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वही आरती अपनी ब्रा की हुक निकलने के लिए अपने हाँथ पीछे ले जाने लगी लेकिन तभी वो रुक जाती है और उसे ऐसा करते देख मैं, अरे आरती बहु तू रुक क्यों गई जल्दी कर मेरे पास पूरी रात नहीं है समझी?, (माय तो उसे ऐसे कह रहा था जैसे मेरी ट्रैन छूट रही हो?), वही आरती फुस फुसते हुए धीरे से बोली मुझे शर्म आ रही है एक काम करो अपना सर घुमा लूओ?, मैं, अरे जब सर घुमा लूंगा तो देखूंगा कैसे तेरे गोर चुके कोऊ?, आरती ये सुनते वो और ज्यादा शर्मा गई ुर धीरे से, पहले आप अपना सर घुमाओ जब माय कहूँगी देखने को तब आप अपना सर मेरी तरफ घूमना वर्ण मैं ये नहीं खोलने वाली ये कह के वो अपना सर निचे करके अपने पेअर की उंगलियों से खेलने लगी, इधर मैं, मान में (साली बहुत नाटक कर रही है एक बार मेरे लुंड के निचे आ गई उसके बाद तुझे रोड पे भी नग्गी..
होने को कहूंगा तो तू वह भी तुझे नग्गी होना पड़ेगा?), ये सोच के बाद मैं, ठीक है बहु ये बोल के माय घूम जाता हु अब मेरा पीठ आरती की तरफ थी और मुँह देवल की साइड और वही देवल के बगल में सिंगर दान था जहा एक बड़ा सा मिरर था माय उसमे देख के मान hi मां में (वह उपरवाले अपने मेरी क्या किस्मत बनाई है भले hi मुझे कला कलूटा इंसान बना के धरती पे भेजा है लेकिन उसके साथ अपने मेरा विशाल लुंड दिया और उस लुंड के निचे पता नहीं अपने किसी किस को भेज रहे है इसके लिए आप का माय हमेशा शुक्र गुजर रही गए), वही मैं, ये सोच hi रहा था की तभी मुझे मिरर से पीछे कड़ी आरती जो एक बार मुझे देखि और ब्रा के हुक खोलने लगी इधर माइन्ज़ मिरर से ब्रा के हुक खोलता देख मेरा लुंड हर एक सेकंड में झटका देने लगा और मुझे सच में विश्वास..
नहीं हो रहा था की आरती मेरे सामने ऐसा कुछ कर रही थी आखिर ये मेरे म्हणत का फल था जो मुझे अपने आप पे गर्व था, इधर थोड़ी देर में मुझे उसके गोल गोल उसके गोर चुके दिखने वाला था, वही आरती, ब्रा के हुक खोलते हुए आपने बदन से पूरी तरह से शर्मा के पिघल चुकी थी ये सब उसे ऐसा रोमांच दे रहा था जो कभी उसको अपने शादी सुदा जिंदगी में महसूस नहीं हुआ था और तभी वोह अपनी ब्रा का हुक बस ढीला करके रुक जाती है शायद इस खेल को और गन्दा बनाने की इर्षा से वो ब्रा ढीला रख के hi आपने गोरा सा कामुक हाँथ अपने भरे हुए और कैसे हुए स्तन की गहरायी में दाल देती है, जिसे देख मुझे विश्वास नहीं होता की ये संस्कारी आरती ऐसा कुछ कर रही है ये सिर्फ देखने वाला hi महसूस कर सकता था जो मेरे सामने दिख रहा था उसके उँगलियों में भीचा हुआ खुद का hi स्तन..
गोर2 चमड़ी से हलके गुलाबी हो चूका था उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ देखने में कितना बड़ा सा महसूस हो रहा था जैसे कोई खरबूजा का फल जोह पक्क चूका हो और क्या चमड़ी थी उसके स्तनों की बास अब्ब कुछ सेकंड की देरी थी उसके बड़े बड़े चुके को बहार आने में मनो दोनों की सांसे अटक गयी हो दोनों की श्रम एक दूसरे से नजरे चुरा रही थी और दोनों की नजरे वही तिकी थी एक अपने बदन को खुला कर रही थी तो दूसरी नजर उस बदन को जलील करना छह रही थी और अगले हे पल आपने निप्पल पे रखे हाँथ आरती आपने एक बड़े चुके को आजाद कर देती है, लेकिन वो अपने मुँह से ये नहीं कह प् रही थी की चाचा घूम के देख लो मैने अपने गोर स्थान नग्गे कर दिए है वही अपने चुके नग्गे कर चुकी आरती को सोचता हुआ मिरर से देखते हुए धीरे से फुस फसाया..
अरे बहु क्या हुआ अभी तक नग्गे नहीं किये देख अब लेट हो रहा है जल्दी कर ये चढ़नी रात कैसे जल्दी2 बिताती जा रही है?, मेरी आवाज़ से आरती धीरे से फुस फुसते हुए मुझे शर्म आ रही है पापा जी माय कैसे आपको अपने नग्गे दिखा सकती हु आप मेरे पापा सामान ह कुछ तो शर्म करो, मैं, देख बहु मर्द और औरत का रिश्ता सिर्फ एक होता है वो तुम्हे माय थोड़ी देर पहले जब तेरे बदन के साथ छेद चढ़ कर रहा था तभी हम दोनों का रिश्ता एक नया जुड़ा है वो है प्यार का अब तू शर्माना छोड़ अब जल्दी से दिखा अपने मादक गोर गोर स्थान को?, (उसे क्या पता की माय उसकी साडी हरकत उसके रूम के मिरर से देख रहा था), मेरे समझने के बाद आरती, कुछ सोची और धीरी आवाज़ में पापा जी लो देख लो यह कह के वो शर्मा गई और अपने आंखे बंद कर ली,
होने को कहूंगा तो तू वह भी तुझे नग्गी होना पड़ेगा?), ये सोच के बाद मैं, ठीक है बहु ये बोल के माय घूम जाता हु अब मेरा पीठ आरती की तरफ थी और मुँह देवल की साइड और वही देवल के बगल में सिंगर दान था जहा एक बड़ा सा मिरर था माय उसमे देख के मान hi मां में (वह उपरवाले अपने मेरी क्या किस्मत बनाई है भले hi मुझे कला कलूटा इंसान बना के धरती पे भेजा है लेकिन उसके साथ अपने मेरा विशाल लुंड दिया और उस लुंड के निचे पता नहीं अपने किसी किस को भेज रहे है इसके लिए आप का माय हमेशा शुक्र गुजर रही गए), वही मैं, ये सोच hi रहा था की तभी मुझे मिरर से पीछे कड़ी आरती जो एक बार मुझे देखि और ब्रा के हुक खोलने लगी इधर माइन्ज़ मिरर से ब्रा के हुक खोलता देख मेरा लुंड हर एक सेकंड में झटका देने लगा और मुझे सच में विश्वास..
नहीं हो रहा था की आरती मेरे सामने ऐसा कुछ कर रही थी आखिर ये मेरे म्हणत का फल था जो मुझे अपने आप पे गर्व था, इधर थोड़ी देर में मुझे उसके गोल गोल उसके गोर चुके दिखने वाला था, वही आरती, ब्रा के हुक खोलते हुए आपने बदन से पूरी तरह से शर्मा के पिघल चुकी थी ये सब उसे ऐसा रोमांच दे रहा था जो कभी उसको अपने शादी सुदा जिंदगी में महसूस नहीं हुआ था और तभी वोह अपनी ब्रा का हुक बस ढीला करके रुक जाती है शायद इस खेल को और गन्दा बनाने की इर्षा से वो ब्रा ढीला रख के hi आपने गोरा सा कामुक हाँथ अपने भरे हुए और कैसे हुए स्तन की गहरायी में दाल देती है, जिसे देख मुझे विश्वास नहीं होता की ये संस्कारी आरती ऐसा कुछ कर रही है ये सिर्फ देखने वाला hi महसूस कर सकता था जो मेरे सामने दिख रहा था उसके उँगलियों में भीचा हुआ खुद का hi स्तन..
गोर2 चमड़ी से हलके गुलाबी हो चूका था उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ देखने में कितना बड़ा सा महसूस हो रहा था जैसे कोई खरबूजा का फल जोह पक्क चूका हो और क्या चमड़ी थी उसके स्तनों की बास अब्ब कुछ सेकंड की देरी थी उसके बड़े बड़े चुके को बहार आने में मनो दोनों की सांसे अटक गयी हो दोनों की श्रम एक दूसरे से नजरे चुरा रही थी और दोनों की नजरे वही तिकी थी एक अपने बदन को खुला कर रही थी तो दूसरी नजर उस बदन को जलील करना छह रही थी और अगले हे पल आपने निप्पल पे रखे हाँथ आरती आपने एक बड़े चुके को आजाद कर देती है, लेकिन वो अपने मुँह से ये नहीं कह प् रही थी की चाचा घूम के देख लो मैने अपने गोर स्थान नग्गे कर दिए है वही अपने चुके नग्गे कर चुकी आरती को सोचता हुआ मिरर से देखते हुए धीरे से फुस फसाया..
अरे बहु क्या हुआ अभी तक नग्गे नहीं किये देख अब लेट हो रहा है जल्दी कर ये चढ़नी रात कैसे जल्दी2 बिताती जा रही है?, मेरी आवाज़ से आरती धीरे से फुस फुसते हुए मुझे शर्म आ रही है पापा जी माय कैसे आपको अपने नग्गे दिखा सकती हु आप मेरे पापा सामान ह कुछ तो शर्म करो, मैं, देख बहु मर्द और औरत का रिश्ता सिर्फ एक होता है वो तुम्हे माय थोड़ी देर पहले जब तेरे बदन के साथ छेद चढ़ कर रहा था तभी हम दोनों का रिश्ता एक नया जुड़ा है वो है प्यार का अब तू शर्माना छोड़ अब जल्दी से दिखा अपने मादक गोर गोर स्थान को?, (उसे क्या पता की माय उसकी साडी हरकत उसके रूम के मिरर से देख रहा था), मेरे समझने के बाद आरती, कुछ सोची और धीरी आवाज़ में पापा जी लो देख लो यह कह के वो शर्मा गई और अपने आंखे बंद कर ली,