मैं, अभी तो शुरुवात भी नहीं हुई और तूने हार मान ली मेरी जान? अभी तो चुदाई की शुरुआत हुई है, अब तो पानी निकलने तक तुझे इसी बिस्तर और तेरे पति के बगल में hi छोडूंगा मेरी रण्डी?.. रति, प्लेससी.. जीजू जो चाहिए वो करो, पर यहाँ नहीं.. प्लीसीई.. रामु जी अगर जाग गए तो सच में मुसीबत हो जाएगी.. मैं, अब एक दम से रुक जाता हु और रति की बात सुनकर और चेहरे पर एक कामिनी मुस्कान लेट हुए क्या बोली तू अभी रांड?, रति, हँ? रामु जी जग गए तो मुसीबत.. मैं, नं.. नहीं.. नं.. नहीं.. वह.. नहीं.. उससे पहले क्या बोली थी वो बता पहले?, रति, आ.. आ.. आप को जो चाहिए वो करो पर यहाँ नहीं कही और ले जेक करो न?. मैं, कामिनी मुस्कान अपने चेहरे पे लेट हुए मुझे जो चाहिए वो तू करेगी?, मेरे कामिनी स्माइल देख कर रति, को एक दम से अपनी कही हुई बात पर पछतावा होने लगता है. वो जान
चुकी थी की उसने बड़ी गलती कर दी है ऐसी बात कर के, पर अब्ब उसके पास कोई चारा भी नहीं था, उसको तो अपने बैडरूम से किसी भी कीमत पर बहार जाना था और उसी बेताबी में hi उसने मुझे यह बात बोल दी थी जिसे फील करते हुए.. आ.. आ.. आप जो सोच रहे हो वो नहीं करुँगी माय ये जान लीजिये?, रति को जैसे मालूम हो की माय कुछ गन्दी हरकत उससे करने के लिए hi बोलने वाला हु, इसलिए वो पहले hi ना कर देती है. उसकी बात पे मैं, माय क्या सोच रहा हु ये तुझे कैसे पता? और माय जो बोल रहा हु वो तू करेगी या नहीं?, बस इतना बता.. रति, (अपने टंगे फैलाये और अपने छूट में पूरा लुंड लिए मेरे से बात कर रही थी साथ hi साथ उस बात के दौरान वो अपनी कमर भी धीरे धीरे उठा रही थी क्युकी उसकी छूट भले hi दर्द कर रही थी लेकिन आज कई दिनों के बाद फिर एक बार अपने जीजा का मोटा लुम्बा लुंड लेके उसकी छूट बार बार अपना
राश बहा रही थी साथ hi साथ रति की कामवासना भी बाद रही थी वह खुल के चुदाई का मज़ा लेना चाहती थी? बिना डरे के और इसी लिए वह बर्बर रिक्वेस्ट कर रही थी की इस रूम से कही और ले जाने को जहा कोई न हो सिर्फ हम दोनों के अलावा, लेकिन मैं, नसे में था और मुझे छूट और लुंड के अलावा कुछ दिखाई नहीं दे रहा था साथ hi साथ माय रति को सेक्स के लिए एक दम ओपन करना चाहता था आगे के लिए की माय जब चहु जहा चाहिए वह रति अपनी छूट खोल के तैयार हो जाये मेरे से छोड़ने के लिए).. इधर, रति अपनी छूट कभी ढीली करती तो कभी तित करते हुए धीरे आवाज़ में अगर आप कुछ गंदा.. ीीीे.. मममहहह.. रति कुछ बोलती इससे पहले hi माय फिर से अपना लुंड सुपडे तक बहार खींचता हु और अगले hi पल अपना पूरा कला लुंड उसकी गरम भट्ठी जैसी गोरी छूट के अंदर पेल देता हु ुर ऐसे बिना कुछ सोचे समझे
मैं फिर एक बार उसकी रफ़ और हार्ड धक्के मर के चुदाई करने लगता हु और रति फिर से अपने मुँह पर हाथ रख कर अपनी चीखो को काबू करने म लग जाती है. मैं, धक्के मरते हुए.. जितना कहा है तुझसे उतना hi बोल.. aahh..bol..my जो.. आह कहूंगा वो करेगी ना.. बोलल.. ुम्हह.. इतना कहने के बाद मैं, बिना रुके लगातार 10 से 14 धक्के डीप मरता हु, जिससे रति की आँखे लाल पिली हो जाती है और उसकी बुर अंदर से पानी का सैलाब छोड़ने लगती है साथ hi साथ उसके मुँह से गर्म सांसो के साथ उसकी सिसकारियां आह्ह्हह्ह्ह्ह.. ुघ्हहहहह... सशह्ह्ह्हह्ह.. हहययययययय.. ऊह्ह्ह्हह्ह.. उम्मंहहहहह.. निकलने लगती है साथ hi साथ अपने दोनों पैरो को मेरी काली पीठ पर रख कर क्रॉस लेती है साथ hi साथ अपने दोनों हाथो को मेरे मजबूत हांथो को पकड़ के झड़ने का मज़ा लेने लगती है साथ hi साथ उसका जिस्म जोरो से थरथराने लगता..
है ुर उसकी बुर के अंदर से निकल रहा काम राश मेरे लुंड के साइड से निकल कर उसके पुरे बीएड शीट को भीगा देता है और मैं उसके चेहरे का एक्सप्रेशंस देख कर अपने आप पर जैसे गर्व महसूस करने लगता हु, क्यूंकि इस उम्र में भी माय रति जैसी जवान और संस्कारी औरत का पानी निकल रहा था साथ hi साथ अपने मन में (मदर जाट पानी छोड़ दी इस रण्डी ने.. हहै.. वाह्ह राधे वाह्ह.. देख कैसे हाफ रही है ये कुत्तिया पानी निकल के?), यह सोचने के बाद मैं उसके दोनों चुचो को अपने दोनों काळा हांथो में पकड़ कर मसलते हुए एक बार फिर से रति की छूट म अपना कला लुंड पेलने लगता हु और रति जो अभी अभी ढीली पद गई थी अपना राश बहाने क बाद वो अब्ब मेरे तेज धक्के अपने कोमल छूट में लेते hi आह.. रुको, अह्ह्ह्ह.. ठीक है.. माय.. आह्ह्ह्ह.. मम.. माय करुँगी.. आप जो आठ.. जो आप बोलोगे वो.. आह्हः.. रुकक्क..
आह्ह्ह्ह.. रुकक्क.. रति की बात सुनकर मैं, खुश हो जाता हूँ और अपना लुंड उसकी छूट से निकल कर खड़ा हो जाता हु और रति वैसे hi बीएड पर दोनों टंगे फैलाये और लुम्बी लुम्बी साँस लेते हुए मुझे देखने लगती है.. वही उसके छूट से उसका काम राश निकलते हुए बेडशीट को भिगो रहा था इधर मैं, अपना लुंड हिलाते हुए रति को उठने के लिए कहता हु मेरी आवाज़ सुन कर रति जो लुम्बी लुम्बी साँस ले रही थी वो मुझे घूरने लगती है जिसे देख माय साली रंडी जो कह रहा हु तू सुनती क्यों नहीं ये कहते हुए माय फिर से बीएड के और जाने लगा तो रति जल्दी से बीएड पे बैठ जाती है और अपनी एक ऊँगली अपने होंठों पे रख क शुऊ करके मुझे चुप रहने के लिए कहती है, मैं, क्यों शुऊ.. कर रही है चल उठ मुझे छोड़ना है तुझे देख मेरा लुंड कितना प्यासा ह, इसकी प्यास को तू नहीं बुझेगी?