अपडेट 61
अगले hi पल आदित्य का लिंग उसकी योनि को पैंटी के ऊपर से hi रगड़ रहा था और वो भी अपनी उत्तेजना को काबू में न रख पाया और झड़ने लगा. दोनों एक दूसरे की आँखों में देख रहे थे. संध्या हलके से मुस्करायी और आदित्य ने उसकी पैंटी में उंगली डालकर उतरनी चाही तू संध्या ने उसके हाथ को पकड़ते हुए जोर से चीखी 'नहीं'
उस चीख के साथ hi संध्या की नींद खुल गयी और उसने अपने आसपास देखा की आदित्य कान्हा है तू उससे आदित्य कहीं भी दिखाई नहीं दिया और फिर उसने अपने आप को देखा तू उसने कपडे पहने हुए थे. हाँ, जब उसका हाथ उसकी योनि पर गया तू उससे अपनी पैंटी पूरी गीली लगी तू उससे समझ आया की उसने ये सब सपने में देखा है और उस सपने की वजह से hi पेंटी गीली हो गई है.
अभी वह यह सोच hi रही थी की आदित्य ने दूर पर नॉक करते हुए कह रहा था 'क्या हुआ..... क्या हुआ.... दरवाजा खोलो'
संध्या बेचारी सोच में पद गयी की उसको क्या जवाब दूँ, लेकिन उसने जल्दी से बोलै 'अभी खोलती हूँ' उसने दरवाज़ा खोला तू आदित्य ने पूछा क्या हुआ तू संध्या आदित्य के गले लग गयी और कहने लगी 'मैंने बहुत बुरा सपना देखा और दर गयी'
आदित्य 'क्या माँ आप भी न इतनी बड़ी होने पर भी आपको दर लगता है'
संध्या 'दर पर किसी का जोर थोड़ी न चलता है, वैसे भी सपने में कुछ पता hi नहीं चलता की क्या हो गया है'
आदित्य ने खड़े खड़े hi पूछा 'की ऐसा आपने क्या देख लिया जो इतनी जोर से चीखी'
संध्या उससे क्या जवाब देती की उसने क्या देखा है, लेकिन उसने प्रत्यक्ष में कहा 'वो मैंने देखा..... मैंने देखा..... मैंने देखा... '
आदित्य 'क्या देखा'
संध्या 'वो मैंने देखा.... की तुम भी मुझे छोड़ कर चले गए हो और मैं बिलकुल अकेली रह गयी हूँ'. ये कहकर वो सुबकने लगी तू आदित्य अपने हाथ को उसकी पीठ पर ले जाकर उससे सहलाते हुए 'क्या माँ आप भी न, देखो मैं कहीं नहीं गया हूँ, यही पर हूँ और अब आप बिना डरे सो जाइये.
संध्या ने अपने हाथों को आदित्य की कमर पर लेजाकर अपने से कसकर कहने लगी 'नहीं, नहीं मुझे अकेला छोड़ कर न जाओ'
आदित्य 'मैं आपको अकेला छोड़ कर कहीं नहीं जा रहा, मैं सिर्फ अपने कमरे में जा रहा हूँ, आप सो जाइये'
संध्या ने आदित्य को छोड़ा hi नहीं और कहने लगी 'मुझे यंहा अकेले दर लगेगा, तुम भी यही सो जाओ न'
आदित्य 'माँ, ये आप की कह रही हैं' और इतना कहकर आदित्य ने अपने हाथों से उसके होठों को अपनी कमर से हटाया और कहा 'आप सो जाइये, मुझे काम करना है और अगर आपको कोई तकलीफ हो तू मुझे बुला लेना'
संध्या 'तकलीफ में तू मुझे छोड़ कर जा रहे हो और कहते हो की बुला लेना'
आदित्य 'मैं अपने कमरे तक hi तू जा रहा हूँ और अगर आपको कोई तकलीफ है तू मुझे बताओ मैं दूर करने की कोशिश करूँगा'
संध्या 'कह तू रही हूँ की यही सो जाओ'
आदित्य 'ये तकलीफ थोड़ी न है, ये तू आप जबरदस्ती मुझे रोकना छह रही हैं. अगर आप ऐसे करोगी तू न तू मैं कोई काम कर पाउँगा और न hi आप अपनी पढाई पूरी कर पाओगी'
संध्या 'बस इसी तरह बहाना बना कर मुझसे दूर जाने की कोशिश कर रहे हो'
आदित्य 'आप समझती क्योँ नहीं हैं, मुझे काम भी करने हैं. आपको कैसे बताऊँ की सिर्फ तीन घंटे सोकर मैं उठकर उस काम को करने लगा जिसके पैसे एडवांस लिए हैं और आप कह रही है की मैं आपको छोड़ कर जा रहा हूँ. आप बात को समझो और सो जाओ, मुझे अभी बहुत काम करना है'
संध्या 'मुझे दर की वजह से अभी यंहा नींद नहीं आएगी, ऐसा करते हैं की मैं तुम्हारे लिए कॉफ़ी और कुछ स्नैक्स बना लती हूँ, फिर तुम काम करते रहना, मैं तुम्हारे कमरे में बैठ जाउंगी'
आदित्य जब से आया था तू उसने अपनी माँ को ध्यान से नहीं देखा था, उसकी बात सुनकर आदित्य को भी लगा की कॉफ़ी मिल जाये तू अच्छा होगा, उसने अपनी माँ की तरफ ध्यान से देखा की उसने जो निघ्त्य पहनी हुई थी उसमे से संध्या की चूचियों का बड़ा हिस्सा उजागर हो रहा ष्ठा और उससे देखते hi आदित्य के दिल में हलचल मचने लगी और उसने अपनी माँ की बात मानते हुए कहा 'ठीक है जैसा आपको ठीक लगे' और आदित्य अपने कमरे में आ गया.
आदित्य जब अपने कमरे में आया तू उसके दिमाग़ में अपनी माँ की चूचियां आ गयी. वो चूचियां आदित्य को इतनी अच्छी लगती थी की वो उनको देखकर सब भूल जाता था. उससे अपनी माँ पर गुस्सा तू आया हुआ था लेकिन इन चूचियों के दर्शन करके वो गुस्सा माँ की तरह पिघलने लगा था और सोच रहा था की कोई बात नहीं चाहे वो उसकी माँ है लेकिन बनना तू गर्लफ्रेंड hi चाहती है न और धीरे धीरे वो उसके हिसाब से भी चलने लगेगी. उसको अगर थोड़ा वक़्त दिया जाये तू उसके दिमाग़ से माँ हैट जाएगी और गर्लफ्रेंड उस माँ का स्थान ले लेगी. आदित्य तू अपनी माँ का दीवाना हो hi चूका था, इसलिए वो उससे गुस्सा होते हुए भी कुछ नहीं कहता था. अब उसका मन काम पर नहीं लग रहा था. उसके काम करने की ले भांग हो चुकी थी, अब तू उससे अपनी माँ hi माँ दिखाई दे रही थी और उसका मन कर रहा था की सब कुछ छोड़ कर किचन में जाये और माँ को पकड़ ले, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया और दिखने के लिए लैपटॉप ों कर के बैठ गया, लेकिन मन में अपनी माँ की चूचियां घूम रही थी और वो ख्यालों में hi उनसे खेल रहा था.
उधर संध्या आदित्य के जाने के बाद बाथरूम में गयी और सबसे पहले अपनी पैंटी उतारकर अच्छे से अपनी योनि को साफ़ किया और नै पैंटी पहन ली. फिर उसने अपने आप को फ्रेश किया और फेस वाश करके अपने आप को थोड़ा ठीक ठाक किया और शीशे में अपने आप को निहारने के बाद वो किचन में चली गयी. किचन में उसने कॉफ़ी बनाने के लिए गैस पर एक बर्नर पर बर्तन रखा और दूसरे बर्नर पर सैंडविच बनाने लगी, लेकिन उसका धयान तू आदित्य में लगा हुआ था. किसी तरह सैंडविच बनाने के बाद उसने जैसे hi कॉफ़ी का बर्तन उठाने लगी तू बेख्याली में उसका हाथ हैंडल की बजाये बर्तन पर लग गया जिससे उसका हाथ जल गया और वो जोर से चीखी.
आदित्य जो अपनी माँ के ख्यालों में खोया हुआ था चीख सुनकर हड़बड़ा गया और किचन की तरफ भगा तू उसने देखा की उसकी माँ ने एक हाथ से दूसरे हाथ को पकड़ रखा है और वो जोर जोर से सिसक रही थी तू आदित्य ने पूछा की क्या हु तू उसने सिसकते हुए बताया की 'जल गया है.'
आदित्य जल्दी से उससे पकड़ कर पानी के नल के पास ले गया और नल चला कर उसके नीचे अपनी माँ का जले हुए हाथ को कर दिया. पानी के नीचे हाथ रखने से संध्या को थोड़ा आराम मिल रहा था. आदित्य संध्या के बिलकुल पीछे खड़ा था जिससे दोनों के शरीर आपस में मिले हुए थे. आदित्य उसके शरीर से उठाने वाली गंध से उत्तेजित होने लगा और उसका लिंग अपनी औकात में आने लगा. उससे लगा की उसके लिंग का एहसास उसकी माँ को न हो जाये इसलिए वो वंहा से थोड़ा पीछे हो गया.
आदित्य ने एक बर्तन में पानी भरा और उसमे आइस कुबेस दाल दिए और फिर उसमे संध्या के जले हुए हाथ को दाल दिया. संध्या को इस ठन्डे पानी में जयादा आराम मिलने लगा तू आदित्य उस बर्तन को उठाकर संध्या को साथ लेकर अपने रूम पर ले आया और चेयर पर बैठा दिया और बर्तन को टेबल पर रख दिया जिसमे उसका हाथ था. हाथ को बर्तन में डेल रखने के लिए उससे आगे झुकना पद रहा था जिससे सामने बैठे आदित्य को उसकी चूचियों की पूरी झलक मिल रही थी. चूचियों के बीच की घाटी भी पूरी दिखाई पद रही थी और ऊपर से संध्या ने ब्रा भी नहीं पहनी हुई थी. आदित्य तू इस नज़ारे को देख कर बहुत जयादा उत्तेजित हो रहा था. संध्या अगर थोड़ा सा और झुकती तू आदित्य को उसकी चूचियों के निप्पल भी दिखाई दे जाते. आदित्य जो पहले सी हो उत्तेजित था, इस नज़ारे को देखकर उसकी उत्तेजना बहुत जयादा बढ़ गयी थी और उसका रक्त िकखाथा होकर उसके लिंग की तरफ जाने लगा जिससे उसके लिंग का तनाव काफी जयादा बढ़ गया था. आदित्य ने इस वक़्त एक ट्रॉउज़र पहना हुआ था जिसमे उसके लिंग का तनाव साफ़ साफ़ देखा जा सकता था. उसके लिंग का तनाव इसलिए भी कुछ जयादा नज़र आ रहा था क्योँकि उसने ट्रॉउज़र के नीचे अंडरवियर नहीं पहना हुआ था. सिर्फ गनीमत यह थी की उसका ट्रॉउज़र डार्क कलर का था जिसकी वजह से उस पर नज़र कुछ काम पड़ती है, लेकिन तनाव को छुपाना आसान नहीं था.
आदित्य की नज़र बार बार चाहे अनचाहे अपनी माँ की चूचियों पर चली जाती थी और वो उनकी सुंदरता और सुडौलता में जैसे खो सा जाता था. आदित्य इसमें खोया हुआ था की संध्या ने उसका धयान भंग करते हुए कहा 'किचन में कॉफ़ी और सैंडविच तैयार हैं, प्लीज ले आओ न'
आदित्य उसकी बात सुनकर वंहा से उठा और किचन में आकर कॉफ़ी और सैंडविच को ट्रे में रखने लगा लेकिन रूम में जाने से पहले वो अपने लिंग को नियंत्रण में रखना छह रहा था. लेकिन लिंग कान्हा मैंने वाला था वो तू सब दीवारे तोड़ कर आज़ाद होना छह रहा था. आदित्य थोड़ी देर वंहा रुका रहा, जब उसने देखा की उसका लिंग अभी नहीं मानेगा तू वो ट्रे लेकर कमरे में आ गया और टेबल पर रख दी.
आदित्य ने कॉफ़ी का एक मग संध्या के सामने रख दिया और दूसरा अपने सामने और एक सैंडविच उठाकर संध्या के मुंह के पास ले गया तू वो आदित्य को बड़े प्यार से देखने लगी और सैंडविच में एक बाईट लिया और उसके हाथ से सैंडविच अपने बांये हाथ में लेते हुए संध्या ने कहा 'मैं ले लुंगी' तू आदित्य ने कहा 'मैं खिला देता हूँ'
संध्या 'मुझे प्लीज कफ पीला दो, सैंडविच तू मैं खुद hi खा लुंगी'
आदित्य 'प्लीज की जरुरत नहीं है, मैं कॉफ़ी पीला देता हूँ'
आदित्य ने कॉफ़ी का मग उठाकर अपनी माँ की तरफ किया तू वो थोड़ा आगे हुई तू उसके गले में से चूचियों को और जयादा गहराई तक देखा जा सकता था. आदित्य तू इस नज़ारे को देखकर hi पागल सा होने लगा, लेकिन उसने अपने ऊपर नियंत्रण रखते हुए वंहा से नज़रे हटाई और संध्या को कॉफ़ी देने के लिए मग को उसके होठों की तरफ ले जाने लगा तू उसने देखा की संध्या के बालों की लत उसके चेहरे पर आ गयी है. आदित्य ने मग को वापिस टेबल पर रख दिया और थोड़ा सा खड़ा होकर उसके चेहरे पर आयी बालों की लत को पकड़ कर उसके सर के पीछे कर दिया, लेकिन ऐसा करने में आदित्य की नज़रों ने संध्या के उरोजों को काफी गहराई तक देख लिया और वो उन्हें देखकर पागल हुआ जा रहा था.
आदित्य ने अपने ऊपर नियंत्रण रखते हुए दुबारा मग उठाकर उससे कॉफ़ी देने लगा तू वो फिर से झुकी और उसकी चूचियों का नज़ारा आदित्य को फिर से परेशान करने लगा लेकिन उसने मग को आगे बढ़ाया तू बालों की लत फिर से संध्या के चेहरे पर आ गयी तू आदित्य ने फिर से मग नीचे रखकर उसके चेहरे से बालों की लत हटा दी. इस बार जब आदित्य लत हटा रहा था तू उसका अंगूठा संध्या के होठों को चुकार रगड़ खता हुआ निकल गया, लेकिन आदित्य के अंगूठे के स्पर्श ने संध्या के दिल में घंटिया बजा दी. संध्या जो अभी तक अपने हाथ की वजह से कुछ सोच नहीं पा रही थी, लेकिन जैसे hi उससे हाथ की जलन से थोड़ा आराम मिला तू वो फिर से आदित्य के बारे में सोचकर मन hi मन प्रसन्न हो रही थी और ऊपर से आदित्य के अंगूठे का उसके होठों पर स्पर्श उसकी भावनाओं को फिर से आग दिखा गया. अब संध्या फिर से आदित्य में अपना बॉयफ्रेंड ढूंढने लगी. संध्या आदित्य को ऊपर से नीचे तक निहारने लगी और जैसे hi उसकी नज़र पेट के नीचे गयी तू वंहा काफी बड़ा उभर देखकर उसके दिल में हलचल मच गयी. वो सोचने लगी की ये तू काफी बड़ा है. ये सोचते hi उसकी साँसें तेज़ हो गयी.
आदित्य जब अपनी माँ की लत हटा कर उससे कॉफ़ी का मग उठाकर उससे देने लगा तू उसके मुंह के पास ले जाने लगा तू संध्या का चेहरा ऊपर से नीचे हो रहा था और आदित्य ने कॉफ़ी के मग को पीछे ले लिया और संध्या की नज़र का पीछा करने लगा तू उसने पाया की उसकी माँ की नज़र उसके पाजामे के उभर पर आकर अटक गयी है तू आदित्य को शर्म आने लगी लेकिन साथ hi उससे एक अलग तरह की अनुभूति भी होने लगी.
आदित्य ने अपनी झेंप मिटने के लिए कॉफ़ी का मग लेकर संध्या के पीछे चला गया और पीछे से मग को उसके दांयी तरफ से आगे करके उसके मुंह की तरफ ले गया तू संध्या ने एक सिप लिया लेकिन पीछे से आदित्य के झुकने से उसका लिंग संध्या की कमर पर कुर्सी की लकड़ियों के गैप से टच करने लगा तू उससे बहुत hi अजीब सी फीलिंग होने लगी. वो उस एहसास को बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी तू उसने उससे बचने के लिए अपनी कमर को कुर्सी से थोड़ा आगे किया और फिर अपने बांयी तरफ झुक गयी. ऐसा करने से कॉफ़ी के मग को झटका लगा और उसमे से कुछ कॉफ़ी चालक कर संध्या के दांये कंधे और बाजु पर भी गिर गयी तू वो थोड़ा सा चिल्लाई तू आदित्य ने देखा की संध्या अपने बांये हाथ से निघ्त्य के स्ट्राप को दांये कंधे से नीचे खिसका कर उस जगह पर मलने लगी जंहा कॉफ़ी गिरी थी.
आदित्य ने जल्दी से आगे आकर कॉफ़ी का मग को टेबल पर रखा और जल्दी से पानी लेकर उस जगह पर लगाने लगा जंहा कॉफ़ी गिरी थी. कॉफ़ी गरम तो थी लेकिन जयादा गरम नहीं थी, इसलिए वंहा पर स्किन थोड़ी सी लाल हो गयी थी तू ठंडा पानी लगाने से संध्या को आराम मिलाने लगा. आदित्य ने बेख्याली में संध्या के कंधे और बाजु पर पानी तू लगा दिया, लेकिन अब उसकी नज़र सामने का दृश्य देखकर उसको एकदम उत्तेजित कर गयी.
संध्या के निघ्त्य का स्ट्राप कंधे से हटाने की वजह से वो बाजु पर झूल गया और ब्रा न पहनी होने की वजह से संध्या का आधे से जयादा दांयी चुकी नग्न हो चुकी थी और इस दृश्ये को देखकर आदित्य का बुरा हाल होने लगा. वो बार बार अपनी माँ के सुडोल उरोज के दर्शन करता रहा और जिस जगह पर वो पानी लगा राजा था, बेख्याली में वंहा उत्तेजना के वशीभूत होकर दबाने से संध्या के मुंह से हलकी सी चीख भी निकली तू आदित्य चौंक कर संध्या के चेहरे को देखने लगा तू संध्या को शर्म आने लगी और उसने अपने चेहरे को झुका लिया और उसकी नज़र उरोजों पर से हटी हुई निघ्त्य पर पड़ी तू उसकी शर्म और जयादा बढ़ गयी.
संध्या ने अपने बांये हाथ से निघ्त्य को ठीक करना चाहा तू कपडे की छुअन से वंहा जलन होने लगी तू उसके मुंह से एक सिसकी निकल गयी, जिससे सुनकर आदित्य की नज़र संध्या के चेहरे पर पड़ी और दोनों की आँखें चार हुई तू दोनों की आँखों में शर्म उत्तर आयी थी. आदित्य वंहा से उठकर किचन में गया और कुछ आइस कुबेस एक बाउल में डालकर आ गया और एक आइस क्यूब उठाकर उसने अपनी माँ को देते हुए कहा 'इससे आप जलन वाली जगह पर लगा लो तू आराम मिलेगा'
संध्या 'तुम लगा दो न '
आदित्य 'नहीं, आप hi लगा लो, मैं लगाऊंगा तू फिर आप बुरा मान जाओगी'
संध्या 'तुम मेरी हेल्प करोगे तू मैं क्योँ बुरा मानूंगी'
आदित्य 'मेरा हाथ गलती से कहीं इधर उधर लग गया तू आप माँ बनकर मुझसे गुस्सा हो जाओगी'
संध्या 'मैं माँ नहीं, बल्कि गर्लफ्रेंड हूँ'
आदित्य 'Aap.Mom जयादा जो और गर्लफ्रेंड काम'
संध्या 'मैं माँ नहीं, सिर्फ और सिर्फ गर्लफ्रेंड हूँ'
आदित्य 'आप कुछ भी बोल देती हो, लेकिन असल में आप सिर्फ और सिर्फ माँ हो' ये कहकर आदित्य आइस वाला बाउल उसकी तरफ करके वंहा से जाने लगा तू संध्या को झटका लगा और वो कड़ी हो गयी और दौड़कर आदित्य को पीछे से अपने बांये हाथ से पकड़ कर जकड लिया.
आदित्य को अपनी पीठ पर अपनी माँ की चूचियां बहुत अच्छे से फील हो रही थी और चूचियां तो छोडो, उससे अपनी माँ के निप्पल तक भी महसूस हो रहे थे. आदित्य जो पहले से hi उत्तेजित था और उसका लिंग अपनी औकात में आ गया था और अब उसकी माँ का इस तरह उससे पकड़ने से तू उसका उन्माद बढ़ता जा रहा था और उसका लिंग अब झटके मरने लगा था, लेकिन उसने अपने उम्मेद को काबू में रखते हुए बिना पालते 'माँ आप ये क्या कर रही हो, आप प्लीज चेयर पर बैठ जाओ और अपने हाथ को ठन्डे पानी में दाल लो नहीं तू आपके हाथ में जलन बढ़ जाएगी और चले हो जायेंगे'
संध्या ने आदित्य की कमर को छोड़ना तू दूर और जयादा कास लिया और सुबकते हुए 'तुम्हे तू मेरी परवाह hi कान्हा है. तुम्हारी गर्लफ्रेंड का हाथ ख़राब होता है तू हो जाने दो, तुम्हे क्या पड़ी है, तुम्हे तू कोई और गर्लफ्रेंड मिल hi जाएगी और तुम यही तू चाहते हो किसी तरह तुम्हे मुझसे छुटकारा मिल जाये'