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- Dec 5, 2013
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तुषार- जब तुम अंदर जा रही थी तो दूसरे दूर से दो बहुत hi खूबसूरत लड़किया निकली, एक लड़की ने स्कर्ट और शर्ट फेनी हुई थी बहुत hi फिटिंग की बहुत टाइट कपडे थे पूरा फिगर दिख रहा था, और उसके पीछे दूसरी लड़की ने एक बहुत hi शार्ट स्कर्ट और बहुत टाइट टॉप पहना हुआ था जिसमे उसके बूब्स और अस्स अलग hi दिख रहे थे, मैं उन्हें देख रहा था, जब मैंने उन पैर धयान दिया तो मेरे फैट गई,
दीपा- तू यहाँ खड़ा होकर दूसरी लड़कियों की सुंदरता और सेक्सी कपडे देख रहा था, हम से मन भर गया क्या हम लोग काम पद रहे ह तुझे,
तुसाहर- क्या बोल रही हो पूरी बात तो सुन लो सुन्ना क्या देख लो,
तुषार ने फ़ोन निकला और दीपा को कुछ फोटो दिखने लगा, फोटो को गौर से देखने पैर दीपा की आँख फटी रह गई, ये ये तो
तुषार- है यही तो, मेरी भी ऐसी hi हालत हुई थी, ये सीमा दी hi ह,
दीपा- लेकिन सीमा इस रूप में घर से तो कुछ और hi फेन क्र आती ह
तुषार- इसी लिए वो हम सबको ऑफिस से दूर रखती ह, और तुम्हे क्या जानकारी मिली
दीपा- सुरेश चोपड़ा पिछले 1 महीने में 2 बार यहाँ आ चुक्का ह और सीमा उससे मिली भी ह, एक संडे को को वो यही रुका था और सीमा उस संडे को ऑफिस में आई थी,
तुषार- ये तो बहुत गड़बड़ वाली बात ह
दीपा- है यार अब क्या करे हमने तो उन्हें जानकरी लेने भेजा था वो पूरी hi बदल गई
तुषार- लेकिन कोई इतनी जल्दी कैसे बदल सकता ह
दीपा- आज शाम को बात करेंगे
तुषार- तुम टेंशन न लो मैं कुछ करता हु आज रात उनके hi साथ बितानी पड़ेगी बहुत दिन हो गए
दीपा- है जी दिन तो हो गए हैं
तुषार- आप भी प्यासी हो
दीपा- अब तू अपना पानी कही और डालेगा तो हम प्यासी hi रहेंगी
तुषार- कही और मतलब
दीपा- ज्यादा भोला मत बन मैं बच्ची नहीं हु सब समझ आता ह मुझे, लेकिन थोड़ी कंफ्यूज हु
तुषार- ऐसा क्या हो गया जो आप कंफ्यूज हो गई
दीपा- तेरा और मेरा रिश्ता असल में ह क्या
तुषार- आप भी सीमा दी की तरह बहक गई हो क्या, हम भाई बहन ह
दीपा- है कुछ टाइम पहले तक तो भाई बहन hi थे, लेकिन जिस दिन तूने सीमा की चुदाई की तबसे तू एक तरह से मेरा जीजा भी बन गया ह, और फिर तूने मुझे छोड़ा तो मेरा पति बन गया, और अब तूने हमारी माँ भी छोड़ दी ह तो तू अब मेरा बाप भी बन गया, अब तुझे भाई बोलू जीजा बोलू पति बोलू या बाप बोलू
दीपा की बात सुनकर तुषार की सच में गांड फैट गई,
तुषार- ये ये ये क्या बोल रही हो पागल हो गई हो क्या माँ कैसे मतलब आप
दीपा- ोोू फत्तू दर मत मैंने hi तुझसे कहा था माँ की प्यास बुझाने को और मुझसे hi छुपा रहा ह, साला फत्तू हमारे घर में चुप क्र कोई काम नहीं हो सकता
तुषार- श्री वो मैंने सोचा कही माँ गुस्सा करेगी किसी को पता चला तो इसलिए नहीं बताया
दीपा- ज्यादा मत सोचा क्र और पूरी बात बता मुझे
फिर तुषार ने दीपा को अंजलि और खुद की चुदाई की कहानी सुनाई
दीपा- ू bête माँ से शादी क्र ली, अब तो तू पक्का हमारा बाप बन गया ह और मैं तेरी बेटी
तुषार- प्लस यार मजे मत लो मेरे
दीपा- मजे नहीं ले रही मुझे ख़ुशी ह, तूने माँ को वो ख़ुशी दी, लेकिन तुझे के काम और करना ह मुझसे भी शादी करनी ह
तुषार- ये कैसे हो सकता ह माँ तो यही रहेगी किसी को पता नहीं चलेगा लेकिन आपकी तो शादी होगी आपको तो जाना पड़ेगा फिर आप कैसे शादी क्र सकती हो मुझसे,
दीपा- मुझे नहीं पता तू क्या करेगा क्या नहीं मैं नहीं करने वाली किसी से शादी समझा, और सीमा से अपनी और माँ की कहानी छुपा क्र रखना
तुषार- वो तो छुपा लूंगा लेकिन
दीपा- लेकिन वेकिन छोड़ और चल गर चलते ह, आज घर में कोई नहीं होगा जल्दी जाकर चुदाई करते हैं
तुषार- आप कब से ये गंदे वर्ड्स बोलने लगी
दीपा- जब से तेरे लुंड ने मेरी छूट फड़ी ह, अब मजा आता ह तेरे सामने ऐसे बोलने में
दोनों जल्दी से घर पहुंचे और एक तगड़ी वाली चुदाई की,
दीपा- यार तू इतना कैसे छोड़ लेता ह इतना दम कहा से आता ह तेरे में
तुसाहर- पता नहीं
दीपा- तुझे थकन नहीं होती क्या
तुषार- होती ह पैर जल्दी hi ठीक हो जाता हु
फिर कुछ देर बाद रूचि भी आई गई, दीपा और तुषार ने रूचि को साडी बात बताई,
रूचि- मेरा दर सही था
दीपा- अब क्या किया जायेगा
रूचि- दीपा जितना हम सोच रहे हैं प्रॉब्लम उससे कही बड़ी हो सकती ह
तुषार- मतलब?
रूचि- सीमा दी ने झूट बोलै ये तो प्रॉब्लम ह hi लेकिन वो कपडे कहा से खरीद रही हैं, उनकी अभी एक hi साल्लेर्य आई ह उसमे से उन्होंने घर में दे दिए हमे भी शॉपिंग करवा दी, इतने पैसे तो मिले नहीं थे, और जो ड्रेस ये फेन रही ह उसकी कमर 2000 से काम नहीं होगी और ऐसी एक hi ड्रेस तो खरीदी नहीं होगी, और अगर खुद से नहीं खरीदी तो दी किसने,
दीपा- हो सकता ह कंपनी ने दी हो
रूचि- कंपनी में कोई और भी ऐसी ड्रेस में था
दीपा- शामे ऐसी तो नहीं लेकिन जीन्स में स्कर्ट में लड़किया थी
रूचि- अगर कंपनी देगी तो सबको एक जैसी ड्रेस देगी न
दीपा- कही उनका कोई बर्फ तो नहीं बन गया, दीपा ने तुषार की तरफ देखते हुए बोलै
रूचि- हो भी सकता ह वो उप्पेर वाले दिमाग से काम hi सोचती हैं
तुषार- ये उप्पेर वाला दिमाग मतलब दिमाग एक ह जगह होता ह
रूचि- नहीं बच्चो दो जगह होता ह एक उप्पेर एक निचे, जैसे तेरा घुटने में ह
तुषार- अच्छा बताऊ कहा ह मेरा दिमाग
रूचि- मुझे पता ह कहा ह तेरा दिमाग, पैर अभी तेरे दिमाग का नहीं सीमा दी के दिमाग का मुद्दा ह
दीपा- आज हम उससे बात करेंगे
तुषार- मैं भी साथ रहूँगा
रूचि- नहीं तेरे सामने वो बर्फ का सच नहीं बताएंगी
फिर अंजलि भी आ गई शाम को सभी एक साथ बैठे थे, आज अंजलि ने पिले वाले चावल बनाये थे जिन्हे कही कही तहरी कही वेग बिरयानी भी बोलते ह या पुलाओ बोलते ह, पूरा परिवार एक साथ निचे चादर बिछा क्र बैठा था काफी टाइम बाद सब एक साथ थे,
तुषार- माँ मुझे और चाहिए
रूचि- है माँ इस भुक्कड़ का पेट भरो ये कुछ ज्यादा hi महेनत करता ह
दीपा- क्यों नजर ला रही ह
रूचि- इसे नजर नहीं लग सकती
रूचि- पापा क्या ये बचपन से hi इतना बड़ा भुक्कड़ था, या अभी ऐसा ह या अब कुछ ज्यादा काम करने लगा ह जो इतना खता ह, बचपन में तो ये सबके हिस्से का दूध पि जाता होगा,
राजेश- अरे नहीं नहीं जब ये पैदा हुआ था तो बहुत कमजोर था, डॉ. ने तो हाथ खड़े क्र दिए थे बोलै था इसे बचाना मुश्किल ह, तुम्हारी माँ उस टाइम पूरी तरह ठीक नहीं थी, तो इस बेचारे को पूरा पोषण नहीं मिल पाया, 1 साल तक तो इसे दूध भी बड़ी मुश्किल से पिलाया जाता था, तुम्हारी माँ का दूध तो इसने पिया hi नहीं ड्राप से दूध पिलाया जाता था इसे, फिर तुम्हारी माँ इसे लेकर बहुत जगह गई, हरिद्वार गई वेद के पास, कई शेरो में बड़े बड़े डॉ. के पास गई, फिर एक डॉ. ने इलाज किया, 12 साल तक की आगे में इसे इंजेक्शन लगते रहे तब जाकर ये कुछ ठीक हुआ था,
राजेश की बात सुनकर क्र सभी के अंदर एक दर्द उभर आया, सभी की आंखे नाम हो गई थी, सीमा भी दुखी थी,
अंजलि- आप भी क्या बात लेकर बैठ गए, अब ठीक ह वो
रूचि- श्री टुशु आज के बाद नहीं तोकूँगी, तू मेरे हिस्से का भी खा लेना, जितना दिल करे उतना खाना
दीपा- पहले तू hi खायेगा बाकि सब बाद में
तुषार- अअअअअ मेरी प्यारी भेने
अंजलि- किसी को किसी के हिस्से का खाने की जरुरत नहीं ह, महेनत करो ज्यादा कमाओ जिसे कोई भूका न रहे समझे, हिस्सा लूटना hi प्यार नहीं होता, परिवार के लिए महेनत करना उनका ख्याल रखना उनके लिए कामना भी प्यार hi होता ह, इसलिए एक दूसरे के लिए महेनत करो समझे
रूचि- समझ गए मदर इंडिया, हम अपने परिवार के लिए पूरी महेनत करेंगे, कोई हमे अलग नहीं क्र सकता न hi ये दुनिया न hi किसी का प्यार न hi पैसा न दिखावा, सब हमारे परिवार के प्यार के सामने काम hi रहेगा,
ये बात रूचि ने सीमा को देखते हुए बोली, दीपा भी उसका मतलब समझ गई थी, बिना सोचे उठाया हुआ टॉपिक सही जगह काम आ गया था,
रात को दीपा और रूचि सीमा के रूम में बैठे थे, सीमा भी खुश होकर बात क्र रही थी,
रूचि- दी हमारा परिवार कितना लकी ह न हम सब एक दूसरे से कितना प्यार करते हैं
दीपा- है रूचि कोई चीज हमे अलग नहीं क्र सकती और अबसे बड़ी बात ह हम सब एक दूसरे से झूट नहीं बोलते, हमारी माँ ने हमारे बिच कभी कोई बात छुपानी नहीं सिखाई,
रूचि और दीपा पूरा इमोटीनल सीन बना रही थी जिसका असर सीमा पैर हो रहा था,
सीमा- हमारा परिवार कभी अलग नहीं होगा
दीपा- है सीमा बस कोई झूट हमारे बिच न आ जाये
सीमा- वो वो दीपा मैं एक बात बताना चाहती हु
रूचि- क्या हुआ दी हम बहेनो में क्या फोर्मलटीएस बोलो
सीमा- वो मैंने सबसे एक झूट बोलै
दीपा- कैसा झूट
सीमा- वो मैं सुरेश चोपड़ा से मिली थी
दीपा और रूचि ने सरप्राइज होने का नाटक किया, क्या ?
सीमा- है लेकिन हम जैसा उनके बारे में सोच रहे थे वो वैसे नहीं ह बहुत अच्छे इंसाने ह वो, अपने स्टाफ का बहुत ख्याल रखते हैं
दीपा- अच्छा ऐसा क्या किया उन्होंने
सीमा- माँ को मत बताना
दीपा- नहीं बताएँगे
सीमा- उन्होंने मुझे फ़ोन दिलाया और बहुत साडी ड्रेस दिलवाई ऑफिस में पहनने के लिए, ये सूट तो मैं वह नहीं फेन सकती न, और 6 महीने बाद साल्लेर्य भी बढ़जाएगी मेरी, उसकी वजह से ऑफिस में धक् ह मेरी, अलका के साथ भी मेरी काफी बनती ह, ये अच्छे लोग हैं माँ के साथ किसी और ने कुछ किया होगा माँ को उनके खिलाफ भड़काया होगा, और वैसे भी आज तक माँ ने तो कभी उन्हें गलत कहा hi नहीं न ये कहा की उनसे माँ का कोई रिश्ता था,
दीपा- लेकिन
रूचि ने दीपा को रोक दिया, सही बोल रही हो दी अब इस मटर को यही बंद करते हैं, आप ज्यादा कुछ जानने की कोशिश मत करना और है अपने बारे में या माँ के बारे में खास तोर पैर किसी से ज्यादा मत बताना
सीमा- मैं क्यों बताउंगी किसी को
फिर दोनों बहार आ गई
दीपा- तूने मुझे बोलने क्यों नहीं दिया
रूचि- क्योकि इस वक्त उनके दिमाग में पैसे की चकाचोंध हो राखी ह, उन्हें कुछ समझ नहीं आएगा, उन्हें थोड़ा आयना दिखाना पड़ेगा सच हमे hi पता करना पड़ेगा, अगर वो और कुछ पता करने गई तो कही सुरेश चोपड़ा से hi माँ का नाम लेकर जानकारी न पूछनी शुरू क्र दे,
गलती हमारी hi ह हमे उन्हें भेजना hi नहीं चाहिए था, उनका दिमाग सच में उनकी छूट में घुसा पड़ा ह,
दीपा- हे हे मेरी शराफत की रानी क्या बोल रही ह
रूचि- यार दिमाग की माँ बहन हो राखी ह,
दीपा- तू फ़िक्र मत क्र हम कुछ क्र लेंगे तू जाकर आराम क्र,
अगले दिन सभी चल दिए अपनी मंजिल पैर, तुषार शाम को गयम से वापस निकल रहा था, कुछ दूर चलते hi एक बड़ी सी कार उसके पास आकर रुकी, तुषार एक दम चौक गया, और जब उसके अंदर से एक बाला की खूबसूरत औरत उत्तरी तो तुषार और चौक गया, उसे उम्मीद नहीं थी वो औरत वह उसे मिलेगी,
तुषार- आप यहाँ
औरत- इधर से गुजर रही थी तो तुम दिख गई सोचा पूछ लू मेरा फ़ोन नहीं उठाते हो न hi संस का जवाब देते हो, गलती मेरे देवर की थी मेरी तोडना मुझ पैर गुस्सा क्यों दिखा रहे हो
जी है ये औरत अनीता ठाकुर थी, और वो तुषार से ऐसे बात कर रही थी जैसे दोनों पहले से बड़े क्लोज फ्रेंड या जानकार रहे हो,
तुषार- ऐसी तो कोई बात नहीं ह
अनीता- तो फिर कार में बैठो कुछ बात करनी ह यहाँ लोग देखो कैसे देख रहे हैं
तुषार- लोग तो देखेंगे hi, यहाँ औरतो को कार चलते बहुत काम देखा जाता ह,
अनीता- तो बैठो
तुषार कार में बैठ गया, अनीता ने कार आगे बढ़ा दी,
तुषार- आप यहाँ क्या क्र रही हैं
अनीता- हॉस्पिटल आई थी जहा तुमने उस अजय को आराम करने के लिए लिटा दिया ह, ड्राइवर थान hi तो खुद hi आ गई
तुषार- उसका नाम मत लो मेरे सामने
अनीता- नहीं लेती श्री लेकिन मेरी मज़बूरी ह रिश्ता निभाना पड़ता ह वर्ण मैं तो
तुषार ने अनीता की तरफ देखा,
अनीता- ऐसे क्या देख रहे हो,
तुषार- आप उनसे नाराज लग रही हो
अनीता- नाराज नहीं हु, ऐसे लोगो से क्या नाराज होना जो इंसान hi न हो, मैं तो अपनी किस्मत को कोसती हु की इस परिवार में मेरी शादी हुई
तुषार- अब किस्मत से कोण लड़ सकता ह
अनीता- तुम लड़ते हो तुमने जो सबक उस अजय को सिखाया ह मुझे बड़ी ख़ुशी मिली,
तुषार- हहहहह ये तो अच्छा hi हो गया उसने आपके साथ भी कुछ किया क्या
अनीता की आँखों में आंसू आ गए
तुषार श्री मैंने कुछ गलत बोल दिया क्या, तुषार ने अपने हाथ से अनीता के आंसू पॉच दिए, तुषार के हाथ अनीता के गाल पैर लगते hi वो सिहर उठी, और एक दम कार के ब्रेक लगा दिए, तभी पीछे से दूसरी कार वाला डगमगा गया, और कार को सम्हालते हुए साइड में आया, दीखता नहीं क्या भेनचोद मरवाएगा क्या,
जैसे hi उसकी नजर अनीता पैर गई, ओह्ह्ह मैडम थोड़ा धयान से अभी आपकी थूक जाती, और वो आगे निकल गया
उसके जाते hi अनीता की हसी छूट गई,
तुषार- आपको हसी आ रही ह अभी वो पीछे से थोक देता
अनीता- तुमने उसकी हालत देखि पहले तो गली दे रहा था जब देखा सामने औरत ह तो कितने तमीज से बोलकर गया ह
तुषार- जब सामने आप जैसी खूबसूरत औरत हो तो अच्छा अच्छा को तमीज आ जाती ह
अब अनीता शर्मा सी गई, बस बस रहने दो,
तुषार- मैं झूट नहीं बोलता चाहे उस आदमी से पूछ लेते हैं
अनीता- अच्छा जी
तुषार- हम जा कहा रहे हैं
अनीता- पता नहीं
तुसाहर- हे? ऐसे hi चले जार hi हो
अनीता- वैसे तो घर जार hi थी लेकिन तुम दिख गए तो सोचा तुमसे बात क्र लू, तुमसे बात करके अच्छा लगता ह,
तुषार- लेकिन हमने तो आज तक कभी ठीक से बात की hi नहीं
अनीता- अब क्र लेंगे, अच्छा कुछ खाओगे क्या वो देखो वह हल्दीराम का रेस्टोरेंट ह,
तुषार- नहीं मुझे भूक नहीं ह
अनीता- लेकिन मुझे तो बहुत भूक लगी ह
तुषार- आपको लगी ह तो खा लीजिये
फिर अनीता ने कार उधर मोड़ दी, अंदर जाकर दोनों एक कार्नर की टेबल पैर बैठ गए, अनीता ने अपने लिए राजकचौरी आर्डर क्र दी, तुम क्या लोगे
तुषार- मैं कुछ नहीं कहूंगा
अनीता- कुछ तो लो न प्लस
तुषार- अच्छा ठीक ह जो आपको पसंद ह माँगा लो
अनीता ने उसक लिए पनीर टिक्का माँगा दिया,
अनीता- कल अजय को छुट्टी मिल जाएगी और परषो अजय और यश सब वापस चले जायँगे
तुषार- तो मैं क्या कृ
अनीता- मैं नहीं जा रही उनके साथ बड़ी मुश्किल से माँ जी से रिक्वेस्ट करके रुकी हु
तुषार मन में ये मुझे क्यों बता रही ह ये सब, मुझे क्या करना ह
अनीता- अब यहाँ मैं अकेली हु बोर हो जाउंगी क्यात ुम मेरी हेल्प करोगे
तुषार- मैं आपकी क्या हेल्प क्र सकता हु
अनीता- मैं यहाँ कुछ नहीं जानती क्या तुम मुझे यहाँ घूमने में हेल्प करोगे
तुषार- बड़ी बदकिस्मत हो आप, मैंने खुद आज तक यहाँ कुछ नहीं देखा
अनीता- तो दोनों देख लेंगे क्या तुम मेरे साथ टाइम नहीं बिता सकते
तुषार- ऐसी बात नहीं ह, लोग क्या कहेंगे आप इतने बड़े घर की लेडी और मैं एक गरीब लड़का
अनीता- ये अमीरी गरीबी मेरे लिए मायने नहीं रखती
तभी उनका आर्डर आ गया, आज पहेली बार तुषार ने पनीर टिक्का और राजकचौरी देखि थी, घर में कभी कभी पनीर की सब्जी खाई थी लेकिन ऐसे रेस्ट्रोरेंट में बैठ क्र ऐसे आइटम्स नहीं देखे थे, चारो तरफ पैसे वाले लोग सूंदर लड़किया ितं अभीतरीन खाना, तुषार की हवा टाइट हो रही थी,
अनीता ने राजकचौरी कहानी शुरू क्र दी तुषार थोड़ा घबरा सा रहा था,
अनीता- खाओ न
तुषार ने हिम्मत सी करके पनीर का टुकड़ा उठाया और खाने लगा, उसे बहुत टेस्टी लगा,
अनीता- मैं भी टेस्ट क्र लू कैसा ह, अनीता ने भी के टुकड़ा खा लिया टेस्टी ह ये लो राजकचौरी खा क्र देखो
तुषार- नहीं नहीं ठीक ह
दोनों ने अपना अपना फिनिश किया, तुषार उठने लगा,
अनीता- कहा जार हे हो
तुषार- चलना नहीं ह क्या
अनीता- कही जल्दी जाना ह क्या
तुषार- नहीं जल्दी तो नहीं पैर यहाँ कैसे बैठे रह सकते ह
अनीता- ये कोई किराया तोडना लेंगे बैठो
तुषार बैठ गया लेकिन वो थोड़ा असमंजस में था ये इतना क्यों घुल मिल रही ह मुझसे, वैसे तो तुसाहर खुद चाहता था की वो यश और जय के परिवार की औरतो को चोदे लेकिन अनीता खुद सामने से उसके पास आ रही थी, तुषार न चाहते हुए भी घबरा रहा था, घबराये भी क्यों न उसे अभी दुनिया को कैसे कण्ट्रोल करते ह औरतो और लड़कियों को कैसे अपने सामने झुकाते हैं, इन हालातो में कैसे मजबूत बनते हैं, उसे तो ये hi समझ नहीं आ रहा था अनीता चाहती क्या ह, और सच में नहीं पता था किसी को अनीता चाहती क्या ह,
तुषार- आप मेरे साथ क्यों ह मुझे समझ नहीं आ रहा
अनीता- अब क्या बताऊ मैं यहाँ अकेली हु और किसी को जानती भी नहीं हु किसी पैर विश्वास नहीं क्र सकती लेकिन तुम मुझे अच्छे लगे विश्वास करने लायक लगे तो सोचा तुमसे hi बात क्र लिया करू, मेरा टाइम भी काट जायेगा और एक दोस्त भी मिल जायेगा, क्या मैं तुम्हारी दोस्त बन सकती हु
तुषार- लेकिन मैं तो आपसे छोटा हु
अनीता- ये छोटा बड़ा इसी देश में होता ह विदेश में आगे कोई मायने नहीं रखती दोस्ती माये रखती ह, और मुझे तो कोई ाइटर्ज नहीं तुमसे दोस्ती रखने में
तुषार- ऐतराज तो मुझे भी कुछ नहीं ह , लेकिन हमारे बिच उम्र के अलावा और भी बहुत बड़ा अंतर ह
अनीता- दोस्ती में कोई अंतर नहीं होता समझे, और आजसे तुम मेरे दोस्त हो
तुषार- ठीक ह मम
अनीता- मेरा नाम अनीता ह मम नहीं
तुषार- मैं आपक अनाम कैसे ले सकता हु
अनीता- विदेह में सब एक दूसरे का नाम लेते हैं जैसे मर. तुषार या मरस. अनीता ऐसे hi बोलते ह तुम बस अनीता या दोस्त बोल सकते हो
तुसाहर- दोस्त ठीक ह नाम नहीं ले पाउँगा
अनीता- जैसा तुम ठीक समझो
तुषार- अब चले घर भी जाना ह माँ आ चुकी होंगी
अनीता- ठीक ह चलो पैर मिलते रहना
फिर दोनों निकल आये अनीता ने तुषार को वही कसबे में उतर दिया, तुषार घर के सामने से hi निकला था लेकिन किसी को घर का पता न चले इसलिए वापस कसबे में आ गया, उसे घर लौटने में काफी देर हो गाइट hi,
अंजलि- कहा रह गया था
तुषार- वो माँ थोड़ा काम पद गया था
तभी रूचि आ गई अरे कहा रह गया था कब से वेट क्र रहे थे तेरा इतना देर तो कभी नहीं हुई
तुषार- गयम में टाइम लग गया
अंजलि ने तुषार की आँखों में पढ़ लिया की झूट बोल रहा ह, फिर सबने चाय पि
चाय पिने के बाद अंजलि घर के काम में लग गई, तीनो बहन भाई रूचि के कमरे में बैठे थे,
रूचि- हम लोग किस रस्ते चल रहे हैं मुझे समझ नहीं आ रहा
दीपा- क्या हुआ ऐसा क्यों बोल रही ह
रूचि- हम लोग बदला लेना चाहते ह सुरेश चोपड़ा की जानकरी निकल रहे हैं लेकिन उसके बाद क्या,
दीपा- उसके बाद उनसे बदला लेंगे
रूचि- लेकिन कैसे हमारी हालत जानती ह न, हम अपना घर का खर्चा पूरा करने के लिए पूरा दिन ऐसी टेसी करवाते ह, खुद को खाने को पैसे ह नहीं किसी से बदला कैसे लेंगे
वो कहावत सुनी ह खुद को खाने को ह नहीं डेन और अम्मा चली भुनाने, ऐसा hi कुछ ह न
तुषार- है ह तो सही
दीपा और तुषार ने जो प्लान बनाया था वो रूचि को नहीं पता था रजनी के परिवार की औरतो को छोड़ने का लेकिन बाकि सब का क्या, रजनी की हवस दूर करने के लिए तो ये तरीका ठीक था लेकिन बाकि लोग मजबूत भी थे और ताकतवर भी उन्हें कैसे सबक सिखाये,
दीपा- सही बोल रही ह यार हम करेंगे क्या बस गधो की तरह इधर उधर भाग रहे हैं
तुषार- माँ से बात करे क्या वो कोई रास्ता दिखा दे
रूचि- नहीं माँ से नहीं माँ हमे इन लफड़ो में पड़ने hi नहीं देंगी
दीपा- तू कुछ सोच न टुशु, तू लड़का ह बहार निकल सकता ह कुछ तरीका धुंध सकता ह
तुषार- मेरी आगे चाहे जो भी हो गई ह लेकिन मैं अभी 11तह में हु और मुझे उतना hi ज्ञान ह जितना 11तह तक के लड़के को होता ह इससे ज्यादा न किसी ने ज्ञान दिया न hi मैंने हासिल करने की कोशिश की, तो कहा से ज्ञान लाऊंगा और माँ ने हम सभी को आजादी दी ह मैं hi अकेला बहार नहीं निकल सकता आप भी निकल सकती हो
रूचि- टुशु ठीक बोल रहा ह, वो लड़का ह वॉक र सकता ह लेकिन तरीका हम सबको hi सोचना होगा, लेकिन सम्हाल क्र ऐसा न हो हम माँ के लिए अच्छा करने जाये उल्टा उनके लिए मुसीबत पैदा क्र दे,
रात को खाने के बाद तुषार ने सीमा के पास जाने का फैसला किया, उसने सोचा सीमा उससे प्यार करती ह तो शायद उसे सब कुछ खुद hi बता दे,
तुषार सीमा के रूम में गया तो सीमा फ़ोन में लगी हुई थी,
तुषार- क्या क्र रही हो मेरी जान
सीमा एक दम से घबरा गई, टुशु तू यहाँ इस टाइम
तुषार- क्यों आ नहीं सकता क्या अपनी जान के पास
सीमा- कैसी बात क्र रहा ह आ न
तुषार- क्या कर रही हो बिजी तो नहीं थी
सीमा- अरे नहीं नहीं बिजी क्यों हूँगी
तुषार- आज कल ज्यादा थक जाती हो क्या
सीमा- नहीं तो, ऐसा क्यों बोल रहा ह
तुषार- इतने दिन हो गए आपने मुझे अपने पास बुलाया hi नहीं प्यास मिट गई क्या,
सीमा ने तुरंत तुसाहर का कलर पकड़ा और अपने उप्पेर खींच लिया और तुषार के हॉट चुम लिए, ये प्यास कभी बुझ सकती ह क्या
तुषार- इतने दिन से दूर दूर हो सोचा प्यास ख़तम हो गई,
सीमा- मुझे लगा तू नाराज ह मुझसे इसलिए मेरे पास नहीं आता आज कल
तुषार- मैं क्यों नाराज रहूँगा आपसे आप hi नाराज रहती हो और अगर नाराज था भी तो कुटिया का फर्ज होता ह अपने मालिक को मानाने का
सीमा- माफ़ क्र दो मालिक आपकी कुटिया आपके पास नहीं आई, इस लिए अपनी कुटिया को सजा दो ऐसी सजा दो की कुटिया की गांड फैट जाये,
तुषार- सजा तो मिलेगी जरूर मिलेगी
तुषार ने सीमा को गॉड में उठा लिया और चूमने लगा,
जल्दी hi दोनों के कपडे उतर चुके थे, सीमा पागलो की तरह तुषार को चुम रही थी उसके लुंड को चूमने लगी तुषार भी सीमा को चूमे जार है था फिर उसकी चूचियों को अच्छे से चूसने मसलने लगा, सीमा तुषार का लुंड चूसने लगी,
आज कल तुषार मोबाइल में सेक्स की अलग अलग पोस्टिटोन देखने लगा था तो उसे एक पोजीशन याद आ गई, उसने सीमा को खड़ा किया और उसे गॉड में उठा क्र पलट दिया, सीमा का सर निचे और पेअर उप्पेर हो गए जिससे सीमा की छूट तुषार के मुँह के सामने आ गई, और तुषार का लुंड सीमा के मुँह के सामने था,
एक बार तो सीमा घबरा गई उसे बड़ा अचंम्भा हुआ तुषार ने उसे खिलोने की तरह उठा लिया था, और ये पोटिओसिओन बड़ी मस्त थी, तुषार ने सीमा की छूट पैर मुँह लगा दिया, सीमा भी तुषा रखा लुंड चूसने लगी,
ये ज्यादा देर नहीं चला, तुषार ने सीमा को निचे उतरा और एक पेअर हवा में उठाया और लुंड उसकी छूट पैर सेट करके धक्का लगा दिया, सीमा की चीख निकल निकलती रह गई, तुषार आज कुछ नया hi तरय करता जार है था, थोड़ी दे रेज hi छोड़ने के बाद तुषार ने सीमा को गॉड में उठा लिया और अपना लुंड उसकी छूट में घुसा क्र अपने हाथो पैर उछलने लगा,
सीमा ने तुसह रकि गार्डन में हाथ दाल दिए, और लुंड पैर उछलने लगी, लुंड एक दम गहराइयों तक जार है था, जिससे सीमा की सिसकारियां जोर जोर से निकलने लगी, जिसकी आवाज दीपा के रूम तक जार hi थी, aghhhhhhhhhh छोड़ अपनी कुटिया को अह्ह्ह्हह्ह ऐसे hi उछाल उछाल क्र छोड़ ahhhhhhhhhhhhh बना दे भोसड़ा मेरी छूट का aahhahhhhhhhhhhhhh फाड् दे इस भेनचोद को बहुत प्यासी रहती ह ये छूट aahahhhhhhhhhhhhhhhhhhh, सीमा खुद को सम्हाल नहीं पाई और झाड़ गई,
तुषार ने सीमा को बीएड पैर लिटाया और पीछे से लुंड छूट में डालने लगा, लेकिन छूट के रास में सना लुंड गलती से सीमा की गांड के छेद सेट हो गया और जैसे hi तुषार ने धक्का मारा तो सीमा की चीख निकल गई अह्ह्ह्हह्हह्ह्ह्ह वह नहीं aahhhhhhhhhhhhhhhhh,seema एक दम आगे हो गई,
सीमा- तू पागल ह क्या वह क्यों दाल रहा ह
तुषार- गलती से चला गया जान
सीमा- मेरी गांड कुँअरि ह वह कभी भी मत डालना
तुषार- मैंने तो कभी सोचा भी नहीं वह डालने का
सीमा- ठीक ह तेरा हुआ नहीं क्या
तुषार ने सीमा को खींचा और सीधा लिटा क्र अपना लुंड एक hi बार में घुसा दिया और धक्के लगाने लगा,
वो तब तक धक्के लगता रहा जब तक खुद झाड़ नहीं गया, झड़ते हुए उसने अपना लुंड सीमा के मुँह में दे दिया, और पूरा रास उसके मुँह में खली क्र दिया, सीमा 2 बार झाड़ गाइट hi,
फिर दोनों ने खुद को साफ़ किया, और एक साथ चिपक क्र लेट गए,
तुषार- जब तुम अंदर जा रही थी तो दूसरे दूर से दो बहुत hi खूबसूरत लड़किया निकली, एक लड़की ने स्कर्ट और शर्ट फेनी हुई थी बहुत hi फिटिंग की बहुत टाइट कपडे थे पूरा फिगर दिख रहा था, और उसके पीछे दूसरी लड़की ने एक बहुत hi शार्ट स्कर्ट और बहुत टाइट टॉप पहना हुआ था जिसमे उसके बूब्स और अस्स अलग hi दिख रहे थे, मैं उन्हें देख रहा था, जब मैंने उन पैर धयान दिया तो मेरे फैट गई,
दीपा- तू यहाँ खड़ा होकर दूसरी लड़कियों की सुंदरता और सेक्सी कपडे देख रहा था, हम से मन भर गया क्या हम लोग काम पद रहे ह तुझे,
तुसाहर- क्या बोल रही हो पूरी बात तो सुन लो सुन्ना क्या देख लो,
तुषार ने फ़ोन निकला और दीपा को कुछ फोटो दिखने लगा, फोटो को गौर से देखने पैर दीपा की आँख फटी रह गई, ये ये तो
तुषार- है यही तो, मेरी भी ऐसी hi हालत हुई थी, ये सीमा दी hi ह,
दीपा- लेकिन सीमा इस रूप में घर से तो कुछ और hi फेन क्र आती ह
तुषार- इसी लिए वो हम सबको ऑफिस से दूर रखती ह, और तुम्हे क्या जानकारी मिली
दीपा- सुरेश चोपड़ा पिछले 1 महीने में 2 बार यहाँ आ चुक्का ह और सीमा उससे मिली भी ह, एक संडे को को वो यही रुका था और सीमा उस संडे को ऑफिस में आई थी,
तुषार- ये तो बहुत गड़बड़ वाली बात ह
दीपा- है यार अब क्या करे हमने तो उन्हें जानकरी लेने भेजा था वो पूरी hi बदल गई
तुषार- लेकिन कोई इतनी जल्दी कैसे बदल सकता ह
दीपा- आज शाम को बात करेंगे
तुषार- तुम टेंशन न लो मैं कुछ करता हु आज रात उनके hi साथ बितानी पड़ेगी बहुत दिन हो गए
दीपा- है जी दिन तो हो गए हैं
तुषार- आप भी प्यासी हो
दीपा- अब तू अपना पानी कही और डालेगा तो हम प्यासी hi रहेंगी
तुषार- कही और मतलब
दीपा- ज्यादा भोला मत बन मैं बच्ची नहीं हु सब समझ आता ह मुझे, लेकिन थोड़ी कंफ्यूज हु
तुषार- ऐसा क्या हो गया जो आप कंफ्यूज हो गई
दीपा- तेरा और मेरा रिश्ता असल में ह क्या
तुषार- आप भी सीमा दी की तरह बहक गई हो क्या, हम भाई बहन ह
दीपा- है कुछ टाइम पहले तक तो भाई बहन hi थे, लेकिन जिस दिन तूने सीमा की चुदाई की तबसे तू एक तरह से मेरा जीजा भी बन गया ह, और फिर तूने मुझे छोड़ा तो मेरा पति बन गया, और अब तूने हमारी माँ भी छोड़ दी ह तो तू अब मेरा बाप भी बन गया, अब तुझे भाई बोलू जीजा बोलू पति बोलू या बाप बोलू
दीपा की बात सुनकर तुषार की सच में गांड फैट गई,
तुषार- ये ये ये क्या बोल रही हो पागल हो गई हो क्या माँ कैसे मतलब आप
दीपा- ोोू फत्तू दर मत मैंने hi तुझसे कहा था माँ की प्यास बुझाने को और मुझसे hi छुपा रहा ह, साला फत्तू हमारे घर में चुप क्र कोई काम नहीं हो सकता
तुषार- श्री वो मैंने सोचा कही माँ गुस्सा करेगी किसी को पता चला तो इसलिए नहीं बताया
दीपा- ज्यादा मत सोचा क्र और पूरी बात बता मुझे
फिर तुषार ने दीपा को अंजलि और खुद की चुदाई की कहानी सुनाई
दीपा- ू bête माँ से शादी क्र ली, अब तो तू पक्का हमारा बाप बन गया ह और मैं तेरी बेटी
तुषार- प्लस यार मजे मत लो मेरे
दीपा- मजे नहीं ले रही मुझे ख़ुशी ह, तूने माँ को वो ख़ुशी दी, लेकिन तुझे के काम और करना ह मुझसे भी शादी करनी ह
तुषार- ये कैसे हो सकता ह माँ तो यही रहेगी किसी को पता नहीं चलेगा लेकिन आपकी तो शादी होगी आपको तो जाना पड़ेगा फिर आप कैसे शादी क्र सकती हो मुझसे,
दीपा- मुझे नहीं पता तू क्या करेगा क्या नहीं मैं नहीं करने वाली किसी से शादी समझा, और सीमा से अपनी और माँ की कहानी छुपा क्र रखना
तुषार- वो तो छुपा लूंगा लेकिन
दीपा- लेकिन वेकिन छोड़ और चल गर चलते ह, आज घर में कोई नहीं होगा जल्दी जाकर चुदाई करते हैं
तुषार- आप कब से ये गंदे वर्ड्स बोलने लगी
दीपा- जब से तेरे लुंड ने मेरी छूट फड़ी ह, अब मजा आता ह तेरे सामने ऐसे बोलने में
दोनों जल्दी से घर पहुंचे और एक तगड़ी वाली चुदाई की,
दीपा- यार तू इतना कैसे छोड़ लेता ह इतना दम कहा से आता ह तेरे में
तुसाहर- पता नहीं
दीपा- तुझे थकन नहीं होती क्या
तुषार- होती ह पैर जल्दी hi ठीक हो जाता हु
फिर कुछ देर बाद रूचि भी आई गई, दीपा और तुषार ने रूचि को साडी बात बताई,
रूचि- मेरा दर सही था
दीपा- अब क्या किया जायेगा
रूचि- दीपा जितना हम सोच रहे हैं प्रॉब्लम उससे कही बड़ी हो सकती ह
तुषार- मतलब?
रूचि- सीमा दी ने झूट बोलै ये तो प्रॉब्लम ह hi लेकिन वो कपडे कहा से खरीद रही हैं, उनकी अभी एक hi साल्लेर्य आई ह उसमे से उन्होंने घर में दे दिए हमे भी शॉपिंग करवा दी, इतने पैसे तो मिले नहीं थे, और जो ड्रेस ये फेन रही ह उसकी कमर 2000 से काम नहीं होगी और ऐसी एक hi ड्रेस तो खरीदी नहीं होगी, और अगर खुद से नहीं खरीदी तो दी किसने,
दीपा- हो सकता ह कंपनी ने दी हो
रूचि- कंपनी में कोई और भी ऐसी ड्रेस में था
दीपा- शामे ऐसी तो नहीं लेकिन जीन्स में स्कर्ट में लड़किया थी
रूचि- अगर कंपनी देगी तो सबको एक जैसी ड्रेस देगी न
दीपा- कही उनका कोई बर्फ तो नहीं बन गया, दीपा ने तुषार की तरफ देखते हुए बोलै
रूचि- हो भी सकता ह वो उप्पेर वाले दिमाग से काम hi सोचती हैं
तुषार- ये उप्पेर वाला दिमाग मतलब दिमाग एक ह जगह होता ह
रूचि- नहीं बच्चो दो जगह होता ह एक उप्पेर एक निचे, जैसे तेरा घुटने में ह
तुषार- अच्छा बताऊ कहा ह मेरा दिमाग
रूचि- मुझे पता ह कहा ह तेरा दिमाग, पैर अभी तेरे दिमाग का नहीं सीमा दी के दिमाग का मुद्दा ह
दीपा- आज हम उससे बात करेंगे
तुषार- मैं भी साथ रहूँगा
रूचि- नहीं तेरे सामने वो बर्फ का सच नहीं बताएंगी
फिर अंजलि भी आ गई शाम को सभी एक साथ बैठे थे, आज अंजलि ने पिले वाले चावल बनाये थे जिन्हे कही कही तहरी कही वेग बिरयानी भी बोलते ह या पुलाओ बोलते ह, पूरा परिवार एक साथ निचे चादर बिछा क्र बैठा था काफी टाइम बाद सब एक साथ थे,
तुषार- माँ मुझे और चाहिए
रूचि- है माँ इस भुक्कड़ का पेट भरो ये कुछ ज्यादा hi महेनत करता ह
दीपा- क्यों नजर ला रही ह
रूचि- इसे नजर नहीं लग सकती
रूचि- पापा क्या ये बचपन से hi इतना बड़ा भुक्कड़ था, या अभी ऐसा ह या अब कुछ ज्यादा काम करने लगा ह जो इतना खता ह, बचपन में तो ये सबके हिस्से का दूध पि जाता होगा,
राजेश- अरे नहीं नहीं जब ये पैदा हुआ था तो बहुत कमजोर था, डॉ. ने तो हाथ खड़े क्र दिए थे बोलै था इसे बचाना मुश्किल ह, तुम्हारी माँ उस टाइम पूरी तरह ठीक नहीं थी, तो इस बेचारे को पूरा पोषण नहीं मिल पाया, 1 साल तक तो इसे दूध भी बड़ी मुश्किल से पिलाया जाता था, तुम्हारी माँ का दूध तो इसने पिया hi नहीं ड्राप से दूध पिलाया जाता था इसे, फिर तुम्हारी माँ इसे लेकर बहुत जगह गई, हरिद्वार गई वेद के पास, कई शेरो में बड़े बड़े डॉ. के पास गई, फिर एक डॉ. ने इलाज किया, 12 साल तक की आगे में इसे इंजेक्शन लगते रहे तब जाकर ये कुछ ठीक हुआ था,
राजेश की बात सुनकर क्र सभी के अंदर एक दर्द उभर आया, सभी की आंखे नाम हो गई थी, सीमा भी दुखी थी,
अंजलि- आप भी क्या बात लेकर बैठ गए, अब ठीक ह वो
रूचि- श्री टुशु आज के बाद नहीं तोकूँगी, तू मेरे हिस्से का भी खा लेना, जितना दिल करे उतना खाना
दीपा- पहले तू hi खायेगा बाकि सब बाद में
तुषार- अअअअअ मेरी प्यारी भेने
अंजलि- किसी को किसी के हिस्से का खाने की जरुरत नहीं ह, महेनत करो ज्यादा कमाओ जिसे कोई भूका न रहे समझे, हिस्सा लूटना hi प्यार नहीं होता, परिवार के लिए महेनत करना उनका ख्याल रखना उनके लिए कामना भी प्यार hi होता ह, इसलिए एक दूसरे के लिए महेनत करो समझे
रूचि- समझ गए मदर इंडिया, हम अपने परिवार के लिए पूरी महेनत करेंगे, कोई हमे अलग नहीं क्र सकता न hi ये दुनिया न hi किसी का प्यार न hi पैसा न दिखावा, सब हमारे परिवार के प्यार के सामने काम hi रहेगा,
ये बात रूचि ने सीमा को देखते हुए बोली, दीपा भी उसका मतलब समझ गई थी, बिना सोचे उठाया हुआ टॉपिक सही जगह काम आ गया था,
रात को दीपा और रूचि सीमा के रूम में बैठे थे, सीमा भी खुश होकर बात क्र रही थी,
रूचि- दी हमारा परिवार कितना लकी ह न हम सब एक दूसरे से कितना प्यार करते हैं
दीपा- है रूचि कोई चीज हमे अलग नहीं क्र सकती और अबसे बड़ी बात ह हम सब एक दूसरे से झूट नहीं बोलते, हमारी माँ ने हमारे बिच कभी कोई बात छुपानी नहीं सिखाई,
रूचि और दीपा पूरा इमोटीनल सीन बना रही थी जिसका असर सीमा पैर हो रहा था,
सीमा- हमारा परिवार कभी अलग नहीं होगा
दीपा- है सीमा बस कोई झूट हमारे बिच न आ जाये
सीमा- वो वो दीपा मैं एक बात बताना चाहती हु
रूचि- क्या हुआ दी हम बहेनो में क्या फोर्मलटीएस बोलो
सीमा- वो मैंने सबसे एक झूट बोलै
दीपा- कैसा झूट
सीमा- वो मैं सुरेश चोपड़ा से मिली थी
दीपा और रूचि ने सरप्राइज होने का नाटक किया, क्या ?
सीमा- है लेकिन हम जैसा उनके बारे में सोच रहे थे वो वैसे नहीं ह बहुत अच्छे इंसाने ह वो, अपने स्टाफ का बहुत ख्याल रखते हैं
दीपा- अच्छा ऐसा क्या किया उन्होंने
सीमा- माँ को मत बताना
दीपा- नहीं बताएँगे
सीमा- उन्होंने मुझे फ़ोन दिलाया और बहुत साडी ड्रेस दिलवाई ऑफिस में पहनने के लिए, ये सूट तो मैं वह नहीं फेन सकती न, और 6 महीने बाद साल्लेर्य भी बढ़जाएगी मेरी, उसकी वजह से ऑफिस में धक् ह मेरी, अलका के साथ भी मेरी काफी बनती ह, ये अच्छे लोग हैं माँ के साथ किसी और ने कुछ किया होगा माँ को उनके खिलाफ भड़काया होगा, और वैसे भी आज तक माँ ने तो कभी उन्हें गलत कहा hi नहीं न ये कहा की उनसे माँ का कोई रिश्ता था,
दीपा- लेकिन
रूचि ने दीपा को रोक दिया, सही बोल रही हो दी अब इस मटर को यही बंद करते हैं, आप ज्यादा कुछ जानने की कोशिश मत करना और है अपने बारे में या माँ के बारे में खास तोर पैर किसी से ज्यादा मत बताना
सीमा- मैं क्यों बताउंगी किसी को
फिर दोनों बहार आ गई
दीपा- तूने मुझे बोलने क्यों नहीं दिया
रूचि- क्योकि इस वक्त उनके दिमाग में पैसे की चकाचोंध हो राखी ह, उन्हें कुछ समझ नहीं आएगा, उन्हें थोड़ा आयना दिखाना पड़ेगा सच हमे hi पता करना पड़ेगा, अगर वो और कुछ पता करने गई तो कही सुरेश चोपड़ा से hi माँ का नाम लेकर जानकारी न पूछनी शुरू क्र दे,
गलती हमारी hi ह हमे उन्हें भेजना hi नहीं चाहिए था, उनका दिमाग सच में उनकी छूट में घुसा पड़ा ह,
दीपा- हे हे मेरी शराफत की रानी क्या बोल रही ह
रूचि- यार दिमाग की माँ बहन हो राखी ह,
दीपा- तू फ़िक्र मत क्र हम कुछ क्र लेंगे तू जाकर आराम क्र,
अगले दिन सभी चल दिए अपनी मंजिल पैर, तुषार शाम को गयम से वापस निकल रहा था, कुछ दूर चलते hi एक बड़ी सी कार उसके पास आकर रुकी, तुषार एक दम चौक गया, और जब उसके अंदर से एक बाला की खूबसूरत औरत उत्तरी तो तुषार और चौक गया, उसे उम्मीद नहीं थी वो औरत वह उसे मिलेगी,
तुषार- आप यहाँ
औरत- इधर से गुजर रही थी तो तुम दिख गई सोचा पूछ लू मेरा फ़ोन नहीं उठाते हो न hi संस का जवाब देते हो, गलती मेरे देवर की थी मेरी तोडना मुझ पैर गुस्सा क्यों दिखा रहे हो
जी है ये औरत अनीता ठाकुर थी, और वो तुषार से ऐसे बात कर रही थी जैसे दोनों पहले से बड़े क्लोज फ्रेंड या जानकार रहे हो,
तुषार- ऐसी तो कोई बात नहीं ह
अनीता- तो फिर कार में बैठो कुछ बात करनी ह यहाँ लोग देखो कैसे देख रहे हैं
तुषार- लोग तो देखेंगे hi, यहाँ औरतो को कार चलते बहुत काम देखा जाता ह,
अनीता- तो बैठो
तुषार कार में बैठ गया, अनीता ने कार आगे बढ़ा दी,
तुषार- आप यहाँ क्या क्र रही हैं
अनीता- हॉस्पिटल आई थी जहा तुमने उस अजय को आराम करने के लिए लिटा दिया ह, ड्राइवर थान hi तो खुद hi आ गई
तुषार- उसका नाम मत लो मेरे सामने
अनीता- नहीं लेती श्री लेकिन मेरी मज़बूरी ह रिश्ता निभाना पड़ता ह वर्ण मैं तो
तुषार ने अनीता की तरफ देखा,
अनीता- ऐसे क्या देख रहे हो,
तुषार- आप उनसे नाराज लग रही हो
अनीता- नाराज नहीं हु, ऐसे लोगो से क्या नाराज होना जो इंसान hi न हो, मैं तो अपनी किस्मत को कोसती हु की इस परिवार में मेरी शादी हुई
तुषार- अब किस्मत से कोण लड़ सकता ह
अनीता- तुम लड़ते हो तुमने जो सबक उस अजय को सिखाया ह मुझे बड़ी ख़ुशी मिली,
तुषार- हहहहह ये तो अच्छा hi हो गया उसने आपके साथ भी कुछ किया क्या
अनीता की आँखों में आंसू आ गए
तुषार श्री मैंने कुछ गलत बोल दिया क्या, तुषार ने अपने हाथ से अनीता के आंसू पॉच दिए, तुषार के हाथ अनीता के गाल पैर लगते hi वो सिहर उठी, और एक दम कार के ब्रेक लगा दिए, तभी पीछे से दूसरी कार वाला डगमगा गया, और कार को सम्हालते हुए साइड में आया, दीखता नहीं क्या भेनचोद मरवाएगा क्या,
जैसे hi उसकी नजर अनीता पैर गई, ओह्ह्ह मैडम थोड़ा धयान से अभी आपकी थूक जाती, और वो आगे निकल गया
उसके जाते hi अनीता की हसी छूट गई,
तुषार- आपको हसी आ रही ह अभी वो पीछे से थोक देता
अनीता- तुमने उसकी हालत देखि पहले तो गली दे रहा था जब देखा सामने औरत ह तो कितने तमीज से बोलकर गया ह
तुषार- जब सामने आप जैसी खूबसूरत औरत हो तो अच्छा अच्छा को तमीज आ जाती ह
अब अनीता शर्मा सी गई, बस बस रहने दो,
तुषार- मैं झूट नहीं बोलता चाहे उस आदमी से पूछ लेते हैं
अनीता- अच्छा जी
तुषार- हम जा कहा रहे हैं
अनीता- पता नहीं
तुसाहर- हे? ऐसे hi चले जार hi हो
अनीता- वैसे तो घर जार hi थी लेकिन तुम दिख गए तो सोचा तुमसे बात क्र लू, तुमसे बात करके अच्छा लगता ह,
तुषार- लेकिन हमने तो आज तक कभी ठीक से बात की hi नहीं
अनीता- अब क्र लेंगे, अच्छा कुछ खाओगे क्या वो देखो वह हल्दीराम का रेस्टोरेंट ह,
तुषार- नहीं मुझे भूक नहीं ह
अनीता- लेकिन मुझे तो बहुत भूक लगी ह
तुषार- आपको लगी ह तो खा लीजिये
फिर अनीता ने कार उधर मोड़ दी, अंदर जाकर दोनों एक कार्नर की टेबल पैर बैठ गए, अनीता ने अपने लिए राजकचौरी आर्डर क्र दी, तुम क्या लोगे
तुषार- मैं कुछ नहीं कहूंगा
अनीता- कुछ तो लो न प्लस
तुषार- अच्छा ठीक ह जो आपको पसंद ह माँगा लो
अनीता ने उसक लिए पनीर टिक्का माँगा दिया,
अनीता- कल अजय को छुट्टी मिल जाएगी और परषो अजय और यश सब वापस चले जायँगे
तुषार- तो मैं क्या कृ
अनीता- मैं नहीं जा रही उनके साथ बड़ी मुश्किल से माँ जी से रिक्वेस्ट करके रुकी हु
तुषार मन में ये मुझे क्यों बता रही ह ये सब, मुझे क्या करना ह
अनीता- अब यहाँ मैं अकेली हु बोर हो जाउंगी क्यात ुम मेरी हेल्प करोगे
तुषार- मैं आपकी क्या हेल्प क्र सकता हु
अनीता- मैं यहाँ कुछ नहीं जानती क्या तुम मुझे यहाँ घूमने में हेल्प करोगे
तुषार- बड़ी बदकिस्मत हो आप, मैंने खुद आज तक यहाँ कुछ नहीं देखा
अनीता- तो दोनों देख लेंगे क्या तुम मेरे साथ टाइम नहीं बिता सकते
तुषार- ऐसी बात नहीं ह, लोग क्या कहेंगे आप इतने बड़े घर की लेडी और मैं एक गरीब लड़का
अनीता- ये अमीरी गरीबी मेरे लिए मायने नहीं रखती
तभी उनका आर्डर आ गया, आज पहेली बार तुषार ने पनीर टिक्का और राजकचौरी देखि थी, घर में कभी कभी पनीर की सब्जी खाई थी लेकिन ऐसे रेस्ट्रोरेंट में बैठ क्र ऐसे आइटम्स नहीं देखे थे, चारो तरफ पैसे वाले लोग सूंदर लड़किया ितं अभीतरीन खाना, तुषार की हवा टाइट हो रही थी,
अनीता ने राजकचौरी कहानी शुरू क्र दी तुषार थोड़ा घबरा सा रहा था,
अनीता- खाओ न
तुषार ने हिम्मत सी करके पनीर का टुकड़ा उठाया और खाने लगा, उसे बहुत टेस्टी लगा,
अनीता- मैं भी टेस्ट क्र लू कैसा ह, अनीता ने भी के टुकड़ा खा लिया टेस्टी ह ये लो राजकचौरी खा क्र देखो
तुषार- नहीं नहीं ठीक ह
दोनों ने अपना अपना फिनिश किया, तुषार उठने लगा,
अनीता- कहा जार हे हो
तुषार- चलना नहीं ह क्या
अनीता- कही जल्दी जाना ह क्या
तुषार- नहीं जल्दी तो नहीं पैर यहाँ कैसे बैठे रह सकते ह
अनीता- ये कोई किराया तोडना लेंगे बैठो
तुषार बैठ गया लेकिन वो थोड़ा असमंजस में था ये इतना क्यों घुल मिल रही ह मुझसे, वैसे तो तुसाहर खुद चाहता था की वो यश और जय के परिवार की औरतो को चोदे लेकिन अनीता खुद सामने से उसके पास आ रही थी, तुषार न चाहते हुए भी घबरा रहा था, घबराये भी क्यों न उसे अभी दुनिया को कैसे कण्ट्रोल करते ह औरतो और लड़कियों को कैसे अपने सामने झुकाते हैं, इन हालातो में कैसे मजबूत बनते हैं, उसे तो ये hi समझ नहीं आ रहा था अनीता चाहती क्या ह, और सच में नहीं पता था किसी को अनीता चाहती क्या ह,
तुषार- आप मेरे साथ क्यों ह मुझे समझ नहीं आ रहा
अनीता- अब क्या बताऊ मैं यहाँ अकेली हु और किसी को जानती भी नहीं हु किसी पैर विश्वास नहीं क्र सकती लेकिन तुम मुझे अच्छे लगे विश्वास करने लायक लगे तो सोचा तुमसे hi बात क्र लिया करू, मेरा टाइम भी काट जायेगा और एक दोस्त भी मिल जायेगा, क्या मैं तुम्हारी दोस्त बन सकती हु
तुषार- लेकिन मैं तो आपसे छोटा हु
अनीता- ये छोटा बड़ा इसी देश में होता ह विदेश में आगे कोई मायने नहीं रखती दोस्ती माये रखती ह, और मुझे तो कोई ाइटर्ज नहीं तुमसे दोस्ती रखने में
तुषार- ऐतराज तो मुझे भी कुछ नहीं ह , लेकिन हमारे बिच उम्र के अलावा और भी बहुत बड़ा अंतर ह
अनीता- दोस्ती में कोई अंतर नहीं होता समझे, और आजसे तुम मेरे दोस्त हो
तुषार- ठीक ह मम
अनीता- मेरा नाम अनीता ह मम नहीं
तुषार- मैं आपक अनाम कैसे ले सकता हु
अनीता- विदेह में सब एक दूसरे का नाम लेते हैं जैसे मर. तुषार या मरस. अनीता ऐसे hi बोलते ह तुम बस अनीता या दोस्त बोल सकते हो
तुसाहर- दोस्त ठीक ह नाम नहीं ले पाउँगा
अनीता- जैसा तुम ठीक समझो
तुषार- अब चले घर भी जाना ह माँ आ चुकी होंगी
अनीता- ठीक ह चलो पैर मिलते रहना
फिर दोनों निकल आये अनीता ने तुषार को वही कसबे में उतर दिया, तुषार घर के सामने से hi निकला था लेकिन किसी को घर का पता न चले इसलिए वापस कसबे में आ गया, उसे घर लौटने में काफी देर हो गाइट hi,
अंजलि- कहा रह गया था
तुषार- वो माँ थोड़ा काम पद गया था
तभी रूचि आ गई अरे कहा रह गया था कब से वेट क्र रहे थे तेरा इतना देर तो कभी नहीं हुई
तुषार- गयम में टाइम लग गया
अंजलि ने तुषार की आँखों में पढ़ लिया की झूट बोल रहा ह, फिर सबने चाय पि
चाय पिने के बाद अंजलि घर के काम में लग गई, तीनो बहन भाई रूचि के कमरे में बैठे थे,
रूचि- हम लोग किस रस्ते चल रहे हैं मुझे समझ नहीं आ रहा
दीपा- क्या हुआ ऐसा क्यों बोल रही ह
रूचि- हम लोग बदला लेना चाहते ह सुरेश चोपड़ा की जानकरी निकल रहे हैं लेकिन उसके बाद क्या,
दीपा- उसके बाद उनसे बदला लेंगे
रूचि- लेकिन कैसे हमारी हालत जानती ह न, हम अपना घर का खर्चा पूरा करने के लिए पूरा दिन ऐसी टेसी करवाते ह, खुद को खाने को पैसे ह नहीं किसी से बदला कैसे लेंगे
वो कहावत सुनी ह खुद को खाने को ह नहीं डेन और अम्मा चली भुनाने, ऐसा hi कुछ ह न
तुषार- है ह तो सही
दीपा और तुषार ने जो प्लान बनाया था वो रूचि को नहीं पता था रजनी के परिवार की औरतो को छोड़ने का लेकिन बाकि सब का क्या, रजनी की हवस दूर करने के लिए तो ये तरीका ठीक था लेकिन बाकि लोग मजबूत भी थे और ताकतवर भी उन्हें कैसे सबक सिखाये,
दीपा- सही बोल रही ह यार हम करेंगे क्या बस गधो की तरह इधर उधर भाग रहे हैं
तुषार- माँ से बात करे क्या वो कोई रास्ता दिखा दे
रूचि- नहीं माँ से नहीं माँ हमे इन लफड़ो में पड़ने hi नहीं देंगी
दीपा- तू कुछ सोच न टुशु, तू लड़का ह बहार निकल सकता ह कुछ तरीका धुंध सकता ह
तुषार- मेरी आगे चाहे जो भी हो गई ह लेकिन मैं अभी 11तह में हु और मुझे उतना hi ज्ञान ह जितना 11तह तक के लड़के को होता ह इससे ज्यादा न किसी ने ज्ञान दिया न hi मैंने हासिल करने की कोशिश की, तो कहा से ज्ञान लाऊंगा और माँ ने हम सभी को आजादी दी ह मैं hi अकेला बहार नहीं निकल सकता आप भी निकल सकती हो
रूचि- टुशु ठीक बोल रहा ह, वो लड़का ह वॉक र सकता ह लेकिन तरीका हम सबको hi सोचना होगा, लेकिन सम्हाल क्र ऐसा न हो हम माँ के लिए अच्छा करने जाये उल्टा उनके लिए मुसीबत पैदा क्र दे,
रात को खाने के बाद तुषार ने सीमा के पास जाने का फैसला किया, उसने सोचा सीमा उससे प्यार करती ह तो शायद उसे सब कुछ खुद hi बता दे,
तुषार सीमा के रूम में गया तो सीमा फ़ोन में लगी हुई थी,
तुषार- क्या क्र रही हो मेरी जान
सीमा एक दम से घबरा गई, टुशु तू यहाँ इस टाइम
तुषार- क्यों आ नहीं सकता क्या अपनी जान के पास
सीमा- कैसी बात क्र रहा ह आ न
तुषार- क्या कर रही हो बिजी तो नहीं थी
सीमा- अरे नहीं नहीं बिजी क्यों हूँगी
तुषार- आज कल ज्यादा थक जाती हो क्या
सीमा- नहीं तो, ऐसा क्यों बोल रहा ह
तुषार- इतने दिन हो गए आपने मुझे अपने पास बुलाया hi नहीं प्यास मिट गई क्या,
सीमा ने तुरंत तुसाहर का कलर पकड़ा और अपने उप्पेर खींच लिया और तुषार के हॉट चुम लिए, ये प्यास कभी बुझ सकती ह क्या
तुषार- इतने दिन से दूर दूर हो सोचा प्यास ख़तम हो गई,
सीमा- मुझे लगा तू नाराज ह मुझसे इसलिए मेरे पास नहीं आता आज कल
तुषार- मैं क्यों नाराज रहूँगा आपसे आप hi नाराज रहती हो और अगर नाराज था भी तो कुटिया का फर्ज होता ह अपने मालिक को मानाने का
सीमा- माफ़ क्र दो मालिक आपकी कुटिया आपके पास नहीं आई, इस लिए अपनी कुटिया को सजा दो ऐसी सजा दो की कुटिया की गांड फैट जाये,
तुषार- सजा तो मिलेगी जरूर मिलेगी
तुषार ने सीमा को गॉड में उठा लिया और चूमने लगा,
जल्दी hi दोनों के कपडे उतर चुके थे, सीमा पागलो की तरह तुषार को चुम रही थी उसके लुंड को चूमने लगी तुषार भी सीमा को चूमे जार है था फिर उसकी चूचियों को अच्छे से चूसने मसलने लगा, सीमा तुषार का लुंड चूसने लगी,
आज कल तुषार मोबाइल में सेक्स की अलग अलग पोस्टिटोन देखने लगा था तो उसे एक पोजीशन याद आ गई, उसने सीमा को खड़ा किया और उसे गॉड में उठा क्र पलट दिया, सीमा का सर निचे और पेअर उप्पेर हो गए जिससे सीमा की छूट तुषार के मुँह के सामने आ गई, और तुषार का लुंड सीमा के मुँह के सामने था,
एक बार तो सीमा घबरा गई उसे बड़ा अचंम्भा हुआ तुषार ने उसे खिलोने की तरह उठा लिया था, और ये पोटिओसिओन बड़ी मस्त थी, तुषार ने सीमा की छूट पैर मुँह लगा दिया, सीमा भी तुषा रखा लुंड चूसने लगी,
ये ज्यादा देर नहीं चला, तुषार ने सीमा को निचे उतरा और एक पेअर हवा में उठाया और लुंड उसकी छूट पैर सेट करके धक्का लगा दिया, सीमा की चीख निकल निकलती रह गई, तुषार आज कुछ नया hi तरय करता जार है था, थोड़ी दे रेज hi छोड़ने के बाद तुषार ने सीमा को गॉड में उठा लिया और अपना लुंड उसकी छूट में घुसा क्र अपने हाथो पैर उछलने लगा,
सीमा ने तुसह रकि गार्डन में हाथ दाल दिए, और लुंड पैर उछलने लगी, लुंड एक दम गहराइयों तक जार है था, जिससे सीमा की सिसकारियां जोर जोर से निकलने लगी, जिसकी आवाज दीपा के रूम तक जार hi थी, aghhhhhhhhhh छोड़ अपनी कुटिया को अह्ह्ह्हह्ह ऐसे hi उछाल उछाल क्र छोड़ ahhhhhhhhhhhhh बना दे भोसड़ा मेरी छूट का aahhahhhhhhhhhhhhh फाड् दे इस भेनचोद को बहुत प्यासी रहती ह ये छूट aahahhhhhhhhhhhhhhhhhhh, सीमा खुद को सम्हाल नहीं पाई और झाड़ गई,
तुषार ने सीमा को बीएड पैर लिटाया और पीछे से लुंड छूट में डालने लगा, लेकिन छूट के रास में सना लुंड गलती से सीमा की गांड के छेद सेट हो गया और जैसे hi तुषार ने धक्का मारा तो सीमा की चीख निकल गई अह्ह्ह्हह्हह्ह्ह्ह वह नहीं aahhhhhhhhhhhhhhhhh,seema एक दम आगे हो गई,
सीमा- तू पागल ह क्या वह क्यों दाल रहा ह
तुषार- गलती से चला गया जान
सीमा- मेरी गांड कुँअरि ह वह कभी भी मत डालना
तुषार- मैंने तो कभी सोचा भी नहीं वह डालने का
सीमा- ठीक ह तेरा हुआ नहीं क्या
तुषार ने सीमा को खींचा और सीधा लिटा क्र अपना लुंड एक hi बार में घुसा दिया और धक्के लगाने लगा,
वो तब तक धक्के लगता रहा जब तक खुद झाड़ नहीं गया, झड़ते हुए उसने अपना लुंड सीमा के मुँह में दे दिया, और पूरा रास उसके मुँह में खली क्र दिया, सीमा 2 बार झाड़ गाइट hi,
फिर दोनों ने खुद को साफ़ किया, और एक साथ चिपक क्र लेट गए,