Pyaar Nafrat or Kismat - Page 2 - SexBaba
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Pyaar Nafrat or Kismat

अपडेट 8

बचपन की यादें

पैर भानु के पिता और भानु दोनों जानते थे की अगर भानु वहाँ रहा तोह उसके परिवार के लिए लोगो की बातून का जवाब देना मुश्किल हो जाता…

खैर भानु ने राइड छोड़ा और दूसरे शेर में आज्ञा वहाँ असिस्टेंट मैनेजर की पोस्ट पैर काम करने लगा क्युकी पड़ा लिखा तोह था hi …ऐसा नहीं था की बड़ी पोस्ट नहीं मिल सकती थी पैर उसने थोड़ा लौ प्रोफाइल काम खुद hi चुना था …ताकि काम लोगो को उसके बारे में पता चले…

खैर टाइम अपने हिसाब से चलता रहा और भानु और शालिनी कैग हर एक नहीं पारी ने जनम लिया जिसका नाम उन्दोनो ने बड़े प्यार से कनिका रखा जी हाँ कनिका उर्फ़ कनु.

जब कनु थोड़ी बड़ीहुई तोह उनका ट्रांफर राजनगर हो गया जहां उसका एडमिशन मन ऊके स्कूल में हुआ बाकी तोह आपने पड़ा hi है…

एक बार सुमित्रा और शालिनी की मुलाकात पेरेंट्स मीटिंग के षाले होगयी थी दोनों के बचे एक दूसरे के बारे में ज़ाहिर सी बात है तोह घर पैर भी बात करते होंगे सो दोनों में बात हुई …और आप सभी को लेडीज टॉक तोह पता hi होगा ….हाँ जी 2 या 3 घाटे हुई बात में दोनों की अछि दोस्ती हो गयी ….क्युकी दोनों के पति भी शामे कंपनी में काम करते थे पैर पोस्ट का बहुत बड़ा डिफरेंस था जो आप सभी को टाइम के साथ पता चल जायेगा ….

खैर जब दोनों की दोस्ती हुई तोह दोनों एक दूसरे के बचूं का ख्याल भी रखने लगी ,,,,

शालिनी को मनु जो चुप चाप रहता था बहुत मासूम और पसंद tha,,ulta नहीं सोचने का पसंद बोले तोह क्यूट लगता था,,,

वहीँ सुमित्रा को नटखट bad-bad करके सबके दिल लगने वाली कनु बड़ी क्यूट lagti,thi

अरे भाई होता है न जो पास होता है उसमे नया क्या उसका अपोजिट मिले जो रोज़ खाते हो तोह अचानक से पार्टी वाली फीलिंग आती hai…wahi दोनों के साथ था…

खैर जब सुमित्रा ने सुना की कनु के पापा का ट्रांसफर हो गया है ,,,इसका मतलब हु सब चले जायेंगे तोह कनु का क्या होगा….

माँ की ममता jaagi,,unhe अचानक से अपने बेटे की चिंता होने लगी की अब मनु का क्या होगा ….
 
अपडेट 9


बचपन की यादें

खैर जब सुमित्रा ने सुना की कनु के पापा का ट्रांसफर हो गया है ,,,इसका मतलब हु सब चले जायेंगे तोह कनु का क्या होगा….

माँ की ममता jaagi,,unhe अचानक से अपने बेटे की चिंता होने लगी की अब मनु का क्या होगा ….

सुमित्रा को लगा अब उनका बीटा फिर से अकेला पद जायेगा ,क्युकी उनकी लोकैलिटी में कोई छोटा बचा तोह थान यही और जो बड़े थे उनके साथ बचे का कहलना पॉसिबल नहीं था क्युकी जहां वह रहते थे वह जगह उसी कंपनी के वर्कर्स के लिए the,asaan भाषा में वह उसी कंपनी की कॉलोनी थी ,,,और कंपनी की कॉलोनी में एक बात बहुत मटर करती है हु hai,worker की पोस्ट सू लौ पोस्ट के वर्कर को उसके विचारो से नहीं उसकी पोस्ट से जज किया जाता tha,,,yeh मन्ना नार्मल लोगों के लिए थोड़ा मुश्किल है पैर जो ऐसी किसी colony’s में रह चूका हो हु अचे से जनता hoga…jaise मंजर की बीवी मनगरनि और चपरासी की बीवी चपरासन यह हु कमान वर्ड हैं जिनसे आप सभी को अंदाज़ा हो गया होगा ,,,की बहले hi दुनिआ चाँद पैर चली जाये पैर इन पैर पोस्ट से ज्यादा सोचने की फुर्सत मिले तब सोचना …

खैर वापस सुमित्रा की चिंता बड़ी थी उसे उसके बेटे का अकेलापन साफ़ साफ़ महसूस हो रहा था उसने उसी चिंतित सवार में राजिंदर से pucha”kab तक चले जायेगे हु लोग क्या रुक नहीं सकते ,अब मनु का क्या होगा ,,,,”

राजिंदर भी उसकी चिंता को समझ कर बोलै “मैं जनता हूँ तुम क्या पूछना चाहती हो ,मैनेजर साहिब की ट्रांसफर होगयी hai,isme हम क्या कर सकते हैं, अगले हफ्ते तक उनको जाना होगा ,,,

सुमित्रा ने राजिंदर से kaha”aapne सोचा मनु का क्या होगा मेरा बीटा फिर से अकेला पद जायेगा ,,,

उसके इस अकेलेपन से आगे आने वाले कल में उसके दिमाग पैर क्या असर होगा,,,???”

राजिंदर ने कहा “जनता हूँ तुम कहना क्या चाहती हो मैं भी उसका बाप हूँ ,मुझे भी यही चिंता है, की हमारे बेटे का क्या होगा ,,,?”

राजिंदर ने कुछ सोचा और kaha”dekho एक काम हो सकता hai…agar तुम कहो तोह???”

सुमित्रा ने हैरानी से देखा और kaha”kya हो सकता है ,,,मैं अपने बचे को अकेला नहीं देख sakti,,uske लिए जो भी सही है ,,हु करुँगी…”

राजिंदर ने kaha”dekho तुम भी समझदार हो कब तक हम किसी और बचे से उसके अकेलेपन के लिए उम्मीद lagayen,ab हर बचा अपने maa-baap के साथ रहता hai.toh क्यों न हम अपने मन ऊके लिए कोई भाई या बहिन के लिए तरय करलेने क्युकी दूसरे का बचा तोह आज नहीं तोह कल चला जाएगा पैर उसका भाई या बहिन तोह हमेशा उसके साथ रेहगा न,,,”

राजिंदर की बात सुमित्रा ने सोची उसे अपने पति की बात साहिब hi लगी क्युकी, दूसरे का बचा आखिर कब तक उनके बेटे का साथ रहे खुद का भाई या बहिन उसके साथ जब मर्जी चाहे खेल सकता है…

सुमित्रा ने राजिंदर की तरफ देखा और कहा “आपकी बात सही है उसे अब उसके भाई या बहिन के साथ की जरूरत hai…abhi कुछ दिनों में उसकी गर्मी की छुट्टियां पड़ने वाली हैं ,,,तब उसे उसकी नानी के पास दिल्ली बेहज देंगे और उसके भाई या बहिन के बारे में सोचेंगे ,,,”

राजिंदर ने मुस्कुराकर अपना सर सहमति में हिलाकर ,,,आगे की बात बड़ाई ,..और ऐसे hi यह दिन बिट गया…

अगले दिन ज्यादा कुछ नहीं हुआ शामे रूटीन बचे अपने स्कूल दोनों को अपनी दुनिआ से फुर्सत hi कहाँ थी…

आखिर थे तोह कनु और मनु बचे hi….unhe दिन दुनिआ से भला क्या लेना देना थोड़ी सी ख़ुशी और थोड़ा सा पसंद का खाना मिल जाये और थोड़ा पसंद का खिलौना मिल जाये बचे के लिए उसका फेवरेट दिन होता है,,,



खैर वहीँ भानु अगले हफ्ते में क्या करना है उसमे बिजी होना शुरू कर दिया था ,,,कहाँ रहना है लाड़ली का स्कूल और बस की सर्विस और आस पास की लोकैलिटी और नियर बी में हॉस्पिटल यह सब देखकर aas-paas में कनेक्टिविटी देखकर नई कॉलोनी में अपने नई घर और नई जगह के वर्कर के साथ ताल मेल बिठाने के चक्कर में बेचारा बहुत बिजी रहने लगा था…
 
अपडेट 10


बचपन की यादें

खैर वहीँ भानु अगले हफ्ते में क्या करना है उसमे बिजी होना शुरू कर दिया था ,,,कहाँ रहना है लाड़ली का स्कूल और बस की सर्विस और आस पास की लोकैलिटी और नियर बी में हॉस्पिटल यह सब देखकर aas-paas में कनेक्टिविटी देखकर नई कॉलोनी में अपने नई घर और नई जगह के वर्कर के साथ ताल मेल बिठाने के चक्कर में बेचारा बहुत बिजी रहने लगा था…

वहीँ उनके बिजी रहने फ़ायदा उनकी वाइफ शैलिनी को खूब मिल रहा tha…jo आजकल मनु और कनु के स्कूल से आने के बाद अपनी बेस्ट फ्रेंड सुमित्रा ,,हाँ जी फ्रेंड को बेस्ट फ्रेंड बनने में वक़्त hi कितना लगता hai,,jab बचे शामे स्कूल में ho,,similar आगे ग्रुप हो शामे लोकैलिटी में रहते हो और उप्पेर से आपके बचे बेस्ट फ्रेंड जैसे हो तोह बेस्ट फ्रेंड बनने में टाइम कितना लग्न चाहिए .

खैर अब दोनों मॉम्स यंग थी और दोनों के बचे एक दूसरे माँ के फेवरेट थे सो दोनों का दुःख भी शामे hi tha,,,manu की माँ को कनु से दूर होने का दुःख और कनु की माँ को मनु से दूर होने का दुःख.

खैर आजकल दोनों मॉम्स अपने बच्चू को थोड़ा बहुत बहार घूमने ले जाती thi,,,jahaan दोनों बहस अपनी मस्ती में खूब मज़े से कहते और दोनों की मम्मीओं की वही गिल्स टॉक …ऐसे में अचानक एक दिन शालिनी ने सुमित्रा से kaha”Sumitra एक बात कहूं अगर तुम्हे बुरा न लगे तोह ,,,

सुमित्रा ने kaha”itne दिन होगये अगर बुरा लगता तोह अपने घर hoti,,,bindass बोलो”

शालिनी समझ गयी आज सुमित्रा का मूड ाचा है सो उसने आगे kahaa,,,”mujhe मनु से दूर जाने में पता नहीं क्यों ाचा नहीं लग रहा hai,mera बस चलता तोह मैं अपने मनु को किसी तरह से छोड़कर नहीं jati,,ya अपने साथ ले जाती..”

सुमित्रा ने इसकी बात सुनी तोह उसके हाथ को थमा और कहा “शामे मैं भी यही सोचती hun,,per भला यह कैसे संभव है,,,

सुमित्रा का िश्रा शालिनी के पति और उसके back-ground से tha,,jiske बारे में शालिनी ने खुद बताया tha,,aap सब तोह जानते हैं अगर दो ौरातून को थोड़ी देर के लिए अकेला छोड़ दो तोह पता नहीं एक दूसरे के बारेमे कितना जनलटी hain(yaar कहा तोह सुच है पैर फ्रेमलेस रीडर से पहले hi सॉरी ?)

खैर सुमित्रा ने जब यह कहा तोह शालिनी ने kaha”Sumitra तुम ऊँचा निचा मत सोचा karo,kismat कब किसीको कहाँ ले जाये यह खुद उस इंसान को पता नहीं होता,,, “

सुमित्रा “पैर चादर के हिसाब से अगर पेअर रहे तोह ाचा hai,,chahti तोह मैं भी कनु को हूँ पैर अपनी हैसियत नहीं भूलपति,”

इस पैर शालिनी ने kaha”thik है अगर तुम हैस्यत नहीं भूलना चाहती तोह एक वडा करो ,मेरा मनु मुझे जब मगन तोह दे dogi,,,samjh रही हो न???”

सुमित्रा हैरत से सोचने लगी की जो बात उसके दिल में थी अचानक बेहिचक शालिनी ने केहड़ी वह बेचारी सोच में पद gyi,kya बोले क्या न बोले क्युकी हु भी चाहती वही थी जो कनु की माँ चाहती थी पैर एक उच्च नीच की दिवार ने बेचारी के मुँह पैर छुपी का टाला लगा दिया ,,था..

शालिनी ने जब यह देखा तोह हु समझ गयी की उसकी बेस्ट फ्रेंड चुप क्यों hai,,,who boli”dekhka सुमित्रा में जानती हूँ तुम क्या सोच रही हो तुमको मेरे और कनु के पापा के बारे में पता hi है मैंने कभी नहीं सोचा था की , ुंजाईसे इंसान से कभी मेरी शादी hogi,per शायद किस्मत में लिखा था सो बहुत कुछ हुआ पैर मेरी शादी उनके साथ hui,or आज तुम्हारे सामने हूँ कनु के sath,mujhe मनु मैं पता नहीं क्यों अपनापन नज़र आता hai,or मेरा दिल यह कहता है की उसकी किस्मत एक दिन उसे बहुत बड़ा और ाचा इंसान banyegi,,us समय मैं अपने मनु को अपने पास देखना चाहती हूँ,,,”
 
अपडेट 11

बचपन की यादें

शालिनी ने जब यह देखा तोह हु समझ गयी की उसकी बेस्ट फ्रेंड चुप क्यों hai,,,who boli”dekhka सुमित्रा में जानती हूँ तुम क्या सोच रही हो तुमको मेरे और कनु के पापा के बारे में पता hi है मैंने कभी नहीं सोचा था की , ुंजाईसे इंसान से कभी मेरी शादी hogi,per शायद किस्मत में लिखा था सो बहुत कुछ हुआ पैर मेरी शादी उनके साथ hui,or आज तुम्हारे सामने हूँ कनु के sath,mujhe मनु मैं पता नहीं क्यों अपनापन नज़र आता hai,or मेरा दिल यह कहता है की उसकी किस्मत एक दिन उसे बहुत बड़ा और ाचा इंसान banyegi,,us समय मैं अपने मनु को अपने पास देखना चाहती हूँ,,,”

सुमित्रा जो अभी भी सोच में गुंथी शालिनी की बात सुनकर boli”tumahra hi है मनु जैसे मेरी कनु हेयर यही दूर की बात जब चाहे जहां चाहे अपने लादले से मिल lena,,ab खुश”

Shalini”main जानती हूँ तुम मेरी हर बात समझ रही हो ,,,लगता है खुलकर कहना hoga,,dekho मैं भी जानती हूँ कनु को तुम किस नज़र से देखती हो??? मैं भी अपने लादले मनु को उसी नज़र से देखती हूँ””

सुमित्रा अब चुप हो गयी क्युकी शालिनी ने सुच hi कहा tha,,,dono एक दूसरे के विचारों से अछि तरह परिचित thi,per सुमित्रा अभी शांत थी….

शालिनी ने आगे kaha”sumi देख मैं जानती हंट ु क्या सोचती है कनु के लिए मैं भी शामे सोचती हूँ मन ऊके liye,tut ओह श्याद hi बोल पाए आज मैं hi कह देती hun,,,mujhe मनु अपने बेटे की तरह चाहिए मेरे बुढ़ापे में मुझे मनु चाहिए ,,,तुम जानकर अनजान बनाना चाहो तोह हु मौका नहीं दूंगी ,,,मुझे कनु के लिए मनु का हाथ चाहिए, मुझे तुम्हरी ऊंच नीच की बातों से कुछ लेना देना नहीं,,,

और न कहने का सोचना नहीं क्युकी मैं तुम्हारे दिलको जानती hun,tum भी यही चाहती हो तुम तोह पहल करोगी नहीं सो मैंने कर दी अब कोई ड्रामा न करना….”

सुमित्रा ने यह सुना तोह उस थोड़ी देर तक यकीं hi नहीं हुआ की शालिनी ने उससे क्या कह दिया हु भी शामे ख्याल रक्ति थी कनु के लिए पैर हु भानु और शालिनी का back-ground जानती थी सो हु उनकी तुलना अपने परिवार से करती thi..so पीछे हैट जाती थी पैर आज जब शालिनी ने पहल करदी सो हु बेचारी एक तरफ तोह बहुत खुश हुई दूसरी तरफ सोच में पद गयी की यह सब होगा कैसे मनु को भला भानु क्यों अपनी बेटी का हाथ dega,,,kyuki अभी तोह दोनों की हैसियत बिच में ाजति है…

शालिनी ने जब सुमित्रा को सोचते हुए देखा तोह समझ गयी की क्या सोच रही है ,,,अरे भाई बेस्ट फ्रेंड का मतलब hi होता है आपके बोलने से ज्यादा आपकी छुपी को जो पद सके हु hi बेस्ट फ्रेंड होता है ,,,शालिनी ने छुपी तोड़ते हुए अपना आखिर डाव chaldiya”lagta है तुमको मेरी कनु पसंद nahi,,main hi पागल थी जो इतना सब सोचे बैठी thi,,,lagta है मनु का प्यार मुझे नसीब नहीं होगा,,,

सुमित्रा अब शालिनी की बातों में उलझ गयी थी तुरंत बोली “नहीं आप गलत समझ रही हो आपने जो कहा सुच कहा की मैं भी कनु को अपनी beti(bahu) बनाना चाहती हूँ पैर, आप तोह सब जानती हैं हम कहाँ आप कहाँ आप ने कहा तोह मैं मान लूँ पैर आप भी जानती hain,aage क्या होगा कैसे होगा ,,,??भला कनु के पापा और मनु के पापा उनको भी मानना पड़ेगा, हु सब ठीक है पैर …???

सुमित्रा आगे कुछ बोलती शालिनी ने पास खेल रहे मनु का हाथ पकड़कर kaha”iska जवाब है मेरा manu,kya होगा कैसे होगा यह सब किस्मत पर छोड़ दो क्युकी मुझे उपपरवाले पैर भरोसा है जिसने मेरे और तुम्हारे दिल में यह ख्याल दिया है ,उसका जवाब भी उसी के हाथ में hoga,bas तुम हाँ या ना कुछ कहो….

फिर मनु से बोली Shalini”man ुतु बड़ा होकर मुझे प्यार करेगा न अपनी माँ की tarah,or कनु का ध्यान रखेगा न manu,bol मेरे बचे.



मनु भला अपनी फेवरेट अन्त्य से क्या bolta”haan मैं जब बड़ा हो जाऊंगा तोह आपको मम्मी की तरह बहुत प्यार करूँगा और कनु का भी ध्यान रखूँगा.
 
अपडेट 12


बचपन की यादें

मनु भला अपनी फेवरेट अन्त्य से क्या bolta”haan मैं जब बड़ा हो जाऊंगा तोह आपको मम्मी की तरह बहुत प्यार करूँगा और कनु का भी ध्यान रखूँगा.

शालिनी को और क्या चिहए था हु इस बात पैर मनु को अपने सीने से लगाकर उसके गलो को चूमकर मेरा पायरा बचा मेरा लाडला कहती है..

वहीँ अब सुमित्रा की समझ में भी आज्ञा था ,,की शालिनी ने जो कहा है दिल से कहा है, तोह आगे का फैसला उसने भी किस्मत के हवाले छोड़ दिया

सुमित्रा शालिनी से बोली “मेरी तरफ से हाँ हैं पैर आगे क्या होगा किसे पता ,,,”

इस पैर शालिनी ने जिसके गॉड में मनु था उसका हाथ दिखा कर कहा “इसका जवाब मेरा मेरा उपपरवाले पैर विशवास और मेरा मनु है ,,,तुम देखलेना एक दिन तुम्हारे और मेरे हर सवाल का जवाब होगा हमारा manu..yeh मेरा दिल कहता hai,,mera उपपरवाले पैर पूरा विशवास है जिसने हुमहरे दिल में यह सपना दिया है उसे पूरा भी वही करेगा ,,,

अब दोनों में ज्यादा बात नहीं होती क्युकी दोनों ने एक दूसरे के बच्चों के लिए जो सपना देखा था हु दोनों ने मान लिया था..

आज ज्यादा कुछ हुआ नहीं दोनों मुम्मों ने अपने बचूं के साथ बहुत साड़ी मस्ती की और खूब साड़ी पिक्चर खिचवाई ,,,जिसमे सिंगल और डबल और दोनों मुम्मों किध वो बचूं के साथ जॉइंट फोटोग्राफ भी thi.ek पिछ कनु की सिंगल थी और एक मनु की सिंगल और एक में दोनों अपनी मुम्मों के साथ थे …सभी पिक्स की सब ने 4 copy’s बनवाई थी ,,

खैर टाइम अपने हिसाब से चलता है ,,,दोनों मॉम्स के बिच में एक वडा हो चूका था अब क्या हु वडा पूरा होगा या नहीं यह सब फ्यूचर में था और फ्यूचर किसको पता है भला …

वीक ओवर होगया जब भानु और शालिनी के जाने का टाइम आया तोह सुमित्रा और राजिंदर ने उनसब की हेल्प की सब कामो में आज दोनों बेस्ट फ्रेंड उदास थी क्युकी दोनों आज बिछड़ रही thi…jaate जाते सुमित्रा ने शालिनी और कनु को रस्ते के लिए खाना पैक करके दिया ,,,जिस पैर शालिनी ने जाते हुए सुमित्रा से उसका वडा याद दिलाया (अरे भाई मनु और कनु के बड़े होने पैर उनका वडा क्या हुआ था समझ hi गए होंगे आप लोग) सुमित्रा ने भी हाँ में सर हिलाकर उसकी बात पैर सहमति की मोहर लगा di,Shalini बहुत खुश थी.

जाते जाते कनु ने मनु से कहा “देख अपना ख्याल रखना और मैं तेरी पिछ लेकर जा रही हूँ तू भी मेरी पिछ पास में रह्कने और मुझे भुला न तोह सोचलेना कटती कर दूंगी..

मनु ने चुप चाप हाँ में सर हिलाया और bye करके उनको जाने दिया ,,,

दोनों बचो को सिर्फ यह बताया गया था की कनु गर्मी की छुटियाँ मानाने जा रही है ,,,वर्ण दोनों बचे रो रो कर धूम मचदेते …

खैर भानु नए शहर चले गए और मनु को उसकी नानी के पास दिल्ली भेज दिया gya,,,uske लिए भाई या बहिन की तयारी के लिए ,,,

इस बीच सुमित्रा और शालिनी की टेलीफोन पैर बातें होती रही…



भाई लोग मोबाइल तोह 2000 के आस पास इंडिया में आया था सो उसके आने से पहले और आने के काफी समय के बाद तक भी अपना पुराण ट्रिंग ट्रिंग वाला ग्रैहम बेल्ल का ावशीकर hi सहारा था हांजी दोनों उसी फ़ोन से बात किया करती थी सुमित्रा ने जब शालिनी को मनु के लिए भाई या बहिन की तयारी बताई तोह शालिनी भला कैसे पीछे रहती उसने भी शामे तरय करना शुरू कर दिया,,,
 
अपडेट 13


बचपन की यादें

सुमित्रा ने जब शालिनी को मनु के लिए भाई या बहिन की तयारी बताई तोह शालिनी भला कैसे पीछे रहती उसने भी शामे तरय करना शुरू कर दिया,,,

खैर टाइम अपने हिसाब छठा रहा मनु के घर एक भाई का आगमन हो चूका था जीका नाम रखा गया Ajay.manu के लिए तोह सबसे ख़ुशी की बात थी की उसका भाई हुआ है ,,,,

अजय बाबू को खुद नहीं पता चला हु कब अपने भैया के फेवरेट बन गया ,,,मनु खुद छोटा था पैर नन्हा अजय उसके लिए सब कुछ था खुद उसे उठाने की कोशिश करता tha,,,per भाई बचा सो नहीं उठा पता था per,,use हसने में कसार कोई नहीं छोड़ता था ,,

उधर कनु के घर एक नन्ही बहिन ने hello कहा…

जिसका नाम सबने नैना रखा गया कनु भी अपनी बहिन में बिजी gyi,time टाइम पैर दोनों मॉम्स की बातें होती रहती थी दोनों एक दूसरे का हाल चाल लेते रहते थे,

खैर टाइम चलता रहा पांच साल बिट चुके थे..

मनु अब थोड़ा बड़ा होगया था और अजय भी उसी स्कूल में जाने लगा था ,,,मनु की ज़िन्दगी में एक नया तूफ़ान एंट्री मरने की तयारी में था…
 
अपडेट 14

बचपन की यादें

मनु अब थोड़ा बड़ा होगया था और अजय भी उसी स्कूल में जाने लगा था ,,,मनु की ज़िन्दगी में एक नया तूफ़ान एंट्री मरने की तयारी में था…

तूफ़ान भी आएगा और अपने टाइम से आएगा जब आएगा तोह पता चल जायेगा क्या तूफ़ान है ,,

खैर मनु और अजय जो दोनों hi स्कूल जाने लगे थे ,,,

मनु अजय से 4 साल बड़ा तहत ओह ज़ाहिर सी बात है क्लास में भी बड़ा होगा ,अजय का पूरा ध्यान रखता था,

अजय जो मनु का छोटा भाई था बचपन से थोड़ा भोला और शर्मिला किस्म का था ज्यादा बचे क्युकी उस एरिया में थे नहीं सो बेचारा बस मनु के पीछे भैया भैया करता भागता था,

अजय और मनु में थोड़ा डिफरेंस था जी हाँ सेज भाइयो में भी डिफ्ररेंस होता hai,,jo कमान सी बात है, मनु का रंग जहां गेहुअन tha,jo उसे उसकी माँ से मिला था , वहीँ अजय का रंग सवाल था जो उसके पिता राजिंदर पैर गया था,

मनु को जहां बचपन में कोई भी गॉड में उठाकर खिलने लगता tha,wahin अजय को उसके रंग की वजह से कोई मुश्किल से hi खिलता था,

पैर अजय को इनसब की ज़रूरत नहीं पड़ी क्युकी मनु के लिया अजय हमेशा उसके साथ होता tha,uski ज़रूरत से पहले और ज़रूरत के samay,ab आप सब सोचेंगे ज़रूरत के समय तोह ठीक है पैर ज़रूरत से पहले कैसे ???

तोह एक बार की बात है जब मनु और अजय स्कूल में थे तोह अजय ने पॉटी करदी क्लास में hi ,,,

क्युकी मनु भी उसी स्कूल में था थोड़ा बड़ी क्लास में तोह बेचारे को बुला अजय की मम ने अब बेचारा मनु क्या करता स्कूल की आया से बोलै “आमा जी आप इसके कपडे पैक कदो में घर पैर धुलवा लूंगा वही आया जो अजय से गुस्सा हुई पड़ी थी , जब मनु ने प्यार और मासूमियत से कहा तोह हु पिघल गयी और चुप चाप उसने अजय को साफ़ करवाया और अजय के कपडे पाली बेग में पैक करके ददए ,,

अजय जो अब तक उस आमा से दांत खाकर खूब रो रहा था ,

उसको मनु ने पकड़ा और अपनी स्कूल की जर्सी उसे पहना दी क्युकी मनु की जर्सी अजय से काफी बड़ी थी सो अजय की शेम शेम होने से बच गयी ,, मनु अब उसे घर लेकर आ रहा था रस्ते में अजय ने ज़िद किट ओह उसे ice-cream दिलवाई और घर ले आया अजय ने मनु का हाथ पकड़ा हुआ था और दूसरे हाथ से उसकी गन्दी पॉलीबाग पकड़ी हुई थी अजय जहां मस्ती में ice-cream कहता हुआ खूब खुश था वहीँ मनु बेचारा उसकी ख़ुशी में खुश था , जब दोनों घर पहुंचे तोह सुमित्रा हैरत से दोनों को देखने लगी क्युकी दोनों टाइम से पहले hi घर आगये थे अजय ख़ुशी से ुहलता हुआ अपनी मम्मी से बोलै “मम्मी आज मज़ा आज्ञा भैया ने आज मुझे ice-cream खिलाई”

सुमित्रा ने मन ऊके हाथ में पॉलीबाग देखा तोह पूछा इसमें क्या hai.toh मनु ने चुप चाप सुमित्रा को दे दिया ,सुमित्रा ने जब उसे खोल कर देखा तोह समझ आया यह तोह अजय का कारनामा है,,

सुमित्रा ने मनु से पूछा “यह सब क्या है और क्या जरूरत थी इस बदमाश को ice-cream खिलने की”

और अजय को गुस्से से देकने lagi,ajay डरकर मन ऊके पीछे चिप gya,Sumitra ने अजय को डांटना चाहा तोह मनु ने रोक दिया,

और bola”mummy जाने दो छोटा है गलती हो जाती hai,koi बात नहीं आगे से नहीं करेगा और वैसे भी ice-cream के लिए इसने कहा तोह मेरे पास थोड़े पैसे थे जो बचे हुए थे सो मैंने दिला दी,”

सुमित्रा “पैर हु पैसे मैंने तुझे नयी ज्योमेट्री बॉक्स के लिए दिए थे,,”
 
अपडेट 15


बचपन की यादें

सुमित्रा “पैर हु पैसे मैंने तुझे नयी ज्योमेट्री बॉक्स के लिए दिए थे,,”

मनु बोलै “कोई बात नहीं अभी पुराने से काम चल जायेगा “

सुमित्रा “इसको ज्यादा बिगड़ने की ज़रूरत नहीं hai,or रस्ते भर यह नंगा hi आया है”??

फिर सुमित्रा ने ध्यान से देखा तोह पाया की अजय ने मनु की जर्सी पहनी हुई hai,,toh सर पकड़ कर बोली”

अब यह इसमें भी पॉटी करदेगा तोह तू क्या पहनेगा,,??

इसपर अजय ने कहा “मम्मी स्कूल में ज़ोर से गयी पैर भैया ने जर्सी पहना दी इसमें नहीं करूँगा यह तोह भैया की है मेरे भैया की उसे गन्दी कैसे कर सकता हूँ भला???

मनु मुस्कुरा कर अपनी ड्रेस चेंज करने चला गया ,,,

तब तक अजय ने जो जो स्कूल में हुआ था सब अपनी मम्मी को बता दिया, जब सुमित्रा को यह सब पता चला तब उसकी समझ में आया बेचारा मनु कैसे कैसे अजय को स्कूल में संभालता होगा ,,

अब अजय बाबू की खूब अछि कहतीर दरी हुई ,,

ऐसे hi दिन बीतने लगे ,,,

अब उनके एरिया में एक नई फॅमिली उनके घर से कुछ दुरी पैर आयी ,जिनमे हस्बैंड वाइफ और एक बेटी थी जो अजय कुछ छोटी थी ,

हस्बैंड अनिल यादव वाइफ रजिनि यादव बेटी का नाम सोनम यादव था ,,

खैर आस पास रहने से थोड़ा थोड़ा दोनों फैमिलीज़ में भी बात चित होती थी, पैर लिमिट से hi,waise एक बात और बताता चलूँ की क्युकी कंपनी की कॉलोनी थी सो नई क्वार्टर (छोटे छोटे मकान) थे और पानी की सिर्फ एक hi लाइन थी सो थोड़े परिवार होने की वजह से एक नल को सबको शेयर करना पड़ता था.

खैर अनिल जो एक सिक्योरिटी गार्ड था अपने काम से काम रखा करता था वहीँ उसकी बीवी रजिनि थोड़ी तेज़ तरार औरत थी,

और ज़बान से तोह पूरी लड़ाकू थी ,

उससे हम सबको क्या लेना अरे भाई लेना कैसे नहीं कहानी में है तोह कुछ न कुछ तोह करेगी hi न बिना मतलब के कहानी में क्या करेगी,

खैर एक बार की बात है मनु स्कूल में था, अजय उस नल पैर नाहा रहा था, रजिनि आयी और उसने जय को उठा कर सुनाया और वहां से भगा दिया,

अजय भागता हुआ सुमित्रा के पास रोटा हुआ पूछा और सब बता दिया की रजिनि ने उसे क्या कहा कैसे कहा और कैसे उसे नाहते हुए भगा दिया,

सुमित्रा को बुरा लगा उसने अजय को गॉड में लिया और रजिनि से जाकर पूछा “रजिनि क्या हुआ अजय को क्यों डाटा, देखो अगर तुम्हे कोई काम है तोह मुझसे कहो मैं बाद में काम कर लुंगी तुम अभी अपना काम कर लो per,,aage से अजय को डांटना नहीं क्युकी अजय छोटा hai,,sonam की तरह और छोटे बचे से कैसे बात की जाती है ,,तुम्हे नहीं पता ,,तुमको जितना देर काम करना है करो पैर आगे से अजय से कोई बात किट ओह अछि बात नहीं होगी”

रजिनि थी टोटल बकचोद उसने इस बात पैर अजय को ढाका दिया और गिरा दिया और boli”nal सबका है और रही बात तेरे बेटे की तोह समझ ले आगे से सामने आया तोह मुँह तोड़ दूंगी इसका ,,और ज्यादा बात बनाई तोह साथ में तेरा भी ,,,चल निकल यहां से बड़ी आयी मेरे बेटे को कुछ कहा तोह ,,,हैं खूब खाहूँगी दम है तोह रोककर दिखा साली बकवास करती है ,,,”

सुमित्रा ने जब देखा की उसने जय को ढाका दे दिया और फिर से मरने की और खुद उसका मुँह तोड़ने की बात कर रही है तोह ,,,

वैसे तोह सुमित्रा शांत रहती थी पैर अपने सामने बिना किसी वजह के अपने बचे को किसी और पिट ता हुआ कोण देख सकता है भला ,,,

सुमित्रा का गुस्से के मारे बुरा हाल हो गया उस पैर रजिनि के इस बात पैर की हु फिर कभी भी अजय को मारेगी और यहां तक की उसे भी मरने की ओह मरने के साथ मुँह तोड़ने को भी कहा था ,,,,दमकी दे दी और अजय को ढाका अब सुमित्रा का गुस्से के मारे बुरा हाल हो गया था.

उसने रजिनि को ढाका दिया और गिरा दिया और पास में पड़े आड़े िनत का टुकड़ा (आधा या हाफ ब्रिक)

हाथ में उठया और रजिनि का सर और थोबड़ा अचे से फोड़ दिया.



रजिनि जिसने सोचा था सुमित्रा तोह संत रहती है क्या कर लेगी और अगर उससे दर गयी तोह उस एरिया में उसकी अछि धाक जैम जाएगी यह सोचकर उसने यह डाव चला था ,
 
अपडेट 16


बचपन की यादें

रजिनि जिसने सोचा था सुमित्रा तोह संत रहती है क्या कर लेगी और अगर उससे दर गयी तोह उस एरिया में उसकी अछि धाक जैम जाएगी यह सोचकर उसने यह डाव चला था ,

उसे बिलकुल भी अंदाज़ा नहीं था की सुमित्रा जैसी शांत रहनेवाली इंसान उसे रोकेगी बल्कि अचे से ठोकेगी भी ,,

क्युकी उसने सिर्फ सोचा था थोड़ा डरने को और डरे तोह ठीक वर्ण बाद में सॉरी बोल्दो और बात को ख़तम कार्डो, पैर उसने ऐसा तोह बिलकुल नहीं सोचा था की कोई उसे इस तरह से पिट भी सकता है ओह्ह्ह! सॉरी पिट नहीं अचे से थोक सकता है,,,

सो सुमित्रा ने आधे से खूब अचे से उसके कंधे और कमर और चेहरे और सर का ाचा खाशा हाल बदल दिया, रजिनि जो पहले शेर थी सिवाय पीटने के कुछ नहीं कर प् रही thi,,uske सर से और चेहरे से खून टपकने लगा tha.jab उसने खुद का खून देखा तोह उसने बची कुछ हिम्मत जूता कर अपने उप्पर से सुमित्रा को ढाका दिया और घर की और भागी ,,सुमित्रा ने अजय को उठया और गॉड में लिया और आधा जो उसके हाथ में था लेकर रजिनि कैग हर चल पड़ी रजिनि जो अभी तक घर पूछने वाली थी रस्ते में उसका पतिउसे मिला उसने पूछा क्या हुआ तोह बहते खून के साथ बोली “सोनम के पापा मुझे मार डाला बचाओ मुझे “

अनिल जिसकी समझ में कुछ नहीं आया बस इतना समझ पाया की किसी ने उसकी बीवी को पेल दिया है मतलब पिट दिया है,,,

उतने में सामने से अजय को गॉड में लिए सुमित्रा आगयी और रजिनि को फिर से ठोकना शुरू कर दिया ,,अनिल ने जब देखा तोह उसने रोकने की कोशिश किट ओह सुमित्रा ने अजय को निचे उतरा और अनिल से कहा ौरातून की बात में तुम्हारा क्या काम तुम दूर रहो…

अनिल नहीं माना उसने सुमित्रा का हाथ पकड़ा रजिनि ने इसका फ़ायदा उठने की सोची लगी भागने सुमित्रा ने अपने हाथ के आधे से अब अनिल के सर को ठोकना शुरू कर diya..anil के लिए अब खुद को बहकना मुश्किल हो गया..

हु भी अपनी जान बचाकर अपनी बीवी के पीछे भागने लगा दोनों miya-biwi खून में लथपथ रोड पैर भागे जा रहे थे और सुमित्रा एक हाथ से अजय को गॉड में लिया हुआ tha,,or दूसरे से आधा हिलाते हुए दोनों को ठोकते पेट ते हुए उनके पीछे पीछे भगति जा रही थी….

सामने से आते राजिंदर को देखकर दोनों miya-biwi उसके बाइक के सामने आगये राजिंदर को कुछ समझ नहीं आया कोण है यह लोग क्युकी दोनों के चेहरे और कपडे खून से लेथ पथ हो गए the.unke असली चेहरे पहचानना बहुत मुश्किल था.

अनिल ने राजिंदर की आगे हाथ जोड़कर उसके पेअर पकड़कर kaha”bhai शाहब बचा लो हम दोनों को आपकी बीवी हम दोनों को जान से मर देगी ..

राजिंदर ने उसी टाइम सुमित्रा को अजय को गॉड में लिए हाथ में आधा लिए आते हुए देखा सुमित्रा ने दोनों को देखा और फिर से उसने दोनों को बजना शुरू कर diya,usne गुस्से में ध्यान hi नहीं दिया राजिंदर पैर,

राजिंदर भी देखकर हैरान था के उसकी बीवी एक औरत के साथ एक गार्ड जो की काफी हटा कटा होता है उसे भी सुमित्रा ने एक हाथ में अजय को पकड़ा हुआ है और एक हाथ से hi दोनों miya-biwi की सुताई करने लगी हुई थी…



राजिंदर काफी हैरान tha,ek तरफ उसे देखकर ाचा लगा उसकी बीवी कितनी दिलेर है ,वहीँ दोनों miya-biwi की हालात देखकर उसे दर भी लगा किध वो को कहीं सुमित्रा जान से hi न मार दे…
 
अपडेट 17


बचपन की यादें

राजिंदर काफी हैरान tha,ek तरफ उसे देखकर ाचा लगा उसकी बीवी कितनी दिलेर है ,वहीँ दोनों miya-biwi की हालात देखकर उसे दर भी लगा किध वो को कहीं सुमित्रा जान से hi न मार दे…

सो राजिंदर ने मुके की नज़ाकत को समझते हुए सुमित्रा को रोक्का और उन्दोनो को समझाया और पैसे दिए उनके इलाज के और बात को ख़तम करने को कहा …

सुमित्रा इस बात से राजिंदर से नाराज़ भी हुई की राजिंदर ने उनलोगो को बच्या और पैसे भी दिए ,,,इलाज के liye,jab उसका गुस्सा ठंडा हुआ तोह राजिंदर ने उसे समझया की उसने पैसे इलाज़ के लिए इसलिए दिए की आगे बात न बड़े और अगर दोनों में से किसी को कुछ भी हो जाता तोह बदले में जो पुलिस कारवाही होती उसके मुकाबले यह सब कुछ नहीं था…

सुमित्रा को भी समझ आज्ञा था की जो कुछ राजिंदर ने किया था उस समय के हिसाब से सही hi था,,,

खैर काफी दिन तक अनिल और रजिनि पातिओं में रहे तब तक रजिनि और अनिल पैर उस एरिया के लागबहग सभी लोग हस्ते थे क्युकी कहाँ हु चली थी शेरनी बनने पैर सुमित्रा ने एक हाथ से दोनों को छथि का दूध याद दिला दिया था..

खैर बात और टाइम बीतने लगा रजिनि ने और अनिल ने अपनी गलती मानली अनिल ने सुमित्रा के पेअर पकड़ कर बहिन माफ़ कार्डो कहा सो,

सुमित्रा ने भी दोनों को माफ़ कर diya.per माफ़ करना ऐसे लोगों को क्या सही था या नहीं ???यह भी समय बातयेगा …

खैर समय अपने हिसाब से चलता रहा इसमें सुमित्रा और शालिनी की बात चित थोड़ी काम होने लगी thi.or वही रजिनि और अनिल के परिवार से सुमित्रा के परिवार की अछि बात चित हो गयी थी ,

अनिल अब सुमित्रा को बहिन मंटा था और रजिनि सुमित्रा को ननद की तरह ट्रीट करती thi,Sumitra ने भी सोचा गलती भी इंसान से होती सो उसने भी उन दोनों माफ़ कर दिया था,,



इस बेच रजिनि को दो और बेटी हुई टीना और माला ,,,वहीँ उस एरिया में कुछ लोग और रहने आगये ,
 
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