Romance Sex kahani - Ek Bhool 2 - Page 19 - SexBaba
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Romance Sex kahani - Ek Bhool 2

अपडेट 108

ये भिंडी कितने का है?

एक बुजुर्ग ने तरकारी वाला से पूछा.

300 रुपैया किलो.

इतना मेहेंगा? ठीक ठाक दाम लगाओ? :माध:

यही दाम है दादा जी. :)...बहुत ख़ास भिंडी है ये.

अच्छा ऐसी क्या बात है इस भिंडी में?

ये जमीन में ुंगता है.

ये सुनते hi वो बुजुर्ग गुस्सा हो gaye...Aas आस के सभी लोग उस तरकारी वाला को घूरने lage...Thodi दूर खरीद दारी कर रही मेघा ने ये सुनते hi.

मेघा:- क्या बदतमीज़ी है ये?

अरे मैडम ji....Aap क्यों गुस्सा हो रही है? आप को तो 5 रुपैया किलो दूंगा.

ये आवाज सुनते hi मेघा का गुस्सा और बढ़ gaya...Iss बार गुस्से से तरकारी वाले को देखती hai...Jo झुका हुआ चेहरा को कैप धक् रहा tha...Iske बावजूद मेघा को सामने बैठा शख्स को पहचानने में बिलकुल भी दिक्कत नहीं हुआ.

भिंडी की और नजर पड़ा तो सामने 2 किलो के आस पास के hi भिंडी था.

सुमित....

गुस्से में इतना hi निकला मेघा के मुंह से.

मेघा को गुस्से में जाता देख उसकी दोनों hi सहेली हँसते हुए मेघा के पीछे जाने लगी.

सुमित:- दादा जी ये भिंडी आप रख लीजिये.

दादा जी:- लेकिन पैसे?

सुमित:- जरुरत nahi...Mai तो ऐसे बी वक्त बिता रहा था.

फिर सुमित वह से निकल जाता है मेघा के पीछे.

अरे Megha...Suno तो?

अनीता:- ले आ गया तेरा आशिक़.

मेघा:- बकवास बंद कर और चल चुप चाप.

सहेली 2:- काफी तेज है jeeju...Unse तेज नहीं भाग पाएगी तू.

मेघा वही रुक जाती है और गुस्से से.

मेघा:- Anjali...Tu अपनी बकवास बंद कर.

तब तक सुमित भी वह आ जाता hai...Sumit को देख मेघा भड़क जाती है.

मेघा:- बहुत बार कह चुकी हूँ मेरा पीछा छोड़ do...Sumit तुम सीधी बात नहीं समझते हो क्या?

सुमित:- तुम तो जानती hi ho...Mujhe मुझसे भी भी ज्यादा :लव:.

मेघा गुस्से से बस सुमित को देखती है.

सुमित:- बहुत दिन हो gaye...Tumhara तारीफ़ किये.

गुस्से में तो तुम और भी खूबसूरत लगती हो. :लव:

मेघा:- बस...

तभी सड़क में चल रहे 2 लोग वह पहुँचते है.

क्या हो रहा है?

एक आदमी ने पूछा.

सुमित:- आपसी मामला है.

आदमी 2:- ऐसा लग तो नहीं रहा hai...Ye तुम लोगो को परेशान कर रहा है क्या?

मेघा और मेघा के दोस्तों की तरफ देख उस आदमी ने पूछा.

किसी ने कोई जवाब नहीं दिया.

आदमी 2:- देख ladke...Pyaar से समझा रहा हूँ निकल जा यहाँ से.

सुमित:- अब्ब मेरा दिमाग ख़राब हो रहा hai...Agar तुम दोनों यहाँ से नहीं गए तो पक्का बुरी तरह से पीट जाओगे.

इस बार सुमित की आवाज में भी गुस्सा था.

आदमी 1 सुमित की तरफ अपना हाथ बढ़ा hi रहा था की सुमित उसको पकड़ कर वही गिरा देता hai...Aur एक तेज मुक्का उस आदमी की चेहरे के बिलकुल पास जम्में में मारता hai...Ek जोरदार आवाज के साथ सुमित के जाता से खून बहने लगता hai...Dusra पंच उससे भी तेज उस आदमी के नाक के बिलकुल पास आ कर रुक जाता है.

सुमित फिर उठ कर दूसरे आदमी की तरफ देखता है.

सुमित:- ले जा isko....Warna तुम दोनों का क्या हालत करूँगा मुझे खुद नहीं पता.

वो दोनों आदमी वह से निकल जाते है.

मेघा:- और करो गुंडागर्दी.

इतना कह कर मेघा वह से चली जाती hai...Sumit भी सड़क के पास बैठ जाता है.

क्या तुम सच में मरघा से प्यार करते हो?

आवाज की तरफ देखा तो अनीता थी.

सुमित:- क्या लगता है तुम्हे?

अनीता:- लगता तो यही है की प्यार करते ho...Lekin प्यार का तरीका सही नहीं है.

सुमित:- पहले तो मेघा को ये सब बहुत पसंद tha...Uske पीछे lagna...Usse थोड़ा परेशान करना और बहुत साड़ी तारीफ़ करना. :)

मुस्कुराते हुए सुमित ने kaha...Megha का ख्याल आते hi अपना सारा गुस्सा भूल गया वो.

अनीता:- वक्त के साथ सब कुछ बदल जाता hai...Insaan bhi...Picchle कुछ दिनों से मेघा बहुत बदल गयी है.

सुमित:- अब्ब समझ में आ रहा hai...Aur इस बदलाव का वजह भी मई hi हूँ :वेरिसद:

सब कुछ ठीक कर dunga...Megha का गुस्सा उसकी दिल का ghaaw...Sab kuch...Bas एक मौका तो mile...Wo तो मुझसे hi दूर भाग रही है.

अनीता:- नहीं कर पाओगे.

सुमित:- क्यों?

अनीता:- ऐसी छोटे बातों में छिड़ जाते ho....Megha तो बहुत नाराज hai...Itni जल्फी नहीं मानने wali...Agar तुम ऐसे hi हर बात से छिड़ने लगे तो खुद hi थक हार कर यहाँ से निकल जाओगे.

सुमित:- ये बात तो सही hai...Shayad कभी खुद को हारता हुआ देख नहीं पाटा hun...Koshish कर रहा hun...Iss बार सोचा है मेघा के लिए कुछ bhi...Agar थोड़ा बहुत आत्मा सम्मान को चोट भी लगा तो कोई बात nahi...Maine भी मेघा का बहुत बार दिल दुखाया है.

अनीता:- देखते है.

इतना कह कर अनीता भी वह से निकल जाती है.


अगला दिन


सुबह सुमित तालाब के पास बैठ कर तालाब में पत्थर फेंक रहा था.

मुझे तुमसे कुछ बात करनी है?

ये सुनते hi सुमित एकदम से खुश हो utha..Yahi तो वो चाहता tha...Kuch देर मेघा के साथ बैठ कर बात करने के लिए.

मेघा:- मेरा पीछा छोड़ do....Tang आ चुकी हूँ अब्ब मई.

सुमित:- तुम्हे अब्ब परेशान नहीं करूँगा.

मेघा:- क्यों बात नहीं समझ रहे हो? जब तक तुम यहाँ हो हर वक्त परेशान रहूंगी mai...Tum hi हो मेरी परेशानी.

ये बात सुमित के दिल को चुभ gaya...Lekin इस पर कोई भी प्रतिकिरिया नहीं दिया उसने.

मेघा:- कब जाओगे तुम यहाँ से?

सुमित:- जब तुम साथ चलोगी.

मेघा:- फिर वही baat...Har बार अपने जिद्द पर hi लगे रहते ho....Ye भी नहीं समझना चाहते हो की मेरी क्या इच्छा है.

सुमित:- तुम्हारे इच्छा का सम्मान करता hun...Jab तुम मुझे माफ़ कर डौगी और मेरे साथ चलने को तैयार होगी मेरी पत्नी बन kar...Tab hi यहाँ से जाऊँगा. :लव:

मेघा:- सपना पर इतना विश्वाश भी ठीक नहीं है.

गुस्से में मेघा ने जवाब दिया.

सुमित:- कुछ लोग सपना देखते है उससे हकीकत बनाने के लिए.

मेघा:- और तुम वो कुछ लोग में से नहीं हो?

सुमित:- और ऐसा क्यों?

मेघा:- पापा मेरे लिए रिश्ता देख रहे hai...Kuch hi दिन में मेरी शादी हो jaayegi...Fir तुम मनाते रहना मुझे.

ये बात सुमित के लिए किसी झटका से काम नहीं tha...Usse भी ज्यादा दुःख इस बात का था की मेघा की आवाज में कोई भी दुःख नहीं था इस रिश्ते की बात se...Wo कुछ बोल भी नहीं पाया.

मेघा:- इसी लिए समझा रही hun...Mera पीछा छोड़ दो.

ऐसे hi जिद्द करते रहे तो तुम्हारा ये जिद्द तुम्हे hi चोट पहुचायेगा.

इतना कह कर मेघा वह से निकल gayi...Megha के जाते hi सुमित निचे जमीन पर गिर gaya....Aankhon में एकदम से आंसू भर आया.
 
अपडेट 109

Hello

दूसरी तरफ से आ रहा फ़ोन को उठाते हुए सुमित ने कहा.

कहा हो तुम?

सुमित:- मेघा की गांव में.

जानती थी.

सुमित:- कुछ काम था क्या?

अब्ब तुमसे बात करने के लिए भी काम की जरुरत है.

सुमित:- Nahi...Lekin ऐसा फीलिंग आ रहा है की जिस वजह से तुमने फ़ोन किया है वो शायद ठीक नहीं है.

संजना ने कोई जवाब नहीं दिया.

सुमित भी चुप हो गया.

संजना:- मेघा मान गयी?

सुमित:- नहीं.

निराशा भरी आवाज में सुमित ने जवाब दिया.

संजना:- क्या सच में इतनी नाराज है?

सुमित:- पता nahi...Lekin जैसा सोचा था मामला उससे भी गंभीर लग रहा है.

संजना:- कोशिश करते raha...Maan hi jaayegi...Aakhir कौन लड़की तुम्हे मन कर सकती है.

इस बात पर सुमित को हंसी आता hai...Hansi में भी व्यंग था.

सुमित:- ऐसी बेवकूफी कर बैठता हूँ प्यार के मामला mein...Aaj तक किसी ने प्यारनहि किया जब भीमाई किसी से प्यार करता हूँ.

संजना:- मेघा को जितना भी जानती hun...Bahut प्यार करती है tumse...Aaj नहीं तो कल मान hi जायेगी.

सुमित:- उम्मीद तो यही है. :)

संजना:- वैसे सुमित एक बात कहु.

सुमित:- हाँ.

संजना:- वैसे तो तुम्हारा भला hi चाहती हूँ की मेघा तुम्हे मिल jaaye...Lekin कभी कभी ये ख्वाहिश भी है की काढ़ मेघा तुम्हे मन कर de...Shayad तुम मेरे हो जाओगे.

इतना कह कर संजना चुप हो gayi...Dar भी लग रहा था की सुमित कही गुस्सा ना हो जाए.

सुमित को भी ये बात पसंद नहीं आया लेकिन...

सुमित:- समझ सकता हूँ तुम्हारी baat...Tumhari जगज होता तो शायद मई bhi...Nahi नहीं वही चाहता था मई bhi...Kaas कीर्ति विवेक से अलग हो जाती.

लेकिन वक्त के साथ सब कुछ बदल गया.

अगर सच कहु तो मेघा मेरी नहीं हुई तो भी मई तुम्हारा नहीं बन पाऊंगा.

संजना:- लेकिन क्यों?

सुमित:- जब भी किसी से प्यार ho...Wo प्यार सच्चा होना chahiye...Naa की कोई ऑप्शन.

मैंने जब भी किसी से प्यार किया मेरे पास हमेशा से ऑप्शन thhe...Isse ब्रेकअप हुआ तो चल दूसरा hi sahi...Backup तो hai...Aise hi 4 ब्रेअकूपस हुआ.

जब कीर्ति से भी अलग हो रहा था मेघा अच्छी लगती thi...Ata नहीं kyu...Shayad हमेशा वो मेरे साथ thi...Mere सबसे मुश्किल वक्त में bhi...Vishwas था अगर कीर्ति चली भी गयी तो बहुत दर्द होगा लेकिन शायद उस दर्द में बजी मेघा मेरे साथ hogi...Ek दोस्त के रूप में या फिर दोस्त से भी ऊपर....

उस वक्त तो इससे ज्यादा सोचना नहीं चाहता था लेकिन अंदर hi अंदर दिल शायद सब कुछ जानता था.

उस वक्त भले hi पता नहीं था लेकिन मेघा भी एक बैकअप hi thi...Lekin अब्ब nahi...Abb कोई बैकअप नहीं.

शायद आखिरी बार प्यार हो रहा hai...Megha को मनाने के लिए एक और आखिरी बार प्यार के उस पागलपन से गुजरना चाहता hun...Agar मेघा मान गयी तो जिंदगी भर के लिए सच्चा प्यार और नहीं मानी तो कुछ वक्त बाद घरवालों के लिए किसी और से शादी कर lunga...Pyaar होगा नहीं होगा इस बारे में सोचा नहीं hai...Lekin हर एक जिम्मेदारी जरूर निभाउंगा.

लेकिन ये बैकअप का झूठा दिलाशा कभी नहीं दूंगा.

इतना कह कर सुमित चुप हो gaya...Sanjana भी चुप hi थी.

सुमित:- तुम्हारा हाल समझता hun...Kai बार ऐसा होता है की जो चीज हमसे दूर होने लगता है वो चीज हमे और प्यारा लगने लगता hai...Shayad मेरे लिए भी तुम्हारा ऐसा hi होगा.

अभी मेरा कहना बहुत आसान लग रहा hoga...Lekin ये मैंने भी महसूस किया hai...Jo प्यार नहीं मिल सकता उसके पीछे भागना बेवकूफी hai...Dard hi मिलता है.

मुझे भूल कर आगे बढ़ने की कोशिश karo...Suru में मुश्किल हो सकता hai...Lekin बाद में यही सही लगेगा.

कुछ देर के खामोशी के बाद.

संजना:- कोशिश करुँगी.

सुमित कुछ कहने hi वाला था की....

सनजना:- लेकिन वादा karo...Tum हमेअह मेरे दोस्त बने रहोगे.

सुमित:- वादा रहा.

फिर ऐसे hi बातें करने के बाद सुमित ने फ़ोन रख दिया.

मेघा की वो बात उसके घरवाले रिश्ता देख रहे hai...Raat भर ये बात सुमित को परेशां करता raha...Jab भी नींद लगता सोने के कुछ hi देर बाद दर कर उठ जाता.

मेघा को खोने की बात से hi अब्ब वो कांपने लगा.

रात तो बहुत बुरा kata...Ek पल को भी छैन nahi...Megha को देखने के लिए आँखें तरस गया था.

जब सुबह हुआ तो एक पल भी सुमित से रहा नहीं gaya....Sidhe चल दिया वो मेघा की घर की aur....Raashte में तो थोड़ा खुश भी था की मेघा को देख उसकी आँखों को सुकून मिलेगा.

लेकिन कब तक?

ये सवाल आते hi उसका दिल कांप उठा.

किसी तरह एक बहुत मुश्किल फैसला किया और बिना रुके मेघा की घर पहुँच गया.

आओ Sumit...Bataao रिसर्च में. क्या मदद कर सकता हूँ?

सुमित को देख मेघा की पापा मुस्कुराते हुए बोले.

सुमित:- एक बार घर के सभी सदस्य को यहाँ bulaiye...Kuch जरुरी बात करनी है?

म. डैड:- सब ठीक तो है?

सुमित:- Haan...Bas कुछ बातें करनी है.

कुछ hi देर में सब वह जमा हो गए.

म. डैड:- हाँ बताओ Sumit...Kya बात है?

सुमित:- मेघा ने कहा की आप लोग उसके लिए रिश्ता देख रहे है.

म. माँ:- हाँ सही hi तो hai...Abb शादी नहीं करेगी तो कब karegi...Waise भी पढाई के चक्कर में पहले hi देरी हो चुकी है.

म. डैड:- कहो Sumit..Jo भी कहना है.

सुमित की आँखों में देख कर उन्होंने पूछा.

सुमित:- उस रिश्ते के लिए मई कैसा हूँ?

सुमित की इस बात ने सबको चौंका diya...Sabse ज्यादा तो मेघा ko...Itna डिरेकीलय सुमित ये बात कह देगा उसको यकीं नहीं था.

म. डैड:- मजाक तो नहीं कर रहे हो?

अब्ब वो भी सीरियस हो गए.

सुमित:- Nahi...Aaj नहीं तो कल ये बात करना hi tha...Aur आप सब के अनुमति बिना बात आगे भी तो नहीं बढ़ सकता.

म. डैड:- Megha...Sumit क्या सच बोल रहा है?

मेघा:- मई कुछ नहीं जानती.

हैरानी में मेघा बस इतना hi बोल पायी.

मेघा की ये जवाब सुमित को थोड़ा बुरा जरूर लगा लेकिन इसके लिए वो पहले hi तैयार था.

म. डैड:- (तो सुमित) मेघा का जवाब मिल गया होगा तुम्हे.

सुमित:- अभी मेघा नाराज hai....Lekin मुझे विश्वास है की मई इससे जरूर मन लूंगा.

म. डैड:- Megha...Iski बातों से लगता है की तुम दोनों सिर्फ दोस्त नहीं thhe...Iss बारे में बातें तो बाद में karenge...Lekin क्या ये तुम्हे परेशान तो नहीं कर रहा है?

मेघा:- अभी तक तो नहीं.

म. डैड:- देखो Sumit...Tum मेघा के दोस्त हो इसी लिए तुमसे अच्छे से बात कर रहा हूँ और अगर मेघा के साथ थोड़ा भी गलत हुआ होगा तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा.

इस बार उनकी आवाज में थोड़ा गुस्सा भी था.

सभी हैरानी से कभी सुमित को देख रहे थे तो कभी मेघा ko...Paas में hi नेता सूरज और राजू बस गुस्से से सुमित को देख रहे थे.

म. डैड:- सुमित अभी तुम जा सकते हो.

राजू;- ऐसे नहीं Kaka...Munhe तो पहली बार hi इस पर शक हो गया था.

इतना कह कर राजू सुमित की तरफ बढ़ने लगा.

म. डैड:- राजू...

राजू:- नहीं काका...

म. डैड:- राजूउउ

ये आवाज इतना तेज था की राजू भी डरते हुए रुक गया.

राजू:- पर Kaka...Isse सबक.

म. डैड:- अपनी जगह जा कर baith...Aur मई हूँ यहाँ अपने बेटी के लिए फैसला करने के liye...Tera इस मामले में कोई लेना देना नहीं.

राजू को ये बात अच्छा तो नहीं laga....Lekin कुछ कर भी नहीं सकता था.

सुमित:- अच्छा अंकल चलता hun...Megha को मनाने के बाद आपको भी मना लूंगा.

म. डैड:- अच्छा तो बीटा तुम अब्ब खुली आँखों से सपना देखने लगे.

गुस्सा थोड़ा अभी भी उनकी आवाज में tha...Sumit फिलहाल बात को यही तक रखना चाहता था.

गेट से निकलते वक्त सुमित ने एक नजर मेघा को देखा जो गुस्से से उससे hi घर रही थी.
 
फ्रेंड्स 1 वीक और वेट कर lijiye...Jaanta हु बहुत लेट हो गया hun...Soch रहा था आज तक अपडेट दे dunga...Thoda थोड़ा लिखा भी hai...Lekin खुद hi सटिस्फीएड नहीं hun...Sunday से फाइनल एग्जाम hai...Issi लिए आगे फिलहाल नहीं लिख सकता tha...Koshish यही था की आज तक कम्पलीट करके पोस्ट करने ki...Jo हो नहीं पाया.

इस बार 2 एक्साम्स के बिच 4 वीक का hi गैप tha...Khair ये एग्जाम 1 वीक चलेगा उसके बाद 1 ईयर तक एग्जाम का कोई टेंशन नहीं hai...Exam ख़त्म होते hi पहला लक्ष्य यही होगा की स्टोरी को जल्दी से कम्पलीट कर सकू...20 उपदटेस बाकी है लगभग.

स्टे तुनेड.
 
अपडेट 110

अभी से धंधा सुरु कर दिया आपने जीजू?

सुमित ने गांव के एक कोने में अभी छोटा सा क्लिनिक सेट किया था.

ये जीजू किसे बोल रही है?

अनीता की बात पर मेघा बुरी तरह से भड़क गयी.

अनीता:- जिसके साथ बात कर रही hu...Saamne hi तो है सुमित सफस.

सुमित:- सफस :D...Ye तो खुद मई भी भूल गया tha...Megha तुम्हे अभी भी याद है और सभी को सुनाती भी हो.

सही है.

मेघा:- फ़ालतू चीज पर मई ध्यान नहीं देती.

अनीता:- झूठ बोल रही है ये जीजू.

अनीता की और मेघा गुस्से से देखती है.

मेघा:- पहले तो इससे जीजू कहना बंद kar...Aur ये जीजू बना kab?..Abb सच में इर्रिटेट हो रही हु मई.

अनीता:- जीजू तो ये उसी दिन बन गए है जिस दिन तेरे घर तेरा हाथ मांगने गए थे.

बिलकुल हीरो की अंदाज़ में.

मेघा:- उसके लिए मेरा मंजूरी भी तो chahiye...Jo ना मुमकिन है.

सुमित:- वैसे भी ससुर जी की मंजूरी तो मिल hi चूका है. :डी

मेघा:- और जीयो अपने इस देलुसिओं में.

सुमित:- देलुसिओं :डी. देलुसिओं ऑफ़ लव के साथ तो हमेशा jeeyunga...Bas तुम्हारा साथ मिल जाए.

मेघा:- देलुसिओं ऑफ़ ग्रान्डीओसीटी.

अनीता:- ये क्या बात कर रहे हो तुम dono...Kuch समझ में आये ऐसा बोलो.

मेघा:- देलुसिओं ऑफ़ Grandiosity...Ek ऐसा साइकियाट्रिक बीमारी जिसमें इंसान को लगता है उसके पास स्पेशल पावर hai...Wo भगवन hai...Wo जो चाहेगा वैसा hi होगा.

सुमित तुम्हे तो हमेशा से ऐसा hi लगता है ना?

सुमित:- अगर अब्ब भी मई तुम्हे एक्सप्लनेशन दू तो मई खुद hi अपने आप को बेवकूफ samjhunga...Mujhse भी ज्यादा जानती हो तुम mujhe...Jo तुम कहो वही सही.

अनीता:- (तो मेघा) अब्ब काम की बात भी करेगी या ऐसे hi इश्क़ लड़ाती रहेगी.

मेघा:- सुमित आज तो तुमने सच में हद्द पार कर di...Apna ना सही मेरी इज्जत का तो ख्याल karo...Tum तो पागल हो बेवकूफ ho...Pata नहीं मेरे घर वाले क्या सोच रहे होंगे? मुंह उठा के आ गए घर और कर दिया बकवास की मेरा हाथ मांगने आये हो.

मेघा की गुस्से में कही ये बात सुमित को चुभ gaya...Lekin वो जानता था की ऐसा कुछ जरूर hoga...Wo तैयार था.

सुमित:- जब विश्वाश होता है तो वह पर शक नहीं होता hai...Aur वैसे भी वो तुम्हारे घर वाले hai...Kyu कुछ सोचेंगे तुम्हारे बारे में?

मजाक से बाहर निकल कर अब्ब सीरियस हो कर सुमित ने कहा.

मेघा:- फिर से वही फ़िल्मी बातें? कभी तो ढंग से बात करो.

मेघा का गुस्सा बढ़ता hi जा रहा था.

सुमित:- सॉरी.

मेघा ने कोई जवाब नहीं दिया.

सुमित:- सॉरी तुम्हारे दिल दुखाने के liye...Lekin मैंने जो किया सही किया.

मेघा:- अभी भी तुम्हे ऐसा लगता है?

सुमित:- कभी न कभी तो कहना hi था ये baat...Yaa फिर भाग कर शादी करने की फंतासी है तुम्हारी? :lol1:

मेघा:- फिर से बकवास :माध:

सुमित:- अच्छा सॉरी sorry...Chalo अब्ब मुद्दे पर आता हूँ.

तुम्हारे परिवार मुझे कुछ साल पहले से जानते hai...Thik थक जान पहचान hai...Mai कैसा हूँ ये भी वो जानते hai...Agar वो मुझे अपने दामाद के रूप में स्वीकार करना चाहते है तो जरूर करेंगे वर्ण शायद नहीं.

और tum...Tumse ज्यादा मुझे कौन जानता है? बस नाराजगी दूर करनी hai...To सोचा अगर वो मना कर देते है तो सभी को मनाने के लिए जो पापड बेलना पड़ेगा वो एक साथ बेल लेता हूँ.

अनीता:- वाह jiju...Kya कैलकुलेशन है? :क्लाप्स:

सुमित कुछ जवाब देता उससे पहले सूरज और राजू भी वह आ जाते है.

सूरज:- ये क्या है?

सुमित की छोटा सा क्लिनिक का सेटअप देख कर सूरज ने पूछा.

राजू:- देखने में hi झोला छाप डॉक्टर लग रहा hai...Clinic भी ऐसा hi होगा na...Aur मजे की बात तो ये है की इस झोला चाप के पास कोई अपना इलाज के लिए आ भी नहीं रहा है.

अगर कोई और वक्त होता तो सुमित राजू को उसकी बातो से hi मजा ले लेता लेकिन अभी मूड ख़राब था सुमित का.

सुमित:- क्या बात है Raju...Pura बत्तीसी दिखा रहा है.

राजू:- सच मिर्ची सा लगता है.

सुमित:- अगर ये बत्तीसी hi नहीं रहा to...Naa रहेगा दांत न सुनाई देगा तेरा ये हंसी.

सुमित का गुस्सा देख राजू एक पल के लिए चुप हो गया.

सूरज:- Didi...Ye आप को परेशान कर रहा है?

सुमित:- Suraj...Abhi मूड ठीक नहीं hai...Abhi मई और तेरा दीदी बात कर रहे hai...Tum जाओ यहाँ से.

सूरज:- एक तो मेरे दीदी को परेशां कर रहे हो और ऊपर से...

सुमित:- तेरी दीदी है wo...Tujhse बहुत samajhdaar...Agar परेशान होती तो यही एक पल और नहीं tikti...Abhi के लिए जाओ यहाँ से.

राजू:- इसकी जुबान बहुत चलती hai...Sabak सीखना पड़ेगा.

इतना कह कर राजू सुमित की तरफ बढ़ता hai...Paas पहुँच कर सुमित को एक पंच मारता है.

लेकिन राजू का मुक्का सुमित अपने चेहरे के पास hi रोक लेता hai...Aur उसके हाथ को ऐसे घुमाता है की दुनिया भर की दर्द का चीख राजू के मुंह से निकलता है.

वो जम्में पर अपने हाथ को पकड़ कर चीखने लगता है.

मेघा:- क्या हुआ उसको? कही हाथ फ्रैक्चर तो नहीं कर दिया?

मेघा की आवाज में दर था.

सुमित:- नहीं.

मेघा:- फिर?

राजू को ऐसे तड़पता देख लग रहा था की कुछ ज्यादा हो चोट आया है उसको.

सुमित:- पहले इसको उठाओ.

सूरज राजू को उठाता है.

मेघा:- क्या किया इसके saath...Abb तो बताओ?

सुमित:- राइट एआरएम इस इन अब्दुक्तिओं पोजीशन विथ एक्सटर्नल रोटेशन ऑफ़ शोल्डर जॉइंट.

मेघा:- मतलब?

सुमित:- इतना भी नहीं pata...Ye तो ऑर्थोपेडिक्स का बेसिक्स है. क्या डॉक्टर बनोगी रे तुम? :डी

अचानक से सुमित का मूड मजाकिया हो गया.

मेघा:- इसकी हालत करब हो रही है और तुम्हे मजाक सूझ रहा है.

सुमित:- एंटीरियर शोल्डर जॉइंट डिस्लोकेशन.

मेघा का चिंता और बढ़ गया.

सुमित:- ओर्थपेडीक emergency...Agar कुछ घंटा और इलाज नहीं हुआ तो इसका जॉइंट किसी काम का nahi...Bekaar हो jaayega...Agar किस्मत और भी खराब रहा तो इसके हाथ का hi कोई काम नहीं रहेगा.

सुमित ने तो हँसते हुए कहा लेकिन वह मौजूद सभी के दर के मारे हालत खराब था.

मेघा:- सर्जरी करना padega...Sumit कुछ karo...Majaak का टाइम नहीं है ये.

सुमित:- लेकिन मुझे क्या मिलेगा?

मेघा को प्यार से देखते हुए सुमित ने कहा.

मेघा:- अब्ब ब्लैकमेलिंग पर उतर आये?

सुमित:- नहीं nahi...Itna भी कमजोर नहीं है मेरा प्यार.

जो तुम कहो वो बिना शर्त के कर दूंगा.

मेघा:- अब्ब डायलाग बाज़ी बंद karo...Jaldi से ले चलो hospital..Surgery जरुरी है.

सुमित:- सर्जरी की जरुरत नहीं पड़ेगा.

मेघा:- जॉइंट डिस्लोकेटेड है और तुम कह रहे हो सर्जरी की जरुरत नहीं?

इस बार मेघा की आवाज में गुस्सा था.

सुमित:- सर्जन तुम हो या मैं?

मेघा:- Tum..Lekin तुम जनरल सर्जन हो ओर्थपेडीक सर्जन नहीं.

सुमित:- लेकिन सर्जरी का प्रिन्सिपले बहुत हद्द तक मैच करता है?

अब्ब मेघा सुमित के सामने हाथ जोड़ लेती है व्यंग के रूप में.

मेघा:- अब्ब तुम्हारा हो गया तो इलाज पर ध्यान doge...Pehle hi टाइम लोस्स हो चूका है.

सुमित:- मेघा मेघा Megha...Bahut बड़ी डॉक्टर हो tum...Internal मेडिसिन ki...Apni फील्ड ki...Lekin ओर्थपेडीक का सिंपल सा बेसिक भूल gayi...Ye एक्सपेक्टेशन नहीं tha..Khair होता hai...Aage से ध्यान देना.

मेघा:- मतलब?

सुमित:- मॉडिफाइड कोचर Maneuver..Kuch याद आया?

मेघा एकदम से चौंक गयी तब तक सुमित राजू का हाथ फिर से पकड़ लेता है.

सुमित:- Traction..Itna कह कर सुमित राजू का हाथ जोर से बाहर खिंच लेता hai...Raju का दर्द सेहन शक्ति के बाहर जा रहा था.

एक्सटर्नल Rotation...Raju और जोर से chillaya...Adduction...Abb चीखने की भी ताकत नहीं था राजू mein...Internal Rotation...Abb राजू निचे जमीन में गिर गया.

फिर सुमित मेघा की तरफ देखता है.

सुमित:- लो हो गया काम.

राजू हिम्मत कर के अपने उस हाथ को चलाने की कोशिश करता hai...Usse भी लगता है शायद ठीक हो गया hai...Haath अपनी जगह पर वापस आ गया hai...Bas दर्द के मारे हाथ चला नहीं पा रहा था.

सुमित फिर प्रिस्क्रिप्शन के पेपर में कुछ लिख कर राजू को देता है.

सुमित:- झोला चाप डॉक्टर का ये दवाई जरूर काम करेगा कुछ hi मिनट में.

सूरज तू ले कर जा इससे और फार्मेसी से दवाई खरीद कर खिला देना.

सूरज राजू को उठाता है.

सुमित:- और सुन बे chirkut...Tera सोच क्या है और क्यों मुझसे पन्गा ले रहा है सब समझता hun...Isse बस वार्निंग समझ.

और एक baat...Mai हमेशा से अपने लाइफ का हीरो hun...Abhi रोमांटिक हीरो बना हूँ यो रोमांस करने दे अपने अंदाज़ mein...Action हीरो बन गया तो तेरा खैर नहीं.

सूरज राजू को ले जाता है.

अनीता:- वाह jiju...Kya डायलाग hai...Filmi हीरो वाला.

सुमित:- वो तो एक्टिंग करते है साली sahiba...Mai नेचुरल hun...Apne और मेघा की लाइफ का hero...Kyu मेघा? याद आया kuch...Wo डायरी? तुम्हारे लाइफ का हीरो? :डी

अब्ब तो ये हीरो विलन से भी लड़ गया? क्लाइमेक्स आ गया है स्टोरी ka...Kab समझोगी इस हीरो के प्यार को?

मेघा:- तुम बिलकुल hi पागल हो?

इतना कह कर मेघा वह से निकल gayi...Saath hi अनीता भी.

मेघकी लास्ट की ये लाइन सुमित को समझ में नहीं aaya...Megha गुस्सा है या खुश है?

सुमित अभी भी वही अटका था मेघा मान जायेगी या नाराज hi rahegi...Lekin आज की घटना के बाद उसका कॉन्फिडेंस जरूर बढ़ गया.
 
अपडेट 111

अगली सुबह जब सुमित फ्रेश हो कर क्लिनिक में बैठा hi था की कुछ दूर से एक शख्स आता हुआ dikha...Thoda जाना पहचाना था.

सुमित की नजर उस पर hi टिक gaya...Jab वो थोड़ा और पास आया तो उस शख्स का चेहरा और साफ़ होने laga...Usse पहचानते hi थोड़ा हैरानी भी हुआ.

सुमित:- (तो हिमसेल्फ) ये यहाँ क्यों आया?

शख्स:- कैसे हो भैया आप?

आज उस शख्स की आवाज में अपने लिए इज्जत देख सुमित की हैरानी बढ़ने लगा.

सुमित:- ठीक हु Aarav...Tu bata...Yaha कैसे?

कही कोई दादा जी के टाइम से कोई प्रॉपर्टी का पेपर सिग्न करने तो नहीं आया? :हिंतहिंट:

आरव:- क्या आपके नजर में अब्ब मई इतना नालायक हो गया हु?

सुमित:- सच कहु तो तेरे बारे में कोई आईडिया नहीं hai...Kabhi तुझसे ढंग से बात हुआ भी नहीं है और ना hi तेरे बारे में किसी से कुछ ख़ास सुना है.

तुझे मुझसे कभी मतलब रहा भी नहीं और मुझे भी कोई लगाव है तुझसे.

सुमित की आवाज में कोई भाव नहीं था.

आरव:- क्या इससे बदल नहीं सकते है हम?

सुमित:- क्या?

अब्ब तो सुमित पूरी तरह से हैरान रह गया.

सुमित:- अगर कुछ काम हो तो सीधे सीधे बता? ऐसे घुमा फिर कर नहीं.

आरव:- सीधा hi सुन्ना चाहते है तो suniye...Mujhe आप की जरुरत है भैया?

ये कहने के बाद आरव की आँखें थोड़ा भींग gaya...Sumit को अजीब तो लग रहा था लेकिन इस बार वो कुछ नहीं बोलै.

आरव:- बहुत देर से hi सही लेकिन अब्ब मुझे समझ में आया किस चीज की कमी खाल रहा है मुझे.

सुमित बस सुन रहा था.

आरव:- भैया एक बात बताइये, आपको क्या लगता है, मेरा सोच आपको ले कर क्या हो सकता है?

सुमित:- पहले भी कह चूका hun...Koi आईडिया नहीं है तेरे बारे mein...Naa कभी ढंग से बात चित ना कभी ढंग से mulaakaat...Agar कभी मिलते भी थे और जब भी तू बदतमीज़ी करता था वैसा hi जवाब दे देता tha...Bas इससे ज्यादा कुछ नहीं.

पिछले कुछ सालों में तो तुझसे भूल hi गया tha...Aaj इतने दिनों बाद तुझे देखा तो थोड़ा हैरानी है की यहाँ क्या कर रहा है?

आरव:- आपसे नफरत था या नहीं ये तो पता nahi...Lekin आपसे एक छिड़ जरूर था जो बढ़ता hi चला gaya...Aur इतना बढ़ गया की आपको भैया के रूप में ना देख कर एक कॉम्पिटिटर के रूप में देखने लगा.

सुमित:- और आज एकदम से बदलाव आ गया?

आरव:- Nahi..Ekdum से nahi...Dhire धीरे हो सही लेकिन आ hi gaya...Shayad बहुत देर से.

अभी तक जितनी बातें आरव का सुमित ने सुना था उससे समझ में आया की आरव के मन में बोझ है.

सुमित:- चल बैठ.

इतना कह कर सुमित ने एक चेयर आरव की तरफ badhaya...Aarav बैठ गया.

सुमित:- चल अब बता.

आरव:- पैदा होने के बाद जब से होश संभाला है तब से खुद को काम बोलने वाला और शांत hi पाया hai...Aap को देखता था तो आप हमेशा से ओवरएक्टिव thhe...Mujhse ठीक ulta...Issi लिए शायद हमारे बिच कभी अच्छे से बना नहीं.

धीरे धीरे जब बड़ा होने laga..Papa की परवरिश तो सही hi था लेकिन एक चीज गलत या फिर सही नहीं था वो था कम्पटीशन की feeling...Papa को हमेशा एक चीज का अफसोश था पहले वो हमेशा किसी न किसी चीज में किसी से पीछे रह जाते थे.

मुझे हमेशा सबसे आगे देखना चाहते thhe...Har चीज में हर किसी se...Jo वो नहीं कर पाए वो मुझ में देखना चाहते थे.

और जब रिश्तेदार आपकी तारीफ़ करते थे और कभी मुझे अनदेखा कर देते थे तो बहुत बुरा लगता tha...Man hi मन एक कम्पटीशन सुरु हो चूका tha...Aapse अच्छा दिखाने का.

कम्पटीशन की सुरुवात पढाई से hua...Aapse और बाकी बच्चों से आगे निकलना चाहता tha...Man लगा कर पढता था लेकिन आप काम पढ़ कर भी मुझसे अच्छा परफॉर्म करते thhe...Ye हमेशा चुभता रहा.

जब भी मई आपका मजाक उड़ाने की कोशिश करता सबके सामने आप उल्टा मेरा hi मजाक उड़ा देते थे ... इससे और भी ज्यादा ढिढने लगा आपसे.

मेडिकल में जब स्कालरशिप नहीं मिला तो डोनेशन में hi पढ़ लिया सोचा बाद में आपसे अच्छा कर के दिखाऊंगा.

जब हम दोनों मब्ब्स कर रहे थे और आपका परफॉरमेंस डाउन हुआ तो बहुत ख़ुशी मिला ... साथ hi एक झटका भी ... आपको तो कोई फर्क hi नहीं padta...Fir मेरा इतना म्हणत का क्या?

धीरे धीरे आपके ऊपर जो लीड बन चूका था उससे बढ़ाने के लिए मस करने में उसे चला गया.

बहुत खुश tha...Socha आपसे जीत gaya...Aapse तो जीत गया था लेकिन खुद से?

अब्ब खुद से हारने लगा tha...Sabhi से कम्पटीशन hi तो कर रहा tha..Lekin खुद से? खुद का hi अस्तित्वा भूल गया tha...Mai कौन हूँ, क्या कर रहा हूँ और आगे क्या करूँगा कुछ समझ में नहीं आ रहा tha...Frustration इतना था की कभी कभी सवाल करता था खुद से, जी भी क्यों रहा हु?

विदेश में एक खालीपन, ना किसी के साथ ना sahara...Mera पढ़ाई तो चौपट हो hi गया, रिलेशनशिप में प्रॉब्लम आया और यहाँ तक की anti-depressant भी लेने लगा?

जब परेशानी हद्द से ज्यादा बढ़ गया तो एक दिन ऐसे hi इंटरनेट में स्पिरिचालित्य ने ध्यान आकर्षण kiya..For समझ में आया मेरे अंदर कितना लोभ, नफरत, अहंकार और ईर्ष्या भरा हुआ hai...Dhire धीरे hi सही उससे अपने अंदर से हटाता gaya...Sukhi रहने के लिए मेरे जो बड़े बड़े सपने थे जिनका कोई मतलब नाजी उन्हें त्याग diya...Jitna था उसी में खुश rehta...Fir योग और मैडिटेशन की आदत से वो मानसिक शान्ति भी मिल गया.

जब शांत मन से सोचा तब पता चला आपका कोई गलती hi नहीं tha...Balki कई ऐसे मौका भी आया था जब आपने मुझे समझाया भी tha...Lekin मई अपने घमंड में आ कर सब कुछ अनसुना कर दिया.

मन में कुछ बोझ tha...Unn में से एक आपसे माफ़ी माँगना भी है.

और जब वापस आया तो सबसे पहले आपके घर gaya...Aur जब पता चला की आप यहाँ इस गांव में है तो बिना समय नष्ट किये यहाँ आ गया.

इतना कह कर आरव चुप हो गया.

सुमित:- पहले अपने घर जाना चाहिए था तुझे.

आरव:- नहीं बोझ इतना था मन में की शान्ति नहीं मिल रहा था.

सुमित:- तेरे लिए कभी शिकायत नहीं tha...Haan तुझे उतना पसंद तो नहीं करता था लेकिन तुझे सामने hi चुप कर देता tha...Waise भी किसी बात को अपने मन में दबा कर कभी नहीं रखता हु मई.

आरव:- आपने मुझे माफ़ कर दिया न?

सुमित:- तुझे अपना गलती दिखा वही बहुत hai...Waise भी सिर्फ ये बात गलत लगता था की तू बड़ो के साथ भी बद्तमीज़ hai...Khair अब्ब ये बात समझ गया है तो माफ़ न करने की सवाल hi नहीं आता.

कुछ देर की शान्ति के बाद,

आरव:- वैसे आप यहाँ क्या कर रहे है इस गांव में?

सुमित:- है एक मिशन.

आरव:- बताइये ना?

सुमित:- अभी किस चीज की जल्दबाज़ी hai...Ek पूरी की पूरी कहानी hai...Aaram से सुनाऊंगा.

आरव:- ये क्लिनिक आपने यहाँ क्यों खोला?

सुमित:- टाइम पास के लिए.

आरव:- मतलब?

सुमित:- कुछ हफ्ता और यहाँ रहना hai...Jisse मिलने आया हूँ वो hi दिन भर गायब रहती है तो बैठे बैठे बोर हो जाता हूँ.

सोचा क्यों न क्लिनिक खोल lu...Log आएंगे तो वक्त किसी तरह काट जाएगा.

आरव:- आप सर्जन है, और सर्जरी के इंस्ट्रूमेंट्स ना के बराबर है?

सुमित:- यहाँ डॉक्टर बन कर थोड़ी न आया hun...Wo तो बस किसी तरह वक्त गुजारने के liye...History और एग्जामिनेशन अच्छे से कर सकता hun...Dawaai का नाम प्रेस्क्रिबे कर hi सकता हूँ और अगर लगा की सीरियस बीमारी है तो रेफेर.

आरव:- वैसे सिर्फ सर्जिकल केस या और भी?

सुमित:- सब kuch...MBBS अच्छे से पढ़ा था तो बाकी डिपार्टमेंट का भी अच्छा ख़ासा नॉलेज है.

आरव:- सर्जरी से याद aaya...Ek बात पूछना था आपसे.

सुमित:- पूछ.

आरव:- मैंने आपको बताया था की फ़्रस्ट्रेशन की वजह से मस की पढ़ाई अच्छे से नहीं हो पाया.

थ्योरी तो अच्छा hai...Lekin सर्जरी सिर्फ ठीक ठाक hi कर पाटा hun...Wo आपसे सीखना tha...Seher भर आपका तारीफ़ सूना hai...Aapke सर्जिकल स्किल्स के बारे mein...Jab भी आप सर्जरी करेंगे मुझे असिस्ट करने के लिए बुला lijiye...Kuch केसेस प्रैक्टिस करने के बाद अच्छे से सिख जाऊँगा.

सुमित:- चल ठीक hai...Lekin वक्त lagega...Abhi अलग hi मूड में हूँ.

मुस्कुराते हुए सुमित ने कहा.

आरव:- मतलब?

सुमित:- Bataunga...Abhi तो पूरी कहानी बाकी है.

आरव:- मूड से याद आया.

आरव वोडका की बोतल बैग से निकालता है.

आरव:- अब्ब मना मत kijiye...Mai जानता हूँ आप पीते है.

सुमित:- लेकिन अब्ब छोड़ दिया है.

आरव:- आज तो पीना hi पड़ेगा.

सुमित:- नहीं bhai...Nafrat है मुझे इस चीज se...Pehle भी tha...Bas दुःख को भुलाने के लिए पीटा tha...Nasha हो गया iska...Iss वजह से छोड़ नहीं paaya...Aur जब से छोड़ा है नफरत और बढ़ गया है.

तू क्या कोई भी बोलेगा तो भी इस चीज को हाथ नहीं लगाऊंगा.

आरव:- ठीक hai...Company तो dijiye...Aapke लिए कोक है.

सुमित:- चल लगा.

फिर आरव दो शीशा की गिलास निकालता hai...Ek में वोडका और दूसरे में कोक.

तभी वह मेघा और अनीता पहुँचती है.

चियर्स करने के बाद सुमित ने एक घूंट पीया hi था की...

मेघा:- आदत दाल lo...Fir यादों में हमेशा इसी का सहारा लेना पड़ेगा.

ये सुनते hi सुमित मेघा की तरफ मुस्कुराते हुए देखता है और एक घूँट में पूरा गिलास खाली कर देता है.

मेघा की आँखों में नफरत था.

सुमित:- इतनी ख़ास हो क्या तुम?

सुमित ने आँखें नचाते हुए kaha...Jaise वो दिखाना चाहता था की नशे में है वो.

मेघा गुस्से में मुंह दूसरी और घुमा लेती है.

आरव:- ये कौन?

आरव को आँख दिखा कर...

सुमित:- इज्जत se...Bhabhi है तेरी. :लव:

आरव:- मेघा भाभी.

ये सुन कर सुमित और मेघा दोनों हैरान रह गए.

सुमित:- तू कैसे जानता है.

आरव:- इन्हे देखा तो नहीं tha...Naam जरूर पता tha...Aapke बारे में थोड़ा पता करता था कॉलेज टाइम mein...Uss वक्त सुना था की आप रिलेशनशिप में है मेघा के साथ.

सुमित:- अबे खुद मुझे नहीं पता था की मई रिलेशनशिप में hun...Mere अलावा सभी को पता था.

शायद मुझे भी पता चल जाना चाहिए था.

मेघा की तरफ देख हँसते हुए सुमित ने कहा.

सुमित:- और Megha...Ye है Aarav...Tumhara ओने एंड ओनली देवर.

मेघा:- मुझे लगा तुम्हारी तरह hi एक और बेवड़ा होगा.

इस बात का कोई जवाब सुमित और आरव नहीं दे पाया.

सुमित:- मेघा वैसे तुम इतनी subah...Mujhe देखे बिना छैन नहीं मिला क्या?

मेघा:- इतना फ़ालतू समय नहीं है मेरे paas...Kuch जरुरी बात tha...Issi लिए आयी हूँ.

सुमित:- अच्छा अब्ब बोल भी दो वो 5 जादुई शब्द. :डी

मेघा बस गुस्से से सुमित को देखती है.
 
अपडेट 112

सुमित:- Aarav...Ye गिलास पकड़.

इतना कह कर सुमित गिलास आरव की और फेंकता hai...Aarav पकड़ लेता है.

सुमित:- बहुत सही Aarav...Agar गिरा देता तो 100 रुपैया का चुना लग जाता.

मेघा को समझ में नहीं आ रहा था की आखिर सुमित कर क्या रहा है.

आरव:- क्या भैया आप भी? अब्ब इतना कमाते हो फिर भी 100 की फ़िक्र?

सुमित:- अपने म्हणत का एक एक रुपैया का महत्वा hai...Abb थोड़ी न बाप के कमाई का ऐश कर सकता हूँ. :डी

एक नजर सुमित ने मेघा की और dekha...Kuch खुराफात दिमाग में आया.

सुमित:- वैसे भी शादी हो जाएगा तो बीवी और बच्चे छैन से जीने कहा देंगे.

बच्चे बाप का पैसे हवा में उड़ाएंगे जैसे मई उड़ाता था और Biwi...Ghar चलाने के लिए पूरा का पूरा जेब खाली कर degi...Fir भी उसका मन नहीं bharega...Behtar है अभी से एक एक रुपैया बचा कर रखो.

ये लाइन सुमित ने सिर्फ मेघा की और देख कर bola...Megha बस सुमित को घूरती है.

तब तक सुमित बड़े hi चालाकी से कोक की बोतल से स्टीकर फाड़ कर फेंक देता है और बोतल को हवा में उछाल कर दूसरे से पकड़ लेता है.

फिर आरव और अपना गिलास को अच्छे से साफ़ करके दोनों में कोक दाल कर मेघा और अनीता की तरफ बढ़ा देता है.

अनीता गिलास पकड़ लेती है लेकिन मेघा नहीं.

अनीता:- ये क्या है जीजू?

सुमित:- इतनी देर से तुम दोनों यहाँ हो लेकिन ठंडा या गरम भी पूछ नहीं sakta...Kyuki गरम के लिए चाय और कॉफ़ी बनाने की सामान नहीं hai...Issi लिए ठंडा hi दे रहा हूँ.

मेघा:- और ठंडा में दुसरो को वोडका पिलाया जाता है?

मेघा सामने आरव के पास के ब्लैक वोडका के बोतल को घूरती हुई बोली.

सुमित:- अरे कुछ नहीं hota...Bas जातक जाओ. :डी

मेघा:- अपने जैसा hi बेवड़ा समझ रखा है क्या?

इस बार मेघा की आवाज में गुस्सा tha...Maahaul एकदम से शांत हो gaya...Fir सुमित अनीता को इशारा करता है पीने के लिए.

अनीता:- नहीं jiju...Mai नहीं पीती हूँ.

सुमित:- मुझ पर भरोसा है?

अनीता:- मेघा से भी ज्यादा. :lol1:

मेघा:- बहुत हंसी आ रही है तुझे :माध:

सुमित:- फिर क्या hai...Bas जीजू पर भरोषा रखो और जातक जाओ.

अनीता एक बूँद पीती hai...Usse स्वाद जाना पहचाना लगता hai...Ek घूंट पीने के बाद पूरी गिलास जातक जाती है.

मेघा को अजीब लगता hai...Jis लड़की ने आज तक दारु को हाथ नहीं लगाया उसने पूरी गिलास ख़त्म कर दी ...कन्फूसिओं में खुद से hi बोलती है.

मेघा:- 42% कंसंट्रेशन :हम्म:

ये सुनते hi सुमित हसने लगता hai...Megha सुमित की हाथ से गिलास चीन कर एक घूंट पीती है.

फिर जैसे hi मेघा सुमित को देखती hai...Sumit के साथ साथ सभी हसने लगते है.

सुमित:- माफ़ कीजिये madam...Aapke साथ छोटा से बिना कैमरा वाला प्रैंक हुआ hai...Aap चाहे तो कैमरा की जगह मुझे देख सकती है. :डी

इस बात पर अनीता और आरव हनते है.

मेघा:- चल अनीता यहाँ से.

सुमित:- लेकिन तुम कुछ बताने आयी thi...Shayad जरुरी tha...Warna फ़ालतू की बात तुम बताने इतनी दूर क्यों आती?

इस बार सुमित की आवाज में व्यंग था.

मेघा फिर सुमित के पास आ जाती है.

मेघा:- जरुरी बात hi hai...Lekin तुम बोलने डोज तो ना!!

सुमित:- Bolo...Kaan खड़ा कर के सुन्न रहा हु.

मेघा:- मजाक बंद करो.

इस बार मेघा का गुस्सा देख..

सुमित:- अच्छा बताओ.

मेघा:- उस दिन तुमने राजू के साथ जो किया था उस वजह से राजू और सूरज गुस्से में hai..Tumhe सबक सिखाने की सोच रहे है.

सुमित:- Accha...Mai तो दर hi गया. :lol1:

सुमित इस बार सीरियस होने की एक्टिंग नहीं कर paaya...Aur आखिर में जोर जोर से हसने लगा.

मेघा:- हर बात मजाक नहीं hota...Samjha रही hu...Samajh जाओ.

सुमित:- Hmm...aur बताओ.

मेघा:- ये कोई कहानी है जो सुनाती रहूंगी?

बस सावधान रहो.

सुमित:- सतर्क भी रहूँगा. :डी

फिर सुमित को हंसी आ गया.

मेघा:- ये क्या मजाक लग रहा है तुम्हे? :माध:

सुमित:- Nahi...Tum मुझसे रूठने की दवा करती हो और मेरी फ़िक्र के लिए यहाँ तक आ gayi...Bas इसी ख़ुशी में.

इस बार सुमित की आवाज में सुकून था.

मेघा:- ज्यादा खुश मत ho...Baad में तुम्हारा हाल देख कर अफसोश ना ho...Issi लिए पहले hi बताने आ गयी.

इतना कह कर मेघा जाने लगी.

सुमित:- पिछली बार आया था तो शोल्डर डिस्लोकेशन कर के भेजा tha...Iss बार हिप डिस्लोकेशन कर के भेजूंगा.

उसका इलाज तो सर्जरी hi hai...Aise hi खेल खेल में ठीक नहीं hoga...Fir सोचता रहेगा बैठना कैसे है और उठना कैसे है.

मेघा पीछे मुद कर कहती है.

मेघा:- इस बार वो अकेला नहीं hai...Mera भाई सूरज भी उसके साथ होगा.

सुमित:- शायद कुछ भूल रही हो?

मेघा:- क्या?

सुमित:- याद है हमारे पहला गांव bhraman...Ussi वक्त तुम्हारे भाई के बारे में कुछ कहा था.

इस बार मेघा को याद करने में कोई दिक्कत नहीं हुआ.

सुमित:- और कैसा भाई है ये तुम्हारा सूरज? दीदी की ख़ुशी के लिए जीजू से मार भी नहीं खा सकता?

सुमित ने हँसते हुए कहा लेकिन मेघा उतना hi गुस्सा हो गयी.

मेघा:- खबरदार जो मेरे भाई को हाथ भी लगाया तो.

सुमित:- पता है तुमसे बुरा कोई नहीं होगा. :डी

इस बात से मेघा का गुस्सा और भड़क gaya...Wo गुस्से में सीधे वह से निकल गयी.

अनीता:- इतना क्यों तंग करते हो usse...Dekha न आपने गुस्सा हो गयी वो.

सुमित:- गुस्से से हो सही कुछ तो बोलती hai...Warna कान तरस गए है उसकी आवाज सुनने के liye...Aankhe भी थक जाते है उसके एक झलक के लिए.

3 दिन हो गए उससे mile...Milne भी तो नहीं aati...Intejaar में पूरा दिन निकल जाता hai...Bas यही क्लिनिक का थोड़ा सहारा है वक्त काटने के लिए.

अब्ब ऐसे में एक यही तो रायता है थोड़ा परेशान कर दो गुस्सा dilaao...Jo भी दिल में है सब पता चल जाएगा.

अनीता:- वाह jiju...Bahut चलाख हो आप.

सुमित:- अभी तुमने चलाखी देखा hi कब है :डी

अनीता:- देखने के लिए उत्सुकः हूँ.

इतना कह कर अनीता भी वह से निकल जाती है.

आरव:- वाह bhaiya...Aap तो कमाल ho...Thoda हमे भी सीखा दीजिये लड़की पटाने की कला.

सुमित:- जो बाँदा अपनी रूठी हुई प्रेमिका को मनाने के लिए इस काफी धुप में दिमाग खुजाये जा रहा है :hmm:...Abb उससे सीखेगा तू?

आरव:- आपको अभी भी लगता है की भाभी आपसे प्यार नहीं करती?

सुमित:- इतना बेवकूफ भी नहीं हु की मेघा की दिल की बात अभी भी समझ न पाउ.

आरव:- फिर?

सुमित:- क्या फिर?

आरव:- मुझे भी सिखाइये.

सुमित:- फुर्सत mein...Abhi सो जा.

आरव:- अब्ब आप भाव खा रहे है.

सुमित:- सो जा abhi...Warna रात को मेरा दिमाग खायेगा तू.

आरव:- मतलब?

सुमित:- शाम को मेला है गांव mein...Jo रात तक chalega...Mai तो अपने मेघा के साथ बिजी हो jaaunga...Tu बोर हो कर मेरा दिमाग खायेगा वापस लौटने के लिए की तुझे नींद आ रहा है.

आरव:- और आप सूरे कैसे है की भाभी भी आएँगी?

सुमित:- इंटेलिजेंस रिपोर्ट है.

आरव फिर हँसते हुए जाता है आराम करने के लिए.

शाम

मेला का तैयारी सुरु हुआ hi था की सुमित की ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं tha...Megha जो दिख गया था उससे.

मेघा के पास जैसे hi वो पहुंचा मेघा वह से निकल जाती है.

जैसे hi रोड के दूसरी और खड़ा सूरज ये देखता है उसका गुस्सा नियंत्रण के बाहर चला जाता है.

गुस्से में वो सुमित की तरफ बढ़ hi रहा था की एक आउट ऑफ़ कण्ट्रोल ओवरस्पीड जीप सूरज को टक्कर मार देता hai...Aawaj इतना तेज था की सभी का ध्यान आकर्षण उस तरफ हो जाता है.

करीब 20 मीटर दूर जा कर गिरा Suraj...Girte hi खून से लेथ पथ थोड़ी देर में hi होश खो baitha...Jeep भी मौका का फायदा उठा कर भाग गया.

मेघा दौड़ कर सूरज के पास पहुँच जाती hai...Doctor होने की वजह से सूरज को देख उसके हालात का अंदाजा हो गया tha...Aur आखिर में हार मान कर सूरज के पास hi बैठ कर रोने लगती है...2 मिनट में hi मेघा की माँ और पापा भी आ जाते है जो यही मेला में thhe...Sabhi का हाल वैसा hi था.

शायद सुमित का bhi...Wo भी बस एक जगह बैठ देख रहा tha...Usne अपने करियर में बहुत लोगो को मरते देखा tha...Lekin ऐसे अपने आँखों के सामने कभी नहीं.
 
अपडेट 113

सुमित तेजी से उठ कर सूरज के पास पहुँचता है और थोड़ा एग्जामिनेशन करने के बाद...

सुमित:- प्राइमरी सर्वे कर लिया hai...Airway और ब्रीथिंग ठीक hi लग रहा hai...Bleeding को रोकना जरुरी hai...Sir पे चोट लगा नहीं hai...Bach सकता है.

अचानक hi आत्मविश्वाश से सुमित ने कहा.

मेघा:- लेकिन...

सुमित:- लेकिन वेकिन कुछ nahi...Abhi एक्सप्लनेशन देने का भी टाइम नहीं है.

जल्दी से किसी गाडी तैयार करो.

यहाँ हॉस्पिटल भी तो होना चाहिए.

बिच में से एक आदमी बोलै.

20 कम दूर है.

दूसरे आदमी ने जवाब दिया.

लेकिन वो तो हड्डी और एक्सीडेंट के लिए है.

पहला आदमी ने कहा.

सुमित:- काम हो jaayega...Koi गाडी की व्यवस्था कीजिये.

पहला आदमी:- पगला गए हो kya...Keh रहा हूँ उस हॉस्पिटल में हड्डी के डॉक्टर है और इसका (सूरज) खून पेट और छाती से बह रहा है.

सुमित:- मई हूँ.

आदमी:- जहर फुख करने या फिर प्राथना?

सुमित:- सर्जरी.

इस बार सुमित को भी गुस्सा आ गया लेकिन वो फिलहाल गाडी की जुगाड़ में लगा tha...Abb तक मेघा के पापा उठ कर गाडी की व्यवस्था के लिए निकल पड़े थे.

आदमी:- अब्ब तो कोई भी ऐरा गैर सर्जरी करने की बात कर रहा hai...Dekho बीटा ऐसे इमोशनल होने की जरुरत नहीं hai...Thande दिमाग से काम लो और वास्तविकता को स्वीकार कर लो.

एक तो पहले से तनाब का माहौल ऊपर से ये बकवास baatein...Abb सुमित से रहा नहीं गया.

सुमित:- अब्ब सर्जन सर्जरी नहीं करेगा तो क्या आप जैसे बड़बोला करेगा?

आदमी:- Surgeon...Dekhne से तो नहीं लगता.

सुमित:- दिखने में तो आप भी गधा लगते hai...Lekin है क्या?

सुमित की इस बात पर सभी हसने लगते है.

सुमित:- फ्री का कॉमेडी शो चल रहा hai...Abb अगर किसी के पास थोड़ा भी वक्त हो सही काम के लिए तो राष्ट बताने का कष्ट करेंगे?

हर बीत रहा पल सुमित की बेचैनी बढ़ा रहा था.

एक आदमी आ कर सुमित को राष्ट बताता hai...Tab तक मेघा की पापा भी एक गाडी ले कर आ चुके थे.

म. डैड:- ये रहा बीटा गाडी.

गाडी में सूरज को बिठाने के बाद..

सुमित:- कोई तेजी से गाडी चला सकता है?

आरव:- Mai...Accha एक्सपीरियंस hai...Aapse hi कम्पटीशन tha...Aap बाइक तेज चलाते थे तो मई कार...

आरव कुछ बोलता उससे पहले hi...

सुमित:- ये बातें बाद mein...Tu तेज चला सकता है यही बड़ी बात hai...Megha तुम भी गाडी में baitho...Bas याद रखना प्रेशर से किसी भी आर्टरी और वीन का ब्लीडिंग रोका जा सकता hai...Koshish करो बाहर के ब्लड वेसल्स के ज्यादा से ज्यादा ब्लीडिंग रोकने की.

मेघा सर हां में हिलाती है.

सुमित:- (तो आरव) हाँ याद आया गांव के थोड़ा hi बाहर एक जगह है जहा से तू कोई भी फ्लूइड रिंगेर्स लैटते या फिर नार्मल सेलाइन ले कर सूरज को चड्ढा dena...Circulation मेन्टेन करना इम्पोर्टेन्ट है.

(तो मेघा) ब्लड ग्रुप क्या है सूरज का.

मेघा:- ा पॉजिटिव.

सुमित:- तुम लोग जल्दी pahucho...Mai उस ट्रामा हॉस्पिटल में जा कर बात करता हूँ और सभी प्रिपरेशन जल्द hi सुरु करता हूँ जो भी जरुरी है.

इतना कह कर थोड़ी दूर पार्क अपनी बाइक की और जाता hai...Kuch hi सेकंड में सुमित की बाइक हवा से बात करने लगता है.

मेघा की हालत ख़राब tha...Aur वैसा hi उसके माँ और पापा का भी.

अभी भी मेघा के दिल और दिमाग में बहुत सी बातें चल रहा tha...Dar पर भी कोई काबू नहीं tha...Bas एक चमत्कार की hi उम्मीद था.

सुमित को सर्जिकल गाउन में देख उम्मीद तो बढ़ा लेकिन सूरज की हालत याद आते hi दर फिर से हावी कर दिया.

वो सुमित के करीब जा hi रही थी की सुमित ने इशारा से रोक दिया.

सुमित:- पूरी तरह से स्टेराइल हूँ अभी दूर raho...Infection का रिस्क नहीं ले sakta...Suraj के लिए ठीक नहीं होगा.

सूरज के ओट रूम पहुँच जाने के बाद.

सुमित:- भरोषा rakho...Ek एक पल अमूल्य है ... बेकार जाने नहीं दूंगा.

फिर सुमित ओट रूम में चला देता hai...Assist करने के लिए आरव और वही के ओर्थपेडीक सर्जन भी थे.

बाहर का माहौल नाजुक tha...Aur उसको बढ़ाने के काम धीमी गति से बढ़ रहा वक्त कर रहा था.

मेघा एक कोने में कड़ी thi...Uske पापा पास आते है.

मेघा:- Papa...Suraj को कुछ होगा तो...

वो आगे कुछ बोलता उससे पहले...

म. डैड:- भरोषा है mujhe...Sumit सब कुछ ठीक कर dega...Abb तो इतना मुलाकात हो चूका है की वो क्या क्या कर सकता है और कितनी काबिलियत है ये आसानी से बता सकता हूँ.

एक्सीडेंट के टाइम से hi देखा है उसका जोश सूरज को बचने के liye...Vishwash है की वो कुछ भी कर सकता है अपने लक्ष्य तक पहुँचने के लिए राष्ट भले hi कितना भी मुश्किल हो.

मेघा:- सुमित की काबिलियत पर शक नहीं hai...Lekin सूरज का हाल देख कर बहुत दर लग रहा hai...Khoon बहुत बह चूका hai...Aur शायद डॉक्टर नहीं होती तो भरोषा करके सब कुछ सुमित पर छोड़ देती लेकिन डॉक्टर होने की वजह से पता है की कितना नाजुक केस है.

म. माँ:- वो कितना अच्छा डॉक्टर बन सकता है इस बात का अंदाजा उसी वक्त हो गया था जब पहले hi मुलाक़ात में तेरी दादी को दम (अस्थमा) की दवाई कैसे लेना है वो सीखा diya...Jab की तुम लोग का पढाई सुरु hi हुआ था.

बस ऐसे hi बातों से मनोबल को बढ़ाने की कोशिश कर रहे थे sab...Bich बिच में दर भी हावी होता था तो कभी उम्मीद की किरण.

अब्ब सर्जरी को 5 घंटे से भी ज्यादा हो गया tha...Sabhi के मन बिचलित होने के साथ धैर्य भी जवाब देने लगा था.

तभी ओट रूम का गेट खुल gaya...Aur सबसे पहले बाहर nikla...Sumit.

सुमित को देखते hi सब उसके पास पहुँच गए.

सभी को देख सुमित के होंठ में एक मुस्कान aaya...Muskaan ऐसा था की किसी को समझ में नहीं आया की ये ख़ुशी का है या दुःख ka...Surgery सफल होने की ख़ुशी की मुस्कान या इतनी कोशिश के बावजूद असफल होने की दुःख का मुस्कान.

सुमित आँखें बंद कर लेता है...2 बूँद आंसू आँखों से निचे गिर पड़ता है.

मेघा:- क्या हुआ सुमित?

दर भरी आवाज में मेघा ने पूछा.

सुमित कुछ बोलने hi वाला था लेकिन अचानक से वो वह से निकल गया और थोड़ी दूर बेंच में जा कर हाथ से आँखों को बंद कर वही बैठ गया.

इससे सभी दर gaye...Megha सुमित के पास जाने hi वाली थी की गेट से ओर्थपेडीक सर्जन भी आ गए.

मेघा:- Doctor...Kya हुआ? अब्ब कैसा है मेरा भाई?

ो. सर्जन:- तो आप है उनके रिलेटिव?

मेघा:- Haan...Abb प्लीज बताइये कैसा है सूरज?

मेघा से और रहा नहीं जा रहा था.

ो. सर्जन:- ये एक होपलेस केस tha...Pehle hi पता चल गया था की कुछ नहीं होने वाला इस केस mein...Khoon hi इतना बह चूका tha...Upar से मल्टीप्ल इंटरनल इंजरीज bhi...Grade 2 लिवर एंड स्प्लीन injury...Aur साथ hi बहुत जगह से ब्लड वेसल रप्चर और ब्लीडिंग जिसको इतने काम टाइम में रिपेयर करने के लिए एक एक्सपेरिएंस्ड ट्रामा सर्जन की जरुरत पड़ता जो की यहाँ नहीं था.

अब्ब शायद सबको उनका जवाब मिल गया tha...Kuch hi पल में आँखों से आंसू की धरा बहने लगा और गले से रोने की आवाज निकलता उससे पहले hi

ो. सर्जन:- आपको वह बैठे सर्जन (सुमित) को शुकिर्या कहना चाहिए जिसने एक होपलेस केस में भी जान फंक दिया और मुझे गलत साबित कर diya...Uska वो Surgery...Gyaan और कला का वो drishya...Itne साल के अनुभव में बहुत hi काम देखा है.

पहले तो मई इस सर्जरी के बिलकुल खिलाफ tha...Time वास्ते लग रहा tha...Lekin उसकी baatein...Pata नहीं कैसे लेकिन अपनी बात मना hi liya...Baat करने सेले कर हर एक चीज बिलकुल perfect...Knowledge और Skill...Bataane के लिए शब्द काम पद जायेंगे.

जैसे hi पेट को चिर कर अंदर बढ़ा हर एक आर्टरी और उसका ब्रांच का नॉलेज था उससे. यहाँ तक की आर्टरी के आखिर तक के ब्रांच को लगते (सतोप्पिंग ब्लीडिंग बी सर्जिकल प्रोसीजर) किया. हमारा ऑपरेशन सेंटर इतना भी एडवांस्ड नहीं hai...Electrocautery नहीं hai...Jisse आसानी से ब्लीडिंग स्टॉप किया जा sake...Bas लीगतिओं hi एक ऑप्शन tha...Jismein उससे महारथ हासिल tha...Itne काम टाइम में इतने आर्टरीज और वीन को लगते कर दिया देख कर hi हैरानी हो रहा था.

उस सर्जन की आवाज में अभी भी हैरानी tha...Kabhi वो सुमित को देखते तो कभी मेघा और उसके परिवार की और देख सुमित की भर भर के तारीफ़ करते.

म. डैड:- आपसे भी अच्छा सर्जरी किया सुमित ने?

ो. सर्जन:- मेरा तो मैं फोकस ओर्थपेडीक सर्जरी में hai...Ye उसका फील्ड था मई तो बस असिस्ट कर रहा tha...Lekin विश्वाश कीजिये इसके फील्ड में आज जो इसने कर दिखाया है बहुत काम सर्जन कर पाते hai...Wo भी इतने काम एक्सपीरियंस में.

अब्ब मेघा तेजी से सुमित की और बढ़ती है.

सुमित:- Paani...Jaldi से पानी ले कर aao....Thanda paani...Fridge का.

दर्द भरी आवाज में सुमित ने कहा.

मेघा पानी ला कर देती hai...Sumit वो पानी पीने की जगह तेज गति से चल कर ओट के पास के वाशरूम में जाता है.

2 मिनट बाद वापस निकलता hai...Chehra और बाल पूरी तरह से भींगा हुआ था.

सुमित:- माफ़ kijiye...Tabhi बात करने की हालत में नहीं tha...Thak चूका hun...Mentally...Ek तो कल रात भर सोया नहीं था और आज ये accident...Suraj को बचने के लिए खुद की थकान से भी एक युद्ध लड़ रहा tha...Jo भोलेनाथ की कृपा से सब कुछ ठीक रहा.

ो. सर्जन:- कितना भी बड़ा सर्जन क्यों ना ho...Har सर्जरी के पहले ऊपरवाला हमेशा याद आते hai...Especially इमरजेंसी सर्जरी में. :)

म. डैड:- पता नहीं beta...Kya जाहु कुछ समझ में नहीं आ रहा hai...Bas तुम्हारा ये एहसान....

सुमित:- एहसान की बातें फिर कभी करेंगे uncle...Abhi हालात ठीक नहीं hai...Aankh और सर में बहुत दर्द हो रहा hai...Neend की बहुत शख्त जरुरत है.

मेघा:- कल रात क्यों नहीं सोये?

मेघा की आवाज में बहुत बदलाव आया.

सुमित:- तुम सोने डौगी तो न?

किसी तरह मुस्कुरा कर सुमित ने कहा.

सुमित:- तुमने जो बम फोड़ा था की तुम्हारा शादी होने वाली hai...Neend कहा से आएगी :वेरिसद:

फिर सुमित वह से निकलने लगा.

ो. सर्जन:- कुछ कांटेक्ट तो देते जाओ?

सुमित:- कल आऊंगा sir...Abhi कुछ देर और रहूँगा तो सच में पागल हो jaaunga...Fir आपको मेरे लिए साइकियाट्रिक वार्ड अलग से खोलना पड़ेगा. :डी

इस बात पर सभी मुस्कुराने लगे.

सब खुश thhe...Jo उम्मीद मेघा और उसके माँ, पापा और घर बैठी दादी छोड़ चुके थे वो चमत्कार आखिर हो hi gaya...Sumit के लिए सभी की इज्जत और बढ़ gaya...Abb बस उन्हें सूरज से मिलना tha...Jiske लिए कुछ देर का इंतजार और बाकी था.
 
अपडेट 114

अभी कितना वक्त सूरज को हॉस्पिटल में रखना पड़ेगा?

अगला दिन सुबह सुमित हॉस्पिटल में आते hi मेघा की पापा ने पूछा.

सुमित:- शॉक.

एक नजर सुमित ने सभी को देखा और फिर कहना सुरु किया.

सुमित:- शॉक मतलब शरीर के अंग (ऑर्गन) में खून बहुत काम जाना होता hai...Pehle एक्सीडेंट के टाइम सबसे खतरनाक चीज था ह्य्पोवोलेमिक shock...Matlab खून ज्यादा बह गया tha...Khoon की कमी से ऑर्गन फेलियर की वजह से जान जाने की बहुत ज्यादा चांस tha...Sahi वक्त में ब्लीडिंग को रोक कर वो खतरा तो ताल गया.

अब्ब एक और खतरा hai...Septic shock...Matlab इन्फेक्शन की वजह से ब्लड वेसल्स में इंजरी होता है और उसकी वजह से खून हर एक अंग में नहीं पहुँच पाटा है और उसी के साथ इन्फेक्शन हर एक अंग में फैलने के कारण multi-organ फेलियर हो सकता है.

सूरज का स्किन पहले hi कंटामिनटेड था जहा से खून बह रहा था.

सुमित का इतना hi कहना था की...

म. माँ:- खतरा अभी भी बाकी है.

एकदम से सभी के चेहरे में दर के भाव आ गए.

सुमित:- हाँ भी और नहीं भी.

एक लम्बा सांस ले कर सुमित ने समझाना सुरु किया.

सुमित:- सर्जरी के वक्त hi कंटामिनटेड part को साफ़ कर दिया tha...Aur एंटीबायोटिक्स भी चल रहा hai...Abhi तक स्टेबल है Suraj...Lekin हॉस्पिटल में अभी रखना padega...Iske अलावा कुछ पोस्ट ऑपरेटिव केयर भी बाकी है.

कुछ दिन मॉनिटरिंग में रखने के बाद डिस्चार्ज हो जाएगा.

इस बात से सभी को सुकून मिला.

सुमित:- कल रात की तूफ़ान के बाद भी सब कुछ ठीक है मतलब खतरा ताल चूका है.

कल अपने प्रैक्टिस से भी काफी ज्यादा म्हणत करना पड़ा था वक्त को ध्यान में रख कर बाकी तो बस सही वक्त में सही कदम चलने का hai...Kuch नहीं होगा सूरज को.

आत्मविश्वाश से भरी आवाज के साथ सुमित ने मेघा की माँ और पापा को देख कर कहा.

इसके बाद ओर्थपेडीक सर्जन से कुछ बातें करने के बाद.

आरव:- यकीं नहीं होता है bhaiya...Mai तो हार मान hi चूका था.

सुमित:- मेरे अलावा सभी हार मान चुके थे क्या? :डी

सभी की तरफ देख मुस्कुराते हुए सुमित ने पूछा.

सुमित:- खैर ये बात भी काफी देर से hi सीखा की कभी भी हार नहीं मानना chahiye...Acche दिन और वक्त हमेशा हमारा इंतजार कर रहा होता है.

ये बात सुमित ने मेघा को देख कर kaha...Megha को समझ में अनहि आ रहा था की कैसे रियेक्ट करे.

सुमित:- अगर यहाँ पर हार मान गया तो जिंदगी से hi हार जाऊँगा. :डी

अब्ब मेघा सुमित से नजर हटा लेती है.

सुमित:- मेघा.

मेघा:- हम्म.

सुमित:- एक जरुरी बात hai...Chalo मेरे साथ.

सभी के आगे मेघा को कुछ समझ में नहीं आ रहा tha...Wo अपने पापा की और देखती है.

म. डैड:- जाओ.

.

.

.

.

मेघा:- हाँ कहो.

सुमित:- याद है जब कीर्ति से मई अलग हो गया था तब तुमने कहा था "जो होता है अच्छे के लिए होता है." उस वक्त तो बहुत गुस्सा आया था ये सुन kar...Lekin अब्ब सही लग रहा है.

मेघा:- ये कौनसी नयी बात है? बिना बात को सोचे समझे रियेक्ट करना तो तुम्हारा आदत है?

मेघा की इस बात पर सुमित कुछ देर तो चुप रहा फिर मुस्कुराने लगा.

मेघा:- वैसे क्या अच्छा हो गया तुम्हारे लिए?

सुमित:- मेरे लिए नहीं तुम्हारे लिए?

मेघा:- क्या?

सुमित:- याद है जब रेजीडेंसी के आखिरी महीने में तुम्हे इग्नोर करता tha...Wo तुम्हारे लिए अच्छा hi था.

मेघा:- हाँ अब्ब अपना गलती को छुपाने के लिए कोई भी नयी कहानी सुना दो.

सुमित:- देखा इस बार तुमने बिना सोचे समझे गुस्से में रियेक्ट कर दिया.

फिर सुमित हसने लगता है जिससे मेघा और छिड़ जाती है.

मेघा:- काम की बात karo...Bakwas नहीं.

सुमित:- उस टाइम hi मैंने वैस्कुलर सर्जरी (ब्लड वेसल्स) सीखा tha...Bahut hi टफ सर्जरी लगता है personally...Uss वक्त थोड़ा बहुत सिख तो गया था.

बस उसी एक्सपीरियंस पर विश्वाश करके सूरज का सर्जरी कर रहा tha...Jo अच्छे से हो गया.

मेघा:- इस में मेरा क्या अच्छा हुआ? तुम्हारा सर्जरी सफल रहा, तुम्हारा आत्मविश्वाश बढ़ा hai...Accha तो तुम्हारे लिए हुआ?

सुमित:- भाई तुम्हारा है, देखा था तुम्हारा दर्द जो मुझसे सहा नहीं जा रहा tha...Mera तो साला hai...Jisse मुझे कोई खास लगाव नहीं है.

मेघा इस बात पर सुमित को गुस्से से घूरती है.

सुमित:- सच यही hai...Baad में अच्छा लग जाए अलग बात hai...Aur वैसे भी आत्मविश्वाश बढ़ाने के लिए कोई भी सर्जन इतना इमरजेंसी सर्जरी और ऐसे उन्स्तब्ले कंडीशन वाला केस तो अपने हाथ में बिलकुल नहीं लेता है.

मेघा:- मुझे लगा तुम यहाँ बुला कर हमदर्दी बटोर कर मुझे मनाने की कोशिश करोगे? लेकिन तुम तो मुझे और भी गुस्सा दिला रहे हो?

सुमित:- ग़लतफहमी है tumhara...Jo मुझे किसी को मनाने के लिए ऐसी नीच हरकत करना pade...Agar मुझे लग गया की सामने वाला मानने को तैयार नहीं तो मई खुद उससे दूर चला jaaunga...Kirti की वक्त के गलती नहीं दोहराऊंगा.

मेघा:- तो तुम्हे उम्मीद है की मई मान जाउंगी?

सुमित:- है इसी लिए लगा हूँ.

मेघा:- अगर ये उम्मीद टूट गया तो?

सुमित:- चला जाऊँगा.

दर्द भरी आवाज में hi सही लेकिन मेघा की आँखों में देख कर कहा सुमित ने.

मेघा:- और वो दिल टूटने की दर्द?

सुमित:- वो तो सेहत hi आ रहा हूँ पिछले 10 साल से. :D...Aur झेल लूंगा कुछ saal...Lekin फैसला कर लिया है की जिंदगी में हमेशा खुश rahunga...Chahe ख़ुशी की नयी वजह क्यों ना ढूंढ़ना पड़े.

अभी मेरे लिए सबसे बड़ी ख़ुशी तुम ho...Abhi मेरे दिल का जो हाल है वो भले hi शब्दों से दिखा न पाउ लेकिन पिछले कुछ वक्त से तुम्हारे लिए जो प्यार है मेरे दिल में वो बहुत hi ख़ास hai...Tumhara साथ मिल गया तो सिर्फ ख़ुशी नहीं जिंदगी के हर एक पल नयी उचाई साथ साथ चढ़ने की मजा hi कुछ और होगा.

हाँ कभी कभी छोटे मोठे झगडे भी होंगे जैसे अभी हो रहा है उससे भी संभाल lenge...Do पल का साथ थोड़ी न है जिंदगी भर ka...Budhaape में बहके hi शरीर कमजोर हो कर चल न सके लेकिन दिल उतना मजबूत जरूर होगा की तब तक भी एक दूसरे को समझ सके और आखिरी सांस तक एक दूसरे का साथ बना रहे.

सुमित की ये बात मेघा की दिल को छू gaya...Abb आवाज में नरमी के साथ.

मेघा:- सच bataao...Ye सर्जरी तुमने क्या सिर्फ मेरे लिए किया था?

सुमित:- सिर्फ तुम्हारे लिए तो nahi...Haan लेकिन तुम्हारे वजह से अपना सारा कुछ झोंक दिया tha...Kisi भी तरह से सूरज को बचाना tha...Tumhare liye...Tumhare ख़ुशी के लिए.

वैसे मैंने इमरजेंसी सर्जरी कभी अस ा लीड नहीं kiya...Residency में भी अस ा असिस्टेंस hi किया tha...Kismat अच्छा है की आज तक सभी में पेशेंट की जान बचा है.

आगे का सोचा नहीं tha...Iss बार जान बचा पाया हूँ तो इसी मोटिवेशन से मुश्किल से मुश्किल कंडीशन में भी पेशेंट की जान बचाने की पूरी कोशिश रहेगा.

कुछ देर के चुप्पी के बाद.

सुमित:- सूरज से ज्यादा बातें नहीं हुआ होगा tumhara...Chalo चलते है.

मेघा:- एक मिनट.

सुमित बिना कुछ कहे बस वही खड़ा रहता है.

मेघा:- कुछ कहना है tumse...Lekin कैसे समझ में नहीं आ रहा है?

सुमित:- अब्ब बता भी दो सच और अपनी दिल की baat...Kab तक ऐसे hi झूट बोल कर अपने पीछे घुमाती रहोगी? :डी

मेघा:- वो बात नहीं है.

सुमित:- फिर.

कुछ देर चुप रहने के बाद मेघा कहना सुरु करती है.

मेघा:- तुम बहुत अच्छे हो...

सुमित:- कुछ नया bolo...Ye तो मई जानता हूँ. :डी

मेघा:- अगली बार बिच में कुछ बोलै तो देख लेना.

फिर मेघा बोलना जारी रखती है.

मेघा:- जानती हूँ रम मुझसे बहुत प्यार करते ho...Aur मुझे खुश रखने के लिए कुछ भी करोगे.

लेकिन मुझे लगता है मई फिर भी तुम्हारे साथ खुश नहीं रह पाउंगी.

सुमित:- क्यों?

हैरानी में एकदम से सुमित की मुंह से निकला.

मेघा:- बहुत डिफरेंसेस नजर आ रहे है हमारे bich...Jab से तुम मुझसे अलग होने की कोशिश कर रहे थे उसी वक्त से बहुत कुछ मुझे ऐसा महसूस होने लगा की हमारे बिच शायद सब कुछ ठीक नहीं rahega...Galti किसी की भी नहीं hai...Fir भी.

इसी लिए तुम्हे बिना बताये hi वपव चली aayi...Mujhe महसूस हो गया की हमें अलग हो जाना hi ठीक रहेगा.

सुमित भी अब्ब सोच में पद गया.

सुमित:- इसका सलूशन क्या है फिर?

मेघा:- हमारा अलग हो जाना?

सुमित:- कुछ और ? ये कैसा सलूशन है?

इस बार सुमित की आवाज में भी थोड़ा गुस्सा था.

मेघा:- वो तुम जानो.

कुछ देर सोचने के बाद सीमित ने कहा.

सुमित:- एक तरीका तो hai...Lekin तुम नहीं मानोगी.

मेघा:- क्या?

सुमित:- हम अलग थे इस वजह से ये विश्वाश भी टूटा होगा.

कुछ समय और साथ बिताना hoga...Ek बार फिरसे एक दूसरे को जानना समझना hoga...Shayad काम बन जाए.

मेघा:- इतने साल से साथ hi तो थे? तब कुछ नहीं हुआ तो अब्ब कुछ वक्त में क्या हो जाएगा?

सुमित:- उस वक्त मई वो सुमित नहीं tha...Tab तुमसे प्यार नहीं करता था और जब करता था तो तुम्हारे पास आना नहीं चाहता था.

लेकिन अब्ब तो तुमसे प्यार करता हूँ तुम्हे एहसास कराना चाहता हूँ की तुम मेरे लिए क्या हो? मई तुम्हारे लिए क्या क्या कर सकता हूँ?

सुमित की ये बात सुनने और कुछ देर सोचने के बाद.

मेघा:- मुझे नहीं लगता है ये काम करेगा?

सुमित:- अगर सोचने भर से सब कुछ वैसा hi हो जाता तो हर कोई सिर्फ सोचता कोई कुछ नहीं करता.

सुमित की आवाज में अब्ब बेचैनी बी साफ़ दिख रहा था.

सुमित:- कर के देखने में क्या hi जाता hai...Agar बात नहीं बना तो वैसे भी चला hi जाऊँगा.

वादा करता हूँ अगर मुझे लगा की सच में हमारे बच डिफरेंस है और हम साथ नहीं रह सकते क्यों की तुम्हे परेशानी hai...Yaa फिर जब भी तुम कहो मई हमेशा के लिए तुमसे दूर चल जाऊँगा.

कुछ देर सोचने के बाद.

मेघा:- ठीक hai...Lekin कितनी देर?

सुमित:- दिन में 6 घंटा.

मेघा:- पागल हो क्या?

सुमित:- मैंने अपना टाइम bataya...Abb तुम बताओ.

मेघा:- 2 घंटा.

सुमित:- चलो ना तुम्हारा न मेरा...4 घंटा.

मेघा कुछ नहीं बोली.

सुमित:- बार्गेनिंग का फायदा प्यार में भी होता है. :डी

मिलते है आज शाम से 4 घंटा की डेली डेट के लिए.

मेघा:- लेकिन कब तक?

सुमित:- ये बातें बाद mein...Abhi तो ये पल को जियो.

और एक baat...Tumhe मेरे साथ वैसे hi बेहवे करना होगा जैसे पहले करती thi..Aise खड़ूस बन कर nahi...Jo बिलकुल hi डिमोटिवेट कर देता है.

मेघा:- अच्छा ठीक है. :डी

फिर दोनों हॉस्पिटल की और जाते है.

सुमित आज बहुत खुश tha...Usse जो चाहिए था वो मिल gaya...Megha का vakt...Warna मेघा के इंतजार में तो कभी कभी पूरा दिन निकल जाता tha...Aur मेघा की एक झलक भी नहीं मिल पाटा था.

अब्ब सुमित का विश्वाश भी बढ़ गया था की वो मेघा को जरूर मनाएगा.
 
अपडेट 115

ये क्या कर रहे हो!! लोग आ रहे hai...Utro निचे!!

गांव से थोड़ा बाहर एक आम (मानगो) के पेड़ पर चढ़ रहा सुमित को देख मेघा बोली.

लेकिन सुमित बात को नजर अंदाज़ करके और ऊपर चढ़ने laga...Kuch पका हुआ आम और कुछ कच्चा मेघा की और फेकने लगा.

मेघा का दर बढ़ रहा था जैसे जैसे लोग उनकी तरफ आ रहे thhe...Thodi hi देर में कुछ लोग चिल्लाने लगे.

चोर चोर.

और वो तेजी से पेड़ की तरफ भागने लगे.

मेघा:- अब्ब तो उतरो.

इस बार मेघा की आवाज में दर के साथ गुस्सा भी tha...Jawaab में सुमित सिर्फ मुस्कुराता hai...Jisse मेघा और भी गुस्सा हो जाती है.

जब वो लोग बहुत पास आ गए तो सुमित ने पेड़ से छलांग लगा कर मेघा के हाथ पकड़ liya...Aur तेजी से भागने लगा.

जब कुछ देर भागने के बाद भी उन् लोगो ने पीछा नहीं छोड़ा और मेघा भी थक गयी तो सुमित ने मेघा को अपने बाहो में उठा liya...Thodi देर भागने के बाद अब्ब रफ़्तार में कमी भी आने लगा लेकिन पीछे से आ आया आवाज ने सुमित के पाँव को एकदम से रोक दिया.

गरीब को hi लूटो और भाग जाओ.

सुमित ने मेघा को निचे utaara...Aur पीछे मुदा.

2 आदमी thhe...Ek सुमित के hi उम्र का था और एक बुजुर्ग थे.

सुमित:- अरे chacha...Itne बड़ा खेत है आपका और हर एक पेड़ में इतने आम है की गिनते गिनते गिनती hi भूल जाऊँगा. 4 आम लेने से गरीब हो जाएंगे :डी

चाचा:- तुमने 4 आम churaya...Tumhare जैसे सौ चोर आ गए तो खेत hi साफ़ हो jaayega...Thodi देर बाहर क्या गए थे आ गए चोरी करने.

सुमित:- चोर :डी

मुस्कुराते हुए सुमित ने बस इतना hi जवाब दिया.

चाचा:- तो फिर क्या कहना चाहिए तुम्हारे इस काम को?

सुमित ने इस बार कोई जवाब नहीं दिया.

चाचा:- अब्ब चुप क्यों हो? देखने में तो अच्छे खासे घर के लगते ho...Pehnaawa (ड्रेसिंग) से भी यही लगता hai...Aur फिर ये chori...Sharm नाम की कोई चीज है hi नहीं.

चाचा की इस बात पर मेघा भी सुमित को गुस्से से देखती hai...Sumit के कारण hi उससे भी शर्मिंदा होना पद रहा था.

सुमित सिर्फ मुस्कुरा hi रहा था.

चाचा:- और अभी भी बेशर्म की तरह हसे जा रहे हो. :माध:

उनका गुस्सा बढ़ता hi जा रहा था.

सुमित:- Chacha...Phone है आपके पास?

चाचा:- Haan...Kyu किसी से धमकी दिलवाना है?

सुमित:- Nahi...Ek सरप्राइज है.

चाचा:- कैसा सरप्राइज?

सुमित:- अपने किसी आदमी को फ़ोन कीजिये? और जिस पेड़ से आम तोडा था पूछिए उसके निचे क्या है?

सुमित जैसा कहता है वो वैसा hi करते है.

फ़ोन करने के बाद हैरानी से चाचा सुमित को देखते hai...Wo सच में सरप्राइज हो गए.

चाचा:- कुछ समझ में नहीं आया.

सुमित:- क्या मिला वह?

चाचा:- कुछ चॉकलेट्स है 200 रस के.

सुमित:- अब्ब तो गांव का नजारा कभी कभी hi मिलता hai...Bachpan के कुछ पल hi गांव में रहने को मिला है.

उन् पल को आज भी याद करता hun...Bahut से शरारत करता tha...Shayad hi कोई पडोसी होगा जिसे परेशान ना किया ho...Unn में से एक शरारत ये भी था की गर्मी के मौसम में स्कूल से आने के बाद खेत से आम चोरी कर के भाग jaana...Aur तब तक भागना जब तक खेत के मालिक पलाद ना ले या फिर वो थक न जाए.

बहुत दिन बाद गांव आया हूँ तो ये काम करने का एकदम से मन kiya...Lekin चोरी कर के भाग जाने का क्या मजा? इसी लिए पहले तो आप का इंतजार किया और आपके पास आने के बाद hi भागा और तब तक जब तक आप थक नहीं गए.

ये सुनते hi चाचा कुछ बोलने वाले थे लेकिन सुमित ने कहना जारी रखा.

सुमित:- पहले तो बच्चा tha...Bacchon वाला मस्ती करता tha...Abb थोड़ा समझदारी wala...Aam चुराने से आप लोग का नुकशान समझता hun...Issi लिए सरप्राइज के तौर पर चॉकलेट्स रख diya...Surprise hi रखना चाहता था उस चॉकलेट को लेकिन बताना पड़ा.

आपके घर में बच्चे तो honge...Aajkal कोले बच्चे चॉकलेट से खुश होते है जैसे हम शरारत करके खुश होते थे.

बस बचपन वाला वो एहसास दुबारा चाहता था जो ये करके फिर से मिल गया.

ये कहने के बाद चाचा भी मुस्कुराने lage...Megha भी हैरानी से सुमित को देखने लगी.

सुमित:- अगर कुछ ज्यादा hi गरीब है आप या नुकशान हो रहा है तो वापस ले लीजिये.

सुमित फिर मेघा के हाथ से आम उठा कर वापस देने लगा.

चाचा:- रख लो.

सुमित:- आपका तो नुकशान हो रहा था. :डी

चाचा:- 3-4 आम से क्या नुकशान hoga...Nukshan तब होता है जब चोर पुरे के पुरे गाछ को खाली कर देते है.

वैसे भी कुछ नया सुनने को mila...Accha laga...Rakh लो उपहार समझ कर.

सुमित:- शुक्रिया.

चाचा:- तुम इस गांव के नहीं लगते हो? कहा से हो?

सुमित:- सही kaha...Darasal मई अपने ससुराल आया हूँ.

ये सुन कर पीछे बैठी मेघा सुमित को जोर से पिंच कर देती है जिसे चाचा देख नहीं पाते hai...Sumit का दर्द बस आँखों में hi रह gaya...Aawaj में आने नहीं दिया.

चाचा:- बहुत अच्छा जोड़ी hai...Lekin तुम्हे (मेघा) भी कभी नहीं देखा है.

फिर मेघा अपने पापा का नाम बताती है.

चाचा:- बस नाम पता है और थोड़ा बहुत जानता hun...Issi लिए तुम्हे नहीं पहचान पाया.

सुमित:- गांव में भी एक दूसरे को लोग काम पहचानते hai...Hairaani की बात है. :एक्स:

चाचा:- बीटा दुनिया hi तेजी से बदल रहा hai...Aise में तो लोगो को अपने से फुर्सत मिलता कहा hai...Unn में से मई भी एक हूँ.

और वैसे तुम काम क्या करते हो?

सुमित:- आपको परेशान जरूर किया hai...Lekin मेरा काम लोगो की परेशानी दूर करना है.

चाचा:- मतलब?

सुमित:- कुछ दिन के लिए गांव में hun...Agli बार की मुलाक़ात में बताऊंगा.

चाचा:- अभी बताने में क्या परेशानी है?

सुमित:- कुछ nahi...Aapki जल्दबाज़ी की वजह से वो चॉकलेट वाली सरप्राइज सरप्राइज नहीं raha...Abb इस बात को hi सरप्राइज समझ लीजिये.

चाचा:- चलो ये भी सही hai...Lekin अगली बार मुलाकात होगी या नहीं ये भी तो पता नहीं.

सुमित:- जरूर होगा.

चाचा:- इतनी विश्वाश से कह रहे हो तो होना hi चाहिए.

फिर बाकी की बातें कर सुमित और मेघा वह से आगे बढ़ जाते है.

मेघा:- तुम्हे कुछ आये या नहीं आये लोगो को अपने बात से आकर्षित जरूर कर लेते ho...College के गुस्से वाला प्रोफेस्सोर्स से ले कर गांव के अनजान aadmi...Harkisi को अपने शब्द से घेर लेते हो.

सुमित:- ये टैलेंट तो बचपन से है.

फिर कुछ सोच कर.

सुमित:- सिर्फ अपने प्रेमिका को छोड़ kar...Chahe वो तुम हो या कीर्ति. :(

मेघा:- अभी भी कीर्ति?

सुमित:- जलन :डी

मेघा:- मई क्यों jalungi...Naa तुम्हे कीर्ति मिली और ना hi मई मिलूंगी :बीए:

सुमित:- मेरा फूटा kismat...Kasam से अगर कीर्ति आस पास भी होती तो तुम्हे इतना जलाता की तुम बर्षो तक याद रखती उस बात को. :डी

मेघा गुस्से से सुमित को घूरती है.

सुमित:- उस चाचा ने भले hi चोरी के लिए माफ़ कर दिया ho...Lekin तुम संभल के रहना.

मेघा:- क्या मतलब?

सुमित:- अगला चोरी तुम्हारे hi कीमती चीज का होने वाला hai...Ho सकता है फिर तुम मुख्य माफ़ ना कर पाओ..

मेघा:- क्या?

सुमित:- तुम्हारा dil...Kab चुरा लूंगा तुम्हे खुद पता नहीं चलेगा..

मेघा:- बहुत अच्छा जोके था. :माध:

सुमित:- तो फिर हसो.

मेघा अब्ब कुछ ज्यादा hi इर्रिटेट हो gayi...Chehra से तो यही लग रहा था.

कुछ दूर और आगे चलने के बाद.

मेघा:- और बचपन की यादें. दोहराने की मौन सा नया भूत चढ़ा है तुम्हे?

सुमित:- नया नया चढ़ा hai...Lekin काफी लम्बे समय तक चढ़ा रहेगा.

व्यस्त रहना, पैसे कमाना hi जिंदगी नहीं hai...Samay निकाल कर अपनों के साथ वक्त bitaana...Har छोटी बड़ी इच्छा पूरा karna...Chahe वो कितना hi बचपना और पागलपन lage...Har एक चीज पूरा करना अपना भी और अपनों का bhi...Ek बार की जिंदगी है हसी ख़ुशी जीना चाहिए.

क्या कहती हो?

मेघा:- अभी तो कह रहे ho...Lekin बाद में बदल रही दुनिया के रफ़्तार के बराबरी करने के लिए एक पल का फुर्सत नहीं होगा तुम्हे बाकी लोगो के जैसे.

सुमित:- Priority...Har लोगो की अलग प्रायोरिटी होता hai...Kisi का हो सकता है दुनिया जितना, किसी को अमीर होना तो किसी को वक्त से आगे rehna...Wo अपनी जगह सही है लेकिन मेरा प्रायोरिटी है, जिंदगी को हसी ख़ुशी बिताना और बढ़ते वक्त के साथ कुछ नया सीखना.

वर्ण कीर्ति के पीछे न जाने कितने साल बर्बाद करने वाला बेवकूफ तो हु nahi...Bas अपनी ख़ुशी के लिए.

फिर सुमित अपने मोबाइल में कुछ खोल कर मेघा को दिखता है.

सुमित:- मरने से पहले दुनिया के इन् जगह घूमना hai...Aasmaan को छूने वाले इन् हिमालय से ले कर उनके निचे से बहने वाली ये jaldhara...Inn पहाड़ियों के हरियाली में खोना है तो इन् गुफा की गहराई में जा कर ध्यान लगाना है.

इन् ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल के भ्रमण को अपने मन में बसाना है तो इन् महान इंसान से मिल कर उनसे कुछ सीखना hai...Alag अलग देश और अलग अलग लोगो से मिलना hai...Unko जानना है और उनके रेहान sahan...Jindagi के हर एक चीज को जीना है जिसे ख़ुशी भी मिले और कुछ नया सिखने को भी मिले.

और आखिर में जिंदगी के आखिरी वक्त में अकेला हो गया तो जिंदगी के आखिरी पल एक सन्यासी की तरह बिताना है और मरते वक्त होंठो में मुस्कान और दिल में ये सतोष होना चाहिए की हाँ मेरा सभी इच्छा पूरा हो गया.

इतना कह कर सुमित चुप हो gaya...Megha सुमित को देख रही thi...Sumit की इच्छा में से बहुत चीज मेघा के साथ भी मिल रहा था.

सुमित:- और तुम जानती हो मई अपना इच्छा पूरा करने के लिए कितना जिद्दी हूँ.

मेघा को भी सुमित की बातों में उसकी सच्चाई नजर आ रहा था.

मेघा:- तुम कहते हो की अपनों का साथ हमेशा देते ho...Lekin उस चाचा के आम चुरा कर आज hi फसा diya...Wo तो किस्मत अच्छा था की बच....

मेघा आगे कुछ बोलती उससे पहले...

सुमित:- मैंने बचाया था.

मेघा:- फसाया भी तुमने hi.

सुमित:- जिंदगी हर वक्त अपने इच्छा अनुसार चले तो क्या majaa...Kabhi कभी कोई मुशीबायंट आ jaaye...Saamna करने का मौका mile...Aur उससे जीत कर आगे निकल गए तो विश्वाश करो बहुत सिखने को मिलेगा और यादगार पल तो बन hi जाएगा.

ये आम चुराने की वजह बचपन की याद दोहराना तो था hi साथ में तुम्हे ये एहसास दिलाना भी था की जब तक मई तुम्हारे साथ हु तुम्हारी जिंदगी में उत्साह हमेशा रहेगा.

शरारत में तुम्हे परेशां करने से ज्यादा ये सोचता हूँ की कभी कोई परेशानी तुम्हारे पास से भी ना gujre...Warna सूरज का जब सर्जरी कर रहा था उसका हर काम होता धड़कन में तुम्हारा आंसू दिख रहा tha...Kaise भी बचाना था.

और तुम भी मेरे लिए ऐसा hi सोचोगी तो सोने में सुहागा.

मेघा:- क्या बात है? आज कुछ अलग hi नजर आ रहे हो?

सुमित:- अब्ब में वो डिप्रेस्ड सुमित नहीं hun...Abb वो सुमित हूँ जिसे तुम मब्ब्स के वक्त पहली बार मिली thi...Tumhare भासा में कहु तो सुमित सफस यानी की स्ट्रैट फॉरवर्ड सुमित.

दोनों आगे hi बढ़ रहे थे की आगे एक सांप dikha...Karib 1 मीटर का...30 मीटर की दुरी पर.

सुमित:- Saamp...Saamp.

सुमित की आवाज में थोड़ा दर था.

मेघा:- कुछ देर पहले तो बहुत उड़द रहे thhe...Bol रहे थे बचपन में गांव में ये करते थे वो करते थे.

गांव में सांप भी होते hai...Sirf खेत में आम नहीं. :डी

सुमित:- और मारो ताना. :बीए:

मेघा:- अच्छा ये बताओ गांव में सांप देख कर क्या करते थे तुम बचपन में?

सुमित:- भाग जाता था. :(

मेघा:- :lol1::lol1:

तभी मेघा को एक शरारत सूझता है.

मेघा:- कीर्ति के लिए तो तुम उस तेज बहाव वाले नदी में कूद गए thhe...Mere लिए इस सांप को छू कर दिखाओ.

सुमित डरते हुए मेघा को देखती है.

सुमित:- फिर मान जाओगी?

मेघा:- पहले छू कर dikhaao...Fir सोचूंगी.

सुमित डरते हुए सांप के पास जाता hai...Alag सा जूनून था शायद मेघा को मनाने ki...Chehre में दर तो था फिर भी आगे बढ़ रहा था.

मेघा मुस्कुरा रही thi...Usse यकीं था की सुमित दर कर लौट आएगा लेकिन जब सुमित सांप के बहुत पास पहुँच गया तो मेघा गौर से एक नजर सांप को देखती hai...Achanak से उसके चेहरे में दर के भाव साफ़ दिखने लगता है.

दर से कुछ बोल भी नहीं पा रही थी की तभी सुमित मुस्कुराने लगता है.

अपना हाथ सांप की और बढ़ा hi रहा था की मेघा का थूक उसके गले में अटक रहा था.

वो बोलने hi वाली थी की सुमित सांप को ना सिर्फ छूटा है बल्कि सांप को सर से पकड़ कर अपने गले में लपेट लेता है.

मेघा:- फेको usseeee....Kkkkrait है वोऊ.

मेघा दर कर पसीना पसीना हो गयी thi...Khud को hi कोष रही थी की सांप को ले कर ऐसा मजाक क्यों kiya...Lekin Sumit...Usse क्या फर्क पड़ता.
 
अपडेट 116

सुमित:- महादेव का भक्त hun...Saamp से क्या डरना?

हँसते हुए सुमित ने जवाब दिया.

मेघा:- भक्त ho...Swayam महादेव nahi...Aur वो सांप करैत है नाग नहीं.

दर में भी मेघा गुस्से हो गयी सुमित को मजाक करता dekh...Dar अभी भी वैसा hi था.

सुमित कुछ कहने hi वाला था की जो सांप को वो गले में लपेट चूका था मौका मिलते hi उसने सुमित को काट लिया.

एक baar...Do baar...Pure चार बार सुमित को कान्त liya...Lekin सुमित ने अभी तक सांप को खुद से दूर नहीं किया.

मेघा की हालत इतना ख़राब था को वो कुछ बोल नहीं पा रही thi...Dar से पूरा चेहरा पसीना हो गया.

मेघा:- हटाओ उससे.

किसी तरह मेघा इतना hi बोल पायी.

सुमित अब्ब सांप को गले से उतार कर हाथ में hi पकडे रहता है.

मेघा:- चलो हॉस्पिटल.

सुमित की पास आ कर वो बोली.

सुमित:- क्या faaidaa...Kuch देर में उपरवाले को प्यारा हो जाऊँगा.

मेघा:- चलो jaldi...Nahi तो...

सुमित का दूसरा हाथ पकड़ कर मेघा खींचने लगती है.

सुमित:- नहीं तो क्या हो jaayega...Tumhare बाहो में अपना दम तो दूंगा....

सुमित आगे कुछ बोलता उससे पहले hi मेघा सुमित के गाल में एक जोरदार थप्पड़ लगा देती है.

मेघा:- मजाक लग रहा है तुम्हे ये...

मेघा को गुस्सा और इतना डरते देख अब्ब सुमित एक लम्बा सांस लेता है.

सुमित:- ये करैत नहीं है?

मेघा:- फिर क्या है?

सुमित:- करैत जैसा hi दीखता hai...Band भी वैसा hi hai...Jaanta था तुम इससे करैत hi समझोगी इसी लिए मजे ले रहा था.

मेघा:- करैत hi है ye...Aur तुम कैसे यकीं के साथ कह सकते हो की ये करैत नहीं है?

सुमित:- करैत की तरह ये बिलकुल hi काला नहीं hai...Aur सर भी थोड़ा चपटा hai...Jaha मेरे गर्दन पर काटा है वह अभी करैत की तरह बाईट मार्क नहीं hoga...Ye करैत नहीं करैत जैसा hi दिखने वाला वुल्फ स्नेक है.

मेघा:- फिर भी हॉस्पिटल चलो.

सुमित:- क्यों?

मेघा:- अगर जेहटीला होगा तो एंटी धोटे milega...Observation में रहना बहुत जरुरी है.

सुमित:- जैसे की मुझे तो पता hi नहीं.

मेघा:- पता hai...Lekin तुम कभी सीरियस रहते हो?

सुमित इस बार कुछ नहीं kehta...Bas वो सांप को निचे जमीन में रख देता है और वो सांप अपना राष्ट बना कर निकल जाता है.

मेघा:- चलो अब्ब.

सुमित:- नहीं मेरा मूड नहीं है. :बीए:

मेघा:- चलो नहीं to....:mad:

सुमित:- नहीं तो क्या? :डी

मेघा:- दूसरा गाल भी लाल कर dungi...Chalo जल्दी से. :एंग्री++:

सुमित:- गाल hi क्यों? पूरा का पूरा तुम्हारा hun...Bas एक बार हां कर दो. :)

मेघा:- अगर मेरे हो to...Meri बात क्यों नहीं मानते?

सुमित:- तुमने हां भी तो नहीं कहा?

मेघा:- अब्ब ऐसे इमोशनल ब्लैकमेल करोगे?

सुमित:- Chalo...Ye कोशिश भी कर के देख केते है.

मेघा:- बिलकुल nahi...Jo मर्जी वो करो.

इतना कह कर मेघा भी गुस्से में दूसरी और मदद जाती है.

सुमित:- सोच lo...Mai बिलकुल नहीं मानूंगा.

मेघा:- मुझे क्या मतलब? जो मर्जी वो करो.

सुमित:- अच्छा ठीक है फिर.

इतना कह कर सुमित निचे जमीन में बैठ जाता है.

मेघा दूसरी तरफ देख रही thi...Lekin उसकी शरीर की हलचल से सुमित आसानी से अंदाजा लगा सकता था की वो कितनी बेचैन है.

और ज्यादा परेशान ना करने का सोच कर.

सुमित:- अच्छा गुस्सा थूक दो.

मेघा कुछ जवाब नहीं देती लेकिन एकदम से उसका बेचैनी भी बंद हो जाता है.

सुमित मेघा के पास जाता है.

सुमित:- करैत का जहर न्यूरोटॉक्सिक होता hai...Laghbhag आधा घंटा से दो घंटा तक जहर होगा तो सिग्नस एंड सिम्पटम्स दिख jaayega...Agar सिग्नस दिखा तो हॉस्पिटल जरूर jaaunga...Aadha घंटा है यहाँ से हॉस्पिटल...15 मं में पहुँच जाऊँगा.

मेघा:- लेकिन अभी जाने में क्या परेशानी है?

सुमित:- मौसम dekho...Aas पास के नज़ारे dekho...Kitne रोमांटिक है? इस पल को तुम्हारे साथ बातें कर बिताना चाहता hun...Naa की हॉस्पिटल के बीएड में बैठ कर बोर होना चाहता हूँ.

मेघा:- सांप ने काटा है तो रिस्क तो है hi.

सुमित:- करैत है hi नहीं तो क्या रिस्क? अब्ब बोर मत करो यार तुम bhi...Agar जहर का लक्षण दिखा तो चला जाऊँगा हॉस्पिटल हवा की रफ़्तार में.

मेघा:- Nahi...Hospital तो चलना पड़ेगा hi.

सुमित:- अगर ऐसे hi बोर करती रही तो मई चला jaaunga...Hospital nahi...Yahi खेतो mein...Abhi तो तुम्हारे ऑब्जरवेशन में hu...Kuch होगा तो बचा भी logi...Socho अगर चला गया और सांप सच में जेह्रीला था तो अगली दिन किसी खेत से मेरा लाश मिलेगा.

मेघा गुस्से से सुमित को देखती है.

सुमित:- विश्वाश karo...Kuch नहीं होगा.

फिर दोनों की बातचीत सुरु होता hai...Megha सुरु में तो काम बोलती hai...Lekin धीरे धीरे वो भी साथ देने लगती है.

जब 2 घंटे बीत गए मेघा की परेशानी काम होने लगा.

लेकिन tabhi...Sumit की दोनों आँखें फड़फड़ाने लगा.

मेघा:- डेल्हा मैंने कहा tha...Abb तुम्हारे आँखें फड़फड़ा रहा hai...Ptosis...1st न्यूरोटॉक्सिक सिग्न ऑफ़ स्नेक बाईट.

मेघा का दर एकदम से बढ़ गया.

सुमित:- उस में नया क्या hai...Tumhe डेल्ह कर तो हमेशा मेरा आँख फड़फड़ाता है.

एक बार फिरसे सुमित को ऐसा करता देख मेघा गुस्से से सुमित की पीठ पर मुक्को की बरसात सुरु कर देती है.

सुमित:- अभी समय कितना हुआ?

मेघा:- 8 बज चूका है.

सुमित:- हम मिले कब थे?

मेघा:- 2 बजे.

अब्ब मेघा हैरानी से सुमित को घूरती है.

सुमित:- मतलब 6 घंटा का milan...Tum तो कहती थी 4 घंटा से 1 भी मिनट ज्यादा नहीं milega...Lekin पहली hi मिलान में?

मेघा कुछ जवाब नहीं देती.

सुमित:- इस प्यार को क्या नाम डौगी?

मेघा:- कोई प्यार वीआर नहीं है.

सुमित:- अच्छा तो सांप का मुझे काटने के बाद मुझसे ज्यादा तुम्हे घबराहट होना और ये 6 घंटे कब बीत गए इसका भी कोई एहसास ना होना? इसका क्या जवाब है.

मेघा:- Pyaar...Jo तुम कभी समझ hi नहीं पाए थे.

सुमित:- अब्ब समझा हूँ तो खुद मुझसे दूर होते जा रही हो.

मेघा:- लेकिन अब्ब लगता है की तुम्हारे साथ कम्फर्टेबले नहीं हु जो मई पहले भी बता चुकी हु.

सुमित:- अभी के लिए तो तुमने माना है की तुम अभी भी मुझसे प्यार करती हो?

मेघा:- हाँ.

सुमित:- ठीक hai...Mai चाहु तो एक दिन में hi तुम्हे कम्फर्टेबले फील करवा du...Lekin इतना जल्दी भी क्या है? थोड़ा इस खेल का मजा लिया जाए.

मेघा:- इतना विश्वाश?

सुमित:- बिलकुल.

मेघा:- एक बात bataao...Tum भी मुझसे प्यार करते हो?

ये पूछते वक्त मेघा की होंठो में कुछ अलग सा मुस्कान था.

सुमित:- येभी कोई पूछने की बात है?

मेघा:- एक काम करोगे?

सुमित:- बोलो.

मेघा:- स्नेक बाईट का ज्यादातर लक्षण 8 घंटे में आते hai...Lekin ऑब्जरवेशन के लिए 24 घंटा बेस्ट है.

इसी लिए हवा के रफ़्तार से हॉस्पिटल जाओ और बाकी के 22 घंटे ऑब्जरवेशन में रह कर अपना प्यार साबित करो.

ये सुनते hi सुमित का चेहरा उतर गया.

सुमित:- ये तो ना इंसाफ़ी है. :(

मेघा:- मुझे इतना डराया था tumne...Kya वो तुम्हारा इन्साफ था?

सुमित कुछ बोल नहीं पाया.

मेघा:- और हाँ no cheating...Jitne मिनट तुम वह हॉस्पिटल से बंक karoge...Utne घंटे तुमसे मिलना काम कर dungi...Faisla तुम्हारा है. :डी

इतना कह कर मेघा वह से चली gayi...Sumit बेचारा सर खुजाते हुए अपने बाइक की और बढ़ने लगा.
 
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