया वो रात में बहार hi कड़ी है जब उसका काम हो जाए तो वो शोभा के कमरे में चली जाएगी और उसे इस बारे में कुछ नहीं बताएगी. नेहा कमरे के बहार आ गई. नेहा बहार कड़ी hi की उसने हवेली के पीछे की झाड़ियों में किसी के कराहने की आवाज़ सुनी नेहा आवाज़ का पीछा करते हुए झाड़ियों की तरफ चल दी. झाड़ियों के पीछे देखते hi नेहा की आँखे फटी की फटी रह गई. छोटू नाम का 18 साल का लड़का जो कल्लू (जिसने बस में गरिमा को छेड़ा था) के साथ हवेली में वेटर का काम करता था नंगा घोड़ी की तरह ज़मीन पर झुका हुआ है और हवेली का मुख्या रसोइया रामु काका जिसमे उम्र 50 से ऊपर है अपनी धोती खोले अपना कला मोटा लुंड निकले उस बच्चे की गांड मार रहा है और बेदर्दी से उसके बाल खींच रहा था. छोटू दर्द के मरे कराह रहा है शायद ये बुद्धा रसोइया बड़सम का शौक़ीन था.

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दर्द से कराहते छोटू की नज़र अचानक नेहा पर पड़ी और वो उठने लगा. छोटू को उठता देख रामु को गुस्सा आ गया उसने छोटू के बाल खींचे तो छोटू ने ऊँगली से नेहा की तरफ इशारा कर दिया. नेहा को इस तरह अपने सामने खड़ा देख रामु की भी सिटी पित्ती गम हो गई उसे लगा की नेहा अब आवाज़ लगाकर सबको बुला न ले. रामु भी छोटू को छोड़ पीछे हैट गया पीछे हटने से रामु का लुंड छोटू की गांड से बहार आकर झूलने लगा. नेहा की नज़रे रामु काका के लुंड पर गई रामु के शरीर की तरह hi एकदम कला और पूरी तरह फूला हुआ था उनका लुंड. और चारो तरफ सफ़ेद झांट के बालो से ढाका हुआ था जाने कितने सालो से उन्होंने अपनी झांट के बाल साफ़ नहीं करे होंगे. नेहा के मन ऐसे गंदे झांटो से भरे लुंड के लिए भी अलग फंतासी थी पर इस वक़्त वो ये सब देख शॉक थी क्युकी उसे नहीं पता था की ये सब छोटू की मर्ज़ी से हो रहा या ज़बरदस्ती इसलिए वो कुछ रियेक्ट नहीं करना चाहती थी. नेहा को देख रामु काका ने ज़मीन से अपनी धोती उठा कर लपेट ली और नेहा के सामने हाथ जोड़ कर बैठ गया की किसीको बताना मत. नेहा ने भी रामु की वारं करा की दुबारा इस बच्चे को परेशां न करे. नेहा को वडा कर रामु काका वह से नौकरो के तम्बू की तरफ चला गया.

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दर्द से कराहता छोटू वह अब भी नंगा खड़ा था. उसका लुंड रामु काका जितना तगड़ा और आकर्षक तो नहीं था आखिर 16 साल के लड़के का लुंड था पर लुंड तो लुंड hi होता है औरत की प्यास बुझाने के लिए तो काफी है. पर इस वक़्त बेचारा गांड मरवाकर दर्द से भरा हुआ था और थोड़ी शर्म भी थी यु नेहा के सामने नंगा खड़ा होने की. वो कराहते हुए अपने कपडे उठाने के लिए बड़ा पर नेहा को लगा इसकी गांड पर थोड़ी क्रीम लगा दू तो शायद इसका दर्द कुछ कम हो जाए. नेहा उसे रोकने का बोल अपने कमरे की तरफ बड़ी पर उसे याद आया कमरे में तो शबाना धामु है वह नहीं जा सकते पर नीतू आरती जा चुके है उनका कमरा खली है उनके कमरे में क्रीम होगी. वो उनके कमरे से क्रीम ले आई छोटू अब भी नंगा खड़ा नेहा उसके पीछे आ गई और उसके घुटनो के बल बैठ कर उसकी चूतड़ों को अपने हाथ से खोलकर क्रीम लगाने लगी. इतनी जवान खूबसूरत सेक्सी लड़की से अपनी गांड पर क्रीम लगवाकर छोटू को अलग एक्ससिटेमेंट हो रहा और इस तरह अँधेरे में एक 18 साल कच्चे जवान लड़के की गांड में क्रीम लगाना में नेहा को बड़ा मज़ा आ रहा था.

इधर जब नेहा धामु को कमरे में छोड़ कर आई थी उसके बाद.

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शबाना कमरे में एक गाउन पहने बैठी थी और धामु सामने खड़ा था. दोनों को समझ नहीं आ रहा था की क्या करे. धामु तो अब भी शबाना की कल की दांत से डरा हुआ था और शबाना जैसी शरीफ ज़हीन महिला के लिए भी खुद को इस हद तक गिरा कर एक मंदबुद्धि आदमी का फायदा उठाना बड़ा अजीब लग रहा था. पर इतना आगे बढ़ने के बाद वो पीछे नहीं हैट सकती और पहल भी उसे hi करनी थी क्युकी धामु से पहल की उम्मीद करना तो बेवकूफी है. शबाना एक गहरी सास बिस्तर से उठ कर धामु का हाथ पकड़ कर उसे अपने साथ बिस्तर पर ले आई.

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उसने धामु को रिलैक्स करा की वो उससे नाराज़ नहीं है. उसने धामु के गाल पर और होंठो पर किश की.

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शबाना का ये बदला रूप देख धामु भी खुश था वही अपने मोबाइल से शबाना की हर हरकत पर लालू भी नज़र रखे था साथ hi साथ वो ये रिकॉर्ड भी कर रहा था वो हवेली पहुंचने वाले थे.

शबाना ने बड़ी हिम्मत के साथ धामु की पंत और अंडरवियर उतर दी. धामु का छोटा सा लुंड उसकी आँखों के सामने था. छोटा hi सही पर उसे माँ बनाने का जरिया तो ये hi था और वो ये सब अपने मज़े के लिए नहीं बल्कि मजबूरी में कर रही थी. उसने धामु के लुंड को हाथ में भर लिया और अपने हाथो को उसपे आगे पीछे करके उसे उत्तेजित करने की कोशिश करने लगी क्युकी लुंड को उत्तेजित करने का यही तरीका उसे पता था.

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नेहा की तरह सेक्स के खेल में पारंगत नहीं थी बल्कि पारंगत क्या अपने पति से कभी उसे सेक्स का अनुभव मिला hi नहीं अगर मिलता तो ये नौबत hi न आती. पर धामु के शरीर में वो गोली अपना असर दिखा चुकी थी उसके शरीर किसी तरह की उत्तेजना पैदा hi नहीं हो रही थी. शबाना अपने पति के साथ ये परिसहिति पहले भी फेस कर चुके और एक बार फिर अपनी सेल्फ रेस्पेक्ट को गिरा कर उसने इतना बड़ा फैसला करा और एक बार फिर एक मुरझाया हुआ लुंड उसके सामने था. शबाना धामु के लुंड पर तेज़ तेज़ हाथ चला कर उसे खड़ा करने की भरसक कोशिश कर रही थी पर उसकी हर कोशिश बेकार थी. लालू शबाना की इस हालत पर मन hi मन मुस्कुरा रहा था क्युकी शबाना की छूट का उद्घाटन तो उसे करना था.

खिसिया कर शबाना ने धामु का लुंड हाथ से छोड़ दिया और नेहा को कॉल करने लगी. बहार छोटू की गांड में क्रीम लगा राइ नेहा ने देखा की शबाना कॉल कर रही तो उसने छोटू कपडे पेहेन कर जाने को कहा. जाते जाते उसने छोटू को होंठो पर किश दिया छोटू ने एक्सपेक्ट नहीं करा था की गांड पर क्रीम लगाने के बाद नेहा जैसी हॉट लड़की उसे लिप किश भी देगी.

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उसका गांड का सारा दर्द इस किश छूमंतर सा हो गया. नेहा से लिप किश लेकर छोटू वापस सर्वेंट के टेंट की तरफ चला गया. नेहा अपने कमरे में आई जहा शबाना गुस्से और दुःख में मुँह छुपाए बैठी थी और बगल में धामु अधनंगी हालत में बैठा था. नेहा को देख धामु ने अपने कपडे पेहेन लिए. शबाना ने नेहा से कहा की वो धामु को वापस छोड़ आए नेहा ने रीज़न पुछा पर शबाना ने कहा की पहले इसे छोड़ आए. नेहा धामु को लेकर बहार निकल आई और धामु को उसके रूम तक छोड़ आई. तब तक विकर्म लालू की कार भी हवेली के अंदर आ गई.

मौसम का मिज़ाज़ भी अचानक से बदलने लगा था. आज मौसम विभाग ने एक बड़े तूफ़ान की भविष्यवादी की थी शायद ये वही तूफ़ान था. चारो तरफ धुए का गुबार छ गया था तेज़ आंधी चलने लगी थी आँख खोलना भी मुश्किल हो रहा था. नेहा छुपते छुपाते भागकर वापस अपने कमरे आ गई. वापस आकर उसने शबाना से पुछा की उसने धामु को वापस क्यों भेज दिया तो शबाना ने नेहा को साडी बात बता दी की धामु का लुंड खड़ा hi नहीं हुआ वो भी उसके पति की तरह नामर्द है. पर नेहा ने शबाना को समझाया की अगर वो नामर्द होता तो कल नशे में उसका लुंड खड़ा कैसे हो गया शबाना को भी नेहा की बात में लॉजिक लगा पर आज क्यों नहीं खड़ा हुआ ये बात भी थी. तब नेहा ने शबाना को समझाया की मर्द को उत्तेजित करना भी एक कला है सिर्फ लुंड को हाथ में रगड़ने से ज़रूरी नहीं वो खड़ा हो जाए. औरत अपनी अदाओ अपनी बातो या सबसे अचूक अस्त्र अपनी ज़बान से नामर्द से नामर्द मर्द का लुंड भी खड़ा कर सकती है. पर शबाना को तो ये सब आता नहीं था नेहा ने शबाना को रिलैक्स करा की चिंता न करे वो उसे ये सब सीखा देगी उसे सेक्स के खेल में माहिर कर देगी और फिर वो धामु को उत्तेजित करे. शबाना मान गई पर उसे ये समझ नहीं आ रहा था की नेहा उसे ये आड़े ये त्रियाचरित्र कैसे सिखाएगी खूकि ये कोई बोल कर सीखने वाली चीज़ नहीं है. इसका तरीका तो नेहा ने अपने दिमाग में सोच लिया था और सीखने का जरिया भी उसे मिल गया था जिसमे उसकी फंतासी और शबाना की ट्रेनिंग दोनों साथ साथ हो जाती. कल की प्लानिंग कर दोनों सो गए शबाना की टेंशन में नेहा नीतू और आरती के बारे में भूल hi गई की उसे उनसे फ़ोन करके उनला हाल चल पूछ लेना चाहिए.
 
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इधर जब हवेली में नेहा धामु को लेकर शबाना के पास आई थी तब हवेली के बहार नीतू और आरती अघोरी की बताई जगह पर उनसे मिलने पहुंच गई. कुछ देर बाद अघोरी भी वह पहुंच गया. नीतू ने आरती के बारे में कहा की अकेले आने में उसे दर लग रहा था और आरती ने ज़िद करि साथ आने की इसलिए उसे ले आई. अघोरी ने कहा की ठीक है पर आरती साधना वाली जगह पर नहीं जा सकती उसे बहार hi इंतज़ार करना होगा. तीनो अघोरी के निवास स्थान जहा संकल्प साधना होनी थी के लिए चल दिए. घने जंगलो के बीच से होते हुए वो चले जा रहे थे रस्ते में उन्हें एक छोटा सा शिव मंदिर और उसके पीछे से ढोल नगाड़ो की आवाज़े सुनाई दी.

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अघोरी ने उन्हें बताया की ये ये यहाँ का प्राचीन शिव मंदिर है जो यहाँ तीन सौ साल से है काफी सिद्ध मंदिर है और नीतू से कहा की वो अपने कौमार्य दान की साधना के बाद इस मंदिर में ाहिरवाद ले लेना अपनी गलती की महादेव से छमा मांग लेना और अपने प्रेमी राज के जीवन पर कोई संकट न आए उसकी विनती कर लेना. अघोरी ने उन्हें ये भी बताया की ये मदिर असलियत में एक सीमा रेखा प्राचीन भील आदिवासी समाज और गाँव के नए रहें सेहेन में जीने वाले लोगो के बीच. इस मंदिर के उस पार भील आदिवासी समाज का निवास है जो तंत्र मंत्र के महाज्ञाता है अघोरी ने खुद तंत्र का ज्ञान उन्ही से लिया. भील समुदाय और गाँव वालो के बीच टकराव न हो इसलिए बरसो पहले जंगल के बीच महादेव का ये जाग्रत मंदिर बनाया गया ऊसर निर्धारित किया गया की न भील समुदाय इधर आएगा न गांववाले उस तरफ जाएंगे. नीतू आरती दूर से उस मंदिर को प्रणाम कर अघोरी के पीछे पीच चल दिए. कुछ hi देर में तीनो एक कब्रिस्तान के सामने खड़े थे. काली अँधेरी रात में कब्रिस्तान का ये मंज़र बेहद डरावना लग रहा था.

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अघोरी ने उन्हें बताया की इस कब्रिस्तान के बीच में उसकी झोपडी है जहा अगले तीन दिन नीतू को राज की ज़िन्दगी के साधना करनी और आज उस साधना का संकल्प करना है. नीतू आरती की सिटी पित्ती गम थी पर जिस रस्ते वो आगे बड़े थे वो रास्ता उन्होंने अपनी मर्ज़ी से चुना था. चारो तरफ बस कब्र hi कब्र थी और दूर एक घर दिख रहा था. अघोरी ने आरती को कहा की उसे यही बहार इंतज़ार करना होगा जब तक नीतू अंदर साधना करती है. आरती को अकेले वह रुकने में दर तो बहुत लग रहा था पर कर भी क्या सकते थे नीतू के साथ आने का फैसला उसका अपना था. आरती को वही बहार छोड़ नीतू और अघोरी घर के अंदर चले गए. घर के अंदर एक हवन कुंड बना था जिसमे और हवन कुंड बना था और हवन कुंड के बगल में एक ताम्रा अर्थात ताम्बे की मूर्ती थी जो एक योद्धा जैसा था जिसके हाथ में एक अजीब सा हथियार था और पास में एक तीन मुँह वाले कुत्ता बैठा था.

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नीतू और अघोरी उस हवन कुंड के दोनों तरफ बैठ गए. अघोरी ने नीतू को उस मूर्ति के बारे में बताया की ये मूर्ति हेड्स की है.

अघोरी: दुनिया तीन भागो में बाटी है आसमान धरती और पटल. हदीस ज़ीउस और पोसिएशन तीन भाई थे जिन्होंने मिलकर अपने पिता क्रोनस को हराया था और उसके अत्याचार से दुनिया को मुक्ति दिलाई जिसका दुनिया के तीनो भागो पर कब्ज़ा था. विजय के बाद तीनो भाई एक एक भाग के देवता बन गए और वह निवास करने लगे. ज़ीउस अनंत आकाश का स्वामी बना पोसिएडोन मृत्युलोक यानि धरती पर अथाह समुद्र का देवता बना और हदीस के गुस्सैल और क्रोधी स्वाभाव के कारन उसे पटल का शाशन मिला हलाकि हदीस इस बटवारे से खुश नहीं था पर बाकि दो भाइयो के एकसाथ होने के कारन उसे मजबूरन ये बटवारा मन्ना पड़ा.

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हदीस को hi हम मृत्य का देवता भी कहता है. हमे यहाँ तंत्र साधना के माध्यम से हदीस को hi प्रसन्न करना है ताकि राज के जीवन पर आया मृत्यु रुपी संकट वो हर ले. ये साधना हमे कैसी करनी है वो मई तुम्हे आने वाले दिनों में बताऊंगा पर फिलहाल तुम्हे यहाँ इस साधना का संकल्प करना होगा क्युकी तंत्र में साधना से ज्यादा महत्वा उसके संकल्प का होता है एक बार अगर तुमने इस साधना का संकल्प कर लिया फिर छह कर भी तुम पीछे नहीं हैट सकती. कुछ इसी तरह का संकल्प विनीता और लखन सिंह ने भी करा है. इसलिए एक बार फिर सोच लो अभी भी वक़्त है क्या तुम वाकई ये साधना करना चाहती हो.

नीतू: जी बाबा पीछे हटना का तो सवाल hi पैदा नहीं होता राज के लिए मई कुछ भी कर सकती हु.

अघोरी: ठीक है तो अब इस हवन कुंड में हदीस के नाम की आहुति दाल कर हम उनका आवाहन करेंगे और ये संकल्प करेंगे की हम राज के जीवन के लिए ये साधना प्रारंभ कर रहे और किसी भी सूरत में हम इससे पीछे नहीं हटेंगे इसके अंतर्गत तुम अपना कौमार्य एक ब्रह्मचारी पुरुष को समर्पित कर राज के प्रति अपने प्रेम का प्रमाण डौगी. तुम्हारे कौमार्य और उस पुरुष के ब्रह्मचर्य स्वीकार कर उसके बदले में राज जे जीवन पर आया संकट हदीस दूर करे.

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घर के अंदर संकल्प साधना प्रारम्भ हो गई बहार दर के मरे में आरती का बुरा हाल था सुनसान कब्रिस्तान में अकेले खड़े होकर बहादुर से बहादुर को दर लग जाए. खड़े खड़े आरती के पेअर भी दुख रहे थे उसने आस पास बैठने की कोई जगह देखि पर सब तरफ बस कब्र hi कब्र थी और किसी की कब्र के ऊपर बैठना ठीक नहीं कब्रिस्तान के एक कोने में एक पीपल के पेड़ के नीचे उसे एक बड़ी सी चट्टान नज़र आ. आरती जाकर उस पर बैठ गई और मन hi मन प्रार्थना करने लगी की इस खौफनाक वतववरण में ऊपर वाला उसकी रक्षा करे.

अचानक मौसम का मिज़ाज़ बदलने लगा मौसम विभाग की भविष्यवाणी के अँसुअर जिस तूफ़ान का अंदेशा था वो आ चूका था. ये वही समय था जब हवेली में नेहा धामु को छोड़कर आई थी और वह तूफ़ान आ गया था वही तूफ़ान यहाँ कब्रिस्तान में अब आरती के सामने था. पूरा आसमान ढूंढ से धक् गया था आरती ने तो अपनी आंके बंद कर ली उसका आँख खिले रखना मुश्किल हो रहा था. ढूंढ के साथ अब बिजली कड़कना भी शुरू हो गया.

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कब्रिस्तान की इस दुनिया और उस दुस्सरि दुनिया जहा हम मरने के बाद जाते है के बीच का एक द्वार है. पर आसमान में व्याप्त दिव्या उर्ज़ाए उस द्वार को बंद रखती है और सूर्य का प्रकश दिन में स्वयं और रात में चंद्र के मथ्यम से उन शक्तियों को उस दुनिया से इस दुनिया में नहीं आने देता इसिलए काली अमावस को मनहूस कहा जाता है क्युकी उस दिन उन शक्तियों की ताकत बाद जाती है. इसी तरह ऐसा रौद्र तूफ़ान भी इन शक्तियों की ताकत को कई गुना बड़ा देता है क्युकी इस तूफ़ान की वजह से धरती और आसमान के बीच संपर्क अवरुद्ध हो जाता है.

अंदर संकल्प साधना अपने उफान पर थी. संकल्प साधना से उठ रही तंत्र ऊर्जा ने कब्रिस्तान में इस दू िया और उस दुनिया के बीच के द्वार को कमज़ोर कर दिया था. कोई शक्ति थी जो उस द्वार को खोल इस द्वार में आने के लिए संघर्ष कर रही थी. चट्टान के बगल में खड़ा पीपल का पेड़ तूफ़ान में तेज़ तेज़ हिल रहा था आरती को आदेश हो रहा था की ये पेड़ कभी भी टूट कर गिर सकता है और इधर झुका होने की वजह सीधा उसके ऊपर गिरेगा इसलिए आरती उस चाटन से उतर गई. आरती बस उस चट्टान से उत्तरी hi थी की अचानक आसमान में एक तीव्र बिजली कड़की और उस चट्टान पर आकर गिरी जिस पर एक पल पहले आरती बैठी थी.

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वो तो अच्छा हुआ आरती वह से हैट चुकी थी. वो बिजली सीधा उस चट्टान पर गिरी वो विशाल चट्टान दो खंड में बात गई. उस चट्टान से पत्थर का एक टुकड़ा आरती के सर में लगा और आरती अपने होशो हवस खो कर बेहोश होकर वही ज़मीन पर गिर पड़ी.

तेज़ आंधी में उस चाटन के बगल में खड़ा पीपल का पेड़ तेज़ तेज़ झटके खा रहा था हवा एक तीव्र झटके ने उस घने विशाल पेड़ को तोड़ दिया और पेड़ सीधा ज़मीन पर बेहोश पड़ी आरती के ऊपर गिरने लगा. आरती इस हालत में भी नहीं थी अपनी तरफ तेज़ी से बाद रही मौत को देख पति और उससे बचने के लिए कुछ कर पति. एक तरह से आरती की मौत निश्चित थी. पर अचानक एक चमत्कार हुआ आरती के ऊपर गिर रहा रहा पेड़ हवा में hi रुक गया जैसे किसीने उसे अपने हाथो में थम लिया हो जैसे कोई आरती और उस पेड़ के बीच दीवार बन कर खड़ा हो गया हो. कोई था जो उस दुनिया की ज़ंजीरो को तोड़ कर इस दुनिया में दाखिल हो गया था. एक रूहानी साया था जो आरती और उसकी मौत के बीच आ गया था. उस साए ने पेड़ को दूसरी तरफ फ़ेंक दिया और ज़मीन पर बेहोश पड़ी मासूम सी आरती को करीब आकर उसे निहारने लगा. उस साए ने आरती को अपनी बाहो में थम लिया. आरती का जिस्म हवा में झूल रहा था क्युकी उसे थमने वाला नज़र नहीं आ रहा था. उस साए ने आरती के चेहरे से बालो के परदे को हटाया और बेहोश आरती की मासूमियत को एकटक निहारने लगा.

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साया: बरसो से मई तुम्हारा इंतज़ार कर रहा था बहुत देर करदी तुमने यहाँ आने में. बरसो से मई उस दुनिया से इस दुनिया में आने के लिए तड़प रहा था और देखो किस्मत आज तुम्हे वही ले आई जहा बरसो पहले मुझे तुमसे अलग कर दिया गया था. हमारी मुहोब्बत जो बरसो पहले अपने अंजाम तक न पहुंच पाई थी आज एक बार फिर मुझे तुम्हारे पास ले आई है.

कौन था ये साया किस बरसो पुराणी मुहोब्बत की बात कर रहा था. आरती तो अभी 27 साल की थी और कभी उसका कोई बॉयफ्रेंड भी नहीं रहा फिर किस मुहोब्बत की बात कर रहा था वो साया. आरती को निहारते हुए उस साए ने अपने होंठ आरती के होंठो पर रख दिए. आरती जिसने आज तक कभी किसी लड़के को खुद को हाथ भी नहीं लगाने दिया बेहोशी की हालत में अपने जीवन की पहली किश कर रही थी वो भी एक रूह के साथ. अचानक अघोरी की झोपडी का दरवाज़ा खुलने की आवाज़ हुई नीतू की संकल्प साधना पूरी हो गई थी अघोरी और नीतू झोपडी से बहार आ रहे थे. वो साया बरसो बाद इस दुनिया में वापस आया था और अभी वो अघोरी जैसे सिद्धा तांत्रिक के साथ उलझना नहीं चाहता था इसलिए आरती को ज़मीन पर लिटा कर वो वह से गायब हो गया.

बहार का तूफ़ान भी अब थम चूका था बहार के गिरे हुए पेड़ अस्त व्यस्त माहोल देख नीतू शॉकेड रह गई उसे आरती का ख्याल आया वो आरती को इधर उधर देखने लगी और उसकी नज़र कब्रिस्तान के आखरी कोने में बेहोश पड़ी आरती पड़ी. अघोरी और नीतू भागकर आरती के पास पहुंचे और बेहोश पड़ी आरती को संभाला अघोरी को आस पास किसी रूहानी ताकत की मौजूदगी का एहसास हो रहा था. वो साया दूर से छुपकर उन्हें देख रहा था. नीतू ने आरती को होश में लाने के लिए अघोरी से पानी माँगा. और अघोरी का ध्यान उस एहसास से हैट गया की ये कब्रिस्तान है यहाँ ये एहसास होना आम बात है अघोरी झोपडी से पानी ले आया और आरती के मुँह पर चहेते मार कर उसे होश में लाया. आरती होश में आ गई और होश में आकर उसने उन्हें उस तूफ़ान बिजली चट्टान के बारे में बताया आरती की नज़र गिरे हुए पेड़ पर पड़ी वो सोच में डूब गई की ये पेड़ उसकी तरफ झुका हुआ था और लॉजिक के हिसाब से ये उसकी तरफ गिरना चाहिए था पर ये दूसरी तरफ कैसे गिरा. नीतू और अघोरी को तसल्ली थी आरती ठीक थी पर उन्हें ये नहीं पता था की आरती को बचने वाला कोई और था जो इस वक़्त छुप छुप कर उन्हें देख रहा था. नीतू ने अघोरी से रिक्वेस्ट करि की वो उन्हें हवेली तक छोड़ आए. अघोरी ने हवेली तक छोड़ आया वो साया भी उनके पीछे पीछे हवेली तक पहुंच चूका था. अघोरी उन्हें छोड़ कर जा चूका था नीतू और आरती अपने कमरे में आ गए और नेहा को मश्ग कर दिया की वो दोनों वापस आ गए और सो गए.

पर वो आगे दो थे पर वापस तीन आए थे. कोई था मुहोब्बत के डोर से बंधा हुआ उनके पीछे पीछे उनके कमरे तक आ गया था. पर वो साया आरती के लिए अच्छा था या एक खतरा ये अब भी एक रहस्य था बेशक उसने आरती को मरने से बचाया पर वो आरती से चाहता था क्या था जिस बरसो पुराणी मुहोब्बत का वो ज़िक्र कर रहा था वो क्या था ये कोई नहीं जनता था.

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इश्क़ में डूबे एक फ़साने की

दांस्ता है ये उस दीवाने की

मौत भी न जिसे रोक पाई है
 
बाथरूम में भूरा के हाथो नेहा की गांड मरै उस अनजान स्ट्रेंजर के खत.

शोभा के अंदर वासना का बढ़ते तूफ़ान.

गरिमा और हरिया के मिलान.

विनीता और लाख की उस कठिन यात्रा.

लालू के षंडयंत्र और शबाना के उसमे धीमे फास्ट जाने.

नीतू की संकल्प साधना.

और

आरती के जीवन में उस साये के प्रवेश के साथ कहानी का ये चौथा दिन ख़तम हुआ अब बस पुराणी लिखी जा चुकी कहानी का एक दिन बाकि है जिसके बाद नै कहानी लिखी जाएगी.

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एन्ड ऑफ़ डे 4
 
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