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- Dec 5, 2013
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मनीषा- (मुंह बनाकर) मैं जानती थी आप सिर्फ दोनों दीदी से hi प्यार करते हैं मुझसे तो आप प्यार hi नहीं करते. ठीक है मैं भी नहीं जा रही हूँ (और मुंह फुलाकर बैठ गई)
मैं- लो अब नाराज़ हो गई तुम. अच्छा ठीक है तुम रुको मैं तैयार होकर आता हूँ.
उसको बोलकर मैं अपने कमरे में तैयार होने के लिए आ गया.
अब आगे.
मैं अपने कमरे में आकर अभी तैयार हो hi रहा था की मनीषा मेरे कमरे में आ गई. जिस समय वह कमरे में उसी समय मैं बाथरूम से सिर्फ चढी में आया था. मेरे आने पर वह उठकर जाने को हुई तो मैंने उसे बैठने के लिए बोल दिया. अब मुझे मनीषा के साथ भी थोड़ा खुलना था. इसलिए मैं उसके सामने hi कपडे पहनने लगा. वो एक तक मेरे मस्कुलर बॉडी को देखे जा रही थी. तो मैंने उससे पूछा.
मैं- क्या हुवा मनीषा ऐसे क्यों देख रही हो.
मनीषा- कसम से भैया क्या मस्त बॉडी बनाई हुई है आपने.
मैं- (मेरे मुंह से अचानक निकल gaya)Mast बॉडी तो तेरी भी है.
मेरी बात सुनकर मनीषा शर्मा गई और शरमाते हुवे मुझसे बोली.
मनीषा- क्या भइया आप भी न मेरी तंग खींच रहे हैं.
मैं- नहीं मैं सच कह रहा हूँ. सच में तेरी भी बॉडी मस्त है.
इन बातो के दौरान मनीषा लगातार मेरी बॉडी hi देख रही थी. जब मैं तैयार हो गया तो मनीषा ने कहा.
मनीषा- मेरा भाई तो बड़ा हैंडसम लग रहा है.
इतना कहकर वो मेरे गले लग गई उसके गले लगते hi उसकी तानी हुई चूचिया सीधे मेरे साइन में धंस गई. उसकी चूचियों के स्पर्श से मेरे बदन में एक सनसनी दौड़ गई तो मैंने भी उसे कसकर अपने साइन से चिपका लिया और उसकी पीठ पर हाँथ फेरने लगा. मुझे उसकी पीठ पर उसकी ब्रा स्पस्ट फील हो रही थी. फिर मैंने अपने हाँथ निचे लेजाकर अपने एक हाँथ को उसकी गांड पर ऐसे फिराया जैसे ये सब अनजाने में हुवा हो. और उससे बोलै.
मैं- अरे यार अब चलना भी है या इसी पॉश में फिल्म बनानी है.
मनीषा मेरी बात सुनकर वो मुझसे अलग हुई और शरमाते हुवे मुझसे बोली.
मनीषा- थैंक यू भैया मेरे साथ फिल्म देखने जाने के लिया.
Main-(hanste हुवे) मैं नहीं जा रहा हूँ. मुझको ले जाया जा रहा है. अब चल और जाने से पहले सरिता दी को जाकर बता दो की हम दोनों बहार जा रहे हैं.
इतना बोलकर मैं घर से बहार निकल गया. थोड़ी देर बाद मनीषा भी बहार आ गई. तो मैंने अपनी बाइक स्टार्ट की और मनीषा दोनों तरफ पेअर करके बैठ गई और मैंने बाइक आगे बढ़ा दी. थोड़ी देर बाद मैंने उससे पूछा.
मैं- अच्छा ये बताओ मनीषा. आज तुम्हारा फिल्म देखने का प्लान कैसे बन गया.
मिनिषा- वो तो मैं आपके साथ तोडा वक्त गुजरना चाहती थी इसलिए फिल्म देखने का प्लान बनाया.
मैं- लेकिन मेरे साथ क्यों. तुम्हे तो अपने दोस्तों के साथ जाना चाहिए.
मनीषा- वो इसलिए की आप अब मुझको बिलकुल भी समय नहीं देते. हर समय या तो सविता दीदी के साथ या सरिता दीदी के साथ समय बिताते हो. आप तो मुझसे प्यार भी नहीं करते आप तो अपना सारा प्यार दोनों दीदी को hi देते हो. इसीलिए मैंने आज फिल्म देखने का प्लान बनाया है.
उसकी बात सुनकर तो मेरा दिमाग hi झन्ना गया और मैंने गाड़ी रोक दी. और उसकी तरफ देखने लगा. मुझे अब लगने लगा था की इसको जरूर कुछ न कुछ पता है. लेकिन मुझे ये समझ में नहीं आ रहा था की अगर इसे कुछ पता है तो इसने मम्मी पापा को अभी तक क्यों नहीं बताया. फिर मैंने उससे कहा.
मैं- क्या मतलब है की सारा प्यार दोनों दीदी को दे रहा हूँ.
मनीषा- अरे भैया मेरे कहने का मतलब ये है की आप दोनों दीदी को ज्यादा प्यार करते हैं मेरे मुकाबले. अब गाड़ी चलाइये.
मैंने दोबारा से बाइक स्टार्ट कर दी और चल दिया. अब मनीषा मुझसे सत्कार बैठ गई जिससे उसकी चूचिया मेरी पीठ पर टकराने लगी. लेकिन मेरे ध्यान कही और था मैं इस सोच में गम था की हो न हो मनीषा कुछ न कुछ तो जरूर जानती है तभी तो कुछ दिन से इसका व्यव्हार कुछ बदला बदला लग रहा है. थोड़ी देर बाद मुझे उसने गाड़ी रोकने के लिए कहा. मैंने बाइक रोक दी और देखा तो थिएटर आ गया था. तो मैं और मनीषा बाइक पार्क करके टिकट लेने गए तो वह जुली-2 मूवी लगी हुई थी. तो मैंने उसे किसी दूसरी मूवी के लिए कहा. लेकिन वह नहीं मणि और यही मूवी देखनी है यही जिद करने लगी तो मैंने दो टिकट ली और थिएटर के अंदर आ गया.
थिएटर लगभग पूरा खली था बस इक्का दुक्का लोग hi थिएटर में बैठे थे वो भी सुप्ले. हम दोनों भी एक जगह बैठ गए. थोड़ी देर बाद फिल्म शुरू हो गई. फिल्म बहुत hi बोल्ड थी. कई जगह सेक्सी स्कीन थे. जिसे देखकर मैं गरम हो गया. मैंने मनीषा को देखा तो उसकी भी सांसे सामान्य से तेज़ चल रही थी. मैंने सोचा क्यों ने मनीषा के साथ भी तरय किया जाये. तो मैंने अपने एक हाँथ उसके गार्डन से घुमाकर उसके कंडे पर रख दिया. कंधे पर हाँथ रखने पर उसने मेरी तरफ देखा लेकिन बोली कुछ नहीं और सामने देखते हुवे फिल्म देखने लगी.
मैं अपने हाँथ से उसके कंधे को सहलाने laga.thodi देर कंधे को सहलाने के बाद मैंने अपने हाँथ उसके कंधे से सरकते हुवे उसकी चूचियों की तरफ ले जाने लगा. जिससे मनीषा की शरीर में झुरझुरी दौड़ने लगी थी. थोड़ी देर में मैंने अपने हाँथ सरकते हुवे महिषा की चूचियों पर रख दिया और अपना दूसरा हाँथ उसकी जांघ पर रख दिया और सहलाता रहा. थोड़ी देर तक उसकी जांघ और चुकी सहलाने के बाद मैंने उसकी चुकी को मुठी में भर लिया और जांघ को कपडे के ऊपर से मुट्ठी में लिया और दोनों को जोर से मसल दिया. मनीषा हलके से चीख पड़ी और मेरे दोनों हाँथ को झटक कर मुझको घूरने लगी. उसके इस बदले हुवे रूप को देखकर मैंने उससे पूछा.
मैं- क्या हुवा मनीषा.
मनीषा- मुझे आप सरिता दीदी या सविता दीदी न hi समझे तो ज्यादा अच्छा है आपके लिए.
उसकी बात सुनकर मुझे पक्का यकीं हो गया की इसको हम तीनो की रासलीला के बारे में सब पता चल गया है. ये जानकर तो मेरी हालत ख़राब हो गई. मैंने उसकी तरफ देखा तो वो फिल्म नहीं बल्कि मुझे देख रही थी उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं था. तो मैंने उसका हाँथ पकड़कर उसे बहार ले जाने लगा. वो भी चुपचाप मेरे साथ चल पड़ी. मैं उसे लेकर एक पार्क में गया और गाड़ी पार्क करके उसे अंडाल ले जाकर एक सुनसान जगह पर बैठ गया और मनीषा से कहा.
मैं- ये तुम वह क्या बोल रही थी.
मनीषा- मैंने क्या कहा. मैंने तो बस इतना hi कहा की जैसे अआप दोनों दीदियो के साथ छेड़खानी करते हैं वैसे मेरे साथ मत किया कीजिये. मुझे गुदगुदी होती है.
मैं- नहीं तुम कोई और बात कह रही थी. जो भी बात है साफ साफ कहो.
मनीषा- कोई बात नहीं है भैया. आप पता नहीं क्या क्या सोच रहे हो. मुझे गुदगुदी होती है इसलिए मैंने आपको मन किया.
मैं- पक्का कोई बात नहीं है न. अगर है तो अभी बता दे.
मनीषा- अरे मेरे बाप. कोई बात नहीं है. जो भी था बता तो दिया.
मैं- लेकिन तुम गुस्सा किस बात पर हो गाइट hi.
मनीषा- क्या कृ भैया आप मुझे गुदगुदी कर रहे था और मेरी जांघो को आपने दबा दिया. जिससे मुझे दर्द हुवा इसलिए थोड़ा गुस्सा आ गया. बस.
मैं- अच्छा चल घर चलते हैं. तूने बहुत बेकार मूवी सेलेक्ट की देखने के लिए.
मनीषा- हां भैया फिल्म वाकई बहुत ख़राब थी. वो दोस्तों ने कहा अच्छी है इसलिए देखने के लिए आई.
मैं- चल फिर अब घर चलते हैं.
उसके बाद हम दोनों घर वापस आ गए. उस दिन और कुछ खास नहीं हुवा. हम को मां पापा जॉब से घर आ गए. थोड़ी देर बाद सरिता दीदी भी आ गई और मैदान में चलने के लिए बोली. लेकिन मैंने बहाना बनाकर मन कर दिया. जिससे उनका चेहरा उतर गया. फिर रात के खाने की तयारी होने लगी. खाना खाकर मैं अपने कमरे में चला गया. थोड़ी देर बाद मेरे व्हाट्सअप पर सविता दीदी का मश्ग आया. दीदी से दिन में फ़ोन पर बात हो गयी थी इसलिए अब वत्स अप्प से बात शुरू हो गयी थी.
सविता दी- ही अभी.
मैं- ही सविता डार्लिंग.
सविता दी- कैसा है तू
मैं- मैं ठीक हूँ. तुम कैसी हो.
सविता दी- ठीक hi हूँ. और घर में सब कैसे हैं.
मैं- सब ठीक हैं. क्या कर रही हो तुम.
सविता दी- कुछ नहीं बस सोने की तयारी कर रही हूँ.
Main-(shararat से)- क्यों जीजा के साथ चुदाई नहीं करनी है क्या.
सविता दी- वो हो गई और वो सो भी गए.
मैं- अच्छा. एक अच्छी सी फोटो भेजो अपनी. बड़ी जल्दी सो गए. कितने बजे शुरू हो गए थे.
दीदी ने अपनी एक बहुत hi सुन्दर सी फोटो सलवार कमीज़ में भेजी. दीदी उस फोटो में बहुत प्यारी लग रही थी. उनकी चूचियों का ऊपरी भाग थोड़ा थोड़ा नज़र आ रहा था.
सविता दी- कितने बजे क्या. अभी 15 मिनट पहले शुरू किया था. इतनी देर में इनका काम तमाम हो गया.
मैं- 15 मिनट में तुम्हारी प्यास कैसे बुझी होगी. तुम्हे तो काम से काम 1 घंटा रगड़ के चुदाई चाहिए. तब तुम्हारी प्यास बुझेगी. इसीलिए तुम बहुत छुडासी रहती हो.
सविता दी- तू फिर से शुरू हो गया. कभी तो ढंग से बात कर लिया कर.
मैं- देखो सविता मैं तो ऐसे hi बात करूँगा. और तुमको करना है बात या नहीं ये तुम डीडे करो. और एक सेक्सी और हॉट सी फोटो भेजो. जिससे मेरा लुंड खड़ा हो जाये.
सविता दी- तू बहुत बड़ा कमीना है तू कभी नहीं सुधर सकता.
इतना कहकर दीदी ने अपनी एक फोटो भेजी जिसमे दीदी की शट से उनकी चुकी का एक निप्पल दिख रहा था. उस फोटो को देखकर मेरा लुंड खड़ा हो गया.
मैं- वह सविता डार्लिंग. क्या फोटो भेजी है तुमने एकदम हॉट. मेरा तो खड़ा हो गया. और बताओ जीजा ने तुम्हारी प्यास बुझाई ठीक से या नहीं.
सविता दी- तेरा से छोड़ने के बाद अब तो पता hi नहीं चला मुझे की कब इनका हथियार अंदर गया और कब बहार आया. तूने इनके काबिल hi नहीं छोड़ा.
मैं- जीजा को कुछ आता hi नहीं की अपनी बीबी को कैसे छोड़ते हैं. तेरी छूट तो ऐसी है की उसमे दिन रत लुंड डालकर पड़ा रहना चाहिए.
सविता दी- चुप बदमाश. बहन हूँ मैं तेरी.
मैं- अच्छा सविता ब्रा में अपनी फोटो भेजो न. बड़ा मन कर रहा है तुम्हारी चूचिया देखने का.
सविता दी- तू तो बड़ा कमीना है. अपनी दीदी को बोल रहा है की अपनी चूचिया दिखा दे. शर्म कर.
मैं- अब ज्यादा नखरा मत दिखाओ यार फोटो भेजो न.
सविता दी- तू मैंने वाला तो है नहीं. अच्छा रुक भेजती हूँ.
उसके बाद दीदी ने अपनी एक फोटो ब्रा में भेजी. दीदी एकदम सज संवर कर अपनी फोटो भेज रही थी. आँखों में काजल. गलो पर हलकी लाली. होंठो पर लाल लिपस्टिक. दीदी फोटो में बहुत hi कामुक लग रही थी. मैंने दीदी से फिर कहा.
मैं- सविता ब्रा में अपनी चूचियों को बहार करके कोई फोटो भेजो बड़ा मन कर रहा है देखने का.
मेरे कहने पर सविता दीदी ने एक फोटो भेजी जिसमे उनकी दोनों घुंडीया ब्रा से बहार निकली हुई थी. मेरा लुंड दीदी का ये रूप देखकर झटके मरने लगा. मैंने दीदी से कहा.
मैं- क्या बात है सविता सच में तेरी चूचियों का कोई जवाब नहीं. एकदम ृषभरी और कदम चूचिया हैं तुम्हारी. एक और फोटो भेजो एकदम ऐडा के साथ.
मेरे कहने के कुछ देर बाद hi दीदी ने एक और फोटो भेजी. ये फोटो तो पिछली वाली फोटो से भी ज्यादा सेक्सी थी. इस फोटो में भी दीदी की दोनों घुंडीया ब्रा से बहार थी लेकिन दीदी ने एक ऐडा के साथ ये फोटो भेजी थी. जिसमे वो अपना मुंह गोल करके मुझे चिढ़ा रही थी. मेरा लुंड तो झटके खाने लगा था.
उनकी फोटो देखने के बाद मैंने दीदी से कहा.
मैं- क्या बात है सविता. इन दोनों फोटो में तू एकदम रंडी लग रही है. जैसे रंडिया सजती हैं अपने ग्राहकों को रिझाने के लिए. ठीक उसी तरह तेरी फोटो मुझे रिझा रही है. सच में तू किसी रंडी से काम नहीं है. काश मैं वह होता तो तेरी चूचियों को निचोड़ निचोड़ कर इसका सारा राश पि गया होता. एक और फोटो भेज न वो भी बिना ब्रा के.
सविता दी- बस अब बहुत हो गया. अब कुछ नहीं मिलेगा देखने को. तू फोटो देखकर गन्दी गन्दी बाते करने लगता है. अब मैं नहीं भेजने वाली कोई फोटो वोटो.
मैं- अच्छा सॉरी सविता डार्लिंग. लेकिन मैं क्या करू. तू सच में वैसी hi लग रही है उन फोटो में. अच्छा बस एक फोटो लास्ट और भेज दो.
उसके बात दीदी ने अपनी एक बिना ब्रा की फोटो भेजी. लेकिन ये फोटो उतनी अच्छी नहीं लगी मुझे जितनी अच्छी इसके पहले की दो फोटो थी. मैंने दीदी से कहा.
मैं- तुम्हारी फोटो देखकर अब मुझसे बर्दास्त नहीं हो रहा है. मैं बहुत जल्दी आने वाला हूँ तुम्हारे पास दीदी.
सविता दी- मैं इंतज़ार करुँगी पता नहीं वो दिन कब आएगा. अच्छा अब तू सो जा. गुड़ नाईट.
उसके बाए मैंने मोबाइल साइड में रख दिया.
इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
मनीषा- (मुंह बनाकर) मैं जानती थी आप सिर्फ दोनों दीदी से hi प्यार करते हैं मुझसे तो आप प्यार hi नहीं करते. ठीक है मैं भी नहीं जा रही हूँ (और मुंह फुलाकर बैठ गई)
मैं- लो अब नाराज़ हो गई तुम. अच्छा ठीक है तुम रुको मैं तैयार होकर आता हूँ.
उसको बोलकर मैं अपने कमरे में तैयार होने के लिए आ गया.
अब आगे.
मैं अपने कमरे में आकर अभी तैयार हो hi रहा था की मनीषा मेरे कमरे में आ गई. जिस समय वह कमरे में उसी समय मैं बाथरूम से सिर्फ चढी में आया था. मेरे आने पर वह उठकर जाने को हुई तो मैंने उसे बैठने के लिए बोल दिया. अब मुझे मनीषा के साथ भी थोड़ा खुलना था. इसलिए मैं उसके सामने hi कपडे पहनने लगा. वो एक तक मेरे मस्कुलर बॉडी को देखे जा रही थी. तो मैंने उससे पूछा.
मैं- क्या हुवा मनीषा ऐसे क्यों देख रही हो.
मनीषा- कसम से भैया क्या मस्त बॉडी बनाई हुई है आपने.
मैं- (मेरे मुंह से अचानक निकल gaya)Mast बॉडी तो तेरी भी है.
मेरी बात सुनकर मनीषा शर्मा गई और शरमाते हुवे मुझसे बोली.
मनीषा- क्या भइया आप भी न मेरी तंग खींच रहे हैं.
मैं- नहीं मैं सच कह रहा हूँ. सच में तेरी भी बॉडी मस्त है.
इन बातो के दौरान मनीषा लगातार मेरी बॉडी hi देख रही थी. जब मैं तैयार हो गया तो मनीषा ने कहा.
मनीषा- मेरा भाई तो बड़ा हैंडसम लग रहा है.
इतना कहकर वो मेरे गले लग गई उसके गले लगते hi उसकी तानी हुई चूचिया सीधे मेरे साइन में धंस गई. उसकी चूचियों के स्पर्श से मेरे बदन में एक सनसनी दौड़ गई तो मैंने भी उसे कसकर अपने साइन से चिपका लिया और उसकी पीठ पर हाँथ फेरने लगा. मुझे उसकी पीठ पर उसकी ब्रा स्पस्ट फील हो रही थी. फिर मैंने अपने हाँथ निचे लेजाकर अपने एक हाँथ को उसकी गांड पर ऐसे फिराया जैसे ये सब अनजाने में हुवा हो. और उससे बोलै.
मैं- अरे यार अब चलना भी है या इसी पॉश में फिल्म बनानी है.
मनीषा मेरी बात सुनकर वो मुझसे अलग हुई और शरमाते हुवे मुझसे बोली.
मनीषा- थैंक यू भैया मेरे साथ फिल्म देखने जाने के लिया.
Main-(hanste हुवे) मैं नहीं जा रहा हूँ. मुझको ले जाया जा रहा है. अब चल और जाने से पहले सरिता दी को जाकर बता दो की हम दोनों बहार जा रहे हैं.
इतना बोलकर मैं घर से बहार निकल गया. थोड़ी देर बाद मनीषा भी बहार आ गई. तो मैंने अपनी बाइक स्टार्ट की और मनीषा दोनों तरफ पेअर करके बैठ गई और मैंने बाइक आगे बढ़ा दी. थोड़ी देर बाद मैंने उससे पूछा.
मैं- अच्छा ये बताओ मनीषा. आज तुम्हारा फिल्म देखने का प्लान कैसे बन गया.
मिनिषा- वो तो मैं आपके साथ तोडा वक्त गुजरना चाहती थी इसलिए फिल्म देखने का प्लान बनाया.
मैं- लेकिन मेरे साथ क्यों. तुम्हे तो अपने दोस्तों के साथ जाना चाहिए.
मनीषा- वो इसलिए की आप अब मुझको बिलकुल भी समय नहीं देते. हर समय या तो सविता दीदी के साथ या सरिता दीदी के साथ समय बिताते हो. आप तो मुझसे प्यार भी नहीं करते आप तो अपना सारा प्यार दोनों दीदी को hi देते हो. इसीलिए मैंने आज फिल्म देखने का प्लान बनाया है.
उसकी बात सुनकर तो मेरा दिमाग hi झन्ना गया और मैंने गाड़ी रोक दी. और उसकी तरफ देखने लगा. मुझे अब लगने लगा था की इसको जरूर कुछ न कुछ पता है. लेकिन मुझे ये समझ में नहीं आ रहा था की अगर इसे कुछ पता है तो इसने मम्मी पापा को अभी तक क्यों नहीं बताया. फिर मैंने उससे कहा.
मैं- क्या मतलब है की सारा प्यार दोनों दीदी को दे रहा हूँ.
मनीषा- अरे भैया मेरे कहने का मतलब ये है की आप दोनों दीदी को ज्यादा प्यार करते हैं मेरे मुकाबले. अब गाड़ी चलाइये.
मैंने दोबारा से बाइक स्टार्ट कर दी और चल दिया. अब मनीषा मुझसे सत्कार बैठ गई जिससे उसकी चूचिया मेरी पीठ पर टकराने लगी. लेकिन मेरे ध्यान कही और था मैं इस सोच में गम था की हो न हो मनीषा कुछ न कुछ तो जरूर जानती है तभी तो कुछ दिन से इसका व्यव्हार कुछ बदला बदला लग रहा है. थोड़ी देर बाद मुझे उसने गाड़ी रोकने के लिए कहा. मैंने बाइक रोक दी और देखा तो थिएटर आ गया था. तो मैं और मनीषा बाइक पार्क करके टिकट लेने गए तो वह जुली-2 मूवी लगी हुई थी. तो मैंने उसे किसी दूसरी मूवी के लिए कहा. लेकिन वह नहीं मणि और यही मूवी देखनी है यही जिद करने लगी तो मैंने दो टिकट ली और थिएटर के अंदर आ गया.
थिएटर लगभग पूरा खली था बस इक्का दुक्का लोग hi थिएटर में बैठे थे वो भी सुप्ले. हम दोनों भी एक जगह बैठ गए. थोड़ी देर बाद फिल्म शुरू हो गई. फिल्म बहुत hi बोल्ड थी. कई जगह सेक्सी स्कीन थे. जिसे देखकर मैं गरम हो गया. मैंने मनीषा को देखा तो उसकी भी सांसे सामान्य से तेज़ चल रही थी. मैंने सोचा क्यों ने मनीषा के साथ भी तरय किया जाये. तो मैंने अपने एक हाँथ उसके गार्डन से घुमाकर उसके कंडे पर रख दिया. कंधे पर हाँथ रखने पर उसने मेरी तरफ देखा लेकिन बोली कुछ नहीं और सामने देखते हुवे फिल्म देखने लगी.
मैं अपने हाँथ से उसके कंधे को सहलाने laga.thodi देर कंधे को सहलाने के बाद मैंने अपने हाँथ उसके कंधे से सरकते हुवे उसकी चूचियों की तरफ ले जाने लगा. जिससे मनीषा की शरीर में झुरझुरी दौड़ने लगी थी. थोड़ी देर में मैंने अपने हाँथ सरकते हुवे महिषा की चूचियों पर रख दिया और अपना दूसरा हाँथ उसकी जांघ पर रख दिया और सहलाता रहा. थोड़ी देर तक उसकी जांघ और चुकी सहलाने के बाद मैंने उसकी चुकी को मुठी में भर लिया और जांघ को कपडे के ऊपर से मुट्ठी में लिया और दोनों को जोर से मसल दिया. मनीषा हलके से चीख पड़ी और मेरे दोनों हाँथ को झटक कर मुझको घूरने लगी. उसके इस बदले हुवे रूप को देखकर मैंने उससे पूछा.
मैं- क्या हुवा मनीषा.
मनीषा- मुझे आप सरिता दीदी या सविता दीदी न hi समझे तो ज्यादा अच्छा है आपके लिए.
उसकी बात सुनकर मुझे पक्का यकीं हो गया की इसको हम तीनो की रासलीला के बारे में सब पता चल गया है. ये जानकर तो मेरी हालत ख़राब हो गई. मैंने उसकी तरफ देखा तो वो फिल्म नहीं बल्कि मुझे देख रही थी उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं था. तो मैंने उसका हाँथ पकड़कर उसे बहार ले जाने लगा. वो भी चुपचाप मेरे साथ चल पड़ी. मैं उसे लेकर एक पार्क में गया और गाड़ी पार्क करके उसे अंडाल ले जाकर एक सुनसान जगह पर बैठ गया और मनीषा से कहा.
मैं- ये तुम वह क्या बोल रही थी.
मनीषा- मैंने क्या कहा. मैंने तो बस इतना hi कहा की जैसे अआप दोनों दीदियो के साथ छेड़खानी करते हैं वैसे मेरे साथ मत किया कीजिये. मुझे गुदगुदी होती है.
मैं- नहीं तुम कोई और बात कह रही थी. जो भी बात है साफ साफ कहो.
मनीषा- कोई बात नहीं है भैया. आप पता नहीं क्या क्या सोच रहे हो. मुझे गुदगुदी होती है इसलिए मैंने आपको मन किया.
मैं- पक्का कोई बात नहीं है न. अगर है तो अभी बता दे.
मनीषा- अरे मेरे बाप. कोई बात नहीं है. जो भी था बता तो दिया.
मैं- लेकिन तुम गुस्सा किस बात पर हो गाइट hi.
मनीषा- क्या कृ भैया आप मुझे गुदगुदी कर रहे था और मेरी जांघो को आपने दबा दिया. जिससे मुझे दर्द हुवा इसलिए थोड़ा गुस्सा आ गया. बस.
मैं- अच्छा चल घर चलते हैं. तूने बहुत बेकार मूवी सेलेक्ट की देखने के लिए.
मनीषा- हां भैया फिल्म वाकई बहुत ख़राब थी. वो दोस्तों ने कहा अच्छी है इसलिए देखने के लिए आई.
मैं- चल फिर अब घर चलते हैं.
उसके बाद हम दोनों घर वापस आ गए. उस दिन और कुछ खास नहीं हुवा. हम को मां पापा जॉब से घर आ गए. थोड़ी देर बाद सरिता दीदी भी आ गई और मैदान में चलने के लिए बोली. लेकिन मैंने बहाना बनाकर मन कर दिया. जिससे उनका चेहरा उतर गया. फिर रात के खाने की तयारी होने लगी. खाना खाकर मैं अपने कमरे में चला गया. थोड़ी देर बाद मेरे व्हाट्सअप पर सविता दीदी का मश्ग आया. दीदी से दिन में फ़ोन पर बात हो गयी थी इसलिए अब वत्स अप्प से बात शुरू हो गयी थी.
सविता दी- ही अभी.
मैं- ही सविता डार्लिंग.
सविता दी- कैसा है तू
मैं- मैं ठीक हूँ. तुम कैसी हो.
सविता दी- ठीक hi हूँ. और घर में सब कैसे हैं.
मैं- सब ठीक हैं. क्या कर रही हो तुम.
सविता दी- कुछ नहीं बस सोने की तयारी कर रही हूँ.
Main-(shararat से)- क्यों जीजा के साथ चुदाई नहीं करनी है क्या.
सविता दी- वो हो गई और वो सो भी गए.
मैं- अच्छा. एक अच्छी सी फोटो भेजो अपनी. बड़ी जल्दी सो गए. कितने बजे शुरू हो गए थे.
दीदी ने अपनी एक बहुत hi सुन्दर सी फोटो सलवार कमीज़ में भेजी. दीदी उस फोटो में बहुत प्यारी लग रही थी. उनकी चूचियों का ऊपरी भाग थोड़ा थोड़ा नज़र आ रहा था.
सविता दी- कितने बजे क्या. अभी 15 मिनट पहले शुरू किया था. इतनी देर में इनका काम तमाम हो गया.
मैं- 15 मिनट में तुम्हारी प्यास कैसे बुझी होगी. तुम्हे तो काम से काम 1 घंटा रगड़ के चुदाई चाहिए. तब तुम्हारी प्यास बुझेगी. इसीलिए तुम बहुत छुडासी रहती हो.
सविता दी- तू फिर से शुरू हो गया. कभी तो ढंग से बात कर लिया कर.
मैं- देखो सविता मैं तो ऐसे hi बात करूँगा. और तुमको करना है बात या नहीं ये तुम डीडे करो. और एक सेक्सी और हॉट सी फोटो भेजो. जिससे मेरा लुंड खड़ा हो जाये.
सविता दी- तू बहुत बड़ा कमीना है तू कभी नहीं सुधर सकता.
इतना कहकर दीदी ने अपनी एक फोटो भेजी जिसमे दीदी की शट से उनकी चुकी का एक निप्पल दिख रहा था. उस फोटो को देखकर मेरा लुंड खड़ा हो गया.
मैं- वह सविता डार्लिंग. क्या फोटो भेजी है तुमने एकदम हॉट. मेरा तो खड़ा हो गया. और बताओ जीजा ने तुम्हारी प्यास बुझाई ठीक से या नहीं.
सविता दी- तेरा से छोड़ने के बाद अब तो पता hi नहीं चला मुझे की कब इनका हथियार अंदर गया और कब बहार आया. तूने इनके काबिल hi नहीं छोड़ा.
मैं- जीजा को कुछ आता hi नहीं की अपनी बीबी को कैसे छोड़ते हैं. तेरी छूट तो ऐसी है की उसमे दिन रत लुंड डालकर पड़ा रहना चाहिए.
सविता दी- चुप बदमाश. बहन हूँ मैं तेरी.
मैं- अच्छा सविता ब्रा में अपनी फोटो भेजो न. बड़ा मन कर रहा है तुम्हारी चूचिया देखने का.
सविता दी- तू तो बड़ा कमीना है. अपनी दीदी को बोल रहा है की अपनी चूचिया दिखा दे. शर्म कर.
मैं- अब ज्यादा नखरा मत दिखाओ यार फोटो भेजो न.
सविता दी- तू मैंने वाला तो है नहीं. अच्छा रुक भेजती हूँ.
उसके बाद दीदी ने अपनी एक फोटो ब्रा में भेजी. दीदी एकदम सज संवर कर अपनी फोटो भेज रही थी. आँखों में काजल. गलो पर हलकी लाली. होंठो पर लाल लिपस्टिक. दीदी फोटो में बहुत hi कामुक लग रही थी. मैंने दीदी से फिर कहा.
मैं- सविता ब्रा में अपनी चूचियों को बहार करके कोई फोटो भेजो बड़ा मन कर रहा है देखने का.
मेरे कहने पर सविता दीदी ने एक फोटो भेजी जिसमे उनकी दोनों घुंडीया ब्रा से बहार निकली हुई थी. मेरा लुंड दीदी का ये रूप देखकर झटके मरने लगा. मैंने दीदी से कहा.
मैं- क्या बात है सविता सच में तेरी चूचियों का कोई जवाब नहीं. एकदम ृषभरी और कदम चूचिया हैं तुम्हारी. एक और फोटो भेजो एकदम ऐडा के साथ.
मेरे कहने के कुछ देर बाद hi दीदी ने एक और फोटो भेजी. ये फोटो तो पिछली वाली फोटो से भी ज्यादा सेक्सी थी. इस फोटो में भी दीदी की दोनों घुंडीया ब्रा से बहार थी लेकिन दीदी ने एक ऐडा के साथ ये फोटो भेजी थी. जिसमे वो अपना मुंह गोल करके मुझे चिढ़ा रही थी. मेरा लुंड तो झटके खाने लगा था.
उनकी फोटो देखने के बाद मैंने दीदी से कहा.
मैं- क्या बात है सविता. इन दोनों फोटो में तू एकदम रंडी लग रही है. जैसे रंडिया सजती हैं अपने ग्राहकों को रिझाने के लिए. ठीक उसी तरह तेरी फोटो मुझे रिझा रही है. सच में तू किसी रंडी से काम नहीं है. काश मैं वह होता तो तेरी चूचियों को निचोड़ निचोड़ कर इसका सारा राश पि गया होता. एक और फोटो भेज न वो भी बिना ब्रा के.
सविता दी- बस अब बहुत हो गया. अब कुछ नहीं मिलेगा देखने को. तू फोटो देखकर गन्दी गन्दी बाते करने लगता है. अब मैं नहीं भेजने वाली कोई फोटो वोटो.
मैं- अच्छा सॉरी सविता डार्लिंग. लेकिन मैं क्या करू. तू सच में वैसी hi लग रही है उन फोटो में. अच्छा बस एक फोटो लास्ट और भेज दो.
उसके बात दीदी ने अपनी एक बिना ब्रा की फोटो भेजी. लेकिन ये फोटो उतनी अच्छी नहीं लगी मुझे जितनी अच्छी इसके पहले की दो फोटो थी. मैंने दीदी से कहा.
मैं- तुम्हारी फोटो देखकर अब मुझसे बर्दास्त नहीं हो रहा है. मैं बहुत जल्दी आने वाला हूँ तुम्हारे पास दीदी.
सविता दी- मैं इंतज़ार करुँगी पता नहीं वो दिन कब आएगा. अच्छा अब तू सो जा. गुड़ नाईट.
उसके बाए मैंने मोबाइल साइड में रख दिया.
इसके आगे की कहानी अगले भाग में..