अपडेट:-11 ( ब्रूटलिटी :डेविल: )
मैंने गेट बंद किया रूम का और अभय को उन दोनों के मुँह की पट्टी खोलने को बोलै, अभय ने उनकी पट्टी हटाई तो असुसुअल वो apne-apne खानदानो का गुणगान करने लगे खुद की बेशक गांड फटी हो फिर भी धमकी दे रहे थे.
मैं:- अबे चुप करो दोनों कितना भोकते हो.
ये मैंने चिल्ला के बोलै तो वो चुप हुए.
देव:- देख एक उस दिन बस मैंने तुझे थोड़ा सा मारा था, रोहन ने मारा था ज्यादा.
सोनल:- और मैंने तो कुछ किया hi नहीं, मैं देव की गर्लफ्रेंड हु तो मुझे भी उठा लाये.
मैं:- हाहाहाहा gf-bf हो तो दोनों साथ hi उप्पेर जाओगे, चलो थैंक्स बोलो.
देव:- देख एक पीटने के लिए कोई जान से नहीं मरता यार.
मैं:- अंजलि को भूल गए तुम.
अब लगा उन्दोनो को सॉलिड झटका, अब दोनों कुछ न बोल पा रहे थे, बोलेंगे भी कैसे बस गांड न तोड़ दूंगा.
देव:- देख एक मैं प्लान मेरे बड़े भाई का था हमे छोड़ दे मैं तुझे कुछ नहीं कहूंगा.
मैं:- एक नेवर फॉरगिव एंड फॉरगेट.
ये बोलके मैंने रामपुरी उठायी, बस अभय गज़ब बाँदा है क्या नाइफ लेके आया गलती से टच भी हो जाए यो वही पे कट लगा दे और इससे इनके सरीर को छिलने में अलग hi मज़ा आएगा.
अभय बीएड पे बैठा और मैं देव के सामने और उसके फेस पे उस नाइफ को फेरा, वो बस नहीं नहीं किये जा रहा था तो मैंने उसके मुँह पे वो टेप फिर से लगा दी.
मैं:- भसडक कितना बड़बड़ करता है बे तू.
अब मेरे दिमाग में फिरसे बकचोदी होने लगी थी मैं फील कर पा रहा था, दर्द नहीं हो रहा था बस वो कुछ मांग रहा हो ऐसा लग रहा था.
मैं:- देव बीटा रेडी, आज ऐसी मौत दूंगा तुझे की तेरी बॉडी की पहचान पोस्टमॉर्टेम वाले भी नहीं कर पाएंगे.
ये बोलके मैंने वो चाकू उसके लेफ्ट कंधे में घुसाया, नाइफ बड़ा स्मूथली उतर गया उसके कंधे में, वो तो नहीं चिल्ला पाया लेकिन सोनल मैडम चिल्ला के रोने लगी और मुझे हसी आ गयी.
मैं:- हाहाहा अभी तो स्टार्ट है डार्लिंग, याद कर वो पल जब अंजलि दीदी भी ऐसे तड़पती थी.
ये बोलके मैंने वो नाइफ बहार खींचा और अगले सेकंड में उसके दूसरे कंधे में दाल दिया, वह से भी खून टपकने लगा.
मैं:- अबे ऐसे तो ये मर जायेगा, वो सामान ला जल्दी.
मैं वो नाइफ वह से निकला और हथेली मैं घोप दिया, इस बार सोनल नहीं चिल्लाई, मैंने उसे देखा तो मैडम बेहोश थी.
अभय इतनी देर में एक बोतल लाया जो एसिड की थी उसने वो बोतल खोली और थोड़ा उसके कट्स पे दाल दिया जिससे खून आना बंद हो गया लेकिन देव की सकल कुत्ते जैसी हो गयी थी.
अभय:- अब ज्यादा मजे न ले बहुत मिलेंगे ऐसे आगे, उनपे निकलियो अपना ये एडिक्शन. अगर ये सुबह तक घर न पहुंचे तो पुलिस को खबर मिल जाएगी और हमे ढूंढने में ज्यादा देर नहीं लगेगी.
मुझे भी उसकी बात सही लगी और मेरे आँखों में एक बार अंजलि दीदी का चेहरा आया और उस चेरे को देख के इतना गुस्सा आया की वो नाइफ उठके मैंने बहुत स्पीड से कई बार उसके पेट में घोपा, बहुत देर तक घोपता रहा में.
अभय:- बस कर बे मर गया वो.
मैंने उसकी तरफ देखा तो रट हुए मर गया था, मैंने उसके पेट पे हाथ फेरा जहा से मॉस तो दिख hi नहीं रहा था मैंने अपना पूरा हाथ ब्लड से भिगोया और अपने नाक के पास ले जाके सुंघा, हहासशह्ह्ह बस "दारू तो यही बदनाम है असली नशा तो खून में है".
मैं:- इस लोंड़िया को उठा.
अभय:- अब तू लड़की को भी ऐसे मारेगा.
मैं:- इसकी मौत तो और भयानक होगी, क्युकी इसे मैं नहीं मरूंगा ये खुद मारेगी.
अभय ने कुछ नहीं बोलै बस उसे होश में ले आया, वो होश में आयी तो दो चीज़ हुयी, एक वो देव की बॉडी देख के दर गयी इतनी ज्यादा दर गयी की उसने पेशाब कर दिया जीन्स में, दूसरी उसके गले से आवाज़ नहीं निकल रही थी.
मैं:- तो मैडम रेडी हो तुम.
सोनल:- देखो प्लीज मुझे छोड़ दो, तुम्हे एक लड़की को मरते हुए सरम नहीं आएगी.
मैं:- ाजजी कहे की सरम, अंजलि लड़की थी और तुम भी फिर भी तुमने उसे मरवा दिया.
सोनल:- तो प्लीज मुझे आसान मौत दे दो, ऐसे मत मारना एक बार में मार दो.
मैं:- ाचा ये ले नाइफ और मार ले खुद को मैं हाथ भी न लगूंगा.
उसने झट से नाइफ उठके अपने गले पे लगाया लेकिन वो कुछ कर न पायी, बस रोने लगी फिर से और फिर वो नाइफ निचे रख दिया.
मैं:- देखा सुसडे करना कितना मुश्किल काम होता है, मेरी दीदी ने कैसे किया होगा सोच के देख जरा.
अभय:- अब क्या करना है भाई.
मैं:- अबे मौत तो बेफालतू में बदनाम है असली दर्द तो जिंदगी देती है, अब इसका रपे करेंगे पहले हम, फिर इसकी नुदेस इंटरनेट पे डालेंगे और फिर देव से भी बुरी तरह से इसके हाथ पेअर काट देंगे, बस मरने नहीं देंगे, और फिर इसे जिन्दा रखेंगे, ओह्ह्ह सॉरी सिर्फ इसकी बॉडी को जिन्दा रखेंगे, आत्मा तो मर hi जाएगी इसकी.
सोनल जो हमारी बाते गौर से सुन रही थी, उसने ये सब सुनके वो नाइफ झट से उठाया और अपना गाला काट लिया, उस टाइम उसके चेहरे पे कोई एक्सप्रेशन नहीं था. लेकिन वो अभी पूरी नहीं मरी थी.
सोनल:- तुममम बहहहउतत्ट बुर्र्र्री ममाऊट मरररोगगी अक्क.
मैं:- मरने से कोण डरता है, मैं तो वैसे भी जल्दी से मरना चाहता हु बस सारे इंटेंशन कम्पलीट हो जाए. नाउ गुड bye मिलते है नरक में, मैं भी वही आऊंगा.
और सोनल ने भी अपनी साँसे तोड़ दी. मैं भी वही बैठ गया और अभय भी.
अभय:- तेरे लिए एक चीज़ लाया हु.
मैंने उसकी तरफ देखा तो उसने एक पोटली टाइप रख दिया हाथ में. और मैंने खोल के देखा तो ड्रग्स थे उसमे.
मैं:- अबे कोनसा है इसमें.
अभय:- पता नहीं कोनसा है, वैसे भी सब एक जैसे होते है.
मैंने टाइम देखा तो रात के 3 बज रहे थे,
Main:-sun दीपक को बुला ले और इन दोनों की डेड बॉडी वह ले जा जहा हमने उसकी बॉडी गायब की थी :हिंट: और कोई ढूंढ नहीं पाया था.
अभय ने हाँ में मुंडी हिल्लायी और लग गया काम पे और मैंने हाथ मुँह धोये बॉडी ले जाने के बाद कमरे की थोड़ी सी सफाई की क्युकी एक मैट बिछा दी थी हमने जिसे अभय ले गया, थें मैंने उस पोटली में से थोड़ा सा ड्रग्स फ़ोन के बैक पर रखा ( पता नहीं ज्यादा था या काम क्युकी मुझे नहीं पता था कितना लेते है मेरे लिए तो नार्मल hi था वो) और नाक लगा के एक दम से खींच गया, एक दम से और पहली बार ड्रग्स लेने से बहुत तेज़ खासी आयी लेकिन 20 सेकंड बाद वो ड्रग मुझे मेरे ब्रेन में फैलता हुआ दिखा और फिर कुछ hi सेकंड बाद सब ब्लेंक हो गया और में वही बीएड पे पद गया, और कब आँख लगी पता hi नहीं चला.
सुबह कोई मेरेको झिंझोड़ के उठा रहा था.
"उठो भेनचोद, क्या पिया था रात को"
"अबे एक लौड़े उठा न तेरा फ़ोन बज रहा कितनी देर से"
मैं कसमसाते हुए उठा तो देखा की विवेक नाहा धो के तैयार बैठा था, फिर मैंने अपना फ़ोन जेब से निकला तो पहली नज़र टाइम पे पड़ी तो 12 बजे थे, दूसरी नज़र मिस्ड कॉल पे पड़ी तो किरण की 72 मिस्ड कॉल थी.
मैं झटके से खड़ा हुआ और किरण को कॉल करता उससे पहले उसका कॉल खुद hi आ गया,
मैं:- hello ma'am.
किरण:- ma'am के बचे फ़ोन क्यों नहीं उठा रहा था?
मैं:- अभी सके उठा हु इसलिए.
किरण:- हां क्युकी देव और सोनल मर्डर करके लेट सोया होगा न तू.
मैं:- वेट किसका मर्डर, मैं तो रात को नशे करके सो रहा था बेशक चेक करवा लो, और नशे में कोई खून थोड़ी कर सकता है.
किरण:- ाचा उस दिन तो बोल रहे थे की तुम उन्हें मार डोज, वगैरह-2.
मैं:- मैं तो बोलूंगा की मैं पं हु इंडिया का तो मान लोगी, वो तो डीएलओगे मार दिया था मैंने.
किरण:- देख तूने कुछ किया है तो बता दे मैं तुझे इन सब से दूर रखूंगी.
मैं:- नहीं मैंने कुछ नहीं किया.
किरण:- ोकक.
उसने कॉल काट की तो मुझे हसी आ गयी, बस बचा समझती है क्या जो चिकनी चुपड़ी बातो में आ जाऊंगा.
मैं अंदर गया और बोलै
Main:-suno बे आज का दिन तो चुद गया स्कूल भी न जा पाए. मैं, अभय और दीपक तो थक गए, अब विवेक रखेगा उस बड़े वाले लड़के पे नज़र, सिर्फ नज़र.
विवेक:- ठीक है तुम आराम करो.
फिर हम तीनो हो लिए अपने अपने घर और विवेक लग गया अपने काम पे, घर पंहुचा तो मुझे याद आया की बस इसने पूरी इनफार्मेशन नहीं दी इसको तो सुनना था लेकिन सोचा छोड़ो बचा है अभी.
फिर कुछ ज्यादा नहीं हुआ वो hi डेली रूटीन खाना पीना सोना, बस आज रात को वो ड्रग्स लिया तो बस फिर से ब्रेन खुल गया पूरा ऐसा लग रहा था को दिमाग बहुत तेज़ है मेरा किसी भी चीज़ पे कंसन्ट्रेट कर सकता हु मैं, लेकिन ज्यादा देर न सोच पाया और सो गया.
तो बे कॉन्टिनोएड ??