Pyaar Nafrat or Kismat - SexBaba
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Pyaar Nafrat or Kismat

hotaks

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Dec 5, 2013
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मैं कोई राइटर नहीं हूँ पैर कुछ दिल मैं आये तोह लिख देता हूँ दोस्तोव....

आप सभी का साथ और आपकी पसंद और न पसंद को धयान में रखकर लिकने की कोशिश करूँगा,,

कहीं कोई गलती हो तोह प्ल्ज़ आप सभी से रिक्वेस्ट hai,,,bata देना और आप सभी का सुग्गेस्टिव और व्यू बताते रहिएगा...

और हाँ स्टोरी का यह प्लाट कैसा लगा प्ल्ज़ बताना zaroor,,,agar पसद आये तोह रिप्लाई ज़रूर करना मेरे लिए हर एक का व्यू मायने रखता है..

चाहे वह स्टोरी का साइलेंट रीडर hi क्यों न हो...



एक बात और अगर आप सभी का साथ मिलेगा toh,har रोज़ कोशिश करूँगा एक या दो अपडेट देने की ...बाकी सब आपके उप्पेर है.. :थैंक्स:
 
थोड़ा सा pre-face भी है अस ट्रेलर मोस्ट ऑफ़ स्टोरी ,,,,आपको अगर पसंद आये तोह प्ल्ज़ बताना ,,,आप सभी की पसंद और न पसंद को कंसीडर किया जायेगा ,,,,,और सबसे ज़रूरी स्टोरी का अपडेटेड आप लोगो पैर निर्भर है अगर आप लोगो को पसंद आयी तोह कोशिश करूँगा हर रोज़ एक या दो अपडेट देने की ......

बाकी सब आप सभी पैर निर्भर है अछि लगे तोह बताना न अछि लगे तोह भी बिंदास बता देना....

:थैंक्स:


इंडेक्स


अपडेट 1अपडेट 2अपडेट 3अपडेट 4अपडेट 5अपडेट 6अपडेट 7अपडेट 8अपडेट 9अपडेट 10अपडेट 11अपडेट 12अपडेट 13अपडेट 14अपडेट 15अपडेट 16अपडेट 17अपडेट 18अपडेट 19अपडेट 20अपडेट 21अपडेट 22अपडेट 23अपडेट 24अपडेट 25अपडेट 26अपडेट 27अपडेट 28अपडेट 29अपडेट 30अपडेट 31अपडेट 32अपडेट 33अपडेट 34अपडेट 35अपडेट 36अपडेट 37अपडेट 38अपडेट 39अपडेट 40अपडेट 41अपडेट 42अपडेट 43अपडेट 44अपडेट 45अपडेट 46अपडेट 47अपडेट 48अपडेट 49अपडेट 50अपडेट 51अपडेट 52अपडेट 53अपडेट 54अपडेट 55अपडेट 56अपडेट 57अपडेट 58अपडेट 59अपडेट 60अपडेट 61अपडेट 62अपडेट 63अपडेट 64अपडेट 65अपडेट 66अपडेट 67अपडेट 68अपडेट 69अपडेट 70अपडेट 71अपडेट 72अपडेट 73अपडेट 74अपडेट 75अपडेट 76अपडेट 77अपडेट 78अपडेट 79अपडेट 80अपडेट 81अपडेट 82अपडेट 83अपडेट 84अपडेट 85अपडेट 86अपडेट 87अपडेट 88अपडेट 89अपडेट 90अपडेट 91अपडेट 92अपडेट 93अपडेट 94अपडेट 95अपडेट 96अपडेट 97अपडेट 98अपडेट 99अपडेट 100
 
प्यार नफरत और किस्मत …

कहने को तोह यह तीन शब्द या तीन लफ्ज़ हैं, पैर इंसान की पूरी दुनिआ इन तीन शब्दूं के जाल के िरद गिरद गुमटी रहती है.

प्यार :-- यह वह लफ्ज़ है जो कहने को दुनिआ का सबसे खूबसूरत लफ्ज़ है, किसी को अगर प्यार होता है, तोह उसका बस एक hi सपना होता है, की जिसे वह प्यार करे उसे उसका प्यार मिल जाये. प्यार के मायने हर किसी के लिए अलग अलग हो सकते हैं , जैसे किसी को किसी अपने का होने का एहसास प्यार hai,kisi के लिए किसी अपने का होना प्यार hai,kisi को अपने प्यार को खुश रखना hi प्यार है.

एक बचे की किलकारी से लेकर किसी के चले जाने तक हर इंसान प्यार से घिरा हुआ है,,,

नफरत :--- यह वह लफ्ज़ है जैसी अपनी अलग दुनिआ hai,iski अपनी एहमियत hai,ab आप सोचेंगे नफरत से भला किसी को क्या मिल सकता है , तोह जवाब आप खुद दे सकते है, नफरत वह लफ्ज़ है जो हर किसी इंसान के अंदर होता hai,bilkul प्यार की तरह ,यह वह लफ्ज़ है जो किसी को किसी से भी और कहीं नहीं हो सकता hai,nafrat इंसान को वह ताकत देती hai,jiske कारन इंसान जीवन में कभी कभी बहुत उचाई तक चला जाता hai,ya फिर दुनिआ की सबसे घरी खाइयों tak,nafrat आप को एक कम्पटीशन में जीत ने के लिए या ज़िन्दगी में जीतने की वह ताकत दे देती hai,jo स्याद hi कोई देसके….

किस्मत :--यह वह लफ्ज़ है जिसका होना और न होना हर इंसान के लिए अलग मायने रखता hai,kehte है किस्मत इंसान को कुछ भी बना देती hai,,raja को रैंक ,और रैंक को राजा. किस्मत हर किसी इंसान की ज़िन्दगी में अलग अलग तरह से काम करती hai,kismat का मतलब हर इंसान के लिए मतलब रखता hai,jahaan कोई किस्मत को खूब कोस्टा hai,toh कोई बुरे से बुरे है में भी अपनी किस्मत से प्यार करता hai.kismat की कहानी भी अज़ाब और गज़ब hai.yeh सुनती है सबकी पैर करती है अपने मैं की यहां इस दुनिआ से उस दुनिआ तक किस्मत का खेल अज़ाब निराला है,,

हर जगह किस्मत को अलग अलग तरह से कहा जाता है किसी के लिए जिन्दा बचना किस्मत hai,toh किसी के लिए सही मौत मिलना किस्मत hai,har कोई किस्मत का धनि है और हर कोई कहीं न कहीं किस्मत का मारा है…

तोह यह है इस कहानी के हु तीन शब्द जिनका इस कहानी में एहम किरदार होग्गा …
 
अपडेट 1



बचपन की यादें

यह सहर है राजनगर (काल्पनिक) आइये कहानी शुरू करते हैं. हर किरदार का जीकर कहानी के साथ साथ होता जायेगा सो थोड़ा इंतज़ार करे ..

एक छोटा बचा अपनी बस का इंतज़ार कर रहा है . बचा डरा सहमा सा इधर उधर देख रहा था क्युकी बस थोड़ी लेट थी. सो वह थोड़ा सा चिंतित था. खैर बस आयी तोह वह उसमे चढ़ा चढ़ते hi एक जानी पहचानी आवाज़ ने उसे पुकारा “आओ मनु आगे आजाओ, मैंने तुम्हारे लिए सीट बचा राखी है “.

बचे ने उस ओर देखा और उसके चेहरे पैर जो चिंता लेट होने की थी ,वह अब कृषि में बदल गयी ,क्युकी आगे उसकी एक लौटी दोस्त कनिका उर्फ़ कनु मुस्कुराकर उसे आगे आने का इशारा किया था.

मनु आगे जाकर उसके साथ बेथ जाता है ,शर्दियों के दिन थे सो दोनों आगे बेथ कर आती जाती गाड़ियों को देखकर खुश थे.

मनु कनु की मुस्कुरहट में खो सा जाता है. और याद करता है की कैसे अभी एक हफ्ते पहले उसका एडमिशन हुआ था इस स्कूल में जो पब्लिक स्कूल था ,जहां लड़के लडकियां साथ पड़ते थे,

वहाँ उसका कोई दोस्त नहीं था ,सबसे बात करने में डरने वाले मनु को इस स्कूल में नर्सरी में एडमिशन मिला था, पहली बार घर से निकलना क्या होता है ,,उसे पता चला था,

नार्मल लोकैलिटी में रहने वाले बचूं के लिए तोह दोस्त बनाना आम सी बात होती hai,per मन ऊके साथ यहां प्रॉब्लम यह थी की जिस एरिया में हु रहता tha,wahaan अधिकतर बचे या तोह ** ईयर या उसे बड़े थे जिनके साथ कहलना या बात करना मन जैसे छोटे बचे के लिए पॉसिबल नहीं था.

खैर मनु याद करता है की कैसे कुछ दिनों में hi उसकी और कनु जो की उसके एरिया के पास hi रहा करती थी उससे उसकी दोस्ती कैसे हो गयी,

रोज़ दोनों का साथ बस में आना और शामे क्लास में होना और शामे एरिया से होने की वजह से दोनों में अछि बॉन्डिंग होने लगी थी.

बॉन्डिंग आप कहेंगे छोटे बचूं में कैसी बॉन्डिंग अरे भाई चॉकलेट और डॉल की स्पेशल टॉक जो सिर्फ कनु की स्पेशिलिटी थी जिसको सयाद hi कोई सुनता,,

मनु जैसा चुप रहनेवाला लड़का चुपचाप सुनता था और बात ख़तम होने पैर सिर्फ थोड़ा सा मुस्कुरा देता tha,,chahe बेचारे को कुछ डॉल के बारे में समझ आया हो य नया हो…

कनु जैसी बातूनी लड़की जो दिन भर बस बोलना जानती हो उसकी बातों को कोई सुने उसके लिए इतना काफी था,

उसके लिए तोह मनु किसी स्पेशल फ्रेंड से काम नहीं tha,jo सिर्फ कनु की बातें सुनने के लिए hi बना tha,kya करे थी तोह छोटी बची उसको लगता था की मनु पैर सिर्फ उसका कॉपीराइट है.

मनु जिसके लिए बस से जाना नया था जब पहली बार कनु ने उसे आगे की सीट पैर बुलाया तोह मनु की हैरत देखकर कनु को लगा की मनु को आगे की सीट पसंद है ,

फिर क्या था फिर तोह कनु का डेली जल्दी बस में जाकर, ड्राइवर अंकल से बोलकर सीट बचा लेना उसका काम था कनु जैसी बची जो खूब बोलती हो और क्यूट हो उसके लिए ड्राइवर अंकल को प्ल्ज़ कहना काफी होता tha…or रही सही कसार कनु ड्राइवर अंकल को “चाचू कहकर पूरी करदेती थी.”
 
अपडेट 2

बचपन की यादें

फिर क्या था फिर तोह कनु का डेली जल्दी बस में जाकर, ड्राइवर अंकल से बोलकर सीट बचा लेना उसका काम था कनु जैसी बची जो खूब बोलती हो और क्यूट हो उसके लिए ड्राइवर अंकल को प्ल्ज़ कहना काफी होता tha…or रही सही कसार कनु ड्राइवर अंकल को “चाचू कहकर पूरी करदेती थी.”......

अब आगे....

खैर बस में मनु और कनु आगे बैठे थे कनु अपनी आदत के मुताबिक कुछ न कुछ बोलती रहती मनु बेचारा जिसकी कुछ समझ में ए या नए बस उसकी ओर देखकर सुनने की कोशिश करता तोह कभी बहार जाती गाडिओं को देखता ..और थोड़ा कनु की ओर देखकर मुस्कुरा देता..

अपने टाइम पैर दोनों स्कूल पूछ गए ,,,

थोड़ी देर बाद दोनों अपनी क्लास में बैठे थे जिसमे उनकी मैडम मरस. वर्मा क्लास को पड़ा रही थी.

अचानक कनु ने धीरे से अपना बेग खोला और अपनी चॉकलेट खाने लगी.

मनु जो सामने देख रहा था उसने कनु की तरफ देखा और अपनी पड़े में लग गया, कनु चुपचाप चॉकलेट कहने में लगी रही शायद आज दिन कहो या किस्मत उसकी ठीक नहीं thi,so मरस वर्मा ने उसे देख लिया और कहा

“कनु अछि बात नहीं पड़े करो कुछ कहना हो तोह लंच टाइम में खा लेना”

कनु ने अपनी चोरी पकडे जाने पैर मरस वर्मा की तरफ देखा जिनके हाथ में लॉन्ग स्केल tha,usne सोचा आज पिटाई पक्की hai,so उसने चॉकलेट मन ऊके हाथ में देदी और बोली

“मम यह तोह मनु की है और वही खा रहा tha,maine तोह सिर्फ हाथ में पकड़ राखी थी,”

मरस वर्मा ने मनु की तरफ देखा बेचारा जिसे कुछ समझ आया कुछ नहीं आया पैर मैडम के हाथ में लम्बा सा लकड़ी का स्केल देखकर उसे लगा की शायद यह स्केल कनु को padega,so बेचारे ने सोचा उसकी एकलौती दोस्त जिसके साथ हु रोज़ अत है ,एक साथ एक क्लास में बैठता है, अगर वह उस लकड़ी के स्केल से पटेगी तोह शायद hi कभी उससे बात करे ,,,,

सो बेचारा बिना ज्यादा कुछ सोचे तुरंत बोल पड़ा “हाँ मां यह मेरी चॉकलेट है में hi खा रहा था मैंने सिर्फ पकड़ने के लिए कनु को दी थी”

मरस वर्मा ने एक बार मनु का साफ़ चेहरा देखा और कनु का चॉकलेट से सना हुआ चेहरा देखा वह तुरत मनु का कनु को बचने का जूथ समझ गयी,,

मरस वर्मा मनु के पास गयी उसके सर पैर प्यार से हाथ फेरकर बोली ,”मनु कोई बात नहीं मगर अब लंच से पहले कुछ खाया तोह आगे से तुम सबसे पीछे बैठोगे”

कनु ने जब यह सुना उसने फ़ौरन चॉकलेट बेग में रख दी और बोली “मम अब कोई लंच से पहले नहीं कहेगा पैर मनु पीछे नहीं bethega.agar वह पीछे जायेगा तोह मैं भी वहीँ बेठुंगी”

मरस वर्मा ने जब यह सुना तोह वह मुस्कुराकर boli”abhi छोड़ देती हूँ पैर अगर लंच से पहले कुछ खाया toh,manu कल से पीछे बैठेगा और तुम उसके साथ नहीं बैठोगी”

अब कनु मासूमियत के साथ boli”Mam न में लुक से पहले कुछ खाउंगी न मनु को कहने दूंगी पैर प्ल्ज़ मनु को पीछे मत बिठाना “

मरस वर्मा फिर मुस्कुराकर वापिस अपनी सीट पैर चली गयी और स्टडी को आगे कंटिन्यू कर दिया…

कनु अब मनु की तरफ देखकर उससे boli”sorry अब नहीं कहूँगी मैं और डर के मरे तुम्हारा नाम ले लिया मैंने पैर तुम प्ल्ज़ पीछे मत bethna.agar तुम पीछे गए तोह मैं तुमसे कभी बात नहीं करुँगी तुम्हारी मेरी कटती हो जाएगी”
 
अपडेट 3

बचपन की यादें

कनु अब मनु की तरफ देखकर उससे boli”sorry अब नहीं कहूँगी मैं और डर के मरे तुम्हारा नाम ले लिया मैंने पैर तुम प्ल्ज़ पीछे मत bethna.agar तुम पीछे गए तोह मैं तुमसे कभी बात नहीं करुँगी तुम्हारी मेरी कटती हो जाएगी”

अब आगे...

मनु बेचारा क्या बोलता “नहीं में नहीं जाऊंगा पीछे पैर तुम मुझसे कटती मत करना”

कनु ने मनु का हाथ पकड़ा और अपने पुराने अंदाज़ में boli”nahi करुँगी katti,per तुमको हमशा मेरी बात माननी होगी, और मुझे छोड़कर कहीं गए तोह हमारी कटती “

मनु क्या बोलता बेचारा बिना कुछ किये फास गया tha..sochne लगा अब अकेले आना होगा स्कूल ,,,

आगे की सीट भी नहीं मिलेगी और स्कूल में भी पीछे बैठना होगा ..यह सब दिमाग में आते hi तुरंत बिना कुछ सोचे बोलै “नहीं जो तुम बोलोगी वैसा hi karunga,abhi भी और बाद में भी और जब बड़ा हो जाऊंगा तब भी तुम्हारी hi बात मानुगा”

कनु थी तोह छोटी पैर मूवी वगेरा देखती रहती थी तोह कोई मूवी सन याद करके बोली “बड़े हो जाओगे तोह तुम अपनी बीवी की मानोगे या मेरी”

मनु बेचारा दर्रा हुआ था बिना कुछ ज्यादा सोचे जो कनु को नाराज़ नहीं करना चाहता था तुरनत बोलै “मैं तोह तुम्हारी मानुगा चाहे कुछ भी हो और बीवी कोण है कुछ कहनेवाली जब में बड़ा हो जाऊंगा तुमसे hi शादी करूँगा”

कनु बोली” मुझे शादी करोगे??”

मनु बोलै “हाँ में सिर्फ तुमको पसंद करता हूँ सिर्फ तुम्हारी बात मानुगा बड़ा होकर तुमसे शादी karunga,per मुझसे कटती मत करना”

यह बात मरस वर्मा ने सुनली क्युकी वह वहीँ आयी थी उन्दोनो को चुप कर्णने के liye.per जब उन्होंने शादी की बात सुनी तोह उन्हें भी बहुत ज़ोर से हसी आयी जो बहुत कमान सी बात है बहला आये भी क्यों न जीने बचे को चॉकलेट और स्कूल से ज्यादा कुछ पता नहीं वह ऐसी बात करे तोह ज़ाहिर सी बात है हास्य आणि बनती है…

मरस वर्मा ने चुप रहकर देखा तोह कनु ने मनु का हाथ अपने हाथ में लिया और कहा “तू पका मानेगा न मेरी बात हमेशा और शादी भी मुझसे करेगा तोह ठीक है मैं कटती नहीं karungi,tujhse पैर नहीं मन तोह देखलेना मम से कहदूंगी तू सनटैन नहीं है”

मरस वर्मा का अब अपनी हसी रोकना मुश्किल होगया था वह घुसकर बोली “शादी के बात करते हो बुलाऊँ तुम्हारे पेरेंट्स को…??

दोनों की सिटी पीती गम hogyi…mam ने स्केल दिखया और चुप रहने का इशारा किया और अपने काम में लग गयी,,,,

खैर दिन ख़तम हुआ और दोनों अपने अपने घर चले गए जहां दोनों के लिए एक तूफ़ान त्यार था….
 
अपडेट 4

बचपन की यादें

दोनों की सिटी पीती गम hogyi…mam ने स्केल दिखया और चुप रहने का इशारा किया और अपने काम में लग गयी,,,,

खैर दिन ख़तम हुआ और दोनों अपने अपने घर चले गए जहां दोनों के लिए एक तूफ़ान त्यार था….

अब तूफ़ान क्या था वह भी पता चल jayega,jab मनु अपने घर पहुंचा तोह रोज़ की तरह अपनी मम्मी सुमित्रा जी से bola”mummy मम ने आज ाचा नहीं किया,,,?

सुमित्रा “क्या ाचा नहीं किया “

Manu”mummy मैं कनु से कह उसका हाथ पकड़कर उससे केहरहा था की तू मुझे अछि लगती है मैं हमेशा तेरी बात मानुगा और बड़ा होकर भी मानुगा ,,तोह उसने कहा की बड़ा होकर तोह तू ाबपनी बीवी की बात सुनेगा मेरी nahi,toh पता है मम्मी मैंने क्या कहा “???

सुमित्रा बड़े चाव से अपने नन्हे शैतान की बड़ी बातें सुन रही थी boli”kya कहा तूने”

मनु” यही की जब बड़ा हो जुन्गा तोह कनु से शादी कर लूंगा”

सुमित्रा हैरत के साथ अब हसे बिना न रह सकीय अब खूब ज़ोर से हसी और बोली “फिर क्या करेगा ???”

मनु “ कनु की बात मानुगा और क्या करूँगा वार्ना वह मुझसे कटती हो जाएगी ,फिर में किस्से बात करूँगा और किसके साथ कहलूँगा”

सुमित्रा” तोह मेरा शेर बीटा अभी से जोरू का गुलाम banega,or अभी से वडा कर आया है की बड़ा होकर भी गुलामी करेगा.”” यह कहकर हस्ते हस्ते हुए लोट पॉट होने लगी….

मनु तेरा बिचारा बचा जिसे शादी का मतलब सिर्फ पार्टी और ढोल या दज पैर डांस के अल्वा पता न था. बोलै “मम्मी यह जोरू का गुलाम क्या होता है “??

सुमित्रा “ कुछ नहीं तू आगे बता क्या हुआ क्या कहा कनु ने “??

मनु बड़े इत्र कर बोलै “मम्मी वह बोली की हम बड़े होकर शादी करलेंगे वार्ना वह मुझसे बात नहीं करेगी और कटती कर legi,tabhi मैंने बोलै की तू कटती न करना मैं बड़ा होकर तुझसे शादी कर लूंगा …”

सुमित्रा ने जब यह सुना तोह बड़े प्यार से बोली “सिर्फ कटती से बचने के शादी करेगा “

मनु bola”haan मम्मी अगर कनु ने मुझसे कटती कर ली तोह फिर से कोई मेरे साथ नहीं बोलेगा ,कोई मेरे साथ नहीं केहलेगा, बात तोह वैसे भी कोई मुझसे करता नहीं , मैं फिर से अकेला हो jaunga,,agar कनु ने मुझसे कटती कर्ली तोह “??

सुमित्रा जो सब जानती थी की क्यों मनु से कोई बात नहीं करता और क्यों नहीं कहलता ,,जब उन्होंने यह सुना की उनका बीटा कैसे अपने अकेलेपन से बचने के लिए कनु की सब बात मान ने को त्यार होगया यहां तक की शादी करने को भी.

एक माँ के दिल को जो दर्द हुआ यह वह hi बता सकता है जिसने अपने बचे को तड़पते हुए देखा हो,

(ऐसा क्यों है की मनु के साथ कोई नहीं कहलता और क्यों उसके साथ ज्यादा लोग बात नहीं करते यह सब आपको पता चल जायेगा कहानी के साथ….)

सुमित्रा ने अपने बेटे की और देखा उसका पायरा बीटा जो गेहुएं रंग का था न ज्यादा गोरा न ज्यादा कला प्यारी सी बड़ी बड़ी ऑंखें जो उससे उसकी माँ से मिली थी और लाल गोलू मोलू से gaal.chota पैर क्यूट सा चेहरा जिसे देखकर कहीं से भी नहीं लगता था की. यह प्यारा और मासूम सा बचा किसी को शायद hi कभी लौटकर कोई जवाब दे. वैसे भी मनु की आदत थी काम बात करने की ,,,जहां और बचे चॉकलेट और टीवी पैर कार्टून या खिलोनो के लिए माँ बाप से लड़ते थे वहीँ मनु की आदत चुपचाप अपने काम से काम रखने की thi.aisa नहीं था की मनु कोई चॉकलेट या खिलोनो का कोई शोक नहीं tha,,per कुछ बचे होते हैं न जिनको एक बार प्यार से मनाओ तोह वह बचे आराम से मान जाते hain.kuch इसी तरह का मासूम बचा था मनु…
 
अपडेट 5

बचपन की यादें

ऐसा नहीं था की मनु कोई चॉकलेट या खिलोनो का कोई शोक नहीं tha,,per कुछ बचे होते हैं न जिनको एक बार प्यार से मनाओ तोह वह बचे आराम से मान जाते hain.kuch इसी तरह का मासूम बचा था मनु…

सुमित्रा ने बड़ी चालाकी से बात बदलते हुए मनु से bola”ohho! अब मेरा शेर बीटा शादी करेगा तोह फिर मुझे शादी में बुलाएगा नहीं..??

मनु बोलै “अपनी मम्मी के बिना मुझे कुछ नहीं चाहिए शादी भी nahi,or हाँ शादी तोह बड़ा होकर करूँगा तब मम्मी हम दोनों दज पैर खूब नाचेंगे और शादी की पार्टी में खूब खाएंगे खूब मज़ा आएगा ,,,,

सुमित्रा अपने बेटे की तरफ देखकर boli”mere साथ नाचेगा तोह बीवी गुस्सा हो जाएगी ,और सिर्फ तू पार्टी और दज का सोच रहा है ,,मैं तोह अपने बेटे को खूब सजाकर घोड़ी पैर bethungi….jab चलेगा तोह क्या मज़ा आएगा…??”

मनु “मम्मी मुझे घोड़ी पैर नहीं बैठना मुझे डर लगता है…”

सुमित्रा “बीटा बारात तोह घोड़ी पैर hi जाती है ,,,,”

मनु “मम्मी मुझे घोड़ी से ज्यादा ट्रेक्टर पसंद है ,मेरी बारात तोह ट्रेक्टर में hi जाएगी “ मनु ने अपने खिलोने ट्रेक्टर की तरफ ऊँगली से िसहरा करते हुए कहा …

इस पैर उसकी मम्मी मुस्कुरा padi…unko मुस्कुराता हुआ देखकर मनु बोलै “मम्मी मेरी बारात ट्रेक्टर में जाएगी और अंग्रेजनि नाचेगी…..

अब सुमित्रा का है हसकर बुरा हाल होगया ….”बरात ट्रेक्टर में और अंग्रेजनि नाचेंगी ….अग्रजनिया hi क्यों क्या तुझे अग्रेजनि पसंद हैं क्या या कोई ख़ास वजह है क्या..??

यही बाते चल रही thi..ki सुमित्रा के पति राजिंदर घर के अंदर आते हैं और पूछते हैं…

राजिंदर “कोण किस को नचा रहा है…”

सुमित्रा हस्ते हुए बोली “आपका लाडला नचा रहा है अपनी बुआओं को ….”

हस्ते हुए मनु की तरफ देखा जो बिचरा समझने की कोशिश करने लगता है की बुआ कहाँ से बिच में आगयी???

राजिंदर “मनु बुआ को नचा रहा है कोई बात भी है या बेमतलब hi तुम उसपर इलज़ाम लगा रही हो???

मनु तुरत बोलै “पापा मैंने तोह बुआ को कुछ नहीं कहा बस इतना कहा था मेरी शादी में अंग्रेज़नियाँ नाचेंगी…..

राजिंदर ने जब यह सुना तोह सुमित्रा की तरफ देखा जो हस्ते हस्ते अपनी आंखों से पानी पूछ रही थी…

सुमित्रा की और देखकर राजिंदर उसकी चालाँकि भाप गए और मनु से kaha….”beta तुम तोह अचे बचे हो मेरे शेर बेटे हो बुआ तुम्हारी तोह तुम्हारे पापा से भी बड़ी हैं हु नाचते हुए क्या खाख अछि लगेंगी पैर हाँ तुम्हारी मौसी और बड़ी मामी अभी जवान है खूब लचक दर हैं अगर हु नाचेगी तोह मज़ा आ जाएगा …और तुम कहो तोह तुम्हारे पापा भी उन ाग्रेज़्नियूं के साथ तुम्हारी शादी में nachege….kaho क्या कहते हो….?????”
 
अपडेट 6


बचपन की यादें

सुमित्रा की और देखकर राजिंदर उसकी चालाँकि भाप गए और मनु से kaha….”beta तुम तोह अचे बचे हो मेरे शेर बेटे हो बुआ तुम्हारी तोह तुम्हारे पापा से भी बड़ी हैं हु नाचते हुए क्या खाख अछि लगेंगी पैर हाँ तुम्हारी मौसी और बड़ी मामी अभी जवान है खूब लचक दर हैं अगर हु नाचेगी तोह मज़ा आ जाएगा …और तुम कहो तोह तुम्हारे पापा भी उन ाग्रेज़्नियूं के साथ तुम्हारी शादी में nachege….kaho क्या कहते हो….?????”

मनु बेचरा अपना सर कुज्जते हुए जिसकी समझ में कुछ आया कुछ नहीं आया पैर अपने पापा के नाचने की बात सुनकर खुश होकर बोलै….

Manu”papa यह तोह अछि बात है अब तोह मौसी और ममी सब नाचेगी बुआ का प्लान कैंसिल….

यह सुनकर राजिंदर ने सुमित्रा की तरफ देखा जो वहाँ कड़ी अपने पति की चालाँकि को खुद पैर भरी पड़ता हुआ देखकर चीड़ गयी उसने सोचा भी नहीं था की उसका बुआ का डाव उसी पैर उल्टा पद जायेगा …

चिढ़कर और तुनकर boli”haan बुआ की बड़ी कमर तोह लचक जाएगी और नाचने के लिए तोह बूढी कमर नहीं चलती यह बोलकर गुस्से से तुनककर अंदर चली गयी….

राजिंदर उसे अंदर जाता देखकर अपने दिमाग और चल पैर हस्देटा है…

मनु जिसकी कुछ भी समझ नहीं आता अपनी मम्मी के पास जाकर देखता hai…jo अपने काम में लगी हुई thi…toh आकर टीवी देखने लगता है…

डिनर के टाइम सब बैठे हुए थे खाना होने के बाद राजिंदर ने सुमित्रा से कहा की सुनो….

तुम्हे हमारे नए असिस्टेंस मैनेजर भानु राइ का पता है न …

भानु राइ यह राइड (काल्पनिक ) से जमीदारो की फॅमिली से हैं इनका परिवार पुरखों से जमींदारी करता आया था पैर यह अपनी पड़े करने के बाद ,,,देहरादून घूमने गए थे जहां एक सुन्दर सी लड़की पैर दिल हार बैठे. बात वहीँ नहीं रुकी उस लड़की और भानु राइ ने शादी कर्ली और जब अपनी बीवी के साथ अपने जमींदार पिता के पास पूछे तोह उसके जमादार पिता ने पहले तोह लड़की की तरफ देखा उसे देखकर खुश हुए फिर भानु से पूछा बीटा शादी करनी थी तोह बोल देते क्या तुम्हे अपने बाप पैर इतना यकीं नहीं था की मैं तुम्हारी शादी ठीक तरह से करा पता ???

भानु जिसको अपने बाप से यह सुनने की ज़रा भी उम्मीद नहीं थी bola”pitaji मुझे लगा की श्याद hi आप हाँ कहें सो मुझे जो सही लगा मैंने किया ,,,,

उसके पिता ने सिर्फ इतना कहा “भानु तुम मेरे बड़े बेटे हो मेरा स्वाभिमान हो मेरी भी कुछ िचायें थी तुम्हारी शादी को लेकर उनका क्या..???

Bhanu…behara क्या बोलता …उसके पिता उससे पूछा बीटा बहु तोह अछि है पैर “कोण जाट है “

भानु ने जब जब उसकी बीवी की जाट बताई तोह जो बाप अभी तक उसकी शादी को मानने को त्यार थे अचानक से अपनी मुचून को ताव देकर बोले “भानु तुम्हे इतनी बड़ी दुनिआ में हमारे बराबर की लड़की नहीं मिली कोई बात नहीं …गरीब ले आते तोह मैं यह सोचकर साबरा कर लेता की मेरा सब कुछ तुम्हारा है पैर नीच जाट से शादी करके तूने इस कुल और इस जमीदारों के खानदान के मुँह पैर कालिख पॉट दी है …..

अभी के अभी तू और अपने इस कचरे को ले कर निकल जा इस घर से तुझे पूरी दुनिआ में कोई लड़की नहीं मिली ….

भानु ने अपनी बीवी की तरफ देखा जिसकी आँखें अब आसन से तर हो चुकी थी हाथ जोड़कर बोली “पिताजी इनसे गलती हो गयी ,,मैं चली जाती हूँ यह आपके बेटे हैं आप जहां चाहे इनकी शादी कर दीजिएगा …
 
अपडेट 7

बचपन की यादें

भानु ने अपनी बीवी की तरफ देखा जिसकी आँखें अब आसन से तर हो चुकी थी हाथ जोड़कर बोली “पिताजी इनसे गलती हो गयी ,,मैं चली जाती हूँ यह आपके बेटे हैं आप जहां चाहे इनकी शादी कर दीजिएगा …

भानु ने जब यह सुना तोह उसे याद आज्ञा की कैसे उसकी बीवी के मरते हुए पिता ने जब यह सुना की भानु उनकी लड़की को चाहता hai.or ज़िंदगी भर उसका साथ देगा तोह उन्होंने भानु से सिर्फ इतना कहा की “बीटा मेरी बेटी बिन माँ की बची है और मेरा पता नहीं कब तक जिन्दा rahun…bas इतना वडा करो की उसे हमेशा खुश रखोगे और उसका साथ कभी नहीं छोड़ोगे ….अगर यह वडा कर सको तोह मेरी बेटी का हाथ आज से तुम्हारा हुआ ….और भानु के हाथ में अपनी बेटी शालिनी का हाथ दे दिया दोनों की शादी मंदिर में हुई थी.

इसे किस्मत कहिएः या संजोग भानु और शालिनी के शादी के 1 घंटे के बाद hi शालिनी के पिता की मौत हो गयी…

भानु अब वात्विकता में आता है देकता है उसकी बीवी का रो रोकर बुरा है hai..or जब उसने शालिनी के मुँह से यह सुना की वह उसे छोड़ degi,toh उसे उसके गाल पैर थपड सामन laga.kyuki उसे उसका शालिनी के पिता से किया हुआ वडा याद आज्ञा था…

भानु ने अब एक कठोर निर्णय लिया और कहा “शालू चुप हो jao,kya तुम चाहती हो की तुम्हारे पति का तुम्हारे पिता से किया हुआ वडा टूट जाये ,,,क्या तुम छाती हो की तुम्हारे पति की हार हो …???

शालिनी ने रट हुए भानु की और देखा और न में सर हिलाया …

भानु ने अब अपने पिता की और देखा और कहा “पिताजी सबसे पहले मुझे माफ़ कर दिज्ये की आपको बिना बातये मैंने शादी ki.pitaji आप मुझे जानते हैं मैं कभी आपको निचा दिखने के बारे में सोच नहीं sakta.or रही बात मेरी आपको बिना बताये शादी की तोह पिताजी कभी कभी हालत इंसान से बहुत कुछ करवा देते hain…jo इंसान अपने सपने में भी नहीं सोचता ….मैं जनता हूँ की मैंने आपको बिना बताये एक बहुत बड़ा फैसला लिया hai…per अपने इस बेटे और अपनी परवरिश पैर इतना भरोषा भी रखिये की जो किया है शायद यह मेरी किस्मत hi रही hogi…ek बात इस में साफ़ है शालिनी अब मेरी बीवी है और इसे छोड़ना किसी तरह संभव नहीं hai…kyuki मैंने इसके पिता को अपने पिता की गैर हज़ारी में भी आपको साक्षी मान कर वडा किया है..

भानु के पिता ने जब खुद यह सब सुना तोह उनका गुस्सा तोह काम ज़रूर हुआ पैर क्या कर सकते थे क्युकी बात सिर्फ बेटे की ख़ुशी की नहीं उनके मान सम्मान की भी थी….

हु चुप रहे तोह भानु बोलै पिता जी आप इस बात की चीन न कीजिए की मैं किसी भी तरह आपके नाम को निचा होने दूंगा ….मैं शालिनी को लेकर सिर्फ आपसे आपका आशीर्वाद लेने आया tha…aap बेफिक्र रहिये मैं शालिनी को लेकर अभी यहां से चला जाऊंगा ताकि आप पैर कोई ऊँगली न उठा सके ….

हो सके तोह मुझे माफ़ कर दीजिएगा पिता जी ….मैंने हर काम आपसे पूछकर या आपकी मर्ज़ी से किया पैर अपनी ज़िन्दगी का सबसे बड़ा फैसला hi मुझे आपको बिना बताये करना पड़ा …ाचा पिता जी पाए लागो.

भानु और शालिनी दोनों उसके पिता के पेअर छूटे हैं ,,,भानु के बोलने से पहले hi उसके पिता ने दूसरी और अपना चेहरा घुमा लिया tha…jab दोनों ने उनके पेअर छुए तोह उनकी आंखों से आंसूं भने लगे …

पैर भानु के पिता और भानु दोनों जानते थे की अगर भानु वहाँ रहा तोह उसके परिवार के लिए लोगो की बातून का जवाब देना मुश्किल हो जाता…

 
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