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अपडेट 18
बचपन की यादें
इस बेच रजिनि को दो और बेटी हुई टीना और माला ,,,वहीँ उस एरिया में कुछ लोग और रहने आगये ,
रजिनि और अनिल को दो ओर बेटी हो चुकी थी,, टीना और माला मतलब अब उनकी तीन बेटियां हुई थी पहली सोनम दूसरी टीना और तीसरी माला ,,
आजकल तोह कोई बीटा और बेटी में ज्यादा भेदभाव नहीं करता पैर रजिनि की तीव्र इच्छा थी लड़के की सो उसी चकार में तीन लड़कियां उसकी झोली में आ चुकी थी,,,
खैर एरिया में नए लोग रहने आये जिन में दयाल वर्मा उनकी बीवी ललिता और चार बचे थे दो बेटी और दो बेटे,, सबसे बड़ी बिंदिया जिसकी शादी हो चुकी थी क्युकी उसकी आगे कोई 18 थी और हु अधिकतर अपने नानी के गांव में रहा करती थी सो गांव में शादी जल्दी करदेते हैं, अपने ससुराल में रहती थी, बिंदिया के बाद
नंबर आता है पुष्पी का हु पड़ने में अछि थी , और उस समय 7 तह में थी ,ज्यादातर चुपचाप रहा करती थी,
उसके बाद नंबर अत है प्रसाद का जो पुष्पी से एक साल छोटा था 6 में था, शैतान और पड़ने में कम दिमाग लगता था,
सबसे छोटा था चिंटू जो प्रसाद से दो साल छोटा था, मन ऊके barabar,kuch अलग hi था कैसे यह भी पता चल जायेगा आप सभी को,
दयाल वर्मा जी जब वहाँ रहने आये तोह बचो का एडमिशन करवाने में राजिंदर ने उनकी मदद की और क्युकी एक hi कंपनी में काम करते थे सो अछि जान पेचान होगयी,
पुष्पी और प्रसाद का एडमिशन गोवत में होगया था, पैर चितु जो गोवत स्कूल का एडमिशन का टेस्ट क्लियर नहीं करपया सो मजबूरन उसका एडमिशन उसी स्कूल में हुआ जिसमे मनु पड़ता था,,
इसे किस्मत कहो की दोनों की क्लास भी शामे hi थी, खैर मनु से जब दयाल बाबू मिले तोह मनु को उसके घर वालो ने सिख्या था की कोई बड़ा घर आये तोह उसके पेअर चुकार आशीर्वाद लेना चिहिए सो उसकी आदत थी कोई बड़ा घर आता सो उनके पेअर चुकार आशीर्वाद लेता tha,kyuki दयाल गांव से था सो उसे मनु का पेअर चुना बड़ा ाचा लगा उसपर मनु की अछि आदत ने दयाल बाबू के दिल में उसका फरिस्त इम्प्रैशन सॉलिड बना दिया,
उन्होंने सोचा अगर यह बचा उनके चिंटू के साथ रेहगा तोह ाचा hoga,kyuki सांगत अपना असर छोड़ती है चाहे अछि हो या बुरी, उनका बीटा चितु गांव में रहकर और अपनी माँ के लाड प्यार की वजह से काफी ज़िद्दी और बद्तमीज़ हो गया था जब दयाल ने मनु को देखा तोह उन्हें लगा की ुमका बीटा चितु जो की शामे आगे का है हु भी मन ऊके साथ रहकर सुधर जायेगा,
वैसे तोह चितु ठीक था पैर सबसे छोटा होने के कारन और माँ का लाडला होने के कारन ज़िद्दी और मचला होगया tha,khair दयाल बाबू ने मनु से कहा “बीटा चितु मेरा छोटा बीटा तुम्हारी आगे का है तुम्हारे स्कूल में उसका एडमिशन होगया hai,or हु तुम्हारी क्लास में hai,so बीटा उसका ध्यान rakhna,usse अछि बातें सीखना,”
मनु ने जब यह सुना की उसकी क्लास और उसके साथ जाने के लिए कोई मिलगया hai,,use बहुत ाचा लगा क्युकी इससे पहले सिर्फ कनु hi उसके साथ हुआ करती थी, उसके बाद अजय ,क्युकी अजय काफी छोटा और उसपर उसका भाई था, सो उसने बिना सोचे चिंटू को दोस्त मान liya,kyuki उसके लिए किसी का साथ होना hi दोस्ती थी,
खैर दयाल बाबू मनु से मिलने के बाद घर वापस पूछे तोह उन्होंने चितु को बुलाया और कहा “देखो चितु अब तुम सुधर जाओ कहलो खेलने से मन nahi,per बीटा अचे से पड़े करना तुम्हारे साथ हमारे साथी का बीटा स्कूल जाएगा और अछि बात है तुम दोनों एक hi क्लास हो तोह उससे उसकी हेल्प लेलेना और उसकी बात मन्ना क्युकी बड़ा ाचा बचा है, अचे और ऊँचे संस्कार हैं uske…tumhari तरह नहीं कोई भी ए जाये तुम्हे तोह किसी से बात करने का ढंग तक नहीं, उससे सीखो कैसे बड़ो से बात करते hain,kaise बड़ो का सम्मान किया जाता hai,agar कोई अछि बात सिखने को मिले तोह सीखना चाहिए.”
यह बात सुनकर चितु ने हाँ में सर hilaya,per अंदर से गुस्से से भर gya,kyuki अछि बात सबको पसंद आती hai,per किसी बचे या बड़े को किसी से कपड़े करने का मतलब hai,,ek को दूसरे का दुश्मन साबित करना क्युकी एक इंसान किट ऊलना दूसरे से करना मतलब पहले को दूसरे से छोटा साबित karna,,,bade इंसान में भी शामे है पैर बड़ा इंसान जहां इस ीक कम्पटीशन की तरह देखता है ,वहीँ बचे दूसरे से छिड़ने या आजीवन दुश्मनी मान लेते hai,,jaise एग्जाम के बाद किसी के मार्क्स किसी को कपड़े करना हरजगह कमान सी बात hai,har माँ बाप सोचते हैं उनका बचा अचे नंबर से पास हो आगे बड़े पैर इस चक्कर में हु अनजाने में दूसरे बचे की तुलना अपने बचे से करते hain,jaise बगलवाले गुप्ता जी bete/beti ने तुमसे ज्यादा अचे नंबर लिए हैं एग्जाम में, उससे कुछ सीखो यह बात हु कहकर अपने बचे की तुलना गुप्ता जी के बचे से करने लगते hain,har बचे की अपनी अलग पहचान होती hai,per जब किसी किट ऊलना किसी से की जाये तोह जिसके नंबर काम है हु खुद को निचा समझेगा यह कमान सा फैक्टर है,
इसी चक्कर में बहुत से बचे बिना बोले एक दूसरे के दुश्मन बन जाते hain,,,ab यहां चितु तोह चुप रहा पैर अंडर काम कर रही उसकी माँ पैर इसका सिद्ध असर hua,who नाम से ललिता नहीं काम से भी ललिता thi,kehne को काम पड़ी लिखी औरत thi,chintu उसका सबसे छोटा बीटा था सो लाडला भी tha,use अपने बचे की तुलना में अपने खुद के पति से दूसरे की तारीफ बर्दास्त नहीं हुई उसे भी चिंटू की तरह गुस्सा तोह बहुत आया पैर उसने सोचा की अगर उसके पति की बात अगर 1% भी सही hai,toh उसका hi फ़ायदा है ,चिंटू पड़ने में दिल लगये इससे ाचा क्या हो सकता hai,kyuki अगर हु भी गोवत स्कूल में पद पाटा सो उनके घर के बजट के उससे काफी हेल्प मिलती क्युकी सिंपल सी बात है प्राइवेट स्कूल गोवत की कपड़े में काफी मेहगे होते hain,,,usper ड्रेस चार्ज ,टैक्स , बस चार्ज लगाकर ाचा कहसा निचोड़ लेते हैं प्राइवेट स्कूल ,
खैर उसने सोचा और अपने पति से ज़ोर से कहा “अगर इतना पायरा बचा है तोह कभी घर बुलाओ उसे हमारा चितु भी milelega,usse और हमारे चितु को भी नया दोस्त मिलजायेगा,”
बचपन की यादें
इस बेच रजिनि को दो और बेटी हुई टीना और माला ,,,वहीँ उस एरिया में कुछ लोग और रहने आगये ,
रजिनि और अनिल को दो ओर बेटी हो चुकी थी,, टीना और माला मतलब अब उनकी तीन बेटियां हुई थी पहली सोनम दूसरी टीना और तीसरी माला ,,
आजकल तोह कोई बीटा और बेटी में ज्यादा भेदभाव नहीं करता पैर रजिनि की तीव्र इच्छा थी लड़के की सो उसी चकार में तीन लड़कियां उसकी झोली में आ चुकी थी,,,
खैर एरिया में नए लोग रहने आये जिन में दयाल वर्मा उनकी बीवी ललिता और चार बचे थे दो बेटी और दो बेटे,, सबसे बड़ी बिंदिया जिसकी शादी हो चुकी थी क्युकी उसकी आगे कोई 18 थी और हु अधिकतर अपने नानी के गांव में रहा करती थी सो गांव में शादी जल्दी करदेते हैं, अपने ससुराल में रहती थी, बिंदिया के बाद
नंबर आता है पुष्पी का हु पड़ने में अछि थी , और उस समय 7 तह में थी ,ज्यादातर चुपचाप रहा करती थी,
उसके बाद नंबर अत है प्रसाद का जो पुष्पी से एक साल छोटा था 6 में था, शैतान और पड़ने में कम दिमाग लगता था,
सबसे छोटा था चिंटू जो प्रसाद से दो साल छोटा था, मन ऊके barabar,kuch अलग hi था कैसे यह भी पता चल जायेगा आप सभी को,
दयाल वर्मा जी जब वहाँ रहने आये तोह बचो का एडमिशन करवाने में राजिंदर ने उनकी मदद की और क्युकी एक hi कंपनी में काम करते थे सो अछि जान पेचान होगयी,
पुष्पी और प्रसाद का एडमिशन गोवत में होगया था, पैर चितु जो गोवत स्कूल का एडमिशन का टेस्ट क्लियर नहीं करपया सो मजबूरन उसका एडमिशन उसी स्कूल में हुआ जिसमे मनु पड़ता था,,
इसे किस्मत कहो की दोनों की क्लास भी शामे hi थी, खैर मनु से जब दयाल बाबू मिले तोह मनु को उसके घर वालो ने सिख्या था की कोई बड़ा घर आये तोह उसके पेअर चुकार आशीर्वाद लेना चिहिए सो उसकी आदत थी कोई बड़ा घर आता सो उनके पेअर चुकार आशीर्वाद लेता tha,kyuki दयाल गांव से था सो उसे मनु का पेअर चुना बड़ा ाचा लगा उसपर मनु की अछि आदत ने दयाल बाबू के दिल में उसका फरिस्त इम्प्रैशन सॉलिड बना दिया,
उन्होंने सोचा अगर यह बचा उनके चिंटू के साथ रेहगा तोह ाचा hoga,kyuki सांगत अपना असर छोड़ती है चाहे अछि हो या बुरी, उनका बीटा चितु गांव में रहकर और अपनी माँ के लाड प्यार की वजह से काफी ज़िद्दी और बद्तमीज़ हो गया था जब दयाल ने मनु को देखा तोह उन्हें लगा की ुमका बीटा चितु जो की शामे आगे का है हु भी मन ऊके साथ रहकर सुधर जायेगा,
वैसे तोह चितु ठीक था पैर सबसे छोटा होने के कारन और माँ का लाडला होने के कारन ज़िद्दी और मचला होगया tha,khair दयाल बाबू ने मनु से कहा “बीटा चितु मेरा छोटा बीटा तुम्हारी आगे का है तुम्हारे स्कूल में उसका एडमिशन होगया hai,or हु तुम्हारी क्लास में hai,so बीटा उसका ध्यान rakhna,usse अछि बातें सीखना,”
मनु ने जब यह सुना की उसकी क्लास और उसके साथ जाने के लिए कोई मिलगया hai,,use बहुत ाचा लगा क्युकी इससे पहले सिर्फ कनु hi उसके साथ हुआ करती थी, उसके बाद अजय ,क्युकी अजय काफी छोटा और उसपर उसका भाई था, सो उसने बिना सोचे चिंटू को दोस्त मान liya,kyuki उसके लिए किसी का साथ होना hi दोस्ती थी,
खैर दयाल बाबू मनु से मिलने के बाद घर वापस पूछे तोह उन्होंने चितु को बुलाया और कहा “देखो चितु अब तुम सुधर जाओ कहलो खेलने से मन nahi,per बीटा अचे से पड़े करना तुम्हारे साथ हमारे साथी का बीटा स्कूल जाएगा और अछि बात है तुम दोनों एक hi क्लास हो तोह उससे उसकी हेल्प लेलेना और उसकी बात मन्ना क्युकी बड़ा ाचा बचा है, अचे और ऊँचे संस्कार हैं uske…tumhari तरह नहीं कोई भी ए जाये तुम्हे तोह किसी से बात करने का ढंग तक नहीं, उससे सीखो कैसे बड़ो से बात करते hain,kaise बड़ो का सम्मान किया जाता hai,agar कोई अछि बात सिखने को मिले तोह सीखना चाहिए.”
यह बात सुनकर चितु ने हाँ में सर hilaya,per अंदर से गुस्से से भर gya,kyuki अछि बात सबको पसंद आती hai,per किसी बचे या बड़े को किसी से कपड़े करने का मतलब hai,,ek को दूसरे का दुश्मन साबित करना क्युकी एक इंसान किट ऊलना दूसरे से करना मतलब पहले को दूसरे से छोटा साबित karna,,,bade इंसान में भी शामे है पैर बड़ा इंसान जहां इस ीक कम्पटीशन की तरह देखता है ,वहीँ बचे दूसरे से छिड़ने या आजीवन दुश्मनी मान लेते hai,,jaise एग्जाम के बाद किसी के मार्क्स किसी को कपड़े करना हरजगह कमान सी बात hai,har माँ बाप सोचते हैं उनका बचा अचे नंबर से पास हो आगे बड़े पैर इस चक्कर में हु अनजाने में दूसरे बचे की तुलना अपने बचे से करते hain,jaise बगलवाले गुप्ता जी bete/beti ने तुमसे ज्यादा अचे नंबर लिए हैं एग्जाम में, उससे कुछ सीखो यह बात हु कहकर अपने बचे की तुलना गुप्ता जी के बचे से करने लगते hain,har बचे की अपनी अलग पहचान होती hai,per जब किसी किट ऊलना किसी से की जाये तोह जिसके नंबर काम है हु खुद को निचा समझेगा यह कमान सा फैक्टर है,
इसी चक्कर में बहुत से बचे बिना बोले एक दूसरे के दुश्मन बन जाते hain,,,ab यहां चितु तोह चुप रहा पैर अंडर काम कर रही उसकी माँ पैर इसका सिद्ध असर hua,who नाम से ललिता नहीं काम से भी ललिता thi,kehne को काम पड़ी लिखी औरत thi,chintu उसका सबसे छोटा बीटा था सो लाडला भी tha,use अपने बचे की तुलना में अपने खुद के पति से दूसरे की तारीफ बर्दास्त नहीं हुई उसे भी चिंटू की तरह गुस्सा तोह बहुत आया पैर उसने सोचा की अगर उसके पति की बात अगर 1% भी सही hai,toh उसका hi फ़ायदा है ,चिंटू पड़ने में दिल लगये इससे ाचा क्या हो सकता hai,kyuki अगर हु भी गोवत स्कूल में पद पाटा सो उनके घर के बजट के उससे काफी हेल्प मिलती क्युकी सिंपल सी बात है प्राइवेट स्कूल गोवत की कपड़े में काफी मेहगे होते hain,,,usper ड्रेस चार्ज ,टैक्स , बस चार्ज लगाकर ाचा कहसा निचोड़ लेते हैं प्राइवेट स्कूल ,
खैर उसने सोचा और अपने पति से ज़ोर से कहा “अगर इतना पायरा बचा है तोह कभी घर बुलाओ उसे हमारा चितु भी milelega,usse और हमारे चितु को भी नया दोस्त मिलजायेगा,”