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बचपन की यादें
उसके इन सब बातों को बताने से मनु को क्या सिख मिली और आगे मनु कैसे चिंटू को जवाब देगा …क्युकी चिंटू ने अपनी तरफ से नफरत की जुंग साफ़ लहज़े में शुरू कर दी थी ….राजिंदर के काम का सहारा लेकर जो उसने मनु को पुरे स्कूल में निचा दिखने की कोशिश थी उससे .साफ़ इशारा था की मनु …चिंटू की नफरत ने elaan-e-jung कर दिया hai…baari अब मनु की थी जवाब देने ki.or निशा का क्या रिएक्शन होगा मन ऊके लिए चिंटू के इस झूंठ से और मनु का क्या जवाब होगा चिंटू और आनेवाले कल के हर दुश्मन को यह अब चिंटू की किस्मत और टाइम पैर निर्भर था......
अब आगे....
अब आगे क्या होनेवाला था यह तोह वक़्त hi बता सकता था ,,पैर कहीं न कहीं मनु को उसके पिता ने आज जो नसीहत दी थी की दुनिआ वैसी नहीं जैसी दिखती hai..yeh मनु को कुछ हद तक समझ आ चूका tha…or उसने भी अपने बाप की बात को एक वडा किया था ..की आनेवाले टाइम में वह अपने माँ और बाप को आराम देगा मतलब और ज्यादा म्हणत नहीं करने देगा …अब उसका वडा और आनेवाला टाइम उसे यह सब करने देगा या नहीं यह मनु की किस्मत , उसके दिमाग और वक़्त के साथ उसके सही या गलत फैसले जो हु आगे लेगा या लेने की कोशिश करेगा उसपर निर्भर थे …क्युकी इंसान चाहे कितना भी दुनिआ से लड़ ले चाहे किस्मत साथ दे या न दे पैर एक इंसान के सही टाइम लिए गए सही या गलत फैसले से उसकी ज़िन्दगी बदल जाती hai…ya यूँ कहिये इंसान के आज लिए हुए फैसले hi उसे बड़ा या छोटा बनाते हैं दुनिआ में इज़्ज़त और बजती दोनों दिलाते hain…aage क्या होगा ,कैसे होगा और मनु क्या फैसले लेगा यह सब आनेवाला वक़्त hi जनता था..
खैर अगला दिन आया ….सुबह का अपना रेगुलर रूटीन मनु ने फॉलो किया मम्मी की हेल्प ,खुद को और अजय को त्यार करना और साथ स्कूल ले jana..ajay और सुमित्रा को तोह पता भी नहीं था की मनु किस परेशानी से जूझ रहा है ..जिसपर मनु खुद नहीं चाहता था की इन दोनों को कुछ पता चले अजय क्युकी छोटा था और मनु से बहुत प्यार करता था ..अजय एक बार को अपने बाप से गुस्सा हो जाता था ..पैर मनु उसके लिए बहुत मायने रखता था …क्युकी उसकी जितनी परवाह शायद मनु करता था कोई और करता हो …आप सब भी जानते हैं क्युकी उसके दोनों माँ और बाप सिर्फ अपने बचूं के फ्यूचर के लिए कितनी म्हणत कर रहे the..jis वजह से दोनों अपने बचूं को ज्यादा टाइम नहीं दे पते the…jis वजह से दोनों एक दूसरे के साथ ज्यादा वक़्त बीत्या करते थे और ..क्युकी अजय और मनु में मनु अजय से बड़ा था सो मनु अजय की हर जरूरत के समय उसके सामने रहता था ,,जिस वजह से अजय के लिए मन ऊके दिल मैं एक स्पेशल रेस्पेक्ट thi..or क्युकी कई बार अजय मनु के मन करने पैर कुछ चीज़ें कर देता था अपने बचपने मैं पैर जब भी अजय ने मनु की बात नहीं मानी तब तब अजय किसी न किसी मुसीबत में पड़ा ..जिस पैर भी मनु अजय को हर बार उस मुसीबत से निकल hi लेता tha..jaise आइस फैक्ट्री में मनु ने अजय को बचाया था जिसमे अजय को तोह मनु ने पानी में डूबने से बचा लिया था पैर खुद उसके पेअर में कांच लग गया था ..जिसपर भी उसने अजय को कुछ नहीं कहा था ..और घर पैर भी नहीं कहा था वार्ना राजिंदर और सुमित्रा अचे से अजय की क्लास लगडते सो इन सब बातों के चलते अजय मनु की बहुत रेस्पेक्ट करता था और प्यार तोह शुरू से था hi उसे अपने बड़े भाई से ..
खैर मनु अजय क्युकी छोटा था सो उसे अपनी परेशानियों से जितना हो सके दूर रहना चाहता tha…kyuki मनु जानता था की अजय जो उसकी बुराई तक नहीं सुन सकता उसे पता लगा तोह पता नहीं कितना ड्रामा होगा स्कूल में जो मनु नहीं चाहता था और अब बची सुमित्रा …सुमित्रा को मनु इसलिए यह सब बताना नहीं चाहता था क्युकी वह अचे से जानता था की अगर सुमित्रा को यह सब पता चलेगा की एक तरफ उसका पति राजिंदर कितनी म्हणत कर रहा है अकेले 3 या 4 लोगो का काम कर रहा है और दूसरी तरफ मनु को उसी के बाप के नाम पैर निचा दिखया जा रहा है ..तोह हु पता नहीं क्या करती ..दूसरी तरफ राजिंदर ने भी उसे सुमित्रा को इन सब से दूर रखने को कहा tha..or मनु खुद नहीं चाहता था की सुमित्रा पैर कोई भी मेंटली प्रेशर बने सो ..इन सब बातों को देखकर मनु ने अजय और सुमित्रा को अपनी और राजिंदर की टेंशन से दूर रखना ठीक समझा..
खैर आज सुबह मॉर्निंग मैं सब नार्मल hi था ,पैर एक बात अलग हुई थी राजिंदर जो सुबह नास्ता करता और चुप चाप bye बोलकर घर से ऑफिस के लिए निकल जाता वह आज मनु और अजय के रेडी होने के बाद मनु के गले लग कर उसके सर पैर हाथ फेर कर बोलै “बेस्ट ऑफ़ लक मेरे sher”…jis पैर सुमित्रा चौंके बिन आना रह सकीय और बोली “आज यह सब कैसे सूरज कहा से निकला है या यह कोई सपना है की आप इनको बेस्ट ऑफ़ लक कह रहें हैं “ ????
राजिंदर ने इस पैर मन ऊके गले लगे हुए कहा “ हाँ जी प्यार तोह सिर्फ आपको hi है बचूं से हमको कहाँ मैं कहता नहीं तोह यह मतलब नहीं की मुझे मेरे दोनों शेरो से प्यार नहीं hai…main जितना अपने बचूं से प्यार करता हूँ ..उतना hi तुमसे भी ..”
इस बात पैर सुमिता शर्म से बोली “ आप भी न मैं ऐसा तोह नहीं कहा और कुछ तोह सरम करो बचे सामने हैं”
राजिंदर “ तोह क्या हुआ उनको भी तोह पता चले कैसे उनका बाप उनकी इस शेरनी माँ को चाहता है”
इस पैर सुमित्रा सरम से आगे कोई बात न बड़े तोह मुस्कुराती हुई किचन में जाकर काम करने लगी…
राजिंदर ने अब मनु की तरफ देखा जो इस समय उस कंधे से लगा हुआ था …क्युकी राजिंदर ने उसे गले लगने के बाद से अपने से अलग नहीं किया tha..ab राजिंदर ने नार्मल होकर मनु से कहा “ मेरे शेर बेटे तू जानता है न आगे का टाइम में कैसे लोग मिलने वाले हैं ..बीटा फिर से कह रहा हूँ आगे लोग मिलकर तेरी आँखों में आंख दाल कर झूठ बोलेंगे और तुझे यह जानते हुए भी की सामने वाला झूठ कह रहा है ,,सही टाइम आने तक उसको झेलना होगा क्युकी बिना सही टाइम के तू कुछ नहीं कर पायेगा ..और जब टाइम आये तोह हर एक को धोकर निचोड़ कर सूखा देना ..समझ रहा है न …क्युकी अगर तूने जल्द बाज़ी में कोई भी फैसला लिया या सही फैसला लेने में चूक की तोह आगे बहुत कुछ बदल जायेगा ..तू मेरा मतलब समझ रहा है न??”
मनु “ हाँ पापा अचे से समझ रहा हूँ मुझे खुद भी सही टाइम का इंतज़ार है …क्युकी मैं अपने दुश्मन से भी सिख लेता हूँ …जब usne(chintu ने) सही टाइम के लिए इतना वेट किया तोह मुझे भी उससे सिख मिली है की …मैं खुद उसे अचे से सही टाइम पर जवाब दूंगा …आप टेंशन न लो ..”
राजिंदर “ बीटा टेंशन होनी लाज़मी है बाप हूँ तेरा पैर तुझे भी अचे से जानता हूँ तू मेरा hi खून है तोह तेरी काबिलयत मैं अचे से जानता हूँ पैर एक बाप होने के नाते समझाना मेरा फ़र्ज़ बनता है ..वही कर रहा हूँ मैं जनता हंट ु सही टाइम पैर अपना काम कर देगा ..और एक बात का ध्यान रखना तेरा यह बाप हमशा तेरे साथ तेरे हर फैसले में तेरे साथ hai..so आगे से कोई भी बात अगर तंग करे तोह बिंदास बता देना ..अगर बाप के सामने बोलने में कोई झिझक हो तोह दोस्त समझकर बोल देना ..ok “
मनु हसकर “ok पापा “ दोस्त समझकर हम्म!”
राजिंदर मुस्कुराकर “ हम्म्म! नहीं हाँ बीटा क्युकी कुछ बातें बाप से कहने में बेटे शर्मा जाते हैं तब दोस्त समझ कर कह देना क्युकी जब बेटे का पेअर बाप के झूठे में आने लगे तोह हर बाप को बेटे को एक दोस्त की तरह समझना चाहिए (पुराणी कहावत है सुनता आया हूँ याद आयी तोह लिख दी ) और वैसे भी एक अचे बेटे की साड़ी खूबियां है तुझमे तोह मेरा भी फ़र्ज़ बनता है की मैं अचे बाप होने का फ़र्ज़ निभाऊं ….सो जब कोई टेंशन हो अपने बाप से शेयर कर लेना मुझे भी नया दोस्त मिल जायेगा ..और घर में न कम्फर्टेबले लगे तोह दोनों बाप बेटे नाईट वाक पैर डिस्कशन कर lenge…wahan तोह अपनी “”बॉयज टॉक”” आराम से हो जाएगी ..
मनु कुछ बोलता उससे पहले hi सुमित्रा बहार आते हुए बोली “आज कोई स्पेशल दिन है क्या जो आज अपने मनु को इतना चिपका रखा है जी …और क्या बातें हो रही हैं मैं भी तोह सुनु ..”
राजिंदर “आज तक तुम्हरे और तुम्हारी सहेली के बिछा में मैं कुछ पूछा ,,और जब पूछा तोह “गर्ल्स टॉक “सुनकर चुप हो गया ..खैर यह बाप बेटे की बिच की बात है ..ज्यादा कुछ ख़ास नहीं ..जस्ट “बॉयज टॉक “
सुमित्रा “ मतलब मैं कुछ पूछ नहीं सकती आपके इस “बॉयज टॉक “ के बारे में …पैर कोई बात नहीं मुझे तोह फिर भी बहुत ख़ुशी है की आज आपने अपने बेटे से इतनी बात की “
राजिंदर “ सुमित्रा मैं अपने परिवार से बहुत प्यार करता हूँ मेरे यह दोनों बेटे मेरी दोनों आँखें है और तुम मेरा दिल हो .ऐसा नहीं है की मुझे तुम लोगो की परवाह नहीं है ..पैर एक मर्द होने के नाते मुझे तुम सभी की जिम्मेदारी भी निभानी है ..सो उसी के चलते ज्यादा टाइम नहीं दे पता हूँ बचूं और तुमको ..पैर इसका यह रति भर मतलब नहीं की मुझे तुम सब से प्यार नहीं hai..pyaar जाताना और निभाना दो अलग बात hain…jatata नहीं पैर पूरी ईमानदारी से निभा रहा हूँ ..और कमा क्या सिर्फ अपने लिए रहा हूँ ..नहीं न आनेवाले टाइम में बचे बड़े होंगे उनकी ज़रूरत भी बढ़ेंगी तब उनके अचे फ्यूचर के लिए उनका बाप रेडी मिलेगा …तब उनको भी पता चल जायेगा की उनका बाप नकार निकम्मा नहीं है एक जिम्मेदार बाप है …”
इस बात पैर सुमित्रा रो पड़ी “मुझे माफ़ कर दिज्ये मैं ऐसा तोह नहीं कहा tha..main आपको अचे से जानती hun..per एक दुःख था की बचूं के साथ आप एक दुरी बना कर रखते थे ..वह बात मुझे खटकती थी ..कह नहीं पति थी पैर दुखी रहती थी पैर आज अपने इस तरह मनु को गले लगा के बात किट ओह लगा कोई सपना है ..सो यकीं नहीं hua..mujhe माफ़ कर दीजिये ,,मैं आपको गलत समझती थी..”
राजिंदर “ सुमित्रा बचे जब छोटे थे तब दुरी इसलिए रक्त था की बचे अगर दोनों माँ बाप से प्यार पाएंगे तोह सुनेगे किसी की और बिगड़ जाते क्युकी मैं शाक्त था और दुरी बनाकर रखता था और तुम प्यार से समझती थी तोह देखो अपने बचे कैसे hai..kya तुम्हे भी मेरा त्याग समझ नहीं आया …खुद के बचूं से दूर रहना कितना मुश्किल होता hai..main जनता हूँ ..उस नालायक जय चाँद को पालने से मैंने यह सिख ली थी की अगर सभी प्यार करे तोह इंसान नालायक hi बनता है क्युकी ज्यादा प्यार से इंसान जिम्मेदारी से दूर रहता है उसे पता होता है की जिम्मेवारी उसे मिलेगी nahi..so जब इंसान जिम्मेदारी की क़द्र नहीं करता तोह बदले में सिर्फ और सिर्फ आलसी और काम बुद्धि का prani,or म्हणत से जी चुरानेवाला ,,नालायक इंसान बनता है ..बिलकुल जय चाँद की तरह ..क्या तुमको अपने मनु और जैचंद में फरक नज़र नहीं आता…???”
सुमित्रा सोचती हुई “ कैसा फरक जी “
राजिंदर “हु आलसी है …काम बुद्धि वाला है अपनी बीवी के दिमाग के आगे झुका रहता hai..or काम काज से जी चुरता hai…kya अपना मनु भी वैसा है …नहीं वह अभी छोटा है पैर अभी से पूरा दिन पड़ने के साथ बस्सी रहता है ..दो जगह पैर सिकने भी जाता है बिज़नेस को …और अपनी क्लास में पिछले दो साल से फर्स्ट आ रहा है ..तोह जय चाँद के टाइम पैर जो मैं गलती किट hi उसकी हर मांग को पूरी करके उन सब गलतियूं से मने सीखा था ..की बचे की बेमतलब की मांग कभी पूरा न karo..or देखलो अपने बेटे को क्या इतना छोटा होने के बाद भी कितना मेहनती है ..और जिम्मेदार भी ..तोह क्या मैंने दुरी बनाकर गलत किया ..बोलो”
सुमित्रा रट हुए “नहीं जी आपने बिलकुल ठीक किया मैं hi पागल थी बेवजह खुद से आप पैर गुस्सा हुआ करती थी की आप सिर्फ जैचंद को hi प्यार करते हैं ऐसा तोह मैंने सोचा hi नहीं tha..mujhe माफ़ कर देना जी ..पैर एक चीज़ मुझे समझ नहीं आयी जी “
Rajinder”konsi चीज़ज़ “
सुमित्रा “आपने कहा था की बच्चों से आप दुरी बनाकर रखते थे तोह अभी अजय भी छोटा है तोह मतलब अभी भी दूर hi रहेंगें बचूं से ??”
राजिंदर “ अब उसकी ज़रूरत नहीं है …मनु अब समझदार है ..तोह दुरी की ज़रूरत नहीं है क्युकी अब अजय को मनु संभल लेगा और उसकी गलतियूं को मनु अचे से समझकर हैंडल कर लेता है ,,,मैंने खुद देखा है की कैसे हु अजय को सही सीखता है ..हाँ जनता हूँ हमारे बचे स्मार्ट hain..unko लगता है माँ बाप से दूर रहते हैं पैर हम भी माँ बाप हैं अपने बचूं को समझना हमे आता hai..manu अजय को सही गाइडेंस दे रहा है और खुद अजय को भी मनु को देखकर की उसका बड़ा भाई कैसा है इससे सिख मिलेगी सो हु सही बनेगा ..सो कुल मिलकर अब अपने बचूं से मुझे दुरी बनने की ज़रूरत नहीं है..”
मनु चुप चाप दोनों की बातें सुन रहा था और सोच रहा था की उसके माँ बाप कितना कुछ डाव पैर लागए हुए थे उन दोनों भाइयों के फ्यूचर के लिए ..उसे उस समय अपने माँ बाप पैर बड़ा गर्व हुआ की उसके माँ बाप कैसे दोनों भाइयों से प्यार करते थे और बिना कहे भी दोनों पैर नज़र रखते the..yahan तक की उसे पता भी नहीं था की राजिंदर को उसके और अजय के बिच में होने वाले टॉपिक्स भी पता थे …
खैर यह सब चलता रहा और मनु स्कूल पूछा …
जहाँ उसे कल जैसा ट्रीट किया गया बात बात पैर सभी ने निचा दिखने की कोशिश की उसे …सबसे पीछे हु अकेला बेंच पैर बैठा tha..nisha आज भी स्कूल नहीं आयी thi..manu ने धयान से देखा था की चिंटू जब भी उसकी बजती होती तोह कितना खुश होता tha..baat बात पैर जब कोई मनु को निचा दिखता तोह मनु ध्यान से चिंटू के चेहरे को देखता ..उसके चेहरे की चमक और उसकी शैतानी हंसी देखकर मनु अचे से चिंटू की नफरत समझ गया था ..पैर उसे यह समझ नहीं आ रहा था ..की बाकी यूं को उसके बाप के नाम पैर निचा दिखने से क्या मिलने वाला था ..पैर साले सब लगे हुए थे ..उसे बात बात पैर जमादार …जमादार बोलने में ..पैर मनु अकेला करता भी क्या ..क्युकी साला कोई भी उसे सिद्ध कुछ कहता नहीं था ..बस बिच में कोई भी कहीं से चिलाकर बोलता “जमादार “और सब हसने लग जाते सबका ध्यान और ऑंखें मनु पैर गाड़ी होती जैसे सब उम्मीद लगये हुए थे इस टार्चर से मनु रो पड़े ..यह सामने से लड़ाई नहीं थी ,,,इस लड़ाई को आप साइकोलॉजी की लड़ाई भी कह सकते हैं आप की किसी को आप मेंटली टार्चर दो और उसे आप अन्दर से तोड़ दो …क्युकी सामने की लड़ाई में इंसान सिर्फ और सिर्फ हाथ पेअर तुड़वाता या तोड़ देता है पैर मेन्टल लड़ाई में इंसान को चोट भी अंडर hi मिलती hai..or उस चोट का असर उसकी फिजिकल बॉडी पैर नज़र आता है एक टाइम baad..kyuki मेन्टल टार्चर इंसान को सामने से नहीं भीतर से तोड़ता है तोह उसके शरीर पैर कोई चोट नज़र आती नहीं है ..
यह टार्चर बड़े पुराने टाइम से उसे किये जाते थे ..जैसे ओल्ड ेगीपतिएंस में किसी को अगर मेंटली टार्चर दिया जाता था तोह उसमे हु कैदी को एक अँधेरे कमरे में बंद करके उसके हाथ पेअर बांध कर एक बीएड पैर यह बीएड की शेप में लिटा दिया करते थे जिसके बाद उसके सर से काफी उचाई पैर एक पानी से भरा हुआ बर्तन बंधा जाता था जिस से निचे उस कैदी के सर पैर कुछ 30 सेकंड के बाद एक पानी की बूँद (वाटर ड्रॉप्स) टपका करती thi..aap सोचेंगे एक बूँद से क्या होगा पैर ज़रा सोच कर देखिए एक अंधेरे कमरे में जहाँ हु हिल नहीं सकता था उसके सर या माथे में पैर पानी क एक बूँद टपक कर उसकी मानसिक शांति और उसके दिमाग में चल रहे विचारों को कैसे डिस्टर्ब करती hogi..kuch जानते बाद hi हर कैदी को मेंटली ब्रोकन फील होने लगता था ..और पूरा दिन होने के बाद उसकी हालत पतली हो जाती थी …अगले उस कैदी को खाना कहिल्या जाता और फिर वहीँ बांध दिया जाता था …शामे ट्रीटमेंट के लिए …अधिकतर कैदी 3 या 4 दिन में टूटकर सब कुछ बोल देते थे ..यह ट्रीटमेंट स्पेस और दुश्मनो पैर किया जाता tha..is ट्रीटमेंट को अगर 1 वीक किया जाता तोह कैदी मर जाया करते थे या जो बच जाते थे हु पूरी तरह से पागल हो जाया करते थे…
2ंद वर्ल्ड वॉर के टाइम भी जिनको सपयिन्ग या किसी खास मक़सद से पकड़ा जाता था ..उनको बांध कर सिर्फ एक बेल्ल सुनाई जाती थी हर 30 के डिफरेंस पे जिसमे कैदी को यह मेंटली टार्चर 3 या 4 दिन के भीतर hi तोड़ दिया करता था और जिनपर आगे किया जाता हु या तोह पागल हो जाते या सुसाइड कर लिया करते थे …
आप सब सोच रहे होंगे की कहानी में यह सब क्या बकवास hai…toh यह बकवास नहीं फैक्ट है चाहो तोह गूगल कर लो …यहाँ इतना सब बताने का मक़सद इतना है …की चिंटू ने जो प्लान किया था उसमे उसका मक़सद यही था की मनु को इतना मेंटली टार्चर मिले या सब मिलकर मनु को इतना मेंटली तोड़ दें ताकि मनु कभी आगे न बाद पाए या तोह उसकी हिम्मत जवाब दे de..ya हु अंदर से टूटकर उसके आगे झुकार अपनी हार मान ले ..पैर खुद चिंटू ने भी यह सब नहीं सोच की अगर किसी को मेन्टल टार्चर किया जाये तोह …इंसान कभी कभी इतना टूट जाता है की अपनी खुद की पहचान भूल जाता है ,,,क्युकी बॉडी और मंद का सिद्ध कनेक्शन होता है …आप इस बात से समझ सकते है ..की एक लबोर वर्कर जितना फिजिकल वर्क करता है और उसे जितनी थकन होती है …उतना hi एक कंप्यूटर पैर काम करने वाले टारगेट पूरा करने वाले या ऑफिस में काम कर्णवाले पर्सन को होती है ..शायद कुछ लोग इस बात से सहमत न हो की एक फिजिकल वर्कर और एक मंद वर्कर (जो मंद से वर्क लेता है फिजिकल वर्क की जगह उसे मंद वर्कर hi कहना ठीक hoga)kya कपरिसों बूत आप गूगल पैर देख लेना की मंद से वर्क करना और बॉडी से वर्क करना दोनों में पर्सन को लगभग शामे hi थकन होती hai..dunia में कई रिसर्च हुई हैं इसी बात पैर कइयों ने अपनी पीएचडी की थीसिस भी लिखी हैं…
खैर बात थी मेन्टल टार्चर की चिंटू ने यही प्लान किया था की मनु का इनसब बातून का असर पड़े और हु मेंटली ब्रोकन हो जाये ..ताकि मनु को बर्बाद करके हु निशा के दिल में अपनी जगह बना सके और अपना प्यार पा सके ..और क्युकी अपने खुद के घर में मनु के नाम को सुन सुनकर उससे खुद का घर hi बेगाना महसूस होता tha..kyuki बात -बात पैर मनु यह, मनु हु, मनु जैसे बनो, आगे बड़ो मनु की तरह ,या बीटा हो तोह मनु जैसा हर रोज़ उसे यह मनु का नाम सुनकर मनु के नाम से नफरत हो गयी thi..per क्युकी खुद उसका hi फ़ायदा था मनु के साथ रहने में सो जब तक चलता रहा तब तक चिंटू चलता रहा ..
पैर जब से उसने निशा को देखा और निशा को देखते hi उसे प्यार हो गया अब पता नहीं की उसे प्यार था या निशा में उसे परफेक्ट पैकेज नज़र आता था अपने सिक्योर फ्यूचर का …की निशा उसके लिए बहुत मायने रखती थी पैर जब उसने निशा को मनु के आस पास देखा तोह उसकी नफ़रत ने उसे मनु को उसकी आँख में काँटा बना दिया ..और जब उसे पता लगा या उसने देखा की निशा की आँखों में मनु का प्यार परवान चढ़ने लगा है ..तोह उसे लगा की श्याद मनु निशा को उससे चीन लेगा …और आज तक मनु से हारते हुए उसे प्यार में भी मनु से हार hi मिलनेवाली थी जो शायद उसे बर्दास्त नहीं tha..so एक तरह से उसने अब मनु पैर यह मेन्टल टार्चर का वॉर किया था ..जिसमे मनु कितना टूटेगा और क्या मनु पैर यह मेन्टल वार काम करेगा इस सोच में चिंटू ने सोचे समझे कदम के साथ साड़ी क्लास को अपने साथ मिल्या tha..milya भी क्यात है …पहले भी बताया था फिर बता रहा हूँ सब अपने मतलब से चिंटू के साथ थे ..हर किसी का अपना एम्बिशन था कोई मनु से आगे निकल न चाहता था ,..तोह कोई मनु के स्टाइल और चार्म से जलता था ..और लडकियां है लडकियां उनको बहला क्या प्रॉब्लम थी मनु से …तोह उनसभी के साथ मनु ने हमशा हेल्पफुल नेचर रखा था ..बूत हु लड़कियों से लिमिट से hi बात किया करता था …जहाँ अधिकतर लडकियां मनु में ाचा बॉयफ्रेंड देखती थी ..पैर मनु ने उनको आगे बढ़ने का कोई चांस नहीं दिया tha..kyuki हर दूसरी लड़की उसे पाना चाहती thi..per मनु उन सभी से अपनी लिमिट बना कर बात करता था पैर निशा जबसे आयी थी मनु के साथ रहती थी ..तबसे लडकियां निशा से भी काफी हद तक जलने लगी thi…jiska निशा को और फ़ायदा हुआ ..निशा और करीब हो गयी थी मनु के ..जहाँ मनु सिर्फ निशा को दोस्त के नज़र से देखा करता था ..वहीँ निशा का प्यार साड़ी लड़कियां महसूस कर सकती थी और उस दिन जब निशा ने मनु को अपने हाथ से खाना खिलाया तोह पता नहीं कितनी लड़कियां निशा से निशा की किस्मत से और उसके मनु के पास होने से जलने लगी थी..
जिस तरह एक सिंगल लड़का अधिकतर लडकियां इग्नोर करती hain,uski चाहे कितनी भी खूबियां हो नहीं दिक्ति न hi उस पैर लड़कियां गौर करती हैं , पैर जब उसी लड़के की शादी हो जाये या उसके साथ उसकी लाइफ में कोई गर्लफ्रेंड बन जाये तोह हु hi इग्नोर करनेवाली लडकियां उस लड़के को सेक्सी समझने लगती हैं या पसंद करने लगती है (सॉरी गर्ल्स बूत थिस इस आल्सो fact)jis लड़के को पहले जो लड़कियां इग्नोर करती हैं वही जब उस लड़के को किसी और के साथ देखती हैं तब अचानक से उन्हें उसी लड़के में दिलचस्पी होने लगती है …वैसे hi निशा जब मनु के करीब होने लगी तोह हु लडकियां जो सामने से मनु को बॉयफ्रेंड नहीं बना पायी तोह उससेभी को निशा और मनु का करीब आना नागवार गुज़रा …जहां निशा पैसे में और सुंदरता में उन सभी से कई गुना आगे थी जिसको कुछ कहना और उसका कुछ करना उन लड़कयूँ के बस के बहार था सो उनका गुस्सा मनु पैर था की उसने उनमे से किसी को क्यों नहीं chuna…waise तोह अगर मनु उनमे से किसी एक को भी चंक लेता गर्लफ्रेंड के नाम पैर तोह उसका हाल भी निशा के जैसा िसलते होता उस लड़की को भी मनु के साथ अकेले रहना पड़ता पैर अब क्युकी अब निशा थी और निशा सिर्फ निशा नहीं थी उसका बैकग्राउंड भी ाचा tha..per मनु को निशा का ाचा और केयरिंग नेचर और उसके बातचीत का तरीका ाचा लगा था सो उसकी फ्रेंडशिप निशा से हुई thi..so अब आप समझ गए होंगे की चिंटू ने इतना सब क्यों और किस मक़सद के साथ किया था ..
क्युकी चिंटू चाहता था की मनु सब से दूर अकेला पद जाये और िसलते हो जाये जिस से हु डिप्रेशन में चला जाये और शायद खुद को ख़तम तक कर ले …
जैसा आजकल इंडिया में चल रहा है सुशांत सिंह राजपूत का केस …भी लगभग कुछ इसी की सिमिलॅरिटी के साथ है ,,की कैसे ज़िन्दगी जीने वाला ीत इंडिया में 7तह रैंक लेन वाला एक छोटे से शहर का लड़का …जो अपने टैलेंट के दम पैर श्याद और कुछ करता श्याद आगे और मिसाल बनता उन छोटे शहरो के टैलेंटेड लोगो के लिए जो सोचते हैं की हमारा क्या होगा ..उनके लिए सुशांत हु इंस्पिरेशन tha…jisne हर छोटी सिटी के इंसान को उसके सपने पुरे हो सकते हैं ऐसे पंख दिए the…kyuki आप सब अचे से जानते हैं हर इंसान अपने सपने में किसी न किसी को आइडल मंटा hi है जैसे सिंगिंग मैं लता जी , साइंस में आइंस्टीन या कलम शाहब सो कहीं न कहीं सभी किसी न किसी से इंस्पिरेशन लेते हैं ..ऐसे hi बहुत से लोगो की इंस्पिरेशन होगा श्याद सुशांत भी जो उस जगह खुद को आइसोलेटेड पता हो जहां सिर्फ बड़े लोग hi पाए जाते होंगे …जहाँ हु दिमाग से भी टैलेंटेड था ..वहीँ कुचउँ को िक दुनिआ जानती हैं ….सो सोचने वाली बात यही है की जिन्दा आदमी खुद को कितना आइसोलेटेड महसूस करता होगा जिसने सुसाइड जैसा बड़ा कदम तक लिया होगा कितना कोई मानसिक टूर पैर टूट जाता है की खुदखुशी जैसा कदम लेता है ..नार्मल लाइफ में आप उंगली श्याद जान भूझकर भी न काटेंगे पैर जब मेंटली टार्चर झेलते हैं और खुद को आइसोलेटेड पते हैं तोह खुद की उंगली भी न काट पाने वाला इंसान खुद को ख़तम तक कर देता है ..यह इस बात की मिसाल है ..
खैर मेरा फिल्म और celebrity’s से कोई लेना देना नहीं ..बूत आइसोलेशन और मेन्टल टार्चर जिसके तहत चिंटू ने जो प्लान बनाया था हु आप सभी को क्लियर करना था …सो अब ताका आप समझ गए होंगे की चिंटू को मनु की लाइफ ख़तम होने से भी कोई प्रॉब्लम नहीं थी ..एक तरह से अगर मनु मानसिक ट्रामा के चलते अगर मर भी जाता तोह उस से उसे कोई प्रॉब्लम नहीं थी बल्कि उसके लिए तोह निशा का रास्ता साफ़ हो जाने वाला था …
खैर मनु ने आज का दिन भी निकला …राजिंदर आज भी उसे रात को वाक पैर ले कर गया और दिन भर के बारे में पूछा और समझा …मनु ने भी सब खुलकर बताया की क्या बिहेवियर है पूरी क्लास का उसके साथ..
तोह राजिंदर ने उसे समझते हुए कहा ..
राजिंदर “बीटा आगे भी ऐसे कई टाइम तुम्हारे साथ होगा तुम्हारे साथ के लोग hi तुम्हारे रस्ते की दीवारे होंगे तोह क्या करोगे ..तुम उन सबकी परवाह न करना क्युकी जो भी अपने मतलब के लिए तुम्हारे साथ अगर गलत बर्ताव करे तोह उनकी परवाह करोगे तोह इन सब में hi उलझकर रह jaoge…jo तुम्हारे लिए गलत सोचे उसकी परवाह करना बेवकूफी है ..सो उनसब के बारे में कभी मत सोचना …दुनिआ है hi ऐसी ..तुम सिर्फ अपने फ्यूचर और फॅमिली के बारे में सोचना क्युकी जब भी तुम खुदको अकेला फील करो तोह हमसभी को याद करलेना हम सभी दिल, दिमाग और हर तरह से तुम्हारे साथ हैं..”
मनु “ पैर पापा पूरी क्लास एक साथ कैसे समझना थोड़ा मुश्किल है..”
राजिंदर “ बीटा दुनिआ में सभी का अपना अपना कोई न कोई लालच या स्वार्थ ज़रूर होता है …जिसके के चलते कब कोण किसका दुश्मन बन जाये कहना मुश्किल है …और अगर तुम इन सब के बारे में सोचने लगो गए तोह अपने रस्ते से भटक जाओगे …सो जो साथ है ठीक जो न साथ हो तोह ठीक आपने रस्ते पैर आगे चलते raho..kyuki लास्ट मैं इंसान की पहचान उसकी कामयाबी hi होती है …और साड़ी दुनिआ चढ़ते सूरज को सलाम करती hai..so या तोह यह सोचो की आगे कैसे बडोगे या यह सोचते रहो की सब एक साथ तुम्हारे खिलाफ क्यों ??हैं …फैसला तुम पैर है या तोह उनकी परवाह करो जिनको तुम्हारी परवाह hai…ya उनकी परवाह करो जिनको तुम्हारी हार से hi मतलब है जिनके लिए तुम्हारी अछइयां कोई मायने नहीं रखती..”
मनु “पापा आपका मतलब अचे से समझ गया हूँ थैंक्स ा लोट की आपने मेरा कन्फूसिओं क्लियर कर दिया वार्ना सुच में मैं अकेला महसूस कर रहा था पूरी क्लास में पैर आपने अचे से समझा दिया है की मैं अकेला नहीं हूँ और न मुझे उनसब की ज़रूरत है ,मुझे यही बात परेशान कर रही थी की अचानक से यह सारे क्यों एक जैसे हो gaye..??per अब सब ठीक है और don’t वोर्री मैं अभी अकेला ज़रूर हूँ क्लास में पैर दिमाग से कमज़ोर नहीं हूँ हाँ कुछ सवाल तंग कर रहे थे पैर आपने सब क्लियर कर दिया है की फॅमिली मेरे साथ है ..सो आगे बढ़ने पैर ध्यान दूंगा आगे से लव ु पापा..”
राजिंदर “ लव ु तो बीटा मुझे भी टेंशन थी की कहीं तुम कोई गलत कदम उठालो या पता नहीं क्या करो पैर मुझे अपने बेटे की काबिलियत अचे से पता सो जहाँ तुम कन्फ्यूज्ड फील करो तोह अपने बाप से बिना टेंशन के बात कर लेना ok “
“Ok पापा अब घर चलने या भी गुमना है “ मनु
राजिंदर “ नहीं बीटा थक गया हूँ पैर तेरी चिंता थी तोह बात करने का टाइम निकलना भी ज़रूरी th..chal अब टग हर चल अब चैन से सो सकूंगा..”
दोनों बाप बेटे घर आ आगये थे …और सो गए …
अगला दिन भी शामे रहा .जिसमे सबने आपने बेस्ट दिया मनु को निचा दिखने में पैर मनु शांत था …उसे उसके पिता से सिख मिल गयी थी …सब कोई मौका नहीं छोड़ रहे थे मनु को निचा दिखने का ..पैर मनु को न अब उनसब की परवाह थी न उनसब से कोई मतलब ….पड़ने के टाइम पड़ता और लंच के टाइम नीता मम के पास चला जाता …आज तीसरे दिन भी निशा नहीं आयी thi..manu को अब निशा की चिंता हो रही थी …
” की तीन दिन से पता नहीं क्यों निशा आ नहीं रही है …पता नहीं क्या हुआ है निशा को ….कहीं चिंटू ने तोह कुछ नहीं कर दिया उसे नहीं चिंटू निशा को छू भी नहीं सकता निशा कैग हर में hi एक दजन नौकर हैं फिर अंकल हैं अन्त्य hain…or हु लम्बा तगड़ा गार्ड है जो गेट पैर रहता hai…ek हाथ अगर उसका पद गया तोह चिंटू का मुट्ठ hi निकल जायेगा …पैर चिंटू में कहाँ इतनी हिमायत है की निशा को कुछ कर सके …कहीं निशा की तबियत तोह ठीक hai..nahi कहीं उसे कुछ हो गया ho…ho सकता है कहीं गयी हो ..”
ऐसे कितने सारे सवाल एक साथ मनु के दिमाग में एक साथ घूम रहे the…jahaan उसे आज निशा की कमी महसूस हो रही thi…yeh इंसानी फितरत hi है की अगर कोई रात दिन आपके सामने हो तोह कोई बात नहीं पैर अगर उसी इंसान से कुछ दिन की दूरी कई जनमो के बराबर लगती है …यही हाल इस समय मनु का था ..क्युकी सबने उसे पुरे 3 दिन से टार्चर किया था …पहले दो दिन तोह उसके दिमाग में निशा का ख्याल नहीं आया पैर दूसरे और तीसरे दिन में उसे निशा के लिए चिंता होने लगी ..फिर अचानक से उसके दिमाग में आया कहीं निशा भी इन सबके साथ मिल गयी toh….is ख्याल से मनु को एक अंजना डर सा लगा …हु दिल से दुआ करने लगा था की निशा भी और जैसा बर्ताव न करे उसके साथ …
क्या होगा अगर निशा भी वैसे hi बर्ताव करे जैसे सब उसके साथ करते hain…yeh सोचकर उसके दिल में एक तीस सी उठी ..पैर फिर उसे अपने पिता की बात याद आयी ..की जो तुम्हारी परवाह करे उसकी परवाह करो जो न तुम्हरे बारे में सोचे तुम भी आगे बढ़कर आपने रस्ते चल दो …
पैर मनु के लिए ऐसे hi निशा को इग्नोर करना क्या पॉसिबल था ..और निशा कहाँ है 3 दिन से और अगर निशा का सामना अगर मनु से हुआ तोह उसका रिएक्शन क्या होगा …क्या हु भी सभी की तरह मनु से नफरत करेगी या …शामे रहेगी और अगर निशा भी शामे ट्रीट करे और लोगो जैसा तोह क्या मनु बर्दास्त कर सकेगा ….इसका जवाब या किस्मत के हाथ या आनेवाले टाइम के हाथ में था….:हिंट:
बचपन की यादें
उसके इन सब बातों को बताने से मनु को क्या सिख मिली और आगे मनु कैसे चिंटू को जवाब देगा …क्युकी चिंटू ने अपनी तरफ से नफरत की जुंग साफ़ लहज़े में शुरू कर दी थी ….राजिंदर के काम का सहारा लेकर जो उसने मनु को पुरे स्कूल में निचा दिखने की कोशिश थी उससे .साफ़ इशारा था की मनु …चिंटू की नफरत ने elaan-e-jung कर दिया hai…baari अब मनु की थी जवाब देने ki.or निशा का क्या रिएक्शन होगा मन ऊके लिए चिंटू के इस झूंठ से और मनु का क्या जवाब होगा चिंटू और आनेवाले कल के हर दुश्मन को यह अब चिंटू की किस्मत और टाइम पैर निर्भर था......
अब आगे....
अब आगे क्या होनेवाला था यह तोह वक़्त hi बता सकता था ,,पैर कहीं न कहीं मनु को उसके पिता ने आज जो नसीहत दी थी की दुनिआ वैसी नहीं जैसी दिखती hai..yeh मनु को कुछ हद तक समझ आ चूका tha…or उसने भी अपने बाप की बात को एक वडा किया था ..की आनेवाले टाइम में वह अपने माँ और बाप को आराम देगा मतलब और ज्यादा म्हणत नहीं करने देगा …अब उसका वडा और आनेवाला टाइम उसे यह सब करने देगा या नहीं यह मनु की किस्मत , उसके दिमाग और वक़्त के साथ उसके सही या गलत फैसले जो हु आगे लेगा या लेने की कोशिश करेगा उसपर निर्भर थे …क्युकी इंसान चाहे कितना भी दुनिआ से लड़ ले चाहे किस्मत साथ दे या न दे पैर एक इंसान के सही टाइम लिए गए सही या गलत फैसले से उसकी ज़िन्दगी बदल जाती hai…ya यूँ कहिये इंसान के आज लिए हुए फैसले hi उसे बड़ा या छोटा बनाते हैं दुनिआ में इज़्ज़त और बजती दोनों दिलाते hain…aage क्या होगा ,कैसे होगा और मनु क्या फैसले लेगा यह सब आनेवाला वक़्त hi जनता था..
खैर अगला दिन आया ….सुबह का अपना रेगुलर रूटीन मनु ने फॉलो किया मम्मी की हेल्प ,खुद को और अजय को त्यार करना और साथ स्कूल ले jana..ajay और सुमित्रा को तोह पता भी नहीं था की मनु किस परेशानी से जूझ रहा है ..जिसपर मनु खुद नहीं चाहता था की इन दोनों को कुछ पता चले अजय क्युकी छोटा था और मनु से बहुत प्यार करता था ..अजय एक बार को अपने बाप से गुस्सा हो जाता था ..पैर मनु उसके लिए बहुत मायने रखता था …क्युकी उसकी जितनी परवाह शायद मनु करता था कोई और करता हो …आप सब भी जानते हैं क्युकी उसके दोनों माँ और बाप सिर्फ अपने बचूं के फ्यूचर के लिए कितनी म्हणत कर रहे the..jis वजह से दोनों अपने बचूं को ज्यादा टाइम नहीं दे पते the…jis वजह से दोनों एक दूसरे के साथ ज्यादा वक़्त बीत्या करते थे और ..क्युकी अजय और मनु में मनु अजय से बड़ा था सो मनु अजय की हर जरूरत के समय उसके सामने रहता था ,,जिस वजह से अजय के लिए मन ऊके दिल मैं एक स्पेशल रेस्पेक्ट thi..or क्युकी कई बार अजय मनु के मन करने पैर कुछ चीज़ें कर देता था अपने बचपने मैं पैर जब भी अजय ने मनु की बात नहीं मानी तब तब अजय किसी न किसी मुसीबत में पड़ा ..जिस पैर भी मनु अजय को हर बार उस मुसीबत से निकल hi लेता tha..jaise आइस फैक्ट्री में मनु ने अजय को बचाया था जिसमे अजय को तोह मनु ने पानी में डूबने से बचा लिया था पैर खुद उसके पेअर में कांच लग गया था ..जिसपर भी उसने अजय को कुछ नहीं कहा था ..और घर पैर भी नहीं कहा था वार्ना राजिंदर और सुमित्रा अचे से अजय की क्लास लगडते सो इन सब बातों के चलते अजय मनु की बहुत रेस्पेक्ट करता था और प्यार तोह शुरू से था hi उसे अपने बड़े भाई से ..
खैर मनु अजय क्युकी छोटा था सो उसे अपनी परेशानियों से जितना हो सके दूर रहना चाहता tha…kyuki मनु जानता था की अजय जो उसकी बुराई तक नहीं सुन सकता उसे पता लगा तोह पता नहीं कितना ड्रामा होगा स्कूल में जो मनु नहीं चाहता था और अब बची सुमित्रा …सुमित्रा को मनु इसलिए यह सब बताना नहीं चाहता था क्युकी वह अचे से जानता था की अगर सुमित्रा को यह सब पता चलेगा की एक तरफ उसका पति राजिंदर कितनी म्हणत कर रहा है अकेले 3 या 4 लोगो का काम कर रहा है और दूसरी तरफ मनु को उसी के बाप के नाम पैर निचा दिखया जा रहा है ..तोह हु पता नहीं क्या करती ..दूसरी तरफ राजिंदर ने भी उसे सुमित्रा को इन सब से दूर रखने को कहा tha..or मनु खुद नहीं चाहता था की सुमित्रा पैर कोई भी मेंटली प्रेशर बने सो ..इन सब बातों को देखकर मनु ने अजय और सुमित्रा को अपनी और राजिंदर की टेंशन से दूर रखना ठीक समझा..
खैर आज सुबह मॉर्निंग मैं सब नार्मल hi था ,पैर एक बात अलग हुई थी राजिंदर जो सुबह नास्ता करता और चुप चाप bye बोलकर घर से ऑफिस के लिए निकल जाता वह आज मनु और अजय के रेडी होने के बाद मनु के गले लग कर उसके सर पैर हाथ फेर कर बोलै “बेस्ट ऑफ़ लक मेरे sher”…jis पैर सुमित्रा चौंके बिन आना रह सकीय और बोली “आज यह सब कैसे सूरज कहा से निकला है या यह कोई सपना है की आप इनको बेस्ट ऑफ़ लक कह रहें हैं “ ????
राजिंदर ने इस पैर मन ऊके गले लगे हुए कहा “ हाँ जी प्यार तोह सिर्फ आपको hi है बचूं से हमको कहाँ मैं कहता नहीं तोह यह मतलब नहीं की मुझे मेरे दोनों शेरो से प्यार नहीं hai…main जितना अपने बचूं से प्यार करता हूँ ..उतना hi तुमसे भी ..”
इस बात पैर सुमिता शर्म से बोली “ आप भी न मैं ऐसा तोह नहीं कहा और कुछ तोह सरम करो बचे सामने हैं”
राजिंदर “ तोह क्या हुआ उनको भी तोह पता चले कैसे उनका बाप उनकी इस शेरनी माँ को चाहता है”
इस पैर सुमित्रा सरम से आगे कोई बात न बड़े तोह मुस्कुराती हुई किचन में जाकर काम करने लगी…
राजिंदर ने अब मनु की तरफ देखा जो इस समय उस कंधे से लगा हुआ था …क्युकी राजिंदर ने उसे गले लगने के बाद से अपने से अलग नहीं किया tha..ab राजिंदर ने नार्मल होकर मनु से कहा “ मेरे शेर बेटे तू जानता है न आगे का टाइम में कैसे लोग मिलने वाले हैं ..बीटा फिर से कह रहा हूँ आगे लोग मिलकर तेरी आँखों में आंख दाल कर झूठ बोलेंगे और तुझे यह जानते हुए भी की सामने वाला झूठ कह रहा है ,,सही टाइम आने तक उसको झेलना होगा क्युकी बिना सही टाइम के तू कुछ नहीं कर पायेगा ..और जब टाइम आये तोह हर एक को धोकर निचोड़ कर सूखा देना ..समझ रहा है न …क्युकी अगर तूने जल्द बाज़ी में कोई भी फैसला लिया या सही फैसला लेने में चूक की तोह आगे बहुत कुछ बदल जायेगा ..तू मेरा मतलब समझ रहा है न??”
मनु “ हाँ पापा अचे से समझ रहा हूँ मुझे खुद भी सही टाइम का इंतज़ार है …क्युकी मैं अपने दुश्मन से भी सिख लेता हूँ …जब usne(chintu ने) सही टाइम के लिए इतना वेट किया तोह मुझे भी उससे सिख मिली है की …मैं खुद उसे अचे से सही टाइम पर जवाब दूंगा …आप टेंशन न लो ..”
राजिंदर “ बीटा टेंशन होनी लाज़मी है बाप हूँ तेरा पैर तुझे भी अचे से जानता हूँ तू मेरा hi खून है तोह तेरी काबिलयत मैं अचे से जानता हूँ पैर एक बाप होने के नाते समझाना मेरा फ़र्ज़ बनता है ..वही कर रहा हूँ मैं जनता हंट ु सही टाइम पैर अपना काम कर देगा ..और एक बात का ध्यान रखना तेरा यह बाप हमशा तेरे साथ तेरे हर फैसले में तेरे साथ hai..so आगे से कोई भी बात अगर तंग करे तोह बिंदास बता देना ..अगर बाप के सामने बोलने में कोई झिझक हो तोह दोस्त समझकर बोल देना ..ok “
मनु हसकर “ok पापा “ दोस्त समझकर हम्म!”
राजिंदर मुस्कुराकर “ हम्म्म! नहीं हाँ बीटा क्युकी कुछ बातें बाप से कहने में बेटे शर्मा जाते हैं तब दोस्त समझ कर कह देना क्युकी जब बेटे का पेअर बाप के झूठे में आने लगे तोह हर बाप को बेटे को एक दोस्त की तरह समझना चाहिए (पुराणी कहावत है सुनता आया हूँ याद आयी तोह लिख दी ) और वैसे भी एक अचे बेटे की साड़ी खूबियां है तुझमे तोह मेरा भी फ़र्ज़ बनता है की मैं अचे बाप होने का फ़र्ज़ निभाऊं ….सो जब कोई टेंशन हो अपने बाप से शेयर कर लेना मुझे भी नया दोस्त मिल जायेगा ..और घर में न कम्फर्टेबले लगे तोह दोनों बाप बेटे नाईट वाक पैर डिस्कशन कर lenge…wahan तोह अपनी “”बॉयज टॉक”” आराम से हो जाएगी ..
मनु कुछ बोलता उससे पहले hi सुमित्रा बहार आते हुए बोली “आज कोई स्पेशल दिन है क्या जो आज अपने मनु को इतना चिपका रखा है जी …और क्या बातें हो रही हैं मैं भी तोह सुनु ..”
राजिंदर “आज तक तुम्हरे और तुम्हारी सहेली के बिछा में मैं कुछ पूछा ,,और जब पूछा तोह “गर्ल्स टॉक “सुनकर चुप हो गया ..खैर यह बाप बेटे की बिच की बात है ..ज्यादा कुछ ख़ास नहीं ..जस्ट “बॉयज टॉक “
सुमित्रा “ मतलब मैं कुछ पूछ नहीं सकती आपके इस “बॉयज टॉक “ के बारे में …पैर कोई बात नहीं मुझे तोह फिर भी बहुत ख़ुशी है की आज आपने अपने बेटे से इतनी बात की “
राजिंदर “ सुमित्रा मैं अपने परिवार से बहुत प्यार करता हूँ मेरे यह दोनों बेटे मेरी दोनों आँखें है और तुम मेरा दिल हो .ऐसा नहीं है की मुझे तुम लोगो की परवाह नहीं है ..पैर एक मर्द होने के नाते मुझे तुम सभी की जिम्मेदारी भी निभानी है ..सो उसी के चलते ज्यादा टाइम नहीं दे पता हूँ बचूं और तुमको ..पैर इसका यह रति भर मतलब नहीं की मुझे तुम सब से प्यार नहीं hai..pyaar जाताना और निभाना दो अलग बात hain…jatata नहीं पैर पूरी ईमानदारी से निभा रहा हूँ ..और कमा क्या सिर्फ अपने लिए रहा हूँ ..नहीं न आनेवाले टाइम में बचे बड़े होंगे उनकी ज़रूरत भी बढ़ेंगी तब उनके अचे फ्यूचर के लिए उनका बाप रेडी मिलेगा …तब उनको भी पता चल जायेगा की उनका बाप नकार निकम्मा नहीं है एक जिम्मेदार बाप है …”
इस बात पैर सुमित्रा रो पड़ी “मुझे माफ़ कर दिज्ये मैं ऐसा तोह नहीं कहा tha..main आपको अचे से जानती hun..per एक दुःख था की बचूं के साथ आप एक दुरी बना कर रखते थे ..वह बात मुझे खटकती थी ..कह नहीं पति थी पैर दुखी रहती थी पैर आज अपने इस तरह मनु को गले लगा के बात किट ओह लगा कोई सपना है ..सो यकीं नहीं hua..mujhe माफ़ कर दीजिये ,,मैं आपको गलत समझती थी..”
राजिंदर “ सुमित्रा बचे जब छोटे थे तब दुरी इसलिए रक्त था की बचे अगर दोनों माँ बाप से प्यार पाएंगे तोह सुनेगे किसी की और बिगड़ जाते क्युकी मैं शाक्त था और दुरी बनाकर रखता था और तुम प्यार से समझती थी तोह देखो अपने बचे कैसे hai..kya तुम्हे भी मेरा त्याग समझ नहीं आया …खुद के बचूं से दूर रहना कितना मुश्किल होता hai..main जनता हूँ ..उस नालायक जय चाँद को पालने से मैंने यह सिख ली थी की अगर सभी प्यार करे तोह इंसान नालायक hi बनता है क्युकी ज्यादा प्यार से इंसान जिम्मेदारी से दूर रहता है उसे पता होता है की जिम्मेवारी उसे मिलेगी nahi..so जब इंसान जिम्मेदारी की क़द्र नहीं करता तोह बदले में सिर्फ और सिर्फ आलसी और काम बुद्धि का prani,or म्हणत से जी चुरानेवाला ,,नालायक इंसान बनता है ..बिलकुल जय चाँद की तरह ..क्या तुमको अपने मनु और जैचंद में फरक नज़र नहीं आता…???”
सुमित्रा सोचती हुई “ कैसा फरक जी “
राजिंदर “हु आलसी है …काम बुद्धि वाला है अपनी बीवी के दिमाग के आगे झुका रहता hai..or काम काज से जी चुरता hai…kya अपना मनु भी वैसा है …नहीं वह अभी छोटा है पैर अभी से पूरा दिन पड़ने के साथ बस्सी रहता है ..दो जगह पैर सिकने भी जाता है बिज़नेस को …और अपनी क्लास में पिछले दो साल से फर्स्ट आ रहा है ..तोह जय चाँद के टाइम पैर जो मैं गलती किट hi उसकी हर मांग को पूरी करके उन सब गलतियूं से मने सीखा था ..की बचे की बेमतलब की मांग कभी पूरा न karo..or देखलो अपने बेटे को क्या इतना छोटा होने के बाद भी कितना मेहनती है ..और जिम्मेदार भी ..तोह क्या मैंने दुरी बनाकर गलत किया ..बोलो”
सुमित्रा रट हुए “नहीं जी आपने बिलकुल ठीक किया मैं hi पागल थी बेवजह खुद से आप पैर गुस्सा हुआ करती थी की आप सिर्फ जैचंद को hi प्यार करते हैं ऐसा तोह मैंने सोचा hi नहीं tha..mujhe माफ़ कर देना जी ..पैर एक चीज़ मुझे समझ नहीं आयी जी “
Rajinder”konsi चीज़ज़ “
सुमित्रा “आपने कहा था की बच्चों से आप दुरी बनाकर रखते थे तोह अभी अजय भी छोटा है तोह मतलब अभी भी दूर hi रहेंगें बचूं से ??”
राजिंदर “ अब उसकी ज़रूरत नहीं है …मनु अब समझदार है ..तोह दुरी की ज़रूरत नहीं है क्युकी अब अजय को मनु संभल लेगा और उसकी गलतियूं को मनु अचे से समझकर हैंडल कर लेता है ,,,मैंने खुद देखा है की कैसे हु अजय को सही सीखता है ..हाँ जनता हूँ हमारे बचे स्मार्ट hain..unko लगता है माँ बाप से दूर रहते हैं पैर हम भी माँ बाप हैं अपने बचूं को समझना हमे आता hai..manu अजय को सही गाइडेंस दे रहा है और खुद अजय को भी मनु को देखकर की उसका बड़ा भाई कैसा है इससे सिख मिलेगी सो हु सही बनेगा ..सो कुल मिलकर अब अपने बचूं से मुझे दुरी बनने की ज़रूरत नहीं है..”
मनु चुप चाप दोनों की बातें सुन रहा था और सोच रहा था की उसके माँ बाप कितना कुछ डाव पैर लागए हुए थे उन दोनों भाइयों के फ्यूचर के लिए ..उसे उस समय अपने माँ बाप पैर बड़ा गर्व हुआ की उसके माँ बाप कैसे दोनों भाइयों से प्यार करते थे और बिना कहे भी दोनों पैर नज़र रखते the..yahan तक की उसे पता भी नहीं था की राजिंदर को उसके और अजय के बिच में होने वाले टॉपिक्स भी पता थे …
खैर यह सब चलता रहा और मनु स्कूल पूछा …
जहाँ उसे कल जैसा ट्रीट किया गया बात बात पैर सभी ने निचा दिखने की कोशिश की उसे …सबसे पीछे हु अकेला बेंच पैर बैठा tha..nisha आज भी स्कूल नहीं आयी thi..manu ने धयान से देखा था की चिंटू जब भी उसकी बजती होती तोह कितना खुश होता tha..baat बात पैर जब कोई मनु को निचा दिखता तोह मनु ध्यान से चिंटू के चेहरे को देखता ..उसके चेहरे की चमक और उसकी शैतानी हंसी देखकर मनु अचे से चिंटू की नफरत समझ गया था ..पैर उसे यह समझ नहीं आ रहा था ..की बाकी यूं को उसके बाप के नाम पैर निचा दिखने से क्या मिलने वाला था ..पैर साले सब लगे हुए थे ..उसे बात बात पैर जमादार …जमादार बोलने में ..पैर मनु अकेला करता भी क्या ..क्युकी साला कोई भी उसे सिद्ध कुछ कहता नहीं था ..बस बिच में कोई भी कहीं से चिलाकर बोलता “जमादार “और सब हसने लग जाते सबका ध्यान और ऑंखें मनु पैर गाड़ी होती जैसे सब उम्मीद लगये हुए थे इस टार्चर से मनु रो पड़े ..यह सामने से लड़ाई नहीं थी ,,,इस लड़ाई को आप साइकोलॉजी की लड़ाई भी कह सकते हैं आप की किसी को आप मेंटली टार्चर दो और उसे आप अन्दर से तोड़ दो …क्युकी सामने की लड़ाई में इंसान सिर्फ और सिर्फ हाथ पेअर तुड़वाता या तोड़ देता है पैर मेन्टल लड़ाई में इंसान को चोट भी अंडर hi मिलती hai..or उस चोट का असर उसकी फिजिकल बॉडी पैर नज़र आता है एक टाइम baad..kyuki मेन्टल टार्चर इंसान को सामने से नहीं भीतर से तोड़ता है तोह उसके शरीर पैर कोई चोट नज़र आती नहीं है ..
यह टार्चर बड़े पुराने टाइम से उसे किये जाते थे ..जैसे ओल्ड ेगीपतिएंस में किसी को अगर मेंटली टार्चर दिया जाता था तोह उसमे हु कैदी को एक अँधेरे कमरे में बंद करके उसके हाथ पेअर बांध कर एक बीएड पैर यह बीएड की शेप में लिटा दिया करते थे जिसके बाद उसके सर से काफी उचाई पैर एक पानी से भरा हुआ बर्तन बंधा जाता था जिस से निचे उस कैदी के सर पैर कुछ 30 सेकंड के बाद एक पानी की बूँद (वाटर ड्रॉप्स) टपका करती thi..aap सोचेंगे एक बूँद से क्या होगा पैर ज़रा सोच कर देखिए एक अंधेरे कमरे में जहाँ हु हिल नहीं सकता था उसके सर या माथे में पैर पानी क एक बूँद टपक कर उसकी मानसिक शांति और उसके दिमाग में चल रहे विचारों को कैसे डिस्टर्ब करती hogi..kuch जानते बाद hi हर कैदी को मेंटली ब्रोकन फील होने लगता था ..और पूरा दिन होने के बाद उसकी हालत पतली हो जाती थी …अगले उस कैदी को खाना कहिल्या जाता और फिर वहीँ बांध दिया जाता था …शामे ट्रीटमेंट के लिए …अधिकतर कैदी 3 या 4 दिन में टूटकर सब कुछ बोल देते थे ..यह ट्रीटमेंट स्पेस और दुश्मनो पैर किया जाता tha..is ट्रीटमेंट को अगर 1 वीक किया जाता तोह कैदी मर जाया करते थे या जो बच जाते थे हु पूरी तरह से पागल हो जाया करते थे…
2ंद वर्ल्ड वॉर के टाइम भी जिनको सपयिन्ग या किसी खास मक़सद से पकड़ा जाता था ..उनको बांध कर सिर्फ एक बेल्ल सुनाई जाती थी हर 30 के डिफरेंस पे जिसमे कैदी को यह मेंटली टार्चर 3 या 4 दिन के भीतर hi तोड़ दिया करता था और जिनपर आगे किया जाता हु या तोह पागल हो जाते या सुसाइड कर लिया करते थे …
आप सब सोच रहे होंगे की कहानी में यह सब क्या बकवास hai…toh यह बकवास नहीं फैक्ट है चाहो तोह गूगल कर लो …यहाँ इतना सब बताने का मक़सद इतना है …की चिंटू ने जो प्लान किया था उसमे उसका मक़सद यही था की मनु को इतना मेंटली टार्चर मिले या सब मिलकर मनु को इतना मेंटली तोड़ दें ताकि मनु कभी आगे न बाद पाए या तोह उसकी हिम्मत जवाब दे de..ya हु अंदर से टूटकर उसके आगे झुकार अपनी हार मान ले ..पैर खुद चिंटू ने भी यह सब नहीं सोच की अगर किसी को मेन्टल टार्चर किया जाये तोह …इंसान कभी कभी इतना टूट जाता है की अपनी खुद की पहचान भूल जाता है ,,,क्युकी बॉडी और मंद का सिद्ध कनेक्शन होता है …आप इस बात से समझ सकते है ..की एक लबोर वर्कर जितना फिजिकल वर्क करता है और उसे जितनी थकन होती है …उतना hi एक कंप्यूटर पैर काम करने वाले टारगेट पूरा करने वाले या ऑफिस में काम कर्णवाले पर्सन को होती है ..शायद कुछ लोग इस बात से सहमत न हो की एक फिजिकल वर्कर और एक मंद वर्कर (जो मंद से वर्क लेता है फिजिकल वर्क की जगह उसे मंद वर्कर hi कहना ठीक hoga)kya कपरिसों बूत आप गूगल पैर देख लेना की मंद से वर्क करना और बॉडी से वर्क करना दोनों में पर्सन को लगभग शामे hi थकन होती hai..dunia में कई रिसर्च हुई हैं इसी बात पैर कइयों ने अपनी पीएचडी की थीसिस भी लिखी हैं…
खैर बात थी मेन्टल टार्चर की चिंटू ने यही प्लान किया था की मनु का इनसब बातून का असर पड़े और हु मेंटली ब्रोकन हो जाये ..ताकि मनु को बर्बाद करके हु निशा के दिल में अपनी जगह बना सके और अपना प्यार पा सके ..और क्युकी अपने खुद के घर में मनु के नाम को सुन सुनकर उससे खुद का घर hi बेगाना महसूस होता tha..kyuki बात -बात पैर मनु यह, मनु हु, मनु जैसे बनो, आगे बड़ो मनु की तरह ,या बीटा हो तोह मनु जैसा हर रोज़ उसे यह मनु का नाम सुनकर मनु के नाम से नफरत हो गयी thi..per क्युकी खुद उसका hi फ़ायदा था मनु के साथ रहने में सो जब तक चलता रहा तब तक चिंटू चलता रहा ..
पैर जब से उसने निशा को देखा और निशा को देखते hi उसे प्यार हो गया अब पता नहीं की उसे प्यार था या निशा में उसे परफेक्ट पैकेज नज़र आता था अपने सिक्योर फ्यूचर का …की निशा उसके लिए बहुत मायने रखती थी पैर जब उसने निशा को मनु के आस पास देखा तोह उसकी नफ़रत ने उसे मनु को उसकी आँख में काँटा बना दिया ..और जब उसे पता लगा या उसने देखा की निशा की आँखों में मनु का प्यार परवान चढ़ने लगा है ..तोह उसे लगा की श्याद मनु निशा को उससे चीन लेगा …और आज तक मनु से हारते हुए उसे प्यार में भी मनु से हार hi मिलनेवाली थी जो शायद उसे बर्दास्त नहीं tha..so एक तरह से उसने अब मनु पैर यह मेन्टल टार्चर का वॉर किया था ..जिसमे मनु कितना टूटेगा और क्या मनु पैर यह मेन्टल वार काम करेगा इस सोच में चिंटू ने सोचे समझे कदम के साथ साड़ी क्लास को अपने साथ मिल्या tha..milya भी क्यात है …पहले भी बताया था फिर बता रहा हूँ सब अपने मतलब से चिंटू के साथ थे ..हर किसी का अपना एम्बिशन था कोई मनु से आगे निकल न चाहता था ,..तोह कोई मनु के स्टाइल और चार्म से जलता था ..और लडकियां है लडकियां उनको बहला क्या प्रॉब्लम थी मनु से …तोह उनसभी के साथ मनु ने हमशा हेल्पफुल नेचर रखा था ..बूत हु लड़कियों से लिमिट से hi बात किया करता था …जहाँ अधिकतर लडकियां मनु में ाचा बॉयफ्रेंड देखती थी ..पैर मनु ने उनको आगे बढ़ने का कोई चांस नहीं दिया tha..kyuki हर दूसरी लड़की उसे पाना चाहती thi..per मनु उन सभी से अपनी लिमिट बना कर बात करता था पैर निशा जबसे आयी थी मनु के साथ रहती थी ..तबसे लडकियां निशा से भी काफी हद तक जलने लगी thi…jiska निशा को और फ़ायदा हुआ ..निशा और करीब हो गयी थी मनु के ..जहाँ मनु सिर्फ निशा को दोस्त के नज़र से देखा करता था ..वहीँ निशा का प्यार साड़ी लड़कियां महसूस कर सकती थी और उस दिन जब निशा ने मनु को अपने हाथ से खाना खिलाया तोह पता नहीं कितनी लड़कियां निशा से निशा की किस्मत से और उसके मनु के पास होने से जलने लगी थी..
जिस तरह एक सिंगल लड़का अधिकतर लडकियां इग्नोर करती hain,uski चाहे कितनी भी खूबियां हो नहीं दिक्ति न hi उस पैर लड़कियां गौर करती हैं , पैर जब उसी लड़के की शादी हो जाये या उसके साथ उसकी लाइफ में कोई गर्लफ्रेंड बन जाये तोह हु hi इग्नोर करनेवाली लडकियां उस लड़के को सेक्सी समझने लगती हैं या पसंद करने लगती है (सॉरी गर्ल्स बूत थिस इस आल्सो fact)jis लड़के को पहले जो लड़कियां इग्नोर करती हैं वही जब उस लड़के को किसी और के साथ देखती हैं तब अचानक से उन्हें उसी लड़के में दिलचस्पी होने लगती है …वैसे hi निशा जब मनु के करीब होने लगी तोह हु लडकियां जो सामने से मनु को बॉयफ्रेंड नहीं बना पायी तोह उससेभी को निशा और मनु का करीब आना नागवार गुज़रा …जहां निशा पैसे में और सुंदरता में उन सभी से कई गुना आगे थी जिसको कुछ कहना और उसका कुछ करना उन लड़कयूँ के बस के बहार था सो उनका गुस्सा मनु पैर था की उसने उनमे से किसी को क्यों नहीं chuna…waise तोह अगर मनु उनमे से किसी एक को भी चंक लेता गर्लफ्रेंड के नाम पैर तोह उसका हाल भी निशा के जैसा िसलते होता उस लड़की को भी मनु के साथ अकेले रहना पड़ता पैर अब क्युकी अब निशा थी और निशा सिर्फ निशा नहीं थी उसका बैकग्राउंड भी ाचा tha..per मनु को निशा का ाचा और केयरिंग नेचर और उसके बातचीत का तरीका ाचा लगा था सो उसकी फ्रेंडशिप निशा से हुई thi..so अब आप समझ गए होंगे की चिंटू ने इतना सब क्यों और किस मक़सद के साथ किया था ..
क्युकी चिंटू चाहता था की मनु सब से दूर अकेला पद जाये और िसलते हो जाये जिस से हु डिप्रेशन में चला जाये और शायद खुद को ख़तम तक कर ले …
जैसा आजकल इंडिया में चल रहा है सुशांत सिंह राजपूत का केस …भी लगभग कुछ इसी की सिमिलॅरिटी के साथ है ,,की कैसे ज़िन्दगी जीने वाला ीत इंडिया में 7तह रैंक लेन वाला एक छोटे से शहर का लड़का …जो अपने टैलेंट के दम पैर श्याद और कुछ करता श्याद आगे और मिसाल बनता उन छोटे शहरो के टैलेंटेड लोगो के लिए जो सोचते हैं की हमारा क्या होगा ..उनके लिए सुशांत हु इंस्पिरेशन tha…jisne हर छोटी सिटी के इंसान को उसके सपने पुरे हो सकते हैं ऐसे पंख दिए the…kyuki आप सब अचे से जानते हैं हर इंसान अपने सपने में किसी न किसी को आइडल मंटा hi है जैसे सिंगिंग मैं लता जी , साइंस में आइंस्टीन या कलम शाहब सो कहीं न कहीं सभी किसी न किसी से इंस्पिरेशन लेते हैं ..ऐसे hi बहुत से लोगो की इंस्पिरेशन होगा श्याद सुशांत भी जो उस जगह खुद को आइसोलेटेड पता हो जहां सिर्फ बड़े लोग hi पाए जाते होंगे …जहाँ हु दिमाग से भी टैलेंटेड था ..वहीँ कुचउँ को िक दुनिआ जानती हैं ….सो सोचने वाली बात यही है की जिन्दा आदमी खुद को कितना आइसोलेटेड महसूस करता होगा जिसने सुसाइड जैसा बड़ा कदम तक लिया होगा कितना कोई मानसिक टूर पैर टूट जाता है की खुदखुशी जैसा कदम लेता है ..नार्मल लाइफ में आप उंगली श्याद जान भूझकर भी न काटेंगे पैर जब मेंटली टार्चर झेलते हैं और खुद को आइसोलेटेड पते हैं तोह खुद की उंगली भी न काट पाने वाला इंसान खुद को ख़तम तक कर देता है ..यह इस बात की मिसाल है ..
खैर मेरा फिल्म और celebrity’s से कोई लेना देना नहीं ..बूत आइसोलेशन और मेन्टल टार्चर जिसके तहत चिंटू ने जो प्लान बनाया था हु आप सभी को क्लियर करना था …सो अब ताका आप समझ गए होंगे की चिंटू को मनु की लाइफ ख़तम होने से भी कोई प्रॉब्लम नहीं थी ..एक तरह से अगर मनु मानसिक ट्रामा के चलते अगर मर भी जाता तोह उस से उसे कोई प्रॉब्लम नहीं थी बल्कि उसके लिए तोह निशा का रास्ता साफ़ हो जाने वाला था …
खैर मनु ने आज का दिन भी निकला …राजिंदर आज भी उसे रात को वाक पैर ले कर गया और दिन भर के बारे में पूछा और समझा …मनु ने भी सब खुलकर बताया की क्या बिहेवियर है पूरी क्लास का उसके साथ..
तोह राजिंदर ने उसे समझते हुए कहा ..
राजिंदर “बीटा आगे भी ऐसे कई टाइम तुम्हारे साथ होगा तुम्हारे साथ के लोग hi तुम्हारे रस्ते की दीवारे होंगे तोह क्या करोगे ..तुम उन सबकी परवाह न करना क्युकी जो भी अपने मतलब के लिए तुम्हारे साथ अगर गलत बर्ताव करे तोह उनकी परवाह करोगे तोह इन सब में hi उलझकर रह jaoge…jo तुम्हारे लिए गलत सोचे उसकी परवाह करना बेवकूफी है ..सो उनसब के बारे में कभी मत सोचना …दुनिआ है hi ऐसी ..तुम सिर्फ अपने फ्यूचर और फॅमिली के बारे में सोचना क्युकी जब भी तुम खुदको अकेला फील करो तोह हमसभी को याद करलेना हम सभी दिल, दिमाग और हर तरह से तुम्हारे साथ हैं..”
मनु “ पैर पापा पूरी क्लास एक साथ कैसे समझना थोड़ा मुश्किल है..”
राजिंदर “ बीटा दुनिआ में सभी का अपना अपना कोई न कोई लालच या स्वार्थ ज़रूर होता है …जिसके के चलते कब कोण किसका दुश्मन बन जाये कहना मुश्किल है …और अगर तुम इन सब के बारे में सोचने लगो गए तोह अपने रस्ते से भटक जाओगे …सो जो साथ है ठीक जो न साथ हो तोह ठीक आपने रस्ते पैर आगे चलते raho..kyuki लास्ट मैं इंसान की पहचान उसकी कामयाबी hi होती है …और साड़ी दुनिआ चढ़ते सूरज को सलाम करती hai..so या तोह यह सोचो की आगे कैसे बडोगे या यह सोचते रहो की सब एक साथ तुम्हारे खिलाफ क्यों ??हैं …फैसला तुम पैर है या तोह उनकी परवाह करो जिनको तुम्हारी परवाह hai…ya उनकी परवाह करो जिनको तुम्हारी हार से hi मतलब है जिनके लिए तुम्हारी अछइयां कोई मायने नहीं रखती..”
मनु “पापा आपका मतलब अचे से समझ गया हूँ थैंक्स ा लोट की आपने मेरा कन्फूसिओं क्लियर कर दिया वार्ना सुच में मैं अकेला महसूस कर रहा था पूरी क्लास में पैर आपने अचे से समझा दिया है की मैं अकेला नहीं हूँ और न मुझे उनसब की ज़रूरत है ,मुझे यही बात परेशान कर रही थी की अचानक से यह सारे क्यों एक जैसे हो gaye..??per अब सब ठीक है और don’t वोर्री मैं अभी अकेला ज़रूर हूँ क्लास में पैर दिमाग से कमज़ोर नहीं हूँ हाँ कुछ सवाल तंग कर रहे थे पैर आपने सब क्लियर कर दिया है की फॅमिली मेरे साथ है ..सो आगे बढ़ने पैर ध्यान दूंगा आगे से लव ु पापा..”
राजिंदर “ लव ु तो बीटा मुझे भी टेंशन थी की कहीं तुम कोई गलत कदम उठालो या पता नहीं क्या करो पैर मुझे अपने बेटे की काबिलियत अचे से पता सो जहाँ तुम कन्फ्यूज्ड फील करो तोह अपने बाप से बिना टेंशन के बात कर लेना ok “
“Ok पापा अब घर चलने या भी गुमना है “ मनु
राजिंदर “ नहीं बीटा थक गया हूँ पैर तेरी चिंता थी तोह बात करने का टाइम निकलना भी ज़रूरी th..chal अब टग हर चल अब चैन से सो सकूंगा..”
दोनों बाप बेटे घर आ आगये थे …और सो गए …
अगला दिन भी शामे रहा .जिसमे सबने आपने बेस्ट दिया मनु को निचा दिखने में पैर मनु शांत था …उसे उसके पिता से सिख मिल गयी थी …सब कोई मौका नहीं छोड़ रहे थे मनु को निचा दिखने का ..पैर मनु को न अब उनसब की परवाह थी न उनसब से कोई मतलब ….पड़ने के टाइम पड़ता और लंच के टाइम नीता मम के पास चला जाता …आज तीसरे दिन भी निशा नहीं आयी thi..manu को अब निशा की चिंता हो रही थी …
” की तीन दिन से पता नहीं क्यों निशा आ नहीं रही है …पता नहीं क्या हुआ है निशा को ….कहीं चिंटू ने तोह कुछ नहीं कर दिया उसे नहीं चिंटू निशा को छू भी नहीं सकता निशा कैग हर में hi एक दजन नौकर हैं फिर अंकल हैं अन्त्य hain…or हु लम्बा तगड़ा गार्ड है जो गेट पैर रहता hai…ek हाथ अगर उसका पद गया तोह चिंटू का मुट्ठ hi निकल जायेगा …पैर चिंटू में कहाँ इतनी हिमायत है की निशा को कुछ कर सके …कहीं निशा की तबियत तोह ठीक hai..nahi कहीं उसे कुछ हो गया ho…ho सकता है कहीं गयी हो ..”
ऐसे कितने सारे सवाल एक साथ मनु के दिमाग में एक साथ घूम रहे the…jahaan उसे आज निशा की कमी महसूस हो रही thi…yeh इंसानी फितरत hi है की अगर कोई रात दिन आपके सामने हो तोह कोई बात नहीं पैर अगर उसी इंसान से कुछ दिन की दूरी कई जनमो के बराबर लगती है …यही हाल इस समय मनु का था ..क्युकी सबने उसे पुरे 3 दिन से टार्चर किया था …पहले दो दिन तोह उसके दिमाग में निशा का ख्याल नहीं आया पैर दूसरे और तीसरे दिन में उसे निशा के लिए चिंता होने लगी ..फिर अचानक से उसके दिमाग में आया कहीं निशा भी इन सबके साथ मिल गयी toh….is ख्याल से मनु को एक अंजना डर सा लगा …हु दिल से दुआ करने लगा था की निशा भी और जैसा बर्ताव न करे उसके साथ …
क्या होगा अगर निशा भी वैसे hi बर्ताव करे जैसे सब उसके साथ करते hain…yeh सोचकर उसके दिल में एक तीस सी उठी ..पैर फिर उसे अपने पिता की बात याद आयी ..की जो तुम्हारी परवाह करे उसकी परवाह करो जो न तुम्हरे बारे में सोचे तुम भी आगे बढ़कर आपने रस्ते चल दो …
पैर मनु के लिए ऐसे hi निशा को इग्नोर करना क्या पॉसिबल था ..और निशा कहाँ है 3 दिन से और अगर निशा का सामना अगर मनु से हुआ तोह उसका रिएक्शन क्या होगा …क्या हु भी सभी की तरह मनु से नफरत करेगी या …शामे रहेगी और अगर निशा भी शामे ट्रीट करे और लोगो जैसा तोह क्या मनु बर्दास्त कर सकेगा ….इसका जवाब या किस्मत के हाथ या आनेवाले टाइम के हाथ में था….:हिंट: