My Complete Intentions - The Beginning - Page 3 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

My Complete Intentions - The Beginning

:थैंक्स: भाई फॉर योर ब्यूटीफुल एंड वैल्युएबल रिव्यु :पीस:

एक को बीमारी पहले hi हो चुकी है उसकी एक नस काट चुकी है डॉक्टर ने ये पहले hi बता रखा है, और भाई अगर वो हर्ष के भाई की नाशिएट मान लेगा तो स्टोरी आगे कैसे बढ़ेगी और ये कोई फॅमिली ड्रामा वाली स्टोरी थोड़ी न है जो हीरो ाचा आदमी बांके रहेगा. एंड फ्यूचर प्लान बनाना बहुत इजी है लेकिन उनको अचीव करना बहुत मुश्किल.

कीप सपोर्टिंग बरोथेर :यूरोक:
 
:थैंक्स: अक वायरस भाई फॉर योर ब्यूटीफुल एंड वैल्युएबल रिव्यु :पीस:

मैं ज्यादा तो नहीं बोलूंगा क्युकी आपके सवालो के जवाब आने वाले उपदटेस में आलरेडी पोस्ट हो चूका है.

और टीपोस इसलिए है क्युकी दारू पाइक रात को 12 बजे अपडेट लिखूंगा तो यही होगा :हिंट:

कीप सपोर्टिंग ऑलवेज :डिक्लेअर:
 
अपडेट:-10 ( किडनैपर्स बीएच :कूल: )

सुबह मेरी आँख सबसे पहले खुली तो देखा विवेक निचे पड़ा था अभय बीएड के कोने में पड़ा था, मैं उठा और एक सिगग्रेटे जलाई और दोनों की गांड पे लात मार्के उठाया.

मैं:- उठो लाडो स्कूल नहीं जाना क्या?

मैं:- अबे उठो न भेनचोद तुम्हारे बाप का घर है क्या?

वो दोनों अपनी गांड सहलाते हुए खड़े हुए और थोड़ा हाथ मुँह धोके हमे तीनो अपने अपने घर हो लिए.

मैं घर पंहुचा तो मोनू और उसकी मम्मी बैठे थे हॉल में उन्होंने मुझे देखा लेकिन कुछ पूछा नहीं और न मैं कुछ बोलै, सीधा रूम में गया और नाहा धो के रेडी हुआ.

और स्कूल के लिए निकल गया विवेक के साथ. वैसे एक चीज़ हुयी दारु पिने से की अब सर बहुत हल्का हो गया था. आज मैं और विवेक तो स्कूल जा रहे थे और अभय देव और सोनल पे नज़र रखे हुए था क्युकी परसो गेम बजाना था उनका.

आज स्कूल में ज्यादा कुछ हुआ नहीं रिया और रोहन स्कूल छोड़ के चले गए थे, जैसा उनके पापा ने कहा था प्रिय आयी थी स्कूल लेकिन वो दरी हुयी थी बिचारि, मेरे को तो सब नार्मल लगते हुए भी एक दो पे शक था की रोहन और रिया के जाने के बाद भी ड्रग्स तो सप्लाई होंगे स्कूल में और मुझे पकड़ना है, ये मत सोचना मैं ाचा बनना चाहता हु इसलिए इन ड्रग्स वालो को पकड़ रहा हु, नाना भूल के भी नहीं मेरे लेके गांड मरए ये और गांड मरए ड्रग्स लेने वाले बेशक मर जाए मुझे घंटा फर्क नहीं पड़ता किसी से बस मुझे तो इनके जरिये इनसे उपपरवालो तक पहुंचना है. मेरे लेके स्कूल में दारू बेचो, ड्रग्स बेचो या कोठा खोल लो, ी don't गिव ा फ्लाइंग फ़क तो एनीवन.

खैर आज का और कल दिन हमारा बहुत नार्मल और शांति से गुज़रे ये तूफ़ान से पहले की शांति थी, इन दो दिनों में कुछ नहीं हुआ मैंने प्लानिंग पे ध्यान दिया विवेक ने पढ़ाई और घर पे और अभय ने उन बन्दों पे नज़र राखी.

घरवाले तो मुझसे अब बात hi नहीं करते थे बस खाना मिल जाता था तीन टाइम का मैं भी बस खाने के टाइम hi उनकी सकल देखता था नहीं तो पुरे दिन कमरे में बैठके सिगग्रेटे पिता रहता और आगे के बारे में सोचता रहता.

************************

आज सुबह आँख खुली तो एक नयी एनर्जी थी सरीर में क्युकी आज काण्ड होने वाला था, मैं बीएड से उठा नहाया धोया, रेडी हुआ और अभय को कॉल किया.

मैं:- hello बीच.

अभय:- अबे सोने दे लौड़े

मैं:- सुन बे उस सोनल पे नज़र रख और दीपक को देव के पीछे लगा और शाम के टाइम अड्डे पे मिल अपने.

अभय:- हां हां मालूम है, चल सोने दे.

और फ़ोन कट कर दिया बस. मैं निचे गया खाना खा hi रहा था की दादाजी आ गए और बोले

दादा:- इतने दिनों से कोनसी दुनिया में रह रहा है.

मैं:- कोई सी नहीं.

दादा:- घर पे रहा कर और सब से बात किया कर.

मैं:- मेरा मैं नहीं करता किसी से बात करने का और सुनो मैं आज रात घर नहीं आऊंगा.

दादाजी दिमाग में घुसते इससे पहले निकल लिया मैं वह से बहार आया तो विवेक बाइक लेके खड़ा था.

मैं:- जल्दी नहीं आ सकता था लौड़े.

विवेक:- जल्दी hi आया हु टाइम 15 मं बाद का है आने का.

मैं:- हां चल सिगग्रेटे ले रस्ते में भारी तालाब मच रही.

विवेक ने बाइक दौड़ा दी रस्ते पे और आगे चल के एक दुकान से एक पैकेट सिगग्रेटे लिया एयर उसमे से दो जला के चल दिए फिरसे.

मैं:- वैसे दुनिया बड़ी मादरचोद है!

विवेक:- सबको पता है.

मैं:- हां लेकिन कोई कुछ करता नहीं.

विवेक:- देख तू फालतू की बाते करके मुझे हँसा देगा तो रहने दे.

एक्चुअली बात ये थी की विवेक जो है वो नाराज़ था मुझसे और अभय से क्युकी हम दोनों इसे रात की पार्टी में शामिल नहीं कर रहे थे.

मैं:- देख लौड़े बात मान लिया कर, हम कोई होली नहीं खेल रहे जो तुझे भी साथ लेले.

विवेक:- भाई तुम दोनों गांड मरवाओगे तो मैं भी मरवाउंगा.

मैं:- :wtf: अखंड चुटिया है तू, तुझे मेरी कसम अगर तूने अब जिद्द की तो.

विवेक ने बुरा सा मुँह बनाया और मुझे गली बकते हुए बाइक चलने लगा. हम दोनों टाइम पे स्कूल पहुंचे और वो hi डेली रूटीन फॉलो किया आज भी.

लेकिन मुझे जिस लड़के पे शक था मैंने उसी लड़के को ड्रग्स देते हुए देखा, ी मैं सुरेली तो नहीं कह सकता लेकिन ड्रग्स hi थे. लेकिन मैंने कोई एक्शन नहीं लिया भेनचोद लो जितने लेने हो लो मुझे क्या मुझे जरूरत होगी तब धार लूंगा इन्हे.

हम दोनों ने स्कूल में पढ़ाई की और छुट्टी होते hi निकल गए अड्डे पे.

अड्डे पे पहुंचे तो हमारे साथ hi अभय और दीपक भी आ गए, हमे 4ों ने खाना खाया जो वो पैक करा के लाये थे,

खाना खा के सत्ता मारा और वेट करने लगे रात होने का, शाम को मैंने विवेक को घर भेज दिया था कसम वगैरह दे के ( विवेक बड़ा इनोसेंट सा है बिचारा कसम वसं में आ जाता है)

खैर वो टाइम आ गया जब हमे एक्शन में आना था,

मैं:- सुनो बे तुम दोनों जाओ उस क्लब में, देव को इतना नशा करवाओ की वो ठीक से चल भी न पाए और उसे उठके यहाँ ले आओ, मैं जाता हु उस लोंड़िया को लाने.

अभय:- क्यों बे लोंड़िया को हम लाएंगे.

मैं:- अबे पागल है क्या, उस देव ने मेरा थोबड़ा देखा हुआ है और वो लड़की मुझे नहीं जानती.

अभय:- ोकक बॉस.

मैं:- और सुनो कोई दिक्कत हो तो काट लेना वह से बाद में देख लेंगे.

अभय:- ोकक बॉस

मैं:- अब बॉस की गांड मरोगे क्या, निकलो.

वो दोनों कार पे निकले, भेनचोद हम रेंट की कार पे किडनैप करने वाले थे ( मुझे सोच के hi हसी आ रही थी लेकिन ये टाइम हसने का नहीं दर्द देने का था अपने अंदर के शैतान को जगाने का था, ये टाइम था बदले का, जिसमे अंजलि दीदी का नाम सबसे उप्पेर आता है लेकिन फिर भी मैं ये अपने स्वार्थ के लिए कर रहा था)

इस मोटिवेशनल स्पीच से मेरी बॉडी चार्ज हो गयी मैं भी कार में बैठा और निकला उस सोनल के घर की तरफ आधे घंटे में, मैं उसके घर के पास था और अब मैं कार में बैठ के वेट कर रहा था उसके निकलने का.

मेरा इंतज़ार जल्दी hi पूरा हुआ, वो एक ब्लैक ऑडी में घर से बहार निकली और एक और चल दी, मैंने भी डिस्टेंस बनाते हुए उसके पीछे लगा दी अपनी कार, थोड़ी दूर चलने पे एक सुनसान रोड आ गया बस यही काण्ड करना था मुझे, लेकिन सायद उसे एहसास हो गया था की कोई उसे फॉलो कर रहा है इसलिए उसने स्पीड इनक्रीस कर दी थी एक दम से, मैं भी दाल दिया टॉप गियर और पेल दी फुल स्पीड में, बेशक उसके पास ऑडी हो लेकिन मेरे पास थी देसी बोलेरो मॉडिफाइड करवाई हुयी और रोड इतना ाचा नहीं था तो उसकी ऑडी नहीं भाग पा रही थी क्युकी उसके टायर बड़े नहीं थे और मेरी बोलेरो के टायर ट्रक जैसे थे बस इसलिए कूदती हुयी भाग रही थी कुछ देर में मैंने उससे अपनी कार आगे निकली और घुमाके स्किड मारी, उसकी भी गांड फटी और उसने भी ब्रेक मारे लेकिन मैंने पहले बताया रोड ाचा नहीं था तो उसकी मेहेंगी कार के ब्रेक तो लगे लेकिन धीरे से इसलिए उसके कार टकरा गयी मेरी वाली से, मैं इतने मैं बहार निकल चूका था कार से, मैं अपने वाली कार के बोनट पे से स्लिप करके उसकी साइड जम्प किया, वो वापिस लेने वाली थी अपनी कार को लेकिन मैंने मारा पंच उसके मिरर पे जो एक पंच में भीकर गया, ( अरे लोहे का पंच पेहेन रखा था मैं, खली हाथ मरता तो हाथ hi टूट जाता मेरा लेकिन स्टिल वाइब्रेशन हो रही थी हाथ में, ये हमारा प्लान था मिरर तोड़ने का क्युकी गन वगैरह थी नहीं जो गन पॉइंट पे ले ले नाइफ दिखता तो उसे लुंड फर्क नहीं पड़ता बल्कि मुझपे hi गाड़ी चढ़ा देती.)

मैंने हाथ अंदर दाल के लॉक खोला और उसका हाथ पकड़ के बहार खींचा, वो झटके से बहार आ गयी क्युकी पतली सी हॉट मिर्ची टाइप की थी वो, बस एक बार को तो फ़िदा हो गया उसपे लेकिन जल्दी hi अपने जज़्बातो पे काबू पा लिया मैंने, उसकी तरफ देखा तो मुझे कुछ नेगेटिव फीलिंग आयी और मैंने ये सेंस करते hi पीछे पलट के देखना चाहा तो उसने दी मेरे ाँद पे किक, मैं अपने अंडे पकड़ के झुका तो उसने दे मुँह पे एक किक और कुछ कुंग फु टाइप स्टान्स लेके कड़ी हो गयी. (तो बस ये बात है हसने की स्टिल जो भी हो मैं एक 18.5 साल का लड़का हु तो इसके सामने तो बचा hi था मैं इसलिए ये चौड़ी हो रही थी)

मैंने अपने फेस से खून साफ़ किया और उसकी तरफ बढ़ा लेकिन वो थोड़ा पीछे हटी और जम्प करके सीधा चेस्ट पे एक किक दी. ( भेनचोद विवेक ने इनफार्मेशन में ये तो बताया hi नहीं इस लौड़ी को मार्टिकल आर्ट्स आते है, लौड़े को मारूंगा बस मिलने दो एक बार)

मैं और कुछ सोच था उससे पहले मेरे स्मार्ट से फेस एक पंच लगा उसका, लेकिन मुझे इसका ज्यादा असर नहीं हुआ, बेशक उसको ये loda-lahson आता हो लेकिन ताकत तो नहीं थी, और ये सोचके hi मैंने मारा उसकी नाक पे फुल स्पीड पंच, उसने इसकी उम्मीद नहीं की थी वो कोई chindi-chor समझ रही थी मुझे.

एक पंच में उसके आँखों से आंसू आ गए, लेकिन उसका दर्द देखके मेरे अंदर एक अलग सी एनर्जी आ गयी और मैंने non-stop 3-4 पंच और दिए उसके थोबड़े पे और वो अब ढीली हो गयी उसे चिल्लाने तक का मौका नहीं दिया, उसके फेस से ब्लड भी निकलने लगा था जो मेरे हाथ पे लग चूका था, मैं किया की अभी मार दू इसे लेकिन कण्ट्रोल किया मैंने.

मैंने उसके दोनों हाथ बंधे और उसके मुँह पे टेप लगायी ताकि वो चिल्लाये न और उसका फ़ोन वही फेका. उसको उठके खुद की कार में डाला और निकल लिया उसको लेके. रस्ते भर मैं यही सोच रहा था की इनको कैसी मौत दू, ये मेरी पहला मर्डर होगा सायद नहीं, सायद नहीं बे ऑफकोर्स ये मेरा पहला मर्डर नहीं है, इससे पहले भी मैंने एक जान ली है इन्ही हाथो से. ( वैसे अभय और दीपक आते तो वो इसे नहीं किडनैप कर पाते क्युकी वो डरा धमका के लाने की सोच रहे थे की लड़की है दर जाएगी लेकिन ये बस चांडाल निकली, और वो दोनों सिद्ध पुरुष लड़की पे हाथ नहीं उठाते और ये उन दोनों को पेल देती, और मुझे घंटा फर्क नहीं पड़ता बेशक लड़का हो या लड़की).

मैं अपने अड्डे पे पंहुचा यानी उसी रूम पे, मैंने उसे कार से बहार निकला और उसे रूम के अंदर लेके आया जहा अभय बैठा था और वो देव कुर्सी पे बंधा था दीपक घर जा चूका था अपने क्युकी फॅमिली वाला था वो उसे ज्यादा इन्वॉल्व नहीं कर सकते थे, सोनल अंदर आयी और अंदर देव को देखके चौक गयी और देव उसे देख के.

मैं:- कैसा लगा सरप्राइज.

देव ने मुझे देखा और देखते hi गांड फैट गयी उसकी.

अब देखते है आगे क्या होता है साथ बने रहे और अपना-2 फीडबैक निचे देते रहे.

तो बे कॉन्टिनोएड ??
 
IMG-20200911-162526.jpg
 
:थैंक्स: फॉर योर ब्यूटीफुल एंड वैल्युएबल रिव्यु सर

ी क्नोव एक बर्बादी की और जा रहा है लेकिन सचाई hi यही है और हीरोइन, कोकीन नहीं वो और उप्पेर जाने वाला है, बूत वो कोई किलर नहीं है वो उससे भी उप्पेर बनेगा, एक हीरो है या विलन ये तो मुझे भी नहीं पता और इस बात का जीकर मैंने कई बार किया है, पर मैं दिखाना यही चाहता हु जो दिखा रहा हु.

Btw :थैंक्स: :पीस:
 
:थैंक्स: सर फॉर योर ब्यूटीफुल एक्सप्लनेशन. :डोरे:

मैं भी यही दिखाना चाहता हु की जो इंसान अंदर से पूरा टूट चूका है उसे कोण तोड़ सकता है भला, उसका सपना है दुनिया पे राज़ करने का और दुनिया पे राज़ करना सपना hi रह जाता है लेकिन ये स्टोरी है तो देखते है उसकी लाइफ कैसी होती है, और वैसे भी कोई नरमदिल और नेकदिल इंसान ये काम नहीं कर सकता.

अगेन थैंक्स सर :डोरे:
 
अपडेट:-11 ( ब्रूटलिटी :डेविल: )

मैंने गेट बंद किया रूम का और अभय को उन दोनों के मुँह की पट्टी खोलने को बोलै, अभय ने उनकी पट्टी हटाई तो असुसुअल वो apne-apne खानदानो का गुणगान करने लगे खुद की बेशक गांड फटी हो फिर भी धमकी दे रहे थे.

मैं:- अबे चुप करो दोनों कितना भोकते हो.

ये मैंने चिल्ला के बोलै तो वो चुप हुए.

देव:- देख एक उस दिन बस मैंने तुझे थोड़ा सा मारा था, रोहन ने मारा था ज्यादा.

सोनल:- और मैंने तो कुछ किया hi नहीं, मैं देव की गर्लफ्रेंड हु तो मुझे भी उठा लाये.

मैं:- हाहाहाहा gf-bf हो तो दोनों साथ hi उप्पेर जाओगे, चलो थैंक्स बोलो.

देव:- देख एक पीटने के लिए कोई जान से नहीं मरता यार.

मैं:- अंजलि को भूल गए तुम.

अब लगा उन्दोनो को सॉलिड झटका, अब दोनों कुछ न बोल पा रहे थे, बोलेंगे भी कैसे बस गांड न तोड़ दूंगा.

देव:- देख एक मैं प्लान मेरे बड़े भाई का था हमे छोड़ दे मैं तुझे कुछ नहीं कहूंगा.

मैं:- एक नेवर फॉरगिव एंड फॉरगेट.

ये बोलके मैंने रामपुरी उठायी, बस अभय गज़ब बाँदा है क्या नाइफ लेके आया गलती से टच भी हो जाए यो वही पे कट लगा दे और इससे इनके सरीर को छिलने में अलग hi मज़ा आएगा.

अभय बीएड पे बैठा और मैं देव के सामने और उसके फेस पे उस नाइफ को फेरा, वो बस नहीं नहीं किये जा रहा था तो मैंने उसके मुँह पे वो टेप फिर से लगा दी.

मैं:- भसडक कितना बड़बड़ करता है बे तू.

अब मेरे दिमाग में फिरसे बकचोदी होने लगी थी मैं फील कर पा रहा था, दर्द नहीं हो रहा था बस वो कुछ मांग रहा हो ऐसा लग रहा था.

मैं:- देव बीटा रेडी, आज ऐसी मौत दूंगा तुझे की तेरी बॉडी की पहचान पोस्टमॉर्टेम वाले भी नहीं कर पाएंगे.

ये बोलके मैंने वो चाकू उसके लेफ्ट कंधे में घुसाया, नाइफ बड़ा स्मूथली उतर गया उसके कंधे में, वो तो नहीं चिल्ला पाया लेकिन सोनल मैडम चिल्ला के रोने लगी और मुझे हसी आ गयी.

मैं:- हाहाहा अभी तो स्टार्ट है डार्लिंग, याद कर वो पल जब अंजलि दीदी भी ऐसे तड़पती थी.

ये बोलके मैंने वो नाइफ बहार खींचा और अगले सेकंड में उसके दूसरे कंधे में दाल दिया, वह से भी खून टपकने लगा.

मैं:- अबे ऐसे तो ये मर जायेगा, वो सामान ला जल्दी.

मैं वो नाइफ वह से निकला और हथेली मैं घोप दिया, इस बार सोनल नहीं चिल्लाई, मैंने उसे देखा तो मैडम बेहोश थी.

अभय इतनी देर में एक बोतल लाया जो एसिड की थी उसने वो बोतल खोली और थोड़ा उसके कट्स पे दाल दिया जिससे खून आना बंद हो गया लेकिन देव की सकल कुत्ते जैसी हो गयी थी.

अभय:- अब ज्यादा मजे न ले बहुत मिलेंगे ऐसे आगे, उनपे निकलियो अपना ये एडिक्शन. अगर ये सुबह तक घर न पहुंचे तो पुलिस को खबर मिल जाएगी और हमे ढूंढने में ज्यादा देर नहीं लगेगी.

मुझे भी उसकी बात सही लगी और मेरे आँखों में एक बार अंजलि दीदी का चेहरा आया और उस चेरे को देख के इतना गुस्सा आया की वो नाइफ उठके मैंने बहुत स्पीड से कई बार उसके पेट में घोपा, बहुत देर तक घोपता रहा में.

अभय:- बस कर बे मर गया वो.

मैंने उसकी तरफ देखा तो रट हुए मर गया था, मैंने उसके पेट पे हाथ फेरा जहा से मॉस तो दिख hi नहीं रहा था मैंने अपना पूरा हाथ ब्लड से भिगोया और अपने नाक के पास ले जाके सुंघा, हहासशह्ह्ह बस "दारू तो यही बदनाम है असली नशा तो खून में है".

मैं:- इस लोंड़िया को उठा.

अभय:- अब तू लड़की को भी ऐसे मारेगा.

मैं:- इसकी मौत तो और भयानक होगी, क्युकी इसे मैं नहीं मरूंगा ये खुद मारेगी.

अभय ने कुछ नहीं बोलै बस उसे होश में ले आया, वो होश में आयी तो दो चीज़ हुयी, एक वो देव की बॉडी देख के दर गयी इतनी ज्यादा दर गयी की उसने पेशाब कर दिया जीन्स में, दूसरी उसके गले से आवाज़ नहीं निकल रही थी.

मैं:- तो मैडम रेडी हो तुम.

सोनल:- देखो प्लीज मुझे छोड़ दो, तुम्हे एक लड़की को मरते हुए सरम नहीं आएगी.

मैं:- ाजजी कहे की सरम, अंजलि लड़की थी और तुम भी फिर भी तुमने उसे मरवा दिया.

सोनल:- तो प्लीज मुझे आसान मौत दे दो, ऐसे मत मारना एक बार में मार दो.

मैं:- ाचा ये ले नाइफ और मार ले खुद को मैं हाथ भी न लगूंगा.

उसने झट से नाइफ उठके अपने गले पे लगाया लेकिन वो कुछ कर न पायी, बस रोने लगी फिर से और फिर वो नाइफ निचे रख दिया.

मैं:- देखा सुसडे करना कितना मुश्किल काम होता है, मेरी दीदी ने कैसे किया होगा सोच के देख जरा.

अभय:- अब क्या करना है भाई.

मैं:- अबे मौत तो बेफालतू में बदनाम है असली दर्द तो जिंदगी देती है, अब इसका रपे करेंगे पहले हम, फिर इसकी नुदेस इंटरनेट पे डालेंगे और फिर देव से भी बुरी तरह से इसके हाथ पेअर काट देंगे, बस मरने नहीं देंगे, और फिर इसे जिन्दा रखेंगे, ओह्ह्ह सॉरी सिर्फ इसकी बॉडी को जिन्दा रखेंगे, आत्मा तो मर hi जाएगी इसकी.

सोनल जो हमारी बाते गौर से सुन रही थी, उसने ये सब सुनके वो नाइफ झट से उठाया और अपना गाला काट लिया, उस टाइम उसके चेहरे पे कोई एक्सप्रेशन नहीं था. लेकिन वो अभी पूरी नहीं मरी थी.

सोनल:- तुममम बहहहउतत्ट बुर्र्र्री ममाऊट मरररोगगी अक्क.

मैं:- मरने से कोण डरता है, मैं तो वैसे भी जल्दी से मरना चाहता हु बस सारे इंटेंशन कम्पलीट हो जाए. नाउ गुड bye मिलते है नरक में, मैं भी वही आऊंगा.

और सोनल ने भी अपनी साँसे तोड़ दी. मैं भी वही बैठ गया और अभय भी.

अभय:- तेरे लिए एक चीज़ लाया हु.

मैंने उसकी तरफ देखा तो उसने एक पोटली टाइप रख दिया हाथ में. और मैंने खोल के देखा तो ड्रग्स थे उसमे.

मैं:- अबे कोनसा है इसमें.

अभय:- पता नहीं कोनसा है, वैसे भी सब एक जैसे होते है.

मैंने टाइम देखा तो रात के 3 बज रहे थे,

Main:-sun दीपक को बुला ले और इन दोनों की डेड बॉडी वह ले जा जहा हमने उसकी बॉडी गायब की थी :हिंट: और कोई ढूंढ नहीं पाया था.

अभय ने हाँ में मुंडी हिल्लायी और लग गया काम पे और मैंने हाथ मुँह धोये बॉडी ले जाने के बाद कमरे की थोड़ी सी सफाई की क्युकी एक मैट बिछा दी थी हमने जिसे अभय ले गया, थें मैंने उस पोटली में से थोड़ा सा ड्रग्स फ़ोन के बैक पर रखा ( पता नहीं ज्यादा था या काम क्युकी मुझे नहीं पता था कितना लेते है मेरे लिए तो नार्मल hi था वो) और नाक लगा के एक दम से खींच गया, एक दम से और पहली बार ड्रग्स लेने से बहुत तेज़ खासी आयी लेकिन 20 सेकंड बाद वो ड्रग मुझे मेरे ब्रेन में फैलता हुआ दिखा और फिर कुछ hi सेकंड बाद सब ब्लेंक हो गया और में वही बीएड पे पद गया, और कब आँख लगी पता hi नहीं चला.

सुबह कोई मेरेको झिंझोड़ के उठा रहा था.

"उठो भेनचोद, क्या पिया था रात को"

"अबे एक लौड़े उठा न तेरा फ़ोन बज रहा कितनी देर से"

मैं कसमसाते हुए उठा तो देखा की विवेक नाहा धो के तैयार बैठा था, फिर मैंने अपना फ़ोन जेब से निकला तो पहली नज़र टाइम पे पड़ी तो 12 बजे थे, दूसरी नज़र मिस्ड कॉल पे पड़ी तो किरण की 72 मिस्ड कॉल थी.

मैं झटके से खड़ा हुआ और किरण को कॉल करता उससे पहले उसका कॉल खुद hi आ गया,

मैं:- hello ma'am.

किरण:- ma'am के बचे फ़ोन क्यों नहीं उठा रहा था?

मैं:- अभी सके उठा हु इसलिए.

किरण:- हां क्युकी देव और सोनल मर्डर करके लेट सोया होगा न तू.

मैं:- वेट किसका मर्डर, मैं तो रात को नशे करके सो रहा था बेशक चेक करवा लो, और नशे में कोई खून थोड़ी कर सकता है.

किरण:- ाचा उस दिन तो बोल रहे थे की तुम उन्हें मार डोज, वगैरह-2.

मैं:- मैं तो बोलूंगा की मैं पं हु इंडिया का तो मान लोगी, वो तो डीएलओगे मार दिया था मैंने.

किरण:- देख तूने कुछ किया है तो बता दे मैं तुझे इन सब से दूर रखूंगी.

मैं:- नहीं मैंने कुछ नहीं किया.

किरण:- ोकक.

उसने कॉल काट की तो मुझे हसी आ गयी, बस बचा समझती है क्या जो चिकनी चुपड़ी बातो में आ जाऊंगा.

मैं अंदर गया और बोलै

Main:-suno बे आज का दिन तो चुद गया स्कूल भी न जा पाए. मैं, अभय और दीपक तो थक गए, अब विवेक रखेगा उस बड़े वाले लड़के पे नज़र, सिर्फ नज़र.

विवेक:- ठीक है तुम आराम करो.

फिर हम तीनो हो लिए अपने अपने घर और विवेक लग गया अपने काम पे, घर पंहुचा तो मुझे याद आया की बस इसने पूरी इनफार्मेशन नहीं दी इसको तो सुनना था लेकिन सोचा छोड़ो बचा है अभी.

फिर कुछ ज्यादा नहीं हुआ वो hi डेली रूटीन खाना पीना सोना, बस आज रात को वो ड्रग्स लिया तो बस फिर से ब्रेन खुल गया पूरा ऐसा लग रहा था को दिमाग बहुत तेज़ है मेरा किसी भी चीज़ पे कंसन्ट्रेट कर सकता हु मैं, लेकिन ज्यादा देर न सोच पाया और सो गया.

तो बे कॉन्टिनोएड ??
 
:थैंक्स: सर फॉर योर ब्यूटीफुल एंड वैल्युएबल रिव्यु

हां ये बात सही है ये किसी की नज़र में हीरो होगा तो किसी की नज़र में विलेन, इस करैक्टर से बहुत खेलने वाला हु मैं, जितने बुरे काम करेगा उतने hi अचे काम भी करेगा. फॅमिली ड्रामा भी आएगा सेकंड part में रोमांस भी आएगा, सब कुछ दिखाऊंगा. बस आप साथ बने रहे.

:यूरोक:
 
अपडेट:12 (गुड वर्क :कूल: )

मैं सुबह उठा किसी के हिलने से, देखा तो मोनू था मैंने उसे कुछ न बोलै बस सीधा बाथरूम में घुस गया और स्कूल यूनिफार्म में chaka-chak रेडी होक निकला, और फ़ोन उठा के कॉल लगाया.

अभय:- हां भाई.

मैं:- सुन उस रोहित को एक लेटर लिख और कैसे भी करके वो लेटर उसके हाथो में पंहुचा दे बस तू सामने नहीं आना चाहिए.

अभय:- अबे लेटर की क्या जरूरत है.

मैं:- सुन लौड़े एक प्लान है बहुत तगड़ा, तूने ये कोनसा ड्रग दिया है पता नहीं बूत बहुत फाडू है बस दिमाग बुलेट ट्रैन माफिक दौड़ रहा है.

अभय:- बता कोनसा लव लेटर लिखू.

में:- सुन सिंपल प्लान है , लेटर में लिख की "तेरे भाई और उसकी गफ को तो मार दिया मैंने अकेले ने अब तेरा नंबर है".

अभय:- इससे क्या होगा,

मैं:- इससे एक सिंपल सी चीज़ होगी की वो गांडू छुपेगा ये पढ़ के और छुपेगा कहा घर में तो छुपेगा नहीं बहार hi छुपेगा कही, और तू उसपे मज़ार रखेगा तो पकड़ा जायेगा वो ैसिलय और लेटर में सिंगल पर्सन समझ के सिक्योरिटी में ज्यादा बन्दे भी नहीं रखेगा.

अभय:- wtf तेरा दिमाग तो सच में तेज़ चल रहा बे.

मैं:- हां तू काम पे लग जल्दी से कल रात को देखते है इसे.

अभय:- ोकक बॉस!

और कॉल कट किया तभी निचे से हॉर्न की आवाज़ आयी मैं भाग के निचे गया तो विवेक था मैं कूद के बाइक पे बैठा और उसने भी भगा ली क्युकी लेट थे हम थोड़ा आज.

लेट थे तो सिगग्रेटे वगैरह नहीं ली हमने सीधा hi हो लिए. स्कूल पहुचे तो पार्किंग साइड कोई नहीं था क्युकी प्रेयर हो रही थी. हम भी बाइक कड़ी करके वह से जाने लगे तो वह एक खोपचे टाइप सा है जहा कई बार सत्ता मार लेते है हम, तो वह से आवाज़ आयी कुछ, मैंने विवेक को इशारा किया और हम दोनों दबे पेअर उस तरफ गए और विंडो से झाके के देखा तो मूड ख़राब हो गया क्युकी अंदर अमित ( फिजिक्स) और एक लड़का खड़ा था. हम तो सोचे बस चुदाई हो रही होगी हम भी हाथ साफ़ कर लेंगे. हम लोग वह से जाने को हुए तभी मेरे कानो में ये आवाज़ पड़ी जो की अमित की थी और हम वही रुक्के सुनने लगे.

अमित:- आज पैसे लाया तू, पैसे नहीं देगा तो कोई ड्रग नहीं मिलेगा.

लड़का:- सर लाया हु ये लो

उस लड़के ने कुछ पैसे अमित को दिए.

लड़का:- सर अब तो देदो और ड्रग्स.

अमित:- लंच के बाद आना, सप्लायर लंच में आके दे जायेगा.

बस हमारा काम हो चूका था तो हम निकल लिए वह से और भाग के क्लास में आ गए क्युकी सायद प्रेयर ख़तम हो गयी थी.

विवेक:- ये अमित तो बड़ी फिल्म निकला बे.

मैं:- सुन बे अब कोई ाचा काम करते है, थोड़ा नाम कमा लेते है.

विवेक:- क्या करना होगा बोल.

मैं:- ी हैवे प्लान बस तू इनपे नज़र रख चुपचाप, मैं किरण से बात करके आता हु.

मैं क्लास से बहार आया टॉयलेट का बहाना बनके और ग्राउंड में आके फ़ोन ों किया और किरण को कॉल लगाया.

मैं:- hello ma'am.

किरण:- बोलो एक

मैं:- ैला इतनी जल्दी पहचान गए.

किरण:- हां तुम्हारा नंबर सेव है.

मैं:- ाचा सुनो किसी ड्रग डीलर को पकड़ना है तो हमारी स्कूल में आ जाना लंच में, खुद hi आना पुलिस लेके मत आने वो देख के भाग जायेंगे.

किरण:- ोकक बूत मैं अकेले कैसे?

मैं:- अकेले कहा? एक है न आपके साथ.

किरण:- ोकक ी विल तेरे.

मैंने फ़ोन कट किया और क्लास में आके रेसस्स का वेट करने लगा.

इंतज़ार भी पूरा हुआ मतलब लंच हुयी और मैं भगा क्लास के बहार अमित को ढूंढने, लेकिन वो लौड़ा मिल hi नहीं रहा था. मैंने कई जगह देखा कही नहीं मिला, मेरा फ़ोन भी विबरते करने लगा था सायद किरण का कॉल होगा, और मैं बहार गेट की तरफ गया की कही बहार न हो लेकिन वह भी नहीं दिखा लेकिन किरण मिल गयी, बस क्या माल लग रही थी जीन्स एंड टॉप में :द्रूल: .

किरण:- कहा है तुम्हारा डीलर.

मैं:- एक्चुअली वो मिल नहीं रहा. मिल गया मिल गया.

किरण:- व्हाट? इतनी जल्दी.

मैं:- वो टेरेस पे देखो वो टीचर और वो सप्लायर और वो स्टूडेंट जो लेने वाला है. Let's जो, फॉलो में.

ये कहके मैं भगा उप्पेर और किरण मेरे पीछे- पीछे रस्ते में विवेक मिला तो उसको मैंने इशारे से बुला लिया.

मैं:- ोयी दीपक जा प्रिंसिपल को बता दे सब और बोल की सब बचो को ग्राउंड पे ीखता करे इंस्पेक्टर किरण ने बोलै है.

ये बात मैंने भागते हुए बोली थी तो उसके रिप्लाई पे ध्यान नहीं दिया हम लोग भाग के टेरेस पे आये 4तह फ्लोर भी बोल सकते हो.

हम लोगो को देखके वो तीनो शॉकेड हुए और थोड़ा घबरा गए, उन दोनों का तो पता नहीं पर वो लोंदा मुझे देख के घबरा गया, हम तीनो उनके पास गए. तभी वो लड़का लगा रंडी रोना करने की अब अबकी छोड़ दो ये वो. मैंने दिया रैप्टा सूत के उसके कान पे और वो मरियल हड्डी एक में hi निचे गिर गया, इतने में दीपक भी आ गया और उसने उस लड़के को पकड़ा.

वो सप्लायर:- देखो इंस्पेक्टर मैडम गलत आदमी से पन्गा ले रही हो हम राजेश भाई के आदमी है.

इतने मैं वो अमित भागने को हुआ लेकिन मैंने पकड़ी उसकी गुड़ी और घुमा के वही गिरा दिया उसे,

मैं:- अरे सिरजी कहा.

विवेक ने अमित को गले से पकड़ा और खड़ा किया.

इतने में उस सप्लायर ने मुझे ढाका मारा और भगा निचे, मैं भी झटके से खड़ा हुआ और भागते हुए बोलै

Main:-in दोनों को ग्राउंड में ले चलो.

अब मैं उस आदमी के पीछे हो लिया फुल स्पीड में, (लेकिन मजे की बात ये थी की पूरा स्कूल ग्राउंड से हमारा शो देख रहा था छोटे से लेके बड़े तक) खैर मैं उसके पीछे भागता रहा फर्स्ट फ्लोर तक, भसदक़ा बहुत तेज़ भाग रहा था, फर्स्ट फ्लोर की उसे सिडिया नहीं मिली क्युकी वो दूसरी साइड से थी तो वो फास गया, लेकिन वो छोड़ू सीधा भागता हुआ कांच तोड़ के निचे कूद गया फर्स्ट फ्लोर से, मुझे भी कूदना पड़ा बस पूरा स्कूल देख रहा था बजती हो जाती. इसलिए मैं भी बिना कुछ सोचे कूद गया और ग्राउंड में hi उसके पीछे भागने लगा, अब मैंने अपने गांड तक का दम लगा दिया भागने का और उसके पास पहुंच के उसकी शर्ट पकड़ के दिवार की साइड किया जिससे वो डिस्बैलेंस

होक, लेकिन वो भसदक़ा फिर भागने को हुआ लेकिन इस बार नहीं बस बहुत भगा लिया.

जैसे hi वो खड़ा हुआ मैंने दिए एक पंच उसके पेट में उसको थोड़ा सा असर हुआ लेकिन स्टिल उसने मेरे थोबड़े पे पंच मरना चाहा लेकिन मैं निचे झुका और उसके रिब्स पे दिया एक और पंच, वो इस पंच से एक साइड को उछला और मैंने दी उसके एक लात दूसरे साइड की रिब्स पे, वो बस निचे बैठ गया, मैंने फिर दिया एक घुटना उसके सर पे और वो लुढ़क गया पीछे. मैं उसे और मरता इससे पहले कुछ हवलदार आये और उसको उठा लिया.

मैं पलटा तो देखा की पूरा स्कूल मुझे घर रहा था.

मैं भी उनके साइड गया और वह जाते hi प्रिंसिपल ने सभी के आगे मेरी तारीफ़ की और अमित और उस लोंदे और जो भी स्टूडेंट्स ड्रग्स लेते थे उनको बहार निकला, अमित को तो अरेस्ट कर लिया गया था.

बस कुछ देर में पुरे डिस्ट्रिक्ट में न्यूज़ फ़ैल गयी की एक नाम के लड़के ने एक ड्रग सप्लायर को पकड़वाया, सारे स्टूडेंट्स भी मुझे आज पहली बार रेस्पेक्टफुल्ली देख रहे थे, जिसे देख के मुझे ज्यादा खुसी तो नहीं हुई, खुसी हुयी तो बस एक चीज़ की, मुझे अटेंशन मिल गयी. वैसे कुछ भी हो किरण स्मार्ट तो है बस बैकअप लेके आयी थी पीछे से. खैर सभी स्टूडेंट्स ने तालिया वगैरह बजायी और जो बचे ड्रग्स लेते थे उनको हॉस्पिटल भेजा गया.

खैर किरण भी वह से चली गयी बाद में मिलने का बोलके. और आज के इस काण्ड से हमारी भी जल्दी छुट्टी कर दी गयी तो हम भी घर आ गए.

लेकिन घर मैं भी सब को आज का पता लग चूका था लेकिन सायद कोई खुस नहीं था इस चीज़ से दादा ने भासन दिया की ये सब मत कर, पढ़ाई पे ध्यान दे ाचा आदमी बन ( ाजजी लौड़ा मेरा ाचा आदमी बनेगा)

मैं शाम को डॉक्टर से मिलने निकल गया क्युकी मुझे उस ड्रग का नाम जानना था. मैंने थोड़ा सा सैंपल ले लिया था साथ अपने. कुछ 30 मिनट के बाद मैं उसके केबिन में बैठा था और वो मेरे सामने.

डॉक्टर:- तो आज कैसे आना हुआ?

मैं:- पहले तो आप अपना नाम बताओ.

डॉक्टर:- सिमरन नाम है मेरा, तुम सिम्मी बुला सकते हो.

मैं:- ोकक तो मिस सिम्मी, मुझे एक ड्रग मिला जिसे मैं तीन बार ले चूका हु, तो इस ड्रग का नाम बताइये.

और मैंने वो ड्रग उस के सामने रख दिया, उसने वो ड्रग्स उठाया और वह किसी टेस्ट तुबे में डाला और उसमे कुछ केमिकल मिलाये और जो रिजल्ट सामने आये तो उसके हाथ से वो टेस्ट तुबे और वो ड्रग दोनों गिर गए.

सिमी:- ओह माय गॉड! ये तो "टिगों" है ये ब्लैक मार्किट का सबसे महंगा ड्रग्स है, ये इंसान के दिमाग की कैपेबिलिटीज बढ़ा देता है लेकिन ज्यादा लेने से इंसान के दिमाग की नशो को डैमेज करके उसे पिस्को भी बना देता है. और ये ड्रग्स 24 हॉर्स में एक बार तो कंपल्सरी लेना होता है नहीं तो ब्लैकआउट आने लग जाते है. तुम्हे ये ड्रग्स कहा से मिला, क्युकी हरयाणा में तो इसका कोई डीलर नहीं है, ये सिर्फ दिल्ली में मिलता है.

मैं:- ी थिंक तुमने आज की न्यूज़ नहीं देखि की ेओ स्कूल के लड़के ने ड्रग सप्लायर को पकड़ा है. देखना मैं चलता हु.

मैं:- वैसे ये इंसान को पागल कितने दिनों में बना देता है.

Simi:-dino में नहीं काम से काम 5 या 6 साल लगते है वो भी तब जब एक्सेस अमाउंट में लिया जाए.

मैं:- 6 साल तो बहुत है मेरे लिए, इतने दिन hi जिन्दा रहूँगा मैं.

ये बोलके मैं वह से निकल गया घर की तरफ.

मैं घर आया और सोचने लगा की ड्रग्स लू या नहीं फिर सोचा ले लेना चाहिए बस कुछ नहीं होगा.

खैर किसी तरह आज का दिन भी निकल दिया मैंने, रात को टिगों दुबारा लिया बस मजा आ गया, खोपड़ी सुन्न हो गयी एक दम से बोले तो एक दम से ठंडक आ गयी थी. कल तो किरण से भी मिलना है तो स्कूल की छुट्टी करते है कल और ये सब सोचते सोचते कब आँख लगी पता hi न चला.

तो बे कॉन्टिनोएड ??
 
अपडेट:-13 ( नई फ्रेंड )

मैं सुबह सके उठा और अपने किर्या करम निपटा के मतलब नाहा धो के रेडी हुआ, स्कूल के लिए नहीं क्युकी आज पुलिस स्टेशन जाना था. मैं निचे आया तो दादा जी ने मुझे जीन्स और शर्ट में देख के कहा

दादा:- स्कूल नहीं जाना क्या?

मैं:- नहीं आज कही जरूरी काम से जाना है.

दादा:- हमे पता है तेरे जरूरी काम कोनसे है, लड़ाई झगड़ा, मार पिटाई, और अब तो नए शौक पाल लिए है पुलिस से दोस्ती.

मैं:- अब मूड न ख़राब करो मेरा

दादा:- हां हां हम तो अब मूड ख़राब करते है तेरा, अरे वो राजेश का आदमी है, अगर तेरी वजह से मेरे परिवार पे आंच आयी तो देख लियो.

मैं खाना बिच में रोका और उठ के जाने लगा तो वो औरत जो मेरी माँ बानी बैठी है वो कुछ बोलने को हुयी लेकिन मुझे गुस्से में देख के चुप हो गयी. मैं घर से निकला और पनवाड़ी की दूकान पे हो लिया, भेनचोद काहे की फॅमिली, फॅमिली पहले थी जब तो गांड मारा ली थी सबने, भेनचोद खाना भी नहीं ठूसने देते, किसी दिन दिमाग घूम गया तो सबसे पहले इस फॅमिली के लौड़े लगा दूंगा. भेनचोद इतनी टेंशन काम है जो ये और दिमाग में घुस जाते है.

मैं पनवाड़ी की दुकान पे पंहुचा,.

मैं:- ोू छोटू भें के लोडे सिगग्रेटे दे जल्दी.

छोटू:- लो चौ..... भाई.

वो चौधरी साहब बोलने वाला था लेकिन मेरे को गुस्से में देख के चुप हो गया, मैंने भी सिगग्रेटे जलाई थी की किरण का कॉल आ गया.

मैं:- hello.

किरण:- ये आदमी मुँह नहीं खोल रहा है अपना, क्या करू.

मैं:- पुलिस वाले तुम हो मुझे क्या पता क्या करो, गांड तोड़ दो साले की.

किरण:- हेय्य एक लैंग्वेज.

मैं:- मूड ख़राब है आज मेरा, रुको 30 मिनट में आया, वो तो क्या उसका बाप भी बोलेगा.

किरण:- ोकक वेटिंग.

मैं कॉल कट करके अभय को कॉल किया.

मैं:- कहा है भसडक.

अभय:- आ रहा हु भाई रुक जा रात से काम पे लगा था मस्त न्यूज़ मिली है मूड सही हो जायेगा तेरा.

मैं:- नाना फिर तो रहने दे अभी ख़राब मूड की hi जरूरत है. तू जल्दी से अड्डे पे आ.

अभय:- ोककक!

मैंने इन दो कॉल्स में वो पूरी सिगग्रेटे पि ली थी लेकिन बस पता hi नहीं चला, जबसे टिगों लेने लगा हु तबसे सिगग्रेटे का नशा hi नहीं होता इसलिए मैंने एक और सिगग्रेटे फुकी पर बस वो hi हाल मज़ा hi न आया. भेनचोद गुस्सा आने लग रहा था दुबारा.

मैं अपना गुस्सा किसी और पे वास्ते करता इससे पहले अभय आ गया बाइक लेके और हम दोनों निकल लिए स्टेशन की तरफ, अभय ने भी बकचोदी नहीं की क्युकी वो मुझे अचे से जनता है, उसे पता है जब जब मूड ख़राब होता है मेरा मैं सामने वाले को पेल देता हु बिना सोचे समझे.

हम दोनों पुलिस स्टेशन पहुंचे तो किरण हमे उस हॉल टाइप एरिया में hi मिल गयी.

किरण:- आ गए तुम दोनों, चलो मिलवाती हु तुम्हे उससे.

अभय:- हां चलो ma'am.

किरण:- इसे क्या हुआ आज.

अभय:- पता नहीं सायद मूड ख़राब है इसका आज.

मुझे इनकी बातो में कोई इंटरेस्ट नहीं था इसलिए मैं इनसे आगे हो लिया और सेल में घुसा जहा उस आदमी को रखा हुआ था. वह का नज़ारा देख के तो और गुस्सा आ गया मुझे बस उसे चेयर पे बिठा रखा था और एक sub-inspector उससे सवाल जवाब करना चाहा रहा था लेकिन वो लौड़ा गालिया बक्क रहा था पुलिस को मुझे भी और अपने बाप लोगो का गुणगान कर रहा था और ये सब देख के मेरा मूड और ख़राब हो रहा था की बस क्रिमिनल को विप ट्रीटमेंट दे रहे ये लोग.

मैंने जाते hi दी उसकी चाहती में लात वो चेयर समेत निचे गिरा और वो चेयर लकड़ी थी तो टूट गयी और उसकी आवाज़ से सब की नज़र मुझ पे आ गयी और sub-inspector तो बस उछाल के पीछे हो गया, किरण भी आँखे फाड़े मुझे देख रही थी, मैंने उसे उठाया निचे से लेकिन वो स्टिल बकबक कर रहा था जो मुझे और इर्रिटेट कर रही थी मैंने उसे खड़ा करते उसके पेट में पंच दिया वो झुका और झुकते hi में दी एक कोहनी उसकी खोपड़ी में और वो अपने दोनों हाथो से खोपड़ी पकड़ के खड़ा हुआ तो मैंने दी उसकी चेस्ट में एक लात खींच के वो पीछे दिवार से बाज़ा और घुटनो पे आ गया.

मैं:- अब बता भसडक देगा उन्ही इनफार्मेशन और कोर्ट में सबके नाम लेगा ताकि सबके खिलाफ वारंट निकले.

आदमी:- राजेश भाई और मला तेरे परिवार को जिन्दा जला देंगे लड़के उनको तेरे बारे में पता है.

भेनचोद ये फॅमिली का रंडी रोना इसने भी सुरु कर दिया और मुझे फिर से ट्रिगर कर दिया मैंने उसे झुके हुए को hi सीधा किया और उसके फेस पे पंचेस की बरसात कर दी, स्पीड इतनी तेज़ थी की वो हाथ भी बिच में नहीं ला पा रहा था, यहाँ तक की उसका चिल्लाना बंद हो गया और आखरी में उसने हाथ जोड़ लिए और पेअर पकड़ लिए मेरे. हास्सश्ष्ठ बस सब कुछ इस लोदु पे निकल के खड़ा हुआ मैं और अपने हाथ वगैरह धोये पुलिस वाले मुझे hi घूरे जा रहे थे लेकिन कोई बोल नहीं रहा था कुछ पर मुझे एक टेंशन खाये जा रही थी फॅमिली की.

खैर किरण ने उसका बयां लिया उसमे उसने राजेश का और उसके गैंग की इनफार्मेशन दी मुझे तो बस नार्मल लगा पता नहीं क्यों इतनी हवा बना राखी थी उसने, मला के बारे में भी बताया, हां मला में कुछ जान लग रही थी मुझे और उसके बन्दे भी त्रिनेड थे. और ये बाँदा कोर्ट में गवाही देने के लिए भी मान गया बस.

खैर ये सब काम निपटाके मैं, अभय और किरण एक पार्क में बैठे थे.

मैं:- सो अपनी कहानी बताओ की आप हम लोगो का साथ क्यों दे रही हो?

किरण:- मेरी कोई स्टोरी नहीं है.

अभय:- ma'am आप एक से झूट नहीं बोल सकती.

किरण:- ोकक, तो कहानी सिंपल सी है, हर्ष चौधरी ने मेरे हस्बैंड को मरवा दिया क्युकी वो एक रिपोर्टर थे और उन्होंने उसके खिलाफ कुछ बोल दिया था और जब मैंने एक्शन लेना चाहा तो मेरा ट्रांसफर यहाँ करवा दिया. और मैं अकेले उससे बदला नहीं ले सकती लेकिन एक में मुझे वो आग दिखी जो सबको जला देगी.

मैं:- लिसेन लिसेन फर्स्ट ऑफ़ आल हर्ष चौधरी कोई राजेश या मला जैसा चिन्दी चोर नहीं है. हे रन्स दिल्ली एंड हाफ इंडिया, वो जब चाहे मुझे मरवा सकता है, और सडली हे doesn't केयर अबाउट में, वो सोचता है वो मुझे कभी भी मरवा सकता है इसलिए वो हमपे ध्यान नहीं दे रहा और इसलिए ये बेस्ट तरीका है प्लान बनाने का क्युकी अगर उसने हमपे ध्यान दिया तो वो हम लोगो को हमारे सो कॉल्ड फॅमिली के साथ एक घंटे में दफना दे गए. उसके नाम से इंडियन अंडरवर्ल्ड कापता है. तो इतना इजी न लो उसे की एक मिल गया तो हर्ष को टपका देंगे. Btw मैं आपके साथ हु लेकिन स्टिल याद रखो हर्ष अभी बहुत दूर है बहुत दूर अभी फ़िलहाल हम उसके पेअर की धूल है और वो हमे कभी भी साफ़ कर सकता है और ये hi कड़वा सच है और मेरी मानो तो अभी उसके बारे में सोचो hi मत इस मला पे ध्यान दो नहीं तो ये hi लाशें बिछवा देगा हमारी.

और ये बोलके मैंने अभय को इशारा किया चलने का और किरण अभी मुझे आँखे फाड़े देख रही थी क्युकी मैंने उसका सामना सचाई से करवा दिया था, ऐसे बदला लिया जाता तो लोढ़ा फेक के मरता यही से और उसका खानदान छोड़ देता.

मेरे दिमाग में बस एक चीज़ चल रही थी फॅमिली को कैसे दूर किया जाए इस सबसे या उन्हें सेफ किया जाए, और उनको सेफ करने का प्लान मेरे दिमाग में 2 मिनट के अंदर आ गया.

मैं:- अभय मेरे साथ चल आज घर छोड़ दूंगा मैं, सामान पैक करवा मेरा.

अभय:- अबे घर छोड़ने से वो मला बक्श नहीं देगा उनको

मैं:- ी क्नोव बीच उसके लिए बहुत बेटर प्लान है बस कल तक का वेट कर तू फिर देखियो धमाका.

अभय:- पता नहीं लौड़े तू क्या क्या करता रहता है, बूत ी बिलीव यू बेब.

हम दोनों ने विवेक और दीपक को भी मेरे घर बुला लिया, जितने वो आते उतने मैंने और अभय ने मेरे कपडे, बुक्स और सब सामान पैक कर लिया. इतना सामान था की 2 बाइक्स पे hi जायेगा. थोड़ी देर में वो लोग आये और हम चारो वो बैग्स निचे लेके आये और बखेड़ा तो होना hi था उसे कोण रोक सकता है लेकिन आज कुछ ज्यादा होना था. निचे हॉल में इस टाइम सब थे मेरे पूजिनिये पिता जी, दादा जी, सो कॉल्ड माँ, और भाई.

दादा:- कहा जा रहा है बैग लेके

मैं:- घर छोड़ के जा रहा हु, दिख न रहा.

औरत:- बीटा ऐसी क्या बात हो गयी जो घर छोड़ के जा रहे हो

मैं:- वेट वेट आइंदा से बीटा न बोल देना, नफरत है मुझे इस वर्ड से.

पापा:- ऐसे बात करते है अपनी माँ से.

मैं:- न मेरा कोई बाप है न मेरी कोई माँ है, और सुन लो आज के बाद ये आवाज़ ुचि हुयी न तो अब तक जो बची कुछ इज़्ज़त थी न वो भी भूल जाऊंगा.

दादा:- ाचा ठीक है चला जा तुझे अकेला रहना है तो लेकिन रीज़न तो बता.

मैं:- ये जो तुम्हारी सो कॉल्ड फॅमिली है न ये मेरी वजह से हर्ट न हो इसलिए जा रहा हु क्युकी वो मला मेरे पीछे पड़ा है.

सब चुप हो गए मला का नाम सुन के.

मैं:- उसको मैं देख लूंगा खुस रहो फॅमिली के साथ कुछ जरूरत या मुसीबत हो तो याद कर लेना.

इतना बोल के हम वह से निकलने लगे तो मोनू बोलै.

मोनू:- भैया ध्यान रखना अपना.

मैंने न चाहते हुए भी अपनी मुंडी हाँ में हिलायी और जल्दी से बहार निकल गया. सायद मैं मोनू की वजह से घर छोड़ रहा था ताकि उसपे कोई आंच ना आये लेकिन कमज़ोर नहीं पद सकता था मैं और ये सोच के हम पहुंचे उस रूम पे जहा उन दोनों का गेम बजाय था. वह हमने सामान सेट किया और खाना खाया बस रात हो गयी थी.

मैं:- सुन विवेक कल भी स्कूल चला जइयो तू और दीपक , मुझे कुछ काम है.

विवेक में हाँ में मुंडी हिल्लायी और दीपक के साथ निकल गया, उसने भी बकचोदी नहीं की आज क्युकी उसे पता था बहार से मैं कितना भी स्ट्रांग हु लेकिन अंदर से तो टुटा हुआ हु.

उनके जाते hi मैं टिगों निकला और टेबल पे बिछा के एक सांस में खींच गया, हास्सश्ठ फाइनली शान्ति. इस बार खोपड़ी बस थोड़ी देर के लिए सुन्न हुयी फिर नार्मल हो गयी लेकिन स्टिल दिमाग को बूस्ट कर गयी थी, मैंने देखा तो अभय सो गया था थक गया था ये भी बस, मैं भी किरण के बारे में सोचता सोचता सो गया. मुझे उसमे एक तड़प दिखी थी बदले की उसमे भी आग है बदले की और इसी लिए मैंने आज से उसे अपनी नयी फ्रेंड मान लिया था. वैसे आज हम 8 बजे hi सो गए क्युकी थक गए थे पुरे दिन भाग दौड़ करके. लेकिन हमारी किस्मत में सोना कहा लिखा है वो भी चैन से 12 बजे मेरा फ़ोन बज गया मेरा, किरण का फ़ोन था, मैंने फ़ोन उठाया तो उसकी आवाज़ बहुत दरी हुयी लग रही थी.

तो बे कॉन्टिनोएड ??
 
Back
Top