Incest The Tiger - Page 17 - SexBaba
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Incest The Tiger

अपडेट 117

दिव्या के घर से निकल क्र मई सीधा अपने घर गया वह स्नेहा और रम्भा मेरा hi इंतजार क्र रही थी मई जेक फ्रेश हुआ और हम साथ में खाना खा क्र सो गए.

अगले दिन रोज की तरह मई गार्डन पंहुचा वह पर दिव्या नहीं आयी हुई थी इसलिए मई गार्डन में रनिंग करने लगा कुछ देर में दिव्या भी वह आ गयी मई उसे गुड मॉर्निंग बेबी कहा तो उसने कोई जवाब नहीं दिया.

मई जान गया की ये नाराज है मैंने अपनी रनिंग ख़तम की और वो जिस बेंच पर बैठी हुई थी मई भी जा क्र व्ही बैठ गया .

मई : अभी भी नाराज हो .

पर दिव्या ने कोई जवाब नहीं दिया.

मई : अच्छा सॉरी बाबा अब से हर बात मई तुम्हे बताउगा कोई भी बात नहीं छुपाऊंगा ok.

दिव्या ने मेरी तरफ देखा मगर कोई जवाब नहीं दिया.

अच्छा ठीक है मेरे साथ चलो मई आज तुम्हे पूरा मेरे बारे में बताउगा उसके बाद तुम्हारा जो भी फैसल होगा मुझे मंजूर है .

ये बोल क्र मई गार्डन के सुनसान एरिया जहा पर बहुत काम hi लोग जाते थे उधर जाने लगा दिव्या कुछ देर सोचती रही फिर वो भी धीरे से उठ क्र मेरे पीछे आने लगी.

एक कोने में जाकर मई दिव्या को अपने साथ उदा क्र एक सुनसान घाटी में ले आया .

मई : दिव्या एक बात मई तुम्हे बता दू यह पर जो भी तुम देखोगी सुनोगी उसे अपने तक hi सिमित रखना.

फिर मैंने अपना शर्ट निकल दिया और शेर सिंह को यद् किया, शेर सिंह टैटू से बहार निकल आया जिसे देख क्र एक पल के लिए दिव्या दर भी गयी तब मैंने उसे संत करवाया.

मई : डरो नहीं दिव्या ये है शेर सिंह जी और ये hi तुम्हे मेरे बारे में बताएँगे.

फिर शेर सिंह ने दिव्या को मेरे जन्म से लेकर नील प्लेनेट और मेरी सक्तियो के बारे में बताया ये भी बताया की हर सकती को पाने के लिए मुझे विवाह करना होता है जितनी अभिक पत्नी उतना hi फायदा मुझे सकती पाने के लिए होता है.

मई : तो मई तुम्हे बता दू मेरी अभी से 6 पत्नी है और आगे और भी बन सकती है इसके आलावा मेरे कई स्त्रियों के साथ सम्बन्ध है अब आगे तुम्हारी मर्जी .

शेर सिंह: देखो बेटी टाइगर कोई साधारण पुरुष नहीं वो एक रक्छक है जो ब्रम्हांड को बचने के लिए पैदा हुआ है और जो भी इस से जुड़ेगा उसकी भी भागीदारी होगी ब्रम्हांड को बचने में .

दिव्या : मैंने तो पहले hi कह दिया था की अब तो मेरी जान जाने के बाद hi मई तुम से जुड़ा होउंगी मई तो बीएस थोड़ी सी नाराज थी और कुछ नहीं चलो अच्छा हुआ तुम ने मुझे सब कुछ बता दिया अब ये भी बता दो की वो कोण कोण है जो तुम्हारी पत्नी बन चुकी है.

मई: ठीक है ये भी जानलो

  1. समिति
  2. सीतल
  3. नीलम
  4. दीपिका
  5. स्नेहा
  6. रम्भा
दिव्या: तो मुझे से शादी लैब करोगे.

मई :जब तुम चाहो अभी बोलोगी तो अभी मंडी में शादी क्र लेंगे.

दिव्या: नहीं उसकी कोई जरुरत नहीं है जब ऊपर वाले की इच्छा होगी तब क्र लेंगे shadi,ab चलो चलते है तुम्हे कॉलेज भी जाना है.

फिर शेर सिंह वापस मेरे पीठ में टैटू बन गए और मई दिव्या को उसके घर के पास उतर क्र वापस अपने घर चला गया ऐसे hi कुछ दिन निकल गए.

इधर शेठ धनराज का p.a उसको मेरे बारे में जो जानकारी हासिल की थी उसके बारे में बताता है .

प् : सर उस लड़के का नाम टाइगर है और...

धनराज: kya..kya बोलै ,क्या है उस लड़के का नाम.

प्: सर टाइगर.

धनराज: ये नाम कहि तो सुना है मैंने पर याद नहीं आ रहा, ठीक है आगे बताओ.

प् : सर ये कही बहार से यह पढाई करने आया है ये यह पर अपनी बुआ के पास रहता था लेकिन अब एक किराये के माकन में रहता है साथ में दो लड़किया भी है, ये नीलम और दीपिका बिटिया के कॉलेज में hi पढाई क्र रहा है और सर ये दिव्या बिटिया से हमेसा मिलता है और सर ये कितने आगे जा चुके है ये पता नहीं.

धनराज :दो टके का लोंदा डायमंड किंग के दमांद बनने के सपने देख रहा है दुनिया से hi गायब क्र दो उसे.

प्: hi सर हो जायेगा.
 
अपडेट 118

मई कॉलेज जाने के लिए संध्या का इंतजार क्र रहा था विनोद चला गया था अपनी गर्लफ्रेंड को पिक उप करने इसलिए हम दोनों साथ में hi जा रहे थे कुछ देर बाद वो आयी और हम निकल गए.

मई : संध्या क्या करती हो यार इतना टाइम लगता है तुम्हे रेडी होने में लेट हो रहा है.

संध्या : बस आज की hi बात है कल से तुम अकेले जा सकते हो.

मई : क्यों? क्या नई बाइक लेके दे रहे है क्या अंकल.

संध्या: नहीं , मई कल से अपने बॉयफ्रेंड के साथ जाउंगी कल से वो hi पिक करेगा मुझे.

मई : क्या बॉय फ्रेंड ! तुमने लैब बना लिया बॉयफ्रेंड.

मुझे कुछ बुरा तो लगा फिर सोचा चलो वो अपनी लाइफ में आगे तो बढ़ रही है उसकी भी लाइफ है वो कुछ भी करे.

संध्या: है तुम्हारे ठुकराने के बाद hi बनाया है और आज मिल भी लेना अपने hi कॉलेज का है .

मई : पर मैंने कब...

बिच में hi रोकते हुए....

संध्या: अब और हम इस बारे में बात नहीं करेंगे, अब चुप चाप बाइक को चलाओ.

फिर हम कॉलेज पहुंचे तो संध्या जल्दी hi उतर क्र एक लड़को के ग्रुप के पास जाकर पहुंच गयी और एक लड़के से कुछ कहा और उसे मेरे पास लेन लगी मई उसे जनता था वो अपना hi क्लासमेट था पर लगता तो टपोरी आईएस किस्म लड़का उसका पूरा ग्रुप hi ऐसा था पता नहीं संध्या ने क्या देख क्र इसे पसंद किया था .

संध्या : टाइगर इनसे मिलो ये है मेरा बॉयफ्रेंड रॉकी और रॉकी ये है टाइगर मेरे फ्रेंड.

रॉकी: ी क्नोव इन्हे कोण नहीं जनता पुरे कॉलेज का hi स्मार्ट लोंदा है पूरी हसीं लोंड़िया इस पर मरती है.

मई : टैरिफ के लिए थैंक्स पर मई ऐसा नहीं हु मई सिंपल सा रहने वाला बाँदा हु मुझे कोण किसके पीछे भाग रहा है इसे कोई लेना देना नहीं पर मई अपनों के बारे में जरूर सोचता हु इस लिए संध्या का धयान रखना अब से ये तेरी जिम्मेदारी है और अगर कुछ हुआ तो...... Ok bye.

मई रॉकी को वार्निंग देते हुए ऊँगली दिखते हुए कैंटीन की तरफ निकल गया.

कैंटीन में काव्य & उसकी फ्रेंड एक टेबल पर बैठी हुई थी और कविता को दीपिका अपने साथ लेकर अलग टेबल पर बैठी हुई थी, नीलम आज अपने पुराने गैंग के साथ बैठ क्र मस्ती क्र रही थी मई जाकर मनोज और उसकी सिस्टर रचना बैठी हुई थी उनको hi hello बोल क्र व्ही जाकर बैठ गया .

मई : और मनोज क्या हॉल है भाई.

मनोज : अब क्या बताऊ भाई सभी की एक न एक गर्लफ्रेंड बीएस मुझे hi नहीं मिल रही .

मई : ा रे मई भी तू हु यार सिंगल मेरी भी तो कोई गर्लफ्रेंड नहीं है .

मनोज: पर भाई तू तो हमेसा लड़कियों के बिच घिरा रहता है तेरी तो बन भी जाएगी और मेरी...,

मई : उन्ही लड़कियों में तो तेरी बहन रचना भी है तो क्या उसे बना लू अपनी गर्लफ्रेंड क्यों रचना.

ये बोल क्र मैंने रचना की तरफ देखा तो ये क्या रचना तो मुझे में hi खोई हुई थी वो एक तक मुझे hi देखे काठी थी .

मुझे रचना की तरफ देखता पाकर मनोज ने भी रचना की तरफ देखा और रचना को खोया पाकर उसे आवाज लगाई पर फिर भी उस ने धयान नहीं दिया तक मनोज ने रचना के हाथो को हिलाया तब जेक उसे होस आया.

मनोज: कहा खो गयी थी रचना.

रचना: कही नहीं भाई वो क्या कह रहे थे आप.

मई : कुछ नहीं जाने दो .

तभी दीपिका अपने साथ कविता को भी लेकर आ गयी और हमारे साथ hi बैठ गई .

दीपिका: है टाइगर , कैसे हो .

मई : है मई बढ़िया हु , तुम और तुम्हारी फ्रेंड कैसी है.

दीपिका: मई तो ठीक हु लेकिन मेरी फ्रेंड का हल कुछ ठीक नहीं है.

तब कविता ने दीपिका के जांघो में चिमटी कटी और धीरे से खा - क्या तुम भी कुछ भी बोलती हो .

दीपिका आउउउछह करती हुई धीरे से कविता को बोलती है - ा रे तेरी फिर से सेटिंग करवा रही हु यार.

मई : क्या खुसुर पुसुर हो रही है तुम लोगो के बिच .

दीपिका: कुछ नहीं बीएस ऐसे hi चलो क्लास में चलते है टाइम हो गया है.

उसके बाद हम लोग क्लास में चले गए उसके बाद कुछ खास नहीं हुआ बीएस अलका मम से मस्ती मजाक हुई.

नेस्ट डे-

इधर बुआ के घर में -

समिति घर का पूरा काम और रही थी क्यों की बुआ का सत्व महीना चल रहा था वो बहुत कम hi काम करती थी, ब्रेकफास्ट क्र के काव्य ने कविता से कहा.

काव्य : दीदी तुम रेड्डी नहीं हुई कॉलेज जाने के लिए टाइम भी हो गया है.

कविता: तू चल मई थोड़ी देर में आती हु वो क्या है की आज पहला लेक्चर फ्री है तो मई बाद में आती हु.

उसके बाद काव्य चली गयी और थोड़ी देर बाद कविता भी रेड्डी हो क्र निकल गयी. इधर मुझे भी लेट हो गया था आज दिव्या से और घर में रम्भा और स्नेहा से कुछ जायदा hi मस्ती हो गयी थी .मई भी जल्दी जल्दी से तैयार हो क्र अपनी बाइक से निकल गया .

मई तेजी से जा hi रहा था की मेरे सामने एक गाड़ी आ गयी और मेरा रास्ता रोक दिया और उसमे से कुछ गुंडे निकले और मेरा हाथ पकड़ क्र ले जाने लगे मई भी झूठी एक्टिंग करने लगे क्यों की एक तो वह पर पब्लिक थी और दूसरी मुझे ये भी जानना था की ये मुझे क्यों और कहा ले जा रहे है इस लिए मई चुप चाप उनके साथ चला गया उधर रस्ते में कविता ने मुझे ुंगुंडो के साथ मुझे देख लिया .

कविता: ये टाइगर इन गुंडे जैसे आदमियों के साथ कहा जा रहा है ,कहि कोई गड़बड़ तो नहीं है क्या कृ देखना पड़ेगा.

ये सोच क्र कविता एक ऑटो की रुकवा क्र इन के पीछे पीछे जाने लगी.....
 
अपडेट 119

कविता: ये टाइगर इन गुंडे जैसे आदमियों के साथ कहा जा रहा है ,कहि कोई गड़बड़ तो नहीं है क्या कृ देखना पड़ेगा.

ये सोच क्र कविता एक ऑटो की रुकवा क्र इन के पीछे पीछे जाने लगी.

इधर ये गुंडे मुझे लेकर एक बंद पड़ी पुराणी फैक्ट्री में ले गए और मुझे एक चेयर पर बैठा क्र बंद दिया.

तभी उनमे से कोई एक गुंडा बोलता है.

गुंडा 1: भाई मुझे एक बात समझ नहीं आ रही है.

लीडर: क्या बे..

गुंडा1: यही की ये लोंदा बिना कोई लफड़ा किये चुप चाप हमारे साथ चला आया.

लीडर: है बे ये तो है खैर हमे क्या उस आदमी को आ जाने दो फिर देखते है इसका करना क्या रुको मई अभी फ़ोन करता हु .

ये बोल क्र उसने एक आदमी को फ़ोन लगाया.

लीडर (फ़ोन पे) : है सेठ हम लोगो ने उस लोंदे को पकड़ लिया है वो इस वक्त हमारे कब्जे में है.

उधर से: है ठीक है मई आता हु उसे मेरे hi सामने मरना ताकि मई उसका वीडियो बना क्र अपने बॉस को दिखा सकू.

उसके बाद उस लीडर ने फ़ोन काट दिया और मेरी तरफ आ क्र मुझे बोलने लगा चल बीटा मरने के लिए तैयार हो जा वो सेठ आ रहा है.

मई भी उसी का इंतजार क्र रहा था कोण है वो जो मुझे मरना चाहता है .

तभी वो प् कविता के बालो को पकड़ क्र अंदर लता है , कविता दर्द से चीख रही जो मुझे जरा भी बर्दास्त नहीं हो रहा था.

प्: तुम लोगो को कोई अकाल है की नहीं ये लड़की तुम्हारा पीछा करते हुए यह तक आ गयी कही पुलिस को बता देती तो पूरा खेल गड़बड़ हो जाता.

लीडर: माफ़ करना सेठ हम ने धयान नहीं दिया ,अब इसका क्या करना है.

प्: करना क्या है इस लड़के के साथ इसे भी मरना होगा.

अभी वो लोग कुछ क्र पते उस से पहले मैंने रस्सियों को तोड़ते हुए उठ खड़ा हुआ और बाकि कुछ क्र पते उस से पहले मैंने प् को एक पंच मारा वो उड़ता हुआ जा क्र फैक्ट्री में रखे हुए ड्रमों के ऊपर जा गिरा और बेहोश हो गया.

कविता दौड़ क्र मेरे गले लग गयी और रोने लगी.

मैंने उसे चुप कराया और थोड़ा साइड किया ताकि उसे कोई नुकसान न पहचा सके.

मई : अब बताओ तुम लोगो का क्या करना है.

लीडर: मारो बे सेल को बड़ा हीरो बन रहा है.

लीडर के इतना बोलते hi उन गुंडों को जो मिला उसे लेकर मेरी तरफ दौड़ पड़े ,

मई चाहता तो उनको अपने तलवार से गाजर मूली की तरह काट सकता था लेकिन इन कीड़ो मकोड़ो के लिए तो मेरे हाथ hi काफी थे.

मई भी दौड़ते हुए उन गुंडों पर टूट पड़ा मई उनके पास पहुंच क्र निचे झुक क्र दोनों हाथो से दो गुंडों को उनके पेट पर घुसा मारा घुसा ीनता तेज था की ुंगुंडो के मुँह से खून निकलने लगे और वो दोनों व्ही गिर गए तभी एक गुंडे ने मेरे पीठ पर डंडे से वर किया डंडे के दो टुकड़े हो गए मई पीछे मुदा और एक पंच उसके गाल पर मारा जिससे उसका चेहरा hi पीठ की तरफ मुद गया ,फिर एक ने मुझे लत मरने के लिए अपना पेअर उठाया hi था की मैंने उसका पेअर पकड़ क्र उसे घूमते हुए फेक दिया जिससे वो दिवार से जा टकराये .

अपने आदमियों को मर कहते देख क्र गुंडों का लीडर मुझे मरने के लिए आया उसके हाथ में गन था उसने मुझ पर गोली चलाई तो मई साइड हैट गया उसने फिर से गोली चलाई जो मेरे बाजु को चीरती हुई निकल गयी तब मुझे गुस्सा आया मेरी आँखे पूरी डार्क ब्लू हो गयी और और गोली चला पता उस से पहले मई उड़ते हुए एक लत उस लीडर के चेहरे पे मारा जिससे वो निचे गिर गया और गन उसके हाथो से छूट क्र दूर जा गिरा उस के बाद मैंने उस को ऐसा मारा की उसके प्राण पखेरू hi उड़ गए बाकि बचे तीन चार गुंडे वो अपनी जान बचा क्र वह से भाग गए.

फिर मई कविता के पास गया वो मेरे गले लग क्र रोने लगी.

कविता : मुझे माफ़ करना टाइगर तुम ने मुझे पहले से hi बता दिया था की तुम और भी बहुत सी लड़कियों से प्यार करते हो लेकिन मई काव्य के बहकावे में आ गयी थी मुझे माफ़ क्र देना टाइगर.

मई : कोई बात नहीं कविता हो जाता है चलो अब चुप हो जाओ .

कविता : पहले कहो माफ़ किया .

मई : अच्छा मेरी जान माफ़ किया अब खुस ,मई नाराज hi कब था बीएस थोड़ा दुःख जरूर हुआ की तुमने भी मेरी एक बात नहीं सुनी चलो अब उस आदमी से भी पूछना था की वो मुझे क्यों मरना चाहता है.

फिर हम ने उस प् को उठाया जो बेहोश हो चूका था उसके चेहरे पर पानी मारा तब उसे होस आया .

मई : बोलो तुम मुझे क्यों मरना चाहते हो .

प् : .........

मई : बोलो नहीं तो जान से मर दूंगा.

प्: नहीं मुझे मत मरना मई बताता हु मुझे धनराज शेठ ने कहा है तुम्हे मरवाने के लिए क्यों की तुम उसके बेटी से प्यार करते हो.

मई : धनराज शेठ मई यही तो चाहता था.

उसके बाद मई कविता को लेकर वह से निकल गया झा पर मेरी बाइक कड़ी थी .

अब कॉलेज तो नहीं जा सकते तो चलो मेरे घर चलते वह किसी और से भी मिलता हु तुम्हे.

फिर मई कविता को बाइक में बैठा क्र घर ले आया जहा मई रहता था ,वो वह पहुंच क्र स्नेहा से मिली .

कविता: ओह्ह स्नेहा दीदी आप कब से यह पर हो .

स्नेहा: मुझे तो बहुत दिन हो गए यह आये हुए और तुम कैसे यह वो भी टाइगर के साथ , लगता है तुम लोगो के बिच जो मन मुटाव हो गया था वो अब मिट चूका है.

कविता : है दीदी.

तभी हमारी आवाज सुन क्र रम्भा रूम से बहार आयी.

कविता: ये कोण है दीदी?

स्नेहा: ये रम्भा है मेरी छोटी बहन hi समझ लो और बाकि तुम्हे टाइगर hi बतायेगे .

मई: कविता पहले तुम प्रॉमिस करो की तुम पूरी बात सुनोगी उसके बाद hi कुछ फैसल लेना.

कविता: ठीक है मई प्रॉमिस करती हु.

मई: ये रम्भा मेरी पत्नी है.

कविता: क्या तुम ने सदी क्र ली .

ये बोल क्र वो रोने लगी ,

मई : कविता मैंने पहले hi खा था की पूरी बात सुन लेना उसके बाद hi फैसल लेना.

Kavita:(rote हुए) अब और बताने को बचा hi क्या है.

मई : रम्भा मेरी 6 no. की पत्नी है.

कविता: क्या ! 6no की तो और बाकि कोण कोण है.

मई:

  1. समिति
  2. सीतल
  3. नीलम
  4. दीपिका
  5. स्नेहा
  6. रम्भा
कविता: हे बागवान तुम इतनी साडी लड़कियों की जिंदगी से खेल रहे हो और स्नेहा दीदी तो तुम्हारी सगी बहन है उनसे भी तुम ने सदी क्र ली ये सब क्या है मुझे तो कुछ समझ में hi नहीं आ रहा.

स्नेहा: कविता मेरी बहन तुम जो सोच रही हो ऐसा कुछ भी नहीं है एक बार तुम टाइगर की पूरी बात तो सुन लो .

कविता: बोलो अब और क्या बचा है.

मई : ये बात नील प्लेनेट से सुरु होती है......

कविता को मैंने सुरु से लेकर आखरी तक बताया की मई को हु कहा से और कैसे आया बीएस उसको ये नहीं बताया की मेरे किसके किसके साथ साररिक सम्बन्ध है बाकि सब बता दिया.

कविता: कुल मिला क्र तुम एक सुपर हीरो हो .

मई: तुम ऐसा भी कह सकती हो .

कविता: तो तुम मुझ से सदी काटोगे की नहीं.

मई : करूँगा जरूर करूँगा मेरे सभी चाहने वालो से मई जरूर सदी करूँगा क्यों की मेरी जितनी जायदा पत्निया होंगी मुझे उतना hi फायदा होगा.
 
अपडेट 120

नेक्स्ट डे मई सुबह जल्दी से उठ क्र पार्क पंहुचा और दिव्या को बताया की तुम्हारे पापा ने कल मेरा किडनेप करवाया और मुझे मरने की कोसिस की लेकिन उनका पूरा प्लान मैंने फ़ैल क्र दिया.

दिव्या: तुम्हे कुछ हुआ तो नहीं न.

मई : मुझे क्या हो सकता है.

दिव्या: ये पापा भी न ,अब तुम क्या करने वाले हो.

मई : मेरे पास एक प्लान है और उसके लिए मुझे तुम्हारे घर आना होगा व्ही आकर मई बताउगा की क्या करना है.

उसके बाद मई घर आ गया और ब्रेकफास्ट क्र के बाइक के पास खड़ा हुआ था की रॉकी वह पर अपनी बाइक लेकर आ गया.

रॉकी: hi टाइगर भाई कॉलेज hi जा रहे हो न.

मई : है लेकिन तुम यह कैसे .

रॉकी: वो मई संध्या को कॉलेज जाने के लिए पिक करने आया हु.

हम अभी बात hi क्र रहे थे की संध्या अपने घर से बहार निकली और रॉकी के बाइक र जाकर बैठ गई और रॉकी मुझे bye का इसरा करते हुए निकल गया मई इन दोनों को जाते हुए देखता hi रह गया.

फिर मई भी अपनी बाइक उठाई और निकल गया कॉलेज की तरफ वह स्टैंड में बाइक पार्क की और कैंटीन की तरफ निकल गया वह जाकर देखा तो साडी मण्डली व्ही मिल गए मई सब को hi hello बोल क्र एक खली टेबल पर जाकर बैठ गया कुछ देर बाद वह दीपिका और कविता आकर बैठ गई उसके बाद नीलम भी व्ही आ गयी फिर मैंने उन्हें भी बताया की उनके पापा ने मुझे मरवाने के लिए गुंडे भेजे थे.

नीलम: ये पापा भी न वो दीदी से बहुत प्यार करते है उनके लिए वो कुछ भी क्र सकते है.

मई: है इसलिए मैंने एक प्लान बनाया है उसके लिए आज मई तुम्हारे घर आऊंगा और पूरा प्लान बताउगा की क्या करना हैऔर एक बात बतानी थी सायद तुमलोगो को बताया था या नहीं ये मुझे यद् नहीं.

दीपिका: यही की तुम कविता से भी प्यार करते हो .

मई : तुम्हे कैसे पता चला.

दीपिका : हम पक्की सहेलिया है ये चाहे मुझे न बताये फिर भी मुझे पता चल hi गया .

मई: है मई कविता से भी प्यार करता हु और ये पहली लड़की है जिससे मेरा प्यार सुरु हुआ और काव्य भी मुँह से प्यार करती है लेकिन वो अभी नाराज है देखो न अभी भी मुझे hi देख रही है.

फिर जब इन तीनो बे काव्य की तरफ देखा तो सच में hi वो मुझे घर रही थी.

जब हम सब में उसकी तरफ देखा तो वो अपना चेहरा दूसरी तरफ क्र लिया .

नीलम : मुझे भी लगा था काव्य हमेसा hi तुम्हारे साथ चिपकी रहती थी जैसे वो ुम्हारा साया हो.

मई : ठीक है चलो अब क्लास में चलते है.

फिर जब हम उठ क्र क्लास की तरफ जा रहे थे तब मैंने एक टेबल पर संध्या को देखा वो रॉकी और उसके दोस्तों के साथ बैठी हुई थी ,मैंने उसकी तरफ देखा तो वो मुझे hi देख रही तो थी और मुझे अपनी तरफ देखता पाकर वूर रॉकी के गले में हाथ डालकर उससे चिपक गयी और बात करने लगी , मुझे लगा की इसके मन में जरूर कुछ है और ये दिखा कुछ और रही है, उसके बाद कॉलेज में कुछ खास नहीं हुआ बीएस अलका मम से छोड़ी हसी मजाक हुई उसके बाद हम सब अपने अपने घर आ गए .

इधर बुआ के घर में काव्य कविता से बात करती है.

काव्य: दीदी आप उस टाइगर से फिर से बात करने लगी जब की आपको पता है वो कैसा लड़का है .

कविता: देखो काव्य टाइगर ने मुझे सब बता और समझा दिया है वो ऐसा नहीं है जैसा तुम समझ रही हो.

काव्य : ठीक है आपको टाइगर से रिस्ता रखना है तो रखो लेकिन मई टाइगर को माफ़ नहीं करुँगी.

ये बोल क्र काव्य वह से चली जाती है और कविता मन में बोलती है - आखिर कब तक माफ़ नहीं करोगी काव्य मई भी देखती हु टाइगर से जायदा दिन तक तुमभी दूर नहीं रह पाओगी.

उधर मई शाम को स्नेहा और रम्भा को बता क्र निकल गया दिव्या के घर की तरफ एक बार मैंने नीलम को फ़ोन क्र के कन्फर्म क्र लिया था की मां जी घर पर है या नहीं अब तक तो उन्हें भी पता चल चूका होगा की मई अभी तक जिन्दा हु, खैर मई दिव्या के घर में गया वह दिव्या ने पहले hi बता दिया था की मई आ रहा हु इसलिए वो मेरा hi इंतजार क्र रहे थे .

मई गया ममी जी से पेअर छुए फिर व्ही एक सोफे पर बैठ गया दीपिका मेरे लिए पानी लेकर आयी और नीलम चाय लेकर दी और सभी लोग व्ही पर बैठ गए.

वर्षा: है तो टाइगर बीटा क्या बताने वाले थे तुम.

मई : ममी अब समय आ गया है की मां जी को उनकी करनी यद् दिलाया जाये और दोनों परिवारों को एक किया जाये.

वर्षा: ये तो बहुत अच्छी बात है बीटा लेकिन उसके लिए क्या करने वाले वो तुम.

मई : ममी उसके लिए एक प्लान है मेरे पास सुनिए आप लोगो को क्या करना है...........

मैंने उन सभी को बता दिया की मेरा क्या प्लान है और वो कल से hi सुरु करना है ममी बोल रही थी कुछ गड़बड़ न हो सब सही से हो जाये ,मैंने उन्हें समझाया की सब कुछ प्लान के हिसाब से hi होगा.

फिर मई वह से घर चला गया और स्नेहा और रम्भा को लेकर निकल गया शॉपिंग करने के लिए वह हम ने अपने लिए कुछ कपडे और घर के लिए कुछ सामान लिया फिर एक अच्छे से रेस्ट्रोरेंट में जाकर खाना खाया और फिर घर आ गए सोने के समय दोनों से थोड़ा छेड़ छड़ किया फिर हम सो गए .

नेक्स्ट डे मई सुबह जल्दी से उठा और पार्क में चला गया वह दिव्या को एक बार फिर से बताया की जो भी करना वो एक डैम सही लग्न chahiye,fir थोड़ी बहुत एससीसे क्र के हम अपने अपने घर आ गए.

दिव्या अपने घर पहुंची और फ्रेश हो क्र ब्रेकफास्ट के लिए पहुंची वह उसके पापा पहले से hi न्यूज़ पेपर लेकर बैठे हुए थे .

दिव्या : गुड मॉर्निंग पापा .

धनराज शेठ: गुड मॉर्निंग मेरी बेबी डॉल.

दिव्या: क्या पापा आप हमेशा मुझे बेबी डॉल बोलते रहते है अब मई बड़ी हो गयी हु.

धनराज: तू कितनी भी बड़ी हो जाये मेरे लिए तो व्ही मेरी प्यारी बेबी डॉल hi रहेगी.

तभी वह पर दीपिका और नीलम भी आ गयी.

दीपिका: गुड मॉर्निंग पापा.

धनराज : गुड मॉर्निंग बीटा.

नीलम: गुड मॉर्निंग पापा.

धनराज (रूखे स्वर में) गुड मॉर्निंग.

वर्षा भी वह आ गयी फिर सभी लोग ब्रेकफास्ट करने लगे ब्रेकफास्ट के दौरान धनराज को छोड़ क्र सभी लोग दिव्या की तरफ hi देख रहे थे क्यों की शुरुआत तो दिव्या hi करने वाली थी .

मैंने दिव्या को एक दवाई दी थी ब्रेकफास्ट के बाद खाने के लिए .

दिव्या का ब्रेकफास्ट हो गया उनलोगो का धयान दिव्या की तरफ hi था दिव्या ने अपने पापा का धयान दूसरी तरफ पाकर चुप चाप वो दवाई खा ली और छोड़ी देर बैठी रही ,कुछ देर बाद hi......
 
अपडेट 121

दिव्या का ब्रेकफास्ट हो गया उनलोगो का धयान दिव्या की तरफ hi था दिव्या ने अपने पापा का धयान दूसरी तरफ पाकर चुप चाप वो दवाई खा ली और छोड़ी देर बैठी रही ,कुछ देर बाद hi दिव्या को ऐसा लगा जैसे उल्टिया होने वाली है और वो अपना मुँह दबाकर वाश बेसिन की तरफ भागी.

सभी लोग उसकी तरफ hi देख रहे थे उधर दिव्या उलटी पे उलटी किये जा रही थी धनराज और वर्षा तुरंत दिव्या के पास आते है.

धनराज: क्या हुआ है बेटी ये तुम्हे उल्टिया क्यों आ रही है तबियत तो ठीक है न.

दिव्या : पता नहीं पापा थोड़ा चक्कर सा भी लग रहा है.

धनराज: रुको मई अभी डॉक्टर को फ़ोन करता हु तब तक तुम आराम करो .

फिर दिव्या अपने रूम में चली जाती है कुछ देर में डॉक्टर आते है और वो दिव्या का चेक उप करते है , चेक उप के बाद वो धनराज को रूम से बहार ले जा क्र कहते है.

डॉक्टर: धनराज जी हो सके तो दिव्या बेटी की जल्दी से शादी करवा दीजिये क्यों की वो प्रेग्नेंट है.

धनराज: क्या ये कैसे हो सकता है आपने ठीक से तो चेक किया है न डॉक्टर साहब.

डॉक्टर: अब मई जो है व्ही तो बताउगा न धनराज जी .

फिर डॉक्टर वह से चले जाते है और धनराज गुस्से में दिव्या के रूम में जाते है झा सभी लोग बैठे हुए थे.

धनराज:( दिव्या से) : दिव्या हम ने इतने लड़ प्यार से तुम्हे रखा इसका यही सिला दिया तुम ने अगर इतनी hi जल्दी थी तुम लोगो को ये सब करने की तो मुझे बता दिया होता हम तुम्हारी शादी करा देते ऐसे हमारी नक् तो नहीं कटती.

वर्षा: हुआ क्या है जी जो आप ऐसे बात क्र रहे है मेरी बेटी से.

धनराज: सुना चाहती हो तो सुनो तुम्हारी बेटी प्रेग्नेंट है.

वर्षा: हे बागवान ये क्या कह रहे हो जी .

धनराज : मई सुच कह रहा हु डॉक्टर ने मुझे अभी बताया.

वर्षा: ये तूने क्या क्र दिया दिव्या हमे कही मुँह दिखाने लायक नहीं छोड़ा कितना बड़ा नाम है तुम्हारे पिता जी का इस सहर में अगर किसी को पता चल गया की शेठ धनराज की बेटी बिन ब्याहे माँ बनने वाली है तो क्या होगा हमारी कितनी बदनामी होगी .

धनराज: अभी भी कुछ नहीं बिगड़ा है बुलाओ उस लड़के को हम उस से बात क्र के जल्द से जल्द इसकी शादी करा देते है फिर किसी को पता भी नहीं चलेगा.

फिर दिव्या मुझे फ़ोन क्र के आने को बोलती है जिसका मई बेसब्री से इंतजार क्र रहा था मई रम्भा को लेकर निकल गया दिव्या के घर की तरफ और रस्ते में उसे सब समझा दिया की उसे क्या करना है.

हम दिव्या के घर के अंदर गए वह हॉल में पहले से hi सभी लोग हमारा इंतजार क्र रहे थे.

मुझे देखते hi दिव्या के पापा याने की मेरे मां जी बोले.

धनराज: ओह्ह तो तुम हो टाइगर उम्र तो इतनी सी है लेकिन काम बड़े बड़े क्र रहे हो .

मई : मेरा जन्म hi बड़े काम करने के लिए हुआ है, ये सब तोड़िये आप बे मुझे क्यों बुलाया है वो बताइये.

धनराज: काम hi तुम इतने बड़े बड़े क्र रहे हो इसी लिए बुलाया है आओ बैठ के बात करते है.

फिर मई और रम्भा वह के एक बड़े सोफे पर बैठ गए.

धनराज : देखो जो हो गया उसे भूल जाओ मई तुम्हारी और दिव्या की शादी करवाना चाहता हु तो अपने मम्मी पापा को बुला लो मई उससे hi बाकि की बात क्र लूंगा.

मई : शादी और वो भी तुम्हारी बेटी से है है है है..

वर्षा: देखो बीटा दिव्या तुम्हारे बच्चे की माँ बनने वाली है इस लिए हम सोच रहे थे की.....

अभी वो कुछ जायदा hi बोल पति मैंने बिच में hi उसकी बात को काटते हुए.

मई : देखिये आंटी जी आज कल के दौर में ये सब कॉमन है गर्लफ्रेंड बॉयफ्रेंड में ये सब आम बात है रात गयी बात गयी उसके बाद सब चीज भूल जाना चाहिए मेरी मनो तो बच्चा गिर्वा दो.

धनराज : ये लड़के तू मुझे जनता नहीं है सन्ति से बात क्र रहा हु इसलिए मुझे कोई मामूली आदमी न समझ लेना अभी खड़े खड़े यही दफना दूंगा किसी को पता भी नहीं चलेगा.

मई : और आप मुझे मामूली लड़का समझ रहे है भूल गए आपके प् और उन गुंडों का क्या हॉल किया मैंने ये सब छोडो आप ने तो मुझे बचपन में hi मुझे मरने की कोसिस की थी तब नहीं मर पाए तो अब मुझे क्या मर पाओगे.

धनराज: उस दिन का तो मुझे यद् है क्यों की मुझे तुमलोगो की नजदीकियों का पता चला था मगर बचपन में कब..... एक मिनट कोण हो तुम ? ओह मई जान क्यों नहीं पाया जब तुम्हारा नाम मुझे पता चल टाइगर .

मई : ओह तो पता चल hi गया मां जी.

वर्षा: एक मिनट कोई मुझे भी बतायेगे की ये क्या हो रहा है और ये लड़का आपको मां जी क्यों बोल रहा है.

धनराज: ये आरती का बीटा है इसके hi दादा hi के कारन हम ने अपने सहर घर सब छोड़ा था और ये अपने दादा का बदला लेने यह आया है.

मई : है मई बदला लेने यह आया हु लेकिन अपने घर वालो को ये नहीं बताया की आपने अपने दोस्तों को मुझे मरने के लिए भेजा था इसी कारन दादा hi और पापा आपको धुंध रहे थे .

वर्षा: क्या ये सही बोल रहा है जी.

धनराज: नहीं ये झूठ बोल रहा hai,kya साबुत है तुम्हार पास की तुम सच बोल रहे हो .

मई : अभी मुझे 30 मिनट का समय दीजिये मई अभी दूध का ढूंढ और पानी का पानी क्र दूंगा रम्भा तुम यही रुको मई आता हु.

फिर मई घर से बहार आया और तेजी से उड़ते हुए पंहुचा अपने सहर और फिर उन तीनो को लेकर आया 25 मिनट में मई ुन्तीणो को लेकर आ गया .

रंजीत: तुम हमे खा लेकर आ गए.

मई : यही तुम लोगो का पुराण दोस्त राजवीर रहता है अब अंदर तो चलो और जो जो भी तुम ने मुझे बताया था उसे उनके घर वालो को बताना समझ गए.

आगे जारी रहेगा....
 
अपडेट 122

मई उन तीनो को लेकर घर के अंदर गया तो देखा की मां और ममी को रम्भा ने फ्रीज़ क्र दिया है और बाकि आराम से बाटे क्र रहे है.

मई : रम्भा ये सब क्या है.

रम्भा: ये इधर उधर बहुत hi थे थे तो मई इन्हे फ्रीज़ क्र दिया तो आपकी ममी जी भी मुझे इन्हे छोड़ने को बोलने लगी तो मैंने इन्हे भी फ्रीज़ क्र दिया .

मई: ठीक है अब फ्री करो इन्हे.

फ्री होते hi धनराज अपने पुराने साथियो को देख क्र थोड़ा अचम्भे में पद गए.

मई : क्या हुआ मां जी यही है न आपके पुराने dost.(Ranjit से) चलो अब बोलो जिस लिए तुम्हे लाया गया है.

रंजीत (वर्षा से) हमे माफ़ करना भाभी हम कॉलेज के समय आपने जो मुझे थप्पड़ मार क्र बेज्जित किया था उसका बदला हम लेना चाहते थे और इसलिए हम ने उस रात हम ने एक प्लान बनाया की राजवीर को सरब पीला क्र हम उसे उसके परिवार वालो के साथ लाडवा देंगे फिर राजवीर को फसा क्र जेल में डलवा देंगे फिर वर्सा से अपने अपमान का बदला आराम से ले लेंगे .

धनराज: सालो कमीनो तुम लोग मेरे साथ ऐसा करना चाहते थे.

मई : रुक जाओ मां जी इन्हे आगे तो बोलने दीजिये है भाई बोल.

अमरीश : राजवीर को एक और बेटी पैदा होने पर बहुत अफ़सोस जो रहा था इसलिए हमे वो मौका मिल hi गया और जिस दिन हम ने राजवीर को सरब पिलाई और उसको खूब भड़काया जिससे वो अपने बहन के बेटे को मरने पर उतारू हो गया और हम उसको मर क्र राजवीर का नाम ले देते जिससे वो जेल चला जाता और हम ऐश करते.

(अब से धनराज को मई राजवीर लिखूंगा)

वर्सा: (राजवीर से) वह जी वह मतलब आप भी बीटा बेटी में फर्क करने लग गए तभी मई सोचती थी की आप नीलम को इतना प्यार क्यों नहीं देते है अरे टाइगर वो भी तो अपने बेटे जैसा है फिर आपने उसे मरने की कोसिस की मुझे तो सरम आ रही है आपको अपना पति मानते हुए, आप तो ऐसा नहीं सोचते थे बीटा हो या बेटी सभी एक सामान मानते है और टाइगर भी तो अपने hi बेटे जैसा है फिर आप ने उसे मरने की कोसिस की और इल्जाम इसके दादा जी पर लगा दिया की ये तुम्हे मरना चाहते है .

राजवीर: मुझे माफ़ क्र दो वर्षा मई इनलोगो के बहकावे में आ गया था और इतनी बड़ी गलती क्र दी जिसके कारन मई अपनी बहन से hi दूर हो गया मुझे माफ़ क्र दो टाइगर मई तुम्हे मरवाने की कोसिस की , मई आरती और तुम्हारे घर वाले सभी से माफ़ी मैग लूंगा जिससे मेरे कारन तकलीफ हुई .

मई : कोई बात नहीं मां जी आप बे माफ़ी मांग ली और आपने जो भी किया सब इनलोगो के बहकावे में आकर किया चलिए अब सब ठीक हो गया है मई कल hi माँ और पापा को यह बुला लेता हु वो लोग भी आप लोगो से मिल क्र खुस हो जायेंगे.

राजवीर: है बुला लो बीटा मई उनसे हमारा और दिव्या की शादी की बात भी क्र लूंगा ,अब तो तुम दिव्या से शादी करोगे na,beta अगर तुम ने न क्र दिया तो उसकी जिंदगी ख़राब हो जाएगी .

मई : मां जी मई दिव्या से शादी नहीं करूँगा.

राजवीर: क्यों बीटा .

मई : मई आपका पैसा बचाना चाहता हु.

राजवीर: बीटा तुम दिव्या से शादी नहीं करोगे तो हमारी नक् कट जाएगी इसमें मई पैसे बचा के क्या करूँगा मुझे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा है .

मई: ये बात आप अपने घर वालो से hi पूछ लो.

मेरी इस बात पे सभी हसने लगते है.

राजवीर: अब तुम लोग है क्यों रहे हो कोई मुझे भी बतायेगे की ये हो क्या रहा है.

मई : मां जी मई आपको बताता हु और पहले इनलोगो को यह से भेजते है.

राजवीर: नहीं इनलोगो को मई ऐसे hi नहीं छोडूंगा इनके कर्णन hi मई तुम सब को अपना दुसमन बना लिया मई इन्हे ऐसे जाने नहीं दूंगा.

मई : मां जी कानून इनको इनकी करनी की सजा दे चुकी है अब ये लोग सराफत की जिंदगी hi रहे है इन्हे जाने दीजिये, रम्भा इनको बहार छोड़ क्र इनके जाने का प्रबंध क्र दो.

मई : है तो मई कह रहा था की मां जी दिव्या प्रेग्नेंट नहीं है.

राजवीर: क्या ! पर डॉक्टर ने तो बोलै था की वो प्रेग्नेंट है.

मई : वो सब मेरे hi कहने वे किया गया है और िस्काम में इनसभी ने मेरी मदद की .

राजवीर: मतलब ये सभी लोग तुमसे पहले से hi मिले हुवे है.

मई : है मां जी और मई दिव्या से hi नहीं बल्कि आपकी सभी बेटियों से शादी करना चाहता हु जिससे आपके पैसे भी बच जायेंगे.

राजवीर: क्या सभी से पर ये...

तभी दिव्या दीपिका और नीलम एक साथ अपने पापा को बोलने लगी- प्लीज पापा मन जाइये न हम तीनो टाइगर से प्यार करते है प्लीज पापा.

वर्षा: ाजी अब है भी बोल दीजिये इसी में hi हमारी भी खुसी है तीनो बच्चे साथ में रहेंगे हमे और क्या चाहिए.

राजवीर: ठीक है मई बात करता हु आरती से अब खुस.

फिर मैंने रम्भा से कह क्र स्नेहा को भी बुला लिया वो भी सब से मिल क्र खुस हो गयी ,हम ने साथ में hi व्ही खाना खाया फिर हम ने जाने की आज्ञा मांगी तो ममी जी में हमे व्ही hi रुक जाने के लिए कहा तो हम व्ही रुक गए मैंने माँ को फ़ोन क्र के बता दिया था की वो कल यह आ जाये उनके लिए सरप्राइज है.

रात में मैंने तीनो बहनो के साथ थोड़ी बहुत मस्ती की फिर हम सो गए .

नेक्स्ट डे मैंने मां जी और ममी को छोड़ सब को उठा दिया और हम सब साथ में hi पार्क गए उधर भी यू hi टाइम पास हो गया आज हमे कॉलेज तो जाना नहीं था क्यों की मम्मी पापा जो आने वाले थे.

सुबह हम ने साथ में hi ब्रेकफास्ट किया फिर दोपहर से पहले hi मम्मी पापा को मैंने जो एड्रेस दिया था वो व्य पे आ गए

फिर हुआ मिलाप भाई बहन का दोनों ने गले सिक्वे दूर किये मां ने पापा से भी माफ़ी मांगी फिर हुई मेरी बात चित .

मां: आरती तुम्हारे बेटे ने तो मेरी पूरी की पूरी दौलत अपने नाम करवा ली है.

आरती : वो कैसे भैया.

मां: मैंने अपनी पूरी दौलत अपने तीनो बेटियों के नाम की थी और वो ुन्तीणो को hi तुम्हारी बहु बनाना चाहता है.

आरती: तीनो मतलब दिव्या दीपिका और Neelam,he भगवान् ये हो क्या रहा है ये लड़का क्र क्या रहा है यह, रुको अभी .

तब माँ ने मुझे आवाज लगाई.

आरती: टाइगर टाइगर खा हो अभी मेरे पास आओ.

मई भागते हुवे माँ के पास गया.

मई : क्या हुआ माँ आपने बुलाया मुझे.

आरती: ये मई क्या सुन रही हु तू यह पढाई के लिए आया था या कुछ और करने.

मई (अनजान बनते हुवे) : क्या हुआ माँ बात क्या है.

आरती: ये मई क्या सुन रही हु तुम भैया की तीनो बेटियों को मेरी बहु बनाना चाहते हो अरे पागल अभी तुम्हारी उम्र hi क्या हुई है जो ये सब काम क्र रहा है एक तो ठीक है और तीनो.

मई : माँ मई क्या कृ ये तीनो hi मेरे पीछे पड़ी है मुझ से शादी करो मुझ से शादी करो मई किसी का दिल दुखाना नहीं चाहता था इस लिए तीनो को है क्र दी आगे आपकी मर्जी.

आरती: दिव्या दीपिका नीलम तुम भी आओ यह.

वो तीनो भी माँ के पास आकर कड़ी हो गयी.

आरती : ये टाइगर क्या बोल रहा है तुम तीनो बे मेरे बेटे को फसाया है मई तो एक से hi इसकी शादी करौगी और वो कोण होगा तुम लोग डीडे क्र लो .

तभी तीनो माँ के पैरो में आकर कहने लगी.

तीनो : बुआ हम टाइगर से बहुत प्यार करते है हम से उन्हें जुड़ा मत करो आप जो बोलेंगी हमे सब मंजूर है.

तभी ममी वह आ गयी.

वर्षा: अरे वह आरती तुम ने तो अभी से hi सास वाला रूप दिखा सुरु क्र दिया तीनो को hi अपने पैरो पे ले आयी.

आरती: नहीं भाभी मई तो मजाक क्र रही थी असल में तीनो hi मुझे बहुत पसंद है और मई सास हु इनकी इतना तो हक़ बनता है न मेरा.

Varsha:vo तो है और तुम तीनो जाओ और अपने सास और ससुर के लिए बढ़िया सा खाना बना के दिखो नहीं तो तुम्हारी सास तने मारेंगी की सदी से पहले तुम्हारी माँ ने कुछ नहीं सिखाया.
 
अपडेट 123

फिर तीनो बे मिल क्र खाना बनाया और हम ने साथ में hi मिल क्र खाना खाया .

आरती: वह क्या खाना बनाया है मेरी बहुवो ने मजा आया गया खाना कहकहे .

माँ ये सब बोल रही थी तब रम्भा का चेहरा मुरझाया हुआ था क्यों की वो भी तो मेरी पत्नी थी लेकिन मैंने घर में ये बताया hi नहीं था और जब सास अपने दूसरे बहु की बड़ाई करे तब दूसरी बहु पर क्या बिताती है ये तो लड़किया hi बता सकती है खैर छोडो मैंने रम्भा का चेहरा पढ़ लिया वो बेचारी चुप चाप खाना खा रही थी फिर सब बे खाना खाया और माँ ने तीनो को पैसे दिए बोली की ये सगुन के पैसे है रखना hi पड़ेगा तीनो ने पैसे रख लिए , फिर हम सभी ने साथ में बैठ क्र बात चित की और बाद में माँ ने बुआ के घर से होते हुए अपने घर जाने के लिए मां से कहा तो मां ने कुछ दिन रुकने की जिद की पर पापा ने अपने बिज़नेस के कारन फिर कभी आने की बात कही मां ने भी यह के अपने बिज़नेस को समेत क्र फिर से अपने सहर जाने की बात कही जिससे पुरे परिवार वाले खुस थे और फिर वो बुआ की घर की तरफ निकल गए हम भी साथ में बुआ के घर गए मैंने वह पर नार्मल hi बेहवे किया उन्होंने भी ऐसा hi किया जिससे माँ पापा को सक न हो की मई वह पर नहीं रहता माँ पापा खुस थे की बुआ के यह फिर से नन्हा मुंह मेहमान आने वाला है बीएस कुछ hi महीनो की बात है, वह जाने पर पता चला की समिति भी सीतल के बुलाने पर अमेरिका जाना चाहती है और बुआ की वजह से जा नहीं पा रही है थोड़ी देर बुआ के घर में रुक क्र माँ पापा जाने वाले थे उन्होंने स्नेहा को भी अपने साथ चलने के लिए कहा स्नेहा तो तैयार नहीं थी लेकिन उनको जाना hi था क्यों की उसको यह रुकने का और बहाना नहीं मिला मैंने धीरे से रम्भा को बोलै की वो स्नेहा का सारा सामान लेकर यह आ जाये तो वो चली गयी और सारा सामान लेकर आ गयी बुआ को अपना धयान रखने को कहा और मुझे भी बुआ का धयान रखने को कहा गया क्यों की माँ पापा को मालूम नहीं था की मई यह नहीं रहता मई समिति से भी अकेले में मिला वो भी मुझ से गले लग क्र तो रही थी वो भी तो मेरी पत्नी hi थी और मई उस से बहुत दिनों बाद मिल रहा था वो थोड़ी इमोशनल हो गयी मैंने उसे संत करवाया और उसे कुछ दिन और रुकने को कहा , काव्य तो बीएस मुझे देखती hi रही लेकिन मुझ से बात तो दूर वो मेरे पास भी नहीं आयी फिर माँ पापा स्नेहा को अपने साथ लेकर निकल गए स्नेहा का चेहरा मुरझाया हुआ था वो मुझे छोड़ क्र जाना hi नहीं चाहती थी मगर उसे जाना hi था फिर मई और रम्भा भी वह ने निकल गए शाम हो चुकी थी स्नेहा के बिना मुझे और रम्भा को भी घर सुना सुना लग रहा था इसलिए हम ने बहार से hi खाना मगाया फिर हम ने साथ में खाना खाया और फिर सोने के लिए आ गए वह भी खली खली लगा क्यों की हम तीनो hi साथ में सोते थे खाई हम लेट गए अब स्नेहा नहीं थी तो मुझे भी कुछ करने का मन हुआ तो मैंने रम्भा का चेहरा अपनी तरफ किया वो मुझे देखने लगी फिर उसने मुझे जोर से गले लगा लिया

फिर मैंने उसके टॉप को निकल क्र नीच गिरा दिया उसकर चूचे मस्त दिख रहा था ब्रा के , ऊपर से बहार आने के लिए तड़प रहा था मस्त जवानी थी उसकी 20 की उम्र थी, मैंने उसके चूचे (बूब) को पकड़ के दबाने लगा, वो बहुत थी टाइट था और साइज करीब 34 का था, मैंने उअके ब्रा के हुक खोल दिया और और उसे निकल क्र फेक दिया अब तो क्या बताऊ ऐसे बहुत hi टाइट चुकी थी उसकी निप्पल पिंक कलर का मैंने चूसना शुरू किया “वो तो पागल हो रही थी aaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhh ohhhhhhhhhhhhh मैं मर jawaaaaaaaaaaaaaaa jeeeeeeeeeeeeeeee, क्याआआआ कर रहे हो, डाट से नहीं प्लीसीईईई जीवः से कर लो, काटना नहीं pleaseeeeeeeeeeeeeeee. और वो गरम हो गयी और बीएड पे लेट गयी, मैं उसके जीन्स के बताना खोल दिया और पंतय भी उतार फेकि.

और अपना भी पजामा खोलकर नंगा हो गया और उसपर चढ़ कर किश करने लगा दोनों ने करीब 5 मं तक किसिंग की फिर उसने मेरे सर का बाल पकड़ में अपने boor(chut) के पास ले गयी मैंने चाटना शुरू किया, अब्बब्बब्बब्ब नहीं प्लीज देर मत करो प्यास बुझा दो, बहुत दिनों से परेशान हु पहले कुछ नहीं होता था लेकिन जब उस दिन आपने किया तब से दुबारा करने का मन हो रहा है. मैं भी देर ना कर अपना लुंड निकला और लुंड के सुपडे को उसके बूर के पास रख के कास के धक्का लगाया और पूरा 7” का लुंड बूर के अंडर, वो तो एकदम hi चीला उठी. maaaaaaaaaaaaaaar diyaaaaaaaaaaaaaaa, मैं मर गैईईई, पहात गयाआआआ मेरा booorrrrrrrrrr, मैंने तुरंत उसका मुँह बंद किया नहीं तो वो उस घर में जितने भी लोग वो जग जाते ये मेरे बहुत दिनों बाद सेक्स करने का नतीजा था जो मैंने एक बार में hi अपना लैंड दाल दिए .

रम्भा: आराम से करिये न दर्द होता है ,मई कही भागी तो नहीं जा रही हु.

फिर मैंने धीरे धीरे अपने लैंड को आगे पीछे करना स्टार्ट किया तो रम्भा को अच्छा लगने लगा फिर मैंने भी थोड़ी अपनी गति बढ़ा दी रम्भा ने अपने पेअर फैला के ये साबित क्र दिया है की उसको भी मजा आ रहा था.

अब मैं लुंड रम्भा की छूट में डेल आराम से उसके मुम्मे चूस रहा था और रम्भा मेरे सर पर और पीठ पर अपने नाज़ुक हाथ फेर रही थी अब रम्भा का दर्द भी ठीक हो गया था इसलिए उसने निचे से अपनी गांड को ऊपर की तरफ उठाना शुरू कर दिया मैंने भी dheere-dheere झटके लगाने शुरू क्र दिए. कुछ देर बाद हम दोनों की एक रिथम सी बन गयी जब लुंड बहार को जाता तो वह अपनी गांड भी निचे को ले जाती जब लुंड अंदर को दाखिल होता तो वह भी अपनी गांड ऊपर को उठा देती हम दोनों मज़े की वादियों में खोये हुए थे एक दूसरे को बुरी तरह चूम और चाट रहे थे. अचानक रम्भा ने मुझे जोर से झटके मरने को कहा मैंने भी dhere-dheere अपने झटको में तेज़ी पैदा की अब निचे thappp...thappp...thappp की आवाज़े आ रही थी रम्भा की छूट बुरी तरह पानी छोड़ थी अब उसने अपनी गांड को निचे से जोर से हिलना शुरू कर दिया मैं भी अब उसको और तेज़ी से झटके लगा रहा था फ़िज़ा ने अपनी दोनों तांगे हवा में उठके मेरी कमर के ird-gird लाटेप ली अचानक उसकी तांगे फिर से कांपने लगी और उसने मुझे जोर से अपने गले से लगा लिया मैं निचे से लगातार जोर से झटके लगाए जा रहा था और एक तेज़ आआह्ह्ह्हह्ह टाइगर मेरिइइइइइइ जाननननननननन कहती हुई रम्भा ठंडी पद गयी मैं अभी भी ठंडा होने के कही करीब नहीं था इसलिए झटके लगता रहा अब रम्भा ने मुझे ऊपर से हटने का इशारा किया और खुद मेरे ऊपर आ गयी और मेरे लुंड को पकड़ कर छूट की मोरी पर सेट करके एक आअह्ह्ह्ह के साथ लुंड पर बैठती चली गयी. अब उसकी छूट ने एक hi झटके में पूरा लुंड अंदर ले लिया था बिना रम्भा को किसी क़िस्म का दर्द दिए शायद अब उसकी छूट खुल गयी थी. अब वह मेरे ऊपर थी और मैं निचे लेता था रम्भा ऊपर निचे हो रही थी उसके इस तरह से करने से उसकी बड़ी गांड thapppp.....thapppp की आवाज़ पैदा कर रहे थे अब वह मेरे ऊपर लेट गयी और फिर से मेरे होठ चूसने लगी निचे से उसकी गांड लगातार झटके लगा रही थी मैंने उसके मुम्मो को अपने दोनों हाथो से थाम लिया और उसकी निप्पल्स को अपने अंगूठे और उंगली की मदद से मरोड़ने लगा जिसमे उससे शायद बोहोत मज़ा आ रहा था कुछ hi देर में उसके झटके जोरदार हो गए वह लगातार तेज़ी से ऊपर निचे हो रही थी मैंने भी निचे से अब झटके लगाना शुरू कर दिया था वह मज़े से मेरी छाती पर हाथ फेर रही थी और झटके लगा रही थी कुछ hi देर में वह aaahhh.....aaahhh करती हुई फिर से ठंडी पद गयी और मेरी छाती पर hi लुढ़का गयी और tez-tez सांस लेने लगी. थोड़ी देर लेटने के बाद उसने मेरे कण में कहा पति जी आपका हुआ नहीं मैंने ना में सर हिला दिया उसने फिर से मेरे होठ चूम लिए और मुझे ऊपर आने का कहा

मैंने उसका बाजु पकड़ कर उसको उठाया और घुमा कर उसको दोनों घुटनो पर दोनों हाथो पर किसी जानवर की तरह खड़ा कर दिया उसको कुछ समझ नहीं आ रहा था क्योकि ये तरीका उसके लिए शायद नया था. मैंने अँधेरे में अंदाज़े से उसकी छूट को ढूंढ कर लुंड को निशाने पर रखकर एक जोरदार झटका लगाया मेरे लुंड उसकी छूट को खोलता हुआ अंदर चला गया उसके मुँह से एक "आगयीईईईईई ससीईईई आराम से करो" की आवाज़ निकली. अब मैंने उसकी बड़ी सी गांड को अपने दोनों हाथो में थमा और tez-tez झटके लगाने शुरू कर दिए जो उसको और भी मज़ेदार लगे. अब मैंने एक हाथ से उसके लम्बे बालो को पकड़ लिया था और दूसरे हाथ से उसकी गांड पर थप्पड़ मरते हुए उस्सकी बुरी तरह छोड़ना शुरू कर दिया उसके लिए यह सब नया था इसलिए उसको मेरे ऐसा करने से दर्द भी हो रहा था और मज़ा भी बोहोत आ रहा था इसलिए उसने एक हाथ से अपना मुँह बंद कर लिया ताकि आवाज़ निचे ना जाये अब मैं बुरी तरह से उसको छोड़ रहा था और उसके मुँह से सिर्फ mmmm....mmmm की आवाज़ निकल रही थी मेरे इन् तेज़ झटको से वह 2 बार और झाड़ चुकी थी लेकिन मेरी इतनी जबरदस्त चुदाई से वह फिर गरम हो जाती थी अब मैं भी मंज़िल के करीब hi था इसलिए अपनी रफ़्तार में और इज़ाफ़ा कर दिया अब मैंने एक हाथ से उसके लम्बे बाल पकडे थे और दूसरा हाथ निचे से उसके मुम्मे को थामे jor-jor से दबा रहा था और अचानक एक तेज़ bahav.mere लुंड में पैदा हुआ मुझे ऐसा लगा जैसे मेरे लुंड में से कुछ निकलने वाला है इसलिए मैंने अपनी रफ़्तार फुल स्पीड kardi...poori कोठरी में तेज़ thappp.....thappp की आवाज़ आ रही थी. लेकिन अब हमे निचे आवाज़ जाने की भी परवाह नहीं थी और हम दोनों अपनी मंज़िल को पाना चाहते थे अचानक मेरे लुंड ने पहला झटका लिया और एक पिचकारी मेरे लुंड से निकली और रम्भा की छूट में गिरी पहली के बाद दूसरी फिर तीसरी फिर चौथी ऐसे hi मेरे लुंड ने कई झटके खाये और काफी सारा गाड़ा माल रम्भा की छूट में hi छोड़ दिया रम्भा भी अब ठंडी हो चुकी थी लेकिन उसकी छूट अब भी मेरे लुंड को अंदर की तरफ दबा रही थी जैसे मेरे लुंड को अंदर से चूस रही हो और एक भी कटरा बहार निकलना उससे मंजूर न हो. रम्भा अब अपना मुँह बिस्तर पर गिराए हांफ रही थी मैं भी tez-tez सांस ले रहा था मज़े का यह तूफ़ान थम चूका था. हम दोनों hi तेज़ साँसों के साथ एक साथ बिस्तर पर लेते थे रम्भा मेरे सीने पर सर रखे मेरे पेट पर हाथ फेर रही थी और मेरे सीने को उसको होठ चुम रहे थे. थोड़ी देर रुर क्र हम फिर सुरु हो गए मैंने रम्भा को पूरी रात सोने नहीं दिया.
 
अपडेट 124

मई तो सोया hi नहीं सुबह 5बजे मई गार्डन पहुंच गया आज वह तीनो बहन पहुंच गयी.

मई : ा रे क्या बात है आज तीनो hi यह पहुंच गयी मई सोच रहा था की आज थोड़ा दिव्या से कोने में रोमांस करूँगा पर तुम तीनो आ गयी तो जाने दो .

नीलम : तुम बोलते बीएस हो तुम से कुछ होता नहीं है.

न्यास hi मेरे मुँह से निकल गया : अभी एक को निपटा के आ रहा हु वो अभी hi सोइ है.

दिव्या : क्या.. मतलब तुम ने स्नेहा के जाते hi रम्भा के साथ सुरु हो गए .

दीपिका : दीदी आपकी तो अभी शादी भी नहीं हुई है लेकिन मेरी और नीलम की तो रम्भा से पहले hi इसके साथ शादी हो गयी है लेकिन हमे अब तक इन्होने छुआ भी नहीं.

दिव्या : तुम दोनों ने तो शादी भी क्र ली है मगर मेरा पता नहीं क्या होगा कब होगी मेरी सदी.

नीलम: ये क्या आप दोनों भी क्या बात लेकर बैठ गए संत रो अब, टाइगर पापा कह रहे थे की इसी महीने में hi वो अपना पूरा बिज़नेस समेत क्र हमारे पुराने सहर चले जायेंगे बीएस हम तीनो बहने hi यह रहेंगी.

मई : वह ये तो बड़ी अच्छी खबर है घर में कोई नहीं रहेगा तो मई बरी बरी से तुम लोगो का खता भी खोल दूंगा .

नीलम : टाइगर तुम भी ये कैसी बात करते हो मेरी दोनों बहने है साथ में अकेले में बोलै करो न ऐसी बाटे.

दिव्या: वह रे छुटकी लगता है तुझे बड़ी जल्दी है खता खुलवाने के लिए जो तू हम से शर्मा रही है.

दीपिका: बीएस हो गया आप दोनों का , टाइगर रम्भा अभी hi सोइ है तो तुम्हारे लिए लंच कोण बनाएगा ,आज तुम कॉलेज तो आ रहे हो न..

मई : है मई कॉलेज आ रहा हु और कुछ मई बना लूंगा अपने खाने के लिए तुम टेंशन मत लो ,है दिव्या तुम न बिच में घर पर आ जाना क्यों की अब स्नेहा तो नहीं है तो रम्भा अकेली हो जाएगी तो तुम आओगी तो उसे भी कंपनी मिल जाएगी.

दिव्या: ठीक है मई आ जाउंगी.

फिर हम लोग अपने घर चले gye,vha जाकर देखा तो रम्भा अभी भी सो रही थी मैंने उसे जगाना ठीक नहीं समझा और जल्दी से नहा धोकर अपने लिए ब्रेकफास्ट बनाया और खा पि क्र निकल गया कॉलेज की तरफ आज संध्या और उसका बर्फ पहले से hi यह आ गया मई भी अपने ग्रुप के पास चला गया.

वह जा के पता चला की रॉकी अपने दोस्तों के साथ कहि एन्जॉय करने जा रहा है और सब अपने अपने गर्लफ्रेंड को भी लेकर जा रहे है , मैंने इस बारे में विनोद से बात की तो वो बोलै की वो उसकी लाइफ है वो जैसे छे जिए मई इसमें कोई इंटरफेरे नहीं क्र सकता तो मैंने भी जायदा धयान नहीं दिया.

खैर मैंने मिस अलका को इस संडे मिलने का वादा किया फिर कुछ खास नहीं हुआ.

इधर मेरे कॉलेज जाने के बाद घर में दिव्या आयी तो रम्भा अभी भी सो रही थी तब दिव्या ने जाकर उसे उठाया.

दिव्या: ो महा रानी कितने समय तक सोती रहोगी पति को बिना खिलाये hi कॉलेज भेज दिया.

रम्भा क्या वो कॉलेज चले गए उसने मुझे उठाया भी नहीं मई कुछ नास्ता बना देती हे भगवान् ये मुझ से क्या हो गया पति को बिना खिलाये hi भेज दिया.

ये सब उनकी hi गलती है रात भर सोने hi नहीं दिया मुझे..

दिव्या : मतलब तुम्हारे hi ऐश है अभी जो पति रात भर सोने नहीं दिया हमारी तो शादी भी नहीं हुई है हम तो सिर्फ किश से hi काम चला रहे है, खैर छोडो चलो उठो रेडी हो जाओ हम आज शॉपिंग करने चलते है.

इनलोगो को शॉपिंग करने देते है हम वापस कॉलेज चलते है वह पर जब क्लास ऑफ हो गया तो हम सभी घर जाने के लिए निकल रहे थे अलका मिस भी जाने के लिए निकल रही थी मगर उनकी कार स्टार्ट hi नहीं हुई तो वो कार से बहार निकल क्र इधर उधर देख रही थी सायद किसी से लिफ्ट लेने के लिए और मई यह सभी अपने दोस्त को कल मिलने को बोल क्र निकलने hi वाला था की अलका मिस ने मुझे आवाज दिया.

अलका मिस: टाइगर... टाइगर...

मई गाड़ी घुमा क्र उनके पास गया.

मई: जी मिस आपने मुझे बुलाया.

अलका: वो क्या है न की मेरी कार ख़राब हो गयी है तो क्या तुम मुझे घर तक छोड़ डोज.

मई : है मिस क्यों नहीं आइये मई छोड़ देता हु.

फिर अलका मिस मेरे बाइक में बैठ गयी और no मुझे रास्ता बताती गयी और मई उस रस्ते पर चलता गया फिर एक आलीशान बंगले के बहार मुझे रुकवाया गेट कीपर में सलाम करते हुए गेट खोला और मैंने बाइक अंदर की तरफ ले गया मैंने मिस को उनके घर के दरवाजे के पास उतरा तो मिस में मुझे अंदर चलने को खा.

मई : नहीं मिस मई चलता हु फिर कभी आऊंगा.

अलका : नहीं तुम्हे अभी hi आना है मतलब आना है तुम कब से बोल रहे हो आऊंगा आऊंगा लेकिन आते hi नहीं आज तुम आये हो तो मई तुम्हे ऐसे नहीं जाने दूंगी अब चलो भी .

मई : थी है आप अंदर चलिए मई एक कॉल क्र के आता हु.

फिर मिस अंदर चली गयी और मई दिव्या को फ़ोन लगाया और खा की मुझे आने में थोड़ा समय लग सकता इसलिए तुम रम्भा को अपने साथ hi रखना.

फ़ोन रखने के बाद मई अंदर गया तो घर जितना बहार से खूबसूरत लग रहा था अंदर से और भी खूबसूरत लग रहा था.

मई अंदर जाकर हॉल के सोफे पर जाकर बैठ गया और बंगले की खूबसूरती देख hi रहा था की मिस चेंज क्र के हॉल में आयी , चेंज करने के बाद मई मिस को hi देखने लगा .सच में वो अभी भी जवान और खूबसूरत थी.

अलका: ऐसे क्यों देख रहे हो मुझे.

तो बे कॉन्टिनोएड
 
छोटा अपडेट के लिए सॉरी अभी इसी से काम चला लीजिये
 
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