सुप्रिया: एक जवान बीवी की कहानी - Page 6 - SexBaba
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सुप्रिया: एक जवान बीवी की कहानी

अपडेट 41स

बस राहुल को पता था की उसने कैसे अभी तक अपना विरए निकलने से रोका था. सुप्रिया के नरम शरीर और मुँह से छू कर उसका लुंड अब तक कई बार अपनी चरम सीमा तक पहुंच कर वापस आया था. उसने बस किसी तरह अपने आपको कण्ट्रोल किया था, पर अब उससे और सब्र नहीं हो रहा था. वह अपना सारा माल सुप्रिया के अंदर निकालना चाहता था. उसे ऐसा लग रहा था की जैसे की कड़ी तपस्या के बाद अब बस उसे आखिर वह फल मिलने hi वाला था जिसका उसे बेसब्री से इंतज़ार था.

अपनी हालत जानते हुए hi उसने सुप्रिया के मुँह से अपना लुंड दूर किया, और अब सुप्रिया को भी बुरी तरह उत्तेजित करने का सोचा. ताकि जब उसका लुंड सुप्रिया की छूट में जाये तोह वह भी उतना hi मज़ा ले पाए जितना उसे आने वाला. उसके सामने सुप्रिया की खुली टाँगे थी और उनके ठीक बीच में उसका आज का लक्ष्य.

राहुल को अपनी छूट की तरफ घूरते देख, सुप्रिया ने अपनी खुली टाँगे बंद करने की कोशिश करि ताकि राहुल वहां न झाँक पाए, पर राहुल के अपने हाथों से उसकी दोनों टांगो को कास के पकड़ा हुआ था.

सुप्रिया - राहुल... छोडो न पेअर प्लीज... और वहां मत देखो प्लीज...

राहुल ने सुप्रिया के हिलती हुई टांगो को काबू में लाने की कोशिश की - सुप्पु... आज कुछ नहीं छोड़ने वाला...

सुप्रिया बेचैन होते हुए बोली - ये सुप्पु सुप्पु क्या होता है...

राहुल - प्यार से तुम्हारा नाम... जो मैंने रखा है... ाचा नहीं लगा क्या...

सुप्रिया - तोह मैं क्या तुम्हे राहु बुलायो.... सच में ऐसा hi लग रहा है की राहु केतु मुझे पर आज छड्ड गए है...

राहुल एक बड़ी सी मुस्कान लिए बोलै - अभी तोह काफी कुछ बाकी है चढ़ना...

सुप्रिया - बेशरम हो बिलकुल....

सुप्रिया ने शर्म से अपना मुँह दूसरी और फेर लिया और राहुल ने अपने हाथ सुप्रिया की सुडोल झांघो पर रखते हुए उन्हें हलके हलके मसलना शुरू कर दिया. ऐसा करने से सुप्रिया की हालत खराब होनी शुरू हो गयी थी. राहुल ने सुप्रिया की टांग पकड़ कर उसे नीचे से ऊपर तक किश करना शुरू कर दिया. कितने लचीले से पेअर थे उसके.

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जैसे hi राहुल के होंठ सुप्रिया की झांग के ऊपरी हिस्से पर आये, सुप्रिया ने राहुल के बाल पकड़ते हुए उसके रोक लिया - अह्ह्ह..... ममममम.... गुदगुदी हो रही है.... रुको न...

राहुल - ाचा.... फिर ये बताया अब क्या महसूस हो रहा है...

राहुल ने ये बोलते hi एकदम से अपना मुँह सुप्रिया की जाँघों के बीच में घुसा दिया, और उसकी जांघ के अंदरूनी हिस्से पर चूमना शुरू कर दिया. सुप्रिया ने अपनी कमर उचकते हुए ज़ोर से चद्दर को पकड़ लिया. वह अभी भी अपनी टाँगे बंद करने के कोशिश कर रही थी पर राहुल अपना मुँह गड़ाए उन्हें बंद नहीं होने दे रहा था.

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सुप्रिया ने घबराते हुए कहा - प्लीज राहुल... वहां रहने दो न... मुझे नहीं करवाना कुछ भी....

राहुल - पर मुझे तोह करना है... और जब तक करोगी नहीं तुम्हे पता कैसे चलेगा की कितना ाचा लगता है...

सुप्रिया - नहीं.... नहीं.... मैं बहुत सेंसिटिव हु वहां...

राहुल ने उसकी जांघ पर हलके से चुकती काटी - तुम कहाँ सेंसिटिव नहीं हो...

सुप्रिया - ोुछः....

राहुल - तुम बस चुप चाप लेती रहो... मैंने कहा न....

सुप्रिया बुरी तरह काँप रही थी, पर राहुल उसे वहां से हिलने नहीं दे रहा था. जंघ के अंदरूनी हिस्से को चूमता हुआ, राहुल अपने मुँह को सुप्रिया की छूट के बिलकुल करीब ले आया. उसने अपना एक हाथ सुप्रिया के बूब्स पर रखा और दूसरा पलंग पर अपने आप को सहारा देने के लिए. सुप्रिया ने भी कांपते हुए अपना हाथ राहुल के हाथ पर रखते हुए उसे जकड लिया. वह बेहद घबराई हुई थी, क्यूंकि उसे बिलकुल भी नहीं पता था की उसे ये सब कैसा लगने वाला था.

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राहुल ने सुप्रिया के बूब को ज़ोर से अपने हाथ से दबाया ताकि उसका धयान नीचे से हैट जाये, जो हुआ भी. और फिर एक डैम से अपने होंठ सुप्रिया की छूट पर लगा दिए. सुप्रिया की ज़ोर की अह्ह्ह्हह निकल गयी, और उसने दुसरे हाथ से अपना बूब पकड़ लिया. उसे आज कुछ ऐसी अनुभूति हो रही थी जो पहले कभी नहीं हुई थी. राहुल ने अपने होंठ वहां नीचे अचे से घुमा दिए जिससे उसकी दादी सुप्रिया के कोमल अंगो पर चुभने लगी.

सुप्रिया - Ufff....mmmm.... राहुल... बस... प्लीज....

पर राहुल ने उसकी बात को अनसुना करते हुए अपनी जीब छूट के बहार फेरनी शुरू कर दी, और सुप्रिया ने और भी उत्तेजित होते हुए अपनी गांड ऊपर कर ली. अब सुप्रिया की छूट राहुल के होंठों के बीच में थी और वह बहुत hi हलके हलके से छूट के बहार के हिस्से को अपने होंठों से खींच रहा था.

सुप्रिया - अह्ह्ह्हह..... ममममयीय..... उफ्फ्फ......

सुप्रिया ने पागल होते हुए अपने बाल पकड़ लिए.

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राहुल ने मुस्कुराते हुए ऊपर देखा, और सुप्रिया को इतने ज्यादा आनंद में देख कर उसे अपनी कलाकारी पर नाज़ हो रहा था.

राहुल ने फिर से वहां चूमते हुए कहा - कैसा लग रहा है सुप्पु....

सुप्रिया - अह्ह्ह्हह..... ओह गॉड.... राहुल... ये क्या कर रहे हो... समझ hi नहीं आ रहा कुछ....

राहुल ने सुप्रिया की कमर पकड़ते हुए अपना मुँह और ज़ोर से सुप्रिया ने नीचे गदा दिया. सुप्रिया को अब ऐसा लग रहा था जैसे उसके अंदर कोई ज्वाला मुखी पनप रहा हो, जो किसी भी पल फुट सकता था.

राहुल ने और आगे बढ़ते हुए अपनी जीब सुप्रिया की छूट में ज़रा सी घुसा दी...

सुप्रिया को ऐसा लगा जैसे कोई छोटा सा जानवर उसकी छूट में घुस गया हो, और उसने राहुल को अपने पेअर से पीछे धकेलते हुए कहा - उफ्फ्फ.... बस बस... प्लीज.... नहीं तोह तुम गीले हो जाओगे...

सुप्रिया ने नीचे झाँक कर देखा तोह चद्दर थोड़ी गीली हो चुकी थी और राहुल अपना होंठ चाट रहा था.

सुप्रिया ने बनावटी गुस्से में बोलते हुए कहा - की... कितने गंदे हो तुम.... मुझे नहीं करना ये अब....

सुप्रिया करवट लेते हुए पलट गयी और खड़े होने की कोशिश कर hi रही थी की राहुल ने पीछे से उसके जकड़ते हुए उसके ऊपर लेट गया.

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राहुल - कहाँ जा रही हो... अभी असली खेल तोह बाकी है...

सुप्रिया ने हाँफते हुए कहा - अह्ह्ह्ह... हो गया न सारे खेल....

राहुल ने अपना हाथ सुप्रिया की बाहों के नीचे घुसते हुए उसको दोनों बूब्स को पकड़ लिया और उसे अपने बिलकुल पास सत्ता लिया. राहुल का लुंड सुप्रिया की गांड की दरार को छू रहा था, पर आज वह जगह उसकी मंज़िल नहीं थी. वह अपना मुँह सुप्रिया के कानो के पास लाया और उसके कान के सॉफ्ट वाले हिस्से को हलके से काटा. सुप्रिया अपने आप को राहुल की कैद से छुड़ाने की कोशिश कर रही थी, पर वह अछि तरह जानती थी की अब बहुत देर हो चुकी थी, और जो होना था वह तोह हो कर hi रहेगा.

राहुल से अब कण्ट्रोल नहीं हो रहा था, उसने सुप्रिया को अपने साइड में लिटाया और पीछे से उसकी एक टांग को हल्का सा ऊपर करते हुए, अपना लुंड उसकी छूट के ठीक बहार लगाया. उसने एक हाथ से सुप्रिया की सर पकड़ा हुई थी जिससे वह नीचे नहीं देख प् रही थी, बस झटपटी रही थी. और फिर एक hi झटके में उसने अपना कड़क लुंड सुप्रिया की छूट में दाल दिया.

लुंड के अंदर जाते hi सुप्रिया की तोह जैसे सांस hi अटक गयी थी. वह अपने पेअर हिला रही थी पर कोई फायदा नहीं था. राहुल ने सुप्रिया की छूट के अंदर धक्के मारने शुरू करे.

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धक्के लगते hi सुप्रिया की ज़ोर ज़ोर की चीखे निकालनी शुरू हो गयी थी - अह्ह्ह... अह्ह्ह.... अह्ह्ह... अह्ह्ह्ह.. उफ्फ्फ...

राहुल का लुंड उसके इतनी अंदर जा रहा था जितने पहले कभी नहीं गया था. राहुल भी लुंड डालते डालते महसूस कर पा रहा था की सुप्रिया की छूट अभी भी काफी टाइट थी. उसने शुरुवात हलके हलके धक्को से hi की. पर कुछ hi देर में जैसे hi सुप्रिया की चीख दर्द से बदल कर उत्तेजना भरी होने लगी, उसने भी अपनी गति बड़ा दी.

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उसका लुंड सुप्रिया के अंदर की गर्मी को महसूस करता हुआ उसे बुरी तरह फड़क रहा था, और सुप्रिया उसे अपने अंदर घुसता हुआ साफ़ महसूस कर पा रही थी. इतना तोह उसने अपने फर्स्ट नाईट पर भी महसूस नहीं किया था.

राहुल ने हाथ सुप्रिया को जकड़े हुए उसे बूब्स को नोच रहे थे, जिससे सुप्रिया की चीखे कुछ दर्द में और कुछ चरम सुख में निकल रही थी. राहुल अब बस अपने आप को और नहीं रोक पा रहा था, एक घंटा हो चूका था उन्हें ये पूरा खेल शुरू करे हुए. सुप्रिया का भी कुछ ऐसा hi हाल था, और उसके अंदर का ज्वाला जो पहले hi थोड़ा फुट चूका था, अब सैलाब बनने वाला था. आज उसे पता चल रहा था की ओर्गास्म होता क्या है.

राहुल ने एक तेज धार के साथ सुप्रिया के अंदर अपना सारा झाग निकालते हुए अपनी स्पीड को थोड़ा धीरे किया.

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उसके हाथ अभी भी सुप्रिया के बदन पर घूम रहे थे और उसने सुप्रिया के सर को अपनी कैद से आज़ाद कर दिया था. सुप्रिया को भी पूरे सुख की अनुभूति हो चुकी थी और उसने अपना हाथ पीछे करके राहुल के सर पर फेरना शुरू कर दिया था.

कुछ देर बाद दोनों ऐसे hi निढाल बीएड पर पड़े रहे. राहुल का हाथ हलके हलके से सुप्रिया के बूब्स को मसलता हुआ और सुप्रिया का हाथ पीछे राहुल की टांग को छूटा हुआ. सुप्रिया की बड़ी हुई सांसें अभी धीमी होती जा रही थी, और वह अपनी आँखें बंद करके राहुल के हाथ पर लेट गयी

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राहुल जो चाहता था आखिर सच हो hi गया था, और उसके हिसाब से, दुनिया की सबसे खूबसूरत लड़की आज उसकी बाँहों में बे झिझक लेती हुई थी. दूसरी और सुप्रिया इतनी लम्बे सेशन से काफी थक गयी थी और सब होने के बाद उसे थोड़ा गिल्ट सा आने लगा था.

थोड़ी देर बाद राहुल ने पुछा - कैसा लगा सब सुप्पु....

सुप्रिया ने धीमी सी आवाज़ में कहा - पता नहीं.... तुम बताया... तुम्हे कैसे लगा...

राहुल - सच बतायु तोह आज तुम्हारे साथ करने के बाद लग रहा है की मैंने कभी पहले सेक्स hi नहीं किया था....

सुप्रिया - ाचा... और कितनी लड़कियों के साथ सेक्स किया है तुमने...

राहुल हस्ते हुए - अगर मैं कहु तुम पहली हो तोह?

सुप्रिया - तोह मैं कहूँगी तुम झूठ बोल रहे हो... उस दिन hi तोह....

राहुल - किस दिन क्या?

सुप्रिया अभी राहुल को कृति की याद नहीं दिलाना चाहती थी और न hi ये बताना चाहती थी उसे पता था उनके बीच क्या हुआ था - कुछ नहीं....

राहुल - हाँ मैं मानता हु कॉलेज में मेरी गर्लफ्रेंड थी और हमने ये सब किया था, पर वह तुम्हारे आगे कुछ नहीं थी... तुम्हारे आगे तोह कोई भी नहीं हो सकता...

सुप्रिया अछि तरफ जानती थी की ये पूरा सच तोह नहीं था, कृति वाली बात कितनी आसानी से राहुल ने गोल कर दी थी. पर इस समय वह इस बारे में कुछ भी पूछना नहीं चाहती थी.

राहुल ने सुप्रिया का मुँह अपनी और मोड़ते हुए उसे हलके से किश किया और फिर से उसके होंठों को चूसने लगा.

सुप्रिया ने राहुल को पीछे धकेला - मैं नहीं भरा क्या...

राहुल - तुम से कभी किसी का मैं भर सकता है क्या.... कोई बेवक़ूफ़ hi होगा...

सुप्रिया - तोह फिर आज के बाद किसी और के साथ कुछ नहीं करोगे....

राहुल - जब तक तुम मेरे साथ हो... तब तक मैं किसी और के बारे में सोच भी नहीं सकता...

राहुल की बातों से सुप्रिया मैं hi मैं खुश हो रही थी. शायद आज के बाद राहुल कभी कृति की और देखेगा भी नहीं. सही मायने में तोह शायद आज उसका बर्थडे मन था और वह भी ऐसा बर्थडे जो वह कभी भूल नहीं सकती थी.

तभी सुप्रिया के फ़ोन की घंटी बजने लगी, फ़ोन बहार लिविंग रूम में hi रह गया था. सुप्रिया बहार ऐसे नंगी नहीं जाना चाहती थी तोह उसने राहुल की और इशारे से देखा और वह उसका इशारा समझते हुए बहार फ़ोन लेने गया.

सुप्रिया ने बैडरूम से आवाज़ लगायी - किसका फ़ोन है?

राहुल कमरे में बजते हुए फ़ोन के साथ दाखिल हुआ - अतुल कॉल कर रहा है...

ये सुन कर सुप्रिया एक डैम से सकपका सी गयी, जैसे अतुल ने उसे राहुल के साथ सेक्स करते हुए hi पकड़ लिया हो, और वह राहुल की और डर भरी नज़रो से देखने लगी. उसे समझ hi नहीं आ रहा था की वह अतुल से कैसे बात करेगी और उससे कैसे नज़रे मिलाएगी. जो कुछ हुआ उसका अंजाम अब शायद उसकी आँखों के सामने घूमने लगा था.
 
अपडेट 42

सुप्रिया का फ़ोन अभी भी बज रहा था और वह उसे सेहमी हुई नज़रो से देख रही थी.

सुप्रिया ने राहुल की और देखते हुए इशारे में पुछा की वह क्या करे.

राहुल - उठाया न फ़ोन!!

सुप्रिया - तुम चुप रहना बिलकुल...

सुप्रिया ने कॉल उठाते हुए धीमी सी आवाज़ में कहा - Hello...

दूसरी साइड से अतुल की आवाज़ आयी - सुप्रिया... कहाँ हो तुम... इतनी देर से कॉल भी नहीं उठा रही थी...

सुप्रिया - मैं बस थोड़ी देर के लिए बहार मार्किट में आयी थी मेघा के साथ...

अतुल - मेघा तोह मुझे अभी दिखी थी जब मैं घर आ रहा था...

सुप्रिया एक डैम से सकपका सी गयी, पर उसने बात को सँभालते हुए कहा - वह मेघा नहीं... मेरे ऑफिस में है एक मेघा, उसके साथ. आप... घर आ गए? इतनी जल्दी आज?

अतुल - हाँ, मेरा काम हो गया तोह सोचा तुम्हे सरप्राइज दे दू, पर तुम तोह घर पर hi नहीं हो... और ये ऑफिस वाली मेघा कहाँ से आ गयी?

सुप्रिया ने अपनी आवाज़ को और कॉंफिडेंट करते हुए कहा - बताया तोह था मैंने... आप मेरी बात सुनते hi कहाँ हो...

अतुल - ाचा... सॉरी यार... तुम आ जायो जल्दी से... मैंने सोचा आज तुम्हारा बर्थडे सेलिब्रेट करते है...

सुप्रिया - हाँ मैं आती हु... थोड़ी देर में

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सुप्रिया ने देखा की राहुल वहीँ उसके नंगे पैरो के पास आ कर लेट गया था और उसके बदन की और देख रहा था. सुप्रिया ने चादर खींचते हुए अपने शरीर को ढकने की कोशिश करि. सुप्रिया के चेहरे पर टेंशन साफ़ झलक रही थी. पर राहुल चादर के अंदर अपना हाथ दाल कर सुप्रिया को छूने की कोशिश कर रहा था. सुप्रिया ने अपना पेअर पीछे खींच लिया.

सुप्रिया - ाचा... अभी मैं रखती हु... मैं बस थोड़ी में आती हु...

सुप्रिया ने फ़ोन रख कर गुस्से में राहुल की और देखा - एक तोह मैं इतनी टेंशन में थी, और उस पर तुम उस टाइम मुझे टच कर रहे थे... अगर मेरे मुँह से कुछ निकल जाता तोह...

राहुल ने अपना हाथ सुप्रिया की टांग पर रखा - तोह निकल जाने दो न...

सुप्रिया - तुम्हारे लिए कहना आसान है... तुम मैरिड नहीं हो न... पता नहीं मैं अब अतुल का सामना कैसे करुँगी... तुम्हे पता है मुझे झूठ बोलना नहीं आता..

राहुल ने एक हलकी सी मुस्कान के साथ कहा - अभी तोह बोलै इतना ाचा झूठ... बहुत जल्दी सीख रही हो...

राहुल ने आगे बाद कर सुप्रिया को हुग, वह अभी भी पूरा नंगा था और उसका लुंड आधा खड़ा लटका हुआ था. सुप्रिया ने उसे पीछे करते हुए चद्दर से अपने आप को धक् लिया और चद्दर हो अपने हाथों से कास के पकड़ लिया.

सुप्रिया - क्या कर रहे हो... कपडे पेहेन लो न....

राहुल - क्यों.... पहले एक और राउंड हो जाये...

राहुल ने सुप्रिया के हाथों से चादर को खींचते हुए उसके बूब्स को उघाड़ दिया. सुप्रिया पलट कर बीएड की तरफ मुँह करके लेट गयी.

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सुप्रिया - क्या कर रहे हो राहुल... मुझे घर जाना है... तुमने सुना न अतुल को...

राहुल सुप्रिया की पीठ पर किश करता हुआ उसके साइड में लेट गया - जल्दी क्या है? चली जाना....

सुप्रिया हलके से गुस्से में बोली - हटो न प्लीज... देर हो रही है...

राहुल ने पीठ पर हाथ फेरते हुए सुप्रिया के कंधे पर किश किया - जायो फिर... मैंने तोह नहीं रोका....

सुप्रिया - राहुल!! मेरे कपडे दे दो और तुम भी कपडे पेहेन लो...

सुप्रिया ने राहुल को पीछे धकेला, और राहुल बीएड से थोड़ा सा नीचे सरक गया. उसने खड़े होते सुप्रिया के कपडे सुप्रिया के और फेके, और अपना अंडरवियर पेहेन्ने लगा. सुप्रिया बीएड पर लेती हुई राहुल की और देख रही थी. आज तोह उसने राहुल के साथ सब कुछ कर लिया था, और उसे ाचा भी लगा था, पर पता नहीं क्यों उसे फिर भी काफी अजीब सा लग रहा था. पता नहीं इस दिल को आखिर चाहिए क्या होता है, उसे समझ hi नहीं आ रहा था. उसने फ़्रस्ट्रेशन में अपने बाल पकड़ लिए.

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सुप्रिया - दूसरी और देखो... मुझे कपडे पेहेन्ने है.

राहुल - हमने तोह एक दुसरे को अब पूरी तरग देख लिया है... अब क्या बचा है छुपाने को...

बात तोह सच थी, पर सब होने के बाद सुप्रिया अब वापस अपने नार्मल होश में आ रही थी, और उसे एक पराये मर्द के सामने कपडे बदलना अजीब सा लग रहा था. राहुल उसकी शकल देख कर उसकी मैं की उलझन को समझ गया था और वह दूसरी तरफ मुद गया.

राहुल - वैसे सच कहु तोह अभी भी मैं कर रहा है तुम्हारे शरीर के हर कोने को और भी गौर से देखु...

सुप्रिया चिल्ला के बोली - पीछे मत मुड़ना…

सुप्रिया ने अपने कपडे पहनने शुरू करि, पहले अपनी पंतय, फिर अपनी सफ़ेद सेक्सी ब्रा को किसी तरह से फिर से बंद किया. सच में काफी छोटी सी ब्रा थी वह जो वह आज पेहेन कर आयी थी. ब्रा पेहेनते हुए उसे अपने बूब्स पर राहुल के नाख़ून से पड़े लाल निशाँ दिखे. उसने उन्हें हलके से मसला, और सोचा की शायद ये 2-3 दिन में ठीक हो जायेंगे. पर उसे अतुल को अभी अपने से दूर hi रखना होगा. सुप्रिया अपने बाकी कपडे पहनती हुई कड़ी हो गयी, और आईने में देख कर अपने बाल ठीक करने लगी.

राहुल - फिर कब करेंगे हम ये सब??

सुप्रिया ने आईने में देखते हुए एक लौ आवाज़ में कहा - पता नहीं...

राहुल - सोच लो... पर ज्यादा देर मत करना...

सुप्रिया - और अगर देर कर दी तोह...

राहुल - तोह फिर क्या.... कृति और मैं अभी भी एक hi गयम में वर्कआउट करते है...

सुप्रिया ने गुस्से में पलट के राहुल की और देखा. राहुल शायद उसकी कमज़ोरी को भांप गया था.

सुप्रिया - पूरे लखनऊ में तुम्हे वही गयम मिला था जाने के लिए....

राहुल है पड़ा - शायद मेरी किस्मत थी.... और तुम्हारी भी...

सुप्रिया - तुम जानते नहीं हो कृति को, बहुत चालू लड़की है... पता नहीं कितने बॉयफ्रेंड है उसके... तुम्हारे जैसे लड़को को तोह वह चुटकियों में घुमा दे...

सुप्रिया जानती थी ऐसा कुछ नहीं है, कृति काफी स्वीट सी लड़की थी जो अपने ड्रीम बॉय की खोज में थी. पर जो भी वह राहुल नहीं हो सकता था, वैसे भी उसकी और राहुल की कोई बराबरी भी नहीं थी.

राहुल - मुझे तोह ऐसी फीलिंग नहीं है उससे बात करके...

सुप्रिया ने झुंझलाते हुए कहा - तुम उसे अभी जानते hi कहाँ हो.... जानोगे तब पता चलेगा न...

राहुल - तोह तुम कह रही हो उसका करैक्टर ख़राब है....

सुप्रिया एक सेकंड के लिए हिचकी और फिर बोली - हाँ.... तुम्हे भरोसा नहीं है मेरी बात पर?

राहुल - तुम पर तोह पूरा भरोसा है... चलो रेडी हो तोह मैं ड्राप कर दू तुम्हे...

सुप्रिया - ठीक है... पर मुझे घर से थोड़ा पहले hi ड्राप कर देना... कहीं कोई देख न ले...

राहुल ने हाँ में सर हिलाया और वह दोनों नीचे कार में बैठ कर सुप्रिया के घर की और चल पड़े. सुप्रिया गाडी में चुप चाप बैठी कृति के बारे में सोच रही थी. उसने आज राहुल को बोल दिया था की कृति छत्रिहीन है, जबकि उस जैसे प्यारी और अछि लड़की काम hi होती है. पर फिर उसे सोच के गुस्सा आने लगा की राहुल और कृति ने साथ में सब कुछ कर लिया था. वह दोनों मैरिड तोह नहीं थी, तोह शायद उसे चरित्रहीन बुलाना गलत नहीं होगा. पर क्या इस हिसाब से वह भी.....

राहुल ने सुप्रिया को उसकी बिल्डिंग से 2-3 मं की दूरी पर उतार दिया और सुप्रिया वहां से चलते हुए अपनी घर की तरफ बड़ी. शाम के 4-5 बज गए थे, पर अभी भी काफी धुप थी. बिल्डिंग के बहार के लोहे के दरवाज़े पर उसे इक़बाल दिख गया. आज तोह वह इक़बाल से भी नज़र नहीं मिला पा रही थी, पता नहीं अतुल के सामने उसका क्या हाल होगा.

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इक़बाल ने उसे देख आवाज़ दी - मैडमजी... आप कहाँ से चल के आ रहे हो इतनी धुप में....

सुप्रिया - यहीं बस पास में गयी थी किसी काम से....

इक़बाल - हाँ पर आप तोह ऑटो से गए थे न सुबह…

सुप्रिया - आप क्यों इतनी नज़र रखते है मेरे आने जाने पर…

इक़बाल ये सुन कर थोड़ा सा घबरा सा गया, आज तक सुप्रिया ने उससे ऐसे बात नहीं की थी - नहीं बस आपकी फ़िक्र होती है.. और कुछ भी नहीं…

सुप्रिया को एकदम से लगा वह कुछ ज्यादा hi बोल गयी इक़बाल को - सॉरी इक़बाल जी… मुझे आपसे ऐसे नहीं बोलना चाहिए था…

इक़बाल ने उसके चेहरे की परेशानी पड़ते हुए कहा - कोई बात नहीं मैडमजी… सब ठीक है न... आप परेशान से लग रहे हो...

सुप्रिया - नहीं कुछ नहीं... बस गर्मी है न....

इक़बाल - आपको इतनी धुप में पैदल नहीं चलना चाहिए... आपका सारा रंग ढल जायेगा... आप मेरी गाडी ले जाया करो… अब तोह आपको चलनी भी आ hi गयी है…

सुप्रिया - हाँ... वह बस.... इतनी भी अछि नहीं आयी है अभी (सुप्रिया ने बात बदलते हुए पुछा) अतुल आ गए है न?

इक़बाल - हाँ... आपके शोहर की गाडी कोई डेड- दो घंटे पहले आयी थी... वह ऊपर hi होंगे...

सुप्रिया - ाचा... हाँ मैं अभी घर जा रही हु... बाद में बात करती हु...

सुप्रिया जल्दी से चलते हुए लिफ्ट से ऊपर चली गयी. उसे लिफ्ट में से hi घबराहट होनी शुरू हो गयी थी. एक तोह अतुल ने उसका मेघा वाला झूठ भी पकड़ लिया था, कहीं उसे शक तोह नहीं हो गया था की वह कहाँ गयी है. अगर उसने उससे कुछ पूछ लिया तोह वह उसे क्या बोलेगी. पता नहीं उसका मैं कभी कभी इतना बेकाबू क्यों हो जाता है, और उसे परेशानी में दाल देता है.

सुप्रिया ने लिफ्ट से उतरने के बाद कांपते हुए हाथों से अपने घर की दुर्बल बजायी. वह भूल hi गयी थी की उसके पास भी घर की दूसरी चाबी है. इस समय उसका दिमाग hi नहीं चल रहा था. अंदर से अतुल ने एक स्माइल के साथ दरवाज़ा खोला. उसकी स्माइल को देख कर तोह सुप्रिया का दिल और भी बैठ गया.

अतुल - आयो जी... वेलकम बैक...

सुप्रिया के चेहरे पर एक नर्वस सी मुस्कान थी - थैंक यू....

अतुल ने सुप्रिया के खाली हाथों को देखा - शॉपिंग गयी थी... कुछ लायी नहीं आज?

सुप्रिया को ऐसा लग रहा था की एक के बाद एक उसके सारे झूठ पकडे जा रहे थे - नहीं... वह... कुछ समझ नहीं आया.... वह मेरी फ्रेंड को शॉपिंग करनी थी बस....

अतुल - ऑफिस वाली मेघा को..

सुप्रिया - हाँ वह ऑफिस वाली मेघा को...

अतुल ने हस्ते हुए कहा - तुम ये मेघा नाम की लड़कियां से बड़ी जल्दी दोस्ती कर लेती हो...

अतुल को अचे से मूड में देख कर सुप्रिया भी नार्मल होती जा रही थी - हाँ... क्या करू... मैं हु hi पानी की तरह... मेघ मेरी और खींच hi जाते है...

अतुल - वह तोह है... चलो फिर मैं भी तोह चख कर देखु इस पानी को...

अतुल ने पास आ कर सुप्रिया की कमर पर अपने हाथ रख दिए और उसकी आँखों में देखने लगा.

सुप्रिया ने काफी धीमी आवाज़ में कहा - आप वह पानी नहीं चख पाओगे...

अतुल - क्या? सुनाई नहीं दिया...

सुप्रिया - कुछ नहीं... वैसे आज इतने रोमांटिक कैसे हो रहे हो.... आप तोह अब बस हमेशा काम काम और काम में hi लगे रहते हो... भूल भी गए हो कोई बीवी भी है...

अतुल ने सुप्रिया के कन्धों पर हाथ रखते हुए उसके माथे को चूमा - सॉरी यार.... तुम जानती हो न... बॉस नहीं थे और मुझ पर पूरी जिम्मेदारी थी... बस एक ाचा इम्प्रैशन बनाना था की मैं सब संभल सकता हूँ...

सुप्रिया - सब कुछ.... मुझे छोड़ कर....

अतुल - नहीं... बस अब बॉस अगले हफ्ते वापस आ जायेंगे और तुम्हारा ये पति फिर से असिस्टेंट ब्रांच मैनेजर बन जायेगा... पहले से थोड़ा काम तोह हो जायेगा काम...

सुप्रिया - क्या हुआ था बॉस को वैसे... छुट्टी पर क्यों थे?

अतुल - पूरी तरह से नहीं पता... पर तुम गयी थी न उनकी बेटी की शादी पर... क्या नाम था उसका... उसके साथ कुछ हुआ है शायद...

सुप्रिया ये सुन कर थोड़ा चौंक सी गयी - निक्की के साथ? क्या हुआ?

अतुल - नहीं पता ज्यादा... बस एहि की वह वापस घर आ गयी...

सुप्रिया का चेहरा थोड़ा सीरियस हो गया था - कब की बात है ये...

अतुल - नहीं पता... बस यह पता है की मेरे प्रमोशन के एक हफ्ते के बाद से hi सक्सेना सर छुट्टी पर है...

सुप्रिया ने अपने दिमाग में पिछली बाते दौड़ाई. अतुल का प्रमोशन उस दिन हुआ था जिस दिन होटल में विक्रम सर ने प्रताप को मारा था. अगर उसके कुछ दिन बाद से hi सक्सेना सर छुट्टी पर थे, इसका मतलब क्या? कहीं उस काण्ड की वजह से तोह निक्की के साथ ऐसा नहीं हुआ?

सुप्रिया को चिंता के घेरे में देख अतुल ने सुप्रिया के गाल खींचे - क्या हुआ... कहाँ खो गयी... तुम क्यों इतना परेशान हो रही हो इन लोगो के चक्कर में...

सुप्रिया - नहीं कुछ नहीं....

अतुल - आज मैं जल्दी फ्री हो गया हु... तुम्हारा बर्थडे सेलिब्रेट करने बहार चले...

सुप्रिया ने मुँह लटका के बोलै - नहीं... मैं काफी थक गयी हु... और वैसे भी बर्थडे तोह अब निकल गया है...

अतुल - ाचा.... तोह फिर घर पर hi कुछ स्पेशल कर लेते है....

सुप्रिया - क्या स्पेशल??

अतुल ने सुप्रिया के गाल पर किश करते हुए कहा - बहुत दिन हो गए... चले बैडरूम में...

सुप्रिया - नहीं... आज नहीं अतुल... मैं बहुत थकी हुई हु...

अतुल ने सुप्रिया के हाथ पकड़ कर अपनी और खींचा - बस थोड़ी देर.... जल्दी से कर लेंगे....

सुप्रिया ने सोचा की उनके बीच सब कुछ जल्दी hi तोह हो जाता था. आज शायद उसे पहली बार राहुल के साथ फोरप्ले समझ आया था. अतुल तोह बस सीधे अपनी बन्दूक उसके अंदर दाग देते थे, और फिर थोड़ी सी hi देर में उनका हो भी जाता था. आज तोह राहुल और उसने काफी देर तक ये खेल खेला था. आज शायद वह ये और नहीं कर पायेगी. और वैसे भी उसके शरीर पर अभी भी कुछ निशाँ थे, जो अगर अतुल को दिख गए तोह गड़बड़ हो जाएगी. उसकी छूट भी अभी तक थोड़ी सी दुःख रही थी.

सुप्रिया - नहीं.... आज मेरा बिलकुल मैं नहीं है...

अतुल - क्या हुआ... पीरियड्स पर हो क्या....

सुप्रिया के मुँह से एक डैम से नहीं निकल गया, उसने सोचा उसे शायद हाँ बोलना चाहिए था...

अतुल - इतने दिन हो गए और तुम तोह कभी मन नहीं करती... फिर आज क्यों....

सुप्रिया ने अपनी आवाज़ थोड़ी सी ुचि करि - क्यों? मैं मन नहीं कर सकती? बस तुम्हे hi वह हक़ है?

अतुल - मैंने ऐसा नहीं कहा... बस मेरा काफी मैं था...

सुप्रिया - तोह बस हम तभी करेंगे जब तुम्हारा मैं होगा...

पता नहीं उसके अंदर इतना खुल के बोलने की हिम्मत कहाँ से आ रही थी. अतुल भी उसकी शकल देखता रह गया था. सुप्रिया वहां से गुस्से में दनदनाती हुई अपने बैडरूम में चली गयी और कपडे चेंज करके बीएड पर लेट गयी. उसे अतुल पर गुस्सा आ रहा था, आखिर वह उसे समझता क्या था, बस एक सेक्स करने के मशीन. जब चाहा बटन ों कर लिया और जब चाहा बटन ऑफ कर लिया. न तोह उसे उसकी फीलिंग्स की परवाह थी और न hi वह उसे कोई टाइम देता था. उनकी शादी को अब 8-9 महीने हो चुके थे, और वह अब तक उसे समझ नहीं पाया था.

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पर अंदर hi अंदर, आज जो भी हुआ, वह भी उसे खाये जा रहा था. पता नहीं यहाँ से उसका और राहुल का रिश्ता आगे कहाँ जायेगा. क्या वह अतुल को हमेशा के लिए छोड़ कर राहुल की हो जाये? उस में शायद ये करने की हिम्मत तोह नहीं थी. पर पता नहीं आज जो भी किया उसकी हिम्मत कैसे हो गयी थी. आज तोह उसकी लिखी ुनलिखि कई सारे रेखाएं पार कर दी थी.

उसने बहार की और झाँक कर देखा की अतुल यहाँ आ कर उसके पास बैठे. उसके आंसू रिम झिम बहने शुरू हो गए थे. क्या पता अतुल आ hi जाता तोह आज hi उसके मुँह से साड़ी बातें निकल भी जाती. पर अतुल नहीं आया, और थोड़ी hi देर में सुप्रिया की आँख लग गयी थी. वह काफी गहरी नींद में सो गयी.

जब उसकी आँख खुली तोह कमरे में अंधेरा हो गया था, उसने आखें मलते हुए देखा की अतुल वहीँ बीएड पर उसके बराबर में सो रहा था. उसने घडी में टाइम देखा तोह रात के 10 बज गए थे. वह 5-6 घंटे सो गयी थी. वह बीएड से उठती हुई और बहार लिविंग रूम में जा कर बैठ गयी. उसने अपना फ़ोन चेक किया तोह किसी ख़ास का कोई मैसेज नहीं था, कोई ख़ास माने तोह राहुल.

अगले दिन ऑफिस जाना था, पर सुप्रिया का ऑफिस जाने का बिलकुल भी मैं नहीं था. पर जाना तोह पड़ेगा है, इसलिए सुप्रिया ने कुछ हल्का फुल्का खाया और वापस बीएड पर आ कर लेट गयी. पता नहीं अतुल इतनी आराम से कैसे सो जाता था, सुप्रिया को तोह कई बार घंटो घंटो नींद नहीं आती थी. और आज रात तोह ख़ास कर उसे जल्दी से नींद नहीं आने वाली थी. लेते लेते वह अपना फ़ोन चलती रही ताकि वह अपने दिमाग को कहीं और भटका सके, और काफी देर के बाद उसे आखिर नींद आ hi गयी.

अगले सुबह फिर से ऑफिस की भाग दौड़ शुरू हो गयी थी. सुप्रिया ने सुबह भी अतुल से ज्यादा बात नहीं करि और अतुल उसे ऑफिस ड्राप करता हुआ बैंक चला गया. सुप्रिया आज थोड़ा जल्दी ऑफिस पहुंच गयी थी और कृति अब तक नहीं आयी थी. कितना कुछ बदल गया था पिछले फ्राइडे ने इस मंडे तक. जब वह फ्राइडे को ऑफिस से निकली थी वह कितनी खुश थी की उसकी कृति जैसी दोस्त थी, पर अब वह कृति से दूर hi रहना चाहती थी. कहीं न कहीं उसके मैं में जो भी हुआ उसका पूरा गिल्ट था.

कृति हमेशा की तरह मुस्कुराती हुई ऑफिस में आयी. सुप्रिया कोशिश कर रही थी की अपने आप को काम में इतना बिजी रखे की उसे कृति से आँख न मिलनी पड़े.

कृति - क्या हुआ मैडम... सुबह सुबह इतनी बिजी?

सुप्रिया ने उसे बिना देखे कहा - हाँ वह उस वाले क्लाइंट के कुछ ईमेल आये है... वह hi पद रही थी....

कृति - ाचा.. क्या बोल रहा है तुम्हारा डनण्य...

सुप्रिया ने त्योरियां चढ़ाते हुए कहा - मेरा डनण्य??

कृति - ारी मतलब, तुम hi तोह हैंडल कर रही हो न उसे....

सुप्रिया ने उसे बिना देखे - हम्म्म्म

कृति - क्या हुआ सुबह सुबह हस्बैंड से लड़ाई हुई क्या?

सुप्रिया - नहीं... क्यों होगी लड़ाई....

कृति ने आँख मारते हुए कहा - तोह फिर प्यार हुआ इसलिए मिस कर रही हो?

सुप्रिया - नहीं... मैं बस काम कर रही हु...

कृति - ारी यार... सीरियस तोह मुझे होना चाहिए पर तुम हो रही हो...

सुप्रिया ने उसकी तरफ देखते हुए पुछा - क्या हुआ?

कृति - वह तुम्हारा दोस्त... राहुल... गयम वाला....

राहुल का नाम सुन कर सुप्रिया के मैं की घभराहट बढ़ने लगी थी, पता नहीं क्या बोलने वाली थी कृति. कहीं राहुल ने उसे सब बता तोह नहीं दिया था. नहीं राहुल इतना बेवक़ूफ़ तोह हरगिज़ नहीं था. तोह फिर क्या किया उसे?

सुप्रिया - क्या हुआ? मेरा कोई दोस्त वोस्ट नहीं है वह वैसे...

कृति - कुछ नहीं... कल पूरा दिन... न तोह कॉल पिक करि न मैसेज का जवाब दिया... ऐसा लग रहा है जैसे मुझे घोस्ट कर दिया हो...

सुप्रिया - घोस्ट कर दिया?? मतलब?

कृति - ओफ्फो... मतलब मुझे इग्नोर कर दिया... सब कुछ तोह ठीक था सैटरडे तक... पता नहीं क्या हुआ एक डैम से...

सुप्रिया ये सुन कर अंदर hi अंदर काफी खुश हो गयी. राहुल ने उसकी बात मानी और कृति को पूरा इग्नोर कर दिया - हम्म्म्म.... शायद बिजी होगा?

कृति - मैं ज्यादा डेस्पेरेट नहीं बनना चाहती... तोह अभी मैं ज्यादा भाव नहीं दूंगी उसको...

सुप्रिया - हाँ मेरे ख्याल से एहि ठीक रहेगा....

कृति - तुम्हारी बात होती है क्या उससे?

सुप्रिया हड़बड़ाते हुए - नहीं... मेरी क्यों होगी बात उससे? वह बस मेरे हस्बैंड के बैंक में काम करता है... और कुछ नहीं....

कृति - मैंने तोह ऐसे hi पुछा... चिल....

सुप्रिया - तुम्हे इतना परेशान देखा तोह इसलिए....

कृति - नहीं इतस फाइन... देखते है... अब उसका भी कॉल आएगा तोह मैं इग्नोर कर दूंगी...

सुप्रिया ने सोचा की शायद इसी में सबकी भलाई रहेगी. और अगर कृति राहुल से दूर हो गयी तोह शायद वह अपने दिमाग से कृति के बारे में सारे नेगेटिव ख्याल निकाल पाएगी. कृति ने कितनी हेल्प करि थी उसकी इस जॉब में और उससे कृति से बात करना काफी ाचा लगता था इस सब से पहले.

सुप्रिया ने कृति को सोफ़्त्ल्य आवाज़ दी - हाँ... कृति... सुनो... मेरी इस ईमेल के रिप्लाई में हेल्प करो न...

वैसे तोह कृति सुप्रिया से नाराज़ नहीं थी, और होती भी क्यों. पर सुप्रिया को ऐसा लग रहा था की जैसे वह कृति से प्यार से बुला कर, उसकी मदद ले कर उसे मन रही हो. कृति सुप्रिया के डेस्क की तरफ आ गयी और वह दोनों मिल कर ईमेल का जवाब देने लगे. सुप्रिया के चेहरे पर स्माइल वापस आ गयी थी, पर पता नहीं वह टिकने वाली थी या नहीं.
 
अपडेट 43

शाम होते होते तक सुप्रिया का मूड काफी हद्द तक ठीक हो गया था. जो कुछ पिछले दिन हुआ, उस सोच कर अब सुप्रिया को इतना बुरा नहीं महसूस हो रहा था. शायद एहि फायदा था उसका जॉब करने का. घर बैठे बैठे वह कई बार कुछ ज्यादा hi सोच कर डिप्रेशन में चली जाती थी. पर आज ऑफिस की चेहेल पहल ने उसके मैं में छाये काले बादलो को हटा दिया थे, और वह अपने काम पर अचे से कंसन्ट्रेट कर पा रही थी.

मंडे सुबह hi कुछ अछि खबर आयी थी जिससे सुप्रिया को लग रहा था की अब शायद वह उस वाला क्लाइंट आखिर मान hi जाये. उन्हें सुप्रिया के भेजे हुए सैम्पल्स काफी अचे लगे थे, पर वह अभी भी वह आर्डर देने में थोड़ा टाइम लगा रहा थे. पर अब आखिर कार डनण्य का बॉस - माइक, हु एक कला इंसान था, एक मीटिंग के लिए मान गया था. सुप्रिया और उसकी वीडियो कांफ्रेंस इस हफ्ते के एन्ड में सचेडूले की गयी थी. सुप्रिया उस मीटिंग को ले कर काफी एक्ससिटेड थी, अगर उन्हें ये आर्डर मिल जाता है तोह शायद विक्रम सर काफी खुश हो जायेंगे. और उनकी ख़ुशी से बड़ी तोह क्या बात हो सकती थी.

5 बजे तक सुप्रिया का आज का काम पूरा हो गया था, और वह बस थोड़ी देर में घर निकलने hi वाली थी. उसे लग रहा था की अभी कुछ hi पालो में उसके फ़ोन पर राहुल का मैसेज आएगा, और वह उसे पिक करने आ जायेगा. सुप्रिया बेचैनी से अपने फ़ोन को देख रही थी, की पता नहीं कब उसका मैसेज आएगा. पर ऐसा कुछ नहीं हुआ, और लगभग एक घंटे तक वेट करने के बाद भी राहुल का कोई मैसेज नहीं आया. सुप्रिया को थोड़ा सुर्प्रिसिंग तोह लगा की आज राहुल उसे कैसे मिलने नहीं आया. तभी कृति वापस अपनी सीट पर आयी.

कृति - तुम गयी नहीं अभी तक आज? उस वाले क्लाइंट से कॉल है क्या?

सुप्रिया - नहीं... मैं बस निकलने hi वाली थी...

कृति - तुम्हारा वर्क तोह बहुत पहले ख़तम हो गया था... तोह ऑफिस में क्यों रुकी हुई हो? हस्बैंड आ रहे है क्या लेने?

सुप्रिया - उनके पास कहाँ टाइम है मेरे लिए... मैं तोह खुद hi जा रही हु....

कृति - चलो... मैं तुम्हे ड्राप कर देती हु...

सुप्रिया - पर तुम्हे तोह शाम को गयम जाना होता है न...

कृति - उसी रास्ते में पड़ेगा... कोई प्रॉब्लम नहीं है चलो...

सुप्रिया कृति के साथ उसकी कार में चल पड़ी. उसे काफी अजीब सा लग रहा था की आज राहुल की जगह उसे कृति घर छोड़ रही थी.

सुप्रिया ने ऐसे hi बात शुरू करने के लिए पुछा - सो... राहुल से बात हुई?

कृति - हम्म्म... नहीं... पर वह गयम में तोह मिलेगा hi...

सुप्रिया - ाचा.. वह रोज़ गयम आता है क्या?

कृति - हाँ... काफी डेडिकेटेड है अपने गयम वर्कआउट को लेकर...

सुप्रिया - और तुम? तुम भी रोज़ गयम जाती हो?

कृति के जवाब देते हुए गाल लाल हो गए - हाँ.. अब तोह मैं भी रोज़ hi गयम जाने लगी हु...

सुप्रिया ने कृति की तरफ देखते हुए पुछा - पर अब तोह वह तुम्हे अवॉयड कर रहा है न? तोह फिर तुम भी उसे अवॉयड करोगी न?

कृति सोचते हुए बोली - पता नहीं.... समझ hi नहीं आता क्या करू....

सुप्रिया ने अपने दिमाग की बात साफ़ बोल दी - ऐसा क्या ाचा लगता है तुम्हे राहुल में? तुम्हे तोह कोई भी लड़का मिल जायेगा?

कृति को हलकी सी हसी आ गयी - कुछ तोह है उसमे, पता नहीं क्या... और उस दिन तुम्हारी बर्थडे पार्टी के बाद से तोह....

सुप्रिया - उस दिन के बाद से क्या? कुछ हुआ था क्या उस दिन?

कृति बुरी तरह ब्लश कर रही थी - नहीं.... हाँ... जाने दो ना...

सुप्रिया ने अपनी तीखी आँखों से उसे घूरा. राहुल सिर्फ उसका था, और यहाँ ये लड़की उसके बराबर में बैठ कर पता नहीं क्या क्या सोच रही थी उसके बारे में. गॉड, उसे उसी दिन उन दोनों को सेक्स करने से रोक देना चाहिए था. पता नहीं क्या समझती थी कृति अपने आप को.

सुप्रिया - तुम्हारा फर्स्ट टाइम तोह नहीं था वह राहुल के साथ, तोह फिर?

कृति ने एक डैम से अपना चेहरा सुप्रिया की और करके उसकी शकल को देखा. क्या वह सीरियसली उससे ये पूछ रही थी? और उसे कैसे पता की उसके और राहुल के बीच क्या हुआ था. और उसकी शकल पर इतना गुस्सा क्यों था?

कृति - उम्म्म.... तुम तोह पास्ड आउट थी न उस रात को.... तोह फिर...

सुप्रिया ने अपने चेहरे का भाव ठीक करते हुए कहा - तुम्हारी बातों से गेस कर लिया.... बताया न? राहुल तुम्हारा फर्स्ट तोह नहीं होगा?

कृति सुरपिया के इतना खुल के बात करने पर थोड़ा सा हैरान थी, पर वह अपने मैं के बात किसी से तोह शेयर करना चाहती थी - उम्म्म... नहीं फर्स्ट तोह नहीं था... पर तहत वास् माय बेस्ट...

सुप्रिया - और अगर फिर मौका लगेगा तोह उसके साथ दुबारा करना चाहोगी?

कृति - ये सब क्यों पूछ रही हो???

सुप्रिया - के ों... वे अरे फ्रेंड्स... मुझे तोह बता hi सकती हो...

कृति थोड़ा हिचकिचाते हुए - हाँ.... ी गेस सो... यू अरे मेकिंग में उनकंफर्टबले सुप्रिया...

सुप्रिया - सॉरी... तुम मेरी फ्रेंड हो, इसलिए तुम्हे एक बात बताना चाहती थी...

कृति - क्या बात?

सुप्रिया के चेहरा काफी सीरियस हो गया था. कृति हर कुछ पल में सुप्रिया की और पलट कर देख रही थी. उसे सस्पेंस खाये जा रहा था.

कृति - क्या बात है? बताया न? राहुल से रिलेटेड है क्या?

सुप्रिया - हाँ....

कृति - बोलो न फिर....

सुप्रिया - मुझे पक्का नहीं पता... मैंने बस अपने हस्बैंड से सुना है... काफी प्लेबॉय टाइप का लड़का है राहुल...

कृति - व्हाट??

सुप्रिया - तुम मेरी फ्रेंड हो... तोह मैंने सोचा तुम्हे वारं कर दू...

कृति के चेहरा टेंशन से भर चूका था - अरे यू किडिंग में? ओह गॉड!

सुप्रिया किसी तरह से अपना चेहरा सीरियस रखते हुए बोली - मैं क्यों मज़ाक करुँगी इस बारे में?

कृति - नहीं नहीं! ी ट्रस्ट यू यार... बस मुझे अपने आप पर गुस्सा आ रहा है... हे ब्लडी ुसेड में एंड थें दुपद में...

कृति अब टेंशन से हैट कर गुस्से वाले मोड में जा रही थी. सुप्रिया उसकी ये हालत देख कर मैं hi मैं काफी खुश हो रही थी. एहि मौका था उन दोनों को हमेशा के लिए अलग करने का. न कृति और राहुल आपस में बात करेंगे, न कोई तमाशा होगा फ्यूचर में. इस तरह से सब खुश रहेंगे अपनी लाइफ में.

सुप्रिया - तुम टेंशन मत लेना.... और हो सके तोह उसे अवॉयड hi करना... उससे पूछोगी तोह वह तोह मन hi करेगा...

कृति - No ी ऍम फाइन... हाँ ी डोंट वांट अन्य ड्रामा इन माय लाइफ...

इतने में सुप्रिया के अपार्टमेंट की बिल्डिंग भी आ गयी थी - चलो... गुड नाईट... टेक केयर...

कृति - थैंक्स सुप्रिया... थैंक यू सो मच... अगर तुम मुझे न बताती तोह पता नहीं....

सुप्रिया - शायद मुझे तुम्हे और पहले बता देना चाहिए था... बस ी डिडन्ट क्नोव तुम लोग रोमांटिकल्ल्य इन्वॉल्व हो जाओगे...

कृति - इतस फाइन... ी टोटली अंडरस्टैंड... चलो गूडनिघत...

(हम आज सुप्रिया को यहीं छोड़ कर कृति के साथ आगे स्टोरी बढ़ाएंगे)

सुप्रिया को उसकी बिल्डिंग के बहार ड्राप करके कृति अपनी कार चलती हुई गयम की तरफ ले गयी. वह अभी भी काफी गुस्से और शॉक में थी. हालाँकि वह राहुल को सिर्फ पिछले 2-3 महीनो से जानती थी, वह दोनों एक दुसरे के साथ कई डेट्स पर जा चुके थे और उसे राहुल का साथ बहुत hi ाचा लगता था. राहुल काफी फनी था पर उसके साथ वह हमेशा सेफ फील करती थी. और उस दिन उनके बीच जो भी हुआ, उसके बाद तोह वह जैसे राहुल की दीवानी hi हो गयी थी.

पिछले 1-2 दिनों से वह राहुल से बात नहीं कर पायी थी सो उसे काफी अजीब सा लग रहा था पर. पर अभी सुप्रिया ने उसे जो भी बताया था उसके बाद तोह राहुल को लेकर उसके सारे सपने और अरमान जैसे बिखर से गए थे. शायद उसका काम निकलते hi उसने कृति को इग्नोर करना शुरू कर दिया था. कोई इंसान इतना दोगला कैसे हो सकता था, उसे यकीं hi नहीं हो रहा था.

कृति आज चाहती तोह गयम न भी जाती पर वह उस कमीने की शकल देखना चाहती थी और उससे पूछना चाहती थी की उसने उसके साथ ऐसा क्यों किया. पर गयम में घुसते घुसते उसका मैं बदल सा गया था. कितने सारे लोग थे वहां, और वह कोई सन नहीं क्रिएट करना चाहती थी. राहुल की कोई इज़्ज़त हो या न हो, उसकी तोह थी.

कृति गयम के चेंजिंग रूम में घुस गयी और उसने अपने कपडे चेंज कर लिए. वह चेंज करके गयम के एक कोने में लगे पंचिंग बैग को ज़ोर ज़ोर से पंच करने लगी. उसे होश नहीं था की गयम में कौन था और कौन नहीं, उसे बस अभी अपना गुस्सा निकलना था.

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कृति पंचिंग बैग को ज़ोर ज़ोर से पंच करते हुए गुस्से भरी आवाज़ें निकाल रही थी. तभी पीछे से उसे राहुल ने आवाज़ दी.

राहुल - क्या बात है मैडम... आज तोह लगता है पंचिंग बैग को hi फोड़ डौगी.

कृति ने एक पल के लिए पलट कर राहुल की और देखा और फिर से पंचिंग बैग को ज़ोर ज़ोर से पंच करने लगी.

राहुल - आज तोह लगता है काफी गुस्से में हो...

कृति ने पंच करना रोका और टॉवल से अपना पसीना पोछा. और फिर वापस चेंज रूम की तरफ जाने लगी. वह यहाँ नहीं रह सकती थी, उसके मुँह से कुछ न कुछ निकल hi जायेगा. वह राहुल की साइड से निकलती हुई जल्दी से चेंजिंग रूम में घुस गयी.

राहुल को लगा की शायद उसने 2 दिनों से कृति को मैसेज या कॉल नहीं किया था इसीलिए वह उससे गुस्सा होगी. वह लेडीज चेंजिंग रूम के बहार खड़ा हो गया. काफी देर हो गयी थी कृति को अंदर गए हुए और वह अब तक बहार नहीं आयी थी. राहुल लोगो को अंदर आता जाता देख राजा था, उसके हिसाब से अभी चेंज रूम में सिर्फ कृति hi अंदर थी. वैसे भी इस गयम में ज्यादा लडकियां नहीं आती थी.

कृति भी यहाँ बस अपने ट्रेनर के कहने पर hi आयी थी, जब वह उससे पहली बार मिला था. पहली नज़र में hi उसे कृति बहुत hi क्यूट सी लड़की लगी थी. शुरू में तोह उससे बात करने में काफी हिचकिचाया था पर कृति का ट्रेनर और राहुल अचे दोस्त थे और उसने hi उनकी बात करवाई थी. शुरू में तोह वह जानता भी नहीं था की कृति एक अमीर फॅमिली से थी. बस कृति और उसकी वाइब्स मैच होने लगी और वह एक दुसरे की और खींचने लगे थे. उसे कृति की सबसे अछि बात ये लगती थी की उसमे ज़रा भी ऐटिटूड नहीं था, और वह दोनों एक दुसरे से खुल कर मजाक कर पाते थे.

राहुल ने इधर उधर देखा और वह जल्दी से लेडीज चेंज रूम में घुस गया. थोड़ा अंदर जाते hi उसे सामने कृति कड़ी दिख गयी. उसके सामने कृति गुस्से में हाथ पर हाथ बांधे कड़ी थी.

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उसे देख कर hi राहुल सफाई देने लग गया - तुम इतनी देर तक बहार नहीं आयी थी न, तोह मुझे तुम्हारी फ़िक्र होनी लगी थी...

कृति ने अपना बैग उठाया और बहार की और जाने लगी. राहुल ने दीवार पर हाथ रख कर उसका रास्ता रोका.

राहुल - हे.... सॉरी यार मैं तुम्हे मैसेज या कॉल नहीं कर पाया कल.... मेरे कुछ रिलेटिव्स आये हुए थे...

कृति - ी डोंट केयर.... मेरे रास्ते से हटो...

राहुल - कृति.... क्या हुआ है तुम्हे....

कृति - जस्ट गेट आउट ऑफ़ माय वे... तुम्हारे लिए वही ाचा होगा... ोथेरविसे ी विल कॉल सिक्योरिटी....

राहुल - मुझे बताया तोह मैंने क्या किया है....

कृति - मैं तुमसे मुँह नहीं लग्न चाहती...

राहुल हस्ते हुए बोलै - तोह मुँह के बिना भी गले लग सकते है....

कृति - इतस नॉट फनी...

राहुल - ी मिस्ड यू... काफी क्यूट लग रही हो तुम....

कृति - एहि बोलते हो तुम हर लड़की को....

राहुल - किस लड़की को....

कृति ने एक गहरी सांस भरी - लुक... ी डोंट हैवे टाइम फॉर थिस....

राहुल ने अपना हाथ नीचे कर दिया और कृति बहार की तरफ चली गयी. राहुल भी उसके पीछे पीछे चल पड़ा. उसे समझ hi नहीं आ रहा था की कृति को हुआ क्या था. कृति अपनी कार की तरफ चल पड़ी और राहुल उसके ठीक पीछे.

कृति कार में बैठ hi रही थी की राहुल ने उसे आवाज़ दी - कृति! रुको एक सेकंड....

कृति ने कार का इंजन चालू किया, राहुल - कृति... मुझे बताया तोह... हुआ क्या है... ी लव यू यार....

पर कृति उसके ठीक सामने अपनी कार चलते हुए वहां से ले गयी. राहुल वहीँ गयम के बहार खड़ा रह गया था. क्या कृति को उसके साथ सेक्स करके ाचा नहीं लगा था या कुछ और बात थी. नहीं, सेक्स के बाद तोह वह कितनी खुश थी, अगली सुबह भी. वह अपने दिमाग में समझ hi नहीं पा रहा था की हुआ क्या है. कहीं सुप्रिया ने उसे सब तोह नहीं बता दिया? नहीं, सुप्रिया ऐसा क्यों करेगी?

राहुल ने जल्दी से सुप्रिया को कॉल लगाया, और दूसरी तरफ से सुप्रिया की आवाज़ आयी - Hello...

राहुल - सुप्रिया....

सुप्रिया दबी आवाज़ में बोली - हाँ बोलो... इस टाइम क्यों कॉल किया.... अतुल घर पर हैं...

राहुल - मुझे बस पूछना था की कृति से कोई बात हुई थी क्या आज?

सुप्रिया - कैसी बात?

राहुल - कुछ भी? वह काफी डिस्टर्बेद सी लग रही थी आज? कहीं हमारे बारे में तोह नहीं....

सुप्रिया - पागल हो क्या? मैं उसे कुछ क्यों बतायूंगी? अभी मैं कॉल रख रही हु, कल कॉल करुँगी.... वैसे ी मिस यू ा लोट...

राहुल बिना किसी फीलिंग के बोलै - ी मिस यू तू...

सुप्रिया ने जल्दी से कॉल रख दिया और राहुल अपने मैं में साड़ी बातें घूमते हुए सोचने लगा की आखिर ऐसा क्या हुआ था की कृति उससे बात भी नहीं करना चाहती थी. और आज क्यों वह सुप्रिया की और नहीं, कृति की और खींचा जा रहा था.

फ़ोन रखते hi सुप्रिया की चेहरे पर एक बड़ी सी स्माइल आ गयी थी. आखिर उसका प्लान काम कर hi गया था. आज के बाद कृति कभी भी राहुल पर भरोसा नहीं करने वाली थी. और रही बात राहुल की, वह तोह बस अब उसका hi था. कल hi तोह उसने राहुल के साथ वह सब किया था जो आज से पहले कभी अतुल के साथ भी नहीं किया था. वह सब सोचते hi उसके शरीर में अलग सी कम्पन होने लगी थी, और वह चाहती की वह सब वह दुबारा करे.

अतुल ने कमरे में घुसते हुए सुप्रिया से पुछा - किसका कॉल था?

सुप्रिया - भाभी का कॉल था... वह पूछ रही थी की रक्षा बंधन के लिए आ रही हो क्या.

अतुल - तोह फिर? जा रही हो क्या?

सुप्रिया - नहीं... मैं तोह नहीं जा पयूंगी... इतनी दूर है और वीकडे भी है....

अतुल - मैं तोह हर साल जाता हूँ... और अभी अर्पिता एक्सपेक्टिंग भी है...

सुप्रिया - तोह आप हो आयो न...

अतुल - और तुम? यहाँ अकेले कैसे रहोगी...

सुप्रिया - इसमें क्या है? एक दिन की तोह बात है, मैनेज हो जायेगा...

अतुल - ठीक है, अभी तोह 2 हफ्ते है... मैं देखता हु अगर टिकट बनती है तोह...

सुप्रिया - बना लो आप टिकट... मेरी वजह से कैंसिल मत करना....

अतुल ने हाँ में सर हिलाया, और वह बीएड पर आकर दूसरी और लेट गया. उसे कितना टाइम हो गया था अपनी फॅमिली से मिले हुए और इस टाइम वह अपनी फॅमिली के पास जाना चाहता था. वह अभी भी कल की सुप्रिया की बात से थोड़ा हर्ट सा था, और उसने कोई कोशिश नहीं करि सुप्रिया को दुबारा छूने की. जल्द hi उसे नींद आ गयी.

दूसरी और सुप्रिया आज की साड़ी घंटायो के बारे में सोच सोच कर मुस्कुराती हुई जागती रही. उसने सोचा की कल ऑफिस में कृति की उत्तरी हुई शकल देखने में कितना मज़ा आएगा. थोड़ी देर बाद वह भी चैन की नींद सो गयी.
 
लगता है मेरे पहले की पोस्ट्स की साड़ी इमेजेज होस्टिंग साइट्स से डिलीट हो गयी है... काफी स्ट्रेंज है... ऐसा होता है क्या?

काफी ख़राब सा लग रहा है... मैंने काफी मुश्किल से पिक्स ढून्ढ ढून्ढ कर ऐड करि थी.

ी थिंक चलो अब से मैं बिना पिक्स के hi स्टोरी पोस्ट कर दूंगी... उससे स्टोरी तोह जल्दी पूरी हो जाएगी.
 
अपडेट 44

थर्सडे की शाम आ गयी थी, और सुप्रिया मीटिंग रूम में उस वाले क्लाइंट से मीटिंग करने जा रही थी. कितना ाचा हफ्ता गया था उसका, कृति के मुरझाये हुए चेहरे को देख कर तोह जैसे उसे पोते हफ्ते और भी एनर्जी मिली थी. अब बस उसे इस क्लाइंट का आर्डर मिल जाये तोह इससे बेहतर क्या hi हो सकता था.

हालाँकि उसके साथ इस प्रोजेक्ट पर आकाश ने भी काम किया था, आज उसे किसी पर्सनल काम से ऑफिस से जल्दी निकलना था. शाम के 7 - 7.30 बजे थे और ज्यादातर लोग ऑफिस से जा चुके थे. साहिल सर अभी भी अपने केबिन में बैठे काम में लगे थे. पता नहीं वह घर जाते भी थे या नहीं, इतने महीनो में सुप्रिया ने तोह उन्हें घर जाते नहीं देखा था और सुबह भी वह उससे पहले hi अपने केबिन में बैठे होते थे.

सुप्रिया अपनी प्रेजेंटेशन लेकर मीटिंग रूम में पहुंची. उसे लगभग 2 महीने हो गए थे इस प्रोजेक्ट पर काम करते करते और आज आखिर कार उसे माइकल से मीटिंग मिल hi गयी थी. माइकल जो माइक के नाम से जाना चाहता था, उनकी कंपनी के सारे परचेस ऑर्डर्स अप्प्रोवे करता था, और उसकी मर्ज़ी के बिना ये आर्डर पास नहीं होने वाला था. सुप्रिया की बातचीत अब तक सिर्फ डनण्य से hi हुई थी जो माइक ने नीचे था. डनण्य बहुत hi हसमुख सा लड़का था, जिससे सुप्रिया भी खूब हसी मजाक कर लिया करती थी और उसे ऐसा लग रहा था की डनण्य की तरफ से उसको पूरा सपोर्ट था.

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पर अब बारी थी माइक की, और जहाँ तक सुप्रिया को याद था, वह जब उससे ट्रेड शो में मिली थी, वह उसे बिलकुल ाचा नहीं लगा था. सुप्रिया ने एक गहरी सांस ली और वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग ों करि, और थोड़ी hi देर में माइक से अपनी साइड से भी ज्वाइन कर लिया. वह अपने कंप्यूटर में देखता हुआ काफी बिजी सा लग रहा था. सुप्रिया को उसकी काली शकल देख कर मानो सब कुछ याद आ गया हो.

सुप्रिया ने अपनी स्वीट सी आवाज़ में कहा - गुड मॉर्निंग सर... हाउ अरे यू?

माइक ने सुप्रिया की खनकती हुई आवाज़ सुन कर अपना सारा ध्यान कैमरा की और किया - गुड मॉर्निंग... और शॉल ी से इवनिंग फॉर यू...

सुप्रिया - It's इवनिंग हेरे सर.... थैंक यू सो मच फॉर जोइनिंग थे कॉल टुडे... ी अप्प्रेसियते योर टाइम...

माइक - It's पर्फेक्ट्ली फाइन... एंड यू कैन कॉल में माइक राथेर थान सर.

सुप्रिया - सूरे माइक...

माइक - डनण्य बॉय हेरे कीप्स टॉकिंग अबाउट यू आल थे टाइम... यू हैवे मेड किते ान इम्प्रैशन ों हिम... लिखे यू गोत हिम व्राप्पेड अराउंड योर फिंगर...

ये सुन कर सुप्रिया के चेहरे पर स्माइल के साथ साथ शर्म सी भी आ गयी थी - ओह्ह, इतस नथिंग लिखे तहत. विल डनण्य बे जोइनिंग थे कॉल तू?

माइक ने मुँह बनाते हुए कहा - No... व्हाई दो वे नीड हिम... इतस जस्ट थे तवो ऑफ़ उस... इस तहत एनफ?

सुप्रिया - सूरे सर.. ी मैं माइक... व्हाटएवर यू से...

माइक - सो तेल्ल में सुप्रिया... हाउ कैन ी हेल्प यू?

सुप्रिया - सर अस यू क्नोव आवर कंपनी एक्सपोर्ट्स क्लोथ्स तो उसे एंड इतर कन्ट्रीज, एंड वे थिंक वे हैवे ा ग्रेट प्रोडक्ट फॉर योर कंपनी तो तरय आउट.

माइक सकहते हुए - हम्म्म्म.... ok.....

सुप्रिया - ी सेंत सम सैम्पल्स ओवर लास्ट मंथ, एंड डनण्य रियली लिकेड थम... सो ी वांटेड तो फिनॉइज़ थे डिटेल्स विथ यू...

माइक - Ok... एंड थी अरे इंडियन क्लोथ्स मैनली?

सुप्रिया - No सर... आल टाइप्स ऑफ़ ड्रेसेस एंड इतर क्लोथ्स....

माइक - अह्ह्ह यस.... ी रेमेम्बेर.... एंड आल टाइप्स ऑफ़ इतर क्लोथ्स लिखे bra's एंड पैंतीस तू..

सुप्रिया ने सोच रखा था की वह अपने आप को शांत रखेगी - हाँ... ी मैं यस सर...

माइक - हाँ... इस तहत लिखे इंडियन फॉर यस...

सुप्रिया - यस, हाँ मैं यस इन हिंदी...

माइक - इंटरेस्टिंग... व्हाई डोंट यू टीच में मोरे...

सुप्रिया - उम्म्म... सूरे सर ी वोउल्ड लव तो टीच यू मोरे हिंदी, बूत कैन वे प्लीज डिसकस ों थे आर्डर फर्स्ट....

माइक - यू क्नोव सुप्रिया, यू हैवे ा एक्सट्रेमेली प्रीटी फेस....

सुप्रिया - थैंक यू सर... बूत...

माइक - It's रौदे तो इंटरप्ट थे कस्टमर यू क्नोव....

सुप्रिया का चेहरा काफी सीरियस हो गया था - ी ऍम सॉरी सर...

माइक ने हस्ते हुए कहा - रिलैक्स... ी ऍम जस्ट मेस्सिंग विथ यू... सो यू कुड बे ा मूवी स्टार... व्हाई वर्क इन थिस कंपनी?

सुप्रिया का चेहरा लाल हो गया था - No सर... ी ऍम जस्ट ा सिंपल गर्ल...

माइक - यू अरे no वे सिंपल... एंड ी बेट यू क्नोव तहत तू... व्हाई डोंट ी गिव यू माय फ़ोन नंबर एंड वे कैन हैवे ा कॉल और तवो लेटर ों....

सुप्रिया - अबाउट थे आर्डर सर?

माइक - है है... no स्वीटी... नॉट अबाउट थे आर्डर... जस्ट वांटेड तो गेट तो क्नोव यू बेटर फर्स्ट.... मय्बे यू कैन वर्क फॉर में इन थे फ्यूचर... और अंडर में...

सुप्रिया को उसकी बातें समझ में आ रही थी पर वह कोशिश कर रही थी की वह रीच न करे - माइक... ी थिंक....

माइक - और हाउ अबाउट यू टेक सम पिक्टुरेस ऑफ़ यू वेअरिंग थी प्रोडक्ट्स ऑफ़ योर्स एंड सेंड थम तो में... I'd लव तो सी हाउ थे फिट यू...

सुप्रिया के माथे पर त्योरियां छड्ड गयी थी - उम्म्म.. ी हैवे शेयर्ड थे कैटेलॉग फोटोज विथ डनण्य विथ आवर मॉडल्स वेअरिंग थी ड्रेसेस...

माइक मुस्कुराते हुए बोलै - नहहहह... इतस गोत्ता बे यू...

सुप्रिया हिचकाचते हुए बोली - ी डोंट.... ी डोंट दो तहत सर....

माइक - सूरे यू कैन... तेरे इस ा फर्स्ट टाइम फॉर एवरीथिंग... यू हैवे ान अमेजिंग बॉडी, ी वोउल्ड लव तो सी आईटी उप क्लोज....

सुप्रिया - सर... व्हाट अरे यू सयिंग....

माइक - यू क्नोव व्हाट ी ऍम सयिंग... ा गर्ल लिखे यू नीड्स ा प्रॉपर मन... एंड ी सूरे यू गोत ा लोट ऑफ़ गाइस चैसिंग अराउंड यू....

सुप्रिया से अब रुका नहीं गया - ी थिंक व्हाट अरे यू सयिंग इस कम्प्लीटली उनप्रोफेशनल...

माइक का चेहरा एक डैम से काफी सीरियस हो गया - राइट... सो कंसीडर थिस आर्डर नॉट एप्रूव्ड.... बूत ी विल सेंड यू माय नंबर अन्य वे.... आल राइट, टेक केयर स्वीटी...

माइक ने अपनी साइड से वीडियो कांफ्रेंस बंद कर दी, और सुप्रिया मीटिंग रूम में हैरान परेशान बैठी हुई रह गयी. उसकी पिछले दो महीने की म्हणत पर पानी फिर गया था. और वह भी एक ठरकी इंसान की वजह से. लगता है हर देश के मर्द ऐसी hi थे. पता नहीं वह अब विक्रम सर को क्या बोलेगी, और बाकी सब को भी क्या बोलेगी. शायद उसे आकाश के साथ hi ये मीटिंग करनी चाहिए थी, उसके सामने माइक की ये हिम्मत तोह न होती.

मीटिंग रूम पर हलकी सी नॉक हुई और दरवाज़ा थोड़ा सा खुला. सुप्रिया ने उस और पलट कर देखा तोह साहिल सर अपना बैग ले कर खड़े थे.

साहिल - सुप्रिया... तुम अभी भी यहाँ हो....

सुप्रिया - उम्म्म... हाँ सर... वह बस उस वाले क्लाइंट्स से कॉल थी....

साहिल - ाचा... अगर कॉल हो गया है तोह तुम भी घर निकलो... लेट हो रहा है...

सुप्रिया - हाँ सर... वह बस निकल रही हु...

सुप्रिया को लगा की साहिल सर पूछेंगे की क्लाइंट के साथ कॉल कैसी गयी या फिर वह घर कैसे जाएगी, पर साहिल सर ने ऐसा कुछ नहीं किया. वह वापस अपने केबिन के पास जा कर खड़े हो गए. सुप्रिया सोचने लगी की इस टाइम तो ऑटो में जाना भी इतना सेफ नहीं होगा. वह अतुल को मैसेज डालने लगी उसको पिक करने के लिए.

सुप्रिया - अतुल... आप मुझे ऑफिस से पिक कर लोगे क्या...

थोड़ी देर इंतज़ार के बाद भी अतुल का कोई जवाब नहीं आया. साहिल सर अभी भी आराम से खड़े थे, जैसे सुप्रिया का hi इंतज़ार कर रहे हो. सुप्रिया के अतुल को कॉल लगाया पर कई घंटी जाने के बाद भी उसने कॉल नहीं उठाया. सुप्रिया ने परेशान होते हुए साहिल सर की और देखा, पर वह उसकी तरफ देख hi नहीं रहे थे.

सुप्रिया ने उन्हें वहां रुका देख बोलै - उम्म्म.. मैं अपने हस्बैंड को कॉल कर रही हु... वह आ जायेंगे मुझे लेने...

साहिल - ठीक है...

सुप्रिया ने फिर से अतुल को कॉल लगाया पर उसने फिर से नहीं उठाया. अब उसके पास बस एक hi दूसरा ऑप्शन था, और उसने राहुल को फ़ोन लगाया. राहुल ने 3-4 बेल्ल के बाद hi कॉल उठा लिया.

राहुल - हाँ सुप्रिया बोलो...

सुप्रिया ने दबी आवाज़ में कहा - मुझे ऑफिस से पिक कर लोगे क्या प्लीज... अतुल फ़ोन नहीं उठा रहे...

राहुल - ाचा... अतुल तोह ऑफिस से काफी देर पहले निकल गया था.... पर तुम रुको.... मैं आता हूँ... 20-30 मिनट तोह लगेंगे..

सुप्रिया - थैंक यू...

सुप्रिया ने फ़ोन रखा और साहिल सर की तरफ संकोच भरी नज़रो से देखा. उसे ख़राब लग रहा था की वह उसके लिए रुके हुए थे. अभी तोह राहुल को आने में टाइम था तोह उसने अपना बैग नीचे रख दिया.

सुप्रिया - सर... वह उनको आने में थोड़ा टाइम लगेगा.. आप चाहो तोह जा सकते हो...

साहिल - मुझे जल्दी नहीं है... मैं चला जायूँगा...

सुप्रिया कितना काम जानती थी साहिल सर के बारे में, बल्कि कुछ भी नहीं. कोई भी उनके बारे में ज्यादा बात नहीं करता था, और वह बस अपने काम में hi डूबे रहते थे. और बस वह दोनों वहां अकेले खड़े थे, तोह सुप्रिया के पास मौका था उनसे सवाल करने का, पर पता नहीं क्यों उसकी हिम्मत hi नहीं हो रही थी.

सुप्रिया ने चुप्पी को तोड़ते हुए कहा - सर... आपका बताना था... वह शायद उस वाले क्लाइंट की बात नहीं बानी...

साहिल ने काफी आराम से कहा - कोई बात नहीं... और क्लाइंट मिल जायेंगे...

सुप्रिया - सर... पर विक्रम सर को क्या बोलेंगे...

साहिल - उन्हें मैं बता दूंगा...

सुप्रिया - थैंक यू सर... पर विक्रम सर काफी नाराज़ होंगे न…

साहिल - शायद… शायद नहीं…

साहिल ने एक फाइल उठायी और उसमे कुछ देखने लग गया.

सुप्रिया - सर... आपकी फॅमिली में कौन कौन है....

साहिल ने फाइल से बिना नज़र हटाए बोलै - ह्म्म्मम्म... वाइफ है... बचे है...

सुप्रिया - ओह ाचा.. कितने साल के है आपके बचे...

साहिल - हम्म्म.... चलो नीचे वेट करते है...

सुप्रिया ने हाँ में सर हिलाया और वह दोनों ऑफिस से नीचे की और चल पड़े. शायद साहिल सर उसे कुछ ज्यादा नहीं बताने वाले थे, और सुप्रिया ने और कुछ पूछना सही नहीं समझा. ऑफिस के नीचे अभी भी काफी भीड़ थी और सुप्रिया को नीचे आ कर लगा की शायद वह ऑटो से भी घर जा सकती थी. वह दोनों वहीँ बहार बैठ गए, थोड़ा दूर दूर. सुप्रिया अपने फ़ोन पर कुछ कुछ करने लगी, और साहिल सर बस आराम से बैठे सामने की और देखते रहे.

थोड़ी देर बाद राहुल की गाडी सामने आ गयी, और सुप्रिया ने उसे आते देख जल्दी से गाडी की तरफ जाने लगी.

सुप्रिये ने पलट कर साहिल सर को देखा, वह अभी भी बैठे हुए थे - गुड नाईट सर... थैंक यू सो मच...

साहिल ने सुप्रिया की और देखा - गुड नाईट सुप्रिया...

सुप्रिया जल्दी से भागते हुए राहुल की गाडी में बैठी और राहुल वहां से गाडी चलता हुआ ले गया.

राहुल ने सुप्रिया की और एक नज़र देखा, आज उसने एक टाइट सलवार कमीज पहनी हुई थी जिसमे उसके शरीर के कर्व्स और भी बड़े लग रहे थे - वाओ... आज तोह काफी सेक्सी लग रही हु... मेरे लिए इतना तैयार हुई थी क्या..

सुप्रिया - शट उप....

राहुल ने अपना एक हाथ सुप्रिया के जांघ पर रखा और हलके से मसलने लगा. सुप्रिया की सॉफ्ट सी चिकनी पजामी बिलकुल उसके शरीर से चिपकी हुई थी और उसके शरीर जैसी hi महसूस हो रही थी. सुप्रिया ने राहुल का हाथ अपने हाथ से पकड़ लिया.

सुप्रिया ने गुस्से में कहा - तुम सारे मर्द इतने ठरकी क्यों होते हो... बस लड़की देखि नहीं और शुरू हो गए...

राहुल - क्या हुआ... इतना गुस्सा क्यों....

सुप्रिया - पूछो मत...

राहुल - वह जो बुद्धा बैठा था तुम्हारे पास, वह ठरकी था क्या...

सुप्रिया - नहीं!! वह तोह साहिल सर है... वह ऐसे नहीं है... पर वह अमेरिका का काला बाँदा... पता है मुझे क्या क्या बोल रहा था...

राहुल ने मजाक के मूड में सुप्रिया से कहा - क्या बोल रहा था वह...

सुप्रिया ने गहरी सांस ली - कुत्ता... हरामज़ादा.... मैं ब्रा में उसको अपनी फोटो भेजू....

राहुल सुप्रिया के मुँह से गाली सुन कर हसी सी आ गयी - अब इसमें उस बेचारे की क्या गलती है... तुम्हे देख कर हर किसी की नियत....

सुप्रिया ने राहुल की और गुस्से में देखा और अपनी ऊँगली उसे दिखते हुए बोली - तुम उसका साथ दे रहे हो....

राहुल ने एक डैम से अपना हाथ सुप्रिया की कुर्ती की गले पर रखा और अपनी उँगलियों से उसकी कुर्ती को आगे खींचा...

सुप्रिया ज़ोर से चिल्लाई - अह्ह्ह.... क्या कर रहे हो...

राहुल - बस तुम्हारी ब्रा देखने की कोशिश कर रहा हूँ...

सुप्रिया ने राहुल का हाथ झिडकते हुए अपनी कुर्ती से हटाया - रोड पर ध्यान दो.... मेरी तरफ नहीं....

राहुल - क्यों... तुम्हारा मैं नहीं करता... उस दिन के बाद.... दुबारा कुछ करने का....

सुप्रिया इस बात का कोई जवाब hi नहीं दे पायी. मैं तोह उसका इतना ज्यादा था फिर से वह सब करने का, पर वह ऐसे hi अपने आप को परोस कर तोह राहुल को नहीं देना चाहती थी.

सुप्रिया - नहीं... मेरा मैं तोह नहीं है... तुम्हारा मैं है क्या?

राहुल - हद्द से ज्यादा... मैं चाहता हूँ तुम्हारे होंठ फिर से मेरे....

सुप्रिया ने उसकी बात बीच में काटते हुए कहा - बस बस.... वैसे वह... कृति से बात हुई क्या...

कृति का नाम सुनकर राहुल के चेहरा थोड़ा सीरियस सा हो गया - नहीं... तुम्हारी बात हुई क्या उससे? वह तोह मेरे मैसेज का जवाब hi नहीं दे रही... तुम बात करोगी क्या उससे?

सुप्रिया - मैं कैसे बात करू उससे तुम्हारे बारे में... उसे क्या लगेगा की हमारे बीच क्या है....

राहुल बस सामने hi देख रहा था और अपने खयालो में खोया हुआ था - हम्म्म्म....

राहुल को ऐसे कृति के खयालो में खोया हुआ देख सुप्रिया को ाचा नहीं लग रहा था. वह नहीं चाहती थी की राहुल कृति के बारे में सोचे भी. सुप्रिया अपना चेहरा राहुल के चेहरे के पास लाते हुए उसके गाल पर हल्का सा किश किया.

सुप्रिया - वैसे तुम भी काफी अचे लग रहे हो आज...

राहुल की मुस्कान वापस आ गयी - ाचा... कितना ाचा....

सुप्रिया ने अपनी ऊँगली राहुल के चेहरे पर फेरी - बहुत hi अचे....

राहुल - तोह गाडी अपने घर की तरफ ले चालू?

सुप्रिया - नहीं... आज नहीं... काफी रात हो रही है... और अतुल भी पता नहीं फ़ोन क्यों नहीं उठा रहे है... तुम्हे पता है क्या की वह कहाँ गए होंगे...

राहुल - नहीं... पर आज सक्सेना सर वापस आ गए थे... अतुल तोह दिन में hi ऑफिस से निकल गया था....

सुप्रिया सोच में पद गयी की अतुल ऑफिस से कहाँ निकल गया था और उसने उसका फ़ोन भी नहीं उठाया और मैसेज भी नहीं किया. सब ठीक तोह था न.

घर पास आता देखा, सुप्रिया ने राहुल को कहा - बस बस यहीं थोड़ा पहले रोक दो...

राहुल - इतनी रात हो रही है... यहाँ से पैदल जायेगी? बिल्डिंग के बहार hi ड्राप कर देता हूँ न...

सुप्रिया - वह... इक़बाल देख लेगा तोह...

राहुल - इतना क्यों डर्टी हो एक वॉचमन से....

राहुल ने गाडी सुप्रिया की बिल्डिंग के ठीक बहार रोकी. सुप्रिया अपना सामान लेकर उतरने hi वाली थी, की राहुल ने अपना हाथ सुप्रिया के गाल पर फेरा.

राहुल - एक किश तोह देती जायो...

सुप्रिया ने बहार की और देखा और उसे इक़बाल गेट पर दिखा, वह गाडी की और hi देख रहा था. इक़बाल को देख कर उसकी हिम्मत नहीं हुई राहुल को किश करने की. राहुल सुप्रिया को किश करने के लिए उसकी और हुआ.

पर सुप्रिया ने उसे रोकते हुए कहा - आज नहीं... मुझे जल्दी से घर पहुंचना है… पता नहीं अतुल कहाँ है…

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सुप्रिया अपना मुँह दूसरी और करके पीछे हो कर बैठ गयी. राहुल के मैं में अतुल की जरा सी भी फ़िक्र नहीं थी, जहाँ भी हो वह उसे क्या फरक पड़ता था, उसकी बीवी तोह अब सिर्फ उसकी hi थी.

राहुल भी वापस अपनी सीट पर हुआ - ठीक है, मुझे बता देना अगर कोई भी प्रॉब्लम हो तोह, मैं आ जायूँगा. पर ये किश उधार रही...

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सुप्रिया राहुल की और देख कर मुस्कुरायी और फिर जल्दी से गाडी से उतर कर अपनी बिल्डिंग के गेट की तरफ बड़ी. इक़बाल भी उसके ठीक सामने आ गया था. पीछे राहुल गाडी चलता हुआ वहां से निकल गया था.

सुप्रिया ने इक़बाल की तरफ देख कर पुछा - इक़बाल... अतुल घर आ गए है क्या....

इक़बाल - मुझे नहीं पता मैडमजी... मैं बस थोड़ी देर पहले hi आया हु ड्यूटी पर...

सुप्रिया की आवाज़ में थोड़ी सी घबराहट थी - ाचा.... मैं देखती हु ऊपर जा कर..

इक़बाल - सब ठीक तोह है न मैडमजी?

सुप्रिया - हाँ... सब ठीक hi होना चाहिए...

सुप्रिया जल्दी से लिफ्ट से ऊपर गयी और अपने घर का दरवाज़ा खोला. अंदर घुसते hi हुए उसे एक अजीब सी स्मेल सी आयी और अतुल के जूते ज़मीन पर दिखे, वह बस ऐसे hi ज़मीन पर पड़े हुए थे. उसने सामने लिविंग रूम में देखा तोह अतुल सोफे पर लेता पड़ा था और टेबल पर एक शराब की बोतल राखी हुई थी जो आधी खाली थी.

सुप्रिया भागी हुई अतुल के पास आयी और उसने पाया की वह शराब ने नशे में सोया हुआ था. तभी शायद उसने उसका फ़ोन नहीं उठाया था और न hi उसके मैसेज का जवाब दिया था. सुप्रिया को समझ hi नहीं आ रहा थी की आखिर हुआ क्या था. कहीं अतुल को उसके और राहुल के बारे में तोह नहीं पता चल गया था?
 
अपडेट 45

पूरी रात सुप्रिया सोचती रही की आखिर अतुल की हुआ क्या था. उसने क्यों इतनी शराब पी थी? कहीं उसे राहुल और उसके बारे में तोह पता चल गया था? अगर पता चल गया था तोह वह क्या करेगा? और उससे भी ज्यादा सुप्रिया क्या करेगी? घर वाले और पूरी दुनिया क्या कहेगी? अगर अतुल उसे छोड़ देगा तोह क्या वह राहुल के साथ अपना जीवन बिताना चाहेगी? पर शायद ऐसा कुछ भी न हो, क्या पता उसने बस ऐसे hi शराब पी हो बस. इन्ही सब सवालों में उसकी पूरी रात बीत गयी.

वह जब सुबह उठी तोह उसने कमरे से बहार आ कर देखा और अतुल अभी भी सोफे पर hi लेता हुआ था. सुप्रिया को अतुल को इस हालत में देख कर गुस्सा आ रहा था. उसने एक बार पहले hi अतुल को बोल दिया था की वह शराब नहीं पिए पर अतुल ने कल रात तोह कुछ ज्यादा hi पी ली थी शायद. सुप्रिया ने अतुल की पीठ पर हाथ रख कर उसे जगाने के लिए हिलाया.

सुप्रिया - अतुल... अतुल... उठो.... होश भी है आपको कितना टाइम हो गया...

अतुल की आँखें हलकी हलकी खुली - ुह्ह्ह्ह... क्या.....

सुप्रिया - आपको पता है मैं कितना परेशान थी कल रात से...

अतुल - थोड़ा धीरे बोलो न... इतनी तेज़ क्यों बोल रही हो...

अतुल को उठते न देख, सुप्रिया का गुस्सा बढ़ता जा रहा था - मुझे कल रात ऑफिस में काफी लेट हो गया था... और आप फ़ोन उठा hi नहीं रहे थे, तोह मुझे राहुल को बुलाना पड़ा...

सुप्रिया के मुँह से एकदम से बिना सोचे समझे राहुल का नाम निकल गया. वह ये बोलते hi एकदम से छुप हो गयी, पता नहीं अतुल ने इस हालत में ये सुना था की नहीं.

पर अतुल ने शायद ये सुन लिया था - ओह ाचा.... राहुल ने ड्राप कर दिया तुम्हे...

सुप्रिया ने धीमी सी आवाज़ में कहा - हाँ...

अतुल - सॉरी यार.... वह बॉस आये थे इतने दिनों बाद ऑफिस, और वह ऑफिस के बाद मुझे ड्रिंक्स पर ले गए, और कुछ ज्यादा hi पी ली.

सुप्रिया ने टेबल पर राखी बोतल की तरफ इशारा करते हुए कहा - और फिर ये दूसरी बोतल कहाँ से आयी?

अतुल - ारी ये... वह राहुल लाया था न एक बार... याद है...

सुप्रिया - अतुल, मैंने आपको पहले भी कहा था न की मुझे ाचा नहीं लगता आपका ये शराब पीना, फिर आपने क्यों पी?

अतुल - सॉरी बाबा... बस एक hi बार तोह पी है... अब बॉस को कैसे मन करता...

सुप्रिया - ये क्या बात हुई, बॉस की गलत बात भी मानोगे?

सुप्रिया वहां से गुस्से में उठ कर नहाने चली गयी. अतुल भी धीरे धीरे खड़ा हो गया और उसने बोतल को वहां से हटा दिया. सुप्रिया ने थोड़ी देर बाद आ कर देखा तोह अतुल अभी भी आराम से सोफे पर बैठा हुआ था.

सुप्रिया गुस्से में बोली - अतुल जायो नाहा के आयो... आपको पता है कितनी बदबू आ रही है आप में से...

अतुल - जा रहा हूँ, इतनी क्या जल्दी है...

इतने में घर की घंटी बजी और करुणा काम करने आ गयी थी. सुप्रिया ने न चाहते हुए भी दरवाज़ा खोल कर उसे अंदर किया. करुणा भी अंदर घुसते hi सूंघ कर समझ गयी थी की यहाँ सब क्या हुआ है. करुणा को देख अतुल भी जल्दी से लिविंग रूम से निकल कर बैडरूम में घुस गया और नहाने की तैयारी करने लगा. करुणा भी काम करने लगी और बीच बीच में पलट कर सुप्रिया के झुंझुलाये हुए चेहरे की और देख रही थी.

और फिर मौका लगते hi उसने पूछ लिया - दीदी... क्या हुआ...?

सुप्रिया ने उसे बिना देखे बोलै - क्या होता? कुछ नहीं हुआ?

करुणा - नहीं वह... काफी स्मेल सी आ रही न आज...

सुप्रिया ने करुणा को घूर कर देखा - तुम्हारी नाक काफी तेज़ है आज... वैसे तुम्हे कोई स्मेल कभी नहीं आती...

करुणा हस्ते हुए - दीदी ऐसा कुछ नहीं है.... बस वह लगा कुछ...

सुप्रिया - हाँ... तुम्हारे भैया ने शराब पी थी कल रात को... ठीक है अब....

करुणा - दीदी मेरा वह मतलब नहीं था, बस लगा आप परेशान हो...

सुप्रिया - नहीं, मैं परेशान नहीं... मुझ से ज्यादा तोह तुम परेशान लग रही हो...

करुणा - माफ़ कर दो न दीदी... इतना गुस्सा मत करो न...

सुप्रिया - ाचा ठीक है, तुम बस अपना काम में दिमाग लगाया...

करुणा फिर से काम में लग गयी और उसके जाने के बाद सुप्रिया भी गुस्से में सो गयी. पूरा दिन उसका ऐसे hi गुस्से में निकल गया. पता नहीं उसे अतुल के शराब पीने पर इतना गुस्सा क्यों आ रहा था, या फिर गुस्सा करुणा पर था, या फिर अपने आप पर? पूरे दिन सुप्रिया गुस्से में अपने कमरे में बीएड पर बैठी रही, जो कुछ हुआ था उसके बारे में सोचते हुए. अतुल भी डर के मारे उसके पास नहीं आया.

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अगली सुबह, वह जल्दी उठ कर नीचे अपनी ड्राइविंग क्लास के लिए पहुंच गयी. वह ड्राइविंग सीट पर बैठी और कॉन्फिडेंस से गाडी चलने लगी. उसे लगभग 2 महीने हो गए थे इक़बाल के साथ सैटरडे संडे कार चलते हुए और उसे काफी कॉन्फिडेंस आ चूका था, और वह काफी आसानी से कार चला रही थी. इक़बाल को कुछ ज्यादा बोलना भी नहीं पद रहा था. कार चलते चलते सुप्रिया भीड़ वाली जगह पर भी आ गयी थी और वहां भी वह अचे से कार चला पा रही थी.

इक़बाल ने सुप्रिया की और देखा, बिना किसी मेक उप के सुबह सुबह उसके चेहरे पर धुप पड़ती हुई वह कितनी प्यारी लग रही थी. पर आज कितनी चुप चुप सी थी वह, वैसे तोह उन दोनों के बीच कितनी hi बातें हो जाती थी.

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इक़बाल ने चुप्पी को तोड़ते हुए बोलै - मैडमजी, अब आपको अचे से कार चलनी आ गयी है, अब तोह आप मेरे बिना भी चला लोगे...

सुप्रिया खुश हो कर - इक़बाल... सच में आपने मेरे साथ कितना सब्र दिखाया मुझे कार सीखने के लिए...

इक़बाल आँखें नीचे करते हुए बोलै - मैडमजी मैंने तोह कुछ भी नहीं किया, सब आपने खुद hi सीखा है...

सुप्रिया - आप भी जानते हो ये सच नहीं है....

इक़बाल - अब बस आप भी अपनी गाडी निकल कर कहीं भी जा सकती हो...

सुप्रिया - हाँ, पर अतुल को तोह अभी तक नहीं पता की मैं कार चलना सीख गयी हु

इक़बाल - आप उनको hi बिठा के कहीं ले जाना...

सुप्रिया ने गन्दा से मुँह बनाया - नहीं, उनको कहीं नहीं ले जयुंगी...

इक़बाल - क्या मसला है... वह फिर से शराब पीने लगे?

ये सुन कर सुप्रिया की आँखें शर्म से झुक सी गयी - नहीं, बस एक बार hi था...

इक़बाल - इंसान को शराब से दूर hi रहना चाहिए...

सुप्रिया - आपने मुझे पहले भी कही थी ये बात, और मैंने उन्हें बोलै भी था, पर पता नहीं क्या हुआ था उन्हें इस बार...

इक़बाल - कोई बात नहीं, आप फ़िक्र मत करो... सब ठीक हो जायेगा...

सुप्रिया - शुक्रिया इक़बाल... वैसे एक बात तोह रह hi गयी...

इक़बाल - कोनसी बात?

सुप्रिया - आपने मुझसे कुछ भी फीस नहीं ली थी मुझे गाडी सीखने के लिए.... मैं आपको बहार खाने के लिए ले जाना चाहती हु...

इक़बाल ने चौंकते हुए कहा - मुझे??!! मैडमजी पर...

सुप्रिया - पर वॉर कुछ नहीं, इतना तोह बनता hi है मेरा हक़...

इक़बाल - आपका तोह पूरा हक़ है मुझ पर... पर मैं बहार ज्यादा कुछ खाता नहीं....

सुप्रिया - ाचा.... तोह फिर आप hi बताइये मैं आपके लिए क्या कर सकती हु....

इक़बाल - मैडमजी.... कुछ करने की जरूरत नहीं है...

सुप्रिया - नहीं नहीं... आपको बताना hi होगा...

सुप्रिया के इतना ज़िद करने पर इक़बाल सोच में पड़ा गया - मैडमजी... मैं बता तोह दूंगा... पर आपको शायद वह करना न चाहो..

सुप्रिया भी सोचने लग गयी की ऐसा क्या कहना चाहता है इक़बाल जो वह वह करना न चाहेगी. कहीं वह बाकी मर्दो की तरह उससे कुछ गलत....

सुप्रिया ने फिर भी पूछ hi डाला - आप बताइये तोह...

उसे घबराहट हो रही थी की पता नहीं इक़बाल क्या hi बोलेगा, तभी इक़बाल ने कहा - आप मेरे साथ जमा मस्जिद चलेंगी....

सुप्रिया ये सुनकर हैरान hi हो गयी, उसने कभी सोचा भी नहीं था की इक़बाल कुछ ऐसा मांग बैठेगा. सुप्रिया कोई ज्यादा '. तोह थी नहीं, और उसके परिवार ने हमेशा उसे सभी धर्मो का आदर करना hi सिखाया था, तोह उसे ये इतनी बड़ी बात नहीं लगी.

सुप्रिया - जमा मस्जिद? पर वहां क्यों? आप तोह कुछ भी और मांग सकते थे न...

इक़बाल - मैं चाहता हो की आपके साथ जा कर वहां आपकी सलामती की लिए दुआ करू... मुझे बहुत सुकून मिलता है वहां....

सुप्रिया - पर मैं तोह आज तक कभी किसी भी मस्जिद में नहीं गयी.... मुझे पता भी नहीं की वहां क्या करते है...

इक़बाल - मस्जिद तोह बस खुदा का hi घर है... आप फ़िक्र मत करो इतना.... आप चलोगे न? आप मन करोगे तोह मैं समझ सकता हूँ... मैं भी कभी मंदिर नहीं जाता हूँ...

सुप्रिया - नहीं नहीं, ऐसा नहीं है, मैं चलूंगी... पर क्या हम अगले हफ्ते जा सकते है?

सुप्रिया को याद था की अतुल अपने घर जा रहा है, शायद वही सही समय होगा इक़बाल के साथ मस्जिद जाने का. उसे काफी अजीब लग रहा था वह इस चीज़ के हाँ कर रही थी, पर इक़बाल ने उसके लिए कितना कुछ तोह किया था और वह उसे निराश नहीं करना चाहती थी.

सुप्रिया की बात सुन कर इक़बाल भी खुश हो गया - शुक्रिया मैडमजी... आप जब भी चलना चाहो मुझे बता देना...

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ड्राइविंग का आखरी पाठ ख़तम करके सुप्रिया चहकती हुई सी घर वापस आयी. वह बस अब अतुल को अपनी ड्राइविंग स्किल्स दिखाना चाहती थी.

अतुल भी कल की नाराज़गी के बाद सुप्रिया को मानना चाहता था. सुप्रिया घर वापस आते hi किचन में चाय बनाने लग गयी. अतुल किचन के दरवाज़े पर आया और उसने सुप्रिया को पीछे से देखा. उसने एक वाइट टीशर्ट और एक ब्लैक कलर की लेग्गिंग पहनी हुई थी. इस टाइट लेग्गिंग में सुप्रिया की गांड बहुत hi मस्त लग रही थी और अतुल को मूड बनने लगा. अतुल ने पीछे से आकर पकड़ सुप्रिया को पकड़ लिया.

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अतुल ने सुप्रिया के गाल पर किश करते हुए कहा - ी ऍम रियली सॉरी कल के लिए.... आगे कभी नहीं होगा...

सुप्रिया अतुल की और नहीं मुड़ी और अपने काम में लगी रही - आपने पिछली बार भी एहि बोलै था...

अतुल - अब की बार सच में नहीं होगा... waada...maan भी जायो न प्लीज....

सुप्रिया ने भी अपने गुस्से को ख़तम करते हुए कहा - ाचा ठीक है... वैसे मेरे पास आपके लिए एक सरप्राइज है.

अतुल ने एक्ससिटेड हो कर सुप्रिया को ज़ोर से भीचा - ाचा... क्या सुर्पीसे है? कहीं मैं पापा तोह नहीं...

सुप्रिया ने मुँह बनाया - उफ्फ्फ.. नहीं... वह सरप्राइज नहीं है....

अतुल सुप्रिया को पीछे से खींचने लगा - तोह फिर उस सुर्पीसे को सच करते है न अभी बैडरूम में जाकर...

सुप्रिया ने अपने आप को अतुल की जकड से आज़ाद करने की कोशिश करि - अभी नहीं प्लीज...

पर अतुल सुप्रिया को छोड़ने के मूड में नहीं था और उसने अपना मुँह उसकी गर्दन पर चिपका लिया - बहुत दिन हो गए यार...

सुप्रिया - सुनो तोह... आज मंदिर चले क्या...

मंदिर का नाम सुनकर अतुल की पकड़ थोड़ी हलकी हुई, जैसे वह भी भगवन से डरता हो - हम्म्म... ठीक है...

सुप्रिया - ठीक है तोह आप जल्दी से तैयार हो जायो....

अतुल - बाद में नहीं जा सकते क्या? पहले प्यार फिर मंदिर?

सुप्रिया - नहीं... पहले मंदिर... फिर कुछ और...

अतुल सुप्रिया के बात मानता हुआ जल्दी से नाहा के तैयार हो गया. थोड़ी देर बाद सुप्रिया ने भी नाहा के एक नयी साड़ी पेहेन कर तैयार हो गयी. उसने साड़ी को कास के बाँध लिया ताकि उसे ड्राइविंग में कोई प्रॉब्लम न हो, और इस कासी हुई साड़ी में वह बहुत hi मस्त लग रही थी. साड़ी हमेशा से उसे एक अजीब सी hi ड्रेस लगती थी, कहने को तोह बहुत hi ट्रेडिशनल ड्रेस थी पर इसमें लड़कियों का पूरा पेट साफ़ दीखता था. और सुप्रिया के गोर पेट पर तोह हर किसी की नज़र जाती थी.

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वह दोनों नीचे उनकी गाडी की और गए और अतुल ड्राइवर सीट पर बैठने hi वाला था की सुप्रिया ने उसके हाथ से चाबी ली और वहां बैठ गयी.

अतुल - सुप्रिया दूसरी साइड बैठो न...

सुप्रिया - नहीं आप बैठो दूसरी साइड... मैं आपको लेकर चल रही हूँ आज....

अतुल - ये क्या मजाक है...

सुप्रिया ने चाबी से गाडी स्टार्ट करते हुए कहा - मजाक नहीं है... आप बैठो तोह... नहीं तोह मुझे अकेले hi जाना पड़ेगा...

अतुल पुज़्ज़लेड सा होता हुआ गाडी में पैसेंजर साइड पर बैठा. सुप्रिया ने हैंडब्रेके नीचे करि और फिर गाडी को गियर में डालते हुए चलनी शुरू कर दी. अतुल हैरान हो कर सुप्रिया को ये सब करते देख रहा था.

अतुल - तुमने कार चलनी कब सीखी...

सुप्रिया मुस्कुराते हुए बोली - अभी तोह बस देखते hi जायो...

सुप्रिया कार चलते हुए बिल्डिंग के दरवाज़े तक ले गयी जहाँ इक़बाल अब ड्यूटी पर खड़ा था. सुप्रिया को लाल गाडी में ड्राइवर्स सीट पर बैठे देख इक़बाल को बहुत hi ख़ुशी हो रही थी. जैसे वह खुद hi बैठ कर कार चला रहा हो.

सुप्रिया ने इक़बाल को मुस्कुरा के देखा - इक़बाल... गेट खोलना प्लीज...

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इक़बाल - जी मैडमजी...

इक़बाल जल्दी से गेट खोलने लगा और मुद कर सुप्रिया की और देखने लगा - मैडमजी बहुत अचे लग रहे हो आप ड्राइवर सीट पर...

सुप्रिया ने उसे हाथ हिला कर bye बोलै और सड़क पर गाडी निकाल ली.

अतुल को समझ hi नहीं आ रहा था की ये सब हो क्या रहा था - सुप्रिया... तुमने इतनी अछि ड्राइविंग कब सीखी... पहले सी hi आती थी क्या...

सुप्रिया अपना राज़ नहीं खोलना चाहती थी - हाँ... कुछ ऐसा hi समझ लो... आप आराम से बैठो न...

सुप्रिया गाडी चलती हुई मंदिर ले गयी और दोनों ने वहां भगवन के दर्शन किये. मंदिर में भी उसे ऐसा लग रहा था जैसे लोग उसे मुद मुद कर देख रहे हो. पर उसका कॉन्फिडेंस आज उसे इस सब से डर नहीं एक अलग सा एहसास दे रहा था. बाकी दिन ऐसे hi बहार शॉपिंग और डिनर में चला गया और रात को अतुल कार चलता हुआ वापस घर ले आया.

आज अतुल भी सुप्रिया के कॉन्फिडेंस से काफी चकित सा रह गया था. उसके सामने एक नयी अलग सी सुप्रिया थी, और उसे कहीं न कहीं ऐसा लग रहा था की जैसे वह उसके लायक hi न हो.

घर पहुंच कर अतुल बोलै - अब मुझे लग रहा है की मैं आराम से ग्वालियर जा पायूँगा तुम्हे यहाँ छोड़ कर...

सुप्रिया - हाँ बिलकुल... और वैसे 2 दिन क्यों... जा रहे हो तोह 4-5 दिनों के लिए तोह जायो काम से काम...

अतुल - ारी पर ऑफिस भी तोह है...

सुप्रिया - आपके बॉस ने भी तोह छुट्टी ली थी इतने सारे दिनों की... आप नहीं ले सकते क्या? आपकी फॅमिली आपको कितना मिस करती है.

अतुल - तुम्हे भी तोह मिस करती है...

सुप्रिया - मैं तोह कितने दिन रही हु वहां? खैर, आपका मैं भी है न जाने का...

अतुल - हाँ मैं तोह मेरा भी है ज्यादा दिनों के लिए जाने का, पर तुम्हे यहाँ कैसे छोड़ जायु इतने दिनों के लिए?

सुप्रिया - ारी... अभी तोह आपने कहा की मैं कितनी इंडिपेंडेंट और कॉंफिडेंट हो गयी हु...

अतुल ने सुप्रिया के पास आते हुए कहा - हो तोह गयी हो... पर पीछे से कुछ गड़बड़...

सुप्रिया - कुछ गड़बड़ नहीं होगी.... मैं सब संभल लुंगी...

अतुल ने सुप्रिया को गले लगते हुए कहा - ाचा... पहले यहाँ आकर मुझे तोह सम्भालो.... बहुत दिन हो गए है...

सुप्रिया ने अतुल को अपने से दूर किया - नहीं... अभी आपकी सजा ख़तम नहीं हुई जो आपने फ्राइडे को किया था... तोह अभी बस चुप चाप सो जायो... जब आप वापस आओगे तब सोचेंगे इस सब के बारे में...

जब से पिछले हफ्ते सुप्रिया ने राहुल के साथ सेक्स किया था, उसने अतुल को एक मौका भी नहीं दिया था अपने आप को छूने का. अतुल अपना मैं मार कर चुप चाप सो गया. और थोड़ी देर बाद सुप्रिया भी.

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अगले दिन सुप्रिया काफी अचे मूड में ऑफिस पहुंची. उसने अपना कंप्यूटर खोला hi था की पेओन ने आकर उसे बोलै की विक्रम सर ने उसे मीटिंग रूम में बुलाया है. सुप्रिया को थोड़ी हैरानी हुई की विक्रम सर सुबह सुबह ऑफिस आये हुए है. पर वह मुस्कुराती हुई मीटिंग रूम की तरफ गयी और उसने हल्का सा दरवाज़ा खोला.

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सुप्रिया ने मुस्कान के साथ कहा - सर.. मई ी के इन...

विक्रम भी सुप्रिया को देख कर हलके से मुस्कुराया - सुप्रिया... आयो आयो....

सुप्रिया अंदर आ कर विक्रम के सामने बैठ गयी - सर... आप यहाँ मंडे को सुबह सुबह?

विक्रम हस्ते हुए - है है, क्यों यहाँ मंडे को आना मन है क्या?

सुप्रिया की चेहरे की स्माइल और बड़ी हो गयी - नहीं सर... ऐसी बात नहीं है...

विक्रम - लगता है तुम काफी अचे मूड में हो आज... आल स्माइल्स... लुक्स गुड ों यू...

सुप्रिया - थैंक यू सर...

विक्रम - उम्म्म... होपफ़ुल्ली मेरी बातें तुम्हारे चेहरे की मुस्कान न चीन...

सुप्रिया टेंशन में आते हुए - उम्म्म... मैंने कुछ गलत किया क्या सर?

विक्रम - नहीं... आल गुड... वह मुझे बस लास्ट वीक की मीटिंग के बारे में पता चला... सो वांटेड तो टॉक तो यू.

सुप्रिया तोह उस मीटिंग को अपने दिमाग से बिलकुल निकाल चुकी थी. माइक ने जिस तरह की घटिया बातें उसके साथ की थी, वह उसको याद भी नहीं करना चाहती थी. पर अब विक्रम सर को तोह एक्सप्लनेशन देनी hi पड़ेगी शायद.

सुप्रिया का चेहरा थोड़ा सीरियस होने लगा - सर.. हाँ वह मैंने साहिल सर को बताया था...

विक्रम - सुप्रिया.. डोंट बे नर्वस... जस्ट तेल्ल में की की उस मीटिंग में क्या हुआ था?

सुप्रिया थोड़ा हिचकिचाई, वह अब कैसे विक्रम को उस मीटिंग के बारे में बताती. और पता नहीं विक्रम कैसे रियेक्ट करेगा ये सुन कर. पिछली बार उसने प्रताप का क्या हाल किया था. काम बताना hi शायद सही रहेगा.

सुप्रिया - सर वह एक्चुअली... हमे आर्डर नहीं मिला... बस एहि बताया उन्होंने मीटिंग में...

विक्रम ने सुप्रिया की बॉडी लैंग्वेज पड़ने की कोशिश करि. वह पहले से थोड़ा आराम से झूठ बोल पा रही थी पर अभी भी उसका झूठ पकड़ा जा रहा था. शायद कुछ ऐसा था जो वह बताना नहीं चाहती थी, और विक्रम उसे फाॅर्स नहीं करना चाहता था. पर सुप्रिया की चुप्पी उसे बहुत कुछ बता रही थी, और विक्रम ने बहुत दुनिया देखि थी.

विक्रम - Ok, गोत आईटी. ी थिंक मुझे जो पता करना था, वह पता लग गया है...

सुप्रिया ने चौंटे हुए कहा - क्या सर?

विक्रम - तुम सब मुझ पर छोड़ दो... मैं देख लूंगा क्या करना है...

सुप्रिया - सर... आप कुछ ऐसा वैसा.... प्लीज... कुछ भी नहीं हुआ था...

विक्रम हस्ते हुए बोलै - तुम क्यों टेंशन ले रही हो, इतस नॉट योर फाल्ट.

सुप्रिया धीमे से बोली - थैंक यू सर..

विक्रम - सो, गेट योर चीन उप, एंड कीप समिलिंग. कैन यू आस्क साहिल तो के टॉक तो में?

सुप्रिया चेयर से खड़े होते हुए बोली - सूरे सर...

सुप्रिया थोड़ी सी टेंशन लिए मीटिंग रूम के बहार आ गयी. पता नहीं विक्रम सर क्या hi करने वाले थे. पर जो भी शायद माइक की अब खैर नहीं थी.

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पूरा हफ्ता ऐसे hi काम में निकल गया. अतुल की भी ग्वालियर जाने की टिकट कन्फर्म हो गयी थी और अब वह पूरे हफ्ते के लिए जा रहा था. शनिवार की सुबह को निकल कर वह अगले शनिवार की रात को वापस आने वाला था. सुप्रिया को थोड़ी टेंशन तोह हो रही थी, पर उसे पता था वह सब आराम से मैनेज कर लेगी. और वैसे भी राहुल तोह था hi उसकी मदद करने के लिए अगर कुछ भी हो गया तोह.

शनिवार की सुबह अतुल घर से रेलवे स्टेशन के लिए निकल गया और सुप्रिया अब घर में पूरी तरह आज़ाद थी. पहली बार अपनी लाइफ में वह इतनी आज़ाद फील कर रही थी, न तोह घर वाले थे न पति था घर पर, बस वह अकेली. उसके दिमाग में बहुत कुछ चल रहा था, वह कहते है न खली दिमाग शैतान का घर.

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अपडेट 46

(शार्ट क्विक 2ंद अपडेट टुडे विथ कॉन्टिनुइटी फ्रॉम थे लास्ट अपडेट अस सम पीपल मई फंड थे लास्ट अपडेट ा बिट बोरिंग, बूत आईटी वास् नेसेसरी तो प्रोग्रेस थे स्टोरी. विल पोस्ट रेस्ट ऑफ़ आईटी लेटर थिस वीक)

अतुल को घर से निकले अभी 2-3 घंटे hi हुए थे, और अभी से सुप्रिया को अकेले घर में अजीब सा लग रहा था. करुणा भी काम करके जा चुकी थी और जैसे कुछ और करने के लिए था hi नहीं. सुप्रिया ने अतुल से थोड़ी सी देर फ़ोन पर बात करि थी, और वह ट्रैन में बैठ चूका था. कभी कभी उसे अपना hi मैं समझ नहीं आता, कभी तोह अतुल की इतनी फ़िक्र होती, और दूसरी तरफ उसने अतुल को अपने साथ कुछ करने भी नहीं दिया था.

दो हफ्ते पहले राहुल के साथ किया प्यार उसके शरीर के अंदर कुछ भड़का सा चूका था. वह चाहती थी की वह फिर से उसी तरह का प्यार राहुल से पाए, पर वह इस बार पहल नहीं करना चाहती थी. वह भी तोह जानता था की अतुल घर पर नहीं है, पर अभी तक तोह उसका कोई भी कॉल या मैसेज नहीं आया था. पर उसके अंदर की आग उसे बहुत hi ज्यादा गरम कर रही थी, और उसे ये गर्मी अब उससे सेहेन नहीं हो रही थी.

सुप्रिया ने कमरे में आ कर अपनी साड़ी उतारी और कुछ हलके कपड़ो में बीएड पर लेट गयी. अतुल के घर जाने की वजह से वह आज कुछ जल्दी भी उठ गयी थी. उसने आँख बंद करके सोने की कोशिश करि, पर नींद उसकी आँखों से कोसो दूर थी. अब बस और बर्दाश्त नहीं हो रहा था और उसने एक एक करके अपने सारे कपड़े उतार फेके, पहले टीशर्ट, फिर शॉर्ट्स, फिर ब्रा और आखिर में अपनी पंतय. वह पूरी नंगी हो कर चद्दर में घुस गयी.

शायद आज से पहले उसे ऐसा मौका मिला भी नहीं था. शादी से पहले घर में इतने सारे लोग होते थे की वह कभी अकेली hi नहीं होती थी. और शुरू में जब वह यहाँ लखनऊ आयी थी और काम नहीं करती थी तोह उसे अपने शरीर में ऐसी भयंकर गर्मी तोह कभी महसूस नहीं हुई. उसका पूरा शरीर जैसे जल रहा था, तड़प रहा था बुरी तरह. शादी से पहले उसने 2-3 बार कभी मस्टरबैशन किया था, पर आज तोह उसकी हालात पागलो जैसी हो रही थी.

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सुप्रिया ने अपने फेयर फैला कर, चद्दर के ऊपर से अपनी छूट को रगड़ना शुरू किया. वह अपनी उँगलियों से अपनी छूट को सेहला रही थी, और उसके मुँह से अह्ह्ह उम्म्म्म की आवाज़ें निकल रही थी. अपनी छूट को ऐसे प्यार से सहलाने से उसकी गर्मी और बढ़ती जा रही थी, और उसने अपने होंठ ज़ोर के भींच लिए.

उसका हाथ अब और तेज़ी से चलना शुरू हो गया था और उसकी सांसें और आवाज़ें भी तेज़ होती जा रही थी. पता नहीं क्या hi हो रहा था उसे की इस सब से भी कोई शान्ति hi नहीं मिल रही थी.

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सुप्रिया ने चादर को नीचे धकेला और अपनी एक हाथ की उंगलियां अपनी छूट के बहार रगड़नी शुरू करि और दूसरा हाथ अपने मम्मो पर रख लिया. उसने आनंद में अपनी आँखें बंद कर ली.

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पर ये भी अब उसे संतुष्ट नहीं कर रहा था, उसने अपने हाथ से अपने बूब्स को ज़ोर से भीचा और अपने पूरे हाथ से ज़ोर ज़ोर के अपने छूट को घिसने लगी.

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सुप्रिया फिर बीएड पर उल्टा लेट गयी और अपनी छूट पर बीएड तेज़ी से रगड़ने लगी. वह चाहती इस समय कोई उसकी अंदर की आग को बुझा दे, जो उसे बुरी तरह पागल कर रही थी. उसके छूट के होंठ पूरी तरह खुल चुके थे और इंतज़ार कर रहे थे की कब उसमे कुछ अंदर आएगा.

सुप्रिया बीएड पर उलटी हो कर लेट गयी और अपनी छूट को बीएड से रगड़ने लगी, और फिर एक तकिया अपने नीचे खींचती हुई उस पर बैठ गयी और अपने शरीर को सेक्स की पोजीशन में तकिये पर चलने लगी. ये तकिया hi आज उसके लिए राहुल का लुंड था. और उसकी गरम छूट को इससे अब कुछ रहत मिलनी शुरू हुई थी.

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सुप्रिया की सांसें बहुत तेज़ हो चुकी थी - Ahhh...ahhhh.... मुम्ममय... aahhh...mmmmmm....

काफी देर के इस खेल में वह बस अपनी मंज़िल तक पहुंचने hi वाली थी की एकदम से उसके फ़ोन की घंटी बजने लगी. फ़ोन उसकी पहुंच से थोड़ी दूर था तोह वह देख नहीं पा रही थी की कौन कॉल कर रहा है. वह फ़ोन की घंटी को इग्नोर करते हुए तकिये पर अपना पूरा डैम निकालती रही, पर फ़ोन फिर भी बजे जा रहा था. पता नहीं कौन उसे इस समय डिस्टर्ब कर रहा था. कहीं राहुल तोह नहीं?

सुप्रिया ने झुंझुला के अपने आप को तकिये से अलग किया और फ़ोन को बिना देखा उठा लिया.

सुप्रिया की हांफती हुई आवाज़ बहार आयी - हेल्ल्लूओ...

दूसरी और इक़बाल की आवाज़ थी - मैडमजी... आप ठीक तोह हो...

सुप्रिया इक़बाल की आवाज़ सुन कर चौंक सी गयी, और उसे पता नहीं क्यों शर्म सी भी आने लगी, जैसे इक़बाल उसे नंगा देख पा रहा हो इस समय. उसने जल्दी से अपने आप को चद्दर से धक् लिया.

सुप्रिया - हॉँण्णन... ठीक हूउउ....

इक़बाल - नहीं... आपकी आवाज़ से ऐसा लगा....

सुप्रिया - हाँ वह मैंनेई... अभी कुछ.... भाआरी समाआन उठाया था.... इसलिए सांस फूल रही थी....

इक़बाल - आप मुझे बुला लेते, मैं कर देता... आपकी शौहर भी नहीं है अभी यहाँ...

अब सुप्रिया उसे कैसे समझती की इस भरी काम में वह उसे नहीं बुला सकती थी. उसे इक़बाल की भोली सी बातों पर हसी भी आ रही थी

सुप्रिया - नहीं.... ठीक है... हो गया बस्सस....

इक़बाल - आपको अगर कुछ भी चाहिए हो तोह आप मुझे बता देना.... आपको उनके पीछे से कोई दिक्कत नहीं होने दूंगा...

सुप्रिया की सांसें अब धीमी होती जा रही थी और साथ hi उसके शरीर की गर्मी भी. उसे समझ नहीं आ रहा था की इक़बाल ने उसे इस समय क्यों कॉल किया था. वह उससे सीधे सीधे पूछने में हिचक सी रही थी.

सुप्रिया - आप आज ड्यूटी पर है?

इक़बाल - हांजी मैडमजी... नीचे hi हु.... बस इसलिए कॉल किया... मैंने आपको शनिवार का बोलै था न, पर मेरी ड्यूटी चेंज हो गयी तोह आज नहीं हो पायेगा...

सुप्रिया को कुछ समझ नहीं आया - किस चीज़ के लिए?

इक़बाल - वह मस्जिद जाना था न....

सुप्रिया - ओह हाँ.... माफ़ कीजिये मुझे... मैं भूल गयी थी....

इक़बाल - कोई बात नहीं... कोई दिक्कत नहीं, मैं तोह बस ये सोच रहा था की कहीं आप आज का तोह नहीं सोचे बैठी थी...

सुप्रिया सोच में पद गयी. हाँ उसने इक़बाल को हाँ तोह की थी, पर मस्जिद जाना कितना अजीब सा लगेगा. पर अगर जाना था तोह शायद इसी वीकेंड ये काम पूरा करना पड़ेगा, नहीं तोह फिर अगले हफ्ते तोह अतुल वापस आ जायेगा.

सुप्रिया - हम लोग कल चल सकते है क्या?

दूसरी तरफ से इक़बाल की ख़ुशी का ठिकाना नहीं था - बिलकुल मैडमजी... कल मेरी छुट्टी है... तोह आराम से जा सकते है...

सुप्रिया अभी भी बीएड पर चद्दर में नंगी लेती अपने शरीर को छू रही थी - उम्म्म... ठीक है.... कल मिलते है फिर....

इक़बाल - कितने बजे?

सुप्रिया - आप बताइये...

इक़बाल - सुबह थोड़ी भीड़ काम होगी, तोह शायद वही सही वक़्त रहेगा...

सुप्रिया - ठीक है मैं सुबह तैयार हो जयुंगी... 9 बजे चले?

इक़बाल - 9 बजे सही रहेगा.... मैं आ जायूँगा आपको लेने...

सुप्रिया - ाचा सुनो सुनो... मैं तोह कभी मस्जिद गयी नहीं... वहां क्या पेहेन कर जाना होगा?

इक़बाल - जैसे आप चाहे...

सुप्रिया - साड़ी तोह शायद नहीं चलेगी न....

इक़बाल - हाँ... मेरे ख्याल से आप साड़ी या जीन्स शर्ट मत डालना... नहीं वैसे आप बहुत सुन्दर लगते हो साड़ी में पर....

सुप्रिया - नहीं मैं समझ गयी आपकी बात... मैं फिर एक सलवार सूट पेहेन लू?

इक़बाल - हाँ वह बढ़िया रहेगा....

सुप्रिया नंगी लेती हुई इक़बाल से कपड़ो के बारे में बात कर रही थी, अब इससे ज्यादा क्या hi अजीब होता.

सुप्रिया - ठीक है इक़बाल जी... मैं कल 9 बजे मिलती हु... वैसे आप करुणा को मत बोलना ये बात.... या किसी को भी...

इक़बाल - सवाल hi नहीं होता इस बात का, आप बेफिक्र रहे...

सुप्रिया ने bye बोल कर फ़ोन रखा और अपना दूसरा हाथ भी चद्दर के अंदर किया. फ़ोन पर बात करने से उसकी पूरी गर्मी उतर चुकी थी और अब उसके सर में दर्द सा शुरू हो गया था. काश ये कॉल न आया होता तोह पूरी तरह झाड़ पाती. पर अब न तोह उसके शरीर को वह शान्ति मिली थी जो उसे चाहिए थी, और न hi इस हालत में थी की अपने आप को फिर से उस मूड में लेकर आ सके. सच में कितना मजा आ रहा था आज उसे ये सब कर के.

सुप्रिया ने अपने फ़ोन को साइलेंट पर किया और वह ऐसे hi बिना कपड़ो के अपना मैं मार कर थोड़ी देर के लिए सो गयी.
 
अपडेट 47

अगले दिन सुबह सुप्रिया इक़बाल के साथ जाने के किये तैयार होने लगी. तैयार होते होते वह पिछली शाम के बारे में सोचने लगी. कल शाम को वह ठण्ड से कांपते हुए उठी थी और उसका पूरा जिस्म बुरी तरह थरथरा रहा था. ये सिर्फ ठण्ड की कम्पन नहीं थी, बल्कि एक ऐसा एहसास था जो उसे समझ hi नहीं आ रहा था. कांपते हुए उसने किसी तरह अपने कपडे पहने और जब फ़ोन चेक किया तोह अतुल की कॉल आयी हुई थी.

उसने अतुल को वापस कॉल करने से पहले अपना चेहरा धोया और आवाज़ को ठीक किया. उसे पता था की अगर अतुल ने उसकी ऐसी बीमार सी आवाज़ सुन ली तोह वह काफी परेशान हो जायेगा. पानी पीने के बाद सुप्रिया ने अतुल से बात करि और साथ hi बाकि सब से भी. वैसे तोह सुप्रिया की अपने ससुराल में बात हफ्ते में एक दिन हो hi जाती थी, पर तब थोड़ी सी लम्बी खींच गयी.

इन बातों में पता चला की ध्रुव तोह कॉलेज ख़तम होने के बाद जॉब के लिए दिल्ली चला गया था. अब तोह वैसे भी वह कभी ध्रुव के बारे में सोचती नहीं थी और शायद वह भी उसके के बारे में नहीं सोचता होगा.

दीदी की डिलीवरी की डेट भी पास आ रही थी, बस अब 2-3 महीने hi बचे थे. सुप्रिया और अतुल की एनिवर्सरी के ठीक पास hi बेबी होने वाला था. सुप्रिया ने सबसे अचे से बात करके फ़ोन रखा, उसका सर अभी भी दुःख सा रहा था.

उसके फ़ोन पर राहुल की भी 2 मिस्ड कॉल्स आयी हुई थी. ये देख कर सुप्रिया के चेहरे पर स्माइल सी आ गयी, चलो उसने कॉल तोह किया. पर तब सुप्रिया उससे बात करने की हालत में नहीं थी और वह जल्दी hi थोड़ा बहुत खाना खा कर फिर से सो गयी थी.

सुबह उठ कर सुप्रिया को थोड़ा बेहतर महसूस हो रहा था, और उसने जल्दी से अपना एक सफ़ेद रंग की सलवार कमीज़ निकल कर प्रेस कर लिया. उसके पास सफ़ेद रंग के ज्यादा कपडे नहीं थे, और उसने सफ़ेद इसलिए चुना था क्यूंकि उसकी बाकी साड़ी कुर्ती काफी रंग बिरंगी सी थी और ज्यादातर सब स्लीवलेस. और इस कुर्ती पर चिकन का काम हो रखा था, जिससे वह कुर्ती आज की जगह के हिसाब से बिलकुल सही लग रही थी.

सुप्रिया ने हमेशा की तरह अपने माथे पर एक छोटी सी बिंदी लगा ली, और थोड़े स्टाइलिश से झुमके कानो में दाल लिए. वह अपने आप को आईने में देखने लगी और सोचनी लगी की कहीं वह कुछ ज्यादा तैयार तोह नहीं हो गयी थी.

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9 भी बस बज hi गए थे, पर सुप्रिया थोड़ी सी नर्वस हो रही थी. वह अकेले एक वॉचमन के साथ ऐसी जगह जा रही थी जहाँ पहले नहीं गयी थी. पर जितना वह इक़बाल को जान पायी थी, वह उसे एक ाचा इंसान लगता था. सुप्रिया तैयार बैठी इक़बाल के कॉल का इंतज़ार कर रही थी, और फिर आखिर इक़बाल का कॉल आ hi गया था.

इक़बाल - मैडमजी... आप तैयार हो? मैं नीचे आ गया हूँ....

सुप्रिया - हाँ... बस आती हूँ...

इक़बाल - कोई नहीं... आप आराम से आयो... कोई जल्दी नहीं है...

सुप्रिया - नहीं मैं बस आयी...

सुप्रिया ने अपनी सफ़ेद चुन्नी उठायी औरघर का दरवाज़ा लॉक करके नीचे की और चली गयी. और फिर वहां बिल्डिंग के नीचे इक़बाल को ढूंढ़ती हुई कड़ी हो गयी. पर उसे इक़बाल तोह कहीं दिख hi नहीं रहा था. वह अपने हाथ पर हाथ बांधे इधर उधर देखने लगी की उसे कहीं इक़बाल दिख जाये.

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पर इक़बाल दीखता कैसे! वैसे तोह वह सुप्रिया के ठीक सामने hi खड़ा था, पर आज वह अपनी दादी कटवा कर एक चमचमाता सफ़ेद कुर्ते में आया था. ऐसा लग रहा था की जैसे उन दोनों ने बिलकुल प्लानिंग से कपडे चुने हो.

इक़बाल ने hi आवाज़ लगायी - मैडमजी...

सुप्रिया ने आवाज़ की और देखा तोह उसे इक़बाल दिखाई दिया. शेव करने के बाद उसके चेहरे की कालिख जैसे बिलकुल हैट गयी थी और अंदर एक सावला सा चेहरा चमक के दिखाई दे रहा था. उसके वॉचमन वाले कपडे थोड़े बेढंगे से होते थे, पर इस कुर्ते में तोह उसकी मजबूत छाती और कंधे अचे से दिख रहे थे. एक पल के लिए तोह सुप्रिया देखती hi रह गयी की ये इक़बाल hi था क्या.

इक़बाल ने फिर से आवाज़ लगायी - मैडमजी... चले....

सुप्रिया इक़बाल की और बड़ी - हांजी... सॉरी... आप पहचान में नहीं आये एकदम से...

इक़बाल थोड़ा झेपते हुए बोलै - हाँ कल hi मैंने ये नया कुरता खरीदा है... वैसे आप भी काफी अलग से लग रहे हो आज...

सुप्रिया ने इक़बाल को छेड़ते हुए कहा - अलग अछि या बुरा?

पर इक़बाल ने भी एकदम से जवाब दे दिया - बहुत अछि.... आप पर सफ़ेद बहुत ाचा लगता है...

जिस तरह से इक़बाल सुप्रिया की और देख रहा था, सुप्रिया के गाल लाल हो रहे थे. उसने आखें नीचे करते हुए कहा - बाकी रंग नहीं अचे लगते क्या मुझपर?

इक़बाल - नहीं नहीं... आप पर तोह सारे रंग अचे लगते है, पर आपको आज पहली बार सफ़ेद में देखा...

सुप्रिया ने हलके से इक़बाल की पीठ पर हाथ रखते हुए कहा - चले भी अब, या यहीं बातें करते रहेंगे...

इक़बाल - हांजी मैडमजी.. चलिए...

इक़बाल का मैं तोह नहीं हो रहा था की सुप्रिया का हाथ उसकी पीठ से हेट, पर वह न चाहते हुए भी अपनी गाडी की तरफ बाद पड़ा और उसने सुप्रिया के लिए पीछे का दरवाज़ा खोला. सुप्रिया पहले भी इस कार में बहुत बार बैठ चुकी थी पर आज तोह ये बिलकुल किसी नयी गाडी की तरह चमक रही थी.

इक़बाल सुप्रिया की शकल देख कर समझ गया था - कल hi मैंने इसे खूब रगड़ा है.... एकदम चमका दिया...

रगड़ने का नाम सुनते hi सुप्रिया को हसी सी आने लगी और थोड़ी शर्म भी. कल दिन में वह पूरी नंगी लेती हुई इक़बाल से फ़ोन पर बात कर रही थी. क्या इक़बाल को इस बार का ज़रा सा भी पता था.

सुप्रिया - आज पीछे क्यों? आगे क्यों नहीं?

इक़बाल - आज मैं आपको गाडी सीखा नहीं रहा हूँ न... मैं तोह आपको वहां लेकर जा रहा हूँ... तोह एहि मुनासिब होगा की आप पीछे बैठे..

इक़बाल दरवाज़ा खोले खड़ा था, और सुप्रिया मुस्कुराती हुई पीछे की सीट पर बैठ गयी... ड्राइवर सीट की तिरछी तरफ. इक़बाल भी जल्दी से आकर ड्राइवर सीट पर बैठ गया और गाडी चलनी शुरू कर दी.

गाडी बहार के गेट को पार करती हुई सड़क पर आ गयी थी. सुप्रिया इधर उधर देख रही थी, आज से पहले वह कभी इस गाडी में पीछे नहीं बैठी थी. थोड़ी थोड़ी देर में उसकी नज़रें कार के रियर व्यू मिरर में इक़बाल की आँखों से मिल जाती. इक़बाल भी शायद बार बार आईने के ज़रिये सुप्रिया की और hi देख रहा था. सुप्रिया को समझ hi ना आ रहा था वह क्या बोले. जहाँ वह जा रहे थे उसके बारे में सुप्रिया के मैं में सवाल थे, पर वह उन्हें पूछ नहीं पा रही थी.

आखिर इक़बाल hi कुछ बोलै - मैडमजी… आपको पता है आपकी सबसे अछि बात क्या है?

सुप्रिया - क्या?

सुप्रिया को लगा कहीं इक़बाल उसके शरीर की किसी अंग के बारे में तोह नहीं बोलेगा, उसकी आँखें या उसके होंठ या उसके चेहरा. थोड़ा सा ावक्वार्ड हो जायेगा.

इक़बाल- एहि की आप अपनी बात के बिलकुल पक्के हो….

सुप्रिया को हलकी सी हसी आ गयी - इक़बाल…. मैं उतनी भी अछि नहीं हु जितना तुम सोचते हो…

इक़बाल - वही तोह आपकी सादगी है…

सुप्रिया - ऐसा कुछ नहीं… वैसे आज कुछ ख़ास है क्या जो तुम इतने अचे से तैयार हो कर आये हो….

इक़बाल - मैडमजी… एक तोह आपके साथ जाना था आज और दूसरा….

सुप्रिया - दूसरा क्या….

इक़बाल - आज मेरी बीवी का जन्मदिन है…

सुप्रिया - ारी वह… मेरी तरफ से भी उन्हें हैप्पी बर्थडे बोल देना…

इक़बाल हलके से उदास आवाज़ में बुदबुदाया - काश वह कर पाटा...

सुप्रिया को अचे से सुनाई नहीं दिया - कुछ कहा आपने?

इक़बाल - नहीं मैडमजी... कुछ नहीं...

सुप्रिया - वैसे... मैं आपकी सबसे ख़ास बात बतायु?

इक़बाल - कुछ ख़ास होगा तोह बताइयेगा न...

सुप्रिया - आप ऐसा क्यों सोचते है... कितना कुछ तोह ख़ास है आप में!!

इक़बाल - मैडमजी बस पहुंच hi गए है... थोड़ा पैदल चल कर जाना होगा...

सुप्रिया - कोई बात नहीं... चलिए बाद में बताती हूँ आपको....

इक़बाल ने गाडी को थोड़ा पहले hi पार्किंग में लगा दिया और वह दोनों उतर कर उस ईमारत की और चलने लगे. सुप्रिया ने देखा की काफी भीड़ थी वहां, कुछ लोग तोह बस आम लोग hi लग रहे, कुछ शायद बहार से आये टूरिस्ट्स थे. और काफी सारे लोग इक़बाल की तरह hi सफ़ेद कुर्ते पहने थे, कुछ ने टोपी लगा राखी थी. और फिर थोड़ी सी औरते बुर्का पहने उस और जा रही थी.

इक़बाल कुछ सीढ़ियों पर चढ़ता हुआ ऊपर की और चला जा रहा था और सुप्रिया ठीक उसके पीछे पीछे चल रही थी. जैसे जैसे इमारत पास आ रही थी, सुप्रिया को उसकी खूबसूरती और अछि लग रही थी. बड़े बड़े गुम्बद और तराशी हुई मिन्नारे जैसे किसी बीते हुए ज़माने की कहानी बता रहे हो.

सीढ़ियों से थोड़ा ऊपर छड्ड कर सुप्रिया को एक बोर्ड दिखाई दिया जिस पर उर्दू, हिंदी और इंग्लिश में लिखा हुआ था की गैर धर्म के लोग इससे आगे नहीं जा सकते थे. सुप्रिया वह बोर्ड पड़ते hi वहीँ सीढ़ियों पर रुक गयी. इक़बाल कुछ और कदम ऊपर छडा, जस उसे आभास हुआ की सुप्रिया पीछे रह गयी थी.

इक़बाल ने पीछे मुद कर सुप्रिया की और देखा - क्या हुआ मैडमजी… आप रुक क्यों गए?

सुप्रिया - आप वह बोर्ड पर देखो क्या लिखा है? .... वैसे आप पद सकते हो न?

इक़बाल - जी. बिलकुल पद सकता हु मैडमजी… आप मुझे अनपढ़ न समझो… दसवीं पास हु…

सुप्रिया - सॉरी… मेरा वह मतलब नहीं था… वह बोर्ड पर लिखा है की मैं आगे नहीं जा सकती…

इक़बाल ने पलट कर बोर्ड को देखा और फिर दो तीन कदम नीचे सुप्रिया की तरफ बढ़ाये - बोर्ड पर लिखे होने से क्या होता है मैडमजी… और वैसे भी कौन पूछने वाला है...

सुप्रिया - पर हर जगह के अपने नियम कायदे होते है न…

इक़बाल - सबसे बड़े तोह ऊपर वाले का कैद होता न… आप फ़िक्र मत करो, आप चलो… वैसे भी आपको देख कर कोई नहीं कह पायेगा की आप…

इक़बाल ने सुप्रिया से दो तीन कदम ऊपर खड़े अपना हाथ उसकी और बढ़ाया, और सुप्रिया उसका कॉन्फिडेंस देख कर उसका हाथ पकड़ने से अपने आप को रोक hi नहीं पायी. इक़बाल के उसका हाथ पकडे उसे ऊपर की और खींच लिया और वह 2-3 सीढ़ियां छलाँगते हुए इक़बाल के बराबर आ कड़ी हुई. सुप्रिया इक़बाल के बराबर में कड़ी उसकी और ऊपर देख रही थी.

उसने तभी गौर किया की आस पास लोग उन्हें जाते हुए घूर रहे थे. सुप्रिया ने इक़बाल का हाथ छोड़ दिया और अपनी आखें नीची कर ली.

सुप्रिया धीमी आवाज़ में बोली - लोग हमे घूर क्यों रहे है?

इक़बाल ने पलट कर इधर उधर देखा - मैडमजी…. आपने अपना सर नहीं ढाका हुआ न… शायद इसलिए…. आप अपनी चुन्नी से सर धक् लो.

सुप्रिया ने जल्दी से अपनी चुन्नी से अपना सर ढाका. इक़बाल उसे ऐसा करता देख बस देखता hi रह गया. कितनी प्यारी लग रही थी वह. उसे गुलाबी होते हुए गाल, होते पर लगते हुए उसके बाल, और लाज हाय से ढाका हुआ चेहरा, किसी को भी अपना दीवाना बना दे.

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सुप्रिया ने चुन्नी से सर धक् कर इक़बाल की और देखा - क्या हुआ… ऐसे क्यों देख रहे हो… अछि नहीं लग रही क्या मैं?

इक़बाल - मैश,.'… बहुत hi अचे लग रहे हो… नज़र न लगे आपको...

सुप्रिया के गाल जैसे और सुर्ख लाल हो गए - अब चले…

दोनों साथ चलते हुए सीढ़ियों से ऊपर आये और वहां आ कर सुप्रिया को ईमारत बिलकुल साफ़ दिख रही थी. ईमारत पर हर जगह बहुत hi कलाकारी से नक्काशी की हुई थी. थोड़ी और आगे चलते हुए एक और बोर्ड आया, उस पर लिखा था की औरतो और आदमियों के घुसने की जगह अलग अलग थी.

सुप्रिया उस बोर्ड को पड़ते हुए - लगता है आपने सही से सोचा नहीं यहाँ आने के बारे में… ऐसा करते है मैं यहाँ बहार कड़ी रहती हु, आप अंदर हो कर आ जायो...

इक़बाल - नहीं... आप अंदर नहीं जाएँगी तोह फायदा hi क्या यहाँ तक आने का... अंदर आप आँखें बंद करके थोड़ी देर बैठना, आपको ऐसा सुकून मिलेगा, जैसा कहीं नहीं...

सुप्रिया - पर अब मैं अकेले अंदर कैसे जायु?

इक़बाल सोचते हुए - आप फ़िक्र मत करो… मैं करता हु कुछ इंतज़ाम…

इक़बाल पास में में hi औरतो के एंट्री की जगह के पास गया और वहां उसने पास से जाती हुई एक बूढ़ी औरत को आवाज़ दी - चची… सुनो जरा…

औरत - हाँ बीटा… बोल…

इक़बाल - चची अंदर जा रही हो न… (थोड़ी दूर कड़ी सुप्रिया की और इशारा करते हुए, जो उनकी बात ठीक से सुन नहीं पा रही थी) इनको साथ ले जायेगी… इनकी पहली बार है यहाँ…

औरत - ठीक है बीटा… ले जयुंगी…. वैसे तू तोह बड़ी तमीज से बात करता है अपनी बीवी के बारे में….

इक़बाल अब क्या hi बोलता, उसे अभी इस औरत की मदद चाहिए थी और वह उसे बताता भी तोह क्या बताता की सुप्रिया कौन है. तोह उसने हाँ में हाँ मिलाना hi सही था.

औरत - वैसे एकदम चाँद का टुकड़ा है तेरी बेगम तोह… थोड़ा और धक् के रख इसको बुर्क़े में…

इक़बाल - हाँ चची… वह घर पर भूल गए…

औरत - मेरे पास है… मैं दू क्या?

इक़बाल - नहीं नहीं… अभी आप बस इन्हे अंदर ले जायो… अभी ,,., का वक़्त तोह नहीं है बस थोड़ा बहुत इधर उधर दिखा देना और उसके बाद बहार का रास्ता दिखा देना…

औरत - ठीक है बीटा… काश मेरा बीटा भी तेरे जैसा होता…

इक़बाल ने सुप्रिया को पास आने का इशारा किया और उसके आते hi उसे कहा - ये तुम्हे अंदर ले जाएँगी… इनके साथ चली जायो… 15-20 मं में मिलते है यहीं पर बहार…

सुप्रिया ने हाँ में सर हिलाया और उस औरत के साथ अंदर की और चल पड़ी. उसने पलट के एक बार इक़बाल की और देखा, जो वहीँ खड़ा उसे जाते देख रहा था.

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अंदर एक बड़ा सा हॉल था जिसमे कारपेट बिछा हुआ था और बीच बीच में खम्बे थे. एक जगह बीच में आदमियों और औरते के सेक्शन अलग करने के लिए बैरिकेड लगे हुए थे, पर दूर तक उस सेक्शन में दिखाई दे रहा था. इस समय काफी काम लोग थे अंदर, शायद संडे था इसलिए.

सुप्रिया एक जगह कड़ी हो कर ऊपर की और ईमारत की बनावट को देख रही थी. दूसरी और साथ में कड़ी औरत सुप्रिया को अचे से देख रही थी, और उसने एक डैम से सुप्रिया से पूछ लिया - कितना वक़्त हुआ शादी को??

सुप्रिया को समझ नहीं आया की उसे कैसे पता था की उसकी शादी हो गयी थी, पर फिर भी सुप्रिया ने उसे बता दिया - बस एक साल होने को आया है…

औरत - तभी चेहरे पर इतना नूर है… कहाँ से है?

सुप्रिया - वैसे तोह झाँसी से हु… पर अब यहीं लखनऊ में रही हु

औरत - ाचा... बस तुम दोनों… तुम और तुम्हारा शोहर…

सुप्रिया - जी हाँ… बस हम दोनों…

औरत - खुशकिस्मत हो… (औरत ने एकदम से सुप्रिया के पेट को अपने हाथ से हलके से छूटे हुए) … बच्चे के बारे में सोचा है…

सुप्रिया इस औरत की सवालो से थोड़ा सा परेशान सी हो रही थी पर वह इस अनजान जगह पर अकेले नहीं होना चाहती थी - अभी तोह नहीं सोचा है…

औरत - क्यों? उम्र निकल जाएगी फिर करेगी क्या… आज कल की लड़कियां बस अपने जिस्म को सलीक़े से रखने में खुश है… तुम्हारी उम्र में मेरे तीन बच्चे थे…

सुप्रिया - नहीं वह ऐसा नहीं है… वह बस जब होगा तब hi जायेगा… अभी बस नहीं हुआ...

औरत - तेरे शोहर को देख कर तोह लगता नहीं की उसमे कोई कमी होगी…

सुप्रिया चौंकते हुए - मेरा शौहर??

औरत - हाँ तेरा शोहर... क्या दिमाग है तेरा लड़की… खुदा ने बस जिस्म दे दिया… दिमाग नहीं… वह देख वो रहा वहां आगे खड़ा है…

सुप्रिया को बहुत दूर सफ़ेद कुर्ते में इक़बाल खड़ा दिखाई दिया. इस समय इतनी भीड़ नहीं थी तोह वह उसे दूर से भी साफ़ ोाता चल रहा था. क्या इक़बाल ने इस औरत को बोलै था की वह मेरा पति है?

सुप्रिया एकदम से बोलने को हुई - वह मेरे… (पर फिर अपने आप को रोक लिया)

औरत ने इक़बाल की और इशारा किया - हाँ वह तोह रहा… चमक रहा है सफ़ेद कुर्ते में…

सुप्रिया ने बस हलकी से हाँ की आवाज़ भरी - हम्म्म्म…

पर वह औरत तोह अभी भी बोले जा रही थी - वैसे बन्नो ठीक भी है, अभी तुम्हारी हसने खेलने की उम्र, कहाँ अभी से बच्चो के चक्कर में फसोगे… पर वैसे मौलवी साहब बोलते है की गुब्बारे का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए…

सुप्रिया - गुब्बारा???

औरत होंठ पर ऊँगली रखते हुए - शह्ह्ह्ह धीरे बोल ले जरा… ारी गुब्बारा… क्या कहते है उसे… ारी वही जो उसके ऊपर छेड़ते है…

सुप्रिया को कुछ समझ नहीं आ रहा था - किसके ऊपर छेड़ते है?

औरत - तू सच में अपना दिमाग दिखवा कहीं… तेरा खसम अपने लुंड के ऊपर चददाता होगा न गुब्बारा… तभी तोह बच्चे नहीं अभी...

सुप्रिया ने गन्दा सा मुँह बनाया और सोचने लगी, ओह गॉड, कहाँ फास गयी थी वह, और ये औरत पता नहीं क्या अनाप शनाप बोले जा रही थी.

औरत थोड़ा दिमाग पर ज़ोर डालते हुए बोली - कंडोम… हाँ कंडोम बोलते है न उसे…

सुप्रिया - आपका मतलब कंडोम है शायद…

औरत - हाँ वही वही…. मौलवी साहब कहते की उसके बिना hi सब करना चाहिए… और सच कहूं जब तक अन्दर खाल में खाल महसूस न हो तब तक क्या मज़ा आये… क्यों सही कह रही हूँ न… हाय अपने दिन याद आ गए...

इससे पहले सुप्रिया कुछ कहती, लाउडस्पीकर से किसी आदमी की आवाज़ आणि शुरू हो गयी थी, जैसे मानो सुप्रिया को बचने के किये ऊपर खुदा से hi आयी हो. सुप्रिया ने औरत को चुप होने का इशारा किया और फिर वहीँ नीचे कारपेट पर बैठ गयी और अपनी आँखें बंद कर ली. जैसे इक़बाल ने बोलै था वह यहाँ अपने अंदर का सुकून खोजना चाहती थी.

पर बंद आँखों में भी उसके दिमाग में बस उस औरत की कहीं बातें hi आ रही थी. कल शाम को जो काम अधूरा रह गया था जैसे वह उसे फिर से तड़पने लगा था और उसने नीचे एक हलकी सी नमी होने लगी थी. उसने अपना दिमाग भटकने के लिए लाउडस्पीकर से आती आवाज़ पर ध्यान देने की कोशिश करि पर उसे कुछ ख़ास समझ नहीं आ रहा था. पर सुप्रिया ने अपनी आखें बंद hi राखी, ताकि उसे उस औरत से बात न करनी पड़े.

कुछ 3-4 मिनट बाद उसे ऐसा महसूस हुआ की उसने पास कोई और आकर खड़ा है. सुप्रिया ने आखें खोली तोह एक आदमी जिसकी दादी बड़ी हुई थी वह सुप्रिया की पीठ के पीछे खड़ा था.

औरत - मौलवी साहब… अस्सलाम वालेकुम...

मौलवी ने सुप्रिया की और इशारा किया - बड़ी बी… इनको पहले नहीं देखा यहाँ, आपकी बेटी है क्या…

औरत - नहीं जी... मेरी बेटी तोह इससे बहुत बड़ी है...

मौलवी - ाचा... वही मैं कहूं... आप तोह इतने सालो से आ रही हो... इनको तोह नहीं देखा...

सुप्रिया घबरा सी गयी, अगर वह पकड़ी गयी तोह क्या होगा. पर इससे पहले वह कुछ बोलती उसके साथ की औरत बोल पड़ी - हाँ मेरे दूर की बेहेन की बहु है, पहली बार hi आयी है, इसका शोहर वह आगे वहां खड़ा है…

सुप्रिया खड़े हो गयी और जो उसने अभी उस औरत को बोलते सुना था किसी तरह से हल्का सा सर झुकाते हुए दोहरा दिया - असलम वालेकुम..

मौलवी ने तीखी नज़रों से सुप्रिया की और देखा, जैसे उसे असलियत को परख रहा हो - कहाँ से हो बच्चे… तुम्हारी जबान थोड़ी अलग सी है...

सुप्रिया - मैं… यहीं से…

औरत - आज hi आयी है बहार से... थोड़ा दिमाग कमज़ोर है इसका… भूल जाती है... ारी वह देख तेरे मियां जी बहार की और जा रहे है.. चल हम भी चले… फिर मिलते है मौलवी साहब...

वह बूढ़ी औरत सुप्रिया को खींचती हुई मौलवी से दूर बहार की और ले चली, उसने सुप्रिया का एक हाथ पकड़ा हुआ था.

थोड़ा सा बहार आते hi वह औरत धीरे से पर तीखी सी आवाज़ में बोली - अगर यहाँ नाटक करके घुसना hi था तोह बिंदी तोह हटा देती…

सुप्रिया - क्या??

बूढ़ी औरत ने सुप्रिया की सर की बिंदी की और अपनी ऊँगली से इशारा किया - ारी... बिंदी… सर की बिंदी… तू इसके हाथ लग जाती न आज, तोह ये तेरा घोषत बना देता…

सुप्रिया ने पलट कर उस औरत का चेहरा देखा और वह समझ गयी की उसकी तज़ुर्बेकार नज़र उसकी असलियत पहचान गयी थी.

औरत - तब तोह तेरे दूल्हे राजा को बोलै था की इसे बुर्का पहना दे… वैसे दूल्हा तोह है न वह तेरा?

सुप्रिया इतनी घबराई सी हुई थी की उसने बस डर के मारे हाँ में सर हिला दिया.

औरत - तेरे धरम में नहीं मिला तुझे कोई? चल कोई नहीं... तुझे जल्दी से उसके पास छोड़ देती हूँ...

दोनों चलते चलते बहार की और आ गए, और इक़बाल वहीँ बहार खड़ा उनका बेसब्री से इंतज़ार कर रहा था. इक़बाल को देख कर सुप्रिया की जान में जान वापस आयी और चेहरे पर एक बड़ी सी स्माइल भी आ गयी थी, पर उसने उस मुस्कान को छुपाने के लिए इक़बाल की तरफ न देखते हुए दूसरी और देखने लगी.

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वह औरत सुप्रिया को इक़बाल के पास ले गयी और सुप्रिया का हाथ इक़बाल के हाथ में पकड़ते हुए बोली - ये लो अपनी दुल्हन को सम्भालो… वह तोह भला हो मैं थी इसके साथ अंदर...

सुप्रिया के सॉफ्ट कोमल हाथ इक़बाल के खुरदुरे हाथों में पड़ते hi इक़बाल तोह जैसे पूरा हिल सा गया. इस समय सुप्रिया का पूरा हाथ उसके हाथ में था, अंदर आते हुए सीढ़ियों पर भी उसने सुप्रिया का हाथ पकड़ा था पर तब इतने अचे से नहीं. सुप्रिया ने भी अपना हाथ हटाया नहीं और कुछ पल वहीँ रखा रहने दिया.

औरत - जोड़ी अछि है तुम्हारी, बस इस बावली का दिमाग दिखवाया कहीं…

इक़बाल ने मुस्कुरा कर सर झुका कर उस औरत को आँखों hi आँखों में शुक्रिया बोलै, और सुप्रिया को अपने साथ लेकर वहां से बहार की तरफ चल दिया. सुप्रिया चुप चाप इक़बाल के साथ चलती रही, और उन्ही सीढ़ियों से नीचे आ गए. वहीँ नीचे जा कर वह दोनों एक जगह बैठ गए.

सुप्रिया - इक़बाल, आप जानते थे क्या उस औरत को?

इक़बाल - नहीं नहीं… बस तुम्हे अंदर पहुंचने के लिए बोलै था…

सुप्रिया - वह बोल रही थी की मैं आपकी… मतलब हम दोनों की….

इक़बाल - शायद कोई गलत फेहमी हुई होगी इनको… मैंने ऐसा कुछ नहीं बोलै इनको…

इक़बाल सुप्रिया की आँखों में आँख दाल ये बोल रहा था तोह सुप्रिया को लगा की वह झूठ नहीं बोल रहा होगा.

सुप्रिया - खैर.. जाने देते है ये बात…

इक़बाल - कैसा लगा आपको अंदर… मैंने देखा था आप आँखें बंद करके बैठी थी… सुकून मिला आपको…

सुप्रिया अब क्या hi बताती इक़बाल को. उस औरत ने सुप्रिया को बोल बोल कर तोह कुछ और hi सोचने पर मजबूर कर दिया था, और जो सुकून कहीं वापस आ रहा था वह भी चला सा गया था.

सुप्रिया झूठ बोलते हुए - हाँ… मिला थोड़ा तोह सुकून…

इक़बाल - शुक्रिया आपका बहुत बहुत यहाँ आने के लिए… मैंने तोह आपके लिए hi दुआ करि थी अंदर…

सुप्रिया - मेरे लिए??

इक़बाल - हाँ.. आपको हर ख़ुशी मिले आपकी जिंदगी में...

सुप्रिया - ाचा… थैंक यू…

दोनों एक दुसरे के पास बैठे झिझकते हुए से एक दुसरे की और देख रहे थे.

इक़बाल - चलिए… मैं आपको घर छोड़ देता हूँ…

सुप्रिया - हाँ.. क्या टाइम हो गया? मैंने शायद अपना फ़ोन गाडी में hi छोड़ दिया था...

इक़बाल - 12 बजने hi वाले है...

सुप्रिया - ओह ाचा... हाँ चलिए... काफी टाइम हो गया है...

दोनों ने खड़े हो कर वापस गाडी की और चलना शुरू कर दिया.
 
अपडेट 48

कार के पास पहुंचते hi सुप्रिया को अपने फ़ोन की बजने की आवाज़ आने लगी. उसने जल्दी से गाडी का दरवाज़ा खोला और पीछे की सीट पर पड़े अपने फ़ोन को उठाया.

दूसरी और से राहुल की आवाज़ आयी - सुप्रिया… तुम कहाँ थी… इतनी देर से फ़ोन नहीं उठा रही थी…

सुप्रिया ने हलकी आवाज़ में बोलै - हाँ… वह मैं थोड़ा बहार थी…

इतने में इक़बाल भी आगे की सीट पर बैठ गया और गाडी स्टार्ट कर दी. उसकी नज़रें शीशे से पीछे hi देख रही थी और कान भी सुनने की कोशिश कर रहे थे की सुप्रिया किस्से बात कर रही है.

राहुल - मुझे लगा तुम अतुल के जाने के बाद hi मुझे कॉल करोगी…

सुप्रिया कोशिश कर रही थी की वह जितना हो सके फुसफुसा कर बात करे, ताकि इक़बाल को उसकी आवाज़ न आये - तुम भी तोह कॉल कर सकते थे…

राहुल हस्ते हुए - हाँ… पर दोस्त के जाते hi उसकी बीवी को फ़ोन करना थोड़ा गलत होता न...

सुप्रिया ने गुस्से में अपने दांत भीचते हुए कहा - और दोस्त की बीवी के साथ वह सब करना... वह गलत नहीं था...

राहुल - है है है... मजाक कर रहा हूँ यार... वही सब तोह दुबारा करने के लिए बेकरार हूँ... मुझे पता है तुम भी हो...

सुप्रिया - नहीं... मैं तोह नहीं हु...

राहुल - इतनी धीरी क्यों बोल रही हो... थोड़ा तेज़ बोलो न... मुझे सुनाई नहीं दे रहा सही से...

सुप्रिया - कुछ नहीं कहा मैंने... तुम कहाँ हो?

राहुल - घर पर hi हूँ... तुम आ जायो न यहाँ... फिर बैठ कर बातें करते है...

सुप्रिया - मैं अभी घर जा रही हु... मैं वहां ड्राइव करके नहीं आ सकती...

राहुल - ठीक है फिर मैं आ जाता हूँ... वह तुम्हारा वॉचमन हीरो तोह नहीं रोकेगा मुझे...

सुप्रिया आगे शीशे में इक़बाल की आँखों को देखती हुई - नहीं वह नहीं होगा वहां अभी... तुम अपनी गाडी से मत आना... बस किसी तरह से मेरे फ्लैट के बहार पहुँचो... मैं आती हूँ...

सुप्रिया ने फ़ोन रख दिया, उसे नहीं पता था की इक़बाल ने कितना सुना था या नहीं, पर वह इतनी धीमी आवाज़ में बोल रही थी की शायद hi उसे कुछ समझ आया हो.

इक़बाल - सब ठीक मैडमजी?

सुप्रिया - हांजी... वह बस अतुल का कॉल था...

इक़बाल - ाचा... आपने उन्हें बताया क्या आज के बारे में...

सुप्रिया - नहीं... मैंने उन्हें कुछ नहीं बताया... और आप भी कहीं जिक्र मत करना प्लीज..

इक़बाल - जैसा आप कहें... वैसे मैं आपसे माफ़ी माँगना चाहता था...

सुप्रिया - किस बात की?

इक़बाल - वह आपने बोलै न था की वह औरत आपको परेशान कर रही थी अंदर...

सुप्रिया - इसमें आपकी क्या गलती है... बूढ़े लोग ऐसे hi होते है... क्या कर सकते है...

इक़बाल - वैसे क्या कह रही थी वह?

सुप्रिया सोच में पद गयी, अब वह इक़बाल को कैसे बताये की वह औरत क्या क्या नहीं बोल रही थी. सब कुछ hi तोह बोल डाला था उसने, शादी, सेक्स, बच्चे, कुछ ज्यादा hi. उसकी बातों के बाद से सुप्रिया सही से नज़रें भी नहीं मिला पा रही थी इक़बाल से. गुब्बारे के बारे में सोचते सोचते एक दो बार तोह उसकी नज़र नीचे इक़बाल की पंत की तरफ भी चली गयी थी. उसे काफी शर्मिंदगी सी हो रही थी इस बात से.

सुप्रिया - कुछ नहीं... वह जैसे आपने कहा, उसे कुछ गलत फेहमी हो गयी थी...

इक़बाल - ाचा... आपने दूर कर दी गलत फेहमी उनकी?

सुप्रिया - उम्म्म नहीं... एक्चुअली वह मौका hi नहीं मिला... वह मौलवी भी आ गए थे, सो थोड़ा घबरा सी गयी थी... पर क्या फरक पड़ता है अब...

इक़बाल - हाँ.. वह तोह है... क्या फरक पड़ता है अब... पर वैसे मुझे बहुत ख़ुशी हुई की आप मेरे साथ आयी यहाँ, नहीं तोह कौन किसी का भरोसा करता है आज कल.

सुप्रिया - ारी, आपका भरोसा कैसे नहीं करती, अब तोह इतना टाइम हो गया आपको जानते जानते...

इक़बाल - तोह आप मुझे जान गयी है?

सुप्रिया - थोड़ा बहुत तोह... पर शायद अभी और जानना बाकी है...

इक़बाल - अमीन... खुदा करे की आप मुझे पूरा जान पायो...

सुप्रिया - वैसे... आपके और करुणा के बीच सब....

इक़बाल थोड़ा चुप सा हो गया - जी पता नहीं... वैसे आपके घर गए नहीं हम...

सुप्रिया जैसे इक़बाल से खुलती जा रही थी - आप जा सकते हो जब चाहो... मैं करूँगा को भी फिर से बोल दूंगी... वह तोह मुझे लगता है आपसे भी ज्यादा बेचैन है...

उसने सोचा, कितना अजीब था न, वह इक़बाल को अपने घर पर सेक्स करने के लिए खुली छूट दे रही थी. और इतना खुल के करुणा के बारे में बोल रही थी. जबकि वह खुद भी इस समय बेचैन थी राहुल की बाहों में सामने के लिए.

थोड़ा और समय लग गया उन्हें घर पहुंचते पहुंचते, और वहां पहुंच कर इक़बाल ने गाडी को बिल्डिंग के अंदर लगा दिया. सुप्रिया और इक़बाल गाडी से उतरे.

इक़बाल - मेरी ड्यूटी अभी 1 घंटे बाद शुरू होगी... तब तक मैं खाना खा लेता हूँ...

सुप्रिया ने सोचा की अगर ऊपर राहुल न होता तोह वह एक बार के लिए इक़बाल को अपने घर खाना खाने के लिए बोल देती. इतना तोह उसका फ़र्ज़ बनता hi था. पर अभी वह ऐसा कुछ नहीं कर सकती थी.

सुप्रिया - ठीक है इक़बाल जी... मिलते है...

सुप्रिया पलट कर बिल्डिंग की लिफ्ट की और जाने लगी और इक़बाल गेट की तरफ. पीछे से उसे दुसरे वॉचमन की आवाज़ आयी इक़बाल से बात करते हुए.

वॉचमन - क्या बात है मियां... इतने सज धज के आज... और इन मैडम को लेकर घूम रहे हो... क्या चल रहा है?

इक़बाल - कुछ भी नहीं... मैडमजी को कुछ काम था तोह मैंने मदद कर दी...

वॉचमन - इन मैडम की बहुत मदद करते हो तुम आजकल.... कुछ तोह पाक रहा है...

इक़बाल - ारी यार, तुम भी क्या क्या सोचने लग जाते हो...

सुप्रिया की कानो में ये बात पड़ी, और उसे लगा की अगर इस दुसरे वॉचमन ने इस बात का गौर किया है तोह शायद और भी लोगो ने किया हो. उसे थोड़ी दूरी बनानी पड़ेगी इक़बाल से ताकि लोगो को कुछ गलत न लगे. सुप्रिया ने लिफ्ट में अपना फ़ोन चेक किया, राहुल का कोई भी मैसेज नहीं था, पता नहीं वह ऊपर उसका इंतज़ार कर भी रहा था या नहीं.

पर जैसे hi सुप्रिया अपने फ्लैट के दरवाज़े के पास आयी, उसे वहीँ राहुल दुर्मत पर बैठा हुआ दिखा.

सुप्रिया ने उसे देखते hi कहा - तुम नीचे क्यों बैठे हो! और कब पहुंचे, मुझे मैसेज भी नहीं डाला...

राहुल ने मुस्कुरा कर कहा - मैं सरप्राइज बन कर आया हूँ न तुम्हारे लिए... अभी कुछ 5-10 मिनट पहले hi आया. तुम्हारी वह पडोसी भी अभी निकल कर गयी थी बहार, घूर रही थी मुझे...

सुप्रिया - मेघा!! उसने देख लिया तुम्हे... ओह गॉड... ाचा चलो जल्दी से अंदर...

सुप्रिया ने जल्दी से चाबी से दरवाज़ा खोला और वह और राहुल घर के अंदर आ गए. सुप्रिया ने अपनी चुन्नी उतार कर साइड में रख दी, और वह अपने बालों को ठीक करती हुई लिविंग रूम में कड़ी थी. राहुल उसे ऊपर से नीचे अछि तरह से देख रहा था.

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राहुल - वैसे आज तोह काफी अलग सी लग रही हो... ऐसा लग रहा है जैसे... क्या कहते है...

सुप्रिया ने उसका इशारा समझते हुए उसे बात पूरी नहीं करने दी - अछि नहीं लग रही क्या मैं?

राहुल सुप्रिया के पास आ गया और उसकी कमर पर अपने हाथ रख दिए - बहुत hi गजब लग रही हो... मैं कर रहा है बस कच्चा hi खा जायु...

वह दोनों एक दुसरे की आँखों में देख रहे थे, सुप्रिया अपने हाथ राहुल की छाती पर रखती हुए बोली - क्यों… अब अपने दोस्त की बीवी को खाना गलत नहीं लगेगा…

राहुल ने सुप्रिया की गर्दन पर किश किया और अपने होंठों से वहां चूसने लगा.

सुप्रिया - अह्ह्ह्ह… क्या कर रहे हो… छोडो… निशाँ पद जायेगा…

राहुल ने अपने होंठ हटाए और सच में वहां एक गहरे लाल रंग का निशाँ उभर के आ रहा था…

सुप्रिया उस निशाँ को मसलने लगी, जैसे हटाने की कोशिश कर रही हो - उफ्फ्फ… ये क्या किया.. ये तोह मेरी गर्दन पर सबको दिख जायेगा…

राहुल - तोह सही है न… मेरे प्यार की स्टाम्प है ये… सबको दिखनी चाहिए…

सुप्रिया ने राहुल की छाती पर अपने हाथों से हलके से मारा - तुम न…

राहुल की स्माइल और बड़ी हो गयी - मैं न... आज… हर जगह निशाँ छोड़ना चाहता हु…

सुप्रिया ने एक दो कदम पीछे लिए, और उसके पेअर सोफे से टकराये जिससे वह बैलेंस खो कर सोफे पर पीछे गिर गयी. उसने अपने पैरो को सोफे के ऊपर किये और शर्मा के नीची की और देखा. उसके अंदर का ज्वालामुखी फिर से जलने लगा था.

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राहुल सोफे पर सुप्रिया के बराबर में बैठ गया और उसे अपनी और खींचते हुए उसे अपनी गोदी में बिठा लिया. सुप्रिया का दिल तेज़ तेज़ धड़क रहा था. उसे दो हफ्ते हो गए थे कुछ भी किये हुए, और उसे पता था की आज फिर से क्या होने वाला था. राहुल ने सुप्रिया के खुले हुए बालों को उसके चेहरे से साइड करते हुए कान के पीछे टिकाया, और उसके गुलाबी गालों को चूमने लगा. सुप्रिया उसकी गोदी में बैठी दरवाज़े की तरफ देख रही थी, एंड हलके हलके मुस्कुरा रही थी.

राहुल ने अपने दोनों हाथ सुप्रिया के चेहरा पर रखते हुए उसे अपनी और किया और फिर उसके होंठों को चूमना शुरू किया. पहले हलके हलके, और फिर उसके होंठों को अपने दांतों से खींचते हुए.

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सुप्रिया - ोुछःह.... दांत क्यों गदा रहे हो...

राहुल - मैंने कहा न... आज तोह हर जगह निशाँ कर दूंगा...

सुप्रिया - फिर मैं नहीं करने वाली कुछ भी तुम्हारे साथ...

राहुल ने सुप्रिया के होंठों को हलके से किश किया - ाचा जी... मैं अछि तरह से जानता हु तुम भी कितना तड़प रही हो...

सुप्रिया - मममम... ऐसा कुछ नहीं...

राहुल - ाचा, पहले ये कान की बालियान निकालो न... चुभ जाएँगी...

सुप्रिया ने जल्दी से अपने कानो की बालियां निकल कर राहुल को दे दी, और उसने साइड वाली टेबल पर उन्हें रख दिया. और फिर वह उसके कानो को हलके हलके चूसने लगा, और फिर वहां भी काटने लगा. सुप्रिया की सिसकियाँ तेज़ होती जा रही थी और राहुल को पता था की वह उसे किसी चीज़ के लिए मन नहीं करेगी आज.

सुप्रिया के हाथ भी अब राहुल के शरीर पर चलने लगे थे और उसने जाने अनजाने उसकी शर्ट के ऊपर के ek-do बटन खोल दिए थे. सुप्रिया अपने पेअर राहुल के दोनों और फैला कर उसके ऊपर अचे से बैठ गयी. हर पल जैसे उसकी बेचैनी बड़ा रहा था.

राहुल ने खुद hi अपनी शर्ट के बाकी बटन खोलते हुए उसके उतार कर फैका, और सुप्रिया के हाथ ऊपर करते हुए उसकी कुर्ती को भी उतार दिया.

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अंदर सुप्रिया की सफ़ेद ब्रा और उसने से बहार झांकते हुए मम्मी उसे पागल कर रहे थे. इन्ही के लिए तोह यहाँ आया था. उसने सुप्रिया को ज़ोर से भीचा और और अपनी जीब से उसके ब्रा के आस पास चाटने लगा.

सुप्रिया हलके हलके ाँहें भर रही थी - Ahhh...mmmmm..... (फिर वह हलके से बोली) आज यहीं सोफे पर सब करने का इरादा है क्या...

सुप्रिया को ऐसे खुल के बोलते सुन राहुल की आँखों में चमक सी आ गयी - आईडिया तोह ाचा है....

सुप्रिया शरमाते हुए बोली - नहीं... मेरा वह मतलब नहीं था...

राहुल - अब तोह आज यहीं करेंगे लंच...

राहुल ने सुप्रिया के बाल पकड़ते हुए उसके कांडों से लेकर बूब्स तक किश करना शुरू कर दिया. उसका लुंड सुप्रिया की गांड के ठीक नीचे था और टाइट होता जा रहा था. सुप्रिया ने अपनी बाहें राहुल की गर्दन से लपेट ली और अपने शरीर को राहुल के शरीर पर हलके हलके चलने लगी, जिससे राहुल का लुंड और खड़ा हो गया.

राहुल - अह्ह्ह्ह... उफ्फ्फ्फ़... टाइट होता जा रहा है... मुझे उसे बहार निकलना पड़ेगा...

सुप्रिया ने अपने आप को राहुल की गोदी से थोड़ा सा ऊपर किया और राहुल ने अपनी जीन्स एंड अंडरवियर नीचे सरकते हुए अपना लुंड पूरा आज़ाद कर दिया. सुप्रिया उसके लुंड को देखती सी रही गयी थी.

सुप्रिया - तुम गुब्बारा तोह उसे करोगे न आज... उस दिन जल्दी में बिना उसके हो गया था...

राहुल - गुब्बारा?

सुप्रिया - हाँ... कंडोम....

राहुल - कंडोम की क्या जरूरत है... ऐसे hi करते है न...

सुप्रिया ने गन्दा सा मुँह बनाया - नहीं... अगर कुछ ऐसा वैसा हो गया तोह...

राहुल - तोह ाचा है न... मम्मी बन जायेगी...

सुप्रिया ने राहुल की छाती पर हाथ मारा - शट उप... मुझे नहीं बनना मम्मी...

राहुल - मेरे पास नहीं है कंडोम... और तुम सारा मूड ख़राब कर रही हो...

सुप्रिया - शायद होगा अंदर, अतुल का, मैं लेकर आती हु...

सुप्रिया जल्दी से कड़ी हो कर अंदर भागी और बीएड के साइड वाली ड्रावर से एक कंडोम का डब्बा उठाते हुए लायी. शुरू शुरू में अतुल कंडोम इस्तेमाल करता था, बस फिर बाद में उसने बंद कर दिया था.

सुप्रिया को अजीब लग रहा था की वह अपनी hi चुदाई के लिए कंडोम लेकर राहुल को देने जा रही थी. वह शर्माती हुई सी लिविंग रूम में वापस आयी और कंडोम का डब्बा राहुल की और उछाल दिया. राहुल अपने लुंड को हलके हलके सेहला रहा था ताकि वह खड़ा रहे.

राहुल - आ जायो यार... अब रहा नहीं जा रहा...

सुप्रिया के पास आते hi राहुल ने सुप्रिया की पजामी और कच्ची को नीचे खींचा और उसे नीचे से पूरी तरह नंगा कर दिया. उसके ऊपर बस एक ब्रा बाकी थी. सुप्रिया ने अपने हाथ नीचे करके अपनी छूट को राहुल की नज़रों से ढकने की कोशिश करि. पर राहुल ने सुप्रिया का हाथ खींचते हुए उसे नीचे बिठाया और उसकी ब्रा के हुक खोल दिए. फिर उसकी ब्रा को उतारते हुए वह सुप्रिया के कोमल से बूब्स को अपने हाथों से मसलने लगा. दोनों बिलकुल नंगे एक दुसरे से सटे बैठे थे.

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राहुल - उफ़... क्या बाला हो तुम यार...

सुप्रिया - ममममम.... राहुल... अह्ह्ह.....

राहुल ने अपने लुंड की तरफ इशारा करते हुए कहा - तुम इसे टोपी पहनयोगी या मैं सीधे अंदर दाल दू.

सुप्रिया ने एक कंडोम पकड़ा, और राहुल के तने हुए लुंड के ठीक ऊपर रखते हुए उसे उसके लुंड पर नीचे खींच दिया. कंडोम एक डैम पारदर्शी था और उस में राहुल का लुंड साफ़ दिख रहा था. इस बहाने सुप्रिया के हाथ राहुल के लुंड पर पड़ने से उसका लुंड ऊपर नीचे उछालने लगा था.

राहुल - चूसोगी इसे उस दिन की तरह...

सुप्रिया ने न में सर हिलाया, वह बस चाहती थी राहुल उसकी छूट में अपना लुंड दाल कर उसे शांत कर दे. राहुल उसका चेहरा देख कर समझ गया था की वह क्या चाहती थी, और उसे सुप्रिया के बाल पीछे से पकड़ते हुए उसे सोफे पर लिटा दिया और उसके ऊपर आ गया. सुप्रिया का सर सोफे के आर्मरेस्ट पर था और वह राहुल का भर अपने ऊपर महसूस कर पा रही थी. राहुल ने सुप्रिया के पेअर खोले और अपने पैरो को सुप्रिया के बीच में टिकाया. फिर उसने सोफे पर हाथ रखते हुए अपने शरीर को नीचे किया और अपने लुंड को सुप्रिया की छूट के बहार रखा. लुंड हलके हलके छूट को छू रहा था, जिससे सुप्रिया की सांसें तेज़ हो रही थी.

राहुल के ज़ोर से झटका देते हुए अपने लुंड को सुप्रिया की छूट में घुसा दिया. सुप्रिया की आँखें जैसे और बड़ी हो गयी और उसने राहुल को कास के पकड़ लिया. राहुल ने सुप्रिया के अंदर धक्के मारने शुरू करे. धक्के मारते hi सुप्रिया के पेअर ऊपर उठ गए, और उसके मुँह से जोर की चीखें निकालनी लगी.

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सुप्रिया - अह्ह्ह... ahhh....ahh... उफ्फ्फ... अह्ह्ह...

सुप्रिया की हालत ख़राब होती जा रही थी, पर साथ hi उसकी छूट को एक ऐसी शान्ति मिल रही थी जिसके लिए वह तड़प रही थी. उसने अपने हाथ को राहुल के बालों में डाला और उसे और नीचे खींच लिया, जिससे उसका लुंड और अंदर चला गया. राहुल किसी तरह से अपना बैलेंस बनाये सुप्रिया की छूट के अंदर अपना लुंड चला रहा था और सुप्रिया अपनी गांड ुचा कर उसका पूरा साथ दे रही थी.

राहुल - फ़क... सुप्पु.... आह्ह्ह्ह... ममममम.....

सुप्रिया - ईई... राहुल.... और तेज़ करो न....

सुप्रिया के मुँह से ये सुनते hi राहुल की स्पीड और तेज़ हो गयी, और वह ज़ोर ज़ोर से सुप्रिया की तरफ धक्के मारने लगा. सुप्रिया उसके धक्के कहते कहते और पीछे हो गयी और उसका सर सोफे से नीचे लटक गया. पर राहुल ने अपना लुंड बहार नहीं निकाला और वह भी सरक कर सुप्रिया के साथ आगे बाद गया. सुप्रिया ने राहुल को कास के पकड़ लिया ताकि वह गिरे न, और उसके पेअर भी हवा में होते हुए राहुल ने लिपट गए.

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सुप्रिया - अह्ह्ह... राहुल... मुझे पीछे खींचो न...

राहुल ने सुप्रिया को जकड़े हुए उसे वापस सोफे पर लिटाया. सुप्रिया ने अपनी टाँगे जैसे hi नीचे की, राहुल ने उसकी एक टांग ऊपर उठायी और अपना लुंड फिर से उसके अंदर डालते हुए उसे छोड़ने लगा. सुप्रिया ने अपने हाथों से सोफे को पकड़ लिया और उसके मुँह से फिर से चीखे निकालनी शुरू हो गयी थी - अह्ह्ह.. उफ्फ्फ.... Rahul....ahhh.... मम्मी....

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पर राहुल तोह जैसे रुकने का नाम hi नहीं ले रहा था, उसने अपनी उँगलियों से सुप्रिया की योनि के बहार के हिस्से को रगड़ना शुरू किया और अपने लुंड को अंदर बहार करता रहा.

सुप्रिया बस अपने चरम तक पहुंच गयी थी और उसके अंदर किसी भी पल विस्फोट होने वाला था - अह्ह्ह्हह..... मममममम.... गॉडडडडड...

राहुल ने अपना बाँध छोड़ते हुए अपना विरए निकाल दिया, पर इस बार उसे अपना विरए सुप्रिया के अंदर जाता नहीं अपने लुंड पर गरम गर्म महसूस हुआ. इससे उसका थोड़ा सा मजा जैसे किरकिरा सा हो गया.

राहुल - ओफ्फो... ये कंडोम ने सारा मजा ख़राब कर दिया... अहह.....

राहुल ने अपना लुंड बहार निकाला और वह सुप्रिया के चिपचिपे पानी से लथपथ था. राहुल ने कंडोम को अपने लुंड से उतार फेका और फिर से सुप्रिया से चिपट गया. दोनों नंगे एक दुसरे की बाहों में लेते हुए अपनी सांसें वापस आती महसूस कर रहे थे. सुप्रिया को राहुल का नंगा लुंड अपनी जाँघों पर फिरता हुआ फील हो रहा था. दोनों ऐसे hi थोड़ी देर धराशायी होते हुए एक दुसरे की बाहों में आँखें बंद करके लेट गए.

राहुल के हाथ हलके हलके सुप्रिया के बूब्स पर घूम रहे थे - आज कैसा लगा मैडमजी.....

मैडमजी सुनते hi सुप्रिया को इक़बाल की याद आ गयी, पता नहीं क्यों वह हर गलत वक़्त उसके दिमाग में आ जाता था. सुप्रिया कुछ बोली नहीं और शरमाते हुए उसने अपना मुँह राहुल के सीने में चुप्पा लिया.

राहुल - बोलो न... आज तोह बताना hi पड़ेगा...

सुप्रिया - पता नहीं मुझे क्या होता जा रहा है... इससे पहले मुझे सेक्स की इतनी जरूरत महसूस नहीं होती थी....

राहुल - बिलकुल नेचुरल है ये... और इसका मतलब मैं ये निकलू की तुम्हे मेरे साथ बहुत ज्यादा मज़ा आता है...

सुप्रिया के गाल लाल हो गए और उसने राहुल को हलके से चांटा मारा - ऐसा लग रहा है जैसे तुम मुझे बिगाड़ रहे हो...

राहुल - ारी.... मैं क्या बिगाड़ रहा हु तुम्हे... चलो कोई नहीं, बिगाड़ना hi है तोह अभी तोह पूरे 6 दिन और है... मैं सोच रहा हु की यहीं राहु तुम्हारे साथ इन 6 दिन...

सुप्रिया - ाचा... और बाकी सब कैसे करोगे....

राहुल - बाकी सब है hi क्या करने के लिए... यहीं से ऑफिस चले जायेंगे... और बिलकुल एक नेवली मैरिड हस्बैंड वाइफ की तरह रहेंगे इन 6 दिन... तुम्हे भी तोह पता चले असली हस्बैंड क्या होता है...

सुप्रिया को ये सुनते hi सोच में डूब सी गयी. उसे फिर से अतुल के लिए थोड़ा गिलटी सा फील होने लगा था. कितना भरोसा करता था वह उस पर, और वह यहाँ अकेली क्या कर रही थी.

राहुल ने सुप्रिया के गाल को हल्का सा थपथपाते हुए कहा - कहाँ खो गयी. और हाँ सुनो... दोनों ऐसे hi बिना कपड़ो के रहेंगे जब भी घर पर होंगे...

सुप्रिया - पागल हो क्या... बिना कपड़ो के कौन रहता है पूरा दिन.

राहुल - एहि सोच लो की हनीमून पर आये है शादी के बाद.

सुप्रिया - हनीमून पर तोह बहार घुमते है, कमरे में थोड़ी न रहते है.

राहुल - लगता है आप हनीमून पर गयी नहीं है कभी...

सुप्रिया - और लगता है आप 4-5 बार हो आये है...

दोनों एक दुसरे को देख कर हसंने लगे, और एक दुसरे की बाँहों में लिपटे फिर से किश करने लगे. सुप्रिया सोचने लगी की क्या सच में अगले कुछ दिन आज की तरह hi होने वाले थे. आज इतने दिनों के बाद सब करने के बाद उसका दिमाग कितना शांत सा महसूस कर रहा था.
 
देखो आगे क्या क्या होता है.... डोंट वोर्री सब ठीक हो जायेगा.... लिखे ी साइड बिफोर स्टोरी की एंडिंग सबको अच्छी लगेगी. पर अभी टाइम लगेगा वहां तक पहुंचने में, सो प्लीज बे पेशेंट.
 
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