फिर रेखा और बड़ी बहू दोनों ने परम के लंड को चूस-चूस कर ठंडा किया। बहू ने रेखा को यह नहीं बताया कि परम किरण और उसकी माँ दोनों को चोद चुका है।
“ओह... आज बहुत मजा आया...” बड़ी बहू ने कहा, “रेखा... पहले तूने और फिर इस लंड ने मेरी चूत को खुश कर दिया...” उसने परम के लंड को सहलाया और बोली, “मैं जब तक यहाँ हूँ, मुझे चोद... जितना हो सके... और तेरे में और तेरे इस लंड में जितनी ताकत है... मेरे छेदों पर ही निकालता रह...”
रेखा ने बड़ी बहू की निप्पल को बहुत जोर से खींचा और छोड़ दिया। लेखिका फनलवर है।
“देखा ना भाभी... मैं कहती थी कि मेरे इस यार का लंड एक बार जिसकी चूत में गया... वह चूत उसकी हो जाती है... तेरे इस माल का सत्यानाश करने अब तू सामने से ही उसके लंड पर लटकेगी...”
दोनों औरतें थक गई थीं, परम भी थक गया था। तीनों एक-दूसरे से लिपटकर सो गए। परम दो मालों के बीच में था। दोनों ने एक-एक चुची उसकी छाती पर और एक-एक जाँघ उसके पैरों पर रख दी थी।
और वहाँ परम का कमरा, जो नीचे था
सेठजी कमरे में दाखिल हुए। अँधेरा था। उन्होंने लाइट जलाई और तुरंत अंदर से दरवाजा बंद कर लिया। किरण के जवान, नग्न शरीर से उनकी नजरें हट ही नहीं रही थीं।
सेठजी अपने कमरे में सुंदरी और फिर छोटी बहू का इंतजार कर रहे थे। वे लगभग आधी रात को सोने चले गए थे और अब सुबह के तीन बज चुके थे। उनकी दोनों रखैलें चुदाई के लिए नहीं आईं। उन्होंने सोचा कि शायद सुंदरी अपने घर चली गई होगी और यह सोचकर उन्हें गुस्सा आ गया कि छोटी बहू अभी भी परम से चुद रही है।
इसलिए वे उठे और परम के कमरे में आ गए।
उन्होंने देखा कि एक तरफ पाँच छोटे लड़के सो रहे हैं और दूसरी तरफ उनकी साली की इकलौती बेटी किरण नंगी सो रही है। उन्हें किरण के बगल में परम का पायजामा और कमीज़ पड़ा दिखाई दे रहा था। साफ था कि परम ने इस लड़की को भी चोदा है। परम का लंड किरण की दरार को भर चुका है।
सेठजी को आश्चर्य हुआ कि परम अपने कपड़े यहाँ छोड़कर कहाँ चला गया होगा! तभी उनकी नजर एक साड़ी पर पड़ी जो सेठजी ने रात के खाने के समय छोटी बहू के शरीर पर देखी थी।
सेठजी को यह सोचकर गुस्सा आ गया कि किरण की चुदाई करने के बाद परम छोटी बहू को चुदाई के लिए किसी दूसरे कमरे में ले गया है। लेकिन उसकी नजर जवान लड़की किरण की बिना बाल वाली, बहुत कमसिन, छोटी चूत पर पड़ी।
अपने जवानी के दिनों में सेठजी ने अपनी साली (किरण की माँ) के साथ छेड़खानी की थी, लेकिन उन्होंने उसे कभी नहीं चोदा। असल में सेठजी को किरण की माँ कभी पसंद नहीं थी क्योंकि उनका शरीर उन रंडियों की तरह आकर्षक नहीं था जिन्हें वह चोद रहे थे। फनलवर का निर्माण।
उन्होंने किरण की ओर देखा और उसके माल को देखा। किरण नंग-धड़ंग लेग्स इधर-उधर कर लेती थी। नींद में उसकी छोटी लेकिन गोल-गोल, टाइट बोबले हर साँस के साथ ऊपर-नीचे हो रही थीं।
सेठजी किरण के पास आकर खड़े हो गए। किरण की चिकनी और नन्ही चूत देखकर सेठजी का लंड फड़फड़ाने लगा। वो सुंदरी और छोटी बहू दोनों को भूल गए।
सेठजी ने अपना धोती खोला। फिर गंजी बाहर निकला।
सेठजी ने फैसला किया कि अब जो भी हो, इस लड़की, जो उनकी छोटी साली की लड़की है, को चोदेंगे जरूर। सुंदरी की गदराई मस्त जवानी सेठजी को बहुत प्यारी थी और है, लेकिन पिछले दिनों पहले छोटी बहू, फिर कल शाम को महक और आज दिन में पूनम को चोदने के बाद सेठजी को कच्ची, जवान माल ज्यादा पसंद आने लगा था। वो पहले भी कोलकाता में छोटी बहू की नौकरानी की कमसिन लड़की को चोदकर कच्ची चूतों का मजा ले चुके थे।
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बस यही तक दोस्तों।
आगे की कहानी आपके कोमेंट्स आने के बाद तुरंत।
तब तक के लिए Funlover की ओर से जय भारत।।
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