Mere Khandan Ki Anmol Phuddiyan - Page 4 - SexBaba
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Mere Khandan Ki Anmol Phuddiyan



चौबीसवीं क़िस्त


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अम्मी जान की ऑंखें हैरत से फेल गई थी. वो मुझे देखे hi जा रही थी. और मई मुस्कुराता हुआ उन्हें देख रहा था. फिर अम्मी जान वलिहना अंदाज़ में मेरे चेहरे को चूमने लगी. जोश के साथ पूरी शिद्दत के साथ चूमने लगी. ऐसा करते हुए अम्मी जान की फुद्दी का दबाओ मेरे लुंड पर बढ़ने लगा था. अम्मी जान की फुद्दी मेरे लुंड पर हरकत करने लगी थी. पंतय में कैद अम्मी जान की महकती हुई गुलाब की पंखड़ियों जैसे लबों वाली phuddi(bad में देख ली थी, तो अभी से बोल रहा हों) मेरे लुंड पर मस्सगे करने लगी.

एक माँ अपने बेटे के मोह से ऐसी समझदारी वाली बात, ज़िम्मेदारी वाली बात सुनकर कैसे खुद पर काबू बनाये रख सकती थी. अम्मी जान तो मुझसे पहले hi बहुत प्यार करती थी. उसी प्यार के चलते वो मेरे साथ खुलने लगी थी. किश तो आम बात बन गई थी. उसी आम सी किश का वो भरपूर बना कर मुझे चूमे जा रही थी

फिर अम्मी जान की ऑंखें थोड़ी सी नाम हो गई. अम्मी जान मेरे ऊपर लेती हुई अपने मुम्मे मेरे सीने पर दबाये अपनी फुद्दी मेरे लुंड पर दबाये मेरे गाल से गाल रगड़ने लगी.

अम्मी जान बड़े hi जज़्बाती लहजे में बोली - बाबू तुम क्या से क्या बनते जा रहे हो. मैंने इतना भी नहीं सोचा था. मेरा बाबू इतना ज़यादा पायरा, फरमानबरदार और ज़िम्मेदार बन जाएगा. और तो और राह एक औरत उसके चेहरे की चमक और पाकीज़गी, भरोसा मर्दानगी और प्यार देख वो उससे बात करेगी. कोई भी शर्म ो हाय वाली औरत अनजान से मिल ऐसी बातें नहीं करती. जैसी rukhsar(phool शॉप पर मिलने वाली औरत का नाम) ने तुमसे वहां खड़े खड़े की. तुम्हे बीटा मान लिया. अब तुम ऐसी सुलझी हुई बड़ों वाली अपनी बहनो की फ़िक्र में डूबी बातें कर गए. बाबू ये सब बहुत ज़यादा है. और इतना ज़यादा है. तेरी अम्मी जान से ये सब संभाला नहीं जा रहा है. बाबू तुम कितने अच्छे बनते जा रहे हो. पहले रोज़ जब तुमने मेरे माथे से माथा जोड़ मुझसे वो बातें बुलवाई थी न....

अम्मी जान मेरे गाल से गाल रगड़ मेरी नक् से नक् रगड़ कर मेरी आँखों में देख अपनी फुद्दी मेरे लुंड से रगड़ कर, अपने मुम्मे मेरी छाती से रगड़ कर थोड़ी सी ऊपर खिसकती हुई मेरी आँखों को चुम गई.. फिर वापिस से वही अमल दोहराती हुई एक बार फिरसे खिसकती हुई मेरे चीन पर अपने होंठ लगा कर चुम गई.

ऐसी रगड़ के बाद लुंड साब पर मर्द के कण्ट्रोल से बहार हो जाया करती है. फुद्दी की ऐसे रिकॉर्ड तोड़ रगड़ पर लुंड खड़ा न हो तो वो लुंड hi नहीं हो सकता. मेरा लुंड जोश में आते आते पूरी तरह सर उठा गया.. अंडरवियर में कैद अम्मी जान की फुद्दी के साथ लगा हुआ था.. अम्मी जान भी कमालात को पोहंची हुई हस्ती थी. वो बिना कुछ भी अपनी आँखों से शो करवाए मुझपर अपना प्यार बरसाए जा रही थी.

इतना सब करने के बाद अम्मी जान मेरी आँखों में न देख कर मेरे चेहरे पर एक हाथ रख फेरती हुई बोली

अम्मी जान - मेरे दिल में खटक भी हुई थी. और तुम्हारी अम्मी जान होने के नाते के जवान मर्द बेटे की अम्मी जान होते के नाते मुझे बहुत ज़यादा शर्म भी आई थी बाबू. इतनी शर्म कह अगर तुम बाबू न बन गए होते तो मई तुम्हारी आँखों में देख hi नहीं सकती थी. लेकिन तुम्हारे अनमोल प्यार की शिद्दत ने दिल की सच्चाई और रूह की पाकीज़गी को सबत कर दिखाया. फिर मैंने तो तुझे अपनी कोख से जनम दिए था. कैसे तुझसे दूर रह सकती. शर्म महसूस करती कैसे तुझसे दूर हो सकती थी.. आज जो कुछ तुमने किया, जैसी इज़्ज़त और प्यार तुझे मिला.. मेरे दिल में तू और भी गहराई बनता हुआ उस गहराई में उतर गया है बाबू. अब मेरे दिल पर पूरी तरह से तेरी हुकूमत क़ायम हो चुकी है बाबू.. मेरा दिल पूरी तरह से तेरा हो गया है बाबू.

माँ मेरे गर्म साँसे छोड़ रही थी.. सुकून भरी साँसे मुझे तो बहुत ज़यादा सुकून पोहंचा रही थी. पर मेरे लुंड की बेचैनी को साथ hi बढ़ा रही थी अम्मी जान की फुद्दी की गर्मी और नरमी.

मई -- अम्मी जान ये सब आप के दूध का कमल है. आप के बेपनाह और भरोसा का कमल है.

अम्मी जान - नहीं ये सब तुम्हारा hi कमल है. वर्ण तो हर माँ hi अपने बच्चे से प्यार और उसपर भरोसा करती है. बाबू तुम्हे अपनी मोहब्बत अपनी शराफर से मेरे दिल को पूरी तरह से जीत लिए है

मई धीरे से बोलै -- शराफत. कहाँ अम्मी जान.. बाबू अब कहाँ शरीफ रहा है

अम्मी जान - ऐसा न कह. मेरे दिल से पूछ तू कितना शरीफ है. तेरा प्यार कितना पाक साफ़ और शरीफ है. तूने कहा था. तू पहले दो लड़कियों में इन्वॉल्व था. फिर तूने कहा तूने उन दोनों को अनमोल प्यार पर कुर्बान कर दिए है.. बाबू ऐसी बातें कहनी आसान है.. अमल करना नामुमकिन होता है.. लेकिन तूने ऐसी शानदार जवानी का मालिक होकर भी खुद को सबत कर दिखाया

मई -- इसमें मेरा मतलब भी तो हो सकता है न

अम्मी जान - मतलब के बिना तो कुछ भी नहीं है इस दुन्या में. क्या तुझे प्यार न मिले तो पहले के जैसे hi मुझे सबको प्यार दे सकता है

मई -- हाँ दे सकता हों

अम्मी जान - नहीं दे सकता

मई - क्यों नहीं दे सकता

अम्मी जान मुस्कुराई - यहाँ मई तुझसे जीत रही हों बाबू.. जो बात मई कहने वाली हों. हो सकता है तुम जानते हो. पर इस वक़्त वो तुम्हारी दिमाग में नहीं है

अम्मी जान की स्माइल और ऐसी बात पर मई भी मुस्कुरा पड़ा.. अम्मी जान आज फुल मूड में थी.. मेरे हार्ड हो चुके लुंड पर फुद्दी रखे लेती थी. एक बार फिरसे अपनी फुद्दी मेरे लुंड पर रगड़ती हुई ऊपर को खिसकी और मेरे पुरे चेहरे को चूमने लगी. देर तक चूमती रही.. फिर से वापिस अपनी फुद्दी मेरे लुंड पर ठीक सही जगा टिका कर वो मेरे चेहरे पर हाथ फेरती हुई बोली

अम्मी जान - वो ऐसे कह जब तुम्हे प्यार के बदले प्यार नहीं मिलेगा न तुम उदास रहने लगोगे.. हमारे लिए प्यार को काम तो नहीं करोगे.. लेकिन उदास होने की वजा से तुम खुल कर पहले जैसा प्यार दे नहीं पाओगे

मई अम्मी जान की बात सुन क़ायल होता हुआ बोलै -- हाँ अम्मी जान. सही कहा आप ने

अम्मी जान चहकती हुई - तो हुई न फिर बात मतलब की. मतलब के बिना दुन्या में कुछ भी नहीं है. फिरसे ऐसा न कहना... मई औरत हों बाबू.. और एक औरत कुछ पहचाने या न पहचाने पर नज़रें ज़रूर पहचान लेती है. जब से तुम बदले हो न... एक यही काम तो मई रेगुलर कर रही हों. तुम्हारी नज़रें पहचानन्ने वाला काम

मई कुछ घबराया..

अम्मी जान खिलखिला कर है पड़ी -- ना बाबू घबरा मत.. और कोई भी बात न करना.. कुछ कहना भी मत.. कुछ मुझसे सुन्ना भी मत.. जैसे सब चल रहा है.. चलने दे.. जो जैसे तू जिस किसी के साथ भी डील कर रहा है... करता रह..

मई हैरान hi तो रह गया था अम्मी जान की बात सुनकर...

अम्मी जान ने मेरी आँखों पर बरी बरी ऊँगली फेरनी शुरू कर दी

अम्मी जान -- मई भी कई दिनों से ऐसी hi हैरानी में जी रही हों बाबू.. पता है, कभी सोचा नहीं था, ऐसी मस्त और खुशियों भरी लाइफ जीने को मिलेगी मुझे. मई बहुत हैप्पी हो बाबू.. इतनी हैप्पी कह मई बता नहीं सकती.. अब तुम्हारे मतलब वाली बात का पूरा पूरा जवाब दे दूँ मई तुम्हे.. जो मतलबी होता है न, वो हर जगा से अपना मतलब hi निकलता है. तुम्हारी उस दिन की डिटेल से मुझसे करि सभी बातों में तुम्हारा कोई भी मतलब नहीं था. होता न तो तुम कभी भी उन दोनों लड़कियों से रिलेशन का थे एन्ड नहीं करते. तुम क्या समझते हो, मई एक अहमक़ माँ हों. दो दो बेटियों की माँ हों. एक बीटा माँ से ऐसी बातें करे और माँ बुद्धू बन सब सुन समझ hi न पाए.. नहीं बाबू ऐसी कोई बात नहीं...

फिर अम्मी जान हस्ती हुई मेरे ऊपर से उठती हुई बोली -- और बात वैसी भी नहीं है. तुम क्या समझते हो, कुछ भी तुम्हे ऐसे hi मिल जाएगा क्याआआआ ??

इतना बोल अम्मी जान बीएड से उतर चप्पल पहनंने लगी.. और मई सर खुजरा हुआ अम्मी जान को देखने लगा.. सच hi तो कह रही थी अम्मी जान.. जिस बेटे के लुंड को अपनी फुद्दी की गर्मी से खड़ा करने के बाद भी देर तक अपनी फुद्दी लुंड पर रखे रही थी.. फिर फुद्दी को बड़े hi कातिल अंदाज़ में रगड़ कर अपने प्यार के रंग भी दिखा और बता गई थी. सच में कोई भी अम्मी जान ऐसी अहमक़ नहीं होती.. वो तो मेरा प्यार अनमोल सबत हो चूका था.. वर्ण तो सीधा फायर मेरे दिल के सुराख़ बनता हुआ मेरी पीठ से निकल गया होता.

ये भी मई पहले hi दिन जान गया था. अब घर में कोई भी फुद्दी मेरे लुंड की पोहंच से दूर नहीं है.. अम्मी जान नीचे फर्श पर देख धीमे अंदाज़ में मुस्कुरा रही थी.. बड़ी सलौली अपने शूज भी पहन रही थी.. जैसे मेरे लिए hi वही कड़ी हों. और छह रही हों. मई बीएड से उतर उन्हें पकड़ लून. कमरे से जाने न दूँ

वाह्ह्ह क्या ऐडा थी अम्मी जान की.. मई भी समझता हुआ झट बीएड से उतर गया. तभी अम्मी जान हस्ती हुई अपनी चप्पल पहन दूर हो गई..

फिर सीरियस होकर मुझे देख बोली -- बहुत देर हो गई है. तेरे पापा इंतज़ार में होंगे.. सोना भी और फिर सुबह जल्दी उठना भी है.. एक तो तुम्हारे पास आती हों तो टाइम का भूल भी जाती है और टीम का अंदाज़ा भी नहीं रहता..

मई आगे बढ़ अम्मी जान को अपनी बहन में जकड गया.. इस बार मेरा लुंड अम्मी जान की फुद्दी से कुछ ऊपर लगा.. अम्मी जान के भरी मुम्मे मेरे सीने में डाब गए..

अम्मी जान मीठी स्माइल से -- मैं नहीं भरा क्या अभी.. कितना प्यार किया मैंने तुमसे. अब मुझे जाने दो बाबू.. कसम से बहुत देर हो गई है

मई अम्मी जान के गाल को चुम कर -- प्यार आपने किया है.. मेरा प्यार करना तो अभी रहता है

अम्मी जान हस्ती हुई 😂😂 -- तुम्हारा प्यार करना और मेरा प्यार करना एक बराबर है बाबू.. अब छोडो भी मुझे जाने दो न बाबा.. देर हो रही है मुझे

मई -- नहीं जाने दूंगा

अम्मी जान -- मान जाओ न babu..mere प्यारे बेटे नहीं हो

मई -- हूँ!

अम्मी जान - तो फिर मुझे छोडो

मई -- बहुत दिनों से आप ने मुझे लटका रखा है अम्मी जान.. आज तो आप मुझे अपना पेट चूमने को दे hi दें

अम्मी जान के गाल गुलाबी हुई शर्म से.. फिर अम्मी जान बोली -- आज नहीं.. फिर कभी.. आज देर हो गई है. एक तुमसे इतनी बातें की.. दूसरा रुखसार से फोन पर बात करते कितना टाइम लग गया... आज जाने दो.. फिर कभी.. और अगली बार मई तुम्हे रोकूंगी नहीं..

मई -- आप बड़ी तेज़ हो अम्मी जान

अम्मी जान 😍😍😍 -- कहाँ तेज़ हों. होती भी तो कहाँ अपने बाबू से भगति मई. और भाग कर जाउंगी भी कहाँ.. चल कर ले मुझे प्यार यहीं खड़े खड़े..

मई अम्मी जान के एक गाल कर किश कर गया.. अम्मी जान निहाल होने लगी. मई अम्मी जान की आँखों में देखता हुआ दूसरे गाल पर किश कर गया

अम्मी जान -- ऐसे hi सुकून से प्यार में मज़ा है न बाबू

मई -- हाँ अम्मी जान

अम्मी जान - क्या तुम मुझे कभी जल्दबाज़ी में प्यार करना चाहोगे

मई -- नहीं अम्मी जान

तभी अम्मी जान ने झट खुद को मुझसे अलग कर दिए. और हस्ती हुई बोली -- अब बाकि का प्यार सुकून से करना. अब टाइम नहीं है.. बहुत रत हो चुकी है. अगर तुमने ज़िद करि तो जल्दबाज़ी से प्यार करोगे.. और तुमने खुद कहा है.. जल्दबाज़ी वाला कोई प्यार मेरे साथ नहीं करोगे

मई दिल मासूस कर रह गया अम्मी जान की इस चालाकी पर

अम्मी जान हस्ती हुई हाथ उठा कर मेरे चेहरे की तरफ इशारा करती हुई बोली - हाहाहा बाबू तेरे चेहरे कर रंग क्यों फीका पद गया

मई ढीला पड़ता हुआ -- ऐसा ज़ुल्म करे जो खुद की hi अम्मी जान अपने बेटे पर.. फिर हालत न हो चेहरे की ऐसी hi.. आह्हः आज तो ऐसे hi सोना पड़ेगा मुझे आधे अधूरे प्यार के साथ

अम्मी जान भी काम नहीं थी -- मई भी तो आधे अधूरे प्यार के साथ hi सोवांगी न. चल शाबाश मेला बच्चा अब बीएड पर लेट कर सो जा..

मई - आप मुझे लोरी सुना कर सुला दें न अम्मी जान

अम्मी जान 🤣🤣 -- बच्चो अभी तुम्हारे पापा उठ गए होंगे. मई उन्हें लोरी दे कर सुलाऊँगी.. और भी मेरी ड्यूटी वहां है लोरी दे कर सुलाने की.. यहाँ नहीं.. यहाँ मेला बाबू मोबाइल पर कुछ सुन कर लोरी की कमी को पूरा कर लेगा..

फिर वही कड़ी कड़ी hi बोली -- ोकक टाटा bye bye अच्छे बचे देर रात तक नहीं जगा करते..

फिर अम्मी जान हस्ती हुई कमरे का पहले लॉक फिर दूर खोल कर चली गई.. मई बीएड पर गिर दोनों बाहें पहला कर अम्मी जान के अपने लुंड पर फुद्दी की रगड़ को फील करने लगा. आठ कितना मज़ा आया था तब.. और फील कर भी उतना hi मज़ा आ रहा था. बीएड पर अम्मी जान के जिस्म की खुशबु और गर्मी अभी तक मौजूद थी..

मई तेज़ साँस लेता अम्मी जान के जिस्म की खुशबु को अपने अंदर उतरने लगा.. फिर मेरी आँखों में मीठी मीठी नींद उतरने लगी.
 
पच्चीसवीं क़िस्त

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सुबह मेरी आंख तब खुली जब मेरे गाल को कोई अपने नरम और गरम हाथ से सहला रहा था. आंख खोल जो देखा तो माहिरा एपीआई थी. आंख खुलते hi उनका हसीं मुखर देख मेरी आँखों में चमक और होंटो पर मुस्कराहट आ गई

माहिरा एपीआई बड़े प्यार से मेरी hi आँखों में देख रही थी. शर्म का रंग भी उनकी आँखों में था

माहिरा - मेरा बाबू उठ गया

माहिरा एपीआई मेरे गाल पर ऐसे hi हाथ फेर कर बोली

मई - हाँ उठ गया एपीआई. बहुत ाचा लगा आंख खुलती hi आप के हसीं और प्यारे चेहरे को देख कर

माहिरा एपीआई मुस्कुरा कर मेरे गाल पर फिरसे हाथ फेरने लगी - पहले भी तुझे कई बार उठा चुकी हों बाबू. लेकिन आज की बात अलग है. आज दिल को अलग hi ख़ुशी मिल रही है. अलग hi सुकून दिल में उतर रहा है. मई रात सोने से पहले hi अलार्म लगा कर सोइ थी. बड़ा दिल था मेरा मई ऐसे तुम्हे उठाऊं.

मई - बहुत अच्छा किआ एपीआई आप ने.. कसम से मुझे बहुत ाचा लगा. और भी ाचा लगता अगर आप--

माहिरा - बोलो न रुक क्यों गए तुम बाबू. तुम्हारा आवाज़ कानो में रास घोलती है

मई - काश आप अपने हाथ से मेरे गाल को न सहला कर अपने मीठे होंटो से मेरे गाल को चुम मुझे उठती

माहिरा एपीआई के होंटो पर मीठी मुस्कान उभर आई. फिर वो झुक मेरे गाल को चुम गई

माहिरा - लो अब चुम लिए मैंने अपने बाबू के गाल. अब खुश

मई - नहीं

माहिरा - क्यों ?

मई - अब तो हमारा रिश्ता एक साथ कई स्टेप बदलता हुआ अपना रुख चेंज कर चूका है न एपीआई. तो फिर एक माशूका की तरह आप मुझे प्यार दे कर भी तो उठा सकती थी

माहिरा एपीआई के सुर्ख होते हुए कुछ फेल गए शर्म से. चमक भी बढ़ गई.. फिर मेरी आंख में देख शर्म से बोली - पता नहीं कल कैसे मई इतनी बावली हो गई थी बाबू. खुद पर कण्ट्रोल लूसे कर बैठी थी. वर्ण शर्म तो मेरे अंदर भी अम्मी जान और किन्ज़ा एपीआई के जितनी hi है. हाँ हों मई कुछ कुछ मॉडर्न सोच वाली. मॉडल भी बनना चाहती हों. अपनी फ्रेंड के साथ रिलेशन में बहुत आगे भी बढ़ चुकी हों. पर मेरी शर्म वैसी की वैसी hi है बाबू

मई - ये तो बहुत अच्छी बात है न

माहिरा - एक बात है. एक दिल कहता है. जितना ज़रूरी है. उतना शर्म को साइड रख सब कुछ कर जाऊं. अब तुम्हारे सामने मेरा दिल मेरा दिमाग पूरी तरह खुल चूका है. मुझे इतनी शर्म पता नहीं क्यों आने लगी है अब तुमसे. हालाँकि प्यार में इज़हार के बाद शर्म जाए न जाए पर जिससे प्यार हो, उसके साथ पूरी तरह खुल ज़रूर जाते हाँ. लेकिन मई खुल नहीं पा रही हों. पहले सोचने को बहुत कुछ सोच तो गई थी. मोह से बोल भी गई थी. लेकिन अब जब साडी सोचें सरे जज़्बात हक़ीक़त का रूप धारण लगे हाँ तो सब कुछ खवाब खवाब सा लगने लगा है. ऐसा लगता है. जैसे आंख खुलेगी और खवाब टूट जाएगा

मई माहिरा एपीआई का हाथ पकड़ चुम गया.. माहिरा एपीआई का जिस्म शर्म से कैंप उठा.

मई - क्या ये सोच कर यकीन नहीं आया आप को. बाबू का प्यार अनमोल बनकर सरे सपनो को हक़ीक़त का रूप दे चूका है

माहिरा एपीआई ने अपना हाथ मेरे हाथ में hi रहने दिए - जान चुकी हों. वो तो मई ऐसे hi कह रही थी. वर्ण तो यकीन कर लेने के बाद मेरा रुअन रुअन झूम उठा है. रात मुझे बेपनाह ख़ुशी के चलते नींद नहीं आणि चाहिए थी. लेकिन रात मुझे बड़ी मीठी नींद आई बाबू.. इतनी मीठी नींद कह पहले कभी नहीं आई

मई फिरसे एपीआई का हाथ चुम कर बोलै - क्या खवाब देखा था. खवाब में मुझे देखा था

माहिरा बड़ी hi दिल ावेज़ मुस्कान के साथ बोली - जो दिल में हो, शिद्दत से जिससे प्यार भी हो. उसका प्यार अनमोल भी हो. उसके प्यार की गर्मी जिस्म के रुएँ रुएँ में रची हुई हो. फिर वो खवाब में कैसे नहीं आएगा

मई - एपीआई मेरे ऊपर आ कर लेट जाइये न. ऐसे मुझे ाचा लगेगा

माहिरा एपीआई के गालों की लाली बढ़ी.. फिर दूर की तरफ देखने लगी. मैंने देखा तो पता चला दूर अंदर से लॉक्ड है

मई - ये आप ने ाचा किआ एपीआई

माहिरा - मई भी चाहती थी. मुझे कोई डिस्टर्ब न करे. मई कुछ पल तुम्हारे साथ बिताना चाहती थी

इतना बोल माहिरा एपीआई चप्पल उतार बीएड पर छड़ी.. फिर मेरे ऊपर आने लगी. तभी माहिरा एपीआई की नज़र मेरे खड़े लुंड पर पड़ी. उनकी शर्म और भी बढ़ी. कुछ सांस भरी हुई... फिर मेरी आँखों में देख एक नॉटी स्माइल पास करती मेरे ऊपर आ गई..

रात अम्मी जान की तरह माहिरा एपीआई ने भी मेरे लुंड पर अपनी फुद्दी राखी और मुम्मे मेरे सीने पर दबती हुई लेट गई

मैंने दोनों बाहें माहिरा एपीआई की कमर पर रख दी

माहिरा एपीआई ने पंतय नहीं पहन राखी थी

मई - एपीआई ये आप ने अच्छा किआ जो आधे hi ड्रेस में आप चली आई

एपीआई की आँखों में शर्म के साये लहराए.. एक मीठी और शर्मीली मुस्कान उनके होंटो पर आई.

माहिरा - मई रात hi आधे कपडे पहन कर सोइ थी. कल किन्ज़ा एपीआई के साथ जो कुछ हुआ था हमारे बीच. हमारा जो टकराओ हुआ था. हमारे जिन जो चीज़ का टकराओ हुआ था न. जैसे अब हो रहा है.. मुझे ऐसा सुकून मिला बाबू. मुझे पुरे कपडे अच्छे नहीं लग रहे थे. इसलिए मई आधे अधूरे कपडे पहन hi लेट गई.. पता है बाबू मेरी जो सबसे कीमती चीज़ है. वही जिसकी वजा से कल मुझे शर्मिंदा भी होना पड़ा. किन्ज़ा एपीआई से दन्त भी कहानी पड़ी. फिर उसी चीज़ की वजा से hi मुझे एक बहुत बड़ा इनाम भी मिला. मुझे बाबू का अनमोल प्यार सबसे ज़यादा मिला.

मई - कहाँ मिला

माहिरा एपीआई धीरे से हसी - मिला न.. पूरी तरह नहीं मिल सका है. पर हमारे दिलों के एक हो जाने से उन दोनों के मिलान की राह भी हमवार हो गई है. कुछ परदे हाँ, वो भी धीरे धीर सरक जाएंगे. मतलब एक दिन हमारे दोनों का मिलान तो होगा hi न

माहिरा एपीआई धीरे धीरे खुलती जा रही थी

मुझे रात माँ माँ सन याद आया. लेकिन माहिरा एपीआई के साथ मेरा अलग से करने का मूड बना

मई - मई आप के ऊपर आ जाऊं एपीआई

माहिरा - हम्म्म आ जाओ. लेकिन तुम बहुत भरी हो बाबू.. देखना कहीं मेरा कचूमर न निकल देना तुम

मई माहिरा एपीआई का पलट लिटाता हुआ खुद उनके ऊपर आ गया.. खुद को पूरी तरह उनके ऊपर hi गिरा कर पूरा वज़न उनके ऊपर hi दाल गया. माहिरा एपीआई मेरी आँखों में देखने लगी. ऐसा करने से मेरा लुंड उनकी फुद्दी पर कुछ ज़यादा hi डाब गया था. शर्म से उनकी पलकें कैंप उठी

मई हलके से अपना लुंड माहिरा अपनी की फुद्दी पर रगड़ गया.. लेकिन मुझे मज़ा नहीं आया.. मई अपनी गांड उठा कर अपने लुंड को पकड़ कर अंडरवियर की साइड से निकल गया.. फिर ऐसे hi माहिरा एपीआई के फुद्दी पर रख गया

माहिरा एपीआई की फुद्दी पर इस बार सही से लुंड लगा तो मेरे लुंड ने माहिरा एपीआई की फुद्दी के होंटो को फील कर लिए.. माहिरा एपीआई कैंप उठी. मेरी आँखों में न देख सकीय

फिर मई ऐसे hi माहिरा एपीआई की फुद्दी के लबों पर अपना लुंड रगड़ता हुआ माहिरा एपीआई की आँखों को चूमने लगा. इधर लुंड का जोश बढ़ने लगा. वो माहिरा एपीआई की फुद्दी पर दबने लगा.. मई माहिरा एपीआई के गालों को चूमने लगा. पुरे चेहरे को चूमने लगा. अभी एपीआई के होंटो पर मेरा रसाई नहीं हो सकीय थी. माहिरा एपीआई मेरा प्यार अपने चेहरे पर प् कर फूली नहीं समां रही थी. उनके चेहरे की चमक बढ़ गई

मई मदहोश लहजे में माहिरा एपीआई के गाल पर ज़ुबान फेर बोलै - एपीआई आप ने अपनी सबसे कीअंति चीज़ मेरे नाम लिख दी है न

माहिरा - हाँ बाबू.. लिख दी है

मई - आप ने अपनी सबसे कीमती चीज़ के दर्शन अपनी बेस्ट फ्रेंड को करवा दिए हाँ न

माहिरा - हाँ बाबू.. अब सोच रही हों. मुझसे गलती हुई

मई - कैसे ?

माहिरा - जो तेरी अमानत थी. वो किसी और को दिखा गई.. सच में मुझे बुरा लग रहा है.

मई - वो पुराणी बायत थी न

माहिरा - फिर भी बाबू.. अब मुझे बुरा लग रहा है. अब से मई उसे कभी नहीं दिखाउंगी

मई - ये अच्छी बात है.. लेकिन ऐसे वो बेचारी उदास भी हो जाएगी और उसे बुरा भी लगेगा

माहिरा - उसे बुरा क्यों लगेगा.. लगता भी है तो मई क्या करूँ. मुझे अब उससे कुछ लेना देना नहीं है

मई - क्या वो आप की बेस्ट फ्रेंड नहीं है

माहिरा - है न.. वही तो है मेरी इकलौती बेस्ट फ्रेंड

मई - क्या उसने खुद से आप को ये सब करने के लिए बोलै था.

माहिरा - नहीं उसे तो मैं hi इस लाइन पर लाइ थी बाबू

मई - आप को तो बाबू मिल गया. वो बेचारी क्या करेगी. शादी तक तो उसे आप का hi सहारा है न

माहिरा - हाँ वो फोन पर भी काफी डिस्टर्ब रही सब करने के लिए

मई - क्या वो बुरी लड़की है

माहिरा - वो बुरी होती तो मई उसके साथ ऐसा सब करती hi क्यों.. वो बहुत अछि और बहुत शरीफ है बाबू

मई - फिर उस शरीफ लड़की की आग को आप hi शांत कर सकती हो.

माहिरा - मई

मई - हाँ आप. वर्ण वो कहीं किसी और को न ढूंढ ले. ऐसे वो किसी गलत हाथ में पद सकती है

माहिरा - हाँ ऐसा हो सकता है बाबू. मई सालों खुद से लड़ी हों. पठान न होती, शर्म वाली माँ की बेटी न होती तो कबकी भटक गई होती. अब मेरी बेस्ट फ्रेंड को मैंने चस्का दाल दिए है. वो अब एक हफ्ते से ज़यादा रह नहीं सकती. बेचैन होने लगती है

मई - फिर तो उसे सहारा डरकर है

माहिरा - ये बात भी है बाबू

धीरे धीरे मेरे लुंड की माहिरा एपीआई की फुद्दी पर रगड़ बढ़ने लगी थी. मई इतनी जल्दी इतना न खुलता अगर पहले से माहिरा एपीआई मेरे लुंड पर अपनी फुद्दी रगड़ कर फुद्दी का पानी न निकल गई होती.

माहिरा एपीआई के मुम्मे फूलने लगे. उनकी फुद्दी आग बरसाने लगी. उनका जिस्म गरम होने लगा. मेरे नीचे दबी माहिरा एपीआई मेरे लुंड की अपनी फुद्दी पर रगड़ का पूरा पूरा मज़ा ले रही थी.

मई और भी ज़यादा मदहोश होने लगा - एपीआई आप अपनी फ्रेंड का साथ न छोड़ना. जैसे हम सब एक दूसरे से बहुत प्यार करते हाँ. ऐसे hi आप उससे और वो आप से प्यार करती है. आप पर भरोसा करती है

माहिरा - हाँ करती है. लेकिन मैंने उसका सीक्रेट तुम्हारे और किन्ज़ा एपीआई के आगे खोल कर उसके भरोसा को तोड़ दिए है

मई - ऐसा तो न कहो आप एपीआई.. क्या हमारा प्यार चीप लेवल का है

माहिरा - नहीं बाबू.. हमारा अनमोल प्यार तो उस लेवल पर है. जिस लेवल को कभी कोई टच भी नहीं कर पाया. और हमारा अनमोल प्यार धीरे धीरे और भी लेवल क्रॉस करता जा रहा है

मई - एपीआई एक स्टेप और आगे बढ़कर अनमोल प्यार के लेवल को अपग्रेड कर लें

माहिरा एपीआई खामोश रही.. एक लम्बी सांस खेंचने लगी. मैं थोड़ा सा ऊपर उठ उन्हें ैसिलय सांस लेने में मदद देने लगा

मई - बोलिये न एपीआई.. हमारे प्यार का डेली एक लेवल ऊपर बढ़ना बनता है न

माहिरा एपीआई भी नशे में थी - हाँ बाबू

मई - क्या आप बता सकती हाँ. हमारे प्यार का लेवल किस अंदाज़ में आगे बढ़ाया जाए.

माहिरा नाह में सर हिला गयी

मई - मतलब मई खुद से लेवल बढ़ा लून

माहिरा - हम्म्म्म

माहिरा एपीआई की श्रम बढ़ रही थी. लुंड की उनकी फुद्दी पर रगड़ भी उन्हें बेचैन करने लगी थी. अपनी फ्रेंड के साथ होती तो बड़ी hi बेशर्मी के साथ बात कर जाती. लेकिन हमारा प्यार अलग था.. अभी नया नया था न.. धीरे धीरे रंग बदलने वाला था

मई - प्यार के इज़हार के बाद सबसे पहले जो काम करते हाँ लवर्स.. मई भी वहीँ करूँगा.. आप चाहें तो अपनी ऑंखें बंद कर सकती हाँ

माहिरा एपीआई समझती हुई झट से अपनी ऑंखें बंद कर गई

मई अपने होंटो पर ज़ुबान फेरता हुआ अपने होंठ धीरे धीरे माहिरा एपीआई के होंटो के करीब करने लगा.. ऐसा करते हुए मेरे लुंड का जोश और भी ज़यादा बढ़ा

तभी मैं एपीआई के होंटो पर होंटो रखने से पहले एक हाथ नीचे ला कर अपने और अपने लुंड के बीच माहिरा एपीआई की कमीज़ के पल्लू को साइड करता हुआ शलवार को पकड़ खेंच गया.. फिर अपने लुंड को जो माहिरा एपीआई की फुद्दी के साथ जोड़ा तो कमल hi हो गया.. मेरा लुंड सही से माहिरा एपीआई की फुद्दी की गर्मी को पता हुआ लबों को महसूस करने laga...mai अपने लुंड को एडजस्ट करता हुआ माहिरा एपीआई की फुद्दी के होंटो के बीच घिसता हुआ अपने होंठ बड़े hi प्यार के साथ माहिरा एपीआई के होंटो से जोड़ गया.

माहिरा एपीआई के वजूद में हलचल हुई. मई बड़े प्यार के साथ माहिरा एपीआई के होंठ चूसने लगा. जैसे पहले प्यार से गालों को चूमा करता था. वैसे hi प्यार से होंटो को चूसने लगा. मुझे कोई जल्दी नहीं थी. हाँ लेकिन मेरा लुंड बड़ा बेताब था.. नीचे से मई थोड़ा जोश बढ़ा कर माहिरा एपीआई की फुद्दी पर लुंड घिसने लगा. ऊपर से बड़े आराम के साथ मई माहिरा एपीआई के होंठ चुस्त चला गया

धीरे धीरे वक़्त गुजरने लगा. लुंड की रगड़ पर माहिरा एपीआई के जिस्म में ींथन शुरू होने लगी. फिर वो अपनी दोनों बाहें मेरी पीठ पर रख मेरी पीठ सहलाने लगी. माहिरा एपीआई ज़यादा स्पीड के साथ गरम होने लगी. असल में आग भी बहुत थी माहिरा एपीआई के जिस्म में. वही आग जैसे पहले खेल खेलते हुए उनके काबू से बहार हो गई थी. एक बार फिरसे काबू से बहार होने लगी..

एकदम hi माहिरा एपीआई ने अपनी ऑंखें खोल दी. मैंने देखा तो एपीआई की ऑंखें गहरी सुर्ख हो चुकी थी..

माहिरा एपीआई फुल मदहोश लहजे में बोली - बाबू जितनी शिद्दत अपने अनमोल प्यार की बढ़ा सकते हो बढ़ा दो..

मई कुछ सोच कर - एपीआई आप का प्यार भी बड़ा अनमोल है. मई चाहता हों. एक बार फिरसे आप अपना जोश मुझे दिखाएँ

एपीआई की शर्म बहुत काम हो चुकी थी. अब मई भी समझ गया था. लास्ट स्टेज पर पोहंच माहिरा एपीआई खुद से बहार होने लगती थी

वो फिर खुद से बहार होती हुई बोली - बाबू मुझे तेरी नज़रों में अपनी वैल्यू काम नहीं करवानी है.

मई - नहीं काम होगी

माहिरा - बाबू मई बहुत जल्द हॉर्नी होने लगती हों. तुझे बुरा न लग जाए

मई - ऐसा सोचिये भी मत एपीआई. आप तो हर लम्हा मेरे दिल में अंदर और अंदर तक उतरती जा रही हाँ. आप खुद में कुछ भी हों. पर जैसे मई अम्मी जान का बीटा हों. ऐसे hi आप भी अम्मी जान की बेटी हाँ. मैंने और आप ने अम्मी जान का दूध पिया है. हमारा प्यार कभी काम नहीं हो सकता. तो हमारे दिलों में एक दूसरे के लिए फर्क भी नहीं आ सकता

माहिरा - हाँ नहीं आ सकता. पर मई पता नहीं क्यों दूसरों से शायद अलग हों बाबू.. पहले देखो मुझे कितनी शर्म ा रही थी. पर तुम्हारे प्यार करने की वजा से मई जल्द hi खुद से बहार होने लगी. तुम देख रहे हो न मेरी आँखों का बदला रंग.. ये रंग कई बार बदल चूका है बाबू.. जब भी ये रंग बदला है न. कसम से हर बार मुझे ुसकता रहा है. मई साडी शर्म और खंडन की इज़्ज़त को साइड रख वो सब कुछ कर जाऊं.. जो करने की खवाहिश मेरे अंदर सबसे बढ़कर है. इस वक़्त वही खवाहिश उरूज पर है बाबू..

माहिरा एपीआई तेज़ सांस लेती हुई बोली

मई - इसी लिए तो सारा खेल आप के हैंडओवर कर रहा हों. आप अपने दिल की कर लें

माहिरा - ठीक है फिर

मई साइड लेता.. और इस बार माहिरा एपीआई बिना शर्म के मेरे ऊपर आ कर खुद से अपनी कमीज़ का पल्लू साइड करती तसली के साथ अपनी फुद्दी के होंटो को मेरे लुंड की कैप पर सेट करती हुई मेरे ऊपर लेट गई.. फिरसे तेज़ सांस लेती अपने मुम्मे फूलती मेरी आँखों में देख अपनी ऑंखें बंद करती हुई मेरे होंटो के साथ अपने होंठ मिलाये जोश के साथ चूसने लगी..

मई माहिरा एपीआई के अंदर की आग को देख हैरान रह गया.. उफ़ कितनी गरम थी मेरी बहन.. मई माहिरा एपीआई के जोश को और बढ़ने के लिए उन्हें और भी ज़यादा मज़ा देने के लिए उनकी कमीज़ में हाथ घुसा कर उनकी नंगी कमर कर अपने नंगे और गरम हाथ फेरने लगा..

माहिरा एपीआई किश करती हुई अपनी फुद्दी को धीरे धीरे जोश बढाती हुई मेरे लुंड पर घिसने लगी.. मई भी माहिरा एपीआई की कमर पर हाथ फेरने लगा. मेरे हाथ बार बार माहिरा एपीआई की शलवार को चहहू रहे थे.. फिर ऐसे hi एक बार मेरी एक ऊँगली माहिरा एपीआई की शलवार में घुस गई.. तब मैंने धयान दिए तो पता चला माहिरा एपीआई की शलवार में नाडा नहीं इलास्टिक है..

जैसे hi मेरी ऊँगली माहिरा एपीआई की शलवार में घुसी. माहिरा एपीआई ने ऑंखें खोल मेरी आँखों में देखा.. उनकी आँखों में चमक आई. और मई बहुत कुछ माहिरा एपीआई की आँखों की चमक देख समझता हुआ अपने हाथ माहिरा एपीआई की शलवार में घुसा कर उनके नंगे पिछवाड़े पर रख फेरने लगा..

आठ मैंने तो एक लेवल का सोचा था. लेकिन ये तो एक साथ कई लेवल मई अचीव करने लग गया था.. बढ़िया.. बहुत बढ़िया था ये सब..

मई माहिरा एपीआई के गरम और नरम गांड पर हाथ फेरने लगा. उनके चूतड़ों पर दबाओ दाल अपने लुंड पर और भी कस्सके दबाने लगा.. इधर माहिरा एपीआई का जोश और भी बढ़ता चला गया.. मेरा लुंड कैसे न जोश में आता.. वो भी जोश में आने लगा. बड़ी hi करारी और मज़े की रगड़ माहिरा एपीआई की फुद्दी पर लगा रहा था..

मई अपनी उंगिलयां माहिरा अपनी की गांड की लकीर में दाल गया.. फिर मई माहिरा एपीआई की गांड की लकीर गांड के छेड़ को उँगलियों से कुरेदने लगा

बास मेरे ऐसे करने से माहिरा एपीआई का जोश हदों से गुजरने लगा.. फिर वो मुझे वीलडली मुझे किश करने लगी.. अपनी फुद्दी मेरे लुंड पर पुरे जोश के साथ रगड़ती चली गई...

इधर मेरे हाथ लाइफ में पहली बार सेज खुनी रिश्ते वाली की गांड के लम्स पर झूम उठे थे... मेरा भी जोश में आया माहिरा एपीआई की गांड पर हाथ फेरता चला गया

जैसे अचानक से तेज़ रफ़्तार गाडी के सामने किसी के आ जाने पर गाड़ी का ड्राइवर ब्रेक लगा कर गाड़ी रोक जाता है.. ऐसे hi माहिरा एपीआई भी फुल्ली स्पीड से ड्राइव करती हुई एकदम से ब्रेक लगा का ढीली पड़ती चली गई. माहिरा एपीआई की फुद्दी का गरमा गरम पानी मेरे लुंड पर रिस्ता हुआ आने लगा.. माहिरा एपीआई मेरे ऊपर गिरी पड़ी hi लम्बी लम्बी साँसे लेने लगी.

अब मेरा भी लुंड माल छोड़ने को बेचैन था.. मई ऐसे hi माहिरा एपीआई की गांड पकड़ माहिरा एपीआई की फुद्दी को अपने लुंड पर दबा दबा कर रगड़ने लगा

जब तक माहिरा एपीआई रिलैक्स होती.. मेरे लुंड ने भी मणि छोड़ दी.. आठ आज पहली बार भाभी के बाद अपने घर में किसी के जिस्म के साथ अपने लुंड को रगड़ मेरे लुंड ने मणि निकली थी..

मई भी हल्का होकर सुस्त पड़ने लगा.. माहिरा एपीआई की फुद्दी के पानी के बाद मेरे लुंड से निकली मणि ने मेरे ट्रॉउज़र को गीला करना शुरू कर दिए था..

फिर माहिरा एपीआई मेरी आँखों में शर्म से देखती हुई मेरे गाल और मेरे होंटो पर किश करती हुई बड़ी hi ख़ामोशी के साथ मुझसे अलग हुई.. बीएड से उतर अपनी चप्पल पहन दूर के पास गई. शर्मीली मुस्कान से मुझे देख आँखों hi आँखों में गुडबाय कहा.. उसके बाद पहले लॉक खोल फिर दूर खोल तेज़ी के साथ कमरे से निकल गयी.

मई ऐसे hi लेता दरवाज़े को ताकने लगा.... आठ माहिरा एपीआई... आप ने अपना जिस्म अपने भाई के नाम कर hi दिए.. अपना अनमोल प्यार दे कर मेरा अनमोल प्यार प् hi लिए आप ने माहिरा एपीआई..

मई माहिरा एपीआई को याद करता ये भूल गया. दूर खुला हुआ... धयान तब दिए.. जब अम्मी जान की आवाज़ सुनाए दी

अम्मी जान - बाबू ये क्या है ??.

मई अम्मी जान को देख अपने भीगे ट्रॉउज़र को देखने लगा.

फिर हड़बड़ा कर उठ बैठा और दोनों हाथ अपने भीगे ट्रॉउज़र पर लुंड वाली जगा पर रख गया

अम्मी जान धीरे से है पड़ी.. बोली कुछ नहीं

मई - अम्मी जान.. रात की खुशबु का ये सारा कमल है

अम्मी जान - मई जानती हों. किसका कमल है ये सारा

मई - आप जानती हाँ सब

अम्मी जान - माँ हों.. एक नहीं कई ऑंखें हाँ मेरी

मई - तब क्या मुझे शर्मिंदा होना चाहिए

अम्मी जान - ये मैंने कब कहा

मई - तोह ?

अम्मी जान - ये करिश्मा कब और कैसे हुआ.. सब जाँणे की खवाहिश एकदम से hi दिल में सर उठाने लगी है बाबू..

मई - क्या आप जानना चाहती हाँ ??

अम्मी जान मेरे पास बेथ बोली - अगर तो ये सीक्रेट है तब तो मुझे न बताना.. और नहीं है तो बता सकते हो. आफ्टरऑल मई तुम्हारी अम्मी जान हों. और जहाँ तक मेरा ख्याल हों.. क्वीन का टाइटल मेरे hi नाम रहने वाला है

अम्मी जान के चेहरे पर भी शर्म की गहरी चादर थी. पर वो शराफत और हद के दायरे में रहती हुई hi बोल रही थी.

मई - वूववव अम्मी जान.. आप ने कितना सही कहा.. सच में आप के शिव कोई क्वीन हो भी नहीं सकती..

अम्मी जान - मई किसी और को होने भी नहीं दे सकती

मई - एक है.. बल्कि एक नहीं दो हाँ ??

अम्मी जान मुझे ऑंखें दिखती हुई - एक नहीं दो दो ?? क्या मतलब

मई हस्ता हुआ बीएड से उतर बाथरूम की तरफ जाता हुआ -- एक वो रात वाली.. और दूसरी

अम्मी जान - बेशरम.. उसे लिस्ट में क्यों शामिल कर रहे हो

अम्मी जान रात मेरे पास से जाने के बाद बिलकुल भी बदल गई थी

मई हसने लगा

अम्मी जान - दूसरी का ज़िक्र कहाँ से आ गया.. कोण है वह

मई बाथरूम के दूर पर खड़े होकर - दूसरी के बारे में उनकी परमिशन से hi बता पाउँगा. वैसे भी अभी दूसरी वाली के जवाब का इंतज़ार है मुझे

मई हस्ता हुआ बोलै. तो अम्मी जान बोलती हुई मुझे शॉकेड कर गई

अम्मी जान - एक आध दिन में वहां से जवाब भी मौसूल हो जाएगा मेरे बाबू को. और मेरे बाबू को कोई इंकार कर hi नहीं सकती

अम्मी जान की बात सुनकर मेरा मोह hi हैरत के मारे खुल गया.

अम्मी जान हस्ती हुई - रात कहा था न.. तुम्हारी अम्मी जान हों. बाबू तुम मुझे क्यों बच्ची समझने पर उतरे हुए हो. मई बच्ची होती न तो तुम कभी बाबू बन hi नहीं सकते थे.. तुझे बाबू बनाने में भी समझ लो मेरा hi हाथ है.

मई - मई कुछ समझा नहीं

अम्मी जान - जाओ ट्रॉउज़र बदल कर आओ पहले.. फिर बात करते हाँ.. ऐसे कोई और भी कमरे में आ सकता है. और ऐसे ट्रॉउज़र के साथ तुम्हे कोई देखे.. वो भी मेरे सामने.. जाओ बदल कर आओ ट्रॉउज़र

मई हैरान हैरान सा अम्मी जान को देखता हुआ एक दूसरा ट्रॉउज़र उठा कर बाथरूम में घुस गया..

मई समझ रहा था. मई hi हों. जो हर बाल पर सिक्सर पर सिक्सर मारे जा रहा है.. पर अब समझ में आ रहा था.. सिक्सर भले hi मई लगा रहा था.

लेकिन अगर बॉलर hi हर बॉल सिक्सर वाली करवाए तो बैटमैन का कमल 50% से भी काम हो जाता है..

मई ऐसा सोचता हुआ अपनी मणि और माहिरा एपीआई की फुद्दी से निकले रास से लोथड़ा ट्रॉउज़र उतार दूसरा पहनने लगा.
 


छब्बीसवीं क़िस्त

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मई हैरान हैरान सा ट्रॉउज़र बदल बाथरूम से निकल पड़ा.. अम्मी जान दूर को अंदर से लॉक किये बीएड पर एक महारानी के जैसी शान के साथ करवट के बल आधी उठी आधी लेती हुई थी. एक हाथ पर सर का वज़न डाले अम्मी जान अलग hi स्माइल के साथ मुझे देखे जा रही थी

जिसे मई समझ नहीं पाया. कल रात hi की तो बात थी. तब अम्मी जान ऐसी तो नहीं थी. कुछ hi घंटों में कितनी बदल गई थी वो.. उनकी स्माइल उन्हें अलग hi गुलशन खान शो कर रही थी. ऐसी न तो मैंने पहले कभी अपनी अम्मी जान देखि थी. न hi गुलशन खान.

तो क्या रात अम्मी जान ने मेरे लुंड से अपनी फुद्दी रगड़ कर पुराणी गुलशन से नयी गुलशन में कन्वर्ट हो गई थी

अम्मी जान उसी स्माइल के साथ - क्या देख रहे हो बाबू.. आओ बीएड पर. और मेरे बराबर लेट जाओ

मई बीएड पर जा माँ के बराबर लेट बोलै - अम्मी जान क्या ये आप hi हो

अम्मी जान धीरे से घायल कर देने वाले अंदाज़ में हस्ती हुई मेरे सीने पर हाथ रख मुझे पीठ के बल लिटा गई.. फिर खुद से hi मेरे ऊपर आ कर लेटने लगी. मई तो अम्मी जान की ऐडा पर मरने वाला हो गया

मेरी आँखों में हैरत और ख़ुशी देख अम्मी जान पहली बार खुल कर खिलखिलाती हुई है पड़ी.. फिर अम्मी जान मेरे ऊपर आती एक हाथ से अपनी कमीज़ के पल्लू को एक साइड करती हुई मेरे लुंड पर अपनी फुद्दी रख मेरे ऊपर रात की तरह लेट गयी.

uffffffffff एक hi सेकंड में मेरा लुंड हलचल मचाते हुए तन कर खड़ा होने लगा. अम्मी जान पंतय उतार कर आई थी. अम्मी जान की फुद्दी के होंठ जो मई रात फील नहीं कर सका था. रात अम्मी जान की फूढी पंतय में कैद थी. लेकिन अब आज़ाद थी.. आज़ाद hi नहीं बहुत गर्म बहुत सॉफ्ट थी अम्मी जान की फुद्दी

अम्मी जान अपने भरी मुम्मे मेरे सीने पर दबती हुई मेरी आँखों में देखने लगी. लेकिन मई तो अम्मी जान की फुद्दी के लम्स पर मदहोशी के समंदर में होते लगता हुआ ऑंखें बंद कर गया. और मेरे ऑंखें बंद करते hi अम्मी जान की फुद्दी के नीचे दबा लुंड फुल जोश में, फुल मूड में आते हुए अकड़ता चला गया.. अम्मी जान ने भी अपनी फुद्दी को मेरे लुंड पर लेफ्ट राइट हिला दिए..

अब भला मई कैसे होश में रह सकता था. महसूस करने वाला कपड़ों के रहते हुए भी सब महसूस कर लिए करते हाँ. गलियों बाज़ारों में फिरने वाले आवारा लड़के जो राह चलती लड़कियों और औरतों की फुद्दी और गांड पर कपड़ों के ऊपर से हाथ फेर कर पूरी तरह मज़ा भी ले लिया करते थे, और जिस्म के नर्माहट और गर्माहट के साथ साथ पूरा पूरा गेओग्रफिए जान लिए करते थे.

मेरे लुंड पर तो फिर भी अम्मी जान की फुद्दी दबी हुई थी.. ऊपर से अम्मी जान खुद से अपनी फुद्दी को मूव करती मेरे लुंड की कैप अपनी फुद्दी के लबों के बीच में एडजस्ट कर गई थी. कैसे न मई पूरी तरह अम्मी जान की फुद्दी को फील कर पता.. कैसे न मई सरे अहसासात को महसूस करता.

अम्मी जान - ऑंखें क्यों बंद कर ली तुमने

मई - सकत ख़तम हो गई थी अम्मी जान. पलकें बहुत भरी हो गई थी अम्मी जान. सुरूर की इन्तहा मिले तो नींद न होते हुए भी पलकें ऐसे अहसासात का बोझ उठा नहीं सकती... भरी हो कर गिरने लगती हाँ

अम्मी जान - मुझे भी तुझे ऐसी hi हालत में लाना था बाबू

मई कुछ हैरान हुआ.

अम्मी जान - ऑंखें मत खोलना बाबू

मई - क्यों ?

मेरी सांस भरी होने लगी

अम्मी जान अपने बदन को पानी और खुशबु से नहला कर आई थी..

अम्मी जान ने एक रगड़ और मेरे लुंड पर अपनी फुद्दी की करि.. ये रगड़ रात वाली रगड़ों से हज़ारों गुना बढ़कर थी.

काश अम्मी जान ब्रा भी उतार कर आती.. ब्रा उतार सबको अम्मी जान के निप्पल दिख जाते.. इसलिए नहीं उतार कर आई थी..

अम्मी जान ऊपर को सरकती हुई मेरे माथे पर अपना माथा रख गई. मई चौंका.. ये अम्मी जान आज मेरा hi दो मुझपर तो नहीं उलटने वाली

तभी अम्मी जान बोल पड़ी - बछुओ तू बड़े एक्सपेरिमेंट करने लगा है सब के साथ. तू क्या समझता है. एक तेरे hi पास दिमाग है. एक तू hi सबपर रोज़ नए नए एक्सपेरिमेंट कर सकता है. एक तू hi सबको अपना अनमोल प्यार दिखा कर सबको अपना बना सकता है. बच्चू मई भी तेरी hi माँ हों. 9 महीने तुझे अपनी कोझ में रख अपने खून से सेणचा है मैंने. फिर तू दुन्या में आया तो तुझे अपने छाती से लगा कर बरसों तुझे अपना दूध पिलाया..

अम्मी जान मेरे साथ एक्सपेरिमेंट करती हुई मेरी hi तरह धीमी लहजे में हिप्नोतिजे करने कर देने वाले अंदाज़ में बोलने लग पड़ी थी. जैसे मई सबसे कहता फिरता था. वही सब अम्मी जान मुझसे कहने लगी

अम्मी जान - बाबू मेरी आवाज़ तेरे कानो में उतर रही है या तू अपने दिमाग में मेरी आवाज़ की गुन्ज सुन रहा है

मई न चाहते हुए भी अम्मी जान के लहजे का शिकार होने लगा. सच में अम्मी जान की आवाज़ मेरे दिमाग में मेरे पुरे जिस्म के अंदर मुझे गूंजती हुई सुनाई दे रही थी.

मैंने सच बोल दिए -- अम्मी जान आप की आवाज़ मेरे दिमाग में मेरे पुरे वजूद के अंदर गूँज रही है

अम्मी जान - तो फिर बता. तुझे ये सब कैसा लग रहा है

मई - बहुत ाचा.. बहुत अलग. ऐसा लग रहा है.. जैसे मई किसी और hi दुन्या में ऑंखें बंद किये लेता हुआ हों. मेरे आस पास खुशबुएँ hi खुशुइन बिखरी हुई हाँ.. आप की आवाज़ मेरे कानो में रास घोलती लग रही है.

अम्मी जान और भी अपनी आवाज़ को धीमा बनती हुई मदहोशी भरे लहजे में बोली

अम्मी जान - तो फिर बता मुझे दिल की बात. बता मुझे, मई क्या हैसियत रखती हों तेरे दिल में. बता मुझे मई आम माँ की तरह एक टिपिकल माँ हों तेरी नज़र में. तू सच में वही बाबू है. जो सब को दिखाई देता है. क्या सच में तेरी ऑंखें जो बोलती दिखाई देती है.. वही सब कुछ तेरी आँखों की गहराई में भी है. बता मुझे तेरे दिल में सबके लिए जो अनमोल प्यार है. वो रियल में भी अनमोल hi है. या तेरे दिल में हमें लेके जिस्मानी मिलाप की ग़र्ज़ जनम ले चुकी है. तू आवारा बदमाश जिस्मो का भूका बीटा और भाई बन अपने hi घर में आवारगी करने वाला बाबू बन चूका है.

मई अम्मी जान की ये बातें खुली आँखों से सुनता तो झट बुरा मन कर अम्मी जान से नाराज़ हो जाता. लेकिन मई तो प्रेजेंट वर्ल्ड में रहा hi नहीं था. मेरा कनेक्शन मौजूदा दुन्या से टूट चूका था. अम्मी जान के महकते और खुशबूदार जिस्म ने मुझसे मेरी सुध बुध छीन ली थी. नीचे से अम्मी जान की गर्म फुद्दी की गर्मी और नरमी ने मेरे लुंड की वाट लगा राखी थी. कैसे कोई और अहसास मेरे अंदर पैदा हो पता

मई मदहोशी भरे लहजे में सारा सच अम्मी जान के घोष गुज़ार करने लगा

मई - पहले मेरे दिल में ऐसा hi कुछ था. मई बाबू तो था. पर अनमोल प्यार करने वाला बाबू नहीं था. लेकिन फिर---

अम्मी जान -- मुझे डिटेल से बता. तू कैसे जिस्मानी खेल की तरफ निकल पड़ा.. तू पहली बार कैसे बहका. कैसे तेरे दिल में अपनी अम्मी जान अपनी दादी जान अपनी बहनो, भाभी, फुफु और सबके लिए ऐसी फीलिंग्स आई. हर बीटा बहार मोह मारता hi है. हर भाई बहार आवारगी करता है. लेकिन घर में वो खुनी रिश्तों के साथ फेयर होकर चलता है. कैसा क्या चेंज आया तेरी लाइफ में.. जो अपने hi घर की खंडन की लड़कियों औरतों बारे ऐसी फीलिंग्स को अपने अंदर जनम दे गया.. डिटेल के साथ मुझे सब जानना है. और तुम झूट नहीं बोल सकते हो बाबू.. तुम मेरे ज़ेर इ असर हो. मेरे कण्ट्रोल में हो.. मेरे हुकम के पाबंद हो.. क्या तुम हो मेरे कण्ट्रोल में.

मई - हाँ मई हों आप के कण्ट्रोल में

अम्मी जान - गुड तो फिर शरू हो जाओ.. अपनी लाइफ स्टोरी खुल कर बयां करनी शुरू कर दो

मई होश में होता तो अम्मी जान के मोह से इतनी डिटेलिंग बातें सुन मई शॉकेड हो जाता. और सोचता. कैसे अम्मी जान इतना सब जान सकती हाँ. कैसे वो ये सोच भी सकती हाँ... मेरे दिल में सभी के लिए, भाभी दादी अपनी बहनो और फुफु के साथ साथ सब के लिए फीलिंग्स बदल चुकी थी.

लेकिन अफ़सोस अम्मी जान ने मेरा hi हरबा मुझपर आज़मा दिए था.. मैंने तो नोर्मल्ली एक्सपेरिमेंट किया था सबपर... लेकिन अम्मी जान अपनी फुद्दी मेरे अकड़े हुए लुंड पर घिसती मुझे अपनी फुद्दी की गर्मी का पूरा पूरा अहसास दिलाती मुझपर एक्सपेरिमेंट कर रही थी..

तजुर्बा... आठ तजुर्बा.... मेरा तजुर्बा कहीं आज मेरे hi गले में न पद जाए.

मई अम्मी जान को अपने लुंड में हलचल के शुरू होने से लेकर दोनों लड़कियों को पता कर छोड़ने तक की साडी बातें डिटेल के साथ बताने लगा. कैसे और कब मैंने किस किस बहार की लड़की को देख कैसी नज़रों से देखा.. वो अम्मी जान को बताने लगा. मई लफ़्ज़ों का इस्तेमाल मदहोश रहते हुए भी कर रहा था.

फिर आई मेरी इन्सेस्ट की ऑर्डर टर्न लेने की बात..

मई - हर घर में रहने वाले मर्द की नज़रों में घर की फ्रेमलेस के जिस्म आधे खुले होते हाँ. जिस्मो के सभी अंग देखने को मिलते रहते हाँ. बिना कपड़ो के देख पाना हर किसी के नसीब में नहीं होता. लेकिन वो गीले कपड़ों में भीगे बालों में अक्सर hi घर में फ्रेमलेस को देखता रहता है. जवान होने के बाद जब मुझे भी अपने hi घर में ऐसे सीन्स देखने को मिले तो मेरे अंदर हलचल मचनी शरू हो गई. कभी आप दादी और किन्ज़ा माहिरा एपीआई कपडे धोया करती, झाड़ो पोछा लगाया करती तो आप सभी के हिडन पॉइंट क्लेअर्ल्य दिखाई दे जाया करती थी. बैक में फँसी कमीज़ से बनने वाली लकीर देख मुझे सबसे ज़यादा मज़ा आया करता था. हम पठान हाँ और पत्रों को ऐसे सीन्स बहुत ज़यादा भय करते हाँ. मेरे दिल में भी आप की और दादी जान की लकीर देख हलचल उतनी शरू हो गई.. मई हिलने लगा. मज़े लेने लगा. फिर एक दिन किन्ज़ा एपीआई ब्रालेस होकर मेरे सामने आई.. तब पहली बार उन्हें देख मेरे अंदर की हलचल में शिद्दत पैदा हुई. फिर मई रेगुलर नज़र बनाने लगा. ऐसे hi मोके मिलते गए और आप के साथ साथ घर में सभी का बहुत कुछ मुझे देखने को मिलने लगा. ऐसे मेरे अंदर इन्सेस्ट फीलिंग्स स्ट्रांग से स्ट्रांग होती चली गई. मैंने मैं बना लिए. अब कुछ भी हो, कैसे भी हो. मई पीछे नहीं हटूंगा.. और कैसे भी करके अपने मकसद को प् कर रहूँगा.. फिर मैंने चालाकी से किन्ज़ा एपीआई के बाथरूम में कैमरा फिट कर दिए. उनके नहाते हुए की वीडियो रिकॉर्ड कर ली. अपने लैपटॉप में सेव कर ली. मई किन्ज़ा एपीआई की बेलिबास नहाते हुए देख देख हिलने लगा. मेरा मज़ा हज़ारों गुना बढ़ गया.. ऐसे hi दिन गुज़रते चले गए.. और मई प्लान्स पर प्लान्स बनता चला गया.. मुझे जल्दी नहीं थी. जल्दीबाज़ी में काम बनने वाला नहीं था. इसलिए मैंने खुद को पूरा पूरा टाइम दिए.. लेकिन फिर

अम्मी जान - फिर!. फिर क्या हुआ

मई - फिर किन्ज़ा एपीआई के रिश्ते की बात चली. उन्हें देखने दादा जान ने एक फॅमिली को बुलवाया.. उस दिन मैंने घोर से किन्ज़ा एपीआई को देखा. और उनसे बात करि. मुझे लगा था, किन्ज़ा एपीआई इस रिश्ते पर खुश नहीं हाँ. मई उनके पीछे पद गया.. उनका सर खा लिए.. अपने प्यार की कसमें दी. अपने प्यार का वास्ता दिए. तब जा के कहीं किन्ज़ा एपीआई ने बता दिए.. वो किसी और को पसंद करती हाँ.

मेरे ऐसे कहने पर अम्मी जान मेरे ऊपर लेती हिल कर रह गई.

अम्मी जान - kyaaaaaaaaaaa ??

अम्मी जान को झटका लगा था. अम्मी जान की आवाज़ थोड़ी सी लाउड हुई तो मई जैसे ट्रांस से बहार आने लगा. मुझे होश आने लगा. मैंने ऑंखें खोल दी

अम्मी जान - ऑंखें बंद hi रखो बाबू

जैसे पहले मई जान लिए करता था सामने वाले ने ऑंखें खोल ली है. ऐसे hi अम्मी जान ने भी जान लिए था. और मुझे ऑंखें बंद करने को बोल गई थी..

मई ऑंखें बंद किये सोचने लगा.. जो जो मई अम्मी जान के सामने खोल गया था. वो सब याद आने लगा. मई दिल में डरा भी... पठान होते हुए भी डर गया था मई

अम्मी जान - फिरसे शुरू हो जाओ. मई हैरान हों. जो बात मई नहीं जान पाई. वो तुमने कैसे जान ली.

मैंने सोचा.. अब जब इतना सब बोल hi चूका हों. तो बाकि का क्यों छुपाना.. जिससे छुपाना था. वो खुद अपनी फुद्दी बेटे के लुंड पर रखे मज़े ले भी रही थी और दे भी रही थी. हमारा फ्यूचर क्या होने वाला है.. ये साफ़ दिखाई दे गया था मुझे भी और अम्मी जान को भी.

तो मैं बोलने लगा - किन्ज़ा एपीआई के लिए फीलिंग्स के बदल जाने पर मैंने उनपर धयान बढ़ा दिए था. आप पर और सब भी बढ़ा दिए था. फिर किन्ज़ा एपीआई ने मुझे अपने दिल की बात बता दी. तब मैंने उनसे वडा कर लिए.. और कहा.. मई ये रिश्ता आगे नहीं बढ़ने दूंगा.. मैंने आप सब से बात करि. दादा जान से बात करि. इस सब के होने से पहले मेरे दिल में आप सब के लिए प्यार तो बहुत था.. लेकिन वो प्यार अनमोल नहीं था. फिर मई जो बोलै. वो सुन आप सब खुश हो गए... तब पहली बार मुझे प्यार की ताकत का पता चला.. फिर मेरे हर स्टेप ने आप सब को मेरे और भी करीब करना शुरू कर दिए. तब मुझे खुद से शर्म आने लगी. सब मुझसे कितना प्यार करते हाँ और मई उनके लिए क्या सोचे हुए हों.. मेरे अंदर से इन्सेस्ट फीलिंग्स नहीं गई. लेकिन मैंने फिर सोचा.. जब सब करना hi है तो जिस्म को भूल अपने प्यार को अनमोल बना कर भी तो किया जा सकता है.. फिर खुद से hi मेरे दिल ने मुझे सब सीखना शुरू कर दिए. आप सब ने मेरे फैसले को सराहा.. फिर भाभी की परेशानी शुरू हुई. मैंने अपने अनमोल प्यार के ज़रिये उनकी परेशानी को ख़तम कर उन्हें हसने पर मजबूर कर दिए. ऐसे दिन पर दिन गुज़रते चले गए. मेरे अंदर से अनमोल प्यार की परसेंटेज फुल स्पीड के साथ बढ़ती चली गई.. फिर मैंने सबसे पहले किन्ज़ा एपीआई की बनाई वीडियो लैपटॉप से डिलीट करि. सब के लिए दिल में सच्चे प्यार को पूरी तरह जागते हुए बाहरी सरे मतलबी जिस्मानी रिलेशन्स तोड़ दिए.. तब हुआ एक असली खालिस और सच्चे प्यार करने बाबू का असली जनम. अब मेरे दिल में किसी के लिए डर्टी फीलिंग्स नहीं हाँ.

अम्मी जान - क्या सच में नहीं हाँ

मई - हाँ नहीं हाँ!

अम्मी जान - जितने तेरे साथ सब आगे बढ़ गए हाँ. जितने तू सबके साथ आगे बढ़ गया है. क्या तू वापिस पलट सकता है. क्या सब वापिस पलट सकते हाँ

मई - हाँ पलट सकते हाँ

अम्मी जान - ऐसा नामुमकिन है. तू पलट भी गया तो दूसरे पलट नहीं सकेंगे अब वापिस. लेकिन तू उदास रहने लगेगा. तेरे अंदर नयी जनम ले चुकी फीलिंग्स बड़ी शिद्दत के साथ के साथ तेरी नस नस में उतर चुकी है.. ऐसा तेरे लिए तो अब मुमकिन नहीं होगा. तू पीछे नहीं हैट सकता

मई - नहीं मई हैट सकता हों.

अम्मी जान - तेरे लिए जो चीज़ सबसे बढ़कर हो गई ho..tu उसे कैसे छोड़ सकता है

एक बार फिरसे मई ट्रांस वर्ल्ड में पोहंचा हुआ था. और सारा सच मेरे अंदर से बहार आ रहा था

मई - प्यार की यही तो ताकत है अम्मी जान. मई खुद ग़र्ज़ और मतलबी हूँ तो वापिस नहीं लौट सकता. लेकिन मुझे खुद से भी ज़यादा अपनी जान से भी ज़यादा आप सब के प्यार से ग़र्ज़ है अब.

अम्मी जान - लेकिन तू उदास रहने लगेगा

मई - कोई भी बेइंतेहा प्यार पाने के लिए फिर उतना hi प्यार न मिलने पर उदास रहता है. मेरी hi तरह सब भी उदास रहेंगे. जिस अंदाज़ में हमारा प्यार बढ़कर अनमोल प्यार में बदलता जा रहा है. वैसे प्यार के बिना अब सब hi उदास उदास रहेंगे

अम्मी जान - लेकिन ऐसा जिस्मानी प्यार तो सही नहीं होता.

मई - बहुत सही होता है.. ऐसे hi प्यार करने पर तो प्यार की बुलंदियों को छुवा जा सकता है.

अम्मी जान - प्यार ऐसे भी बुलंदियों पर पोहंचाया जा सकता है. जिस्म के मिलने वाली बात बकवास है

मई - बकवास नहीं है.... हक़ीक़त है.. हमारी दुन्या में जितने भी प्यार करने वाले प्यार को पाए बिना अमर हो गए.. वो सरे के सरे अपनी अपनी माशूका को पाए बिना मर गए.. उनका प्यार दुन्या वळून ने अनमोल बना दिए. लेकिन मरने वाले प्रेमी जोड़े एन्ड तक एक दुखों भरी दर्द और उदासी भरी लाइफ hi जिए.. और मई फिरोज खान उर्फ़ बाबू आप में से किसी को उदास नहीं देख सकता. मैंने जान लिए है.. रूह के साथ साथ जिस्म का मिला भी बहुत ज़यादा ज़रूरी है मेरे प्यार को अनमोल बनाने के लिए.. और ये पहले दिन से hi साबित होता आ रहा है.. जब से हम खुल कर प्यार करते हुए एक दूसरे के करीब कर प्यार करने लगे हाँ.. हमारा प्यार अनमोल बनता जा रहा था.. जैसे जैसे हम स्टेप बी स्टेप आगे बढ़ रहे हाँ.. वैसे वैसे हमारा अनमोल प्यार भी शिद्दत अख्तियार करता जा रहा है

अम्मी जान - सही कहा तूने बाबू.. कितना सुचाल बोलना सीख गया है तू बाबू.. आज मैंने पूरी तरह जान लिए है.. तेरे जैसा किसी माँ का कोई बीटा नहीं हो सकता.. तेरा प्यार सच में अनमोल है बीटा, बड़ा hi घाना अनमोल.. कुछ डाउट थे दिल में.. वो भी आज सरे के सरे रफा हो गए. आज मेरी खुशियों का कोई ठिकाना नहीं रहा बाबू..

मई - मई भी बहुत हों अम्मी जान. दिल पर ऐसी बातों के दबे रहने पर बड़ा बोझ था अम्मी जान.. आप ने ाचा किआ जो मुझपर मेरा hi एक्सपेरिमेंट करते हुए मुझसे सब जान लिए.

अम्मी जान - ऐसा मैंने भी समझ लिए था मेरे बाबू, मेरे दिल के चैन. कैसे मई मेरे बाबू के दिल बोझ बर्दाश्त कर सकती थी. और फिर रात तेरे पास से जाने के बाद मैं देर तक सोचती रही. बहुत सोचने पर फिर मैंने एक बड़ा फैसला कर लिए

मई - कैसा फैसला ?

अम्मी जान - तू राजा बनेगा तू तेरी कोई रानी भी होगी.. तू किंग बनेगा तो तेरी कोई क्वीन भी होगी. तो मुझे लगा तेरे जैसे राजा और किंग के लिए मुझसे बढ़कर कोई रानी कोई क्वीन नहीं हो सकती.. पहले तुझसे कहा था. तू सब के साथ जैसा भी रहे. न मुझे बताएगा किसी के बारे में.. और hi मई तुझसे कुछ पूछूँगी. लेकिन मैंने अपनी सोच बदल दी है. मई मेरे जीने का स्टाइल बदल दूंगी. मेरे बारे में तू किसी को कुछ नहीं बताएगा.. लेकिन तू मुझे हर एक के बारे में सब बताएगा.. चल अब बता तेरी फुफु के साथ तेरा क्या मामला चल रहा है

मैंने अम्मी जान को फुफु के साथ जो ड्रामा किआ. वो सब बता दिए. सब सुन कर अम्मी जान हसने लगी.

अम्मी जान - बाबू तू कितना चालक हो गया है.. बड़ा चक्कर दिए तूने अपनी फुफु को. वो तो तेरे लिए शुरू से पागल है. जब तू बदला तो मैंने समझ लिए तू उसे भी नहीं माफ़ी देगा. तो मई तेरी एक एक मूवमेंट पर नज़र रखने लगी. अंदाज़ा था, कुछ गड़बड़ उधर भी है. अब साबित भी हो गया.. सुन बाबू मेरी तरफ से तुझे खुली छूट है. जिस जिस को चाहे अपने अनमोल प्यार से जीत सकता है.. सिवाए अनमोल प्यार के तू किसी के साथ कुछ नहीं करेगा

मई - ऐसा तो मैंने पहले hi सोच चूका हों

अम्मी जान - चल अब माहिरा और सराह के बारे में सब बता

मैंने अम्मी जान को दोनों की बातें बता दी. ये सीक्रेट्स थे. अम्मी जान तो क्या किसी को भी नहीं बताने चाहिए थे. लेकिन एक तो मेरे ऊपर अम्मी जान थी. दूसरे वो घर की हेड भी थी. उनके नॉलेज में सब होना चाहिए थे. कोई एक स्पेशल होनी चाहिए.. अगर कोई बात बिगड़ जाए तो शेयर करके उसे संभाला जा सके

अम्मी जान - ये ऐसे अंदाज़ में आगे बढ़ना भी साबित कर गया है. तू कितना पायरा है.. तेरा प्यार कितना अनमोल है.. चल इसी ख़ुशी में मई भी मौका मिलने पर तेरी भरपूर मदद किया करूँगा. यहाँ तो सब तेरे आसान शिकार हाँ.. जहाँ तुझे कुछ मुश्किल बने तू मुझसे कहना.. फिर देखना राजा की ये रानी और किंग की ये क्वीन अपने अपने राजा अपने किंग के लिए क्या करती है.. एक बात और सुन.. तू राजा है, किंग है तो तेरे मद्दे मुकाबल भी एक रानी एक क्वीन है.. आसानी से तू मुझे नहीं प् सकेगा. वो रानी hi क्या जो आसानी से काबू में आ जाए. तू आज तक मुझसे जितने भी तीर छोड़ता रहा है न.. वो सब मेरे खुद से तेरे निशाने पर आ जाने से सही तरह से लग पाए हाँ... तू माहिर खिलाडी है तू मई भी हिरणियों की सरदार हिरणी हों. आसानी से मुझे शिकार नहीं कर पायेगा तू बछुओ

मई ऑंखें खोल अम्मी जान को देखने लगा. इस बार अम्मी जान भी ऑंखें खोल मुझे देखने लगी. दोनों की आँखों में नशा hi नशा था. मदहोशी hi मदहोशी थी. रंग hi रंग थे. सुरूर hi सुरूर था... हम ऐसी hi हालत में एक दूसरे की आँखों में देखने लगे

तभी अम्मी जान ने अपनी फुद्दी को मेरे लुंड पर दबा के घिस दिए.. पता चला अम्मी जान की फुद्दी पानी बहा बहा कर कमली झल्ली हुई हम दोनों से भी ज़यादा मदहोशी उसपर तरी हुई थी...

मेरा लुंड भी काम नशे में नहीं था. अम्मी जान ने एक घीसी और लगाई. नशे और सुरूर से मेरी ऑंखें बंद होने लगी. तभी मुझे दिखा.. अम्मी जान भी नशे से चूर होती हुई अपनी ऑंखें बंद कर गई.
 
पच्चीसवीं क़िस्त

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मई ऑंखें खोल अम्मी जान को देखने लगा. इस बार अम्मी जान भी ऑंखें खोल मुझे देखने लगी. दोनों की आँखों में नशा hi नशा था. मदहोशी hi मदहोशी थी. रंग hi रंग थे. सुरूर hi सुरूर था... हम ऐसी hi हालत में एक दूसरे की आँखों में देखने लगे

तभी अम्मी जान ने अपनी फुद्दी को मेरे लुंड पर दबा के घिस दिए.. पता चला अम्मी जान की फुद्दी पानी बहा बहा कर कमली झल्ली हुई हम दोनों से भी ज़यादा मदहोशी उसपर तरी थी.....

मेरा लुंड भी काम नशे में नहीं था. अम्मी जान ने एक घीसी और लगाई. नशे और सुरूर से मेरी ऑंखें बंद होने लगी. तभी मुझे दिखा.. अम्मी जान भी नशे से चूर होती हुई अपनी ऑंखें बंद कर गई.

अम्मी जान अब बार बार मेरे सख्त हो चुके लुंड पर अपनी फुद्दी घिस रही थी.. अम्मी मेरे चढ़े को थाम कर ऊपर घिसती.. फिर नीचे को खिसक कर अपनी फुद्दी मेरे लुंड पर घिसने लगती.

आठ काश मेरा लुंड आवाज़ होता.. अम्मी जान की फुद्दी की असली शेप का पता तो चल जाता. अंदाज़ा तो अब भी कुछ कुछ हो रहा था. मज़ा भी बहुत ज़यादा आ रहा था. अम्मी जान पहली बार बिना पंतय पहने मेरे लुंड पर अपनी फुद्दी लगाए घिस रही थी.. पर जो बात बिना अंडरवियर के होनी थी. वह ऐसे नहीं थी. फिर भी मज़े से मैं और मेरे लुंड दोनों पागल होने लगे.

थोड़ी देर और गुज़री फिर अम्मी जान की स्पीड तेज़ होती चली गई.. मई समझ गया, अम्मी जान अब झड़ने वाली है. मुझे तो देर लगनी थी. भला मेरे लुंड इतनी जल्दी ढीला कैसे हो सकता था. हाँ अगर डायरेक्ट अम्मी जान की नंगी फुद्दी से लगा होता तो एक hi पल में मेरे लुंड ने हार मान लेनी थी

अम्मी जान का बढ़ा हुआ जोश देखते हुए मेरे हाथ हरकत में आये.. और अम्मी जान की बैक पर चलने लगे.. अम्मी जान लगी रही अपनी फुद्दी घिसने में

मेरे हाथ अम्मी जान के चूतड़ों पर जा पोहंचे.. अम्मी जान घिसाई रोक गई.. मुझे देखने लगी. उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ अम्मी जान की ऑंखें गहरी लाल सुर्ख थी. अम्मी जान ने दोनों हथु से मेरे हाथ अपने पिछवाड़े पार्स हटा दिए

फिर धीरे से बोली -- बाबू मुझे सब करने दो.. अभी तुम इतने आगे मत बढ़ो

मई लाचारी और बेबसी से बोलै -- लेकिन अम्मी जान मैं तो राजा हों न

अम्मी जान मदहोशी में भी धीरे से है पड़ी --- हाँ.. तुम राजा हो. और मई राजा की रानी.. लेकिन ये मत भूलो.. जिस सल्तनत के तुम राजा अब बने हो.. बरसों से मैं उस सल्तनत की रानी हों.. और मेरा हक़ ज़यादा है

अम्मी जान ने मुझे लावजब कर दिए था.. खुद से अपनी फुद्दी मेरे लुंड पर घिसती हुई मेरे हाथ हटा कर मज़े लेने लगी थी

मेरे लुंड के तो मज़े थे. लेकिन मेरे हाथ और मेरे जिस्म के मज़े नहीं थे.. जिस्म अंदर से झूम उठा था. लेकिन कोई भी हरकत अपनी मर्ज़ी से नहीं कर सकता था

फिर अम्मी जान ज़ोर से घिसाई करती हुई झाड़ गई.. मेरे सीने पर सर गिरा कर हांपने लगी. मई अम्मी जान की पीठ सहलाने लगा.. अम्मी जान की तेज़ साँसों की आवाज़ कमरे में गूँज रही थी

फिर अम्मी जान रिलैक्स हो गई. अम्मी जान ने मुझे देखा.. अम्मी जान की आँखों में गहरी शर्म की सुर्खी थी. लेकिन माँ थी, इसलिए फुल कॉन्फिडेंस साबित करती हुई मुझसे निगाह नहीं चुरा सकीय..

अम्मी जान -- मेरा बाबू कितना प्यारा है

मई मोह बना कर बोलै -- आप ने तो अपना मतलब पूरा कर लिए अम्मी जान. प्यारा तो मैं आप को लगूंगा hi.. आप चाहें तो आप भी मुझे पायरी लग सकती हैं..

अम्मी जान खिलखिला कर हसने लगी --- उसके लिए मुझे तुम्हारा मतलब पूरा करने में मदद देनी होगी

मैं --- तो और क्याआ.. मैं आप का इतना पायरा बीटा हों. आप इतनी अछि अम्मी जान हो. बेटे के सुख, सुकून और मज़े का ख्याल आप नहीं रखेंगी तो और कोण रखेगा

अम्मी जान नॉटी स्माइल करती हुई मेरी नक् पकड़ कर मरोर गई.. मैं कराह उठा

अम्मी जान है पड़ी --- हेहेहे.. बाबू के बच्चे.. आज जितना हुआ है. क्या इतने की भी तुमने उम्मीद राखी थी. इतना मज़ा करा दिए मैंने तुम्हे.. और तुम हो कह.. जाओ मई तुमसे बात नहीं करती

अम्मी जान नाराज़ माशूका के जैसे मोह पहला कर मेरे ऊपर से उठती हुई बेथ गई

अम्मी जान ने एक हाथ से अपनी कमीज़ का पल्लू सही करके अपनी गीली भीगी फुद्दी और शलवार छुपा ली थी. ऐसा करते हुए अम्मी जान के गालों की सुर्खी बढ़ी थी. लेकिन अम्मी जान ने इस मामले में खुद को संभल लिए. मेरे लिए मोह बनाये वो बैठी रही

जैसे मैं अब उन्हें मनाऊँगा

और मैं अम्मी जान को मानाने लगा.. मई भी उठ बैठा.. अम्मी जान का एक हाथ थाम कर चूमता हुआ बोलै

मैं -- मेरी रानी अपने राजा से नाराज़ हो गई है

अम्मी जान के होंटो पर मुस्कान आई मेरी बात पर. फिर मूड बनती हुई बोली -- क्या नहीं होना चाहिए मुझे अपने बाबू से नाराज़.. मैंने मेरे बाबू के लिए इतना ज़यादा किआ.. फिर भी मेरा बाबू मुझसे खुश नहीं है..

मैं माँ के गाल को चूमता हुआ बोलै -- ाचा रानी साहिबा.. राजा से गलती हुई. काइंडली राजा को माफ़ कर दीजिये

अम्मी जान खिलखिला कर हस्ती हुई मेरे गालों को चूमने लगी

अम्मी जान -- बाबू........ ये वाली ज़िन्दगी मेरी अब तक की जी ज़िन्दगी से कहीं ज़यादा हसीं ज़िन्दगी है. ी लव यू बाबू.. ये सब तुम्हारे अनमोल प्यार की वजा से मुमकिन हो सका है... बहुत खुश हों मैं ऐसी ज़िन्दगी प् कर... उम्माह उम्माह

माँ मेरे पुरे चेहरे को चूमने लगी. देर तक चूमती चली गई.. फर बीएड से उतरती हुई फर्श पर कड़ी हो गई. अपने कपडे सही करने लगी

मैं -- अभी तो मत जाओ न अम्मी जान आप.. अभी तो और भी बहुत से मज़े करने को दिल का रहा है

अम्मी जान घूर कर स्माइल से बोली - पूरी उम्र पड़ी है. और सुना नहीं मैं तुमसे क्या बोली थी..

मई -- क्या बोली थी आप

अम्मी जान -- भुलाकड़ नहीं हो तुम बाबू.. फिर भी बता दूँ.. इतनी आसानी से मुझे पा नहीं सकोगे तुम.. समझे

मैं शरारत से बोलै --- क्या नहीं प् सकूंगा अम्मी जान..

और अम्मी जान का मोह खुल गया.. शर्म से चेहरा कुछ और भी लाल होने लगा. फिर वापिस जाती हुई बोली -- आज के लिए बहुत हुआ बाबू के बच्चे.. बाकि के मज़े घर में किसी के साथ भी कर सकते हो तुम..

माँ फुल मेरे मज़े लेती हुई हस्ती मुस्कुराती शरारती बच्ची के जैसी स्माइल से मेरे कमरे से निकल गई. अम्मी जान निकली तो मैं अपने लुंड को पकड़ कर देखने लगा

आह्हः आज तो मेरे लुंड की ईद hi हो गई थी. आज माँ की बिना पंतय वाली फुद्दी को मेरे लुंड ने देर तक चूमा था.. आह्हः अम्मी जान. पायरी अम्मी जान. अब वह दिन दूर नहीं.. जब आप की फुद्दी और गांड में मेरा लुंड होगा.. पापा आप के बाद मैं आप की बीवी के जिस्म का मालिक बनने वाला हों. आप के जैसे मैं भी पठान हों पापा. मैं भी अम्मी जान की गांड ज़रूर मारूंगा. बार बार मारूंगा.. उफ्फ्फ पापा अम्मी जान की गांड कितनी मस्त है..

मेरा लुंड हार्ड से हार्ड होने लगा. अम्मी जान की फुद्दी की खुशबु मेरे चरों तरफ फैली हुई थी.
 
छब्बीसवीं क़िस्त

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अम्मी जान के खुल जाने से ज़िन्दगी और भी खुश रंग हो गई थी. पहले hi मेरी पांचू घी में और सर कड़ाही में था. लेकिन अब अम्मी जान के मेरे इतने करीब आ जाने से साड़ी कमियां hi पूरी हो गई थी. सोचा भी नहीं जा सकता था, अम्मी जान भी बेटे के संग ऐसी राह पर चल सकती हैं

लेकिन अम्मी जान पुरे दिल से मेरे साथ नए रिश्ते की बुनियाद रख गई थी. लाइफ और भी मस्त हो गई थी.

कॉलेज के लिए निकलने लगा तो अम्मी जान मुझसे अकेले में मिली और मेरे गाल को चुम कर बोली

अम्मी जान -- बाबू.. मुझे कहना तो नहीं चाहिए. फिर भी माँ हों न, फ़िक्र तो रहेगी hi

मैं --- अम्मी जान आप हुकम कीजिये. जो भी आप के दिल में है, बेधड़क कह दीजिये

अम्मी जान स्माइल करने लगी. मेरे गाल पर हाथ फेरती हुई बोली -- तुम्हारे जैसे मिसालि बेटे की अम्मी जान हों. दिल की बात दिल में तो नहीं रख सकती. बाबू मैं बास इतना hi कहना चाहती थी तुमसे. तुम्हारी पढाई या लाइफ की कोई भी रूटीन मुतासिर नहीं होनी चाहिए

मेरे होंटो पर स्माइल उभर आई -- अम्मी जान.. आप को कहने की ज़रूरत hi नहीं थी. मैं सब hi तो आप को अपने दिल की बातें बता चूका हों. आप सभी का अनमोल प्यार ऐसा प्यार है अम्मी जान. हर काम करते हुए मेरी लगन hi बढ़ जाया करती है. हर काम मैं पुरे दिल से करता हों. आप यकीन करें अम्मी जान, मेरा ज़हन भटकता नहीं है. मेरी कोई भी सोच वीक नहीं है

अम्मी जान खुश हो गई थी. मेरे गाल को चुम कर बोली -- मुझे मेरे बाबू पर यकीन है. फिर भी बाबू मेरा फ़र्ज़ था मैं तुझसे ये सब कहूं. और कहती रहूंगी

मैं -- आप अपनी ड्यूटी जारी रखिये अम्मी जान. मैं हमेशा आप के आगे सर झुकाये रहूँगा.

अम्मी जान खिल उठी.. मेरे माथे को चुम कर मुझे दुआएं देने लगी.

मैं कॉलेज के लिए निकल पड़ा.. कॉलेज में टाइम ाचा स्पेंड हुआ. वापिस आने लगा तो माहिरा एपीआई की कॉल आ गई. वो मुझे बुटीक बुला रही थी. मैं बुटीक जा पोहंचा

माहिरा एपीआई मुझे देख खिल उठी. चहकती हुई हाथ से इशारा करने लगी, कहिब आ जाओ

मई माहिरा एपीआई के पास जा पोहंचा. घूम कर काउंटर के अंदर hi जा घुसा था. माहिरा एपीआई ने मुझे एक चेयर दी -- बाबू कुछ देर बैठो तुम.. मैं ज़रा इन कस्टमर्स से फ़राग़त हासिल कर लून

मैं मुस्कुराता हुआ --- okay

बोल कर बुटीक में कड़ी फ्रेमलेस को देखने लगा. एक जगा नज़र पड़ी तो मैं चौंक उठा.. मुझे फ्लावर शॉप पर मिली मुक़द्दस और पाकीज़ा चेहरे वाली आंटी और उनकी तीनो बेटियां दिखी.. ग़लबान एक बहु थी उनकी..

मैं चौंक कर उठा.. तो आंटी मुझे देख कर चहकती हुई करीब आ गई

मैं ---- आंटी आप लोग यहाँ

आंटी ने मेरे सर और गाल पर हाथ फेर कर मुझे प्यार दिए --- अंदाज़ा नहीं था फिरोज बीटा, फिरसे और इतनी जल्दी हमारी मुलाक़ात हो जायेगी.

माहिरा एपीआई हैरानी से हमें देख रही थी. वैसे वह दूसरे कस्टमर्स में भी बिजी रही.

मैं आंटी से बातें करने लगा. बुटीक में काम करने वाली एक लड़की को आंटी और तीनो गर्ल्स के लिए कोल्ड ड्रिंक के लिए बोल दिए.. सब न न करती रही. लेकिन मैं कहाँ मानने वाला था.

कोल्ड ड्रिंक आई.. सब काउंटर के अंदर hi आ गई थी. अब तीनो लड़कियों ने आंटी के कहने पर नक़ाब हटा लिए थे. मैंने सिरसरि सा देखा. और कोई खास रियेक्ट नहीं किआ. आंटी से बातें होती रही.. आंटी ये जान कर खुश हो गई थी. माहिरा मेरी एपीआई है. और मैं माहिरा का भाई हों..

माहिरा एपीआई फ्री होकर करीब आई -- बाबू तुम कैसे आंटी और सबको जानते हो

आंटी मुझे निहारती हुई फूल शॉप पर हुई पहली मुलाक़ात बारे बताने लगी. माहिरा मुझे प्यार से देख रही thi.mera एक हाथ अपने हाथ में लिए सहला रही थी

तीनो गर्ल्स अब और hi निगाह से मुझे और माहिरा एपीआई को, हम भाई बहन के प्यार को देखती जा रही थी.

घंटा भर बाद आंटी और गर्ल्स चली गई

माहिरा एपीआई मुझे मीठी निगाह से देखती हुई बोली -- बाबू.. जानते हो ये फॅमिली कोण थी

मैं -- जी एपीआई जनता हों

माहिरा एपीआई ख़ुशी से उछलती हुई बोली -- तुम नहीं जानते हो बाबू.. ये सिटी की रिचेस्ट फॅमिली hi नहीं है.. बड़ी इज़्ज़त भी कमा राखी है शाह फॅमिली ने.. सब के सब बहुत मिलनसार हैं..

माहिरा एपीआई स्माइल करती हुई बोली -- वैसे बाबू.. आज मैंने तुम्हे अपनी सहेली दिखने के लिए बुलवाया है

मैं है पड़ा -- क्यों मुझे अपनी सहेली का दूल्हा बनाने का इरादा तो नहीं रखती आप

माहिरा एपीआई है पड़ी -- नाहीइ.. हहै.. बास दिल में आया, तुम्हे अपनी सहेली का दीदार करवा दूँ

ऐसे बोलते वक़्त माहिरा एपीआई के गाल सुर्ख हो गए थे. उन्हें याद ा गया था, वो अपनी किश और कैसी सहेली के बारे में अपने भाई को बता रही है.

कुछ देर में एक खूबसूरत लड़की बुटीक में दखल हुई और चलती हुई काउंटर के करीब आ कड़ी हुई

माहिरा एपीआई को देख कर चहकती हुई बोली -- तुमने बुलाया... देखो मैं आ गई

तभी उसकी नज़र मुझपर पड़ी.. शर्म और हैरत का रंग उसकी आँखों में लहरा गया.

माहिरा --- फरीहा इससे मिलो.. ये बाबू है मेरा भाई

फरीहा नमी माहिरा एपीआई की सहेली मेरा नान सुनकर उसका मोह खुल गया था. वह मुझे एक्ससिटेड हुए बिना पालक झपके देखने लगी

माहिरा एपीआई उसके फेस के आगे चुटकी बजती हुई बोली -- ो hello मिस फरीहा साहिबा.... मेरा भाई आलरेडी बुक है. ऐसे मत घूरो तुम मोहतरमा मेरे भाई को.. तुम्हे नहीं मिलने वाला

मैं फरीहा को क्यूट स्माइल से देखने लगा. फरीहा झींपति हुई होंटो पर जुबां फेर कर माहिरा एपीआई को खफ़गी से देखने लगी

माहिरा एपीआई खिलखिला कर है पड़ी -- हाहाहा.. डरपोक.. बुज़दिल.. चल आए अंदर..

फरीहा काउंटर के अंदर आ गई. वही राखी एक चेयर पर बेथ गई.. फरीहा के एक साइड माहिरा एपीआई और दूसरी साइड मैं था.. फरीहा की गांड मेरे आगे थी.. मस्त किसम की खुशबु उसके बदन से फूट रही थी

माहिरा एपीआई के चेहरे पर भी बार बार शर्म की सुर्खी फैलने लग जाती थी.

देर तक फरीहा से बातें होती रही.. फिर माहिरा एपीआई कुछ देर में आने का बोलल कर वहां से चली गई. फरीहा ने एक नज़र मुझे देखा और मुस्कुरा पड़ी

मैं तो चालक था hi. मई फरीहा को स्माइल के बदले स्माइल पास करता हुआ झुका और फरीहा के कंधे के करीब होकर बोलै --- आप बहुत खूसूरत हैं फरीहा की

फरीहा की सांस hi फूल गई थी मेरे अंदर और वर्ड्स पर.. वो मोह खोल कर मुझे देखने लगी. मई उसका हाथ पकड़ कर सहलाता हुआ बोलै -- हुसैन की तारीफ न करना ज़यादती होती है मोहतरमा...

फरीहा माहिरा एपीआई की लेस्बियन फ्रेंड थी. जिस्म शनास थी. अब भी गर्म होने लगी.

फरीहा घबरा कर काउंटर के पार देखने लगी. कोई देख तो नहीं रहा. ऐसा डर हुआ उसे

मैं उसके हाथ को पकड़ कर चूमता हुआ बोलै -- आप के हाथ बहुत हसीं हैं.. इनके हुसैन को काम मत होने दीजियेगा.. आप की ये मख़रूति और शाही क़लम के जैसी उँगलियाँ आप की बाहुन पर खूब जचती हैं

फरीहा की ऑंखें हैरत से और भी ज़यादा खुल गई. मैं उसके हाथ को चुम कर छोड़ गया

इतने में माहिरा एपीआई भी आ गई. फरीहा मुझसे कुछ नहीं बोली... बास शॉकेड बैठी रही. माहिरा एपीआई के आने पर खुद को संभल गई. लेकिन अब बार बार मुझे देखती जा रही थी.

मैं नार्मल शो करवाता माहिरा एपीआई से बातें करने लगा

घर पोहंचा तो सबसे पहले अम्मी जान से hi मिला. अम्मी जान मुझसे मिली. गले लगा कर मेरे माथे और गालों को चूमा.. अब तो ये डेली की बार बार की रूटीन बन गई थी

सराह भाभी मिली.. सराह भाभी मेरा हाथ थाम कर बड़ी mutma'in लहजे में बोली

सराह -- थैंक यू बेबी. तुम बहुत अच्छे हो. मैं डर रही थी. लेकिन तुमने मुझे शर्मिंदा नहीं होने दिए.

मैंने सराह भाभी के हाथ को चुम लिया -- सराह भाभी मैंने आप से पहले भी कहा था, आप को कभी भी सस्ता नहीं होने दूंगा. हमारा अनमोल प्यार तो हमारी क़द्रो कीमत हर पल बढ़ता hi जा रहा है.

सराह -- फिर भी थैंक्स बाबू.. ये सब तुम्हारे दम से है. देवर भाभी के बीच ऐसा रिश्ता मुमकिन नहीं होता. लेकिन यहाँ बन चूका है.. लेकिन थैंक्स गॉड.. अपनी hi निगाहों में न गिर कर मैं तो अनमोल हो गई हों. हाँ बाबू, तुम्हारा प्यार मिल जाने से मुझे मेरा ये सरापा देखते हुए और भी अच्छा लगने लगा है.

सराह भाभी की पलकें झिलझिला रही थी. अस्स पास निगाह दाल कर मैंने सराह

के होंठ चुम लिए. सराह भाभी घबरा कर मुझसे अलग हो गई. मैं है पड़ा

सराह भाभी ने आस पास देख कर तसली करि और अपनी साँसों पर काबू पति हुई बोली -- बाबू तुमने तो मेरी जान hi निकाल कर रख दी थी. यहाँ खुले में..

फिर शर्म से सर झुका कर बोली -- बाबू तुम बड़े ख़राब हो..

मई हस्ता हाउ करीब हुआ और झुक कर बोलै -- अभी तो चूमे hi थे भाभी.. अभी तो बहुत कुछ करना बाकि है

सराह भाभी लजाती हुई बोली -- चुप.. बाबू के बच्चे. अब और मत बोलना

सराह भाभी की मुस्कान बता रही थी. उन्हें बड़ा मज़ा आ रहा था मुझसे ऐसी बातें करते हुए

मैं -- क्यों न बोलो.. मैं तो बोलूंगा.

सराह भाभी एकदम से चहकती हुई बोली -- तो फिर करो न बाबा..

इतना बोल कर घूम गई. और खिलखिला कर हसने लगी. हसी स्लो hi थी

मई भाभी की ऐडा देख कर दिल थम कर रह गया था. सराह भाभी तीनगर बन रही थी.. वाह्ह्ह भाभी..

मैं भाभी का हाथ पकड़ कर चुम गया -- भाभी.. फिरसे कब.. मेरा ख्याल है अब तो फ्रंट और बैक दोनों hi--

सराह भाभी कनपटी हुई मेरे होंटो पर अपना नरम हाथ रख गई. फूली हुई सांस के साथ एक क़दम हटकर कड़ी हो गई

मैं भी कहाँ बाज़ आने वाला था. फिरसे उनका हाथ थाम गया.. फिरसे होंटो से लगा कर बोलै

मैं -- भाभी आप की हसीं वादी में बास थोड़ी सी hi एंट्री हो पाई है मेरी. भाभी महकती वादी में मुझे पूरी तरह घुस कर सैर करनी है. काम आप मुझे गेट से गुजरने देंगी. दो दो गेट के होते हुए भी मैं एक गेट से भी दूर कर दिए गया हों

सराह भाभी अपने दिल पर हाथ रख कर अपनी फूली सांस काबू में करने की कोशिश करने लगी.

मैं -- भाभी meri(mere लुंड की लम्बाई मोटाई) हेल्थ तो अच्छी लगी न आप को. गेट खुलने पर आप को mera(mere लुंड का) वेलकम करने में ज़यादा परेशानी तो नहीं हुई थी न.. ऐसा है तो फिरसे एक बार मुझे विजिट की इजाज़त दीजिये. इस बार मैं पूरा का पूरा सर से लेके पैरों तक वादी के दोनों दरवाज़ों से घुस जाना चाहता हों. पूरी वादी के सरे सुंदर नज़ारे कर लेना चाहता हों.

सराह भाभी के चेहरे पर चमक तो बढ़ hi गई थी. लेकिन पसीने के कतरे भी भाभी के चेहरे पर चमकने लगे थे

मैं कुछ देर और भाभी के साथ मस्ती करता रहा.. और भाभी पल पल रंग बदलती रही

बाद में किन्ज़ा एपीआई से मिला. मुझे देख कर वह अपनी बाहें खोल गई थी. मुझे खुद से गलों पर किश करती हुई बोली -- कैसा है मेरा बाबू

मैं -- आप के महकते गालों की कसम मैं बहुत ाचा हों

किन्ज़ा एपीआई है पड़ी.. फिर मेरे गाल पर मीठी स्माइल करती हाथ फेरने लगी

किन्ज़ा -- बहुत पायरा है मेरा भाई

किन्ज़ा एपीआई अपने मुम्मे मेरे सीने से काम hi लगने दिए करती थी. अब भी बास टच hi हो रहे थे.

मैं उनके होंटो को देखता हुआ बोलै -- किन्ज़ा एपीआई.. आज किश

किन्ज़ा एपीआई लजा गई. सर झुका कर पलकें उठा कर मुझे देखती हुई होंटो पर जुबां फेरने लगी

किन्ज़ा -- ठीक है. लेकिन तुम मुझे ज़यादा परेशां नहीं करोगे

मैं -- ज़यादा??. मतलब.. मैं आप को काम परेशान कर सकता हों. गुड.. एंड थैंक्स आप ने इजाज़त दे दी

किन्ज़ा एपीआई खिलखिला कर हस्ती हुई मेरे होंटो से होंठ मिला कर किश करने लगी

पहले धीरे से लगी रही. मेरा जोश बढ़ा तो वह भी किश करने लगी. लेकिन एक हद तक hi जोश लिमिटेड रहा

फिर किन्ज़ा एपीआई मुझसे अलग हो गई.. अपने होंठ उलटी हथेली से साफ़ करती हुई बोली

किन्ज़ा - बदमाश.. अब तुम जाओ.. तुम्हारी विश मैंने पूरी कर दी

मैं -- आप ज़यादा चालक मत बनो एपीआई.. विश आप की पूरी हुई है.. मेरी नहीं

किन्ज़ा एपीआई अपनी हसी दबती हुई सीरियस होकर बोली -- क्या मतलब

वर्ण उनकी ऑंखें है रही थी

मैं -- मतलब..... करीब आ कर बताता हों

मैं करीब हुआ तो किन्ज़ा एपीआई हस्ती हुई दूर कड़ी होकर मुझे स्माइल से देखने लगी

किन्ज़ा -- वही रह कर बताओ.. हहै

मैं भागने लगा. किन्ज़ा एपीआई भी कमरे में भागने लगी. एक मोके पर मैंने उन्हें पकड़ कर बीएड पर उल्टा गिरा दिए.. फिर खुद उनके ऊपर लेट गया. मेरा सोया लुंड उनकी गांड पर था..

किन्ज़ा एपीआई हस्ती हुई बोली -- बाबू.. तुम बहुत भरे हो. हटो मेरे ऊपर.. या मेरा कचूमर निकल कर hi तुम्हे चैन मिलेगा

मैं -- इतना भी भरी नहीं हों मैं समझी आप... और वैसे भी

मैं चुप कर गया

किन्ज़ा -- वैसे क्या??. तुम कुछ कहते कहते रुक क्यों गए

मैं --- रुका नहीं, सोचने लग गया था, क्या जवाब डॉन

किन्ज़ा -- क्या मतलब.. क्या जवाब तुम्हारे पास रेडी नहीं था

मई -- वह तो रेडी है..

किन्ज़ा -- फिर??

मैं -- असल में मैं कहना चाहता था... लड़की खः सिंगल पसली भी क्यों न हो.. भरे से भरे मर्द को भी बर्दाश्त कर लेती है

अपनी बात कह कर मैं ज़ोर से हसने लगा था. किन्ज़ा एपीआई झींपति हुई हसी..

एक बार फिरसे किन्ज़ा एपीआई के होंटो को चूसा फिर वहां से हैट गया. अम्मी जान की याद दिल में चुटकियां ले रही थी

मैं अम्मी जान के कमरे में घुसा तो अम्मी जान एक टांग स्टूल पर रखे शलवार घुटने तक किये लोशन लगा रही थी

अम्मी जान की गोरी टांग देख कर मेरा मोह खुल गया. और मेरा खुला मोह देख कर अम्मी जान है पड़ी

अम्मी जान -- बेशरम बाबू.. मोह ऐसा खोले हुए है. जैसे सरे ज़माने का ठरकी इक तू hi है... हेहेहे

मैं हंस मुख अम्मी जान के करीब चला गया. और करीब से अम्मी जान की आधी नंगी टांग देखने लगा

अम्मी जान ने जल्दी से शलवार नीचे की और टांग स्टूल से हटा कर फर्श पर रखती हुई हसने लगी

अम्मी जान -- बाबू... अब टांग भी ऐसे टुकर टुकर करके देखने वाली चीज़ है भला.
 
सत्ताईसवीं क़िस्त

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मैं अम्मी जान की टांग उठा कर वापिस से स्टूल पर रख गया. अम्मी जान मुझे मीठी स्माइल से देख रही थी. मई अम्मी जान की शलवार पकड़ कर घुटने से ऊपर सरकने लगा

अम्मी जान है पड़ी -- बाबू.. ये तुम क्या कर रहे हो

अम्मी जान ने मुझे रोका या टोका नहीं. जस्ट सवाल किआ था. वो भी मस्ती के मूड में

मैं अम्मी जान की शलवार घुटने से ऊपर करता हुआ नंगी कर के अम्मी जान की नंगी गोरी लेग पर होंठ लगा गया. अम्मी जान सिसक पड़ी थी. रोमांस का ये अंदाज़ भला कहाँ पापा के बास का रोग था. मैंने अम्मी जान को देखा. नशा दिखाई दिए अम्मी जान की आँखों में

पर वह मुस्कुरा रही थी

मैं फिरसे अपने होंठ अम्मी जान की चिकनी गोरी नरम मुलायम संग इ मर्मर से तराशी हुई टांग पर रख गया.. छोटे छोटे किश करते हुए मैं अम्मी जान की पूरी लेग को चूमने लगा. अम्मी जान कभी सिसक पड़ती. कभी हसने लग जाती. अम्मी जान की आँखों में दौरे तैरने लगे थे

मैं अम्मी जान की शलवार और भी ऊपर उठाने लगा. पतली शलवार का पेंचा राण से ऊपर नहीं हो सका. रंग थोड़ी भरी और पेंचा छोटा था. फँस गया

अम्मी जान है पड़ी. मैं अम्मी जान को घूरता हुआ शलवार के तंग पेंचे को देखने लगा. मैं भी ऐसा फेस बना गया था, जैसे मेरे हाथ बड़ी hi कीमती चीज़ आते आते रह गई हो

अम्मी जान अब खिलखिला कर है रहे थी. फिर अम्मी जान का हसना बंद हो गया. मैं अम्मी जान की थोड़ी सी नंगी राण पर जुबां रख कर फेर गया. अम्मी जान का मोह खुल गया. मैंने अम्मी जान को देखा. अम्मी जान का रंग उड़ने लगा था. लेकिन अम्मी जान के चेहरे पर सुकून और नशा बहुत ज़यादा था. अम्मी जान को भी ये सब बहुत भा रहा था. और मुझे तो कुछ ज़यादा hi बहाने लगा था. मैं मज़े ले रहा था अम्मी जान के जिस्म के

मैं अम्मी जान की आधी से ज़यादा टांग नंगी किये चुम और चाट रहा था. जुबां फेर रहा था.. मज़ा और सवाद ले रहा था. अब अम्मी जान की सांस भरी होने लगी थी. बड़ी मुश्किल से अम्मी जान खुद पर काबू पाए हुए थी. अम्मी जान ने कहा था, मैं खुद से कुछ ज़यादा न करूँ. पर मैं जो कर रहा था. वो तो

कुछ न होते हुए भी बहुत ज़यादा था. अम्मी जान की नंगी टांग के बाल खड़े हो गए थे. सुरूर से अम्मी जान पागल होने लगी थी. मेरे होंटो की तपिश के आगे अम्मी जान पिघलने लगी थी.

मैं अम्मी जान को देखता हुआ टांग नीचे उतर कर दूसरी टांग स्टूल पर रख गया और अम्मी जान ने भी मेरी हेल्प करि दूसरी टांग स्टूल पर रखवाने में

मैं अम्मी जान की दूसरी टांग की शलवार भी ऊपर उठाते हुए घुटने से ऊपर जहाँ तक जा सकती थी, उठा गया. अम्मी जान की दूसरी गोरी नंगी टांग भी मेरे सामने थी

मैं अपने होंठ अम्मी जान के पेअर की उँगलियों पर रख गया. अम्मी जान सिसक पड़ी

मैं बार बार अम्मी जान के पैरों की उँगलियों को चुम और चाट रहा था. धीरे धीरे में ऊपर बढ़ता हुआ अम्मी जान की पूरी टांग को चूमने चाटने लगा. मैं अम्मी जान की सेक्सी सुंदर गोरी राण पर जा पोंछा. वहां होंठ रखे तो राण बुरी तरह से गर्म हो चुकी थी. अम्मी जान की फुद्दी से सेक निकलता हुआ फील हो रहा था

मैं देर तक अम्मी जान की लेग्स को चूमता चाट ता रहा. फिर अम्मी जान खुद को नार्मल करती हुई हस्ती हुई बोली --- बास बास अब खड़ा हो जाओ.. दिन बा दिन तेरी नौटंकी बढ़ती hi जा रही है. भला ये भी कोई तुक बनती है. कोई टाँगें भी चूमता है क्याआ.. चलो आज का तो तुम्हारा खाना गया. तुम्हारी तो भूक और प्यास तो यकीनन अब मिट गई होगी

अम्मी जान भी मेरी hi अम्मी जान थी. मैं सुपर था तो अम्मी जान डबल सुपर थी. नौटंकी में वह कैसे पीछे रह सकती थी. मैं हसने लगा

फिर अम्मी जान को हुग करता हुआ गाल को चूमने लगा. अम्मी जान ने मुझे घूरा

मई है पड़ा -- तो क्या हुआ अम्मी जान... आप को चूमा छठा है. आप के hi बदन से लगे हैं मेरे होंठ.. ऐसे तो मोह टेढ़ा न करें

अम्मी जान शर्म से धीरे से है पड़ी -- बाबू.. तू बड़ा तेज़ होता जा रहा है.. भला आज जैसा तूने किआ.. कोई ऐसा भी करता है क्या

मैं -- मैं तो जो करता हों अम्मी जान. वो तो कोई भी बीटा या भाई नहीं करता. और मेरी अम्मी जान और बहने भी जो करती हैं वह कहीं और की अम्मी जान और बहने नहीं करती हैं

अम्मी जान -- बास बास.. जीनियस बॉय.. दलीलें देकर बच्चों को समझाया करो. मैं माँ हों तुम्हारी.. बच्ची नहीं हों.. जो मुझे समझने चले हो

कुछ देर और अम्मी जान के साथ मस्ती भरी बातें होती रही. फिर मैं अम्मी जान के पास से जाने लगा

अम्मी जान बोली -- आज कुछ किआ क्या तुमने

मैंने अम्मी जान को देखा. उफ्फ्फफ्फ्फ़ अम्मी जान को मेरी मस्तियों के बारे में जान्ने का कितना शोक चढ़ा हुआ था. मैं अम्मी जान को देखने लगा

मैं -- अभी तक तो नहीं किआ कुछ भी.. हाँ लेकिन भाभी से बातें हुई कुछ

अम्मी जान इश्तिआक के साथ बोली -- तो बताओ.. चुप क्यों हो अभी तक.

मैं हसने लगा. अम्मी जान मेरी हसी का मतलब समझती हुई खुद भी हसने लगी

अम्मी जान -- अब क्या करूँ बाबू.. नई लाइफ की नई डिमांड्स hi अलग हैं.. सच में अब रहा नहीं जाता

मैं बाहें खोलता हुआ होंटो पर जुबां फेरता हुआ बोलै -- मतलब आप भी भुकी और प्यासी हैं. मैं भी भूका हों, बहुत ज़यादा प्यासा हों अम्मी जान.. आइये मिलकर भूक और प्यास मिटते हैं

और अम्मी जान खिलखिला कर हसने लगी -- बाअबूउउउउ.. हेहेहे. तुम भी न.. मुझे न तो इतनी भूक लगी है और न hi प्यास.. लगी भी तो किचन में फ्रिज भरी पड़ी है खाने और पीने दोनों तरह की चीज़ों से

इतना बोल कर पेट पकड़ कर हस्ती हुई बीएड पर जा बैठी.. मुझे देख खिलखिलाये जा रही थी

मैं अम्मी जान को यौन हस्ता हुआ देख कर उनके पास जा बैठा.. दोनों बाहुन में उन्हें भर कर उनके गालों को चुम गया

अम्मी जान मुझे मीठी निगाह से देखने लगी. मैं अम्मी जान के गाल को चूमता हुआ अपने होंठ अम्मी जान के होंटो के करीब करने लगा

और अम्मी जान मुझे एक आंख टेढ़ी करके घूरने लगी. फिर ऐसे hi घूरती हुई झट से मेरे होंटो को चुम कर पीछे हुई और दोबारा से खिलखिला कर है पड़ी

दोनों हाथ बीएड पर पीछे गिरा कर हथुन के सहारे खुद को बैलेंस करती हुई हसे जा रही थी

मई अम्मी जान का ऐसा रूप देख कर झूमने लगा. अम्मी जान कितनी पायरी लग रही थी ऐसे हस्ते हुए

मैं अम्मी जान को भाभी के साथ हुई थोड़ी सी बातें बता कर जाने लगा

अम्मी जान फिरसे बोली -- आज्ज कुछ खास करना.. फिर रात में तेरे कमरे में आउंगी.. मुझे सब डिटेल में बताना.. और हाँ.. अब थोड़ी सी स्पीड पकड़ ले

मैं अम्मी जान को आंख मारता हुआ बोलै -- मैं तो स्पीड पकड़ना hi चाहता हों. आप hi नहीं मेरा साथ दे रही है

अम्मी जान मेरा कान पकड़ती हुई मरोर कर बोली -- मुझे तो भूल hi जा तू समझा.. बाबू के बच्चे.. कहा तो है मुझे आसानी से प् नहीं सकेगा

मैं -- देखना आप hi खुद बेताब होकर मेरे पास आएँगी.. कहेंगी बाबू अब रहा नहीं जाता. अब पा hi दो

अम्मी जान ने मेरा कान ज़रूर से मरोर दिए.. मैं चीख पड़ा

अम्मी जान थोड़ी ग़ुस्से में खुद को ज़ाहिर करती हुई बोली -- ऐसी गन्दी लैंग्वेज का इस्तेमाल मेरे साथ मत कर

मैं -- कहाँ लैंग्वेज का गन्दा इस्तेमाल किआ मैंने अम्मी जान.. वो तो पहले आप ने "प्" का ज़िक्र किआ था. जब आप ने कर दिए तो मैंने भी कर दिए.. गलत वर्ड तो नहीं है न "प्"...

इतना बोल कर हस्ता हाउ मैं बीएड से खड़ा हो गया.. अम्मी जान मुझे घूरने लगी. फिर हसने लगी. फिर कड़ी हुई और मेरे करीब आ कर मुझे हुग करती हुई मेरे गालों को पुरे चेहरे को चूमने लगी

अम्मी जान -- अब का बाबू हर पल प्यारे से भी प्यारा होता जा रहा है. बाबू प्यार के ये रंग कभी फीके मत पढ़ने देना

अम्मी जान थोड़ी इमोशनल हो गई थी

मैं अम्मी जान के गाल को चूमता हुआ बोलै -- अम्मी जान.. ये बाबू को सिर्फ आप सभी का प्यार चाहिए.. प्यार का रंग बदलने लगा है.. तो ऐसा रंग भी अब बाबू को चाहिए.. और बाबू ने जान लिए है. उसके अपने उसके संग ऐसे रंगों को खुल कर जीना चाहते हैं. अम्मी जान मैं कभी भी प्यार के इन अनमोल रंगों को फीका नहीं होने दूंगा

अम्मी जान ने मुझे फिरसे चूमना शुरू कर दिए...

मैं -- अम्मी जान. बहुत पुराणी बात हो गई है अब तो.. मुझे आप ने अपना पेट नाह दिखाया.. मैं तो आप का पेट चुम भी नहीं सका

अम्मी जान थोड़ी शर्म के साथ बोली -- क्या जितना रात हुआ, वो पेट दिखने और चूमने से काम था क्याआ??.

मैं -- नहीं.. बहुत ज़यादा था

अम्मी जान -- तो फिर लाइफ को एन्जॉय क्यों नहीं करता तू.. एक hi बात के पीछे तो मत पड़ा कर. सबर से सुकून से सब मिल hi रहा है तो बेताबी का मुज़ाहिरा क्यों

मैं -- समझ गया अम्मी जान

अम्मी जान -- जा. और सुन.. रोज़ मेरे लिए चटपटी ख़बरों का स्टॉक मेरे लिए रखा कर. अब से लाइफ स्टाइल में चेंज आ रहा है तो मुझे ये चेंज बहुत भने लगा है. मैं तुझसे तेरे मज़े, दूसरों के मज़े जानना और सुन्ना चाहती हों. ऐसे शायद मेरी लाइफ और भी मस्त हो जाए. और मैं कोई भी मौका हाथ से जाने नहीं देना चाहती

उफ्फफ्फ्फ़ अम्मी जान.. आप भी न

अम्मी जान की अजीब खवाहिश जान कर मैं दांग रह गया था. अम्मी जान अपनी hi बेटियों और बहु सास के बारे में मुझसे जानना चाहती थी

मैं कुछ देर अम्मी जान के पास रहा.. फिर कमरे से निकल कर ऊपर किन्ज़ा एपीआई के कमरे में जा घुसा.. बिना दूर नॉक किये मैं अंदर घुस जाया करता था. सिर्फ में hi ऐसा कर सकता था. बाकि घर में किसी को इजाज़त नहीं थी

किन्ज़ा एपीआई ड्रेसिंग टेबल के सामने कड़ी थी. शिरट्लेस्स थी. नीचे शलवार और ऊपर रेड जालीदार ब्रा पहने हुए थी. दूर खुला तो मुझे देख कर घबरा गई. जल्दी से अपनी कमीज़ अपने मुम्मों पर कर गई

मई दूर लॉक करता हाउ उनके करीब जाने लगा. किन्ज़ा एपीआई शर्म से निगाहें चुरा गई थी. मुझे देख नहीं सकीय थी

मई उनके करीब हुआ.. उनके हाथ से कमीज़ पकड़ कर अपने हाथ में कर गया.. किन्ज़ा एपीआई के हाथ ब्रा के ऊपर मुम्मों पर थे. मुम्मे जो छुपाये नहीं छुप सकते थे. फिर भी मुझसे छुपाने की पूरी पूरी कोशिश कर रही थी

गोरा चिकना बदन, 36 के बड़े बड़े मुम्मे आधे ब्रा के अंदर से दिखाई दे रहे थे.

मई किन्ज़ा एपीआई के दोनों हाथ पकड़ कर मुम्मों के ऊपर से हटाने लगा. किन्ज़ा एपीआई शर्म से कंपनी लगी थी

मिनमिनाइ -- बाबू.. प्ल्ज़.. तुम जाओ.. थोड़ी देर के बाद आना. उफ्फ्फ्फ़.. मैं दूर लॉक करना कैसे भूल गई

मैं - क्या मई ये समझो मुझसे गलती हुई

किन्ज़ा एपीआई का रंग शर्म से बार बार बदल रहा था. पर मेरी बात पर वह चौंकती हुई सर उठा कर मुझे देखने लगी. शर्म खुद से hi साइड जा कड़ी हुई थी

किन्ज़ा एपीआई अपने मुम्मों पर रखे हाथ हटा कर मेरे हाथ को पकड़ती हुई बोली

किन्ज़ा -- बाबू.. ऐसी बात फिरसे कभी मत करना तुम.. मुझे बड़ा दुःख हुआ तुम्हारे मोह से ऐसी बात सुनकर..

मई किन्ज़ा एपीआई को झट अपने सीने में भींच गया. किन्ज़ा एपीआई शिरट्लेस्स थी, ऐसे hi मेरे सीने में जा समय

किन्ज़ा -- मैं तुमसे कितना प्यार करने लगी हों बाबू.. क्या तुम नहीं जानते.. तुम्हारा मेरे कमरे में बिना इजाज़त आ जाना भी मेरी अनमोल मोहब्बत को ज़ाहिर करता है. फिर क्यों तुमने ऐसा कहा, तुमसे गलती हुई

किन्ज़ा एपीआई शिकवा कर रही थी. मैं तो उनका मूड बदलने के लिए ऐसा बोलै था

मैं -- सॉरी एपीआई.. बास मैं ऐसा hi जो मोह में आया बक गया.. गलती तो नहीं होइ मुझसे. हो भी नहीं सकती. यहाँ हमारा प्यार खालिस और अनमोल है. गलती की गुंजाइश तो कही भी नहीं निकलती

किन्ज़ा एपीआई मेरे कालर से खेलती हुई बोली -- फिरसे ऐसी गलती मत करना तुम बाबू.. मेरा दिल इतना भी मज़बूत नहीं है. तुम्हारी ऐसी बायत सुनकर सहन कर पाऊँ

मैं -- ाचा सॉरी बोलै न बाबा.. अब माफ़ भी कर दो

किन्ज़ा एपीआई ने मुझे देखा और मुस्कुरा पड़ी. मैंने सर झुकाया और उनके माथे पर किश कर दिए.. किन्ज़ा एपीआई मज़े से आंखें बंद कर गई. फिर मैं किन्ज़ा एपीआई का चेहरा थाम गया

किन्ज़ा एपीआई ने शर्म से भीगी निगाह उठा कर मुझे देखा. उनके होंटो की स्माइल कुछ और भी गहरी हो गई

मैं किन्ज़ा एपीआई के चेहरे को थाम कर गाल पर अपने होंठ रख गया. देर तक ऐसे hi किन्ज़ा एपीआई के गाल को फील करता रहा.. फिर दूसरे गाल पर होंठ रख कर सवास लेने लगा

किन्ज़ा एपीआई के गाल गुलाबी होने लगे थे. उनकी ऑंखें बंद हो चुकी थी

मैं किन्ज़ा एपीआई के दूसरे गाल को चूमता हुआ किन्ज़ा एपीआई के होंटो पर ऊँगली फेरने लगा

किन्ज़ा एपीआई ने ऑंखें खोल कर मुझे देखा. जहाँ अब नशा hi नशा था. मैं कुछ देर होंटो पर ऊँगली फेरता रहा.. फिर अपने होंठ किन्ज़ा एपीआई के होंटो पर रख गया

किन्ज़ा एपीआई ने पूरी ऑंखें खोल कर मुझे देखा. फिर मेरे गिर्द दोनों बाहें कस्ती हुई मेरे होंटो को पीने लगी. नशा बढ़ा तो फिरसे ऑंखें बंद कर गई.

मैं और किन्ज़ा एपीआई देर तक किश करते रहे. फिर किश तोड़ दी गई

मैं और किन्ज़ा एपीआई दोनों हांप रहे थे. दोनों की साँसे जो फूल गई थी.. किन्ज़ा एपीआई के गाल कुछ ज़यादा hi ऊपर को खिंच कर सुर्ख हो गए थे.

मैं किन्ज़ा एपीआई की ब्रा को देखता हुआ बोलै -- किन्ज़ा एपीआई.. अब आप को इस हालत में देख hi लिए है तो क्यों न आज hi दीदार भी करने को मिल जाए

मैं इशारतन ब्रा के ऊपर दोनों हाथ ले गया

किन्ज़ा एपीआई घबरा कर पीछे हैट गई. मैं उन्हें देखने लगा -- प्ल्ज़ एपीआई.. आज बहुत दिल कर रहा है कसम से

किन्ज़ा एपीआई कनपटी लरज़ती हुई बोली -- n-nahi बाबू.. मैंने ऐसा एक बार भी नहीं सोचा है.. प्ल्ज़ तुम ऐसी कोई डिमांड मुझसे मत करो

मैं -- आप को मेरे दिल का ज़रा सा भी अहसास नहीं है

किन्ज़ा -- बाबू तुम hi मेरी शर्म का कुछ पास कर लो.. शर्म से मैं गिर पड़ूँगी बाबू.. मेरे लिए ये कठिन से भी कठिन काम है.. जिसे तुम इजी समझ रहे हो

मैं -- एपीआई हम कितना आगे बढ़ चुके हैं. क्या हमारे अनमोल प्यार की अपनी कुछ डिमांड्स नहीं हैं

किन्ज़ा एपीआई धीरे से सर झुकाये बोली -- बाबू. होंगी डिमांड्स.. प्यार में डिमांड्स hi डिमांड्स होती हैं बाबू.. पर बाबू.. कसम से ये डिमांड मुझसे पूरी नहीं हो पाएगी

मैं -- हम्म्म.. ठीक है. मैं आप को परेशान नहीं करूँगा.. लेकिन चाहूंगा आप जल्द से जल्द मेरी इस विश को पूरा कर दें

किन्ज़ा एपीआई ने मुझे घोर से देखा और चुप रही

मैं कुछ देर किन्ज़ा एपीआई के पास रहा. फिर वहां से निकल पड़ा.
 
अठाईसवीं क़िस्त

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मई माहिरा एपीआई के पास जा पोहंचा. वो कमरे में hi थी. माहिरा एपीआई मुझे भाग कर मेरे सीने में आ समय. माहिरा एपीआई अपने बालों का रंग बदलती रहा करती थी. थिस टाइम माहिरा एपीआई के बाल डार्क ब्राउन थे. फैशन गर्ल थी. मॉडल बनना चाहती थी. एक सुपर मॉडल की सभी खसूसियत माहिरा एपीआई के अंदर थी. चेहरा दिलकश, 34 साइज के मुम्मे, इतनी hi गांड थी. पतली कमर, रंग वैरी फेयर. ऑंखें झील सी गहरी. काजोल भरा होता आँखों में तो माहिरा एपीआई की ऑंखें क़यामत ढाने लगती थी.

वैसे तो अम्मी जान और किन्ज़ा एपीआई सबसे ज़यादा हसीं और पुरकशिश थी. पर जिस अंदाज़ से माहिरा एपीआई ने खुद को मेन्टेन कर रखा था. एक अनोखी कशिश झलकती थी माहिरा एपीआई के सरपे में.

मेरे सीने से लगी अपने बदन की खुशबु से मेरी रूह को मोअत्तर करने लगी. मई लम्बी सांस खेंच कर खुशबु को अपने अंदर उतरने लगा. सुरूर में मैं पहले भी था. अब और भी ज़यादा सुरूर में होने लगा. माहिरा एपीआई मुझसे जुड़ा नहीं हुई. मैंने भी माहिरा एपीआई के गिर्द लिपटी अपनी बाहें ढीली नहीं की. देर तक हम दोनों प्रेमी भाई बहन एक दूसरे से चिपके खड़े रहे

माहिरा -- तो कैसी लगी मेरे बाबू को मेरी सहेली मेरी सेक्स पार्टनर

मई माहिरा एपीआई की बात पर दांग रह गया. माहिरा एपीआई का चेहरा थम कर उसे देखने लगा

माहिरा एपीआई स्माइल से बोली -- हम्म.. तभी तो तुम्हे बुटीक बुलाया था बाबू.

मई -- क्यों?

माहिरा एपीआई एड़ियों पर उठी और मेरे होंटो को चुम गई --- बाबू.. मेरा दिल बड़ा खुश है. जब से तुम्हारा अनमोल प्यार मुझे मिला है. मेरी दुन्या hi बदल गई है बाबू. काश मेरे अख्त्यार में होता तो पूरी कायनात अपने बाबू के क़दमों में दाल देती

मई माहिरा एपीआई के मेरे लिए प्यार की शिद्दत पर दांग रह गया. फिर मुस्कुराता हुआ माहिरा एपीआई के चेहरे को थाम कर चूमने लगा. माहिरा एपीआई का चेहरा चमक उठा था

मई पुरे चेहरे को चुम कर माहिरा एपीआई के होंटो पर होंठ रख गया. गर्म उबलते हुए भाप छोड़ रहे होंटो से मेरे होंठ मिले तो सवाद hi आ गया.. रास भरे कुंवारे होंठ... उम्मम्मम मई दोनों हथुन के अंगूठे और उँगलियाँ माहिरा एपीआई के गालों पर होंटो के किनारे पर फेरता हुआ किश करने लगा

देर तक चली किश में माहिरा एपीआई ने मेरा भरपूर साथ दिए. सांस उखाड़ने लगी तब जा के हम ने किश तोड़ी. हम दोनों hi एक दूसरे को देखते हुए तेज़ साँसे ले रहे थे

फिर मैं माहिरा एपीआई को उठा कर बीएड पर लिटा गया. वापिस आया और दूर को अंदर से लॉक करता हाउ वापिस माहिरा एपीआई के पास पोहंचा. वो मुझे मीठी और शरमीली निगाह से देख रही थी

मई करीब हुआ और माहिरा एपीआई की कमीज़ के पल्लू को पकड़ गया

मई --- माहिरा एपीआई बहुत दिनों से आप के जिस्म के कीमती और दिलकश नशेब ो फ़राज़ का दीदार नहीं हुआ..

माहिरा एपीआई शर्मा गई. साथ hi दिलकश अंदाज़ में मुस्कुरा पड़ी -- बाबू हर बहन का जिस्म शोहर होने वाले शोहर की अमानत होता है. लेकिन मैं अपना दिल, अपनी रूह अपना जिस्म अपना सब कुछ अपने बाबू के नाम लिख चुकी हों.

मेरे हाथ ऊपर उठे तो माहिरा एपीआई ने बाहें उठा दी. साथ hi माहिरा एपीआई ने अपनी गांड उठा कर कमीज़ के गांड वाले पल्लू को भी ऊपर होने का मौका दिया

मई प्यार से आराम से माहिरा एपीआई की कमीज़ उतारने लगा. माहिरा एपीआई कभी मुझे देखती. कभी शर्मा और मुस्कुरा कर निगाह फेर लेती. माहिरा एपीआई की कमीज़ उतार कर मैंने बीएड पर राखी. अब माहिरा एपीआई शलवार और पिंक सॉफ्ट ब्रा में थी.

मई माहिरा एपीआई के मुम्मे जो ब्रा में कैद थे, देखने लगा. कुछ पल देखने के बाद मैंने ब्रा पकड़ी और ऊपर को उठा कर माहिरा एपीआई के 34 साइज के मुम्मे नंगे कर गया

माहिरा एपीआई कसमसा गयी. लेकिन कुछ और रियेक्ट नहीं किआ उन्हों ने. अब मेरी निगाहों के सामने माहिरा एपीआई के चमकदार गोर रेड निप्पल्स वाले मुम्मे थे. मई अपनी नक् एक मुम्मे के साथ लगता हुआ ज़ोर की सांस खेंच गया

माहिरा एपीआई सिसक पड़ी... भरी सांस छोड़ गई. मई भी लम्बी सांस खेंचता हुआ मुम्मे की महक को अपने अंदर उतारने लगा. दिल नहीं भरा तो दूसरे मुम्मे पर भी नक् लगा कर स्मेल करने लगा

माहिरा -- बाबू तुम्हारा ये अंदाज़, तुम्हारा ये प्यार मैं कभी नहीं भूल सकुंगी. बाबू तुम्हारा प्यार ऐसे hi अनमोल नहीं हो गया है. बाबू तुम सब कुछ दिल से करते हो. वर्ण जिस्म तो गर्म होने, ठंडा होने की चीज़ है. जब आग भड़क उठे तो बिना देरी के आग बुझाने में बिजी हो जाया करते हैं लड़के भी और लड़कियां भी. लेकिन तुम अनमोल प्यार के रंग को गहरा hi नहीं करते. तुम दिल में गहराइयों का इज़ाफ़ा भी करते हो और रूह को सुकून भी बख्श देते हो. जो सिर्फ तुम hi कर सकते हो.. आठ बाबू तुम मेरे दिल में और कितनी गहराई तक समाओगे.. अब तुम्हारे शिव किसी और को सोचने को डिल नहीं करता. काश मेरी शादी hi न हो. काश मुझे किसी और की न होना पड़े. काश मैं हमेशा के लिए तुम्हारी hi बानी रहूं..

मई माहिरा एपीआई की आँखों में देखता हुआ बोलै -- काशः.. ऐसा होता.. काष्ठ वैसा होता.. काश ये हो जाए.. काश वो हो जाए.. काश ये मिल जाए.. काश वह मिल जाए.. काश.. काशः.. काशः.. माहिरा एपीआई हमारी लिव्स से ये मनहूस "काश" नहीं जाने वाला. इसलिए रियलिटी में ज़िंदा रहते हुए जो मज़े लुटे जा सकते हैं. उन्हें पुरे दिल से लूट लिया जाए

माहिरा -- आठ मई भी तो कई दिनों से यही सब सोचे जा रही हो. अब और सबर नहीं होता बाबू.

मई -- मुझसे भी नहीं होता एपीआई.. क्या हम एक दूसरे का पूरा प्यार पा लें

माहिरा -- इस तमन्नाह के पूरा होने के इंतज़ार में तो मैं एक मुद्दत से हों

मई माहिरा अपनी के दोनों मुम्मे पकड़ कर दबाने लगा. गर्म मुम्मे बड़ी स्पीड से फूलने लगे थे. माहिरा एपीआई की गोर 34 साइज क मुम्मे फूल कर बड़े होने लगे. माहिरा एपीआई का जिस्म पहले hi बड़ा हसीं था. अब मुम्मे फूले तो माहिरा एपीआई का सीना और भी ज़यादा पुरकशिश और सेक्सी लगने लगा

मई झुका और एक मुम्मे पर अपने होंठ रख गया

माहिरा -- आठ बाबू.. तुम्हारे होंठ.. उफ्फ्फ ये होंठ नहीं अंगारे हैं.. आठ बाबू... जाली नहीं हों मई. हाँ लेकिन सुकून इतना मिल रहा है.. गहरी नींद सो जाने को मैं करने लगा है.

मैंने मुम्मे से होंठ हटा कर माहिरा एपीआई को देखा. उनकी पलकें सच में सुरूर से भरी होने लगी थी

मई दूसरे मुम्मे पर होंठ रख गया. पहले वाले मुम्मे को पकड़ कर मसलने लगा. थोड़ी देर तक मुम्मों का मज़ा लेता रहा. लेकिन अब मेरा लुंड मुझे परेशां करने लगा था. बहुत वक़्त से मैंने कोई फुद्दी ढंग से नहीं मारी थी.

मई माहिरा एपीआई को लिटा कर उनकी शलवार खोलने लगा. माहिरा एपीआई मुझे hi देखे जा रही थी. मैंने एक नज़र उन्हें देखा और आंख मार दी. माहिरा एपीआई हसी ज़रूर. लेकिन बुरी तरह से शर्मा गई थी. उनका सागा भाई उनकी कमीज़ और ब्रा के बाद अब उनकी शलवार उतर रहा था. शर्माना तो बनता था

मैंने शलवार और पंतय दोनों एक एक करके महीअर एपीआई के बदन से अलग कर डाली

अब माहिरा एपीआई मेरे सामने पूरी नंगी लेती हुई थी. उनकी क्लीन शेव फुद्दी मेरी आँखों के सामने थी. मई भी अपनी पंत उतारने लगा. शर्ट नहीं उतरी..

नीचे से नंगा होकर मई माहिरा एपीआई की लेग्स खोलता हुआ बीच में आ गया.

मई माहिरा एपीआई की शवेद चमकदार बंद लबों वाली फुद्दी देख होंटो पर जुबां फेरने लगा

माहिरा -- बाबू क्या मोह में पानी भर आया है

मई माहिरा एपीआई को देख कर स्माइल से बोलै -- हाँ एपीआई.. आप सच में लाजवाब हैं. मोह में पानी तो आएगी hi

माहिरा एपीआई शरमति हुई मुस्कुरा पड़ी.

मई एक हाथ माहिरा एपीआई की फुद्दी पर रख कर गया

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रात डिनर के टाइम सब hi मौजूद थे. अम्मी जान सब को एक नज़र देखने के बाद पापा को देख कर बोली

अम्मी जान -- आज से रात 11 बजे तक जिस किसी को बाबू चाहिए.. वो बाबू को उदा कर ले जा सकता है. जिस किसी का मैं हो, वो बाबू के साथ बाबू के कमरे में टाइम स्पेंड कर सकता है. लेकिन मेरा टाइम फाइनल है. बाकि सब अपना अपना टाइम टेबल खुद से सेट कर लें. मई मेरे टाइम पर कोई बहस पसंद नहीं करुँगी

पापा और सब का मोह अम्मी जान की बात सुनकर खुल गया था. निवाले और चमच हथुन में hi रहे रह गए.

पापा हस्ते हुए बोले -- ये क्या सूझी तुम्हे गुलशन

अम्मी जान मुझे निहारती हुई बोली -- बाबू के अनमोल प्यार ने मुझे सूझ बूझ दी है. पारा नहीं कितनी ज़िन्दगी बाकि है. लेकिन मैं अब बाबू से दूर नहीं रह सकती. कल को बाबू की बीवी आ जायेगी. मई बाबू की बीवी के आने से पहले पहले बाबू के साथ ढेर सारा टाइम स्पेंड कर लेना चाहती हों.

पापा है पड़े -- आठ काश मैं भी पापा न होकर अम्मी जान होता.

सब पापा की बात पर खिलखिला कर है पड़े. अम्मी जान ने ज़रूर मुझे नॉटी स्माइल से देखा था. कुछ था अम्मी जान की आँखों में. जिसे मैंने पढ़ लिए.. और जो मैंने पढ़ा. वो पढ़ कर बड़ी मुश्किल से मई अपनी हसी रोक पाया था

अम्मी जान की आँखों में लिखी तहरीर कुछ यौन थी --- बाबू तुम्हारे पापा भी तुमसे मेरे जैसा प्यार करना चाहते हैं. लेकिन वो बड़े भोले है. नहीं जानते जो मेरे पास है वह उनके पास नहीं है. होता तो सब कुछ तुम्हे देने की सोच बैठते

ये तहरीर पढ़ी मैंने अम्मी जान की आँखों में तो ज़बरदस्ती अपने होंठ डेंटन में भींच कर मैंने अपनी हसी कण्ट्रोल करि थी. और अम्मी जान वह भी बेआवाज़ है पड़ी थी

किन्ज़ा एपीआई, माहिरा एपीआई, नदीम भाई, दादा दादी, भाभी सराह सब भी अपना अपना टाइम सचेडूले सेट करने लगे.

रात 11 बजे तो मेरे कमरे का दूर खुला और अम्मी जान अंदर दखल होती दिखाई दी. अम्मी जान ने सबसे पहले अंदर दूर को लॉक लगाया.. फिर स्माइल करती हुई बीएड पर मेरे बराबर आ कर बीएड से टेक लगाए बेथ गई

मुझे देख कर बोली -- बाबू.. मैंने सही किआ न

मई अम्मी जान का हाथ थाम कर बोलै -- जी अम्मी जान. आप कभी कुछ गलत कर hi नहीं सकती. एंड थैंक्स अम्मी jan..aaaj से मुझे हर रात सुकून की नींद आया करेगी

अम्मी जान झुकी.. मुम्मों की क्लीवेज दिखती मेरे गाल को चुम गई. मेरी निगाह अम्मी जान के आधे झलकते दूध जितने गोर मुम्मों पर पड़ी तो अम्मी जान धीरे से हस्ती हुई मुझे घूरने लगी. फिर मेरे सर पर हलकी सी चपत लगाती हुई बोली

अम्मी जान -- बेशरम बाबू. अपनी अम्मी जान को कोई भी बीटा ऐसी निगाह से नहीं देखता है

अम्मी जान की आँखों और फेस के एक सेंटीमीटर में मस्ती hi मस्ती भरी हुई थी

मैं अम्मी जान का दुपट्टा पकड़ कर सर से अलग करता हुआ बीएड पर दाल गया

अम्मी जान और भी नॉटी होती हुई बोली -- बीटा अब अम्मी जान का दुआपात्ता भी सर से उतरेगा

मैं भी मूड में आ गया. अम्मी जान को अपने साथ जोड़ कर उनके गालों को चूमता हुआ बोलै -- अभी तो शुरुआत है अम्मी जान. आगे आगे देखिये होता है क्या

अम्मी जान खिलखिला कर है पड़ी -- हम्म्म.. तुम्हारे.. बाबू के बच्चे मुझे तुम्हारे इरादे कुछ ठीक नज़र नहीं आ रहे हैं

मई अम्मी जान के होंटो को चुम गया.. अम्मी जान ने एक आंख टेढ़ी करके मुझे घूरा. फिर मुस्कुरा पड़ी

मैं -- क्या मुझे मेरे इरादे नेक बना लेने चाहिए

अम्मी जान -- और नहीं तो क्या.. बुरे इरादे भी कोई अच्छी चीज़ होते हैं.. तुम इतने प्यारे हो.. अनमोल प्यार के मालिक हो तुम.. तुम्हारे इरादों में पाकीज़गी होनी चाहिए

मैं -- जी ज़रूर अम्मी जान.. क्या आप मुझे बताइयेगी. थोड़ी सी पाकीज़गी तर्क कर देने से बहुत से फायदा और ढेर सारा सुकून मिलने लगता है

अम्मी जान होंठ भींच कर हसी को दबा गयी..

अम्मी जान -- उम्म्म.. ढेर सरे फायदे और ढेर सारा सुकून.. बाबू के बच्चे ये फायदे और सारा सुकून. तुम्हारे hi लिए है. मेरे लिए क्या.. और मुझे भला क्या पड़ी है. तुम्हारे फायदा और सुकून के लिए मैं अपनी नींद हराम करूँ

मैं -- वह अम्मी जान... आप भी न... आप ने मुझे लत लगाई. आप ने मुझे आवारा से बदल कर अनमोल प्यार करने वाला बनाया.. अब आप hi मुझसे ऐसी बातें कर रही हैं

अम्मी जान खिलखिला कर है पड़ी.. मेरे सीने पर एक हाथ की उँगलियाँ फेरती हुई बोली

अम्मी जान -- वैसे तो हमारे पास करने को बहुत सी बातें हैं. लेकिन बाबू टाइम की कमी हो जाया करती है थिस टाइम. इसलिए शाबाश.. फार फार आज के दिन की साड़ी रोइडाड़ सुननी शुरू कर दो. एक भी बात, एक भी लम्हा, एक भी वर्ड मिस मत करना.. मुझे सब का सब कुछ डिटेल में जानना है. लेकिन उससे पहले.. ज़रा तुम उठो अपनी जगह से

अम्मी जान खुद भी कड़ी हो गई. अम्मी जान की बेचैनी का अंदाज़ा भी था और अहसास भी.. फिर भी अम्मी जान मेरी दिन भर रसलीएल सुन्ना छह रही थी. मेरे अंदर अभी से आग लगने लगी थी. ठंडी मीठी सुरूर भरी हवाएं चलने लगी थी.

अम्मी जान बीएड के साथ टेक लगा कर बेथ गई. अपनी टांगें अम्मी जान ने खोल कर फेल दी थी

अम्मी जान -- बाबू.. अब मेरी गॉड में टांगों के बीच बेथ जाओ. मोह मेरे पैरों की तरफ कर लो

मैं है पड़ा -- अम्मी जान.. लगता है आप आज दिन में कुछ ज़यादा hi सो ली थी. दिन में hi बुरा सपना भी देख लिए आप ने..

अम्मी जान हसने लगी -- ऐसा नहीं है बाबू.. लेकिन तुम ऐसे बोल क्यों रहे हो. मतलब क्या बना तुम्हारी इस बात का

मैं अम्मी जान की टांगों के जोड़ पर, जहाँ अम्मी जान की फुद्दी इनविजिबल थी, वहां देखता हुआ बोलै

मैं -- अम्मी जान. जैसे आप टेक लगाए बैठी हैं. और मुझे बैठने को कह रही हैं. ये सब मुझे करना और कहना चाहिए था. लेकिन उलट हुआ. आप माशूक़ बनकर मुझे, अपने जवान मर्द बेटे को माशूका बना गई हैं

और अम्मी जान दोहरी हुई मोह पर हाथ रख कर खिलखिला कर हसने लगी

अम्मी जान -- हेहेहे.. हाहाहा. बाबू. तुम भी ना. हहै.. तुम्हारी ये बात. हहै

अम्मी जान से बोलै नहीं गया. वो हस्ती रही.

फिर मई अम्मी जान की गॉड में बेथ गया. मेरी गांड अम्मी जान की फुद्दी के साथ जुड़ गई. अम्मी जान की दाहक रही फुद्दी की तपिश से मेरी गांड जलने लगी. लेकिन मैं सुकून से बेथ गया था.

इस वक़्त में बिना अंडरवियर के ट्रॉउज़र और t-shirt में था.

अम्मी जान सीढ़ी हुई. अपनी दोनों पहले टाँगें उठा कर मेरी रनों के जोड़ यानि के मेरे लुंड के करीब रख ली. अम्मी जान की एड़ियां मेरे लुंड के पास थी. अम्मी जान के पैरों की उँगलियाँ मेरे घंटो के पास थी.

अम्मी खुद भी मेरे सीने पर दोनों हाथ रख कर मेरी पीठ अपने मुम्मों के साथ लगा गई

और मैंने अब धयान दिए.. अम्मी जान ने ब्रा और पंतय दोनों नहीं पहन राखी थी. उफ्फ्फ अम्मी जान.. अम्मी जान पूरी तरह से कील कांटे से लेस मेरे पास आई थी

मई सर मोड़ कर हैरत और ख़ुशी के मिले जुले तासरत के साथ अम्मी जान को देखने लगा

और अम्मी जान आँखों से मुस्कुराती हुई मेरे गाल पर दांत गाढ़ गयी. मई कराह उठा. अम्मी जान हस्ती हुई अपने दन्त मेरे गाल से अलग कर गई

अम्मी जान हस्ती हुई hi बोली -- कुछ उल्टा सीधा बोलना मत.. समझे तुम बाबू..

अम्मी जान मुझे लिए पीछे टेक लगा गई. मैं भी अम्मी जान के मुम्मों के साथ जुड़ा हुआ आधा लेट गया था. मेरी टाँगें लम्बी पड़ी थी. अम्मी जान की टाँगें फोल्ड थी. एड़ियां मेरे लुंड को अब टच होने लगी थी

फिर अम्मी जान ने अपने पैरों की दोनों एड़ियों से मेरे लुंड को टटोला और फिर मेरे लुंड को अपनी एड़ियों से कस्सति हुई मेरे गाल को चुम कर बोली

अम्मी जान -- चल अब शुरू हो जा.. कोई इंटरवल नहीं होगा. कोई रेस्ट शिस्त नहीं होगी. टाइम काम है. और बातें ढेर साडी. इसलिए शाही वज़ीर की तरह मुझे मलका समझते हुए सब कुछ फार फार बताना शुरू कर दो.

अम्मी जान के दोनों हाथ मेरी शर्ट में घुस कर मेरे सीने पर चल रहे थे

मैं -- आप कहें तो मैं अपनी शर्ट उतार डॉन

अम्मी जान - इतना भी मत उछाल बाबू... नहीं तो इतने से भी जाएगा

मई जल्दी से बोलै -- नहीं नहीं.. ऐसे hi ठीक है. ज़यादा के चक्कर में मई इतने से भी नहीं जाना चाहता

और अम्मी जान पूरा मोह खोल कर हसने लगी

मई अम्मी जान को सराह भाभी के साथ हुई बातें बताने लगा. फिर किन्ज़ा एपीआई का शिरट्लेस्स ऊपरी जिस्म देखना, किन्ज़ा एपीआई के साथ मस्ती, उनके साथ हुई बाटने, मैंने सब अम्मी जान को बता दी

अम्मी जान पुरे मज़े से मेरी बातें सुन रही थी.

अम्मी जान -- उफ्फफ्फ्फ़ बाबू.. तुम्हारी लाइफ तो एकदम मस्त चल रही है

मैं -- जी अम्मी जान. ये सब आप सब के अनमोल प्यार की बदौलत है

अम्मी जान -- डायलाग नहीं लड़के.. कहानी सुनाओ.. फिर किस्से मिले तुम.. ज़रूर माहिरा से मिले होंगे. उसके साथ ज़रूर कुछ तो किआ है तुमने. मैंने माहिरा के चमकते चेहरे को देखा है

अम्मी जान मेरे गाल पर एक हाथ रख कर मुझे अपनी तरफ घुमा गई थी

मैं अम्मी जान के गाल पर किश करता हाउ बोलै -- आप क्वीन हो अम्मी जान. आप मलका हो. कुछ भी आप की निगाहों से छुप नहीं सकता है

अम्मी जान -- सही कहा तुमने बाबू.. माँ की हर पल नज़र खास बेटियों के चेहरों पर बदलते रंगों पर होती है. मैं बहुत पहले hi कुछ कुछ जान गई थी. फिर समझने लगी. बाद में बहुत कुछ और जान्ने और समझने को मिला.. तभी बन पाया है हमारा प्यार अनमोल. तो बताओ माहिरा के साथ क्या किआ तुमने.. मस्ती काम की कह ज़यादा.. कहीं माहिरा को बुरा तो नहीं लगा.. नहीं लगा होगा. वो तो बड़ी खुश और फ्रेश फ्रेश दिखाई दे रही थी. कैसे हर एक से चहक चहक कर बातें कर रही थी. मुझे सब डिटेल में जानना है बाबू

अब तक मेरा लुंड फुल हार्ड हो चूका था. एक तो अम्मी जान अपनी एड़ियों से मेरे लुंड को मसल भी रही थी और रगड़ भी रही थी. ऊपर से किन्ज़ा एपीआई के साथ हुई मस्ती की याद, फिर बातों ने मेरे लुंड में आग लगा दी थी

अब माहिरा एपीआई की कहानी अम्मी जान मेरी ज़ुबानी सुन्ना चाहती थी. और ये बड़ा रिक्सी मरहला था. मई जोश में पागल हो सकता था. अम्मी जान कैसे मेरे मोह से ये सब सुन सकती थी. एक बीटा था और दूसरी बेटी. दोनों जवान थे. बेटी कुंवारी भी थी और शर्म वाली भी. जिसकी शादी होनी थी. और फुद्दी की सील ब्रेक हो जाने के बाद शादी कहते में पद सकती थी

लेकिन यहाँ ऐसी हर परेशानी से दूर रहते हुए सब लाइफ के मज़े लूटने में लगे हुए थे.

मैं अम्मी जान को माहिरा एपीआई के कमरे में घुसने के बाद की कहानी डिटेल के साथ सुनाने लगा

लफ़्ज़ों का इस्तेमाल मैं सोच समझ कर और अम्मी जान के अहतराम को मद्दे नज़र रखते हुए कर रहा था. मैं जान माहिरा एपीआई को पूरा नंगा करने के बाद माहिरा एपीआई के मुम्मों पर होंठ रखने वाली बात तक पोहंचा तो अम्मी जान सिसकारी ले गई

साथ hi अम्मी जान मेरे सीने पर दबाओ बढ़ा कर अपने मुम्मों के साथ मुझे कस्सणे लगी. अम्मी जान के मुम्मे पूरी तरह से कड़क हो चुके थे. अम्मी जान की फुद्दी की हीट में अब गीलापन भी फील होने लगा था

मेरे लुंड पर अम्मी जान की एड़ियों की कसावट खतरनाक हद तक बढ़ने लगी. मेरे लुंड का कहीं काचूरमार hi न निकल जाए.

अम्मी जान हॉर्नी हो चुकी थी. अभी तो बहुत सी कहानी माहिरा एपीआई की और मेरी बाकि थी. अभी से hi अम्मी जान की हालत ग़ैर होने लगी थी. अभी से hi अम्मी जान अपने जिस्म के अंदर भड़कती आग को संभल नहीं पा रही थी.

बाद में तो वह पगला hi जाती. मुझपर टूट hi पड़ती. नजाने आज की रात अम्मी जान के साथ क्या होने वाला था. नजाने आज की रात मेरे नसीब में कैसी लिख दी गई थी

मई और अम्मी जान दोनों अनजान थे. लेकिन माहिरा एपीआई की कहानी भी काम मज़ेदार नहीं थी.

अम्मी जान जज़्बात से कनपटी हुई आवाज़ में बोली - फिर... फिर क्या हुआ बाबू..

अम्मी जान की नक् और मोह से आग hi आग निकल कर मेरी गर्दन को गरमा रही थी.
 
खबरदार.... होशियार....

अब की बार आने वाली अपडेट इस स्टोरी की सबसे खतरनाक अपडेट होने जा रही है.

पहले से बता दूँ. लुंड वाले लुंड पर रबर चढ़ा कर मणि को रोकने का इंतेज़ाम कर लें. दिल करे तो लुंड के सुराख़ में ेल्फी दाल कर मणि के निकलने का रास्ता hi ब्लॉक कर दें.

और फुद्दी वालियां पहले से अपनी फुद्दी को लॉक लगा लें. खीरा, केला या उँगलियाँ खतरनाकि को बढ़ा सकती हैं. होश गम हो सकते हैं. इसलिए अभी से ख़बरदार कर दूँ. कुछ कर लीजिये अपने लिए.. लुंड से निकलने वाली मणि और फुद्दी से निकलने वाला रास बहुत कीमती होते हैं.. इसे सम्भालिये.. इसका धयान रखिये..

हो सका तो अपडेट आज hi रात 12ऍम से पहले पोस्ट कर दूँ. नहीं तो कल फर्स्ट टाइम टिल 9ऍम तक ज़रूर पोस्ट हो जायेगी.
 


उन्तीसवीं क़िस्त


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मैं अम्मी जान को गॉड में बैठा था. मेरी गांड अम्मी जान की फुद्दी की आग से जलने लगी थी. मेरा लुंड फुल हार्ड हो चूका था. अम्मी जान अपने पैरों की एड़ियों से मेरे लुंड को दबा भी रही थी और रगड़ भी रही थी. अब मेरा लुंड लम्बा नहीं था. अब मेरा लुंड उठा हुआ था.

मैंने अम्मी जान को बताया मेरे होंठ माहिरा एपीआई के मुम्मों पर आये.

अम्मी जान इतना hi सुन पाई थी. अम्मी जान की फुद्दी में धीरे धीरे बढ़ती आग एक hi पल में हदों को पार निकलने लगी. अम्मी जान ने मेरे लुंड को अपने पैरों के तलवों के साथ मिला कर कस लिए. इधर मेरे सीने पर दोनों हाथ रखे मुझे अपने मुम्मों के साथ कस्सति चली गई थी.

नीचे से अम्मी जान की फुद्दी.. उफ्फ्फ अम्मी जान का बास नहीं चल रहा था. अम्मी जान अपनी फुद्दी hi काट कर मेरे लुंड पर राखी. फिर हाथ से दबा कर अपनी फुद्दी को मेरे लुंड में पारो दें. जैसे फूलों वाली माला की डोरी में फूल परोया जाता है..

ये मेरा ख्याल था.. बास लम्हों के नशे और मस्ती सुरूर ने मुझे ख्याल सुझाया था.. अम्मी जान की सांस बहुत गर्म और भरी होकर मेरी गर्दन को झूलजाने लगी थी

अम्मी जान सेक्सी, नशीली और लज़्ज़त में डूबी आवाज़ में बोली -- आगे बता न बाबू

अम्मी जान मेरे लुंड की दोनों पैरों से मुठी लगाने लगी. अब मेरे लिए खुद को संभालना और भी मुश्किल होने लगा था.

मैं ---- अम्मी जान.. आप कहें तो मैं अपने केले का छिलका उतार दूँ.

अम्मी जान अनारी नहीं थी. मेरी डबल मीनिंग बात को समझ गई

अम्मी जान की सांस कुछ और भरी हुई. लज़्ज़त और नशा कुछ बढ़ा. फुद्दी की आग और बढ़ी. मुम्मे खतरनाक हद तक फूल गए

अम्मी जान कुछ लम्हे चुप रही.. फिर अम्मी जान मेरी बात का जवाब न देते हुए एक और hi काम कर गयी. अम्मी जान ने एक पेअर मेरे लुंड से हटा कर मेरे ट्रॉउज़र में घुसना शुरू कर दिए

डोरी लगी हुई थी

मैं ---- अम्मी जान.. केला पॉलिथीन के अंदर बंद है. आप इजाज़त दें तो मैं पॉलिथीन बैग खोल दूँ.

अम्मी जान ने कुछ नहीं कहा. बास मेरी ट्रॉउज़र की डोरी पर हाथ रख गई. खुद से hi सब कुछ किये जा रही थी.

अम्मी जान डोरी पकड़ कर खोलती.. मैं बोल पड़ा -- ठहरिये अम्मी जान..

अम्मी जान का हाथ रुक गया. अम्मी जान की गर्म साँसे अब मेरे गाल को गरमा रही थी. रुक कर भी वह कुछ नहीं बोली. बेटे के ट्रॉउज़र की डोरी खोलने जा रही थी

हाथ डोरी पर रखा रह गया. अम्मी जान के हाथ मेरे लुंड और अम्मी जान की फुद्दी से भी ज़यादा गर्म हो चुके थे.

मैं ----- अम्मी जान मुझे आप को माहिरा एपीआई के साथ बिताये लम्हे स्पेशल स्टाइल में बताने का मैं हो रहा है.. मुझे किचन में जाना पड़ेगा अम्मी जान

मई इतना बोलै था. अम्मी जान "हम्म्म" के इशारे से मुझे इजाज़त दे गई. मैं अम्मी जान का अपने ट्रॉउज़र की डोरी पर रखा हाथ हटा गया. फिर अम्मी जान के दोनों पेअर पकड़ कर अपने लुंड पर रगड़ता हुआ साइड हटा गया

ऐसा मैंने अम्मी जान की इजाज़त के बिना किया था

मैं ---- अम्मी जान आप को मेरा ऐसा करना गुस्ताखी तो नहीं लगा

अम्मी जान और hi दुन्या में पोहंची हुई थी. बोली -- नहीं

मैं अम्मी जान के घुटनो पर हाथ रख ऊपर हाथ लेजाने लगा. अगर मेरा ऐसा करना गलत होता तो अम्मी जान ज़रूर मुझे रोक देती. इसलिए मैं अपने हाथ धीरे धीरे ऊपर करता चला गया. अम्मी जान वाज़ेह तौर पर कैंप उठी थी. लेकिन शायद वह भी देखना चाहती थी. मई करना क्या चाहता हों. किस हद तक उनकी इजाज़त के बिना जाता हों

मेरे हाथ अम्मी जान की रेशमी शलवार पर फिसलते हुए अम्मी जान की राणो पर चलते हुए ऊपर फुद्दी के करीब पोहंच कर थम गए

मैं ---- अम्मी जान यहाँ से आगे आप की सल्तनत के सबसे बेष कीमत ख़ज़ानों से भरी दूकान है. यहाँ के ख़ज़ानों की चमक दमक मई बिना आप की इजाज़त के देखना तो चाहता हों. लेकिन आप का दिल नहीं दुख सकता. ये दूकान ख़ज़ानों और जहरात से भी नहीं भरी हुई है अम्मी जान.. मेरी नज़र आप का जिस्म एक गुलदस्ता है. और यहाँ जहाँ मेरे हाथ हैं. यहाँ आप के जिस्मी गुलदस्ता का सबसे हसीं और महकता हुआ फूल मौजूद है. अम्मी जान आप के इस फूल की खुशबु पाना की इजाज़त मुझे हमेशा डरकर रहेगी.. कैसी अजीब बात है अम्मी जान.. मैं आप के इसी गुलदस्ते का एक फूल भी हों और इसी दूकान का बरसों पुराण मालिक भी. शायद मैं मालिक लफ्ज़ गलत कह गया अम्मी जान.. मालिक तो पापा हैं. लेकिन मैं भी खुद को आप की दूकान, आप के हसीं गुलदस्ते का मालिक समझता हों अम्मी जान.. 9 महीने इसी दूकान से गुज़रते रास्ते में मेरा ठिकाना रहा है. जब मैं इस दुन्या में आया तो इसी दूकान का गेट मेरे लिए खुल गया था. लेकिन फिर यही गेट मेरे लिए बंद कर दिए गया. बड़े दुःख की बात है.. लेकिन उससे भी कहीं ज़यादा ख़ुशी की बात है. आज नहीं तो कल ये दूकान, इस दूकान का गेट मेरे लिए हमेशा के लिए खुलने वाला है. और आप चुनकेह अपनी सल्तनत की महारानी भी हैं और क्वीन भी. कुछ भी आप की इजाज़त के बिना नहीं होगा अम्मी जान.. पर आप खुद hi मुझे अपनी सल्तनत का राजा डिक्लेअर कर चुकी हैं. इसलिए चाहूंगा.. जिस कदर जल्द मुमकिन हो सके. मुझे मेरी दूकान का मालिक बना कर मुझे पूरी तरह से महाराजा भी डिक्लेअर कर दें..

मेरे वर्ड्स ऐसे नहीं थे. अम्मी जान खुद को संभाल सकती. अम्मी जान की साँसे अम्मी जान के काबू से बहार होने लगी. मैंने खुल कर अम्मी जान से उनकी फुद्दी अपने लुंड के लिए मांग ली थी.

मई अम्मी जान की दोनों राणो पर फिरसे दोनों हाथ फेरता हुआ अम्मी जान की टांगों को खोल कर उठ खड़ा हुआ. मेरा लुंड ट्रॉउज़र को पहाड़ देने के लिए मचलता नज़र आने लगा

मैं बीएड पर खड़ा मुद कर अम्मी जान को देखने लगा. अम्मी जान मुझे hi देख रही थी. अम्मी जान के चेहरे पर शर्म के गहरे बादल छाये हुए थे. लेकिन अम्मी जान खुद को महारानी साबित करती हुई मुझसे नज़रें नहीं चुरा गई. अम्मी जान पुरे ऐतमाद और हक़ के साथ मेरी आँखों में देखे जा रही थी

अम्मी जान की आँखों में क्या कुछ नहीं था.. uffffffffff.. अम्मी जान का तौललक रियल वर्ल्ड से रहा hi नहीं था. मेरे मोह से मेरी कहानी सुनकर, अपने लिए मेरे वर्ड्स और खवाहिश को खुले आम सुनकर अम्मी जान प्रेजेंट वर्ल्ड में रह नहीं पाई थी.

अम्मी जान की आँखों में तेज़ नशा दिखाई दे रहा था. जैसे अम्मी जान कड़ी हों. और फ़ौरन hi लड़खड़ा कर गिर पड़ें..

1 मिनट से भी ज़यादा टाइम तक बिना पलकें झपकाए हम दोनों अम्मी बीटा एक दूसरे की आँखों में देखते रहे

फिर मैं झुका और अम्मी जान के होंटो पर अपने होंठ रख चुम गया

मई हड़बड़ा गया था. अम्मी जान के होंठ अंगारा बन चुके थे. मेरे होंठ जल गए.. अम्मी जान ने मेरी निगाह से निगाह नहीं हटाई

मैं समझ गया. आज अम्मी जान का मेरे लिए प्यार हमेशा से हज़ारों लाखों गुना बढ़ गया है

मई बीएड से उतरा और बिना चप्पल पहने दूर के पास पोहंच गया. वहां मुद कर अम्मी जान को देखा.. वह मुझे hi देखती जा रही थी

अम्मी जान की ऐसी हालत देख कर मेरे अंदर एक और hi रूप ने जनम लेना शुरू किआ

मैं अम्मी जान को देखता हुआ वहीँ दूर के पास खड़ा होकर अपने हाथ की एक हथेली को चुम कर अम्मी जान को देख कर फ़्रीलिंग किश करने लगा

और अम्मी जान की सांस और भी ज़यादा भारी हो गई. अम्मी जान ने ज़िन्दगी में पहले कभी भी ऐसा आशिक़ाना रंग नहीं देखा था. अम्मी जान को ये सब कुछ ज़यादा hi बहाने लगा था. अम्मी जान के जिस्म और दिल की दुन्या hi बदलती जा रही थी

मैं समझ गया. मैं और देर न करता हुआ दूर खोल कर बहार निकल गया. मैं जानता था. इस टाइम कोई मुझे नहीं मिलेगा.. इसलिए मई अपने लुंड की परवा न करते हुए किचन तक जा पोहंचा... वहीँ खड़े होकर एक एप्पल को काट कर फुद्दी की शेप बनाई... फिर दोनों एप्पल लिए मैं वापिस चल पड़ा

अपने कमरे का दूर खोल कर जो मैंने अम्मी जान को देखा.. पता चला अम्मी जान दूर को देखती हुई कहीं खोई हुई थी.. मैंने स्माइल करि. पर अम्मी जान ने कोई रियेक्ट नहीं किआ

मैं दूर अंदर से लॉक करता हुआ अम्मी जान के पास बीएड पर जा पोहंचा.. अम्मी जान इस बार मुझे देखने लगी. खोया पत्र गया नहीं था..

मैं अम्मी जान की टाँगें पकड़ कर पहले की तरह खोलता हुआ अम्मी जान की फुद्दी के साथ अपनी गांड पहले से ज़यादा जोड़ता हुआ बेथ गया.. अम्मी जान की दोनों टाँगें पकड़ कर पहले की तरह अपने टांगों के जोड़ पर राखी. फिर अम्मी जान के दोनों पैरों के तलवों को अपने लुंड के साथ लगा कर रगड़ दिए.. सुरूर की इन्तहा में पहले भी था.. लेकिन खुद से करने से सुरूर की इन्तेहाओं में इज़ाफ़ा होने लगा

लुंड पहले hi फटने वाला हुआ जा रहा था. अब और भी हालत ख़राब होने लगी मेरे लुंड की

मैं कुछ पल ऐसे hi अम्मी जान की टाँगें पकड़ कर अपने लुंड के साथ दोनों तलवे लगाए बैठा रहा

फिर अम्मी जान ने मुझे मेरे कन्धों से पकड़ कर मेरी पीठ अपने कड़क और फूल कर फटने वाले हो चुके मुम्मों के साथ लगा गई. अम्मी जान ने ज़ोर की लम्बी सांस अपने सीने में खेंचि.. अम्मी जान के मुम्मे और भी ज़यादा फूल गए.. अम्मी जान बिना पंतय और ब्रा के थी.. अम्मी जान के दोनों निप्पल्स सख्त होकर अंगारे बन चुके थे.

मुझे ऐसा लगा.. जैसे मेरी पीठ में किसी ने दो बैर चिपका दिए हों

मई अम्मी जान के दोनों पैरों के तलवे ज़ोर से अपने लुंड के साथ दबा गया.. सुरूर hi सुरूर था. नशा hi नशा था. शुक्र है इतने सुरूर और नशे से मैं पागल नहीं हो गया था.. वर्ण आज कोई कसार बाकि नहीं बची थी.

फिर अम्मी जान ने मेरे दोनों हाथ पकड़ कर अपनी टांगों से हटा दिए.. अम्मी जान ने मेरे ट्रॉउज़र की डोरी पकड़ कर खोली.. ट्रॉउज़र को ढीला किया.. फिर एक टांग मेरे ट्रॉउज़र के अंदर घुसाई.. फिर दूसरी घुसाई

अब अम्मी जान के नंगे पेअर मेरे नंगे लुंड से टच हो रहे थे.. अब मई अपने सुरूर की कोई हद बयां नहीं कर सकता. लफ्ज़ hi ख़तम हो गए थे मेरे पास.. जैसे अम्मी जान के पास आज लफ़्ज़ों का खज़ाना ख़तम हो गया था. बॉडी लैंग्वेज का hi इस्तेमाल कर रही थी.. और क्या hi कमल का इज़हार था अम्मी जान के बदन की जुबां का

अब अम्मी जान के दोनों पेअर मेरे नंगे लुंड पर थे.. अम्मी जान दोनों तलवों से मेरे कड़क लुंड की मुठी लगाती हुई नशीले लहजे में मुझसे बोली

अम्मी जान -- ये दो एप्पल तुम किस लिए लाये हो बाबू

बहुत देर के बाद अम्मी जान के मोह से ये 9 वर्ड्स निकले थे.. मैंने फुद्दी शेप वाले एप्पल को उठाया और अम्मी जान की आँखों के सामने कर दिए

अम्मी जान मेरे लुंड को अपने पैरों के तलवों से रगड़ रही थी. अपने मुम्मे मेरी पीठ पर रगड़ रही थी.. अम्मी जान की फुद्दी और गांड अब धीरे धीरे हिलने लगी थी.

लेकिन एप्पल फुद्दी अम्मी जान की आँखों के सामने आई.. तो अम्मी जान का पूरा वजूद hi जैसे परलीज़े हो गया.. अम्मी जान की सांस तक थम गई. मैंने मुद कर अम्मी जान को देखा.. पता चला अम्मी जान का पूरा मोह hi खुल गया था..

हैरानी से फुद्दी एप्पल को देखती जा रही थी.. मैं अम्मी जान की फुद्दी तो नहीं देख सका था.. लेकिन एप्पल फुद्दी पर बने एक लैब पर मैंने जुबां फेर दी

और अम्मी जान की आँखों में नशे और शर्म का रंग गहरा हो गया..

मैं ---- अम्मी जान अब आप अच्छे से जान सकेंगी. मैंने और माहिरा एपीआई ने कैसे मज़े किये और लिए थे.

अम्मी जान अपने सूखते जा रहे होंटो पर जुबां फेरने लगी..

मैं फुद्दी एप्पल रख कर दूसरा साफ़ और बिना कटा एप्पल उठा गया..

मैं एप्पल अम्मी जान की आँखों के सामने करता हुआ अपने होंठ एप्पल पर रख गया

मैं -- अम्मी जान.. आप ने अपने पैरों को क्यों रोक लिया.. आप वही सब करें न. जो आप कर रही थी. मुझे ाचा लग रहा था

अम्मी जान खोये लहजे में बोली ---- जो हो रहा है. उससे ाचा तो कुछ भी पूरी दुन्या में नहीं है बाबू... मई सब करुँगी. तुम बास मुझे माहिरा के साथ क्या और सब कैसे किया.. डिटेल में बताओ.. और हाँ.. मुझे ये एप्पल वाला आईडिया बहुत पसंद आया..

अम्मी जान कुछ कुछ होश में थी.. वर्ण मैं तो समझ रहा था.. अम्मी जान टोटली होश खो बैठी हैं

कोई नहीं... अब के वह खुद को संभाल नहीं पाएंगी.. मैं ऐसा hi चक्कर चलने वाला था.. अम्मी जान के आज होश न उदा दिए तो मेरा नाम भी फिरोज खान नहीं..

नोट..... डिअर रीडर्स ये सन कुछ ज़यादा hi लेंथी होने वाला है. इसलिए इस अपडेट में सब लिखा नहीं जा सकता.. अधूरा रह जाने की सूरत में आप सभी बेक़रार हो जाएंगे. किसी को गुसा भी आ सकता है.. इसलिए मैंने आज के अपडेट को यही रोक दिए है.. नेक्स्ट अपडेट लेंथी लिखूंगा.. और पूरा सन लिख कर पोस्ट करूँगा.. क्यों कह आगे जो मैं लिखने वाला हों. वह लिखनी अब तक की स्टोरी की सबसे बेस्ट राइटिंग होगी. मैं अपने हिसाब से इस सन और पूरी स्टोरी में पूरी पूरी जान दाल देना चाहता हों. इसलिए आज के अपडेट को इतना hi ग़नीमत समझिये.. और मज़ा लीजिये..

और हाँ.. मैं व्यूज देख कर समझ सकता हों. मेरे थ्रेड पर रीडर्स की तादाद हिरणकूं तौर पर बहुत कमाल की है. मुझे लाइक्स का लालच तो नहीं है.. लेकिन मुझे आज देखना है. मेरे थ्रेड को कितने रीडर्स पुरे दिल से एन्जॉय कर रहे हैं...

अपडेट को लिखे कीजिये.. दिल खोल कर कीजिये.. फ़क़त मेरा जानने का इरादा है. कितने रीडर्स मेरे उपदटेस का वेट कर रहे हैं.. कितने रीडर्स उपदटेस लेट होने/ कहानी अधूरी रह जाने पर दुःख, ग़ुस्सा, रंज का शिकार हो जाएंगे. और मैं किसी भी रीडर का दिल नहीं दुखाना चाहता. इसलिए चाहता हों. आप सब मुझे प्यार के बंधन में कुछ ऐसे बांधिए.. मैं छह कर भी आप सब से दूर न हो सकूँ..

गॉड ब्लेस्स यू आल
 
तीसवीं क़िस्त

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सच में hi मैंने अम्मी जान के होश उड़े दिए थे. एक तो अम्मी जान लाइफ में पहली बार मेरे ट्रॉउज़र में नंगे पेअर दाल कर मेरे नंगे खड़े लुंड को अपने पैरों से दबाये हुए थी. ऊपर से अम्मी जान की फुद्दी मेरी गांड से लगी थी. उनके मुम्मे मेरी पीठ पर दबे हुए थे. कैसे अम्मी जान खुद को संभल सकती थी

सब के खास बात मेरे हाथ में दो एप्पल थे. एक एप्पल पर फुद्दी बानी हुई थी. फुद्दी वाला एप्पल मई साइड रख पूरा एप्पल उठा कर उसपर होंठ रख अम्मी जान को बताने लगा. कैसे मैंने माहिरा एपीआई के नंगे मुम्मों पर होंठ रख थे. मैं फुल डिटेल के साथ अम्मी जान को बताये जा रहे थे. जैसे नशे और अनमोल प्यार में डूब कर मैंने माहिरा एपीआई के मुम्मों पर मदहोश अंदाज़ में अपने तपते हुए होंठ रखे थे. ऐसे hi एप्पल पर रखे तो अम्मी जान सिसक पड़ी. मेरे लुंड को पैरों के तलवों से कस कस के रगड़ने लगी थी.

अपने मुम्मे मेरी पीठ पर रगड़ रही थी. अपनी फुद्दी रगड़ रही थी

फिर मैंने फुद्दी एप्पल उठा लिया.. एक फुद्दी एप्पल के साइड के लिप की साइड पर ऊँगली फेरता हुआ बोलै था

मई -- अम्मी जान इस एप्पल का इस लिप को देखिये. कितना हसीं और नरम है. कितनी मस्त खुशबु आ रही है. ऐसे hi माहिरा एपीआई के ऐसे लिप्स से महकती खुस्भु आ रही थी. मैंने बड़े प्यार से एक ऊँगली रख कर लिप को साइड खेंचा था. फिर एक साइड के लिप के अंदर ऊँगली फेरने लगा था.

मई ऐसे hi अम्मी जान को पूरी फुद्दी पर उँगलियाँ और जुबां होंठ फेर फेर कर बताने लगी. अम्मी जान की हालत ख़राब से ख़राब तर होने लगी. फिर फुद्दी एप्पल के बीच में बने छोटे से सुराख़ पर जुबां की नोक रख मैं चाटने लगा

और अम्मी जान ने मेरे सीने पर हाथ रख कर मुझे ज़ोर से अपने सीने के साथ भींच लिए. अम्मी जान की साँसे बेपनाह गर्म हो चुकी थी. कुछ भी अम्मी जान की नक् के आगे रख दिए जाता. पल भर में भून कर रह जाता. ऐसी hi अम्मी जान अंदर बहार से गरम हो चुकी थी.

मैं फुद्दी एप्पल को लिखे फुद्दी चूमता चाट ता चला गया. और लग hi नहीं रहा था. मई एप्पल को चुम और चूस रहा हों या माहिरा एपीआई की फुद्दी को

अम्मी जान को सब कुछ लाइव दिखाई दे रहा था. फिर अम्मी जान खुद पर काबू भूल गई.

खुद लेट कर मुझे अपने ऊपर लिटा गई. अम्मी जान ऐसे झाड़ नहीं प् रही थी.

कई दिनों तक सहरा में भटकने वाले इंसान को नखलिस्तान दिखाई दे तो वह पागलों की तरह दौड़ पड़ता है. फिर वहां जहाँ पानी दिख जाए उसे. पागलों की तरह होश से बेगानों की तरह पानी पर झपट पड़ता है

अम्मी जान की हालत भी कुछ ऐसी hi होने लगी थी. मुझे अंदाज़ा नहीं था. अम्मी जान ऐसे भी खुद के कण्ट्रोल से बहार हो सकती हैं. अम्मी जान ने मुझे अपने ऊपर लिटा कर दोनों टाँगें मेरे ऊपर लपेट पर मुझे पुरे जोश के साथ किश करनी शुरू कर दी. मेरा खड़ा लुंड अम्मी जान की फुद्दी पर लगा दबता hi जा रहा था. और अम्मी जान मेरे लुंड को अपने पैरों के दबाओ से दबती hi चली जा रही थी. शलवार के ऊपर से कैसे, ट्रॉउज़र के अंदर कैद लुंड भी कैसे अम्मी जान की फुद्दी में दखल हो सकता था. लेकिन अम्मी जान ऐसे hi कर रही थी. जैसे दोनों नीचे से फुल नंगे हों. और मेरा लुंड अब अम्मी जान की फुद्दी में घुसने hi वाला हो

पुरे जोश के साथ मुझे किश करती अम्मी जान मेरे लुंड को अपनी फुद्दी में उतार लेना चाहती थी

लेकिन आज सच में अम्मी जान मेरी माहिरा एपीआई के साथ मज़े को सुनकर खुद के काबू से बहार हो गई थी. अम्मी जान या मुझे अंदाज़ा तक नहीं था, ऐसे किसी के साथ मस्ती मज़े की दास्ताँ पर कोई ऐसे भी काबू से बहार हो सकता है

अम्मी जान भी काबू से बहार हो चुकी थी. किश तोड़ कर अम्मी जान नशे से चूर दहकती हुई आँखों और गर्म तेज़ चलती साँसों के साथ मुझे देखने लगी.

अजीब नशा था अम्मी जान की आँखों में

फिर अम्मी जान ने अपनी टाँगें मेरी गांड पर से हटा ली

अम्मी जान ने दोनों हथु से मेरे ट्रॉउज़र को पकड़ा और नीचे करने लगी. मैं हैरान रह गया

अम्मी जान लगी रही. मैं भी समझता हुआ अपना ट्रॉउज़र नीचे कर गया

फिर अम्मी जान मुझे किश करने लगी. इस बार मेरा नंगा लुंड अम्मी जान की शलवार में बंद फुद्दी पर था. मेरा लुंड अब आज़ाद था. मैं अपने लुंड को अम्मी जान की गीली शलवार वाली गीली फुद्दी पर रगड़ने लगा. किश का मज़ा लेने लगा.

मई भी बहुत आगे बढ़ चूका था. लग रहा था, जैसे अम्मी जान के जोश के आगे जल्द hi मैं भी हिम्मत हार जाऊंगा. वैसे भी बहुत देर अम्मी जान के पैरों के तलवों से लगती मुठी ने भी मेरे लुंड कोई वाट लगा दी थी

अब कैसे मैं खुद को संभल सकता था

अम्मी जान की गीली शलवार वाली गीली फुद्दी भी मेरे लुंड को और मुझे खूब मज़ा दे रही थी

लेकिन आज अम्मी जान सच में पागल हो गई थी. फिरसे किश तोड़ कर अपनी गांड ऊपर उठाने लगी. अम्मी जान के दोनों हाथ नीचे उनकी शलवार पर आये. अम्मी जान अब इलास्टिक वाली शलवार पहना करती थी.

और मैं अम्मी जान की मंशा जान कर दांग रह गया. अम्मी जान अपनी शलवार नीचे करना छह रही थी.

अम्मी जान मेरी आँखों में देखती हुई गर्म साँसे छोड़ती हुई शलवार पकड़ कर नीचे करने लगी. लेकिन कर नहीं प् रही थी. मई उनके ऊपर जो था

मेरी तो लाटरी निकल पड़ी थी. जैसे अम्मी जान मेरे साथ कर रही थी. मई समझ रहा था. महीनो और लगेंगे मुझे अम्मी जान को छोड़ने में. अम्मी जान की शलवार उतारने में. लेकिन अम्मी जान तो आज hi सब कुछ करने पर उतर आयी टी

मेरे दिल में लड्डू फूटने लगे थे. एक बार तो दिल में आई. अम्मी जान होश में नहीं हैं. उन्हें रोक दूँ. ऐसे वह होश में आ जाएँगी. फिर सोचा नहीं. एमी जान के लिए इस वक़्त ज़रूरी है झड़ना. वो झाड़ नहीं प् रही हैं.. कहीं कोई गड़बड़ न हो जाए उनके ब्रेन के साथ

मई भी अपनी गांड उठा गया. अम्मी जान ने भी अपनी गांड उठा दी. फिर अपनी शलवार नीचे करने लगी. इस काम में मैंने अम्मी जान की हेल्प करि

और अम्मी जान की शलवार रनों तक नीचे हो गई. अब मेरा लुंड अम्मी जान की फुद्दी के ऊपर था. गीली नंगी रास बहती फुद्दी के लबों पर था

अम्मी जान ने मेरे लुंड को लेफ्ट हैंड से पकड़ लिए. इस बार खुद से मेरे लुंड को अपनी फुद्दी के लबों पर रक्ति हुई किश करने लगी

मई समझ गया. अब अम्मी जान की फुद्दी के लबों को छोड़ना था

और मई किश करता हुआ छोड़ने लगा. कुछ देर ऐसे hi करता रहा.. अम्मी जान ने मेरे लुंड को जड़ से पकड़ा हुआ था. फिर अम्मी जान ने दोनों टाँगें मेरी गांड पर रख दी.

अम्मी जान अब बास झड़ने hi वाली थी. दोनों टांगें हिला हिला कर हिला कर गांड भी हिला रही थी

फिर अम्मी जान ने तन अपनी टांगों का दबाव एकदम से बढ़ाया. जब मेरा लुंड उनकी फुद्दी के सुराख़ पर था

दबाव बढ़ा और फिर मेरा लुंड एक झटके के साथ अम्मी जान की फुद्दी में उतर गया. मई अरु अम्मी जान दोनों hi झटका खाते हुए रुक गए थे.

मई भी हैरान था और अम्मी जान भी.. कुछ लम्हे जाते थे अम्मी जान झाड़ जाती. इस बर्र अम्मी जान ने मेरे लुंड को आगे से पकड़ लिए . मेरे लुंड की कैप अम्मी जान की फुद्दी में उतर चुकी thi.mera लुंड मोटा था. अम्मी जान की फुद्दी टाइट थी. लुंड आसानी से रास से भरी फुद्दी में नहीं उतर सकता था. उसके लिए अम्मी जान को दर्द के दरया को पार करना पड़ता

ऐसे hi अम्मी जान और मैं किश करते रहे. कभी मैं लुंड फुद्दी से निकाल कर लबों पर रगड़ने लगता. कभी लुंड की कैप अम्मी जान की फुद्दी में उतार कर हलके से धक्के मारने लगता

मई हिम्मत हारता जा रहा था.. अम्मी जान की फुद्दी में मेरा लुंड. भले hi कैप तक घुस सका था. पर सोच अलग थी. जोश अलग था

अम्मी जान का भी ऐसा hi हाल था. अपने जवान बेटे के जवान लुंड को अपनी फुद्दी पर नंगे पा कर वो जल्द मंज़िल पर पोंछने लगी

फिर देखते hi देखते अम्मी जान के जिस्म में झटके बढ़ते चले गए.. इधर मेरा जोश भी आखरी हदों को छूने लगा था. अम्मी जान की फुद्दी की आग ने मेरे लुंड में आग लगा दी थी. मेरे जिस्म में भी आग लगा दी थी. मेरे खून में आग लगा दी थी. वहीँ आग मेरे लुंड में उतरी और मेरी मणि को पिघला गई

उधर अम्मी जान झड़ी. इधर मेरे लुंड की कैप अम्मी जान की फुद्दी में फँसी हुई थी. फिर मेरा लुंड और मैं दोनों हिम्मत हार गए

मेरे लुंड से तेज़ प्रेशर के साथ मणि निकल कर अम्मी जान की फुद्दी में आगे तक जाने लगी. मणि का प्रेशर बहुत था.. ऐसे hi दूर दूर तक जाने लगी

मई और अम्मी जान दोनों हांपने लगे. देर तक हप्ते रहे

आज वो हुआ था. जिसके होने की अभी दूर दूर तक कोई उम्मीद नहीं थी

देर तक मई और अम्मी जान दोनों खामोश रहे

फिर अम्मी जान बोली -- आज के बाद तुम कुछ भी करो बाबू. मुझे कभी कुछ मत बताना. मेरी तौबा. मेरी माँ की तौबा. मेरे बाप की तौबा. मेरे अगले पिछलों की तौबा. जो अब से तुझसे मैंने किसी की रासलीला सुनी भी. मैं नहीं सुन सकती. बाबू तुम बहुत खतरनाक हो. सुनकर hi मेरी ये हालत कर डाली तुमने. कभी देखने को कहती और तुम मुझे दिखा देते मैं तो पागल hi हो जाती. नहीं बाबू. अब के तुम कुछ भी करो.. बास ख़ामोशी से करो.. हम दोनों के बीच अनमोल प्यार पहले जैसा रहेगा. जिस हद तक हम आज अचानक से आ गए हैं. इस हद से आगे तुम मेरी मर्ज़ी के बिना बढ़ने की कोशिश मत करना

मई -- अम्मी जान.. इस हद तो आने की इजाज़त है

अम्मी जान अब शर्माने लगी थी -- हाँ इजाज़त है. लेकिन तुम कुछ देखोगे नहीं. जैसे अभी तुमने कुछ नहीं देखा है.. समझ लो एक तूफ़ान आया था. जो बहुत कुछ उखाड़ कर ले गया. फिर भी बहुत से परदे अभी बाकि हैं. और मैं नहीं चाहती वो सारे परदे एक hi बार में उतर जाएं

मई -- अम्मी जान जो हुआ. उसपर आप दिल में दुखी तो नहीं हैं न

अम्मी जान शर्म से सुर्ख पड़ते चेहरे के साथ बोली -- नहीं. तेरे होने से मुझे कोई दुःख नहीं है. वैसे भी ये सब तो होना hi था. बहुत पहले hi अंदाज़ा हो गया था. बास अब मैं कुछ और नहीं बोल सकती. आज शर्म बहुत बढ़ी हुई है. तुम ऐसा करो. ऑंखें बंद कर लो. जब तक मैं न कहूं.. खोलना मत

मेरा शरारत करने को मैं हुआ.

अम्मी जान मेरी आँखों में शरारत जाएं कर झट से बोली -- नहीं बाबू. आज नहीं. प्ल्ज़ आज नहीं. आज पहले hi बहुत ज़यादा हो चूका है. आज अभी मई मज़ाक और फन के मूड में नहीं हों

मई -- लेकिन आज सच में फन करने में खूब मज़ा आने वाला है अम्मी जान

अम्मी जान - और मेरी जान जा सकती है. सच में दिल की हालत समझले नै संभल प् रही है

मई अम्मी जान को किश करने लगा. मेरा लुंड ढीला हो कर अम्मी जान की फुद्दी पर लगा हुआ था. अंदर से निकल आया था. अम्मी जान भी किश करने लगी

किश करती हुई मेरी आँखों पर हाथ रख गई. मई ऑंखें बंद कर गया

किश के बाद अम्मी जान ने मेरी आँखों पर से हाथ हटाया.. फिर मुझे हटा गई

मई देख नहीं सकता था. कपड़ो की सरसराहट से अंदाज़ा हो रहा था. अम्मी जान अपनी शलवार ऊपर कर रही हैं..

फिर अम्मी जान बोली -- अब तुम ऑंखें खोल सकते हो बाबू

मैंने ऑंखें खोल अम्मी जान को देखा. और अब अम्मी जान शर्म भरी नॉटी स्माइल से मेरे ढीले पड़े लुंड को देखती जा रही थी

मई झट से दोनों हाथ अपने लुंड पर रख गया और अम्मी जान खिलखिला कर है पड़ी

अम्मी जान -- अब क्या फायदा बाबू..

मई -- ये चीटिंग है अम्मी जान

अम्मी जान होंठ भींच हस्ती हुई बोली -- है तो??.. मैं अम्मी जान हों. चीटिंग करना मेरा हक़ बनता है

मई बीएड से उछाल पड़ा. अम्मी जान भाग कर दूर के पास पोहकनही और मुझे स्माइल से देख ऊँगली उठा कर वारं करती हुई बोली

अम्मी जान -- देखो बाबू.. हद में रहो. वर्ण एक चांटा मारूंगी और होश ठिकाने आ जाएंगे

मई अम्मी जान के अल्हड़ लड़कियों जैसा निखार और शोख अंदाज़ देख खोने लगा

और अम्मी जान चुप करती मुझे देख शर्माने लगी. फिर एकदम से दूर खोल कर निकल भागी

मई अम्मी जान को देखता हुआ दूर बंद कर गया

फिर बीएड पर बेथ कर अपने लुंड को हाथ में पकड़ कर देखने लगा. कुछ देर पहले मेरा लुंड अम्मी जान की फुद्दी में था. भले hi थोड़ा सा था. पर घुसा तो था

मुझे मेरे लुंड पर प्यार भी आने लगा और फखर भी होने लगा

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अचानक से hi हालत बदल कर रह गए थे..

2 महीने गुज़र चुके थे. और हमारे खुशहाल खंडन में जहाँ अनमोल प्यार के शिव कुछ नहीं था. आज भी हर फारद एक दूसरे से अनमोल प्यार करता था. पर प्यार के रंगों में कुछ रंग और भी शामिल हो गए थे.

जिस रात अम्मी जान के साथ मज़े किये थे. उसी रत की सुबह बड़ी दर्दनाक थी. मेरे नाना अचानक से हार्ट अटैक की वजा से जान से चले गए. अम्मी जान तो जैसे टूट कर रह गई. संभाले नहीं संभल प् रही थी. बहुत बड़ा झटका लगा था हम सब को. नाना जान से मैं भी बहुत प्यार करता था.

जिस्मानी प्यार की अब कोई बात नहीं रही थी. मई कर सकता था. लेकिन दिल में जैसा दर्द था, उसे जाते जाते वक़्त लगता. लेकिन फिर नानी बीमार रहने लगी. और अम्मी जान कभी इधर कभी उधर.. मैं भी कभी इधर और कभी अम्मी जान के साथ उधर. हम सब गहन चक्कर बन कर रह गए थे.

फिर एक और इंसिडेंट हुआ. और मैं लरज़ उठा. अम्मी जान खुद बिस्तर पर लग गई. पापा के लिए इस बार की घटना बर्दाश्त से बहार थी.

हुआ ये था .. उस रात होश खो देने से हुआ थोड़ा सा मेरे और अम्मी जान के बीच हुआ था. बास वही से एक नयी कहानी ने जनम ले डाला था.

मेरे लुंड की सिर्फ कैप hi अम्मी जान की फुद्दी में उतर सकीय थी. इतने से hi लुंड से निकली मणि अम्मी जान की फुद्दी में आगे ट्रेवल करती हुई बच्चेदानी तक रसाई हासिल कर गई थी. अम्मी जान प्रेग्नंट हो गई थी

नाना के घर मई अम्मी जान और पापा गए थे थे. वहीँ अम्मी जान चक्र कर गिर पड़ी थी. डॉक्टर को बुलवा गया था. पता चला अम्मी जान फिरसे माँ बनने वाली है. कुछ तो ये जान कर सुरप्रीसेड रह गए थे. कुछ हो गए थे. कुछ तो पापा के कंधे को थापक बोले थे. अब भी हिम्मत रखते हो. शाबाश..

लेकिन पापा तब तो सब को है कर ताल गए थे. लेकिन घर ा कर चुप हो गए थे. बात ये थी. जिन दिनों मेरी मणि अम्मी जान की फुद्दी में उतरी थी. अम्मी जान और पापा के बीच कुछ नहीं हुआ था. मतलब सिवाए मेरे लुंड की मणि के अम्मी जान की फुद्दी में किसी और की मणि नहीं उतरी थी.

इस बात ने अम्मी जान को बुरी तरह से तोड़ कर रख दिए था. पापा से नज़रें मिलाने के क़ाबिल नहीं रही थी. और पापा अब मुझे और hi नज़रों से देखा करते थे. मई भी सब समझ गया था जैसे. और पापा से निगाहें मिला पाना मेरे लिए अब मुमकिन नहीं रहा था. लेकिन सब को शक में नहीं डाला जा सकता था. इसलिए नार्मल बेहवे कर रहे थे.

सब समझ रहे नाना की डेथ और नानी की बीमारी के चलते ऐसा हो रहा था. ऊपर से इस उम्र में अम्मी जान का प्रेग्नेंट होना भी अजीब बात थी. कोई अम्मी जान के साथ छेड़ छड़ नहीं कर सकता था. और अम्मी जान पापा से ये भी नहीं कह सकती थी. वो ये बच्चा जाया करवाना चाहती हैं. मुझसे बहुत काम बात करने लगी थी अब अम्मी जान

बिना कुछ भी हुए हमारे बीच, बहुत कुछ हो गया था. लाइफ ने बड़ा hi भयंकर मोड़ ले लिए था.
 
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