Mere Khandan Ki Anmol Phuddiyan - Page 6 - SexBaba
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Mere Khandan Ki Anmol Phuddiyan



इक्तालीसवीं क़िस्त


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गार्ड मेरी बातें कर यकीन न कर पता. पर वह देख चूका था. फायरिंग से भी मेरी आँखों में डर या घबराहट जैसा कुछ नहीं था. मेरी बॉडी लैंग्वेज के आगे वह खुद हथुन में हथ्यार रखते हुए भी बच्चे रहे. मई उसकी आँखों में बिना पलकें झपकाए घूरता चला गया

मई --- जाओ.. अंदर से किसी को बुला कर लाओ

कोई कोठी के ऊपरी फ्लोर से मुझे देख रहा था. वह मेरी डेरिंग पर हैरान था. मेरे वर्ड्स वह सुन नहीं पाया था. वहीँ से चिल्लाया और पुछा मेरे बारे में.

मई उसे देख ऊँची आवाज़ में बोलै -- मई वो हों. जो बेज़ा को ठीक कर सकता है. मेरे शिव उसे कोई और ठीक नहीं कर सकता..

और वह झटका खा गया. भागता हुआ कहीं गम हुआ. और फिर गेट के बहार मेरे सामने खड़ा हप्ता हुआ मुझे देकने लगा

मई -- मुझे देखो मत. मेरी आँखों में देख कर समझ सकते हो तो समझ लो. जान लो मुझे.. कोई डॉक्टर नहीं हों मई. फिर भी यकीन कर लो.

मई चुटकी बजता हुआ बोलै -- बेज़ा को मई चुटकी बजाते hi ठीक कर डालूंगा. वह पहले जैसी हो जाएगी.

वह -- आओ मेरे साथ

बेज़ा अब चिल्ला नहीं रही थी. ज़रूर उसे इंजेक्शन देकर या ऐसे hi किसी तरीके से बेहोश कर दिए गया था

मई -- मई बेज़ा का सामना नहीं करना चाहता अभी. अभी नहीं चाहता वह मुझे देखे

वो होंठ भींच दर्द भरे लहजे में बोलै -- बेज़ा सो रही है अब्ब

मई उसके साथ अंदर जा पोहंचा.. पूरी फॅमिली ड्राइंग रूम में आ गई थी.

अमीर अहमत - फॅमिली हेड था. अमीर अहमत और उसकी वाइफ अज़रा अहमत दोनों 60 प्लस थे.

बेज़ा के चार भाई थे. सब एक साथ रहते थे.

एक्रेम अहमत

एल्टन अहमत

सरकन अहमत -- इसके साथ मैं कोठी के अंदर आया था.

सेवकेट अहमत

सब के सब मुझे देखने लगे. सरकन अहमत सब को मेरी बात बता चूका था. बेज़ा की चरों भाभियाँ भी बच्चों समेत आ गई थी.

अमीर अहमत hi दुःख भरे लहजे में बोलै -- हम हर आस खो चुके हाँ. बीटा तुम जो कोई भी हो. कुछ कर सकते हो तो कर गुज़रो. बदले में हमसे जो चाहे ले लो. हमारी बेज़ा हमारी जान है. दौलत के ढेर लगे पड़े हैं हमारे पास. लेकिन सारे सुख बेज़ा के दम से हैं. चाहे तो बदले में साडी दौलत ले लो. हमारी बेज़ा को ज़िन्दगी लौटा दो.

अज़रा अहमत सिसकती हुई बोली -- हम बेज़ा को चाहते हैं. हमारे दिलों की धड़कन हमारी बेटी बेज़ा है. हमें कोई पेड़ की आस भी दिलाये तो हम उसके आगे हाथ जोड़ बैठें. बीटा तुम्हारी आँखों में मुझे हमारे hi जैसे किसी दर्द की परछाई दिख गई है.. दिल पुकार उठा है. ज़रूर तुम कुछ कर सकते हो. ये देखो इस माँ के तेरे आगे हाथ बंधे हैं.. उसकी इकलौती बेटी को ज़िन्दगी लौटा दो

मई हैरान ज़रूर होता.. इतने अमीर लोग जिनके आगे किसी का खड़ा होना आसान नहीं था. मैंने आस दिलाई तो अमरत भूल गई थी. साडी शान ो शौकत को एक साइड रख गए थे.

मई एक एक को देख रहा था. हर आंख बेज़ा के लिए नाम थी. ऐसा hi प्यार तो मेरी फॅमिली में भी था.. आठ ऐसे hi दर्द में तो मैं और सब भी आ गए थे.

मई एक गहरी सांस लेकर छोड़ता हुआ बोलै - बेज़ा के पास ले चलो मुझे

कुछ देर में हम सब बेज़ा वाले कमरे में थे. और मई बेज़ा का मुरझाया सोया हुआ हुसैन देख कर हैरान रह गया. बेज़ा मेरी ज़िन्दगी की सबसे हसीं लड़की थी. हम पठानों में एक से बढ़कर एक हसीं लड़कियां होती हैं. लेकिन बेज़ा के जैसी हसीं मैंने आज तक नहीं देखि थी. पिछले कई महीनो से मैं दुन्या घूम रहा था. लेकिन एक भी चढ़ा मुझे बेज़ा के जैसा नहीं दिखा था

मई -- यकीन कर लो आप सब.. कुछ दिनों में hi बेज़ा ऐसी नहीं रहेगी. जैसे कभी हुआ करती थी. वैसी hi हो जायेगी..

फिर मई बेज़ा के भाइयों को देख बोलै -- जो कहूं. वही करना होगा.. कुछ भी मेरे प्लान में गड़बड़ नहीं होनी चाहिए.. और एक बात खास तौर पर ज़ेहन में रखना.. मई कुछ भी कर गुज़रूँ.. मुझे कोई रोके मत.. एक बात का वडा करता हों. बेज़ा की इज़्ज़त के लिए खतरा नहीं बनूँगा.. हाँ उसकी शर्म का मैं कोई वडा नहीं करूँगा.. पठान हों... पाकिस्तानी हों.. मर्द का बचा हों.. बेज़ा को ठीक करने के लिए न तो मुझे एक भी पैसे की ज़रूरत है न hi आप सब के थैंक्स की. बिना किसी मतलब के लिए मई ये सब कर रहा हों.. कोई अगर मतलब है मुझे तो आप सब के दर्द से मतलब है.. बेज़ा जैसी पायरी लड़की की खो चुकी खुशियों से मुझे मतलब है..

कोई कुछ बोलता.. बेज़ा की माँ बोल पड़ी -- मुझे अपने पांचवें बेटे की हर बात मंज़ूर है.

एक मुद्दत के बाद मेरे होंटो पर पुराणी मुस्कान उभरी. और मैं अज़रा अहमत के दोनों हाथ कर चूमता हुआ बोलै -- कुछ रिश्ते खुद से और अचानक बन जाया करते हैं.. अचानक के बने रिश्ते पुराने रिश्तों पर सबक़त ले जाया करते हैं. आप की मंज़ूरी ने मुझपर यकीन को बढ़ा भी दिए है. और ये यकीन मैं टूटने नहीं दूंगा.. बेज़ा ठीक होगी और हर सूरत ठीक होगी.

अज़रा अहमत की आँखों में नमी उतर आई थी. वह मेरे प्यार भरे लहजे पर खुद को काबू में नहीं रख सकीय और मेरा चेहरा पकड़ माथा चुम गई..

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बेज़ा एक जंगली कॉटेज में थी. जब बेज़ा को होश आया तो उसने खुद को पलंग पर ज़ंजीरों से बंधे हुए पाया. खुद को बंधे हुए पाया तो बेज़ा के चेहरे पर डर खौफ और दहशत के एक्सप्रीसिओं आने लगे. ये बेज़ा की वह हालत थी, जब उसे अपने साथ हुए घिनोने वाके का एक के लम्हा याद ा जाया करता था.

उसी टाइम कमरे का दरवाज़ा खुला और मुझे अंदर धकेलता हुआ 4 मसकमान अंदर दखल हुए.. चरों के हथुन में गन्स थी. बेज़ा डर गई. लेकिन चीखी चिल्लाई नहीं..

एक बोलै -- ये हमारे दुश्मनो की लड़की है. एक बार इसे किडनैप करके हमने तावान भी वसूला और इसके बदन को रोंडा भी. तुम हमारे दुश्मनो के सज्जन हो. और अब तुम hi हमारे दुश्मनो की इज़्ज़त की धज्जियाँ उड़ाओगे.

मई ज़ख्मों से चूर था.

(ड्रामे में रंग भरने के लिए मैंने खुद को ज़ख़्मी करवाया था. कोई मेरी बात मन्ना नहीं चाहता था. लेकिन मैं सिरफिरा भी था. पठान था. अपनी मनवा कर रहा था)

टपक रहे खून के साथ मई कड़क कर बोलै था -- तुम चाहे मेरी जान भी ले लो.. लेकिन मई इस मासूम की इज़्ज़त के साथ नहीं खेलूंगा.

मसकमान है पड़े -- मासूम.. हाहाहा.. इसकी इज़्ज़त तो पहले hi लूटी जा चुकी है. इस बार हम इसे नहीं इसकी फॅमिली को तड़पना चाहते हैं. सारे सुख उनसे छीन लेना चाहते हैं.. तुम्हारे पास कोई दूसरा रास्ता नहीं है. हर हाल में इस लड़की की इज़्ज़त लूटनी होगी तुम्हे.. नहीं तो

मई -- नहीं तो क्याआ.. क्या कर लोगे तुम..

वह हँसा -- नहीं तो तुम्हे जान से मारने से पहले, तुम्हारी आँखों के सामने, तुम्हारी गफ की इज़्ज़त की धज्जियाँ उदा दी जाएंगी

और मैं बेज़ा को देखने लगा. बेज़ा की आँखों में अब बेपनाह कहुआफ के साये लहराने लगे थे.

मई -- मई बेज़ा की इज़्ज़त से नहीं खेल सकता. चाहे तुम लोग किसी भी हद से गुज़र जाओ..

चरों मुझपर टूट पड़े.. मुझे फिरसे कूटने लगे.. मेरे हाथ पीछे बंधे हुए थे.. मई मार खा सकता था. मार नहीं सकता था..

मुझे कुछ देर और पीटा गया. फिर मेरे हाथ खोल कर मुझे नीम बेहोशी की हालत में कमरे से निकल गए.. बहार से दरवाज़े को टाला लगा दिए गया था.

और भी बेज़ा मुझे खौफ से देखती जा रही थी. अपनी कोठी में नहीं थी. अनजान जगह थी. ये सब न सोच कर वह मुझसे डर रही थी. एक बार फिरसे वह लूटना नहीं चाहती थी..

मई टूटे कमज़ोर लहजे में बोलै -- दर्रो नहीं बेज़ा.. मई तुम्हारे भाइयों का दोस्त भी हों और इज़्ज़तों का मुहाफ़िज़ भी.. मर जाऊँगा.. लेकीन तुम्हारी इज़्ज़त से नहीं खेलूंगा.. किसी और को भी नहीं खेलने दूंगा

लेकिन बेज़ा जल्द समझने वाली नहीं थी. खौफ उसके ज़ेहन की गहराइयों में बैठा हुआ था... मई बेहोश नहीं हुआ. बेहोशी का ड्रामा करने लगा.. फिर मुझे नींद आ गई. देखा तो बेज़ा वैसे hi बंधी हुई मुझे देख देख दरर्ति जा रही थी..

3 दिन तक यही खेल खेला गया.. बेज़ा ऐसी हालत में खा नहीं सकती थी. डॉक्टर्स की एक टीम हिरे की गई थी.. जो बेज़ा को बेहोश करने के बाद एनर्जी पोहंचाया करती थी. और बेज़ा इस बात से अनजान थी. मेरा भी ट्रीटमेंट जारी रही. ये सब बेज़ा से ख़ुफ़िया रखा गया था..

इन तीन दिनों में मई कई बार बेज़ा के सामने मार खा चूका था. लेकिन अपने इरादों पर अटल रहा.. मस्कमेन कोठी के hi गार्ड्स थे. और पुश्तों से बेज़ा फॅमिली के नमक खुवार थे. पुरे दिल से मेरा साथ दे रहे थे..

अब बेज़ा नरम पड़ती जा रही थी.. 5 पांचवें दिन एक और खेल खेला गया. मैं गार्ड्स को डर लड़ा.. फेक बुलेट्स से सब को मार दिए.. वह भी खूब मरने का ड्रामा करते हुए तड़पने लगे. और मैंने देखा था बेज़ा की आँखों में ख़ुशी भरी चमक की एक लहार उभर कर गायब हो गई थी

मई बेज़ा को खोल कर वहां से निकल भगा.. बेज़ा मेरा पूरा साथ दे रही थी. बास कुछ बोल नहीं रही थी...

ऐसे hi अगले 6 दिन तक और जंगल में भटकते रहने के बाद मैंने बेज़ा का ऐतमाद तस्लीम कर लिए.. बेज़ा के दिल से मेरे लिए डर निकल गया.. बेज़ा की जुबां नहीं खुली.. जैसे मई घर पर अम्मी जान, भाभी माहिरा एपीआई, किन्ज़ा एपीआई और दादी जान के माथे के साथ माथे जोड़ एक्सपेरिमेंट किआ करता था. बेज़ा के साथ करने लगा... बेज़ा मुझसे बिदकती थी. पहले खौफ ज़ादा हो जाया करती थी. लेकिन वह देख रही थी. मई एक एक क़दम उसकी न सिर्र्फ इज़्ज़त कर रहा हों. उसकी इज़्ज़त बचने के लिए मारा मारा फिर रहा हों

बास फिर बेज़ा की जुबां खुल गई.. जंगल में बेज़ा मुझसे लिपट कर ऐसी रोइ.. मुझे भी रुला गई... अपनी इज़्ज़त लूटने की पूरी दास्ताँ एक एक अहसास के साथ बयां कर गई. हर एक लम्हा वह कैसे मरी... सब खुल कर बोलती चली गई

मैंने भी बेज़ा को नहीं टोका.. बोलने दिए.. सब बोल देने से, खुल कर रो लेने से बेज़ा के अंदर का सारा ग़ुबार निकल गया...

इन कुछ दिनों में मैं बेज़ा को लिटा कर कई बार उसके ऊपर चढ़ गया था.. बेज़ा के जिस्म के सारे नशेब ो फ़राज़ का मुझे पता चल गया था.. और बेज़ा अब पूरी तरह से वापिस लौट चुकी थी.. मेरे अनमोल प्यार की वजा से मैंने उसे यकीन करवा दिए था.. जिस्म मेला होता है न रूह.. कुत्तों ने मोह मारा.. और कुत्ते तो कुत्ते होते हैं.... बेज़ा मुझसे लिपट कर बोली थी

बेज़ा -- बाबू!.. तुम मुझे छोड़ तो नहीं डोज न.. मई तुम्हारे बिना अब एक भी सांस नहीं लेना चाहती. तुमने मुझे ज़िंदा किआ है. अब तुम्ही मेरे आखरी सांस तक के हमसफ़र रहोगे.

बेज़ा की इस बात पर मई परेशां हो गया था. ये बात मई भूल गया था.. ऐसा कोई लम्हा भी आ सकता है. मई जनता था. लेकिन मई भूल कैसे गया था.. मेरे प्यार की बारिश की कुछ बूँदें प् कर hi सब कुछ भूल जाया करते थे मुझसे प्यार करने वाले.. बेज़ा भी मुझे नहीं भूल सकती थी... हज़ल भी तो मुझसे प्यार करने लगी थी. और शायद बेज़ा से ज़यादा मुझसे प्यार हज़ल करती थी. मैंने तो अभी तक उसके प्यार को भी एक्सेप्ट नहीं किआ था..

बेज़ा मुझे चुप देख रो पड़ी - मुझे ज़िन्दगी दी है बाबू तो पूरी दो.. मेरे मसाले जा चुके जिस्म के कदरदान तुम्ही बन सकते हो. वर्ण मुझे हमेशा मेरे जिस्म से घिन आती रहेगी.. तुम्हारा प्यार मुझे मिला तो, सच कहती हों, मई जी उठूंगी.. तुम न मिले मुझे तो मेरे कुचले हुए जिस्म में ज़िन्दगी का कोई मतलब नहीं बनता...

बेज़ा ज़िन्दगी की तरफ लौट आई थी. लेकिन इज़्ज़त तो लुटवा hi चुकी थी. और ये बात कभी भी ज़ेहन के गोशों से निकल नहीं सकती थी.

बेज़ा ने मुझे परेशां कर डाला था.. मई उसे क्या जवाब देता.. लेकिन जवाब तो देना hi था

मई --- बेज़ा अभी सब को पहले तुम्हारे ज़िन्दगी की तरफ लौट आने की खुश खबरि देते हैं

बेज़ा मेरे ऊपर चढ़ आई थी -- बाबू!..

बाबू नाम मई बेज़ा को पहले hi दिन अपनी अनमोल लव स्टोरी ऑफ़ होम सुना चूका था.. उसके मंद की गहराइयों में ये नाम उतर चूका था.. अब बेज़ा मुझे बाबू hi कहती थी..

प्यार करने वळून के मोह से बाबू सुन्न्ना मुझे बहुत भला लगता था

बेज़ा -- ज़िन्दगी की तरफ तो मई तभी लौटूंगी जब तुम मुझे एक्सेप्ट कर लोगे. सच कहती हों. मुझे कभी भी प्यार नहीं हुआ था.. अब तुमसे हुआ है.. क्या मई..

सिसक पड़ी -- क्या इस कुचली हुई बेज़ा का आम सा प्यार तुम्हारे जैसा अनमोल प्यार का मालिक बाबू के लिए क़ाबिल इ क़ुबूल हो सकता है. अगर हाँ तो इस बेज़ा को ज़िन्दगी दे दो बाबू.. मुझे दुन्या में किसी और चीज़ की अब कोई ज़रूरत रही है न छह.. मेरी ज़िन्दगी सिर्फ तुम हो.. सिर्फ तुम.. मेरी हर ख़ुशी हर सुख दुःख तुम्ही से शुरू होकर तुम्ही पे ख़तम होता है... मुझे यहाँ से ले चलो बाबू.. कहाँ मर्ज़ी ले चलो.. रूखी सूखी खा लुंगी. लेकिन तुमसे दूर नहीं रहूंगी..

और बेज़ा ने मेरी परेशानी बढ़ा दी

मई -- बेज़ा तुम समझने की कोशिश क्यों नहीं कर रही हो.. मेरी ज़िन्दगी में तुम hi नहीं हो. और भी--

मेरी बात पूरी होने से पहले hi बेज़ा मेरे होंटो पर हाथ मुझे चुप करवाती हुई बोली

बेज़ा -- मर्द चार शादियां कर सकता है. तुम अपनी साडी ज़िन्दगी अपनी मर्ज़ी से जीना. बास मुझे मत छोड़ना

और मई बेज़ा की बात सुनकर हक्का बक्का रह गया.. अपनी सल्तनत की शहज़ादी थी बेज़ा.. और ऐसी बात बोल गई थी

बेज़ा -- ऐसे हैरान मत होवो बाबू.. कसम ले लो.. चाहे कोई सी भी.. मुझे बास बाबू चाहिए.. इसके शिव कुछ नहीं चाहिए.. बाबू के लिए मई सारा जग छोड़ सकती हों. बाबू ने बेज़ा को ज़िन्दगी दी है. बेज़ा बाबू के लिए कुछ भी कर जायेगी.. बाबू की हर ख़ुशी को अपनी ख़ुशी मान कर जियेगा. और हमेशा खुश रहेगी. बिन बाबू बेज़ा कभी खुश नहीं रह सकती अब..

और मैं बेज़ा को लेके उसके अपणु में आ गया. सब बेज़ा को पहली जैसी देख कर ख़ुशी से रो पड़े थे. और बेज़ा भी अपणु में पांच एक एक से लिपट कर खूब रोइ...

बेज़ा ने वही सबके सामने दिल की बात बोल दी.. और कमल हो गया. सब ने खुल कर कह दिए.. बेज़ा और मेरा रिश्ता पुरे दिल से उन्हें मंज़ूर है..

मई -- लेकिन मुझे मंज़ूर नहीं है

मई ऐसा बोलै तो बेज़ा को झटका लगा वह लगा hi. सब को भी लगा. सब शॉकेड हुए मुझे देखने लगे

मई -- आप सब मेरे बारे में कुछ नहीं जानते हो. मई घर छोड़ कर निकला हुआ लड़का हों. कसम खा कर, एक वडा करके निकला था.. ज़िन्दगी में कुछ बनकर लौटूंगा.. और ज़रूर लाटुंगा. बेज़ा से शादी से मुझे इंकार इसलिए नहीं है. बेज़ा से मुझे खार नहीं है. बेज़ा बेस्ट लीफर पार्टनर है.. लेकिन मई जब तक अपनी ज़िन्दगी के मकसद को नहीं प् लेता.. बेज़ा तो किसी भी लड़की से शादी के बारे में सोच भी नहीं सकता..

बेज़ा होंठ डनोटों में भींच गई

उसका एक भाई बोलै -- बेज़ा के नाम एक आइलैंड है. बेज़ा की अपनी इतनी दौलत है... सात पुश्तें बेथ कर भी खाएं. तो भी ख़तम न हो

मई मुस्कुराया फिर चटनी लहजे में बोलै -- मैं पठान हों.. खुद्दार पठान.. याद है मैंने कहा था. मई बेज़ा को ठीक करूँगा.. बदले में न तो मुझे एक ढेला चाहिए और न hi थैंक्स.. सो बेज़ा अब ठीक हो चुकी है. मेरा काम ख़तम हुआ

और बेज़ा तड़प कर सबके सामने मुझसे लिपट कर आंसू बहती हुई बोली

बेज़ा -- बाबू... मुझसे दूर जाने की बात मत करना.. जाना hi चाहते हो तो एक वडा करके जाओ.. अपने मकसद को पाने के बाद मेरे पास आओगे.. और मुझे लेकर जाओगे.. मुझसे शादी करोगे. भले hi बाद में या पहले जितनी और जिस किसी के साथ भी कर लो.. तुम्हारी हाँ मुझे ज़िन्दगी दे सकती है. और तुम्हारी नाह अभी मुझसे मेरी साड़ी साँसे छीन लेगी

मई बेज़ा को ठीक कर गया था. बेज़ा बुरी लड़की नहीं थी.. बहुत अच्छी बहुत प्यारी लड़की थी. बेज़ा की ज़िन्दगी के साथ जुडी थी कई और ज़िंदगियाँ

मई -- तो फिर सुन लो बेज़ा... मेरी ज़िन्दगी में तुमसे पहले हज़ल है.. वो दीवानी महीनो से मेरे पीछे पीछे है. और मैंने एक बार भी उसे मुस्कुरा कर नहीं दिए... कई बार उसकी जान लेने की कोशिश की.. तुम हो बेज़ा.. जिसने बाबू को ज़िंदा किआ है..... तुम न मिलती, तो शायद बाबू भी दफ़न hi रहता.. मई तुम्हे कभी नहीं छोडूंगा.. मुझे दौलत से प्यार नहीं है. लेकिन अब मेरी ज़िन्दगी का मकसद बन चूका है.. अपने मकसद को पा लूँ. फिर तुम्हे भी अपना लूंगा

एक भाई बोलै -- उसके हम तुम्हारे काम आ सकते है

मई नासमझी से उसे देखने लगी

वो फिरसे बोलै -- हमारे और बेज़ा के दुश्मन तुम्हारे भी दुश्मन हुए. क्यों कह तुम बेज़ा को फ्यूचर में अपनी वाइफ डिक्लेअर कर चुके हो.

मई -- हाँ सही कहा आपने

वह -- दुश्मनो से लड़ाई.. फिर जो माल मिले.. उसे माल इ ग़नीमत कहते है.. ऐसा माल जायज़ होता है.....

मई अब सब समझ गया -- कहाँ मिलेगा वह दुश्मन..

और सबके होंटो पर मुस्कराहट फेल गयी.. लेकिन बेज़ा फ़िक्र में डूब गई

बेज़ा -- बाबू की ज़िन्दगी को खतरा हो सकता है

बेज़ा का बाप बोलै -- बाबू की आँखों में पहले अच्छे से देख लो. फिर अपनी बात को दोहराना बेज़ा बेटी

और बेज़ा मेरी आँखों में देखने लगी.. फिर उसे सब कुछ समझ में आता चला गया.. अब वह ये भी जान चुकी थी.. उसे ठीक करने के लिए कैसा ड्रामा रचा गया था. और ड्रामे में रंग भरने के लिए मैंने कैसे असली मार खाई थी. सारे के सारे घाव असली थे..

बेज़ा -- बाबू को कुछ नहीं होगा.. ठीक है. बाबू का पूरा पूरा साथ दिए जाए

टर्की से दूर hi आइलैंड था.. जहाँ वह गैंगस्टर गैंग रहता था. जहाँ बेज़ा की इज़्ज़त से खेलने वाले कुछ दुश्मन लीडर रहते थे. कुछ को तो बहुत वक़्त पहले hi मार दिए गया था..

एक टीम बनाई जाने लगी. उस टीम का लीडर मैं था. माइकल भी फाइटर था.. हज़ल अब बेज़ा के साथ रहने लगी थी. और बेज़ा पगली हज़ल को अपनी छोटी बहन मान कोठी की शहज़ादी बना गई थी. हज़ल तो लावारिस लड़की थी. खिल उठी. पूरी कोठी में भगति नज़र आती.. कोठी की खुशियां और रौनकें लौट आई थी.

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टोटल 10 महीने और लगे थे.. दुश्मन आइलैंड पर चढ़ाई करके दुश्मन को तबाह करने में.. वहां मुझे दौलत के ढेर मिले.. हर शकल में दौलत मिली थी.. डॉलर, पोंड्स, कई दूसरे कन्ट्रीज की करेंसी.. सोने की ईंटें, हीरे कई कीमती मोती..

मई भी एकदम से बिल्लीवारे बन गया था.. मेरे साथ अमीर बन गया था माइकल भी.. हज़ल तो मेरी बन चुकी थी.. और वह खिल उठी थी.. उसके गोर गालों की लाली मेरे नाम से हर पल बढ़ती hi चली जा रही थी...

अब मेरे घर लौटने का टाइम आ गया था.

 


बीतलीसवीं क़िस्त


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वाया 3रद पर्सन

गुलशन उदास चेहरा लिए लॉन वाले झूले पर लेती हुई थी. फराह उसे देख उसके पास जा पोहंची.. फराह अपने 1 साल के बेटे को अपने एक कंधे से लगाए गुलशन के उदास चेहरे को देखने लगी.

फिर अपने बेटे फरज़ान को गुलशन के सीने पर लिटा गई. गुलशन हड़बड़ा कर ऑंखें खोल गई थी. फरज़ान को अपने सीने पर देख उसकी उदास भाग गई. फरज़ान के चेहरे को चुम बोली -- छोटे बाबू क्या बात है.

फराह -- छोटे बाबू को बड़े बाबू की बहुत याद आ रही है

और गुलशन का मोह देखने वाला हो गया

फराह जल्दी से बोली -- अम्मी जान.. बाबू जहाँ कहीं भी है. उसे हमारी पल पल की खबर है. और मेरे मंद में एक आईडिया आया है.. बाबू को लौटने पर मजबूर किआ जा सकता है

फराह की बात सुनकर फरज़ान को उठाये गुलशन उछलती हुई झूले से बहार कड़ी हो गई थी

जोश भरे लहजे में बोली -- जल्दी से बताओ.. क्या है ऐसा.. जिससे बाबू वापिस मेरे पास लौट आये..

फराह फरज़ान के गाल पर हाथ फेर बोली -- किन्ज़ा की शादी, उसकी पसंद के लड़के से कर दी जाए.. मुझे 100% यकीन है. बाबू ज़रूर लौट आएगा

गुलशन भी खिल उठी -- हैं.. ये बात मेरे दिमाग में क्यों नहीं आई.. उफ्फ्फ पहले hi ऐसा कर लेती तो बाबू इतने टाइम तक मुझसे दूर नहीं रहता

फराह -- किन्ज़ा की पढाई भी अधूरी रह जाती न फिर.. ऐसे बाबू को ख़ुशी कहाँ मिलती. वह तो हमसे और भी ज़यादा नाराज़ हो जाता. अभी hi तो किन्ज़ा फाइनल एक्साम्स दे कर फ्री हुई है..

गुलशन -- बास फिर ठीक है.. इसी महीने किन्ज़ा की शादी उसकी पसंद के लड़के से कर दी जाएगा.. आठ बाबू.. 2 साल से भी ऊपर हो गए तुझे देखे हुए

गुलशन रोने लगी

बाद में सब एक साथ बैठे तो गुलशन ने किन्ज़ा की शादी और बाबू की आमद के ामकान का खुल कर बोल दिए. सब सुन कर शशदर रह गए थे. ऐसी बात थी तो उन्हें बहुत पहले hi किन्ज़ा या माहिरा की शादी कर देनी चाहिए थी. माहिरा के लिए तो लड़का अभी देखा नहीं गया था. किन्ज़ा की पसंद बारे अब सब जान चुके थे.

किन्ज़ा शादी के नाम पर शर्मा गई थी. सब ने रज़ामंदी ज़ाहिर कर दी.

किन्ज़ा शर्म फील कर रही थी. उठ कर जाना चाहती थी. लेकिन मैं टॉपिक बाबू था.. वह खुल कर बोल पड़ी -- बाबू के लिए ये शादी राखी जा रही है. तो मेरी भी एक शर्त है. बाबू के आने तक निकाह और रुखसती मुमकिन नहीं है. ऐसा न हो, आप सब के अंदाज़ा गलत हो जाएँ. मई सभी महमानो और रिश्तेदारों के सामने शादी से इंकार कर दूँ. बाबू के आने तक डिले के लिए बोल दूँ.. इससे खंडन की इज़्ज़त पर हर्फ़ आएगा.. लेकिन मई किसी भी सूरत बाबू के बिना निकाह नहीं करुँगी..

सब को चुप लग गई थी. बाबू न आया तो खंडन की इज़्ज़त मिटटी में मिल जायेगी.

सब परेशां हो गए थे.

गुलशन ने फराह को देखा और बोली -- तुम्हे क्यों यकीन है फराह बेटी. बाबू किन्ज़ा की शादी पर ज़रूर आएगा.

फराह -- मुझे क्या पूछ रही हैं आप अम्मी जान.. अपने दिल से पूछें.. मैंने तो अपने दिल की कही थी. आप अपने दिल की कहें..

गुलशन सच में ऑंखें बंद कर गई थी. कुछ देर बाद जब उसने ऑंखें खोली तो बोली -- बाबू ज़रूर आएगा. आप सब शादी की तयारीजन करिये

दादा जान बोले थे -- बाबू न भी आया तो भी शादी को डिले करना कोई बड़ी बात नहीं होगी.. कह देंगे.. लड़की का भाई किसी वजा से लेट हो गया है..

नदीम -- ऐसे में सब निकाह के लिए बोलेंगे

किन्ज़ा --- और मैं कह चुकी हों. बिना बाबू के मैं अरूसी जोड़ा तो पहन सकती हों. निकाह या ृशति का सोच भी नहीं सकती..

किन्ज़ा अपनी बात कह कर उठ गई थी. माहिरा उसके पीछे जाने लगी..

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डेढ़ महीने की डेट राखी गई थी.. घर के पास hi एक खली मैदान में शम्याने लगे हुए थे.. एक साइड लेडीज के लिए और एक साइड मर्दों के लिए इंतेज़ाम किआ गया था.. किसी होटल या मार्की में भी सब अर्रंगे किआ जा सकता था.. लेकिन बाबू के आने के डाउट ने ऐसा करने से रोक दिए था..

बारात आ चुकी थी. सब दिलों की धड़कने हर लम्हा तेज़ होती चली जा रही थी. टाइम जैसे जैसे गुज़रता जा रहा था. बाबू के इंतज़ार में सब की हालत ख़राब होती जा रही थी.. किन्ज़ा दुल्हन के कस्टम में बड़ी पायरी लग रही थी. लेकिन वह अपने होने वाले दूल्हे को न सोच कर बाबू को सोचती जा रही थी. बाबू के साथ बिताये कुछ हसीम और गरम लम्हे उसे याद आने लगे थे. उसके सामने माहिरा ने कैसे अपनी फुद्दी बाबू के लुंड पर रगड़ रगड़ कर फुद्दी ठंडी की थी..

किन्ज़ा के दिल में हुक उठी...

किन्ज़ा दिल में -- क्यों बाबू.. मेरे साथ तुम कितने आगे बढ़ गए. अब तो मुझे najeeb(kinza का होने वाला दूल्हा) से भी उतना लगाव नहीं रहा. जितना तुम्हारे अनमोल प्यार को पाने से पहले था. मज़बूरी है न, लड़की हों, शादी के बिना गुज़ारा नहीं है. मेरी मर्ज़ी नहीं चल सकती. तुमने कितना कुछ किआ मेरे साथ. मेरे कुंवारे गालों पर, मेरे उनतोच होंटो पर तुमने अपने अनमोल प्यार की मोहर लगा दी.. मई तुम्हारी बड़ी बहन थी. तुमने मुझे ुंदरेस देख लिए.. कितना आगे बढ़ गए तुम मेरे साथ बाबू.. जितने करीब आये, उतने दूर भी हो गए.. क्यों??.. लौट आओ बाबू.. पता नहीं क्यों मुझे घुटन सी होने लगी है. मई ये शादी नहीं करना चाहती अब...

किन्ज़ा ऐसी hi सोचें सोचती जा रही थी.. सिवाए बाबू के कुछ नहीं था उसके दिल में.. कुछ था तो बाबू के साथ बिताये अनमोल प्यार वाले लम्हे थे. यादें थी.

गुलशन भी महमानो से बातें करती जा रही थी. फ्लावर शॉप पर मिलने वाली लेडी रुखसाना शाह की फॅमिली भी वही थी. गुलशन उससे बातें करती जा रही थी. लेकिन सोच बाबू को रही थी. रुखसाना की फॅमिली से पिछले 2 साल से वह रेगुलर टच में थी.. रुखसाना शाह का एक बीटा किन्ज़ा को पसंद करने लगा था. अपनी अम्मी से रुखसाना शाह से बोल भी चूका था. लेकिन वह भी चुप कर गई थी. बाबू होता तो बोल भी देती.. लेकिन?.. बाबू नहीं था.. किन्ज़ा को वोह्टी बने देख उसके दिल में भी दर्द उठने लगा था. लेकिन वह भी बाबू का इंतज़ार किन्ज़ा को अपनी बहु बनाने से ज़यादा कर रही थी..

फराह अपने बेटे फ़र्ज़न को उठाये बार बार उसके गालों को चुम उसके कान में बोलती जा रही थी -- आज मेरे बेटे के पापा आ रहे हाँ.. वह ज़रूर आएंगे..

माहिरा खान भी बेचैनी से इंतज़ार कर रही थी बाबू का.. नदीम बड़ा सीरियस था.. अपने भाई से कभी भी इतने टाइम तक दूर नहीं रहा था.. लेकिन ये 2 साल उसने भी सूली पर बिताये थे..

हशमत खान के दिल की हालत सही नहीं थी.. वो खुश भी था, बाबू अगर आ जाए तो.. डर भी रहा था.. कैसे अपने बेटे का सामने करेगा.. अगर वह सच में आ गया तो

दादी रहना खान का भी हाल हशमत खान से काम नहीं था. बहुत कमज़ोर हो गई थी वह.. बाबू की जुदाई और अपनी बदगुमानी पर वह टूट कर रह गई थी.

रियासत खान अलबत्ता नार्मल दिखाई दे रहा था.. फुफु सुल्ताना खान और उसकी फॅमिली भी किन्ज़ा की शादी की ख़ुशी से ज़यादा बाबू के लिए बेचैनी में टाइम बिता रही थी..

टाइम धीरे धीरे गुज़रता जा रहा था. कइयों ने तो कहना शुरू कर दिए था.. निकाह में इतनी देरी क्यों?.. कह दिए गया.. दुल्हन के भाई का वेट किआ जा रहा है..

गुलशांन शम्याने की झैर से बार बार बाहर देखती जा रही थी.. और उसके साथ कड़ी सुल्तान खान और रुखसाना शाह दोनों भी बहार देखने लगती थी..

माहिरा खान की हालत सबसे ज़यादा ख़राब थी.. बाबू के लिए दुखी थी. तो उसे अब बाबू पर गुस्सा भी आने लगा था.

माहिरा दिल में -- अब के तुम न ए न बाबू के बच्चे.. तो कभी तुमसे बात नहीं करुँगी..

माहिरा की लेबसो फ्रेंड भी उसके साथ थी... वो भी आज कल खुश नहीं रहती थी. माहिरा के उसके साथ मज़े करने जो छोड़ दिए थे..

इस बार गुलशन खान ने जो शम्याने की झरि से बहार देखा तो देखते hi उसके दिल की धड़कन तेज़ होने लगी. रोड की एक साइड से कई गाड़ियां आती हुई दिखाई दी.. वह सर को और भी जोड़े बहार देकने लगी. सुल्ताना खान और रुखसाना शाह भी चौंकी और गुलशन के जैसे बहार देखने लगी.....

देखा देखि सब झाड़ियों से बाहर देखा जाने लगा.

और गुलशन एक गाड़ी की फ्रंट सीट पर देख चीख पड़ी -- बाअबूउऊउउउउ

और बहार को भाग निकली.. सुल्ताना खान और रुखसाना शाह ने उसे पकड़ लिए

गुलशन रोने लगी -- छोड़ दो मुझे

सुल्ताना खान और रुखसाना शाह ने भी फिरोज को देख लिए था.. दोनों के दिलों की धड़कने बढ़ गई थी..

सुल्ताना -- नहीं.. ऐसे तुम बहार नहीं जा सकती

गुलशन रोने लगी -- मुझे जाने दो सुल्ताना.. मेरा बाबू सालों बाद लौट कर आया है

सुल्ताना -- लौट आया है तो यही तेरे पास hi आएगा.. खुद को सम्भालो.. तमाशा मत बनो.. तमाशा बन बनाओ फॅमिली का.. कोई नहीं जनता.. असली मटर

ये बात वो धीरे से बोली थी. और गुलशन आंसू बहती भाग कर फिरसे झरि के साथ ऑंखें लगा गई.. माहिरा या किन्ज़ा कैसे पीछे रहती.. सब hi जान गई थी. बाबू लौट आया है..

फुफु की बियाँ हिना खान और सजल खान भी रोने लगी थी बाबू को देख कर..

सजल -- कितना बदल कर आया है बाबू

हिना खान -- हाँ सजल.. बाबू तो और भी ज़यादा हैंडसम होकर आया है

अंदर हलचल मच उठी थी. मेहमान लर्कियन औरतें सब बड़ी हैरान हुई थी बाबू के बारे में सुन और जान कर.. किसी लड़के के लिए ऐसी चाहत... हैरत की कोई हद नहीं थी...

दादी हिम्मत नहीं कर पाई थी. किसी भी झरि से ऑंखें लगा कर बहार देखने की.. उसकी आँखों से आंसू बहने लगे थे.

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नदीम खान और हशमत खान, फूफा ज़ुबैर खान, उसका बीटा बिलाल खान, दादा जान, सब गाड़ियों को आते देख पहले तो हैरान हुए. फिर जो बाबू सबसे आगे वाली गाड़ी की फ्रंट सीट पर बैठा दिखा

तो नदीम भाग पड़ा था..

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मई लौट आया था. और जनता था.. मेरे लौट आने पर सब की क्या हालत होगी.. सब के प्यार को भला मुझसे बढ़कर कोण जान सकता था.

नदीम भैया मुझे भागते दिखे अपनी तरफ.. मैं अपने पैरों में पड़ी राइफल उठा कर हाथ में कर गया था.. मेरे साथ मेरे कई साथी थे.... माइकल था.. और भी कई थे..

कुछ तो अलग होने वाला था..

गाड़ी मर्दों के शम्याने के सामने जा कर रुकी.. मई गाड़ी से बहार आया तो नदीम भाई मुझसे मिलने के लिए मचल उठे

मई हाथ उठा कर बोलै -- अभी नाहीइ

मेरे हथुन में राइफल देख कर hi चौंक गए थे नदीम भाई.

तभी साड़ी गाड़ियों के डोर्स एक साथ खुले.. और कई हथुन में गन्स लिए मर्दों औरतों के शम्याने को घेर कर खड़े हो गए...

मई बिना किसी से मिले बड़ी शान के साथ चलता हुआ मर्दों वाले शम्याने में अंदर घुसता चला गया... सब मेहमान उठ खड़े हुए थे..

मई चलता हुआ सीधा जा पोहंचा अपनी किन्ज़ा के दूल्हे के पास.. वह मुझे हैरत से देखने लगा.. उसके साथ खड़े सब भी मुझे हैरानी से देखने लगे

फिर मैंने वो किआ.. सब चीख पड़े.. तभी मेरे कुछ साथी शम्याने में घुस आये..

मैं नजीब को गरेबान से पकड़ कर खेंचता हुआ बहार ले जाने लगा था.. उसके कुछ साथियों के पास गन्स थी. हम पठान थे.. और पठान शादियों में वेपन्स का इस्तेमाल आम करते हाँ.. नजीब फॅमिली भी काम नहीं थी..

सब हथ्यार उठा लिए गए.. लेकिन मेरा पलड़ा भरी था

मई नजीब को बहार घसीट ता हुआ ले गया.. फिर अपनी राइफल से दो फायर कर डाले. दोनों के दोनों नजीब की दोनों टांगों पर किये थे..

वो और उसके साथ आये सब चिल्ला उठे थे...

मई -- गन्दी नाली के कीड़े.. तूने क्या रियासत खान के खून को अपने जैसा समझ रखा था. तू और तेरी फॅमिली एक लम्बा खेल खेलते हुए हमारी इज़्ज़त से खेलनेगे.. दुश्मनी का बदला लेंगे.. और हम अनजान बन तेरे और तेरी फॅमिली के सामने हमेशा के लिए ज़लील होते रहेंगे... भूल है तेरी कुत्ते... भूल है तेरे बड़ों की... सब के सब आज मरेंगे.. लेकिन तू नहीं मरेगा.. उम्र भर के लिए बैसाखी तेरा मुक़दर बन चुकी है.... मेरी बहन को धोका देता है.. उसे प्यार के जाल में फंसता है..

फिर पूरी की पूरी राइफल मैंने उसकी टांगों पर खली कर दी.... और सब हक्के बक्के खड़े मुझे और नजीब को देखते रह गए थे.

किसी की समझ में कुछ नहीं आया

मई दादा जान के सामने पोहंचा और बोलै -- तय नयमत खान को हमसे अलग करने, palwasha(taya की बड़ी बेटी) की ज़िन्दगी उजड़ने वाला कोई और नहीं आप का पुराण दुश्मन ज़ोरावर खान है... ये नजीब उसी का पोता है दादा जान.. बहुत बड़ा खेल रचा गया था... लेकिन अब सारे मोहरे मेरे हाथ में हैं... अब कोई भी कुछ नहीं कर सकता..

मैंने माइकल को देखा.. और माइकल ने इशारा कर दिए..... फिरसे कुछ गाड़ियों के दरवाज़े खुले.. और ज़ोरावर खान, उसके बेटे, पोते और कई दूसरे ज़ख्मों स चूर खेंच कर बहार निकले गए...

साथ hi तय जान और उसकी पूरी फॅमिली भी एक गाड़ी से निकलती हुई दादा जान के सामने आ गई

मई -- लीजिये दादा जान... मैंने खुद को साबित कर दिखाया.. अपने पैरों पर खड़ा hi नहीं हुआ.. खंडन के दुश्मन को भी आप के पैरों में ढेर कर दिए. आप का जो बीटा आप से नाराज़ होकर दूर चला गया था.. वह भी आप को लौटा दिए..

और दादा जान को मैंने पहली बार रट हुए देखा.. मुझसे लिपट कर आंसू बहाने लगे.
 


तरतालीसवीं क़िस्त


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दादा जान -- तुमने अढ़ाई बरस पहले जो कहा था. वह सच कर दिखाया.. तुम तो मुझसे भी बढ़कर बन गए बाबू...

मई -- आप का खून मेरी रगों में दौड़ रहा है दादा जान.. जैसे शेर बूढा हो जाय करता है. आप भी बूढ़े हो गए थे. जवान होते तो ज़ोरावर की इतनी हिम्मत थी कह वह हमारे खंडन की इज़्ज़त की तरफ आंख उठा कर देख सकता..

दादा जान मेरे दोनों कन्धों पर हाथ रख थपकते हुए बोले -- आज मैं तेरी शकल में खुद को देख रहा हों..

मई -- मैं बाबू भी हों और रियासत खान भी.. पठान हों.. आप के खून को रुलता हुआ कैसे देख सकता था..

मई नदीम भैया से मिला. वो उनकी ऑंखें नाम थी..

नदीम -- बाबू.. तेरे लिए मई बहुत तड़पा हों.. लेकिन तुझे इस रूप में देख कर मैं बता नहीं सकता, मुझे कितनी ख़ुशी मिल रहे है

दादा जान अपने बड़े बेटे से नयमत खान से मिल रहे थे. और तय जान, दादा जान से सॉरी बोलते जा रहे थे

तय -- पापा!.. नहीं जनता था, ये ज़ोरावर की बेग़ैरती थी.. मुझे माफ़ कर दें. मैंने आप की शान में बड़ी गुस्ताखी कर डाली..

दादा जान -- नहीं.. बीटा.. तुम्हारी कोई गलती नहीं थी.. जो हुआ, दुश्मन की चालाकी से हुआ.. शुक्र है.. ऑंखें बंद होने से पहले तुम मुझे मिल गए

तय मुझे नदीम भैया से लिपटे देख कर फखर और ख़ुशी से बोले -- ये सब बाबू की वजा से मुमकिन हो सका है. पापा हम पठान थे, लेकिन बाबू ने खुद को हमपर बढ़कर सच्चा पठान साबित कर दिखाया है.. बाबू न होता तो मई एक गलत फहमी के साथ उम्र भर आप को कोस्टा रहता.. मुझे माफ़ कर दीजिये पापा..

दादा जान अपने बड़े बेटे से लिपट गए थे.

मई नदीम भाई से बोलै -- कहा सच करने न जाता तो सोचो भैया.. आज खंडन का शेरज़ा hi नहीं बिखरता.. इज़्ज़त भी लूट जाती.. ये सब खुदा की करनी है. मेरे दिल में शायद इसी लिए अचानक से ख़यालात और इरादे बदलने लगे थे. चुप चाप जाना भी उपरवाले की रज़ामंदी थी. मई भी आप के लिए सब के लिए बहुत तड़पा हों.

नदीम भैया के बाद पापा पर नज़र पड़ी. वह पछतावे की आंसू लिए मुझे देख रहे थे. बहुत सजा प् ली थी पापा ने.. मई सब जानता था

मेरा दिल साफ़ हो चूका था. बाप को इससे बढ़कर सजा देना सही नहीं था.. मैं पापा के गले से लग कण में बोलै -- पुराणी साड़ी बातें भूल जाइए.. कुछ आप से गलत हुआ. कुछ मुझसे.. हम दोनों पुराणी बातें भूल कर आज को सेलिब्रेट करेंगे..

(बाबू ज़िंदा जो हो गया था.. कैसे अब दिल में खेद रख कर जी सकता था. अपणु को तड़पा कर जी सकता था.)

पापा ने मुझे शुक्रगुज़ार नज़रों से देखा.. और महमानो और रिश्तेदारों के सामने वह कुछ और नहीं बोल सकते थे. बास ऑंखें नाम किये मुझसे देर तक लिपटे रहे

मेरी नज़र शम्याने की एक झरि पर पड़ी.. और मेरा दिल ज़ोर से धड़कने लगा.. मई समझ सकता था.. सब समझ रहा था..

मई पापा से अलग हुआ. फुफुआ ज़ुबैर और बिलाल खान से मिला.. कुछ और से जल्दी जल्दी मिला

फिर लेडीज शम्याने की ऑर्डर तेज़ी से बढ़ने लगा.. राइफल मैं पहले hi फ़ेंक चूका था.. बाकि ज़ोरावर और दुश्मन सारे अंडर कस्टडी थे.

तभी शामयाना ज़ोर से हिला.. और अम्मी जान की चीखती आवाज़ सुनाई दी

अम्मी जान --- baaaaaaabuuuuuuuuuu

और मैं भाग कर शम्याने में घुस अम्मी जान के बहार निकलने से पहले hi उनसे लिपट गया था.. अम्मी जान मुझसे लिपट मुझे बुरी तरह से चूमने लगी थी..

कई ऑंखें शॉक से खुली पड़ी थी.. बाकि साडी ऑंखें मुझे घेर कर आंसू बहाने लगी थी..

मई देर तक अम्मी जान से लिपटा रहा. अम्मी जान थक hi नहीं रही थी..

अम्मी जान मेरे चेहरे को चुम आंसुओं भरे गले और भीगी आँखों से मुझे देख बोली -- अब तो अपनी अम्मी जान को छोड़ कर नहीं जाओगे न तुम बाबू..

मई -- मैं यहाँ नहीं रह सकता अम्मी जान. मई आज hi यहाँ से जा रहा हों.

अम्मी जान के चेहरे पर मौत की सी ज़र्दी फैलने लगी.. ऑंखें पलटने लगी

मई जल्दी से बोलै - जहाँ मैं जाऊंगा.. वहीँ आप को साथ ले जाऊँगा

सरे रंग वापिस लौटने लगे

मई आगे बोलै -- हम सब ये शहर छोड़ देंगे.. दुश्मन और भी कई हाँ हमारे.. यहाँ हम हंसः सेफ नहीं रह सकते.. हम कराची जाएंगे.. वहां 50कम दूर एक आइलैंड मैंने ख़रीदा है.. हम सब वहीँ रहेंगे.. हमेशा हमेशा रहेंगे..

और अम्मी जान के साथ साथ सब चीख पड़ी -- kyaaaaaaaaaaaa!!.. आइलैंड!!..

मई स्माइल से बोलै -- बाबू अब बिल्लीवारे है अम्मी जान..

और अम्मी जान मुसर्रत की इन्तहा से मुझसे लिपट कर मुझे चूमने लगी..

कई अब भी के बड़बड़ाये जा रही थी. शॉक में आ गई थी सब फ्रेमलेस...

आइलैंड!

सजल बच्ची hi रही.. मेरे कंधे को पकड़ झंझोड़ कर बोली --- तुम सच कह रहे हो बाबू

मई उसे देख -- क्या बाबू अपनी छिपकली से झूट बोल सकता है

छिपकली कहने पर उसका मोह ज़रा सा टेढ़ा hau..fir जल्दी से बोली -- अगर तुम सच मच आइलैंड के मालिक बन चुके हो तो मैं तुझे मुझे छिपकली कहने पर माफ़ कर सकती हों..

मई -- तो फिर तुम.. छिपकली.. छिपकली.. छिपकली.. छिपकली.. छिपकली..

वो ख़ुशी से नाच उठी -- याआआअहूऊओ.. हमारा आइलैंड

और किन्ज़ा अम्मी जान से मुझे खेंच अलग करती हुई मुझसे लिपट कर फूट फूट कर रोने लगी

किन्ज़ा -- नजीब धोकेबाज़ था निकला बाबू.. तुमने मुझे बचा लिए बाबू...

मई उसके सर को सहलाता हुआ बोलै -- अपनी एपीआई की ज़िन्दगी बर्बाद कैसे होने दे सकता है बाबू.. बाबू का अनमोल प्यार क्या मज़ाक है.

किन्ज़ा एपीआई मेरी आँखों में रोटी हुई देख बोली -- ी लव यू बाबू... तुमने सच्चे मुहाफ़िज़ होने का साबुत दे दिए.. ये किन्ज़ा को तुम पर हमेशा फखर रहेगा..

किन्ज़ा के बाद माहिरा मुझसे लिपट खूब रोइ.. फिर फुफु.. फिर उसके बाद हिना खान और सजल मुझसे मिली. सजल सब के सामने मुझसे गले मिली तो शर्माने लगी

अम्मी जान अपने आंसू साफ़ करती हुई बोली -- शर्मा ले जितना शर्माना है.. इसे तो मई अपनी बहु कभी नहीं बनाउंगी..

और सजल सच मच बच्ची hi निकली -- आप जो मर्ज़ी कर लें.. मैं तो आप की बहु बांके hi रहूंगी.. अब

और अपनी बात को समझती फुफु से लिपट कर उनकी छाती में मोह छुपा गई. सब ज़ोर से हसने लगी

रुखसाना आंटी वही थी. मेरे चेहरे को थाम मेरे माथे को चूमा.. फिर मेरे सर को अपनी छाती से लेटती हुई बोली -- उस दिन मैंने सही तुम्हे पहचाना था बाबू बीटा.. तुम सच मच सच्चे मुहाफ़िज़ निकले..

मई -- आप जैसी माँ की दुआएं का सदक़ा है सब अम्मी जान

मैंने उसे भी अम्मी जान कहा तो उनका मोह खुल गया..

फिर वह जज़्बाती हो गई. और इस बार अम्मी जान के जैसे मुझे अपनी आग़ोश में भर सिसकने लगी..

उनकी तीनो बेटियां एक बहु और 3 दूसरी करीबी रिश्तेदार लड़कियां सब मुझे स्माइल और चमक से देख रही थी.. आज सब की सब बिना नक़ाब के थी. सब की सब एक से बढ़कर एक हसीं लग रही थी..

किसी ने कहा -- अब क्या होगा. पहले वाला दूल्हा तो फेक निकला. अब क्या ऐसे hi सब--

वह अपनी बात अधूरी छोड़ गई

रुखसाना आंटी मुझसे बोली -- बाबू बीटा.. अगर तुम्हे बुरा न लगे तो मई मेरे बेटे हुमायूँ शाह से किन्ज़ा बेटी का निकाह चाहती हों.

मई -- आप ने अब सोचा है अम्मी जान. मैं पहले hi सोच कर आया हों.. ऐसा मेरे दिल की राजा भी थी.. आज से नहीं, जिस दिन आप से मिला था. उसी दिन से.. आप की फॅमिली से जुड़ना हमारी खुश नसीबी होगी अम्मी जान

और वह ऐसे खिल उठी. जैसे ज़माने भर की खुशियानं मैंने उनके दिल में दाल दी हों. उनकी बियाँ एक बहु और दूसरे लड़कियां सब खिल उठी थी..

बातें होने लगी. सब खुसर फुसर करने लगी.

किन्ज़ा एपीआई शर्माने लगी. लेकिन उनकी आँखों में मेरे लिए कुछ था. वह मुझसे कुछ कहना चाहती थी

मई उन्हें साइड ले गया -- क्या बात है

उन्हें पसीना आने लगा

मई खुल कर बोल गया -- आप के दिल की बात से बाबू कैसे अनजान रह सकता है किन्ज़ा एपीआई.. आप के दोनों दरवाज़े मैं hi खोलूंगा.. देखना मैं कैसे हुमायूँ को चक्कर देता हों.. सब सेट हो जायेगा

और किन्ज़ा एपीआई बुरी तरह से शर्माती हुई भाग कर अम्मी जान से लिपट गई

अम्मी जान उसे पाचकरति हुई मुझसे बोली -- बाबू इसे क्या हुआ

मई -- दूल्हे को सोच कर शर्मा गई है किन्ज़ा एपीआई

और सब है पड़ी

मई बहार मर्दों में गया. और इस बार मैं पहली बार हुमायूँ से मिला..

मई उसे साइड ले गया... और अंदर जो बात हुई वो उसे बता दी. वो सुनकर पहले चुआनका.. फिर उसके चेहरे पर ख़ुशी फूट निकली

लेकिन मई सीरियस रहा. वह कुछ उलझा

मई -- हुमायूँ भाई.. आप के दौर के तक़ाज़े आप तो जानते hi होंगे.. मॉडर्न ज़माना है.. कीज़्ना एपीआई नजीब से लव करती थी. शादी टूटने पर खुश भी हाँ और दुखी भी.. खुश इसलिए है, वो फ्रॉड साबित हुआ.. और हमेशा के लिए दलदल में जाने से बच गई.. दुखी इसलिए है.. आज कल की लड़कियां लड़के लव करते हुए शादी से पहले hi बहक जाते है.. और मुझे कुछ महीनो पहले hi टर्की में रहते इलम हुआ था.. फिर मई बिजी हो गया... किन्ज़ा एपीआई नजीब की चाहत में कुछ आगे बढ़ गई थी. आप समझ सकते हाँ तो ठीक है. मैं डिटेल मैं नहीं जाऊँगा.. ऐसी सूरत में भी किन्ज़ा एपीआई आप को क़ुबूल है तो निकाह आज hi होगा.. और रुखसती कुछ वक़्त बाद..

हुमायूँ ने एक पल के लिए सोचा फिर बोलै -- मुझे कोई ऐतराज़ नहीं हुआ बाबू.. मई किन्ज़ा को गलत नहीं कहूंगा.. आज जो हुआ, न होता तो जो किन्ज़ा ने किआ, वो निकाह हो जाने पर सही हो जाता.. इसलिए मेरे दिल में किन्ज़ा की इज़्ज़त पहले जैसी hi रहेगी.. अगर कहूं तो पहले से बढ़ जाएगी.. मुझे तो उम्मीद नहीं थी. वह मुझे मिल सकती है. फिर अम्मी जान तो किन्ज़ा की मुझसे भी ज़यादा दीवानी हैं.

मई -- अंदर आप की साडी फॅमिली खुशियां मन रही है.. और रुखसाना अम्मी जान ने खुद से किन्ज़ा एपीआई के निकाह के लिए बोलै था. सच कहूं तो पहली बार रुखसाना अम्मी जान से मिलते hi मेरे दिल में ऐसा hi ख्याल आया था. लेकिन बात अलग निकली. और नजीब धोकड़ेबाज़ निकला....

बात बन गई थी. मेरी बहन किन्ज़ा अब पहले मेरी होती. फिर हुमायूँ को मेरी झूटी मिलती.. और उसके बाद किन्ज़ा मुझे हमेशा मिलती रहती.. और हुमायूँ को हवा भी नहीं लगती...

सब को बता दिए गया....

फिर निकाह की तैयारियां की जाने लगी

लेकिन मई एक बार फिरसे बोल पड़ा --- निकाह एक नहीं चार होंगे.

और सब के मोह खुल गए.. चाकर...

फिर एक दूसरे को देखने लगे. सब उलझन गए थे. अंदर अम्मी जान और सब भी हैरान थी

अम्मी जान ने मुझे बुलाया और बोली --- बाबू ये क्या है.. मेरी तो कुछ समझ में नहीं ा रहा है.. किन्ज़ा और हुमायूँ एक जोड़ा है. निकाह भी एक होगा.. बाकि के तीन जोड़े किधर हाँ. कोण हैं..

मई स्माइल से देखने लगा -- आप के लिए बिग सरप्राइज है अम्मी जान

और मैंने किसी को कुछ नहीं बताया...

कुछ देर में कई गाड़ियां और आती दिखाई दी..

जब करीब आए तो तीन दुलहने एक hi गाड़ी से बहार निकलती दिखाई दी.

सब के मोह हैरत से खुल गए थे..

ये बेज़ा, हज़ल और मेरे तय की बेटी पालवश थी.. तीनो के साथ मेरे अकेले का निकाह होने वाला था... दूल्हा एक और दुल्हन तीन.. बेज़ा की पूरी फॅमिली आई थी..

जिसे देख सब सर खुजाने लगे थे.. सब अभी तक अनजान थे

फिरसे अम्मी जान ने मुझे अंदर बुलवाया

मई स्माइल से बोलै -- क्या है अम्मी जान.. आप बार बार क्यों मुझे मर्दों के बीच में से बुलवाने लग जाती हैं

अम्मी जान मुझे घूरने लगी -- एक तो तुम सस्पेंस में रखे हुए हो. ऊपर से तुझे बुलवाऊं भी नहीं..

दादी जान से भी मैं स्पेशल मिल चूका था.. मेरे दिल में अब उनके लिए भी कोई खेद नहीं था. वो भी खिल उठी थी

मई -- दादी जान.. आप को भी जानना है

दादी जान मेरे गाल को सहला कर बोली थी -- क्यों मेरा हक़ नहीं बनता है

इतनी देर में सब तुर्किश लेडीज और तीनो दुल्हनें अंदर आ गई.. सब उन्हें देख कर घेरने लगी

मई -- अम्मी जान ये तीनो दुल्हन मेरी हाँ.. तीनो आप की बहुएं हाँ. एक तय की बेटी पालवश है..

पालवश की माँ, मेरी तै और उनकी दूसरी 2 बेटियां और 3 भाभियाँ सब भी वही थी.. तै की फॅमिली भी आ गई थी..

फिर सब को शार्ट में डिटेल दी गई

अब सब के मोह हैरत से खुल गए थे.. एक साथ मेरा तीन तीन से निकाह

सब लड़कियों के मोह हैरत से खुल गए थे

मई सजल को देख बोलै -- नाहीई.. सॉरी गलती हो गई.. तीन नहीं चाकर.. मुझे सजल से भी आज hi निकाह पढ़वाना है..

और सजल ख़ौफ़ज़दा होती हुई उछाल पड़ी. और भाग कर अपनी अम्मी यानि मेरी फुफु के पीछे जा छुपी

रोने लगी -- नाहीइ.. मुझे नहीं करना तुम्हारे साथ निकाह.. पहले hi तीन से कर रहे हो.. मई क्यों करूँ तुमसे निकाह..

मई -- लेकिन मई तो करूँगा..

सजल रोने लगी -- मुझे नहीं करना.. अम्मी मुझे घर जाना है

और सब ज़ोर से हसने लग पड़ी.. फिर सब की हसी तब थमी.. जब तीनो दुल्हनों के घूंघट उठाये गए..

तीनो एक से बढ़कर एक हसीं थी.. लेकिन बेज़ा का हुसैन.... आठ दिन में hi चाँद धरती पर उतर आया था..

अम्मी जान, दादी जान, फराह भाभी, माहिरा एपीआई, किन्ज़ा एपीआई, फुफु, सजल और हिना खान.. सब के मोह खुल गए थे.. सुई भी गिरती तो आवाज़ आती... ऐसा सन्नाटा छा गया था..

मैं अजीब सी ख़ुशी महसूस होने लगी. दुन्या का सारा हुसैन मेरी झोली में आ गिरा था..

फराह भाभी मेरे कण में बोली -- तुमने तो कहा था.. बेज़ा हसीं है.. ये तो पागल कर देने वाले हुसैन की मालिक है

मई -- चुप करो भाभी. किसी को पता चल गया न.. मई रेगुलर आप के कांटेक्ट में रहा हों.. तो फिर आप की खैर नहीं

और फराह भाभी घबरा कर कुछ फैसला रख कर कड़ी हो गई..

फराह भाभी का बीटा मेरा बीटा था.. मई टर्की जाने से पहले लाहौर आया था. और फराह भाभी ने बोल दिए था. मेरे साथ आगे बढ़ hi चुके हो तो पूरी तरह आगे बढ़ो.. फिर मैं और फराह भाभी इतने आगे बढे.. भाभी प्रेग्नेंट हो गई. और मेरे बेटे की माँ बन गई.

 


चवालीसवीं क़िस्त

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आफ्टर 1 वीक

मई -- तोह फिर!... अब!.. क्या कुछ आ रह है आप के दिल में अम्मी जान!.

अम्मी जान इधर उधर देख एक झुंझारी लेती हुई मुझसे लिपट कर बोली

अम्मी जान -- उफ्फफ्फ्फ़ बाबू.. मैं कैसे बताऊँ.. रोमांस का माहौल भी है और दहशत का भी.. तुम मुझे इतनी दूर आइलैंड से कई किलोमीटर दूर इस मोटर बोट पर ले आये हो.. सोच कर hi दिल में घबराहट होने लगती है. दिल की धड़कन थमने लगती है.. ये सोच कर दिल हौलने लगता है. अगर मोटर बोट वापिस से स्टार्ट न हुई. हम आइलैंड वापिस न जा सके. बीच समंदर में hi फँस कर रह गए... तोह??..

और मैं अम्मी जान को प्यार से देखता हुआ एक हाथ से कमर को पकड़ एक झटका देता हुआ उन्हें अपने सीने से लगा गया. अम्मी जान के भरी कैसे हुए मुम्मे मेरे सीने नाल vajje..(seene से लगे).. तो अम्मी जान सिसकारी ले कर रह गई

मेरी आँखों में देख शर्माने लगी

मई -- मैं तो हर लम्हे को आप के लिए यादगार बना देना चाहता हों अम्मी जान. यहाँ कोई नहीं है. दूर दूर तक नीले समंदर के कुछ नहीं है. ये मोटर बोट है. ये सुहाना मौसम है, तन्हाई है.. मैं हों और आप हो..

अम्मी जान के गाल सुर्ख होने लगे शर्म से

मई अम्मी जान के गाल को चुम बोलै -- बाबू के होते हुए भी डर रही हैं आप.. क्या अपने बाबू को जानती नहीं हाँ आप..

अम्मी जान भी प्यार से मुझे देख रही थी. मेरी आँखों के समंदर में उतर रही थी

अम्मी जान -- जानती हों.. मेरे बाबू को मुझसे बेटर कोण जान सकता है भला.

मई -- फिर ये डर कैसा

अम्मी जान -- अपने बाबू का साथ मुझे सौ साल, हज़ार साल और चाहिए. ये समंदर कहीं किसी उन्होनी के चलते हमारे लम्हों को निगल न ले.. ये सोच कर डर लगने लगा है

मई --- बाबू आप के पास है तो डर को भगा दीजिये.. मैं आप को यहाँ इसलिए लेकर आया हों. आप के साथ का नया ये सफर यादगार सफर बन जाए.. आइलैंड पर हमें वह मज़ा नहीं मिलता. जो यहाँ मिलेगा.. वहां ये अहसास दिल से जाएगा नहीं.. कोई अस्स पास है.. यहाँ चरों ऑर्डर सिवाए पानी के कुछ भी नहीं है.. दूर नज़रों के सामने आइलैंड एक सब्ज़ धब्बे के शिव कुछ दिखाई दे रहा है. हम दोनों एक दूसरे में गम होकर नयी दून्यों को दरयाफ्त करेंगे.. क्यों ??.. दिल में गुदगुदी होने लग गई है न

और अम्मी जान बुरी तरह से शर्माती हुई मेरे सीने में मोह छुपा गई.. मैं दोनों बाहें अम्मी जान के गिर्द पूरी तरह से लपेट ता हुआ अम्मी जान को खुद में कसने लगा

ऐसा पहले कुछ नहीं सोचा था मैंने.. लेकिन बिल्लीवारे बनते hi मैंने सोच लिए था.. अम्मी जान के साथ नए रिश्ते का शुरूआती सफर में ऐसे hi मुनफ़रद अंदाज़ में करूँगा..

अम्मी जान और मेरे, हम दोनों के दिल की धड़कने बहुत फ़ास्ट चलने लगी थी

फिर अम्मी जान ने सर उठा कर मेरी आँखों में देखा. तो उनकी आँखों में दुन्या यहाँ का प्यार था मेरे लिए.. धरती के सारे रंग उनकी आँखों में उतर आये थे.. दुन्या भर की शराबों का नशा उनकी आँखों में दिखाई देने लगा था

मई बड़ी महवियत से अम्मी जान को देखने लगा. और अम्मी जान हर बार बार शर्माए जा रही थी.. मई उनके चेहरे को थाम अपने होंठ उनके होंठ से मिला गया

और अम्मी जान शर्म जज़्बात से कैंप उठी.. लेकिन मेरे होंटो को चूसने के मामले में वह पीछे नहीं रही.

लहरों पर मोटर बोट हिचकोले खा रही थी. हिचकोले कहती मोटर बोट के साथ हम भी हिलते हुए किश किये जा रहे थे.. और मेरा पप्पू भी अम्मी जान की फुद्दी की गर्मी प् कर मूड में आता जा रहा था..

यकीनन अम्मी जान के साथ पहला मिलान अनोखा लुत्फ़ देने वाला था..
 
सिंपल समझने वाली बात थी भाई.. कोई भी समझ नहीं सका अब तक.. जब से फ्रोज़ खान बाबू बना है... बाबू का किसी के साथ सेक्स नहीं दिखाया गया है. फुल फोकस अम्मी जान पर है.. और उसी का फर्स्ट हक़ भी बनता है. फराह बाबू के बेटे की माँ बन गई.. उसका सेक्स भी नहीं दिखाया गया है अभी तक.. फर्स्ट सन बना था, जब शलवार पहाड़ कर थोड़ा सा बोल कर पूरा दाल दिए था. वह भी फुल सेक्स नहीं था...

सब की सेक्स डिटेल आफ्टर बाबू वस अम्मी जान सेक्स के साथ hi दिखाई जायेगी

और अभी बाबू का निकाह hi हुआ है. रुखसती की तो बात लिखी hi नहीं गई. सुहागरात कैसे मनाई और दिखाई जाए.. :दद:

फराह का ज़रूर फ्लैशबैक दिखाया जाएगा कुछ डिटेल के साथ.. पालवश की कहानी भी ज़रूर लिखी जायेगी.. और पालवश बाबू की फॅमिली फ्रेमलेस के बाद फर्स्ट है..

पालवश वह है. जो बाबू की कोई बहन भी नहीं है. बाबू की अम्मी जान के बाद समझ लें, फॅमिली में टॉप लेडी है.. वेट करिये :वेटिंग1:
 


पेंतालीसवीं क़िस्त


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एक डीप किश के बाद मई और अम्मी जान दोनों एक दूसरे को देखने लगे

अम्मी जान की आँखों में शर्म के रंग गहरे थे. लेकिन प्यार की रंगों की कोई हद नहीं थी. ऐतमाद से कड़ी पुरे हक़ से मेरी आँखों में देखने लगी.

मई -- अम्मी जान

अम्मी जान भी मेरे जैसे अंदाज़ में बोली -- मेरा बाबू

और हम दोनी hi मुस्कुरा पड़े

मई -- अम्मी जान लाइफ के ये लम्हे किस कदर हसीं हाँ न

अम्मी जान -- हाँ बाबू.. इस कदर हसीं हाँ. ऐसा लग रहा है. मई और hi दुन्या में हों अपने बाबू के साथ. इस दुन्या का कोई भी अहसास नहीं है. सब कुछ अनोखा है. हर अहसास बहुत बढ़कर है. ये चल रही हवाएं भी ऐसी गुनगुणाती हुई पहले कभी नहीं लगी थी.

मई -- पहले भी हमारे बीच बहुत कुछ हो चूका है अम्मी जान. लेकिन आज की फीलिंग्स और लज़्ज़त ो सुरूर की कोई हद नहीं है

अम्मी जान -- हाँ बाबू.. सही कहा तुमने

मई होंटो पर जुबां फेर उनके होंटो को देखने लगा

अम्मी जान शर्मा गई -- क्या देख रहे हो बाबू. इनका रास तो तुम निचोड़ चुके हो

मई -- अम्मी जान आप खुलने लगी हाँ

अम्मी जान -- हाँ बाबू.. तुम गए तो मई बदल गए. अचानक से हुई प्रेगनेंसी ने मेरी सोचों को बदल कर रख दिए. शोहर से भी जो औरत न खुल सके. वह अपने लवर के साथ खुल जाया करती है. यही असली लुत्फ़ वाली ज़िन्दगी है. ऑंखें तो सब hi बयां कर दिए करती हाँ. लेकिन जुबां का इस्तेमाल दिल के हाल को बताने में सही रोले ऐडा करते हाँ. मई बहुत खुश हों बाबू. मई साडी की साडी बदल चुकी हों. तुम्हारे प्यार ने, अनमोल प्यार ने मुझे टीनएज लड़की बना दिए है. तब जो जो अहसासात थे न मेरे. वह सरे के सारे लौट आये हाँ.

मई -- मई देख रहा हों. सच में आप साडी की साडी बदल गई हाँ. और पहले से बहुत ज़यादा हसीं और प्यारी लगने लगी हाँ

अम्मी जान -- अपने बाबू के लिए इतना भी न करूँ मैं. बहुत दुःख दे लिए मैंने अपने बाबू को.. ये तो मेरा बाबू था. जो सारे गीले शिकवे भूल कर फिरसे मेरे प्यार को एक्सेप्ट कर गया. मेरी काम अक़्ली से जो सुख मुझसे छीन रहे थे. तुम वह सारे सुख मुझे लौटने आ गए.. अब मुझे किसी बात की कोई परवा नहीं है.

मई - मई जनता हों. और मेरा अनमोल प् कर जहाँ आप और सब सिवाए मेरे अब किसी और को नहीं सोच पते हाँ. मई जो पहले हवसी था--

अम्मी जान ने तड़प कर मेरे मोह पर हाथ रख दिए

अम्मी जान -- नहीं बाबू. अपने लिए, अपने अनमोल प्यार के लिए ऐसे हत्या और सस्ते वर्ड्स उसे मत करो..

मई -- पहले ऐसा hi था मैं. आप सब के अनमोल प्यार ने मुझे बदल दिए. मेरे अंदर से हवस को हटा कर अनमोल प्यार को भर दिए.. लाइफ बहुत खूबसूरत होने लगी. और आज.. आज लग रहा है. इस लाइफ जैसे हज़ारों ज़िन्दगियों भी मुझे और मिलें तो काम हाँ

अम्मी जान मेरे लफ़्ज़ों पर कुर्बान होती निगाह से मुझे देखने लगी. फिर मुझसे लिपट कर मेरे होंटो को चुम कर बोली -- हाँ हज़ारों ज़िन्दगियों भी काम है. वैसे तो तेरे संग एक एक लम्हा hi बहुत काफी हो जाया करता है. लेकिन ये दिल.. आठ इस दिल को तेरी छह हर दम रहने लगी है.

मई -- मुझे भी..

और हम फिसरे किश करने लगे.. डोलती मोटर बोट में किश का अलग hi मज़ा मिल रहा था.. हम गिर नहीं सकते थे. मोटर बोट बड़ी थी. और सेफ्टी ग्रिल्स लगी हुई थी

डीप किश के बाद हम अलग हुए तो हमारी आँखों में एक दूसरे की तस्वीर थी

मई अम्मी जान को छोड़ 2 क़दम पीछे हैट अम्मी जान को नीचे से ऊपर तक देखने लगा

अम्मी जान शर्माती हुई बोली -- क्या देख रहे हो बाबू

मई आशिक़ाना अंदाज़ में बोलै - अपनी मेहबूबा की खूबसूरती को देख रहा हों

और अम्मी जान खिलती हुई बोली -- तो कैसी लगी मेरे बाबू को अपनी मेहबूबा

मई -- सही से दिख नहीं रही है

अम्मी जान भी मस्ती में आती हुई बोली - तो मई मेरे बाबू को कैसे सही दिखूंगी

मई समंदर से पानी खेंचने वाली मोटर को स्टार्ट करता हुआ पाइप पकड़ गया

मई फुल मस्ती में आ चूका था -- ऐसे

पानी एक फुवार की सूरत अम्मी जान पर बरसने लगा

और अम्मी जान खिलखिला कर हसने लगी.. अपने बदन को भीगने से बचने लगी. मैं पाइप का रुख बदल बदल कर अम्मी जान के पुरे बदन को भिगोने लगा

मई -- ऐसे तो आप अपने बदन के कपडे उतार कर मुझे अपने गोर अनमोल बदन का दीदार नहीं करवाएंगी.. सोचा कपडे भिगो कर hi आप के गोर बदन की झलक देख लूँ

अम्मी जान की शर्म बढ़ चुकी थी. कपडे भीग कर बदन से चिपक चुके थे. गोरा बदन बारीक सूट के अंदर से झांकता दिखाई देने लगा था.. ब्रा पंतय.. उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़

मई मोटर बंद किये पाइप को छोड़ अम्मी जान के भीगे हुसैन को देखने लगा.

और अम्मी जान अपनी ज़िन्दगी की सबसे बढ़ी हुई शर्म में डूबती सर झुकाये मुस्कुराने लगी थी.

मई बेखुद हुआ एक एक क़दम चलता हुआ अम्मी जान के करीब होने लगा. और शर्म लज़्ज़त ो सुरूर से अम्मी जान का वजूद कंपनी लगा.

 


पेंतालीसवीं क़िस्त

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अम्मी जान के भीगे लिबास के अंदर से झांकता गुलाबी बदन सूरज की किरणों से सुनहरा दिखाई देने लगा था. मैं सहारजादा सा हुआ अम्मी जान के सुनहरे बदन को देख एक एक क़दम चलता हुआ अम्मी जान के पास जा पोहंचा.. अम्मी जान की रेड ब्रा और रेड पंतय के अंदर छुपे बदन के शिव अम्मी जान का पूरा जिस्म नज़र ा रहा था. मेरा लुंड तो पहले hi अकड़ चूका था.. अंडरवियर पहाड़ कर बहार आने को बेताब होने लगा था. लेकिन मैं अम्मी जान के कपड़ों के अंदर से झांकते बदन को देख अपने लुंड को भूल गया था. पलकें तक झपकना भूल गया था. आठ होश बाकि रह भी कैसे सकते थे. अम्मी जान, जिसके बदन को ऐसे शायद पापा ने भी नहीं देखा था. मैं खुश नसीब था, जो बीटा होते हुए अम्मी जान की तमाम तर चाहतों को पाने के बाद समंदर के बीच ो बीच अम्मी जान के बदन को देख रहा था..

अम्मी जान के गुलाबी गालों की रंगत और भी ज़यादा गहरी होने लगी थी. अहह अम्मी जान..

मेरे हाथ उठे और अम्मी जान के मुम्मों पर जा पोहंचे..

मई मदहोशी में बोलै -- अम्मी जान.. आप तो यहाँ से सबसे ज़यादा खूबसूरत हाँ.. फिर एक हाथ अम्मी जान की पंतय पर रखता हुआ फुद्दी पर फेर गया

मई -- और यहाँ से भी.. इन दोनों जगहों से मेरा गहरा नाता है अम्मी जान.. आठ अम्मी जान आप कितनी ज़यादा हसीं हाँ... आप का संग इ मर्मर से तराशा हुआ बदन कितना चमकदार है.

अम्मी जान के गाल और होंठ फड़फड़ाने लगे. पलकें कंपनी लगी. वह कुछ बुल नहीं पाई.. शर्म भरी मीठी निगाह से मुझे देखती जा रही थी.

मई दोनों हाथ मुम्मों पर रखता हुआ ब्रा को कमीज़ समेत ऊपर उठा गया. और आअह्ह्ह

अम्मी जान के गोर कैसे हुए भीगे मुम्मे मेरी आँखों के सामने आये, भोरे रंग वाले निप्पल अकड़े दिखाई दिए तो मैं एक हाथ अपने दिल पर रख सिसकारी ले कर रह गया

अम्मी जान होंठ दबा कर अपनी मुस्कान को दबा गई. नज़रें झुका कर शर्मा गई

मैंने दोनों चुटकियों में अम्मी जान के दोनों निप्पल्स पकड़ लिए..

अम्मी जान को देखता हुआ बोलै -- अम्मी जान अपने बाबू की आँखों में देखिये न

अम्मी जान की शर्म से कनपटी आवाज़ सुनाई दी -- m-mujhe.... बाबू मुझे बड़ी शर्म आ रही है

मई झुका और एक निप्पल मोह में लेकर चूस गया

अम्मी जान -- आह्हः बाआआअबूउउउ

अम्मी जान का हाथ मेरे सर पर आया और मुम्मे पर डाब गया..

मैं दूसरे निप्पल को मोह में लिए चूस गया.. अम्मी जान फिरसे सिसक पड़ी. फिरसे मेरे सर को अपने मुम्मे पर दबा गई

मई -- बहुत मस्त हाँ ये आप के अम्मी जान

अम्मी जान शर्म से कनपटी आवाज़ के साथ बोली -- मुझे भी आज अहसास हुआ अम्मी जान के बाबू..

अम्मी जान जो शायद पहले तहैय्या किये हुए थी. मेरी आँखन में देखती रहेंगी. लेकिन नहीं देख प् रही थी. बार बार देखती और बार बार पलकें गिरा देती थी

मई कमीज़ के पल्लू को ऊपर करता शलवार और पंतय को एक साथ पकड़ता हुआ नीचे कर गया.. अम्मी जान लरज़ उठी.. कपकपा उठी.. समंदर में दोल रही मोटर बोट पर उनके बेटे ने उनकी फुद्दी आगे से और गांड पीछे से नंगी कर दी थी..

मैं पंतय नीचे करने के बाद फुद्दी और गांड नंगी करने के बाद अम्मी जान को बाज़ुओं से पकड़ कर घुसा गया.. अम्मी जान घूम गई

मई अम्मी जान की गांड देखने लगा. चूतड़ देखने लगा. भरी चूतड़ गीली और कैसे हुए थे

मैं -- मई जनता हों आप की तरफ से मुझे साड़ी इज़ज़तें मुयस्सर हाँ अम्मी जान. फिर भी इजाज़त चाहूंगा. क्या मैं आगे बढूं

और अम्मी जान थोड़ी सी आगे को बेंड हुई लरज़ते लहजे में बोली -- हम्म्म

मई - उफ्फ्फ अम्मी जान आप की ये शर्म मेरे शौक और जज़्बातों को बहुत बढ़ा रही है

मई नीचे बेथ गया.. अम्मी जान ने एक हाथ से रेलिंग को पकड़ लिए.. खुद को बैलेंस कर लिए.. यहाँ वह गिर सकती थी.. बड़े भयंकर मंज़र में उनका बीटा जो कुछ उनके साथ करता जा रहा था. वो समंदर से भी भयंकर था.. वो खुद के काबू से बहार होती हुई समंदर में जा गिर सकती थी

मई अपने नंगे हाथ अम्मी जान के भीगे चमकते चूतड़ों पर रख दिए..

अम्मी जान सिसक पड़ी.. कैंप उठी.. एक हाथ मेरे हाथ पर रख गई.. ये वाला सन hi बहुत काम कमल का था. अम्मी जान का नंगा चूतड़.. दोनों चूतड़ों पर मेरे हाथ.. चूतड़ पर धरे एक हाथ पर अम्मी जान का लरज़ता कांपता गोरा हाथ..

मई अम्मी जान के हाथ को चुम्म गया.. अम्मी जान झट से अपना हाथ हटा गई.

मई अम्मी जान के नंगे चूतड़ों पर हाथ फेरता हुआ किश करने लगा. अम्मी जान अपने होंठ भींच गई थी. वर्ण सिसकियाँ उनके काबू से बहार होने लगी थी.. और अभी हमारे नई रिश्ते की शुरुआत थी.. अम्मी जान की शर्म की कोई हद नहीं थी

दोनों चूतड़ों पर अच्छे से हाथ फेरने के बाद, चूमने के बाद मैं चूतड़ खेंच अम्मी जान की गांड की दरार को खोल गया.. तभी अम्मी जान भी शर्म और जज़्बात से कैंप उठी. आगे को थोड़ी सी और झुक गई. अम्मी जान की गांड का सुराख़ मुझे साफ़ दिखाई दे गया. गांड साइड से थोड़ी डार्क ब्राउन थी.. मैं समझ सकता था. हम साले पठान अपनी औरतों की फुद्दी काम और गांड ज़यादा मारा करते थे..

अम्मी जान की गांड का सुराख़ बंद था.. टाइट और कैसा हुआ था.. काफी टाइम से खुला नहीं था. पापा का लुंड गया नहीं था.. आठ

मेरे मोह में पानी भरना लगा..

मई खुद को रोक नहीं पाया और अम्मी जान की गांड के सुराख़ पर जुबां की नोक रख गया

अम्मी जान इस बार हिली भी और सिसकारी लेती हुई बोली -- आठ बाबू.. तुम भी पठान निकले

मई गांड से जुबां की नोक हटते हुए बोलै -- हाँ.. हों मई भी पठान. लेकिन मई आप के लिए वह करूँगा. जो आप के दिल की चाहत है. मई तो बास अभी आप को प्यार कर रहा हों.. ज़यादा प्यार आगे से hi करूँगा.. और आज पहले आगे से hi करूँगा

अम्मी जान शर्म से -- हम्म

मई -- मई जनता हों. आप को आगे की चाहत ज़यादा है.. लेकिन पीछे से भी आप आदि हो चुकी होंगी.. मई दोनों तरफ से आप को सुख दूंगा.. आप के बदन का ज़र्रा ज़र्रा मेरे लिए अनमोल है.. आप मेरी आँखों से नहीं देख सकती अम्मी जान अपने संग इ मर्मर से तराशे हुए बदन के हुसैन को. धुप से आपकी स्किन चमकती हुई ऐसी सुनहरी और दिलकश हो गई है. पीछे से आप को देख कर मैं खुद को संभल नहीं प् रहा हों

जज़्बातों के मचलने से अम्मी जान की कनपटी आवाज़ उभरी -- समझ सकती हों..

मई फिरसे गांड को चुम कर खड़ा हुआ. अपने कपडे उतरने लगा..

कपड़ों की सरसराहट पर अम्मी जान के बदन में कपकपाहट बढ़ गई थी. अब वो लम्हे आने वाले थे. जिन के इंतज़ार में एक मुद्दत गुज़र गई थी

मई अपने खड़े नंगे लुंड को पकड़ कर मसलता हुआ अम्मी जान की गांड और गांड के नीचे से झांकती गुलाबी फुद्दी देखने लगा

फिर दूसरे हाथ को अम्मी जान की फुद्दी पर रख एक ऊँगली फुद्दी के लबों में आगे को फेर गया

अम्मी जान -- आअह्ह्ह बाअबूउ.. उम्म्म उफ्फ्फ

अम्मी जान और भी आगे को बेंड हो गई.... मई फिरसे बैठा और इस बार अम्मी जान की फुद्दी पर होंठ लगता हाउ फुद्दी को चाटने लगा

अम्मी जान कहाँ मेरी जुबां की ताब ला सकती थी.. रेलिंग को सख्ती से पकड़ती हुई कुछ झुकती चली गई..

फुद्दी चाटने में अलग hi चार्म मिल रहा था. लेकिन अभी मुझे अपनी और अम्मी जान की असली तड़प का बखूबी अहसास था.. इसलिए फुद्दी चाटनी छोड़ कर मई फिरसे खड़ा हुआ और अपने लुंड को पकड़ कर अम्मी की फुद्दी के सुराख़ पर लगता हुआ हिलने लगा.. गीली फुद्दी और भी गीली होने लगी.. मेरा सख्त लुंड अम्मी जान की फुद्दी से लगा तो अम्मी जान को करंट का झांकता लगा था

अम्मी जान थोड़ी सी और झुकी और एक हाथ पीछे लाने के बाद फ़ौरन hi आगे को ढीला छोड़ गई थी.. अम्मी जान की भरी साँसे तेज़ चलने लगी थी

मई कुछ देर लुंड को रगड़ने के बाद अम्मी जान की कमर पकड़ गया

मई -- अम्मी जान खुद को संभालिएगा.. और सामने समंदर का नज़ारा करिये.. अपने बाबू, और बाबू के बाबू को याद करियेगा.. दोनों बाबू आप को बहुत सारा मज़ा देने वाले हाँ

अम्मी जान -- हाँ बाबू

अम्मी जान की आवाज़ भरी हो चुकी थी -- दोनों बाबू मुझे बहुत मज़े देने वाले हाँ.. और इन लम्हों के इंतज़ार में बड़ा तदपि हों

मई - तभी तो जल्दी कर रहा hon.warna आप के सुनहरी बदन की पूरी ज़ियारत से पहले मैं ये स्टेप कैसे ले सकता था

ा

अम्मी जान तेज़ चलती सांस के साथ बोली -- अब करो बाबू

और मैं अम्मी जान की तड़प को समझता हुआ अपने लुंड को उनकी फड़फड़ा रही रही फुद्दी के सुराख़ में पुश करता चला गया.. मोठे लुंड का मोटा सर अम्मी जान की फुद्दी में फस्स चूका था. फुद्दी को खोलता हुआ अंदर जाने लगा.. थोड़ा सा hi गया था.. रुक गया. कहीं फस्स गया था

अम्मी जान -- आठ बाबू..

मई -- दर्द हो रहा है

अम्मी जान -- हाँ बाबू

मई -- दर्द मज़ा देता है न

अम्मी जान - बहुत ज़यादा

मई -- तो दर्द काम दूंगा के ज़यादा

अम्मी जान -- मज़ा ज़यादा दो बाबू

और मैं अम्मी जान की कमर को कसके पकड़ता हुआ एक ज़ोर का धक्का मार गया

अम्मी जान चीख पड़ी -- aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

समंदर लहरें मोटर बोट के बहार हलचल मचाये हुई थी. मेरा लुंड मोटर बोआर के अंदर हलचल मचने लगा

आधा लुंड अम्मी जान की फुद्दी में उतर चूका था.. मई अम्मी जान को सीधा कर गया..

अम्मी जान के गाल को चूमता हुआ मेह्बूबाना अंदाज़ में बोलै -- अम्मी जान. मई कितना खुश नसीब हों न

अम्मी जान -- नहीं मैं ज़यादा खुश नसीब हों बाबू

अम्मी जान की आवाज़ नशे में डूब चुकी थी

मई -- हम दोनों खुश नसीब हाँ अम्मी जान

मई आधे लुंड को बहार निकाल फिरसे अंदर घुसा गया.. अम्मी जान की कमीज़ वाली कमर पर हाथ रख मई फिर धीरे धीरे धक्के मारने लगा.. अम्मी जान रेलिंग छोड़ चुकी थी. मैंने जो संभल रखा था

अम्मी जान कड़ी कड़ी थोड़ी सी झुकी मेरे लुंड से छोड़ने लगी

मई उनके गाल को चूमता हुआ धक्के मार रहा था.. धीरे धीरे करके अम्मी जान की फुद्दी के अंदर पानी की बारह आने लगी. लुंड रवानी से अंदर बहार होने लगा. धुप से मेरा लुंड और अम्मी जान की गांड, चूतड़ और फुद्दी चमकाने लगी थी

कुछ देर में पूरा लुंड अम्मी जान की फुद्दी में अंदर बहार हो रहा था..

अम्मी जान मदहोशी में बोली -- उफ़ बाबू.. मैंने इतने मज़े का भी नहीं सोचा था.. चरों ऑर्डर पानी hi पानी और तुम्हारा अनमोल प्यार मैं पाउंगी

मई -- मैंने भी कहाँ सोचा था अम्मी जान. ये तो आप के लिए खास प्यार था न.. जो मुझे ऐसा मौका मिला. और मई अपनी अम्मी जान को ज़यादा मज़े और सुरूर देने के लिए ऐसा करने पर मजबूर हो गया.. भला बाबू अपनी अम्मी जान को काम प्यार कैसे दे सकता है

अम्मी जान ने मेरे साइड गाल को चूमा. चूमते हुए नशे से भरी अम्मी जान की निगाह मेरी निगाह से मिली. और एमी जान शर्म से चमकती निगाह फेर गई

मई अब दोनों हाथ अम्मी जान के मुम्मों पर रख दबाता हुआ उनकी फुद्दी मार रहा था.. अम्मी जान गर्म हो चुकी थी

मई -- अम्मी जान.. थैंक्स.. आप ने मुझे अपना अनमोल जिस्म दिए

अम्मी जान -- ये तुम्हारी किस्मत में था बाबू.. लेकिन मेरी किस्मत में तुम होकर भी नहीं रहे थे. तुमने मुझे नज़र अंदाज़ नहीं किआ.. मेरी साडी गलतियों पर भी तुमने मुझसे मोह नहीं मोड़ा.. मुझे शर्मिंदा नहीं किआ.. शुक्रिया तो तुम्हारा बनता है बाबू... और मैं अपने बाबू को दिन रात शुक्रिया बोलती रहती हाँ

स्पीड बढ़ी तो अम्मी जान की फुद्दी में आग बढ़ने लगी.. फिर बातें बंद हो गई. अम्मी जान की ाआहें सिसकियाँ बढ़ने लगी.. और देखते hi देखते अम्मी जान की फुद्दी में आग लग गई..

अम्मी जान एक बार फिरसे रेलिंग को थाम गई. मोटर बोट पहले के जैसे दोल रही थी.. अब अम्मी जान और मैं दोनों ज़ोर से हिल रहे थे.. अम्मी जान झड़ने वाली थी. इसलिए अपनी गांड हिलने पर मजबूर थी

फिर अम्मी जान झाड़ गई. और मई लगा रहा.. अम्मी जान की फुद्दी से पानी की बरसात होने लगी

चिकनी फुद्दी और भी ज़यादा चिकनी हो गई.. मैं अब फुल स्पीड से अम्मी जान की फुद्दी मारने लगा

मारते मारते अम्मी जान फिरसे गरम होने लगी.. अब अम्मी जान भी थक चुकी थी.

मई अम्मी जान को सीधा कर गया. उनकी एक तंग उठा कर उसकी फुद्दी में लुंड दाल कर उन्हें छोड़ने लगा.. अम्मी जान शर्मीली स्माइल से मुझे देख मेरे गले में बाहें दाल गई थी

मई पूरा लुंड निकाल कर कैप अंदर hi दी थी, अम्मी जान के होंटो को चूमता हुआ एक ज़ोर का धक्का मार गया.. पूरा लुंड अम्मी जान की फुद्दी में समाया तो अम्मी जान शर्माती हुई निगाह चुराई गई

मई -- अभी भी फस फस कर रहा है अम्मी जान

अम्मी जान थोड़ी सी मसखरी और थोड़ी सी शर्म से बोली -- मोटा जो ज़यादा है.. इसलिए

मई -- नहीं.. आप स्पेशल हो. आप की वह भी स्पेशल है. खासी कस्सी हुई है

और अम्मी जान की इस बार शर्म ज़यादा बढ़ी.. अम्मी जान मेरे कंधे पर चीन रख टी हुई निगाह चुरा गई थी

मई स्पीड से छोड़ने लगा.. अम्मी जान कड़ी कड़ी फिरसे झड़ी तो मैं अम्मी जान को वही घोड़ी बना कर छोड़ने लगा

टोटल 40 मिनट तक अम्मी जान की फुद्दी पेली.. फिर अम्मी जान की फुद्दी में मैं तब अपना लुंड खली कर गया.. जब अम्मी जान पीठ के बल लेती मुझसे चुद रही थी

लुंड खली हुआ. तो मैं हांपने लगा. और अम्मी जान मेरे सर को पीठ को दोनों हाथ से सहलाने लगी.

हम दोनों माँ बीटा फर्स्ट सेक्स के नशे में मस्त डोलती मोटर बोट पर आधे नंगे लेते गहरी गहरी साँसे लेने लगे.

 


Episode No 47

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बाइक साहिल पर नार्मल स्पीड से दौड़ रहा थी. बाइक मई चला रहा था. मेरे पीछे बाइक पर माहिरा एपीआई थी. वह बैठी नहीं कड़ी थी. वह कपडे पहने हुए नहीं थी. वह आज़ाद ज़िन्दगी के पुरे पुरे मज़े लेती एन्जॉय कर रही थी. ब्रा पंतय में मेरे पीछे सीट पर कड़ी दोनों बाहें फैलाएं ख़ुशी के नारे लगाए जा रही थी.



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माहिरा -- yaaaaaahooooooooooooooo.... एससससस.. एससससस... एससससस... आहा बाबू.. ऐसी hi आज़ाद ज़िन्दगी के तो मैंने हमेशा सपने देखे थे.. अहा मज़ा आ गया खुदा की कसम. इतना मज़ा तो मुझे मॉडल बनकर नहीं मिलता. जितना तुम्हारे संग ऐसे बाइक पर अध् नंगी कड़ी सफर कर रही हों.... एक साइड हरा भरा आइलैंड एक साइड समंदर.. आठ बाबू.. तुमने मेरे लिए कितना कुछ कर डाला

जज़्बाती होने लगी... मई बाइक एक जगह रोक गया.. वह ऐसे hi मेरे आगे आ कर बेथ गई. उसकी ऑंखें भीग गई थी. मुझे बेपनाह प्यार से देखती हुई मेरे चेहरे को थाम मेरे होंटो से होंठ मिला गयी. और नरमी से किश करने लगी. मेरे होंटो को चूसने लगी. मैं भी उसके रसीले होंटो का रास चूसने लगा...

बड़े आराम सुकून से किश होने लगी. फिर वह गांड हिला कर अपनी फुद्दी मेरे लुंड से लगा कर रगड़ती हुई कुछ जोश के साथ मुझे किश करने लगी. मेरी आँखों में शर्म और प्यार से देखने लगी. मैंने एक आंख मार दी

वह किश तोड़ कर मुझे देखने लगी. फिर शर्मा गई

मई -- उम्म्म माहिरा एपीआई. आप ब्रा पंतय में हो. इस ड्रेस में, ऐसी हालत में, एक साइड हरा भरा आइलैंड एक साइड समंदर और आप की शर्म. आठ माहिरा एपीआई आप और भी किस कदर हसीं लगने लगी हाँ

और माहिरा एपीआई मेरी आँखों में देखती फिरसे मेरे होंटो पर टूट पड़ी. इस बार की किश वाइल्ड होती चली गई. वह गांड हिलती, अपनी फुद्दी मेरे लुंड पर रगड़ती खुद को और भी आज़ाद शो करती मज़े लूटने लगी.

मई क्यों पीछे रहते. दोनों मुम्मे पकड़ कर मसलता हुआ किश करने लगी. माहिरा एपीआई मदहोश होने लगी. फिर किश तोड़ती हुई बोली

माहिरा -- चलो न बाबू.. वाक करते हाँ. समंदर में उतारते हाँ. कसम से आज़ाद लाइफ के मज़े इतने ज़यादा हाँ. मैं करने लगा है. सारे के सारे मज़े अभी के अभी लूट लूँ.. आठ लेकिन ऐसा हो नहीं सकता. एक साथ सारे मज़े....

मई माहिरा एपीआई को बहन में उठाये बाइक से उतर गया. फिर हम दोनों हाथ में हाथ डेल बाइक से दूर होने लगे. साहिल पर चलने लगे



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माहिरा एपीआई के छोटे चूतड़ कमल धा रहे थे. मैं पीछे मुद चूतड़ देखने लगा

माहिरा एपीआई शर्म से है पड़ी

मई -- मज़ा आ रहा है. इसलिए देख रहा हों. बड़े दिलकश लग रहे हाँ

माहिरा -- तुम्हारे लिए hi तो इन्हे आज़ाद छोड़ा है बाबू..

मई रुक गया. वो भी रुक गई. दोनों एक दूसरे की आँखों में देखने लगे. दोनों एक दूसरे के प्यार में जलने लगे. फिरसे लिपट पड़े. फिरसे किश करने लगे. मैं hi नहीं भर रहा था...

फिर हम समंदर में उतरने लगे.. कुछ देर काम पानी में खड़े रहे. कभी बाटने करने लगते. एक दूसरे की आँखों में देखने लगते. कभी माहिरा एपीआई शरमाने लगती.

उनकी हसी मुझे बेकाबू करने लगी. और मैं पानी में hi उन्हें पकड़ गया. इस बार की किश का मज़ा hi अलग था..



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माहिरा एपीआई बहुत गर्म हो चुकी थी.. मैं उसके गलों पर हाथ फेरता हुआ मुम्मों पर रख किश करने लगा.. फिर ब्रा ऊपर उठा कर नंगे मुम्मे पकड़ दबाने लगा. मसलने लगा.. माहिरा एपीआई मज़े से पागल होने लगी. और मैं.. मेरी तो बात hi निराली थी. लुंड फटने को हो रहा था.. अंडरवियर फाड़ने को मैं होने लगा था मेरे लुंड का

डीप किश के बाद माहिरा एपीआई हांपने लगी. मई उसके मुम्मे मसलने लगा

वो एक साइड देखती हुई बोली -- चलो न बाबू वहां चलते हाँ. वहां का नज़ारा ज़यादा सुंदर है

मई भी उधर देखता हुआ माहिरा एपीआई की ब्रा ऊपर करता हुआ उन्हें बहन में उठा गया.



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मेरे गले में बाहें मुझे प्यार से देखने लगी

माहिरा -- ऐसे लम्हों का कभी एन्ड न हो बाबू

मई -- नहीं होगा.. ये बाबू अपनी जान से वडा करता है

मेरे होंटो को चुम अपनी ख़ुशी का इज़हार करने लगी. मई अपनी जुबां उनके गाल पर फेर गया

माहिरा -- दूर दूर तक कोई नहीं है..

मई -- इधर कोई आएगा भी नहीं

महरिअ -- तभी तो मई इतनी रिलैक्स हों.. वर्ण मई कपडे क्यों उतरती

मई -- अपनी जान के लिए मैं सब कुछ कर जाऊं

माहिरा -- मुझे यकीन है

आगे एक जगह पानी थोड़ा गहरा था.. मैंने माहिरा एपीआई को नीचे खड़ा कर दिए. फिरसे किश करने लगे..



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माहिरा एपीआई किश के बाद बोली -- आप की किस्सेस मैं कभी नहीं भूलूंगी बाबू

मई -- मैं भी.. ये साड़ी किस्सेस मेरे दिल में लिखी जा चुकी हाँ. मेरी जान मेरी एपीआई माहिरा मेरे साथ ऐसे हसीं लम्हे जी रही हाँ.

माहिरा -- हाँ.. मैंने कभी नहीं सोचा था बाबू... पहले.. तुम्हारे अनमोल प्यार से पहले.. उफ्फ्फ मेरे अंदर कितनी आग थी.. और मई मेरी सहेली के साथ लेसिबां करके अपनी आग बुझाया करती थी. लेकिन फिर तुम्हारे अनमोल प्यार ने जनम लिए.. और मेरे अंदर की आग ऐसे रंग बदल गई. मई हैरान रह गई.

मई -- लाइफ के मज़े बढ़ गए हाँ न

माहिरा -- बहुत ज़यादा

मई - तो फिर और क्यों न बढ़ाएं हम अपने मज़े को

माहिरा एपीआई ने मेरे होंटो की नॉटी और नशीली मुस्कान देखि तो झींप गई. शर्मा गई

मई उनकी ब्रा ऊपर करता हुआ अपने होंठ उनके मुम्मे पर रख चूमने लगा

माहिरा -- आठ बाबू.. तेरे इन होंटो की हिद्दत के लिए मैं बहुत तदपि हों. एक बार के बाद तुम्हारे होंठ एक लम्बे आरसे तक के लिए मुझसे दूर हो गए थे. जिस दिन तुम घर से गए थे न.. उसी दिन मैंने सोच लिए था. उसी रात मैं तुम्हरे साथ सब कुछ कर लेना चाहती थी बाबू.. मुझसे और इंतज़ार नहीं हो रहा था. सबर का दमन हाथ से छूट चूका था. लेकिन तुम चले गए. और मेरे दर्द को बढ़ा गए

मई दूसरे निप्पल को चुम और चूस कर बोलै -- लौट कर आया हों.. उस एक रात

के बदले कई बढ़कर प्यार और मज़े देने आया हों. क्या मैंने गलत कहा

माहिरा सिसक रही थी. उसके मुम्मे मेरे होंटो की हिद्दत से फूलने लगे थे.. मई अपना लुंड भी पानी में नंगा कर चूका था. माहिरा एपीआई की पंतय नीचे करते हुए अपने लुंड को उसकी फुद्दी के साथ लगता हुआ उन्हें गले से लगा गया..

वो सिसक पड़ी.. मुझसे लिपट गई

माहिरा -- आठ बाबू.. तुमने सही कहा.. ये वाले मज़े के आगे उस रात के मज़े कुछ भी नहीं थे.. ाचा किआ तुम चले गए

मई अपने लुंड को उसकी फुद्दी के साथ लगता हाउ रगड़ने लगा

माहिरा एपीआई नशे से पागल होने लगी --- ऐसी लाइफ कहाँ मिलती फिर मुझे. ऐसे आज़ाद खुली फ़िज़ाओं में तुम्हारा अनमोल प्यार कैसे पाती.. अहह बाबू.. स्पीड से रगड़ो.. मेरी बेचैनी बढ़ने लगी है

मई -- वही तो बढ़ाना छटा हों. मज़ा भी तभी बढ़ेगा

माहिरा एपीआई मेरे होंटो पर टूट पड़ी.. पानी में अपनी टाँगें खोलती हुई मेरे लुंड को अपनी फुद्दी और टांगों के बीच भींचने लगी.. मई ज़ोर लगा का अपना लुंड खेंचने लगा.. उसकी फुद्दी से रगड़ता हुआ टांगों के जोड़ के बीच से पार निकलने लगा

माहिरा एपीआई खुद को संभल नहीं प् रही थी. अपनी गांड भी हिलने लगी.. मई स्पीड बढ़ा गया. किश और भी ज़यादा वाइल्ड होने लगी..

फिर वह मुझे कस के जकड़ती हुई मेरे कंधे पर सर रख हांपने लगी

माहिरा एपीआई खुले में पहली बार झाड़ गई थी.. वह भी समंदर में. वो भी अपने सेज भाई के लुंड की अपनी फुद्दी पर रगड़ से..

मई माहिरा एपीआई को लिए पानी से बहार निकल पड़ा..

माहिरा एपीआई को छोड़ मैं साहिली रेट पर दोनों हथुन का तक तकिया बनाये लेट गया.. माहिरा एपीआई रिलैक्स हो चुकी थी.. मेरे साइड लेती एक तंग मेरे ऊपर रख मुझे मीठी स्माइल से देखने लगी..



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माहिरा -- अब कोई ऐसे मज़े के लिए मुझे दुन्या भर की दौलत भी दे दे.. मैं सब ठुकरा दूंगी. मुझे मेरे बाबू के अनमोल प्यार के ऐसे हसीं लम्हों के शिव कुछ नहीं चाहिए..

 




Episode No 48

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माहिरा -- अब कोई ऐसे मज़े के लिए मुझे दुन्या भर की दौलत भी दे दे.. मैं सब ठुकरा दूंगी. मुझे मेरे बाबू के अनमोल प्यार के ऐसे हसीं लम्हों के शिव कुछ नहीं चाहिए..

एक समंदर हमारे सामने था. एक समंदर प्यार भरा माहिरा एपीआई की आँखों में मौजज़न था. बड़े प्यार से मुझे देख रही थी. मई hi मई था अब उनकी व्होले लाइफ में. उनकी राग राग में. और मेरी रगों में खून के साथ दौड़ रहा था सब के लिए अनमोल प्यार..

मैं माहिरा एपीआई को अपने ऊपर गिरता हुआ भींचने लगा. वह प्यार से मुझे देखने लगी. मैं उनकी ऑंखें चुम गया

मई मदहोशी भरे लहजे में बोलै -- क्या इस जगह से बढ़कर मेरी जान को प्यार करने के लिए और जगह हो सकती थी.

माहिरा सुरूर की इन्तेहाओं पर पोहंची अपने मुम्मे मेरे सीने पर दबाये मेरे होंटो को चुम कर बोली

माहिरा -- नहीं बाबू.. यहाँ की फ़िज़ा गुणगाणाती हुई है. यहाँ की हवाओं में बाबू के बदन की खुशबु रच चुकी है. और भी बहुत ज़यादा मई बेखुद होती जा रही हों. यहाँ हर सू नशा hi नशा है. सुरूर hi सुरूर है. लज़्ज़त hi लज़्ज़त है.

माहिरा एपीआई की आँखों में शर्म और सुरूर के कई रंग उतर आये थे

मैं वही रेट पर उन्हें पलट कर उनके ऊपर आया. वह शर्मीली मुस्कान होंटो पर सजा गई. शर्मीली मुस्कान पर मेरा दिल और लुंड झूम उठा. मैं अपने होंठ माहिरा एपीआई के होंटो से मिला गया.. लुंड नीचे से फुद्दी पर दबा फुद्दी को चूमने लगा

डबल किश चालू हो गई. माहिरा एपीआई पुरे जोश के साथ मेरे होंटो का रास पीने लगी. मेरे हाथ ने उनकी ब्रा को फिरसे ऊपर किया.. नंगे मुम्मे मेरे हाथ से दबते चले गए

माहिरा एपीआई का ठंडा जिस्म फिरसे गरम होने लगा. मैं मुम्मे कास कास के दबाता हुआ किश करने लगा. माहिरा एपीआई की नक् से तेज़ गरम साँसे ख़ारिज होने लगी

मैं किश तोड़ एक मुम्मे पर आया और चूमने चाटने लगा.

महरिअ -- आठ बाबू.. आज इन लम्हों को अमर कर दो.. उम्म्म उफ्फ्फ बाबू मेरे शोना.. मेरी जान.. उम्म्म उफ्फ्फ कितनी लज़्ज़त है तेरे होंटो में.. उफ्फ्फ उफ़ उफ़

लज़्ज़त तो मुझे मिल रही थी. क्या मुम्मे थे माहिरा एपीआई के. ऐसा नज़ारा, साहिली किनारा. रेट पर लेती मेरी ब्रा पंतय में एपीआई. उसके नंगे मुम्मे मेरे हथु में थे. मेरे होंठ दोनों मुम्मों पर बरी बरी चल रहे थे. गोर चित्ते कैसे हुए मुम्मे.. उफ्फ्फ रेड निप्पल्स

मई बरी बरी दोनों मुम्मों चूमने चाटने लगा. जुबां फेरने लगा. दूसरे मुम्मे को एक हाथ से पकड़ कर निछड़ोंए लगा

माहिरा एपीआई मचलने लगी. मेरे लुंड लेती मदहोश होने लगी. एक निप्पल को डेंटन में लिए और थोड़ा सा दबाता हुआ ऊपर को खेंच गया

माहिरा एपीआई लज़्ज़त भरी सिसकारी लेती हुई मुझे देकने लगी. नशा hi नशा था उनकी आँखों में

मई ऐसा hi दूसरे निप्पल के साथ कर गया. माहिरा एपीआई को ऐसा मज़ा मिला.. मेरे सर को अपने मुम्मे पर कस के दबती हुई झटके खाती झड़ने लगी

फिर ढीली पद गई. हांपने लगी. तेज़ साँसे लेने लगी.

मई नीचे हुआ. खुद पूरी तरह से नंगा हुआ और उनकी पंतय उनकी टांगों से निकाल गया

मई -- यहाँ डर तो नहीं लग रहा है मेरी जान माहिरा एपीआई को

माहिरा एपीआई -- डर.. बाबू के रहते डर कैसा

मई -- हाँ बाबू के रहते डर कैसा.... बाबू के पास होते हुए सिवाए उसके अनमोल प्यार के बाकि सब कुछ भूल जाया करो

माहिरा एपीआई अब नार्मल थी. मीठी शर्मीली निगाह से देख बोली -- कब की भूलना सीख गई हों बाबू. अब तेरे शिव, तेरा अनमोल प्यार के शिव मुझे कुछ याद hi नहीं.

मैं उनकी रसीली फुद्दी चुम गया.

माहिरा -- उम्म्म बाबू .. तुम्हारा अनमोल प्यार hi गहरा नहीं है बाबू. तुम्हारे प्यार करने का अंदाज़ बहुत मैं को भय करता है. ऐसे चूमते हो. जैसे मई चीचे की बानी कोई स्टेचू हों

मई -- यकीनन आप हो एपीआई

मैं फिरसे उनकी फुद्दी जुबां से चाट गया. माहिरा एपीआई कोहनियों पर उठी मुझे देकने लगी. मई बार बार उनकी फुद्दी चुम चाट उन्हें देख रहा था. शर्म के कई रंग माहिरा एपीआई की आँखों में चेहरे पर थे. सबसे गहरा रंग ख़ुशी का था

मैं दोनों हथुन के थम्ब्स से फ़ुदद्दी के लिप्स खोल कर अंदर जुबां की नोक फेर गया

माहिरा एपीआई लज़्ज़त से पागल हो उठी. रेट पर ज़ोर से सर मार सिसकने तड़पने मचलने लगी थी

माहिरा -- आठ बाबू.. मई मर जाउंगी. इतनी लज़्ज़त कैसे सम्भालूं मैं बाबू.. आठ उम्म्म उफ्फ्फ्फ़ अम्म्मम्मीईईई jaaaaaaaaaaaaaannn बबबबबबबबूउऊउउउ उफ्फ्फ्फ़ आह्ह्ह्ह siiiiiiiiii

मैं रेगुलर फुद्दी के सुराख़ पर जुबां फेर चाटने लगा. माहिरा एपीआई तड़पती रही.. सिसकारियां लेती रही.

मैं कुछ उनकी फुद्दी चाट ता रहा.. फिर खुद hi माहिरा एपीआई नशे और मस्ती से चूर होती हुई उठी और मुझे रेट पर लिटा कर मेरे पैरों में आई और मेरे लुंड को थम गई

माहिरा -- बहुत सबर कर चुकी बाबू.. अब और नहीं कर सकती. आठ बाबू.. मैं तेरे अनमोल प्यार के लिए बड़ी तदपि हों

बोल मेरा लुंड चुम गई. मई मचल उठी. माहिरा एपीआई की कुंवारी जुबां की हिद्दत से मैं उछाल पड़ा tha.mere पुरे बदन में सनसनी सी दौड़ गई थी

माहिरा एपीआई मुझे प्यार से देखने लगी.

माहिरा -- माहिरा के बाबू को झटका लगा

मई -- हाँ

माहिरा -- ऐसे hi कई झटके तुमने भी तो मुझे दिए हाँ बाबू. अब मेरी बरी है

मई -- हाँ.. अब आप की बरी है. और मुझे लग रहा है. आज मेरा खुद पर कण्ट्रोल लूसे हो जाएगा. आप की जुबां की गर्मी जो प्यार से कुंदन बन चुकी है. मेरे अंदर उतर मुझे बेहाल कर देगी

माहिरा -- यकीनन ऐसा hi होगा मेरे बाबू

फिरसे मेरे लुंड को चूमने लगी. लुंड चूमने का नज़ारा ऐसा था. मई देखता रह गया. नंगी माहिरा एपीआई के पीछे नीला पानी hi पानी था. ऊपर नीला आस्मां.. पास रेट और आस पास हरयाली hi हरयाली.. आँखों में सुरूर और सवाद hi सवाद उतरने लगा

माहिरा एपीआई मज़े से मेरे लुंड को चूमने लगी.. फिर कैप मोह में लेके चूस गई. मुझे देख शरमाई.. फिर से चूमने चूसने लगी. धीरे धीरे मेरे लुंड को मोह में अंदर लेती माहिरा एपीआई बड़ी हसीं और अल्हड दिखाई दे रही थी

अब वह भी मस्त होने लगी थी. सब कुछ भूल कर मेरे आधे लुंड को मोह में लिए चूसने लगी. लुंड चूसने में वो एक्सपर्ट दिखी.

मई -- आठ माहिरा एपीआई.. आप तो खिलाडी निककली

माहिरा -- घर में केले बहुत थे किचन में बाबू.. बहुत प्रैक्टिस करि मैंने. जब से तेरा अनमोल प्यार मिला.. लेस्बियन में एक्सपर्ट तो थी hi. तेरा प्यार मिला तो मैं खुद को एक्सपर्ट बनाने लगी. मज़ा आ रहा है न

मई -- बहुत

महरिअ एपीआई अब पुरे मैं पुरे जोश के साथ मेरे लुंड को चूसे जा रही थी

मुझसे कण्ट्रोल छूटने लगा. मई और सबर नहीं कर सका

माहिरा एपीआई को पकड़ कर लिटा गया

माहिरा एपीआई के दिल की तेज़ धड़कने मुझे साफ़ सुनाई दे रही थी.

मई उनकी टांगों के बीच था. अब उनकी फुद्दी की सील खुलने वाली थी

मेरा फुँफना रहा लुंड मेरे हाथ में था. और लुंड की आँखों के सामने माहिरा एपीआई की फुद्दी थी

मैं अपने लुंड को मसलता हुआ माहिरा एपीआई की चिकनी कुंवारी फुद्दी को देखने लगा

रास चमक रहा था माहिरा एपीआई की फुद्दी पर

मैं अपने लुंड को उनकी फुद्दी पर रखता हुआ उन्हें देखने लगा

और इस बार माहिरा एपीआई शर्मा गई. चेहरा फेर गई

मई -- ऐसी शर्म के साथ आप बहुत पायरी लग रही हो

माहिरा -- हम्म्म

मई अपने लुंड उनकी फुद्दी के लबों में रगड़ने लगा

मई -- अक्सर इंसान सोचता नहीं है. पर आने वाले वक़्त में बहुत कुछ हटके हो जाया करता है. आप ने कभी सोचा था. आप का भाई आप की हिफाज़त करने वाला बाबू hi आप की लाइफ का फर्स्ट मर्द बनेगा

तेज़ सांस और धड़कते दिल के साथ वह बोली -- नहीं सोचा था. अंदाज़ा भी नहीं था. लाइफ में इतने ज़यादा मज़े मेरा वेट कर रहे हं

मई -- तब फिर आप को वह मज़ा दूँ. जिसके वेट में आप एक मुद्दत से तड़प रही हाँ

मदहोशी भरी कनपटी आवाज़ सुनाई दी -- हाँ बाबू

और मैं अपना लुंड उनकी फुद्दी के सुराख़ के साथ जोड़ पुश करने laga..mahira एपीआई कराह उठी. दर्द तो होना hi था. कुंवारी थी. सीलपैक थी. लुंड के दबाव पर hi उनके चेहरे पर दर्द के तासरत फैलने शुरू हो गए थे

मई -- सॉरी एडवांस में hi.. दर्द देना पड़ेगा

माहिरा -- हम्म्म.

मई समझ गया. वो अभी बोलने की हालत में नहीं हाँ.. मरहला hi ऐसा था

मई सुराख़ में लुंड फसता ज़ोर से पुश कर गया.. उछाल पड़ी. फिर एक धक्का मार लुंड की कैप पूरी तरह से सुराख़ में फसा गया

चीख पड़ी.. बिलबिला उठी

मोटा लुंड नन्हे से सुराख़ में फसा हुआ था

मई -- बास एपीआई.. थोड़ा सा दर्द.. फिर मज़े hi मज़े

माहिरा -- हम्म्म्म

मई एक करारा शॉट मारता हुआ सील तोड़ गया.. खून निकलने लगा. वह खुल कर चीखी.. कोई सुनने वाला नहीं था

आँखों से आंसू बहती रोने लगी माहिरा एपीआई

ये दर्द तो होना hi था. फिर भी मई तड़प उठा था. मई झुका उनके मुम्मे पकड़ मसलने लगा. निप्पल्स के साथ खेलने लगा.. वो हिल रही थी. हिलने से लुंड निकल देना चाहती थी

मई देर तक उनकी फुद्दी में लुंड फसाये उनके मुम्मे मसलता रहा.. निप्पल्स अकड़ने लगे. मुम्मे फूलने लगा. वह कराहना भूल मज़े से सिसकारियां लेने लगा

तब मैंने एक धक्का और मार दिए.. फिर से तड़प उठी

मई झुका और उन्हें किश करने लगा

आधा लुंड उनकी फुद्दी में था.. आँखों से संसांद्र बाह रहा था

मई सारा समंदर होंटो से चाटने लगा

पुरे फेस पर अपने होंटो से मोहरें लगाने लगा

देर तक वह नार्मल हो सकीय

माहिरा -- जान hi निकल दी तुमने तो मेरी बाबू

मई -- बहुत मोटा जो है

माहिरा एपीआई शर्मा गई

मई लुंड हिलता हुआ धीरे धीरे बहार निकल कर फिरसे अंदर दाल गया

वो दर्द से फिरसे तड़पने लगा

थोड़ी देर में आधा लुंड उन्हें मज़े देते हुए अंदर बहार हो रहा था. फस्स फस्स कर अंदर बहार होता हुआ लुंड अब मुझे और माहिरा एपीआई दोनों को मज़े देने लगा

सलौली सलौली चुदाई चालू हो गई. हम दोनों किश करने लगे. मेरा जोश बढ़ने लगा

स्पीड बढ़ने लगी. किश वाइल्ड होने लगी.

उनकी फुद्दी पानी छोड़ने लगी. खून तो बहा hi चुकी थी. अब रास बहाने लगी

लुंड चिकना होने लगा. रवानी से अंदर बहार होने लगा

मज़े से छोड़ने लगी

और धीरे धीरे गांड हिलती अपने मज़े को शो करने लगी

ऐसे में मई रुक रुक कर दो धक्के और मारता हुआ पूरा लुंड उनकी फुद्दी में उतार गया

सारा मज़ा दर्द में बदल गया

अगले पांच मिनट में वह फिरसे नार्मल थी

मई -- आप की तो ऑंखें hi लाल हो गई एपीआई

माहिरा -- होनी hi थी.. मुझे अंदाज़ा नहीं था बाबू. इतना दर्द होगा

मई -- इससे भी ज़यादा होना था. पर मैंने होने नहीं दिए.

माहिरा एपीआई मेरे होंटो को चुम बोली -- मेरा पायरा बाबू... मुझे अंदाज़ा है.. फिर भी बड़ा दर्द हुआ. तुमने बड़े प्यार से किआ सब बाबू.. मुझे अब बड़ा मज़ा आ रहा है

मई -- तो फिर स्पीड बाधाओं

माहिरा -- हाँ... ज़रूर.. मुझे लग रहा है. एक बार और मेरा काम होने से मैं पूरी तरह से रिलैक्स और फ्रेश हो जाउंगी. तब फिर तुम्हारा पूरा साथ दे सकुंगी

मई उनके होंठ चुम बोलै -- तो फिर लज़्ज़त की इन्तेहाओं को पोछने के लिए तैयार हो जाएँ

मैंने फुल स्पीड से माहिरा एपीआई को छोड़ने लगा. वो दोनों टाँगें मेरी गांड पर रख हर धक्के पर अपनी फुद्दी पर दबाने लगी

फुद्दी से खून मिक्स रास निकल निकल कर रेट में मिक्स होता जा रहा था

थोड़ी देर और गुज़री. माहिरा एपीआई चार्म पर पोहंच किश तोड़ गई. मुझे कसने लगी..

मई और भी स्पीड से उनकी फुद्दी मारने लगा. पूरा पूरा लुंड निकाल कर अंदर बहार करने लगा

ऐसे hi एक मोके पर उनका जिस्म अकड़ा फिर वह ढीली पड़ती चली गई..

मई उनके गालों को चूमता हुआ धक्के मारने लगा

वह रिलैक्स हुई तो मई लुंड निकाल कर उन्हें वही घोड़ी बना गया

वह घोड़ी बन पीछे मुद मुझे शर्म भरी स्माइल से देखने लगी

मई उन्हें देखता हुआ अपना लुंड पकड़ कर उनकी फुद्दी के साथ रगड़ गया

कई रंग एक साथ उनके फेस पर आये. वो शर्मा कर आगे देखने लगी

मई मस्ती से चूर लहजे में बोलै -- अंदर डालूं माहिरा एपीआई

और माहिरा एपीआई गांड समेत पूरी कैंप उठी.

मई झुका और उनकी गांड चुम उठा. वह और भी ज़ोर से कैंप थी. मई ऐसे hi उनके जगह जगह चूमने लगा. कभी गांड कभी चूतड़ कभी फुद्दी. कभी कमर

माहिरा एपीआई मेरे प्यार पर मचल उठी

नाम जज़्बाती आवाज़ में सिसकती हुई बोल -- बाबू.. तेरा अनमोल प्यार हर लम्हा और भी मेरे अंदर गहराई में उतरता जा रहा है..

मई -- यही तो मई भी चाहता हों

मई अपना लुंड उनकी फुद्दी के साथ रगड़ता हुआ अंदर डालने लगा

पूरा लुंड उनकी फुद्दी में उतरने के बाद उनकी कमर पकड़ कर मई आराम आराम से चुदाई करने लगा

धीरे धीरे स्पीड बढ़ने लगा. माहिरा एपीआई के साथ बातें करने लगी. धीरे धीरे माहिरा एपीआई भी खुलती जा रही थी. कोई भी बेहूदा वर्ड न मई और न hi माहिरा एपीआई बोल रही थी. प्यार भरी चुदाई का पूरा पूरा मज़ा ले रहे थे हम दोनों

माहिरा एपीआई फिरसे झड़ी तो मेरा लुंड भी आखरी जोश पर था

मई फुल स्पीड से लुंड अंदर बहार करने लगा

फिर जब झड़ने वाला हुआ तो अपना लुंड निकाल कर बहार झड़ने hi वला था

माहिरा एपीआई बोल पड़ी -- नहीं बाबू.. अंदर hi खली कर

शर्म से भीगी आवाज़ थी उनकी.. मैंने उनकी मान थी

फिरसे उनकी फुद्दी में लुंड दाल 2 4 धक्कों के बाद झड़ने लगा

माहिरा एपीआई हंप्टी हुई लज़्ज़त भरी आवाज़ में बोली -- मुझे पूरी तरह से फील करना था बाबू तेरे प्यार को. बड़ा सुकून मिला मुझे

मई -- गरम गरम सुकून

वो धीरे से है पड़ी थी

मई साइड लेट हांपने लगा. वो मेरे सीने पर सर रख लेट गई

माहिरा -- पिल्स खा लुंगी. बास मुझे ऐसा सुख बहार खली करने से नहीं मिलना था. इसलिए ऐसा बोली..

मई -- अब से अंदर hi खली किआ करूँगा

माहिरा एपीआई का सर मेरे सीने पर था

माहिरा -- हम्म्म.. बाबू.. हमारा प्यार आज और भी कितना गहरा हो गया है न

मई -- हाँ एपीआई.. इस समंदर की गहराई के जैसे गहरा हो गया है.

नशे hi नशा था. सुरूर hi सुरूर था.. हम दोनों चुप कर गए. दोनों ऑंखें बंद कर गए.. लम्बी भरी मदहोशी भरी साँसे लेने लगे.

 






Episode No 49


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मई -- कहाँ जा रही हो मेरी बुलबुल!.

किन्ज़ा एपीआई जो मेरे करीब आते hi भाग कर दूर होने लगी थी. आज कल उसे मुझसे कुछ ज़यादा hi शर्म आने लगी थी. मैं उसकी कलाई पकड़ उसे रोक गया था.

वो अपनी कलाई छुड़वाती हुई बोली -- छोड़ दो न बाबू.... प्लीज बाबू..

शर्म से गुलाबी गाल होने लगे थे उसके

मई उसे खेंच अपने सीने में भींच गया. वो घबरा गई. शर्मा गई. लजा गई. नज़रें झुका गई

मई -- अब की किन्ज़ा एपीआई हमेशा से ज़यादा हसीं हो गई है.

किन्ज़ा एपीआई मेरी बहन में मचलती मुझसे अलग होने लगी -- प्लीज बाबू..

बेचारी के पसीना आने लगा था

मई एक ऊँगली की पुअर से पसीने की बूँद पोछते हुए बोलै -- ये घबराहट है या मेरे प्यार की हिद्दत

होंठ भींच गई. बोल नहीं सकीय. गाल गुलाबी और और भी गहरे होने लगे

मई गाल पर होंठ रख गया. वो कसमसाने लगी -- छोड़ दो न बाबू

लाड और प्यार से बोली थी -- सच में छोड़ दूँ

बदले में मुझे ऐसी निगाह से देखने लगी.

मई घायल होता हुआ बोलै -- हाय किन्ज़ा एपीआई. आप तो मेरा दिल hi निकाले दे रही है

खिलखिला कर है पड़ी

मई -- हसी तो फांसी

फिरसे हसी -- बेशरम कहीं के बाबू

होंटो और अँखियों से अब मुस्कुराने लगी थी

मई उनकी ऑंखें बरी बरी चुम गया. वो मस्त होने लगी

मई -- आप को भी मुझसे प्यार हो जाएगा. मैंने तो सोचा था. आप ने कभी सोचा था

झट से बोली -- नाहीइ

मई -- दिल तोड़ रही हो आप

किन्ज़ा अब मस्ती में आने लगी -- तोह!.. मेरी मर्ज़ी.. तुम्हारा दिल तुम्हारा रहा hi कहाँ है. बूत गया है. जो मेरे हिस्से में आया है. वह मेरा हो चूका है. मई उसे तोडूंगा. चाहे टेबल पर सजा के रखूं. चाहे फ्रेम करवा के रखूं

मई -- बड़ी नॉटी नॉटी होने लगी हो आप अचानक से

और एकदम से जज़्बाती हुई पूरी तरह से मुझसे चिपक गई

किन्ज़ा -- बाबू.. ये कैसा प्यार है. एकदम से हुआ और सारे रिकार्ड्स तोड़ गया. प्यार ऐसा भी होता है. मुझे पता hi नहीं था. मई तो नजीब--

मई -- उस कुत्ते का नाम न लो मेरे एपीआई.. वो कुत्ता मर गया.. उसके सरे कुत्ते मर गए.

किन्ज़ा -- सॉरी

मई -- तो फिर बोलो. कहाँ सुहागरात या सुहागदिन मानना है. समंदर के बीच ो बीच या फिर किसी साहिल पर.. या फिर

शर्मा कर बोली -- कहीं भी नहीं

मई -- मतलब मेरे साथ मज़े नहीं करने

किन्ज़ा -- नहीं

मई -- क्यों??

किन्ज़ा -- क्यों बताऊँ!

मई -- आठ ज़ालिम हसीना. आप की अदाएं मेरी जान ले लेंगी

किन्ज़ा एपीआई मेरी आँखों में देख शर्म और थोड़ी सी शोखी के साथ बोली

किन्ज़ा -- जो ज़ालिम नहीं वह हसीना भी नहीं. हेहेहे

मई उसके हस्ते होंटो पर अपने होंठ रख गया. बेचारी की ऑंखें खुल गई. फिर एकदम से झुकती चली गई. फड़फड़ाने लगी. मैं प्यार से उनके होंठ चूमने चूसने लगा

मचलने लगी. वह तो नहीं निकल सकीय मेरे बहन से.

उसके मुम्मे मेरे सीने में दबने लगा

मई एक हाथ उनकी गांड पर रख फेरने लगा. हिलती किन्ज़ा एपीआई एकदम से शांत हो गई. झटका जो बड़ा दे दिए था मैंने

नीचे से मेरा हाथ कैसा हुआ कैद लुंड उनकी फुद्दी को चूमने लगा. मई खड़े खड़े उनके होंठ चुस्त हुआ गांड पर हाथ फेरता हुआ अपने लुंड को उनकी फुद्दी के साथ रगड़ने लगा

फिरसे कसमसाने लगी. पर मुझसे अलग कहाँ हो सकती थी

थोड़ी देर गुज़री. मदहोश होने लगी

इसी मदहोशी का फायदा उठता हाउ मैं उनके मुम्मे पकड़ मसलने लगा.. वो खुद से किश करने लगी

मई सब काम एक साथ करने लगा

थोड़ी देर और गुज़री. उनकी नक् से गरम साँसे मेरी नक् से टकराने लगी. उनकी गांड हिलती हुई मेरे लुंड से फुद्दी रगड़ने लगी

और कुछ देर गुज़री. उसका बदन अकड़ने लगा. फिर झटके खाने लगा

मई तब तक लगा रहा. जब तक वह झाड़ नहीं गई थी. अब वह मेरे होंठ खाने लगी थी. झड़ी तो मेरी बहन में झूलने लगी

मई उसे बीएड पर लिटा कर उसके ऊपर लेट गया. उसके गालों को चूमने लगा.. होंटो और पुरे चेहरे को चूमने लगा. वो हंप्टी रही और मई प्यार करता रहा.

 
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