Incest The Tiger - Page 9 - SexBaba
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Incest The Tiger

अपडेट 54

मई- खुस होते हुए अब कोण सी सकती मिलेगी मुझे?

शेर सिंह - ये सकती के कारन तुम हवा में ुध पाओगे और सिर्फ उधोगे नहीं बल्कि सबसे तेज उड़ोगे हजारो कम की दुरी कुछ hi पल तय क्र लोगो.

मई - ये सकती तो मेरे बहुत काम आएगी ,पर ये सकती मुझे मिलेगी कहा ये भी बता दीजिये.

शेर सिंह- ये सकती एक उड़ने वाले यूनिकॉर्न की है जिसका नाम था पेगासस ये प्राचीन कल का सबसे तेज उड़ने वाला घोडा करता था, अपने ाखि समय में इसने वो सकती दान क्र दी थी उसी सकती की तुम्हे पाना है जो इस समय पटल में है .

मई -पर मई वह पहुँचूँगा कैसे ?

शेर सिंह- वह जाने के लिए सबसे पहले तुम्हे उसका दरवाजा ढूँढना होगा और वो तुम्हे नदी में मिलेगा.

मई - नदी में, कोण से नदी में, और कहा पर ?

शेर सिंह - उसे ुम्हे कहि ढूढ़ने की जरुरत नहीं पड़ेगी, वो तुम्हे खुद hi दिखाई देगी पर तुम्हे वह पर से पहले एक और विवाह करना होगा.

मई - विवाह तो मई क्र लूंगा पर कब करना है.

शेर सिंह- जिस समय तुम्हे पटल में जाने का रास्ता दिखे तब और है इस बार खतरा बहुत होगा क्यों की इस सकती को पटल वासियो ने hi अपने कब्जे में रखा है तो इस बार रह आसान नहीं होगा.

उसके बाद शेर सिंह की आवाज आणि बंद हो गयी और मई कुछ देर और वह पर रुक क्र मई घर की तरफ निकल गया.

इधर नीलम कैंटीन से निकलने के बाद सीधे घर चली गयी वो बहुत hi जायदा अपसेट हो गयी थी क्यों की उस ने जिस जीवनसाथी का इंतजार किया तो वो किसी और से प्यार करता है और वो लड़की कोई और नहीं बल्कि उस की बहन दीपिका थी.

कोई और होती तो वो कुछ सोचती मगर यह तो खुद की बहन hi थी.

खैर कुछ तो करना hi था कुछ समय बाद जब दीपिका घर लौटी तो डिनर करने के बाद वो नीलम के रूम में गयी तो देखा की नीलम गहरी सोच में डूबी है.

दीपिका नीलम के पास जाकर बीएड पर बैठ गयी.

नीलम के सर पर हाथ फेरते हुए

दीपिका- क्या सोच रही हो मेरी बहन .

नीलम- ओह दीदी आप कब आयी.

दीपिका - जब तुम गहरी सोच में गम थी, बताओ क्या बात है.

नीलम - वो वो दीदी बात ये है की मई किसी से प्यार करती हु.

दीपिका- वाओ ये तो बहुत अच्छी बात है बताओ कोण है वो लड़का जिससे मेरी बहन प्यार करती है.

नीलम - दीदी पहले मेरी पूरी बात तो सुन लो, मई उस से प्यार करती हु पर वो किसी और लड़की से प्यार करता है.

दीपिका- क्या , तूने कभी उस से अपने प्यार का ईशर किया है.

नीलम - नहीं दीदी और कैसे कृ जब मुझे पहले से hi पता है की वो किसी और को चाहता है.

दीपिका - देख पहले ये बता वो लड़की कोण है फिर अगर उस को पैसे चाहिए तो हम उसे पैसा दे देंगे या कुछ और जो वो बोले और अगर फिर भी वो नहीं मणि तो दोनों में उनका ब्रेकअप करवाने के लिए कुछ और तरय करेंगे पर तुम्हे तुम्हारा प्यार मिलेगा जरूर.

नीलम - तो सुनो दीदी वो जिससे मई प्यार करती हु वो लड़का कोई और नहीं टाइगर है और वो लड़की आप है दीदी.

दीपिका शॉक होते हुए - क्या .

नीलम- है दीदी मई टाइगर से बहुत प्यार करती हु मगर वो आपसे प्यार करता है (रट हुए खा)

दीपिका - देख नीलम तू उसे भूल जा कोई और देख ले दुनिया में लड़को की कमी नहीं है .

नीलम (रट हुए) - तो आप hi छोड़ दो न कोई और देख लो .

दीपिका- चुप हो जा नीलम मई उस से सच्चा प्रेम करती हु और वो भी मुझे से प्यार करता है.

नीलम- दीदी मुझे एक बाबा जी ने कहा था की जो मुझे हरा देगा व्ही मेरा सच्चा जीवन साथी होगा क्यों की वो सबसे ताकत वर होगा और टाइगर ने hi मुझे हराया है और गुंडों से अकेले hi लड़ के उसने साबित क्र दिया की वो सबसे सकती साली है.

तभी दरवाजे के पास से आवाज आयी बीएस बहुत हुआ चुप हो जाओ दोनों.

जब दीपिका और नीलम ने दरवाजा की तरफ नजर घुमा क्र देखा तो दोनों की बड़ी बहन दिव्या थी.

दिव्या बहुत hi सूंदर लड़की थी लेकिन वो हमेशा सिंपल hi रहना पसंद करती थी न hi वो पैसो का कोई घमंड था वो सिंपल सलवार शट में hi रहती थी और कही आने जाने के लिए बस या ऑटो से जाती थी.

दिव्या - कब से सुन रही हु तुम लोगो की बाटे बहन हो या सौतन जो लड़ाई क्र रही हो ,

दोनों एक साथ- पर दीदी वो.

दिव्या - दोनों चुप रो, अभी मेरी बात ख़तम नहीं हुई है, तुम दोनों को प्यार हुआ वो भी एक hi लड़के से.

दीपिका और नीलम पहले मेरी बात धयान से सुन्ना फिर कोई डिसिशन लेना

दिव्या- देखो नीलम अगर तुम्हारी किस्मत में उस लड़के को तुम्हारा जीवन साथी बनना लिखा है तो वो तुम्हारा जीवन साथी बन के hi रहेगा कोई उसे रोक नहीं पायेगा और दीपिका तुम , अगर वो लड़का तुम्हे सच्चा प्यार करता है और तुम्हे धोखा नहीं देगा तो तुम्हे किसी और से डरने की क्या जरुरत .

आयी तुम दोनों को मेरी बात समझ में की नहीं,

दोनों- आ गयी दीदी.

फिर तीनो बहन मिल क्र इधर उधर की बाटे करने लगे और कुछ खास नहीं हुआ.

नेक्स्ट डे
 
अपडेट 55

नेक्स्ट डे मई रोज की तरह hi सुबह 5 बजे उठा और जॉगिंग के लिए रेडी हो क्र रूम से बहार आया तो देखा आज काव्य नहीं थी, तो मई काव्य को देखने के लिए उसके रूम में गया .

मई काव्य को हिलाते हुए - काव्य काव्य आज नहीं जाना क्या जॉगिंग के लिए.

काव्य - नहीं जान आज तुम अकेला hi चले जाओ आज मेरी तबियत सही नहीं लग रही है.

मई - ok जान तुम रेस्ट करो मई चला हु.

और मई उसके माथे को किश क्र के निकल गया घर से बहार निकल आया.

मई रनिंग करते हुए पार्क पंहुचा और पार्क के चारो तरफ रनिंग करते हुए चक्कर लगाने लगा तो मैंने देखा की एक लड़की उदास होकर अनपे चेहरे को निचे क्र के बैठी हुई थी.

ये लड़की कोई और नहीं दिव्या थी जो रत में सोच रही थी की मेरी दोनों छोटी बहनो को प्यार हो गया एक मई hi हु जिसको जो भी लड़का मिलता है उसकी आखो में hi जिस्म की भूख और धोखा hi दीखता इसी लिए मुझे कोई लड़का पसंद नहीं आता है.

क्या मेरी किस्मत में कोई ऐसा लड़का नहीं है जो मेरे जिस्म को नहीं मुझसे प्यार करे, यही सब सोचते हुए दिव्या को रत में नींद नहीं आयी और वो सुबह होते hi अपना मन हल्का करने के लिए इस पार्क में आ गयी.

मुझ से उसकी उदासी देखि नहीं गयी इसलिए मई रनिंग करते हुए जाकर उसके पास बैठ गया.

मई -है गुड मॉर्निंग

दिव्या -...........

उसकी और से कोई जवाब न पाकर मई फिर से पूछा.

मई - ो hello मैडम मई आप से पूछ रहा हु.

दिव्या ने वैसे hi जवाब दिया- आप से मतलब आप अपना काम कीजिये.

मई - देखि मैडम अगर आप अपनी प्रॉब्लम शियर नहीं करेंगी तो उसका हल कैसे निकलेगा .

अब की बार दिव्या को थोड़ा गुस्सा आ गया इस लिए उसने गुस्से से मेरी तरफ देखा और कुछ बोलती उस से पहले hi वो मेरी आखो में देखने लगी.

वो पूरी तरह मेरे आखो में खो गयी थी.

मई - ो hello मैडम फिर कहा खो गयी .

फिर मैंने उसे हिलाया तब जेक उसे होस आया .

दिव्या - है क्या हुआ.

मई - आप मुझ से पूछ रही है क्या हुआ, आप बताइये आपको क्या हुआ और आप खा खो गयी थी .

दिव्या - आपकी इन नीली आखो में.

मई - क्या मतलब?

मई मन ने सोचने लगा अभी तो ये रूडली बात क्र रही थी अचानक प्यार से बात करने लगी और मेरी आखो में खो गयी, ओह माय गॉड कहि ये भी तो नहीं नहीं ये नहीं होना चाहिए.

दिव्या - ो hello मर आप खा खो गए.

मई अपनी नजरे बचा क्र - दूसरी बात तो ये है की मेरा नाम टाइगर है और पहली बात ये है की मई आप बात को hi सोच रहा था.

दिव्या- hello टाइगर माय नाम इस दिव्या.

मई - नीस तो मीट यू दिव्या, और आपको मैंने यह पहली बार देखा है.

दिव्या- ओह या वो क्या है की रात को मुझे नींद नहीं आयी तो सुबह होते hi मई मान बहलाने के लिए यह चली आयी, क्या आप यह रोज आते है ?

मई - है मई तो रोज यही जॉगिंग के लिए आता हु.

दिव्या धीरे से- अब तो मुझे भी रोज आना होगा.

मई - क्या खा आपने .

दिव्या - वो मैंने कहा की अब मुझे घर चलना चाहिए ,घर में सब मुझे ढूंढ रहे होंगे, मैंने किसी को नहीं बताया है की मई आयी हु.

मई - ok bye..

दिव्या- bye टाइगर.

मई थोड़ी बहोत और एससीसे की फिर घर की तरफ लौट गया.

इधर दिव्या जब घर पहुंची तब उसकी माँ वर्षा उसे बहार से आता देख क्र चौक गयी.

वर्षा- दिव्या तू सुबह सुबह बहार से कैसे आ रही है मई तो सोच रही थी की तू अपने रूम में सो रही होगी.

दिव्या - वो माँ मेरी नींद सुबह जल्दी खुल गयी थी इसलिए सोचा की बहार थोड़ा घूम औ सेहत की लिए अच्छा होता है .

वर्षा - बीटा एक दिन में कुछ नहीं होता.

दिव्या - नहीं माँ अब से मई रोज सुबह उठ क्र जॉगिंग के लिए जाउंगी.

वर्षा - चल ठीक है जा फ्रेश हो क्र आजा मई ब्रेकफास्ट लगाती हु .

व्ही दीपिका और नीलम जो डाइनिंग टेबल पर बैठ क्र नास्ता क्र रही थी वो दोनों एकदूसरे की तरफ देख क्र इसरा किया और नास्ता ख़तम क्र के दोनों दिव्या के रूम में पहुंच गयी उस वक्त दिव्या बाथरूम में नाहा रही थी .

वो दोनों बीएड पर बैठ क्र दिव्या का इंतजार करने लगी.

दिव्या बाथरूम में गण गुनगुनाते हुए नहा रही थी.

कुछ देर बाद वो बहार आयी तो दोनों को अपने रूम में देख क्र पूछा.

दिव्या- तुम दोनों यह क्या क्र रही हो कहि फिर से तुम दोनों में लड़ाई तो नहीं हो गयी.

नीलम- नहीं दीदी हम तो ठीक है आप सुनाओ आप को क्या हुआ है.

दिव्या - मुझे क्या हुआ है, कुछ भी तो नहीं.

दीपिका - जब से आप बहार से आयी हो तब से आप का चेहरा खिला खिला लग रहा है और बाथरूम में नहाते समय भी आप गण गुनगुना रही थी माजरा क्या है कहि आपको भी किसी से प्यार तो नहीं हो गया हुम्म्म.

दिव्या - मेरी किस्मत तुम दोनों जैसी खा लेकिन आज मई पार्क में एक लड़के से मिली उसकी आँखों में मुझे प्यार hi प्यार दिखा नहीं तो मई अब तक जिससे भी मिली उसकी आँखों में तो जिस्म की भूख hi देखि है मैंने.

नीलम - मतलब भी प्यार की शुरुआत हुई है .

दिव्या - है और अब तुम लोग जाओ मुझे कपडे चेंज करने है.

उसके बाद वो दोनों कॉलेज के लिए निकल गए.
 
अपडेट 56

इधर मई भी घर आया और तैयार हो क्र ब्रेकफास्ट किया आज हमारे साथ कॉलेज काव्य नहीं जा रही थी क्यों की उसकी तबियत थोड़ी ख़राब थी इस लिए मई और कविता ब्रेकफास्ट क्र के निकल गए कॉलेज की तरफ .

आज काव्य के बिना मुझे भी कॉलेज जाने का मन नहीं हो रहा था इस लिए मई कविता से खा की चलो न आज कहि घूमने चलेंगे आस्क मेरा मन नहीं हो रहा कॉलेज जाने का.

कविता - तुम्हे तो बस छुट्टी की hi पड़ी रहती है अभी अभी तो कॉलेज आना सुरु किया है चलो चुप चाप कॉलेज .

मई मन मर क्र रह गया क्योकि मुझे काव्य के बिना जरा भी अच्छा नहीं लग रहा था, जब हम दोनों कॉलेज पहुंचे तो कविता अलग अपने क्लास की लड़कियों के पास चली गयी मई तुरंत hi दीपिका को फ़ोन किया और कहा की कॉलेज के गेट के बहार hi मिलो और फ़ोन कट क्र दिया कुछ hi देर में दीपिका गेट के बहार आयी.

दीपिका - बोलो मेरी जान ऐसे फ़ोन क्र के क्यों बुलाया बहार, अभी कुछ hi देर में क्लास भी सुरु होने वाली है .

मई - वो दीपिका मई सोच रहा था की क्यों न आज हम कहि घूमने चलते है.

दीपिका - ठीक है फिर कॉलेज के बाद चलेंगे.

मई - कॉलेज के बाद नहीं अभी जाना है.

दीपिका - वाओ कॉलेज बंक क्र के जाना है फिर तो मजा आएगा चलो फिर कहा जाना है.

फिर मई अपनी साइकिल निकली और चले गए पहाड़ियों की तरफ एक अच्छी सी जगह देख क्र एक पेड़ के निचे दीपिका बैठ गई और मई उसकी गोदी में सर रख क्र लेट गया दीपिका मेरे बालो को सहला रही थी.

मई - दीपिका तुम मुझ से कितना प्यार करती हो .

दीपिका- अपनी जान से भी जयादा.

मई - हम्म और अगर मई तुम्हे कहु की मुझे तुम से अभी शादी करनी है तो .

दीपिका - तो... चलो फिर अभी किसी मंदिर में जाकर शादी क्र लेते है.

मई - अरे पागल अभी नहीं करनी है मई तो चेक क्र रहा था की तुम क्या जवाब देती हो .

दीपिका - तो मिल गया तुम को जवाब.

मई - है और ये भी पता चल गया की तुम मुझ से कितना प्यार करती हो ी लव यू दीपिका ,ये बोल क्र मैंने दीपिका को व्ही घास पर लिटाया और किसिंग स्टार्ट क्र दी किश करने के दौरान मेरा हाथ दीपिका के बूब्स पर अस गए और मैंने उसे सहलाने लगी तो दीपिका और जोर से मेरे होठो को चूसने लगी तो मई भी मजे से उसके बूब्स को हलके हलके दबाने लगा जब एक्ससिटेमेंट बढ़ गया तो मैंने जोर से उसके बूब्स को बड़ा दिए तो दीपिका ने तुरंत मुझे धक्का दे दिया और अपने सांसो पर काबू पते हुए कहा-

दीपिका - ये तुम क्या क्र रहे थे .

मई - क्या मैंने क्या क्र दिया इतना तो प्यार में चलता है.

दीपिका - देखो मेरी जान किश तक तो ठीक है लेकिन इस से आगे का मैंने शादी के बाद hi सोच क्र रखा है लेकिन फिर भी तुम जो कुछ भी करना चाहते हो क्र सकते हो मई तुम्हे नहीं रोकूंगी ये तो मेरी एक चाहत है की मई जो भी कुछ करुँगी शादी के बाद सुहागरात में hi करुँगी.

मई - वह ये बहुत hi अच्छी बात है सभी लड़कियों को यही सोचना चाहिए नहीं तो बेचारे पतियों को सुहागरात के दिन लुटा हुआ खजाना hi मिलता है.

फिर मई दीपिका इधर उधर की बाटे करने लगे मई उस से उसकी फॅमिली के बारे में सब पूछ ताछ करने लगा और बातो hi बातो में ये भी बता दिया

दीपिका - मेरी तीन बुआ है दो के बारे में तो मुझे भी पता नहीं पर एक बुआ महेंद्र ग्रह के ठाकुर खंडन में गयी है और हम पहले जयपुर में रहते थे तो बुआ जी के ससुर ने मेरे पापा को पता नहीं क्यों मरने के लिए ढूंढ रहे थे इस लिए हम वह से यह पर चले आये.

दीपिका की बात ये मुझे ये तो पता चला की मेरी दो मासिया भी है खैर मई माँ से बाद में उनके बारे में पूछूंगा और मुझे ये भी पता चल की मेरे मां ने मेरे दादाजी के नाम से गलत आरोप लगा क्र वो अपनी फॅमिली के साथ यह छुप गए.

फिर हम कॉलेज की छुट्टी होने के टाइम तक व्ही रह क्र इधर उधर की बाटे करने लगे.

मैंने भी अपनी फॅमिली के बारे में जितना हो सके उतना hi बता दिया

फिर हम टाइम पर वापस कॉलेज आये और दीपिका अपने घर चली गयी और मई कविता को लेकर निकल गया .

रस्ते में कविता ने मुझसे कहा

कविता - तो तुम ने अपने मन की क्र hi ली और दीपिका के साथ कॉलेज बंक क्र ले घूम आये है.

मई - है तुमने तो मन क्र दिया था इस लिए मई दीपिका को ले गया अब तुम नहीं तो कोई और सही और टाइगर के दिवानियो की कमी नहीं है.

कविता - अच्छा बच्चू घर चलो मई काव्य को बताती हु व्ही खबर लेगी तुम्हारी और तुम्हारे दिवानियो की.

मई - ा रे नहीं बाबा मई तो मजाक क्र रहा था काव्य को कुछ मत बताना वैसे भी वो अभी ठीक नहीं है.

फिर हम घर पहुंचे मई डिनर किया फिर काव्य का हल चल पूछा तो वो अभी भी ठीक नहीं लग रही थी.

फिर कुछ खास नहीं हुआ, मई शाम को साइकिल पकड़ क्र निकल गया घूमने मार्किट की तरफ घूमते हुए अंदर भी हो गया था तो मई वापस जाने के लिए निकल गया तो एक जगह पर कुछ 4-5 लड़के एक लड़की को छेद रहे थे एक ने उसका दुपट्टा भी खींच लिया था. लड़की बहुत दर गयी थी और तो क्र उन लड़को से विनती क्र रही थी की उसे जाने दे बाकि वह पर खड़े लोग तमसा देख रहे थे कोई भी कुछ नहीं बोल रहा था.

लड़का 1- ये लड़की सीधे से बोल रहे है चुप चाप चल हमारे साथ नहीं तो उठा क्र ले जायेंगे.

लड़की - प्लीज मुझे जाने दो मेरा रास्ता छोड़ दो प्लीज.

लड़का 2 - है है है तुझे जाने दे अरे तुम पर तो हम लोगो की नजर बहुत पहले से hi थी.

लड़की - प्लीज मुझे जाने दो मैंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है .

लड़का 3- देखो हम भी तुम्हारा कुछ नहीं बिगड़ेंगे अगर तुम चुप चाप हमारे साथ चलो हम भी मजे करेंगे और तुम भी क्र लेना .

लड़की - मई ऐसी लड़की नहीं हु प्लीज मुझे जाने दो मई आपके आगे हाथ जोड़ती हु.

जब मैंने उस लड़की का चेहरा देखा तब पता चला की ये तो मनोज की बहन संध्या है तो मैंने फॉर ान अपनी साइकिल टिके .

आगे कल ......
 
अपडेट 57

मई भी उन लड़को के पास गया और जिस ने संध्या का दुपट्टा पकड़ा हुआ था उस के मुँह पे एक जोर दार पंच मारा वो धादम्म्मम्म्म्म से निचे गिर गया.

लड़का1- अब तू कोण है बे बहन लगती है क्या तेरी.

मई - मेरी तो नहीं पर किसी की बहन तो जरूर है और अगर जल्दी से तुम लोगो ने इनसे माफ़ी नहीं मांगी तो अंजाम बहुत बुरा होगा .

लड़का 1- तो ठीक है फिर देख हम लोग कैसे तेरे hi सामने इस लड़की की इज्जत की धज्जिया उड़ाते है.

और उसने साइड में काढ़े लड़के को इसरा किया तो वो संधया के कंडे के ऊपर सलवार को अभी पकड़ा hi था की मैंने उसके बालो को पकड़ लिया और अपनी तरफ कीचा जिस कारन संधया का सलवार थोड़ा सा फैट गया जिस से उसकी ब्रा दिखाई देने लगी मुझे ये देख क्र बहुत hi गुस्सा आया मैंने तेजी से उस लड़के के बालो को पकड़ क्र hi जोर से जमीं पर पटका और फिर वो सम्हाल पता उस से पहले hi मैंने जिस हाथ से उसने संधया को छुआ था उस हाथ को अपने हाथो में फसा क्र मोड़ दिया जिस से उसका हाथ hi टूट गया और वह पर एक जोरदार चीख निकली उस लड़के के मुँह से वो अपने हाथ को पकड़ क्र तड़प रहा था और दर्द से बेहोस हो गया ये देख क्र बाकि के लड़के दर गए .

लड़का 1 ने चाकू निकल लिया और मई उसकी तरफ बढ़ने लगा .

लड़का 1 - देख पास मत आना मई मर दूंगा मेरे अंकल यह के बहुत बड़े गुंडे है वो तुम्हे छोड़ेंगे नहीं ये बोल क्र वो मुझे पर वर करने लगा जो मुझे स्लो मोक्शं में दिखाई देने लगा जिससे मई वर से बच रहा था जब उसने मेरे गले पर वर किया तो मई थोड़ा पीछे हटा और घूम क्र एक लत उसके हाथ को मारा जिससे उसका चाकू दूर जा गिरा फिर क्या था एक घुसा उसके पेट में मारा वो झुक गया तो एक लत उसके मुँह पे मारा वो जमीं में गिर पड़ा मई उसके साइन पर बैठ गया और घुसो की बरसात क्र दी उसके चेहरे पर उसका पूरा चेहरा खून से सं गया था और वो बेहोस हो गया फिर मई उठा और बाकि के दोनों लड़को की तरफ देखा तो वो दोनों दर से कप रहे थे .

मई - तुम दोनों तो हमारे hi कॉलेज में पढाई करते हो न .

दोनों लड़के हाथ जोड़ क्र- है टाइगर भाई हम तो इन लोगो के बहकावे में आ गए थे लड़का1 के कहने पर हम ने मनोज की बहन को यह पर रोका था हमे माफ़ क्र दो हम आइंदा से ऐसी गलती नहीं करेंगे.

मई - ठीक है जाओ .

मेरे इतना बोलते hi वो दोनों भाग गए और जिस लड़के ने दुपट्टा पकड़ा था उसका भी नक् फुट गया था और सामने के दो डट भी टूट गयी थी मैंने उस से दुपट्टा लिया और संधया को धक् दिया तो संधया रट हुए मेरे गले लग गयी मई उसके बालो को सहलाते हुए चुप कराया.

संधया- टाइगर अगर आज तुम समय पर नहीं आते तो ये लोग मुझे किसी को मुँह दिखने के काबिल नहीं छोड़ते .

मई - चलो अब चुप हो जाओ कुछ हुआ तो नहीं न और मेरे होते हुए तुम्हे कोई कुछ नहीं क्र सकता कुछ भी प्रॉब्लम हो मुझे बताना, अब चलो मई तुम्हे तुम्हारे घर छोड़ दू, इस बहाने तुम्हारा घर भी देख लूंगा.

फिर वो मेरे से अलग हुए तब तक वह पर पुलिस आ गयी इंस्पेक्टर को देखते hi संधया ने उसे गले लगाया और रट हुए उसने सब कुछ बता दिया , तब वो इंस्पेक्टर मेरे पास आये और मुझे सबसि देते हुए कहा

इंस्पेक्टर- थैंक्स बीटा आज देश को तुम्हारे जैसे लड़को की hi जरुरत है आज तुमने मेरी बेटी की इज्जत बचाई इसका मई बहोत बहोत आभारी हु , तुम्हे कभी भी कुछ तकलीफ हो तो मुझे बताना.

ओह तो ये है मनोज और संधया के पापा मई मन hi मन बोलै .

नाम था हेमंत राजपूत .

हेमंत - जाओ बेटी इन्हे घर ले जाओ मई कुछ hi देर में पहुँचता हु यह का काम निपटा के.

फिर मैंने अपनी साइकिल उठाई और संधया के साथ बात करते हुए पैदल उसके घर पहुंचे तो दरवाजा उसकी मम्मी ने खोला और हम अंदर गए तो संधया ने अपनी मम्मी को भी साडी बात बताई और वो कपडे चेंज करने चली गयी

(संधया की मम्मी को मई आंटी लिखूंगा)

आंटी- थैंक्स बीटा जो तुमने मेरी बेटी को उन बदमासो से बचाया तुम बैठो मई पानी लेकर आती हु हमारी आवाज सुन क्र मनोज भी आ गया और संधया भी आगयी.

संधया ने मनोज को भी साडी बात बताई तो उसने भी मुझे थैंक्स कहा.

मई - अब तू दोस्त को भी थैंक्स बोलेगा.

मनोज ने मुझे गले से लगा लिया .

आंटी- बीटा आज यही खाना खा क्र जाना.

मई - नहीं आंटी फिर कभी जरूर खाऊंगा अभी मई चलता हु.

संधया- ओह मर चुप चाप बैठो कही नहीं जाना है तुम्हे बोलै न खाना खा क्र hi जाना .

फिर मई कुछ बोल hi नहीं पाया आंटी किचन में चली गयी और मनोज बेयर लेने चला गया मैंने मना किया फिर भी वो नहीं रुका मई समिति को मैंने फ़ोन करके बता दिया की मई आज दोस्त के घर से खाना खा के आउगा.

फिर संधया मुझे अपना घर दिखने लगी और अपने रूम में लेकर गयी , उसने बहुत hi अच्छे तरीके से अपने रूम को सजाया था ,

संधया बात करते हुए मुझे hi देखती रहती थी

फिर मनोज आया और हम चाट पर जा क्र 1-1 बेयर निपटाया और हम निचे आ गए तो वह मनोज के पापा भी आ गए थे मई भी जाकर उनके पास बैठ गए.

हेमंत- बीटा लगता है तुम ने जिन लड़को को मारा है उसमे से एक कोमा में चला गया है और दूसरे की हाथ की हड्डी टूटी हुई थी तीसरे की नक् और दो डट टूटे हुए थे.

मई - क्या करू अंकल उस वक्त मुझे बहुत गुस्सा आ गया था, कोई प्रॉब्लम हो गयी क्या अंकल.

हेमंत- नहीं बीटा वो मई सब देख लूंगा तुम्हारा नाम तक नहीं आएगा.

मई - थैंक्स अंकल.
 
अपडेट 58

मई - क्या करू अंकल उस वक्त मुझे बहुत गुस्सा आ गया था, कोई प्रॉब्लम हो गयी क्या अंकल.

हेमंत- नहीं बीटा वो मई सब देख लूंगा तुम्हारा नाम तक नहीं आएगा.

मई - थैंक्स अंकल.

हेमंत- वैसे बीटा तुम यह खा पर रहते हो और तुम्हारे पिताजी का क्या नाम है.

मई - अंकल मई यह पर अपनी बुआ के घर पर रहता हु मेरी पूरी फॅमिली तो भोपाल में रहती है और हमारी पुस्तैनी हवेली महेंद्र ग्रह में है.

मेरे पिता का नाम राजेश्वर सिंह ठाकुर है .

हेमंत- कहि तुम्हारे दादा जस्ट का नाम राजनाथ ठाकुर तो नहीं है.

मई - जी अंकल मेरे दादाजी का नाम राजनाथ ठाकुर hi है .

हेमंत- ओह माय गॉड तुम राजेश्वर के बेटे हो.

ये बोल क्र वो मुझे गले से लगा लिया.

हेमंत - बीटा मई भी पहले व्ही रहता था मेरा पूरा बचपन व्ही बिता है मेरी शादी के बाद पुलिस की मौकरी मिल गयी तो मई यह चला आया और जानते हो तुम्हारे पिताजी मेरे बचपन कस दोस्त है लाओ तुम्हारे पिताजी का नंबर दो अभी बात करता हु.

फिर मैंने उन्हें पापा ला नंबर दिया तो उन्होंने तुरंत कॉल लगा दिया और लाउड स्पीकर पर दाल दिया हम सब भी उनकी बात सुनने लगे.

हेमंत - hello राजेश्वर ठाकुर जी .

राजेश्वर- जी बोलिये .

हेमंत- मई देहरादून से इंस्पेक्टर हेमंत बोल रहा हु आपका बीटा टाइगर मेरे पास है .

राजेश्वर- जी सर क्या क्र दिया मेरे बेटे ने .

हेमंत- आपके बेटे ने तो मुझे कर्जदार बना दिया है.

राजेश्वर - जी मई समझा नहीं.

हेमंत- अबे राजेश्वर मई बोल रहा हु तेरे बचपन का दोस्त हेमंत यद् है तेरी शादी पर मैंने नागिन डांस भी किया था.

राजेश्वर- अरे हेमंत तुझे कैसे भूल सकता हु यार तू hi यह से जाने के बाद मुझे भूल गया कैसा है यार और मेरा बीटा तेरे पास कैसे आ गया.

हेमंत- तेरे बेटे ने तो बहुत बड़ा अहसान क्र दिया मुझ पर यार फिर साडी बात उन्होंने मेरे पापा को बता दी.

राजेश्वर- ी ऍम प्राउड ऑफ़ माय सोन

हेमंत - चल ठीक है जब कभी यह आएगा मुझ से मिल क्र hi जाना ठीक है रखता हु..

फिर आंटी ने डिनर के लिए बुलाया, हम ने साथ में डिनर किया फिर मैंने जाने की इजाजत मांगी.

हेमंत - बीटा इसे अपना hi घर समझना किसी भी चीज की जरुरत हो तो मुझे बताना आखिर मेरे जिगरी दोस्त के बेटे जो हो.

फिर मैंने आंटी की स्वादिस्ट खाना खिलने के लिए थैंक्स कहा और फिर मनोज से मिला फिर लास्ट में संधया से कॉलेज में मिलने को बोल क्र निकल गया घर की तरफ.

घर पहुंचते तक काफी रात हो चुकी थी दरवाजा समिति ने खोला उसे देख क्र मेरा लुंड hi खड़ा हो गया क्यों की उसने बहुत hi सेक्सी नाईट ड्रेस पहनी हुई थी जिसमे उसके बिना ब्रा के बूब्स साफ दिखाई दे रहे थे .

मई - आज आपके इरादे कुछ ठीक नहीं लग रहे.

समिति - है बहुत दिन हो गए है पति देव जी आज मेरे सरीर के सरे नसों को ढीला क्र दो .

मई - धीरे धीरे बोल कोई सुन न ले.

समिति - कोई नहीं सुनेगा सब सो गए है.

मई - ठीक है चलो मई कपडे चेंज क्र के आता हु आपके रूम में.

फिर मई अपने रूम में आया और कपडे चेंज क्र के समिति के रूम में पंहुचा और समिति की ताबड़तोड़ चुदाई की एक बार छूट और एक बार उसकी गांड भी मरी मुझे भी बहोत मजा आया बहुत दिन हो गए थे चुदाई किये हुए.

उसके बाद मई अपने रूम में आकर सो गया.

अगली सुबह अलार्म की आवाज से मेरी नींद खुली मई फ्रेश हो क्र निकल गया पार्क की तरफ पार्क में पहुंच क्र क्या देखता हु आज दिव्या भी आयी हुई है जॉगिंग करने उसकी नजर जब मुझ पर पड़ी तब उसने hi.. का इसरा किया तो मई भी Hi खा और पहुंच गया उसके पास

मई - आज आप यह पर जॉगिंग करने आयी है.

दिव्या - क्यों मई जॉगिंग करने नहीं आ सकती क्या .

मई - नहीं वो बात नहीं है वो क्या है की आपको पहली बार देख रहा हु न इसलिए.

दिव्या - वो क्या है की मुझे भी अपने बॉडी को फिट रखना है न इसलिए मैंने भी सोचा की सुबह सुबह एक्सरसाइज और रनिंग करुँगी.

मई दिव्या को ऊपर से निचे तक देखा और कहा की आप तो वैसे भी फिट hi लगती है, मेरे इतना बोलते hi वो मुस्कुरा पड़ी.

फिर हम ने साथ में स्लो स्लो रनिंग किया और कुछ एससीसे किया और फिर एक बेंच पर बैठ क्र इधर उधर की बाटे की फिर हम दोनों ने एक दूसरे को bye कहा और निकल गए घर की और.
 
अपडेट 59

घर पहुंच क्र फ्रेश हुआ और कॉलेज के लिए रेडी हो क्र ब्रेकफास्ट किया फिर मई और कविता निकल गए कॉलेज की तरफ काव्य को अभी भी कमजोरी फील हो रही थी.

काव्य के नहीं होने पर हम दोनों मेरे साइकिल से hi जाते थे, मई साइकिल में कविता के साथ हलकी फुलकी छेद कहानी करते हुए कॉलेज जा रहा था कॉलेज के गेट में hi मेरे दोस्त मिल गए तो सभी से hi, hello किया और वह से कविता अपने फ्रेंड के पास चली गयी और हम पाछो अपने क्लास रूम की तरफ निकल गए यह एक बात हुई की संधया चोर नजर से बार बार मुझे hi देख रही थी जिसे रचना ने नोटिस क्र लिया .

क्लास रूम में आज मेरे एक तरफ संधया चिपक क्र बैठी हुई थी तो रचना ने धीरे से संधया के कण में खा

रचना - क्या बात है आज तू टाइगर को क्यों बार बार चोर नजर से देख रही है और तेरे चेहरे पर मुस्कान आ रही है.

संधया- क्या बताऊ यार कल क्या हुआ मेरे साथ.

रचना- क्या हुआ बता न यार.

संधया- तो सुन फिर उसके बाद कल जो भी हुआ मार्किट में सब रचना को बता दिया और तब से टाइगर मेरे दिल में बस गया है यार.

रचना- वाओ यार तुम्हे भी प्यार हो hi गया वो भी टाइगर बड़ी खुसनसीब है यार तू और एक मई हु जो आज तक सिंगल hi हु कास तेरी तरह टाइगर जैसा मुझे भी कोई मिल जाये, और ये बता तुम टाइगर को तो बता दिया है न की तू उस से प्यार करती है.

संधया - नहीं यार लेकिन जल्द hi मई अपने प्यार का इकरार उस से क्र दूंगी.

मई - क्या खुसुर फुसुर हो रही है तुम दोनों में .

संधया - वो कल के बारे में hi इसे बता रही थी की कैसे तुम ने उन लड़को को सबक सिखाया.

उसके बाद कुछ खास नहीं हुआ है मिस अलका जब क्लास में आयी तब मई उसमे hi खो गया था और ये बात मिस नोटिस क्र रही थी.

छुट्टी के बाद हम घर आ गए तो मई डिनर के बाद सो गया , शाम को मई काव्य के hi रूम में गया तो काव्य आराम क्र रही थी,

मई - अब तबियत कैसी है तुम्हारी .

काव्य- पहले से ठीक हु .

मई - यार तुम्हारे बिना कॉलेज जाने का मन नहीं करता है.

काव्य- मंडे से मई चलुगी तुम्हारे साथ कॉलेज .

उसके बाद ऐसे hi इधर उधर की बाटे होती रही जब तक के समिति ने रात के डिनर के लिए बुलाने नहीं आयी.

डिनर के बाद मई सो गया कल संडे था .

नेक्स्ट मॉर्निंग मई अपने रूटीन के अनुसार जॉगिंग करते हुए पार्क गया और दिव्या के साथ थोड़ी रनिंग और एससीसे की फिर थोड़ी देर बात क्र के मई घर आ गया और फ्रेश हो क्र ब्रेकफास्ट किया और अपनी साइकिल पकड़ क्र निकल गया घूमने

घूमते हुए मई नदी के पास पंहुचा व्य पर मैंने अपनी साइकिल कड़ी की और नदी के किनारे चले हुए आगे जा रहा था की अचानक मेरी नाराज नदी में एक जगह पर पड़ी वह पर देखने से ऐसा लग रहा था की वह से नदी उलटी बाह रही है मगर आगे सामान्य था देखने से बड़ा hi अजीब लग रहा था.

तभी मेरे अंदर से आवाज आयी

शेर सिंह- टाइगर यही है पटल में जाने का मार्ग तुम्हे जल्दी hi जाना होगा नहीं तो ये कल तक विलुप्त हो जायेगा फिर सायद खा पर पटल का दरवाजा खुलेगा पता नहीं होगा, इस लिए आज hi तुम्हे दरवाजे के पर जाना होगा किन्तु पहले तुम्हे विवाह करना होगा.

अब मुझे जल्दी hi कुछ सोचना पड़ेगा क्या कृ क्या करू किस्से शादी कृ समझ नहीं आरहा, काव्य , नहीं उसकी तो तबियत करब है , कविता वो अभी शादी के लिए नहीं मानेगी तो एक hi रास्ता बचा है वो है दीपिका.

मई तुरंत hi दीपिका को कॉल किया इधर दीपिका बाथरूम में थी उसका फ़ोन रिंग हो रहा था तभी फ़ोन रिसीव हुआ मई सामने कोण है ये जाने बिना hi बोल पड़ा

मई - hello दीपिका तुमने मुझे से खा था न की जब भी तुम मुझे शादी के लिए कहोगे मई आ जाउंगी तो समझ लो वि समय आ गया है और जो भी तुम्हे पूछना हो बाद में पूछ लेना तुम तुरंत hi मेरे बताये हुए एड्रेस पे पहुँचो मई एड्रेस सेंड करता हु और है दुल्हन का जो भी गेट उप होता है न वो रस्ते में hi ले क्र रेडी हो क्र आना और जल्दी है bye.

मैंने कॉल कट क्र दिया और पास के hi मंदिर पहुंच क्र पंडित को पता क्र शादी के लिए मनाया और शादी का पूरा सामान ले क्र दीपिका का वेट करने लगा.

थोड़ी hi देर में वो आ गयी लाल दुल्हन के जोड़े में घूँघट ढाका हुआ था वो अपनी कार से निकल क्र मंदिर पहुंची.

मई - देखो दीपिका मैंने तुम्हे इतनी जल्दी शादी के लिए क्यों कहा ये मई तुम्हे बाद में बताउगा ठीक है .

उसने कुछ नहीं कहा बीएस सर हिला दिया.

मई - ये घूँघट क्यों धक् रखा है ओह है शादी के पहले लड़किया घूँघट में hi मंडप में बैठती है गुड.

तो बे कॉन्टिनोएड
 
अपडेट 60

मई - चलो अब क्या सोच रही हो जो भी पूछना है शादी के बाद पूछ लेना मुझ पर विश्वास रखो .

उसके बाद मई उसका हाथ पकड़ा क्र मंदिर में बने मंडप के पास लाया और दोनों मंडप में बैठ गए.

मई - पंडित जी सुरु कीजिये और है थोड़ा सॉर्ट में निपटने की कोसिस कीजियेगा.

फिर पंडित मंत्र पढ़ना सुरु किया और कुछ रस्म करने के बाद बोले

पंडित - अब वर और वधु फेरे के लिए खड़े हो जाइये पहले ये वर माला एक दूसरे को पहना दो.

फिर पंडित जी मंत्र पढ़ने लगे और हम ने एक दूसरे को वर माला पहनाया फिर हवं कुंड के फेरे लेने लगे, सात फेरो के बाद फिर से बैठ गए

पंडित - अब वर वधु के गले में मंगलसूत्र पहनाइए.

मई मंगलसूत्र लेकर दीपिका के गले में पहनने लगा दीपिका ने सर झुका लिया था और ऊपर से घूँघट , मुझे मंगलसूत्र पहनने में परेशानी होने लगी तब दीपिका ने खुद hi अपने हाथ लेजाकर पहन लिए उस समय मई चेहरे की तरफ जायदा धयान नहीं दिया, पंडित जी फिर से मंत्र पढ़ने लगे और कुछ देर बाद

पंडित- अब कन्या के मांग में सिंदूर भरिये.

मई सिंदूर की डिब्बी लेकर दीपिका की तरफ देखा तो उसने घूँघट ओढ़ रखा था तो मैंने पहले घूँघट उठाया और जब घूँघट उठा तब मेरे मुँह से एक hi सबद निकल

मई - तुम ........

क्योकि जब घूँघट रूपी पर्दा उठा तब असलियत बहार आयी, घूँघट के उठने के बाद जिस लड़की का चेहरा सामने आया था वो दीपिका का नहीं नीलम का था.

मई - तुम यह , दीपिका खा है और तुम यह पर कैसे पहुंची ?

नीलम - हुआ ये की जब तुम ने दीदी को कॉल किया था तब दीदी बाथरूम में थी तभी मई किसी काम से दीदी के रूम में गयी तो देखा उनका मोबाइल बजा रहा है और तुम्हारा नाम शो हो रहा था तो मैंने फ़ोन उठा लिया और तुम ने शादी की बात बताई तो मैंने सोच यही सही मौका है तुम्हे पाने का इस लिए मैंने तुम्हारे फ़ोन कट करने के बाद मोबाइल की कॉल हिस्ट्री से तुम्हारा नंबर डिलीट किया और मई यह आ गयी.

मई - देखो नीलम मई तुम से शादी नहीं क्र सकता ये पाप होगा मेरे लिए.

नीलम - देखो टाइगर मई तुम से बहुत प्यार करती हु, और तुम्हे hi अपना जीवन साथी मन लिया है और मुझ से शादी करने में तुम्हे कोण सा पाप लगेगा .

तभी मेरे अंदर से आवाज आयी टाइगर ये समय पाप पुण्य के बारे में सोचने का नहीं है और तुम्हारी बहनो का विवाह तुम से hi होगा ये तुम्हारे किस्मत में लिखा है और वैसे भी ये मत भूलो की तुम पहले नील ग्रह के प्राणी हो बाद में यह के और नील ग्रह में विवाह के लिए रिश्ते नहीं देखे जाते वह सब जायज है तुम्हे ये विवाह करना hi होगा क्यों की पटल लोक का दरवाजा कभी भी बंद हो सकता है.

फिर मई जायदा न सोचते हुए मांग भर दिए नीलम भी हैरान हो गयी क्यों की मई अभी उसे पाप पुण्य की दुहाई दे रहा था और अचानक hi मांग में सिंदूर भर दिया था .

पंडित - विवाह संपन्न हुआ.

फिर हम ने देवी माँ का आशीर्वाद लिए और पंडित जी के पेअर छू क्र आशीर्वाद लिए और अंत में नीलम ने मेरे पेअर छू क्र आशीर्वाद लिए.

फिर मई पंडित जी को दक्षिणा दी और नीलम की लेकर निकल गया नदी के किनारे झा पर पटल में जाने का दरवाजा था, वह पर पहुंच क्र मैंने अपना शर्ट उतर दिए.

नीलम- क्या तुम अब नहाने वाले hi जो शर्ट निकल रहे हो.

मई - नहीं ये तो यह पर सुहागरात मानाने के लिए उतर रहा हु.

नीलम- जोके अच्छा क्र लेते हो .

मई - अब मई तुम्हे जिस लिए मैंने इतनी जल्दी शादी क्यों की ये बताउगा और साथ hi मई तुम से शादी क्यों नहीं करना चाहता था ये भी बताउगा.

मई शेर सिंह को यद् किया और मेरे पीठ पर जो टाइगर का टैटू बना हुआ था वो बहार आ गया नीलम sher(tiger) को अपने सामने देख क्र दर hi गयी थी और वो भी मेरे पीठ से निकलता देख क्र शेर सिंह सामने जा क्र बैठ गए और एक बार जोर

शेर सिंह- डी
 
सॉरी फ्रेंड्स ये अपडेट अधूरा है बाकि बचा हुआ अपडेट कुछ समय बाद मिलेगा
 
अपडेट 60 कंटिन्यू

मई शेर सिंह को यद् किया और मेरे पीठ पर जो टाइगर का टैटू बना हुआ था वो बहार आ गया नीलम sher(tiger) को अपने सामने देख क्र दर hi गयी थी और वो भी मेरे पीठ से निकलता देख क्र शेर सिंह सामने जा क्र बैठ गए और एक बार जोर

शेर सिंह- डरो नहीं पुत्री नीलम तुम्हारे मन में चल रहे सरे सवालों के जवाब मई दूंगा और मई तुम्हारे बारे में भी बताउगा की तुम कोण हो टाइगर क्यों तुम से विवाह नहीं करना चाहता था मगर मज़बूरी में करना पड़ा.

आओ मेरे करीब आओ और अपने आखो को बंद क्र के मेरे सर पर हाथ रखो तुम्हे सब पता चल जायेगा.

नीलम ने मेरी तरफ देखा तो मैंने उसे जाने का इसरा किया तो वो थोड़ा डरते डरते शेर सिंह के नजदीक गयी और डरते हुए hi शेर सिंह के सर पे हाथ रखा और आखे बंद क्र ली.

शेर सिंह का सर चमकने लगा और और नीलम को वो सब दिखाई देने लगा की कैसे नील ग्रह नस्ट हुआ और कैसे वो अपनी माँ अमांडा के गर्भ से निकल क्र वर्षा के गर्भ में आयी और उसका जन्म पृथ्वी में हुआ फिर कैसे उसके पापा को उसके दोस्तों ने भड़काया और उनके बहकावे में आकर उसने दुश्मनी निकली सब कुछ उसे शेर सिंह ने दिखा दिया.

फिर शेर सिंह के सर से रोशनी निकलनी बंद हो गयी तब नीलम ने शेर सिंह के सर से अपना हाथ हटा लिया और फिर मुद क्र मेरी तरफ देखा तो मैंने देखा की उसके आखो में आशु थे वो दौड़ते हुए मेरे पास आयी और भाई बोल क्र मेरे गले से लग गयी .

फिर नीलम को कुछ यद् आया तो वो मुझ से अलग हो क्र फुट फुट क्र रोने लगी

नीलम - ये क्या हो गया ऐसा नहीं होना चाहिए था.

मई- अब क्या हुआ और क्या नहीं होना चाहिए था.

नीलम - हम दोनों की शादी और जब तुम्हे पहले से पता था की हम दोनों सेज भाई बहन है तो फिर तुमने शादी क्यों की.

ये बोल क्र वो फिर से रोने लगी.

मई - इस का जवाब भी तुम्हे शेर सिंह hi दे सकते है.

शेर सिंह- हमारे नील गृह में ये सब आम बात है वह पर भाई बहनो में शादिया होती है और ये पाप पुण्य तो इस पृथ्वी लोक में hi मन जाता है हमारे ग्रह में नहीं और तुम ये क्यों भूल रही हो की तुम भी नील गृह का hi हिसस हो और टाइगर का अपने रिस्तेदार से विवाह करना उसके भगय में hi लिखा है जिसे कोई बदल नहीं सकता.

शेर सिंह की बात सुनकर नीलम मुस्कुरा क्र मेरे गले लग गयी.

शेर सिंह - बाकि बाटे बाद में करते रहना अभी अपने अगले पड़ाव की तरफ धयान दो , पटल लोक का का दरवाजा जयादा समय के लिए नहीं खुला रहेगा अब जाओ देर करना ठीक नहीं है.

ये बोल क्र शेर सिंह मेरे अंदर वापस आ गए और टैटू बन गए,

मई - चलो अब हमें चलना होगा.

नीलम - पर कहा.

फिर मैंने नीलम को पटल में जाने का रास्ता दिखाया.

नीलम - ये क्या है ऐसा मैंने कभी नहीं देखा नदी का पानी सिर्फ यही पर hi वापस जा रहा है ऐसा लग रहा है.

मई - है क्यों की यही पर hi पटल लोक में जाने का दरवाजा है .

नीलम - पर हमे यह क्यों जाना है.

मई - क्यों की मुझे सकती यही से प्राप्त होगी अब और कोई सवाल नहीं बाकि बाद में पूछ लेना.

ये बोल क्र मई नीलम का हाथ पकड़ क्र नदी में कूद गया.
 
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