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बचपन की यादें
उसके बाद स्कूल उसके बाद टूशन और फिर बिज़नेस की ट्रेनिंग बोले तोह मनु एक बस्सी पर्सन की तरह से बस्सी लाइफ जी रहा था … उस पैर सुनील की डाइट पता नहीं kon-konsi अलग अलग हर्ब्स मनु को देता था की मनु के चेहरे और बॉडी में एक अलग सी चमक आने लगी थी …अब मनु भी खुद को एक अलग एनर्जेटिक पर्सन फील करता था की एक दिन और कुछ ऐसा हुआ जो मनु के लिए और बहुत कुछ चेंज ले आया …
और क्या हुआ ऐसा और क्या चेंज आया मनु की लाइफ में …
अब आगे ........
मनु की लाइफ अब एक रेगुलर रूटीन में बाँट चुकी थी …उसी के साथ उसकी बस्सी लाइफ के साथ उसकी प्रोग्रेस भी बढ़ती जा रही थी उसने सुनील और मास्टर के साथ एक ऐसी चीज़ें सिकने शुरू कर दिया था ….जो शायद मनु ने किसी मूवी में भी नहीं देखि thi…..indian martial-arts के साथ वर्ल्ड क्लास मार्टिकल आर्ट्स ..और अलग अलग फाइटिंग स्टाइल अब मनु को सीखने लगे थे मास्टर और सुनील गुरु जी…
मास्टर ने अब शबनम को अपने फार्म हाउस ? में बुलाना शुरू कर दिया था क्युकी कहीं न कहीं मनु के चलते हु नहीं चाहते थे की मनु और शबनम का सामना हो और मनु को उन्हें शबनम के बारे में बताना पड़े सो मास्टर उससे बहार मिलकरते थे …मास्टर के शराब छोड़ने की सबसे ज्यादा खुसी शबनम को हुई थी ..उसने मास्टर को उस दिन दिल से खुश किया …बोले तोह उस दिन गज़ब चुदाई हुई दोनों में चुदाई के बाद मास्टर ने शबनम को शराब छोड़ने और मनु के बारे में बताया जिसपर शबनम ने मनु को दिल से दुआएं दी की जो काम हु न कर सकीय हु मनु ने कर दिया …जिसपर उसने मनु से मिलने को कहा तोह मास्टर ने उसे साफ़ कहा की टाइम आने पैर हु मनु से मिल सकेगी ..
मास्टर खुद एक फाइटर थे और बहुत hi बेहतरीन फाइटर रह चुके थे ..जिनका फाइटिंग फील्ड में बड़ी रेस्पेक्ट से नाम लिया जाता था आज भी …मास्टर ने शादी से पहले साड़ी फाइट बंद कर दी थी पैर आज भी लोग उनको इज़्ज़त से जानते थे …उस पैर मास्टर का कामयाब बिज़नेस और रईस होना सो मास्टर के बेहिसाब कांटेक्ट थे ..लोग खुद सामने से उनसे कांटेक्ट बनाना पसंद करते थे …जिनका फ़ायदा मनु को हुआ..
मास्टर के ओल्ड कांटेक्ट के चलते मनु ने बहुत साड़ी डार्क फाइट (हु फाइट जो बड़े लेवल पैर होती हैं और बड़े लेवल पैर ओर्गनइजे होती है पैर साडी दुनिआ से छुपकर मतलब illegal’s वे मैं जिसमे fighter’s की जान तक चली जाया करती थी क्युकी इललीगल होती हैं ऐसी फाइट्स तोह पैसा बेहिसाब मिलता है हर फिघ्टर्स को पैर उसके साथ जान का भी जोखिम होता है ..)
उधर अजय अब मनु के बस्सी सचेडूले के चलते अब पुष्पी के हवाले था …उसका भी ग्रोथ होने लगा था …फिजिकली और मेंटली भी ..और क्युकी उसका बड़ा भाई अब अपने शरीर पैर ध्यान दे रहा था तोह …अजय भला भाई को यहां कॉपी कैसे न करता …उसने भी भाई की देखा देखि एक्सरसाइज पैर धयान बन आलिया …और कहीं न कहीं कार्टूनों से दुरी बना ली थी पैर उसका कार्टून प्रेम इतना जल्दी कैसे छूट जाता भला पैर हाँ यह जरूर था की पहले जहां उसका रात दिन कार्टून का चैनल टीवी पैर फिक्स था वहीँ अब उसने भाई की ट्रेनिंग को देखकर ववे देखना भी शुरू कर दिया था ..वह हर रोज़ शाम को अपने भाई से आजकी फाइट पैर बात करता जिसपर मनु उसे कहता की …”देख फाइट देखने को मन नहीं कर रहा हूँ …पैर पड़े पैर इसका असर नहीं पड़ना चाहिए ..तेरी बाकी अगर तुझे सीखना है तोह मैं हूँ न …”
अजय “भैया ी लव ु ुर थे बेस्ट बीआरओ ऑफ़ थे वर्ल्ड …अब मैं भी फाइट सीखूंगा yaaaahoooooo!!!!..dekhna भैया मैं भी आगे से ववे में आऊंगा …”
अजय की बातें सुनकर मनु भी उसके ववे में जाने की बात सुनकर हंस पड़ता ….पैर मनु ने जब से खुद फाइट सीखनी शुरू कर दी थी …तोह उसने जय को भी ट्रैन करना शुरू कर दिया था ….जिसके पीछे उसका दिमाग था की अजय को पता नहीं आगे कैसा टाइम देखने को मिले और आएगी अजय पता नहीं क्या करे और कैसे हैंडल करे सो मनु चाहता था की अजय फुल्ली प्रेपर रहे हर फाइट जो ज़िन्दगी मैं उसे करनी हो उसके लिए …
उधर निशा की कोई भी खबर नहीं थी पैर मंजू के फादर की तबियत के चलते उसका वहीँ रेहन फिक्स था …पैर मंजू ने निशा से एक वडा किया की मनु की खबर उसे मिल पायेगी ….तोह मंजू ने एक फोटोग्राफर को हिरे किया की हु वीक में एक बार या महीने में जितना हो सके मनु की पिक्चर कलेक्शन करके नई ज़ीलैण्ड में उसके पास भेज दे …जिससे निशा शांत रह सके पैर निशा का दिल कहाँ सनटैन था कभी कभी हु अपने माँ के गले लगकर मनु के नाम पैर जीखोलकर खूब आंसू भाटी ….और मनु की सलामती की दुआ मांगती ..
पैर मनु इन सब से दूर अपनी दुनिआ मैं रात दिन की ट्रेनिंग में अलग- अलग फाइटिंग स्टाइल सिखने में बस्सी हो गया था उसे निशा के नाम तक से गुस्सा और नफ़रत हो चली thi…nisha hi क्या निशा के बाद हु बात बिहषक करता था लड़कियों से पैर उसको हर लड़की से मन hi मन निशा के धोखे के चलते नफ़रत हो गयी thi.woh किसी भी लड़की के करीब जाना या किसी लड़की को अपने करीब तक नहीं आने देना चाहता था …उसे प्यार के नाम से गुस्सा आ जाता था …
इन सब के बिच जय चाँद ने एक बार भी राजिंदर के घर जाकर कोई khair-khabar लेने की कोशिश नहीं की क्युकी उसके दिल मैं था की मनु की मौत हो चुकी होगी पैर मनु अभी जिन्दा था …उससे बड़ी हैरानी हुई की राजिंदर ने अभी तक मनु की मौत को लेकर उसे यानि जैचंद को कोई भी खबर नहीं दी ..जिसके चलते उसकी टेंशन बाद चुकी थी की अगर मनु मर गया है ..तोह खबर क्यों नहीं आयी …पैर मनु ने उस दिन के बाद भी अपने maa-baap से जैचंद यानि चाचा का कोई ज़िकर नहीं किया tha…kyuki उसके लिए माँ -बाप की टेंशन ज्यादा ज़रूरी थी बजाये चाचा की धोखेबाज़ी के और हु नहीं चाहता था की हु अपने maa-baap को खुद पैर हुए उस्मान के हमले के बारे में बता कर उन्हें टेंशन दे जिसके बाद उसके maa-baap उसका घर से निकलना बंद कर दें सो उसने कुछ नहीं बताया न हमले के बारे में न चाचा का धोखा …हाँ उसने अपने बाप राजिंदर को यह ज़रूर बता दिया की उसे फाइटिंग में रूचि (दिलचस्पी )है जिसपर राजिंदर ने उसका साथ दिया जैसा उसने वडा किया था ,,,
जिसपर उसकी माँ सुमित्रा ने काफी हंगामा किया की “बचा अगर फाइट सीखेगा तोह रात दिन झगडे करेगा और फ़ालतू में बदनामी होगी और आगे पता नहीं क्या करे …”हु एक माँ की तरह सोच रही थी जिसको अपने बचे की फ़िक्र होती है …उसने मनु को भी बहुत मनाया .
जिसपर राजिंदर के एक सवाल ने सुमित्रा को सही समझा दिया ..”एक बात बताओ क्या तुमको अपनी परवरिश पैर यकीं नहीं है ??…क्या अपने बेटे पैर यकीं नहीं है …आगे जाकर क्या टाइम ागेगा क्या पता क्या तुम नहीं चाहती हो हमारा बीटा दुनिआ की हर लड़ाई के लिए त्यार हो ??? क्या तुम चाहती हो तुम्हारा बीटा क्यार बने ???क्या हमारे बेटे की हार बर्दास्त होगी तुम्हे ???
सुमित्रा “ आपने सोच भी कैसे लिया की मैं अपने मनु का साथ नहीं दूंगी ….और मुझे उसकी हार कैसे बर्दास्त हो सकती है भला ???बीटा है मेरा गुरुर है …उसकी जीत में मेरी आपकी और हमारी जीत hai…thik है जा मनु जो सीखना है सिख मैं तेरे साथ हूँ पैर अगर किसी मासूम को जुल्म में फसे हुए देखे तोह उसकी मदद जरूर करना …बस इतनी बात तेरी माँ कह रही है मान लेना ..”
मनु “ok मम्मी जो आप कहो जब लगेगा की कोई मासूम जुल्म में फसा हुआ है और मैं उसकी हेल्प कर सकता हूँ तोह मैं उसकी मदद जरूर करूँगा अपने मनु पैर विश्वास रखिये जो कर रहा हूँ सोच समझकर कर रहा हूँ ..ी लव ु मम्मी …ी लव ु पापा..”
और मटर सोल्वे होगया जिसके बाद मनु आज़ाद था फाइट सिखने के लिए …इन सब मैं अजय का फ्री में फ़ायदा हो चूका था …भाई बेस्ट ट्रेनिंग ले रहा था ..अचे और बेस्ट ट्रेनर्स और बेस्ट डिएटिट्यां से जिसका फ़ायदा उसे मनु ने ट्रेनिंग के रूप मैं देना शुरू कर दिया था …और अजय की जब अछि डाइट की बात आयी तोह मनु ने सुनील से हेल्प मांगी तोह सुनील ने पूछा तोह मनु ने सुच बता दिया की अजय को ट्रेनिंग दे रहा है …जिस पैर सुनील ने थोड़ी देर सोचा और मनु ने भी अपनी प्लानिंग बताई जोकि आगे आप सभी को भी पता चलेगी जिसपर सुनील ने उसे भी ट्रेनिंग में शामिल करने को कहा ….पैर
मनु ने यह कहकर मन कर दिया की “अजय अभी छोटा है अगर यहां के काळा काम और काली फाइट देखेगा तोह उसका दिमाग पता नहीं कैसे रियेक्ट करे सो उसे घर पैर मैं खुद hi ट्रेनिंग दूंगा ताकि उसके दिमाग को भी गाइड कर sakun…aap सिर्फ उसकी डाइट में हेल्प कर दिज्ये …”
सुनील “बीटा तुम सुच में बहुत ाचा सोचते हो कोई बात नहीं इसमें मई तुम्हारे साथ हूँ …”
जिसके बाद अजय भी सही शेप में आने लगा था सो मनु समझ गया की अछि डाइट से क्या हेल्प होती है …
उसका ध्यान डाइट के नाम आते hi अपनी दूसरी माँ नीता मम पैर गया …मनु ने उनके बारे में सोचा ..जिनका फिगर जीरो था हाँ भाई जीरो बोले तोह बादवाला जीरो मनु ने अब प्यार से कर काम पैर लगा दिया और एक अलग डाइट चार्ट बनाया जिसपर बेचारी मनु से प्यार के चलते झख मारकर काम करने लगी thi…jisper मनु की सख्ती और कभी भी बात न करने की बात के चलते उनका बहार का खाना काम हो गया था …क्युकी हु अकेली रहती थी सो उनकी आदत कुछ न कुछ खाने की थी जो अधिकतर चीट मील (नॉट हेअल्थी फ़ूड) होता था जिसे एक दम से छोड़ देना खुद उनके बस मैं भी नहीं था ...क्युकी न कोई रोक थी न कोई रोकनेवाला फिर भी कोशिश जारी थी बेचारी नीता की जिसमे सिर्फ कुछ hi फर्क आया था …इन्ही सब मैं कुछ महीने बिट चुके थे …
कहीं किसी जगह एक घर में एक मस्त से फिगर की मस्त गांड और गज़ब सी चुकी वाली कमाल की टॉप क्लास औरत एपनिया आप को आईएनए यानि मिरर में देख रही थी …
खुद को सवार रही thi….”sajna है मुझे सजाना के लिए ,,,” यह गाना उसके लिपस्टिक लगे शोख होटोंन पैर था …
की पीछे से कोई अचानक आया ..और उसकी आँखें बंद कर दी अपने हाथूं से …
औरत “है आगये आप …आपके लिए hi तोह मेरी जान यह आपकी बेगम सजी है और आप हैं की अभी भी पहचान कोण खेल रहे हैं,,,,,,,,,,, ारे मेरी जान आपके हथून को न पहचानू ऐसे बेगम नहीं हूँ मैं मेरे शोहर मेरे रूह के मालिक …अब सामने आईएनए .बहुत हुई यह जुदाई …”
उस शक़श ने उसकी आँखों से हाथ हटाया और सामने आज्ञा उसके “बेगम कसम परवरदिगार की उसकी बनायीं अज़ीम be-misal नेमत हो तुम मेरे लिए यह “”सुलतान हस्सान पठान”” तुम्हारा शोहर तुम्हे दिलो जान से चाहता है ….अब और न तडपाओ मेरी जान .. सराह बस आ जा और न तड़पा ..”
सराह “ आएयेह न “”
सुल्तान ने सराह को खड़ा किया और उसे अपने साइन से लगा लिया जिसके बाद उसके हाथ सराह के जिस्म पैर नाचने लगे …सराह का फिगर अपने में गज़ब था उसका कद 5’ 8’’ था उसका फिगर 38’ 30’ 42’ था जिसमे उसकी मोती चुकी और उसकी उभरी गांड किसी का भी लैंड खड़ा कर दे …उसका शोहर “”सुल्तान हस्सान पठान” जिसका कद 6’ और बॉडी का आईडिया आपको दे देता हूँ 50’ की चेस्ट और मज़बूत देसी शरीर जिको देखकर कोई भी अंदाज़ा लगा सकता था की यह शक़श पका कोई देसी पहलवान टाइप होगा …
खैर अब सुल्तान के हाथ सराह की उभरी गांड पैर चल रहे थे जो उसने मसलनि शुरू कर दी थी ….जिसके चलते सराह के होतोओं से एक अलग सी सिसकी फूटने लगी थिस…..
इस्स्स्सस्स! जिसको सुल्तान ने पूरा भी नहीं निकल ने दिया उसके लाल सुर्ख होतोओं से सुल्तान ने उसके होटों पैर अपने होठ लगा कर उसकी लाल लिपस्टिक को खाना शुरू कर दिया ….
जिसके चलते मचलती सराह के हाथ सुल्तान के कमर और उसके सर के पीछे चलते हुए अपनी मस्ती जाहिर करने लगे …
एक लम्बी किश के बाद दोनों ने एक दूसरे की आँखों में देखा सराह के होठों की साडी लिपस्टिक कहीं की कहीं फ़ैल चुकी थी …जिसे देखकर सुल्तान ने अपने होटों पैर सराह की लिपस्टिक को महसूस करके खुद की जीभ से चाट कर kaha”haay बेगम आज चीर्य का फ्लेवर है …क्या बात है कल वैनिला चाहिए मुझे..”
सराह “ हुज़ूर आपकी कनीज़ आपका हुकम जरूर मानेगी …क्युकी बीवी के होटों पैर शोहर का हक़ है …सो उसकी लिपस्टिक पैर भी आपका हक़्क़ है …पैर आपका यह शॉक मेरे समझ से परे है अलग तरह का लिपस्टिक और उसका फ्लेवर आप hi जानो मेरे लिए तोह इतना काफी है की मेरे सरताज को मैं अपने होटों के जैम पीला देती हूँ…”
सुल्तान “ बेगम हर रोज़ लिपस्टिक का शॉक मेरा है मुझे तुम्हारे इन हसीं होटों से लिपस्टिक चूसने में जो मज़ा मिलता है ..वह सिर्फ मैं जानता हूँ यह मेरा हक़ है सो तुम सिर्फ लिपस्टिक लगया करो उसे चूसने का काम मेरा है हु मुझपर छोड़ do…or अब मुझे चूसने दो इन होटों की लाली ..””
“हम्म्म!” सराह कुछ बोलती उससे पहले hi उसके होठ अब उसके शोहर की गिरफ्त में थे …
सुल्तान ने उसके होठ चूसकर साड़ी लिपस्टिक चूस ली थी ..जिसके बाद उसका हाथ सिद्ध पूछा उसकी मोती और फुल्ली हुई चूचियों पैर …
और उन पैर सुलतान ने ज़रा भी रेहम नहीं किया खूब ज़ोर शोर से मसलना शुरू कर दिया जिसपर सराह की हालत ख़राब होने लगी उसने किश तोड़कर कहा” थोड़ा आराम से कर लो कहीं भागी तोह नहीं जा रही हूँ आपकी हूँ और आपकी hi रहूंगी बस थोड़ा ज़ोर काम लगाओ न है!!”
सुल्तान “तुम सिर्फ अपना मज़ा लो बेगम तुम्हारी इन बैलन को ज़ोर से न मसलन तोह मज़ा नहीं अत इन पैर मुझसे कोई रेहम नहीं हो सकता …सो या तोह साहू या चिल्लाओ …”
और सराह कुछ कहती पैर सुलतान ने कोई मौका नहीं दिया उसे फिर से होठों को चूसने लगा जिसपर अब कहीं न कहीं सराह को अब मस्ती चढ़ने लगी थी ….सुलतान का चूचियों को बेदर्दी से मसलना और उसके बाद उसके होठों की चूसै सिद्ध असर उसकी छूट पैर पड़ने लगा …उसकी छूट से पानी रिसने लगा था …पैर सुल्तान ने चूस चूस के उसके होठों को लाल कर दिया था और साथ hi उसकी चूचियां भी खुद मसल कर रख दी थी …सराह को इनसब की आदत हो चुकी थी क्युकी सुल्तान की यह आदत ने शुरुवात में उसकी चीखें निकल दी थी …उसकी चुकी पहले 34 की हुआ करती थी जब उसका निकाह हुआ था पैर सुल्तान का चुकी प्रेम उसपर ऐसा मेहरबान हुआ की रोज़ का बेदरदादि से मसलना और खूब चूसना उसकी चुकी का साइज अब 38’ कर चूका था ….जिसपर उसे बहुत सरम आती थी की बिना बचा पैदा हुए hi उसकी दूध की फैक्ट्री का साइज बड़ा हुआ था सुल्तान की बदौलत …
खैर सुल्तान से अब उसके कपडे उप्पेर से उतरने शुरू कर दिए जिसमे सराह ने उसका साथ दिया …और दोनों बीएड पैर आ चुके थे …
जिसके बाद सुल्तान टूट पड़ा उसकी चूचियों पैर खूब चूसने लगा …और एक हाथ में उसकी फुल छूट सलवार के उप्पेर से hi हाथ में भर कर भिचने लगा ….जिसपर सराह का हाल बेचैनी से भर चूका था …उसके हाथ चुकी चूसते सुल्तान के सर पैर घूमने लगे थे …सुल्तान कभी जोर से उसकी छूट को हाथोमे भीचता तोह कभी हाथ से उसकी छूट की लकीर सहलाने लगता …
जिसपर सराह का जिस्म खुद बा खुद गर्म होने लगा था …उसकी चुदाई की तालाब इस बात से समझ सकते हो आप की उसकी छूट ने इतना पानी बहा दिया था …की उसकी कच्ची छूट के हिस्से से भीग चुकी थी…
सुल्तान अब आगे बढ़ा और उसने सराह की सलवार का नाडा खोल दिया जिसके बाद उसने सराह की सलवार को खींच कर एक झटके में निकल दिया और उसे घुमा कर पेट के बल कर दिया …
और उसकी पीठ पैर किश कर ने लगा …उसका एक हाथ उसने सराह की कच्ची में उसकी छूट पैर लगा दिया ….जिसपर सराह उलटी लेती हुई …मज़े की दुनिआ में तेर रही थी ….जिसके बाद एक हाथ से सुल्तान उसकी छूट को उप्पेर से निचे सहलाता और उसकी पीठ पैर चूमता सराह का मज़ा अलग उफान पैर था ….एक तरफ से सुल्तान का हाथ उसे मज़ा दे रहा था …और दूसरी तरफ उसके गरम किश ने सराह को झड़ने पैर अब मज़बूर कर दिया था …अहहहहह!!!!!! इस्स्स्सस्शह्ह्हआआ!!!! उसकी कमर को उसने गांड से उठा लिया जो सुल्तान को इशारा था की सराह झाड़नेवाली है उसने भी अब उसका क्लीट सहलाना शुरू कर दिया और तेज़ी से सराह इतनी तेज़ी से झाडी की उसका मुट्ठ भी उसके पानी के साथ निकलने लगा …..
अहहहहहा!!!!! की आवाज़ उसके ओर्गास्म का प्रूफ था की उसका ओर्गास्म भी कोई 30 सेक् चला जिसमे सुल्तान का हाथ और तेज़ होता चला गया ताकि सराह को पूरा मज़ा मिले …..
ओर्गास्म के बाद सराह की साँसे और शरीर में कुछ सेकंड के लिए जान सी निकल गयी जिसके बाद सुलतान ने उसे फिर से पलट दिया …और उसकी मुट्ठ और उसके पानी में भीगी कच्ची उतार दी और उसकी छूट पैर लग गया …चूसै करने …उसके दोनों हाथ उसकी मस्त और फुल्ली हुई गांड को मसल रहे थे ..और होटों से छूट की चूसै सराह को और गरम करने लगी ….उसकी गरम दुबारा से बढ़ने लगी थी…
जिसपर सराह भी दुबारा से रेडी होने लगी …और जब उसे मज़ा आने लगा तोह उसने ज़ोर देकर सुल्तान को अपनी छूट से हटाया …
सुल्तान ने उसकी आँखों में देखा एक शोख और लाल रंग का चुदाई का नशा उसकी आँखों में तेर रहा था …उसकी आँखों में चुदाई की एक मांग थी …जिसे सुल्तान ने समझ लिए …पैर फिर उसका लैंड भी अब बेचैनी के मारे पूरा सिद्ध खड़ा था …जो इस बात को साबित करता था की सुल्तान
भी चुदाई के लिए कितना बेचैन है , उसने बीएड ? से उठने का फैसला किया …और उठा अपने हर एक कपडे को 1 मिनट से काम के रिकॉर्ड टाइम में अलग किया और सिद्ध बड़ा बीएड पैर जहाँ सराह की बेचैन छूट उसका इंतज़ार कर रही थी…
सराह ने उसे अपने उप्पेर खींच और उसके लैंड को जोकि ाचा लम्बा और मोटा रहा होगा कोई 7.5’ लम्बा और 5’ मोटा सिद्ध उसने अपनी छूट पैर लगाया और सुल्तान से शायद अब रुकना मुश्किल था पैर सराह अभी लैंड को अपनी छूट पैर उप्पेर निश्च फिर कर उसे चिकना करना छह रही थी ..पैर सुल्तान ने अचानक से उसके हाथ ने जब छूट पैर उप्पेर निचे होते हुए एक झटका दिया …जिसमे सराह की छूट में सुल्तान का लैंड सूखा hi घुस गया …
जिसपर सराह की चीख निकल gayi…””haay ाआमईईई मर दलायआ ….. “
सुल्तान “ अभी मारा कहाँ है अभी तोह मरना बाकी है ….”और उसके होटों को अपने होतोओं की ज़द में ले लिया और लगा तूफानी झटके देने ..
जिसपर सराह की छूट में सूखा लैंड घुसने से उसकी छूट में अलग सा दर्द हो चूका था पैर धीरे धीरे उसकी छूट से बेहटा पानी और सुलतान के तेज़ झटके …जिनके चलते उसकी सुखी छूट पानी छोड़ने लगी और अब उससे बे हिसाब मज़ा मिलने लगा उसकी जाँघे उठने लगी …जिसके बाद सुल्तान ने उसकी टाँगे अपने कंधे पैर रख ली जिसके बाद उसका लैंड और अंदर तक जाने लगा और सराह को और मज़ा मिलने लगा …
उसके हाथ सुल्तान की पीठ पैर थे सुल्तान जब भी किश तोड़कर साँस लेता सराह के मुँह से यही निकलता “”
“”है “””आअह्ह”” ोर्ड्र्र ज़ोर”””””” sesssssssseee”’’’’’’’hayyyyyyyyyy’”
Oroooorrrrrrrrrrr ज़ोररररररररर seeeeeeeeeeee””
सुल्तान कैद हेक और तेज़ हो चले थे …जिनमे अब तक सराह दो बार पानी छोड़ चुकी थी और तीसरी बार के लिए त्यार थी …सुल्तान भी झड़ने के करीब था ….
Sultan””haay मैं आने वाला हूँ बोलो बेगम पानी कहा चाहिए छूट मुँह या चुकी …बोलो ???”
सराह “आज छूट में चाहिए और ज़ोरररररररर सीईई आहाहा ! इसके साथ hi सुल्तान ने अपना पानी सराह की छूट में अपने आखिरी झटकों के साथ उत्तर दिया ….और कसकर सराह को अपने सिनने से लगा लिया …
सुल्तान के माल उसके पानी जो सराह की छूट और उसके कोख में लग रहा था …उससे सराह का भी ज़बरदस्त ओर्गास्म हुआ एक नहीं कई (मल्टीपल) ओर्गास्म हुए जिसमे दोनों एक दूसरे को अपने से कसकर जकड़े हुए ओर्गास्म का मज़ा ले रहे थे …और जब ओर्गास्म ख़तम हुआ तोह सराह और सुल्तान एक दूरसे से चिपके हुए सो गए थकन के चलते …कोई एक घंटा के बाद सराह की आंख खुली मुट्ठ के प्रेशर से पैर सुल्तान अपनी दोनों बाँहों में उसे कैसे उसकी चूचियों में मुँह दबाये सो रहा था …जिसे देखकर सराह के चेहरे पैर एक अलग सी मुस्कराहट फ़ैल गयी …पैर मुटना भी ज़रूरी था …सो जैसे hi हु हिल्ली नीड में hi सुल्तान हिला और बंद आखों के बाद भी उसके होठ सिद्ध उसकी चूचियों पैर लग गए …
जिसपर सराह “ है नींद मैं भी चैन नहीं है …देखो कैसे चूस रहे हैं …है पता नहीं अपनी अम्मी को भी कितना चूसा होगा इन्होने बचपन में ….”
सुल्तान “ बेगम अम्मी को जितना चूसा सो चूसा पैर अभी तुम्हे चूसना है …क्यों कोई प्रॉब्लम..”
सराह “ है आप जाग रहे हैं हटिये न मुझे पिशाब जाना है ,,,”
सुल्तान “तोह जाओ मुट्ठ लो “
सराह “ या मौल्ला !!!!! आप कमसे काम पिशाब hi बोल देते ..मुट्ठ कितना गन्दा अल्फ़ाज़ है.. ची !”
सुल्तान “ बेगम हम तोह मुट्ठ hi बोलेंगे जो चाहे कर लो ..”
सराह “ आपको जो बोलना है बोलिये पैर मुझे जाने दिज्ये ..”
सुल्तान भी अब बहस नहीं करता और सराह की मोती गांड को थिरकते हुए जाते देखता है अपने बैडरूम के जॉइंट आत्ताच बाथरूम में और कुछ सोचने लगता है ..वह अपनी सोच में डूबा हुआ नंगा hi बीएड ? लेता हुआ अपने रूम की चाट को देखता हुआ अपनी सोच में गम था …
उसकी सोच को थोड़ी देर में तोडा उसकी बीवी सराह ने …”क्या हुआ आप कहाँ खोये हैं…”
सुलतान “तुम जानती हो न मेरा क्या काम है …और मैं क्यों परेशान हूँ ….उपपरवाला जनता है आजकल कितनी टेंशन है …और शायद किसी दिन पता नहीं क्या हो जाए …???”
सराह “ ऐसी बात न कीजिये आपको उस मौल्ला का वास्ता …आपको मेरी कसम ऐसी मनहूस बात न करो …जानती हूँ आप पैर कितनी टेंशन हैं …और समझती भी हूँ …बस आप अल्लाह पैर भरोसा रखे ,,उसकी नेमत सब पैर है …और मैंने कभी आपको कुछ कहा है क्या ….आप से सिर्फ गिना चुना मिल पाती हूँ इस दुनिआ मैं आपकी जायज़ बीवी होने के बाद भी इस दूर farm-house ? पैर अकेले कैद हूँ पैर आपके साथ हूँ न …”
सुल्तान “ बेगम तुम में मेरी जान बस्ती है …खुद पैर मैं कोई भी जख्म बर्दास्त कर सकता हूँ पैर तुम पैर एक खरोच भी nahi…aag ? लगा दूंगा साड़ी दुनिआ को …अगर किसी ने तुम्हें छुआ तोह ..!!!”
सराह “ मेरे शोहर मुझे भला कोण छू सकता है आपकी इज़ाज़त के …और मुझे खुद बर्दास्त नहीं की किसी और किन ाज़ार भी पड़े मुझपे …ाचा अब यह सब छोडें और त्यार हो jayen…aapko दिन रहते निकलना भी है…”
सुल्तान नंगी सराह को अपने उप्पेर खींचते हुए …”बेगम दिन ख़तम होने में अभी कुछ टाइम बाकी है और तब तक अपने शोहर को थोड़ा और प्यार कर लेने दो साथ में अछि सी चुदाई भी …” इसके साथ hi सुल्तान ने उसकी फुल्ली गांड पैर अपने हाथ चलने सुरु कर दिए और उसकी ऊँगली ….
इस्स्स्सस्छ्हःहःहः!!!!! AAAAAAAhhhhhhhhhhhhh! एक सिसकी निकली सराह की …
“”आआअह्हह्ह्ह्हह !!! आपको कितनी बार कहा है न की वहां हाथ न लगाया कीजिए …मैं त्यार नहीं हूँ उसके लिए …और वैसे भी वहां से सिर्फ गंध निकलता है …”
हाँ सुल्तान की ऊँगली सराह की गांड में थी जो अंडर ता हलचल मज़ाये हुए थी ..पैर सराह ने आजतक सुल्तान को अपनी गांड से दूर रखा था ….क्युकी गांड मरवाने के नाम पैर सराह की गांड पहले hi फैट जाती thi…per सुल्तान को हु उसकी भरपाई लोढ़ा चूसकर कर दिया करती थी…
खैर उसके बाद सुल्तान ने भी जोर नहीं दिया और क्युकी हु भी सराह के जवाब जनता था …सो उसने थोड़ा और देर उसकी गांड को अपनी उंगली से कुरेदा और उसे गरम किया …और एक और राउंड चुदाई का चला जिसके बाद दिन भी ढलने लगा था …
सुल्तान भी चुदाई और उसके बाद अचे से फ्रेश होकर निकल farm-house ? से और चल पड़ा अपनी मीटिंग प्लेस पैर उसका इंतज़ार उसका पार्टर कर रहा था…
पैर बिज़नेस में कब कोनसा पार्टनर कब अपने पुराने पार्टनर को बदलने का मूड बना ले कहना मुश्किल है …और बिज़नेस में कब कोण किस साइड आजाये यह तोह सिर्फ वही बता सकता है …जिसको आगे प्रॉफिट नज़र आये ….
खैर आज सुल्तान हस्सान पठान की किस्मत को भी शायद कुछ और hi मंज़ूर था …या शायद उसके पार्टनर की प्लानिंग उसके खिलाफ थी …
उसने सुल्तान को भरी मार्किट में बुलवाया था ….जहाँ सुल्तान अपनी कार ? से पुहंच गया था ..पैर आगे के तंग रस्ते के चलते सुल्तान अब पैदल चल दिया सामने के ढाबे टाइप होटल के छोटे से बालकनी से उसके पार्टनर ने हाथ हिल्या ..और आगे आने का इशारा किया …
और उसके हाथ हिलाते hi सुल्तान ने अपने पुराने पार्टनर गुलफाम कुरैशी को देखकर एक मुस्कराहट के साथ आगे बढ़ने लगा …
पैर आज सुल्तान को यह नहीं पता था …की आगे आने का हु इशारा सिर्फ उसी के लिए hi नहीं था …किसी और के लिए भी था …उसके हाथ हिलने के साथ hi सुल्तान का ध्यान तोह गुलफाम पैर था सो आगे बढ़ने लगा उस होटल टाइप ढाबे की तरफ ….रास्ता क्युकी मार्किट थी तोह तंग था …भीड़ भाड़ अचे से मार्किट में थी …उस पैर आज संडे का दिन भीड़ और भरी थी मार्किट में शायद आज सभी अपनी पसंद का सामान निकल आये थे लेने …
खैर सुल्तान आगे बाद रहा था पैर उसके साथ hi बाद रही थी मौत उसके करीब दो लोगो की शकल में जिनके हाथ में अलग किस्म के चाकू थे … उनको चाक़ू कहना गलत होगा ….वह एक गुप्ति टाइप के कुछ थे (गुप्ति या सुअन वह होगा जो आपने शायद कभी बर्फ यानि आइस तोड़ने वाले को देखा होगा, जो पतला और बहुत नुकीला और शार्प होता है…)
तोह आप समझ सकते है हैं गुप्ति क्या है वही लिए दोनों आगे बाद रहे थे अलग अलग साइड से ताकि अगर एक भी चुके तोह दूसरा अपना काम कर सके ….
सुल्तान कुछ hi कदम चला होगा की टककककक! की आवाज़ आयी सुल्तान को …..
और सुल्तान ने देखा ठीक उसके कमर के पास एक लड़का …एक सब्ज़ी तोलने वाले बर्तन सी एक चाक़ू को रोके हुए है …एक लड़का उसके और उस चाक़ू के बिच में उस बर्तन को अदाए हुए था …सुल्तान के लिए इतना काफी था …उसे अचे से समझ आ गया था की उसकी फील्डिंग सेट है आज यहाँ उसको बुलाना और मरवा देना यही इस मीटिंग का मक़सद है …वर्ण सुल्तान पल में कहाँ पल में कहाँ ..सुल्तान अपने धंदे बोले तोह बिज़नेस के चलते कहीं भी रुका नहीं करता था …क्युकी उसके दुश्मन भी सुल्तान को कब कहाँ लुढ़का दें यही वजह थी सुल्तान पल में कहीं पल में कहीं और निकल जाया करता था….
खैर उसकी कमर के पास उस लड़के से रुकी हुई चाक़ू देखकर सुल्तान फ़ौरन हरकरत में आज चूका था उसने दूसरी तरफ देखा तोह उसे दूसरा शख्स भी नज़र आ गया जिसके हाथ में चाक़ू था …और उसके बिलकुल नज़दीक था पैर उसके साथी की चूक ने उसको थोड़ा रुकने पैर मज़बूर कर दिया था …क्युकी उसे शायद बता दिया गया था …की सुल्तान अगर बचा तोह तुमको जिन्दा नहीं छोड़ने वाला …
सुल्तान को उस लड़के की फ़िक्र भी थी क्युकी एक अनजान फ़रिश्ते ने उसकी ज़िन्दगी और उम्र आज और बड़ा दी thi…per सुल्तान कुछ कर पता उससे पहले लड़के के हाथ और पेअर बिजली की रफतार से उस चाक़ू वाले पैर बरसने लगे …सुल्तान अब हैरत में था …
उसके साथ उसके सामने खड़ा हु चाक़ू वाला शक़श भी क्युकी खली हाथ होते हुए भी उस लड़के के गुणसे (पंच ?) और लात (किक ) से हु हथियार होते हुए भी कुछ नहीं कर प् रहा था …सुल्तान और आदमी जो सुल्तान को मरने आया था …दोनों hi एक अनजान से तमाशे में फास गए थे जिसमे एक कातिल था जिसका काम पैसे के लिए किसी को मरना था और सामने एक लड़का था जो खाली हाथ था पैर उसकी फुर्ती और गज़ब के डाव पेंच के चलते हु आदमी उसे छू तक नहीं प् रहा था ….
की अचानक उस लड़के ने एक डबल फ्लिप के साथ उसके सामने खड़े चाकू वाले के सर पैर एक ज़ोरदार किक जड़ दी जिसके पड़ते hi हु आदमी …बेहोश हो गया …जिसके बाद हु लड़का मुदा और सुल्तान की और आने लगा ….
सुल्तान और हु दूसरा किलर उसके साथी बेहोश होते hi अचनाक नीड से जगे …पैर हु किलर कुछ करता उससे पहले hi सुल्तान ने उसके हाथ से हु चाकू चीन लिया और सुल्तान ने उसके हाथ से हु चाक़ू खिंच लिया और उसी के गले पैर लगा दिया …
सुल्तान ”सिर्फ एक बार पूछूंगा किसने तुम्हें यहाँ बेह्जा hai..ek बात और तू बता या मत बता मरेगा तू जरूर पैर तेरे घर से भी कोई नहीं बचेगा यह सुल्तान हस्सान पठान का वडा है ..” और सुल्तान ने धीरे उसके गले के लेफ्ट साइड से हु चाक़ू थोड़ा अंदर चुभाया जिस के बाद उसका खून निकलने लगा …
“गुलफाम कुरैशी ने भेजा है मर्दो पैर घरवालों को कुछ मत करना …उनके लिए hi यह करने आया था …”
सुल्तान कुछ करता उससे पहले hi उस लड़के ने न का इशारा किया ….सुल्तान ने देखा और छोड़ दिया उसे …
सुल्तान “ जा निकल जा आज के बाद कभी तेरे हाथ में चाक़ू दिखा या कभी तुझे गलत करते देखा तोह तेरा नाम और तेरा खानदान दोनों में से कोई नहीं होगा ….यह पहली बार है सुल्तान हाथ में आये किसी दुश्मन को जिन्दा छोड़ रहा है …निकल ले “
हु उठा और अपने गेरे साथ को लेकर हवा की तरह निकल गया ….
उसके बाद सुल्तान ने मोबाइल निकला और किसी से बात की…
वहां मार्किट में इस वक़्त एक कर्फ्यू सा लगा चूका था …हु तोह तभी उतना हिस्सा कहली हो चूका था …जब उस लड़के ने उस किलर को रोका था सुल्तान को चाकू मरने से …उसके बाद सुल्तान ने जब उसके बाद दूसरे किलर के गले पैर चाक़ू लगया तोह आस पास के लोग भाग गए थे…
सुल्तान ने मोबाइल पैर बात ख़तम की ..उस लड़के की तरफ बड़ा ..
सुल्तान “बहुत बहादुर हो तुमने आज सुलतान हस्सान पठान की जान बचा कर उसे खरीद लिया है …दिल से सुकरिया बचे …तुम्हारा एहसान है मुझपे ..”
लड़का “कोई एहसान नहीं रहा मैंने आपको बचा और आपने सिर्फ मेरे कहने पैर अपने मारने वाले को छोड़ दिया एहसान बराबर हुआ ..वैसे उसने आपके नाम की जिससे पेमेंट ली थी हु अभी शायद दुबारा कुछ करे अपना ध्यान रखना आप..”
सुल्तान “ नहीं हु कुछ नहीं कर सकेगा हु यहीं था ..जिसने सुपारी दी थी मरने की ..पैर अब तक उसकी कार ? में बम लग चूका होगा या उसको मेरा शूटर देख लेगा क्युकी यहाँ से तोह हु कबका निकल चूका होगा पैर आगे कुछ करने के लिए मेरा पार्टनर जिन्दा नहीं बचेगा …क्युकी दुश्मन को एक बार बक्शा जा सकता है पैर गद्दार दोस्त को नहीं…”
उस लड़के के चेहरे पैर गद्दार दोस्त का नाम आते hi एक अज़्ज़ेब सी नफरत उभर आयी थी जिसे सुल्तान ने अचे से देख लिया ..
सुल्तान “लगता है किसी बहुत करीबी से धोखा खा चुके हो बचे …तुम भी क्युकी जो दर्द तुम आज देख रहे हो हु दर्द मैं कई बार झेल चूका हूँ …”
Ladka”haan कुछ ऐसा hi है जनाब..
“जो करीब होता है दिल के , जिस से दिल मांगता है हर पल सुकून.
धोखा देना काम है इस दुनिआ का कर देते हैं उसी दिल का खून..”
सुल्तान “लगता है कोई गहरा जख्म मिला है किसी करीबी से ..अरे मैं सबसे ज़रूरी बात तोह बुल hi गया तुम्हारा नाम क्या है ..??”
लड़का “ मानव सिंह नाम है मेरा और मेरे अपने मुझे मनु कहते हैं..”
सुल्तान “ मनु ाचा लगा तुमसे मिलकर आज का एहसान तोह उतर नहीं सकता पैर आज के बाद सुल्तान की जान और खुद सुलतान तुम्हारे नाम है …”
मनु “अरे आप बड़े है आपको निचा दिखाकर मैं चैन से कैसे बेथ सकता hun..acha अगर आप कुछ करना चाहते तोह मुझे कुछ सीखा देना ..ok “
सुल्तान “दोने मनु “ उसके साथ हाथ मिलकर दोनों चल दिए एक साथ क्युकी सुल्तान मनु के बारे में और जानना चाहता था …और दोनों चल दिए मार्किट से बहार ? में सुल्तान के अड्डे की तरफ …
जहाँ पहुंच कर दोनों ने चाय पैर बातें होने लगी…?
सुल्तान की एंट्री मनु की ज़िन्दगी में क्या रंग लेन वाली थी :hunter:…or मनु का एहसान सुल्तान कैसे चुकाएगा :beaten:..iska जवाब मनु की किस्मत या टाइम के पास hi होगा.. :हिंट:
मेगा अपडेट
बचपन की यादें
उसके बाद स्कूल उसके बाद टूशन और फिर बिज़नेस की ट्रेनिंग बोले तोह मनु एक बस्सी पर्सन की तरह से बस्सी लाइफ जी रहा था … उस पैर सुनील की डाइट पता नहीं kon-konsi अलग अलग हर्ब्स मनु को देता था की मनु के चेहरे और बॉडी में एक अलग सी चमक आने लगी थी …अब मनु भी खुद को एक अलग एनर्जेटिक पर्सन फील करता था की एक दिन और कुछ ऐसा हुआ जो मनु के लिए और बहुत कुछ चेंज ले आया …
और क्या हुआ ऐसा और क्या चेंज आया मनु की लाइफ में …
अब आगे ........
मनु की लाइफ अब एक रेगुलर रूटीन में बाँट चुकी थी …उसी के साथ उसकी बस्सी लाइफ के साथ उसकी प्रोग्रेस भी बढ़ती जा रही थी उसने सुनील और मास्टर के साथ एक ऐसी चीज़ें सिकने शुरू कर दिया था ….जो शायद मनु ने किसी मूवी में भी नहीं देखि thi…..indian martial-arts के साथ वर्ल्ड क्लास मार्टिकल आर्ट्स ..और अलग अलग फाइटिंग स्टाइल अब मनु को सीखने लगे थे मास्टर और सुनील गुरु जी…
मास्टर ने अब शबनम को अपने फार्म हाउस ? में बुलाना शुरू कर दिया था क्युकी कहीं न कहीं मनु के चलते हु नहीं चाहते थे की मनु और शबनम का सामना हो और मनु को उन्हें शबनम के बारे में बताना पड़े सो मास्टर उससे बहार मिलकरते थे …मास्टर के शराब छोड़ने की सबसे ज्यादा खुसी शबनम को हुई थी ..उसने मास्टर को उस दिन दिल से खुश किया …बोले तोह उस दिन गज़ब चुदाई हुई दोनों में चुदाई के बाद मास्टर ने शबनम को शराब छोड़ने और मनु के बारे में बताया जिसपर शबनम ने मनु को दिल से दुआएं दी की जो काम हु न कर सकीय हु मनु ने कर दिया …जिसपर उसने मनु से मिलने को कहा तोह मास्टर ने उसे साफ़ कहा की टाइम आने पैर हु मनु से मिल सकेगी ..
मास्टर खुद एक फाइटर थे और बहुत hi बेहतरीन फाइटर रह चुके थे ..जिनका फाइटिंग फील्ड में बड़ी रेस्पेक्ट से नाम लिया जाता था आज भी …मास्टर ने शादी से पहले साड़ी फाइट बंद कर दी थी पैर आज भी लोग उनको इज़्ज़त से जानते थे …उस पैर मास्टर का कामयाब बिज़नेस और रईस होना सो मास्टर के बेहिसाब कांटेक्ट थे ..लोग खुद सामने से उनसे कांटेक्ट बनाना पसंद करते थे …जिनका फ़ायदा मनु को हुआ..
मास्टर के ओल्ड कांटेक्ट के चलते मनु ने बहुत साड़ी डार्क फाइट (हु फाइट जो बड़े लेवल पैर होती हैं और बड़े लेवल पैर ओर्गनइजे होती है पैर साडी दुनिआ से छुपकर मतलब illegal’s वे मैं जिसमे fighter’s की जान तक चली जाया करती थी क्युकी इललीगल होती हैं ऐसी फाइट्स तोह पैसा बेहिसाब मिलता है हर फिघ्टर्स को पैर उसके साथ जान का भी जोखिम होता है ..)
उधर अजय अब मनु के बस्सी सचेडूले के चलते अब पुष्पी के हवाले था …उसका भी ग्रोथ होने लगा था …फिजिकली और मेंटली भी ..और क्युकी उसका बड़ा भाई अब अपने शरीर पैर ध्यान दे रहा था तोह …अजय भला भाई को यहां कॉपी कैसे न करता …उसने भी भाई की देखा देखि एक्सरसाइज पैर धयान बन आलिया …और कहीं न कहीं कार्टूनों से दुरी बना ली थी पैर उसका कार्टून प्रेम इतना जल्दी कैसे छूट जाता भला पैर हाँ यह जरूर था की पहले जहां उसका रात दिन कार्टून का चैनल टीवी पैर फिक्स था वहीँ अब उसने भाई की ट्रेनिंग को देखकर ववे देखना भी शुरू कर दिया था ..वह हर रोज़ शाम को अपने भाई से आजकी फाइट पैर बात करता जिसपर मनु उसे कहता की …”देख फाइट देखने को मन नहीं कर रहा हूँ …पैर पड़े पैर इसका असर नहीं पड़ना चाहिए ..तेरी बाकी अगर तुझे सीखना है तोह मैं हूँ न …”
अजय “भैया ी लव ु ुर थे बेस्ट बीआरओ ऑफ़ थे वर्ल्ड …अब मैं भी फाइट सीखूंगा yaaaahoooooo!!!!..dekhna भैया मैं भी आगे से ववे में आऊंगा …”
अजय की बातें सुनकर मनु भी उसके ववे में जाने की बात सुनकर हंस पड़ता ….पैर मनु ने जब से खुद फाइट सीखनी शुरू कर दी थी …तोह उसने जय को भी ट्रैन करना शुरू कर दिया था ….जिसके पीछे उसका दिमाग था की अजय को पता नहीं आगे कैसा टाइम देखने को मिले और आएगी अजय पता नहीं क्या करे और कैसे हैंडल करे सो मनु चाहता था की अजय फुल्ली प्रेपर रहे हर फाइट जो ज़िन्दगी मैं उसे करनी हो उसके लिए …
उधर निशा की कोई भी खबर नहीं थी पैर मंजू के फादर की तबियत के चलते उसका वहीँ रेहन फिक्स था …पैर मंजू ने निशा से एक वडा किया की मनु की खबर उसे मिल पायेगी ….तोह मंजू ने एक फोटोग्राफर को हिरे किया की हु वीक में एक बार या महीने में जितना हो सके मनु की पिक्चर कलेक्शन करके नई ज़ीलैण्ड में उसके पास भेज दे …जिससे निशा शांत रह सके पैर निशा का दिल कहाँ सनटैन था कभी कभी हु अपने माँ के गले लगकर मनु के नाम पैर जीखोलकर खूब आंसू भाटी ….और मनु की सलामती की दुआ मांगती ..
पैर मनु इन सब से दूर अपनी दुनिआ मैं रात दिन की ट्रेनिंग में अलग- अलग फाइटिंग स्टाइल सिखने में बस्सी हो गया था उसे निशा के नाम तक से गुस्सा और नफ़रत हो चली thi…nisha hi क्या निशा के बाद हु बात बिहषक करता था लड़कियों से पैर उसको हर लड़की से मन hi मन निशा के धोखे के चलते नफ़रत हो गयी thi.woh किसी भी लड़की के करीब जाना या किसी लड़की को अपने करीब तक नहीं आने देना चाहता था …उसे प्यार के नाम से गुस्सा आ जाता था …
इन सब के बिच जय चाँद ने एक बार भी राजिंदर के घर जाकर कोई khair-khabar लेने की कोशिश नहीं की क्युकी उसके दिल मैं था की मनु की मौत हो चुकी होगी पैर मनु अभी जिन्दा था …उससे बड़ी हैरानी हुई की राजिंदर ने अभी तक मनु की मौत को लेकर उसे यानि जैचंद को कोई भी खबर नहीं दी ..जिसके चलते उसकी टेंशन बाद चुकी थी की अगर मनु मर गया है ..तोह खबर क्यों नहीं आयी …पैर मनु ने उस दिन के बाद भी अपने maa-baap से जैचंद यानि चाचा का कोई ज़िकर नहीं किया tha…kyuki उसके लिए माँ -बाप की टेंशन ज्यादा ज़रूरी थी बजाये चाचा की धोखेबाज़ी के और हु नहीं चाहता था की हु अपने maa-baap को खुद पैर हुए उस्मान के हमले के बारे में बता कर उन्हें टेंशन दे जिसके बाद उसके maa-baap उसका घर से निकलना बंद कर दें सो उसने कुछ नहीं बताया न हमले के बारे में न चाचा का धोखा …हाँ उसने अपने बाप राजिंदर को यह ज़रूर बता दिया की उसे फाइटिंग में रूचि (दिलचस्पी )है जिसपर राजिंदर ने उसका साथ दिया जैसा उसने वडा किया था ,,,
जिसपर उसकी माँ सुमित्रा ने काफी हंगामा किया की “बचा अगर फाइट सीखेगा तोह रात दिन झगडे करेगा और फ़ालतू में बदनामी होगी और आगे पता नहीं क्या करे …”हु एक माँ की तरह सोच रही थी जिसको अपने बचे की फ़िक्र होती है …उसने मनु को भी बहुत मनाया .
जिसपर राजिंदर के एक सवाल ने सुमित्रा को सही समझा दिया ..”एक बात बताओ क्या तुमको अपनी परवरिश पैर यकीं नहीं है ??…क्या अपने बेटे पैर यकीं नहीं है …आगे जाकर क्या टाइम ागेगा क्या पता क्या तुम नहीं चाहती हो हमारा बीटा दुनिआ की हर लड़ाई के लिए त्यार हो ??? क्या तुम चाहती हो तुम्हारा बीटा क्यार बने ???क्या हमारे बेटे की हार बर्दास्त होगी तुम्हे ???
सुमित्रा “ आपने सोच भी कैसे लिया की मैं अपने मनु का साथ नहीं दूंगी ….और मुझे उसकी हार कैसे बर्दास्त हो सकती है भला ???बीटा है मेरा गुरुर है …उसकी जीत में मेरी आपकी और हमारी जीत hai…thik है जा मनु जो सीखना है सिख मैं तेरे साथ हूँ पैर अगर किसी मासूम को जुल्म में फसे हुए देखे तोह उसकी मदद जरूर करना …बस इतनी बात तेरी माँ कह रही है मान लेना ..”
मनु “ok मम्मी जो आप कहो जब लगेगा की कोई मासूम जुल्म में फसा हुआ है और मैं उसकी हेल्प कर सकता हूँ तोह मैं उसकी मदद जरूर करूँगा अपने मनु पैर विश्वास रखिये जो कर रहा हूँ सोच समझकर कर रहा हूँ ..ी लव ु मम्मी …ी लव ु पापा..”
और मटर सोल्वे होगया जिसके बाद मनु आज़ाद था फाइट सिखने के लिए …इन सब मैं अजय का फ्री में फ़ायदा हो चूका था …भाई बेस्ट ट्रेनिंग ले रहा था ..अचे और बेस्ट ट्रेनर्स और बेस्ट डिएटिट्यां से जिसका फ़ायदा उसे मनु ने ट्रेनिंग के रूप मैं देना शुरू कर दिया था …और अजय की जब अछि डाइट की बात आयी तोह मनु ने सुनील से हेल्प मांगी तोह सुनील ने पूछा तोह मनु ने सुच बता दिया की अजय को ट्रेनिंग दे रहा है …जिस पैर सुनील ने थोड़ी देर सोचा और मनु ने भी अपनी प्लानिंग बताई जोकि आगे आप सभी को भी पता चलेगी जिसपर सुनील ने उसे भी ट्रेनिंग में शामिल करने को कहा ….पैर
मनु ने यह कहकर मन कर दिया की “अजय अभी छोटा है अगर यहां के काळा काम और काली फाइट देखेगा तोह उसका दिमाग पता नहीं कैसे रियेक्ट करे सो उसे घर पैर मैं खुद hi ट्रेनिंग दूंगा ताकि उसके दिमाग को भी गाइड कर sakun…aap सिर्फ उसकी डाइट में हेल्प कर दिज्ये …”
सुनील “बीटा तुम सुच में बहुत ाचा सोचते हो कोई बात नहीं इसमें मई तुम्हारे साथ हूँ …”
जिसके बाद अजय भी सही शेप में आने लगा था सो मनु समझ गया की अछि डाइट से क्या हेल्प होती है …
उसका ध्यान डाइट के नाम आते hi अपनी दूसरी माँ नीता मम पैर गया …मनु ने उनके बारे में सोचा ..जिनका फिगर जीरो था हाँ भाई जीरो बोले तोह बादवाला जीरो मनु ने अब प्यार से कर काम पैर लगा दिया और एक अलग डाइट चार्ट बनाया जिसपर बेचारी मनु से प्यार के चलते झख मारकर काम करने लगी thi…jisper मनु की सख्ती और कभी भी बात न करने की बात के चलते उनका बहार का खाना काम हो गया था …क्युकी हु अकेली रहती थी सो उनकी आदत कुछ न कुछ खाने की थी जो अधिकतर चीट मील (नॉट हेअल्थी फ़ूड) होता था जिसे एक दम से छोड़ देना खुद उनके बस मैं भी नहीं था ...क्युकी न कोई रोक थी न कोई रोकनेवाला फिर भी कोशिश जारी थी बेचारी नीता की जिसमे सिर्फ कुछ hi फर्क आया था …इन्ही सब मैं कुछ महीने बिट चुके थे …
कहीं किसी जगह एक घर में एक मस्त से फिगर की मस्त गांड और गज़ब सी चुकी वाली कमाल की टॉप क्लास औरत एपनिया आप को आईएनए यानि मिरर में देख रही थी …
खुद को सवार रही thi….”sajna है मुझे सजाना के लिए ,,,” यह गाना उसके लिपस्टिक लगे शोख होटोंन पैर था …
की पीछे से कोई अचानक आया ..और उसकी आँखें बंद कर दी अपने हाथूं से …
औरत “है आगये आप …आपके लिए hi तोह मेरी जान यह आपकी बेगम सजी है और आप हैं की अभी भी पहचान कोण खेल रहे हैं,,,,,,,,,,, ारे मेरी जान आपके हथून को न पहचानू ऐसे बेगम नहीं हूँ मैं मेरे शोहर मेरे रूह के मालिक …अब सामने आईएनए .बहुत हुई यह जुदाई …”
उस शक़श ने उसकी आँखों से हाथ हटाया और सामने आज्ञा उसके “बेगम कसम परवरदिगार की उसकी बनायीं अज़ीम be-misal नेमत हो तुम मेरे लिए यह “”सुलतान हस्सान पठान”” तुम्हारा शोहर तुम्हे दिलो जान से चाहता है ….अब और न तडपाओ मेरी जान .. सराह बस आ जा और न तड़पा ..”
सराह “ आएयेह न “”
सुल्तान ने सराह को खड़ा किया और उसे अपने साइन से लगा लिया जिसके बाद उसके हाथ सराह के जिस्म पैर नाचने लगे …सराह का फिगर अपने में गज़ब था उसका कद 5’ 8’’ था उसका फिगर 38’ 30’ 42’ था जिसमे उसकी मोती चुकी और उसकी उभरी गांड किसी का भी लैंड खड़ा कर दे …उसका शोहर “”सुल्तान हस्सान पठान” जिसका कद 6’ और बॉडी का आईडिया आपको दे देता हूँ 50’ की चेस्ट और मज़बूत देसी शरीर जिको देखकर कोई भी अंदाज़ा लगा सकता था की यह शक़श पका कोई देसी पहलवान टाइप होगा …
खैर अब सुल्तान के हाथ सराह की उभरी गांड पैर चल रहे थे जो उसने मसलनि शुरू कर दी थी ….जिसके चलते सराह के होतोओं से एक अलग सी सिसकी फूटने लगी थिस…..
इस्स्स्सस्स! जिसको सुल्तान ने पूरा भी नहीं निकल ने दिया उसके लाल सुर्ख होतोओं से सुल्तान ने उसके होटों पैर अपने होठ लगा कर उसकी लाल लिपस्टिक को खाना शुरू कर दिया ….
जिसके चलते मचलती सराह के हाथ सुल्तान के कमर और उसके सर के पीछे चलते हुए अपनी मस्ती जाहिर करने लगे …
एक लम्बी किश के बाद दोनों ने एक दूसरे की आँखों में देखा सराह के होठों की साडी लिपस्टिक कहीं की कहीं फ़ैल चुकी थी …जिसे देखकर सुल्तान ने अपने होटों पैर सराह की लिपस्टिक को महसूस करके खुद की जीभ से चाट कर kaha”haay बेगम आज चीर्य का फ्लेवर है …क्या बात है कल वैनिला चाहिए मुझे..”
सराह “ हुज़ूर आपकी कनीज़ आपका हुकम जरूर मानेगी …क्युकी बीवी के होटों पैर शोहर का हक़ है …सो उसकी लिपस्टिक पैर भी आपका हक़्क़ है …पैर आपका यह शॉक मेरे समझ से परे है अलग तरह का लिपस्टिक और उसका फ्लेवर आप hi जानो मेरे लिए तोह इतना काफी है की मेरे सरताज को मैं अपने होटों के जैम पीला देती हूँ…”
सुल्तान “ बेगम हर रोज़ लिपस्टिक का शॉक मेरा है मुझे तुम्हारे इन हसीं होटों से लिपस्टिक चूसने में जो मज़ा मिलता है ..वह सिर्फ मैं जानता हूँ यह मेरा हक़ है सो तुम सिर्फ लिपस्टिक लगया करो उसे चूसने का काम मेरा है हु मुझपर छोड़ do…or अब मुझे चूसने दो इन होटों की लाली ..””
“हम्म्म!” सराह कुछ बोलती उससे पहले hi उसके होठ अब उसके शोहर की गिरफ्त में थे …
सुल्तान ने उसके होठ चूसकर साड़ी लिपस्टिक चूस ली थी ..जिसके बाद उसका हाथ सिद्ध पूछा उसकी मोती और फुल्ली हुई चूचियों पैर …
और उन पैर सुलतान ने ज़रा भी रेहम नहीं किया खूब ज़ोर शोर से मसलना शुरू कर दिया जिसपर सराह की हालत ख़राब होने लगी उसने किश तोड़कर कहा” थोड़ा आराम से कर लो कहीं भागी तोह नहीं जा रही हूँ आपकी हूँ और आपकी hi रहूंगी बस थोड़ा ज़ोर काम लगाओ न है!!”
सुल्तान “तुम सिर्फ अपना मज़ा लो बेगम तुम्हारी इन बैलन को ज़ोर से न मसलन तोह मज़ा नहीं अत इन पैर मुझसे कोई रेहम नहीं हो सकता …सो या तोह साहू या चिल्लाओ …”
और सराह कुछ कहती पैर सुलतान ने कोई मौका नहीं दिया उसे फिर से होठों को चूसने लगा जिसपर अब कहीं न कहीं सराह को अब मस्ती चढ़ने लगी थी ….सुलतान का चूचियों को बेदर्दी से मसलना और उसके बाद उसके होठों की चूसै सिद्ध असर उसकी छूट पैर पड़ने लगा …उसकी छूट से पानी रिसने लगा था …पैर सुल्तान ने चूस चूस के उसके होठों को लाल कर दिया था और साथ hi उसकी चूचियां भी खुद मसल कर रख दी थी …सराह को इनसब की आदत हो चुकी थी क्युकी सुल्तान की यह आदत ने शुरुवात में उसकी चीखें निकल दी थी …उसकी चुकी पहले 34 की हुआ करती थी जब उसका निकाह हुआ था पैर सुल्तान का चुकी प्रेम उसपर ऐसा मेहरबान हुआ की रोज़ का बेदरदादि से मसलना और खूब चूसना उसकी चुकी का साइज अब 38’ कर चूका था ….जिसपर उसे बहुत सरम आती थी की बिना बचा पैदा हुए hi उसकी दूध की फैक्ट्री का साइज बड़ा हुआ था सुल्तान की बदौलत …
खैर सुल्तान से अब उसके कपडे उप्पेर से उतरने शुरू कर दिए जिसमे सराह ने उसका साथ दिया …और दोनों बीएड पैर आ चुके थे …
जिसके बाद सुल्तान टूट पड़ा उसकी चूचियों पैर खूब चूसने लगा …और एक हाथ में उसकी फुल छूट सलवार के उप्पेर से hi हाथ में भर कर भिचने लगा ….जिसपर सराह का हाल बेचैनी से भर चूका था …उसके हाथ चुकी चूसते सुल्तान के सर पैर घूमने लगे थे …सुल्तान कभी जोर से उसकी छूट को हाथोमे भीचता तोह कभी हाथ से उसकी छूट की लकीर सहलाने लगता …
जिसपर सराह का जिस्म खुद बा खुद गर्म होने लगा था …उसकी चुदाई की तालाब इस बात से समझ सकते हो आप की उसकी छूट ने इतना पानी बहा दिया था …की उसकी कच्ची छूट के हिस्से से भीग चुकी थी…
सुल्तान अब आगे बढ़ा और उसने सराह की सलवार का नाडा खोल दिया जिसके बाद उसने सराह की सलवार को खींच कर एक झटके में निकल दिया और उसे घुमा कर पेट के बल कर दिया …
और उसकी पीठ पैर किश कर ने लगा …उसका एक हाथ उसने सराह की कच्ची में उसकी छूट पैर लगा दिया ….जिसपर सराह उलटी लेती हुई …मज़े की दुनिआ में तेर रही थी ….जिसके बाद एक हाथ से सुल्तान उसकी छूट को उप्पेर से निचे सहलाता और उसकी पीठ पैर चूमता सराह का मज़ा अलग उफान पैर था ….एक तरफ से सुल्तान का हाथ उसे मज़ा दे रहा था …और दूसरी तरफ उसके गरम किश ने सराह को झड़ने पैर अब मज़बूर कर दिया था …अहहहहह!!!!!! इस्स्स्सस्शह्ह्हआआ!!!! उसकी कमर को उसने गांड से उठा लिया जो सुल्तान को इशारा था की सराह झाड़नेवाली है उसने भी अब उसका क्लीट सहलाना शुरू कर दिया और तेज़ी से सराह इतनी तेज़ी से झाडी की उसका मुट्ठ भी उसके पानी के साथ निकलने लगा …..
अहहहहहा!!!!! की आवाज़ उसके ओर्गास्म का प्रूफ था की उसका ओर्गास्म भी कोई 30 सेक् चला जिसमे सुल्तान का हाथ और तेज़ होता चला गया ताकि सराह को पूरा मज़ा मिले …..
ओर्गास्म के बाद सराह की साँसे और शरीर में कुछ सेकंड के लिए जान सी निकल गयी जिसके बाद सुलतान ने उसे फिर से पलट दिया …और उसकी मुट्ठ और उसके पानी में भीगी कच्ची उतार दी और उसकी छूट पैर लग गया …चूसै करने …उसके दोनों हाथ उसकी मस्त और फुल्ली हुई गांड को मसल रहे थे ..और होटों से छूट की चूसै सराह को और गरम करने लगी ….उसकी गरम दुबारा से बढ़ने लगी थी…
जिसपर सराह भी दुबारा से रेडी होने लगी …और जब उसे मज़ा आने लगा तोह उसने ज़ोर देकर सुल्तान को अपनी छूट से हटाया …
सुल्तान ने उसकी आँखों में देखा एक शोख और लाल रंग का चुदाई का नशा उसकी आँखों में तेर रहा था …उसकी आँखों में चुदाई की एक मांग थी …जिसे सुल्तान ने समझ लिए …पैर फिर उसका लैंड भी अब बेचैनी के मारे पूरा सिद्ध खड़ा था …जो इस बात को साबित करता था की सुल्तान
भी चुदाई के लिए कितना बेचैन है , उसने बीएड ? से उठने का फैसला किया …और उठा अपने हर एक कपडे को 1 मिनट से काम के रिकॉर्ड टाइम में अलग किया और सिद्ध बड़ा बीएड पैर जहाँ सराह की बेचैन छूट उसका इंतज़ार कर रही थी…
सराह ने उसे अपने उप्पेर खींच और उसके लैंड को जोकि ाचा लम्बा और मोटा रहा होगा कोई 7.5’ लम्बा और 5’ मोटा सिद्ध उसने अपनी छूट पैर लगाया और सुल्तान से शायद अब रुकना मुश्किल था पैर सराह अभी लैंड को अपनी छूट पैर उप्पेर निश्च फिर कर उसे चिकना करना छह रही थी ..पैर सुल्तान ने अचानक से उसके हाथ ने जब छूट पैर उप्पेर निचे होते हुए एक झटका दिया …जिसमे सराह की छूट में सुल्तान का लैंड सूखा hi घुस गया …
जिसपर सराह की चीख निकल gayi…””haay ाआमईईई मर दलायआ ….. “
सुल्तान “ अभी मारा कहाँ है अभी तोह मरना बाकी है ….”और उसके होटों को अपने होतोओं की ज़द में ले लिया और लगा तूफानी झटके देने ..
जिसपर सराह की छूट में सूखा लैंड घुसने से उसकी छूट में अलग सा दर्द हो चूका था पैर धीरे धीरे उसकी छूट से बेहटा पानी और सुलतान के तेज़ झटके …जिनके चलते उसकी सुखी छूट पानी छोड़ने लगी और अब उससे बे हिसाब मज़ा मिलने लगा उसकी जाँघे उठने लगी …जिसके बाद सुल्तान ने उसकी टाँगे अपने कंधे पैर रख ली जिसके बाद उसका लैंड और अंदर तक जाने लगा और सराह को और मज़ा मिलने लगा …
उसके हाथ सुल्तान की पीठ पैर थे सुल्तान जब भी किश तोड़कर साँस लेता सराह के मुँह से यही निकलता “”
“”है “””आअह्ह”” ोर्ड्र्र ज़ोर”””””” sesssssssseee”’’’’’’’hayyyyyyyyyy’”
Oroooorrrrrrrrrrr ज़ोररररररररर seeeeeeeeeeee””
सुल्तान कैद हेक और तेज़ हो चले थे …जिनमे अब तक सराह दो बार पानी छोड़ चुकी थी और तीसरी बार के लिए त्यार थी …सुल्तान भी झड़ने के करीब था ….
Sultan””haay मैं आने वाला हूँ बोलो बेगम पानी कहा चाहिए छूट मुँह या चुकी …बोलो ???”
सराह “आज छूट में चाहिए और ज़ोरररररररर सीईई आहाहा ! इसके साथ hi सुल्तान ने अपना पानी सराह की छूट में अपने आखिरी झटकों के साथ उत्तर दिया ….और कसकर सराह को अपने सिनने से लगा लिया …
सुल्तान के माल उसके पानी जो सराह की छूट और उसके कोख में लग रहा था …उससे सराह का भी ज़बरदस्त ओर्गास्म हुआ एक नहीं कई (मल्टीपल) ओर्गास्म हुए जिसमे दोनों एक दूसरे को अपने से कसकर जकड़े हुए ओर्गास्म का मज़ा ले रहे थे …और जब ओर्गास्म ख़तम हुआ तोह सराह और सुल्तान एक दूरसे से चिपके हुए सो गए थकन के चलते …कोई एक घंटा के बाद सराह की आंख खुली मुट्ठ के प्रेशर से पैर सुल्तान अपनी दोनों बाँहों में उसे कैसे उसकी चूचियों में मुँह दबाये सो रहा था …जिसे देखकर सराह के चेहरे पैर एक अलग सी मुस्कराहट फ़ैल गयी …पैर मुटना भी ज़रूरी था …सो जैसे hi हु हिल्ली नीड में hi सुल्तान हिला और बंद आखों के बाद भी उसके होठ सिद्ध उसकी चूचियों पैर लग गए …
जिसपर सराह “ है नींद मैं भी चैन नहीं है …देखो कैसे चूस रहे हैं …है पता नहीं अपनी अम्मी को भी कितना चूसा होगा इन्होने बचपन में ….”
सुल्तान “ बेगम अम्मी को जितना चूसा सो चूसा पैर अभी तुम्हे चूसना है …क्यों कोई प्रॉब्लम..”
सराह “ है आप जाग रहे हैं हटिये न मुझे पिशाब जाना है ,,,”
सुल्तान “तोह जाओ मुट्ठ लो “
सराह “ या मौल्ला !!!!! आप कमसे काम पिशाब hi बोल देते ..मुट्ठ कितना गन्दा अल्फ़ाज़ है.. ची !”
सुल्तान “ बेगम हम तोह मुट्ठ hi बोलेंगे जो चाहे कर लो ..”
सराह “ आपको जो बोलना है बोलिये पैर मुझे जाने दिज्ये ..”
सुल्तान भी अब बहस नहीं करता और सराह की मोती गांड को थिरकते हुए जाते देखता है अपने बैडरूम के जॉइंट आत्ताच बाथरूम में और कुछ सोचने लगता है ..वह अपनी सोच में डूबा हुआ नंगा hi बीएड ? लेता हुआ अपने रूम की चाट को देखता हुआ अपनी सोच में गम था …
उसकी सोच को थोड़ी देर में तोडा उसकी बीवी सराह ने …”क्या हुआ आप कहाँ खोये हैं…”
सुलतान “तुम जानती हो न मेरा क्या काम है …और मैं क्यों परेशान हूँ ….उपपरवाला जनता है आजकल कितनी टेंशन है …और शायद किसी दिन पता नहीं क्या हो जाए …???”
सराह “ ऐसी बात न कीजिये आपको उस मौल्ला का वास्ता …आपको मेरी कसम ऐसी मनहूस बात न करो …जानती हूँ आप पैर कितनी टेंशन हैं …और समझती भी हूँ …बस आप अल्लाह पैर भरोसा रखे ,,उसकी नेमत सब पैर है …और मैंने कभी आपको कुछ कहा है क्या ….आप से सिर्फ गिना चुना मिल पाती हूँ इस दुनिआ मैं आपकी जायज़ बीवी होने के बाद भी इस दूर farm-house ? पैर अकेले कैद हूँ पैर आपके साथ हूँ न …”
सुल्तान “ बेगम तुम में मेरी जान बस्ती है …खुद पैर मैं कोई भी जख्म बर्दास्त कर सकता हूँ पैर तुम पैर एक खरोच भी nahi…aag ? लगा दूंगा साड़ी दुनिआ को …अगर किसी ने तुम्हें छुआ तोह ..!!!”
सराह “ मेरे शोहर मुझे भला कोण छू सकता है आपकी इज़ाज़त के …और मुझे खुद बर्दास्त नहीं की किसी और किन ाज़ार भी पड़े मुझपे …ाचा अब यह सब छोडें और त्यार हो jayen…aapko दिन रहते निकलना भी है…”
सुल्तान नंगी सराह को अपने उप्पेर खींचते हुए …”बेगम दिन ख़तम होने में अभी कुछ टाइम बाकी है और तब तक अपने शोहर को थोड़ा और प्यार कर लेने दो साथ में अछि सी चुदाई भी …” इसके साथ hi सुल्तान ने उसकी फुल्ली गांड पैर अपने हाथ चलने सुरु कर दिए और उसकी ऊँगली ….
इस्स्स्सस्छ्हःहःहः!!!!! AAAAAAAhhhhhhhhhhhhh! एक सिसकी निकली सराह की …
“”आआअह्हह्ह्ह्हह !!! आपको कितनी बार कहा है न की वहां हाथ न लगाया कीजिए …मैं त्यार नहीं हूँ उसके लिए …और वैसे भी वहां से सिर्फ गंध निकलता है …”
हाँ सुल्तान की ऊँगली सराह की गांड में थी जो अंडर ता हलचल मज़ाये हुए थी ..पैर सराह ने आजतक सुल्तान को अपनी गांड से दूर रखा था ….क्युकी गांड मरवाने के नाम पैर सराह की गांड पहले hi फैट जाती thi…per सुल्तान को हु उसकी भरपाई लोढ़ा चूसकर कर दिया करती थी…
खैर उसके बाद सुल्तान ने भी जोर नहीं दिया और क्युकी हु भी सराह के जवाब जनता था …सो उसने थोड़ा और देर उसकी गांड को अपनी उंगली से कुरेदा और उसे गरम किया …और एक और राउंड चुदाई का चला जिसके बाद दिन भी ढलने लगा था …
सुल्तान भी चुदाई और उसके बाद अचे से फ्रेश होकर निकल farm-house ? से और चल पड़ा अपनी मीटिंग प्लेस पैर उसका इंतज़ार उसका पार्टर कर रहा था…
पैर बिज़नेस में कब कोनसा पार्टनर कब अपने पुराने पार्टनर को बदलने का मूड बना ले कहना मुश्किल है …और बिज़नेस में कब कोण किस साइड आजाये यह तोह सिर्फ वही बता सकता है …जिसको आगे प्रॉफिट नज़र आये ….
खैर आज सुल्तान हस्सान पठान की किस्मत को भी शायद कुछ और hi मंज़ूर था …या शायद उसके पार्टनर की प्लानिंग उसके खिलाफ थी …
उसने सुल्तान को भरी मार्किट में बुलवाया था ….जहाँ सुल्तान अपनी कार ? से पुहंच गया था ..पैर आगे के तंग रस्ते के चलते सुल्तान अब पैदल चल दिया सामने के ढाबे टाइप होटल के छोटे से बालकनी से उसके पार्टनर ने हाथ हिल्या ..और आगे आने का इशारा किया …
और उसके हाथ हिलाते hi सुल्तान ने अपने पुराने पार्टनर गुलफाम कुरैशी को देखकर एक मुस्कराहट के साथ आगे बढ़ने लगा …
पैर आज सुल्तान को यह नहीं पता था …की आगे आने का हु इशारा सिर्फ उसी के लिए hi नहीं था …किसी और के लिए भी था …उसके हाथ हिलने के साथ hi सुल्तान का ध्यान तोह गुलफाम पैर था सो आगे बढ़ने लगा उस होटल टाइप ढाबे की तरफ ….रास्ता क्युकी मार्किट थी तोह तंग था …भीड़ भाड़ अचे से मार्किट में थी …उस पैर आज संडे का दिन भीड़ और भरी थी मार्किट में शायद आज सभी अपनी पसंद का सामान निकल आये थे लेने …
खैर सुल्तान आगे बाद रहा था पैर उसके साथ hi बाद रही थी मौत उसके करीब दो लोगो की शकल में जिनके हाथ में अलग किस्म के चाकू थे … उनको चाक़ू कहना गलत होगा ….वह एक गुप्ति टाइप के कुछ थे (गुप्ति या सुअन वह होगा जो आपने शायद कभी बर्फ यानि आइस तोड़ने वाले को देखा होगा, जो पतला और बहुत नुकीला और शार्प होता है…)
तोह आप समझ सकते है हैं गुप्ति क्या है वही लिए दोनों आगे बाद रहे थे अलग अलग साइड से ताकि अगर एक भी चुके तोह दूसरा अपना काम कर सके ….
सुल्तान कुछ hi कदम चला होगा की टककककक! की आवाज़ आयी सुल्तान को …..
और सुल्तान ने देखा ठीक उसके कमर के पास एक लड़का …एक सब्ज़ी तोलने वाले बर्तन सी एक चाक़ू को रोके हुए है …एक लड़का उसके और उस चाक़ू के बिच में उस बर्तन को अदाए हुए था …सुल्तान के लिए इतना काफी था …उसे अचे से समझ आ गया था की उसकी फील्डिंग सेट है आज यहाँ उसको बुलाना और मरवा देना यही इस मीटिंग का मक़सद है …वर्ण सुल्तान पल में कहाँ पल में कहाँ ..सुल्तान अपने धंदे बोले तोह बिज़नेस के चलते कहीं भी रुका नहीं करता था …क्युकी उसके दुश्मन भी सुल्तान को कब कहाँ लुढ़का दें यही वजह थी सुल्तान पल में कहीं पल में कहीं और निकल जाया करता था….
खैर उसकी कमर के पास उस लड़के से रुकी हुई चाक़ू देखकर सुल्तान फ़ौरन हरकरत में आज चूका था उसने दूसरी तरफ देखा तोह उसे दूसरा शख्स भी नज़र आ गया जिसके हाथ में चाक़ू था …और उसके बिलकुल नज़दीक था पैर उसके साथी की चूक ने उसको थोड़ा रुकने पैर मज़बूर कर दिया था …क्युकी उसे शायद बता दिया गया था …की सुल्तान अगर बचा तोह तुमको जिन्दा नहीं छोड़ने वाला …
सुल्तान को उस लड़के की फ़िक्र भी थी क्युकी एक अनजान फ़रिश्ते ने उसकी ज़िन्दगी और उम्र आज और बड़ा दी thi…per सुल्तान कुछ कर पता उससे पहले लड़के के हाथ और पेअर बिजली की रफतार से उस चाक़ू वाले पैर बरसने लगे …सुल्तान अब हैरत में था …
उसके साथ उसके सामने खड़ा हु चाक़ू वाला शक़श भी क्युकी खली हाथ होते हुए भी उस लड़के के गुणसे (पंच ?) और लात (किक ) से हु हथियार होते हुए भी कुछ नहीं कर प् रहा था …सुल्तान और आदमी जो सुल्तान को मरने आया था …दोनों hi एक अनजान से तमाशे में फास गए थे जिसमे एक कातिल था जिसका काम पैसे के लिए किसी को मरना था और सामने एक लड़का था जो खाली हाथ था पैर उसकी फुर्ती और गज़ब के डाव पेंच के चलते हु आदमी उसे छू तक नहीं प् रहा था ….
की अचानक उस लड़के ने एक डबल फ्लिप के साथ उसके सामने खड़े चाकू वाले के सर पैर एक ज़ोरदार किक जड़ दी जिसके पड़ते hi हु आदमी …बेहोश हो गया …जिसके बाद हु लड़का मुदा और सुल्तान की और आने लगा ….
सुल्तान और हु दूसरा किलर उसके साथी बेहोश होते hi अचनाक नीड से जगे …पैर हु किलर कुछ करता उससे पहले hi सुल्तान ने उसके हाथ से हु चाकू चीन लिया और सुल्तान ने उसके हाथ से हु चाक़ू खिंच लिया और उसी के गले पैर लगा दिया …
सुल्तान ”सिर्फ एक बार पूछूंगा किसने तुम्हें यहाँ बेह्जा hai..ek बात और तू बता या मत बता मरेगा तू जरूर पैर तेरे घर से भी कोई नहीं बचेगा यह सुल्तान हस्सान पठान का वडा है ..” और सुल्तान ने धीरे उसके गले के लेफ्ट साइड से हु चाक़ू थोड़ा अंदर चुभाया जिस के बाद उसका खून निकलने लगा …
“गुलफाम कुरैशी ने भेजा है मर्दो पैर घरवालों को कुछ मत करना …उनके लिए hi यह करने आया था …”
सुल्तान कुछ करता उससे पहले hi उस लड़के ने न का इशारा किया ….सुल्तान ने देखा और छोड़ दिया उसे …
सुल्तान “ जा निकल जा आज के बाद कभी तेरे हाथ में चाक़ू दिखा या कभी तुझे गलत करते देखा तोह तेरा नाम और तेरा खानदान दोनों में से कोई नहीं होगा ….यह पहली बार है सुल्तान हाथ में आये किसी दुश्मन को जिन्दा छोड़ रहा है …निकल ले “
हु उठा और अपने गेरे साथ को लेकर हवा की तरह निकल गया ….
उसके बाद सुल्तान ने मोबाइल निकला और किसी से बात की…
वहां मार्किट में इस वक़्त एक कर्फ्यू सा लगा चूका था …हु तोह तभी उतना हिस्सा कहली हो चूका था …जब उस लड़के ने उस किलर को रोका था सुल्तान को चाकू मरने से …उसके बाद सुल्तान ने जब उसके बाद दूसरे किलर के गले पैर चाक़ू लगया तोह आस पास के लोग भाग गए थे…
सुल्तान ने मोबाइल पैर बात ख़तम की ..उस लड़के की तरफ बड़ा ..
सुल्तान “बहुत बहादुर हो तुमने आज सुलतान हस्सान पठान की जान बचा कर उसे खरीद लिया है …दिल से सुकरिया बचे …तुम्हारा एहसान है मुझपे ..”
लड़का “कोई एहसान नहीं रहा मैंने आपको बचा और आपने सिर्फ मेरे कहने पैर अपने मारने वाले को छोड़ दिया एहसान बराबर हुआ ..वैसे उसने आपके नाम की जिससे पेमेंट ली थी हु अभी शायद दुबारा कुछ करे अपना ध्यान रखना आप..”
सुल्तान “ नहीं हु कुछ नहीं कर सकेगा हु यहीं था ..जिसने सुपारी दी थी मरने की ..पैर अब तक उसकी कार ? में बम लग चूका होगा या उसको मेरा शूटर देख लेगा क्युकी यहाँ से तोह हु कबका निकल चूका होगा पैर आगे कुछ करने के लिए मेरा पार्टनर जिन्दा नहीं बचेगा …क्युकी दुश्मन को एक बार बक्शा जा सकता है पैर गद्दार दोस्त को नहीं…”
उस लड़के के चेहरे पैर गद्दार दोस्त का नाम आते hi एक अज़्ज़ेब सी नफरत उभर आयी थी जिसे सुल्तान ने अचे से देख लिया ..
सुल्तान “लगता है किसी बहुत करीबी से धोखा खा चुके हो बचे …तुम भी क्युकी जो दर्द तुम आज देख रहे हो हु दर्द मैं कई बार झेल चूका हूँ …”
Ladka”haan कुछ ऐसा hi है जनाब..
“जो करीब होता है दिल के , जिस से दिल मांगता है हर पल सुकून.
धोखा देना काम है इस दुनिआ का कर देते हैं उसी दिल का खून..”
सुल्तान “लगता है कोई गहरा जख्म मिला है किसी करीबी से ..अरे मैं सबसे ज़रूरी बात तोह बुल hi गया तुम्हारा नाम क्या है ..??”
लड़का “ मानव सिंह नाम है मेरा और मेरे अपने मुझे मनु कहते हैं..”
सुल्तान “ मनु ाचा लगा तुमसे मिलकर आज का एहसान तोह उतर नहीं सकता पैर आज के बाद सुल्तान की जान और खुद सुलतान तुम्हारे नाम है …”
मनु “अरे आप बड़े है आपको निचा दिखाकर मैं चैन से कैसे बेथ सकता hun..acha अगर आप कुछ करना चाहते तोह मुझे कुछ सीखा देना ..ok “
सुल्तान “दोने मनु “ उसके साथ हाथ मिलकर दोनों चल दिए एक साथ क्युकी सुल्तान मनु के बारे में और जानना चाहता था …और दोनों चल दिए मार्किट से बहार ? में सुल्तान के अड्डे की तरफ …
जहाँ पहुंच कर दोनों ने चाय पैर बातें होने लगी…?
सुल्तान की एंट्री मनु की ज़िन्दगी में क्या रंग लेन वाली थी :hunter:…or मनु का एहसान सुल्तान कैसे चुकाएगा :beaten:..iska जवाब मनु की किस्मत या टाइम के पास hi होगा.. :हिंट: