Teri tadap jaldi khatam nahi hogi - Page 11 - SexBaba
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Teri tadap jaldi khatam nahi hogi

अपडेट ..... 89



अर्जुन कुछ देर तक वही बाइक पर बैठा हुआ होता है आवर फिर घर के अंदर आ जाता है

अर्जुन हॉल मैं आकर टीवी ों कर देता है आवर देखने लगता है

अर्जुन बड़ी जल्दी आ गया कॉलेज से क्या बात है

अर्जुन टीवी देख रहा होता है तभी आँचल हॉल मैं आती हुई पूछती है

वही माँ की आवाज़ सुन कर अर्जुन थोड़ा दर कर शर्मा भी जाता है आवर टीवी से नज़र हटा कर माँ की तरफ देखता है जो आँचल मुस्कुराती हुई अर्जुन को देख रही होती है जो अर्जुन को थोड़ा अजीब लगता है की माँ उसे मुस्कुरा कर देख रही है क्या माँ को अपनी पेंटी मैं मेरा पानी नहीं दिखा ... या माँ को पता चलने के बाद भी उनेह मुझपे गुस्सा नहीं आया

मुझे यकीन है मेरा जितना पानी माँ की पेंटी पर था माँ को पता चल गयी होगी ...... अर्जुन मन मैं सोचता है

माँ वह मेरा मन नहीं लग रहा था कॉलेज मैं आज इस लिए घर आ गया .. अर्जुन माँ की चेहरे से नज़र हटा कर बोलता है

अर्जुन बीटा तेरा तबियत तो ठीक है न दिखा मुझे .. आँचल बोलती हुई अर्जुन की गले को टाच कर के देखती है तो पति है अर्जुन बिलकुल ठीक है

माँ मैं ठीक हुईं ... मुझे भूख लगी है ... अर्जुन बोलता है

ठीक है मैं खाना अभी लती हुईं ...... आँचल बोलती है आवर किचेन मैं चली जाती है

अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ुछहःछः

आँचल जब किचेन मैं जाती है तो उसे अपनी पेंटी छूट मैं चिपकी हुई होने से थोड़ा अजीब लगती है तो आँचल पेंटी को अलग करने की कोशिश करती है तो आँचल को पकड़ कर आगे की तरफ करती है तभी आँचल को अपनी छूट का बाल भी खींचा जाता है आवर आँचल को अपनी छूट मैं दर्द होती है लेकिन पेंटी अभी भी छूट से चिपकी हुई होती है

आँचल दर्द मैं चीखती हुई वही थोड़ी देर के लिए बैठ जाती है

अह्ह्ह मायआ

ये पेंटी छूट मैं कैसे चिपक गयी

आँचल मन मैं सोचती है आवर फिर किचेन वाले रूम से हॉल मैं अर्जुन की तरफ देखती है जो अर्जुन टीवी देख रहा होता है .... अर्जुन को टीवी देखते हुआ देख कर आँचल वही अपनी साड़ी उठा कर पेंटी को पकड़ कर किसी तरह छूट से हटा देती है जिससे आँचल की छूट की बॉल भी पेंटी मैं चिपकी हुई आ जाती है

ये क्या मेरी पेंटी छूट मैं इतनी कैसे चिपक सकती है ..... ओह्ह गॉड ये क्या है

आँचल अभी मन मैं सोच hi रही होती है तभी आँचल की नज़र पेंटी पर चली जाती है जो पेंटी पर उजली उजली दिख रही होती है

आँचल पेंटी को अपनी आँखों के करीब लेकर देखती है आवर फिर सुख चुकी अर्जुन के मॉल को पेंटी छूती है जो अर्जुन का मॉल पेंटी मैं पूरी तरह चिपक चुकी होती है जब आँचल की ऊँगली मैं वह उजली चीज नहीं आती है तो आँचल पेंटी को अपनी नाक के पास कर के सूंघती है

Ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

ये कैसी बदबू है .... ाएसि बदबू तो मैंने कभी नहीं सूंघी .... क्या ये मेरी छूट से निकली है

कही मैं सोती हुई तो .... नहीं नहीं छूट से निकली होती तो मुझे पता चल hi जाती आवर पेंटी तो मैं धोकर राखी थी फिर मेरी पेंटी मैं ये कैसे लग गयी

आँचल पेंटी सूंघने के बाद मन मैं सोच रही होती है

आँचल पेंटी को पहनते हुआ भी अर्जुन का मॉल नहीं देखि होती है आवर वह कपडे पहन कर सो चुकी होती है जो आँचल को खुद पर सक हो रही होती है मगर आँचल ये भी सो रही होती है अगर वह सोते हुआ झड़ी भी है तो उसे पता कैसे नहीं चल रही है कुछ तो याद आ hi जाती है जो पहले भी आँचल झड़ी होती है सपने मैं तो उसे सुबह पता चल जाता था

आँचल अभी आवर इस बारे मैं नहीं सोचती है आवर अपने पेंटी को वही किचेन मैं रख कर हाथ धोती है आवर अर्जुन के लिए खाना निकल कर चल देती है आवर अर्जुन को खाना देकर वही बैठ कर अर्जुन के साथ टीवी देखने लगती है

अर्जुन बाबू तेरी तबियत ठीक है न ..... गीता हॉल मैं आती हुई बोलती है

गीता की आवाज़ सुन कर आँचल गीता की तरफ देखती है वही अर्जुन कहते हुआ रुक जाता है

गीता बेटी तू आयी क्यू पूछ रही है .... आँचल बोल पड़ती है

माँ वह अर्जुन लांच टाइम मैं hi कॉलेज से घर आ गया न इस लिए दी पूछ रही हुईं .... इस बार अंजलि बोलती है

वही की बात सुन कर आँचल मन hi मन थोड़ी हैरान होती है

क्या अर्जुन पहले से घर आया है हे भगवन कही वह अर्जुन का पानी तो नहीं है

अर्जुन अभी घर आया तो उसके हाथ मैं कोई किताब नहीं तह वह सायद पहले hi घर आ गया था आवर घर का गेट भी खुला था दीदी के जाने के बाद क्या अर्जुन मेरे रूम आया था आवर मेरी पेंटी पर

माँ क्या सोच रही है .... आँचल को सोच मैं दुनिया देख कर अंजलि पूछती है

कक कुछ नहीं जा कपडे बदल कर आ मैं खाना निकलती हुईं ... आँचल बोलती है

वही गीता आवर अंजलि दोनों अपनी अपनी रूम मैं चली जाती है

अर्जुन बीटा तू घर इसके पहले भी आया था ... आँचल सवालिए नज़ारे से घूरती हुई पूछती है

आँचल की दिल ज़ोर ज़ोर से धड़क रही होती है आँचल मन मैं सोचने लगती है के अर्जुन बोल दे की वह घर नहीं आया तह मगर अर्जुन कुछ देर तक जवाब नहीं देता है

अर्जुन के कुछ न बोलते हुआ पाकर आँचल की साख अब यकीन मैं बदलने लगती है आवर आँचल की छूट मैं सिहर सी उठने लगती है ये सोच कर की अर्जुन का पानी उसकी छूट मैं अभी भी लगी हुई है

लेकिन आँचल की दिल अभी भी ये अर्जुन से सुन्ना छह रही होती है के अर्जुन पहले भी घर आया था

अर्जुन बीटा बता नहीं घर आया तह क्या .... आँचल एक बार फिर से पूछती है

सॉरी माँ www वह .... अर्जुन आगे आवर कुछ नहीं बोलता है आवर वह से उठ कर चला जाता है

Sssssssssssssssssssssss

अर्जुन के सॉरी बोल कर जाते हुआ देख कर आँचल अब समझ जाती है वह पानी अर्जुन का है जो नहाते वक़्त मेरे रूम मैं आये था आवर मेरी पेंटी मैं .... ये सोचती हुई हो आँचल की छूट मैं हलचल सी मच जाती है आवर आँचल वही सिहर कर दोनों पेअर फैला देती है जैसे अर्जुन का लैंड hi उसकी छूट मैं चली गयी है

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राखी देवी खेत वाली घर मैं अभी नंगी hi लेती हुई होती है आवर ज़ोर ज़ोर से हांफ रही होती है आवर राखी देवी की चिकनी छूट से पानी बाह कर गांड की दरार मैं जा रही होती है

वही पास मैं बैठी हुई कमला राखी देवी की जिस्म को ललचाई हुई नज़र से देख रही होती है जिसे बस कुछ देर पहले hi मसल मसल कर मालिश की होती है

मालकिन की जिस्म तो दिन पर दिन आवर भी खूबसूरत होती जा रही होती है मालकिन की जिस्म तो जवानी लड़की की जिस्म से भी बढ़ कर है जैसे मालकिन की जवानी तो अब आ रही है

Aahhhhhhhhhhhhhhhhhhh

कई दिन के बाद मेरी छूट को इतनी आराम मिली है मालकिन की छूट मैं इतनी गर्मी है की मेरी छूट मालकिन की छूट मैं टाच होती hi रोने लगती है

मालकिन की इतनी खूबसूरत जिस्म तो भगवन ने दिया मगर इनकी जवानी एहि बर्बाद हो रही है मालकिन अभी भी चाहे तो कितने जवान लड़के इनकी जिस्म को देख कर शादी करने के लिए बेताब हो जायेंगे

मालकिन की छूट की गर्मी देख कर तो लग रही है मालकिन खुद को जयादा दिन आवर नहीं रोक पाएंगी ... यकीनन कोई गाओं का hi मर्द मालकिन की जिस्म की आग संत कर सकता है

कमला इस तरह क्या घर रही है .... तेरा काम हो गया जा तू अब ....

राखी देवी जब देखती है की कमला बस उनेह hi घूरे जा रही है तो राखी देवी थोड़ी गुस्सा हो जाती है आवर बोल पड़ती है जो कमला भी जल्दी से अपनी साड़ी ठीक करती हुई रूम से निकल जाती है

राखी देवी कुछ देर तक नंगी hi बीएड पर सोइ हुई होती है आवर अपनी जिस्म पर हाथ फेर रही होती है

Ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

राखी देवी की हाथ जैसे hi छूट पे जाती है राखी देवी की सिसकियाँ निकल जाती है राखी देवी तड़पती हुई अपनी पेअर एक दूसरे से मोड लेती है

हे भगवन जी आप ने ये क्या किया मेरे साथ भरी जवानी मैं मुझे तनहा कर दिया आप ने

भगवन जी आप को पता है मैंने आज तक कोई आएसा काम नहीं किया जिससे मेरे दमन पर कोई दाग लगे हां मैंने अपने छोटे भाई के साथ सम्भन्ध बनाया मगर आप को पता है मेरे भाई की हालत क्या है ... हां मगर मुझे उसके साथ सम्भन्ध बना कर मुझे अच्छा लगता था मेरी जिस्म की गर्मी संत हो जाती थी चाहे वह मैंने मज़बूरी मैं किया था

लेकिन आप को मेरी वह भी ख़ुशी नहीं देखि गयी आवर आप ने मुझे छोटे भाई के साथ मेरे बेटे को दिखा दिया ..... जो मैंने अपनी जिगर के टुकड़े को खुद से दूर कर दिया

आप hi बताये क्या मैंने गलत किया था अगर उस वक़्त मैं उसे दूर नहीं करती तो क्या उसे मैं खुद को बेशर्मी उसे दिखती ..... मैं तो चाहती थी मेरे भाई बस ठीक हो जाये आवर आँचल को उसकी ख़ुशी मिल जाये ... लेकिन मुझे ये नहीं पता था उस गलती की वजह से मेरे लाल मुझसे दूर चला जायेगा

भगवन जी मैं अपनी जिस्म की आग मैं जल सकती हुईं मगर मैं अब आएसा कोई काम नहीं करुँगी जो मुझे अपने लाल से दूर होना पड़े

राखी देवी मन hi मन सोच रही होती है आवर राखी देवी की आँखों से आंसू निकल रही होती है

राखी देवी फिर बीएड से उठती है आवर अपनी छूट पर लगी पानी को अपनी पेंटी मैं पोछ कर फिर से वही पेंटी पहन लेती है आवर फिर टाइम देखती है तो शाम होने वाली होती है तो राखी देवी घर की तरफ निकल पड़ती है

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गीता रूम मैं सोइ हुई होती है तभी गीता की फ़ोन बजने लगती है गीता पढ़ रही होती है तो पास मैं बैठी हुई अंजलि नई नंबर देख कर झट से फ़ोन उठा लेती है आवर कुछ बोले बिना hi फ़ोन को कान मैं लगा कर गीता को देखने लगती है

Hello गीता दीदी ..... अंजलि की कान मैं आवाज़ आती है

कौन बोल रहा है ...तुम लड़के हो न ..... अंजलि गीता को देखती हुई बोलती है

अंजलि को बोलते हुआ देख कर गीता अंजलि को घूरने लगती है

गुड़िया फ़ोन दे मुझे .... गीता बोलती हुई फ़ोन लेने के लिए हाथ बढाती है तब तक अंजलि बीएड से उतर जाती है

Hello कौन बोल रहा है बताओगे .... अंजलि फिर से बोलती है


आप अंजलि दी बोल रही है .. उधर से फिर से अंजलि की कान मैं लड़की की आवाज़ आती है

हां मैं अंजलि बोल रही हुईं .... तुम मुझे कैसे जानती हो .... आवर क्या तुम सच मैं लड़की हो वीडियो कॉल करो अभी ..... अंजलि बोल कर फ़ोन काट देती है

वही गीता अंजलि को अभी भी घर रही होती है .....

दीदी मुझे पता है वह लड़का आप किस लड़के से बात करती हो ... अंजलि मुस्कुराती हुई पूछती है

अह्ह्ह्हह डीई अंजलि मुस्कुराती हुई पूछती है hi है की गीता झट से उठ कर बीएड पर से hi अंजलि को पकड़ लेती है आवर पकड़ कर बीएड पर लेता देती है आवर गीता की पीठ पर 2 से 3 बार मार देती है जिसे अंजलि मुंह बना कर बैठ जाती है

तू घोड़ी जैसी होती जा रही है मगर तेरी दिमाग बच्चों जैसी hi है ..... तुझे पता है न मैं लड़कों से बात नहीं करती

गीता अभी बोल रही होती है तभी वीडियो कॉल आ जाती है तो गीता फ़ोन उठा लेती है

वही अंजलि मुंह बना कर दूसरी तरफ देख रही होती है मगर जैसे hi कॉल आता है झट से उठ कर गीता की पीछे चली जाती है ताकि देख सके वह लड़का है या लड़की वही गीता फ़ोन उठा कर फ़ोन निचे रख देती है ताकि अंजलि न देख सके

दीदी अब क्या हुआ दिखाइए मुझे नहीं तो मैं भी आप मरूंगी .... आवर माँ को बता दूंगी आप लड़कों से बात करती हो .... अंजलि एक छोटी बच्ची की तरह बोलती है

वही अंजलि की हरकत को देख कर गीता मुस्कुरा रही होती है

गीता दीदी कुछ दिख रही रहा है

गीता अभी मुस्कुरा hi रही होती है तभी फ़ोन से आवाज़ आ जाती है जो अंजलि भी आवाज़ सुन लेती है


ले तुहि बात कर माँ की चमची .... गीता फ़ोन अंजलि को दे देती है जो अंजलि भी फ़ोन ले लेती है

ही गीता डीई

अंजलि जैसे hi फ़ोन लेकर देखती है तो उसे एक खूबसूरत लड़की दिखाई देती है जो उसे गीता समझ कर ही कर रही होती है

तुम कौन हो आवर वह लड़का कहा है जो मेरी दीदी से बात करना चाहता है .... अंजलि लड़की को देखती हुई बोलती है

वही अंजलि की बात सुन कर गीता अपनी सर पकड़ लेती है

आप अंजलि दीदी हो .... मेरे साथ कोई लड़का नहीं मैं अभी अकेली हुईं आप किस लड़के की बात कर रही है मैं प्रीतमपुरा से बोल रही हुईं आप के बड़े दादा की पोती .... कोमल हुईं मैं

अंजलि की बात सुन कर कोमल थोड़ी हैरान हो रही होती है इस लिए पूरी बात बता देती है ताकि अंजलि यकीन कर सके

क्या तुम प्रीतमपुरा से बोल रही हो .... हां वह प्रीतमपुरा से बोल रही है पागल लड़की

गीता अंजलि से फ़ोन लेती हुईं बोलती है

ही कोमल कैसी हो तुम .... गीता पूछती है

मैं अच्छी हुईं गीता दीदी .. वह अंजलि दीदी किस लड़के की बारे मैं बी रही थी ..... कोमल पूछती है

अरे वह पागल है रे .. अच्छा बताओ तुमको हम लोगों की याद कैसे आई इतने सल्ल मैं कभी हमसे मिलने तो नहीं आये तुम लोग .... गीता पूछती है

दीदी हमेह तो पता hi नहीं था .... वह तो आंटी के आने के बाद पता चला इस लिए मैंने आंटी से फ़ोन नंबर लिया था ...... आप को पता था तो आप कभी हमसे मिलने क्यू नहीं आई ... कोमल थोड़ी मायूस होकर बोलती है

मुझे भी पता नहीं था कोमल ... गीता बोलती है गीता के बात करने के बाद अंजलि भी काफी देर तक कोमल से बात करती है

रात के 10 : पं


दिंनिंग टेबल पर सभी साथ बैठ कर खाना खा रहे होते है अर्जुन तो बस किसी को न देख कर बस खाना खा रहा होता है मगर आँचल आवर राखी देवी बार बार अर्जुन को देख रही होती है जहा राखी देवी की आँखों मैं अर्जुन के लिए बहुत सारा प्यार नज़र आ रही होती है

वही आँचल आँखों मैं अर्जुन के लिए प्यार के साथ एक अजीब सरम भी नज़र आ रही होती है जैसे अर्जुन को आज पहली बार आँचल देख रही है

आँचल खाना कहते हुआ कभी कभी hi अर्जुन को देख रही होती है जो गीता की नज़र आँचल पर पद जाती है जो गीता अकेले मैं पूछने को सोचती है

वही अर्जुन खाना खा कर अपने रूम मैं चला जाता हैं अर्जुन अपने रूम मैं लेटने को होता है तभी उसे याद आता है उसका फ़ोन गीता दीदी की रूम मैं चार्ज लगा है तो अर्जुन फ़ोन लेने के लिए गीता की रूम मैं चला जाता है

अर्जुन गीता दीदी की रूम मैं जाकर अपने फ़ोन लेकर जाने को होता है तभी गीता की फ़ोन पर मस्सगे की आवाज़ सुनता है तो अर्जुन जाकर गीता की फ़ोन देखता है जो वात्सप्प पर कुछ आया हुआ दिखाई देता है अर्जुन को गीता की लॉक पता होती है तो वह लॉक खोल कर वात्सप्प ओपन कर देता है

अर्जुन जैसे hi वात्सप्प ओपन कर के उस नंबर पर टाच करता है कई साडी फोटो लोड होने लगती है आवर एक एक फोटो को देख कर अर्जुन की आँखों मैं एक चमक सी आने लगती है


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वाओ ये लड़की है या कोई आसमान की पारी है

अर्जुन तो लड़की की फोटो देख कर एक वक़्त के लिए खुद को hi भूल जाता है आवर एक तक लड़की को देखता रहता है

अर्जुन की आँखें भी नहीं हैट रही होती है अर्जुन लड़की की कभी चेहरे तो कभी लड़की की जिस्म को देख रहा होता है मगर की आँखें बस लड़की की चेहरे पर आकर रुक रही होती है

वही अर्जुन दिल भी ज़ोर ज़ोर से धड़क रहा होता है

अर्जुन की लाइफ की ये पहली लड़की होती है जिसे देख कर अर्जुन की दिल घंटी बाज़ा चुकी होती है

अर्जुन पहले hi कई साडी एक से बढ़ एक खूबसूरत लड़की को देख चूका होता है मगर इस लड़की की पिछ देख कर अर्जुन की दिल मैं हवस नहीं प्यार आ रहा होता

बाबू क्या देख रहा है .... अर्जुन पिछ देख hi रहा होता है तभी रूम मैं आती हुई अर्जुन को देख कर गीता बोल पड़ती है वही अर्जुन हड़बड़ा कर गीता का फ़ोन लॉक कर देता है आवर फिर चार्ज मैं लगा कर अपना फ़ोन ले लेता है

वह दीदी फ़ोन लेने आया था ... अर्जुन बोलता है आवर फिर बिना गीता की तरफ देख रूम से चला जाता है

अर्जुन हड़बड़ाहट मैं गीता का वात्सप्प पर लॉक कर चूका होता है

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वही आदि के घर पर

आदि पहले से अच्छा हो चूका होता है अब वह अपने रूम मैं बेचैन होकर घूम रहा होता है आदि की आँखों मैं गुस्सा साफ नज़र आ रही होती है

ये ये यह कैसे पहुँच गयी इसकी ये हालत कैसे हुई ..... वह मक लोग क्या कर रहे थे ...... बस फ़ोन भी नहीं उठा रहे है

बस सभी की मैया छोड़ दूंगा

आदि रूम मैं गुस्से से घूमता हुआ बड़बड़ा रहा होता है

वही चांदनी भी रूम मैं इस वक़्त गुस्से मैं घूम रही होती है

तूने मेरी ज़िन्दगी बर्बाद कर दिया है

मैं तेरी ज़िन्दगी नर्क बना दूंगी मैं तुझे मौत के से बड़ी सजा दूंगी नहीं छोडूंगी तुझे मैं

चांदनी मन मैं सोचती है आवर चांदनी की आँखों मैं गुस्से के साथ आंसू भी बहने लगती है चांदनी रोटी हुई बीएड के निचे बैठ जाती है मगर चांदनी की आँखों मैं बेपनाह गुस्सा भरा हुआ होता है

___________________________ गीता बीएड पर सोइ हुई होती है आवर फ़ोन चला रही होती है तभी गीता की रूम पर कोई धीरे धीरे पीटने लगता है

गीता टाइम देखती है 1 : ऍम बज रहे होते है गीता मुस्कुरा पड़ती है

अभी तो बोल रहा था मन नहीं है देखों फिर भी आ hi गया .... आज तो मैं इसे सुबह तक नहीं छोड़ने वाली हुईं

गीता मन मैं सोचती है आवर उठ कर सिर्फ ब्रा पेंटी मैं hi गेट खोलने चली जाती है

ओह्ह आआ ाआपपपप

गीता जैसे hi गेट खोलती है सामने देख कर हड़बड़ा जाती है आवर जल्दी से भाग कर अपनी नाईट ड्रेस पहन लेती है

गीता बहुत शर्मा भी रही होती है जो अपनी सर निचे कर के देखने लगती है

वही वह सामने कड़ी औरत गीता को घूरती हुई रूम मैं आ जाती है जो गीता की हालत आवर भी ख़राब होने लगती है

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अपडेट ..... 90



माआआ

गीता की मुंह से बस इतना hi निकलता है आवर बीएड पर अपनी नाईट ड्रेस उठा कर गीता जल्दी से पहन लेती है आवर फिर से निचे देखने लगती है

गीता बेटी ये क्या है इतनी रात को तुम जाग रही हो वह भी इस हालत मैं

राखी देवी गुस्से बोलती है

माँ मैं सोइ हुई थी आचानक गेट पर आवाज़ होने से ..... गीता बहुत hi धीरे से बोलती है

गीता बेटी मैंने तुमको झूट बोलना नहीं सिखाया है .... इस लिए झूट मत बोलो .... मुझे पता है तुम सोइ नहीं थी .....

गीता की सहमी सी आवाज़ सुन कर राखी देवी थोड़ी नार्मल हो जाती है आवर गीता के साथ बीएड पर बैठ जाती है

वही गीता थोड़ी हैरान रह जाती है माँ को कैसे पता मैं अभी जाग रही थी

ठीक है जाग रही थी कोई बात नहीं मगर इस तरह गेट खोलने की क्या ज़रुरत थी ..... मेरी जगह अर्जुन होता तो ...... राखी देवी गीता की गिरी हुई झुलफें ऊपर करती हुई बोलती है

माँ सॉरी अचानक गेट पीटने से मुझे समझ नहीं आया .... गीता इस बार भी धीरे से बोलती है

चालों ठीक है लेकिन अगली बार से धयान रखना ..... चलो सोते है

माँ आप मेरे साथ

राखी देवी को अपने बीएड पर सोती हुई देख कर गीता थोड़ी हैरान होती हुई बोलती है ..... जो हैरानी की hi बात थी ये सायद गीता को खुद याद नहीं था की उसकी माँ उसके साथ कब सोइ थी जो अपनी माँ की बात सुन कर गीता मन मैं खुश भी हो जाती है

हां ..... आज मैं अपनी बेटी के साथ सोने आई हुईं क्या तुम नहीं चाहती तो मैं चली जाती हुईं ......

राखी देवी बोलती हुई उठने लगती है

नहीं माँ आप मेरे साथ सोयेंगी तो मुझे अच्छा लगेगा ..... गीता झट से बोल पड़ती है जो राखी देवी मुस्कुरा पड़ती है



गीता बेटी मुझे मांफ करना मैं उन माँ की तरह तुम्हारे साथ कभी नहीं रही जिसे हर बेटी अपनी माँ की पहली सहेली मानती है .... गीता बेटी एक बेटी की सबसे अच्छी सहेली उसकी माँ होती है जो मैं कभी तुम्हारी माँ के अलावा वह सहेली नहीं बन पाई ..... लेकिन अब मैं वैसी hi माँ बनना चाहती हुईं .... जैसे एक माँ बेटी एक दूसरे से हर बात करती है .... चाहे वह बातें कैसी भी हो

गीता बेटी क्या तुम मुझसे अपनी सहेली बनाओगी ..... राखी देवी गीता के सर पर हाथ फेरती हुई पूछती है

हां माँ मैं आप को अपनी सहेली बनाओगी ...... गीता झट से बोलती है जैसे गीता कब से ये बात सुन्ना चाहती थी

ठीक है ..... आज से हम दोनों अकेले मैं सहेली जैसी रहेंगी .... राखी देवी खुश होकर बोलती है वही गीता भी हस्ती हुई अपनी माँ से चिपक जाती है

दोनों माँ बेटी एक दूसरे से कुछ देर तक चिपकी हुई होती है गीता तो अभी इतनी खुश होती है की राखी देवी से पूरी तरह चिपक चुकी होती है जो गीता की चुकी राखी देवी अपनी चुकी पर महसूस कर रही होती है

हां तो बताओ वह कौन है जिसके लिए मेरी सहेली इतनी रात तक जाग रही है ... गीता बेटी ये मैं एक माँ की हक़ से नहीं पूछ रही

राखी देवी पूछने के बाद hi ये भी बोल देती है ताकि गीता बताने मैं हिचकिचाए नहीं

माँ आप जो समझ रही है आएसा कुछ नहीं है .... गीता बड़ी hi प्यार से बोलती है

ठीक है तुम मुझे अपनी सहेली नहीं मन रही तो कोई बात नहीं ..... राखी देवी थोड़ी नाराज़गी सवार मैं बोलती है

माँ सच मैं .... मैं कोई लड़के से बात नहीं कर रही थी आप मेरा फ़ोन देख सकती है ..... मैं तो कोमल से बात कर रही थी ..... गीता अपनी फ़ोन राखी देवी की तरह बढ़ाते हुआ मशोमियस्ट से बोलती है

मुझे अपनी बेटी पर पूरा यकीन है .... ठीक है चलो सोते है काफी रात हो गयी है

राखी देवी गीता से फ़ोन न लेते हुआ बोलती है ....

वैसे माँ आप को कैसे पता चला मैं अभी भी जाग रही हुईं मेरी लाइट तो बंद थी

गीता के मन मैं ये कब से चल रही थी के वह जाग रही है उसकी माँ को कैसे पता चला .... इस लिए पूछ hi लेती है

मैं तेरी नानी से बात कर रही थी फिर तेरी भेजी हुई पिछ देख रही थी तो देखा तू वात्सप्प पर ऑनलाइन है इस लिए आ गयी ..... राखी देवी बोलती है

ओह तभी आप ये सब पूछ रही थी ..... गीता बोल पड़ती है जो राखी देवी मुस्कुरा पड़ती है आवर साथ मैं गीता भी फिर दोनों माँ बेटी एक दूसरे की बाँहों मैं सो जाती है

गीता अभी बहुत खुश होती है क्यू की कई सैलून के बाद उसकी माँ उससे इतने वक़्त तक बात की होती है


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अगली सुबह

राखी देवी की जब नींद खुलती है तो देखती है गीता उससे लिपट कर अभी भी सो रही है जिसे देख कर राखी देवी की चेहरा पर मुस्कान आ जाती है

राखी देवी गीता की माथे पर किश करती है आवर उठ कर अपनी रूम मैं चली जाती है

राखी देवी कुछ देर के बाद hi अपनी रूम से निकलती है आवर हवेली से बहार निकलती है तभी राखी देवी की नज़र अर्जुन पर पड़ती है जो गार्डन मैं लेता हुआ होता है तो राखी देवी मुस्कुराती हुई अर्जुन के पास चली जाती है

गुड मॉर्निंग बीटा .... राखी देवी अर्जुन के पास जाकर बोलती है आवर तभी राखी देवी की नज़र अर्जुन की जिस्म पर जाती है जो अर्जुन का तिसरत पूरी तरह भींग चुकी होती है जो अर्जुन का हार्ड सरीर राखी देवी को दिख रही होती है

राखी देवी अर्जुन की छाती तो कभी अर्जुन बड़ी तो कभी अर्जुन को निचे से ऊपर पूरी जिस्म को देख रही होती है जैसे राखी देवी अर्जुन को आज पहली बार देख रही है

मेरा बीटा तो अब बड़ा हो गया है बिलकुल अपने पापा पर गया है उनका भी जिस्म इसी तरह था ..... कैसे उनकी बाँहों मैं जाकर मैं खुद को छोटी बच्ची समझने लगती थी

वह मेरे से लम्बाई मैं बस थोड़े hi बड़े थे ..... मगर उनका जिस्म आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मेरी जिस्म तो अकड़ hi जाती थी उनकी बाँहों मैं

अर्जुन मुझे उनकी तरह बाँहों मैं भरेगा तो वही हॉल होगी मेरी

गुड मॉर्निंग माँ .... अर्जुन बोलता है उठ कर बैठ जाता है

अर्जुन की आवाज़ सुन कर राखी देवी होश मैं आती है आवर दूसरी तरफ देखने लगती है

आज इतनी सुबह कैसे उठ गया ..... हर रोज़ तो उठाना पड़ता है .. राखी देवी मुस्कुराती हुई पूछती है

मैं तो घर पर सबसे पहले उठ जाता था माँ आवर नानी मेरे उठने के बाद उठती थी .... माँ हर रोज़ कहती थी वह मुझसे पहले उठेंगी मगर वह मुझसे पहले कभी भी नहीं उठ पाई ..... लेकिन यह आने के बाद मुझे सुबह उठने का मन hi करता था

अर्जुन बोलते हुआ राखी देवी की आँखों मैं देखने लगता है जो राखी देवी भी अर्जुन को बड़े hi प्यार से देख रही होती है


मायआ .... बीटा तू आँचल को माँ कितने प्यार से पुकारता है जैसे वह hi तेरी असली माँ है .... मैं कितनी बदनसीब माँ हुईं जो खुद तुझे जनम देकर खुद से अलग कर दिया

आँचल कितनी
खुशनसीब है जो तुम जैसा बीटा मिल गया ... मगर मैं वह माँ नहीं बन पाई .....

अर्जुन सॉरी ..... राखी देवी बस इतना hi बोल कर सर निचे किये हुआ अपनी हाथ जोड़े देती है जो अर्जुन को कुछ बस अपनी माँ को देखते रह जाता है जो राखी देवी की आँखों से आंसू निचे गिर रही होती है

ये भी बता दे तू हर रात चीटिंग करता था खुद मेरी बाँहों मैं आकर बोलता था माँ पेअर दर्द कर रहा है सर दर्द कर रहा है .... आवर मैं लेट नाईट तक तेरी मालिश करती रहती थी आउट तू सो जाया करता था ..... लेकिन नींद तो मेरी पहले hi खुल जाया करती थी मगर मैं फिर भी बीएड से नहीं उठती थी ..... ताकि मेरा बीटा मुझसे हार न जाये .... क्यू की तेरी जित मैं मेरी ख़ुशी होती है आवर तू है की मेरी बुराई कर रहा है

अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह माँ माँ

आँचल राखी देवी की पीछे hi गार्डन मैं आ चुकी होती है आवर वह थोड़ी दूर hi कड़ी होकर इनकी बाटे सुन रही होती है मगर जैसे hi आँचल सामने आती है तो देखती है राखी देवी अर्जुन के सामने हाथ जोड़े हुआ सिसक रही होती है आँचल दोनों माँ बेटे के बिच तो नहीं आना चाहती थी मगर आँचल से ये बिलकुल भी नहीं देखा जाता है की राखी देवी फिर से उन यादों को याद कर के दुखी हो जाये इस लिए अर्जुन के पास आकर अर्जुन का कान पकड़ लेती है बोलती हुईं

वही राखी देवी तो निचे सर किये हुआ सिसक रही होती है मगर जैसे hi अर्जुन की आह्हः राखी देवी की कानो मैं जाती है राखी देवी झट से आँचल की हाथ पकड़ कर अर्जुन के कान से हटा देती है आवर अर्जुन के कान पर फुक मरने लगती है

वही अर्जुन तो बस अपनी माँ को देखने लगता है ..... वही आँचल कड़ी मुस्कुरा रही होती है

क्या हुआ दर्द कर रहा है .... अर्जुन को खुद की तरफ देखती हुई पाकर राखी देवी पूछती है

नहीं ..... अर्जुन राखी देवी को मुस्कुराता हुआ देख कर बोलता है

ठीक है चालों मैं कॉफ़ी बनती हुईं ..... राखी देवी मुस्कुराती हुई अर्जुन के गल्ल पर हाथ फेरती है आवर फिर अर्जुन के माथे पर किश कर के चली जाती है

माँ ...... क्या ये मेरी वही माँ है जो मुझे खुद से अलग कर दी थी

अर्जुन पास कड़ी मुस्कुराती हुई आँचल से पूछता है

अर्जुन बीटा दीदी तुझसे बहुत प्यार करती है ये मुझसे जयादा कोई नहीं जनता .... वह तेरी जनम से पहले से तुझे प्यार करती है बस वह प्यार दिखने का उनेह वक़्त नहीं मिला ....

तू जितना दीदी के साथ रहेगा तुझे उनका प्यार का पता चलता रहेगा ..... आँचल अर्जुन के पास बैठ कर बोलती है

अह्ह्ह्हह क्या हो रही है मेरी जिस्म को अर्जुन के करीब आते hi मेरी जिस्म इतनी गर्म क्यू होने लगती है हुंनंन

आँचल मन मैं सोचती है आवर कड़ी होती हुई अपनी छूट मसल देती है जो अर्जुन नहीं देख पता है

वही आँचल की बात सुन कर अर्जुन राखी देवी को जाते हुआ देखता रह जाता है

चल कॉफ़ी पिटे है .... आँचल अर्जुन से बोलती है आवर सरमाती हुई हवेली मैं चली जाती है

अर्जुन अंदर आने के बाद अपने रूम मैं चला जाता है

वही आँचल किचेन मैं चली गयी होती है

अर्जुन अपने रूम मैं जाकर सीधे बाथरूम मैं चला जाता है आवर फ्रेश होने लगता है

वही आँचल जब किचेन मैं जाती है तो राखी देवी की गले लग जाती है जो राखी देवी थोड़ी मुस्कुरा पड़ती है


दीदी मुझे यकीं है अर्जुन आप के प्यार को अब समझ जायेगा ... आँचल मुस्कुराती हुई बोलती है

थैंक्स आँचल अर्जुन को इतना प्यार देने के लिए ..... अर्जुन अगर हॉस्टल मैं रहता तो वह मुझे कभी मांफ नहीं करता सायद ..... राखी देवी थोड़ी दुखी सवार मैं बोलती है

दीदी अर्जुन भी आप से बहुत प्यार करता है इस लिए तो वह आप से इतना गुस्सा था .... जिससे हम प्यार करते उसी पर जयादा गुस्सा करते है

दीदी अर्जुन बचपन से आप को प्यार करता है .... अर्जुन अगर आप को उनके साथ नहीं देखता तो सायद आप इतने सल्ल तक इतनी दुखी नहीं रहती .... आँचल बोलती है

आँचल मुझे अभी भी दर लगता है अर्जुन वह राज़ एक न एक दिन ज़रूर मुझसे पूछेगा मैं उसे कैसे बताउंगी .... वह साडी बातें ..... राखी देवी मायूसी से बोलती है

दीदी आप नहीं बता सकती तो मैं hi बता दूंगी उसे .. क्या

गुड मॉर्निंग मेरी प्यारी माओं

आँचल आवर कुछ बोलती के किचेन मैं अंजलि की आवाज़ आ जाती है जो आँचल चुप हो जाती है

गुड मॉर्निंग बंदरिया बच्ची .... है है है है

राखी देवी आवर आँचल दोनों hi सेम बातें बोल कर हसने लगती है

मैं बंदरिया हुईं तो आप दोनों बंदरिया की माँ हो वह भी बड़ी वाली बंदरिया ..... हूंणनननननन

अंजलि मुंह बना कर बोलती है आवर वही किचेन के दिवार मैं सात कर कड़ी हो जाती है

वही आँचल आवर गीता अभी भी दोनों एक दूसरे को देख कर है रही होती है

गुड मॉर्निंग ...... क्या हुआ आप दोनों इतनी क्यू है रही है आवर गुड़िया इस तरह मुंह बना कर क्यू कड़ी है

गीता जब अंजलि को देखती है तो पूछती है

दीदी आप बोलो मैं बंदरिया की तरह दिखती हुईं ...... अंजलि मुंह बना कर पूछती है

अंजलि की बात सुन कर गीता समझ जाती है की उसकी दोनों माँ आज अंजलि से मज़े ले रही है जो गीता भी मन hi मन मुस्कुराने लगती है

माँ आप दोनों ने गुड़िया को बंदरिया कैसे बोल दिया ..... गुड़िया तो घोड़ी है न है है है है है

गीता बोलते hi किचेन से भाग पड़ती है

क्याआआआआ

दीदी मैं आप को नहीं छोड़ने वाली .... अंजलि गुस्से मैं गीता के पीछे भगति है


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डीई

अंजलि जैसे hi किचेन के गेट पर जाती है आँचल राखी देवी को पुकारती हुई अंजलि की तरफ देखने को कहती है जो अंजलि किचेन के गेट पर कड़ी होकर गीता दीदी को देख रही होती है वह कहा भाग रही है

वही राखी देवी आँचल को इसरा से पूछती है क्या हुआ .....

दीदी गुड़िया को देखिये .... गुड़िया गीता से छोटी है मगर इसकी जिस्म को देखिये कितनी जल्दी ये बड़ी हो गयी है लगता है गीता से पहले इसकी hi शादी करवानी पड़ेगी .....

वही आँचल की बात को सुन कर राखी देवी अंजलि को देखने लगती है


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सच मैं गुड़िया तो अब जवान हो गयी है गुड़िया की जिस्म तो मुझसे भी खूबसूरत है गुड़िया की गांड अभी इतनी निकल गयी है तो शादी के बाद तो अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह इसका पति तो देख कर hi पागल हो जायेगा ..... मेरी गुड़िया को इसका पति बहुत प्यार करेगा ..... राखी देवी मन मैं सोचती है

दीदी क्या सोचने लगी .... आँचल जब देखती है की राखी देवी अंजलि की जिस्म को घर कर देख रही है तो पूछती है

आँचल की जिस्म को देख कर मुझे अपनी जवानी याद आ रही है जैसे मैं फिर से गुड़िया की सकल मैं जवान हो गयी हुईं .... राखी देवी मुस्कुराती हुई बोलती है

दीदी गुड़िया के लिए लड़का भी लम्बा छोड़ा देखना पड़ेगा .... बिलकुल अर्जुन की तरह .... हे भगवन ये क्या निकल गया मेरे मुंह से ..... आँचल बोल कर खुद hi अफ़सोस कर देती है

वही राखी देवी आँचल को घूरने लगती है

सही कहा आँचल गुड़िया के लिए ... अर्जुन जैसा hi लड़का चाहिए .....

राखी देवी अर्जुन को आते हुआ देख कर बोलती है

वही आँचल थोड़ी रहत की साँस लेती है की उसकी बातों पर राखी देवी कुछ उल्टा न सोचती है मगर आँचल को अभी भी अपनी कही हुई बातों पर अफ़सोस हो रही होती है के उसके मुंह से ये निकला भी कैसे

हे भगवन मेरे दिलों दिमाग पर अर्जुन hi छ गया है अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह

आँचल मन मैं सोचती है

वही अर्जुन मैं आता है तो राखी देवी अर्जुन को कॉफ़ी देती है


वही आँचल को किचेन मैं देख कर शर्माना लगती है

अर्जुन कॉफ़ी लेकर किचेन से चला जाता है

राखी देवी आवर आँचल साथ मैं नास्ता बनती है

अर्जुन हॉल मैं बैठ कर कॉफ़ी पिने लगता है मगर अर्जुन की नज़र किचेन मैं hi होती है

अर्जुन क्या इरादा है ममी माँ से बात करूँ .... कब तक इस तरह उनेह घूरता रहेगा

गीता अर्जुन के कान मैं बोलती है जो अर्जुन थोड़ा घबरा जाता है ....

दीदी मम मैं

अर्जुन ममी माँ को तेरी ज़रूरत है प्लीज मान जा न .... बस एक बार उनसे प्यार करले अगर तुझे अच्छा नहीं लगेगा तो मन कर देना ..... प्लीज

अर्जुन के बोलने से पहले hi गीता बोल पड़ती है

अर्जुन गीता की बातें सुन कर एक वक़्त के लिए चुप हो जाता है

दीदी क्या माँ भी एहि चाहती है .... अर्जुन कुछ देर के बाद पूछता है

अर्जुन माँ भी तुझे मेरी तरह hi प्यार करती है

अर्जुन माँ को हमारे बारे मैं पता है उन्होंने देख लिया था

गीता अर्जुन को साडी बात बता देती है

अर्जुन गीता दीदी की बात सुन कर मान जाता है जो गीता बहुत खुश हो जाती है आवर किचेन की तरफ देखती हुई अर्जुन को किश करने लगती है

मैं ममी माँ को बता देती हुईं के आज वह तैयार हो जाये .... गीता हस्ती हुई बोलती है आवर अर्जुन के पास से चली जाती है

वही आज के दिन कर अर्जुन कुछ बोलने को होता है मगर तब तक गीता चली जाती है

गीता जब किचेन मैं जाती है तो आँचल को देख देख कर मुस्कुरा रही होती है जो आँचल हैरानी से गीता को देख रही होती है आवर शर्मा भी रही होती है

ममी माँ आज रात किस तरह अपने बेटे के पास जाना चाहती है माँ की तरह या बीवी की तरह

राखी देवी के किचेन से जाते hi गीता आँचल से बोलती है

गीता बेटी क्या बोल रही है ..... आँचल गीता की बात को सुन कर पूरी तरह शर्मा जाती है

ममी माँ अर्जुन मान गया है .... उसे मैंने बोल दिया है आज hi वह आप के साथ .... गीता हस्ती हुई बोलती है

वही आँचल की सांसे ज़ोर ज़ोर से चलने लगती है आँचल की आँखें सरम से लाल हो जाती है

आँचल कुछ देर के लिए सुन रह जाती है

आँचल के पेअर भी कैंप जाती है आँचल कभी गीता तो कभी हॉल मैं बैठा अर्जुन को देखने लगती है

गीता बेटी आज रात वह भी घर मैं ..... ये कैसे होगा ..... आँचल घबराती हुई बोलती है

वाओ मतलब ममी माँ आप तैयार हो .... आप फिकर न करो मैं संभल लुंगी बस आज आप रात के लिए खुद को आवर इसे तैयार कर लीजिये

Aahhhhhhhhhhhhhhhhhh

गीता बोलती हुई आँचल की साड़ी के ऊपर से hi छूट मसल देती है जो आँचल की आह्ह्ह्ह निकल जाती है

गीता बेटी पागल तो नहीं हो गयी है वह इस घर मैं करने को बोल रही है ..... ये कैसे होगा कही ...... दीदी को पता चल गया तो


यक़ीनन दीदी को पता चल जायेगा .... म मैं अर्जुन के साथ वह प्यार करना चाहती हुईं मगर मैं दीदी आवर गुड़िया की नज़र मैं गिरना नहीं चाहती ....

आँचल किचेन मैं कड़ी होकर सोचने लगती है

आँचल क्या हुआ नास्ता बन गया तो निकल कर दिंनिंग टेबल पर रखते है न .... कॉलेज जाना है बच्चों को

राखी देवी किचेन मैं आकर बोलती है

वही आँचल भी नास्ता निकलने लगती है


अर्जुन नास्ता करते हुआ आँचल की तरफ कभी कभी देखता है मगर आँचल एक बार भी अर्जुन की तरफ नहीं देखती है

अर्जुन नास्ता करने के बाद कॉलेज के लिए निकल जाता है वही गीता आवर अंजलि भी कॉलेज के लिए निकल जाती है

आँचल नास्ता करने के बाद सारा पैकेट किचेन मैं रखने लगती है

आँचल मैं खेत पर जा रही हुईं गेट बंद कर लेना

राखी देवी अपनी रूम से निकलती हुई बोलती है

राखी देवी के जाने के बाद आँचल गेट बंद कर के अपनी रूम मैं आ जाती है

आँचल की दिल की धड़कन अभी भी धक् धक् कर रही होती है लेकिन आँचल की छूट मैं तो हलचल सी मची हुई होती है की आँचल बार बार अपनी हाथ छूट पर रख रही होती है आवर छूट को मसल रही होती है जैसे आँचल की छूट मैं खुजली हो रही है

आँचल आज बरसों बाद तेरी सुखी हुई वीरान ज़िन्दगी मैं बहार आने वाली है तू आवर कुछ मत सोच ..... गीता बेटी ने कुछ तो सोची होगी ..... वह तुझे बदनाम तो नहीं होने देगी

आँचल तू इस बात से मत दर के रात मैं दीदी को पता चल जाएगी ..... आँचल दीदी के बारे मैं सोचना बंद कर आवर ये सोच के तू अपने बेटे का सामना कैसे करेगी .....

आज रात तुझे उसकी बाँहों मैं जाना है ..... वह भी बिलकुल नंगी होकर Aahhhhhhhhhhhhhh


जब तू उसकी बाँहों मैं नंगी जाएगी तो तेरी जिस्म के साथ रूह भी कैंप जाएगी

Ahhhhhhhhhhhhh कही अर्जुन के बाँहों मैं जाते वक़्त न तेरी छूट से नदिया बाह जाये

Ahhhhhhhhhhhhhh

अर्जुन तेरी छूट मैं जब अपना मुंह लगाएगा तो


Ahhhhhhhhhhh

तू तो तड़प कर अर्जुन कर सर अपनी छूट मैं दबा देगी गांड उठती हुई

आँचल बीएड पर बैठी सोच रही होती है आवर आँचल की हाथ खुद hi अपनी छूट मैं चली गयी होती है जो आँचल की पेंटी पूरी तरह गीली हो चुकी होती है


आँचल जब अपनी ऊँगली छूट से निकल कर देखती है तो शर्मा कर बीएड पर लेट जाती है

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अपडेट ..... 91

आँचल बीएड पर उसी तरह सो गयी होती है

आँचल की अचानक नींद खुलती है तो वह खुद को बिस्टेर पर नंगी हालत मैं पति है जो आँचल की साड़ी निचे गिरी हुई होती है आवर पेटीकोट का नाडा भी खोली हुई होती है

ओह्ह ह्ह्हह्हह्ह्ह्ह

आँचल जब बीएड पर बैठती है तो आँचल अपनी छूट मैं गिला सा महसूस करती है आवर आँचल हैरान होती हुई छूट मैं हाथ दाल देती है तो आँचल की छूट की पानी आँचल की ऊँगली मैं लग जाती है

आँचल अपनी ऊँगली को अपनी आँखों के करीब लेकर देखने लगती है

आँचल तेरी छूट तो अभी से अर्जुन के नाम से तड़पने लगी है

आँचल तेरा दिल भले hi घबरा रही है मगर तेरी ये जिस्म अर्जुन के लिए तड़प रही है ........

आँचल तू जयादा मत सोच ......

आँचल ये सोच तूने 19 सल्ल तक इतनी हसीं जवानी को क्यू बच्चा कर राखी है ..... आँचल सायद इस लिए की तुझे इतनी गर्मी अपनी जिस्म मैं कभी महसूस hi नहीं हुई थी आवर उसकी वजह था अर्जुन .... क्यू की अर्जुन जब से तेरी जीवन मैं आया तूने बस अर्जुन को खुश रखना hi सही समझा आवर अपनी जिस्म की गर्मी को कभी खुद पर हावी hi नहीं होने दिया क्यू की तू अर्जुन के प्यार मैं सब कुछ भूल गयी थी ...... लेकिन आँचल वह तेरी जिस्म की गर्मी अब काफी बढ़ चुकी है आवर वह भी उस लड़के के लिए जिसे तूने सबसे जयादा प्यार किया वह तेरा बीटा नहीं है तुझे कभी लगा hi नहीं आवर सायद अर्जुन भी तुझे एक माँ से कही बढ़ कर प्यार करता है तभी तो वह तुझे कभी दुखी नहीं देख सकता है

आँचल वह वक़्त आ गया है जो तू अर्जुन से कितना प्यार करती है बताने का ..... आँचल ये सोच जब तू अर्जुन के सामने बिलकुल नंगी होगी आवर तेरे सामने अर्जुन नंगा होगा Ahhhhhhhhhhhh


सच कहती हुईं आँचल तेरी जिस्म की गर्मी तो उस वक़्त चिंगारी की तरह उड़ने लगेगी ..... आवर कुछ मत सोच आँचल चल अपने बेटे के लिए तैयार होजा आज तेरी सबसे हसीं रात होने वाली है

आँचल बीएड पर बैठी अपनी छूट की पानी को देख रही होती है आवर आँचल की मन मैं साडी बातें चल रही होती है ..... अचानक आँचल की चेहरे पर सरम सी मुस्कान आ जाती है

आँचल मुस्कुराती हुई बाथरूम मैं चली जाती है

आँचल बाथरूम से बहुत टाइम के बाद निकलती है आवर रूम मैं आने के बाद कपडे पहनने लगती है

आँचल कपडे पहनने के बाद टाइम देखती है तो आँचल की दिल मचल जाती है .... क्यू के अर्जुन के कॉलेज से आने का वक़्त आ गया होता है

आँचल धड़कते हुआ दिल के साथ किचेन मैं चली जाती है आवर खाना गर्म करने लगती है

आँचल खाना गर्म कर रही होती है तभी हॉल मैं आँचल की नज़र गीता पर पड़ती है जो गीता की हाथ मैं एक थैला दिखाई देती है जो गीता जल्दी बाज़ी मैं अपने रूम मैं चली जाती है

गीता की हाथ मैं थैला देख कर आँचल थोड़ी हैरान हो जाती है

आँचल खाना गर्म कर के दिंनिंग टेबल पर रख रही होती है तभी गीता अपनी रूम से निकलती है आवर आँचल के पास आ जाती है

ममी माँ अर्जुन आवर गुड़िया अभी तक घर नहीं आये क्या ..... गीता पूछती है

गीता बेटी तुम उनके साथ कॉलेज गयी थी न .... आँचल घूरती हुई बोलती है

आँचल को थैले के बारे मैं भी पूछने का मन तो कर रहा था मगर पूछती नहीं है

ममी माँ वह तो मैं आज कॉलेज नहीं गयी थी ..... गीता इस बार आँचल को देखती हुई मुस्कुरा कर बोलती है

गीता बेटी ये क्या बोल रही है .... कॉलेज नहीं गयी थी तो पूरा दिन कहा थी ..... तुझे पता है न गुड़िया कैसी है उसे अकेले कैसे छोड़ दिया ..... इस बार आँचल थोड़ी गुस्से मैं बोलती है

माँ गुड़िया अब बच्ची नहीं रही वह अब बड़ी हो गयी है .... आप तो उसे बच्ची बच्ची बोल कर आवर बच्ची बाबा देती हो .... ठीक है सॉरी ..... मगर मैंने गुड़िया को कॉलेज छोड़ कर आई थी ..... मैं अभी फ़ोन करती हुईं गुड़िया को

जब गीता देखती है आँचल उसे अभी भी घर रही है तो वह बोलती है आवर अंजलि को फ़ोन करने लगती है

मैंने इनके लिए इतनी सब कुछ कर रही हुईं मगर िनेह सिर्फ गुड़िया की पड़ी है ..... गीता अंजलि को फ़ोन करती हुई मन मैं सोचती है

Hello गुड़िया कहा है अभी तक घर क्यू नहीं आई ..... गीता आँचल को देखती हुई थोड़ी मुंह बना कर पूछती है

हां ठीक है जल्दी आ तेरी ममी माँ परेशां हो रही है ..... गीता बोलती है आवर आँचल को देख कर वह से चली जाती है

वही आँचल बस गीता को देखती रहती है

आँचल तू कर क्या रही है तुझे गीता बेटी से इस तरह बात नहीं करनी चाहिए थी मन की तू गुड़िया से बहुत प्यार करती है मगर भूल मत तू गीता से भी प्यार करती है जो गीता बेटी तेरे लिए इतना कुछ कर रही है

जा देख वह कही तुझसे जयादा न नाराज़ हो जाये .... आँचल के मन मैं ये ख्याल आते hi आँचल गीता की रूम की तरफ जाती है

आँचल जब गीता की रूम मैं जाती है तो देखती है गीता मुंह बना कर बीएड पर बैठी हुई होती है


सॉरी सॉरी सॉरी ..... तू तो मेरी समझदार बेटी है न ..... अपनी माँ की इतनी छोटी बात पर नाराज़ हो गयी ..... है मन की मैं गुड़िया की जयादा फ़िक्र करती हुईं .... इसकी वजह तुझे भी पता है वह किसी से लड़ जाती है अगर वह अकेली कॉलेज मैं रहेगी तो यकीनन कोई लड़का उससे बोली बोलेगा आवर वह भी उसे बोलेगी फिर जानती है उसके बाद क्या होगा ..... क्यू के एक बार पहले भी हो चूका है

अगर गुड़िया के साथ फिर से कुछ हो गया तो ..... आँचल बोलती हुई थोड़ी दुखी हो जाती है

ठीक है मांफ किया .... लेकिन आप भूलना नहीं मैं पहले आप की बड़ी बेटी हुईं ...... गीता हस्ती हुई बोलती है

हां मुझे पता है ..... इस थैले मैं क्या है ......

बीएड पर थैले को देख कर आँचल पूछ hi लेती है

ये ये ये ये आप के लिए है .... गीता झट से बोल पड़ती है आवर मुस्कुरा भी देती है

मेरे लिए क्या है .... आँचल फिर से पूछती है

आप खुद देख सकती है .... गीता फिर से हस्ती हुई बोलती है

आँचल पहले गीता को देखती है आवर फिर धड़कते हुआ दिल के साथ थैले को उठा लेती है आवर एक बार मैं hi थैला पलट देती है आवर आँचल की सरम के मरे आँखे लाल होने लगती है

क्यू की उसमे ब्रा पेंटी सिंदूर होठ लाली बिंदिया चूड़ी आवर एक क्रीम होती है

आँचल सरे चीजों को देख कर एक वक़्त के लिए सुन रह जाती है आवर वही पर जैम गयी होती है आँचल बस उन चीजों को देखती रहती है

क्या हुआ आप अच्छा नहीं लगा .... मुझे लगा आप को अच्छा लगेगा इस लिए मैं कॉलेज न जाकर इसके लिए पूरा दिन इंतज़ार किया ..... गीता बोलती है

माँ माँ माँ ... हा

आँचल के कुछ न बोलने पर गीता आँचल को हिलती हुई बोलती है जो आँचल हड़बड़ कर होश मैं आती है


गीता बेटी ये सब क्या है .... आँचल शर्माती हुई बोलती है

माँ ये सब ज़रूरी है मुझे पता है आज का दिन आप के लिए कितना अनमोल है .... आप अर्जुन को बहुत प्यार करती है आवर आप भी अर्जुन के लिए कुछ आएसा करना चाहती होंगी जो अर्जुन आप के प्यार को कभी भूल न पाए ..... माँ मैं सच बोल रही हुईं न .....

गीता आँचल की हाथ पकड़ कर बोलती है वही
आँचल शर्माती हुई बाद मुस्कुरा देती है

ओह no गुड़िया आ गयी .... माँ आप किचेन मैं जाइये मैं ये आप की रूम मैं रख देती हुईं .....

अंजलि की आवाज़ सुन कर गीता बोलती है वही आँचल रूम से निकल जाती है


आँचल किचेन मैं जाती है आवर पलट लेकर हॉल मैं आ जाती है तब तक अंजलि आवर गीता भी वह आ जाती है लेकिन अर्जुन अभी तक घर नहीं आया हुआ होता है अर्जुन को न देख कर आँचल गीता की तरफ देखती है जो गीता बस मुस्कुरा देती है

तीनो साथ मैं खाना कहती है खाना खा कर अंजलि तो अपनी रूम मैं चली जाती है मगर गीता आँचल की हेल्प करती है दिंनिंग टेबल साफ करने मैं

गीता बेटी ये कैसे होगा .... मेरा दिल बहुत घबरा रहा है

किचेन मैं आँचल बोलती है .....

ममी माँ मुझपे
यकीं कीजिये सब अच्छे से होगा ..... मुझे पता है आज आप की चीख इस हवेली मैं बहुत गूंजेगी .... माँ आप जितना मन करे चीख लीजियेगा .... आप को कोई डिस्टर्ब नहीं करेगा .....

गीता मुस्कुराती हुई बोलती है वही आँचल बस शर्मा जाती है


ओह हो माँ तो शर्मा रही है ओह हो

Ahhhhhhhhhhhhh

गीता बोलती हुई आँचल की कमर पर हाथ रख देती है जो आँचल सिसक जाती है आवर गीता की बिलकुल करीब आ जाती है जो दोनों की जिस्म भी एक दूसरे से चिपक जाती है

आँचल आवर गीता की नज़ारे एक दूसरे से मिल जाती है जो आँचल की आँखों मैं अभी भी सरम होती है वही गीता की चेहरे की भी रंग बदलने लगती है

अह्ह्ह

ममी माँ की जिस्म की तो बहुत गर्म है अह्ह्ह्हह माँ की जिस्म की महक भी कितनी अच्छी है अह्ह्ह्हह माँ की ये होंठ इतनी उम्र होने के बाद भी एक लड़की की तरह चिकनी है अह्ह्ह मन कर रहा है है माँ की होंठ चूस लू

Ahhhhhhhhhhhhh

गीता मन मैं सोचती है आवर अपनी हाथ से आँचल की कमर को मसल देती है है जो आँचल आह भर्ती हुई गीता की कमर भी पकड़ लेती है

Ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

दोनों माँ बेटी की चुकी भी एक दूसरे से डाब जाती है जिसे दोनों की आह्हः एक साथ निकलती है

गीता ममी माँ की जिस्म की खुसबू मैं इतनी दुब जाती है की गीता की मुंह अपने आप hi आँचल की होंठों को तरफ बढ़ने लगती है

Ahhhhhhhhhhhh


माँ आप की ये होठ

Ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

गीता आँचल की होंठ पर अपनी होंठ रखती उसके पहले hi आँचल पीछे हो जाती है जिससे गीता बस सिसक कर रह जाती है

सॉरी माँ गीता इतना hi बोल कर चली जाती है


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शाम के 5 :50

गीता अपनी रूम मैं सोइ हुई होती है आवर गीता की मन मैं बार बार आँचल के साथ किचेन मैं जो हुआ याद आ रही होती है

वाओ

ममी माँ की जिस्म की खुसबू की तीनि अच्छी है है एक पल के लिए तो मैं भूल hi गयी थी मैं लड़की हुईं कोई लड़का नहीं

ममी माँ की खुसबू से मैं इतनी बेचैन हो गयी थी तो अर्जुन का क्या हॉल होगा

अह्ह्ह्हह अर्जुन को ममी माँ की जिस्म की खुसबू इतनी पागल कर देगी की अर्जुन तो ममी माँ की जिस्म नोच hi लेगा

Ahhhhhhhhhhhh

अर्जुन हवस मैं इतना पागल हो जायेगा के वह ममी माँ की छूट फाड़ने के बाद भी छोड़ता रहेगा अर्जुन का पानी निकलने के बाद फिर से लैंड खड़ा हो जायेगा ममी माँ की छूट hi इतनी गर्म होगी

Ahhhhhhhhhhhhh अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह

ममी माँ चीख चीख कर तो पूरी बस्ती तो जगा देंगी Ahhhhhhhhhhh अह्ह्ह्हह्हह

ममी माँ होंठ को अर्जुन

Aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaàhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

गीता बीएड पर गांड उठा उठा कर कुछ देर तक सिसकती रहती है आवर फिर गीता संत होकर आँखे बंद कर लेती है

ओह गॉड पहली चुदाई जितना पानी आज भी निकल गयी मेरी छूट से .... गीता मन मैं सोचती है आवर उठ कर पेंटी मैं hi बाथरूम मैं चली जाती है

गीता फ्रेश होकर हॉल मैं आती है तो देखती है माँ भी खेत से आ गयी है तो जाकर राखी के बगल मैं बैठ जाती है

क्या हुआ तबियत ठीक है न बीटा आँखें इतनी लाल क्यू है .... गीता की लाल आँखें देख कर राखी देवी पूछती है

हां माँ वह अभी सो कर उठी हुईं न इस लिए ...... गीता पहले तो थोड़ी घबरा जाती है मगर वह राखी देवी को ज़ाहिर नहीं होने देती है

अब राखी देवी को क्या पता उसकी ये बेटी अभी अपनी ऊँगली आवर छूट को कितनी तकलीफ देकर आई है जिसे इसकी आँखें भी लाल हो चुकी होती है

माँ बेटी बातें कर रही होती है अर्जुन आता है आवर बिना कुछ बोले अपने रूम मैं चला जाता है

राखी देवी कुछ देर तक गीता से बात करती है जो गीता भी हस्ती हुई अपनी माँ से गाओं की बातें करती है आवर फिर दोनों माँ बेटी साथ मैं किचेन मैं चली जाती है

अर्जुन रूम मैं आकर कपडे चेंज करता है आवर बीएड पर लेट जाता है

बस चोट तू बैठ क्यू नहीं रहा है ....

अर्जुन का लैंड फुल टाइट खड़ा होता है अभी जो अर्जुन लैंड को बार बार दबा रहा होता है

अर्जुन चाहे कुछ भी करले ये अभी तो नहीं बैठने वाला है .... ये जब तक माँ की छूट मैं नहीं जायेगा संत नहीं होगा ....... इसे तो बस रात होने का इंतज़ार है फिर माँ के साथ

Ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

अर्जुन मन मैं सोचते हुआ अपना लैंड हिला रहा होता है मगर अर्जुन का लैंड बैठ नहीं रहा होता है

अर्जुन थक कर उसी तरह लैंड खड़ा छोड़ कर अपनी आँखें बंद कर लेता है


रात के 10 :पं

अर्जुन अर्जुन

डीईई

अर्जुन सोया हुआ होता है तभी गीता की आवाज़ सुन कर अर्जुन उठ जाता है आवर टावल लपेट कर गेट को खोलता है

अर्जुन चल खाना खा ले ..... डीई

अर्जुन बड़े hi प्यार से गीता को पुकारता है अर्जुन को आवाज़ सुन कर गीता जाये जाते रुक जाती है तभी गीता की नज़र अर्जुन के लैंड पर जाती है

ओह हो इतना हॉल बेहाल हो गया है माँ के लिए ..... गीता हस्ती हुई बोलती है

डीई ये बैठ hi नहीं रहा है दिल कर रहा है माँ की रूम मैं ..... अर्जुन बोलता हुआ रुक जाता है

आज तो माँ की खैर नहीं .... माँ की बिल तो गुफा hi बन जाएगी

डीई .... अच्छा ठीक है

मैं तेरी हालत समझ सकती हुईं बाबू .... एहि हॉल मेरी भी हुई थी जिस दिन तुमने मुझे सेक्स करने के लिए बोलै था उस दिन मैं सिर्फ अपनी छूट को hi मसल रही थी .... आएसा कर तू रूम मैं रह मैं खाना लेकर आती हुईं

अर्जुन को घूरते हुआ देख कर गीता बोलती है आवर मुस्कुरा कर रूम से निकल जाती है

गीता बीटा अर्जुन नहीं आया .... गीता को अकेली आते हुआ देख कर राखी पूछती है

माँ अर्जुन पढ़ रहा है बोलै है खाना रूम मैं लेन को मैं लेकर जाती हुईं साथ मैं खा लुंगी अर्जुन के

ममी माँ अर्जुन का छोटा भाई आप के लिए गुस्से मैं खड़ा है बोल रहा है जल्दी आप की पारी पर बैठना है ....


हूंणंन्न हूंणणन्न

गीता आँचल की कान मैं बहुत hi धीरे से बोलती है जो आँचल हिचकी लेने लगती है

गुड़िया पानी ममी को

राखी देवी बोलती है तो अंजलि जल्दी से पानी देती है

माँ आप ठीक है .... अंजलि पूछती है

हां गुड़िया ..... आँचल बस इतना बोलती है

खाना खाने के बाद राखी देवी अपनी रूम मैं चली जाती है वही अंजलि आँचल की मदद करने लगती है

माँ कोई बात है जो आप मुझे बताना चाहती है ...... मैं जब से कॉलेज से आई हुईं देख रही हुईं आप खोई खोई सी लग रही है

अंजलि पलेट धोती हुई बोलती है ....

हे भगवन इसे कैसे पता चल जाता है मैं दुखी हुईं उदास हुईं क्या हुईं .... भगवन जी क्या ये दीदी की बेटी है ....... मुझे तो कभी कभी लगता है ये मेरी hi बेटी है बस दीदी ने इसे जनम दिया है .... मेरी दिल की हर बात ये जान लेती है

माआआआआ अब क्या सोचने लगी .... अंजलि फिर से पूछती है

गुड़िया वह आज तेरे मां की याद आ रही है उनेह कई बार फ़ोन किया जो नहीं लगा .... आँचल बोलती है जो पूरी तरह झूट होती है मगर आँचल अच्छे जानती थी एक एहि झूट बोलेगी तो अंजलि यकीन करेगी ....

माँ सायद मां के फ़ोन मैं नेटवर्क नहीं होगी आप फिर से फ़ोन कर लेना ....

ठीक है मैं सोने जा रही हुईं .... ी लव यू ुंआआआआ गुड नाईट

अंजलि मुस्कुराती हुई आँचल से बोलती है आवर गाल पर किश कर के चली जाती है

माँ आप रूम जाकर तैयार हो जाइये मैं बाकि काम कर लेती हुईं ...... गीता मुस्कुराती हुई बोलती है

गीता को मुस्कुराते हुआ देख कर आज तो आँचल हर बार शर्मा रही होती है

गीता बेटी अभी कैसे वह दीदी आवर गुड़िया तो जाग रही है

आँचल बोलती है

माँ आप तैयार हो जाइये मैं देख लुंगी वह सोइ की नहीं .... गीता बोलती है

वही आँचल को समझ नहीं आ रही होती है गीता क्या कर रही है एक तरफ तो बोल रही है आँचल को बदनाम नहीं होने देगी मगर फिर क्यू राखी देवी आवर अंजलि के सोने से पहले hi बोल रही है तैयार होने के लिए ...... वह दोनों अचानक उसकी रूम मैं आ गए तो ..... या फिर रात मैं उनकी नींद खुल गयी तो

आँचल मन मैं सोचती हुई किचेन से चली जाती है

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थैंक्स दोस्त .....

लिखना सुरु किया है तो पूरा तो होगा hi दोस्त ... हर वक़्त हर इंसान के पास समय नहीं होता है ये बात हर किसी को पता होती है .... हां सायद अभी मेरे पास समय है तो लिख रहा हुईं आवर जल्द से जल्द इसे ख़तम भी करना चाहता हुईं .....

लेकिन ज़िन्दगी का कोई भरोसा नहीं है दोस्त कब क्या हो जाये .... ये उम्मीद रखना भी सही नहीं है के मैं hi स्टोरी ख़तम करूँगा .... बाकि जो समझदार होंगे तो समझ गए होंगे :फाइव:
 
अपडेट ...... 92

गीता बचा हुआ काम करती है आवर फिर किचेन से सीधे अपनी माँ की रूम मैं चली जाती है जो राखी देवी की रूम की गेट खुली हुई hi होती है

माँ माँ

गीता एक डोर बार माँ माँ बोलती है मगर राखी देवी कोई जवाब नहीं देती है जो गीता मन मैं hi मुस्कुरा देती है आवर फिर अपनी माँ की रूम से निकल कर गेट को बंद कर देती है फिर गीता अंजलि की रूम मैं जाती है जो अंजलि की रूम अंदर से बंद होती है जो गीता थोड़ी परेशां हो जाती है आवर वह अंजलि की गेट पीटने लगती है मगर अंजलि की कोई आवाज़ नहीं आती है गीता फिर अंजलि को फ़ोन करने लगती है जो कई बार करने पर भी अंजलि फ़ोन नहीं उठती है

चलो गुड़िया भी सो गयी है ..

अंजलि के फ़ोन न उठाने पर गीता एक सन्ति भरी आठ भर्ती हुई बोलती है

गीता वह से सीधे आँचल की रूम के पास जाती है तो देखती है आँचल की रूम अंदर से बंद है तो गीता आँचल को आवाज़ देती है आँचल कुछ देर के बाद गेट खोलती है .....

गेट खोलने पर गीता को आँचल दिखाई नहीं देती है तो गीता रूम मैं आ जाती है

ममी माँ आप ने लाइट क्यू बंद किया है

वाओ Maaaaaaaaaaa

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गीता जैसे hi लाइट ों करती है गेट के पास कड़ी आँचल को लाल साड़ी मैं दुल्हन की तरह सजी हुई देख कर हैरान होती हुई बोल पड़ती है

वही आँचल की चेहरे पर अजीब सी कसीस दिख रही होती है जैसे आँचल कुछ कर थोड़ी परेशां हो

आँचल गीता की आँखों मैं कुछ देर तक देख कर सरम के मेरे सर निचे कर लेती है ::

माँ आप सच मैं बहुत बहुत hi प्यारी लग रही है जैसे आप कुवारी लड़की है ..... माँ आप को दुल्हन के रूप मैं देख कर कोई भी एहि समझेगा आप की ये पहली बार शादी हो रही है

माँ आप तो इस उम्र मैं भी हम जैसी लड़कियों को मात दे दिया

वाओ माँ आप इतनी खूबसूरत है मुझे आज पता चल रही है .....

गीता बोलती है आवर ये सच भी होता है गीता सच मैं अपनी ममी माँ की खूबसूरती देख कर हैरान हो गयी होती है आवर जो भी बोल रही होती है वह दिल से बोल रही होती है ...

गीता बेटी वह दीदी आवर गुड़िया .... आँचल सरमाती हुई बोलती है

ममी माँ चिंता न करो मैंने बोलै था न मैं सब कुछ संभल लुंगी .... मैंने माँ आवर गुड़िया को नींद की गोली दे दिया है आवर वह दोनों सो गयी है .....

आप बस तैयार हो जाइये आज सुहागरात मानाने के लिए .... वैसे आप कहेंगी तो मैं भी यह रुक सकती हुईं ..... क्या कहती है

गीता बेटीईईईई

गीता हस्ती हुई बोलती है जो आँचल गीता को घूरने लगती है

आँचल को घूरती हुई देख कर गीता हस्ती हुई रूम से निकल जाती है ....

आँचल गीता को हस्ती हुई देख के कर शर्मा जाती है आवर आँचल गेट को सिर्फ चिपका कर बीएड पर आ जाती है

आँचल की दिल मचल रही होती है आँचल बीएड पर बैठी हुई बार बार गेट की तरफ देख रही होती है आवर अपनी पल्लू को मोड रही होती है

आँचल की जिस्म धीरे धीरे गर्म हो रही होती है आवर जैसे जैसे वक़्त बिट रही होती है आँचल की जिस्म मैं चुभन सी हो रही होती है

Maaaaaaaaaaaaaa

आँचल अपनी जिस्म की मदहोशी मैं मचल रही होती है तभी आँचल को कानो मैं अर्जुन की आवाज़ आती है

अर्जुन की आवाज़ सुन कर आँचल एक वक़्त के लिए सुन रह जाती है आवर आँचल की जिस्म कैंप सी जाती है आँचल की दिल की धड़कन तेज़ी से धड़कने लगती है

आँचल बीएड पर बैठी हुई अपनी साड़ी को पकड़ कर ऊपर की तरफ मोड कर अपनी पेअर भी मोड लेती है .... मगर अर्जुन से कुछ नहीं बोलती है

बाबू यह क्यू खड़ा है अंदर जा न ... अर्जुन को बहार खड़ा देख कर गीता बोलती है जो अर्जुन के पीछे आ गयी होती है

दी वह माँ .. अर्जुन बाद इतना बोलता है

देख बाबू मुझे पता है तेरे दिल मैं ममी माँ के लिए प्यार आवर सम्मान है .... लेकिन बाबू ममी माँ भी एहि चाहती है

वर्ण देख वह इस तरह तैयार नहीं होती

बाबू तू इतना घबराएगा तो ममी माँ को वह प्यार नहीं दे पायेगा .... बाबू समझ ले वह आज सिर्फ एक औरत है जो तुझसे प्यार करती है ....

बाबू आज कोई भी सरम नहीं जिस तरह मुझे खुश किया था आज ममी माँ को भी खुश करदे .....

गीता बोलती हुई अर्जुन के बिलकुल पास आ जाती है जिससे दोनों भाई बहन की होंठ एक दूसरे से बिलकुल करीब आ गयी होती है !

गीता तो अर्जुन की होंठों पे अपनी होंठ रख hi देती है !

अर्जुन भी गीता की कमर पर हाथ रख कर किश करने लगता है .. दोनों भाई बहन किश करते हुआ बीएड तक आ जाते है !

Ahhhhhhhhhhhhh

अचानक गीता बीएड पर गिरती हुई सिसक पड़ती है !

गीता क्या कर रही है .... खुद पे कब्ज़ा कर ..... अर्जुन आज तुझे नहीं ममी माँ को खुश करने वाला है बीएड पर गिरी हुई गीता मन मैं सोचती है !

म म मैं जाती हुईं .... गीता अपनी सांसों को कभी करती हुई बोलती है आवर रूम से तेज़ी मैं निकल भगति है !

गीता जाती हुई गेट भी बंद कर देती है अब रूम मैं सिर्फ आँचल आवर अर्जुन रह जाते है .... अर्जुन बीएड पर बैठ कर माँ को देखने लगता है जो आँचल सर निचे की हुई बैठी हुई होती है आवर आँचल की सर पे पल्लू गिरी हुई होती है लेकिन अर्जुन नज़र तो अभी दुल्हन बानी माँ की साइन पर नज़र चली जाती है जो इस वक़्त आँचल की चिकनी गोरी सीना दिख रही होती है जिससे अर्जुन की आँखे बड़ी होने लगती है

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अर्जुन माँ को देखते हुआ बीएड के आवर ऊपर चला जाता है आवर आँचल के सामने बैठ जाता है ! तभी अर्जुन की नज़र माँ की होंठ पर जाती है

वाओ माँ की होंठ मैं कितनी रास भरी है ... अर्जुन मन मैं सोचता है

मा मैंने कभी आप के लिए अपने मन मैं आएसा ख्याल नहीं लाया माँ म म म मुझे पता नहीं कब आप से आयी वाला प्यार करने लगा ......

माँ आप अगर मेरे आवर दीदी के बारे मैं जानने के बाद ये करना चाहती है तो आप आवर कुछ दिन वक़्त ले सकती है .... अर्जुन बोलते हुआ आँचल का हाथ पकड़ लेता है

वही आँचल कुछ नहीं बोलती है

या कह सकते है आँचल की जिस्म इस वक़्त इतनी गर्म हो चुकी होती है की आँचल की धड़कन ज़ोर ज़ोर से चल रही होती है आवर अर्जुन के हाथ पकड़ने से तो आँचल की गाला भी सूखने लगती है

माँ मैं जनता हुईं आप शर्मा रही है बोलने मैं माँ आप बस अपनी पल्लू सर से हटा सकती है जो मैं समझ जाऊंगा ... अर्जुन कांपते हुआ बोलता है

हालत तो अर्जुन की भी ख़राब होती है

अर्जुन आँचल के साथ सेक्स करना तो चाहता था मगर अर्जुन के दिल मैं आँचल के लिए इतना मान सम्मान होता है की अर्जुन अभी आगे बढ़ने मैं शर्मा रहा होता है

बीटा प् प् पानी ..... आँचल बहुत hi धीरे से लड़खड़ती हुई बोलती है जो अर्जुन टेबल पर रख हुआ पानी का गिलास उठा कर आँचल की तरफ बढ़ा देता है

माँ पानी .... अर्जुन बोलता है

वही अर्जुन की आवाज़ सुन कर आँचल अपनी पल्लू सर से हटा देती है आवर अर्जुन के हाथ से पानी लेकर पिने लगती है लेकिन आँचल की नज़र अर्जुन के ऊपर होती है ....

अर्जुन एक वक़्त के लिए सोच मैं पद जाता है माँ ने आखिर उसका जवाब दिया या उनेह प्यास लगी थी ...

अर्जुन मन मैं सोचते हुआ निचे देख रहा होता है ....

वही आँचल पानी पीती हुई अर्जुन को देख रही होती है

आँचल पानी पि कर गिलास खुद hi रख देती है आवर पल्लू फिर से सर पे रख देती है

ये क्या माँ ने पल्लू सर पर रख दिया ... माँ सायद नहीं चाहती है ...

ठीक है माँ मैं समझ गया ...

अर्जुन इतना बोल कर बीएड से उठाने लगता है

ा ा ा अर्जुन अब तुम भी पल्लू हटा सकते हो ....

अर्जुन बीएड से जाने को होता है तभी आँचल बोल पड़ता है ..... माँ की आवाज़ सुन कर अर्जुन जो थोड़ा दुखी हो गया होता है वह अब खुश हो जाता है

अर्जुन बीएड पर फिर से बैठ जाता है

अर्जुन माँ को देखता हुआ अपना हाथ ऊपर के तरफ ले जाने लगता है अर्जुन के हाथ ऊपर आते हुआ देख कर आँचल अपनी घूँघट पकड़ लेती है


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आँचल घूँघट के अंदर से hi अर्जुन को देखती है जो रुक गया होता है

अर्जुन कांपते हाथ फिर से उठा कर माँ की घूंघट पकड़ लेता है दोनों माँ बेटे की दिल की धड़कन बढ़ चुकी होती है आँचल की तो सांसे भी रुक रुक कर चलने लगती है


अर्जुन कांपते हाथों से माँ की घूंघट हटा hi देता है !

वाओ माँ ये आप हो या कोई चाँद हो

अर्जुन माँ की चाँद की तरह खूबसूरत चेहरे को देख कर हैरान होते हुआ बोल पड़ता है


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वही अर्जुन की बात सुन कर सरमाती हुई आँचल मन hi मन मुस्कुरा पड़ती है

अर्जुन बाद माँ को hi देखे जा रहा होता है अर्जुन को यकीन hi नहीं हो रहा होता है माँ इतनी खूबसूरत है

अर्जुन माँ को बचपन से देखता आ रहा होता है अर्जुन को ये पता था उसकी माँ खूबसूरत है मगर आँचल आज आवर भी जयादा खूबसूरत लग रही होती है जिससे अर्जुन तो सौक hi हो गया होता है

अर्जुन माँ को देखते हुआ अपना एक हाथ उठा कर आँचल की होंठ पे रख देता है

Ahhhhhhhhhhhhhhh

अर्जुन के हाथ होठ पर जाते hi आँचल अपनी आँखे बंद करती हुई सिसक पड़ती है

थोड़ा टाइम है दोस्तों :डी

तब तक गीता को देख लेते है

:::::::::

गीता अभी बीएड पर लेती हुई इधर से उधर करवट बदल रही होती है

क्या कर रहा होगा बाबू अभी

क्या बाबू माँ की छूट मैं अपना अगर दाल दिया होगा ....

नहीं नहीं बाबू का अगर माँ की बोल मैं जायेगा तो माँ की चीखे ज़रूर मुझे सुनाई देगी

अभी माँ की कोई आवाज़ नहीं आ रही है

क्या कर रहा होगा बाबू माँ की लाल लाल होंठों को चुम रहा होगा

आह्ह्ह्हह्ह्ह्हह

माँ तो मचल मचल कर बाबू को पकड़ रही होंगी

माँ की छूट तो पानी पर पानी छोड़ रही होगी

क्या करू माँ के पास जॉन क्या

मुझे यकीन है माँ की हालत ख़राब हो जाएगी

माँ बीएड पर तड़प जाएँगी ....

वह बता रही थी वह काफी समय से नहीं चूड़ी है

अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह

साली कुटिया तू मुझे क्यू परेशां कर रही है ..... आज तुझे कुछ नहीं मिलेगी

Ahhhhhhhhhhhhhhh

गीता अपनी छूट खुद मसल कर सिसक पड़ती है आवर गुस्से मैं बोलती है

गीता की छूट भी बहुत गर्म हो चुकी होती है

गीता बस एहि सोच रही होती है इस वक़्त अर्जुन क्या कर रहा होगा आवर ममी माँ की क्या हालत होगी

Ahhhhhhhhhhhhhhhhhh

कुटिया तू मुझे सोने नहीं देगी चल तुझे संत कर hi देती हुईं .... देख आवर देख कर रोना नहीं आज तुझे कुछ नहीं मिलेगी मैं बता रही हुईं

Ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

गीता बोलती हुई अपनी छूट फिर से मसल देती है

Ahhhhhhhhhh

क्या करू जॉन की नहीं वह गयी तो मुझे आवर बर्दास्त नहीं होगी .... कही मैं बीएड पर न चली जॉन

Ahhhhhhhhhhhhhhh

तू चुप कर न ..... गीता बड़बड़ाती हुई बार बार अपनी छूट मसल रही होती है

गीता का मन बस अर्जुन आवर आँचल की रूम मैं जाने की कर रही होती है जो गीता जाये या न जाये सोच रही होती

Ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

कामिनी तू नहीं मानेगी चल तुझे मसल मसल के संत हो कर देती हुईं कुटिया सोने भी नहीं दे रही है

Ahhhhhhhhhhhh

गीता अभी पागलों जैसी हरकत कर रही होती है आवर अपनी छूट को मसल नहीं रही होती है बल्कि अच्छे से पकड़ पकड़ कर नोच रही होती है

गीता बस ब्रा पेंटी मैं hi रूम से निकल जाती है ये सोच कर के बस बहार से देख कर अपनी छूट को संत कर देगी :डी

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अपडेट ...... 93



अर्जुन माँ की होंठों को छूटा है जिससे आँचल सिसकती हुई आँखें बंद कर लेती है

माँ की मदहोशी मैं आँखें बंद की हुई खूबसूरत चेहरे को देख कर अर्जुन अपना हाथ आँचल की गलों मैं रख देता है

huinnnnnnnnnnn

अर्जुन के हाथ रखने पर आँचल कहर जाती है आँचल कहर hi रही होती है तभी आँचल को अर्जुन का हाथ अपनी कमर पर महसूस होती है जो आँचल सिसकती हुई अर्जुन की बाँहों मैं चली जाती है

अर्जुन के बाँहों मैं जाते hi आँचल अर्जुन को बहुत मज़बूती से पकड़ लेती है जिससे आँचल की कठोर टाइट चुकी अर्जुन को अपने साइन पर महसूस होने लगती है

वहहह माँ की चुकी तो बहुत कड़क है ... अर्जुन मन मैं सोचता है

स्स्स्सस्स्स्स अह्ह्ह्हह हूंणनननननन

अर्जुन माँ से लिपट हुआ आँचल के गले को चूमने लगता है जो आँचल अर्जुन को आवर भी मज़बूती से पकड़ कर सिसकियाँ लेने लगती है


वही अर्जुन माँ की गले को लगातार चूमते hi चला जाता है जो आँचल भी अर्जुन के बाँहों मैं कसमसाती चली जा रही होती है

अर्जुन तो माँ की जिस्म की खुसबू से इतना गर्म होते चला जा रहा होता है की माँ की गले को चूमते हुआ अपना हाथ आँचल की कमर को मसलने लगता है जो आँचल रह रह कर सिसक रही होती है आवर अर्जुन को आवर भी अपनी बाँहों मैं दबा रही होती है

आँचल की जिस्म मैं इतनी गर्मी बढ़ जाती है की आँचल की माथे से पसीने आने लगती है आवर आँचल अचानक बीएड पर लेट जाती है !


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आँचल बीएड पर लेटते hi अपनी आँखें बंद कर लेती है

अर्जुन सामने बैठा हुआ माँ की चुकी को देखने लगता है जो आँचल की सांसे लेने से आँचल की चुकी ऊपर निचे हो रही होती है

अर्जुन का हाथ अपने आप माँ की चुकी पर चला जाता है जो अर्जुन आँचल की चुकी को बस हल्का से पकड़ लेता है

Ahhhhhhhhhhhhhhhh


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आँचल सिसक पड़ती है तभी अर्जुन की नज़र माँ की ऊपर जाती है आवर अर्जुन का लैंड टनटना जाता है

आँचल अपनी थोड़ी से आँखें खोल कर अर्जुन को देख रही होती है मगर अर्जुन की नज़र तो अभी माँ की लाल लाल रास से भरी हुई होंठों पर तिकी हुई होती है जो आँचल के सिसकने से आँचल की होंठ खुल गयी होती है

अर्जुन खुद को आवर नहीं रोक पता है आवर माँ के ऊपर लेट कर अपना होठ आँचल की होंठ पर रख कर चूसने लगता है

huinnnnnnnnnnnnnnnn

आँचल तड़प कर अर्जुन को फिर से बाँहों मैं भर लेती है

अर्जुन माँ की होंठों को चूमते hi जा रहा होता है वही आँचल बस अर्जुन को देखे जा रही होती है आवर अर्जुन के सर को सहला रही होती है

Ahhhhhhhhhhhhhhhh

अर्जुन माँ को किश करते हुआ हाथों से माँ की साड़ी भी निकल रहा होता है आवर अपना लैंड भी आँचल की छूट के ऊपर रगड़ने लगता है जिससे आँचल एक लम्बी आह्ह्ह्हह्ह भरी हुई मचल जाती है जिससे दोनों की होंठ भी अलग हो जाती है लेकिन अर्जुन फिर से आँचल की होंठों को चूमने लगता है

आँचल भी अर्जुन का साथ देने लगती है अर्जुन माँ की होंठ को पागलों की तरह चूमते हुआ चला जा रहा होता है ये जाने की अब उसकी माँ की सांसे फूल रही है

AAaaaaaaaaaaaaaaaa

अर्जुन एक आआ के साथ आँचल के बगल मैं बीएड पर लेट कर हाफने लगता है वही आँचल भी ज़ोर ज़ोर से हांफ रही होती है आँचल की आँखों से पानी की बून्द भी आ गयी होती है

दोनों माँ बेटे कुछ देर तक अपनी सांसों पर काबू करते रहते है

आँचल रह रह कर कैंप रही होती है वही अर्जुन का लैंड पूरी तरह टाइट खड़ा हो चूका होता है जो अर्जुन को अपने लैंड मैं दर्द महसूस होने लगता है अर्जुन अपने लैंड को पकड़ कर थोड़ा दूसरी तरफ करता है

अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह बस आवर रुका नहीं जाता माँ की जिस्म की खुसबू पागल कर रही है मुझे ....

अर्जुन मन मैं सोचता है आवर आँचल की पेट पर हाथ रख कर नेवल को सहलाने लगता है जो आँचल मचल जाती है अर्जुन माँ की तड़प की सिसक सुन कर अपना हाथ निचे करते हुआ पेटीकोट की डोरी भी खोल देता है जो आँचल मचल कर अर्जुन का हाथ पकड़ लेती है अर्जुन झट से अपना मुंह आँचल की पेट रख कर चूमने लगता है


Ahhhhhhhhhhhhhhh

आँचल मचलती हुई अपनी पूरी जिस्म hi उठा देती है आवर आँचल की हाथ भी वह से हैट जाती है अर्जुन झट से पेटीकोट के साथ पेंटी भी निचे कर देता है

Aahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

आँचल को जैसे hi अहसास होती है वह अब बिलकुल नंगी हो गयी है आँचल अपनी छूट पर हाथ रखती हुई उठ बैठती है

माँ आप की जिस्म बेमिसाल है आप की जिस्म की कोई जवाब नहीं है माँ क्या आप मुझे ये जिस्म शॉप सकती है मुझे

मैं आप की इस जिस्म को बहुत प्यार करना चाहता हुईं ...... अर्जुन आँचल की जिस्म को घूरते हुआ बोलता है

वही आँचल आँखों मैं बेहपनाह सरम लिए अर्जुन को देख रही होती है आवर अर्जुन की मुंह से अपनी तारीफ सुन कर आवर भी जयादा शर्मा जाती है मगर आँचल मन hi मन बहुत खुश भी होती है

अर्जुन माँ को देखते हुआ hi अपना पूरा कपडा भी निकलने लगता है

अर्जुन कपडा निकल रहा होता है वही आँचल अपनी छूट को छुपाये हुआ अर्जुन की जिस्म को घर रही होती है अर्जुन पूरा कपडा निकल चूका होता है आवर अंडरवियर पर हाथ रख दिया होता है निकलने को

वही आँचल की धड़कन धक् धक् कर रही होती है

ओह माँ अंडरवियर के अंदर hi इतना लम्बा आवर मोटा दिख रहा है बहार कैसा दुखेगा

गए गए गीताआ बेटी सही बोल रही थी

हे भगवन ये तो बहुत मोटा आवर लम्बा है Ahhhhhhhhhhhhhh मेरी छूट


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आँचल अभी मन मैं सोच hi रही होती है तभी अर्जुन अपना अंडरवियर निकल देता है आवर अर्जुन का फुल टाइट खड़ा लैंड आँचल की आँखों के सामने आ जाता है जिसे देख कर आँचल की मुंह खोल जाती है आवर आँचल मन मैं सोच कर शर्मा भी जाती है

आँचल एक तक अर्जुन का बिसाल लैंड देखते hi जा रही होती है

ा अर्जुन ये क क क क्या है आँचल हिचकती हुई बोलती है आवर अपनी छूट को छुपाने लगती है

वही अर्जुन लैंड पकड़ कर आँचल के छूट के पास आ जाता है आवर अपने एक हाथ से आँचल का हाथ छूट से हटा देता है

वाओ माँ की छूट तो दूध की तरह गोरी है आवर चिकनी भी है .... अर्जुन माँ की छूट को देखता हुआ सोचता है

आँचल की छूट देख कर अर्जुन की मुंह मैं पानी आने लगता है अर्जुन माँ को एक नज़र देखता है आवर फिर अपना मुंह माँ की छूट के पास करने लगता है

आ अर्जुन ननणणन न नाहीईईई Ahhhhhhhhhhhhhhhhhhh ohhhhhhhhhh Ahhhhhhhhhhh

आँचल को जैसे hi अहसास होता है अर्जुन क्या करने वाला है आँचल अर्जुन को रोकने के लिए बोलती है तब तक अर्जुन अपना मुंह आँचल की छूट मैं दाल चूका होता है

अर्जुन के छूट चाटते hi आँचल बीएड पर अपनी गांड उठा उठा कर मचलने लगती है !

आँचल की छूट पहले से पानी छोड़ रही होती है जिसे अर्जुन चाट चाट कर चूस रहा होता है माँ की छूट को जो अर्जुन को माँ की छूट का पानी बहुत टेस्टी लग रही होती है

आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अर्जुन वह गंडीई सससससस सससससस Ahhhhhhhhhh Ohhhhhhhhhhh Ahhhhhhhhhhhh

आँचल सिसकती हुई बोलना छह रही होती है मगर अर्जुन छूट को चाटते हुआ आँचल की छूट होंठ को नोच दे रहा होता है जिससे आँचल तड़प जा रही होती है

आआआआ अअअअअअअ Aaaaaaaaaaaaa Arjunnnnnnnnnnnnnnnnn

आँचल चीखती हुई झड़ने लगती है जिससे आँचल की जिस्म पूरी कैंप रही होती है आँचल गांड उठा कर कुछ सेकंड तक झड़ती hi रहती है आवर लम्बी लम्बी सांसे लेती रही है

आँचल की आँखें लाल हो चुकी होती है आँचल की जिस्म मैं गर्मी भी बहुत बढ़ जाती है जिससे आँचल की माथे पर पसीने आने लगती है


आँचल हफ्ते हुआ hi अर्जुन के लैंड को देख रही होती है आवर आँचल की पेअर खुद hi अर्जुन के लैंड पर चली जाती है

आँचल की छूट से पानी गांड से होती हुई बीएड पर जा रही होती है


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माँ आप तैयार है मुझे आवर रुका नहीं जा रहा है अर्जुन अपना लैंड आँचल के छूट के पास करते हुआ बोलता है ....

अर्जुन माँ की छूट को देख कर आवर खुद को रोकने के बारे मैं सोचता hi नहीं है

वही आँचल बस अर्जुन के लैंड को देखे जा रही होती है

आह्ह्ह्हह्ह्ह्हह SSSSSSSSSS

अर्जुन बीटा धीरे से डालना ..... आँचल बहुत hi मशोमियस्ट से बोलती है


आँचल की आँखों मैं अर्जुन दर साफ देख रहा होता है

माँ मैं आप को जयादा दर्द देने के बारे मैं सोच भी नहीं सकता .... अर्जुन बोलते हुआ आँचल की गलों पर हाथ रख देता है

पता है मेरे लाल ... आँचल इस बार बोलती हुई थोड़ी मुस्कुरा देती है आवर अपनी नरम गल्ल अर्जुन के हाथ मैं सत्ता देती है

अर्जुन अपना लैंड पकड़ कर माँ की छूट के पास कर के रुक जाता है आवर आँचल की छूट की बहुत हुई पानी को अपने लैंड पर लगा देता है

माँ आप मैं दाल रहा हुईं ... अर्जुन माँ की छूट मैं लैंड सताते हुआ बोलता है

वही आँचल भी खुद को तैयार करती हुई हां मैं सर हिला देती है आवर अपनी आँखें बंद कर लेती है

Ahhhhhhhhhh

अर्जुन का अभी टोपा का थोड़ा hi हिस्सा गया होता है की आँचल सिसकने लगती है जो अर्जुन रुक जाता है

बस ये अर्जुन क्या कर रहा है .... बस बोलता है माँ को दर्द नहीं दूंगा इस तरह डालेगा तो माँ को इतना दर्द होगा की वह सह नहीं पायेगी आवर न तू अपना लैंड ये घोड़े जैसा लैंड माँ की छूट मैं दाल पायेगा देखा था न उस दिन दीदी की क्या हालत हुई थी ...

अगर चाहता है माँ को जयादा दर्द न सहना पड़े तो थोड़ा तुझे हरामी बनाना होगा आवर एक hi झटका मार ज़ोर से जो लैंड का आधा हिस्सा माँ की छूट मैं चली जाये माँ को दर्द होगी मगर एक बार hi वह इतना दर्द सह सकती है .....

अर्जुन मन मैं सोचता है .... माँ मुझे मांफ करना न बस थोड़ा दर्द होगा .... अर्जुन बोलता है आवर अपने लैंड को पकड़ कर माँ की छूट मैं सत्ता देता है आवर माँ की कमर दोनों हाथों से पकड़ लेता है

आँचल अभी भी सिसक रही होती है अर्जुन के पकड़ने से आँचल अपने हाथ से बीएड की चादर पकड़ लेती है

Aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa

माँ माँ माँ माँ

अर्जुन एक बहुत hi तेज़ धक्का मार चूका होता है जो अर्जुन का 4 से 5 इंच लैंड आँचल की छूट मैं चली गयी होती है


छूट मैं लैंड जाते hi आँचल बीएड पर चीखती हुई तड़पने लगती है आँचल की चीख सुन कर गीता भगति हुई रूम मैं आ जाती है आवर माँ पुकारती हुई आँचल के पास बैठ जाती है आवर आँचल की आँखों से बहती हुई आंसू पोछने लगती है

आह्ह्ह्हह मेरी छूट गीता बेटी मेरी छूट फैट गयी Aahhhhhhhhhhh अर्जुन बीटा बहुत दर्द हो रही है प्लीज निकल ले बीटा

Aahhhhhhhhhhhhhh

आँचल दर्द मैं बोलती है आवर गीता की हाथ पकड़ लेती है

माँ मैं एहि हुईं .... माँ अब दर्द नहीं होगा

गीता आँचल की गिरी हुई बालों को ऊपर करती हुई बोलती है आवर आँचल की गलों को सहलाने लगती है

वही अर्जुन आधा लैंड डेल hi रुका हुआ होता है

अह्ह्ह्हह्हह बस मेरा लैंड भी दर्द कर रहा है माँ की छूट कितनी टाइट है जो मेरे लैंड को जकड़ी हुई है ..... अर्जुन मन मैं सोचता है

डीई माँ की छूट बहुत टाइट है मेरा लैंड फास गया है .... अर्जुन बोलता है

बाबू माँ काफी समय से नहीं चूड़ी है आवर वह बस ऊँगली दाल कर hi खुद को ठंडी करती हुई आई है आवर तूने एक बार मैं hi इतना बड़ा सांप दाल दिया तो क्या होगा ... गीता मुस्कुराती हुई बोलती है


डीई ... अर्जुन घूरता हुआ बोलता है

वही दोनों की बात सुन कर आँचल आंसू बहती हुई hi शर्मा रही होती है

रुक माँ जब अपना गांड हिलाये तब तू धीरे धीरे धक्का देना .... गीता बोलती है

गीता बोल कर आँचल की होंठो पर किश करने लगती है आवर आँचल की चुकी को मसलने लगती है

आँचल धीरे धीरे गर्म होने लगती है आवर आँचल की छूट की दर्द भी थोड़ी काम हो जाती है जिससे आँचल अपनी गांड हिलने लगती है

माँ की इसरा पते है अर्जुन धीरे धीरे धक्का मरने लगता है

आह्ह्ह्हह अह्हह्ह्ह्ह Ssssssssss ह्ह्हह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह Ahhhhhhhhhhh

अर्जुन जब जब धक्का मरता है आँचल सिसक रही होती है

अह्ह्ह्हह आवर ज़ोर से बीटा आह्ह्ह्हह आवर ज़ोर अर्जुन अह्हह्ह्ह्ह फाड् दो मेरी छूट अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आवर तेज़्ज़ बीटा

अर्जुन एहि समय है पूरा लैंड दाल दे माँ छूट मैं माँ झड़ने वाली है ..... आँचल को बोलते हुआ सुन कर गीता बोलती है

वही अर्जुन भी अपने धक्कों की स्पीड बढ़ा देता है

अह्ह्ह्हह मेरी छूट आह्ह्ह्हह्हं आवर ज़ोर से मेरे लाल फाड् अह्हह्ह्ह्ह दे माँ चूत्तत्ततत्तत को अह्ह्ह्हह्हह दर्द अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मेरी छूट

Ahhhhhhhhhhhh मा ह्ह्हह्हह्ह्ह्ह ये लो माँ फाड् दूंगा आप छूट एस्प की छूट इतनी टाइट कैसे अह्ह्ह्हह ओह्ह्ह्हह्ह बीटा आह्ह्ह्हह

AAaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa

आँचल अचानक hi चीखती हुई सुस्त पद जाती है जो आँचल की छूट से पानी बहने लगती है

वही अर्जुन तेज़्ज़ तेज़्ज़ धक्का मरते hi रहता है

AaaaaaaAaaaaaaa maaaaaaaaaaaaaa

अर्जुन भी अपनी माँ की टाइट छूट की गर्मी जयादा देर बर्दास्त नहीं कर पता है आवर 5 से 6 धक्का मरते hi आँचल के ऊपर गिर जाता है

रूम मैं एक वक़्त के लिए बिलकुल सन्ति छ जाती है ......

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ुंआआआआ AAaaaaaaaaaaa

Ahhhhhhhhhhhhhh प्लीज रुक जाओ Aahhhhhhhhhhh अभी नहीं Ahhhhhhhhhhhhhhh ohhhhhhhhhhhh

एक लड़की बार बार एक लड़के को खुद से दूर कर रही होती है लेकिन लड़का दूर न होकर लड़की के करीब hi जा रहा होता है

Ahhhhhhhhhhhhh


मैं क्या करू तुम्हारी जिस्म को देख कर अभी खुद को रोक नहीं पा रहा हुईं ..... Umaaaaaaaaaaaaa

लड़का बोल कर फिर से लड़की को किश करने लगता है

Ahhhhhhhhhhhhhhh अर्जुन

प्लीज मान जाओ बस कुछ देर सबर करो मैं अभी देख कर आती हुई कोई जाग तो नहीं रहा है ..... वर्ण तुम यह पकडे गए तो अच्छा नहीं होगा

Ahhhhhhhhhhhhhhhhhh


प्लीज मान जाओ ना मेरे बाबू सोना Ahhhhhhhhhhhhhh लड़की सिसकती हुई बोलती है

वह अर्जुन को दूर कर रही होती है मगर अर्जुन दूर होने का नाम hi नहीं ले रहा होता है आवर लड़की को पकड़ कर किश करते हुआ लड़की की जिस्म को मसल रहा होता है

AAhhhhhhhhhhhhhhh हूंणणन्न मत करो अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह हूईँन्नन्नन्न मत करो प्लीज अर्जुन Ahhhhhhhhhhhhh ओह्ह्ह्हह्ह

Nahiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii

दीदी क्या हुआ बीएड पर सोइ हुई लड़की चीखते हुआ उठ जाती है

वही पास मैं सोइ हुई लड़की अपनी दीदी की चीख सुन कर वह भी उठ जाती है तो देखती है उसकी दीदी बीएड पर बैठी हांफ रही होती है तो वह अपनी दीदी से पूछती है मगर वह लड़की कोई जवाब दिए बस लम्बी लम्बी सांसे ले रही होती

दीदी ये पानी पियो .... छोटी लड़की जल्दी से टेबल पर राखी पानी देती हुई बोलती है

वह लड़की पानी का गिलास लेते hi एक साँस मैं पूरी पि जाती है

दीदी क्या हुआ कोई डरावना बहुत था क्या सपने मैं आप के पसीने छूट रहे है

दीदी बोलिये न बड़ी माँ को बोलौं क्या

वह छोटी लड़की थोड़ी दरी हुई बोलती है .....

गुड़िया माँ को मत बोलै ..... चल अभी सो जा सुबह बताउंगी ..... लड़की बोलती है

अपनी दीदी की बात सुन कर वह लड़की कुछ आवर नहीं पूछती है आवर अपनी दीदी को पकड़ कर फिर से सोने लगती है ....

ये कैसा सपना था ...... अर्जुन आएसा कभी करेगा क्या मेरे साथ ..... मुझे तो यकीन hi नहीं हो रही है .... वह लड़की मन मैं सोचती है आवर फिर से आँखें बंद कर लेती है

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गीता आँचल को बाँहों मैं भरी हुई आँचल की सर सहला रही होती है आँचल की आँखों से अभी भी आंसू निकल रही होती है

वही अर्जुन भी आँचल के बगल मैं लेता आँचल की जिस्म पर हाथ फेर रहा होता है

ममी माँ आप थी है न .... गीता पूछती है

गीता बेटी मुझे बाथरूम जाना है .... अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह

आँचल बोलती हुई उठने लगती है मगर आँचल की छूट मैं दर्द होने से वह फिर से लेट जाती है

ममी माँ मैं लेकर चलती हुई .... गीता बोलती है आवर आँचल को पकड़ कर बीएड से उतर जाती है आवर बाथरूम मैं लेकर चली जाती है

वही माँ को जाते हुआ देख कर अर्जुन की नज़र आँचल की चिकनी गांड पर नज़र चली जाती है

वहहहह माँ की गांड तो आवर भी मतवाली है .... माँ की गनद भी मिल जाती तो .... अर्जुन मन मैं सोचता है

Ahhhhhhhhhh गीता बेटी दर्द हो रही है Ahhhhhhhhhhhhh

बाथरूम मैं मुट्ठी हुई आँचल सिसकती हुई बोलती है

आँचल की छूट से मूत के साथ खून भी थोड़ी थोड़ी निकल कर बाह रही होती है ...

वाओ बाबू ने तो माँ की छूट को एक hi बार मैं बिल हॉल बना दिया है .... बाबू 2 से 4 बार माँ की छूट मैं अपना डंडा दाल दिया तो माँ की छूट गुफा बन जाएगी

गीता आँचल की छूट को देखती हुई सोचती है

माँ ये दर्द तो होना hi था ... अब तो आप अर्जुन का लैंड आराम से अपनी छूट मैं ले सकती है .... गीता मुस्कुराती हुई बोलती है

नहीं गीता बेटी अब मैं आवर नहीं कर करती हुईं ....... आँचल झट से बोल पक्ति है

वही आँचल की दरी हुई बातें सुन देख कर गीता की चेहरे पर फिर से मुस्कान आ जाती है

माँ ठीक है आप आराम करने मैं संभल लुंगी बाबू को ..... गीता बोलती है आवर मुस्कुरा देती है

गीता बेटी सुबह दीदी को क्या बोलूंगी ..... अभी नहीं पता चला मगर सुबह दीदी को मेरी हालत दिख hi जाएगी

आँचल राखी देवी को याद करती हुई बोलती है

माँ मैं सुबह देख लुंगी .... आप मुझे ये बताइये कैसा लगा बीटा का लैंड लेकर गीता हस्ती हुई पूछती है

वहह्ह्ह्ह गीता बेटी अर्जुन ने तो मेरी जान hi निकल दिया उसका वह मेरी छूट मैं गया तो

Ahhhhhhhhhhhhhhhhhh

वह सोच कर hi मेरी छूट मैं जलन हो रही है बेटी ..... आँचल सोचती हुई बोलती है

गीता की बात सुन कर मुस्कुरा रही होती है आवर ये भी सोच रही होती है के ममी माँ उससे इस बारे मैं अब बात तो कर रही है ...

गीता आँचल को बाथरूम से लेकर रूम मैं आ जाती है

आँचल जैसे hi रूम मैं आती है आँचल की नज़र अर्जुन पर पद जाती है आवर फिर अर्जुन के लैंड पर चली जाती है

देखों तो मेरी छूट फाड् कर भी खड़ा है ....... इधर मत देखों मैं फिर नहीं देने वाली

मगर कितना प्यारा है न मेरे बेटे का लैंड आज जीवन मैं पहली बार मुझे अहसास हुआ मैं औरत हुईं .... आँचल मन मैं सोचती हुई बीएड पर आ जाती है

वही अर्जुन उठ कर बाथरूम मैं चला जाता है

Ahhhhhhhhhhhh गीता betiiiiiiiiiiiiiiiiiiii

आँचल की चीख रूम मैं गूंज पड़ती है जो बाथरूम मैं अर्जुन को भी सुनाई देती है आवर अर्जुन बाथरूम से भागता हुआ रूम मैं आ जाता है

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अपडेट ...... 94

अर्जुन बाथरूम से भाग कर रूम मैं आता है तो देखता है माँ बीएड की तरफ देख रही होती है वही गीता माँ को पकड़ी हुई है

ममी माँ क्या हुआ .... दर्द हो रहा है मैं अभी सके कर देती हुईं ..... गीता थोड़ी घबरा कर बोलती है

डीईई वह बेडशीट .... अर्जुन बाथरूम के गेट पर से hi बोलता है जो अर्जुन की नज़र माँ की नज़र कहा है पद चुकी होती है

वही गीता अर्जुन बात सुनते hi बेडशीट को झट से उठा देती है लेकिन आँचल की नज़र तो पद hi चुकी होती है बेडशीट पर कितनी खून लगी हुई है जो उसकी hi छूट से निकली है इस लिए तो आँचल अपनी छूट की खून देख कर चीख पड़ी थी

गीता भी जल्दी से वह बेडशीट उठा कर अर्जुन को दे देती है जो अर्जुन बेडशीट को लेकर बाथरूम मैं चला जाता है

माँ कुछ नहीं हुआ है .... गीता बोलती है आवर आँचल को बीएड पर सुला देती है आवर साथ मैं खुद भी लेट जाती है

गीता की छूट मैं आग लगी हुई होती है मगर वह आँचल के सामने कुछ नहीं करना चाहती है इस लिए वह आँचल के साथ hi सो जाती है


अगली सुबह

फ़ोन पर अलार्म की रिंग होने से गीता की नींद खुल जाती है जो सोने से पहले hi गीता कर सोइ हुई होती है

गीता उठ कर देखती है तो पति है बीएड पर वह आवर आँचल hi है तो गीता समझ जाती है अर्जुन अपने रूम मैं चला गया है

गीता उठ कर अपने रूम के बाथरूम मैं जाती है आवर फ्रेश होने लगती है

गीता फ्रेश होने के बाद किचेन मैं चली जाती है आवर कॉफ़ी बना कर आँचल की रूम मैं कॉफ़ी लेकर चली आती है

ममी माँ माँ

गीता बोलती हुई आँचल को उठती है जो आँचल कुछ देर के बाद आँख खोलती है

गीता बेटी क्या टाइम हो रही है ... आँचल सोती हुई hi पूछती है

माँ 6 बजने वाला है आप ये कॉफ़ी पीजिये मैं बाथरूम से आती हुईं ....

Ahhhhhhhhhhhhhhhhhhh

माँ आआ

गीता अभी

गीता अभी बीएड से दो कदम hi चलती है की आँचल की आज सुन कर आँचल के पास आ जाती है आवर आँचल को पकड़ कर उठती है

माँ जयादा दर्द हो रही है

ओह्ह्ह आप को तो फीवर भी है .... रुकिए मैं अभी टेबलेट लेकर आती हुईं

आँचल की जिस्म को छूने पर गीता को आँचल की जिस्म जलता हुआ लगता है ....

गीता आँचल को बीएड पर बैठा कर अपनी रूम मैं चली जाती है

माँ आप कॉफ़ी पि कर ये टेबलेट खा लीजिये मैं बेडशीट को धोकर नाहा लेती हुईं ..... गीता बोल कर बाथरूम मैं चली जाती है

राखी देवी की नींद जब खुलती है तो वह उठ कर बीएड पर बैठ जाती है आवर फ़ोन मैं टाइम देखती है तो 7 बजने वाला होता है ......

हे भगवन मैं आज इतने देर तक कैसे सोती रही ..... आँचल ने भी नहीं उठाया मुझे

राखी देवी मन मैं सोचती है आवर उठ कर बाथरूम मैं चली जाती है

गुड मॉर्निंग गीता बेटी

गीता बेटी कॉफ़ी बना है क्या .... राखी देवी किचेन मैं आकर बोलती है


गुड मॉर्निंग माँ ! हाँ माँ बना है .... ये लीजिये

माँ आप ठीक है .... गीता कॉफ़ी देने के बाद बोलती है

हां बेटी ... बस ज़रा सा सर दुःख रहा है

लगता है आज कुछ जयादा hi सो गयी .....

आँचल कहा है .......
राखी देवी पूछती है

वह माँ .... ममी माँ की भी तबियत ठीक नहीं है वह भी सो रही है ..... गीता बोलती है

क्या हुआ है आँचल को रुक मैं देखती हुईं .... राखी देवी बोलती है आवर कॉफ़ी पीती हुई hi किचेन से चली जाती है

हे भगवन कही माँ को पता न चल जाये ..... गीता मन मैं सोचती है

राखी देवी आँचल की रूम मैं जाती है तो देखती है आँचल बीएड पर बैठी हुई है

आँचल क्या हुआ ..... राखी देवी पास बैठी हुई बोलती है आवर आँचल की हाथ को पकड़ लेती है


आँचल तुझे तो फीवर है ..... राखी देवी थोड़ी घबराती हुई बोलती है

हां दीदी रात मैं अचानक जिस्म गर्म हो गया था .... आँचल बोलती है मगर राखी देवी से नज़र नहीं मिलती है

आँचल तू फर्श होकर नास्ता करले फिर हम हॉस्पिटल मैं चलते है .... फीवर जयादा तो नहीं हो गया है .... राखी देवी बोलती है

दीदी मैं ठीक हुईं बस आज कल जिस्म थोड़ा जयादा hi गर्म हो जयादा है .... आप को बताया था कल !

आवर आप भी यह नहीं थी ! आँचल सरमाती हुई बोलती है जो राखी देवी समझ जाती है

आँचल तू चाहे तो मैं किसी से बात कर सकती हुईं .... मुझसे अब तेरा ये अकेला पैन नहीं देखा जाता है

तू समझ रही है न आँचल ..... राखी देवी आँचल की हाथ पकड़ कर बोलती है

आँचल की बात सुन कर राखी देवी की दिमाग मैं ये बात आ जाती है की आँचल की जिस्म चौड़ाई के लिए तड़प रही है इस लिए बोलती है जो आँचल भी समझ जाती है आवर मन hi मन मुस्कुराने भी लगती है

भगवन जी बहुत बहुत सुक्रिया के आप ने दीदी जैसी नन्द मुझे दिया ..... दीदी आप परेशां न हो अब से मेरी जिस्म इतनी गर्म नहीं होगी रात मैं आप के लादले ने जिस्म की आधी गर्मी तो ख़तम hi कर दिया है

आँचल मन मैं सोचती है आवर खुद hi शर्मा भी जाती है

आँचल मेरी बात मान ले मेरी बहन ... आँचल को कुछ न बोलते देख राखी देवी फिर से बोलती है

दीदी मैं जानती हुईं आप मेरे लिए hi बोल रही है मगर दीदी मैं ये नहीं कर सकती ...... आँचल थोड़ी मायुश होकर बोलती है क्यू की राखी देवी भी थोड़ी दुखी हो गयी होती है


आँचल तेरी ये ज़िद्द ठीक नहीं है .... आँचल मैं तेरे साथ हुईं अगर कोई तेरे ऊपर मुसीबत भी आई तो पहले मैं उसकी सामना करुँगी .....

राखी देवी खुल के बोल रही होती है ताकि आँचल बात मान जाये राखी देवी को अच्छे से पता था इस उम्र मैं बर्दास्त करना कितना मुश्किल है राखी देवी तो कविता के साथ मालिश करवाते हुए ठंडी हो जाती थी लेकिन छूट की गर्मी तो राखी देवी को परेशां तो करती थी लेकिन राखी देवी अर्जुन की वजह से अब कोई आएसा काम नहीं करना चाहती थी जिससे अर्जुन उससे दूर हो जाए

दीदी मैं ठीक हुईं आप परेशां न होइए ..... जयादा हुई तो आप है न .... हां आप के साथ भी कर के मुझे सकूँ नहीं मिला तो मैं आप को पता दूंगी ..... आँचल राखी देवी की आँखों मैं खुद के लिए प्यार देख कर बोल पड़ती है

लेकिन आँचल को ये बात भी पता थी अब उनेह किसी मर्द की ज़रूरत नहीं है उसका बीटा hi काफी है लेकिन राखी देवी को इस वक़्त देख कर बोल पड़ती है

ठीक है जा फ्रेश होजा मैं नास्ता बना देती हुईं .... गीता अकेली किचेन मैं है

राखी देवी आँचल की गलों पर हाथ फेरती हुई बोलती है वही आँचल मुस्कुरा देती है

राखी देवी आँचल की रूम निकल कर किचेन मैं चली जाती है

माँ .... ममी माँ ठीक तो है न ..... राखी देवी को किचेन मैं आते hi गीता पूछती है


हां वह ठीक है बेटी .... मैं नास्ता बना रही हुईं जाकर देख गुड़िया आवर अर्जुन उठे की नहीं ..... राखी देवी बोलती है तो गीता चली जाती है आवर चैन की आज भरी है की राखी देवी को कुछ पता नहीं चला

हे भगवन ये देखो महारानी को .... ये घोड़ी जैसी हो गयी है सिर्फ

गीता की नज़र जैसे hi अंजलि पर जाती है बोल पड़ती है जो अंजलि की उठी हुई गांड गीता की आँखों के दिख रही होती है वह भी बिलकुल नंगी


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अंजलि इस वक़्त चैन की नींद सो रही होती है वह भी सिर्फ पेंटी मैं आवर ऊपर बंदी पहनी हुई होती है लेकिन अंजलि की पूरी उभरी हुई मोती गांड दिख रही होती जो पेंटी भी अंजलि ाएसि पहनी हुई होती है जो पेंटी बस अंजलि की गांड की बिल पर फांसी हुई होती है

गुड़िया उठ कॉलेज नहीं जाना क्या ... गीता पहले तो अंजलि की ट्रॉउज़र उठा कर गांड के ऊपर रखती है आवर अंजलि को उठती है

अंजलि काफी देर तक हुईं हुईं करते हुआ उठ hi जाती है

अह्ह्ह्हह दी मेरे सर कितना दर्द कर रहा है

अंजलि उठती हुई सर पकड़ कर बोलती है

वही गीता थोड़ी सहम जाती है मगर जल्द hi खुद को संभल लेती है ....

आह्ह्ह्ह डीई

इतने वक़्त तक तू सोती रहेगी तो सर दर्द तो करेगा hi न .... जा जल्दी से नाहा काफी वक़्त हो गया है कॉलेज नहीं जाना क्या

गीता अंजलि के सर मर मरती हुई बोलती है वही अंजलि मुंह बना कर बाथरूम मैं चली जाती है

ओह्ह गॉड गुड़िया आवर माँ को कोई सक नहीं हुआ ..... गीता अंजलि की बेडशीट ठीक करती हुई मन मैं सोचती है

इस वक़्त दिंनिंग टेबल पर आँचल नहीं होती है अर्जुन राखी देवी के बगल मैं बैठ कर नास्ता कर रहा होता है वही राखी देवी नास्ता करती हुई बार बार अर्जुन को मुस्कुरा कर देख रही होती है वही अर्जुन की नज़र जब अपनी माँ पर पड़ती है तो अर्जुन भी मुस्कुरा देता है

नास्ता करने के बाद गीता अंजलि आवर अर्जुन अपने अपने रूम मैं चले जाते है वही राखी देवी सारा पालते उठा कर किचेन मैं रखने लगती है

फिर तीनो भाई बहन साथ मैं कॉलेज के लिए निकल जाते है क्यू आज अर्जुन बाइक को लेकर नहीं जाता है

गीता

गीता अंजलि से बातें करती हुई जा रही होती है तभी पीछे से आवाज़ सुन कर रुक जाती है तो देखती आदि की माँ रजनी पीछे आ रही होती है


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वाओ सो इस ब्यूटीफुल रजनी मेम ..... आदि की माँ को करीब आते हुआ देख कर अंजलि बोल पड़ती है

वही अर्जुन भी आदि की माँ को आते हुआ देख रहा होता है जो अर्जुन की आँखों मैं एक अजीब सी चमक आ गयी होती है

यस डीई ..... रणजी मेम तो बहुत खूबसूरत है क्या जिस्म है रणजी मेम की

वहहहह होंठ कितने पतले है अह्ह्ह्हह साड़ी मैं देख कर ये हालत हो रही है मेरी तो रजनी मेम जब नंगी होगी तो कितनी खूबसूरत होंगी Ahhhhhhhhhhhhh

अर्जुन क्या हुआ

अर्जुन आदि की माँ को आते हुआ देख कर मन मैं सोच रहा होता है तभी अर्जुन का हाथ अपने लैंड पर चला जाता है जो अर्जुन की अह्ह्ह्ह निकल जाती है जो अंजलि सुन कर पूछ लेती है

दी दी वह ... हां मैं बोल रहा था रजनी मेम खूबसूरत है

अर्जुन किसी तरह खुद को सँभालते हुआ बोलता है

रजनी मेम आप खूबसूरत लग रही है .... पास आने पर गीता बोलती है जो गीता भी आदि की माँ की खूबसूरती आज धयान से देख रही होती है

सच मैं रणजी मेम आप इस उम्र मैं भी बहुत खूबसूरत है ..... गीता के बोलते hi अंजलि भी बोल पड़ती है

थैंक्स गीता आवर अंजलि आवर मैं मेम तुम्हारी कॉलेज मैं हुईं कॉलेज से बहार मुझे आंटी बोलै सकती हो .....

वैसे तुम दोनों मुझसे मस्ती कर रही हो न ..... आदि की माँ हस्ती हुई बोलती है आवर अर्जुन को एक नज़र देख कर आगे चलने लगती है

ठीक है रजनी मेम ओह सॉरी .... आंटी बहार हम आप को आंटी hi बोलेंगे

वैसे हम मस्ती नहीं कर रही आप आज आवर भी खूबसूरत लग रही है .. क्यू अर्जुन

हां क क क्या दी ..... अर्जुन पहले तो हां बोलते है ये कह सकते है अर्जुन के मुंह से हां निकल जाता है मगर अर्जुन फिर हड़बड़ा भी जाता है आवर आदि की माँ को देख कर अपनी नज़ारे हटा भी लेता है

देखा अंजलि मैं बोल रही थी तुम दोनों बहाने मुझसे मस्ती कर रही हो ..... अगर मैं अभी खूबसूरत लगती तो अर्जुन भी कुछ बोलता न .... देखों तो ये तो मुझ जैसी बुद्धि को देख भी नहीं रहा है

नहीं आंटी आप बहुत खूबसूरत लग रही है सच मैं ..... अभी लग hi नहीं रहा आप की शादी हुई है ..... अर्जुन बोल चलते हुआ रुक जाता है आवर ठीक अदि की माँ के सामने खड़ा होकर बोल पड़ता है

वही अर्जुन की बात सुन कर आदि की माँ तो शर्मा hi जाती है आवर निचे देखने लगती है

अब तो आप मान गयी न आंटी .... अंजलि की आवाज़ सुन कर आदि की माँ होश मैं आती है जो अर्जुन की तारीफ सुन कर वही निचे कड़ी शर्मा रही होती है

थैंक्स अर्जुन ..... आदि की माँ सरमाती हुई बोलती है


वही अर्जुन भी देख कर मुस्कुरा देता है जो आदि की माँ आवर भी शर्मा जाती है

वाओ कुछ तो चल रहा है अर्जुन आवर रणजी आंटी के बिच उस दिन भी रणजी आंटी अर्जुन को देख कर कैसे शर्मा रही थी आउट आज भी शर्मा रही है मेरा बाबू इतना हैंडसम है hi की किसी का भी दिल आ जाये

गीता आदि की माँ को सरमाती हुई देख कर मन मैं सोचती है जो कब से देख रही होती है

चले रणजी आंटी वर्ण लेट हो जायेंगे .... गीता बोलती है तो आदि की माँ चलने लगती है साथ मैं गाओं की लड़की भी आ जाती है जो अर्जुन को बस ताड़े रही होती है जिसे देख कर अंजलि मन hi मन गुस्सा हो रही होती है

ोये कजरी इधर से चल न ....... अंजलि जब गाओं की लड़की कजरी को अर्जुन के पास से चलती हुई देखती है तो बोलती है

वही अंजलि को घूरती हुई देख कर कजरी अर्जुन के पास से हैट जाती है

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राखी देवी किचेन का काम कर के आँचल को खुद नास्ता करती है आवर फिर हवेली से निकल कर खेतों की तरफ चल पड़ती है


सुबह 10 बज रहे होते है आवर इस वक़्त धुप बहुत hi तेज़्ज़ लग रही होती है जिससे पैदल चलती हुई राखी देवी को पसीने आने लगती है राखी देवी गाओं से बहार आती आवर एक बरगद के पड़े के पा कड़ी हो जाती है आवर अपनी पल्लू से अपनी खूबसूरत चेहरे को पूछने लगती है

मोहन वह देख मालकिन की फुलवाना कितनी बड़ी बड़ी है आवर टाइट भी कैसे लग रहा है मालकिन की बलाउज फाड् कर बहार आने को तड़प रहे है

अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मालकिन निकल दो न

राखी देवी से दूसरी तरफ दो बूढ़े बैठे हुआ होते है आवर राखी देवी की पल्लू हटते hi एक बुड्ढे की नज़र पद जाती है तो बोलता है ......

या ये भी कह सकते है राखी देवी आते वक़्त तक बुड्ढे की नज़र राखी देवी पर hi होती है

हां बिरजू मालकिन की हुसैन तो बेमिसाल है पता नहीं मालकिन इतने दिन बिना चौड़ाई के कैसे रह गयी है

मालकिन एक बार मुझसे बोल देती अह्हह्ह्ह्ह मालकिन की छूट कितनी गिरी होगी न काका .... दूसरा बुद्धा बोलता है

ये दोनों राखी देवी को देख कर बातें कर रहे होते है वही राखी देवी खुद की चेहरे पर आई पसीने को पोछ रही होती है तभी राखी देवी की नज़र दोनों बुड्ढे पर पद जाती है राखी देवी जल्दी से पल्लू साइन पर रख देती है

काका आप दोनों यह क्या कर रहे है .... राखी देवी थोड़ी घूरती हुई बोलती है क्यू की राखी देवी की नज़र पद चुकी होती है वह बुड्ढे की नज़र कहा पर थी वह

मालकिन खाने जा रहे है .... आते हुआ जयादा धुप लग रही है तो बैठ गए है .... मोहन दन्त दीखते हुआ बोलता है

देखो तो इस बुड्ढे की दन्त भी आधे टूट गए है आवर कैसे मेरी छाती को देख रहा था ......

ये लोग तो मुझे आयी घूरते है जैसे मुझे खा hi जायेंगे ......

आएसा क्या है मेरी जिस्म मैं जो हर औरत के पास होती है वही तो मेरे पास भी है ...... राखी देवी मन मैं सोचती हुई वह से आगे बढ़ जाती है ......वही वह बुड्ढे राखी देवी को जाते हुआ राखी देवी की गांड को देख कर अपना लैंड पकड़ लेते है


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Aahhhhhhhhhhhh मालकिन की गांड तो सब से कमल की है

वह बुद्धा बोलता हुआ अपना पेअर फैला कर पेड़ से सात जाता है

लो हो गया मोहन तू ठंडा .....

सेल तेरे को मालकिन चाहिए गांड देख कर hi तेरी सांसे टेंगा गयी ..... बिरजू बोलता है आवर मुस्कुरा देता है लेकिन बिरजू की नज़र अभी भी राखी देवी की गांड पर hi होती है

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अपडेट ........ 95

Auntyyyyyyyyyyy

राखी देवी खेत वाले घर मैं जाने वाली होती है तभी पीछे से आवाज़ सुन कर रुक जाती है आवर पलट कर देखती है तो साहिल सामने से आ रहा होता है

अरे साहिल तुम यह .... राखी देवी थोड़ी हैरान होती हुई बोलती है


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वही साहिल की नज़र तो राखी देवी पर तिकी हुई होती है

अह्ह्ह्ह आज तो आंटी आवर भी फटका लग रही है कितनी चौड़ी छाती है आंटी की होंठ भी कितनी कमल की है ये गल्ल जिह कर रहा है खा जॉन आंटी की गलों को

साहिल कहा खो गया ..... साहिल को घूरते हुआ देख कर राखी देवी बोलती है

वही साहिल राखी देवी की आवाज़ सुन कर होश मैं आता है आवर बाइक को खड़ा करने लगता है

आंटी वह सहर गया था .... आप मुझे दिख गयी तो सोचा आप से मिल लेता हुईं ..... साहिल बोलता है

आंटी क्या करूँ आप को देखने का बहुत दिल कर रहा था इस लिए तो आप के गाओं तक आ गया हुईं आप की इस रास भरी जिस्म को देख कर hi मुझे थोड़ी रहत मिल जाती है ..... साहिल राखी की जिस्म को घूरता हुआ मन मैं सोचता है

अच्छा किया साहिल आ जाओ बैठ बात करते है ...... राखी देवी बोलती है तो साहिल भी राखी देवी के पीछे घर मैं आ जाता है

राखी देवी साहिल को पानी पिने को देती है

बता खेत का काम कैसा चल रहा है वह .... आवर तेरी माँ कैसी है ...

राखी देवी पूछती है .... अच्छा चल रहा है आंटी आवर माँ भी अच्छी है आप कब आ रही है वह ......

आखिर कार साहिल अपने मन मैं चल रहे बात को पूछ hi लेता है ताकि वह राखी देवी के करीब रह सके आवर मक्का देख कर राखी देवी को छोड़ दे

साहिल अभी तो नहीं आ सकती लेकिन हां हम लोग जल्द hi वह आने की कोशिश करेंगे .... राखी देवी बोलती है वही राखी देवी की बात सुन कर साहिल मन hi मन मायुश हो जाता है मगर चेहरे पर कोई भाव नहीं लता है

साहिल राखी देवी के साथ कुछ आवर बातें कर के चला जाता है मगर जब तक राखी देवी के साथ रहता है अपनी आँखें सकता hi रहता है

कॉलेज के केंटीन मैं

नीतू आस्था कॉलेज क्यू नहीं आ रही है .... अर्जुन आस्था की दोस्त नीतू से पूछता

अर्जुन कॉलेज मैं आने के बाद आज भी आस्था को क्लास मैं नहीं देखता है तो हांफ टाइम होने के बाद केंटीन नीतू को देख कर उसके पास जाकर पूछता है ....

वाओ मतलब तुम्हारे दिल मैं उसने खुद के लिए प्यार जगा hi दिया

आस्था बेबी देखों इसके आँखों मैं कितनी बेचैनी है तुमसे मिलने की ..... नीतू अर्जुन के चेहरे को देखती हुई मन मैं सोचती है

नीतू तुमेह पता है क्या ..... अर्जुन फिर से पूछता है ....

वह अपने मसि के घर गयी है .... वैसे तुम पूछ क्यू रहे हो .... नीतू पूछती है

वह एक काम था .... जब वह आये तो बोल देना मुझसे मिलने को ..... अर्जुन इतना बोल कर वह से चला जाता है

वही अर्जुन को जाते हुआ देख कर नीतू मन मैं मुस्कुरा पड़ती है

अर्जुन सीधे क्लास मैं जाकर बैठ जाता है धीरे धीरे सरे स्टूडेंट्स आ जाते है

क्लास ख़त्म होने के बाद अर्जुन कॉलेज के गेट पर खड़ा होकर अपनी दोनों बहन का इंतज़ार करता है जो थोड़ी hi देर मैं अंजलि आवर गीता भी आ जाती है तो अर्जुन अपनी बाँहों के साथ घर आ जाता है

अर्जुन अपने रूम मैं जाता है आवर कपडे चेंज करने लगता है अर्जुन कपडे चेंज कर के आँचल के रूम मैं जाने को होता है लेकिन आँचल की रूम मैं अंजलि दीदी को देख कर नहीं जाता है आवर घर से निकल जाता है

तै तै आप कहा है ..... अर्जुन पुकारता हुआ घर के अंदर चला जाता है आवर आंगन मैं रखे हुआ खत पर बैठ जाता है

अर्जुन तू है बैठ मैं ऑटो हुईं .... पूजा की माँ बोलती है

पूजा की माँ बोलती है जो इस वक़्त आँगन मैं कपड़ों से घेरे हुआ बाथरूम मैं कपडे धो रही होती है आवर अर्जुन की आवाज़ सुन कर वह धोये हुआ कपडे उठा कर बहार आ जाती है आवर कपडे डालने लगती है


आज तुझे अपनी तै की याद आ hi गयी एक hi गाओं मैं रहने के बाद भी लगता है कितने दूर रहता है तू ...... पूजा की माँ बोलती है

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अर्जुन खत पर बैठा फ़ोन चला रहा होता है तै की आवाज़ सुन कर उनकी तरफ देखता है तो देखता hi रह जाता है

तै सिर्फ पेटीकोट मैं होती है आवर तै की पेटीकोट भी भींगी हुई होती जो अर्जुन तै की पूरी जिस्म को देख रहा होता है जिससे अर्जुन का लैंड भी खड़ा होने लगता है

अबे सेल क्या देख रहा है वह तेरी माँ से भी बड़ी उम्र की है जिसे तू तै कहता है ... अर्जुन क्या हो गया है तुझे ..... बस औरत दिखी नहीं तेरा लैंड घुसने के लिए बेचैन होने लगता है उस औरत को छूट मैं

अर्जुन मन मैं सोचता है

लेकिन अर्जुन तै की जिस्म को देख hi चला जा रहा होता है जैसे अर्जुन को दिमाग की सोच से कोई मतलब नहीं है

वही तै अर्जुन की तरफ जैसे hi घूमती है अर्जुन नज़र खुद hi निचे हो जाती है

क्या हुआ कुछ बोल क्यू नहीं रहा .... आज तुझे तै की याद कैसे आ गयी ...... पूजा की माँ थोड़ी गुस्से वाली सकल बना कर पूछती है

तै तुम क्या बोल रही है .... मैं तो हर वक़्त आता रहता हुईं .... तुम hi घर पर नहीं होती है ..... अर्जुन बोलता है मगर सर निचे hi किया हुआ होता है ताकि उसकी नज़र फिर से तै पर न जाए

वही अर्जुन का लैंड खड़ा हो चूका होता है जो अर्जुन अपना एक हाथ लैंड के ऊपर रख कर दबा कर बैठा रहा होता है

ओह मेरे अर्जुन ..... मुझे पता था अर्जुन मेरे न होने पर घर आता होगा .... अर्जुन बता बैठ मैं अभी नाहा कर आती हुईं

तै बोलती है आवर फिर से बाथरूम मैं चली जाती है

तै के बाथरूम मैं जाते hi अर्जुन खड़ा होकर अपना लैंड जेन्स मैं अर्जेस्ट करने की कोशिश करता है मगर अर्जुन का लैंड बैठने का नाम hi नहीं ले रहा होता है तै की गर्दै हुई जिस्म देखने के बाद

अर्जुन तै नाहा रही है चल न देखते है तै की जिस्म भी पूजा दीदी से काम नहीं है ..... अर्जुन के मन मैं ख्याल आता है लेकिन अर्जुन बाथरूम के करीब न जाकर तै के घर से hi चला जाता है


अर्जुन तै के घर से निकल कर पंकज के दोकान पर आता है आवर सिगरेट पिने लगता है

अर्जुन सिगरेट पि रहा होता है तभी उसका फ़ोन बजने लगता है अर्जुन फ़ोन देखता है तो आँचल माँ का होता है तो अर्जुन फ़ोन उठा लेता है

अर्जुन बीटा कहा है .... बीटा जल्दी घर आ

माँ माँ क्या हुआ .... अर्जुन आँचल की आवाज़ सुन कर घबरा जाता है क्यू की आँचल बोलती हुई तो भी रही होती है

अर्जुन जल्दी से सिगरेट
फक्त है आवर घर की तरफ भागता है

अर्जुन घर आते hi बहुत तेज़ी मैं आँचल की रूम मैं जाता है तो देखता है गीता आवर अंजलि भी रूम मैं है आवर वह दोनों भी आँचल की बाँहों मैं सिसक रही है वही आँचल दोनों को चुप करा रही है

आँचल को ठीक देख कर अर्जुन चैन की साँस लेता है लेकिन दोनों दीदी को रट देख कर दुखी भी हो जाता है

माँ क्या हुआ दीदी रो क्यू रही है .... अर्जुन पूछता हुआ गीता आवर अंजलि के पास hi चला जाता है

बीटा वह तेरी नानी ..... आँचल इतना बोल कर रोने लगती है .....

माँ क क क क्या हुआ नानी को बताइये न ..... अर्जुन हकलाता हुआ पूछता है आवर अर्जुन भी आँचल से लिपट जाता है

पूछते हुआ अर्जुन की आँखें भी भर आती है ये सोच कर नानी कही मार तो नहीं गयी

माँ क्या नानी को बताइये न ..... अर्जुन को यकीन नहीं हो रहा होता है जो वह सोच रहा है वह सच है इस लिए फिर से पूछता है .....

बीटा वह हॉस्पिटल मैं भर्ती है वह सीढ़ियों से गिर गयी है ..... आँचल बोलती है

वही माँ की बात सुन कर अर्जुन थोड़ा संत होता है ......

माँ नानी ठीक होंगी आप चिंता न करो ......

मैं अभी नानी के पास जा रहा हुईं ....... अर्जुन बोलता है

अर्जुन बीटा दीदी आती होंगी वह भी जाएँगी ...... आँचल बोलती है


अर्जुन अपने रूम मैं चला जाता है

थोड़ी hi देर मैं राखी देवी भी घर आ जाती है आवर अपने रूम मैं तैयार होने चली जाती है

रात भी होने वाली होती है तो अर्जुन लेट करना नहीं चाहता है इस लिए राखी देवी के आते देख कर जल्दी चलने को बोलता है

राखी भी तैयार हो जाती है तो अर्जुन बाइक लेकर निकल पड़ता है !

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रात के 9:पं


कोमल अपने रूम मैं बैठी कुछ सोच मैं डूबी हुई होती है

ये कैसी सपना मेरी नींद मैं आई थी मैं तो कभी अर्जुन से मिली भी नहीं फिर मैं उसका नाम कैसे ले रही थी


अर्जुन मेरे साथ आएसा कर भी कैसे सकता है

मन की वह मेरा अपना भाई नहीं है ! लेकिन मेरे दादा का भाई का पोता है तो उस हिसाब से अर्जुन मेरा भाई hi है ! हम दोनों एक hi परिवार से है अगर हम दोनों के दादा अलग नहीं हुआ होते तो सायद हम सब साथ होते !

मैं तो किसी लड़के से बात करना भी पसंद नहीं करती फिर मैं अर्जुन के बारे मैं ाएसि सोच भी कैसे सकती हुईं

मैं अर्जुन से मिलना चाहती हुईं मगर एक भाई के जैसा वह मेरा भाई hi है मेरा पाटीईईई

कोमल मन मैं सोचती हुई वही रुक जाती है

ओह्ह गॉड क्या सोच रही हुईं मैं ......

कोमल को जैसे hi अहसास होती है वह क्या बोल गयी अपनी सर पकड़ लेती है आवर बीएड पर गिर पड़ती है

कोमल बीएड पर लेती हुई परेशां होती है अर्जुन को सोच कर तभी कोमल का फ़ोन बजने लगती है तो कोमल नंबर देख कर मुस्कुरा देती है

नमस्ते आरती दी ....... कोमल खुश होकर बोलती है

गुड़िया सो गयी क्या ..... आरती पूछती है

नहीं दी ..... बस सोने वाली थी .....

बताओ कब आने वाली है आप ....... कोमल पूछती है

मुझे पता था मैं अच्छी हुईं ये नहीं ये नहीं पूछेगी

मगर मैं कब आ रही हुईं ये ज़रूर पूछेगी

वैसे मैं 4 दिन बाद आने वाली हुईं खुश हो गयी बोल .....

क्या सच डीई

कोमल सुन कर खुश होती हुई पूछती है

हां तेरे जीजू कुछ दिन के लिए दूसरी जगह जस रहे है तो मैंने सोचा मैं भी घर चली आती हुईं ..... आरती बोलती है

अच्छा सोचा दी आप ने आ जाइये खूब मस्ती करेंगे हम सब .... कोमल खुश होकर बोलती है

कोमल अपनी आरती दीदी से बात करने के बाद खुद को थोड़ा सकूँ महसूस करती है आवर बीएड पर आंखे बंद कर लेती है

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रात के 11: पं

राखी देवी इस वक़्त हॉस्पिटल मैं अपनी माँ के साथ होती है आवर अर्जुन भी पास मैं बैठा हुआ होता है जो अर्जुन की नानी अभी गहरी नींद मैं होती है

वही अर्जुन के मां डॉ से बात कर रहे होते है

अर्जुन के मां डॉ से बात करने के बाद उनके पास आ जाते है

छोटे क्या कहा डॉ ने ..... अपने भाई के आने के बाद राखी देवी पूछती है

दीदी डॉ ने कहा है चिंता की कोई बात नहीं है माँ ठीक है ....... हां कमर मैं चोट आई है जो डॉ ने बोलै है मालिश करने से ठीक हो जायेगा सुबह हम माँ घर लेकर जा सकते है

ठीक है छोटे मैं माँ की मालिश खुद करुँगी ..... राखी देवी बोलती है

दीदी आप आवर अर्जुन घर चली जाइये थक गयी होंगी ..... अर्जुन के मां बोलते है

छोटे मैं ठीक हुईं तू चिंता न कर जा तू आराम करले सुबह तुझे गाओं जाना होगा मैं यह माँ के साथ रहूंगी कुछ दिन ....... राखी देवी बोलती

राखी देवी की बात सुन कर अर्जुन के मां आवर कुछ नहीं बोलते है आवर जाने लगते है

अर्जुन बीटा मां के साथ घर चला जा .... राखी देवी अर्जुन से बोलती है मगर अर्जुन मन कर देता है जो राखी देवी भी जयादा ज़िद्द नहीं करती है

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अपडेट ...... 96

अगली सुबह

अर्जुन सोया हुआ होता है तभी अर्जुन को अपने जिस्म पर कुछ भरी चीज का महसूस होता है तो अर्जुन सोये हुआ hi अपना हाथ से हटाने की कोशिश करता है मगर अर्जुन हटा नहीं पता है तो अर्जुन सोये हुआ hi दूसरी तरफ घूमने की कोशिश करने लगता है मगर फिर भी अर्जुन घूम नहीं पता है अर्जुन कसमकस हुआ आँखें खोल देता है तो देखता है उसकी माँ उसे पकड़ कर सो रही है आवर राखी देवी की एक पेअर भी अर्जुन के ऊपर होती है अर्जुन जब आँखें खोल कर सामने देखता है तो पता है उसकी माँ चैन की साँस हो रही है आवर राखी देवी की पल्लू भी साइन से हैट चुकी होती है जिससे राखी देवी की आधी चुकी अर्जुन की आँखों के सामने होती है जो अर्जुन का मुंह भी ठीक पास मैं होता है जो अर्जुन माँ की आधी नंगी हुई चुकी को देखने लगता है

अर्जुन माँ की चुकी को देख hi रहा होता है तभी राखी देवी अपनी पेअर अर्जुन के ऊपर से उठा देती है माँ की उठने की अहसास से अर्जुन भी अपनी आँखें बंद कर लेता है

वही राखी देवी की जब नींद खुलती है तो वह खुद को अर्जुन के जिस्म से लिपटी हुई पति है तभी राखी देवी की नज़र अर्जुन पर जाती है जो देखती है अर्जुन अभी सो रहा है

अर्जुन को सोता हुआ देख कर राखी देवी मन मैं मुस्कुरा पड़ती है

देखों सोते हुआ आज भी बच्चे जैसा लगता है कितने सल्ल हो गए अर्जुन के साथ सोये हुआ देखो कैसे सोते हुआ मुझसे लिपटा है मगर उठाते hi मुझसे दूर हो जायेगा

ओह्ह मेरा बच्चा ..... राखी देवी ये बात बोलती हुई अर्जुन को पकड़ कर फिर से आँखें बंद कर लेती है !

वही अर्जुन सोने का नाटक कर रहा होता है मगर माँ को फिर से पकड़ सोते देख कर अर्जुन उठने की कोशिश करने लगता है

वही राखी देवी को ये अहसास होते hi वह अर्जुन को छोड़ देती है जो अर्जुन उठ जाता है आवर उठ कर रूम से निकल जाता है

अर्जुन के जाने के बाद भी राखी देवी उठ जाती है आवर अपनी माँ के पास जाती है तो देखती है वह भी उठ चुकी है !

माँ अभी कैसा लग रहा है .... राखी देवी अपनी माँ की हाथ पकड़ कर पूछती है !

ठीक लग रहा है राखी .... राखी देवी की माँ बोलती है !

माँ मैं कॉफ़ी आवर कुछ खाने को लती हुईं ..... राखी देवी बोल कर रूम से बहार आती है तो देखती है अर्जुन कॉफ़ी आवर कुछ खाने का सामान लेकर आ रहा होता है तो राखी देवी वही रुक जाती है

माँ आप नानी को कुछ खिला दीजिये मैं डॉ को लेकर आता हुईं वह नानी को देख लेंगे तो हम घर चलेंगे .... अर्जुन देते हुआ बोलता है !

वही राखी देवी कॉफ़ी आवर फ्रूट लेकर अपनी माँ के पास चली जाती है !

थोड़ी hi देर मैं अर्जुन डॉ को साथ लेकर रूम मैं आता है तो डॉ नानी को चेक करते है .... !

ये ठीक है मैं कुछ दवाइया लेख देता हुईं आवर एक टालल भी होगा जिससे आप इनकी हर रोज़ मालिश करती रहेंगी तो जल्दी ठीक हो जाएँगी ... डॉ बोलता है तो राखी देवी हां मैं जवाब देती है !

अर्जुन डॉ के साथ चला जाता है !


डॉ से पर्ची लेने के बाद अर्जुन दवा लेता है आवर बिल पाय कर के हॉस्पिटल से बहार आता है आवर एक टैक्सी को ठीक करता है आवर फिर नानी को लेकर घर आ जाता है !

राखी देवी घर आने के बाद कुछ देर अपनी माँ के साथ बैठी हुई होती है

राखी बेटी तुम फ्रेश हो जाओ मैं दीदी के पास हुईं ..... आँचल की माँ आकर बोलती है तो राखी देवी उठ कर चली जाती है

अर्जुन इस वक़्त मार्किट मैं एक घूमती पे बैठा हुआ होता है आवर सिगरेट पि रहा होता है

वही एक बाइक पर 2 लड़के बैठे ठीक उसी घूमती पर आते है आवर बाइक रोक कर वह दोनों भी घूमती पर आ जाते है ..

लालू 2 सिगरेट देना तो .... उनमे से एक लड़का बोलता है

सेल आज तो तुम दोनों पक्का पिटोगे ....

उन दोनों लड़कों को देख कर पान वाला मन मैं सोचता है

उस लड़के की नज़र अभी अर्जुन पर नहीं पड़ी हुई होती है क्यू के अर्जुन दूसरी तरफ बैठ कर सिगरेट पि रहा होता है ...

लालू शिला आज दोकान पर नहीं आई है क्या .... वह लड़का पान वाले से पूछता है

देख विकी मैंने पहले भी कहा है आवर आज भी बोल रहा हुईं मेरे दोकान पर आकर ये सब मत पूछा कर .... मैं यह दोकान चला कर अपने परिवार चला रहा हुईं मैं किसी को देखता नहीं रहता कौन आई है कौन नहीं ..... लालू बोलता है

अबे चूतिये तो दोकान चलते हुआ भी देख तो सकता है न आवर कौन सा तुझे जाकर देखना है सामने तो दिख रहा है नज़र तो जाती होगी न .... जैसे अभी दोकान पर शिला नहीं दिख रही है ..... विकी लालू पर भड़कता हुआ बोलता है

मुझे नहीं पता ये सिगरेट ले आवर जा यह से ..... लालू बोलता है

अबे चूतिये आज इतना अकड़ क्यू रहा है बे ... सेल तुझे पता है न मैं चहुँ तो तेरी ये दो कौड़ी की दोकान मिटटी मैं मिला सकता हुईं ......

तेरे पाप का राज है क्या बे छक्के .....

बस कब से बकवास कर रहा है ..... किसके बारे मैं जानना चाहता है तू .....


आ अर्जुन म मैं .....

अर्जुन की आवाज़ सुन कर hi विकी की गांड फैट जाती है वह हकलाता हुआ बोलने लगता है

बस मुझे कुछ नहीं जानना अभी निकल जा यह से नहीं तो अच्छा नहीं होगा .... अर्जुन बेंच से उठता हुआ बोलता है वही विकी बिना सिगरेट लिए hi वह से चला जाता है

अर्जुन सिगरेट का पैसा देता है आवर बाइक लेकर वह से चला जाता है

अर्जुन बाइक चलते हुआ एक पार्क मैं जाकर बैठ जाता है आवर फिर से सिगरेट निकल कर पिने लगता है !

मैं तुमसे प्यार नहीं करती तुम क्यू मुझे परेशां करते रहते हो ! मेरा पीछे करने क्यू नहीं छोड़ देता !

ठीक है बस मुझे एक बार खुश करदे ! बदले मैं जितना पैसा तुझे चाहिए मैं देने को तैयार हुईं .... मुझे पता तुझे पैसों की ज़रूरत है ..... !

मैं ऐसी घटिया हरकत कभी नहीं करुँगी .... मैं इतना कमा लेती हुईं के अपने परिवार को पल सकूँ मुझे पैसे नहीं चाहिए. ! भगवन के लिए मुझे यह से जाने दो !

अह्ह्ह प्लीज मुझे जाने अह्ह्ह्ह दो ..... !

रॉकी तू हरामी hi रहेगा क्या ...... !

अर्जुन बैठा हुआ सिगरेट पि रहा होता है वही थोड़ी आगे एक लड़की को रॉकी नाम का लड़का लड़की को परेशां कर रहा होता है जो अर्जुन बस सुन रहा होता है मगर जैसे hi रॉकी लड़की के साथ बदतमीज़ी करने लगता है अर्जुन उठ कर वह चला जाता है आवर बोलता है वही अर्जुन की आवाज़ सुन कर रॉकी लड़की को छोड़ देता है ..... !

देख अर्जुन तू इस लफड़े मैं मत पढ़ ये कोई कॉलेज नहीं है आवर नहीं अब मैं तुझसे डरता हुईं .... रॉकी बोलता है !

तू डरता है की नहीं मुझे नहीं पता ..... लेकिन ये तुझे पता है मैं किसी के बाप से भी नहीं डरता .... मेरी बात मान आवर इस लड़की को जाने दे ...... अर्जुन इस बार रॉकी को देखता हुआ मुस्कुरा कर बोलता है जिसे देख कर रॉकी समझ जाता है अर्जुन क्या बोलना छह रहा है !

अर्जुन अभी तो मैं जा रहा हुईं मगर मैं जल्द तुझसे मिलूंगा ...... तब तुझे पता चलेगा मैं क्या चीज हुईं ..... रॉकी बोलता है आवर वह से चला जाता है !

तुम वही अर्जुन हो जिसके बारे मैं कॉलेज मैं सब बातें करते है ..... लड़की अर्जुन को घूरती हुईं पूछती है !

हां सायद मैं वही हुईं .... लेकिन आप कॉलेज मैं .... !

मैं कुछ महीने पहले कॉलेज मैं आई हुईं मैथ्स पद्धति हुईं .... लड़की बोलती है !

ओह्ह अच्छा है ..... ठीक है फिर कभी मिलते है ........ अर्जुन इतना बोल कर वह से चल देता है !

सच मैं ये वैसा hi है जैसी बातें करते है कॉलेज मैं स्टूडेंट्स इसके बारे मैं !


....

अर्जुन को जाते हुआ देख कर लड़की मन मैं सोचती है !

अर्जुन वह से सीधे घर आता है आवर बाइक लगा कर घर मैं चला आता है तो देखता है उसकी माँ हॉल मैं बैठी हुई है

अर्जुन कहा गया था बीटा नास्ता भी नहीं किया है दोपहर होने वाली है .... राखी देवी बोलती है

माँ नास्ता कर लिए है ..... फ्रेश होकर आता हुईं तो खाना खाऊंगा .... अर्जुन बोलता है आवर रूम मैं चला जाता है

अर्जुन कपडे चेंज करता है आवर टावल लेकर रूम से निकल कर बाथरूम मैं आ जाता है

अर्जुन बाथरूम मैं आकर गेट बंद कर देता है

बाथरूम का गेट बंद होने की आवाज़ सुन कर राखी देवी को कुछ याद आ जाता है

हे भगवन मैंने तो कपडे वैसे hi छोड़ दिया है बाथरूम मैं देख कर अर्जुन क्या सोचेगा .... राखी देवी मन मैं सोचती है आवर थोड़ी परेशां भी हो जाती है आवर राखी देवी को सरम भी आ रही होती है

वही अर्जुन बाथरूम मैं आने के बाद बिलकुल नंगा होकर झरने को ओपन कर के नहाने लगता है जब अर्जुन का पूरा जिस्म बीइंग जाता है तो झरना बंद कर के साबुन लेने के लिए जाता है तभी अर्जुन की नज़र साबुन के ऊपर तंगी हुई माँ की ब्रा पेंटी पर नज़र चली जाती है !


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अर्जुन ब्रा पेंटी को देखने लगता है आवर फिर अर्जुन अपना हाथ ब्रा की तरफ बढ़ा देता है

अर्जुन क्या कर रहा है ये ब्रा पेंटी किसकी है तुझे पता भी है ये तेरी माँ की भी हो सकती है या फिर दोनों नानी मैं किसी की तुझे सरम नहीं आएगी बे

अर्जुन भाड़ मैं गयी सरम मान ले माँ की भी है तो क्या होगा तू माँ के साथ थोड़ी कुछ कर रहा है देख कितनी नरम है ये ब्रा हाथ मैं लेकर देख अर्जुन ....

अर्जुन सोचते हुआ hi आखिर को पकड़ hi लेता है

वाओ सच मैं बहुत नरम है ....... हूंणनननननन अह्हह्ह्ह्ह क्या खुसबू भी

ब्रा को सूंघते हुए अर्जुन को नासा से होने लगता है जिससे अर्जुन का लैंड भी खड़ा होने लगता है

अर्जुन ब्रा की एक चुकी वाली जगह पे मुंह रख कर आँखें बंद कर के फिर से सूंघने लगता है ब्रा की खुसबू अर्जुन की दिमाग पर नासा कर रही होती है जो अर्जुन का एक हाथ खड़ा हुआ लैंड पर चला जाता है

क्या ये माँ ब्रा है .... वाओ माँ की चुकी भी काम बड़ी नहीं है अह्हह्ह्ह्ह कितनी अच्छी खुसबू है माँ की जिस्म की अह्ह्ह्हह अर्जुन ब्रा को सूंघ रहा होता है आवर मन मैं सोच रहा होता है ये भूल कर की वह ब्रा पेंटी उसकी अपनी माँ की है

अर्जुन ब्रा की खुसबू लेते लेते दूसरा हाथ लैंड से हटा कर पेंटी को उठा लेता है .....

अह्ह्ह्हह्हह ये पेंटी कितनी बड़ी ! माँ की इतनी बड़ी गांड है Ahhhhhhhhhh माँ की गांड तो इसमें चिपक जाती होगी

Ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh


पेंटी की खुसबू तो आवर भी अच्छी है

पेंटी को सूंघते अर्जुन का पेअर डगमगा जाता है अर्जुन पेंटी को लैंड पर रखता है आवर ठीक गांड वाली जगह पर लैंड का टोपा फसा कर हिलने लगता है अर्जुन जयादा देर तक खुद पर काबू नहीं कर पता है आवर अपने लैंड का पानी माँ की गांड वाली जगह पर गिरा देता है आवर हफ्ते हुआ वही बैठ जाता है

बस ये मैंने क्या किया .... माँ को पता चला तो क्या करेंगी वह .... अर्जुन कही दर तो नहीं रहा माँ

भूल मत माँ भी कोई दूध की धूलि हुई नहीं है .... पर वह है तो मेरी माँ न

वैसे भी मैंने उनेह बहुत तड़पा दिया है


अर्जुन जयादा मत सोच उनेह पता नहीं चलेगा इसको जाते वक़्त पानी मैं भिनगा देना

अर्जुन जयादा आवर कुछ नहीं सोचता है आवर नाहा कर राखी देवी की ब्रा पेंटी भी पलटी मैं दाल कर अंदर कर देता है जो पहले से उसमे राखी देवी की साड़ी पेटीकोट होती है अर्जुन नगर कर अपने रूम मैं जाता है आवर कपडे पहनने लगता है

राखी देवी हॉल मैं बैठी अर्जुन का निकलने की रह देख रही होती है अर्जुन जैसे hi अपने रूम मैं जाता है राखी देवी जल्दी से बाथरूम मैं घुस जाती है लेकिन जैसे hi राखी देवी बाथरूम मैं जाकर ब्रा पेंटी देखती है ब्रा पेंटी वह होता hi नहीं है जो राखी देवी हैरान हो जाती है

ब्रा पेंटी ऊपर तो राखी थी मगर यह तो नहीं है ब्रा पेंटी कहा चली गयी !

राखी देवी बाथरूम मैं चरों तरफ देखती है मगर ब्रा पेंटी कही नहीं दिखती है

कही मैंने कपड़ों के साथ बाल्टी मैं तो नहीं रख दिया ..... लेकिन मुझे पूरा याद है मैंने ब्रा पेंटी इसी पर राखी थी .... राखी देवी मन मैं सोचती हुई बाल्टी से सारा कपडा निचे गिरा देती है तो देखती है ब्रा पेंटी भी उसमे भिनगा हुआ है

राखी देवी ब्रा पेंटी बाल्टी मैं देख कर फिर कुछ नहीं सोचती है या कह सकते है राखी देवी अर्जुन के लिए अपने मन मैं गलत ख्याल नहीं लाना चाहती है क्यू के राखी देवी को इतना तो यकीन था उनका अर्जुन ऐसी कोई हरकत नहीं करेगा इस लिए राखी देवी के मन मैं कोई भी बात अर्जुन के बारे मैं नहीं आती है

राखी देवी कपडे फिर से बाल्टी मैं रख कर बाथरूम से निकल जाती है

राखी देवी बाथरूम से निकल कर किचेन मैं जाती है आवर खाना निकल कर दिंनिंग टेबल पर रखने लगती है तब तक अर्जुन भी रूम से निकल जाता है

अर्जुन खाना खता है आवर चोरी नज़र से अपनी माँ को देखता है जो राखी देवी खाना खा रही होती है !

अर्जुन को इस वक़्त थोड़ा अब बुरा भी लग रहा होता है ये सोच कर अपनी माँ की कपडे पर पानी गिरा कर अच्छा नहीं किया

अर्जुन खाना खा कर उठ जाता है आवर छत पर चला जाता है !

राखी देवी भी खाना खा कर सभी किचेन मैं रखने लगती है राखी देवी हॉल मैं आती है देखती है किसी को कॉल आ रहा है तो राखी देवी चार्ज से फ़ोन निकल कर नंबर देखती है तो आँचल की होती है

Hello आँचल ..... गुड़िया कॉलेज गयी क्या

नहीं दीदी वह घर पर है .... माँ जी कैसी है !

माँ ठीक है आँचल परेशां न हो ..... मैं अर्जुन के साथ एहि कुछ दिन रहूंगी ...... राखी देवी बोलती है

हां दीदी गुड़िया के मां ने मुझे बताया ..... दीदी अर्जुन कहा है ... आँचल पूछती है

वह अभी खाना खा कर छत पर गया है

आँचल माँ के बगल वाला दोनों रूम लॉक है छोटे से पूछ उसकी के कहा है .... राखी देवी बोलती है

दीदी उसकी के अर्जुन के रूम मैं होगी ये अर्जुन के रूम मैं सोते थे तो वही है के मगर दीदी वह दोनों रूम तो फुल है क्या करोगी आप ..... आँचल बोलती है

क्या फुल है दोनों रूम ....... राखी देवी चौंकती हुई बोलती है

हां दीदी दोकान का कपडे जयादा hi ले लिए है .....


दीदी आप ऐसा करो आप मेरे रूम मैं सो जाइएगा अर्जुन के साथ आवर मेरी माँ को अर्जुन के रूम मैं सोने को बोल दीजियेगा ..... आँचल बोलती है

आँचल तू बोलना क्या चाहती है मैं समझी नै ..... मैं तेरी माँ के साथ भी तो सो सकती हुईं न ........ फिर रूम चेंज क्यू करना है ..... राखी देवी आँचल की बात से थोड़ी चौंकती हुई बोलती है


वह दीदी मैं इस लिए बोल रही थी मेरी माँ रात मैं आप को सोने नहीं देंगी ..... वह सोती हुई खरंटे बहुत तेज़्ज़ लेती है जिससे आप सो नहीं पाओगी .... इस लिए बोल रही बाकि आप खुद देख लेना ...... आँचल बोलती है

आँचल फिर तो मुश्किल है मैं उनके साथ सो पाऊँगी .... ठीक है देखती हुईं .... राखी देवी बोलती है

राखी देवी कुछ देर आवर आँचल से बात कर के फ़ोन रख देती है आवर घर का काम करने लगती है इस तरह शाम भी होने लगती है

अर्जुन भी छत से आकर अपने रूम मैं जाता है आवर कपडे चेंज कर के घर जाने लगता है

अर्जुन कहा जा रहा है ...... राखी देवी पूछती है

माँ मैं अपने दोस्तों से मिल कर आता हुईं .... अर्जुन बोलता हुआ निकल जाता है

अर्जुन बीटा जल्दी आ जाना आवर किसी से प्लीज कोई लड़ाआआ

राखी देवी बोलती हुई रुक जाती है क्यू की अर्जुन बाइक तेज़ी मैं लेकर निकल जाता है

ये सहरी
माहौल भी न ..... गाओं मैं तो सूरज डूबा नहीं के सभी बच्चे गाओं से बहार नहीं निकलते मगर सहर मैं तो रात होने के बाद hi बच्चे घर से निकल जाते है ...... राखी देवी मन hi मन बुदबुदाती है

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अपडेट ....... 97

 राखी देवी घर का काम कर चुकी होती है आवर इस वक़्त अपनी माँ की मालिश कर रही होती है आवर बार बार हॉल मैं देख रही होती है अर्जुन आया की नहीं जो रात के 10: पं होने वाला होता है आवर अर्जुन अभी तक घर नहीं आया हुआ होता है

इतनी रात हो गयी अर्जुन अभी भी घर नहीं आया कहा है ये लड़का .... राखी देवी बुदबुदाती है

राखी क्या हुआ ...... राखी देवी की धीमी आवाज़ सुन कर उसकी माँ पूछती है

माँ वह अर्जुन .... राखी देवी बोलती है

अरे वह काफी दिन के बाद यह रुका है गया होगा अपने दोस्तों से मिलने आ जायेगा तू परेशां न हो ..... राखी देवी की माँ बोलती है !

राखी देवी अपनी माँ की बात सुन आउट कुछ नहीं बोलती है तभी राखी देवी को अर्जुन हॉल मैं आते दिख जाता है तो राखी देवी रूम से निकल कर हॉल मैं आ जाती है !

अर्जुन बीटा जल्दी कपडे चेंज कर के आजा मैं खाना निकलती हुईं .... राखी देवी बोलती है !

वही अर्जुन ठीक है बोलता हुआ रूम मैं चला जाता है !

राखी देवी खाना निकलती है आवर दिंनिंग टेबल पर रखती है तब तक अर्जुन भी आ जाता है तो दोनों माँ बेटे साथ मैं खाना खाने लगते है राखी देवी खाना कहते हुआ अर्जुन को देख कर मन hi मन खुश हो रही होती है !

अर्जुन खाना खा कर चला जाता है तो राखी देवी पलट किचेन मैं रखने लगती है !

राखी देवी किचेन का काम कर के फिर से अपनी माँ की मालिश करने लगती है जब रात के 12 बजने लगते है तब राखी देवी को नींद आने लगती है तो राखी देवी अपनी माँ की मालिश करना बंद करती है आवर पहले अर्जुन की रूम मैं जाती है तो देखती है अर्जुन का रूम अंदर से बंद है तो आँचल की माँ की रूम मैं जाती है तो उनका रूम खुला हुआ होता है !

ओह मार गयी .... राखी देवी जैसे hi रूम मैं जाती है आँचल की माँ सोइ हुई लम्बी लम्बी सांसे ले रही होती है जिससे रूम मैं उनकी hi खरंटे गूंज रही होती है राखी देवी रूम से जाना चाहती है मगर नींद hi इतनी आ रही होती है की राखी देवी बीएड पर सो जाती है मगर राखी देवी आँखें बंद करती लेकिन आँचल की माँ की खरंटे सुन कर राखी देवी सो नहीं पति है !

राखी देवी को जब कुछ समझ नहीं आता है वह पहले आँचल की माँ को एक बार पकड़ कर हिलती है जो आँचल की माँ की खरंटे रुक जाती है फिर राखी देवी अपनी कान मैं रुई दाल कर आँखें बंद कर लेती है कुछ hi देर मैं राखी देवी को नींद लग जाती है !

राखी देवी की रात मैं भी कई बार नींद खुलती है जो राखी देवी किसी तरह सो जाती है या कह सकते है राखी देवी बस आँखें बंद की होती है

राखी देवी को जब अहसास होती है सुबह होने वाली है तो राखी देवी बीएड से उठ जाती है आवर बाथरूम मैं जाकर फ्रेश होने लगती है

राखी देवी जब बाथरूम से नाहा कर निकलती है तब राखी देवी को थोड़ा अच्छा महसूस होता है लेकिन नींद को राखी देवी की आँखों मैं अभी भी होती है

राखी देवी किचेन का काम करने लग जाती है

अर्जुन सोकर उठता है आवर बाथरूम मैं जाने को होता है तो देखता है उसकी माँ किचेन मैं काम कर रही है अर्जुन माँ को देखते हुए फिर बाथरूम मैं चला जाता है !

राखी देवी नास्ता बना कर पहले अपनी माँ को खिलाती है आवर फिर किचेन मैं आकर अर्जुन के लिए नास्ता निकलने लगती है

राखी देवी नास्ता निकल कर दिंनिंग टेबल पर रखती है तब तक अर्जुन भी वह आ जाता है तो राखी देवी फिर आँचल की माँ को बोलती है आवर तीनो बैठ कर नास्ता करने लगती है

अर्जुन बीटा कही जाना है अभी .... नास्ता करती हुई आँचल की माँ पूछती है

जी नानी बोलिये कुछ काम है .... अर्जुन पूछता है

अर्जुन वह दोकान खोलना था वह दोनों भी आज नहीं आने वाली है ..... आँचल की माँ बोलती है

ठीक है नानी मैं दोकान खोल देता हुईं .... अर्जुन बोलता है नास्ता करने के बाद

अर्जुन दोकान का के लेकर चला जाता है

राखी देवी भी किचेन का काम कर के अर्जुन के रूम मैं जाकर सो जाती है

अर्जुन दोकान पर बैठा हुआ होता है आवर फ़ोन चला रहा होता है तभी दोकान पर 2 औरते आती है ....

जी बोलिये क्या लेना है ..... अर्जुन फ़ोन को रखते हुआ बोलता है

बीटा राखी का घर कहा है ... उनमे से एक औरत पूछती है

जी आप कौन .... अर्जुन अपनी माँ की नाम सुन कर बोलता है

बीटा हम राखी की कॉलेज फ्रेंड है .... क्या तुमेह पता है राखी का घर कौन है कभी दिन के बाद यह आते है तो उसका घर हम भूल गया है पहले हम उसके घर आये है मगर अभी समझ नहीं आ रहा उसका घर कौन है ..... वह औरत बोलती है

ये लड़का कितना क्यूट है नहीं ज्योति ...... दूसरी औरत अपनी सहेली के कान मैं मैं बोलती है

चुप कर रेनू ..... वह औरत बुदबुदाती हुई बोलती है

जी वह घर है उनका .... अर्जुन घर की तरफ इसरा करते हुए बोलते है ....

बीटा हम अभी आते है राखी से मिल कर ..... हमेह कपडे लेना है ..... ज्योति बोलती है

वह दोनों औरत अर्जुन के घर मैं चली जाती है वही अर्जुन उन दोनों औरत को देख कर फिर से फ़ोन चलने लगता है

राखी राखी ..... ज्योति घर के गेट पर से hi राखी देवी को पुकारने लगती है जो थोड़ी hi देर मैं आँचल की माँ गेट पर आ जाती है

कौन हो बेटी राखी से क्या काम है ....

आंटी हम राखी की फ्रेंड है राखी यह है ये अपने ससुराल मैं है .... वैसे आप कौन है

ओह वह तुम दोनों राखी की सहेली हो आओ बेटी अंदर आओ .... मैं राखी की भाभी की माँ हुईं .... आँचल की माँ बोलती है !

ज्योति आवर रेनू दोनों अंदर चली आती है ......

बेटी तुम दोनों बैठों मैं राखी को बुला देती हुई ..... आँचल की माँ बोल कर राखी देवी को बुलाने चली जाती है

ज्योति क्या लगता है राखी आज भी उतनी hi खूबसूरत होगी ये उसकी जवानी ढल गयी होगी ..... रेनू ज्योति के कान मैं बोलती है

रेनू तू बिलकुल पागल है .... राखी जैसी भी होगी अच्छी hi होगी ..... वह पहले भी खूबसूरत थी आवर मेरे ख्याल से आज भी खूबसूरत hi होगी .... ज्योति चिढ़ाती हुई बोलती है !

ज्योति ओह गॉड इतने दिन के बाद तुझे मेरी याद आई .... राखी देवी जैसे hi हॉल मैं आती है ज्योति को देख कर बोल पड़ती है !

ओह मेरी बेबी गर्ल ज्योति भी बोलती हुई भाग कर राखी से लिपट जाती है !

वही रेनू बस एक तक राखी देवी को देखती रह जाती है !

वाओ राखी तो पहले से भी जयादा खूबसूरत हो गयी है कितनी सूंदर लग रही है इस साड़ी मैं .... रेनू राखी देवी की खूबसूरती को देखती हुई हैरान होकर कर मन मैं सोचती है !

ही राखी क्या कहती है जो पहले से भी जयादा तेरी खूबसूरती निखार गयी है .... रेनू राखी देवी के पास आती हुई बोलती है

ही रेनू .... रेनू मैं भी वही कहती हुईं जो सभी कहते है .... राखी देवी हस्ती हुई बोलती है

आंटी कॉफ़ी बन गया तो लेकर आ जाइये प्लीज ..... राखी देवी आँचल की माँ को आवाज़ देती है

आवर बता ज्योति तेरे बच्चे कैसे है आवर तू इंडिया कब आई .... राखी देवी सोफे पर बैठती हुई पूछती है

बच्चे अच्छे है बेबी .. इंडिया कुछ दिन पहले hi आई हुईं ..... तेरे बच्चे कैसे है .... ज्योति पूछती है

मेरे भी बच्चे अच्छे है .... अच्छा लगा तू मुझसे मिलने आई ज्योति ... राखी देवी हस्ती हुई बोलती है

आँचल की माँ तब तक कॉफ़ी लेकर आ जाती है तो कॉफ़ी पिने लगती है ......

राखी सॉरी मुझे मांफ कर दे जब तेरे पति के बारे मैं मुझे पता चला मैं उस वक़्त प्रेग्नेंट थी जो इंडिया तेरे पास नहीं आई ..... ज्योति राखी देवी की हाथ पकड़ कर बोलती है

कोई बात नहीं ज्योति .... राखी देवी फींकी मुस्कराहट के साथ बोलती है

राखी देवी थोड़ी दुखी हो जाती है अपने पति को याद कर के लेकिन ज्योति को ज़ाहिर नहीं होने देती है

राखी चल न थोड़े कपडे लेने है बगल मैं hi दोकान है .... दोकान पर एक क्यूट लड़का भी बैठा है थोड़ा मस्ती करते है उसके साथ पहले की तरह .... रेनू मुस्कुराती हुई बोलती है

ये रेनू अभी भी नहीं सुधरी है ..... ये सायद मेरे अर्जुन की बात कर रही है .... राखी देवी मन मैं सोचती है

हां राखी चल न तेरे घर के बगल मैं दोकान है तो तुझे देख कर कपडे भी अच्छा hi देगा वह

ज्योति भी बोल पड़ती है ..... ज्योति के कहने पर राखी देवी भी साथ चलने को मान जाती है मगर राखी देवी कुछ सोच कर ये नहीं बताती है वह दोकान मेरा है आवर अर्जुन मेरा बीटा है ....

राखी देवी ज्योति आवर रेनू के साथ दोकान पर आ जाती है लेकिन दोकान के अंदर नहीं जाती है आवर ज्योति के साथ बहार hi टेबल पर बैठ जाती है

बीटा ज़रा अच्छा वाला साड़ी दिखना प्राइस कितना भी चलेगा .... ज्योति बोलती है

अर्जुन महंगे वाले साड़ी निकल कर ज्योति के आगे रख देता है

राखी देख कितनी क्यूट आवर हैंडसम है न मन तो कर रहा है इसको hi अपना बॉयफ्रेंड बना लूँ .... इतने दिन मैं ये लड़का तेरी नज़र मैं नहीं आया आवर सबसे बड़ी बात के इस लड़के ने तुझे कभी कुछ नहीं कहा ...... तेरी जैसी औरत को देख कर तो आज कल के लड़के पागल हो जाये होंगे ..... रेनू राखी के कान मैं धीरे से बोलती है

ये साली कुटिया कैसी गन्दी बातें कर रही है रुक मैं तुझे अभी बताती हुईं ....

रेनू अगर तेरी छूट मैं आग लगी है तो बोल मैं अर्जुन से बात करती हुईं वह तेरी गर्मी संत कर देगा ..... राखी देवी भी धीरे से बोलती है

राखी मैंने ऐसा नहीं कहा मैं तो बस बोल रही हुईं वह लड़का हैंडसम है .... तू कहा की बात कहा लेकर जा रही है .... रेनू सरमाती हुई बोलती है

अर्जुन बीटा देख आंटी को बहुत गर्मी छड़ी है अंदर बुला कर इस गर्मी उतार दे

हाआआआ

kyaaaaaaaaaaa

nahiiiiiiiiiiiiiii

राखी देवी की बात सुन कर जहा अर्जुन शोक होकर है बोलता है वही ज्योति क्या बोल पड़ती है

वही रेनू नहीं बोलती हुईं चीख hi पड़ती है वही राखी बस मुस्कुरा पड़ती है

अर्जुन मैं बोल रही हुईं ज़रा फैन इस तरफ करदे आंटी को गर्मी लग रही है बीटा .... राखी देवी बोलती है

ठीक है माँ ....

राखी अर्जुन तेरा बीटा है

अर्जुन के माँ बोलते है ज्योति हरैं होकर बोलती है वही रेनू की आँखें बड़ी हो जाती है आवर वह अपनी सर निचे कर लेती है

हां अर्जुन मेरा बीटा है आवर ये दोकान भी मेरी है ... ज्योति तू चौंक क्यू रही है ..... राखी देवी मुस्कुराती हुई रेनू की तरफ इसरा करती हुई बोलती है जिसे देख कर ज्योति भी मुस्कुरा पड़ती है

अर्जुन फैन को रेनू की तरफ घुमा देता है जो रेनू अभी भी सर निचे की होती है ये रेनू भी न ज्योति मन मैं सोचती है

ज्योति 2 से 3 साड़ी पसंद कर लेती है

आंटी आवर कुछ दिखना है ..... अर्जुन पूछता है

राखी ब्रा पेंटी भी लेना है अब अर्जुन से कैसे कहूं ये जान कर के अर्जुन तेरा बीटा है .......

ज्योति धीरे से राखी देवी के कान मैं बोलती है

Ok साइज बोल मैं निकल देती हुईं ..... राखी देवी बोलती है ....

अर्जुन बीटा जा कॉफ़ी पीकर आ मैं इसे कपडे दिखा देती हुईं राखी देवी बोलती है तो अर्जुन चला जाता है

अर्जुन घर आता है आवर हॉल मैं बैठ जाता है

अर्जुन हॉल मैं बैठा फ़ोन चला रहा होता है तभी अर्जुन की नज़र बाथरूम की तरफ चला जाता है

बाथरूम से निकल रही आँचल की माँ को देख कर अर्जुन का लैंड अपनी सर उठा देता है जो इस वक़्त अर्जुन की नानी की बड़ी बड़ी चुकी अर्जुन के आँखों के सामने नज़र आ रही होती है

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अह्ह्ह्ह नानी भी पटाखा है यार नानी को चुकी तो अभी भी टाइट लग रही है

अर्जुन आँचल की माँ की बड़ी बड़ी चुकी को घूरता हुआ मन मैं सोचता है तब तक आँचल की माँ रूम मैं चली जाती है

अर्जुन का लैंड फुल टाइट खड़ा हो चूका होता है जो अर्जुन जल्दी से बाथरूम मैं भागता है आवर बिना गेट बंद किया हुआ चैन खोल कर मूतने लगता है ताकि थोड़ा आराम मिल सके

अर्जुन अभी मूत hi रहा होता है तभी बाथरूम मैं ज्योति आंटी घुस जाती है

ओह No सॉरी बीटा ज्योति जैसे hi बाथरूम मैं जाती है सामने अर्जुन का लैंड देख कर बाथरूम से चौंकती हुई सॉरी बोल कर निकल भगति है

वही अर्जुन भी शोक हो जाता है जिससे अर्जुन का मूत भी बंद हो जाता है अर्जुन चैन बंद करता है आवर बाथरूम से निकलता है तो बाथरूम के बगल मैं कड़ी ज्योति आंटी को देखता है मगर कुछ बोले hi चला जाता है वही अर्जुन के जाते hi ज्योति आंटी बाथरूम मैं घुस जाती है आवर बाथरूम का गेट बंद कर देती है

ओह्ह गॉड वह क्या था .... किसी का रियल मैं इतना बड़ा कैसे हो सकता इतना बड़ा तो पोर्न मैं देखा है मैंने ओह्ह गॉड जिसकी भी छूट मैं अर्जुन का लैंड जायेगा उसकी तो छूट hi फैट जाएगी ..... वह मेरी hi छूट मैं गया तो मैं तो मर hi जाउंगी ..ओह्ह गॉड ये मैं क्या सोचने लगी अर्जुन मेरे बाटे जैसा है चींईईई

ज्योति खुद hi सर्मिन्दा होकर अपनी साड़ी उठा कर पेंटी निचे करती है आवर मूतने लगती है


ज्योति मूत रही होती है मगर ज्योति के आँखों के सामने अर्जुन का लैंड अभी भी घूम रहा होता है .... ज्योति की छूट से बहुत hi धीमी आवाज़ मैं मूत निकल रही होती है जैसे ज्योति की छूट की बिल बहुत छोटी हो

Ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

ज्योति मूत कर पेंटी ऊपर करने लगती है जिस ज्योति की हाथ छूट मैं टाच हो जाती है जो ज्योति की जिस्म सिहर उठती है आवर ज्योति की आँखें भी बंद हो जाती है ज्योति साड़ी निचे करती है आवर बाथरूम से निकल जाती है


ज्योति सारा सामान पैक कर दिया आवर कुछ लेना है ..... ज्योति आंटी जब दोकान पर आती है तो राखी बोलती है

वही ज्योति आंटी की सांसे अभी भी थोड़ी तेज़्ज़ चल रही होती है तभी ज्योति आंटी की नज़र सामने बैठे अर्जुन पर जाती है जो ज्योति आंटी की आँखों मैं आवर भी सरम आ जाती है आवर वह निचे देखने लगती है

ज्योति आवर कुछ चाहिए क्या .... ज्योति को न बोलते देख कर राखी देवी फिर से पूछती है

न नहीं राखी हो गया ..... ज्योति आंटी थोड़ी रुक कर बोलती है

अर्जुन बीटा मैं ज्योति को आगे तक छोड़ कर आती हुईं .... राखी देवी बोलती है तो अर्जुन हां मैं सर हिला देता है

बाप रे इतना बड़ा भी होता है क्या ....

क्याआआआ

ज्योति क्या बोली .... रास्ता चलती हुई ज्योति बोल पड़ती है जो राखी देवी सुन लेती है आवर चैंकते हुए पूछ भी लेती है

राखी यार इतने उम्र होने के बाद आज पहली बार इतना बड़ा सांप देखा है ...... ज्योति अर्जुन का लैंड याद करती हुई बोलती है

ज्योति तू क्या बोल रही है मुझे समझ नहीं आ रही ... कहा आवर कब सांप देख लिया तूने मुझे बताया क्यू नहीं ...... राखी देवी ज्योति को घूरती हुई बोलती है

देख राखी मैं जयादा घुमा फिरा कर बात नहीं करती ... देख तू बुरा भी नहीं मन्ना ......

मैं जब बाथरूम मैं मूतने गयी थी तब अर्जुन बाथरूम मैं मूत रहा था गेट खुला था तो मैं सीधा अंदर चली गयी तभी मेरी नज़र अर्जुन के लैंड पर पड़ी मेरी तो हालत hi ख़राब हो गयी थी राखी अर्जुन का लैंड इतना बड़ा कैसे हो गया




ज्योति बोलती हुई मुंह मैं थूक जातक जाती है

वही ज्योति की बात सुन कर राखी देवी की आँखें बड़ी हो जाती है राखी देवी ज्योति को वही कड़ी होकर घूरने लगती है

वही रेनू तो बस ज्योति की हाथ को देख रही होती है जो ज्योति बताती हुई हाथ अभी भी पकड़ी हुई होती है

चीई ज्योति कैसी बातें कर रही है तू रेनू के साथ रह कर इसके जैसी होती जा रही है .... राखी देवी मुंह बनती हुई बोलती है

राखी तेरे चेहरे पर कोई हैरानी नहीं हुई मतलब तुझे पता तेरे बेटे का लैंड कितना बड़ा है ......


ज्योति बोलती हुई इस बार राखी देवी की चेहरा का रंग उड़े जाता है मगर राखी देवी जल्द hi अपने आप पर काबू कर लेती है आवर दूसरी तरफ देखने लगती है

राखी तुझे पता है मतलब .... राखी सच अर्जुन का लैंड इतना बड़ा आवर प्यारा है की जिस लड़की से उसकी शादी होगी उस लड़की की किस्मत hi खुल जाएगी .... कस तू अर्जुन को पहले जनम दे देती

Jyotiiiiiiiiiiiiiii

ओह सॉरी सॉरी यार ..... ज्योति की बातें सुन कर राखी देवी गुस्से मैं ज्योति को पुकारती है जिससे ज्योति सॉरी बोलने लगती है

ज्योति तेरा दिमाग ख़राब हो गया है ..... छियईईई

राखी राखी सॉरी यार ....

राखी देवी बोल कर वह से घर की तरफ चल पड़ती है वही ज्योति राखी देवी से सॉरी सॉरी बोलती रह जाती है मगर राखी देवी पीछे देखती भी नहीं है

राखी देवी जब दोकान के पास से गुजरती है तब राखी देवी की नज़र अर्जुन पर पड़ती है जो राखी देवी अर्जुन को देख कर अपनी नज़र निचे कर लेती है क्यू के उस वक़्त अर्जुन भी बहार देख रहा होता है आवर राखी देवी की नज़र अर्जुन से मिल जाती है


राखी देवी जल्दी से घर मैं आ जाती है आवर सीधे अर्जुन के रूम मैं चली जाती है

चीई कितनी गन्दी बातें बोल रही थी ज्योति अर्जुन उसके बेटे जैसा है .... वह कैसे मेरे बेटे के बारे मैं इस तरह बात कर सकती है उसको ज़रा भी सरम नहीं लग रही थी

राखी तू इतनी भड़क क्यू रही है आखिर ज्योति ने ऐसा क्या कहा जो भी कहा सच hi तो कहा ...... ये बात तो तुझे भी पता है अर्जुन का वह कितना बड़ा है

राखी तुमने तो छू कर भी देखा है

ज्योति ने कोई गलत बात नहीं कहा अर्जुन का इतना बड़ा है की अर्जुन से कोई भी लड़की शादी करेगी तो खुश हो रहेगी

राखी लड़की hi नहीं तेरी तरह औरत भी एक बार अर्जुन के साथ सोइ तो बार बार अर्जुन के साथ सोने के लिए मरी जाएगी ....

राखी देवी रूम मैं बैठी हुई सोच रही होती है आवर राखी देवी की पूरी चेहरे पर पसीने पसीने हो रही होती है

हे भगवन मुझे इतनी गर्मी क्यू हो रही है


राखी देवी अपनी माथे पर आई पसीने को पूछती हुई सोचती है

राखी देवी की छूट भी अंदर से गीली हो गयी होती है जब राखी देवी को अहसास होती है तो राखी देवी कड़ी हो जाती है आवर बाथरूम के अंदर चली जाती है

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