- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 147,337
चौबीसवीं क़िस्त
----------------------
अम्मी जान की ऑंखें हैरत से फेल गई थी. वो मुझे देखे hi जा रही थी. और मई मुस्कुराता हुआ उन्हें देख रहा था. फिर अम्मी जान वलिहना अंदाज़ में मेरे चेहरे को चूमने लगी. जोश के साथ पूरी शिद्दत के साथ चूमने लगी. ऐसा करते हुए अम्मी जान की फुद्दी का दबाओ मेरे लुंड पर बढ़ने लगा था. अम्मी जान की फुद्दी मेरे लुंड पर हरकत करने लगी थी. पंतय में कैद अम्मी जान की महकती हुई गुलाब की पंखड़ियों जैसे लबों वाली phuddi(bad में देख ली थी, तो अभी से बोल रहा हों) मेरे लुंड पर मस्सगे करने लगी.
एक माँ अपने बेटे के मोह से ऐसी समझदारी वाली बात, ज़िम्मेदारी वाली बात सुनकर कैसे खुद पर काबू बनाये रख सकती थी. अम्मी जान तो मुझसे पहले hi बहुत प्यार करती थी. उसी प्यार के चलते वो मेरे साथ खुलने लगी थी. किश तो आम बात बन गई थी. उसी आम सी किश का वो भरपूर बना कर मुझे चूमे जा रही थी
फिर अम्मी जान की ऑंखें थोड़ी सी नाम हो गई. अम्मी जान मेरे ऊपर लेती हुई अपने मुम्मे मेरे सीने पर दबाये अपनी फुद्दी मेरे लुंड पर दबाये मेरे गाल से गाल रगड़ने लगी.
अम्मी जान बड़े hi जज़्बाती लहजे में बोली - बाबू तुम क्या से क्या बनते जा रहे हो. मैंने इतना भी नहीं सोचा था. मेरा बाबू इतना ज़यादा पायरा, फरमानबरदार और ज़िम्मेदार बन जाएगा. और तो और राह एक औरत उसके चेहरे की चमक और पाकीज़गी, भरोसा मर्दानगी और प्यार देख वो उससे बात करेगी. कोई भी शर्म ो हाय वाली औरत अनजान से मिल ऐसी बातें नहीं करती. जैसी rukhsar(phool शॉप पर मिलने वाली औरत का नाम) ने तुमसे वहां खड़े खड़े की. तुम्हे बीटा मान लिया. अब तुम ऐसी सुलझी हुई बड़ों वाली अपनी बहनो की फ़िक्र में डूबी बातें कर गए. बाबू ये सब बहुत ज़यादा है. और इतना ज़यादा है. तेरी अम्मी जान से ये सब संभाला नहीं जा रहा है. बाबू तुम कितने अच्छे बनते जा रहे हो. पहले रोज़ जब तुमने मेरे माथे से माथा जोड़ मुझसे वो बातें बुलवाई थी न....
अम्मी जान मेरे गाल से गाल रगड़ मेरी नक् से नक् रगड़ कर मेरी आँखों में देख अपनी फुद्दी मेरे लुंड से रगड़ कर, अपने मुम्मे मेरी छाती से रगड़ कर थोड़ी सी ऊपर खिसकती हुई मेरी आँखों को चुम गई.. फिर वापिस से वही अमल दोहराती हुई एक बार फिरसे खिसकती हुई मेरे चीन पर अपने होंठ लगा कर चुम गई.
ऐसी रगड़ के बाद लुंड साब पर मर्द के कण्ट्रोल से बहार हो जाया करती है. फुद्दी की ऐसे रिकॉर्ड तोड़ रगड़ पर लुंड खड़ा न हो तो वो लुंड hi नहीं हो सकता. मेरा लुंड जोश में आते आते पूरी तरह सर उठा गया.. अंडरवियर में कैद अम्मी जान की फुद्दी के साथ लगा हुआ था.. अम्मी जान भी कमालात को पोहंची हुई हस्ती थी. वो बिना कुछ भी अपनी आँखों से शो करवाए मुझपर अपना प्यार बरसाए जा रही थी.
इतना सब करने के बाद अम्मी जान मेरी आँखों में न देख कर मेरे चेहरे पर एक हाथ रख फेरती हुई बोली
अम्मी जान - मेरे दिल में खटक भी हुई थी. और तुम्हारी अम्मी जान होने के नाते के जवान मर्द बेटे की अम्मी जान होते के नाते मुझे बहुत ज़यादा शर्म भी आई थी बाबू. इतनी शर्म कह अगर तुम बाबू न बन गए होते तो मई तुम्हारी आँखों में देख hi नहीं सकती थी. लेकिन तुम्हारे अनमोल प्यार की शिद्दत ने दिल की सच्चाई और रूह की पाकीज़गी को सबत कर दिखाया. फिर मैंने तो तुझे अपनी कोख से जनम दिए था. कैसे तुझसे दूर रह सकती. शर्म महसूस करती कैसे तुझसे दूर हो सकती थी.. आज जो कुछ तुमने किया, जैसी इज़्ज़त और प्यार तुझे मिला.. मेरे दिल में तू और भी गहराई बनता हुआ उस गहराई में उतर गया है बाबू. अब मेरे दिल पर पूरी तरह से तेरी हुकूमत क़ायम हो चुकी है बाबू.. मेरा दिल पूरी तरह से तेरा हो गया है बाबू.
माँ मेरे गर्म साँसे छोड़ रही थी.. सुकून भरी साँसे मुझे तो बहुत ज़यादा सुकून पोहंचा रही थी. पर मेरे लुंड की बेचैनी को साथ hi बढ़ा रही थी अम्मी जान की फुद्दी की गर्मी और नरमी.
मई -- अम्मी जान ये सब आप के दूध का कमल है. आप के बेपनाह और भरोसा का कमल है.
अम्मी जान - नहीं ये सब तुम्हारा hi कमल है. वर्ण तो हर माँ hi अपने बच्चे से प्यार और उसपर भरोसा करती है. बाबू तुम्हे अपनी मोहब्बत अपनी शराफर से मेरे दिल को पूरी तरह से जीत लिए है
मई धीरे से बोलै -- शराफत. कहाँ अम्मी जान.. बाबू अब कहाँ शरीफ रहा है
अम्मी जान - ऐसा न कह. मेरे दिल से पूछ तू कितना शरीफ है. तेरा प्यार कितना पाक साफ़ और शरीफ है. तूने कहा था. तू पहले दो लड़कियों में इन्वॉल्व था. फिर तूने कहा तूने उन दोनों को अनमोल प्यार पर कुर्बान कर दिए है.. बाबू ऐसी बातें कहनी आसान है.. अमल करना नामुमकिन होता है.. लेकिन तूने ऐसी शानदार जवानी का मालिक होकर भी खुद को सबत कर दिखाया
मई -- इसमें मेरा मतलब भी तो हो सकता है न
अम्मी जान - मतलब के बिना तो कुछ भी नहीं है इस दुन्या में. क्या तुझे प्यार न मिले तो पहले के जैसे hi मुझे सबको प्यार दे सकता है
मई -- हाँ दे सकता हों
अम्मी जान - नहीं दे सकता
मई - क्यों नहीं दे सकता
अम्मी जान मुस्कुराई - यहाँ मई तुझसे जीत रही हों बाबू.. जो बात मई कहने वाली हों. हो सकता है तुम जानते हो. पर इस वक़्त वो तुम्हारी दिमाग में नहीं है
अम्मी जान की स्माइल और ऐसी बात पर मई भी मुस्कुरा पड़ा.. अम्मी जान आज फुल मूड में थी.. मेरे हार्ड हो चुके लुंड पर फुद्दी रखे लेती थी. एक बार फिरसे अपनी फुद्दी मेरे लुंड पर रगड़ती हुई ऊपर को खिसकी और मेरे पुरे चेहरे को चूमने लगी. देर तक चूमती रही.. फिर से वापिस अपनी फुद्दी मेरे लुंड पर ठीक सही जगा टिका कर वो मेरे चेहरे पर हाथ फेरती हुई बोली
अम्मी जान - वो ऐसे कह जब तुम्हे प्यार के बदले प्यार नहीं मिलेगा न तुम उदास रहने लगोगे.. हमारे लिए प्यार को काम तो नहीं करोगे.. लेकिन उदास होने की वजा से तुम खुल कर पहले जैसा प्यार दे नहीं पाओगे
मई अम्मी जान की बात सुन क़ायल होता हुआ बोलै -- हाँ अम्मी जान. सही कहा आप ने
अम्मी जान चहकती हुई - तो हुई न फिर बात मतलब की. मतलब के बिना दुन्या में कुछ भी नहीं है. फिरसे ऐसा न कहना... मई औरत हों बाबू.. और एक औरत कुछ पहचाने या न पहचाने पर नज़रें ज़रूर पहचान लेती है. जब से तुम बदले हो न... एक यही काम तो मई रेगुलर कर रही हों. तुम्हारी नज़रें पहचानन्ने वाला काम
मई कुछ घबराया..
अम्मी जान खिलखिला कर है पड़ी -- ना बाबू घबरा मत.. और कोई भी बात न करना.. कुछ कहना भी मत.. कुछ मुझसे सुन्ना भी मत.. जैसे सब चल रहा है.. चलने दे.. जो जैसे तू जिस किसी के साथ भी डील कर रहा है... करता रह..
मई हैरान hi तो रह गया था अम्मी जान की बात सुनकर...
अम्मी जान ने मेरी आँखों पर बरी बरी ऊँगली फेरनी शुरू कर दी
अम्मी जान -- मई भी कई दिनों से ऐसी hi हैरानी में जी रही हों बाबू.. पता है, कभी सोचा नहीं था, ऐसी मस्त और खुशियों भरी लाइफ जीने को मिलेगी मुझे. मई बहुत हैप्पी हो बाबू.. इतनी हैप्पी कह मई बता नहीं सकती.. अब तुम्हारे मतलब वाली बात का पूरा पूरा जवाब दे दूँ मई तुम्हे.. जो मतलबी होता है न, वो हर जगा से अपना मतलब hi निकलता है. तुम्हारी उस दिन की डिटेल से मुझसे करि सभी बातों में तुम्हारा कोई भी मतलब नहीं था. होता न तो तुम कभी भी उन दोनों लड़कियों से रिलेशन का थे एन्ड नहीं करते. तुम क्या समझते हो, मई एक अहमक़ माँ हों. दो दो बेटियों की माँ हों. एक बीटा माँ से ऐसी बातें करे और माँ बुद्धू बन सब सुन समझ hi न पाए.. नहीं बाबू ऐसी कोई बात नहीं...
फिर अम्मी जान हस्ती हुई मेरे ऊपर से उठती हुई बोली -- और बात वैसी भी नहीं है. तुम क्या समझते हो, कुछ भी तुम्हे ऐसे hi मिल जाएगा क्याआआआ ??
इतना बोल अम्मी जान बीएड से उतर चप्पल पहनंने लगी.. और मई सर खुजरा हुआ अम्मी जान को देखने लगा.. सच hi तो कह रही थी अम्मी जान.. जिस बेटे के लुंड को अपनी फुद्दी की गर्मी से खड़ा करने के बाद भी देर तक अपनी फुद्दी लुंड पर रखे रही थी.. फिर फुद्दी को बड़े hi कातिल अंदाज़ में रगड़ कर अपने प्यार के रंग भी दिखा और बता गई थी. सच में कोई भी अम्मी जान ऐसी अहमक़ नहीं होती.. वो तो मेरा प्यार अनमोल सबत हो चूका था.. वर्ण तो सीधा फायर मेरे दिल के सुराख़ बनता हुआ मेरी पीठ से निकल गया होता.
ये भी मई पहले hi दिन जान गया था. अब घर में कोई भी फुद्दी मेरे लुंड की पोहंच से दूर नहीं है.. अम्मी जान नीचे फर्श पर देख धीमे अंदाज़ में मुस्कुरा रही थी.. बड़ी सलौली अपने शूज भी पहन रही थी.. जैसे मेरे लिए hi वही कड़ी हों. और छह रही हों. मई बीएड से उतर उन्हें पकड़ लून. कमरे से जाने न दूँ
वाह्ह्ह क्या ऐडा थी अम्मी जान की.. मई भी समझता हुआ झट बीएड से उतर गया. तभी अम्मी जान हस्ती हुई अपनी चप्पल पहन दूर हो गई..
फिर सीरियस होकर मुझे देख बोली -- बहुत देर हो गई है. तेरे पापा इंतज़ार में होंगे.. सोना भी और फिर सुबह जल्दी उठना भी है.. एक तो तुम्हारे पास आती हों तो टाइम का भूल भी जाती है और टीम का अंदाज़ा भी नहीं रहता..
मई आगे बढ़ अम्मी जान को अपनी बहन में जकड गया.. इस बार मेरा लुंड अम्मी जान की फुद्दी से कुछ ऊपर लगा.. अम्मी जान के भरी मुम्मे मेरे सीने में डाब गए..
अम्मी जान मीठी स्माइल से -- मैं नहीं भरा क्या अभी.. कितना प्यार किया मैंने तुमसे. अब मुझे जाने दो बाबू.. कसम से बहुत देर हो गई है
मई अम्मी जान के गाल को चुम कर -- प्यार आपने किया है.. मेरा प्यार करना तो अभी रहता है
अम्मी जान हस्ती हुई
मई -- नहीं जाने दूंगा
अम्मी जान -- मान जाओ न babu..mere प्यारे बेटे नहीं हो
मई -- हूँ!
अम्मी जान - तो फिर मुझे छोडो
मई -- बहुत दिनों से आप ने मुझे लटका रखा है अम्मी जान.. आज तो आप मुझे अपना पेट चूमने को दे hi दें
अम्मी जान के गाल गुलाबी हुई शर्म से.. फिर अम्मी जान बोली -- आज नहीं.. फिर कभी.. आज देर हो गई है. एक तुमसे इतनी बातें की.. दूसरा रुखसार से फोन पर बात करते कितना टाइम लग गया... आज जाने दो.. फिर कभी.. और अगली बार मई तुम्हे रोकूंगी नहीं..
मई -- आप बड़ी तेज़ हो अम्मी जान
अम्मी जान
मई अम्मी जान के एक गाल कर किश कर गया.. अम्मी जान निहाल होने लगी. मई अम्मी जान की आँखों में देखता हुआ दूसरे गाल पर किश कर गया
अम्मी जान -- ऐसे hi सुकून से प्यार में मज़ा है न बाबू
मई -- हाँ अम्मी जान
अम्मी जान - क्या तुम मुझे कभी जल्दबाज़ी में प्यार करना चाहोगे
मई -- नहीं अम्मी जान
तभी अम्मी जान ने झट खुद को मुझसे अलग कर दिए. और हस्ती हुई बोली -- अब बाकि का प्यार सुकून से करना. अब टाइम नहीं है.. बहुत रत हो चुकी है. अगर तुमने ज़िद करि तो जल्दबाज़ी से प्यार करोगे.. और तुमने खुद कहा है.. जल्दबाज़ी वाला कोई प्यार मेरे साथ नहीं करोगे
मई दिल मासूस कर रह गया अम्मी जान की इस चालाकी पर
अम्मी जान हस्ती हुई हाथ उठा कर मेरे चेहरे की तरफ इशारा करती हुई बोली - हाहाहा बाबू तेरे चेहरे कर रंग क्यों फीका पद गया
मई ढीला पड़ता हुआ -- ऐसा ज़ुल्म करे जो खुद की hi अम्मी जान अपने बेटे पर.. फिर हालत न हो चेहरे की ऐसी hi.. आह्हः आज तो ऐसे hi सोना पड़ेगा मुझे आधे अधूरे प्यार के साथ
अम्मी जान भी काम नहीं थी -- मई भी तो आधे अधूरे प्यार के साथ hi सोवांगी न. चल शाबाश मेला बच्चा अब बीएड पर लेट कर सो जा..
मई - आप मुझे लोरी सुना कर सुला दें न अम्मी जान
अम्मी जान
फिर वही कड़ी कड़ी hi बोली -- ोकक टाटा bye bye अच्छे बचे देर रात तक नहीं जगा करते..
फिर अम्मी जान हस्ती हुई कमरे का पहले लॉक फिर दूर खोल कर चली गई.. मई बीएड पर गिर दोनों बाहें पहला कर अम्मी जान के अपने लुंड पर फुद्दी की रगड़ को फील करने लगा. आठ कितना मज़ा आया था तब.. और फील कर भी उतना hi मज़ा आ रहा था. बीएड पर अम्मी जान के जिस्म की खुशबु और गर्मी अभी तक मौजूद थी..
मई तेज़ साँस लेता अम्मी जान के जिस्म की खुशबु को अपने अंदर उतरने लगा.. फिर मेरी आँखों में मीठी मीठी नींद उतरने लगी.