Pyaar Nafrat or Kismat - Page 6 - SexBaba
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Pyaar Nafrat or Kismat

अपडेट 48


बचपन की यादें

उसके इन सब बातों को बताने से मनु को क्या सिख मिली और आगे मनु कैसे चिंटू को जवाब देगा …क्युकी चिंटू ने अपनी तरफ से नफरत की जुंग साफ़ लहज़े में शुरू कर दी थी ….राजिंदर के काम का सहारा लेकर जो उसने मनु को पुरे स्कूल में निचा दिखने की कोशिश थी उससे .साफ़ इशारा था की मनु …चिंटू की नफरत ने elaan-e-jung कर दिया hai…baari अब मनु की थी जवाब देने ki.or निशा का क्या रिएक्शन होगा मन ऊके लिए चिंटू के इस झूंठ से और मनु का क्या जवाब होगा चिंटू और आनेवाले कल के हर दुश्मन को यह अब चिंटू की किस्मत और टाइम पैर निर्भर था......

अब आगे....

अब आगे क्या होनेवाला था यह तोह वक़्त hi बता सकता था ,,पैर कहीं न कहीं मनु को उसके पिता ने आज जो नसीहत दी थी की दुनिआ वैसी नहीं जैसी दिखती hai..yeh मनु को कुछ हद तक समझ आ चूका tha…or उसने भी अपने बाप की बात को एक वडा किया था ..की आनेवाले टाइम में वह अपने माँ और बाप को आराम देगा मतलब और ज्यादा म्हणत नहीं करने देगा …अब उसका वडा और आनेवाला टाइम उसे यह सब करने देगा या नहीं यह मनु की किस्मत , उसके दिमाग और वक़्त के साथ उसके सही या गलत फैसले जो हु आगे लेगा या लेने की कोशिश करेगा उसपर निर्भर थे …क्युकी इंसान चाहे कितना भी दुनिआ से लड़ ले चाहे किस्मत साथ दे या न दे पैर एक इंसान के सही टाइम लिए गए सही या गलत फैसले से उसकी ज़िन्दगी बदल जाती hai…ya यूँ कहिये इंसान के आज लिए हुए फैसले hi उसे बड़ा या छोटा बनाते हैं दुनिआ में इज़्ज़त और बजती दोनों दिलाते hain…aage क्या होगा ,कैसे होगा और मनु क्या फैसले लेगा यह सब आनेवाला वक़्त hi जनता था..

खैर अगला दिन आया ….सुबह का अपना रेगुलर रूटीन मनु ने फॉलो किया मम्मी की हेल्प ,खुद को और अजय को त्यार करना और साथ स्कूल ले jana..ajay और सुमित्रा को तोह पता भी नहीं था की मनु किस परेशानी से जूझ रहा है ..जिसपर मनु खुद नहीं चाहता था की इन दोनों को कुछ पता चले अजय क्युकी छोटा था और मनु से बहुत प्यार करता था ..अजय एक बार को अपने बाप से गुस्सा हो जाता था ..पैर मनु उसके लिए बहुत मायने रखता था …क्युकी उसकी जितनी परवाह शायद मनु करता था कोई और करता हो …आप सब भी जानते हैं क्युकी उसके दोनों माँ और बाप सिर्फ अपने बचूं के फ्यूचर के लिए कितनी म्हणत कर रहे the..jis वजह से दोनों अपने बचूं को ज्यादा टाइम नहीं दे पते the…jis वजह से दोनों एक दूसरे के साथ ज्यादा वक़्त बीत्या करते थे और ..क्युकी अजय और मनु में मनु अजय से बड़ा था सो मनु अजय की हर जरूरत के समय उसके सामने रहता था ,,जिस वजह से अजय के लिए मन ऊके दिल मैं एक स्पेशल रेस्पेक्ट thi..or क्युकी कई बार अजय मनु के मन करने पैर कुछ चीज़ें कर देता था अपने बचपने मैं पैर जब भी अजय ने मनु की बात नहीं मानी तब तब अजय किसी न किसी मुसीबत में पड़ा ..जिस पैर भी मनु अजय को हर बार उस मुसीबत से निकल hi लेता tha..jaise आइस फैक्ट्री में मनु ने अजय को बचाया था जिसमे अजय को तोह मनु ने पानी में डूबने से बचा लिया था पैर खुद उसके पेअर में कांच लग गया था ..जिसपर भी उसने अजय को कुछ नहीं कहा था ..और घर पैर भी नहीं कहा था वार्ना राजिंदर और सुमित्रा अचे से अजय की क्लास लगडते सो इन सब बातों के चलते अजय मनु की बहुत रेस्पेक्ट करता था और प्यार तोह शुरू से था hi उसे अपने बड़े भाई से ..

खैर मनु अजय क्युकी छोटा था सो उसे अपनी परेशानियों से जितना हो सके दूर रहना चाहता tha…kyuki मनु जानता था की अजय जो उसकी बुराई तक नहीं सुन सकता उसे पता लगा तोह पता नहीं कितना ड्रामा होगा स्कूल में जो मनु नहीं चाहता था और अब बची सुमित्रा …सुमित्रा को मनु इसलिए यह सब बताना नहीं चाहता था क्युकी वह अचे से जानता था की अगर सुमित्रा को यह सब पता चलेगा की एक तरफ उसका पति राजिंदर कितनी म्हणत कर रहा है अकेले 3 या 4 लोगो का काम कर रहा है और दूसरी तरफ मनु को उसी के बाप के नाम पैर निचा दिखया जा रहा है ..तोह हु पता नहीं क्या करती ..दूसरी तरफ राजिंदर ने भी उसे सुमित्रा को इन सब से दूर रखने को कहा tha..or मनु खुद नहीं चाहता था की सुमित्रा पैर कोई भी मेंटली प्रेशर बने सो ..इन सब बातों को देखकर मनु ने अजय और सुमित्रा को अपनी और राजिंदर की टेंशन से दूर रखना ठीक समझा..

खैर आज सुबह मॉर्निंग मैं सब नार्मल hi था ,पैर एक बात अलग हुई थी राजिंदर जो सुबह नास्ता करता और चुप चाप bye बोलकर घर से ऑफिस के लिए निकल जाता वह आज मनु और अजय के रेडी होने के बाद मनु के गले लग कर उसके सर पैर हाथ फेर कर बोलै “बेस्ट ऑफ़ लक मेरे sher”…jis पैर सुमित्रा चौंके बिन आना रह सकीय और बोली “आज यह सब कैसे सूरज कहा से निकला है या यह कोई सपना है की आप इनको बेस्ट ऑफ़ लक कह रहें हैं “ ????

राजिंदर ने इस पैर मन ऊके गले लगे हुए कहा “ हाँ जी प्यार तोह सिर्फ आपको hi है बचूं से हमको कहाँ मैं कहता नहीं तोह यह मतलब नहीं की मुझे मेरे दोनों शेरो से प्यार नहीं hai…main जितना अपने बचूं से प्यार करता हूँ ..उतना hi तुमसे भी ..”

इस बात पैर सुमिता शर्म से बोली “ आप भी न मैं ऐसा तोह नहीं कहा और कुछ तोह सरम करो बचे सामने हैं”

राजिंदर “ तोह क्या हुआ उनको भी तोह पता चले कैसे उनका बाप उनकी इस शेरनी माँ को चाहता है”

इस पैर सुमित्रा सरम से आगे कोई बात न बड़े तोह मुस्कुराती हुई किचन में जाकर काम करने लगी…

राजिंदर ने अब मनु की तरफ देखा जो इस समय उस कंधे से लगा हुआ था …क्युकी राजिंदर ने उसे गले लगने के बाद से अपने से अलग नहीं किया tha..ab राजिंदर ने नार्मल होकर मनु से कहा “ मेरे शेर बेटे तू जानता है न आगे का टाइम में कैसे लोग मिलने वाले हैं ..बीटा फिर से कह रहा हूँ आगे लोग मिलकर तेरी आँखों में आंख दाल कर झूठ बोलेंगे और तुझे यह जानते हुए भी की सामने वाला झूठ कह रहा है ,,सही टाइम आने तक उसको झेलना होगा क्युकी बिना सही टाइम के तू कुछ नहीं कर पायेगा ..और जब टाइम आये तोह हर एक को धोकर निचोड़ कर सूखा देना ..समझ रहा है न …क्युकी अगर तूने जल्द बाज़ी में कोई भी फैसला लिया या सही फैसला लेने में चूक की तोह आगे बहुत कुछ बदल जायेगा ..तू मेरा मतलब समझ रहा है न??”

मनु “ हाँ पापा अचे से समझ रहा हूँ मुझे खुद भी सही टाइम का इंतज़ार है …क्युकी मैं अपने दुश्मन से भी सिख लेता हूँ …जब usne(chintu ने) सही टाइम के लिए इतना वेट किया तोह मुझे भी उससे सिख मिली है की …मैं खुद उसे अचे से सही टाइम पर जवाब दूंगा …आप टेंशन न लो ..”

राजिंदर “ बीटा टेंशन होनी लाज़मी है बाप हूँ तेरा पैर तुझे भी अचे से जानता हूँ तू मेरा hi खून है तोह तेरी काबिलयत मैं अचे से जानता हूँ पैर एक बाप होने के नाते समझाना मेरा फ़र्ज़ बनता है ..वही कर रहा हूँ मैं जनता हंट ु सही टाइम पैर अपना काम कर देगा ..और एक बात का ध्यान रखना तेरा यह बाप हमशा तेरे साथ तेरे हर फैसले में तेरे साथ hai..so आगे से कोई भी बात अगर तंग करे तोह बिंदास बता देना ..अगर बाप के सामने बोलने में कोई झिझक हो तोह दोस्त समझकर बोल देना ..ok “

मनु हसकर “ok पापा “ दोस्त समझकर हम्म!”

राजिंदर मुस्कुराकर “ हम्म्म! नहीं हाँ बीटा क्युकी कुछ बातें बाप से कहने में बेटे शर्मा जाते हैं तब दोस्त समझ कर कह देना क्युकी जब बेटे का पेअर बाप के झूठे में आने लगे तोह हर बाप को बेटे को एक दोस्त की तरह समझना चाहिए (पुराणी कहावत है सुनता आया हूँ याद आयी तोह लिख दी ) और वैसे भी एक अचे बेटे की साड़ी खूबियां है तुझमे तोह मेरा भी फ़र्ज़ बनता है की मैं अचे बाप होने का फ़र्ज़ निभाऊं ….सो जब कोई टेंशन हो अपने बाप से शेयर कर लेना मुझे भी नया दोस्त मिल जायेगा ..और घर में न कम्फर्टेबले लगे तोह दोनों बाप बेटे नाईट वाक पैर डिस्कशन कर lenge…wahan तोह अपनी “”बॉयज टॉक”” आराम से हो जाएगी ..

मनु कुछ बोलता उससे पहले hi सुमित्रा बहार आते हुए बोली “आज कोई स्पेशल दिन है क्या जो आज अपने मनु को इतना चिपका रखा है जी …और क्या बातें हो रही हैं मैं भी तोह सुनु ..”

राजिंदर “आज तक तुम्हरे और तुम्हारी सहेली के बिछा में मैं कुछ पूछा ,,और जब पूछा तोह “गर्ल्स टॉक “सुनकर चुप हो गया ..खैर यह बाप बेटे की बिच की बात है ..ज्यादा कुछ ख़ास नहीं ..जस्ट “बॉयज टॉक “

सुमित्रा “ मतलब मैं कुछ पूछ नहीं सकती आपके इस “बॉयज टॉक “ के बारे में …पैर कोई बात नहीं मुझे तोह फिर भी बहुत ख़ुशी है की आज आपने अपने बेटे से इतनी बात की “

राजिंदर “ सुमित्रा मैं अपने परिवार से बहुत प्यार करता हूँ मेरे यह दोनों बेटे मेरी दोनों आँखें है और तुम मेरा दिल हो .ऐसा नहीं है की मुझे तुम लोगो की परवाह नहीं है ..पैर एक मर्द होने के नाते मुझे तुम सभी की जिम्मेदारी भी निभानी है ..सो उसी के चलते ज्यादा टाइम नहीं दे पता हूँ बचूं और तुमको ..पैर इसका यह रति भर मतलब नहीं की मुझे तुम सब से प्यार नहीं hai..pyaar जाताना और निभाना दो अलग बात hain…jatata नहीं पैर पूरी ईमानदारी से निभा रहा हूँ ..और कमा क्या सिर्फ अपने लिए रहा हूँ ..नहीं न आनेवाले टाइम में बचे बड़े होंगे उनकी ज़रूरत भी बढ़ेंगी तब उनके अचे फ्यूचर के लिए उनका बाप रेडी मिलेगा …तब उनको भी पता चल जायेगा की उनका बाप नकार निकम्मा नहीं है एक जिम्मेदार बाप है …”

इस बात पैर सुमित्रा रो पड़ी “मुझे माफ़ कर दिज्ये मैं ऐसा तोह नहीं कहा tha..main आपको अचे से जानती hun..per एक दुःख था की बचूं के साथ आप एक दुरी बना कर रखते थे ..वह बात मुझे खटकती थी ..कह नहीं पति थी पैर दुखी रहती थी पैर आज अपने इस तरह मनु को गले लगा के बात किट ओह लगा कोई सपना है ..सो यकीं नहीं hua..mujhe माफ़ कर दीजिये ,,मैं आपको गलत समझती थी..”

राजिंदर “ सुमित्रा बचे जब छोटे थे तब दुरी इसलिए रक्त था की बचे अगर दोनों माँ बाप से प्यार पाएंगे तोह सुनेगे किसी की और बिगड़ जाते क्युकी मैं शाक्त था और दुरी बनाकर रखता था और तुम प्यार से समझती थी तोह देखो अपने बचे कैसे hai..kya तुम्हे भी मेरा त्याग समझ नहीं आया …खुद के बचूं से दूर रहना कितना मुश्किल होता hai..main जनता हूँ ..उस नालायक जय चाँद को पालने से मैंने यह सिख ली थी की अगर सभी प्यार करे तोह इंसान नालायक hi बनता है क्युकी ज्यादा प्यार से इंसान जिम्मेदारी से दूर रहता है उसे पता होता है की जिम्मेवारी उसे मिलेगी nahi..so जब इंसान जिम्मेदारी की क़द्र नहीं करता तोह बदले में सिर्फ और सिर्फ आलसी और काम बुद्धि का prani,or म्हणत से जी चुरानेवाला ,,नालायक इंसान बनता है ..बिलकुल जय चाँद की तरह ..क्या तुमको अपने मनु और जैचंद में फरक नज़र नहीं आता…???”

सुमित्रा सोचती हुई “ कैसा फरक जी “

राजिंदर “हु आलसी है …काम बुद्धि वाला है अपनी बीवी के दिमाग के आगे झुका रहता hai..or काम काज से जी चुरता hai…kya अपना मनु भी वैसा है …नहीं वह अभी छोटा है पैर अभी से पूरा दिन पड़ने के साथ बस्सी रहता है ..दो जगह पैर सिकने भी जाता है बिज़नेस को …और अपनी क्लास में पिछले दो साल से फर्स्ट आ रहा है ..तोह जय चाँद के टाइम पैर जो मैं गलती किट hi उसकी हर मांग को पूरी करके उन सब गलतियूं से मने सीखा था ..की बचे की बेमतलब की मांग कभी पूरा न karo..or देखलो अपने बेटे को क्या इतना छोटा होने के बाद भी कितना मेहनती है ..और जिम्मेदार भी ..तोह क्या मैंने दुरी बनाकर गलत किया ..बोलो”

सुमित्रा रट हुए “नहीं जी आपने बिलकुल ठीक किया मैं hi पागल थी बेवजह खुद से आप पैर गुस्सा हुआ करती थी की आप सिर्फ जैचंद को hi प्यार करते हैं ऐसा तोह मैंने सोचा hi नहीं tha..mujhe माफ़ कर देना जी ..पैर एक चीज़ मुझे समझ नहीं आयी जी “

Rajinder”konsi चीज़ज़ “

सुमित्रा “आपने कहा था की बच्चों से आप दुरी बनाकर रखते थे तोह अभी अजय भी छोटा है तोह मतलब अभी भी दूर hi रहेंगें बचूं से ??”

राजिंदर “ अब उसकी ज़रूरत नहीं है …मनु अब समझदार है ..तोह दुरी की ज़रूरत नहीं है क्युकी अब अजय को मनु संभल लेगा और उसकी गलतियूं को मनु अचे से समझकर हैंडल कर लेता है ,,,मैंने खुद देखा है की कैसे हु अजय को सही सीखता है ..हाँ जनता हूँ हमारे बचे स्मार्ट hain..unko लगता है माँ बाप से दूर रहते हैं पैर हम भी माँ बाप हैं अपने बचूं को समझना हमे आता hai..manu अजय को सही गाइडेंस दे रहा है और खुद अजय को भी मनु को देखकर की उसका बड़ा भाई कैसा है इससे सिख मिलेगी सो हु सही बनेगा ..सो कुल मिलकर अब अपने बचूं से मुझे दुरी बनने की ज़रूरत नहीं है..”

मनु चुप चाप दोनों की बातें सुन रहा था और सोच रहा था की उसके माँ बाप कितना कुछ डाव पैर लागए हुए थे उन दोनों भाइयों के फ्यूचर के लिए ..उसे उस समय अपने माँ बाप पैर बड़ा गर्व हुआ की उसके माँ बाप कैसे दोनों भाइयों से प्यार करते थे और बिना कहे भी दोनों पैर नज़र रखते the..yahan तक की उसे पता भी नहीं था की राजिंदर को उसके और अजय के बिच में होने वाले टॉपिक्स भी पता थे …

खैर यह सब चलता रहा और मनु स्कूल पूछा …

जहाँ उसे कल जैसा ट्रीट किया गया बात बात पैर सभी ने निचा दिखने की कोशिश की उसे …सबसे पीछे हु अकेला बेंच पैर बैठा tha..nisha आज भी स्कूल नहीं आयी thi..manu ने धयान से देखा था की चिंटू जब भी उसकी बजती होती तोह कितना खुश होता tha..baat बात पैर जब कोई मनु को निचा दिखता तोह मनु ध्यान से चिंटू के चेहरे को देखता ..उसके चेहरे की चमक और उसकी शैतानी हंसी देखकर मनु अचे से चिंटू की नफरत समझ गया था ..पैर उसे यह समझ नहीं आ रहा था ..की बाकी यूं को उसके बाप के नाम पैर निचा दिखने से क्या मिलने वाला था ..पैर साले सब लगे हुए थे ..उसे बात बात पैर जमादार …जमादार बोलने में ..पैर मनु अकेला करता भी क्या ..क्युकी साला कोई भी उसे सिद्ध कुछ कहता नहीं था ..बस बिच में कोई भी कहीं से चिलाकर बोलता “जमादार “और सब हसने लग जाते सबका ध्यान और ऑंखें मनु पैर गाड़ी होती जैसे सब उम्मीद लगये हुए थे इस टार्चर से मनु रो पड़े ..यह सामने से लड़ाई नहीं थी ,,,इस लड़ाई को आप साइकोलॉजी की लड़ाई भी कह सकते हैं आप की किसी को आप मेंटली टार्चर दो और उसे आप अन्दर से तोड़ दो …क्युकी सामने की लड़ाई में इंसान सिर्फ और सिर्फ हाथ पेअर तुड़वाता या तोड़ देता है पैर मेन्टल लड़ाई में इंसान को चोट भी अंडर hi मिलती hai..or उस चोट का असर उसकी फिजिकल बॉडी पैर नज़र आता है एक टाइम baad..kyuki मेन्टल टार्चर इंसान को सामने से नहीं भीतर से तोड़ता है तोह उसके शरीर पैर कोई चोट नज़र आती नहीं है ..

यह टार्चर बड़े पुराने टाइम से उसे किये जाते थे ..जैसे ओल्ड ेगीपतिएंस में किसी को अगर मेंटली टार्चर दिया जाता था तोह उसमे हु कैदी को एक अँधेरे कमरे में बंद करके उसके हाथ पेअर बांध कर एक बीएड पैर यह बीएड की शेप में लिटा दिया करते थे जिसके बाद उसके सर से काफी उचाई पैर एक पानी से भरा हुआ बर्तन बंधा जाता था जिस से निचे उस कैदी के सर पैर कुछ 30 सेकंड के बाद एक पानी की बूँद (वाटर ड्रॉप्स) टपका करती thi..aap सोचेंगे एक बूँद से क्या होगा पैर ज़रा सोच कर देखिए एक अंधेरे कमरे में जहाँ हु हिल नहीं सकता था उसके सर या माथे में पैर पानी क एक बूँद टपक कर उसकी मानसिक शांति और उसके दिमाग में चल रहे विचारों को कैसे डिस्टर्ब करती hogi..kuch जानते बाद hi हर कैदी को मेंटली ब्रोकन फील होने लगता था ..और पूरा दिन होने के बाद उसकी हालत पतली हो जाती थी …अगले उस कैदी को खाना कहिल्या जाता और फिर वहीँ बांध दिया जाता था …शामे ट्रीटमेंट के लिए …अधिकतर कैदी 3 या 4 दिन में टूटकर सब कुछ बोल देते थे ..यह ट्रीटमेंट स्पेस और दुश्मनो पैर किया जाता tha..is ट्रीटमेंट को अगर 1 वीक किया जाता तोह कैदी मर जाया करते थे या जो बच जाते थे हु पूरी तरह से पागल हो जाया करते थे…

2ंद वर्ल्ड वॉर के टाइम भी जिनको सपयिन्ग या किसी खास मक़सद से पकड़ा जाता था ..उनको बांध कर सिर्फ एक बेल्ल सुनाई जाती थी हर 30 के डिफरेंस पे जिसमे कैदी को यह मेंटली टार्चर 3 या 4 दिन के भीतर hi तोड़ दिया करता था और जिनपर आगे किया जाता हु या तोह पागल हो जाते या सुसाइड कर लिया करते थे …

आप सब सोच रहे होंगे की कहानी में यह सब क्या बकवास hai…toh यह बकवास नहीं फैक्ट है चाहो तोह गूगल कर लो …यहाँ इतना सब बताने का मक़सद इतना है …की चिंटू ने जो प्लान किया था उसमे उसका मक़सद यही था की मनु को इतना मेंटली टार्चर मिले या सब मिलकर मनु को इतना मेंटली तोड़ दें ताकि मनु कभी आगे न बाद पाए या तोह उसकी हिम्मत जवाब दे de..ya हु अंदर से टूटकर उसके आगे झुकार अपनी हार मान ले ..पैर खुद चिंटू ने भी यह सब नहीं सोच की अगर किसी को मेन्टल टार्चर किया जाये तोह …इंसान कभी कभी इतना टूट जाता है की अपनी खुद की पहचान भूल जाता है ,,,क्युकी बॉडी और मंद का सिद्ध कनेक्शन होता है …आप इस बात से समझ सकते है ..की एक लबोर वर्कर जितना फिजिकल वर्क करता है और उसे जितनी थकन होती है …उतना hi एक कंप्यूटर पैर काम करने वाले टारगेट पूरा करने वाले या ऑफिस में काम कर्णवाले पर्सन को होती है ..शायद कुछ लोग इस बात से सहमत न हो की एक फिजिकल वर्कर और एक मंद वर्कर (जो मंद से वर्क लेता है फिजिकल वर्क की जगह उसे मंद वर्कर hi कहना ठीक hoga)kya कपरिसों बूत आप गूगल पैर देख लेना की मंद से वर्क करना और बॉडी से वर्क करना दोनों में पर्सन को लगभग शामे hi थकन होती hai..dunia में कई रिसर्च हुई हैं इसी बात पैर कइयों ने अपनी पीएचडी की थीसिस भी लिखी हैं…

खैर बात थी मेन्टल टार्चर की चिंटू ने यही प्लान किया था की मनु का इनसब बातून का असर पड़े और हु मेंटली ब्रोकन हो जाये ..ताकि मनु को बर्बाद करके हु निशा के दिल में अपनी जगह बना सके और अपना प्यार पा सके ..और क्युकी अपने खुद के घर में मनु के नाम को सुन सुनकर उससे खुद का घर hi बेगाना महसूस होता tha..kyuki बात -बात पैर मनु यह, मनु हु, मनु जैसे बनो, आगे बड़ो मनु की तरह ,या बीटा हो तोह मनु जैसा हर रोज़ उसे यह मनु का नाम सुनकर मनु के नाम से नफरत हो गयी thi..per क्युकी खुद उसका hi फ़ायदा था मनु के साथ रहने में सो जब तक चलता रहा तब तक चिंटू चलता रहा ..

पैर जब से उसने निशा को देखा और निशा को देखते hi उसे प्यार हो गया अब पता नहीं की उसे प्यार था या निशा में उसे परफेक्ट पैकेज नज़र आता था अपने सिक्योर फ्यूचर का …की निशा उसके लिए बहुत मायने रखती थी पैर जब उसने निशा को मनु के आस पास देखा तोह उसकी नफ़रत ने उसे मनु को उसकी आँख में काँटा बना दिया ..और जब उसे पता लगा या उसने देखा की निशा की आँखों में मनु का प्यार परवान चढ़ने लगा है ..तोह उसे लगा की श्याद मनु निशा को उससे चीन लेगा …और आज तक मनु से हारते हुए उसे प्यार में भी मनु से हार hi मिलनेवाली थी जो शायद उसे बर्दास्त नहीं tha..so एक तरह से उसने अब मनु पैर यह मेन्टल टार्चर का वॉर किया था ..जिसमे मनु कितना टूटेगा और क्या मनु पैर यह मेन्टल वार काम करेगा इस सोच में चिंटू ने सोचे समझे कदम के साथ साड़ी क्लास को अपने साथ मिल्या tha..milya भी क्यात है …पहले भी बताया था फिर बता रहा हूँ सब अपने मतलब से चिंटू के साथ थे ..हर किसी का अपना एम्बिशन था कोई मनु से आगे निकल न चाहता था ,..तोह कोई मनु के स्टाइल और चार्म से जलता था ..और लडकियां है लडकियां उनको बहला क्या प्रॉब्लम थी मनु से …तोह उनसभी के साथ मनु ने हमशा हेल्पफुल नेचर रखा था ..बूत हु लड़कियों से लिमिट से hi बात किया करता था …जहाँ अधिकतर लडकियां मनु में ाचा बॉयफ्रेंड देखती थी ..पैर मनु ने उनको आगे बढ़ने का कोई चांस नहीं दिया tha..kyuki हर दूसरी लड़की उसे पाना चाहती thi..per मनु उन सभी से अपनी लिमिट बना कर बात करता था पैर निशा जबसे आयी थी मनु के साथ रहती थी ..तबसे लडकियां निशा से भी काफी हद तक जलने लगी thi…jiska निशा को और फ़ायदा हुआ ..निशा और करीब हो गयी थी मनु के ..जहाँ मनु सिर्फ निशा को दोस्त के नज़र से देखा करता था ..वहीँ निशा का प्यार साड़ी लड़कियां महसूस कर सकती थी और उस दिन जब निशा ने मनु को अपने हाथ से खाना खिलाया तोह पता नहीं कितनी लड़कियां निशा से निशा की किस्मत से और उसके मनु के पास होने से जलने लगी थी..

जिस तरह एक सिंगल लड़का अधिकतर लडकियां इग्नोर करती hain,uski चाहे कितनी भी खूबियां हो नहीं दिक्ति न hi उस पैर लड़कियां गौर करती हैं , पैर जब उसी लड़के की शादी हो जाये या उसके साथ उसकी लाइफ में कोई गर्लफ्रेंड बन जाये तोह हु hi इग्नोर करनेवाली लडकियां उस लड़के को सेक्सी समझने लगती हैं या पसंद करने लगती है (सॉरी गर्ल्स बूत थिस इस आल्सो fact)jis लड़के को पहले जो लड़कियां इग्नोर करती हैं वही जब उस लड़के को किसी और के साथ देखती हैं तब अचानक से उन्हें उसी लड़के में दिलचस्पी होने लगती है …वैसे hi निशा जब मनु के करीब होने लगी तोह हु लडकियां जो सामने से मनु को बॉयफ्रेंड नहीं बना पायी तोह उससेभी को निशा और मनु का करीब आना नागवार गुज़रा …जहां निशा पैसे में और सुंदरता में उन सभी से कई गुना आगे थी जिसको कुछ कहना और उसका कुछ करना उन लड़कयूँ के बस के बहार था सो उनका गुस्सा मनु पैर था की उसने उनमे से किसी को क्यों नहीं chuna…waise तोह अगर मनु उनमे से किसी एक को भी चंक लेता गर्लफ्रेंड के नाम पैर तोह उसका हाल भी निशा के जैसा िसलते होता उस लड़की को भी मनु के साथ अकेले रहना पड़ता पैर अब क्युकी अब निशा थी और निशा सिर्फ निशा नहीं थी उसका बैकग्राउंड भी ाचा tha..per मनु को निशा का ाचा और केयरिंग नेचर और उसके बातचीत का तरीका ाचा लगा था सो उसकी फ्रेंडशिप निशा से हुई thi..so अब आप समझ गए होंगे की चिंटू ने इतना सब क्यों और किस मक़सद के साथ किया था ..

क्युकी चिंटू चाहता था की मनु सब से दूर अकेला पद जाये और िसलते हो जाये जिस से हु डिप्रेशन में चला जाये और शायद खुद को ख़तम तक कर ले …

जैसा आजकल इंडिया में चल रहा है सुशांत सिंह राजपूत का केस …भी लगभग कुछ इसी की सिमिलॅरिटी के साथ है ,,की कैसे ज़िन्दगी जीने वाला ीत इंडिया में 7तह रैंक लेन वाला एक छोटे से शहर का लड़का …जो अपने टैलेंट के दम पैर श्याद और कुछ करता श्याद आगे और मिसाल बनता उन छोटे शहरो के टैलेंटेड लोगो के लिए जो सोचते हैं की हमारा क्या होगा ..उनके लिए सुशांत हु इंस्पिरेशन tha…jisne हर छोटी सिटी के इंसान को उसके सपने पुरे हो सकते हैं ऐसे पंख दिए the…kyuki आप सब अचे से जानते हैं हर इंसान अपने सपने में किसी न किसी को आइडल मंटा hi है जैसे सिंगिंग मैं लता जी , साइंस में आइंस्टीन या कलम शाहब सो कहीं न कहीं सभी किसी न किसी से इंस्पिरेशन लेते हैं ..ऐसे hi बहुत से लोगो की इंस्पिरेशन होगा श्याद सुशांत भी जो उस जगह खुद को आइसोलेटेड पता हो जहां सिर्फ बड़े लोग hi पाए जाते होंगे …जहाँ हु दिमाग से भी टैलेंटेड था ..वहीँ कुचउँ को िक दुनिआ जानती हैं ….सो सोचने वाली बात यही है की जिन्दा आदमी खुद को कितना आइसोलेटेड महसूस करता होगा जिसने सुसाइड जैसा बड़ा कदम तक लिया होगा कितना कोई मानसिक टूर पैर टूट जाता है की खुदखुशी जैसा कदम लेता है ..नार्मल लाइफ में आप उंगली श्याद जान भूझकर भी न काटेंगे पैर जब मेंटली टार्चर झेलते हैं और खुद को आइसोलेटेड पते हैं तोह खुद की उंगली भी न काट पाने वाला इंसान खुद को ख़तम तक कर देता है ..यह इस बात की मिसाल है ..

खैर मेरा फिल्म और celebrity’s से कोई लेना देना नहीं ..बूत आइसोलेशन और मेन्टल टार्चर जिसके तहत चिंटू ने जो प्लान बनाया था हु आप सभी को क्लियर करना था …सो अब ताका आप समझ गए होंगे की चिंटू को मनु की लाइफ ख़तम होने से भी कोई प्रॉब्लम नहीं थी ..एक तरह से अगर मनु मानसिक ट्रामा के चलते अगर मर भी जाता तोह उस से उसे कोई प्रॉब्लम नहीं थी बल्कि उसके लिए तोह निशा का रास्ता साफ़ हो जाने वाला था …

खैर मनु ने आज का दिन भी निकला …राजिंदर आज भी उसे रात को वाक पैर ले कर गया और दिन भर के बारे में पूछा और समझा …मनु ने भी सब खुलकर बताया की क्या बिहेवियर है पूरी क्लास का उसके साथ..

तोह राजिंदर ने उसे समझते हुए कहा ..

राजिंदर “बीटा आगे भी ऐसे कई टाइम तुम्हारे साथ होगा तुम्हारे साथ के लोग hi तुम्हारे रस्ते की दीवारे होंगे तोह क्या करोगे ..तुम उन सबकी परवाह न करना क्युकी जो भी अपने मतलब के लिए तुम्हारे साथ अगर गलत बर्ताव करे तोह उनकी परवाह करोगे तोह इन सब में hi उलझकर रह jaoge…jo तुम्हारे लिए गलत सोचे उसकी परवाह करना बेवकूफी है ..सो उनसब के बारे में कभी मत सोचना …दुनिआ है hi ऐसी ..तुम सिर्फ अपने फ्यूचर और फॅमिली के बारे में सोचना क्युकी जब भी तुम खुदको अकेला फील करो तोह हमसभी को याद करलेना हम सभी दिल, दिमाग और हर तरह से तुम्हारे साथ हैं..”

मनु “ पैर पापा पूरी क्लास एक साथ कैसे समझना थोड़ा मुश्किल है..”

राजिंदर “ बीटा दुनिआ में सभी का अपना अपना कोई न कोई लालच या स्वार्थ ज़रूर होता है …जिसके के चलते कब कोण किसका दुश्मन बन जाये कहना मुश्किल है …और अगर तुम इन सब के बारे में सोचने लगो गए तोह अपने रस्ते से भटक जाओगे …सो जो साथ है ठीक जो न साथ हो तोह ठीक आपने रस्ते पैर आगे चलते raho..kyuki लास्ट मैं इंसान की पहचान उसकी कामयाबी hi होती है …और साड़ी दुनिआ चढ़ते सूरज को सलाम करती hai..so या तोह यह सोचो की आगे कैसे बडोगे या यह सोचते रहो की सब एक साथ तुम्हारे खिलाफ क्यों ??हैं …फैसला तुम पैर है या तोह उनकी परवाह करो जिनको तुम्हारी परवाह hai…ya उनकी परवाह करो जिनको तुम्हारी हार से hi मतलब है जिनके लिए तुम्हारी अछइयां कोई मायने नहीं रखती..”

मनु “पापा आपका मतलब अचे से समझ गया हूँ थैंक्स ा लोट की आपने मेरा कन्फूसिओं क्लियर कर दिया वार्ना सुच में मैं अकेला महसूस कर रहा था पूरी क्लास में पैर आपने अचे से समझा दिया है की मैं अकेला नहीं हूँ और न मुझे उनसब की ज़रूरत है ,मुझे यही बात परेशान कर रही थी की अचानक से यह सारे क्यों एक जैसे हो gaye..??per अब सब ठीक है और don’t वोर्री मैं अभी अकेला ज़रूर हूँ क्लास में पैर दिमाग से कमज़ोर नहीं हूँ हाँ कुछ सवाल तंग कर रहे थे पैर आपने सब क्लियर कर दिया है की फॅमिली मेरे साथ है ..सो आगे बढ़ने पैर ध्यान दूंगा आगे से लव ु पापा..”

राजिंदर “ लव ु तो बीटा मुझे भी टेंशन थी की कहीं तुम कोई गलत कदम उठालो या पता नहीं क्या करो पैर मुझे अपने बेटे की काबिलियत अचे से पता सो जहाँ तुम कन्फ्यूज्ड फील करो तोह अपने बाप से बिना टेंशन के बात कर लेना ok “

“Ok पापा अब घर चलने या भी गुमना है “ मनु

राजिंदर “ नहीं बीटा थक गया हूँ पैर तेरी चिंता थी तोह बात करने का टाइम निकलना भी ज़रूरी th..chal अब टग हर चल अब चैन से सो सकूंगा..”

दोनों बाप बेटे घर आ आगये थे …और सो गए …

अगला दिन भी शामे रहा .जिसमे सबने आपने बेस्ट दिया मनु को निचा दिखने में पैर मनु शांत था …उसे उसके पिता से सिख मिल गयी थी …सब कोई मौका नहीं छोड़ रहे थे मनु को निचा दिखने का ..पैर मनु को न अब उनसब की परवाह थी न उनसब से कोई मतलब ….पड़ने के टाइम पड़ता और लंच के टाइम नीता मम के पास चला जाता …आज तीसरे दिन भी निशा नहीं आयी thi..manu को अब निशा की चिंता हो रही थी …

” की तीन दिन से पता नहीं क्यों निशा आ नहीं रही है …पता नहीं क्या हुआ है निशा को ….कहीं चिंटू ने तोह कुछ नहीं कर दिया उसे नहीं चिंटू निशा को छू भी नहीं सकता निशा कैग हर में hi एक दजन नौकर हैं फिर अंकल हैं अन्त्य hain…or हु लम्बा तगड़ा गार्ड है जो गेट पैर रहता hai…ek हाथ अगर उसका पद गया तोह चिंटू का मुट्ठ hi निकल जायेगा …पैर चिंटू में कहाँ इतनी हिमायत है की निशा को कुछ कर सके …कहीं निशा की तबियत तोह ठीक hai..nahi कहीं उसे कुछ हो गया ho…ho सकता है कहीं गयी हो ..”

ऐसे कितने सारे सवाल एक साथ मनु के दिमाग में एक साथ घूम रहे the…jahaan उसे आज निशा की कमी महसूस हो रही thi…yeh इंसानी फितरत hi है की अगर कोई रात दिन आपके सामने हो तोह कोई बात नहीं पैर अगर उसी इंसान से कुछ दिन की दूरी कई जनमो के बराबर लगती है …यही हाल इस समय मनु का था ..क्युकी सबने उसे पुरे 3 दिन से टार्चर किया था …पहले दो दिन तोह उसके दिमाग में निशा का ख्याल नहीं आया पैर दूसरे और तीसरे दिन में उसे निशा के लिए चिंता होने लगी ..फिर अचानक से उसके दिमाग में आया कहीं निशा भी इन सबके साथ मिल गयी toh….is ख्याल से मनु को एक अंजना डर सा लगा …हु दिल से दुआ करने लगा था की निशा भी और जैसा बर्ताव न करे उसके साथ …

क्या होगा अगर निशा भी वैसे hi बर्ताव करे जैसे सब उसके साथ करते hain…yeh सोचकर उसके दिल में एक तीस सी उठी ..पैर फिर उसे अपने पिता की बात याद आयी ..की जो तुम्हारी परवाह करे उसकी परवाह करो जो न तुम्हरे बारे में सोचे तुम भी आगे बढ़कर आपने रस्ते चल दो …

पैर मनु के लिए ऐसे hi निशा को इग्नोर करना क्या पॉसिबल था ..और निशा कहाँ है 3 दिन से और अगर निशा का सामना अगर मनु से हुआ तोह उसका रिएक्शन क्या होगा …क्या हु भी सभी की तरह मनु से नफरत करेगी या …शामे रहेगी और अगर निशा भी शामे ट्रीट करे और लोगो जैसा तोह क्या मनु बर्दास्त कर सकेगा ….इसका जवाब या किस्मत के हाथ या आनेवाले टाइम के हाथ में था….
:हिंट:
 
अपडेट 49


बचपन की यादें

पैर मनु के लिए ऐसे hi निशा को इग्नोर करना क्या पॉसिबल था ..और निशा कहाँ है 3 दिन से और अगर निशा का सामना अगर मनु से हुआ तोह उसका रिएक्शन क्या होगा …क्या हु भी सभी की तरह मनु से नफरत करेगी या …शामे रहेगी और अगर निशा भी शामे ट्रीट करे और लोगो जैसा तोह क्या मनु बर्दास्त कर सकेगा ….इसका जवाब या किस्मत के हाथ या आनेवाले टाइम के हाथ में था….

अब आगे .....

मनु के लिए निशा का बर्ताव क्या होगा यह एक सवाल था और निशा भी क्या सबके जैसा बर्ताव करेगी या पहले जैसी रहेगी यह तोह खुद निशा hi बता सकती थी ,,पैर हु तोह वहां थीं यही सो मनु न जाने क्या क्या सोच रहा था ..तोह मनु ने फैसला किया की आज और इंतज़ार करता हूँ निशा का नहीं तोह कल चला जुन्गा उसके घर पता लगाने की निशा क्यों नहीं आ रही है स्कूल..

आज मनु 4 दिन स्कूल गया जहाँ निशा का कोई नामोनिशान नहीं था खुद क्लास टीचर ने पूछा निशा क्यों नहीं आ रही है …पैर कोई क्या जवाब देता मनु भी हैरत में था की निशा को आखिर हुआ क्या है जिसके चलते 4 दिन से स्कूल से गायब है ..

अब मनु से रुकना मुश्किल था सो पैर बिना निशा के बुलाये हु कभी भी उसके घर नहीं जाया करता था …सो उसने फिर भी कई बार मान बनाया की निशा के घर जाकर पूछ ले पैर उसके साथ हो रहे बर्ताव से कहीं न कहीं हु खुद में डर हुआ था की निशा ने भी शामे बर्ताव किया तोह क्या होगा ..अपने पिता के समझने से उसने बाकी लोगों की फ़िक्र करनी याय उन कहिये की उनके बारे में सोचना छोड़ दिया था पैर मनु को निशा के बर्ताव की चिंता थी क्युकी निशा और उसकी फॅमिली से मिला अपनापन कहीं न कहीं मनु को निशा के लिए एक सॉफ्ट कार्नर पैर ले आया था..

खैर फिर भी मनु निशा कैग हर तक गया जहां गार्ड को देखकर उसके पेअर कई बार अंदर जाने के लिए होते पैर अपने साथ होने वाले बर्ताव को सोचकर पीछे हो जाते ..उसने गार्ड को देखा

गार्ड भी मनु को अचे से जान्ने लगा था उसने कई बार मनु को निशा के साथ आते जाते देखा था ..सो उसने खुद hi कहा “ आज आप अकेले आये हैं .अंडर इन्फॉर्म कर देता हूँ आप चले जाएये”

मनु “नहीं गार्ड अंकल हु तोह पास से hi गुजर रहा था सो सोचा यहां से चला जाता हूँ और सब ठीक है न निशा घर पैर hi है क्या..??”

मनु ने निशा के बारे में पूछना चाहा..

गार्ड “हाँ छोटी बीत्या घर पैर hi hain..koi काम था क्या..?”

मनु “नहीं कोई काम नहीं था हु बस ऐसे hi पूछ रहा hun.acha अब चलता hun..namste अंकल “

गार्ड “नमस्ते बाबू “

मनु “अंकल जी मैं कोई बाबू नहीं हूँ मैं आपको अंकल कह रहा हूँ तोह आप भी मुझे मेरे नाम से बुला सकते हैं मेरा नाम तोह पता हैं आपको ,,,मानव है नाम मेरा और सब प्यार से मनु कहते हैं मुझे ..और आप भी मुझे मनु कह सकते हैं”

गार्ड “बीटा अचे से जनता हूँ तुम्हारा नाम मैं इस घर के लोग ऐसे hi तुमसे प्यार नहीं करते आज पता चला तुम वास्तव में कितने अचे हो वार्ना दरवाज़े पैर खड़े होनेवाले गार्ड को भला कोण इतना आदर देता है ..मनु बीटा “

मनु “अंकल जी मैं तोह देता हूँ मैं कोई बड़ी फॅमिली से तालुक नहीं रखता हूँ मेरे घरवालों ने अपने से बड़ों से िज़ात से बात करना सिखाया है और आप अगर गार्ड हैं तोह उसमे भला आपका क्या दोष आप काम करके कहते हैं न की चोरी करके ..और जो काम करे उसे सम्मान मिलना hi chahiye..aapko मैं अबसे गार्ड भी नहीं कहूंगा आप आज से अंकल है मेरे लिए ”

गार्ड “उप्पेर वाला तुम्हे बहुत तैराकी दे यही मेरी प्रार्थना है ,,बीटा तुम बहुत अचे हो बैठो न चाहो तोह अंडर बता दूँ ?,,”

मनु “नहीं अंकल अब चलता हूँ ाचा नमस्ते “

मनु चलागया वापस पैर उसे बड़ा अजीब लगा यह जानकार की निशा घर पैर hi है पैर स्कूल नहीं आयी ..उसने सोचा अगर कल निशा नहीं आयी तोह कल पक्का घर जाकर पता करूँगा..

खैर अगला दिन आया आज मनु जैसे hi स्कूल आया उसकी चेहरे पैर ख़ुशी च गयी क्युकी आज निशा आयी हुई thi..per इससे पहले हु निशा से कुछ बात कर पता पीरियड शुरू हो गया …और मनु सबसे पीछे जाकर अकेला बेथ गया …

निशा ने एक बार नहीं इधर उधर नहीं देखा मनु थोड़ा परेशान हुआ ..पैर चलते पीरियड में क्या कर सकता था भला …टीचर पड़ते गए और एक के बाद दूसरा और उसके बाद अगले पीरियड चलता गया ..

मनु अकेला और बेचैन सा जबरदस्ती पड़ने में लगा रहा पैर उसका सारा ध्यान सिर्फ और सिर्फ निशा पैर लगा हुआ था..

खैर जब लंच हुआ तोह मनु से रुकना मुश्किल हो गया हु चुप चाप उठा और निशा के सामने चला गया …जिसपर निशा ने एक बार उसकी तरफ देखा और फिर अपने बेग से टिफ़िन निकलने लगी मनु के दिल में दुनिआ भर के सवाल थे पैर जवाब सिर्फ निशा के पास थे ..और मनु की बेचैन अब बर्दास्त के बहार हो चली थी ..सो मनु ने निशा का हाथ पकड़ा और लागबहग कीचते हुए उस रूम में ले गया जहाँ हु तीनो लंच किया करते थे ..निशा भी किसी बेल की तरह उसके साथ कीची चली गयी ..बिना कोई सवाल किये की मनु उसे कहाँ और क्यों ले जा रहा है..

जब दोनों उस रूम में पुचुन्चे तोह मनु ने निशा की तरफ देखा और समझने की कोशिश करने लगा की निशा के दिल और दिमाग में क्या चल रहा है ..पैर निशा मनु को न देखकर ज़मीं की तरफ देख रही थी..

मनु से अब रुकना मुश्किल हो गया उसने निशा से kaha”Nisha एक बार मेरी तरफ मेरी आँखों में देखो”

निशा ने ज़मीं से नज़ारे उठाकर मनु की तरफ देखा मनु के चेहरे पैर हज़ारो सवाल थे और परेशानी साफ़ दिख रही thi..nisha का आज का बर्ताव कुछ नया था मनु के लिए उसे निशा का यह बर्ताव कुछ अटपटा सा लग रहा था ..

निशा ने एक बार मनु की नज़रो में देखा जिसमे उसे ऐसे लगा की मनु की नज़ारे उसके अंडर तक उसका वजूद पड़ने की कोशिश कर रही thi..nisha ने जब यह महसूस किया तोह उसने फिर नज़ारे चुरा ली और फिर से ज़मीं जहाँ अभी फर्श नहीं पड़ा था उसे देखने लगी..

मनु ने कहा “निशा लगता है तुम भी मुझसे नफरत करने लगी हो …ाचा ठीक है अगर तुम्हे भी नफरत है तोह मैं क्या कर सकता हूँ चलता हूँ अपना धयान रखना”

मनु वापस जाने को मुदा और अपने कदम बहार रखता तभी निशा ने उसे खींचकर पीछे घुमाया और मनु को अपने गले से लग आलिया …मनु हैरान सा शॉक में चला गया की निशा ने यह क्या किया अचानक से.

निशा उसे गले लगाकर boli.”tumne यह सोच भी कैसे लिया की मैं तुमसे नफरत कर सकती हूँ और तुम्हे भूल सकती हूँ तुम्हे तोह अब मुझसे कोई अलग करने के बारे में सोच भी नहीं सकता …सिर्फ एक चीज़ hi मुझे तुमसे जुड़ा कर सकती है ..और हु है मौत..”

मनु को यह सुनकर थोड़ा सुकून मिला की चलो निशा तोह उससे नफरत नहीं करती ..पैर निशा के इस तरह गले लगाने से मनु थोड़ा शॉक था सो उसने निशा से अलग होकर kaha…”thik है मैं तोह समझा की तुम भी मुझसे नफ़रत करने लगी हो …वार्ना पूरा दिन निकल गया एक बार भी न मुझे देखा और न बात की …ऐसा क्यों निशा और तुम पिछले 4 दिन से स्कूल भी नहीं आयीं क्या वजह है जान सकता हूँ भला ..???”

निशा ने जब इतने सवाल सुने तोह उसके चेहरे पैर एक अनोखी लाली च गयी ..और बोली “दिन भर सोचा देख लूँ अगर मैं खुद न बोलूं तोह तुम क्या करोगे और कैसे मुझे मनाओगे …इसलिए तुम्हे तड़पा रही थी..”

मनु “ऐसे न तड़पाया करो निशा पता भी है क्या कुछ गुज़री है इन दिनों मैं मुझपर (मनु का इशारा पूरी क्लास और बर्ताव को लेकर था)” पैर निशा ने जब यह सुना तोह उसेलगा की मनु ने उसे इन चार दिनों में कितना मिस किया है ..उसके चेहरे को कोई भी देखकर बता सकता था की उसकी ख़ुशी किस हद तक है ..पैर इस समय मनु के दिमाग में बहुत साड़ी बातें चल रही थी ..सो उसने इन सब पैर ध्यान नहीं दिया ..

निशा तुनकर बोली “हाँ पता है तभी तोह एक बार भी नहीं आये मुझे घर पैर देखने ,,,अब यह मत कहना की तुम्हे घर का एड्रेस याद नहीं था …”??

मनु “निशा मैं घर तक कई बार आया यकीं न आये तोह गार्ड अंकल से पूछ लेना पैर न जाने क्यों अंदर तक जाने की हिम्मत नहीं हुई थी..”

निशा ने जब सुना की मनु सुच में उसके घर आया था ,,तोह उसे लगा की मनु उसकी कितनी परवाह करता है उसका दिल ख़ुशी के मारे उछलने लगा ..

निशा “ाचा जी घर के चक्कर लगा सकते हो गार्ड से बात कर सकते हो पैर गेट पार करके नहीं आ सकते ..”निशा अब पुराने रंग में आ चुकी थी..

मनु “आना तोह चाहता था पैर पता नहीं क्यों कदमो ने साथ नहीं दिया वार्ना तुम क्या जानो कैसे और क्या बीती है यहां तुम्हारे बिना mujhpe(uska अभी भी मतलब रोज़ हो रही उसकी बजती से था)””

पैर निशा को ऐसा लग रहा था की मनु भी उसे उसी तरह चाहता है जैसे हु मनु को …

निशा “ाचा बाबा मान लिया की तुम्हारी हिम्मत नहीं हुई थी पैर आगे से कुछ भी हो अगर घर तक आ ोटोः बहार से मत लौट जाना वार्ना तुम्हे नहीं छोडूंगी और मम्मी से अचे से दांत लावा दूंगी ok”

मनु “ाचा बाबा आगे से बहार से hi नहीं वापस जाऊंगा अब अंदर भी आ जाया karunga..per तुम इतने दिन से क्यों नहीं आयी स्कूल हु तोह बताओ न”

निशा ने जब यह सवाल सुना तोह उसके चेहरे पैर फिर से लाली च गयी और हु फिर से शर्माने लगी और आँखें निचे झुका कर बोली “ तबियत ठीक नहीं थी इसलिए नहीं आयी स्कूल..”

मनु ने जब सुना की निशा की तबियत ठीक नहीं थी सो उसे खुद पैर बड़ा गुस्सा आया की हु घर के बहार से hi क्यों लौट aaya..kya पता निशा की क्या हालत ho..kya पता निशा की कितनी तबियत खराब हो..??

मनु ने फुरण निशा का हाथ पकड़ा और उसके सर पैर हाथ रखकर बुखार (फीवर) देखकर बोलै “तुम्हारी तबियत ख़राब है और तुम मुझे अब बता रही हो ..वैसे अब बुखार तोह नहीं hai,,or अभी भी कड़ी हो ऊंटनी (फीमेल कैमल) की तरह यह नहीं बेथ जाओ ..”मनु ने उस उसी बेंच पैर बिठा दिया जिस पैर बैठकर हु खाना खाया करते थे..

निशा को बहुत ख़ुशी हुई की मनु को उसकी परवाह है और कैसे अभी हु उसके सर पैर हाथ रखकर फीवर चेक कर रहा है ..और खड़ा भी नहीं रहने दे रहा ,,निशा मनु की केयरिंग देखकर अंडर hi अंडर बड़ी खुश थी..

मनु अपनी धुन में निशा का हाथ लेकर उसके हाथ की नब्ज़ लेकर कान के पास लगा कर बहार सामने की दिवार जो की दूर थी उसमे सेकंड की सुई को देखकर ताल मेल के साथ किसी माहिर वैद की तरह चेक कर रहा था यह ओल्ड वे का तरीका उसने एक वैद्य से सीखा था ,,पता नहीं कितना सीखा था पैर अभी तोह किसी माहिर वैद्य की तरह लगा हुआ था..

निशा सिर्फ उसकी इस हरकरत और केयरिंग को देखकर ख़ुशी से झूम रही thi..usne एक बार भी मनु को रोकने की कोशिश नहीं ki..bas चुपचाप मनु के हाथो में अपने हाथ को देखकर मनु को इलाज करने की कोशिश करते देखकर खुश हो रही thi..use इस बात से कोई लेना देना नहीं था की मनु क्या कर रहा है पैर उसे इस बात की ख़ुशी थी की उसका हाथ उसके प्यार के हाथों में है..

खैर मनु कुछ देर निशा की नब्ज़ चेक करता रहा और जब उसे तसली हो गयी तोह बोलै “ पैर अब तोह तुम ठीक हो “

कोई और होता तोह हंस हंस कर पागल हो जाता की कैसा अजीब जवाब है …अरे यार अगर ठीक न होती तोह स्कूल आती क्या …??

पैर भाई प्यार करनेवाले दुनिआ में अनोखे hi होते हैं निशा को मनु के इस जवाब से यह पता चल रहा था की मनु कितना केयरिंग है निशा को लेकर जबकि मनु तोह अभी अपनी एक लौटी dost(kyuki 4 दिन से ज़िल्लत झेल रहा था हु भी कभी दोस्त hi हुआ करते थे पैर आज क्या हैं आपको भी पता है..) की फ़िक्र थी की कहीं एक लौटी दोस्त भी सभी के साथ उसे बेज़्ज़त न करेने लग जाये..

तर्रीफ़ और बेज़्ज़ती का भी अपना एक अलग नाता है ..जहां इंसान की तारीफ़ से उसे दुनिआ में हिम्मत और शोहरत पाने के लिए हर समय नयी प्रेरणा मिलती hai…tarrif इंसान में नया आत्म विशवास भर देती है…

वहीँ बेज़्ज़ती उस धीमा zehar(slow पाइजन) की तरह है जो इंसान को हर समय अंडर से खोखला करने में लगी रहती है ,,,हर पल मिलने वाली बेज़्ज़ती इंसान की इच्छाओं और उसकी हिम्मत को तोड़ देती है ,बल्कि उस इंसान का aatamvishvaash(confidence लेवल) भी ख़तम करने में लग जाती हैं..

हर रोज़ की बजती कहीं न कहीं मनु को भी अंडर से तोड़ रही थी उसका खुद से विश्वाश भी कहीं न कहीं डगमगने लगा tha..ab आप कहेंगे निशा का इसमें क्या रोले तोह भाई डूबता हुआ इंसान भी तिनके के सहारे सफर काट लेता hai..or जब पूरी क्लास उसके खिलाफ थी तोह मनु की एकलौती दोस्त बची थी निशा जिस पैर hi मनु की उम्मीद तिकी थी ..की कहीं निशा भी उसके साथ ोरों जैसा बर्ताव करेगी या पुराणी दोस्ती की लाज रखेगी …हाँ जनता हूँ निशा तोह मनु को प्यार करती hain…per भाई मनु को कहाँ पता है ..उसे तोह निशा का प्यार एक प्यारी दोस्त की केयरिंग लगता है तोह आएगी क्या??

निशा ने जब सुना की मनु को इसकी कितनी चिंता है तोह उसकी आखों में ज़माने भर का प्यार मनु के लिए आज्ञा पैर मनु की बेचैनी देखकर सिर्फ इतना बोली “हाँ अभी ठीक hun..”or फिर से नज़ारे चुरा ली ..

मनु के ज़ादा कुछ समझ नहीं आया हु बोलै “हुआ क्या था तुम्हे जो इतने दिन लग गए ..??”

निशा इधर उधर देखते हुए “कुछ नहीं कुछ भी तोह नहीं हुआ था…??”

निशा जैसी हसने मुस्करानेवाली और टाइम टाइम पैर मनु पैर अपना गुस्सा (झूठा गुस्सा ) दिखने वाली लड़की से यह सुना मनु ने तोह मनु को यकीं नहीं हुआ उसपर निशा का बर्ताव (behavior)or टेंशन दे रहा था मनु ko…manu को कोई गड़बड़ लगी तोह उसने निशा का चेहरा अपनी तरफ किया जिसमे उसने निशा मनु से आँखें चुराते हुए लगी ..तोह मनु ने ज़ोर देकर कहा “मेरी आँखों में देखकर कहो तुम्हें हुआ क्यात है “

निशा नज़ारे चुराते हुए “प्ल्ज़ मनु झूठ नहीं बोल रही हूँ आगे न पूछना प्ल्ज़”

मनु को अब तोह और गड़बड़ लगी इंसानी फितरत hi है एक बार कोई चीज़ मन हो तोह उसे तोह करता hi है ..यकीं न आये तोह सोच कर देखना डॉक्टर आपको कोई चीज़ का परहेज़ (restricted)kare तोह साला उसी चीज़ को दिल उसी दिन ज़रूर मचल जाता hai..manu भी इंसान hi था उसे लगा निशा उससे कुछ छुपा रही थी..

मनु ने निशा का चेहरा छोड़ दिया और उसका हाथ पकड़ा और उसे अपने सर पैर रखकर bola”Nisha तुम्हे मेरे सर की कसम है सुच बोलो क्या हुआ था तुम्हे अगर झूठ बोलोगी तोह मेरा मारा मुँह dekhogi..so सब तुम्हारी मर्ज़ी है..”

निशा ने तुरंत मनु के सर से हाथ खींच लिया और उसके मुँह पैर रख दिया “तुम पागल हो गए हो जो एक बार भी नहीं सोचते की तुम मेरे लिए क्या हो यह तुम्हे समझ नहीं आता ..जो ऐसी उलटी सीधी बात कर रहे हो …यह भी नहीं सोच रहे हो की पता नहीं बात बताने लायक भी है या नहीं”

Manu”maine तोह कसम दे दी अब तुम्हारी मर्ज़ी तुम बताओ या न बताओ ..ज्यादा से ज्यादा क्या होगा मर hi तोह जाऊंगा तुम क्यों टेंशन लेती हो वैसे भी चिंटू तोह है hi न और हु तोह तुम्हे एंजेल भी कहता है ..खुश रहना उसके साथ ..”

निशा रट हुए खींचकर मनु को गले लगा लेती hai“tum पागल हो क्या जो कुछ भी उल्टा सिद्ध बोल रहे हो निशा के लिए मनु क्या है तुम्हे क्या पता अगर तुम्हे कुछ हुआ तोह देख लेना पीछे पीछे वहां भी आ जाउंगी मेरे लिए हु बेहूदा था और बेहूदा hi rahega..per तुम इतना कैसे पीछे पड़े हो आज मेरी तबियत के ..??”

मनु निशा को अपने सेने से हटते हुए “ तुम्हारी मर्ज़ी कसम मनो या मत मनो 4 दिन मैंने कैसे काटे हैं तुम्हे कैसे pata”uska इशारा अभी भी वहीँ था क्लास वालों पैर ..

निशा “ठीक है क्युकी तुमने कसम भी ऐसी दी है की इसे तोडना तोह दूर तुम्हे कुछ हो जाये ऐसा मैं सपने में भी नहीं सोच सकती ..पैर बाद मैं मुझे गलत मत समझना ..वादा करो”

मनु ने निशा का हाथ थामकर वडा किया और उसका हाथ पकड़ रखा था और उसके चेहरे की तरफ देख रहा tha..jisper अभी ज़माने भर की शर्म सिमट आयी thi..per मनु सिर्फ उसके मुँह से उसकी बीमारी जाने में लगा हुआ था..

Nisha”tumhe अब कैसे कहूं”

मनु हाथ छोड़कर बहार जाने laga.nisha ने खींच कर उसे बिठया और कहा “लगता है आज तुम मानोगे नहीं पैर एक वडा करो मुझे बाद में गलत नहीं समझोगे ..”

मनु “गलत नहीं समझोगे गलत नहीं samjhoge..kya है यह सब तुम्हे कसम दी है अब तुम मानो या न मानो वडा भी कर चूका हूँ ..पैर ऐसा क्या है जो तुम इतना सोच रही हो..??”

निशा “तुम खुद तोह बुद्धू हो और मुझे भी बेशरम बनाना पैर लगे हो…”

मनु “मैं जा रहा हूँ समझ लूंगा की तुमने मुझे मारा मान लिया”

निशा “खबर दर जो एक शब्द भी आगे बोलै तुम्हे कुछ हो मुझे मंज़ूर नहीं पैर ऐसी बातें बोलोगे तोह खुद मार दूंगी तुम्हे और उसके बाद खुद भी मर जाउंगी..”

मनु “रुकूँ या जॉन ?”

निशा “तुम्हे पता है न मैं भी अब बड़ी हो रही हूँ”

मनु “तोह उसमे क्या है मैं भी तोह हो रहा हूँ”

निशा “लड़को की बात और hai..hum लड़कियों में बड़े होने पैर बहुत से चंगेस होते हैं..”

मनु “हम लड़को मैं भी होते hain..usme इतना क्या सोचना”

Nisha”tum समझ क्यों नहीं जाते “

मनु “तोह समझा दो या मैं जॉन मेरा सर फटा जा रहा है..”

निशा “ठीक है बेशरम बनो खुद भी और मुझे भी बना दो तोह सुनो मुझे कल मेंस्ट्रुएशन प्रॉब्लम हुई थी जो लड़कियों की आगे बढ़ने के बाद होने लगती है…”

मनु को उसने कैसे होता है क्यों होता है सब समझा दिया निशा ने जितना ज़रूरी था उतना बता diya..…jiske बाद मनु सरम से पानी पानी हो गया था..

मनु ”ी म सॉरी मुझे सच अब लगता है मैंने जो देकर गलत किया ..तुम्हारी प्राइवेसी को ब्रेक kiya…mujhe माफ़ कर देना…”

Nisha”tum न एक नंबर पागल हो खुद तोह बेशर्म थे hi मुझे भी बना दिया और अब मेरी प्राइवेसी की चिंता हो रही है जनाब को वह जी वह …और खबर दर जो माफ़ी मागि मुझसे तोह ..एक बात अचे से समझ लो की तुमसे यह बात करना जितना बुरनाही लगा पैर तुम्हारा माफ़ी मांगना कसम से जान ले लेता है ,,,आगे से जो चाहो पूछ लेना पैर कभी माफ़ी न मांगना मुझसे ..”

मनु जिसके कानो से मेंस्ट्रुएशन के बारे में सुनकर धुआं सा निकल रहा tha..usne सिर्फ हाँ में सर हिलाया और kaha”ek बात पूछूं बुरा तोह नहीं मानोगी”

निशा “इतना सब बता दिया अब भी लगता है बुरा मानने को कुछ बचा है ..??”

मनु “तोह तुमको वहाँ पैन भी होता होगा ??”

निशा मनु का इशारा समझ गयी और सरम से लाल हो gayi..or निचे देखकर बोली “हम्म होता तोह है ,,पैर मेरा फर्स्ट टाइम था सो बहुत हुआ ..पैर मम्मी ने कहा है आगे से दर्द की आदत पद जाएगी .”

मनु “यार आज एक बात समझ आयी है तुम लड़कियां कितनी ब्रेव होती हो ,,हर महीने यह दर्द झेलना और फिर भी खुश रहना कसम से हर लड़की हर औरत को सलूट है मेरी तरफ से ..की तुम सब कितने दर्द को सहकर नया जीवन दुनिआ में लाया करती हो”

निशा निचे देखते हुए “बस भी करो साड़ी गर्ल्स जेहलती है इसमें ऐसा क्या है और शर्मिंदा कर रहे हो मुझे..??”

मनु “मैं तुम्हे शर्मिंदा नहीं कर रहा हूँ बस सभी फ्रेमलेस के दर्द के बारे में जानकार रेस्पेक्ट और बाद गयी दिल में..”

निशा “ाचा अब चेंज थे टॉपिक आईएम नॉट मोरे कम्फर्टेबले इन आल अबाउट थिस दर्द याद आने लगता है ाचा तुम आज दिखे नहीं तुम थे कहाँ “??

इस बात का मनु कोई जवाब देता उसे पहले एक आवाज़ आयी ..”यह आजकल हमसे रूठा है तोह हमसे नाराज़गी दिखा रहा है ..”

जब निशा और मनु ने आवाज़ की दिशा में देखा तोह पाया यह आवाज़ चिंटू की थी ..जिसे देखकर कहीं न कहीं मनु और निशा दोनों के चेहरे का रंग चेंज हो गया था …निशा को अब मनु से खुलकर बात करने का मौका नहीं मिलने वाला था सो उस पैर निशा को बुरा लग रहा था..

पैर मनु को हैरत और चिंटू की हिम्मत पैर ताजुब था की इतना टार्चर करने के बाद भी चिंटू उसके सामने शान से खड़ा hai..manu के चेहरे पैर अभी शॉक और हैरत के साथ गुस्से के मिले जुले भाव थे..

खैर चिंटू अंडर आया और निशा से हाथ मिलकर बोलै “निशा यह गलत बात है अपने इस दोस्त को भूल गयी तुम और अकेले आ गयी तुम्हे पता हैं कितनी चिंता हो रही थी मुझे मैं कितना परेशां था यकीं न आये तोह मनु से पुछलो…??”

मनु की तरफ देखकर चिंटू ने कहा “यार तू जितना भी गुस्सा हो जाये पैर निशा को तोह बता देता की हमको उसकी कितनी फ़िक्र है ..और मैं खुद तुझे कितना चाहता हूँ एक hi दोस्त है मेरा यहां मनु,…”

मनु हैरत में सोच रहा था उसके पिता राजिंदर ने सही कहा था की कैसे लोग आँखों में आँख दाल कर झूठ बोलते हैं ..आज उसने देख भी लिया था ..की 4 दिन मैं कितना कुछ सिर्फ और सिर्फ चिंटू की वजह से सहा था उसने ..पैर फिर भी चिंटू उसके सामने कहड़ा निशा से उसी के बारे मैं शिकयत कर रहा है इतने दिन बेज़्ज़त करके आज उसे hi दोस्त कह रहा hai..use लगा उसे उसके पिता राजिंदर ने जो सिख्या और जो कुछ बताया tha..kahin न कहीं आज उसकी आखों के सामने tha…use अपने पिता की बात पैर अब कोई शक नहीं था …हु समझ गया था की आगे का सफर कठिन होने वाला था..

चिंटू मनु के पास आया और उसके गले लग कर उसके कान में bola”tu hi तोह एक दोस्त है मेरा कितना प्यार है तुझसे यह तुझे 4 दिन में पता चल चूका होगा..”???

चिंटू ने अब सिर्फ धीमी आवाज़ में कहा जो सिर्फ मनु के कान में hi जा सकती थी क्युकी हु इस वक़्त मनु के गले लगा हुआ tha…”Nisha को अभी कुछ पता नहीं है …और अगर तू चाहता है की हु भी तुझसे नफरत करे तुझे छोड़ दे तोह तेरी यह इच्छा भी पूरी कर दूंगा …वार्ना चुपचाप निशा के सामने नार्मल बेहवे करना वार्ना तू समझ hi गया हो गए की क्या कर सकता हूँ मैं..”

मनु क्या बोलता चुप चाप सर हिलकर बात मानने की पुस्टि (कन्फर्मेशन) की क्युकी इस समय उसका दिल सिर्फ निशा जो की सिर्फ उसकी एक लौटी दोस्त थी उसे नहीं खोने देना चाहता था ..सो अभी हु चिंटू की बात मानने को मजबूर फील कर रहा था..

चिंटू “अरे एंजेल ने आज खाना नहीं कहाया आज मैं खुद तुम्हे आपने हाथों से खिलाऊंगा और अकेला मैं hi क्यों मनु भी हैं आज हु भी तुम्हे अपने हाथ से खिलेयेगा ..क्यों मनु खिलायेगा न तू ”

मनु किसी और दुनिआ चला गया था सोच रहा था की यह कैसी दुनिआ है जहां सामने से दोस्त केहरहा पैर मुझे निचा दिखने में लगा हुआ hai…dil में रति भर की दोस्ती नहीं है पैर मुँह से दोस्ती का ज्ञान दे रहा hai..nisha की बात नहीं होती तोह इसके होने न होने से मेरी सेहत पैर कुछ न असर पड़ता ..पैर क्या है इसके दिमाग में समझ क्यों नहीं आ रहा किसी बात की नफरत करता हैं यह मुझसे …कोई बात नहीं निशा को अभी इनसब से दूर रखता हूँ बाद मैं सोचूंगा चिंटू का क्या करना है,….

जब चिंटू ने आवाज़ लगाई तोह नीड से जगा ..और बोलै “हाँ कैसी बात करता है तू निशा हर रोज़ हमे खिलाती है आज मैं खुद निशा को अपने हाथ से खिलूँगा…”

निशा को भला अब क्या प्रॉब्लम होती उसका प्यार खुद उसे अपने हाथ से खिलने वाला है …मनु चुपचाप निशा को अपने हाथ से खिलता जिसमे निशा पुर मैं से खा रही थी बिच बिच ,में चिंटू भी निशा को अपने हाथ से खिलादेता ..जिसपर निशा चुपचाप मैं मार्कर खा लेती थी उसके लिए इस समय मनु का प्यार ज्यादा अहमियत रखता था नाकि चिंटू की बकवास ..चिंटू भी खिला रहा था ..की अचानक उसने आँख मारी निशा को और स्टाइल से bola”meri एंजेल सब स्वीट है “

जिसपर निशा को बहुत गुस्सा आया और बोली “चिंटू अपनी लिमिट में रहो मैं तुम्हारी कोई एंजेल वंगेल नहीं हूँ ..आगे से यह सब बोलने की ज़रूरत nahi..baat करनी है करो नहीं करनी तोह और ाचा ..पैर अपनी लिमिट समझ लो वार्ना मैंने अपनी लिमिट क्रॉस की तोह रेडक्रॉस की ज़रूरत पद सकती है”

चिंटू बेशर्मो की तरह हसकर “सॉरी यार तुमको देखता हंट ओह गलती हो जाती है आगे से ध्यान रखूँगा..”

चिंटू और मनु का निशा को खाना खिलाना हो गया जहां आज निशा ख़ुशी के मारे दूसरी दुनिआ तक घूम रही थी वहीँ मनु हैरान और बेचैन सा था की चिंटू निशा के सामने यह सब क्यों कर रहा है और निशा के पीछे चिंटू उससे बात तक नहीं करता ..

मनु अपनी सोच में गम था निशा टिफ़िन लेकर जाने लगी पैर मनु और चिंटू वहीँ रुके हुए the..chintu ने मनु से कहा ..अपने छोटे से दिमाग में गुस्सा ले की तू निशा को इनसब के बिच में लाना चाहता है या नहीं …और हाँ उस पुष्पी को अगर तू बहिन मंटा है तोह भूले से भी उसे इनसब के बारे में मत बताना वर्ण तेरी दुनिआ इतनी अकेली कर दूंगा किट ु सोच भी नहीं सकता ..”

मनु ने जब पुष्पी का नाम सुना तोह उसके दिमाग का फ्यूज hi ढीला होगया की चिंटू को कैसे पता है की पुष्पी को हु अपनी बहिन मंटा है और अगर पता hai…toh उसने पहले क्यों नहीं बोलै …कहीं पुष्पी खुद भी तोह इसमें शामिल नहीं …नहीं पुष्पी दीदी ऐसी नहीं hain…toh चिंटू ऐसा लगता था …हो सकता है पुष्पी के बारे में पता लगा लिया हो चिंटू ने यार घर तोह रोज़ hi आती हैं मेरे पैर उसे यह कैसे पता लगा की मैं उनको अपनी बहिन मंटा हूँ …और अगर इसे पहले से पता था तोह कभी बोलै क्यों nahi…kahin दीदी और चिंटू का मिला जुला को प्लान तोह नहीं …नहीं दीदी ऐसी नहीं हैं हु तोह बिना किसी मतलब के हम दोनों भाइयों को पड़ा रही है ..बिना एक पैसे लिए ..वह ऐसी नहीं हो सकती…

मनु के दिमाग में चिंटू के फोड़े गए बूम का ज़बरदस्त असर हुआ था …मनु हर तरह से समझने की कोशिश कर रहा था की चिंटू को पता कैसे chala..koi भी उसका चेहरा देखता तोह समझ जाता की मनु का दिमाग कितना तेज़ी से चल रहा था…

जिसपर चिंटू ने हंसकर कहा ….तेरे छोटे दिमाग में अभी इतना दम नहीं है किट ु चिंटू को समझ पाए..



“हर सवाल का रखता हूँ जवाब …है मेरे पास हर ताले की चाबी…



नाम है चिंटू mera…yehi है ज़ालिम इस दुनिआ में मेरी खराबी …”:हिंतहिंट2:

तू ज्यादा न सोच तेरे बस का नहीं है बस चुपचाप बात मंटा जा वार्ना तुझे पता है …साडी दुनिआ एक तरफ और तू अकेला एक taraf.chal वापस चल और ऐसे रियेक्ट कर जैसे कुछ सुना hi न हो”

मनु अंदर तक हिल गया था चिंटू की बातों से पैर अभी हालत समझना चाहता tha…chintu चला गया मनु को अकेला छोड़ कर मनु को उसके सवालो के साथ तनहा ..मनु ने बहुत कोशिश की पैर घंटा कुछ समझ नहीं आ रहा था..

खैर इसके बाद मनु क्लास में गया और सबसे पीछे बेथ गया जहां तीन दोस्त अपनी अपनी दुनिआ में खोये थे जहां निशा मनु को अपने पीरियड की प्रॉब्लम बताकर और उसकी केयरिंग देखकर और उसके हाथों खाना खाकर अपनी ख़ुशी में मस्त थी…

वहीँ चिंटू इस बात से खुश था की आज उसने निशा की तरफ एक कदम और बड़ा दिया था ..खुद अपने हाथ से खिला कर पैर निशा ने जब उसे सुनाया तोह उसे अचे से पता था की कहीं न कहीं होगा hi क्युकी निशा तोह मनु पैर मरती थी और चिंटू निशा पैर …पैर दोनों के बिच की कड़ी था मनु …

जो इस समय चिंटू के फोड़े गए बूम पैर सोचने में बस्सी था ..क्युकी उसके दिमाग में अब पुष्पी को लेकर भी ख्याल आने लगे थे ..की क्या पता आगे पुष्पी भी चिंटू की साथी निकली तोह क्या होगा.

पैर उसका दिल उसे पुष्पी पैर शक करने पैर धिकार भी देता था .” .की आजतक पुष्पी ने बदले में मनु से कुछ नहीं माँगा तोह ऐसा शक क्यों …???”

दिमाग ” अबे मांगती तोह तब जब जरूरत होती …हु तोह प्लान के साथ आयी है तेरी लाइफ तुझे बर्बाद करने…

दिल “यार दीदी ऐसी नहीं है”

दिमाग “तोह चिंटू पहले ऐसा tha…meri बात मान विस्वाश उतना कर जितना ठीक हो वर्ण रहना हमशा चिंटू जैसे लोगो के संग घिरा हुआ…

मनु के दिल और दिमाग का हाल यही था …

पैर उसका यूँ पुष्पी पैर शक करना ठीक था या नहीं पुष्पी जो कलतक उसकी सबसे अछि बहिन थी चिंटू ने उसको भी शक के घेरे में लाकर खड़ा कर दिया tha..or क्या पुष्पी ने कभी कुछ ऐसा किया था की मनु उसपर इस तरह शक kare..ya यह भी कोई गेम था चिंटू का जो वह मनु के साथ खेल रहा था उसके दिमाग के भीतर ...:ब्रशिंग:



खैर दिन का अंत हुआ पैर यह दिन अपने पीछे छोड़ गया बहुत सारे सवाल जिनका जवाब अभी मनु के पास नहीं tha..per आनेवाला कल उसके बहुत सारे सवालों के जवाब लेन वाला tha..or जवाब क्या हैं यह तोह आनेवाला वक़्त hi बता सकता hai…:hint:
 
अपडेट 50

बचपन की यादें

खैर दिन का अंत हुआ पैर यह दिन अपने पीछे छोड़ गया बहुत सारे सवाल जिनका जवाब अभी मनु के पास नहीं tha..per आनेवाला कल उसके बहुत सारे सवालों के जवाब लेन वाला tha..or जवाब क्या हैं यह तोह आनेवाला वक़्त hi बता सकता है…

अब आगे......

आनेवाले कल के साथ बहुत कुछ जुड़ा हुआ था मनु की जिदनागि में कहते हैं न जब ज़िन्दगी इम्तिहान लेती है तोह अचे से लेती है …

मनु अपनी ज़िन्दगी में चिंटू से जूझ रहा था. एक तरफ जय चाँद और कमलेश नयी साज़िश के साथ खड़े थे इस बार दोनों ने प्लान बनाया था राजिंदर की फॅमिली को फ़साने का अपने शैतानी दिमाग के जरिये …

और क्या था इस बार जय चाँद और कमलेश का प्लान हु तोह भाई दोनों hi जानते थे ..या अब आप जान्ने वाले हैं ..अगले दिन सुबह hi सुबह राजिंदर कैग हर पैर जैचंद खड़ा था …

जैचंद “राजिंदर देख बहुत प्रॉब्लम हो गयी है ..

जी हाँ राजिंदर ने भले hi जय चाँद को पला था पैर जय चाँद शुरू से hi राजिंदर को नाम से बुलाता था..

राजिंदर “क्या बात है..”

जय चाँद “मेरी साली की शादी है उसके शादी के दहेज़ के लिए 50 हज़ार रुपया काम हैं अगर नहीं दिए तोह उसका घर बसने से पहले hi टूट जायेगा”

सुमित्रा और दोनों बचे भी अभी घर पैर hi थे ..

राजिंदर “तोह इस मैं क्या करूँ क्या मुझसे पूछ कर अपनी साली की शादी तय किट hi या मेरे नाम पैर शादी करवा रहे हो तुम लोग जब तुम्हारा बजट नहीं था तोह क्यों लगे हो शादी करने में और वैसे भी दहेज़ लेना और देना कानूनी अपराध है मैं इसमें क्या कर सकता hun..or वैसे भी तुझे पला पद्य लिख्या जो तेरे बस्का थान यही तेरी शादी तक कराइ यहां तककि तेरे जैसे इंसान के लिए दूकान तक खुलवाकर दी अब क्यात ेरे जीवन भर का ठेका लिया हुआ है मैं तू खुद भी मर्द है एपनिया आप कर कुछ मेरी भी फॅमिली है क्या इनको नहीं देखूं मैं???”

राजिंदर का सब्र शायद अब भर चूका था जैचंद से ..

जैचंद ने जब देखा राजिंदर गुस्से में है तोह उसने नरम रुख कर liya”bhai किसी की ज़िन्दगी का सवाल है लड़की का मामला है अगर शादी रुक गयी तोह शायद आत्महत्या तक कर ले हु”

राजिंदर “मरती है तोह मरे मेरा तेरे ससुराल से कोई लेना देना नहीं है और मेरे पास क्या पेड़ लगा है जो तुझे हवा में हाथ हिलकर पैसे दे dun..main खुद कैसे अपने घर का खर्चा चलता हूँ मुझे पता है …तेरी भाभी ने आजतक घर से पेअर तक नहीं निकला था उसे भी अब काम करना पड़ता है …तोह तेरी बीवी क्या कहीं की महारानी लगी हु भी तोह कुछ कर सकती है या nahi..or तेरा हु कपटी ससुर तेरी बीवी के सिर्फ कान भरता है …साला सिर्फ बाचे hi पैदा करना जानता है कामना नहीं साला निकम्मा आजतक सिर्फ दारु पीकर यहाँ वहां पड़ा रहता है ाचा खासा मुस्टंडा है साला बचे पैदा करने के साथ कमा भी तोह सकता है तभी साले की बीवी उसे छोड़ कर भाग गयी थी…”

मेरे पास रति भर पैसा नहीं है …तेरी साली है तू खुद samjh…ya तुझे भी पालन तेरी साली की शादी भी करवाऊं इंसान हूँ कोई बैंक नहीं …मेरे अपने भी बचे हैं क्या इनको कुवे में फ़ेंक dun..mere पास नहीं है paisa…tu कहीं और देख जैचंद मुझे माफ़ कर ..”

जय चाँद अकेला नहीं आया था उसका निकम्मा ससुर भी साथ था पैर बहा खड़ा था राजिंदर को क्या किसी को पता नहीं tha..woh सुनतोह सब रहा था पैर करता क्या ..क्युकी राजिंदर ने सुच hi कहा था सलत है hi निकम्मा उसकी बीवी भी परेशान हो गयी थी उससे तोह छोड़कर बैग गयी थी पीछे छोड़ गयी थी ..3 बेतिया ..

पहली कमलेश थी जिसकी शादी जैचंद से हुई थी और जय चाँद से शादी के बाद हु और उसकी सभी बेटियां जय चाँद के पास hi पड़े रहा करते थे …क्युकी ससुर था और शैतानी खोपड़ी उसकी बेटी और दामाद भी शामे थे तोह तीनो की अछि पैट जाती thi..usne जब सुना की राजिंदर ने उसकी बीवी के बारे में क्या कहा है तोह उसे गुस्सा तोह बहुत आया पैर करता क्या ेके क बात सच थी राजिंदर की ..

सुमित्रा अंदर से सुन रही थी उसे भी सब सुनाई दे रहा था आज उसने खुद देखा था की राजिंदर ने साफ़ साफ़ अपने भाई से मन कर दिया था पैसे के लिए ..उसे कहीं न कहीं दुक्खा था की पैसे के चलते एक लड़की की शादी टूट जाएगी ..

जय चाँद राजिंदर का जवाब सुनकर दरवाज़े पैर गया जहाँ उसका ससुर खड़ा था एक शैतानी मुस्कराहट के साथ ..जैचंद के बहार आते hi उसने धीरे से जैचंद पास उसके कान में kaha”tumse नहीं हु आना अब मेरा कमाल देखो कैसे पैसे निकलते hain“hath में ठेला लिए अंदर चला गया जहाँ राजिंदर गुस्से में बैठा tha..per क्युकी जैचंद का ससुर चाहे कितना भी कमीना हो निकम्मा हो पैर रिश्ते में तहत ओह बड़ा तोह राजिंदर ने उसे प्यार से बैठाया और हाल चाल पूछा ..सुमित्रा भी उसके लिए चाय लायी तोह उसने थाले से निकल कर काळा और फल सुमित्रा के हाथ में रख दिए .. और सुमित्रा से bola”beti एक तरह से मैं भी तुम्हारे बाप सामान हूँ मेरी बेटी की शादी है तुम ज़रूर आना पता नहीं अब हो भी पाएगी या नहीं पैर तुम्हारा यह गरीब बाप किसी से नाराज़ नहीं है बीटा तुम भी मुझे माफ़ करदेना (राजिंदर से )”

सुमित्रा को बहुत बुरा लगा की इतनीआगे का आदमी एक तरफ उसे बेटी कह रहा है और माफ़ी भी मांग रहा जिसमे हु कहीं न कहीं खुद को दोषी मान रही थी की शायद उनके पास पैसे न होने से किसी का घर नहीं बस सकेगा ..तोह उसने एक फैसला किया और kaha”aap टेंशन न लीजिये बाबू जी आप यह बेटी अभी सही सलामत है आपकी बेटी आपकी उस बेटी की शादी में कोई भी परेशानी नहीं होने देगी”

जिस पैर जय चाँद का ससुर खुश हो गया होता भी क्यों नहीं प्लान जो सही पद गया था पैर राजिंदर को यह ना गवर guzra..”tum जानती हो क्या कह रही हो 50 हज़ार चाहिए हमारे पास कहाँ hain..itne पैसे “

सुमित्रा “अगर पैसे नहीं है तोह ऑफिस से ले लीजिए जी पैर किस लड़की का घर नहीं टूटना चाहिए …”

राजिंदर “चाहे खुद के बचे रोड पैर आ जाएँ सही है न ,जय चाँद के ससुर से गुस्से में तुम चाहते क्या हो तुम्हारा क्या ठेका ले रखा है मैंने खुद के बचे तुम्हारे शादी लायक हैं मैं क्यों दूँ पैसे खुद कमाओ और खुद लगाओ ..यह मेरा घर है कोई आठ आश्रम नहीं .”

सुमित्रा “आप इनसे ऐसे बात न करिये हो सकता है कोई बात हो जो खुलकर न कह पा रहे हों यह ..”जिस पैर नौटकी ससुर ने ाँसों भर कर kaha”nahi बेटी यह भी सहीह ै तुम्हारा भी परिवार है …मेरी एक बची के चलते तुम्हारा घर खराब हो ऐसा नहीं हो सकता ..”

सुमित्रा “नहीं ऐसा नहीं हो सकता आपने मुझे बेटी कहा है ,,तोह मेरा भी फ़र्ज़ बनता है आपकी मदद karun..suniye जी इनकी जितनी हो सके हेल्प कीजिये …और कोई सवाल नहीं आप को मेरी कसम”

राजिंदर क्या बोलता कसम ने टाला दाल दिया tha..so बोलै “पैसे नहीं हैं मेरे पास पैर राशन भरवा दूंगा और उसके पैसे धीरे धीरे देता रहूँगा और कोई बात नहीं होगी इसपर ..”

जैचंद का ससुर बड़ा खुश हुआ सुमित्रा के पेअर चुने चल दिया मसका मारने के लिए ..

सुमित्रा “बाबूजी यह सब क्या कर रहे हैं आप मैं भी आपकी बेटी हूँ ऐसा पाप न कीजिए”

ससुर “नहीं बीटा तुम्हारे चलते मेरी बेटी की शादी अब सुकून से हो जाएगी ..”

ससुर उठा और बहार चल दिया मनु भी बहार गया देखा जहाँ हु कह रहा था जैचंद से “देखा जो काम भइया नहीं कर पाया हु काम चाँद ांसो से तेरी उस अकड़ू भाभी ने कर दिया और दोनों हसने लगे मनु को बड़ा गुस्सा आया पैर करता क्या क्यकि पैसा उसके माँ बाप ने देना था दोनों को पैट नहीं था की मनु उनकी बात सुन रहा है..

Jaichand”maan न पड़ेगा तुम्हारी शैतानी खोपड़ी को जब चलती है सामने वाले को पता भी नहीं चलता कब फास gaya..hahahahahahah”

ससुर” हाहाहाहा देख लिया इस शैतानी खोपड़ी का कमाल अब जल्दी चलो राशन भरना है और शादी भी करनी है …एक बार इसकी शादी हो जाये फिर कोई नया तरीका ढूंढेंगे तुम्हारे भाई और भाभी को लपेटने का हहहहहहह!”

जय चाँद “मुझे तोह अब भी यकीं नहीं हो रहा है की राजिंदर और सुमित्रा ने राशन के लिए हाँ कह दिया आखिर क्या किया तुमने ??”

ससुर “”ऐसे लोगों की सिर्फ एक कमी होती है उनकी achai…or आंसू मैं कुछ ख़ास किया नहीं बस तुम्हारी भाभी के सामने थोड़ा रोया और थोड़े फल थे जो दिए उसे लगा की उनके चलते किसी का घर बच सकता है सो आसानी से आ गयी फंसे में ..दोनों ने एक बार फिर से थका लगया अपनी शैतानी हंसी का और चले गए राजिंदर ने राशन वाले को फ़ोन किया और कह दिया की जैचंद आये तोह उसे जीतनेय का भी राशन ले उसे दे de..rajinder का मूड बड़ा ख़राब हुआ था आज सुमित्रा से पैर करता क्या बीवी थी उसकी उसका बेटर हाफ सो चुपचाप शी गया ..पैर बोलै कुछ नहीं ..पैर मनु अंडर गया और बोलै सुमित्रा se”mummy जब पापा ने मन किया था तोह आपको क्या जरूरत थी उनकी मदद करने की हो सकता है उनका कोई प्लान हो …??”

सुमित्रा “बीटा उनकी माया हु जाने पैर अगर कोई हेल्प मांगे तोह उसकी हेल्प करनी चाहिए जितना हो सके वर्ण इंसान होने का क्या लाभ”??

मनु “चाहे हेल्प के नाम पैर खुद बर्बाद हो जाओ ??”

Sumitra”beta उपपरवाला सब देखता है हमारा काम हेल्प करना है बदले में उनको उपपरवाला देख लेगा ..अगर तुमसे कोई हेल्प मांगे तोह उसकी हेल्प करना ok अगर हु गलत हैं तोह उनकी सजा उपपरवाला dega..kyuki अचे के साथ हमशा ाचा होता है अब कोई बहस नहीं”

मनु क्या बोलता अब चुपचाप चल दिया स्कूल ..जहाँ चिंटू उसे जलील करने का कोई मौका नहीं छोड़ता tha..hua भी वही चिंटू ने बाकी सबसे मनु को अलग कर दिया था सिर्फ और सिर्फ निशा hi मनु से बात करती थी जिस पैर निशा ने कई बार उसके पीछे अकेले बैठने की वजह पूछी तोह मनु ने मैं न होने का बहाना बनाकर उसे चुप कर दिया था ..

मनु नहीं चाहता था की निशा चिंटू और उसके बिच में पड़े ऐसे hi एक हफ्ता निकल चूका था ..जिसमे मनु ने अपनी नज़र पुष्पी पैर गदा राखी थी अपने शक के चलते पैर पुष्पी में उसे कुछ भी अजीब नहीं लगा न उसके बर्ताव में कोई चेंज नोटिस किया मनु ने ..

वहीँ एक तरफ निशा का प्यार अपने पुरे परवान पैर था ..उसने पता नहीं कब मनु की कोई पिक्चर खींच ली थी और उसके पास मनु की पिक थी जिसे लेकर हु हर रात मनु से बातें किया करती थी..

ऐसे hi एक रात को हु अपने ालशान बीएड पैर उलटी लेती हुई मनु की तस्वीर को अपने हाथों में लिए hue..keh रही thi”or कितना तड़पाओगे न जाने कब मेरे दिल का हाल समझोगे तुम ..क्या मेरी आँखों में नहीं दीखता तुम्हे कितना चाहती हूँ तुम्हे …बस भी करो मुझे तड़पना एक बार फिर मुझे अपने सीने से लगा कर मेरे प्यार को अपना लो मेरी ज़िन्दगी तुम्हारे नाम से चलती hai..jis लड़की ने आजतक किसी लड़के का हाथ तक नहीं थमा हु अपनी मम्मी के नाम पैर खुद तुम्हारे लिए खाना बनती है और अपने हाथ से खिलाती है पैर जवान हो रहे हो पैर कितने बुद्धू हो की एक लड़की तुम्हे अपने हाथसे खिलाये और तुम्हे समझ भी नहीं आता की एक पगली तुम्हारे नाम हो चली है ी लव ु मुहह्हह्हआआ! “ यह किश निशा ने मनु की उस पिक को किट hi जो उसने अपने हाथ में थामी हुई थी…

जिसका पता आज बहार खाने पैर निशा को खुद बुलाने पैर आयी उसकी माँ ने सब सुन लिया tha…or जब उसने मनु की पिछ देखि तोह उन्हें सब समझ आ गया की उनकी लड़की प्यार में दीवानी हो गयी है जिसपर हु मुस्कुराती हुई चुप चाप लौट आयी ..जिसपर अशोक खाने की टेबल पैर दोनों माँ बेटी का इंतज़ार कर रहा था थोड़ा चूका क्युकी मंजू अकेले आयी थी और अपने में हंस रही थी..

अशोक “अरे भाई क्या हुआ कोण सा जोके सुनकर आ रही हो जो खुद में मगन ho..hume भी तोह पता चले और निशा कहा रह गयी उसे नहीं लायी साथ??”

Manju”laati कहाँ से उसका दिल तोह पापी और झपि से hi भर गया होगा ..उसे अब खाने किन यही किसी और की ज़रूरत है???”

अशोक “महारानी साहिबा पहली खाली पेट नहीं सुलझती हमसे बात क्या जरा खुल कर कहो और पापी झपि क्या मतलब है तुम्हारा “”??

मंजू “आप भी न पता नहीं कब समझोगे लड़की अब बड़ी हो गयी है इतनी बड़ी की उसने आपने जीवन साथी भी चुन लिया है..”

अशोक “ मनु hi होगा है न “

मंजू हैरत के साथ“ आपको कैसे पता चला”??

अशोक “अरे भाई बाप हूँ उसका जो बाप को पसंद है माँ को पसंद है तोह उसे क्यों नहीं होगा भला, और मैं तोह पहले दिन hi समझ गया था की निशा उसे कितना चाहती है..”

मंजू “ तोह आपने कुछ कहा क्यों नहीं उसे ??”

अशोक “ क्या कहता उसे जब हमने खुद लव मैरिज की है तोह भला अपनी बेटी को कैसे रोक लूँ और फिर मैंने सोचा था की पहले मनु को समझूँ और उसके बाद निशा को समझूँ पैर मनु एक परफेक्ट लड़का है अपनी निशा के लिए तोह भला मुझे या तुम्हे क्या प्रॉब्लम होनी चाहिए..??”

Manju”baat तोह आपकी सहीह ै कितना ाचा लड़का है आपका तोह पता नहीं पैर जब उसने मुझे माँ मन था तभी मैंने सोच लिया था की निशा की शादी मैं मनु से hi करुँगी ..पैर निशा सिर्फ अकेले मेरी hi तोह नहीं है आपकी भी मंजूरी जाननी थी सो सोचा सही टाइम देखूंगी और आपसे बात करुँगी ..मनु के लिए पैर थोड़ा डर्टी थी की पता नहीं उसके गरीब होने से आप क्या कहेंगे ???”

अशोक “महारानी जी मनु को लेकर मैंने खुद भी कई बार सोचा था की इतनी छोटी आगे में कितना सभ्य और संकारी के साथ कितना तेज़ दिमाग है उसका और कितने तरीके से बात चित करता है पता भी नहीं चलता कब अपना बणग्या hai..usper उसका बिज़नेस नॉलेज कमाल का है …तोह मुझे भला क्या ऐतराज़ होगा भला..??”

Manju”matlab उसके गरीब होने से आपको कोई प्रॉब्लम नहीं है??”

Ashok”maharani जी आपके यह गुलाम आगे को देखकर चलता है पीछे नहीं ..जो लड़का 13 साल की आगे में इतना स्किल्ड है हु आगे क्या क्या आर्काइव नहीं कर सकता उसके बैकग्राउंड को देखकर अभी इग्नोर करना समझ आता है पैर आनेवाले सालो में जब हु सही मुकाम पैर होगा .तब श्याद कोई hi उसे इग्नोर कर सके तुम्हे पता है भटनागर खुद उससे डिस्ट्रीब्यूशन हैंडलिंग समझ रहा है और उसका असर हमारे बिज़नेस पैर कितना पड़ा है “”??

मंजू “कितना “

अशोक “जहाँ सिर्फ 3 या 4 डिस्ट्रिक्स में हमारा सामान जाता था आज 20 डिस्ट्रिक्ट में हमारा hi सामान hai..uski स्किल कमल की है ..मैं एक बिजनेसमैन हूँ और हमलोग लॉन्ग टर्म को देखते हैं छोटी से छोटी डील में भी और ऐसे लड़के का आनेवाला कल सुनहरा होगा तुम मुझसे लिखवा सकती ho..aise में मैं उसे इग्नोर कर दूँ सिर्फ इस लिए की हु गरीब है तोह मुझसे बड़ा बेवकूफ कोण होगा ..जो टैलेंट की क़द्र न कर सका तोह मैं बिजनेसमैन किस नाम का मुझे तोह फर्स्ट डे से पसंद है ..उस पैर उसके संस्कार मुझे अचे से समझ आज्ञा की मेरी बेटी सही इंसान से प्यार करती है ,,,एक बाप की तरह कहूं तोह मुझे उसकी चॉइस पैर नाज़ है..”

मंजू “आपने तोह मेरी साड़ी प्रॉब्लम hi हल करदी वार्ना एक बार को तोह मैं डर गयी थी की पता नहीं आपका रिएक्शन क्या hoga..per अभी तोह छोटे हैं दोनों तोह phir..ab ??”

अशोक “जिस शेरनी से पूरा ऑफिस डरता है हु डर गयी हहहहह मंजू यह तोह तुम रहने hi दो सब समझता हूँ की अगर मेरी हाँ नहीं होती तोह तुम मुझे मन hi लेती ..पैर मैं भी बाप हूँ कोई दुश्मन नहीं अपनी बेटी का??”

मंजू “आपका मतलब”

अशोक “मैं भी जनता हुनकी तुम दोनों माँ बेटी को कितना पसंद है मनु मुझे भी पसंद है पैर हुँतोह एक बेटी का बाप जो अभी जवानी की देहलीज़ पैर कदम रख रही है ..मुझे पता है की मेरी लाड़ली कोई ऐसा काम नहीं करने वाली जिससे उसके बाप का सर झुके पैर जब मैंने मनु को देखा और समझा और उसके दिल में औरतों के लिए इज़्ज़त देखि तब जाकर सुकून आया की मेरी बेटी सही इंसान के साथ है ,,वार्ना तुमको क्या लगता है की मैं निशा को ऐसे hi किसी के साथ भी गुमने दूंगा भला अरे भाई एक लौटी बेटी है हमारी ..हमारी राजकुमारी को भला ऐसे hi किसी के साथ भी छोड़ सकता हूँ भला ..चाहे कुछ भी हो एक बाप के नाते हमारा फ़र्ज़ बनता है अपनी बेटी की safety.or मैं खुद ऑफिस में भी मनु को ऑब्सेर्वे करता हूँ की कितना सहीह ै और यकीं मनो हु परफेक्ट है हमारी बेटी के लिए पैर क्युकी अभी छोटी है तोह उसे अभी इनसब से दूर रखो और समझाओ जब सही टाइम आएगा तब मनु सिर्फ और सिर्फ उसका होगा”

मंजू इतनी खुश हुई की आज पहली बार खुद उसने अशोक को किश कर लिया खुद उसकी गॉड में जाकर बेथ गयी

Manju”mere सरताज आपने इस माँ को कितना बड़ा इनाम दिया है मैं आपको बता नहीं सकती आज बैडरूम में आओ तब बताता हूँ यह शेरनी कैसे शिकार करती hai..aaj दिल खुश कर दिया आपने मेरा की मेरा बीटा अब मेरे पास हक़ से hoga..”uski आँखों की चमक देखकर अशोक भी ललचा गया ..

अशोक “मतलब आज मेरा शिकार होकर रहेगा चलो ाचा है शिकार खुद त्यार है जानेमन अभी तुम जाओ और उस “मनु की दीवानी “ को कहो की कहना खा ले और मेरे बारे में न बातकारी उसे प्यार से समझाओ की तुम उसके साथ हो और सही टाइम आने पैर मुझे मन लोगी ..”

मंजू “जब मान hi गए हो तोह अभी क्यों नहीं बताऊँ आपके बारे में???”

अशोक “हु इस लिए मेरी शेरनी ताकि तुम उसके और करीब हो जाओगी तोह तुम उसे सही गलत समझा सकती हो और आनेवाले टाइम में निशा तुम्हरी हर बात मानेगी क्युकी तुम उसके प्यार की राज़दार जो तेरी पैर मेरे बारे में अगर अभी कहोगी तोह होसकता है आगे सा जवानी के और प्यार के जोश में डरना और सही चीज़ माना छोड़ दे ..और वैसे भी मुझे अपनी बेटी पैर पूरा भरोसा है पैर जवान बचे का क्या भरोसा कल को क्या कर जाये पागलपन में कमसे कामे एक का डर तोह बना रहेगा न उसके दिमाग में वार्ना कल को क्या करले ??”

मंजू अशोक के दिमाग की डाटा देते hue”maan गए जी आपके दिमाग की जितनी तारीफ़ करूँ काम है ..सुच में आपका दिमाग सही चलता है …तोह रेडी रहना आज शिकार होने के लिए ध्यान रखना आज धमाल होगा ..”इसके साथ एक जोर दार किश किया मंजू ने अशोक को और तेज़ी के साथ चल दी बेटी के रूम में जहाँ निशा की बातें अभी भी जारी थी..

निशा एक हाथ में मनु की पिछ लिए किश कर रही थी की मंजू चुपचाप उसके बीएड पैर आकर उसके हाथ से मनु की तस्वीर चीन लेती है ..और गुस्से के sath”yeh सब क्या है निशा तुम अभी इतनी बड़ी नहीं हुई की तुम यह सब कर सको इसलिए स्कूल जाती हो tum..hmm कल से तुम्हारा स्कूल बंद”””

निशा ने अचानक से हुए अपने माँ के हमले से बुरी तरह घबरा गयी और उसने स्कूल का नाम सुना तोह डर के मारे कांपने लगी ..

मंजू श्याद और डरने के मूड में thi..”or यह मनु की फोटो है न इस साथ यह सब क्या चल रहा है अभी जाती हूँ तुम्हारे पापा को बताता हूँ की एक तरफ शरीफ बनता है दूसरी तरफ हमारी hi बेटी को फंसा रहा है हु अचे से खबर लेंगे तुम्हारी भी और उस मनु की भी …

निशा ने जब यह सुना की उस मार पड़ेगी और श्याद मनु को भी तोह उसे अपनी मार से भला कोई फरक पड़ा या नहीं पड़ा पैर मनु के मार पड़ने के नाम पैर उसकी आँखों से आंसू बहने लगे और ज़मीन पैर गिर कर अपने दोनों हाथ जोड़कर बोली “मम्मी मुझे जितना मरना है मार्लो जैसे चाहे वैसे करो पैर मनु को कुछ मत करना उसका इसमें कोई कसूर नहीं है (कसूर भाई की स्टोरी है भाई अपने को अछि लगती है दिल किया तोह नाम ऐड कर दिया ) आप चाहो तोह मुझे जान से मार्दो मैंने आजतक कोई गलत काम नहीं किया मम्मी जिससे आपका और पापा का नाम ख़राब हो हाँ मनु से दिलो जान से प्यार करती हूँ पैर कभी उसे भी नहीं बताया मैं की मैं उसे कितना चाहती हूँ ..माँ आपकी बेटी आपकी हर बात मानेगी पैर आप मेरे मनु को कुछ मत करना वार्ना आपकी यह पागल बेटी जीते जी मर jayegi..”Nisha ने लगभग बिलख बिलख कर रट हुए कहा …

मंजू का एक बार तोह कलेजा मुँह तक आगया की निशा को खुद के पीटने से ज्यादा चिंता मनु की है उसने एक बार भी खुद के लिए नहीं कहा मनु के प्यार केआगे निशा ने अपने खुद के पीटने की या बदनाम होने की ज़रा भी चिंता नहीं की …मतलब उसके पति अशोक का अंदाजा सही था अगर निशा को नहीं सभाला तोह यह मनु की दीवानी कहीं कुछ गलत न कर ले …

मंजू ने यह सब सोचकर आराम से निशा को उठाया और उसके आंसू होने हाथ से पूछे उसे साथ लेकर निशा के बीएड पैर बेथ गयी और निशा को अपने ममता की चाव में लिया मतलब अपने सीने से लगा लिया ..जिसपर अपनी माँ का नरम रुख देखकर निशा भी अब चुप होगयी थी..

निशा “माँ सुच में मनु की कोई गलती नहीं है आप पापा से कुछ न कहना वार्ना शायद हु मुझसे कभी बात न करे..”

मंजू “ोवाहः! मेरी बची इतनी बड़ी हो गयी है की खुद की जगह मनु की चिंता है और मेरे नाम से खुद खाना बना रही और अपने हाथ से खिला भी रही है..”

निशा को तोह जैसे सांप सूंघ गया था क्या बोलती और क्या बहाना मरती क्युकी उसकी माँ बिलकुल सही थी निशा यही करती थी ..”

निशा की ऑंखें फिर भर आयी मंजू ने उसके सर पैर हाथ पेरते हुए kaha”us मनु किट ओह देखो मेरी फूल सी बची जिसने किचन का टाइल भी नहीं देखा था आज हु सुबह जल्दी उठकर उसके नाम से खाना पकने लगी है और तुम क्या सोचती हो माँ तोह अंधी है न बीटा तुम्हारी माँ को पहले दिन से hi पता था पैर देखना चाहती थी की कितने दिन चलेगा यह पैर आज तुझे देखकर कह सकती हूँ की लगता है तूने मनु के नाम अपना जीवन hi कर दिया है …इतनी सी ुमार में क्या यह सही है …??”

निशा ने जब मंजू से सुना की उसका जीवन अब उसने मनु के नाम करदिया है ..तोह उसके चेहरे पैर एक लग लाली च चुकी थी शर्मा कर निशा boli”maa आईएम सो सॉरी पैर पता नहीं कैसे मुझे मनु से प्यार हो गया पहले तोह मैंने सिर्फ सोचा दोस्ती है पैर उसका केयरिंग नेचर कब मेरे दिल और कब दिल से मेरी आत्मा में चला गया मुझे पता hi न चला पैर माँ कसम से मैंने आज तक कोई गलत काम नहीं किया है यहाँ तक की मेरी चाहत मेरे और सिर्फ मेरे साइन में कैद है और अगर आप नहीं चाहती तोह वडा है मेरा मर जाउंगी पैर मनु को खबर तक नहीं होने दूंगी अपनी चाहत का पैर मुझे उसे देखने का हक़ तोह मत चाइनो मम्मी प्ल्ज़ …”निशा ने फिर लगभग रट हुए कहा अब मंजू का दिल भी भर आया था निशा को और तंग करना उसे अब ठीक न लगा ..

मंजू “बीटा कोई तुझसे तेरे प्यार को चीन नहीं रहा है ..बल्कि मुझे तोह खुद पसंद है हु बस मेरी बची बहुत हो गयी तेरी तपस्या उस पगले को बता दे की हु पागल किसे अपनी लाइफ में मिस कर रहा है उसे भी तोह पता चले की यह प्रेमदीवाणी कैसे उसका नाम लेकर पागल हुई जा रही है..”

निशा को तोह आज उसकी दुनिआ hi मिल गयी थी

अजीब होते हैं न यह आंसू जब उदास हो तो भी ऑंखें भर देते हैं और जब ख़ुशी मिले तोह दिल के साथ फिर से आँखें भर देते hain..kambhkt कोई ईमान नहीं होता इन आंसूं ka..jab मौका मिले आँखों से चालक जाते है किस भरे जैम के पैमाने की तरह..

उसकी आँखोने में आज माँ की सहमति की मोहर लग गयी थी मतलब एक तरह से अपने प्यार में माँ का साथ मिल गया था ..थोड़ी देर पहले ज़मीन पैर रोने वाली निशा एक तरह से खुदने लगी उसकी आँखों से आंसू अब भी बह रहे थे पैर पहले जहाँ उसकी आंखों में प्यार चीन जाने की कसक थी वहीँ इन आंखों में अब ज़माने को अपने प्यार का एलान करने की नयी उमग नयी चाहत thi..usne मंजू को चुम लिया इतना चूमा इतना चूमा की मंजू ने मज़बूर होकर निशा को खुद से अलग किया और कहा “साड़ी किश अपनी माँ पैर hi लुटा देगी तोह मनु के हिस्से क्या आएगा ..थोड़ा तोह कण्ट्रोल कर ..”

निशा अपनी माँ के मुहसे मनु को किश देनेवाली बात पैर दुनिआ भरी की शर्म उतर आयी thi..simat गयी हु खुद में और फिर से एक बार मंजू एक गले लगकर बोली “मम्मी कुछ तोह सरम करो बेटी हूँ आपकी कुछ भी कह रही हो”

मंजू “हाँ हाँ थोड़ी देर पहले जब उसकी फोटो लिए किश चलरही थी तब माँ की याद नहीं आयी ाचा सुन तू अब टेंशन न ले तेरी माँ तेरे साथ है बस तू अपनी लिमिट क्रॉस न करना और बाकी सब मुझपर छोड़ दे और वैसे भी मनु के लिए तेरे पापा को मानना है न ..और उस मनु के बचे का भी पता लगाना है की हु भी तुमसे प्यार करता है या नहीं..”

निशा “थैंक्स मम्मी आप दुनिआ की सबसे अछि मम्मी हो आप टेंशन न लो हु जायेगा कहाँ मैं आज नहीं तोह कल उसे अपने प्यार का एहसास करवाके hi दम लुंगी और कल सुबह से hi आपको और पापा को बीएड टिया मेरी तरफ से लव ु मम्मी”

मंजू “वैसे मन्ना पड़ेगा मनु को”

निशा “हु क्या भला“

मंजू “जो काम में पीछे 8 साल से नहीं कर सकीय हु काम मनु ने बिना बोले कर दिया हमारी बेटी खुद किचन सभालने लगी और कितनी जिम्मेदार भी होगयी बस अब तू बड़ी हो तोह जल्दी से मनु के हवाले कर तुझे दाफा करें हमलोग ..”

निशा इस बात पैर सरम से तर बतर हो गयी थी उसके सपने उसे पुरे होते नज़र आ रहे थे ..कहीं कहीं उसे उसका प्यार खुद के करीब महसूस हो रहा tha..ki मंजू ने एक हाथ मार्कर उसके सपने से उसे वापस हक़ीक़त की ज़मीं पैर ला दिया ..

मंजू “बस कर अभी सारे सपने देख डालेगी खाने खा ले वर्ण तेरे पापा उप्पेर आजायेंगे और ध्यान रखना सही टाइम आनेपर हम खुद मनु को तेरे लिए मन लेंगे बस तू उसे अपने प्यार का एहसास करती रहना पैर बेटी पनि लिमिट में भी रहना वरना तेरी माँ और बाप शयद पता नहीं क्या करें जमाना ख़राब है और दूसरी बात तुम दोनों अभी बहुत छोटे हो इन सब बातों के लिए पैर मैं भी एक माँ हूँ सो माँ होने के नाते तेरा दुःख भी बर्दाश्त नहीं है मुझे तेरे पापा को मुझपर छोड़ और मनु को तू संभल पैर लिमिट में ok “मंजू ने समजते हुए उसके सर पैर हाथ फेरते हुए कहा

निशा “समझ गयी मम्मी आपने जोकः है सब वैसे hi होगा अब आपका साथ मुझे मेरे मनु को मेरे और करीब ले आएगा मुझे आपने जो ख़ुशी आज दी है हु स्याद मेरी ज़िन्दगी की सबसे बड़ी हसरत thi..thanks मम्मी”

Manju”aaj से तू सिर्फ मेरी बेटी hi नहीं मेरी सहेली भी hai…toh जो दिल में हो खुद तक न रखकर अपनी माँ से शेयर करना ok डिअर “

दोने मम्मी आज से आप मेरी सबसे पक्की Saheli”Nisha ने कहा ..

इस बाद दोनों माँ बेटी का एक अलग hi बांड बना जो एक दोस्ती के नाम के साथ बहुत साड़ी जिम्मेदारी भी लाया था बेटी जिसे अपने प्यार को पाने की हसरत थी साथ में अपने परिवार की िज़ात को मेन्टेन करने की जिम्मेदारी थी ..एक माँ जिसे उसकी बेटी का प्यार उसे मिले और हु उसे सही गाइड करके सही रस्ते से भटकने से रोके दोनों की दोस्ती के आणखी जिम्मेदारी साथ लायी थी..

खैर दोनों माँ बेटी निचे गयी और आज ख़ुशी से आपने डिनर फिनिश किया …जिसके बाद मंजू ने अशोक के साथ एक प्यार भरा शिकारी खेल खेला हाँ यार चुदाई की ..जिसमे अशोक को आज मंजू ने गज़ब डोमिनाते किया जिसके अंत के बाद दोनों चैन से सो गए …

अगले दो दिन तक कुछ ख़ास नहीं हुआ बस निशा खुद को किसी तरह काबू करे हुए थी की मनु से कैसे अपने प्यार का इज़हार kare..per मनु चिंटू के और पुष्पी के चलते थोड़ा परेशान था ..जहाँ एक तरफ उसके चाचा और उसके ससुर ने उसके माँ बाप को जो चुना लगाया था जानते हुए भी कुछ नहीं कर पा रहा था क्युकी बात सिर्फ 50 हज़ार की हुई थी पैर जैचंद ने पुरे 70 हज़ार का राशन उठाया था मतलब शादी के साथ खुद के कई महीने का इंतज़ाम कर लिया था जैचंद ने ..और राजिंदर और सुमित्रा लग गए कोलुह के बेल्ल की तरह उसकी किश्ते भरने को जिसकी शादी होनी थी हुई और बहुत अचे से हुई जिसमे राजिंदर की पूरी फॅमिली गयी जहाँ मनु ने हर एक को अचे से नोट किया और अचे से सबके बर्ताव को अपने दिमाग में बिठा लिया क्युकी इसका माना था की इन संपूलो का ज़हर जाने बिना बिल में हाथ देना बेकार है …जहाँ उसे बहुत कुछ पता चला उनके बारे में जो आगे आपको भी पता चल जायेगा टाइम आनेपर.


वहीँ दूसरी तरफ मनु सिर्फ एक कड़ी ढूंढ़ना छह रहा था पुष्पी के नाम की इतने दिनों का नज़र और सयम काम आया जिसमे उसे अचानक कुछ ख़ास क्लू मिला … :हिंट:
 
अपडेट 51

बचपन की यादें

वहीँ दूसरी तरफ मनु सिर्फ एक कड़ी ढूंढ़ना छह रहा था पुष्पी के नाम की इतने दिनों का नज़र और सयम काम आया जिसमे उसे अचानक कुछ ख़ास क्लू मिला …

अब आगे......

मनु कई हफ्ते से पुष्पी पैर नज़र बाए हुए था ..क्युकी पुष्पी पैर शक करने की मनु की सबसे स्पेशल वजह थी की …क्युकी बेशक पुष्पी उसकी बहिन लगती थी …उसे भाई सामान मानती थी पैर थी तोह चिंटू की सगी बहिन क्या पता दोनों का कोई मिला जुला प्लान हो मनु के साथ कुछ करने का …या पुष्पी किसी ख़ास वजह के चलते मनु के करीब आयी ho..kyuki मनु के करीब आने में खुद पुष्पी की पहल हुई थी सो कहीं न कहीं मनु के दिल में एक अनजाने डर ने घर किया हुआ था …उसके दिल में हर रोज़ आवाज़ आती की नहीं मनु पुष्पी दीदी ऐसी नहीं हैं …पैर दिमाग कहीं न कहीं उसे सावधान कर रहा होता क्युकी उसने खुद के बाप को उसके भाई (मतलब मनु का बाप राजिंदर और उसका भाई जैचंद )को लूटते हुए देखा था …जहां उसे समझ आने लगा था की जहाँ लोग सेज को नहीं बक्से वहाँ पुष्पी का तोह उसके साथ सिर्फ प्यार का hi रिश्ता है …तोह अगर 1 % भी पुष्पी का दिल अपने खुद के सेज भाई चिंटू की साइड लेगा तोह मनु के साथ अजय और उसका परिवार साथ में प्रभावित hoga..kyuki पुष्पी उसके घर hi आती थी…

सो उसका शक करना भी गलत नहीं tha.per क्या पुष्पी सच में गलत थी ..या नहीं इसका पता तोह पुष्पी की सचाई जान्ने के बाद hi लग सकता tha..or जहां आजकल चिंटू कोई मौका नहीं छोड़ता था मनु को निचा दिखने का वहीँ मनु भी हर ज़हर और ज़िललत का घूंट भर कर चुप रहता था …क्युकी उसे पुष्पी का सुच जनन्ना था….

मनु हर रोज़ पुष्पी को गौर से देखता था उसके हाव भाव और उसके बर्ताव में चेंज ढूंढ़ने की कोशिश करता था कई हफ्ते बीतने तक उसे कुछ नया मिला नहीं पुष्पी में न hi कोई चेंज उसके बिहेवियर में मनु ने नोट किया …पैर अब कहीं न कहीं मनु ने उम्मीद छोड़ दी थी की शयद hi कुछ मिले …उसने कहीं न कहीं चिंटू को जितना सोचा था उससे ज्यादा चालक paya..use तोह लगने लगा था की शायद hi कभी हु चिंटू को कोई जवाब दे पाए …

पैर अचानक एक दिन मैं उसने पुष्पी में कुछ चेंज नोट किया उसने ध्यान दिया तोह पाया की पुष्पी आज कुछ दुल्ल सी है (और दिन के मुकाबले enactive)..usne ध्यान दिया तोह पाया पुष्पी आज अपने को नार्मल से ज्यादा कवर किये हुए hai..use कुछ शक hua..per उसने कुछ कहा नहीं …उसने चुप चाप अपनी पड़े ख़तम की और अजय की पड़े ख़तम होने का इंतज़ार करने लगा …क्युकी आज बाबा या भटनागर के पास जानने से ज्यादा पुष्पी के बारे में उसकी दिलचपी ज्यादा थी तोह हु वहीँ रहा …जिस पैर पुष्पी ने उसे पूछा भी “आज घर पैर hi है आज जाना नहीं है “

मनु “नहीं दीदी आज थोड़ा थकन ज्यादा है..”

जिसपर पुष्पी “क्या हुआ भाई सब ठीक तोह है या तेरे लिए काढ़ा बनाऊं “इसके साथ hi अपनी जगह से उठी और मनु के सर पैर हाथ रखकर देखने लगी…

मनु बड़ा हैरान था की पुष्पी को उसकी कितनी चिंता है …एक बार को तोह खुद उसके दिल ने उसे कोसा “आबे पागल जिसको तेरी इतनी फ़िक्र है उसी मस्सों पैर शक करता है दूप कर मर जा सेल “

दिमाग” साले चूतिये दिल टूट ओह अपना मुँह बंद hi रख शक करने में दिक्कत hi क्या है सिर्फ दिखने से तोह प्यार होता नहीं दिखने से अगर प्यार होता है तोह ले ी लव ु और मेरा पकड़ कर झूल जा सेल मुँह बंद कर यहां बात मनु की फॅमिली की है जहाँ चाचा मक्कार हो वहां यह तोह है कोण …जब बाप का भाई अपना नहीं तोह यह तोह उस चिंटू की सगी बहिन है दोनों एक hi फॅमिली से हैं यह मनु चुटिया कोनसा उसके घर रोज़ जाकर देखता है की हु चिंटू से बात करती है या nahi..kya पता दोनों का कोई प्लान हो???”

दिल “साले दुब मर जो लड़की इतने दिन से इस मनु को और उसके भाई को पढ़ा रही है एक दम से उसे चिंटू की बहिन बोलकर सारे रिश्ते तोड़ डोज …ठु है तुझपर साले कमीने दिमाग उसे कोनसा प्रॉफिट मिला आजतक इतनी मदद का..:”

दिमाग “देख साले चुप रह कोनसा प्रॉफिट चाहिए तुझे इस मनु ने दीदी कहा और उसकी लाइफ चेंज हो गयी अबे दोनों भाइयों को पड़ा कर टीचिंग लाइन का फ्री में एक्सपीरियंस ले रही है और तू चाहता क्या है साले दिमाग का काम दिमाग को करने दे और तू अपना काम कर ..अपनी जगह मत भूल तू निचे इस लिए है क्युकी तू बहक जाता है पैर मुझे अच् ाबुरा सब सोचना पड़ता है तोह साले बिना सोचे बिना देखे मैं यकीं नहीं करता चल बे मनु लग जा काम पैर वार्ना आज नहीं पता नहीं कब पैर चांस मिले..”

दिल “देख कह रहा हूँ साले पोजीशन पैर मत जा वर्ण ..”

Dimaag”yaar तेरी मेरी चलती रहेगी मनु को काम करने दे चल बे उठ और अजय के जाते hi लगजा काम पैर”

इतने में अजय की भी पड़े फिनिश हो गयी और हु अंदर रूम में चला गया ..जिसके बाद पुष्पी घर जाने के लिए उठी ..तोह मनु ने उसे बिठलिया ..और बोलै “आज दीदी को मैं अपने हाथ से कॉफ़ी पीलूँगा बनाकर ..”

पुष्पी को कॉफ़ी पसंद thi.so मान गयी मनु कॉफ़ी लाया और पिलाने लगा …पुष्पी खुद को बार बार पतले स्टाल (पतला सा शाल) से कवर किये जा रही थी जिससे उसे कॉफ़ी पिने में प्रॉब्लम हो रही थी तोह मनु ने अचानक से पुष्पी से हु स्टाल खींच लिया यह कहते हुए “दीदी पहले चैन से कॉफ़ी पि लो “उसके बाद उसने जो देखा उसका खून खुल गया देखकर …

पुष्पी के गले और उसके हाथों पैर मार के निशाँ थे जब मनु ने देखा तोह पुष्पी खुद को रोक न पायी और ज़ोर से रोने लगी ..क्युकी अजय एक रूम छोड़ का अगले रूम में तेज़ आवाज़ में टीवी देख रहा था सो उसे तोह कुछ सुनाई नहीं दिया पैर मनु ने जब पुष्पी पैर मार के निशाँ देखे तोह उसे बहुत गुस्सा आया क्युकी चाहे हु खुद को कुछ भी कहकर पुष्पी से अलग करे पैर पुष्पी की म्हणत और प्यार को तोह हु नज़र अंदाज़ नहीं करसकता tha..kyuki पुष्पी की म्हणत hi थी जिसके चलते हु 1सत आने लगा tha…toh उसे गुस्सा तोह आना hi था…

उसने गुस्से में पूछा “यह सब क्या है didi..ek सब्द झूठ मत कहना जिसे भी तुम दुनिआ में प्यार करती हो उसकी कसम सुच bolo…kiski ज़िन्दगी इतनी दुखी है जो मेरी बहिन पैर हाथ उठाया उसने ..”

पुष्पी “ भाई गुस्सा न हो चुप हो जा तूने कसम न दी होती तोह शायद न कहती इस दुनिआ में मुझे सबसे प्यारा तू है तू hi हु वजह है जिसके चलते मैं जिन्दा हूँ ..क्युकी तूने मुझे जीना सिख्या खुद की इज़्ज़त करनी सिखयी और आगे तेरे प्यार की हिम्मत के चलते मुझे कुछ करने की ज़रूरत नहीं है..”

मनु” दीदी मैंने कुछ पूछा है दीदी मैं जितना पूछ रहा हूँ उतना batado…vrna शायद गुस्से के मारे मैं कुछ कर न बेथुन..”

पुष्पी ने खींच कर रट हुए गुस्से मैं पागल मनु को अपनी गॉड में लिटा लिया क्युकी मनु गुस्से में पता नहीं क्या कर लेता उसका चेहरा देखकर पहली बार खुद पुष्पी को उससे बड़े होने के बावजूद डर लगा था …सो पुष्पी ने जो उस समय सही समझा किया उसने सोचा की थोड़ी देर मनु को गॉड में चैनसे लिटा ले बाद में आगे कुछ kahegi…manu मान नहीं रहा था तोह पुष्पी ने कहा अगर तू मेरी गॉड से उठा तोह मारा मुँह देखगे …मनु झक मर कर चुपचाप लेट गया उसकी गॉड में..

लड़कियां या औरत भी कितनी अजीब होती हैं न ???खुद कितना भी दर्द सेहलेति हैं .पैर जिसकी परवाह करती हैं तोह उसके लिए सब कुछ कर जाती हैं ,,औरत से संसार है …हर जगह औरत है ..इंसान के पैदा होने से लेकर मरने टाक ..जब इंसान पैदा होता है तोह पैदा करने वाली माँ औरत hai…hath पकड़ कर खाना खिलने वाली बहिन औरत है …जवान होने के बाद भी साथ रहने वाली गफ औरत है …शादी करके आपकी दुनिआ सवारने वाली बीवी औरत है ….कहाँ नहीं है औरत …उसके बाद भी औरत को लोग पीटते hain..maarte हैं भाई kyu…manta हूँ सब ऊँगली एक बर्बर नहीं होती मतलब सब औरतें अछि नहीं होती पैर 85% औरतें बिना वजह वायलेंस जेहलती hain…kya कसूर है उनका यही की उनको आपकी परवाह है …

गलती हो तोह अलग बात hai..per फिर भी मरना hi सब कुछ नहीं जब आखिरी रास्ता मारना हो तब भी एक बार सोचकर देखिये की जिस औरत पैर आप हाथ उठा रहे हैं उसका आपकी ज़िन्दगी में कोई योगदान है या क्या एहमियत है उसकी आपकी लाइफ me…ek बार बिना औरत के दुनिआ का सोचना ज़रा ….हाँ पता है पैर सोचकर देखो ज़रा क्या रह पाओगे एक दिन बिना माँ के बहिन या गफ या बीवी के …नहीं न तोह अगली बार गुस्सा आये तोह एक बार यह सोच लेना की आखिरी बार कब उसने तुम्हारे लिए कुछ ाचा किया था शायद गुस्सा काम हो जाए …..

जनता हूँ अडुल्टेरी सेक्शन में लिख रहा हूँ पैर भाई रियल लाइफ की कहानी है ..सो रियल लाइफ की बात न हो तो बेमानी होगा …और वैसे भी अगर इसे पढ़कर एक भी अपना मन बदलकर औरत को हवस की नज़र की बजाये अगर प्यार और सम्मान से देखेगा तोह शायद कोई एक तोह दुनिआ में ाचा बन जायेगा …पैर कोई और hi क्यों आप hi क्यों नहीं …

यार लड़की मैं सिर्फ छूट hi नहीं होती हु भी इंसान hai..uske सीने में भी दिल है ..उसका भी दिल है जिसमे तुम्हारे लिए प्यार है …एक बार उसे क़द्र से रखकर तोह देखो ..एक बार उसके दिल को चुकार आपने लिए प्यार जागकर तोह देखो ….यकीं मानो जो मज़ा प्यार करनेवाले पार्टनर के साथ आता है हु किसी और के साथ nahi…sex में प्यार करनेवाला पार्टनर खुद के साथ अपने पार्टनर के सटिस्फैक्शन का ज्यादा ध्यान रखता hai…jahan किसी और के साथ सेक्स करो मतलब चुदाई करो तोह यह देखना पड़ता है ..की पता नहीं हु सेफ है या नहीं कहीं उसे कोई बीमारी तोह नहीं और चुदाई करते हुए यह भी सोचते रहो की पता नहीं हु सटिस्फी है या नहीं क्या पता अगर अभी सटिस्फैक्शन नहीं हुआ तोह कहीं अगली बार आपको hi bye न केहड़े ..इतना सब सोचोगे तोह होगयी चुदाई..

खैर ज्ञान बहुत पेल दिया नाउ बैक तो स्टोरी …

मनु थोड़ा बेचैन हुआ पैर पुष्पी ने उसे अपनी गॉड में शांत कर दिया ..मनु ने फिर पूछा तोह पुष्पी ने कहा “ इस दुनिआ में मेरे खुद के घरवळून से ज्यादा मुझे तू पायरा है तेरी कसम खाकर कहती हूँ बस तुझे मेरी कसम है तू कुछ नहीं करेगा क्युकी मैं नहीं चाहती की तुझे कुछ हो…”

मनु “ठीक है दीदी आपने कसम देदी अब सब बताओ मैं ाकि कसम का मान रखूँगा “

पुष्पी एक लम्बी सांस लेकर” भाई तू जनता है लड़की होना कितना पाप है मेरी माँ किन ाज़ार में उस पैर मैं घर में किसी से बात नहीं करती और एक दिन चिंटू ने मुझे तेरे घर से निकले हुए देख लिया और अजय से उसने सब पता लगा लिया की मैं पीछे कई साल से तुझे और अजय को अपना भाई मानती हूँ उसने मुझे बहुत दरया धमकाया की मैं तुझसे न मिलूं तुझसे अलग रहूं पैर भाई मुझे तुझसे अलग करना मतलब मेरी सांस मुझसे अलग करना है मैं मर सकती हूँ पैर तुझे कभी धोखा नहीं दे सकती ..तोह उसने बड़ी होने के बावजूद मुझे मारना शुरू कर दिया मैं सब सेहती रही किसी से कुछ कहा नहीं ..पैर कुछ दिन से उसने मुझपर बेल्ट से मरना शुरू कर दिया है …कहता है अपना सागा भाई नहीं दीखता दूसरे को भाई कहती है ..आज भी बहुत मारा है उसने मुझे पैर मुझे इसका कोई गम नहीं मुझे सिर्फ और सिर्फ तेरी चिंता है मैं नहीं चाहती की तुझे मेरे चलते कोई भी दिक्कत हो इसलिए तुझे अपनी कसम देदी ”

मनु ने जब यह सुना की उसके चलते पुष्पी पैर कितने जुल्म हो रहे हैं और हु खुद पुष्पी पैर शक कर रहा था पैर पुष्पी सिर्फ और सिर्फ मनु के लिए हर जख्म हंसकर सेहती आए रही थी तोह उसे खुद पैर बड़ी शर्म आयी …उसकी आँखों से ानो निकलने लगे जिसपर पुष्पी ने उसे चुप करवाते हुए kaha”dekh भाई मेरी मार से ज्यादा तेरे यह ांसो मुझे ज्यादा तकलीफ देते हैं सो प्ल्ज़ चुप हो जा..”

मनु “मुझे माफ़ कार्डो दीदी आपकीतनी महँ हैं मेरे लिए कितना कुछ शी रही hain…or मैं पागल आप पैर hi शक कर रहा था ..मुझे माफ़ कार्डो दीदी उस चिंटू के चलते मैं भी आप पैर शक करने लगा था मुझे माफ़ कार्डो दीदी” अब तोह तीर निकल चूका था अपने कमान से …

पुष्पी “ चिंटू के चलते देख भाई तू कहना क्या चाहता है सुच बोल तुझे कसम है मेरी “

मनु भी अब टूट चूका था हर रोज़ की ज़िललत से और पुष्पी के दर्द से उसपर पुष्पी ने कसम और दे दी अब कुछ छुपाना पॉसिबल नहीं था मनु के लिए हु भी कब तक अकेले दर्द सेहत था तोह छोटा hi मुझबुर होकर उसने सब कुछ बताया चिंटू ने उसके खिलाफ क्या किया कैसे राजिंदर के नाम पैर साड़ी क्लास के सामने निचा दिखया और कैसे उसे जलील किया सब बता ता चला गया मनु …पुष्पी सब सुनती रही और जब मनु ने सब बताया तोह पुष्पी कुछ नहीं बोली कुछ देर तक …मनु चुप चाप दीदी का हाथ थामे एक बचे के जैसे बैठा tha..or इंतज़ार कर रहा था की दीदी कुछ बोलेन …

पुष्पी ने फिर कहना शुरू किया “देख भाई क्युकी मैं तुझे कसम दी है तोह तू कुछ नहीं कर सकता क्युकी मैं नहीं चाहती किट ु किसी की भी नज़र में बुरा बने और चिंटू को मैं खुद समझ लुंगी की उसने मेरे भाई कैसे इतना टार्चर किया …तू बस देखता जा और अब कोई बात नहीं ..चल एक बार अपनी दीदी को अपने सीने से लगा ले और हिम्मत रख तुझे आज फिर कह रही हूँ दुनिआ में तेरे साथ कोई दे य आना दे तेरी दीदी हमेशा तेरे साथ है तू अकेला नहीं है …आंसू पूछ टूट ओह मेरा शेर भाई है और आगे से जो भी हो मुझसे कुछ छुपाना नहीं ok ..”

मनु ने पुष्पी को गले लगया और चुप hogaya..iske बाद पुष्पी अपने घर चल दी ..आज पुष्पी के चेहरे पैर एक अलग सा भाव था जिसे समझना या समझाना मुश्किल था उसके चेहरे पैर कोई फैसला लेने जैसे कुछ भाव थे..

पुष्पी घर लौटी और अपने रूम में gayi…or रूम का दरवाज़ा बंद कर लिया दयाल वर्मा भी कुछ देर में आ गए क्युकी उनके ऑफिस से घर आने का टाइम था ..दयाल बाबू के आने कामतलब था की प्रसाद और चिंटू की उनसे पहले घर वापसी दोनों भाई पुरे दिन जहाँ भी रहें पैर दयाल बाबू के आने से पहले घर पैर मिलते थे वर्ण दयाल बाबू दोनों को अचे से तोड़ देते थे मतलब सुताई ..पिटाई जैसे समझो क्युकी माँ तोह हाथ उठती नहीं थी सो दिन भर दोनों अपनी दुनिआ में मस्त रहते थे पैर बाप के आने से पहले दोनों घर पैर मिलते थे .

खैर जैसे hi दयाल बाबू आकर बैठे थे की पुष्पी के रूम का दरवाज़ा खुला उसके हाथ में एक सूटकेस था हु दयाल बाबू के पास आयी और उनके पाँव चुकार बोली “पापा मुझे माफ़ कर देना मैं अब और नहीं सशक्ति अब और यहाँ रही तोह श्याद मर जाउंगी …”

दयाल बाबू का अपनी बेटी पुष्पी से बड़ा लगाव था क्युकी उसके उस नरक जैसे घर में जहाँ दो नालायक बेटे थे जो सिर्फ बाप के डर से इज़्ज़त करते थे याय उन कहलो बाप के पैसे की इज़्ज़त करते थे क्युकी आता जाता थान यही सालो को सो अपने बाप पैर hi निर्भर थे अपनी ज़रूरत के लिए सो मजबूर होकर बाप को लगाव दिखते थे वहीँ पुष्पी अपने माँ बाप की इज़्ज़त करनेवाली अछि पड़े करनेवाली और अचे संकरो वाली लड़की थी दोनों से बड़ी होने के बाद भी आज तक कभी बिना वजह घर से बहार नहीं निकलती थी ..तोह बाप का प्यार भी उसके लिए लाज़मी था …बाप के प्यार के चलते hi हु अपनी माँ के जुल्म या दोगला बर्ताव सहन कर लेती thi..per उसने आजतक अपनी माँ के किसी बात की अपने बाप से शिकायत नहीं की ..

जब पुष्पी ने यह कहा तोह दो चेहरे अपना रंग छोड़कर हवा में लटक गए the..ji हाँ हु दो चेहरे थे ललिता और चिंटू का क्युकी ललिता को डर था की कहीं उसके बारे न बोल दे कुछ पुष्पी आपने बाप से ..

चिंटू का भी यही हाल था उसने मारने पीटने से पहले नहीं सोचा था की पुष्पी लौट कर ऐसा कुछ कर भी सकती है उसने सोचा था दर्रा धमका कर रखेगा और उसे मनु से दूर कर देगा ताकि साला वापस पासिंग मार्क्स लाये …पैर पुष्पी ने जब अपने बाप के सामने यह सब किया तोह उसके पैरो के निचे से जमीन खिसक गयी थी क्युकी उसने सोचा तक नहीं था की पुष्पी ऐसा भी कुछ कर सकती है..

दयाल बाबू ने जब सुना की पुष्पी घर छोड़ कर जाना चाहती है तुरंत खड़े होकर पुष्पी के सर पैर हाथ फिरकर kaha”meri बची अपने बाप को छोड़कर चली जाएगी यहाँ तेरे बाप का क्या हाल होगा सोचा भी है तेरे बिना ..ठीक है तू बड़ी है समझदार है पैर अभी इतनी बड़ी नहीं की अकेली रेशके ..पैर एक बार तोह अपने बाप के बारे में सोच “”

पुष्पी सिद्ध आगे बढ़कर अपने बाप के सीने से लगकर रट हुए boli”papa मुझे मत रोको मैं शायद और न जी पौन यहाँ अब मेरा दम घुट ता है …मुझे जाने दो “

दयाल “पैर मेरी बची जाएगी कहाँ”

पुष्पी “पापा रोड पैर रह लुंगी पैर यहाँ नहीं”

दयाल “तू जाना चाहती है न तोह जा पैर तुझे मेरी कसम जाने से पहले सब बातकारी जा क्यों जा रही है ..”

दो लोगो के बस मुट्ठ निकलने वाला hi थे हाँ समझ गए न कोण..

पुष्पी “पापा आपने कसम दी है तोह बताना पड़ेगा हु……”

इससे पहले कुछ बोलपति पुष्पी ललिता “क्या बोलेगी यह होगा कोई नया ड्रामा”

चटाकक!!!! यह थपड पड़ा था ललिता के गाल पैर …दयाल के हाथ से “ख़बरदार किसी और की आवाज़ निकली बिच में तोह सेल को चीयर कर रख दूंगा भूल जाऊंगा की बीवी है बीटा सेल सब चुप खबरदार जो बाप बेटी के बिच में कोई बोलै तोह”

ललिता के मुँह की आवाज़ उसकेमुह में वापस चली गयी थी ..और चिंटू प्यारा अपने कच्चे में कुछ बाउंड बहा चूका था हाँ जनता हूँ ऐसे मैं ज़ोर से निकल जाता है पैर भाई कुछ देर पहले hi मुट्ठ कर आया था तोह जितना टंकी में बचा था उतना बहा दिया अपने कच्चे में हीहीही..

ललिता पैर शायद पहली बार हाथ उठाया था दयाल बाबू ने ..दयाल का हाथ बड़ी ज़ोर से पड़ा था ललिता के गाल पैर ..सो ललिता सदमे चली गयी थी और अपनी आखों में इतनी सी विनती लिए पुष्पी की तरफ देख रही थी की शायद उसके बारे में हु कुछ न बोले …

दयाल “बीटा तू बोल मैं जानना चाहता हूँ की जिस बेटी ने आज तक किसी चीज़ के लिए अपने बाप से ज़िद तक न की हो आज हु बेटी कैसे घर छोड़ कर जाना चाहती है क्या वजह है तेरे जाने की क्युकी कोई कुछ भी बोले पैर मुझे अचे से पता है की मेरी बेटी गलत नहीं हो सकती मैं बस वजह जानना चाहता हूँ..”

पुष्पी कुछ बोलती उससे पहले फिर एक बार ललिता ने आखिर कोशिश की पुष्पी को चुप करवाने की ..

ललिता “ पहले चाय पि लीजिए फिर बात कर लेना इसका क्या है कोई नया ड्रामा होगा …आप चैन से बेथ जाए जी”

इस बार दयाल कुछ बोलता उससे पहले पुष्पी बोल पड़ी शायद अब उसका सबर का पैमाना भर चला था..

“हाँ आपको तोह ड्रामा hi लगता है न पापा यह देखो मैं कितनी ड्रामेबाज़ हूँ देखो ..”पुष्पी ने अपने उप्पेर लपेटा हुआ स्टाल लगभग हवा में उदा दिया जो उड़कर गिरा चिंटू के मुँह पैर …दयाल ने जब पुष्पी के हथून और गले पैर बेल्ट की मार के निशाँ देखे तोह एक बार को उसका कलेजा भी मुँह को aagya..dyaal लगभग पुष्पी को अपने दोनों हाथों से खींच कर अपने पास बैठकर bola”yeh सब क्या है किसने इतनी बेदर्दी से मारा है मेरी बची को एक बार नाम बता मुझे साला ऐसा कोण सा मर्द है मैं भी तोह मिलूं उससे ज़रा उसे मैं भी तोह देखूं साला है कोण मुझे नाम बता ..”दयाल ने लगभग दहाड़ ते हुए कहा …

अपने बाप की दहाड़ सुनकर चिंटू की रही सही हवा भी निकल गयी thi…who धीरे धीरे सरकता हुआ वहां से निकले वाला था पैर शायद चिंटू की बुरी किस्मत कहो प्रसाद ने उसे देख लिया और खींच कर वहीँ वापस खड़ा कर दिया और

उसके कान में बोलै “ अबे अब कहाँ जा रहा है आज लगता पापा सही मूड मैं है देखा नहीं मम्मी को सेक दिया आज उस बन्दे की तोह आज गांड फटी समझ जिसने पुष्पी पैर हाथ उठाया है वैसे अपने बाप का हाथ है बड़ा सॉलिड देखा मम्मी के कान से दुआ भी निकल दिया और पूरी 5 की 5 चाप भी दी हैं ..लगता आज फ्री में कोई एक्शन मूवी देखने को मिलेगी ..तू भी देखना अब मज़ा आनेवाला है “

प्रसाद की बात सुनी और अपनी माँ का गाल देखकर उसका रहा सहा मुट्ठ भी निकल गया उसके कच्चे में फिर कहूंगा ाचा था की पहले मुट्ठ कर आया था हु वर्ण आज मुट्ठ मुट्ठ कर उसका हाल ख़राब हो जाता …उसकी गांड गाड़ी के हर सेकंड के साथ हिल रही थी की पता नहीं पुष्पी कब उसका नाम ले दे..

pushpi”papa कोई बहार का नहीं है इसी घर के और आपके लादले चिंटू ने मुझे बेल्टों से मारा है कहता की मनु से न मिलूं हु मुझे दीदी मंटा पैर इसके गंदे दिमाग में पता नहीं क्या क्या चलता है …एक तरफ यह है जिसने कभी मेरे जीने मरने की परवाह नहीं की वहीँ हु हैं जिसने मुझे दीदी दीदी कहकर हमेशा मेरी ख़ुशी का मान रखा ..खुद इसके फ़ैल होने पैर भी हु रात दिन इसको पड़ता रहा वर्ण क्या ज़रूरत थी उसे हु तोह पास हो hi गया था na…papa अगर आपके बाद मुझे किसी ने प्यार दिया है तोह हु है मनु …क्या एक भाई का बहिन से मिलना गलत hai…kya यह सहीह ै जो आजतक मुझे नाम से बुलाता है इतना छोटा होने के बाद भी …मनु ने आजतक दीदी के शिव मुझे कभी किसी और नामसे नहीं पुकारा है ..जहाँ मैं इनदोनो को राखी बांधती हूँ और उसे भी पैर इनदोनो के मेरे जीने मरने से कोई लेना देना नहीं पैर उसे मेरी ख़ुशी की कितनी परवाह है उसका सबूत यह है ..हाँ देखिये यह जो कपडे मैंने अभी पहन रखे हैं हु खुद की कमाई से उसने आपकी बेटी अपनी दीदी के लिए लिए the..(manu को कभी कभी बाबा के यहाँ से पैसे मिलते थे तोह हु सुमित्रा और अजय के साथ पुष्पी और राजिंदर के लिए भी कुछ न कुछ ले आया करता था ..)क्या अब भी लगता है हु गलत है या मैं गलत hun.usse न मिलूं मैं तोह चिंटू मुझे बेल्टों से मरता था और जब इसका मैं इतने से भी नहीं भरा तोह इसने मनु को स्कूल में टार्चर करना शुरू कर दिया हर रोज़ कितना जलील करता है यह उसे मुझे पता है या मनु को या खुद इसको.”

दयाल की आँखों से अंगारे निकलने लगे “साले मादरचोद इधर आ बहिन पैर हाथ उठता है ..गंदे िज़म लगता है …उस लड़के को गलत कहता है साले उसकी वजह से आज चैन से है तू वार्ना होता एक साल पीछे …साले क्या कुछ नहीं किया उसने तेरे लिए अबे साले दुब मर तेरी जगह हु तेरी बहिन के साथ भाई की तरह खड़ा है और तू उसे निचा दिखा रहा …कभी अपने बाप को या अपनी माँ को कुछ लाया है 2 रूपए का भी कमाकर साले पैसा कैसे कमाया जाता साले हरामखोर हमारे दिल से पूछ साले गांड फटकार हाथ में आजाती है कभी कमाया हो तोह पता चले की खुद की कमाई किसी और पैर खर्च करना क्या होता hai..saale तेरी बहिन को उसने कपडे दिलये इससे भी तेरे गंदे दिमाग में नहीं आया की कितना प्यार करता होगा हु उससे साले कभी तूने राखी पैर खुद की कमाई से दिया उससे साले पालते हो मेरे पैसे पैर और मेरी hi लाड़ली बेटी पैर हाथ उठाते हो आज मादरचोद मैं बता ता हूँ कैसे बेल्ट का सही इस्तेमाल होता है …ोये प्रसाद तू गेट बंद कर zara…”dyaal ने लगभग मन की साड़ी भादस निकल दी थी और चीखकर प्रसाद को आर्डर दिया था …प्रसाद को अचे से पता था अगर इस समय कुछ भी बोलै तोह चिंटू के साथ खुद भी लपेटे में आ जायेगा ..सो गांड से निकले हवा की राफ्तेर से उसने गेट बंद किया …

दयाल ने अपनी गार्ड की हु जैसी पुलिस की बेल्ट होती है न वैसे छोड़ी बेल्ट उतारी और प्रसाद की तरफ देखकर "हाथ पकड़ साले के ..अगर इसके हाथ हिले तोह यह सोच ले तू इसकी जगह आज धुल जैसा बजेगा ..

ललिता के आंसूं निकल आये थे जब उसने अपनी बेटी के साथ चिंटू की हरकत सुनी तोह ..बेशक उसका बीटा प्रेम था जिसमे हु लड़की को इग्नोर करती थी पैर फिर भी खुद की बड़ी बेटी को अपने छोटे बेटे से पीटने की बात सुनकर उसे बहुत बुरा लगा था ..और जब उसने मनु का सुना की कैसे हु पुष्पी को अचे से रखता है सुना तोह उसके दिल को बड़ा सुकून मिला हर औरत कहीं न कहीं तन को ढकनेवाले को पसंद करती hain..are भाई मतलब यह की पुष्पी ने जब बताया की कपडे तक मनु दिलवाता है पुष्पी को ..तोह बेटी को सामान देनेवाला किसे बुरा लगेगा भला ..कहीं न कहीं आज ललिता और दयाल के मैं में भी मनु ने वहाँ दोनों के सामने न होकर भी एक जगह बना ली थी..

खैर दयाल बाबू “हां तोह हरामखोर बहिन पैर हाथ उठेगा न आज उठा अभी उठा..”

पुष्पी को लेकर ललिता अंदर जाने को hui..toh दयाल chillakar”oye चुपचाप बैठकर तमाशा देख सब तेरा किया धरा है बहार बेल्ल की तरह इस लिए कमाता हूँ की बचूं को तू देख सके पैर इसने आज अपनी बड़ी बहिन पैर हाथ उठाकर साबित कर दिया की कितनी अछि परवरिश दी है इस हरामखोर को तूने तोह अब अपने लादले की चीखे सुनती जा और आगे से याद रखना की इसकी हरहरामखोरी की सजा तुझे भी milegi..pehle तू इसकी चीखें सुनेगी उसके बाद यह तेरी..”

इस पैर प्रसाद जो चिंटू के हाथ पकड़ कर उसे जमीन पैर लिट्ये हुआ था उसकी हंसी निकल गयी की मम्मी और भाई दोनों की सुताई होगी मतलब डबल entertainment..mujhe से उसके यही निकल भी गया दयाल जो बेल्ट हाथ में गम्मा रहा था एक बेल्ट उसी में रसीद करके bola…”makkar साले तू टेंशन न ले माँ और भाई के साथ तुझे भी प्रसाद मिलेगा …तेरा नाम प्रसाद सिर्फ ऐसे hi नहीं रखा मैं”

“आयी पापा सॉरी” प्रसाद ..

दयाल “ चल लग जा काम पैर वार्ना तुझसे शुरुवात होगी “ प्रसाद ने पकड़ा और होगयी सुताई..

चटकककक !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

चटकककक!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

चटकककक!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

चटकककक!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

“आयी पापा गलती होगयी मुझे माफ़ कार्डो ..आगे से गलती नहीं होगी…” चिंटू

चटकककक!!

चटकककक!!!!!!!!!!!!!!!

“नहीं बीटा गलती तोह मुझसे हुई एक बीटा hi काफी था नाम डूबने को मैंने तोह दो नलयाल पैदा कर दिए …यह साझा तेरे अकेले की नहीं मेरे लिए भी सालो तुम दोनों सजा ho..”dyaal

“नहीं पापा आगे से नहीं होगा पुष्पी जो चाहे करे मैं कभी नहीं कहूंगा चटकककक आआ पापा मुझे माफ़ कार्डो प्रसाद छोड़ दे मुझे वार्ना “”चिंटू ने अब प्रसाद को धमकन शुरू कर दिया था ..

“वर्नाक्य बीटा मैं भी तोह सुनु ज़रा चटकककक चटकककक” दयाल ने आज अचे से सुताई कर दी थी चिंटू को आज दयाल ने अचे से लिटा कर फिर बिठाकर पैर से लिटाकर अचे से धोया जिस पैर आज उसकी माँ को पुष्पी से ज्यादा हमदर्दी थी ..प्रसाद कोई साला किसी से कोई लेना देना था नहीं हु अपनी दुनिआ में मस्त था हु पुष्पी की बेशक इज़्ज़त करता हो न करता हो पैर बतमीज़ी उसकी आदत नहीं थी …पैर कहीं न कहीं उसे बड़ा दुःख भी हुआ था की चिंटू ने पुष्पी पैर हाथ उठाया tha..aajtak उसने भी घर वालो का कभी नहीं सोचा था पैर कहीं न उसे अब मनु के बारे में सुनकर अपनी जिम्मेवारी का एहसास हो रहा था ..की कैसे उनकी सगी बहिन उनके होते हुए भी किसी दूसरे को अपना भाई बना चुकी थी .पैर उसने सोचा यार भाई बांया है तोह प्रॉब्लम hi क्या है कमसे काम कोई बर्फ तोह नहीं बनाया …कह रहा हूँ न मस्त आदमी है यह इसकी अपनी दुनिआ है ..

खैर दयाल ने चिंटू आज अचे से बहिन की इज़्ज़त कैसे की जाती है समझा दिया था 1 ½ (ओने ंद हाफ hours)gante धुल की तरह बाज़ा कर आप सोचोगे इतना कैसे बजाय तोह भाई जब थक जाता तोह थोड़ा सांस लेता फिर से लग जाता सुताई पैर चिंटू की …आज चिंटू के सारे हाल और सुर चेंज हो गए the..pit पिट कर ढीला हो गया था दयाल और प्रसाद भी पसीने पसीने हो चुके थे..

दयाल का रुख अब बेल्ट लिए ललिता की तरफ tha..”haan तो हाब तेरा नंबर hai..ab परवरिश तेरी है तोह इनाम तोह मिलेगा hi …तोह चल हो जा रेडी तुझे एक पल शर्म नहीं आयी की आदमी कामकामा कर पागल हो रहा कितनी बार तुझे कहा था की बहार की जिमेवारी मेरी पैर घर तेरे हाथ में है पैर तूने क्या kiya…yeh जो घटिया हरकत इस हरामजादे ने की है उसके लिए तोह तुझे सजा मिलकर rahegi..”dyaal गुस्से से अभी भी भरा था..

ललिता अपने दोनों हाथ जोड़कर उसके सामने बेथ गयी “ सुनिए जी आपको जितना मरना है मार्लो पैर उपपरवाले के नाम पैर कुछ न कहो मैं अचे से समझ गयी हूँ की मेरी बेटी ने क्या सहा है खुद के भाई से पीटना क्या होता मैं अचे से जानती हूँ मेरे खुद के भाई मुझे पिता करते थे ..पैर अब जब तक मैं जिन्दा हूँ मेरी बची के साथ हु सब नहीं होगा जी ..आपको जितना मरना है मारो मुझे आगे से यह नहीं होगा ..”

दयाल कुछ कहता इससे पहले pushpi”papa आपको मेरी कसम अब मम्मी को बक्श दो प्ल्ज़”

दयाल गुस्से से ललिता को “ सरम कर देख ले जिसपर इतना कुछ बिता हु अब भी तेरे साथ है ..यह मत सोच में कुछ नहीं जनता अचे से जनता हूँ किट ु बेटे के प्यार में कितनी अंधी है तब मैं सिर्फ इसलिए चुप था क्युकी उस समय मैं अकेला कमानेवाला और खर्चा करने वाले 6 सो मैं तेरे मामले में कभी बोलै नहीं क्युकी बिंद्या की बात और थी हु पड़ना hi नहीं चाहती थी पैर पुष्पी को पड़ने के शिव और कुछ आता नहीं है …सो आगे से कण्ट्रोल कर खुद को या मैं करूँगा तोह तुझे बड़ा भरी padega..ab सामने से दफा होजा “

दयाल ने आज ललिता को दुत्कार दिया ललिता ने रट हुए पुष्पी को गले लगाकर उसे चुकार कहा “बस बेटी अब तेरी माँ तेरे साथ है तुझे जो करना है कर तेरा हु भाई मनु है न अगर तुझे उसके घर जाना जो तोह मुझे बातकारी चली जाना …जब हु आइयेगा घर तोह मैं खुद उससे माफ़ी मांग लुंगी की कैसे कमीने कप्पोत को जाना है मैं जो न बहिन की क़द्र करना जनता है न दोस्ती का मान रखना जनता “ललिता ने धिक्कारने वाली नज़र से ज़मीं पैर पड़े चिंटू को देखकर कहा..

चिंटू अभी भी ज़मीं पैर पड़ा था दयाल ने बेल्ट से सिर्फ उसका सर और चेहरा छोड़ा था और सिर्फ खोनी से उप्पेर के हाथ बचे थे क्युकी हु प्रसाद के हाथ में थे ..बाकी हर हिस्से पैर कलर बदल गया था कई जगह से उसकी चामिड़ चील गयी थी हाल बुरा था उसका ..

दयाल “मेरी प्यारी बची जब तेरा मैं करे अपने उस भाई के पास जा सकती है …मुझे तुझे पे पूरा भरोसा है ..बस बीटा जब जाये तोह बता कर जाना वार्ना चिंता होगी और आगे से घर छोड़ने की बात कभी न करना वर्ण तेरा बाप वहीँ मर जायेगा ..”

उसके बाद थोड़ा माँ बाप का रोना हुआ प्रसाद अपने टीवी में मस्त हो गया ..और बचा चिंटू कोई घाटे भर वहीँ ज़मीं पैर पड़ा रहा फिर हिम्मत करके उठा अंदर गया …और सो गया दर्द में दर्द की गोली लेकर ..खैर पुष्पी क ीक कदम से आज उसके घर में चिंटू को उसके बाप ने उसकी औकात दिखा दी थी ..और जहाँ पुष्पी को अब मनु के पास जाने के लिए किसी के छुपकर जाने की ज़रूरत नहीं थीं ा hi चिंटू से ब्लैकमेल होकर पीटने की ज़रूरत थी अब हु जब चाहे मनु के पास आजा सकती थी इनसब में ललिता और पुष्पी की दूरियां भी मिट गयी thi..or इसी के साथ आज का दिन बड़े धमाके के साथ ख़तम हुआ ..

हाँ भाई चिंटू का धमाका ..जो अभी दयाल ने मस्त ट्रीटमेंट दिया धमाके दार नहीं लगा आपको..

खैर अगले दिन चिंटू अपने दर्द में रहा और मनु स्कूल में हैरान होता रहा की चिंटू क्यों नहीं आया जिसका जवाब उसके मिला पुष्पी की जादू भरी मुस्कुरहट के साथ ..जिसके बाद पुष्पी ने उसे बताया की चिंटू को कल क्या ट्रीटमेंट मिला है और कल कैसे ललिता की सोच भी पुष्पी के लिए बदल गयी ..और उसे यह भी बताया की कैसे उसके माँ बाप मनु को चाहते हैं और उसपर विशवास करते hain..or अब हु बिना किसी प्रॉब्लम के जब चाहे मनु के घर आ सकती hain..jisper मनु ने अपनी ख़ुशी का इज़हार उसके गले लगकर किया …और टाइम के बाद पुष्पी अपने घर चली गयी और दिन का एन्ड हुआ..

इनदोनो का प्यार और गदा हो गया tha..aajka एक दिन और ख़तम हुआ

अगले दिन चिंटू आया था पैर उसके तेवर नहीं बदले थे जब पहला पीरियड ओवर हुआ तोह हु अपनी सीट से उठकर मनु के पास गया और बोलै ..”साले चूतिये जितना उड़ना है उड़ ले एक बाज़ी जीता है तू अभी तोह पूरा गेम पड़ा है …खुश होना है तोह हो जा तूने मेरी बहिन चीनी है न मुझसे मेरी माँ तेरा नाम मुझसे ज्यादा लेती है मेरा बाप रात दिन तेरे नाम की माला जाप्ता hai..per मैं चिंटू hun…na कोई मुझे मेरे रस्ते से हटा सकता है न झुका सकता hai…abhi मौज़ ले और मेरे अगले वॉर के बारे में सोच क्युकी अब तेरे दिल पैर वार होगा त्यार हो जा रोने के liye…haan जनता हंट ु मर जायेगा सोच सोच कर्त ओह सुन डाव पैर अब है निशा ….!!”

मनु के दिमाग ने जब निशा का नाम सुना तोह किसी बड़ी अनहोनी की आशंका से टेंशन में आ गया …उसके दिल और दिमाग में अजीब ख्याल आने लगे की चिंटू क्या करेगा निशा के साथ..

चिंटू उसे परेशान देखा कर शैतानी हंसकर स्टाइल से बोलै..

“लूट लूंगा तेरा सब तुझसे ..रेहम नहीं करूँगा ज़रा भी ..

नाम है चिंटू मेरा दुनिआ में यही है मेरी खराबी..”

चिंटू अपने रस्ते और मनु सोच में चिंटू क्या करेगा निशा के साथ ???यह सवाल छोड़ गया मनु के जेहन में..


अब इसका जवाब तोह आनेवाला टाइम या निशा की किस्मत hi बता सकती है …:हिंट:
 
अपडेट 52


बचपन की यादें

चिंटू अपने रस्ते और मनु सोच में चिंटू क्या करेगा निशा के साथ ???यह सवाल छोड़ गया मनु के जेहन में..

अब इसका जवाब तोह आनेवाला टाइम या निशा की किस्मत hi बता सकती है …

अब आगे......

“अब क्या होगा निशा का ???”

“क्या होगा निशा के साथ ???”

“क्या चिंटू उसे कोई न कोई प्रॉब्लम में लेकर आएगा ???”

क्या निशा उसकी बातों का भरोसा करेगी ??”

“नहीं निशा मेरी बहुत अछि दोस्त है मैं उसको कुछ नहीं होने दूंगा …अब और बचा hi कोण है दोस्ती के नाम पैर मेरे पास…” इन सब सवालों ने मनु के दिमाग का सुकून और चैन चीन रखा था .

जहाँ एक तरफ उसे ख़ुशी थी की पुष्पी अब चिंटू के दुबारा किसी चक्कर मैं नहीं फासनेवाली और अब उसके घर पैर उसकी सही से केयर हो सकेगी …और साथ hi पुष्पी से अब चिंटू कहीं न कहीं उलझनेवाला नहीं है काम से काम सिद्ध तोह nahi…per

“ निशा का क्या चिंटू ने कहा है की निशा को मुझसे अलग कर देगा …और अगर निशा को उसने कुछ किया तोह नहीं निशा को हाथ लगाने से पहले हु हज़ार बार सोचेगा फिर यह चिंटू करने क्या वाला है???”

मनु जितना सोचता उतना hi उलझता जाता ..पैर उसके सोचने पैर भी कोई हल न निकलता …क्युकी चिंटू क्या करनेवाला था यह तोह सिर्फ और सिर्फ चिंटू hi जनता है..

मनु अब निशा को बचने का मैं बना चूका था ..पैर क्या सिर्फ मैं बनाना hi काफी होता है …???

खैर मनु ने अब चिंटू की हर हरकत को बर्की से देखना शुरू कर दिया …पैर चिंटू तोह चिंटू hi था …जहाँ उसे दयाल से पीटने के बाद उसकी नफरत मनु के लिए घरी और ज्यादा घरी हो चली थी …इतना पीटने के बाद कोई नार्मल इंसान हो तोह अपने मैं और गांड दोनों को काबू में कर ले पैर चिंटू प्यारा हाँ भाई चिंटू प्यारा बड़ा ढीठ था ..इतने के बाद भी नहीं मन …और अब उसका टारगेट थी निशा साला करने की क्या सोचता है …है झांट भर का पैर साले का दिमाग मन्ना पड़ेगा कितना शैतानी है …

खैर मनु पूरा जासूस बन चूका था क्योकि उसने अब चिंटू की हरहकट पैर पेनी नज़र बना ली थी …इसमें उसका साथ दिया पुष्पी ने भी क्युकी पुष्पी ने वडा लिया था न उससे की सब बताएगा …और एक वजह और भी थी स्कूल में तोह चिंटू पैर नज़र रखना आसान था मनु के लिए पैर घर पैर कोण रक्त सो इसमें उसने पुष्पी का सहारा लिया दोनों बनगए पुरे जासूस चिंटू के ..पैर

चिंटू तेरा चिंटू उसके बर्ताव से लगता hi नहीं था की शायद कुछ करेगा निशा को पैर मनु के पुरे होश उड़े हुए थे ..निशा के मटर में हु कोई भी चांस नहीं लेना चाहता था ..

उधर निशा की दीवानगी भी अब सर चढ़कर बोलने लगी थी हर रोज़ अपनी माँ मंजू से मनु के टॉपिक पैर घंटों बात करती “ मम्मी मनु यह ……मम्मी मनु who……..mummy जब मैं बड़ी हो जाउंगी तोह मनु के काढ़े तक पूछूँगी या उसके कान tak…mummy मेरे मनु पैर वाइट कलर ाचा लगता है पैर मैं एक बार उसे स्काई ब्लू कलर के शर्ट में देखना चाहती हूँ?? मंजू भी एक ची माँ की तरह उसके साथ उसके हर टॉपिक पैर अपनी राइ रखती थी …उसे अपनी बेटी की दीवानगी पैर एक तरफ ख़ुशी थी की चलो मनु के चक्कर में अब उसकी बेटी उसकी सबसे पक्की सहेली है …उसके पास ज्यादा टाइम स्पेंड करती है …और उसके और ज्यादा करीब हो चली है ..पैर कहीं न कहीं उसे निशा की दीवानगी पैर डर भी लगता था “की पता नहीं अगर मनु ने उसे मन कर दिया की उसे निशा से प्यार नहीं है या अपने गरीब होने के चलते उसकी बेटी से दुरी बना ली तोह निशा टूटकर भिखर जाएगी तब निशा को कैसे सभालूँगी मैं …???”

यह सवाल उसके दिमाग में उसकी भी टेंशन बना देते थे क्युकी हु भी अब कहीं न कहीं निशा की ख़ुशी चाहती थी ..पैर साथ में हु मनु को भी अचे से जानती थी की मनु अपने गरीबी और निशा के आमिर होने के चलते एक बार को निशा से दुरी बना सकता है …क्युकी मंजू ने मनु की आँखों में वही खुद्दारी देखि थी जो अशोक की आँखों में हुआ करती thi..jahan निशा और उसकी फॅमिली का क्लियर था की मनु एक बार हाँ करे तोह निशा उसकी ज़िन्दगी में शामिल हो जाएगी पैर मनु का न उसकी फॅमिली का कुछ पता था की उनका डिसिशन क्या होगा …पैर मंजू खुद को यह कहकर समझा लिया करती थी की आमिर लोगो से दुनिआ रिश्ते जोड़ती है …पैर अगर मनु के माँ बाप ने खुद की गरीबी देखकर निशा के रिश्ते को मन कर दिया तोह ???

फिर हु खुद को अशोक की हु बात याद करके समझा लेती “जो लड़का अभी इतना टैलेंटेड है आगे क्या नहीं कर सकता …”अशोक की यह बात उसके दिमाग में आती तोह दुआ करती “ख़ास जो भी हो उनकी बेटी को उसका प्यार मिल जाये “??

अब आगे क्या होगा यह तोह दोनों की किस्मत …पैर यहाँ एक बात माननी होगी जहाँ दुनिआ मैं सेंकडो लोगो के प्यार मैं खुद उनके माँ बाप ुचे और निचे जाट बारादरी धरम और मज़हब ुचा निचा देखकर बच्चों के प्यार को सूली पैर लटका दिया करते थे वहीँ ..यहाँ तोह खुद निशा की माँ अपनी बेटी के प्यार की दुआएं माँगा करती thi..ahsok भी कहीं न कहीं इस प्यार के सपोर्ट में hi था ..क्युकी खुद अशोक और मंजू की लव मैरिज थी तोह दोनों hi प्यार की एहमियत को बखूबी समझते थे ….पैर हर माँ बाप की तरह उनकी फिक्र भी जायज़ थी की प्यार अपनी जगह और लिमिट अपनी जगह है …

खैर मनु और पुष्पी पिछले 2 हफ्ते से चिंटू पैर बर्बर नज़र रख रहे थे ..पैर कुछ भी हाथ नहीं लगरहा था …

पुष्पी “भाई तुझे लगता है चिंटू कुछ करेगा ???”

मनु “दीदी मैं खुद यही दुआ करता हूँ किना करे ..पैर क्या मेरे और आपके हाथ में कुछ है नहीं न ??”

Pushpi”per ऐसा कर क्या सकता है हु की निशा तुझसे दोस्ती तोड़ de..tu खुद सोचकर देख न???”

मनु “पता नहीं दीदी मैंने तोह आजतक चिंटू का ब्यूरेन यही सोचा पैर पता नहीं उसे प्रॉब्लम क्या है मुझसे??”

पुष्पी “ तोह तुझे सुच में नहीं पता ..???”

मनु ने ना में सर हिलाते हुए कहा …

पुष्पी ...”अब तू मुझसे झूठ भी बोलने लगा लोग भले hi तेरे बातों में आजाते हों पैर मेरे भाई तेरी यह बहिन तेरी आँखें पड़ती hai…such बोल जाती वार्ना लगूंगी >>” पुष्पी ने झूठा गुस्सा दिखते हुए कहा …

मनु “ दीदी अब आपसे क्या छुपाना चिंटू आज से नहीं बहुत पहले से मुझे निचा दिखने में लगा हुआ है ,पहले मेरे साथ के दोस्तोव को बड़कया उसके बाद आगे का आपको पता hi है…”

पुष्पी “ हाँ जानती हूँ उसे भी और तुझे भी की हु तुझे दबाता रहेगा और तू दोस्ती के नाम पैर दबता रहेगा ..हैं न ..???”पुष्पी जैसे कुछ ढूंढ रही थी मनु के भीतर ..

मनु “ नहीं दीदी इसके बाद भी दोस्ती के नाम पैर मैं नहीं दबसाक्ता hun..per दबने की एक वजह है ..और प्ल्ज़ पूछना मत वार्ना आपको न मैं कह सकूंगा न आप सुन सकोगी..”

पुष्पी “ मुझसे सब जानना है चाहे ाचा हो य ाबुरा और कोई बहाना नहीं ..वार्ना “

मनु “ok दीदी आजकल आपके इस वार्ना से बड़ा डर लगता है जब देखो कान गरम हो जाते hain…acha बाबा तोह सुनो ……दीदी उससे दबने या उसे जवाब न देने की वजह आप हैं …क्युकी मैं नहीं चाहता की उसके और मेरे बिच की दुरी का असर मेरी दीदी और मेरे बिच में ho…so उसे जवाब दे नहीं पता …”

पुष्पी “ तुझे मेरे चलते किसी की आगे झुकने की ज़रूरत नहीं hai…kyuki दुनिआ की कोई भी ताकत तेरे और मेरे बिच में नहीं आ सकती ..आगे से जो कुछ भी हो मुँह तोड़ जवाब देना ok …”

मनु “ ok दीदी”

पुष्पी “ ाचा सुन तूने जो क्लास में हुआ था निशा को बताया ???”

मनु “ दीदी उस बात का यहाँ उससे क्या लेना देना निशा से भला .???”

पुष्पी ने ज़ोर से मनु सर पैर एक तपली maari(chanta/slap type)or मनु अपना सर सहलाने लगा …

पुष्पी “ पागल इंसान कैसे नहीं है क्या पता उसका यही प्लान हो तेरे बारे में की निशा को अंकल के बारे में उल्टा सिद्ध बोलकर तेरे बारे में उसके दिल में तेरे लिए नफरत भर दे और निशा को तुझसे दूर करदे …सोच कर देख दुफर ..???”

मनु “ पहले तोह दीदी आप मरना थोड़ा काम करो आजकल आपके हाथों की पावर मेरे उप्पेर कुछ ज्यादा hi निकल जाती है …..और हाँ आपने सही कहा ऐसा तोह मैंने सोचा hi नहीं …यह भी हो सकता hai…ab ??”

पुष्पी “अब क्या “??

मनु “ अब क्या करूँ??”

पुष्पी “ अरे दुफर निशा को अपने ट्रस्ट में ले और उसे पहले hi बता दे की चिंटू क्या कह सकता है जब हु अपना दिमाग चला रहा है तोह तुझे किसने रोका hai…chal लगजा काम पैर ”

मनु “ यह सही कहा उसे ट्रस्ट में लेना hi होगा वार्ना मुझसे पहले चिंटू ने कुछ भी कहा तोह हु मेरी बातों पैर यकीं नहीं karegi…thanks दीदी अब यही करूँगा पहले …”

फिर दोनों अपने अपने घर चल दिए …

अगले दिन स्कूल में मनु ने निशा से लंच में किसी और रूम में आने को कहा …क्युकी भले hi चिंटू से मनु का क्लैश था पैर निशा के सामने चिंटू मनु का सिर्फ और सिर्फ आम दोस्त hi था …और जब तक निशा स्कूल में रहती thi..tab तक कोई भी लड़का या लड़की मनु को कुछ नहीं कहता था अब यह चिंटू कैसे मैनेज करता था चिंटू hi जाने ..पैर जिस दिन निशा नहीं आती थी ..उस दिन सारे मिलकर आपने रमैनिंग डेज की कसार निकल लिया करते थे मनु को ज़लील करने की …

खैर निशा ने जब कहा “आज अलग रूम क्यों..??”

मनु “ क्युकी कोई ख़ास बात करनी है तुमसे जो चिंटू सामने रहेगा तोह नहीं हो पाएगी…”

निशा का दिल मचल गया उसने सोचा लगता है जो प्यार की आग उसके दिल में है वही मनु के दिल में भी है …शायद मनु आज उसे पर्पस कर देगा …

निशा मन में “ आज अगर मेरे मनु ने मुझे पर्पस किया तोह क्या होगा …क्या कहूँगी main…kaise कहूँगी मैं उससे की

“दिल की बात दिल तक पूछे यह अरमान hi काफी है..

प्यार है सिर्फ इतना केहदो, मेरे साजन तुम्हारा यह अहसान hi काफी है..”



"है एक बार कहकर तोह देखो मेरे साजन तुम्हारी यह दीवानी क्या कर जाएगी..

प्यार है तुमको मुझे से सिर्फ इतना केहदो वर्ण यह पागल गम में hi मर जाएगी.."

Nisha……nisha …..निशा …मनु निशा को पुकार रहा था पैर निशा अपने मैं में पता नहीं क्या क्या सोच रही thi..usne तोह खुली आँखों से हु हसीं पल महसूस करने भी शुरू कर दिए थे …की मनु उसे कहेगा ी लव ु निशा …है उस समय थोड़े नखरे दिखूंगी …मनु से थोड़ा और अपनी बात मानवाउंगी …फिर तब जाकर हाँ कहूँगी …

नहीं नहीं कहीं उसने अपना इरादा बदल दिया तोह ..तोह मेरा क्या होगा ..और वैसे भी उसपर मरनेवाली यहाँ काम नहीं हैं कहीं मैं कोई नक्र किया और हु बुरा मान गया तोह न बाबा न मुझे कोई चांस नहीं लेना ..वह कहेगा और तुरंत hi हाँ कर दूंगी ..मुझे भी अपने प्यार को पाने का पूरा हक़ है..”

(अब निशा को क्या पता जिनके बारे में वोह सोच रही है हु भी अब मनु के खिलाफ चिंटू के साथ मनु को ज़लील करने का कोई मौका नहीं छोड़ती hai..kal तक जो निशा के सामने मनु की अच्छी की तारीफें किया करती थी आज वही मनु को देखकर मुँह बना लेती thi…jaise मनु कोई बदबूदार चीज़ ho…kaise लोग होते हैं यहाँ जहाँ कलतक कोई इंसान ाचा लगता है हीरो की तरह पैर बाप का काम का सुनकर सभी उसे निचा दिखाने में लगे थे अरे भाई उसके बाप के काम से उसका क्या लेना देना हु कल भी मनु था आज भी मनु hai..woh कल भी वही इंसान था आज भी वही इंसान है …फरक मनु में nahi..tha देखने वाले की नियत में फर्क था ..आज भी मनु वैसा hi था अगर कोई उससे मदद मांगता तोह हु करता मदद उसकी पैर अब उन्सब्कि बेरुखी के चलते मनु ने भी उनसभी से दुरी बना ली थी..)

खैर निशा ने भी मैं बन आलिया था की मनु बस एक बार कहे और हु उसकी हो जाए आनेवाली पूरी ज़िन्दगी के लिए …

“निशा ……..निशा …….निशा कहाँ खोयी हुई ho…tumhari तबियत तोह ठीक है ???” मनु ने बेचैनी के साथ उसके माथे पैर हाथ रखकर पूछा ..

निशा उसके हाथ रखते hi अपने में सिमट चली थी …नज़ारे चूका कर बोली ..”नहीं ठीक हूँ बस ऐसे कुछ सोच रही थी..”

मनु “ तुम पका ठीक हो न ..??”

निशा हाँ में सर हिलाकर . कहती hai..”bilkul ठीक हूँ..”

मनु “ थैंक गॉड मैं घबरा hi गया था …की पता नहीं तुम्हे हुआ क्या hai..acha लंच में याद से अलग रूम में आजाना ाचा चलता हूँ अपना ख्याल रखना ok …???”

निशा हाँ में सर हिलती है और मैं में कहती है…

“है

“उनके एक इशारे से उड़जाति हैं होश हमारे, पास होने से दिल अपना नहीं rehta,or उनकी ऐडा का क्या कहना ..

न आँखों में नींद है दिल को करार है.. मेरा लुटेरा फिर भी कहता बेदर्दी से मुझे अपना ख्याल रखना..”

खैर लंच का टाइम हुआ और निशा और मनु अपने बातये हुए रूम में पहुंचे ..वहां कोई और नहीं था. उधर चिंटू रेगुलर जगह गया जहाँ निशा और मनु में से कोई मिला नहीं तोह उसे बड़ा गुस्सा आया ..पैर पुरे स्कूल में ढूंढ़ता कहाँ कहाँ सो गुस्से में दन्त पीसकर खुद से bola”sale चूतिये एक दिन बच गया तोह हर दिन निशा को बचा लेगा क्या निशा सिर्फ मेरी है …आज तूने बहुत गलत किया है ..तुजे इसकी सजा ज़रूर मिलेगी मनु …अब तू देखता जा मैं क्या करता hun..???”or गुस्से में पागल होकर वापस क्लास में चला गया..

उधर मनु और निशा जब रूम में पहुंचे तोह रूम में सिर्फ उन दोनों के अलावा कोई और नहीं था ..जहां निशा अपने में संती हुई थी क्युकी उसे लग रहा था की आज उसका हु सपना जो हर लड़की अपने जीवन में देखती है ..प्यार पाने का और कोई ऐसा वैसा नहीं पहला प्यार दुनिआ गवाह है की कितने खुसनसीब लोग होंगे हु जिन्हे अपना पहला प्यार नसीब हुआ होगा ..अब निशा भी खुद को उन चाँद खुश नसीबो में गईं रही थी और एक तरफ दिल से दुआ कर रही थी की मनु श्याद उससे अपने प्यार का इज़हार करदे और निशा भी बदले में हाँ कहकर अपना पहला प्यार हासिल कर ले …

वहीँ दूसरी तरफ मनु बड़ा संजीदा और तनहा फील कर रहा था की पता नहीं निशा का रिएक्शन क्या होगा जब हु राजिंदर के काम के बारे में निशा को बटेगा …कहीं हु भी चिंटू के बताने के बाद जैसे पूरी क्लास ने उससे अकेला और तनहा छोड़ दिया था वैसे hi छोड़ देगी या उसे अपना लेगी एक दोस्त की तरह या अब निशा उसके लिए दोस्ती की जगह हमदर्दी या दया दिखाएगी ….मनु कहीं न कहीं इन सब में उलझ चूका tha…kahin न कहीं सोच रहा था की अगर निशा उसे अब दया और हमदर्दी से देखगी तोह क्या उसका वजूद इस दोस्ती में खुश रह सकेगा या हु यह सब शी सकेगा …

ऐसे कई सवाल थे जिनके जवाब सिर्फ और सिर्फ निशा के पास थे मनु हिम्मत जुटने में लगा हुआ था की कहाँ से शरुवात करे और कैसे शुरू करे आज दोनों hi चाहे निशा हो या मनु दोनों के मैं में अलग अलग विचार थे दोनों के सामने रोज़ वाला टिफ़िन था पैर खाने की तमन्ना शयद hi किसी के दिल में हो ..??

निशा जहाँ अपने आनेवाले कल के सपने सजा रही थी …वहीँ मनु अपने आने वाले कल में निशा के बर्ताव को लेकर सोच में गम था ..कल जिसका कोई ठिकाना नहीं है …कल कभी इंसान के हाथ में नहीं होता न hi बिता हुआ कल न hi आनेवाला कल …कोण जाने कल क्या होगा पैर साड़ी दुनिआ कल के पीछे भागने में बस्सी है बिना यह सोचे की कल किसके हाथ में है …साड़ी दुनिआ अपना कला च देखना चाहती है …सब अचे की hi उम्मीद करते हैं कहते हैं उम्मीद पैर hi दुनिआ कायम है …पैर क्या सुच में कल पैर कोई ज़ोर नहीं ..कहना थोड़ा मुश्किल है कल क्या होगा हम आज को ाचा बनाकर आनेवाले कल में भी ाचा हो इसके लिए सोच सकते हैं..

खैर दोनों अपनी सोच में गम थे दोनों अपने हिसाब से इस ख़ामोशी का अंदाज़ा लगा रहे थे …किसी को तोह इस ख़ामोशी को तोड़ना hi था ..तोह मनु अपने में गम तहत ओह पहल निशा ने hi की …”हाँ तोह कहो क्या बात hai…tumne आज यहाँ क्यों बुलाया है मुझे ..???”निशा मैं से दुआ कर रही थी की मनु बस आज उसके प्यार को उससे एक बार कहकर तोह देखे …निशा साड़ी दुनिआ की ख़ुशी अपनी साड़ी उम्र मनु के नाम कर देगी …

मनु अपने ख्यालो के भवर से बहार निकला और शब्द ढूंढने लगा की कैसे शुरू करे ..वहीँ निशा की बेचैनी अब बर्दास्त के बहार हो चली thi..usne मनु को देखा तोह पाया की मनु गहरी सोच में गम है तोह खुद उसने शुरुवात की “क्या बात है तुम परेशान लग रहे हो सब ठीक तोह है न .???”

मनु अभी भी सही शब्दों के जाल में फांसा हुआ था की शुरू कहाँ से करे ?? फिर भी उसने सर हिलकर ठीक होना का इशारा किया …

निशा “हम दोस्त हैं न इतना तोह भरोसा कर hi सकते हो मुझपर जो भी बात है कहो भी या मुझे इतना गैर समझते ho..??”Nisha ने उसे हिम्मत देते हुए उसका हाथ पकड़कर कहा ..

मनु ने जब सुना की निशा को उसकी कितनी परवाह है तोह उसने निशा कैद वो कंधे पकड़ कर उसकी आँखों में देखकर कहा “ मेरे पास अब सिर्फ तुम hi तोह हो , जिसे मैं किसी कीमत पैर खोना नहीं चाहता hun,,ab इस दुनिआ में सिर्फ तुम hi तोह हो जिसे खोना शायद अब मैं बर्दास्त नहीं कर सकता …??”

निशा ने जब यह सुना तोह उसके दिल मैं घंटियाँ बजाने लगी उसे लगा की मनु को सुच में उससे कितना प्यार है ,,उसकी कितनी परवाह है निशा मनु कैद वो हाथों में संती हुई कड़ी थी उसकी आँखें मनु की आँखों में अपने लिए परवाह और अपने लिए प्यार ढूंढ रही थी ..वहीँ मनु भी उनकी आँखों में अपने लिए परवाह ढूंढ रहा था..

निशा मनु के अंदर अपने लिए केयर देख रही thi…manu भी उसकी आँखों में अपने लिए केयर देख रहा था …

Manu”aaj कुछ कहना चाहता हूँ पैर तुम्हारा जो भी फैसला हो आगे मुझे मंजूर होगा ..क्युकी आनेवाले कल में हमारा रिस्ता चाहे जो भी हो मैं तुम्हारी रेस्पेक्ट उतनी hi करूँगा जितनी आज करता hun..”manu ने बहुत हिम्मत के साथ कहा जिमे उसका मतलब यही था की कालको अगर तुमभी मुझसे दुरी बनाओ तोह तब भी मुझे तुम्हारी परवाह है ..

निशा मैं में “ मेरे साजन अब कह भी दो हु 3 वर्ड ..और मैं तुम्हारी हो जाउंगी ..बस कह भी दो ..

हट पागल तुमने यह कैसे सोच लिया की तुम्हारे किसी भी बात पैर मैं तुम्हे छोड़ दूंगी अब तोह ज़िन्दगी hi तुमसे मेरा दामन छुड़ा सकती है …अरे तुम बस हिम्मत करो एक बार अपने लाभों से कह दो ..मैं तोह कबसे तुम्हारी hun…keh भी दो देखो अब यह दुरी बर्दास्त नहीं होगी मुझसे और …कहो न कह भी दो ..”निशा के लबो की छुपी से ज्यादा उसके मैं और उसकी आँखों में बातें चल रही थी…

मनु “कुछ तोह कहो निशा अगर तुमने मुझे दूर कर दिया तोह पता नहीं मैं कैसे जी पाउँगा …हाँ जीऊंगा तोह ज़रूर पैर पता नहीं कैसे .??”

निशा ने मनु को अपने सीने से लगा ले ऐसा उसका दिल हुआ पैर सरम और लिमिट का दायरा उसने नहीं पार किया …जबकि उसके दिल में यह सब सुनकर कितनी हलचल हुई थी यह तोह वही जानती थी..

मनु उसके कंधे पकडे हुए उसकी आँखों में आनेवाले भावो को समझने की कोशिश में लगा हुआ था …

निशा “ अब कहो भी तुम मुझपर एक बार भरोसा तोह कर के देखो….” आगे उसकी ज़बान से हु निकल नहीं पाया की तुम एक बार भरोसा तोह करके dekho..ek बार कहकर तोह dekho..main तोह तुम्हारी hi hun..sirf कह दो एक बार …ह्म्मम्फः कितना पागल है मेरा नादान साजन अकेले तनहा रूम में एक लड़की को लगभग अपनी बहून में लिए खड़ा है फिर भी सोच रहा है …अरे कब kahoge..?nisha के मैं में दुनिआ भर की जुंग चल रही थी..

मनु ने शायद अब हिम्मत जूता ली थी निशा के कहने के बाद ..

मनु “निशा मैं तुमसे यह कहना चाहता हूँ की मैं एक गरीब घर का लड़का हूँ…”

निशा “ हैं हाँ अचे से जानती हूँ तुम कोण हो क्या हो मुझे इससे कोई प्रॉब्लम नहीं hai..ok तुम मेरे लिए क्या हो यह मेरा दिल hi जनता है ..”निशा जो सुन्ना चाहती थी उसके लिए मनु को हिम्मत दे रही thi.kyuki हु अचे से जानती थी की मनु कितना खुद्दार किसम का इंसान है …पैर अभी शायद हु सुन्ना कुछ और चाहती थी..

Manu”Nisha तुम शायद समझ नहीं रही हो …मैं यह कहना चाहता हुनकी …उसके बाद मनु ने अपने पिता जो एक केयरटेकर हैं और आजकल कितनी म्हणत कर रहे हैं जिनको अकेले 3 या 4 लोगो का काम करना पड़ता है सब बता दिया…..”

निशा ख़ामोशी से सुनती रही सुनते हुए उसे एहसास हुआ की मनु वासतव में किन परेशानियों से जूझता होगा ,,परेशानी जो आम लोगो की ज़िन्दगी में रोज़ आती हैं पैर अमर लोगो की ज़िन्दगी उन्ही ज़रूरतों की जिम्मेवारी नौकरों की होती hai..example देकर बोर नहीं करूँगा …समझ जाओ यार आपलोग भी समझ सकते hain..acha ठीक है फिर भी बता देता हूँ वार्ना कल को सवाल यही होगा की ऐसी कोण सी स्पेशल प्रॉब्लम होती hai..are भाई सब्ज़ी लेने से सिलिंडर बदलना और सामान लाना घर का उसके साथ कपडे बर्तन जहाँ बड़े लोगो के घर इन सब छोटे मोठे कामो को नौकर हैंडल कर लेते हैं वही ट्रेवलिंग में भी अंतर होता है जहाँ निशा कार से आती जाती थी शुरू मैं पैर मनु के साथ रहने के चक्केर में अब पैदल यात्रा करती थी ताकि ज्यादा टाइम स्पैंड कर सके उसके साथ ..वहीँ मनु क्युकी अब स्कूल बस छुटवा दी गयी थी अफ़्फोर्ड न करने की वजह से …कारन दोनों माँ बाप मिलकर कमा रहे थे पैर घर के खर्चे का बजट और उस पैर सुमित्रा की बेवकूफी की वजह से 70 हज़ार की चोट बस दोनों माँ बाप कैसे मैनेज करके दोनों भाइयों को उस प्राइवेट स्कूल में पड़ा रहे थे वही दोनों जानते the…manu भी सब समझता था सो छोटी मोती चीज़ो का लालच को कुर्बान कर दिया करता था …क्युकी अजय भी अब थोड़ा बड़ा हो गया था सो हु भी अपने भाई को देखकर समझदार होने लगा था पैर तहत ओह बचा hi ..कभी – कभी ज़िद कर जाता था ..सो मनु को जब पैसे मिलते थे तोह हु ज़िद अजय की मनु पूरी क्र दिया करता था..

परेशानियों में पालनेवाले बचे अपनी उम्र से ज्यादा मातुरे हो जाया करते हैं क्युकी kismat,waqt और रियल वर्ल्ड से बड़ा कोई टीचर नहीं hai..manu भी अपनी उम्र के बच्चों से शायद इनसभी बातों के चलते थोड़ा जल्दी मातुरे हो गया था..

खैर निशा के दिल में भी राजिंदर के और सुमित्रा के प्रति इज़्ज़त पैदा हो चुकी thi..ki कैसे दो माँ बाप लगभग दुनिआ में अपने बचूं के लिए हर रोज़ दुनिआ में एक नयी जुंग लड़ा करते थे …कहीं न कहीं उसके दिल में दोनों को देखने की भावना ज़ोर पैर थी खुद से अपने मैं में बोली ..”है मेरे साजन तोह हैं hi सुपर पैर सासु माँ और ससुर जी भी सुपर से उप्पेर hain..hay अभी तोह शादी भी नहीं हुई और मैंने उन्हें सास और ससुर भी मान लिया मैं भी कितनी पागल हूँ अरे पहले यह पर्पस तोह करें एक बार उसके बाद पीछा नहीं छोडूंगी हर एक बदला लुंगी मैं भी क्या क्या सोचने लगती हूँ अभी तोह बड़ा भी होना है तब देखते है पैर मेरे साजन तुम सिर्फ मेरे हो सिर्फ मेरे…” निशा चुपचाप बैठी मनु की हर बात ध्यान से सुन रही थी और जब मनु ने अपनी बात ख़तम किट ओह भी निशा चुप hi रही मनु का दिल बैठा जा रहा था की पता नहीं क्या जवाब दे निशा..

पता नहीं निशा के मैं में क्या चल रहा होगा यह सवाल मनु को परेशां कर रहा था.. निशा का रिएक्शन पैर मनु की साड़ी उम्मीद तिकी हुई थी क्या उसकी एकलौती दोस्त भी उसे छोड़ देगी …अकेला पैन क्या होता है किसी तनहा इंसान से पूछना …

अरे पूछने की ज़रूरत भी नहीं पड़ेगी एक बार उसकी आँखों में ध्यान से देखना उसकी तन्हाई खुद से कहेगी आपसे

“मत पूछ मेरी ताहै का अलाम क्या है ,मेरा दिल दुनिआ की भीड़ को कहाँ जनता है ..

मेरी तन्हाई की दास्ताँ तोह सिर्फ मेरा वजूद और मेरा तनहा दिल hi जनता है”

मनु फिर अकेले होने के डर में सिमटा हुआ निशा के चेहरे को देख रहा था …निशा जो उसकी बात सुनने के लिए पास पड़ी बेंच पैर बेथ गयी थी ..पैर मनु वहीँ गम गम कर बता रहा था …सो निशा अपनी जगह से उठकर मनु के पास आयी और उससे कुछ कहती उस पहले hi …

“निशा ो निशा लंच कब का ओवर हो गया है क्लास में चलो मम ने तुमको ढूंढ़ने को सभी को लगा रखा है..” एक लड़की अपनी सांस को काबू में करते हुए बोली …

निशा कुछ कह नहीं पायी कहती भी कैसे अब हु सिर्फ दो नहीं थे हु तीन थे किसी और के सामने अपने जज़्बात कैसे कहती हु ..मनु खुद में सिमटा हुआ निशा के लबूं को देख रहा था ..की शायद आज उसका दोस्त उसे भी खुद से जुड़ा न कर दे ..

निशा ने फिर कुछ कहने की कोशिश ki,,,”chal जल्दी पूरी क्लास लगी है तुझे ढूंढ़ने में और तू यहां बेकार में कड़ी hai,,,uska बेकार वर्ड पैर थोड़ा ज्यादा ज़ोर था जो उसने लानत भरी नज़र से मनु को देकते हुए कहा था …

मनु को उसकी हु नज़र अंदर तक चिर गयी थी ..यह वही लड़की थी जिसके लिए उसने रात भर जाग कर उसकी प्रैक्टिकल की फाइल का काम करके दिया tha..per आज वही लड़की जो कभी उसके आगे पीछे गम्मा करती थी आज “बेकार” कहकर बेज़्ज़त कर रही थी….

उस बेकार का मतलब मनु समझ गया था जबकि निशा को उसके बारे में पता hi तहत ओह हु बेचारी क्या samjhti…who जाते जाते उस लड़की की तरफ देखकर आगे चलने का इशारा किया और मनु की तरफ देखकर बोली “ कल लंच में मेरा वेट करना बता दूंगी ok bye …”

उसके बाद निशा चली गयी अकेला मनु को छोड़कर ….जहाँ निशा यह सोचकर गयी थी की कल मनु को अचे से अपने दिल का हाल बतादेगी की मनु उसके लिए कितना ख़ास hai..or हु अकेला नहीं है निशा हर कदम उसके साथ है ,,

मनु को कहाँ पता क्या सोच रही है निशा ..उसने सोचा निशा पता नहीं कल क्या कहेगी अकेला खड़ा खुद से बात करते हुए ज़ोर से बोलै (इतना ज़ोर की जितना खुद से कोई करता है bhai..chillakar नहीं क्युकी स्कूल में है) “कब तक खुद को और मानिएगा निशा सिर्फ दोस्त नहीं है तेरी …कब तक खुद को झूठलाएगा कब तक अपना प्यार छुपायेगा उससे ….हाँ मैं भी प्यार करता हूँ निशा से आज से नहीं बहुत दिन से पाथेर नहीं हूँ की कोई लड़की अपने हाथ से खिलाये और मुझमे हलचल भी न हो पैर अपनी औकात कैसे भूल जाऊं मैं अब तोह मैं सिर्फ मनु नहीं हूँ एक नाम और मिला है मुझे इस दुनिआ से “””जमादार””” कैसी दुनिआ है यह मैंने आज तक कुछ साफ़ नहीं किया पैर इस एक शब्द ने मेरा वजूद hi साफ़ कर दिया और अब लोगों की नज़रों में मैं एक “”jamadar”””hun कैसे भला .???

तुम तोह राजकुमारी हो निशा कैसे तुमसे कहदूँ की हाँ मैं भी तुम्हे पगलून की तरह चाहता हूँ ..जब चिंटू जैसे को भी तुमसे प्यार हो सकता है तोह मैं भी इंसान हूँ पाथेर नहीं …मेरे सीने में भी जज़्बात हैं ..पैर कहाँ तुम और कहाँ मैं ..जिसका खुदका कोई वज़ूद भी नहीं है पैर वडा करता हूँ निशा तुमसे की मैं इतनी म्हणत करूँगा की तुमको खुश रख sakun..i लव ु निशा ..ी लव ु सो मच पैर पता नहीं कल तुम मुझे कैसे मिलोगी …क्या पहले जैसा होगा सब या तुम भी ूरों की तरह चिंटू का साथ doogi…Nisha तुम मत छोड़कर जाना वार्ना शायद पता नहीं कैसे खुद को सम्भालूंगा main..i लव ु निशा …ी लव ु “ आज मनु ने इस तन्हाई में अपने प्यार का इज़हार कर दिया था ..जो उसने पता नहीं कबसे अपने दिल में दबा रखा था …पैर कह नहीं सकता था हु निशा से क्युकी निशा और उसके बैकग्राउंड का लम्बा अंतर उसकी जुबां पैर हु खुद्दारी का टाला लगा देता था जिसकी चाबी उसने आनेवाले कल को सूप दी थी ुस्कल को जिसमे उसने सोचा हुआ था की म्हणत के दम पैर निशा के काबिल बैंकर उसे हक़ से हासिल करेगा ..पैर वक़्त के दिल में क्या है कोण समझा है भला वक़्त को उसके लिए तोह दोस्ती के नाम पैर निशा के पास होने में भी उतनी ख़ुशी थी जयंती अपने प्यार के पास निशा को होती थी जो मनु को नहीं पता था ,,अब क्युकी निशा दोस्त के साथ उसका प्यार भी थी ..तोह मनु का डर लग्न भी अपनी जगह सही था. क्युकी अब निशा उसे ठुकराती तोह इसका मतलब प्यार और दोस्ती दोनों से मनु दूर …इस एक एहसास से मनु का हाल- e-dil समझ सकते हैं आप भी ..

और मज़े की बात यह है की निशा बेचारी जिस ी लव ु को सुनने के लिए कितनी दुआएं मांगती रहती थी ..की आज मनु उसे एक बार सिर्फ एक बार ी लव ु कह दे पैर आज उसकी दुआ कुबूल हुई थी मनु ने एक बार नहीं 4 बार हाँ 4 बार ी लव ु निशा कहा था ..पैर निशा वहां नहीं थी मौजूद बेचारी वहाँ जो अपने प्यार का इक़रार सुन पाती..

पैर किसी और ने सुन लिया था …जिसके चेहरे पैर फिर एक नयी शैतानी चमक थी और उसके भूतों पैर दरंगी के हु अलफ़ाज़ “मेरी निशा से प्यार करेगा तू साले चुटिया तुझे पहले hi कहा था की निशा को तुझसे चीन लूंगा अब तू देख मैं कल क्या करता hun..“haan यह कोई और नहीं चिंटू hi था जो निशा को ढूंढते हुए आया था ..पैर मनु को खुद से बातें करते हुए देखकर और निशा के नाम प्यार का इज़हार करते हुए देखकर रूककर उसके दिल का हाल जाने लगा था …मनु को नहीं पता था की चिंटू वहां है वार्ना हु एक शब्द भी न कहता …

खैर चिंटू गुस्से से भुनभुनाता हुआ चला गया और मनु भी कुछ देर बाद चला gya…manu अगले दिन के बारे में और अपने प्यार निशा के बारे में सोचते हुए सो गया …

अगला दिन आया सुबह रेगुलर रूटीन फॉलो किया और अजय के साथ स्कूल चल दिया …जहां रोज़ की तरह सभी की लानत भरी नज़र उसका रोज़ की तरह वेलकम करती है …और हु अपनी सीट पैर जाकर बेथ गया आज निशा चुप सी थी आज मनु से ,और मनु का दिल इस छुपी से कितना बेचैन था यह तोह वही जनता था ..हर सेकण्ड्स के साथ उसके दिल और दिमाग में जुंग चीड़ जाती थी ..पैर जवाब निशा के पास hi था …दिल दिमाग फिर भी लड़ रहे थे अपने अपने हिसाब से …

पैर एक अजीब बात आज मनु देख रहा था की निशा जहाँ आज उसके साथ चुप थी पैर चिंटू क एक बार देखने से निशा मुस्कुरा पड़ती थी ..आज दोनों की केमिस्ट्री hi अलग सीट hi …हु चिंटू का निशा को देखना और कोई इशारा करना .और बदले में निशा का शर्माना और चुप रहने का इशारा करना …

मनु ने जब यह नोटिस किया तोह उसके दिमाग से आवाज़ आयी ..”कुछ तोह गड़बड़ है मनु आज जो बेहूदा कहनेवाले को आज निशा इतना मुस्कुरा कर देख रही hai..maan जा तू देख ले इसका इशारा साफ़ है यह गयी अब तेरी ज़िन्दगी से दूर अब “

दिल “अबे पागल है क्या ऐसे hi चली गयी ???”

मनु के दिल दिमाग फिर से लड़ने लगे थे …पैर घंटा दोनों के कुछ समझ आनेवाला था ..

खैर लांच हुआ और मनु उसी रूम की तरफ चल दिया मरे से मैं से यह सोचते हुए की उसका प्यार पता नहीं उसका होगा या नहीं पैर कमसे काम दोस्ती भी न टूट जाये ..

हु रूम के पास पूछा उसकी ज़मीं खिसक चुकी थी …उसे अपनी आखों पैर यकीं नहीं हो रहा था सामने का नज़ारा देखकर ….

हाँ सामने का नज़ारा hi कुछ ऐसा था ,,जिसे देखकर मनु को यकीं hi नहीं हो रहा की यह सपना है या हक़ीक़त …उसके कदम रूम के बहार hi रुक चुके थे ..क्युकी सामने देखकर अंदर जाना शायद अब उसके बस में नहीं था..

सामने निशा अपने हाथों से चिंटू को खाना खिला रही thi,,wahi निशा जिसको मनु पता नहीं कबसे चाहने लगा था ..वही निशा जिसके पास होने भर से मनु का दिल सुकून पा लेता था ..वही निशा जो कल तक चिंटू को बेहूदा इंसान कहती थी अपने हाथ से हंस- हंसकर खिला रही thi..or चिंटू …

चिंटू के क्या कहने आज लगता है जनम भर का भूका था मस्ती के साथ खा रहा था ….मनु के लिए शायद एक झटका और बाकी था ….

अचानक चिंटू ने निशा के कान में कुछ कहा जिसके बाद निशा शरमाते हुए चिंटू के गले लग गयी मनु …की आँखें चालक चुकी थी यह सब देखकर ..उसकी आत्मा टूट चुकी थी उसकी रही सही उम्मीद ख़तम हो चुकी thi..manu का दिल रो रहा था अंडर से चिंटू ने तुमसुप का इशारा गेट की तरफ किया जो एक इशारा था जिसका मतलब मनु बखूबी समझ गया tha…use समझ आज्ञा था की चिंटू को पता है की मनु वहां गेट पैर है …अब मनु के बर्दास्त के बहार हो चला खुद के प्यार को चिंटू के गले लगे हुए देखकर मनु के कदम वापस मुद चुके थे …जो जाकर रुके स्कूल की चाट (roof)per जहाँ हु दिल खोलकर आंसू भाता गया इतना रोया की एक बार को शायद आस्मां को भी दिल किया की रो दे पैर रियल लाइफ है यहाँ किसी के रोने से फिल्मो की तरह बारिश नहीं हुआ करती सो समझ जाओ खुद आप लोग स्मार्ट हैं और रोना भी बनता है भाई uska…kyuki आज उसके प्यार के साथ उसकी एक लौटी दोस्त शायद उसे तनहा कर चुकी थी …आज किस्मत और नफरत ने मनु के साथ कैसा मज़ाक किया था अरे कल hi तोह उसने अपना प्यार निशा के लिए अपनी जुबां से कुबूल किया था ..और आज किस्मत और नफरत ने उसका प्यार चीन लिया था ..

ऐसा क्या हुआ था की निशा चिंटू को अपने हाथ से खाना खिला रही थी …और उसके गले लगी हुई थी ….क्या मनु ने जो देखा हु सही था क्या निशा उसे सुच मच तनहा कर चुकी थी ….क्या चिंटू जीत गया था …क्या मनु हमेशा हमेशा के लिए तनहा हो गया था …क्या मनु की आँखोने ने सही देखा था या यह कोई प्लान था चिंटू का ..या निशा ने चिंटू को चुन लिया था …….इसका जवाब किस्मत के या टाइम के हाथ hai….:hint:
 
अपडेट 53

बचपन की यादें

ऐसा क्या हुआ था की निशा चिंटू को अपने हाथ से खाना खिला रही थी …और उसके गले लगी हुई थी ….क्या मनु ने जो देखा हु सही था क्या निशा उसे सुच मच तनहा कर चुकी थी ….क्या चिंटू जीत गया था …क्या मनु हमेशा हमेशा के लिए तनहा हो गया था …क्या मनु की आँखोने ने सही देखा था या यह कोई प्लान था चिंटू का ..या निशा ने चिंटू को चुन लिया था …….इसका जवाब किस्मत के या टाइम के हाथ है….

अब आगे......

निशा ने ऐसा क्यों किया ?? यह हु सवाल था जिसके चलते आज मनु का दिल और दिमाग दुनिआ के हर दर्द को एक साथ महसूस कर रहा tha…use अभी भी यकीं नहीं हो रहा था की निशा को उसने चिंटू के करीब इतना करीब देखा है ..

जिस चिंटू को निशा “बेहूदा इंसान “ कहा करती थी आज उसी इंसान को अपने हाथ से कहलाना मनु के दिल का क्या हाल कर रहा था यह तोह स्कूल की हु चाट hi जानती थी जहाँ उसके गरम फ़र्ज़ पैर मनु के आंसू जमा थे या हु दिवार जब मनु रट रट कमज़ोर हुआ तोह उस दिवार का सहारा लेकर मनु सिर्फ अपने दिल के दर्द को बहाने में लगा हुआ था …दर्द जो उसे मिला था निशा से जो उसका शायद पहला प्यार tha(hosh और ध्यान में) हु प्यार जिसका करीब होना इंसान को कितना सुकून देता है …इसका जवाब तोह किसी प्यार करनेवाले से hi आप जान सकते हैं.. या हु जो प्यार को अचे से समझते हैं..

किसी के लिए साथ होना प्यार है ,,किसी के लिए दोस्ती प्यार है किसी के लिए ,,अपने प्यार को दूर से बस चाँद घडी देखलेना प्यार है , या किसी को अपने प्यार को उसके खुशनुमा चेहरे पैर उसकी मुस्कुराहट hi प्यार है..

(ज्यादा बोर नहीं करूँगा वार्ना कमेंट में फिर क्लास लग jayegi…ki आप कुछ भी उल्टा लिख देते हो ..अरे भाई राइटर अपनी दुनिआ अपनी आँखों या अपनी कल्पना से hi तोह आप तक पहुंचता है …वैसे भी मैं आप तक अपनी बात रखता hun..usme सही या गलत ढूंढ़ना आपका काम है.)

वही प्यार जिसके लिए मनु ने न जाने कितने सपने सजा लिए थे जो इंसान इस प्यार को जान ने के बाद भी आगे जाकर कुछ बैंकर अपने प्यार को हासिल करना चाहता था आज उसका हु सपना भी टूट चूका था …

“किसी गैर की बहून में हैं who,kuch इस तरह जैसे कभी हम थे hi न उनके ..

मिल तोह जाती है सुबह और रात भी एक जगह अगर चाहत सूचि दिलो की “

“जनता हूँ नहीं थे हम तुम्हरे पहले भी ,

पैर इस दिल को कैसे समझूँ जिसमे आज भी तुम हो “

सारे दर्द मनु के सीने में जैसे आज सिमट आये थे ….पता नहीं कब तक रोटा रहा अकेला और जैसे निशा को सब डंटे हुए फिर रहे थे कल पैर आज किसी ने जैसे मनु को ढूंढ़ने की कोशिश नहीं की …जैसे सबको उसके होने न होने से कोई फर्क पड़ता hi न ho…jab खुद रो रो कर उसका दिल थोड़ा हल्का हुआ तोह उठा खुद को लगभग घसीट ते हुए अपनी क्लास में गया जहाँ मम ने पूछा “कहाँ से आ रहे हो ??”

मनु क्या जवाब देता …उसके जवाब कहीं न कहीं खो से गए थे चुपचाप अपनी सीट पैर चला गया मम ने भी कोई सवाल नहीं किया क्योकि अब मनु से कोई ज्यादा बात नहीं किया करता tha..chalte हुए मनु आगे से गुज़रा उसके ठीक सामने चिंटू बैठा हुआ था जो आज कुछ अलग hi मुस्कराहट के साथ बैठा हुआ था …आज कहीं न कहीं मनु को चिंटू से कोई गुस्सा नहीं था ,,,होता भी कहाँ से इस समय उसे खुद का होश तक नहीं था ….उसके जेहन में सिर्फ निशा hi घूम रही थी उसने देखा निशा की सीट की तरफ जिसपर निशा मुजूद नहीं thi…jisper मनु को थोड़ा हैरत भी हुआ पैर उस हैरत को शांति मिली दो लड़कियों की बात सुनकर “एक यह पागल सा बना हुआ गम रहा है कभकहत मरता भी क्यों नहीं …पता नहीं कब तक जेह्लना होगा इसे …ाचा सुन तुझे पता है निशा कहाँ गयी…??”

दूसरी लड़की “हां उसके घर से कोई आया था की उसके छोटे मां जो विदेश में हैं उनके यहाँ से उसका कॉल आया था की उसके नाना की तबियत बहुत ख़राब hai..so कोई आया और निशा को ले गया ”

मनु कोई बड़ी फिकरा हुई की निशा ऐसे चली गयी फिर तुरंत hi उसके सामने निशा चिंटू के गले लगे हुए गुमने लगी हु तस्वीर उसके मैं और दिमाग में जैसे चाप सी गयी थी आज हु इतने दर्द में था जिसके चलते शायद पहली बार हु नीता मम (अपनी मुँहबोली माँ ) के पास भी नहीं गया था ..नीता मम को आज ऐसे अचानक से मनु के न आने से उसकी चिंता हो चली थी सो उन्होंने मनु का इंतज़ार किया पैर मनु को खुद अपना होश होता तोह कुछ करता न . तोह नीता मम ने पेओन को कहकर मनु को बुलाया …पेओन ने क्लास में आकर मनु को नीता मम ने बुलाया है बोलकर उसे साथ ले गया ..नीता मम ने जब मनु को पास बुलाया जहाँ उनको मनु में कुछ बहुत अलग सा लगा पैर पेओन सामने था तोह उन्होंने पेओन को वापस बेहज दिया ..मनु उनके सामने शांत चुप और अलग सी दुनिआ में खोया हुआ था …उसकी सोज़्ज़ी हुई आखें इस बात की गवाही चीख चीख कर दे रही थी की मनु बहुत रोया है …

नीता मम को किसी अनजाने प्रॉब्लम की आशंका हुई कहते हैं माँ सिर्फ माँ होती है जिसके पास शायद सिक्स सेंसेस होती है की बीटा दुःख में है वैसे hi नीता मम को भी पता लग गया …”मनु मेरे बचे क्या अब मैं इतनी परै हो गयी हूँ किट ु अकेले रो सकता है पैर अपना दर्द अपनी इस बदनसीब माँ से शेयर नहीं कर सकता क्या सुच में इतना hi अहमियत रखती हूँ तेरी नज़र में मैं , यही इज़्ज़त है तेरी इस माँ के लिए …की मैं तेरा दर्द तक साथ न बाँट पौन??

मनु ने जब यह सुना तोह उसकी रही सही हिम्मत फिर से टूट गयी और उसकी ाँहों से ाँसों ने फिर बग़ावत करदी …पैर इस बार हु रट हुए नीता मम यानि अपनी माँ के गॉड में अपना सर रखकर रोने लगा नीता मम ने भी पहले उसे रोने दिया ताकि शायद उसका दिल हल्का हो जाये …मनु रोटा रहा कुछ देर बाद जब उसका दिल थोड़ा सा हल्का हुआ तोह उसने अपनी नज़रर उठा कर उप्पेर नीता मम की तरफ देखा और दोनों अपने दोनों हाथ joadkar”maa मेरे दिल मैं आपके लिए कितना प्यार और कितना सम्मान है यह तोह सिर्फ मेरा दिल दे सकता है या हु जो यह जनता है की मैं कितना सुच कह रहा हूँ ??पैर माँ सुच मनो तोह मेरे लिए माँ का मतलब मेरा वजूद है और कोई अपने वजूद को जैसे नकार नहीं सकता वैसे hi मैं आपको अपने से अलग नहीं मंटा “

नीता मम” हु तोह मैं जानती हूँ मेरे बचे पैर..”

मनु “ माँ प्ल्ज़ आगे आप कुछ न पूछना मैं आपको नहीं बता सकता आपको क्या किसी को नहीं ..और कसम खाके कहता हूँ सुच में माँ अगर कहने लायक होगा तोह सबसे पहले आपको बता देता …प्ल्ज़ माँ आप मुझे गलत न समझना बस अभी के लिए इतना समझ लो कुछ है जो मुझ में टूट गया है खुद से कुछ छूटा (लॉस्ट) सा महसूस कर रहा hun…aap आगे कुछ न पूछना आपको मेरी कसम ..”

नीता मम प्यार से उसके सर पैर हाथ फिरते हुए“ मेरे प्यारे बचे, मेरे लादले ,,ाचा ठीक है जब तूने कसम दे दी है तोह नहीं पूछूँगी पैर तूने सोचा है की तेरे रोने का इस माँ पैर क्या असर होगा …क्या तेरी यह माँ अपने बचे को रट हुए डेक सकेगी क्या बर्दास्त कर सकेगी तेरे यह ाँसों जो एक माँ का कलेजा चलनी कर देते है …तूने कहा की तुझसे कुछ छूट रहा है कुछ है जो तुजमे टूट गया है तोह मेरे बचे जो टूट गया उसे जोड़ ले …जो छूट गया या तोह उसे छोड़कर जो तेरे पास जो तेरे साथ है उसपर ध्यान दे …ज़िन्दगी में आगे बढ़ना रोने से कहीं ज़ादा ज़रूरी है …??”

इस बात से मनु के ांसो अचनाक से रुक गए नीता मम ने उसे दुनिआ का हु पाठ पड़ा दिया था की जो छूट गया उसपर रो रहे हो जबकि हु तोह अपना था भी नहीं जो अपना है उसकी सोचो आने वाले कल की सोचो आगे बड़ो ..और ज़िन्दगी में अपने सपने पुरे करो ..रट रहना हर चीज़ का हल नहीं है ,,

मनु की यह बात अचे से समझ आ गयी थी उसने फ़ौरन अपने आंसूं पूछे और जिस ज़मीन पैर बेथ कर नीता मम की गॉड में सर रखकर रोरहा था वहां से उठा खड़ा हुआ ..और नीता मम के गले लगकर उनके हाथों को चूमकर बोलै “सॉरी माँ मैंने आपका दिल डुखया उसके लिए मुझे माफ़ कार्डो आपने सही कहा की जो मेरा थान यही उसपर आंसू बहाना बेकार है …जो मेरा है उसकी क़द्र करना ज्यादा ज़रूरी है …क्यों है न..??”

नीता मम ख़ुशी से की मनु फिर से उठ खड़ा हुआ है नार्मल इंसान की तरह “ हाँ मेरे bache,beta तुम समझदार हो जो यह बात इतनी जल्दी समझ गए …उसकी क़द्र करो अभी जो तुम्हारे पास है …और आगे का सोचो…”

मनु “तोह ठीक है माँ अब पहले आपकी क़द्र करूँगा सबसे पहले..”

नीता मम “मतलब “

मनु नीता मम के मोठे मोठे गोल गोल गैलन पैर किश करता है जिसपर नीता मम भी हसने लग जाती हैं और उसके सर पैर तपली मार्के “ऐसे कैसे मतलब कुछ भी..”

मनु “लगता है अभी काम क़द्र की है “और फिर से पापी ले लेता है जिसपर मम भी उसे मरने को दौड़ती हैंयह बोलकर की “माँ की पापी लेता है बेशरम “

दोनों ऑफिस में खूब भाग दौड़ मजा डालते है ..और अपने अपने में दोनों एन्जॉय करते है ..मनु अंदर से दर्द में जरूर था पैर कहीं न कहीं नीता मम ने उसे अचे से समझा दिया था की जो हमारे पास हैं उस सभी की क़द्र भी जरूरी है ,,,

खैर दोनों कुछ देर में नार्मल हो गए थे ..उसके बाद दोनों ने चैन से खाना साथ में खाया …और अपने अपने काम पैर लग गए .

नीता मम जहाँ आज एक तरफ खुश थी की मनु ने रट हुए कैसे उनको थामकर अपनापन जताया था, ,,वहीँ कहीं न कहीं हु सोच भी रही थी की ऐसा क्या हुआ की मनु जैसा इंसान अचानक से टुटा हुआ महसूस करने लगा hai..or क्युकी मनु बेशक उन्हें माँ जैसे प्यार करता था पैर उनको कभी भी अपना दर्द नहीं बताया करता था ..वर्ण जिस क्लास में हु इतना जलील हो रहा था ..जहाँ उसको रोज़ नया टार्चर मिलता था ..क्या हु एक बार भी नीता मम से कहता तोह नीता मम की सिर्फ एक आवाज़ पैर उनसभी की अकाल सही जगह पैर आ जाती ..पैर मनु नहीं चाहता था की उसे किसी भी तरह से नीता मम से यह सब कहना पड़े ..और उनका किसी भी तरह से उस क्लास के सामने कोई इन्वॉल्वमेंट ho..so हु नीता मम से यह सब नहीं बताया करता था..

एक तरफ उन्हें इस बात की ख़ुशी भी थी की कैसे उन्होंने कैसे अपने बेटे को इतनी जल्दी न केवल चुप कार्य बल्कि कहीं न कहीं जहाँ हु खुद को फसा हुआ महसूस कर रहा था वहां निकल भी लिया उसे…

खैर उधर आज जब मनु का स्कूल ओवर हुआ तोह चिंटू मनु के पास से निकल “क्यों बे चूतिये बड़ा उछलता है न अब देखना क्या करता हूँ आगे देखता जा ..”

मनु एक बार तोह गुस्से से भर गया पैर फिर उसे लगा की जब निशा ने hi उसे चुन लिया तोह मैं भला होता कोण हूँ बिना वजह उलझनेवाला.

हु चुप चाप अपने रस्ते चल दिया घर आया और अपने होमवर्क को फिनिश किया उसके बाद अजय का काम मतलब उसका होमवर्क में हेल्प किया ..और उसके बाद पुष्पी के साथ टूशन और फिर बाबा के यहाँ ट्रेनिंग उसके बात जब हु आज भटनागर के पास गया तोह आदत के मुताबिक भटनागर के पेअर छुए जिसपर अब भटनागर ने भी उसे प्यार से आशीर्वाद दिया और क्युकी की अब दोनों में अछि कहसि अछि बनने लगी थी जिसपर दोनों अपने काम में लग गए …अभी दोनों कुछ करते उसी बिच अशोक वहां आया थोड़ा परेशान था ..जिसपर भटनागर ने पूछा भी …जिसपर उसने मनु की तरफ देखकर kaha”yaar एक प्रॉब्लम है …निशा के नाना की तबियत ठीक नहीं है और क्युकी अब मंजू और निशा से मिलना चाहते hain.toh दोनों को बेहजना होगा पैर निशा ज़िद पैर अदि हुई है की बस मिलकर आजायेगी …यार उनकी कंडीशन क्रिटिकल है ..कुछ कहना मुश्किल है क्या करूँ मैं कुछ समझ नहीं आ रहा ..है ??”

भटनागर “तोह सर क्या सोच रखा है आपने ..”

अशोक “यार सोचा तोह कुछ खास है नहीं पैर उनकी कंडीशन अभी क्या है और आगे क्या होगी कहना मुश्किल है और ऐसे मैं निशा का इस तरह गुस्सा मेरी समझ से परे है …हाँ इतना तोह पक्का लगता है ..की कई महीने लग सकते hain..tab निशा की एजुकेशन का क्या होगा इसको लेकर भी टेंशन hai…samjh नहीं आ रहा क्या करूँ..”

Bhatnagar”phir प्रॉब्लम क्या है निशा को वहीँ के स्कूल में एडमिशन करवा दो उसका आगे का फ्यूचर भी ाचा हो जायेगा …”

अशोक मनु की तरफ देखते हुए जैसे मनु के अंडर झांकना चाहता ho.”yaar बेहजुं तोह तब जब हु बात मने meri..sunti hi कहाँ है उसका फ्यूचर भी देखना है पैर सुनती कहाँ है ..मेरी..??”

भटनागर “तोह उसमे प्रॉब्लम कहाँ है मनु उसका फ्रेंड है हु बात कर लेगा निशा से ..क्यों मनु करोगे न इतना सा काम ..?”मनु क्या जवाब देता चुप चाप उसने हाँ मैं सर हिला दिया..

अशोक “सुच बीटा अगर ऐसा है तोह तुमने सुच में मेरे सर से बहुत बड़ा बोझ उतार दिया ..तुम एक काम करो अभी ड्राइवर के साथ चले जाओ और उसे समझाओ मुझे लगता है की तुम्हारी बात उसकी समझ में आ जाएगी और अगर हु मानी तोह रात को hi निकलना होगा सभी को..”

मनु ने जब सुना की आज रात को hi निशा को जाना होगा एक बार को उसके पाँव कांप गए की प्यार के अभी जाने का गम भी ठीक से नहीं मन पाया था साथ में जुदाई भी मिल गयी …चलो शयद यही किस्मत है …कमसे काम चिंटू जैसे घटिया इंसान से तोह सेफ रहेगी ..और उस चिंटू को भी निशा के नाम पैर निचा दिखने को नहीं मिलेगा ..”इनसब सोचों में मनु निशा कैग हर पूछ गया अशोक की गाड़ी में ..

अंडर गया तोह हर हु चीज़ वैसे hi थी जैसे पहले हुआ करती थी ..पैर आज मनु को यहाँ राखी हर चीज़ से एक लग सी बेचैनी हो रही thi…kahin न कहीं हु निशा की बेवफाई अभी तक पचा नहीं प् रहा था..

खैर अंडर गया जहाँ मंजू रेडी हो रही थी …पैर निशा वहीँ गुस्से में बैठी थी…

निशा ने मनु को देखा तोह उठी और मनु के पास मुस्कुराते हुए चली आयी..

मनु हैरत से देख रहा था की कैसे अभी थोड़ी देर पहले जो चिंटू की बहून में थी फिर से मुस्कुरा कर उससे मिल रही थी ..कहीं न कहीं उसे अंदर से गुस्सा सा आने लगा था …उसकी बेवफाई पैर …

निशा “अरे तुम अचानक से कैसे यहां पैर इस टाइम तोह तुम ऑफिस में होते हो न …??”

मनु चुप था आज वही निशा जिसकी आवाज़ सुनकर कभी मनु का दिल मचल जाया करता था आज उसकी बेवफाई पैर सुलग रहा था …कहीं न कहीं उसे खुद पैर गुस्सा सा आने लगा की उसने हाँ कहा hi क्यों ..और हु क्यों निशा से बात करने आया …

मंजू “आओ बीटा अब तुम hi इसे समझाओ की इसके नाना की तबियत ठीक नहीं है और यह जाने से मन कर रही है ..मेरी तोह सुनती नहीं तुम hi केहदो श्याद तुम्हारी बात मानले …”और साइड से नज़र बचाकर निशा को आँख मार दी …जिसको मनु न देख पाया पैर निशा इस पैर मुस्कुरा padi..manu कहीं न कहीं खुद को आज गुस्से की कैद में महसूस कर रहा tha…pata नहीं उसे गुस्सा क्यों आरहा था ...पैर जब भी निशा को देखता उसे हु सन याद आ जाता की चिंटू और निशा ….”बस बहुत हुआ जो काम करना है करूँगा और जल्दी निकल जाऊंगा यहाँ से वार्ना आज पता नहीं क्या हो जाये”

मंजू “ तुम दोनों बात करो मैं अपने बेटे के लिए चाय लती हूँ बीटा आईएम सो सॉरी अभी मैं थोड़ी ज्यादा परेशान हूँ तुम निशा के साथ बैठो मैं आती hun”manju ने जाते हुए फिर से निशा को आंख मार देती और ठूंस उप का सिग्न दिया उसे ताकि और टाइम स्पेंड कर सके निशा मनु के साथ …जहाँ आज मंजू अपने पिता की तबियत को सुनकर परेशान थी पैर हु अचे से जानती थी इतना दूर होने की वजह से चाहे कितना भी परेशां हो ले पैर बदलना तोह था नहीं पैर यहाँ एक तरफ अपने बाप की तबियत को ुस्कने अपने अंदर दफ़न सा कर लिया था और निशा को एप्रोच करने में लगी हुई थी..

अब निशा और मनु अकेले थे मनु कोशिश में लगा हुआ था की निशा का चेहरा काम से काम देख सके …पैर निशा एक तक उसे देखने में लगी थी …दोनों में से कोई कुछ नहीं बोल रहा था …जहाँ निशा सिर्फ मुस्कुराकर मनु को देख रही थी वहीँ मनु जब भी उसकी मुस्कराहट देखता तोह उसका गुस्सा और बाद जाता …जब यह मुस्कराहट उसके बर्दास्त के बहार हो गयी तोह हु उठा और बहार की तरफ जहां उनका बड़ा सा लॉन था जाने लगा निशा भी उसके पीछे जाने लगी…

मनु “निशा मैं तुमसे कुछ पूछूं सच कहोगी plz..”manu ने लगभग जल्दी से हिम्मत करके पूछा..

निशा “तुमको मुझसे ऐसे पूछने के लिए इज़ाज़त की कबसे ज़रूरत पड़ने lagi..jo पूछना है पूछ सकते हो ??”

मनु “निशा तुम्हारे नाना की तबियत ठीक नहीं है और तुम जाने को मन कर रही हो जानती हो तुम्हारी वजह से तुम्हरी मम्मी भी नहीं जा पाएंगी …क्या तुम अपनी मम्मी को अपने नाना को देखने में हेल्प नहीं कर सकती हो “

Nisha”per अगर मैं वहां गयी तोह पता नहीं कितने दिन लगेंगे और क्या पता कितना टाइम रुकना पड़ेगा वहाँ अब मैं कर hi क्या सकती हूँ…”

मनु “कर सकती हो तुम सब कर सकती हो अपने नाना को देख भी सकती हो और अपनी मम्मी को भी अपने नाना से मिलवाने में हेल्प कर सकती हो ..”

कैसे “?? निशा

मनु “वहीँ जाकर वहां रुक कर और वहीँ पढ़कर ..”

निशा “नहीं मैं नहीं रह सकती वहां और पड़े तोह वहां बिलकुल नहीं …मेरे बस में नहीं है …”

मनु “ क्या मैं दोस्त के नाते तुमसे इतना भी नहीं मांग सकता अगर तुम मुझे अपना मानती हो तोह तुम अब आगे कोई बहस नहीं करोगी तुम न सिर्फ वहां जाओगी बल्कि वहीँ पड़ोगी भी …तुम्हरा फ्यूचर बन अजेयगा वहां…”

Nisha”tumne यह कैसे कह दिया की मेरा फ्यूचर सिर्फ वहीँ हो सकता है क्या पता मेरा फ्यूचर मुझे यहाँ दीखता हो तोह ???”मनु को देखते हुए …

मनु मैं में “हाँ अब तोह फ्यूचर यहीं डिकेहगा न तुम्हे उस चिंटू के पास …निशा क्या है उसमे ऐसे जो तुम जैसी अछि लड़की उसके जाल में फास गयी hai…nahi मैं यह नहीं होने दूंगा….”

मनु “निशा देखको तुमको मेरी कसम तुम अब कोई फालतू बात मत सोचो और वहां जाओ और वहीँ अचे से पड़ना और अपना ख्याल रखना अब और बात नहीं और अगर मेरी कसम के कुछ मायने हो तोह मान लेना और वहीँ रहना …मैं अब चलता हूँ..” मनु ने जबसे यह सुना था की निशा अपना फ्यूचर यहाँ देख रही है उसे लगा चिंटू में देख रही है उसके लिए निशा के पास खड़ा होना भी मुश्किल हो गया ..वह अपनी कसम देकर वहां बिना आगे कुछ बोले निकल आया …

जहाँ मंजू अपने हाथ में चाय का कप लिए आयी थी ..उसने लॉन में देखा जहाँ निशा अकेली कड़ी थी उसने पूछा “मनु कहाँ है “निशा के कंधे पैर उसने अपना हाथ रखा तोह उसके हाथ से चाय का कप ज़मीं पैर छूटकर गिर gya.uska दिल कांप सा गया सामने निशा की आँखें आसूंओं से तर थी …

Manju”kya हुआ मेरी बची और मनु कहाँ है ..”

निशा “मम्मी हु चले गए और जाते जाते कसम देकर गए हैं की मैं आपके साथ नाना के पास नई ज़ीलैण्ड चली जॉन ..और वहीँ पड़े भी करूँ …और कहते हैं की अगर उनकी कसम का कोई मैना हो तोह मान लूँ …अरे उनका सिर्फ कह देना मेरे लिए उस आर्डर सामान है जिसे पूरा करने के लिए मैं कुछ भी कर jaun..per एक बार तोह मुझसे ठीक से मिलकर जाते हु…?”

मंजू “न बेटी तू खुद सोच टूट ओह उसे प्यार करती है ..पैर उसके लिए चाहे तू सिर्फ दोस्त हो पैर उसने जब कहा होगा तोह क्या उसने तुझे एक बार भी देखा ???”

निशा रट हुए” नहीं माँ आज एक बार भी नहीं देखा ठीक से मुझे”

मंजू” न मेरी बची रो मत तू सोच कहीं न कहीं उसे भी तोह अपनी दोस्त से बिछड़ने का गम होगा न तोह तू एक बार उसके दिल का भी तोह सोच ..उसने कितनी हिम्मत की होगी की तुझे उसने यह कहा होगा ..एक बार उसका त्याग भी देख खुद की दोस्ती उसने लगा दी है डाव पैर ..और जब लगा होगा की श्याद तू आसानी से न मने तोह अपनी कसम देदी hogi..sochkar देखना इस बारे में भी क्या उसकी कसम नहीं मानेगी बाबू”

निशा “माँ उनकी कसम कैसे नहीं मानूगी पैर एक बार मुझसे मेरी मर्ज़ी भी पूछ लेते न खैर कोई बात नहीं जब उन्होंने कहा है तोह उनकी बात निशा पूरी न करे ऐसा हो नहीं सकता ..पैर माँ उनसे दुरी कैसे सहूंगी में ..”निशा ने एक निश्चय के साथ अपने ांसो पूछते हुए कहा ..

मंजू “बीटा हु सब तू मुझपर छोड़ दे हु सब बाद में देखेंगे ..अभी तयारी कर चल ाचा आज चिंटू क्यों नहीं आया..”

Nisha”maa आज पता है उसने स्कूल में क्या कहा ..??”

मंजू “ देख बीटा मनु की बात अलग है ,,पैर मैं सच केहड़ेटी हूँ आज मुझे उस चिंटू के बचे के लाछां ठीक नहीं लगते ,,कुछ अजीब सा गड़बड़ इंसान लगता है हु मुझे..??”

निशा “अरे मम्मी मुझे भी पहले हु अजीब लगता था …और पता है मैं खुद उसे बेहूदा इंसान कहती थी..”

मंजू “तोह फिर”

निशा “मम्मी आज सुबह जब मैं स्कूल गयी तोह उसने मुझे बुलाया और पूछा क्या मैं मनु से प्यार करती हंट ओह मेरे पैरों के निचे से ज़मीं खिसक गयी …मैंने सोचा की इसको क्या जवाब दूँ तोह उसने मुझे अचनाक से भाभी कहना शुरू कर दिया और बोलै की अब मनु उसके भाई सामान है तोह मैं भी उसकी भाभी लगी न कसम से सरम से गड गयी थी मैं …उस पल “

मंजू “फिर “

निशा “फिर लंच के टाइम उसने कहा एक भाभी के हक़ से क्या मैं अपने लक्समन सामान देवर को अपने हाथ से खिला नहीं सकती क्या?? मुझे एक भाई सामान इंसान यह कहे और में न कर दूँ मैं उसे अपना भाई समझकर उसे अपने हाथ से खिलाया और उसने कहा की एक बार अपने देवर को अपना भाई मानकर एक बार हु हुग चाहता था …सो मैं भी भाई मानकर उसे गले लगा liya..mummy हु इतना बुरा नहीं है. जितना हम उसे सझते हैं…”

मंजू “देख एक बात कहूँगी अभी भी तू उस से दूर रहना उसकी आँखें ठीक नहीं लगती मुझे …अब दूर क्या रहना अब तोह वैसे भी परमानेंट दूर हो गयी अब तू ….”

निशा की जैसे दुखती राग पैर हाथ रख दिया था मंजू ने ..उसकी दूर वाली बात पैर फिर ांसो चालक आये उसके ..

मंजू “बीटा कब तक रोयेगी एक बार उसके बारे में और अपनी माँ के बारे में भी सोच जिसका बाप बीमार है पैर नवासी को नाना से ज्यादा अपने फ्यूचर हस्बैंड की फ़िक्र है ..(इस बात पैर रट हुए भी निशा मुस्कुरा पड़ी)”

खैर दोनों माँ बेटी त्यार हुई और तयारी में लग गयी अपनी apni..nisha के नाना उसके छोटे मां के साथ रहा करते थे …उसकी नानी अब दुनिआ में नहीं थी ..और उनका बड़ा बीटा गांव में अपनी फॅमिली के साथ रहा करता था जिसकी वहीँ पैर गोवत जॉब thi..per छोटा बीटा नई ज़ीलैण्ड में था जिसने वही की लोकल गर्ल से शादी की थी और जब निशा के नाना को एक बार अपने पोते को देखने का दिल किया तोह हु चल दिए नई ज़ीलैण्ड जहाँ उनका दिल अपने पोते और नयी बहु के साथ ऐसा लगा की वहीँ के होकर रह गए और अब उनकी तबियत के चलते निशा और मंजू से मिलने की उनकी ीचा थी क्युकी पता नहीं कब उनका टाइम आज जाये ऐसा उनका मन्ना था ..सो जाने से पहले हु एक बार निशा को और अपनी बेटी को देखना चाहते थे..

खैर निशा और मंजू के चलने का टाइम हुआ तोह निशा एयरपोर्ट पैर बार बार देख रही थी उसकी आँखें अपने प्यार मनु को देख रही थी ..पैर मनु होता तोह आता जिसपर उसकी आँखें मनु के न आने पैर चालक आयी…

जिसपर मंजू ने उसे मानते हुए कहा “बीटा कितना रोयेगी तू …खुद सोच उसपर क्या बिट रही होगी हु भी तोह खुद से तुझे दूर कर रहा है ….मैंने उसकी आँखोने में तेरे लिए परवाह देखि है …और मैं इतने दिन में उसे अगर सही समझी हूँ तोह हु भी तेरी तरह आंसूं बहा रहा hoga..ab तोह मान जा जब टाइम आये तोह सारा बदला ले लेना उससे मैं कुछ नहीं खाउंगी..”

जिसपर निशा को थोड़ी हिम्मत मिली की मनु को उसकी परवाह है ..फिर उसने अपने ांसो पूछे और जमीं से हाथ लगाकर उसे सर पैर लगा कर कहा” आप जहाँ भी हैं खुश रहिएगा आपकी बात मेरी लिए सब कुछ है दुरी हमे अलग नहीं कर सकती जब भी वापस आउंगी आपसे अपनी मोहब्बत का सारा बयाज वसूल कर लुंगी इस ज़मीं को चुकार आपके प्यार को साक्षी मान कर कसम कहती हूँ जब भी निशा वापस लौटेगी हमेशा हमेशा के लिए आपकी होगी यह कसम है mujhe..is धरती की मानव hi निशा का पति होगा उसके शिव कोई नहीं कसम है मुझसे इस मिटटी की ”

Manju”mitti की कसम कुछ ज्यादा फ़िल्मी नहीं हो गया मेरी अम्मा हम एयरपोर्ट पैर हैं तोह तुझे कहाँ से इसमें मिटटी नज़र आ रही है जिसकी कसम खा रही और हु इतनी बड़ी कुछ तोह शर्म कर माँ साथ में है नाना को देखने जा रही है और बात कर रही है अपने होने वाले हस्बैंड की पता नहीं शर्म साड़ी बेच दी है इस लड़की ने ..”मंजू ने मज़ाक में निशा को छेड़ते हुए कहा

निशा “मम्मी प्ल्ज़ don’t तैसे में …वार्ना फिर से हिम्मत टूट जाएगी मेरी और रो पड़ूँगी मैं …आप जानती हो क्या बिट रही है मुझपर फिर भी..”

मंजू “ाचा चल तेरे पापा भी आनेवाले होंगे …” इतना कहा hi था की सामने से अशोक आता नज़र आया और उसके बाद तीनो ने फ्लाइट पकड़ी और चल दिए नई ज़ीलैण्ड की ोूर.

मनु अपने घर की चाट पैर उसी समय अकेला अँधेरे में हाथ में कोई पिछ थी उसके …

Manu”pagalo की तरह प्यार किया तुमसे पैर मिला क्या बेवफाई पता नहीं क्या तुमसे गुस्सा होना भी चयन तोह गुस्सा नहीं हो सकता पैर तुम्हारी इस बात को उस बेवफाई को कैसे भूल सकता हूँ main..per आज तुमको खुद से दूर जाते देखना भी बर्दास्त नहीं हो रहा क्या करूँ कुछ समझ नहीं अत …और उस चिंटू के साथ ..नहीं निशा यह मुझे बर्दास्त नहीं है की मेरा प्यार किसी और की बाहों में हो और हु मेरे लिए नफरत रखनेवाला चिंटू ठु है मनु तुझपे जो प्यार में आंसू बाह्य तू लानत है तुझपर मनु जो किसी बेवफा के लिए तेरी आँखों से एक बून्द भी आंसू निकल तोह ..निशा आजके बाद मनु के मुँह पैर नाम भी नहीं होगा tumhara….aaj अभी इसी वक़्त से भूल जाऊंगा तुम्हे निशा हमेशा हमेशा के लिए. कसम है मुझे .और इसके साथ hi उसने भी एक कसम ले ली और निशा की हु पिछ अपने हाथों से फाड़कर चाट पैर चलने वाली हवा में सिर्फ अपने हाथ खोले जिसमे निशा की तस्वीर और उसकी हर याद को मनु ने हवा और समय के हवाले कर दिया था..

हवा का तेज़ झोंका निशा की हर याद और उन तस्वीर के टुकड़ो को मनु के हाथों से और दिल से लेकर उड़ चला था …कसम दोनों ने hi खायी थी एक ने आपने बनाना की कसम तोह एक ने हमेशा के लिए भूल जाने की kasam…ab किसकी कसम पूरी होनी थी यह तोह वक़्त hi जनता है या दोनों की किस्मत …:हिंट:

वहीँ किसी बड़े से आलिशान बंगले में एक अनजान शख्स चेयर पैर बैठा tha…kisi और hi दुनिआ में गम था उसके कमरे की साड़ी लाइट बंद thi…us रूम में एक अलग सी शांति थी जैसे उस इंसान को भी उस शांति के साथ अपना ताल्लुक़ हो पैर. अचनाक से एक और इंसान ने उस रूम की लाइट ों की और अपनी आवाज़ से उस शांति ओस तन्हाई को रोक दिया “मालिक वह मैडम आ गयी है आपका वेट कर रही हैं..”

हु इंसान खड़ा हुआ उसका पूरा शरीर किसी अचे पहलवानो से भी ाचा और एक अचे एथलिट के जैसे था उसकी आगे कोई 36 के आस पास होगी …उसके चेहरे से कोई भी बता सकता था की यह किसी ऊँचे खानदान का रईसी में पला बड़ा इंसान होगा उसके चेहरे की चमक के साथ उसकी कद काठी भी अछि खासी थी उसकी हाइट 6’ पूरी थी उसकी चेस्ट कोई 52 के आस पास होगी उसके बाइसेप्स 25 के आस पास और वैस्ट लाइन उसकी कोई 36 होगी तोह आप अचे से इमेजिन कर सकते हैं कैसे लगता होगा …

खैर हु उठा और चलता हुआ उस दूसरे इंसान के पास आया .चुप चाप वहां गया जहाँ हु लेडी उसका इंतज़ार कर रही थी…

उस लेडी ने उस आदमी के आते hi बड़े अदब से झुककर उसे अपना शिस्टाचार दिखया जिसे उस आदमी ने सर झुककर कुबूल किया ..

उसके बाद उस आदमी ने पहिचे देखा जहाँ उसका हु नौकर हाथ में एक ट्राली को धकेलता हुआ लारहा था जिसपर 2 स्कॉच और 1 व्हिस्की की बोतल राखी thi…jise उस लेडी ने तुरंत अपने हाथ में ले लिया और उस नौकर और बहार जाने का इशारा किया …और उस ट्राली को धकेलते हुए रूम में ले आयी जिसमे एक चेयर पैर बैठा हु आदमी अपने में खोया हुआ था …उसने ट्राली उसके पास लगा दी जिसकी आवाज़ से उसे अचानक से ध्यान आया और हु उस ट्राली पैर राखी स्कॉच की बोत्तल उठाकर सिद्ध मुँह से लगा लेता है और सिद्ध अपने हलक में उतरने लगा था …

जैसे उसे कड़वी शराब में अपने दर्द को ख़तम कर देना चाहता हो हु औरत सिर्फ पास कड़ी चुपचाप उसको यह करते हुए देख रही थी …जिसकी आँखों से भी कुछ बुँदे निकल चुकी थी उसके इस तरह से कूद को दर्द देते हुए …पैर उसकी छुपी नहीं tuti…usne चुपचाप अपनी उन बूंदूं को अपने रुम्मल से चोरी से पूछ लिया ..उस आदमी का दर्द श्याद इतना ज़ादा होगा की जिसमे उससे शराब की कड़वाहट काम लग रही होगी या उसे इसकी आदत होगी…

उसके हलक से लगी बोतल अब ख़तम हो चुकी थी उसने बोत्तल को अपने होतोओं से अलग किया और उस औरत को देखा उस औरत को देखकर उसने अपनी आखोंसे इशारा किया जिसके बाद हु औरत एक और रूम जो शायद बैडरूम होगा किसी का उसमे चलदी हु आदमी भी लड़खड़ाता हुआ चल दिया …जहाँ हु औरत बीएड के एक साइड में कड़ी थी शयद उस आदमी के इतंज़ार में …

उस आदमी ने एक बार उसके हसीं जिस्म को एक नज़र देखा उस औरत का जिस्म किसी क़यामत से काम नहीं था …उसकी उम्र कोई 28 के आस पास होगी और उसका हु कटीला जिस्म देखकर कोई मुर्दा भी अपना लैंड पकड़ कर कहे “एक बार बस लैंड को छूट का यह हसीं जैम मिल जाये तोह मौत भी माज़ूर हो..”

उसकी हाइट कोई 5’ 9’’ के अस्स पास होगी …इसका मतलब अछि खशी लम्बी होगी …और उसका फिगर कोई 36डी , 28, 38 के अस्स पास होगा मतलब उसकी कमर किसी हसीं बल कहती मोड़ के जैसे थी …

उस आदमी ने उस औरत के पास आकर उसके जिस्म को छुआ और उस औरत को उस छुअन से एक अलग hi मरदाना मज़ा मिला जिससे उसके मुँह से हलकी ससिकी निकल gayi…issssssshaaa !!!

जिसके बाद हु आदमी और वाइल्ड हो गया और उसने उस औरत की दोनों चूचियों को अपने दोनों हाथों से थाम कर जोर से भींच डाला जिसमे उस औरत को बेइंतेहा दर्द हुआ …पैर उसके मुँह से कोई आवाज़ अभी न निकली …पैर उसकी आँखों का दर्द देखकर उस आदमी को शायद थोड़ा रेहम आ गया होगा जो उसने थोड़ा आराम से चूचियां दबाने शुरू करदिन उसके बाद तोह जैसे उस औरत का हाल बदल गया …

उस का मज़ा उसके मुँह से निकलने वाली हर सिसकी िस्स्सस्स्स्सहायआ!!!! Immmmmaahaaaaa!!!!!.............hayyyyy!!!!!!!!!! इस्स्स्सस्स्स्शह्ह्ह!

जैसी आवाज़ों से समझ सकते hain…uske निप्पल सख्त हो चले थे ….उसकी छूट में अब हु मीठी हलचल मच गयी थी ….जिसका मतलब था ….की उसकी चुदाई की इच्छा और ज्यादा बाद चुकी थी शरीर का टेम्परेचर इतना बाद गया था की शायद कोई चुकार देखे तोह कहे बुखार है …पैर यह बुखार उस चुदाई का था जिसके चलते उसकी साँसे अब भरी हो चली थी …उसने अब खुद पहल की और बेथ गयी निचे उस आदमी की पेंट की ज़िप खोली उसने……

जज़्ज़िज़ीज़ज़्ज़ज़्ज़ज़प …ज़िप खोलकर उसने आपने हाथ बढ़ाकर उसका लैंड हाथ में लिया जो अभी अआधा खड़ा था ….उसने जब उसे देखा तोह उस औरत के हाथ से बड़ा था उस आदमी का लैंड उसने जब उसका लैंड देखा तोह …उससे अपनी खुद की गर्मी के चलते रुकना मुश्किल हो चला था ….उसने सिद्ध उस लैंड जिसका साइज कोई 8’ के अस्स पास होगा मुँह में लिया और चूसने लगी और चुस्ती रही धीरे धीरे लैंड अपने पुरे ज़ोर पैर आने लगा था और उसके मुँह में आना मुश्किल होचला था …क्युकी लैंड की गोलाई या मोटाई भी बाद चली थे किसी बेसबॉल बात के जैसा सख्त हो चला था उसका लैंड एक शराब की गर्मी उसपर गोरी चिति हसीना का लैंड को चूसना किसी लल्लू का भी लैंड खड़ा करदे ..तोह हु तोह पक्का सांड जैसा मर्द था और उसपर उसका लैंड कड़क उस औरत का अब मुँह में लेना भी मुश्किल था सो उसने मुँह से निकला …और हु आदमी भी शायद आपने पुरे जोश में आ चूका था …सो उसने उस औरत के जिस्म से एक एक कपडे को उससे जुड़ा कर दिया था ..और उसके जिस्म की तरफ देखा क्या सांचे में तराशा हुआ जिस्म था …बिना दाग का गोरा बदन ..उस पैर उसकी शानदार गज़ब की कासी हुई चूचियां जिनके सीधे कड़क निप्पल इस बात को चीख -चीख कर कह रहे थे …की एक बार हमे छू लो …उसके उन गोरी चूचियों में लाल निशाँ इस बात का सबूत था की कैसे उनको ज़ोर से मसला हुआ tha….or उसका कैसा हुआ पेट इस बात का पुख्ता सबूत था की उस औरत को कसरत करने और खुद को मेन्टेन रखने में महारत हासिल है …उसकी जंघे देख कर कोई किसी चिकने पेड़ के बारे में सोच सकता है …उस आदमी ने जग उस औरत को देखा तोह उसने सबसे पहले उसकी छूट की तरफ देखा उसकी छूट फुल्ली शवेद थी जिसपर बालों का नामो निशान नहीं था कहते हैं छूट छूट में रंग का hi अंतर नहीं होता है किसी किसी को शयद खुद उपपरवाला अपने हाथ से तराशता है …जिसका जिस्म शायद उसकी बनायीं इस दुनिआ में केहर ध देती है ..उस औरत की छूट भी कुछ ऐसी hi थी ..पूरी गोरी जिसके होंठ अभी थोड़े गल्ले थे जिनसे छूटा पानी इस बात का इशारा था की उसको चुदाई की कितनी तालाब है …उस आदमी ने जब उसकी छूट को देखा तोह उसके लैंड ने एक अलग ज़ोरदार ठुमका लगाया …

और उसके बाद उस आदमी ने खुद को भी अपने कपड़ूँ से आज़ाएद किया और उस औरत को अपनी तरफ कीचा और सिद्ध एक किश …किया जिस में उसके होंठ उस औरत के होटों की मिठास पिने लगे और उसके एक हाथ ने उसकी एक चुकी को मसलना चालू कर दिया ….और दूसरे हाथ ने उसकी गिल्ली छूट को मसलना …एक तरफ़ा हमला हो तोह शायद कोई शी भी सके पैर यहां तोह हुम्ला भी 3 तरफ़ा था ..उस औरत की हालात इस बात से पता लगा सकते हैं आप की ..कोई 5 मिनट्स में hi उसका पानी निकल गया …सिर्फ छूट मसलने से hi …और पानी hi नहीं साथ में उसका पिशाब भी (squirt)jisme उस आदमी का हाथ भी गिल्ला हो गया …पैर शायद हुस्न और जिस्म का नशा …शराब और शबाब का नशा उसके सर चढ़ चूका था उसने जैसे hi उस औरत को झड़ते देखा …उसके बाद सिद्ध एक हाथ से जो उसकी एक चुकी पैर चल रहा था …सिद्ध उसका गाला पड़ा और थोड़ा डब्बा दिया जिससे उसकी औरत की नसे अकड़ आगये और उसका गोरा चेहरा लाल हो चला था …एक दम लाल …उसने फिर सीधा उसे बीएड की तरफ फेख दिया …हु औरत भी शायद पानी निकल जाने के बाद थोड़ी ढीली हो चली थी ..सो सिद्ध बीएड पैर धड़ाम से गिर पादि …

जिसके बाद हु आदमी सीधे बीएड पैर चढ़ा और उसका गरमा गर्म लैंड सु औरत को अपनी छूट पैर लगा हुआ महसूस हुआ …और जब उसे छूट पैर लैंड महसूस हुआ …तोह उसने अपना हाथ निचे ले जाकर उस लैंड को अपनी छूट के छेद पैर लगया ..और बाकी का काम उस आदमी के डुमार झटके ने कर दिया …..खाआक्कच्च ..पानी से लबालब भरी छूट में आवाज़ के साथ लैंड ने अपनी एंट्री मार ली …जिसके साथ hi उस औरत ने एक सिसकी ली ….iiiisssssshaaaaaa!!!!!!!!!!!...araaaammmmmmmmm..haayyyyyy उसके बाद उस आदमी ने उस औरत के दोनों पेअर उठा लिए और अपने कंधे पैर रख लिए और तूफानी झटके देने शुरू कर दिए….

झटके इतने दुमदार थे की हर झटके पैर उसकी सीसिसकी के साथ उसका पूरा शरीर हिल जाता …खास टूर पैर उसकी भारी रसीली चूचियां हर झटके के साथ उप्पेर निचे एक ताल मेल से हिल रही थी ….उस आदमी का हर झटका उस औरत की छूट के आखिरी हिस्से पैर उसे मह्सूस होता था …जहाँ शायद आज तक hi कोई लैंड पूछा हो ….उसे कितना मज़ा आ रहा था …आप इस बात से समझ सकते हैं की उसका पानी 15 मं में एक बार और जोर के पिशाब के प्रेशर के साथ निकल गया और कोई 30सेक् के लिए जबरदस्त ओर्गास्म हुआ उसे …तब तक के लिए भी उस आदमी ने उस पैर कोई रेहम नहीं किया उसने अब उसे गम्य और घोड़ी बनाकर अपना लैंड एक बार में सिद्ध उत्तर दिया और उसके लम्बे बाल अपने हाथ गुल गुमा कर एक लगाम की तरह खींच लिए और फिर से लगा तूफानी झटके ….हर बार उस औरत के झटक के साथ मज़े और दर्द जो अब उसकी छूट में महसूस होने लगा था ….बुरा हाल tha…per फिर भी उस आदमी ने उसे …ज़ोर के साथ चुदाई जारी राखी …कोई 20 मं बाद में अब शायद हु आदमी भी झड़ने के कागार पैर था …

पैर उस औरत की हालत अब थकन और कोई 4 बार झड़ने से खस्ता हो गयी थी ….पैर फिर भी हु आदमी लगा हुआ था की 5 बार उसका पानी छूट गया ….पिशाब के साथ ….वह आदमी भी अपना लैंड निकाल कर उसे इशारा करता है …तोह हु अपनी जगह से उठती है और उसका लैंड मुहमे लेकर ज़ोर से चूसने लगती hai…jisper शायद आपने अंतिम पालो के चलते उस आदमी ने उसके सर में आपने आखिर चाँद झटके उसके मुँह में लगा कर अपना लैंड जबरदस्ती उसके हलक में उतार दिया और अपना माल उसके पेट में उत्तर दिया …फिर उनसे उसका सर छोड़ा जिसपर उस औरत ने उसका लैंड चूसा और बचा हुआ माल भी चूस लिया …जिसके बाद दोनों बीएड पैर गिर गए…

थोड़ी देर ..बाद हु औरत उठी और “मालिक चलती हूँ आप और न पीना ..”

हु आदमी “ठीक है पैर मालिक कब तक कहोगी मुझे ..”

औरत “ आप मेरे लिए मालिक है और रहेंगे हमेशा ..वर्ण कोण कोठे की रंडी फातिमा को आज़ाद करता ..आज सर उठाकर आपके ऑफिस में काम करती हूँ …आपको नहीं कहूं तोह किसे कहूं मालिक आपने उसे नयी ज़िन्दगी दी है जिसे खुद उसके पैदा कर्णवाले भी भूल चुके थे …आप हमेशा मेरे मालिक hi रहेंगे..”

हु आदमी” पैर आज़ादी के बाद भी तोह तुम वही करती हो जो वहां करती thi…tum को कहता हूँ अभी भी चाहो तोह कहीं भी सटले हो जाओ …मैं देख लूंगा…”

Aurat”malik आपने आज तोह कह दिया आगे से न कहना …आप कैसी बात करते हैं …वहां मेरी रूह तक को हर रोज़ नोचा जाता था …रंडी का मतलब क्या होता है …कोई रंडी के दिल से पूछकर देखे …यहाँ सिर्फ आप हैं और आपके साथ मेरी मर्ज़ी भी शामिल है isme..so आप खुद को न जिम्मेदार मने इसके liye….verna रण्डिकाहने की फातिमा शेख यहाँ की शबनम नहीं होती ..मालिक मुझे आपसे कोई शिकत नहीं है बस आप खुद से मुझे दूर न करेने और मुझे अपने साथ hi रहने दें यह मेरी आखरी इल्तज़ा है आपसे..”

आदमी “ठीक है तुम जैसे चाहो तुम्हे खुली आज़ादी है …तुम जो चाहो करो ाचा ..अपना ध्यान रखना “और हु उठा और बाथरूम की तरफ चल दिया …

उसके बाद हु नंगी hi उठी और आपने कपडे जो ज़मीं पैर बिखरे थे उठाया और चलदी रूम से बहार…

हु आदमी बहार आया नाहा कर बाथ रूम से और आकर नंगा hi अपने दूसरे रूम की तरफ चल पड़ा ,हाथ में एक और स्कॉच की बोत्तल लेकर ..जहाँ शयद उसके नौकर ने पहले से साफ़ कपडे उसके बीएड पैर रख दिए थे …उसने कपडे पहने और सामने राखी तस्वीर जिसमे कोई बचा और कोई और औरत उसके साथ थी शायद कोई फॅमिली फोटो thi..use हाथ में लेकर …”ी मिस ु माय लव माय ओनली लव ..माय लाइफ माय वाइफ ,,,एंड माय डरेस्ट सोन मोहित कितना मिस करता है तुम्हारा यह बाप यह हाथ में बोत्तल इस बात का सबूत है क्यों छोड़ गए तुम दोनों मुझे तनहा इस दुनिआ में अकेला ..की जो इंसान जिसने कभी ज़िन्दगी में शराब को छुआ तक नहीं था आज डूबा है इसी में …ी मिस ु बोथ …”

एक ज़ोर दार धाड़ के साथ उसके आंसू भ चले …उसका रोना इतना दर्द से भरा था की पास के सर्वेंट रूम तक जाती उसकी आवाज़ को सुनकर हु नौकर भी आंसू बहाने लगता है …”हे उपपरवाले इतना ाचा इंसान आज कितना अकेला और तनहा है ..क्या तुझे ज़रा भी रेहम नहीं है अचे लोगों पैर ..??क्या यही है तेरा इन्साफ हु इंसान कितना तनहा है जिसने ज़िन्दगी भर शराब को हेट किया आज उसी में डूबा हुआ है कुछ तोह रेहम कर मालिक मेरे अचे मालिक पैर …”उस नौकर ने रट हुए उपपरवाले से शिकायत करते हुए कहा..

कोण था यह आदमी इतना अकेला तनहा क्यों था और क्यों बना ऐसा …और मनु की और निशा की कसम का क्या ..होगा …सबसे बड़ा सवाल इस आदमी का इन सबमे क्या काम …:हिंट:
 
अपडेट 54


बचपन की यादें

कोण था यह आदमी इतना अकेला तनहा क्यों था और क्यों बना ऐसा …और मनु की और निशा की कसम का क्या ..होगा …सबसे बड़ा सवाल इस आदमी का इन सबमे क्या काम …

अब आगे.....

मनु को कहीं न कहीं चिंटू और निशा पैर बहुत गुस्सा आ चूका था पैर …मनु ने निशा को नई ज़ीलैण्ड भेजकर निशा को सेफ कर दिया था चिंटू से …चाहे खुद हु निशा पैर गुस्सा था पैर कहीं न कहीं उसके इस गुस्से से निशा भी सेफ hi हुई थी चिंटू के गंदे दिमाग से …पैर चिंटू को जब अगले कुछ दिन बाद जब पता चला की निशा ने स्कूल और देश दोनों छोड़ दिया है …उसका पारा और नफरत दोनों मनु के लिए बेहिसाब थे …उसके दिल में अब मनु को लेकर बेहिसाब नफ़रत और गुस्सा भर गया था …

उसने अगले दिन जब मनु क्लास में आया तोह मनु का गाला पकड़ लिया और कहा” साले चूतिये यह सब क्या है तूने निशा को स्कूल और देश से निकल व दिया साले तुझे छोडूंगा नहीं मैं ….”

मनु अपने गले पैर उसका हाथ पकड़ कर शांति से उसके हाथ को देखकर बोलै “हाथ हटाए चिंटू…”

चिंटू “साले तूने यह कैसे सोच लिया की चिंटू तुझे इतनी आसानी से छोड़ देगा …तुझ जैसे दो टेक के इंसान को जब चहुँ मसल सकता हूँ …”

मनु “ हाथ हत्ता chintu…!”manu ने थोड़ा ज़ोर से कहा आज पहली बार था की साड़ी क्लास के सामने चिंटू ने मनु पैर हाथ डाला था …और सब भी के चेहरे का रुख दोनों पैर लगा हुआ था …जहाँ सबको चिंटू का डोमिनेटेड करैक्टर सभी को लगता था …पैर मनु की शांत बात से आज सभी हैरत में थे …क्लास टीचर अभी क्लास में नहीं थी क्युकी क्लास शुरू होने में टाइम था …

चिंटू “ साले तुझे मैं जब चयन तब मसल दूंगा साले “””दो टेक के जमादार””””..”

मनु “ हाथ हत्ता चिन्तुउउउउ!!!!” पुरे गुस्से से मनु ने कहा और चिंटू की आँखों में देखा जिनमे गुस्से के मारे लाली चाय हुई थी …जिसे देखकर सभी की आवाज़ के साथ एक बार को तोह सभी को अपना दिल भी रुकने जैसा फील हुआ .

शायद मनु का गुस्सा देखकर सभी को एक बार को यकीं नहीं हुआ की मनु जैसे इंसान जो की हँसता है और हेल्पफुल है शायद hi गुस्सा आता होगा …पैर आज मनु गुस्से से भरा हुआ था …पैर चिंटू का हाथ भी अपनी जगह टिका हुआ था …क्युकी शायद चिंटू का गुस्सा भी अपनी जगह बहुत था या ..चिंटू को लगा होगा की मनु सिर्फ दमकी दे सकता है…

मनु “सुना नहीं तूने हाथ हटा …”

चिंटू “ अबे जा साले तू क्या समझता है डर जाऊंगा तुझसे “”साले दो टेक के जमादार “”..

मनु का शायद अब गुस्सा अपने चरम पैर आ चूका था …उसने एक हाथ से उसके हाथ को अपने गले से छुड़ाया और चटकककककककक!!!!

चटककककककक!

दो चांटे चांटे कहना शायद गलत होगा झनातेदार चांटे चिंटू कैद वो गालो पैर सेक दिए ..और अपने एक हाथ से चिंटू का गाला पकड़ा और उसे धकेलते हुए पीछे तक लेकर गया और दिवार से लगा कर हवा में उठाना शुरू कर दिया ….

“ायककककका हावक्क ावकककककक!! “ चिंटू के घुटते हुए गले से ऐसी आवाज़ आने लगी ….पैर आज शायद मनु को देखकर किसी की हिम्मत नहीं हुई की कोई भी चिंटू को मनु से बचा सके …

मनु ने गुस्से से भरी आँखों के साथ एक बार अपनी गर्दन घुमाकर सबके चेहरे को देखा …और ज़ोर से कहा “साला आज के बाद किसी के भी मुँह से आवाज़ निकली तोह उसका यही हाल होगा …मेरे पापा के नाम पैर निचा दिखने वळून …आगे से किसी के मुँह से हु लव्ज़ निकला तोह हु इंसान इसकी जगह हवा में लटका होगा …और हाँ तुम भी आँखें खोल कर देखलो (लड़कियों की तरफ) चाहे लड़की hi क्यों न हो …कोई रेहम नहीं करूँगा …बहुत शी लिया आज के बाद सभी को जो भी उल्टा बोलै ऐसे hi हवा में लटका होगा …”

मनु को सब अचे से जानते थे की जो बोल्ड एटा है करता जरूर है ..उस पैर बेशक मनु अकेला था पैर उसका शरीर अपने साथ के लड़को से ज्यादा था ..और आज उसकी हिम्मत देख कर सभी की रोज़ उछलने वाली जबान उनके पेट में चली गयी थी…

मनु ने चिंटू की तरफ देखा जो भरपूर हाथ पेअर चला रहा था पैर मनु का हाथ तस से मास नहीं कर प् रहा था या शायद मनु का गुस्सा इतना था की मनु पैर कोई असर नहीं हो रहा था …

“ायककककका हावक्क ावकककककक!! “ चिंटू के मुँह से थूक और उसकी आखों का रंग देखकर सभी की हालत पतली थी …थोड़ी देर पहले जो चिंटू शेर जैसा था अभी खुद की जान के लाले महसूस कर रहा था …

जब मनु को लगा की शायद कुछ देर में चिंटू दम तोड़ दे सो उसने हाथ हैट आलिया और चिंटू जमीं पैर जो कुछ इंच उप्पेर लटका हुआ था हवा में गिर पड़ा ..और ज़ोर ज़ोर से सांस लेने लगा …और खुद की उखड़ी साँसों को सँभालने लगा ..

मनु पलटा और वापस जाने लगा ..

“साले दो टेक कक्क” इससे पहले उसके मुँह से आवाज़ निकलती मनु ने एक बार फिर घूमकर उसका गाला भींच लिया था इस बार और ज़ोर से ..

मनु “ ज़बान के लव्ज़ ज़बान में वापस लेले चिंटू अब मनु ने सहना छोड़ दिया है ….आज के बाद कभी भी मेरे सामने यह दुबारा बोलै तोह दोस्ती के मज़े तोह तूने ले लिए …दुश्मनी क्या होती है सीखा दूंगा तुझे …जा लिमिट समझा अपनी जुबां को ..”

फिर गाला छोड़ दिया चिंटू का और चिंटू भी थोड़ा हिल सा गया दोनों बार के हमले से पैर था चिंटू ढीठ इंसान फिर बोलै “अबे जा बे लैंड डरता है मेरे तुझसे ..जो कर सके कर लेना ..”

मनु घुमा और खींच कर एक तामचा मारा उसके गाल पैर …

chataakkkk!......uske गाल के साथ चिंटू के कान से एक चिडया सी उड़ती चली गयी ….सीसीसीसीसीसीसीसीसिस एक साइड का कान इस आवाज़ से बज उठा …

मनु” अब के बाद लिमिट बुला तोह यह चांटा याद रख लेना शायद औकात याद रहे तुझे …

उसके बाद चिंटू गुस्से से भुनभुनाता हुआ रहा पैर बोलै कुछ नहीं …आज सभी के लिए एक शॉक का दिन था इतना शॉकिंग एक्सपीरियंस जो मनु ने दिया था उससे कोई नहीं उबार पाया और जिसके दम पैर सबने मनु को ज़लील किया हुआ था मनु ने उसे सबके सामने ज़मीं पैर धूल छठा दी thi…or मनु इन सबके बाद अपनी सबसे पीछे की सीट पैर जाकर अकेला शांत बेथ गया …और बाकी सब भी आज के शॉकिंग इंसिडेंट के बाद अपनी अपनी सीट पैर जाकर बेथ गए ..

चिंटू बाकी सब से “आज जो इसने चिंटू पैर हाथ उठाकर गलती की है इतनी आसानी से छोडूंगा नहीं इस “”जमादार “”को हहहह” इतना पीटने के बाद भी चिंटू की अकड़ कायम थी…

इसके बाद क्लास शुरू हुई और सब अपनी दुनिआ मतलब स्कूल में बस्सी हो गए पैर आज मनु का रूप देखकर कईओं के दिल में मनु का खौफ बेथ गया था …पैर क्या कर सकते थे जिसने भी चिंटू को एक हाथ से उठाये हुए मनु को याद किया उसकी हिम्मत वहीँ पैर फ़स हो गयी ….

खैर ऐसे hi कुछ दिन तक चला अब अंतर था पहले से सबके बर्ताव में जहाँ पहले सबका टारगेट मनु था …वहीँ अब सभी के दिल में मनु से डर कहीं न कहीं दुरी बनाये रखने को मज़बूर कर देता था …पैर मनु को भी अब शायद किसी की मतलब उनसब की परवाह नहीं बची थी ..क्युकी उसने उनका अपने अचे बरताव के बाद हेल्पिंग के बाद भी हु चेहरा देख लिया था की कैसे उनसभी ने उसे जलील करने में कोई कसार नहीं छोड़ी थी ..सो उसे अब उनमे से किसी से कोई लगाव या उनकी कोई परवाह नहीं थी…

सब अपनी – अपनी ज़िन्दगी में आगे बाद रहे थे पैर उन सब में चिंटू को मनु के खिलाफ और गुस्से से पागल कर दिया था ..पैर सामने से मनु की ताकत की आगे उसकी हिम्मत अब सामने से वार करने जैसी बची नहीं thi…so उसने प्लानिंग पैर ध्यान देना शुरू किया …

और ऐसे hi एक दिन जब मनु स्कूल से घर जा रहा tha…toh रस्ते में चिंटू मनु से मिला और बोलै …”आबेत ु खुद को समझता क्या है उस दिन का बदला जरूर लूंगा चिंटू नाम है मेरा याद रखना “

मनु “जब टाइम आएगा देखा जाएगा चल रास्ता नाप अपना बहुत बर्दास्त किया तुझे आगे शायद न करूँ सो सोच लेना वीर से हवा में न तंग दूँ तुझे …???”

चिंटू “हाहाहा टाइम ओह कुत्तों का आता है चिंटू तोह तेरा टाइम बनाएगा

“”यह वडा है मेरा आसानी से छोड़ दूँ तुझे यह चिंटू का काम नहीं .

नाम याद रखा आएगा टाइम तेरा भी वर्ण चिंटू मेरा नाम नहीं ,,”

मनु “ मत कर इतना गुमान देखेंगे दम तेरा डरना अब मनु का काम नहीं ,,

जवाब मिलेगा अब तुझे तेरे हर सवाल का फिर मत कहना चिंटू अब तेरा नाम नहीं”

चल रास्ता दे …”

मनु ने जवाब दिया चिंटू को उसीके लहज़े में और अपने रस्ते चल दिया …

चिंटू “ मनु बड़ा उड़ रहा हैं न तू कल मिलेगा जवाब हहहहहह!”

चिंटू की शैतानी हंसी के साथ अपने रस्ते चल दिया …

अगला दिन भी आया सुबह मनु का वही डेली रूटीन वर्क मम्मी की हेल्प और अजय के साथ स्कूल चल देना पैर आज अजय ने पेट दर्द कहा तोह मनु ने उसे आज घर पैर छोड़ दिया क्युकी अजय भी इतना बड़ा तोह हो चूका था की उसे ज्यादा समझने की और देख रेख की ज़रूरत नहीं थी ..और वैसे भी उसने अपने मम्मी पापा से आंख बचा कर मनु को आँख मर दी थी जिसका मतलब पेट दर्द का सिर्फ बहाना था आज पक्का कोई स्पेशल कार्टून मूवी थी ..जिसके चक्कर में अजय ने छुट्टी मरी थी और आँख मरना उसका कोड वर्ड था मनु को की भाई आज अकेले जाओ …मनु क्या बोलता उसके लिए अजय की ख़ुशी भी इम्पोर्टेन्ट थी जिसपर उसने सिर्फ उसे घर का धयान रखने और अपनी आज की पड़े पैर और धयान लगाने को कहा …क्युकी पुष्पी की सख्ती के साथ मनु के साथ अजय की पड़े भी अछि कहल रही थी लास्ट टाइम हु भी अपनी क्लास में 2ंद आया था …सो घरवाले भी जब बचे ाचे रिजल्ट लेट थे सो ज्यादा टूका ताकि नहीं किया करते थे .

खैर मनु अपने रस्ते स्कूल गया और जाकर अपनी सीट पैर बैठा आज चिंटू के चेहरे की चमक अलग hi थी …बार बार हु पीछे मुड़कर मनु को देखता और शैतानी मुस्कराहट पास कर देता …जिसको मनु भी इग्नोर कर देता ….

शायद मनु ने सोचा हो की हसकर यह मनु को गुस्सा दिलाना चाहता था …पैर क्या सुच में ऐसा था …इसका जवाब तोह चिंटू के दिमाग सॉरी शैतानी दिमाग के पास था जिसमे पता नहीं क्या चल रहा था …???

खैर स्कूल का एन्ड मतलब छुट्टी हुई मनु अपने रस्ते चलने लगा रस्ते में एक साइकिल ज़ोर से गुज़री जिस पैर कोई रुमाल से मुँह ढके सवार था …मनु ने ध्यान नहीं दिया …मनु अपने रस्ते चलने लगा …

आगे एक घर के सामने जोकि वहां के अचे दबंग टाइप आदमी था जिसका नाम उस्मान अली था जो की एक गुस्से बाज़ आदमी था और अपनी बीवी से बहुत प्यार करता था …सुना था …वहीँ के लोगों से कईओं ने की एक बार किसी मनचले ने उसकी बीवी का हाथ रस्ते में आते जाते पकड़ लिया था …तोह उस उस्मान ने उसे घर से निकल का बहुत मारा था और जब मार मार कर उसे अधमरा कर दिया तोह उसका हु हाथ जिससे उनमंचाले ने उसकी बीवी का हाथ पकड़ा था उसे तोड़ दिया था …जिसके बाद वहाँ बहुत हंगामा हुआ था ….जो निकलते हुए मनु ने भी देखा था और उस टाइम चिंटू भी उसके साथ था …

उस्मान अली का उस इलाके में बहुत दबदबा था …उसका काम पोलिटिकल सपोर्ट के साथ चलता था सो उसपर पुलिस भी ज्यादा हाथ नहीं डालती थी …क्युकी उसकी पहुँच अछि थी उप्पेर तक और क्युकी हु कई पोलिटिकल मर्डर भी कर चूका था सो लोगो में उसके नाम का खौफ भी ाचा खासा था …अब इंसान जब ऐसे काम करता है तोह उसके चेले और चपटे भी अपनी चमचागिरी में लगे होते हैं ..ऐसा hi कुछ उस्मान का भी रूब था उसके चेले भी अचे खासे हटकते थे क्युकी उस्मान बड़े और उलझे काम जैसे पोलिटिकल प्रॉब्लम में किसी को धमकाना और ज़रूरत पड़े तोह मर्डर भी कर दिया करता था तोह उसका जेल में भी आना जाना लगा रहता था ..जिसपर उसके बड़े आका उसे सही टाइम पैर वहां से बहार भी निकल लिया करते थे …और जब इतने चेले हूँ तोह छोटे मोठे मार पिट और झगडे तोह हु चेले भी देख लिया करते थे वैसे तोह उस्मान बिना वजह किसी से पंगे बाज़ी करता नहीं था या उन कहो की कोई खुद भी सामने से उससे पन्गा लेने से बचता था ….तोह शायद अब आप समझ गए होंगे उस्मान अली को ..उसकी बीवी भी अपने मिया को खूब प्यार करती थी …भले hi उस्मान कहीं भी रहे पैर खाने के टाइम उसकी बीवी अपने हाथ से बनाकर उसे परोसा करती थी और उस्मान भी खाने के टाइम सिर्फ अपने घर पैर मिला करता था …

खैर आज उस्मान की बीवी ..सुमैला अली आज खुद शायद उस्मान के लिए खाना बनाना के मूड में thi..per उसने देखा की सब्ज़ी तोह है नहीं और आज उसका मन था उस्मान के लिए स्पेशल बिरयानी का सो उसने खुद hi ठेला लिया और सूट सलवार में चल पड़ी बाजार ..बाजार से सामान लेकर आ रही थी की अचानक घर के पास की गली में कोई दो हाथ पीछे से आये और उसके मुँह पैर लाल रंग लगा दिया जिससे सुमैला डर गयी और उसने आँखें बंद कर ली जिसके बाद अनडू हाथों ने उसकी चूचियिओं को जैम कर मसाला और सुमैला की चीख निकल गयी और फिर उन दो हथून ने उसे छोड़ दिया सुमैला बुरी तरह घबरा चुकी थी …उसके साथ जो हुआ था उसने उसके होश उदा दिए थे …कुछ देर लगी उसने इधर उधर देखा कोई नहीं था गली सुनसान thi…sumaila के आंसू निकलने लगे और हु तेज़ी से घर भागी बदहवासी में …उस्मान घर के भहर कुछ चेलों से फालतू की तारीफ सुन रहा था चेले भी पूरी चमचागिरी में लगे हुए थे ..की सुमैला बढौसी में उसके पास से गुज़री उसने सुमैला को देखा और अपने पास बुलाया जिसपर दर्री हुई सुमैला दौड़ कर उसके गले लग गयी जिसपर सारे चेले आपने मुँह घूमकर खड़े हो गए और खुद उस्मान भी हैरान था की सुमैला को हुआ क्या hai…jo सुमैला सामने पूरी नज़रपरस्ती रक्ति थी आज सब के सामने उसके गले लगी रो रही थी …इसका मतलब कुछ तोह हुआ है जिससे सुमैला दरी हुई है …

उस्मान “ए सब थोड़ा बहार जाओ “ सब अलग हो गए जिसपर उसने सुमैला से पूछा “क्या हुआ जो तू इतनी बदहवास लग रही है “

जिसपर सुमैला ने सब बता दिया की उसके साथ क्या हुआ है…

उस्मान के तनबदन में आगे लग गयी “बेगम अन्दर जाओ जिसने तुम्हारे पाक जिस्म को छुआ है जिसने इस चेहरे पे यह रंग लगाया है उसे आज दुनिआ नहीं भूलेगी यह उस्मान अली का वडा है “

“ आये कहाँ मर गए सबके सब चलो रे हथियार ले लो आज किसी को दुनिआ से रुखसत करना है..”

सारे चमचे फुर्ती के साथ हथियारों से लेज़ थे …अरे भाई गन्स नहीं ओल्ड फ़िल्मी स्टाइल उस्मान के पास 9मम की सेमि आटोमेटिक पिस्तौल थी पैर बाकी सबके पास लम्बे लम्बे चाक़ू थे …उस्मान गोली से ज्यादा चाक़ू रखवाता था चेलों के हाथ क्युकी चाकू को देखकर लोगो में उसका दबदबा कायम रहे …

सारे लोड होकर कहने लगे “भाई कहाँ चलना है किसका काम करना है???“

उस्मान “ जिसके हाथ में लाल रंग होगा वही होगा आज हमारा शिकार चलो”

चेले “भाई ऐसे कैसे किसको ढूंढेंगे कोई भी हो सकता है “

इसपर उस्मान को गुस्सा आया और चटककक उसका कान गरम कर दिया “साले ऐसे क्या चुटिया समझा है देखा नहीं तुम्हारी भाभी का चेहरा पॉट रखा है तोह इसका मतलब उसके हाथ में अभी भी लाल रंग लगा होगा हम सिर्फ उसे ढूंढ़ना है और काम कर देना है जिसने यह बाद सलूकी की …

चेले “चलो भाई..”



सारे एक साथ कई गाडी मतलब कारों में लड़कर चल दिया तेज़ी के साथ तभी मनु के पास से साइकिल फिर गुज़री और कुछ दुरी पैर उसके पीछे ruki….chirrrrrrr! तेज़ ब्रेक के साथ मनु ने पलट कर देखा तोह पाया की कोई लड़का जो श्याद शामे उसी के जैसे ड्रेस में था श्याद उसी के स्कूल से था उसने कोई प्लास्टिक का बेग फेका उसके तरफ जिसे मनु ने रेफ्लेक्सेस के चलते दोनों हाथों से लपक लिए (कैच किया )..जिसपर उसके अंदर का लाल रंग उसके हाथों को रंग गया मनु इससे पहले कुछ कर पता या बोल पता हु साइकिल सवार तेज़ी के साथ अपनी दिशा में चला गया और मनु के हथून में थमा गया हु लाल रंग का ठेला .......:हिंट:
 
अपडेट 55


बचपन की यादें

सारे एक साथ कई गाडी मतलब कारों में लड़कर चल दिया तेज़ी के साथ तभी मनु के पास से साइकिल फिर गुज़री और कुछ दुरी पैर उसके पीछे ruki….chirrrrrrr! तेज़ ब्रेक के साथ मनु ने पलट कर देखा तोह पाया की कोई लड़का जो श्याद शामे उसी के जैसे ड्रेस में था श्याद उसी के स्कूल से था उसने कोई प्लास्टिक का बेग फेका उसके तरफ जिसे मनु ने रेफ्लेक्सेस के चलते दोनों हाथों से लपक लिए (कैच किया )..जिसपर उसके अंदर का लाल रंग उसके हाथों को रंग गया मनु इससे पहले कुछ कर पता या बोल पता हु साइकिल सवार तेज़ी के साथ अपनी दिशा में चला गया और मनु के हथून में थमा गया हु लाल रंग का ठेला .......

अब आगे.....

वह लाल रंग thela(polyethene बेग ) ने मनु के दोनों हाथ रंग दिए थे ….हर रोज़ दुनिआ में इतना लोग कहते हैं की प्लास्टिक बंद करो बंद करो (आजकल इंडिया में भी गोवत लगी हुई है लोगों को समझने में की प्लास्टिक कितनी डेंजरस है पैर लोग मानते कहाँ हैं …प्लास्टिक हु सर का दर्द है जो 100 साल जमीं में रहने पैर भी डिस्पोसे नहीं होता उल्टा जमीं की उवरका क्षमता मतलब कपाबिलिटी ऑफ़ प्लांटेशन को ख़तम कर देता है दुनिआ में सब लोग लगे हुए हैं अपनी तरफ से प्लास्टिक को कमसे काम उसे करने के लिए होने भी चाहिए यह सभी की जिम्मेदारी है की एपनिया अस पास इस चीज़ को लेकर लोगों को समझया जाये की प्लास्टिक न केवल उनके बल्कि उसे करनेवाले के लिए भी जहर है प्लास्टिक में खाने की चीज़ रखना कहीं न कहीं ज़िन्दगी को कैंसर के पास ले जाने के बराबर है …इस पैर कई स्टडीज और रिसर्च भी हैं चाहो तोह गूगल कर लो … ) मनु यह सब सोचता हुआ अपने हाथ झड़ने लगा …पैर उसका ध्यान उस साइकिल वाले पैर था जिसने उसपर रंग फेंका था …और तेज़ी से गायब हो गया था बोले तोह अपनी साइकिल ? पैर निकल गया था ….

हु तेज़ी से निकल ज़रूर था पैर उसके तेज़ी से जाने पैर भी मनु ने गौर से उसे देखने की कोशिश की थी.

पैर मनु सिर्फ और सिर्फ उसके गले के लेफ्ट साइड पैर एक मास्सा (मोले ) देख पाया था …जिसपर उसने सोचने की कोशिश किट ओह उसे तुरंत चिंटू का नाम याद आया था …क्युकी मनु के साथ में चिंटू काफी टाइम तक रहा tha..or एक टाइम पहले मनु की आगे पीछे भी रहा करता था …वजह थी उसके पापा का आर्डर की उसे मनु के साथ रहना होगा और अछि चीज़ें सीखनी होगी …पैर मनु ने उसे हमेशा दोस्त मन और हमेशा जितना हो सका उसकी मदद hi की थी पैर चिंटू की नज़र में आज मनु सबसे बड़ा दुश्मन था..

पैर एक दिन मनु ने जब चिंटू कपडे चेंज कर रहा था अपने घर पैर तब उसने उसके गले के लेफ्ट साइड में मास्सा देखा था …जिसपर चिंटू ने उसे कहा भी था की यह तोह बचपन से है ….और बात आयी गयी हो गयी थी …पैर आज जब मनु ने वही …मास्सा देखा तोह उसे समझते देर नहीं लगी की साइकिल ? सवार कोई और नहीं चिंटू hi था …

पैर ऐसे सिर्फ रंग फेंक देना और वापस चले जाना उसके समझ से परे था ….कभी कभी इंसान सोचता बहुत है …पैर उसके पास उस समय कोई हल या सलूशन नहीं होता प्रॉब्लम का क्युकी सलूशन तोह तब हॉग आना जब पास में प्रॉब्लम हो …जवाब एपनिया आपमें hi सब कुछ नहीं होता …जवाब बिना सवाल के कोई भी मायने नहीं रखता …और इस बात से अनजान मनु सिर्फ जवाब पाने में अपना दिमाग खरच कर रहा tha…bina यह जाने की सवाल क्या है ????

मनु ने हर तरह से अपना दिमाग लगाया पैर उसे कुछ समझ नहीं आया था की ऐसे अचानक चिंटू का यूँ रंग फेंकना ???

मनु के दिमाग में जो सिक्स सेंस था उसने खतरे की घंटा बाज़ा दी थी

” की कोई न कोई गड़बड़ है …वर्ण चिंटू सिर्फ रंग फेंक कर चला जाये इतना तोह चिंटू शरीफ नहीं है …पैर वजह क्या है …???”

वजह उसके पास अपने रफ़्तार से बड़ी चली आ रही थी …कारों में उस्मान अपने ड्राइवर को ध्यान से चलने को कह रहा था ….अब क्युकी होली का त्योहार इंग्लिश में बोले तोह फेस्टिवल ब्रिटेन हुए काफी टाइम हो चूका tha…so ऐसे मैं रंग लेकर घुमा कमान भी नहीं हो सकता सो उस्मान के चेले और खुद उस्मान अली पूरी शिद्दत से उस इंसान को ढूंढ़ना चाहता था जिसने उसकी बीवी के साथ यह गन्दी हरकत की thi…aise hi कार ? चलते हुए एक टर्न आया …जिसपर उस्मान की कार ? ने टर्न लिया जहां से कोई 100 या 200 मीटर की दुरी पैर मनु रंग को अपने हाथ से झाड़ने में लगा हुआ था …

“हु रहा कमीना जिसने मेरी बीवी को छेड़ा है …देखलो सालो आज इसकी गर्दन सर से अलग चाहिए मुझे…” उस्मान ने गुस्से में चली हुए कार ? से चिल्ला कर कहा …जिस पैर उसके चेले भी छीलकर बोले ..”आज नहीं बचेगा यह हरामखोर भाई इसकी मुंडी आज ज़मीं पैर लावारिस होगी “

यही गुस्से में शायद भेहकर कहना इनकी गलती थी …..अगर यह चुप चाप मनु को पकड़ लेते ..तोह आसानी से उसके साथ कुछ भी कर सकते थे …पैर पहले hi छीलकर बोलने से मनु ने भी उनकी बातें सुन ली thi..jinper उसका सिक्स सेंस पहले hi चिंटू की रंग फेंकने की हरकत पैर””” कोई तोह गड़बड़ है का सिग्न दे चूका था “

मनु ने आव देखा न ताव बस भागना शुरू कर दिया …क्युकी उसने उनकी बातें सुन ली थी और उनके हाथ लगने का मतलब था की …सिद्ध मौत ….और क्युकी हु उस्मान को पहले भी देख चूका tha…uske बारे में जानता भी था …सो उससे बेमतलब बात करके रेहम की उम्मीद रखना सरासर बेवकूफी होगी ..

मनु भाग रहा था की उसके दिल ने कहा “अबे पहले उससे बात तोह कर ले ..क्या पता उसे कोई गलत फेहमी हुई ho..kya पता कोई ऑर्डर हो ..जिसे मरने आया हो..”

मनु का दिमाग “अबे चुप साले देख नहीं रहा था आस -पास कोई और नहीं था और चिंटू का यूँ रंग फेंकना और तुरंत वहां से भाग जाना क्या तुझे मज़ाक लगता है ….कोई न कोई गड़बड़ की है उस चिंटू ने जिसमे मुझे फस्या है …साले पहले जान बचा बाकी …बकचोदी बादमे देख नहीं रहा सारे हथियार बंद हैं ऐसे में खाली हाथ उनके सामने पड़ने का मतलब समझता है …अपने सर को फुटबॉल ? बनने देने आज़ादी देना उनको और चल मान भी लिया की उनको कोई ग़लतफहमी हुई है तोह साले दी लेक बात बता इंटने लोग और हु भी हथियार के साथ तुझे लगता है यहाँ क्रिकेट कहलने आये hain…saale काटने आये हैं चिंटू ने कोई तगड़ा कांड किया है जिसमे हार्ड टारगेट ? मैं हंट ओह साले दिमाग का काम करने दे और चुप चाप भाग …वर्ण आज हम दोनों जुड़ा हो जायेंगे …”

मनु का dil”aabe पागल सुबह सुबह बोल लड़ाई तेरी मेरी चलेगी तब जब साथ होंगे हम दोनों पैर सेल एक का भी जुड़ा होने का मतलब है दोनों का थे एन्ड तोह तेरा कहना सहीह ै अभी भागना इम्पोर्टेन्ट हैं वर्ण मनु की गर्दन के साथ हम दोनों का भी एन्ड …मनु भाग गांड मार दुनिआ की अभी तू सिर्फ भाग …”

मनु के दिल और दिमाग सिर्फ उसे भाग ने को कह रहे थे ..और क्युकी अभी बात जान की थी सो भागता रहा मनु …पीछे कार ? उस्मान और उसके चेला दो कारों ? में लड़े हुए मनु का पीछा करने लगे …और क्युकी बात अब जान की थी तोह मनु भी कार से ज्यादा तेज़ दौड़ना चाहता था और भाग भी रहा था …

उस्मान अली “ भाग सेल आज तुझे छोड़ दिया तोह कभी अपनी बीवी से नज़ारे नहीं मिला पाउँगा भाग साले तुझे भागा भागा कर मारूंगा ताकि आस पास के लोगो को ाचे से पता चल जाये की उस्मान की जान को गलत नज़र से देखने का क्या अंजाम होता hai…”usmaan ज़ोर से चिल्ला रहा था …और मनु को भागने पैर मज़बूर कर रहा था ….

उधर आगे भागता हुआ मनु भी सुनकर हैरान था की उसकी बीवी और उसका मनु ने क्या बिगाड़ दिया पैर उस्मान से ऐसे गुस्से में बात करने का मतलब था मौत …क्युकी उस्मान पूरा उबला हुआ था ..और मनु की जान का प्यासा था …

चेला “भाई कहाँ तक भागेगा …वैसे आपके पास पिस्तौल ? है लाग्दो एक गोली काम ख़तम क्यों भागना बे मतलब का …??”

उस्मान ने गुस्से में उसका गिरेबान कीचकर उसकी आँखों में आँखें दाल कर देखा उस चेला की हवा ख़राब हो गयी …उस्मान “हराम के जाने तू क्या समझता है ..गोली से मरना होता तोह वहीँ एक सेकंड में मार दिया होता ..पैर इस कुत्ते को भागा भागा कर इसलिए मारना चाहता हूँ की जहाँ से यह भागता गुज़ारे वहाँ के हर शख्स के दिल में उस्मान अली के नाम का कहुआफ बेथ जाए ..साले तू समझता क्या है मुझे …जितनी तेरी उम्र है उससे ज्यादा को मैंने आपने हाथों से लुढ़काया है ..आज के बाद मुँह खोलना तोह खाने के लिए या हुकम किट आमिल करने के लिए वार्ना ..”

समझ गया भाई”” उसकी गांड के साथ आस पास के सारे चेलों को समझ आ गया था …की आज उस लड़के की खैर नहीं …क्युकी आखरी बार उस्मान को गुस्सा आया था तोह उसने जिसे मारा था उसके मरने से पहले दोनों हाथ उखाड़ दिए थे जिसकी मौत बड़े दर्दनाक तरीके के से हुई थी ..पैर क्युकी उसका दम हाथ उखाड़ने के साथ hi निकल गया था ..और इतना सब देखकर उसके कई चेले मुट्ठ चुके थे अपने कपड़ों में तोह किसी को इतना भयनक मंज़र देखर उल्टियां होने लगी थी …जिस पैर उसकी लैश को समुन्दर के हवाले करना पड़ा था क्युकी ..जिस तरह उसे मारा गया था …अगर हु सब बात खुलती तोह बड़ी जवाब देहि बनती पुलिस की भी और देर सावेर पुलिस को भी उस्मान को उठाना पड़ता ..सो मजबूरन उसकी लाश को समुन्दर में फेंक दिया गया टुकड़े टुकड़े करके …

यह मंज़र उस्मान के चेले याद कर रहे थे …उनकी गांड अचे से फैट चुकी थी ..ऐसे मैं अब उस्मान से बहस करने या कुछ बोलने का मतलब था …खुद की मौत सो सारे चेले चुपचाप मनु के पीछे कार ? लगा कर भागने लगे थे …

उधर मनु की हालात भी अब भागते हुए पतली हो चुकी थी …सीधे रस्ते पैर काफी देर से भाग रहा था …उस्मान अगर उसे मरना चाहता तोह सिर्फ कार ? तेज़ भगवा कर पकड़ कर उसका काम तमाम कर देता पैर उस्मान के लिए बहुत दिनों के बाद शिकार का टाइम आया tha…jiske चलते हु मनु को भागकर लुढ़कना चाहता tha..taaki उसका डबडबा बना रहे …

मनु ने सोचा “”अगर सिद्ध भागता रहा तोह यह जब चाहे पकड़ लेगा उसके बाद …नहीं???? गलियों में भागता हूँ..””

और मनु ने गलियों की तरफ अपना रखकर दिया भागने का सामने की दिवार कूदकर दूसरी गली में भागने लगा …जिसपर उस्मान के चेले जिसके हाथ में कार का स्टीयरिंग व्हील ? था “भाई साला हरामी अब गलियों में भागने वाला है …अब कार ? का क्या karu…???matlab कार ? से पहिचा करना है या पैदल पकड़े साले को ??”

उस्मान “अबे शिकार टाइम है ऐसे कैसे कार ? छोड़ दें अपनी शान है और हु तोह पैदल है तू बस आराम से पीछा कर साले को छोड़ना नहीं है भगा भगा कर शिकार करना है …तू आराम से पीछा कर हम भी तोह देखे साला गलियों में कब तक बच पायेगा तू अपना काम कर बिना टेंशन के”

उसके बाद उसके चेले ने कार ? घूमकर गलियों में मोड दी वहां से गलियां सिंगल रोड की हो चुकी थी ….बोले तोह सिंगल लेन रोड जिसपर उस्मान की कार ? मनु का पीछा कर रही थी…

पैर मनु ने जब टूटी दिवार फन्दी तब वहीँ रुक कर थोड़ा सांस लिया और धयान लगाने लगा की अब किस दिशा में भागे …तब तक उस्मान की कार ? के हॉर्न ? जो उसने अपने पीछे भागते हुए सुना था ….उसकी आवाज़ सुनाई दी तोह हु फिर से दिवार कूदकर रोड पैर आ गया क्युकी अब गलियों में उस्मान की कार ? थी …पैर शायद मनु की किस्मत को आज मज़े लेने का मूड होगा की उस्मान के चेले जो दूसरी कार ? में थे हु भी उसी टूटी दिवार के पास से गुज़र रहे थे ..सो मनु ने फिर हिम्मत जूता कर वापस उसी टूटी दिवार को फिर से फांदा और वापस गलियों में दौड़ने लगा …

मनु “ साले हरामखोर पता नहीं क्या खाकर पीछा कर रहा है …क्या बिगाड़ा है चिंटू मैंने तेरा जो इन हरामखोरो को और पीछे लगा दिया मेरे ….”

अब क्युकी गालियां सिंगल लेन की थी तोह यहां मनु को थोड़ा आराम था एक गली पार करता और थोड़ा सा सांस लेता ऐसे hi उसने गली पार की तोह सामने साइकिल ? पैर दो लोगों को देखा …जीहको देखकर उसकी हिम्मत बढ़ी और उसे जैसे नयी हिम्मत मिली…

उनमे से एक के कंधे पैर हाथ रखकर मनु ने कहा “”चाचा ाचा हुआ आप मिल गए मुझे …कुछ लोग मुझे मरना चाहते hain…plz चाचा मुझे बचा लो ….मैंने कुछ गलत नहीं किया hai…apne भतीजे को बचा लो चाचा..”

जी हाँ यह साइकिल ? पैर कोई और नहीं उसका सागा चाचा जय चाँद और उसका मक्कार ससुर था ….

जैचंद ने सामने गली के दोनों कोनो (रोड के आने जाने वाले corner)per देखा जिस मैं उस्मान अली और उसके चेले कार ? में बैठे घुटे नज़र आये जिनके हाथों में हथियार दिख रहे the…jai चाँद साइकिल से उतरा और कुछ मनु के कंधे पैर हिम्मत के साथ हाथ रखकर कुछ कहने को हुआ की तभी उसके ससुर ने न में इशारा किया …और उसके कान में कहा “पागल न बनो दामाद जी क्या गज़ब करने में लगे हो …जबकि किस्मत सामने से मौका दे रही है ….अरे बिच में नाप अदो और यहाँ से किसको …इस पिल ेके मरते hi तुम्हारे भाई की अकाल एपनिया आप ठिकाने पैर आ जाएगी और मकान आज नहीं तोह कल तुम्हारा hoga…abhi सिर्फ कल्टी मारो यहां से …”

जय चाँद जो श्याद मनु की मदद करना चाहता होगा उसके दिमाग में जब माकन की बात आयी तोह मकारी और खून में मक्कारी की जीत हुई जैचंद साइकिल ? पैर लढा और उसके पीछे ससुर दोनों अपने रस्ते …मनु बिचरा अपने सेज चाचा से मदद की उम्मीद लगाए देखता रहा पैर उसके चाचा ने hi उसे मौत के हवाले कर दिया tha…uski हिम्मत टूटने के कगार पैर थी ..क्युकी अपनों का दिया धोखा इंसान को अंदर तक तोड़ देता है ….उसे पता तोह था की उसका चाचा कमीना है …पैर उसने सोचा था की चाहे कितना भी कमीना हो …उसका सागा चाचा है …खून खून पैर मर जाया करता है ..तोह उसका चाचा उसे बचा तोह सकता hi है …पैर आज उसने अपने चाचा का एक ओर कमीना रूप देख लिया था की कैसे उसने पलट कर देखा भी नहीं मनु की आँखों में अब अपने चाचा की इस गन्दी हरकत पैर आंसू थे ..उसने यह नहीं सोचा था की उसका चाचा उसके लिए उस्मान से लड़ पड़े …जो की जैचंद को देखकर कोई भी मान सख्त था क्युकी जैचंद देखने में किसी पहलवान से काम नहीं था, उसकी हाइट बॉडी और वेट से पहलवान सा hi था जैचंद ..पैर मनु ने सिर्फ इतना चाहा था …की हु सिर्फ मनु की मदद कर दे छुपने में …पैर जैचंद ने मनु की हु रही सही हिम्मत भी तोड़ दी थी…

उसके बाप के हु शब्द “दुनिआ में लोग तेरी आँखों में आँख दाल कर तुझसे झूठ बोलेंगे और तेरा बुरा तेरे साथ hi रहकर चाहेंगे “गूंज रहे थे …मनु रो रहा था उस्मान के डर से नहीं अपने सेज चाचा की हरकत पैर उसने यह सोचा …”जानता हूँ कमीना है पैर इतना कमीना की सेज भतीजे की जान की भी परवाह नहीं अरे दायां भी सात घर छोड़ दिया करती है पैर मेरा खुद का चाचा कितना कमीना है की अपने सेज भाई के बेटे की जान की परवाह तक नहीं करता ….”

उधर जय chand”tumne वैसे ाचा नहीं किया हु भतीजा था मेरा चाहे कुछ भी हो …मेरा राजिंदर की बात अपनी जगह पैर हु तोह बचा है …उसकी जान पैर बानी है ..और तुमने मुझे वहाँ से चलने को कहा …यह बात ठीक नहीं है …”

ससुर “दामाद जी दिल से नहीं दिमाग से सोचो की रस्ते से एक काँटा निकल रहा है और अब बचा छोटा बीटा राजिंदर का टाइम आने पैर उसे भी किडनैप कर लेंगे और राजिंदर जख मार्कर बेट ेके नाम पैर माकन तुम्हारे नाम कर देगा और तुम्हारा फ्यूचर सेफ हो जायेगा ..”

जय चाँद “अरे यह तोह मैंने भी नहीं सोचा था ….तुम सुच में धूर्त खोपड़ी हो हहहहह..”

दोनों अपने रस्ते चल दिए थे …

उधर मनु रोटा हुआ भाग रहा था जो श्याद अपने चाचा की हरकत से थोड़ा ज्यादा परेशान हुआ था …जिसने अब गलती से अब रोड की तरफ दौड़ना शुरू कर दिया था …

उस्मान भी पीछे पीछे कार ? में जोर से “ भाग सेल हरामी आज तू कितना भाग सकता है देखता हूँ गाडी में अभी और तेल ⛽(पैट्रॉल) बचा है आज मैं भी देखता हूँ तेरा सर फुटबॉल ? बैंकर कैसा लगेगा ..”

मनु ने रट हुए भागने तेज़ कर दिया था …हु अब मैं रोड पैर भाग रहा था …

एक आदमी आगे चल रहा था अपनी दुनिआ में मस्त उसके हाथ में एक तस्वीर थी जिसमे कोई फॅमिली पिक्टुरेस थी जिसमे खुद हु आदमी और उसकी वाइफ और एक बीटा जिसकी आगे कोई 13 साल रही होगी …ऐसी hi पिक्चर थी उसके हाथ में …

आदमी “तुम दोनों ने मुझे तनहा कर दिया क्यों तुम दोनों को मौत ले लगायी और मुझे अकेला छोड़ गयी इस दुनिआ मैं मेरी लव तुमने एक बार भी नहीं सोचा की बचपन का प्यार और शादी का वचन इन सबको के बाद भी तुम मुझे अकेला छोड़ गयी और साथ में कसम भी दे दी की जीता रहूं मरने की कोशिश न करू और माय सोन मोहित तुमने एक बार भी नहीं सोचा बेटे की जिसको मुझे कन्धा देना था ..मैंने उसे कन्धा दिया होगा तब एक बाप पैर क्या बीती होगी ..अब किस लिए जियूं दुनिआ मैं क्या है दुनिआ में मेरे लिए …जीने की कोई वजह कोई मक़सद नहीं है मेरे पास …!!!हे उपपरवाले तूने मेरा सब कुछ चीन मुझे तनहा दुनिआ में छोड़ दिया …मेरा सबकुछ मुझसे लूट लिया तूने …मैं अपनी जान अपनी वाइफ के वेड की लाज की वजह से ज़िंदा हूँ पैर ज़िंदा कहना खुद को गली देना होगा …हे उपपरवाले काम से काम अगर ज़िंदा छोड़ hi दिया है तोह कोई मक़सद कोई तोह वजह दे की मैं भी जी sakun…warna तेरा वजूद इंसान मन्ना छोड़ देगा..!!”

मनु तेज़ रोटा हुआ भाग रहा था सामने से उस कोई आदमी जाता हुआ दिख रहा था ….आज सुबह जो रंग के कपडे मतलब शर्ट में राजिंदर को उसने देखा था शामे सा लग रहा था …मनु को लगा राजिंदर hi होगा …एक तरफ राजिंदर की बातें भी उसके दिमाग में घूम रही thi…or उस पैर शामे शर्ट मनु को लगा राजिंदर hi होगा हु और तेज़ दौड़ा …

पीछे से पकड़ कर “पापा मुझे बचा लो देखो बिना वजह मुझे यह लोग मरना चाहते हैं ..”मनु ज़ोर के झटके के साथ उसे पीछे से पकड़ लिया …जिससे उसके हाथ से हु तस्वीर छूट कर आगे गिर गयी…

उस आदमी ने घूमकर पापा कहने वाले मनु को साइन से लगा लिया और उसके चेहरे के उप्पेर बेतहाशा चूमने लगा “मोहित मेरे बचे तू आज्ञा देख तेरा पापा तेरा कितना इंतज़ार कर रहा था …”

मनु रोटा हुआ हैरान था क्युकी जिसे उसने पापा कहा था हु कोई ोूर इंसान था …मज़बूत शरीर ाची कद काठी और महंगे कपडे और उस पैर रूब तोह उसके चेहरे से ऐसे टपक रहा था …की कोई खंडनी रईस हो …मनु ने पास में गिरी हुई तस्वीर को देखा जिसमे हु आदमी और एक औरत के साथ कोई लड़का भी था …मनु ने थोड़ा और गौर से देखा …तोह पाया यह तोह हु खुद hai…uski खोपड़ी से धुआं सा निकलने लगा था की यह सब क्या है …फिर उसने ध्यान से सोचा …”मोहित मोहित यही नाम लिया था इस आदमी ने मतलब उस लड़के का नाम मोहित होगा जो शायद इसका बीटा होगा पैर इसकी शकल मुझे इतनी कैसे मिल सकती है जैसे मेरा जुड़वाँ भाई हो ..”मनु सोच में गम था …

उतने में उस्मान के चेले की कार ? मनु के जो पीछे लगी हुई थी आ गयी ….उसमे कोई 8 लोग थे …

1 चेला …आये लड़के को हमारे हवाले करदे …आज इसकी जान का फैसला होगा ..उस्मान भाई का शिकार है यह …हाथ हटा उससे ,बहिन के लुंड ..”

2 चेला “ ोये भोसड़ी के माँ के लोडे सुना नहीं तूने हाथ हटा उस लड़के से वार्ना …”

उस आदमी ने जिसकी आँखों में अभी तक आंसू थे मनु से “बीटा तुम आ गए ाचा हुआ बीटा मोहित हु देखो हु कार ? पैर बेथ जाओ …तुम तुम्हारा पापा है न …”

चेला 1 “ अबे मादरचोद सुना नहीं तूने …लड़के से हाथ हटा यह उस्मान भाई का शिकार है ..”

मनु को उसने कार की डिक्की (बैक ट्रंक ) पैर बिठा दिया था …और उसके उप्पेर अपने हाथ से सर पैर फिर कर प्यार से बोलै …”बीटा ज्यादा टाइम नहीं लगेगा …मोहित तुम आराम करो “

मनु ने तुरंत उत्तर का हु फोटो जो सामने पड़ी हुई थी उठा ली और देखने की कोशिश करने लगा ..

चेला 1“ लड़के को हमारे हवाले करदे वार्ना उस्मान भाई तेरे और उस लड़के की इतनी गांड फाड़ेंगे की तुमको समझ भी नहीं आएगा की तुम इंसान हो या गांड ..”

चेला 2 “बहिन के लोडे को उड़ा दो और उस मादर छोड़ड़ड़ड़ड़ aakkkkkkk!!!!!!..............uske मुँह का अल्फ़ाज़ उसके मुँह में hi रह चूका था क्युकी उस आदमी ने उसकी गर्दन अपने हाथ से तोड़ दी thi….or उसके मरते hi …

“मारो सल्ले को बहिन का लैंड उस्मान भाई के लोगों से पन्गा लेता है…”

आदमी “ तुम्हारी और तुम्हारे उस उस्मान भाई की क्या औकात की हु मेरे जिगर के टुकड़े को हाथ लगा सके .. वीरेंदर प्रताप सिंघणीअ ऊँची आवाज़ भी बर्दास्त नहीं करता तुमने तोह मेरे कलेजे पैर वार किया है …आज तुम को जिन्दा मौत क्या होतीहै पता चल जायेगा …”

हु सब मारने के लिए उसे घेरने लगे …”मारो सेल को “

वीरेंदर ने उसके पहले बन्दे को एक रेवेरसिंग किक मारी उसके कान पैर उसकी गर्दन से कड़ाक की आवाज़ निकली ..जो लगभग सभी ने सुनी और हु चेला अपनी टूटी गर्दन के साथ दुनिआ छोड़ चूका था ..

अब सभी चोक्कन हो गए थे …फिर एक ने पीछे से वार के की कोशिश की पैर वीरेंदर ने जम्प लिया समर सॉल्ट जीके बाद हु वॉर कर ने वाले के पीछे था उसने हैरानी के साथ वीरेंदर को देखा और चाकू चलने की कोशिश की पैर वीरेंदर की फुर्ती के चलते उसका हर वॉर खली था …वीरेंदर ने घूमकर एक पंच उसके सीने में मारा उसकी अंदर से कई पसलिया टूट चुकी थी ..

जिसके बाद एक ने पीछे से वार किया और वीरेंदर ने उसके घूमकर हाथ पकड़ा और कड़ाक!!! एक और आवाज़ के साथ उसका हाथ बाइसेप्स ? पैर से हवा में झूल रहा था. मतलब उसका हाथ भी टूट चूका था …

अब बचे थे 4 चेले उन्होंने जब अपने चार साथयूं की हालत देखि तोह उनकी हवा भी निकल चुकी थी …

कहीं न कहीं उनकी समझ में भी आगया था की वीरेंदर उनपर भरी था …अब सभी ने वीरेंदर को अब ध्यान से लेना शुरू कर दिया ….

वीरेंदर ने अब बचे हुए चेलों को एक किक और एक पूछ के साथ ज़मीन पैर उनकी लाश के साथ हमेशा के लिए दुनिआ से आज़ादी दे दी थी …और वीरेंदर चल पड़ा मनु की तरफ …

जिस पैर पीछे से एक आवाज़ जो श्याद चेले की thi..”saale कोण है जिसने हमारे उस्मान भाई के लोगों पैर हाथ उठाया ,,,

वीरेंदर ने एक बार गुस्से से घूमकर देखा रुकनेवाली कार ? को जिसमे से उस्मान अली उतर कर गन निकल कर उसकी तरफ आ रहा था ….लेकिन उस्मान ने जब उसका चेहरा देखा तोह उसके मुँह से एक hi वर्ड निकला जिसके बाद उसके साथ का हर चेला हैरत में दुब गया …और हु वर्ड था “मालिक आप यहां “……

कोण था यह मालिक और उस्मान का वीरेंदर को मालिक कहना क्या मतलब था इसका …और क्या वजह थी की उस्मान के कदम रुक से गए थे ….और यह मालिक उर्फ़ वीरेंदर का बीटा मोहित और मनु की शकल इतनी कैसे मिलती है इसका जवाब क्या है ….इसका जवाब या तोह वीरेंदर या खुद किस्मत hi दे सकती है… :हिंट:
 
अपडेट 56

बचपन की यादें

कोण था यह मालिक और उस्मान का वीरेंदर को मालिक कहना क्या मतलब था इसका …और क्या वजह थी की उस्मान के कदम रुक से गए थे ….और यह मालिक उर्फ़ वीरेंदर का बीटा मोहित और मनु की शकल इतनी कैसे मिलती है इसका जवाब क्या है ….इसका जवाब या तोह वीरेंदर या खुद किस्मत hi दे सकती है…

अब आगे.....

वीरेंदर को देखकर उस्मान की एंड hi उसके गले में फास गए थे ….उसके चेले भले hi वीरेंदर प्रताप सिंघणीअ को न जानते हो पैर हु अचे से जनता था …

उसके पीछे से एक चेला “ भाई इस हरामजादे ने उस पिल्ले को भी बचा लिया और हमारे 8 साथियों को उप्पेर पूछा दिया और आप सोच रहे हो …मारो सेल को …”

इस के साथ hi उसका चेला आगे बड़ा “ मादरचोद हमारे साथियों को मारेगा …””

तभी एक आवाज़ !!! आयी दुनस्सस्सशःह्ह्ह! उसी के साथ उस चेले की आवाज़ हमेशा के लिए शांत हो गयी ….

सामने से वीरेंदर ने अपने हाथ में सीलेंसर लगी पिस्तौल ? पकड़ी हुई thi…jise देखकर अब बाकी सब चेले जमीं और आस्मां के बिच खुद को खली हाथ खड़ा महसूस कर रहे थे …क्युकी उनके हाथ में चाकू थे …और गन ? सिर्फ उस्मान के पास थी .पैर सामने वाला बाँदा वीरेंदर जो आलरेडी खली हाथ से 8 लोगों को मौत का हसीं मंज़र दिखा चूका tha..ab उसके हाथ में गन ? थी और हु ….घुटने पैर गोली मरने वालो में से नहीं था …क्युकी अभी जिसको उसने जन्नत दिखयी थी उसके थिंक माथे पैर लगी गोली का साफ़ मतलब था …की हाथ और पैरो के साथ उसका निशाना बोले तोह टारगेट ? भी सॉलिड था …

वीरेंदर “ डरो नहीं नकली नहीं है गन ? मेरी और निशाना भी सहीह ै देख लिया होगा ….और हाँ यह ध्यान रखना अब उस्मान को मिलकर तुम सिर्फ 7 लोग हो पैर मेरे पास अभी तीन मैगज़ीन और हैं गन को रिफिल करने के लिए …और हाँ don’t वोर्री अगर लिमिट क्रॉस की तोह जिस भाई के निचे तुम लोग लटका करते हो उसी से पूछ लेना की वीरेंदर प्रताप सिंघणीअ कैसी मौत देता hai…so बे केयरफुल …” वीरेंदर पलटा और वापस मनु के पास चल दिया ….

उस्मान को शायद अभी भी यकीं नहीं हो रहा था की सामने वीरेंदर है …हु तोह किसी और hi दुनिआ में खो चूका था …..उसके कंधे पैर एक चेले जो की उसका सब ख़ास आदमी था उसके कान के पास धीरे से बोलै “ भाई आपने कहा “”मालिक” भाई यह है कोण जिसने सामने से हमारे इतने लोगो को मार दिया है फिर भी आपके मुँह से एक लफ्ज़ नहीं निकला ..जबकि एक बार रसूल का किसी ने कालर पकड़ा था तोह आपने उसके हाथ को तोड़ दिया था …पैर न तोह आपने अपनी गन ? hi निकली और न hi कुछ कहा बस आपके मुँह से एक अल्फ़ाज़ निकला “””मालिक”” पैर भाई यह है कोण जिसके सामने आप शांत हैं…”

उस्मान उसकी बात सुनकर बाकी सब से बोलै “आये उनकी लाशूँ को गाडी में डालो और वापस चलो …वर्ण इंक ोटोः हम ले जायेंगे पैर हमे तोह म्युनिसिपेलिटी की गाडी लेकर जाएगी …हाथ तेज़ chalao..re“

हु सब चेले चुपचाप काम पैर लग गए की वीरेंदर ने अपनी कार ? का गेट खोला और एक छोटा सा बेग निकला और उसमे एक बंडल जो की पैक था उस्मान के आगे फेंकता हुआ बोलै “ उस्मान यह उठा ले और इनका जनाज़ा और उसके बाद का काम इज़्ज़त से करवा देना और याद रखना आजके बाद उस लड़के के सामने तुझे वीरेंदर से सामना करना होगा … अब दफा हो जाओ ..”

उस्मान हाथ जोड़कर सर झुका कर बोलै “मालिक इसकी ज़रूरत नहीं है मैं सब कर लूंगा आप बे फ़िक्र रहे आपने केहड़िया आपका यह खादिम समझ गया ..इज़्ज़ज़त दे मालिक”

वीरेंदर “उस्मान शायद तू भूल गया वीरेंदर प्रताप सिंघणीअ ने एक बार जो दिया उसे वापस नहीं माँगा …कभी भूल गया होगा …सुमैला से पूछना जब उसकी इज़्ज़त पे बात बानी थी तब भी मैंने बिना सोचे कैसे उसे बचाया था …यह लड़का गलत नहीं हो सकता …जिसकी गलती है उसे dund…mujhe अचे से पता है तू बिना किसी गलती के इसके पीछे नहीं पड़ा होगा ..पैर एक बार उसको देख क्या तुझे नहीं लगता किट ु एक बचे के पीछे पड़ा है …क्या तुझे नहीं लगता एक बार उसकी बात सुन्नी चाहिए तुझे एक बार …”

वीरेंदर ने मनु की तरफ इशारा करके उसे बुलाया ..”बीटा आपने क्या है …”

मनु “ सर मैंने कुछ नहीं किया मैं तोह स्कूल से घर जा रहा था ,,पैर रस्ते में एक लड़का साइकिल ? पैर तेज़ी से मेरे पास आया और रंग का यह बेग (मनु ने अपने बेग से निकल कर जो उसने अनजाने में अपने बेग में रख लिया था ) निकल कर सबके सामने दिखया ..यह बेग उसने मेरे उप्पेर फेंका और तेज़ी से बैग गया मैं सिर्फ हैरानी से सोच रहा था की उसने ऐसा क्यों किया है तब तक यह (उस्मान की तरफ इशारा करके ) आये अपनी कार ? में और बिना जाने मुझे मरने की बात करने लगे सर कसम से मैंने कुछ गलत नहीं किया ..आप मेरा यकीं karo(usmaan अली से )अंकल आप मुझे जान से मार देना अगर मेरी गलती हो कसम से उफ़! तक नहीं करूँगा पैर सुच कहता हूँ यहाँ मेरा कसूर इतना है की श्याद उस साइकिल ? वाले ने कोई कांड किया और मुझे फसा दिया …अंकल (उस्मान के हाथ को pakadkar)aap मेरी आँखें देखो और यकीं करो अगर मैं गलत हूँ तोह बेशक मेरा सर और फुटबॉल ⚽ जो चाहे कर लेना पैर यकीं मनो मुझे तोह पता भी नहीं है ..की यहाँ मेरी गलती क्या है..” मनु ने एक साँस में साड़ी बात उस्मान को कह दी ..

उस्मान “ सॉरी बीटा सॉरी हमे माफ़ कार्डो हमसे गलती हो गयी …हमने भी न जाने क्यों तुमसे कुछ पूछा नहीं ..की तुम्हारे हाथ में रंग है …उसे देखकर हमने तुम्हे hi हु कमीना समझ लिया …ाचा तोह हु साइकिल ? वाला तुम उसे जानते हो कोण था …अगर हाँ तोह बता दो …”

मनु “ सॉरी ? अंकल उसका चेहरा रुमाल से ढका हुआ था सो मैं उसे देख नहीं पाया ..वह तेज़ी से आया था उसकी साइकिल ? रेड कलर की थी और शायद रेंजर टाइप की थी और उसके पीछे हरे रंग की लम्बी झंडी लगी थी इसके शिव अंकल और कुछ नहीं जनता अगर जनता तोह जरूर बता देता ..”

उस्मान “कोई बात नहीं बीटा हम उसे दंड लेंगे और उसका हु हाल करेंगे की हु याद रखेगा …ाचा मालिक अब इज़्ज़ज़त दें “

उस्मान के चेले ने सामने पड़ा बंडल उठा लिया और बाकी की लाशये भी कार ? में लड़ चुकी थी लाशूँ को उसकी एक कार में डालकर उसके एक चेला जो उनके साथ था ..ले गया ..और उसका सब ख़ास चेला जिसके हाथ में बंडल था उसने खोलकर देखा तोह उसकी आँखें बहार आने को हो गयी उसमे 2 हज़ार के नोटों का बंडल था हु और कोई 10 लाख के अस्स पास होंगे पैर उस्मान को शायद इसकी परवाह नहीं थी या शायद उसे वीरेंदर की इस बात से हैरानी नहीं thi..woh हैरान और परेशां सात है की ऐसा कोण है जिसने एक बेक़सूर लड़के को फंसा दिया …

उसकी सोच देखकर उसका ख़ास चेला “भाई मुझे अभी भी उस लड़के पैर डाउट है हु लड़का वही है मुझे लगता है हु झूंठ बोल रहा है ..”

उस्मान “ नहीं उसकी आँखों की हिम्मत और चमक सच कह रही है हु बेक़सूर है अगर गलत होता तोह नज़र चुराकर बात करता मेरा हाथ थामकर नहीं …और सुच बोलूं तोह इतने खून किये हैं मैंने पैर आज तक ऐसा लड़का नहीं देखा जिसने खुद आकर मेरी आँख में आँख डालकर कहा की “गलत हंट ओह बेशक मार देना मुझे” अरे इतनी हिम्मत गलत करनेवाले इंसान की आँखों में नहीं होती और उस्मान आँखें अचे से पड़ना जानता है ,,,कोण सच्चा है और कोण झूठा …अगर गलत होता तोह खुद मालिक ने उसका सर कलम कर देना था ..उसे बचाना नहीं …”

चेला “पैर भाई यह मालिक है कोण जिन्होंने भाभी को नाम से बुलाया और आप शांत रहे ..”

उस्मान “ उनका नाम इज़्ज़त से लेना टब hi हु कोई आम इंसान नहीं खानदानी रईस और न केवल इस शहर बल्कि कई स्टेट के सबसे बड़े आमिर इंसान हैं …जिनके पास बेशुमार दुलत है ..पैर उस बात का घमंड ज़रा भी नहीं हु इतने नाम के बाद भी एक नेकदिल और शरीफ इंसान hain..jo अच्छी में एल्म (भरोसा) रखते hain..itna बड़ा रईस इंसान होने के साथ दुनिआ के सबसे खतनाक फिघ्टर्स में उनकी गिनती होती है …और उनको मिल्क इसलिए कहते हैं क्युकी उनका नाम लेना हुमजैसे छोटे इंसानो के बास्की बात नहीं है हु खानदानी रजवाड़े हैं जिनके यहाँ हमारे जैसे कई लोगो के परदादा काम किया करते थे ..और हु इतने अचे हैं की कई बार उनकी वजह से कितने मासूमो की जान बची है यह खुद उनको याद भी नहीं होगा …खुद एक बार मेरे किसी दुश्मन ने तुम्हारी भाभी को किडनैप कर लिया था और उसके साथ गन्दी हरकत (रपे) करने की कोशिश करने वाला था की मालिक ने उसे (सुमैला ) को न जानते हुए भी उसे न सिर्फ बचाया बल्कि उसके फाटे कपड़ों को अपने कपड़ों से धक् दिया और सुमैला को अचे और साफ़ कपडे पहनवा कर बाइज़्ज़त घर छोड़ा ..उस दिन उस्मान को अचे से अच्छी की ताकत का अंदाज़ा हुआ ..उस दिन से मैंने मज़लूमो की है से तौबा कर ली ..”

चेला “भाई इसका मतलब मालिक सॉलिड इंसान है ..??”

उस्मान “ सॉलिड क्या होता है …तूफ़ान बोल तूफ़ान हैं मालिक …सुमैला के बाद खुद कई बार उनके दर से मुझे मदद मिली है पैर जहाँ साड़ी दुनिआ बदले में कुछ न कुछ छाती है वहीँ मालिक ने आजतक न कभी कुछ चाहा न अरे आजतक उन्होंने सुमैला का नाम भी नहीं लिया पैर आज उन्होंने जब सुमैला का जीकर किया तोह उसके पीछे की वजह साफ़ थी ,,,की जब मिल्क बिना किसी मतलब के किसी की मदद कर सकते हैं तोह हम क्या उसलड़के से पहले बात नहीं कर सकते the…or जब उस लड़के से बात हुई तब समझ आया की गलती उसकी काम हमारी ज्यादा thi…ki हम किसी और के कांड में उसलड़की को सहीद कर देते ..और वैसे भी बड़े लोगों की बात के कई मतलब होते हैं ..सो अभी सिर्फ उस मादरचोद के बारे में सोचो जिसने उस लड़के को फस्या और सुमैला के साथ बदसलूकी की …ढूंढो उस हरामजादे को जहाँ मिल जाये उठा लाना उसका हरसरर दुनिआ के लिए मिस्साल होगा”

उधर मनु और Virendra..ab वीरेंदर की कार ? में थे ..

मनु “ सो सॉरी सर आपको मेरी वजह से बहुत प्रॉब्लम हुई उसके लिए सॉरी और आपने मेरी जान बचाई उसके लिए बहुत बहुत थैंक्स सर …………..सर आपकी पिछ”

वीरेंदर “कोई बात नहीं बीटा ाचा कहाँ रहते हो आप ..”तस्वीर ले ली और मनु से पूछा ..

मनु ने एड्रेस बता या …और “ सर एक बात आपसे पूछ सकता हूँ की यह तस्वीर में शामे मेरे जैसे दिखने वाला कोण है ???”

वीरेंदर “ बीटा आपको सर कहने की ज़रूरत नहीं है मुझे और यह तस्वीर में मेरा एकलौता बीटा मोहित है जिसके साथ मेरी वाइफ सुकन्या है जिन्दोनो की मौत आज से कोई 6 साल पहले हो चुकी है एक एक्सीडेंट में जिसमे सिर्फ मैं hi बचा था …और आज शायद उपपरवाले से जिनने की वजह मांग रहा था की क्यों जियूं मैं और मोहित का चेहरा लिए तुम सामने थे मेरे…”

वीरेंदर ने आगे कहा “ बीटा थैंक्स तोह मुझे कहना चाहिए तुम्हे जो तुमने एक बाप को उसका बीटा लौटा दिया है कमसे काम तुम्हारे रूप में मैं अपने बेटे को जब चहुँ देख सकता हूँ अगर तुम्हे कोई प्रॉब्लम न हो तोह …”

मनु “ सर मुझे तोह बल्कि ख़ुशी होगी की कमसे काम इस चेहरे से आपको आपका बीटा कैसा है और आगे शायद कैसा हो इसका अंदाज़ा हो पायेगा …आपने तोह मेरी जान बचाई है आपके लिए इतना तोह कर hi सकता हूँ main…aap जब चाहें मुझसे मिल सकते हैं या चाहें तोह मैं खुद आपके पास आ जाऊंगा …”

वीरेंदर “ बीटा तुम्हारी बातें सुच में मुझे मेरे मोहित की याद दिलाते हैं ..तुम शामे उसी के जैसे हो पैर एक बात में उससे अलग हो तुम बातचीत में थोड़े और स्मार्ट हो उससे ..पैर मुझे अभी भी यकीं नहीं होता की 6साल बाद शामे उसी रूप में अपने मोहित को तुम्हारे अंदर देख सकूंगा ..थैंक्स बीटा ..”

वीरेंदर ने आगे kaha”waise तुम्हारी स्मार्टनेस की झलक मैं उस्मान से बात करते और उससे झूठ बोलते हुए देख ली थी जब तुमने उससे कहा की साइकिल ? का कलर यह है किस रंग की झंडी लगी है पैर तुम उस इंसान को नहीं जानते ….यह झूंठ अचे से समझ गया था ..मैं “

मनु अब थोड़ा शर्मिदा फील कर रहा था …”सॉरी सर मुझे माफ़ कर दिज्ये मैंने वहाँ जो ठीक समझ हु कह दिया …पैर आपसे मैं झूंठ नहीं कह सकता क्युकी यह ज़िन्दगी आपकी वजह से सलामत है “

वीरेंदर “ नहीं बीटा मुझे गलत न समझो बताओ य आना बताओ मैं तोह तुम में अपने मोहित को देखकर hi खुश हूँ ….उप्परवाले का भी चमत्कार है की 6 साल पहले मेरा बीटा जैसा दीखता था ठीक वैसे तुम आज दीखते हो जबकि तुम्हारा और मेरा कोई रिश्ता नहीं यहाँ तक की तुम्हारी फॅमिली से मेरा कोई दूर दूर तक लिंक भी नहीं है (मनु उसे अपनी फॅमिली के बारे में बता चूका था ..)

मनु “सर अगर आपको मुझ में आपका मोहित दीखता है तोह मेरा भी फ़र्ज़ बनता है की आपको सब सुच बताऊँ क्युकी आपने hi मेरी जान बचाई है ….और आपसे सच कहना मेरा फ़र्ज़ है …””

और मनु ने अपने आजतक की साड़ी फॅमिली और चिंटू मतलब सब कुछ लेखा जोखा जिसमे उसके चाचा और उसका ससुर और भी बहुत कुछ था जो मनु ने वीरेंदर को बताया …जिसे वीरेंदर एक शारद ख़ामोशी के साथ सनटैन रहा …और कार ? अब अपने घर की तरफ मोड़ ली …और सुनता हुआ कार ? ड्राइव करता रहा …(मनु ने वीरेंदर को निशा के बारे में मतलब अपने प्यार के बारे में कुछ नहीं बताया था . सिर्फ इतना बताया की निशा नाम की उसकी एक दोस्त है जो अब नई ज़ीलैण्ड में रहती है ..)

मनु “तोह यह सब वजह thi…jiske चलते मुझे झूंठ कहना पड़ा …क्या मैं गलत हूँ सर …”

वीरेंदर “नहीं बेटे तुम सही हो पैर जवाब न देना और जुल्म सहते रहना सही नहीं है …अगर तुम बिना गलती के जुल्म सहते हो और सामने वाले को जवाब भी नहीं देते तोह उसकी नज़र में तुम कायर कहलाओगे जिस पैर हु जब चाहे जैसे चाहे फिर दुबारा हुम्ला तरय करेगा ..अब या तोह ऐसे hi भागते रहो या पलट कर जवाब देना शुरू करो…”

मनु “पैर सर मैं तेरा छोटा बचा मैं कर hi क्या सकता हूँ उसपर अब मेरे दुश्मनो की गति बढ़ती जा रही है ….और दोस्त इस हालत मैं सुच कहूं तोह सिर्फ मेरी परछाई है ….जिसके साथ खुद को और अपनी फॅमिली को भी बचाना है …क्या करूँ मैं यह मेरे समझ से परे है …”

वीरेंदर “एक काम तोह कर सकते हो ???”

मनु “हु क्या सर “

वीरेंदर “एक बार मेरे मोहित ने कहा था की “पापा मुझे भी ाचा फाइटर बनाना है “ पैर मैंने तब उसे कहा की बीटा तुझे क्या जरूरत है फाइटर बनने की तेरा पापा है न हु जब ज़रूरत होगी तेरे सामने ढल बना होगा …पैर देखो आज वही ढल मेरे मोहित को बचा नहीं पायी उस बात का आज भी मलाल है मुझे ..” वीरेंदर ने कार ? चलते हुए ांसो बैठे हुए कहा …

जिसपर मनु ने उसकी आँखों से आंसू पूछते हुए कहा “ सर अगर आपके मोहित को यह आंसू दिखेंगे तोह उसे कितना बुरा लगेगा …यह सोचा है आपने कभी …”

वीरेंदर “ सॉरी बीटा मैं अपने मोहित की तब हु ख्वाहिश पूरी नहीं कर पाया पैर तुम्हें एक ाचा ….नहीं ाचा नहीं बेस्ट तुहे हु सब सिखाऊंगा जो मोहित को नहीं सीखा सका …और तुम्हे एक टॉप क्लास का डेडली फाइटर बनाऊंगा जो हर तरह की फाइट और अपने काबिल दिमाग से दुनिआ में किसी की आगे न जुखे यह आज तुमसे वीरेंदर प्रताप सिंघणीअ का वडा है …”

मनु “ थैंक्स मास्टर “

वीरेंदर “ सर से मास्टर यह क्या है बीटा …तुम अंकल भी कह सकते हो …मुझे ..पापा के लिए तोह मैं तुमसे एक्सपेक्ट भी नहीं करूँगा ..क्युकी इंसान किसी को भी माँ मन सकता है पैर बाप सभी का सिर्फ एक होता है …और बाप का हक़ तुम्हारे पिता का hi होना भी चाहिए क्युकी मैं भी कभी बाप तहत ओह यह बात अचे से समझ सकता हूँ पैर अंकल hi कह्देते मुझे …”

मनु “ आपने जिस पल मुझे सीखने की कसम ली उसी पल आप मेरे गुरु बनगए और गुरु का दर्ज़ा भी सिर्फ एक होता है और हु मैंने भी आपको hi दिया है …जिसे मैं अंकल जैसे घटिया वर्ड से बेज़्ज़त नहीं कर सकता …क्युकी अंकल तोह रह चलते को भी कह दिया जाता है पैर मास्टर सिर्फ और सिर्फ एक hi होता है और आज से आपको मैं मास्टर hi कहूंगा …भले hi आपकी नज़र में मैं आपके मोहित सामान रहूं पैर आप मेरे लिए मास्टर रहेंगे और यह मेरा आपके लिए सम्मान (रेस्पेक्ट) है …”

वीरेंदर “ बीटा तुम सच में काफी होशियार हो इस स्मार्टनेस के साथ तुम्हारा यह ाचा नेचर और अछि सोच लाजवाब है ….ी लिखे ु ….एंड ी एक्सेप्ट ु अस स्टूडेंट ऑफ़ माइन …गॉड ब्लेस्स ु बीटा …”

मनु ने कार ? में hi जो की रुकी हुई थी उसी में वीरेंदर के पेअर छू लिए …और गुरु को हाँ अपने नए गुरु को रेस्पेक्ट दी …और वीरेंदर ने भी उसके सर पैर इज़्ज़त और प्यार से हाथ रखकर उसके अचे फ्यूचर के लिए आशीर्वाद दिया … और कार फिर चल पड़ी वीरेंदर के घर की तरफ चल पड़ी रस्ते में मनु ने घर पैर वीरेंदर के मोबाइल जोकि उस समय सिर्फ पैसे वळून के पास हुआ करता था क्युकी इनकमिंग और आउटगोइंग दोनों के पैसे कटा करते थे …पैर वीरेंदर का पोस्टपेड मोबाइल था …बोले तोह बिल वाला था जिससे मनु ने अजय को फ़ोन करके कहा की हु आज लेट आएगा पैर जवाब मिला पुष्पी से क्युकी आज पुष्पी जल्दी आ गयी थी …जिसपर मनु ने उसे अपना और अजय का धयान रखने को कहा और कॉल काट दी..

और मनु और वीरेंदर अब उसके घर के बहार एक आलिशान गेट के बहार थे जहाँ गार्ड ? ने सलूट मार्कर गेट ओपन किया वीरेंदर का घर किसी फ़िल्मी राजमहल जैसा था …जो बहार से शानदार कारीगरी का अज़ाब एक्साम्प्ले था …जिसको देखकर मनु के मुँह से अपने आप निकल गया …”वाओ”

जिसपर वीरेंदर ने ठीक घर सामने कार ? रोकी और अंदर चलने लगा जहाँ सामने उसके नौकर अपने अपने कामो में बस्सी थे …पैर उसका हेड ऑफ़ स्टाफ (नौकरो का हेड जो शायद उसका पुराण ख़ास था)

हु सामने आया और वेलकम किया पैर जैसे hi उसने मनु की तरफ देखा तोह उसके मुँह से एपनिया आप निकला “ मोहित बाबा “ जिसपर वीरेंदर ने उसे साड़ी बात अपने रूम में जाकर बताई …जहाँ मनु घर देखने में बस्सी था …घर में कई जगह मोहित की बड़ी बड़ी तस्वीर लगी हुई थी जिनको देखकर कोई भी अंदाज़ा लगा सकता था की मोहित कितना लाडला होगा उस घर का …

मनु सभी तस्वीरों के साथ घूमता हुआ घर देखता रहा उधर वीरेंदर ने उसके ख़ास नौकर जिसको हु मनु के बारे में बता रहा था …जिसका नाम सुनील था उसे बताया कैसे मनु को उस्मान से बचाया और कैसे उसके साथ के दोस्त ने hi मनु को मरवाने का काम किया और कैसे उसका सागा चाचा भी उसे मरने के लिए छोड़कर भाग गया …जिसे सुनकर सुनील को भी बहुत गुस्सा आया ….वह बोलै “मालिक आपने सही काम किया उस बचे को यहां लेकर कितना कुछ सहा हॉग आना जब अपने hi जान लेने और जान से मरने के लिए छोड़कर चले जाते हैं …कितना कुछ टुटा हॉग आना उसके अंदर …सर मैं इसमें आपके साथ हूँ उस उपपरवाले की भी अज़ाब करामात है 6 साल बाद मोहित बाबा की शामे फेस लेकर इस बचे को हमारी ज़िन्दगी में भेज दिया ….मालिक आपसे कुछ कहूं तोह आप बुरा तोह नहीं मानेगे ..??”

वीरेंदर “सुनी लेक तोह कितनी बार कहूं तुम बचपन के साथ हो मेरे फिर भी मालिक क्यों कहते ho…or जो कहना चाहो खुलकर कहो…”

सुनील “आप मेरे मालिक है इसलिए मालिक कहता हूँ आपके जैसे अचे इंसान को जहाँ गंदे से गन्दा इंसान भी इज़्ज़त देता है वहां तोह मैं आपके साथ बचपन से रहा हूँ आपके परिवार ने मुझ अनाथ को रोड से उठाकर पढ़ाया लिख्या और इस काबिल बनाया की मैं कुछ कर सकूँ तोह आपको मालिक न कहूं तोह क्या कहूना आप मुझे मालिक hi कहने दे मेरी ख़ुशी इसी में hai..or मैं यह कहना चाहता हूँ की आपकीतने मासूमो का जीवन सुधरते हैं अनाथलयूं को बनवा कर शायद आपके अचे कर्मो का फल hi है की मोहित बाबा के जाने के बाद मोहित बाबा को तोह हम बड़ा होते देख नहीं पाए पैर इस मानव में hi मैं मोहित बाबा को बड़ा होते देखना चाहता हूँ अगर आपको इतना मंज़ूर हो तोह प्ल्ज़ मान लीजिए …”

वीरेंदर उसके कह्दे पैर हाथ रखकर “ दोस्त हो तोह तेरे जैसा हाँ मैं भी यही चाहता हूँ इसलिए उसे एक ाचा और बेहतरीन फाइटर बनाना की ट्रेनिंग दूंगा और जो मोहित को नहीं सीखा सका हु सब मनु को सिखाऊंगा ..और इसी में अपने मोहित को बड़े होते देखूंगा …शायद उपपरवाले ने भी इसीलिए मनु को मेरे पास भेजा है ताकि मैं उसकी मदद कर सकूँ उसको और मज़बूत बनाना में और हु मदद कर सके मेरे अकेलेपन को दूर कर sake……ahaa …. अब मैं अपने मोहित को उसमे बड़ा होते देखूंगा …. “ उसके बाद वीरेंदर के चेहरे पैर 6 साल बाद मुस्कराहट थी जो सुनील ने आज देखि थी जिसे सुनील बड़ा मिस करता था या यूँ कहिये भूल hi चूका था की वीरेंदर की मुस्कराहट को क्युकी उसने सुकन्या और मोहित के बाद कैसे टूट ते हुए देखा था यह हु अचे से जानता था की वीरेंदर ने कैसे खुद को शराब में डूबा लिया था ..पैर आज मनु के आने के बाद उसने वीरेंदर को खुश देखा था ..उसने मैं hi मैं ुप्पीवाले को धन्यवाद दिया की उसने मनु को मोहित का हमशकल बनाया और कहीं न कहीं उसे भी मनु से हमदर्दी थी की कैसे एक बचे ने कितना कुछ सहा है..

वीरेंदर “सुनील अब देखना कैसे मैं मनु को त्रिनेड करूँगा की मनु अकेला कितनो पैर भारी पड़ेगा …और इन सब में तुम मनु की देख रेख karoge…kyuki मनु का अपना भी परिवार है तोह हर समय हु यहाँ रह नहीं सकता पैर जब भी यहाँ होगा उसका खाना पीना तुम्हारा जिम्मा होगा तुम मनु को वर्ल्ड की सबसे बेस्ट डाइट देना ताकि मनु परफेक्ट फाइटर बनसके ..”

सुनील हाँ में सर हिलकर इशारा करता है ,,,सुनील ने एक बेस्ट डिएटिट्यां की ट्रेनिंग ली थी सो अब मनु की अछि डाइट का जिम्मा अब सुनील का था…

वीरेंदर और सुनील अब बहार आये जहां मनु aas-pass घूमकर आकर खड़ा था ….जहाँ मनु खड़ा था वहां वीरेंदर का बार था …जो उसके मोहित और सुकन्या के जाने के बाद बनवाया गया था …

वीरेंदर “मनु बीटा इनसे मिलो यह है सुनील मेरे बचपन का दोस्त और अब तुम्हारे डाइट का जिम्मा इनका hi होगा या यूँ कहो आज से तुमको क्या खाना है और कैसे खाना है इसमें तुम्हारे गुरु हैं यह…”

मनु ने सुनील के भी पेअर चुकार उसे गुरु का सम्मान दिया ..

सुनील “ारे यह क्या कर रहे हो मैं तोह नौकर हूँ यहां का और तुम मेरे पेअर छू रहे हो??”

मनु “ मास्टर ने आपको मेरे गुरु बनाया है डाइट में तोह मैं अपने गुरु का सम्मान किया है ..और गुरु सिर्फ गुरु होता है …उसका काम देखकर शिष्य नहीं सम्मान देता गुरु को सिर्फ गुरु योग्य सम्मान दिया जाता है जोकि मैं वही दे रहा हूँ ..सो आप ज्यादा सोचें नहीं..”

सुनील “ बीटा तुम सुच में बहुत अचे हो मालिक ने तुम्हारी जिम्मेवारी मुझे देकर मुझे जो तुमसे इज़्ज़त मिली है उसमे तुमने सुच में मेरा दिल जीत लिया आजके बाद तुम्हारी खाने के साथ …इंडियन मार्टिकल आर्ट्स की ट्रेनिंग मेरा जिम्मा है ठीक है न मालिक ?? सुनील ने वीरेंदर की तरफ देखते हुए कहा …

वीरेंदर “ सुनील मैं अचे से जनता हूँ की इंडियन मार्टिकल आर्ट्स में तुम्हारी कपाबिलिटी कितनी अछि है …पैर शायद मैं खुद भी नहीं कह सका पैर तुमने खुद कहा बहुत ाचा है ..मुझे ख़ुशी है …की तुमने खुद फैसला किया …”

मनु “ मास्टर क्या आपसे एक चीज़ पूछ सकता हूँ मैं अगर इज़्ज़ज़त हो तोह ..??”

वीरेंदर “ हाँ बीटा पूछों न और आगे से जो चाहे पूछ सकते हो ???

मनु “मास्टर इतनी साड़ी शराब कोण पिता है यहाँ …???”

वीरेंदर “बीटा मैं hi पिता हूँ …क्यों क्या हुआ ?”

मनु “मास्टर आपसे कुछ माँगना चाहता हूँ अगर आप बुरा न मने तोह …”

वीरेंदर “ बीटा कहा न जो कहना है बिना हिचक के कहो …”

मनु “ मास्टर क्या आप मेरे लिए यह शराब नहीं छोड़ सकते हैं …यह अछि आदत नहीं hai…plz इतनी बात मानेगेंगे न आप ..??”

वीरेंदर ने सुनील की तरफ हैरत से देखा सुनील की आँखों में आंसू आ चुके थे ..क्युकी शायद मनु ने हु कह दिया था जिसे हु दोस्त होने के बाद भी खुद न कह पाया था वीरेंदर से …

वीरेंदर एक लम्बी साँस के साथ“ मनु बीटा पहले मैं जीने की बजाये मरने के बहाने ढूंढा करता था पैर आज मुझे जीने की वजह मिल चुकी hai…toh आज जब तुमने कुछ माँगा है मुझसे और मैं न दूँ यह हो नहीं सकता ..आज से शराब हमेशा हमेशा के लिए बंद..”

मनु “ मास्टर जनता हूँ मैं की एक दम से छोड़ देना ठीक नहीं होगा आप अपने हिसाब से छोड़ दीजिएगा …और चाहे तोह ोक्सासिओनल्ल्य पि सकते है पैर हर रोज़ नहीं …प्ल्ज़ मास्टर ..”

वीरेंदर “ठीक है बीटा जैसा तुम कहो …”

मनु “मास्टर ाचा अब चलता हूँ …”

सुनील “मनु no वोर्री ड्राइवर घर छोडेगा तुमको ok “

मनु “ok गुरु जी “

उसके बाद मनु घर निकल जाता है ड्राइवर के साथ और वीरेंदर सुनील से “कल से इसकी ट्रेनिंग शुरू ..”और दोनों एक दूसरे को देखकर मुस्कुरा उठे …इसी के साथ मनु का आज का दिन ख़तम हुआ इतने बड़े उत्तर चढ़ाव के बाद जहाँ मनु मरते हुए बचा दोस्त का चाचा का धोका देखा और एक hi दिन में एक नहीं दो दो गुरु पा चूका था मनु …आज का दिन मनु की ज़िन्दगी में एक तूफ़ान सा आया था…

खैर अगला दिन आया मनु स्कूल गया जहाँ उसका सामना चिंटू से हुआ ..जहाँ चिंटू मनु को देखर हैरत में दुब गया tha…kyuki मनु तोह अब तक मर जाना चाहिए था चिंटू ने इसी का तोह प्लान किया था और इतना बड़ा काण्ड मनु के सर डाला था ..पैर मनु का जिन्दा होना इस बात का साबुत था की चिंटू की प्लानिंग फ़ैल हो चुकी थी …पैर मनु ने चिंटू को आज फुल इग्नोर कर दिया जैसे अब चिंटू का होना या न होना उसके लिए अब कोई मायने नहीं रखता था …

स्कूल ख़तम हुआ मनु ने उसके बाद पुष्पी और उसके बाद बाबा और भटनागर की ट्रेनिंग पूरी की और उसके बाद पूछा वीरेंदर (आगे से वीरेंदर को मास्टर hi लिखूंगा ) कैग हर जहाँ सुनील उसे देखकर बोलै “ बीटा सुबह से हम तुम्हारा इंतज़ार कर रहे थे तुम अब आये हो ?? यह कोई टाइम है आनेका??”

मनु ने फिर उसे अपना सारा सचेडूले बता दिया की कैसे उसे स्कूल और उसके बाद टूशन (पुष्पी के पास) उसके बाद दो जगह बिज़नेस की ट्रेनिंग लेने जाना होता है …जिसे सुनकर एक बार को तोह सुनील भी हैरत में आ गया की यह इतना टाइम सिर्फ अलग अलग तरह की ट्रेनिंग पैर hi लगा देता है उस पैर अब एक और training…kya बचा है …गज़ब.

सुनील “बीटा तुम कल से सुबह के 4 बजे से ट्रेनिंग पैर सिर्फ अपने घर से बहार आना एक ड्राइवर कल से सुबह तुमको पिक करेगा और यहाँ ले आएगा और इस लॉन (उस बहुत बड़े लॉन की तरफ इशारा करके ) यहीं तुम्हारी साड़ी ट्रेनिंग होगी आज तोह मालिक भी ऑफिस में चले गए तुम्हारा इंतज़ार करके .पैर कोई बात नहीं ..कल से रेडी रहना ..”

उसके बाद सुनील ने मनु को एक गिलास दूध दिया जिसमे पता नहीं क्या क्या मिल्या हुआ था मनु ने भी चुप चाप उसे पि लिया जिसके पिने के कुछ देर बाद hi मनु के शरीर से पसीना छूटने लगा …

मनु “गुरु जी यह सब क्या हो रहा है..??”

Sunil”manu डरो नहीं उसमे कुछ स्पेशल हर्ब्स थी जिनके चलते कुछ देर तुम्हारा पसीना निकलेगा ..उसके बाद तुम रिफ्रेश फील करोगे …सो don’t वोर्री..”

थोड़ी देर बाद सचमुच वैसे hi हुआ मनु के पसीने निकने बंद हुए और मनु खुद को नया और अलग सी ताज़गी में भरा हुआ फील कर रहा था ….जिस पैर सुनील ने एक डाइट चार्ट उसे दिया और उसमे क्या क्या नहीं खाना यह उसमे लिखा tha…jo मनु ने अचे से पड़ा और संभलकर रख लिया …और थोड़ा और टिप्स सुनील ने दिए उसके बाद मनु पैदल hi घर चला गया …और

अगले दिन से जो उसकी ट्रेनिंग शुरू हुई है …मनु का तेल्ल बोले तोह पसीना जो निकला है आप समझ जाओ बस …जिसमे सुनील ने मनु को इंडियन मार्टिकल आर्ट्स में ट्रेनिंग देना शुरू कर दिया पहला काम होता था मनु का स्टैमिना पैर जिसको पूरा किया डूअड़ लगवाकर ..मनु को कोई 1 वीक पूरा लगा लॉन के 4 चक्कर लगाकर एक्सरसाइज करने और उसके बाद की ट्रेनिंग को के साथ मैच करने में जिसमे सबसे ज्यादा हेल्प सुनील की डाइट ने की सुनील ने कुछ स्पेशल डाइट उसके लिए सेट की हुई थी वर्ण जिस ट्रेनिंग को लोग पुरे कई महीने में भी सिर्फ दौड़ के चक्कर में hi निकल देते वहां मनु सिर्फ एक हफ्ते में डूअड़ के साथ एक्सरसाइज और ट्रेनिंग तीनो पैर आ चूका था सुनील ने उसे इंडियन मार्टिकल आर्ट्स की ट्रेनिंग देना शुरू कर दिया था ..और मास्टर ने अपने बिज़नेस पैर भी ध्यान देना शुरू कर दिया ..क्युकी पहले सिर्फ शराब के चलते हु कभी जाता था कभी नहीं जाता था अपने ऑफिस पैर अब मनु को देखकर उसके दिल में एक नयी उमग आ चुकी थी ..और उसने भी बिज़नेस को अचे से देखना शुरू किया ..और बचे हुए कामो को फिनिश करना शुरू किया ताकि जब सुनील की ट्रेनिंग मनु फिनिश करे तोह उसके बाद हु खुद मनु को और हार्ड त्रिनेड कर सके …

उधर मनु सुनील की अछि डाइट और अछि ट्रेनिंग के चलते उसका शरीर और उसकी तेज़ी अपने चार्म पैर थी …क्युकी अब मनु की जो एक्सरसाइज थी उसका असर उसकी बॉडी पैर होने लगा था …क्युकी हु पहले से अछि एथलेटिक बॉडी रखता था पैर …अब जो बचा कुछ हिस्सा जो शायद नार्मल ट्रेनिंग में कविरूप न होता हो …इतनी इन्तेंसेड ट्रेनिंग के चलते उसकी बॉडी 13 साल में भी अछि हो चली थी हर जगह कट्स और चउरवे देखने लायक बन चुके थे …

जिसके चलते अब मनु कपडे थोड़े ढीले पहना करता था …ताकि किसी को उसकी बॉडी का साइज न पता चल सके …पैर इसके बाद भी अब लड़कियों में कहीं न कहीं उसका क्रेज सॉलिड था हाँ जनता हूँ की उसे निचा दिखने में क्लास की लड़कियों ने कोई कसार नहीं छोडी थी पैर दूसरे सेक्शन में भी तोह लडकियां थी …और खुद उसकी क्लास की लडकियां भी कहीं न कहीं खुद को कोसा करती थी की क्यों उनहूँ ने चिंटू के चलते मनु को निचा दिखया ….क्युकी मनु अब न सिर्फ ाचा दीखता था ाचा पड़ता था …हेल्पिंग तोह सबको पता hi था …पैर अब हर लड़की ने मनु को चिंटू को एक हाथ से पूरी क्लास के सामने हवा में लटकते देख लिया था …जिससे उसकी ताकत से भी बहुत इम्प्रेस thi…kyuki अकाल , शकल ,और ताकत एक साथ मिलना और उस में भी ाचा नेचर श्याद hi कोई लड़की हो जो मनु को पसंद न करे पैर मनु को उनसब में कोई दिलचस्पी बची नहीं थी …..क्युकी हु छह कर भी उनसब से मिली बेज़्ज़ती भूल नहीं पता tha…isliye जब कोई दूसरे सेक्शन की लड़की मनु से बात करती तोह मनु उससे बात कर लेता पैर अपनी क्लास वालों से नहीं …जिसपर क्लास की लड़कियों के दिल पैर कैसे सांप लूटा करते थे यह तोह उनका दिल hi जनता था…

उधर उस्मान भी ज़ोर शोर से उस मनचले को ढूंढ रहा था जिसने सुमैला के साथ हु सब किया था …जिसके लिए उसके सभी चेले काम पैर लगे थे पैर चिंटू अपनी मस्ती में मस्त tha..use तोह पता भी नहीं की मनु की वजह से उसकी उम्र और उसकी नफरत और लम्बी हो गयी thi…chintu भी अब थोड़ा चौककना था क्युकी उसे भी पता लग चूका था की उस्मान उस बन्दे को बुरी तरह से नाहा धोकर दंड रहा hai…chintu की एक बार तोह गांड का गुर्गावा बन गया था की अगर उस्मान के हाथ चढ़ गया हु तोह…

खैर अब मनु की लाइफ मैं फालतू लोगो की जगह नहीं थी ….अरे जगह तोह जब होगी जब बन्दे के पास टाइम होगा सुबह 4 बजे से ट्रेनिंग उसके बाद नहाना धोना जो हु सुनील और मास्टर के वहीँ कर लेता था …

उसके बाद स्कूल उसके बाद टूशन और फिर बिज़नेस की ट्रेनिंग बोले तोह मनु एक बस्सी पर्सन की तरह से बस्सी लाइफ जी रहा था … उस पैर सुनील की डाइट पता नहीं kon-konsi अलग अलग हर्ब्स मनु को देता था की मनु के चेहरे और बॉडी में एक अलग सी चमक आने लगी थी …अब मनु भी खुद को एक अलग एनर्जेटिक पर्सन फील करता था की एक दिन और कुछ ऐसा हुआ जो मनु के लिए और बहुत कुछ चेंज ले आया …

और क्या हुआ ऐसा और क्या चेंज आया मनु की लाइफ में …:हिंट:
 
थैंक्स बीआरओ......



भाई जी आप 8.30पं तक का टाइम मान लो क्युकी मैं अपने सारे काम फिनिश करके अपडेट कर देता हूँ

हाँ कभी अगर काम ज्यादा हो या अपनी डेस्क से बहार हूँ तब थोड़ा टाइम जरूर लग सकता हैं ...वर्ण कोशिश यही करता हूँ 8 या 8.30 तक पोस्ट कर दूँ ...

और भाई जो डाउट हो कहानी को लेकर आप जब कमेंट करोगे जैसे hi ऑनलाइन आऊंगा रिप्लाई कर दूंगा ....शायद hi कोई कमेंट हो जिसपर रिप्लाई न किया हो ...

सो जो बात हो बिंदास बोलने का भाई को ...👍:welcome1:



थैंक्स फॉर रीडिंग & स्टेइंग विथ us...:goteam:
 
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