Incest Story EK MAA PART-2 - Page 6 - SexBaba
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Incest Story EK MAA PART-2

अपडेट-36






निधि- ये क्या बोल रही हो मम आप, ऐसा कैसे हो सकता ह,

अंजलि- यहाँ सब कुछ हो सकता ह, और ऐसा पहले भी हो चुक्का ह,

निधि- पहले मतलब

अंजलि- सब पता चल जायेगा लेकिन उसे जानने से पहले मुझे तुम्हारा सच जानना ह पूरा सच, शुरू से आज तक का पूरा सच,

निधि- मेरे सच का आपके परिवार से क्या रिश्ता, मेरा सच बहुत बुरा ह मम, इसमें सिर्फ तकलीफ hi तकलीफ ह,

अंजलि- बेटी दर्द और तकलीफ क्या होती ह मुझसे भीतर शायद hi कोई समझ पाए, इसलिए तू बेफिक्र होकर बोल, तेरे सच से शायद हमारा पास्ट भी जुड़ा हो सकता ह,

निधि- आपका पास्ट मतलब मैं समझी नहीं,

अंजलि- जो घटनाये तेरी बेटी नित्य के साथ घटनी ह, वो इस परिवार के साथ जुडी हुई हैं, और वो क्यों जुडी हुई हैं ये सोचने वाली बात ह,

निधि- मैं सबके सामने नहीं बता पाऊँगी,

अंजलि- मुझे और निधि को एकांत जगह दो,

निधि- मैं चाहती हु ह्रदय वह रहे, उसे मेरा सच जानने का अधिकार ह, मैंने उससे बहुत कुछ छुपाया ह,

अंजलि ने ह्रदय को वही बुलवा लिया, अब रूम में निधि अंजलि ह्रदय थे,

आगे का part निधि की जुबानी उसका पास्ट…………

मेरा नाम निधि ह, मैं उत्तराखंड के रुड़की की रही वाली हु, मेरे परिवार में मेरे पिता सोराब कुमार और माँ मनीषा और मैं और 3 भेने और सबसे छोटा एक भाई थे,

हम चार बहेनो के बाद एक लड़का पैदा हुआ था, वो भी एक बाबा की कृपा से, उन्होंने कुछ तंत्र मात्रा किया था तब हमारा भाई पैदा हुआ था, माँ उस आश्रम में हमेशा जाया करती थी, और वो महाराज भी अक्सर घर आते थे,

पिता मजदूरी किया करते थे, हमारी पढाई रुक गई थी, छोटे भाई को अच्छा जीवन देने के लिए हम चारो बहेनो का एक टाइम खाना तक बंद हो गया था, तो मैंने पिता के साथ मजदूरी शुरू क्र दी, बहार काम करने की वजह से मैं जल्दी hi जवान लगने लगी थी, लोगो की नजर मुझे गन्दी होने लगी थी,

एक बार आश्रम के मजरज हमारे घर आये तो उनकी नजर मुझ पैर पड़ी, मैंने उस महाराज की नजरो में गन्दगी देखि, लेकिन हमारे लिए तो वो पूजनीय थे,

उस महाराज ने मेरे पिता को अपने आश्रम में काम पर रख लिया, और मुझे भी आश्रम की सफाई उसके कमरे की सफाई के लिए नौकरी पर रख लिया, चीजे काफी ठीक सी होने लगी, लेकिन अचानक मेरे पिता की तबियत ख़राब रहने लगी, तो उनकी जगह माँ आने लगी, कुछ समय तो सब नार्मल चल रहा था, लेकिन एक दिन उस महाराज ने मेरी बैक पैर हाथ फिर दिया, मैं दर क्र दूर हो गई, वो मुस्कुराता रहा, मैं वह से चली गई, मैंने माँ को बताया तो माँ ने कहा गलती से लग गया होगा, और वो महाराज हैं, उनकी सेवा अच्छे से किया कर,

मैं कुछ दिन महाराज से दूर बचती रही लेकिन एक दिन मैं सफाई कर रही थी तो महाराज कमरे में आ गए और दरवाजा बंद क्र लिया, मैं दर गई, महाराज मेरे पास आये

महाराज- तू बहुत खूबसूरत ह, तुझे यहाँ नौकरानी नहीं यहाँ की शिष्य होना छाइये, ये सब काम छोड़ क्र मुझसे दीक्षा ले ले, फिर देख तू कितना खुस रहती ह,

निधि- महाराज जी अगर मैं दीक्षा ले लुंगी तो घर कैसे चलेगा मुझे तो काम करना hi पड़ेगा,

महाराज- यहाँ की सेविका बन क्र बहुत पैसे मिलते हैं, बस कुछ समय मेरी सेवा करना फिर सब समझ जाएगी,

महाराज ने मेरी चूचियों पैर हाथ मर दिया, मैं एक दम दर गई और बहार को भागी लेकिन उसने मुझे पकड़ पैर बिस्टेर पैर लिटा दिया, काफी ताकतवर आदमी था वो, वो मेरे उप्पेर लेटने लगा तभी किसी ने दरवाजा खटखटा दिया,

महारज गुस्से इ चिलाय- कोण ह,

बहार से- गुरु जी बड़े गुरु जी का फ़ोन आया ह,

बड़े गुरु जी का नाम सुनते hi वो तुरंत बहार को भगा, आज मेरी जानबच गई थी, मैं रट हुए वह से बहार को सीधे माँ के पास भागी,

निधि ने माँ को सब बताया, तो मेरी माँ ने बहुत गुस्सा किया,

माँ- मैं बात करती हु महाराज जी से,

माँ बहार चली गई, मैं दरी हुई बैठी रही, कुछ देर में माँ आई और बोली महाराज बिजी हैं किसी व्यवस्था में, वो अपनी गलती पैर शर्मिंदा हैं, शाम को तुझे मिलकर माफ़ी मांगेंगे, तू चिंता मत कर,

निधि- माँ घर चलिए न यहाँ से, मुझे दर लग रहा ह,

माँ- नहीं आज तो हमे देर तक काम करना होगा, कल आश्रम में बहुत बड़े लोग आ रहे हैं, बहुत सफाई और तैयारी करनी होगी,

निधि- मैं कल से नहीं आउंगी yaha,kahi और काम कर लुंगी,

माँ- ठीक ह कल से मत आना,

मैं मान गई और काम में लग गई, शाम को अँधेरा होने लगा था, मैंने बहुत काम किया था, पूरा आश्रम सजा दिया था, वह से जल्दी जाने के चक्कर में बहुत जालिद जल्दी काम क्र रही थी, फिर भी अँधेरा हो चुक्का था,

सारा काम ख़तम करके मैं माँ को ढूंढ़ने गई, लेकिन माँ कही नहीं मिली, मैं ढूंढ़ते हुए महाराज के कमरे तक पहुंची तो मुझे अंदर आवाज सुनाई दी, जिसमे माँ की आवाज भी थी, मैं अंदर घुसने लगी तो अंदर का नजारा देख क्र मेरी रूह तक कैंप गई, मनीषा मेरी माँ उस महाराज के सामने घुटनो पैर बैठी हुई थी एक दम नंगी और वो महाराज माँ के सामने खड़ा था एक दम नंगा, उसका लुंड माँ के शामे झूल रहा था,


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मुझे अपनी आँखों पैर विश्वास नहीं हो रहा था, ऐस अलग रहा था जैसे मेरा शरीर प्राण त्याग चुक्का ह, मेरा दिमाग एक दम सुन था, कदम वही जैम गए थे, मैं फटी आँखों से सब देख रही थी, माँ ने महारज का लुंड पकड़ा जो काफी मोटा और लम्बा था, उसे अपने मुँह में भर लिया,

महाराज- चल कुटिया मादरचोद चूस इसे, तेरी उस रंडी कुटिया बेटी ने इसे नाराज किया ह, तू इसे खुश कर,

मनीषा जोर जोर से लुंड को चूसने लगी, काफी देर चूसने के बाद,

मनीषा- वो तो मूरख ह उस करमजली को क्या पता जीवन का सुख क्या ह, आपके निचे आ जाएगी तो काली से फूल बन जाएगी फिर कही नहीं जाएगी, वो भी ऐसे hi चूसेगी आपका ये लुंड,

महाराज- कब आएगी वो हरामजादी,

मनीषा- आप कहो तो आज hi ला दू, लेकिन आपने थोड़ी जल्दबाजी क्र दी उसके साथ, मैं धीरे धीरे तैयार करती उसे,

महाराज- उसे पाने के चक्कर में उसके बाप को काम दिया, फिर उसे काम दिया,

मनीषा- और मुझे यहाँ बुलाने के लिए तो आपने लिमिट hi पर क्र दी, उसके बाप को इतना बीमार क्र दिया को वो कभी भी मर सकता ह,

महाराज- वो मरेगा फिर तू आजाद हो ाजेगी न, फिर हमेषा के लिए यहाँ आ जाएगी और तेरी बेटी निधि मेरी सेवा करेगी, फिर तू मेरे बाकि चलो की सेवा करेगी, सब तुझे देख क्र लुंड हिलाते हैं, मैंने देखा ह,

मनीषा- है मैंने भी देखा ह, आप जिससे कहोगे मैं चुद लुंगी, आपकी सेवा करना मेरा धरम ह,

महाराज- तेरी छूट से लड़का जो निकला ह मैंने,

मनीषा- आपके लुंड का hi दम ह वर्ण मैंने तो सोचा था मेरी छूट से कभी लड़का निकलेगा hi नहीं, मेरे नामर्द पति ने तो 4-4 लकडिया दे दी,

महाराज- अरे उसने तो बहुत भला काम किया ह, वो चारो लड़किया मेरी सेवा करेंगी, पहले ये निधि, जब से इसके वो अनार जैसे चुके हाथ में लगे हैं लुंड बैठ hi नहीं रहा, उसके बाद तेरी दूसरी बेटी जब वो जवान होगी तो उसका भोग मैं लगाऊंगा, और निधि को बाकि चलो के लिए भेज दूंगा, फिर तीसरी फिर छोटी, चारो को आश्रम की गणिका बनाऊंगा, जो बहार जाकर बड़े बड़े लोगो को खुश करेंगी और यहाँ के लिए पैसा कमा कर लाएंगी,

मनीषा- जैसा आप कहे महाराज,

महाराज- और तेरा बीटा इस आश्रम की सेवा करेगा, हमारे लिए लकडिया लाया करेगा, जल्दी hi तेरा पति इस दुनिया से चला जायेगा, बस फिर तू जल्दी से यहाँ आकर रहने लग्न और इस रंडी निधि को मेरे इस लोडे के निचे ले आ, जब उसके मुँह में मेरा ये लोढ़ा जायेगा तो अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह, aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa

महाराज की आठ उसकी चीख में बदल गई, और उसके सामने बैठी मनीषा का मुँह कौन से लथपथ हो गया, और महाराज का खड़ा लुंड जमीन पर पड़ा था, हाथ में निधि एक तेज धार वाला चुरा लिए कड़ी थी, महाराज जोर जोर से चीख रहा था, निधि ने अगला वॉर उसकी गार्डन पैर किया और एक hi वॉर में उसकी गले को चिर दिया, महाराज के मुँह से चीखे बंद हो गई बस चारो तरफ खून hi खून था,

मनीषा दर और दहशत की वजह से शॉकेड में चली गई थी, महाराज के गिरते hi निधि ने मनीषा की तरफ देखा, और उसने मनीषा के बाल पकडे,

निधि- कलंकनी तू इतना गिर गई की अपने पति को धोखा देने लगी,

माणसीः- मुझे माफ़ कर दे बेटी

निधि- बेटी कैसी बेटी, वही बेटी जिसे तू इस कमीने से छुड़वाना चाहती थी, अपनी मासूम सी छोटी बच्चियों को नहीं बक्शा, और मेरे पापा तू मेरे पापा को मरना चाहती ह, तूने उन्हें मरने की कोशिश की,

मनीषा कुछ बोलने वाली थी की निधि ने वो चुरा मनीषा के मुँह में hi घुसा दिया, और मनीषा का मुहबन्द क्र दिया, मनीषा वही जमीन पैर गिर पड़ी और तड़प तड़प क्र मर गई, आश्रम के बाकि लोग जब तक चीख सुन क्र वह पहचुहे तब तक निधि ने दोनों को मार दिया था, निधि गुस्से में झुलस रहीथी, वो कड़ी उन दोनों को देखती रही, आश्रम के लोगो ने उसे पकड़ लिया और बांध दिया,

इतना सब होने के बाद भी किसी ने पुलिस को फ़ोन नहीं किया, सब एक दूसरे से बाते करने लगे,

उनमे जो सबसे उम्रदराज और महाराज के बाद सब काम सम्हालता था उसका नाम रणवीर था,

रणवीर- बड़े गुरु जी को फ़ोन करो और उन्हें सब बताओ, पुलिस को खबर नहीं लगनी चाहिए, पुलिस आश्रम के अंदर आई तो सब बर्बाद हो जायेगा,

निधि का गुस्सा जैसे जैसे शांत हुआ वो रोने लगी थी, सुबह तक उसे ऐसे hi बंधे रखा था, सुबह एक गुरु वह आये बहुत लम्बे चोदे, एक दम शांत किसम के इंसान थे, उन्होंने वह देखा तो बस मुस्कुराये और मेरे सामने आकर बैठ गए,

उन्होंने मेरे सर पैर हाथ फिराया, मैं रोये जा रही थी,

गुरु जी- शांत हो जा एक दम शांत हो जा, कुछ नहीं होगा, मुझे बता क्या हुआ था यहाँ, तूने ऐसा क्यों किया,

मैं चुप रही,

गुरु जी- मुझे नहीं बताएगी तो मैं तुझे यहाँ से बचाऊंगा कसिए,

निधि ने गुरु जी को सब बताना शुरू किया,

गुरु जी- इस कन्या के हाथ खोलो, और इसे नहला कर साफ़ सुत्रे कपडे पहनाओ,

कुछ औरते मुझे ले गई, तब तक उस कमरे का हुलिया hi बदल दिए गया, जैसे hi मैं साफ़ होकर आई तो देखा कमरा पूरा साफ़ ह

गुरु जी- अब क्या चाहती ह तू,

निधि- मेरे पापा वो मरने वाले हैं, मुझे उनके पास जाना ह,

गुरु जी- तू यहाँ से बहार मत जा अगर किसी ने शिकायत कर दी तो शंश्य हो जाएगी,

मैं शांत हो गई,

गुरु जी- इसके पिता का इलाज करवाओ, जाओ तुरंत,

निधि- मेरी भेने और भाई

गुरु जी- उन्हें आश्रम में भेजो और किसी पाठशाला में भर्ती कराओ,

मैंने गुरु जी के पैरो में पद गई,

गुरु जी- यहाँ नहीं बच्ची मेरे गले लग, तूने बहुत बहादुरी काम काम किया ह,

गुरु जी ने मुझे गले लगा लिया,

गुरु जी- मेरा नाम ह चिरनिवि, मैं इन सब का गुरु हु, तू मेरे साथ चल और वही रह इन सब से दूर,

मैंने मन करना चाहा लेकिन उनके अहसानो के आगे नहीं बोल पाई,

निधि- मेरे पिता

चिरंजीवी- ठीक होने के बाद उन्हें भी वही बुला लेंगे,

मैंने गुरु जी की बात मान ली, और उनके साथ वह से निकल क्र उनके आश्रम में चली गई, उनका आश्रम जम्मू कश्मीर की पहाड़ियों में था,

अभी मैं वह पहुंची hi थी की मुझे खबर मिली की मेरे पिता ने दम तोड़ दिया, मैं पूरी तरह टूट गई, बहुत रोई, ऐसा मन करता था मैं मर जाऊ, लेकिन गुरु जी की वजह से खुद को शांत रखने लगी और खुद को उनकी सेवा में लगा दिया,

कुछ महीने तो ठीक रहे, आश्रम में बहुत से टीचर आते जो वह की सभी लड़के लड़कियों को पढ़ते थे, मैं पढाई में कमजोर थी, लेकिन न जाने मुझे क्या हुआ की मेरा दिमाग काफी तेजी से सब कवर करने लगा, जिसका मुझे बाद में पता चला की वह सभी लड़कियों को कुछ दवाइया दी जाती थी जिससे उनके दिमाग की छमता बधाई जाती थी,

मैं काफी होशियार हो चुकी थी, लेकिन मेरी किस्मत में सब कुछ अच्छा कैसे हो सकता था, मेरे अंदर सेक्स की इच्छा बढ़ने लगी थी, हमेशा ऐसा मन करता की किसी के साथ सेक्स क्र लू, और चिरंजीवी बाबा की ाचै देख क्र वह की सभी लड़किया उनकी तरफ आकर्षित रहती थी, उसी तरह मैं भी रहती थी, ये सब दवाइयों का असर था जो वह ाकि लड़कियों को खाने में दी जाती थी,

एक बार में बाबा के कमरे की सफाई कर रही थी की, मैं उनके बाथरूम में थी, उनका बाथटब साफ़ करते हुए उसी में फिसल गई और पूरी भीग गई, तभी गुरु जी आ गए,

मैं दर क्र बहार जाने लगी तो गुरु जी ने कपडे बदलनेको कहा, उन्होंने एक साड़ी दी, मैंने उनके बाथरूम में पुरे कपडे उतर दिए और नंगी हो गई, फिर वो साड़ी पहन क्र बहार आई,

गुरु जी- तू बड़ी खूबसूरत ह निधि,

मैं शर्मा गई,

गुरु जी- तेरे नितम्ब पैर जो टिल ह बड़ा सूंदर ह

मैं चौंक गई, मेरे नितम्ब इन्होने कैसे देख लिए, मैंने उनकी तरफ देखा तो वो मुस्कुरा रहे थे,

उन्होंने मेरा हाथ पकड़ा और बीएड पैर गिरा दिया, मैं उठने लगी तो उन्होंने वो साड़ी पकड़ क्र खींच दी, छोटी सी साड़ी थी निचे मैं बिलकुल नंगी थी, मैं उनके सामने नंगी हो गई,

मैं बहुत दरी और शॉकेड थी, मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा था, मैं भागना छाती थी लेकिन मेरा बदन कुछ और hi बोल रहा था, गुरु जी के हाथ मेरे बदन पैर पड़े तो मैं गरम सी महसूस क्र रही थी,

निधि- गुरु जी मुझे जाने दीजिये

गुरु- तू घबरा मत सब ठीक ह, बस आराम से लेट जा मैं तुझे आज काली से फूल बना दूंगा,

मैं भागना छाती थी लेकिन चिरंजीवी बहुत ताकतवर था, उसने मुझे लिटाया और मेरे उप्पेर आ गया, उसने एक आयल ुत्या और मेरी छूट पैर दाल दिया, फिर अपनी धोती खोली और पूरा नंगा हो गया, उप्पेर से तो वो हमेसा नंगा hi रहता था, उसने मेरी चूचियों को अपणु मुठी में भीचा मेरे मुँह से दर्द भरी चीख सी निकल गई,

और अगले hi पल ऐसा लगा जैसे किसी ने मेरी छूट को चिर दिया हो, चिरंजीवी का मोटा लम्बा लुंड मेरी कुँअरि छूट को चीरता हुआ अंदर घुस गया, मैं जोर से चीखी और बेहोश हो गई, लेकिन उस पैर कोई असर नहीं हुआ, कुछ देर बाद मुझे होश आया मेरी छूट में भयंकर दर्द हो रहा था, मैं दर्द से तड़पने लगी, लेकिन वो मुझे छोड़ता रहा, अगले 1 घंटे तक वो मुझे छोड़ता रहा, मेरी छूट फैट चुकी थी, मैं न जाने कितनी बार बेहोश हुई होंगी, मुझे याद तक नहीं,

जब वो झाड़ा तो मैं फिर से बेहोश हो गई, वो एक ऐसा हैवान था, जिसके अंदर कोई दया रहम नहीं था, उसे बस कुँअरि लड़कियों की छूट चाहिए थी,

जब मुझे होश आया तो मैं चिरंजीवी के कमरे में hi निचे फर्श पैर पड़ी हुई थी बिलकुल नंगी, 4-5 आदमी और कुछ औरते वही थी, औरते बीएड की सफाई कर रही थी, कुछ उस बाबा की सफाई कर रही थी, आदमी बस मेरे पास खड़े थे,

मैं शर्म से पानी पानी हो रही थी, मैंने उठना चाहा लेकिन उठ न सकीय, अपनी जगह से हिल भी नहीं सकीय,

चिरंजीवी- कैसी ह निधि,

निधि- तुमने मेरे साथ बलात्कार किया ह, तुमने ऐसा क्यों किया,

बाबा- अरे मैंने तेरा भला किया ह, देखना मैं तुझे कितना कामयाब बना दूंगा

निधि- मैं पुलिस में रिपोर्ट करुँगी, तुम बलात्कारी हो, मैंतुम्हेँ बर्बाद कर दूंगी,

बाबा बस मुस्कुराया,

तभी एक आदमी बोलै पहले ये देख ले फिर फैसला कर क्या करना ह,

सामने रखे टीवी पैर उसने एक वीडियो चला दी, जिसमे मेरे हाथ में चुरा ह और मैं उस महाराज और अपनी माँ को मार रही हु, फिर जब से मैं यहाँ और जिस कमरे में रही उसमे बाथरूम में हर जगह कमरे लगे थे, तो मेरी नंगी वीडियोस का ढेर था, जो सबके समाने चल रही थी,

मैं शर्म और दर से पागल हुई जा रही थी, मेरा मन कर रहा था मैं मर जाऊ,

बाबा- तू hi फैसला कर तुझे क्या करना ह यहाँ रहना ह या बहार पुलिस के पास जाना ह,

निधि- मैं खुद को ख़तम कर लुंगी

बाबा- न न ऐसा मत करना वर्ण तेरे भाई बहन उनका क्या होगा, वो सड़क पैर भीक मांगेंगे, और तेरी बहन यही मेरे बिस्टेर पैर,

निधि- बास कीजिये,

मैं जोर जोर से रोने लगी, तो दो आदमियों ने मुझे नंगी को hi उठाया और सबके सामने hi मुझे मेरे रूम में लेजाकर बीएड पैर फेंक दिया, मैं अगले तीन दिन तक ऐसे hi पड़ी रही रोटी रही, लेकिन जब भूक जगती ह तो इंसान की शर्म सम्मान सब को खा जाती ह, और मेरे पेट की भूक ने मुझे मजबूर क्र दिया, मैंने अपनी किस्मत के साथ समझौता कर लिया, और बाबा के सामने जाकर हाथ जोड़ लिए,

बस उस दिन से मेरी ट्रेनिंग शुरू हो गई, उस ट्रेनिंग में मुझे इंग्लिश में बिज़नेस में और सेक्स में इतनी महारत दिला दी की मैं जल्दी hi बाबा के लुंड को आसानी से अपनी छूट में लेने लगी, कुछ hi समय में मैं आश्रम की सबसे बेस्ट गणिका बन गई, बाबा मुझे आश्रम में आने वाले बिज़नेस में के सामने परोसने लगा,

इधर वह आश्रम में कुछ आवाजे आने लगी थी, किसी के छिलने की, इतनी भयंकर आवाजे थी की किसी की आत्मा तक कैंप जाये, और ये बाबा का चेला रवि हमेशा उसके साथ रहता, फिर ये 3 महीने के लिए गायब हो गया, और जब ये तीन महीने बाद आया तो बहुत ताकतवर हो चुक्का था, इधर वो आवाजे भी आणि बंद हो गई,

फिर एक दिन बाबा ने मुझे बुलाया और एक बच्ची मेरी गॉड में दी और बोलै की आज से इस बच्ची को तुम पलोगी, इसे अपनी तरह काबिल बनाओगी लेकिन ख्याल रहे जवान होने तक इसे कोई छू न पाए, जब ये जवान होगी मैं इसका भोग लगाऊंगा, ये तुम्हारी जिम्मेदारी ह,

उस बच्ची को पाकर मैं बहुत खुश थी, क्योकि अब मुझे लोगो के सामने सोना नहीं पड़ता था, मैं खुद माँ नहीं बन सकती थी, क्योकि आश्रम में मेरी कोक को बाँझ क्र दिया था, मैं एक माँ की तरह उस बच्ची का ख्याल रखने लगी, वो थी मेरी बेटी नित्य,

लेकिन मेरे अंदर एक दर सताने लगा, की जब ये बड़ी होगी तो वो हैवान उसके साथ वैसा hi करेगा, नहीं मैं ये नहीं होने दूंगी, लेकिन मेरे पास कोई रास्ता नहीं था, तभी उस आश्रम में अशोक कपूर आया,

अशोक और बाबा के बिच एक डील हुई थी जिसमे अशोक के साथ एक ताकतवर आदमी और एक बहुत hi सेक्सी लड़की जनि थी, ये अशोक को तय करना था किसे लेकर जायेगा, और वो लड़की भी अपनी मर्जी से तैयार होनी चाहिए थी,

मुझे काफी टाइम बाद किसी मर्द के पास भेजा गया, अशोक कपूर मुझे इतना खुश हुआ की वो मुझे अपने साथ लेकर जाने को कहने लगा, मुझे एक उम्मीद जगी और मैंने अशोक कपूर के साथ चलने का फैसला कर लिया लेकिन उसे एक शर्त राखी की उसकी बेटी उसके साथ जाएगी, लेकिन किसी को पता नहीं चलना चाहिए,

अशोक ने मुझे एक आईडिया दिया की मैं किसी तरह इस बच्ची को मारा हुआ दिखा दू और यहाँ से बहार निकल दू, मैंने वैसा hi किया, नित्य को अशोक के हाथो आश्रम से बहार निकल दिया, अशोक ने मुझे एक मरे हुए बच्चे की बॉडी लेकर दी, आश्रम के बहार बहुत घेरि खाई थी, और मैंने ऐसे दिखाया की मेरा पेअर फिसल गया और बच्ची उसमे गिर गई,

अशोक कपूर ने पहले hi वह आदमी लगाए थे, जिन्होंने वह खून दिखा क्र ऐसा दिखाया की कोई जानवर बच्ची को खा गया,

उस दिन बाबा इतना गुस्सा हुआ की पूरा आश्रम दहल उठा, उस दिन बाबा के कहर से बस मुझे किस्मत ने बचा लिया था, वर्ण वो मुझे उसी दिन मर देता,

उस दिन अशोक कपूर मुझे वह से बचा लाया, उसके बाद मैं फिर कभी वापस नहीं गई, और नित्य को अपनी बेटी बना कर पलटी रही, अशोक ने आश्रम में ये बताया की उसने एक बेटी गॉड दिलवाई ह मुझे ताकि किसी को शक न हो, मैं अशोक के अहसान निचे इतना डाब गई की उसका कहा हर काम करने लगी, उसके लिए लोगो से छोड़ने लगी, उसके बिज़नेस को बढ़ने लगी, जो हो सकता था वो करती गई, और नित्य को छुपा कर पलटी रही, लेकिन आज वो उस बाबा के सामने आ hi गई,

निधि अपनी बात कह क्र चुप हो गई, उसकी आँखों में आंसू थे, अंजलि ने उसके सर पैर हाथ रखा और उसे दिलासा दिया,

ह्रदय की आँखों में दर्द और अफ़सोस था,

हार्डी- मुझे माफ़ करना, मैंने आपके साथ इतना बुरा व्यव्हार किया,

निधि- तुमने जो किया अपनी जगह बिलकुल सही था, मेरे साथ गलत हुआ इसका मतलब ये नहीं ह की मैं किसी के साथ गलत करू,

ह्रदय- अब आप आजाद हैं आपने अशोक का अहसान उतरने के लिए आपने बहुत कुछ कर दिया ह,

अंजलि- तुम्हारे भाई बहेनो का क्या हुआ,

निधि- सबकी शादी हो गई, सब विदेश में सिफत करवा दिए थे मैंने,

अंजलि- गुड, अच्छा अशोक को ताकतवर इंसान क्यों चाहिए था,

निधि- अशोक का एक बीटा ह रोहन, जिस रात मैंने उस महाराज और अपनी माँ को मारा उसी दिन एक और घटना हुई थी, अशोक का बीटा एक अंश नाम के लड़के से भीड़ गया था, और अंश ने उसे इतना मारा की वो कोमा में चला गया, अशोक कपूर उसे बदला लेना छटा था, तो वो चिरंजीवी के पास आया था, लेकिन चिरंजीवी ने अशोक को रोक दिया की वह कुछ चल रहा ह, अशोक का बदला अपने आप पूरा हो जायेगा,

लेकिन कुछ महीनो बाद भी जब कुछ नहीं हुआ तो अशोक फिर गया चिरंजीवी के पास तो उसने रवि को भेजा वह लेकिन वो बहुत बुरी तरह पिट कर आया, बड़ी मुश्किल से जान बची उसकी, उसके बाद से वह कोई नहीं गया,

इसलिए अशोक अपने अलग मकसद पैर निकल गया,

ह्रदय- अलग मकसद मतलब

निधि ने अशोक के मकसद के बारे में बताया, जिसे सुन क्र ह्रदय शॉकेड रह गया,

तभी कपिल का फ़ोन अंजलि के पास आया,

अंजलि- है क्या हुआ

कपिल- दीपा आ गई माँ,

अंजलि- मैं आती हु,

अंजलि निधि को लेकर बहार चली गई, ह्रदय भी साथ था,

अंजलि- दीपा जल्दी से अपने उस पंडित जी से बात क्र जिसने तुम लोगो की शादी करवाई थी,

दीपा- वो तो बहुत बूढ़ा हो चुक्का होगा माँ

अंजलि- शादी करवानी तो आती होगी न उसे

दीपा- है वो तो आती होगी,

अंजलि- तो तुरनत बुला और शादी में क्या क्या सामान चाहिए जालिद से पूछ, जब तक वो यहाँ पहुंचे हमे पूरी तैयारी करनी ह,

दीपा ने तुरंत फ़ोन मिला दिया, और कुछ बात करने के बाद, उसके फ़ोन पैर एक संस आ गया

दीपा- माँ शादी के सामान की लिस्ट आ गई ह,

अंजलि- कपिल जल्दी से सामान मँगाओ, और तुम सब लड़कियों को तेया रकरो,

ह्रदय- लड़कियों मतलब

अंजलि- दीपा इसे लेकर जा और रेडी कर शादी के लिए,

दीपा को घर में आते hi सब बता दिया था परिवार वालो ने,

दीपा ह्रदय का हाथ पकड़ क्र रूम में ले गई,

ह्रदय- माँ ये सब क्या ह, नित्य के अलावा भी किसी की शादी ह क्या,

दीपा- तू ज्यादा मत सोच जो हो रहा ह वो होने दे, माँ जैसा कर रही हैं वो होने दे बस,

ह्रदय- मैं उनके किये को रोक नहीं रहा हु, लेकिन मुझे भी तो पता होना चाहिए क्या हो रहा ह, ये लड़ाई मुझे लड़नी ह और मुझे hi नहीं पता,

तभी वह अंजलि आ गई,



अंजलि- सही कहा तूने, अगर तुझे hi पता नहीं होगा तो तू लड़ाई लड़ेगा कैसे, तेरी शादी आज 9 लड़कियों से होगी, क्यों होगी इसका कारन मैं तुझे समझाउंगी,
 
अपडेट-37






दीपा- माँ ये सच जानने का अधिकार सभी का ह, सबको पता होना चाहिए ये क्यों हो रहा ह, इसकी वजह क्या ह, वो लड़किया भी सब कुछ जानने की हक़दार हैं, उन्हें उनकी मर्जी करने का हक़ मिलना चाहिए,

अंजलि- सही बोल रही ह, सबको बुलाओ मैं सबसे बात करुँगी,

दीपा तुरंत निचे गई और सबको एक जगह इकठा किया, अंजलि ह्रदय के साथ निचे आ गई,

सभी लड़किया लगभग रेडी हो चुकी थी, जब वो रेडी हो रही थी तो सब खुश थी लेकिन जैसे hi निचे आई और देखा साडी लड़किया रेडी हो राखी हैं तो सब कंफ्यूज सी एक दूसरे को देख रही थी, बस वन्य एक दम रिलैक्स थी और ाव्य वो रेडी नहीं थी उसके फेस पैर अजीब से भाव थे,

अंजलि- तुम सभी लड़किया सोच रही होंगी ये सब क्या हो रहा ह, वैसे तुम्हारी माओ ने तुम्हे पहले hi समझा दिया होगा की तुम्हारा रिश्ता ह्रदय के साथ बनना ह, हमारी फॅमिली का सच भी तुम सब जानते हो, लेकिन एक सच और ह जो तुम्हे जानना चाहिए और फिर खुद फैसला करना चाहिए की तुम्हे इस रस्ते पैर चलना ह या नहीं, मैं अब तक जो फैसले लेती आ रही थी उसके कुछ कारन थे, वर्षा उस बारे में बहुत कुछ जानती ह, लेकिन पूरा सच क्या ह वो मैं बताती हु,

जब तुषार अलका और रूचि लापता हो गए तो हमने पूरी ताकत लगाई उन्हें ढूंढ़ने में, जब सब जगह से हम हर गए हमे कोई रास्ता नहीं दिख रहा था, पहले मैंने अपनी ताकत लगाई फिर पुलिस की ताकत का इस्तेमाल किया, जब मैं सब जगह से हर गई तो मैंने भगवान् के रस्ते की तरफ चल दी, मैं सभी बड़े बड़े ज्योतिशो के पास गई, बहुत से ढोंगी मिले, लेकिन बहुत से ऐसे भी थे, जिन्होंने मुझे सही रास्ता दिखाया, उसी दौरान राजस्थान में एक घटना घाट रही थी, जो बिलकुल इस दुनिया से अलग थी, ऐसी घटना जिसे पूरी दुनिया अंधविश्वास कहेगी, मैं उस घटना के पीछे चली गई, सच में मुझे एक अनोखे इंसान के बारे में पता चला, और वही मुझे गुरु जी के बारे में पता चला, जिन्हे ढूढ़ने मैं हिमालय की पहाड़ियों में चली गई, जहा मेरी मुलाकात गुरु जी से हुई, उन्हें देख क्र hi ऐसा लगा जैसे मेरी सभी शमश्याओ का हल हो गया हो, मन शांत हो गया,

मुझे देखते hi गुरु जी बोले-

गुरु जी- आओ आओ बेटी, तू मुझ तक पहुंच hi गई,

अंजलि- आप मुझे जानते हैं,

गुरु जी- मैं क्या जनता हु इससे फरक नहीं पड़ता, तुम क्या जानना चाहती हो ये सोचने वाली बात ह,

अंजलि- गुरु जी मैं अपने बेटे और बेटी को ढूंढ़ना चाहती हु,

गुरु जी- बहुत hi होनहार बच्चा ह वो, उसका कोई कुछ नहीं बिगड़ सकता, लेकिन

अंजलि- लेकिन, लेकिन क्या गुरु जी,

गुरु जी- अगर तू उसे वापस पाना चाहती ह तो कुछ कड़े फैसले करने होंगे,

अंजलि- मैं कुछ भी करने को तैयार हु, आप बस बता दीजिये,

गुरु जी- तो सबसे पहले अपने पुरे परिवार को अलग क्र दे, सब का पालन पोषण अलग होना चाहिए, और अपने बेटे को इतना मजबूत बना की कोई ताकत उसे तोड़ न सके,

अंजलि- मेरा बीटा, मैं उसे hi तो ढूंढ़ने आई हु गुरु जी,

गुरु जी- वो नहीं, दूसरा जो उसी से पैदा हुआ ह, वो तेरे पास अमानत ह भविष्य की, उसे इतना मजबूत बनाना की वो हर लड़ाई लड़ सके, और जो तूने इस बार किया ह वो फिर से दोहराना होगा, इस लड़के की शादी उन सभी लड़कियों से होगी जो तेरे बेटे से पैदा हुई हैं,

अंजलि- लेकिन गुरु जी ये सब कैसे हो सकता ह,

गुरु जी- क्यों नहीं हो सकता, जब तू खुद अपने बेटे से शादी कर सकती ह, अपनी बेटियों की शादी उनसे करवा सकती ह तो ये क्यों नहीं,

गुरु जी की बात सुनकर क्र अंजलि शर्म से पानी पानी हो गई,

गुरु जी- मैं तुझे यहाँ शर्मिंदा नहीं कर रहा , ये होना hi था, ये तो नियति में लिखा हुआ ह पुत्री, और इससे भी ज्यादा लिखा हुआ ह, जो होकर hi रहेगा, बस तुझे फैसला करना ह वो कैसे होगा,

अंजलि- मैं कुछ समझी नहीं,

गुरु जी- ये सब बच्चे भविष्य की धरोहर हैं तेरे पास, ये साधारण बच्चे नहीं हैं, इन सभी में कुछ न कुछ खास ह, ये सभी कन्याये बहुत खास हैं, इनका कौमार्य एक श्राप और एक आशीर्वाद में बंधा ह, और इनका कौमार्य किसी ऐसे इंसान के हाथो भांग न हो जो इस समाज के लिए खतरा हो, इसलिए ये काम बस तेरे बेटे के द्वारा होना चाहिए,

और जब तक ये सभी बच्चे बड़े न हो जाये, या यु कहु सम्भोग के लायक न हो जाये एक दूसरे से दूर रहने चाहिए, खास क्र तेरे बेटे से, जब भी ये कन्याये उसके नजदीक रहेंगी, उन कन्याओं का अंदर से एक ऊर्जा उत्पन होगी जो नकारातमक विचारो वाले इंसानो को अपनी तरफ आकर्षित कर सकती है, इसलिए सबको दूर रखना, जब इन सबका मिलान होना होगा, तब ये खुद किसी न किसी कारन से एक दूसरे के करीब आते जायेंगे,

और इनका मिलान होता जायेगा, अगर तुझे लगे मिलान में देरी हो रही ह तो तुझे खुद आगे बढ़ क्र इनका मिलान करवाना होगा,

अंजलि- लेकिन मुझे कैसे पता चलेगा की इनके मिलान में देरी हो रही ह,

गुरु जी- जब इनके आस पास कोई ऐसा दिखे जिसे देख क्र लगे ये इस दुनिया का तो नहीं ह, या तुम्हारे युग का नहीं ह, तो समझ जाना अब समय बहुत काम ह,

अंजलि- लेकिन इसमें मेरे बेटे और बेटियों को कैसे ढूंढा जायेगा,

गुरु जी- तेरा बीटा खुद ढूंढेगा, वो अपने पिता को ले आएगा, लेकिन उसके बाद भी कुछ ऐसा ह जो करना पद सकता ह, जिसकी तैयारी तुझे अभी से शुरू करनी होगी,

अंजलि- क्या करना होगा गुरु जी,

गुरु जी- तू यहाँ बैठी ह इसी वक़्त एक और घटना घाट रही ह, एक लड़की ह निधि तुझे उसे ढूंढ़ना होगा और उसके साथ जुड़ना होगा, उसके द्वारा जो अविष्कार होगा उससे जुड़ना होगा, वो अविष्कार किसी गलत हाथो में न जाये, हो सकता ह तुझे उस अविष्कार की जरुरत हो,

अंजलि- आपको तो सब कुछ पता ह, मुझे बताइये न क्या होने वाला ह, मेरे बच्चे किसके पास हैं, कोण ह दुश्मन,

गुरु जी- भगवान् शंकर को सब पता होता था क्या कब कैसे होगा फिर भी वो कभी किसी को कुछ नहीं बताते थे, जो होने वाला ह अगर पहले hi बता दिया तो वो होगा hi नहीं, इसलिए जो हो रहा ह उसे होने दिया जाये, तू अपना प्रयाश जारी रख, और जो हो रहा ह उसे होने दे, तेरा दुश्मन सिर्फ तेरा दुश्मन नहीं ह, वो समय का दुश्मन ह, तेरे बेटे का जनम एक बहुत hi पुण्य करम के लिए हुआ ह, अपने पिता को ढूंढ़ने के अलावा भी उसका एक लक्ष्य होगा, जो उसे पूरा करना होगा,

अंजलि- मेरा क्या योगदान होगा उसमे,

गुरु जी- तू उससे दूर रहना, जब तक वो जवान न हो जाये, खुद समय आएगा जब तू उससे मिलेगी, लेकिन कोई ऐसा उसके पास रहे जो उसे महाबली बनाये, जब जब वो इन कन्याओ के करीब आएगा उसकी ताकत बहदति जाएगी, ये समझो उसकी ताकत इन कन्याओ के कौमार्य में कैद ह,

अंजलि- जैसा आप बोल रहे हैं मैं वैसा hi करुँगी,

गुरु जी- एक फैसला और लेना होगा जो तेरे लिए शायद मुश्किल होगा लेकिन लेना होगा, वो बहुत जरुरी होगा, उसका कारन मैं न बता सकता हु, न समझा सकता हु, वक़्त आने पैर समझ आ जायेगा,

गुरु जी ने कुछ बाते अंजलि को बताई जिसे सुनकर अंजलि शॉकेड रह गई,

अंजलि वह से वापस अपने घर आई और आते hi सबसे पहले फैसला लिया की सभी बच्चो को दूर भेजा जाये ताकि वो सेफ रहे, और खुद लग गई तुषार अलका और रूचि को ढूंढ़ने,

अंजलि ये सब बता रही थी लेकिन उसने गुरु जी की आखरी बात को छुपा लिया, जो वक़्त आने पैर सामने आएगी,

अंजलि की बाते सुनकर पूरा परिवार शॉकेड और कंफ्यूज सा था,

इधर निधि की समझ में कुछ नहीं आ रहा था, वो तो अब तक इसी बात से कंफ्यूज थी की ह्रदय अंजलि का बीटा कैसे,

अंजलि- मैं वर्षा को कुछ बाते बताई और उसे काम पैर लगाया, जब बच्चे बड़े होने लगे तो वन्य का दिमाग बहुत hi तेज था, वर्षा ने निधि की खोज की और बहुत मुश्किल नहीं हुआ, क्योकि जिस रफ़्तार से निधि टर्की कर रही थी, इतना उसे पहले किसी ने नहीं की, तब वर्षा ने वन्य को निधि के साथ जोड़ा और उस अविष्कार का हिस्सा बनाया,

जब ह्रदय ने मुझे बताया की दो आदिमानव जैसे इंसानो ने उस पर हुम्ला किया तो मुझे समझ आ गया की अब कार्य में देरी हो रही ह, इसलिए मैंने लड़कियों को ह्रदय के साथ रिश्ता बनाने के लिए आगे बढ़ने को कहा, लेकिन अब वो चिरंजीवी तुम सब लड़कियों के पीछे ह, और वक़्त काम h,isliye मैंने ये फैसला लिया ह की तुम सबकी शादी ह्रदय से कर दी जाये और जल्द से जल्द तुम सबकी सुहागरात मनवा दी जाये,

अंजलि- अब तुम सब फैसला करो मैंने जो किया या कर रही हु सही ह या गलत,

सचिन- आप कभी गलत नहीं कर सकती माँ, हम सब मिल्क रभी आपके सामने इस लायक नहीं की आपके किये फैसलों पैर सवाल उठा सके,

दीपा- मुझे नहीं पता क्या सही ह क्या गलत, लेकिन आपने जब भी कोई फैसला लिया ह वो सही hi साबित हुआ ह,

रिंकी- तुम सब खड़े सोच क्या रहे हो, लड़कियों क्या सोचा तुमने शादी करनी ह या नहीं, तुम सबने साडी बात सुन ली न, कोण कोण तैयार ह शादी के लिए,

सभी लड़कियों ने एक दम हाथ उठा दिए सिवाए ाव्य के,

वर्षा- बेटी तू शादी नहीं करना चाहती,

ाव्य वह से अपने कमरे में भाग गई, बिना कुछ बोले

वन्य- वो ऐसे शादी नहीं करेगी माँ

अंजलि- मतलब, क्या ाव्य को ह्रदय पसंद नहीं ह,

वन्य- पसनद, वो पागल ह ह्रदय के लिए, लेकिन आज जो हो रहा ह वो उसके प्यार का अपमान ह, यहाँ जितनी लड़किया ह, ज्यादातर ह्रदय की सुंदरता उसकी ताकत और परिवार के इतहास की वजह से उसके करीब जा रही हैं, लेकिन ाव्य ऐसी ह जो बिना देखे ह्रदय से प्यार करती आई ह, उस दिन से जब से उसने ह्रदय के बारे में सुना तक नहीं था, जानती तक नहीं थी, माँ ने मुझे ह्रदय के बारे में बताया इसलिए मेरे दिल में उसके लिए प्यार ह, लेकिन ाव्य ऐसी थी जिसके दिल में बिना देखे बिना सुने बिना जाने ह्रदय के लिए प्यार ह,

दीपा- ये कैसे हो सकता ह,

वन्य तुरनत दौड़ क्र गई और फाइल उठा ले, और उसने वो फाइल सबके सामने खोल दी जिसमे सिर्फ ह्रदय से मिलते जुलते चेरे की तस्वीर थी, जो हाथ से बनाई गई थी,

वन्य- ये तस्वीरें उसने अब से 5 साल पहले बनाई थी, तब तो जवान भी नहीं हुई थी, वो अपने खयालो में सपनो में बस ह्रदय को देखती आ रही ह, और उसी से प्यार करती आ रही ह, जब मैंने ह्रदय कीतस्वीर पहेली बार देखि तो मैं खुद सोच में पद गई थी, लेकिन मुझे ाव्य और ह्रदय के किसी पुराण ेजनम के रिश्ते का अहसास होने लगा था,

सीमा- ये तो अच्छा ह उसे उसका प्यार मिल रहा ह,

वन्य- उसे प्यार खैरात में नहीं छाइये, उसे वो हासिल करना था, उसे प्यार तो मिल रहा ह, लेकिन वो प्यार नहीं ह सिर्फ एक प्यारा खिलौना ह, क्योकि ह्रदय के दिल में उसके लिए कोई प्यार वाली फीलिंग्स नहीं हैं,

ह्रदय- ऐसा किसने कहा,

सबने ह्रदय को देखा,

ह्रदय- मुझे ाव्य से बात करनी ह, आप सब तैयारी कीजिये,

ह्रदय ाव्य के रूम में चला गया, बाकि सब शादी की तैयारी में लग गए,

ाव्य अपने बीएड पैर लेती हुई थी उदास सी,

ह्रदय- क्या हुआ नाराज हो,

ाव्य एक दम उठ क्र बैठ गई,

ाव्य- मैं क्यों नाराज होने लगी,

ह्रदय- मुझसे गलती हुई ह न

ाव्य- गलती कैसी गलती

ह्रदय- अपने दिल की बात बोलने में, लेकिन उसकी भी वजह ह,

ाव्य- दिल की बात कैसी बात, और कैसी वजह

ह्रदय- मैं तुम्हे ये नहीं बता पाया की मैंने जबसे तुम्हे देखा ह, मेरे दिल में बस तुम्हारा की चेरा घूमता रहता ह, मैं समझ नहींपा रहा था ये सब क्यों हो रहा ह, और कहा इसलिए नहीं था कही तुम्हे ऐसा न लगे की मेरे चारो तरफ लड़किया ह फिर भी मैं तुम्हारे पीछे पड़ा हु, कितना हवसी हु मैं,

ाव्य- तुम झूट बोल रहे हो ह न

ह्रदय- मैंने कभी झूट नहीं बोलै, मैं अपनों से झूट नहीं बोलता, और बी क्या झूट बोलूंगा जब मेरी तुम्हसे शादी होने वाली ह,

ाव्य- मैंने शादी को है नहीं कहा अब तक

ह्रदय- मैं चाहता हूत ुम मुझसे शादी कर लो, मुझे तुम्हारी जरुरत ह, न जाने क्यों लगता ह तुम मुझे पूरा कर सकती हो,

आवय- तुम सच कहे रहे हो न

ह्रदय- अंजलि माँ की कसम

ाव्य ह्रदय के गले लग गई,

ाव्य- मैं कब से इस पल का इंतजार कर रही थी,

ह्रदय- तो चले पहले शादी करते हैं, फिर अपने प्यार को जीते हैं,

ाव्य- तुम चलो मैं तैयार होकर आती हु,

ह्रदय निचे आ गया,

दीपा- क्या हुआ मान गेन ा

ह्रदय- हम्म्म्म मान गई,

अंजलि- क्या कहा तूने उसे

ह्रदय- जो सच ह वही कहा, उसे देख क्र दिल में हलचल होती ह, ऐसा लगता ह जैसे मैं उसी के लिए बना हु, लेकिन

अंजलि- लेकिन क्या

ह्रदय- ऐसा मुझे दो लड़कियों के साथ और महसूस होता h,main उनसे ज्यादा नहीं मिला लेकिन फीलिंग्स शामे आती ह, मैं तो उन्हें ठीक से जान भी नहीं पाया हु लेकिन ऐसा लगता ह जन्मो से जनता हु,

दीपा- कोण हैं वो

अंजलि- बाकि सब के लिए क्या फील होता ह

ह्रदय- अपने पैन की फीलिंग्स तो सबके लिए आती ह, सबके लिए लगता ह ये मेरे लिए hi हैं लेकिन उन तीनो के लिए कुछ खास ह,

अंजलि- नाम बता

ह्रदय ने नाम बता दिए, जिन्हे सुन क्र दीपा और अंजलि चौंक गए,

अंजलि- ऐसा कैसे हो सकता ह

ह्रदय- वही तो मैं आपसे बताना चाहता था, मैंने कहा था ये जरुरी ह लेकिन आपने सुना नहीं,

अंजलि- बता मुझे क्या बात ह,

तभी पंडित जी ने आवाज लगाई, लड़के को बुलाओ इतनी शादिया ह जल्दी कीजिये,

अंजलि- तू जा मंडप में बैठ हम बाद में बात करेंगे,

ह्रदय मंडप में बैठ गया, और सबसे पहले मंडप में आई शनाया, उसके बाद दिया फिर वन्य फिर नित्य अन्य फिर काम्य फिर नैना और रम्य और सबसे लास्ट में किसी राजकुमारी की तरह ाव्य, सबसे शादी के बाद पंडित जी निकल गए, इस सब में पूरी रात निकल गई,

अंजलि- अब से तुम सब पति पत्नी हो लेकिन समाज के सामने तुम्हारा रिश्ता पहले जैसा hi होगा, तुम्हारी मांग का सिन्दूर किसी को दिखना नहीं चाहिए, नित्य की शादी का ऐलान मैं कर चुकी हु, तो जब मैं कहूँगी वो सबके सामने आकर खुद को ह्रदय की पत्नी बता सकती ह,

ाव्य- मैं क्यों नहीं बता सकती, सबको पता ह मैं वर्षा की बेटी हु, न की इस घर की,

वर्षा- बात तो ठीक ह,

वन्य- ये hi बात मुझ पैर भी लागु होती ह,

काम्य और नैना- हम पैर भी ये बात लागु होती ह,

रम्य और अन्य – इस हिसाब से तो हम तो बहुत hi दूर के हैं, हँ चुप क्र क्यों रहेंगे,

अंजलि- लेकिन मैं सबको ह्रदय की पत्नी कैसे दिखाउंगी,

सभी एक साथ- वो हमे नहीं पता आप क्या करेंगी, लेकिन हम पत्नी की तरह hi रहेंगी, हम चुप क्र नहीं रहेंगी, जो हमारी माओ के साथ हुआ हम नहीं करेंगे,

शनाया- मतलब मैं और दिया को hi चुप क्र रहना होगा, ये तो गलत हुआ ह,

अंजलि- ठीक ह मैं कुछ सोचती हु, लेकिन जब तक मैं कहु तब तक तो शांत रहोगी,

निधि- मेरे लिए ये बहुत hi शॉकिंग ह, इतनी साडी लड़किया एक hi लड़के से शादी कर रही हैं वो भी इतना खुश होकर, मेरी बेटी तक को कोई ऐतराज नहीं दिख रहा, जिसने कभी अपना खिलौना तक किसी को नहीं दिया, आज वो बिना सोचे अपने जीवन साथी को एक दूसरे के साथ ख़ुशी से बात रही हैं, कैसे,

एक औरत कभी ऐसा नहीं कर सकती, वो सब बर्दास्त कर सकती ह लेकिन सौतन को नहीं शी सकती,

वन्य- हम सेह सकती हैं, क्योकि हम सौतन नहीं ह, हम भेने हैं, और

अंजलि- और इन सबका रिश्ता निश्चित था, अब आगे कैसे इस रिश्ते को निभाना ह ये सब इनका फैसला होगा, इनकी माओ ने अपने अपने रिश्ते को बखूबी निभाया था, उनका प्यार आज भी दीखता ह, अब ये कैसे उस प्यार को निभाती हैं, ये इनके उप्पेर ह,

निधि- मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा ह,

अंजलि- वक़्त दो अपने आप को, सब समझ जाओगी, लेकिन उससे पहले हमे बहुत काम करने हैं,

सभी लड़कियों को उनक ेरूम में लेकर जाओ और सचिन पूरी हवेली की सिक्योरिटी बढ़ा दो, बहार के किसी भी आदि पैर विश्वास मत करना, प्लॉस पैर भी भरोसा मत करना, कम उस बाबा के साथ मिला हुआ ह,

सचिन- जी माँ

अंजलि- ह्रदय अब हम उससे मिलेंगे, शाक्षी से, देखते हैं उसे क्या क्या पता ह, जब तक तुम्हारे लिए सुहाग सेज सज जाएगी,

ह्रदय और अंजलि वर्षा और दिया चल दिए शाक्षी के पास, शाक्षी एक कमरे में बढ़ी हुई थी, 2 आदमी उसके पास खड़े थे

अंजलि- कैसी ह ये

आदमी- बहुत शोर मचती ह ये मम,

अंजलि- इसे कुछ खाने को दिया या नहीं,

आदमी- अभी तो नहीं,

अंजलि- बहुत बढ़िया, अब तुम जाओ इसके लिए खान ेके लिए लेकर आओ, तब तक हम इससे कुछ बात कर ले,

शाक्षी- तू क्या बात करेगी मुझसे रंडी, बाजारू औरत, न जाने किस किस के साथ मुँह कला किया ह तूने,

ह्रदय- जबान सम्हल क्र बात एक्रो,

शाक्षी- तू इसका क्या लगता ह, तेरी दादी लगती होगी ये तो, तुषार का बीटा ह तू, लेकिन तेरी माँ कोण ह, तुषार की तो बहुत सी प्रेमिकाए थी, इस रंडी ने अपने बेटे को प्लेबॉय बना दिया, न जाने किस किस के उप्पेर चढ़ा दिया, पुरे चंडीगढ़ में तुषार के hi बच्चे घूम रहे हैं,

लेकिन तुषार का बाप कोण ह ये तो इसे भी नहीं पता होगा,

(एक बात तो शाक्षी ने सही बोली की पुरे चंडीगढ़ में तुषार के hi बच्चे घूम रहे हैं,)

अंजलि- इसकी माँ और दादा के बारे में तो ये सब जनता ह, लेकिन तुम कोण हो, क्यात ुम जानती हो,

शाक्षी- मैं कोण हु, मेरे बारे में सब जानते हैं, विकास और रजनी की बेटी हु मैं,

अंजलि- रजनी की या विकास की,

शाक्षी ने कंफ्यूज hi होरक अंजलि को देखा,

अंजलि- है है सही सवाल किया ह मैंने रजनी की या विकास की बेटी ह तू, तेरे जवाब पैर hi मैं आगे के सवाल करुँगी, और तेरे साथ क्या करना ह ये फैसला होगा,

शाक्षी- मैं दोनों की बेटी हु, तेरी तरह नहीं हु मैं,

अंजलि- तेरी हरकत तो बता रही हैं तू सिर्फ रजनी की बेटी ह, विकास का खून तुझमे ह hi नहीं,

शाक्षी- मेरी माँ तेरी तरह नहीं थी,

अंजलि- तेरी माँ क्यात hi वो सब जानते हैं, और वो क्या करती हुई पकड़ी गाइट hi ये भी सब जानते हैं,

शाक्षी- तेरी इस नाजायज बेटी की वजह से मेरी माँ मरी गई,

शाक्षी ने दीपा की तरफ इशारा किया,

अंजलि- इसने तो अपनी उस माँ को मारा था जिसने इस ेजनम देते hi फेंक दिया था, इसे बर्बाद करने की कोशिश किट hi, इसे मरने तक की कोशिश की लेकिन तूने क्या किया, तूने तो अपने उस बाप को मार दिया जिसने तुझे दुनिया के सरे सुख सरे संस्कार, दुनिया भर का प्यार दिया,

तूने तो अपनी उस बहन को बर्बाद कर दिया जोट ेरे लिए अपनी जान तक दे सकती थी, और किस लिए अपनी उस बदचलन माँ के लिए जिसने अपने पति को धोखा दिया, राजेश जी के साथ गलत किया, अपनी बेटी के साथ गलत किया, और बाद में जिस आदमी ने उसे इतना प्यार सम्मान दिया उसके साथ भी धोखा किया, सिर्फ अपनी हवस के लिए, तू अपनी माँ जैसी बन गई,

शाक्षी- मेरी माँ को मारा तुम लोगो ने,

अंजलि- उसे तो मरना hi था, लेकिन तूने अपने परिवार को क्यों मारा, अपने आप को एक रंडी से भी बदतर बना दिया, कोई भी चलता फिरता मर्द तुझे छोड़ क्र चला जाता ह, तू किसी के सामने भी अपनी टंगे खोल देती ह, ये hi इज्जत ह तेरी,

दीपा- जिस लड़की को पाने के लिए पूरा कॉलेज के लिए मरने मरने को तैयार था, जिसकी सुंदरता की वजह से शहर की लड़किया जल भून जाती थी, आज वो अपनी हवस के लिए किसी भी मर्द की बहो में चली जाती ह,

शाक्षी की आँखों में आंसू थे,

लेकिन अगले hi पल उसके दन्त भींच गए,

शाक्षी- ये सबा तुम्हारी वजह से हुआ ह,

वर्षा- ये नहीं सुधरने वाली इससे जानकारी निकालो या इसे मर दो,

अंजलि- तेरा और उस सोनिया का की आपलं ह,

शाक्षी- हहहहहा तुझे बर्बाद करना, तेरे पुर िखण्डन को ख़तम करना,

अंजलि- वो तू नहीं क्र पायेगी, अगर तू चाहती ह किट ु जिन्दा रहे तो बता दे मेरे बच्चे कहा हैं,

शाक्षी- वो तुझे कभी नहीं मिलेंगे, तेरे सभी अपने मरे जायेंगे, तूने मुझे किडनैप किया ह, सोनिया को पता चल गया होगा, अब वो तेरे बच्चो को मार देगी,

ह्रदय- उसे पता hi नहीं चलेगा, उसे जानकारी दी गई ह किट ु उस धामा के वह से जाते hi डार्क र भाग गई ह,

शाक्षी- ये नहीं हो सकता,

ह्रदय- तुमने एक हतियार तैयार किया था न हमारे परिवार को बर्बाद करने के लिए, अब वो हतियार तुम्हे hi बर्बाद करेगी, दृष्टि उसे सब पता चल गया ह,

शाक्षी- हहहहह हतियार से तू मिला hi कहा ह अब तक, दृष्टि तो एक प्यादा ह,

ह्रदय- धामा ह ने तुम लोगो का हतियार, शायद तुम भूल गई गाओं में वो टकराया था मुझसे,

शाक्षी गुस्से में ह्रदय को देखने लगी,

अंजलि ने एक थपड शाक्षी को मारा- अगर तू चाहती ह तू जींद आरहे तो बता दे कहा ह मेरे बच्चे वर्ण कसम से यही मार दूंगी तुझे,

थपड इतना तेज था की शाक्षी के हॉट से खून आने लगा था,

शाक्षी- मुझ ेमरने से कुछ नहीं मिलेगा, मेरे पास कोई जानकरी नहीं ह, सोनिया मुझे कुछ नहीं बताती, और उसने मेरे साथ जुड़ने से पहले hi तुषार अलका रूचि को गायब क्र दिया था, मुझे नहीं पता उसने कहा रखा ह,

अंजलि- उस बाबा का अड्डा कहा

शाक्षी- अच्छा तू बाबा के बारे में भी जानती ह, हहहहह वो तुझे नहीं छोड़ेगा, तुम सबको मर देगा,

ह्रदय- उसका नाम hi चिरंजीवी ह लेकिन वो ज्यादा दिन जीवित नहीं रहेगा,

शाक्षी- उससे टकराने की भूल मत करना लड़के, वर्ण तुझे जो घमंड ह अपनी ताकत का वो एक hi झटके में चूर चूर हो जायेगा, वो इंसान नहीं ह,

अंजलि- अगर इंसान नहीं ह तो और भी अच्छा ह, उसे मरते हुए हमे दुःख नहीं होगा की हमे किसी इंसान को मार दिया,

शाक्षी- जब वो तुम सबको मरेगा और तुम्हारे घर की बेटियों के साथ उनकी छूट के साथ चीरफाड़ करेगा, तब तुम्हे पता चलेगा तुमने किस्से पन्गा लिया ह,

दीपा- तेरे अंदर वही गन्दा खून ह जो उस रजनी में था,

शाक्षी- सबसे पहले वो इस घर के सबसे छोटी बेटी के साथ शुरुआत करेगा, जल्दी hi वो उसे अपने हवस का शिकार बनाएगा, उसका लुंड इतना बड़ा ह की छूट से घुस क्र लड़की के मुँह ताका ा जाये, और कुँअरि लड़की को इतनी बेदर्दी से छोड़ता ह की लड़की पहेली चुदाई में hi मर जाती ह, जब वो तुम्हारी बेटी की छूट में अपने लुंड को बेदर्दी से घुसायेगा और वो दर्द से चटपटायेगी, उसके मुँह से हकिकः भी नहीं निकल पायेगी, और तुम सब ये नजारा अपनी आँखों से देख रहे होंगे तब तुम्हे तकलीफ का अहसास होगा,

दीपा ने एक जोर दर थपड शाक्षी के मुँह पैर जड़ दिया,

दीपा- तू मेरी बेटी के साथ ऐसा करवाएगी, मैं तुझे जान से मार दूंगी,

अंजलि- छोड़ उसे

दीपा- माँ ये दिया के बारे में ऐसा बोल रही ह, सबसे छोटी वही ह इस घर में, अगर इसने मेरी बेटी की तरफ नजर भी उठाई तो मैं इसकी आँखे निकल लुंगी,

शाक्षी हसने लगी,

ह्रदय- ये दिया के बारे बात नहीं कर रही,

सबने ह्रदय को देखा, शाक्षी ने भी थो अजीब नजरो से ह्रदय को देखा,

ह्रदय गुस्से में शाक्षी के नजदीक पंहुचा और दोनों हाथ कुर्सी पैर रख दिए, ह्रदय की नजरो में इतना गुस्सा था की उसकी आँखे लाल ो गई, जिससे शाक्षी के अंदर एक दर सा बैठ गया,

अंजलि- ये किसकी बात कर रही ह, कोण ह वो

ह्रदय- दृष्टि



ह्रदय की बात सुनकर सब चौंक गए,
 
अपडेट- 38






ह्रदय ने वह धमाका सा कर दिया था, किसी को भी अपने कानो पैर विश्वास नहीं हो रहा था,

अंजलि- तू तू तू ये क्या क्या कह रहा ह,

ह्रदय- है माँ दृष्टि रूचि माँ की बेटी ह, जिसे इन लोगो ने अपने जाल में फसाया हुआ ह,

अंजलि- तूने मुझे पहले क्यों नहीं बताया

ह्रदय- मैंने कहा था माँ बहुत जरुरी बात करनी ह, लेकिन आपने कहा इससे जरुरी कुछ नहीं ह,

अंजलि- उसे पता ह इस बारे में,

ह्रदय- अभी नहीं

दीपा- तुझे किसने बताया

ह्रदय- कोमल मौसी ने, वो दृष्टि की सुरक्षा की वजह से hi वह इन सबके अत्याचार सेह रही हैं, अब तक दृष्टि की नफरत शेती आई ह, ताकि वो सेफ रहे,

अंजलि- मेरी रूचि की बेटी, हे मैं उसे पहचान क्यों नहीं पाई,

वर्षा- हममे से कोई उससे मिला hi कहा ह,

अंजलि- मैंने उसे उस दिन देखा था फिर भी पहचान नहीं पाई,

शाक्षी- तूने सब पता कर लिया, लेकिन उसे बचा नहीं पायेगा, उसका वो हाल होगा जिस पैर तुम सब खून के आंसू बहाओगे,

अंजलि ने एक और थपड शाक्षी के मुँह पैर जड़ दिया, अंजलि ने एक चाकू उठाया और शाक्षी की जांघ में गड दिया,

अंजलि- मैंने तुझे अब तक इसलिए कुछ नहीं बोल रही थी क्योकि मुझे लगा तेरे साथ गलत हुआ ह, लेकिन तू इस लायक नहीं ह, तेरी फितरत hi ऐसी ह, तेरे अंदर उस रजनी का खून बोल रहा ह, न जाने उस बदचलन औरत ने क्या गुल खिलाये होंगे, तू विकास की औलाद ह भी या नहीं, या फिर उस रजनी ने तुझे न जाने किस आवारा के साथ चुद क्र पैदा किया ह,

क्योकि विकास का खून उस लकड़ी नेहा में ह, जो इतनी तकलीफो के बाद भी इज्जत की जिंदगी जीने के लिए आज तक तरस रही ह,

शाक्षी दर्द से तड़प रही थी,

शाक्षी- aahhhhhhhhhhh छोड़ दो मुझे ahhhhhhhhhhhh

अंजलि- आज मैं तुझे जान से मार दूंगी,

शाक्षी दर्द से रोये जा रही थी, ह्रदय ने अंजलि को पकड़ लिया और जबरदस्ती खींचता हुआ बहार ले गया,

वर्षा ने अपना सर पकड़ लिए,

वर्षा- आज तो ये गई थी,

दीपा- इसका तो टाइम आ गया ह, इसके पास कोई जानकरी ह नहीं, तो माँ इसे जिन्दा क्यों रखेगी,

वर्षा- हम कुछ कर सकते हैं क्या

दीपा- हम क्या कर सकते हैं,

वर्षा- यार मुझसे तो देखा नहीं जाता देख कितना खून निकल रहा ह, ये तो मर जाएगी,

दीपा- देखा तो मुझसे भी नहीं जा रहा, लेकिन माँ से कहे क्या, कुछ झूट बोल दे क्या की इसने कुछ जानकरी दी ह,

वर्षा- लेकिन हम बताएँगे क्या

शाक्षी- प्लस मुझे बचा लो मैं मरना नहीं चाहती,

दीपा- हम भी तुझे मरना नहीं चाहते, जैसी भी ह लगती तो मेरी बहन hi ह, लेकिन क्या करू,

वर्षा- तुझे कुछ जानकरी हो तो बता दे, हम बोल देंगे तूने सब बता दिया ह, उम्मीद ह माँ तुझे छोड़ दे,

दीपा- वर्ण माँ आज इसे नहीं छोड़ने वाली, इसने रूचि की बेटी के बारे में बोलै ह, रूचि माँ की जान थी, उसकी बेटी के बारे में इतना गलत नहीं सुन सकती माँ

शाक्षी- मुझे कुछ नहीं पता, मैं कुछ नहीं जानती,

दीपा- नहीं जानती तो अपनी किस्मत को कोस अब, की तू क्यों कुछ नहीं जानती,

वर्षा- चल यार मुझसे नहीं देखा जा रहा ये सब,

दोनों बहार को चल दी, तभी शाक्षी ने आवाज लगाई,

शाक्षी- मेरी बात सुनो प्लस,

दोनों ने पलट क्र शाक्षी को देखा,

शाक्षी- वो तीनो जिन्दा हैं, और उस बाबा चिरंजीवी के पास कैद में हैं,

दीपा- ये तो हम भी जानते हैं कुछ नया बता

शाक्षी- वो बाबा तुषार और रूचि पैर कोई एक्सपेरिमेंट क्र रहा ह,

वर्षा- कैसा एक्सपेरिमेंट,

शाक्षी- मुझे नहीं पता, मुझे कभी मिलने नहीं दिया गया उनसे,

दीपा- कहा ह वो लोग

शाक्षी- मैं नहीं जानती, मैं हमेषा सोनिया के साथ रही हु, बाबा के पास तो कभी कभी जाती थी, जब वह किसी को खुश करना होता था,

वर्षा- कहा जाती थी,

शाक्षी- अलग अलग जगह,

दीपा- कोई खास जगह भी थी क्या,

शाक्षी- पहेली बार सोनिया मुझे जम्मू कश्मीर लेकर गई थी, वह का आश्रम पहाड़ो के बिच में था,

वर्षा- कश्मीर

दीपा- बढ़िया, अब लगता ह माँ तुझे जान से तो नहीं मारेगी,

शाक्षी- तुम लोग क्या करना चाहते हो,

वर्षा- जो भी होगा तुझे पता चल जायेगा,

शाक्षी- तुम उसका कुछ नहीं बिगड़ सकती, वो इंसान नहीं ह,

दीपा- मेरी बात धयान से सुन, जब तुम लोगो ने तुषार को कैद किया था, उस समय वो अकेला था, और वो मासूम था, उसके अंदर चालाकी नहीं थी, अगर अंजलि माँ उसके साथ होती तो यमराज की भी हिम्मत नहीं थी तुषार को हाथ लगा सके,

इस बार ह्रदय के साथ उसकी माँ रहेगी, और ह्रदय को मैंने तैयार किया ह, खुद शैतान भी उसके सामने आकर खड़ा हो जाये तो भी मेरे बेटे का कुछ नहीं बिगड़ सकता,

दीपा का लहजा इतना खतरनाक था की शाक्षी के शरीर में दर जहर झूरी सी फ़ैल गई,

दीपा और वर्षा बहार को चल दिए,

शाक्षी- तुम दृष्टि को नहीं बचा पाओगे, वो उसे मार देगा

दीपा- वो रूचि की बेटी ह, और रूचि को शायद तुम ठीक से नहीं जानती थी, दृष्टि के अंदर रूचि और तुषार का खून ह, वो अकेली hi उस चिरंजीवी के साम्राज्य को तबाह कर सकती ह, बस अब तक उसे ये नहीं पता की वो ह कोण,

शाक्षी बस दीपा को देखती रह गई,

इधर इनकी बाते चल रही थी, वही साडी लड़किया एक रूम में बैठी थी, क्योकि उनके रूम सजाये जा रहे थे, लेकिन ये तय नहीं हो प् रहा था सबसे पहले किसके पास जायेगा ह्रदय,

लड़किया भी इसी बात पैर विचार कर रही थी,

अन्य- वो सबसे पहले कहा जायेंगे,

रम्य- सबसे बड़ी से स्टार्ट करते हैं न,

दिया- इस हिसाब से तो मेरा नंबर 9 दिन बाद आएगा, और तुम सब उसे निचोड़ लोगी,

इस बात पैर सब है पड़े,

शनाया- वो अकेले hi हम सभी को निचोड़ सकते हैं, वो भी एक hi रात में, तो इस बात की फ़िक्र मत कर,

दिया- लेकिन मैं इतना इंतजार नहीं कर सकती,

काम्य- तुम तो उनके साथ क्र चुकी हो न, फिर इतनी उतावली क्यों हो रही हो,

वन्य- नहीं इसके साथ कुछ नहीं हुआ, वो सब झूट था, कामिनी को झांसे में डालने के लिए,

नैना- तो कोण कोण क्र चुक्का ह,

शनाया और वन्य ने हाथ उठाया,

वन्य का हाथ देख क्र सभी चौंक गई,

काम्य- जो क्र चुकी ह उसे इंतजार करना होगा, उनका नंबर सबसे बाद में आएगा,

शनाया- ये तो गलत ह

वन्य- ये hi सही ह, अंजलि माँ ने बताया था न हमारी विर्जिनिटी खोलना असली मकसद ह, तो सबसे पहले सबकी खुलने दो,

नैना- तो अब बचे हम 7,

अन्य- पर्ची निकल लेते हैं न,

ाव्य- मेरा नाम मत डालना

सबने ाव्य को देखा,

सब एक साथ- क्यों

ाव्य- तुम सब पहले कर लो, मुझे कोई जल्दबाजी नहीं ह, मैं आराम से पूरा टाइम लुंगी,

काम्य- वह 1 और काम हुई अब 6 बची, नित्य तुम्हे भी कुछ कहना ह क्या

नित्य बेचारी इन बातो से पहले hi शरमाई हुई बैठी थी, अपना नाम सुनकर और शर्मा गई,

रम्य- लो ये तो पहले hi शर्मा गई, ये बेचारी क्या करेगी,

नैना- मेरे पास एक आईडिया ह, जिससे जल्दी काम हो सकता ह

सब – क्या

नैना- शनाया तुम्हारे हिसाब से वो हम सबको एक साथ संतुष्ट करने की छमता रखते हैं, तो 2 को तो आराम से झेल hi लेंगे,

शनाया- मतलब,

नैना ने काम्य को देखा और मुस्कुरा पड़ी, काम्य भी मुस्कुरा पड़ी,

नैना- हम दोनों ने सब कुछ एक साथ किया ह आज तक और एक बार काम्य ने कहा था हम दोनों एक साथ पहला सेक्स करेंगे, आज हमारे पास मौका ह और हमारे पति भी एक hi हैं, तो मैं और काम्य एक साथ उनके पास जायेंगे,

रम्य- वाओ सुपर तुमने तो मेरा दिल खुश कर दिया, मेरा सपना भी पूरा कर दिया, मैं और अन्य भी एक साथ जायेंगे,

शनाया- लो आधी प्रॉब्लम तो सोल्वे, मैं और वन्य जायेंगे नहीं, ाव्य सबसे बाद में जाने का बोल hi रही ह, और ये दो दो के जोड़े से जाएँगी, तो अब ये फैसला कर लो पहले कोण जाएगी,

वन्य- वह मेरी समझदार बहन, अब तक ये hi तो लड़ाई ह पहले कोण जाएगी, तूने क्या नया बता दिया,

सब है पड़ी, काफी देर तक सब बहस करते रहे लेकिन कोई फैसला नहीं आया, तो ाव्य बुरी तरह किलास गई, और गुस्से में उठी,

ाव्य- तुम साडी की साडी भें की लोदी हो, तुम लोग ये तय नहीं क्र प् रही कोण पहले छुड़ेगी, क्या सबको आज hi छोड़ना ह, सबको पता ह अकेली उसे नहीं जेल पायेगी लेकिन फिर भी अपनी अपनी फड़वाने को बैठी हैं,

जब पता ह वो सबको एक साथ पेल सकता ह तो किस बात की चिंता ह, पहला जोड़ा 2 का जायेगा और उसके बाद 1 जाएगी दिया या नित्य,

आज रात के लिए इतना काफी ह, अगला जोड़ा कल दिन में जायेगा, अगर तुम लगो को दिन में छोड़ना पसंद नहीं ह तो रात में छुड़वा लेना, काम्य और नैना सबसे बड़ी हैं चाहे 15-20 दिन hi बड़ी हैं लेकिन बड़ी तो ह hi, तो उनका नंबर सबसे पहले आएगा, और नित्य सबसे छोटी ह, हमारी परिवार में तो दिया छोटी ह, लेकिन अब नित्य भी इसी परिवार का हिस्सा ह तो नित्य पहले जाएगी,

कल रम्य और अन्य और उसके बाद दिया जाएगी, समझ गयी न तुम सब

इतना बोल क्र ाव्य उठी और अपने कमरे की तरफ चली गई,

साडी बैठ क्र उसे बस देखती रह गई,

शनाया- वन्य ये क्या था,

वन्य है पड़ी- मैं बहुत देर से सोच रही थी, इतनी देर बहस हो गई लेकिन मेरी शेरनी अब तक कुछ बोली क्यों नहीं, उसे ज्यादा सोच विचार करना पसंद नहीं ह, और बहस सुन्ना तो बिलकुल पसंद नहीं ह, और उसकी गलियों का बुरा मत मन्ना, मुंबई में कुछ ज्यादा hi गालिया देते हैं तो इसने भी सिख ली,

काम्य- कुछ भी कहो लेकिन लड़की में लीडर शिप की क्वालिटी ह, फैसला सुनाने का तरीका बड़ा hi खतरनाक ह, ऐसा लगता जैसे कोई रानी हो,

शनाया ने सीमा को कॉल करके बता दिया की पहले किसी सुहाग रात होगी,

तो उसके रूम को सजाया जाने लगा,

इधर आश्रम में सोनिया ने बवाल मचाया हुआ था की शाक्षी कहा चली गई, पुरे आश्रम में किसी को नहीं पता की शाक्षी कहा गई ह, पुरे आश्रम में खोज बीन हो चुकी थी, आस पास के जंगल में भी ढूंढ लिया था,

सोनिया ने कोमल का गाला पकड़ लिया

सोनिया- हरामजादी बता कहा ह शाक्षी

कोमल- मुझे कैसे पता होगा उसके बारे में, मैंने तो रात में उसे अपना बेग पैक करते देखा था, इससे ज्यादा मुझे नहीं पता,

दृष्टि- कही वो यहाँ से भाग तो नहीं गई,

सोनिया- वो सामान लेकर क्यों जाएगी, मुझे बताये बिना क्यों जाएगी,

कोमल- हहहहह अब यहाँ तुम लोगो का रक्षक नहीं ह न, इसलिए शायद,

सोनिया ने कोमल को गुस्से में देखा,

दृष्टि- हो भी सकता ह, वो हमेशा यहाँ पापा के लिए hi तो आती थी,

सोनिया- उस हरमजादि को मैं जान से मर दूंगी,

दृष्टि- शायद इसी दर से वो भाग गई, पापा यहाँ ह नहीं तो उसकी रक्षा कोण करेगा, लगता ह ह्रदय का दर उसके दिल में कुछ ज्यादा hi बैठ गया था, उस दिन तारीफ भी कुछ ज्यादा hi कर रही थी,

सोनिया गुस्से में चीजे िधा रूधर फैकने लगी,

तभी आश्रम का एक तगड़ा सा शिष्य वह आया,

आदमी- ए ये तोड़ क्यों क्र रही ह, ये गुरु जी का आश्रम ह तेरा घर नहीं ह,

सोनिया एक दम शांत हो गई,

दृष्टि के फेस पैर मुस्कान आ गई,

दृष्टि सोनिया को लेकर अंदर चली गई,

दृष्टि- दादी शाक्षी का यहाँ से भागना हमारे लिए खतरनाक हो सकता ह, अगर वो उस अंजलि के हाथ आ गई तो क्या होगा,

सोनिया- मैं उसे जिन्दा नहीं छोडूंगी,

दृष्टि- लेकिन पापा गए कहा हैं,

सोनिया- मुझे नहीं पता गुरु जी ने बुलवाया ह कुछ जरुरी काम ह,

दृष्टि- अगर इस बिच ह्रदय आ गया तो क्या होगा,

सोनिया- किसी को नहीं पता हम कहा हैं,

दृष्टि- वो हमे ढूढ़ता हुआ हमारे गाओं तक पहुंच गया था, यहाँ क्यों नहीं आ सकता,

सोनिया- गाओं में तेरी गलती से आया वो,

दृष्टि- आपने hi तो भेजा था मुझे उसके पीछे, मुझे क्या पता था यहाँ आएगा, लेकिन वो हमे ढूंढ क्यों रहा ह,

सोनिया- हमे मरने के लिए,

दृष्टि- लेकिन वो अंजलि तो हमसे सब चीन चुकी ह, हमे उसे बर्बाद करना था, वो हमे क्यों ढूंढ रही ह, उसका कुछ ह क्या हमारे पास, उसने तो खुद अपने बेटे और बेटी को मार दिया था, फिर ये हमारे पीछे क्यों ह,

सोनिया- वो औरत क्या चाहती ह तू नहीं समझेगी,

दृष्टि- लेकिन ह्रदय से पता चला था वो अपने पिता को ढूंढ रहा ह, और गाओं में पता चला उसके पिता तुषार ह, जब अंजलि ने hi तुषार को मारा ह तो ह्रदय से तुषार को क्यों ढुँढ़वा रही ह,

सोनिया- वो औरत बहुत चालक ह, उस लड़के का इस्तेमाल कर रही ह,

दृष्टि- क्या ह्रदय की माँ ने उसे नहीं बताया होगा, जब आपको पता ह अंजलि ने अपने बेटे को मार िद्या तो क्या ह्रदय की माँ को नहीं पता होगा,

सोनिया- उसने किसी को नहीं बताया,

दृष्टि- तो आप बता दीजिये न, फिर वो ह्रदय अंजलि के hi खिलाफ खड़ा हो जायेगा,

सोनिया- ये तो हमने सोचा hi नहीं, लेकिन उसके लिए मुझे सामने आना होगा,

दृष्टि- बिना सामने आये खबर भिजवा दो न,

सोनिया- तेरा दिमाग काफी तेज चलने लगा ह,

दृष्टि- लेकिन एक प्रॉब्लम ह जिसके बारे में हमे सोचना पड़ेगा

सोनिया- कैसी प्रॉब्लम

दृष्टि- अब वो हम पैर विश्वास नहीं करेगा, तो हमे सबूत देने पड़ेंगे, लेकिन हमारे पास सबूत कहा से आएंगे,

सोनिआ सोच में डूब गई,

दृष्टि- जितना मैं ह्रदय से मिली हु, बस एक hi चीज उसे हमारी तरफ ला सकती ह उसके पिता की जानकारी, की उन्हें किसने मारा, वो कहा गए, उनके साथ क्या हुआ, और फिर खुद ह्रदय hi अंजलि का सर्वनाश कर देगा,

सोनिया- अगर उसे खबर दी जाये की तुषार

दृष्ति- तुषार क्या,

सोनिया- कुछ नहीं, मैं कुछ करती हु,

सोनिया ने तुरंत फ़ोन निकला और धामा उर्फ़ रवि को मिला दिया,

रवि- hello

सोनिया- तुम कहा हो इस वक़्त

रवि- गुरु जी के पास,

सोनिया- मुझे अर्जेंट गुरु जी से बात करनी ह,

रवि- वो बहुत बिजी हैं,

सोनिया- जितना बोलै ह उतना कर, मेरी अर्जेंट बात करवाओ उनसे,

रवि फ़ोन लेकर गुरु जी के पास पंहुचा,

चिरंजीवी सर पैर हाथ रखे बैठा था, बहुत घेरि सोच में डूबा हुआ था,

रवि- गुरु जी सोनिया आपसे बात करना छाती ह,

गुरु- अभी समय नहीं ह बाद में करेगी,

रवि- बोल रही ह बहुत जरुरी ह,

चिरंजीवी ने रवि को देखा फिर फ़ोन ले लिया,

चिरंजीवी- तुझे समझ नहीं आता क्या जब बोलै समय नहीं ह,

सोनिया- शाक्षी यहाँ से भाग गई ह

चिरंजीवी- बहग गई कहा भाग गई, ऐसे कसिए भाग गई,

सोनिया- दर क्र, धामा आपके पास गया ह तो उसे ह्रदय से दर लगने लगा,

चिरनिवि- ये ह्रदय इस लड़के ने मेरी नाक में दम क्र दिया ह,

सोनिया- मेरे पास एक आईडिया ह उसके लिए

चिरंजीवी- आईडिया हँ तेरे पास, हाहाहा, अच्छा चल बोल क्या ह,

सोनिया- अगर हम ह्रदय को कहे की उसका बाप जिन्दा ह, और वो उसे मिल सकता ह, अगर वो हमारी तरफ आ जाये तो,

चिरंजीवी- तेरी अकाल घास चरने गई ह क्या, वो अंजलि के परिवार से ह, क्या अंजलि ने उसे तुषार के बारे में सब कुछ नहीं बताया होगा, वो तेरे बहकावे में कैसे आ जायेगा,

सोनिया- हम उससे कहेंगे की तुषार को अंजलि ने hi गायब किया ह, और हम उसकी मदद कर सकते हैं तुषार को ढूंढ़ने में, तो वो हमारे पास आएगा, फिर आप उसे ख़तम कर देना,

चिरंजीवी- तू फ़ोन रख बाद में बात करूँगा इस बारे में,

चिरंजीवी ने फ़ोन काट दिया,

सोनिया गुस्से में बड़बड़ाने लगी,

सोनिया- कभी मेरी बात नहीं सुनता मुझे बेवकूफ समझता ह,

दृष्टि- क्या हुआ दादी, वो नहीं मने,

सोनिया- नहीं हमे hi कुछ करना होगा,

दृष्टि- लेकिन हम ये कैसे कहेंगे की तुषार उसे मिल सकता ह, जबकि वो जिन्दा hi नहीं ह,

सोनिया- वो जिन्दा ह और इस बाबा के पास ह,

दृष्टि- क्या लेकिन कैसे आपने तो कहा था अंजलि ने उसे मार दिया,

सोनिया- मैंने उसे बचा लिया था और इस बाबा ने उसे अपने कब्जे में ले लिया, और अपने आश्रम में छुपा कर रखा ह, जहा मैं भी नहीं जा सकती, कोई नहीं जा सकता, जम्मू

सोनिया- खैर छोड़ मैं देखती हु क्या करती हु, इस ह्रदय को तो अपनी तरफ लाना hi गोगा, वर्ण ये सब तबाह कर देगा,

दृष्टि- मुझे भी उससे दर लगने लगा ह दादी, देखा था न उस दिन उसने अकेले hi कितने आदमियों के हाथ पाव तोड़ दिए थे, पापा के भी काबू में नहीं आ रहा था वो, उन दो रखसश जैसे आदमियों से भी लड़ गया था, और मैंने उसे 50 आदमियों को एक साथ मरते देखा ह, दादी बहुत खतरनाक ह वो,

सोनिया घेरि सोच में दुब गई थी,

इधर अंजलि गुस्से में बैठी हुई थी ह्रदय उसके पास बैठा था, दीपा और वर्षा वह आ गई, दोनों के फेस पैर विजयी मुस्कान थी,

अंजलि- कुछ कहा उसने,

दीपा- बहुत कुछ

अंजलि- क्या बताया

वर्षा- तुषार जम्मू क्षीर में ह इस बाबा के आश्रम में,

अंजलि कड़ी हो गई- सच तू सच बोल रही ह, उसने अपने मुँह से कहा तुषार वह ह,

दीपा- नहीं लेकिन उसने बताया की जम्मू कश्मीर में ऐसा आश्रम ह जहा वो बाबा किसी को लेकर नहीं जाता, बहुत hi काम लोग वह जाते हैं, और वो आश्रम बहुत बड़ा ह, बाबा ज्यादा तर वही रहता ह, तो हमारा अनुमान ह की तुषार को वही रखा गया होगा,

तभी ह्रदय बोल पड़ा- सही बोल रही हो आप माँ, वो जम्मू में hi हैं,

अंजलि- तुझे कैसे पता

ह्रदय के हाथ में फ़ोन था

ह्रदय- दृष्टि का संस आया ह, उसने सोनिया को फ़साने की कोशिश की बातो में तो सोनिया के मुँह से जम्मू का नाम निकल गया और ये भी की पापा जिन्दा हैं,

अंजलि की आँखों में ख़ुशी के आंसू चालक गए, वो सोफे पैर लगभग गिर सी गई,

अंजलि- ह्रदय बीटा अपने पापा को ले आ, मेरे बेटे को ले आ,

ह्रदय- माँ आप फ़िक्र न कीजिये, मुझे चाहे इस बाबा की पूरी लंका hi क्यों न जलनि पद जाये, मैं सब तबाह कर दूंगा लेकिन उनको ढूडन क्र ले आऊंगा, मैं आज hi वह के लिए निकलूंगा,

अंजलि- नहीं आज नहीं, तुझे पहले सुहागरात माननी ह, इन लड़कियों के कौमार्य को भांग करना ह, उसके बाद तू कही और जायेगा,

ह्रदय- लेकिन माँ

अंजलि- इन लड़कियों का कौमार्य भांग होना जरुरी ह, मैं अब कोई मौका नहीं देना चाहती,

ह्रदय थोड़ा झेप सा रहा था,

दीपा- लेकिन वो साडी तैयार बैठी होंगी, सबसे पहले किसके पास जायेगा,

वर्षा- उन्होंने डीडे क्र लिया होगा, लकडिया बहुत होशियार हैं

अंजलि- तू जितना जल्दी हो सके सबका कौमार्य बंग क्र,

ह्रदय- माँ वो 9 हैं टाइम लगेगा न,

अंजलि- तेरा बाप काम से काम 4 को एक साथ झेल सकता था, तू नहीं कर सकता,

ह्रदय ने सर निचे कर लिया,

दीपा- शर्मा क्यों रहा ह, बता माँ को तू इन सभी को एक साथ क्र सकता ह, अगर तू चाहे तो ये साडी लड़किया मिलकर भी तुझे शांत नहीं कर सकती,

अंजलि ने गर्व से ह्रदय को देखा,

अंजलि- फिर मैं तेरा वो रूप देखना चाहूंगी, तेरा हुनर मैं देखना चाहूंगी

वर्षा और दीपा चौंक गए

दीपा- आप देखना चाहोगी मतलब आप कैसे

अंजलि- बेअकल उन लड़कियों के साथ,

दोनों ने रहत की साँस भरी, ह्रदय वह से बहार निकल गया,

दीपा- मुझे लगा कही आप

वर्षा ने दीपा को हाथ मारा, दीपा है पड़ी, लेकिन अंजलि के फेस पैर एक तनाव था,

दीपा और वर्षा ने अंजलि को देखा और एक दम सीरियस हो गई,

दीपा- क्या हुआ माँ,

अंजलि- मुझे कुछ बताना ह तुम दोनों को, तुम दोनों hi हो जो हर बात को समझ सकती हो और मेरे लिए कुछ कर सकती हो,

वर्षा और दीपा अंजलि के समाने बैठ गए,

वर्षा- बोलिये माँ हमसे जो हो सकेगा हम करेंगी,

अंजलि काफी देर असमंजस से में रही फिर हिम्मत करके बोलना शुरू किया, जिसे सुनकर क्र वर्षा और दीपा की आँखे फटी रह गई, वो भोचकी सी अंजलि को देखे जा रही हटी,

दोनों के मुँह खुले रह गए थे,

अंजलि- अब तुम hi बताओ मैं क्या करू

दीपा- लेकिन ये कैसे हो सकता ह माँ,

वर्षा- जो होना ह वो होकर hi रहेगा, रास्ता खुद बन जायेगा, कोई नहीं रोक पायेगा, अगर ये जरुरी ह तो होगा hi,

दीपा- लेकिन

वर्षा ने दीपा के कंधे पैर हाथ रखा

वर्षा- हमे रास्ता बनाना ह, उसमे बढ़ा नहीं बनना,

दीपा ने है में सर हिलाया,

दीपा- ठीक ह माँ, हमसे जो होगा हम करेंगे,

इधर काम्य और नैना एक hi कमरे में बैठी हुई थी, और ह्रदय का वेट क्र रही थी,

नैना- तूने बोल तो दिया लेकिन हम दोनों एक साथ कर पायेंगी क्या, ये पॉसिबल ह क्या

काम्य- हम दोनों की माँ ने ये एक साथ किया था, हालत चाहे जो भी रहे थे, वो दोनों एक दूसरे की फ्रेंड्स तक नहीं थी, हम दोनों तो बहन हैं, हमने एक दूसरे को बचपन से देखा ह, सब कुछ देखा ह, फिर उनके सामने एक साथ आने में क्या तकलीफ ह,

नैना- तकलीफ तो कुछ नहीं ह, लेकिन, चल देखा जायेगा जो होगा आने दे हमारे पति देव को,

काम्य- नित्य के लिए कुछ छोड़ना ह या सब निचोड़ लेना ह,

नैना- देखना पड़ेगा कितना दम ह, मुझे लगता ह शनाया कुछ ज्यादा hi बढ़ा चढ़ा कर बोल रही थी, दो दो लड़कियों को एक साथ शांत करना इतना आसान नहीं ह,

काम्य- देखा जायेगा,

इधर नित्य अपने रूम में लेती हुई थी निधि उसके पास थी,

निधि- तू ठीक ह न बेटी,

नित्य- यस माँ मैं खुश हु

निधि- तेरे पति के साथ 8 और लड़कियों की शादी हुई ह, तुझे बुरा नहीं लग रहा,

नित्य- लग्न तो चाहिए लेकिन लग नहीं रहा, न जाने क्यों ये सब अच्छा लग रहा ह, मेरे बहुत से दोस्त रहे हैं लेकिन कभी किसी के लिए प्यार जैसा कुछ नहीं रहा, और मैं हमेशा उन लड़को के खिलाफ रही हु जिनके एक से ज्यादा गफ रही हो, लेकिन मेरे पति की 9 पत्निया हैं और मुझे बुरा नहीं लग रहा,

निधि- कुछ तो ऐसा ह जो इस सब को गलत होकर भी गलत साबित नहीं क्र रहा, ऐसा लगता ह ये सब सही हो रहा ह, मुझे डार्ट है कही तेरे दिल में कोई दुःख न हो, तुझे अपने फैसले पैर अफ़सोस न हो,

नित्य- नहीं माँ मुझे अपने फैसले पैर कोई अफ़सोस नहीं ह, लेकिन पापा उनका क्या,

निधि- तू वो सब मत सोच, तू बस आज की सोच और ख़ुशी से इस पल को जी, ये बड़ी किस्मत से आता ह जिंदगी में,

नित्य- ये तो सबके साथ आता ह माँ

निधि- सबके साथ नहीं आता बेटी, इस पल दिल खोल क्र जी ले,

ह्रदय थोड़ा टेंशन में बैठा हुआ था, उसे अपने पिता की जानकरी मिली थी लेकिन वो जा नहीं प् रहा था, और सामने 9 लड़कियाठी जिनके साथ उसे सुहाग रात माननी थी, उसे ऐसा बैठा देख रिंकी उसके पास आ गई,

रिंकी- क्या हुआ घबरा रहे हो,

ह्रदय- नहीं नहीं ऐसी तो कोई बात नहीं ह,

रिंकी- मैं समझ सकती हु, ये सब नार्मल ह, तुमने सब कुछ सीखा ह लेकिन सेक्स के बारे में सब कुछ सीखना भूल गई दीपा दीदी,

ह्रदय- मैं सब जनता हु मैंने सेक्स किया ह

रिंकी- मैं जानती हु तुमने सेक्स किया ह, लेकिन सेक्स केवल करने की चीज नहीं होती, उसे फील किया जाता ह, तुम्हारे पिता ने एक hi दिन में मुझे और मेरी माँ दोनों के साथ सेक्स किया था, उनके लिए भी ये आसान नहीं था, लेकिन जब वो सेक्स करते थे तो उनके दिल में कभी दर नहीं होता था की वो किसके साथ कर रहे हैं, जब वो करते थे तो पुरे मन से, बस उस पल को जीते थे, तुम्हारी प्रॉब्लम ह तुम अब भी ये सोचने में लगे हो तुम्हे किसके साथ करना ह, वो सोचने का टाइम ख़तम हो चुक्का ह, अब तुम्हे बस अपने खुशियों के पालो को जीना ह,

जब तुम अंदर जाओगे तो ये मत सोचना किसके साथ हो, और किस किस के साथ ये करना ह, क्यों करना ह, बस इतना सोचना सामने तुम्हारी पत्नी ह, वो पहेली ह या दूसरी या साडी एक साथ हैं, बस वो तुम्हरी पत्निया हैं, जिसके साथ भी रहो पूरी ईमानदारी से रहो, फिर देखना सब आसान हो जायेगा, ये सोच क्र मत जाओ अंदर कोनसी पत्नी मिलेगी तुम्हे कैसे रियेक्ट करना ह, बस ये सोचो वो तुम्हारी पत्नी होगी, और तुम्हे उसे प्यार देना ह,

ह्रदय रिंकी की बातो को बड़े गोर से सुन रहा था, और ऐसा लग रहा था जैसी रिंकी ने उसके मन का सारा बोझ दूर कर दिया हो,

ह्रदय- ठंकु रिंकी माँ, आप ठीक बोल रही हैं, मुझे सबको प्यार देना ह, और पूरी ईमानदारी से देना ह,



रिंकी ने ह्रदय का माथा चुम लिया,
 
अपडेट- 39






साडी लड़किया ह्रदय का हाथ पकडे कड़ी थी उनमे बस काम्य और नैना नहीं थी, सभी लड़किया खुद ह्रदय का हाथ पकड़ क्र उन दोनों के रूम तक लेकर गई,

वन्य- हल्का हाथ रखना,

सबकी हसी छूट गई, और ह्रदय को अंदर धकेल दिया,

अंदर बिस्टेर पैर काम्य और नैना बैठी हुई थी, दोनों को एक साथ देख क्र ह्रदय थोड़ा सा चौंका, फिर आगे बढ़ क्र बीएड पैर बैठ गया,


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नैना उठी और ह्रदय के पेअर छू लिए, जिसे देख काम्य भी आगे बढ़ी और ह्रदय के पेअर छू लिए,

ह्रदय- ये सब क्या ह,

नैना- बस दिल ने कहा मुझे ऐसा करना चाहिए तो मैंने किया,

काम्य – मेरे दिल ने ऐसा कुछ नहीं कहा, मैंने तो इसे देख क्र छू लिए, मुझे लगा शायद ऐसा होता होगा,

ह्रदय- तुम मेरी पत्निया हो, मेरा प्यार हो, और प्यार दिल में रहता ह पैरो में नहीं,

ह्रदय ने दोनों को अपनी बहो में बाहर लिया, दो दो लड़किया एक साथ ह्रदय की बहो में थी ये ह्रदय को बहुत एक्सिटमेंट बढ़ रही थी,


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ह्रदय- तुम दोनों एक साथ, कोई प्रॉब्लम तो नहीं होगी न

काम्य- हमारी चिंता मत करो, आप बताओ हम दोनों से कोई प्रॉब्लम तो नहीं होगी,

ह्रदय बस मुस्कुरा दिया,

नैना- क्या यही खड़े रह क्र बाते करेंगे हम

काम्य- तुझे बड़ी जल्दी हो रही ह,

नैना- फिर नित्य का भी नंबर ह

कमाया- क्यों जी पति देव एक रात में तीनो सम्हाल लोगे न,

ह्रदय- हम्म्म बस एक hi चिंता ह

काम्य- चिंता, अभी से चिंता होने लगी,

ह्रदय- अपनी नहीं नित्य की चिंता ह उसका क्या होगा, अगर तुम दोनों ने मिलकर मुझे खली क्र दिया तो उसे खली करने में बड़ी तकलीफ होने वाली ह, अगर तुम खली नहीं कर पाई तो वो झेल जाएगी,

नैना- देखते हैं कोण किसको खली करता ह,

नैना ने ह्रदय के सीने पैर हाथ फिरना शुरू किया तो ह्रदय ने भी अपना एक हाथ नैना की कमर पैर रख लिया और उसे सहलाने लगा, काम्य ने ह्रदय के बालो में अपनी उंगलिया फसे और ह्रदय का सर निचे झुका क्र अपने हॉट उसके होतो की तरफ बढ़ा दिए, ह्रदय ने भी तुरनत काम्य के होतो पैर अपने हॉट रख दिए,


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नैना ने अपने हॉट ह्रदय की गार्डन पैर रख दिए, कुछ देर काम्य के होतो का रास पिने के बाद ह्रदय ने अपने हॉट नैना के होतो से जोड़ दिए, और काम्य ह्रदय के पीछे आ गई और पीछे से ह्रदय को बहो में भर लिया और अपने बदन को ह्रदय से रगड़ने लगी,

ह्रदय ने नैना को और काम्य दोनों को एक साथ उठा लिया और बीएड की तरफ चल दिया,


stock-photo-groom-holding-the-hands-of-two-brides-382956769.jpg




बीएड पैर लिटा क्र ह्रदय बिच में लेट गया,

ह्रदय ने नैना के ब्लाउज के हुक खोलने शुरू किये, काम्य ने ह्रदय की टी शर्ट उतर दी, ह्रदय की छोड़ी छाती और शरीर के एक एक कट अलग hi दिख रहा था,

वही नैना का ब्लाउज जैसे hi उतरा उसकी टाइट ब्रा में कैद चूचिया उभर क्र सामने आ गई, एक दम दूध की तरह सफ़ेद रंग और कैसा हुआ बदन,

ह्रदय ने नैना को अपनी गॉड में बैठा लिया, निचे लहंगा और उप्पेर बस एक ब्रा, ह्रदय का हाथ नैना की ब्रा के उप्पेर से hi उसकी चुकी पैर पहुंच गया था, ह्रदय हाथ लगते hi नैना की आँखे बंद होने लगी, वही काम्य पीछे से ह्रदय की कमर गार्डन को चुम रही थी,

नैना गरम हो चुकी थी वो निचे से अपनी कमर को हिलने लगी थी, ह्रदय के लुंड का उभर नैना की पंतय में छुपी हुई छूट पैर दबाव बना रहा था,

ह्रदय ने एक हाथ नैना की कमर में डाला और उसके लहंगे का नाडा खोल दिया, लहंगा एक दम लोस्से हो गया, नैना तुरंत ह्रदय से चिपक गई, उसने अपनी चूचिया ह्रदय की चेस्ट में रागादि, पीछे से काम्य अपनी चूचियों को ह्रदय की नंगी कमर में रगड़ रही थी,

ह्रदय ने काम्य का हाथ पकड़ क्र उसे भी अपने सामने किया और उसके लहंगे के अंदर हाथ दाल क्र उसकी नंगी जांघो पैर अपना हाथ फिराया, और हाथ उप्पेर लेजाकर उसकी छोटी सी पंतय में कैद टाइट गांड को पकड़ लिया,

दूसरा हाथ नैना की ब्रा के हुक पैर था,

ह्रदय ने नैना को इशारा किया, नैना ह्रदय के इशारे को समझते हुए तुरंत काम्य का ब्लाउज खोलने लगी, काम्य ने तुरनत अपनी चूचिया उभर क्र सामने क्र दी, जैसे बोल रही हो जल्दी क्र दे मुझे नंगी,

ह्रदय ने काम्य के लहंगे का नाडा भी खोल दिया, काम्य झुकी हुई कड़ी थी तो उसका लहंगा तुरंत निचे गिर गया, ब्लाउज नैना ने खोल दिया था, काम्य अब एक छोटी सी ब्रा पंतय में कड़ी थी, क्या खूबसूरत बदन था उसका, ह्रदय की आँखे काम्य के बदन पैर ठहर गई,


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इधर नैना कड़ी हुई और अपना लहंगा निकल क्र दूर फेंक दिया, अब दोनों लड़किया ब्रा पंतय में ह्रदय के सामने कड़ी थी, शायद hi कोई इस दुनिया में ये फैसला कर सके की दोनों में से ज्यादा खूबसूरत कोण ह,

नैना की चूचिया काम्य से बड़ी और एक दम गोल थी, काम्य की गांड की शेप बहुत खूबसूरत थी,

ह्रदय ने एक हाथ काम्य की गांड पैर दुरसा हाथ नैना की गांड पैर रख दिया, दोनों लड़किया ह्रदय से चिपक गई, दोनों अपनी नंगी जंगे ह्रदय के बाजुओं पैर रगड़ने लगी, ह्रदय ने दोनों की जांघो को चुम लिया, काम्य झुक क्र ह्रदय के कानो को अपनी जीभ से शेला रही थी, काम्य की चूचिया ब्रा में झूल रही थी, जो बहुत hi खूबसूरत लग रही thi,naina ह्रदय का मुँह अपनी जांघो के बिच दबा रही थी,

नैना ने झुकी हुई काम्य की ब्रा का हुक खोल दिया, जब तक काम्य सम्हालती ब्रा निचे लटक गई और काम्य की 34 के साइज की चूचिया उछाल क्र सामने आ गई, काम्य ने झूठा गुस्सा दिखते हुए नैना पैर हुम्ला क्र दिया और उसकी ब्रा को खींचने लगी, नैना बच रही थी जिस वजह से ब्रा खुलने की जगह उसका हुक टूट गया, और ब्रा उछाल क्र निचे आ गई,

अब दोनों सिर्फ पंतय में बीएड पैर कड़ी थी, दोनों ने एक दूसरे को इशारा किया और ह्रदय के उप्पेर खुद पड़ी, दोनों ह्रदय की जीन्स को खोलने लगी, और जल्दी जड़ली उतरने लगी, दोनों की चूचिया हिल रही थी जिन्हे देख क्र ह्रदय का लुंड फुंकार मर रहा था,

जीन्स उतरने के बाद जब दोनों उप्पेर हुई तो अंडर वियर में से लुंड का उभर देख क्र दोनों के मुँह खुले से रहे गए, नैना की आँखे नशीली हो राखी थी, उससे कण्ट्रोल करना मुश्किल हो रहा था, वो तुरंत ह्रदय के होतो की तरफ गई और अपनी नंगी चूचियों को ह्रदय की चेस्ट में दबाया और अपने हॉट उसके होतो से मिला दिए,

वही काम्य कुछ पल देखती रही फिर वो ह्रदय के पैरो के बिच में आ गई और अपने हाथ से ह्रदय की जांघो को सहलाने लगी, और फिर जीभ से जांघो को चाटने लगी और लुंड की तरफ बढ़ने लगी, ह्रदय का जोश बढ़ने लगा उसने नैना के सर को पकड़ा और और उसके होतो को चूसने लगा, एक हाथ से नैना की गांड को पकड़ लिया और जोर से रगड़ने लगा,

काम्य ह्रदय के लुंड के उप्पेर पहुंच गई थी, कुछ पल तो उसने बड़े गोर से लुंड के उभर को देखा, फिर धीरे से अपना हाथ लुंड के उप्पेर रख दिया औरउसे फील करने लगी, हलके हलके सहलाने लगी, लुंड की मोटाई और लम्बाई को भांप क्र काम्य का गाला सुख गया, काम्य की उंगलिया ह्रदय के लुंड के टोपे पैर पहुंची, ऐसा लगा जैसे एक मोटा टमाटर छुपा रखा हो,

काम्य का जोश एक दम से बेहद गया उसने लुंड को मुठी में भर लिया, इधर ह्रदय की उंगलिया नैना की पंतय के अंदर छूट के बिलकुल नजदीक थी, काम्य ने जैसे hi लुंड को पकड़ा ह्रदय की मुठी भींच गई, और उन्स्की उंगलिया नैना की छूट पैर रगड़ गई, जिससे उसके मुँह से अह्ह्ह निकल गई,

काम्य ने तुरंत दूसरा हुम्ला कर दिया, उसने अपना मुँह ह्रदय के लुंड पैर रख दिया, और जीभ निकल क्र चाटने लगी, ह्रदय ने नैना को अपने उप्पेर खींचा और उसकी चुहकइयो पैर अपना मुँह लगा दिया,


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काम्य अंडर वियर के उप्पेर से hi लुंड को चुम रही थी चाट रही थी, लुंड को मुँह में लेने की कोशिश कर रही थी, इधर ह्रदय नैना की चूचियों को अच्छे से निचोड़ रहा था, नैना का हाथ निचे ह्रदय के पेड से उसके एबीएस को महसूस करता हुआ लुंड की तरफ बढ़ रहा था, वह काम्य पहले से लगी पड़ी थी, नैना का हाथ काम्य के फेस टकराया तो काम्य ने उप्पेर देखा, नैना ने भी पलट क्र उसे देखा,

काम्य उठी और नैना की तरफ मुस्कुरा क्र देखते हुए अंडर वियर को पकड़ा और निचे खींचने लगी, नैना की आँखो में भी चमक थी, तभी ह्रदय ने नैना की चुकी पैर दन्त गदा दिए, जिससे वो दर्द से अह्हह्ह्ह्ह करने लगी और अपना मुँह ह्रदय उप्पेर दबा लिया, इधर काम्य ने लुंड को आजाद क्र दिया, लुंड उछाल क्र सामने आ गया,


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काम्य तो लुंड को देख क्र शॉकेड सर यह गई, ह्रदय ने लुंड को एक झटका दिया, काम्य का मुँह खुल गया, उसने बड़े प्यार से ह्रदय के लुंड को दोनों हाथो में पकड़ा और इधर उधर करके देखने लगी, तभी नैना का हाथ फिर से लुंड की तरफ आ रहा था तो काम्य ने उसका हाथ पकड़ा और नंगा लुंड उसके हाथ में पकड़ा दिया, नैना एक दम चौंक क्र उठ गई, वो घबरा गई थी ये इतना मोटा लोहे जैसे कड़क एक दम गरम चीज उसके हाथ में क्या आ गई,

नैना उठ क्र बैठ गई और लुंड को देखने लगी,

काम्य- क्या हुआ दर गई

नैना- दर इसे देख क्र तो कैंप काँपी छूट गई यार, ये इतना बड़ा और मोटा कैसे ह,

काम्य- तभी शनाया इतना कॉंफिडेंट थी की ये हम दोनों को संतुष्ट क्र सकता ह,

नैना- हम दोनों को नहीं हम सबको,

ह्रदय- देखती hi रहोगी क्या पूरी रात

काम्य और नैना ने एक साथ लुंड को पकड़ लिया और अपनी ताकत उस पैर आजमाने लगी, ह्रदय उन्हें देख क्र मुस्कुरा रहा था,

काम्य- हम जितना इसे झुका रहे हैं ये उतना hi उछाल रहा ह, अगर इसे झुकना ह तो इसका रास बहार निकलना होगा,

नैना बस मुस्कुरा पड़ी,

काम्य ने धीरे से अपना मुँह खोला और लुंड को अंदर लेने लगी, निचे से नैना ने लुंड को मुठी में पकड़ा हुआ था, काम्य पूरी कोशिश करने के बाद भी लुंड को ज्यादा अंदर तक नहीं ले पाई, निचे से नैना अपनी मुठी में लुंड को हिला रही थी,


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ह्रदय ने नैना की गांड पैर हाथ फिरना शुरू क्र दिया, उसने नैना की पंतय में हाथ डाला और उसकी छूट पैर उंगलिया फिरै, जिससे नैना की सिसकिया निकलने लगी,

ह्रदय ने पंतय को निचे खिसकाया जिससे नैना की 34 साइज की गोल गांड सामने आ गई, और उसमे छुपी हुई छोटी सी छूट, एक दम चिकनी, ह्रदय ने उंगली से उसकी छूट को कुरेदना शुरू किया, नैना की सिसकिया बढ़ने लगी, उसने लुंड के निचे के हिस्से पैर अपने हॉट रख दिए, नैना और काम्य एक साथ ह्रदय के लुंड को चुम रही थी,


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ह्रदय ने नैना को अपने उप्पेर क्र लिया और नैना की छूट खुल क्र ह्रदय के सामने आ गई, ह्रदय ने अपनी जीभ निकल क्र नैना की छूट की दरार में घुमाई, नैना एक दम सिसक पड़ी,

नैना की सिसकिया सुन क्र काम्य ने उप्पेर देखा तो पाया ह्रदय नैना की छूट चूस रहा था, काम्य फिर से लुंड छोड़ने लग गई, दोनों पुरे जोश से ह्रदय का लुंड चूस रही थी, काफी देर जब वो लुंड को नहीं झुका सकीय और दोनों के मुँह दर्द करने लगे,

काम्य- ये ऐसे काबू में नहीं आने वाला, इस शेर को गुफा में लेजाकर इसकी अकड़ निकलते हैं,

नैना- मेरी गुफा में तो नदी भेने वाली ह, मैं रोक नहीं प् रही हु, इन्होने तो जीभ से hi मेरी नदी बहा दी, ये शेर अंदर जायेगा तो गुफा की दीवारों को चिर देगा,

काम्य- कुछ नहीं होगा, लड़की की गुफा ऐसे hi शेरो के लिए बानी ह,

काम्य बोल रही थी तभी नैना की छूट ने फवारा छोड़ दिया,

नैना- आह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह ahhhhhhhhhhhh मैं गई ahahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

काम्य- धत तेरी की, तू तो पहले hi ढेर हो गई,

ह्रदय ने नैना को बीएड पैर लिटाया और आयल की बोतल उठाई जो शनाया और वन्य ने पहले hi रख दी थी, काम्य ने तुरंत आयल ह्रदय के लुंड पैर डालना शुरू किया, और कुछ आयल नैना की छूट पैर भी डाला,

ह्रदय- अब समय आ गया ह गुफा का दरवाजा खोलने का,

काम्य- खोलो मत तोड़ दो इस दरवाजे को,

नैना ने आँखे बंद क्र ली, काम्य ने लुंड को पकड़ा और दूसरे हाथ से नैना की छूट की दीवारों को खोला और लुंड को नैना की छूट पैर लगाया, ह्रदय ने तुरंत दबाव बनाया और लुंड छूट को फाड़ता हुआ अंदर घुस गया, लुंड के घुसते hi नैना की चीख निकल गई,


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काम्य ने तुरनत उसके मुँह पैर हाथ रखा, ह्रदय ने नैना की चुकी को सहलाना शुरू क्र दिया, कमाया ने भी ह्रदय को देख क्र दूसरी चुकी को सहलाना शुरू क्र दिया, लुंड छूट में फसा हुआ था, और ह्रदय और काम्य नैना को शांत करे में लगे हुए थे,

कुछ देर में नैना को रहत हुई तो ह्रदय ने कमर हिलनी शुरू क्र दी, लुंड को जगह नहीं मिल रही थी, छूट पूरी तरह से लुंड जकड़े हुए थी, ह्रदय जब लुंड को बहार खींचने की कोशिश करता तो छूट भी उसके साथ बहार को खींची चली आ रही थी, इससे नैना को बहुत तकलीफ होती,

ह्रदय ने लुंड को बहार खींचना बंद किया, बस कमर को हिलने लगा, जिससे नैना को रहत भी हुई और जल्दी hi मजा भी आने लगा, काम्य नैना की हालत देख रही थी, वो नैना की चूचियों को शलए जा रही थी, अचानक काम्य ने नैना की चूचियों पैर अपने हॉट रख दिए,

नैना एक दम स्कॉकेड सी रह गई लेकिन उसे मजा इतना आया की अगले कुछ hi पालो में उसकी छूट ने जवाब दे दिया और वो झड़ने लगी, उसकी सिसकारियां पुरे कमरे में गूंजने लगी, ह्रदय को मौका मिल गया लुंड को अंदर बहार करने का, ज्यादा तो नहीं लेकिन लगभग आधा लुंड छूट में घुस चुक्का था, नैना ने काम्य का सर पकड़ क्र चूचियों पैर दबा दिया और झड़ती जा रही थी,

कुछ देर बाद वो शांत हुई लेकिन ह्रदय नहीं रुका था, वो उसे छोड़ता hi रहा, वही काम्य उठी और ह्रदय के पीछे आ गई और अपनी चूचिया उसकी कमर में रगड़ने लगी, फिर अपनी छूट को भी ह्रदय की कमर पैर रगड़ने लगी,

फिर वो काम्य के दोनों तरफ पेअर करके ह्रदय की तरफ मुँह करके कड़ी हो गई और अपनी छूट उसके मुँह के सामने कर दी, ह्रदय ने भी तुरनत अपना हाथ काम्य की छूट पैर रखा और रगड़ने लगा,

नैना इस पोजीशन को देख क्र फिर एक्सीटेंड हो गई और झड़ने लगी, ह्रदय के धक्के तेज हो गए थे, काम्य तुरंत पलट क्र नैना के उप्पेर लेट गई और दोनों की चूचिया एक दूसरे से रगड़ने लगी,

नैना- ahhhhhhhhhhhhh ahhhhhhhhhhhhhhhh माँ बस बस रुक जाओ और नहीं झेल सकती, मेरी छूट में जलन हो रही ह, प्लस रुक जाओ,

ह्रदय ने हालत को समझते हुए लुंड को बहा रनिकल लिया, लुंड खून में भीगा हुए था, तभी काम्य एक कपडा लेकर आई और लुंड को साफ़ करने लगी, और आयल उठा क्र अपनी छूट और लुंड पैर डालने लगी, काम्य खुद hi सब कर रही थी,

नैना से तो हिला भी नहीं जा रहा था, काम्य ने लुंड को पकड़ा और अपनी छूट पैर लगाया, ह्रदय ने काम्य की नजरो में देखा काम्य ने भी उसकी नजरो से नजरे मिले,

ह्रदय- तैयार हो न

काम्य- मैं तो कब से मरी जा रही हु, ये ख़ुशी के आंसू बहा रही ह,

ह्रदय ने दबाव बनाया और लुंड छूट की चीरता हुआ अंदर घुस गया, काम्य न छाते हुए भी चीख पड़ी, काम्य की चीख सुनकर नैना को होश सा आया और उसने काम्य के पास आने की कोशिश की, लेकिन दर्द की वजह से हिल भी नहीं पाई,

नैना हिम्मत करके काम्य के नजदीक आई और उसकी चूचियों को सहलाने लगी, काम्य नैना से ज्यादा मजबूत थी, या यु कहे वो नैना की हालत देख क्र तैयार हो चुकी थी इस दर्द के लिए, जल्दी hi काम्य ने खुद को कण्ट्रोल किया,

काम्य- हलके हलके शुरू करो

ह्रदय ने हलके हलके धक्के लगाने शुरू किये, कुछ hi देर में काम्य की छूट ने जवाब दे दिया और वो झड़ने लगी, जिसे लूँ डको थोड़ी आसानी हुई अंदर जाने में, आधा लूँ डंडेर घुसा हुआ था, जिसे ह्रदय बड़े प्यार से हिला रहा था, दोनों लड़कियों को तो मजा आ गया था लेकिन ह्रदय को उतना मजा नहीं आ रहा था, क्योकि वो अपना पूरा इस्तेमाल नहीं कर प् रहा था,

लेकिन उसने अपने मजे को एक तरफ रखा और खुद पैर काबू रखा, अगले 30 मिनट्स तक हरयदा उसी पोजीशन में काम्य को छोड़ता रहा, अब काम्य फिर से झड़ने की कगार पैर थी, काम्य ने निचे से अपनी कमर को हिलना शुरू क्र दिया था, अब वो पुरे मजे में आ चुकी थी,

काम्य- यस यस यस ahhhhhhhhhhhh अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ahhhhhhhhhh बुक में फ़क में फ़क माय पुसी uuuummmmmmmmmmmmm

काम्य ने नैना का मुँह पकड़ा और उसके हॉट अपने होतो से जोड़ दिए, नैना एक दम शॉकेड रह गई काम्य के इस हमले से, काम्य इतने जोश में थी की उसे अहसास hi नहीं था वो किसे चुम रही ह, ह्रदय भी थोड़ा जोश में आया और एक धक्का थोड़ा तेज लगा दिए जिससे काम्य का मुँह खुला रह गया,

ह्रदय को चुदाई करते हुए 1 घंटे से ज्यादा हो चुक्का था, नैना और काम्य 3-3 बार झाड़ चुकी थी लेकिन ह्रदय अब तक नहीं झाड़ा था,

काम्य- प्लस अब झाड़ जाओ मैं नहीं सेह सकती,

ह्रदय- अभी तो मैंने ठीक से सुरु भी नहीं किया,

काम्य- प्लस आज माफ़ कर दो अगली बार जितना मर्जी क्र लेना,

ह्रदय ने लुंड बहार निकल लिया,

नैना- लेकिन आप बिना झड़े कैसे रहोगे, आप मेरे अंदर दाल कर झाड़ जाइये,

ह्रदय- कोई बात नहीं, रहने दो,

काम्य- नहीं ऐसे नहीं, आप थोड़ा धयान लगा कर जल्दी क्र लीजिये, कुछ देर नैना की छूट में कुछ देर में छूट में शायद जल्दी हो जायेगा,

ह्रदय को एक आईडिया आया उसने नैना और काम्य को एक दूसरे के उप्पेर लिटा दिया दोनों की चूचिया एक दूसरे से रगड़ रही थी, और दोनों की छूटे क दूसरे की छूट के उप्पेर थी, और ह्रदय के सामने थी,

ह्रदय ने नैना की छूट में लुंड घुसा दिया, नैना फिर से उछाल पड़ी, लेकिन काम्य ने उसकी कमर और गांड शेलनि शुरू की, ह्रदय ने हलके हलके धक्के लगाए, फिर लुंड बहार निकल क्र काम्य की छूट में दाल दिया, ऐस एही वो लुंड कभी नैना की छूट में तो कभी काम्य की छूट में डालता, अब दोनों फिर से गरम हो चुकी थी, दोनों को मजा आने लगा था, और उसी मजे में दोनों के हॉट आपस में जुड़ गए थे,


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दोनों एक दूसरे के होतो को चूसने लगी थी, ह्रदय को भी मजा आ रहा था और उस मजे में ह्रदय ने अपने धक्के बढ़ाये और झड़ने लगा, उसने आधा रास काम्य की छूट में और आधा रास नैना की छूट में भर दिया, इधर काम्य और नैना भी एक साथ झाड़ गई थी,

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एक लम्बी चुदाई के बाद ह्रदय झाड़ा और नैना काम्य 4-4 बार झाड़ गई थी,

पुरे बीएड पैर खून hi खून था, तीनो एक दूसरे से चिपक गए बिच में ह्रदय और साइड में दोनों लकडिया उससे चिपकी हुई लेती थी, ह्रदय का लुंड अब भी लगभग खड़ा जैसे मुद्रा में था,

काम्य और नैना बुरी तरह थक गई थी,

नैना- ये अब तक कैसे खड़ा ह


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काम्य- हमने तो इसका रास निकल दिया न

ह्रदय- इसमें अभी बहुत रास ह, जो इतनी आसानी से नहीं निकलने वाला,

नैना- हम दोनों को एक साथ करने में 1.5 घंटे से ज्यादा लग गया, नित्य का क्या होगा,

ह्रदय- मैं एक बार झाड़ गया हु दूसरी बार झड़ने में और टाइम लगेगा,

काम्य- वो बेचारी आज नहीं बचने वाली,

ह्रदय- अभी बस यहाँ हम ह तो हमारी hi बात होगी और किसी की नहीं,

ह्रदय की बात से दोनों उससे चिपक गयी,

ह्रदय एक एक करके उन्हें बाथरूम में ले गया और सफाई करके वापस बीएड पैर लिटा दिया, वही पास में चादर रखीथी जिसे ह्रदय ने बदल दिया,

फिर काफी देर तीनो नंगे hi लेते रहे, काम्य और नैना को नींद आने लगी,

ह्रदय ने उनके सोने का इंतजार किया, फिर कपडे पहने और उनके उप्पेर चादर दाल क्र बहार निकल गया, बहार अंजलि कड़ी थी,

ह्रदय- माँ आप यहाँ

अंजलि- मुझे लड़कियों की फ़िक्र हो रही थी,

ह्रदय- माँ आपको मुझ पैर भरोसा नहीं ह क्या

अंजलि- पूरा भरोसा ह, इसलिए तेरी फ़िक्र ज्यादा ह, तूने उन्हें तकलीफ से बचने के चक्कर में खुद को सजा दी होगी, सेक्स में लड़का और लकड़ी दोनों को मजा आना चाहिए, लेकिन तुझे झेलना किसी भी लकड़ी के लिए आसान नहीं ह,

ह्रदय- एक दो बार में झेलने लायक हो जाएँगी माँ,

अंजलि- तू बहुत समझदार ह, जा नित्य इंतजार कर रही होगी,

ह्रदय- वो इन सबसे छोटी ह माँ, क्या वो झेल पायेगी,

अंजलि- ये सब लड़किया तेरे लिए hi पैदा हुई हैं, तो झेलने की छमता भी होगी इनमे,

ह्रदय आगे बढ़ गया नित्य के रूम की तरफ तो बहार निधि जमीन पैर hi बैठी थी,

ह्रदय ने निधि को उठाया

ह्रदय- आप यहाँ क्या कर रही हो

निधि- तुम्हारा इंतजार,

ह्रदय- कोई प्रॉब्लम ह क्या

निधि- जब किसी लड़की की शादी होती ह, तो माँ को सबसे ज्यादा चिंता होती ह की उसकी बेटी को खुशिया मिलेंगी या नहीं, केवल पैसा और जरुरत से hi खुशिया नहीं मिलती, पति का प्यार सम्मान और शारीरिक जरुरत भी बहुत मायने रखती ह,

ह्रदय- आपको लगता ह नित्य को ईनमसे से कुछ भी काम मिलेगा

निधि- सब कुछ बहुत ज्यादा मिलेगा, किसी माँ को तुम्हारे जैसा दामाद मिलना बहुत गर्व की बात होती ह, लेकिन वो बहुत मासूम ह क्या वो झेल पायेगी, तुम्हे उसकी माँ भी ठीक से नहीं झेल पाई थी, वो तो एक दम वर्जिन ह,

ह्रदय- ये उसकी किस्मत ह, और किस्मत में कुछ भी गलत नहीं लिखा होता, जो जिसके लायक होता ह उसे वही मिलता ह, अगर उसकी किस्मत में मैं लिखा हु तो उसे झेलने की ताकत भी मिली होगी,

निधि- एक दिन मैं तुम्हारे निचे आई थी, आज मेरी बेटी ह,

ह्रदय- मैं ख्याल रखूँगा उसका, आपसे ज्यादा खुशिया दूंगा उसे,

निधि ने ह्रदय का माथा चूमा फिर उसके होतो पैर अपने हॉट रख दिए,

निधि- ी लव ु

ह्रदय मुस्कुराता हुआ आगे बेहद गया नित्य के रूम में, रात के 1 बजे हुए थे, नित्य दुल्हन के कपड़ो में सजी हुई अपने बिस्टेर पैर लेती हुई थी, अपने पति के सपने देख रही थी जो उससे पहले दो और पत्नियों के साथ सुहागरात मानाने गया हुआ था,


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ह्रदय धीरे से अंदर आया, लेकिन नित्य ने आहात सुन ली और तुरंत कड़ी हो गई,

नित्य- मुझे माफ़ करना मुझे पता नहीं चला आप अंदर आ गए,

ह्रदय- अरे तुम क्यों माफ़ी मांग रही हो, माफ़ी तो मुझे मांगनी चाहिए, मैंने तुम्हे इंतजार करवाया,

नित्य- ये मेरा सौभाग्य ह, और आप मेरी hi बहेनो के पास थे, वो भी आपका कर्त्तव्य था,

ह्रदय- तुम्हे बुरा नहीं लग रहा,

नित्य- मुझे नहीं पता मुझ ेबुरा लग्न चाहिए या नहीं, मुझे बस इतना पता ह आप मेरे पति हैं, और शायद इससे अच्छा और मेरे जीवन में कुछ नहीं हो सकता,

ह्रदय- रात बहुत हो गई ह, अगर तुम सोना हचती हो तो सो सकती हो,

नित्य- आज हमारी सुहागरात ह, और अगर आज मैं सोइ तो किस्मत मुझसे रूत जाएगी, लेकिन अगर आप थकान महसूस कर रहे हो तो हम सो सकते हैं,

ह्रदय- मुझे थकन नहीं होती, मैं तुम्हारी भलाई के लिए hi बोल रहा था,

नित्य- मेरी भलाई आपके साथ होने में ह, ये मौका मैं नहीं जाने दे सकती, वर्ण कल दूसरी भेने हैं, उनका नंबर कैसे आएगा,

ह्रदय- वो सब किसी न किसी तरह मुझसे जुडी हुई हैं, वोट क दूसरे से जुडी हैं, मेरे साथ हर रिश्ते को बर्दास्त कर ले, लेकिन तुम उनसे अलग हो, क्या तुम मेरी इतनी पत्नियों को बर्दास्त कर पाओगी,

नित्य- मैंने कहा न मुझे जो मिला ह मेरे जीवन का सबसे ख़ुशी का पल ह, और मुझे किसी से कोई ाइटर्ज नहीं ह, ऐसा लगता ह वो और मैं एक hi हैं,

ह्रदय- मुझे भी ऐसा hi लगता, आज हमारी सुहाग रात ह, मैं चाहता हु तुम्हे सच पता हो, मैं तुम्हारे बारे में कुछ गलत नहीं सोचना चाहता था, लेकिन मेरा दिल तुम्हे देख क्र बेकाबू हो जाता था, हमे मिले हुए ज्यादा समय नहीं हुआ लेकिन फिर भी ऐसा लगता था जैसे हम ीक होना hi ह,

नित्य- मैंने भी आपको जब से देखा था, मेरे दिल दिमाग में आपके अलावा और कुछ नहीं अत था, लेकिन हिमत नहीं थी, ऐसा लगता था जैसे आप मुझे एक्सेप्ट नहीं करोगे,

ह्रदय- ऐसा क्यों लगा तुम्हे

नित्य- क्योकि आपके रिश्ता माँ के साथ था, आप उनकी बेटी के साथ रिश्ता कसिए बनाते

ह्रदय- तुम जानती थी मेरे और निधि जी के बारे में,

नित्य- वो मेरी माँ हैं, वो क्या करती हैं मैं सब जानती हु, इसीलिए मैं उनसे दूर रहती थी, या यु कहे माँ मुझे दूर रखती थी, जॉब hi मर्द उनके करीब आया मुझे उससे नफरत होती थी, लेकिन मैं आपसे नफरत की जगह प्यार कर बैठी, न चाहते हुए भी मैं आपको प्यार करने लगी,

ह्रदय- तुम्हे बुरा नहीं लग रहा,

नित्य- अब नहीं लगता, अब लगता ह जैसे ये सब होना hi था, अगर आप उनके साथ न होते तो शायद हम कभी न मिलते,

ह्रदय- तुम जाना नहीं चाहोगी मेरे और निधि जी के बिच का हुआ और क्यों हुआ,

नित्य- मेरे लिए आप जरुरी हैं, मुझे फरक नहीं पड़ता क्या हुआ क्यों हुआ कैसे हुआ, जो हुआ सो हुआ, आगे भी होता ह तब भी मुझे ऐतराज नहीं ह,

और अब बाते नहीं मुझे आपका प्यार चाहिए, यहाँ आज सिर्फ मैं और आप हैं तो बाते भी हमारी होनी चाहिए न,

ह्रदय- सही कहा,

ह्रदय ने नित्य को बहो में ले लिया,

दोनों के हॉट एक दूसरे के होतो में गम हो चुके थे, नित्य का किश बहुत hi पेसोनियत था, नित्य बड़े प्यार से ह्रदय के होतो को चुम रही थी, दोनों किश करते करते बीएड पैर आ गए, नित्य किश रोकने का नाम hi नहीं ले रही थी, 10 मिनट्स से ज्यादा किश चला दोनों का,

ह्रदय ने नित्य के कपडे खोलने शुरू किये, वो ज्यादा देर नहीं करना चाहता था, नित्य ने भी पूरा साथ दिया, जल्दी hi नित्य ब्रा पंतय में ह्रदय के सामने थी, एक दम चरेरा बदन, बहुत hi खूबसूरत थी नित्य,

नित्य ने भी ह्रदय के कपडे खोलने शुरू क्र दिए, जल्दी hi ह्रदय सिर्फ अंडर वियर में खड़ा था, नित्य ह्रदय के नंगे बदन से चिपक गई, नित्य का गरम बदन ह्रदय को बहुत सकूं दे रहा था,

ह्रदय के हाथ नित्य के बदन पैर घूम रहे थे, नित्य भी ह्रदय के नंगे बदन को पूरी तरह फील कर रही थी,

नित्य की हिम्मत नहीं हो रही थी ह्रदय के लुंड को चुने की, ह्रदय ने भी उसे फाॅर्स नहीं किया, ह्रदय ने नित्य ाको लिटाया और ुकि ब्रा उतर दी, और दूध सी सफ़ीद चूचियों को सहलाने लगा, नित्य आँखे बंद किये सिसकिया भर रही थी,

कुछ देर नित्य की चूचिया चूसने के बाद ह्रदय निचे गया और पंतय उतरने लगा, फिर नित्य की चिकनी छूट पैर अपना मुँह लगा क्र चूसने लगा, नित्य अपनी कमर उचकने लगी, पहेली बार छूट को किसी ने छुआ था ो भी सीधे अपने होतो से, नित्य मजे में बावली हो गई, और कुछ hi देर में झाड़ गई,

छूट को अच्छे से चूसने के बाद ह्रदय उठा और अपना अंडरवियर उतरा और टेबल से आयल उठाया और नित्य की छूट पैर डला और बहुत सा आयल अपने लुंड पैर डाला,

नित्य झुकी हुई नजरो से ह्रदय के लुंड को देखने की कोशिश कर रही थी, उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी, ह्रदय आयल लगा क्र एक बार नित्य के सामने खड़ा हुआ,

ह्रदय- देखना नहीं चाहोगी

नित्य ने नजरे उठा क्र ह्रदय के लुंड को देखा, उसकी आँखों में नशा सा उतरा हुआ था, उसने ह्रदय को देखा, फिर मुस्कुरा क्र नजरे झुका ली,

ह्रदय उसके पैरो के बिच आ गया,

ह्रदय- तुम्हे तकलीफ होगी,

नित्य- मैं तैयार हु,

ह्रदय ने लुंड को छूट पैर लगाया और धीरे से धकेल दिया, लुंड का टोपा छूट में घुस गया, नित्य के मुँह से दर्द भरी आह्ह्हह्ह्ह्ह निकल गई, ह्रदय को उम्मीद थी नित्य चिलायेगी लेकिन उसने उस दर्द को सेह लिया था,

ह्रदय थोड़ा सॉकेड था, ह्रदय ने हल्का सा दबाव बनाया और एक गरम गरम लावा से ह्रदय को महसूस हुआ, नित्य की एक दबी हुई चीख निकल गई, नित्य की वो कौमार्य को सुरक्षित रखने वाली झिल्ली टूट गाइट hi,


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नित्य उम्मीद के परे हौसला दिखा रही थी, जल्दी hi आधा लुंड नित्य की छूट में घुस चुक्का था, नित्य के दन्त भींचे हुए थे, उसने चादर को मुट्ठी में भीचा हुआ था, आँखे बंद की हुई थी, ह्रदय ने ज्यादा आगे बढ़ना सही नहीं समझा और हलके हलके धक्के लगाने शुरू किये, थोड़ी मुश्किल हो रही थी, लेकिन नित्य पूरा साथ दे रही थी,

कुछ देर ऐस एही कोशिश करने के बाद छूट की चिकनाहट बढ़ गई और कुछ खून की वजह से लुंड को आसानी होने लगी, ह्रदय हल्का सा लुंड बहार खींचता और अंदर कर देता, अगर 20 मिनट्स ह्रदय ऐसे छोड़ता रहा, नित्य नैना और काम्य से ज्यादा देर तक तिकी हुई थी, लेकिन कब तक तिकी रहती जल्दी hi वो झड़ने लगी, और झड़ने का फायदा ये हुआ की लुंड और अंदर घुस गया,

अब तक नित्य के मुँह से सिसकियों के अलावा कोई आवाज नहीं आई थी, ह्रदय ने नित्य की हिम्मत को देखना चाहा और धक्के लगते लगते पूरा लुंड नित्य की छूट में घुसा दिया, जैसे hi पूरा लुंड नित्य ाकि छूट की घेरे में उतरा नित्य के मुँह से दर्द भरी चीख निकल गई, ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhh माआआआआ,


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ह्रदय रुक गया, नित्य की आँखों से आंसू निकल पड़े थे, ह्रदय ने नित्य का फेस देखा, उसकी हिम्मत देख क्र ह्रदय उसका कायल हो गया, ह्रदय ने नित्य के हॉट चूसने शुरू क्र दिए, नित्य ने भी ह्रदय का साथ दिया,

ह्रदय हलके हलके कमर चलता रहा, ह्रदय काफी देर तक ऐसे hi चुदाई करता रहा,

नित्य- अब आप रफ़्तार बढ़ा सकते हैं, मैं अब ठीक हु

तब से नित्य बस ये hi शब्द बोली थी, ह्रदय बड़ा सुरप्रीसेड हुआ, पहेली बार कोई मिली थी जिसने कहा हो की तुम रफ़्तार बढ़ा सकते हो, वो भी पहेली बार जिसके साथ हो रहा हो,

ह्रदय ने हलकी रफ़्तार बछड़े, निचे से नित्य भी साथ दे रही थी, नित्य फिर से झड़ने लगी, ह्रदय की रफ़्तार बढ़ती hi जार hi थी, चुदाई को लगभग 1:30 घंटा होने आया था, नित्य का ये तीसरी बार होने वाला था, ह्रदय को बहुत मजा आ रहा था, उसने ज्यादा लम्बा खींचना सही नहीं समझा और चुदाई के उस मजे में खुद को भेने दिया और अपन ल ावा नित्य की छूट में भर दिया,


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कमरे में बार दोनों की सिसकिया और सांसे गूंज रही थी, नित्य ह्रदय को बहो में कैसे हुए लेती रही, उसने अपने दोनों पेअर ह्रदय की कमर पैर लपेटे हुए थे,

काफी देर दोनों ऐसे hi लेते रहे, सुबह के 3:30 बजे हुए थे,



ह्रदय ने नित्य को उठाया और बाटरूम में लेजाकर उसकी सफाई की और खुद भी साफ़ होकर बीएड की चादर बदली और दोनों नंगे hi चिपक कर लेट गए, वही कमाया और नैना भी नंगी hi एक दूसरे से चिपकी हुई सो रही थी,
 
अपडेट- 40




अगली सुबह घर में शोर मचा हुआ था, ह्रदय की आँख खुली वो निचे आया तो देखा अशोक और रवि और हनी खड़े हैं,

ह्रदय की आँखों में नींद भरी हुई थी, उसे बात तो समझ नहीं आई लेकिन हनी और अशोक के छिलने की आवाज से उसका दिमाग ख़राब हो चुक्का था,

और जो शब्द हनी ने कहे उन्हें सुन क्र ह्रदय का दिमाग ख़राब हो गया,

हनी- ये बदचलन औरत रंडी पहले खुद उससे चुद रही थी, अब अपनी बेटी को भी उससे छुड़वाने यहाँ ले आई रवि अंकल,

इसी वक़्त ह्रदय निचे आया था, और उसने सीधे हनी की गार्डन पकड़ी और हवा में उठा लिया,

ह्रदय- तेरी हिम्मत कैसे हुई इस घर में आने की,

तभी रवि ह्रदय पैर कूद पड़ा, ह्रदय ने हनी को हवा में hi उछाल क्र दूर फेंक दिया वो दीवार से जाकर लगा, और जैसे hi रवि उसके सामने आया और रवि ने अपना मुका चलाया वैसे hi ह्रदय ने भी अपने मुक्के का वॉर किया और दोनों के मुक्के आपस में तक्यारे, और एक दर्द बाहरी चीख वह गूंज गई, जो थी रवि की,

रवि को पहेली बार किसी ने दर्द में देखा था, निधि सॉकेड सी रवि को देख रही थी, वही अशोक की हालत ख़राब हो गई थी, अंजलि के फेस पैर मुस्कराहट आ गई थी,

अशोक- रुक जाओ हम यहाँ लड़ने नहीं आये हैं,

हनी उठ क्र वह आया

हनी- ये क्या बोल रहे हो दादा जी, इन लोगो ने हमारे घर की इज्जत को दाग लगाया ह,

अशोक- मैंने कहा चुप रह, मैं बात कर रहा हु न, रवि तू भी आराम से बैठ,

रवि ने गुस्से में ह्रदय को देखा, ह्रदय की आँखों में भी वही गुस्सा था,

अशोक ह्रदय से- शांत हो जा बीटा, हम यहाँ बात करने आये हैं,

अंजलि- तुम यहाँ बात करने आये हो या धमकाने,

अशोक- मैं माफ़ी चाहूंगा अपने बेटे और पोते की तरफ से, लेकिन हमारी बहु बेटी आपके घर में हैं, और मैं एक इज्जतदार इंसान हु, समाज में लोग क्या कहेंगे,

अंजलि- अब वो इस घर की अमानत हैं, नित्य की शादी ह्रदय से होने वाली ह,

अशोक- शादी से पहले कोनसी लड़की अपनी ससुराल में जाती ह,

अंजलि- ये सब बकवास 50 साल पहले चलती थी, अब इन बातो को कोई याद नहीं रखता, तुम क्या चाहते हो नित्य इस घर की बहु न बने

अशोक- नहीं नहीं ऐसी बात नहीं ह, मैं ऐसा नहीं बोल रहा,

अंजलि- फिर क्या बोल रहे हो,

हनी- ये ह कोण हम क्यों इससे अपनी बहन की शादी करवाए, क्या रिश्ता ह इसका इस घर से, ये कहा से आया ह, इसका बाप कोण ह, बाप ह भी या नहीं

अंजलि और ह्रदय एक साथ गुस्से में चीला क्र बोल उठे- जबान सम्हल क्र बात क्र वर्ण हलक से जबान खींच ली जाएगी,

हनी एक दम घबरा गया,

अशोक ने डरते हुए- ये सवाल तो सही ह इस लड़के का आपसे क्या रिश्ता ह, कोण ह ये,

अंजलि- ये मेरी बेटी का बीटा ह दीपा का बीटा,

अशोक- इसके पिता कोण ह,

इस सवाल पैर एक दम ख़ामोशी च गई,

दीपा- मैंने अपनी मर्जी से किसी को पसंद किया लेकिन शादी नहीं की, इस पैदा किया ह, इसलिए मैं इसकी माँ हु बस, तुम लोगो को कोई ऐतराज ह,

दीपा के जवाब से अशोक का मुँह बंद हो गया,

हनी- लेकिन इसके पप्पेर्स में तुषार का नाम क्यों ह,

अंजलि- क्योकि उसने इसे बाप का नाम दिया ह, रिकार्ड्स पुरे करने के लिए,

निधि- ह्रदय के पिता कोण ह, माँ कोण ह इस सब से मुझे और मेरी बेटी को कोई फरक नहीं पड़ता, और आज के टाइम में लड़के लड़किया अपनी मर्जी से किसी के भी साथ लिविंग में रहते हैं, किसी को फरक नहीं पड़ता किसके माता पिता कोण ह किसी को फरक नहीं पड़ता, आज कल बच्चे बिना बाप के नाम के जी रहे हैं,

रवि- तुम बहुत बोलने लगी हो

निधि- तुम्हे और भी कुछ सुन्ना ह, मैं और भी बहुत कुछ बोल सकती हु,

रवि ने गुस्से में निधि को देखा, और उसकी तरफ बढ़ा,

ह्रदय फिर बिच में आ खड़ा हुआ,

अशोक- रवि और हनी तुम लोग बहार जाकर गाड़ी में बैठो मैं आता हु,

रवि जाना नहीं चाहता था, लेकिन जाना पड़ा,

उनके जाते hi

अशोक- निधि मुझे तुमसे कुछ बात करनी ह,

ह्रदय ने निधि को देखा, तो निधि ने है में गार्डन हिलाई, अशोक और निधि के कमरे में खड़े थे,

अशोक- तुमने बगावत कर दी ह, गुरु जी बहुत नाराज हैं, और उन्हें पता चल गया ह की नित्य वही बच्ची ह जिसे तुमने मारा बताया था, उनका गुस्सा सातवे आसमान पैर ह, कुछ भी हो सकता ह, उन्होंने hi मुझे यहाँ भेजा ह, तेरे साथ साथ मुझे अपना भी अंत दिखाई दे रहा ह,

निधि- किसने बताया उसे

अशोक- किसी ने नहीं, नित्य को देख क्र hi उसे पता चल गया, वो नित्य और ह्रदय की शादी नहीं होने देगा,

निधि- उसकी चिंता आप मत कीजिये, आप बस उस प्रोजेक्ट के बारे में उसे मत बता देना

अशोक- उसका धयान इस वक़्त तुम पैर नित्य और इस परिवार पैर ह, वो प्रोजेक्ट को भूल गया ह,

निधि- ये अच्छा ह,

अशोक- मैंने तुम्हारा साथ दिया था अगर उन्हें ये पता चला तो वो मुझे ख़तम कर देगा, फिर भी मैं अपने बेटे के लिए ये रिस्क ले रहा हु, वो प्रोजेक्ट कहा ह, तुमने उसे क्यों गायब क्र दिया वह से,

निधि- ताकि वो गलत हटो में न पद सके, आप मेरा साथ दे रहे हैं, इसका फल आपको जरूर मिलेगा, सही वक़्त का इंतजार कीजिये, क्योकि ये सब मेरे और आपकी जरुरत से बहुत ज्यादा अलग ह, हम दोनों बस अपने अपने मकसद के लिए चल रहे थे, लेकिन यहाँ कुछ और hi ह, ये गुरु इसका मकसद बहुत खतरनाक लग रहा ह,

अशोक- मैं इसका मकसद तो नहीं जनता लेकिन इतना पता ह की वो जो भी ह बहुत खतरनाक ह,

निधि- अगर आप चाहते हैं सब सही रहे तो रोहन को लेकर कही गायब हो जाइये वर्ण सब ख़तम हो जायेगा, मैं वडा करती हु, रोहन के लिए जो हो सकता ह वो करुँगी,

अशोक- अब मुझे तुम्हारे वेड पैर hi भरोसा ह,

निधि- आपने मेरी तब सहायता की थी जब मैं बिलकुल अकेली थी, और आपकी वजह से hi मैं आज यहाँ हु, इसलिए आपको सलाह दे रही हु, एक युद्ध शुरू होने वाला ह, खुद को इससे दूर कर लो, वर्ण जो भी इस युद्ध के बिच आएगा, ये तूफ़ान उसे तबाह कर देगा,

इतना बोल क्र निधि बहार आ गई, अशोक भी हताश सा बहार आया और अंजलि की तरफ हाथ जोड़ क्र चला गया,

अंजलि- क्या कहा उसने

निधि- चिरंजीवी नित्य को हासिल करने की कोशिश कर रहा ह, वो बोखला रहा ह, वो कुछ खतरनाक कर सकता ह,

अंजलि- हम तैयार हैं, अब युद्ध आमने सामने का होगा,

ह्रदय- पहले मुझे पापा को लेने जाना होगा,

अंजलि- पहले सबकी सुहागरात

दिया- पहले हमारे पापा,

साडी लड़किया एक साथ बोल पड़ी- है हमारे पापा

अंजलि- मैं तुम सबकी भावनाये समझती हु, लेकिन अगर ये जरुरी न होता तो मैं कभी इस बारे में न बोलती,

ह्रदय- हमे दृष्टि को सेफ करना होगा,

अंजलि- मेरी बात दृष्टि के करवा,

ह्रदय ने तुरंत दृष्टि को संस क्र दिया, अर्जेंट कॉल करे के लिए, उसने रीप्ले में कुछ देर बाद को बोलै,

ह्रदय- वो कुछ देर में बात करेगी,

अंजलि- सीमा लड़कियों के कमरे तैयार कर, आज hi इनकी सुहागरात होगी,

अनीता – ह्रदय को थोड़ा आराम तो करने दो,

अंजलि- जब सामने शिकार खड़ा हो तो शेर आराम नहीं करता, क्यों मेरे शेर तुझे आराम चाहिए क्या,

ह्रदय ने ना में गार्डन हिलाई,

अंजलि- तू जा कमरे में अपना काम ख़तम कर, मैं तब तक तैयारी करती हु, हुम्ला ऐसा होगा की किसी को सम्हालने का मौका नहीं मिलेगा,

ह्रदय खड़ा सोचता रह गया कहा जाये, किसके कमरे में जाये, अभी तो नित्य के रूम से उठ कर आया था,

दीपा ने उसकी प्रॉब्लम को भांप लिया, वो ह्रदय का हाथ पकड़ क्र ले गई, सीमा भी उसके पीछे चली गई,

अंजलि- तुम लड़कियों अपने रूम में जाओ, और जिसका नंबर ह वो तैयार रहो,

माफ़ करना ये सब ऐसे करना पद रहा ह, लेकिन बच्चो हम एक युद्ध में हैं, और युद्ध प्यार का समय नहीं देता, इसलिए जिम्मेदारियों को सम्हालो, प्यार करने के लिए साडी जिंदगी पड़ी ह,

लड़किया अपने अपने रूम में चली गई,

अंजलि- सचिन सबको गाओं लेकर जाने की तैयारी करो अपने पापा के पास, आज शाम तक यहाँ कोई नहीं होना चाहिए, सिवाए मेरे और ह्रदय के

सचिन- जी माँ

वन्य- आप दोनों क्यों

अंजलि- हमे युद्ध के लिए निकलना ह,

वन्य- आप अकेले नहीं जाओगे,

अंजलि- जाना होगा, तुम सबका सेफ रहना जरुरी ह,

वन्य उस टाइम चुप रह गई,

दीपा ह्रदय को अपने रूम में ले गई,

दीपा- बीटा अपनी यहाँ की सभी जिम्मेदारियों को निपटा ले फिर हमे आगे बढ़ना ह

ह्रदय- समझता हु माँ, लेकिन

दीपा- यहाँ सब असत व्यस्त ह, जैसा हर लड़का चाहता ह, तेरी लाइफ वैसी नहीं ह, तेरी लाइफ में बहुत लड़किया ह, लेकिन बाकि जैसा प्यार नहीं ह, ये सभी लड़किया तुझे बहुत प्यार करती हैं, लेकिन तुम लोगो की सीधे सदी हो गई, रोमांस का टाइम hi नहीं मिला, और सुहागरात भी ऐसी हो रही ह जैसे कोई काम निपटना ह, लेकिन मज़बूरी ह, तेरी जिम्मेदारी तेरी खुशियों से ज्यादा बड़ी हो गई हैं,

ह्रदय- माँ आप फ़िक्र न करे, मैं सब जिम्मेदारी निभाउंगा, मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं ह,

दीपा- चल तो अपनी पत्नियों को उनके हिस्से का प्यार दे,

दीपा ह्रदय को अन्य और रम्य के रूम के सामने ले गई,

ह्रदय अंदर गया तो देखा अन्य और रम्य बहुत hi खूबसूरत निघ्त्य में उसके सामने कड़ी थी,

ह्रदय उनके करीब गया,

ह्रदय- कितना अजीब ह न ये सब रात में होना चाहिए था लेकिन दिन में करना पद रहा ह,

अन्य- अमेरिका में इस वक़्त रात हो रही ह,

ह्रदय- तो

अन्य- मतलब दिन और रात कोई मायने नहीं रखते, कुछ जगह ऐसी भी हैं जहा 6 महीने रात रहती ह, तो क्या दिन के काम नहीं होंगे,

रम्य- इसका मतलब ह, दिन और रात कुछ नहीं होते, बस जगह का महत्व होता ह, यहाँ दिन ह और वह रात,

ह्रदय- समझ गया तुम क्या कहना चाहती हो,

अन्य- छोड़ो हम क्या कहना चाहते हैं, अभी वक़्त ह इस पल को जीने का तो क्यों न इसे जिया जाये,

अन्य और रम्य ने अपनी निघ्त्य उतर दी और सिर्फ ब्रा पंतय में आ गई, बालक ब्रा पंतय में गोरा बदन और कैसा हुआ गठीला बदन देख क्र कोई भी उनमे खो जाये,

ह्रदय ने आए बढ़ क्र दोनों को अपनाई बहो में भर लिया, और उनके होतो को चूमने लगा, बरी बरी से दोनों अपने हॉट ह्रदय से चुसवा रही थी, लेकिन रम्य थोड़ी ज्यादा उतावली थी, जब ह्रदय अन्य के हॉट चुम रहा था तो रामय ने बिच में अपने हॉट घुसा दिए, पहले तो अन्य और ह्रदय चौंके लेकिन अगले hi पल तीनो एक साथ किश करने लगे,

ये एक नया अनुभव था तीनो के लिए, फिर दोनों लड़कियों ने जल्दी जल्दी ह्रदय के कपडे उतरे, ह्रदय अंडर वियर में खड़ा था, अन्य और रम्य उसके सामने बैठ गए,

रम्य- मैंने बहुत पोर्न मूवीज देखि हैं, मैं चाहती हु हमारी पहेली फूकिंग ऐसी हो की हम हमेषा याद रखे,

अन्य- तो जो देख क्र सीखे हैं हम पूरा इस्तेमाल करते हैं,

ह्रदय- आज की चुदाई तुम्हे हमेषा याद रहेगी,

रामय- चुदाई ज्यादा इरोटिक लगता ह, हिंदी में hi छोड़ो इंग्लिश में तो पोर्नस्टार चुदवाती हैं, हम तो पत्निया हैं,

ह्रदय है पड़ा,

रामय ने ह्रदय का अंडर वियर निचे किया और लुंड उनके सामने आ गया, दोनों एक तक लुंड को निहारे जार hi थी,

अन्य- ये रात से अब तक थका नहीं ह क्या

ह्रदय- इसे तो ताकत मिल रही ह,

रामय ने तुरनत लुंड को मुँह में भर लिया, और चूसने लगी, अन्य कुछ देर उसे देखती रही फिर वो भी साइड से लुंड को चाटने लगी,

कुछ देर लुंड चुसवाने के बाद ह्रदय ने उन्हें बीएड पैर लिटाया और उनकी पंतय और ब्रा निकल दी फिर अपने हॉट अन्य की छूट पैर रख दिए, और रामय की छूट को अपने हाथ से सहलाने लगा,

बरी बरी से दोनों की छूट चूसने के बाद उसने अन्य की छूट पैर अपना लुंड लगाया और लुंड को धकेल दिया, लुंड अन्य की छूट को चीरता हुआ अंदर घुस गया, अन्य की चीख निकल गई, ह्रदय को लगा वो सेह लेगी लेकिन वो दर्द से बिलबिला उठी, ह्रदय ने उसे शांत करने की कोशिश की, रम्य ने तुरंत उसके होतो से अपने हॉट जोड़ दिए, और उसकी हकुचिया मसलने लगी,

कुछ देर बाद अन्य शांत हुई तो ह्रदय ने चुदाई शुरू की, अन्य जैसे तैसे दर्द को बर्दास्त क्र रही थी, उसे मजा तो आ रहा था लेकिन दर्द बहुत ज्यादा था, लेकिन दर्द कितना भी हो जब छूट अपनी गर्मी पैर होती ह तो वो गधे का लुंड भी झेल सकती ह, और हुआ भी वाइस यही जल्दी hi अन्य लूँ डको सहने लगी और जल्दी hi झड़ने लगी, जब अन्य झाड़ गई तो उसे और सहा नहीं गया,

ह्रदय इ लुंड को बहार निकल लिया, फिर रामय जग में पानी ले और लुंड को पानी में धोने लगी, फिर बहुत सा आयल लुंड पैर डाला और खुद hi लुंड के समाने लेट गई, ह्रदय ने तुरंत लुंड उसकी छूट में घुसा दिया, रामय थोड़ी मजबूत थी जो झेल गई, लेकिन कब तक झेल पति, जल्दी hi उसकी भी चीखे कमरे में गूंजने लगी, अन्य बस बगल में पड़ी देखती रही, अगले 45 मिनट्स तक रमय चुदती रही और 2 बार झाड़ गई,

ह्रदय को लगभग 1: 30 घंटा हो चुक्का था, अब वो भी झड़ने वाला था उसने धक्के बढ़ाये

ह्रदय- मैं आने वाला हु कहा औ

रामय- हमारे उप्पेर हमारी चूचियों पैर डालो अपना रास जैसे पोर्न मूवीज में होता ह,

ह्रदय ने वैसा hi किया, अपना पूरा रास उन दोनों की चूचियों पैर निकल दिया, और उनके बराबर में लेट गया,

कुछ देर बाद दोनों को साफ़ किया और चादर बदल क्र उन्हें सुला कर बहार आ गया,

शाम होने को आ चुकी थी,

ह्रदय निचे आया तो सभी एक साथ बैठे हुए थे,

ह्रदय- क्या हुआ कुछ प्रॉब्लम ह क्या

तभी सचिन बहार से आया,

सचिन- माँ गाड़िया आ गई हैं, सब तैयार ह,

ह्रदय- गाड़िया क्यों क्या हुआ

अंजलि- सब गाओं जा रहे हैं, रात में सब निकल जायेंगे,

ह्रदय- क्या ये सेफ रहेगा, सबको दूर भेजना

अंजलि- यहाँ कभी भी हुम्ला हो सकता ह,

ह्रदय- फिर कुछ और करना होगा,

अंजलि- क्या

ह्रदय- गाड़िया सीधे गाओं नहीं जाएँगी, कही और भेजो, जहा कोई न पहुंच सके, गाओं को सब जानते हैं, अगर यहाँ हुम्ला हुआ और यहाँ कोई नहीं मिला तो वो लोग सबको ढूंढ़ते हुए गाओं जायेंगे,

अंजलि- सही बात ह, ठीक ह मैं जानती हु इन्हे कहा भेजना ह,

तभी ह्रदय के फ़ोन पैर दृष्टि की कॉल आई,

ह्रदय- hello दृष्टि

दृष्टि का नाम सुनते hi अंजलि ने फ़ोन चीन लिया,

अंजलि- दृष्टि बेटी दृष्टि तू कैसी ह तू ठीक ह न, मेरी बच्ची

ह्रदय धीरे से- माँ उसे अब तक सच नहीं पता ह,

अंजलि ने खुद को सम्हाला

दृष्टि- जी मैं ठीक हु, मुझे ह्रदय से बात करनी ह, अर्जेंट ह,

अंजलि ने ह्रदय को फ़ोन दे दिया,

ह्रदय ने फ़ोन स्पीकर पैर डाला

ह्रदय- है दृष्टि क्या हुआ, सब ठीक ह न,

दृष्टि- नहीं कुछ गड़बड़ लग रही ह, हम सबको चंडीगढ़ बुलाया जा रहा ह, यहाँ के सभी आदमी चंडीगढ़ आने की तैयारी क्र रहे हैं,

ह्रदय- सोनिया ने कुछ बताया

दृष्टि- नहीं कुछ नहीं बस ितं अकहा की तैयारी क्र ले, सेवा करने जाना ह,

अंजलि- दृष्टि बेटी मैं अंजलि बोल रही हु, कोमल कहा ह, मेरी उससे बात करवा सकती ह,

तभी दूसरी तरफ से सुबकते हुए आवाज आई- मायआ

आवाज में इतना दर्द और रोने का रूढां था की परिवार में बैठे सभी की आँखों में आंसू आ गए, वही साथ में बैठी थी काम्य, काम्य ने जब अपनी माँ की आवाज सुनी तो उसका रओं ानिकल गया, नंदनी ने उसे शांत किया

अंजलि- मेरी बच्ची मैं आ रही हु, अब तू और तकलीफ में नहीं रहेगी, मैं आ रही हूत ेरे पास,

कोमल- माँ अब बर्दास्त नहीं हो रहा, प्लस सबको बचा लो, कुछ बड़ा होने वाला ह माँ, बहुत तैयारी हो रही हैं,

अंजलि- तू चिंता मत कर मेरी बच्ची मैं कुछ नहीं होने दूंगी, मुझे कसम ह गंगा मैया की इस बार इस सोनिया को बिच में चिर दूंगी,

ह्रदय- मौसी आप फ़िक्र मत करो, दृष्टि तुम अपने फ़ोन की लाइव लोकेशन मुझे भेजो, तुम कहा हो मुझे पता चलता रहेगा, इस बार मैं सब ठीक कर दूंगा, अब समय आ गया ह सबको वापस लेन का,

दृष्टि ने ok कहा और फ़ोन काट दिया,

अंजलि- क्या करना छटा ह तू,

ह्रदय- पहले सबको सेफ जगह भेजो,

ाव्य- मैं यहाँ से कही नहीं जाउंगी, तुम्हे अकेला छोड़ क्र तो कही नहीं जाने वाली,

अंजलि- जिद नहीं करते बीटा

ह्रदय- नहीं माँ ाव्य को रुकने दो मुझे ाव्य की जरुरत होगी,

ाव्य के चेरे पैर मुस्कान आ गई, बाकि लड़किया थोड़ा सा मुँह बनाना लगी,

ह्रदय- यहाँ मैं अंजलि माँ ाव्य वन्य वर्षा माँ रहेंगे,

दिया ने हलके से हाथ उठाया तो ह्रदय ने उसे भी रोक लिया,

अंजलि- सचिन बाकि सब को गाड़ियों में बैठा और राजस्थान निकल, यहाँ हिम तैयारी करते हैं,

अनीता और रिंकी उप्पेर जाकर अन्य और रम्य को भी ले आये, उनसे उठा भी नहीं जार ह अतः लेकिन उन्हें दवाइया देकर चलने लायक तैयार किया गया, और सभी को रात में सचिन और कपिल लेकर चले गए,

वर्षा- हमे क्या करना होगा,

ह्रदय- माँ हम पहले दृष्टि और कोमल मूसी को छुडवायेंगे फिर हम जम्मू जायेंगे, आपको यहाँ इन लोगो को सम्हलना होगा, जब तक वो बाबा यहाँ ह इस दौरान मैं पापा और माओ को वह से निकल लाऊंगा,

अंजलि- तू यहाँ की फ़िक्र मत कर मैं सब सम्हाल लुंगी,

रात में ह्रदय ाव्य और अंजलि और दिया निकला गए, दृष्टि की लोकेशन उन्हें मिल रही थी, जब दृष्टि की लोकेशन चंडीगढ़ के नजदीक पहुंची तो ह्रदय पूरी तैयारी के साथ एक सुमसान जगह पैर खड़ा हो गया, और 2 गाड़िया और एक मिनी बस थी जिसमे वो सब तैनात थे, अंजलि ने दूर से hi निशाना लगा क्र टायर पिंचर क्र दिए, अंजलि बन्दूक चलने में बहुत माहिर हो चुकी थी,

गाड़ियों के रुकते hi मिनी बस के अंदर से 8-10 आदमी उतरे जिनके सामने ह्रदय आ गया, आदमी ह्रदय की तरफ दौड़े, बाकि गाड़ियों में से भी आदमी तुरंत ह्रदय की तरफ दौड़े, ह्रदय के साथ ाव्य भी आ चुकी थी, एक गाड़ी में सोनिया दृष्टि और कोमल थी,

उनकी गाड़ी में दो आदमी थे जो बहार निकल चुके थे, सोनिया ने तुरंत फ़ोन निकला और धामा उर्फ़ रवि को कॉल लगाने लगी, लेकिन दृष्टि ने उसका फ़ोन हसीन लिया, सोनिया एक दम चौंक गई, तभी एक तहापड उसके गाल पैर पड़ा जो कोमल का था,

सोनिया- हरमजादि मुझ पैर हाथ उठती ह,

दृष्टि सोनिया को गाड़ी के बहार निकल लाइ, तभी वह दिया आ गई,

दिया- दृष्टि इसे ले चलो हमारी गाड़ी में और बांध दो

दृष्टि- ने सोनिया के गाल पैर एक थपड मारा और वो वही जमीन पैर गिर पड़ी, कोमल और दिया ने सोनिया को उठाया और गाड़ी की तरफ ले गई, वही दृष्टि ने देखा ह्रदय इतने आदमियों से लड़ रहा ह वो उसकी मदद करने दौड़ पड़ी,

लेकिन ह्रदय को किसी की जरुरत पड़ती hi कहा ह, उसके सामने जॉब hi आ रहा था, ह्रदय नॉन स्टॉप उन पैर घुसे बरसा रहा था, वही अंजलि के हाथ में एक तलवार थी और वो बिजली की रफ़्तार से तलवार चला रही थी, और ाव्य उसका तो कमल था, उसकी ताकत और फुर्ती देख क्र खुद अंजलि भी हैरान थी, ाव्य के समाने दो पहलवान जैसे मर्द थे, ाव्य ने उछाल क्र उनकी छाती में लात मरी दोनों दूर जाकर गिरे,

दृष्टि जब तक वह पहुंची तब तक ह्रदय अंजलि और ावय सबको जमीन में सुला चुके थे,

दृष्टि दौड़ क्र ह्रदय के गले लग गई,

अंजलि तुरनत उनके पास आई

अंजलि- तुम ठीक हो न बेटी

दृष्टि- है मैं ठीक हु,

अन्जाइल- कोमल कहा ह

दृष्टि- वो दिया के साथ सोनिया को लेकर गई हैं,

अंजलि- ह्रदय इन सब को ठिकाने लगाना होगा,

अंजलि ने किसी को कॉल लगाया और कुछ बताया,

फिर सब अपनी गाड़ी के पास आ गए,

सामने सोनिया कड़ी थी उसके हाथ और पेअर बंधे हुए थे अउ रमुह भी बंद किया हुआ था.

अंजलि ने उसके नजदीक आते hi सोनिया को एक जोरदार थपड जड़ दिया,

सोनिया जब तक सम्हालती दूसरा थपड भी उसके मुँह पैर आ लगा, अंजलि ने लगातार 8-10 थपड उसे जड़ दिए, जिससे सोनिया के मुँह से खून आने लगा,

कोमल पीछे से अंजलि के गाल इलाज गई,

अंजलि- मत रो मेरी बच्ची मत रो, मैं आ गई हु अब सब ठीक हो जायेगा,

सोनिया- हहहहह सब ठीक, कुछ ठीक नहीं होगा, तेरे बच्चे मरे जांयेंगे,

अंजलि- अलका तेरी बेटी ह, अपनी बेटी का तो ख्याल करती

सोनिया- हँ मेरी बेटी वो रंडी, तेरे बेटे से चुद रही थी, वो मेरे बेटी नहीं ह, उसकी वजह से मेरे बेटे मरे गए,

अंजलि- टब hi तो मेरे बेटे से चूड़ी थी तूने खुद को क्यों नहीं मर दिया,

सोनिया- मेरे साथ तुम सबने धोखा किया था,

अंजलि- धोखा तू धोखे की बात कर रही ह, जलील औरत तूने सब बर्बाद क्र दिया,

सोनिया- बर्बाद तो वो बाबा करेंगे, और तू दृष्टि हरामजादी तूने भी मुझे धोखा दिया, देखना बाबा तेरी छूट ऐसी फाड़ेंगे की कोई सिलने वाला नहीं मिलेगा,

सोनिया की बात पैर इस बार एक थपड कोमल ने जड़ दिया,

कोमल- तेरा वो बाबा अब इसका कुछ नहीं बिगड़ पायेगा, अब वो अपने परिवार के साथ ह,

दृष्टि कोमल की बात से चौंक गई,

कोमल- मैंने अपनी जिंदगी के 18 साल तेरी कैद में गुजर दिए, तुझे क्या लगा मुझे तुषार रूचि या अलका की चिंता थी, नहीं हरामजादी नहीं, मैंजनती थी उनकी किस्मत में जो लिखा ह वो होगा hi, लेकिन मुझे इस बच्ची की फ़िक्र थी, मैं इसके लिए आज तक तेरा हर अत्याचार शेती रही, मैं चाहती तो पहले hi अंजलि माँ को खबर भिजवा सकती थी, लेकिन तब मैं इस बच्चो को बचा नहीं पति, इसे सुरक्षित रखने के लिए मैं आज तक सब शेती आई हु,

सोनिया- तू जानती ह ये कोण ह

कोमल- है जानती हु ये कोण ह,

तभी वह कुछ गाड़िया आ गई, उनमे से कुछ आदमी निकले, जीने अंजलि ने वह का सारा काम समझा दिया, उन आदमियों ने कुछ hi देर में वह से सभी लाशे और जिन्दा बचे आदमियों को गायब कर दिया और गाड़िया भी खींच क्र ले गए,

अंजलि- अब यहाँ से घर चलो,

ह्रदय- माँ आप लोग घर जाइये, मैं जाऊंगा जम्मू

जम्मू का नाम सुनकर सोनिया चौंक गई वो समझ गई इन्हे सब पता चल चुक्का ह,

सोनिया- तू वह अपनी मोत से मिलने जार है ह, हहहह तेरी मोत वह तेरा इंतजार कर रही ह,

ाव्य सामने आई और सोनिया की गार्डन पकड़ ली और दबाने लगी, सोनिया की साँस रुक गई उसकी आँखों में उसे अपनी मोत नजर आने लगी,

दिया ने ाव्य को रोका, तो ाव्य ने हाथ हटा लिया,

ाव्य की ताकत देख अंजलि बहुत सुरप्रीसेड थी,

सोनिया- कोण ह टूट ेरे अंदर ये ताकत,

ाव्य- अलका और तुषार की बेटी, और ये ताकत मेरे पिता से मिली ह मुझे,

सोनिया- तू जानती ह मैं तेरी नानी हु,

ाव्य- तेरी माँ की छूट भें की लोदी, खबर दर जो दुबारा अपने गांड ेमुह से मेरा या मेरी माँ का नाम लिया, कसम अपनी माँ की तेरे भोसड़े में आग लगा दूंगी,

ाव्य की गली सुनकर ह्रदय और दिया की हसी छूट गई,

अंजलि ने ाव्य को शांत किया,

कोमल- आज तेरे सामने वो हैं जिनसे तुझे डरना चाहिए सोनिया,

ह्रदय- माँ बातो में समय ख़राब नहीं करना चाहिए, हमे यहाँ से निकलना चाहिए,

अंजलि- मैं तुझे अकेले कैसे जाने दू,

ाव्य- ये अकेले कहा ह मैं हु न इनके साथ, इनकी परछाई,

दृष्टि- और मैं भी

अंजलि- नहीं बच्ची तू इनके साथ मत जा वह खतरा ह,

कोमल- जाने दीजिये माँ, वो सम्हाल लेगी,

कोमल- दृष्टि बेटी खुद पैर यकीन रखना, अपने आप को पहचानना, तेरे अंदर तेरे पिता का खून ह, और उनकी ताकत का कोई मुकाबला नहीं

दृष्टि- आपने अब तक नहीं बताया मेरे पिता कोण हैं,

अंजलि- वो खुद तेरे सामने आजायेंगे,

दिया- मैं भी जाउंगी, क्या पता वह क्या जरुरत पद जाये,

ह्रदय ने हामी भर दी,



ह्रदय अपने साथ दृष्टि ाव्य और दिया को लेकर चल दिया, अंजलि कोमल और सोनिया को लेकर घर चली गई,
 
बहुत बहुत धन्यवाद आप सभी दोस्तों का लव यू आल,

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अपडेट- 41






ह्रदय दृष्टि ाव्य और दिया 2 घंटे में hi जम्मू पहुंच चुके थे, लेकिन मुश्किल थी अड्डे का पता करना, जितनी जानकारी मिली उस हिसाब से वो आगे बढ़ते जा रहे थे, आगे बढ़ते हुए वो कश्मीर की बर्फ की वादियों में पहुंच चुके थे, सबको बस इतना hi पता होता था की आश्रम पहड़ियो और बर्फ के बिच में ह, उससे ज्यादा कोई नहीं जानता था, क्योकि कोई भी वह खुली आँखों से कभी गया hi नहीं था, कुछ लोगो को छोड़ क्र सबकी आँखों पैर पट्टी बांध क्र या बेहोश करके लेकर गए थे,

चारो तरफ बस सनता hi सनता था, चारो तरफ बर्फ hi बर्फ थी, दिया और दृष्टि को ठण्ड लगने लगी थी, ाव्य को हल्का सा ठण्ड का अहसास था, लेकिन ह्रदय वो बिलकुल नार्मल था उसे ठण्ड का कोई फरक नहीं पद रहा था, गाड़ी को दूर कड़ी करके उन्होंने छुपा दी और चारो तलाश में लग गए,

रात के 2 बजे हुए थे,

दिया- मुझसे ठण्ड बर्दास्त नहीं हो रही, मैं तो जैम जाउंगी,

दृष्टि- मेरी भी यही हालत ह, ठण्ड बहुत ज्यादा ह,

ाव्य- इतनी भी ठण्ड नहीं ह, मुझे तो नहीं लग रही,

दिया- टेम्प्रेचर -10 हो रखा ह, और तुम्हे ठण्ड नहीं लग रही,

ाव्य- ये गलत बता रहा ह, 0 के आस पास होना छाइये,

ह्रदय- ये टेम्प्रेचर सही ह, यहाँ -10 डिग्री का तापमान ह, इन्हे ठण्ड लग रही होगी,

ाव्य- तुम्हे देख क्र तो ऐसा नहीं लगता की तुम्हे ठण्ड लग रही ह, एक नार्मल सी टी शर्ट में घूम रहे हो,

ह्रदय- मुझे ठण्ड नहीं लगती, मेरी बॉडी को ठण्ड का अहसास नहीं होता, और तुम्हे देख क्र भी कुछ ऐसा hi लग रहा ह, तुम्हे भी ठण्ड का ज्यादा असर नहीं पड़ता,

ाव्य- हम मुंबई में रहते थे वह कभी इस बात का अहसास hi नहीं किया,

ह्रदय- लेकिन इन दोनों के शरीर अलग हैं ये दोनों यहाँ जैम जाएँगी हमे कोई सेफ जगह ढूंढ़नी पड़ेगी जल्दी hi,

ह्रदय ने दिया को अपनी बहो में भर लिया, दृष्टि बेचारी उसे आस भरी नजरो से देख रही थी, तभी ाव्य ने दृष्टि को बहो में भरा और आगे बढ़ने लगे,

इधर चंडीगढ़ में,

सोनिया और शाक्षी दोनों चेयर पैर बंधी हुई थी और उनके सामने अंजलि वर्षा कोमल और वन्य बैठी हुई थी,

सोनिया गुस्से में सबको देख रही थी,

वर्षा- तू कैसी औरत ह, तेरे अंदर अपनी औलाद के लिए भी कोई दया नहीं ह,

सोनिया- मेरी औलाद उन्हें तो तुम लोगो ने मिलकर मार दिया, तू मेरी कुछ नहीं लगती,

कोमल- वर्षा ये नहीं सुधरेगी, मैंने उसके साथ बहुत वक़्त बिताया ह, इसके अंदर सिर्फ नफरत और हवस भरी हुई ह, इस परिवार को बर्बाद करने के लिए ये कुछ भी क्र सकती ह, इसने अपनी बेटी अलका तक को नहीं बक्शा जिसने इस पैर भरोसा किया, इसने उसी भरोसे को तोड़ दिया,

अंजलि- भरोसा कैसा भरोसा

कोमल- अलका ने इस पैर विश्वास किया लेकिन इसने उसका विश्वास तोड़ दिया,

सोनिया- वो बेवकूफ थी, तुम लोगो ने भी तो उसकी बेवकूफी का फायदा उठाया था, मैंने भी उठा लिया, और उसकी मूरखता की वजह से तू आज तक तड़प रही ह अंजलि हहहहहह

अंजलि- क्या किया था इसने

कोमल- इसने तुषार रूचि और अलका को धोके से वह बुलवाया और कैद क्र लिया,

सोनिया- हैट रंडी तू पूरी तरह सच नहीं बता पायेगी तुझे कुछ नहीं पता, मैं बताती हु, वैसे भी अब ये कुछ नहीं क्र पायेगी, ज्यादा से ज्यादा मुझे मर सकती ह न, तो अब मुझे मोत का कोई दर नहीं ह, मैं बर्बाद हुई हु तो ये भी बर्बाद हो चुकी ह, तुषार बाबा की कैद में ह और अब इसने ह्रदय को भी भेज दिया ह, हहहहह

अंजलि- तू नहीं जानती वो ह्रदय क्या ह, शायद तूने उसे ठीक से नहीं समझा, अगर वो चाहे तो हठी की सुध पकड़ क्र उसे हवा में उदा सकता ह,

सोनिया- वो तो तुझे पता चल जायेगा उसके साथ क्या होगा, लेकिन तू ये सुन तेरे बेटे के साथ क्या हुआ था, और अब क्या हो रहा ह उसके साथ,

सोनिया ने बोलना शुरू किया,

जब तुम लोगो ने हमारा एनकाउंटर करवाने का प्लान बनाया तो मेरे एक खबरी ने जेल में hi मुझे खबर दे दी थी, फिर मैंने अपना जाल बिछाया और खुद को उस एनकाउंटर से बचा लिया, मेरे मन में आया था की मैं सुरेश को भी बचा लू, लेकिन अब उस भोसड़ी वाले में उतना दम नहीं रहा था, पैसा तो वैसे hi हाथ से चला गया था, तो जो करना था मुझे hi करना था इसलिए मैंने उसे नहीं बचाया,

मैं वह से निकल क्र जंगलो में छुपती छुपाती कश्मीर पहुंच गई, मैं वह एक आश्रम में जाकर रहने लगी, वो आश्रम था चिरंजीवी का, उस आश्रम का साधु मुझ पैर आकर्षित हो गया, वैसे भी मैं हु hi इतनी कमाल की की कोई भी मेरे लिए पागल हो जाता ह, मैंने भी जान बचने के लिए खुद को उसके निचे बिछा दिया,

जड़ली hi मुझे वह चिरंजीवी बाबा की जानकारी मिली और मैंने उनसे मिलने का विचार बनाया, और किस्मत से मेरी मुलाकात हो भी गई, और मैंने अपना जादू चला क्र चिरंजीवी के निचे तक पहुंच गई, लेकिन उसने मुझे ऐसा छोड़ा की मेरी छूट की धजिया उदा दी, लेकिन मजा भी बहुत दिया,

मेरे काम और चालाकी से बाबा बहुत खुश रहने लगा, फिर मैंने उन्हें तेरे और तुषार के बारे में बताया, तुषार की ताकत के बारे में सुनकर उसकी जिज्ञासा बढ़ गई, और उसने मेरी मदद करने का फैसला किया, फिर मैंने शाक्षी से मिलना जुलना शुरू किया और इधर बाबा की मदद से उन लोगो को मारवा दिया जिन्होंने मेरी जेल से भागने में मदद की थी,

वो जिन्दा रहते तो मेरे खिलाफ कुछ बोल देते, और ये शाक्षी अपनी उस चैनल माँ के लिए सदमे में थी इसे अपने काबू में करना बड़ा आसान था, और मैंने इसका भोग चिरंजीवी को लगाया, ये साली तुषार से छोड़ना चाहती थी, लेकिन बाबा ने इसे ऐसा छोड़ा की ये आज तक खुद को छोड़ने से नहीं रोक प् रही ह, बाबा ने इसकी छूट में ऐसा जादू क्र दिया किया इसे हर टाइम लुंड छाइये,

फिर बाबा ने तुषार को उसके पास लेन का प्लान बनाया और रंगा के परिवार को उठवा लिया, मैं हमेशा अंडरवर्ल्ड को ताकतवर समझती थी लेकिन चिरंजीवी के सामने सब बच्चे थे, वो जो चाहे कर सकता था लेकिन फिर भी शांत रहता था,

तुषार के पास रंगा ने मजबूर होकर फ़ोन किया और एक पार्टी का बहाना बना क्र बुलाया, दिल्ली के बहार जंगलो में एक फार्महाउस पैर, जहा अक्सर अंडरवर्ल्ड की पार्टी होती हैं, तुषार को रंगा पैर विश्वास था वो चला आया और सोने पैर सुहागा वो अलका और रूचि को भी ले आया,

वह सब कुछ हमारे हिसाब से था, बड़े बड़े नेता मंत्री बिज़नेस में गुंडे डॉन मौजूद थे, बाबा के भी अपने आदमी वह लगे हुए थे,

तुषार पार्टी में तो आ गया लेकिन जल्दी hi उसे समझ आ गया की वो गलत जगह आ पंहुचा ह, तेरा बीटा ह न चालक तो होना hi था उसे, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी, रूचि प्रेग्नेंट थी लेकिन अलका वो तो माँ बनकर और भी खूबसूरत बन गई थी, तभी दो आदमियों ने अलका और रूचि के सर पैर बन्दूक तान दी, और तुषार को पकड़ लिया, आज वो शेर कब्जे में आया था,

रूचि को उन्होंने चेयर पैर बांध दिया, और अलका को चारो तरफ से घेर लिया मेरे इशारे पैर, मैं उसी पार्टी में छुपी हुई थी,

मैं अलका को सबक सीखना चाहती थी, और मेरे hi इशारे पैर वह खड़े 65 लोग अलका को नोच क्र खाने वाले थे वो भी उस तुषार के सामने, और जैसे hi वह खड़े मंत्री ने अलका की साड़ी पकड़ क्र खींची तभी न जाने तुषार में कोनसी सी आत्मा आ गई और उसने कुर्सी पैर बैठे बैठे hi उछाल क्र खुद को गिरा लिया जिससे वो कुर्सी टूट गई, और वो आजाद हो गया,

वह खड़े गुंडों ने उसकी तरफ बन्दूक तानी लेकिन उसके अंदर तो अजीब hi ताकत आ गई थी मैंने उसे पहले कभी इतनी ताकत में नहीं देखा, उसका एक मुक्का सामने आये गुंडे के मुँह पैर लगा और उसका जबड़ा एक साइड से टूट क्र बहार आ गया, जैसे सामने वाला गुंडा माँ का बना हो, सब एक दम दर गए, तुषार रुका नहीं वो बिना सोचे समझे मरने लगा, जो भी सामने आ रहा था, दूसरे वॉर के लिए जिन्दा नहीं बच रहा था, तभी वह शो के लिए तंगी दीवार तुषार के हाथ में आ गई और उसने ऐसी तलवार चलाई की सामने आये 65 आदमियों को चिर क्र रख दिया, कोई जिन्दा नहीं बचा,

तुषार दौड़ क्र अलका के पास गया वो खून में पूरा भीगा हुआ था, अलका उससे लिपट गई, वो जैसे hi रूचि को खोलने गए, तभी वह चिरंजीवी के आदमी आ गए, और तुषार पैर हुम्ला कर दिया, वो दो आदमी hi इतने ताकतवर थे जिनका मुकाबला मुझे नहीं लगता कोई कर सकता ह, तुषार उनसे लड़ा लेकिन वो जीत नहीं प् रहा था, तुषार उनसे लड़ने में वयश्त था तुषार ने अलका को कह ाकि रूचि को लेकर यहाँ से निकल जाये, अलका ने रूचि को उठाया और चल दी, तब मैं वह आई और अलका से मिली,

और वो बेवकूफ लड़की मेरे सामने तुषार को बचने की गुहार लगाने लगी, मैंने उसे अस्वासन दिया की मैं तुषार को बचा लुंगी, तुम मेरे साथ चलो जल्दी, मैंने उसे रूचि को बचने का आश्वासन दिया और वो मान गई, और मेरे साथ रूचि को उठा क्र ले चली, रूचि उसे समझती रही लेकिन मैंने उसे ऐसा प्यार दिखाया की वो समझ hi नहीं पाई और मैंने उसे बहार गाड़ी में लेजाकर बंद क्र दिया, तुषार ने मुझे उसे ले जाते देख लिया था,

वो उन आदमियों को झांसा देकर मेरी तरफ आया और तभी सामने आ गए चिरंजीवी बाबा उन्होंने एक hi मुक्का मारा तुषार को और तुषार बेहोश हो गया, तेरा बीटा बाबा के एक hi मुक्के में बेहोश गया हाहाहाहाहा,

फिर हम उसे उठा क्र ले गए बाबा के अड्डे पैर, जहा उसे बांध दिया गया, अलका मुझसे गुहार लगा रही थी तुषार को छोड़ने के लिए, मैंने उसे सबको बचने का ऐसा झांसा दिया की वो सब कुछ करने को तैयार थी, और फिर रूचि की औलाद पैदा हुई, जिसे अलका ने मेरे हाथो में दे दिया ये सोच क्र की अब मैं तुषार को निकलवा दूंगी, लेकिन वो पागल मुझे कभी समझ hi नहीं पाई, फिर हमने उसे कैद क्र लिया,

मैंने बाबा को कहा की अलका का भोग लगा ले, लेकिन उसने मन क्र दिया ये मुझे आज तक समझ नहीं आया की उसने मन क्यों क्र दिया, इसी बिच तुम लोग तुषार को ढूंढ़ने निकले, हमारा पता लगाना नामुमकिन था लेकिन न जाने ये कोमल कैसे पहुंच गई मुझ तक, शायद मेरे जैसी क्रिमिनल ह न इसीलिए मुझ तक पहुंच गई, लेकिन मेरे चंगुल से बच नहीं पाई, इसे पता चल गया की दृष्टि रूचि की बेटी ह, ये मूरख उसकी सेवा करने के चक्कर में मुझसे दूर hi नहीं गई,

फिर बाबा ने तुषार पैर पर्योग करने शुरू किये, दृष्टि को माँ के दूध की जरुरत थी तो इस कोमल ने उसे दूध पिलाया, बाबा ने मन कर दिया था रूचि का दूध पिलाने से,

बाबा तुषार और रूचि पैर एक्सपेरिमेंट करने लगा, वैसे उसने मुझे कभी उन एक्सपेरिमेंट्स के बारे में जानकरी लगने नहीं दी, फिर कुछ दिन बाद उसने मुझे एक आदमी दिया जिसका नाम था धामा, क्या ताकत थी उसमे, ऐसा लगा जैसे तुषार फिर सामने आ गया हो,

और कसम से जब वो छोड़ता था तो लगता था जैसे तुषार hi छोड़ रहा हो, क्यों शाक्षी ऐसा hi लगता था न, बाबा ने दृष्टि को मुझे सौंपा और कहा, जब वो बड़ी हो जाये तो बाबा उसका भोग लगयेन्गे, और आज मैं उसे उनके पास ले जा रही थी, लेकिन तूने मेरा रास्ता रोक लिया,

लेकिन इससे तू ज्यादा खुश मत हो जाना, बाबा उसे कही से भी ढूंढ लेंगे, वो उसका भोग खुद लगाएंगे, वो उनकी अमानत ह, और जल्दी hi बाबा तुम सबका अंत कर्नेगे, उनकी ताकत के सामने सब बेकार ह, वो इंसान नहीं ह हवन ह,

अंजलि ने सोनिया की गार्डन पकड़ ली, मैं तुझे जान से मार दूंगी हराम जड़ी, तू नागिन ह, अरे नागिन अपनी बच्चियों को तो बकश देती,

सोनिया- हहहहह मैंने तेरे पुरे परिवार को तबाह कर दिया, लेकिन मुझे बड़ी हरमजादि तो तू ह, तूने अपनी बेटियों को किस्से छुड़वाया, किस किस के बच्चे पल रही ह, जैसे पहले न जाने किस किस से चुद क्र तूने 6 बच्चे इकठा कर लिए थे, अब ये सब किस किस के बच्चे हैं, कहा से ले आई इतनी साडी लड़किया, और सबके बाप में तुषार का नाम

अंजलि- ये सब तुषार की बेतिया हैं, और तू क्या मेरा परिवार उजाड़ेगी, तूने hi मेरे अंदर वो सब भरा था, परिवार में चुदाई करना तूने hi सिखाया था मुझे, मेरे hi बाप से छुड़वाया था तूने मुझे, लेकिन तू शायद अपने जीवन की सबसे बड़ी गलती कर गई थी जो मुझे ये सब सीखा गई, जाना चाहती ह मैंने क्या क्या किया,

सोनिया अंजलि को देखने लगी,

अंजलि- ये लड़की ये ह वर्षा और तुषार की बेटी, और है कोमल और नंदनी की बेतिया भी हैं जो की तुषार से hi पैदा हुई हैं, और है दीपा और सीमा से भी बेतिया हैं वो भी तुषार से hi पैदा हुई हैं, और अनीता और रिंकी उन्हें तो तू जानती hi होगी, उनकी भी बेतिया हैं जिनका बाप तुषार ह, अलका की बेटी भी ह जिसका बाप तुषार ह, और रूचि की बेटी दृष्टि जो अब सही सलामत ह्रदय के साथ ह, उसका बाप भी तुषार ह, और ह्रदय वो भी तुषार का बीटा ह,

सोनिया- तू बहुत बड़ी रंडी ह, अपनी hi बेटियों को अपने बेटे से छुड़वा रही थी, और औलादे पैदा करवा रही थी,

अंजलि- जब तू सुनेगी ह्रदय की माँ कोण ह तो शायद तेरी फैट न जाये,

सोनिया- हँ

अंजलि- वो मैं हु, है मैं हु ह्रदय की माँ, ह्रदय मेरे और तुषार की चुदाई से पैदा हुआ ह, तूने मुझे मेरे बाप से छोड़ना सिखाया और मैं अपने hi बेटे से चुद गई, ये सब तेरी वजह से हुआ,

अंजलि की बाते सुन क्र सोनिया शाक्षी और कोमल शॉकेड थी,

कोमल को भी यकीन नहीं हो रहा था ये सच ह, वर्षा ने कोमल के कंधे पैर हाथ रखा और उसे है में इशारा किया,

सोनिया- ची ची ची कुटिया अपने बेटे को तो बकश देती,

अंजलि- मैंने तो अपने बेटे के साथ बस शादी की लेकिन तूने तो अपने hi बेटो को मरवा दिया, अपनी बेटियों को हैवानो के सामने भेज दिया जो उसे नोच कहते, और बाप से बेटियों को छुड़वाने का बंदोबस्त करती रही,

सोनिया- नहीं बचेगी तू न hi तेरा ये परिवार बाबा सबको ख़तम कर देगा,

अंजलि- तू और तेरे बाबा की गांड में पेट्रोल दाल क्र इतना दौड़ाउंगी की पृथ्वी का पूरा चक्कर लगाकर भी नहीं रुकोगे, एक बार बस मेरा बीटा और बेतिया वापस आ जाये फिर देखना तू,

तभी बहार एक धमाका हुआ, जिसमे घर का मैं दूर को उदय गया था,

सोनिया- हाहाहाःहाहा देख तेरी गांड मरने आ रहे हैं

अंजलि- देखती हु मरने आ रहे हैं या मरवाने आ रहे हैं,

उधर कश्मीर में ह्रदय तीनो लड़कियों को लेकर एक गुफा में घुसा हुआ था, दिया की हालत बिगड़ती जा रही थी,

ाव्य और दृष्टि दिया को बहो में भर क्र बैठी हुई हटी,

ह्रदय गुफा के बहार खड़ा खोजने की कोशिश क्र रहा था, लेकिन अँधेरा काफी था, चाँद की रौशनी काफी नहीं थी, बर्फ गिर रही थी, तो देखना मुश्किल हो रहा था,

ह्रदय वापस अंदर आया,

ह्रदय- कुछ पता नहीं चल रहा,

ाव्य- पहले दिया को बचाओ इसकी हालत ख़राब ह,

दृष्टि- लेकिन हम कर भी क्या सकते हैं,

ाव्य- ह्रदय कर सकते हैं,

ह्रदय और दृष्टि ाव्य को देखने लगे,

ाव्य- ऐसे क्या देख रहे हो, कपडे उतरो और इससे आकर चिपक जाओ,

ह्रदय- यहाँ पैर

ाव्य- अब इसके लिए कोई जगह बनाना पड़ेगी क्या, जल्दी करो

दृष्टि- लेकिन ह्रदय को ठण्ड लग जाएगी,

ाव्य- नहीं लगेगी,

ह्रदय ने अपनी टीशर्ट उतरी और दिया के पास लेट गया,

ाव्य- दृष्टि तुम भी ह्रदय से चिपक जाओ, इनके बदन कीगर्मी से तुम्हे रहत मिलेगी,

दृष्टि ाव्य की तरफ देखने लगी,

ाव्य- शर्माओ नहीं, जिन्दा रहना सबसे जरुरी होता ह जीवन में, और ह्रदय जैसे इंसान के साथ होना अपने आप में सम्मान की बात ह,

ह्रदय को बड़ा गर्व सा महसूस हुआ ाव्य के मुँह से ये सब सुन्ना,

दृष्टि चिपक गई और ह्रदय के नंगे बदन से लगते hi दृष्टि के अंदर रोमांच भरने लगा, इधर दिया की सांसे भी गरम सी होने लगी थी, ाव्य दूर बैठी हुई देख रही थी,

कुछ देर तो दिया को रहत मिली लकिन ठण्ड बहुत ज्यादा थी, इधर दृष्टि की भी हालत ख़राब होने लगी,

ाव्य- ह्रदय अपने पुरे कपडे उतरो और अपने बदन की पूरी गर्मी इनके अंदर दो,

ह्रदय- यहाँ पैर ?

ाव्य- जैसा बोल रही हु करो वर्ण से सुबह तक नहीं झेल पाएंगी, अभी दिन निकलने में 3 घंटे हैं, और जब तक सूरज नहीं निकलता गर्माहट नहीं आएगी, इन 3 घंटे तक तुम्हे hi इन्हे गर्मी देनी होगी,

ाव्य की बात सुनकर दिया तुरंत ह्रदय की जीन्स खोलने लगी, जिसे दकह दृष्टि चौंक गई,

दृष्टि- ये क्या बोल रही हो ये कैसे हो सकता ह, ये तो भाई बहन लगते हैं न,

ाव्य- तुम ज्यादा मत सोचो, फ़िलहाल अपनी जान बचाओ, और पाने कपडे उतर क्र चिपक जाओ ह्रदय से,

दृष्टि- मैं मैं कैसे, ये नहीं नहीं

ाव्य- यार ये वक़्त मैं मैं करने का नहीं ह, हम ीक युद्ध लड़ना ह, और इस युद्ध में ह्रदय को हम सब की जरुरत ह, उसके लिए तुम लोगो को जिन्दा रहना होगा, इसलिए मेरी बात मनो, एक तो हम वैसे hi गलती क्र चुके हैं, इतनी ठण्ड में यहाँ आये लेकिन धनाग के गरम कपडे नहीं लाये,

ह्रदय- ये मेरी गलती ह, मुझे ठण्ड नहीं लगती, और मैंने इस बात का ख्याल hi नहीं रखा की लड़कियों को तो ठण्ड लग सकती ह,

ाव्य- ये हम सबकी गलती ह, लेकिन अब एक गलती के लिए अपनी जान तो नहीं दे सकते न,

ाव्य इन्हे समझा रही थी तब तक दिया ने ह्रदय को पूरा नंगा कर दिया था और खुद भी पूरी नंगी हो गई और ह्रदय से चिपक गई, अपनी नंगी जांघ ह्रदय की नंगी जंग पैर रख दी, जिससे ह्रदय का लुंड सीधे दिया की छूट के मुँह पैर ठोकर मर रहा था,

दिया की नंगी जांघ देख क्र दृष्टि के दिल में बेचैनी होने लगी थी, उसे दिल में भूचाल सा आया हुआ था, उसके हाथ कैंप रहे थे, उसने जो अब तक ह्रदय को बहो में भरा हुआ था वो ढीले पड़ने लगे थे,

ह्रदय को ये महसूस हो रहा था लेकिन वो कुछ नहीं कर सकता था, इस वक़्त दृष्टि को कुछ भी समझा पाना आसान नहीं था,

ाव्य भी दृष्टि को देख रही थी,

ाव्य- दृष्टि यहाँ जो हो रहा ह शायद तुम्हे गलत लगे लेकिन हमारे लिए ये गलत नहीं ह, इस वक़्त तुम लोगो की जान बचाना ज्यादा जरुरी ह, अपने मन से सब निकल दो और अपनी लड़ाई के लिए जिन्दा रहो,

दृष्टि का दिमाग सुन पड़ने लगा तहत हैंड की वजह से, उसके दिल और दिमाग में बहुत कुछ चल रहा था लेकिन शरीर उसे कुछ सोचने hi नहीं दे रहा था, ाव्य ने आगे बढ़ क्र दृष्टि के कपड़े उतर दिए और ह्रदय से चिपका दिया, दृष्टि के पास भी कोई ऑप्शन नहीं था, इस वक़्त जान ज्यादा जरुरी थी,

दिया और दृष्टि तो ठण्ड से अकड़ रही थी लेकिन ह्रदय उसके अंदर तो दोनों लड़कियों के नंगे बदन चिपकने से उसके बदन की गर्मी बढ़ने लगी थी, लुंड खड़ा होने लगा था जो दिया की छूट पैर दस्तक दे रहा था, ह्रदय की गर्मी से दोनों लकड़ियों की गर्मी भी बढ़ रही थी,

काफी देर सब शांत रहे लेकिन दिया को जैसे hi गर्माहट मिली उसके अंदर सेक्स की लहार दौड़ने लगी, उसकी नंगी चूचिया ह्रदय की चेस्ट पैर रगड़ रही थी, और छूट पैर लुंड रगड़ रहा था, दिया के अंदर गर्मी बढ़ने लगी थी, दिया ह्रदय से और चिपक रही थी, और उसके हाथ ह्रदय के बालो में घूमने लगे थे, दिया ने अपनी कमर को हिलाया जिससे ह्रदय का लुंड दिया की छूट की दीवारों को हल्का सा खोल क्र उसके भनसा पैर रगड़ गया,

दिया ने जोश में ह्रदय को कास क्र पकड़ लिया जिससे उसके हाथ ह्रदय की कमर पैर चिपकी दृष्टि की चूचियों को रगड़ गए, इससे दृष्टि एक अंदर भी एक लहार सी दौड़ गई, वो तो वैसे hi गरम होती जार hi थी लेकिन दिया कीउंगलियो की रगड़ ने वो गर्माहट और बढ़ा दी,

दिया ने ह्रदय की आँखों में देखा और अपने हॉट उसके होतो से जोड़ दिए, दृष्टि को कुछ दिख तो नहीं रहा था लेकिन उसे अहसास हो गया था आगे क्या हो रहा ह, वही ाव्य दूसरी तरफ मुँह फेर क्र बैठ गई उसे ठण्ड लग रही थी लेकिन दिया और दृष्टि से काम,

दिया ने अपने हॉट अलग किये और ह्रदय को आँखों hi आँखों में इशारा करके समझा दिया की वो तैयार ह, ह्रदय थोड़ा झिजक रहा था क्योकि वह दृष्टि भी उसके पीछे चिपकी हुई थी,

लेकिन उसे याद आया की इस युद्ध से पहले सभी लकड़ियों का कौमार्य भांग हो जाना छाइये, शायद ये सही समय ह दिया के साथ करने का, शायद इसके बाद समय मिले या न मिले, हम दुश्मन के इलाके में हैं,

ह्रदय ने दिया की कमर में हाथ डाला और उसे कास क्र अपने से चिपका लिया, लुंड का दबाव और बढ़ गया छूट पैर, फिर ह्रदय का हाथ दिया की मखमली गांड पैर गया, दिया की स्किन एक दम ठंडी थी, ह्रदय ने कास क्र दिया की गांड को अपनी मुठी में कास लिया, दिया के मुँह से आआअह्ह्ह्हह निकल गई, दृष्टि बस कान लगाए सुन रही थी, उसके बदन में सिरहन सी दौड़ रही थी,

ह्रदय अच्छे से दिया की गांड को मसल रहा था, दिया अपनी कमा रको हिला रही थी जिससे लुंड का टोपा दिया की छूट पैर रगड़ रहा था, दिया की छूट ने जल्दी hi आंसू बहाने शुरू क्र दिए थे, उसके बदन में गर्मी सी दौड़ने लगी थी, आँखों में नशा सा टेरने लगा था, दिया अपनी कमर को तेजी से चलने जार hi थी, लुंड की रगड़ से उसे इतना मजा आ रहा था की 10 मिनट्स में hi उसकी छूट ने फवारा छोड़ना शुरू क्र दिया था,

दिया आहे भरने लगी थी और तेज तेज कमा रहिलान ेलगी थी, अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्हह हम्मम्मम्मम्म hhmmmmmmmmmmm उउउउउउम्म्मह्हह्ह्ह्ह,

दृष्टि समझ रही थी ये क्या हो रहा ह, उसकी आँखों में आंसू आ गए थे, लेकिन हालत को समझते शांत लेती रही,

इधर ह्रदय ने लोहा गरम देख क्र अपना हतोड़ा घुसा दिया, मतलब दिया की छूट की गरमी को समझते हुए अपना लुंड का दबाव बढ़ा दिया, और छूट की चिकनाहट की वजह से ह्रदय के लुंड का टोपा दिया की छूट को फाड़ता हुआ अंदर घुस गया,

Ahhhhhhhhhhhhhh माआआआ ahhhhhhhhhhhh मर गई,

दिया की दर्द भरी चीख निकल गई जिसकी आवाज से ाव्य भी चौंक गई, उसका धयान दिया की तरफ गया और नजरे सीधे दिया की टैंगो के बिच गई, जहा उसे दिया की छोटी सी छूट में ह्रदय का मोटा लुंड फसा हुआ दिखा, लुंड का आकर देख क्र ाव्य का मुँह खुला रह गया, दिया की छूट किसी रबड़ की तरह ह्रदय के लुंड पैर फांसी हुई थी, लुंड का साइज देख क्र ाव्य की आँख एफटी रह गई,

वही दृष्टि के कानो में जब दिया की दर्द बहरी चीख पड़ी तो वोट क पल के लिए सहम गई, लेकिन अगले hi पल उसे अहसास हुआ की ह्रदय और दिया के बिच क्या हुआ ह इससे दृष्टि के शरीर में सनसनी सी फ़ैल गई,

तभी दिया का हाथ दृष्टि की चूचियों पैर पहुंच गया और दर्द में भरी हुई दिया ने दृष्टि की चुकी को मुठी में भर क्र जोर से भींच लिया, इससे दृष्टि की भी चीख निकल गई,

सबका धयान दृष्टि की चीख पैर गया, तो दिया ने हाथ हैट अलिअ और दिया जैसे hi हिली उसी चक्कर में ह्रदय के लुंड का दबाव बन गया और लुंड एक इंच अंदर घुस गया, दिया का मुँह खुला रह गया, उसकी चीख भी वही दबी रह गई,

ह्रदय ने जल्दी से दिया कैग एंड को सहलाना शुरू किया और अपनी उबगलिया निचे लेजाकर दिया की छूट को सहलाना शुरू क्र दिया, और अपने होतो उसके होतो से जोड़ दिए,

अगले 10 मिनट्स तक सब शांत सा रहा, जब ह्रदय को महसूस हुआ की दिया शांत होने लगी ह तो उसने हलकी सी कमर हिलनी शुरू क्र दी, वो इतने हलके से कमर हिला रहा था की लुंड छूट के बहार न आये बस अंदर hi हिलता हुआ महसूस हो, दिया को दर्द तो हो रहा था लेकिन मजा भी बहुत आने लगा था, वही दृष्टि का नंगा पेट ह्रदय की हिलती हुई गांड से टकरा रहा था, इससे दृष्टि का रोमांच बढ़ता जा रहा था,

ह्रदय अगले 40 मिनट्स तक इसी पोजीशन में दिया की छूट में हलके हलके धक्के लगता रहा, इस बिच दिया 2 बार झाड़ गई, एक बार तो वो पहले hi झाड़ चुकी थी केवल लुंड की रगड़ से,

इसी चुदाई में लुंड कब दिया की छूट में आधे से ज्यादा घुस चुक्का था, ठण्ड और चुदाई के मजे में दिया की छूटे क दम सुन हो चुकी थी, उसे अब उतना दर्द नहीं हो रहा था, अब दिया फिर से झड़ने लगी थी,



Ahahhhhhhhhhh ahhhhhhhhhhhh ahhhhhhhhhhhhhh करते रहे ऐसे hi करते रो, मैं कब से प्यासी थी इसके लिए, आज मैं तृप्त हो गई हु, ahhhhhhhhhhhhhhhhh करते रो, बहुत मजा आ रहा ह, मैं आपको प् क्र धन्य हो गई, मेरा सौभाग्य ह मैं आपकी पत्नी बानी,
 
अपडेट- 42




दिया तो बड़बड़ाती हुई झाड़ क्र शांत हो गई थी, लेकिन ह्रदय अब तक नहीं झाड़ा था, दिया की सिसकारियों ने दृष्टि को इतना गरम कर दिया था की उसका पेअर कब ह्रदय की कमर पैर पहुंच चुक्का था उसे अहसास hi नहीं हुआ, वो खुद अपनी कमर को आगे करके अपनी छूट को ह्रदय को गांड पैर रगड़ रही थी, और जब दिया जेहड़ी तो दृष्टि की छूट से भी पानी निकल गया, लेकिन इससे उसकी आग और भड़क चुकी थी,

दिया के शांत होने पैर ह्रदय ने उसे तकलीफ देना सही नहीं समझा और लुंड को बहार निकल लिया, लुंड के बहार आते hi छूट से खून बहार भेने लगा,

ाव्य कुछ देर तक उनकी चुदाई देखती रही लेकिन फिर वो मुँह फेर क्र बैठ गई थी, इधर ह्रदय ने दिया के उप्पेर कपडा धक् दिया क्योकि वो बेसुध सी होकर लेट गई थी, उसमे हिलने की भी ताकत नहीं थी,

जब ह्रदय दिया को छोड़ रहा था तो दृष्टि की हरतो को अच्छी से महसूस क्र रहा था, इसलिए उसने दृष्टि की तरफ मुँह किया, और दृष्टि को खुद से चिपका लिया, और दृष्टि को अपने निचे लिटा क्र उसके उप्पेर आ गया, और अपने हॉट दृष्टि के होतो से मिला दिए, और बिना कुछ कहे अपना लुंड दृष्टि की छूट पैर लगाया और अंदर धकेल दिया,

पहले hi धक्के में लुंड दृष्टि की छूट को चीरता हुआ अंदर घुस गया, दृष्टि के हॉट ह्रदय के होतो में कैद थे जिससे उसकी चीख वही घुट क्र रह गई, लेकिन उसकी आँखे जरूर फैट गई थी, ह्रदय ने दृष्टि को कोई मौका नहीं दिया था, और एक हाथ दृष्टि की चुकी पैर लेजाकर उसे मसलने लगा, ह्रदय कुछ उतावला सा हो रहा था,

दृष्टि के मुँह से चीख तो निकली थी लेकिन उतनी नहीं जितनी दिया या बाकि लड़कियों की निकली थी, ह्रदय को अहसास हुआ की दृष्टि को बहुत ज्यादा दर्द नहीं हुआ ह,

उसने हल्का सा लुंड बहार खींचा और फिर से धकेल दिया और लुंड और घेरे में उतर गया, ह्रदय ने हलके हलके धक्के लगाने शुरू क्र दिए, दृष्टि ने ह्रदय के दोनों कंधो को कास क्र पकड़ा हुआ था, उसके नाखून ह्रदय के कंधो में घुस रहे थे,

आज से पहले ह्रदय के अंदर ऐसा जोश नहीं आया था, उसने कुछ hi झटको में आधा लुंड दृष्टि की छूट में घुसा दिया था, दृष्टि की आँखे फैलती जा रही थी, लेकिन वो दर्द को बर्दास्त क्र रही थी, ह्रदय ने कमर को हिलना शुरू क्र दिया, दृष्टि की आँखे बंद क्र ली थी, ह्रदय ने उसके होतो से अपने हॉट अलग किये, और दृष्टि के फेस को देखने लगा, दृष्टि ने आँखे नहीं खोली, उसकी फेस पैर दर्द साफ़ दिख रहा था, लेकिन वो बर्दास्त कर जा रही थी,

ह्रदय को थोड़ा सरप्राइज हुआ की ये कैसे हो सकता ह, दृष्टि पहेली बार में hi इतने बड़े लुंड को सहन क्र जा रही थी, ह्रदय का जोश बढ़ने लगा था, उसने धक्के थोड़े तेज क्र दिए थे, और लुंड को अंदर घुसाने लगा था, और कुछ hi देर में लुंड पूरा दृष्टि की छूट की घेरे में उतर चुक्का था,

जब लास्ट धक्के में लुंड दृष्टि की बच्चेदानी से टकराया तब जाकर दृष्टि की एक चीख निकली, उसकी चीख से ाव्य का धयान उसकी तरफ गया, और उसने देखा ह्रदय का पूरा लुंड दृष्टि की छूट में घुसा हुआ ह, और ह्रदय हलके हलके धक्के लगा रहा ह, और दृष्टि आँखे बंद किये बस आह्ह्ह्हह्ह ahhhhhhhhhhh किये जा रही ह,

ह्रदय को 30 मिनट्स से ज्यादा हो गए थे दृष्टि को छोड़ते हुए, लेकिन न दृष्टि झड़ी थी न hi ह्रदय, ह्रदय बड़ा शॉकेड था इतनी देर चुदाई करने के बाद भी दृष्टि नहीं झड़ी ह, ह्रदय ने रफ़्तार बढ़ा दी, दृष्टि की आँखों से आंसू बह रहे थे लेकिन उसके मुँह से कोई दर्द भरी आवाजे नहीं आ रही थी,


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चुदाई को बहुत समय हो चुक्का था, ह्रदय खुद को जितना रोक सकता था रोक चुक्का था अब उसके बदन में गर्मी से भूचाल आया हुआ था, ह्रदय के धक्के तेज होते जा रहे थे, उसने धक्क्के लगते लगते दृष्टि के कानो में बस एक बात कही

ह्रदय- दृष्टि ी लव यू, मैं तुम्हे बहुत प्यार करता हु, मेरे रोम रोम में तुम hi समय हुई हो,

बस ये शब्द दृष्टि के कानो में पड़े और उसके हाथ ह्रदय की कमर पैर कास गए, और दृष्टि की छूट ने फवारा छोड़ दिया, वो अपनी कमर को निचे से उछलने लगी, और सिसकारियां भरने लगी,

अह्ह्ह्हह्हह अह्हह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ahhhhhhhhhhhhhhhh ahhhhhhhhhhhhhhhha hhhhhhhhhh

दृष्टि के झड़ते hi ह्रदय के लुंड ने भी आग उगलनी शुरू क्र दी, और ह्रदय का लुंड लगातार अपना रास दृष्टि की छूट की घेरे में उतरता चला गया, जैसे hi लुंड खली हुआ ह्रदय दृष्टि के उप्पेर चित हो गया, आज पहेली बार था जब ह्रदय को कोई टक्कर देने वाला मिला था,

कुछ पल बस वह शांति थी और बस दोनों की सांसो की आवाज आ रही थी, दोनों पसीने से लथपथ थे, ाव्य दूर बैठी सब देख रही थी, ाव्य के बदन में प्यार का खुमार भर चुक्का था, लेकिन पता नहीं वो किस मिटटी की बानी थी, दो दो लड़कियों की चुदाई देख क्र भी वो इतनी शांत बैठी थी,

कुछ देर के सनते के बाद किसी के सुबकने की आवाज आई, आवाज को देखा तो वो दृष्टि थी, ह्रदय ने चेरा उप्पेर करके दृष्टि को देखा तो उसकी आँखों से आंसू बह रहे थे, और वो लगातार रोये जा रही थी, ह्रदय घबरा गया, वो जल्दी से उठा तो उसका लुंड दृष्टि की छूट से पुक की आवाज के साथ बहार आ गया,

ह्रदय दृष्टि के सर के पास पंहुचा,

ह्रदय- दृष्टि क्या हुआ क्या हुआ, तुम ठीक हो न

दृष्टि बस रोये जा रही थी, उसका रोना और तेज हो गया, ाव्य भी घबरा गई वो भी दृष्टि के पास पहुंची,

ह्रदय ने दृष्टि को उठाने की कोशिश की लेकिन दृष्टि ने उसे धक्का दे दिया और चिल्ला कर बोली- दूर रहो मुझसे,

दृष्टि का ये रूप देख क्र ह्रदय बुरी तरह चौंक गया, ाव्य के चेरे पैर एक दर्द उभर आया और उसकी आँखे बंद हो गई, वही दृष्टि के जोर से चिल्लाने से दिया भी उठ गई,

ाव्य- दृष्टि शांत हो जाओ, सब ठीक ह

दृष्टि- सब ठीक ह, तुम कैसी लड़की हो, तुम्हारे सामने इसने मेरी इज्जत लूट ली, और तुम बोल रही हो सब ठीक ह,

दिया- ये क्या बकवास कर रही हो तुम

दृष्टि- तुम चुप रो तुम्हे देख क्र नहीं लगता था तुम इतनी गिरी हुई होगी, मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था ह्रदय मेरे साथ ऐसा करेगा,

ाव्य- तुम इसमें बराबर की हिस्से दर हो,

दृष्टि- मैं ठण्ड से कैंप रही थी और इसने मेरा फायदा उठा लिया,

दिया- तुम जानती भी हो क्या बकवास कर रही हो और किसके बारे में कर रही हो,

दृष्टि- इसमें और उस बाबा में क्या अंतर रह गया ह, और तुम तुम तो रंडी से भी बुरी हो, ह्रदय तुम्हारा भाई लगता ह फिर भी उसके साथ तुमने ये सब कर लिया, और तुम ाव्य तुम सामने बैठ क्र इस लाइव पोर्न मूवीज का आनंद ले रही थी, ची ची ची तुम सबसे तो वो सोनिया hi भीतर ह,

ाव्य- तुम बहुत बोल चुकी हो दृष्टि खामोश हो जाओ,

दृष्टि- मैंने क्या सपने सजाये थे की मेरा पति होगा उसके साथ जीवन के पालो को जियूँगी, लेकिन आज

ह्रदय बौखलाया सा उसे देख रहा था, आज पहेली बार उसकी आँखों में एक दर्द था, पश्चाताप था,

ाव्य ने ह्रदय को देखा वो तुरंत उसके करीब पहुंची और उसे बहो में भर लिया,

ाव्य- नहीं नहीं नहीं आप कमजोर नहीं पद सकते, आपकी गलती नहीं ह, आपने कुछ गलत नहीं किया,

ह्रदय की आँखों में आंसू आ गए, और जब ह्रदय के आंसू की बून्द ाव्य के कंधे पैर गिरी तो ाव्य की आँखों में गुस्से का लावा फुट पड़ा, उसने ह्रदय के चेरा अपने सामने किया और ह्रदय के आंसू अपने हाथ से पोंछे,

उसके बाद वो दृष्टि की तरफ पलटी, ाव्य के चेरे पैर गुस्सा और आँखों में आग देख क्र दृष्टि एक पल के लिए सहम गई,

ाव्य- तेरी इतनी हिम्मत तूने मेरे ह्रदय की आँखों में आंसू दिए, तू जानती hi क्या ह इनके बारे में, इन्होने तुझे ठण्ड से बचने के लिए अपना सहारा दिया था, और तूने क्या किया अपनी छूट रगड़ने लगी इनसे, वो दिया के साथ क्या कर रहे थे ये उन दोनों का पर्सनल था लेकिन तू खुद अपनी छूट लेकर आई इनके नजदीक, तेरे अंदर आग नहीं भड़की थी क्या,

दृष्टि- मैं कुछ पालो के लिए बहक गई थी,

ाव्य- तेरे उसी बहकने ने इन्हे बताया की तू इनसे प्यार करती ह, और तुझे भी प्यार की जरुरत ह, वैसे प्यार तो तू करती hi ह इनसे, लेकिन शायद तुझे लगा ये सिर्फ तेरे होंगे, तुझे तकलीफ इस बात की ह न की इन्होने दिया के साथ किया, तू इन पैर बस अपना अधिकार चाहती थी न, इसलिए तुझे गुस्सा आ गया, जब इनका लुंड तेरी छूट में घुसा तो मजे ले रही थी, लेकिन तुझे अहसास हुआ की ये सब कैसे हुआ तो तुझे अपनी ईजत याद आ गई,

दृष्टि- चुप हो जाओ तुम, इसके अंदर हवस भरी थी, वो सब हवस में किया, मेरा रूप देख क्र ये खुद को रोक नहीं पाया,

ाव्य- तू समझती क्या ह आपने आप को, तू सूंदर ह ये सब जानते हैं लेकिन सिर्फ तू hi सूंदर ह इस बात का घमंड मत कर, तेरे सामने जिस लड़की ने अभी इनके निचे खुद को बिछाया ह वो तुझे से किसी भी पैमाने में काम नहीं ह, और सिर्फ दिया hi नहीं तेरी जैसी 9 लकडिया हैं जो इनके पीछे पागल हैं, और वो सब इनकी पत्निया हैं, जिन्हे ये पिछले 2 दिन से छोड़ रहे हैं, इनकी हवस को मिटने के लिए इनकी पत्निया खुद को सड़क पैर भी इनसे छुड़वा सकती हैं,

दृष्टि- 9 पत्निया ची, दिया इसकी बहन ह

ाव्य- इनकी 9 पत्निया इनकी बहन hi हैं, जैसे तुम हो,

ाव्य की बात सुनकर दृष्टि शॉकेड रह गई,

दृष्टि- ये क्या बोल रही हो तुम,

दिया- दृष्टि शांत हो जाओ, ाव्य सही बोल रही ह, बस शांति से बात सुनो और पूरा सच सुनो, तुमने अब तक पूरा सच नहीं जाना ह, इसीलिए तुम ये सब बोल रही हो, हमारे बिच ये सब हुआ ये होना hi था, और ये जरुरी भी था, तुम्हे अपना इतहास और अपने परिवार का इतहास जानना होगा

दृष्टि- कैसा इतहास

दिया- तुम हम सबका इतहास तो निकलती हुई आ गई थी की हम कोण हैं, लेकिन खुद के बारे में सब कुछ नहीं जान पाई, तुम इसी परिवार की बेटी हो तुम्हारे पिता वो hi हैं जो हमारे पिता हैं, तुषार और तुम्हारी माँ, इस घर की सबसे लड़की और सबसे प्यारी लकड़ी ह रूचि जो इस वक़्त चिरंजीवी के कब्जे में ह,

फिर दिया ने दृष्टि को अपने परिवार का पूरा सच बताना शुरू किया, जिसे सुनकर दृष्टि का मुँह खुला रह गया,

अब तक ह्रदय अपनी जीन्स पहन क्र गुफा से बहार आकर बैठा हुआ था,

दृष्टि काफी देर तक शॉकेड रही,

दृष्टि- कोमल आंटी ने मुझे ये क्यों नहीं बताया,

ाव्य- क्योकि वो तुम्हे सरे सदमे एक साथ नहीं देना छाती थी, धामा तुम्हारा पिता नहीं ह,

दृष्टि- मैं तुम सब की बहन हु, लेकिन हमारे परिवार में इन्सेक्ट हो रहा ह, ये सब गलत ह

दिया- हो सकता हो ये गलत हो लेकिन कुछ ऐसा ह जो इस सब से जुड़ा हुआ ह, हमने कभी नहीं छः इन्सेक्ट को लेकिन न छाते हुए भी हम खुद ये सब कर रहे हैं, और हमे ख़ुशी ह हम ये कर रहे हैं, अंजलि माँ ने कहा था तुषार पापा से पैदा हुई सभी लड़कियों का कौमार्य ह्रदय hi भांग कर्नेगे वर्ण अनर्थ हो जायेगा, और तुम्हारे साथ खुद हो गया,

दृष्टि- लेकिन प्यार मेरे प्यार का क्या,

आवय- जैसे तुम उन्हें प्यार करती हो वैसे वो भी तुम्हे तब से प्यार करते आ रहे हैं जब तुम्हे देखा भी नहीं था, बस तुम्हारे हॉट के इस टिल को पहचानते हैं वो, और हम सबके मिलने से पहले उनके जीवन में किसी भी लड़की के आने से पहले वो तुम्हे प्यार करते आये हैं

दृष्टि- क्या बोल रही हो तुम

ाव्य- है ये hi सच ह, तुम्हारी सोशल ईद ह न धड़कन के नाम से, कभी देखना तुम्हारे फोल्लोवेर्स में एक नाम ह्रदय का भी ह, और केवल अकेली तुम हो जिसको उन्होंने फॉलो किया ह, तुम्हे देखने के लिए hi वो ईद बानी थी,

दृष्टि की आँखों में आंसू आ गए, वो सुबकने लगी,

दिया- दृष्टि हमारा परिवार और उसके राज बहुत अजीब हैं लेकिन वो सब सच हैं, और ये जरुरी था, अगर तुम्हारा कौमार्य भांग नहीं होता और तुम उस बाबा के हाथ आ जाती तो वो तुम्हारे साथ बलात्कार करता,

दृष्टि नंगी hi उठी और गुफा के बहार को भागी उसके पीछे ाव्य भी चल दी, और दिया भी लड़खड़ाती हुई उठी और बहार चल दी, बहार अभी भी थोड़ा थोड़ा अँधेरा था, लेकिन अब सब साफ़ दिख रहा था, जैसे hi तीनो बहार पहुंची तो एक दम चौंक गई और घबरा गई,

वही चंडीगढ़ में…

उधर कश्मीर ह्रदय लड़कियों के साथ चुदाई क्र रहा था, इधर चंडीगढ़ में बाबा के भेजे गुंडे हवेली में घुस चुके थे, उनके साथ था रवि उर्फ़ धामा,

वो तोड़ फोड़ करता हुआ घर में घुसा चला आ रहा था,

अंजलि ने सोनिया का मुँह बंद क्र दिया, जिससे उसकी आवाज न निकल सके,

पुरे घर में सनता था, रवि न ेपुरी हवेली में तोड़ फोड़ शुरू क्र दी थी, उसने पूरी हवेली छान मरी लेकिन उसे कुछ नहीं मिला था, पूरी गैंग परेशां हो गई थी, जब उन लोगो को कुछ नहीं मिला तो वो वापस जाने लगे थे तभी सोनिया ने कोमल के पेअर में लात मर दी जिससे कोमल की चीख सी निकल गई, चीख ज्यादा तेज नहीं थी लेकिन रवि जिसकी सुनने की छमता बहुत तेज थी, उसने वो आवाज सुन ली थी,

सब लोग रुक गए और फिर से ढूंढ़ने लगे, रवि को रमझ आ गया था की यहाँ कोई तहखाना भी ह,

अब अंजलि समझ गई थी की ये लोग जल्दी hi बहार आ जायेंगे, तो अंजलि और कोमल बहार निकल आई और दोनों के हाथ में बंदूके थी, अंजलि तो एक योद्धा थी hi लेकिन कोमल तो एक लेडी किलर रह चुकी ह, पुलिस वाले की बेटी थी तो सब जानती थी, दोनों ने हतियार तान लिए, और फायरिंग शुरू क्र दी, जब तक गुंडों को समझ आता क्या हुआ तब तक तो दोनों ने 8 लोगो को निपटा दिया था,

अब सरे गुंडे चुप गए और जिधर से गोलिया आ रही थी उधर निशाना लगा क्र गोलियों की बरसात कर दी, काफी देर हवेली में फायरिंग चलती रही, अंजलि और कोमल तो सेफ थी लेकिन उन्होंने 15-16 आदमी मार गिराए थे,

अंजलि के निशाने पैर रवि आ गया, अंजलि ने गोली चलाई जो रवि के कंधे को छू क्र निकल गई, अगली गोली जैसे hi चलने वाली थी कोमल ने अंजलि को धक्का दे दिया,

अंजलि- कोमल ये क्या कर ह्री ह

कोमल- उसका जिन्दा रहना बहुत जरुरी ह माँ,

अंजलि- लेकिन क्यों

कोमल- यहाँ से बचे तो बताउंगी,

अंजलि- अगर उसे मार नहीं सकते तो यहाँ से निकलना hi बेहतर होगा, वो हम सबको मर देगा,

तू ऐसा क्र वन्य और वर्षा बुला ला और उन दोनों चुडलो वही बंधी रहने देना, जब हम यहाँ से निकल जायेंगे तो कोई कुछ नहीं ढूंढेगा, मैं तब तक इन्हे रोकती हु,

कोमल चली गई, इधर अंजलि लगातार गोलिया बरसाती रही, वर्षा वन्य के आते hi उन्होंने निकलना शुरू क्र दिया, ये अंजलि की हवेली थी तो उसे सब पता था, कहा से निकलना ह क्या करना ह,

हवेली के बहार आ कर वन्य ने गाड़ी निकली तब तक भी अंजलि दरवाजे पैर अंधाधुन्द गोलिया बरसाती रही ताकि कोई बहार न आ सके,

वन्य ने पूरी रफ़्तार से गाड़ी डोडा दी, रवि और उसके बचे हुए आदमी उनके पीछे दौड़े लेकिन देर हो चुकी थी, वन्य बहुत तेज रफ़्तार से गाड़ी डोडा कर ले गई थी,

अंजलि- कोमल तूने उसे मरने क्यों नहीं दिया, आज एक दुश्मन ख़तम कर देती मैं,

कोमल- माँ उसका जिन्दा रहना बहुत जरुरी ह,

Anjali-lekin क्यों ?

कोमल- पूरा सच तो मैं नहीं जानती लेकिन एक बार मैंने सोनिया और शाक्षी को कहते सुना था की धामा को मारा तो तुषार भी नहीं बच सकता,

अंजलि- ये क्या बात हुई

कोमल- मैं नहीं जानती ये सब क्या ह क्यों ह, लेकिन कुछ तो ह जिसे वो लोग जानते हैं,

अंजलि- अब कैसे पता करे, वो दोनों तो वही बंधी पड़ी हैं, और हम वापस भी नहीं जा सकते,

वर्षा- आप शांत हो जाओ माँ हम पता कर लेंगे, ह्रदय उन्हें छुड़वा लाएगा,

अंजलि- ह्रदय को फ़ोन लगा, देख तो वो कहा ह, सब ठीक ह न

वर्षा ने कॉल मिले लेकिन किसी का फ़ोन नहीं मिला,

वर्षा- फ़ोन नहीं मिल रहा, वो किसी ऐसे एरिया में ह जहा नेटवर्क नहीं हैं,

अंजलि गुस्से में हाथ मरने लगी,

गाड़ी दौड़े जा रही थी, एक सुमसान से इलाके में ेकफार्महाउसे पैर गाड़ी पहुंच गई थी,

रवि और गुंडे सड़को पैर अंजलि की गाड़ी को ढूंढ रहे थे, रवि ने साडी जानकारी चिरंजीवी को दे दी, चिरंजीवी गुस्से में आग बबूला हो चुक्का था,

उसके आदमी चारो तरफ फ़ैल चुके थे, सबकी तलाश हो रही थी, आज अशोक भी लापता था, बाबा का गुस्सा और बढ़ चुक्का था,

इधर कश्मीर में……

ाव्य दृष्टि और दिया गुफा के सामने कड़ी थी, और कुछ दुरी पैर ह्रदय खड़ा था और उसके सामने था एक टाइगर खड़ा हुआ था, जिसे देख क्र तीनो लकडिया घबरा गई, लेकिन उनका धयान गया की ह्रदय बहुत आराम से खड़ा था जैसे किसी से बात कर रहा हो, तीनो ने साइड होकर देखा तो एक औरत वह कड़ी थी,

औरत की नजर लड़कियों पड़ी तो एक मीठी सी आवाज में वो औरत बोली- बच्चियों कपडे तो पहन आओ,

दिया और दृष्टि को अहसास हुआ की वो नंगी हैं,

दोनों तुरंत लड़खड़ाती हुई अंदर भागी और कपडे फैंन का वापस आई, तब तक ाव्य ह्रदय और उस औरत के पास पहुंच चुकी थी,

तीनो लड़किया उस औरत को निहारे जा रही थी, शायद उन्होंने अपने जीवन में उससे ज्यादा खूबसूरत कुछ नहीं देखा था, ऐसा रूप की सामने वाला बस उसमे खो जाये, शरीर का एक एक कटाव इतना परफेक्ट जैसे किसी मूर्तिकार ने अपनी सबसे खूबसूरत मूर्ति बनाई हो,


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और आँखे इतनी कटीली और घेरि की कोई भी दुब जाये, हॉट किसी गुलाब की पंखुड़ी से भी ज्यादा लाल और परफेक्ट आकर में थे, तीनो लड़किया बस उस औरत को निहारे जार hi थी, वह एक टाइगर भी ह ये वो भूल hi गई थी,

ह्रदय- आप ये सब कैसे जानती हैं, और क्या ये टाइगर आपका hi ह, मैंने इसे पहले भी देखा ह, इसने मुझ पैर हुम्ला किया था,

औरत- हहहहह हुम्ला, ये तुम पैर हुम्ला नहीं करेगा कभी भी

ह्रदय- लेकिन मैंने इसे काफी बार देखा ह

औरत- जरूर देखा होगा, लेकिन ये वक़्त इसके बारे में जानने का नहीं ह, अपनी मंजिल की तरफ जाने का ह,

ह्रदय- आप मेरे बारे में बहुत कुछ जानती हैं,

औरत- बहुत कुछ नहीं बीटा सब कुछ जानती हु,

ाव्य- आप ह कोण

औरत- मेरे बारे में आराम से जान लेना, मैं आउंगी तुम सब से मिलने, लेकिन तुम लोग अभी अपनी मंजिल को हासिल करने का ह,

यहाँ से पूर्व दिशा की तरफ कुछ दूर चलने के बाद तुम्हे तुम्हारी मंजिल के निशान मिलने शुरू हो जायेंगे, सही वक़्त ह वह पाचुच्ने का, जाओ और विजय हासिल करो,

ह्रदय और तीनो लड़किया शॉकेड से औरत को देख रहे थे, तभी टाइगर जोर से दहाड़ा,

औरत- मेरे जाने का समय हो गया ह, अब मैं चलती हु जल्दी hi मिलने आउंगी,

औरत मुड़ी और चल दी, फिर अचानक मुड़ी और दृष्टि के पास आई, और उसके सर पैर हाथ रखा

औरत- बेटी तू फ़िक्र मत क्र कुछ गलत नहीं हुआ ह, जो होना होता ह वही होता ह, और अच्छा बुरा सही गलत का फैसला समाज के ठेकेदारों को करने दे, तू अपनी जिंदगी को जी और अपने हमसफ़र का साथ दे, ये सब तेरा hi ह ये सब लोग तेरे अपने hi हैं, तो अपने मैं से ग़लतफ़हमिया निकल और भरोसा कर इन सब पैर,

दृष्टि- क्या आप कोई अप्सरा हैं, या कोई देवी हैं, आप सब कैसे जान ले रही हैं,

औरत- मैं सिर्फ एक इंसान हु, और मैं कोण हु क्यों हु ये सब ये लड़का खुद पता लगा लेगा, अब मैं चलती हु तुम लोगो को देर हो रही ह,

वो औरत चली गई, कुछ दूर तो वो जाती दिखी लेकिन फिर वो किधर मुड़ी चारो में से कोई जान नहीं पाया,

औरत के जाने के बाद, दृष्टि बैचैन सी कड़ी थी, ह्रदय भी नजरे झुकाये इधर उचार देख रहा था,

ाव्य- मैंने आपसे कहा थान ा आपने कुछ गलत नहीं किया ह, जो होना ह वही होता ह, ये जरुरी था,

ह्रदय- लेकिन दृष्टि की मर्जी के बिना हुआ ह, माँ ने समझाया था जब तक लड़की खुद न कहे किसी के साथ कुछ मत करना,

दृष्टि- मुझे माफ़ कर दो ह्रदय, कही न कही मैं यही चाहती थी, लेकिन मेरे अंदर तुम्हे खुद के लिए पाने की इच्छा थी लेकिन सही तरीके से तो नहीं लेकिन इतना समझ आ गया ह तुम किसी एक के नहीं हो सकते, शायद हम सबकी नियति एक hi ह, सही हुआ या गलत मैं नहीं जानती, मैंक्या छाती थी अब मायने नहीं रखता, बस इतना समझ आ गया ह ये सब होना जरुरी था,

दृष्टि ह्रदय के गले लग गई, दिया ने ख़ुशी से तालिया बजा दी, ाव्य के फेस पैर एक सकूं भरी मुस्कान आ गई,

ाव्य- बहुत हो गया अब मंजिल की तरफ चलना ह, अब इन दोनों की पूरी ठण्ड उतर चुकी ह, और सुबह भी होने वाली ह,

ह्रदय- हम्म्म्म चलो

दिया- ये औरत थी कोण और यहाँ क्या कर रही थी

ह्रदय- मैं नहीं जनता ये कोण थी, लेकिन ये सब कुछ जानती थी, हम कोण हैं, क्यों आये हैं कहा जा रहे हैं, अंदर क्या हुआ सब कुछ, ऐसा जैसे इन्हे पहले से पता हो क्या होने वाला ह,

ाव्य- कोई बहुत बड़ी ज्योतिष होंगी शायद, जो हमारी मदद करने आई होंगी

ह्रदय- मुझे एक बात अजीब लगी

ाव्य- कोनसी बात?

ह्रदय- उन्होंने कहा, जब तुम दुबारा सफर पैर निकालो और सही गलत में फैसला न कर पाओ तो मुझे याद कर लेना,

दिया- समझ नहीं आय ाकुछ

ह्रदय- मेरी भी नहीं

ाव्य- मेरी समझ में आ गया ह, लेकिन ये वक़्त वो सब सोचने का नहीं ह, जल्दी चलो उन्होंने कहा था ये hi शै समय ह हुम्ला करने का,

चारो चल दिए औरत की बताई हुई दिशा की तरफ, दिया को मुश्किल हो रही थी चलने में, उसकी छूट में अभी तक दर्द था, लेकिन वो हिमायत करके चल रही थी, लेकिन दृष्टि हलके के पेअर खोल क्र चल रही थी लेकिन ऐसा बिलकुल नहीं लग रहा था जैसे उसे तकलीफ हो रही हो, ाव्य ने दिया का हाथ पकड़ लिया था और चारो काले जार हे थे, कुछ दूर चलने के बाद ह्रदय को एक लोहे का वायर पड़ा हुआ मिला,

ह्रदय ने वो वायर उठाया,

दिया- ये क्या ह

ह्रदय- हमारी मंजिल नजदीक hi ह, पहाड़ो में इस उचाई पैर ये लोहे का वायर कोई आम इंसान नहीं लाएगा, मतलब बाबा का अड्डा आस पास hi ह,

वो लोग आगे बढे तो किसी के पैरो के निशान दिखाई दिए,

ह्रदय- यहाँ देखो ये निशान बता रहे हैं की यहाँ कोई लगातार घूम रहा था, जैसे एक hi जगह पैर चक्कर लगा रहा हो, मतलब यहाँ कोई निगरानी पैर था,

ाव्य- हम बहुत नजदीक हैं,

वो लोग बर्फ के तिलो में चिपटे हुए पैदा में चिपटे हुए आगे बढ़ने लगी, फिर वो पहाड़ी के काफी ुचे इलाके में पहुंच गए, ह्रदय बर्फ में रेंगता हुआ आगे बढ़ा और देखा तो उसे ढलान पैर पैरो के निशान दिखे और एक दरवाजा दिखा जो कुछ पैदा के बिच में ढाका हुआ था,

कोई आम इंसान उसे नहीं देख क्र समझ hi नहीं पता,

ह्रदय ने इशारे से तीनो लड़कियों को अपने नजदीक बुलाया, और उन्हें वो दरवाजा दिखाया,

दृष्टि- लेकिन हम वह जायेंगे कैसे

ह्रदय- ये एक अंडरग्राउंड अड्डा ह तो इसमें हवा का इंतजाम जरूर किया गया होगा और उसके लिए रास्ता खुले आसमन में बर्फ से बहार लिकला गया होगा, हमे वही रास्ता ढूंढ़ना ह, ये रस्ते एक से ज्यादा भी हो सकते हैं, चुप क्र ढूंढ़ना शुरू करो,



ह्रदय ने तीनो को कुछ समझाया, पहले तीनो मन करने लगी लेकिन समझने पैर मान गई,
 
अपडेट-43






रवि अपने गिने चुने आदमियों के साथ बाबा के सामने खड़ा था,

बाबा- मुझे तुझे से उम्मीद नहीं थी, तू उस औरत से हर गया, क्या इतने लोगो में से किसी को नहीं मर पाया तू,

रवि- गुरु जी वह 3-4 औरते hi थी बस, लेकिन ये समझ नहीं आया वो थी कोण कोण, हवेली में अँधेरा था, बस गोलिया चल रही थी, हम उन्हें नहीं देख पाए, बस उनकी गाड़ी जाती दिखी उसी में पता चला की 3-4 औरते थी, पूरी हवेली खली थी,

बाबा- वो पूरी तैयारी के साथ थी, मैंने इस अंजलि को हलके में ले लिया, ये बहुत शातिर ह, मैं उसके पुरे खानदान का नामोनिशान मिटा दूंगा, मुझे वो लड़किया चाहिए, किसी भी कीमत पैर और वो लड़का भी,

रवि- गुरु जी आपके पास उसका बाप ह, उसके बाप में भी तो ताकत ह न, आप उसकी ताकत का इस्तेमाल कर लीजिये न, वही लड़का क्यों

बाबा- तू नहीं समझ पायेगा, तुझे क्या लगता ह मुझे ताकत की जरुरत ह, मेरे अंदर कितनी ताकत ह ये तो तू जनता hi होगा,

रवि- ये hi मैं आज तक समझ नहीं पाया हु आपके पास इतनी ताकत ह फिर आपको ताकत की क्या जरुरत ह,

बाबा- तुझे समझ नहीं आएगा, बस इतना जान ले अगर मुझे जिन्दा रहना ह तो वो ताकत हमे हासिल करनी होगी, वर्ण न मैं रहूँगा न hi तुम सब, और ये कभी भी हो सकता ह, समय निकला जा रहा ह, क्या पता निकल भी गया हो,

रवि- कैसा समय, आप किस से दर रहे हो गुरु जी, इस धरती पैर कोण ह जो आपको डरा सके,

बाबा- तू ये सब छोड़ और उस लड़के को ढूंढ और उन लड़कियों को भी, मुझे काम से काम एक लड़की के साथ सम्भोग करना ह, लेकिन ख्याल रहे वो कुँअरि हो, मैंने उन दोनों लड़कियों को अपने लिए hi सम्हाला था, लेकिन सब बर्बाद हो गया, वो कुटिया निधि भी धोखा दे गई मुझे,

रवि- उस निधि को तो मैं मारूंगा गुरु जी, आप फ़िक्र न कीजिये मैं उन्हें ढूंढ लाऊंगा, जल्दी hi ढूंढ लाऊंगा,

इधर कश्मीर में ह्रदय ने तीनो लड़कियों को अलग दिशा में भेजा, दिया और दृष्टि एक साथ थी ाव्य अकेली और ह्रदय अकेला, सभी अलग दिशा में चल दिए रास्ता देखने, लेकिन ह्रदय चल दिया सीधे सामने वाले रस्ते की तरफ, वो जैसे hi दरवाजे के पास पंहुचा तभी उसे थक की अव्वज आई तो ह्रदय वापस दौड़ क्र पेड के पीछे चिप गया, तभी वो दरवाजा खुला और वह से 2 आदमी पुरे पैक ड्रेस में गन के साथ बहार निकले, और आगे बढे, लेकिन कुछ दूर जाकर ठिठक गए,

दोनों ने एक दूसरे को देखा और दौड़ क्र वापस दरवाजे के पास पहुंचे, दरवाजा बंद होने hi वाला था, दोनों आदमियों ने जोर से चिलाय, - यहाँ कोई आया ह किसी के पैरो के निशान ह यहाँ पैर,

ह्रदय को आवाज आ गई थी, ह्रदय को यही सही मौका लगा उसने बड़ी तेजी से दौड़ लगा दी उन आमदियो की तरफ जब तक वो सम्हाल पते ह्रदय ने एक जोर दर टक्कट मरी जिससे एक आदमी की गार्डन दरवाजे से टकराई और टूट गई, वो वही ढेर हो गया, दूसरे आदमी को ह्रदय ने गार्डन से पकड़ा और हवा में उठा क्र जमीन में दे मारा और अपने घुटना उसकी गार्डन पैर रख क्र गार्डन तोड़ दी,

तभी अंदर से एक आदमी और बहार आया जिसे ह्रदय ने हाथ पकड़ क्र घुमा दिया, उसका हाथ टूट गया, ह्रदय ने उसे हवा में उठाया और अपने घुटने पैर पटक दिया जिससे उसकी कमर की हड्डी टूट गई, फिर ह्रदय ने जल्दी जल्दी उनमे से एक आदमी के कपडे बदले और अंदर घुस गया और दरवाजे को बंद नहीं होने दिया, वह एक आदमी को बिच में ऐडा दिया जिससे थोड़ा सा दरवाजा खुला रहे,

ह्रदय सावधानी से आगे बढ़ने लगा था, जमीन के निचे एक बहुत बड़ा एरिया कवर किया हुआ था, ये एक बहुत बड़ी और आधुनिक लैब सी लग रही थी, बहुत से लोग हथियारों के साथ थे बहुत से साइंटिस्ट घूम रहे थे,

ह्रदय किसी पैर हुम्ला नहीं करना छटा था, ताकि वह के आदमी चौकन्ने न हो जाये, वो चुप्पता हुआ सब देखता हुआ अंदर घुस गया, ह्रदय ने वह के सुकीर्ति की ड्रेस फेनी थी तो पहेली बार में किसी को शक भी नहीं हो रहा था, चारो तरफ एक से एक आधुनिक हथियार थे, ह्रदय को जो ढूंढ़ना था उसकी जानकरी मिलना आसान नहीं लग रहा था,

तभी ह्रदय की नजर एक रस्ते पैर गई जहा बहुत से गार्ड गन के साथ खड़े थे, ह्रदय को वही अपनी मंजिल दिखाई दी, ह्रदय उनके नजदीक पंहुचा लेकिन यहाँ से अंदर घुसने के लिए अब लड़ाई के अलावा कोई तरीका नहीं था,

ह्रदय जैसे hi उनके नजदीक पंहुचा तो एक गार्ड बोलै- अबे तू यहाँ क्या कर रहा ह, तेरी ड्यूटी कहा लगी हुई ह,

ह्रदय- वो मुझे यही भेजा ह

दूसरा गार्ड- यहाँ किसी को नहीं भेजा जाता, कोण ह तू

तीसरा गार्ड- गोली मर इसे यहाँ किसी और गार्ड की आणि की हिम्मत नहीं ह, ये कोई बहरूपिया ह,

जैसे hi उन लोगो ने ह्रदय पैर गन तानी, ह्रदय ने तुरंत अपनी फुरती का प्रदशन किया और एक की गन को पकड़ा और उसके मुँह पैर एक घुसा मारा और गन चीन क्र दूसरे के सर में गन की बूत मरी, तीसरे के जांघो के बिच में एक लात मरी और गन को उसके सर में घुसा दिया,

चौथा आदमी जल्दी से अलार्म बजने के लिए डोडा, लेकिन ह्रदय ने एक गार्ड की कमर में लगा चाकू निकला और चौथे गुंडे की पीठ में घुसा दिया, चारो गार्ड वही ढेर हो गए, ह्रदय ने जल्दी से उनकी साइड में छुपा दिया और अंदर घुस गया,

यहाँ शीशे के कमरे बने हुए थे, ह्रदय उनमे देखता हुआ अंदर चलता चला गया, तभी उसकी नजर एक कमरे पैर गई जहा एक औरत बेसुध सी पड़ी हुई थी, ह्रदय उसके नजदीक पंहुचा, और गोर किया तो ह्रदय पहचान गया की वो अलका ह,

ऐसा लगता था जैसे उसके अंदर जान hi न हो, ह्रदय ने अंदर घुसने का रास्ता ढूंढ़ना चाहा लेकिन कोई रास्ता नहीं दिखा, तभी दूसरे कमरे से एक आदमी निकला देखने से एक साइंटिस्ट लग रहा था,

आदमी- हे तुम यहाँ क्या कर रहे हो, तुम अंदर कसिए आये, तुम्हे पता ह न यहाँ आना मन ह,

ह्रदय- वो मुझे इस औरत को देखने भेजा ह की वो जिन्दा ह या नहीं, शायद गुरु जी को इसकी जरुरत पड़ने वाली ह,

ह्रदय ने अँधेरे में तीर चलाया था, लेकिन सही जगह लग गया,

आदमी- ओह गुरु जी का आदेश ह, मैं चेक करता हु,

आदमी ने अपना एक कार्ड निकला और सेंसर पैर लगाया जिससे दरवाजा खुल गया, वो आदमी अलका के पास पंहुचा और उसको लात मरी- उठ जिन्दा ह या मर गई.

ह्रदय को गुस्सा आ गया उसने उस आदमी के सर पैर एक जोर दर घुसा मारा जिससे वो वही चित हो गया, अलका लत लगने से घबरा क्र उठी थी, लेकिन जब उसके सामने ह्रदय ने उस आदमी को घुसा मारा तो वो और घबरा गई, और एक दम पीछे हो गई, अलका दर कर चीखने hi वाली थी की ह्रदय ने उसके मुँह पैर हाथ रख दिया

ह्रदय- अलका मौसी शांत हो जाइये चिलाना नहीं प्लस

अलका ने चौंक क्र ह्रदय को देखा,

ह्रदय- मौसी मैं हु ह्रदय

ह्रदय नाम सुनकर क्र अलका की आँखे बड़ी हो गई, अलका को ह्रदय नाम याद था, ह्रदय ने अलका के मुँह से हाथ हटाया

अलका- तुम तुम ह्रदय लेकिन तुम कैसे, मुझे यकीन नहीं हो रहा, तुम झूट बोल रहे हो, फिर से कोई चल खेल रहे हो मेरी साथ,

ह्रदय- नहीं मौसी मैं ह्रदय हु, अंजलि माँ ने मुझे भेजा ह आपको पापा को और रूचि माँ को ढूंढ़ने के लिए, जल्दी कीजिये हमारे पास समय काम ह,

अलका तुरंत ह्रदय के गले लग गई,

ह्रदय ने सहारा देकर अलका को उठाया,

अलका- तुम यहाँ आये कैसे

ह्रदय- आप सबका आशीर्वाद ह मेरे सर पैर, आप सबने बहुत इंतजार किया ह मौसी, पूरा परिवार आपके लिए पलके बिछाये बैठा ह, जल्दी hi आप उनके पास होगी,

अलका- लेकिन तेरे पापा वो

ह्रदय- कहा ह वो

अलका ने एक कमरे की तरफ इशारा किया,

अलका- रूचि और तुषार वह कैद हैं, बस किसी तरह जिन्दा हैं,

ह्रदय रूचि को लेकर उधर चलने लगा तभी 4 आदमी उनकी तरफ दौड़ते हुए आ रहे थे, ह्रदय ने अलका को साइड किया और आगे बढ़ क्र उन चारो को अपनी ताकत का एक छोटा सा नमूना दिखाया जिससे वो चारो वही ढेर हो गए, जिसे देख अलका के फेस पैर एक सकूं सा दिखा

अलका- तू बिलकुल अपने पापा जैसा ह,

ह्रदय आगे बढ़ा और दरवाजे के पास पंहुचा, ह्रदय ने उस आदमी के कार्ड से दरवाजा खोलना चाहा लेकिन खुला नहीं, इस पैर सिक्योरिटी ज्यादा थी,

अलका- इस दरवाजे को उस चिरंजीवी के अलावा कोई नहीं खोलता,

ह्रदय- आज खुलेगा ये दरवाजा,

ह्रदय ने आगे बढ़ क्र दरवाजे को देखा फिर अलका को साइड में किया और 10 कदम पीछे हुआ, और पूरी रफ़्तार से दरवाजे की तरफ डोडा और पूरी ताकत से उसमे टक्कर मरी, जिससे वो दरवाजा उखड क्र अंदर जा गिरा, दरवाजे के उखड़ते hi पुरे इलाके रेड सिरों बजने लगे, और तभी बाबा के फ़ोन पैर भी सिरों बजने लगा,

बाबा ने फ़ोन देखा,

बाबा- नहीं नहीं ये नहीं हो सकता, वो लोग वह पहुंच गए हैं, ये दरवाजा नहीं खुल सकता, रवि जल्दी से हेलीकाप्टर तैयार क्र हमे अड्डे पैर पहुंचना होगा,

इधर ह्रदय अंदर घुसा तो वह 3 आदमी थे जो कंप्यूटर के सामने बैठे हुए थे और रीडिंग्स देख रहे थे, दरवाजे के उखड़ते hi वो खड़े हो गए, अलका और ह्रदय अंदर गए तो देखा एक बिस्टेर पैर रूचि पड़ी हुई थी, उसकी नशो में बॉटल्स चढ़ाई जार hi थी, दूसरी तरफ था तुषार जिसे एक मशीन में बंद किया हुआ था, उसके सर पैर शोक देने वाली मशीन लगी हुई थी, और हाथ पाओ सब जगह सिरिंज लगी हुई थी जिनसे तुषार को जिन्दा रखा जा रहा था, तुषार की हालत ऐसी थी जैसे कोई कंकाल हो,

ह्रदय ने वह खड़े आदमियों से कहा- अगर जिन्दा रहना छाते हो तो इन्हे आजाद कर दो वर्ण यही मार दूंगा,

वो आदमी दर गए और उन्होंने तुरनत दोनों को आजाद कर दिया, रूचि को तो थोड़ा होस था लेकिन तुषार को कोई होस नहीं था, ह्रदय ने एक कंधे पैर तुषार को उठाया और दूसरे कंधे पैर रूचि को, फिर बहार की तरफ दौड़ लगा दी, लेकिन जैसे hi बहार आया उसके सामने 100 से ज्यादा आदमी खड़े थे सबके हाथ में बंदूके थी,

वही बाबा जल्दी से हेलीकाप्टर की तरफ भगा और तुरंत कश्मीर के लिए निकल गया,

ह्रदय चारो तरफ से घिरा हुआ था, और उसके सामने खड़े थे वो दो आदमी जिनसे वो पहले भी टकरा चुक्का था, ह्रदय ने तुषार और रूचि को निचे उतरा अलका ने उन दोनों को सम्हाला,

वो दोनों आदमी ह्रदय की तरफ बढे और उस पैर हुम्ला कर दिया, ह्रदय मजबूर था वो हुम्ला नहीं कर सकता था उसे दर था कही सामने खड़े आदमी गोली न चले दे, और गोली अलका रूचि या तुषार को न लग जाये,

वो उन दोनों आदमियों से मर खाने लगा, उसके मुँह से खून आने लगा था, अलका तड़प रही थी, उसकी आँखों से आंसू आ रहे थे,

तभी एक आदमी बोलै- गुरु जी आ रहे हैं उनका हेलीकाप्टर निकल चुक्का ह, बस इसे कुछ देर रोक क्र रखना ह, फिर गुरु जी इसका फैसला कर्नेगे, और गुरु जी ने कहा ह इन सबको जिन्दा रखना ह, अगर ईनमसे से किसी को कुछ हुआ तो वो सबको मर देंगे,

उस आदमी की बात सुनकर ह्रदय के फेस पैर स्माइल आ गई, तभी पीछे से तीन लकड़ियों के छिलने की आवाज आई जिनके हाथो में बंदूके थी और वो चिलाती हुई गोलिया बरसाती हुई डोडी चली आ रही थी,

ाव्य जोर से चिल्ला कर- उठो और बताओ इनको तुम कोण हो और क्या कर सकते हो, ये भें के लोडे तुम्हारा कुछ नहीं बिगड़ सकते, इन सबकी माँ छोड़ दो आज,

गन पकडे आदमी तीनो लड़कियों की तरफ मुड़े तब तक ह्रदय मुस्कुराता हुआ उठा और एक गुंडे को पकड़ा और उसकी कमर में एक घुसा मारा उसके मुँह से खनन की फुहार निकल गई और वो वही मर गया, उसकी हालत देख क्र वह खड़े सभी लोग दहशत में आ गए, ह्रदय तुरंत उन दोनों आदमियों की तरफ डोडा और एक के मुँह पैर लात मरी और दूसरे के मुँह पैर घुसा, फिर फुर्ती से उनकी तलवार निक्कल ली, और तलवार लेकर बाकि गुंडों की तरफ दौड़ पड़ा, और जो सामने आ रहा था उसे एक hi वॉर चीरता हुआ चला जा रहा था,

वही ाव्य की गोलिया ख़तम हो गई थी, उसने अपनी ताकत का इस्तेमाल करना शुरू क्र दिया था, वह एक भी गुंडा ऐसा नहीं था जो ाव्य को छू भी सके, ाव्य का एक एक मुक्का किसी पहलवान को जमीन में लिटाने लायक था,

वही दृष्टि और दिया चुप चुप क्र घोलिया बरसा रही थी, बेचारियो के निशाने तो अच्छे नहीं थे लेकिन फिर भी वो गुंडों को डरा क्र तो रखे हुए थी, इसका फायदा ाव्य उठा रही थी, जिससे वो उन गुंडों को जाकर थोक दे रही थी, वही ह्रदय अपनी तलवार से चीरता हुआ चला जा रहा था,

तभी संभु और दूसरा साथी उठे और अलका रूचि और तुषार की तरफ बढे, उन्हें अपने कब्जे में लेना छाते थे, ह्रदय का धयान दूसरी तरफ था, लेकिन ाव्य वह पाहकः गई और उन दोनों के सामने कड़ी हो गई,

ाव्य ने उछाल क्र एक की छाती में लात मरी, वो गिरा तो नहीं लेकिन उसके कदम पीछे हैट गए थे,

ाव्य- खबर दर जो मेरी माँ और पापा की तरफ आँख उठाई, कसम अपनी माँ की लुंड काट क्र तुम दोनों की गांड में दे दूंगी,

वो दोनों ाव्य की तरफ बढे, ाव्य ने उन पैर हुम्ला किया लेकिन वो ाव्य से ज्यादा ताकतवर थे और दो थे, ाव्य कुछ hi देर में उनके कब्जे में आने लगी, उनमे से एक ने ाव्य के मुँह पैर एक घुसा मारा जिससे ाव्य दूर जाकर गिरी उसके मुँह से खून आ गया था, अलका ने दौड़ क्र ाव्य को देखा

अलका- तुम ठीक हो बेटी, ये जल्लाद हैं इनसे तुम नहीं लड़ पाओगी,

ाव्य की आँखों में आंसू थे, आज पहेली बार वो अपनी माँ की गॉड में थी, उसकी माँ उसका मुँह पैर लगा खून अपने पल्लू से पॉच रही थी,

तभी उस आदमी ने अलका के बाल पकडे, तो ाव्य के आँखे गुस्से में लाल हो गई वो जोर से चिल्लाई

ाव्य- hardayyyyyyyyyy इस भें के लोडे ने माँ को हाथ लगाया ह,

तभी ह्रदय किसी तूफ़ान की तरह दौड़ता हुआ आया और उछाल क्र अपना घुटना उस आदमी के हाथ में मारा वो आदमी दर्द में चीख पड़ा, उसका हाथ कोहनी पैर से टूट क्र लटक गया था,

तभी दूसरा आदमी ह्रदय की तरफ बढ़ा जिसे ह्रदय ने हवा में उठा लिया और जमीन में दे मारा, जैसे hi उन दोनों आमदियो की ऐसे हालत हुई तभी वह बचे हुए आदमियों ने हथियार फेंक दिए और बहार की तरफ दौड़ पड़े,

दृष्टि और दिया जल्दी से अलका रूचि और तुषार के पास पहुंची उन्हें सम्हालने लगी, इधर ह्रदय उन दोनों आमदियो को किसी जानवर की तरह मरे जा रहा था, जैसे शेर के सिकंजे में कोई सूअर आ गया हो जिसे वो अपने जबड़ो से चिर रहा हो,

ाव्य- इन्हे ऐसी सजा दो जिससे उस बाबा की रूह तक कैंप जाये,

ह्रदय ने उन दोनों की हालत ख़राब कर दी थी, ह्रदय की ताकत सच में बहुत बढ़ गई थी, जिसका अनुमान खुद ह्रदय को नहीं था,

जिस आदमी का हाथ तोडा था उसका दूसरा हाथ ह्रदय ने पकड़ा और उसकी छाती पैर पेअर रख क्र हाथ को खींचने लगा, उस आदमी के चीखने की आवाज चारो तरफ फ़ैल गई, ह्रदय ने उसका हाथ hi उखड लिया था, तभी दूसरे आदमी ने अपनी लात ह्रदय पैर चलाई जिसे ह्रदय ने पकड़ लिया और जमीन में गिरा लिया और दूसरे पेअर पैर पेअर रख क्र चीरने लगा,

वो आदमी दर्द से बिलबिला उठा, लेकिन ह्रदय के सर पैर जानूं सवार था और उसने उसकी टैंगो को बिच से चिर दिया था, वो दोनों आदमी वही मर गए, ह्रदय की आँखों में गुस्सा भरा हुआ था, वो जोर से चिल्लाया

ह्रदय चीखते हुए- ह कोई तो आओ, आज मैं बताऊंगा मेरे माँ बाप को हाथ लगाने पैर क्या होता ह, मेरी पत्नियों की तरफ किसी ने आँख भी उठाई तो ऐसे hi चिर दूंगा सबको,

ाव्य दौड़ क्र ह्रदय से लिपट गई

ाव्य- शांत हो जाओ अब कोई नहीं ह, शांत हो जाओ,

तभी बहार से हेलीकाप्टर की आवाज आई,

दिया- लगता ह बाबा यहाँ आ चुक्का ह, निकलते हैं यहाँ से

ह्रदय- नहीं मैं इस बाबा का खेल आज ख़तम कर दूंगा

ाव्य- नहीं ये सही समय नहीं ह, माँ पापा साथ ह उन्हें बचाना जरुरी ह पहले,

दृष्टि- ाव्य सही बोल रही ह, यहाँ से निकलो, उससे भिड़ने के लिए हमे पूरी तैयारी करनी होगी,

ह्रदय ने तुषार को अपने कंधे पैर उठाया और रूचि को ाव्य ने उठा लिया,

दिया और दृष्टि एक रस्ते की तरफ दौड़ पड़े,

दिया- ये रास्ता सेफ ह, हम इसी से अंदर आये थे,

सभी दिया के पीछे दौड़ पड़े, वो लोग एक छोटी सी पहाड़ी के उप्पेर निकले, वह एक रास्ता बना हुआ था, जो हवा आने जाने के लिए बना था,

इधर बाबा जैसे hi अड्डे पैर घुसा चारो तरफ अपने आदमियों को लाशे देख क्र उसकी आँखों में खून उतर आया था, और जब उसने अपने दोनों खास आदमियों की हालत देखि उसकी सच में गांड फैट गई थी, इन दोनों की ऐसी हालत करना नामुमकिन था,

रवि की तो आँखे फटी रह गई,

रवि- ऐसा कोण कर सकता ह

बाबा- वही लड़का, मैंने उसकी ताकत को काम आंक लिया था, उसने मुझे किसी की याद दिला दी, ऐसी ताकत मैंने बस दो बार देखि ह, ऐसा करने की ताकत बस उनमे थी, ये कहा से आ गया, ये हमारे लिए बहुत बड़ा खतरा ह,

तभी वह कुछ साइंटिस्ट आ गए,

सब एक साथ- गुरु जी वो लोग उस रस्ते से भागे हैं, 1 लड़का और तीन लड़किया हैं और साथ में हमारे तीनो कैदी भी हैं,

रवि तुरंत अपने आदमी लेकर उस तरफ डोडा,

बाबा बस वह का नजारा देखे जा रहा था, तभी उसे कुछ याद आया और वो एक दिशा में दौड़ पड़ा, उसे दौड़ता हुआ देख सभी चौंक गए,

बाबा एक कमरे के पास पंहुचा और दरवाजा खोल क्र अंदर घुस गया, उसके आदमी बहार खड़े रह गए, ये एक ऐसा कमरा था जिसमे किसी को जाने की अनुमति नहीं थी, बाबा के अलावा उसमे आज तक कोई नहीं गया था,

रवि उस रस्ते से बहार निकला लेकिन काफी देर हो चुकी थी वो लोग काफी आगे निकल चुके थे, और इस वक़्त रवि के पास इतने आदमी भी नहीं थे जो उनका पीछा कर सके और पकड़ लिया तो ह्रदय का सामना कर सके, इसलिए वो वापस आ गया,

बाकि आदमियों के साथ रवि भी उस कमरे के सामने खड़ा हो गया,

इधर ह्रदय और बाकि सब अपनी गाड़ी के पास पहचुहे, धुप खिली हुई थी, ठण्ड तो थी लेकिन सब के अंदर एक जानूं और जोश था जिसकी वजह से उन्हें अहसास नहीं हो रहा था,

ह्रदय ने सबको गाड़ी में बैठाया और गाड़ी को डोडा दिया अपने मंजिल की तरफ, वो लोग जैसे hi नेटवर्क में आये उनके फ़ोन पैर अलर्ट संस आने लगे थे, वही संस यहाँ चंडीगढ़ में अंजलि वर्षा वन्य के फ़ोन पैर भी पाहकः गए, की वो लोग नेटवर्क में आ गए हैं,

वन्य ने तुरंत फ़ोन मिलाया जो ाव्य ने उठाया और स्पीकर पैर दाल लिया,

वन्य- ाव्य कहा हो तुम, कैसे हो तुम लोग सब ठीक हो न

ाव्य- हम ठीक हैं, हम आ रहे हैं

अंजलि ने वन्य के हाथ से फ़ोन ले लिया और स्पीकर पैर डाला

अनजलि- ाव्य बेटी तुम्हे वो मिले

ाव्य- है माँ हमने उन्हें ढूंढ लिया,

अंजलि का गाला भर आया वो थरथराती आवाज में बोली- फिर से बोल फ़ी से बोल

ाव्य- है माँ हमने उन्हें ढूंढ लिया वो हमारे साथ हैं, हम उन्हें लेकर आ रहे हैं,

तभी अंजलि की आवाज पहचान क्र अलका बोल पड़ी,

अलका- माँ

अलका की आवाज सुनकर वर्षा और अंजलि दोनों का रोना निकल गया,

अंजलि- अलका मेरी बच्ची

अलका- माँ मैं आ रही हु

अंजलि- जल्दी आजा मेरी बच्ची जल्दी आजा, ाव्य जल्दी से अपनी माँ को लेकर आ जा

अलका ने ाव्य की तरफ देखा और अलका की आँख भर आई

अलका- मेरी बेटी

अंजलि- है अलका ाव्य तेरी hi बेटी ह,

अलका तुरंत ाव्य से लिपट गई, और दोनों माँ बेतिया रोने लगी, सबकी आँखे भर आई थी,

ह्रदय पूरी रफ़्तार से गाड़ी दौड़ाये जा रहा था, वन्य ने उन्हें अपनी लोकेशन बता दी,

फ़ोन दिया ने ले लिया,

दिया- अंजलि माँ हमे डॉक्टर्स चाहिए होंगे, आप पूरी टीम तैयार कीजिये, पापा और रूचि माँ होश में नहीं हैं, और हम नहीं जानते उन्हें हुआ क्या ह, इसलिए पूरी टीम तैयार रखिये,

अंजलि- तुम लोग आ जाओ मैं पूरी टीम के साथ तैयार मिलूंगी,

वही सोनिया और शाक्षी बंधे हुए थे, सोनिया लगातार खुद को छुड़वाने की कोशिश कर रही थी, और वो उसमे सफल हो भी गई, उसका हाथ निकल गया और उसने खुद को आजाद क्र लिया, पहले तो वो खुद hi भागी तभी शाक्षी बोल पड़ी

शाक्षी- आरी हरामजादी मेरे साथ अब भी धोखा कर रही ह

सोनिया- अरे नहीं मैं तो रास्ता देख रही थी,

सोनिया वापस मुड़ी और शाक्षी को खोल दिया और दोनों वह से भाग निकली,

वही कश्मीर में काफी देर बाद चिरंजीवी उस कमरे से बहार आया उसके चेरे के रंग उदा हुआ था, अपने आप में hi कुछ बड़बड़ा रहा था,

सब खामोश खड़े थे,

रवि- क्या हुआ गुरु जी सब ठीक ह न,

बाबा ने गुस्से में रवि की तरफ देखा- तुझे ये सब ठीक लग रहा ह क्या, सब बर्बाद हो रहा ह, मेरे आदमी मरे गए, और वो मुझे

इतना बोल क्र बाबा चुप हो गया, रवि भी खामोश हो गया था, कुछ देर बाद बाबा फिर बोलै

बाबा- रवि तुझे **** जाना होगा और वह तुझे एक तांत्रिक मिलेंगे उनसे मिलना होगा और एक सन्देश उन्हें देना होगा,

रवि- ठीक ह बाबा लेकिन वो ह कोण

बाबा- उनके सामने कोई सवाल मत करना बस जो मैं बोल रहा हु वो सन्देश उन्हें देना ह, अगर कुछ कहा तो तेरे प्राण वही चीन लेंगे वो,

रवि- जी समझ गया, लेकिन आप तो बता सकते हो वो कोण हैं,

बाबा- मेरे पास भी उनके बारे में बात करने का अधिकार नहीं ह, समझ ले वो मेरे भी गुरु हैं, उनकी भी वही जिम्मेदारी ह जो मेरी ह, वो अपनी जिमेदारी में असफल हुए थे लेकिन मैं असफल नहीं होना चाहता, तू उनसे मिल और उन्हें सन्देश पंहुचा, तब तक मैं यहाँ सब ठीक करता हु, हमे सफल होना ह किसी भी कीमत पैर सफल होना ह,

रवि- ठीक ह गुरु जी मैं निकलता हु, रवि वह से निकल गया,

बाबा अपने आदमियों से- एक टीम चंडीगढ़ भेजो और सभी हॉस्पिटल में अपने आदमी लगाओ, उन सबको इलाज की जरुरत ह वो लोग हॉस्पिटल जरूर जायेंगे, इसलिए मुझे साडी खबर चाहिए,

आदमी- जी गुरु जी अभी लगता हैं,

बाबा- और इस अड्डे को तबाह कर दो, यहाँ कुछ नहीं मिलना चाहिए आज के बाद ये पूरी तरह भर दो, बस ये कमरा सेफ रहेगा और यहाँ आने का रास्ता बदलो,

आदमी- ठीक ह गुरु जी,

बाबा खुद से hi- हॉस्पिटल जाकर भी उसे नहीं बचा पायेगा तू लड़के

ह्रदय सबको लेकर अंजलि के पास पहुंच गया, सभी पलके बिछाये उनके िटजर में खड़े हुए थे, जैसे hi सब बहार निकले वर्षा दौड़ क्र अलका से लिपट गई, अंजलि तुषार के पास पहुंची लेकिन तुषार और रूचि दोनों बेहोश थे, अंजलि रोने लगी, ह्रदय ने उसे सम्हाला,

तुरंत सबको अंदर लेकर गए, जहा डॉक्टर्स खड़े हुए थे, और पूरा सेटअप लगया हुआ था, अंजलि ने पुरे डॉक्टर्स की टीम और जरुरत का सब सामान वही फार्महाउस पैर मंगवा दिया था,



तुषार की हालत देख क्र सबकी साँस सी अटकी हुई थी, डॉक्टर्स तुषार और रूचि को चेक कर रहे थे, वही अलका अंजलि से लिपटी हुई थी, अंजलि उसे साइन से लगाए रोये जा रही थी, वन्य ने बाकि परिवार वालो को भी खबर भेज दी थी की सभी मिल चुके हैं,
 
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