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इधर गेट के बहार कड़ी सुन के ठीक है मम्मी जी माय चाचा को जो अपने बोली वो दे आती हु ये कहके वो किचन में गई और गैस पे पानी रख दी और किचन में पुराण बर्तन ढूंढने लगी तभी उसे याद आया (कैसे राधे चाचा ने मेरी इज्जत बचाई और मम्मी पापा को राधे चाचा का उपकार मानना चाहिए लेकिन ये लोग उच्च नीच घटिया नसी रिवाज मान रहे है लेकिन माय ये सब नहीं मानती उन्हें अचे वाला वर्तन ुर अपना कम्बल दूंगी), ये सोचते हुए वो एक बार गैस पे रखे पानी को देखि तो वो गर्म हो रहा था और वह जल्दी से अपने बीएड रूम में गई और अपना कम्बल लेके किचन में ै और जब पानी गरम हो गई तब वो एक स्टील की बड़ी जग में पानी भर के जहा माय सोया था वह ै इधर आरती का बदन उन गुंडों की छेद चढ़ से पूरा बदन तूप रहा था न..
झाड़ पाने की वजह से जिसकी कारन उसके पुरे बदन में इस ठण्ड के मौसम में भी पसीने बाह रहे थे खास कर उसकी क्लीन सेव आर्मपिट्स के पास कुछ ज्यादा hi बह रही थी जिसकी गवाही उसकी ब्लाउज़ दे रहा था गिला होक? वही हॉल में एते hi जहा माय चार पाई पे सोया हुआ था वो वह कड़ी होक धीरे स आवाज़ दी चाचा पानी पिणि है तो माय गरम पानी ले ै हु और ठण्ड लग रही है तो कम्बल भी ले हु, इधर माय पहले hi आरती की नग्गी बदन देख के गरम था और मेरा लुंड आज सोने का नाम hi नहीं ले रहा था और सायद ऊपर वाले ने मेरी सुन ली आरती को मेरे पास भेज कर? वही माय कम्बल से अपना सर निकल के हॉल के तेज रौशनी में देखा तो पाया की आरती मुझे hi देख रही थी और उसके मासूम खूबसूरत चेहरे पे एक हलकी और प्यारी वाली स्माइल थी और उसकी..
मासूम चेहरे को देख के हम दोनों की नजरे एक दूसरे से मिल जाती है और माय क्या देखता हु की आरती एक बहुत hi सेक्सी साड़ी में मेरे सामने कड़ी थी एक स्टील के जग के साथ और माय उस साड़ी के खूबसूरती ुर नजाकत का पूरा आनंद उठाने लगता हु, इधर आरती मेरे साइड में आ जाती है और उस के हाँथ में बड़ा सा स्टील का जग था और वो मेरे बगल वाले छोटे से टेबल पे रखने के लिए थोड़ा झुकने लगती है? ये झुकाव इतना तो नहीं था पर आरती के ब्लाउज़ में कैद दोनों स्तन लटक जाये इतना जरूर था, आरती का कमसिन खुशबूदार बदन अब मेरे काफी करीब था उसके बदन की खुसबू पुरे हॉल रूम में फ़ैल जाती है और उसके पसीने से आने वाली इरोटिक महक मेरे नाक और लुंड दोनों सूंघ लेते है और दोनों को hi उस महक से काम इच्छा की भावना पैदा हो जाती है इधर आरती का
पल्लू भी मनो मेरे बाजु में था वो भी सरकते हुए कहना छह रहे ते (लो देखो मेरे मालिकिन का बदन, घूरो हमें, लो अपने नयन से सुख इस गोरी चमड़ी का), मैं, सुनो बहु रानी?, आरती, मेरी आवाज़ सुन के मुस्कुरा कर मेरी और देखती है ुर अपनी सुरीली और धीमे आवाज़ में क्या हुआ?, मैं, एक बात कहु बहु कही तू ग़ुस्सा तोह नहीं करोगी मेरी बात सुन कर है?, आरती, कहिये न चाचा वैसे भी मुझे जल्दी सोने जाना हैं आपका पानी रख कर, मैं, बहु तू बहुत खूबसूरत है?, मेरी बातो को सुन आरती हल्का सा मुस्कुराती है और एक बार मेरी और देख के शर्मा जाती है लेकिन कुछ कहती नहीं है वही मैं, बात को आगे बढ़ाते हुए ये खूबसूरती मैने आज बहुत करीब से देखि है और यह खूबसूरती तुझे दूसरी लड़कियों से अलग बनती है और तुझे देख के मुझे ऐसा
लगता है की तू अभी भी 15, 16 साल की है, वैसे तेरी शादी और तेरी उम्र कितनी ह?, आरती, मेरी बातो को सुन के बहुत ज्यादा hi ब्लश करती है ुर मान में ( हे भगवन माय कैसे भूल गई की चाचा मुझे नग्गी देख लिए है अब माय क्या जवाब दू इनका?), ये सोचते हुए धीरे से चाचा माय 18 की हु और मेरी शादी को 4 महीने से कुछ ज्यादा दिन हुए है, मैं, तेरे ये मासूम चेरे और तेरा ये फिगर देख के मेरी नज़र hi नहीं हटती और मान तो करता है सारा दिन तुझे ऐसे hi निहारते राहु लेकिन माय ऐसा नहीं कर सकता क्युकी हम दोनों का रिश्ता ससुर बहु वाले है वैसे तू मुझे चाचा की जगह पापा जी कह के बुलाया कर उसे सुन के बहुत खुसी होगी?, आरती, एक पाल तो शर्मा जाती है जब माय उसकी जिस्म की तारीफ कर रहा था और दूसरे hi पाल जब उसे पापा जी बोलने को बोलै तो..
झाड़ पाने की वजह से जिसकी कारन उसके पुरे बदन में इस ठण्ड के मौसम में भी पसीने बाह रहे थे खास कर उसकी क्लीन सेव आर्मपिट्स के पास कुछ ज्यादा hi बह रही थी जिसकी गवाही उसकी ब्लाउज़ दे रहा था गिला होक? वही हॉल में एते hi जहा माय चार पाई पे सोया हुआ था वो वह कड़ी होक धीरे स आवाज़ दी चाचा पानी पिणि है तो माय गरम पानी ले ै हु और ठण्ड लग रही है तो कम्बल भी ले हु, इधर माय पहले hi आरती की नग्गी बदन देख के गरम था और मेरा लुंड आज सोने का नाम hi नहीं ले रहा था और सायद ऊपर वाले ने मेरी सुन ली आरती को मेरे पास भेज कर? वही माय कम्बल से अपना सर निकल के हॉल के तेज रौशनी में देखा तो पाया की आरती मुझे hi देख रही थी और उसके मासूम खूबसूरत चेहरे पे एक हलकी और प्यारी वाली स्माइल थी और उसकी..
मासूम चेहरे को देख के हम दोनों की नजरे एक दूसरे से मिल जाती है और माय क्या देखता हु की आरती एक बहुत hi सेक्सी साड़ी में मेरे सामने कड़ी थी एक स्टील के जग के साथ और माय उस साड़ी के खूबसूरती ुर नजाकत का पूरा आनंद उठाने लगता हु, इधर आरती मेरे साइड में आ जाती है और उस के हाँथ में बड़ा सा स्टील का जग था और वो मेरे बगल वाले छोटे से टेबल पे रखने के लिए थोड़ा झुकने लगती है? ये झुकाव इतना तो नहीं था पर आरती के ब्लाउज़ में कैद दोनों स्तन लटक जाये इतना जरूर था, आरती का कमसिन खुशबूदार बदन अब मेरे काफी करीब था उसके बदन की खुसबू पुरे हॉल रूम में फ़ैल जाती है और उसके पसीने से आने वाली इरोटिक महक मेरे नाक और लुंड दोनों सूंघ लेते है और दोनों को hi उस महक से काम इच्छा की भावना पैदा हो जाती है इधर आरती का
पल्लू भी मनो मेरे बाजु में था वो भी सरकते हुए कहना छह रहे ते (लो देखो मेरे मालिकिन का बदन, घूरो हमें, लो अपने नयन से सुख इस गोरी चमड़ी का), मैं, सुनो बहु रानी?, आरती, मेरी आवाज़ सुन के मुस्कुरा कर मेरी और देखती है ुर अपनी सुरीली और धीमे आवाज़ में क्या हुआ?, मैं, एक बात कहु बहु कही तू ग़ुस्सा तोह नहीं करोगी मेरी बात सुन कर है?, आरती, कहिये न चाचा वैसे भी मुझे जल्दी सोने जाना हैं आपका पानी रख कर, मैं, बहु तू बहुत खूबसूरत है?, मेरी बातो को सुन आरती हल्का सा मुस्कुराती है और एक बार मेरी और देख के शर्मा जाती है लेकिन कुछ कहती नहीं है वही मैं, बात को आगे बढ़ाते हुए ये खूबसूरती मैने आज बहुत करीब से देखि है और यह खूबसूरती तुझे दूसरी लड़कियों से अलग बनती है और तुझे देख के मुझे ऐसा
लगता है की तू अभी भी 15, 16 साल की है, वैसे तेरी शादी और तेरी उम्र कितनी ह?, आरती, मेरी बातो को सुन के बहुत ज्यादा hi ब्लश करती है ुर मान में ( हे भगवन माय कैसे भूल गई की चाचा मुझे नग्गी देख लिए है अब माय क्या जवाब दू इनका?), ये सोचते हुए धीरे से चाचा माय 18 की हु और मेरी शादी को 4 महीने से कुछ ज्यादा दिन हुए है, मैं, तेरे ये मासूम चेरे और तेरा ये फिगर देख के मेरी नज़र hi नहीं हटती और मान तो करता है सारा दिन तुझे ऐसे hi निहारते राहु लेकिन माय ऐसा नहीं कर सकता क्युकी हम दोनों का रिश्ता ससुर बहु वाले है वैसे तू मुझे चाचा की जगह पापा जी कह के बुलाया कर उसे सुन के बहुत खुसी होगी?, आरती, एक पाल तो शर्मा जाती है जब माय उसकी जिस्म की तारीफ कर रहा था और दूसरे hi पाल जब उसे पापा जी बोलने को बोलै तो..