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Episode 27बी,
वही मैं, अब उसकी आँखों में देखते हुए उसके नंगे जिस्म पर लेट जाता हु और मेरा नग्गा कला एनाकोंडा अब काम्य की मोती मोती जांघो के बीच जैसे फिट हो जाता है वैसे hi उसकी गर्मी का एहसास होते hi काम्य, अपनी बड़ी बड़ी आंखे करके मुझे देखने लगती है जैसे सोच रही हो की राधे का लौड़ा कब नग्गा हुआ? उसे कैसे पता नहीं चला? लेकिन अब उसके लिए देर हो चुकी थी क्युकी नग्गा शाक्त लौड़ा उसके जंगो के बिच पहुंच चूका था और सायद काम्य भी अपने छूट की आग से विवस हो चुकी थी, वही मैं, तेरी जांघो के बीच में काफी गर्मी है मेरी जान, काम्य, को यकीन नहीं हो रहा था इस वक़्त उसकी दोनों टैंगो के बीच में एक खूंखार नग्गा लौड़ा फसा हुआ है. इधर मैं, उसकी आँखों में देखते हुए अपने नग्गे लुंड को उसकी जांघो के बीच में घुसाने लगता हु.
उधर काम्य, मेरे गरम लोहे जैसे शाक्त लुंड अपनी जांघो से होते हुए छूट के मुहाने पर आ जाता है इसे फील करते hi उसकी सिसकारियां अब बढ़ने लगती hai..Aur अपनी जंघे तित कर देती है जिससे मेरा लौड़ा फिसल कर दूसरी तरफ चला जाता है, मैं, थोड़ा गुस्से में काम्य की तरफ देखता हु तो पाटा हु? की काम्य के चेहरे पर हलकी हंसी थी जिसे देख कर अब्ब मैं समझ जाता हु की वह मुझे परेशां करना छह रही है लेकिन मैं, तो महा कमीना था इस लिए उसके दोनों टैंगो को फैला देता हूँ और अपना लौड़े को पकड़ कर उसकी छूट के ऊपर रख कर धीरे धीरे पुश करने लगता हूँ. उधर काम्य, मेरे भरी भरकम लौड़ा अपने बुर के ऊपर पा कर उसे अहसास कुछ हुआ और अपनी सर को उठा कर एक बार मेरे लुंड को देखि और झट से अपनी नज़र बंद करके मन hi मन में (हे भगवन इतना
बड़ा ुर मोटा किसी का कैसे हो सकता है और कितना कला है जैसे कोई मोती सी कोयला हो, ये कैसे मेरे अंदर जा सकता है क्या माय रोकने के लिए बोलू, लेकिन मेरे इतना रोकने के बाद भी यह अब तक मेरे साथ सब कुछ कर रहा है तो भला अब वह क्या रुकेगा ), वही काम्य, ने बस अपने पति का hi बस लुंड देखि थी जो राधे के लौड़े से चार गुना छोटा था यानि 3 से 4 इंच का था, लेकिन राधे का लौड़ा देखते hi जैसे उसकी आंखे फटी की फटी रह गई थी, डर और हैरानी दोनों वजह से, काम्य मुझे अपना लुंड अपनी छूट पर रगड़ता देख.. वो बस मेरे लुंड को देख जा रही थी जो कभी भी उसकी छूट को फाड़ते हुए अंदर जाने वाला था, इधर मैं, भी बेचैन हो रहा था उसकी फूली हुई छूट के अंदर करने को लेकिन मैं जल्दबाज़ी में नहीं था, इस लिए माय बस उसके फूली हुई छूट पर अपना लुंड अच्छे से
रगड़ रगड़ कर उसको और ज्यादा गर्म करने में लगा हुआ था मेरे लिए ये सिर्फ मजा था लेकिन काम्य की हालत ख़राब हो चुकी थी. उसका दिमाग ठीक से काम नहीं कर रहा था. वो अपनी आँखे बंद कर के बस अपनी गांड हलके से उठा रही थी, ताकि मेरा लुंड उसकी छूट में घुस सके. वो नशे में थी इस वक़्त और मैं उसकी हालत देख अपना लुंड और जोर जोर से उसकी फैंको के बिच में अपना गुलाबी सूपड़ा घिसते हुए मेरी जान.. घुसा दू अपना लौड़ा?, काम्य मेरे घ्हिसने और हाँथ से छूट सहलाने की वजह से तड़प उठी और उसके मुँह आह्ह्ह्हह्ह निकल गई उसको अभी कोई होश नहीं था, वो बस अपने आँखे बंद किये अपनी छूट पर मेरा गर्म लुंड महसूस किये जा रही थी, (आखिर क्यों न उसकी हालत ख़राब हो कई सालो बाद उसके नग्गे छूट पर किसी का लुंड टच हुआ था वह भी किसी सैतान जितना बड़ा और कही ज्यादा मोटा लुंड जिसे..
देख कर hi दरी हुई थी काम्य, लेकिन उसके जलते छूट के आगे वह डर भी जैसे गायब हो गया था, वो अब किसी भी हाल में राधे का लुंड अंदर लेना चाहती थी), इधर मैं, अब और बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था काम्य की फूली हुई छूट की गर्मी से. इस लिए माय अपना लुंड घुसाने के लिए अब जोर लगता हु जिससे काम्य के छूट म अब्ब मेरा 5 इंच का मोटा गुलाबी सूपड़ा जिसकी खाल पूरी तरह से पीछे हो गई थी वो काम्य की फैंको को धीरे धीरे फैलते हुए अंदर जाने लगता है उधर मेरा ऐसा करते hi काम्य अपनी दांतो से होंठो को हलके से काटते हुए.. आह्हः.. नहीं आईये.. मा.. ऊऊफफफफफफफ.. मर.. गई.. उम्म्म्म.. करने लगती उसकी दर्द भरी आह्हः सुन के मेरा लौड़ा कुछ ज्यादा hi शाक्त हो जाता है, वही आज कई सालो बाद काम्य के सेक्सी छूट के अंदर कोई लौड़ा जा रहा था, जिसकी वजह से उस को बेचैनी, डर और
दर्द सब कुछ महसूस हुए जा रहा था, साथ hi काम्य को ऐसा लग रहा था जैसे वह कुमारी लड़की हो और उसकी सुहागरात हो रही है, वैसे hi वह अपने छूट के अंदर दर्द महसूस करे जा रही थी, इधर मेरा मोटा सूपड़ा काम्य की इतनी तित छूट होने की वजह फिसल जाता है ये होते hi काम्य, जल्दी से अब्ब अपनी आंख की पलके खोल दी, इधर मैं, भी उसकी और देखा अब हम एक दूसरे को देखते है और वही मैं उसकी सिसकारी सुनकर मुस्कुरा देता हु ुर वो शर्म से दूसरी तरफ देखती है, इधर मैं, बिना वक़्त गवाए अब्ब माय उसके दोनों टंगे हवा में उठा दिया और अपने लुंड पर ढेर सारा थूक निकल कर गुलाबी सुपडे पर मलने लगता हु और फिर काम्य की तरफ देखा तो उसकी नज़र मेरे लौड़े पर hi अटकी हुई थी इधर मैं, उसे देख के क्यों मेरी जान मेरा कला कोबरा तुझे पसंद नहीं आया क्या?
जो ऐसे घर रही है मेरे ऐसा कहते hi काम्य, जो लौड़े को घर रही थी वो शर्मा कर अपना मुँह फेर कर आंखे बंद कर लेती है और मेरे मुँह पर सैतानी स्माइल आ जाती है और उसे देखते हुए.. लगता है मेरी गर्लफ्रेंड को ये कला कोबरा पसंद आ गया है? ये कहते हुए मैं, थोड़ा झुक कर अपने लौड़े को पकड़ कर उसकी छूट की फैंको को फैला कर वह रख देता हूँ. उसकी फूली हुई छूट के फैंको के बिच लुंड रख कर माय उसकी छूट के क्लाइटोरिस को अपनी दो ऊँगली में पकड़ कर घिसने लगता हु. इस हमले से काम्य की आँखे नशीली हो जाती है और वो अब मेरी आँखों में देखने लगती है, उसकी आँखों में हवस साफ़ दिख रही थी, वो चाहती थी की अब उसकी छूट में मेरा लुंड जाए और वो अनजाने में अपनी कमर उठा के अपनी छूट मेरे लुंड पर दबाने लगती हु उसके ऐसा करने से मेरे लुंड का सूपड़ा अब उसकी छूट की..
फैंको को हलके से चीरता हुआ अंदर जाता है, उधर काम्य की सासे अब बढ़ चुकी थी साथ hi उसकी हवस आसमान छू रही थी, लेकिन मैं अगले hi पल अपने काळा लौड़े के गुलाबी सुपडे को बहार कर देता हूँ. उधर काम्य, के ऊपर तो जैसे अब्ब जुल्म हुए जा रहा था? वह पल पल लुंड अपने फूली हुई छूट के अंदर लेने के लिए तड़प रही थी? लेकिन राधे महा कमीना था, वह तड़पने का एक पल भी नहीं छोड़ रहा था. उधर काम्य, कोई रण्डी तो थी नहीं की वह कहे की राधे अपना लौड़े को मेरी छूट में पेल कर मुझे किसी रण्डी की तरह छोड़ो और मेरे ऊपर कोई रहम मत करो. इधर मैं, कुछ देर क्लाइटोरिस को सहलाने के बाद मैं अपने लौड़े को पकड़ कर फिर उसकी छूट से लेकर गांड की भूरी छेद तक घिसता हु मेरे ऐसा करते hi काम्य, एक बड़ी सिसकारी लेती है आह्ह्ह्ह आईईए.. आईईए.. ुंहःहः.. सशह्ह्ह.. की.
वही मैं, अब उसकी आँखों में देखते हुए उसके नंगे जिस्म पर लेट जाता हु और मेरा नग्गा कला एनाकोंडा अब काम्य की मोती मोती जांघो के बीच जैसे फिट हो जाता है वैसे hi उसकी गर्मी का एहसास होते hi काम्य, अपनी बड़ी बड़ी आंखे करके मुझे देखने लगती है जैसे सोच रही हो की राधे का लौड़ा कब नग्गा हुआ? उसे कैसे पता नहीं चला? लेकिन अब उसके लिए देर हो चुकी थी क्युकी नग्गा शाक्त लौड़ा उसके जंगो के बिच पहुंच चूका था और सायद काम्य भी अपने छूट की आग से विवस हो चुकी थी, वही मैं, तेरी जांघो के बीच में काफी गर्मी है मेरी जान, काम्य, को यकीन नहीं हो रहा था इस वक़्त उसकी दोनों टैंगो के बीच में एक खूंखार नग्गा लौड़ा फसा हुआ है. इधर मैं, उसकी आँखों में देखते हुए अपने नग्गे लुंड को उसकी जांघो के बीच में घुसाने लगता हु.
उधर काम्य, मेरे गरम लोहे जैसे शाक्त लुंड अपनी जांघो से होते हुए छूट के मुहाने पर आ जाता है इसे फील करते hi उसकी सिसकारियां अब बढ़ने लगती hai..Aur अपनी जंघे तित कर देती है जिससे मेरा लौड़ा फिसल कर दूसरी तरफ चला जाता है, मैं, थोड़ा गुस्से में काम्य की तरफ देखता हु तो पाटा हु? की काम्य के चेहरे पर हलकी हंसी थी जिसे देख कर अब्ब मैं समझ जाता हु की वह मुझे परेशां करना छह रही है लेकिन मैं, तो महा कमीना था इस लिए उसके दोनों टैंगो को फैला देता हूँ और अपना लौड़े को पकड़ कर उसकी छूट के ऊपर रख कर धीरे धीरे पुश करने लगता हूँ. उधर काम्य, मेरे भरी भरकम लौड़ा अपने बुर के ऊपर पा कर उसे अहसास कुछ हुआ और अपनी सर को उठा कर एक बार मेरे लुंड को देखि और झट से अपनी नज़र बंद करके मन hi मन में (हे भगवन इतना
बड़ा ुर मोटा किसी का कैसे हो सकता है और कितना कला है जैसे कोई मोती सी कोयला हो, ये कैसे मेरे अंदर जा सकता है क्या माय रोकने के लिए बोलू, लेकिन मेरे इतना रोकने के बाद भी यह अब तक मेरे साथ सब कुछ कर रहा है तो भला अब वह क्या रुकेगा ), वही काम्य, ने बस अपने पति का hi बस लुंड देखि थी जो राधे के लौड़े से चार गुना छोटा था यानि 3 से 4 इंच का था, लेकिन राधे का लौड़ा देखते hi जैसे उसकी आंखे फटी की फटी रह गई थी, डर और हैरानी दोनों वजह से, काम्य मुझे अपना लुंड अपनी छूट पर रगड़ता देख.. वो बस मेरे लुंड को देख जा रही थी जो कभी भी उसकी छूट को फाड़ते हुए अंदर जाने वाला था, इधर मैं, भी बेचैन हो रहा था उसकी फूली हुई छूट के अंदर करने को लेकिन मैं जल्दबाज़ी में नहीं था, इस लिए माय बस उसके फूली हुई छूट पर अपना लुंड अच्छे से
रगड़ रगड़ कर उसको और ज्यादा गर्म करने में लगा हुआ था मेरे लिए ये सिर्फ मजा था लेकिन काम्य की हालत ख़राब हो चुकी थी. उसका दिमाग ठीक से काम नहीं कर रहा था. वो अपनी आँखे बंद कर के बस अपनी गांड हलके से उठा रही थी, ताकि मेरा लुंड उसकी छूट में घुस सके. वो नशे में थी इस वक़्त और मैं उसकी हालत देख अपना लुंड और जोर जोर से उसकी फैंको के बिच में अपना गुलाबी सूपड़ा घिसते हुए मेरी जान.. घुसा दू अपना लौड़ा?, काम्य मेरे घ्हिसने और हाँथ से छूट सहलाने की वजह से तड़प उठी और उसके मुँह आह्ह्ह्हह्ह निकल गई उसको अभी कोई होश नहीं था, वो बस अपने आँखे बंद किये अपनी छूट पर मेरा गर्म लुंड महसूस किये जा रही थी, (आखिर क्यों न उसकी हालत ख़राब हो कई सालो बाद उसके नग्गे छूट पर किसी का लुंड टच हुआ था वह भी किसी सैतान जितना बड़ा और कही ज्यादा मोटा लुंड जिसे..
देख कर hi दरी हुई थी काम्य, लेकिन उसके जलते छूट के आगे वह डर भी जैसे गायब हो गया था, वो अब किसी भी हाल में राधे का लुंड अंदर लेना चाहती थी), इधर मैं, अब और बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था काम्य की फूली हुई छूट की गर्मी से. इस लिए माय अपना लुंड घुसाने के लिए अब जोर लगता हु जिससे काम्य के छूट म अब्ब मेरा 5 इंच का मोटा गुलाबी सूपड़ा जिसकी खाल पूरी तरह से पीछे हो गई थी वो काम्य की फैंको को धीरे धीरे फैलते हुए अंदर जाने लगता है उधर मेरा ऐसा करते hi काम्य अपनी दांतो से होंठो को हलके से काटते हुए.. आह्हः.. नहीं आईये.. मा.. ऊऊफफफफफफफ.. मर.. गई.. उम्म्म्म.. करने लगती उसकी दर्द भरी आह्हः सुन के मेरा लौड़ा कुछ ज्यादा hi शाक्त हो जाता है, वही आज कई सालो बाद काम्य के सेक्सी छूट के अंदर कोई लौड़ा जा रहा था, जिसकी वजह से उस को बेचैनी, डर और
दर्द सब कुछ महसूस हुए जा रहा था, साथ hi काम्य को ऐसा लग रहा था जैसे वह कुमारी लड़की हो और उसकी सुहागरात हो रही है, वैसे hi वह अपने छूट के अंदर दर्द महसूस करे जा रही थी, इधर मेरा मोटा सूपड़ा काम्य की इतनी तित छूट होने की वजह फिसल जाता है ये होते hi काम्य, जल्दी से अब्ब अपनी आंख की पलके खोल दी, इधर मैं, भी उसकी और देखा अब हम एक दूसरे को देखते है और वही मैं उसकी सिसकारी सुनकर मुस्कुरा देता हु ुर वो शर्म से दूसरी तरफ देखती है, इधर मैं, बिना वक़्त गवाए अब्ब माय उसके दोनों टंगे हवा में उठा दिया और अपने लुंड पर ढेर सारा थूक निकल कर गुलाबी सुपडे पर मलने लगता हु और फिर काम्य की तरफ देखा तो उसकी नज़र मेरे लौड़े पर hi अटकी हुई थी इधर मैं, उसे देख के क्यों मेरी जान मेरा कला कोबरा तुझे पसंद नहीं आया क्या?
जो ऐसे घर रही है मेरे ऐसा कहते hi काम्य, जो लौड़े को घर रही थी वो शर्मा कर अपना मुँह फेर कर आंखे बंद कर लेती है और मेरे मुँह पर सैतानी स्माइल आ जाती है और उसे देखते हुए.. लगता है मेरी गर्लफ्रेंड को ये कला कोबरा पसंद आ गया है? ये कहते हुए मैं, थोड़ा झुक कर अपने लौड़े को पकड़ कर उसकी छूट की फैंको को फैला कर वह रख देता हूँ. उसकी फूली हुई छूट के फैंको के बिच लुंड रख कर माय उसकी छूट के क्लाइटोरिस को अपनी दो ऊँगली में पकड़ कर घिसने लगता हु. इस हमले से काम्य की आँखे नशीली हो जाती है और वो अब मेरी आँखों में देखने लगती है, उसकी आँखों में हवस साफ़ दिख रही थी, वो चाहती थी की अब उसकी छूट में मेरा लुंड जाए और वो अनजाने में अपनी कमर उठा के अपनी छूट मेरे लुंड पर दबाने लगती हु उसके ऐसा करने से मेरे लुंड का सूपड़ा अब उसकी छूट की..
फैंको को हलके से चीरता हुआ अंदर जाता है, उधर काम्य की सासे अब बढ़ चुकी थी साथ hi उसकी हवस आसमान छू रही थी, लेकिन मैं अगले hi पल अपने काळा लौड़े के गुलाबी सुपडे को बहार कर देता हूँ. उधर काम्य, के ऊपर तो जैसे अब्ब जुल्म हुए जा रहा था? वह पल पल लुंड अपने फूली हुई छूट के अंदर लेने के लिए तड़प रही थी? लेकिन राधे महा कमीना था, वह तड़पने का एक पल भी नहीं छोड़ रहा था. उधर काम्य, कोई रण्डी तो थी नहीं की वह कहे की राधे अपना लौड़े को मेरी छूट में पेल कर मुझे किसी रण्डी की तरह छोड़ो और मेरे ऊपर कोई रहम मत करो. इधर मैं, कुछ देर क्लाइटोरिस को सहलाने के बाद मैं अपने लौड़े को पकड़ कर फिर उसकी छूट से लेकर गांड की भूरी छेद तक घिसता हु मेरे ऐसा करते hi काम्य, एक बड़ी सिसकारी लेती है आह्ह्ह्ह आईईए.. आईईए.. ुंहःहः.. सशह्ह्ह.. की.