Incest Porn Kahani - EK MAA - Page 3 - SexBaba
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Incest Porn Kahani - EK MAA

अपडेट-19






तुषार का लुंड दीपा की छूट से टकराने लगा था दीपा की छूट भी फिर से गीली होने लगी थी, दीपा ने पीछे हाथ लेजाकर लुंड पकड़ लिया और उसे अपनी छूट पैर सेट किया और पीछे होने लगी, लुंड का टोपा दीपा की छूट में घुस गया, तुषार ने भी निचे से धक्का लगया पोजीशन सही नहीं थी लेकिन फिर भी आधा छूट में घुस गया, दीपा के दोनों पेअर जुड़े हुए थे जिस वजह से छूट और टाइट हो रही थी, जिससे दोनों को और मजा आ रहा था,


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दीपा- बस ऐसे hi लेता रह न, इसे अंदर डेल हुए बहुत मजा आ रहा ह

तुषार- है यार कसम से ये तो सच में बहुत मजे आ रहा ह

दोनों बिलकुल एक दूसरे से चिपक गए, तुषार के हाथ दीपा की चूचियों पैर थे,

दीपा- टुशु मेरे मन में एक बात ह

तुषार- है बताओ क्या हुआ

दीपा- मैं इस रजनी को सबक सीखना चाहती हु

तुषार- वो तो मैं भी चाहता हु पैर क्या करना ह बता

दीपा- मैं चाहती हूत ु उसे चोदे और इतना चोदे की वो जिंदगी भर चुदाई से हाथ जोड़ ले जब भी उस रंडी की छूट में आग लगे तेरी चुदाई याद आ जाये उसके घर की हर औरत को तू चोदे और अपना बच्चा पैदा करे

तुषार- क्या बोल रही ह तुम्हारी माँ ह वो

दीपा- माँ मत बोल उस रंडी को, मेरी माँ निचे सो रही ह

तुषार- अच्छा ठीक ह नहीं बोलता लेकिन तुम अपने भाई को hi किसी और को छोड़ने को बोल रही हो

दीपा- तू मेरा भाई मेरा प्यार सब कुछ ह तेरी ख़ुशी hi मेरा धर्म ह बस और तेरा लुंड एक औरत से खुश नहीं रह सकता तू जिसे चाहे जितनी चाहे औरतो को चोदे मुझे कोई ऐतराज नहीं ह बस मुझे धोका मत देना

तुषार- कैसी बात क्र रही हो मैं कभी सपने में भी नहीं सोच सकता आपको धोका देने की, आपकी इच्छा जरूर पूरी करूँगा मैं वक़्त आने दो,

दीपा- ठंकु, अच्छा ये बता तुझे सबसे अच्छा कोण लगता ह, सच बताना मुझे बुरा नहीं लगेगा

तुषार- ये कैसा सवाल हुआ मेरा पूरा परिवार hi सबसे अच्छा लगता ह

दीपा- मैंने तुझे बताया न मुझे कोई ऐतराज नहीं ह तू किसी और को भी छोड़ता ह तो, बता न, मैं सीमा रूचि या माँ सबसे अच्छी कोण ह

माँ का नाम आते hi तुषार के लुंड ने एक झटका मारा, दीपा के फेस पैर मुस्कान आ गई,

दीपा- अच्छा ये बता सबसे सूंदर बूब्स किसके ह सच बताना

तुषार- हम्म्म्म माँ के

दीपा- माँ के तो ह hi इतने बड़े, जो कपडे मैंने पहने थे वो माँ फेन ले तो कयामत लगेगी,

तुषार- है सच में यार

तुषार ने लुंड आगे धकेल दिया,

दीपा मुस्कुराते हुए, उसकी तो गांड भी काफी बड़ी ह, कितनी टाइट होगी न

तुषार जोश में आ गया और उसने दीपा की कमर पकड़ी और जोर का धक्का लगा दिया, दीपा की आह्ह्ह्ह निकल गई, तुषार उठा और दीपा के पेअर के बिच आ गया कांबले अलग पैक दिया और ताबड़तोड़ धक्के लगाने लगा, दीपा मुस्कुराते हुए मजे से अह्ह्ह्हह्ह अह्हह्ह्ह्ह छोड़ मेरे भाई छोड़, देख तेरे सामने माँ की चूचिया ह कितनी बड़ी बड़ी

तुषार ने चूचिया मुँह में भर ली और धक्के लगाने लगा,


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दीपा- aahhhhhhhhhhh चूस ने पि ले माँ का दूध निचोड़ ले अहहहहहहह तेरा लुंड ऊऊफफफफफफफफफ कितना प्यारा ह ाहः

अगले 20 मिनट्स तुषार ऐसे hi छोड़ता रहा, दीपा भी मजे लेकर चुदती रही, तुषार जब झड़ने को हुआ तो वो लुंड बहार तो निकल पाया लेकिन दीपा को मौका नहीं मिला लुंड तक पहुंचने का तुषार ने दीपा के पेट पैर अपन अमाल गिरा दिया, और साइड में लेट गया, दीपा मुस्कुराती हुई अपने हाथो से तुषार का रास चाटने लगी,

तुषार ने दीपा को रास चाट ते हुए देखा

तुषार- दीदी क्या तुम्हे ये इतना पसंद ह

दीपा- है टुशु मेरे अंदर लुंड का रास पिने की इतनी बुरु आदत लग गई ह की मैं खुद को रोक ह नहीं पति,

तुषार- इससे कोई नुकसान तो नहीं ह न

दीपा- नहीं रे बिलकुल नहीं

फिर तुषार उठा और खुद को साफ़ करके आया फिर दीपा गई, फिर दोनों ऐसे hi लेट गए कांबले ओढ़ क्र,

दीपा- मजा आया न

तुषार- है बहुत मजा आया

दीपा- माँ की चूचियों के बारे में सोच क्र मेरी चुकी उखाड़ने वाला तहत ु

तुषार- दीदी आप भी न

दीपा- शर्मा क्यों रहा ह जब बहन को छोड़ सकता ह तो माँ को छोड़ने में क्या बुराई ह मुझे पता ह तुझे माँ बहुत पसंद ह

तुषार- ऐसी कोई बात नहीं ह

दीपा- फिर माँ का नाम सुनते hi तेरा ये खड़ा क्यों हो जाता ह

तुषार- वो तो ऐसे hi बस

दीपा- मुझसे झूट बोलेगा तुझे पता ह न मुझसे कोई झूट नहीं बोल सकता

तुषार- अब क्या बताऊ अच्छा बाबा है माँ मुझे पसंद ह बहुत पसंद ह इतनी पसंद की शायद दुनिया में उनके अलावा और कुछ नहीं

दीपा- हे मेरा भाई तो ासिक हो गया ह अपनी माँ का बेशरम

तुषार- देखो इसी लिए नहीं बता रहा था

दीपा- अरे मजाक क्र रही थी, मुझे ख़ुशी ह की तू माँ को पसंद करता ह हमारा परिवार ऐसा hi ह और माँ को भी जरुरत ह पापा का तुझे पता hi ह वो बेचारी कब से प्यासी होंगी, हम तो मजे ले रहे ह लेकिन उनका क्या उन्हें भी ये सुच चाहिए, और मुझ ेलगता हवा भी तुझे वैसा hi प्यार करती हैं, बस माँ ह इसलिए आगे नहीं बढ़ सकती

तुषार- मैंने कैसे बधु आगे मुझे समझ नहीं आता उनके पास जाता हु तो लुंड खड़ा हो जाता ह उन्हें भी अहसास हो जाता ह की मेरा लुंड खड़ा ह वो मुझ ेकुछ नहीं खेती फिर भी मेरी हिम्मत नहीं होती आगे बढ़ने की

दीपा- अगर वो तुझे कुछ नहीं खेती तो समझ जा वो तैयार ह तुझे hi आगे बढ़ना पड़ेगा मेरे भाई हिम्मत दिखा उन्हें वो ख़ुशी दे दे, बहुत दुःख देखे ह हमारी माँ ने

तुषार- अब उन्हें दुःख नहीं होने दूंगा मैं साडी खुशिया दूंगा उन्हें इस दुनिया की साडी खुशिया दूंगा मैं

दीपा- हम सब मिलकर देंगे

दीपा ने तुषार को बहो में भर लिया

तुषार- अब मैं चलता हु बहुत देर हो गई देखो 1 बज रहा ह

दीपा- थोड़ी दे रेज hi लेता रह न बड़ा सकूं मिल रहा ह

तुषार लेट गया दोनों ऐसे hi नंगे एक दूसरे से चिपके चलते रहे, ठण्ड में निवास आते hi थकन की वजह से दोनों सो गए, सुबह 4 बजे तुषार की आँख खुली तो उसका लुंड अभी भी खड़ा था दीपा की जांघो के बिच फसा हुआ था, तुषार मुस्कुराया और दीपा को किश किया और उस पैर कांबले डाला फिर अंडरवियर पहना और बाकि कपडे ऐसे hi हाथ में लिए और निचे अपने रूम में आ गया,

उसे बहुत तेज टॉयलेट आ रहा था, वो बाथरूम की तरफ भगा जैसे hi उसने दरवाजा खोला उसकी आँख मुँह गांड सब फटी रह गई, उसके सामने नजारा hi ऐसा था,


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सामने अंजलि ब्रा पंतय में कड़ी थी, वैसे तो तुषार ने बचपन से अंजलि को ऐसी रूप में देखा था कपडे बदलते देखा था लेकिन अब सब कुछ बदल चुक्का था अब तुषार की नजर में अंजलि सिर्फ माँ नहीं थी वो उसमे एक औरत को अपने प्रेमिका को देखता था, वही अंजलि का नजरिया भी बिलकुल बदल चुक्का था,

उसकी नजर तुषार पैर गई और दूसरी नजर सीधे उसके लुंड पैर गई जो एक दम तना खड़ा था अंडर वियर में से,


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अंजलि की तो साँस hi अटक गाइट hi, दोनों बस एक दूसरे क घूरे जा रहे थे, तुषार को समझ नहीं आ रहा था क्या करे अंजलि भी बिना कुछ बोले कड़ी थी,

तुषार के दिमाग में दीपा की बाते हतोड़े की तरह बज रही थी, की माँ बहुत प्यासी ह बहुत तकलीफ में ह वो मन नहीं करेगी वो भी पसंद करती ह, तुझे हिम्मत करनी होगी तुझे हिम्मत करनी होगी,

तुषार आगे बढ़ता गया अंजलि बस उसे देखे जा रही थी, तुषार ने अंजलि कमर में हाथ डाला और अपनी तरफ खींचा, अंजलि की भरी भरी चूचिया तुषार के सीने से टकरा गई, तुषार का लुंड अंजलि के पेट पैर रगड़ रहा था, तुषार ने कास क्र अंजलि को खुद से भींच लिया और अपने हॉट अंजलि के होतो पैर रख दिए, अंजलि एक दम शॉकेड और शांत कड़ी थी उसने कोई हरकत नहीं की थी, तुषार बस अंजलि के हॉट चूमे जा रहा था, अंजलि ने एक बार भी अपनी तरफ से कुछ नहीं किया था,


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तुषार ने जोश में अंजलि के हॉट काट लिया और उसकी चुकी जोर से भींच दी, अंजलि ने तुषार को धकेला और एक जोर दर थपड तुषार के गाल पैर जड़ दिया, थपड इतना जोर डार्ट है की पूरा बाथरूम गूंज उठा, तुषार जिसे बहुत तेज मूत आया हुआ था जो अंजलि को देख क्र हवस में बदल गया था, थपड लगते hi हवस उतर गई और तुषार ने अंडरवियर में hi मूत दिया,

वो इतना दर गया था की उसकी आँखों से आंसू और लुंड से मूत निकल गया था, अंजलि ने देखा तुषार को अंडरवियर में hi मूत ते हुए तो वो बहार चली गई, तुषार कुछ देर वही खड़ा रहा उसे समझ hi नहीं आ रहा था ये क्या हुआ माँ तो उसे सपोर्ट करती थी उसे कभी नहीं रोकती थी फिर आज ऐसा क्यों किया,

फिर उसने अंडर वियर निकला और नहाया फिर अपने कमरे में आकर कपडे पहन क्र लेट गया, वो बहुत डरा हुआ था उसे बहुत पछतावा हो रहा था की उसने ऐसा क्यों किया, उसे ऐसा नहीं करना चाहिए था, वो रोटा था और रट रट सो गया, उधर अंजलि की आँखों में भी आंसू थे, वो बहार के कॉमन बाथरूम में गई और शावर चला क्र बहुत देर तक ठन्डे पानी में नहाती रही और रोटी रही,

क्यों रो रही थी ये तो अंजलि hi बता सकती थी, वो तो तुषार के साथ खुश थी उसके साथ गरम हो जाती थी फिर आज क्या हुआ आज वो तुषार को देख क्र मोहित हो गाइट hi खुद उसमे खो गाइट hi फिर उसने तुषार को थपड क्यों मारा?

अगले दिन दीपा भी देर से उठी लेकिन आज अंजलि ने कोई धयान नहीं दिया वो तो बिना कुछ खाये पिए घर से जल्दी निकल गई, ये बाकि सभी के लिए बड़ा अजीब था अंजलि ने आज से पहले ऐसा नहीं किया था

रूचि- ये आज माँ को क्या हुआ खुद भी नाश्ता नहीं किया किसी को उठाया भी नहीं इतनी जल्दी चली गई, पापा कुछ बात हुई ह क्या

राजेश- नहीं बीटा रात तो ठीक थी सुबह नहाने गई थी फिर बाहर वाले बाथरूम में चली गई पता नहीं क्यों, मैंने उससे पूछा भी नहीं

रूचि- ठीक पापा आप नाश्ता कीजिये आपको देर हो रही होगी

राजेश नाश्ता करके चला गया

रूचि- ये दीपा और टुशु नहीं उठे अभी तक क्या बात ह आज का दिन कुछ अजीब ह पहेली बार दीपा उठने में लेट हुई ह माँ पहेली बार ऐसे घर से गई ह,

सीमा- कोई बात नहीं तू नाश्ता लगा मैं दीपा को लती हु

सीमा को पता था दीपा क्यों नहीं उठी लेकिन अंजलि ऐसे क्यों गई उसे नहीं पता था

सीमा दीपा के रूम में गई तो डीप आठ चुकी थी बीएस नाहा क्र बहार आई थी,

सीमा- क्यों ऋ कामिनी पूरी रात hi चूड़ी ह क्या जो अब तक नहीं उठी

दीपा- शर्म क्र लिया करो थोड़ी सी सुबह सुबह hi चुदाई की धुन चढ़ जाती ह तुझे

सीमा- अच्छा खुद बिना बताये पूरी रात लुंड से खेलती ह और मुझे ज्ञान दे रही ह

दीपा- है चूड़ी थी दो बार चूड़ी और बताओ और सुन्ना ह कुछ

सीमा- बाद में सुनूंगी पहले निचे चल जल्दी रूचि शोर मचा रही ह उस लोमड़ी का दिमाग तेज दौड़ता ह बहुत उससे छुपा क्र रखो ऐसी बाते वर्ण नोच खायेगी

दीपा- है है चलो

तब तक रूचि तुषार को उठाने गई, उसने जैसे hi कम्बल हटाया रूचि के फेस पैर दुनिया का सारा दर्द उभर आया, तुषार के फेस पैर आंसू सुच क्र लाइन बना चुके थे ऐसी लाइन तभी बनती ह जब कोई बहुत रोया हो, तुसाहर का फेस देखते hi रूचि खुद को सम्हाल नहीं पाई और रोने लगी, उसका आंसू तुषार के फेस पैर गिरा तो तुषार की आँखे खुल गई, आँख खुलते hi सामने रूचि वो भी आँख में आंसू लिए तुषार का तो दिमाग hi घूम गया,

तुषार- क्या हुआ रूचि क्या हुआ रो क्यों रही ह किसी ने कुछ कहा क्या हुआ

तुषार की आवाज इतनी तेज थी की सीमा और दीपा के कानो तक भी पहुंच गई, दोनों तेजी से उस तरफ भागी,

रूचि को रोटा देख दोनों घबरा गई,

क्या हुआ रूचि क्या हुआ बता बहन तू तो ठीक थी रो क्यों रही ह,

रूचि शांत हुई, आपको मेरा रोना दिख रहा ह लेकिन इसका चेरा नहीं दिख रहा ये क्यों रो रहा था

दोनों की नजर तुषार के फेस पैर गई दोनों को लगा रात में न सोने क वजह से आँखे सूज रही ह ,

दीपा- अरे वॉक अहा रो रहा ह रात को मुझसे बात क्र रहा था इसलिए आँखे सूज रही ह

तुषार- है रूचि देर से सोने की वजह से आँखे सूज सी गई ह

रूचि- ख़बरदार जो मुझसे झूट बोलै तो मैं तेरी रूह तक को पहचानती हूत ु कब खुश होता ह कब दुखी मैं सब जानती हु जल्दी से बता क्या बात ह वर्ण माँ खुद पूछेगी

तुषार- नहीं नहीं माँ को मत बताना

तुषार के ऐसे घबराते hi तीनो बहन समझ गई रूचि का शक सही ह वो रोया ह और छुपा रहा ह

सीमा- टुशु क्या हुआ दीपा पानी लाना जल्दी

दीपा दौड़ क्र पानी ले आई

ले पानी पि आराम से बैठ और बता क्या हुआ

तुषार की समझ में कुछ नहीं आ रहा था क्या बोले वो कुछ देर खामोश रहा

तीनो उससे पूछे hi जार hi थी, मज़बूरी में तुषार को कहानी बनाने पड़ी

तुषार- वो रात को लेते लेते मुझे पापा की कहानी याद आ गाइट hi फिर माँ की वो 16 साल की आगे में प्रग्नेंट होकर भागना याद आ गया माँ पापा की तकलीफ से दिल भर आया और आंसू भेने लगे, बस खुद को कोस्टा रहा मैं कितना लचर हु जो उनके लिए कुछ नहीं क्र पाया,

तीनो बहेनो ने एक साथ तुषार को गले से लगा लिया,

सीमा- तू कभी आंसू मत बहाना वर्ण हमारी जान निकल जाएगी

दीपा- है भाई सचिन और कपिल भी हमारे भाई ह लेकिन जितना प्यार हम तुझसे करती ह शायद किसी और से करे इसलिए तू दुखी होता ह तो बहुत तकलीफ होती ह

रूचि- अगर आज के बाद तू रोया तो मैं पता नहीं क्या क्र जाउंगी ख़बरदार जो तेरी आँखों में आंसू आये तो हम क्यों रोयेंगे, रोयेंग तो वो लोग जिन्होंने गलत किया ह और हम उन्हें ऐसा रुलायेंगे वो जिंदगी भर पछतायेंगे उन्होंने हमारे माँ बाप के साथ ऐसा क्यों किया,

सीमा हम किसी को नहीं छोड़ेंगे, न hi उन्हें जिन्होंने माँ के साथ गलत किया ह हम उन्हें ढूंढ लेंगे चाहे कही भी घुसे हो

दीपा- न hi उस यश ठाकुर को न hi उस रजनी को उन्होंने हमारे पापा के साथ जो किया ह उसके लिए वो बहुत पछतायेंगे

रूचि- सही कहा कोई नहीं बचेगा तू चिंता मत क्र हम किसी को नहीं बख्शेंगे टुशु

दीपा- इसमें एक इंसान और ऐड हो गया ह

सीमा- कोण

दीपा ने उस रात वाली बात सबको बताई जिस रात अजय अजनाली के घर आया था

रूचि- तूने पहले क्यों नहीं बता बेवकूफ हो सकता ह वही पहेली कड़ी बन जाता माँ का पास्ट जानने में

दीपा- रात को कैसे बताती फिर हम यहाँ आ गए तो भूल गई

तुषार- आपने कुछ और देखा

दीपा- नहीं बस उसके पास रेड कार थी ****** वाली

रूचि- रेड कार हमारे गाओं में किस किस के पास ह

तुषार- ठाकुरो के पास

रूचि- फिर वही हो सकता ह मेरा शक सही हो सकता ह मुझे पूरा विश्वास ह वो hi होगा

तुषार- कोण रूचि कोण किस पैर शक ह तुझे

रूचि- अजय ठाकुर पैर

सीमा- क्यों उस पैर क्यों शक ह तुझे वो तो यहाँ रहता भी नहीं ह

रूचि- वो अब यहाँ नहीं रहता लेकिन पहले तो रहता था न, और जिस तरह से वो उस दिन माँ को मुस्कुराता हुआ देख रहा था और माँ उससे नजर चुरा रही थी, वो बड़ा अजीब था मैंने माँ को आज तक नजर चुराते नहीं देखा ह किसी से भी चाहे वो कितना भी बड़ा जिमिदार क्यों न हो

सीमा- बात में दम ह इसकी, इस लोमड़ी का दिमाग अगर कह रहा ह तो कुछ न कुछ लिंक तो होगा hi लेकिन पता कैसे चलेगा,

रूचि- चल जायेगा वो भी चल जायेगा लेकिन अब थोड़े तरीके से काम करो सब

दीपा- आप hi बता दीजिये हमारी लीडर जी कैसे काम करे कहा से करे

तुषार- दीदी मजाक नहीं वो सही कहे रही ह, बोल रूचि

रूचि- सीमा दी आप ऑफिस से जुड़ क्र जल्दी से जल्दी चोपड़ा की हिस्ट्री निकालो और दीपा तू इस रजनी की थोड़ी डिटेल इखट्टी कर, सजा तो इसे भी मिलेगी और टुशु तू पता क्र कामिनी बुआ का वो कहा ह

सीमा- कामिनी बुआ वो क्यों

रूचि- दीदी आप सबसे बड़ी होकर भी बिलकुल बावली हो

सीमा- है है हु बावली

रूचि- गुस्सा मत करो समझो, पापा की एक तकलीफ उनकी बहन भी ह जो उनसे दूर हो गई ह याद ह रक्षा बंधन पैर वो दही थे और माँ बोल रही थी सब ठीक हो जायेगा,

तुषार- है सही बोल रही ह मैं करता हु उनके बारे में पता करने की कोशिश करूँगा

दीपा- लेकिन बुआ अब वापस क्यों आएगी वो अपने परिवार में सुखी होगी न

रूचि- मैं उन्हें यहाँ बुलाने के लिए इन्ही धुंध रही

सीमा- फिर

रूचि- मेरे माँ बाप को दर्द देने वाले हर इंसान को सजा मिलेगी दी हर इंसान को, चाहे उसमे कोई भी हो बुआ को भी सजा मिलेगी अगर वो सुधर गई और पापा ने उन्हें माफ़ क्र दिया तो ठीक ह वर्ण उनकी सजा भी वैसी hi होगी जैसी गलती होगी

सीमा- तू बड़ी खतरनाक होती जा रही ह तू कितनी हसमुख सी प्यारी गुडिअ थी, अब तू कितनी खतरनाक बाते करने लगी ह

रूचि- मुझे अपना परिवार सबसे प्यारा ह, जब मैंने पापा की कहानी सुनी मेरे अंदर की ख़ुशी वही मर गई बस एक तकलीफ एक दर्द ने जगह ले ली और ये दर्द तब तक काम नहीं होगा जब तक सभी गुन्हेगार को सजा न दे दू

तुषार- तू चिंता मत क्र हम सब साथ ह जल्दी सब ठीक क्र देंगे

फिर सब उठ गए नाश्ता किया आज कॉलेज कोई नहीं गया, बस सब ये hi प्लानिंग करते रहे की जानकारी कहा से मिलेगी पहेली जानकारी सबसे जरुरी थी उससे आगे तभी बढ़ा जा सकता था,

सीमा के लिए तो रास्ता खुल गया था लेकिन दीपा को रजनी का गाओं पता करना था ो किस्से पूछे और तुषार को उस आदमी का पता करना था जिसके साथ कामिनी भागी थी वो तो काम करने आया था वह, उसे कैसे ढूंढे,

वही आज अंजलि बहुत दुखी थी अपने सबसे प्यारे bête पैर हाथ उठा क्र वो बहुत दुखी थी, या तुषार की हरकत से दुखी थी, उसे समझ नहीं आ रहा था, उसका क्लास में भी मन नहीं लग रहा था जैसे तैसे वो स्कूल में बैठी थी, लेकिन उससे बर्दास्त नहीं हो रहा था, तो उसने स्कूल से छुट्टी ली और निकल चली और पार्क में जाकर बैठ गई, वो बहुत देर तक वही बैठी रही, उसका घर जाने का मन नहीं क्र रहा था, लेकिन घर तो जाना hi था ो उठी और चल दी पैदल hi वो चले जार hi थी, लगभग अँधेरा सा होने लगा था सर्दी थी तो अँधेरा जल्दी हो जाता था,

काफी देर चलते हुए अंजलि को लगा कोई उसका पीछा क्र रहा ह, पहले तो अंजलि को वहां लगा लेकिन जब उसने धयान दिया तो सच में एक आदमी उसका पीछा क्र रहा था, अंजलि ने वह से निकलना hi भीतर समझा वैसे उसका घर ज्यादा दूर नहीं रहा था फिर भी उसने ऑटो पकड़ा और उसमे बैठ क्र निकल गई, वो आदमी ऑटो के पीछे दौड़ने लगा, लेकिन ऑटो तेज था निकल गया, अंजलि ने होतु अपने घर के सामने नहीं रुकवाया बल्कि उससे 4 कम आगे रुकवाया और वही कुछ देर बैठ गई और सड़क पैर धयान देने लगी वो इंसान यहाँ तो नहीं ह, जब सब कुछ नार्मल लगा तो उसने वापस होतु पकड़ लिया घर के लिए,

इस बार भी वो घर से थोड़ा पीछे उत्तरी और चारो तरफ नजर डोडा क्र आगे बढ़ने लगी वो थोड़ा घूम क्र गर के पीछे वाली गलियों में घूम क्र घर में आई, थोड़ी घबराई हुई थी, राजेश भी आ गया था सभी परेसाहन थे आज दिन अंजलि के लिए सुबह से अब तक बुरा hi था, सब टेंशन में थे, तुषार को लग रहा था की ये सब उसकी वजह से हुआ ह क्योकि सीमा ने बता दिया था की अंजलि सुबह भी अजीब बेहवे करके गाइट hi और अभी ताका आई नहीं,

पूरा परिवार घर के बहार hi खड़ा इंतजार क्र रहा था, सब घबराये हुए थे और तुषार की आँखों में आंसू थे, अंजलि घर पहुंची और पहुंचते hi डाटा लगा दी,

बहार क्यों खड़े हो सब अंदर चलो, अंदर आते hi दूर बंद क्र दिया,

राजेश- क्या हुआ अंजलि कहा रह गई थी सब परेशां हो रहे थे

अंजलि- सीमा पानी ला

सीमा दौड़ क्र पानी ले आई

अंजलि ने पानी पिया

अंजलि- वो स्कूल के ट्रस्टी के घर एक प्रोग्राम था तो वह जाना पड़ा सभी को इसलिए देर हो गई

रूचि- माँ आप िनी घबराई हुई सी क्यों हो

अंजलि- कुछ नहीं वो रात में मुझे जगह दिखाई नहीं दी तो ऑटो वाले ने आगे उतर दिया तो वह से पैदल आई हु रस्ते में कुत्ता पीछे पद गया

अंजलि बता तो रही थी लेकिन तुषार और रूचि का मन नहीं मन रहा था तुषार को यकीन था अंजलि उसकी वजह से नहीं आई और रूचि को शक था कुछ और बात ह

लेकिन सब शांत रहे फिर अंजलि फ्रेश हुई और अपने hi रूम में खाना खा लिया, जिससे तुषार के सामने न आना पड़े, वही अंजलि का दिमाग ख़राब हो रहा था कोण हो सकता ह उसके पीछे, उसने राजेश को बता दिया की कोई उसका पीछा क्र रहा था, राजेश ने सलाह दी की कुछ दिन घर पैर रहे बहार दिखा न दे कही कोई उसका एड्रेस ढूंढ रहा हो.

रात को अंजलि और तुषार दोनों की नींद गया थी, लेकिन तुम कितने भी परेशां हो नींद तो आ hi जाती ह, तो दोनों सो गए,

अगले दिन अंजलि स्कूल नहीं गई और सभी को घर रहने के लिए बोलै बस राजेश गया अपने काम पैर वो भी सम्हालते हुए,

तुषार और अंजलि एक दूसरे के सामने आने से बचते रहे, वही अंजलि के घर पैर रुकने से सबका प्लान खराब हो गया जेकरि इकठा करने का, तुषार को गयम की सफाई करने जाना था लेकिन अंजलि से कैसे कहे इसलिए चुप रह गया, पूरा दिन ऐसे hi काट गया, बाकि सब तो नार्मल थे लेकिन रूचि के दिमाग के घोड़े दौड़ रहे थे, उसे लग रहा था जरूर कुछ बात ह माँ सबसे कुछ छुपा रही ह,

अगले दिन संडे था तो तुषार ने सीमा से कहा की उसे गयम क सफाई करने जाना ह क्योकि वो कल नहीं गया था तो आज जाना होगा लेकिन माँ जाने नहीं देगी,

सीमा- तू जा मैं सम्हाल लुंगी

तुषार निकल गया अंजलि को बिना बताये, जब अंजलि को पता चला तो उसने बहुत गुस्सा किया, आज पहेली बार था जब अंजलि ने इतना गुस्सा किया था वो भी इतनी छोटी सी बात पैर सीमा के समझने पैर भी वोन hi समझी थी, राजेश ने उसे शांत किया,

राजेश- क्या हुआ ह तुम्हे इतनी गुस्से में क्यों हो

अंजलि- मुझे चिंता ह वो बहार गया ह कही उसके पीछे वो आदमी न लग जाये

राजेश- वो बच्चा नहीं ह उसे सही गलत पता ह

अंजलि- मैं जानती हु वो बच्चा नहीं ह लेकिन माँ के लिए तो बच्चा hi रहेगा न, अब ये भी तो नहीं पता की वॉक ों था किसने भेजा उसे

राजेश- क्या उसके दर से तुम हमेशा घर में छुपी रहोगी, तुम तो ऐसी नहीं हो जो ऐसे डार्क र चुप जाओगी, तुम्हारी वजह से तो मेरेऔर बचो की हिम्मत बढ़ जाती ह तुम ऐसे दर जाओगी तो बच्चो पैर भी गलत असर पड़ेगा

राजेश की बात को समझते हुए अंजलि ने खुद को सम्हाला नहीं डरूंगी जो होगा देखा जायेगा,



तुषार जल्दी hi वापस आ गया, अंजलि ने को तसली हुई लेकिन वो बोली नहीं, तुषार भी चुप चाप अपने कमरे में चला गया,
 
अपडेट-20






अगले दिन सीमा का पहला दिन था ऑफिस का तो वो ड्रेस नहीं ढूंढ प् रही थी क्या पहने वैसे तो उसके पास ज्यादा कुछ था भी नहीं लेकिन आज तो उसे कुछ अच्छा पहनना था, तो अंजलि ने उसे अपना एक सूट दिया जो वो स्कूल जाने के लिए फेंटी थी, सूट का गाला काफी बड़ा था अंजलि ने ये किसी पार्टी वगेरा के लिए बनवाया था ताकि वाओ अहा के बड़े लोगो में अजीब न लगे, सीमा उस सूट में बड़ी खूबसूरत लग रही थी उसकी चूचिया बहार को झांक रही थी,


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सीमा- माँ इसमें तो ये दिख रही ह

अंजलि- तो क्या हुआ तेरे पास इतनी खूबसूरत ह तो दिखने दे

सीमा- माँ अजीब सा लगेगा

अंजलि- तू बहार निकल रही ह थोड़ा कॉन्फिडेंस रख और जो लड़किया दबे भींचे कपड़ो में रहती ह लोग उन्हें और दबा देते ह, मैं अंग प्रदर्शन करने को नहीं बोल रही लेकिन किसी को ये मत दिखाओ की ये अंग तुम्हारी कमजोरी ह वर्ण सब इसी कमजोरी पैर वॉर करेंगे,

सीमा- समझ गई माँ बस पहेली बार किस के सामने ऐसे कपडे पहन रही हु तो इसलिए अजीब लग रहा ह

अंजलि- आगे तुझे और भी सेक्सी कपडे पहनने पड़ेंगे हम गाओं में थे तो वह के हिसाब से हमारे कपडे अच्छी थे लेकिन अब तू जिस दुनिया में कदम रख रही ह वह के हिसाब से बदलना सिख ले वर्ण भड़ में पीछे रह जाएगी,

सीमा- जी माँ आशीर्वाद दो मैं सब अच्छे से क्र पाव

अंजलि- मेरा आशीर्वाद हमेशा तुम सबके साथ ह,

फिर सभी अपने अपनी मंजिल की तरफ चले गए,

ऑफिस में पहुंचते hi राहुल ने सीमा का स्वागत किया,

राहुल- आज तुम और अच्छे लग रही हो

सीमा- ठंकु सर

राहुल- आज से तुम जूही के साथ hi बैठोगी और उसके काम को ऑब्सेर्वे करोगी

सीमा- जी सर

सीमा जूही के पास चली गई

जूही- आओ सीमा बैठो अच्छी लग रही हो

सीमा- ठंकु मम

जूही- अरे यार मुझे मम मत बोलो एक तो हमारी आगे में बहुत ज्यादा अंतर नहीं ह दूसरा मैंतुम्हेँ पोस्ट में भी बड़ी नहीं हु, दोस्त बन क्र रहते ह न

सीमा- ok फ्रेंड्स

जूही- तो आज कुछ काम नहीं बस इंट्रो करते ह और मैं तुम्हे पूरा ऑफिस घूमती हु

फिर दोनों ने एक दूसरे के बारे में जाना और जूही ने सीमा को ऑफिस दिखाया

वही तुषार कामिनी की खोज में लग गया था लेकिन कहा से शुरू करे समझ नहीं आ रहा था, दीपा को भी रास्ता नहीं मिल रहा था, वही अंजलि घर से निकलते और घर आते टाइम बड़ी चोक्कणी रहती थी,

ऐसे hi 1 वीक निकल गया किसी को कोई जानकारी नहीं मिली, सीमा ऑफिस में थोड़ी दरी हुई सी थी उसकी हिम्मत hi नहीं हो रही थी कुछ पूछ पाने की, तुषार और दीपा भी लगे हुए थे लेकिन किस्से पूछे समझ नहीं आ रहा था,

लेकिन जब सच्चे मैं से कुछ जानना चाहो तो मिल hi जाता ह, एक दिन दीपा को रजनी दिखाई दी, दीपा ने सोचा वो उसका पीछा करके पता करेगी वो कहा जार hi ह, रजनी एक बस में चढ़ गई दीपा भी उसके पीछे बस में बैठ गई सर्दी थी तो दीपा ने अपना मुँह अच्छे से कवर क्र लिया था ो रजनी के पीछे hi कड़ी हो गई,

रजनी ने वह से 10 कम दूर रोड पैर पड़ने वाले गाओं का टिकट लिया, दीपा को इतना पता चल चुक्का था रजनी कहा से आती ह तो वो अगले hi स्टॉप पैर उतर गई, दीपा को तो कामयाभी मिली, घर आकर उसने सभी को बताया,

सीमा- लेकिन हम पता कैसे करेंगे उसके बारे में वह जायेगा कोण रजनी हम सभी को जानती ह उसने हमे देख लिया तो पहचान जाएगी

रूचि- यहाँ के 15 कम दूर तक के सभी गाओं के बच्चे इसी कसबे के स्कूल कॉलेज में आते ह, तो उस गाओं के बच्चे भी हम लोगो के कॉलेज में आते होंगे बस हमे किसी को ढूंढ़ना ह और उससे दोस्ती करनी ह,

तुषार- मैं कल स्कूल में पता करूँगा

अगला दिन सबने इसी कोशिश में निकल दिया, और कामयाभी भी मिल गई तुषार के स्कूल में कुछ बच्चे आते थे उस गाओं से एक लड़का था अमन जो तुषार की क्लास में hi था, तुषार ने आज पहेली बार उससे बात चित की और हलकी सी दोस्ती की शुरुआत की,

ये चारो भाई बहन ज्यादा किसी से दोस्ती नहीं करते थे, लेकिन अब दोस्ती का समय आ चुक्का था, तुषार ने अगले 4 दिन में उससे अच्छी दोस्ती क्र लिट् hi, उससे उसके गाओं के बारे में जानने लगा,

तुषार- यार तेरे गाओं इतनी दूर ह तेरे साथ और कोई नहीं आता

अमन- यार हमारे गाओं से हम 5 बच्चे आते ह यहाँ

तुषार- तू तो पुरे गाओं को जनता होगा

अमन- है लगभग सभी को

तुषार- अच्छा तुम्हारे गाओं में कोई रजनी नाम की औरत भी रहती ह क्या

अमन- रजनी रजनी आगे क्या होगी

तुषार- यही कोई 45 के आस पास

अमन- इस आगे की एक hi रजनी ह गाओं में, दुहेजिया ह वो

तुषार- दुहेजिया मतलब

अमन- अरे उसकी दूसरी शादी हुई ह पहला पति मर गया था उसका हमारे गाओं के एक लड़के ने उससे शादी क्र ली मतलब भगा क्र ले आया लोग तो ये कहते ह

तुषार समझ गया ये वही रजनी ह अच्छा

अमन- लेकिन तू कैसे जनता ह,

Tushar-are वो हमारे गाओं की थी,

अमन- अच्छा, उसकी बेटी पढ़ती ह हुए hi स्कूल में हमारे hi साथ आती ह वो

तुषार की आँखों में चमक आ गई, कोण

अमन- अरे 12तह में ह न शाक्षी


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तुषार- अच्छा अच्छा, यार ये बात रजनी या शाक्षी को पता न चले मैं उनके बारे में पूछ रहा था

अमन- क्यों

तुषार- यार वो लोग अपने अतीत से दूर वह अपनी जिंदगी जे रहे ह अगर उन्हें पता चला की उनके पुराने गाओं से कोई उनके बारे में पूछ रहा था तो घबरा जायेंगे

आमना- सही बोल रहा ह तू

तुषार ने घर आकर सबको बताया तो

दीपा- बस पहला दुसमन रजनी का hi इलाज करते ह तू उस शाक्षी को पता

रूचि- लेकिन उसमे शाक्षी की क्या गलती ह

दीपा- हमारी क्या गलती थी

रूचि चुप हो गई,

प्लानिंग शुरू हो गई तुषार को कोई आईडिया नहीं था किसी लड़की को कैसे पतये, लेकिन उस बेवकूफ को खुद hi नहीं पता था उस पैर कितनी लड़किया मरती ह उसने कभी किसी लड़की पैर धयान hi नहीं दिया था, इसलिए लड़किया ज्यादा hi दीवानी थी उसकी लेकिन उससे कहते हुए डर्टी थी,

इस बिच तुषार दीपा और सीमा के बिच कोई चुदाई नहीं हुई थी सबका दिमाग बस अपने दुश्मनो पैर था, अंजलि और तुषार की बात चित बंद थी जिसे दोनों ऐसे सम्हाल रहे थे की किसी को शक hi नहीं हुआ, क्योकि अब सबके घर आने की टाइमिंग देर से हो गई थी, लेकिन तुषार और अंजलि अंदर से बहुत दुखी थे, तुषार की माफ़ी मांगने की हिम्मत hi नहीं हो रही थी,

वही तुषार शाक्षी के करीब आने की कोशिश में भी जुट गया था, बहुत बार 11तह और 12तह को एक साथ बैठा दिया जाता था जो पहले भी होता था लेकिन तब तुषार को फरक नहीं पड़ता था लेकिन अब उसे शाक्षी के करीब जाना था इसलिए फायदा उठता था, वो कोशिश करता शाक्षी के पास बैठने की,

शाक्षी की शैलियों में तुषार की चर्चा थी क्योकि स्कूल का सबसे स्मार्ट और खूबसूरत शरीर का मालिक था तुषार पढाई में भी टोपर था, तो लड़किया हमेशा उसकी hi बात करती थी शाक्षी भी उसकी तरफ आकर्षित थी, और अब तुषार खुद उसके पास बैठ जाता था, कुछ hi समय में तुषार और शाक्षी में बात चित शुरू हो गई और दोनों ये hi चाहते थे तो दोस्ती भी हो गई,

दोस्ती कब तक रहती क्योकि दोनों के दिमाग में दोस्ती से आगे जाने के विचार पहले से hi थे, शाक्षी थी भी बड़ी खूसूरत, शाक्षी ने तुषार को परपोज़ क्र दिया, तुषार ने भी है क्र दी,

शाक्षी ने आगे बढ़ क्र तुषार के हॉट चुम लिए, तुषा रको कुछ भी नहीं करना पद रहा था सब शाक्षी खुद hi क्र रही थी, तुषार सब कुछ घर आकर बताता, दीपा दिखा तो रही थी उसे ख़ुशी ह लेकिन वो अंदर से दुखी थी, उसका प्यार किसी और के साथ बात रहा था,

अजीब बात थी सीमा चुद रही थी अंजलि की तरफ तुषार को दीपा खुद भेज रही थी उसे कोई प्रॉब्लम नहीं थी लेकिन कोई बहार की आते hi उसे जलन हो रही थी, वही रूचि हमेशा गुस्से में रहती खेती कुछ नहीं,

इस सब में 1 मंथ निकल गया, सीमा को भी कुछ कामयाबी मिली थी, वो भी देख लेते ह क्यात hi,

सीमा और जूही की दोस्ती काफी अच्छी हो गई थी सीमा काम भी सिख गई थी,

सीमा- जूही यार इस कंपनी के ओनर से कब मुलाकात होगी

जूही- यार ओनर के घर में बहुत लफड़े ह

सीमा- क्यों क्या हुआ

जूही- सुना ह अब इस ऑफिस को ओनर की बेटी देखेगी

सीमा- कोण कोण ह उनकी फॅमिली में

जूही- फॅमिली में ओनर ह सुरेश चोपड़ा आगे लगभग 60 के आस पास होगी बड़ा ठरकी ह, वो ऑफिस में हमेशा यंग लड़कियों को रखता उनके साथ मजे करने के लिए

सीमा- तेरे साथ भी किये क्या

जूही- यार तुझसे क्या छिपउ सुरेश ने मुझे इसी ऑफिस में बहुत बार छोड़ा ह जब भी आता ह अपना चुसवाते ह और छोड़ता ह इस ऑफिस की लगभग सभी लड़कियों को छोड़ चुक्का ह, इसी लिए मैं तुझे मन क्र रही थी, जब बॉस का मन भर जाता ह तो ये राहुल छोड़ता ह, तुझे भी मेरे पास इसी लिए रखा गया ह की मैं तुझे समझा सकू की बॉस से चुद लेना

सीमा- सब लड़किया चुद लेती ह उससे

जूही- यार मज़बूरी ऐसी hi होती ह जैसी तेरी मज़बूरी थी

सीमा- सही कहा और कोण ह

जूही- उसकी पत्नी सोनिया आगे 40-45 के बिच में होगी, लेकिन लगती नहीं ह


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सीमा- कुछ ज्यादा अंतर नहीं हो गया

जूही- है वो सुरेश की सेक्रेटरी थी उसी से शादी क्र ली पहेली पत्नी के मर जाने के बाद, फिर दो bête

बड़ा बीटा सोहन चोपड़ा उसकी वाइफ नंदनी


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छोटा बीटा कमल चोपड़ा उसकी वाइफ कोमल

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फिर बड़ी बेटी वर्षा

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छोटी बेटी अलका

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सुना ह दोनों बेटी बात से नाराज रहती ह, वही दोनों bête अपने बाप पैर गए ह बहुत हरामी ह यहाँ जब भी आते ह किसी न किसी लड़को को छोड़ क्र जाते ह, तू खुश किस्मत ह अब तक वो तीनो यहाँ नहीं आये ह, वर्ण अब तक तेरी छूट फाड् चुके होते,

उनके परिवार में कुछ दिक्कत चल रही ह जिससे अलका यहाँ का ऑफिस सम्हालेगी अब से यही रहेगी अगले महीने आ रही ह वो,

ये पता नहीं सीमा के लिए अच्छा हुआ या बुरा ये तो समय hi बताएगा,

सीमा ने साडी जानकारी घर में दी, अब फॅमिली का तो पता चल गया लेकिन आगे बढ़ने में तकलीफ थी, ये सब बहुत हिम्मत वाले थे लेकिन सही दिशा दिखने वाला कोई नहीं था,

एक दिन भैंस बहुत शोर मचा रही थी,

रूचि- पापा ये रज्जो इतना शोर क्यों मचा रही ह कही उसे कोई परेशानी तो नहीं ह

राजेश- नहीं बीटा वो ठीक ह

रूचि- पापा कुछ तो होगा डॉ. के पास लेकर चले क्या

राजेश बीटा वॉक अल जाएगी उसकी प्रॉब्लम दूसरी ह

सीमा- दूसरी मतलब

राजेश- मतलब कुछ नहीं तुषार तू कल रज्जो को ब्लॉक में ले जाना

तुषार- पापा ब्लॉक में बताना क्या ह

राजेश- अंजलि तुम hi समझा दो क्या बताना ह मुझे कल बनिए के साथ जम्मू जाना ह वह से उसका बादाम अखरोट आने ह तो मुझे साथ लेकर जा रहे हैं, सुबह जल्दी निकलूंगा वापस आने में 3 दिन लग जायेंगे, तुम तुषार के साथ चली जाना

अंजलि- ने बस है में सर हिलाया

तुषार और अंजलि दोनों का दिल जोर से धड़कने लगा 1 महीने में दोनों की कोई बात नहीं हुई थी, तुषार की तो हिम्मत hi नहीं हो रही थी वही अंजलि जाने क्यों ऐसा क्र रही थी,

राजेश उठ क्र अपने कमरे में चला गया तुषार भी चला गया

रूचि- माँ ये दूसरी प्रॉब्लम क्या ह क्या होगा ब्लॉक में

अंजलि- कुछ नहीं होगा तू क्या करेगी जान क्र

दीपा- माँ बताओ न पापा की तरह बात ताल रही हो

अंजलि- अरे पागलो रज्जो माँ बनना चाहती ह इस लिए रम्भा रही ह

रूचि- क्या मतलब माँ बनना चाहती ह

अंजलि- जब कोई जानवर के अंदर गर्मी बढ़ने लगती ह तो उसे पार्टनर की जरुरत होती ह सेक्स के लिए, सेक्स करने के बाद ये शांत हो जाती ह और माँ बनने का प्रोसेस शुरू होता ह

रूचि- आप रज्जो को ब्लॉक में सेक्स करवाने ले जाओगी

अंजलि- है वह सरकारी भेंसे होते ह जो भैंस को ग्याभन करते ह

सीमा- रूचि तुझे देखने जाना ह क्या तेरी रज्जो कैसे करेगी

रूचि- क्या ह दीदी कुछ भी बकवास करती हो, माँ जानवरो को किस उम्र में पता चलता ह की वो माँ बनना चाहती ह मतलब सेक्स करना चाहती ह

अंजलि- जैसे हम औरतो की माहवारी आती ह उसके बाद हम बच्चे पैदा क्र सकते ह, ऐसे hi इनकी भी आगे होती ह जिसमे इनके अंदर की गर्मी बता देती ह इनकी जरुरत

रूचि- माँ जैसे सर्कार ने हमारी उम्र बनाई ह सेक्स या शादी करने की 18 साल क्या इनकी उम्र नहीं बनाई,

रूचि की बात सुनकर क्र तीनो माँ बेटी हसने लगी

रूचि- है क्यों रही हो

अंजलि- हसो मत उसके दिमाग में अगर कोई सवाल ह तो पूछने में कोई ऐतराज नहीं ह

बीटा इंसानो के लिए आगे हम औरतो के भले के लिए बनाई ह, लड़कियों को माहवारी 12-13 साल में आ जाती ह किसी की जल्दी किसी की देर से, अब 13 साल की उम्र में किसी लड़की को माँ बनने का ज्ञान होता ह क्या उसका शरीर खुद बच्चे जैसा दिमाग भी बच्चो जैसा होता ह वो अपने औलाद को कैसे सम्हालेगी उसका शरीर भी ख़राब हो जायेगा, लेकिन ये दुनिया किसी औरत की तकलीफ नहीं समझती, ये लोग बस बच्चा पैदा करवाने के लिए छोटी बच्चियों क भी माँ बना देते, तो उन बच्चियों को बचने के लिए सर्कार ने ये लॉ बनाया ताकि छोटी बच्चियों का कोई फायदा न उठा सके,

रूचि- ओह, और सेक्स के लिए भी आगे क्यों, कोई माँ न बने बस सेक्स करे तो

अंजलि- उस बच्ची को कैसे पता की माँ बनना ह या नहीं सामने वाला मर्द अच्छा न हुआ तो क्या होगा 18 की आगे तक थोड़ी समझदारी आ जाती ह इसलिए लड़की अच्छे बुरे मर्दो को पहचानने लगती ह तो बस लड़कियों के भले के लिए hi बनाई ह

रूचि- माँ आपके साथ भी तो गलत हुआ थान ा 16 की आगे में माँ बना दिया

ये तो सभी पैर बम फोड़ दिया था रूचि ने, सीमा और दीपा जो अब तक रूचि की बातो का मजा ले रही थी उनका मुँह खुला रह गया, अंजलि की आँखों में एक दर्द उभर आया, वोट क दम चुप हो गई

रूचि- श्री माँ मैंने गलती से बोल दिया माफ़ क्र दो

अंजलि- कोई नहीं मेरी बच्ची जाओ अब सो जाओ

तीनो चुप चाप चली गई, अंजलि दुखी अपने रूम में आ गई, रूचि के सवाल ने उसके जखम हरे क्र दिए थे, उसकी आँखों में आंसू थे रट रट कब उसे नींद आ गई पता hi नहीं चला, उसके दिमाग से सुबह तुषार के साथ जाना ये तो निकल hi गया, लेकिन तुषार तो बैचैन था कैसे अकेले में अपनी माँ का सामना करेगा, करना तो पड़ेगा,

अगले दिन सब अपने कॉलेज चले गए, अंजलि तैयार होकर निकट हुए ुचि आवाज में बोल गई 11 बजे रज्जो को लेकर कसबे में आ जाना मैं बस स्टॉप के सामने कड़ी मिलूंगी, वो तुषार का जवाब सुने बिना hi चली गई, तुषार घबराया सा नाश्ता क्र रहा था,

वही आज सीमा के ऑफिस में बड़ी भगदड़ मची हुई थी, सीमा ऑफिस पहुंची तो देखा पूरा स्टाफ जल्दी आया हुआ था सीमा के पास फ़ोन नहीं था तो उसे इनफार्मेशन नहीं मिल पाई थी,

सीमा- जूही से- क्या हुआ सब इतनी जल्दी कैसे आ गए आज और ये सब क्या हो रहा ह

जूही- यार राहुल सर बहुत गुस्सा हो रहे तेरे से तेरे पास फ़ोन नहीं ह आज सबको जल्दी आना तहत ु देर से आई ह

तभी राहुल आ गया

राहुल- थोड़ा गुस्से में सीमा ये क्या तरीका ह तुम देर से आई हो पूरा स्टाफ आ चुक्का ह

सीमा- सर मुझे जानकारी नहीं थी मेरे पास फ़ोन नहीं ह

राहुल- तो इसमें ऑफिस की क्या गलती ह अगर तुम्हे नौकरी करनी ह तो ठीक ह वर्ण ये बहाने नहीं चैलेंज, ये तुम्हारी जिम्मेदारी ह

सीमा की आँखों से आंसू आ गए पुरे स्टाफ के सामने उसे डाटा पेड़ रही थी,

तभी एक भरी सी आवाज आई- ये तुम्हारी गलती ह राहुल तुम्हे देखना चाहिए था तुम्हारे सभी स्टाफ के पास फ़ोन ह या नहीं अगर नहीं था तो तुम्हे उसे देना चाहिए था इस बेचारी को क्यों डाटा रहे हो,

सीमा ने आवाज की तरफ देखा तो सुरेश चोपड़ा सामने खड़ा था, जूही ने तो उसे 60के आस पास बताया था लेकिन को उसे 45 -50 से ज्यादा नहीं बोल सकता था, सीमा तो उसे देख क्र मन्त्र मुग्ध सी हो गई, क्या प्रेसनलिटी थी उस बन्दे की,

राहुल- श्री सर वो मुझे याद नहीं रहा

सुरेश चोपड़ा- तो अपनी गलती सुधारो और अभी एक अच्छा मोबाइल मंगवाओ और कंपनी का सिम दाल क्र मिस सीमा को दो ताकि ये आगे से अपडेट रहे,

राहुल- जी सर अभी करता हु,

राहुल ने तुरंत एक एम्प्लोयी को इशारा किया वो तुरंत वह से चला गया,

सुरेश चोपड़ा- बाकि सब अपना काम करो सीमा तुम ऑफिस में आओ, और राहुल मोबाइल लेकर तुम भी आओ

सीमा सुरेश के पीछे चल दी, जूही ने मुस्कुराते हुए आल था बेस्ट कहा,

सुरेश ने सीमा को बैठने के लिए कहा, सीमा घबराती हुई उसके सामने बैठ गई,

सुरेश- तो सीमा कोण कोण ह घर में

सीमा तो उसके फेस और बोलने के स्टाइल में इतना खो गई की उसे धयान hi नहीं रहा वो सुरेश चोपड़ा की जसुसुई करने आई थी, उसने तो पुरे घर के मैंम्बर गिनवा दिए,

सुरेश- तुम बहुत खूबसूरत हो तुम्हे देख क्र मुझे किसी की याद आती ह, तुम बहुत टर्की करोगी

सीमा- ठंकु सर

सुरेश- मैं यहाँ 2 दिन के लिए आया हु उसके बाद मेरी बेटी अलका यहाँ आएगी, इन दो दिनों में तुम मेरा ख्याल रखोगी मुझे जॉब hi चाहिए राहुल तुम्हे बता ता रहेगा तुम वो अर्रेंगे करोगी समझ गई

सीमा- यस सर

सुरेश- वैरी गुड

तभी राहुल आ गया, सर ये लीजिये

उसके हाथ में एक दम नई मल्टीमीडिया मोबाइल था

सुरेश ने वो मोबाइल सीमा को देते हुए कहा ये लो इसमें कंपनी का सिम ह ुलिमिटेड कॉल अनलिमिटेड डाटा, ये हमेशा ों रहना चाहिए, इसमें पुरे स्टाफ के no सेव क्र दिए ह और मेरा no. भी सेव ह तुम्हारा no. मेरे पास होगा. मैं जब भी कॉल कृ एक बार में hi कॉल उठना चाहिए

सीमा- यस मैं आपको शिकायत का मौका नहीं दूंगी

सुरेश- मुझे शिकायत करना पसंद भी नहीं सिर्फ सजा देना पसंद ह और राहुल ने तुम्हे फ़ोन नहीं िद्या था उसकी सजा उसे मिल गई उसकी सेलर से इस फ़ोन की कीमत कटी जाएगी और तुमने फ़ोन न होने की जानकारी नहीं दी तो उसकी सजा तुम्हे भी मिलेगी,

सीमा दर गई जिसे सुरेश ने अच्छे से भाप लिया, डरो नहीं पहले सजा सुन लो हो सकता ह तुम्हे सजा में भी मजा लगे,

इनकी सजा को छोड़ क्र अब चलते ह तुषार के पास……..

तुषार रज्जो को लेकर चल दिया कसबे की तरफ पैदल hi चले जार है था, उसे पहुंचने में में 11:30 बज गए, अंजलि कड़ी इंतजार क्र रही थी, जैसे hi तुषार वह पंहुचा तो अंजलि ने गुस्से में ये टाइम ह आने का कब से इंतजार क्र रही हु,

तुषार- श्री माँ वो पैदल आने में देर हो गई श्री माफ़ क्र दो श्री अब ऐसा नहीं होगा

अंजलि- ये श्री पहले भी तो बोलै जा सकता था

तुषार की समझ में नहीं आया, अंजलि इतना बोल क्र चल दी तुषार भी उसके पीछे चल दिया, दोनों ब्लॉक में पहुंच गए,

तुषार ने अंदर जाकर बात की, तो एक आदमी ने रज्जो को उनसे ले लिया और और घेरे से में खड़ा क्र दिया, फिर अंजलि ने कुछ पैसे जमा किये, तो कुछ देर बाद एक आदमी एक भैंसा लेकर आ गया, तुषार और अंजलि पास hi खड़े थे, वो भैंसा भैंस के पीछे सूंघने लगा, कुछ देर सूंघने के बाद भेंसे का लुंड बहार आ गया एक दम लाल नुकीला लम्बा,

भेंसे के लुंड को देखते hi अंजलि की आँखों में एक नशा सा भर आया, वही भेंसे ने दोनों पेअर उठाये और भैंस की कमर पैर रख दिए और अपना लुंड भैंस की छूट में उतर दिया, अंजलि के मुँह से अह्ह्ह्ह निकल गई जिसे तुषार ने सुन लिया था, तुषार के लुंड में भी हलचल हो गाइट hi ये नजारा देख क्र लेकिन माँ का डार्ट है उसे,

कुछ hi देर में बैसा उतर गया, फिर वो आदमी उस भेंसे को दूर घुमा क्र लाया और एक बार फिर वही करवाया, फिर वो भेंसे को ले गया फिर एक डॉ. आया उसने एक ग्लव्स पहना और अपने हाथ में एक दवाई राखी और भैंस की छूट में हाथ घुसा दिया, ये देख क्र तुषार शॉकेड हो गया, वही अंजलि गरम हुए जार hi थी, वो अपने हॉट काट रही थी, उसकी आँखे नशीली हो गाइट hi,

तभी वो डॉ. आया और बोलै- भाई ले जाओ अपनी भैंस को इसकी उम्र ज्यादा ह ग्याभन होने में प्रॉब्लम हो सकती ह इसलिए मैंने दवाई रख दी शायद बात बन जाये लेकिन अगली बार ये ग्याभन नहीं हो पायेगी

तुषार- जी डॉ. साहिब ठंकु

अंजलि और तुषार भैंस को लेकर घर की तरफ चल दिए, दोनों ख़ामोशी से चलते रहे, घर पहुंच क्र अंजलि अपने रूम में चली गई और तुषार अपने रूम में,

अंजलि बिना कपडे चेंज किये हुए बीएड पैर लेट गई उसकी सांसे तेज चल रही थी एक तो पैदल चाक र दूर उसकी नजरो से वो नजारा हाथ hi नहीं रहा था, उसका रोम रोम तड़प रहा था,

अंजलि मन में- मुझसे ज्यादा अच्छी तो वो भैंस भी ह उसे भी कोई मिल गया मैंने क्या अपराध किया जिसकी सजा मिल रही ह मैं कब से तड़प रही हु,

दूसरी सोच- आया तो था तेरे पास खुद चल क्र तूने hi उसे थपड मर दिया

अंजलि- उसने हरकत hi ऐसी की थी

सोच- हरकत क्या गरम खून ह बहक गया बेचारा

अंजलली- अगर अब नहीं रुका तो कही वो भी वैसा hi न बन जाये

सोच- वोन hi बनेगा तू रोक सकती ह अंजलि तू उसे सम्हाल सकती ह उसके अंदर वो ह जो लाखो में एक को मिलता ह बहुत खुश किस्मत ह वो और टब hi तेरा पूरा परिवार

अंजलि- है ह तो हम सब खुशकिस्मत

सोच- कही वो बेटियों के चक्क्र में माँ को hi न भूल जाये

अंजलि- नहीं ऐसा नहीं होगा मेरा बीटा मुझे नहीं भूल सकता मैं उसे भूलने नहीं दूंगी,



तुषार आंखे बंद किये हुए लेता था और सोच रहा था माँ से कैसे माफ़ी मांगे माँ की नाराजगी उसे बहुत तकलीफ दे रही थी, उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी माँ का सामने करने की,
 
अपडेट-21




तभी उसके रूम का दूर खुला तुषार ने हलकी सी आँख खोल क्र देखा तो उसे 440 वाट का झटका सा लगा सामने का नजारा hi इतना खूबसूरत था, जिसे देख खुद काम देव भी सम्मोहित हो जाये, सामने अंजलि कड़ी थी एक रेड कलर की सदी में ब्लाउज इतना छोटा की 60% चूचिया तो बहार hi दिख रही थी, अंजलि हाथ में पल्लू लिए कड़ी थी, तुषार बिना पलके झपकाए बस अंजलि को देखे जार है था,


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तुषार खड़ा हो गया था और उसके लुंड तो उससे पहले hi खड़ा था, अंजलि धीरे धीरे चलती हुई तुषार के पास आई, दोनों आमने सामने खड़े थे, तुषार की हालत ख़राब थी वही अंजलि की धड़कन भी बहुत बढ़ी हुई थी, दोनों के बिच फैसला बस एक उंगली की मोटाई जितना था, तुषार को खुद को कण्ट्रोल करना मुश्किल हो रहा था, लेकिन उसे पिछली बार का थप्पड़ याद आ गया, दोनों 10 मिनट्स तक ऐसे hi खड़े रहे,

फिर अंजलि ने उस ख़ामोशी को तोडा- बस यही कण्ट्रोल चाहिए मुझे तुझमे

तुषार – अचम्बे में जी?

अंजलि- नहीं समझे

तुषार ने न में गार्डन हिलाई

अंजलि- तुम्हे क्या लगता ह मैंने तुम्हे उस दिन थप्पड़ क्यों मारा

तुषार- वो मैंने वो वो गलत हरकत की थी, श्री माँ मुझे माफ़ क्र दो मैं बहक गया था मुझसे गलती हो गई

अंजलि- तुम गलत बात के लिए माफ़ी मांग रहे हो और गलत सोच में जी रहे हो

तुषार- मैं समझा नहीं

अंजलि- तुम मेरे करीब आये और मुझे किश किया अगर किश करने पैर थप्पड़ मरना होता तो पहेली बार में hi मर देती, या उस दिन मर देती जिस रात तुम मुझसे चिपक क्र अपना वो मेरी अस्स पैर रगड़ रहे थे, ये तुम भी जानते हो की मैंने तुम्हे नहीं रोका बल्कि बढ़ावा दिया था,

तुषार- फिर क्या गलती थी मेरी

अंजलि- गलती थी तुम बहक गए मतलब मेरी परवरिश कमजोर रह गई

तुषार- उस रात भी तो बहक गया था तब क्यों नहीं मारा

अंजलि- उस रात मैंने साथ में सपोर्ट किया था मेरी मर्जी शामिल थी, लेकिन उस दिन तुमने मेरी मर्जी जननी चाही तुम बस बहक गए और मुझे चूमने लगे,

तुषार- लेकिन आपने कोई विरोध भी तो नहीं किया

अंजलि- साथ भी तो नहीं दिया

तुषार- तो मुझे कैसे पता चलता की आप साथ देना चाहती हो या नहीं

अंजलि- जब कोई मर्द किसी औरत को चुम रहा हो और औरत शांत कड़ी हो उसके दो कारन होते ह, या तो वो नहीं चाहती मर्द उसे चूमे लेकिन मज़बूरी में चुप ह या वो असमंजस में ह की वो जो कर रही ह सही ह या नहीं

तुषार- माँ कोई औरत खुद तो आकर नहीं खेती मुझे चूमो अगर सामने ऐसी हालत हो कैसे पता चलेगा

अंजलि- तुमने आगे बढ़ क्र किश किया ये मर्द होने की और मजबूत मर्द होने की पहचान ह, लेकिन अगर औरत ने साथ नहीं दिया वह तुम्हारी समझदारी काम आती ह, तुम्हे वही रुक क्र ये परखना चाइये था औरत क्या चाहती ह, अगर औरत मजबूर ह और तुम वही रुक गए तो औरत की नजरो में तुम्हारी इज्जत हमेशा के लिए बढ़ जाएगी और किसी न किसी दिन वो खुद तुम्हारे पास आएगी, और यदि वो असमंजस में ह तो उसकी दुविधा दूर करो अगर दुविधा दूर हो गई तो फिर वो तुम्हारे पास आएगी अगर नहीं हुई तो भी वो तुम्हारा सम्मान करेगी और वक़्त के साथ तुम्हारे पास आ जाएगी, इन तीनो hi हालातो में वो तुम्हारी hi होगी,

लेकिन अगर तुमने उसकी बिना मर्जी के कुछ किया या तो वो तुमसे दूर चली जाएगी, अगर दूर न भी गई उसने तुम्हरे साथ रिश्ता बना भी लिया तो भी मौका मिलते hi वो किसी और की हो जाएगी, तुम्हारी कभी नहीं हो पायेगी,

उस दिन तुमने अपने मन की भावनाओ की सुनी मेरे मन की नहीं, और बीटा औरत के मर्जी की हमेशा इज्जत करना,

तुषार- लेकिन माँ हर औरत ऐसी नहीं होती

अंजलि- एक जवान लड़की जरूर मस्ती में जोश में ऐसा करवाती ह लेकिन जब भी उसे सच्चा प्यार करने वाला सम्मान करने वाला मिलता ह फ्यूचर में उसके पास चली जाती ह इसलिए हर रोज कोई न कोई ब्रेकअप होता ह, और जो ऐसा प्यार पसंद करती हैं उन्हें जब उनसे मजबूत आदमी मिलता ह उसके पास चली जाती ह,

तुषार- समझ गया माँ अब मुझे गलती का अहसास ह

अंजलि- मैंने तेरी परवरिश सबसे अलग की ह तेरे दोनों भाइयो से भी अलग तुझे समझना होगा हालातो को अपने कण्ट्रोल में करना होगा तुम हालातो के कण्ट्रोल में नहीं जा सकता,

तुषार- माँ अब कभी ऐसा नहीं होगा

अंजलि- जब भी तुझे लगे तेरा मन बहक रहा ह मेरे पास आ जाना मैं तुझे सही रास्ता दिखाउंगी

तुषार- जी माँ

फिर अंजलि आगे हो गई अंजलि की चूचिया अब तुषार की छाती में डाब गई, अंजलि ने नशीली आँखों से तुषार को देखा तो तुषार की धड़कन बढ़ गई, अंजलि ने तुषार के बालो में हाथ घुमाया और उसका सर निचे झुका क्र अपने हॉट उसके होतो से मिला दिए, ufffffffffffffffff तुषार की तो हालत hi ख़राब हो गई थी, इतने मुलायम हॉट खुद तुषार के होतो को अपनी गिरफत में लिए हुए थे, कोई हड़बड़ाहट नहीं थी बड़े प्यार से अंजलि तुषार के होतो को चुम रही थी, तुषार सीधा खड़ा था, उसे हाथ चलते हुए दर लग रहा था, लेकिन उसके हॉट चलने लगे थे


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दोनों बड़े प्यार से एक दूसरे के होतो को चुम रहे थे, अंजलि ने तुषार का हाथ पकड़ा और अपनी कमर पैर रख दिया, तुषार ने दूसरा हाथ खुद उसकी कमर पैर रखा दिया और अपने से और चिपका लिया, तुषार का लुंड जो खड़ा हो चुका था अंजलि की छूट के उप्पेर साड़ी के उप्पेर से hi ठोकर मर रहा था, अंजलि की जीभ तुषा रके मुँह में घुस चुकी थी तुषार के हाथ अंजलि की गांड पैर पहुंच चुके थे तुषार कोई जल्दबादी या हड़बड़ाहट नहीं क्र रहा था, वो बड़े प्यार से अंजलि की टाइट गांड को शेला रहा था,

अब तक तुषार ने सीमा दीपा और रजिया की गांड को मसला था लेकिन अंजलि का आकर इन तीनो से hi अच्छा और वेल शेप्ड था, अंजलि की गांड सीमा और दीपा जितनी hi टाइट थी और आकर में रजिया से कुछ काम नहीं थी,

दोनों बहुत गरम हो चुके थे, तुषार ने अंजलि की गांड पैर दबाव बनाया तो लुंड का दबाव छूट के पास और बढ़ गया, दोनों को 15 मिनट्स से ज्यादा हो गए थे एक दूसरे को चूमते हुए दोनों में से किसी का मन नहीं था हटने के, दोनों ऐसे खो गए थे जैसे जन्मो के प्यासे हो और एक दूसरे के होतो से अमृत चूस रहे हो,

अंजलि का एक हाथ तुषार की कमर से होता हुआ दोनों के बिच में घुस गया और उसने तुषार के लुंड पैर अपना हाथ रख दिया, तुषार के लुंड ने तुरंत झटका मारा, तुषार ने अंजलि की गांड को कास क्र भींच दिया, अंजलि ने भी लुंड को मुठी में पकड़ लिया, सब हो रहा था लेकिन किश नहीं टूट रहा था,

तुषार ने अंजलि की गांड पकड़ क्र हल्का सा उप्पेर उठा लिया तभी बहार से दूर बेल्ल बज गई, दोनों एक दम अलग हो गए दोनों की आँखे नशे में लाल हो राखी थी, अंजलि नशीली आँखों से तुषार को देख रही थी, तुषार का मन नहीं था अलग होने का तुषार ने फिर अंजलि को अपनी तरफ खींचा, अंजलि फिर उससे चिपक गई और तुषार के होतो पैर हल्का सा चुम्मन दे दिया,

अंजलि- जा जाकर दरवाजा खोल दे

तुषार- मन नहीं हो रहा अलग होने का

अंजलि- ये hi कण्ट्रोल सीखना ह तुझे, कोई भी औरत कितनी भी सूंदर हो कितनी भी सेक्सी हो तुझे कमजोर न क्र सके बल्कि तेरे करीब आकर वो कमजोर पद जाये,

तुषार- पैर माँ मुझे किसी और से क्या मतलब मेरे पास आप हो

अंजलि- जा दूर खोल वक़्त आने पैर समझ जायेगा

तुषार अधूरे से मन से गुस्सा सा करता हुआ चला गया, पता नहीं कोण आ गया मजा ख़राब क्र दिया uuffffffffffff

अंजलि तुषार को जाते देख मुस्कुराती हुई बाथरूम के रस्ते अपने रूम में पहुंच गई, मन तो उसका भी नहीं था अलग होने का

दूर पैर दीपा और रूचि खड़े थे,

रूचि- तुझे आवाज नहीं आती क्या इतनी देर से बेल्ल बजा रहे हैं

तुषार- वो मैं सो गया था

रूचि- तेरी आँखे बता hi रही ह सो गया था

दीपा किन अजर तुषार के खड़े लुंड पैर गई और आँखे एक दम लाल दीपा समझ गई ये सोने की आँखे नहीं ह सोते हुए लुंड खड़ा ह और आँखे लाल कुछ गड़बड़ ह,

आज रूचि किन अजर भी तुसाहर के लुंड पैर गई उसने बिना कोई रियेक्ट किये अंदर घुस गई, उसके जाते hi

दीपा- क्यों रे इसे क्यों खड़ा किया हुआ ह किसकी याद में खड़ा ह ये

तुषार ने निचे देखा तो पता चला उसकी क्या हालत ह उसने बात को सम्हालते हुए, आपके hi सपने देख रहा था, कब आप आओ और कब मैं सवारी करू,

दीपा- चल झूठा कही का रूचि के सामने hi इसे दिखा रहा था

तुषार- उसने धयान नहीं दिया होगा

दीपा- है वो तो बच्ची ह उसे पता थोड़े अचलेहा कुछ चल जाकर इसे शांत क्र वर्ण पेण्ट फाड् क्र बहार आ जायेगा

दोनों हस्ते हुए अंदर आ गए, तुषार अपने रूम में चला गया, अब तक अंजलि ने कपडे बदल लिए और किचन में पहुंच गई, खाना बनाने

दीपा और रूचि उप्पेर चली गई कपडे बदलने, तुषार किचन में गया और अंजलि के पीछे से चिपक गया तुषार का खड़ा लुंड अंजलि की गांड में डाब गया,


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अंजलि- इसे शांत क्र सबको दिखता घूम रहा ह

तुषार- किसे माँ किसे शांत कृ

अंजलि- माँ से शरारत करता ह नालायक

तुषार- माँ आपने hi तो सिखाया ह शर्माना नहीं चाहिए

तभी उप्पेर से किसी के आने की आहात हुई तो तुषार रूम में चला गया, ये दीपा थी,

दीपा- माँ भूक लग रही ह

अंजलि- है बस बैठो तुम लोग अभी देती हु

सभी खाना खाने बैठ गए, तुषार अंजलि की आँखों में देखे जार है था अंजलि बड़ा नार्मल बेहवे क्र रही थी लेकिन उसके चेरे की मुस्कराहट और चमक कुछ अलग hi थी आज काफी दिन बाद तुषार के चेरे पैर ख़ुशी दिखाई दे रही थी, वो सब कुछ क्र रहा था लेकिन खुश नहीं था 1 मंथ से, रूचि ने ये नोटिस किया

रूचि- टुशु आज बड़ा खुश दिख रहा ह

तुषार- मैं तो हमेशा खुश hi रहता हु

रूचि- नहीं काफी दिन से तेरा चेरा उदास सात है आज कुछ अलग लग रहा ह

अंजलि- टुशु क्या हुआ कोई प्रॉब्लम थी क्या,

अंजलि तुषार को छेद रही थी

तुषार- नहीं माँ कोई बात नहीं थी बस ऐसे hi लग रहा ह इन्हे

अंजलि- अच्छा लगता ह तू खुराक ठीक से नहीं ले रहा

तुषार- खुराक मतलब

अंजलि- तुझे खुराक नहीं पता क्या

रूचि- अरे खाना बुद्धू

अंजलि मुस्कुरा दी- अच्छा किराया दे आया रजिया को

रजिया का नाम सुनते hi तुषर को याद आ गया उसे रजिया के पास जाना था उसकी चुदाई करने किराये की किश्त के रूप में,

तुषार- भूल गया था माँ कल संडे ह कल जाऊंगा

अंजलि- ठीक ह जाने से पहले मुझसे बात करके जाना कुछ काम ह गाओं में वो करके आना ह

तुषार- ठीक ह माँ

फिर सभी इधर उधर की बाते करने लगे, आज राजेश तो आने वाले थे नहीं बस सीमा का इंतजार था, तुषार खुश था आज उसके पापा घर में नहीं होंगे रात को वो और अंजलि अकेले होंगे, उसका लुंड ख़ुशी से उछाल रहा था, अंजलि के दिमाग में भी ये hi घूम रहा था राजेश घर में नहीं ह अंजलि और तुषार निचे के फ्लोर पैर अकेले होंगे, उसके आगे बढ़ना ह या नहीं वो चाहती थी आगे बढे वो खुद को बहुत रोक चुकी थी लेकिन अब वो नहीं रुकना चाहती थी लेकिन वो तुषार को खुद को रोकने का हुनर सीखना चाहती थी, लेकिन क्यों वो तो अब अपनी प्यास बुझा सकती थी फिर क्यों रुक रही थी,

आज काफी देर हो गई थी सीमा अभी नहीं आई थी, सभी इंतजार क्र रहे थे अंजलि की घबराहट बढ़ने लगी थी, बाकि सब भी परेशां होने लगे थे, क्योकि उन्हें तो पता था सीमा सुरेश चोपड़ा के ऑफिस में कामकरति ह किसी मुसीबत में न पद जाये,

लेकिन इंतजार ख़तम हुआ सीमा लोट आई थी उसके चेरे पैर ख़ुशी दिख रही थी,

अंजलि- कहा रह गई थी बीटा

सीमा- माँ ऑफिस में मीटिंग थी आज मुझे मेरी पोस्ट मिली ह

अंजलि- बहुत अच्छे बीटा लेकिन तुम देर से आई थी तो दिल घबरा रहा था

सीमा- श्री माँ लेकिन इनफार्मेशन देने का कोई साधन hi नहीं था, लेकिन अब हो गया ह

अंजलि- क्या हो गया ह अब

सीमा- ये देखो माँ मुझे ऑफिस से ोबिले दिया गया ह जिससे मैं ऑफिस से कनेक्ट रह सकू अब हमारे पास भी फ़ोन ह हम भी लोगो से जुड़े रह सकेंगे

अंजलि- लेकिन हमे क्या जरुरत ह इसकी

सीमा- माँ ऑफिस में जरुरत ह वह जॉब करने के लिए तो रखना पड़ेगा

अंजलि- अच्छा ठीक ह लेकिन ये तो तेरे पास रहेगा न फिर घर कैसे बताएगी,

तुषार- माँ हम कुछ अर्रेंगे करेंगे अभी तो सेलिब्रेट करते हैं

सीमा कपडे चेंज करके आ गई

फिर सबने रात का खाना खाया, खाना खा क्र सभी भाई बहन सीमा के रूम में इकठे हो गए, अंजलि किचन का काम समेटने लगी

दीपा- सीमा दिखा न मोबले कैसा ह बड़ा महंगा लग रहा ह

सीमा- महंगा hi ह बॉस ने खुद दिलवाया

रूचि- बॉस मतलब सुरेश चोपड़ा से मुलाकात हुई तेरी

सीमा- नहीं अभी नहीं हुई बस उन्होंने मैनेजर को बोलै, आज सुबह सबको जल्दी बुलाया था लेकिन मेरे पास जानकारी नहीं थी तो मैं देर से पहुंची तो मैनेजर मुझे डाटने लगा फिर बॉस को ये जानकरी दी तो उन्होंने मैनेजर को डाटा और कहा अगर सीमा के पास फ़ोन नहीं ह तो उसे खरीद क्र दो, तब मुझे ये मोबाइल मिला

दीपा- अरे वह मजा आ गया

रूचि- तो उस चोपड़ा से मुलाकात कब होगी कुछ पता चला

सीमा- पता नहीं कल पता करुँगी

तुषार- कल कल तो संडे ह

सीमा- वो कल हमारी मीटिंग ह नई बॉस आएगी न उसके लिए मीटिंग राखी गई ह, वही खाना पीना होगा तो आने में भी देर हो जाएगी,

रूचि का धयान सीमा की आँखों में था, वो बहुत घेरि नजरो से उसक आँखों में देखे जार hi थी,

सीमा- अच्छा यार सोने दो मुझे बहुत थक गई हु कल भी बहुत काम ह,

सीमा का ये अजीब व्यव्हार सभी को दुखी सा क्र गया लेकिन सब चले गए,

रात को तुषार बड़ा बैचैन लेता हुआ था वो सोच रहा था बस जल्दी से माँ के कमरे में चला जाऊ, उसे लग रहा था अंजलि खुद उसके कमरे में आ जाएगी लेकिन जब अंजलि नहीं आई तो वो खुद को रोक नहीं पाया और उठ चला अंजलि के रूम में पहले वो बाथरूम की तरफ से गया तो बाथरूम का दूर बंद था वो वापस आकर मैं दूर से गया जो खुला था, वो धीरे से अंदर गया तो अंजलि कांबले ओढ़े लेती थी उसे लगा अंजलि सो गई ह,

वो धीरे से अंजलि के पास बैठ गया उसके फेस पैर छै मासूमियत को निहारने लगा, फिर उसने बड़े प्यार से अंजलि के फेस पैर हाथ घुमाया, अंजलि ने आँखे नहीं खोली, तुषार ने कम्बल के अंदर हाथ डाला और अंजलि की कमर को सहलाने लगा, फिर निचे झुकता चला गया और अंजलि के होतो से हॉट मिला दिए,

एक किश के बाद उसने अंजलि को सीधा किया और उसके उप्पेर झुक गया और जैसे hi वो फिर से अंजलि के हॉट चूमने वाला था अंजलि ने आँखे खोल दी, तुषार उसे देख मुस्कुराया, लेकिन अंजलि नहीं मुस्कुराई,

अंजलि- नहीं रोक पाया न खुद को फिर खो बैठा न अपना कण्ट्रोल,

तुषार शॉकेड होकर अंजलि को देखने लगा उसे समझ नहीं आया आज दिन में hi उसकी माँ खुद साझ दाझ क्र उसके पास आई थी इतना जबरदस्त किश किया सब इतना मस्त था और रात होते hi ये अलग रूप,

अंजलि- ऐसे क्या देख रहा ह

तुषार- माँ वो दिन में तो आप

अंजलि- दिन में मैंने तुझे लुभाया और तू रात होते hi चला आया, ऐसे hi कोई औरत तुझे अपने हुसैन में फसायेगी और तुम कुत्ते की तरह दम हिलता हुआ चला जायेगा, यही कण्ट्रोल ह तेरा खुद पैर

तुषार- मुझे लगा माँ की आपको भी जरुरत ह

अंजलि- है तो अगर मेरी जरुरत ह तो मुझे तेरे पास आना चाहिए था तुझे नहीं

तुषार- लेकिन कोई औरत खुद कैसे आएगी माँ

अंजलि- बस यही सीखना ह तुझे, तेरे लिए कोई भी औरत खुद आये, तुझे ऐसा बनना होगा की कोई भी औरत खुद चलकर तेरे पास आये, वो चाहे मैं हु या कोई और दुनिया की कोई भी औरत तेरे सामने कमजोर होनी चाहिए, तू किसी औरत के सामने कमजोर नहीं पड़ेगा, तेरे पास सब कुछ ह तुझे सब कुछ दिया गया ह सब कुछ दिया गया ह समझे,

जा और मजबूत क्र खुद को और मजबूत क्र तू गयम जाता ह न सफाई के लिए तो वह इस शरीर को मजबूत क्र, इस दिल को मजबूत क्र इस दिमाग को मजबूत क्र और इसे (अंजलि ने तुषार के लुंड पकड़ लिया) इसे भी मजबूत क्र ये बस तेरे दिमाग की सुने जज्बातो की नहीं, जिस दिन तू ये सब क्र ले मेरे पास आना मैं खुद तेरे निचे आ जाउंगी, मुझे पाना ह तो खुद को कठोर और ताकतवर बनाना होगा समझे

तुषार- समझ गया माँ समझ गया अब मैं तुम्हे तुम्हारी सोच के हिसाब से बांके दिखाऊंगा,

और तुषार अपने रूम में जाने लगा, लेकिन अंजलि ने उसे पकड़ लिया और अपने हॉट उसके होतो पैर रख दिए, और एक जबरदस्त किश किया और बोली माफ़ करना बीटा ये करना जरुरी ह तुझे तकलीफ होगी मैं भी तेरे लिए प्यास में जलूँगी


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तुषार- लेकिन क्यों माँ

अंजलि- वक़्त आने दे सब पता चल जायेगा क्यों तुझे ये करना ह कल रजिया के साथ इसे शांत क्र लेना

तुषार चोकते हुए

आपको पता ह

अंजलि – मैं तेरी माँ हु समझे मैं तुझे नहीं जानूँगी तो कोण जानेगा और रजिया को मैं तब से जानती हु जब वो गाओं में शादी करके आई थी, उसके अंदर कितनी गर्मी ह सब जानती हु क्यों उसने तुझे घर दे दिया और कोनसी किश्त तू उसे देने जायेगा कल सब जानती हु

तुषार- माँ वो मैं वो

अंजलि- वो वो मत क्र मेरी नाक मत कटवा देना समझे

तुषार- नहीं कवाऊंगा धजिया उदा दूंगा आप कहो तो

अंजलि- जानती हु तू क्या कर सकता ह इसे मजबूत करता रह अब जा वर्ण मैं खुद को रोक नहीं पाऊँगी

तुषार- जल्दी आऊंगा माँ नहीं नहीं आप आओगी माँ मेरे पास

अंजलि- हस्ते हुए मैं तो तेरे hi पास हु बीटा हमेशा तेरी hi हु

तुषार- आपका सब कुछ मेरा होगा माँ

अंजलि- सब तेरा hi ह

तुषार वह से निकल गया उसका लुंड जो अंजलि की बाते सुनकर शांत हो गया था वो फिर से खड़ा हो गया था, लेकिन उसने खुद को समझाया और लेट गया,

अगले दिन सीमा ऑफिस चली गई अंजलि ने रोका लेकिन उसने जरुरी ह बोल क्र निकल गई, फिर तुषार गाओं के लिए निकल गया, अंजलि ने बताया की आते हुए अम्मा (चंद्रो देवी) से मिलकर आना और उन्हें सब कुशल मंगल की खबर देकर आना

तुषार- लेकिन माँ आप उन्हें साडी जानकारी क्यों देती हो

अंजलि- तू नहीं समझेगा तू जा और झंडे गाड़ क्र आना

तुषार- माँ ऐसे मत छेड़ा करो

अंजलि- जा जा

तुसाहर गाओं की तरफ निकल गया, गाओं पहुंच क्र सबसे पहले वो रजिया के घर पंहुचा, रजिया तुषार को देखते hi खुश हो गई लेकिनअगले hi पल गुस्सा दिखने लगी,

रजिया- अब आया ह तू इतने दिन बाद

तुषार- वो चची वह सब ठीक थक करने में टाइम लग gaya,isliye देर से आया

रजिया- मेरे बारे में नहीं सोचा

तुषार- तुम्हारी याद में hi तो आया हु किराया देने

तभी अंदर से सलमा आ गई कोण ह माँ

रजिया- कोई नहीं तेरा तुषार भाई ह मिलने आया ह

सलमा 19 साल की बाला की खूबसूरत लड़की थी जिसकी आँखे बहुत सूंदर थी गाओं के बहुत hi काम लोगो ने इन चारो बहेनो को देखा था,

सलमा को देख क्र एक बार तो तुषार का मन दोल गया लेकिन उसे अंजलि की बात याद आ गई, तो उसने अपना धयान वह से हटा लिया, तुषार का ऐसे सलमा को इग्नोर करना सलमा को सुर्पीसे सा लगा क्योकि आज तक ऐसा कोई नहीं था जो सलमा से नजर हटा ले, वो बात और ह रजिया उन्हें कही बहार नहीं जाने देती थी लेकिन वो भी जवान हो रही थी,

चलो आज इन चारो बहेनो को जान लेते हैं

सबसे बड़ी बेटी- सानिया- आगे- 21


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दूसरी बेटी- नगमा- आगे-20

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तीसरी बेटी- सलमा आगे-19

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चौथी- अश्मा- आगे 17

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सलमा और अश्मा के बिच भी एक और बच्चा था जो पेट में hi ख़तम हो गया था,

बड़ी तीनो बहन पूरी जवान और बहुत hi गोरी खूबसूरत थी तीनो के अंदर बहुत गर्मी थी, उनका खान पान hi इतना गरम था की गर्मी तो होती hi लेकिन उस गर्मी को निकलने वाला कोई नहीं था, रजिया उन्हें कभी निकलने hi नहीं देती थी,

तुषार का िंगोर करना सलमा को हर्ट क्र गया, वो मुँह सा बनाते हुए अंदर चली गई,

तुषार- चची मैं घर पैर हु जल्दी आ जाना

रजिया- तू चल मैं आई

तुषार हस्ता हुआ चला गया, कुछ देर बाद रजिया भी आ गयी, तुषार आराम से खड़ा हो गया वो देखना चाहता था औरत उसके लिए क्या क्या कर सकती ह, रजिया ने दूर बंद किया और तुषा रपर टूट पड़ी वो उसे चूमे hi जार hi थी, जल्दी जल्दी उसके कपडे उतरने लगी अपने कपडे भी खुद ने उतर दिए, तुषार का लुंड तन चुक्का था, रजिया तुरंत निचे बैठ गई और तुस्साह रखा लुंड चूसने लगी, कुछ देर चूसने के बाद, तुषार ने रजिया को खड़ा किया और उसकी छूट चूसने के लिए निचे बैठने लगा तो रजिया ने उसे रोक दिया,

टाइम काम ह बीटा लड़कियों को शक हो जायेगा मेरी छूट तो वैसे hi बहुत गीली हुई पड़ी ह तुझे देखते hi इतने दिन से प्यासी जो ह,

तुषार- क्यों चची इतने दिन से किसी का लुंड लिया नहीं क्या

रजिया- इसे तेरे लुंड का स्वाद मिल चुक्का ह अब इसमें किसी और का लुंड मजा नहीं दे सकता अब ये तेरे hi लुंड की गुलाम ह

तुषार ने रजिया को झुकाया और अपना लुंड छूट पैर लगा क्र एक जोर दर धक्का मर दिया लुंड एक hi बार में छूट में घुस गया, aaaaahhhhhhhhhhhhhh मर गई अह्ह्ह्ह बहुत मोटा ह आराम से

तुषार- चची तुमने इतने लुंड खाये ह फिर भी चिल्ला रही हो

रजिया- जीतनेय भी खाये ह पैर तेरे जैसा कोई नहीं था ये जब भी अंदर घुसता ह दर्द जरूर देता ह,

फिर तुषार धक्के लगाने लगा, रजिया की कमर पकड़ क्र तुषार धक्के लगाए जार है था रजिया अह्ह्ह अह्ह्ह्ह किये जार hi थी काफी देर चुदाई करने के बाद तुषार ने रजिया को अपनी गॉड में उठा लिया और अपना लुंड उसकी छूट में घुसा दिया, रजिया हैरान रह गई, एक तो उसके लिए ये नया तजुर्बा था दूसरा उसे तुषार की ताकत पैर बड़ी हैरानी हुई, रजिया अच्छे भरे शरीर की औरत थी, उसे वैसे hi गोद में उठाना मुश्किल था लेकिन तुषार ने उसे उठा भी लिया और अपने लुंड पैर उछाल भी रहा था,


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रजिया इस नै पोजीशन में इतना मस्त हो गई की हवा हवा में hi झाड़ गई, उसने तुषार की गार्डन कास क्र पकड़ ली, तुषार को धक्के लगाने में तकलीफ हो रही थी, तुषार ने उसे निचे उतरा और एक पेअर हवा में उठाया और धक्के लगाने लगा, बड़ा मस्त नजर था जिसे कोई और भी दरवाजे की दरार में से झक रहा था, उसका धयान बस छूट में घुसते मोठे लुंड पैर था, जब तुषार झड़ने वाला हुआ तो रजिया ने लुंड मुहमे भर लिया,

तुषार ने पूरा लुंड रजिया के मुँह में खली क्र दिया, वो जॉब hi था ये सब देख रहा था, जैसे hi तुषार का लुंड खली हुआ तो उसका धयान दरवाजे पैर गया जहा उसे दर्ज में परछाई सी दिखी, उसे पता चल गया कोई ह वह, तुषार रजिया के सामने कुछ नहीं कहना छटा था, उसने रजिए से पूछा चची एक राउंड और करे,

रजिया- नहीं बच्चा अब बास्की नहीं ह तूने एक hi बार में जन्नत दिखा दी, अगली बार जल्दी आना

तुषार ने तुरंत कपडे पहन लिए और बोलै आप कपडे फिनॉल मैं रास्ता साफ़ ह या नहीं देख लू, तुषर तुरंत दरवाजा खोल क्र बहार निकल गया, जॉब hi वह देख रहा था ो जा चुक्का था, तुषार ने इधर उधर देखा तो रजिया के घर में नगमा को घुसते देखा, नगमा ने अंदर घुसते हुए पीछे मुद क्र देखा तो तुषार खड़ा हुआ दिखा, नगमा शरमाते हुए अंदर घुस गई, तुषार को पता चल गया की नगमा अपनी माँ की चुदाई ेख क्र गई ह,

तुषार अंदर आया रास्ता साफ़ ह चची

रजिया- अब कब आएगा तू

तुसाहर- जब आप बुलाओ

रजिया- कैसे बुलाऊ तुझे बात तो हो नहीं पति

तुषार- है ये तो प्रॉब्लम ह

रजिया- सुन मेरे साथ चल मैं अभी करती हु इंतजाम

तुषार- कसिए इंतजाम



रजिया- चल तो
 
अपडेट-22






तुषार रजिया के साथ चला गया, घर में रजिया ने उसे हॉल में बैठाया, और आवाज लगाई अरे कोई सी अपने भाई तुषार को चाय दो

तुषार- अरे चची इसकी क्या जरुरत ह

रजिया- अरे पि ले मैं अभी आई

रजिया अंदर चली गई, कुछ देर बाद नगमा वह आई उसके हाथ में दूध का गिलास था, उसने गिलास तुषार की तरफ क्र दिया, ये लो भाई जी दूध पि लो

तुषार- चची तो चाय को बोल रही थी

नगमा- महेनत करके चाय नहीं दूध पिटे ह वर्ण कमजोरी आ जाएगी

तुषार के फेस पैर मुस्कराहट आ गई

नगमा भी मुस्कुरा दी, तुषार ने गिलास पकड़ लिया उसकी उंगलिया नगमा के हाथ को छू गई, नगमा ने बड़ी नजाकत से अपनी उंगलिया तुषा रकि उंगलियों पैर फिरै, तभी रजिया आ गई

अरे दूध ले आई अच्छा किया ताकत आ जाएगी वापस पैदल जायेगा न,

नगमा- है अम्मी

रजिया- चल तू जा और काम कर ले,

नगमा तुषार को देखती हुई चली गई

रजिया- ये ले इसे अपने पास रख

तुषार- ये क्या ह चची

रजिया- ये मेरा पुराण फ़ोन ह इसकी बेटरी ज्यादा नहीं चलती थी तो तेरे चाचा दूसरा फ़ोन ले आये थे ये ऐसे hi पड़ा था तू इसे ठीक करवा ले और एक सिम खरीद ले, और मेरे no. पैर कॉल क्र देना फिर तो हमारी बात हो जाया करेगी,

तुषार- चची ये मैं कैसे ले सकता हु

रजिया- चुप रह जो मैं दे रही हु चुप चाप ले ले

तुषार- चची आप मेरे लिए ये सब क्यों क्र रही हो

रजिया- तू मेरे दिल में बस गया ह बच्चा, तूने मेरे अंदर वो जगह बना ली ह जो औरत के दिल में उसका पति भी नहीं बना पता, जब किसी औरत के दिल में उस जगह बैठ जाओगे तो वो औरत तुझे अपना सब कुछ दे देगी चाहे जान भी मांग लेगा वो भी दे देगी

तुषार- ऐसा ह क्या

रजिया- आजमा क्र देख ले मेरी जान सब तेरा ह

तुषार- अरे नहीं चची आपका प्यार hi मेरा इनाम ह

रजिया- इसे ले जा

तुषार- जी चची ठंकु

रजिया- ठंकु तो मुझे बोलना चाहिए तेरी वजह से मैंने जगह जगह मुँह मरना बंद क्र दिया, तूने मेरी गर्मी शांत क्र दी ह, बस तू आते रहना

तुषार- जरूर चची

तुषार वह से निकल गया, नगमा चुप क्र सब देख सुन रही थी,

तुषार वह से सीधा चंद्रो देवी के पास पंहुचा, वो चंद्रो देवी के कमरे में जा hi रहा था की सामने से आती हुई अनीता से उसकी टक्कर हो गई और अनीता का बैलेंस बिगड़ गया, तुषार ने तुरंत रियेक्ट किया अनीता को गिरने से बचने के लिए, उसका एक हाथ अनीता की कमर पैर गया और दूसरा अनीता की गांड पैर, अनीता पीछे की तरफ गिर रही थी जिससे तुषार उससे सम्हालते हुए उसके उप्पेर झुक गया था,

अनीता को सम्हालने के लिए तुषार को ताकत लगनी पद रही थी जिससे तुषार के हाथ अनीता की कमर और गांड पैर पूरा दबाव बना रहे थे, तुषार ने जोर लगा क्र अनीता को उठाया तो सीधे होते hi अनीता तुषा रकि छाती से टकरा गई, अनीता की 34 साइज की कड़क चूचिया तुषार की छाती से टकरा गई, दोनों ने खुद को सम्हाला

तुषार- सस्र्य श्री मम मैंने धयान नई दिया था

अनीता- कोई बात नहीं मेरा धयान भी कही और था गलती दोनों की ह

तुषार- ठंकु मम

अनीता- तुम उस दिन आये थे न दिवाली वाले दिन

तुषार- जी है मम माँ ने भेजा ह अम्मा से मिलने

अनीता- अम्मा तो अभी बहार गई ह तुम बैठो आती hi होंगी

तुषार- जी कोई नहीं मैं बहार वेट क्र लूंगा

अनीता- कोई बात नहीं बैठो घर के मर्द सिटी गए ह कोई प्रॉब्लम नहीं ह कोई बतमीजी नहीं करेगा तुम बैठो

तुषार बैठ गया,

अनीता ने नौकर को आवाज लगाई की दो कप चाय बनल ए

अनीता- क्या नाम ह तुम्हारा क्या करते हो

तुषार- जी तुषार नाम ह पढाई करता हु

अनीता- गुड अच्छा नाम ह और तुम खुद भी बहुत खूबसूरत नौजवान हो

तुषार- ठंकु मम

अनीता- और है ताकतवर भी हो मरे जैसी भरी औरत को बड़ी आसानी से सम्हाल लिया

तुषार- शरमाते हुए जी वो तो, आपको गलत जगह हाथ लग गया था उसके लिए श्री

अनीता- अरे तुमने तो मुझे गिरने से बचाया और बचते हुए इधर उधर हाथ लग hi जाता ह और मैं विदेश में रहने वाली औरत हु ये सब चीजे वह मायने नहीं रखती, अब शर्माओ मत

तभी चाय आ गई, दोनों चाय पिने लगे

तुषार- मम आप बहुत अच्छी हैं

अनीता- तुम भी बहुत अच्छे हो तुम्हसे बात करके अच्छा लगा, इस घर में इतनी पॉजिटिव विबे पहेली बार मैंने किसी में देखि ह तुम्हारे अंदर बहुतपोसेटिवे विबे ह

तुषार- ठंकु मम आप भी बहुत अच्छी ह मुझे बड़ा अच्छा लगा आपसे बात करके पहेली बार पैसे वालो से बात करके मुझे गुस्सा नहीं आया

अनीता- हस्ते हुए अरे पैसे वालो ने क्या गलती की ह जो तुम्हे गुस्सा आ जाता ह

तुषार- वो हम गरीबो को इंसान नहीं समझते

अनीता- इंसान की गरीबी उसकी प्रॉब्लम नहीं होती, जब वो उस गरीबी को अपनी कमजोरी मान लेता ह तब पैसे वाले उस पैर हावी होते हैं और तुम्हे देख क्र नहीं लगता तुमने गरीबी को खुद की कमजोरी बनाया ह

तुषार- मेरी माँ ने कमर रहना नहीं सिखाया हमे

अनीता- तुम्हारी माँ को देख क्र hi लगता ह बहुत सुंदर ह तुम्हारी माँ

तुषार- सूंदर तो आप भी बहुत ह

अनीता- हहहहए तुम्हारी माँ से ज्यादा नहीं मैं तो इन महंगे कपड़ो में सूंदर लग रही हु शायद लेकिन वो नेचुरल ब्यूटी हैं

तुषार- गर्व से सर ुचा करके बैठ गया, ठंकु मम, आप सच में बहुत अच्छी हैं,

तभी चंदो देवी आ गई- अरे तुषार कैसा ह बच्चे कब आया

तुषार- अभी कुछ देर पहले अम्मा

चंद्रो देवी- अंजलि कैसी ह सब अच्छे ह न

तुषार- है जी माँ ने ये hi खबर देने भेजा था

चंद्रो देवी- बड़े दिन हो गए उससे बात किये हुए

तुषार- कोई नहीं अम्मा जी मैं जल्दी hi आपसे बात करवा दूंगा, मैं ेके मोबाइल ले लिया ह बस जाकर एक सिम ले लूंगा no स्टार्ट होते hi आपकी बात करवाऊंगा

चंद्रो देवी- ये अच्छा किया तूने अब अंजलि से बात हो जाया करेगी, अरे अनीता तुषार को मेरा और घर का no. लिख क्र दे दे, ये वह जाकर बात करवा देगा,

तुषार- जी अम्मा बस आप ये no. किसी और को मत देना वर्ण माँ गुस्सा करेगी

चंद्रो देवी- मैं जानती हु बच्चा क्या करना चाहिए क्या नहीं तू फ़िक्र न क्र,

अनीता के पप्पेर पैर no. लिख क्र ले आई, उस पैर तीन no. लिखे थे उसने सीधे तुषार के हाथ में पप्पेर दे दिया,

अनीता- इसमें मैंने no. के सामने लिख दिया ह कोनसा किसका no . ह

तुषार ने वो पप्पेर जेब में रख लिया और नमस्ते करके चल दिया,

चंद्रो देवी- बड़ा hi भला लड़का ह ये

अनीता- हम्म्म बातो से लग रहा था

तुषार वह से निकल क्र कसबे में चला गया वह उसने मोबाइल का चार्जर खरीदा और एक सिम लिया, और घर आ गया, अंजलि किचन में काम क्र रही थी, तुषार पीछे से उससे चिपक गया, माँ मैं आ गया


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अंजलि- जानती हु तू आ गया ह कैसा रहा दिन

तुषार- अच्छा था अम्मा जी से मिल आया और उन्हें बता दिया की सब ठीक ह, और माँ ये रजिया चची ने मुझे अपना पुराण फ़ोन दिया ह

अंजलि- क्यों

तुषार- बोल रही थी उनके पास बेकार पड़ा ह तेरे काम आ जायेगा, मैंने तो मन किया था लेकिन बोली जब औरत खुश हो जाती ह तो वो कुछ भी दे सकती ह मन मत क्र,

अंजलि- ये तो मैं तुझे समझा रही थी ये तुझे सीखना ह, वैसे तेरी खुराक पूरी हो गई

तुषार- खुराक अरे कहा माँ आज तो खाना hi नहीं मिला

अंजलि- पागल कही का खाना तो मैं खिला hi दूंगी, लेकिन तेरी खुराक रजिया से पूरी हो गई,

तुषार- आप उस खुराक की बात क्र रही थी उस दिन भी

अंजलि- और क्या पागल तुझे खाना तो मैं hi खिलाती हु तो इस खुराक की बात क्यों करुँगी, तेरी खुराक तो वो hi ह

तुषार- चची की पूरी हो गई मेरी ठीक से पूरी नहीं हुई

अंजलि- कोई बात नहीं हो जाएगी शेर थोड़ा भूका hi रहना चाहिए तभी शिकार का मजा आता ह

तुषार- माँ आप भी न कैसी कैसी बाते करती हो, पुरे शरीर में आग लग जाती ह

अंजलि दिख रही ह तेरी आग निचे जा फ्रेश हो ले मैं खाना लगाती हु

तुषार फ्रेश होकर आ गया, दीपा और रूचि भी आ गई तुषार खाना खाने लगा बाकि सब चाय पि रहे थे, तुषार ने दोनों बहेनो को फ़ोन दिखाया, दीपा ने उसे चार्जिंग पैर लगा दिया,

तुषार- माँ दीदी नहीं आई

अंजलि- नहीं अभी नहीं आई

तुषार- आज तो संडे ह फिर इतनी देर तक ऑफिस में मीटिंग होती ह

Anjali-nai नै जॉब ह न तो करना पड़ता ह,

रूचि- माँ पापा कब आएंगे

अंजलि- कल शाम को आ जायेंगे

रूचि- आज मैं आप पास सोऊंगी

तुषार- मैं सोऊंगा माँ के पास

अंजलि- तुम दोनों सो जाना काफी बड़ा बीएड ह

दीपा- और मैं

अंजलि- टब hi आ जाना

दीपा – नहीं आज इन्हे hi सुला लो मैं तो अकेली सोऊंगी आपके साथ

फिर रात के खाने की तैयारी में लग गए, आज फिर सीमा देर से आई बहुत थकी हुई थी, वो सीधे अपने रूम में चली गई,

अंजलि- इसे क्या हुआ आज रुकी भी नहीं

दीपा- मैं पूछ क्र आती हु

दीपा उप्पेर चली गई,

दीपा- सीमा क्या हुआ कुछ परशान लग रही ह

सीमा- नहीं बस थक गई हु

दीपा- चाय लौ क्यात ेरे लिए

सीमा- नहीं मुझे कुछ नहीं चाहिए माँ से बोल देना मैं खाना खा क्र आई हम एरा खाना न बनाये और मुझे कोई डिस्टर्ब न करे, मैं सो रही हु मेरी कमर में दर्द हो रहा ह

तुषार- मैं दबा दूंगा कमर तो,

अशर बहार खड़ा सब सुन रहा था उसे लगा वो मजाक करेगा सीमा खुश हो जाएगी

सीमा- कोई जरुरत नहीं ह बस मुझे आराम करने दो जाओ यहाँ से

दोनों उदास से होकर निचे आ गए

अंजलि- क्या हुआ आई नहीं

दीपा- माँ वो थक हुई ह खाना भी नहीं खायेगी खा क्र आई ह

अंजलि- ये क्या बात हुई

तुषार- जाने दो न माँ नौकरी का प्रेशर ह तो बेचारी थक गई होगी,

फिर सबने खाना खाया, फिर तीनो बहन भाई रूचि के रूम में बैठे थे,

रूचि- सीमा दी में बहुत बदलाव आ रहा ह वो ऑफिस की बात नहीं बता रही हमसे भी दूर रहे रही ह

दीपा- है यार कुछ तो गड़बड़ ह

तुषार- उन्हें थोड़ा टाइम देते ह न हो सकता हो उन पैर ज्यादा प्रेशर आ गया हो

रूचि- ऐसा क्या प्रेशर जो अपने मकसद को hi भूल जाये

तुषार- अरे नहीं यार ऐसा नहीं होगा थोड़ा टाइम देते ह उन्हें

रात को रूचि अंजलि के पास सो गई तुषार अपने रूम में चला गया और फिर दीपा के पास और दोनों भाई बहन ने फिर छुए का भर पुर मजा लिया,

अगले दिन तुषार ने गयम की सफाई के साथ एक्सरसाइज भी शुरू क्र दी, वही वो शाक्षी के साथ किश करना बूब्स दबाना सब क्र रहा था उप्पेर उप्पेर से, वो आगे बढ़ने के लिए सही टाइम का वेट क्र रहा था, फ़ोन स्टार्ट होते hi उसने रजिया को कॉल करके no. दे दिया अपना, ऐसे hi 15 दिन निकल गए इस बिच तुषार और अंजलि की हलकी फुलकी मस्ती चलती रहती थी, दोनों एक दूसरे को होतो पैर किश कर लेते बहो में भर लेते, तुसाहर पीछे से अंजलि को चिपक जाता, मस्ती चल रही थी, अब तुषार का कण्ट्रोल बहुत बढ़ गया था, अब वो घर आता अंजलि को पीछे से गले लगता, उसकी गार्डन चुम लेता, अंजलि उसके हॉट भी चुम लेती, लेकिन तुषार का लुंड उसकी मर्जी के बिना हिलता भी नहीं था, अंजलि भी ये महसूस क्र रही थी, और वो बहुत खुश भी थी, सीमा एक दम खामोश सी रहती थी वो ऑफिस की कोई बात नहीं बताती बस बोल देती की सुरेश आया नहीं, इन दिनों में उसने तुषार को भी छोड़ने नहीं दिया, ये बात दीपा को बड़ी अजीब लग रही थी, वैसे तो तुषार ने दीपा को भी नहीं छोड़ा था, क्योकि उसे खुद पैर काम करना था,

एक दिन तुषार पुरस से पैसे निकल रहा था तो एक कागज निचे गिर गया, उसने उसे उठा क्र खोला तो उस पैर no. लिखे थे, वो no. चंद्रो देवी का था, पहला चनदरो देवी का मोबाइल का दूसरा उनके घर के लैंडलाइन का no. और तीसरा no. जो सबसे निचे लिखा था, अनीता, तुषार अचंभित रह गया, अनीता उसे अपना no. क्यों देगी, साइड के कोने में लिखा था, जब तुम्हारा फ़ोन चल जाये तो कॉल करना, इसे चुप चाप रख लो,

शायद अनीता को दर था तुषार वही पढ़ने लगेगा लेकिन तुषार ने तो कागज बिना देखे hi रख लिया था,

तुषार ने उस no. पैर कॉल किया तो किसी ने उठाया नहीं, तुषार ने एक संस भेज दिया मैं तुषार हु, कुछ देर बाद संस आया बाद में बात करुँगी,

तुषार घर आ गया, रात को सब खाना खाने बैठे तो राजेश ने बताया की कल वो बहार जा रहा ह, अंजलि ने तुरंत तुषार की तरफ देखा, दोनों किन अजर मिली, अंजलि के आँखों की चमक देख क्र तुषार समझ गया वो क्या कहना च रही ह, तुषार का दिल ख़ुशी से उछलने लगा, अंजलि की धड़कन भी बढ़ गई थी,

अगले दिन सब अपने अपने कॉलेज चले गए, वापस आते टाइम दीपा आज जल्दी आ गाइट hi, अंजलि को ऑटो नहीं मिल रहा था तो वो पैदल hi चल दी, रस्ते में उसके पीछे से एक कार आकर रुकी उसमे से चार लोग उतरे, तीन तो बदमाश टाइप थे चौथा था अजय,

अजय को देखते hi अंजलि घबरा गई

अजय- कहा जा रही हो जान हमसे क्यों दूर भाग रही हो,

अंजलि- मेरा रास्ता छोड़ो

अजय- बड़ी मुश्किल से तो तेरा रास्ता मिला ह, ऐसे कैसे छोड़ दू, मैंने कहा था 2 महीने यही हु तू मिलने नहीं आई

अंजलि- प्लस मुझे जाने दो

अजय- ऐसे कैसे जाने दू अभी 10 दिन और हु यहाँ और इन 10 दिन तू मेरे साथ रहेगी, चलो रे डालो इसे अंदर

उनमे से एक ने अंजलि का हाथ पकड़ लिया तभी उसके सर पैर एक पत्थर लगा,

खबरदार जो मेरी माँ को हाथ लगया तो,

ये रूचि थी जो अपने कॉलेज से आ रही थी,

अजय- अरे अरे ये तो एक के साथ दो मिल गाइट ु भी इससे काम जबरदस्त माल नहीं ह, तेरी उम्र में ये भी तेरी तरह कांचा माल थी,

अंजलि- अजय वो बेटी ह मेरी

अजय- तभी तो तेरी तरह चिकनी माल ह, इसे भी उठाओ आज बहुत हो गया ड्रामा

अंजलि- मैं तुम्हारे हाथ जोड़ती हु अजय मेरी बेटी को छोड़ दो ये तुम्हारी..

अजय- चुप रहे साली बहुत सालो से तड़पाया ह तूने अब नहीं

रूचि ने एक थपड अजय के गाल पैर जड़ दिया

रूचि- तुझे इतनी भी तमीज नहीं ह कैसे बात करते ह छोड़ मेरी माँ को

थप्पड़ लगते hi अजय का गुस्सा चढ़ गया उसने रूचि के बाल पकडे और दूसे हाथ से उसका सूट पकड़ लिया गले पैर से

अंजलि उसकी तरफ भागी जिसे अजय के आदमी ने पकड़ लिया,

अंजलि- अजय छोड़ दो मेरी बेटी को मैं चल रही हु तुम्हारे साथ प्लस उसे छोड़ दो

अजय- इसे कैसे छोड़ दू बड़ी गर्मी ह इसमें इसकी साडी गर्मी निकलूंगा आज, अरे कल्लू जरा इस कुटिया क नंगा क्र एक बार यही

उस कल्लू नाम के आदमी ने अंजलि की साड़ी पकड़ी और खींच दी, तभी पीछे एक लत उसकी कमर पैर पड़ी लात पड़ते hi वो कार से जा टकराया,

ख़बरदार जो मेरी माँ बहन को हाथ लगाया, कसम अपनी माँ की बिच में से फाड् दूंगा, एक तेज दहाड़ के साथ तुषार सामने आ गया,

एक बार तो अजय भी घबरा गया, फिर सम्हालते हुए बोलै, आज तेरे सामने hi तेरी माँ बहन को च…. वो इतना hi बोल पाया था, तुषार उछाल क्र उसके पास पहुंच गया और उसकी गार्डन पकड़ क्र दबा दी, रूचि अजय के हाथ से छूट गई,

तभी अजय के दोनों आदमी पीछे से आ गए उन्होंने तुषार को पकड़ना चाहा, लेकिन तुषार उनकी सोच से ज्यादा फुर्तीला निकला उसने तुरंत अजय को छोड़ा और घूम गया वो दोनों अजय से टकराये, तभी वो तीसरा आदमी जिसे तुषार ने पहले लात मरी थी वो कार से हॉकी लेकर आ गया था, उसने जैसे hi तुषार पैर हॉकी चलाई, तुषार ने उसकी की हॉकी चीन ली, और उसी पैर बजानी शुरू क्र दी, तुषार जवान और ताकतवर लड़का था ो तीनो 50 से ज्यादा होंगे, अजय थोड़ा काम का था, तुषार की हॉकी जहा भी लगती वही से हदी टूटने की आवाज आती सर्दी का मौसम था चोट भी डबल असर क्र रही थी, 10 मिनट में hi चारो की हालत ख़राब हो गई,

अब तुषार ने अजय की तरफ रुख किया और उसकी दोनों पैरो में हॉकी बजानी शुरू क्र दी, तुसाहर ने अजय के दोनों पेअर तोड़ दिए थे,

तुषार- आज तुझे जान से मर दूंगा

अजय- अंजलि बचा मुझे इससे

तुषार- वो तुझे क्यों बचाएंगी कमीने

अजय- अंजलि तुझे तेरे प्यार की कसम बचा ले मुझे

अंजलि- तुषार रुक जा बीटा छोड़ दे इसे

रूचि- माँ ये क्या बोल रही हो इस हरामजादे को छोड़ने को बोल रही हो जिसने आपको इतना परेसाहन किया ह

अंजलि- है मैं नहीं चाहती एक bête के हाथ से ऐसा ाप्रद हो

सभी का मुँह खुला रह गया

Ruchi-beta मतलब

अंजलि- है बीटा ये तुम दोनों का बाप ह

ये सुनकर रूचि तुषार और खुद अजय भी शोकेड रह गया

तुषार- ये क्या बोल रही हो माँ ये ये मेरा बाप नहीं माँ नहीं ऐसा मत बोलो, कह दो ये झूट ह मैं ऐसे गिरे हुए इंसान क औलाद नहीं हो सकता

अजय- अंजलि तुम सच बोल रही हो ये दोनों मेरे

अंजलि- ख़बरदार जो तुमने इन्हे अपने बच्चे बोलै तुम्हारे धोके और मेरी विश्वास की पहचान ह ये दोनों और ये बस मेरे बच्चे ह

रूचि- माँ चलो यहाँ से मुझसे बर्दास्त नहीं हो रहा मुझे खुद के पैदा होने पैर अफ़सोस हो रहा ह अगर मैं इस आदमी की औलाद हु तो

अजय- तू झूट बोल रही ह तूने अपने मजे के लिए इन्हे पैदा किया ह, पता नहीं किसका खून ह और मेरे सर मध् रही ह

अंजलि- चिल्ला क्र अजय

तुषार- हरामजादे मैं तुझे जान से मार दूंगा

तभी पीछे से दो गाड़िया आ गई, अजय क ीक आदमी ने मार कहते टाइम hi गाओं में कॉल क्र दी थी, कार में से 8-10 आदमी उतरे वो सभी तुषार की तरफ भागे तभी आवाज आई रुक जाओ, ये चंद्रो देवी थी,

सभी अपनी जगह रुक गए, चंद्रो देवी ने अंजलि की तरफ देखा और मामला कुछ समझ आया,

चंद्रो देवी- क्या हुआ यहाँ

अजय- माँ इस लड़के ने

चंद्रो देवी- चुप एक दम चुप, क्या हुआ अंजलि?

अंजलि ने साडी बात चंद्रो देवी को बता दी

चंद्रो देवी ने एक थपड मारा अजय को- अगर तू मेरी औलाद न होता तो तुझे अभी गोली मर देती, चलो से इसे हॉस्पिटल में फेंक क्र आओ, वो आदमी अजय और बाकि आदमियों को लेकर हॉस्पिटल चले गए,

चन्रो देवी- माफ़ क्र दे बीटा आज मेरा सर पूरी तरह झुक गया तेरे सामने

अंजलि- अम्मा इसमें आपकी क्या गलती ह

चंद्रो देवी- मेरी hi गलती ह मुझे लगा ये सुधर गया ह लेकिन मेरी दोनों संतान कभी नहीं सुधर सकती,

तुषार- चलो माँ यहाँ से

चंद्रो देवी मैं तुम्हे छोड़ देती हु

तुषार- नहीं अम्मा हम चले जायेंगे

अंजलि चंद्रो देवी की तरफ हाथ जोड़ क्र रोटी हुई चली गई, तुषार और रूचि दोनों की आँखों से अंगारे बरस रहे थे साथ में आंसू की नदिया भी भी रही थी,

घर पहुंच क्र तुषार ने दरवाजे को लत मरी और अंदर घुस गया, आवाज सुनकर दीपा दौड़ क्र आई, क्या हुआ, लेकिन सबके ऐसे हालत देख क्र घबरा गई,

तुषार ने रूम में जाकर दरवाजा बंद क्र लिया रुचे भी अपने रूम में घुस गई, अंजलि ब्रॉक्ली सी कड़ी रही,

दीपा- क्या हुआ माँ क्या हुआ

अंजलि- सब ख़तम हो गया बीटा

दीपा- लेकिन हुआ क्या

अंजलि- आज इन्हे अपनी हकीकत से सामना हुआ ह

दीपा- मतलब

अंजलि- इन्हे पता चल गया ह की ये किसके बच्चे ह अब ये खुद को सम्हाल नहीं प् रहे

दीपा- लेकिन कैसे

अंजलि- वो सब बाद में बीटा बस तू इन्हे सम्हाल

दीपा- आप बैठो मैं कुछ करती हु

दीपा सबसे पहले रुचे के रूम के सामने पहुंची- रूचि दरवाजा खोल

रूचि- अभी चली जा दीपा

दीपा- रूचि एक बार खोल तो सही बात तो सुन

रूचि- अभी कुछ नहीं सुन्ना मुझे

दीपा- क्यात ु भी मेरी तरह करेगी जो गलती मैंने की वही टब hi करेगी एक बार माँ का सच तो सुन ले,

रूचि- ये सच मुझसे बर्दास्त नहीं हो रहा

दीपा- हमने ये सब पहले hi सोच क्र फैसला किया था की हम सच पता करेंगे, इस दिन के लिए सच जानना था तुझे ताकि तू ऐसा रियेक्ट करे हम जानते थे सच बहुत कड़वा हो सकता ह,

रूचि ने दरवाजा खोला- क्या करू दीपा बर्दास्त नहीं हो रहा मुझसे

दीपा- बाबू हम जो देख रहे ह जरुरी नहीं वही सच हो उसमे बहुत सी बाते हो सकती ह, एक बार माँ से बात तो क्र ले

रुचे ने है में गार्डन हिलाई और निचे आ गई, रूचि को निचे आता देख अंजलि को थोड़ा सकूं मिला,

अंजलि- बीटा मुझे माफ़ क्र देना

रूचि- नहीं माँ मुझे माफ़ क्र दो मुझे आप पैर यकीन रखना चाहिए था,

अंजलि- तुषार

रूचि- मैं लती हु उसे

रूचि तुषार के रूम के पास चली गई- टुशु दरवाजा खोल

तुषार ने एक hi बार में दरवाजा खोल दिया और रूचि को गले लगा लिया, ये क्या हो गया ऐसा तो नहीं सोचा था

रूचि- तो क्या सोचा था कोई तो हमारा बाप निकला hi,

तुषार- हम्म्म्म बस उस इंसान के नाम से भी मुझे गुस्सा आ रहा ह, बस अच्छा ये ह की हम सेज भाई बहन ह ये तो पता चला

रूचि- (धीरे से )बस इसी बात का दुःख ह

तुषार- क्या

रूचि- कुछ नहीं माँ से बात कर उनका हाल बहुत बुरा हो रहा ह हम अपने दुःख में माँ का दुःख तो भूल hi गए उन पैर क्या बीत रही होगी

तुषार- है यार मैं सच में बहुत बड़ा पागल हु चल जल्दी

दोनों अंजलि के पास आ गए अंजलि जो बैचेन कड़ी थी उन्हें देखते hi उनकी तरफ बढ़ी, दोनों ने अंजलि को गले से लगा लिया, तीनो काफी देर तक ऐसे hi चिपके रहे फिर दीपा भी चिपक गई उनके साथ, चारो काफी देर ऐसे hi खड़े रहे फिर दीपा ने सबको रूम में बैठाया और चाय बनाने चली गई,

जब तक दीपा आई तीनो एक दूसरे की गॉड में लेते रहे, दीपा अंदर आई,

दीपा- अब कोई मुझे भी बताएगा कुछ

रूचि- छोड़ दीपा रहने दे

अंजलि- नहीं बीटा तुम्हे पता होना चाहिए,

तुषार- लेकिन माँ उसकी जरुरत नहीं ह

अंजलि- जरुआत ह इसी लिए बता रही हु, और धयान से सुनो और धयान से समझो

तीनो खामोश हो गए फिर अंजलि ने बोलना शुरू किया,



फ़्लैश बैक…………………
 
अपडेट-23




फ़्लैश बैक बी अंजलि……………….

सीमा के पैदा होने के बाद दीपा भी मेरे पास आ गई थी, आगे बहुत काम थी लेकिन मैं लगती नहीं थी 1 साल तो ठीक रहा, लेकिन मेरे अंदर सेक्स की बहुत रेक्विरेमेंट थी, काम आगे में भी मुझे जरुरत से ज्यादा सेक्स चाहिए था, राजेश सेक्स क्र नहीं सकते थे, मैं खुद को कण्ट्रोल करती रही, लेकिन एक दिन यश नाम का तूफ़ान हमारे घर आ गया, घर तो उन्ही लोगो का था तो उन्हें रोक hi कोण सकता था हम तो वह मजदुर थे,

राजेश को उसने सामान लेन को भेज दिया और मेरे पास आ गया, मैं उसे पहले नहीं जानती थी की ये वही यश ह जिसकी वजह से राजेश जी की ये हालत हुई ह, राजेश वही बैठ गया और बोलै- अंजलि जब तक राजेश आये आ यहाँ बैठ मेरे पास तुझसे कभी बात चित नहीं हुई

अंजलि- जी वो मैं बचो को दूध पीला दू

यश- अरे पीला देना दूध आ तो सही

मैं उसके सामने निचे बैठ गई,

यश- सब ठीक चल रहा ह न कोई दिक्कत तो नहीं हो रही यहाँ

अंजलि- नहीं सब अच्छा ह

यश- राजेश खुश रखता ह न तुझे

अंजलि- है जी बहुत

यश- वैसे ये तो बता ये बच्चे किसके हैं,

अंजलि- जी क्या मतलब ह आपका हमारे हैं

यश- तेरे तो होंगे लेकिन बाप कोण ह इनका

अंजलि- ये कैसी बात कर रहे हो आप राजेश जी hi ह इनके पिता

यश- अरे जो आदमी तुझे छोड़ नहीं सकता बच्चे कैसे पैदा करेगा उसके पास तो लुंड hi नहीं ह

मैं वह से उठ क्र जाने लगी तो यश ने मेरा हाथ पकड़ लिया, अरे रुक तो अच्छा नहीं पूछता किसके बच्चे हैं, पैर तेरी गर्मी कैसे शांत होती होगी बता न, तड़प रही होगी तू तो, आ मेरे पास मैं क्र देता हु शांत तेरी गर्मी,

अंजलि- छोड़ो मुझे वर्ण मैं शोर मचाउंगी

यश- ये मेरा घर ह और अगर इस घर में रहना ह तो मुझे खुश रखना होगा और इससे तुझे भी ख़ुशी मिलेगी, वर्ण अभी बहार फेंक दूंगा

मैं दर गई, अगर हमे यहाँ से भगा दिया तो क्या होगा, मैं उसके हैट जोड़ने लगी, प्लस ऐसा मत करो प्लस छोड़ दो मुझे, वो हस्ता हुआ मेरी तरफ आया और उसने मुझे अपनी बहो में भर लिया और उठा क्र कमरे में चल दिया, मैं रोने लगी और उससे छुड़वाने के लिए जोर लगाने लगी लेकिन वोन hi रुका उसने मुझे बीएड पैर गिराया तभी पीछे से एक लड़के ने उसे रोका भैया ये क्या क्र रहे हो, चलो यहाँ से , ये अजय था

यश- अजय तू बहार रुक

अजय- भैया चलो यहाँ से वर्ण मैं माँ को बता दूंगा

माँ का नाम सुनते hi यश पीछे हाथ गया, और बहार चला गया कुछ hi देर में राजेश भी आ गए, उस दिन मेरे दिल में अजय के लिए इज्जत ने जगह ले ली, कुछ दिन बाद अम्मा चंद्रो देवी आई मैंने उन्हें यश की हरकत बताई तो उन्होंने यश को थपड लगाए और उसकी शादी करवा दी, वही अजय का हमारे पास आना जाना शुरू हो गया, वही यश शादी के बाद विदेश चला गया,

अजय मेरी काफी मदद क्र देता बहुत अच्छी बाटे करता था, उस टाइम मैं बहुत प्यासी रहती थी मेरे अंदर बहुत गर्मी थी जिसका असर ये हुआ की मैं अजय को दिल दे बैठी, उसकी सुंदरता उसकी अच्छे पैर मंत्रमुग्ध हो गई थी, अजय ने एक दिन मुझे परपोज़ भी क्र दिया था, मैं बेवकूफ ये नहीं समझ पाई की एक तो मैं शादी शुदा 2 बच्चो की माँ और जय के घर में नौकरानी हु वो मुझ ेक्यो प्रपोज़ कर्ज लेकिन जब हवस और महोब्बत एक साथ आ जाये तो दिल और दिमाग दोनों hi सोचना बंद क्र देते हैं, मैंने ये बात राजेश को बताई की मुझे अजय अच्छा लगने लगा ह

राजेश- अंजलि मैं और तुम पति पत्नी नहीं हैं हमारा रिश्ता बस समाज के लिए दिखावा ह मैं तुम्हे कोई ख़ुशी नहीं दे सकता, इसलिए तुम अपनी जिंदगी जियो जो पसंद आये करो मुझे कोई ऐतराज नहीं ह

राजेश जी की परमिशन मिलते hi मैंने अजय को अपने दिल का हाल सुना दिया, अजय बहुत खुश हो गया और 2 दिन बाद hi हमारे बिच शारीरिक सम्बन्ध बन गए, अब अजय दिन भर मेरे hi पास रहता कभी मुझे कार में ले जाता कभी कही और और हम दोनों अपनी प्यास बुझाते, जिसका नतीजा ये हुआ की 18 की आगे में मैं फिर प्रेग्नेंट हो गई, मैं दर गई थी लेकिन राजेश बोले कोई नहीं अजय अच्छा इंसाने ह वो इस बच्चे को अपना लेगा, अजय भी है है बोलता रहा, और 8तह मंथ तक वो मेरे साथ सम्बन्ध बनता रहा, जब बच्चा पैदा होने का टाइम आया तो उसने हाथ खड़े क्र दिए की वो एक नौकरानी से कोई रिश्ता नहीं रख सकता,

उस दिन मैं इतना टूट गई की मैं अपने होश खो बैठी और मरने का फैसला क्र लिया, लेकिन राजेश जी ने एक बार फिर मेरा साथ दिया और बोले ये बच्चा भगवान का दिया आशीर्वाद ह इसे हम पालेंगे मुझे ख़ुशी होगी मैं 3 बच्चो का बाप बन जाऊंगा और समाज में मेरी इज्जत hi होगी,

चंद्रो देवी हमसे मिलने आई, तो मैंने अपना और अजय के रिश्ते के बारे में बता दिया और उस बच्चे के बारे में भी, चंद्रो देवी को अपने आदमियों से पहले hi इसकी जानकारी थी लेकिन उन्होंने बिच में आना सही नहीं समझा, लेकिन उन्होंने मुझे वडा किया की वो जो सहायता हो सकती ह करेंगी बस किस को पता न चले ये बच्चा किसका ह, मैं भी वडा क्र दिया, और हमारी ये फुल सी बच्ची रूचि पैदा हुई, घर में तीसरी लड़की आ गई, राजेश बहुत खुश थे,

अगले 2 महीने उन्होंने मुझे कोई काम नहीं करने दिए, चंद्रो देवी ने मेरे खाने के लिए बहुत सी चीजे भेजी, आखिर रूचि उनकी पहेली पोती जो थी, सब अच्छा था मैं भी नार्मल होने लगी थी, की एक दिन राजेश कही बहार गए थे, तो घर में अजय आ गया उसने बहुत शराब पि राखी थी, और मेरे सामने रोने लगा

अजय- मुझे माफ़ क्र दो अंजलि मैं तुम्हे अपना नहीं पाया ी लव ु अंजलि

अंजलि- तुम जाओ यहाँ से अजय प्लस

अजय- अंजलि मैं तुमसे बात क्र रहा हु तुम मुझे जाने को बोल रही हो

अंजलि- प्लस चले जाओ यहाँ से मुझे कोई बात नहीं करनी मुझे बच्चो का धयान रखना ह

अजय- माँ छुड़ाए तेरे बच्चे साली चल मेरे साथ मैं तुझे प्यार करता हु

अजय का ये रूप देख क्र मैं दर गई, मैंने उसे बहार को धकेला लेकिन उसने मुझे अपने कंधे पैर उठा लिया और जबरदस्ती गाड़ी में दाल लिया, और अपने गाओं ले आया अपने खेत में बने एक कमरे पैर, वह यश भी पहले से बैठा था

अजय- लो भाई ले आया मैं इस कुटिया को इसने आपको मन किया था न आज बुझा लो अपनी प्यास

यश- ठंकु यार तू मेरा सच्चा भाई ह उस दिन तूने रोका मैं तो समझ hi नहीं पाया था तूने क्यों किया

अजय- अरे भाई वो नामर्द राजेश आता दिख गया था मुझे, आज कोई नहीं आएगा

अजय और यश की बात सुनकर मेरी रूह तक काँप गई, मैंने ऐसे जानवर से प्यार क्र लिया था, जिसे मेरी कोई परवाह hi नहीं ह मुझे धोके से फसा क्र मेरा इस्तेमाल किया था, मैं कुछ बोल hi नहीं प् रही थी बस रोये जार hi थी, अब बच्चा पैदा किये 2 hi महीने हुए थे तो शरीर में उतनी ताकत भी नहीं थी इन हैवानो का सामना करू,

यश- पहले तू क्र ये तेरी फसे हुई कबूतरी ह आज पहले तू ठंडा हो जा फिर मैं करूँगा

अजय हस्ता हुआ मेरी तरफ आने लगा मैं पीछे हटने लगी और उसने मेरे पेअर पैर अपना पेअर रख दिया मैं दर्द से चिल्ला उठी लेकिन उसे कोई फर्क नहींपड़ा और उसने मेरे साथ जबरदस्ती करनी शुरू क्र दी, उस दिन मेरा दिल खून के आंसू रो रहा था, मुझे बस ऐसा लग रहा था की क्या मर्दो के लिए औरत की इच्छा उसके जज्बात उसके प्यार की कोई अहमियत नहीं ह, बस मर्दो के लिए औरतो का शरीर भोगने का साधन ह उनके लिए औरत बस चुदाई के लिए खिलौना ह,

अजय मुझे रोंद्ता रहा मैं बेसुध सी पड़ी रही, जैसे hi अजय उठा तो यश अंदर आ गया, वो अपने कपडे उतर hi रहा था की पीछे से चंद्रो देवी आ गई,

सरला काकी भी साथ थी सरला काकी ने अजय को मुझे गाओं में लेट हुए देख लिया था, वही चंद्रो देवी को बुला ले, लेकिन चंद्रो देवी के आने में देर हो चुकी,

चंद्रो देवी ने एक डंडा उठा क्र दोनों बेटो को पीटना शुरू क्र दिया, मैं खुद को समेटे हुए रोये जा रही थी,

यश- माँ ये खुद हमारे पास आई ह माँ इसका पति तो कुछ क्र नहीं सकता, पता नहीं तीनो बच्चे किसकी औलाद ह किस किस के साथ सोती ह ये और तुम हमारी गलती बता रही हो

चंद्रो देवी- ख़बरदार जो एक भी शब्द अपने मुँह से निकला तो जान ले लुंगी, भूल जाउंगी तुम मेरे bête हो, इसे मुझे भीतर कोई नहीं जनता अगर तुम लोग यहाँ से नहीं गए तो मैं खुद पुलिस को बुलाऊंगी और जेल भिजवाउंगी और अपनी जायदाद से निकल दूंगी,

दोनों भाई दर गए और भाग गए वह से, चंद्रो देवी मुझे हॉस्पिटल ले गई मेरा इलाज करवाया, उधर राजेश परेशां थे तीनो बच्चे घर में अकेले थे दूध के लिए रो रहे थे,

चंद्रो देवी ने राजेश जी को खबर भिजवा दी, और सरला काकी को चुप रहने का वडा दिलाया, सरला काकी को पता चल गया राजेश बाप नहीं बन सकता और मेरे बच्चो के बाप कोई और हैं,

मैं घर वापस आ गई लेकिन मेरे अंदर की औरत मर सी गई थी मैं बेसूद सी रहती, इस काम उम्र में 3 बच्चो को सम्हालना और ऐसे हालातो से गुजरना बहुत मुश्किल था, लेकिन एक और दर्द मेरी तरफ आ रहा था, जब मुझे पता चला मैं फिर प्रेग्नेंट हो गई हु,

ये मेरे लिए और बड़ा दर्द था क्योकि ये प्यार की नहीं पाप की निशानी था मैं एबॉर्शन करना चाहती थी लेकिन डॉ. ने मन क्र दिया एक तो मैं 3 महीने पहले hi माँ बानी थी और मेरी आगे बहुत काम थी मेरी जान को खतरा था, राजेश ने कहा तुम घबराओ नहीं हम इस बच्चे को पालेंगे मैंने न चाहते हुए भी बच्चा पैदा करने का फैसला लिया, क्योकि मैं मर भी नहीं सकती थी मेरी 3 बछिया कैसे जीती, और फिर पैदा हुआ तुषार, जिस दिन वो पैदा हुआ तो मैंने सोच लिया था ये hi हमारे दुःख दर्द दूर करेगा, ये हमारे साथ हुए अत्याचारों का बदला लेगा,

जिस हॉस्पिटल में मैं एडमिट थी वही एक औरत और एडमिट थी उसकी जुड़वाँ बच्चे पैदा हुए थे, वो और मैं एक hi रूम में शिफ्ट क्र दिए थे, मैं उदास सी तुषार को गोद में लिए बैठी थी राजेश घर गए हुए थे, तभी उस औरत को रूम में लाया गया और मेरे पास वाले बीएड पैर लिटा दिया, उसके दो जुड़वाँ बच्चे बड़े प्यारे थे, उस औरत की आँखों ने आंसू थे, मैं तो पहले hi उदास थी

औरत- बहन तुम भी मेरी तरह इस बच्चे को नहीं चाही थी,

अंजलि- जी क्या

औरत- तुम दुखी हो इसलिए पूछा

अंजलि- मैं सोच रही हु इस गरीबी में कैसे पालूंगी बच्चो को, पैर तुम क्यों दुखी हो

औरत- मेरे दुःख का कारन मेरी जिंदगी ह

अंजलि- मुझे बताओ शायद कुछ दर्द हल्का हो

औरत- मैंने एक लड़के से प्यार किया और उसके साथ भाग गई थी, हम दोनों बहुत खुश थे, लेकिन धीरे धीरे उसका मन मुझसे भर गया और वो मुझे प्रेग्नेंट करके भाग गया, मैं अकेली रह गई अपने घर जा नहीं सकती थी, मरना चाहती थी, तभी जिस माकन में मैं किराये पैर रहती थी उसके मालिक ने मेरा साथ दिया, उनकी पत्नी मर चुकी थी उनकी एक बेटी ह, वो मुझे अपनी पत्नी बनाने के लिए तैयार ह लेकिन वो चाहते ह मैं ये बच्चे कही अनाथाश्रम में दे औ

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औरत- वो किसी और के पाप की निशानी को नहीं पालेंगे

अंजलि- तुमने क्या सोचा ह

औरत- मैंने फैसला क्र लिया ह मैं इन्हे अनाथ आशाराम में दे आउंगी

अंजलि- ये तुम्हारे बच्चे हैं तुम इनके साथ ऐसा कैसे क्र सकती हो

औरत- मैं इन पाप की निशानियों के लिए खुद की जिंदगी क्यों बर्बाद करू

मेरा दिल रो उठा उन बच्चो को देख क्र मैं बैचैन हो गई, मुझे कुछ नहीं सूझ रहा था, तो मैंने राजेश जी से पूछे बिना एक फैसला क्र लिया और उस औरत से बोली

तुम ये बच्चे मुझे दे दो तुम्हे इनसे छुटकारा चाहिए न, तुम चली जाओ अभी यहाँ से मैं इन्हे पालूंगी

औरत- तुम इतनी महँ क्यों बन रही हो

अंजलि- मैं महँ नहीं बन रही बस एक माँ बन रही हो

औरत- सोच लो बाद में मेरे गले मत दाल देना

अंजलि- न तुम मुझे जानती हो न मैं तुम्हे जानती हु कभी मुलाकात भी हुई तो भी अनजान बन जायेंगे एक दूसरे से

औरत- लेकिन तुम यहाँ कैसे करोगी

अंजलि- वो मैं खुद देख लुंगी

उस औरत ने अपने बच्चे अंजलि के बीएड पैर लिटाये और वह से निकल गई, अब मैं 20 साल की लड़की बिना शादी किये 6 बच्चो की माँ बन चुकी थी.

कुछ देर बाद राजेश और साथ में चंद्रो देवी भी आ गयी, मैंने उन्हें सब बताया

चंद्रो देवी- क्या औरत ह तू अंजलि मैं तो तुझे देवी मैंने लगी हु

अंजलि- अम्मा मैं इंसान hi हु बस बिना माँ के बच्चो को पालते देखा ह इसलिए माँ न होने का दर्द समझती हु

राजेश- मुझे ख़ुशी ह तुम मेरी जिंदगी में आई अंजलि ऐसी औरत इस दुनिया तो कही नहीं होगी

अंजलि- अब मेरी तरफ न करो ये बताओ यहाँ काया कहोगे

चंद्रो देवी- वो मैं क्र दूंगी तुम घर चलने की तैयारी करो

चंद्रो देवी ने हॉस्पिटल में सब सम्हाल लिया, घर आकर मैं खुश भी थी और परेशां भी 6 बच्चे कैसे पालेंगे, फिर सब बड़े होने लगे सबकी उम्र कैसे बताई जाएगी ये समझ नहीं आ रहा था, अंजलि सबसे बड़ी थी फिर दीपा जो अंजलि जितनी hi लगती थी उसकी उम्र 1 साल काम लिखे बिरथ सर्टिफिकेट में, फिर रूचि अब ये तीनो लड़के एक hi आगे के थे लेकिन तुषार बहुत कमजोर था उसकी ग्रोथ बहुत स्लो हो रही थी क्योकि जब मैं प्रेग्नेंट हुई तो मेरा शरीर बहुत कमजोर था तुषार को पूरा पोस्टिव नहीं मिल पाया, इसलिए उसकी आगे सचिन और कपिल से 1 साल काम लिखवाई,

मैं लगभग 20 और 21 के बिच में थी 6 बच्चो की माँ सभी अभी दूध पिने की उम्र में थे एक अकेली औरत किस किस को दूध पिलाती,

लेकिन जिसका ख्याल उप्पेर वाला रखता ह उन्हें कुछ नहीं होता मुझे इतना दूध आता था की सबकी भूक मिट जाती थी उसका कारन मेरे हार्मोन्स में बदलाव होना था, मेरे बूब्स पहले से hi काफी बड़े थे और दूध भी बहुत था, जिससे मैं तुम सब को पाल पाई.

ये फ़्लैश बैक एन्ड………

प्रेजेंट………..

अंजलि की बात सुनकर तीनो बहन भाई की आँखों से आंसू बहे जा रहे थे तीनो एक साथ अपनी माँ के कदमो में बैठ गए,

दीपा- माँ आप सच में बहुत महँ हो

तुषार- मुझे गर्व ह माँ की मैं आपका बीटा हु

रूचि- माँ तुमने कितने दुःख उठाये हमे पलने के लिए

अंजलि- कोई माँ दुखी नहीं होती अपने बचो को पलने में

दीपा- माँ कोई औरत दुसरो के बच्चे नहीं पाल सकती लेकिन आपने तो

अंजलि- बस बस मेरे बचो तुम सब मेरे साथ हो तो मुझे कोई दुःख दर्द नहीं ह

तुषार- लेकिन उन्हें दुःख भी होगा और दर्द भी जिन्होंने आपके साथ गलत किया ह

अंजलि- अभी समय नहीं आया ह बीटा

रूचि- कैसा समय माँ उन लोगो को माफ़ नहीं करना

अंजलि- नहीं किया बीटा किसी को माफ़ नहीं किया बस अभी समय नहीं आया

दीपा- माँ आपकी आज तक शादी नहीं हुई ये सिंदूर आपकी मांग में किसके लिए

अंजलि- इसका अभी तक कोई हक़दार नहीं ह बीटा, अजय से प्यार किया लेकिन वो इंसान धोकेबाज था, तुम्हारे पिता राजेश जी के नाम का सिंदूर लगा क्र मैं उन देवता इंसान को कलंकित नहीं करना चाहती अगर उनके नाम का सिंदूर लगा क्र मैं किसी और के पास जाती तो उनके साथ धोखा होता इसलिए आज तक इस सिंदूर पैर किसी का हक़ नहीं ह

रूचि- माँ हम दिलाएंगे हक़

अंजलि- नहीं बीटा हक़ लेने वाला खुद ले लेगा

तभी बहार से दूर बेल्ल बजी सीमा आज जल्दी आ गई,

अंजलि- जाओ खुद को ठीक करो और इस दर्द को अपने जीवन में मत आने देना

दीपा ने दूर खोला, सीमा का फेस रोज की तरह उखड़ा हुआ वो बिना बोले अपने रूम में चली गई, रात को खाने के टाइम सभी एक साथ बैठे आज सब खामोश थे किसी के पास शब्द hi नहीं थे, सीमा अपने hi खयालो में खोई हुई थी, फिर सब रूम में चले गए, दीपा तुषार के पास पहुंची

दीपा- टुशु हमारी माँ ने बहुत तकलीफ उठाई ह अब हमारी जिम्मेदारी बनती ह उनकी तकलीफ काम करने की

तुषार- सही कहा दीदी हम करेंगे जरूर करेंगे

दीपा- हम इस अजय और यश को जरूर सबक सिखांएंगे

तुषार- मैं इनकी दुनिया उजाड़ दूंगा

दीपा- लेकिन उससे पहले तुझे किसी और की दुनिया बासनी ह

तुषार- किसकी दुनिया

दीपा- माँ की

तुसाहर- मतलब मैं समझा नहीं

दीपा- तू hi माँ को उनके हिसे की खुशिया दे सकता ह टुशु तुझे माँ की 24 सालो की प्यास को बुझाना होगा

तुषार- दीदी मुझसे नहीं होगा, माँ की कहानी सुनकर मेरे अंदर की िछाये hi मर गई

दीपा- तो क्या तू माँ को ऐसे hi तड़पने देगा

तुषार- दीदी मैं क्या करू समझ नहीं आ रहा

दीपा- मैं जो बता रही हु वही क्र समझे

तुषार- हम्म्म्म

तभी अंजलि आ गई सोना नहीं ह क्या आज दोनों को,

दीपा- जा रही हु माँ

दीपा अपने रूम में चली गई,

अंजलि- टब hi सो जा

तुषार- मैं आपके पास सोऊँगा माँ

अंजलि- मेरे पास सो पायेगा तू

तुषार- बस आपके पास hi मुझे सकूं मिल सकता ह माँ

अंजलि- अच्छा ठीक ह थोड़ी देर बाद आ जाना

अंजलि चली गई रूम में, तुषार खामोश लेता रहा और सोचता रहा, उसे क्या करना चाहिए, काफी देर लेटने के बाद वो उठा और चल दिया अंजलि के रूम में, उसने दरवाजे को हाथ लगाया तो वो खुल गया कमरे में अँधेरा था, तुषार अंदर घुसा तो बड़ी प्यारी खुशबु आ रही थी, लेकि उसे दिखाई कुछ नहीं दे रहा था,

तुसाहर- माँ सो गई क्या

अंजलि- नहीं

तुसाहर- अँधेरा क्यों किया हुआ ह

अंजलि- लाइट जला ले

तुषार अँधेरे में लाइट जलने पहुंचा और जैसे hi उसने स्विच ों किया ुर उसकी नजर बीएड पैर गई उसकी आँखे चुंधिया गई, सामने का नजारा देख क्र उसे अपनी आँखों पैर यकीन hi नहीं हो रहा था, बीएड पैर सफेद चादर पैर कुछ गुलाब के फुल और उन गुलाबो के बिच में लाल जोड़े में गुलाब जैसी खूबसूरत अंजलि बैठी हुई थी, जिसे देख क्र तुषार स्तब्ध सा खड़ा रह गया उसे समझ नहीं आया क्या करे


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अंजलि- ऐसे hi खड़ा रहेगा क्या यहाँ नहीं आएगा

तुसाहर- हल्कले हुए मम्माआ ये क्या ह

अंजलि- आज तेरे सामने तेरी माँ नहीं ह टुशु, तेरी प्रेमिका ह वो प्रेमिका जिसे तू कब से पाना चाहता ह, वो औरत जो कब से तेरे लिए प्यासी ह

तुषार- माँ मैं ये सब लेकिन

अंजलि- आज मैं खुद तेरे पास आई हु टुशु तू नहीं आया आज मैंने खुद तुझे अपना सब कुछ सपने का फैसला किया ह आज तू वो मर्द बन जो मैं तुझे बनाना चाहती हु,

तुषार आगे बढ़ा, और बीएड पैर बैठ गया,

तुषार- माँ आपके लिए तो मैं कुछ भी क्र सकता हु

अंजलि- तू एक माँ के लिए कुछ भी क्र सकता ह मुझे पता ह और मैं एक माँ होकर तेरे लिए कुछ भी क्र सकती हु, लेकिन आज कुछ ऐसा क्र जिससे मैं एक औरत होकर तेरे लिए कुछ भी करने के लिए तैयार हो जाऊ,

तुषार ने अंजलि के हाथ अपने हाथो में लिए और अंजलि की आँखों में देखा, इस देखने में जो प्यार था जो कशिश थी उससे अंजलि का दिल तेजी से धड़कने लगा, तुषार ने अंजलि के हाथो को चूमा, फिर अंजलि का माथा चूमा और गले से लगा लिया, अंजलि क अहसास हुआ जैसे उसका सच्चा ासिक सच्चा प्यार करने वाला आज उसे मिला ह, तुषार ने की जल्दबादी को हवस कोई दिखावा नहीं था बस प्यार था, और ये hi प्यार तो चाहिए था अंजलि को,


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तुषार ने अंजलि को अपनी गॉड में लिटाया और उसके गाल को शलया उसकी नजर अंजलि की नजरो से नहीं हैट रही थी,

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फिर तुषार ने अपने हॉट अंजलि के होतो की तरफ बढ़ाये, अंजलि के हॉट खुद खुलते चले गए, और दोनों के सुलगते हुए हॉट आपस में मिल गए, एक बहुत hi प्यार और शालीनता भरा हुआ चुम्बन हुआ दोनों के बिच, अंजलि की आँखे लाल होने लगी थी उसकी आँखों ने नशा सा चढ़ने लगा था, 24 साल बाद उसने किसी को अपना शरीर शॉप था, और जो सामने था वो कोई आम लड़का नहीं था,

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तुषार ने अंजलि को पूरा अपनी गॉड में बैठा लिया, और उसके गाल सहलाते हुए सर पैर से सरीर उतर दी, तुषार किन अजर अंजलि की मांग में गई जहा सिंदूर नहीं था, ये पहेली बार था जब अंजलि की मांग में सिंदूर नहीं था

तुषार- माँ आपने सिंदूर नहीं लगाया

अंजलि- वो सिंदूर समाज के लिए लगाती आई हु, आज मैं तेरे सामने बिन ब्याही औरत के रूप में आई हु इस सिंदूर का कोई मालिक नहीं ह, क्या तू वो अधिकार सम्हाल पायेगा

तुषार चोकते हुए अंजलि को देखने लगा- माँ ये कैसे हो सकता ह मैं तो आपका बीटा हु

अंजलि- बीटा होने का कर्त्तव्य तू हमेशा से निभाता आ रहा ह और मुझे पता ह आगे भी निभाएगा लेकिन क्या इस ाभागि का पति होने का कर्त्तव्य निभा पायेगा, मैं बहुत तदपि हु बीटा बहुत सम्हाला ह खुद को लेकिन मैं बिन ब्याही नहीं जीना चाहती मैं नहीं चाहती मेरी जिंदगी में ये सुच रह जाये, और दुनिया में किसी और को ये अधिकार मैं दे नहीं सकती

तुषार- नहीं माँ ऐसा नहीं होगा आप इस सुच से दूर नहीं रहोगी

अंजलि ने तकिये के निचे से सिंदूर की डिब्बी तुसाहर के सामने कर दी

तुषार ने थोड़ा सा सिंदूर लिया और अंजलि की मांग में भर दिया, माँ आज से आप शादीशुदा हु सुहागन हो और आप इस सुहागन के जीवन को जियोगी,


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अंजलि की आँखों से आंसू आ गए,

तुषार- नहीं माँ ये तो ख़ुशी का पल ह रोने का नहीं

अंजलि- तू मुझे अकेला तो नहीं छोड़ देगा

तुषार- कभी नहीं माँ कभी नहीं

अंजलि- जब तेरी शादी हो तब क्या होगा

तुषार- मैं शादी नहीं करूँगा मेरी शादी हो चुकी ह आज, और आज से आप मेरी पत्नी हो

अंजलि ने तुषार के पेअर छू लिए

तुषार- नहीं माँ ये मत करना पहले मैं आपका बीटा हु और वो रिश्ता पेअर छू क्र ख़तम मत करो मैं जी नहीं पाउँगा, आज के रिश्ते से हमारा वो रिश्ता कभी ख़तम नहीं होना चाहिए माँ

अंजलि- ठीक ह कभी ख़तम नहीं होगा लेकिन अकेले में हम पति पत्नी hi होंगे

तुषार- ह तो बड़ा अजीब लेकिन मुझे बड़ी ख़ुशी हो रही ह मेरी शादी हो गई ह मैं पति बन गया हु, फिर तो सीमा दीपा और रूचि आपकी ननद बन गई



अंजलि- मुझसे ज्यादा ख़ुशी नहीं हो रही होगी 40 साल की आगे में मेरी शादी हुई ह सोच मुझे कितनी ख़ुशी हो रही होगी, दुनिया की साडी खुशिया एक तरफ और शादी करने की ख़ुशी एक तरफ होती ह
 
बहुत बहुत धन्यवाद्, आप बहुत बारीकी से कहानी को ऑब्सेर्वे क्र रहे हैं,

मैं बहुत खुश हु सबको कहानी पसंद आ रही ह, मैं बस वही शब्दों का इस्तेमाल करती हु जो रोज मर्रा की लाइफ में सुनती हु, मुझे ज्यादा आईडिया नहीं ह मैं कोई बड़ी राइटर नहीं हु बस जो रोज देखती सुनती हु उसी हिसाब से लिखती हु जो मैं फील करती हु वैसा hi लिख देती हु
 
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ठंकु वैरी मच मुझे इतना प्यार देने के लिए, ये आप सबका प्यार hi ह जो इतनी जल्दी 100 पेज पुरे हो गए
 
अपडेट- 24



तुषार ने अंजलि को गॉड में उठा क्र उसके होतो पैर अपने हॉट रख दिए इस बार किश बहुत hi कामुक था दोनों बड़ी तलीनता से एक दूसरे के होतो का रास पैन क्र रहे थे,

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काफी देर तक दोनों चुम्बन का मजा लेते रहे फिर तुषार उठा और उसने अंजलि की साड़ी उतरनी शुरू क्र दी, साड़ी उतारते hi अंजलि ब्लाउज और पेटीकोट में आ गई, तुषार ने अंजलि को बीएड पैर लिटा दिया,

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फिर अपनी t-shirt उतर दी, और अंजलि के उप्पेर आने लगा, और उसकी गार्डन चूमने लगा गार्डन चूमते हुए वो निचे होने लगा और ब्लाउज में से उभरती हुई चूचियों पैर अपने हॉट रख दिए, अंजलि की चूचियों का रोंगटे भी खड़ा हो गया था, उसने मजे में बीएड की चादर को मुठी में भींच लिया, तुषार ब्लाउज के उप्पेर से hi चूचियों को चूमता हुआ निचे आने लगा, फिर उसने अंजलि के पेट को चूमना शुरू किया, इस आगे में भी उसके पेट पैर जरा सी भी एक्स्ट्रा चर्बी नहीं थी,

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अंजलि की नाभि को चूमते हुए तुषार ने अंजलि की चुकी पैर हाथ रख दिया, फिर चूमते हुए निचे की तरफ जाने लगा और पेटीकोट के उप्पेर से hi छूट पैर अपना मुँह रगड़ने लगा, अंजलि की हालत ख़राब हो चुकी थी, वो अपना सर इधर उधर पटक रही थी, फिर तुषार ने अंजलि को पलट दिया और उसकी गांड पैर अपना मुँह रगड़ते हुए उप्पेर को बढ़ने लगा, फिर अंजलि की पतली कमर को चूमने लगा और पीछे से ब्लाउज की डोरी खोल दी, और अंजलि को पलट क्र अपनी गॉड में ले लिया, ब्लाउज को निकल क्र अलग क्र दिया,

अंजलि की बड़ी बड़ी चूचिया ब्रा फाड् क्र बहार आने को उछाल रही थी, ब्रा काफी मॉर्डन थी जिसमे उसकी चूचिया लगभग पूरी hi बहार दिख रही थी, तुषार ने अपने हॉट उसकी आधी नंगी चूचियों पैर रख दिए, फिर अपना हाथ निचे लेजाकर पेटीकोट का नाडा खोल दिया, और निचे सरका दिया, फिर तुषार ने अंजलि को उप्पेर से लेकर निचे तक चूमना शुरू क्र दिया, पंतय के उप्पेर से hi अंजलि की छूट को चूमने लगा, अंजलि की छूट पूरी गीली हो राखी थी, जिससे उसकी पंतय पूरी भीग चुकी थी, जिसे तुषार चूस रहा था,


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फिर उसने अंजलि को उल्टा किया और ब्रा का हुक खोल दिया, अंजलि की कमर को चूमता हुआ निचे जाने लगा

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और अपने दत्तो में अंजलि की पंतय पकड़ ली और निचे खींचने लगा जिससे तुषारका मुँह अंजलि की गांड पैर रगड़ रहा था, अंजलि ने थोड़ी सी गांड उप्पेर करके तुषार को हेल्प की,

अब अंजलि बिलकुल नंगी तुषार के सामने उलटी लेती थी, उसकी गांड इतनी खुनसुरत थी की अच्छे अच्छे मर्द तो बस गांड देख क्र hi अपनी पेण्ट गीली क्र देंगे,


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तुषार आगे बढ़ा और अंजलि के पेअर चूमता हुआ उप्पेर जाने लगा, और उसकी गांड को चूमने लगा और एकहाथ से दबाने लगा,

इतने सालो बाद अंजलि किसी मर्द का ऐसा स्पर्श प् रही थी उसकी हालत ख़राब हो चुकी थी, उसने पूरी चादर अपनी मुठी से पकड़ पकड़ क्र hi असत व्यस्त क्र दी थी, तुषार ने एक झटके से अंजलि को सीधा क्र दिया, अंजलि की वो विशाल चूचिया जिनमे इतना दूध भरा हुआ था की 6 – 6 बच्चो को एक साथ पीला देती थी, जिन चूचियों से तुषार ने भी दूध पिया था, तुषार के सामने थी, तुषार की आँखों में साफ दिख रहा था की ये नजर कितना खूबसूरत ह,


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तुषार ने अंजलि की चुकी पैर अपना मुँह लगा दिया और चूसने लगा जैसे कोई बच्चा चुस्त ह,

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अंजलि ने भी उसका सर सहलाना शुरू क्र दिया, दूसरे हाथ से तुषार ने दूसरी चुकी पकड़ ली और उसे सहलाने लगा, अंजलि तुषार की कमर सहलाने लगी, तुषार ने दूसरी चुकी मुँह में भर ली और चूसने लगा, फिर तुषार निचे की तरफ जाने लगा उस दिशा में जहा से वो खुद निकला था, अंजलि ने दोनों पेअर जोड़ लिए, तुषार ने मुस्कुराते हुए अंजलि को देखा और उसकी जांघो को चूमने लगा, अंजलि से बर्दास्त नहीं हो रहा था, उसकी जंघे खुद खुल गई, और तुषार ने उस जन्नत के दुवार पैर अपना मुँह लगा दिया जहा से उसने जनम लिया था,

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Ahahhhhhhhhhhhhhhhhh टुशु ahahhhhhhhhhhhh अंजलि ने तुषा रखा सर अपनी छू टपर दबा दिया, तुषार ने एक हाथ उप्पेर लेजाकर अंजलि की चुकी पैर रख दिया और नीच ेउसकी छूट को बड़ी तलीनता से चूसने लगा, अंजलि बहुत देर से खुद को कंटोल क्र रही थी लेकिन अब उससे बर्दास्त करना मुश्किल हो रहा था, वो निचे से अपनी कमर हिलने लगी, और तुषार का सर छूट पैर दबाये जार hi थी, 5 मिनट्स hi तुषार ने अपना कमल दिखाया होगा की अंजलि की छूट से काम रास का फवारा छूट गया

आह्ह्ह्हह्ह टुशु अहहहह करता रह अहहहहहहह बहुत प्यासी ह ये अहहहहह निचोड़ ले इसे हहहहहहह मैं गई अह्हह्ह्ह्हह ऊऊफफफफफफफफ है है हां ऐसे ह आह्ह्ह्ह aaaaaaaaaaaaaaa mmmmmmmmmmmaaaaaa ahahhhhhhhhhhhhhhhhh

अंजलि की छूट ने इतना रास छोड़ा था की तुषार का पूरा मुँह भीग गया तुषार भी बड़ी तेजी से अंजलि की छूट का रास पिए जा रहा था, जाइए hi अंजलि का झड़ना रुका अंजलि ने तुषा रको अपनी तरफ खींचा और अपने हॉट उसके होतो पैर रख दिए, और बहुत hi वाइल्ड जलगी तरीके से उसके हॉट चूसने लगी, अंजलि ने तुषार के मुँह पैर लगे अपनी छूट के रास को पूरा चूस लिया, ये तुषार के लिए भी नया था,

फिर अंजलि ने तुषार को खड़ा किया और उसकी पेण्ट खोलने लगी, पेण्ट निचे सरकते hi लुंड अंडरवियर फाड् क्र बहार आने को तैयार था, अंजलि ने अंडरवियर में हाथ दाल क्र लुंड को पकड़ लिया और उसे चूमने लगी, फिर उसने अंडरवियर के उप्पेर से hi लुंड को चूमा


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और अंडर वियर निचे किचन लगी जैसे hi लुंड उछाल क्र अंजलि के सामने आया उसकी आँखे खुली रह गई, आज पहेली बार वो तुषार के लुंड को अपनी आँखे से देख रही थी, इससे पहले बस कपड़ो में इ hi आकर का अनदाजा लगाया था,

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अंजलि लुंड को मुठी में लेकर बड़े गोर से देखे जार hi थी,

तुसाहर- क्या देख रही हो

अंजलि- देख रही हु ये इंसान का hi ह न ये तो हालत ख़राब क्र देगा

तुषार- नहीं बहुत प्यार देगा ये

अंजलि- बस उसी प्यार की प्यासी हु मैं

अंजलि ने तुषार के लुंड का टोपा चुम लिया, तुषा रके मुँह से अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह निकल गई, कब से तड़प रहा था वो इस पल के लिए,

अंजलि ने लुंड को मुँह में भर लिया और कुछ देर ऐसे hi चूमती रही तुसाहर को बहुत मजा आ रहा था अपनी माँ के मुँह में अपन अलुंड घुसा क्र उसे तो लग रहा था जैसे इससे हसीं पल दुनिया में हो hi नहीं सकता,


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फिर अंजलि तुषार के लुंड को पूरा मुँह में भर्ती चली गई, जिसे देख क्र तुषार का मुँह भी खुला रह गया अब तक ऐसा कोई नहीं क्र पाया था इतना बड़ा लुंड अंजलि कैसे मुँह में ले गई, और उसे जरा बी तकलीफ नहीं दिख रही थी,

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काफी देर तक अंजलि लुंड को मुँह में लिए रही, तुषार से बर्दास्त नहीं हो रहा था, उसका लुंड फटने को तैयार हो गया था, उससे कण्ट्रोल नहीं हो रहा था कहा उसने दो दो कुँअरि छूटे फाड् दी थी रजिया जैसी खेली खाई औरत को धराशाही क्र दिया था वो अंजलि के मुँह के जादू को hi नहीं सम्हाल प् रहा था,

तुषार ने झटके से लुंड बहार निकला लुंड के साथ अंजलि के मुँह से बहुत सा थूक भी भेने लगा, अंजलि ने नशीली आँखों से तुषार को देखा जैसे बोल रही हो बस निकल गई साडी मर्दानगी, तुषार ने अंजलि को खड़ा किया और उसे अपने गॉड में उठा क्र उसके हॉट चूमने लगा, फिर बीएड पर आ गया और लिटा दिया,

तुषार- आप तैयार हो न

अंजलि- मैं तो कब से तैयार हु

तुषार- क्रीम ले औ आपको तकलीफ होगी

अंजलि- ये तकलीफ hi औरत का अभिमान होती ह जब उसका पति उसे ये दर्द देता ह तभी उसे अपने पति पैर गर्व होता ह, मुझे वो गर्व महसूस करवा टुशु

तुषार अंजलि के पैरो के बिच आ गया और अपना लुंड उसकी छूट पैर रखा, और अंजलि की आँखों में देखने लगा, फिर धीरे से लुंड का दबाव छूट पैर बनाया, लुंड का टोपा जैसे hi छूट में घुसा अंजलि के चेरे पैर दर्द उभर आया, तुषार को अंजलि की छूट सीमा और दीपा जितनी hi टाइट महसूस हुई, होती भी क्यों न 24 साल से उसे हाथ भी नहीं लगाया था अंजलि ने

तुषार ने फिर दबाव बनाया लुंड अंदर घुसने लगा,


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अंजलि ने तुषार के कंधे पकड़ लिए उसके नाखून तुषार के कंधो में गड गए, लेकिन अभी तक अंजलि के मुँह से आह्ह्ह्हह नहीं निकली, वो तुषार को ऐसे hi निहारती रही, अब लुंड आगे नहीं बढ़ रहा था तो तुषार ने हल्का सा लुंड बहार खींचा और थोड़ा जोर लगा क्र धकेला तो लुंड घुस गया इस बार अंजलि की अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह निकल गई,

Aahhhhhhhhhhhh टुशु

तुषार- रुक जाऊ क्या माँ

अंजलि- नहीं बिलकुल नहीं मुझे ये दर्द चाइये

तुषार ने हलके हलके धक्के लगाने शुरू क्र दिए छूट लुंड पैर पूरी तरह फांसी हुई थी तुसाहर को भी मुश्किल हो रही थी धक्के लगाने में, लेकिन जल्दी hi छूट गीली होने लगी लुंड को रहत मिली, अंजलि के फेस पैर भी दर्द कुछ काम हुआ था, तुषार अपन ामुह अंजलि की चुकी पैर रख दिया था और हलके हलके धक्के लगता रहा,

अंजलि- टुशु दाल दे पूरा

तुसाहर- माँ अभी आधा बहार ह आपको दर्द होगा

अंजलि- तू फ़िक्र न क्र पैर इस बार पूरा चला जाये

तुषार ने पूरा लुंड बहार खींचा और एक जोर दर धक्का अंजलि की छूट में लगा diya,a ुर इस बार पूरा लुंड छूट को फाड़ता हुआ अंदर तक अंजलि क बच्चे दानी तक जा टकराया,

और अंजलि के मुँह से जो दर्द भरी चीख निकली ahhhhhhhhhhhhhhmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmm

अगर सही समय पैर तुषार अपने हॉट अंजलि के होतो पैर न रखता तो पूरा घर वह इकठा हो जाता, अंजलि की दर्द से आँखे बहार आ गई थी आँखों से आंसू निकल गए थे, अंजलि के नाख़ून तुसाहर की कमर में गड़े हुए थे, कुछ देर तुसाहर ऐसे hi शांत लेता रहा, जब अंजलि कुछ नार्मल हुई तो तुषार ने अपना मुँह हटाया और अंजलि की आँखों में देखा, अंजलि की आँखों में आंसू थे लेकिन चहरे पैर मुस्कान थी दर्द साफ दिख रहा था फिर भी वो मुस्कुरा रही थी,

तुषार- आप ठीक हो

अंजलि ने है में गार्डन हिलाई

तुषार ने हल्का सा लुंड बहार खींचा आह्ह्ह्हह अंजलि की आह्ह्ह्ह निकल गई, तुषार ने बहुत hi हलके हलके कमर हिलं षुरू की जिसे बस लुंड हिले अंदर बाहर न हो, अंजलि की छूट ने तुसाहर के लूँ डको जकड लिया था, लेकिन छूट ऐसी जगह ह जहा अच्छे अच्छे लुंड धरी भी उसे नहीं समझ पते,

जल्दी hi छूट खुद चिकनी होने लगी, लुंड को भी थोड़ी रहत मिली, तुषार ने हलके हलके लुंड अंदर बहार करना शुरू क्र दिया, तुषार थोड़ा सा लुंड बहार खींचता और अंदर घुसा देता, अंजलि के मुँह से आह्ह्ह्ह निकल जाती, जल्दी hi लुंड को आसानी होने लगी थी, तुषार पूरा लुंड कीच क्र ढके लगाने लगा था, हर धक्के पैर अंजलि की चूचिया हिल रही थी, अंजलि बस तुसाहर को देखे जार hi थी,

तुषार खुल क्र धक्के नहीं लगा रहा था क्योकि उसे डार्ट है कही वो झाड़ न जाये अंजलि की छूट की गर्मी उसके लुंड को पिघला रही थी, और अंजलि का यु आँखों में देख क्र छोड़ना बहुत hi कामुक था, तुषार खुद को रोक नहीं प् रहा था, अभी चुदाई पुरे शबाब पैर भी नहीं पहुंची थी की अंजलि की छूट ने फवारा छोड़ दिया वो झड़ने लगी थी , ahahhhhhhhhhhhhh टुशु ahhhhhhhhhhhhhhhh तेज क्र आअह्ह्ह्हह क्र ahahhahhhhhhhhhh और तेज अउ रटेज आह्ह्ह्हह्ह्ह्हह अह्ह्ह

वो निचे से छूट को उछाल रही थी उसने तुसाहर की कमर पैर अपने पंजे गाड़ दिए और अपने डाटा तुषार की गार्डन पैर गाड़ दिए, तुषार भी खुद को रोक नहीं पाया वो हन्ता चाहता था लेकिन अंजलि ने उसे ऐसे पकड़ रखा था जैसे पेड से कोई बैल चिपक जाती ह, तुषार- माँ मैं गया अंदर हो जायेगा

अंजलि- होने दे होने दे मुझे अहसास करने दे बस करता रह

तुषार ने तीन चार धक्के जोर से लगाए और एक हुंकार के साथ लुंड से लावा निकलने लगा, तुषार ने अंजलि की कमर में हाथ डेल और उसे थोड़ा सा उप्पेर उठा लिया और लुंड को जड़ तक घुसा क्र चिपक गया, काफी देर तक लुंड से रास निकलता रहा अंजलि आँखे बंद किये उसका आनंद लेती रही, और जब तुषार का लुंड अंदर रास छोड़ता हुआ हिलता तो अंजलि की आह निकल जाती,

(जब किसी औरत की छूट में लुंड दाल क्र बिना धक्का लगाए अपने लुंड को बस उप्पेर निचे हिलाओ तो देखना कोई भी औरत टाइम से पहले hi झाड़ जाएगी)

सर्दी के मौसम में भी दोनों पसीने से लथपथ थे, दोनों बहुत देर तक ऐसे hi चिपके रहे, अंजलि ने कम्बल खींच क्र अपने उप्पेर दाल लिया, और तुषार को अपनी बहो में भर लिया, लुंड वैसे hi छूट में घुसा रहा, आज पहेली बार था जब तुषार इतनी जल्दी झाड़ गया था, ये अंजलि की गर्मी थी या माँ bête की चुदाई का नशा की वो खुद को रोक नहीं पाया,

अंजलि तुषार के गाल चुम रही थी और तुषार भी अंजलि के कान चुम रहा था, काफी दे रेज hi लेते रहने के बाद, तुषार उठा तो उसे लुंड बहार निकल गया तो अंजलि के मुँह से आह निकल गई, तुषार ने उठ क्र देखा तो छूट से उसका रास निकल रहा था और साथ में हल्का सा खून भी था,

तुसाहर- माँ खून भी निकल रहा ह

अंजलि- इतने सालो बाद इतना मोटा और बड़ा लुंगी तो खून तो निकलना hi था,

अंजलि ने उठना चाहा लेकिन हिल भी नहीं पाई, तुषार ने उसे गॉड में उठाया और बाथरूम में ले गया, वह ठंडा पानी था तो तुसाहर जल्दी से चादर लप्पेट क्र किचन से पानी गरम करके लाया फिर अपने hi हाथ से अंजलि की छूट को गरम पानी से धोया, जैसे hi गरम पानी अंजलि की छूट पैर लगा तो छूट में बहुत तेज जलन हुई जिससे उसकी आह्ह्ह्ह निकल गई, फिर तुषार ने अंजलि को बीएड पैर लिटाया और खुद को साफ़ करके उसके पास लेट गया,

दोनों नंगे एक दूसरे से चिपके लेते रहे, ज्यादा देर लेट नहीं पाए क्योकि तुषार का लुंड फिर से खड़ा हो गया था, अंजलि की चूचिया तुषार की छाती में डाब रही थी, और लुंड जांघो से टकरा रहा था,

तुषार- माँ आप आराम करो अब

अंजलि- क्यों थक गया क्या

तुषार- नहीं आप को तकलीफ होगी

अंजलि- आज मेरी सुहागरात ह और सुहागरात में एक बार से संतुष्टि नहीं होती

अंजलि घूम केर तुषार के उप्पेर आ गई तुषार का लुंड अंजलि की जांघो के बिच आ गया और उसकी चूचिया तुषार की छाती में डाब गई, अंजलि ने तुषार के हॉट चूमने शुरू क्र दिए, तुषार ने भी अंजलि का सर पकड़ा और चूमने लगा कुछ hi देर में दोनों फिर गरम हो गए,

अंजलि- अब दिखाओ मुझे तुमने क्या क्या सीखा ह रजिया की कैसे ली मुझे दिखाओ,

तुषार ने अंजलि को पलट क्र अपने निचे क्र लिया और अंजलि की गांड उठा ली जिससे अंजलि की छूट तुषार के मुँह के शामे आ गई, पहेली चुदाई से छूट पूरी तरह सूज गई थी, तुसाहर ने अंजलि की आँखों में देखते हुए उसकी छूट पैर मुँह लगा लिया, और रगड़ने लगा, वो बस अपना मुँह छूट पैर रगड़ रहा था, अंजलि की हालत ख़राब हो रही थी छूट सूजी हुई थी उसे दर्द महसूस हो रहा था, फिर तुषार ने अपनी जीभ छूट में घुसा दी,


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Ahhhhhhhhhhhhhhhhhh अंजलि के मुँह से सिसकिया निकलने लगी, बहुत कुछ सिख गए हो, अंजलि अब तुसाहर को तू से बात नहीं क्र रही ह उसके शब्दों में तुम आ गया था,

अंजलि की गार्डन मुड़ी हुई थी और कमर पूरी उठी हुई जिससे उसे तुषार का छूट चूसना अपनी आँखों से साफ साफ दिख रहा था, वो तुषार का फेस देखे जार hi थी, जो आँखे बंद किये बस छूट को चूसे जार है था, कुछ देर बाद तुषार ने अंजलि को पलट दिया और उसके पेट के निचे तकिया लगा दिया, जिससे छूट उप्पेर उठ गई, तुसाहर पीछे आ गया और अपना लुंड उसकी छूट पैर रगड़ने लगा,


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अंजलि- अहहहहहहह बहुत जालिम हो गए हो तुम

तुषार- बस ये hi सीखा ह माँ

अंजलि- माँ नहीं यहाँ बस अंजलि कहो मुझे आज रात बस पत्नी जैसा सुख दो

तुषार- लेकिन मैं आपका नाम कैसे लू

अंजलि- जैसे अपनी पत्नी का लेगा

तुषार ने लुंड आगे धकेलते हुए कहा ठीक ह अंजलि ये लो मेरा प्यार आपकी गहराइयों में

Aahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh uuuuuuuuuuuuuuffffffffffffffff धीरे धीरे aahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

तुषार रुक गया दर्द हो रहा ह आपको

अंजलि- नहीं मेरी जान ये hi दर्द चाहिए मुझे इस दर्द के लिए मैं पूरी जवानी तरसी हु, तुम रोको मत ये तो सूजन की वजह से ह और तुहारा वो सूखा था न तुमने गिला भी नहीं करने दिया

तुषार- क्या सूखा ह क्या गिला नहीं करने दिया अंजलि हस्ते हुए

अंजलि- वही जो तुमने मेरी उस में दाल रखा ह

तुषार- नाम से बताओ हम सबको तो सिखाती हो शर्माना नहीं खुद इतना शर्मा रही हो

अंजलि- तुम्हारे सामने नंगी होकर सम्भोग क्र रही हु तो सहरमा कहा रही हु

तुषार- नाम बोलने में इतना शर्मा रही हो

अंजलि- मैं नहीं शर्मा रही

तुषार- तो बताओ फिर

अंजलि- तुम्हारा लुंड सूखा ह और मेरी छूट सूजी हुई ह जो तुषार इस हब्सी लुंड ने सुजा दी

तुषार- uuuffffffffffffffff कितने प्यारे लग रहे हैं आपके मुँह से सुनकर

अंजलि- रुक क्यों गए घुसा दो पूरा जैसे उस भैंसे ने हमारी रज्जो की छूट में घुसा दिया था एक hi बार में

तुषार- रज्जो झेल गई थी आप झेल पाओगी

अंजलि- मैं वही देखना चाहती हु उस मजे को जीना चाहती हु

तुषार ने एक जोर दर धक्का लगा दिया, छूट बातो बातो में hi गीली हो गई थी तो लुंड को घुसने में ज्यादा तकलीफ नहीं हुई और पूरा लुंड अंदर घुसता चला गया, लेकिन अंजलि की आँखे बहार आ गई उसने अपना मुँह बीएड पैर दबा लिया, फिर भी उसके मुँह से दर्द भरी aahhhhhhhhhhhhh बहार ताका ा रही थी,

अंजलि- बस एक मिनट रुकू बस एक मिनट

तुसाहर रुक गया और अपना हाथ आगे लेजर अंजलि की चूचिया सहलाने लगा, कुछ देर बाद अंजलि कुछ नार्मल हुई, अब हॉकर हलके करो


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तुषार ने हलके हलके धक्के लगाने शुरू क्र दिए, कुछ hi देर में अंजलि की छूट पूरी तरह गीली हो गयी थी दर्द लगभग गायब hi हो चुक्का था या यु कहु की चुदाई का नशा इतना चढ़ गया की दर्द का अहसास hi नहीं हो रहा था

अंजलि- बढ़ाओ रफ़्तार

तुषार ने धक्के लगाने शुरू क्र दिए धक्के बहुत तेज थे ऐसा लग रहा था जैसे कोई चाकू मॉस में घुस क्र बार बार उसे चिर्र है हो, तुषार अंजलि के दोनों चूतड़ों को पकड़ क्र धक्के लगा रहा था, अंजलि प्रो डोगग्य स्टाइल में आ गई थी, उसे ये पोजीशन अच्छे से आती थी, तुषार को और मजा आ रहा था,


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फिर तुषार ने अंजलि को बीएड पैर लिटाया और खुद निचे खड़ा हो गया और लुंड छूट में दाल दिया अब धक्के और घेरे लग रहे थे, अंजलि तो किसी और hi दुनिया में खो गई थी, और जल्दी hi झाड़ गई, अह्ह्ह्हह्ह ahhhhhhhhhhhh अह्ह्ह्हह्हह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह और तेज और तेज आह्ह्हह्ह्ह्ह uuufffffffffffffffff फाड् दो इसे फाड् दो फाड् दो छोड़ दो सीमा की माँ को, तुम्हारा सपना थान ा सीमा की माँ को छोड़ने का छोड़ो और छोड़ो, तुषार बस धक्के लगाए जार है था, वो अंजलि को पूरा मजा देना चाहता था

अंजलि झाड़ क्र शांत हो गई थी लेकिन तुषार रुका नहीं वो धक्के लगता ह रहा अंजलि की छूट में जलन होने लगी थी लेकिन उसने तुषार को अहसास नहीं होने दिया, कुछ hi देर में अंजलि फिर गरम हो गई और तुषार का साथ देने लगी,

आप सब तो जानते hi होने सेकंड टाइम औरत ज्यादा देर रुक नहीं पति क्योकि उसका दिमाग से कण्ट्रोल हैट जाता ह और वही अंजलि के साथ हुआ वो फिर झड़ने लगी, तुषार ने धक्के तेज क्र दिए वो अंजलि के साथ झड़ना चाहता था, और हुआ भी वही तुषार ने भी अपना लावा अंजलि की छूट में उगलना शुरू क्र दिया, अंजलि ने तुषार को कास क्र खुद से भींच लिया, तुसाहर निचे से हलके हलके धक्के से लगा रहा था और अपना लावा अंजलि की छूट में भर रहा था, अंजलि ने तुषार को चूमना शुरू क्र दिया, दोनों ऐसे hi पड़े रहे,

अंजलि- कम्बल ओढ़ लो ठण्ड लग जाएगी

तुषार- पहले साफ़ क्र लेते ह वर्ण बाद में नहीं उठा जायेगा

दोनों बाथरूम में चले गए दोनों ने एक दूसरे को साफ़ किया


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और काम्बले में लेट गए, टाइम रात के 2 बज रहे थे दोनों पिछले 3 घाटे से चुदाई में खोये हुए थे, कम्बल में दोनों नंगे hi चिपक क्र लेट गए

तुषार- आप खुश तो हो न माँ

अंजलि- माँ नहीं यह सिर्फ अंजलि, और मैं बहुत खुश हु आज मैंने असली ख़ुशी पाई ह

तुषार- लेकिन क्या ये सब गलत नहीं ह माँ bête के बिच

अंजलि- हर चीज का नजरिया होता ह

तुषार- कैसे

अंजलि- तुमने गाओं में कुत्ते देखे हैं

तुषार- है जी

अंजलि- तुमने सोचा ह कभी कुत्तो की शादी तो होती ह नहीं और दूसरे गाओं के कुत्ते वह आते नहीं फिर भी कुत्तो की शंख्या बढ़ती जाती ह

तुषार- है वो तो

अंजलि- है वही कुटिया का बीटा बड़ा होकर उसी कुटिया को छोड़ता ह और सरे भाई बहन तब तक भाई बहन ह जब तक वो जवान नहीं होते, जवान होते hi रिश्ता ख़तम जरुरत बनजाति ह

तुषार- लेकिन वो तो जानवर ह

अंजलि- धरती पैर रहने वाले है जीव जानवर hi होता ह, पक्षियो में भी यही होता ह जानवरो में भी यही होता ह, ऐसा को जीव नहीं धरती पैर इंसान के अलावा जो ऐसा न करता हो, और इंसान भी एक जीव hi ह बस हमारी भाषा अलग ह हर जानवर की अलग होती ह वैसे hi हमारी भी ह

तुषार- तो परिवार में सेक्स गलत नहीं होता

अंजलि- मैंने कहा न सोच सोच की बात ह, मैं खुद को बाकी जीवो के बराबर hi मानती हु इसलिए मुझे गलत नहीं लगता जो खुद को अलग मानते हैं उनके लिए गलत ह, इसलिए जिन्हे गलत नहीं लगता वो अपनी जगह सही ह जिन्हे गलत लगता ह वो अपनी जगह सही

तुषार- तो क्या हमारे परिवार में कोई नियम नहीं ह

अंजलि- हहहहहए तुम नियम का पूछ रहे हो जो पहले hi अपनी दो दो बहेनो को छोड़ चुके हो

तुषार चौक गया, वो मैं वो श्री माँ मैं बताना चाहता था लेकिन डरता था

अंजलि- हहहहह दर, उस रात तुम्हे समझ नहीं आ गया था जब तुम्हारी माँ तुम्हारे इस मोठे लुंड की दीवानी हो गई थी, और मैंने तो कभी कोई रिश्ते की बंदिश दी hi नहीं, फिर दर क्यों

तुषार- लेकिन आपको कैसे पता

अंजलि- सीमा ने तो खुद hi बता दिया और दीपा की हरकतों ने बता दिया

तुषार- आपको बुरा नहीं लगा

अंजलि- मुझे ख़ुशी ह मेरी बेटियों ने सही फैसला लिया ह तुम से भीतर और कोई हो hi नहीं सकता था

तुषार- लेकिन फ्यूचर में क्या होगा उनकी शादी हो जाएगी तब उनके पति को पता चल जायेगा की वो कुँअरि नहीं ह

अंजलि- फ्यूचर का फ्यूचर में देखंगे और आज के टाइम में दुनिया की न के बराबर लड़किया hi कुँअरि मिलती ह शादी के टाइम तुम फ़िक्र न करो,

दोनों ऐसे hi चिपक क्र लेते रहे और गर्माहट आते hi दोनों को नींद आ गई,
 
अपडेट-25






तुषार की आँख खुली उसके लुंड में होने वाली हलचल से, अंजलि उसका लुंड चूस रही थी और अंजलि की छूट तुषार के मुँह के सामने थी, तुषार बहुत आलस में था फिर भी उसने अंजलि की गांड पैर हाथ रखा और छूट पैर मुँह लगा दिया ये मस्त पोजीशन लगी तुषार को एक साथ दोनों को मजा मिल रहा था,


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कुछ देर अंजलि उठी तो तुषार भी उठने लगा अंजलि ने उसके साइन पैर हाथ रख क्र लेते रहने का इशारा किया और उसके उप्पेर आ गई,

फिर उसे किश किया तुषार ने अंजलि की भरी चूचियों पैर मुँह लगा दिया, फिर अंजलि सीधी हुई और तुषार के लुंड को हाथ निचे ले जाकर मुठी में भर लिया और अपनी छूट पैर लगाया, तुषार आँखे फाडे ये नजारा देख रहा था, लुंड को छू टपर सेट करके अंजलि उस पैर बैठ टी चली गई और लुंड छूट में घुसता चला गया, दोनों के मुँह से एक साथ aahahhhhhhhhhhhhhhh निकल गई,


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तुषार को तो हैरत हो रही थी की कोई इतने मोठे लुंड पैर कैसे बैठ सकता ह, लेकिन मजा तो पूछो hi मत, अंजलि दबाव तब तक बढाती रही जब तक लुंड पूरा छूट की घेरे में नह उतर गया, अंजलि के फेस पैर दर्द के भाव साफ़ साफ़ पढ़े जा सकते थे, जब पूरा लुंड अंदर घुस गया तो अंजलि रुक गई और तुषार की तरफ मुस्कुरा क्र देखने लगी,

तुषार की हालत तो और भी ख़राब थी उसका लुंड तो फटने को तैयार हो रहा था, तुषार ने काफी बार सेक्स किया था लेकिन उसे असली सेक्स गुरु आज मिली थी, जिसे चुदाई की हर विद्या का ज्ञान था, जब की वो 24 साल से चूड़ी भी नहीं थी, फिर अंजलि ने धीरे धीरे कमर हिलने शुरू की वो उप्पेर निचे नहीं हो रही थी, बस अपनी कमर को हिला रही थी,


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कुछ hi देर में छूट पूरी तरह गीली हो चुकी थी, तो अंजलि थोड़ा उप्पेर हुई फिर निचे बैठ गई, उसने हल्का हल्का उप्पेर निचे होना शुरू क्र दिया, अब अंजलि को तकलीफ नहीं हो रही थी बल्कि मजा आ रहा था, उसके धक्को की रफ़्तार बढ़ने लगी थी, जल्दी hi अंजलि पूरी ऊपर होती और तेजी से लुंड पैर बैठ जाती लुंड सीधे उसकी बच्चे दानी से टकराता, दोनों को बहुत मजा आ रहा था, तुषार ने अंजलि की गांड पकड़ ली जिसे अंजलि ने हटा दिया और उसे हाथ अलग रखने का इशारा किया, अंजलि तुषार के पेट पैर हाथ रख क्र सीधे लुंड पैर उछाल रही थी,

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तुषार की बेचैनी बढ़ रही थी उससे बर्दस्त नहीं हो रहा था, वो भी निचे से लुंड को हिलने लगा, अब अंजलि को भी बर्दास्त नहीं हो रहा था, वो भी झड़ने वाली थी, वो तुसाहर के उप्पेर लेट गई क्योकि अब तक थक चुकी थी, अंजलि ने तुषार को बहो में भरा और लुंड पैर तेजी से अपनी छूट आगे पीछे करने लगी, इसमें भी तुसाहर को बहुत मजा आ रहा था, अंजलि झाड़ रही थी वो अपनी पूरी ताकत लगा रही थी छूट में लुंड को आगे पीछे करने में,

जैसे hi अंजलि शांत हुई तुषार ने उसे बहो में भरा और पलट गया, लुंड छूट में hi घुसा हुआ था, तुषार ने उप्पेर आते hi धक्के लगाने सुरु क्र दिए और धक्के इतने तेज थे की अंजलि की एक एक जॉइंट हिल गया था, रूम में बस घेरि घेरि सांसो और तप तप की आवाज गूंज रही थी, तुषार ने अंजलि के दोनों पेअर अपने कंधे पैर रख रख लिए जिसे छूट और उभर क्र सामने आ गई, इससे अंजलि को दर्द हो रहा था लेकिन मजा भी बहुत आ रहा था,


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तुषार तब तक धक्के मरता रहा जब तक वो खुद नहीं झाड़ गया इस बिच अंजलि दो बार झाड़ गई थी, तुषार के झड़ने का टाइम बढ़ता hi जार है था, वो पहले दो बार झाड़ चुक्का था इसलिए इस बार वो और देर तक अंजलि को छोड़ता रहा, अब अंजलि की हालत ख़राब हो चुकी, उससे हिला भी नहीं जार है था, दोनों ऐसे hi नंगे लेट गए, खुद को साफ़ भी नहीं किया,

कुछ देर बाद दूर पैर नॉक हुई तो दोनों दर गए, अंजलि ने टाइम देखा तो 7 बज रहे थे, अंजलि 6 बजे तक उठ जाती ह, वैसे तो वो 4 बजे hi उठ जाती थी लेकिन यहाँ उसे जल्दी नहाने या चुप क्र नहाने का दर नहीं था इसलिए थोड़ा देर से उठने लगी, वैसे भी सर्दियों में सब देर से hi जाते थे,

दूर पैर दीपा कड़ी थी,- माँ उठी नहीं हो क्या टाइम हो रहा ह

अंजलि- बीटा मेरी तबियत ठीक नहीं ह तुम लोग जाओ आज मैं रेस्ट करुँगी

दीपा- ok तुषार भी नहीं उठा उसे उठती हु

अंजलि- नहीं रहने दे वो बोल रहा था आज की छुट्टी लेगा वो और रात को काफी देर तक मेरे पेअर दबा रहा था,

दीपा को थोड़ा अजीब लगा पहला तो ये की आज तक किसी ने इस घर में दूर लॉक नहीं किया फिर माँ का कैसे और माँ बिना बहार आये बोल रही ह,

दीपा- आपको कुछ चाहिए का दूर खोलो

अब अंजलि फास गई थी उसने तुषार को इशारा किया जल्दी से अपने रूम में जाये, तुषार ने जल्दी के अपने कपडे उठाये और नंगा hi अपने रूम में भाग गया, और नंगा hi कम्बल में घुस गया, उसने सोचा दीपा नहीं आएगी,

अंजलि जैसे hi बीएड से उठी दर्द से उसकी चीख निकल गई अह्ह्ह्हह्हह्ह्ह्ह माँ मर गई

दीपा- क्या हुआ माँ

अंजलि- खुद को सम्हालते हुए कुछ नहीं घुटने में दर्द हो रहा ह ठण्ड की वजह से,

अंजलि को कोई कपडा नहीं मिला क्योकि सरे कपडे तो बिखरे पड़े थे,


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उसने जल्दी से सरे कपडे ऐसे hi उठा क्र अलमारी में भर दिए और जल्दी में उसने एक चादर उठाई और ओढ़ ली, और लड़खड़ाते हुए जाकर दूर खोला,

दीपा- माँ क्या हुआ आपको कोई दवाई चाहिए क्या

अंजलि की आँखे पूरी लाल हो राखी थी दो लिया सूज गई थी न सोने से,

अंजलि- नहीं बीटा मैं थोड़ा रेस्ट करुँगी तो ठीक हो जाउंगी तुम तीनो बहन जाओ और हमारा ब्रेकफास्ट भी बना देना, मुझसे उठा नहीं जायेगा,

दीपा- ठीक ह माँ

अंजलि बाथरूम की तरफ जाने लगी तो लड़खड़ा गई दीपा ने जल्दी से उसको सम्हाल लिया, सम्हालने में दीपा का हाथ अंजलि की कमर पैर लगा, उसे तुरंत पता चल गया अंजलि ने अन्दर कुछ नहीं पहना ह, चादर भी घुटनो से उप्पेर थी तो निचे शायद पंतय पहनी हो पैर और कुछ नहीं पहना, दीपा को शक हो गया की अंजलि अंदर से बिलकुल नंगी ह,

दीपा अंजलि को बाथरूम तक ले गई, माँ मैं साथ चालू क्या, इस परिवार की औरतो में एक दूसरे के सामने टॉयलेट करने या नहाने में नंगी होने में कोई परहेज नहीं था अंजलि ने बचपन से hi तीनो बहेनो को ऐसे hi पला था, इसी लिए दीपा ने पूछ लिया था,

अंजलि- अरे नहीं नहीं तू जा मैं सम्हाल लुंगी ये तो हो जायेगा ठीक जल्दी hi

दीपा- ठीक ह माँ

दीपा ने शक को यकीन में बदलने के लिए एक ट्रिक अपने उसने जैसे hi अंजलि को बाथरूम के दूर पैर छोड़ा तो अपना हाथ कमर से हटाने की जगह निचे खिसकती चली गई और अंजलि की गांड तक हाथ को घुमा दिया,

हाथ के घूमते hi दीपा को पता चल गया अंजलि पूरी नंगी ह वही अंजलि भी सिहर उठी, उसे दर लग गया की दीपा को पता न चल जाये वो नंगी ह, अंजलि झट से बाथरूम में घुस गई,

दीपा खुद में hi सोचती हुई तुषार के रूम में चली गई, तुषार ने सोचा था दीपा यहाँ नहीं आएगी लेकिन दीपा की सुई कही अटक गाइट hi, तुषार ने सोने का नाटक किया, उसे लगा दीपा उसे देख क्र चली जाएगी, लेकिन दीपा ने एक बार उसे पुकारा जब कोई जवाब नहीं आया तो वो सीधे उसके कम्बल में घुस गई, और एक दम चौंक गई क्योकि तुषार भी बिलकुल नंगा था, ये पहेली बार था जब घर में कोई नंगा सो रहा था किसी को भी नंगा सोने की आदत नहीं थी,

तुषार नाटक करता रहा, दीपा ने तुषार का लुंड पकड़ लिया जो मुरझाया हुआ था, दीपा खुद से hi इसे तो इस टाइम खड़ा रहना चाहिए था, और ये इतना सूखा सूखा सा कैसे ह इस पैर क्या लगा हुआ ह, दीपा निचे को खिसक गई, तुसाहर को दर लगने लगा tha,deepa ने तुषार के लुंड को मुठी में भरा और मुँह में भर लिया, लुंड बिलकुल मुरझाया हुआ था, पूरी रात से चुदाई क्र रहा था, फिर कैसे खड़ा होता,

दीपा को लुंड का टेस्ट बिलुल अलग लगा अजीब सा नमकीन स्वाद था, मुँह से निकला थूक लगते hi लुंड पैर लगा अंजलि की छूट और लुंड से निकला रास चिपचिपा होने लगा, दीपा को लग तो अजीब रहा था लेकिन उसे स्वाद भी आ रहा था, वो उसे चाटने लगी और पूरा लुंड चाट चाट क्र साफ़ क्र दिया, तुषार कब तक नाटक क्र सकता था,

तुषार- क्या क्र रही हो दीदी

दीपा- चुप रह थोड़ी देर

तुषार चुप हो गया, जब दीपा ने पूरा लुंड चाट लिया, लुंड में अभी भी सख्ती नहीं आई थी बस थोड़ा थोड़ा फुलाव आया था, इतना चूसने चाटने के बाद भी लुंड उठ नहीं रहा था एक तो पूरी रात की चुदाई थकन और दीपा का दर तीनो तुषा रपर हावी थे,

दीपा- क्या हुआ अज्ज ये उठ क्यों नहीं रहा ह

तुषार- दीदी वो कभी कभी हो जाता ह रात को देर से सोया था तो शायद उस वजह से

दीपा- लेकिन आज इसका स्वाद भी कुछ अलग था और इतना चिपचिपा क्यों हो रहा था ये, वैसे टेस्टी लग रहा था पैर क्या लगाया तूने

तुषार- को कुछ नहीं क्या लगाऊंगा

तभी बहार से रूचि की आवाज आई कहा रेहह गई, माँ को जगाने गाइट hi खुद भी सो गई क्या, दीपा जल्दी से उठ क्र भागी,

दीपा- रात को आकर देखती हु तुझे

तुषार दर गया, दीपा ने बहार जाकर बता दिया, फिर तीनो बहेनो ने काम ख़तम किया और जाते हुए तीनो अंजलि से मिलकर गई,

सीमा के फेस की स्मिल उसकी चंचलता सब गायब थी, जो पुरे परिवार को खाल रही थी, सीमा अपने रस्ते चली गई दीपा और रूचि एक साथ जार hi थी,

रूचि- दीपा कुछ गड़बड़ ह

दीपा- क्या हुआ, दीपा को लगा रूचि भी अंजलि और तुषार के बारे में बात करेगी

रूचि- ये सीमा दी आज कल बहुत परेशां सी लगती ह, हमारे साथ रहती तो ह लेकिन बस खामोश सी रहती ह

दीपा- है यार ये तो ह न तो ऑफिस के बारे में बता रही कुछ

रूचि- वह कुछ ऐसा हुआ ह जिसे या तो वो बहुत दर गई ह, या वो किसी के बहकावे में आ गई ह और हमारे सामने कुछ बताना नहीं चाहती

दीपा- हो सकता ह वैसे भी वो किसी के भी बहकावे में आ सकती ह, वो दिमाग से नहीं सोचती उसनका दिमाग तो निचे ह

रूचि- ेय क्या बोल रही ह निचे कहा

दीपा- तू रहने दे तू नहीं समझेगी

रूचि- हस्ते हुए तुम सब को मुझसे ज्यादा कोई नहीं समझ सकता मैडम

दीपा- अच्छा ऐसा क्या समझ लिया तूने हमारे बारे में

रूचि- वो सब कुछ जो तुम लोग अपने बारे में खुद नहीं समझ सकते

दीपा- अच्छा जी रहने दे बस चल तेरा कॉलेज आ गया

वही ऑफिस में…….

जूही- अरे सीमा जान इतनी परेशां क्यों ह तू अब तो तेरे मजे ह

सीमा- रहने दे यार मूड नहीं ह

जूही- अरे क्या हुआ अलका मम ने कुछ बोल दिया क्या

सीमा- नहीं यार वो रा.

तभी राहुल आ गया

राहुल- सीमा मेरे केबिन में आना जरा

सीमा- सर वो मैं ये फाइल अलका मम के पास लेकर जार hi थी

राहुल- पहले मेरे केबिन में आओ

सीमा- मम गुस्सा करेंगी सर

राहुल- ठीक ह ये फाइल देकर वापस आना जल्दी मैं वेट क्र रहा हु

राहुल चला गया

जूही- ये राहुल की सेक्रेटरी मैं हु बुला तुझे रहा ह क्या बात ह तुझ पैर दिल आ गया क्या

सीमा- छोड़ न यार

उधर घर में सबके जाने के बाद अंजलि उठी और मैं दूर लॉक क्र दिया अंदर से, अंजलि ने अभी भी वही चादर लपेटी हुई थी, वो सीधे तुषार के रूम में घुस गई, तुषार अब तक सो चुक्का था, अंजलि ने चादर एक तरफ फेंकी और नंगी hi उस चारपाई पैर तुषार से चिपक गई,

तुषार की हलकी सी नींद खुली,

अंजलि- सो जा सो जा

तुषार मुस्कुराया और अंजलि को बहो में भर लिया, दोनों को कब नींद आई पता hi नहीं चला दोनों माँ बीटा नंगे चिपके हुए सो रहे थे,


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11 बहे अंजलि की आँख खुली, उसने मुस्कुराते हुए तुषार की तरफ देखा जो बड़े सकूं से सोया हुआ था, अंजलि काफी देर तक तुषार को निहारती रही, फिर वो उठी और फ्रेश हुई और नाहा धो क्र एक गाउन फेन लिया बिना ब्रा पंतय के,

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फिर दोनों के लिए चाय बनाई और तुषार को उठाया,

अंजलि- उठिये पति देव कितना सोयेंगे

अंजलि की मीठी सी आवाज सुन क्र तुषार ने अलसाते हुए आँख खोली और अंजलि को देखा जो नहीं हुई तुषार के सामने बैठी थी हाथ में सिंदूर की डिब्बी लिए हुए,

अंजलि- उठिये और मेरी मांग में सिंदूर भरिये,

तुषार मुस्कुराता हुआ उठा और सिन्दूर मन ग में भर दिया,

अंजलि- आज से आपके सरे पत्नी वाले काम मैं करुँगी और मेरे पति वाले काम आप करेंगे बस किसी को बताएँगे नहीं

तुषार- लेकिन दीपा को शायद शक हो गया ह

अंजलि- मुझे लग रहा था कोई बात नहीं आप चिंता मत करो मैं सम्हाल लुंगी

तुषार- आप मुझे आप मत बोलो मुझे शर्म आती ह

अंजलि- अब पति को आप नहीं बोलूंगी तो किसे बोलूंगी

तुषार- लेकिन पहले मैं आपका बीटा हु तो आपके पास तू बोलने का अधिकार ह

अंजलि- जानती हु और जहा bête का रिश्ता निभाना होगा वह मैं तू hi बोलूंगी जहा पति का रिश्ता निभाना ह वह आप, और ये hi आपके लिए भी ह जहा पत्नी का रिश्ता ह वह आप मुझे कुछ भी बोल सकते हो जो दिल आये, लेकिन जहा माँ का रिश्ता निभाना ह वह आप

तुषार- ठीक ह जैसा आपको ठीक लगे

फिर दोनों ने चाय पि

तुषार- अंजलि आपने कपडे क्यों फेन लिए

अंजलि- और क्या परेड दिन नंगी घुमु सर्दी कितनी हो रही ह

तुषार- ह्म्म्मम्म कोई नहीं एक दिन पुरे घर में नंगी घुमाऊंगा

अंजलि- मैं मन नहीं करुँगी

फिर तुषार भी नाहा धो क्र फ्रेश हुआ, दोनों ने साथ खाना खाया, इस सब में 2 बज गए,

अंजलि- जल्दी hi सब आ जायेंगे और आपके पापा भी आ जायेंगे फिर मौका नहीं मिलेगा एक बार और हो जाये

तुषार- ये भी कोई पूछने वाली बात थी

तुषार ने अंजलि को गॉड में उठाया और रूम में ले गया और फिर से दोनों ने एक जबरदस्त चुदाई की,

चुदाई के बाद दोनों एक दूसरे की बहो में थे,

अंजलि- आज बहुत महेनत क्र ली आपने, गयम से जो पैसे आपको मिलेंगे आप उनसे बस अपने खाने का ख्याल रखना

तुषार- लेकिन मेरी भी जिम्मेदारी ह घर में योगदान देने की

अंजलि- जब टाइम आएगा आपको hi सम्हालना ह सब कुछ लेकिन तब तक ये शरीर मजबूत होना चाहिए उन पैसो से बस अच्छी देइत लो एक्सरसाइज करो और ताकतवर बनो

तुषार- जैसा होकुम malika-e- हुसैन

अंजलि- आज कल आप एक लड़की के साथ घूम रहे ह कोण ह वो

अंजलि की बात सुनकर तुषार की गांड फैट गई

तुषार- वो वो तो

अंजलि- घबरा क्यों रहे हो मैं शक नहीं क्र रही पत्नी होने केन एते और माँ होने केन एते मेरा अधिकार ह जाने का, और वैसे भी मैंने अपने किसी बच्चे को झूट बोलना तो नहीं सिखाया

तुषार- वो शाक्षी ह माँ

अंजलि- आप पसंद करते हो उसे

तुषार- नहीं माँ बात पसंद की नहीं ह

अंजलि- फिर

तुषार- वो दीपा दी चाहती ह की मैं रजनी से बदला लू उनके परिवार की हर औरत के साथ समबन्ध बनु, तो मैंने रजनी की बेटी को पटाया ह वो रजनी की बेटी ह

अंजलि- तो तुम लोग बदला लेना चाहते हो

तुषार- माँ वो आपके और पापा के साथ जो हुआ उससे हम सब दुखी थे इसलिए

अंजलि- और क्या क्या क्र रहे हो,

तुषार- वो अजय और यश की फॅमिली को भी सबक सीखना चाहते ह

अंजलि- वो कैसे करोगे

तुषार- पता नहीं माँ, लेकिन यश की वाइफ अनीता ने मेरा no. माँगा था लेकिन अभी बात नहीं हुई उनसे

अंजलि- ok ok और कुछ

तभी दूर बेल्ल बज गई

अंजलि- जल्दी से कपडे पहन और दूर खोल

तुषार ने जल्दी से कपडे पहने और दूर खोलने चला गया, सामने उसकी खूबसूरत बहन रूचि और दीपा खड़े थे,

रूचि- क्या क्र रहा था इतनी देर लगा दी दूर खोलने में

तुषार- बाथरूम में था

दीपा- और माँ कहा ह वो खोल देती

तुसाहर- वो तो रेस्ट क्र रही ह रूम में

दोनों बहन रूम में पहुंची अंजलि ने जल्दी में ब्रा पंतय फेनी और गाउन पहन क्र कमबल में लेट गई,

रूचि- माँ कैसी तबियत ह अब

अंजलि- अच्छी हु बेटी बस थोड़ा रस्ट क्र रही थी, तुम कपडे बदलो मैं चाय बनती हु

दीपा- माँ आप रेस्ट करो आप थकी होंगी मतलब दर्द हो रहा होगा, मैं बना देती हु सबके लिए चाय

फिर दीपा और रूचि चले गए लेकिन दीपा की बात की थक गई होंगी अंजलि के दिमाग में घूम गई, वो समझ गई की दीपा को पूरा यकीन ह आज हमने क्या किया ह, उससे बात करनी पड़ेगी,

फिर सबने अंजलि के रूम में hi चाय पि,

शाम को सीमा और राजेश भी आ गए,

अंजलि का दर्द काफी काम था उसने दवाई ले ली थी वो सरे काम क्र रही थी बस थकी हुई थी, लेकिन उसके चारे की चमक इतनी ज्यादा थी की किसी का भी धयान अपनी तरफ खींच ले,

वही आज सीमा के फेस पैर भी अलग hi स्माइल दिख रही थी, काफी दिनों बाद सीमा सभी से है क्र बात क्र रही थी, रात में अंजलि और तुषार तो ऐसे सोये जैसे दुनिया से कोई मतलब hi न हो, बड़े सकूं की नींद ले रहे थे, वही दीपा और रूचि सीमा के रूम में गई,

दीपा- क्या बात ह आज पहेली वाली सीमा दिखाई दे रही ह वर्ण जब से जॉब पैर गई ह तू तो बदल hi गई थी

सीमा- ऐसा कुछ नहीं ह वो बस थोड़ा सा लोड चल रहा था काम का

दीपा- ऐसा क्या लोड जो परिवार से hi ठीक से न बोले,

रूचि- दी ये सब कहानिया मत सुनाओ सच बताओ क्या हुआ था कुछ तो था जो गलत था लेकिन आज ठीक ह

सीमा- तू सच में लोमड़ी hi ह

रूचि- वो तो मैं हु

सीमा- यार हमारा मैनेजर मुझे ब्लैकमेल क्र रहा था, मेरे साथ गलत हरकत करना चाहता था, मैं परेशां हो गई थी, लेकिन अब बॉस ने उसे जॉब से हटा दिया

दीपा- इतनी बड़ी बात थी तो तूने हमे क्यों नहीं बताया

सीमा- तुम लोग क्या कर सकते थे

रूचि- आपको जॉब छोड़ देनी चाहिए थी आप वह जानकरी लेने गई थी, घर का खर्चा उठाने नहीं,

सीमा- अरे इतनी अच्छी जॉब कैसे छोड़ देती, तुझे कुछ नहीं पता वैसे भी बॉस बहुत अच्छे हैं

रूचि- बॉस अच्छे ह मतलब तुम वह सुरेश की जानकारी लेने गाइट hi या उसकी अच्छे की गाथा गण

सीमा- अरे हम लोग उन पैर गलत शक क्र रहे ह, उनका माँ के साथ कोई रिश्ता नहीं हो सकता, अगर हुआ भी तो उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया होगा जिससे माँ को तकलीफ हो

रूचि- आप मिली ह उससे

सीमा- नहीं नहीं अभी नहीं मिली, मैं तो बस अलका से मिली हु बहुत खड़ूस ह वो लेकिन पूरी कंपनी सुरेश जी के नाम की माला जप्ती रहती ह

दीपा- लेकिन वो सब क्या था जो रूचि के साथ हुआ वो भी सुरेश का hi बीटा था न

सीमा- अरे वो उस भूरा के बहकावे में आ गया होगा और वो थोड़ा सा बिगड़ा हुआ ह

रूचि- थोड़ा सा आपका दिमाग ख़राब हो गया ह क्या, वो मेरा बलात्कार करने वाला था और आप उसे थोड़ा सा बिगड़ा हुआ बता रही हो

सीमा- अरे यार तुम रहने दो बस जाओ सुबह जल्दी उठना ह मुझे

सीमा ने कम्बल ओढ़ लिया, दोनों बहन एक दूसरे का मुँह देखते हुए बहार आ गई,

रूचि- ये क्या हो गया दीपा हमने इन्हे क्या ाकरने भेजा था और ये क्या करके आई हैं,

दीपा- मुझे लग hi रहा था इसके पास दिमाग नहीं ह ये निचे से hi सोचती ह,

रूचि- सही बोल रही हो इनकी हवस इन्हे और हम सब को फसवा देगी

दीपा- अब आई न मैं तो उस दिन hi बोल रही थी ये निचे से सोचती ह

रूचि- लेकिन इतना भी क्या सोचना निचे से, अब हमे hi कुछ करना होगा कल हम इनके ऑफिस चैलेंज,

दीपा- नहीं हमे नहीं पता वह क्या हालत ह, मैं वह जा चुकी हु तो पहले मैं जाउंगी वह,

अगले दिन सभी अपने काम पैर निकल गए, अंजलि एक दम फ्रेश थी, दीपा ने तुषार को इशारा क्र दिया की वो उसके कॉलेज के पास मिले, सबसे पहले रूचि और दीपा का कॉलेज था उससे आगे तुषार का कॉलेज दोनों के बिच बस 1 कम की दुरी थी, और अंजलि का स्कूल सबसे आगे था कसबे के अंदर, अंजलि आगे निकल गई, तुषार पैदल hi दीपा के कॉलेज ताका ा गया, रूचि और दीपा खड़े उसी का इंतजार क्र रहे थे,

तुषार- क्या हुआ देवियो इतना दुखी दुखी क्यों हो

रूचि- मजाक मत क्र बात सुन

तुषार- है क्या हुआ

दीपा ने सीमा की साडी बात बता दी,

रूचि- तू दीपा के साथ जा और पता क्र क्या सीन ह वह, तू अंदर मत जाना बहार रुक जाना, तुझे वह कोई न देखे बस दीपा अकेली जार hi ह इसलिए भेज रही हु

तुषार- समझ गया मेरी माँ कितनी फ़िक्र करती ह

रूचि- मुझे फ़िक्र ह

दीपा- अच्छा तू जा कॉलेज हम निकलते हैं

फिर दीपा और तुषार ऑटो में बैठ क्र सिटी में चले गए, रस्ते में ज्यादा बात नहीं हुई, कंपनी पहुंच क्र दीपा ने तुषार को बहार रोक दिया खुद अंदर चली गई,

वो रेसेपशन पैर गई और सीमा के बारे में पूछा तो पता चला वो ऑफिस में नहीं ह, मैडम के साथ बहार गई ह, अब क्या करे तभी दीपा को आईडिया आया

दीपा- मैं मर. सुरेश चोपड़ा से मिल सकती हु क्या

रेप- वो तो नहीं आते यहाँ अब उनकी बेटी इस ऑफिस को चलती हैं

दीपा- ok लेकिन लास्ट बार बात हुई थी तो उन्होंने कहा था यहाँ आकर मिलना

रेप- तो आप देर से आई सर कल आकर चले गए, आपकी बात लास्ट मंथ हुई होगी, वो लास्ट मंथ दो दिन के लिए आये थे संडे रुके और चले गए फिर कल आये थे,

दीपा- है है उन्होंने कहा था की आकर मिलना

रेप- जॉब के लिए मिलना था क्या

दीपा- है जी

रेप- आप अलका मम से बात क्र लो शायद मिल जाये

दीपा- नहीं सर से hi मुलाकात होनी थी उन्होंने कहा था मुझसे hi मिलना

रेप्सेप्शनिस्ट मुस्कुराई- है वही अच्छे से देते हैं जॉब

दीपा- जी क्या

रेप- कुछ नहीं

दीपा- ok आप सीमा को मत बताना मैं यहाँ आई थी मैं उसको सरप्राइज देना चाहती हु

रेप- ok

दीपा वह से निकल आई, और तुषार के पास आ गई

दीपा- यार सीमा तो ह hi नहीं

तुषार- होगी भी कैसे वो अभी अभी किसी लड़की के साथ कार में गई ह, तुम इधर से घुसी वो उधर से निकल रही थी,

दीपा- चलो अच्छा हुआ उसने देखा नहीं, मुझे थोड़ी सी जानकारी तो मिली

तुषार- बुरा हुआ तुमने उन्हें नहीं देखा

दीपा- क्यों

तुषार- अगर देख लेती तो बेहोश हो जाती मैं बड़ी मुश्किल से होश में रह पाया हु



दीपा- ऐसा क्या देख लिया
 
समाज ने जो नियम बनाये हैं वो बहुत सोच समझ क्र hi बनाये ह उन नियमो को तोड़ कर गलत रिश्ते बनाने से हमारे समाज का पतन होगा जिससे भविष्य में हर जगह बस वासना hi वासना रहेगी, इस वासना से बचने के लिए hi समाज में नियम बने हैं, कोई भी तारक इन नियमो से बड़ा नहीं हो सकता, ये बस कहानी की मांग के हिसाब से लिखा ह मैंने,

सीमा से कुछ गलतिया हुई हैं लेकिन उसके साथ उसका परिवार ह, जो उसे वह से जरूर निकलेगा,

ठंकु डिअर
 
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