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दंगल वाली जगह पर जब दंगल जारी था लालू ने फ़ोन जो उसने धामु को दिया था द्वारा धामु को गाइड करा. और लालू के कहे मुताबिक धामु ने दो गिलास जूस बनाया जिसमे एक में उसने नशे की ड्रग और एक गोली वियाग्रा की मिला दी और दुसरे गिलास में केवल वियाग्रा. और खली वियाग्रा वाला गिलास खुद पी लिया और दूसरा गिलास शबाना को पीला दिया. शबाना उसे धामु का भोलापन समझ कर पी गई. पीने के कुछ देर बाद hi शबाना का सर भरी भरी सा हो गया और वो आराम करने अपने कमरे में चली गई.
धामु से हर घडी की अपडेट ले रहा लालू दूर बैठे बैठे hi ये षड़यंत्र रच रहा था. उसने धामु को पूरी तरह मिसगिदे करके शादी करवाने के लालच में शबाना के कमरे में दाखिल करवाया. वह मिसगिदे करके पति अपनी पत्नी को कैसे प्यार करता है शबाना को खुश करने के नाम पर अर्धबेहोशी की हालत में वियाग्रा की उत्तेजना में अंगड़िया ले रही शबाना की उत्तेजना को उसका दर्द बताकर धामु को उसका दर्द दूर करने को कहा.
धामु को गाइडेंस के नाम पर उसने धामु से वीडियो कॉल करा और मोबाइल को ऐसे एंजेल पर रखवाया ताकि वो सब देख सके और देखने के साथ साथ रिकॉर्ड भी कर सके. शबाना का दर्द दूर करने के नाम पर उसने धामु से शबाना का गाउन उसने कमर तक ऊपर करवाया और धामु को शबाना की छूट चाटने को कहा. इन सब बातो से अनजान धामु तो यही समझ रहा था की लालू उसे सही गाइडेंस कर रहा है और वो शबाना का दर्द दूर कर रहा है. लालू के कहे मुताबिक उसने शबाना की पंतय के ऊपर से उसकी छूट चेतना शुरू कर दिया.
ड्रग के कारन पूरी तरह से बेहोश न होते हुए भी शबाना धामु को अपना पति hi समझ रही थी और वियाग्रा की गोली के प्रभाव के कारन उसकी उत्तेजना कई गुना बाद गई थी जिस वजह से वो धामु का सर खुद से अपनी छूट में दबा रही थी. दंगल में भीड़ से अलग हटकर अपने मोबाइल में ये सब देख रहा लालू भी ये सब देख इतना उत्तेजित हो गया की उसने भी अपना लुंड निकल कर तेज़ तेज़ हिलना शुरू कर दिया. धामु इस वक़्त लालू के लिए उसकी बिछाई शतरंज का एक प्यादा था जिसे वो अपने हिसाब से चला रहा था. वह कर तो बेशक धामु रहा था पर करवाने वाला लालू था.
लालू के कहे मुताबिक धामु ने शबाना की पंतय को उसकी झांघो से निकल दिया और अपनी जीभ शबाना की छूट के अंदर दाखिल करदी. शादी की इच्छा इसकदर धामु की दिमाग पर हावी थी की लालू जो कह रहा था धामु सब कर रहा था. पर धामु की जीभ की छुअन ने शबाना की उत्तेजना को चरम पर पंहुचा दिया. वो अपनी गांड उठा उठा कर धामु की जीभ को ज्यादा से ज्यादा अंदर लेने की कोशिश करने लगी. शबाना की ये उत्तेजना देख लालू को भी बहुत मज़ा आ रहा था क्युकी शबाना की इस उत्तेजना से ये साफ़ था की अपनी पति से सुख न मिलने के कारन शबाना में सेक्स की कितनी भूक है जो लालू के प्लान के लिए बहुत अच्छी बात थी.
धामु की चूसै के कारन शबाना धामु के मुँह में hi झाड़ गई. धामु ने अपना मुँह हटाने की कोशिश करि पर शबाना ने अपनी जांघो क्र बीच धामु का मुँह इतना कास के दबाया था की वो अपना सर पीछे न हटा सका. झड़ने के बाद शबाना की पकड़ भी ढीली पद गई. पर लालू का प्लान अभी ख़तम नहीं हुआ था. अभी तो जो कुछ करा धामु ने करा अब शबाना से भी कुछ करवाना था जिसे होश में आने के वो बतदाशत न कर सके. लालू के इशारे पर धामु भी अपने कपडे उतर कर केवल छड़ी पहने हुए शबाना के ऊपर आ गया वासना की आग में जल रही शबाना के लिए तो इस वक़्त वो अपने पति के साथ थी जिसने आज तक अपनी नामर्दगी के कारन उसे सम्भोग का कोई सुख नहीं दिया. इसलिए उसने धामु को कास कर अपने सीने से लगा लिया.
शबाना की हर हरकत लालू बड़ा मज़ा लेकर रिकॉर्ड कर रहा था. वियाग्रा का असर अब धामु पर भी होने लगा था उसका लुंड चड्डी के अंदर से झटके खाने लगा था और झटके खा खा कर चड्डी के अंदर से hi शबाना की छूट में यहाँ वह घिस रहा था जिसने शबाना की उत्तेजना को दुबारा तीव्र कर दिया. शायद अगर शबाना की छूट और धामु के लुंड के बीच धामु की चड्डी की दीवार न होती तो धामु का लुंड शबाना की छूट में दाखिल हो गया होता. पर लालू ने जानबूझ कर लालू की चड्डी नहीं उतरवाई थी क्युकी लालू सिर्फ शबाना को उत्तेजित करना चाहता उसकी चुदाई तो उसने अपने लिए बचा कर राखी थी.
हद से ज्यादा उत्तेजित शबाना मर्द के लुंड के लिए तड़प रही थी वो अपना हाथ नीचे ले जाकर धामु को लुंड को टटोलने लगी और जल्द hi उसके हाथ धामु के लुंड पर पहुंच गए. और उसने चड्डी के ऊपर से धामु के लुंड को मसलना शुरू कर दिया. धामु के लिए तो ये एकदम नया अभाव था. उसका लुंड चड्डी के अंदर पूरी तरह अकड़ चूका था. उसकी अकड़न को अच्छे से महसूस करने के लिए शबाना ने अपने हाथ धामु की चड्डी के अंदर दाल दिए. और विगरा के कारन पहले से उत्तेजित धामु के कुंवारे लुंड को मसल मसल कर उसके प्रथम स्खलन तक ले जाने लगी.
स्खलन के करीब पहुंच कर शबाना ने अपने हाथ धामु की चड्डी से निकल लिए और दोनों हाथो से धामु को भींच कर अपने जिस्म से चिपका लिया और धामु के होठो को अपने होठो में भर लिया और नीचे अपनी नंगी छूट को धामु की चड्डी के ऊपर से उसके लुंड पर रगड़ने लगी. मोबाइल से ये सब देख रहे लालू के लिए भी अब अपनी उत्तेजना को रोकना मुश्किल था अपने लुंड को तेज़ तेज़ हिलाते हुए उसने वही झाड़ियों के बीच अपना वीर्यपात कर दिया. इधर धामु ज्यादा देर शबाना की छूट की गरम रगड़ को बर्दाश्त न कर सका और अपने पहले स्खलन को हासिल कर लिया. शबाना भी उस अर्धचेतना की हालत में hi अपने दुसरे ओर्गास्म को प् कर संतुष्ट होकर निढाल होकर लेट गई.
धामु और शबाना दोनों पूरी तरह बेदम हो चुके थे और एक दुसरे से चिपके हुए सो गए. लालू भी वह से वापस दंगल वाली जगह पर आ गया जहा दंगल अभी भी जारी था और दो प्रतियोगिताओ के बाद कुछ छान के विश्राम के बाद तीसरी प्रतियोगिता आरम्भ होने को थी.
धामु से हर घडी की अपडेट ले रहा लालू दूर बैठे बैठे hi ये षड़यंत्र रच रहा था. उसने धामु को पूरी तरह मिसगिदे करके शादी करवाने के लालच में शबाना के कमरे में दाखिल करवाया. वह मिसगिदे करके पति अपनी पत्नी को कैसे प्यार करता है शबाना को खुश करने के नाम पर अर्धबेहोशी की हालत में वियाग्रा की उत्तेजना में अंगड़िया ले रही शबाना की उत्तेजना को उसका दर्द बताकर धामु को उसका दर्द दूर करने को कहा.
धामु को गाइडेंस के नाम पर उसने धामु से वीडियो कॉल करा और मोबाइल को ऐसे एंजेल पर रखवाया ताकि वो सब देख सके और देखने के साथ साथ रिकॉर्ड भी कर सके. शबाना का दर्द दूर करने के नाम पर उसने धामु से शबाना का गाउन उसने कमर तक ऊपर करवाया और धामु को शबाना की छूट चाटने को कहा. इन सब बातो से अनजान धामु तो यही समझ रहा था की लालू उसे सही गाइडेंस कर रहा है और वो शबाना का दर्द दूर कर रहा है. लालू के कहे मुताबिक उसने शबाना की पंतय के ऊपर से उसकी छूट चेतना शुरू कर दिया.
ड्रग के कारन पूरी तरह से बेहोश न होते हुए भी शबाना धामु को अपना पति hi समझ रही थी और वियाग्रा की गोली के प्रभाव के कारन उसकी उत्तेजना कई गुना बाद गई थी जिस वजह से वो धामु का सर खुद से अपनी छूट में दबा रही थी. दंगल में भीड़ से अलग हटकर अपने मोबाइल में ये सब देख रहा लालू भी ये सब देख इतना उत्तेजित हो गया की उसने भी अपना लुंड निकल कर तेज़ तेज़ हिलना शुरू कर दिया. धामु इस वक़्त लालू के लिए उसकी बिछाई शतरंज का एक प्यादा था जिसे वो अपने हिसाब से चला रहा था. वह कर तो बेशक धामु रहा था पर करवाने वाला लालू था.
लालू के कहे मुताबिक धामु ने शबाना की पंतय को उसकी झांघो से निकल दिया और अपनी जीभ शबाना की छूट के अंदर दाखिल करदी. शादी की इच्छा इसकदर धामु की दिमाग पर हावी थी की लालू जो कह रहा था धामु सब कर रहा था. पर धामु की जीभ की छुअन ने शबाना की उत्तेजना को चरम पर पंहुचा दिया. वो अपनी गांड उठा उठा कर धामु की जीभ को ज्यादा से ज्यादा अंदर लेने की कोशिश करने लगी. शबाना की ये उत्तेजना देख लालू को भी बहुत मज़ा आ रहा था क्युकी शबाना की इस उत्तेजना से ये साफ़ था की अपनी पति से सुख न मिलने के कारन शबाना में सेक्स की कितनी भूक है जो लालू के प्लान के लिए बहुत अच्छी बात थी.
धामु की चूसै के कारन शबाना धामु के मुँह में hi झाड़ गई. धामु ने अपना मुँह हटाने की कोशिश करि पर शबाना ने अपनी जांघो क्र बीच धामु का मुँह इतना कास के दबाया था की वो अपना सर पीछे न हटा सका. झड़ने के बाद शबाना की पकड़ भी ढीली पद गई. पर लालू का प्लान अभी ख़तम नहीं हुआ था. अभी तो जो कुछ करा धामु ने करा अब शबाना से भी कुछ करवाना था जिसे होश में आने के वो बतदाशत न कर सके. लालू के इशारे पर धामु भी अपने कपडे उतर कर केवल छड़ी पहने हुए शबाना के ऊपर आ गया वासना की आग में जल रही शबाना के लिए तो इस वक़्त वो अपने पति के साथ थी जिसने आज तक अपनी नामर्दगी के कारन उसे सम्भोग का कोई सुख नहीं दिया. इसलिए उसने धामु को कास कर अपने सीने से लगा लिया.
शबाना की हर हरकत लालू बड़ा मज़ा लेकर रिकॉर्ड कर रहा था. वियाग्रा का असर अब धामु पर भी होने लगा था उसका लुंड चड्डी के अंदर से झटके खाने लगा था और झटके खा खा कर चड्डी के अंदर से hi शबाना की छूट में यहाँ वह घिस रहा था जिसने शबाना की उत्तेजना को दुबारा तीव्र कर दिया. शायद अगर शबाना की छूट और धामु के लुंड के बीच धामु की चड्डी की दीवार न होती तो धामु का लुंड शबाना की छूट में दाखिल हो गया होता. पर लालू ने जानबूझ कर लालू की चड्डी नहीं उतरवाई थी क्युकी लालू सिर्फ शबाना को उत्तेजित करना चाहता उसकी चुदाई तो उसने अपने लिए बचा कर राखी थी.
हद से ज्यादा उत्तेजित शबाना मर्द के लुंड के लिए तड़प रही थी वो अपना हाथ नीचे ले जाकर धामु को लुंड को टटोलने लगी और जल्द hi उसके हाथ धामु के लुंड पर पहुंच गए. और उसने चड्डी के ऊपर से धामु के लुंड को मसलना शुरू कर दिया. धामु के लिए तो ये एकदम नया अभाव था. उसका लुंड चड्डी के अंदर पूरी तरह अकड़ चूका था. उसकी अकड़न को अच्छे से महसूस करने के लिए शबाना ने अपने हाथ धामु की चड्डी के अंदर दाल दिए. और विगरा के कारन पहले से उत्तेजित धामु के कुंवारे लुंड को मसल मसल कर उसके प्रथम स्खलन तक ले जाने लगी.
स्खलन के करीब पहुंच कर शबाना ने अपने हाथ धामु की चड्डी से निकल लिए और दोनों हाथो से धामु को भींच कर अपने जिस्म से चिपका लिया और धामु के होठो को अपने होठो में भर लिया और नीचे अपनी नंगी छूट को धामु की चड्डी के ऊपर से उसके लुंड पर रगड़ने लगी. मोबाइल से ये सब देख रहे लालू के लिए भी अब अपनी उत्तेजना को रोकना मुश्किल था अपने लुंड को तेज़ तेज़ हिलाते हुए उसने वही झाड़ियों के बीच अपना वीर्यपात कर दिया. इधर धामु ज्यादा देर शबाना की छूट की गरम रगड़ को बर्दाश्त न कर सका और अपने पहले स्खलन को हासिल कर लिया. शबाना भी उस अर्धचेतना की हालत में hi अपने दुसरे ओर्गास्म को प् कर संतुष्ट होकर निढाल होकर लेट गई.
धामु और शबाना दोनों पूरी तरह बेदम हो चुके थे और एक दुसरे से चिपके हुए सो गए. लालू भी वह से वापस दंगल वाली जगह पर आ गया जहा दंगल अभी भी जारी था और दो प्रतियोगिताओ के बाद कुछ छान के विश्राम के बाद तीसरी प्रतियोगिता आरम्भ होने को थी.