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वही मैं, जहा था वही से देखने लगा की तभी मेरी नज़र जो थोड़ी देर पहले प्रीति से पार्किंग में नकाब वाली लड़की बात कर रही थी वो पब्लिक टॉयलेट की और जाने लगी वो स्टेज के पीछे थोड़ी दुरी पे बना हुआ था मैं सोचा चालो थोड़ा मस्ती hi कर लिया जाये अभी प्रीति का डांस करेगी फिर डिनर करेगी उसके बाद hi वो खली होगी और कोई डर भी नहीं है सब लड़के लड़किया स्टेज के पास hi है मैं सोचा एक बार प्रीति को बता दूँ नहीं तो साली मादरचोद नाटक करने लगेगी साली बहुत तीखी मिर्ची है रण्डी फिर मैं टॉयलेट की और जाते हुए कॉल प्रीति को किया तो वो कॉल उठा के है क्या हुआ तुम्हे एक मिनट भी चैन नहीं है क्या? मैं?, सुनो मैं मूतने जा रहा हु तुम जहा हो वही रहना?, प्रीति, गुस्से से तुमको जहा जाना है जाओ लेकिन घर जाने से पहले मेरे से मिल लेना माय, क्यों जान मेरे बिना नहीं जा सकती अपने घर क्या मेरी बुलबुल?,
प्रीति, अपने जुबान संभल के बोलै करो काळा बुड्ढे कहिके ये बोल के प्रीति गुस्से में कॉल कट कर दी लेकिन माय उसकी बातो का बुरा नहीं मन?, वही माय इधर देखा तो वो नकाब वाली लड़की गर्ल्स टॉयलेट घुस गई, मैं भी उसके पीछे गया और गेट के पास इधर उधर देखा तो वह कोई नहीं था सब कॉन्सर्ट में बिजी थे और मैं बाथरूम के अंदर गया तो देखा उस बाथरूम में 8 टॉयलेट थे और एक बड़ा सा आईने वाशबेसिन पर लगा था ुर अंदर जाते hi बाथरूम में राइट हैंड पर 4 और उसके सामने 4 टॉयलेट बने थे जिसमे 4 वेस्टर्न टॉयलेट और 4 देसी टॉयलेट थे वही वो लड़की 2 टॉयलेट को धक्का देके खोलने की कोशिश की लेकिन अंदर कोई लड़की की आवाज़ ै अरे कौन है साली अंदर नहीं देखती की मैं हूँ, गेट लॉक नहीं दिखता क्या? जो धक्का दे रही है फिर वो लड़की सॉरी बोल के दूसरे
तरफ मुड़ी ुर सबसे लास्ट वाला 4तह वाला टॉयलेट गेट देख के धक्का दी तो खुल गई और अंदर देख के धीरे से बोली ये तो वेस्टर्न टॉयलेट है लेकिन उस लड़की को बहुत तेज की ै हुई थी इस लिए वह कुछ सोचने के मोड़ में नहीं थी ुर फिर वह लड़की उसमे घुसने लगी इधर मैं, गेट के बहार से चुप के देख रहा था की तभी वो लड़की कुछ आभाष हुआ और वो तुरंत पलट के दरवाज़े की और देखि जहा मैं छुपा हुआ था और उसे अचानक पलट ने से माय खुद को छुपा नहीं पाया और वो लड़की सायद मुझे देख ली थी लेकिन उस लड़की को बहुत तेज की टॉयलेट ै हु थी इसलिए कोई रियेक्ट नहीं की और जल्दी से गेट खोल के अंदर दाखिल हुई और अपने बुरखा उप्पेर उठा के जल्दी से इलास्टिक वाली सलवार निचे कर के बैठते hi उसकी बड़ी तेज़ की सीटी के आवाज़ में पिशाब करने लगी पर जब कुछ देर बाद हलकी हुई
तब उसे अब अहसास हुआ की एक आदमी बहार दरवाज़े के पास था और उसकी पिशाब की आवाज़ साफ़ सुनाई दे रही होगी उस आदमी को ये सोचकर शर्म से पानी पानी होने लगी?, वही दूसरे टॉयलेट में जो पहले लड़की घुसी हुई थी वो टॉयलेट से बहार आती है एक गण गेट हुए और वाशबेसिन के पास हाँथ धोने के बाद बहार आने लगी और माय गेट से हैट गया और उसके जाने के बाद मैं फिर से बहार के गेट से अंदर आ के जिस टॉयलेट में वह लड़की मूत रही थी उसके बहार के गेट के पास आके माय अपना कण लगाकर मधुर पिशाब की आवाज़ सुन कर मुस्कुराने लगा उधर वह लड़की पिशाब से फारिग होकर पानी लिया और अपनी बुर को अच्छे से साफ़ करा और अपना सलवार खड़े होकर पहनी बुरखा सही करा अब निकलने की बरी थी, लेकिन बेचारी को दर लगा की वह आदमी कही टॉयलेट के बहार न हो और यहाँ तो कोई भी नहीं है सायद जो लड़की मूत रही थी,
वह भी चली गई है, तभी तो कुछ सुनाई नहीं दे रहा है वह फिर भी डरते डरते जैसे hi दूर ओपन करि वैसे hi उसके सामने 2 फ़ीट की दूरी पर वह कला आदमी लुम्बा चौड़ा अपने डाट देखा के हसने लगा उसके मु पे सैतानी स्माइल थी, वो लड़की जब इतनी पास मुझे देखा तो उसके मुँह से हैरत के उसकी चीख निकलते निकलते रह गयी और उसने अपने दोनों हाथो से चेहरे पर नक़ाब लगा था उस पर हाथ रखकर अपनी चीख पर काबू पाया वो लड़की मुझे देख के इतनी डर गई थी की उसने अपने कदम पीछे की तरफ खींच लिए जहा उसे बहार जाना था वही डर और खौफ की वजह से अंदर की तरफ और आ गयी वही मैं, अपने हाथ से दरवाज़ा और खोला उधर उस लड़की की आँखों में दर साफ़ नज़र आ रहा था तभी कुछ लड़कियों की अंदर आने की ुर आपस में बात करने की आवाज़ आयी पर यहाँ उस लड़की की सिटी पित्ती गम हो चुकी थी,
प्रीति, अपने जुबान संभल के बोलै करो काळा बुड्ढे कहिके ये बोल के प्रीति गुस्से में कॉल कट कर दी लेकिन माय उसकी बातो का बुरा नहीं मन?, वही माय इधर देखा तो वो नकाब वाली लड़की गर्ल्स टॉयलेट घुस गई, मैं भी उसके पीछे गया और गेट के पास इधर उधर देखा तो वह कोई नहीं था सब कॉन्सर्ट में बिजी थे और मैं बाथरूम के अंदर गया तो देखा उस बाथरूम में 8 टॉयलेट थे और एक बड़ा सा आईने वाशबेसिन पर लगा था ुर अंदर जाते hi बाथरूम में राइट हैंड पर 4 और उसके सामने 4 टॉयलेट बने थे जिसमे 4 वेस्टर्न टॉयलेट और 4 देसी टॉयलेट थे वही वो लड़की 2 टॉयलेट को धक्का देके खोलने की कोशिश की लेकिन अंदर कोई लड़की की आवाज़ ै अरे कौन है साली अंदर नहीं देखती की मैं हूँ, गेट लॉक नहीं दिखता क्या? जो धक्का दे रही है फिर वो लड़की सॉरी बोल के दूसरे
तरफ मुड़ी ुर सबसे लास्ट वाला 4तह वाला टॉयलेट गेट देख के धक्का दी तो खुल गई और अंदर देख के धीरे से बोली ये तो वेस्टर्न टॉयलेट है लेकिन उस लड़की को बहुत तेज की ै हुई थी इस लिए वह कुछ सोचने के मोड़ में नहीं थी ुर फिर वह लड़की उसमे घुसने लगी इधर मैं, गेट के बहार से चुप के देख रहा था की तभी वो लड़की कुछ आभाष हुआ और वो तुरंत पलट के दरवाज़े की और देखि जहा मैं छुपा हुआ था और उसे अचानक पलट ने से माय खुद को छुपा नहीं पाया और वो लड़की सायद मुझे देख ली थी लेकिन उस लड़की को बहुत तेज की टॉयलेट ै हु थी इसलिए कोई रियेक्ट नहीं की और जल्दी से गेट खोल के अंदर दाखिल हुई और अपने बुरखा उप्पेर उठा के जल्दी से इलास्टिक वाली सलवार निचे कर के बैठते hi उसकी बड़ी तेज़ की सीटी के आवाज़ में पिशाब करने लगी पर जब कुछ देर बाद हलकी हुई
तब उसे अब अहसास हुआ की एक आदमी बहार दरवाज़े के पास था और उसकी पिशाब की आवाज़ साफ़ सुनाई दे रही होगी उस आदमी को ये सोचकर शर्म से पानी पानी होने लगी?, वही दूसरे टॉयलेट में जो पहले लड़की घुसी हुई थी वो टॉयलेट से बहार आती है एक गण गेट हुए और वाशबेसिन के पास हाँथ धोने के बाद बहार आने लगी और माय गेट से हैट गया और उसके जाने के बाद मैं फिर से बहार के गेट से अंदर आ के जिस टॉयलेट में वह लड़की मूत रही थी उसके बहार के गेट के पास आके माय अपना कण लगाकर मधुर पिशाब की आवाज़ सुन कर मुस्कुराने लगा उधर वह लड़की पिशाब से फारिग होकर पानी लिया और अपनी बुर को अच्छे से साफ़ करा और अपना सलवार खड़े होकर पहनी बुरखा सही करा अब निकलने की बरी थी, लेकिन बेचारी को दर लगा की वह आदमी कही टॉयलेट के बहार न हो और यहाँ तो कोई भी नहीं है सायद जो लड़की मूत रही थी,
वह भी चली गई है, तभी तो कुछ सुनाई नहीं दे रहा है वह फिर भी डरते डरते जैसे hi दूर ओपन करि वैसे hi उसके सामने 2 फ़ीट की दूरी पर वह कला आदमी लुम्बा चौड़ा अपने डाट देखा के हसने लगा उसके मु पे सैतानी स्माइल थी, वो लड़की जब इतनी पास मुझे देखा तो उसके मुँह से हैरत के उसकी चीख निकलते निकलते रह गयी और उसने अपने दोनों हाथो से चेहरे पर नक़ाब लगा था उस पर हाथ रखकर अपनी चीख पर काबू पाया वो लड़की मुझे देख के इतनी डर गई थी की उसने अपने कदम पीछे की तरफ खींच लिए जहा उसे बहार जाना था वही डर और खौफ की वजह से अंदर की तरफ और आ गयी वही मैं, अपने हाथ से दरवाज़ा और खोला उधर उस लड़की की आँखों में दर साफ़ नज़र आ रहा था तभी कुछ लड़कियों की अंदर आने की ुर आपस में बात करने की आवाज़ आयी पर यहाँ उस लड़की की सिटी पित्ती गम हो चुकी थी,