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- Dec 5, 2013
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पेज- 33
अलका ने कमरे में पांव रखते hi कमरे का तापमान बढ़ा दिया था और जो कुछ कसार रह गया था वो उसके शब्दों ने पूरा कर दिया था.. और इसी गर्मी की लहार विशाल के तन बदन में में दौड़ने लगी थी..
Vishal-darunga क्यों मई तो एक दिन तेरे पति के सामने तुझे छोडूंगा वो भी पटक पटक के..
अलका- हाय ऐसी बाटे मत कर वैसे hi मुझसे रहा नहीं जा रहा है…
इतना कहते हुवे अलका सिद्ध विशाल के बीएड पे चढ़ जाती है इस से विशाल कुछ कहता या समझ पता अलका उसके आँखों से ओझल हो जाती है उसे अपने रजाई में कुछ हलचल महसूस होती है और वो जैसे hi रजाई के अंदर देखता है तो अंदर का नजारा कुछ ज्यादा hi कामुक था..

विशाल- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh
अलका- कैसा लगा मेरे bête…
विशाल- बहुत मजा आ रहा है…
अलका- फिर मजे ले और पुरे जोश में अलका विशाल का लुंड मुँह में भर भर के चूसने लगती है…
अब उन्दोनो को रजाई में छुपने की कोई जरुरत नहीं थी क्यूंकि उसके बदन की गर्मी को किसी रजाई या हार्ट की जरुरत नहीं पड़ती.. अलका जो पहले से hi काफी उत्तेजित थी वो पुरे जोश में अपने bête विशाल का लुंड चूसने लगती है….
अलका- तेरा लुंड तो दिन पे दिन सख्त होता जा रहा है
अलका- बड़े दिनों आड़ चूस रही हो न aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh
अलका अब बीएड से उतर के विशाल के लुंड को मुँह में भर भर से चूस रही थी..

अलका जमीं पे कुछ इस क़दर बेथ के लुंड चूस रही थी की उसका गांड कुछ ज्यादा hi छोड़ा और फैला हुआ दिखने लगता है… जिसे देख विशाल कुछ ज्यादा hi उतावला हो के अपना लुंड तेज़ झटको के साथ उसके गले में पेलने लगता है….
विशाल अलका को उठा के अपने ऊपर ले लेता है और अलका अपनी छूट विशाल के मुँह पे रख देती है और विशाल भी अलका के छूट को खोल के उसमे अपनी जीभ दाल देता है..

अलका- aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhh चाट मेरे बचे
विशाल- बहुत पानी बहा रही है तेरी छूट मुंय
अलका- हाँ पि जा अपने माँ के सरे रास को aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh maaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa
विशाल छूट के साथ साथ अलका कैग एंड को बह चाटने लगता है… विशाल का टच अलका के गांड पे पड़ते hi अलका के शरीर में मनो बिजली दौड़ जाती है वो बहुत तेज चटपटे हुवे विशाल का सर अपने छूट पे दबाने लगती है…

अलका- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh mammammmmmmmaaaaaaaaaaaa ये खान छेद दिया तूने uuuuuuuuuuuffffffffffffffffffff चाट जोर से… जीभ पूरा अंदर दालळळ के चूस इसे aaaaaaaaaahhhhhhhhhhh ये तो छूट चाटने से भी ज्यादा एक्ससिटिंग है रे उउउउउउउफ्फ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़
विशाल भी अपनी माँ को खुश करने में की कसार नहीं चूर्ण चाहता था और वो अलका के चुचिओ को मसलते हुवे उसके गांड की भूरी छेद को अपने जीभसे कुरेदने लगता है…. उसका इतने से मन नहीं भरता की वो अपने बिच की ऊँगली को अलका कैग एंड में दाल देता hai….aur ऊँगली अंदर बहार करने लगता है…
अलका- aaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhh मर गयी
विशाल- बहुत टाइट गांड है तेरी माँ…..
अलका- hhhhhhhhhhhhaaaaaaaaaaaaa छूट चाट जोर जोर से अपने माँ की bête इसके अंदर की आग को शांत कर दे मेरे बचे…
विशाल जहां अपने बिच की ऊँगली अलका कैग एंड में डाला हुआ था तो वही अपने हाथ का अंगूठा अलका के छूट में दाल देता है… इस दोहरे हमले से मनो अलका के छूट में करंट दौड़ जाती है… उसके गांड और छूट में विशाल के फिंगर और अंगूठे के बिच बस एक पतली सी स्किन थी जिसके घर्षण से अलका कुछ ज्यादा hi रोमांचित हो रही थी….
अलका- aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhh ये क्या कर रहा है मैं मर गयी uuuuuuuuuuuuuufffffffffffff अलका के मुँह से शोर सुनते hi विशाल अपना लुंड अलका के मुँह में दाल देता है और दनो 69 पोस्टिव में एक दूसरे के आग को शांत करने में लग जाते है….

जहां एक और बीटा अपनी माँ के छूट के दानो को अपने होंठो से खींच और चूस रहा था तो वही माँ भी पूरा का पूरा लुंड अपने गले में उतर के अपने bête को अपने जिस्म में लगे आग का साबुत दे रही थी…
अलका अब विशाल के ऊपर से उतर जाती है और विशाल के लुंड की तरफ किसी कुटिया की तरह गांड मटकते हुवे बढ़ने लगती है…
अलका- अब नहीं रहा जाता है मुझसे अब जल्दी से ये मुसल मेरे अंदर दाल के शांत कर….

और ये कहते हुवे अलका धीरे धीरे विशाल के खड़े लुंड को पहले अपने छूट पे रगड़ती है और फिर धीरे धीरे उस लुंड पे बैठते हुवे पूरा का पूरा लुंड उसकी छूट जातक जाती है…..
अलका- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh कितना बड़ा है रे तेरा पूरा अंदर तक महसूस होता है…
विशाल- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh क्या चीज है तू माँ जितना भी छोड़ू तेरी छूट हर बार टाइट hi लगती है…..
अलका- ाचा hi तो है न तुझे ढीली छूट नहीं milti….aaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh
Aaaaaaaaaaahhhhhhhh अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह
विशाल भी निचे से झटके मरने लगता है और अलका ऊपर से कूद कूद के पूरा लुंड आने छूट में पुरे गहराई तक उतरने लगती है….
विशाल- aaaaaaaaaaaaaaaahhhh माँ फ़क तू कितनी गरम है माआआ hhhhhhhhhhhaaaaaaaaahhhhhhhhhh
Alka-han ऐसे hi छोड़ अपनी माँ को आआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह तेरा ये मोटा लुंड लेने के लिए मेरी छूट कब से मरी जा रही है आआअह्ह्ह्हह
विशाल- मैं भी मेरी जायंननननन आज कितने दिनों बाद हाथ आयी है तू… और विशाल पुरे जोश में अलका के छूट में अपना लुंड किसी पिस्टन की तरह पेलने लगता है..

roll a thirty sided die
विशाल का हर झटका अलका को अंदर तक हिला दे रहा था
अलका- अलका अब पुरे जोरो से छटपटने लगती है… उसकी सिसक अब चीख में बदलने लगती hai…aaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh maaaaaaaaaaaaaaaa मर गयी तेरा लुंड मेरे बच्चेदानी को ठोकर मर रही है reeeeeeeeeeeeeeeee uiiiiuuuuuuuuuuuuiiiiiiiiiiiii maaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa…..
विशाल के हर झटके का जवाब अलका अपने गांड को विशाल के लुंड पे पटक पटक के दे रही थी… और एक तेज़ चीख के साथ विशाल के लुंड पे अपना पानी चोर्ने लगती hai…aur जैसे hi अलका विशाल के लुंड से उतरती है उसके छूट से एक तेज़ पतली धार विशाल के लुंड को और जांघो को भिगोने लगती है…

अलका- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh मैं गयी विशु uuuuuuuuuuuufffffffffffffff तेरी माँ कायल हो गयी तेरे मर्दानगी का aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhh माआआआ
विशाल- अभी तो तेरा हुआ है मेरा तो बाकि hi है मेरी रानी और इतना कहते hi अलका को धक्का लगता है जिस से अलका अब किसी कुटिया की तरह बीएड पे झुक जाती है जहां वो अपने कहनी के सहारे झुकी हुई थी तो वही उसकी गांड हवा में केहरा के मनो विशाल को अपनी छूट में लुंड डालने का न्योता दे रही हो..
विशाल पीछे से अपना लुंड अलका के छूट पे रगड़ने लगता है जिसके चुंबन मात्रा से अलका सिहर उठती है…

अभी तो उसके छूट ने पानी बहाना बंद भी नहीं किया था की दूसरा राउंड …… uuuufffffffffff अलका के मुँह से एक सिसकारी निकल जाती है…
इस से पहले की अलका संभल पति या खुद को दूसरे राउंड के लिए तैयार कर पति विशाल आगे झुक के अलका के नंगी गोरी गोरी पीठ जो की वासना की आग से जल जाने से गुलाबी हो गयी थी को चूमने लगता है और होंठो के साथ साथ अपने जीभ से उसके पिता को चाटने लगता है…. अपने bête के जरिये किये जा रहे इस प्यार से अलका उसके प्यार में बहने लगती है वो मनो अपने bête नहीं अपने प्रेमी के बहो में थी…
अलका- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh क्या जादू है bête तेरे…… इस से पहले अलका अपने बातो को कम्प्ले कर पति विशाल अलका के रेशमी बालो को अपने हाथो में संट्टे हुवे किसी घोड़ी की लगाम की तरह खींचता है जिस दर्द से अलका का सर खुद hi उठ जाता है.. और अभी बेचारी इस दर्द से सम्भली भी नहीं थी की विशाल उसके छूट में अपना लुंड फिर से एक hi झटके में पूरा पेला देता है…

अलका के छूट से बेहटा रास से अलका के छूट में इतनी चिकनाहट आ गयी थी की विशाल का झटका बिना किसी रुकावट के पूरा जड़ तक अलका के छूट में उतर जाता है….
अलका- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh आराम से भी छोड़ सकता है न कही भाग थोड़े रही hu….aaaaaaaaaahhhhhhh मंमारररररर hi डालेगा जैसे
विशाल- मरूंगा लेकिन तुझे नहीं तेरी छूट मेरी बाप की रंडी biwi….aur एक थप्पड़ अलका के गोल गोल गद्दीदार चूतड़ों पे लगा देता है है जिस से अलका के चूतड़ों में थिरकन आ जाती है..
अलका- आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह झटके लग ह्ह्ह्हह्हह्ह्ह्ह छोड़ ऐसे hi uuuuuuuufffffffffff
और विशाल पुरे जोश में अलका के छूट में अपना लुंड पेलने लगता है….. uuuuuuuuuuuffffffffff माँ मैं आने वाला हु…
अलका- थोड़ी देर रुक जा bête इतनी जल्दी नहीं….
और इतना कह के अक पलट जाती है अब अलका निचे और विशाल उसके ऊपर आ जाता hai…alka वापस से विशाल के लुंड को अपने छूट में ले लेती है और अपने होंठ विशाल के होंठो से लगा देती है

विशाल भी अपने माँ के होंठो को चूमना चोर के चूसना शुरू कर देता है और निचे से झटके लगाना जारी रखता है…
अलका- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhh ऐसे hi छोड़ bête
विशाल का हर झटका इतना जोरदार था की अलका का पूरा मुँह खुल जा रहा था…
अलका- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaoooooooooooooocccccccccccccchhhhhhhhhhhhh

विशाल का हर झटका अलका को अंदर तक हिला दे रहा था उसकी छूट में मची खलबली विशाल के हर झटके के साथ अलका के चीखो में बयां हो रहा था…
विशाल- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh मा मैं गैयाआआआआ
अलका- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh मैं भी गयी रईईईईई uuuuuuuhhhhhhhhhhh मममममअअअअअ

और विशाल एक तेज़ पिचकारी मरता है जो सिद्ध अलका के चेहरे पे जा गिरता है… अपने bête के लुंड से निकले पानी की गर्माहट अपने चेहरे पे प् के अलका के चेहरे पे समयले आ जाती है वो उस पानी को चाटने लगती है…
अलका के अंदर जो आग लगी थी उसे उसके bête विशाल ने शांत कर दिया था जिसका असर अलका के चेहरे पे साफ़ दिख रहा था…
अलका अपने चेहरे पे संतुष्टि का भाव लिए विशाल के कमरे से निकलने लगती hai….ki तभी विशाल की नज़र अलका कैग एंड पे पड़ती है.. वो लपक के अलका का हाथ पकड़ता है और मरोड़ते हुवे कहता है.. अभी खान चली मेरी जान आज वो काम पूरा करना है जो बहुत दिनों से बाकि है…

अलका- कौनसा काम bête?
विशाल- तेरी गांड जिसके लिए मैं इतने दिनों से तड़प रहा हूँ…
अलका- आज नहीं bête ..
विशाल- आज नहीं तो कब??
अलका- बहुत जल्दी कोई सही टाइम देख के
विशाल- मैं तुझे पापा के सामने छोड़ना चाहता हु
अलका- क्या पागल हो गया है?
विशाल- हाँ यही समझ लो तेरे बैडरूम में तेरे पति के सामने तू छुड़ेगी मुझसे वर्ण कभी हाथ भी नहीं लगाऊंगा…
अलका- अब ये क्या पागलपन है bête तुझे पता है ये पॉसिबल नहीं है…
विशाल- तू चाहे तो सब पॉसिबल है मेरी रैंड
अलका- पर कैसे होगा???
विशाल- अलका के कमर में हाथ दाल के उसको चूमते हुवे उसके चुचो को मसलते हुवे कहता है प्लस न माँ कितना एक्ससिटिंग होगा और वैसे भी पापा अब आपको छोड़ने के लायक तो नै है काम से काम कुछ दिन तो वो तुझे नहीं छोड़ सकते है…

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अलका विशाल के किश से फिर से बहकने लगती है और कहती है - वैसे एक्ससिटिंग है मुझे भी मजा aayega...chal कुछ जुगाड़ लगाती हूँ….
इतना कह के अलका वापस से अपने बैडरूम की और जाने लगती है...
विशाल भी लुंड मसलते हुवे अलका को जाते हुवे घूरता है और अपने लुंड को मसलते हुवे कहता है तेरे पति के सामने hi तेरी गांड फाड़ूंगा मेरी रंडी माँ तब तक के लिए मटका ले जितना मटकना है तुझे अपनी ये मखमली गांड को....
अलका ने कमरे में पांव रखते hi कमरे का तापमान बढ़ा दिया था और जो कुछ कसार रह गया था वो उसके शब्दों ने पूरा कर दिया था.. और इसी गर्मी की लहार विशाल के तन बदन में में दौड़ने लगी थी..
Vishal-darunga क्यों मई तो एक दिन तेरे पति के सामने तुझे छोडूंगा वो भी पटक पटक के..
अलका- हाय ऐसी बाटे मत कर वैसे hi मुझसे रहा नहीं जा रहा है…
इतना कहते हुवे अलका सिद्ध विशाल के बीएड पे चढ़ जाती है इस से विशाल कुछ कहता या समझ पता अलका उसके आँखों से ओझल हो जाती है उसे अपने रजाई में कुछ हलचल महसूस होती है और वो जैसे hi रजाई के अंदर देखता है तो अंदर का नजारा कुछ ज्यादा hi कामुक था..

विशाल- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh
अलका- कैसा लगा मेरे bête…
विशाल- बहुत मजा आ रहा है…
अलका- फिर मजे ले और पुरे जोश में अलका विशाल का लुंड मुँह में भर भर के चूसने लगती है…
अब उन्दोनो को रजाई में छुपने की कोई जरुरत नहीं थी क्यूंकि उसके बदन की गर्मी को किसी रजाई या हार्ट की जरुरत नहीं पड़ती.. अलका जो पहले से hi काफी उत्तेजित थी वो पुरे जोश में अपने bête विशाल का लुंड चूसने लगती है….
अलका- तेरा लुंड तो दिन पे दिन सख्त होता जा रहा है
अलका- बड़े दिनों आड़ चूस रही हो न aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh
अलका अब बीएड से उतर के विशाल के लुंड को मुँह में भर भर से चूस रही थी..

अलका जमीं पे कुछ इस क़दर बेथ के लुंड चूस रही थी की उसका गांड कुछ ज्यादा hi छोड़ा और फैला हुआ दिखने लगता है… जिसे देख विशाल कुछ ज्यादा hi उतावला हो के अपना लुंड तेज़ झटको के साथ उसके गले में पेलने लगता है….
विशाल अलका को उठा के अपने ऊपर ले लेता है और अलका अपनी छूट विशाल के मुँह पे रख देती है और विशाल भी अलका के छूट को खोल के उसमे अपनी जीभ दाल देता है..

अलका- aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhh चाट मेरे बचे
विशाल- बहुत पानी बहा रही है तेरी छूट मुंय
अलका- हाँ पि जा अपने माँ के सरे रास को aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh maaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa
विशाल छूट के साथ साथ अलका कैग एंड को बह चाटने लगता है… विशाल का टच अलका के गांड पे पड़ते hi अलका के शरीर में मनो बिजली दौड़ जाती है वो बहुत तेज चटपटे हुवे विशाल का सर अपने छूट पे दबाने लगती है…

अलका- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh mammammmmmmmaaaaaaaaaaaa ये खान छेद दिया तूने uuuuuuuuuuuffffffffffffffffffff चाट जोर से… जीभ पूरा अंदर दालळळ के चूस इसे aaaaaaaaaahhhhhhhhhhh ये तो छूट चाटने से भी ज्यादा एक्ससिटिंग है रे उउउउउउउफ्फ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़
विशाल भी अपनी माँ को खुश करने में की कसार नहीं चूर्ण चाहता था और वो अलका के चुचिओ को मसलते हुवे उसके गांड की भूरी छेद को अपने जीभसे कुरेदने लगता है…. उसका इतने से मन नहीं भरता की वो अपने बिच की ऊँगली को अलका कैग एंड में दाल देता hai….aur ऊँगली अंदर बहार करने लगता है…
अलका- aaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhh मर गयी
विशाल- बहुत टाइट गांड है तेरी माँ…..
अलका- hhhhhhhhhhhhaaaaaaaaaaaaa छूट चाट जोर जोर से अपने माँ की bête इसके अंदर की आग को शांत कर दे मेरे बचे…
विशाल जहां अपने बिच की ऊँगली अलका कैग एंड में डाला हुआ था तो वही अपने हाथ का अंगूठा अलका के छूट में दाल देता है… इस दोहरे हमले से मनो अलका के छूट में करंट दौड़ जाती है… उसके गांड और छूट में विशाल के फिंगर और अंगूठे के बिच बस एक पतली सी स्किन थी जिसके घर्षण से अलका कुछ ज्यादा hi रोमांचित हो रही थी….
अलका- aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhh ये क्या कर रहा है मैं मर गयी uuuuuuuuuuuuuufffffffffffff अलका के मुँह से शोर सुनते hi विशाल अपना लुंड अलका के मुँह में दाल देता है और दनो 69 पोस्टिव में एक दूसरे के आग को शांत करने में लग जाते है….

जहां एक और बीटा अपनी माँ के छूट के दानो को अपने होंठो से खींच और चूस रहा था तो वही माँ भी पूरा का पूरा लुंड अपने गले में उतर के अपने bête को अपने जिस्म में लगे आग का साबुत दे रही थी…
अलका अब विशाल के ऊपर से उतर जाती है और विशाल के लुंड की तरफ किसी कुटिया की तरह गांड मटकते हुवे बढ़ने लगती है…
अलका- अब नहीं रहा जाता है मुझसे अब जल्दी से ये मुसल मेरे अंदर दाल के शांत कर….

और ये कहते हुवे अलका धीरे धीरे विशाल के खड़े लुंड को पहले अपने छूट पे रगड़ती है और फिर धीरे धीरे उस लुंड पे बैठते हुवे पूरा का पूरा लुंड उसकी छूट जातक जाती है…..
अलका- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh कितना बड़ा है रे तेरा पूरा अंदर तक महसूस होता है…
विशाल- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh क्या चीज है तू माँ जितना भी छोड़ू तेरी छूट हर बार टाइट hi लगती है…..
अलका- ाचा hi तो है न तुझे ढीली छूट नहीं milti….aaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh
Aaaaaaaaaaahhhhhhhh अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह
विशाल भी निचे से झटके मरने लगता है और अलका ऊपर से कूद कूद के पूरा लुंड आने छूट में पुरे गहराई तक उतरने लगती है….
विशाल- aaaaaaaaaaaaaaaahhhh माँ फ़क तू कितनी गरम है माआआ hhhhhhhhhhhaaaaaaaaahhhhhhhhhh
Alka-han ऐसे hi छोड़ अपनी माँ को आआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह तेरा ये मोटा लुंड लेने के लिए मेरी छूट कब से मरी जा रही है आआअह्ह्ह्हह
विशाल- मैं भी मेरी जायंननननन आज कितने दिनों बाद हाथ आयी है तू… और विशाल पुरे जोश में अलका के छूट में अपना लुंड किसी पिस्टन की तरह पेलने लगता है..

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विशाल का हर झटका अलका को अंदर तक हिला दे रहा था
अलका- अलका अब पुरे जोरो से छटपटने लगती है… उसकी सिसक अब चीख में बदलने लगती hai…aaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh maaaaaaaaaaaaaaaa मर गयी तेरा लुंड मेरे बच्चेदानी को ठोकर मर रही है reeeeeeeeeeeeeeeee uiiiiuuuuuuuuuuuuiiiiiiiiiiiii maaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa…..
विशाल के हर झटके का जवाब अलका अपने गांड को विशाल के लुंड पे पटक पटक के दे रही थी… और एक तेज़ चीख के साथ विशाल के लुंड पे अपना पानी चोर्ने लगती hai…aur जैसे hi अलका विशाल के लुंड से उतरती है उसके छूट से एक तेज़ पतली धार विशाल के लुंड को और जांघो को भिगोने लगती है…

अलका- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh मैं गयी विशु uuuuuuuuuuuufffffffffffffff तेरी माँ कायल हो गयी तेरे मर्दानगी का aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhh माआआआ
विशाल- अभी तो तेरा हुआ है मेरा तो बाकि hi है मेरी रानी और इतना कहते hi अलका को धक्का लगता है जिस से अलका अब किसी कुटिया की तरह बीएड पे झुक जाती है जहां वो अपने कहनी के सहारे झुकी हुई थी तो वही उसकी गांड हवा में केहरा के मनो विशाल को अपनी छूट में लुंड डालने का न्योता दे रही हो..
विशाल पीछे से अपना लुंड अलका के छूट पे रगड़ने लगता है जिसके चुंबन मात्रा से अलका सिहर उठती है…

अभी तो उसके छूट ने पानी बहाना बंद भी नहीं किया था की दूसरा राउंड …… uuuufffffffffff अलका के मुँह से एक सिसकारी निकल जाती है…
इस से पहले की अलका संभल पति या खुद को दूसरे राउंड के लिए तैयार कर पति विशाल आगे झुक के अलका के नंगी गोरी गोरी पीठ जो की वासना की आग से जल जाने से गुलाबी हो गयी थी को चूमने लगता है और होंठो के साथ साथ अपने जीभ से उसके पिता को चाटने लगता है…. अपने bête के जरिये किये जा रहे इस प्यार से अलका उसके प्यार में बहने लगती है वो मनो अपने bête नहीं अपने प्रेमी के बहो में थी…
अलका- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh क्या जादू है bête तेरे…… इस से पहले अलका अपने बातो को कम्प्ले कर पति विशाल अलका के रेशमी बालो को अपने हाथो में संट्टे हुवे किसी घोड़ी की लगाम की तरह खींचता है जिस दर्द से अलका का सर खुद hi उठ जाता है.. और अभी बेचारी इस दर्द से सम्भली भी नहीं थी की विशाल उसके छूट में अपना लुंड फिर से एक hi झटके में पूरा पेला देता है…

अलका के छूट से बेहटा रास से अलका के छूट में इतनी चिकनाहट आ गयी थी की विशाल का झटका बिना किसी रुकावट के पूरा जड़ तक अलका के छूट में उतर जाता है….
अलका- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh आराम से भी छोड़ सकता है न कही भाग थोड़े रही hu….aaaaaaaaaahhhhhhh मंमारररररर hi डालेगा जैसे
विशाल- मरूंगा लेकिन तुझे नहीं तेरी छूट मेरी बाप की रंडी biwi….aur एक थप्पड़ अलका के गोल गोल गद्दीदार चूतड़ों पे लगा देता है है जिस से अलका के चूतड़ों में थिरकन आ जाती है..
अलका- आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह झटके लग ह्ह्ह्हह्हह्ह्ह्ह छोड़ ऐसे hi uuuuuuuufffffffffff
और विशाल पुरे जोश में अलका के छूट में अपना लुंड पेलने लगता है….. uuuuuuuuuuuffffffffff माँ मैं आने वाला हु…
अलका- थोड़ी देर रुक जा bête इतनी जल्दी नहीं….
और इतना कह के अक पलट जाती है अब अलका निचे और विशाल उसके ऊपर आ जाता hai…alka वापस से विशाल के लुंड को अपने छूट में ले लेती है और अपने होंठ विशाल के होंठो से लगा देती है

विशाल भी अपने माँ के होंठो को चूमना चोर के चूसना शुरू कर देता है और निचे से झटके लगाना जारी रखता है…
अलका- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhh ऐसे hi छोड़ bête
विशाल का हर झटका इतना जोरदार था की अलका का पूरा मुँह खुल जा रहा था…
अलका- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaoooooooooooooocccccccccccccchhhhhhhhhhhhh

विशाल का हर झटका अलका को अंदर तक हिला दे रहा था उसकी छूट में मची खलबली विशाल के हर झटके के साथ अलका के चीखो में बयां हो रहा था…
विशाल- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh मा मैं गैयाआआआआ
अलका- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh मैं भी गयी रईईईईई uuuuuuuhhhhhhhhhhh मममममअअअअअ

और विशाल एक तेज़ पिचकारी मरता है जो सिद्ध अलका के चेहरे पे जा गिरता है… अपने bête के लुंड से निकले पानी की गर्माहट अपने चेहरे पे प् के अलका के चेहरे पे समयले आ जाती है वो उस पानी को चाटने लगती है…
अलका के अंदर जो आग लगी थी उसे उसके bête विशाल ने शांत कर दिया था जिसका असर अलका के चेहरे पे साफ़ दिख रहा था…
अलका अपने चेहरे पे संतुष्टि का भाव लिए विशाल के कमरे से निकलने लगती hai….ki तभी विशाल की नज़र अलका कैग एंड पे पड़ती है.. वो लपक के अलका का हाथ पकड़ता है और मरोड़ते हुवे कहता है.. अभी खान चली मेरी जान आज वो काम पूरा करना है जो बहुत दिनों से बाकि है…

अलका- कौनसा काम bête?
विशाल- तेरी गांड जिसके लिए मैं इतने दिनों से तड़प रहा हूँ…
अलका- आज नहीं bête ..
विशाल- आज नहीं तो कब??
अलका- बहुत जल्दी कोई सही टाइम देख के
विशाल- मैं तुझे पापा के सामने छोड़ना चाहता हु
अलका- क्या पागल हो गया है?
विशाल- हाँ यही समझ लो तेरे बैडरूम में तेरे पति के सामने तू छुड़ेगी मुझसे वर्ण कभी हाथ भी नहीं लगाऊंगा…
अलका- अब ये क्या पागलपन है bête तुझे पता है ये पॉसिबल नहीं है…
विशाल- तू चाहे तो सब पॉसिबल है मेरी रैंड
अलका- पर कैसे होगा???
विशाल- अलका के कमर में हाथ दाल के उसको चूमते हुवे उसके चुचो को मसलते हुवे कहता है प्लस न माँ कितना एक्ससिटिंग होगा और वैसे भी पापा अब आपको छोड़ने के लायक तो नै है काम से काम कुछ दिन तो वो तुझे नहीं छोड़ सकते है…

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अलका विशाल के किश से फिर से बहकने लगती है और कहती है - वैसे एक्ससिटिंग है मुझे भी मजा aayega...chal कुछ जुगाड़ लगाती हूँ….
इतना कह के अलका वापस से अपने बैडरूम की और जाने लगती है...
विशाल भी लुंड मसलते हुवे अलका को जाते हुवे घूरता है और अपने लुंड को मसलते हुवे कहता है तेरे पति के सामने hi तेरी गांड फाड़ूंगा मेरी रंडी माँ तब तक के लिए मटका ले जितना मटकना है तुझे अपनी ये मखमली गांड को....


























































































































