Incest The Tiger - Page 16 - SexBaba
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Incest The Tiger

अपडेट 108

मई उसे दिखने के लिए एक तरफ चला गया फिर जब वो वह से हटा तब मई दूसरे टेंटो को देखने क्र लिए जा hi रहा था की मुझे कुछ आवाज सुनाई दी तो मई उस आवाज का पीछा करते हुए एक टेंट के पास गया ,पास से ये आवाज किसकी है ये मुझे पहचानते हुए जरा सी भी देर नहीं लगी क्यों की ये आवाज मेरी पायरी छोटी बहन सोनम की थी मई टेंट के अंदर झक क्र देखा तो एक आतंकवादी जो सायद इन लोगो का लीडर लग रहा था वो सोनम से बात क्र रहा था .

लीडर : देखो तुम मान जाओ तुम एक अच्छी फाइटर को अगर तुम हमारे साथ मिल जाओ तो हम तुम्हारी फॅमिली को छोड़ देंगे.

सोनम : नहीं कभी नहीं मई तुम्हारा साथ देकर अपने देश से गद्दारी कभी नहीं करुँगी चाहे मई मर क्यों न जाऊ .

लीडर : देखो मई आखरी बार बोल रहा हु मन जाओ नहीं तो बहुत hi बुरा हो सकता है तुम लोगो के साथ वैसे भी कल 15 अगस्त है और कल hi हम हुम्ला करेंगे.

तभी मई टेंट के अंदर चला गया

मई : जनाब जब वो आपका साथ नहीं देना चाहती तो क्यों दबाव दाल रहे है आप.

लीडर : कोण हो तुम और तुम्हे अंदर आने को किसने खा .

अभी वो कुछ क्र पता मैंने अपनी तलवार निकली और उसका सर धड़ से अलग क्र दिया.

ये देख क्र सोनम भी डॉ गयी जब मई उसके पास जाने लगा तो दर रही थी.

मई : ड्रॉ मत मेरी जान मई हु आपका टाइगर.

ये बोल क्र मैंने अपने चेहरे से नकाब हटाया , मुझे देखते hi सोनम की खुसी का ठिकाना hi नहीं था.

सोनम : भाई तुम आ गए मई जानती थी की तुम हमे बचने जरूर आओगे.

वो आकर मेरे गले से लग गयी फिर मैंने उसे बाकि सब के बारे में पूछा तो उसने बताया की उनलोगो को किसी दूसरे टेंट में रहा है .

मैंने उस आतंकवादी को व्ही छिपा दिया और सोनम व्ही रुकने को खा ोरमे निकल गया बहार दूसरे टेंटो में ढूंढने वो सभी भी मुझे एक टेंट में मिल गए .

अब इन सब को ऐसे hi बहार तो नहीं निकल सकता था इस लिए मैंने अँधेरा होने का इंतजार किया वो आतंकवादी भी अपने लीडर को ढूंढ रहे थे फिर जब अँधेरा हुआ तो मैंने सोनम को छोड़ क्र बाकि सब होटल पंहुचा दिया क्योकि सोनम दूसरे टेंट में थी, उनलोगो को होटल में छोड़ क्र मई रम्भा को अपने साथ ले लिया और वापस आतंकवादियों के टेंटो में ,और सीधा गया सोनम के पास रम्भा को देख क्र सोनम में उसके बारे में पूछा तो मई कह दिया की इसे भी अपनी छोटी बहन hi समझो.

लेकिन एक आतंकवादी ने हमे देख लिया और बहार चिल्लाने लगा मई तुरंत टेंट के पीछे हिस्से को फाड् क्र सब को बहार निकल दिया और कुछ दुरी पर जाकर रम्भा को सोनम के पास रुकने को खा .

इधर जैसे hi हम टेंट से बहार निकले सामने से कुछ आतंकवादी अँधा धुन गोलिया चलते हुए टेंट के अंदर दाखिल हुए और इधर उधर चेक करने लगे तब उन्हें अपने लीडर की लास मिल गयी वो लोग और भी आग बबूला हो गए पुरे काफिले में हलचल मच गयी सभी लोग अपने हाथो में बन्दुक लेकर इधर उधर दौड़ थे थे .

सोनम और रम्भा को सुरक्छित जगह पर छोड़ क्र मई वापस आतंकवादियों के काफिले के पास वापस आया , मई सीधा उड़ते हुए जाकर उनके बिच में hi खड़ा हो गया.

सरे आतंकवादी मुझे घेर क्र खड़े हो गए .

एक आतंकवादी : यही है वो जिसने हमारे कमांडर को मारा है मारो इसे भुञ्ज डालो गोलियों से .

मई बिच में था मुझे घेर क्र ये लोग गोलिया बरसाने लगे मई ऊपर हवा में उड़ गया जिस से इन की गोलिया सामने खड़े आतंकवादी को लगने लगी ऐसे hi ये अपने hi आदमियों को मर दिए पूरी वादियों में गोलियों की आवाजे गूंज रही थी .

मई वापस निचे आया और अपनी अपनी तलवार को हवा में hi घुमाया तो उसमे से उसमे से लेज़र बीम निकली जिससे सामने खड़े आतंकवादी दो हिस्से में कटने लगे यह तक की गन भी बिच में आयी वो भी दो टुकड़ो में काट गए.

बचे हुए आतंकवादी मुझ पर बम से हुम्ला करने लगे तो मैंने तुरंत hi एक शील्ड बना ली जो मेरी सुरक्छा क्र सके अब उनके बम्ब का भी मुझ पर कोई असर नहीं हो रहा था गोलिये भी मेरे शील्ड से टकराकर निचे गिर रही थी.

अब मई उनलोगो की तरफ भगा और जो भी मेरे पास आता गया मई उनलोगो को गाजर मूली की तरह काटने लगा.

रात होने के कारन गोलियों, बम और आतंकवादी की चीखने की आवाज दूर दूर तक जा रही थी चारो तरफ धुआँ और चीख पुकार मची हुई थी.

गोलियों और बम की आवाज ब्सफ़ वालो तक भी पहुंच गयी थी वो भी अपनी एक सेना की टुकड़ी लेकर इसी तरफ hi आ रहे थे मई सभी आतंकवादियों को ढूंढ ढूंढ क्र मर रहा था न जाने कितने आतंकी अब तक मर चुके थे जब की जो बचे हुए थे वो अपांग हो चुके थे किसी के हाथ कटे हुए थे तो किसी के पेअर और भी अंग काट हुए थे कई तो ऐसे भीषण नरसंहार देख क्र भागने भी लगे थे कुछ देर में ब्सफ़ वाले भी पहुंच गए तब तक मेरे काम हो चूका था वो मुझे देख रहे थे टोर्च की रोशनी में लेकिन जैसे hi उधर धुआँ उठा उसी के साथ hi मई वह से निकल गया और पहुंच गया रम्भा और सोनम के पास फिर उन दोनों को लेकर उड़ गया अपने होटल की तरफ जहा पर हम रुके हुए थे.
 
अपडेट 109

सभी लोग सुरक्छित उस जगह से निकल क्र होटल पंहुचा गए थे सभी लोग एक कमरे में बैठे हुए थे .

मई : आप लोग ये बताइये की आप लोग इन आतंकवादियों के चुंगल में फसे कैसे .

सुमन : वो हमलोग कश्मीर की वादियों में घूम रहे थे तो थोड़ा जायदा hi अँधेरा हो गया था और हमारा गाइड भी रास्ता भटक गया था हम लोग एक तरफ जा रहे की अचानक हमे कुछ आतंकवादियों ने गन दिखाकर हमे अपने साथ लेकर चले गए वो तो अच्छा हुआ की तुम सही समय पर आ गए वार्ना तो वो हमे मर hi डालते.

मई : चलो ठीक अब आप लोग आराम करो सुबह हमे निकलना भी है.

चची : वो तो ठीक है पर तुमने बताया नहीं की ये लड़की कोण है.

मई : ओह्ह मई तो बताना भूल hi गया था लेकिन उस से पहले आप लोगो को एक वादा करना होगा की ये बात आप लोगो के बिच hi रहेगी समय आने पर मई hi ये बात बताउगा.

सभी एक साथ : है हम वादा करते है की ये बात हमारे बिच hi रहेगी .

मई : ये रम्भा है मेरी पत्नी ,जब मई अपनी सकती की खोज में गया था इनके साथ मेरी सदी हुई और जानते हो इनके पिता कोण है, चची सायद आपको नहीं मालूम होगा ये व्ही बाबा जी की बेटी है जिन्होंने माँ को बीटा प्राप्त करने के लिए वनदेवी के पास भेजा था और उन्होंने बे hi मेरा नामकरण भी किया था ये उसी बाबा जी की बेटी है उन्होंने hi खा था की हमारा विवाह पहले से hi तय था, तो मैंने भी सदी क्र ली .

सुमन : है भाई बाबाजी की हे बात सही होती है और तुम इस बात को घर वालो से छुपाना क्यों चाहते हो..

मई : ओह दीदी बात को समझो घर में बताउगा तो तरह तरह के सवाल पूछेंगे की तू वह क्यों गया हम लोगो को भी बताया होता वगेरा वगेरा ,और मई अभी अपने बारे में नहीं बता सकता घर वालो को .

चची : चलो ठीक है अब आराम करो अपने अपने रूम में सुबह जाना भी है और है कोई भी आतंकवादी वाली घटना की बात घर में कोई नहीं करेगा नहीं तो हमे फिर कभी ऐसे घूमने जाने नहीं देंगे ok.

सभी : ok...

उसके बाद हम लोगो ने एडजस्ट क्र के आराम किया और सुबह होते hi ब्रेकफास्ट क्र के निकल गए स्टैशन की तरफ फिर वह से अपने से अपने घर आ गए रस्ते में कुछ खास नहीं हुआ बीएस उनलोगो को अपनी जर्नी के बारे में बताया एक बात मैंने उनसे छिपा ली की मैंने स्नेहा से भी सदी क्र की है .

हम खुसी खुसी अपने घर आ गए घर पर सभी बड़ो ने हमारे टूर के बारे में पूछा तो जिस जिस को जोजो अच्छा लगा वो सब बताते गए ,घर पर मैंने रम्भा का इंट्रोडक्शन फ्रेंड के रूप में कराया और बताया की ये हमे व्ही मिली और हम साथ में hi देहरादून वापस जायेंगे.

फिर व्ही हॉल में हम सब बात करते हुए बैठे हुए थे .

मई : माँ मई परसो देहरादून वापस जा रहा हु और इस बार स्नेहा दीदी को अपने साथ लेकर जाना चाहता हु.

माँ - बीटा तुम पढाई करोगे वह स्नेहा क्या करेगी जाकर.

मई : माँ जाने दीजिये न फिर कभी मौका मिले या न मिले कुछ महीनो बाद तो मेरा एग्जाम है और एग्जाम होते hi हम तुरंत वापस आ जायेंगे.

माँ : ठीक है ले जाना अपनी दीदी को अब खुस .

फिर हम सभी ने साथ में खाना खाया और फिर सोने चले गए .

रम्भा स्नेहा दीदी के साथ hi सो गयी मई पहले छोटी चची को एक बार खुस किया फिर साडी रात सुमन दीदी के साथ मजा लुटा और उनके साथ hi सो गया.

अब आइये एक नजर देहरादून की तरफ करते है.

जब मुझे काव्य में घर से निकल जाने को खा उस समय बुआ घर पर नहीं थी जब बस घर में आयी तब मुझे पुकारने लगी .

बुआ : टाइगर टाइगर खा हो देखो मई तुम्हारे लिए क्या लेकर आयी हु.

तभी कविता अपने माँ के पास आयी.

बुआ : कविता बीटा जा टाइगर को थोड़ा बुला ला.

पर कविता ने कोई जवाब नहीं दिया और व्ही कड़ी.

बुआ : जा न अब कड़ी कड़ी मेरा मुँह क्या देख रही है.

कविता : माँ वो... माँ वो...

बुआ : क्या वो वो लगा रखा है सीधे से बता न , क्या कहि गया हुआ है?

तभी समिति भी आ जाती है .....

समिति : भाभी आप मेरे साथ चलिए आपको कुछ बताना है .

बुआ : पहले मुझे ये बताओ की टाइगर खा है क्या घर पर नहीं है?

समिति : है वो अभी घर पर नहीं है अब आइये मेरे साथ.

समिति सीता को लेकर अपने रूम में जाती है और दूर लॉक क्र देती है .

सीता : अब बोल समिति बात क्या है?

समिति : भाभी मई आप से जो भी पूछूँगी उस का सही सही जवाब देना, ये आपके पेट में जो बच्चा पल रहा है उस का बाप कोण है .

सीता : ये कैसे कैसे सवाल पूछ रही हो समिति.

समिति : भाभी मैंने जो पूछा है उसका सही सही जवाब दीजिये.

सीता कुछ नहीं बोल रही थी और पीछे पलट क्र कड़ी हो जाती है .

समिति : भाभी आप को चेहरा छुपाने की जरुरत नहीं है मुझे मालूम है फिर भी मई आपके मुँह से सुन्ना चाहती हु.

सीता पलट जाती है लेकिन सर झुका हुआ hi था और वो संकोच क्र वो धीरे से जवाब देती है.

सीता : मेरे पेट में पल थे बच्चे का बाप.... टाइगर..... है.

समिति : बीएस भाभी मुझे यही सुन्ना था मुझे भी आपको बहुत कुछ बताना है.

पर सीता कुछ भी नहीं बोलती है

समिति : भाभी आपको पता है मेरी सदी हो चुकी है.

सीता : क्या ? तूने सदी क्र ली है लेकिन कब थे र लड़का कोण है .

समिति : भाभी उस लड़के को आप जानती है क्यों की वो लड़का कोई और नहीं.... Tiger.....hai....
 
अपडेट 110

सीता : क्या ? तूने सदी क्र ली है लेकिन कब थे र लड़का कोण है .

समिति : भाभी उस लड़के को आप जानती है क्यों की वो लड़का कोई और नहीं.... Tiger.....hai...

सीता : क्या बोल रही हो कुछ होस भी है.

समिति : भाभी ये सही है हम लोगो ने मंदिर में सदी क्र की थी .

सीता : पर तू ऐसा कैसे क्र सकती है तू उस से बड़ी है और समझदार भी है फिर क्यों .

समिति : भाभी आप ने क्यों टाइगर के बच्चे को अपने पेट में पल क्र रखा हुआ है और उसे hi क्यों चुना आप बे सम्बन्ध बनाने के लिए.

सीता : देख समिति इसके बहुत से कारन है पहला एक तो तुम्हारा भाई हमेसा बहार रहते है मेरी भी कुछ इच्छा होती है तो मई खा जाती बहार कहि जाती तो बदनामी का दर था.

दूसरा बेटे की छह , टाइगर के बाद से हमारे खंडन में अब बेटे hi होंगे इसलिए मैंने ऐसा किया और सबसे बड़ा कारन कूद टाइगर है पता नहीं ऐसा क्या जादू है उसके पास की मई उसके तरफ खींची चली गयी और ये सब हो गया.

समिति : बीएस भाभी यही कारन मुझमे भी लागु हुआ मई तो उसके आँखों में ढूढ hi गयी लेकिन सदी के लिए खुद टाइगर बे hi मुझे खा था वो कोई आम आदमी नहीं है अनोखा है हमारा टाइगर .

सीता : चलो ठीक है मई बात करुँगी भैया भाभी से तुम्हारे रिश्ते के लिए .

समिति : भाभी अभी भी कुछ और बताना बाकि है.

सीता : है बोलो.

समिति : भाभी हमारी तरह कविता और काव्य भी टाइगर से प्यार करती है .

सीता : क्या ?

समिति : है भाभी और जब आप बहार गयी हुई थी तब टाइगर और मई दोनों सेक्स क्र रहे थे तो दोनों ने देख लिया और दोनों ने टाइगर को बुरा भला बोल क्र घर से निकल जाने को कह दिया, लेकिन टाइगर ने उन्हें पहले hi बता दिया था की उसके और भी लोगो के साथ सम्बन्ध है फिर भी काव्य को मंजूर नहीं था.

सीता को थोड़ा इस बात से धक्का लगा और वो व्ही बीएड पर बैठ जाती है धक्का तो लग्न hi था एक hi घर में उसके पीठ पीछे इतना कुछ हो रहा था और उसे पता भी नहीं चला.

सीता धीरे से बोलती है : अब टाइगर खा है .

समिति : भाभी वो अभी अपने घर गया हुआ है .

सीता : क्या उसने क्या बताया होगा अपने घर में उसे यह से क्यों निकला गया है .

समिति : भाभी टाइगर समझदार है उसने ऐसा कुछ भी नहीं बताया होगा वो तो यह से निकलने के बाद भी अपनी पढाई के लिए अपने किसी दोस्त के घर रुका हुआ था आप बेफिक्र रहिये.

फिर सीता वह से उठ क्र बहार आती है और जोर से चिल्ला क्र काव्य और कविता को बुलाती है.

काव्य और कविता : है माँ क्या हुआ.

सीता : तुम दोनों ने टाइगर को घर छोड़ क्र जाने को क्यों खा किसने दिया तुम लोगो को ये अधिकार .

काव्य : माँ आप टाइगर के बारे में कुछ नहीं जानती उसने जो किया वो आप भी देखती तो आप भी उसे घर से निकल देती.

सीता : मुझे सब पता है टाइगर के बारे में, समिति ने मुझे सब कुछ बता दिया है पहले तुम दोनों ये बताओ की टाइगर ने तुम दोनों को पहले खा की वो तुम दोनों से प्यार करता है .

काव्य : नहीं मैंने पहले खा था.

कविता : मैंने भी पहले hi खा था.

सीता : और उसने तुम दोनों को ये नहीं बताया था की उस के और लोगो के साथ भी सम्बन्ध है .

कविता : बताया था माँ.

काव्य : मुझे भी बताया था लेकिन मुझे उसके साथ किसी और को देखना पसंद नहीं .

सीता : तो तुम्हे उसी वक्त मन करना था जब तुम्हे पता चला की तुम्हारी बहन भी उस से प्यार करती है और तुम कविता तुम्हे तो कोई आपत्ति नहीं थी फिर क्या हुआ.

दोनों बहनो के सर निचे हो गए और जुबान पर टाला लग गया था.

सीता : वो एक अनोखा लड़का है पूरी दुनिया में ढूंढने पर भी उसके जैसा नहीं मिलेगा और अगर तुम लोगो सिर्फ तुम्हारे अलावा किसी और की तरफ न देखने वाला लड़का चाहिए तो तुम दोनों ने ठीक किया मई समिति के बारे में बात करुँगी भैया भाभी से और तुम लोगो का कोई मतलब नहीं होना चाहिए इस बात से ठीक है

ये बोल क्र सीता वह से चली गयी ,सीता के जाने के बाद कविता भी रोटी हुई चली गयी बच गयी काव्य जो अब भी कुछ सोच रही थी .

अब चलते है टाइगर के पास सुबह हुई टाइगर हठ क्र फ्रेश होने के बाद हॉल में आता है तो देखता है फॅमिली के सभी बड़े लोग टीवी पे नजर गड़ाए हुए है पास जाकर मई भी देखता हु की टीवी पे ब्रेकिंग न्यूज़ आ रहा था की परसो रात में एक आदमी बे हजारो की संख्या में आतंकवादियों को मार गिराया है और जो जख्मी हुए है उसे आर्मी वालो बे पकड़ लिया है सूत्रों से पता चला है एक आदमी अपनी तलवार से आतंकवादियों को गाजर मूली की तरह काट रहा था और गोलिया तो उसका कुछ बिगड़ hi नहीं रही थी ये लोग बड़ा आतंकी हुम्ला करने के इरादे से कश्मीर में कैंप बनाकर रुके हुए थे.

वह की पिक्चर भी दिखाई जा रही थी सच में बहुत hi भयानक नजारा था.

माँ में तो खून से सनी लसो को देख क्र चॅनेल hi चेंज क्र दिया.

माँ : आप लोग भी खा सुबह सुबह खून खराबा देख रहे हो.

पापा : आरी भगवान ये देश से जुड़ा मामला है अच्छा हुआ की उस ने इन आतंकवादियों को मार दिया नहीं तो वो हमारे देख में आतंक फैलते .

पापा मेरी तरफ देखते हुए -

पापा : बीटा तुम लोग भी तो कश्मीर में hi थे इतना बड़ा कांड हो गया तुमलोगो को पता था इस बारे में.

मई : वो पापा....

माँ : उनलोगो को क्या पता होगा वो लोग तो घूमने गए थे वह आतंकवादियों को मरने नहीं.

मई पानी पि hi रहा था की मेरा गाला अटक गया और मई खस्ने लगा तो माँ बे मेरी पीठ थपथपाई .

माँ : आराम से पियो बीटा पानी .

रम्भा और सोनम ये देख क्र मुस्कुरा रही थी और बाकि के जो लोग नहीं जानते थे की मैंने उन आतंकवादी को मार दिया है वो लोग मुझे हैरानी से देख रहे थे.

चाचा : और टाइगर बीटा आज का क्या प्रोग्राम है.

मई : कुछ खास नहीं है चाचा hi आज रम्भा को सम सहर घुमाऊंगा बीएस.

चाचा : बीटा थोड़ा टाइम निकल क्र ऑफिस की तरफ भी आ जाना तुम्हे हमारे ऑफिस के स्टाफ वे भी मिलाना है.

मई : ok चाचा hi आ जाऊंगा.

सोनम : भाई हमलोग भी चले के साथ में .

माँ : कोई जरुरत नहीं है इतने दिनों सी कॉलेज नहीं गयी हो उसका क्या टाइगर के साथ कोई नहीं जायेगा तुम लोग आज कॉलेज जाओगे बीएस.

स्नेहा : मई तो आज आराम करुँगी भाई.

उसके बाद हम सब ने साथ में नास्ता किया और उसके बाद पापा और चाचा लोग अपने ऑफिस की तरफ निकल गए बाकि सब भी अपने अपने काम में लग गए ,थोड़े देर में हम भी रेडी हो क्र निकल गए अपने बाइक और घूमने .
 
अपडेट 111

हम दोनों बाइक और बैठ क्र निकल गए घूमने आज रम्भा ने मेरी किसी बहन का जीन्स & टॉप पहना हुआ था और वो मेरी पीठ से चिपक क्र बैठी हुई थी मई रम्भा को अपने सहर के सभी फेमस जगहों पर गुमा रहा था फिर हम थोड़ा रिलेक्स होने के लिए एक पार्क में गए और एक पेड़ के नीच जाकर बैठ गए फिर मई रम्भा के गॉड में लेट गया फिर हमारी बाटे सुरु हुई .

मई : रम्भा मुझे एक बात बताओ तुम्हारी मेरी माँ को मैंने देखा वो अभी भी जवान लगती है जब की बाबा जी तो बूढ़े लगते है .

रम्भा : रम्भा : वो इस लिए की मेरी माता श्री मेरे बाबा की दूसरी पत्नी है और हम हिमालय में रहते थे तो वह की खान पान से भी हम जवान लगता थे और मेरी माता श्री सुन्दर है तभी तो मई भी सुन्दर लगती हु .

मई : है वो तो है .

मई अपने मन में: तुम्हारी माता श्री सच में बहुत सुन्दर है और फिगर भी कमल का है देखना पड़ेगा किसी दिन.

रम्भा : क्या सोचने लगा गए .

मई : ककककुछ भी नहीं वो ऐसे hi.

रम्भा : सुनिए हम वह खा रहेंगे.

मई: पहले तो तुम मुझे सुनो सुनिए ये hi ो hi बोलना बंद करना होगा तुम मेरा नाम लो न सीधे .

रम्भा : नहीं नहीं माँ ने खा था की अपने पति का नाम नहीं लेते ये hi तो हमारी सभ्यता है .

मई : तो फिर तुम अपने हिसाब से देख क्र बोलना किसी को कुछ भी पता नहीं चलना चाहिए, और हम वह किराये के माकन में रहेंगे मेरे एक फ्रेंड का घर है रुको मई अभी उस से बात करता हु.

फिर मैंने संध्या को कॉल किया

मई : hello संध्या खा हो यार कोई कॉल न मैसेज .

संध्या : वह जी वह उल्टा चोर कोतवाल को डेट तुम इतने दिन हो गए अपने घर गए हो तुम ने एक कॉल या मैसेज नहीं किया और मुझे कह रहे हो .

मई : खैर छोडो तुम कैसी हो घर में सब कैसे और कॉलेज कैसा चल रहा है.

संध्या : मई ठीक हु और घर में भी सब ठीक है और कॉलेज भी बढ़िया चल रहा है ये बताओ तुम कब आ रहे हो.

मई : कल hi निकलने वाला हु यह से रूम खली हो गया की नहीं .

संध्या : है हो गया है मैंने रूम की सफाई और पेंटिंग भी करवा दी.

मई : ठीक है मई कल आ रहा हु परसो हम शिफ्ट भी हो जायेंगे और है मेरे साथ मेरी दीदी और उसकी फ्रेंड भी आ रही है वि भी साथ में hi रहेंगी ok bye.

फ़ोन कट क्र के मई और रम्भा थोड़े देर वह रहे फिर वह से निकल क्र रक बढ़िया सी रेस्ट्रोरेंट में गए और वह डिनर क्र के हम निकल गए अपने फैक्ट्री की तरफ वह पर पहले से hi बता दिया गया था की मई आऊंगा इस लिए मेरा भर आवर सवागत किया गया सभी एम्प्लोयी ने तालिया बजा थे थे फिर सीनियर मुझे फूल देकर स्वागत किया मई सभी से मिला मुझे बहुत अच्छा लगा सभी से मिल क्र फिर पापा मुझे एक केबिन में ले गए और वह के चेयर पर मुझे बैठाया.

पापा : बीटा ये है तुम्हारे फ्यूचर का होने वाला केबिन अब पढाई के बाद तो ये सारा काम तुम्हे hi सम्हालना है .

मई पापा को गले से लगाया फॉर खा

मई : थैंक्स पापा और अभी इस सब की क्या जरुरत थी.

पापा : जरुरत थी बीटा यह के एम्पलॉयस को भी तो पता होना चाहिए की तुम hi हो इनके फ्यूचर के मालिक अभी से देख लिए रहेंगे तभी तो जानेंगे.

मई : वो सब तो ठीक है पापा पर मई भी कुछ अलग से करना चाहता हु अभी सोचा तो नहीं है लेकिन मुझे भी अपनी अलग से पहचान बनानी है.

पापा : ी प्राउड ऑफ़ यू माय सोन तुम जो कुछ भी करोगो हम सब की खुसी भी उसमे होगी और ये सब तो तुम्हारा है hi इसे भी तुम्हे hi सम्हालना होगा .

फिर हम लोग थोड़े देर वह पर रुक क्र अपने फैक्ट्री को देखने लगे हमारी फैक्ट्री में क्लोथ्स मटेरियल तैयार किया जाता था फैक्ट्री को पूरा घूम क्र हम घर की तरफ निकल गए

घर पर भी कुछ खास नहीं हुआ रात में डिनर के बाद छोटी चची को एक बार मैंने जैम क्र छोड़ा उसके बाद मई अपने रूम में आकर सो गया.

सुबह मई उठा और उन्दोनो को भी उठाया नहा धो क्र फ्रेश होने के बाद हम लोगो ने ब्रेकफास्ट किया और फिर रेड्डी हो क्र वापस आये पापा ने पहले hi एक कार से ड्राइवर को हम लोगो की छोड़ने के लिए कह दिया था फिर हम लोग सभी से मिले सभी के आँखों में आंसू आ गए थे माँ ने तो मुझे गले से लगा क्र रोना भी सुरु क्र दिया था तक मई जल्द hi वापस आऊंगा बोल क्र उन्हें चुप कराया ऐसे hi सभी से मिला बड़ी चची, छोटी चची तो मुझे पूरा hi अपने बदन से चिपका लिया था .

मई : चची क्या क्र रही हो सब देख रहे है.

छोटी चची : (धीरे से) अपने होने वाले बेटे के पापा को प्यार दे रही हु ताकि वि जल्दी से आ जाये.

फिर मई अपनी बहनो से मिला वो भी मुझे जल्दी आने को बोल रही थी.

सुमन : भाई मई भी चालू क्या तुम लोगो के साथ .

मई : नहीं दीदी अपनी पढाई का नुकसान हो जायेगा मई जल्दी hi वापस आऊंगा न.

ऐसे hi सभी से मिला और उनसे विदा लेकर हम अपनी कार में बैठ गए और फिर हाथ हिला क्र सभी से विदा लेकर हम निकल गए .

देहरादून पहुंचने में हमे 4-5 घंटे लग गए. वह पहुंच क्र मई कार को नीलम के फार्महाउस वाले घर में ले गया.
 
अपडेट 112

वेलकम बैक तो देहरादून

देहरादून पहुंचने में हमे 4-5 घंटे लग गए. वह पहुंच क्र मई कार को नीलम के फार्महाउस वाले घर में ले गया .

मैंने पहले hi नीलम को फ़ोन क्र के बता दिया था मई वापस आ रहा हु और सीधे फार्महाउस hi आऊंगा तो मेरे आने से पहले hi नीलम और दीपिका वह पर पहुंच गयी थी हमारी कार रुकते hi वो दोनों बहार निकल क्र आ गयी फिर जब मई कार से बहार आया तो पहले नीलम ने फिर दीपिका ने मुझे गले लगाकर मेरा सवागत किया .

नीलम : ओह कितना तड़पाया है तुम ने इतने दिन हो गए थे एक कॉल या मैसेज भी नहीं किया तुम ने लगता है तुम वह जाकर हमे भूल hi गए थे है की नहीं .

मई : नहीं मेरी जान मई तुम दोनों को कैसे भूल सकता हु तुम दोनों तो मेरी जान हो.

दीपिका : अगर और कुछ दिन तुम नहीं आते न तो मई सीधे तुम्हारे घर hi पहुंच जाती.

मई अब आ गया हु न तो अब तो खुस हो ,ओह मई तो तुम लोगो के चक्कर में इन्हे तो भूल hi गया इनसे मिलो ये है रम्भा मेरी एक वाइफ और तुमलोगो की एक और बहन और इन्हे पहचानो कोण है.

दीपिका : चेहरे से तो लगता है की मई पहचानती हु इन्हे और यद् नहीं आ रहा है तुम hi बता दो न.

मई : ये मेरी बड़ी दीदी स्नेहा है.

दीपिका : ओह स्नेहा दीदी मुझे पहचाना मई दीपिका हु .

स्नेहा : है है जानती हु टाइगर ने मुझे पहले hi तुम दोनों के बारे में बता चूका है तुम दोनों से सदी भी क्र चूका है ये भी मुझे पता है .

मई : चलो बाकि बाटे अंदर चल क्र करते है मुझे और भी कुछ बताना है.

फिर हम लोग अंदर आ गए और अंदर मल्लिका सिद्धि और उसकी माँ थी उसकी माँ मुन्ने की मालिश क्र रही थी .

मल्लिका : आ गए अपने घर वालो से मिल क्र.

मई : है आ गया और इनसे मिलो मेरी बड़ी दीदी स्नेहा और ये रम्भा इनकी फ्रेंड .

नीलम और दीपिका अपने मान में सोच रही थी की मैंने झूठ क्यों बोलै .

सिद्धि नीलम से : माडेम न ये बैग्स कहा कहा रखना है.

मई : सिद्धि एक काम क्र सब बैग्स को को अलग अलग रूम में रख दो .

फिर थोड़े देर तक हम हॉल में बैठे रहे उस के बाद एक रूम में आ गए उस रूम में स्नेहा रम्भा नीलम दीपिका और मेरे साथ साथ मल्लिका भी थी.

मई : देखो आप सभी को मई कुछ बताना चाहता हु .

नीलम :क्या.

मई : बात ये है की रम्भा के साथ साथ स्नेहा भी मेरी पत्नी है.

नीलम : क्या !

दीपिका : क्या!

मल्लिका : क्या!

मई : ये क्या क्या है है स्नेहा दीदी भी मेरी पत्नी बन चुकी है और मेरी मेरी सभी बहने भी मुझे बहुत प्यार करती है आगे वो भी मेरी पत्नी बन सकती है इसमें चोकने वाली कोई बात नहीं है .

नीलम : पर शेहा दीदी तो आपकी सगी बहन है न.

मई : और तुम क्या हो ? नील प्लेनेट के अनुसार तुम भी तो मेरी सगी बहन hi हो न.

नीलम : है और वह के अनुसार तो बहन से सदी क्र सकते है .

मई : यही तो मई भी क्र रहा हु क्यों की मई भी तो नील प्लेनेट का हिस्सा हु इसलिए अपनी बहनो से विवाह क्र सकता हु अब समझी .

दीपिका : ok ok समझ गए अब ये बताओ दिव्या दीदी का क्या करना है वो तो तुम्हारे प्यार में पागल hi हो गयी है रोज सुबह पार्क जाती है और तुम नहीं मिलते तो उदास हो क्र चली आती है बेचारी.

नीलम : दीदी को तो बता दिया था न की तुम अपने घर जा रहे हो बेचारी का पार्क से आते टाइम चेहरा लटका हुआ रहता है.

मई : है बता दिया था और कल उसे भी प्रोपोज़ क्र के तुम्हारे घर में ेंटरी करूँगा, अब मई थोड़ा आराम करना चाहता हु सफर से थोड़ा थक गया हु शाम कीप संध्या के घर भी जाना है उनका घर देखने.

नीलम : यह भी तो रह सकते हो ये भी तो तुम्हारा hi घर है.

मई : रह तो सकता हु पर से सिटी से दूर है और मुझे कॉलेज भी आना जाना करना होगा तो इसलिए मैंने संध्या का घर चुना रेंट पे वो कॉलेज से भी पास है.

नीलम : ठीक है फिर हम भी चलेंगे घर देखने.

फिर रम्भा और स्नेहा दूसरे रूम में चली गयी आराम करने मई उसी रूम में सो गया शाम को जब मेरी नींद खुली तो देखा की मेरे आजु बाजु दोनों बहने नीलम और दीपिका सोइ हुई है सोइ हुई दोनों कितनी प्यारी लग रही थी ,मई उठा और फ्रेश होने चला गया फिर वापस आकर उन्दोनो को उठाया और रूम से बहार निकल गया मेरे जगाने से पहले hi रम्भा और स्नेहा उठ गयी थी.

शाम तो हो hi चुकी थी चाय पानी पि क्र हम लोग निकल गए सिटी की तरफ सिद्धि को बता दिया था की हम लोगो के लिए खाना न बनाये हम उधर hi कुछ खा लेंगे.

हम लोग पहुंचे संध्या के घर वह पर संध्या के मम्मी पापा और विनोद भी था हम उनसे मिले उनका घर तवो फ्लोर का था ग्राउंड फ्लोर पर वो लोग रहते थे और ऊपर वाला फ्लोर रेंट और दे रहे थे ऊपर भी अच्छा था 3भक का फ्लोर था हमे बहुत अच्छा लगा तो हम लोगो ने रेंट की बात की और कल hi आ रहे है करके बता दिया.

फिर हम लोग थोड़े देर वह पर रहे सभी से थोड़ी बहुत बात चित की संध्या को रम्भा और स्नेहा का इंट्रोडस कराया दीदी और उसकी फ्रेंड बताकर फिर हम वह से निकल क्र एक अच्छे से रेस्ट्रोरेंट में गए वह सभी ने अपने अपने पसंद का खाना खाया सिवाय रम्भा के क्यों की उसने कभी ऐसे बहार खाना नहीं खाया था तो उसके लिए भी मैंने hi आर्डर किया.

हम वह से सीधे घर आये और हमे फार्महाउस छोड़ क्र नीलम और दीपिका वापस अपने घर चली गयी हम भी सीधे सोने चले गए स्नेहा और रम्भा एक रूम में और मई दूसरे रूम में सोने चला गया .

सुबह 5 बजे उठ क्र मई सीधे पार्क चला गया रनिंग करते हुए वह पहुंच क्र मई दिव्या को तलाशने लगा पर वो सायद अभी नहीं आयी थी इसलिए मई थोड़ी देर व्ही बैठा रहा कुछ hi देर में वह पर दिव्या आयी.

दिव्या : hi तिगरररररर.

मई : ओह hi दिव्या.

दिव्या : काफी दिन लगा दिए अपने घर में मम्मी पापा छोड़ नहीं रहे थे क्या .

मई : काफी सालो बाद गया था तो जानती hi होगी घर में सब यू क्नोव.

दिव्या : है मई समझ सकती हु इतने दिन बाद बेटे को देख क्र कैसा लगता है माँ बाप को.

मई : और आप बताओ कैसी हो आप पहले से और काफी ब्यूटीफुल लग रही हो.

दिव्या : तुम भी न कुछ भी बोलते हो मई तो वैसी hi हु जैसे पहले थी.

मई : नहीं सच में मई सच कह रहा हु .

दिव्या : हो सकता है तुम मुझे काफी दिन बाद देख रो.

मई : है ये भी हो सकता है और ये भी हो सकता है की आप मुझे हमेसा hi ब्यूटीफुल लगाती हो .

दिव्या : ये भी हो सकता है चलो छोडो इन बातो को मुझे कुछ कहना है तुम से.

मई : मुझे भी कुछ कहना है.

दिव्या : ठीक है पहला तुम बताओ फिर मई बताऊगी.

मई : नहीं पहले तुम .

दिव्या : नहीं पहले तुम.

मई : नहीं तुम.

फिर काफी देर तक हम लोगो ने कुछ नहीं खा न वो कुछ बोल रही थी और न hi मई , मई चाहता था की वो hi पहले इकरार करे ,काफी समय हो गया था लोग भी पार्क से बहार जाने लगे थे .

फिर मैंने सोचा कही देर न हो जाये और उधर दिव्या ने भी ऐसा hi सोचा और दोनों ने एक साथ.......
 
भाइयो मई एक चीज के लिए आप सभी से माफ़ी चाहता हु की अपडेट थोड़ा लेट हो जाता है क्या करू भाइयो टाइम hi नहीं मिल पता आप सभी को पहले से hi इस बात के लिए माफ़ी चाहता हु.
 
अपडेट 113

फिर मैंने सोचा कही देर न हो जाये और उधर दिव्या ने भी ऐसा hi सोचा और दोनों ने एक साथ एक दूसरे को ी लव यू बोल दिया ऐसा होते hi दिव्या थोड़ी शर्मा गयी और उठ गयी मई तुरंत उठा और उसका हाथ पकड़ा और अपनी तरफ खींचा .

मई : मई तो पहले से hi जनता था तुम मुझ से प्यार करती हो लेकिन मई तुम्हारे मुँह से सुन्ना चाहता था.

दिव्या : और मई तुम्हारे मुँह से सुन्ना चाहती थी.

मई : ी लव यू दिव्या.

दिव्या: ी लव यू तू मेरी जान.

फिर हम दोनों पास आने लगे अभी हमारे होठ करीब आने लगे hi थे की मेरा मोबाइल बज उठा जिससे ये हुआ की दिव्या शर्मा क्र पीछे हट गयी मैंने मोबाइल नंबर देखा तो वो स्नेहा का था मैंने कॉल पिक किया .

स्नेहा : खा हो इतनी देर हो गयी नए घर में भी जाना है जल्दी आओ .

मई : है बस कुछ hi देर में आ रहा हु ok bye.

दिव्या : अच्छा मई भी चलती हु बहुत समय हो गया है घर में भी सब देख रहे होंगे.

जब जाने लगी तो मैंने फिर से आवाज लगाई तो वो रुक गयी.

मई: दिव्या आज शाम को क्या क्र रही हो.

दिव्या : कुछ नहीं.

मई : तो क्या आज तुम मेरे साथ डिनर और चल सकती हो .

दिव्या: उम्म्म्म.. ok.

ठीक है अब मई चलती हु bye शाम को मिलते है bye.

उसके बाद दिव्या चली गयी मई भी तुरंत वह से निकल गया और फार्महाउस पहुंच क्र मई फ्रेश हुआ तब तक नीलम और दीपिका भी आ गयी थी फिर हम लोगो ने ब्रेकफास्ट किया और नीलम की कार में अपना सामान लोड किया और निकल गए संध्या के घर की तरफ वह पहुंच क्र हम संध्या के घर वालो से मिले अपना सामान घर में रहा फिर थोड़ी देर हम उनसे बात की फिर एक लिस्ट बनाई की क्या क्या लेना है और निकल गए हम मार्किट की तरफ मैंने एक बाइक ली रॉयल एनफील्ड 350 फिर बाकि का सामान लिया सब खरीदारी करते हुए हमे 3-4 घंटे लग गए घर आ क्र सभी सामान को जमाया ये सब करते करते शाम हो गयी थी सभी लोग थक गए थे तो स्नेहा ने सभी के लिए चाय बनाने का बोल क्र चली गयी मई भी फ्रेश होने के लिए चला गया वापस आकर देखा तो सभी चाय की चुस्की ले रहे थे मुझे भी रम्भा ने चाय लेकर दी , चाय पि क्र नीलम और दीपिका जाने लगी तो मैंने उन्हें कार के पास रुकने के लिए खा और स्नेहा और रम्भा को आराम करने के लिए खा क्यों की मई खाना बहार से लेन वाला था उन्हें मई घूम क्र आता हु बोल क्र निकल गया बहार आकर नीलम से खा-

मई : नीलम तुम्हारा किसी रेस्ट्रोरेंट या किसी बड़े होटल का नंबर है क्या.

नीलम : क्यों किस लिए?

मई : वो मुझे एक टेबल बुक बरवानी थी कैंडल लाइट डिनर के लिए.

दीपिका : (खुस होते हुए) वाओ किसके लिए .

मई : इतना जायदा खुस होने की जरुरत नहीं है ये तुम्हारी बड़ी दीदी दिव्या के लिए है.

नीलम: बड़े फ़ास्ट जा रहे हो एक hi दिन में प्रोपोज़ और फिर डिनर.

दीपिका : और हम लोगो को तो आज तक कहि घूमने भी लेकर नहीं गया है.

मई : तुम लोगो को भी लेकर जाउगा पहले तुम्हारी बहन को पता क्र तुम्हारे घर का chapter तो क्लोज क्र दू.

नीलम : मई अभी कॉल क्र देती हु एक स्पेशल सा रेस्ट्रोरेंट है वह तुम्हारी डेटिंग भी स्पेशल हो जाएगी और है कुछ अच्छा सा गिफ्ट जरूर ले लेना और डिनर के बाद दीदी को दे देना वो और खुस हो जाएगी.

फिर नीलम ने कॉल क्र के सब सेट क्र दिया और वो लोग निकल गए अपने घर मई भी अपना बाइक उठाया और जेवेलरी शॉप से एक अच्छा सा रिंग लिया और पहुंच गया दिव्या के घर के पास वह पहुंच क्र दिव्या को कॉल किया वो थोड़ी देर बाद गेट से बहार निकली बहुत hi सुन्दर लग रही थी दिव्या 1 पीेछे गरौँ में कमल की लग रही थी.

वो आयी और मेरे बाइक में बैठ गयी फिर हम निकल गए वह से हमारे जस्ट पीछे hi धनराज अपनी कार में बैठ क्र घर आ रहे थे उन्होंने दिव्या को मेरे साथ बाइक और जाते देख लिया.

शेठ धनराज अपने प् से : पता करो ये लड़का कोण है खा रहता है ,क्या करता पूरी डिटेल्स मुझे चाहिए जल्दी पता करो.

प्: जी सर हो जायेगा.

इधर मई बाइक को नार्मल स्पीड में भागते हुए नीलम के दिए हुए एड्रेस पे जा पंहुचा वो एक संदर लोकेशन पर बना हुआ था सोर सरबे से दूर खुले में रेस्ट्रोरेंट बनाया गया था वह पर हमारे लिए एक टेबल बुक की गयी थी जिसमे हम जाकर बैठ गए मैंने मेनू दिव्या को दिया और खा आ सब कुछ तुम्हारी पसंद का होगा फिर दिव्या ने अपनी पसंद का मगाया जो कुछ देर में आ गया हम दोनों बात करते हुए डिनर क्र रहे थे वो बार बार मेरी आँखों में hi देख रही थी कुछ देर में हमारा डिनर भी हो गया तब मैंने अपनी चेयर से उठा और घुटनो पर बैठ क्र

मई : दिव्या ी लव यू .

दिव्या : ी लव यू तू

फिर मैंने रिंग दिव्या को पहनाया तो उसने मुझे गले से लगा लिया मई जनता था की मई दिव्या से कुछ भी मांग सकता था वो मन नहीं क्र सकती थी वो तो मुझे व्ही पर किश भी करने वाली थी लेकिन मैंने उसे रोक दिया .

हम वह से बिल पाय क्र के वह से निकल गए, मई बाइक एक सुनसान जगह पर रोकी और वह पर बाइक को स्टेण्ड किया .

मई : दिव्या तुम्हे मुझ पर भरोसा है .

दिव्या : है मुझे पूरा भरोसा है तुम पे चाहे तो आजमा के देख लो .

फिर मैंने दिव्या के कमर को पकड़ा और उड़ गया आसमान में दिव्या ये देख क्र अपनी आँखे बंद क्र ली और मुझे कास क्र पकड़ लिया.

मई : दिव्या अपनी आँखे खोलो देखो सहर का नजर कैसा लग रहा है .

फिर दिव्या ने अपनी आँखे खोली तो देख की निचे लाइट की रोशनी में पूरा सहर जगमगा रहा था .फिर मैंने एक जगह देख क्र वह जाकर उतर गए जहा पर चाँद की रोशनी थी .

दिव्या : टाइगर तुम उड़ सकते हो कैसे ?

मई : दिव्या मई तुम्हे यह पर सब कुछ बाटुंगा जो तुम्हे जानना जरुरी है .

फिर मई उसे अपनी जन्म के रहस्य के बारे में बताया और ये भी बताया की तुम्हारी बहन भी व्ही की है जो नील प्लेनेट के अनुसार मेरी सगी बहन hai,use मैंने ये भी बताया की मई उसकी बुआ का बीटा टाइगर हु और मेरे पास ऐसे बहुत सी सकतिया भी है दिव्या को मैंने ये नहीं बताया की मेरे और भी बहुत से लोगो के साथ सम्बन्ध है खास क्र के उसकी दोनों बहनो के साथ इन बातो को मई बाद में बताने का सोचा.

मई : देखो दिव्या मैंने सब कुछ तुम्हे बता दिया है अब फैसला तुम्हे करना है की तुम अब भी मुझ से प्यार करती रहोगी या ....

मुझे बिच में hi दिव्या ने रुकवा दिया.

दिव्या : बीएस टाइगर मैंने तो तुम्हे पहले hi कह दिया था की मुझे तुम और पूरा भरोसा है तो फिर क्या सोचना और घर में जानेंगे की तुम मेरे बुआ के बेटे हो तो क्या होगा.

मई : देखो दिव्या हमे दोनों परिवार को मिलाना है तो मई तुम्हे जैसा जैसा करने को कहूंगा वो तुम्हे करना होगा .

दिव्या : दोनों परिवारों को फिर से मिलाने में मई तुम्हारा पूरा साथ दूंगी.

मई : और है इस काम में तुम्हारी बहाने भी मेरा hi साथ देंगी क्यों की वो लोग पहले से hi तैयार है .

दिव्या मुझे गले से लगते हुए: ओह मेरी जान अब मई तुम से दूर नहीं रह सकती चाहे कुछ भी हो जाये.

फिर हमारे होठ टकराये और फिर हमारा किश सुरु हो गया किश करते हुए मेरे हाथ दिव्या के गांड को सहला और दबा रहे थे जिससे दिव्या और भी एक्ससिटेड हो गयी जिसका असर ये हुआ की वो मुझे और जोर से किश करने लगी और मेरे पीठ को जोरो से सहला रही थी उसका किश अब मुझ पर hi भरी पड़ने लगा था वो मेरे होठो को काटने लगी थी तब मैंने दिव्या को अपने से अलग किया पर वो फिर से मुझे किश करना चाहती थी तब मैंने उसके कंधो को पकड़ क्र हिलाया

मई : दिव्या कण्ट्रोल करो अपने आप को क्या हो गया है तुम्हे .

तब दिव्या जोर जोर साँस लेते हुए होस में आई .

दिव्या : सॉरी ीाम रियली सॉरी पता नहीं जब से तुम्हारी आँखों में देखा था तब से पता नहीं मुझे कुछ हो रहा था और जब तुमने मेरे पीछे बॉम को सहलाया तब मई होस खो बैठी अरे तुम्हारे होठ से खून निकल रहा है सॉरी ये मेरी वजह से हुआ है .

मई : कोई बात नहीं फर्स्ट टाइम में ऐसा हो जाता है और खून तो अभी बंद हो जायेगा फिर भी थोड़ा कण्ट्रोल में रहना बाद में काम आएगा.

दिव्या : बाद में किस लिए और लैब काम आएगा.

मई : जिस दिन हमारा मिलान होगा उस दिन काम आएगा उस दिन मई भी तुम्हे नहीं रोकूंगा चलो अब घर चलते है

ये बोल क्र मैंने दिव्या के कमर को पकड़ा और उड़ते हुए बाइक के पास आ गया इस बार दिव्या को कोई दर नहीं लगा वो सिर्फ मुझे hi देख रही थी.

बाइक के पास आकर हम उस और बैठ क्र दिव्या को उसके घर के गेट के पास उतरा दिव्या bye बोल क्र जाने लगी तब मैंने उसे आवाज देकर रोका और फिर एक छोटा सा किश किया फिर bye बोलै तब दिव्या अपने घर गयी और मई अपने घर की तरफ आ गया.

दिव्या के घर में कोई था जो हमे किश करते हुए देख लिया था बताओ वो कोण हो सकता है??????
 
अपडेट 114

दिव्या को उसके घर छोड़ क्र मई निकल गया और जब हम लोग किश क्र रहे थे तो ऊपर चाट से हमे शेठ धनराज में देख लिया था और मई उसको अनदेखा क्र दिया .

मई रस्ते में खाना पैक कराया और निकल गया घर की तरफ वह पहुंच क्र देखा तो दोनों चैन से सो रही थी मैंने उनको उठाया क्यों की वो दोनों भूखे थे और ऐसे hi सो गए थे वो दोनों जल्दी hi खाना खा क्र फिर सो गयी मैंने hi एक अच्छे पति की तरह बर्तन को समेत क्र किचन में ढखा फिर मई भी जाकर उन्दोने के बिच में सो गया दूसरे रूम में एक और बीएड था लेकिन वो सिर्फ लोगो को दिखने के लिए hi था.

मई सुबह जल्दी से उठा फ्रेश हो क्र रनिंग करते हुए पार्क में जा पंहुचा वह थोड़ी देर बाद दिव्या भी आ गयी .

दिव्या : गुड मॉर्निंग बेबी.

मई : गुड मॉर्निंग माय लव पर अब सिर्फ गुड मॉर्निंग से काम नहीं चलेगा अब से तुम्हे गुड मॉर्निंग किश देनी पड़ेगी .

दिव्या : पर यह पर कैसे सब देखेंगे.

मई : देखने दो प्यार किया तो डरना क्या.

फिर दिव्या मेरे पास आयी और मेरी तरफ अपना चेहरा आगे बढ़ाया तब मैंने अपनी आँखे बंद क्र ली तो दिव्या ने मेरे गाल पे hi किश दे दिया.

मई : ये क्या था.

दिव्या: अब गुड मॉर्निंग किश तो ऐसे hi मिलेगी चलना हो तो चलाओ नहीं तो वो भी नहीं मिलेगा.

मई : नहीं नहीं ये भी चलेगा.

फिर कुछ देर तक हम ने बात चित की और बाद में मिलने का बोल क्र हम चले गए अपने घर की तरफ मेरे घर आने पर देखा की वो दोनों भी उठ चुकी थी और किचन में थी मई नहा धो क्र रेडी हुआ और उनके पास गया तो देखा की वो दोनों तो चाय नास्ता बनाने में बिजी थी.

मुझे देख क्र स्नेहा ने खा-

तुम बहार बैठो हम नास्ता लगते है टेबल पर.

मई : मई तो देखने आया था की मेरी बिबिया क्या क्र रही है और लगता है की तुम दोनों तो पूरी बिजी हो किचन में कोई बात नहीं मई बहार वेट करता हु .

कुछ देर बाद में इन दोनों ने डाइनिंग टेबल पे नास्ता लगाया हम ने साथ में नास्ता किया और थोड़ी बहुत बात चित की फिर मई उन्हें बता क्र कॉलेज की तरफ निकल hi रहा था की निचे मुझे संध्या और विनोद मिल गए सायद विनोद की बाइक ख़राब हो गयी थी .

मई : क्या हुआ बाइक स्टार्ट नहीं हो रही है चलो मेरे बाइक में चलते है.

विनोद: ओह टाइगर सही टाइम पर आये हो भाई एक काम करो तुम संध्या को अपने साथ ले जाओ मई बाइक ठीक करवा क्र आता हु.

मई : ok चलो संध्या .

फिर संध्या मेरी बाइक में बैठ गयी ये क्या संध्या अक्सर विनोद जो की उसका भाई था उस के साथ वो हमेसा hi दोनों पेअर एक साइड क्र के बैठती थी मर्डर मेरी बाइक में वो क्रैश क्र के बैठ गई मतलब दोनों पेअर एक एक साइड क्र के और आज उस ने जीन्स टॉप पहना हुआ था और उसके बड़े बड़े बूब्स साफ पता चल रहे थे जब बाइक गड्ढो में जाती या फिर मई ब्रेक मरता तब कुछ देर में हम कॉलेज पहुंच गए तभी वह पर कविता, काव्य और उनकी कुछ फ्रेंड साथ में बैठे हुए थे वो हमे देख क्र काव्य से कहने लगी .

फ्रेंड: काव्य ये टाइगर आज संध्या के साथ कैसे वो भी बाइक पर.

फ्रेंड 2 : यार ये टाइगर इतने दिनों के बाद आ रहा है कहा गया था बता न काव्य.

काव्य : वो अपने घर गया था और अब वो हमारे साथ नहीं रहता हमारा झगड़ा हो गया.

फ्रेंड: तभी मई सोचु तू तो टाइगर को कभी अकेला नहीं छोड़ती थी आज कैसे उसके साथ नहीं है.

फ्रेंड 2 : मतलब अब हमारा रास्ता क्लियर है .

काव्य चिढ़ते हुए : मतलब क्या है तुम्हारा.

फ्रेंड: मतलब ये की तेरे कारन हम टाइगर पे चांस नहीं मरते थे पर अब तो पूरा मौका मिल गया है इतना अच्छा बॉयफ्रेंड तो ढूंढने पर भी नहीं मिलेगा.

काव्य : देख तू उसके चक्कर में मत पद वो अच्छा लड़का नहीं है उसके बहुत साडी लड़कियों के साथ सम्बन्ध है.

फ्रेंड 2 : तो इसमें कोण सा वो बुरा हो गया हम भी एक से जायदा बॉयफ्रेंड रखती है मई तो चली तरय करने .

फ्रेंड: तेरे बाद मई तरय करुँगी कही मुझे चांस मिल जाये.

उसके बाद वो दोनों लड़किया चली गयी इधर काव्य जल भून रही थी लेकिन कविता चुप संत कुछ सोच रही थी.

उधर मई संध्या को लेकर कैंटीन में गया वह पर मेरे बाकि के फ्रेंड मनोज और उसकी सिस्टर दीपिका और नीलम सभी लोग मिल गए कुछ देर में विनोद भी आ गया जो अपने साथ एक लड़की को लेकर आ रहा था वो अपने hi कॉलेज की थी .

विनोद : hi friend's मीट माय नई फ्रेंड सुरेख .

मई : तुम्हारी दोस्ती कब हो गयी इसके साथ.

विनोद : वो आज hi वो क्या हुआ की जब मई बाइक ठीक करवा क्र आ रहा था तब ये ऑटो को वेट क्र रही थी तब मैंने इसे लिफ्ट दी तब हमारी दोस्ती हुई .

फिर विनोद ने सुरेख को हम सब का परिचय दिया.

कुछ देर बाद हम क्लास रूम में आ गए आज मेरे साथ एक साइड में नीलम तो दूसरे साइड में संध्या.

जो भी प्रोफेसर आता वो मुझे यही पूछता की तुम इतने दिनों तक कॉलेज क्यों नहीं आ रहे थे.

मेरा एक hi जवाब सब को देता की मई अपने घर गया था ऐसे hi हाफ टाइम हो गया हम फिर से कैंटीन में आ गए इस बार दीपिका कविता के साथ दूसरे टेबल पर बैठी हुई थी.

इधर विनोद और मई अपने ग्रुप के लिए कुछ खाने पिने के लिए लेने काउंटर पर पहुंचे तब विनोद मुझ से कहने लगा.

विनोद : भाई मेरा एक काम करेगा.

मई : बोल न यार तू तो मेरा दोस्त है और एक दोस्त दूसरे दोस्त के काम नहीं आएगा तो किसके काम आएगा.

विनोद : देख भाई तू तो अब अकेले hi आता जाता है कॉलेज तो क्या तू अब से संध्या को लेकर आ जा सकता है क्या.

मई : वो तो मई क्र दूंगा पर तू क्या करेगा ये भी बता दे .

विनोद : थैंक्स भाई वो क्या है की मई न अब से सुरेख को लाना लेजाना करूँगा क्यों की वो मुझे अच्छी लगाती है सायद कुछ मेरा भी कुछ काम बन जाये आखरी लैब तक मई सिंगल रहूँगा मेरे भी गर्लफ्रेंड होनी चाहिए इस लिए तुझे बोल रहा हु .

मई : चल ठीक है इसी खुसी में बिल तू पेड़ करेगा.

विनोद : मंजूर है.
 
अपडेट 115

ब्रेक के बाद हम फिर से क्लास में गए अब क्लास में अब क्लास में आने वाली थी मिस अलका वो जब क्लास में आयी तब मेरी नजर उन की तरफ गयी और इन और से मेरी नजर हैट hi नहीं रही थी उन्होंने भी मुझे देख लिया की मई उन्हें घर रहा हु वो थोड़ा मुस्कुरा दी वो बुक को टेबल पर रख क्र मुझे आवाज लगाई.

मिस अलका : टाइगर स्टैंड उप..... टाइगर.. टाइगर क्या तुम्हे मेरी बात सुनाई दे रही है .

तब नीलम ने मुझे झकझोर क्र मुझे होस में लाया और खा मिस तुमको खड़े होने को कह रही है.

फिर मई खड़ा हुआ .

मिस अलका: टाइगर तुम्हारा धयान खा रहता है मई तुम्हे कब से आवाज दे रही हु.

मेरे मुँह से अपने आप निकल गया आप पर , ये सुन क्र पूरा क्लास है दिया और नीलम ने मेरे पीछे चिमटी कटी .

मई : वो.... मिस मेरे कहने का मतलब था की आप जो भी क्लास में पद्धति है उसी को मई धयान से सुनता हु.

मेरी बात सुनकर मिस मुस्कुरा दी.

मिस : तो टाइगर hi आप बताएँगे की आप इतने दिनों तक खा थे .

मई : वो मिस क्या है की मई अपनी फॅमिली से मिले काफी दिन हो गए थे इसलिए उनसे मिलने चला गया था.

मिस अलका : ठीक है अब कहि मत जाना अब अपनी पढाई पर धयान दो और क्लास ख़त्म होने के बाद मेरे केबिन में आकर मुझ से मिलो.

फिर मिस पढ़ने लगी लेकिन मई तो उन्हें hi देखता रहा पहले से और भी सुन्दर और सेक्सी लग रही थी मिस मुझे देख क्र मुस्कुरा देती थी सब मेरी आँखों में देख क्र फ़िदा होते है लेकिन मई था की मिस को देख क्र hi फ़िदा हो जाता हु .

फिर जब छुट्टी हुई तो मई सभी को बताकर मिस अलका के केबिन में पंहुचा तो वो चेयर पर बैठ क्र कुछ सोच रही थी.

मई : मई ी के इन मिस .

मिस अलका : है आजाओ टाइगर.

मई : मिस आपने मुझे क्यों बुलाया था.

मिस अलका : टाइगर तुम क्लास में मुझे hi घूरते क्यों रहते हो .

मई : पता नहीं मिस लेकिन मई जब भी आपको देखता हु खो जाता हु .

मिस : और मई भी तुम्हे कुछ बोल नहीं पति क्यों पता है.

मई : नहीं मिस.

मिस: क्यों की मुझे तुम्हारा इस तरह घूरते रहना अच्छा लगता है, और पता नहीं क्यों तुम्हे देख क्र लगता है की तुमसे मेरा करीबी रिस्ता है.

मई : हो सकता है मिस इस ज़माने में कुछ भी हो सकता है.

मिस : यह आराम से बात नहीं हो सकती ऐसा करो छुट्टी के दिन मेरे घर आ जाओ तुम अपना नंबर मुझे दे दो मई तुम्हे कॉल क्र के बता दूंगी की किस टाइम आना है आना जरूर तुमसे बहुत सी बाटे करनी है.

मई मिस को अपना नंबर दिया उसके बाद मई वह से निकल गया बहार आकर सभी दोस्तों से मिला विनोद तो अपनी नई गर्लफ्रेंड को लेकर निकल गया था नीलम और दीपिका को घर शाम को घर आने को बोल क्र मई संध्या को लेकर निकल गया जाते समय भी संध्या अपने बूब्स को मेरे पीठ में फील करा रही थी रस्ते में संध्या ने आइस क्रीम खाने की इच्छा जाहिर की तब मैंने एक आइस क्रीम स्टोर पर जाकर बाइक रोकी और उसकी फेवरेट चॉकलेट वाली आइस क्रीम लेकर दी मेरे लिए भी मैंने ली और व्ही टेबल पर बैठ क्र खाने लगे.

संध्या : टाइगर मुझे तुम से एक बात कहनी थी.

मई : है बोलो न.

संध्या : टाइगर तुम मुझे अच्छे लगते हो अभी तक कोई भी लड़का मुझे पसंद नहीं आया लेकिन तुम वो पहले लड़के हो जो मेरे दिल में अपनी जगह बनाई है टाइगर ी रियली लव यू.

मई : देखो संध्या तुमने क्या देख क्र मुझे प्यार किया ये तो मई नहीं जनता लेकिन तुम मेरे बारे में कुछ भी नहीं जानती हो, तो पहले मेरे बारे में जान लेना उसके बाद hi कुछ करना, तुम मेरी अच्छी दोस्त हो और रहोगी अभी तो पूरी जिंदगी पड़ी है तुम्हे मुझ से भी अच्छा लड़का मिल सकता है और नहीं मिला तो मई तो हु hi मई अपने बारे में तुम्हे सब बता दूंगा उसके बाद विचार करना तब तक देख लो सायद कोई और मिल जाये मुझ से बेटर.

मेरी बात सुन क्र संध्या का चेहरा उतर गया था .

मई : ा रे संध्या यु उदास होने की जरुरत नहीं है हम अब भी अच्छे दोस्त है और मई तो बोल hi रहा हु तुम अभी कोई और ढूंढ लो और फिर भी नहीं मिला तो मई तो हु hi ,चलो अब स्माइल करो घर चलते है.

फिर हम वह से घर की तरफ निकल गए रस्ते में संध्या ने मुझ से कोई बात नहीं की और मुझ से थोड़ा दुरी बना क्र बैठी थी.

संध्या को मैंने इसलिए मन किया क्यों की अभी इतने लाइन में है इतने सरे लोगो को hi मुझे निपटना होगा अब और जायदा के बारे में मई अभी सोच भी नहीं सकता.

घर आने पर भी उसने मुझे कुछ नहीं खा चुप चाप अंदर चली गयी मई भी जायदा सोचे बिना अंदर आ गया शाम को नीलम और दीपिका आयी और उनसे आगे क्या करना है इस बारे में डिसकस किया फिर वो दोनों हमारे साथ hi खाना खा क्र चली गयी और हम तीनो थोड़ी बहुत मस्ती क्र के सो गए .

सुबह मई उठ क्र पार्क में पंहुचा वह आज दिव्या पहले से hi आ गयी थी .

मई उसके गलो पर किश क्र के गुड मॉर्निंग विश किया बदले में उसने भी मेरे गलो पर किश किया ,फिर हम ने कुछ देर एससीसे की और व्ही पर बैठ क्र बात करने लगे .

मई : दिव्या मई तुम्हारे घर आना चाहता हु.

दिव्या : क्यों.

मई : क्यों क्या तुम्हारे फॅमिली मेंबर्स से भी तो मिलना पड़ेगा न और ममी जी को भी तो अपनी तरफ करना है और है जब मां जी न हो उसी समय hi मई जाऊंगा ठीक है.

दिव्या : ठीक है शाम को 6 बजे आ जाना उस समय पापा ऑफिस में होते है और मई घर पर क्या बोलूंगी?

मई : घर पर क्या बोलना है ये तुम जानो या फिर अपनी बहनो से पूछ लेना मई आज शाम को 6 बजे आ रहा हु.

दिव्या : ok सोचा पड़ेगा क्या बोलना है माँ को.

फिर हम एक दूसरे को bye बोल क्र निकल गए घर की तरफ वह से मई कॉलेज निकल गया इस बार संध्या सलवार शट में थी और दोनों पेअर एक साइड क्र क्र के थोड़ी दुरी बना क्र बैठी थी.

मई मन में सोचने लगा की ये संध्या ने भी दिल में ले लेती है हर बात को.

संध्या कॉलेज पहुंच क्र बिना कुछ कहे कैंटीन की तरफ चली गयी मई भी बाइक पार्क क्र के कैंटीन में आ गया वह पर नीलम और दीपिका बैठी हुई थी मई भी जाकर व्ही बैठ गया और उन्हें भी बताया की आज शाम को मई तुम लोगो के घर आ रहा हु तुम और तुम्हारी दीदी जाने की घर में क्या बोलना है.

नीलम : पर घर में आकर तुम क्या करने वाले हो .

मई : ममी जी को अपने बारे में बताउगा और उन्हें मां और उनके दोस्तों की करनी के बारे में बता क्र उन्हें अपनी तरफ करना है.

दीपिका : और तुम्हे घर में कैसे लाना है वो दीदी में सोच भी लिया होगा डोडी काफी समझदार है.

फिर कॉलेज में जैसे होता था व्ही हुआ कुछ खास और नहीं हुआ

कॉलेज से घर गया वह जाकर थोड़ा आराम किया उसके बाद शाम को मई रेडी हो क्र दिव्या के घर की तरफ निकल गया....
 
अपडेट 116

मई बाइक उठाया और निकल गया दिव्या के घर की तरफ लेकिन जाने से पहले मैंने स्नेहा को बता दिया था की मई ममी जी के घर जा रहा हु.

दिव्या अपने घर के गेट के बहार hi मुझे मिल गयी तगता है मेरा hi इंतजार क्र रही थी ,मैंने अपनी बाइक पार्क की और दिव्या को गले लगाया.

मई : क्या मेरी जान मेरा hi इंतजार क्र रही थी क्या?

दिव्या : और नहीं तो क्या पता है मई कब से तुम्हारा इंतजार क्र रही हु काफी समय लगा दिया आने में चलो आओ अंदर.

फिर मई दिव्या के पीछे पीछे घर के अंदर चला गया वह उसने मुझे सोफे और बैठाया.

दिव्या : दीपिका, नीलम देखो कोण आया है .

दीपिका नीलम: hi.. टाइगर.

मई : hi..

दिव्या : तुम दोनों इनका ख्याल रखना मई माँ को बुला क्र लती हु.

फिर दिव्या शिधियो से होते हुए ऊपर चली गयी .

नीलम : तुम ने दीदी को हमारे बारे में बताया तो नहीं है न.

मई : नहीं अभी नहीं बताया इधर सब कुछ सही से हो जाये उसके बाद बताउगा.

दीपिका: हमारी तरह से आल थे बेस्ट.

तभी शिधियो से उतारते हुए दिव्या के साथ उसकी माँ यानि मेरी वर्षा ममी निचे आ रही थी अभी भी कमल की सुन्दर लग रही थी कोई नहीं कह सकता की ये तीन बेटियों की माँ है .

तभी मुझे एक सररत सूझी -

मई : दिव्या ये क्या तुम तो अपनी माँ से मिलाने वाली थी न तो अपनी दीदी से क्यों मिला रही हो .

दिव्या : पागल ये मेरी माँ hi है.

मई : ओह्ह्ह ी ऍम सॉरी आंटी मुझे लगा की आप दिव्या की बड़ी बहन हो आप तो किसी भी एंजेल से इनकी माँ नहीं लगती .

ये बोल क्र मैंने वर्षा ममी के पेअर छुए .

ममी जी थोड़ी सरमते हुए - खुस रो बीटा.

फिर वो मेरे सामने वाले सोफे पर बैठ गई दिव्या भी उनके बाजु में बैठ गई.

वर्षा : तुम तो दिव्या से आगे में छोटे लग रहे हो तो अभी क्या करते हो.

मई : जी आंटी मई अभी पढाई क्र रहा हु.

वर्षा: और पिता hi क्या करते है .

मई : उनका खुद का बिज़नेस है.

वर्षा : तुम अभी कहा रहते हो अपनी फॅमिली के साथ.

मई : नहीं मई पहले बुआ के घर रहता था लेकिन अब किराये के माकन में रहता हु.

वर्षा: लगता है तुम्हारे फॅमिली में सभी लोग है और रिस्तेदार भी जायदा है.

मई : जी आंटी हमारी फॅमिली में सभी लोग है और काफी रिश्ते दर भी है, क्या आप लोगे के रिस्तेदार नहीं है?

वर्षा : नहीं हमारे कोई रिस्तेदार नहीं है.

मई : पर मैंने तो सुना है दिव्या की तीन बुआ और उनकी फॅमिली अभी भी है .

वर्षा: है है लेकिन उनसे हमारा कोई रिस्ता नहीं है.

मई : आप उनसे कैसे रिस्ता टोल सकती है आरती जो आपकी ननद काम दोस्त जायदा थी.

वर्षा: कोण हो तुम और इतना कैसे जानते हो हमारे बारे में.

मई : मई उसी आरती का बीटा टाइगर हु ममी जी.

वर्षा: क्या तुम वही टाइगर हो आरती के बेटे जिसे पाने के लिए मई और आरती बस्तर के जंगल में गए थे.

मई : है मई व्ही टाइगर हु .

वर्षा : (गले लगा क्र) ओह मेरे बच्चे तुम्हे देखने के लिए आँखे तरस गयी थी बीटा ,कितना बड़ा हो गया है तू एक दम गबरू जवान हो गया है, दिव्या क्या मई तो अपनी साडी बेटियों की सदी तुझ से करा दू.

ये सुन क्र झा नीलम और दीपिका खुस हुई व्ही दिव्या थोड़ी हड़बड़ा गयी .

दिव्या : माँ ये आप क्या बोल रही है टाइगर सिर्फ मेरा है इन दोनों का तो अलग से hi बॉयफ्रेंड है.

मई : दिव्या मुझे कुछ और भी बताना था.

दिव्या: क्या?

मई यही की इन दोनों का बॉयफ्रेंड कोई और नहीं मई hi हु ..

वर्सा: क्या....

दिव्या: क्या....

वर्षा: मैंने तो ऐसे hi कह दिया था बीटा पर तुम तो सच में मेरी तीनो बेटियों को फसा लिया .

दिव्या: ये नहीं हो सकता , टाइगर और मेरी दोनों बहनो में मुझे धोखà दिया है .

वर्षा: : बीटा इसमें तुम लोगो की कोई गलती नहीं है टाइगर के भाग्य में hi एक से अधिक विवाह का योग है तो टर्न भी मान जाओ बेटी क्यों की टाइगर से अच्छा लड़का तुम्हे और नहीं मिलेगा और सोचो सभी बहने साथ में hi रहोगी, एक बात और बाबा जी बे खा था की टाइगर एक अनोखा इंसान बनेगा तो तू भी मान जा.

नीलम : माँ दीदी तो मान जाएगी लेकिन पापा को भी तो मानना पड़ेगा न.

वर्षा : ओह.. गॉड ये तो मई भूल hi गयी बीटा तुम्हारे मां जी तो इसके लिए कभी तैयार नहीं होंगे क्यों की तुम्हारे दादा तो उन्हें जान से मरना चाहते थे जब बचपन में तुम पर हुम्ला हुआ था इसका जिम्मेदार वो तुम्हारे मां जी को hi मानते है, इसी कारन तो हम ने हमारा सहर छोड़ा था.

मई: और ये सच भी है ममी जी .

वर्षा: नहीं ये नहीं हो सकता भला वो क्यों तुम्हे मरना चाहते थे.

मई : क्यों की हमारे पुरे खंडन में मई hi था जो लड़का पैदा हुआ ,माँ और आप दोनों गए थे न बेटे के लिए पर आपको बेटी पैदा हुई और माँ को बीटा यही वो कारन है जिससे मां को चीड़ हुई और उन्होंने मुझ पर हुम्ला करवाया.

वर्षा: तुम झूठ बोल रहे हो ,वो ऐसा नई क्र सकते.

मई : मेरे पास इस बात का साबुत है ममी.

वर्षा: कैसा साबुत.

मई : वो तो अब मां जी के सामने hi खुलेगा पूरा राज ,तब तक आप मई जैसा करने के लिए कहूंगा वो आप करेंगे .

वर्षा: ठीक है बीटा जैसा तुम कहो.

मई : ठीक है ममी अब मई चला हु.

वर्षा: बीटा खाना खा क्र जाना मई अभी बनती हु.

मई : नहीं ममी स्नेहा घर पर है वो मेरा इंतजार क्र रही होगी.

वर्षा: क्या स्नेहा भी साथ में hi रहती है उसे भी लाना था न.

मई : अगली बार लेकर आऊंगा ममी.

वर्षा: बीटा चाय कॉफ़ी तो पि hi सकते हो, दिव्या तू क्या कड़ी मेरा मुँह देख रही है जा चाय लेकर आ दमांद जो पहली बार घर आये है.

दिव्या पेअर पटकती हुई किचन में चली गयी सायद गुस्सा थी मई चाय पिटे तक वह रुका थोड़ी बहुत और बात चित करने के बाद में मई वह से घर के लिए निकल गया.
 
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