Pyaar Nafrat or Kismat - Page 3 - SexBaba
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Pyaar Nafrat or Kismat

अपडेट 18


बचपन की यादें

इस बेच रजिनि को दो और बेटी हुई टीना और माला ,,,वहीँ उस एरिया में कुछ लोग और रहने आगये ,

रजिनि और अनिल को दो ओर बेटी हो चुकी थी,, टीना और माला मतलब अब उनकी तीन बेटियां हुई थी पहली सोनम दूसरी टीना और तीसरी माला ,,

आजकल तोह कोई बीटा और बेटी में ज्यादा भेदभाव नहीं करता पैर रजिनि की तीव्र इच्छा थी लड़के की सो उसी चकार में तीन लड़कियां उसकी झोली में आ चुकी थी,,,

खैर एरिया में नए लोग रहने आये जिन में दयाल वर्मा उनकी बीवी ललिता और चार बचे थे दो बेटी और दो बेटे,, सबसे बड़ी बिंदिया जिसकी शादी हो चुकी थी क्युकी उसकी आगे कोई 18 थी और हु अधिकतर अपने नानी के गांव में रहा करती थी सो गांव में शादी जल्दी करदेते हैं, अपने ससुराल में रहती थी, बिंदिया के बाद

नंबर आता है पुष्पी का हु पड़ने में अछि थी , और उस समय 7 तह में थी ,ज्यादातर चुपचाप रहा करती थी,

उसके बाद नंबर अत है प्रसाद का जो पुष्पी से एक साल छोटा था 6 में था, शैतान और पड़ने में कम दिमाग लगता था,

सबसे छोटा था चिंटू जो प्रसाद से दो साल छोटा था, मन ऊके barabar,kuch अलग hi था कैसे यह भी पता चल जायेगा आप सभी को,

दयाल वर्मा जी जब वहाँ रहने आये तोह बचो का एडमिशन करवाने में राजिंदर ने उनकी मदद की और क्युकी एक hi कंपनी में काम करते थे सो अछि जान पेचान होगयी,

पुष्पी और प्रसाद का एडमिशन गोवत में होगया था, पैर चितु जो गोवत स्कूल का एडमिशन का टेस्ट क्लियर नहीं करपया सो मजबूरन उसका एडमिशन उसी स्कूल में हुआ जिसमे मनु पड़ता था,,

इसे किस्मत कहो की दोनों की क्लास भी शामे hi थी, खैर मनु से जब दयाल बाबू मिले तोह मनु को उसके घर वालो ने सिख्या था की कोई बड़ा घर आये तोह उसके पेअर चुकार आशीर्वाद लेना चिहिए सो उसकी आदत थी कोई बड़ा घर आता सो उनके पेअर चुकार आशीर्वाद लेता tha,kyuki दयाल गांव से था सो उसे मनु का पेअर चुना बड़ा ाचा लगा उसपर मनु की अछि आदत ने दयाल बाबू के दिल में उसका फरिस्त इम्प्रैशन सॉलिड बना दिया,

उन्होंने सोचा अगर यह बचा उनके चिंटू के साथ रेहगा तोह ाचा hoga,kyuki सांगत अपना असर छोड़ती है चाहे अछि हो या बुरी, उनका बीटा चितु गांव में रहकर और अपनी माँ के लाड प्यार की वजह से काफी ज़िद्दी और बद्तमीज़ हो गया था जब दयाल ने मनु को देखा तोह उन्हें लगा की ुमका बीटा चितु जो की शामे आगे का है हु भी मन ऊके साथ रहकर सुधर जायेगा,

वैसे तोह चितु ठीक था पैर सबसे छोटा होने के कारन और माँ का लाडला होने के कारन ज़िद्दी और मचला होगया tha,khair दयाल बाबू ने मनु से कहा “बीटा चितु मेरा छोटा बीटा तुम्हारी आगे का है तुम्हारे स्कूल में उसका एडमिशन होगया hai,or हु तुम्हारी क्लास में hai,so बीटा उसका ध्यान rakhna,usse अछि बातें सीखना,”

मनु ने जब यह सुना की उसकी क्लास और उसके साथ जाने के लिए कोई मिलगया hai,,use बहुत ाचा लगा क्युकी इससे पहले सिर्फ कनु hi उसके साथ हुआ करती थी, उसके बाद अजय ,क्युकी अजय काफी छोटा और उसपर उसका भाई था, सो उसने बिना सोचे चिंटू को दोस्त मान liya,kyuki उसके लिए किसी का साथ होना hi दोस्ती थी,

खैर दयाल बाबू मनु से मिलने के बाद घर वापस पूछे तोह उन्होंने चितु को बुलाया और कहा “देखो चितु अब तुम सुधर जाओ कहलो खेलने से मन nahi,per बीटा अचे से पड़े करना तुम्हारे साथ हमारे साथी का बीटा स्कूल जाएगा और अछि बात है तुम दोनों एक hi क्लास हो तोह उससे उसकी हेल्प लेलेना और उसकी बात मन्ना क्युकी बड़ा ाचा बचा है, अचे और ऊँचे संस्कार हैं uske…tumhari तरह नहीं कोई भी ए जाये तुम्हे तोह किसी से बात करने का ढंग तक नहीं, उससे सीखो कैसे बड़ो से बात करते hain,kaise बड़ो का सम्मान किया जाता hai,agar कोई अछि बात सिखने को मिले तोह सीखना चाहिए.”

यह बात सुनकर चितु ने हाँ में सर hilaya,per अंदर से गुस्से से भर gya,kyuki अछि बात सबको पसंद आती hai,per किसी बचे या बड़े को किसी से कपड़े करने का मतलब hai,,ek को दूसरे का दुश्मन साबित करना क्युकी एक इंसान किट ऊलना दूसरे से करना मतलब पहले को दूसरे से छोटा साबित karna,,,bade इंसान में भी शामे है पैर बड़ा इंसान जहां इस ीक कम्पटीशन की तरह देखता है ,वहीँ बचे दूसरे से छिड़ने या आजीवन दुश्मनी मान लेते hai,,jaise एग्जाम के बाद किसी के मार्क्स किसी को कपड़े करना हरजगह कमान सी बात hai,har माँ बाप सोचते हैं उनका बचा अचे नंबर से पास हो आगे बड़े पैर इस चक्कर में हु अनजाने में दूसरे बचे की तुलना अपने बचे से करते hain,jaise बगलवाले गुप्ता जी bete/beti ने तुमसे ज्यादा अचे नंबर लिए हैं एग्जाम में, उससे कुछ सीखो यह बात हु कहकर अपने बचे की तुलना गुप्ता जी के बचे से करने लगते hain,har बचे की अपनी अलग पहचान होती hai,per जब किसी किट ऊलना किसी से की जाये तोह जिसके नंबर काम है हु खुद को निचा समझेगा यह कमान सा फैक्टर है,

इसी चक्कर में बहुत से बचे बिना बोले एक दूसरे के दुश्मन बन जाते hain,,,ab यहां चितु तोह चुप रहा पैर अंडर काम कर रही उसकी माँ पैर इसका सिद्ध असर hua,who नाम से ललिता नहीं काम से भी ललिता thi,kehne को काम पड़ी लिखी औरत thi,chintu उसका सबसे छोटा बीटा था सो लाडला भी tha,use अपने बचे की तुलना में अपने खुद के पति से दूसरे की तारीफ बर्दास्त नहीं हुई उसे भी चिंटू की तरह गुस्सा तोह बहुत आया पैर उसने सोचा की अगर उसके पति की बात अगर 1% भी सही hai,toh उसका hi फ़ायदा है ,चिंटू पड़ने में दिल लगये इससे ाचा क्या हो सकता hai,kyuki अगर हु भी गोवत स्कूल में पद पाटा सो उनके घर के बजट के उससे काफी हेल्प मिलती क्युकी सिंपल सी बात है प्राइवेट स्कूल गोवत की कपड़े में काफी मेहगे होते hain,,,usper ड्रेस चार्ज ,टैक्स , बस चार्ज लगाकर ाचा कहसा निचोड़ लेते हैं प्राइवेट स्कूल ,



खैर उसने सोचा और अपने पति से ज़ोर से कहा “अगर इतना पायरा बचा है तोह कभी घर बुलाओ उसे हमारा चितु भी milelega,usse और हमारे चितु को भी नया दोस्त मिलजायेगा,”
 
अपडेट 19


बचपन की यादें

खैर उसने सोचा और अपने पति से ज़ोर से कहा “अगर इतना पायरा बचा है तोह कभी घर बुलाओ उसे हमारा चितु भी milelega,usse और हमारे चितु को भी नया दोस्त मिलजायेगा,”

दयाल ने जब यह सुना तोह उसे बड़ा ाचा लगा की उसकी बीवी भी उसकी बात से खुश हुई है ,वर्ण आमतोर पैर ऐसी बत्तों से लेडीज गुस्सा हो जाती hain,usne सोचा ाचा मुका hai,so bola”dekho मेरी बात गलत मत लेना चितु का बाप हूँ, अपना बचा ाचा पड़े और अछि बातें सीखे इससे हमरा नाम hi ुचा hoga,,,per तुमने इस बात को समझा ाचा लगा जानकार.”

खैर ऐसे hi दिन निकल गया और कुछ दिन बाद चिंटू और मनु ने स्कूल जाना शुरू कर diya,manu से खुद दयाल बाबू ने चितु को मिलवा और दोनों को साथ रहने को कहा क्यों आपको पता hai,man ऊके लिए तोह यह बड़ी ख़ुशी की बात थी की उसे कोई दोस्त मिला है,

मनु ने चितु से हाथ मिल्या और कहा मैं तुम्हारी हर तरह से हेल्प करूँगा don’t worry,aaj से हम फ्रेंड्स hain,chitu ने भी हाँ में सर हिलाया ,

कुछ hi दिनों में दोनों में अछि दोस्ती hogyi,kamse काम मनु का तोह यही मन्ना था,

खैर चितु एक दो बार मनु के घर भी गया पैर ज्यादा देर के लिए nahi,phir उसने मनु से कहौ स्की मम्मी यानि ललिता ने मनु को घर बुलाया hai,so हु घर aaye,manu को भला क्या दिक्कत हो सकती थी.

चला गया कुछ दिन बाद उसने पहली बार जब ललिता से मिला तोह उसके पेअर छुए और कहा “एंटी जी namste.aaj

मैं में बहुत खुस हूँ मुझे आपसे मिलकर ाचा laga,kyuki आप मेरे दोस्त की मम्मी hai,so एक बात कहूंगा मेरे बारे में चितु बात करता है या नहीं अछि करता है या nahi,per जब भी आपके बारे में बात करता hai,toh सुच में अछि बात करता hai,,bada मैं था आपसे मिलने ka,aapko देखकर पता चलता है की चितु इतना ाचा क्यों है.”

ललिता यह सब सुनकर बड़ी खुश हुई क्युकी यह सब तारीफ उसे नसीब hi नहीं हुआ करती थी, उप्पेर से चित ऊके नाम पैर तारीफ उफ्फ्फ यूँ समझो ललिता हवा में थी,

उप्पेर से निचे तक मनु को देखा ललिता ने फिर अपने चितु को dekha,jo बगल में hi खड़ा था,,

ललिता ने सोचा उसके पति ने ठीक hi कहा था जहाँ उसके बेटे चितु से किसी से बात चित करना बड़ी बात थी , वहीँ मनु बिलकुल मुसुकारकर किसी की भी तारीफ पुरे विश्वास के साथ करता था, ललिता ने सोचा उसके पति ने बिलकुल सही फैसला लिया tha,chitu को मनु का दोस्त बनाकर .



यह भी कड़वा सुच है जहां दोस्ती का मतलब होता है बिना मतलब का या बिना लालच का रिस्ता पैर बेचारे मानु को इस दोस्ती में भी मतलबी लोग hi मिले ,,,
 
अपडेट 20


बचपन की यादें

यह भी कड़वा सुच है जहां दोस्ती का मतलब होता है बिना मतलब का या बिना लालच का रिस्ता पैर बेचारे मानु को इस दोस्ती में भी मतलबी लोग hi मिले ,,,

खैर कुछ देर मनु से बाते करने के बाद ललिता ने उसे अपने बाकी के बचूं से मिलवाया तब मनु बाकी के बचो से भी मिला वही अपनी आदत के मुताबिक पेअर चुकार क्युकी चित ऊके घरवाले थे जिनको हु अपना समझ रहा tha,,,per हु भी क्या शामे उसे अपना समझते थे यह तोह उसकी किस्मत पैर था.

जब मनु ने प्रसाद के पेअर छुए तोह प्रसाद ने उसे मन किया बोलै कोई अंकल हूँ kya,,,aajke बाद ऐसा नहीं करना मुझे पेअर नहीं चुआने पसंद.

खैर पुष्पी अपने कमरे में थी चितु उसके पास लेग्या तोह मनु ने उसके पेअर छुए पुष्पी जो इंट्रोवर्ट किस्मकी इंसान थी जहां उसके खुद के भाई उससे तमीज़ से बात नहीं करते थे वही उसे दीदी बोलकर मनु ने जब उसके पेअर छुए तोह उसे लगा की कोई तोह है जो उसकी भी इज़्ज़त करता है, उसकी आखों में खुद के लिए इज़्ज़त देखकर नमी सी च गयी,

तब चितु ने पुष्पी से कहा “पुष्पी यह मेरा दोस्त है manu”.ji हाँ चितु छोटा था पैर पुष्पी को नाम से बोलता tha,puspi को यह सब ाचा नहीं लगता tha,per हु जानती थी उनके घर में लड़को से कुछ कहा तोह उनकी माँ ललिता से ललिता पवार कब बनजाये किसी को नहीं pata.so हु ज्यादा तर चुप रहा करती थी,

उसे मनु से जो इज़्ज़त मिली उसके लिए नयी बात thi,who इज़्ज़त खुद के भाइयों से मिलना तोह दूर सोचना भी कोई बड़ी बात होगी…

इसी बीच चितु को उसकी माँ ने आवाज़ lagai,toh हु बहार चला gya,bache सिर्फ पुष्पी और मनु,,

मनु पुष्पी से bola”didi क्या मैं आपको दीदी कह सकता hun,,agar आप को बुरा न लगे ,,”???

पुष्पी ने जब यह सुना तोह कुछ सोचने से पहले hi अपना सर हाँ में हिला दिया ,

मनु “दीदी आपको पता hai,meri कोई बहिन नहीं thi,waise चाचा या ताऊ या मां के बेटियां तोह होंगी पैर उनसे ज्यादा कभी बात नहीं होती thi,,per चितु से मिलने पैर आज मुझे दीदी मिलगई मैं बहुत खुश हूँ, दीदी आपसे मिलकर,”

पुष्पी भी जोकि आमतौर पैर काम बोलती thi,usne भी कहीं न कहीं मनु को भाई मन लिए tha,kyuki खुद उसके भाई उसकी इज़्ज़त करते नहीं the,,maa हमेशा भाइयों की साइड लेती thi,usse बात करने वाला यह समझो कोई था hi नहीं, सो बेचारी चुप रहा करती thi,,manu से बातें करने के बाद उस बड़ा अपनापन महसूस hua…pushpi ने इधर उधर देखा की कहीं कोई देख तोह नहीं रहा ,जब उसे लगा कोई नहीं है तोह चुप चाप मनु को अपने साइन से लगया और boli”haan आज से मैं तेरी दीदी हूँ और तुम एरा भाई पैर एक बात ध्यान रकना की मेरे घर में कभी किसी के सामने मुझसे ज्यादा बात नहीं करना और एक बात कान खोलकर सुनले की इसबार से हर राखी पैर तुझे राखी bandhungi,,,jab राखी आएगी तोह यहां वहाँ मत भाग जाना…”



मनु जिसे आज नयी बहिन मिली थी खुश होकर बोलै “दीदी जैसा मेरी दीदी बोलेगी वही hoga.”per सबके सामने क्यों नहीं बात कर सकता”???
 
अपडेट 21


बचपन की यादें

मनु जिसे आज नयी बहिन मिली थी खुश होकर बोलै “दीदी जैसा मेरी दीदी बोलेगी वही hoga.”per सबके सामने क्यों नहीं बात कर सकता”???

पुष्पी ने कहा “दीदी की इतनी बात मान ले बाकी सब बाद में batungi,,,or यहां से जाने के बाद कोई पूछे मुझे से क्या बात हुई तोह केहडेना नमस्ते के शिव कोई बात नहीं हुई thi…”okay”

मनु हैरत से bola”per”??

पुष्पी “पैर वेर कुछ नहीं दीदी की इतनी बात नहीं मानेगा”??

“जैसा आप kaho”manu ने कहा.

ऐसे hi दिन निकल गया….

रात का समय एक मस्त गर्दै हुई गांड की औरत जिसका कद 5.8 के आस पास होगा, मस्ती से चलती हुई आ रही थी,,,

अपने बीएड की ओर उसकी चल में एक अनजानी सी थिरकन थी जिसपर उसकी पायल की झंकार मदमस्त करने में कोई कसार नहीं छोड़ रही थी,,,

उस पैर उसका ब्लाउज और पेटीकोट में छिपा हुआ मादक जिस्म ,,,

उसके उसकी मस्त चूचियां जिसको देखकर किसी का भी मैं उन्हें चुने को करने लगे ,,,

उठी हुई चूचियां अपने निपल को तानकर अपने 36 का होने का भरपूर पता बता रही thi,usper उसका साफ़ रंग ,,

कैसा हुआ पेट जिसे देखकर hi उसपर हाथ लगने का मैं करे थोड़ा सा भरी tha,,per बाकी जब हु चलती थी तोह कमर की थिरकन और शरीर का हिलना जिसमे कुछ खास हिस्से जैसे चुकी ,,,कमर और गांड का हिलना तोह कातिल बना रही thi,,,use …

उसपर उसका फिगर 36- 30-36 ..आप खुद कल्पना करके देखो,,,

उसमे भी सिर्फ उसका ब्लाउज और पेटीकोट में होना किसी भी मर्द को उसके लैंड के खड़े होने का गवाह खुद बना दे ,,,

हु औरत मस्ती से चलती हुई अपने बीएड की तरफ गयी, जहां एक आदमी लेता हुआ था,,

उस औरत को शायद आज चुदाई की छुडास बहुत लगी हुई thi,,,usne उस आदमी के पास जाकर अपने बैलून से उसे उठाने की कोशिश की पैर शायद हु आदमी बहुत थका हुआ था,,,

हु बाल जातक कर सोने laga,us औरत ने जब देखा बैलन को उसने जातक दिया , उस औरत ने फिर से एक बार तरय किया,,,

नतीजा शामे ट्रीटमेंट शायद आदमी थका हुआ था,,,

पैर अब्ब उस औरत ने अपने बैलून का सहारा न लेकर अपने हाथ सीधे उसकी जाघूं पे फिरने लगी ,,,

उससे कुछ असर होने लगा उस आदमी का हथियार उसका लैंड खड़ा होगया,,,,,

जब लैंड खड़ा हो तोह साली ऑंखें भी खुल जाती हैं यह बोलै उस औरत ने,,,

जैसे hi उसका लैंड खड़ा हुआ उस औरत ने उसकी पंत की ज़िप खोलदी ,,,,

 
अपडेट 22


बचपन की यादें

जैसे hi उसका लैंड खड़ा हुआ उस औरत ने उसकी पंत की ज़िप खोलदी ,,,,

और अंडरवियर उतार दिया सामने 6.5 इस का लैंड उसके सामने था,,,

जो कला था ,,,जहाँतो से भरा हुआ था…

जिसपर उस औरत ने कहा कमसे काम झाते तोह बना सकते हो???

या हु भी मैं hi बनाऊ???

जिसपर उस आदमी ने हसकर कहा “जानेमन झटून का क्या hai,,,jab चाहो बनल उन पैर टाइम नहीं मिल pata,,,per तुम चाहो तोह तुम bana,,dena पैर अभी बकचोदी छोडो काम पैर लगो…

औरत ने उसके लैंड को पकड़ कर कास कर मसला और बोली अभी तोह न तुम जगे थे न तुम्हारा land,,ab जाग गए हो तोह अपना काम करो न,,,

देखो आज बहुत मैं है ,,,,तुम जो कहोगे करुँगी पैर मुझे इस बार बीटा चिहए ,,,वर्ण सोच लेना सोनम के पापा वर्ण इस छूट में तुम्हारी एंट्री बैंड करदूंगी…

हाँ यह रजिनि और अनिल थे जहां रजिनि को फिर से बेटे की चाहत उसे अनिल के पास ले गयी थी,,

अनिल “देख ज्यादा बकचोदी न kar,apne काम पैर लग jaa,,,aaj तू मुँह में लेले बड़ा मैं है ,,,

रजिनि ने लैंड की तरफ देखा और boli”dekho मुझे मुहमे लेना पसंद नहीं hai,,per ले रही हूँ ज्यादा देर के लिए नहीं…

अनिल ने उसके बाल पकडे और उसका सर कीचकर अपने लैंड पैर लगा दिया और bola”behan की लोदी पहले मुँह में लेकर इसे ढंग से खड़ा कर और फिर जी भरकर छूट में लेलेना ….बीटा भी हो जेगा”

रजिनि ने न कहते हुए भी चुपचाप अनिल का लैंड बेमन से मुँह में लेना शुरू किया,,

अनिल का लैंड मुँह में लेते hi रजिनि को उलटी होने को हुई क्युकी उसका पति कई कई दिन तक नाहटा नहीं था सो बदबू के मारे उसे उलटी सी होने लगी ,,,पैर अनिल को इनसब से क्या लेना हु बेताहाशा रजिनि का सर आगे पीछे कर रहा था…

रजिनि ने जब लैंड मुहसे निकल ने की कोशिश किट ओह अनिल ने उसे ऐसा करने नहीं दिया..

Chtaakkkk>>rajini के गाल पैर अनिल का तमचा पद चूका था…

रजिनि भी बेमानन से चूसने में या यु कहो मुँह चुदाई में लगी हुई थी…

कहाँ उसने सोचा tha,,,ki थोड़ा अनिल को रिजाहयेगी,,,

और अपनी छूट मरवाकर बीटा पैदा करेगी और कहाँ उसे गन्दा लैंड से मुँह छुड़ाना पद रहा है,,,

अनिल रजिनि का मुँह छोड़ता रहा और एक टाइम आया जब उसने रजिनि के हलक में अपना लैंड उतार दिया और अपनी पिचकारी रजिनि के पेट में उतार दी…

रजिनि जिसके लिए सांस लेना मुश्किल tha…jab उसपर अनिल ने अपना माल उसके मुँह में छोड़ा तोह रजिनि सीधी अनिल को ढाका दे कर बाथरूम में भागी और लगी उल्टियां करने उसका बुरा हाल होगया था जिन्न के मारे…

जैसे तैसे वापस खुद को डोकर वापस आयी तोह देखा anil…phir से सो गया था….



उसे बहुत गुस्सा आया पैर चुपचाप सो गयी…
 
अपडेट 23

बचपन की यादें

जैसे तैसे वापस खुद को डोकर वापस आयी तोह देखा anil…phir से सो गया था….

उसे बहुत गुस्सा आया पैर चुपचाप सो गयी…

अगले कुछ दिन तक मनु का चिंटू के घर जाना नहीं हो सका सो पुष्पी से उसका मिलना नहीं हो सका , पैर उसके दिमाग में पुष्पी का हु अकेले में मिलना थोड़ा कटक रहा tha,usne खूब सोचने की कोशिश की पैर ज्यादा कुछ उसकी समझ में नहीं आया ,,,क्युकी पुष्पी उससे बड़ी thi,or सोच समझ कर बात करने वाली लड़की thi,so मनु ने सोचा जब दीदी ने कहा है तोह कोई तोह ख़ास वजह hogi,jab मिलूंगा तब पूछ लूंगा.

इसी बीच में मनु के घर के बगल वाले घर के पुराने पड़ोसियों का ट्रांसफर hogya,kuch दिन में उनका घर भी खली होगया,

उसका चिंटू के साथ स्कूल जाना चलता raha,school में लागबहग सभी मनु से प्यार से पेश आते थे,

उसकी वजह थी एक तोह काफी मनु का उस स्कूल में पुराण hona,or दूसरी वजह थी उसका ाचा और जॉली नेचर.

चिंटू उसके साथ बना रहता tha,ek अचे दोस्त की तरह मनु ने अपने सभी जान पहचान वाले लोगों से स्कूल में उसे मिलवाया .

चिंटू हर तरह से मनु के aas-paas के लोगो को देखने और समझने laga,or dhire-dhire उन सभी में gulne-milne laga.manu को ाचा लगता था जब चिंटू को हु उनसभी में ghulte-milte देखता tha,kyuki उसके लिए चिंटू उसका दोस्त tha,per चिंटू के मैं में क्यात है यह सब मनु की किस्मत पैर और आने वाले फ्यूचर में था,

इसी बेच में उसके घर के बगल वाले घर में एक फॅमिली आयी जिसमे श्रवण उसकी बीवी शशि उसकी बेटी सुरभि बीटा सोनू थे बचे छोटे the,isi साल उनका एडमिशन होना था.

खैर इसी बीच में मनु का दयाल बाबू कैग हर जाना hua,Lalita ने उसे घर बुलाया tha,so मनु चला gya,jab हु वहाँ गया तोह उसकी नज़र हर जगह अपनी दीदी को ढूंढ रही thi,guar किया आज घर पैर सिर्फ प्रसाद tha,jo श्याद बहार जाने के मूड में था,

मनु ने प्रसाद से pucha”bhaiya चिंटू और अन्त्य जी कहाँ हैं उन्होंने मुझे बुलाया था,,,”

प्रसाद जो शायद बहार जाने के लिए बेचैन था उसने बेमन से kaha”tabhi मैं सोचूं की तू अचानक कहाँ से टपक पड़ा,”


मनु को ऐसे जवाब की उम्मीद नहीं thi,per प्रसाद के बार-2 गेट के ओर देखने से समझ गया की श्याद प्रसाद बहार जाने के लिए बेचैन hai,so हु बोलै” भैया अगर देर हो रही है तोह आप जाओ घर पैर में हूँ पैर बाकी सब हैं kahaan..itna बतादो या कब तक आएंगे ,,”
 
अपडेट 24

बचपन की यादें

मनु को ऐसे जवाब की उम्मीद नहीं thi,per प्रसाद के बार-2 गेट के ओर देखने से समझ गया की श्याद प्रसाद बहार जाने के लिए बेचैन hai,so हु बोलै” भैया अगर देर हो रही है तोह आप जाओ घर पैर में हूँ पैर बाकी सब हैं kahaan..itna बतादो या कब तक आएंगे ,,”

प्रसाद को अब एपनिया आप पैर गुस्सा आने लगा क्युकी उसके सरे लफंगे दोस्त बहार मज़े कर रहे honge,,uske बिना यह सोचकर ,,,उसका रुका मुश्किल हुआ जा रहा tha,per मनु ने जब रुकने की बात की तोह उसे मनु के अंदर कोई फरिश्ता नज़र आने laga.use खुद पैर गुस्सा आने लगा की बेमतलब hi उसने मनु को दांत दिया…

प्रसाद bola”manu देख मम्मी और चिंटू बाजार गए hain,pushpi का दुनिआ को पता है, हु सिर्फ अपनी पड़े में और अपने कमरे में बिजी रहती hai.haan शायद उन्दोनो को अभी और 2 या 3 घाटे लग सकते हैं,,

मुझे बहार जाना tha,per घर पैर रुकना भी जरूरी hai,kya करूँ कुछ सम्ह्ज नहीं आरहा ,,,???”

इस पैर मनु सब समझ गया उसे यह मौका सही लगा पुष्पी से बात करने का सोचा क्युकी उसे यह जानना था पुष्पी ने सबके सामने बात करने से मन क्यों किया tha,so उसने कुछ सोचा और

kaha”bhaiya अगर आपको इतना लेट हो रहा है तोह आपका यह छोटा भाई रुक jayega,aap आराम से जाओ पैर अन्त्य जी के आने से पहले आ जाना,,,”

प्रसाद ने मनु कीतरफ देखा मनु जोकि उसके भाई का दोस्त था,10 साल का रहा hoga,phir उसका घर में आना जाना लगा रहता था, पुष्पी अपने रूम से श्याद hi बहार aaye,ghar को बहार से बंद करने का कोई मतलब नहीं banta,manu सेफ ऑप्शन hai,yeh सोचकर बोलै “मनु तुझे कोई प्रॉब्लम तोह नहीं है na,dekh में मम्मी के आने से पहले आजाऊंगा तब ताकत ु चाहे तोह टीवी देख lena,bas घर का ध्यान रखना”

मनु बोलै “भैया आप निचिंत होकर jao,yeh मेरे दोस्त का घर hai,mere लिए भी कीमती hai,,aap टेंशन न lo,agar आगे भी कभी जरूरत पड़े तोह बिना दिक्कत के मुझे kehdena,main अपने भैया की मदद करूँगा”

प्रसाद को मनु की बात सुनकर ाचा लगा फ्री फण्ड में एक बेवक़ूफ़ मिल gya,ghar के देखभाल करने के liye,so हु जल्दी आने का सोच कर चला गया,

मनु ने गेट लगया और चल दिया पुष्पी के कमरे की taraf”thak थक …

“कोण है बोलै है न बिना मतलब डिस्टर्ब न किया karo,,mujhe और पड़ना hai….”ander से आवाज़ आयी जो पुष्पी किट hi.

थक थक”

“लगता है एक बार का समझ नहीं आता मुझे अकेला छोड़ दो पता है पास होना है वर्ण आप लोगों के लिए मेरा प्लान त्यार होगा…”

यह सुनकर भी मनु चुप रहा क्युकी उसे सुनने में hi कुछ अटपटा सा लगा की पुष्पी अपने घरवालों से कैसे बात करती hai,,,use उस दिन पुष्पी की बात करने का तरीका और आज बात करने के तरीके में बहुत फर्क laga…per उसने आज अपनी दीदी को सरप्राइज देने का सोचा हुआ था सो फिर से चुप चाप दरवाज़ा बजता रहा…

पुष्पी अब कुछ बोली नहीं उठकर दरवाज़ा खोला तोह देखा मनु सामने है…


उसके चेहरे का रंग एक दम से उड़ गया उसने तुरंत इधर उधर देखा जब कोई नहीं नज़र आया तोह तुरंत मनु को अंदर खींचा और जल्दी से दरवाज़ा बंद कर लिया.
 
अपडेट 25

बचपन की यादें

पुष्पी अब कुछ बोली नहीं उठकर दरवाज़ा खोला तोह देखा मनु सामने है…

उसके चेहरे का रंग एक दम से उड़ गया उसने तुरंत इधर उधर देखा जब कोई नहीं नज़र आया तोह तुरंत मनु को अंदर खींचा और जल्दी से दरवाज़ा बंद कर लिया.

मनु को अंदर खींच कर पुष्पी ने उससे देखा मनु तो आराम से चैन और पुरसुकून से खड़ा था .

पुष्पी को थोड़ा अजीब लगा उसने मनु को देखते हुए कहा “भाई तुझे मन किया था न की मुझसे किसी के सामने बात नहीं करना पैर तुम्हे समझ नहीं आया क्या …”????

मनु ने अब सिद्ध पुष्पी से कहा “दीदी अपने जो कहा था वही माना है मैंने की किसी के सामने आपसे बात नहीं करता हूँ आज भी नहीं की आज अभी आपके घर में कोई नहीं है सो आपके पास आया हूँ ….???”

इसके बाद पुष्पी ने हैरत से मनु को देखा और कहा “कोई नहीं है से तेरा क्या मतलब है ???

मनु बोलै “दीदी आपके घर पैर कोई नहीं है “ और साडी बात उसे अचे से समझा दी ..

पुष्पी ने चैन की साँस ली और मनु को अपने गले से लगा लिया और प्यार से उसके सर पैर हाथ फिरकर kaha”kuch ख्य तूने या नहीं,”

मनु ने न में सर हिल्या तोह उसने कहा ाचा रुक “मैं तेरे लिए कुछ बनती हूँ “

मनु ने हैरत से पुष्पी को ओर देखा और bola”didi जहां तक मेने सुना है आप तोह किचन में पेअर तक नहीं रक्ति हिंसा आप कैसे ???”

पुष्पी ने थोड़ा नाराज़गी से कहा “इसका मतलब मेरे बारे में यह सब बोलै गया hai,,acha अब समझी तू सोचता है की मुझे कुछ बनन्ना नहीं अत …”

मनु थोड़ा दर कर बोलै “नहीं दीदी मेरा मतलब हु नहीं था मुझे तोह चिंटू ने कहा था की आपको किचन से नफरत hai,so मैंने सोचा दीदी को किचन में कोई चोट न लग जाये मेरा मतलब सिर्फ इतना tha…ki मैं कोई ऐसा काम न करूँ की मेरी दीदी को कोई भी तकलीफ न हो…?”

पुष्पी ने जब यह सुना तोह उसे मनु पैर खूब प्यार आया, उसने कहा “ाचा चल देख लेते हैं मुझे कुछ अत है या नहीं ,,,”

पुष्पी ने यह कहा और किचन में चली gyi,manu भी उसके पीछे चला गया पुष्पी को देखने लगा ,,

उसे बड़ी हैरत हुई की जो उसने सुना था, हुआ उसका उल्टा hi पुष्पी तोह किस अचे खासे खिलाडी की तरह काम में लगी हुई थी, मनु चुपचाप वापस आकर बेथ गया…

और सोचने लगा यह सब क्या है जैसा पुष्पी के बारे में सुना था है उसका उल्टा hi,,,or खुद हु अपने घरवळून से बात नहीं करती पैर मुझसे खूब प्यार से बात करती है,,

और जब घर में आया तहत ओह कोई प्लान के बारे में भी बोल रही thi,,,sab बाते उसे अजीब महसूस हो रही thi,,usne सोचा सही टाइम पैर पता करना hoga,,,didi का मूड देखकर ..

थोड़ी देर में पुष्पी एक डिश के सात अंदर आगयी ,,जब मनु ने देखा तोह बड़ा खुश हुआ उसमे खीर थी…

पुष्पी ने मनु को सर्वे करके कहने को कहा मनु ने जब उसे चखा तोह पुष्पी ने पूछा कैसी लगी…

मनु ने चुपचाप खाना जारी रखा पुष्पी को लगा शायद मनु को पसंद नहीं आयी उसने फिर पूछा …


मनु ने अब कहा “दीदी इससे पहले इतनी अछि खीर नहीं खायी का मस्त बांयी है दिल करता है आपके हाथ चुम लूँ”
 
अपडेट 26

बचपन की यादें

मनु ने चुपचाप खाना जारी रखा पुष्पी को लगा शायद मनु को पसंद नहीं आयी उसने फिर पूछा …

मनु ने अब कहा “दीदी इससे पहले इतनी अछि खीर नहीं खायी का मस्त बांयी है दिल करता है आपके हाथ चुम लूँ”

यह कहकर उसने पुष्पी के हाथ चुम liye.pushpi को मन ऊके यह सब करना ाचा लगा क्युकी उसके अपने भाई तोह उसे इज़्ज़त से बात तक नहीं करते थे, सो मनु का उसके संग इज़्ज़त से बात करना उसे खुश रखना उसके लिए बहुत बड़ी बात थी…

मनु कहता रहा और पुष्पी की तारीफ करता raha.pushpi भी अपनी तारीफ सुनकर खुश होती रही…

इससे दोनों के बिच अछि बॉन्डिंग होगयी thi..(bhai लोग उल्टा नहीं समझने का बॉन्डिंग बोले तोह bhai-behan की बॉन्डिंग)

खाने के बाद मनु ने जब पुष्पी को खुश देखा तोह उसने सोचा हु सब पूछूं या nahi,pushpi को खुश देखकर उसका मैं नहीं हुआ कोई सवाल करने का क्युकी उसे लगा कहीं दीदी बुरा मन गयी तोह..

सो उसने अगली बार के लिए छोड़ दिया अपने हर सवाल को …

पैर श्याद पुष्पी ने hi कुछ सोचा हुआ होगा सो…

पुष्पी ने कहा “मैं जानती हूँ मेरे बारे में बहुत कुछ बोलै होगा तुझे की मैं नकचढ़ी hu,kitchen का कोई काम नहीं अत मुझे और किसी से बात नहीं karti,or तुझे सबके सामने बात करने से भी रोकती हूँ ,,

यह सब बाते तुझे भी परेशान करती hongi,toh मेरे भाई इन सब में मेरी कोई गलती नहीं hai,,,haan सही सुना तूने मेरी कोई गलती नहीं है””

मनु थोड़ा हैरत में पद गया क्युकी हु खुद यह सब पूछकर पुष्पी को दुखी नहीं करना चाहता था.

पैर पुष्पी ने सामने से आकर खुद hi यह सब टॉपिक छेद दिया था..

हु बोलै “दीदी गलती किसी की है किसकी नहीं मुझे इनसब से कुछ लेना देना नहीं hai,,,mujhe दीदी milgyi,,haan दीदी आप milgyi..aapke हाथो की बानी खीर मिल gyi,,dunia की सबसे बड़ी ख़ुशी मिलगई..

मुझे किसी की गलती से कुछ लेना देना नहीं है अभी छोटा hun,,so कुछ बातीं समझ जाता हूँ कुछ नहीं समझ pata,per मेरे लिए इतना काफी है मेरे पास अब मेरी प्यारी दीदी hai,koi क्या बोलता है आप चिंता मत karo,aapka यह छोटा भाई बिना कोई सवाल किये अपनी दीदी के साथ रहेगा हमेशा “

पुष्पी ने जब यह सुना तोह उसकी ऑंखें चालक आयी उसने मनु को गले लग आलिया और उसके माथे को चूमकर boli”main सुच में खुश नसीब हूँ किट ु मेरा भाई hai,dekh मैं जानती हूँ की मेरे पहले से दो सेज भाई हैं पैर एक बात सुनले कसम से कहती हूँ आज से तू मेरे लिए उन दोनों भाइयों से भी बढ़कर है क्युकी जितना प्यार और सम्मान मुझे तुझसे मिला है उतना मेरे घर में श्याद hi किसी से मिला हो”??

“आज एक वडा करती हूँ मेरे प्यारे भाई किट ु मेरे दिल में हमशा स्पेशल रहेगा पता नहीं क्यों लेकिन तेरे लिए मेरी लाइफ में हमेशा एक ख़ास जगह रहेगी..”

मनु ख़ुशी से bola”didi मेरे लिए तोह इतना काफी है की मैं आज से स्पेशल भाई हो गया अपनी दीदी ka””ithlate हुए डांस करने लगा और साथ में पुष्पी को भी नाचने लगा …

पुष्पी भी इसमें बहुत खुश थी दोनों खूब नाचे साथ में …

फिर पुष्पी डांस रोका और मनु को भी रूककर आराम से बैठने को कहा फिर से boli”dekh सुन तेरे सब जानना जरूरी है क्युकी मैं नहीं चाहती मेरे घर वाले तुझे बाद में कुछ बतईन “

मनु बोलै “दीदी मैंने कहा न कोई बात nahi,,muhe सिर्फ अपनी दीदी से मतलब hai,,koi क्या बोलता है मुझे कुछ लेना देना नहीं…”

पुष्पी ने kaha”dekh मनु तेरा जान्ने जरूरी है क्युकी तू अभी छोटा hai,main जानती हूँ अभी तुझे कोई फर्क नहीं पड़ेगा पैर हर रोज़ को नया झूट अगर कोई इंसान किसी के बारे में सनटैन है तोह उसका विश्वास एक टाइम के बाद में हिल hi जाता hai..har रोज़ कोई आपको किसी के बारे में बुरा बोलता रहे तोह एक टाइम पैर आकर आपका दिमाग कहीं न कहीं उसके बारे में नेगेटिव सोचने पैर मज़बूर हो जाता है यह सब फैक्ट है सो ज्यादा मत सोच और ध्यान से सुन..”


मनु सोचने लगा अब उसकी दीद कोनसा नया बम फोड़ने वाली हैं…
 
अपडेट 27

बचपन की यादें

पुष्पी ने kaha”dekh मनु तेरा जान्ने जरूरी है क्युकी तू अभी छोटा hai,main जानती हूँ अभी तुझे कोई फर्क नहीं पड़ेगा पैर हर रोज़ को नया झूट अगर कोई इंसान किसी के बारे में सनटैन है तोह उसका विश्वास एक टाइम के बाद में हिल hi जाता hai..har रोज़ कोई आपको किसी के बारे में बुरा बोलता रहे तोह एक टाइम पैर आकर आपका दिमाग कहीं न कहीं उसके बारे में नेगेटिव सोचने पैर मज़बूर हो जाता है यह सब फैक्ट है सो ज्यादा मत सोच और ध्यान से सुन..”

मनु सोचने लगा अब उसकी दीद कोनसा नया बम फोड़ने वाली हैं…

पुष्पी बोली “मनु हर जगह जैसा दिखे जरूरी नहीं वैसा hi हो ,,,मेरे परिवार की बहुत सी बातें तुम्हे पता नहीं है तुम जिन्हे अपना मनो जरूरी नहीं की हु भी तुम्हे अपना मने,,

मेरी फॅमिली में लड़कियों को हमेशा से दब्या गया है उसमे मेरी माँ का सबसे बड़ा हाथ रहा hai,,yeh मैंने खुद देखा hai,tumko तोह पता होगा मेरी एक और बड़ी बहिन है..??”

मनु हाँ में सर हूला देता है..

पुष्पी ने आगे कहा “पैर क्या तुम्हे यह पता है की हु ज्यादा नहीं पद पायी जानते हो क्यों?

क्युकी मेरी माँ उसे और मुझे अनपढ़ hi रकना चाहती thi,taaki हम सिर्फ उसके लिए सिर्फ और सिर्फ नुकरणी बैंकर काम कर सके और जब बड़े हो तोह जल्दी से जल्दी हमारी शादिकारके हमसे पीछा चुडया जा सके …”

मनु तहत ओह बचा hi पैर यह सब सुनकर उसे भी बहुत दुःख हुआ..

पुष्पी ने kaha”tum मेरे घर वालो को नहीं जानते हु बिना मतलब किसी से बात तक नहींकरते तुम्हारा चिंटू का दोस्त बनाने में भी उनका कोई न कोई लालच होगा ,,”

मनु सोच में पद गया यह सब क्या है ,उसका दोस्त उसका कैसे फ़ायदा उठा सकता है,,

खैर पुष्पी ने आगे कहना शुरू kiya”dekho मेरी बड़ी बहिन और मैं दोनों को पड़ने से शुरू से रोका गया उसकी वजह मेरी माँ के बेकार खयालात the,,ladkiyoon को लड़को से ज्यादा पड़ना नहीं chahiye,us पैर मेरी दीदी का दिमाग भी थोड़ा कमज़ोर tha,so उन्होंने पड़े छोड़ di,bachi में सो मेरी श्याद किस्मत अछि thi,,ki एक दिन मेरी पड़ोस की अन्त्य ने मेरा एडमिशन गोवत स्कूल में करा diya,,usme गोवत स्कूल में लड़कियों की फीस फ्री होती hai,main पड़ती गयी उसमे भी मुझे हमशा ताने और धमकी मिलती आयी है की अगर इस साल फ़ैल हुई तोह तेरी पड़े बंद और शादी के लिए त्यार रहना ,,,

मेरी माँ ने हमेशा मेरे भाइयों को लाड प्यार से रखा और हम दोनों बहनो को दुत्कारा,

तुम इसी बात से अंदाज़ा लगा सकते हो की मेरे भाई जो सिर्फ कहने को hi भाई हैं आज तक बड़ी होने के बावजूद मुझे बहिन मन्ना तोह दूर आज तक नाम लेकर बात करते हैं ,,,

मनु को पुष्पी के लिए बहुत बुरा लगा …

पुष्पी ने आगे kaha”mujhe इन सबकी आदत हो गयी thi,normal लोगो से ज्यादा म्हणत करनी पड़ती थी पड़े करने के लिए जब तक दीदी रही तब तक ठीक tha,ab हर रोज़ धमकी सुनती हूँ की घर का काम कोण करेगा पड़े में क्या रखा hai,tumko पता है मनु में हर रोज़ क्या सेहती आयी हूँ ,,,मेरा सिर्फ बचपन से सिर्फ एक सपना रहा है की में बड़ी होकर टीचर बनु और मेरी जैसे गरीब लड़की या उन बचूं को पदों जो किसी वजह से पद नहीं सकते,

मनु ने जब यह सुना तोह उसने पुष्पी को अपने गले से लग आलिया और बोलै “दीदी सॉरी मैं नहीं जनता था आप इतने दर्द में रही हैं अब से मैं आपका ध्यान रखूँगा.”
 
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