Pyaar Nafrat or Kismat - Page 4 - SexBaba
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Pyaar Nafrat or Kismat

अपडेट 28

बचपन की यादें

मनु ने जब यह सुना तोह उसने पुष्पी को अपने गले से लग आलिया और बोलै “दीदी सॉरी मैं नहीं जनता था आप इतने दर्द में रही हैं अब से मैं आपका ध्यान रखूँगा.”

इस पैर पुष्पी को मनु पैर खूब प्यार आया तोह उसने मनु को और कस्ते हुए kaha”acha जी मेरा भाई मेरे साथ है मेरे लिए इतना काफी hai,waise मुझे नहीं पता था की मेरा भाई रोटा भी है…???”

मनु ने कहा” मैं कहाँ रो रहा हूँ,”

पुष्पी ने इस बात पैर उसकी ऑंखें से अपने हाथ लगये और उसके आंसू दिखाए मनु को खुद नहीं पता चला था को हु रो रहा था..

पुष्पी ने जब उसके आंसू दिखये तोह हु भी हैरत में padgya..jisper पुष्पी ने उसे प्यार से कहा “जब इंसान को कोई अपना लगता है तोह उस इंसान का दर्द भी अपना लगता hai,yahi वजह है किट ु मेरी वजह से रो पड़ा”

मनु जो अब तक शर्मिदा हो रहा था अपने रोने से उसने जब यह सुना तोह उसके दिल को सुकून मिला की दीदी को उसका रोना बुरा या अजीब नहीं लगा..

पुष्पी अब थोड़ी नार्मल लग रही thi,,toh दोनों अब नार्मल हैकर अलग होगये तब मनु ने पूछा”

दीदी एक बात पुछु आप ने मुझमे क्या dekha,jo मुझे इतना प्यार करती हैं,”?

पुष्पी ने kaha”main जानती हूँ किट ु यही पूछना चाहता है की मेरे खुद के सेज दो भाई हैं पैर उनकी जगह मैं तुझे अपना भाई मानती hun,,,ho सकता है आगे जाकर तुझे लगे श्याद में भी तेरा उसे कर रही हूँ,,??

मनु ने न में सर हिला दिया..

पुष्पी boli”main जानती हूँ की तुझे अजीब लगे पैर जो अपना पैन और इज़्ज़त तुझसे मुझे मिली और जैसे तू मेरी ख़ुशी के बारे में सोचता hai,or आज तोह देख भिलिया की मेरे दुःख पैर रॉब hi पड़ता है मेरे लिए तू hi मेरा सागा भाई hai,or इस बात से निचिंत रहना की तेरी बहिन कभी तुझे धोखा degi,mere भाई तू मेरे बारे में जो भी सोच पैर एक बात हमशा याद रखना की इस दुनिआ में जब कोई भी तेरी बात न मने तोह तू सिर्फ मुझे केहडेना बिना किसी शक के तेरी यह बहिन हमशा तेरे साथ रहेगी…”

उसपर फिर दोनों इमोशनल हो गए ,,,

मनु ने कहा “दीदी आप मुझे गलत समझ रही ho,,maine ऐसा सोचा नहीं .”

जिसपर पुष्पी बोली “मेरे भाई यह हम लड़कियों को गॉड गिफ्ट होता hai,humhe अचे से पता लगजाता hai,ki कोई लड़का हमारे बारे में क्या सोचता hai,or फिर यहां इतना सब हुआ तोह अगर तूने सोचा भी होगा तोह क्लियर करना मेरा काम hai.ek बात याद रकना अगर कभी भी ऐसा कोई टाइम आया की मुझे अपने घरवालों या तुझे चुनने का कोई ऑप्शन मिला तोह मेरा वोट हमशा तुझे hi milega..or एक बात ध्यान रखना आगे से मैं तेरे घर आया करुँगी वहीँ तुझसे बात करुँगी और आगे से तेरी पड़े का जिम्मा मेरा “

मनु बोलै “मतलब दीदी की टीचर का पहला बकरा मैं hi हूँ”

पुष्पी झूठ मुठ गुस्सा होकर मरते हुए boli”tu बकरा है से क्या मतलब है तेरा ाचा तुन यही चाहता तोह नहीं आउंगी तेरे घर और नहीं पड़ूँगी ...”
 
अपडेट 29

बचपन की यादें

मनु बोलै “मतलब दीदी की टीचर का पहला बकरा मैं hi हूँ”

पुष्पी झूठ मुठ गुस्सा होकर मरते हुए boli”tu बकरा है से क्या मतलब है तेरा ाचा तुन यही चाहता तोह नहीं आउंगी तेरे घर और नहीं पड़ूँगी ...”

मनु को लगा पुष्पी गुस्सा होगी है सो अपने कान पकड़ने की बजाये पुष्पी के कान पदक कर बोलै “सॉरी दीदी मेरा मतलब हु नहीं tha,aap मेरी बड़ी दीदी हो मारो पिता पैर गुस्सा मत होना “

पुष्पी उसकी इस बात पैर हसकर बोली “ाचा बाबा छोड़ मेरे कान दर्द हो रहा है”

मनु ने उसके कान छोड़ कर अपने कान पदकद लिए जिसपर पुष्पी हास्पदि.

फिर पुष्पी ने उसे kaha”ek बात का धयान रखना मेरे भाई मेरे घरवाले बिना किसी लालच के किसीको अपने पास आने भी नहीं dete,tu अपना ध्यान रखना मेरी माँ और चितु से थोड़ा दिमाग लगा कर बात करना और अगर कोई भी बात गड़बड़ लगे तोह मुझसे बात किये बिना कोई भी जवाब न देना.

बदले में मनु ने अपना सर हाँ में हिलाकर उसकी बात मानने का इशारा किया.

फिर दोनों अपनी बातो में लगे रहे उसके बाद पहले प्रसाद ने गेट पैर नॉक किया तोह पुष्पी अपने रूम में चली गयी उसके बाद मनु ने गेट खोला और प्रसाद को अंदर आने दिया उसके बाद..

थोड़ी देर में चिंटू और उसकी मम्मी आगयी, फिर मनु ने उनसे ध्यान से बात की और बाद में अपने घर चला गया…

टाइम अपने हिसाब से बीतने लगा जिसमे पुष्पी जब मन ऊके घर आयी तोह उसकी माँ सुमित्रा से मनु ने उसे मिलवाया और सुमित्रा को सबकुछ उसके बारे में पहले hi बता दिया tha..so सुमित्रा ने मनु से कहा था की उसे भी पुष्पी से मिलना hai.yeh जाने के लिए की कहीं पुष्पी भी कोई गलत टाइप तरह किन ा हो.

खैर पुष्पी से मिलने के बाद सुमित्रा के पुष्पी के बर्ताव से सब ठीक लगा और उसे भी ाचा लगा की उसके बेटे को एक ची बहिन मिलगई.

खैर पुष्पी ने अब मनु की पड़े की जिम्मेवारी ले ली thi.isme उसका यही लांच था की हु अपने भाई से मिल सके,,

खैर चिंटू के साथ स्कूल और घर पैर पुष्पी के साथ पड़े इसी में मनु के दिन बीतने लगे इसी बीच में चिंटू भी स्कूल में अपने नए दोस्तों के साथ टाइम बिताने लगा,,

इधर मनु की घर में नयी प्रॉब्लम त्यार थी…

प्रॉब्लम का नाम था जैचंद अरे भाई जय चाँद मतलब जय चन्दर जोकि उसका चाचा tha..rajinder का छोटा bhai.jisko अपने पिता और माँ की मौत के बाद राजिंदर ने खुद पला था और उसकी शादी करवाई थी..

जय चन्दर थोड़ा दुरत किसम का इंसान था इसमें उसकी कोई गलती नहीं thi,who तोह अपने बड़े भाई से हमशा इज़्ज़त करता tha.per उसकी बीवी थी असली वजह उसकी बीवी का मन्ना था की श्याद उसके झेठ राजिंदर ने दोनों के बाप की साड़ी सम्पति को अकेले डाब आलिया hai.jabki ऐसा नहीं था यह बात दोनों भाइयों को पता थी की कैसे राजिंदर ने खुद छोटी सी उम्र में काम करके उसे पड़ने और कामयाब बनाना की कितनी कोशिश किट hi.per जय चाँद हमशा मस्त मौला टाइप का इंसान था खाने पिने और अलसी टाइप का इंसान था जिसके लिए पड़ना ज्यादा संभव नहीं हुआ…

सो उसने पड़े छोड़ दी जिसपर राजिंदर ने उसे एक इलेक्ट्रिक की दूकान खुलवा दी ताकि जय चाँद अपनी लाइफ में सेटल हो सके पैर अलसी इंसान था जिंटा कामचलता उतना काम करता था.


उसकी शादी भी उसके भाई राजिंदर और उसकी भाभी ने करवाई thi,,suhagrat क ईगल दिन hi उसकी बीवी ने नया ड्रामा त्यार कर दिया था.
 
अपडेट 30

बचपन की यादें

सो उसने पड़े छोड़ दी जिसपर राजिंदर ने उसे एक इलेक्ट्रिक की दूकान खुलवा दी ताकि जय चाँद अपनी लाइफ में सेटल हो सके पैर अलसी इंसान था जिंटा कामचलता उतना काम करता था.

उसकी शादी भी उसके भाई राजिंदर और उसकी भाभी ने करवाई thi,,suhagrat क ईगल दिन hi उसकी बीवी ने नया ड्रामा त्यार कर दिया था.

खैर जैचंद की बीवी कमलेश ने उसे अलग होने को कहा तोह नया छूट का आशिक़ बना जय चाँद उसे मन नहीं कर paya.so उसने राजिंदर से कहा तोह राजिंदर ने कुछ नहीं कहा उल्टा उसके लिए नया किरये पैर मकान डिलवय जिसका 6 महीने का किराया भी राजिंदर ने अपनी जेब से भरा था.

हर रोज़ कमलेश जैचंद को नए नए तरीके से भड़कती रहती थी,

नया छूट का बहुत उसकी बात मने लगा जिसका नतीजा हुआ यह की धीरे -धीरे दोनों भाइयों में दुरी बढ़ती गयी..

पैर इसके बाद भी आपस में कोई झगड़ा नहीं hua,tha बातचीत काम होगयीथी पैर राजिंदर अभी भी जैचंद को प्यार करता था. सुमित्रा को यह बात बुरी लगती थी की एक भाई हमशा चालाकी दिखये और दूसरा माफ़ करता रहे.

मनु के पैदा होने के बाद जय चाँद से राजिंदर का लगाव देखकर सुमित्रा को बहुत गुस्सा अत था.

तोह राजिंदर ने एक बार इसका जवाब यह कहकर ताल diya.”maine उसे भी अपने बेटे की तरह पला है उसे कैसे भूल जॉन”

जिसपर सुमित्रा ने kaha”tum भूलो य आना भूलो पैर एक बात याद रखना की तुम्हारे खुद का भी बीटा hai.or उसकी परवरिश में मुझे जय चाँद का कोई साथ नहीं चाहिए और अगर तुमने मेरे बेटे का हक़ किसी और को देने का सोचा तोह sochlena.jis दिन ऐसा हुआ मैं तुम्हे कभी माफ़ नहीं karungi.kyuki मेरे माँ बाप का हमारी शादी में दिया हुआ सारा सामान और यहां तक की अपने जेवर तक उसकी शादी करने में हमने लगा दिए the,,badle में हमे अगले दिन hi अलग होने का सन्देश दे दिया था..


और जब अलग hi हो गए हैं तोह अलग और दूर hi अचे hain,tumhare लिए तुम्हारा भाई का लगाव अपनी जगह hai,per तुम्हारे लगाव का कोई भी असर हमारे बचे पैर पड़ा तोह मैं तुम्हे कभी माफ़ नहीं करुँगी”
 
अपडेट 31

बचपन की यादें

तोह राजिंदर ने एक बार इसका जवाब यह कहकर ताल diya.”maine उसे भी अपने बेटे की तरह पला है उसे कैसे भूल जॉन”

जिसपर सुमित्रा ने kaha”tum भूलो य आना भूलो पैर एक बात याद रखना की तुम्हारे खुद का भी बीटा hai.or उसकी परवरिश में मुझे जय चाँद का कोई साथ नहीं चाहिए और अगर तुमने मेरे बेटे का हक़ किसी और को देने का सोचा तोह sochlena.jis दिन ऐसा हुआ मैं तुम्हे कभी माफ़ नहीं karungi.kyuki मेरे माँ बाप का हमारी शादी में दिया हुआ सारा सामान और यहां तक की अपने जेवर तक उसकी शादी करने में हमने लगा दिए the,,badle में हमे अगले दिन hi अलग होने का सन्देश दे दिया था..

और जब अलग hi हो गए हैं तोह अलग और दूर hi अचे hain,tumhare लिए तुम्हारा भाई का लगाव अपनी जगह hai,per तुम्हारे लगाव का कोई भी असर हमारे बचे पैर पड़ा तोह मैं तुम्हे कभी माफ़ नहीं करुँगी”

यह सब सुनकर राजिंदर को सुचै का एहसास हुआ और सबसे बड़ी बात उसे दर भी लगा की उसकी बीवी जो काम बोलती hai.humesha उसके साथ देती hai,agar उसने उससे बात करनी बंद भी करदी तोह राजिंदर के हाल बुरे हो जाने हैं.

राजिंदर ने जब गॉड में मनु को लिया तोह उसे सुमित्रा का मतलब समझ आज्ञा.

सो

लेटस बैक ात स्टोरी

जय चाँद क्युकी शुरू से राजिंदर के साथ रहा था सो लगभग सब जानपहचान के लोग उसे जानते थे …

राजिंदर एक दूकान से हर महीने अपना राशन कर सामान लिया करता tha..jo सालो से दोनों भाइयों को जनता था.

जय चाँद कई महीने से उससे राजिंदर के नाम पैर उधर ले रहा था. दुकान का लाला राजिंदर को बोलता की जैचंद तेरे नाम से सामान ले गया hai..rajinder चुपचाप उसके पैसे दे देता था ताकि सुमित्रा को घर पैर पैट आना लग जाये और घर पैर हंगामा न हो यह सब कई साल से चलता आ रहा था…

हर घर का बजट होता है जिसको पूरा करने के लिए राजिंदर चुपचाप ओवरटाइम करता tha.per उसने कभी इसका जीकर अपने घर पैर नहीं होने दिया,,,

यह भी नहीं पता चलता पे हुआ यह मनु ने एक दिन राजिंदर से घूमने को कहा तोह राजिंदर उसे अपनी बाइक बुलेट पैर लेकर राशन की दूकान चला गया और मनु से बोलै “तू यहह घूम ले मैं तब तक सामान ले लेता हूँ.”

मनु वहीँ घूमने लगा तब तक लाला ने सामान निकलवा दिया tha..or हिसाब जोड़ रहा था.

की उतने में राजिंदर का कोई jaan-pehchaan वाला आया तोह हु दोनों पास में hi बात करने चले गए लाला से राजिंदर ने कहा था की मनु यहीं घूमकर ए तोह उसे बिठालना.

तब तक मनु आज्ञा लाला ने हिसाब जोड़ दिया tha..manu भी लाला को हिसाब करते हुए देख रहा था अब स्कूल में हिसाब सिक्य hi जाता है उसपर पुष्पी का टाइट गाइडेंस मनु ध्यान से देखा और बोलै “अंकल जी अपने हिसाब में ज्यादा पैसे लिख दिए हैं “

जिसपर लाला बोलै “बीटा मानव यह सही हिसाब है “तोह मनु बोलै “अंकल जी इसमें 3000रस ज्यादा हैं .”

तोह लाला bola”bete यह 3000रस तुम्हारे चाचा के हिसाब के हैं जो उन्होंने सामान लिया है..”

क्युकी लाला को यही लगता tha.ki शायद राजिंदर कैग हर पैर सब पता होगा.

मनु चौंका तोह पैर नार्मल होते हुए बोलै “सर इसी बार का है अंकल जी या पहले का भी लगाया हुआ है..”

जिसपर लाला ने हसकर kaha”beta हर महीने का हिसाब ऐसे hi होता है तुम्हारे चाचा सामान लेते हैं तुम्हारे पापा पैसे देते hain.koi तीन साल से ऐसे hi हिसाब हो रहा है “

मनु समझ गया उसके पापा का ओवरटाइम और हर बार जब भी हु ज़िद करता था की सामान लेन मैं भी चलूँगा तोह क्यों उसके पापा उसे साथ नहीं लेट थे और लेट थे तोह क्यों घूमने भेज दिया करते थे …

उसने कुछ सोचा और बोलै “अंकल जी आप पापा को मत बात आना मैंने गलत हिसाब किया है. वर्ण उनको बुरा लगेगा की मैं हिसाब किताब में अभी ाचा नहीं हूँ..”

लाला ने भी नार्मल बात समझ कर जाने diya,usne भी कहा ok.

तभी राजिंदर आज्ञा और उसने पैसे दिए और सामान लिया और दोनों घरके लिए निकल पड़े…

रास्ते भर मानु चुप raha…uski छुपी से आगे बहुत कुछ बदलने वाला tha….:armyman::don:
 
अपडेट 32

बचपन की यादें

तभी राजिंदर आज्ञा और उसने पैसे दिए और सामान लिया और दोनों घरके लिए निकल पड़े…

रास्ते भर मानु चुप raha…uski छुपी से आगे बहुत कुछ बदलने वाला था….

राजिंदर और मनु घर आये तो वहां अजय और सुमित्रा दोनों टीवी में मस्त थे.

मनु ने सोचा अगर उसके पापा ने उसकी माँ को नहीं बताया तोह उसका अपना रीज़न hoga,per क्युकी मुम्मुय को पता होना चाहिए सो उसने ाचा टाइम सोचा,

और जब उसे ठीक टाइम मिला तोह उसने सुमित्रा को बता दिया की राजिंदर कैसे चाचा की करनी को चुपचाप जेहल रहा है.

जिसपर सुमित्रा को बहुत गुस्सा आया .उसने उसी टाइम राजिंदर से बात करने का socha.per मनु ने उसे यह कहकर रोक दिया अभी रुक jaoo,,thoda टाइम अचे से सोचो ाचा टाइम देकर राजिंदर से बात करना ..

सुमित्रा ने मनु को बात मानने से मन कर दिया जिसपर मनु ने काफी देर समझया ,क्युकी वो नहीं चाहता था की उसके घर में किसी और को लेकर किसी भी तरह का कोई जगदा हो.

सो उसने अपनी माँ को समझाया जिसमे कुछ टाइम लगा पैर सुमित्रा समझ गयी ,,

उसने सुमित्रा को अगले दिन के लिए त्यार रहने को कहा ,और बोलै “मम्मी आपकी टेंशन का इलाज़ hai,,per आपको मेरा साथ देना होगा,,”

सुमित्रा ने कुछ सोचा उसको गुस्से से कुछ समझ नहीं आरहा था,,

उसे राजिंदर के उसके भाई के पैसे भरने से ज्यादा इस बात पैर गुस्सा आ रहा tha,ki राजिंदर ने उससे झूठ कहा है ,,

हु सोच नहीं प् रही thi,,jaisa आम टूर पैर होता hai,jab इंसान गुस्से में होता है तोह छोटी से छोटी बात पैर भी इंसान सोच कर बहार नहीं आ पता ,उसने मनु से पूछा “तुम इतने के बाद भी चाहते हो की मैं चुप rahun,maine तुम्हारे पापा से कहा था, मुझे मेरे बचूं का हक़ किसी और के साथ नहीं बाटना hai,per तुम्हारे पापा नहीं मने और उसपर भी तुम मुझे hi चुप रहने को बोल रहे हो.”

इस पैर मनु ने जवाब diya”mummy मैं आप को सिर्फ घर में किसी और को लेकर झगडे से रोक रहा hun,aap को पापा से बात करने से nahi,abhi आप गुस्से में ho,is टाइम आप बात करोगी तोह बात कहीं से कहीं पहुँच jaeygi.apko पापा के उनके भाई के राशन के पैसे देने से प्रॉब्लम है तोह उसका सलूशन hai,jisme काम भी हो जायेगा और कोई प्रॉब्लम भी नहीं hoogi.bas आप कल त्यार रहना आपको मेरे साथ चलना है.”

सुमित्रा ने मनु की तरफ देखा जो शांत कड़ा tha,uski आँखों की चमक देखकर सुमित्रा ने सोचा एक बार मनु की बात मानाने में क्या हर्ज़ है सो उसने मनु की बात मानली.

अगले दिन अजय स्कूल चला गया पैर मनु ने छुट्टी ले li,or जब राजिंदर चला गया उसके कोई 2 घाटे बाद सुमित्रा से बोलै “मम्मी आप रेडी हो न, चलने के लिए,”

सुमित्रा त्यार थी पैर उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था मनु कहाँ जाना चाहता है और उसका मतलब क्या है पैर उसने सोचा बेटे का साथ देने का ..सो त्यार हुई और दोनों चल दिए ,

रस्ते मैं मनु ने सुमित्रा को kaha”mummy सिर्फ आप मेरा साथ do,aapka प्रॉब्लम आसानी से सोल्वे हो jayega,kya आपको बेटे पैर इतना यकीं है.”??

जिसपर सुमित्रा ने kaha”manu बीटा अगर यकीं नहीं होता तोह तुझे कल रात hi,apne घर में वर्ल्ड वॉर 3 देखने को मिल जाता,,”

जिस पैर मनु हसकर बोलै “मम्मी उसी से अपने घर की शांति को करब होने से बचने के लिए आपके साथ अयाह un,agar मेरा प्लान फ़ैल हुआ तोह आप दोबारा वर्ल्ड वॉर 3 दिखा dena,main सिर्फ सुर से hi dekhunga,bas आप थोड़ा सबर रखो सब वही होगा जो मेरी प्यारी मम्मी चाहती हैं.”

इस बात पैर सुमित्रा को मनु पे बड़ा प्यार आया उसे लगा उसकी परवरिश कितनी सही है की उसका बीटा उसकी और उसके पापा के झगडे को रोकने में उसके साथ है, और साथ में उसके बेटे को अपनी माँ का भी कितना ध्यान hai,??ek तरफ उसे राजिंदर पैर गुस्सा था की कैसे हु उसके मन करने के बावजूद भी उसके बचूं के हक़ का पैसा अपने उस गंदे भाई पैर खर्च कर रहा hai.woh भी घर में बिना बताये वहीँ दूसरी तरफ उसका बीटा सिर्फ अपनी माँ की चिंता करता है, घर में सुकून और शांति रकना चाहता hai,or कैसे उसने सुमित्रा को गुस्से के बावजूद भी राजिंदर से लड़ने से रोक liya.or अभी भी उसके साथ है.

सुमित्रा ने जब यह सब सोचा तोह उसे अपने बेटे पैर बहुत प्यार आया तोह उसने ऑटो में hi मनु को अपने पास कीचकर अपने गले से लग आलिया,

जिसपर मनु भी चुप चाप अपनी मम्मी के गले लग गया और बोलै “मम्मी आप टेंशन न लो सब ठीक कर दूंगा बस आप सिर्फ मेरा साथ dena,aapki और पापा की ख़ुशी मेरे लिए सब कुछ hai,or थोड़ी देर में हम पूछ जायेगे.”


सुमित्रा ने सर हाँ में सर हिलाया और मनु से थोड़ा दूर होकर नोर्मल्ली बेथ गयी.
 
अपडेट 33

बचपन की यादें

जिसपर मनु भी चुप चाप अपनी मम्मी के गले लग गया और बोलै “मम्मी आप टेंशन न लो सब ठीक कर दूंगा बस आप सिर्फ मेरा साथ dena,aapki और पापा की ख़ुशी मेरे लिए सब कुछ hai,or थोड़ी देर में हम पूछ जायेगे.”

सुमित्रा ने सर हाँ में सर हिलाया और मनु से थोड़ा दूर होकर नोर्मल्ली बेथ गयी.

जिसपर ऑटो वाला जो दोनों की बाते सुन रहा tha,shyaad उसके बचे भी मनु जीतनेय होंगे हु मन ऊके बोलने के तरीके और अपने घर में शांति बांये रखने के तरीके के बारे में और अपने माँ बाप की चिंता करते हुए देखकर खुद के बचूं के बारे में सोच रहा tha…usne भी चुपचाप सब देखने का नीचे किया और बोलै” बहिन जी आपकी बाटइ जगह आगयी है.”

दोनों ऑटो से उतरे और पैसे देकर चलने वाले थे ,,

ऑटो वाले के मैं में भी यह जिज्ञासा थी की आगे क्या होगा सो वहीँ रुक गया और चुप चाप दूर से दोनों माँ बेटे को देखने लगा.

मनु अपनी माँ को राशन वाले लाला की दूकान पैर लाया tha..jahaan लाला के साथ उसका बाप बैठा tha..subha का टाइम था सो ज्यादा भीड़ नहीं थी.

मनु को लाला का baap(Bade लाला जी) जनता tha,so मनु आगे बढ़कर लाला के बाप (बड़े लाला जी) के पेअर चुकार उसने “नमस्ते बाबा “बोलै.

लाला का बाप (बड़े लाला जी) मनु से इम्प्रेस था क्युकी हु थोड़ा अलग ख्यालात का था जिसके लिए, बचूं का बड़ों की रेस्पेक्ट करना और संस्कारी होना अचे इंसान की पहचान thi,or उसकी इन सब बातों पैर मनु पूरा स्टिक बैठता tha,uske अपने घर के भी नियम थे की बचे सुबह उठकर सबसे पहले भगवन को प्रणाम करे उसके बाद बड़ो के पेअर चुकार आशीर्वाद le,jahan उसके मॉडर्न पोते पोतियां थोड़ा पेअर चुने को पुराने टाइम का बकवास मानते थे ..पैर दादा की सख्ती के षाले चुपचाप रोज़ की ड्यूटी मानकर पूरा करते थे,

ऐसा नहीं था क बड़े लाला जी को अपने पोते पोतियों की सोच के बारे में पता नहीं tha,use अचे से पता था.

वहीँ दूसरी तरफ मनु बिना किसी झिझक के अपने से बड़ो के पेअर छुआ करता था,

(कुछ लोग आज भी पेअर चुने को ओल्ड फैशन मानते हैं जबकि यह साइंस से भी प्रोवे किया हुआ है इसका पॉजिटिव असर पड़ता है, चाहे आप कैसे भी सोच सकते हैं, आप अपने से बड़े के पेअर चुकार उसे अपनी नम्रता या उसके प्रति अपना आदर दीखते है ,जिसका सिद्ध असर सामने वाले के दिल और दिमाग में होता है ,,उसे आपके पेअर चुने से आपकी उसके प्रति ादार की भावना सीधे पहुंच जाती है,,

चाहे आपसे कोई भी बड़ा हो पड़ा लिखा नए ज़माने का हो या पुराने ज़माने का उसके दिल में आपके लिए आपकी एक पॉजिटिव इमेज बन जाती है, जनता हूँ कुछ लोगों को यह बा ताकि नहीं लगेगी पैर चाहे कुछ भी कहलो किस साइंस भी इस बात को मंटा है की पेअर चुना इंडियन कल्चर का ट्रेडिशन रहा है उसका साइंस से क्या लेना देना.

तोह साइकोलॉजी के हिसाब से आपका किसी के पेअर चुना उसके दिल में यह साबित करता है की आप उसके सामने झुक रहे hain.uski जो भी क्वालिटी हैं उनको नमन कर रहे hain,so “एव्री एक्शन है टेक ान अपोजिट इक्वल रिएक्शन” उसके दिमाग में आपका उसकी क्वालिटी और उसकी रेस्पेक्ट आपको भी ऑटोमेटिकली रेस्पेक्ट दिला देता है.

साथ hi पेअर चुने से आपका भी थोड़ा एक्सरसाइज hi हो जाता hai,chaho तोह एक्सरसाइज समझकर करलो ,,

फोरेनर भी पेअर चुने से बड़े रेस्पेक्टेड फील करते hain,,so यहाँ का नार्मल पैर चाहे पीएचडी कर हुआ हो या नार्मल पर्सन आपके पेअर चुने से आपकी इमेज पॉजिटिव करदेता है.)

खैर लाला के बाप ने मनु को प्यार से उसके सर पैर हाथ फिरका कर पूछा ,”बीटा मनु तुम आज स्कूल नहीं गए और इस टाइम यहां अकेले आये हो क्या??”

उसने थोड़ा चिंतित होकर पूछा जिसपर मनु ने सर हिला कर न में जवाब दिया और kaha”nahi बाबा अकेला नहीं अयाह उन मम्मी के साथ आया हूँ”

जिसपर मनु की मम्मी ने जो सर पैर पलु लिए देय कड़ी थी ,, बड़े लाला जी ने देखा और वहीँ पास में दो कुर्सी माँगा कर दोनों को बेठ्या और कोल्ड ड्रिंक पिलये और अपने बेटे को गल्ले पैर बैठकर दोनों के पास बेथ गया और सुमित्रा से bola”beta बड़ा ाचा लगा की आज तुम भी आयी हो आज पहली बार तुमसे मिल हूँ, मनु मुझे बाबा कहता है तुम्हारे लिए यह समझ लो तुम्हारा ससुर सामान हूँ.”


जिस पैर सुमित्रा ने भी अग्गे बढ़कर लाला के baap(Bade लाला जी) के पेअर छुए.
 
अपडेट 34

बचपन की यादें

जिस पैर सुमित्रा ने भी अग्गे बढ़कर लाला के baap(Bade लाला जी) के पेअर छुए.

बड़े लाला जी बड़े खुश हुए और बोले” बीटा मनु से मैं मिलता रहता हूँ, बड़ा ाचा बचा hai,,bade अचे संस्कार दिए हैं तुमने मनु ko,,per हमशा में सोचता tha,ki मनु में यह सब कैसे वहीँ और बच्चों के देखता हूँ तोह समझना मुश्किल हो जाता हैं की मनु आजकल के समय में ऐसा कैसे hain..per आज तुमसे मिलकर समझ आया .की यह सब एक अछि माँ की अछि परवरिश का नतीजा है, पहली बार तुमसे मिला hun,per समझ आज्ञा मन ऊके जैसा ाचा बीटा सिर्फ तुम्हारा hi हो सकता है.”

जिस पैर सुमित्रा को मनु की और अपनी परवरिश पैर बड़ा प्राउड फील हुआ.

खैर कुछ देर इधर उधर की बाते हुई फिर बड़े लाला जी से मनु bola”baba अगर आप गलत न समझे तोह मम्मी कुछ बात कहना चाहती हैं आपसे” और सुमित्रा की तरफ देखकर बोलने का इशारा किया.

सुमित्रा को थोड़ा अजीब लगा की पहली बार किसी से मिली और अचानक से अपने घर की बात हु कैसे कहे,

बड़े लाला का रात दिन का काम था लोग से बात करने का उन्होंने जब सुमित्रा को देखा तोह हु उसकी झिझक समझ गए और बोले” बीटा तुम्हारे बेटे का बाबा हूँ, राजिंदर मेरे बेटे सामान है उस लिहाज़ से तुम्हारे ससुर सामान hua,per अगर कोई बात ससुर समझकर बोलने में कोई दिकत है तोह तुम मुझे अपना पिता समझकर बोल सकती ho..bikul निश्चिंत होकर कहो अपने पिता से.”

जब बड़े लाला जी ने यह कहा तोह सुनित्र को थोड़ा सुकून मिला सो उसने पूरी बात राजिंदर और जैचंद के सामान लेने से राजिंदर के पैसे भरने तक लाला जी को बता दी,

जिसपर लाला जी को राजिंदर पैर बड़ी हैरत हुई, पैर हु राजिंदर को लम्बे टाइम से जानते थे की कैसे उसने खुद को और जैचंद को पला पोसा था ,सो हु समझ गए ,एक तरफ उन्हें राजिंदर का अपने भाई के प्रति प्यार देखकर ाचा लगा वहीँ दूसरी तरफ जय चाँद की चालाकी देखकर गुसा aagya..unki समझ में सब कुछ आ गया की प्रॉब्लम क्या है..

बड़े लाला जी सुमित्रा से बोले “ बीटा बस इतनी सी बात तुम चिंता न karo,abse ऐसा कुछ नहीं होगा की मेरी बेटी और मेरे पोते को कोई परिशानी ho,per बदले में एक काम करना होगा तुम्हे..”

सुमित्रा हैरत में पड़गयी की क्या काम होगा.

जिसपर बड़े लाला जी बोले “बीटा तुम बेवजह डर रही ho,bas इतना सा काम है की मेरे पोते मनु को जब भी मैं यहां रहूं तब यहां बेहज दिया karna,mera बड़ा मैं लगता hai,manu से बाते करने में और साथ hi मैं इसे आनेवाले टाइम बिज़नेस के बारे में और हिसाब किताब के बारे में सीखना चाहता hun.per अगर तुमको यानि मेरी बेटी को कोई दिक्कत न हो तोह…”

सुमित्रा ने सुकून की साँस ली और boli”pitaji अगर मैं आपकी बेटी हूँ, तोह मनु भी आपका पोता है जिसपर अपने दादा का पूरा अधिकार hai..aap को मुझसे पूछने की कोई जरूरत नहीं hai,aapka पोता है जब उसके दादा चाहे उनके पास होगा उनका पोता मुझे क्या परेशानी होगी उसमे भला???”

जिसपर बड़े लाला जी बड़े कुश हुए और बोले “बेटी तुम सुच में बहुत अछि हो, तुम अब देखना मैं अपने मनु को कैसे एक ाचा बिज़नेस मन banauga,manu को बिज़नेस की अबकड ऐसे समझूंगा की साडी दुनिआ देखेगी मेरे पोते मनु को “

मनु से पूछा बड़े लाला जी ने “मनु बीटा तू आएगा न अपने बाबा के पास”

मनु बोलै “बाबा मेरे लिए तोह अपने बाबा के पास होना hi काफी hai,,sab बच्चों की तरह में भी बचपन से सोचा करता था की मेरे भी baba(dada) और amma(dadi) hon,per दोनों दुनिआ में नहीं the,per जबसे आपको पहली बार बाबा कहा दिल से आपको बाबा भी मान लिया पैर कभी कभी मिला करता tha,so बुरा लगता था की बाबा हैं पैर उनके साथ नहीं मिल पता और वैसे भी आप का और मेरा मिलना थोड़ा hi हो पता था ,,अपने जबसे मुझे पोता मन hai,mere लिए कितनी ख़ुशी है मैं बता नहीं sakta,mera बचपन का सपना पूरा होगया hai,mujhe बाबा मिलगये और क्या chahiye,,business का मैं सीखकर क्या करूँगा बाबा.”?

बड़े लाला जी “ बीटा अपने बाबा की बात मान और ध्यान से सुन आने वाले कल में क्या होगा किसी को नहीं pata.maine दुनिआ देखि है मुझे तुझसे ज्यादा दुनिआ का पता है मैंने जो कहा है कुछ सोचकर कहा hai,,tu ज्यादा मत सोच अपने बाबा की बात नहीं सुनेगा मनु”

मनु “बाबा आप मेरे बाबा हैं आपकी बात को न सुन्ना मेरे लिए पॉसिबल नहीं hai,apne जो बोलै मेरे लिए मेरे बाबा का हुकुम या बाबा का आर्डर hai.jo आपने कहा हर हाल में होकर रहेगा आप जब चाहेंगे में आ जाऊंगा …”


बड़े लाला जी “बीटा पहले राजिंदर की प्रॉब्लम सुलझा दूँ उसके बात हर रोज़ तुम मेरे पास अपना स्कूल और स्कूल का kaam(homework)ke बाद aajana,thik है.”
 
अपडेट 35


बचपन की यादें

बड़े लाला जी “बीटा पहले राजिंदर की प्रॉब्लम सुलझा दूँ उसके बात हर रोज़ तुम मेरे पास अपना स्कूल और स्कूल का kaam(homework)ke बाद aajana,thik है.”

मनु ने सर हाँ में हिलकर स्वीकृति दे di,uske बाद दोनों ने चलने के लिए बड़े लाला जी से पूछा तोह लाला जी ने kaha”beta अब तुम लोग जाना चाहते हो तोह मैं नहीं रोकूंगा क्युकी घर होता तोह शायद hi इतनी आसानी से में अपनी बेटी और पोते को जाने देता पैर यहां दूकान में ज्यादा देर रोकना भी संभव नहीं है सो ध्यान से जाना और राजिंदर की चिंता मत करो, जय चाँद का आज से यहां और आस पास के हर उस दूकान से जहां तक यह पूरा एरिया है वहाँ पैर राजिंदर के नाम से लेना आज से बंद हो जायेगा ,,तुम लोग निचिंत रहो ाचा अब दोनों घर जा सकते हो ,,”

दोनों माँ बेटे ने बड़े लाला जी से पेअर चुकार अलविदा ली, और वापस ऑटो को देखने लगे ,,,

हु ऑटो वाला भी जो नज़र रखे हुए tha,,unke ऑटो देखते hi वापस उनके पास ऑटो लेकर आ गया.

ऑटो वाला “कहाँ चलना है ?

मनु ने ध्यान दिया तोह उसे याद आज्ञा यह तोह वही ऑटो है जिससे हु दोनों आये थे,

ऑटो वाले से बोलै “अंकल आप तोह हमे लाये थे न,??

ऑटोवाला “हाँ बीटा यहां ज़ादा सवारी मिली नहीं सो सोचा रूट बदल लूँ वैसे तुमको कहाँ जाना है??’”

मनु “जहाँ से आये थे वहीँ वापस जाना है.”

ऑटोवाले ने दोनों को बैठाया और वापस चलने लगा.

रस्ते में सुमित्रा ने मनु से kaha”mera बीटा सुच में सही मायने में बड़ा होगया hai,teri सोच और तेरा तरीका बिलकुल सही tha,us पैर तेरे बाबा पैर तेरी सही इमेज ने मुझे तोह ज्यादा म्हणत करने नहीं di,aaj सुच में मेरे बेटे ने मेरा सर ऊँचा कर diya,per तूने अपने पापा से सीधे बात करने क्यों नहीं दी मुझे???

मनु “मम्मी आप के बोलने से पापा और आपके बिच कहा सुनी हो jati,jisse चाचा का कुछ नहीं jata,per हमारे घर का माहोल बिगड़ jata,unko एक दूकान से रोकने से क्या होता हु दूसरी दूकान से सामान लेते पापा के नाम पैर यहां बाबा को मैं अचे से जनता hun,baba की सिर्फ एक यह hi दूकान नहीं है, हु सिर्फ फिट रहने के लिए और क्युकी उनके पुस्तोव के ज़माने से यह दूकान है तोह हु सिर्फ यहाँ hi आते hain,unka काम काफी बड़ा है ऐसा मैंने आस पास के दुकान वालों से सुना hai..agar हु एक बार कह देंगे तोह चाचा का किसी और दुकान से पापा के नाम पैर लेना आसान नहीं hoga,so आप अबसे टेंशन फ्री ह जाओ..”

इस पैर सुमित्रा को उसकी बात और दिमाग के सही फैसले पैर बड़ा प्यार आया से फिर से उसे अपने पास खींच कर अपने गले से लग aliya.or boli”matlab इतना सब सोच रखा था तूने और इतनी प्लानिंग कर राखी thi,,,or मैं सोच रही थी पता नहीं क्या करने वाला है तू ,,मैं तोह सिर्फ सोचे बैठी थी की कैसे तेरे पापा की खबर लूँ और कैसे उनको लाइन पैर लेकर aaun,,ki हु तुम दोनों भाइयों के बारे में भी soche,,per तूने जो किया सही kiya..main बता नहीं सकती की कितनी खुश हूँ मैं मेरा बीटा इतना ाचा और समझदार है की एक बार में उसने हु किया जो मैं श्याद hi कर pati,,mujhe तुझपे सुच में बड़ा गर्व हुआ है मेरे लाल”

यह कहकर मनु का सर चुम लिया सुमित्रा ne,jisper मनु बोलै “मम्मी मैंने कुछ स्पेशल नहीं किया मैंने सिर्फ अपने घर की शांति का सोचा और यह सोचा की क्या करना सही है और क्या करने से सब सही हो सकता hai.per एक बात समझ नहीं आयी…


सुमित्रा “कोनसी बात”
 
अपडेट 36

बचपन की यादें

सुमित्रा “कोनसी बात”

मनु “यही की बाबा ने जब मुझे हिसाब किताब सीखने को कहा तोह अपने भी उनका समर्थन किया..??

सुमित्रा “बीटा तेरे बाबा ने कुछ सोचकर hi कहा होगा, हु हम दोनों से उम्र में बड़े हैं और तुझे भी कितना प्यार करते hain,who रात दिन लोगों से मिलते hain,unhoone होसकता है कुछ सोचा होटेरे बारे me,ya हो सकता है तेरे साथ ज्यादा टाइम बीतने चाहते ho,so तू ज्यादा मत सोच ,और वैसे भी कुछ नया सिखने में कोई बुराई नहीं hai,,kya पता कब कोई पुराणी सिख काम आजाये सो जैसा तेरे बाबा ने कहा मान ले कमसे काम उनके साथ रहने से तुझे भी कुछ नया सिखने को मिलेगा hi तोह बुराई क्या है,,”

मनु ने सोचा बात तोह सही प्रॉब्लम है hi क्या कुछ नया सिखने में.

इस पैर ऑटोवाला भी जो अब तक चुपचाप सुन रहा था अब बोल pada”behan जी आपने सही कहा देखिये मैंने कभी नहीं सोचा था की मैं कभी कोई गाडी चलाऊंगा पैर आज चला रहा hun,samay का कुछ पता नहीं होता बीटा जो हुनर इंसान सीखता hai,kabhi न कभी काम ाही जाता है,”

फिर सुमित्रा से बोलै autowala”behan जी आप सही में किस्मत वाली hain,jo आपका बीटा अभी से अपनी बूढी और सही बर्ताव से घर के और आपके बारे में सोचता hai.warna एक तरफ मेरे बचे भी हैं जिनको न पड़ने की चिंता है न खेलने से fursat..such में आपकी परिवरिश को दिल से मंटा हूँ की आपका बीटा कितना समझदार है इतना छोटा होने बावजूद.”

इसपर सुमित्रा को बड़ा ाचा लगा की कैसे लोग मनु के साथ उसके अछि परवरिश को भी सराह रहे the,kisi भी माँ के लिए तोह प्राउड hi होगा न.

वही सुमित्रा दिन में दो बार मनु और अपनी परवरिश की तारीफ सुनकर मनु के लिए उसके दिल में स्पेशल जगह bangyi(maa का फेवरेट beta),udhar मनु ने भी पुरे मैं लगा कर बिज़नेस को सिखने का पूरा मैं पका कर लिया था उसे उसकी माँ और ऑटोवाले की बात समझ आगयी थी को कोई भी हुनर सिखने में कोई बुराई नहीं hai,so उसने भी पूरा मैं लगाकर बाबा से सिखने का पक्का मैं बना लिया.

खैर ऑटोवाले ने दोनों उनके बताई जगह पैर छोड़ा और दोनों घर आ गए, शाम को मनु ने अपनी didi(pushpi) के साथ पड़े की और दिन ख़तम हो गया..

ऐसे hi दिन बेटने लगे मनु का स्कूल में चिंटू के साथ जाना और वापस आकर पुष्पी के साथ पड़े और उसके बाद बड़े लाला ji(ab से बड़े लालजी बाबा hi लिखूंगा ) के साथ बिज़नेस सीखना लगा रहा ,

उधर राजिंदर को पता लगे बगैर जय चाँद की चालाकी धरी रह गयी aas-paas के एरिया में कोई भी उसे अब राशन नहीं देता था क्युकी बाबा ने सबको बोल दिया था की जैचंद जहां से भी राशन ले उसे उधार राशन न मिले पैर जय चाँद को तोह राजिंदर के नाम पैर राशन लेने की आदत पद गयी थी,

सो उसके लिए तोह यह किसी पहाड़ टूटने से काम नहीं था, खाना इंसान की जरूरत होती है उसपर जय चाँद को दुर्रू के हिस्से का खाने की आदत लग चुकी thi,so जब उसने देखा उधर बंद है सो उसने मज़बूर होकर काम पैर ध्यान दिया और पैसे कमाकर राशन लेने laga,udhar जब जैचंद की बीवी कमलेश को यह पता लगा की उधर मिलना बंद तोह डॉट से मज़बूर लगी फिर से जैचंद को उसके भाई राजिंदर के खिलाफ भड़काने. जय चाँद तेरा छूट का बहुत आने लगा उसके भड़काने में उसके दिल में भी नफरत पनपने lagi,rajinder और उसके परिवार के खिलाफ,


अब यह तोह टाइम hi बता सकता है की उन्दोनो की नफरत मनु और उसके परिवार की ज़िन्दगी में क्या रंग लाएगी.
 
अपडेट 37

बचपन की यादें

अब यह तोह टाइम hi बता सकता है की उन्दोनो की नफरत मनु और उसके परिवार की ज़िन्दगी में क्या रंग लाएगी.

उधर चिंटू भी लगा हुआ था मन ऊके साथ पड़ने और स्कूल में नए दोस्तों के साथ मस्ती में manu,kyuki हु मनु का दोस्त hai,usper मनु का ाचा जॉली और हेल्पिंग, केयरिंग नेचर की वजह से सब कहीं न कहीं उसे मनु से कपड़े करने लगे थे,

चिंटू तेरा चिंटू घर पैर maa-baap का कहना मनु से कुछ सीखो, बहार सबका कभी न कभी मनु की तारीफ सुन्ना उसके बुते से बहार हो चला tha.usper मनु का अब अपने बाबा के यहां जाना, अब मनु को थोड़ा ज्यादा बस्सी रखता tha,jis वजह से हु अपने दोस्तों से काम hi मिल पता था क्युकी स्कूल में सारा दिन पीरियड यानि पड़े के साथ बस्सी और उसके बाद पुष्पी टीचर की हार्ड डिटेंशन टूशन उसके बाद बाबा के पास जाकर बिज़नेस सीखना.

चिंटू लिए ाचा टाइम था खुद मनु से बेटर प्रोवे करने का. सो चिंटू ने कमर कास ली ज्यादा से ज्यादा टाइम अपने नए दोस्तों को देता खूब खेलता और जब कोई मनु को पूछता तोह केहड़ेटा “यार हु आजकल थोड़ा बदल गया hai..”jisper उनसब ने पहले यकीं नहीं kiya..phir एक बार मौका देखकर सबने मनु से पूछा की क्या बात है आजकल तुम्बाट नहीं करते हमसे तोह मनु ने पूछा क्या हुआ कोई बात हुई क्या तोह सबने चिंटू की बात बतादि.

मनु समझ गया पुष्पी ने जो कहा था ,,और यह भी समझ गया की चिंटू ने अपने पते बिछाने शुरू कर दिए hain..kyuki उसकी टाइमिंग बहुत टाइट thi,usper पुष्पी दीदी से मनु के प्यार (भाई बहिन वाला प्यार)

ने चिंटू के खिलाफ कुछ भी बोलने से मनु को चुप रहना ज्यादा ठीक लगा,

सो उसने कहा की “यार हु सही कह रहा था आजकल थोड़ा घर पैर काम है और अजय को भी पड़ना पड़ता hai,so बस्सी रहता hun,tumloog तोह मेरे दिल में हो यारो तुमसे बात काम हो भी जाये तोह दिल को सुकून देने के लिए काफी hai”kyu क्या अपने दोस्तों को टाइम नहीं दे पाया तोह तुम लोगो को भूल गया ऐसा सोचना भी नहीं मेरे दोस्तोव मनु के लिए उसका हर दोस्त उसके दिल में बस्ता hai,tum लोगो को देख भी लूँ तोह मुझे सुकून मिल जाता है की तुम लोग ठीक ho.mere लिए तोह इतना भी काफी है”

सब दोस्त उसकी इन बातो से समझ गए की क्या मामला है चिंटू ने क्या आग लगयी hai,,jisper सब चिंटू को अचे से सबक सीखने के लिए सोचने लगे तोह मनु ने उन्हें रोक दिया और बोलै “दोस्तों उसे गलत मत समझो हु सिर्फ तुमलोगो का दोस्त बना चाहता है उसे सिर्फ तुम लोग की अटेंशन चाहिएः होगी सो उसने भूलसे कुछ कह दिया hoga,usme गुस्सा होनेवाली क्या बात hai”?tumloogo को अगर में ज्यादा टाइम नहीं दे पारा हूँ तोह क्या हुआ हु है na.use भी मेरे जैसा samjho,or अपना लो उसे भी ,पैर एक वडा करो की उसे कभी भी यह सब बाते पैट आना लगने देना”

सब मने को त्यार नहीं थे क्युकी किसी को अपने दोस्त के खिलाफ उसके hi दोस्तों को भड़काने वाले को कोण दोस्त बनाना पसंद करेगा bhala.per क्युकी मनु ने वडा ले लिया था सो सबने मनु की बात मान ली क्युकी चिंटू उस समय कहीं और था सो उसे कुछ नहीं पता चला ,

खैर उधर सुमित्रा की शालिनी से बात चित भी काम हो चली थी क्युकी दोनों के अपने घर में hi बहुत काम होता tha.or उसपर दोनों के बचे भी थोड़े बड़े होने लगे थे.

ऐसे hi एक बार सुमित्रा के पास शालिनी का फ़ोन आया तोह शालिनी ने बताया की भानु का उसके बॉस से झगड़ा होगया hai,or गुस्से में उसने जॉब छोड़ दी है क्युकी भानु ने इतने साल से थोड़ा पैसा ऐसे टाइम के लिए सेफ रखा tha.so उसने बिज़नेस का सोचा tha.so उसके लिए हु लोग दिल्ली शिफ्ट होने वाले the.shalini ने सुमित्रा से कहा की हो सकता है कुछ दिन बाद दोनों दिल्ली सहित हो jaye,Sumitra ने भी अछि सहेली की तरह शालिनी के अचे फ्यूचर की कामना की और अपनी बेस्ट विशेष उसको di,badle में दोनों एक दूसरे के बच्चों के बारे में बात करती thi,Shalini मन ऊके बारे में और सुमित्रा कनु के बारे में,


वहीँ कनु और मनु अपनी अपनी ज़िन्दगी इतने बिजी थे की दोनों एक दूसरे से किये हुए अपने बचपन के वेड और बचपन की दोस्ती को भूल चुके थे. या यूँ समझो दोनों एक तरह से एक दूसरे से पूरी तरह अंजान हो गए थे. अब दोनों के शहर भी बदल गए थे दिल्ली और राजनगर अब मिलना बिछड़ना तोह किस्मत के हाथ में hota.or किस्मत का खेल किसी को कोई पता nahi.manu अपनी ज़िन्दगी में आनेवाले तूफ़ान से बेखबर tha.tufaan जो उसकी सोच से ज्यादा तेज़ी से उसके पास आ रहा था.
 
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