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भी नहीं बचेगी"), ऐसा सोचते हुए माय एक बार रति की गांड दबाता हु हलके से वही रति, चुप चाप वैसे hi कड़ी थी मुझे से चिपके हुए और रति के जिस्म की गर्मी से अब मेरा कला गन्दा और बदबू दर जो हद से ज्यादा लुम्बा और मोटा लुंड था वो मेरी पंत के अंदर एक दम खड़ा हो चूका था जो अब रति को के आगे से उसकी साड़ी के ऊपर से उसके दोनों टांगो के बीच में महसूस होने लगता है ुर उस चुभन के कारन अब रति थोड़ा निचे देखती है तोह वह देखती है के मेरे पंत में एक बड़ा और मोटा सा तम्बू बना हुआ था और वह तम्बू रति को छूट के पास चुभ रहा था जैसे hi रति को ये अहसास होता है के वो क्या है वो तुरंत hi मुझे से दूर हटने की कोशिश करती है ुर थोड़ा दूर हो भी जाती है लेकिन
मैं फिर से उसकी पतली कमर में हाथ दाल कर उससे अपनी तरफ खींचता हु जिसकी वजह से हम दोनों के चेहरे एक दम पास आ जाते है, अब रति का खूबसूरत मासूम चेहरा मेरे काळा भद्दे चेहरे के एक दम सामने था ये देख कर भी रति के मुँह से एक भी शब्द नहीं भी नहीं निकल प् रहा था वो किसी पत्थर की मूर्ति की तरह कड़ी रहती है मेरी बाहो में और मैं एक हाथ उसके पतली 28 साइज की कमर को जाखडे हुए था जिसकी वजा से रति हिल भी नहीं प् रही थी साथ hi मेरा दूसरा हाँथ अब रति के नग्गी कमर से थोड़ा ऊपर फिर निचे करते हुए सहलाने लगता hi एक दम हलके हांथो से.. उधर रति, अपने चेहरे के इतने पास मेरा चेहरा देख अपनी नज़रे हटा देती है पर जैसे hi उसको अपने टैंगो के बिच कुछ शाक्त चूब ने लगता ह वैसे hi वो मुझे..
सवालो भरी नज़रो से घूरने लगती है. मैं भी अब रति की आँखों में घूरते हुए जो हाँथ उसकी नग्गी कमर को सेहला रहे थे उस हाँथ को माय उसकी साड़ी के ऊपर से बड़ी गांड पर रख कर हलके स मसलता हु और उसके दोनों बड़ी बड़ी दो गोलिए को अपने मजबूत दोनों बड़े हथेली में पकड़ के थोड़ा ऊपर करता हु जिससे रति थोड़ा ऊपर हो जाती है और मेरा लुंड जो एक दम खड़ा था उसे रति के साड़ी के ऊपर से सही निशाना मिल जाता है और अब रति की छूट के सामने मेरा खड़ा शाक्त लुंड फिट हो जाता है और मैं अचानक एक जोर का झटका भी उस दौरान मर देता हु जिससे रति के मु से आह्ह्ह्ह.. मररररर.. गई.. उम्घ्हह.. प्लीज छोड़ो.. मुझे.. नहीं तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा (वो थोड़ा गुस्सा होक बोलती है क्युकी वो इतनी भी भोली नहीं थी की उसकी छूट पर क्या वॉर..
हुआ था वो शादी सुदा थी) इधर मैं उसके बात को इग्नोर कर देता हु, वही हम दोनों एक दूसरे को देखने के बाद अब मैं रति की आँखों में देखते हुए उसके गुलाबी होंठो की तरफ अपने सूखे और खुरदरे होंठ बढ़ने लगता हु ये रति के लिए बिलकुल अनएक्सपेक्टेड था की उसका नन्दोई उसको किश करने की कोशिश कर है, लेकिन उसे तो गुस्सा होना चाहिए अपने नन्दोई की इस हरकत पर मगर रति मुझे अनएक्सपेक्टेड रिएक्शन देती है वो अनएक्सपेक्टेड रिएक्शन ये था रति शर्मा जाती है और अपने नज़र थोड़ा निचे करती है, इधर मेरे होंठ नज़दीक आते hi रति अपने हाथ बिच में लाती है जिसकी वजह से मेरे होंठ एक बार उसके गोर हाथो को चूमते है और रति अपना हाथ जल्दी से हटा लेती है और फिर अपना पूरा ताकत लगा के मुझे अपने से दूर कर देती है..
और दौड़ के जल्दी से मेरे रूम का गेट खोल के एक बार मेरी तरफ देखती है और फिर भाग जाती है मैं उसकी मटकती हुई गांड देख अपना मुसल लुंड को मसलता हु और पंत की चैन को खोल एक दम से बहार निकल कर हिलने लगता हु और सोचते हुए है क्या गांड है रति रैंड की आठ.. क़यामत है साली.. आज न सही, पर जल्द hi तेरी छूट और गांड मारूंगा मेरी जान.. आठ.. अब माय जोरो से अपना लुंड हिलाते हुए आहे भरने लगता हु ुर हिलाते हुए बाथरूम में घुस जाता हु क्युकी मैं बहुत गरम था और अपना पानी गिरा देता हु पानी निकल जाने के बाद माय अपने आप को साफ़ करके बहार अत हु, इधर रति अपने रूम में जाकर दरवाजा बंद करके जोरो से सासे लेने लगती है उसकी सांस पहली हुई थी और धड़कने तेज़ चल रही थी. रति को समाज नहीं आता की..
मैं फिर से उसकी पतली कमर में हाथ दाल कर उससे अपनी तरफ खींचता हु जिसकी वजह से हम दोनों के चेहरे एक दम पास आ जाते है, अब रति का खूबसूरत मासूम चेहरा मेरे काळा भद्दे चेहरे के एक दम सामने था ये देख कर भी रति के मुँह से एक भी शब्द नहीं भी नहीं निकल प् रहा था वो किसी पत्थर की मूर्ति की तरह कड़ी रहती है मेरी बाहो में और मैं एक हाथ उसके पतली 28 साइज की कमर को जाखडे हुए था जिसकी वजा से रति हिल भी नहीं प् रही थी साथ hi मेरा दूसरा हाँथ अब रति के नग्गी कमर से थोड़ा ऊपर फिर निचे करते हुए सहलाने लगता hi एक दम हलके हांथो से.. उधर रति, अपने चेहरे के इतने पास मेरा चेहरा देख अपनी नज़रे हटा देती है पर जैसे hi उसको अपने टैंगो के बिच कुछ शाक्त चूब ने लगता ह वैसे hi वो मुझे..
सवालो भरी नज़रो से घूरने लगती है. मैं भी अब रति की आँखों में घूरते हुए जो हाँथ उसकी नग्गी कमर को सेहला रहे थे उस हाँथ को माय उसकी साड़ी के ऊपर से बड़ी गांड पर रख कर हलके स मसलता हु और उसके दोनों बड़ी बड़ी दो गोलिए को अपने मजबूत दोनों बड़े हथेली में पकड़ के थोड़ा ऊपर करता हु जिससे रति थोड़ा ऊपर हो जाती है और मेरा लुंड जो एक दम खड़ा था उसे रति के साड़ी के ऊपर से सही निशाना मिल जाता है और अब रति की छूट के सामने मेरा खड़ा शाक्त लुंड फिट हो जाता है और मैं अचानक एक जोर का झटका भी उस दौरान मर देता हु जिससे रति के मु से आह्ह्ह्ह.. मररररर.. गई.. उम्घ्हह.. प्लीज छोड़ो.. मुझे.. नहीं तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा (वो थोड़ा गुस्सा होक बोलती है क्युकी वो इतनी भी भोली नहीं थी की उसकी छूट पर क्या वॉर..
हुआ था वो शादी सुदा थी) इधर मैं उसके बात को इग्नोर कर देता हु, वही हम दोनों एक दूसरे को देखने के बाद अब मैं रति की आँखों में देखते हुए उसके गुलाबी होंठो की तरफ अपने सूखे और खुरदरे होंठ बढ़ने लगता हु ये रति के लिए बिलकुल अनएक्सपेक्टेड था की उसका नन्दोई उसको किश करने की कोशिश कर है, लेकिन उसे तो गुस्सा होना चाहिए अपने नन्दोई की इस हरकत पर मगर रति मुझे अनएक्सपेक्टेड रिएक्शन देती है वो अनएक्सपेक्टेड रिएक्शन ये था रति शर्मा जाती है और अपने नज़र थोड़ा निचे करती है, इधर मेरे होंठ नज़दीक आते hi रति अपने हाथ बिच में लाती है जिसकी वजह से मेरे होंठ एक बार उसके गोर हाथो को चूमते है और रति अपना हाथ जल्दी से हटा लेती है और फिर अपना पूरा ताकत लगा के मुझे अपने से दूर कर देती है..
और दौड़ के जल्दी से मेरे रूम का गेट खोल के एक बार मेरी तरफ देखती है और फिर भाग जाती है मैं उसकी मटकती हुई गांड देख अपना मुसल लुंड को मसलता हु और पंत की चैन को खोल एक दम से बहार निकल कर हिलने लगता हु और सोचते हुए है क्या गांड है रति रैंड की आठ.. क़यामत है साली.. आज न सही, पर जल्द hi तेरी छूट और गांड मारूंगा मेरी जान.. आठ.. अब माय जोरो से अपना लुंड हिलाते हुए आहे भरने लगता हु ुर हिलाते हुए बाथरूम में घुस जाता हु क्युकी मैं बहुत गरम था और अपना पानी गिरा देता हु पानी निकल जाने के बाद माय अपने आप को साफ़ करके बहार अत हु, इधर रति अपने रूम में जाकर दरवाजा बंद करके जोरो से सासे लेने लगती है उसकी सांस पहली हुई थी और धड़कने तेज़ चल रही थी. रति को समाज नहीं आता की..