Pyaar Nafrat or Kismat - Page 7 - SexBaba
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Pyaar Nafrat or Kismat

अपडेट 57

मेगा अपडेट


बचपन की यादें

उसके बाद स्कूल उसके बाद टूशन और फिर बिज़नेस की ट्रेनिंग बोले तोह मनु एक बस्सी पर्सन की तरह से बस्सी लाइफ जी रहा था … उस पैर सुनील की डाइट पता नहीं kon-konsi अलग अलग हर्ब्स मनु को देता था की मनु के चेहरे और बॉडी में एक अलग सी चमक आने लगी थी …अब मनु भी खुद को एक अलग एनर्जेटिक पर्सन फील करता था की एक दिन और कुछ ऐसा हुआ जो मनु के लिए और बहुत कुछ चेंज ले आया …

और क्या हुआ ऐसा और क्या चेंज आया मनु की लाइफ में …


अब आगे ........

मनु की लाइफ अब एक रेगुलर रूटीन में बाँट चुकी थी …उसी के साथ उसकी बस्सी लाइफ के साथ उसकी प्रोग्रेस भी बढ़ती जा रही थी उसने सुनील और मास्टर के साथ एक ऐसी चीज़ें सिकने शुरू कर दिया था ….जो शायद मनु ने किसी मूवी में भी नहीं देखि thi…..indian martial-arts के साथ वर्ल्ड क्लास मार्टिकल आर्ट्स ..और अलग अलग फाइटिंग स्टाइल अब मनु को सीखने लगे थे मास्टर और सुनील गुरु जी…

मास्टर ने अब शबनम को अपने फार्म हाउस ? में बुलाना शुरू कर दिया था क्युकी कहीं न कहीं मनु के चलते हु नहीं चाहते थे की मनु और शबनम का सामना हो और मनु को उन्हें शबनम के बारे में बताना पड़े सो मास्टर उससे बहार मिलकरते थे …मास्टर के शराब छोड़ने की सबसे ज्यादा खुसी शबनम को हुई थी ..उसने मास्टर को उस दिन दिल से खुश किया …बोले तोह उस दिन गज़ब चुदाई हुई दोनों में चुदाई के बाद मास्टर ने शबनम को शराब छोड़ने और मनु के बारे में बताया जिसपर शबनम ने मनु को दिल से दुआएं दी की जो काम हु न कर सकीय हु मनु ने कर दिया …जिसपर उसने मनु से मिलने को कहा तोह मास्टर ने उसे साफ़ कहा की टाइम आने पैर हु मनु से मिल सकेगी ..

मास्टर खुद एक फाइटर थे और बहुत hi बेहतरीन फाइटर रह चुके थे ..जिनका फाइटिंग फील्ड में बड़ी रेस्पेक्ट से नाम लिया जाता था आज भी …मास्टर ने शादी से पहले साड़ी फाइट बंद कर दी थी पैर आज भी लोग उनको इज़्ज़त से जानते थे …उस पैर मास्टर का कामयाब बिज़नेस और रईस होना सो मास्टर के बेहिसाब कांटेक्ट थे ..लोग खुद सामने से उनसे कांटेक्ट बनाना पसंद करते थे …जिनका फ़ायदा मनु को हुआ..

मास्टर के ओल्ड कांटेक्ट के चलते मनु ने बहुत साड़ी डार्क फाइट (हु फाइट जो बड़े लेवल पैर होती हैं और बड़े लेवल पैर ओर्गनइजे होती है पैर साडी दुनिआ से छुपकर मतलब illegal’s वे मैं जिसमे fighter’s की जान तक चली जाया करती थी क्युकी इललीगल होती हैं ऐसी फाइट्स तोह पैसा बेहिसाब मिलता है हर फिघ्टर्स को पैर उसके साथ जान का भी जोखिम होता है ..)

उधर अजय अब मनु के बस्सी सचेडूले के चलते अब पुष्पी के हवाले था …उसका भी ग्रोथ होने लगा था …फिजिकली और मेंटली भी ..और क्युकी उसका बड़ा भाई अब अपने शरीर पैर ध्यान दे रहा था तोह …अजय भला भाई को यहां कॉपी कैसे न करता …उसने भी भाई की देखा देखि एक्सरसाइज पैर धयान बन आलिया …और कहीं न कहीं कार्टूनों से दुरी बना ली थी पैर उसका कार्टून प्रेम इतना जल्दी कैसे छूट जाता भला पैर हाँ यह जरूर था की पहले जहां उसका रात दिन कार्टून का चैनल टीवी पैर फिक्स था वहीँ अब उसने भाई की ट्रेनिंग को देखकर ववे देखना भी शुरू कर दिया था ..वह हर रोज़ शाम को अपने भाई से आजकी फाइट पैर बात करता जिसपर मनु उसे कहता की …”देख फाइट देखने को मन नहीं कर रहा हूँ …पैर पड़े पैर इसका असर नहीं पड़ना चाहिए ..तेरी बाकी अगर तुझे सीखना है तोह मैं हूँ न …”

अजय “भैया ी लव ु ुर थे बेस्ट बीआरओ ऑफ़ थे वर्ल्ड …अब मैं भी फाइट सीखूंगा yaaaahoooooo!!!!..dekhna भैया मैं भी आगे से ववे में आऊंगा …”

अजय की बातें सुनकर मनु भी उसके ववे में जाने की बात सुनकर हंस पड़ता ….पैर मनु ने जब से खुद फाइट सीखनी शुरू कर दी थी …तोह उसने जय को भी ट्रैन करना शुरू कर दिया था ….जिसके पीछे उसका दिमाग था की अजय को पता नहीं आगे कैसा टाइम देखने को मिले और आएगी अजय पता नहीं क्या करे और कैसे हैंडल करे सो मनु चाहता था की अजय फुल्ली प्रेपर रहे हर फाइट जो ज़िन्दगी मैं उसे करनी हो उसके लिए …

उधर निशा की कोई भी खबर नहीं थी पैर मंजू के फादर की तबियत के चलते उसका वहीँ रेहन फिक्स था …पैर मंजू ने निशा से एक वडा किया की मनु की खबर उसे मिल पायेगी ….तोह मंजू ने एक फोटोग्राफर को हिरे किया की हु वीक में एक बार या महीने में जितना हो सके मनु की पिक्चर कलेक्शन करके नई ज़ीलैण्ड में उसके पास भेज दे …जिससे निशा शांत रह सके पैर निशा का दिल कहाँ सनटैन था कभी कभी हु अपने माँ के गले लगकर मनु के नाम पैर जीखोलकर खूब आंसू भाटी ….और मनु की सलामती की दुआ मांगती ..

पैर मनु इन सब से दूर अपनी दुनिआ मैं रात दिन की ट्रेनिंग में अलग- अलग फाइटिंग स्टाइल सिखने में बस्सी हो गया था उसे निशा के नाम तक से गुस्सा और नफ़रत हो चली thi…nisha hi क्या निशा के बाद हु बात बिहषक करता था लड़कियों से पैर उसको हर लड़की से मन hi मन निशा के धोखे के चलते नफ़रत हो गयी thi.woh किसी भी लड़की के करीब जाना या किसी लड़की को अपने करीब तक नहीं आने देना चाहता था …उसे प्यार के नाम से गुस्सा आ जाता था …

इन सब के बिच जय चाँद ने एक बार भी राजिंदर के घर जाकर कोई khair-khabar लेने की कोशिश नहीं की क्युकी उसके दिल मैं था की मनु की मौत हो चुकी होगी पैर मनु अभी जिन्दा था …उससे बड़ी हैरानी हुई की राजिंदर ने अभी तक मनु की मौत को लेकर उसे यानि जैचंद को कोई भी खबर नहीं दी ..जिसके चलते उसकी टेंशन बाद चुकी थी की अगर मनु मर गया है ..तोह खबर क्यों नहीं आयी …पैर मनु ने उस दिन के बाद भी अपने maa-baap से जैचंद यानि चाचा का कोई ज़िकर नहीं किया tha…kyuki उसके लिए माँ -बाप की टेंशन ज्यादा ज़रूरी थी बजाये चाचा की धोखेबाज़ी के और हु नहीं चाहता था की हु अपने maa-baap को खुद पैर हुए उस्मान के हमले के बारे में बता कर उन्हें टेंशन दे जिसके बाद उसके maa-baap उसका घर से निकलना बंद कर दें सो उसने कुछ नहीं बताया न हमले के बारे में न चाचा का धोखा …हाँ उसने अपने बाप राजिंदर को यह ज़रूर बता दिया की उसे फाइटिंग में रूचि (दिलचस्पी )है जिसपर राजिंदर ने उसका साथ दिया जैसा उसने वडा किया था ,,,

जिसपर उसकी माँ सुमित्रा ने काफी हंगामा किया की “बचा अगर फाइट सीखेगा तोह रात दिन झगडे करेगा और फ़ालतू में बदनामी होगी और आगे पता नहीं क्या करे …”हु एक माँ की तरह सोच रही थी जिसको अपने बचे की फ़िक्र होती है …उसने मनु को भी बहुत मनाया .

जिसपर राजिंदर के एक सवाल ने सुमित्रा को सही समझा दिया ..”एक बात बताओ क्या तुमको अपनी परवरिश पैर यकीं नहीं है ??…क्या अपने बेटे पैर यकीं नहीं है …आगे जाकर क्या टाइम ागेगा क्या पता क्या तुम नहीं चाहती हो हमारा बीटा दुनिआ की हर लड़ाई के लिए त्यार हो ??? क्या तुम चाहती हो तुम्हारा बीटा क्यार बने ???क्या हमारे बेटे की हार बर्दास्त होगी तुम्हे ???

सुमित्रा “ आपने सोच भी कैसे लिया की मैं अपने मनु का साथ नहीं दूंगी ….और मुझे उसकी हार कैसे बर्दास्त हो सकती है भला ???बीटा है मेरा गुरुर है …उसकी जीत में मेरी आपकी और हमारी जीत hai…thik है जा मनु जो सीखना है सिख मैं तेरे साथ हूँ पैर अगर किसी मासूम को जुल्म में फसे हुए देखे तोह उसकी मदद जरूर करना …बस इतनी बात तेरी माँ कह रही है मान लेना ..”

मनु “ok मम्मी जो आप कहो जब लगेगा की कोई मासूम जुल्म में फसा हुआ है और मैं उसकी हेल्प कर सकता हूँ तोह मैं उसकी मदद जरूर करूँगा अपने मनु पैर विश्वास रखिये जो कर रहा हूँ सोच समझकर कर रहा हूँ ..ी लव ु मम्मी …ी लव ु पापा..”

और मटर सोल्वे होगया जिसके बाद मनु आज़ाद था फाइट सिखने के लिए …इन सब मैं अजय का फ्री में फ़ायदा हो चूका था …भाई बेस्ट ट्रेनिंग ले रहा था ..अचे और बेस्ट ट्रेनर्स और बेस्ट डिएटिट्यां से जिसका फ़ायदा उसे मनु ने ट्रेनिंग के रूप मैं देना शुरू कर दिया था …और अजय की जब अछि डाइट की बात आयी तोह मनु ने सुनील से हेल्प मांगी तोह सुनील ने पूछा तोह मनु ने सुच बता दिया की अजय को ट्रेनिंग दे रहा है …जिस पैर सुनील ने थोड़ी देर सोचा और मनु ने भी अपनी प्लानिंग बताई जोकि आगे आप सभी को भी पता चलेगी जिसपर सुनील ने उसे भी ट्रेनिंग में शामिल करने को कहा ….पैर

मनु ने यह कहकर मन कर दिया की “अजय अभी छोटा है अगर यहां के काळा काम और काली फाइट देखेगा तोह उसका दिमाग पता नहीं कैसे रियेक्ट करे सो उसे घर पैर मैं खुद hi ट्रेनिंग दूंगा ताकि उसके दिमाग को भी गाइड कर sakun…aap सिर्फ उसकी डाइट में हेल्प कर दिज्ये …”

सुनील “बीटा तुम सुच में बहुत ाचा सोचते हो कोई बात नहीं इसमें मई तुम्हारे साथ हूँ …”

जिसके बाद अजय भी सही शेप में आने लगा था सो मनु समझ गया की अछि डाइट से क्या हेल्प होती है …

उसका ध्यान डाइट के नाम आते hi अपनी दूसरी माँ नीता मम पैर गया …मनु ने उनके बारे में सोचा ..जिनका फिगर जीरो था हाँ भाई जीरो बोले तोह बादवाला जीरो मनु ने अब प्यार से कर काम पैर लगा दिया और एक अलग डाइट चार्ट बनाया जिसपर बेचारी मनु से प्यार के चलते झख मारकर काम करने लगी thi…jisper मनु की सख्ती और कभी भी बात न करने की बात के चलते उनका बहार का खाना काम हो गया था …क्युकी हु अकेली रहती थी सो उनकी आदत कुछ न कुछ खाने की थी जो अधिकतर चीट मील (नॉट हेअल्थी फ़ूड) होता था जिसे एक दम से छोड़ देना खुद उनके बस मैं भी नहीं था ...क्युकी न कोई रोक थी न कोई रोकनेवाला फिर भी कोशिश जारी थी बेचारी नीता की जिसमे सिर्फ कुछ hi फर्क आया था …इन्ही सब मैं कुछ महीने बिट चुके थे …

कहीं किसी जगह एक घर में एक मस्त से फिगर की मस्त गांड और गज़ब सी चुकी वाली कमाल की टॉप क्लास औरत एपनिया आप को आईएनए यानि मिरर में देख रही थी …

खुद को सवार रही thi….”sajna है मुझे सजाना के लिए ,,,” यह गाना उसके लिपस्टिक लगे शोख होटोंन पैर था …

की पीछे से कोई अचानक आया ..और उसकी आँखें बंद कर दी अपने हाथूं से …

औरत “है आगये आप …आपके लिए hi तोह मेरी जान यह आपकी बेगम सजी है और आप हैं की अभी भी पहचान कोण खेल रहे हैं,,,,,,,,,,, ारे मेरी जान आपके हथून को न पहचानू ऐसे बेगम नहीं हूँ मैं मेरे शोहर मेरे रूह के मालिक …अब सामने आईएनए .बहुत हुई यह जुदाई …”

उस शक़श ने उसकी आँखों से हाथ हटाया और सामने आज्ञा उसके “बेगम कसम परवरदिगार की उसकी बनायीं अज़ीम be-misal नेमत हो तुम मेरे लिए यह “”सुलतान हस्सान पठान”” तुम्हारा शोहर तुम्हे दिलो जान से चाहता है ….अब और न तडपाओ मेरी जान .. सराह बस आ जा और न तड़पा ..”

सराह “ आएयेह न “”

सुल्तान ने सराह को खड़ा किया और उसे अपने साइन से लगा लिया जिसके बाद उसके हाथ सराह के जिस्म पैर नाचने लगे …सराह का फिगर अपने में गज़ब था उसका कद 5’ 8’’ था उसका फिगर 38’ 30’ 42’ था जिसमे उसकी मोती चुकी और उसकी उभरी गांड किसी का भी लैंड खड़ा कर दे …उसका शोहर “”सुल्तान हस्सान पठान” जिसका कद 6’ और बॉडी का आईडिया आपको दे देता हूँ 50’ की चेस्ट और मज़बूत देसी शरीर जिको देखकर कोई भी अंदाज़ा लगा सकता था की यह शक़श पका कोई देसी पहलवान टाइप होगा …

खैर अब सुल्तान के हाथ सराह की उभरी गांड पैर चल रहे थे जो उसने मसलनि शुरू कर दी थी ….जिसके चलते सराह के होतोओं से एक अलग सी सिसकी फूटने लगी थिस…..

इस्स्स्सस्स! जिसको सुल्तान ने पूरा भी नहीं निकल ने दिया उसके लाल सुर्ख होतोओं से सुल्तान ने उसके होटों पैर अपने होठ लगा कर उसकी लाल लिपस्टिक को खाना शुरू कर दिया ….

जिसके चलते मचलती सराह के हाथ सुल्तान के कमर और उसके सर के पीछे चलते हुए अपनी मस्ती जाहिर करने लगे …

एक लम्बी किश के बाद दोनों ने एक दूसरे की आँखों में देखा सराह के होठों की साडी लिपस्टिक कहीं की कहीं फ़ैल चुकी थी …जिसे देखकर सुल्तान ने अपने होटों पैर सराह की लिपस्टिक को महसूस करके खुद की जीभ से चाट कर kaha”haay बेगम आज चीर्य का फ्लेवर है …क्या बात है कल वैनिला चाहिए मुझे..”

सराह “ हुज़ूर आपकी कनीज़ आपका हुकम जरूर मानेगी …क्युकी बीवी के होटों पैर शोहर का हक़ है …सो उसकी लिपस्टिक पैर भी आपका हक़्क़ है …पैर आपका यह शॉक मेरे समझ से परे है अलग तरह का लिपस्टिक और उसका फ्लेवर आप hi जानो मेरे लिए तोह इतना काफी है की मेरे सरताज को मैं अपने होटों के जैम पीला देती हूँ…”

सुल्तान “ बेगम हर रोज़ लिपस्टिक का शॉक मेरा है मुझे तुम्हारे इन हसीं होटों से लिपस्टिक चूसने में जो मज़ा मिलता है ..वह सिर्फ मैं जानता हूँ यह मेरा हक़ है सो तुम सिर्फ लिपस्टिक लगया करो उसे चूसने का काम मेरा है हु मुझपर छोड़ do…or अब मुझे चूसने दो इन होटों की लाली ..””

“हम्म्म!” सराह कुछ बोलती उससे पहले hi उसके होठ अब उसके शोहर की गिरफ्त में थे …

सुल्तान ने उसके होठ चूसकर साड़ी लिपस्टिक चूस ली थी ..जिसके बाद उसका हाथ सिद्ध पूछा उसकी मोती और फुल्ली हुई चूचियों पैर …

और उन पैर सुलतान ने ज़रा भी रेहम नहीं किया खूब ज़ोर शोर से मसलना शुरू कर दिया जिसपर सराह की हालत ख़राब होने लगी उसने किश तोड़कर कहा” थोड़ा आराम से कर लो कहीं भागी तोह नहीं जा रही हूँ आपकी हूँ और आपकी hi रहूंगी बस थोड़ा ज़ोर काम लगाओ न है!!”

सुल्तान “तुम सिर्फ अपना मज़ा लो बेगम तुम्हारी इन बैलन को ज़ोर से न मसलन तोह मज़ा नहीं अत इन पैर मुझसे कोई रेहम नहीं हो सकता …सो या तोह साहू या चिल्लाओ …”

और सराह कुछ कहती पैर सुलतान ने कोई मौका नहीं दिया उसे फिर से होठों को चूसने लगा जिसपर अब कहीं न कहीं सराह को अब मस्ती चढ़ने लगी थी ….सुलतान का चूचियों को बेदर्दी से मसलना और उसके बाद उसके होठों की चूसै सिद्ध असर उसकी छूट पैर पड़ने लगा …उसकी छूट से पानी रिसने लगा था …पैर सुल्तान ने चूस चूस के उसके होठों को लाल कर दिया था और साथ hi उसकी चूचियां भी खुद मसल कर रख दी थी …सराह को इनसब की आदत हो चुकी थी क्युकी सुल्तान की यह आदत ने शुरुवात में उसकी चीखें निकल दी थी …उसकी चुकी पहले 34 की हुआ करती थी जब उसका निकाह हुआ था पैर सुल्तान का चुकी प्रेम उसपर ऐसा मेहरबान हुआ की रोज़ का बेदरदादि से मसलना और खूब चूसना उसकी चुकी का साइज अब 38’ कर चूका था ….जिसपर उसे बहुत सरम आती थी की बिना बचा पैदा हुए hi उसकी दूध की फैक्ट्री का साइज बड़ा हुआ था सुल्तान की बदौलत …

खैर सुल्तान से अब उसके कपडे उप्पेर से उतरने शुरू कर दिए जिसमे सराह ने उसका साथ दिया …और दोनों बीएड पैर आ चुके थे …

जिसके बाद सुल्तान टूट पड़ा उसकी चूचियों पैर खूब चूसने लगा …और एक हाथ में उसकी फुल छूट सलवार के उप्पेर से hi हाथ में भर कर भिचने लगा ….जिसपर सराह का हाल बेचैनी से भर चूका था …उसके हाथ चुकी चूसते सुल्तान के सर पैर घूमने लगे थे …सुल्तान कभी जोर से उसकी छूट को हाथोमे भीचता तोह कभी हाथ से उसकी छूट की लकीर सहलाने लगता …

जिसपर सराह का जिस्म खुद बा खुद गर्म होने लगा था …उसकी चुदाई की तालाब इस बात से समझ सकते हो आप की उसकी छूट ने इतना पानी बहा दिया था …की उसकी कच्ची छूट के हिस्से से भीग चुकी थी…

सुल्तान अब आगे बढ़ा और उसने सराह की सलवार का नाडा खोल दिया जिसके बाद उसने सराह की सलवार को खींच कर एक झटके में निकल दिया और उसे घुमा कर पेट के बल कर दिया …

और उसकी पीठ पैर किश कर ने लगा …उसका एक हाथ उसने सराह की कच्ची में उसकी छूट पैर लगा दिया ….जिसपर सराह उलटी लेती हुई …मज़े की दुनिआ में तेर रही थी ….जिसके बाद एक हाथ से सुल्तान उसकी छूट को उप्पेर से निचे सहलाता और उसकी पीठ पैर चूमता सराह का मज़ा अलग उफान पैर था ….एक तरफ से सुल्तान का हाथ उसे मज़ा दे रहा था …और दूसरी तरफ उसके गरम किश ने सराह को झड़ने पैर अब मज़बूर कर दिया था …अहहहहह!!!!!! इस्स्स्सस्शह्ह्हआआ!!!! उसकी कमर को उसने गांड से उठा लिया जो सुल्तान को इशारा था की सराह झाड़नेवाली है उसने भी अब उसका क्लीट सहलाना शुरू कर दिया और तेज़ी से सराह इतनी तेज़ी से झाडी की उसका मुट्ठ भी उसके पानी के साथ निकलने लगा …..

अहहहहहा!!!!! की आवाज़ उसके ओर्गास्म का प्रूफ था की उसका ओर्गास्म भी कोई 30 सेक् चला जिसमे सुल्तान का हाथ और तेज़ होता चला गया ताकि सराह को पूरा मज़ा मिले …..

ओर्गास्म के बाद सराह की साँसे और शरीर में कुछ सेकंड के लिए जान सी निकल गयी जिसके बाद सुलतान ने उसे फिर से पलट दिया …और उसकी मुट्ठ और उसके पानी में भीगी कच्ची उतार दी और उसकी छूट पैर लग गया …चूसै करने …उसके दोनों हाथ उसकी मस्त और फुल्ली हुई गांड को मसल रहे थे ..और होटों से छूट की चूसै सराह को और गरम करने लगी ….उसकी गरम दुबारा से बढ़ने लगी थी…

जिसपर सराह भी दुबारा से रेडी होने लगी …और जब उसे मज़ा आने लगा तोह उसने ज़ोर देकर सुल्तान को अपनी छूट से हटाया …

सुल्तान ने उसकी आँखों में देखा एक शोख और लाल रंग का चुदाई का नशा उसकी आँखों में तेर रहा था …उसकी आँखों में चुदाई की एक मांग थी …जिसे सुल्तान ने समझ लिए …पैर फिर उसका लैंड भी अब बेचैनी के मारे पूरा सिद्ध खड़ा था …जो इस बात को साबित करता था की सुल्तान

भी चुदाई के लिए कितना बेचैन है , उसने बीएड ? से उठने का फैसला किया …और उठा अपने हर एक कपडे को 1 मिनट से काम के रिकॉर्ड टाइम में अलग किया और सिद्ध बड़ा बीएड पैर जहाँ सराह की बेचैन छूट उसका इंतज़ार कर रही थी…

सराह ने उसे अपने उप्पेर खींच और उसके लैंड को जोकि ाचा लम्बा और मोटा रहा होगा कोई 7.5’ लम्बा और 5’ मोटा सिद्ध उसने अपनी छूट पैर लगाया और सुल्तान से शायद अब रुकना मुश्किल था पैर सराह अभी लैंड को अपनी छूट पैर उप्पेर निश्च फिर कर उसे चिकना करना छह रही थी ..पैर सुल्तान ने अचानक से उसके हाथ ने जब छूट पैर उप्पेर निचे होते हुए एक झटका दिया …जिसमे सराह की छूट में सुल्तान का लैंड सूखा hi घुस गया …

जिसपर सराह की चीख निकल gayi…””haay ाआमईईई मर दलायआ ….. “

सुल्तान “ अभी मारा कहाँ है अभी तोह मरना बाकी है ….”और उसके होटों को अपने होतोओं की ज़द में ले लिया और लगा तूफानी झटके देने ..

जिसपर सराह की छूट में सूखा लैंड घुसने से उसकी छूट में अलग सा दर्द हो चूका था पैर धीरे धीरे उसकी छूट से बेहटा पानी और सुलतान के तेज़ झटके …जिनके चलते उसकी सुखी छूट पानी छोड़ने लगी और अब उससे बे हिसाब मज़ा मिलने लगा उसकी जाँघे उठने लगी …जिसके बाद सुल्तान ने उसकी टाँगे अपने कंधे पैर रख ली जिसके बाद उसका लैंड और अंदर तक जाने लगा और सराह को और मज़ा मिलने लगा …

उसके हाथ सुल्तान की पीठ पैर थे सुल्तान जब भी किश तोड़कर साँस लेता सराह के मुँह से यही निकलता “”

“”है “””आअह्ह”” ोर्ड्र्र ज़ोर”””””” sesssssssseee”’’’’’’’hayyyyyyyyyy’”

Oroooorrrrrrrrrrr ज़ोररररररररर seeeeeeeeeeee””

सुल्तान कैद हेक और तेज़ हो चले थे …जिनमे अब तक सराह दो बार पानी छोड़ चुकी थी और तीसरी बार के लिए त्यार थी …सुल्तान भी झड़ने के करीब था ….

Sultan””haay मैं आने वाला हूँ बोलो बेगम पानी कहा चाहिए छूट मुँह या चुकी …बोलो ???”

सराह “आज छूट में चाहिए और ज़ोरररररररर सीईई आहाहा ! इसके साथ hi सुल्तान ने अपना पानी सराह की छूट में अपने आखिरी झटकों के साथ उत्तर दिया ….और कसकर सराह को अपने सिनने से लगा लिया …

सुल्तान के माल उसके पानी जो सराह की छूट और उसके कोख में लग रहा था …उससे सराह का भी ज़बरदस्त ओर्गास्म हुआ एक नहीं कई (मल्टीपल) ओर्गास्म हुए जिसमे दोनों एक दूसरे को अपने से कसकर जकड़े हुए ओर्गास्म का मज़ा ले रहे थे …और जब ओर्गास्म ख़तम हुआ तोह सराह और सुल्तान एक दूरसे से चिपके हुए सो गए थकन के चलते …कोई एक घंटा के बाद सराह की आंख खुली मुट्ठ के प्रेशर से पैर सुल्तान अपनी दोनों बाँहों में उसे कैसे उसकी चूचियों में मुँह दबाये सो रहा था …जिसे देखकर सराह के चेहरे पैर एक अलग सी मुस्कराहट फ़ैल गयी …पैर मुटना भी ज़रूरी था …सो जैसे hi हु हिल्ली नीड में hi सुल्तान हिला और बंद आखों के बाद भी उसके होठ सिद्ध उसकी चूचियों पैर लग गए …

जिसपर सराह “ है नींद मैं भी चैन नहीं है …देखो कैसे चूस रहे हैं …है पता नहीं अपनी अम्मी को भी कितना चूसा होगा इन्होने बचपन में ….”

सुल्तान “ बेगम अम्मी को जितना चूसा सो चूसा पैर अभी तुम्हे चूसना है …क्यों कोई प्रॉब्लम..”

सराह “ है आप जाग रहे हैं हटिये न मुझे पिशाब जाना है ,,,”

सुल्तान “तोह जाओ मुट्ठ लो “

सराह “ या मौल्ला !!!!! आप कमसे काम पिशाब hi बोल देते ..मुट्ठ कितना गन्दा अल्फ़ाज़ है.. ची !”

सुल्तान “ बेगम हम तोह मुट्ठ hi बोलेंगे जो चाहे कर लो ..”

सराह “ आपको जो बोलना है बोलिये पैर मुझे जाने दिज्ये ..”

सुल्तान भी अब बहस नहीं करता और सराह की मोती गांड को थिरकते हुए जाते देखता है अपने बैडरूम के जॉइंट आत्ताच बाथरूम में और कुछ सोचने लगता है ..वह अपनी सोच में डूबा हुआ नंगा hi बीएड ? लेता हुआ अपने रूम की चाट को देखता हुआ अपनी सोच में गम था …

उसकी सोच को थोड़ी देर में तोडा उसकी बीवी सराह ने …”क्या हुआ आप कहाँ खोये हैं…”

सुलतान “तुम जानती हो न मेरा क्या काम है …और मैं क्यों परेशान हूँ ….उपपरवाला जनता है आजकल कितनी टेंशन है …और शायद किसी दिन पता नहीं क्या हो जाए …???”

सराह “ ऐसी बात न कीजिये आपको उस मौल्ला का वास्ता …आपको मेरी कसम ऐसी मनहूस बात न करो …जानती हूँ आप पैर कितनी टेंशन हैं …और समझती भी हूँ …बस आप अल्लाह पैर भरोसा रखे ,,उसकी नेमत सब पैर है …और मैंने कभी आपको कुछ कहा है क्या ….आप से सिर्फ गिना चुना मिल पाती हूँ इस दुनिआ मैं आपकी जायज़ बीवी होने के बाद भी इस दूर farm-house ? पैर अकेले कैद हूँ पैर आपके साथ हूँ न …”

सुल्तान “ बेगम तुम में मेरी जान बस्ती है …खुद पैर मैं कोई भी जख्म बर्दास्त कर सकता हूँ पैर तुम पैर एक खरोच भी nahi…aag ? लगा दूंगा साड़ी दुनिआ को …अगर किसी ने तुम्हें छुआ तोह ..!!!”

सराह “ मेरे शोहर मुझे भला कोण छू सकता है आपकी इज़ाज़त के …और मुझे खुद बर्दास्त नहीं की किसी और किन ाज़ार भी पड़े मुझपे …ाचा अब यह सब छोडें और त्यार हो jayen…aapko दिन रहते निकलना भी है…”

सुल्तान नंगी सराह को अपने उप्पेर खींचते हुए …”बेगम दिन ख़तम होने में अभी कुछ टाइम बाकी है और तब तक अपने शोहर को थोड़ा और प्यार कर लेने दो साथ में अछि सी चुदाई भी …” इसके साथ hi सुल्तान ने उसकी फुल्ली गांड पैर अपने हाथ चलने सुरु कर दिए और उसकी ऊँगली ….

इस्स्स्सस्छ्हःहःहः!!!!! AAAAAAAhhhhhhhhhhhhh! एक सिसकी निकली सराह की …

“”आआअह्हह्ह्ह्हह !!! आपको कितनी बार कहा है न की वहां हाथ न लगाया कीजिए …मैं त्यार नहीं हूँ उसके लिए …और वैसे भी वहां से सिर्फ गंध निकलता है …”

हाँ सुल्तान की ऊँगली सराह की गांड में थी जो अंडर ता हलचल मज़ाये हुए थी ..पैर सराह ने आजतक सुल्तान को अपनी गांड से दूर रखा था ….क्युकी गांड मरवाने के नाम पैर सराह की गांड पहले hi फैट जाती thi…per सुल्तान को हु उसकी भरपाई लोढ़ा चूसकर कर दिया करती थी…

खैर उसके बाद सुल्तान ने भी जोर नहीं दिया और क्युकी हु भी सराह के जवाब जनता था …सो उसने थोड़ा और देर उसकी गांड को अपनी उंगली से कुरेदा और उसे गरम किया …और एक और राउंड चुदाई का चला जिसके बाद दिन भी ढलने लगा था …

सुल्तान भी चुदाई और उसके बाद अचे से फ्रेश होकर निकल farm-house ? से और चल पड़ा अपनी मीटिंग प्लेस पैर उसका इंतज़ार उसका पार्टर कर रहा था…

पैर बिज़नेस में कब कोनसा पार्टनर कब अपने पुराने पार्टनर को बदलने का मूड बना ले कहना मुश्किल है …और बिज़नेस में कब कोण किस साइड आजाये यह तोह सिर्फ वही बता सकता है …जिसको आगे प्रॉफिट नज़र आये ….

खैर आज सुल्तान हस्सान पठान की किस्मत को भी शायद कुछ और hi मंज़ूर था …या शायद उसके पार्टनर की प्लानिंग उसके खिलाफ थी …

उसने सुल्तान को भरी मार्किट में बुलवाया था ….जहाँ सुल्तान अपनी कार ? से पुहंच गया था ..पैर आगे के तंग रस्ते के चलते सुल्तान अब पैदल चल दिया सामने के ढाबे टाइप होटल के छोटे से बालकनी से उसके पार्टनर ने हाथ हिल्या ..और आगे आने का इशारा किया …

और उसके हाथ हिलाते hi सुल्तान ने अपने पुराने पार्टनर गुलफाम कुरैशी को देखकर एक मुस्कराहट के साथ आगे बढ़ने लगा …

पैर आज सुल्तान को यह नहीं पता था …की आगे आने का हु इशारा सिर्फ उसी के लिए hi नहीं था …किसी और के लिए भी था …उसके हाथ हिलने के साथ hi सुल्तान का ध्यान तोह गुलफाम पैर था सो आगे बढ़ने लगा उस होटल टाइप ढाबे की तरफ ….रास्ता क्युकी मार्किट थी तोह तंग था …भीड़ भाड़ अचे से मार्किट में थी …उस पैर आज संडे का दिन भीड़ और भरी थी मार्किट में शायद आज सभी अपनी पसंद का सामान निकल आये थे लेने …

खैर सुल्तान आगे बाद रहा था पैर उसके साथ hi बाद रही थी मौत उसके करीब दो लोगो की शकल में जिनके हाथ में अलग किस्म के चाकू थे … उनको चाक़ू कहना गलत होगा ….वह एक गुप्ति टाइप के कुछ थे (गुप्ति या सुअन वह होगा जो आपने शायद कभी बर्फ यानि आइस तोड़ने वाले को देखा होगा, जो पतला और बहुत नुकीला और शार्प होता है…)

तोह आप समझ सकते है हैं गुप्ति क्या है वही लिए दोनों आगे बाद रहे थे अलग अलग साइड से ताकि अगर एक भी चुके तोह दूसरा अपना काम कर सके ….

सुल्तान कुछ hi कदम चला होगा की टककककक! की आवाज़ आयी सुल्तान को …..

और सुल्तान ने देखा ठीक उसके कमर के पास एक लड़का …एक सब्ज़ी तोलने वाले बर्तन सी एक चाक़ू को रोके हुए है …एक लड़का उसके और उस चाक़ू के बिच में उस बर्तन को अदाए हुए था …सुल्तान के लिए इतना काफी था …उसे अचे से समझ आ गया था की उसकी फील्डिंग सेट है आज यहाँ उसको बुलाना और मरवा देना यही इस मीटिंग का मक़सद है …वर्ण सुल्तान पल में कहाँ पल में कहाँ ..सुल्तान अपने धंदे बोले तोह बिज़नेस के चलते कहीं भी रुका नहीं करता था …क्युकी उसके दुश्मन भी सुल्तान को कब कहाँ लुढ़का दें यही वजह थी सुल्तान पल में कहीं पल में कहीं और निकल जाया करता था….

खैर उसकी कमर के पास उस लड़के से रुकी हुई चाक़ू देखकर सुल्तान फ़ौरन हरकरत में आज चूका था उसने दूसरी तरफ देखा तोह उसे दूसरा शख्स भी नज़र आ गया जिसके हाथ में चाक़ू था …और उसके बिलकुल नज़दीक था पैर उसके साथी की चूक ने उसको थोड़ा रुकने पैर मज़बूर कर दिया था …क्युकी उसे शायद बता दिया गया था …की सुल्तान अगर बचा तोह तुमको जिन्दा नहीं छोड़ने वाला …

सुल्तान को उस लड़के की फ़िक्र भी थी क्युकी एक अनजान फ़रिश्ते ने उसकी ज़िन्दगी और उम्र आज और बड़ा दी thi…per सुल्तान कुछ कर पता उससे पहले लड़के के हाथ और पेअर बिजली की रफतार से उस चाक़ू वाले पैर बरसने लगे …सुल्तान अब हैरत में था …

उसके साथ उसके सामने खड़ा हु चाक़ू वाला शक़श भी क्युकी खली हाथ होते हुए भी उस लड़के के गुणसे (पंच ?) और लात (किक ) से हु हथियार होते हुए भी कुछ नहीं कर प् रहा था …सुल्तान और आदमी जो सुल्तान को मरने आया था …दोनों hi एक अनजान से तमाशे में फास गए थे जिसमे एक कातिल था जिसका काम पैसे के लिए किसी को मरना था और सामने एक लड़का था जो खाली हाथ था पैर उसकी फुर्ती और गज़ब के डाव पेंच के चलते हु आदमी उसे छू तक नहीं प् रहा था ….

की अचानक उस लड़के ने एक डबल फ्लिप के साथ उसके सामने खड़े चाकू वाले के सर पैर एक ज़ोरदार किक जड़ दी जिसके पड़ते hi हु आदमी …बेहोश हो गया …जिसके बाद हु लड़का मुदा और सुल्तान की और आने लगा ….

सुल्तान और हु दूसरा किलर उसके साथी बेहोश होते hi अचनाक नीड से जगे …पैर हु किलर कुछ करता उससे पहले hi सुल्तान ने उसके हाथ से हु चाकू चीन लिया और सुल्तान ने उसके हाथ से हु चाक़ू खिंच लिया और उसी के गले पैर लगा दिया …

सुल्तान ”सिर्फ एक बार पूछूंगा किसने तुम्हें यहाँ बेह्जा hai..ek बात और तू बता या मत बता मरेगा तू जरूर पैर तेरे घर से भी कोई नहीं बचेगा यह सुल्तान हस्सान पठान का वडा है ..” और सुल्तान ने धीरे उसके गले के लेफ्ट साइड से हु चाक़ू थोड़ा अंदर चुभाया जिस के बाद उसका खून निकलने लगा …

“गुलफाम कुरैशी ने भेजा है मर्दो पैर घरवालों को कुछ मत करना …उनके लिए hi यह करने आया था …”

सुल्तान कुछ करता उससे पहले hi उस लड़के ने न का इशारा किया ….सुल्तान ने देखा और छोड़ दिया उसे …

सुल्तान “ जा निकल जा आज के बाद कभी तेरे हाथ में चाक़ू दिखा या कभी तुझे गलत करते देखा तोह तेरा नाम और तेरा खानदान दोनों में से कोई नहीं होगा ….यह पहली बार है सुल्तान हाथ में आये किसी दुश्मन को जिन्दा छोड़ रहा है …निकल ले “

हु उठा और अपने गेरे साथ को लेकर हवा की तरह निकल गया ….

उसके बाद सुल्तान ने मोबाइल निकला और किसी से बात की…

वहां मार्किट में इस वक़्त एक कर्फ्यू सा लगा चूका था …हु तोह तभी उतना हिस्सा कहली हो चूका था …जब उस लड़के ने उस किलर को रोका था सुल्तान को चाकू मरने से …उसके बाद सुल्तान ने जब उसके बाद दूसरे किलर के गले पैर चाक़ू लगया तोह आस पास के लोग भाग गए थे…

सुल्तान ने मोबाइल पैर बात ख़तम की ..उस लड़के की तरफ बड़ा ..

सुल्तान “बहुत बहादुर हो तुमने आज सुलतान हस्सान पठान की जान बचा कर उसे खरीद लिया है …दिल से सुकरिया बचे …तुम्हारा एहसान है मुझपे ..”

लड़का “कोई एहसान नहीं रहा मैंने आपको बचा और आपने सिर्फ मेरे कहने पैर अपने मारने वाले को छोड़ दिया एहसान बराबर हुआ ..वैसे उसने आपके नाम की जिससे पेमेंट ली थी हु अभी शायद दुबारा कुछ करे अपना ध्यान रखना आप..”

सुल्तान “ नहीं हु कुछ नहीं कर सकेगा हु यहीं था ..जिसने सुपारी दी थी मरने की ..पैर अब तक उसकी कार ? में बम लग चूका होगा या उसको मेरा शूटर देख लेगा क्युकी यहाँ से तोह हु कबका निकल चूका होगा पैर आगे कुछ करने के लिए मेरा पार्टनर जिन्दा नहीं बचेगा …क्युकी दुश्मन को एक बार बक्शा जा सकता है पैर गद्दार दोस्त को नहीं…”

उस लड़के के चेहरे पैर गद्दार दोस्त का नाम आते hi एक अज़्ज़ेब सी नफरत उभर आयी थी जिसे सुल्तान ने अचे से देख लिया ..

सुल्तान “लगता है किसी बहुत करीबी से धोखा खा चुके हो बचे …तुम भी क्युकी जो दर्द तुम आज देख रहे हो हु दर्द मैं कई बार झेल चूका हूँ …”

Ladka”haan कुछ ऐसा hi है जनाब..

“जो करीब होता है दिल के , जिस से दिल मांगता है हर पल सुकून.


धोखा देना काम है इस दुनिआ का कर देते हैं उसी दिल का खून..”



सुल्तान “लगता है कोई गहरा जख्म मिला है किसी करीबी से ..अरे मैं सबसे ज़रूरी बात तोह बुल hi गया तुम्हारा नाम क्या है ..??”

लड़का “ मानव सिंह नाम है मेरा और मेरे अपने मुझे मनु कहते हैं..”

सुल्तान “ मनु ाचा लगा तुमसे मिलकर आज का एहसान तोह उतर नहीं सकता पैर आज के बाद सुल्तान की जान और खुद सुलतान तुम्हारे नाम है …”

मनु “अरे आप बड़े है आपको निचा दिखाकर मैं चैन से कैसे बेथ सकता hun..acha अगर आप कुछ करना चाहते तोह मुझे कुछ सीखा देना ..ok “

सुल्तान “दोने मनु “ उसके साथ हाथ मिलकर दोनों चल दिए एक साथ क्युकी सुल्तान मनु के बारे में और जानना चाहता था …और दोनों चल दिए मार्किट से बहार ? में सुल्तान के अड्डे की तरफ …

जहाँ पहुंच कर दोनों ने चाय पैर बातें होने लगी…?

सुल्तान की एंट्री मनु की ज़िन्दगी में क्या रंग लेन वाली थी :hunter:…or मनु का एहसान सुल्तान कैसे चुकाएगा :beaten:..iska जवाब मनु की किस्मत या टाइम के पास hi होगा..
:हिंट:
 
अपडेट 58

बचपन की यादें

सुल्तान की एंट्री मनु की ज़िन्दगी में क्या रंग लेन वाली थी …और मनु का एहसान सुल्तान कैसे चुकाएगा ..इसका जवाब मनु की किस्मत या टाइम के पास hi होगा..

अब आगे....

सुल्तान और मनु पूछनचे सुल्तान के अड्डे पैर जहाँ सुल्तान ने मनु को अपने स्पेशल रूम जोकि साउंड प्रूफ था जिसमे एक आलीशान बीएड और सामने कई स्क्रीन लगे हुए थे जिनमे अलग- अलग एंगल से लाइव फुटेज चल रही थी…

जी हाँ उन स्क्रीन पैर कैमरा के फुटेज थे …जो सुल्तान के और कई अड्डों से जुड़े हुए थे जिन पैर सुल्तान अपने इस रूम से आराम से मॉनिटरिंग कर सकता था ऐसे रूम उसके हर अड्डे पैर थे मतलब ऐसे रूम जिनको कण्ट्रोल रूम भी कहा जा सकता है …उनको सुल्तान खुद देखा करता था या सुल्तान का कोई ख़ास आदमी …

खैर मनु और सुल्तान दोनों उस रूम में आये और सुल्तान ने इशारा किया और चाय के लिए बोल दिया जिसके बाद सुल्तान ने मनु से कहा “हाँ तोह मनु तुम बड़े बहादुर हो पैर अभी छोटे हो पैर तुम को देखकर लगता है काफी धोखे देखें हैं तुमने अपने जीवन में …अगर भरोसा हो तोह बता सकते हो मुझे ताकि हो सके तोह शायद मैं कुछ मदद कर सकूँ …??”

मनु “ बात ऐसी नहीं है की भरोषा न करुणा आप पैर ,,,पैर जिनपर भरोसा था उन्होंने भी कमी नाम नहीं दिए भाई …”

सुल्तान “ एक तरफ भाई कहते हो और दूसरी तरफ भाई को hi अपने दुःख से दूर करते हो …क्या भाई पैर भरोसा नहीं तोह यह लो …”सुल्तान ने पास रखा चाकू लिया जो शायद पहले रूम में किसी ने फ्रूट काटते हुए रखा होगा …”यह लो यह खून और इस भाई की जान आज से इस छोटे भाई के नाम है …अगर अब भी यकीं न हो तोह किसी से पूछ लेना सुल्तान दोस्ती और दुश्मनी दोनों को जान लगाकर निभाना जनता है…”

मनु ने जब सुल्तान का खून उसके हाथ से बेहटा देखा तोह अपने रुमाल से उसे पट्टी की तरह बांध कर रोक दिया और बोलै “ नहीं भाई आप तोह पुरे फ़िल्मी इंसान निकले यह तोह ज़ंज़ीर याद दिला दी शेरखान की मच का बाल और शेरखान की यारी याद दिला दी आपने पैर खून बहाने की ज़रूरत नहीं थी भाई ,,,हु क्या है न अब थोड़ा दोस्त सोच समझकर बनाना चाहता हूँ …क्युकी शायद मैं इंसान अचे से परख नहीं पता हूँ अभी भी ”

सुल्तान “ देख मनु भाई कहा है न एक बार अपने इस भाई को सब सुच कहकर देख कसम है उस उपपरवाले की जहाँ तुन यही भी बोलेगा वहाँ यह सुल्तान तेरे साथ होगा …यह वडा है अब बता भी दे या मरुँ और कोई डायलाग हाहाहाहा!” ……इस बात पैर दोनों हंस पड़े ..

मनु ने इसके बाद सारा कुछ मतलब अपनी साड़ी कहानी बता दी …हाँ उसने बहुत कोशिश की …की निशा के बारे में न बताये पैर सुल्तान ने खोद खोद कर पूछा और भाई के नाम का वास्ता दिया तोह मनु ने मज़बूर होकर सब बता दिया ….जिस पैर सुल्तान ने सब ध्यान से सुना और समझ गया की कैसे चिंटू और उसके chacha,uska ससुर और family(chacha की फॅमिली) और साथ में उसकी पड़ोसन रजिनि कैसे उसकी फॅमिली के लिए खतरा हैं और सबसे बड़ी बात कैसे सब उसकी फॅमिली में अपनेपन के नाम पैर इन्वॉल्व हैं..

सुल्तान एक गहरी ख़ामोशी में चला गया tha…per मनु ने अभी भी उसे से अपने और मास्टर के साथ को पुरे सोचे समझे तरीके से उस से छुपा लिया था क्युकी चाहे कुछ भी हो मास्टर को हर किसी के सामने हु उजागर बोले तोह रेवेअल नहीं करना चाहता था …

सुल्तान अपने मन में “ अगर कोई इंसान ाचा हो पैर उसकी अच्छी का hi लोग फ़ायदा उठाने लगे तोह मनु जैसे लोग अगर नफरत न करें तोह क्या करें इस में इसकी गलती भी क्या है दोस्त धोकेबाजज़ चाचा मक्कार प्यार बेवफा …और पडोसी कमीना और चालबाज़ …तोह इंसान करे भी तोह क्या ?? अगर यह नफरत करे तोह उसमे गलत भी क्या होगा …क्युकी अच्छी के साथ सही और गलत को समझना भी जरूरी है वार्ना यह नन्हा फरिश्ता जिसने आज मेरी जान बचाई है नफरत की आग में दुनिआ से दूर अपने में अकेला हो जायेगा ….नहीं सुल्तान ने मनु को भाई कहा है और भाई मन है इसकी अच्छी अगर ख़तम हो गयी तोह दुनिआ में अचे लोग तोह वैसे भी काम हैं और अचे लोग अगर अच्छी छोड़ देंगे तोह क्या hoga…nahi मैं ऐसा होने नहीं दूंगा …मनु आज से सुल्तान तुझे हर बुरे वक़्त मैं कैसे लड़ा जाता यह सिखयेगा …और शायद इससे मेरे गुनाह भी कुछ काम हो जायेंगे ”

मनु “भाई क्या सोच रहे हो ???”

सुल्तान “कुछ ख़ास नहीं ाचा एक बात कहूं सच बताना ?”

मनु “ कहो भाई कहा है तोह सच hi कहूंगा न और वैसे भी सब कुछ बता तोह दिया है आपको ??”

सुल्तान “मनु मेरे भाई जैसे की तुमने बताया की तुम्हारे खिलाफ कुछ औरतें भी हैं उनका क्या सोचा है तुमने ???”

मनु “ मतलब सोचना क्या है मुँह तोड़ दूंगा उनका और क्या ??”

सुल्तान को हंसी आ गयी इस बात पैर …अपने सर पैर हाथ मार्कर हंसा और बोलै “मतलब साडी ौरातून का मुँह तोड़ डोज हैं न ,,,??”

मनु गुस्से से “ और करना क्या है जैसे आदमी वैसे औरत मुँह तोड़ दूंगा आनेवाले टाइम में सभी का क्युकी नफरत के शिव कुछ नहीं है मेरे पास उनको देने के अलावा ..”

मनु की यह बात सुनकर सुल्तान की हंसी भी गायब हो gayi,,use मनु का गुस्सा और दर्द दोनों सुल्तान को अंडर से हिलाकर रख गया …उसे कहीं न कहीं मनु का बचपन पीछे छूटता नज़र आया ..

मनु “ भाई मैं तोह ाचा खासा हसने और खुश रहने वाला इंसान था आसपास मदद करना मुझे संस्कार में मिला है ,पैर लोगो के लिए जितना ाचा सोचा जितना ाचा किया मुझे उसके बदले में मिली नफरत हु नफरत जिसको न कभी मैंने चाहा न कभी मैंने माँगा पे कितना भी प्यार बांटा फिर भी मिली मुझे नफरत मुझे जैसे इस नफरत को मुझसे मोह्हबत हो तोह कहीं न कहीं इस मोह्हबत से मुझे भी मोह्हबत है…



“ इश्क़ करनेवाले को इस जालिम दुनिआ ने गुमनाम कर दिया ..


किया इतना क़त्ल इस इश्क़ का की muqddar-e-nafrat मेरे नाम कर दिया..”



इस शेर और इसके पीछे मनु का दर्द देखकर सुल्तान चाहकर भी खुद को न रोक पाया मनु को गले से लगने से उसने चेयर से उठकर मनु को खींचकर अपने गले लगा लिया उसके सर पैर हाथ फिरकर मनु को हिम्मत देने लगा या शायद खुद को क्युकी मनु के बारे में जानकार उसे कहीं न कहीं मनु से अपनापन और हमदर्दी हो गयी थी ,पैर जबसे मनु ने उसे भाई कहा तोह उसने भी खुद को मनु का भाई मान लिया था ..क्युकी अब परिवार के नाम पैर उसकी सिर्फ बीवी बची थी ..

सुल्तान का आदमी ने गेट पैर नॉक किया और सुल्तान ने भी खुद को संभाला …और चेयर पैर वापस बेथ गया …उसकी देखा देखि मनु भी बेथ गया चेयर पैर ..उसके बाद सुल्तान ने अंदर आने को कहा और हु चाय सर्व करके चला गया …दोनों चाय पिने लगे ..

सुल्तान “देख मनु एक बात कहना चाहता हूँ दुनिआ हमेशा वैसे नहीं होती जैसे दिखती है …जनता हूँ दुनिआ दोखेबाज़ो से भरी पड़ी है पैर इसका मतलब यह नहीं की तुम मुस्कुराना छोड़ डोज और लोगों पैर हमेशा शक करते रहोगे ,,मैं शक करने और बेवजह किसी पैर ऑंखें बंद करके भरोसा करने को नहीं कह रहा हूँ बस यह कह रहा हूँ की तुम सब कुछ मैनेज करके आगे बड़ो और अचे बुरे में अंतर करके सही और गलत को सही से देखकर उसके हिसाब से अपने फैसले ले सको …! समझे मेरा मतलब ??

मनु “ हाँ भाई आपका मतलब समझ गया पैर औरतों पैर हंसने से मतलब कुछ समझ नहीं आया..??”

सुल्तान “ हु अभी समझ भी नहीं पाओगोगे अभी क्युकी तुम छोटे हो सो हर जगह मुँह तोड़ देना सही नहीं होगा बस अभी के लिए इतना समझ लो की हर औरत का मुँह तोड़ देना इसका हल नहीं होगा और इस पैर आएगी कोई सवाल नहीं करना बस मेरा भरोसा करो और आगे जो कहूंगा उसे मान लेना एक बड़े भाई की बात समझकर ok??”

मनु “ठीक है भाई जैसा आप कहो ..” मनु ने हाँ में सर हिलाते हुए कहा …क्युकी उसे अब तक सुल्तान का उसके लिए लगाव उसे भी कहीं न कहीं समझ आगया था …

सुल्तान “ देखो मनु ौरातून से डील करना मैं तुमसे ज्यादा अचे से जानता हूँ क्युकी मैं तुमसे बड़ा हूँ तोह तुम इस पैर जो मैं कहता हूँ मान लो ..और भरोसा रखना आगे भी सब सही होगा ..!”

मनु “ ाचा भाई आपने अपने बारे में कुछ नहीं बताया ??”

सुल्तान “ मनु मेरा नाम तुम्हे अचे से पता है और मैं हथियारों और लड़कियों का काम के साथ और भी कुछ काम देखता हूँ और जिस उस्मान से तुम्हारा झगड़ा हुआ था हु कभी मेरा hi चेला था सो अभी के लिए इतना समझ लो की आगे कोई भी बात हो सुल्तान मानव के आगे एक बड़े भाई की तरह हमेशा खड़ा होगा हाँ जनता हूँ तुम एक अचे लड़ाकू हूँ पैर बात जब पुरे गैंग से लड़ने की हो तब अकेला इंसान ज्यादा कुछ नहीं कर सकता है सो अभी सिर्फ अपनी ज़िन्दगी और सिखने पैर धयान दो और लड़कियों से कैसे निबटना है हु तुम्हे सुल्तान अचे से सीखा देगा “

मनु ने सिर्फ हाँ में सर हिल्या और सुल्तान उठकर खड़ा हुआ और किसी को उसने कॉल किया मनु वहां चाय के साथ आये बिस्किट्स और नमकीन खाने लगा …

सुल्तान “hello मैं सुल्तान बोल रहा हूँ पहचाना न मुझे ??”

उधर से “ हाँ पहचान लिया सुल्तान शाहब आपको अचे से कहिये आज कैसे याद आगयी इस नाचीज़ कनीज़ की ??” जी हाँ उधर से कोई औरत बोल रही थी..

सुल्तान “ जानता हूँ तुमने यह लाइन छोड़ दी है ,पैर एक काम था तुमसे तुम्हारी एक हेल्प चाहिए मुझे किसी ख़ास के लिए क्या मैं तुमसे उम्मीद कर सकता हूँ ??”

हु औरत “ देखको आपने अगर मुझे उसी काम के लिए कहा है तोह माफ़ करना मैंने हु सब छोड़ दिया है अब इस जिस्म पैर सिर्फ मेरे मालिक का हक़ है..”

सुल्तान “ मेरा हु मतलब नहीं है मेरा एक भाई है हु अभी छोटा है उसे औरत से लड़ने का मतलब सिर्फ उनका मुँह तोड़ना आता है उसको औरत से सही मायने में कैसे लड़ा जाता है सीखना है ,,इसमें तुम्हारी मदद चाहिए मुझे “

हु औरत हँसते हुए “ ाचा जी ऐसा कोण है जिसे औरत का सिर्फ मुँह तोड़ना आता है और एक मिनट आपका भाई कहाँ से पैदा हुआ जहां तक मुझे पता है आपके खानदान में सिर्फ आप hi बचे है या आपकी बीवी सो अचानक यह भाई कहाँ से पैदा हो गया ???”

सुल्तान “ हाँ जनता हूँ तुमने सही कहा दुश्मनो ने मेरे सारे खानदान को बम ब्लास्ट में उड़ाकर एक रोड एक्सीडेंट का नाम दे दिया था जिसके चलते आज भी मुझे मेरी सराह को छिपकर रखना पड़ता है ,पैर यह हु भाई है जिसके चलते आज सुल्तान जिन्दा है ,,आज उसने मुझे मरने से बच्या है और मैंने उसे अपना भाई मन है अपने खून की कसम खाकर और सुल्तान कभी झूंटी कसमे नहीं खाता तुम जानती हो ..??”

औरत “ हाँ सुल्तान साहिब यह बात भला इस शबनम से ाचा कोण जान सकता है जिसको उस जिस्म की गन्दी दलदल से आपने और मेरे मालिक ने जिन्दा निकल दिया वार्ना आज यह शबनम कहीं किसी रंडीखाने की रंडी hi रही होती ???”

हाँ आप सही समझे यह शबनम उर्फ़ फातिमा शेख hi थी मास्टर की हाँ आप समझ hi गए होंगे …

सुल्तान “ शबनम देखो जो वक़्त बिट गया सो बोत गया तुमने जब कहा की तुम यह सब छोड़ना चाहती हो मैंने रोका नहीं क्युकी सुल्तान गलत काम भी उसूल के साथ करता है …यह उपपरवाला जनता है मैं आजतक किसी से जबरदस्ती नहीं काम करवाया पैर जो यहाँ अपनी मर्ज़ी से काम करता है उसे कभी हम रोकते नहीं …खैर क्या तुम मेरी मदद कर सकती हो इसमें “

शबनम “ भला इसमें मेरा क्या काम पैर इतना तोह पक्का है की हु इंसान पक्का कोई जादूगर होगा जिसने आज सुल्तान से इस कनीज़ को याद करवा दिया …अगर आप गलत न समझे तोह जान सकती हूँ उसका नाम ??”

सुल्तान “ हाँ क्यों नहीं यह सुच hi कहा मैं खुद हैरान हूँ की पहली बार मैं खुद मैंने उसे अपना भाई मान लिया शायद उसकी अच्छी देखकर सुच में बहुत धोखे मिले हैं उसे बहुत काम उम्र में उसके अंदर झाँका तोह ऐसा लगा की अगर यह अपनी अच्छी छोड़ देगा तोह कहीं न कहीं उस उपपरवाले से एक ाचा बाँदा अलग हो जायेगा जो मुझे गवारा नहीं मैं इसकी अच्छी को मरने नहीं दे सकता इसके लिए तुम्हे याद किया है क्युकी बहुत काम लोग हैं जिनपर सुल्तान आज भी भरोसा करता है …!”

शबनम “ चलए ाचा लगा जानकार की सुल्तान को अभी भी शबनम पैर भरोसा है ..और आपकी बातों से उसे शक़श को देखने की तमन्ना पैदा हो गयी है जनाब कमसे काम कनीज़ को अब तोह उस अचे इंसान का नाम बता दो जिसके लिए खुद सुल्तान ने बरसो से भूली हुई शबनम को याद किया है …”

सुल्तान “ उसका नाम है मानव सिंह उर्फ़ मनु ..”

शबनम ने जब यह नाम सुना तोह एक झटका सा लगा उसे उसे तुरंत hi मास्टर का बताया नाम और मनु ने कैसे मास्टर की शराब छुड़ा दी याद आ गया था …उसने उसी दिन सोचा था की कैसे भी हो मनु ने मिलकर रहेगी पैर ुस्तिमे मास्टर ने उसे यह कहकर ताल दिया था की मनु को हु क्या जवाब देंगे ..पैर अब मनु का नाम सुनकर उसे यकीं नहीं हुआ की हु वही मनु है या कोई और जिसपर उसने सुल्तान से उसकी आगे और बाकी सब डिटेल पूछा ,,,सुल्तान ने भी यह सोच कर बता दिया की शबनम अगर मान जाये तोह ाचा होगा ..शबनम ने जब मनु की डिटेल सुनी तोह उसे यकीं हो गया की यह मनु मास्टर का मनु hi है ,पैर उसे इस बात पैर हैरानी हुई की सुल्तान से मनु कैसे मिला ..

शबनम “पैर एक बात समझ नहीं आयी सुल्तान शाहब की मनु आपसे मिला कैसे ???”

जिसपर सुल्तान ने भी अपने पार्टनर की गद्दारी और मनु ने कैसे बच्या सब बता दिया …जिसके बाद शबनम की समझ में सब कुछ आज्ञा ..उसे कहीं न कहीं लगा की” कुछ तोह बात है इस मनु में की पहले मास्टर और अब सुल्तान दोनों उसे अपना मान चुके हैं …वर्ण सुल्तान के पास कोई लड़कियों की कमी थोड़ी है हु चाहता तोह किसी को भी इस काम पैर लगा देता पैर सुल्तान ने उसे चुना जो अब धंधे से बहार थी मतलब सुल्तान नहीं चाहता की मनु गलत राह चुने इस लिए आज उसने सालो बाद उसे कॉल किया ताकि मनु को सही रस्ते पैर रखा जा सके …”

शबनम “ठीक है सुल्तान शाहब आपकी कनीज़ तैयार है पैर करना क्या है क्युकी हु तोह छोटा है अभी तोह आप समझ रहें हैं न उसके साथ ,,,औरत और मर्द का हु रिश्ता तोह ठीक नहीं है ,,तोह मैं इसमें आपकी मदद कैसे करूँ यह अभी तक समझ नहीं आया मुझे …??”

सुल्तान “ शबनम तुमको उसे औरत और मर्द का रिश्ता समझना है पैर जबानी पैर हु भी उसके सही से बड़े होने के बाद अभी तोह उसे औरत को कैसे रिझाना है और कैसे बातों से काबू में रखना है और कैसे कण्ट्रोल में रखना है सीखना है और उसे वही पुराणी दवाइयां देनी है जिससे उसकी मर्दानगी में इज़ाफ़ा हो सके और हु सही मायने में एक मुक्कम्मल मर्द बन सके ..समझ गयी न बस इतनी मदद चाहिए तुमसे …हाँ धयान रखना भाई है मेरा छोटा सो इसको तुम्हे सौंप रहा हूँ क्युकी सुल्तान काम लोगों पैर यकीं करता है और तुम उन काम लोगों में शुमार हो”” सुल्तान ने अचे से समझा दिया शबनम को मनु उसके लिए क्या मायने रखता है और शबनम पैर उसे कितना भरोसा है ..

शबनम “ समझ गयी जनाब मनु को लड़कियों और औरतों को कण्ट्रोल कैसे करते हैं सीखना है ,,,उससे जिस्मानी तालुकात नहीं बनाना और उन दवाइओं से उसे मुक़्क़मल मर्द बनाना है जनाब आपकी यह कनीज़ अचे से समझ गयी …और आपका मतलब भी अचे से समझ गयी शाहब की मनु का ध्यान रखना है की औरत के जिस्म को देखकर भटके नहीं और हर हाल में काबू रखे और दुसरऊँ मेरा मतलब है घोड़ियों को काबू में रखे …और कोई हुकुम साहिब??”

सुल्तान “ नहीं शबनम इतना अगर कार्डो तोह सुल्तान पैर तुम्हारा एहसान होगा सुल्तान तुम्हारा कर्ज़दार होगा हमेशा के लिए अगर तुम इस नन्हे फ़रिश्ते की अच्छी को मरने से बचा लो तोह यह एहसान होगा इस सुल्तान पैर तुम्हारा“

शबनम “साहिब कैसी बात कर रहे हैं आप आपने कैसे इस रंडी को बिना किसी बात के आसानी से रिहा करवा दिया वर्ण एक बार कोई रंडी बन जाये तोह उसकी ज़िन्दगी में सिर्फ दुसरऊँ के निचे लेटना hi होता पैर आपने और मालिक ने मुझे बज़्ज़ारो रंडी को दुनिआ में फिर से जीने की नयी वजह दी उसके आगे तोह यह सब कुछ भी नहीं है और वैसे भी आपने जैसे उसके बारे मैं बताया है मुझे खुद ख़ुशी होगी उससे कुछ सीखा सकूँ तोह शायद मैं भी खुद के कुछ गुनाह काम कर paun..or आप एहसान की बातें न करें क्युकी आज भी इस शबनम की हर सांस आपके और मिल्क की नाम की दें है और क्या पता उसे सिखाते हुए मैं खुद उससे कुछ सिख जाऊं ”

सुल्तान “ हाँ शायद ऐसा हो पैर अभी हु बहुत टुटा हुआ है बहुत धोके देखे हैं उसने सो शायद hi किसी पैर जल्दी भरोसा करे …खैर तुम समझ hi गयी हो क्या करना है सो कबसे भेजूं उसे तुम्हारे पास ??”

शबनम “ देखती हूँ आप थोड़ा सा टाइम दें मुझे ताकि सही से उसका ध्यान रख सकूँ और सही से देख रेख कर सहन उसकी ाचा अब रखती हूँ “ जिसके बाद शबनम ने कॉल ? कट कर दी

सुल्तान ने अब मनु से थोड़ी बात चित की और उसे समझया की उसकी एक दोस्त है जो उसे सही बर्ताव की ट्रेनिंग देगी की कैसे किसी के साथ सही तरीके के से पेश आना है …

मनु मन में “ लग गयी यार एक और ट्रेनिंग मेरी लाइफ या कोई गेम शो कितना ट्रेनिंग लूँ मैं सुबह गुरु जी और मास्टर की ट्रेनिंग उसके बाद स्कूल उसके बाद टूशन उसके बाद बिज़नेस की दो ट्रेनिंग और अब यह नयी ट्रेनिंग कैसे मैनेज करूँगा …पैर इसमें भी शायद कुछ नया सिख जाऊं चलो देखते हैं….” मनु ने नयी ट्रेनिंग को भी दिमाग से अपना लिया था …

उधर शबनम ने मास्टर को कॉल किया “ hello मालिक एक बात है कह सकती हूँ आपसे कुछ ???”

मास्टर “ हाँ कहो शबनम क्या बात है अन्य प्रॉब्लम ???”

शबनम “ नहीं मालिक कुछ बात है जिसमे आपकी परमिशन चाहिए ..??”

मास्टर “ हाँ कहो न कितनी बार कहूं तुम आज़ाद हों जो चाहे कर सकती हो मैं अभी थोड़ा बस्सी हूँ मीटिंग में हूँ हु तोह ाचा है की बहार था सो कॉल पिक कर ली जो ठीक समझो कर लो “ इसके साथ hi मास्टर तेज़्ज़ी के साथ अपने मीटिंग रूम की तरफ बढ़ने लगे थे …

शबनम “ मालिक यह मेरे बारे में नहीं है मनु के बारे में है “

मास्टर के कदम मीटिंग रूम के गेट पैर अचानक से रुक गए मनु का नाम सुनकर …”हम्म्म! मनु उसके बारे में क्या ??? ज़रा सब क्लियर कहो मनु का इन सब से क्या लेना देना है ??”

उसके बाद शबनम ने मास्टर को सुल्तान से हुई बात और मनु के नाम पैर उसकी सिफारिश के साथ सब कुछ बता दिया और कैसे मनु ने उसकी जान बचाई थी यह भी बता दिया ..और सुल्तान ने क्या कहा था की मनु को सही तरीके के साथ ौरातून के साथ पेश आना है हु भी बता दिया …

जब मास्टर ने मनु की बहादुरी सुनी तोह उनके चेहरे पैर एक प्राउड से भरी मुस्कान आ गयी ..पैर साथ मैं एक बात ने दिमाग में एक टेंशन भी दी की मनु ने किसी और की लड़ाई में बिच में कूद गया …

मास्टर “हम्म्म! तोह तुम क्या चाहती हो साफ़ साफ़ कहो ??? बिना किसी टेंशन के की तुम्हारी इस पैर क्या राइ है???”

शबनम “ मालिक सुच कहूं तोह आज सुल्तान ने हु कहा है जो शायद आपको सोचना चाहिए था …”

मास्टर “मतलब ??”

शबनम “ मालिक मनु आपका शागिर्द है ….है या नहीं ???”

मास्टर “ हाँ तोह उसमे सुल्तान का क्या काम??”

शबनम” मालिक ठन्डे दिमाग से सोचिये की मनु अभी बचा है उसका गुस्सा अगर बड़ा और अभी उसके बूल थे की “औरतों का भी मुँह तोड़ दूंगा “ तोह सोचिये यह सही होगा क्या …??”

मास्टर “ तुम कहना क्या चाहती हो साफ़ साफ़ कहो न जब कह चूका हूँ अपनी राइ कहो तोह पहेलियाँ क्यों पूछ रही हो??”

शबनम “ मालिक मेरा मतलब है आगे बहुत मौके ागेंगे मनु की ज़िन्दगी में जहाँ उसका सामना चालाक ौरातून से होगा जिनके चेहरे को देखकर उनके दिल में क्या है मनु श्याद न समझ पाए तोह क्या मनु सभी के मुँह तोड़ देगा नहीं न आज सुल्तान ने जो कहा सही कहा की मनु को औरतों से डील करना सीखना होगा उसे एक मुक़्क़मल मर्द बनाना होगा क्या आप नहीं चाहते की आपका एक लौटा शागिर्द जिसमे आप अपने बेटे को देखते हैं क्या हु दुनिआ में कहीं भी किसी भी चीज़ में फ़ैल हो ???”

मास्टर को शायद शबनम ने आनेवाले कल का हु चेहरा दिखा दिया जिसपर शायद उन्होंने खुद नहीं सोचा था पैर मनु अगर कहीं भी फ़ैल हुआ तोह उसमे मास्टर को कितना दुःख होगा यह सोचकर hi मास्टर को गुस्सा आगया …मास्टर मन में ”नहीं मेरी किसी भी गलती के चलते मनु कहीं नहीं हारेगा जिस दिन से उसे अपना माना है मेरा मोहित मुझे उसमे दीखता है और मैंने भी तोह उसे हर तरह से फाइटर बनाना का सोचा है तोह यहां क्यों नहीं मेरा मनु हर जगह जीतेगा हर जगह चाहे fighting-ring हो या बैडरूम के बीएड की फाइट उसे भरपूर मर्द बनना hoga..or वैसे भी हर जगह औरतों का मुँह तोड़ देना यह बात सरासर बचपना है जो अभी तोह सुननेमे हंसी दिलाते है पैर आगे कदम कदम पैर मनु को जब औरतों से ru-baro होना पड़ेगा तब क्या होगा …यह बात मज़ाक बन जाएगी नहीं उस सुल्तान ने और शबनम ने ठीक कहा मनु को यह सब भी सीखना होगा …यही सही रहेगा ..पैर कैसे हु अभी बचा hi तोह है तोह उसे कैसे समझा सकता हूँ …””

मास्टर अपने खुद के दिमाग में ख्यालों से जूझने लगे थे पैर कुछ समझ आये तोह कहें न …

शबनम “मालिक आप सुन रहे हैं न ???”

मास्टर अपने ख़यालून के भवर से बहार आते हुए …”हाँ हाँ सुन रहा हूँ पैर यह सब होगा कैसे हु है तोह अभी बचा hi सो क्या किया जाए ???”

शबनम “ मालिक उसके लिए तोह आप सुल्तान के दिमाग की डाटा दें की उसने क्या कमल का आईडिया दिया है ???”

मास्टर “ मतलब ???”

शबनम “ मलतब यह की उसने कहा है की मनु मेरी देखरेख में baat-chit का सलीका सीखेगा की कैसे ौरातून के साथ डील किया जाइये और कैसे किसी को कण्ट्रोल में किया जाए और उसने यह भी कहा की उसकी पुराणी दवाई जिनसे किसी भी मर्द की मर्दानगी की ताकत किसी सांड जैसे बड़ाई जाती है वैसे मनु की मर्दानगी की ताकत बड़ों और उसका ध्यान रखूं ..पैर मालिक मैं बिना आपसे पूछे कैसे कुछ कह सकती थी सो पहले आपसे पूछना चाहा की आप क्या कहते हैं इस बारे में??”

मास्टर “ अगर बात तुम्हारी है तोह मुझे कोई दिक्कत नहीं है मुझे तुमपर उतना hi भरोसा है जितना खुद की परछाई पैर सो जो ठीक समझो तुम मनु को ट्रेनिंग दो जैसे सही समझो वैसे करो बस एक सवाल पूछूंगा सुच कहना ???”

शबनम ने जब सुना की मालिक उसपर अपनी परछाई जितना भरोसा करते हैं उसके मुँह से निकला “अब ज़िन्दगी से अपने वजूद की कोई शिकायत बाकी नहीं है “ मास्टर भी इस बात का मतलब अचे से समझ गए की शबनम को आज कितनी ख़ुशी हुई है पैर मास्टर ने इस पैर कोई रिएक्शन नहीं दिया था …पैर शबनम ने जब मास्टर का सवाल सुना तोह अचनाक बोल पड़ी” मिल्क कैसा सवाल तुम यह सब करोगी कैसे और ुंदवईओं से मनु को कोई नुक्सान तोह नहीं होगा न …??ऐसा नहीं है की तुम पैर मुझे कोई शक है पैर इसमें मैं सिर्फ मनु की फ़िक्र भी है मुझे सो प्ल्ज़ तुम मुझे गलत न समझना क्युकी मैं फिर से उस अकेले पैन में नहीं जाना चाहता ???”

शबनम “ मालिक मैं रंडी बनने से पहले एक अछि पड़ी लिखी लड़की थी पैर मेरी किस्मत ख़राब थी की घर से एक बार किडनैप हुई उसके बाद मैं जिस्म की मंडी में नीलाम हुई और जब आपने और सुल्तान ने मुझे छुड़ाया तोह जब मैंने अपने घरवालों के बारे में पता लगाया तोह उन्होंने यह कहकर नाता तोड़ लिया की रंडियों के परिवार नहीं होते पैर आपने मुझे जीने का सहारा दिया अपने ंगो की हेडबनाकर मुझे जीने की नयी वजह दी, और मालिक आपके चलते और अपने पुराने काम के चलते मैंने हर ाचो बुरी तरह की लड़कियों और ौरातून को करीब से देखा है सो मैं उनकी सोच अचे से जानती हूँ और उनसे निबटना भी और रही बात उन दवाइयों की तोह आप बेफिक्र रहे मैं उनका इस्तेमाल अचे से जानती हूँ और यह भी की उनका क्या असर होगा मनु पैर और मनु की मर्दानगी की ताकत मैं कितना इज़ाफ़ा होगा आप इस बात से समझ सकते हैं की आपने खुद भी हु दवा इस्तेमाल की हैं…”

मास्टर “ मैं कब अरे हाँ याद आया हु तुमने hi तोह दी थी न …ाचा ठीक है आज से मेरा दिल तुम्हारे हवाले जैसे सही समझो उसे सिकहो और एक तेज़धार चाकू सा तेज़ बनादो मेरे दिल मनु को और हाँ शाम को तुम्हारा इनाम farm-house ?में तुम्हारा इंतज़ार कर रहा होगा …समझ गयी न ”

शबनम “ हाँ मालिक समझ गयी मेरा इनाम और आपका दिल मेहफ़ूज़ होगा मेरे पहलु में यह आपकी इस कनीज़ का वडा है और हाँ आज निचे से मैदान साफ़ है आपका आर्डर था न सो सफाई हो गयी है ाचा अब रखती हूँ सुल्तान को भी जवाब देना है …”

मास्टर भी अब टेंशन फ्री थे सो हु अपने मीटिंग रूम के अंडर चल दिए …

जिसके बाद शबनम ने सुल्तान को कॉल किया और कल से मनु को आने को बोल दिया …..
:हिंट:
 
थैंक्स बीआरओ....



पहले भी कहा था की कहानी में बचपन और जवानी के साथ जितना हो सकेगा ईमानदारी से लिखूंगा ....सो

भाई नाराज़ न हो कहानी कहानी के हिसाब से hi लिख रहा हूँ बिना इंट्रो के कहानी शुरू इस लिए की थी ताकि जब भी कोई कहानी रीड करे तोह उसे हमेशा एक सस्पेंस मिले की आगे क्या होगा ...और शायद hi इस प्लेटफार्म पैर कोई कहानी हो जिसमे हीरो का बचपन इतना लम्बा चला हो ,,,

उसकी वजह भी थी जो उसके बचपन के साथ उसकी जवानी में जाते hi स्मार्ट लोग अचे से समझ जाएंगे ..

और वैसे भी बचपन का लगभग एन्ड है कुछ अपडेट बाकी हैं ...कहानी थोड़ी लम्बी है ..सो बे कूल बीआरओ ,,,


आगे बहुत कुछ होगा ..

थैंक्स फॉर रीडिंग & स्टेइंग विथ उस....
 
अपडेट 59

बचपन की यादें

मास्टर भी अब टेंशन फ्री थे सो हु अपने मीटिंग रूम के अंडर चल दिए …


जिसके बाद शबनम ने सुल्तान को कॉल किया और कल से मनु को आने को बोल दिया …..

अब आगे....

मनु और सुल्तान की मुलाकात से मनु की लाइफ में ट्रेनिंग के नाम पैर रहा शाह टाइम भी अब मनु के हाथ से छूटनेवाला था …या यूँ कहिये उसकी ट्रेनिंग किसी परफेक्ट योद्धा (वारियर ) की तरह हो चली थी …जिसपर मनु एक तरफ खुश था की नया कुछ सिखने को मिलेगा क्युकी मनु आलरेडी ाचा था बातचीत करने में पैर इंसानो को जज करने में हु कहीं न कहीं कच्चा था ….जिसके पीछे का करना अनुभव हीनता (एक्सपीरियंस की कमी ) थी जिसके चलते इंसान कभी कभी खुद को हालातों में फंसा पता है …क्युकी उसे सही फैसले लेना बेशक उसकी इंसानी फितरत हो पैर उसका कैलकुलेशन कितना सही होगा या कितना गलत यह पता तोह सिर्फ और सिर्फ उस इंसान के एक्सपीरियंस से hi पता चलता है ..

समझदार इंसान अपनी तरफ से हर तरह से सही फैसले लेने को कोशिश कर सकता है ..पैर उसका एक्सपीरियंस उस फैसले में उसकी जीत कितनी सटीक होगी यह परसेंटेज % डीडे करता है…

खैर मनु एक तरफ खुश था की उसे नयी ट्रेनिंग मिल रही है वहीँ एक तरफ सोच में था की इस नयी ट्रेनिंग के साथ उसकी लाइफ का रहा सहा टाइम भी उसके हाथ से गया. मनु इस बात पैर अब धयान नहीं दे पा रहा था की उसका बचपन एक लग राह पैर चल पड़ा है …जिसमे बचपन जैसा कुछ बचा hi नहीं था …लड़ाई धोखा और हर कदम पैर साज़िश जिनसे बचे के लिए मनु को अब शायद रात दिन त्यार रहना था …हु कभी हु दिन भी करता शायद जिसमे हु खुश रहा करता था पैर यहाँ तोह उसके पास सोचने जैसा टाइम भी बचा hi कहाँ था …

अगला दिन मास्टर के सामने मनु ट्रेनिंग पैर था …जिसपर मास्टर ने उससे पूछा “मनु तुम्हारा सुल्तान से क्या मटर था ..??”

जिसपर मनु ने बिना किसी चीज़ को छुपाये सब बता दिया और साथ में नयी ट्रेनिंग का भी जिसपर मास्टर ने kaha”dekho मनु तुम आज़ाद हो अपने फैसले लेने के लिए पैर तुम्हारी फ़िक्र होती है सो ऐसे hi किसी के जगदे में मत कूड़ा करो ok ???”

मनु “जी मास्टर पैर मम्मी से भी एक वडा किया था की बेगुनाह इंसान को बचने की कोशिश करूँगा क्या मैंने गलत किया मास्टर सुल्तान को बचा कर ???“

मास्टर “नहीं बीटा सही किया बात अगर मम्मी से वेड की है तोह ठीक hi किया मुझे तुम पैर सुच में दिल से नाज़ है …पैर तुमसे मैं कुछ मांग सकता हूँ ???“

मनु “ मास्टर आप तोह मेरे गुरु हैं भला आपको कैसे मन कर सकता हूँ …??”

मास्टर “ एक वडा करोगे मुझे से समझलो यही मेरी गुरुदक्षिणा है ???”

मनु” जी मास्टर कहिये कैसा वडा चाहिए आपको ???”

मास्टर “ बीटा सिर्फ इतना वडा करो आगे से तुम चाहे जो भी करो मैं तुम्हे किसी को बचने से नहीं रोक रहा हूँ …बस इतना कह रहा हूँ आगे से ऐसा जब भी हो जो की मुझे अचे से पता है होगा जरूर तोह तुम aas-pass का माहौल देखकर मतलब बिना दुश्मन की ताकत का अंदाज़ा लगाए बिच मैं नहीं कूद पड़ोगे …अगर कुछ करना है तोह करना मन नहीं है पैर बिना दुश्मन की ताकत मेरा मतलब उन सभी से भी है जो छुपकर वॉर करते हैं तोह उनसबको देखकर तुम लड़ोगे और दूसरे के साथ तुम अपना भी ध्यान रखोगे क्युकी तुम्हारे एक कदम से सिर्फ तुम hi नहीं तुम्हारी फॅमिली और तुम्हारे चाहने वाले लोगों पैर भी खतरा बन सकता है …सो वडा करो मुझे अपने गुरु से की तुम इन सब बातों का ध्यान रखकर किसी और की जान बचने के लिए सोचोगे …????”

मनु “ वडा करता हूँ मास्टर बिना दुश्मन की ताकत जाने बिच में नहीं कूदूंगा और खुद का ध्यान भी रखूँगा …यह वडा है मेरा अपने गुरु से …..पैर मास्टर आप चाहते तोह मुझे रुकने का वडा भी मांग सकते थे न ???”

मास्टर “ बीटा तुम को रोकने का वडा मांगना मतलब तुमसे तुमको चीन लेना क्युकी तुम्हारी परवरिश में तुम्हे हेल्पिंग नेचर मिला है सो अगर मैं तुम्हे ऐसा करने को कहूंगा तोह पता नहीं तुम क्या करते क्युकी कुछ लोग होते हैं जिनके हाथ पाँव किसी को परेशानी में देखकर खुद से रियेक्ट करने लगते हैं दुनिआ उन्हें हीरो का नाम देती है ..पैर ुनिनसानो की आदत होती है लोगो का भला करना …सो तुम्हे रोकना मतलब तुमसे तुम्हारी आत्मा चीन न होगा जो एक गुरु के लिए बहुत गलत होगा की हु अपने स्टूडेंड की आदतों का सम्मान न करे,”

मनु” फिर भी मास्टर आप चाहते तोह मैं कर देता वडा आपसे ..”

मास्टर “ नहीं मनु बीटा अगर ऐसा वडा लेता तोह श्याद मैं भी खुद को माफ़ नहीं कर पता …क्युकी इस दुनिआ में सभी तरह के लोग हैं जिन में हु लोग भी शामिल हैं जो खुद को बचा नहीं सकते .उनको बचना किसी भी मर्द की ड्यूटी है ,,और इन थे इतर हैंड इससे तुम्हारे लिए और ाचा होगा रोज़ज पंचिंग बैग्स से लड़ने से ाचा है इंसानो से लड़ना क्युकी पंचिंग बेग तो पलट कर वॉर करनेवाला नहीं है पैर इंसान खुद को बचने के लिए सब तरह से वॉर करेगा सो तुम इसे भी अपनी प्रैक्टिस या प्रैक्टिकल की तरह देखो की तुम कितना सिख चुके हो और खुद कितने पानी में हो …सो बस तुमको खुद की जान की परवाह करने को कहा है …और क्युकी अब तुमको फाइटर बनना है तोह choatain(injuries) भी लगेंगी पैर काम से काम चोटें लगाईं यह वडा लिया है ताकि तुम अपनी लिमिट क्रॉस न करो ..ok समझ गए न “”?

मनु “ लव ु मास्टर आप सुच में ग्रेट हैं मैं खुद को लकी मंटा हूँ की मैं आपका स्टूडेंट हूँ ….आपकी रेस्पेक्ट तोह हमेशा से करता आया हूँपर आज से आपकी रेस्पेक्ट और बाद गयी मेरे दिल मैं ..”

मनु ने आगे बढ़कर मास्टर के पेअर छुए …जिसपर मास्टर ने भी उसे गले लगा लिए और गॉड उठाकर कहा “ बीटा कभी मत भूलना इस लिमिट को क्युकी अब तुमसे ज्यादा तुम पैर हुम्मारा हक़ है …लव ु तू माय सोन और अब इमोशनल होना बंद करो और ट्रेनिंग पैर ध्यान दो आगे टाइम आने पैर तुमको अलग अलग लेवल पैर फाइट करनी होगी …”

मनु “जैसा आप कहें मास्टर आपका यह स्टूडेंट हर जगह अपना बेस्ट ऑफ़ थे बेस्ट देगा …”

उसके बाद मनु अपनी ट्रेनिंग पैर लग गया ….मास्टर खुद के मन में सोचने लगे “बीटा मनु मैं अपना बीटा मोहित तुम्हारे रूप मैं देखता हूँ और मुझे इसके साथ तुम्हारी फिक्र भी है …पैर अचे से जानता हूँ कुछ लोग दुरसरों को मुश्किल में देखकर खुद को नहीं रोक पते उनकी मदद करने से उनके हाथ और पाँव khud-ba-khud चलते लगते हैं उनकी मदद करने के लिए ऐसे लोगों को दुनि हीरो के नाम से जानती है शायद तुम्हारी मम्मी भी जानती होगी तुम्हारी यह फितरत सो उन्होंने तुमसे ऐसा वडा लिया और जब तुम्हारी माँ ने ऐसा वडा लिया है तोह मैं भला कोण होता हूँ तुमको रोकनेवाला पैर जो कमी तुम्हारी माँ ने की थी तुमको बिना लगाम के छोड़कर हु मैंने इस वेड के साथ पूरी करदी वर्ण अगर मैं तुम्हे किसी को बचने से रोकने की कोशिश करता तोह श्याद तुमसे कोई गलत कदम उठ जाता जिसके चलते मैं खुद को कभी माफ़ नहीं कर पता पैर अब तुमको अपनी लिमिट के साथ अपने साथ जुड़े हर शख्स का ध्यान रहेगा और तुम पैर लगाम रैहगी जो गलत चीज़ से रोकेगी …सो बेस्ट ऑफ़ लुक मनु !”

मास्टर ने मनु पैर जो लगाम लगायी थी उसमे क्या होगा यह तोह रब hi जाने पैर मास्टर ने शबनम का जीकर तक नहीं किया मनु से …

खैर मनु रावण हो गया अपनी ट्रेनिंग के बाद शबनम के पास शबनम एक farm-house ? में शिफ्ट गयी थी मनु की ट्रेनिंग के लिए जोकि मास्टर का hi था पैर उसके बारे में सिर्फ मास्टर और शबनम को hi पता था …मनु को शबनम और मास्टर के कनेक्शन से मास्टर ने दूर hi रखा था …

मनु पूछा उसके बताये एड्रेस पैर जहां शबनम ने मनु से मुलाकात की ..

शबनम उप्पेर से निचे देकते हुए मनु को बड़ी खुश हुई उसने मोहित को कई बार मास्टर कैग हर देखा था ..मनु को जब उसने देखा तोह उसे खुद की आँखों पैर यकीं hi नहीं हुआ की उपपरवाले ने मोहित की शकल में मनु को उसके सामने और मास्टर की ज़िन्दगी में भेजा है …उसे यकीं hi नहीं हुआ की मोहित जो 6 साल पहले मर चूका है मनु उसकी मौत के 6 साल बाद शामे तो शामे उसके जैसे दीखता है …इस बात से शबनम भी हैरान थी …पैर उसके हैरानी को उसने अपने तक hi रखा …

शबनम “तोह मनु हो न तुम सुल्तान ने मुझे तुम्हारे बारे में बहुत कुछ बताया था …आज से मैं तुम्हे अचे चाल चलन पैर त्रिनेड करुँगी तुम समझ गए न ???”

मनु ने हाँ में सर हिला कर उसे बता दिया को हु इस के लिए त्यार है ..शबनम ने उसे पहले दिन के चलते यहाँ वहां की बातें की ताकि मनु उससे खुल सके मनु ने उसे अपने बारे में सब बताया जिसके बारे में शबनम पहले से hi मास्टर और सुल्तान दोनों से सुन चुकी थी ..पैर इस में हु सिर्फ मनु की हिचक दूर करना चाहती थी …

जिसके बाद मनु को उसने पूछा “ाचा मनु तुम्हारा फेवरेट जूस कोनसा है …क्या मैं जान सकती हूँ इसके बारे मैं???”

मनु “जी बिलकुल उसमे जान्ने जैसा है क्या मुझे ऑरेंज जूस गर्मियों में और अनार का जूस सर्दियों में पसंद है पैर आपको उसके लिए टेंशन लेने की जरूरत नहीं है ..” मनु ने शबनम को एक तरह से उसके यहाँ जूस पिने को लेकर कहा …

Shabnam”are टेंशन कैसी मनु अब तुम यहाँ सिखने आये हो काम से काम इतना तोह कर hi सकती हूँ तुम्हारे लिए इसमें तकलीफ की क्या बात तुम बैठों मैं अभी आयी ..”

शबनम अंदर गयी और जूस ले आयी .मनु को दिया और पिने को कहा ..

मनु ने जैसे hi उसे पिया तोह उसका टेस्ट कुछ अलग सा लगा उसने शबनम की तरफ देखा …

जिसपर शबनम ने kaha..”are ऐसे क्या देख रहे हो ाचा नै लगा क्या जूस ..???”

मनु “ नहीं ऐसी बात नहीं है मैं बहुत जूस पिया है पैर इसका टेस्ट थोड़ा अलग सा है ..इसलिए सोच रहा था ..”

शबनम “देखो टेस्ट न देखो जूस ? तोह शामे hi है बस इसका टेस्ट थोड़ा ाचा लगे तुम्हे इसलिए इसमें हमारे गांव का मसाला मिल्या है जिससे शरीर में नयी ताज़गी आती है ,,,डरो नहीं अब तुम्हारी जिम्मेवारी मेरी है सो बिना किसी टेंशन के आराम से पिलो …”

मनु ने जब सुना की मसाला है और उसपर शबनम का नेचर देखकर मनु ने chup-chap उस जूस ? को पूरा पि लिया ..जिसपर शबनम ने उसे यहाँ वहां की बातें करनी फिर शुरू कर दी ..कुछ देर मैं hi मनु पसीने से भर सा गया …

उसने शबनम की तरफ देखा ..शबनम “क्या हुआ मनु तुम को इतना पसीना कैसे आने लगा ..???”

मनु “ पता नहीं आपके जूस ? के अलावा कुछ और खाया नहीं पैट नहीं कैसे इतना गरम सा फील हो रहा है …???”

शबनम मन में “ मतलब दवाई का असर होने लगा चलो ाचा है ..वैसे कितना पायरा और दिल का साफ़ इंसान है मनु ाचा है इसको मैं पुरे तरह से मुक्कमल मर्द बनाउंगी मास्टर यह सिर्फ आपका hi नहीं आज से मेरी जिम्मेदारी भी है ..जिसने शबनम के दिल में बरसो बाद अपना पैन जगा दिया है ..कितनी प्यारी आँखें है इसकी ? शबनम अपनी सोच में गम थी पैर मनु के पसीने रुक hi नहीं रहे थे ..

शबनम “ अंदर के रूम में एक है शायद मसाला वाला जूस तुमने पहली बार पिया है इसी लिए तुमको ऐसा लग रहा है तुम अंदर चलो और एक में लेट जाओ कल से मसाला काम डालूंगी ..”

मनु कुछ नहीं बोलै चुप चाप एक वाले रूम में जाकर बीएड ? पैर लेट गया और गरमी से आराम लेने लगा ..

शबनम बहार आयी कॉल किया और धीमे आवाज़ में “मालिक मनु आगया है उसे दवाई दे दी है और दवाई के असर से उसके पसीने निकलने लगे सो उसे मैंने एक वाले रूम में लिटा दिया है हु अभी सो रहा है आज संडे है सो स्कूल की चिंता नहीं और कोई आर्डर है मालिक??”

मास्टर उधर से “मतलब हु ठीक तोह है न उसे कुछ होगा तोह नहीं न शबनम ???” मास्टर की आवाज़ में साफ़ साफ़ मनु के लिए चिंता दिख रही थी …जिसे शबनम ने अचे से समझ लिया

शबनम “मालिक आप मुझे पैर यकीं रहें मैं खुद उसके पास खींचती हुई महसूस कर रही हूँ उसकी आँखों में बरसो बाद शबनम को अपनापन नसीब हुआ है ,,वर्ण इस दुनिआ में आपके बाद मेरा है hi कोण आप भरोसा रखे यह पहली बार था इसलिए शायद मनु का शरीर ऐसे रियेक्ट कर रहा है कुछ दिन मैं उसे इसकी हब्बित हो जाएगी और मनु को एक बांड पसीना नहीं आएगा ,मैं जानती हूँ की मनु आपके लिए क्या है ,,मेरा भरोसा रखें मालिक मनु मेरे लिए भी आज से उतना कीमती है जितना आपके लिए …बस अंतर यह है उसका आप गुरु और चेले का रिश्ता है और मेरा ???”

मास्टर “ अरे पागल तेरा भी वही रिश्ता हुआ न तुम भी तोह उसे मर्द बनने में और बॉडी लैंग्वेज पैर काम करवा रही है मेरा मतलब है उसे सामने वाले की बॉडी लैंग्वेज पढ़कर रियेक्ट करना सिखने वाली है तोह एक तरह से टब hi तोह उसकी गुरु हुई न और बात बात पैर रोने मत लगा कर और देख मनु को तेरे हवाले किया है तोह उसपर तेरा भी हक़ है सो आज और अभी से खुद को अकेला मन्ना छोड़ दे क्युकी मैं अचे से जनता हूँ मनु को उसके अस्स पास कोई भी उसके अपनेपन से बच नहीं सकता सो तू कैसे बच सकती है सो अब अकेला पैन छोड़ और उसका धयान रखना और भूल से भी उसको तेरे और मेरे रिश्ते के बारे में न पता चले …ok bye “

Shabnam.”per क्यों न पता चले मालिक क्या मैं इतनी बुरी हूँ की कोई मेरे पास नहीं रह सकता …??”

मास्टर “ अरे फिर वही देख तू जो समझ रही है गलत समझ रही है मैं सिर्फ इस लिए छुपाने को कह रहा हूँ मनु अभी बचा है उसे यह सब गलत लगेगा ..चाहे तुम मेरी कितनी भी फिकरा करो या मैं तुम्हारा कितना भी ध्यान रखूं पैर हम दोनों का रिश्ता क्या है तुम अचे से जानती हो ..अगर मैंने अपनी सुकन्या से वडा नहीं किया होता तोह शायद तुमसे शादी भी कर लेता पैर प्यार तोह करता हूँ हाँ रिश्ते का नाम नहीं है …और बिना रिश्ते को समझने के लिए मनु अभी इतना बड़ा नहीं है सो यही वजह है की तुमको मनु से इस रिश्ते को छुपाना होगा …”

शबनम जब मास्टर ने कहा प्यार तोह है इस बात पैर रट हुए शबनम के चेहरे पैर मुस्कराहट आ गयी ..”ाचा मालिक मैं समझ गयी आपकी यह खादिम समझ गयी मुझे इस बात का कोई शिक़वा नहीं है की आपने मुझे बीवी नहीं बनाया मैंने तोह कभी खुद को उस काबिल भी नहीं सोचा था की मैं किसी की बीवी बानगी पैर आपने मेरे बारे में इतना सोचा उसके लिए आपकी ये कनीज़ दिल से सुक्रिया करती है की आपने एक रांड को इस काबिल समझ की प्यार कर सके ..आज मुझे उस उपपरवाले से कोई शिकायत नहीं है …सुकिर्या मालिक ाचा रखती हूँ मनु को देखूं ज़रा ….” और कॉल ? कट कर दी आज शबनम खुश थी की बेरंग दुनिआ में उसे कोई अपना और प्यार करने वाला था जिसके साथ एक और नया इंसान उसे अपना सा लगने लगा था मनु …

अब आप यह समझेंगे की मनु से अपना पैन क्यों महसूस हुआ शबनम को तोह मास्टर की ख़ास पर्सन होने के चलते और शबनम के सख्त रुख के चलते हु लोगों से दूर hi रहा करती थी या यूँ कहिये की मास्टर के डर से बहुत से लोग खुद शबनम से दुरी बनाकर रखते थे और शबनम भी अकेली होने की वजह से और अपनी पिछली ज़िन्दगी के चलते किसी को भी अपनी ज़िन्दगी में दाखिल नहीं होने देना चाहती थी ताकि उसके पुराने जीवन को जानकार फिर से कोई और तूफ़ान उसकी ज़िन्दगी में ना आये …कहने को तोह इस बात के कई पहलु हो सकते हैं की शबनम खुदको फालतू लोगों से भी दूर रखना चाहती थी ..स्मार्ट लोग पॉइंट अचे से समझ गए होंगे..

खैर शबनम वापस आयी मनु सोया हुआ था …जिसपर सोता हुआ मनु उसे बहुत पायरा लगा उसने मनु के माथे पैर प्यार से हाथ फिराया और सोते हुए उसके माथे पैर एक किश ? किया …इन सबसे अनजान मनु chup-chap अपनी नीड में खोया हुआ सोता रहा पैर शबनम उसके उठने तक उसे देखकर खुश होती रही और उसके पास बैठी रही …न जाने क्या क्या सोचती रही …

खैर कोई 1 या ½ मतलब डेढ़ घाटे बाद मनु उठा और उसने सामने शबनम को देखा तोह बोलै” सॉरी मुझे पता भी नहीं चला और मैं पता नहीं कब तक सोया रहा …ी म सॉरी आपको मेरी वजह से जो दिक्कत हुई उसके लिए …” मनु ने बहुत hi मासूमियत के साथ कहा जिसपर शबनम को उसपर बहुत प्यार aaya(yaar प्यार कई तरह का होता है यहाँ उस प्यार से मतलब है जो किसी प्यारे बचे को देखकर आता है …) हु मुस्कुराकर boli”are सॉरी की कोई बात नहीं अगर आगे से नीड भी आये तोह आराम से सो जाना कोई प्रॉब्लम नहीं है मुझे ok चलो अब फ्रेश हो जाओ तब तक मैं बहार वेट करती हूँ..”

मनु फ्रेश हुआ और बहार आया और उससे विदा लेकर चल पड़ा घर जहाँ उसने अजय के साथ कोई 2 घाटे और फाइट की प्रैक्टिस की और उसे त्रिनेड किया …उसके बाद उसका रेगुलर रूटीन और दिन का एन्ड …

अगले दिन शामे रूटीन उसके बाद शबनम के पास गया जहाँ मनु को उसने जूस ? दिया ,जिसपर मनु ने मनकरने की कोशिश की कल की हालत बता कर पैर शबनम की आगे उसकी एक न चली ..उसने अछि सेहत और रिफ्रेशमेंट के नाम पैर मनु को हु पीला दिया और मनु को आज भी थोड़े पसीने आये पैर कल के जैसा उसे नींद नहीं आयी क्युकी आज उसकी बॉडी ने हु दवाई थोड़ी एक्सेप्ट कर ली थी …उसके बाद हु अपने स्कूल चला गया …जहाँ शामे हाल था पैर चिंटू में आजकल एक नया बदलाव था उसने मनु से फ़ालतू बात और बात बात पैर टोन मरना छोड़ दिया था …मनु ने भी इसे अपने लिए ाचा समझा और अपनी लाइफ में बस्सी हो गया उसकी लाइफ मैं अब और किसी फालतू इंसान चिंटू जैसे लोगों के लिए टाइम hi नहीं था …और मनु भी अपने साथ मिलने वाले धोखों से कुछ चेंज सा हो चूका था ..हेल्पिंग नेचर तोह उसका शुरू से hi था जो आज भी बरकार था पैर अब उसने बिना वजह की मदद बंद कर दी थी हु दूसरे क्लास के लड़के और लड़कियों से बात करता पैर अपने क्लास के लोगों से दुरी बना ली थी और यह सब उन्ही के कामो के एक्शन में मनु का रिएक्शन था …की मनु ने उनको दूर कर दिया था …मनु अब मदद के नाम पैर सही और गलत देखने लगा था कहते हैं न दूध का जला छाछ को भी ध्यान से पिता है …

(हैं हाँ जनता हूँ कहवत तोह दूध का जला छाछ भी फूंक मर कर पिता है ,,,पैर मुझे यही सही लगता है ,,,,और वैसे भी आप मेरी कहावत से ज्यादा स्मार्ट हो समझ hi जाओगे )

खैर मनु भी अब सही और गलत देखने लगा था क्युकी ठोकर इंसान को लगती है तोह समझदार इंसान ठोकर लगने की वजह पैर ध्यान देता है पाथेर से नहीं लड़ता तोह मनु ने भी अपने नेचर में बदलाव किया था ..लिमिट से बोलना पैर जितना बोलो सॉलिड बोलो और बॉडी तोह उसकी मास्टर और सुनील गुरु जी की ट्रेनिंग ोे अछि डाइट से कुछ नहीं बहुत अलग हो चली थी अपने साथ के लड़कों के मुकाबले उसकी बॉडी का हर हिस्सा गज़ब की शेप में था ..पैर मनु दिखने से ज्यादा छुपाने में भरोसा रखता था ,,सो ढीले कपडे पहना करता था ताकि उसकी बॉडी पैर लोगों का ध्यान काम जाए …

खैर टाइम अपने हिसाब से बिट रहा था 3 साल गुज़र चुके थे बहुत कुछ हुआ था इन 3 सालो मैं मनु अब 16 साल का हो चूका था …उम्र बड़ी है तोह ज़ाहिर सी बात है बाँदा भी बड़ा होगा अरे उसकी हाइट भी बाद गयी थी अब हु 5’ 9’’ का हो चूका था कहते हैं न जब सोने को आग में डाला जाता है तोह हु आग में तप कर कुंदन बन जाता है ,,,यार मेरी ख्वातों पैर ध्यान मत देना अपने को कहावतों में थोड़ा मसाला ऐड करना मस्त लगता है …वर्ण उसी बोरिंग वे मैं कहावत कहूंगा तोह आपको टॉपिक कहा से मिलेगा …ok ok बैक तो स्टोरी …

मनु ने 3 साल में बहुत कुछ सीखा था और बहुत कुछ उसकी लाइफ में हुआ भी था जो टाइम के साथ आपको भी पता चल जायेगा …जैसे अब हु नेशनल लेवल पैर स्कूल ? को रिप्रेजेंट किआ करता था …और स्कूल के अलावा भी मास्टर उसे अलग अलग चैंपियनशिप में भेजा करते थे अलग अलग शहरों में मनु ने भोपाल , इंदौर और लखनऊ के साथ चेन्नई और कोचीन में भी चैंपियनशिप जीती थी …पैर स्कूल लेवल पैर हु सिर्फ दो जगह गया था ..सूरत और हरयाणा जहाँ हु जान भुजकर लिमिट से खेला और जीता क्युकी मास्टर ने उसे समझा रखा था की फालतू शोऑफ से बचे हु ..

उधर चिंटू ने अब लागबहग मनु से बात करना छोड़ दिया था हु भी अब अपने से मतलब रखता था और स्कूल के बाद कहीं गायब हो जाता था …उस्मान अली को आजतक चिंटू का पता नहीं लगा ..शयद इसमें मनु का हाथ था की चिंटू के बारे में उसदिन न बता कर उसने चिंटू की ुमार की लकीर और लम्बी कर दी थी वर्ण उस्मान उसकी लम्भी उम्र को पूरा लम्बा करदेता …

और मनूकी पैरी पड़ोसन पैर अजय की पेनी नज़र और उसको घर में घुसने से मनु की सकहति ने भी अजय को और तेज़ कर दिया था सो रजिनि को 3 साल में कुछ करने का मौका नहीं मिला पैर उसकी दोस्ती मनु की दूसरी पड़ोसन शशि से अब घेरि हो गयी थी .. उस दिन के जैसे शशि के साथ रजिनि ने आगे बढ़ने की हरकत नहीं की पैर हु गंदे मज़ाक जरूर टाइम टाइम पैर किया करती थी…

अजय मनु का भाई हु भी अब बड़ा हो रहा था maa-baap की अछि परवरिश और भाई की देखरेहक में अजय में भी बहुत बदलाव आये थे …हु भी एक अचे और सॉलिड पर्सनालिटी के साथ उभर रहा था उसकी गिनती मनु के बाद हैंडसम लड़कों में होती थी …मनु के जैसे हु भी अपनी बॉडी को मोस्टली कवर hi रखा करता था ..पैर जहाँ मनु शायद hi खुद को रेवेल करे पैर अजय तोह अजय था कभी कभी कुछ न कुछ कर दिया करता था पैर मनु के नाम पैर मान भी जाया करता था उसका गुस्सा बड़ा खतरनाक था जब गुस्से में हो उसके सामने 2 लोग हों या 20 अजय अकेला भिड़ने की ताकत रखता था पैर अजय चाहे कितने भी गुस्से में हो मनु के नाम लेने भर से लाइन पैर आजाता था ,,,मनु ने अजय पैर कभी हाथ नहीं उठाया था शायद दोनों की अंडरस्टैंडिंग hi कुछ कमाल की थी अजय मनु की बात एक बड़े भाई के आर्डर की तरह मंटा था ..उसने मनु की ग्रोथ खुद अपने आँखों से देखि थी और मनु ने कैसे टाइम टाइम पैर उसकी जान बचाई उसे याद था …maa-baap के बाद मनु उसके लिए उसका role-model था …मनु अब बहार चैंपियनशिप में बस्सी रहा करता था तोह अजय का जिम्मा अब मास्टर और सुनील गुरूजी का था ..

अशोक और बाबा के यहाँ मनु अभी भी जाया करता था इनके साथ भी मनु की अछि बॉन्डिंग हो चुकी थी ..अशोक निशा और मंजू को छोड़ने और उनको सटले करने के बाद वापस आगया था कोई 2 महीने बाद पैर एक साल बाद hi मंजू के पिता उम्र के चलते दुनिआ छोड़ चुके थे निशा और मंजू ले साथ उनकी विदेशी बहु ने भी उनकी बहुत देख रेख की थी पैर टाइम था जाने का सो चले गए जिसपर निशा को अपने नाना से बहुत लगाव हो चूका था जिसपर उनकी मौत से निशा बहुत दुखी हुई जिसपर ममी और मंजू उसकी माँ ने उसे संभाला और आगे बढ़ने को कहा ..और निशा भी अब नई ज़ीलैण्ड में आगे पड़ने में लग गयी थी …

उधर मनु और भटनागर ने भी अशोक की कंपनी को कई अचे टेंडर दिलवाये थे जिनको सोचना भी अशोक ने कई बार छोड़ दिया था उसकी कंपनी में अब भटनागर के बाद सबसे ज्यादा पूछा जाने वाला इंसान अब मनु था …

ऐसा hi बाबा के यहां था बाबा ने मनु को जो ट्रेनिंग थी उसके चलते मनु ने बाबा को उस शहर के सरे मार्किट का टॉप डिस्ट्रीब्यूटर लिस्ट एसोसिएशन का चेयरमैन बनवा दिया था अब बाबा की और भी नयी दुकाने खुल चुकी थी ,,बाबा के दिल में मनु के लिए इनसब के चलते अलग प्यार था एक पोते की तरह मनु को देखते थे ..उनके लड़के भी अपने पिता की तरह मनु से प्यार करते थे ..

वैसे तोह होते हैं कई लोग जो अपने बिज़नेस में दूसरे को इन्वॉल्व करना पसंद नहीं करते पैर यहाँ मनु ने बाबा की ट्रेनिंग के बाद उनके बिज़नेस में जो प्रॉफिट हुआ था उसमे से एक पैसा लेने से इंकार कर दिया था …और उसके प्रॉफिट न लेने से बाबा के बेटे जो थोड़े बहुत शक से मनु को देखा करते थे हु भी उनके दिल से निकल चूका था …हु भी मनु को अब दिल से चाहते थे ..उन्होंने मनु से खुद को चाचा कहने को कहा था …मनु भी इंसबकी इज़्ज़त करता था…

चाचा के नाम से याद आया हाँ मनु का पायरा चाचा जैचंद …हु भी अब थोड़ा लिमिट से वास्ता रखता था मनु से ..उस दिन के बाद उसने मनु से कोई बात नहीं की पैर उसे बहुत हैरत हुई थी की मनु जिन्दा है पैर ..मनु की चुओई देखकर हु समझ गया की मनु ने अपने घर पैर कुछ नहीं बताया है ..सो जैचंद भी अब मनु से दूर hi रहता था …मनु ने अजय को जैचंद पैर जब भी घर में आये नज़र रखने को कहा था …ताकि फिर से चुना ना लगा सके ,,,अजय भला मनु की बात कैसे टालता जब भी जैचंद आता अजय की पेनी नज़र उसपर होती और जैचंद और उसके कमीने ससुर से अजय की पेनी नज़र और अजय का देखने और उनसे बात करने का तरीका देखकर उनको अचे से समझ आ चूका था की अब राजिंदर का बीटा तेज़ हो चूका है बड़ा भी और छोटा bhi…so उन्हें दुबारा पैसे नहीं मिलने वाले …

सुमित्रा अभी भी काम कर रही थी पैर अब मनु ने उसे प्यार और अजय के फ्यूचर का वास्ता देकर समझा दिया था की आगे से जैचंद या उसके कपटी ससुर की बातों में ना ए और अपने बच्चों और परिवार के बारे में पहले सोचे ..जिसपर सुमित्रा ने यह कहकर उसे अपने सीने से लगा लिया की उसका बीटा कितना जिम्मेदार हो चूका है आगे से उससे बिना पूछे घर में किसी को कोई पैसा नहीं दिया जायेगा …

नीता मम पैर भी मनु ने अपनी सख्ती जारी राखी थी जिसका असर अब उनके शरीर की शेप में दिखने लगा था नीता मम भी अब शेप में आने लगी थी ..और कई बार मनु के घर आ चुकी थी और सुमित्रा से मिली थी जिसपर सुमित्रा को भी बहुत ख़ुशी हुई थी की उनके बेटे ने एक अकेली औरत को माँ बैंकर उसके सुने जीवन में ममता का रास खोल दिया hai..nita मम से मिकार मनु के दोनों maa-baap बहुत खुश हुए …

नीता मम ने उसके बाद मनु को कई बार अपने घर पैर रात को रुकने को बुलाया जिसकी परमिशन उन्हें सुमित्रा ने दे दी थी जिसमे कभी कभी अजय भी आ जाया करता था …हु नीता मम की इज़्ज़त एक माँ की तरह करता था और नीता भी बहुत खुश थी की अजय भी उसे एक माँ की तरह सामान देता है..

जब कभी तीनो साथ में नीता के घर पैर होते तोह लगभग नीता के घर उस सुने घर जिसमे नीता सिर्फ सोया करती या कभी टीवी देखकर खुदके अकेले पैन पैर रोया करती थी वहाँ आजकल धूम मची रहती थी …खूब मस्ती करते थे तीनो नीता भी दोनों बच्चों के साथ बची बन जाया करती थी ..और अपने आप को दुनिआ का सबसे खुश नसीब इंसान मानती थी की अब हु अकेली नहीं है उसके पास मनु है और अजय भी है ..जब कभी मनु बहार होता अजय उसका ध्यान देने एक चक्कर लगा दिया करता था ..

मनु अपना मनु जिस दिन से निशा को उसने चिंटू के साथ देखा था …उसके दिल में हु नफरत पैदा हुई थी निशा के लिए की उसके बाद उसने कभी निशा का नाम अपनी जुबान पैर नहीं लाया था …अशोक से भी मनु ने कभी निशा के बारे में नहीं पूछा …अशोक इस बात पैर धयान नहीं दे पाया या शायद उसने सोचा हो की मनु आजकल बिज़नेस में ज्यादा इंटरेस्टेड है या बस्सी है सो उसने भी ध्यान नहीं दिया ..पैर जब कभी मनु उसके सामने निशा का जीकर करता तोह मनु काम का बहाना करके वहां से निकल जाया करता था जिसपर अशोक सोचता शायद निशा को मिस कर रहा हो पैर मनु को अपने प्यार को किसी और की बहून में देखना उसदिन बर्दास्त के बहार था …उसदिन उसे जो प्यार के नाम से नफरत हुई थी आजतक बरकार थी ..

वह लड़कियों से बात करता था पैर एक लिमिट्स जहां कोई लड़की लिमिट क्रॉस करने की कोशिश करती मनु की ज़िन्दगी और बातचीत की लिस्ट में भी उसका नाम दुबारा नहीं आता था …उसको कई लड़कियों ने पर्पस किया जिसमे उसकी क्लास की हु सब लडकियां भी शामिल थी जिनको हु देखना भी पसंद नहीं करता था पैर मनु की सख्ती साफ़ थी उसके लिए प्यार अब उस नफरत में बदल चूका था जिसको भरना किसी आम लड़की के बस की बात नहीं थी …

हु जब स्कूल आता उसकी सबसे पिछली बेंच पैर कोई न कोई love-latter उसका इंतज़ार के रहा होता कभी किसी फूल के साथ तोह कभी किसी ग्रीटिंग के साथ पैर मनु एक बार भी उन love-latter को पड़ने की कोशिश नहीं करता था बस देखा और फाड् दिया जिसे देखकर लड़कियों की समझ में आ जाता की मनु का जवाब क्या है पैर दिल के हथून या कहो हवस के हाथों मज़बूर होकर अगले दिन फिर वही हाल मनु का वही जवाब …

आप में से कुछ लोग कहेंगे मनु पागल हो गया है पैर यार अपने प्यार पहला प्यार किसी और की बहून में देखना किसे बर्दास्त होगा मनु के दिल की आग तोह कोई दिलजला hi समझ सकता है जिसने हु दर्द देखा हो ..

“कहते हैं प्यार में साड़ी दुनिआ रंगो से भरी एक गुलशन एक अलग दुनिआ सामान लगती है,,

कभी न मिले किसको बेवफाई का dard-e-dost उसमे वहीँ रंगों भरी दुनिआ बड़ी वीरान लगती है ..”


इन सब में एक दिन जब सुमित्रा ने अपनी छुट्टी के दिन उसे पूर्ण एल्बम दिखया तोह उसने कई पुराणी तस्वीर देखि जिनमे कनु भी थी जिसमे मनु और हु दोनों अपनी माओं की गोद में थे उसकी कई तस्वीरें थी ..जिनमे मनु खुद को कितना खुश देख रहा था उसने सुमित्रा से पूछा “यह कोण है मम्मी और मैं इनसब के साथ “

सुमित्रा “ यह तेरी सबसे अछि दोस्त है जिसकी माँ मेरी बेस्ट फ्रेंड थी और यह तेरी बेस्ट फ्रेंड कनु है …लगता है तुझे याद नहीं पैर तेरी सबसे पहली दोस्त यही थी..”

मनु “ ाचा मम्मी मुझे तोह कुछ याद hi नहीं देखो न कितना खुश लग रहा हूँ मैं ..” मनु खुद को खुश देखकर अपने बचपन की याद कर रहा था …पैर उसे कुछ याद hi नहीं था सुमित्रा भी अब शालिनी से बात चित बंद कर चुकी थी वडा उसे याद था पैर शालिनी कहाँ है कैसी और क्या पता उसे वडा याद भी है या नहीं और पता नहीं मनु कैसे रियेक्ट करे की उसकी माँ ने बचपन में क्या क्या सपने देखे थे पैर शालिनी ने जब लॉकेट भेजा था तब कहा था कनु और मनु दोनों के लिए लिया था और पूजा करवाकर भेजा था मनु ने आज भी मेरी खातिर पहना हुआ है पैर उसे क्या पता यह लॉकेट किसने दिया tha..…insab बातों को सोचकर सुमित्रा ने भी मनु को कनु के बारे में ज्यादा नहीं कहा …मनु ने एक तस्वीर देखि जिसमे मनु बहुत खुश था जिसमे शालिनी और कनु के साथ मनु और सुमित्रा भी साथ में थी ..मनु ने खुद को उसमे बहुत खुश महसूस किया ..निशा के बाद पहली बार था की मनु ने खुद को इतना खुश महसूस किया था …हाँ मनु हँसता था पैर अपने दिल का दर्द दिल में रखकर की आस पास के लोग उसके दर्द से दुखी न हो जाये…

Manu”mummy यह पिछ बहुत अछि है देखो न इसमें मैं कितना खुश हूँ मम्मी इसकी कॉपी मैं अपने पास रखना चाहता हूँ अपने पर्स मैं अगर आपकी परमिशन हो तोह ..और जब भी अकेला रहूँगा इसमें आपको देखकर हिम्मत मिलेगी और जब चौंगा इसमें आपको किश कर लूँगा …”

सुमित्रा “ठीक है ok !.....पैर बच्चू मम्मी को किश करेगा या उसमे किसी और को हम्म!???”

मनु “ अरे मम्मी जिनको जनता नहीं उनकों किश करके मिलेगा क्या मुचे तोह यहां से मलतब है …मुहहहआ!”

मनु ने अपनी मम्मी के एक गाल पैर किश कर दिया . जिसपर सुमित्रा भी मुस्कुराकर रह गयी और पागल बोली मनु को…

अजय आया अंदर से शायद नाहा कर आ रहा था ..जब उसने मनु को मम्मी को गाल पैर किश करते देखा तोह toliya(towel) पहकर आया और सुमित्रा का दूसरा गाल पैर किश करके बोलै “मम्मी यह गलत बात है भैया अकेले पागल नहीं हो सकते मैं भी पागल हूँ सो मुझे बी पागल कहो न “

जिस पैर सुमित्रा का हँसते हुए बुरा हाल हो गया ..तीनो माँ बेटे ऐसे hi हंसी मज़ाक कर लिया करते था राजिंदर उस समय घर पैर नहीं था शायद भर गया था घूमने के लिए …

मनु को अब भी थोड़ा पैसा अशोक के और बाबा के यहाँ से मिलना शुरू हो गया था तोह अब राजिंदर ने भी over-time बंद कर दिया था तीन लोगो के पैसे से अब घर में भी बहुत सारे चेंज आये थे जहाँ पैसे की तंगी के चलते बहुत सी िचाईं फॅमिली में दबनी पड़ती थी अब उसकी ज़रूरत नहीं थी बचे भी समझदार थे और अब जिम्मेदारी के साथ आगे बाद रहे थे …कुल मिला कर मनु की ज़िन्दगी एक ताल मेल के साथ चल रही थी ……..पैर कब तक चलेगी यह तोह किस्मत और वक़्त के हाथ में

है .....:हिंट:
 
अपडेट 60

बचपन की यादें

मनु को अब भी थोड़ा पैसा अशोक के और बाबा के यहाँ से मिलना शुरू हो गया था तोह अब राजिंदर ने भी over-time बंद कर दिया था तीन लोगो के पैसे से अब घर में भी बहुत सारे चेंज आये थे जहाँ पैसे की तंगी के चलते बहुत सी िचाईं फॅमिली में दबनी पड़ती थी अब उसकी ज़रूरत नहीं थी बचे भी समझदार थे और अब जिम्मेदारी के साथ आगे बाद रहे थे …कुल मिला कर मनु की ज़िन्दगी एक ताल मेल के साथ चल रही थी ……..पैर कब तक चलेगी यह तोह किस्मत और वक़्त के हाथ में


है .....

अब आगे....

मनु इन सब से अनजान अपनी ज़िन्दगी की रफ़्तार से चल रहा था… उसकी लाइफ में एक अलग सी ताल मेल बन गयी थी.

इन 3 सालों में उसकी पड़े और ट्रेनिंग के साथ बहुत सी फाइट भी मास्टर के कहने पैर लड़ी हाँ जी फाइट आप सोच रहे होंगे फाइट में अलग क्या जिसका जवाब है …

आज मनु मास्टर के साथ डार्क फाइट में अलग फाइटिंग स्टाइल देखने के लिए गया था …वहां फाइटर आपस में लड़ रहे थे और क्युकी मास्टर का वहां भी काफी नाम था ..और अभी भी बड़े बड़े आर्गेनाइजर मास्टर से कांटेक्ट के लिए मास्टर की आगे पीछे घुमा करते the…per फाइटर तोह फाइटर हैं उनको इनसबसे क्या लेना देना ..

(हु फाइट्स जिनके उप्पेर बहुत पैसा लगता है और जो गोवत और नार्मल फाइट्स से के रूल्स से अलग होती हैं un-rule फाइट्स जिनमे हरने का कई बार मतलब होता है मौत जिनमे मौत के बाद फाइटर की फॅमिली कोई क्लेम नहीं कर सकती क्युकी उसमे रूल नाम की चीज़ hi नहीं होती है ,और साथ में यह इललीगल मार्किट का हिस्सा हैं अगर फाइटर मरता है तोह उसकी फॅमिली को पैसे आर्गेनाइजर से पुछया जाता hai,,who भी अगर उसकी नियत सही हो तोह ,,और क्युकी ऐसे फाइट्स लीगल होते नहीं और आर्गेनाइजर का भी नाम जुड़ा होता है तोह मोस्टली तोह मरनेवाले के घर पैसा चला जाता है पैर कभी अगर आर्गेनाइजर का दिल बदल गया तोह … सो आगे आप स्मार्ट hain.haan पैसा नार्मल फाइट के मुकाबले बुहत बुहत ज्यादा होता है तभी यहाँ फाइटर अपनी जान जोखिम में लगाने से नहीं डरते )

फाइट को और ज्यादा दिलचस्प बनाना के लिए fighter’s एक दूसरे से बेमतलब उलझ जाया करते थे ताकि सामने देखने वाले को लगे इनकी कोई पुराणी दुश्मनी है …बदले में उनपर और ज्यादा पैसे लगा करते थे यह एक तरह से आप लोगों ने ववे में भी देखा होगा ..जहाँ फाइटर एक दूसरे को बिना किसी बात के उकसाया (प्रोवोके) करते हैं …और बदले में और ज्यादा लोग भीड़ के साथ उनपर और ज्यादा गुस्सा दिलाकर फाइट को पर्सन तरह से दिखया करते हैं …पैर वहां सब टीवी पैर आपके सामने होता है जिसमे फाइट फेक होती है और उनको रूल के साथ लड़ना होता है …पैर डार्क फाइट का पहला रूल hi है “”की कोई रूल नहीं “……अगर आपसे किसी फाइटर की मौत भी हो जाये तोह सिवाए उसके आर्गेनाइजर के और कोई दुखी नहीं होगा …और आर्गेनाइजर या मैनेजर भी इस लिए की उस फाइटर के पीछे थोड़ा पैसा उसकी ट्रेनिंग पैर लगा था और उस फाइटर से उसकी कमाई thi…per एक फाइटर के बाद अगला फाइटर जब तक उस आर्गेनाइजर को नहीं मिलजाता तब तक hi दुःख मनाता है उसके बाद अगला फाइटर उसके पास आया तोह पूर्ण फाइटर का नाम भी उसकी डेरी की लिस्ट से गायब …

खैर हुआ यूँ की मनु और मास्टर फाइट देख रहे थे सामने फाइटर ने एक ऐसा डाव चला जिसके चलते उसके साथ लड़ रहे फाइटर की रीद की हड्डी टूट गयी उसपर भी उसका अगला वार हुआ जिसमे उस फाइटर ने उसकी गर्दन तोड़ डाली जिसके चलते हु फाइटर वहीँ मर गया और भीड़ और ज्यादा जोश में आगयी हु फाइटर जिसका नाम “टोनी “ था (ऐसी डार्क फाइटर में फाइटर मोस्टली फेक नाम से लड़ते हैं जिसमे जीना मक़सद सिर्फ इतना है की उनकी फॅमिली और उनकी रियल आइडेंटिटी सेफ रहे …सिर्फ आर्गेनाइजर hi जाना है फॅमिली को ताकि अगर फाइटर अगर फाइट में मर भी जाये तोह उसकी फॅमिली तक पैसा पूछा जा सके …)

खैर टोनी दोनों हाथ उठा कर ज़ोर ज़ोर से पब्लिक की चीखों और मज़े को एन्जॉय कर रहा था …क्युकी उसके लिए यह चेअरिंग मूवमेंट था और जैसा की होता है उसने …रिंग से इशारा किया की अगला फाइटर भेज दो उसका भी काम हो जायेगा …टोनी अपनी फाइटिंग स्टाइल के लिए बदनाम था क्युकी उसकी फाइट में सामने वाला फाइटर उसकी मर्ज़ी पैर जिन्दा बचा करता था …जो की बहुत काम हुआ करता था की टोनी किसी को जिन्दा छोड़ दे …उसकी फाइटिंग स्टाइल इन्डोनेशियाई और थाई का मिक्स कॉम्बो था जिसमे उसके हाथ के साथ कोहनी और घुटने दोनों सामने वाले की हड्डियां तोड़ कर जान ले लिया करते the…aisa नहीं है की सभी मर जाते थे …पैर टोनी के सामने से बचने वाला अगर जिन्दा बचता था …तोह उसकी ज़िन्दगी बीएड ? या व्हीलचेयर ♿ पैर hi बिता करती थी …कुल मिलकर टोनी एक डेडली fighter’s में आता था …

मास्टर भी पिछले एक हफ्ते से मनु को टोनी के फाइट को स्पेसिफिकल्ल्य दिखने को लेकर आये थे ताकि मनु उसके फाइट्स के मूव और ज्यादा ऑब्सेर्वे कर के और ज्यादा फाइटिंग स्टाइल सिख सके …और मनु भी मनु था उसने दो दिन लगातार उसे देखा और अपने मास्टर और गुरु जी की ट्रेनिंग के साथ जो कुछ उसने सीखा था …उसके सामने टोनी का स्टाइल उसके लिए थोड़ा अलग जरूर था पैर अनोखा नहीं ….क्युकी मास्टर ने मनु को ट्रेनिंग hi कुछ अलग तरह की दी थी …जो आप लोगों को आगे पता चल जायेगा …मनु टोनी के हर मूव को बारीकी से देखता थे …जिसमे उसके मरने और जान लेने के तरीके को देखकर मनु भी रोज़ कुछ न कुछ सीखा करता था …

टोनी बड़ा एग्रेसिव बाँदा था …शायद उसे सामने वाले के खून को देखकर अलग hi थ्रिल मिलता था उसके लिए सामने वाला का खून उसकी फाइट का असली मैडल ? था जिसके चलते बहुत से लोग या तोह दुनिआ छोड़ जाते थे या दुनिआ से अलग बीएड ? और व्हीलचेयर ♿ पैर अपनी ज़िन्दगी के दिन गिना करते थे ….अब क्युकी इतनी मौटूं और बेहिसाब लोगो को अपाहिज कर चूका टोनी फेमस न हो यह तोह मज़ाक होगा …टोनी डार्क fight’s का हु नाम था जिसने भी डार्क फाइट देखि होगी हु टोनी को जनता होगा …उसका फाइटिंग स्टाइल उसकी पहचान था और टोनी के नाम से hi रिंग में बहुत से लोग अपना नाम वापस ले लिया करते थे फाइट्स से क्युकी जिन्दा बचकर फाइट और भी लड़ सकते हैं पैर टोनी से बचने के बाद लड़ने के लिए बचेगा hi क्या …

टोनी भी थोड़ा बहुत नहीं काफी डरवना टाइप का पर्सन था ….चुप रहनेवाला पैर उसकी छुपी और उसकी चेहरे की शांति फिघ्टर्स का खून निकले के बाद ख़तम हो जाती थी …टोनी जितना छोटा नाम उसने रखा था उसके उलट उतना hi लम्बा छोड़ा पर्सन था …उसकी हाइट 6’ 4’’ थी और उसकी बॉडी देखकर यही लगता था गयम ⛹ में hi पैदा हुआ है गेंदा साला …गोरा चिटा छोड़ी छाती ,कैसे हुए डोले और कैसा हुआ एबीएस से भरा पेट जिसको देखकर कोई भी अंदाज़ा लगा सकता था की टोनी अपनी बॉडी पैर कितना work-out करता होगा …बहुत से body-builder तोह टोनी की बॉडी देखने hi फाइट में ाचा खासा पैसा दे कर आते थे हाँ भाई ऐसी फाइट देखने के लिए बहुत माल लगता है क्युकी फालतू के लोग वहां अल्लोव नहीं … अब तोह आप टोनी नाम के फाइटर को समझ गए होंगे …

तोह टोनी दोनों हाथ उठा कर अगले फाइटर को ललकार रहा था अगला फाइटर आया जिसको उसने एक घुटना उसके पसलियूं में मारा हु खून ठोकने लगा पैर फिर भी हु हिम्मत से डाटा हुआ था ..और लड़ने लगा टोनी घुमा और उसने उसके सामने से एक टर्न लिया और उसके कान के पास एक खोनी मारी और खोनी इतनी ज़ोरदार थी की उसके दुरसरे कान से थोड़ा खून निकल आये और हु फाइटर बेहोश सा होने लगा पैर टोनी वहीँ नहीं रुका उसने उस बेहोश हो रहे फाइटर की गर्दन अपने दोनों हथून से पकड़ी और भीड़ की चीखों में एक छोटी सी क़ायदायकककक! की आवाज़ आयी जिसके बाद हु फाइटर बेहोशी के बजाये कभी खुलने वाली नींद में चला गया …वहाँ के टीम मेंबर रिंग में आये और उसे डेड का इशारा कर दिया मतलब एक और फाइटर टोनी के नाम हो चूका था ..

जिसके बाद टोनी उसके रिंग में पड़े खून को अपने हाथ से अपने छाती और चेहरे पैर मॉल लेता है ..और ज़ोर ज़ोर से छीलकर अपने चीयर को और बड़ा रूप देने में लगा था ..और रिंग से इशारा करता है …की और कोई फाइटर भेजो …आज आर्गेनाइजर भी छनि बटोरने में लगा था मलतब टोनी का भाव और ुचा हो चूका था …दो fighter’s की मौत ने बहुत से फाइटर की हिम्मत तोड़ दी थी टोनी बर्बर इशारा कर रहा था की और किसी को अंदर भेजो पैर अगला फाइटर टोनी से फाइट को मन कर चूका था …क्युकी एक साथ टोनी ने दो लोगों को मौत के घात उत्तर दिया था ..टोनी देरी से बोखला उठा उसने अपने आर्गेनाइजर की तरफ देखा उसने अपने thums-up के सिग्न को उल्टा किया जो इस बात का इशारा था की आगे कोई फाइटर त्यार नहीं है टोनी इस बात पे और ज्यादा गुस्से में आ गया …और ज़ोर से चिल्लाकर बोलै “ आज ओपन चैलेंज है जो भी कोई टोनी से लड़ेगा और जीतेगा हु टोनी के जित के पैसे का हक़दार होगा …है कोई जो टोनी को टक्कर दे सके ????”

पब्लिक अपने जोश में चिल्ला रही थी और टोनी अपने जोश में सामने से और कोई आने को त्यार नहीं था …

टोनी” क्या बात है पैसे की चिंता मत करो पैसा ों थे स्पॉट मिलेगा टोनी की बात पत्थर की लकीर है” जिसपर हु आर्गेनाइजर को ईशार करता है जिसके बाद हु एक छोटा सूटकेस ? खोल कर पैसे दिखा देता है ..

इस बिच एक आवाज़ आती है “मैं लडूंगा टोनी से “ सबके चेहरे उस आवाज़ की तरफ घूम जाते हैं …हु पर्सन आगे बढ़ता है भीड़ को चीयर कर देखने में कोई 28 साल का बाँदा होगा बॉडी भी ठीक थक थी …शायद थोड़ा बहुत गयम करता हो …हु रिंग की तरफ आया और अपनी शर्ट ? खोलकर रिंग में कूद गया ..जिस पैर टीम मेंबर ने उसका नाम पूछा उसने उसके कान के पास जाकर कहा जिसके बाद अन्नोउंस हुआ “यह हैं शहीद टोनी से लड़ेंगे और अगर जीते (अगर पैर एनाउंसर का ज्यादा जोर tha)toh सारा पैसा ों थे स्पॉट मिल जायेगा …आपको पता है न यहाँ कोई रूल नहीं है और अगर मारे गए तोह कोई क्लेम नहीं होगा ..जिसपर शहीद सर हिलाकर हाँ का इशारा करता hai…shahid को देखकर ऐसा लग रहा था की शायद कुछ परेशानी में है हु शायद पैसे की ज़रूरत हो उसे …पैर पता नहीं अगर पैसे की ज़रूरत है तोह यहाँ आम इंसान बिना पैसे भरे एंट्री तक नहीं ले सकता …खैर शहीद देखने में आम से घर का लग रहा था …उसकी हाइट 6’ थी और ाचा खासा लगने वाला पर्सन था मलतब गयम करता होगा पैर टोनी जितना नहीं ..

उसके बाद फाइट का इशारा हुआ टोनी गुमा और शहीद के दोनों हाथों में अपने हाथ फसा लिए और ज़ोर लगाने लगा शहीद को देखकर लग रहा था हु पूरा ज़ोर लगा रहा है ..तभी टोनी ने डाव बदला शहीद को अपने उसके हाथों से खींचा और सीने से टक्कर मारी और शहीद शायद इस अचनाक हुए हमले के लिए त्यार नहीं था …उसका ध्यान चूका टोनी के लिए उतना काफी था ..उसने उसके दोनों हाथ जो शहीद के हाथों में फसे हुए थे घुमाये और शहीद को घूमकर कमर पैर उठा लिया ..जिससे शहीद का बैलेंस बिगाड़ा उसने टोनी के हाथ छोड़ दिए यही उसकी सबसे बड़ी गलती थी टोनी ने तुरंत हवा में ुनबलने शहीद को उसकी गर्दन से पकड़ा और एक हाथ उसके गांड के पीछे लगया और हवा में उठाकर उसकी रीद की हदी अपने गहने पैर दे मारी जिसके बाद एक आवाज़ कडाकककककक! जिसके साथ शहीद ज़मीन से उठ नहीं पाया जिस पैर टोनी ने उसकी तरफ देखा और उसके मुँह पैर थोक दिया ….पैर शहीद चाहकर भी कुछ नहीं कर पाया जिसके बाद टीम आयी जिसमे शायद मेडिकल के लोग होंगे उन्होंने शहीद को चेक किया और उल्टा थम्ब्स दिखाया जिसका मतलब था फाइट एन्ड ….शहीद को टीम रिंग से बहार ले गयी और वहीँ बेंच पैर लिटा दिया …क्युकी शहीद का कोई आर्गेनाइजर नहीं था और ऐसी जगह बिना कांटेक्ट या बिना आर्गेनाइजर के कोई किसी पैर टाइम नहीं बेकार करता है..

जिस पैर टोनी और बावला हो गया उसने बहार खड़ी भीड़ में देखा उसे कुछ जाने पहचने चेहरे दिखे …उसने एक तरफ ऊँगली उठाई ..और रिंग में आने का इशारा किया ….वह ऊँगली थी मास्टर की तरफ पैर मास्टर ने न में सर हिला दिया …

जिसपर टोनी और गुस्से में आया और बोलै …”अबे दीखता तोह ाचा ख़ासा है …पैर लगता है मर्द नहीं है …जा कहीं दुब मर na-mard कहीं के …”हु मास्टर को प्रोवोके करने लगा ताकि मास्टर को गुस्सा आये और मास्टर रिंग में उससे लाडे पैर मास्टर को इनसब के बारे में पता था सो हु बिलकुल शांत थे जिसे देखकर टोनी और गुस्से से भर गया और बोलै “साले अगर दम नहीं है तोह यहाँ क्या गांड मरने आया है …साले सूट बूट में ऐसे खड़ा है जैसे कहीं का राजा हो …अबे naa-mard साले या तोह लड़ या निकल यहां से “

मास्टर का कोई जवाब आता उससे पहले कोई हवा की तेज़ी के साथ रिंग में कूद गया …जिसे देखकर साडी भीड़ का चेहरा उस तरफ चला गया …टोनी ने भी उसे देखा उसके चेहरे को देखकर वहां सभी हैरान थे टोनी एक बचे से लड़ेगा …उसे देखकर मास्टर ने अपने माथे पैर हाथ मारा मुँह से निकल “अब क्या होगा ??”

जी हाँ यह कोई और नहीं मनु था जिसे टोनी के कड़वे बोल अपने मास्टर के लिए सुनकर बर्दास्त से बहार हो चुके थे …उसका खून खोल उठा था जहाँ मास्टर ने उसे पहले hi समझया था की शांत रहना मनु ने भी कहा था “मास्टर शांत रहूँगा मैं गुस्सा करता hi कहाँ हूँ “ मास्टर को मनु की बात पे भरोसा था क्युकी मनु कलम नेचर का पर्सन था …पैर यहाँ उसका शांत नेचर गुस्से से बहरा था उसके मास्टर को टोनी का naa-mard कहना मनु के गुस्से का हु स्विच ों करने जैसा था जिसमे मनु अपने कलम नेचर के उलट मास्टर से बिना कुछ बोले रिंग में हवा की तेज़ी से खुद चूका था …

सामने 16 साल का लड़का रिंग में देखकर टोनी हैरत से देखने लगा पैर टोनी हंसा और बोलै “हहहहह! अरे भचे घर जा दूध पि और कार्टून देख यह रिंग बच्चों के लिए नहीं है …खामकहन हदी वाड़ी टूट गयी तोह रोटा फिरेगा …चला जा टोनी का नाम बदनाम हो जायेगा की बचे को पिट दिया टोनी ने जा टोनी बचे से नहीं लड़ता ” उसने मनु को रिंग से निकलने को कहा …

मनु की आँखें गुस्से से लाल हो चुकी थी …मनु बोलै “कोई बात नहीं तुम बचे से नहीं लड़ सकते पैर बचा तोह लड़ सकता है न …और वैसे भी तुम्हे लड़ने से मतलब है तोह लड़ो फ़ालतू की बकवास करना और सुन्ना मेरी आदत नहीं है …अगर हदी टूटी तोह देखेंगे या बचे से लड़ने में डर लगता है तोह अलग बात है..”

टोनी उसकी बात पैर गुस्से में आ gaya“main तुह्जे बचने को बोल रहा तहत ु मुझे hi उल्टा बोल रहा है …ठीक है आजा आज तुझे बता ता हूँ मर्द कैसे लड़ते हैं अगर तुझे ज़िंदा छोड़ दिया तोह कालको कोई भी मुँह उठाकर टोनी से लड़ने रिंग में आ जायेगा …”

कोई कुछ अन्नोउंस करता उससे पहले hi टोनी घुमा और उसने अपना घुटना उठा कर मनु के सीना का निशाना लगाया ..उसका निशाना लगता उससे पहले hi मनु हवा में दोनों कहानियों से उसके उस घुटने पैर ज़ोर से चोट करता है …जिसपर टोनी के उस घुटने में दर्द की तेज़ डूअड़ गयी …टोनी फिर भी सम्भला …उसने अब दोनों खोनी से मनु के सर पैर वॉर करना चाहा ..पैर मनु झुका और अपना घुटना उसकी पसलियूं में हवा की तेज़ी से पेल दिया जिसपर कड़ककककक!!!!!! की आवाज़ आयी और टोनी की एक या दो पसली शीहद हो चुकी थी …भीड़ पहली बार टोनी का वार खाली जाता देख रही थी …पैर टोनी इतनी आसानी से हार मान ले ऐसा टोनी नहीं था …उसने फाइट में थोड़ा चेंज किया और मनु के गले पैर हमला बोलै ..पैर मनु की फुर्ती टोनी से ज्यादा थी ..पैर मनु की शर्ट ? का का कालर उसके हाथ में था पीछे से …जिसपर मनु का गाला दबने का ाचा मौका था टोनी के पास पैर मनु के हाथ और पेअर खाली थे जिस पैर मनु निचे से हुम्ला कर सकता था …पैर टोनी कोई चांस लेने के मूड में नहीं था …उसने मनु की पसलियों पैर फिर से घंटा जड़ना चाहा पैर मनु ने अपनी खोनी से उसका वॉर ब्लॉक किया और उसके घुटने में फिर से दर्द की लहर दौड़ा दी …मनु की शर्ट ? का कालर अभी भी टोनी के हाथ में था टोनी ने मनु के सर पैर मुक्का मरना चाहा दूसरे हाथ से ..पैर मनु क्युकी बड़े साइज के ढीले कपडे पहना करता था सो हवा में निचे झुका और शर्ट सी बहार निकल आया ..मनु की शर्ट ? टोनी के हाथ में झूल रही थी …पैर मनु अब टोनी के सामने था …रिंग में मनु की शर्ट ? उतरते hi सीता बजने लगी …

सामने टोनी भी हैरान सा मनु को देख रहा था …जहाँ टोनी 6’ 4’’ का लम्बा छोड़ा body-builder था वहीँ उसके सामने मनु 5’ 9’’ का फुल टोन एथलेटिक लेअन बॉडी के साथ खड़ा था …जिसमे उसकी बॉडी पैर मौजूद हर कट्स हर उभर उसकी बॉडी पैर वर्कआउट की दास्ताँ खुद सुना रहा था …चेस्ट, बाइसेप्स, एबीएस फ्रंट लोअर एबीएस उसकी बैक के टोन मसले देखकर खुद बा खुद टोनी भी हैरान सा देख रहा था की मनु ने कितना वर्कआउट किया होगा …जहाँ भीड़ मनु की बॉडी देखकर khud-b-khud सीटियां बजने लगी थी वहीँ टोनी भी कहीं न कहीं मनु को जो अब तक हलके में ले रहा था …अब हलके में लेना बंद कर चूका था उसके मूव और बॉडी देखकर .

टोनी हवा में खुद मनु की तरफ उसका टारगेट था मनु का सर या पसली जिसको हिट करके मनु को धूल छठा देना उसका टारगेट था ..आज मनु का क्या होगा यह सवाल वहां कड़ी साड़ी भीड़ के जेहन में था ..

पैर एक इंसान था जिसके चेहरे पैर मुस्कराहट फ़ैल चुकी थी और हु और कोई नहीं मास्टर थे …उनकी मुस्कराहट देखकर पास खड़े आदमी ने भी सोचा कैसा आदमी है जो बचे की मौत से खुश हो रहा है ,उस आदमी की नज़र में एक धिक्कार भरा सवाल था मास्टर के लिए “कैसे आदमी हो जो बचे को मरता देखकर मुस्कुरा रहे हो ऐसे में तुम मुस्कुरा hi कैसे सकते हो??” मास्टर ने उसकी नज़र और उसके पीछे छुपे इस धिकार भरे सवाल को आसानी से पद लिया और अपने अंदाज़ में सिगरेट जलाई जोकि मास्टर बहुत खुसी या गम ने जलया करते थे एक काश लिया और उस आदमी को इशारा किया जो इशारा था रिंग में देखने के लिए उस आदमी ने देखा ..मनु न सिर्फ टोनी के वॉर को अपने दोनों हाथों से ब्लॉक किया बलिक तुरंत hi घूमकर टोनी के सर को निशाना बनते हुए उसके सर पैर खोनी का ज़ोरदार वॉर कर दिया जिससे टोनी सर से खून भेने लगा टोनी का दर घूमने लगा था …

मनु गुस्से से भरा हुआ था उसने टोनी के ढीले पड़ते hi उसके सार्क इ पीछे उसी के हाँ भाई टोनी के hi फेवरेट मूव से टोनी की गर्दन के पीछे वॉर किया और टोनी ज़मीं पैर पड़ा था …भीड़ में जहाँ टोनी देखकर हैरानी थी पैर वहीँ अब माहौल टोनी के बजाये मनु को चीयर करने में लगा हुआ था टोनी में अभी भी जान बाकी थी उसने भीड़ की आवाज़ सुनाई दे रही थी …उसे बड़ा ताजुब हो रहा था की केस एक 16 साल के लड़के ने उसे न केवल हराया बल्कि ज़मीं पैर गिरा दिया था ..

भीड़ में हर कोई मनु को चीयर करने में लगा हुआ था …मनु आगे बड़े टोनी का सर ज़मीं से उठाकर उसके कान के पास बोलै “देख जिस भीड़ में तू अपनी जीत को ढूंढा करता था आज तेरी चित होने पैर भी भीड़ वहीँ है पैर अंतर इतना है तेरे साथ देनेवाले भी अब तेरे खिलाफ चीयर कर रहे हैं …बड़ा घमंड थान ा तुझे अपनी ताकत पैर तूने न जाने कितने लोगों को मारा थान ा इसी रिंग में आज तू उसी रिंग में किसी और के reham-o-karam पैर है …बोलै आगे क्या करूँ करूँ तेरे साथ वही जो तू सबके साथ करता आया है …या छोड़ दूँ ???”

मनु ने उसका सर हाथ में पकड़ा हुआ था तभी किसी के चिल्लाने की आवाज़ आयी “किल हिम फिनिश हिम “

शायद कोई होगा जिसके दिल में टोनी के लिए नफरत भरी होगी …आज टोनी को एहसास हो गया था .की दुनिआ में चढ़ते सुराज को सलाम करने की आदत होती है …उस एक आदमी का नारा थोड़ी देर में hi “किल हिम किल हिम “ में बदल चूका था …कितने hi फाइटर रिंग के बहार टोनी की मौत का जश्न्न देखने की उम्मीद के साथ खड़े थे टोनी का घमंड जो रहा सहा था टूट कर हवा में ढूडने की तरह उड़ चूका था …उसकी आखों में मनु से मौत मिलने की पूरी उम्मीद थी …उसे आज तक के खुद के बर्ताव पैर बेहिसाब शर्मिंदगी थी …उसने सोचा अगर मनु उसे मार भी डाले तोह उसके लिए ज़िन्दगी से मुक्ति होगी …भीड़ अपने जोश में चिल्ला रही थी …पैर मनु ने उसके सर को छोड़ दिया और बोलै “तेरे जैसे इंसान के लिए मौत मज़ाक होगा पैर मेरे लिए नहीं तुझे मारकर मैं तेरे जैसा नहीं बनना चाहता हूँ जा तुझे ज़िंदा छोड़ रहा हूँ ताकि तू ज़िन्दगी में लोगों के साथ जान की अहमियत समझे आज के बाद इस हार के बाद जिन्दा रहना तेरी सजा है …”

मनु ने उसे ज़मीं पैर छोड़ दिया और रिंग से बहार निकल आया अपनी शर्ट ? लेकर जो उसने हवा में झाडी और वापस पहन लिया और मास्टर की तरफ बड़ा और उनके पेअर चुकार बोलै “सॉरी मास्टर मैंने बिना आपसे कुछ पूछे फाइट लड़ी क्युकी मेरे सामने आपको कोई कुछ बोले यह मुझे बर्दास्त नहीं …इसके लिए मुझे माफ़ कर देना प्ल्ज़”

मास्टर ने उसके कंधे पैर प्यार से हाथ फेरा और कहा “मैं जनता हूँ की यहाँ प्रोवोकिंग आम है पैर तुम्हारा गुस्सा समझ सकता हूँ ..पैर मेरे शेर आज तूने मेरा शिर फक्र से ऊँचा कर दिया तुमने साबित कर दिया की तुम्हे चुनकर तुम्हारे इस मास्टर ने कोई गलती नहीं की मैं जनता था की तुम जीत जाओगे पैर मुझे तोह फिक्र इस बात की थी की जीतने के बाद तुम टोनी को खिन जान से न मार दो ???” मास्टर ने उस इंसान की तरफ देखकर यह कहा जो अब समझ चूका था उस समय मास्टर क्यों मुस्कुराये थे …

मनु ”सॉरी मास्टर मैं उसे मार्कर आपका और अपना नाम नहीं ख़राब कर सकता उसके लिए जीना hi उसकी सजा है तभी हु दुसरऊँ की जान की कीमत समझ सकेगा …और आज के बाद उसे समझ आ जायेगा की फाइट अपनी जगह और जान अपनी जगह है ..”

मास्टर “शाबास मेरे शेर इस बात से तुमने यह भी साबित कर दिया की तुम दिल और दिमाग का सही इस्तेमाल करना सही मायने में सिख चुके हो ?? ….ी म सो मच प्राउड फॉर ु ”

मनु ने जैसे पीछे जाने को पलटा टोनी का आर्गेनाइजर सामने सूटकेस लिए खड़ा था ….जोकि जीत की रकम थी …जिसे लेने से मनु ने यह कहकर मन करना चाहा “मैं अपने मास्टर के रेस्पेक्ट के लिए लड़ा था पैसे के लिए नहीं ..”

आर्गेनाइजर “ यहाँ पैसे के लिए फाइट होती है और तुम जीत चुके हो अगर पैसे तुमने नहीं लिए तोह इसमें हमारा नाम भी ख़राब होगा जो हमे मंजूर नहीं पैसे लो उसके बाद चाहे इन्हे तुम हवा में उड़ाओ या नाली में डालो उससे हमे कोई लेना देना नहीं हु तुम्हारी मर्ज़ी है तुम जीते हो खली हाथ यहाँ से तुमको जाने देना रूल्स के खिलाफ होगा “

मनु ने मास्टर की तरफ देखा मास्टर सिगरेट पिटे हुए मनु की तरफ हाँ का इशारा किया मनु ने उसके आगे कुछ नहीं बोलै सूटकेस ? ले लिया तभी एनाउंसर आया और मनु से नाम पूछने लगा ..मनु कुछ कहता उससे पहले hi मास्टर “रॉकी नाम है इसका “ मनु चुप hi रहा …

रिंग में अनाउंसमेंट ? hui”aaj की फाइट जीती है रॉकी ने टोनी को हरा कर के ों गाइस राउंड हैवे बिग अप्प्लायसे फॉर आवर नई विनर रॉकी “

भीड़ में हर कोई चिल्ला रहा था “रॉकी ……रॉकी रॉकी!” पूरा फाइटिंग एरिया रॉकी नाम से गुजने लगा था ..

मनु और मास्टर अब वापस बहार की और चलने लगे ….रस्ते में बेंच पैर शहीद दर्द में अकेला पड़ा था जिसे देखकर मनु इसकी तरफ बड़ा …शहीद अब होश में था …मनु ने शहीद की तरफ देखा …

शहीद “ रॉकी बहुत ाचा किया तुमने उसे हारकर मैं बहुत खुश hun…tumhari जीत से फाइट तोह नहीं देख सका पैर तुम्हारे हाथ में हु बेग देखकर समझ सकता हूँ विनर तुम hi हो..”

मनु “जब तुम लड़ना जानते नहीं तोह रिंग में गए hi क्यों ??”

शहीद “ रॉकी गरीबी एक ऐसी सजा है जिसके चलते इंसान रोज़ टिल तिलकर मरता है उसमे अगर कुछ करके मौत मिले तोह अनोखा क्या है???”

मनु “ अरे मौत तोह एक न एक दिन सबको आणि है पैर सामने से कोई खुद मौत के मुँह में खुद जाए तोह उसे समझदारी या बहादुरी नहीं बल्कि बेवकूफी कहते हैं तुमने सोचा है तुम्हारी इस बेवकूफी से तुम्हारे परिवार पैर क्या असर होगा ???”

शहीद “ उसी परिवार के लिए तोह खुद मौत को चुना था ताकि उनकी जान बचा सकूँ ??“

मनु “ मतलब ?”

शहीद “ मेरा नाम तोह सुन hi चुके हो मेरा नाम शहीद है मैं एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हूँ पैर जॉब न मिलने के कारन आजकल बेकार हूँ …मेरी एक बहिन है बिलकुल तुम्हारी आगे की उसके दिल में छेद है जिसे मैं dil-o-jaan से चाहता हूँ हु मेरी गुडिअ है उसके इलाज़ के लिए पैसे की ज़रूरत थी …मेरे कुछ पैसे वाले फ्रेंड के साथ यहाँ अंदर आया था उन्होंने चीयर करने के नाम पैर यहाँ ले आये थे पैर अब लगता है सब भाग गए होंगे मेरे रिंग में उतारते hi…khair मेरी बहिन जिसका मेरे अल्वा दुनिआ में कोई नहीं है ..उसे सामने से मरता देखकर एक भाई भला चैन से कैसे रह सकता है …यहाँ चांस मिला था सो सोचने का चांस था नहीं सो कूद गया रिंग में और आगे चांस मिला तोह फिर से मौत से लड़ जाऊंगा क्युकी उसकी जान जाते देखना भी खुद को मरते देखना hi होगा …पैर सुच कहता हूँ तुम्हारी जीत पैर मैं बहुत खुश हूँ ..”

मनु ने मास्टर की तरफ देखा और उसकी आँखों में मास्टर के लिए सवाल था ..मास्टर ने भी पॉजिटिव इशारा किया …मनु “यह लो तुम पहले अपनी बहिन का इलाज़ करा लो क्युकी इस पैसे की तुम्हे ज़ादा ज़रूरत है …मैं तोह अपने मास्टर के रेस्पेक्ट के नाम पैर लड़ा था ,,मुझसे ज्यादा इन पैसे पैर तुम्हारा हक़ बनता है यह तुम्हारा है ..”

शहीद हैरानी से देख रहा था और सोच रहा था की “दुनिआ में सुच में ऐसे लोग भी होते हैं जो अपने हाथ में जीते हुए पैसे दूरसे को देने को त्यार हो जाएँ हु सोचने लगा कहाँ उसके फ्रेंड जो अचे से जानते थे की उसकी बहिन की बिमारी क्या है ..पैर पैसे की हेल्प करने की बजाये यहां फाइट में पैसे देकर उसे ले आये उसे पैसे देने के बजाय ..उसके फ्रेंड्स कैसे ाज़ेब हैं और उनसे अजीब है सामने खड़ा यह लड़का जिसे मेरे बारे में कुछ पता नहीं फिर भी बिना कुछ सोचे यह मेरी मदद करना चाहता है खुद के जीते पैसे से जबकि इसे यह भी नहीं पता की शायद मैं पैसे दे भी पौन या नहीं ??”

मनु शायद उसके सवाल समझ गया और बोलै “अरे बदले में मुझे कुछ नहीं चाहिए पैसे तुम्हारे हैं रखलो और वापस करने की टेंशन न लो मुझे ख़ुशी होगी की इस पैसे से तुम्हारी बहिन की जान बच गयी तोह शायद तुम आगे ऐसी गलती दुबारा न करो और हाँ जब बहिन ठीक हो जाये तोह मेरे मास्टर से मिल लेना तुम्हे जॉब भी मिल जाएगी …जहाँ तुम चैन और सुकून के साथ अपनी बहिन और अपनी देख रेख कर सकोगे …”

शहीद रट हुए “ तुम इंसान नहीं हो रॉकी ,,तुमने आज मुझे खरीद लिया है …कहाँ मेरे जलील दोस्त जो होते हुए मुझे यहाँ छोड़कर भाग गए कहा तुम जिसने अनजान इंसान को न सिर्फ पैसे दिए बल्कि जॉब के साथ ाचा फ्यूचर भी दे रहे हो ,,,जबकि तुम मुझे जानते तक नहीं और यहाँ तक की मुझे भी नहीं पता की तुम्हारे यह पैसे कैसे दे सकूंगा या नहीं “

मनु ने उसका हाथ थमा “ देखो तुमसे फिर कह रहा हूँ पैसे की टेंशन न लो मुझे बदले में कुछ नहीं चाहिए और वैसे भी यह तोह खून से सना हुआ पैसा है अगर इससे तुम्हारी बहिन की जान बच जाती है तोह तुमसे ज्यादा ख़ुशी मुझे होगी और तुम अभी सिर्फ अपने और अपनी बहिन के बारे में सोचो तुम्हारे दर्द मैं अचे से समझ सकता हूँ मेरा भी भाई एक छोटा अगर उपपरवाला न करे ऐसा शामे कंडीशन मेरे साथ होती तोह शायद मैं भी तुम्हारी तरह रियेक्ट करता सो अब फ़िज़ूल की बातें छोड़कर अपनी हालत और अपनी बहिन का सोचो तुमने एक बार भी सोचा है अगर तुम्हे कुछ हुआ तोह उस अकेली लड़की पैर क्या बीतेगी तुमने hi कहा न तुम्हारे शिव उसका कोई नहीं है ..तोह सोचा ज़रा अगर तुम्हे कुछ हुआ तोह क्या हु जी पाएगी इस दुनिआ में नहीं न तोह अभी सिर्फ ठीक होने पैर ध्यान दो..”

शहीद “ रॉकी भाई तुम न केवल अचे बहादुर हो बल्कि एक अचे इंसान भी हो .. सुच में तुमने आज शहीद को खरीद लिया है वक़्त आने पैर शहीद तुम्हारे लिए अपनी जान देने से भी नहीं चुकेगा ..” शहीद बहुत इमोशनल होगया था मनु ने और कुछ कहना ठीक नहीं समझा ..मास्टर किसी से मोबाइल पैर बात करके आ रहे थे वापस ..

मास्टर “देखो शहीद मैंने अपने डॉक्टर को कह दिया है तुम्हारे और तुम्हारी बहिन के इलाज़ के लिए तुम बेफिक्र रहो और यह मेरा कार्ड ? रखलो वहां तुम्हे पैसे देने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी मेरी ंगो है हु सब देख लेगी वहां भी बोल दिया है और यह पैसा अपने और अपनी बहिन के अचे फ्यूचर के लिए उसे करना और जब ठीक हो जाओ तोह कार्ड पैर लिखे एड्रेस पैर आ जाना और मेरा कार्ड ? दे देना जॉब भी मिल जाएगी और हाँ एम्बुलेंस ? आने वाली है सो टेंशन फ्री हो जाओ ok “

शहीद लागबहग रो पड़ा की इस जाने पहचाने शहर में उस जहाँ उसके maa-baap के मरने के बाद उसके सारे रिश्तेदाररों ने इस डर से नाता तोड़ लिया की कहीं पैसे न मांग ले और दोस्तों का तोह आपने देख hi लिया है कैसे शहीद के साथ को छोड़कर भाग गए …इस बेगानी भीड़ में दो अनजाने लोगों ने न सिर्फ शहीद को अपनापन दिया और पैसे के साथ उसकी बहिन के इलाज के साथ उसे जॉब देकर उसके और उसकी बहिन के अचे फ्यूचर को सवारने में साथ दिया …

इतने में एम्बुलेंस ? आयी और मास्टर ने और मनु ने शहीद को उसमे भेज दिया मास्टर ने कॉल तोह कर hi दिया था सो आगे की कारवाही हॉस्पिटल में hi होनी थी ..

मनु और मास्टर अपनी कार ? की चल पड़े मास्टर ने पार्किंग में जाते hi एक सिगरेट और जलाई और पिने लगे मनु भी रुक गया .मास्टर को सिगरेट देखने लगा …

मास्टर मुस्कुरा कर मनु को सीने से लगा कर बोले “बीटा मनु तुमने आज दूसरी बार मेरा सर फक्र से ुचा कर दिया …जो तुमने अजान शहीद के लिए किया है ..उसे देखकर कसम से आज मैं तुम्हें देखकर बहुत ज्यादा खुश हूँ ..आईएम सो प्राउड ऑफ़ ु माय सोन …ी लव ु तुमने जो किया है सही मायने में आज मुझे बहुत ख़ुशी हुई की तुम कितना ाचा सोचते हो “

मनु “ सॉरी मास्टर आपसे बिना पूछे मैंने शहीद को जॉब के लिए हाँ केहड़िया “

मास्टर “ाहः ! अरे पगले जॉब क्या तुझसे बढ़कर है ,,तुमने जो किया सही किया और वैसे भी मुझे सॉफ्टवेयर इंजीनियर की ज़रूरत थी और शहीद जब आएगा तोह पुरे दिल के साथ काम करेगा जो की बिज़नेस के लिए भी ाचा होगा ,,तोह इसमें घाटे का सौदा कैसे हुआ ..और तुमने आज न सिर्फ शहीद की जान बचाई बल्कि उसकी उस मासूम बहिन को भी बचा लिया जिसके लिए शहीद ने जान की बाज़ी लगाई thi…thank ु बीटा “

मनु “ मास्टर थैंक ु मुझे किस लिए कह रहे हैं आप??”

मास्टर “ बीटा जब से तुम मेरी ज़िन्दगी उस ज़िन्दगी में आये हो जिसे मैं वीरान कर चूका था …पैर जबसे तुम आये हो मुझे भी जीने की नयी वजह मिले और तुम्हारे आने से मैं भी आज इतने अचे काम में जुड़ सका सो थैंक ु की तुम मेरी ज़िन्दगी में आये” मास्टर की आवाज़ अब भारी हो चली थी मनु ने देखा आज मास्टर भी बहुत इमोशनल हो गए थे तोह मनु ने बात हलकी करने के लिए बात घुमा दी..

मनु “ मास्टर हु सब तोह ठीक है पैर रॉकी कहाँ से लगता हूँ मैं आपको और यह नाम कुछ अतरंगा नहीं है या आपने मज़ाक बनाना के लिए तोह नहीं कहा मुझे रॉकी“

मास्टर को मनु की इसबात से हंसी आने लगी “अरे पगले रॉकी नाम तोह मेरे फेवरेट मूवी ? का है “रॉकी थे बल्बोआ जिसमे रॉकी नाम का बॉक्सर ? फाइट करता है सिल्वेस्टर स्टैलोन की मूवी है उसका नाम सबसे पहले ज़ुबान पैर आया तोह “रॉकी “ बोल दिया और वैसे भी यहां सभी के पेट -नाम या fake-name से hi फाइट होती है ..अब कोण जाने टोनी का रियल नाम क्या होगा समझे “रॉकी बाबू” वैसे मन्ना होगा क्या लास्ट का मूव था की टोनी ज़मीं पैर “

दोनों ऐसे hi बात करते रहे और कार ? में बैठकर अपने घर आगये …जिसके बाद मनु अपने घर के लिए निकल गया था …

मनु अपने घर पूछा और उसके पास अजय आया एक ग्रीटिंग कार्ड लेकर मनु को थमा दिया…

मनु ने देखा ग्रीटिंग कार्ड खोलकर ..उसके चेहरे पैर एक मुस्कराहट आ गयी …

अजय “ देख लिया न भैया पुष्पी दीदी ने सिर्फ आपका hi नाम लिखा है मेरा नहीं …आने दो अचे से पूछूंगा उनसे की मेरा नाम क्यों नहीं लिखा इस ग्रीटिंग कार्ड में ..लगता है मुझसे प्यार नहीं करती…” अजय बचूं की तरह मुँह फुलाकर बोलै ..

मनु कुछ कहता उससे पहले hi मनु का मोबाइल बजने लगा जिसपर नाम देखकर मनु ने अजय की तरफ बड़ा दिया ..अजय ने तुरंत कॉल उठाई “मैं आपसे बहुत नाराज़ हूँ दिल्ली गयी पड़ने के लिए हु तोह ठीक है पैर ग्रीटिंग कार्ड भी भेजा हु भी समझ आया …पैर कार्ड पैर सिर्फ भैया का नाम मेरा नाम लिकने में पेन की इंक सुख गयी थी क्या जाओ समझ गया सब कुछ प्यार नहीं है न मुझसे है न जाओ तुमसे बात नहीं करूँगा ..” अजय ने एक सांस में hi अपनी शिकायत कह दी थी पुष्पी से हाँ कॉल उसी का था ..

पुष्पी ने जब अजय की शिकायत सुनी तोह हँसते हँसते उसके पेट में दर्द होने लगा …जल्दी से बोली “ाले ले ले मेरा हीरो सा भाई बुरा मान गया अरे पागल पड़े के चलते तोह घर से दूर यहां हॉस्टल में रह रही हूँ यहाँ तोह कोई अपना भी नहीं है जिससे कुछ कह सकूँ …जिसे देखो अपने में मस्त रहता है ..मैं तुझे अचे से जानती थी ..और तू लड़ेगा मुझसे यह भी इसी लिए जानकार तेरा नाम नहीं लिखा था मैंने क्युकी तेरी लड़ाई बड़ी मिस करती हूँ यहाँ पगले ..अब मनु तोह लड़ता नहीं तोह तुझे छेड़ने का मज़ा मुझे hi पता है …लव ु बीआरओ ..मुह्हह्हआ! “पुष्पी ने ज़ोर से किश कर दी जिसके बाद अभी तक रूठा अजय हंस कर

Bola”didi ी आल्सो मिस ु सॉरी गुस्सा आ गया था ..”

पुष्पी” देख अजय तू लादले हु ज्यादा ाचा लगता है मुझे ,,पैर ऐसे सॉरी मत बोलना ..क्युकी मनु तोह लड़ता नहीं पैर पता नहीं कैसे मेरा हु भाई मेरी और तेरी पड़े के साथ खर्चे भी उठता है उपपरवाला जाने ..तू उसे तंग न करना पैर मुझसे लड़ने में कंजूसी की तोह सोच लियो क्या हाल करुँगी तेरा हपफहह!”

अजय भी अब रंग में आ चूका था “ ाचा देखते है क्या कर लोगी ,,,ाचा भैया से बात करलो ..”अजय ने मनु को मोबाइल पकड़ा दिया और अंदर चला गया क्युकी अंदर से अजय के नाम की आवाज़ लग चुकी थी …जो इस बात का सिग्नल था की खाना रेडी है …

Manu”didi आप ठीक हो न वहां किसी चीज़ की कमी तोह नहीं है न और पैसे भेजे थे मिले गए न और ज़रूरत पड़े तोह सोचना नहीं बस बोल देना …”

पुष्पी रट हुए “बस कर भाई और कितना करेगा मेरे लिए छोटा होकर मेरा सारा खर्चा उठा रहा है स्कालरशिप भी तेरी वजह से मिली और दिल्ली में भी तूने अपने दम पैर भेजा है और हर हफ्ते पैसे भी तू भेज देता है ..मेरे खुद के maa-baap से ज्यादा तोह तू कर रहा है मेरे लिए और कितना करेगा …थोड़ा तो हराम कर न कहाँ हु प्रसाद और हु चिंटू जैसे भाई जिन्होंने एक बार भी नहीं पूछा की उनकी बहिन दिल्ली में कैसे रह रही है या नहीं और कहाँ तू बिना बोले मेरी हर ज़रूरत में मुझसे पहले मेरे आगे खड़ा है …कसम से कभी कभी लगता है क्या मैं तुमसे मदद लेकर सही कर रही हूँ या तुम्हारा उसे कर रही हूँ..”

मनु “ख़बरदार आज कह दिया आगे एक लफ्ज़ नहीं सुन्ना मुझे क्या एक बहिन भाई पैर भोझ होती है और क्या कहा आपने उसे कर रही हो कोई बहिन भाई के फ़र्ज़ को उसे का नाम कैसे दे सकती है …अगर ऐसा है तोह आज के बाद मैं आपसे बात नहीं करूँगा ..ok ??”

मनु का गुस्सा देखकर पुष्पी “नहीं भाई गलती हो गयी देख तू बुरा मत मान जो दिमाग में आया कह दिया और तूने बात करना बंद कर दिया तोह मैं मर hi जाउंगी मेरी भाई मुझसे गलती हो गयी मुझे माफ़ करदे प्ल्ज़”

मनु “दीदी आजके बाद अपने दिमाग का काम मुझसे बात करने पैर मत लगाना मुझे मेरी बहिन का फ़र्ज़ पूरा करने में कोई दिक्कत नहीं है और उसे आप चाहे जो नाम दो पैर कभी मेरे प्यार और सम्मान को आप उसे करने जैसा बोलोगी तोह मैं कैसा फील करता हूँ आपको पता है na,aage से यह सब नहीं कहना और अपने और हमारे सपने को पूरा करने पैर ध्यान दो आप और बाकी की टेंशन अपने इस भाई पैर छोड़ दो ok “

पुष्पी “ok मेरे बाप …तू कब इतना बड़ा होगया समझ hi नहीं आया मुझे पैर भाई सच में तू मुझे दुनिआ में सबसे पायरा है टब hi अपना ध्यान रखना क्युकी तू दुनिआ में सबसे कीमती है इस बहिन के लिए ाचा अब रखती हूँ हॉस्टल में सोने का टाइम हो गया है bye & लव ु ंद टेक केयर मुउउउउउठाआआं!!”

जिसके बाद कॉल कट चुकी थी पैर मनु के चेहरे पैर अब मुस्कराहट लौट आयी thi….manu उठा और खाने चला गया और खाना खाकर सो गया इसके साथ hi आज का दिन ख़तम हुआ …

अगले दिन में डार्क फाइट की हर नई में रॉकी नाम का जिक्र किसी तूफ़ान की तरह फ़ैल चूका था …

हर किसी के मुँह पैर रॉकी नाम चढ़ गया था और चढ़ता भी क्या न टोनी जिसने कितने फिघ्टर्स को जान से मार दिया था …

कितने hi ाफिज़ कर दिए थे टोनी ने आपने हाथों से ..टोनी dark-fights’ का जाना मन नाम था …

जिसका लोगो में क्रेज था …टोनी की हाइट बॉडी उसकी पर्सनालिटी और उसपर उसके डेडली मूव जिसे देखकर dark-fight देखने वाले लोगों के दिल और दिमाग सुन हो जाया करते थे …टोनी की जीत से लोगों को फर्क पड़े न पड़े पैर उसकी हर की खबर जंगल में आग की तरह फ़ैल चुकी थी हर कोई रॉकी का नाम जप रहा था …

पैर रॉकी के बारे में काम hi लोग जानते थे …वैसे तोह मोस्टली dark-fight dark-net पैर ऑनलाइन चला करती थी ..जिनसे ब्रॉडकास्टर भी तगड़ा पैसा बटोरा करते थे …पैर इसे आप मनु की किस्मत कहो या …कुछ और जिस दिन मनु और टोनी की फाइट हुई थी उस टाइम पैर भी उसका लाइव ब्रॉडकास्ट चल रहा था पैर जब शहीद को टोनी ने हरया उसी टाइम dark-net का लिंक कैमरा के फाल्ट के चलते ब्रेक हो गया था जिसमे कैमरामैन जी जान से लगा हुआ था …उसे ठीक करने में पैर कैमरा ठीक नहीं हुआ था …तोह उसने ुरगेंटली दूसरे कैमरा मन से कैमरा मंगवाया जिसमे काफी टाइम लग गया और जब सारा सेटअप लगा कर शुरू किया ब्रॉडकास्ट तब सिर्फ रिंग में गिरा हुआ टोनी दिखा ..क्युकी मनु तब तक रिंग से बहार निकल चूका था …और सारे लाइव व्यूअर सोच में पड़े थे की टोनी जैसे बाँदा जो खुद लोगों को जान से मार दिया करता था …उसे किसने मार दिया …

और उसके बाद जब एनाउंसर ने भी जब अन्नोउंस किया तोह मनु रिंग से बहार मास्टर के साथ था …जिसमे लोगों को सिर्फ एक नाम मिला था “रॉकी” ….और रॉकी हु नाम था जिसने टोनी को हरया था …पैर रॉकी को सिर्फ उस समय मुजूद रिंग में सभी ने देखा था पैर ऑनलाइन वाले viewer’s ने नहीं सो आप सभी समझ hi सकते हैं …..उनके लिए रॉकी एक मिस्ट्री था जिसने टोनी जैसे पहाड़ को तोड़ कर जमीं में मिला दिया था …और दुनिआ एक बात बड़ी अछि है दिखने वाला कैसे भी हो फर्क काम पड़ता है पैर जहाँ सिर्फ नाम होता है जिसकी शकल तक नहीं देखि हो लोगों ने वहां सिर्फ नाम नहीं होता ..हाँ जनम नाम के साथ उसके नाम की कल्पना भी शामिल होती है ऐसा hi लोगो ने जब रॉकी का नाम सुना तोह सबने अपने अपने हिसाब से रॉकी की ऑनलाइन कहानियां बनानी शुरू करदी …

मतलब रॉकी इस समाया ची खासी डिमांड में था ..उसका क्रेज टोनी की हार के बाद ज़बरदस्त तूफ़ान पैर था …

पैर इन सबसे अनजान मनु अपने स्कूल के लिए त्यार हुआ और स्कूल आ गया …जहाँ अजीब सी चल पहल थी हर कोई रॉकी के नाम पैर कुछ न कुछ बोल रहा था …पैर मनु क्युकी फालतू की बातों और फालतू के लोगों

से दूर रहा करता था …अपने बेंच पैर गया और अपनी स्कूल का टाइम निकलने लग गया …स्कूल के बाद हु बाकी की ट्रेनिंग पैर गया उसके बाद अपने घर और खाकर मस्त सो गया …

अगला दिन सुबह जब हु मास्टर और गुरु जी के साथ ट्रेनिंग कर रहा था …तोह मास्टर ने उसे बताया की रॉकी कितना फेमस हो गया है ,,,पैर मनु और संजीदा हो गया …

मनु “ मास्टर यह तोह गड़बड़ हो जाएगी अगर सबको पता चल गया की रॉकी कोई और नहीं मैं हूँ …मतलब मम्मी और पापा की मार पड़ेगी …”

मास्टर “ हाहाहाःहाहा! रॉकी जिसने इतने बड़े टोनी को तोड़ फोड़कर रख दिया हु मम्मी पापा की मर से डरता है ….यह ाचा है कसम से कितना मस्त जोके है …हाहाहाःहाहा!”

मनु ” मास्टर आप हंस रहे हैं यहाँ मेरी फटी जा रही है …मास्टर अब मैं क्या करूँगा जब घर पैर पता चलेगा की रॉकी कोई और नहीं मैं हूँ ??”

अजय “ सूचि में भैया आप रॉकी हो वाओ! क्या बात है कितना कूल है मेरा भाई है जिसने टोनी को थोक डाला ..”

मनु “ अबे तुझे पता भी है क्या कह रहा है ,,,सोच मम्मी पापा को पता लगा तोह क्या होगा ,,,मार पड़ेगी थोक के भाव ..और सुन तुझे कैसे पता टोनी के बारे में ??”

अजय “भैया रिलेक्स मैं घर पैर या बहार किसी को नहीं बताने वाला हूँ सो चिल बीआरओ …और हाँ टोनी को मैंने ऑनलाइन फाइट पैर देखा था गुरु जी ने दिखया था कैसे लाइव dark-net पैर इन फाइट्स का ब्रॉडकास्ट होता है …”

मनु ने सर पकड़ लिया “मतलब तोह सारे लोगों को पता चल गया होगा की रॉकी मैं हूँ …मास्टर अब मैं क्या करूँगा मेरा तोह घर से निकलना भी बंद हो जायेगा …???”

मास्टर से मनु की हालत देखि नहीं गयी ..”अब समझ आया की ऐसे hi बिना सोचे कहीं भी कूद जाना क्या होता है …खैर कोई बात नहीं वहां मेरा एक कांटेक्ट था जब तुम फाइट के लिए कूड़े तोह उससे पहले hi मैंने इशारा कर दिया था उसे क्युकी जब टोनी मुझे uksaane(provoke) में लगा था तोह तुमको देखकर hi मैं समझ गया था की टोनी नाम का इंसान ज़मीं पैर नाचेगा क्युकी तुमको आफ्टर आल ट्रेनिंग मिली भी ऐसी hi है …खैर जब तुम मूव करते रिंग में उससे पहले hi मैं उसे इशारा कर दिया था तोह उसने तभी कैमरा ख़राब कर दिया था वर्ण आज तुम इंटरनेशनल लेवल पैर फेमस होते …???”

मनु “थैंक ु मास्टर सुच में मैंने सोचा भी नहीं था की यह सब हो जायेगा ..आईएम सो सॉरी “

मास्टर “ बीटा सॉरी की ज़रूरत नहीं मुझे तुम पैर और अजय दोनों पैर नाज़ है ..यह सब तोह आम सी बात हैं चलती रेह्न्गी तुम सिर्फ अपनी ट्रेनिंग पैर ध्यान दो इस बार नेशनल फाइटिंग चैंपियनशिप है याद है न देहरादून में तुम्हारी उसे जितना है तुम्हे सो कीप मोरे प्रैक्टिसिंग ंद बे प्रेपरेड़ 4 तहत बैटल …इन सब बातों की फ़िक्र छोड़ दो अपने रॉकी नाम को एन्जॉय करो बे लाइव विथ फेमस लाइफ …और फिर हमसब हैं न देखने के लिए तुम बस उसकी तयारी करो ok सोन ??”

मनु “जी मास्टर आपने कहा न हो जायेगा ..”

उसके बाद मनु और अजय दोनों ट्रेनिंग में लगा गए …मनु को रॉकी नाम से जो पब्लिसिटी मिली थी …बहुत ज्यादा थी ..जिसमे अजय को बड़ी कहसुई हुई थी की उसके भैया ने टोनी जैसे सांड को हरा दिया था पैर क्युकी मनु ने उसे समझा दिया था की हु इस बात को अपने तक hi रखे सो भैया का आर्डर माना उसके लिए मोस्ट इम्पोर्टेन्ट था ..…

वहीँ इसके उलट मनु इस बात से परेशान था की रॉकी की पब्लिसिटी कहीं उसके सर का दर्द न बन जाये उसका ध्यान अभी देहरादून के फाइटिंग चैंपियनशिप की विनिंग पैर था ..

देहरादून में मनु क्या जीत पायेगा ???क्या रॉकी नाम से उसका सर दर्द बढ़ना सिर्फ उसकी सोच है या सिर्फ उसके दिमाग का फितूर ????….इसका जवाब तोह टाइम ⌚ या उसकी किस्मत के पास है ……..:हिंट:
 
अपडेट 61

बचपन की यादें

देहरादून में मनु क्या जीत पायेगा ???क्या रॉकी नाम से उसका सर दर्द बढ़ना सिर्फ उसकी सोच है या सिर्फ उसके दिमाग का फितूर ????….इसका जवाब तोह टाइम ⌚ या उसकी किस्मत के पास है ……..

अब आगे......

मनु अपनी दुनिआ बड़ा चल रहा था एक तरफ ट्रेनिंग और उसके बाद पड़े जिसमे और टेंशन देने के लिए बोर्ड की एक्साम्स थी इस बार हाँ …मनु अब 10तह में था और आगे क्या करना है यह फैसला उसने मास्टर पैर छोड़ दिया था .क्युकी मनु के परिवार में शायद मनु hi था जो 10तह तक पहुंचा था …उसके पिता राजिंदर ने तोह 6तह या 7तह से hi पड़े छोड़ दी थी और जैचंद के पीछे राजिंदर ने पूरी जान लगाई पैर जैचंद तेरा असली उसने भी भाई से ज्यादा पड़े नहीं की थी अब आते हैं सुमित्रा पैर तोह भी अपने पति की तरह गांव में 6तह तक hi पड़ी थी उसके बाद उसने भी पड़े से हाथ जोड़ लिए थे क्युकी उस टाइम उसे दूर जाकर पड़ने का मौका नहीं मिला था …तोह यह कहना सही होगा की मनु ने अपनी फॅमिली में 10तह तक जाने की हिम्मत की थी …जिसके बाद की सलाह कोई पड़ा लिखा इंसान hi दे सकता था …जिसके लिए उसने या तोह पुष्पी या फिर मास्टर ठीक थे अब क्युकी पुष्य भी दिल्ली में चली गयी थी …तोह बचे सिर्फ मास्टर सो मनु ने उनसे कहा की “आगे क्या करना है मतलब 10तह के बाद कोनसा स्ट्रीम लेना सही होगा???”

मास्टर ने छोटा और सिंपल जवाब दिया “जैसे नंबर आएंगे वैसे सोचना ??”

जिसपर मनु ने भी सोचा बात तोह सही है जैसे नंबर वैसा स्ट्रीम चाहे आर्ट्स, कॉमर्स या साइंस,

खैर अभी मास्टर का कहना था की देहरादून में होनेवाली चैंपियनशिप की तयारी में ध्यान देना था .और क्युकी देहरादून में जो टूर्नामेंट था हु नेशनल था सो मनु भी उसकी तयारी में लगा हुआ था …इसमें जीतने का मतलब आगे ..जाकर और ाचा फाइटर बन जाना नेशनल लेवल के बाद इंटरनेशनल लेवल जिसतक पहुंचना हर खिलाडी का सपना होता है …मास्टर तो निश्चिन्त थे उनको पता था की मनु आराम से जीत जायेगा क्युकी बाईट 3 साल की हार्ड ट्रेनिंग अरे हार्ड क्या एक्सट्रेमेली हार्ड ट्रेनिंग जिसको पार करना हर किसी नार्मल इंसान के बस की बात भी न हो पैर थैंक्स तो गुरु जी सुनील जिन्होंने मनु की डाइट का बहुत बेहतरीन ख्याल रखा था जहां एक खिलाडी के लिए डाइट की क्या एहमियत होती है ..आप इस बात से अंदाज़ा लगा सकते हैं की बहुत से खिलाडी अछि डाइट न मिलने के चलते कभी अपनी किस्मत को ब्लैम करते हैं तोह कभी गोवत को की उनको अछि से अछि डाइट प्रोवाइड की जाये ताकि हु अपना फोकस सिर्फ और सिर्फ ट्रेनिंग पे लगा सकें ..पैर यहाँ गुरु जी ने के अचे डिएटिट्यां होने का सबसे बड़ा फ़ायदा मनु को मिला था …मनु ने 3 साल में खुद को और अजय को बहुत hi अचे से डेवलप्ड किया था …और जहाँ उस एक्सट्रेमेली हार्ड ट्रेनिंग को न केवल मनु ने सहा बल्कि उसे पार भी किया …यह गुरु जी की अछि म्हणत और मास्टर के रिसोर्सेज हे थे की मनु को मास्टर और गुरु जी ने बेस्ट ऑफ़ थे बेस्टेस्ट देने में हेल्प की क्युकी मास्टर ने अपने रईस होने के चलते सुनील को भी फुल फ्रीडम दिया हुआ था की मनु को हु सबसे बेस्ट डाइट प्रोवाइड करें और …

यहां यह सब बातें आपको इस लिए बता रहा हूँ की ताकि आपको भी पता चल सके की मनु के अचे फाइटर बनने के मास्टर के सपने के पीछे मास्टर और गुरूजी का कितना हम किरदार है …हु कहते हैं न हीरो सिर्फ एक hi होता है पैर हीरो कभी हीरो नहीं हो सकता अगर उसके सपोर्ट में कोई न हो हाँ हीरो की ताकत और डेडिकेशन बाकियों से ज्यादा होती है पैर क्या सिर्फ इनसब से हीरो जीत पता है …हीरो के पीछे उसकी एक अनदेखी सपोर्ट टीम होती है …जिनकी म्हणत और लगन हीरो से कहीं ज्यादा होती है …जिनको मोस्टली लोग नोटिस hi नहीं करते …यहाँ सिर्फ मास्टर और गुरु जी hi नहीं थे हर हु सेक्स जिसने मनु को अपना मन था उसके लिए उनकी सपोर्ट को अनदेखा नहीं किया जा सकता चाहे maa-baap की म्हणत हो उनका त्याग हो अब आप सोचेंगे की maa-baap ने कोनसा त्याग कर दिया ारे भाई खुद काम पड़े लिखे हैं पैर अपने बचूं के लिए कितनी म्हणत कर रहे हैं बिना रुके बिना थके क्या यह उनकी म्हणत और त्याग नहीं है …और मास्टर जिनका सपना था की मनु बेस्ट फाइटर बने जिसके लिए उन्होंने मनु को हर हु रिसोर्सेज अवेलेबल करवाए जो शायद hi कभी मनु की पहुँच में आ पते ..एक लोअर मिडिल क्लास का लड़का जिसे सिर्फ सोचने में उसकी लाइफ बिट जाती है की आगे करना क्या है और करना है तोह कैसे यहाँ मास्टर के सपने को मनु ने भी अपना सपना बना लिया था …मास्टर ने मनु को हर तरह की ट्रेनिंग में हेल्प की थी चाहे इंडियन मार्टिकल आर्ट्स हो या इंटरनेशनल मार्टिकल आर्ट्स और न सिर्फ सिख्या बल्कि उसे डार्क मार्किट ले जाकर उन फाइट्स के फिघ्टर्स के फाइटिंग मूवमेंट को सिखने में भी मास्टर के बिना मनु श्याद hi कभी सिख पता ..और मास्टर ने उन डार्क फाइट्स को मनु को इसलिए भी सिख्या और दिखाया की मनु उन पेह्लूं पैर भी गुर कर सके जिनपर इंसान ताकत के नशे में चूर होकर गलती कर देता है …उन डार्क फाइट्स से मनु न केवल अलग अलग डेडली मूव्स सिखने में कामयाब हुआ बल्कि उसने वहां लोगों की जान जाते देखा …जिसे दिखाकर मास्टर का मक़सद था की मनु जान की एहमियत समझे जो मनु अचे से समझा तभी उसने टोनी को हरने के बाद भी जिन्दा छोड़ diya…yeh मास्टर hi थे जिनके दम पैर मनु न केवल खुद को त्रिनेड कर रहा था बल्कि अजय भी सिख रहा था …और गुरु जी चाहे कितने अचे भी डिएटिट्यां हों पैर बिना मास्टर के फ्रीडम के क्या हु मनु को अछि से अछि डाइट दे पते नहीं ! सो इनसब की म्हणत और सपोर्ट से आज मनु सही मायने में मनु था …बहुत हुआ गायन जनता हूँ शायद ाचा न लगे पैर किरदार के साथ इन्साफ न हो यह भी अछि बात नहीं है सो बताने की जरूरत लगी सो बता दिया क्युकी एक किरदार दूसरे से कहीं न कहीं जुड़ा होता है रियल लाइफ की तरह सो जो सही लगा बता दिया …अब ज्यादा बोर नहीं करूँगा वर्ण कमेंट में क्लास लग जानी है पक्का इसबात पैर की ज्ञान बहुत पेलता हूँ … सो बैक तो थे स्टोरी फ्रेंड्स…

मनु अपने मास्टर के आर्डर को फॉलो करने में लगा हुआ था …और क्युकी मास्टर ने कहा था तोह जीतना भी मस्ट था मनु के लिए ..सो रात दिन ट्रेनिंग में म्हणत कर रहा था ताकि जीत कर मास्टर के आर्डर को पूरा कर सके चैंपियनशिप दो महीने बाद thi..per मनु कोई कमी नहीं छोड़ना चाहता था …टाइम बिता और चैंपियनशिप का टाइम भी आया और मनु चल दिया देहरादून जहाँ उसे नेशनल में पार्टिसिपेट करना था …मास्टर ने कहा बहुत की “कार ? या air-flight ✈ का अर्रंगेमेन्ट्स कर देता हूँ “..

पैर मनु ने यह कहकर ताल दिया की “मास्टर कार ? में बहुत घूम चूका हूँ और जब टाइम लगेगा तोह फ्लाइट ✈ में भी घूम लूंगा पैर आज तक कभी ट्रैन ? में नहीं बैठा हूँ सो प्ल्ज़ अभी ट्रैन ? का सफर एन्जॉय करना चाहता हूँ ..पैर अगर आप चाहे तोह वापसी में जैसे कहेंगे वैसे आ जाऊंगा …प्ल्ज़ मास्टर प्ल्ज़”

मास्टर ने भी फिर ज़ोर नहीं दिया क्युकी हु भी अचे से जानते थे मनु कभी सिटी से बहार hi नहीं निकला सो ट्रैन ? का सफर एन्जॉय करने का फर्स्ट टाइम मनु अपने हाथ से नहीं जाने देगा …मास्टर ने सिर्फ मुस्कुरा कर इतना कहा की “अपना ख्याल रखना …जानता हूँ तुम्हारी आदत है किसी की भी मदद करने की पैर अगर ज़रूरत पड़े तोह मदद कर देना पैर एक बात का ध्यान रहे अपना रियल नाम न बताना हु रॉकी नाम बता देना क्रेज बना रहेगा ..” मनु आगे कुछ कहता उससे पहले मास्टर ने बिच में रोक दिया .

मनु “जी मास्टर आप भी अपना ध्यान रखना और ज्यादा स्मोक मत करना और टाइम पैर खा लेना और टाइम से मीटिंग ख़तम कर लेना ..और….”

मास्टर “मेरे बाप चैंपियनशिप पैर तू जा रहा है ..और क्लास मेरी ले रहा है ….बस कर इतनी पाबन्दी मेरे बाप ने भी नहीं लगायी कभी मुझपे जितनी तूने एक सांस में लगा दी …ाचा ठीक है सब मानलुंगा तू बस अपना ख्याल रखना और जब जीत जाये तभी बात करना ok लव ु सोन ंद बेस्ट ऑफ़ लक …”

मास्टर ने मनु का माथा चूमा लिया ..

अजय “ भैया यह बा ताकि नहीं है मैं भी फाइट देखना चाहता था आपकी पैर आपने मुझे जाने नहीं दिया ..और अकेले ट्रैन ? के मज़े लोगे आप मैं यहाँ बोर हो जानूंगा थोड़ा छोटे भाई पैर भी रेहम करो “ अजय ने मासूम सा चेहरा बनाकर मनु से कहा ..

मनु ने उसके सर पैर एक तपली मारी “बदमाश सब जनता हूँ घूमना चाहता है न ? पैर घर पैर भी कोई चाहिए नान ाज़ार रखने के लिए वर्ण गिद्ध (वल्चर) कहीं कोई गड़बड़ न कर दे …

(मनु का इशारा उसके रजिनि और जैचंद की तरफ था जो अजय ने बखूबी समझ लिया ,,,मास्टर और गुरु जी भी सब समझते थे क्युकी मनु ने शुरू में hi सब बता दिया था ..)

मनु ने उसके बाद सबसे विदा ले घर से तोह हु विदा लेकर hi आया था राजिंदर और सुमित्रा ने स्पेशल स्पेशलय ऑफ लिया था आज ताकि मनु को स्टेशन तक छोड़ सकें पैर मनु ने सभी को रेस्ट लेने को कहा खुद बस पकड़ कर पहुंचा स्टेशन ?…जहाँ उसने अपनी ट्रैन ? देखि और चल पड़ा ट्रैन की तरफ …मनु का ध्यान ट्रैन ? की तरफ था सो तेज़ी से चलने लगा . पैर भीड़ ज्यादा होने की वजह से मनु किसी से टकरा गया ….ुच्छ ! बड़ी मीठी सी आवाज़ आयी जिसके बाद मनु पलटा और जब पलटा तोह पाया उसकी टक्कर एक हसीना से हो गयी थी हे क्या हसीना थी जिसे देखकर जाने कितने दिल पिसलने को त्यार the….woh लड़की ग्रीन कलर के सूट सलवार में थी उसकी आगे 16 साल लग रही थी उम्र जवानी की थी और जवानी ने उस पैर जो हसीं केहर ढाया था उसका जीता जगता सबूत था उसका जिस्म गोरा चेहरा भूरी सी आँखें पतले से नाजुक हाथ पाँव उसकी कमर प्यारी सी उसका फिगर 32 24 30 के अस्स पास होगा और हाइट कोई 5’ 6’’ के अस्स पास उसके गिरते hi कई हाथ उसकी तरफ बड़े गए जैसे सभी उसके हाथों की छुअन लेना कहते हों जिमे कई जवान अधेड़ और बुड्ढे भी शामिल थे मनु से उसकी टक्कर ऐसा हुई थी की मनु के सीने में उसकी चूचियां भींच गयी थी कुछ चाँद सेकंडके liye,,,per मनु उसके पास था उसने जल्दी से उसे थमा और खड़ा किया और सॉरी बोलै और चल दिया अपने रस्ते न उससे कोई बात किन ा उसकी शिकयत सुनी …

मनु आया और अपनी सीट ढूंढ़ने लगा और जब मिले तोह जा बैठा अपनी सीट पैर ….ट्रैन ? चलने मैं अभी वक़्त था ..ट्रैन जनरल थी मतलब सीट्स पैर और भी लोग आने बाकी थे मनु अपने मस्त था उसने आज पहली बार ट्रैन ? को देखा था …उसके दिल और दिमाग में एक अलग तरह की एक्ससिटेमेंट थी …जिसके चलते हु अपने में खोया हुआ था …उसकी इस एक्ससिटेमेंट को ख़तम करने सामने की सीट पैर नए पैसेंजर आ चुके थे जहाँ एक जानी पहचानी आवाज़ ने उसका ध्यान खींचा…

“अरे भाई तुम यहां कैसे और कहाँ जा रहे हो “यह आवाज़ से मनु का ध्यान टुटा उसने देखा सामने शहीद था …उसने शहीद से हाथ मिल्या और कहा “बस यूँ hi देहरादून जा रहा हूँ टूर्नामेंट के लिए “

शहीद “भाई बहुत ाचा हुआ इस सफर में आप मिले वर्ण मैं तोह सोच रहा था लम्बा सफर कैसे कटेगा ??”

मनु “सफर का क्या है िकट hi जायेगा और आप सुनाओ अब ठीक हो न आप और जॉब कैसे चल रही है आपकी ??”

शहीद “बस भाई तुम लोगों की दुआ है जो एक अजान इंसान को ाचा इंसान बना दिया वर्ण पता नहीं क्या से क्या होता ??”

मनु “ अचे इंसान का हु होता है और जिसका हु होता है हु कभी रास्ता नहीं भूलता “

शहीद ने अचानक किसी को इशारे से बुलाया …और जब हु आया तोह मनु भी थोड़ा हैरान सा हुआ क्युकी हु और कोई नहीं वही लड़की थी जिससे मनु की टक्कर हुई thi…who लड़की भी मनु को देखकर थोड़ी सी हैरान थी ..

शहीद ने उठकर उस लड़की का हाथ थमा और सीट पैर बैठा दिया और उस लड़की से बोलै “देखो तुम रोज़ जिस फ़रिश्ते का जाकर करके उसके लिए दुआ मांगती थी न जिसने तुम्हारा इलाज़ करवाया और मेरा इलाज़ करवा कर अछि जॉब दिलवाई और बदले में कोई चीज़ तक नहीं मांगी आज उससे देख भी लो हु फरिश्ता तुम्हारे सामने है यह हैं हु फरिश्ता जिसने हम दोनों की जहनुमं बन चुकी ज़िन्दगी को नयी जन्नत अत फ़रमाई है खुद देखलो इनको अपनी आखों से “

मनु “ बस बस इतना भी मत कहो ..और फरिश्ता अरे यार आपको कहा से फरिश्ता लग रहा हूँ अगर मैं मदद नहीं करता तोह कोई और कर देता उसमे इतना सब सोचने की ज़रूरत नहीं है “ मनु ने क्रेडिट लेने से इंकार कर दिया हु फरिश्ता सुनकर खुद को over-confidence से दूर रखना चाहता था..

शहीद “ देख लिया न कितने अचे इंसान हैं जो इतना करने के बाद भी टैरिफ सुनने को त्यार नहीं हैं तुम शुक्रिया कहना चाहती थी न इनको लो खुद hi केहदो “

मनु “ अरे कितनी बार कहूना आपको बस भी करो इंसान hi रहने दो और शुक्रिया की जरूरत नहीं है आप दोनों ठीक हो मेरे लिए बस इतना काफी है …ज्यादा सोचकर आपको टेंशन लेने की ज़रूरत नहीं है …”

शहीद कुछ बोलता उससे पहले हु लड़की मीठी सी आवाज़ में शहद घुलती हुई बोली “ शुक्रिया आपने भाईजान की इतनी मदद की और हम दोनों की परवाह की उसके लिए दिल से आपका शुक्रिया “

उसकी मीठी सी आवाज़ ने मनु के दिल को भी एक अलग सा सुकून दिया हु लड़की मनु को शरमाते हुए देख रही थी उसके हाथ खुद के दुपट्टे से गोल गोल करने से कोई भी बता सकता था की हु कुछ और भी कहना चाहती थी पैर शायद मनु को पहली बार देखकर शाम सी गयी थी …उसकी नज़र ज़मीं पैर लगी हुई थी पैर बिच में चोरी से जब भी मौका लगता मनु को एक नज़र देख लेती मनु ने आज सफर के चलते अपने ढीले कपड़ों को छोड़ा हुआ था उसने रेड कलर की एक पोलो t-shirt ? पहनी हुई थी उसके निचे डेनिम ब्लू कलर की जीन्स ? डाली हुई थी जोकि अछि खासी फिट में थी …t-shirt ? हाफ थे जिसमे मनु के मज़बूत डोले और चेस्ट का साइज साफ़ साफ़ उसकी बॉडी बता रहा था …उस बूगी में दो लोगों पैर मेल और फीमेल की नज़रे तिकी हुई थी एक मनु दूसरी हु लड़की क्युकी दोनों hi यंग और डैशिंग स्मार्ट थे …

खैर मनु और शहीद में बात चित होने lagi.woh लड़की चोर नज़रूँ से मनु को देखती थी और खुद में सिमटी हुई थी …मनु ने भी उसके चोरी से देखने को अचे से नोटिस कर लिया था … पैर हु देखकर अनदेखा कर रहा था …शहीद अपनी रो में भेटा हुआ बोलता जा रहा था ..और मनु उसे सुनता जारहा tha..train ? भी अपने टाइम से चल चुकी थी और चलती जारही थी ..शहीद अपने में hi बोलता जा रहा था मनु कभी उस जवाब देता तोह कभी सनटैन रहता उसे शहीद की मनोदशा अचे से समझ आ रही थी की शहीद मनु को कितना अदमीरे करता है इसका सबूत था शहीद का इतना कहना और बार बार उसे फ़रिश्ते सामान कहना …मनु को यह सब अजीब सा फील हो रहा था …की शहीद उसे बार बार फरिश्ता कह रहा है ..

मनु अंत में बोल hi पड़ा “ देखो आप सब कहो मैं सुन रहा हूँ पैर प्ल्ज़ मुझे यूँ फरिश्ता न कहो मैं इंसान hi हूँ आपकी तरह अगर यह सब सुनने की आदत पद गयी तोह शायद यह आदत इंसान को उसकी अच्छी करने के बदले तारीफ का मोहताज़ बना देती है जिससे मैं दूर रहना चाहता हूँ सो प्ल्ज़ मुझे इंसान hi समझ ले आप” मनु ने हाथ जोड़कर कहा था जिसके बाद शहीद भी समझ गया की मनु का मतलब क्या है ..

हु थोड़ा सीरियसली बोलै “ आप जानते हो आपने जो बेग दिया था कितनी रकम थी उसमे ??”

मनु “ उससे फर्क क्या पड़ता है चाहे जितनी भी हो मैंने तोह सिर्फ आपका भला सोचा था मुझे उस पैसे की अभी भी रति भर परवाह नहीं है ,क्युकी इंसान की जान की कीमत पैसे से कहीं ज्यादा है मेरी नज़र में वहां तोह दो जाने डाव पैर लगी थी एक आपकी और उसका इशारा उस लड़की की तरफ था …वहां पैसे की गिनती से क्या फर्क पड़ना था अगर आप लोग ठीक हैं तोह पैसा ज़िन्दगी में और कमा सकते हैं ..”

शहीद “ फिर भी आपकी जानकारी के लिए बता दूँ उसमे पुरे 50 लाख थे ..जिनसे हमने किरये का घर छोड़कर नया घर लिया है और एक दूकान भी ली है जिसमे परचून ? (राशन या ग्रोसरी store)ka सामान भरा है जिससे अछि कमाई होजाती है और मेरी बहिन की आगे की पड़े भी पूरी हो जाएगी ..सब आपकी बदौलत “

मनु “ ाचा लगा जानकर की आपके काम आया पैसा ..पैर अभी भी कहूंगा की आपकी ख़ुशी उस पैसे से ज्यादा कीमती है मेरे लिए क्युकी मैं नहीं चाहता आप जैसा ाचा इंसान दुनिआ में कभी भी गलत रास्ता चुने सो आगे भी कभी ज़रूरत पड़े तोह मदद के लिए बस याद कर लेना जितना इस गरीब से होगा ज़रूर करूँगा “ मनु ने इस लिए 50 लाख पैर ज्यादा रियेक्ट नहीं किया क्युकी बाबा और भटनागर के साथ हु इनसे भी बड़े कई प्रोजेक्ट और मार्किट में काम कर रहा था ..और जब इंसान पैसा देखता है सो उसका रिएक्शन नार्मल hi होता है ..हाँ हु बात और है की पैसा उसका नहीं था पैर सामने जब हर रोज़ पैसा देखता था तोह उसमे अनोखी बात क्या…

शहीद ने अब बातों का रुख मोड़ा क्युकी माहौल थोड़ा सेंटी सा हो चूका था ..

शहीद ने अपनी बहिन से कहा “ अरे तुझे कुछ नहीं कहना घर पैर तोह बड़ी कहती थी की जब हु इंसान मिलेगा तोह यह कहूँगी हु कहूँगी और जब आज सामने है हु इंसान तोह कुछ भी बोल नहीं रही है …कुछ बोल भी दे ”

मनु का ध्यान भी शहीद की बात से उस लड़की की तरफ गया हु लड़की अभी भी अपने पल्लो से खेल रही थी उसकी उंगलिओं में घूमता उसका पल्लो यह साफ़ बता रहा था हु कहना तोह बहुत कुछ चाहती है पैर ज़ुबान और शर्म ने उसे कसकर जकड रखा है …

हु कुछ कहती शहीद अपने सर पैर हाथ मार कर बोलै “अरे मैं भी कितना पागल हूँ इतनी देर से बात कर रहे हैं और आपको अपनी बहिन से नहीं मिलवाया …यह हैं मेरी जान से प्यारी बहिन हीना ..और हीना यह हैं रॉकी “ जिसपर मनु ने तुरंत उसका हाथ दबाकर रोक दिया और

उसके पास आकर बोलै “प्ल्ज़ मेरा नाम ज़ोर से मत लो न मैं ज्यादा फेमस नहीं होना चाहता “मनु ने रॉकी नाम सुनते hi उससे कहा था क्युकी मनु और पब्लिसिटी नहीं चाहता था ..

शहीद ने उसके हाथ पैर हाथ रखकर कहा “जनता हूँ आप क्या सोच रहे हैं और दर्रो नहीं रॉकी नाम दुनिआ में बड़ा कमान है सो don’t वोर्री कोई नहीं समझेगा की हम किसी रॉकी की बात कर रहे हैं “

मनु भी उसका मतलब समझ गया और सोचने लगा” हाँ यार बात तोह सही है इस एंगल से तोह सोचा hi नहीं रॉकी नाम तोह किसी का भी हो सकता है और किसी को क्या पता टोनी को पीटने वाला रॉकी मैं हूँ यह सही है”

शहीद “ अरे हीना जो बोलना है बोल भी दे या मैं समझूँ की तुम्हे कुछ कहना hi नहीं है हम्म्म!??”

हीना तुरंत घूमकर टपक से बोली “मैंने ऐसा तोह नहीं कहा भाई जान “

उसकी इस बात पैर मनु और शहीद दोनों को हंसी आ गयी …जिसपर हु शर्मिंदा सा फील करने लगी …शहीद तोह हँसता रहा पैर हीना थोड़ा उनकंफर्टबले हो गयी थी खुद हरकत की और उन्दोनो की हंसी से ..मनु का ध्यान उसकी पैर था …

मनु “don’t वोर्री अबाउट एनीथिंग प्ल्ज़ बे कम्फर्टेबले विथ उस …आप फालतू की फ़िक्र न करें और प्ल्ज़ थैंक ु तोह बिलकुल न कहना आपके भाईजान ने मेरी जान गले में अटका दी थैंक ु बोल बोलकर और आपने भी कहीं थैंक ु कहा तोह कहीं यह जान hi न निकल जाए ??”

मनु के मुँह से यह सुनकर हीना का हाथ तुरंत उसके मुँह पैर रोकने को चला गया उसे पता नहीं क्यों यह बर्दास्त नहीं हुआ की मनु उन अल्फ़ाज़ों को पूरा कहे …

मनु हैरान था की एक लड़की खुद के भाई के सामने उसके मुँह पे अपने हाथ रखे thi..per शहीद नार्मल लग रहा था ..

हीना “आपको हमारी उम्र लग जाये ऐसे अलफ़ाज़ न निकले आप प्ल्ज़ “

शहीद “ देख लिया न आपकी कितनी इज़्ज़त है हमारी नज़रों में और आप जनाब हमे छोड़ने की बातें कर रहे हैं ..यह अछि बात नहीं है (यह बात शहीद ने मिमिक वे में कही थी..)” जिसपर सभी एक बार फिर से हंसने लगे थे पैर हीना थोड़ी सेंटी हो गयी थी उसकी आँखों में कुछ आंसू से चालक आये थे …हु ांसो न दिखे किसी को तोह हु बहार दूसरी साइड देखने का बहाना करने लगी थी ..पैर शहीद और मनु दोनों ने उसके आंसू देख लिए थे ..

शहीद “रॉकी बाबू यह देखो हमारी जान से प्यारी बहिन की आँखों में आपने आंसू ला दिए हैं यह बात ठीक नहीं है आपकी “

मनु को भी बुरा लग रहा था की उसके बोलने से हीना सेंटी फील करने लगी थी ..वह हीना की तरफ देखकर दोनों काँपकडकर देखने लगा हीना तोह बहार देख रही थी पैर आस पास के लोग मनु को कान पकडे देखकर हंसने लगे थे जिनमे शहीद की हंसी शामिल हो चुकी थी ..जब हीना के कानो में सबकी हंसी पड़ी तोह उसने सभी को मनु की तरफ देखकर हँसते हुए पाया …पैर मनु को जैसे उन्सब्कि हंसी की कोई परवाह hi नहीं थी ..वह तोह बस कान पकडे हीना की तरफ मस्सों सा चेहरा और उम्मीद लिए देख रहा था की हीना रोना बंद करदे …पैर हीना ने जब मनु को देखा तोह उसकी उस मासूम से चेहरे को देखकर उसकी भी हंसी निकल गयी …पैर उसने तुरंत hi मनु के कानो से उसके हाथ हटा दिए

उसके हाथ जब मनु को छुए तोह मनु को तोह एक हीना के हाथों की गर्मी का थोड़ा सा एहसास हुआ पैर हीना के हाथों में मनु के हाथ का एहसास कुछ अलग सा था उसने कभी किसी और लड़के की तरफ देखा भी नहीं था …चुना तोह दूर की बात है …पैर आज मनु से उसकी टक्कर उसकी चुकी को भीचनेवाली मर्दानी छाती ने उसी समय उसके दिल को हिला डाला था उसे उस टाइम भी उतना गुस्सा नहीं आया था जितना उसे ज़रा सी बात पैर भी आ जाया करता था …शायद उसके लिए हु चाँद पल कुछ अलग थे जिसमे उसके जवान जिस्म में किसी और मर्द ने छुआ था …उसने जब पहली बार मनु को देखा तोह उसकी बॉडी उसके चेहरे और उसकी आँखों में खो सी गयी थी हु प्लेटफार्म पैर hi सोच रही थी की पता नहीं उसे फिर देख सकेगी या नहीं पैर जब शहीद ने उसे फरिश्ता कहकर मिलवाया की यह हु इंसान है जिसके लिए तुम दुआ माँगा करती थी …तोह हीना सुच में दिल से बहुत खुश थी की सामने उसने उसी इंसान को देखा जिससे हु टकराई थी …

क्युकी अपनी बीमारी के और भाई के गरीब होने के चलते उसने कहीं न कहीं मान लिया था की शायद हो वोज ज़िंदा बचेगी पैर उस दिन हॉस्पिटल से कॉल आयी तोह पता चला की शहीद भी एडमिट है हॉस्पिटल ? में हु खुद में टेंशन से भर गयी जैसे तैसे हॉस्पिटल ? पुच्ची जहाँ इतना महंगा हॉस्पिटल ? देखकर उसके दिल कहीं न कहीं फीस भी टेंशन का सबब थी पैर उसका भाई यहाँ है यह बात उसके जेहन से निकल hi नहीं रही थी …सो हु जैसे hi अपने भाई से मिली तोह रोने लगी तभी डॉक्टर्स का एक ग्रुप आया और उन्होंने हीना को अपने साथ आने को कहा शहीद ने उसे बेफिक्र होकर जाने को कहा हीना को तुरंत एडमिट कर लिया गया था और अगले 6 से 7 घंटे में उसका हु ओप्रशन भी हो चूका था जिसके चलते हु खुद की मौत को खुद में महसूस कर रही थी …

जैसे hi उसे होश आया तोह शहीद एक व्हीलचेयर ♿ पैर उसके सामने था उसने उसका हाथ थमा और उसे चैन से रहने को कहा अगले 15 दिन में हीना पूरी तरह से फाइन थी और उसके 7 दिन बाद शहीद भी फुल ों फिट था ..दोनों अपने किराये के घर में आये तोह शहीद उसे उसके इलाज़ और खुद के मेहगे इलाज़ और rocky(bole तोह अपना मनु पैर उसके लिए रॉकी hi था ) के बारे में बताया और यह भी की कैसे उसने जीते हुए सारे पैसे उसके हवाले कर दिए यह कहकर की अपना और बहिन का इलाज़ कराओ और बचे पैसे से दोनों का ाचा फ्यूचर भी बनाओ …और साथ में हॉस्पिटल ? का इलाज़ जिसका खर्चा मास्टर के ंगो ने उठाया था इसका मतलब 50लाख पुरे ऐसे hi बच गए थे उनके पास जब हीना ने यह सब सुना तोह हर रोज़ हु अपने भाई से उसके बारे में और जाना चाहती थी की जिसके चलते हु और शहीद जिन्दा और पुरसुकून से थे …

पैर शहीद को जितना पता था उतना hi बता देता था ….पैर हीना हर रोज़ रॉकी के नाम पैर दुआ मांगती थी की उस फ़रिश्ते को दुनिआ में हु और तैराकी दे उसने जाने कैसे सोचा हुआ था की ऐसा होगा वैसा होगा रॉकी पैर आज सामने था तोह हीना कहीं न कहीं मनु उर्फ़ रॉकी को देखकर खो सी गयी थी …जिसमे आज दो बार उसने गैर मर्द को छुआ था पहली बार इत्तेफ़ाक़ से दूसरी बार उसके कान से हाथ हटते हुए …जिसकी छुअन हीना को अंदर से हिला कर रख दिया था …उसकी जवानी भी शुरू हुई थी …पैर उसने कभी खुद को बीमारी के चलते जवान महसूस नहीं किया था …पैर आज उसका जवान दिल कहीं न कहीं मनु की तरफ खिंचा चला जा रहा था …किसी को चुना कोई बड़ी चीज़ नहीं है अगर उसके लिए आपके दिल में फीलिंग न हो तोह पैर अगर ज़रा सी भी फीलिंग है तोह हु चाँद सेकंड की चुहान जिस्म से नहीं रूह से छू कर गुज़र जाती है और पता भी नहीं चलता की हुआ क्या है ??…

मनु के हाथों की छुअन हीना को अंडर तक महसूस हुई थी उसकी आखों में लाल घरे तैर चुके थे ..

मनु इस सब से अलग सोच रहा ता हीना अभी भी नाराज़ है तोह उसने कहा “ हम तोह कभी भी आपके चेहरे पैर ांसो नहीं आने देंगे चाहे जो भी हो “ उसकी इस बात पैर शहीद हंसने लगा हीना भी बहुत खुश हुई की उसके भाई के बाद किसी और को भी उसकी ख़ुशी की परवाह है …मनु ने तोह ऐसे hi कहा था पैर हीना के दिल को मनु की यह बात छू चुकी थी की मनु उसकी ख़ुशी के लिए कुछ भी करेगा और उसके आंसूं की परवाह करता है शहीद के बाद कोई और था जो उसे इतने अपनेपन से देख रहा है …पता नहीं कितना सोच रही थी हीना ..

इसी मैं रात हो चुकी थी क्युकी शाम को ट्रैन ? पकड़ी थी उन सब ne..raat हुई तोह खाने का टाइम हुआ तोह शहीद ने मनु से पूछा ाचा “रॉकी वहां रुकने का क्या इंतज़ाम है ??”

मनु “ वहां एक होटल में रूम बुक है वैसे आप लोग देहरादून में किसके पास जा रहे हैं ??”

शहीद “हु हमारे किसी करीबी की शादी है तोह वहां मौका लगा जाने का तोह पहले तोह सोचना पड़ता था पैर अब दुआ है …की हम अब अपने शहर से बहार निकल कर घूम भी सकते हैं…”

मनु “ ाचा है मेरा भी फर्स्ट टाइम है शहर से बहार सो मैं समझ सकता हूँ …”

शहीद “ ाचा खाने का टाइम हो चूका है आप खाने में कुछ लाये हैं ??”

मनु “ हाँ थोड़ा सा फ्रूट्स लाया हूँ सोचा था किसी स्टेशन पैर रुक कर खा लूंगा ..”

शहीद “ अरे ऐसे कैसे आप कहीं और का खाएंगे हम लाये हैं न हमारे साथ खाइये न हीना खाना निकालो ??”

मनु ने अपने रात के सफर के चलते पूरी सीट ? hi बुक की हुई थी मतलब उसके सामने शहीद और हीना hi थे शायद उस सीट का पैसेंजर न आया हो या उसकी ट्रैन ? मिस हो गयी हो ….खैर जो भी हो पैर यहाँ जगह की कमी नहीं थी और मोस्टली ऑफ सीजन (वीकडेस ) था तोह ट्रैन में भीड़ ज्यादा नहीं थी…

हीना ने खाना निकला और परोसना शुरू कर दिया …शहीद ने मनु को भी दिया खाने में ालो के पराठा और मटर पनीर की सब्ज़ी थी ….जिसका पहला निवाला कहते hi मनु से रुका नहीं गया और बोलै …”कसम से कितना ाचा खाना बनाया है एक बार शेफ मिल जाये तोह उसके हाथ hi चुम लून पैर पता नहीं होटल वाला होगा कहाँ??”

उसके इतना कहते hi शहीद की हंसी छूट गयी पैर हीना शर्म से तर तर हो चुकी थी …शहीद बहुत हंसा पैर मनु थोड़ा हैरान था शहीद को हुआ क्या है …पैर शहीद को उन घंटे देखकर हीना ने शहीद को धीरे से मुक्का मर दिया …मनु किसी अजूबे की तरह देख रहा था …

शहीद अपनी हंसी रोकते हुए “ अरे रॉकी यह खाना किसी होटल का नहीं है यह तोह हीना ने बनाया है …हहहह! सही कहा की हाथ चूमने का मैं कर रहा है ….”शहीद ने मज़ाक में हीना का हाथ चूम लिया जिससे हीना और शर्मिंदा सी हो गयी …अब दोनों बहिन भाई hi थे और क्युकी दोनों hi एक दुरसरे की देख रेख में लगे रहते थे तोह हंसी मज़ाक भी दोनों में कमान था ..पैर शहीद ने शायद पहली बार कहीं बहार हीना के साथ ऐसा मज़ाक किया था हु भी किसी और के सामने …हीना शर्म से लाल हो चुकी थी..

मनु तुरंत यह सुनकर बोलै “ सॉरी हीना जी मेरा हु मतलब नहीं था …मुझे माफ़ कर देना आपका बनाया खाना सुच बहुत अच् बना है मैं खुद को रोक नहीं पाया कहने से पैर मैं तोह सोचा था की शायद किसी शेफ ने बनाया होगा सो मेरे मुँह से निकल गया ी म सो सॉरी ….”

हीना ने एक नज़र उसकी तरफ देखा उसकी नज़र में अलग सा भाव था जिसे मनु समझ नहीं पाया शायद उसे मनु का माफ़ी मांगना ाचा नहीं लगा था ..

पैर मनु ने घूमकर शहीद को भी सॉरी बोलै तोह शहीद बोलै “यार आपका कसूर नहीं है यह बनती hi इतना ाचा है की अभी नया लगा हूँ जॉब पैर …पैर वहां भी मुझे मेरा खुद का टिफ़िन नसीब नहीं होता स्टाफ के लोग खा जाते है शेफ से बनवाया है बोलकर और मुझे होटल से मंगवाकर देते हैं…”

हीना गुस्से से “ाचा तोह आप बहार का खाना कहते हैं मैं पागल हूँ क्या जो इतनी म्हणत करती हूँ की आप बहार का खान आना खाये पैर आपको तोह फ़िक्र hi नहीं है और अगली बार से किसी और को टिफ़िन दिया तोह सोच लेना …ह्म्मम्फह!”

मनु ने हीना का गुस्सा देखा तोह चुप चाप खाना वापस रख दिया …जिसे देखकर शहीद की हंसी छूट गयी …

हीना चिंता से “ अरे मैंने तोह आपको कुछ नहीं कहा न प्ल्ज़ आप तोह ऐसे न करें …”

मनु “सॉरी आपका गुस्सा देखकर सोचा कहीं मैं भी न पिट jaun””manu ने जिस मासूमियत से कहा की शहीद फिर ज़ोर से हंस पड़ा …

हीना “ भाईजान आ फँस रहे हैं इनको कुछ कहते क्यों नहीं क्या मैं ऐसे लगती हूँ की इनके हाथ से खाना चीन लुंगी …? “हीना ने बड़ी hi मासूमियत से कहा

शहीद “ तुम्हारा क्या भरोसा जब तुम मुझे दर्रा धमका सकती हो तोह कुछ भी कर सकती हो हाहाहाःहाहा!???”

हीना “ भाईजान जाइये मैं आपसे बात नहीं करुँगी ….”

शहीद “ अरे हीना देखो ऐसे न करो मैं तोह माज़क कर रहा था ाचा चलो सॉरी ? “

हीना भी मान गयी उसने खाना वापस मनु के हाथ में दिया और खाने को कहा …

मनु भी चुपचाप खाने में लगा रहा और इनसब मैं खाना फिनिश हो गया था हीना ने खाना ज्यादा hi बनाया था …ताकि सफर में काम न पड़े पैर मनु भी शामिल हो चूका था उनके साथ सो खाना बिलकुल सही तरह से ख़तम हो चूका था …

अब थोड़ी देर और बातें हुई जिसमे हीना सिर्फ मनु को देखती रही पैर शहीद मनु आपस में बात करते रहे …जिसमे हीना ज्यादा नहीं बोली बिच में उसका सारा ध्यान मनु पैर लगा हुआ था ..पैर मनु भी शायद उसके घूरने का आदि हो चूका था …पैर अंदर से उसे बिलकुल ाचा नहीं लग रहा था जैसे हीना उसे देख रही थी ..पैर शहीद के चलते हु कुछ रियेक्ट नहीं कर रहा था …दूसरी तरफ हीना तोह जैसे आज की रात मनु को अपनी आखों में समां लेना चाहती थी …जैसे पता नहीं आगे मौका मिले या न mile..or पता नहीं मिले भी तोह कब सो आज जो है उसमे अपनी आखों में मनु को देख रही थी ….बातचीत में थोड़ा बहुत जवाब देती पैर मनु को घूरना तोह जैसे आज उसका टारगेट बन चूका था और आज जैसे इस टारगेट को पूरा करने की कसम hi खा ली थी उसने ..

खैर बात चित में सोने का टाइम आया तोह शहीद ने हीना को उपरवाले बिरथ (बोले तोह सोनेवाली सीट ?) पैर भेज दिया और निचे लेट गया …मनु भी अपनी सीट पैर लेता हुआ था …शहीद खाना कहते hi बाथरूम से फ्रेश हो आया था ..और उसे अब नींद आने लगी थी …की मनु ने सोचा की चलो बाथरूम हो आता हूँ की तभी हीना भी निचे उतर आयी जिसपर शहीद बोलै “क्या हुआ …?”

हीना “ भाईजान जाना है “ उसका इशारा था की बाथरूम्स जाना है शहीद आराम से लेट गया …

शहीद “ ठीक है जाओ हो आओ …”

हीना सोच में पद गयी क्युकी लाइट मोस्टली ऑफ हो चुकी थी …और भाई आराम से लेता हुआ कह रहा है जाओ..

मनु भी मुँह देख रहा था …उसका की केस ाबंदा है …जो अपनी बहिन को अकेला भेज रहा है हु भी खड़ा था बाथरूम्स जाने को पैर कुछ कहा नहीं था usne…shahid से …

शहीद “ अरे सोच क्या रही हो रॉकी है न …यह बहार तक चला जायेगा रात है अकेले नहीं जाना …”

मनु और हीना दोनों उसके इस अजीब सी बात को हैरानी से देख रहे थे …हीना कुछ बोलती उससे पहले

मनु “मेरे ख्याल से आपको जाना चाहिए बेशक आप मुझपर भरोसा कर सकते हैं पैर अजनबी पैर इतना भरोसा ठीक नहीं …”

शहीद “ रॉकी दुनिआ देखि है मैंने कमीनो को उनकी नज़र से पद लेता हूँ तुमने तोह जान बचाई है मेरी और हीना की अगर तुम पैर यकीं नहीं करता तोह शायद हीना के साथ यहाँ तुम्हारे साथ इतना टाइम नहीं bitata…tum दोनों बेधड़क जाओ जितना भरोसा मुझे मेरी बहिन पैर है उतना hi तुम पैर यकीं है की बिना जाने जान बचने वाले ामिनट में bad-neeyat नहीं रखा करते हैं…”

मनु “ फिर भी रात का टाइम है और मैं अनजान हूँ और यह …” मनु पूरा बोल भी नहीं पाया था …

शहीद “ रॉकी इंसान की परख है मुझे जो इंसानो के ाँसों की परवाह करता हो हु दुसरऊँ को आंसूं नहीं दिया करते तुम दोनों जाओ अब मैं सो रहा हूँ ok गुड नाईट …”

शहीद घूमकर लेट गया उसी सीट पैर मनु और हीना दोनों हैरान से एक दूसरे को देख रहे थे …मनु सोच रहा था की”” क्या अजीब इंसान है खामखां मुझे लड़की के साथ फंसा दिया …”

हीना भी अपनी सोच में परेशां थी की “आज भाईजान को हुआ क्या जो मुझे इनके साथ भेज रहे हैं ..??”

आखिर मैं मनु हो बोलै “ रात बहुत हो चुकी है “ यह इस बात का इशारा था की जल्दी से बाथरूम हो आओ मैं भी उसके बाद चैन से सो जॉन ….

हीना ने सोचा जब भाईजान ने खुद hi भेजा है तोह सोचना कैसा चल दी आगे बाथरूम की तरफ …मनु उसके जस्ट दो कदम पीछे चल रहा था …रात का कोई 1.30 ऍम का टाइम होगा तोह मोस्टली लोग सो चुके थे …और जो जागे थे हु लाइट बंद करके चुदाई में लगे हुए थे ….अब ट्रैन ? उस पैर एक रात का सफर उसमे कितने अनजाने लोग जान पहचान निकल कर कब किसे पता कर छोड़ डेल किसे पता …और उसमे अकेले आदमी hi नहीं होते औरते भी अपने टास्ते को बदलने में मस्ती में चुदाई कर लिया करती थी उसमे ..भी रात में रैंड का बूगी में आना बड़ी आम सी बात थी ….अब रात का टाइम तहत ओह मोस्टली लाइट्स ऑफ थी…

खैर हीना आगे चल रही थी की अँधेरे में उसके पेअर में कुछ फंसा और हु गिरती उससे पहले मनु ने आगे बढ़कर उसे थाम लिया अपने फलादि हाथों में हीना को थमने के चक्कर में मनु गलती से उसे अपने करीब अपने सीने से लगये हुए था …हीना के लिए अलग सा एहसास था भाई के सीने से तोह हु कई बार लगी थी पैर मनु एक गैर मर्द उसके सीने से लग कर हीना को अलग सा सुकून मिल रहा था मनु छोड़ा सा सीना बड़े बड़े मज़बूत हाथों में हीना खुद को मेहफ़ूज़ महसूस कर रही thi…manu ने ज्यादा देर उसे सीने से नहीं लगाया था उसका मोतिवे तोह सिर्फ इतना था की एक भाई ने अपनी बहिन को उसके भरोसे उसके साथ बेह्जा है तोह ऐसे में उसे बचना उसका फ़र्ज़ बनता hai…per हीना तोह अपने में खो चुकी thi…uski आँखें बंद हो चुकी थी ….उसकी साँसे मनु के सीने से आती मर्दानी खुशबू जिसमे नए स्विश परफ्यूम की महक हीना को और मदहोश कर चुकी थी की हु मनु के सीने में खो जाना चाहती थी …

पैर इन सब से अनजान मनु ने उसे अपने सीने से दूर किया हीना का हाल किसी बचे से उसका मण्डपसन्द खिलौना छीनने जैसा था …उसे मनु के सीने से अलग होना ज़रा भी ाचा नहीं लगा tha…ki तभी वहां की लाइट जाली तोह मनु ने और हीना ने देखा की हीना का पेअर एक चादर में फंसा था जो ट्रैन ? के फर्श पैर पड़ी thi..ek एक जोड़ा पुरे नंगे हाल में दनादन चुदाई में लगा हुआ था शायद कोई रैंड होगी …

उन्दोनो ने लाइट जलने पैर कोई ड्रामा नहीं किया की लाइट जल गयी तोह अपने नंगे शरीर पैर कपडे दाल ले ऐसा कुछ नहीं था औरत पेट के बल लेती हुई थी और आदमी उसके उप्पेर लेता मिशनरी पोजीशन में अपना लैंड उसकी छूट में किसी पिस्टन की तरह अंदर बहार करने में लगा हुआ था ….उनकी सीट के ठीक सामने hi हीना और मनु दोनों खड़े थे …पैर दोनों के लिए लाइव चुदाई देखना पहली बार था …चुदाई का वर्ड सुनकर क्या लगता होगा यह मनु ने कभो गौर नहीं किया पैर आज सामने एक आदमी और औरत बिना किसी कपडे पहने दुनिआ की साड़ी शर्म टाक पैर रखकर अपने में जुटे हुए थे …न उन्हें किसी से कुछ लेना था और न किसी की कोई परवाह थी मनु और हीना दोनों hi 16 साल के थे जिनको चुदाई के बारे में भी पता था ..पैर चुदाई सुन्ना और देखना दोनों में उतना डिफरेंस है जितना मुठ मरने और चुदाई में ….आगे समझ दार समझ चुके होंगे …

मनु और हीना दोनों hi बाथरूम का रास्ता भूल चुके थे हीना भी कोई बची नहीं थी जो यह सब न समझे ...उसको भी जवानी का मतलब पता था ...पीरियड उसे 12 साल की उम्र से होने लग गए थे …शायद दवाई ज्यादा कहने से जो गर्मी हुई होगी उसके शरीर में तब …तब उसकी माँ जिन्दा थी जिसने उसे इसका मतलब समझया ..और बचा कैसे पैदा होता है सब सिख्या पैर उसके कोई 6 महीने बाद hi maa-baap दोनों किसी एक्सीडेंट्स में चल बेस थे …

फोकस फोकस करो …मनु भी उस आदमी की गांड और छूट में जाते हुए लैंड के साथ उस औरत की सिसकियाँ सुन रहा था …उस पैर उस औरत ने उन दोनों को वहां उसकी चुदाई देखते हुए देख लिया था …फिर भी उसने कुछ नहीं कहा उल्टा उसकी सिसकियाँ और तेज़ी होगयी …शायद किसी और को चुदाई देखने से उसकी छूट में और ज्यादा मज़ा मिल रहा था या किसी और के देखने से उसे एक्ससिटेमेंट महसूस हो रहा था जिस्का असर उसकी छूट में बहते पानी से साफ़ पता चल रहा था हु आदमी लैंड पैर कंडोम लगाए जोर से ढके दे रहा था …शायद हु शराब के नशे में था पैर तेज़ चल रही ट्रैन में बहने वाली हवा से दोनों जवानो मनु और हीना के जिस्म गरम हो चले थे …उन दोनों की आंखें उस लाइव चुदाई से लाल हो चली थी मनु का लैंड खड़ा होने लगा था ..और हीना की छूट में भी खलबली मची हुई थी ….पैर सबसे ज्यादा केहर ढाया था हीना की चूचियों ने उसकी निप्पल पोके कर रही थी हिंदी में बोले तोह निप्पल कड़ी thi…or मटर का दाना उसकी चूचियों किन ाज़ार उतार रहा था ….मनु उस आदमी का लैंड देखर थोड़ा हैरान सात है मनु अपने लैंड पैर धीरे से हाथ टिका देता है जिससे उसका खड़ा लैंड न दिखे ..पैर देखता कोण हीना भी वहीँ ध्यान से देख रही thi…us औरत की छूट से बेहटा पानी और उस नसेड़ी का नशा और छूट में घुसा लैंड कोई रुकने का नाम नहीं ले रहा था …और उसी में छूट से उठती महक जिसकी खुशबू या बदबू जिसे जो समझना है उसकी मर्ज़ी ने दोनों जवानी से बहरे दिलो में चुदाई देखने से होनेवाली गर्मी बड़ा कर एक बघवत कर दी थी …

पैर कुछ और होता उससे पहले हु आदमी घुमा और मनु की तरफ देख कर बोलै “ अबे इस रांड मेरे लिए छोड़ दे …तेरे पास तोह मलाई है उसे चक न जा मज़े कर या साथ में आजा दोनों मिलकर इस रैंड को छोड़ेंगे हहहहहहह! “ उसका नशा उसपर हाफी था पैर मनु और हीना दोनों उस चुदाई के शॉक से बहार आ चुके थे..

मनु को उसकी बातों का मतलब थोड़ा लेट समझ आया …क्युकी उसके दिमाग में भी छूट और चुदाई घूम रही थी कुछ ऐसा हाल hi हीना का था …

मनु को जब समझ आया तोह मनु उसे मरने आगे बढ़नेवाला hi था …की हीना ने उसका हाथ थामकर उसे रोक दिया और सर हिला कर न का इशारा किया …मनु भी हीना के मन करने से मान गया और वैसे भी मनु मौके की नज़ाकत समझ गया था ,,,क्युकी चुदाई तोह हु दोनों कर रहे थे अपनी मस्ती में मस्त पैर मनु और हीना दोनों वहाँ देख रहे थे तोह ऐसे में गलती कोई भी मनु और हीना की मंटा …सो मनु और हिना अब बाथ रूम की तरफ चल पड़े ….और जब वहां पूछे तोह हिना से मनु ने जाने को कहा …

हीना भी कुछ नहीं बोली क्युकी लाइव चुदाई ने उसकी कच्ची को गिला कर दिया था …और हु खुद को गिला महसूस कर रही थी ..पैर उसके दिल में चुदाई आज किसी परफेक्ट मेमोरी के साथ परमानेंट मेमोरी बन चुकी थी …जिसमे लैंड और छूट का क्या रिश्ता होता है अचे से समझ आ चूका था हीना को ....सो हीना भी अभी कुछ ज्यादा बोलने की पोजीशन में नहीं थी …क्युकी उसकी छूट से पानी अभी भी रिस रहा था ..और हीना जल्द से जल्द पिशाब करके खुद की छूट हल्का करना चाहती थी …क्युकी उसे मुठ मरना पसंद नहीं था …बोले तोह छूट में ऊँगली …हु अपने को साफ़ रखना चाहती थी …

पैर शायद हीना और मनु की किस्मत को आज की रात का अगला झटका देना बाकी था ….हीना ने जैसे hi दरवाज़ा खोला दरवाज़े के खुले hi हीना अपना मुँह दबाये पिच किसकी पैर मनु उसके ठीक पीछे था जो उसे पीछे आते देखकर कोई गड़बड़ है सोचकर आगे बड़ा था …पैर सामने का नज़ारा देखा तोह उसके पाँव वहीँ जैम चुके थे ….

हीना पीछे हुई तोह उसकी गांड मनु के लैंड से चिपक चुकी thi….us पैर ट्रैन ? की धड़क धड़क ट्रैन का हिलना और सामने का नज़ारा दोनों फिर से वहीँ जमे हुए थे …क्युकी सामने एक और जोड़ा चुदाई में लगा हुआ था …जिसमे कोई अधेड़ ुमार की औरत किसी काम उम्र के लड़के से चुद रही थी दोनों का मुँह अंडर की तरफ था हु औरत थोड़ी गांड पीछे निकले हुए कड़ी थी और लड़का उसके पीछे निकली गांड से निचे होते हुए अपना लैंड उसकी छूट में कंडोम चढ़ाये छोड़ रहा था क्युकी उस चूतिये का कंडोम कोई सस्ता सात है लाल रंग का …

मनु का लैंड दोहरे दर्द में था एक तरफ हीना की गांड की गर्मी और आगे चल रही एक और लाइव चुदाई मनु का दिल कर रहा था …की वहां से हैट जाये पैर मनु छह कर भी हिल नहीं पा रहा था …उसपर हीना की गरमा गर्म गांड उसके लैंड को और ज़ोर से चिल्ला कर खड़े होने की दावत दे रही थी …हीना भी गुमसुम सी उस चुदाई में खोई हुई बस मनु की आगे सटी हुई थी की तभी उसे एहसास हुआ की शायद मनु का लैंड खड़ा हो चूका है ….पैर मनु का लैंड हार्ड हो रहा था उसे जीन्स में दर्द होने लगा था की …कैसे खड़े लैंड को मुट्ठ कर हल्का करूँ …पैर यहां तोह सामने चुदाई और उसके साथ हीना की गांड की गर्मी और ट्रैन का हिलना ….हीना को जैसे hi मनु के लैंड का एहसास हुआ ..तोह हु लड़की जिसने कभी छूट पैर ऊँगली भी यह सोचकर नहीं रगड़ी थी की “मुझे यह जहालत नहीं करनी …”

पैर आज वही लड़की खुदको मनु के खड़े लैंड के एहसास से खुद को मनु के और करीब जाने से नहीं रोक प् रही थी उसकी गांड उसने मनु के लैंड से चिपका दी थी मनु के खड़े लैंड से उसे मनु के मज़बूत हुलाबी लौड़े का एहसास मिल चूका था …जिससे उसने दिमाग में अंदाज़ा लगाया तोह पाया की मनु का लैंड बहुत बड़ा होगा ..इस हौलबी लाउड ेके एहसास ने उसकी छूट से पानी की हु बरसात करदी जिसमे उसकी कच्ची भीगी चुकी थी आगे से पूरी तरह से उस पैर ट्रैन का हिलना मनु खुद पैर बहुत कण्ट्रोल कर रहा था ..पैर वहां से हिल भी नहीं प् रहा था क्युकी चुदाई दूसरी बार उसकी हालत भी हीना जैसी hi थी बस फर्क इतना था …की मनु का स्टैमिना हीना से ज्यादा था …आगे चल रही चुदाई और पीछे मनु के हुलाबी लौड़े की घिसाई ने हीना की छूट को झाड़ hi दिया …और जब हु झड़ी तोह हिना की लाइफ का यह पहला ओर्गास्म था …जिसमे पानी इतना बहा की उसकी चड्डी में बाद hi आ चुकी थी …उसके पैरों में ताकत hi नहीं बची थी खड़े होने की …हु घृणे को हुई पैर मनु ने उसके गिरने से पहले इस बार भी बखूबी उसे थम लिया …सामने की चुदाई भी ख़तम हो चुकी थी सामने का बाँदा भी हीना के साथ झाड़ चूका था …मनु ने गिर रही हीना को घुमाया क्युकी मनु नहीं छठा था की वहां से निकलते हुए हु लोग हीना का चेहरा देखें …मनु ने जैसे hi हीना को घुमाया हीना उसके चेहरे को देखने लगी …और महसूस करने लगी अपनी पहली ओर्गास्म को जो मनु ने उसे बिना चुदाई के hi दे दिया था …अनजाने में क्युकी हिना और मनु दोनों में से किसी को यहाँ क्या हो रहा है पता कहाँ था इतने में गेट खुला मोस्टली गेट ट्रैन ? में अंदर की तरफ खुलते है पैर साला कोई पक्का खुराफाती होगा जिसने उल्टा दरवाज़ा लगाया था …मतलब यह स्टुपिड गेट बहार की तरफ खुलता था …मनु और हीना को क्या पता दोनों चुप चाप गेट के खुलने का वेट कर रहे थे …की गेट खुला और …

धाम!!! की आवाज़ हुई और हीना के हूंठ मनु के होठों से मिल चुके थे ूनिंटेन्शनली दोनों को अचानक हुए इस हमले का कोई एहसास नहीं था …

हुआ यह की जब उस लड़के ने गेट खोला तोह गेट हीना की कमर में लगा तोह मनु और उसके बिच का गैप उस झटके से भर गया …दोनों के होठ एक दूसरे के होतोओं में लगे हुए the…ek ऐसा किश था जो उनकंडिशनली हो गया था जिसमे दोनों में से कोई त्यार नहीं था …दोनों की hi यह पहली किश थी चाहे हीना हो या मनु हो. दोनों को hi अचनाक से हुए इस किश के बारे में सोचने का hi वक़्त नहीं मिला था …जहाँ हिना तोह मनु के मुँह से निकली गरम सांसों में खो चुकी थी वहीँ मनु को अचानक से निशा और उसके धोके की याद उसके जेहन में चली आयी थी …मनु का शायद पहला प्यार था निशा जिसको उसने चिंटू की बहून में देखा था अपने प्यार को याद करते hi उसके दिमाग में निशा के लिए जो नफरत थी उभर कर चली आयी थी …3 साल में जब भी मनु ने निशा को याद किया जोकि हु करना नहीं चाहता था पैर जब भी उसे निशा की याद आती तोह जो धोका मनु ने महसूस किया था उसके चलते मनु खुद को किसी के पास जाने से भी डरता tha..us लगता था की नफरत से बहरी इस दुनिआ में लोग सिर्फ एक hi चीज़ जानते हैं और हु धोखा …उसकी नफरत निशा के लिए बहुत ज्यादा थी …हु हीना को खुद से अलग करने hi वाला था गुस्से में ढाका देकर की तभी …

हु लड़की अपने कपडे सही करते हुए बहार आया और बोलै “ ओह क्या बात है अरे भाई अंडर चले जाओ वहां मज़े करो खली कर दिया है …कीप एन्जॉय डिअर …”हु इतना बोलै और हीना भी होश में आ चुकी थी …हु जल्दी से दूर हुई की इतने में हु औरत भी बहार आयी और

दोनों को एक दूरसे के पास देखर बोली “उपपरवाला तुम दोनों की जोड़ी बांये रखे जाओ अंडर करलो बचा हुआ काम अपना तोह हो गया …hihihihih!”who इतना बोलकर तेज़ी से वहां से निकल गयी बिना कुछ सुने …

उसके ऐसे बोलते hi हीना शर्म से पानी पानी हो चुकी थी हु अंडर भागी. उसने दरवाज़ा बंद कर लिया और ज़ोर ज़ोर से साँसे लेने लगी ..उसके होठों पैर अभी भी मनु के मुँह का रास लगा हुआ था …हु अंडर अपने कपडे उतार कर पिशाब करने लगी और उसने वहां अपनी कच्ची उतार ली और जब उसने अपनी कच्ची की हालत देखि तोह खुद उसे बहुत श्रम आयी की कैसे मनु के सिर्फ लैंड के हलके से चुने भर से उसका पानी छूट गया

…और उसके बाद हु किश ….है मैं भी कैसी बेशर्म हूँ की यह सब कर बैठी …”ओह रॉकी तुमने आज हीना को अपना बना लिया है ….आज के बाद हीना सिर्फ तुम्हारी है सिर्फ तुम्हारी …आज के बाद हीना सिर्फ रॉकी के नाम से जियेगी …क्युकी यह जान बचने वाला भी तोह वही है तोह भला यह जान और यह ज़िन्दगी उसकी कैसे न हो भला ….हम्म्म! आज से हीना का नाम सिर्फ एक नाम से जुड़ेगा और हु है रॉकी उसके शिव हीना किसी की नहीं होगी … मर जाएगी यह हीना अगर किसी और ने चुने की कोशिश भी की पैर अब हीना सिर्फ रॉकी की होगी और किसी की नहीं …ी लव ु रॉकी “ हीना अपने मन में वेड किये जा रही थी …

पैर बहार मनु निशा के नाम याद आ जाने से hi खुद से खफा हो चूका था …मनु मन में “क्या ज़िन्दगी है मेरी उस निशा ने आज भी मेरा पीछा नहीं छोड़ा …क्यों किया निशा तुमने क्या मिला तुम्हे यह सब करके …क्या कमी थी मुझमे की तुम्हे चिंटू का सहारा लेना पड़ा …और तुम तोह यहाँ हो भी नहीं पैर आज भी मेरे सीने में तुम्हारे नाम का तूफ़ान उठा करता है …निशा तुम्हारे नाम से hi नफरत करता हूँ मैं सिर्फ नफरत और तुम्हे देने के लिए मेरे पास नफरत के शिव और कुछ नहीं है …गलती से भी कभी मेरे सामने मत आजाना पता नहीं उस दिन क्या कर बैठूंगा मुझे खुद नहीं पता …हाँ निशा नफरत है मुझे तुम्हारे नाम से तुम्हारे काम से और तुमसे भी सिर्फ नफरत है नफरत के शिव कुछ नहीं …आज के बाद कभी तुम्हारे बारे में नहीं सोचूंगा ….मेरी ज़िन्दगी तबाह करदी तुमने निशा…….

ी हेट ु निशा शर्मा जस्ट हेट ु ….”

मनु अपने मन में हज़ारों लड़ाइयां लड़ रहा था …पैर जीत होती कहाँ से मैं की लड़ाई में इंसान का बस कहाँ चलता है …

की इतने में हीना बहार आयी उसने अपनी कच्ची को अपने सूट में अंडर फसा लिया था और फ्रेश हो चुकी thi…manu का ध्यान उसके आने से टूट गया …मनु कुछ बोल नहीं प् रहा था हीना से …दोनों के बिच अजीब सी ख़ामोशी चा चुकी थी दोनों के पास कुछ था hi नहीं कहने को मनु तेज़ी से बाथरूम में गया और मूतने लगा मूतने से उसे आराम मिला …लैंड तोह निशा की याद आते hi बेथ चूका था …मनु ने अपना चेहरा धोया और बहार आया जहाँ हीना कड़ी थी …पैर दोनों के बिच ख़ामोशी थी क्युकी मनु को अब खुद पैर शर्म आ रही थी उसने सोचा की उसके लैंड से लग कर हीना को कितना बुरा लगा होगा की मदद करनेवाला इंसान कितना गन्दा है …उसकी जान बचने वाले का खुद पैर कोई काबू नहीं है …

एक तरफ हीना जाने क्या क्या सोच रही thi…manu और हु इसी छुपी के साथ वापस चलने लगे सीट के पास पुह्चने से पहले मनु ने सोचा की शायद दुबारा मौका मिले न मिले उसने हीना से कहा “ सॉरी “

हीना ने उसकी तरफ हैरत से पलट कर देखा और कुछ नहीं कहा चुपचाप अपनी बिरथ पैर चढ़ गयी और मनु ने देखा की शहीद मस्ती से घेरि नींद में मज़े से सोया हुआ है बिना यह जाने की अभी उसकी बहिन और उसके बिच कितना कुछ होते रह गया …

मनु ने अपने दिमाग को झटका दिया और हु भी सो गया …सुबह हुई एक जोर के झटके से ट्रैन ? रुकी जिसके बाद मोस्टली लोग उठ चुके थे सुबह के 8 ऍम बजे थे शहीद ने मनु को हिलकर उठाया …अब तक हीना उठकर फ्रेश हो चुकी थी शहीद भी फ्रेश होकर रेडी था …मनु उठा और फ्रेश हुआ और उसने अपना बेग उठाया क्युकी ट्रैन ? देहरादून पहुँच गयी थी और सभी अपने सामान को लेकर उतरने में लगे थे …मनु के पास सिर्फ एक बैकपैक था उसने कंधे पैर तांगा और बहार प्लेटफार्म पैर उतर गया …उसके आगे शहीद और हीना खड़े थे शायद सी ऑफ करने के लिए …हीना की नज़ारे सिर्फ मनु पैर लगी हुई थी …

शहीद “ थैंक्स रॉकी सफर को और ाचा बनाना के लिए …बहुत एन्जॉय की मैंने तुम्हारी इंटरेस्टिंग कंपनी …बेस्ट ऑफ़ लक तो ुर चैंपियनशिप…”

मनु शहीद से हाथ मिलकर प्लेटफार्म के दूसरी तरफ चल पड़ा ….मनु ने हीना से कुछ नहीं कहा था शायद उसे अभी भी उनकंफर्टबले फील हो रहा था हीना के साथ …उसे डर था की हीना ने अगर शहीद को बता दिया की रात क्या क्या हुआ है तोह शहीद जो कहेगा सो कहेगा पैर मनु उसे पलटकर बोलेगा क्या ???

क्या जवाब देगा की उसने अपनी बहिन को जिसके भरोसे पैर भेजा था हु hi की !!!.....लोगों का इंसानियत से भरोसा उठ जायेगा …

मनु यह सब सोचते हुए सोया था पैर सुबह जब शहीद ने उसे बिना किसी अलग रिएक्शन के जगाया तभी उसे समझ आ चूका था की हीना ने शहीद से कुछ नहीं कहा है ..और मनु हीना से किस मुँह से बात करता यह सोचकर हु सिर्फ शहीद से हाथ मिलकर चल दिया बिना पालते …

पैर कोई था जो उसे पलट पलट कर देख रहा था ..वह थी हीना जो जाते हुए मनु से यही गुज़ारिश कर रही थी की एक बार पलट कर देखे …पैर मनु नहीं पलटा …पैर हीना थोड़ी मायूस हो चुकी थी …

शहीद ..”हु नहीं पलटा न ..??”

हीना “???” हीना ऐसे कड़ी थी जैसे शहीद ने उसकी चोरी पकड़ ली हो ???

शहीद “हाँ बचा नहीं हूँ अचे से समझ चूका हूँ उस फाइटर को की कैसे उसके हाथों मेरी जान से प्यारी बहिन अपना दिल हार गयी है…”

हीना “ भाईजान पैर मैं तोह कुछ नहीं कहा फिर आपने यह सब सोच भी कैसे ??” अंडर से तोह ख़ुशी से भरी हुई थी पैर सामने से कैसे कह देती की रॉकी उर्फ़ मनु से दिल हार चुकी है हीना और हारी भी ऐसा की उसकी होने की कसम तक खाली हीना ने …

शहीद “ जितना झुटलाना है झूठ ला दे पैर दुनिआ को झुठला सकती है एक भाई को नहीं तुझमे जान बस्ती है मेरी …तुझसे पहले तेरी फिक्र होती है मुझे …तोह तेरी पसंद कैसे न समझ पता कल रात hi समझ गया था की तुझे उससे प्यार हो गया है और प्यार भी कोई ऐसा वैसा नहीं पूरी शिद्दत वाला …तेरी आँखों में उसने देखा या नहीं पैर मैं जो देखा उससे साफ़ पता चल गया की मेरी बहिन अब शायद मेरी न रहे पैर उसकी जरूर हो चुकी है …”

हीना “ पैर भाई जान मैंने ऐसा तोह कुछ कहा नहीं ?“

शहीद “ अरे पगली ऐसा बेवक़ूफ़ कोण होगा जो बाथरूम के लिए किसी गैर को अपनी जान से प्यारी बहिन के साथ भेजेगा …अरे पागल इसलिए भेजा था किट ु भी समझ सके की कितना ाचा है हु …ऐसे हो थोड़ी न भेज दूंगा किसी ैरे गैर को ??”

हीना इस बात पैर शर्म से लाल हो गयी उसने अभी सूट भी लाल hi पहना था …उसके गालो की लाली देखकर

शहीद बोलै “ पसंद है न तुझे हु मुझे भी बहुत पसंद है जलदी से हाँ कर दे तू तोह आएगी सोचूं वर्ण ऐसे हेरे को कोण अपने हाथ से जाने देगा जिसकी हिम्मत पहाड़ जैसी हो और दिल सोने का हो ..पैर आगे मर्ज़ी तोह तेरी hi है “

हीना अपने आपको मनु के साथ फील करने लगी उसके सपने सुच होते दिख रहे थे उसे …

पैर शहीद उसे चुप देखकर छेड़ते हुए बोलै “ ाचा ठीक है तोह तुझे पसंद नहीं है तोह कोई बात नहीं मैं कोई और ढूंढ लूंगा ठीक है न पैर तू चुप मत हो ???”

हीना अचानक से जैसे जाएगी “ भाईजान मैंने ऐसा तोह नहीं कहा ??” जिसपर शहीद अपने अंदाज़ में ज़ोर से हंसा जिसका मतलब हीना अचे से समझ चुकी थी …की उसके भाई ने उसके मुँह से सब निकलवा लिया है …

पैर अगले hi पल हीना थोड़ी सीरियसली बोली “ पैर भाईजान हु तोह हमारे मज़हब के भी नहीं हैं आपको कोई दिक्कत तोह नहीं होगी ??”

शहीद “ अरे कोनसे ज़माने की बात कर रही हो तुम यहाँ लोग अचे इंसान को देखते हैं और तुम ….ाचा क्या मम ऊके लड़के ने दूसरे मज़हब में निकाह नहीं किया क्या फूफी के लड़के ने निकाह नहीं किया गैर मज़हब में और तुमने कर लिया तोह कोनसी दुनिआ में आग लग जानी है …यह मेरा दवा है की तुझे उसके पास दुनिआ की सबसे कीमती चीज़ मिलेगी जो किसी और के पास मिले या न मिले और हु है प्यार ..सो फालतू की टेंशन छोड़ और बता पसंद है या नहीं???”

हीना “भाई जान आज तक आपकी कोई बात ताली है जो आज ताल दूंगी जैसा आप ठीक समझे …”

शहीद भी उसकी रज़ामंदी से बहुत खुश हुआ ….उसे हीना को रॉकी का पसंद करना उसके लिए बहुत अछि खबर थी क्युकी उसकी नज़र में रॉकी सही इंसान था जो हीना को अछि ज़िन्दगी के साथ प्यार और इज़्ज़त देता …

उधर मनु इन सब से अंजान अपनी मंजिल की और बाद रहा था जहाँ नया घमासान होना बाकी था …
:हिंट:
 
थैंक्स फॉर आल.........

वेलकम फॉर नई फ्रेंड्स ....वैरी वेल वेलकम फॉर ु ...

जिनको अपडेट पसंद आया उसके लिए बहुत बहुत थैंक्स .....

और सॉरी बिना बताये जाना पड़ा उसके लिए ...सो सॉरी अबाउट तहत ...बूत लाइफ है....

और लाइफ मैं बहुत कुछ सुद्दीन हो जाता है जिसकी pre-planing नहीं होती ...

एक्चुअली मेरा एक फ्रेंड है जिसका एक्सीडेंट हो गया था .....और उसका कंडीशन काफी सीरियस था ....जिसके चलते बहुत अर्रंगेमेन्ट्स करने थे ...

उनसब मैं सिर्फ उसकी हालात को देखकर कहीं इन्फॉर्म करने का वक़्त नहीं मिला और अब जब वह खतरे से बहार है सो ...अब जाकर सुकून मिला है ...

सो देरी और बिना बताये जाने के लिए सॉरी फ्रेंड्स ...पैर लाइफ मैं बहुत कुछ pre-plan हो जाता है जिसपर कभी कभी लाइफ के और बहुत से pre-plan फ़ैल हो जाते हैं ...

आप सभी के कमेंट देखे ाचा लगा की कुछ ने सपोर्ट kiya......or कुछ ने ...

खैर जो लोग इतने दिन से साथ हैं जानते होंगे बिना बताये जाना आदत नहीं है ...पैर वहां सिर्फ उसकी जान की परवाह थी ...सो याद नहीं कर पाया ...

अभी फ्री हो पाया हूँ थोड़ा रेस्ट करके बाकि के काम से जो पेंडिंग होंगे उनको करके अपडेट पैर काम करूँगा और फ्रेंड्स आज का अपडेट शाम तक कर दूंगा ....

एन्जॉय ुर लाइफ ंद प्ल्ज़ बे सेफ ....


थैंक्स फॉर रीडिंग & स्टेइंग विथ उस.....
 
अपडेट 62

बचपन की यादें

शहीद भी उसकी रज़ामंदी से बहुत खुश हुआ ….उसे हीना को रॉकी का पसंद करना उसके लिए बहुत अछि खबर थी क्युकी उसकी नज़र में रॉकी सही इंसान था जो हीना को अछि ज़िन्दगी के साथ प्यार और इज़्ज़त देता …


उधर मनु इन सब से अंजान अपनी मंजिल की और बाद रहा था जहाँ नया घमासान होना बाकी था …

अब आगे......

मनु अब प्लेटफार्म से उत्तरा और स्टेशन से बहार निकल कर बहार आया जहाँ पास में काफी साड़ी प्राइवेट टैक्सी ? कड़ी thi…jo खुद hi पैसेंजर्स को पूछ रहे थे …

मनु उनके पास गया और पूछा की उसे जिस जगह जाना था वहां चलना है ….

“ अरे भैया सीज़ (नाम नहीं दे रहा हूँ नाम की जगह सीज़ लिख रहा हूँ ) जगह चलोगे “मनु

टैक्सी वाला “ हाँ 300रस लगेंगे “

मनु “ ठीक है चलो “

तभी एक टैक्सीवाला “भाई आपको सीज़ जाना है न …??”

मनु “जी हाँ क्यों???”

टैक्सीवाला “ वहां के सिर्फ 70 रस लगते हैं आप मेरे साथ चलो मैं छोड़ देता हूँ ”

मनु ने सोचा की यह तोह टैक्सीवाले बड़े चालक हैं अनजान इंसान को सही बताने के बजैये लौटने में लगे hain…manu तुरनत उसके टैक्सी ? से बहार आया और जिसने 70रस बोले थे उसकी टैक्सी में बेथ गया …

मनु से हु टैक्सीवाला बोलै जिसकी टैक्सी से मनु उत्तर रहा था …” सर हर बार पैसा महंगा या सस्ता नहीं होता कभी कभी जान भी मॅहगी हो जाती है जिसे लोग पैसे से टूल लेते हैं आप 70रस देख रहे हो जबकि हु टैक्सी वाला यहाँ का रेगुलर नहीं है और हम सबसे काम बता रहा है आप समझदार हो सोह लो कहीं आपको कोई प्रॉब्लम न हो …आगे आपकी मर्ज़ी …”

मनु ने उसकी बात को सुनकर भी अनदेखा कर दिया था ..उसने सोचा 70रस मतलब 230रस की बचत सो मनु आगे सोचता भी kya..garib परिवार का लड़का जिसे बजट में जीने की हब्बित हो उसके लिए बचत ज्यादा थी …और इसे आप शायद बेफिकरी भी कह सकते हो …क्युकी फाइटर अक्सर सोचते हैं “आगे जो होगा देखा जायेगा …”

शायद मनु ने ऐसा कुछ सोचा हो अब यह तोह मनु और उसका दिमाग जाने …

मनु नए बन्दे के साथ चल पड़ा …और जब बाँदा नया हो तोह अनजान शहर में सही एड्रेस पैर उसका भरोसा या तोह टैक्सीवाला होता है या पानवाला को भाई जिनपर मोस्टली लूँगी एकिन करते हैं …

टैक्सीवाला “ अरे सर जी ाचा आप कहाँ से हैं …??”

मनु “ आप सिर्फ मुझे सही पते पैर टाइम से छोड़ने पैर ध्यान दो मैं कहाँ से हूँ उसका आप से कोई मतलब नहीं है ??”

टैक्सीवाला “अरे सर आप तोह बेमतलब में नाराज़ हो रहे हैं मैं तोह बस ऐसे hi पूछ रहा था …”

मनु “ आप सिर्फ रस्ते पैर ध्यान दो न उससे ज्यादा और न उससे काम …”

टैक्सीवाला “ आप बड़े अजीब इंसान हो सर एक तोह मैं आपको सस्ते में ले जारहा हूँ और आप हैं बात भी बड़े अजीब तरह से कर रहे हैं ..”

मनु “ टैक्सीवाले भाई शाहिब आप रस्ते पैर ध्यान देने की किरपा करेंगे प्ल्ज़ …”

टैक्सीवाला समझ गया मनु से ज्यादा बात करना ठीक नहीं है …हु अब गुस्से में कुछ नहीं बोलै …और गाड़ी चलने laga…manu सिर्फ अपने साथ लायी हुई बुक ? जो उसने अपने घर से चलते वक़्त देहरादून का सफर काट जाये इसलिए ली थी प्लेटफार्म से पैर रस्ते भर शहीद ने उसे इसकी ज़रूरत महसूस नहीं होने दी सो अब टाइम मिला तोह मनु उसे पड़ने लगा …

गाड़ी अपनी रफ़्तार से चल रही थी …अचानक से उसमे ब्रेक लगा और मनु का ध्यान टुटा ….गाड़ी के रुकने से …

मनु ने बहार की तरफ देखा तोह शहर के किसी घटिया इलाके का कोई सदा हुआ टुटा फूटा गेराज था ….मनु सोचने लगा यहाँ गाडी क्यों रुकी …पैर इसका जवाब मिला उसे टैक्सीवाले की आवाज़ से …

टैक्सीवाला ..”चल बे बहार निकल “

मनु” हु जगह आ गयी क्या ??”

टैक्सीवाला …”तुझे समझ नहीं अत क्या एक बार का बोलै न बहार निकल !”

मनु को अचे से समझ आ चूका था …की यह हु जगह नहीं है ….क्युकी जिस जगह उसे जाना था हु कोई सोल्लगे होना चाहिए था पैर यह जगह तोह कोई स्लम एरिया टाइप की थी …जिसे देखकर साफ़ लग रहा था कोई गड़बड़ है …

मनु कुछ नहीं बोलै अपना बेग लेकर गाड़ी से बहार निकल आया जहाँ कोई 8 लोग खड़े थे हाथ में गेराज के औज़ार को हथियार की तरह पकड़ा हुआ था …जिनका इंटेंसिव सही नहीं लग रहा था मनु को ..पैर मनु अभी भी शांत hi था ….

टैक्सीवाला अब अपनी कमर से रामपुरी निकल कर (रामपुरी बोले तोह हु चाकू या नाइफ जिसको ओल्ड मूवी मैं बहुत लोगों ने देखा होगा एक बटन होता है जिसे प्रेस करो चाकू लम्बे खुल जाता है )

टैक्सीवाला “ हाँ बे तुझे टैक्सी में बड़ी गर्मी लग रही थी मैं बात कर रहा था और तू उल्टा बोल रहा था अब तेरी साडी अकड़ निकल दूंगा देख रहा है न कितने हैं हम ज्यादा छू चपड़ न करना और सारा माल निकल दे वर्ण यह देख रहा है न इसे तेरे पेट में डालकर 8 का नंबर बना दूंगा फिर तेरी साड़ी अंतड़ियाँ रोड पैर होंगी चल माल निकल ..”

मनु अभी भी शांत था मनु ने बेग अपने कंधे से उतारा और गाड़ी के बोनट पैर रख दिया …और अपने हाथ पैर स्ट्रेच करने लगा …जिसे देखकर सब हंसने लगे …

यहाँ इनके नाम इम्पोर्टेन्ट नहीं हैं सो नाम नहीं लिख रहा हूँ नंबर से बता दूंगा …

आदमी 1” देखो साला हाथ पैर खोल रहा है भागने के फ़िराक़ में है …हाहाहाहाहा!”

उसका हंसना था की सारे हांसे लगे …

आदमी 3 “भाई यह इतने में से भाग पायेगा भला सेल को यहीं गाड़कर रख देंगे “

आदमी 2 “ खुद ले बचे खुद ले क्युकी यहाँ तोह पुलिस भी अपनी गांड बचा कर निकल जाती है यह हमारा इलाका है …खुद ले हहहहहहह!”

आदमी 4 टैक्सीवाले से “ अबे तुझे यह कार्टून कहाँ से मिल गया बे यह तोह खुदने लग रहा है …हाहाहाःहाहा!”

टैक्सीवाला “ यह चुटिया लोग सिर्फ सस्ते के मुहताज़ होते हैं अगर कोई 30रस भी काम करदे तोह उसके बाद इनको और दीखता hi क्या है …यह भी वहां सीज़ का पता पूछ रहा था और मैंने सस्ता बोलै तोह चिडया फंस गयी अब इसकी गांड फडनी है साले ने रस्ते भर बेज़ात किया है और भाई कोई बिच में नहीं बोलेगा ..”

जिस पैर सभी ने उसकी हाँ में हाँ मिलायी …मनु अब तक स्ट्रेचिंग कर चूका था ..

आदमी 7 “ अबे सीज़ में तोह फाइटिंग होती है कहीं यह भी तोह फाइटर नहीं है ???”

आदमी 5 “ अरे भाई अगर है भी तोह कर क्या लेगा साला हम 9 लोग और यह अकेला उस पैर भी हमारे हाथ में हथियार और यह साला खली …गांड फाड़ देंगे सेल की “

आदमी 6 “ हाँ तू सही कहता है …और आज इसकी गांड के साथ अपनी सेंचुरी भी पूरी हो जयेगी और अगर इन खुदने की कोशिश की तोह जैसे 28 लोगों को कटा है साले को काट देंगे ..हाहाहाःहाहा!”

मनु ने सोचा “ यह पुराने पापी हैं मतलब पुराने क्रिमिनल हैं जिनको किसी की जान से कोई लेना देना नहीं है …और यह गैंग अब तक 99 लोगों को शिकार बना चूका है …मतलब या तोह यह सब पुलिस से मिले हुए हैं या अचे खासे कहते हुए बदमाश हैं जिनको सुधारना पुलिस के बुते से बहार है …और यह काम बिना किसी अक्लवाले के पॉसिबल नहीं यह क्युकी इनको देखकर कोई भी समझ सकता है की यह कितने गधे हैं…”

मनु “ क्या तुम्हारा कोई लीडर है जिससे बात कर सकता हूँ …”

टैक्सीवाला “ आबेत ु कोई चुटिया है क्या हम तुझे यहाँ मरने को खड़े हैं और तू हमसे लीडर पूछ रहा है …तू कोई समाजसुधारक है क्या ???”

आदमी 3“ अबे तू किस झाँटु को ले आया बे हम सोच रहे थे यह लड़ेगा पैर यह तोह फुसकी बूम निकला ..”

मनु “ मैं सिर्फ पूछ रहा हूँ तुम्हारा कोई लीडर है क्या …”

“ हाँ मैं हूँ इनका लीडर बोल क्या बात है ..” एक आवाज़ आयी बड़ी बाहरी सी जिसके बात हु सारे हंसना बंद कर चुके थे …

मनु ने घूमकर उस आवाज़ के डायरेक्शन में देखा तोह कोई 40 साल का मातुरे 6’ 2’’ लम्बा छोड़ा काला सा आदमी हाथ में तबाकू रगड़ता हुआ आ रहा था उसके चेहरे पैर एक लम्बा सा कट का निशान साफ़ बता रहा था की यह उसे किसी लड़ाई में लगा होगा …उसकी चाल ढल में साफ़ जाहिर था की कोई पुराण क्रिमिनल रहा होगा …हु अपने हाथ से तबाकू पैर ताली मरता हुआ उसे मुँह में दाल कर बोलै ..” लोंदे बड़ा जिगर है तुझमे इंटने लोगों में हथियारों के सामने निहथा खड़ा होकर डारन ेके बदले लीडर पूछ रहा है ..मानना होगा कलेजा तगड़ा है तेरा क्युकी आजतक ज्यादातर को मैंने अपनी जान की भीक मांगते हुए देखा है पैर तेरी आँखों में मौत के खौफ का namo-nishan नहीं है मरनेवाले की आखिरी ीचा तोह उपपरवाला भी सनटैन है तोह तू समझ ले यह तेरी आखिर ीचा है क्युकी आजतक लूट में जिसने मुझे देखा हु जिन्दा नहीं बचा और टब hi नहीं बचेगा बोल क्या बात है ”

मनु “ बात कुछ नहीं बस छोटे से सवाल थे पूछ सकता हूँ ???”

लीडर “ हाँ बोलना क्या जानना है तेरे को ??” उसने साइड में थूक दिया ..

मनु “ पुलिस कुछ कहती नहीं होगी आपको ..यह तोह पता लग रहा है पैर मैं सिर्फ इतना जानना चाहता हूँ आप मैनेज कैसे करते हो पुलिस को ..??”

लीडर “ हाहाहाःहाहा! बस इतनी सी बात मैं तोह समझा तहत ु कुछ और कहेगा …पैर कोई बात नहीं अब क्युकी तू मरने वाला है तोह कान और गांड दोनों खोलकर सुनले यहाँ का इंस्पेक्टर मेरा सागा जीजा है …और क्युकी जीजा जी का सलाह उन तोह पुलिस हमारे लिए लैंड पैर है …और कुछ पूछना है तुझे …???”

मनु “ क्या आपने कभी यह काम छोड़ने के बारे में सोचा है ??”

लीडर “ आबेत ु कोई सनकी है क्या ??? यहाँ हम तुझे मरने के लिए कह रहे हैं और तू हमे बदलना चाहता है …अबे हम गटर की पैदाइश हैं हमको सफाई में छोड़ा तोह मर जायेंगे हमारे लिए लूटना मरना hi हमारा जन्नत है …चल बहुत हुआ तेरा कौन बनेगा करोड़पति अब तेरा टाइम ख़तम …”

हु यह बोलकर उसने टैक्सीवाले को इशारा किया और हु पलटा ताकि गेराज के गेट पैर राखी एकलौती टूटी हुई कुर्सी (चेयर ) पैर जाकर बेथ सके ..पैर जैसे hi हु पलटा उसके सामने खड़ा आदमी हाथ पेअर ढीले करने लगा पैर एक चीख सुनाई दी थी …पैर उसने सामने देखा तोह जो हाथ पेअर ढीले कर रहा था उसके गले के बिलकुल सेण्टर में जहाँ गले की हादी ख़तम होती है वहां रामपुरी घुसा हुआ था और उसके सांस लेने पैर खून उबाल उबाल कर उसके गले से बहार आ रहा था …जिसे देखकर लीडर की एक बार तोह सिटी पित्ती गम सी हो गयी …

उसने पीछे मुड़कर देखा तोह हु टैक्सीवाला जिसके हाथ में रामपुरी चाकू था हु अपना हाथ पकड़े खड़ा चीक रहा था जैसे किसी ने उसकी गांड में 1कग लाल मिर्चे भर दी हों ..बाकी सबके चेहरे से हवाइयां उडी हुई थी… उस टैक्सीवाले ने अपना दूसरा हाथ हत्या तोह लीडर ने देखा उसका हाथ कोहनी और कलाई के बीचों भींच से टुटा हुआ हवा में झूल रहा था …

मनु उसके बाद घुमा और उसने अगले बंद ेके ठीक गर्दन पैर जोरदार घूमकर किक जड़ दी और किक इतनी तेज़ी और ज़ोर से मारी थी की उसे कुछ करने का टाइम नहीं मिला था …पैर जब किक लगी तोह उसकी गार्डन हवा में झूल रही थी मतलब उसकी गार्डन टूट चुकी थी …..और हु ज़मीं पैर किसी टूटे पत्ते की तरह गिर चूका था …

मनु उसके बाद अगले की तरफ बढ़ा और उसकी छाती में पुरे ज़ोर से उसने पंच जड़ दिया जिसके चलते उसकी कई पसलियां शहद हो चुकी थी …पैर मनु रुका नहीं हु जिसकी पसली में मारा था उसक सामने से घुमा और उसके पीछे घूमकर मनु ने ज़ोर से घुटना दे मारा जिसका टारगेट उसकी रीद की हड्डी थी …और एक आवाज़ आयी धाम उसके बाद हु भी ज़मीं पैर …उसकी रीद की हादी टूटी या नहीं यह तोह सराय के बाद hi कहा जा सकता है …

लीडर किसी शॉक से में था …उसने कहाँ सोचा था की मनु को मारकर हु लोग 100 का आंकड़ा पार करेंगे पैर मनु ने उसके सामने दो लोगों को कहली हाथ से ज़मीं पैर लिटा दिया था …और मनु की फुर्ती देखकर हु खुद हैरत में डूबा हुआ था ..

पैर फिल्मी दुनिआ में जो दिखते हैं की हीरो लड़ रहा है और एक के बाद एक गुंडे उसके सामने आते है और हीरो पिट पिट कर सबका हाल बदल देता है …जबकि असल ज़िन्दगी की लड़ाई उस फिल्मी दुनिआ से अलग होती है ..

तोह मनु दो लोगों को ज़मीं पैर गिरा चूका था और एक अपने टूटे हाथ को लिए छीकें भर रहा था …लीडर भला अपनी सेना को अकेला कैसे छोड़ देता उसने अपनी गन ? निकली और फायर किया …

धाएन ! मनु उसे गन निकलते देख चूका था …मनु ने तेज़ी से हवा में जम्प लिया ..और गोली लगी उसके चेले को उसके साइन में ..वह वहीँ गिर चूका था शायद मर गया हु ेक्ग देखनी होगी उसकी तब पता चल सकेगा की जिन्दा है या नहीं …

इससे लीडर अपना आप और खो चूका था उसने फिर से फायर किया और मनु पैर निशाना लगाया पैर मनु ने फिर से जम्प लिया और इस बार भी उसके एक और चेले के पेट में गोली लग चुकी थी ….अब हु और पागल हो गया …पैर मनु होश मैं था और हु हर बार उसके चेले के सामने खुद रहा था ताकि उसके अगले जम्प पैर गोली से उसका सटी उसी के हाथों मरे …पैर गुस्से में लीडर को सिर्फ मनु दिख रहा था …और नतीजा उसके सभी साथी उसी के हाथों गोली का शिकार हो चुके थे …बा टैक्सीवाला बचा था क्युकी उसने हाथ टूटने के बाद hi लड़ाई से हटकर बेथ गया था ज़मीं पैर क्युकी टूटे हाथ को हवा में छोड़ना उसके लिए पॉसिबल नहीं था ..सो हु तोह गाड़ी से भाग जाता अगर गाड़ी से जा सकता तोह पैर उसके दोनों हाथ बिजी थे सो वहीँ जमीं पैर बैठा था …

और बचा था हु लीडर जिसके हाथ में गन ? थी उसने चिल्ला कर कहा “रंडी के बचे तुझे आज कोई नहीं बचा सकता सेल तुझे न मारा तोह मेरा नाम “लल्लू” नहीं …उसके नाम पैर किसी को भी हंसी आ जाये पैर मनु को उसके उसकी मान को रंडी कहने से गुस्सा आ चूका था मनु एक ड्रम के पीछे छुपा था …पैर जब

लल्लू ने उसे रंडी का बचा कहा था उसके दिल में आग लग चुकी थी …उसने इधर उधर देखा सामने गाड़ी के औज़ार नज़र आ रहे थे …उसमे मनु को एक रोड नज़र आयी और एक प्लास (इंग्लिश में प्लिएर टूल) मनु ने दोनों उठा लिए रोड तोह पंक्चर खोलने के लिए उसे होती होगी सो रोड थोड़ी लम्बी थी …

मनु ने निष्णा लगाया उस प्लास से उसके सर पैर ….और ज़ोर से फेंक दिया और हु प्लास भी ज़ोर से लगा उसके सर पैर कोई 5 सेकंड के लिए उसका सर गुमा और मनु के लिए इतना टाइम बहुत था …जब उसे होश आया तोह मनु उसके सामने था ….उसके हाथ में रोड देखकर लल्लू ने गन ? से निशाना उसके सर पैर लगाना चाहा पैर मनु ने उसके लैंड पैर उस रोड से बहारपोर वार किया और उसके मुँह से दुनिआ भर का थूक निकला जिसमे तम्बाकू भी उसके साथ निकल आया था और उसके हाथ से गन छूट चुकी थी क्युकी लैंड की बजाये उसके ाँद पैर रोड लगी थी उसे दुनिआ में टारे दिख रहे थे …मारा नहीं पैर उसके ाँद फुट चुके थे …शायद उसके लैंड के खड़े होने का टाइम आज के बाद नहीं आनेवाला tha…who जमीं पैर खुद को नार्मल होने का वेट कर रहा था ….

पैर मनु ने ज़मीं से गन उठाकर अपनी उसका सेफ्टी लॉक ? ऑफ किया ताकि गन अपने आप न चल जाये मास्टर ने उसे गन ? हैंडलिंग की भी अछि खासी ट्रेनिंग दी थी …सो मनु को मोस्टली गन्स ? को अचे से हैंडल करना आता था …उसने रोड उठाई और लल्लू के दोनों घुटने पैर धड़ा धड़ कई वार किये जिसके बाद लल्लू की चीखे सुनकर उस टैक्सीवाले का पिशाब पेण्ट में निकल गया …क्युकी उसने मनु को उसे मारते हुए देखा था जो की कई खून कर चूका था और …उसी कैद ुम पैर उन्सबके गैंग टिका हुआ था …कई खून करने वाला ज़मीं पैर लाचार चीक रहा था उसके पेअर की हाड़ियाँ टूट चुकी थी और इतनी टूट चुकी थी की घुटने से निचे के हिस्से से पेण्ट फाड़कर बहार टूटी हदी दिख रही थी ….और लल्लू मनु को रोकने के लिए कुछ नहीं कर पा रहा था ….उसके बाद मनु ने उस रोड के नुकीले हिस्से को हाँ उस रोड में हु हिस्सा उन्सबके गैंग की दें था जिन्होंने आम से टूल्स को मॉडिफाई करके हथियार बांया हुआ था…

मनु ने उसका नोकीला हिस्सा उसके कंधे में घुसाया और आर पार करके घुमा दिया जिसका मतलब आप समझ चुके होंगे शामे ऐसा hi उसने दूरसे कंधे के साथ किया ….

उस टैक्सीवाले ने बेशक कितने मर्डर किये थे पैर खुद के साथ और अपने लीडर के साथ ऐसी दरिन्दगी होते देखना उसके लिए फर्स्ट टाइम था …उसका मुट्ठ जाने कितनी बार निकल चूका था पेण्ट में …क्युकी लल्लू की दिल दहला देनेवाली चीक सुनकर किसी का भी दिल कांप जाता पैर मनु के चेहरे पैर तोह कोई इमोशन hi नहीं था जैसे …उसके लिए कोई बड़ी बात न हो उन सबकी मौतें आज उस टैक्सीवाले को जान की असली कीमत का अंदाज़ा हो चूका था…

वो बस दुआ मांग रहा था की कैसे भी यहां से जिन्दा बच जॉन …साला लल्लू की हालत देखकर यह भी भूल चूका था की मनु ने उसका हाथ तोडा था पेअर नहीं …उसकी गांड कितनी फटी होगी इससे आपको अंदाज़ा मिल चूका होगा …पैर सेल ने शायद आपके दिमाग की बात सुन ली थी उठा और भागने को हुआ …पैर

तभी शिईयूं ! फायर की आवाज़ आयी और हु ज़मीं पैर था …हाँ मनु ने उसे भागने को कोशिश करते देख लिया था …और उसने उसकी रीद की हदी पैर फायर कर दिया था ….जिसके बाद हु ज़मीं पैर लाचार पड़ा देख रहा था …उसने घूमकर देखा …मनु ने गन वापस अपनी कमर में रख ली थी…

और हु लोहे की रोड हाथ में ले रहा था लल्लू “ आअह्ह्ह्ह सेल तुझे देख लूंगा रंडी के बचे ाहव!”

मनु शांति से “ तुझे पता है तेरे हाथ और पेअर क्यों तोडे क्युकी तूने मेरी मम्मी को गन्दा बोलै …तुझे में अभी भी मार सकता हूँ पैर नहीं तूने मेरी मम्मी को गली दी है तुझे मैंने तेरे हर जोड़ को इस तरह से तोडा है की तू सिर्फ आज के बाद बिस्तर का मोहताज़ होगा और खुद के मरने की भिक उपपरवाले से मांगे और तुझे बदले में मिले तोह सिर्फ लोगों की दया …जिसपर तू हर पल तड़पे अपने बुरे कर्मो पैर …और तू क्या सोचता है तेरे जीजा को तू मेरे बारे में बता पायेगा नहीं हु मौका नहीं है तेरे पास”

लल्लू हैरत और डर से शांत हो चूका था क्युकी मनु की बातें जो उसने इतने शांत लहज़े में कही थी उसने उसकी रही सही हिम्मत को भी तोड़कर रख दिया था …उसने इधर उधर देखा तोह लोग अपने घरों में दुबके हुए थे क्युकी उसने जब फायर किया था तभी लोग अपने घरो में घुस गए थे …क्युकी हु तोह था hi कमीना उस इलाके में सब उससे परेशान थे और उसके जीजा जी जो इंस्पेक्टर थे उसके बारे में कुछ करने के बजाये उल्टा उन्हें hi धमका दिया करते थे …कुल मिलकर मोस्टली लोग लल्लू के वहां रहने से दुखी थे …पैर आज मनु ने जब उसका हाल बेहाल कर दिया था …तोह वहां का हर आदमी लल्लू के मर जाने की दुआ मांग रहा था ..

मनु ने देखा हु प्लास जो उसने लल्लू के सर पैर मारा था हु वहीँ पड़ा था …उसने उठा या और वापस लल्लू के पास आया प्लस देखकर लल्लू सोचने लगा की अब क्या करनेवाला है यह दरिंदा ..वह कुछ बोलने को हुआ …मनु ने फुर्ती के साथ उस प्लास से उसकी जीभ पकड़ ली …जिसके बाद लल्लू किस सर कटी मुर्गी जैसा फाड् फाड़ने लगा …उसकी आँखोने में ाँसों आ चुके थे …हु खुद की जान आज पहली बार मुश्किल से ज्यादा मुश्किल में देख रहा था …मनु ने तभी प्लस से खींचा उसकी जीभ (टंग ?)और लल्लू कुछ कर पता उसे पहले मनु ने एक घुटना दिया उसके जबड़े पैर और उसके बाद लल्लू की जीभ मनु के प्लस में फांसी हुई थी …

और लल्लू के पुरे शरीर के साथ उसके मुँह से भी खून निकल रहा था ….लल्लू भी खुद की जीभ मनु के हाथ में प्लास में फांसी हुई देख रहा था …उसकी जीभ काटने से सबसे ज्यादा जो किसी की फनती थी हु था टैक्सीवाला ….

उसका हाल इस बात से पता चल सकता है की हु ज़मीं पैर रेंगता हुआ दूर जाने की कोशिश कर रहा था मनु ने रोड उठाया और शामे उसके कंधे और घुटनों का हाल भी वैसा hi कर दिया मनु के इस ट्रीटमेंट को जिसने भी अपने घर में से झांकर देखा था उनका दिल कांप उठा tha…kai कमज़ोर दिल वाले तोह बेहोश हो चुके थे इतना बुरा मंज़र देखकर …

फिर मनु ने उसकी भी जीभ वैसे hi काट दी जैसे लल्लू की काटी थी और दोनों को जीभ को जब उसने ज़मीं पैर फेंका तोह पास में एक कुत्ता था जो शायद आवारा रहा हो उसने बिलकुल मौका नहीं दिया उस जीभ को ज़मीं पैर वास्ते होने को तुरंत खा गया …हु दोनों की जीभों को …

मनु “ सुन बे टैक्सीवाले जब तू मुझे लेकर चला था तब वहीँ पास खड़े आदमी ने आपस में कहा था की “आज एक और बेचारा शायद मारा जायेगा सस्ते के चक्कर में ..तभी मैंने सोच लिया था की तुम लोगों की आज अचे से ट्रीटमेंट करूँगा रस्ते भर तुझे इज़्ज़त नहीं दी तब भी तेरी काम बुद्धि में समझ नहीं आया …की सामने वाली पार्टी तेरी अकाल और बूत ेके बहार है ..खैर अब दोनों सिर्फ बीएड ? पैर सोचते रहना 99 के बाद 100 क्यों नहीं हुए मैं चलता हूँ ….तेरी टैक्सी ? में bye ..”

मनु ने उसकी जेब से टैक्सी ? की के ? ले ली और अपना बेग लेकर जाने वाला था की कोई रोकते हुए bola””beta कमसे काम हमे उन कमीनो से मुक्ति दिलाने वाले का नाम तोह बता दो …??”

मनु ने घूमकर देखा तोह कोई बुल्कुल बूढ़ा आदमी था जो उससे बातें कर रहा था …

मनु रुका और बोलै “ बाबा आपको डारन यही लग रहा मुझे से की कहीं मैं आपको भी मार दूँ ..???”

मनु ने गन ? निकलते हुए कहा …

बुद्धा “ बीटा अब मुझे जैसे बुड्ढे में जीने जैसा है hi क्या और वैसे भी तुम एक बहादुर इंसान हो दुनिआ देखि है मैंने तुम मुझे नहीं मरने वाले हो …”

मनु ने ज्यादा बात काना ठीक नहीं समझा क्युकी ज्यादा देर इस काण्ड के बाद रुकना मतलब उसके लल्लू के जीजा से मुलाकात और जो मनु के लिए सही नहीं था इस लिए तोह मनु ने दोनों की जीभ काट दी thi..taaki हु मनु के बारे में उसके जीजा को कुछ न बोल पाए …

मनु बोलै “देखो बाबा काम हो चूका है और यहाँ रुकना सेफ नहीं है अब तक पुलिस को पता चल चूका होगा और यहाँ जीतनेय काम लोग मेरे बारे में जाने उतना ाचा होगा …ताकि उनको और मुझे काम परेशानी हो …सो चलता हूँ “

बूढ़ा “ बीटा तुम उनकी चिंता न करो उनसब में वैसे हिम्मत नहीं है …की तुम्हारे बारे में कोई कुछ कह सके और वैसे भी यह कमीने जाने कितने लोगों को लूटकर मार चुके है यहीं इसी जगह पैर और आती जाती लड़कियों औरतों को छेड़ना इनकी आदत थी तोह एक तरह से तुमने हमसबको नयी ज़िन्दगी दी है …तुम्हारे बारे में कोई कुछ नहीं बोलेगा यह मैं कह रहा हूँ बाकी मैं सबको समझा दूंगा …बस तुम नाम बता जाओ ताकि लोग तुमको याद रख सकें …”

मनु “ मेरा नाम है “रॉकी “ और इससे ज्यादा न मैं बताना सही समझता हूँ न आप लोगों के लिए सही होगा क्युकी पुलिस जब आएगी तोह आपको जितना काम पता हो आप सभी के लिए उतना ाचा होगा …ाचा चलता हूँ भूल चूक माफ़ करना बाबा और सबको समझा देना की किसी ने मेरा नाम लिया या कुछ कहा तोह उन्सबके यही अंजाम होगा ”यह बात मनु ने ज़ोर से कही थी ताकि लोग उसके बारे में पुलिस को कुछ न कहें..

बाबा “ बेटे तुमने चाहे जो कहा हो पैर तुमने बुल्कुल सही किया इन कमीनो को मार कर ..”

मनु “ मारा नहीं है पैर अपाहिज बना दिया है ताकि जीने की असली एहमियत इनकी खोपड़ी में घुसे ..और जैसे hi मैं यहाँ से निकलूं एम्बुलेंस ? को बुलवा लेना ताकि यह ज़िंदे रहें और उनको देखकर दूसरे गलत करने वाले भी डर से या इनको देखकर सुधर जाएँ ok bye ..” उसके बाद मनु कुछ नहीं बोलै तेज़ी से हु लल्लू की तरफ गया और उसने उसकी शर्ट ? से उस गन ? पैर अपने फिंगरप्रिंट साफ़ किये और उस पैर लल्लू के फिंगरप्रिंट ले लिए और उसके बाद पास पड़े कागज़ से उस गन को कवर किया और टैक्सी ? में बैठा और चल दिया …

मनु ने रस्ते में सुनसान एरिया में गाड़ी रोकी और अपने कपडे चेंज किये और उस गन को पास दिख रहे गटर में दाल दिया …क्युकी उसपर निशान उसके थे नहीं सो जिस मिले उसका धयान अगर गया भी तोह जायेगा लल्लू पैर ..और मनु ने उस टैक्सी ? से भी अपने निशान मिटाये और पैदल चल पड़ा …मैं रोड की तरफ …

जहाँ से उसने टैक्सी ? पकड़ी और चल दिया सीज़ की तरफ ….जहाँ हु पूछा और अपने लिए सस्ते से होटल में कर्मा लिया उसने खाना ख्य और थोड़ा सो liya…kyuki कल फाइट थी सो आज घूमना बेकार था …

उधर मनु के निकलते hi उसका जीजा आ चूका था उसने जब अपने साले और इतने मरे हुए उसके साथी देखे तोह एक बार को तोह उसकी भी हालत ख़राब हो चुकी थी क्युकी इतने लोगों को मरना मतलब किसी बड़े गैंग का हाथ होगा …क्युकी इतने लोगों को मरना किसी एक के बस की बात नहीं थी …ऐसा उसका मन्ना था और जब उसने लल्लू की हालत देखि तोह एक शाक्त जान पुलिस वाला होने के बाद भी उसे उलटी हो गयी क्युकी उसकी पैरूं की कई जगह से हाड़ियाँ तंग के बहार निकल रही थी और उसके हाथों के जोड़ भी कई जगह से टूट चुके थे ….और उसके बाद उसकी कटी हुई जीभ देखकर रोज़ लाशे देखनेवाले उस शकत जान पुलिस वाले को भी उलटी हो गयी थी ..और उन सभी को एम्बुलेंस ? में डाला जाने लगा था उस टैक्सीवाले और लल्लू की हालत खून ज्यादा बहने से बेहोशी में तब्दील हो चुकी thi…itne में बाबा ने अपना काम कर दिया था …की कोई रॉकी का नाम और हुल्य न बोले …और लगभग रॉकी उर्फ़ मनु की दरनदगी देखकर किसी की हिम्मत भी नहीं थी की कोई उसका नाम भी ले सके गलती से भी पैर वहां आस पास में “रॉकी “ नाम किसी जांगले की आग की तरह फ़ैल चूका था …की कोई है जिसने लल्लू को मार मार के भी ज़िंदा रहने की सजा दी है …जिसने अकेले 10 लोगों के गैंग जो लूटकर लोगों को मार दिया करता था …उसे साफ़ कर दिया है ..

कहते हैं इंसान अगर एक ाचा काम करे तोह उसे कोई जल्दी से नहीं जनता पैर अगर कोई उल्टा काम करे तोह लोग उसे अचे से यह बात भूलने नहीं देते …यही हाल हुआ था “रॉकी “ का जिसका नाम आज शाम तक हर छोटे बड़े सिद्ध काम करने वाले या उल्टा काम करने वाले की जबान पैर था ….जिनमे से कुछ सुच था तोह कुछ झूंठ जैसा मुँह वैसे बात दुनिआ है सभी अपने अपने तरह से “रॉकी “ को फेमस करने में लगे थे पैर “रॉकी “ उर्फ़ मनु एक सस्ते होटल ? में खा पि कर आराम से सोया हुआ था ..

खैर अगला दिन हुआ …और चैंपियनशिप का हाल जैसा की पहले से था ..फाइट हुई मनु ने भी काम पैर थोड़ा शांति से फाइट की और जहाँ हु 10 लोगों से लड़ा तोह यहाँ तोह सामने एक ॉपपोनेंट था …

पैर था हु भी ाचा फाइटर हु हरयाणा स्टेट से आया था उसका नाम था यशवीर धामा पुरे सॉलिड जाट …अब क्युकी उसकी आगे और मनु की आगे शामे थी और मोस्टली फाइट में वेट काटेगोरिएस होती हैं तोह यहाँ दोनों का वेट भी शामे था ….

अब शामे था तभी तोह फाइट होनी थी ..जहाँ मनु 16 साल में अभी भी साफ़ सा बचा था मतलब क्लीन शवेद रहता था वहीँ यशवीर को ढाढी बोले तोह बियर्ड ? रखने का शॉक था …उसमे उसका स्तुब्ब्ले लुक ? काफी ाचा जचता था उसपर …यशवीर जिसके दोस्त उसे यश या यशु कहा करते थे …

खैर फाइट स्टार्ट हुई तोह दोनों ने अपना ाचा बेस्ट दिया यश के हर वॉर को मनु ब्लॉक कर रहा था …राउंड ओने के बाद किसी का कोई पॉइंट नहीं था ..यश जो हरयाणा का जाना मन नाम था उसके दोस्त हैरान थे की एक अनजान सा लड़का यश कोई भी पॉइंट लेने नहीं दे रहा था …

यश का दोस्त …”यशु एक आम सा लड़का पॉइंट नहीं दे रहा तुझे क्या बात है …”

यश “ अरे यार उसकी टेक्निक सॉलिड है जिसे तुम आम सा लड़का कह रहे हो मुझे पता है की मैंने कैसे अपना सब कुछ आज़मा कर देखा है की मैं कोई पॉइंट ले सकूँ पैर हाथ क्या आया …घंटा और हु भी तुम्हारा …यार मैं बचपन से लड़ रहा हूँ यह नार्मल लड़ रहा है तुमको लग रहा है पैर इसकी टेक्निक बहुत अलग है मैंने महसूस किया है …”

यश का दोस्त “ अबे तू लड़ने पैर ध्यान दे साले तुझे जितना है पैर तू सामने वाले की तारीफ कर रहा hai…bada अजीब इंसान है तू ..”

यश “ अबे ढक्कन एक फाइटर दूसरे की रेस्पेक्ट करता है …अगर उसमे इज़्ज़त जैसा कुछ हो तोह ..और जब पर्सन उसके जैसे क्लैम नेचर का हो तोह प्रॉब्लम क्या है …तुम लोगों ने यह देखा उसके साथ कोई नहीं आया..??”

यश का दोस्त “ तोह उसमे क्या है शायद अकेला होगा तोह ??”

यश “ अबे यार यह कमान नहीं है एटलीस्ट एक बाँदा तोह साथ में आना चाहिए था …पैर यहाँ उसके पीछे कोई नहीं आया इसका मतलब दो बातें हो सकती हैं या तोह यह इतना घटिया फाइटर है जिसके पीछे कोई टाइम वास्ते नहीं करना चाहता ..यह बात तोह उससे लड़ने के बात समझ चूका हूँ पॉसिबल नहीं है …दूसरा की उसकी फाइट में इतनी पकड़ है जिसे देखकर उसके साथ सभी को इतना कॉन्फिडेंस होगा की यह आसानी से हरने वळून में से नहीं है तोह हु सब यहाँ नहीं आये …जिसमे से यह बात ज्यादा सही लगती है की इसके साथी इस पैर पूरा कॉन्फिडेंस रकते हैं …जोकि सही भी है …”

यश का दोस्त “आबेत ु तोह किसी फैन की तरह बोल रहा है कहीं तू उसका फैन तोह नहीं बन गया ..”

यश “ अरे यार मैंने अपने दादा से सीखा हुआ भी उसपर आज़मा कर देखा और नतीजा वही जीरो सोचकर देखो ऐसे इंसान का कोई भी फैन बन जायेगा और अचे फाइटर को अप्प्रेसियते करना एक अचे फाइटर की निशानी है सो मैं कोनसा बुरा फाइटर हूँ ??”

यश का दोस्त “ यार तू जाने क्युकी तू ाचा फाइटर है तू जो तू कह रहा है सही hi होगा ..?? वैसे इतना हार्ड है क्या उससे लड़ना ??”

यश “ अरे यार मेरे दादा जी ने ओल्ड टेक्निक सिखाई थी जिसका इस्तेमाल आज तक फ़ैल नहीं हुआ मतलब यह ओल्ड टेक्निक में भी त्रिनेड है तोह तुम अंदाज़ा लगा लो मैं क्यों उसकी तारीफ कर रहा हूँ यह मैच चाहे जो भी रिजल्ट लाये पैर बाँदा है टैलेंटेड उसमे कोई दो राइ नहीं है …”

तभी बेल्ल बजी और फाइट शुरू हुई यश ने अटैक किया पैर मनु ने सफाई से ब्लॉक कर दिया पैर उसके तुरंत बाद मनु ने वॉर किया पैर यश उसे ब्लॉक नहीं कर पाया और पॉइंट मनु के नाम जिसको सभी ने देखा था ..जहाँ यशवीर एक जाना मन फाइटर था जिसके वहां बहुत से चीयर पर्सन थे पैर मनु का यह पॉइंट सबके मुँह पैर एक शांति ले आया था क्युकी पूरी भीड़ में से शायद hi कोई था जो मनु को जनता हो वहां मनु ने यश से न केवल एक पॉइंट लिया था बल्कि वहां सभी के दिल में हलचल भर दी थी की यश से कोई अनजान स ाबंदा पॉइंट ले कैसे गया ..

पैर ज्यादा देर यह सब नहीं चला और मनु ने आगे जाकर लगातार पॉइंट पैर पॉइंट बनाये और 7-0 से मैच अपने नाम कर लिया …भीड़ हैरान थी यह हुआ क्या पैर मनु अपने नेचर जैसा साइलेंट hi था उसने जमीं पैर चित पड़े यश को उठाया और उससे एक अचे खिलाडी की तरह हाथ मिल्या ..

यश ने भी मनु से मैच ओवर होने के बाद हाथ मिल्या …

यश “ क्या ाचा लाडे तुम वैरी नीस फाइटर ु हैवे मर. मानव सिंह कॉंग्रट्स और ुर विनिंग ? “

मनु “ अरे आप मुझसे भी ाचा लाडे और आईएम आल्सो अमज़द फॉर ुर आल मूव्स ..कोई बात नहीं आप भी सूची हक़दार है मैडल ? के देखना आप नेक्स्ट टाइम जरूर जीतोगे …कॉज ी हैवे फेथ इन ु…”

यश मनु की इन पॉजिटिव बातों से बहुत खुश हुआ की एक अपोजिट फाइटर होते हुए भी एक अचे खिलाडी की तरह मनु ने उसे एप्रोप्रियेट किया है …जो की खेल की सही और अछि भावना का प्रतिक है ..और जिस तरह मनु ने उसे नेक्स्ट टाइम विनिंग के लिए एप्रोच किया था और उस पैर फेथ की बात की उसने मनु के लिए उसके दिल में एक पॉजिटिव फीलिंग्स ला दी थी …

इन दोनों ने मैच के बाद बहुत बातें हुई जिसके चलते दोनों में एक अछि दोस्ती हो गयी और यश ने उसे अपने सारे फ्रेंड्स से मिलवाया ..जिसमे मनु को यह पता चला की यश एक अचे बैकग्राउंड से ताल्लुक़ रखता है ..और उसके फादर दिल्ली के ैप हैं ..और मनु ने उसे अपने और अपनी फॅमिली के बारे में बताया पैर दोनों की अछि बॉन्डिंग बन चुकी थी क्युकी दोनों फाइटर होने के साथ शॉक भी मोस्टली शामे से रखते थे और जब शामे फील्ड के दो लोग मिले जिनके होब्बीएस शामे हो तोह बात भी अछि लम्बी चलती थी …

खैर मनु ने यश से दोस्ती को एक्सेप्ट कर लिया था जिसमे यश ने भी उसे जब कभी हरयाणा आने का मैं बने तोह घर आने को कहा था …और दोनों ने अपने नंबर एक्सचेंज ? किये और क्युकी यश हार चूका था मनु से सो उसके लिए उसका इस चैंपियनशिप में सफर यहीं तक था ..पैर उसने मनु की फाइट को टीवी पैर देखने का वडा किया ..और चला गया ..

यश गया hi था की मनु का मोबाइल बजा …उसने कॉल उठायी तोह “ कॉंग्रट्स भैया मुझे पता hi था मेरा भाई पाका जित जायेगा …लव ु भाई क्या मूव था उस बन्दे को चांस hi नहीं मिला ुर अवेसमे भैया..”

अजय एक सांस में मनु की तारीफ कर रहा था शायद टीवी पैर मैच देखकर बहुत एक्सीटेंड था ..

मनु ने भी उसे बात की फिर उसके बाद तोह जैसे तनता लग गया कॉल्स का घर से और पुष्पी और मास्टर और गुरु जी सभी ने उसे बधाई दी ..और मनु ने भी सभी से प्यार से बात की ..

उधर कोई और भी था जो टीवी पैर मैच देखकर ख़ुशी से नाच रहा था …

“ हे यह याहू ! मेरे हु जीत गए देखा न मम्मी मैंने कहा था न की हु जरूर जरूर जीतेंगे और देखो हु जीत गए न …लव ु सो मच मम्मी की आपने मुझे बता या की आज उनकी फाइट है ,,,लव सो मच “ हु लड़की किसी बचे की तरह नाच रही थी ,,,

की एक आवाज़ ने उसे रोकने की कोशिश की ..” देख निशा एक माँ ने अपना वडा पूरा किया तुझे कहा था न की तुझे मनु की हर खबर मिलती रहेगी और देख आज भी मिली न पैर थोड़ा धीरे बोलना प्ल्ज़ मेरी माँ तेरा मां घर पैर है और उसे कुछ नहीं पता पैर थैंक्स तोह तू अपनी इस मामी को बोल जिसने तेरे मां को नींद की दवाई से सुला दिया वर्ण जैसे तू नाच रही है मेरी माँ वैसे तोह कोई भी जाग जाता पैर प्ल्ज़ थोड़ा धीरे कूद ले ..”

हाँ यह निशा और मंजू थे साथ में उसकी मामी भी थी जिनको मंजू ने सब बता दिया था …और क्युकी उसकी मामी ने भी निशा को सपोर्ट करने का वडा किया था सो आज का मैच उसके मां को छोड़कर सब देख रहे थे …जिनमे निशा के मां का लड़का जो अब थोड़ा बड़ा हो चूका था हु भी था जिसे आज अपनी दीदी को ख़ुशी से नाचते देखकर समझ में तोह कुछ नहीं आ रहा था पैर दीदी खुश थी तोह हु भी ख़ुशी से नाच रहा था ..

निशा “ लव ु मम्मी ुर थे बेस्ट मैंने तोह सोचा था की यहाँ उसने दूर कैसे रहूंगी पैर आपने उनके पीछे डिटेक्टिव लगा कर ाचा किया कमसे काम हर हफ्ते उनकी पिक मिल जाती है और आज तोह उनको टीवी पैर देख लिया है मम्मी देखो न हु कितने हैंडसम हो गए हैं और उनके मुस्कले ? देखकर कोई कह भी नहीं सकता यह सिंपल इंसान हैं लव ु मम्मी ंद लव ु मामी और लव ु छोटे ंद लव ु डिअर “ निशा ने अपनी मम्मी और मामी के बाद छोटे भाई को उसके गाल पैर किश करते हुए कहा …जिसके बाद हु नाचती कूदती हुई टीवी पैर जहाँ मनु की फाइट ओवर होने के बाद की अनाउंसमेंट चल रही उसमे मनु को देखकर किश कर दिया जहाँ मनु टीवी पैर दिख रहा था …

मंजू ने पीछे से छोटे की बॉल फेंकर मारा “ बदमाश कुछ तोह शर्म कर ले कमसे काम उसकी पिक को hi चुम्लेटी अपने रूम में जाकर पैर तुझे तोह टीवी को भी किश करना है लगता है साड़ी शर्म बेच खाई है तूने manu-diwani “ मंजू ने मज़े लेते हुए कहा ,,

निशा रो पड़ी “ मम्मी आज न रोको प्ल्ज़ कितने दिन बाद देखा है उनको आज खुद को कितना पास महसूस कर रही हूँ उनके यह आप भी अचे से जानती हो जानती मैं भी हूँ की आप मुझे छेद रही हो पैर आज आपने मुझे यह तोहफा दिया है उसे दिल से एन्जॉय कर लेने दो प्ल्ज़ माँ..”

मंजू “ बस कर पगली तेरे लिए एक माँ से तेरी सहेली बानी और तू फिर भी रो रही है …देख तू मेरे दिल का टुकड़ा है …तेरे लिए मैं पहली बार तेरे पापा से छुपकर कुछ किया है और हु प्राइवेट डिटेक्टिव को मनु की खैर खबर रखने को कहा है ताकि तुझे मनु की हर खबर मिल सके …तूने सोचा है की मुझे कैसा लगता होगा जब मनु के साथ यह बर्ताव किया होगा मैंने हु मुझे भी माँ सामान इज़्ज़त देता है …कभी सोचा है तूने जब कभी उसे यह पता चलेगा की मैं उसपर नज़र रखवाती हूँ क्या मैं उसे कभी नज़र मिला कर बात कर सकुंगी ??पैर तेरे लिए मैं ीक बार भी अशोक और मनु की परवाह नहीं ..तोह तू रोकर अपनी माँ के इस त्याग को बेकार में बदनाम न कर मत रो मेरी बची चुप हो जा..”

निशा दुअडकर मंजू के सीने से लगी रो रही थी और मंजू उसे चुप करवा रही thi..or जैसा की मोस्टली लोगों को पता होगा की नई ज़ीलैण्ड और इंडिया का टाइम डिफरेंस 6हरष 30मिनट्स का है तोह जहाँ देहरादून में शाम थी वहीँ नई ज़ीलैण्ड में रात हो रही thi..or निशा मंजू के साथ में एक नयी पार्टनर जुड़ गयी थी क्रिस्टन शर्मा जी हाँ यह निशा की मामी थी जिनका नाम क्रिस्टन वाइट था जो नाम की तरह सफ़ेद थी पैर अब उसके मां से शादी के बाद शर्मा जी बन चुकी थी इनकी हिंदी इतनी अछि थी की कोई हिंदी बोलने वाला भी शर्मा जाये ..क्युकी इन्होने हिंदी लैंग्वेज स्पेशलय सीखी थी जिसके बाद इन्होने जब इंडिया के बारे में और जाना तोह इनको इंडिया में और दिलचस्पी बड़ी और इसके साथ hi उनकी मुलकात निशा के मां से हुई और क्रिस्टन को इंडिया के बारे में सिखाते हुए कब निशा के मां इनको प्यार सीखने लगे दोनों को पता नहीं चला और जब पता चला तोह दोनों तब तक शादी का डिसिशन ले चुके थे ..

खैर जब से क्रिस्टन निशा से मिली थी उसकी निशा में अलग सा लगाव था जिसमे जब मंजू ने मनु और निशा के लव (जोकि निशा का मोस्टली लव था ) जबसे उसकी मामी को पता चला था उसने भी निशा को बहुत सपोर्ट किया यहाँ तक की आज उसने अपने हस्बैंड को नींद में सुला दिया था ताकि निशा मनु को टीवी पैर लाइव देखकर फुल एन्जॉय कर सके क्युकी उसे अचे से पता था की शायद निशा ख़ुशी के मारे हांसे या रोये यह तोह मूड स्विंग्स पैर निर्भर करता है निशा के पैर उसने कोई चांस नहीं लेना था या यूँ कहो यहाँ भी “गर्ल्स टॉक ? “ की टीम थी जिसमे से निशा का मां आउट था और अशोक तोह वहां था hi नहीं …

खैर इनकी चलती रहेगी पैर मंजू ने जो डिटेक्टिव लगाया था मनु के पीछे उसका सिर्फ और सिर्फ एक इंसान को पता था और हु इंसान था मास्टर और क्युकी हु डिटेक्टिव मास्टर के जान पहचान में था सो जब मनु की पिक मंजू ने उसे सेंड की तोह हु हैरत में पद गया क्युकी हु मोहित को देख चूका था …सो उसने फ़ौरन मास्टर से बात की जिसपर मास्टर को भी हैरत हुई की मनु ने उनसे निशा की बात छुपाई थी …पैर हु अचे से मनु को अब तक समझने लगे थे सो समझ गए की “मनु अब एक दिलजले की तरह अकेला रहने लगा है दुनिआ में मनु की मुस्कराहट दिखती है पैर मनु के दिल का दर्द नहीं ”

और मास्टर ने खुद अपने बचपन के प्यार अपनी वाइफ कितना मिस करते थे यह किसी से छुपा नहीं था …सो मास्टर ने भी उस डिटेक्टिव को निशा की और मंजू की असली इंटेंशन जाने के बाद जोकि उनके कांटेक्ट जो नई ज़ीलैण्ड से था पता चलने के बाद उसे सिर्फ इतना कहा “ हर पिक पहले मैं देखूंगा और जितना कहूं उतना बताओगे न उससे ज्यादा न उससे काम क्युकी अगर तुमने जरा सब hi इधर उधर करना चाहा तोह तुम अचे से जानते हो आगे “मास्टर ने उस डिटेक्टिव को अपने लहज़े में समझा दिया था …उसके बाद जब भी हु कोई पिक मंजू को सेंड करता तोह मास्टर पहले चेक करते उसे ..मास्टर मनु को लेकर कितने सेंसिटिव थे इस बात से आप समझ गए होंगे …

खैर मनु ने फाइट के बाद अपने होटल रूम में आकर आराम किया और खाना खाया और सो गया ..चैंपियनशिप कोई 1 वीक चलनी थी सो मनु अगले हर दिन अपनी हर फाइट में जीत रहा था …जिसमे उसकी भीड़ में पकड़ भी अब बढ़ने लगी थी …पब्लिक में उसे एक नया नाम दिया था “साइलेंट किलर “ क्युकी मनु का क्लैम नेचर और उसकी फाइटिंग स्किल्स और सामने से उसके अपोजिट कन्टेंडर को उसके अगले मूव का पता लगाना बड़ी टेढ़ी बात थी …और जब तक समझ आया तब तक फाइट ओवर …पैर उसके बाद भी मनु सभी से पॉजिटिव वे में उनकी हार के बाद भी उस सभी से जोश और इज़्ज़त के साथ मिलता जिनको उसने हराया था …और हर फाइटर उसके इस नेचर से उसके लिए ाचा महसूस करता था …और जहाँ पब्लिक उसे “साइलेंट किलर” कहने लगी थी वहीँ वीक ओवर होते होते उसके एक और fan-base तैयार था और हु थे उसके साथ फाइट करने वाले फिघ्टर्स जो हरने के बाद भी उससे मिली इज़्ज़त और प्यार से मनु के जीतने को और ेन्सॉरगे करते ..सो मनु उस चैंपियनशिप में चाय हुआ था ..

पैर कोई था जो अपनी खोपड़ी खुजा खुजा कर तकला होने को आया था पैर उसके हाथ कुछ भी नहीं लगा था और हु था लल्लू का जीजा जी …? जिनको कुछ नहीं पता लग रहा था की उनके साले की यह हालत की किसने और सारे doctor’s ने उसे यह कहकर और टेंशन में दल दिया था ..”सॉरी यह कभी चल फिर तोह सकेंगे नहीं पैर इनके मर्द होने की निशानी के साथ इनके हाथ भी बेकार हो चुके हैं …वे अरे सॉरी”

दोस्तों कहते हैं हर लड़ाई में जब सॉरी बोल्दिया जाये तोह सॉरी एक मरहम का काम करती है या दुनिआ में कहीं भी देखो सॉरी से बड़ी बड़ी प्रॉब्लम हल हो जाती हैं पैर अगर डॉक्टर सॉरी बोल दे तोह आगे समझदार हो दिमाग के लोड लग जाते हैं और गांड का हलवा बनजाता है और यूँ समझ लो की लाइफ की फूलों लग जाती है ….वाट …

खैर doctor’s ने जबसे उसे यह बताया था की “लल्लू को मरने वाले जो भी थे फुल त्रिनेड थे क्युकी tishu-glance को बिलकुल भी नुक्सान नहीं हुआ है अगर होता तोह यह जिन्दा hi नहीं बचता और किसी ने इसे गुस्से के साथ पुरे दिमाग लगा कर लल्लू को सुच मच का लल्लू डिक्लेअर कर दिया है … “ जिसे सुनकर पुलिस वाला होने के बाद भी उसके हाथ पेअर ढेले पद गए थे क्युकी एक ऍम गुंडा और एक त्रिनेड पर्सन का डिफरेंस उसे अचे से पता था ..क्युकी हु बहुत से केस देखता रहता था मर्डर्स के …ज्यादा डिटेल्स में नहीं जाऊंगा …

उधर मनु अपनी चैंपियनशिप में बस्सी था ..जहाँ भीड़ “साइलेंट किलर “ के नाम पैर अंदर चिल्ला रही थी वहीँ बहार “रॉकी “ नाम का तहलका मचा हुआ था …और बाबा ने जो कहा था हु किया भी था उन्होंने उस जगह के हर इंसान को अचे से समझाया था की किसी सूरत में रॉकी के बारे में कोई डिस्क्रिप्शन न दे पुलिस को वर्ण लल्लू के बाद उसके जीजा जी से प्रॉब्लम होगी आम जनता तोह वैसे hi दुखी थी लल्लू से और उसके जीजा जी का हाथ सभी को पता था …की कैसा है सो सभी ने भी मुँह पैर टाला लगाना hi ठीक समझा …पैर मुँह पैर टाला पुलिस के लिए लगाया था …वैसे नहीं सो “रॉकी ? “वहाँ के साथ पुरे देहरादून में फेमस हो चूका था ..

और यह बात पुलिस से भी भला कैसे छुपी रह सकती थी लल्लू का जीजा अपने से सारे तरीके इस्तेमाल करके देख चूका था पैर किसी ने भी उसे कुछ नहीं बताया …पैर रॉकी नाम उसके भी कानो में पद चूका था …सो उसने भी अपना ध्यान रॉकी पैर लगा दिया था..

जिसपर पुलिस ने भी बहुत घोड़े दौड़ाये ताकि कुछ तोह हाथ लगे पैर “रॉकी “ कोई होता तोह मिलता भी ..पैर अलबत्ता रॉकी नाम के हर लड़के को पुलिस शक की नज़र से देखती थी ऐसे hi लल्लू का जीजा रॉकी के नाम से टेंशन में भरा स्टेशन में बैठा था …”की साला रॉकी है कोण और उससे ढूंढे कहा “ पैर इसके हाथ रॉकी का बाल तक नहीं लगा था पैर हाँ साड़ी जनता ने रॉकी को नाम लल्लू की कुटाई से अचे जोड़ दिया था …की लल्लू को हाथ पाव से बेकार करनेवाला रॉकी hi है …उसने जीजा जी को लल्लू को बहिन से हर रोज़ का तना की “ कैसे पुलिस वाले हो तुम्हारे पहाड़ जैसे सेल को किसी रॉकी ने हमेशा के लिए अपाहिज कर दिया और तुम कुछ भी नहीं कर सके …और जब तक रॉकी को पकड़ नहीं लेते तब तक मुझे चुना तोह दूर बैडरूम में कदम मत रखना “ इस बात ने और आग में घी का काम किया था …बेचारा जीजा जी हर रोज़ सूफी पैर सोता था …इस उम्मीद में की उसकी बीवी को शायद उस पैर तरस आ जाये पैर जिस बहिन का भाई अपाहिज हुआ हो हु उसपर रेहम करने के मूड में नहीं थी …बेचारा हर रोज़ बीवी के होते हुए बाथरूम में मुठ मार्कर खुद को ठंडा करता और रोज़ रॉकी को कोस्टा हर रोज़ रॉकी को पकड़ने के लिए नया प्लान करता पैर रॉकी ने भी उसके हाथ न आने की जैसे कसम hi खली थी उसे हु टैक्सी ? भी मिल चुकी थी जिसपर उसने खूब सारे एक्सपर्ट्स लगये थे की कोई फिंगरप्रिंट्स मिल जाये तोह रॉकी के नाम से आगे भी कुछ पता चले पैर कुछ होता तोह मिलता वहां उसके हाथ लगा सिर्फ घंटा ? जो रॉकी नाम पैर उसके मुँह पैर हर रोज़ पड़ने वाले तामचे को और ज़ोर से उसके मुँह पैर मार रहा था …बेचारा बीवी से कुछ न मिलने की वजह से अब रअण्डों के सहारे अपनी ज़िन्दगी गुज़र रहा था …

हु ऐसे में जला भुना सा स्टेशन में बैठा था जिसपर पीछे लॉकअप में बंद शराबी अपनी शायरी से उसकी गांड में अचे से आगे लगा रहा था …बहाना चूका बोलता है “अब ीक तोह रॉकी नाम से तंग हूँ उप्पेर से इन शराबियों ने दुखी कर रखा है …हद है लाइफ है या झांट साला जितना देखो खींचती जा रही है “

शराबी “ अरे सर जी रॉकी के बारे में जानना है तोह हमसे पूछों न ???”

लल्लू का जीजा “आबेत ु जनता है जिसने लल्लू को पेला हु तुझे कैसे पता की रॉकी कोण है “

शराबी “ सर जी देखो शराबी हूँ लूटेरा नहीं अपने को तोह एक रॉकी के बारे में पता है जिसने टोनी को ठोका था जिसने फाइट में टोनी जैसे सांड को चित किया था …पैर आपको लगता है कोई चुटिया बना रहा है हु तोह यहां पॉसिबल नहीं है की रॉकी जैसा फाइटर यहां आकर आपके झांट जैसे सल्ले को बजाये लगता है रॉकी नाम से कोई आपकी फिरकिन ले रहा है सर जी यह सोचो क्या पता किसी ने रॉकी नाम से आपका चुटिया कटा हो ??”

लल्लू का जीजा चौंका गया की शराबी का दिमाग कितना शार्प है उसने तोह यह सोचा नहीं ..एक शराबी उसके दिमाग को हिला दिया था उसने उसे लॉकअप से बहार सामने चेयर पैर बुलवाया …साड़ी बात उसे समझायी जिस पैर शराबी मस्ती मैं झूमता हुआ बोलै “ अरे सर जी इतनी सिंपल प्रॉब्लम है और आप इतना सोच रहे हो ??”

इंस्पेक्टर “ अबे तुझे इसमें सिंपल क्या लगता है मेरी बीवी मुझे चुने नहीं दे रही और हु रॉकी साला हाथ में नहीं आ रहा है और तुझे सिंपल लग रहा है ??”

शराबी “ हाँ सिंपल hi तोह है आपका काम एक तीर से दो शिकार कर ने के लिए फड़फड़ा रहा है पैर आप तीर से गांड खुजा रहे हो??”

इंस्पेक्टर “साले तुझे प्यार यहाँ बिठा क्या लिया टूट ओह तोपची बनगया मेरी गांड तक आ गया ?”

शराबी “ अगर मुझे छोड़ दो और आगे से कहीं से भी उठाने से रोको तोह इसका आईडिया है मेरे पास “

इंस्पेक्टर” अबे आईडिया दे उसके बाद सोचूंगा ..”

शराबी “ सुच कहते हैं लोग पुलिस अपने बाप की भी सगी नहीं चलो कोई बात नहीं अचे एक सवाल पूछूंगा सुच बताना …???”

इंस्पेक्टर “क्या”

शराबी ”आप बचपन से अपने दिमाग को गांड में दबाकर रकते थे या आजकल कोई अनोखा दिन हैं आपके के ???”

इंस्पेक्टर “ आबेत ु आईडिया बताएगा या दूँ दो कान के निचे ???”

शराबी “ अरे सर जी एक बात बताओ उस रॉकी को आपने देखा है …???”

इंस्पेक्टर “ नहीं क्यों??”

शराबी “ अरे सर जी गांड और दिमाग दोनों खोलकर सुनो जब उसे किसी ने देखा hi नहीं तोह अपने किसी भी पुराने दुश्मन को रॉकी नाम से उठालो अचे से तोड़कर बीवी के सामने और पुलिस के सामने धार दो आपकी बीवी की नज़र में इज़्ज़त और ड्यूटी पैर प्रमोशन दोनों साथ में मिलेगा और बीवी की चुदाई आपका बोनस होगा …सोच लो एक तीर से कई शिकार अब बोलो आईडिया कैसा है ???”

इंस्पेक्टर “ आबेत ु आदमी है या लोमड़ी अगर तू औरत होता तोह आज तुझे चुम लेता …क्या आईडिया दिया है तूने जा आज से तू मेरा बाँदा है जिस जगह पिता है उस पैर आज से मेरा नाम ले देना तेरी साड़ी शराब जब तक मैं यहाँ हूँ तब तक मेरे नाम और आजके बाद कहीं भी कोई पुलिस वाला रोके या तोके तुमरा नाम ले देना तुन यही जनता तूने क्या अकाल दी है अगर तेरी गली को छोड़ दूँ तू तोह…”

शराबी “ बस सर जी आपने दारु बोल दिया न बस बहुत है आगे जब भी आप कहीं फंस जाओ मुझे याद कर लेना बस एक बोत्तल के साथ बंद आपका गुलाम होगा ..”

इंस्पेक्टर जहाँ इस बात से कितना खुश था की उसने उस शराबी को न केवल छोड़ दिया बल्कि मुफ्त की शराब के नाम पैर उसका खता खुलवा दिया …और जैसा उस शराबी ने अकाल दी थी उसने ठीक वैसा hi किया और बदले में उसे न केवल सैलरी में इन्क्रीमेंट मिला बीवी से प्यार इज़्ज़त और चुदाई बोनस में सब मिली...

जब उसकी बीवी को रॉकी का पता चला तोह उसने उस नकली रॉकी को खूब चप्पल से पिता हु चिल्ला चिल्ला कर कहता रहा की हु रॉकी नहीं है पैर उसकी सुननेकी पड़ी किसे थी उस की बीवी अचे से चिल गयी उस नकली रॉकी को बिना यह दिमाग लगये की उसके लम्बे तगड़े भाई को कुटनेवाला कोई डेढ़ पसली का टिंडा सा इंसान रॉकी कैसे हो सकता है …....:हिंट:
 
अपडेट 62

बचपन की यादें

जब उसकी बीवी को रॉकी का पता चला तोह उसने उस नकली रॉकी को खूब चप्पल से पिता हु चिल्ला चिल्ला कर कहता रहा की हु रॉकी नहीं है पैर उसकी सुननेकी पड़ी किसे थी उस की बीवी अचे से चिल गयी उस नकली रॉकी को बिना यह दिमाग लगये की उसके लम्बे तगड़े भाई को कुटनेवाला कोई डेढ़ पसली का टिंडा सा इंसान रॉकी कैसे हो सकता है …....

अब आगे ..........


लल्लू और उसकी गैंग के काण्ड के बाद मनु काफी अलर्ट हो चूका था …क्युकी दरिंदे के जैसे मनु ने लल्लू को अचे से धोया था …उसके बाद उसका पॉलिक्या जीजा रॉकी को न ढूंढे ऐसा पॉसिबल नहीं था …और मनु भी अचे से समझ चूका था की देहरादून उसके लिए ज्यादा सेफ नहीं बचा पैर अभी फाइनल फाइट बाकी थी…

जिसके लिए उसने मास्टर से प्रॉमिस किया था की हु यहाँ से जीत कर hi आएगा …मास्टर ने भी मनु को बहुत सपोर्ट किया …यह कहना गलत नहीं होगा की मनु आज जो भी था …हु अपने पीछे खड़े बहुत से लोगों कैद ुम पैर था …पैर मनु ने कभी भी किसी को भी इस बात का पता नहीं चलने दिया …की हु हर एक को कितना चाहता और अदमीरे करता है …रेस्पेक्ट तोह हु सभी को देता था पैर …यह जो सपोर्टिंग आर्मी थी उसकी उनके कहे किसी बात को मनु कभी नहीं टालता था …और उनको लेकर हु हर वक़्त प्रोटेक्टिव होने के साथ अलर्ट मोड पैर रहता था …खैर लास्ट फाइट कल होनी थी …

कहते हैं छोटे शहरों में न्यूज़ आगे से भी तेज़ी से फैलती है और जब रॉकी का नाम इतना ट्रेंडिंग था सो उसके अरेस्ट की न्यूज़ भी गोली से तेज़ फ़ैल चुकी थी ..पैर

मनु ने भी अपनी तरफ से कोशिश की थी की हु जितना हो सके बहार काम से काम निकलेगा क्युकी रॉकी की बातें अब उसके होटल के वेटर और स्टाफ भी करने लगे थे ..जो खुद मनु ने सुनी थी ….और जब मनु ने सुना तोह उसने भी पता लगाने की कोशिश की ….की लोगों को रॉकी के बारे में और कितना पता है …पैर जब उसने पता किया तोह उसे साफ़ हो गया की सबको सिर्फ नाम पता है की कोई रॉकी है जिसने अकेले लल्लू और उसकी गैंग का बिना तेल लगाए गांड के साथ मुँह भी छोड़ डाला है..?

और तोह और उसके जीजा ने अपनी बीवी के और नौकरी के चलते किसी डेढ़ पसली के बन्दे को रॉकी के नाम पैर अरेस्ट कर लिया है ….सिर्फ अपनी नौकरी के और बीवी के लिए ….होटल के स्टाफ से मनु को यह सब पता चला तोह उसने सोचा “ अबे यह क्या झोल है किसी और को रॉकी के नाम पैर अरेस्ट कर लिया ..यह सुच में इंस्पेक्टर hi है न या कोई ढक्कन ???”

यह सवाल मनु अपने दिमाग में सोच रहा था पैर इसका जवाब दिया उस वेटर ने “ साब जी आप ज्यादा मत सोचो हु साला है hi मादरचोद जब इतना बड़ा काण्ड हुआ तोह साले की फट गयी होगी की रॉकी ने जब अकेले 10 लोगों की गांड फाड् डाली तोह साला हु किस झांट का बाल है तब साले ने यह चाल चली होगी की किसी को भी रॉकी के नाम पैर अंदर कर दो ताकि घर और नौकरी दोनों सेफ रहे ….यह तोह ओल्ड पॉलिक्या पेंटर (ट्रिक) है पैर साब जी हु रॉकी जहाँ भी हो उसकी उम्र उपपरवाला लम्बी करे की उसने इस इलाके के उस झंडू लल्लू को नाम से hi नहीं सुच मच का लल्लू बना दिया …अब दिल बड़ा खुश है ”

मनु “ पैर लल्लू ने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है और तुम क्यों खुश हो रहे हो ???”

वेटर “ साब जी हु कमीना हमारे इस छोटे शहर में किसी गंदे धब्बे की तरह था जिसका काम चोरी और लूट मार के बाद मर्डर था …सोचो साब जी उसके ख़तम होने से कितना अंतर आया होगा लोगों के दिलों में जुर्म को लेकर डर बैठा होगा की कोई तोह है जो पुलिस के बदले उनका हिसाब कर रहा है …एक अकेले लल्लू के गैंग ने कोई काम काण्ड नहीं किये थे …उसका यहाँ सिक्का चलता था ..पैर आज उसका सिक्का उसी की गांड में घुसा हुआ है ..”

इस बात पैर मनु को खुद पैर संतोष हुआ की चलो कुछ ाचा hi हुआ …की उसने लल्लू को सही से लल्लू बना दिया …पैर हु बोलै “ पैर आज नहीं तोह कल पुलिस उस रॉकी को पकड़ hi लेगी तब ??”

वेटर “ साब जी आप न लगता है फिल्मे ज्यादा देकते हो …एक बात बताओ लल्लू और उसका साथी दोनों सेल मौत के मुँह से घूम कर आये हैं …उनके हाथ और जबान किसी काम के नहीं बचे तोह हु किसी को क्या घंटा ? कुछ बताएँगे …और पब्लिक खुद उन कमीनो के खिलाफ थी …अगर किसी ने रॉकी को देखा भी होगा तोह पुलिस को बोलने के बदले घर जाकर आराम से सो जायेगा पैर पुलिस की आगे मुँह तोह खोलेगा नहीं यह पक्का है …अब बचा हु गांडू कमीना इंस्पेक्टर उसने नकली रॉकी को पकड़ कर खुदके पैरो पैर कुल्हड़ी खुद hi मार ली है …सोचो साब जी ऐसे मैं अगर असली रॉकी खुद उसके सामने भी आ गया तोह हु सामने से आंक बंद करलेगा क्युकी अब जो नकली रॉकी उसने पकड़ा है उसका जवाब कोण देगा …और अगर उसने अब कोई और रॉकी के नाम पैर पकड़ा तोह बीवी किन ाज़ार में चुटिया और नौकरी पैर देगा बाज़ होगा …मतलब गांडू की गांड खुद फंस चुकी है तोह रॉकी नाम का हु शिकारी अब खुल्ला सांड है …बोले तोह आज़ाद है ..”

मनु भी उस वेटर की बात सुनकर अब समझ चूका था की रॉकी नाम पैर कोई प्रॉब्लम नहीं होगी उसे “क्युकी अब अगर इंस्पेक्टर ने कुछ किया तोह डाव पैर बीवी और जॉब दोनों है …एक बार को हु जॉब देख भी ले पैर बीवी के सामने अगर झुणता साबित हुआ तोह ..उसकी खैर नहीं …मैं रॉकी इस सेफ …”

पैर मनु फिर भी कोई चांस नहीं लेना चाहता था …सो मोस्टली या तोह हु टूर्नामेंट में होता तोह हु स्टेडियम में होता या अगर वहां से आता तोह अपने रूम में मनु ने एक वीक में बहार निकल कर कुछ नहीं देखा था पैर जब उसने सुना की रॉकी को पकड़ लिया है …तोह उसने सोचा शाम को घूमकर आते हैं..

हु शाम को जैसे hi सूरज ढला तोह घूमे निकला शहर शांत था …और हर जगह मोस्टली स्ट्रीट लाइट्स को छोड़कर बाकी लाइट्स ऑफ होती जा रही थी …मनु जहाँ रुका था थोड़ा …टाउन से दूर था हु एरिया …और क्युकी टाउन से दूर तहत ओह लोग भी यहां अपनी लाइफ में एक टाइम टेबल के हिसाब से चलते थे …मीन्स जोबवाले शाम को ऑफिस के बाद घर आते और परिवार के साथ टाइम बिताकर 8.30पं बजे तक सो जाते ताकि अगले दिन उनका ऑफिस टाइम और बच्चों का स्कूल टाइम मैंटेनस रह सके …

यहाँ केवल चल पहल सिर्फ थोड़ी बहुत हु भी वीकेंड पैर रहा करती थी …और क्युकी वीकेंड दो दिन पहले hi गुज़रा था तोह ..रोड मोस्टली खाली सात है कोई इक्का दुक्का कोई कार या कोई ट्रक गुज़र जाता था …पैर 2 व्हीलर तोह दूर दूर तक कहीं नज़र नहीं आ रहा था …मनु भी ऐसे hi रस्ते पैर चलता हुआ इस शहर की शांति के नज़ारे ले रहा था …अस्स पास का पहाड़ी इलाका होने के चलते दिन चिपटे hi ठण्ड सी होने लगी थी मौसम में …मनु को होटल में तोह ठण्ड कभी लगी नहीं पैर इस खुले एरिया में ठण्ड थोड़ी तेज़ सी थी …

मनु भी अपने दोनों हाथ अपनी पेण्ट में दबा कर चल रहा था …उसने सोचा था की शायद यहाँ कोई चीज़ तोह होगी जिसे एन्जॉय किया जा सके …पैर उसकी सोच के उलट यहाँ तोह परिंदे भी शायद सो चुके थे ..पैर मनु भी उस सस्ते होटल में एक हफ्ते से बंद कमरे में रहकर उकता चूका था …उसने सोचा था चलो घूमकर hi देखा जाइये देहरादून कैसा है …पैर शाम को टाउन से बहार सिर्फ शांति hi मिलती थी …पैर मनु भी उस रोड पैर चलता जा रहा था ..की आगे से कोई ठेले वाला अपना 4 पहिये का ठेला लिए जिस पैर शायद कुछ सस्ते कपडे होंगे लेकर आ रहा था …

उसने मनु को ठण्ड में हाथों को पंत में दबाये देखा ..तोह कहा “अरे शाब जी आप यहाँ ठण्ड में कहाँ घूम रहे हो ???”

मनु “ भाई बस सोचा था यहाँ कुछ देखूंगा पैर यहाँ तोह शायद रोड hi है देखने लायक ??”

ठेलेवाला “ हाहाहा आप न साब जी मज़ाक ाचा करते हो रोड कोई देखने की चीज़ है ..लगता है आप यहाँ से नहीं हो वार्ना यहाँ तोह कुत्ते भी रात में सो जाते हैं??”

मनु “हाँ तुम ठीक कहते हो यहाँ से नहीं हूँ एक हफ्ते से झक मारकर होटल में पड़ा हूँ सोचा आज थोड़ा घूम लिया जाये पैर यहाँ तोह कुछ है hi नहीं ??”

ठेलेवाला “ अरे साब जी ऐसे कैसे नहीं है ?? अरे आप टाउन की तरफ इस रोड पैर आगे 1कम जाओगे तोह आपको पता चलेगा की रात में कैसे रंगीन होता है हमारा शहर …पैर ??”

मनु “पैर ठण्ड है न ाचा तुम कहाँ जा रहे हो यह सब लेकर ??”

ठेलेवाला “ साब जी मैं तोह बाजार जा रहा हूँ उधर (मनु के होटल की डायरेक्शन में ) आज उधर बाजार लगता है न तोह फुटकर में कपडे बेज कर 3 घंटे बाद वापस घर हो लेता हूँ …”

मनु ने उसके पास देखा कपडे तोह काफी थे मनु ने उससे रेट पूछा तोह बहुत hi सस्ते थे शायद बाजार में बेचने के लिए सस्ता माल हो …मनु उससे सस्ते में एक जैकेट ? और रुमाल देखता है जो शायद बाइकर वाला हांके था जिसे बंद कर आजकल के लोगो अपना फेस कवर किया करे थे …उसपर स्कल ? का मार्क था मतलब अगर उसे फोल्ड करके चेहरे को कवर किया तोह सामने स्कल ? मार्क दीखता और उससे नाक और फेस तक कवर हो जाते मनु को हु बड़ा ाचा लगा उसने उसका रेट पूछा तोह हु भी सस्ता लगा मनु ने एक साथ उससे 2 डोज़ेन ले लिए ताकि आगे जाकर काम न पड़े और वैसे भी पता नहीं देहरादून फिर आना हो य आना हो और क्या पता उसके सिटी में यह मिले न मिले सो मनु ने मौका देखा और एक साथ काफी ले लिए .उस ठेलेवाले ने भी मनु को इतना सब सस्ते में hi दे दिया …

मनु उसे सामान लेकर आगे निकला और आगे चलने लगा और कोई 20 मिनट्स चलने के बाद हु टाउन पहुँच गया …जहाँ अंदर जाते hi मनु ने सोचा क्या बात है कितना रंगीन शहर है और मैं सिर्फ रोड का सुना पैन देखकर दुखी था …

मनु ने देखा सामने कोई फंक्शन था शायद कोई कम्युनिटी हॉल होगा जिसमे दुनिआ भर की रंगीनी आज फैली हुई थी मनु भी बस गेट पे खड़ा उस खूबसूरत हॉल को देख रहा था …और सोच रहा था कितनी अलग सी बिल्डिंग ? है (आप हैरान मत होना मनु की यह हॉबी भी थी जो अलग अलग तरह की बिल्डिंग स्ट्रक्चर में खूबसूरती देखा करता था …और पुराने हेरिटेज में उसकी दिलचस्पी थी …आप कहोगे कैसा लड़का है जो सदी हुई बिल्डिंग में खूबसूरती देखता है तोह भाई आंसर साफ़ है खूबसूरती देखने वाले के नज़र में होती है …किसी चीज़ में नहीं वर्ण हर कोई सिर्फ कुछ चुनिंदा चीज़ें hi पसंद करता. ? )

मनु देख hi रहा था की कोई ओल्ड टाइम की बिल्डिंग रही होगी …मनु ने यह सब सोचते हुए बोल भी पड़ा “ खास अंदर से भी देख पता “

उसके मुँह से सिर्फ इतना निकला था की किसी ने उसके काढ़े पैर हाथ रखा और कहा “ अरे तोह अंदर चल कर देख लो प्रॉब्लम क्या है ??”

मनु ने घूमकर देखा तोह हु शहीद था अपनी उसी बोल्ड ऐटिटूड और मुस्कुराते चेहरे के sath…or उसके साथ हीना भी आज गुलाबी और मॉडर्न टाइप के सूट में थी …जिसमे उसने थोड़ा सा मेकअप या कहो थोड़ा सा touch-up किया हुआ था …जिसमे उसका गोरा रंग और सुन्दर सा मुखड़ा किसी क़यामत से काम नहीं था …मनु ने उसे देखा तोह उसे कुछ अलग लगा ….की उस दिन की हु क्लैम और स्वीट सी लड़की आज क़यामत ध रही थी …पैर मनु तेरा सख्त लौंडा ..उसने हीना को सिर्फ एक वर्ड में खुश कर दिया “नीस लुकिंग “

हीना को तोह जैसे ज़माने में यही सुन्ना था उसकी गोर चेहरे पैर मनु को देखने के बाद अलग hi निखार था ..पैर मनु ने जब उसे नोटिस किया और नीस कहा तोह जैसे उसका सजाना मनो पूरा हो चूका था …

हीना जो बहुत चुलबुली हुआ करती थी बचपन से पैर अब जवानी में जबसे आयी थी ..उसके हर सपने में मनु था …हाँ पहले हु उसकी सलामती की दुआ तब माँगा करती थी जब मनु से मिली भी नहीं थी ..पैर जब मिली तोह ऐसी मिली की उसका फर्स्ट किश और फर्स्ट ओर्गास्म मनु के नाम था ..जो बिना चुदाई के ूनिंटेन्शनली हो गया था …पैर मनु के लिए उसके दिल में जज़्बात उसी पल आ चुके थे जब उसने पहली नज़र मनु को देखा था जहाँ उसकी चुकी मनु के मज़बूत सीने में पइसस गयी थी …

भले hi मनु ने उसके साथ वैसा कुछ नहीं किया था ..पैर कभी भाई के बिना हीना ने किसी और का हाथ तक नहीं पकड़ा था …और मनु उसके लिए उसका पहला और एकलौता प्यार था ..जिसमे शहीद की मंज़ूरी मिलने के बाद उसने हर रोज़ मनु के सपने देखने शुरू कर दिए थे …हर रात हु मनु के उस किश और उसके गरम होने पैर उसके हौलबी लोडे को याद करती थी ..जो हीना ने उस रात अपनी गांड पैर महसूस किया था …जिसके वार से किसी की छूट तार तार हो जाये …

हीना भी कोई बची नहीं थी ..भाई के जाने के बाद उसने भी कई बार क्सक्सक्स देखि थी जहाँ लैंड और छूट का मिलान उसकी छूट में आग लगा दिया करता था ..पैर हीना फिर भी ऊँगली या मुठ नाह इमरती थी …क्युकी हु अपने को बचाकर रखना चाहती थी और जबसे उसने मनु के हौलबी लोडे को महसूस किया था तबसे उसने कई बार क्सक्सक्स बोले तोह ब्लूएफिल्मस में हीरो के लोडे की कपड़े मनु के लोडे से की जिसके बाद उसके शरीर में एक तेज़ी झनझनाहट हो जाती थी की हीरो से ज्यादा मनु का लोढ़ा था ….उसके भाईजान के मनु को पसंद करने के बाद तोह उसने मनु को अपना सब कुछ hi मान लिया था …हीना ने मनु को दुबारा देखने के लिए उसके भाई से कहा भी पैर शहीद उसका पता जनता नहीं था यहाँ देहरादून में सो ढूंढ़ता कहाँ पैर फिर भी हर शाम को हु वहां टाउन में घुमा करता की शायद कभी मनु मिल जाये पैर यहाँ जहाँ कोई उम्मीद नहीं थी और हीना ने काफी मन करने के बाद आने को हाँ कहा था …वहां मनु से मुलाकात पैर दोनों भाई और बहिन अपने अपने जगह खुश थे शहीद हीना के लिए और हीना का तोह आप समझ hi सकते हो …

हीना का मासूम चेहरा अपने रॉकी को देखकर ख़ुशी से चमक रहा था …वहीँ मनु अपनी पुराणी हरकत पैर हीना को चोरी से देख रहा था हीना भी शामे तो शामे चोरी से hi देख रही थी …पैर दोनों में से किसी ने सामने से कुछ नहीं कहा था …पैर शहीद दोनों को देखकर एन्जॉय कर रहा था …क्युकी उस रात क्या हुआ था यह सिर्फ दोनों hi जानते थे पैर शहीद तोह यह सोच रहा था शायद हीना रॉकी को देखकर शर्म से कुछ कह नहीं पा रही थी …और मनु उस रात को लेकर शर्मिंदा था ..

खैर शहीद hi बोलै …”तोह रॉकी चलो अंडर चलते हैं ..तुम आराम से बिल्डिंग देख लेना क्युकी मेरे किसी जानकार की शादी है तोह तुम मेरे साथ चल सकते हो ???”

मनु कुछ कहता उससे पहले शहीद ने उसका हाथ पकड़ा और तीनो अंडर थे जहाँ उन्होंने शादी के जोड़े को बधाई दी और वहां दूल्हे के सारे दोस्त सिर्फ और सिर्फ हीना को देखे जा रहे थे …क्युकी यह शादी शहीद के जान पहचान की थी और हु भी शायद मुस्लिम कम्युनिटी से आते थे तोह शादी में मोस्टली मुस्लिम रिचुअल थे …जहाँ शहीद को मोस्टली लोग जानते थे क्युकी शहीद पहले से कई बार यहाँ आया था …पैर हीना को शहीद कभी लाया नहीं था …

सो हीना एक सरप्राइज पैकेज की तरह उसके साथ थी …मनु भी वहां लड़कियों की आखों में किसी स्टार ? की तरह जगमगा रहा था …कुछ लड़कियां कण्ट्रोल से बहार हुई तोह शहीद से पूछ hi लिया …जो शायद शहीद को पहले से जानती थी ….”शहीद भाईजान यह कोण है जिन्होंने हमारी इस शादी में अपनी रंगत बिखेर राखी है इनसे हमे नहीं मिलवाओगे aap..hum भी तोह मिले इन जनाब से ”

मनु का धयान भी उस लड़की पैर गया जो नीले रंग के लहजे में हसीं लग रही थी …पैर एक बात चाहे कहीं की भी लड़कियां हो सबकी कमान होती है ठण्ड में काम कपडे हाँ यहाँ मोस्टली लोग गरम कपडे में थे क्युकी दिन में तोह गर्माहट के चलते ठण्ड लगती नहीं पैर रात में बिना कोई मोटा कपडा पहने लोग बहार घूमना पसंद नहीं करते थे …पैर यहाँ यह मैडम एक पतले से लहंगे में जो शायद कोई अचे डिज़ाइनर से बनवाया हो इसमें ठण्ड के मौसम में अपनी कमसिन जवानी से वहां के ठण्ड भरे माहौल में गर्मी भर रही थी …जिसका पता हर लड़के की नज़र से आप समझ सकते हैं पैर यहाँ उनको उनलड़कों के बदले एक सस्ते से जैकेट ? में जीन्स ? डेल एक लड़के में ज्यादा दिलचस्पी थी…

शहीद “ अरे हाँ नूर इनसे मिलो यह हैं रॉकी मेरे अज़ीज़ दोस्त यह यहाँ घूम रहे थे जिनको बिल्डिंग ? अछि लग रही थी पैर मैंने इनको बिल्डिंग दिखने को कहा और यहाँ ले आया …क्यों सही किया न मैंने ???”

मनु नूर को देखकर थोड़ा उनकंफर्टबले फील कर रहा था क्युकी नूर उसके कुछ ज्यादा hi करीब थी ….कोई और भी उनकंफर्टबले था जिसको मनु के पास नूर की मौजूदगी खटक रही thi…or हु थी हीना ..क्युकी नूर की बोल्डनेस हीना से ज्यादा थी …और आजकल के लड़के नूर जैसी लड़की को ज्यादा पसंद करते हैं यह कमान सी बात है तोह उसे मनु को खुद से ज्यादा नूर के पास देखना जलन महसूस करना hi था …उसे नूर के मनु के पास जाते देखकर उसका दिल जलन से पागल हुआ जा रहा था …

मनु थोड़ा नूर से दूर हुआ …नूर “अरे जनाब शहीद भाईजान ने उस खण्डार को दिखने के नाम पैर आपको यहाँ लेकर हमपर कितना एहसान किया है यह हम hi जानते हैं …”नूर ने बड़ी लचक से एक शोख ऐडा से कहा था जिसपर मनु और हीना को छोड़कर सभी को हंसी आ गयी…

शहीद “ अरे रॉकी आप डरो नहीं यह नूर है ,,इसकी आदत मज़ाक करने की है यह ऐसे hi सबको तंग करती है और नूर सुनो तुम रॉकी को अचे से इस बिल्डिंग का राउंड करवा दो जनाब जवानी में पता नहीं कहाँ से ऐसा शॉक पीला हुए हैं पुराणी इमारतों का ???” इसपर फिर सभी हंसने लगे ..

मनु “ कुछ तोह बात होगी ऐसी इनमे जो आज भी बाकी है ..

किसी का मुकमल इश्क़ होगा जो आज भी कहीं इनमे बाकी है …”

इस बात पैर नूर ने ताली बजादि और ख़ुशी से कहा “ अरे जनाब आप तोह शायरी भी करते हैं …क्या बात है ..शहीद भाईजान सुच में आपने हीरा इस महफ़िल को दिया है ..”

मनु “ मत कहो मुझे हीरा ,सोने तोह चंडी के साथ होता है ,मुझे पाथेर hi रहने दो …

हेरे की तन्हाई तोह खुद हीरा hi जनता है मैं पाथेर hi ाचा मुझे पाथेर hi रहने दो”

इस बात पैर वहां ताली बजने लगी …नूर खुसी से झूमती हुई बोली “ अरे रॉकी साब आप तोह सच में क़त्ल भी बड़ी बेदर्दी के साथ कर देते है ..वह क्या कहते हैं “साइलेंट किलर “ पैर आपका यह अंदाज़ hi आपको और लोगों से अलग बनता है "

इस बात पैर जहाँ सब लोग खुश थे वहीँ हीना और मनु थोड़े अलग थे मनु नूर के ज्यादा दिलचपी लेने को अचे से समझ रहा था ..पैर हीना नूर के मनु के पास से ज्यादा चिपकने से उसे जलन हो रही थी…

शहीद ने नूर को मनु को बिल्डिंग का राउंड करवाने का काम दिया तहत ओह हु उसे लेकर जाने लगी पैर हीना की बेचैनी इस बात पैर थी की कहीं मनु और नूर और करीब आ गए तोह ???

क्युकी नूर बोल्डनेस के साथ गज़ब का खूबसूरत फिगर रखती थी …जिसका दीवाना कोई भी हो जाता 34’ 24’ 36’ किसी परफेक्ट मॉडल सा फिगर था नूर का जिसका शो ऑफ हु अचे से करने में यकीं रखती thi…or जिसकी बल कहती कमर देखकर किसी ठन्डे बुड्ढे का लैंड भी आखिरी बार उठकर खड़ा हो जाये ? पैर हीना उससे ज्यादा गज़ब का फिगर रखती थी पैर उसका नूर जैसे शोऑफ करने में यकीं नहीं tha…per कहीं न कहीं हीना को नूर की बोल्डनेस और तेज़ी के साथ उसकी बेबाकी और मनु पैर उसकी नज़दीकी देखना उसके लिए जलन से बढ़कर कोई कम्पटीशन था …जिसमे उसका हरने का मतलब था रॉकी से नूर की nazdiqi…jo हीना को मंज़ूर नहीं थी…

खैर मनु चाहे कितना भी नूर से उनकंफर्टबले था पैर नूर को मनु के और करीब जाने में कोई प्रॉब्लम नहीं थी …क्युकी मनु में कुछ था जो उसे अपने तरफ खिंच रहा था …नूर भी एक अचे और रेप्युटेड़लय फॅमिली से बिलोंग करती थी ..जिसमे उसके माँ बाप अचे और वेल एडुकेटेड थे …उसके फादर शहर के जाने मने लॉयर थे जिनको वहां का हर आदमी इज़्ज़त से जनता था …और नूर की माँ एक अछि सर्जन थी ….जिनका भी मोस्टली बहुत ाचा नाम था उनकी एकलौती बेटी नूर थी …जिसको उन्दोनो ने बड़े लाड़प्यार से पला था जिसकी मुँह से निकली हर बात उसके परिवार के लिए एक सहजादी की विश की तरह से पूरा किया जाता था …नूर को साफ़ और क्लियर तरह से लोगों से घुलने मिलने में कोई प्रॉब्लम नहीं थी …शहीद उसके रिश्ते में दूर का भाई यानि कौसिन्स लगता था …

हीना भी उसकी बहिन थी …पैर हीना और नूर कभी आपस में मिली नहीं ..क्युकी शहीद हीना को लेकर over-protective था और हीना को कहीं आने और जाने पैर हीना को कुछ हो जाये इसके चलते उसने हीना को शहर से बहार नहीं भेजा और क्युकी शुरू से हीना के बीमारी के चलते भी उसका कहीं लम्बा सफर पे आना जाना ठीक नहीं tha…toh हीना का मोस्ट ऑफ़ चाइल्डहुड सिर्फ घर पैर या हॉस्पिटल में बिता स्कूल भी जाती थी पैर वहां भी उसको ज्यादा भाग डूअड़ से मन किया हुआ था …जिसके चलते हीना सिर्फ अपने भाई और घर में hi खुल पायी थी …

वहीँ नूर एक बिंदास लड़की थी जिसके लिए लोगों से बात करना आम सी बात थी …और क्युकी उसके maa-baap का वहां ाचा नाम तहत ओह मोस्ट ऑफ़ उसको जल्दी से कोई गलत नज़र से देखता नहीं था ya…yun कहो की नूर बहले hi बिंदास थी पैर उसने कभी अपनी लिमिट किसी को कभी भी क्रॉस करने नहीं दिया था …हाँ हंसी मज़ाक हु सभी के साथ कर लेती थी ..पैर लोगों के नज़रों से उनके अंदर क्या हाल है नूर अचे से पता लगा लिया करती थी ..शायद उसकी लाइफ में पहली बार था …की मनु का शांत और गज़ब का चारिस्मैटिक नेचर होने के बाद भी उसकी नज़रों से नूर कुछ पता नहीं लगा पायी थी उसके नेचर के बारे में क्युकी मनु उससे नज़र मिलाने से न जाने क्यों बच रहा था …और मनु के यूँ नज़रें चुराने से नूर और ज्यादा उसके पीछे अत्त्रक्ट हो रही थी …मनु उसकी आखों में देखने से खुद को मोस्टली रोक रहा था क्युकी उसे उसकी आखों में एक जानी पहचानी फीलिंग आ रही थी ..जिससे मनु बचना चाहता था …

वह कहते हैं न की “डिफरेंट पोल्स अत्त्रक्ट एच इतर “ सो मनु जान छुड़ा रहा था और नूर उसे अत्त्रक्ट हो रही थी शायद उसके लाइफ में इतना इग्नोर या un-noticeable होने का यह पहला मामला था …

मनु को नूर ने पास आकर कसकर जकड लिया …अरे गलत मत लेना मतलब उसका हाथ उसकी खोनी में अपना हाथ फस्या और उसके साथ और करीबी से चलने लगी जिसे देखकर वहां मौजूद हर सिंगल लड़के मनु से जल उठे ….और एक जोड़ी नज़र और भी थी जिनकी जलन कबो से बहार हो चुकी थी …हीना हाँ जी हीना को खुद की कजिन से जलन हो रही थी की उसके रॉकी के हु इतना करीब कैसे जा सकती है ???

मनु खुद नूर के पास आने से थोड़ा अलग फील कर रहा था …क्युकी नूर का गर्म जिस्म उसका फिगर न चाहते हुए भी मनु को थोड़ा सा गर्मी दिला रहा था …जिसपर इम्पोर्टेड परफ्यूम की women’s स्पेशल एडिशन की महक उसके सख्त लौंडे के बर्ताव को हिलने में लगे हुए थे …

नूर उसे चिपक कर बहुत से लड़को को जला रही थी …पैर हीना भी साथ में उसे मनु से चिपके देखकर और जल रही थी ..और क्युकी अब दोनों बिल्डिंग की तरफ चल रहे थे …हीना मनु और नूर को दूर जाते हुए टेंशन भरी नज़र से देख रही थी ….जिसे शहीद ने अचे से देख लिया …शहीद ने हीना के खड़े पैर हाथ रखा तोह हीना ने मासूम नज़र की एक इलतज़ा भरे लहज़े में उसकी तरफ देखा …शहीद को बड़ा अफ़सोस हुआ की नूर और रॉकी को लेकर हीना कितनी जलन में फंस गयी …शहीद को हीना पैर बड़ा तरस आया तोह उसने हीना से एक इशारा किया जिसका मतलब हीना ने खूब समझा …

हीना अब तेज़ी से अँधेरे की तरफ जाते हुए मनु और नूर के पीछे चल दी …हाँ शहीद ने उसे दोनों के पास जाने की इज़ाज़त दे दी थी ताकि नूर और रॉकी से दूर रहकर हीना और टेंशन न ले सके …जब हीना तेज़ी से भागी तोह शहीद की हंसी छूट गयी “पगली “ शहीद के मुँह से निकला यह लफ्ज़ एपनिया आप में काफी था हीना की बेचैनी बताने के लिए जिसके बाद शहीद नूर के फादर और मदर के साथ baat-chit में बस्सी हो गया …

उधर मनु ने पब्लिक प्लेस से थोड़ा दूर होते hi नूर से हाथ अलग किया और कहा “मिस नाउ gentleman’s कर्टसी इस ओवर सो प्ल्ज़ मंद थे गैप …(बोले तोह सिम्पली समझ लो भीड़ ख़तम अब थोड़ी दुरी बनलो नूर जी) “

नूर ने भी हाथ छोड़ दिया और तुनक कर बोली “ थी hand’s ? अरे मोस्ट प्रेस्टीजियस इन हेरे ुर सो लकी तहत ु हैवे गेट चांस बी लक …(हिंदी में बोले तोह यह हाथ यहाँ सबसे कीमती है …और इनका साथ पाना आपकी किस्मत है…)

जिसपर मनु ने कहा “ यस ी एग्रीड विथ ु बूत ी don’t हैवे इंटेंशन्स ऑफ़ ुर हैंड अटैच्ड विथ में अगेन …तहत विल बे माय लक at-most …(हिंदी में हाँ पता है पैर तुम्हारे हाथों से दूर रहना मेरी उसे ज्यादा अछि किस्मत होगी ..

मनु ने नूर को साफ़ कर दिया था की मनु अपनी लिमिट के पार नूर की और करीबी बर्दास्त नहीं करेगा पैर नूर …पैर मनु का यह इग्नोरेंस और अट्रैक्शन बढ़ाने का काम कर रहा था …

हीना भी उनसे थोड़ा दूर दोनों को अचे से सुन रही थी …नूर को देखकर जहाँ उसकी सीटीपीटी गम thi…wahin मनु ने नूर से दुरी बनाकर हीना की मुस्कराहट वापस लड़ी थी …हु छिपकर दूर से मनु की दोनों हाथ अपने कानो को चुकार बलायें ले रही थी …उसे सोचा था की नूर का जादू कहीं मनु के उप्पेर न चल जाये पैर यहां मनु ने नूर को सिरे से नकार दिया था हीना को तोह ऐसा लगा की रॉकी ने उसके लिए नूर को रिजेक्ट कर दिया है बेचारी बिना वजह के कम्पटीशन में लगी हुई थी …जबकि मनु को नूर से न कोई लगाव थान ा अट्रैक्शन हाँ उसका फिगर सॉलिड था पैर मनु अब किसी के पास जाकर दिल लगाकर दिल तुवने की जगह ज्यादा अकेला पैन पसंद करता था …पैर हीना को यह सब कहाँ पता ..

हीना तोह वहां अंधेरे में छुपी मनु को देखकर खुश हो रही थी ….अब कुछ उस बिल्डिंग के बारे में बता देता हूँ हु कोई ओल्ड बिल्डिंग थी जिसमे तीन फ्लोर थे ..ग्राउंड फ्लोर के ग्राउंड बेस पैर वहां शादी आर्गनाइज्ड थी और फर्स्ट फ्लोर पैर मेहमान रुके थे और सेकंड पैर खाने पिने का अरेंजमेंट था ..पैर थर्ड फ्लोर खली था …और यह तीनो अभी 3रद फ्लोर पैर थे जहाँ मोस्ट ऑफ़ रूम्स खली थे और किसी किसी रूम की लाइट बंद थी …

खैर हीना आगे बाद पति की एक बचे ने उसके सूट को पीछे से खींचा …हीना ने पीछे देखा तोह कोई 9 या 10 साल का लड़का हाथ में cold-drink किये खड़ा था “बाज़ी शहीद भाई ने आपके लिए भेजी है आप पि लेना “

उसने हीना के हाथ में cold-drink दी और भाग गया …हीना ने cold-drink पि और सामने देखा जहाँ नूर और मनु नहीं थे शायद चाट पैर गए होंगे …

बचा आगे भाग रहा था की किसी ने उसे पकड़ लिया “ोये तूने दे दी न उसे ाचा जो सिख्या था हु केहड़िया न उसने हु cold-drink पि या नहीं ??” उस लड़के ने अपने साथियों के सामने उस लड़के से एक साथ कई सवाल कर दिए

लड़का “ हाँ भाईजान दे दी और दीदी ने पि ली अब पैसे दो जो आपने कहे थे ??”

उस लड़के ने उस लड़के के हाथ में कुछ नोट पकड़ा दिए जिसे देखकर लड़का खुश हो गया और निचे चला गया …

यह तीन लड़के थे जबसे हीना को देखा था पागल हो चुके थे …नूर पैर भी मरते थे पैर उसके बाप की अछि पहचान के चलते उस पैर हाथ डालने से गांड फटा करती थी इनकी …पैर हीना को देखा और तीनो ने प्लान किया की नाशी की ड्रग्स हीना को देकर इस फ्लोर के किसी खली रूम में तीनो ने मज़े मरने का प्लान किया था ….

तीनो के वेह्शी चेहरे गन्दी सोच के साथ हीना को देख रहे थे ….हीना ने शहीद का नाम सुनकर एक बार भी नहीं सोच की शहीद भला ठण्ड के टाइम में उसे cold-drink भला क्यों भेजेगा …पैर हीना शहीद पैर खुद से ज्यादा यकीं करती थी और करती भी क्यों न जिसने उसकी बीमारी के चलते खुद की जान डाव पैर लगा दी थी …तोह ऐसे भाई पैर भला कोनसी बहिन शक और शुबहा रखती …

पैर अब शहीद के नाम पैर उसके साथ एक गन्दा काम हो सकता है यह उसने सोचा भी नहीं था ….उधर हीना ने जैसे hi हु cold-drink ख़तम की उसे नशा सा चने लगा हु गिरने को हुई पैर उन लड़कों ने उसे थम लिए हीना को लेकर हु लड़के अँधेरे रूम की तरफ चलने लगे और उन्होंने उसे रूम में बेंच पैर लिटा दिया और सभी एक गन्दी हंसी हंसने लगे क्युकी हीना का जिस्म देखकर उन तीनो के मुँह से गन्दी तरह से लार टपक रही थी ….

और उसके जिस्म को देखकर उसके ुन्छुए जिस्म को चुने के लिए उनके हाथ उसकी मासूम चूचियों पैर आ चुके थे हीना को थोड़ा सा होश था …हु उनसबको रोकने की कोशिश में लगी हुई थी पैर उसके हाथ और शरीर उसके कबो से बहार था ” मेरे से दूर हटो कमीँनोऊ मेरा जिस्म सिर्फ मेरे जननं की ामनंनातट है ….अपने गंदे हाथ दूर करलो मुझसेइ कहा!!!!” उन तीनो ने एक साथ हीना की चूचियों को मसलना शुरू कर दिया था …

हीना बे बस सी उनके हाथ रोकने में लगी थी दरवाज़ा बंद था और हीना बस नाशी में खुद के लिए उनको रूक रही थी ….”हैट जोऊ कमीनो मेरा रॉकी आया तोह जिन्दा नहीं छोड़ेगा तुम कमीनो को …अहाहा!”

हीना का सूट उन्सब्ने फाड़ दिया था हीना की मासूम बचे की तरह रो रही थी ….उसके हाथ और जिस्म उसके काबू में नहीं था …पैर उसकी जबान भी अब लड़खड़ा रही थी “””!आह्ह्ह्ह! छोड़ दो मुझीऐ मेरे जिसमम्म को मेरीए पयरररर के लिए छोड़ दूऊऊ “

तीनो ने हीना के ब्रा को जबसे देखा था तबसे उनका हाल और बुरा था उनमेसे एक का हाथ हीना की चुकी पैर लगे ब्रा को चुने बाद रहा था की…

धाडककक!! एक आवाज़ आयी और दरवाज़ा जमीं पैर था उसके कब्ज़े उखड चुके थे मनु ने जब अंदर का नज़ारा देखा तोह उसके गुस्से का कोई पार नहीं था …

हु अंदर आया था ..उस टूटे दरवाज़े पैर अपने खड़ा था …हु तीनो उसको देखकर चौंक चुके थे हीना के जिस्म से फटा हुआ सूट उसके नाशी में झूमते होने पैर मनु को सब समझ आ चूका था की अंदर हो क्या रहा है …

एक लड़का “ हराम के पिल्लै छूट चाहिए तोह बोल पैर ऐसे खड़ा मत रह देख माल कोरा है इसे चूसने का मज़ा शायद hi तुझे मिले आह!” मनु ने एक ज़ोरदार किक उसके कान पैर जड़ दी थी और उसका सर पास की दिवार से जोर से भीड़ चूका था …जिसपर सर टकराते hi उसका सर फटा और वह खून भाते हुए बेहोश हो चूका था …

दूसरे ने पास रखे रोड को उठाया और मनु पैर वार करता उससे पहले मनु ने उसके पसली पैर जबरदस्त किक जड़ दी थी उसकी कई पसली एक साथ काटक की आवाज़ के साथ टूट गयी जिसके बाद हु भी उठ नहीं पाया …

बचा हुआ लड़का जिसने हीना के ब्रा पैर हाथ डालना था उसका पंत गिला हो चूका था उसके मुट्ठ से क्युकी उसने अपने सामने अपने दोनों दोस्तों क एक hi किक और एक hi पंच में गिरते हुए और बेहोशी में जाते हुए देखा था सो …उसे अचे से समझ आ चूका था की मनु ने अगर उसे भी पूछ या किक मरी तोह उसकी बाटी गुल ..

लड़का “ भाई गलती हो गयी मुझे माफ़ कर दू …प्ल्ज़ आगे से ऐसा कुछ नहीं होगा …प्ल्ज़ मुझे कुछ मत करना भाई प्ल्ज़ आप चाहे जो करो इस लड़की के साथ मुझे कुछ नहीं पता प्ल्ज़ भाई प्ल्ज़ ायःहा!!!”

मनु उसके हाथ को कताकक! की आवाज़ के साथ तोड़ चूका था हु हाथ जिसने हीना के ब्रा को चुने की हिमाकत की थी ….मनु उसके बाद हु कुछ कर पता अपने दोनों हाथ से उसके चेहरे और खोपड़ी को पकड़ा और ज़ोर से घुमा दिया …..

कदायकककककक! की एक छोटी सी आवाज़ आयी जिसके बाद उसकी पूरी गर्दन टूट चुकी थी वार मनु ने इतने ज़ोर से किया था की उसका पूरा फेस उसके कमर पैर घूम चूका था कुछ ऐसे जैसे उसका सर सिर्फ पीछे देखने के लिए बना हो मनु ने हाथ तोड़ने के बाद उसे चीखने का टाइम भी नहीं दिया था …

उसके बाद मनु ने सामने से बालकनी तक उसके जिस्म को खींचा और अंधरे में उसे सार्क इ बल निचे पक्के फर्श पैर फेंक दिया ….उसका सर जमीं पैर टकराते hi फाटक!! की आवाज़ करता हुआ किसी ख़रबूज़े की तरह फैट चूका था …मनु ने दूरसे के साथ शामे ट्रीटमेंट किया बालकनी से और क्युकी निचे शादी और दज के चलते खूब शोर गुल था ..और मनु ने उसे अँधेरे पिछले हिसी में फेंका था तोह किसी को घंटा ? सुनाई देता .

मनु ने तीसरे को भी शामे ट्रीटमेंट दिया मतलब मनु तीनो को ज्यादा कोई फ़िल्मी डायलाग मरे शांति से मौत की नीड सुला चूका था …अब मनु पलटा और नशे में पड़ी हुई हीना की तरफ गया उसने उसका फटा हुआ सूट देखा तोह उसने अपना जैकेट ? उतार कर उसे पहना दिया हीना अभी भी हाथ चला रही थी …पैर मनु ने सिर्फ इतना hi कहा “ हीना डरो नहीं मैं हूँ रॉकी तुम अब सेफ हो …”

हीना ने बिना होश के भी जब रॉकी का नाम सुना तोह आराम से बेहोशी में चली गयी ..उसका बेहोश होना था की नूर की एंट्री हुई “अरे रॉकी तुम यह इस लड़की के साथ क्या कर रहे हो कहीं तुम कोई रेपिस्ट नहीं हो ???”

मनु ने आगे उसे कुछ कहने से पहले उसके मुँह पैर अपना हाथ रख दिया “ जिसकी आखों के लाल सुर्ख रंग को देखकर नूर की भी हवा टाइट हो गयी ..

मनु ने उसे कहा “यह शहीद की बहिन हीना है और मैं यहाँ रपे करने नहीं उसे बचने आया था जिसे सुनकर नूर की आखें छोड़ी हो गयी मनु ने हीना के फाटे हुए सूट को ज़मीं से उठाकर दिखते हुए कहा ..”यह देखो 3 कमीने इसके साथ बहुत बुरा करनेवाले थे पैर उनको वक़्त रहते रोक दिया और हीना को बचा लिया …”

नूर के मुँह से मनु हाथ हटा चूका था noor”per तुम्हे कैसे पता चला की हीना यहाँ उनके साथ है .????”

मनु “ जब तुम्हारा कॉल आया तोह तुम उसमे बिजी हो गयी थी तोह मैं ीक बचे को देखा जो काफी नोट हाथ में लिए आरहा था मैंने उससे पूछा की तुझे यह सब किसने दिए और क्यों? तोह उसने डर के मारे सब बक दिया और जब मैं यहाँ आया तोह बहार यह पुरसुए मिला जो मैंने सिर्फ हीना के हाथ में देखा था उसके बाद सिर्फ इस कमरे का दरवाज़ा बंद होना मतलब हीना यहीं थी क्युकी जाते हुए मैंने इस दरवाज़े को खुला हुआ देखा था …”

नूर “सो सॉरी रॉकी मैंने न जाने बचने वाले को hi जानने क्या समझ लिया था …मुझे माफ़ कर दो प्ल्ज़“

मनु “ यह सब बाद में पहले तुम हीना को देखो उन्होंने ड्रग दिया है इसे …और इसके कपडे फाटे हुए हैं तोह ऐसे में इसे बहार ले नहीं जा सकते और शहीद जब इसे ढूंढेगा तोह हु सब सोचो माफ़ी से ज्यादा जरूरी इसकी हालत सुधारना है अभी ???”

नूर ने मनु जब यह सब करते हुए देखा तोह मनु का केयरिंग नेचर और अछि सोच के साथ टाइम के साथ सोचने की ताकत देखकर हु भी अपने मनु की फैन हो गयी …पैर वहां किसी को नहीं पता था की मनु ने 3 कमीनो को 3 माले से नहीं दुनिआ से टपका डाला था …क्युकी मनु अपने नेचर के जैसे शांत था …पैर उसकी आँखें देखकर नूर के दिल में भी एक बार मनु के नाम से खौफ पैदा हो गया था पैर मनु ने हीना को उस टाइम ज्यादा परेफरेंस दी थी …क्युकी उसकी हालत बेहोशी में थी और उसका सूट के साथ शहीद कभी भी उसे ढूंढने आ जाता ..

जिसका हल निकला नूर ने उसने अपने फादर से कहा की आज वह हीना के साथ रहेगी उसकी बहिन है हु और शहीद को बोलदे ताकि हीना की चिंता हु न करे …सो किसी को क्या प्रॉब्लम होती उसके बाद उसने अपनी माँ को कॉल किया की उसकी फ्रेंड को किसी ने कोई ड्रग दिया है तोह हु क्या करे उसकी माँ ने उसे कहा की उसे क्लीनिक में ले जाओ इस पैर उसने मनु को सब कुछ कहा की उसने यह सब किया है …

मनु ने सिर्फ एक सवाल किया “ तुम्हारे पास कार ? है अभी???”

नूर “ हाँ है हु तोह ाचा है की आज मैं लेट हो गयी थी सो मुझे अपनी कार में आना पड़ा यहाँ तक ..”

मनु ने नूर से कहा की यहाँ से वह निकले और कार के साथ बिल्डिंग के पीछे मिले ..वह हीना को लेकर आ जायेगा …

नूर वहां से चली गयी …और बहार बिल्डिंग के पीछे कड़ी हो गयी कार के साथ जहाँ उसे साफ़ दिख सकता था की मनु कहाँ से आएगा …हु कार में बैठी हुई बिडिंग की तरफ देख रही thi….ki सामने का नज़ारा देखकर उसे अपनी आखों पैर यकीं नहीं हुआ ….उसने कई बार अपनी आखों को साफ़ किया और कई बार उसके खुद नोचा भी पैर यह सब हक़ीक़त था कोई सपना नहीं वह आज कोई सपना नहीं देख रही थी पैर यह किसी सपने से भी काम नहीं था ….

हाँ नज़ारा hi कुछ ऐसा था मनु ने जब देखा शादी का माहौल है कोई कहीं है कोई कहीं तोह ऐसे में हु हिना को बेहोशी की हालत में कैसे 3रद फ्लोर से लेकर निकलता …उसने काफी देर इंतज़ार किया पैर कोई न कोई रस्ते पैर तहत ओह मनु ने एक हाथ से हीना को अपने कंधे पैर डाला और 3रद फ्लोर के पाइप के सहारे एक हाथ से निचे आने लगा …उसकी ताकत और हिम्मत देखकर नूर ने कई बार खोद को नोचा भी था और आँखें भी साफ़ की थी क्युकी नज़ारा hi ऐसा था की मनु एक कंधे पैर हीना को टंगे हुए एक हाथ से पाइप उतर रहा था …जिसके लिए बहुत हिम्मत चाहिए …पैर यहाँ मनु आराम से उत्तरा और हीना को कंधे पैर लिए उसके कार ? के गेट पैर आया जहाँ नूर मुँह फाडे उसे hi देख रही थी …मनु के शर्ट ? के बाजु उसके इतने तगड़े वर्कआउट के बाद उसके डोले की सही शेप बता रहे थे ….की मनु के मुस्कले ? का साइज कितना हैवी होगा …

मनु ने उसके कार के शीशे को बजाय तोह नूर नींद से जाएगी और उसने गेट ओपन किया मनु ने आराम से हीना को पीछे की सीट पैर लिटा दिया और आगे के ड्राइवर्स की बगल वाली सीट का बैक डाउन कर दिया ताकि किसी तरह भी हीना गिरे नहीं और आगे बेथ गया जिसने बाद नूर ने कार ? को तेज़ी के साथ अपनी माँ के क्लिनिक पैर ले जाकर hi रोका उसकी माँ का clinic….kisi क्लिनिक से काम चिटा हॉस्पिटल था जहाँ मोस्टली नर्स या कोई डॉक्टर अवेलेबल रहते थे ताकि एक्सट्रीम केसेस को हैंडल किया जा सके और क्युकी नूर की माँ सर्जन थी तोह उसके चलते वहां उनके साथ के डॉक्टर ? आया जाया करते थे …

खैर नूर ने वहां जाकर अंदर देखा जहाँ उनकी ओल्ड त्रिनेड नर्स थी जिसको नूर ने साड़ी सिचुएशन बताई ..पैर हीना का नाम नहीं बताया उसे दोस्त hi बताया और क्युकी उसकी माँ ने पहली hi वहां कॉल कर दिया था

तोह हीना को फुरण एंटीडोट दे दिया जिसके बाद हीना अभी भी सो रही थी ,नर्स ने कहा भी की यह अब ठीक है पैर होश तोह अब शायद इस शुबह hi आये तोह बे फ़िक्र रहो…

जिसपर नूर ने मनु की तरफ देखा ..”थैंक्स मम फॉर ुर आल किंडनेस “ मनु ने नर्स से कहा ..

नर्स उसके बाद अपने काम पैर लग गयी मनु ने हीना को फिर गॉड में उठाया और बहार चल दिया …

नूर भी उसके साथ थी …”अरे रॉकी आप इस कहाँ ले जा रहे हैं ???”

मनु “ इसका यहाँ रहना या आपके घर इस हालत में जाना ठीक नहीं है क्युकी यह होश में सुबह तक आनेवाली नहीं है तोह आप एक काम करो अपने घर यह केहदो की आप अपने किसी फ्रेंड कैग हर जा रही हो और एक कॉल उस फ्रेंड को भी कर दो ताकि बाद में कोई मिसकम्युनिकेशन गैप न हो …और मेरे साथ मेरे होटल चलो अगर आपको मुझपर ट्रस्ट हो तोह …???”

नूर “ अगर आप पैर ट्रस्ट नहीं होता तोह यहाँ 2ऍम साथ नहीं होती आप बेफिक्र रहो मैं आपके साथ हूँ ..”

उसके बाद नूर ने वैसे hi किया और मनु के होते चल पड़े रस्ते में उसके मैं में सवाल भी था की " जिसने हीना के साथ यह सब किया है वह है कहाँ ...." पैर मनु के गुस्से भरी आँखोने को देखकर उसने कुछ पूछा नहीं…3 कार ? में होटल के सामने कुछ hi देर में कार ? खड़ी थी क्युकी रात में कोनसा ट्रैफिक होना था …मनु ने अंदर जाकर देखा तोह कोई नहीं था वॉचमैन भी सोया हुआ था ..जिसके बाद मनु ने फिर से हीना को उठाया और नूर के साथ चुपचाप अपने रूम में चला gaya…or रूम खोला नूर ने उसके बाद तीनो अंडर रूम का दूर क्लोज मनु ने हीना को बीएड पैर लिटाया और उसके साथ नूर को लेटने को कहा और खुद पास में चादर बिछाकर सो गया ….नूर ने मनु को बिना कुछ कहे काफी देर तक देखा उसके बाद उसकी आखें भी बंद हो चुकी थी….
:हिंट:
 
अपडेट 63

बचपन की यादें

उसके बाद नूर ने वैसे hi किया और मनु के होते चल पड़े रस्ते में उसके मैं में सवाल भी था की " जिसने हीना के साथ यह सब किया है वह है कहाँ ...." पैर मनु के गुस्से भरी आँखोने को देखकर उसने कुछ पूछा नहीं…3 कार ? में होटल के सामने कुछ hi देर में कार ? खड़ी थी क्युकी रात में कोनसा ट्रैफिक होना था …मनु ने अंदर जाकर देखा तोह कोई नहीं था वॉचमैन भी सोया हुआ था ..जिसके बाद मनु ने फिर से हीना को उठाया और नूर के साथ चुपचाप अपने रूम में चला gaya…or रूम खोला नूर ने उसके बाद तीनो अंडर रूम का दूर क्लोज मनु ने हीना को बीएड पैर लिटाया और उसके साथ नूर को लेटने को कहा और खुद पास में चादर बिछाकर सो गया ….नूर ने मनु को बिना कुछ कहे काफी देर तक देखा उसके बाद उसकी आखें भी बंद हो चुकी थी….

अब आगे ..........

सुबह सबसे पहले मनु उठा उसने दोनों को सोते देखा हु रूम को बंद करके बहार गया और अपनी एक्सरसाइजेज की और पता नहीं कहाँ से किसी लेडी शॉप ? पैर जाकर वह कुछ क्लॉथ परचेस कर लाया और जब वह आया तब भी दोनों सोई हुई थी मनु उसके बाद बाथरूम्स से फ्रेश होकर आया उसने हीना के सर पैर हाथ रखकर देखा हीना की नींद टूट गयी मनु के हाथ रखने से पैर उसने पता नहीं क्या सोचा और मनु का हाथ अपने गाल पैर लगाया और आँखें बंद कर्ली …

मनु बोलै” अब कैसा फील कर रही हो??”

हीना उसकी बात सुनकर जैसे होश में आ चुकी थी उसने अब अपने ass-pass देखा तोह उसे समझ आया की हु अपने घर में नहीं है और उसका रॉकी उसके सामने सुच में खड़ा था …शायद बेचारी रोज़ का कोई सपना देख रही थी पैर मनु ने बोलकर उसे असली दुनिआ में ले आया था …

हु उठी कर बीएड में समथ्कर बेथ गयी जब उसने खुद को देखा तोह उसे मनु का जैकेट ? पहना हुआ दिखा और उसने याद करने की कोशिश की तोह उससे कल रात का सब कुछ याद आया जिस पैर हु रोने लगी ….जिसे सुनकर नूर भी नींद से जाएगी …उसने हीना को रट हुए देखा तोह हु उससे कंसोल करने में लग गयी..

मनु” देखो हीना रोना मत तुम कल रात जैसे थी अभी भी वैसे हो …कल तुम सेफ बच गयी थी …लो यह कपडे हैं देखलो तुमको सही आते हैं या नहीं और थोड़ा फ्रेश हो जाओ तुम को रट देखकर शहीद को भी बुरा लगेगा सो हिम्मत रखो खुद में तुम आगे से ध्यान रखना की कोई कुछ भी दे तोह तुम आगे से सोच समझकर उसे करना …” मनु ने उसे क्लोथ्स का पैकेट देते हुए कहा और हु रूम से बहार चला गया …

जिसपर नूर ने कल रात की साडी बात हीना से पूछी और कैसे रॉकी उर्फ़ मनु ने उसे रात भर अपनी निगरानी में रखा और कैसे उसकी केयर की और उसके रेस्पेक्ट के लिए हु उनको अपने रूम में ले आया सब उसे तफ्सील से बताया …जिसपर हीना को रॉकी के केयर और प्रोटेक्शन का पता चला जिसपर उसने अपने आंसू साफ़ किये …और फ्रेश होने चली गयी …हाँ उसके लिए यह वक़्त बहुत हार्ड था पैर हु खुदको सेफ फील कर रही थी और जबसे उसे पता चला की उसकी इज़्ज़त बचनेवाला मनु है उसके दिल में मनु के लिए और प्यार और रेस्पेक्ट बाद गयी थी …उसने आईने के सामने खुद को देखा और शर्मा कर बोली” जिसके लिए खुद को संभाला था उसी ने मुझे कल रात संभाला था ,,कैसे न प्यार करूँ तुमसे रॉकी अब तोह तुम hi हो मेरे लिए बस तुम hi हो …”

खैर हीना फ्रेश होकर आयी उसके बाद नूर भी फ्रेश हुई तब तक मनु नास्ता लेकर आ चूका था …तीनो ने नाश्ता किया …और हीना का मोबाइल बजा जिसपर उसके फादर का कॉल था …

हीना उठकर एकांत में चली गयी और कॉल पिक किया तब तक हीना ने कपडे चेंज कर लिए थे और हु भी वापस आ चुकी thi.…noor के फादर ने उससे बात की और जब कॉल कट हुई तोह हु वापस आयी मनु को देखा और कहा “ तुमने कैसे उन कमीनो के बारे में कुछ नहीं कहा पैर पापा का कॉल आया तहत ओह पता चला हु तीनो मर चुके हैं पुलिस कातिल की तलाश कर रही है …”

मनु “ तोह जाकर पुलिस को सब बता दो को कातिल कोण hai???”manu ने शांत से लहज़े में कहा ..जिसपर हीना ने भी मनु को देखा क्युकी उसे अब पता चला था की मनु ने उनलड़को को मार दिया था..

नूर “ पैर किसी को ज़रा सी बात पैर कल्ट कर देना क्या वाजिब है ??”

मनु “ हु जिसके लायक थे उनके साथ वही किया ..क्युकी उनकी आँखों में डर और इज़्ज़त नहीं थी लड़कियों के लिए तोह यह करना ज़रूरी था …वैसे भी वह लड़के सिर्फ माफ़ी अपनी जान के डर से मांग रहे थे उनके लिए माफ़ी मिलने का मतलब था आगे फिर गलती करने का encouragement..so जो सही लगा किया ..”

नूर “ तुम जानते भी हो हु लड़के किस फॅमिली से बिलोंग करते थे कितने बड़े घर के बचे थे हु और पुलिस अब तुम्हे अरेस्ट कर लेगी ..??” नूर ने गुस्से में कहा ..

मनु ने शांति से कहा “ बड़े घर के थे तोह क्या किसी भी लड़की का रपे कर सकते थे ..बड़े घर का लड़का मतलब उसके पास लाइसेंस था कुछ भी करने का ??”

नूर “ मैं यह नहीं कह रही पैर क्या थोड़ा बहुत पीटकर उनको पुलिस के हवाले नहीं किया जा सकता था ??”

मनु हंसा उसकी इस हंसी से दोनों हैरान थी “ पुलिस तोह पहले से है कानून भी पहले से है तोह आजतक कितने रेपिस्ट रुके , कितने केस आज भी धुल चाट रहे हैं कितनो को मिला इन्साफ …और जब मैंने एक्शन के बदले रिएक्शन लिया तोह तुम मुझे जज कर रही हो सहीह ै नूर मैडम ..??” मनु ने अपनी बात में एक तंज किया था नूर पैर ..

नूर “ पैर सब अगर ऐसे hi सबको मारने लगे तोह क्या होगा ??”

मनु “ वही होगा जो होना चाहिए हर क्रिमिनल के दिल में डर होगा गलत करने से पहले और हर रेपिस्ट सोऊ नहीं लाख बार सोचेगा किसी लड़की को गलत नज़र से देखने से पहले …लड़की कोई खिलौना नहीं है की जब मैं में आये तोह उससे खेल लो लड़की की अपनी मर्ज़ी जरूरी है किसी के साथ कुछ करने के लिए ..और यहाँ उन लड़कों ने गलती की सो मैंने उनके एक्शन के बदले रिएक्शन दिया ,,,वर्ण मैं कोनसा उनका दुश्मन था ??”

नूर “ मतलब तुम पुलिस और कानून से खुद को उप्पेर मानते हो तुम ऐसी बातें करके साबित क्या करना चाहते हो ??”

मनु आराम से “ मैं किसी को कुछ साबित नहीं करना चाहता हूँ …पुलिस और कानून आजके टाइम सिर्फ बड़े लोगों की रखैल बना हुआ है ,,,हर क्रिमिनल बेख़ौफ़ है जानती हो क्यों क्युकी उनको पता है की माफ़ी के नाम पैर और पैसे के दम पैर हु फिर आज़ाद होंगे और दुनिआ में फिर कोई नया केस उनके नाम होगा क्युकी उनसे सही गलत पूछने वाला कोई है नहीं पैर जो सही करता है सवाल उसके सर होता है …ाचा तुमको प्रॉब्लम किस बात से है …मैंने उनको मारा इस बात से या उनको पुलिस के भरोसे नहीं छोड़ा इस बात से ??”

नूर गुस्से से भर कर बोली “ पुलिस को नहीं सौपा इस बात से “

मनु “ ाचा अगर पुलिस में दे देता उसके बाद ??”

नूर “ उसके बाद कोर्ट में केस होता ??”

मनु “ क्या गारंटी है की कोई वकील उनको सही साबित करने की कोशिश नहीं करता और कोर्ट में उनको किस बिना पैर सजा होती क्या सोचा है तुमने किसी रपे विक्टिम्स को भरे कोर्ट में खुद पैर हुए जुर्म के बारे में कैसे सवाल पूछे जाते हैं हीना और उसका भाई शहीद क्या यह बदनामी बर्दास्त कर पाते …और इनसब के बाद क्या तुमको उम्मीद है की सही में उनको सजा मिलती ???”

नूर के पास उसके इस सवाल का कोई जवाब नहीं था उसके शरीर में सोचकर hi झुरझुरी च गयी थी की हीना पैर सुच में अगर ऐसा कुछ होता तोह शहीद और हीना का क्या होता पैर उसने फिर भी मनु से कहा “ पैर??”

मनु ने उस पैर को पूरा नहीं होने दिया “ पैर क्युकी वहां हीना थी तोह तुमने यह सब मुझसे पूछा और मैंने जवाब दिया इसी पैर के साथ मैं तुमसे कुछ पूछ सकता हूँ ??”

नूर ने हाँ में सर हिलाया ..

मनु “ पैर हीना की जगह तुम होती और वहां मैं टाइम से नहीं आपता तोह तुम उस ज़ेडटी का शिकार बनती ..पैर हु पुलिस में जाते ,,,पैर हु सारे कोर्ट में जज के सामने होते …पैर वहां तुम्हारे पिता जो दुनिआ के लिए केस लड़ते हैं …पैर हु हार जाते …क्युकी हु सरे इन्फ्लुएंस वाले पर्सन hain…per वहां तुम्हे आंसर से नंगा करने वाले हर हु सवाल पूछे जाते जिनको तुमने कभी खुद से भी नहीं पूछा होगा …पैर वहां सबके सामने तुम्हारा हु तमाशा बनता की तुम्हे …इसी पैर के सामने उनको खुद पैर साड़ी दुनिआ के सामने ज़लील होना पड़ता …हु इसी पैर पे तुम्ह्पेर भरी कोर्ट में हँसते …और जब कोर्ट में हु बेगुनाह साबित हो जाते …तोह बहरे कोर्ट में तुम अपनी ज्यादती पैर रोने के शिव कुछ नहीं कर सकती थी क्युकी कोर्ट में कोई सबूत नहीं होता उनके खिलाफ क्युकी वहां सिर्फ चार लोग थे 3 हु जो रपे कर रहे थे ..1 हु जिसका रपे हो रहा था …पैर तुम कहाँ से कोई गवाह लाती कैसे उनपर िज़म लगाती …तोह भरे कोर्ट में तुम और तुम्हारा परिवार बस इस पैर पे शर्मिंदा होता …उसके बाद इसी पैर पर तुमको दुनिआ माँ हर गन्दी तोहमत तुम्हारे सर लगती …और इसी पैर के साथ तुमको सुसाइड करना पड़ता …फिर भी बचता तोह सिर्फ यह….. पैर !” मनु ने एक सांस में उसे समझा दिया था की एक लड़की पैर क्या हाल होता है रपे के बाद ..

नूर ने खुद को वहां हर हाल में िमन किया और हु चिल्ला पड़ी “”नहीं यह नहीं हो सकता “ उसको अब हीना ने संभाला नूर की आँखोने से ांसो बह रहे थे ,,,उसके साथ हीना भी रो पड़ी थी उसे अचे से समझ आ चूका था की मनु ने तुरंत फैसला लेकर गलत नहीं किया था …क्युकी उसने पहले भी यह सब देखा था जब हु अपने पापा के साथ कोर्ट में गयी थी जहाँ एक रपे विक्टिम्स को जब इन्साफ नहीं मिला तोह उसने वहीँ कोर्ट की छत्त से खुद कर सुसाइड कर ली थी ताकि समाज में उसके माँ और बाप चैन से जी सके पैर उसके बाप और माँ का डम्ब hi वहीँ उस लड़की के पास हार्ट फ़ैल से निकल गया था. एक लड़की के इन्साफ न मिलने से एक नहीं 3 लोग दुनिआ से चल दिए थे ..

इस इंसिडेंट ने नूर को अंडर से इतना हिला दिया था की नूर ने उसके बाद कभी अपने पापा से मिलने कोर्ट का रुख नहीं किया था ..और कई दिन तक हु उनसब को याद करके रात में कई बार चीखकर उठ जाया करती थी …जिसपर उसकी माँ ने उसे काफी समझया था ..जिसके बाद हु जाकर नार्मल हुई थी …उसे घटना के बाद से नूर भी कहीं कहीं रपे विक्टिम्स के साथ सिम्पथी रखती थी …

पैर आज मनु ने उस पूर्ण वाकये को उसके सामने फिर से जिन्दा कर दिया था ,,,आज नूर और हीना को कहीं न कहीं मनु की बात अंडर से सही लग रही thi…ki अगर कानून से hi सब सुधर जाते तोह प्रॉब्लम hi क्या thi…or फिर पुलिस और क्रिमिनल के साथ लॉयर्स की साथ गांठ किसे नहीं पता …हाँ सब बिकाऊ नहीं होते पैर जो होते हैं उनका क्या ????

मनु ने उनसे आगे कुछ नहीं कहा था …और क्युकी आज उसका लास्ट फाइट था सो …उसने दोनों से कहा “ देखो मैं आज जिस काम के लिए आया था आज उसका लास्ट डे है …उसके बाद मैं वापस चला जाऊंगा अपने सिटी ..सो जब तुम लोग जाना चाहो जा सकती हो तुम लोग बस मेरे रूम की के ? निचे डेस्क पैर दे जाना ok bye ? आईएम लीविंग नाउ ….” मनु ने अपना एक लौटा बेग उठाया और अपने कपडे उसमे डाले जिसमे हु जैकेट ? भी था जो उसने हीना को दिया था अब हु सामने बीएड पैर था उसने उसे बेग में डाला और चल दिया निचे …उसने पहिचे मुड़कर भी नहीं देखा और न उसने उनसे यह कहा की मेरे बारे में पुलिस से कहना या नहीं क्युकी दोनों को उसने सुच आईना दिखा दिया था …सो अब दोनों की मर्ज़ी थी की उसके बारे में कुछ कहें या नहीं …उसने निचे पेमेंट किया और सीज़ चला गया जहाँ उसकी फाइट thi…or पीछे छोड़ गया दोनों लड़कियों को खुद से लड़ने के लिए ….

दोनों लडकियां काफी देर तक मनु की बातों पैर सोच में रही उसके बाद दोनों को कहीं न कहीं मनु सही या गलत क्या लगा यह हु जाने …पैर नूर ने हीना को साथ लिया और बहार चलदी निचे उसने डेस्क पैर मनु के रूम की के ? दी और पेमेंट तोह मनु ने करवा hi दिया था ….उस बन्दे ने हैरानी से देखा जरूर पैर कहा कुछ नहीं की दो लड़की उस लड़के के रूम में कहाँ और कब आयी …दोनों नूर के कार ? से हीना के एड्रेस पैर थे जहाँ शहीद उसका वेट कर रहा था …

नूर ने उसे ठीक घर के सामने छोड़ा और कार ? से hi शहीद को दुआसलाम किया और चली गयी …अपने घर wapas…shahid ने हीना को देखा और अंदर चला गया उसके साथ …अंडर हीना अपने रूम में गयी शांति से रिश्तेदार जिनका घर था मोस्टली सब कल की शादी की बातें करने छत्त पैर इकठा थे पैर शहीद सिर्फ अकेले निचे था हीना के लिए ….और जब हीना आयी तोह शहीद ने नोट किया की हीना थोडी सोच में गम है और उसने अपनी सोच में गम होते हुए शहीद को बिकुल इग्नोर कर दिया था …

शहीद रूम में आया तब भी हीना अपनी सोच में घूम रही थी शहीद ने रूम का गेट बंद किया और हीना के कंधे पैर हाथ रखा “ क्या हुआ किस सोच में गम है ??”

हीना “ कुछ नहीं भाईजान बस ऐसे hi ..” हीना ने टालते हुए कहा था …की शहीद ज्यादा बात न करे ..

शहीद “ लगता है आजकल बात छुपाने लगी है तू बिना बताये नूर के साथ रुकी जबकि टूट ओह नूर को इतना जानती भी नहीं है और मेरी गुडिअ (शहीद कभी कभी हीना को गुडिअ कहा करता था) मुझसे झुंट कबसे कहने लगी मैं जनता हूँ कुछ तोह गलत है जो तू अपने भाई से छिपा रही है ..?””

हीना को जब शहीद ने गुडिअ कहा तोह उसकी आँखोने से ांसो आने लगे हु शहीद के गले लग कर रोने लगी फुट फुटकर रो रही थी हीना शहीद के सीने से लग कर ..

शहीद ने उसके सर पैर हाथ रखा तोह हीना थोड़ी नार्मल हुई और शहीद को कल की साड़ी बात बता दी जिसमे उसने मनु के 3 लड़को को मरने का और नूर के साथ क्या बात हुई थी बता दिया ..शहीद ख़ामोशी के साथ उसे सनटैन रहा ….हीना सब बता चुकी थी पैर शहीद अब भी शांत था …

शहीद की छुपी देखकर हीना को बहुत डर सा लग रहा था हीना उसे हिलती है …शहीद भी अपनी सोच से बहार आता है ..और हीना को देखता है उसके चेहरे पैर हीना को देखकर फिर से मुस्कराहट आ जाती है हु हीना के सर पैर हाथ फिरकर कहता है “ रॉकी ने बिकुल सही किया उसने वही किया जो कानून शायद नहीं कर पता एक भाई और एक लड़की के घरवाले की नज़र से देखोगी तोह तुम hi कहो कैसे उसे गलत मान लूँ जिसने मेरी गुडिअ किन ा केवल इज़्ज़त बचाई बल्कि रात भर उसका धयान भी रखा ..मेरे डिसिशन बिलकुल सही था की रॉकी तुम्हारे लिए सही था …और तुम कहाँ धरम और मज़हब की बातों में उलझी हुई थी तब भी मैंने कहा था और अब तोह मैं दावे के साथ कह सकता हूँ की ऐसा लड़का जल्दी से नहीं मिलने वाला गुडिअ तुम्हे तुम ज़ादा न सोचो उसने जो किया सही किया …”

शहीद की बात सुनकर हीना शर्म से लाल हो चुकी थी ….दोनों बहिन भाई काफी देर लाक रॉकी को लेकर बात करते रहे …पैर वहां मनु फाइट को लेकर रेडी हो रहा था आज उसकी फाइट का लास्ट डे था बोले तोह फाइनल था आज ..

उसकी फाइट आज मैं फाइट का इवेंट थी क्युकी सामने से दोनों फाइटर आपने अपने हिस्से के semi-final जीत चुके थे जिसपर वहां दोनों के hi छीरिंग पर्सन मौजूद थे मनु जिसे सब “सिलेट किलर “ के नाम से जान्ने लगे थे और सामने था विशाल वर्मा जोकि अपनी फाइटिंग स्टाइल में “कपीसैट “ के नाम से फेमस था …उसकी फाइटिंग में उसे सब कपीसैट कहते थे क्युकी जब हु सामने वाले से लड़ता तोह उसका फाइटिंग स्टाइल कॉपी करके उसी को हरा दिया करता था …पता नहीं साला खता क्या था की कॉपी करके आसानी के हरा देता था …सुनने में आपको अजीब लगे पैर हु जब कॉपी करता तोह सामनेवाले के मूव को धयान में रखकर हु फाइटर क ईगल मूव को प्रेडिक्ट ? करके सामने वाले को धुल छठा देता था …और आज उसका सामना होना था मनु से जो कभी कोई फाइट हारा नहीं था..

खैर मनु के चाहनेवाले सिर्फ रिंग में hi नहीं थे रिंग के बहार मोस्ट ऑफ़ फिघ्टर्स मनु के क्लैम नेचर के चलते उसे पसंद करते थे और सब चाहते थे की मनु जीते क्युकी विशाल बड़ा घंडी टाइप का पर्सन था ..वह जिसे हारता उसे हारने के बाद किसी न किसी तरीके से बेज़ाज़त करने में कोई कसार नहीं छोड़ा करता था …लास्ट फाइट में उसने फाइटर के हरने के बाद उसके मुँह पैर थोक तक दिया था …जिसपर रेफ़री ने उसे वारं भी किया था …जो मनु ने खुद अपनी आँखों से देखा था …मनु खुद से सोच रहा था कितना अजीब बाँदा है जो सामने वाले को निचा दिखने के लिए कितना गिर जाता है …

खैर फाइट की रिंग हुई और दोनों आमने सामने थे विशाल ने मनु को पंच किया मनु ने दोगे किया …पैर विशाल ने राउंड किक मनु के कान पैर मारनी चाही पैर मनु पीछे हुआ और किक फ़ैल हुई जिसपर विशाल चीड़ गया उसने रिंग में जहाँ खड़ा था साइड में मुँह किया और थूक दिया …मनु फिर भी शांत था …

उसने उसके बाद मनु पैर अपने बेस्ट ऑफ़ थे बेस्ट किक उसे किया जिसमे उसने घूमकर हवा में किक किया जिसमे पर्सन को एक किक का पता होता है पैर रोटेशन के साथ किक सिंगल नहीं होती डबल होती है …अगर एक किक न लगे तोह दूसरी जरूर लगती है …पैर यहाँ मनु दोनों को अचे से समझ चूका था …की विशाल का मूव क्या है पैर मनु ने पहली किक को खोनी से रोका और दुरसी किक उसने घूमकर घुटने से ब्लॉक कर दी …

विशाल अब भोखला चूका था ..उसने फिर पूछ घुमाया पैर शामे रिएक्शन जीरो मनु ने उसके पंच को अपने खोनी से फिर ब्लॉक कर दिया …पैर इस बार मनु की खोनी उसके खंड पैर लग चुकी थी क्युकी विशाल गुस्से में डिस्बैलेंस हुआ था गुस्से के चलते …पैर मनु का इंटेंशन सिर्फ ब्लॉक था …पैर विशाल को जैसे किसी ने और ट्रिगर कर दिया था …हु कुछ और करता उससे पहले राउंड के एन्ड का रिंग बजा …दोनों अपने साइड में जाने लगे पैर अचानक विशाल मुदा और उसने वापस मनु की साइड जाने के लिए दौड़ लगा दी रिंग वाला रिंग बजता रहा की हु रुक जाये पैर विशाल रुका नहीं मनु वापस जा रहा था ..पैर विशाल उसके पीछे आ रहा था …विशाल का टारगेट मनु की रीद की हड्डी थी जहाँ उसने अपनी किक से मनु को मरना था ..और उसने स्टान्स लिया भी था पैर उसकी किक मनु की बैक को छूटे उससे पहले hi मनु हवा में जम्प लेकर दोनों पैरो को खोलकर उसने विशाल को अपने निचे से निकल दिया जब मनु जमीं पैर आया तोह विशाल उसके आगे था …

और मनु के हाथ में विशाल के बाल थे जब मनु ने अपने पेअर जमीं पैर रखे तोह मनु ने उसके बाल पकड़ कर उसका सर पीछे खींचा और उसकी कमर पैर पेअर रखकर उसे लेकर पीछे गिरा और उसके बाल खींचता हुआ उसके कमर सामने उसे पीछे पलट कर फेंक दिया जिसके बाद मनु ने अपने हाथ झाड़े क्युकी विशाल के सर के काफी बाल शहद हो चुके थे क्युकी उसका बोझ मनु ने अपने हाथ और पेअर पैर ज्यादा दिया था और क्युकी मनु ने उसके बाल से पकड़ कर उसे उल्टा घुमाकर पटका था सो उसके काफी हिस्से के बाल उसकी खोपड़ी से उसकी खाल समेत साफ़ हो चुके थे बोले तोह साला उतने हिस्से से गांजा हो चूका था वहां से …भीड़ और मोस्ट ऑफ़ थे लोग हैरान थे की मनु ने जस्ट उसके किक चुने से पहले उसे न सिर्फ रोका बल्कि हवा में घूमकर फेंक दिया और साथ में गांजा भी कर दिया उसका आधा सर लगभग गांजा हो चूका था …भीड़ जहाँ अब मनु को चीयर कर रही थी ….

और तभी भीड़ में से किसी ने उसे चिल्ला कर गांजा कहा …जिसपर विशाल की गांड में किसी ने अचे से मिर्ची झोख दी हो ऐसा उसका रिएक्शन था ..वह कुछ करता उससे पहले कई रेफ़री आये और उसे रोक दिया और उससे येलो कार्ड दिखया था मनु ने देखा एक रेफ़री ने उस भी येलो कार्ड दिखया था जिसका मीन्स दोनों के पॉइंट हाफ हो चुके थे …मनु तोह येलो कार्ड का मीन्स समझ चूका था की …उसने फाइटर के हेयर पुल्लिंग के रूल को तोडा था उसके चलते उसे कार्ड शो किया था …जिसपर उस कोई प्रॉब्लम भी नहीं थी …पैर बहार से भीड़ सब मनु के साइड से चिल्ला रही थी …विशाल के राउंड के एन्ड के बाद पीछे से मनु को किक करने को लेकर उसका फैन बेस भी अब मनु के सपोर्ट में था …जिससे विशाल की गांड और सुलगा चुकी थी …पैर उसको अभी रेफ़री से ज्ञान मिल रहा था …हु सुन उसको रहा था पैर उसकी नज़र मनु पैर लगी हुई थी …

उसने अब ध्यान दिया तोह उसके गांड से ज्यादा मिर्च उसके सर पैर लग रही थी …जहाँ से उसके सर की खाल साफ़ हो गयी थी पैर खून नहीं निकला था पैर चीज़ अचे से लग रही थी जिसमे नमक डालने का काम किया था उसके खुद के पसीने ने जहाँ से पसीना गुज़र जाता वहां से सर में आग सी लग जाती अचे खासे फाइटर ने खुद का कार्टून बनवा लिया था …जहाँ आज उसपर हंसने का कोई मौका उसके साथ हरे हुए फाइटर जाने नहीं देना चाहते थे …और मोस्ट ऑफ़ हरे हुए फाइटर जिनको उसने कभी न कभी जलील किया था सभी “ोये तकले …..ोये गंजे ….ोये आधे चाँद जैसे नाम ले लेकर उसकी गांड जला रहे थे …एक ने तोह हद hi करदी उसने खुद की पंत थोड़ी सी दिल्ली की और हलकी सी गांड दिखा कर उसकी चाँद और अपनी गांड का इशारा किया जिसका मतलब था विशाल की तांत बोले तोह उसकी खोपड़ी और उसकी गांड दोनों शामे तो शामे चमक दार है …जिस पैर उससे समझा रहा रेफ़री भी खुद को कण्ट्रोल नहीं कर पाया अपना पेट दबा कर हंसने लगा …जिसे देखकर विशाल की गांड में जवालामुखी सा ब्लास्ट हो चूका था …पैर अब मनु ने उस विशाल से एक सेकंड के लिए भी नज़र नहीं हटाई थी …ताकि फिर हु पीछे से हुम्ला कर सके …

खैर रेफ़री अपना लेक्चर देकर चला गया …और एक बार फिर रिंग बजी …विशाल ने मनु के अब तक के मूव को जो उसने प्रेडिक्ट किया था की मनु अब उसके लेफ्ट में होगा ..और हु मनु के पसली पैर पंच करके मनु को धुल चटाकर मैच ओवर करदेगा और मनु के पसलियों को मैच के दौरान तोड़कर अपने बालों का बदला ले लेगा …उसने किया भी वैसा hi …हु राइट में टर्न हुआ और उसने लेफ्ट से हुक पंच लिया जिसका टारगेट मनु को ब्लॉक करने को मज़बूर करता और हु घुमा कर दूसरे हाथ के खोनी से मनु के पॉलिओन में वार कर देता पैर हुआ उल्टा मनु लेफ्ट की बजाये राइट में घुमा उसका वॉर खली गया मनु ने हल्का सा जम्प लिया और उसके सर के किनारे से होते हुए उसके कंधे पैर खोनी से जोरदार वार किया जिसके बाद विशाल को टारे और चाकर दोनों एक साथ नज़र आने लगे मनु चाहता तोह उसके खंधे के बजाये उसके सर पैर खोनी का वॉर करके आसानी से उसकी गर्दन तोड़ सकता था पैर कल किये 3 बन्दों की समाज सेवा के बाद आज रिंग में सबके सामने एक और समाज सेवा करना हु खुद के और मास्टर के नाम को ख़राब नहीं करना चाहता था ..

मनु ने उसके बाद कोई मौका नहीं दिया विशाल को मनु ने एक साथ कई घुटने उसके पेट में दे दिए जिसके चलते विशाल के मुँह से खून तक आ चूका था ..पैर मनु उसे गिरने नहीं दे रहा था क्युकी अगर हु गिरता तोह रेफ़री काउंटडाउन शुरू कर देता जिसमे मनु उसे हाथ नहीं लगा सकता था तोह मनु ने उसकी अचे से खातिर दारी कर दी जब तक बेल्ल ? बजी मनु ने विशाल को भी बेल्ल ? की तरह बजा डाला था मनु नॉर्मली गुस्से में नहीं लड़ता था ..पैर विशाल का पीछे से वार और उसदिन हरे हुए के मुँह पैर थूकना मनु को बहुत बुरा लगा था …सो मनु ने उसे मरने से ज्यादा घसीटा ज्यादा था …मनु ने उसकी हालत पतली कर दी थी जब विशाल गिरा तोह दुबारा उठा नहीं ...उसे होश नहीं था ...रेफ़री ने उसकी जांच (चेकिंग ) की और हाथ से डिक्लेअर कर दिया की फाइट करना विशाल के बस के बहार है ….भीड़ में ख़ुशी की लहर उठ चुकी थी …

रिंग में बेल्ल ? एक बार फिर से बजी और एक अनाउंसमेंट ? हुई ” आज के फाइनल फाइट के विनर ? है मानव सिंह और थे चैंपियनशिप गोज फॉर हिम प्लीज राउंड हैवे बिग applause…please चीयर हिम “

भीड़ में हर कोई खुश था मनु के लिए हर हु इंसान जो अभी तक मनु से मिला था या जो मनु को जनता भी नहीं था और हु लोग भी जिनको विशाल ने जलील किया था …हर कोई मनु की इस फाइट पैर उसके लिए तालियां बजा रहा था …..

ऑडियंस में हर कोई ज़ोर से “साइलेंट किलर …साइलेंट किलर चिल्ला रही थी ….मनु कहीं न कहीं वहां सभी को खुद से कनेक्ट करने में कामयाब हुआ था…

खैर उसके बाद स्टेज सजाया गया जिसमे मनु को ट्रॉफी ? मिली जिसे मनु ने अपने हाथ में लेते hi होटों से चूमा ..और कैमरा पैर हाथ में ट्रॉफी ? जीतकर चैंपियनशिप जीतने का इशारा किया जिसका मतलब था जो उसके साथी घर पैर उसे देख रहे थे …उनको पता चले की उसकी जीत में उसने ट्रॉफी ? उनके नाम कर दी है …कई लोग जो यह सन देख रहे थे घर पैर उनके आंसू निकल आये थे …

खैर उसके बाद विनिंग प्राइस मिला मनु को कोई 50,000 रस हाँ जनता हूँ काम है पैर इतने बड़े स्टेज पैर इतना भी इज़्ज़त के सामने काम है …इतने अचे इवेंट में पार्टिसिपेटिंग hi बहुत होती है ..पैर मनु तोह सिर्फ जीतना चाहता था उसने तोह सोचा भी नहीं था की कोई पैसा भी मिलेगा …पैर जो मिला आने दो …

मनु उसके बाद सभी फाइटर और मोस्ट ऑफ़ पर्सन्स के साथ मिला जिसपर उसे उसकी जीत पैर सभी ने बधाई दी …और मनु ने भी सभी को इज़्ज़त से जवाब दिया और चल दिया किसी अचे रेस्टोरेंट ? में खाने के लिए जहाँ उसने सोचा कुछ खा लिया जाइये …क्युकी शाम का टाइम हो चूका था और उसने वहीँ डेस्क पैर अपना ट्रॉफी और बेग रख दिया और एक कोने में अपना पर्स निकल कर उसमे अपनी पुराणी तस्वीर देखने लगा क्युकी भले hi ख़ुशी का टाइम था उसके लिए पैर मनु ने कल 3 लोगों को मारा था उसके लिए मरना कोई बड़ी बात नहीं थी ..पैर एक लड़की का इस तरह से मनु को गलत ठरना मनु को ाचा नहीं लगा था …मनु को नूर पैर बहुत गुस्सा आया था ..पैर गुस्से को पीकर हु बहार नास्ता लेन चला गया था …क्युकी अगर हु उसके सामने और रहता तोह शायद कुछ और नूर कहती जो शायद मनु बर्दास्त कर पता या नहीं …उसे इस बात का बहुत बुरा लगा था की एक लड़की होते हुए गलत लोगों को सजा देने वाला मनु कैसे गलत हुआ …क्या किसी आम लड़की को बचाना गुनाह hai…ladki हर जगह मेरे लिए मनहूस हैं आगे से किसी से बात तक नहीं करूँगा …भाड़ में जाये यह सभी ab..manu को बहुत गुस्सा आया था नूर पैर और अब कोनसा उसे नूर से दुबारा मिलना था या हीना से दुबारा मिलना था सो उसने इस ख्याल को दिमाग से निकला और खाने पैर ध्यान दिया खाने लगा मनु …

मनु खा रहा था सामने एक बचा बैठा था शायद अकेला होगा कपड़ों से थोड़ा सा गरीब सात है मनु ने इधर उधर देखा तोह उसके साथ कोई नहीं था ..मनु ने उस बचे को देखा हु कोई 10 साल का रहा होगा चेहरे से मासूम सा मनु ने उससे इशारे से पूछा की खाना खाएगा …उसने हाँ में सर हिला दिया मनु ने प्लेट उसकी तरफ सरका दी …

वेटर एक और प्लेट आर्डर करदी मनु ने बचा खाना पेलने में लगा हुआ था …मनु बस उसे देखता हुआ खुश हो रहा था ..थोड़ी देर में मनु का आर्डर भी आया मनु भी खाने लगा …और जब खाना हो चूका था …मनु ने बिल चुकता किया दोनों का मनु को वापसी में फ्लाइट ✈ से जाना था मास्टर ने आर्डर दिया था “जल्द से जल्द वापस आओ “ सो फ्लाइट रात को 10.30पं की थी जो घाटे भर में मनु को उसके शहर पूछा देती ..

सो मनु ने बिल देने के बाद फिर से अपने पर्स ? में अपनी ओल्ड पिक में खुद को और अपनी मम्मी सुमित्रा को देख रहा था अभी फ्लाइट में कोई 2घंटे का टाइम tha…ek वीक से हु घर से दूर था ..उस मम्मी को देखकर पता नहीं क्या सुझा उसने उस पिक में किश कर di…itne में सामने से हु लड़का उठा और मनु के हाथ से उसका हु पर्स ? लेकर बहार भागा मनु भी हैरान सा उसे देखने लगा हु भी उसके पीछे भागा और अब रेस्टोरेंट के बिल को तोह मनु चूका चूका था सो उसे रोक्का भी नहीं किसी ने वर्ण ऐसे में सबसे पहले हु मनु को रोकते …

खैर लड़का काफी तेज़ी से भागा और एक गली की तरफ भगा जहाँ कुछ अँधेरा था मनु भी उसके पीछे वहां अंधेरे से भरी गली में घुसा …वहां बदबू के मारे बुरा हाल था शायद कोई गन्दी गली थी जिसमे लोग कचरा फेंकते होंगे मनु ने जैसे hi उस गली में कदम रखा …उसका बदबू के मारे बुरा हाल हुआ उसने अपने जेब से रुमाल निकल के मुँह पैर बहधा और आगे बढ़ने लगा …

लड़का गली के आखिरी चोर पैर जहाँ उजाला था वहां नज़र आया मनु भी उसके पीछे चल दिया आगे एक और गली शुरू हो रही थी मनु ने सोचा शायद लड़का वहां हो …हु भी घुस गया वहां …सामने का नज़ारा देखकर उसे गुस्सा आ चूका था ….

यहाँ 3 लोग किसी औरत के साथ कुछ कर रहे थे …मनु को लगा हु औरत उनको रोक रही है मनु जब आगे आया तोह उसका शक सही था वहां एक बंद कार के सामने स्ट्रीट लाइट ? के निचे हु उस औरत को चाकू दिखा कर मरने की कोशिश कर रहे थे …और हु औरत पीछे होते होते बस कार से टकरा कर गिर चुकी थी मनु को लगा हु उसे मरने आये थे …

औरत “ मैंने तुम्हारा बिगाड़ा क्या है जो मुझे मरने आये हो मैं तोह यहां से हूँ भी नहीं ???”

आदमी 1“ तेरे नाम की सुपारी मिली है हमे और आज तेरा गेम बजाना है …तू चिंता मत कर उसके बारे में मत सोच हम तुम्हे एक झटके में मार देंगे …कोई आवाज़ या दर्द नहीं होगा …हाहाहाःहाहा! “

औरत “ पैर मैं तोह यहाँ किसी को जानती तक नहीं बस बहार निकली होटल से और तुम मेरे पीछे लग गए यहाँ तक दौड़ा दिया मुझे लगता है तुम कोई और समझ रहे हो मुझे ???”

आदमी 2 “ तुझे बोलना न हम गलत इंसान को हाथ तक नहीं लगते तुम्हारी तस्वीर है हमारे पास (उसने हु तस्वीर उस औरत को दिखयी )देख यही है न तू तोह हम गलत कैसे हुए ???”

औरत “ मुझे छोड़ दो मैंने आज तक कुछ गलत नहीं किया मुझे तोह अभी अपनी बेटी की शादी करवानी है और अभी तोह ??” उसकी बात पूरी नहीं होने दिया आदमी 3 ने

आदमी 3 “ तुझे कहा न बस अपने उपपरवाले को याद करले आज तेरा टाइम आ चूका है …”

औरत को सुच में लगा की उसका टाइम आ चूका है हु आँखें बंद किये जाने क्या क्या दुआ मांगने लगी थी..

तभी धूम धाम और धड़ाम जैसे कुछ आवाज़ आयी जिसके बाद उस औरत ने आँखें खोली तोह सामने हु तीनो जमीं पैर बेहोश पड़े थे …सामने एक लड़का खड़ा था जिसके मुँह पैर रुमाल बंधा था …

हु औरत सामने खड़े उस लड़के को देखती कभी उन बेहोश पड़े आदमियों को उसके समझ में नहीं आया की यहाँ हुआ क्या था ….वह लड़का आगे बढ़ा तोह हु औरत पीछे जाने लगी …शायद अभी भी घबराई हुई thi…jaise उसे खुद की जान अभी भी खतरे में लग रही थी..

उस लड़के ने उसके दोनों खंधे पकडे और खुद के चेहरे का रुमाल हटाया ….वह औरत शायद इतने करीब से मौत को देखकर सदमे की हालत में थी …

हु लड़का “ डरिये नहीं अब कोई और नहीं है अब आप सेफ हैं ..”

हु औरत उस लड़के से यह सुनकर उसके गले लगकर रोने लगी हु लड़का भी उसके हाल को समझ रहा था …उसे कंसोल कर रहा था …उस औरत को उस लड़के के सीने से लगकर एक अज़्ज़ेब सा अपनापन महसूस हो रहा था ..जैसे कोई उसका पुराण रिश्ता हो उसके साथ उस औरत का …हु लड़का भी उसे सीने से लगाए उसे हिम्मत दे रहा था ….

शायद उस औरत ने आज जैसे जीने की हिम्मत hi छोड़ दी थी …और छोड़ती भी कैसे न ….रात का टाइम अनजान शहर और सुनसान रोड जहाँ दूर दूर तक कोई था नहीं वहां अगर हु लोग उसे मार्कर चले भी जाते तोह शायद hi किसी को पता चलता ..पैर उसके सामने जैसे ज़िन्दगी ने खुद कोई फरिश्ता भेजा था उसकी जान बचने के लिए ..अकेले लड़के ने उन 3 लोगों को कुछ सेकण्ड्स में ज़मीं पैर लिटा दिया था पता नहीं कैसे …

खैर अब हु औरत रोकर थोड़ी नार्मल हुई उसने उस लड़के का चेहरा देखा कोई 16 या 17 साल का होगा …जो शांत सा था जैसे कुछ हुआ hi नहीं था ..

औरत “ थैंक्स बीटा तुमने मुझे बचाया उसके लिए दिल से थैंक्स …मैंने तोह सोच लिया था की मैं आज बचने वाली नहीं हूँ??”

लड़का “ आ पैसे क्यों सोच रही है अब आप सेफ हैं ..”

औरत “ नहीं बीटा मैं सोचा था की इस अनजान शहर में और सुनसान रस्ते पैर मुझे कोण बचने आएगा …??..पैर कहते हैं न उपपरवाला जहाँ खुद नहीं जा पता वहां किसी फ़रिश्ते को भेज देता है …तुमने मुझे किसी फरिस्ते की तरह नयो ज़िन्दगी दी है थैंक ु सो मच बीटा ..”

लड़का “ बीटा भी कह रही हैं और थैंक्स भी अछि बात नहीं है या तोह बीटा मत कहिये या थैंक्स ..दोनों साथ में अचे नहीं लगते ..”

औरत उसकी इस बात पैर हंस पड़ी “ बड़ी अछि बातें करते हो बीटा जान भी बचाई और थैंक्स भी नहीं कहने दिया ??”

लड़का “ जब बीटा कह रही हैं आप मुझे तोह थैंक्स का क्या मतलब अगर अपनी मम्मी को बचाया तोह क्या मम्मी भी मुझे थैंक्स कहेंगी मुझे नहीं न सो आपने बीटा कहा तोह थैंक्स की ज़रूरत नहीं है ??”

औरत “ बीटा बड़े अचे संस्कार है तुम्हारे तुमको सुच में किसी माँ ने अछि परवरिश दी है मुझे ख़ुशी है की तुम जैसे नेक और अचे लड़के ने मुझे माँ सामान मन ..पैर बीटा कमसे काम नाम तोह बता दो अपना ताकि तुमको कभी याद करूँ तोह सही से याद कर सकूँ ???”

लड़का “ मेरा नाम है रॉकी “…हु लड़का कुछ और कहता की तभी एक कार आके वहां रुकी शायद कोई लड़की ड्राइव कर रही थी उसे …उसके दरवाज़े से बहार देखकर बोली “मम्मी देर हो रही है …जल्दी चलो “ शायद उस लड़की ने वहां पड़े आदमियों को देखकर कोई खतरे का अंदेशा सोच हो पैर उसे क्या पता खतरा तोह ताल चूका था …जिसमे आज उसकी माँ शायद हमेशा हमेशा के लिए उसे दुबारा नहीं मिलती …

उसकी कार ? की लाइट थी मनु पैर पद रही थी उस लड़की ने भी अचे से मनु को देखा था …पैर अभी उसे अपनी माँ की चिंता ज्यादा थी …हु औरत मनु की तरफ देखकर बोली “ बीटा तुमने अपना नाम बताया बहुत ाचा नाम है रॉकी मैं हमेशा याद रखूंगी तुम्हें …मेरा नाम शालिनी राइ है और हु जो कार में बैठी है मेरी छोटी बेटी है नैना राइ …मैं दिल्ली से हूँ तुमसे मिलकर सुच में ाचा लगा “ उसकी बात आगे होती पैर तब तक हु लड़की कई बार हॉर्न ? बजाकर जल्दी चलने का सिग्नल ? दे रही थी …

शालिनी ने मनु के सर पैर प्यार से हाथ फरा जिसमे पता नहीं क्यों मनु से अपनापन महसूस हो रहा था उसके साथ पहली बार था की कोई और उसे अपना सा महसूस हो रहा था …हु और बातें करना चाहती थी पैर

नैना ने तोह कसम hi खली थी की हॉर्न ? पे हॉर्न बजने की …शालिनी मनु को bye ? करके कार ? में बैठी और चल दी …मनु बस उसे जाते हुए देखता रहा पता नहीं क्यों उसे भी यह औरत जब उसके सीने से लगी थी तोह उसे क्यों?? अपनापन सा महसूस हुआ था पता नहीं खुद को क्यों मनु उसके साथ जुड़ा सा महसूस कर रहा था ….

(अब कुछ लोग कहेंगे मनु ने पहचाना क्यों नहीं तोह सुनलो भाई जबसे मनु ने हु पिक अपने पर्स
? में राखी थी सो ुस्कने पिक बड़े होने के चलते उसे मोड़कर रखा हुआ था …जिसमे पिक में सिर्फ उसे अपनी और अपनी मम्मी की तस्वीर सामने दिखे और क्युकी मनु ने शालिनी को अपने होश में देखा नहीं और सुमित्रा ने भी जब मनु को याद नहीं तोह ज्यादा बताया नहीं था ..सो मनु के लिए शालिनी एक अनजान सी औरत hi थी)

कार में नैना “ मम्मी आपको एक बार का समझ नहीं आता ऐसे रात में यहाँ एक अनजान लड़के के साथ बिच रोड में कड़ी हैं कुछ हो जाता तोह “ नैना ने चिंता से कहा ..

शालिनी ने उसके गालों को खींचा “ अरे मेरी दादी अम्मा के होते मुझे क्या हो सकता था भला अगर कुछ होता तोह मैं कह देती मैं नैना की मम्मी हूँ सामने से कोई भी प्रॉब्लम दम दबाकर भाग जाती ….हाहाहाःहाहा!” शालिनी ने नैना को छेड़ते हुए कहा …

नैना “ मम्मी समझ रही हूँ आपकी चालाकी लगता है आपका पापा से दिल भर चूका है जभी इतनी रात को उस हैंडसम के साथ बिच रोड में कड़ी thi..hain न चलो इस बार पापा से कहूँगी अपनी बीवी को काबू में रखे वर्ण अभी भी हंसमे लड़के मेरी मम्मी पैर मरते हैं…” नैना ने भी पलट वार में कहा

शालिनी “ अरे बीटा तेरे पापा तोह मेरी जान है और तुम दोनों मेरा दिल पैर उस लड़के को कुछ गलत मत बोल पता नहीं उपपरवाले ने कहा से उसे मुझे ज़िन्दगी देने भेज दिया जबकि मैंने तोह खुद उम्मीद छोड़ दी thi..aaj अगर हु नहीं होता तोह आज तेरी यह माँ जिन्दा नहीं होती …”शालिनी फिर से उसे मौत के मंज़र को याद करके रो पड़ी …

नैना ने जब यह सुना की उसकी माँ शायद जिन्दा नहीं होती उसने गाड़ी में तुरंत ब्रेक लगा दिए …चूऊउउउउउणं! टायर घिसते हुए कार रुकी …

उसने अपनी रोटी माँ को संभाला और शालिनी ने सब कुछ नैना को बता दिया …नैना छोटी थी पैर उसकी अपनी माँ से बहुत अछि बनती थी …शायद दोनों की एक दोस्त के जैसे बॉन्डिंग थी जिसमे नैना टाइम आने पैर दादी अम्मा के जैसे अपनी माँ की खिचाई करती तोह कभी उसे साथ उसके दुःख में उसके साथ एक अचे दोस्त जैसे साथ देती…

जब उसने सुना की उसकी माँ पैर क्या बीती थी और जिस लड़के से हु अपनी माँ को बचने के लिए सोच रही थी …उसी हैंडसम ने उसकी माँ को बचाया था ..उन 3 लोगों से जो खुद को शालिनी के नाम की सुपारी लेने को बोल रहे थे …नैना भी अब टेंशन में थी …

नैना “ सॉरी मम्मी मैं उस लड़के को गलत समझा मैंने सोचा कोई गुंडा होगा पैर मुझे नहीं पता की उसने आपकी जान बचाई है अरे मैं तोह उसे थैंक्स तक नहीं कह पायी???” नैना ने उदास होते हुए कहा …

पैर थैंक्स का नाम सुनकर शालिनी भी मनु को याद करके रट से अचानक मुस्कुराते हुए बोली “ अरे थैंक्स तोह उसने मुझे भी नहीं कहने दिया बड़ा पायरा लड़का था …पता है क्या कह रहा था की या तोह बीटा न कहो या फिर थैंक्स …दोनों साथ में अचे नहीं लगते नैना सुच मन बेटी पता नहीं क्यों दिल उससे मिलकर अपनापन महसूस कर रहा था ..पता नहीं उसके साथ कोनसा नाता है जो उससे मिलकर ऐसा लगा जैसे उसे सालो से जानती hun…per जिसे सोचा था हु तोह नहीं था पैर कुछ तोह था उसमे जो दिल उसे याद करके भी खुश हो रहा है …माँ सामान कह रहा था मुझे हु “ शालिनी को रट हुए से हँसते हुए देखकर नैना भी अब ठीक सी थी ..

नैना “ वैसे माँ उसे बीटा मैट बना लेना लड़का था गज़ब का हैंडसम कसम से मज़ा आ गया उसके मुस्कले ? हाय क्या थे ???” नैना ने माहौल को हल्का करने के लिए कहा …

शालिनी “ हाँ समझ गयी दादी माँ ताकि उसे भाई न कहना पड़े लगता है मुझसे ज्यादा तुझे पसंद आ गया है हु उससे कुछ और पूछती एटलीस्ट उसका नंबर hi ले लेती पैर तुमको तोह हॉर्न ? पे मज़ा मिल रहा था …अब रही पांच टाटी हुई..”

नैना “ अरे मुझे पता होता की हु सॉलिड लड़का ाचा है तोह भला मैं खुद उसका नंबर नहीं ले लेती वहां ज़मीं पैर लोग देखकर मुझे अआप्की चिंता हो रही थी सॉरी मम्मी?”

शालिनी ने उसे प्यार से कहा “ कोई बात नहीं पैर तू इतनी छोटी है और कार कैसे ले आयी ??”

नैना “ मम्मी मैंने पार्किंग से गाड़ी उदा ली ाचा हुआ घर पैर चलनी सिख ली वर्ण कहाँ सुनसान शहर में ढूंढ़ती आपको ाचा चलो और कल यहाँ से निकल जाते हैं क्युकी यहाँ रुकना अब सेफ नहीं है ok ??”

शालिनी ने भी हाँ में सर हिल्या और दोनों की कार ? तेज़ी से अपने होटल की तरफ चल पड़ी …

उधर मनु ने जब शालिनी को जाते हुए देखा तोह उसने देखा एक आदमी उसी लड़के के कान को खींचकर ले जा रहा था …मनु उसके पास गया …

मनु “ तुम इसे जानते हो??”

आदमी “ साब जी जाँऊगा कैसे नहीं बीटा है मेरा साला एक नंबर का बदमाश है माँ नहीं है इसकी पड़ने को भेज नहीं सकता क्युकी गरीब हूँ काम करता तोह यह कम्भकत भाग जाता है आजकल देखो क्या शॉक पीला हुए है कहीं से भी कोई भी चीज़ चुरा लता है ..देखो यह पर्स ? पता नहीं किसका उदा लाया है …???”उस आदमी ने मनु का पर्स ? दिखया उसे ..

मनु “ यह पर्स मेरा है और मुझसे hi चीन कर भागा था इसके पीछे कोई ½ घाटे से भाग रहा हूँ लाओ मुझे मेरा पर्स ? दो ??”

उस आदमी ने जब यह सुना तोह उस लड़के को बजाना शुरू कर दिया …मनु ने उसे रोका और अपनी जीत के पैसे में से कोई 25,000 उसे दिए …

मनु “ यह लो आप इसका एडमिशन करवादो और इसे पढ़ाओ ताकि यह अकेला न रहे और अचे लोगों के साथ अछि बातें सीखे …”

आदमी रोने लगा की अनजान इंसान ने उसके लड़के को ाचा बनने के लिए सोचा …उसने पैसे ले लिए …कोई फ़िल्मी ड्रामा नहीं किया की साब जी नहीं यह नहीं ले सकता …या कुछ ऐसा …जो पैसे कमाता है हु कीमत अचे से समझता है सो उसने अभी अपने बेटे के अचे फ्यूचर को देखा और पैसे ले लिए …

मनु भी अपने उस रेस्टोरेंट ? में वापस आया और अपना सामान जो उसने डेस्क पैर छोड़ा था उठाया और फ्लाइट ✈ के लिए एयरपोर्ट्स को निकल गया…..
:हिंट:
 
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