Incest Kamuk Alka - Page 6 - SexBaba
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Incest Kamuk Alka

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अलका ने कमरे में पांव रखते hi कमरे का तापमान बढ़ा दिया था और जो कुछ कसार रह गया था वो उसके शब्दों ने पूरा कर दिया था.. और इसी गर्मी की लहार विशाल के तन बदन में में दौड़ने लगी थी..

Vishal-darunga क्यों मई तो एक दिन तेरे पति के सामने तुझे छोडूंगा वो भी पटक पटक के..

अलका- हाय ऐसी बाटे मत कर वैसे hi मुझसे रहा नहीं जा रहा है…

इतना कहते हुवे अलका सिद्ध विशाल के बीएड पे चढ़ जाती है इस से विशाल कुछ कहता या समझ पता अलका उसके आँखों से ओझल हो जाती है उसे अपने रजाई में कुछ हलचल महसूस होती है और वो जैसे hi रजाई के अंदर देखता है तो अंदर का नजारा कुछ ज्यादा hi कामुक था..









विशाल- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh

अलका- कैसा लगा मेरे bête…

विशाल- बहुत मजा आ रहा है…

अलका- फिर मजे ले और पुरे जोश में अलका विशाल का लुंड मुँह में भर भर के चूसने लगती है…

अब उन्दोनो को रजाई में छुपने की कोई जरुरत नहीं थी क्यूंकि उसके बदन की गर्मी को किसी रजाई या हार्ट की जरुरत नहीं पड़ती.. अलका जो पहले से hi काफी उत्तेजित थी वो पुरे जोश में अपने bête विशाल का लुंड चूसने लगती है….

अलका- तेरा लुंड तो दिन पे दिन सख्त होता जा रहा है

अलका- बड़े दिनों आड़ चूस रही हो न aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh

अलका अब बीएड से उतर के विशाल के लुंड को मुँह में भर भर से चूस रही थी..









अलका जमीं पे कुछ इस क़दर बेथ के लुंड चूस रही थी की उसका गांड कुछ ज्यादा hi छोड़ा और फैला हुआ दिखने लगता है… जिसे देख विशाल कुछ ज्यादा hi उतावला हो के अपना लुंड तेज़ झटको के साथ उसके गले में पेलने लगता है….

विशाल अलका को उठा के अपने ऊपर ले लेता है और अलका अपनी छूट विशाल के मुँह पे रख देती है और विशाल भी अलका के छूट को खोल के उसमे अपनी जीभ दाल देता है..









अलका- aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhh चाट मेरे बचे

विशाल- बहुत पानी बहा रही है तेरी छूट मुंय

अलका- हाँ पि जा अपने माँ के सरे रास को aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh maaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa

विशाल छूट के साथ साथ अलका कैग एंड को बह चाटने लगता है… विशाल का टच अलका के गांड पे पड़ते hi अलका के शरीर में मनो बिजली दौड़ जाती है वो बहुत तेज चटपटे हुवे विशाल का सर अपने छूट पे दबाने लगती है…









अलका- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh mammammmmmmmaaaaaaaaaaaa ये खान छेद दिया तूने uuuuuuuuuuuffffffffffffffffffff चाट जोर से… जीभ पूरा अंदर दालळळ के चूस इसे aaaaaaaaaahhhhhhhhhhh ये तो छूट चाटने से भी ज्यादा एक्ससिटिंग है रे उउउउउउउफ्फ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़

विशाल भी अपनी माँ को खुश करने में की कसार नहीं चूर्ण चाहता था और वो अलका के चुचिओ को मसलते हुवे उसके गांड की भूरी छेद को अपने जीभसे कुरेदने लगता है…. उसका इतने से मन नहीं भरता की वो अपने बिच की ऊँगली को अलका कैग एंड में दाल देता hai….aur ऊँगली अंदर बहार करने लगता है…

अलका- aaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhh मर गयी

विशाल- बहुत टाइट गांड है तेरी माँ…..

अलका- hhhhhhhhhhhhaaaaaaaaaaaaa छूट चाट जोर जोर से अपने माँ की bête इसके अंदर की आग को शांत कर दे मेरे बचे…

विशाल जहां अपने बिच की ऊँगली अलका कैग एंड में डाला हुआ था तो वही अपने हाथ का अंगूठा अलका के छूट में दाल देता है… इस दोहरे हमले से मनो अलका के छूट में करंट दौड़ जाती है… उसके गांड और छूट में विशाल के फिंगर और अंगूठे के बिच बस एक पतली सी स्किन थी जिसके घर्षण से अलका कुछ ज्यादा hi रोमांचित हो रही थी….

अलका- aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhh ये क्या कर रहा है मैं मर गयी uuuuuuuuuuuuuufffffffffffff अलका के मुँह से शोर सुनते hi विशाल अपना लुंड अलका के मुँह में दाल देता है और दनो 69 पोस्टिव में एक दूसरे के आग को शांत करने में लग जाते है….









जहां एक और बीटा अपनी माँ के छूट के दानो को अपने होंठो से खींच और चूस रहा था तो वही माँ भी पूरा का पूरा लुंड अपने गले में उतर के अपने bête को अपने जिस्म में लगे आग का साबुत दे रही थी…

अलका अब विशाल के ऊपर से उतर जाती है और विशाल के लुंड की तरफ किसी कुटिया की तरह गांड मटकते हुवे बढ़ने लगती है…

अलका- अब नहीं रहा जाता है मुझसे अब जल्दी से ये मुसल मेरे अंदर दाल के शांत कर….









और ये कहते हुवे अलका धीरे धीरे विशाल के खड़े लुंड को पहले अपने छूट पे रगड़ती है और फिर धीरे धीरे उस लुंड पे बैठते हुवे पूरा का पूरा लुंड उसकी छूट जातक जाती है…..

अलका- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh कितना बड़ा है रे तेरा पूरा अंदर तक महसूस होता है…

विशाल- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh क्या चीज है तू माँ जितना भी छोड़ू तेरी छूट हर बार टाइट hi लगती है…..

अलका- ाचा hi तो है न तुझे ढीली छूट नहीं milti….aaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh

Aaaaaaaaaaahhhhhhhh अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह

विशाल भी निचे से झटके मरने लगता है और अलका ऊपर से कूद कूद के पूरा लुंड आने छूट में पुरे गहराई तक उतरने लगती है….

विशाल- aaaaaaaaaaaaaaaahhhh माँ फ़क तू कितनी गरम है माआआ hhhhhhhhhhhaaaaaaaaahhhhhhhhhh

Alka-han ऐसे hi छोड़ अपनी माँ को आआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह तेरा ये मोटा लुंड लेने के लिए मेरी छूट कब से मरी जा रही है आआअह्ह्ह्हह

विशाल- मैं भी मेरी जायंननननन आज कितने दिनों बाद हाथ आयी है तू… और विशाल पुरे जोश में अलका के छूट में अपना लुंड किसी पिस्टन की तरह पेलने लगता है..







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विशाल का हर झटका अलका को अंदर तक हिला दे रहा था

अलका- अलका अब पुरे जोरो से छटपटने लगती है… उसकी सिसक अब चीख में बदलने लगती hai…aaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh maaaaaaaaaaaaaaaa मर गयी तेरा लुंड मेरे बच्चेदानी को ठोकर मर रही है reeeeeeeeeeeeeeeee uiiiiuuuuuuuuuuuuiiiiiiiiiiiii maaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa…..

विशाल के हर झटके का जवाब अलका अपने गांड को विशाल के लुंड पे पटक पटक के दे रही थी… और एक तेज़ चीख के साथ विशाल के लुंड पे अपना पानी चोर्ने लगती hai…aur जैसे hi अलका विशाल के लुंड से उतरती है उसके छूट से एक तेज़ पतली धार विशाल के लुंड को और जांघो को भिगोने लगती है…









अलका- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh मैं गयी विशु uuuuuuuuuuuufffffffffffffff तेरी माँ कायल हो गयी तेरे मर्दानगी का aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhh माआआआ

विशाल- अभी तो तेरा हुआ है मेरा तो बाकि hi है मेरी रानी और इतना कहते hi अलका को धक्का लगता है जिस से अलका अब किसी कुटिया की तरह बीएड पे झुक जाती है जहां वो अपने कहनी के सहारे झुकी हुई थी तो वही उसकी गांड हवा में केहरा के मनो विशाल को अपनी छूट में लुंड डालने का न्योता दे रही हो..

विशाल पीछे से अपना लुंड अलका के छूट पे रगड़ने लगता है जिसके चुंबन मात्रा से अलका सिहर उठती है…









अभी तो उसके छूट ने पानी बहाना बंद भी नहीं किया था की दूसरा राउंड …… uuuufffffffffff अलका के मुँह से एक सिसकारी निकल जाती है…

इस से पहले की अलका संभल पति या खुद को दूसरे राउंड के लिए तैयार कर पति विशाल आगे झुक के अलका के नंगी गोरी गोरी पीठ जो की वासना की आग से जल जाने से गुलाबी हो गयी थी को चूमने लगता है और होंठो के साथ साथ अपने जीभ से उसके पिता को चाटने लगता है…. अपने bête के जरिये किये जा रहे इस प्यार से अलका उसके प्यार में बहने लगती है वो मनो अपने bête नहीं अपने प्रेमी के बहो में थी…

अलका- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh क्या जादू है bête तेरे…… इस से पहले अलका अपने बातो को कम्प्ले कर पति विशाल अलका के रेशमी बालो को अपने हाथो में संट्टे हुवे किसी घोड़ी की लगाम की तरह खींचता है जिस दर्द से अलका का सर खुद hi उठ जाता है.. और अभी बेचारी इस दर्द से सम्भली भी नहीं थी की विशाल उसके छूट में अपना लुंड फिर से एक hi झटके में पूरा पेला देता है…









अलका के छूट से बेहटा रास से अलका के छूट में इतनी चिकनाहट आ गयी थी की विशाल का झटका बिना किसी रुकावट के पूरा जड़ तक अलका के छूट में उतर जाता है….

अलका- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh आराम से भी छोड़ सकता है न कही भाग थोड़े रही hu….aaaaaaaaaahhhhhhh मंमारररररर hi डालेगा जैसे

विशाल- मरूंगा लेकिन तुझे नहीं तेरी छूट मेरी बाप की रंडी biwi….aur एक थप्पड़ अलका के गोल गोल गद्दीदार चूतड़ों पे लगा देता है है जिस से अलका के चूतड़ों में थिरकन आ जाती है..

अलका- आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह झटके लग ह्ह्ह्हह्हह्ह्ह्ह छोड़ ऐसे hi uuuuuuuufffffffffff

और विशाल पुरे जोश में अलका के छूट में अपना लुंड पेलने लगता है….. uuuuuuuuuuuffffffffff माँ मैं आने वाला हु…

अलका- थोड़ी देर रुक जा bête इतनी जल्दी नहीं….

और इतना कह के अक पलट जाती है अब अलका निचे और विशाल उसके ऊपर आ जाता hai…alka वापस से विशाल के लुंड को अपने छूट में ले लेती है और अपने होंठ विशाल के होंठो से लगा देती है









विशाल भी अपने माँ के होंठो को चूमना चोर के चूसना शुरू कर देता है और निचे से झटके लगाना जारी रखता है…

अलका- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhh ऐसे hi छोड़ bête

विशाल का हर झटका इतना जोरदार था की अलका का पूरा मुँह खुल जा रहा था…

अलका- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaoooooooooooooocccccccccccccchhhhhhhhhhhhh









विशाल का हर झटका अलका को अंदर तक हिला दे रहा था उसकी छूट में मची खलबली विशाल के हर झटके के साथ अलका के चीखो में बयां हो रहा था…

विशाल- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh मा मैं गैयाआआआआ

अलका- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh मैं भी गयी रईईईईई uuuuuuuhhhhhhhhhhh मममममअअअअअ









और विशाल एक तेज़ पिचकारी मरता है जो सिद्ध अलका के चेहरे पे जा गिरता है… अपने bête के लुंड से निकले पानी की गर्माहट अपने चेहरे पे प् के अलका के चेहरे पे समयले आ जाती है वो उस पानी को चाटने लगती है…

अलका के अंदर जो आग लगी थी उसे उसके bête विशाल ने शांत कर दिया था जिसका असर अलका के चेहरे पे साफ़ दिख रहा था…

अलका अपने चेहरे पे संतुष्टि का भाव लिए विशाल के कमरे से निकलने लगती hai….ki तभी विशाल की नज़र अलका कैग एंड पे पड़ती है.. वो लपक के अलका का हाथ पकड़ता है और मरोड़ते हुवे कहता है.. अभी खान चली मेरी जान आज वो काम पूरा करना है जो बहुत दिनों से बाकि है…









अलका- कौनसा काम bête?

विशाल- तेरी गांड जिसके लिए मैं इतने दिनों से तड़प रहा हूँ…

अलका- आज नहीं bête ..

विशाल- आज नहीं तो कब??

अलका- बहुत जल्दी कोई सही टाइम देख के

विशाल- मैं तुझे पापा के सामने छोड़ना चाहता हु

अलका- क्या पागल हो गया है?

विशाल- हाँ यही समझ लो तेरे बैडरूम में तेरे पति के सामने तू छुड़ेगी मुझसे वर्ण कभी हाथ भी नहीं लगाऊंगा…

अलका- अब ये क्या पागलपन है bête तुझे पता है ये पॉसिबल नहीं है…

विशाल- तू चाहे तो सब पॉसिबल है मेरी रैंड

अलका- पर कैसे होगा???

विशाल- अलका के कमर में हाथ दाल के उसको चूमते हुवे उसके चुचो को मसलते हुवे कहता है प्लस न माँ कितना एक्ससिटिंग होगा और वैसे भी पापा अब आपको छोड़ने के लायक तो नै है काम से काम कुछ दिन तो वो तुझे नहीं छोड़ सकते है…







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अलका विशाल के किश से फिर से बहकने लगती है और कहती है - वैसे एक्ससिटिंग है मुझे भी मजा aayega...chal कुछ जुगाड़ लगाती हूँ….

इतना कह के अलका वापस से अपने बैडरूम की और जाने लगती है...

विशाल भी लुंड मसलते हुवे अलका को जाते हुवे घूरता है और अपने लुंड को मसलते हुवे कहता है तेरे पति के सामने hi तेरी गांड फाड़ूंगा मेरी रंडी माँ तब तक के लिए मटका ले जितना मटकना है तुझे अपनी ये मखमली गांड को....
 
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रात बिट चुकी थी सूरज की नयी किरण अपने साथ एक नयी सुबह ले के आयी थी.. लेकिन पीछे चोर गयी थी तो वो घटना जो रात अलका अपने bête के साथ खेल चुकी थी.. अलका आज पहली बार पति के घर में होते हुवे अपने bête के लुंड को लेने के लिए नंगी उसके कमरे में चली गयी और न सिर्फ गयी बल्कि अपने छूट के अंदर भड़क रही आग को अपने bête के पानी से बुझवा के भी आयी थी..

खैर अलका वासना के आग में जल के विशाल से चुद तो गयी थी लेकिन इसकी कितनी बड़ी कीमत उसे आगे चाक इ चुकानी पड़ेगी ये तो वक़्त hi बताएगा… रात बिट चुकी थी सुबह हो चुक्का था और अलका अपने कमरे में अधनंगी लेती हुई थी









उसकी छोटी सी निघ्त्य उसके कमर से ऊपर होती तो सायद सिर्फ उसके रसीले छूट का hi दर्शन हो पता लेकिन उसकी ये निघ्त्य का इरादा उसके छूट के साथ आज उसके रसीले चुचिओ को भी धक् के रखने का किसी इरादा में न था… जिसका नतीजा ये हुआ की अलका बेशक निघ्त्य पहने हुवे तो थी लेकिन वो फिर भी एक तरह से नंगी hi थी… उसके छोटे छोटे छूट के ऊपर फैली झांट जो उसके छूट पे किसी गहने की तरह उसकी सुंदरता बढ़ा रही थी… उसके ऊपर जाओ तो उसकी गहरी नाभि और चर्बीदार पेट आआआआअह्हह्ह्ह्हह इस नज़ारे को अभी आँखों में भरा भी नहीं गया था की उसकी गोल गोल कासी हुई चुचिअ और उस पर पड़ती सुबह की किरण उसकी चुचिओ की सुंदरता को और बढ़ा रही थी….

अलका अपने नींद से जागते हुवे एक अंगड़ाई के साथ बीएड से उठती है तो देखती है अशोक अभी भी सो रहा था… वो फर्श होने के लिए वाशरूम जाती है और नाहा धो के एक काळा रंग की साड़ी में जिसकी ब्लाउज इतनी डीप थी की उसकी चूचिया आधे से ज्यादा बहार hi थी…









उसने गले में एक पतली सी सोने का चैन डाला था और वैसा hi एक चैन उसने अपने कमर में भी बंधा था जिस से उसकी कमर पहले से भी खूबसूरत लगने लगती है हाथो में लाल चुडिया खुले बाल और काळा रंग के डीप ब्लाउज से झक्ति उसकी चूचिया.. अलका किसी कामदेवी से काम नहीं लग रही thi..aur इस हालत में पहले वो अशोक को और फिर विशाल को जगती है.. विशाल जो उसे देखते hi मनो अपने होश खो बैठता है वो लपक के अलका को पकड़ने लगता है की अलका खुद को उस से चुराती है और फ्रेश हो के बहार आने का कह के किचन में चली जाती है…

विशाल भी नाहा धो के अपने कमरे से बहार निकल जाता है बहार आने पे उसने देखा की अलका किचन में काम कर रही है और अशोक अभी भी बहार नहीं आया था… वो झट से अलका के पास जाता है और पीछे से उसे अपने बहो में भरते हुवे उसके गले पे अपने होंठ रगड़ने लगता है..









विशाल- आअज तो तुम क़यामत लग रही हो माँ

अलका- चोर क्या कर रहा है तेरे पापा आते hi होंगे..

विशाल- आने दो अब तुमसे दूर नहीं रहा जाता मुझसे माँ

अलका- दूर तो मैं भी नहीं रह पति पर क्या करू…

विशाल- माँ कुछ करो न

अलका- क्या करू कल hi तो छोड़ा है मुझे अपने बाप के घर में होते हुवे

विशाल- हाँ पर मैं चाहता हु तुम्हे तेरे पति के सामने घोड़ी बना के छोड़ू

अलका- आआआआहहहहह ऐसी बाटे मत कर मुझे कुछ होता है..

विशाल एक और जहां अपने शब्दों से अलका के वासना को जगा रहा था तो वही दूसरी और उसके हाथ कभी अलका के चुचिओ को तो कभी पेट को मसल रहे थे और उसकी गरम गरम सांसे जो अलका के गार्डन पे लग रही थी उस से अलका भी मनो बेकाबू सी हो रही थी …









इस से पहले की वो इस वासना के गाड़ी में स्वर हो आगे निकल पति उसके कमरे के दरवाजे का खुलता है और सामने से अशोक फर्श हो के बहार निकलते हुवे सभी को गुड मरंग ग्रीट करता है….

अशोक- गुड मॉर्निंग एवरीवन

विशाल- गुड मरंग डैड

अलका- आ गए अशोक बैठो मई नाश्ता लगाती हूँ…

तीनो सद्श्य नाश्ता कर के अपने अपने काम पे लग जाते है.. जहां विशाल अपने कॉलेज अलका ऑफिस और अशोक घर पे hi बेथ के टाइम पास करने लग जाता है..

आज पुरे दिन अलका का मन काम में नहीं लग रहा था विशाल ने जो शर्त अलका के सामने रखा था वो चल्लेंजिंग तो था hi लेकिन काफी उत्तेजना बढ़ा देने वाला भी था.. अलका का इस बारे में सोच सोच के hi बुरा हाल हो रहा था.. अभी रात hi तो विशाल ने उसके छूट से उसका 2 बार पानी निकला था की फिर से उसकी छूट रिसने लगी थी… ऊपरवाला hi जाने इतना पानी उसके छूट में पानी बार बार आ खान से जाता है…









अलका के दिल में भी अशोक के सामने छोड़ने का सोच सोच के रोमांच बढ़ता जा रहा था तो वही उसे इस बात की टेंसन भी थी की आखिर इस काम को अंजाम कैसे दिया जाये…

अलका चाहती थी की जब वो अशोक के सामने विशाल का लुंड अपने छूट में ले तब अशोक बेहोश न हो बल्कि होश में ho…..yani की पूरी तरह जगा भी न हो तो पूरी तरह बेहोश भी न हो… वो अलका को चुड़ते देखे और सुने पर कुछ कर न पाए…

ये सोच सोच के hi अलका के छूट से उसका कामर्स बहने लगता है उसके शरीर में झुरझुरी दौड़ने लगती है.. उसके छूट में पानी निकलने के साथ साथ एक बिजली भी दौड़ने लगती hai…uska हाथ बार बार अपने छूट पे जाने लगता है उसका दिल हो रहा था कुछ ऐसा हो की वो अभी hi अशोक के सामने विशाल के लुंड पे जोर जोर से कूड़े पर ऑफिस में होने के वजह से वो बस खयालो में hi विशाल का लुंड अपने छूट ले पा रही थी…

देखते देखते रात होने को थी और अलका ऑफिस से घर आने लगती है… आज अलका अपनी कार से आने के वजह फिर से कैब से आयी थी इसलिए उसे घर भी कैब से hi जाना पद रहा था.. पर तेज़ बारिश के कारन सड़क पे पानी भर जाने से कोई कैब भी नहीं मिल रही थी.. की तभी उसके सामने एक कार रूकती है और विंडो के खुलते hi एक जनि पहचानी सी आवाज़ आती है… वो सख्स कोई और नहीं बल्कि अमन था.. रात के हुवे हादसे से अलका उस से सायद मिलना तो नहीं चाहती पर इस समय इस तेज़ बारिश में अमन को देख के उसे इतनी खुसी होती है की बस वो बयान नहीं कर सकती..

अलका भी अमन को हाथ हिला के जवाब में hi कहते हुवे उसके और बढ़ती है… अमन उसे कार के अंदर आने को कहता है

अमन- बारिश में खान भीग रही हो आओ माँ ऐकोर दू

अलका भी इस घडी में बहस करना ठीक नहीं समझती और वो अमन के इनविटेशन को स्वीकार करते हुवे जवाब देती है

अलका- थैंक यू मैं कैब का hi वेट कर रही थी और तुम आ गए और इतना कहते hi वो कार में बैठ जाती है…

दोनों के बिच इधर उधर की बाटे होने लगती है की तभी अमन अपने रात की बात का सफाई में माफ़ी मांगते हुवे अलका को अपनी सफाई देने लगता है..

अमन- वो मैं कल के लिए तुमसे सॉरी कहना चाहता हूँ..

अलका- सॉरी क्यों

अमन- कल जॉब hi हुआ उसके लिए सूर्य… वॉक अल मैं कुछ थका हुआ था और तुम्हारा वो कामुक रूप देख के मेरा खुद पे कण्ट्रोल नहीं रहा सो ी ऍम सॉरी

अलका- कोई बात नहीं होता है कभी कभी

देखते hi देखते अलका अपने घर के काफी करीब आ चुकी थी की घरसे पहले के चौक पे गाड़ी रोकने को कहती है..

अमन- अरे क्या हुआ

अलका- बस मेरा घ आ गया मैं आगे चली जाउंगी..

और अलका कार से उतर जाती है लेकिन बारिश और हवा तेज़ होने के वजह से अलका पल भर में hi भीग जाती है… हवा के तेज़ झोंको से अलका का पल्लू अगले hi पल उसके कंधे से उतर के उसके छतियो को धक् पाने की नाकाम कोशिश करने लगती है..









अलका ने जो आज डीप नैक ब्लाउज पहना था और इस तरह तेज़ हवा से उसके पल्लू के हैट जाने से उसकी दूध जैसी चमकती चूचिया बिलकुल नंगी हो जाती है अगर ये गाला थड़ा और डीप होता तो उसके चुचिओ पे जो पिंक रेड चेरी जैसी निप्पल है वो भी जरूर दिख जाता…

कार के बहार के इस कामुक दृश्य को देख अमन का गाला सूखने लगता है… इस तेज़ बारिश में भी मनो अलका की कंगनी उसकी प्यास जगा दी हो.. वो ऐसे मोके पे अलका को जाने देना नहीं चाहता था वो तुरंत छतरी ले के बहार आता है और अलका को छतरी में आने को कहता है..

पहले तो अलका मन करती है.. लेकिन जब किस्मत कहानी कुछ और लिख चुकी हो तो वो खान होता है जो हम चाहते है यहां भी अलका के साथ कुछ ऐसा hi होता hai..abhi अलका ने अमन को मन किया hi था की एक तेज़ बिजली के कड़कने से वो खुद लपक के छतरी के निचे आ जाती hai…chatri के छोटा होने और इस तरह भाग के छतरी के अंदर आने से अलका की बड़ी बड़ी चूचिया अमन के छाती से जा टकराती है और उसके छाती में hi धस जाती hai…aman भी मोके का पैदा उठाते हुवे अपना हाथ अलका के कमर में दाल के अपने गिरफत को कास लेता है

अलका- aaaaahhhhhhhhhhh ये क्या कर रहे हो

अमन- कुछ भी तो नहीं और अपने होंठ अलका के होंठो में रख देता है…









अलका पहले तो विश्रोध करती है लेकिन अमन के तरफ से एक के बाद एक कई बार जकड बनाने से अलका भी उसके बहो में पिघलने लगती है.. और दोनों के बिच चुम्बन होने लगती है..

दोनों के बिच जो चुमबन मात्रा होठो को स्पर्श कर रही थी वो अब एक दूसरे के होंठो को रगड़ने और चूसने लगती है…

अमन- uuuuuuuuuuuuuuuummmmmmmmmmmmmm uuuuuuuuuuummmmmmmmmm

रात के अँधेरे और तेज़ बारिश के वजह से किसी का भी नजर इन पे पड़ने का कोई चांस hi नहीं था अमन अलका को चूमते हुवे अपना हाथ उसके साड़ी में दाल के उसके मस्त मोठे चूतड़ों को मसलने लगता है.. साड़ी के ऊपर होने से अलका की मखमली गांड अब साड़ी के बहार हो गयी थी और उसकी हरी पंतय दिखने लगी थी..









अमन अलका के बदन की गर्मी और बारिश में भीग जाने से उसके बदन से निकलने वाली खुसबू से मनो पागल होने लगता है वो किसी भी तरह अलका के छूट में घुसना छह रहा था पर ये जगह सही नहीं थी और अलका को अपने घर या होटल ले जाने का मौका भी नहीं था ो इसी उधेड़ बन में था की तभी अमन की नज़र पास में एक पेड़ और बगल में टूटे दीवार पे पड़ती है.. वो अलका को गॉड में उठा के उस तरफ बढ़ जाता है और इस बिच वो अलका के हनथो को चूसना जारी रखता है…

पेड़ के पीछे के दीवार पे जाते hi अमन पता है की कोई छोटा सा मैदान है जहां कुछ झाडिया भी है यानि ये जगह बिलकुल सही था जहां वो अलका को छोड़ सकता था अमन अलका को अपनी गॉड से उतर देता है…

अमन के द्वारा उसके गांड के मसलने से साड़ी तो जाने कब का उसके बदन से उतर चुक्का था और अमन जैसे hi उसके पेट्रिकट का नाडा खींचता है की उसका पेटीकोट एक डैम से उसके टैंगो से सरकते हुवे उसके पैरो पी ा गिरता है… अलका अब एक तरह से पूरी नंगी हो चुकी थी.. उसके बदन पे मात्रा हरे रंग की पंतय और काली ब्रा थी…

अमन अब किश को तोड़ते हुवे अलका के सर को पकड़ के निचे की और दबाने लगता है









अलका जिसपे सुबह से hi चुदाई का खुमार चढ़ा हुआ था ो इस तरह के हमले और बारिश में भीगने से अपने आप को बहकने से रोक नहीं पति.. वैसे तो पानी आग बुझाने के काम आती है पर यहां बारिश की ेके क बून्द आज अलका के कामवासना को और जयदा भड़का रही थी..

अमन के द्वारा उसे निचे बिठाने से उसे समझते देर नहीं लगती की उसे अब क्या करना है… वो निचे बैठ की मन के लुंड को अपने मुँह में भर के चूसने लगती है…

अमन- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh ffffffffffuuuuuucccccccccckkkkkkkkk

अलका- जो बिना कुछ बोले hi बस जोर जोर से अमन के लुंड को चूस रही थी…









वासना में लिप्त अलका ये भूल चुकी थी की वो अपने घर से मात्रा कुछ 500 मित्र hi दूर है जहां कोई भी जान पहचान वाला इंसान उसे इस हालत देख सकता tha..par इन बातो से बेखबर अलका पुरे जोश में अमन का लुंड अपने मुँह के अंदर बहार कर रही थी और साथ hi अपने छूट को अपने दूसरे हाथ से मसल रहा थी.. अमन जो की अपने मंजिल की तरफ पहुंचने hi वाला था की एक तेज़ hornnnnnnnnnnnnnnnnnnn और लाइट से अलका का ध्यान टूटता है.. वो जैसे किसी सपने से जग जाती है.. और जब उसकी नजर अपने आस पास जाती है तो एक बंजर मैदान में खुद को नंगी पति है…









वो जैसे तैसे कर के अपने कपडे समेटने लगती है और बड़े तेज़ी से पहनने लगती है.. अमन के साथ आज एक बार फिर से कलपद हो गया था

अमन- क्या हुआ?

अलका- मुझे घर जाना होगा बहुत देर हो गयी

अमन- parrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrr

अलका- पर वॉर कुछ नहीं मुझे देरी हो रही है

बात करते करते अलका साड़ी पेटीकोट पहन चुकी थी और वो तेज़ कदमो से घर की और भागने लगती है.. पीछे से अमन उसे आवाज़ देता है पर उसे सी यू सून कह के तेज़ कदमो से भागते हुवे अपने घर की बढ़ जाती है…







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अलका जैसे तैसे घर तो पहुंच जाती है पर उसकी सांसे मनो उस से जयदा तेज़ी से भाग रही थी उसकी साड़ी जिसे अमन ने उतर के उसके जिस्म से अलग कर दिया था वो कीचड़ में सं के मिली हो गयी थी

घर का दुर्बल बजाते hi सामने कारन खड़ा था जिसे देख के अलका चौक जाती है

अलका- तुम….

पर जितना अलका नहीं चौकी थी उस से ज्यादा कारन अलका को इस हालत में देख के अपने होश गवा बैठा था उसका मुँह खुला का खुला रह गया था… और खुले भी क्यों न उसके सामने कोई ऐसी वैसी चीज नहीं स्वयं कामदेवी अलका कड़ी थी वो भी भीगी हुई…

भीगी साड़ी उसके बदन से बिलकुल चिपकी हुई थी जिस से उसके बदन का कटाव कुछ अलग hi पेश आ रहा था उसकी चुकी जिसे अमन ने मसल के लाल कर दिया था उसपे कारन का ध्यान जाते hi उसे समझ आ जाता है की उसकी मासी को जरूर किसी दुहा है जैसे गए दुहते है

अलका- ऐसे क्या देख रहा है हैट अंदर आने दे ठण्ड लग रही है और अलका तेज़ कदमो से भागते हुवे अपने बाथरूम में घुस जाती hai…wo जल्दबाजी में बाथरूम का दरवाजा भी नहीं लगाती बाथरूम में अपने कपडे उतरने लगती है…






अलका अगले hi पल बिलकुल नंगी हो के शावर के निचे कड़ी हो के नहाने लगती है और अपने बदन पे लगे मिटटी को धोने लगती है…







अलका के मादक शरीर से टपकती पानी की बुँदे जिसका ेके क बून्द इतना मादक था जिसे पि लो तो कई बोतल शराब का नशा उसके जिसमे से टपकते ेके क बून्द के पिने से हो जाये.. उसकी गोल बहार निकली हुई गांड इस वक़्त दरवाजे के तरफ थी.. उसकी गांड सच में इतनी ज्यादा कैसा हुआ बहार को निकला हुआ था की बस जो देख ले वो मंत्रमुग्ध हो जाये…

नाहते हुवे अलका का ध्यान अचानक शीशे की तरफ जाता है टी वो देखती है की उसका भांजा कारन उसे नंगा देख के अपना लुंड बहार नकल के मसल रहा था या सीधे शब्दों में कहो तो मुट्ठी मार रह था









अलका को पहले तो उसे देख के गुस्सा आता है लेकिन वो गुस्सा करने के बजाय पलट के कारन की तरफ जाती है और उस से पूछती है

अलका- तुम यह क्या कर रहे हो

कारन- वो मासी मुझे टॉयलेट लगी थी और विशाल का कर्मा लोक है तो मैं इधर आ गया पर आप

अलका- तो ये तुम ऐसे टॉयलेट कर रहे हो???

अलका कारन से बात करते हुवे अपने नंगे शरीर को छुपाने की बिलकुल भी कोशिश नहीं करती बस छोटे से टॉवल से अपने गीले बदन को पॉच रही होती है और जवाब में बा इतना कहती है..

अलका- Ok जाओ कर लो जो करना है… अलका कारन को और तड़पने की सोचती है और इसी सोच में आ के वो तोलिये को लपटटे हुवे बहार आने लगती है बूत टोलिया सिर्फ उसके कमर के निचे के part क hi छुपा पा रहा था और उसकी चुचिअ अभी भी हवा में लहरा रही थी..









कारन की पहले तो गांड फटती है पर अलका के साइड से इतना कोल्ड रिएक्शन देख के उसके जान में जान आ जाती है वो तेज़ कदमो से भागते हुवे वाशरूम में घुस जाता है और अलका भी अपने बदन पे तौल लपेटते हुवे बहार आने लगती है..

कारन थोड़ी देर बाद टॉयलेट कर के बहार आ जाता है और तेज़ कदमो से भागते हुवे अलका के कमरे से निकल जाता है…

थोड़ी देर में अलका भी कपडे बदल के बहार आ जाती जहां कारन बैठा टाई पास कर रहा था

अलका- तुम कब आये कारन?

कारन- थोड़ी देर पहले मासी इधर से जा रहा था तो तेज़ बारिश के वजह से सोचा बारिश रुकने तक रुक जाऊ पर आने पेप ता चला विशाल मौसा के साथ उनका चेककप के लिए गया है और घर पे कोई नहीं है …

अलका- फिर तुम अंदर कैसे आये?

कारन- वो विशाल ने बताया था की कीस खान है तो वही से ले लिया और दूर खोल लिया

अलका- गुड और बताओ सारिका किसी है??? चाय कॉफ़ी कुछ लोगे?

नहीं मासी बारिश रुकने को है तो मुझे निकलना चाइये मुम्मा भी वेट कर रही होगी?

अलका- अरे रुक जा विशाल आता hi होगा..

कारन- फिर कभी आऊंगा मासी अभी चलता हु..

अलका भी जो वासना के आग में जल रही थी वो नहीं चाहती थी के ये रुके और उसका चुदाई में कोई दीवार खड़ा हो..

अलका- ठीक है अचे से जाना और सारिका को मेरा होई कहना और पहुंच के फोन जरूर करना

कारन- ok मासी ब्येई इतना कह के कारन भगते हुवे अपने घर को जाने लगता है…

कारन के जाते hi अलका अपने कमरे में जाती है और फिर से सरे कपडे उतर के बिलकुल नंगी हो जाती है









और अपनी छूट में ऊँगली करने लगती है वो कामवासना में इतना ज्यादा जल रही थी की एक के बाद एक दो दो ऊँगली दाल के छूट के अंदर बहार करने लगती है..

अलका- aaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh विशाल खान है मेरे बचे ाआजाए देख तेरी माँ कितना तड़प रही है….

आज एक बार फिर से तेरी माँ बिच रस्ते में किसी अनजान मर्द से चुड़ते चुड़ते रह गयी… uuuuuuuuuuuuuffffffffffffffff ये मेरे छूट की गर्मी दिन पे दिन बढ़ते hi जा रही है… आअज विशु खान माँ छुड़वा रहा है मादरचोद…..

अलका बड़े तेज़ी से ऊँगली अंदर बहार करते हुवे अपने छूट से पानी निकलने hi वाली थी की दुर्बल बज जाता है

अलका- अब कौन मादरचोद आ गया अपनी माँ छुड़वाने चैन से ऊँगली भी नहीं करने देते….

अलका कपडे पहन के दरवाजा खोलने के लिए चल देती है और जैसे hi दरवाजा खोलती है उसकी नज़र में खुसी की लहार दौड़ जाती है…

अलका इतने दिल से याद कर रही थी की विशाल सच में आ hi गया था पर दिक्कत ये थी की विशाल के साथ उसका पति अशोक भी था..

अलका- आ गए तुम लोग..

अशोक बड़ा खुस नज़र आ रहा था और बड़े hi चहक के साथ जवाब देता है.\

अशोक- हाँ और डॉ के क्लीनचीत दे दी

अलका- क्लीनचीत मतलब???

अशोक- मतलब अब मैं बिलकुल फिट हु कोई परहेज की जरूरत नहीं मई पहले की तरह शराब पि सकता हु सेक्स भी कर सकता हु..

अलका- चुप करो सामने बीटा खड़ा है और कुछ भी बोले जा रहे हो..

अशोक- सूर्य सूर्य में इतना खुश हु की ..

विशाल- आप दोनों बात करो मैं अपने कमरे में जाता हूँ..

अशोक- हाँ तू जा गेम खेल

अलका- चलो ाचा है बस अब वो दवा मत लेना

अशोक- हाँ बस उस दवा को मन किया है बाकि सब पहले जैसा hi है.. और आज तो जी भर के पियूँगा और फिर तुझे छोडूंगा पूरी रात…

पर अलका का तो आज का कोई और प्लान था और शराब पिने की बात से वो भी कही न कहि बहुत खुश थी….

वो ख़ुशी की वजह क्यात hi ये तो आने वाले समय में hi पता चलेगा…..

 
पेज- 35 (Part-A)

दिन तो जैसे तैसे काट काट गया था और अब रात एक बार फिर से गहराने लगती है अलका की फॅमिली ने डिनर भी कर लिया था और बी सोने की तयारी चल रही थी.. जहां अशोक आज एक बार फिर से अलका को छोड़ने की हसरत लिए बैठा था तो वही अलका विशाल से छोड़ने का मन बनाये बैठी थी… और इधर विशाल इस असमंजस में था की आज अलका किसके हाथ लगती है… उसके या उसके बाप के???

खैर समय का पहिया एक बार फिर से घूमता है और अलका कमरे में दाखिल होती है जहां अशोक पहले से बोतले और गिलास लिए अलका का वेट कर रहा था… सायद अलका के आने से पहले hi उसने एक दो पेग लगा भी लिए थे जिसकी गवाही उसकी आंखे दे रही थी…

अलका- ये क्या तुमने पीना शुरू कर दिया …… और मेडिसिन ली तुमने??

अशोक- अब मैं ठीक हूँ मेरी जान अब मुझे दवाइयों की नहीं तुम्हारी जरुरत है ये कहते हुवे अशोक उठता है और अलका को अपने बहो में भर लेता है और उसके होंठो पे अपने होंठ रख के उसके होंटो को चूमने लगता है…. अलका तुरंत खुद को उस से अलग करते हुवे कहती है

अक- नहीं अशोक पहले तुम एक डैम फिट हो जाओ और दवाइया लो में कही भागी नहीं आ rahi…itna कह के वो दवाइया लेने बढ़ती है की अशोक उसे पीछे से दबोच ेलता है..






अशोक- ok मेरी जान ले लूंगा लेकिन उस से पहले एक राउंड हो जाये बहुत दिन हो गए है तुम्हे चखा नहीं hai….aur उसके गार्डन को चूमने लगता है…. अलका जो सुबह से hi छुडासी हुवे बैठी थी अशोक के हुवे इस हमले से ज्यादा देर खुद को रोक नहीं पति.. अशोक की गर्म सांसे जो उसके गार्डन पे लगातार पद रही थी उसमे अलका वासना के पिघलने लगी थी… उसकी सांसे चढ़ने लगती है… वो गार्डन कभी ऊपर कर के अभी इधर उधर कर के छटपटाने सी लगती है लेकिन ये छटपटाहट छूटने के लिए नहीं थी बल्कि वासना में डुबकी लगाने किट hi…





अलका ने जो लाल साड़ी पहनी थी वो उसके छाती से गिर के जमीं पे फ़ैल चुकी थी अलका की चढ़ती सांसो से उसकी बड़ी बड़ी चूचिया ऊपर निचे होने लगती hai…ashok की पहाड़ जैसी चुचिओ को मसलने लगता है… और साड़ी का एक कोना जो उसके कमर में कही फास के अटका हुआ था उसे अलका एक झटके में अपने बदन से उतर के दूर फेंक देती है… अब अलका मात्रा ब्लाउज और पेटीकोट में थी जो उसके साड़ी के मशीन कलर यानि रेड था….

साड़ी के जिस्म से दू रो जाने से और पेटीकोट में आ जाने से अलका की गोल भरव्दार उठी हुई गांड अशोक के लुंड पे रगड़ने लगती है जिस से अशोक बहकने लगता है और अशोक के लुंड का अलका कैग एंड में चुबने से अलका का भी कुछ वही हाल था….

अशोक निचे बेथ के अलका के पेटीकोट की डोरी खींच देता है जिस से अलका का रेशमी पेटीकोट एक hi झटके में उसके पैरो में गिर जाता है और अलका सिर्फ गुलाबी पेंटी में अशोक के सामने कड़ी हो जाती है…






अलका की चिकनी मखमली जांघ नाईट लैंप की हलकी रौशनी में कुछ ज्यादा hi चमकने लगती है.. जिसकी चमक में अशोक की आंखे चुंधियाने लगती है… वो निचे बेथ के पंतय के ऊपर से hi कभी उसके छूट तो कभी उसके जांघो को चूमता और मसलता है…

अलका- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh अशोक मेडिसिन ले लो फिर ये सब करते है….

अशोक- अभी कुछ न बोलो प्लस

पर अलका अशोक को दवा दे hi देती है और अशोक के रोज मर्रा की दवाई में अलका ने आधी नींद की गोली भी दाल दिया tha…ashok ने भी जोश में साडी गोलिया एक साथ hi मुँह में दाल लेता है और शराब की मोती सी पेग के साथ साडी दवाइया निगल लेता है….. अब अशोक पे हवस शराब और नींद के गोली का असर एक साथ काम करने वाला था देखना ये था की अशोक टिकता कितनी देर है…

अशोक से अब बर्दाश्त कर पाना मुश्किल हो रहा था.. वो अलका को पागलो की तरह चूमने लगता hai…aur ेके क करके अलका के बदन को उसके कपड़ो से आज़ाद करने लगता है..






अलका भी अशोक का ये रूप देख के मचलने लगती है और खुद को अशोक को सौंप देती है.. अशोक भी हवस में पागल हुवे अलका को पागलो की तरह चूमते हुवे उसके तन पे बचा वो आखरी कपडा यानि की अलका का ब्लाउज को भी फाड़ के उसके शरीर अलग कर कमरे के किसी कोने में फेंक देता है…

अलका- aaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh पागल ो गए हो क्या??

अशोक- हाँ तेरे ये गोरा मादक बदन मुझे अगल hi कर देता है.. इतना कहते hi अशोक ॉक्स को अपने कमरे में पड़े टेबल पे झुका देता है…






अलका क अगोरा बदन टेबल की रौनक बढ़ने लगता है और उसके शरीर से कपड़ो को तो अशोक ने कब का आज़ाद कर hi दिया था जिस से उसकी सूंदर गोल मखमली गांड ऊपर को लहराने लगती है … टेबल की हाइट थोड़ी ज्यादा होने से अलका को अपने उगलिओ के सहारे खड़ा होना पद रहा था जिस से उसकी जंघे कुछ जयदा लम्बी ज्यादा सुडोल लग रही thi…ashok जो पहले से hi वासना में डुबकी लगाए पागल हो गया था ो अलका के बिना तैयार हुवे अपना लुंड अलका के छूट में उतर देता है…

अलका- aaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh क्या हो गया है तुम्हे जानवरो की तरह क्यों कर तहे हो?

अशोक- uhhuhhhhhhhhhhhhhhuh कुछ मत बोल रंडी और एक थप्पड़ उसके गांड पे मार देता है






अशोक के हर जहटके से अलका का पूरा शरीर हिलने लगता है. और सबसे ज्यादा थिरकन तो उसके मटके जैसी गांड में होने लगती है…

अलका- aaaauuuuuuuuuuuuuchhhhhhhhhhhhhhhh लगती है

अशोक अलका के बातो से उत्तेजित हो के और जोर दर कहते मरने लगता है साथ hi अपना लुंड अलका के छूट में पेलने लगता है…

एक तो अशोक वासना में बहुत चरम पे पहुंच गया था ऊपर से दवा और दारू के असर से अशोक जल्दी hi अपने चरम पे पहुंच जाता है पर साथ hi नींद की गोली भी उसे अपने आगोश में लेने लगती है…

अशोक एक गुर्राहट के साथ अलका के छूट मझद जाता है और उसके पीठ पे hi निर्जीव सा पद जाता है….

उसका लुंड तेज़ पिचकारी मरते हुवे झड़ने लगता है और फिर अपने आप hi अलका के छूट से निकल जाता है और इस तरह निकलने से उसके लुंड का पानी कुछ बहार भी गिरने लगता है…






अशोक का लुंड अपना पानी बहा चुक्का था नींद की गोली ने भी अपना असर दिखते हुवे अशोक को नींद की आगोश में सुला दिया था… पानी निकल जाने से नींद का आना तो तय था hi पर उसके ऊपर दाई का असर होना अशोक को सुलाने के लिए काफी था.. वैसे देखा जाये तो अशोक को एक पूरी गोली दी जा सकती थी पर अलका ने आधी hi गोली दी थी क्यूंकि उसके शैतानी दिमाग में कही न कही ये चल रहा था की अशोक पूरी तरह नींद में न हो… वो कुछ कुछ होश में रहे पर इतना भी होश में न रहे की उसके चुदाई में दखल दे…. कुल मिला के वो रोमांच के सिखर को चुना छह रही थी…

अशोक को जैसी तैसे अलका ने बीएड पे लिटा दिया और खुद के लिए एक पेग बनायीं और एक गाउन पहन के निकल पड़ी अपने आशिक और अपने bête के कमरे की तरफ अपनी प्यास बुझाने के लिए…

अलका जैसे hi विशाल के कमरे में घुसती है तो पति है विशाल अपने कमरे में नहीं था उसे लगता है सायद विशाल फिर से उसकी चुदाई देखने के लिए उसके कमरे की तरफ गया हो इस लिए वो वापस मुद के कमरे की तरफ जाने लगती है की तभी बाथरूम से फ्लश की आवाज़ आती है जिसका अटलब था की विशाल बाथरूम में है… अलका मुस्कुराती हुई विशाल के कमरे पे राखी चेयर पे बैठ जाती है…

विशाल को इस बात का जरा भी ज्ञान नै था की अलका उसके कमरे में उसका इंतजार कर रही है.. वो जैसे hi बाथरूम से निकलता है तो एक आवाज़ उसके कानो में गूंजती है…

कही मुठ मर के तो नहीं आ रहा है…. अपना पानी बचा के रखना…… अभी पूरी रात तुम्हे म्हणत करनी है

विशाल जैसे hi आवाज़ का पीछा करते हुवे उसके दिशा की तरफ देखता है तो जो देखता है उसकी आंखे फटी की फटी रह जाती है… उसका गाला सूखने लगता है… उसकी माँ हर दिन एक नया रूप से उसके ऊपर कहर ध रही थी…

अगर वो नंगी होती तो सायद फिर भी विशाल झेल जाता पर अलका तो कुछ और hi बन के आयी थी..






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विशाल जब सामने देखता है तो पता है की उसकी माँ जो एक काळा शार्ट गाउन में थी जो आगे से बिलकुल खुला और गाउन के खुला होने से अलका की गोल गोल भरी चूचिया कमरे की हलकी रौशनी में क़यामत ध रही थी… उस से निचे उसकी गहरी गोल nabhi,,aur उस से निचे उसकी गुलाबी पतली सी धरी वाली छूट…. छूट पे आज बाल का नमो निशान नहीं था जिसकी चमक विशाल को अपनी और आकर्षित कर रही थी… हाथो में शराब का प्याला था और उस शराब से ज्यादा नशीली जो इस वक़्त लग रहा था वो था अलका का मादक बदन… उसकी नश्ली आंखे उसके सुर्ख गुलाबी होंठ … उसकी जंघे और पिण्डलिया … हर एक अंग उसका मनो बड़े hi नकसी से तराशा गया हो…

विशाल तो अपने जादूगरनी माँ के हुश्न में खो hi गया था की तभी फिर से अलका की आवाज़ उसके कानो में गूंजती है..

अलका- बोल छोड़ेगा न अपनी माँ को…?? तैयार तो है न??? या सिर्फ घूरता hi रहेगा… ले ये गाउन भी उतर देती हु अचे से देख अपनी माँ के इस बदन को जोट ेरे लिए hi तैयार hai…main खुद को तुम्हे सौंपने के लिए hi आयी हु…






इतना कहते hi अलका कुर्सी से उठती है और अपना गाउन उतर के बिलकुल नंगी विशाल के सामने कड़ी हो जाती hai….kamre में न कयदा रौशनी थीं ा hi अँधेरा पर अलका के बदन की चमक इन सब से कही ऊपर थी.. अलका के मादक शरीर से टपकता वासना का वो रास जिसमे डुबकी लगाने के लिए वो विशाल को बुलावा दे रही थी.. लेकिन विशाल अपनी माँ के सुंदरता और कामरूप में खोया मनो किसी मूर्ति की तरह बस देखे जा रहा था… अलका के छूट में वासना की जो लहार दौड़ने लगती है वो उस से बर्दाश्त कर पाना मुश्किल हो रहा था ो बड़े नज़ाकत से मटकते हुवे विशाल के करीब आती है और निचे बेथ के उसके शॉर्ट्स को निचे खींच देती है… शॉर्ट्स के कमर के निचे आते hi विशाल का लुंड फड़फड़ते कबूतर की तरह आज़ाद हो के लहराने लगता है..





अलका उसके लुंड को अपने गरमा गरम मुट्ठी में पकड़ती है और विशाल के आँखों में आंखे दाल के पहले उसके लोडे पे जुबान फेरती है और फिर अपने गुलाबी होंठो को खोल के अपने मुँह में भर लेती है….

Alka-oh माय goddddddddddddd कितना त्रसी हूँ इस लुंड के लिए yyyyyyyyyyuuuuuuuuuuuummmmmmmmmmmmmmmmm uuuuuuuuuummmmmmmmmmmmm

विशाल- aaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh mmmmmmmmmmmoooooooooommmmmmmmmmm

अलका- ssssssssssssssshhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh






अलका अचे से चूस छू के विशाल के लुंड को पूरा खड़ा कर देती है और विशाल भी अब अलका का पूरा पूरा साथ देते हुवे उसके बालो को पकड़ के उसके मुँह में झटका मरने लगता है...

अलका जो इस खेल की बहुत hi माहिर और शातिर खिलादन थी वो आज इस खेल को आज लम्बा खेलने के मूड में थी इसलिए वो चूसते चूसते एक डैम से विशाल का लुंड अपने मुँह से निकल लेती है और कड़ी हो जाती है.. विशाल कुछ समझ पता उस से पहले अलका चलते हुवे टेबल की तरफ जाती है और झुक के अपनी गांड बहार को उचका लेती है…






अलका अपनी गांड हवा में लहराने लगती है वो अपने चूतड़ों को मटकते हुवे दये बाये करने लगती है अलका की ये युक्ति विशाल के ऊपर एक करारा प्रहार था.. वो आगे बढ़ते हुवे अलका के चूतड़ों पे थपड मरने लगता है और अलका उसके हर प्रहार को हस्ते हुवे शी रही थी

अलका- ooooooooooooouuuuuuuuuuuuuuuuchcccccccccccccchhhhhhhhhhhhh

विशाल झुक के उसके छूट पे अपनी जुबान भिड़ा के उसके छूट को तो कभी उसके गांड को चाटने लगता है.. विशाल के जीभ का छुवन से अलका के अंदर वासना की लहार दौड़ने लगती है…






और वो विशाल के सर को अपने गांड में दबाने लगती है

अलका- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh खान से सीखा है इतना ाचा चेतना तूने uuuuuuuuuuuuufffffffffffffffffff मैं पागल हो रही हुण्णनं और चाट अचे से चाट bête..

इतना कह के अलका अपने हाथो से चूतड़ फैला के पूरा गांड खोल लेती है जिस से की विशाल को अलका के छूट और गांड चाटने में कोई दिक्कत न हो…

विशाल भी पुरे शिद्दत से अलका के छूट को अपने जीभ से कुरेद कुरेद के चाटने लगता है…

अभी विशाल अलका के छूट में खोया hi था की अलका एक बार फिर से कड़ी हो जाती है..

विशाल कुछ समझ पता उस से पहले अलका विशाल के लुंड को पकड़ के बीएड की तरफ बढ़ने लगती है…. बीएड वो जगह जहां विशाल अलका के छूट में अपना लुंड पेलने वाला tha…bed के पास आते hi अलका विशाल को बीएड की तरफ धकेल देती है और खुद उसके गॉड में बैठ जाती है..






और अलका अपने अपने गरम सुलगते होंठ विशाल को होंठो पे रख देती है.. विशाल के होंठ जिसपे उसके छूट के पानी के साथ साथ अशोक के लुंड का पानी भी लगा हुआ था उसे अलका बड़े hi कामुक अंदाज़ में चूसने लगती है इधर अपने होंठो में अपने माँ के होंठो का स्पर्श पते hi विशाल भी पागलो की तरह अपनी माँ को चूमने काटने लगता है.. अलका विशाल के बहो में पिघल रही थी वो उसके बहो में छटपटने लगती है और विशाल भी अलका को बड़े कास के अपने बहो में जकड के उसे चुम रहा था मनो प्यासे को पानी मिल गया ho…par वो पानी पिने को नहीं चूसने को मिला था और विशाल उसका कटरा कटरा चूस जाना चाहता था..

विशाल कभी अपने हाथ अलका के चुचिओ को तो कभी उसके मखमली पीठ को मसल रहा था जिस से अलका का कामुक शरीर अपने गोरेपन से लाल होने लगता है..

अलका- अब और नहीं रुक सकती छोड़ अपनी माँ को बहुत तड़प रही हु सुबह से..

विशाल- तड़प तो मैं भी रहा हु माँ ये देख मेरा लुंड कितना फड़फड़ा रहा है तेरे छूट में घुसने के लिए… ये कहते हीविशाल अलका को बीएड पे लिटा देता है और उसके छूट पे अपना लुंड रख के रगड़ने लगता है…






अलका- कितना तड़पाएगा bête अपनी माँ को दाल देना अंदर uuuuuuffffffffffffffff अब और नहीं रहा जा रहा है mujhseeeeeeeeeeeeee छोड़ deeeeeeeeeeeeee

विशाल- यहां नहीं आज तुझे तेरे बैडरूम में छोडूंगा…

विशाल- पागल हो गया है क्या व्हाट एरा बाप है…

विशाल- जो भी हो तुझे तेरे पति के सामने hi छोडूंगा…..

अलका जानती थी विशाल के ज़िद की आगे वो टिक नहीं पायेगी इसलिए हार मानते हुवे कहती है ठीक है रुक देख के आने दे तेरा बाप सो गया या जग रहा hai…halanki की अलका कोप ता था की वो सुबह से पहले नहीं जागने वाला फिर भी वो नाटक करते हुवे विशाल को इस बात से अनजान रखती है…

अलका उठ के बिलकुल नंगी अपने बैडरूम की तरफ जाने लगती है और विशाल भी बिक्लुल नंगा अपनी माँ के पीछे पीछे जाने लगता है… अभी अलका अपने कमरे के दरवाजे पे पहुँचती hi है की विशाल उसका हाथ पकड़ के अपनी और खींच लेता है और उसे पागलो की तरह चूमने लगता hai…is से पहले की अलका कुछ बोल पति वो अलका क ीक तंग को हवा में उठा के उसके छूट में बिना किसी चेतावनी के अपना लुंड पेल देता है






अलका- ये क्या करा रहा है पागल हो गया है क्या मादरचोद अंदर तेरा बाप है

विशाल कुछ नहीं बोलता अउ रेज hi पुरे ताक़त से धक्का मारते हुवे अलका को छोड़ने लगता है..

अलका- aaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh रुक जा एक बार के लिए

विशाल- अब तो तेरे छूट में अपना पानी गिराने के बाद hi रुकूंगा मेरी मायआ…

इतना कहते hi विशाल अलका के छूट में लुंड डेल हुवे गॉड में लिए कमरे में घुस जाता है और अपने बाप के सामने अलका को अपनी गॉड में उछाल उछाल के छोड़ने लगता है…..






अलका जो लगातार विशाल से चोर्ने को कह रही थी इस से तंग आ कर विशाल अलका के मुँह को अपने मुँह में भर के बंद कर देता है और किसी गुड़िया की तत्रह हवा में उठा के छोड़ने लगता है… जहां बिस्तर के दूसरी तरफ उसका बाप अभी अभी उसकी माँ को छोड़ के दारू और दवा के नशे में सोया था और इधर बीटा अपनी माँ के छूट में दनादन अपना लुंड पेल रहा था….

विशाल- आज तेरे पति के सामने hi तेरी छूट फाड़ूंगा मैं…

अलका- फाड़ लेना मेरे बचे पर अभी के लिए उतर दे uuuuuuuuuuufffffffffffff

विशाल अलका की बात मानते हुवे उसे सिद्ध बीएड पे पटक देता है और छूट में लोड दाल के जोर जोर से छोड़ने लगता है…

बीएड पे इस तरह पटकने से पूरा बीएड हिल जाता है… जी से अलका दर के अशोक की तरफ देखती है तो वो अभी भी गहरी नींद में सोया हुआ था..






अशोक अभी भी बेखबर सोया हुआ था जागना तो दूर वो करवट लेने के लिए हिला तक नहीं tha…is ासलका भी अब सूरे हो गयी थी की अब वो खुल के मजा ले सकती hai…..aur अब अलका भी अपने रूप में आने के लिए आज़ाद थी......

अलका को अब किसी बात का दर नहीं था उसे पता था की अशोक अब जागने वाला नहीं है और इस बिच वो खुल के अपनी फंतासी पूरी कर सकती है और वो फंतासी थी अशोक के सामने विशाल से छोड़ना... और अपने इसी फंतासी को पूरा करने के लिए अपना अगला देव खेलने के लिए अलका तैयार थी...

वो विशल को धक्का मरते हुवे खुद से अलग करती है और उसे ललकारते हुवे कहती है..

अलका- बहुत मर्दानगी है न तेरे में अपने बाप के सामने अपने माँ को छोड़ने की तो ठीक है ले फैला दिए मैंने अपनी तंग... दिखा अपनी मर्दानगी और छोड़ दिखा अपनी मर्दानगी मादरचोद...






इतना कह के अलका अपनी तने खोल लेती है... ये नज़ारा किसी नामर्द के लिंग में भी तनाव ला देने वाला था.. जहां एक माँ एक बेटे को उसके बाप के सामने छोड़ने के लिए अपनी टंगे खोल के ललकार रही thi....jhan बीवी को अब इस बात का कोई दर नहीं था की बगल में उसका पति लेता हुआ है और वो फिर भी अपनी छूट खोले बेटे का लुंड लेने को तैयार है....
 
पेज 35 (Part-B)

अलका के इस कामुक अंदाज़ से विशाल के बदन में खून डबल स्पीड में दौड़ने लगती है उन दू के शरीर की गर्मी से कमरे का तापमान भी बढ़ गया था… अलका के हवा में लहरा रहे तंग को विशाल उसके जांघो से पकड़ के अपनी और खींच लेता है और अपना लुंड अलका के छूट से भिड़ा देता है..





चुदाई तो इनलोगो ने पहले भी की थी और तो और कल अशोक के घर में होते हुवे भी किया था दोनों ने लेकिन आज का मंजर कुछ और hi था.. आज अशोक बगल में लेता था और विशाल अपनी माँ और उसकी बीवी को उसके सामने छोड़ रहा tha..aur इसी कमोवेश में उनकी वासना आज चरम पेट hi… रक्त का परवाह उनके रगो में दोगुने स्पीड से दौड़ने लगा था…

अपने छूट पे विशाल के लुंड का स्पर्श पा के अलका किसी नागिन की तरह मचलने लगी थी…






और खुद hi उसका लुंड पकड़ के अपने छूट में दाल लेती है.. जो विशाल को बता रहा था की उसकी माँ कितनी कामातुर है उसके लुंड को लेने के लिए… पर वो सिर्फ अपने bête के लुंड को रास्ता दिखा सकती थी उस रस्ते पे बढ़ने के लिए धक्का विशाल को hi लगाना था और वही उसके bête विशाल ने किया भी हवस और वासना के नशे में चूर अपने बाप की मौजूदगी का बिना किस डार्क इ एक hi झटके में अपना लुंड अलका के छूट में उतर देता है.. एक्चुअली उसे दर से ज्यादा एक्ससिटेमेंट मिल रही थी अशोक के होने का जिसका असर आज अलका के छूट पे होते हर प्रः में अलका देख पा रही थी..





विशाल का हर झटका इतना जोरदार था की बीएड के साथ साथ अलका की दोनों चूचिया पानी से भरे गुब्बारे की तरह हिलोरे खा रही थी… और ये हिलोरे विशाल के अंदर के जानवर को और ज्यादा जगा रही थी वो पुरे ताक़त से अलका को छोड़ने लगा था उसका झटका इतना ज्यादा जोरदार था की अलका की चीख hi निकल गयी थी जिसे दबाने के लिए विशाल अलका की पंतय उसके मुँह में दाल के उसकी गूंज उसके मुँह में hi दबा देता है…





अलका की चीख उसके गले में गगगगगग कर के डाब जाती है.. कितना अजीब है न ये पंतय कभी अलका के छूट से बह रहे पानी को रोकती है तो आज वही पंतय उसके मुँह से आने वाले आवाज़ को दबाये बैठी थी…

अलका- ggggggggggguuuuuuuuu gggggggggggggggguuuuu

और विशाल अलका के चुचिओ को मसलते हुवे उसे पुरे जोश में चुदाई जारी रखे हुवे था…

विशाल अलका के पेअर को पुरे हवा में उठा देता है जिस से उसकी गांड भी ऊपर को उठ जाती है और उसकी कमर हवा में होती है यानि अलका अब पीठ और कंधे के बल थी कमर और उस से निचे का हिस्सा उसकी गांड सही हवा में था और विशाल पुरे ताक़त से अलका को पेले जा रहा था अलका उसके हर धक्के से और मुँह में पंतय होने से मुँह बंद होने के कारण वो इतना ज्यादा मचलने लगी थी की उसने पुरे डैम से पंतय को थूक के बहार फ़ेंक दिया और तेज तेज हफ्ते हुवे सिसकारने लगती है…






अलका- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaah मुँह बंद क्यों कर दिया था सेल मरेगा क्या uuuuuuuuuuuuhhhhhhhhhhhhh मेरी साँस hi बंद हो गयी थी…

विशाल अपनी माँ को चूमते हुवे उसे छोड़ना जारी रखता है और अलका भी अब अपनी गांड और कमर उठा उठा के विशाल का लुंड अपने गीली छूट में पूरा पूरा ले रही थी

विशाल- aaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh माआआआ क्या मखमली छूट है तेरी और ये कितनी गरम हो रही है मनो लुंड hi पिघला देगी….

अलका- तू hi है मेरे अंदर के भड़कते आग का कारन और आज ये आग इतना भड़का दिया की देख आज तेरे बाप के सामने अपनी टंगे फैला के तुझसे चुद रही ho….aaaaaaaaaaaahhhhhhhhh….. छोड़ ऐसे hi कोई कसार मत चूर्ण अपने बाप की बीवी के बुर को फाड़ने में ऐसे hi छोड़ maderchod….chod अपनी मम्मा kkkkkkkkkkkkkooooooooo फाड् दे उसकी छूट घुस जा इसमें






विशाल- तू माँ नहीं रंडी हो गयी है अब साली अलका अपने पति के सामने bête से छोड़ने के लियेचूट खोल दिए है तूने… uuuuuuuuuuuuuuuuuuuuffffffffffffff एक दिन अशोक के जागते हुवे छोडूंगा उसके सामने तुझे मेरी रंडी माआ

अलका- छोड़ लेना जैसे और जब मन करे पर अभी मेरी आग शांत कर इस भड़वे के जागने से पहले uuuuuuuuuuuuuuuuuufffffffffffffffffffffff छोड़ छोड़ छोड़ विशाल छोड़ अपनी माँ को

विशाल- चिल्ला क्यों रही है चिनार जग जायेगा तेरा खसम मादरचोद….

अलका- जागने दे देख लेगा उसके bête को उसकी बीवी को छोड़ते हुवे uuuuuuuuuuffffffffffff देखो अशोक तुम्हारा बीटा ुम्हारे सामने तुम्हारी बीवी को छोड़ रहा है…. और तुम सो रहे हो …..

विशाल अपनी माँ की बाटे सुन के पुरे जोश में आ जाता है और अलका की चुदाई की पिस्टन की तरह उसके छूट में लुंड दाल के करने लगता है

विशाल- उफ्फ्फफ्फ्फ़ maaaaaaaaaaaa क्या कर रही हो जागोगी क्या फिर आज तू bête के सतह पति से भी छुड़ेगी एक साथ…

अलका- hhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhaaaaaaaaaaaaaaaaayyyyyyyyyyyyyyyyeeeeeeeeeeee मैं भी तो यही चाहती तू तुम दोनों मिल के मेरा सारा रास निचोड़ लो uuuuuuuuuuuuufffffffffff देख रहे हो अशोक विशाल क्या बोल रहा है …. ये मुझे तुम्हारे साथ मिलके छोड़ना चाहता है तुम्हारे पत्नी को… इतना कह के वो अशोक के लुंड को मुँह में भर के चूसने लगती है…






विशाल जनता था की अलका कामवासना में बह के किसी भी हद तक चली जाती है पर वो ये करेगी इस बात का उसे अंदाज़ा भी नहीं था उसकी गांड फैट जाती है ये देख ke….aur वो अपना लुंड निकलने को होता है… की तभी अलका उसे पलट के कहती है…

अलका- रुक मत मेरा होने वाला है जोर से धक्के लगा… छोड़ तेज़ तेज़ घुस जा मेरे बुर में छोड़ जोर जोर से …

विशाल का भी होने hi वाला था पर अलका के द्वारा अशोक के लुंड चूसने से वो दर गया था इस लिए वो डरते हुवे कहता है…. पपपपप पापा…?

Alka-tensn न ले ये नहीं जागेगा इसे नींद की गोली दी है ये सुबह hi कागेगा अब…

और इतना सुनते hi विशाल मनो बेफिक्र हो गया और और उसके अंदर का जानवर जो कही न कहीअपने बाप के दर से सामने नहीं आ रहा था ो आज़ाद हो चुक्का था विशाल अलका के बालो को पकड़ के अपनी और खींचता है जिस से उसकी चीख निकल पड़ती है..






और फिर विशाल बड़े hi बेरहमी से अलका के छूट में अपना लुंड पेले लगता है…

विशाल- आआअह्ह्ह्हह साली तब से नखरे कर रही थी… बता नहीं सकती थी अब देख तेरी छूट का कचूमर निकलता हु…

अलका- निकल न मेरे bête फाड़ दे अपनी माँ की छूट aaaaaaaaaahhhhhh छोड़ ऐसे hi जोर जोर से

दोनों की चुदाई में घंटा कब बीत गया पता hi नहीं चला अलका के साथ विशाल का भी लुंड अब जवाब देने वाला था… अलका को इस एक घंटे में विशाल ने इतने बुरे तरीके से छोड़ा था की उसके चेहरे का मकूप कबका धूल चुक्का था बाल खींच खींच के चुदाई करने सेउसके आँखों से बहते आंसू उसके चेहरे पे काजल फैला दी थी… उसके चेहरे और शरीर का इतना बुराहाल करने के बाद भी विशाल का मन नहीं भरा था की वो इस क़दर बेरहमी से अलका के छूट में लुंड तेज़ी से पेल रहा था….

विशाल- मा मेरा होने वाला है….

अलका मेरा भी bête बस छोड़ ऐसे hi अंदर hi निकल दे अपनी गर्मी उउउउउउउउउफ्फ्फ्फ़

और इतने में hi विशाल एक तेज़ झटका मारा और दोनों माँ bête एक साथ चिल्लाते हुवे अपन अपन पानी बहाने लगते है…. विशाल अपना पूरा मक्खन से अलका के छूट को भर देता है…

लुंड के बहार निकलते hi एक तेज़ धार अलका के छूट से निकल के उसके गांड से होते हुवे चादर पे फैलने लगती है






विशाल अलका क ेके ऊपर से उतर के साइड में लेट के हाफने लगता hai…alka भी गहरी सांसे भरते हुवे हाफने लगती है…

अलका- aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhh मजा आ गया

विशाल- मजा क्यों इतने से हो गया क्या आज?

अलका- एक राउंड में तेरी माँ अक खान होता….? है तुझे पता तो है…. तू अपने आप को तैयार कर ले थक न जाये कही ..

अलका की नज़र जब बशीत पे जाती है तो वहां सके छूट से निकला उसका और उसके bête का पानी पूरा फ़ैल गया था जिसे देख के अलका का जीभ अनायास hi बहार आ जाता है और वो झुक के चादर पे फैले पानी को चाटने लगती है…






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वो विशाल को देखते हुवे कहती है..

अलका- तेरा पानी कितना गधा है.. अउ रेज hi बिना कंडोम के मेरे अंदर अपना पानी भर देता है किसी दिन मुझे माँ मत बना देना … अपने hi bête की बचे की माँ न बन जाऊ uuuuuuuuuuuufffffffffffffffffffff ये गधा क्रीमममममम..

विशाल- क्या सच में तू मेरे बचे की माँ बन सकती है?

अलका- और नहीं तो क्या… तू क्या सच में मेरी गॉड भरना चाहता है??/

विशाल- हाँ क्यों नहीं…

अलका- फिर मेरी छूट नहीं मिलेगी छोड़ने के liye….aur मैं सबको क्या बताउंगी किसका बचा है??

विशाल- ये तो सोचा hi नहीं…

अलका- फिर कुछ सोच भी लिया कर उत्साहित होए से पहले…

और फिर अलका पूरा चादर का पानी चाट कर जाती है और फिर अपने गांड पे थपड मरते हुवे उठ कड़ी होती है..






विशाल- खान जा रही हो माँ…

अलका- सुसु आयी है कर के आए जाऊ…

विशाल- एक मं रुको और वो बीएड से उठता है और अलका को वही जमीन पे पटक के उसके छूट पे अपना मुँह लगा देता hai..alka उसके इस हरकत से छटपटाने लगती है






अभी अभी झड़ने से उसकी छूट कुछ ज्यादा से सेंसिटिव हो गयी थी और उसके ऊपर विशाल के जीभ का स्पर्श से वो मचलने लगती है

अलका- चोर दे क्या कर रहा है पेशाब लगी है बड़े जोर से हैट जा..

विशाल- तो मूत न मेरी रानी तेरा मूत hi तो पिने के लिए चाट रहा हु टेरेछूट को.. आज तेरे छूट से निकलता ेके क बून्द पि जाऊंगा … मूत जल्दी से

अलका- क्या कह रहा है पागल हो गया है क्या??? जल्दी हैट अब मेरे से नहीं रुका जायेगा…

पर विषला उसे चोरता नहीं है उल्टा उसके छूट के साथ चुचिओ के साथ भी खेलवाड़ करने लगता है.. और अलका से बर्दाश्त नहीं होता और वोट क तेज़ धार अपने bête विशाल के मुँह पे दे मरती है..






पेशाब का धार इतना जोरदार था की अगले hi पल विशाल के मुँह से बहार गिरने लगता hai..aur अलका विशाल का सर पकड़ के अपने छूट पे दबाने लगती है और कामवासना में बह के अनबषानाब बकने लगती है

अलका- ले पि मादरचोद अपनी माँ अक मूत पीना छह रहा थान ा पीईईई बचपन में मेरे चुचो से दूध पिया था आज मेरे छूट का मूत पीई aaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhh कितना हरामी ह गया है रे तू… अपनी माँ के बुर के निचे बेथ के उसका मूत पि रहा है…

विशाल- टब hi काम थोड़े न है रंडी अपने bête के मु पे मूत रही है… पर कुछ भी बोल माँ तेरी पेशाब में भी बड़ा सवाद है एक डैम तेरी तरह namkinnnnnnnnnnnnnnnnn






इतना कह के विशाल अलका के छूट से निकलते पानी की ेके क बून्द चाट जाट है.. अलका भी अपनी गड आगे पीछे कर के विशाल के मुँह पे अपनी छूट रगड़ने लगती है…

अलका- ooooooooooohhhhhhhhhhhh हो गया अब तो चोर दे bête अब क्या खा जायेगा अपनी माँ के छूट को …? इसका सारा पानी तो तू पहले hi निचोड़ के पि गया है….

अलका विशाल के गिरफ्त से आज़ाद हो के कड़ी हो उठती है और जोर जोर से हाफने लगती है..

अलका- तू क्या पागल है क्या क्या करवा रहा है छःहःहःहीीीी और मैं भी …..

विशाल- क्या हुआ माँ मैं भी तुम्हे अपनी मूत पीला चुक्का हु और तब तो तू गटागट निगल गयी थी…

अलका- हाँ पर फिर भी चल चोर….

विशाल- माँ

अलका- हाँ बोल

विशाल- याद है लास्ट टाइम तुम ने मुझे वैलेंटाइन पे कुछ दिया था पर इसी अशोक के वजह से मैं अपना वो गिफ्ट नहीं ले पाया था…

अलका- हाँ याद है तो….?

विशाल- तो आज इसी अशोक के सामने मैं अणि वो गिफ्ट खोलूंगा…

अलका विशाल के इस बात से सिहर सी जाती है उसके छूट के सात साथ गांड में भी झुनझुनी समां जाती है…

अलका- विशु ये तू क्या कह रहा है,, पता है अभी पॉसिबल नहीं है..

विशाल- नहीं मुझे आज तेरी ये गांड चाइये किसी भी हालत में

अलका- विशाल जिद मत कर bête अशोक कही जायेगा तब फाड़ लेना मेरी गांड पार आज नहीं हो पायेगा samjh…ashok जग गया तो मुसीबत हो जाएगी…

विशाल- नहीं जो होगा होने दो पर मुझे आज ये गांड chaiye..ye बात विशाल अलका कैग एंड को मसलते हुवे कहता hai…aur धीरे से अपनी एक ऊँगली उसके गांड में पेल देता है..

अलका जो अभी तक दरी हूत hi गांड के चुदाई से विशाल के ऊँगली करने से उसके गांड की झुरझुरी उसके गले को सूखने लगती है.. वो थूक के बड़े बड़े घुट अपने गले से उतरने लगती है…






अलका- aaaaaaauuuuuuuuuchhhhhhhhhhhhh मान जा हइशा अपने जिद पे क्यों लगा रहता है

विशाल- तो मान जाया कर न क्यों टब hi जिद करती है… वैसे मान जाएगी तो माँ समझ के छोडूंगा वर्ण रंडी समझ के तेरी गांड फाड़ूंगा… ये कहते हुवे इस बार विशाल उसके निप्पल को चुटकियो से मसल देता hai…jiske दर्द और करंट से अलका तिलमिला जाती है…






विशाल के द्वारा निप्पल के मसले जाने से अलका के मुँह से दर्द भरी सिसक फुट पड़ती है…

Alka-aaaaaaaaaaaauuuuuuuuuucccc ये तू क्या कर रहा है… ??? कभी गांड में ऊँगली तो कभी निप्पल मसल रहा ha….uuuuuuuuuuufffffffffff मेरे अंदर आग भड़का रहा है tu…thik है लेकिन छोड़ना है तो रंडी की तरह hi छोड़ना बिना किसी रहें ke..mujhe धीरे धीरे में मजा नहीं आता मैं रौ पर तू रुकना नहीं फिर चाहे तेरा बाप भी जग jaye…ab जो होगा देखा जायेगा… ये कह के अलका आगे बढ़ जाती है….

विशाल- अब खान जा रही हो माँ …..?

पर अलका विशाल के बात का कोई जवाब नहीं देती और डेस्क पे पड़े शारब के बोतल उठा ले उस से 2 मोठे मोठे पेग बना क ीक साँस में जातक जाती है…

Vishal-kya हुआ माँ इतनी शराब क्यों पि रही हो अब???

शराब का नशा और चुदाई की खुमारी अलका के चेहरे को और कामुक बना रहा था… उसके आँखों में तैरते वासना के लाल डोरे साफ़ साफ़ देखे जा ाकते थे…






अलका गिलास हाथ में लिए विशाल की तरफ देखती है और कहती है

अलका- तेरे से गांड फड़वन के लिए खुद को तैयार कर रही हूँ..

अलका का चेहरा सच में बहुत कामुक दिख रहा था और साथ दिख रहा था गांड में मोठे सरिया के जाने का दर….

विशाल के चेहरे पे जीत और खुसी का भाव आ जाता है जिसे देख अलका उसे टोकती है और कहती है लेकिन मेरी एक शर्त है…

विशाल- अब क्या शर्त…..??? जल्दी बोलो मुझे सब मंजूर है…

अलका- पहले सुन तो ले ..

विषहाल- हाँ ok बोलो

अलका सामने रखे चेयर पे बैठ जाती है और अपनी टंगे फैला लेती है और विशाल को दिखते हुवे अपना छूट मसलते हुवे कहती है






अलका –तुझे मेरे इस छूट में लगे आग को शांत करना पड़ेगा तभी तुझे इनाम में मेरी ये गांड मिलेगी वर्ण भूल जा..

विशाल- हाँ मुझे मंजूर है… तेरे गांड के लिए तो तेरी छूट का सारा पानी निचोड़ लूंगा मेरी रांड

अलका विशाल क इस जोश को देख के खुद भी जोश में आ जाती है और पास पड़े बोतल को उठा के पूरा बोतल hi मुँह में लगा लेती है और एक घुट में जितना पीई सकती थी पि जाती है और बोतल फेंक के बीएड पे चढ़ जाती है…






अलका- आज विशाल तैयार है न अपनी माँ को फिर से छोड़ने के लिए थक तो नहीं गया..… ये देख मैंने अपनी ये छूट तेरे लिए hi साफ़ किये है…. तुझे चाटने में दिक्कत नहीं होगी आज चाट मेरे बचे पनि माँ के बुर को चाट के तैयार नहीं करेगा…??? कैसी लगती है तुझे मेरी छूट ?? देख ये कितना पानी बहा रही है… आजा अपना लुंड दाल के इसका सारा पानी पि जा …







विशाल जो पास में बैठा अपनी माँ के अंदर के भड़कते आग को देख के अपना लुंड मसल रहा था वो अलका के बुलावे पे तुरंत भगा भगा चला जाता है… और जाता भी क्यों ना आज उसे उसका इनाम जो मिलने वाला था…

अलका- देख क्या रहा है आजा चाट चूस मेरे इस छूट को तेरे लिए hi टंगे खोल के लेती है तेरी ये माँ आजा मादरचोद ….

विशाल अलका को एक बार फिर से अलका को धकेल के बीएड पे लिटा देता है अलका भी बीएड पे गिर के पने पेअर खोल को अपने bête के लिए खोल देती है और विशाल भी कुछ ज्यादा hi ताक़त से अलका के छूट पे प्रहार कर देता है






विशाल अलका को इतने कास के उसके छूट को मुँह में भर के चुस्त है की अलका तड़प उठती है… वो कभी अपनी गांड उठा उठा के छूट चूसै का मजा लेती है तो ाकभी विशाल का सर अपने छूट पे दबती है तो कभी इतनी कमतर हो जाती है की खुद उसके चेहरे पे बेथ जाती है…

अलका- aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh mmmmmmmmmmaaaaaaaaaaaa हेंक है जा आज इसे घुस जा इसी में uuuuuuuuuuuuffffffffffff देखो अशोक तुम्हारा बीटा क्या कर रहा है.. और तुम सो रहे हो uuuuuuuuuuuuffffffffffffffff aaaaaaaaasssssssshooooooooookkkkkk विशाल मुझे छोड़ देगा बचाओ अपनी अलका को अशोक…. वर्ण मैं खुद भी चुद जाउंगी तुम सोते रहना…

विशाल किसी भी तरह चुदाई शुरू होने से पहले अलका के छूट का पानी काम से कामे क बार उसके छूट को चाट के निकल देना चाहता था वर्ण आज अलका का जो रूप उसे दिख रहा था वो उसपे भरी पद सकती थी… इसलिए विशाल अलका को अपने ऊपर ले लेता है और उसके छूट को पुरे शिद्दत से अपना जिब्भ अंदर दाल दाल के चूस रहा था






अलका भी जल बिन मछली की तरह विशाल के मुँह पे छटपटाते हुवे अपना गांड पटक पटक के अपने छूट अपने bête के मुँह पे रगड़ रही थी….

अलका- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh विशाल बहुत झनझनाहट हो रही है uuuuuuuuuuufffffffffffff

अपनी माँ की बात सुन के विशाल इस जलते हुवे आग में घी डालने का सोचता है और अलका की छूट में जीभ के साथ साथ अपनी दोनों ऊँगली अलका के कासी हुई गांड में दाल के अंदर बहार करने लगता है……






विशाल के तरफ से हुवे इस हमले से अलका तिलमिला जाती है और चाटहत के मरे उसके मुँह से निचे गिर जातिअ है पर विशाल रुकना नहीं चाहता था ो वापस से अलका के पैरो को खोल के उसके छूट में अपना मुँह लगा देता hai…alka जैसे hi विशाल का सर पकड़ने के लिए हाथ बढाती है की तभी विशाल उसके दोनों हाथो को पकड़ के उसे आशय बना देता है..





अलका वासना के सगाई में गोते लगाने लगती है… वो इतना ज्यादा कामुक हो जाती है की खुद अणि गांड उठा उठा के विशाल का मुँह पे मरने लगती है…

अलका- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh mmmmmmmmmmaaaaaaaaaa मैं गयी मैं पागल hi हो जाउंगी ाजजजजज uuuuuuuuuuuuuuuuuufffffffffffff कोई बचाओ मुझे इस दरिंदे से uuuuuuuuuuufffffffffff और चूस मसल मेरे दानो को मेरे बचे आआआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मम्माआ

और इस तेज़ सीत्कारी के साथ अलका अपने छूट से काम रास बहाने लगती है लेकिन विशाल अभी भी उस रास को पिने में लगा था… मनो आज उसने अलका के छूट को न छोड़ने की कसम hi खा ली हो…

अलका भी अपने छूट में हो रहे झनझनाहट से तिलमिलने लगती है… वो कैसे भी कर के विशाल के चंगुल से छूटना छह रही थी पर विशाल था की कुचौर hi सोच रखा था ..

पुरे शरीर का डैम लगा लेने के बाद भी जब ालकखुद को विशाल के चंगुल से आज़ाद नहीं करा पति और विशाल जो लगातार अलका के छूट में अपनी उंगलिया पेलने लगता है इस से अलका की छूट जो अभी अभी झड़ी थी वोट क तेज़ धार बहाने लगती है और अलका वही बीएड पे लेते लेते मूतने लगती है…






सायद ये वह अमृत थी जिसे विशाल निकलने के लिए इतनी म्हणत कर रहा था… इतना तेज़ ओर्गास्म से अलका का शरीर बिलकुल हल्का और बेजन सा हो गया था ो बस अपने सर को पकडे इस पल का आनंद ले रही थी… उसकी सांसे जो अभी उसके काबू में नहीं थी बल्कि उखड़ी हुई थी उसे वो काबू में करने की कोशिश कर रही थी…

अलका- hhhhhhhhhhayaaaaaaaaaaaaayyyyyyyyyyyyyyeeeeeeeeeeeeeeeee तूने तो जान hi निकल दी विशु मजा आ गया मेरा रोम रोम तृप्त हो गया तेरे इस आर्ट से.. uuuuuuuuuuuuuuufffffffff

अलका ने अपने सांसो पे अभी थोड़ा काबू पाया hi था की विशाल उसे बालो से पकड़ के खींचते हुवे उसका चेहरा अपने जांघो पे पटक देता है और इस से पहले की अलका कुछ समझ पति उसके मुँह में अपना लुंड पेल के उसके मुँह को छोड़ने लग जाता है…






अलका जिसकी सांसे अभी भी चढ़ी हुई थी वो इस हमले के लिए तैयार न थी पर क्या फ़र्क़ पड़ता है उसी ने तो कहा था रंडी की तरह छोड़ना… और नाब hi कहती तो विशाल उसे रंडी की तरह hi तो छोड़ता आया है….

अलका- ggggggggggggguuuuuuuu जूउउउउउ गूऊऊऊ

विशाल – हाँ ऐसे hi चूस साली कुटिया

अलका उसके जांघो को पकड़ के अपने मुँह को उसके गिरफत से आज़ाद करते हुवे जोर से खस्ने लगती है और कहती है

अलका- अरे रुक जा साँस तो लेने दे ….

विशाल अलका के बातो का कोई जवाब देना जरुरी नहीं समझता और वापस से उसका सर अपने लुंड पे दबा देते है…

विशाल- बाटे मत कर हरामजादी मुँह चलना है तो इधर चला ….. और ये कह क उसके गांड पे एक चपत लगा देता है…..

अलका फिर से बस गुगु गगग करते हुवे उसके लुंड को अपने मुँह में भर के चूसने लगती है लेकिन जब उस से साँस नहीं लिया जाता तो वो अपना हाथ विशाल के जांघो पे मरने लगती है और अपना मुँह हटाने की कोशिश करने लगती है






दर्द के मरे उसके आँखों में आंसू टेरने लगते है पर इस बात का विशाल को कोई फ़र्क़ नहीं पद रहा था… वो तो अलका को अभी और ज्यादा रगड़ने वाला था और ये तो बस सुरुवात है..

अलका जितना हटने की कोशिश करती थी विशाल उतना hi जोर से उसका सर अपने लुंड पे दबा देता था.. इस से दर्द और छटपटाहट के मरे वो खुद को चुरा के बीएड से उतर के भागने लगती है पर उसके साथ hi विशाल भी बीएड से उतर के उसके पीछे उसे पकड़ने के लिए दौड़ता है….

वो वापस से अलका को पकड़ के वही जमीं पे बिठा देता है और अपना लुंड अलका के मुँह में एक hi झटके में पूरा पेल देता है…






लुंड अलका के गले में उतर चुक्का था और अलका जो की अधमरी सी हो गयी थी जिसके सांसो पे भी इस वक़्त विशाल का कब्ज़ा था ो बस चटपटा के विशाल के लुंड के बहार निकलने का इंतजार करती hai…aur विशाल अपने लुंड को पुरे जड़ तक अलका के मुँह में भर देता है.. उसका बस चलता तो उसके लटक रहे दोनों ाँद को भी ालके के मुँह में अपने लोडे के साथ भर देता…

विशाल अलका के सर को पकड़ के उसके मुँह में hi तेज़ तेज़ झटके मरने लगता है.. और अलका की छटपटाहट भी काम होने लगती है मनो अब उसके शरीर में जान hi न बची हो.. विशाल अपनी माँ की अधमरी हालत देख के उसके मुँह से लुंड बहार निकल लेता है..






लुंड के बहार निकलते hi ढेर सारा थूक और कुघ अलका के मुँह से बहार बहने लगता hai….Alka बड़े गुस्से के भाव से विशाल को घूरती है… और विशाल उसके तरफ एक कुटिल मुस्का के साथ हसने लगता है और एक जोर का छठा अलका के गाल पे लगा देता है…

अलका- aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh रुक जा थोड़ी देर के लिए .. साँस लेने दे… मेरी साँस अटक गयी है… uuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuffffffffffff पूरा मुँह दुःख रहा है…. गाला hi फाड़ दिया तेरे लुंड ने meraaaaaaaaaaaaaaaa hayeeeeeeeeeeeeeeeeeeeee और अलका वही पीठ के बल गिरने लगती है की तभी विशाल उसके बालो से पकड़ के वापस उसे ऊपर की और खींच लेता है जिस से वो गिर तो नहीं पति बार बालो के खींचने से उसे तेज़ दर्द जरूर होता है…

अलका- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhh चोर उखड़ेगा क्या मादरचोद…..

विशाल वापस से अपने वहसि रूप में आता है और अपना लुंड फिर से अलका के मुँह में दाल के उसके मुँह को तेज़ तेज़ छोड़ने लगता है…






अलका जितना भी छूटने की कोशिश करती है विशाल उसके बालो के गिरफ्त से उसे खींच लेता tha…alka के छूट में लुंड पेलने से पहले hi विशाल ने उसे बेहाल कर दिया था….

अलका को अब इस दर्द से छूटने का एक hi तरीका सूझता है वर्ण विशाल उसके मुँह छोड़ छोड़ के hi उसकी जान निकल लेगा….

अलका- मुँह hi छोड़ेगा या छूट भी छोड़नी है…. यही अपना पानी निकल देगा तो मेरी गांड कैसे लेगा हरामजादे…

विशाल- तेरी छूट भी फाड़ूंगा और तेरी गांड भी फाड़ूंगाआज रुक साली अभी दिखता हु तुझे …

और फिर विशाल वही जमीं पे उसे घोड़ी बना के पीछे से उसके छूट में अपना लुंड पेल देता है






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अलका- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh maaaaaaaaaaaaa कितनी बार कहु एक hi बार में पूरा मत डाला कर कही भागी नहीं जा रही मैं…

विशाल- पूरा खान गया है अभी…. अभी तो आधा बहार hi है

और इतना कह के विशाल अपना लुंड अलका के छूट से बहार खींच लेता है और फिर एक जोर का करारा झटका मरता है जिस से उसका लुंड अलका के छूट के दीवारों को घिसते हुवे सिद्ध उसके बच्चेदानी को ठोकर मरने लगता है…

अलका के मुँह से एक जोर की चीख निकल जाती है वो तड़प उठती है उसकी छूट में बहुत तेज़ सेंसेशंस होने लगते है..

अलका- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh mmmmmmmmmmmmmmaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa fffffffffffffaaaaaaaaaaaaaddddddddddddddd diiiiiiiiiiiiiiyyyyyyyyyyyyyyaaaaaaaaaaaaa mmmmmmmmmmmmmmmeeeeeeeeeeerrrrrrrriiiiiiiiiiiiiiii ccccccccccccccchhhhhuuuuuuuuuuuttttttttttttt kooooookooooooooooooo

पर विशाल रुकता नै है बल्कि वो अलका के कमर को पकड़ के एक के बाद एक करारे झटके लगाना चालू रखता hai..isi पोजीशन में काफी देर अलका के छूट को छोड़ने से और चुदाई से पहले hi अलका को डिस्चार्ज कर देने से अलका का छूट अब जवाब देने लग जाता है..

अलका इन हमलो को अब बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी और वो रोई रोई सी होने लागत है…






अलका- uuuuuuuuuuuuuuiiiiiiiiiiiiiii मा धीरे धीरे कर मरे छूट में जलन होने लगी है…

विशाल- छूट में जलन हो रही तो गांड में दाल दू?

अलका- नहीं अभी नहीं अभी मुझे काम से काम से क बार और मरे छूट का रास निकल दे uuuuuuuuuuufffffffffffffff तेरे इन ठोकरों से मैं फिर से जल्दी hi ढेर हो जाउंगी…

अलका- विशु मेरे कमर में दर्द होने लगा है अब मैं और घोड़ी नहीं बन पाऊँगी तू लेट जा मैं टेट्रे ऊपर आती उन…

विशाल भी वैसा hi करता है और निचे लेट जाता है… विशाल के निचे लेटते hi अलका विशाल के ऊपर आ जाती है और अपनी दोनों टंगे विशाल के बगल में रख के विशाल के लुंड को पकड़ के अपने छूट पे घिसने लगती है…






लुंड का स्पर्श अपने छूट पे प् के अलका एक बार फिर से मचलने लगती है.. वो लुंड पे बैठ के उसे अपने छूट में उतरने से पहले इस पल का आनंद लें छह रही थी..

विशाल भी अपनी माँ को मचलता देख अपने लुंड को उसके छूट से ले के उसके गांड के छेद तक घिसने लगता hai…alka को ऐसा महसूस होने लगता है मनो कोई गरम सरिया उसके छूट और उसके गांड पे रगड़ा जा रहा हो और उसके ऊपर उसके छूट से ासीजता हुआ कामर्स जो उसके लुंड को भीगा के और विकराल बना रहा था.. अलका अभी अपने hi दुनिया में होई हुई थी की विशाल समय न गवाते हुवे अपना लुंड अलका के छूट के मुहाने पे सेट करता है और अलका के कंधे पे दबाव देते हुवे उसे अपने लोडे पे पटक देता hai…lund के अंदर घुसते hi अलका के चेहरेपे आनंद का एक भाव आता है






जो अगले पल विशाल के तेज़ धक्को से दर्द और चीख में बदलने लगता है..

Alka-aaaaaaaaaaaaahhhh ममममममअअअअ आह्ह्ह्हह्ह हाँ ऐसे hi छोड़ मुझे फाड् दे मेरी छूट विशाल uuuuuffffffffffffff कितना कड़क लुंड है तेरा मादरचोद hhhhhhhhhhhhaaaaaaaayyyyyyyeeeeeeeeeee मई मर गयी uuuuuuuuuuuffffffff ऐसे hi तेज़ तेज़ धक्के मार…

और अलका पुरे जोश में अपनी गांड आगे पीछे कर के विशाल के लुंड पे रगड़ने लगती है..






विशाल भी जहां एक और अलका के छूट में निचे से अपना लुंड पेल रहा था तो वही वो अलका के चुचिओ को भी साथ में मसल रहा था…

वृषल- ये ले साली रंडी बहुत आग है न तेरे छूट में आज सारा आग मुझे दूंगा साली चिनार…

अलका- हाँ बुझा दे मेरे खसम जैम के छोड़ अपनी इस माँ को अपनी राण बना ले फाड़ दे मेरी बुर की मई चल भी नाप अउ ऐसा छोड़ मुझे….. खूब रगड़ मुझे मेरे पति के सामने ….. तुझसे तेरी माँ अलका नहीं तेरी रखैल तेरे लुंड पे कूद रही है…. दिखा अपनी मर्दानगी… छोड़ अपने इस चिनार माँ अलका को छोड़ मादरचोद…..

अलका वासना के चरम पे थी और ऐसे में उसका उसके जुबान पे कोई कण्ट्रोल नहीं hota…wo जो मन आये बोले जा रही थी जिस से उसके bête विशाल का जोश ठंडा न पद जाये …

विशाल- uuuuuuuuuuufffffffff माँ जब तू ये सब बोलती है न मेरा जोश दोगुना हो जाता है..

अलका उसके मुँह पे एक थपड मर के कहती है….

अलका- इसलिए तो तुझे जोश दिला रही हु मादरचोद और तू जुबान चला रहा है… जोर से झटके मार मेरा निकलने वाला है छोड़ तेज़ तेज़ uuuuuuuuuuuffffffffffffff hayeyyyyyyeeeeeeeeeeeee vishaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaalllllll मैं फिर से gayi…aur इतना कहते hi अलका के छूट ने अपना बांध तोड़ दिया और वो पुरे राफ्तेर से बहने लगी थी…

एक तरफ विशाल अपनी माँ के छूट को निचोड़ लेने के फ़िराक में था तो वही अलका भी इस बार अपने से पहले विशाल के लुंड का पानी निकल देने के लिए पुरे जोश में अपनी अपनी दोनों जांघो को कास लेती है जिस वजह विशाल को उसकी छूट पहले से ज्यादा कासी हुई महसूस होने लगती है…






अलका अपना हर प्रहार इतना जोरदार कर रही थी इस बार उसका नौसिखिया बीटा उसके आगे टिक नहीं पता और वो झड़ने के बिलकुल करीब आ जाता है/….

विशाल- माँ बहुत टाइट हो रही है तेरी छूट uuuuuuuuuuuffffffffffff मेरा लुंड बहुत कैसा हुआ लग रहा है… मैं जैसे झाड़ hi जाऊंगा uuuuuuuuufffffffffff

अलका- नहीं विशु अभी नहीं मेरा भी होने hi वाला है साथ में निकलना थोड़ा कण्ट्रोल kar….uuuuuuuuuuuuuuuuuffffffffffff aaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh थोड़ा तेज़ धक्के लगा थक गया क्या??? अभी से थक गया फिर कैसे गांड मरेगा मेरी bête आआह्ह्ह आह्ह्ह्हह छोड़ तेज़ तेज़

विशाल- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh हाँ मेरी रंडी ले मेरा लुंड पूरा पूरा ले अपनी छूट में .. अभी तेरी छूट फाड़ रहा हु आगे तेरी गांड फाड़ूंगा साली chinar…..aaahhhhhhh मा मैं गया uuuuuuuuuuuffffffffffff कितनी गरम बुर है तेरी

अलका- में भी गयी रे aaaaaaaahhhhhhhhhhh अंदर मत गिरना तू कल से अंदर hi गिरा रहा है…..

पर इस से पहले की अलका उसके ऊपर से उठती विशाल वापस से उसके कंधे से दबा के अपने लुंड पे बिठा देता है…

अलका- क्या कर रहा है…. हैट उतरने de…warna फिर से अंदर hi निकल देगा और मुझे दिक्कत हो जाएगी….

विशाल- चुप साली रंडी चुप से उछलती रह aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh और तेज़ चीख के साथ वो अपनी माँ के छूट में hi अपना पानी भर देता है…

लुंड से पानी निकल जाने से विशाल की पकड़ ढीली पद जाती है और अलका बड़े तेज़ी से विशाल के लुंड को अपने छूट से निकल के उसके ऊपर से उठने लगती है लेकिन जिस से वो दर रही थी वो काम तो विशाल ने कर दिया था उसके छूट में अपना गरमा गरम पानी भर के…






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अलका जैसे hi विशाल के लुंड से उठती है एक तेज़ धार उसके छूट से बहने लगता है… अलका के छूट से उसका और विशाल का मिला जुला पानी उसके छूट से एक मूत की धार की तरह बहने लगता है…

अलका एक बार फिर से जोर जोर से हाफने लगती है और साथ hi उसके साथ विशाल का भी यही हाल था…

थोड़े टाइम बिट जाने के बाद दोनों की सांसे कण्ट्रोल में आने लगती है.. की तभी विशाल फिर से अलका के बदन से साथ खेलने लगता है वो अपना हाथ अलका के पीठ कमर उसके गांड फिर चूचिया सब पे वो अपनी हाथो को फेरने लगता है और देखते hi देखते ये हाथ फेरना बदन मसलने में बदलने लगता है..






विशाल अलका के होंठो को चूसते हुवे अपना हाथ अलका के दोनों भरी भरकम चूतड़ों में घुसते हुवे उसके छूट पे अपने हाथ फेरने लगता है…

अलका- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh uuuuuuuuuuuuuuuuuuuuummmmmmm

विशाल उंगलिया फेरते फेरते उसके छूट में अपने उंगलिओ को घुसाने लगता है और उसके होठो पे चुम्बन जारी रखता है .. अलका भी विशाल के बहो में पिघलने लगती है और अपना कमर हिला हिला के अपना में उसके उंगलिअ लेने लगती है…

अलका- uuummmmmmmmmmmm aaaaaaaaaaaaahhhhhhh

और फिर अलका अपने आप को विशाल से चुरा के जैसे hi जाने लगती है की तभी विशाल वापस से उसे पकड़ के अपने ऊपर लिटा लेता है…






अलका- चोर दे बहुत जोरो की प्यास लगी है पानी पीन ेके लिए तो जाने दे..

विशाल- मुझे भी बहुत जोरो की प्यास लगी है पर उस से ज्यादा जोर से पेशाब आ रहा है…

अलका- तो क्या अपनी माँ को अपना मूत पिलाना चाहता है..?

विशाल- पियोगी?

अलका- चल निचे बीएड गीली हो जाएगी…..

विशाल- तू चुदाई में सच में रंडी बन जाती है…

Alka-han तूने hi तो मुझे अपना रखैल बनाया है… तो रखैल का तो काम hi है अपने मालिक को खुश करना… ये कहते हुवे वो विशाल के लोडे की आगे बेथ जाती है…

Vishal-rakhail तो तू सच में बहुत कमल की है मेरी चिनार रंडी अलका…. और ये कहते हुवे उसके मुँह पे एक थप्पड़ मार देता है..






अलका- यस हिट में हिट में हार्ड डैडी…. मुझे अपना मूत पिलाओ मेरे मालिक… प्लस डैडी…

एक मर्द को अपने शब्दों के जाल में कैसे फ़साना है इस आर्ट की जादूगरनी थी alka…aur वो अपने शब्दों की जाल हर बार की तरह इस बार फिर से विशाल पे चलने लगी थी…

अलका- चल मूत अपनी माँ के मुँह में भर दे अपने लोडे का पानी अपने इस रखैल के मुँह में ले मैंने मुँह खोल दिया aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa….. निकल अपना गरमा गरम पानी बहुत प्यासी है तेरी माँ… तुमने छोड़ छोड़ के सारा पानी निचोड़ लिया है अब तू hi फिर से भीगा दे अपने पानी से… मूत चल आजा






विशाल जो पहले से hi पेशाब करने के लिए उसका लुंड फटा जा रहा था अलका के इस जादुई शब्दों के सामने वो ज्यादा देर टिक नहीं पाटा और अलका के चेहरे के ऊपर अपने पेशाब का धार चोर्ने लगता है…

अलका इस वक़्त विशाल की माँ या कोई घरेलु औरत नहीं बल्कि सच में किसी बाजारू रंडी लग रही thi…uske चेहरे पे हवस और वासना के साथ बेशर्मी विशाल के मूत से ज्यादा चालक रही थी…. विशाल के लुंड के धार का सारा पानी अलका निगल चुकी थी.. लेकिन जो कुछ बुँदे उसके मुँह से जमीन पे गिरी थी अलका उसे भी चाट चाट के पिने लग जाती है…






अपनी माँ अक ये रांड वाला रूप देख के विशाल भी जमीं पे hi बचे खुचे पेशाब को गिराने लगता है और उसकी चनर माँ अलका किसी कुटिया की तरह उसे जुबान से चाट चाट के पिने लग जाती है…. देखते hi देखते अलका अगले hi पल पूरा फ्लोर का मूत अपने गले में उतर चुकी थी और किसी वैश्य की तरह विशाल को देख के मुस्कुराने लगती है और कहती है…

अलका- मेरी प्यास तो तेरे पेशाब ने hi बुझा दी…

विशाल- बिलकुल पागल हो जाती है तू छोड़ने के लिए…

अलका- हाँ तो क्या बुराई है… मुझे तुझसे खुल के छोड़ना पसंद है.. बिना किसी बंदिश ke…bina किसी शर्म ke….main अपनी साडी फंतासी तेरे साथ पूरा करना चाहती hunnn…fir उसके लिए तो अभी इस बंद कमरे के अंदर हंट ु कहेगा तो तो खुलेआम तेरी रखैल बनने को तैयार है ये तेरी माँ अलका.. तेरे इस लोटे से लोडे ने मुझे अपना गुलाम बना लिया है vishu..jiske लिए मैं कुछ भी कर सकती hun….ye कहते हुवे अलका विशाल के लुंड को मुँह में भर लेती है…

विशाल भी अपना लुंड अलका के मुँह में पेल के अपने मुरझाये लुंड से hi अलका के मुँह छोड़ने लग जाता है… पर अलका के मुँह में वो जादू था की विशाल का मुरझाया लुंड भी ज्यादा देर तक मुरझाया न रह सका और अलका के मुँह के गर्माहा में hi अंगड़ाई लेने लगा था.. दोनों माँ bête इतने कामातुर हॉग ए थे की जहां अलका पूरा का पूरा लुंड निगल लेना चाहती थी तो वही उसका बीटा विशाल भी मनो अपना लुंड अलका के गले से भी निचे जहां तक वो पहुंच सके वहां तक उतर देना छह रहा tha…wo अलका के बालो को पकड़ के झटके मरने लगता है.. और जैसे hi विशाल अपना लोड अलका के मुँह से बहार खींचता है अलका के मुँह से ढेर सारा लार और कुघ एक साथ बहार गिरने लगता है जो अलका क ेके मुँह से गिरके उसके चौड़ी छतियो से होते हुवे उसके नाभि फिर उसकी छूट को भिगो रही थी..






अलका के इतने कामुक चेहरे को देख के विशाल का हाथ अनायास hi अलका के चेहरे पे चल जाता है और जोरदार थप्पड़ उसके गाल पे जड़ देता hai..jiski आवाज़ कमरे में गूंज उठती hai..use इस बात की जरा भी परवाह नहीं थी की वो जिस औरत को मार मार के छोड़ रहा है उसका पति वही बगल में काफी देर से सोया हुआ था जो अब कभी भी जग सकता था…

अलका- ओने मोरे… हिट में हार्ड डैडी जोर से मार

विशाल फिर से एक के बाद एक 3-4 थप्पस अलका के गाल पे जड़ देता है.. जिसका दर्द अलका के आँखों से आंसू बन के चालक पड़ता है.. पर अलका को इस से भी ज्यादा हार्ड और रफ़ बनने की ख्वाईश थी…

अलका- क्या हुआ मार न लाल कर दे मेरे इस गाल को… मेरे इन चुचिओ को को मसल दे मार मुझे मादरचोद मार

विशाल- साली रंडी तुझे दर्द नहीं होता क्या पूरा गाल लाल हो गया और तुझे और जोर का चाइये??

अलका- हाँ और जोर का चाइये हिट में डैडी हिट में हार्ड…

पर विशाल अलका को मरने की जगह उसके होंठो को चूमने लग जाता है… अलका भी विशाल को खींच के वही निचे बिठा देती है और खुद उसके गॉड में बेथ के उसके होंठो को बहुत बुरी तरह चूसने लगती है






काफी देर इ दूसरे को चूमने के बाद दोनों एक बार फिर से तैयार हो चुके थे एक दूसरे के भीतर फिर से समां जाने के लिए….

ये पूरा अपडेट 3 part में लिखा है मैंने ये उसका 2ंद part है नेक्स्ट और फाइनल part जल्दी hi अपडेट हो जायेगा.. तब तक के लिए इसे एन्जॉय करे...
 
यार जब अपडेट में थोड़ी डिले करो तो लोग कमेंट करने लगते है स्टोरी बंद हो गया... अपडेट दो... ेट्स ेट्स और जब रेगुलर अपडेट देने लगता हु तो कोई कमेंट या फीडबैक नहीं मिलता... अगर ऐसा है तो ठीक है अब से रेगुलर न दे के मैं भी महीने में एक अपडेट डाला करूँगा... फालतू में टाइम एंड एनर्जी वास्ते कर रहा हु.. रियली डिसअप्पोइंटेड विथ यू गाइस...
 
तब क्लोज करते हो लॉगआउट हो जायेगा... फिर साइट ओपन करोगे तो लॉगिन करना पड़ेगा
 
Don't वोर्री यहां ताका मज़ा आया है तो आगे भी आएगा
 
मैं खुद हर बार लॉगिन करता हु ों माय लैपटॉप और मोबाइल
 
Episode 35,Part-3 अलका के गांड का उद्घाटन



अशोक के घर में उसके hi बीवी bête के बिच एक तरह का गृहयुद्ध चिड़ा हुआ था… जिसमे ना तो उसकी बीवी अलका और न hi उसका बीटा विशाल हथियार डालने को तैयार tha..pure कमरे में घमसान मचा हुआ था अलका विशाल की गॉड में बैठ के उसे पागलो की तरह चुम रही थी.. लगातार विशाल के गॉड में बेथ के अपने गांड को घिसने से अलका की छूटे क बार फिर से पनियाने लगती है.. और उसे छूट की चिकनाहट से विशाल के लुंड में भी तनाव आना शुरू हो जाता है.. ये एक संकेत था की दोनों माँ bête एक बार फिर से तैयार हो रहे है…









अलका किश करते करते एक बार फिर से इतना बहकने लगती है की अभी तक जो वो विशाल के गॉड में बेथ के उसके होंठो को चुम रही थी वही अब वो विशाल को धकेल के लिटा देती है और उसपे हावी होते हुवे उसके लुंड को मसलने लगती है और साथ hi साथ उसके होंठो को चूमना तो चोरटी hi नहीं…

अलका- कितना जान है रे तेरे इस लोडे में देख कितनी सख्ती से फिर से खड़ा हो गया मेरे अंदर जाने के लिए…

विशाल- तू चीज hi ऐसी है माँ तुझे देख के तो किसी का भी लुंड खड़ा हो जाये…

अलका- ाचा किसी का भी….? ये कहते हुवे अलका विशाल के लुंड को जोर से दबा देती है

विशाल- हाँ किसी का भी मेरी चिनार माँ…

अलका- फिर तैयार है न इस चिनार को फिर से छोड़ने के लिए…

विशाल- हमेशा तैयार…

अलका इस बार विशाल के लुंड के साथ साथ उसके बॉल्स को भी कास के भींच देती है…









विशाल दर्द के मरे चीख पड़ता है…

विशाल- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh साली रंडी क्या कर रही है….

अलका- क्यों दर्द हुआ ….? और जो तू मुझे देता है उसका कभी सोचा है… ये कहते हुवे एक बार फिर से उसका लुंड अपने मुँह में भर लेती है और साथ hi अपनी गांड विशाल के मुँह की तरफ कर देती है जिसका मतलब विशाल को अचे से पता था की उसे अब क्या करना है….









अलका- aaaaaaaahhhhhhhhhhhh हाँ ऐसे hi चाट बहुत ाचा लगता है जब तू अपनी जुबान मेरे दानो पे फेरता है aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh mmmmmmmmaaaaaaaaaaaaa बस bête ऐसे hi छत्ता reh….itna कह के फिर से विशाल का लुंड मुँह में भर लेती है और उसे चूसना सुरु कर देती है…

ये लुंड और छूट के चूसै और चटाई का सिलसिला काफी देर तक यूँ hi चलता रहता hai…ki विशाल अलका को उठा के घोड़ी बना देता है और अपना मुँह उसके गांड के छेद पे लगा के चाटने lagta..apne गांड में विशाल के जुबान का एहसास पाते hi अलका मदमस्त होने लगती है..

विशाल अब अपना लुंड डालने के लिए तैयार था और वो जैसे hi अलका कैग एंड के भूरी तंग छेद पे अपना लुंड का टोपा सताता है अलका का पूरा बदन सिहर जाता है.. आज पहली बार वो विशाल का लुंड अपने गांड में ले रही थी वोग एंड जिसे कभी उसने अपने पति को भी चुने नै दिया था.. इस एहसास मात्रा से उसका शरीर गुदगुदी से भर जाता है.. लेकिन इस से पहले विशाल कोई हरकत करता अलका उसे रोक देती है…

Alka-pahle छूट में दो चार धक्के लगा उसके पानी से लुंड गिला कर ले अचे से और गांड में भी लगा देना तब जाने में आससनी hogi…aur यहां नहीं ऊपर वाले कमरे में षाले है.. तेरा लुंड मेरी ये गांड झेल भी पायेगी या नहीं ऊपर से अशोक के सोये काफी समय हो गया है कही हमारे आवाज़ से वो जग न जाये…

ये कह के अलका जैसे hi उठने को होती है की विशाल एक डैम से अपना लुंड अलका के छूट में भर देता hai…chut के गिला होने से और काफी देर से विशाल के साथ चुदाई करने से लुंड काफी आसानी से अंदर चला जाता है लेकिन इस अचानक के हमले से अलका को एक दर्द का एहसास भी होता है









अलका- aaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh ममममममममअअअअअअ मररररर dddddaaaaaaaaaaalllllllaaaaaa कमीने neeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeee

विशाल- अभी खान मारा है मेरी रानी अभी तो तेरी असली चुदाई होनी है…

अलका- छोड़ न किसने रोका है तुझे छोड़ अचे से aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh फाड् दे मेरी छूट …… aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh mmmmmmmmmmmaaaaaaaaa मर धक्के जोर जोर से…

विशाल इसी पोजीशन में अलका को थोड़ी देर तक छोड़ता रहता है….. अलका का छूट का पानी और विशाल के लुंड के धक्को से पूरा कर्मा फच फच के आवाज़ से गूंज रहा था… विशाल लुंड के साथ साथ एक दो ऊँगली भी अलका के छूट में दाल देता है और अपनी माँ अलका के छूट के पानी से साणे ऊँगली को निकल के वापस अलका कैग एंड में दाल के उसके गांड को उंगलिओ से छोड़ने लगता है…

अभी अलका लुंड के साथ साथ ऊँगली के डालने से सिहर उठती है और वो इस हमले से उबार भी नहीं पति की विशाल की ूँगी अपने टाइट गांड में घुसता पा के उसका पूरा रोंगटे खड़ा होने लगता है… ऊँगली थी जो अंदर जा hi नहीं रही थी इतनी कासी हुई गांड थी….

अलका सोच में दुब जाती है ऊँगली जब झेल नहीं पा रही हु फिर इसका लुंड कैसे झेलूंगी….

विशाल जैसे तैसे कर के ऊँगली अलका कैग एंड में पेल hi देता है और आगे झुक के अलका के पीठ और गार्डन को चूमने लगता है… एक साथ इतने सरे प्रहार को अलका झेल नहीं पाती और एक बार फिर झड़ने के करीब आ जाती है…

अलका- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh मर तेज़ झटके थोड़ा जोर से uuuuuuuuuuffffffffffff मैं फिर से गयी विशु पूरा छूट निचोड़ लिया तूने मेरा uuuuuuuuuuuuiiiiiiiiiiii maaaaaaaaaaaaaaaa









और ऐसे hi चीखते हुवे अलका तेज़ झटके कसे साथ विशाल के लुंड को अपने छूट से निकल लेती हाईल ुण्ड के निकलते hi छूट से एक पतली धार सिद्ध विशाल के लुंड पे गिरने लगती है जो की अलका का ओर्गास्म था….

ये आज रात में 4-5 बार था जब अलका के छूट ने अपना पानी बहाया था… अभी वो अपने सांसो पे काबू करने hi लगती है की विशाल वापस से लुंड दाल के छोड़ने लगता है..

एक hi रात में विशाल ने अलका के छूट का कबाड़ा बना दिया था और उसे 5 बार चरमसुख का आनंद दे दिया था… लेकिन अभी मंजिल दूर थी जहां अलका विशाल के लुंड से पूरी तरह तृप्त हो गयी थी तो वही विशाल आज अलका के गाने में अपना लुंड पेलने के लिए उत्साहित हो रहा था….

दोनों माँ bête पसीने में बिलकुल लथपथ हो गए थे पर कामवासना में लिप्त इन दोनों को किसी बात की कोई परवाह नहीं थी बस परवह थी तो अपने कामाग्नि के शांत होने की….







जल्दी hi अलका के चेहरे पे जो चरमसुख और चुदाई का संतुष्टि था वो दर्द और जलन में बदलने लगा tha..vishal ने सच में उसके छूट को निचोड़ लिया था..

अलका की छूट से मनो सारा पानी बह गया था और उसकी बुर सुन पद गयी हो.. और विशाल के लुंड के हर झटके उसके छूट के अंदर के मांस को कुरेद रही thi…jiski जलन से अलका छटपटाने लगती hai..aur बड़े मरे हालत में कहती है..

अलका- चोर दे चोर दे bête और कितना छोड़ेगा मेरे छूट में अब पानी यही बचा सारा निचोड़ लिया तूने uuuuuuuuuuuuuuuuuffffffffffffffff मैं मर गयी …..मेरे छूट में बहुत जलन हो रही है तू मेरी गांड मार ले अब मैं नहीं रोकूंगी पर मेरी छूट को चोर दे….

फाइनली विशाल ने अलका को इतना मजबूर कर दिया की अलका खुद अपनी गांड विशाल को सौपने को राजी हो गयी……

विशाल भी अपनी जीत महसूस करते हुवे अलका को चोरड एटा hai…chut से लुंड निकलते hi अलका एक बार को बिस्तर पे बेजान गिर जाती है….

अलका अभी बेजान सी पड़ी अपनी हिम्मत जूता hi रही थी की विशाल उसके गले पे थप्पड़ मरने लगता है…









विशाल- तुझे सोने को किसने खा साली रांड चल उठ हरामजादी चिनार…

अलका- सो नहीं रही हु… जान नहीं बची मेरे अंदर दो मिंट साँस लेने दे…

पर विशाल उसपे कोई तरस खाने की जगह एक जोरदार थप्पड़ उसके गाल पे जड़ देता hai…par अलका के शरीर में कोई खास हरकत न देख उसके मुँह में अपना अंगूठा दाल देता है जिसे अलका विशाल के लुंड की तरह चूसने लगती है…. वो फिर अंगूठा निकलता है और एक जोर का थप्पड़ लगता है और फिर अङ्गूठा दाल के अलका से चुसवाते है…









विशाल- बहाना बना रही है साली चिनार… आज तेरा कोई बहाना नहीं चलेगा आज मैं तेरी गांड में अपना लुंड दाल के रहूँगा…. और फिर दो कहते और लगा देता है…

अलका का पूरा चेहरा उसके छतो से लाल हो चुक्का था… कई घंटो से छोड़ने के वजह से बदन पहले hi थक्का हुआ हुआ था उस के ऊपर विशाल के ये जुल्म.. पर अलका की जिस्म की भूख मनो ये सब बर्दाश्त करने को तैयार थी वो हर चाट ेके बदले एक कामुक मुस्कान अपने चेहरे पे बिखेर देती है और बार अंगूठे को पुरे शिद्दत से विशाल के लुंड की तरह चूस रही थी...

Alka-aaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhh तेरा ये अंगूठा भी किसी लुंड की तरह है एक डैम सख्त और मोटा…. और अंदर दाल न …aaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh

विशाल के अंदर भी अपनी माँ अलका के इस रंडी वाले रूप को देख हवस बढ़ने लगता है..

विशाल- खुद से चलेगी या उठा के ले चालू???

अलका- उठा ले

विशाल- उठा के ले जाऊंगा तो छोड़ते हुवे ले जाऊंगा…

अलका- जो मन करे कर मैं तेरी हूँ ये जिस्म तेरा है ये छूट तेरे लिए है और आज से ये गांड भी हो जाएगी uuuuuuuuuuuuuuufffffffffffffffff विशु आराम से bête मुझे बहुत्त दर लग रहा है तेरे इस मोठे लुंड को कैसे ले पाऊँगी…

विशाल अलका को गॉड में एक hi झटके में उठा लेता है और ऊपर के कमरे की तरफ जाने लगता है..









अलका जैसी 5.8फट की औरत को विशाल ने एक hi झटके में अपने गॉड में उठा लिया था… उसकी पतली कमर मनो विशाल के गिरफ्त में आ के खो गयी हो.. लेकिन उसकी बड़ी बड़ी मटके जैसी चूतड़ पसीने में कुछ ज्यादा hi चमक रहे थे…

विशाल अलका को उठा के अपने घर के फर्स्ट फ्लोर में बने गेस्ट रूम में ले आता है… जहां वो आराम से अलका के एंड के छेद को खोल सकता था… कमरे में आते hi वो अलका को जमीं पे खड़ा करता है पर अलका उसे चोरटी नहीं है बल्कि उसे चूमे जा रही थी… यान यूँ कहो वो अपने लिए नेक्स्ट चुदाई के लिए विशाल से समय चुरा रही थी… और काफी देर चूमने के बाद वो विशाल के गोदी से उतर जाती hai..god से उतारते hi उसके पेअर लड़खड़ जाते है और वो गिरने को होती है.. मनो उसके पैरो में जान hi न हूँ.. और दूसरी तरफ उसकी छूट जो रुकने का मनो नाम hi नहीं ले रही थी उसके छूट से एक पतली सी धार बह रही थी मनो उसके छूट से कोई धागा लटका हो









विह्सल- रेडी हो मेरी जान…?

अलका- हमेशा

विशाल- तो चल खोल अपनी गांड…. चल घोड़ी बन जा अब मेरी रंडी अलका

अलका भी बिना देरी किये घोड़ी बन जाती hai….alka की बड़ी सी छोड़ी और कासी हुई गांड उसके निचे उसके छूट से निकलती धार एक बहुत hi कामुक दृश्य बना रही thi..vishal का लुंड भी अजगर सांप की तरह तना हुआ फुफकार मार रहा था.. मनो आज साडी चीजों को भुला कर वो बस अलका की गांड में घुसना छह रहा था









पर अलका के पेअर में सच में इतना जान नहीं बचा था की वो इस पोजीशन में कड़ी हो सके… पोजीशन बनाते hi वगिरने लगती hai…fir वो विशाल से कहती है..

विशाल- मेरे पेअर में जान नहीं बची है bête.. मं तुम्हे रोकूंगी नहीं पर पहले मुझे लेता के चाहे तो मेरी गांड मार ले फिर हिम्मत और जान बची तो घोड़ी बी बन जौंग तेरे लिए पर अभी के लिए मैं कड़ी नहीं हो पा रही हुन्न

वशाल भी अलका की बात समझते हुवे ok कहता है जिस से अलका आ के बीएड पे लेट जाती hai..ab अलका बीएड पे लेट जाती है और पैरो को पूरा खोल के अपने चूतड़ों को पहला लेती है जिस से गांड के छेद खुल जाये और लुंड आसानी से जा sake..par अलका का गांड इतनी आसानी से खुलने वाला नहीं था..









गांड में लुंड लेने का दर अलका के चेहरे के साथ साथ उसके गांड में भी दिखने लगा था… उसके छेद मनो साँस लेने लगा हो… वो खुद से hi खुलने और बंद होने लगा था….. विशाल के लुंड के छुवन से hi उसका रोम रोम सिहरने लगा था पर अभी तो सुरुवात भी नहीं हुआ था और मंज़िल काफी दूर है पता नहीं क्या होगा मेरे गांड का …… इसी कश्मकश में अलका सेहमी हुई अपने चूतड़ फैलाये लेती rahi…wo विशाल को बस नाराज़ नहीं करना चाहती थी…. इसलिए उसक खुसी के लिए वो ये दर्द भी सहने को तैयार थी…

काफी कोशिशों के बाद भी लुंड अंदर नहीं जा रहा था और जब भी विशाल थोड़ा जोर लगता अलका दर्द के मरे पीछे खिसक जा रही thi…akhir में विशाल ने अलका के छूट से बहते पानी को और ढेर सारा थूक अलका कैग एंड और अपने लुंड पे माल्टा है और फिर दुबारा से कोशिश करता hai..is बार लुंड का टोपा अंदर जा पता है…









अलका दर्द के मरे बिलबिलाने लगती है…. उसके टाइट गांड में लुंड ऐसा फसा हुआ था मनो माखन के बड़े से ब्रिक में किसी ने गर्मागर्म चाकू पेल दिया हो… उसकी आंखे निकल के बहार hi आ गयी थी… पूरा जिस्म थार था जाता है और एक बहुत hi जोर की चीख उसके मुँह से निकलती है…

अलका- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh mmmmmmmmmmmmmmmaaaaaaaaaaaaaaaa ffffffffffaaaaaaaaaaaaaaadddddddddddddd dddddddiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii mmmmmmmmmmmmmmeeeeeeeeeeeerrrrrrrrrrrrriiiiiiiiiiiiiiiiiiii ggggggggggggggaaaaaaaaaaaaannnnnnnnnnnndddddddddddddddd nniiiiiiiiiiiikkkkkkkkkaaaaaaaaaaaalllllllll iiiiiisssssssssssseeeeeeeeeeeee mmmmmmmmmmaaaainnnnnnnn नहीं ले पाऊँगी निकल निकलबाहुत दर्द हो रहा है मादरचोद तूने मेरी गांड hi फाड़ दी आज हाय मैं मर गयी इस मादरचोद को खुश करने के चक्कर में uuuuuuuuufffffffffffffffffffffffffffff…..









अलका अपने मुठी में चादर को दबा लेती है और उठ के अपने गांड की तरफ देख ने की कोशिश करती है.. और जब उसे दीखता है की लुंड का अभी सिर्फ टोपा hi गया है तो उसके तो जैसे जान हलक में आ जाती है…..

अलका- निकल दे विशाल मैं नहीं शी पाऊँगी तेरे इस अजगर को अपने गांड में बहुत दर्द हो रहा है…

विशाल- धीरे चीख रंडी तेरा पति जग जायेगा…

अलका- मादरचोद मेरे गांड में सरिया दाल के खड़ा है और कहता है चीख भी ात uuuuuuuuuuffffffffffffffffffff

विशाल पहले तो हस्ता है फिर आगे झुक के अलका को किश करने लगता है…. जब अलका कुछ नार्मल होने लगती है तो विशाल मौका देख के फिर से एक धक्का लगता है और बाकि बचे हुवे लुंड को भी अलका के गांड में उतर देता है… अलका जो पहले hi विशाल के आधे लुंड को झेल नहीं पा रही थी वो इस धक्के को बर्दाश्त नहीं कर पति और उसके छूट से उसके पेशाब की धार फुट पड़ती है…







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अलका- oooooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhh fffffffffffffuuuuuuuuuuuuuuuukkkkkkkkkkkk

मर गयी मैं विशु फाड् दिया तूने मेरे इस गांड को aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh

विशाल अलका के नाज़ुक हालत देख के बस उसके जिस्म पे प्यार से हाथ फेरता है और उसे छोटे छोटे किश कर के उसके उत्साह को बढ़ने की कोशिश करता है..

पर अलका की हालत सच में खराबा होने लगी थी जान तो उसकी विशाल ने पहले hi निकल दी थी और बी उसके गांड में अपने मोठे मुसल को दाल के रही सही कसार भी उसने पूरी कर दी थी…

काफी देर तक विशाल के होंठो के रास को पिने के बाद अलका के शरीर में फिर से हरकत होने लगती hai…jane इस औरत में इतनी जान आ खान से जाती है .. हर बार अधमरी हो के फिर से छोड़ने को तैयार… शरीर की गर्मी इतनी हो तो उसपे होते जुल्म की खान परवाह होती है.. और अलका का वही हाल था…

अब अलका के गांड में विशाल के लुंड ने अपना जगह बना लिया था और अलका भी अपनी गांड अब धीरे धीरे उचका के विशाल को धक्का लगाने का इशारा कर रही थी…









अपनी माँ की गांड से होती हरकत को देख विशाल भी अब अपनी पूरी शक्ति से अलका के गांड में उतर जाना चाहता था और वैसे उसने किया भी….

विशाल पुरे जोश में अलका की गांड मार रहता और अलका भी चीख चीख के विशाल के लुंड को अपने मखमली गांड के लेने लगती है…

विशाल- aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh mmmmmmmmmmmaaaaaaaaa कितनी कासी हुई गांड है मेरा लुंड चील जायेगा तेरे गांड के कसावट से….

अलका- अब लुंड दाल hi दिया है तो अछेसे अपने अरमान पुरे कर ले फाड् दे मेरी गांड aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh बिलकुल तरस मत खा अपनी इस रंडी माँ पे अचे से फाड् दे इस गड को और बड़ी कर दे इसकी छेद….









और जोर जोर से खुद hi अपने गांड पे थप्पड़ मरने लगती है… अलका दर्द और वासना के चरम पर thi…uski गांड उसके छतो से बिलकुल लाल हो चुक्का था पर भी वो अपनी गांड पे थप्पड़ बरसाना नहीं रोकती…

अलका अब एक बार फिर से झड़ना चाहती थी और बी उसे आराम चाइये था पर उसे आराम तब तक नहीं मिलने वाला था जब तक की विशाल उसके बुर में ढेर न हो जाये… और अलका अचे से जानती थी की विशाल को ढेर करना है तो उसे उकसाना होगा जिस से वो जबरदस्त चुदाई कर के खुद भी झाड़ जाये और अलका भी उसके साथ अपना पानी निकल के चैन की नींद सो payegi…isliye अलका अब विशाल को उकसाना शुरू कर देती है…

अलका- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh विशु दर्द से ज्यादा तो मजा आ रहा है रे तेरे इस मोठे लुंड को गांड में भर के uffffffffffffffffff ऐसे hi छोड़ फाड् देर अपनी इस रैंड माँ की गांड मेरे bête….aise मजा नहीं आता न तुझे रुक मैं घोड़ी बन जाती हु फिर अचे से अपनी माँ के गांड की चौड़ाई देख के फाड़ना इसे …

इतना कह के अलका घोड़ी बन जाती hai…aur फिर से विशाल को भड़काने लगती है..









अलका- ले विशु तेरी माँ तेरे ख़ुशी के लिए अपनी गांड खोले घोड़ी बन के कड़ी है.. दिखा अपनी मर्दानगी और फाड़ दे मेरी गांड…. आज कर ले अपने मन की छोड़ जैसे तेरा छोड़ने का मन kare….le मैं अपने हाथो से फैला लेती हु अपने चूतड़ों को तेरे लिए…. ऐसा छोड़ की मैं सुबह चल भी न पाव…









विशाल भी अलका के बातो से पुरे जोश में आ जाता है और अलका कैग एंड के ऊपर लुंड सेट कर क ीक जोरदार धक्का मरता है…. लुंड अलका के गांड के इतना गहराई तक समां जाता है की उसके पेट में पेशाब के लिए जगह नहीं बचता और और अलका के छूट से धार बन के बहने लगती है…

अलका एक बार फिर से चीख पड़ती hai…..aaaaaaaaaaahhhhhhhhh मममममअअअअ कितना बड़ा है इस मादरचोद का लगता है गले से निकल jayega………uuuuuuuuuuuffffffffffffffff

विशाल की नज़र जब अलका के गांड पे पड़ती है तो पता है की अलका की गांड सच में फैट चुकी थी… उसके मुहाने पे खून की चीते साफ़ दिख रहे थे.. फिर भी अलका विशाल से रुकने की जगह जोरदार चुदाई के लिए कह रही थी…

विशाल ने जब जब अपना लुंड अलका के गांड से निकल के देखा तो अलका का गांड जिसमे एक ऊँगली के जाने तक का भी रास्ता नहीं था वही अलका के गांड में अब एक सुरंग बन चुक्का tha..vishal इन्ही बातो में खोया हुआ था की उसके कानो में फिर से अलका की आवाज़ गूंजती है…









अलका- क्या हुआ थक गया क्या??? ख़तम हो गयी तेरी मर्दानगी…. बस इतने के लिएमारे जा रहा था??? अब छोड़ न मुझे फाड़ मेरी गांड को मादरचोद… ऐसे तो तेरी रखैल खुश नहीं रह पायेगी कही किसी दूसरे के सामने न अपनी गांड खोल दे…..

अलका की बातो से विशाल के रगो में खून डबल स्पीड से दौड़ने लग जाता है…. और फिर वो पुरे जोश और स्पीड में अलका कैग एंड मरने लग जाता है… अलका मुट्ठी रही वो अलका की गांड मरता रहा….

विशाल- कितना मूत रही है तू माँ…?

अलका- तेरे लुंड पुरे पेट में हिलोरे मार रहा है पेशाब तो निकलेगा hi न …….

अलका का पेअर एक बार फिर से जवाब देने लग जाता है वो कड़ी नहीं हो पाए रही थी.. वो धीरे कदमो से अपने गांड में विशाल का लुंड लिए आगे बढ़ती है और सोफे पे एक पेअर जमा के उसका सपोर्ट लेने की कोशिश करे लगती है…









अलका- थोड़ी मरमत मेरी छूट की भी कर दे विशु ये फिर से तैयार हो गयी तेरे लुंड के लिए….

विशाल भी अलका के हालत को देखते हुवे उसके गांड से लुंड निकल के छूट में पेल देता है.. अभी दो hi धक्के लगाए थे की अलका की छूट क जवाब दे जाती है…… थोड़ी देर और रुक जाती तो विशाल भी साथ में अपना पानी बहा देता पर अलका के छूट अब इतनी सेंसिटिव हो गयी थी बार बार झाड़ के और मूत मूत के की दो धक्के भी नहीं झेल पायी और अपना पानी बहाने लग जाती है…

अलका अब किसी मुर्दे की तरह गिर पड़ती है पर विशाल का अभी हुआ नहीं था इसलिए वो छूट में धक्के मरने के लिए जैसे hi कमर बढ़ता है अलका उसे रोक देती है और उसका लुंड खुद अपने हाथो से पकड़ के अपने गांड में दाल लेती है…









अलका मरे हालत में कहती है- अब मेरे छूट में तेरे एक धक्के के लिए भी जान नहीं बची है.. अब तू मेरी गांड में hi अपना लुंड दाल और अपना पानी निकल…

विशाल- क्यों साली चिनार अभी तो कह रही थी फाड़ दे मेरी गांड और छूट…. रखैल खुश नहीं है…. कही और गांड मरवायेगी तू…. अब क्या हुआ अब माँ चुद गयी तेरी???

सच में अलका की हालत बहुत नाजुक थी वो लगातार झड़ने से और फिर हर धक्के से उसके छूट जो पेशाब बहा रही थी उसने उसकी पूरी जान निचोड़ ली थी.. अलका का पूरा शरीर पसीने और पेशाब से तरबतर हो गया था ो जमीं पे लेती विशाल के धक्को को बस अपने गांड में महसूस कर पा रही थी लेकिन उसका कोई जवाब दे पाए इतनी हिम्मत नहीं बची थी उसमे…

अलका- कोई जवाब नहीं देती है बस विशाल के लुंड अपने गांड में जाते हुवे महसूस कर रही होती है…









विशाल- बोल साली रंडी क्या हुआ????

अलका- तो छोड़ न भड़वे फाड़ दे इस गांड को उउउउउउउउउफ्फ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ तेज़ तेज़ छोड़ दिखा अपनी मर्दानगी…. ये दोनों छेद काम पड़े तो मेरे मुँह में दाल दे आजा

विशाल- शरीर में जान नहीं बचा लेकिन जोश अब भी वही है तेरा साली रैंड इतना कह क ीक थप्पड़ उसके गांड पे मार देता है…

अलका- मादरचोद तेरे जैसे 4-4 को और खा जाउंगी भड़वे रंडी की औलाद… अभी बचा है तू…

विशाल जो अब झड़ने के बिलकुल करीब था वो अलका के ऐसी बातो से अपना आप खोने लगता है और और फिर वो अपने पुरे जोश को इकट्ठा कर के अलका कैग एंड में जोरदार धक्के लगाने लगता hai…aur एक तेज़ धक्के के साथ विशाल का पूरा शरीर कैंप उठता है और अपने जवानी का रास से वो अपनी माँ के गांड को भर देता है…









अलका अपने पेअर और गांड हवा में उठा के इस गर्माहट का आनंद ले रही थी उसकी आंखे बंद थी और सांसे अभूत तेज़ तेज़ चल रही थी… तभी विशाल एक अचे bête के की तरह अपने लुंड में बचे पानी को अपने माँ के चेहरे पे गिराने लगता है..









क्यूंकि वो जनता था की लुंड और छूट से निकले पानी को पि के उसके माँ के अंदर जान आ जाती है.. और आज तो वैसे भी अलका ने बहुत म्हणत की है…. चेहरे पे गिर रहे विषा के लुंड के पानी की गर्माहट पा के अलका अपना मुँह खोल देती है… यानि की विशाल से वो पानी अपने मुँह में डालने का कह रही थी और ाग्यकारी बीटा विशाल अलका के मुँह को अपने पानी से भरने लगता है.. और अपने लुंड का आखरी बून्द गिरने तक वो अपना लुंड अलका के मुँह में hi रखता है जिसे अलका चाट के साफ़ कर देती है









चुदाई और हवस का दौर समाप्त हो चुक्का था अब उन्हें निचे जाना था लेकिन लका के पुरे शरीर से पेशाब पसीने और छुम के बदबू आ रह थी.. काफी देर आराम करने के बाद जब दोनों की नज़र घडी पे जाती है तो घडी में सुबह के 5 बज चुके थे.. अशोक कभी भी जग सकता था या क्या पता जग गया हो..

अलका उठे की की कोशिस तो करती है पर उठ नहीं पति.. वो अपने टूटे आवाज़ में कहती है मुझे उठा के मेरे कमरे में सुला दे विशु…. मुझे तो तूने सच में चलने लायक नहीं छोड़ा लगता है.. और ये चुदाई कितना दर्दनाक होगा ये तो सो के उठने के बाद hi पता चलेगा..

विशाल- सॉरी माँ आपको हर्ट करने के लिए पर पता नहीं क्यों जब आपको छोड़ता हु तो मेरे अंदर जैसे कोई शैतान आ जाता है जो बस आपको नोच खाना चाहता है..

अलका- तभी तो तेरी माँ तेरी दीवानी हो गयी bête सॉरी मत बोल अभी तो ये शिलशिला शुरू hi हुआ है.. चल अब जल्दी से मुझे सुला दे कही अशोक ढूंढ़ते हुवे न आ जाये…

विशाल भी अलका को अपने गॉड में उठा के उसके बैडरूम में ले के जाता है जहां अशोक अभी भी सो रहा था..









विशाल अलका को उसके जगह पे सुला देता है अउ रजते जाते उसके चुचिओ को मुँह में भर के चुस्त है और उसके छूट में ऊँगली दाल के उस से बाह रहे रास को पहले खुद चुस्त है फिर अलका को चूसता है और फिर वापस अपने बैडरूम में चला जाता है….

ये था episode 35 का फाइनल part.. लेकिन अगर आप रेगुलर स्टोरी पढ़ रहे हो तो आपको याद होगा की part-A में कारन अलका को उसके बाथरूम में नहाते देखता है और फिर अलका भी उसके सामने हवस के खुमारी में बिना किसी संकोच के नंगे अपने छूट और चूचिया दिखते हुवे बात कर रही होती hai…jiska असर ये होता है की कारन के दिमाग में भी अलका नाम का बुखार चढ़ने लगता hai..wo कैसे भी जल्दी जल्दी घर पहुंचना छह रहा था और बारिश में hi वो तेज़ ीके चलते हुवे घर कीओर चल पड़ता है..

घर पहुंचते hi वो अपनी बाइक साइड लगता है और दूर डैल बजता है जहां उसकी माँ सारिका दूर खोलती है.. कारन कालका के नंगे जिस्म को देख के हवस में इतना अँधा हो गया था की वो गेट पे खड़े खड़े hi सारिका के हनथो को चूमने लग जाता है…

तो अब यह से कहानी शुरू होगी कारन और सारिका की……

 
episode 36



अचानक से हुवे इस हमले से सारिका बिलकुल भी संभल नहीं पाती hai…aur न hi कारन को रोक पति है.. उल्टा बारिश के ठंडक वातावरण में वो खुद भी रोहित के बहो में पिघलने लगती hai…fir भी वो एक पल को किस तोड़ते हुवे कारन से कहती है…








Sarika-ander तो चल ले अब क्या दरवाजे पे hi सब करेगा….?

कारन- फ़िलहाल तो मुझे तेर अंदर आना है मेरी माँ सारिका… और बड़े बेरहमी से अलका के चुचिओ को उसके टॉप को ऊपर कर के मसलने लगता है..

देखते hi देखते सारिका कारन के रंग में रंगने लगती है और कोई विरोध किये बिना उसके मजबूत पकड़ में क़ैद हो के अपने जिस्म क अपने bête कारन को सौंप देती है…









कारन बिना समय गंवाए आने कपडे उतर के बिलकुल नंगा हो जाता है और अपनी माँ सारिका के गार्डन को किश करते हुवे उसके स्कर्ट में हाथ दाल के उसके कटदो को मसलने लगता है…

सारिका- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh uiiiiiiiiiiii mmmmmmmmmmaaaaaaaaa कारन क्या हो गया है आज तुझे….? तू तो एक डैम उतावला hi हुआ जा रहा है … आराम से bête कही भागी नहीं जा रही हु मैं… और गार्डन ऊपर कर के कारन के होंठो के स्पर्श और उसके गरम सांसो को अपने गार्डन पे महसूस करते हुवे उसके एक डैम तने हुवे लुंड को मुठियाने लगती है…

कारन- आज कुछ मत बोल माँ आज बहुत मन है तुझे जैम के छोड़ने का…

सारिका- वो तो तेरे इस लुंड को देख के hi पता चल रहा है… छोड़ ले बीटा किसने रोका है तुझे….. आह्ह्ह्ह कितना सख्त हो गया है….. ऐसा क्या कर की ा रहा है तू??/

पारा कारन कुछ बोलने के बजा सारिका के स्कर्ट को एक झटके में उतर देता है… सारिका भी अपनी टंगे उठा के स्कर्ट को निकलने में पूरा मदद करती है और अपनी एक पेअर को उठा के कारन के जांघो पे टिका देती है…. लेकिन इस बिच उनका चुम्बन नहीं रुकता…









अब कारन चूमते चूमते अपनी माँ सारिका कौस तंग से पकड़ के उठा देता है जो तंग सारिका ने उठा के कारन के जांघो पे टिकाये थे… गॉड में उठा लेता है.. वो हवस में इतना अँधा हो गया था की उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था की वो अपने अंदर की आग को कैसे निकले… बस उसके जो जी में आ रहा था वही ककर रहा था…

सारिका भी बड़े आराम से कारन के बहो में बिखर जाती hai…par कारन सारिका को बहो में भरने का कोई इरादा न था ो अगले hi पल सारिका को उतर के निचे बिठा देता है और उसका सर निचे की और दबाने लगता hai..jis से की अगले hi पल करा का लुंड सारिका के होंठो के सामने होता है..









सारिका बड़े hi प्यार से अपने bête कारन के लुंड पे जुबान फेरने लगती है… वो उसके बॉल्स से जीभ फेरना सुरु करती है और उसके लुंड के छेद से निकल रहे प्रेकम को चाट जाती है.. और फिर धीरे धीरे अपने bête कारन का लुंड अपने मुँह में भर के चूसा शुरू कर देती है..

सारिका बड़े hi आराम से कारन के लुंड को चूस रही थी… पर कारन को आज इस आराम में कोई मजा नहीं आ रहा था वो तो मनो बेकाबू हुवे जा रहा था… सारिका के प्यार से चूसने के बदले में वो जवाबी हमला करते हुवे उसके मुँह में पूरा अंदर तक लुंड पेल देता है…









और सारिका के माथे को पकड़ के उसके मुँह को छोड़ने लगता है…..

सारिका के मुँह पे हो रहे इस अतय्चार के बदले उसके मुँह से बस गुग्गूग्गूग गुगुगुगू की आवाज़ आ रही थी… उसकी दोनों विशालकाय चूचिया किसी ब्लाडर की तरह उछाल रही thi..kafi देर मुँह में hi छोड़ने के बाद कारन अपना लुंड सारिका के मुँह से निकल लेता hai…aur लुंड के साथ सारिका का ढेर सारा लार भी उसके मुँह से निकल के उसके छतियो पे बहने लगता है जिस से की उसकी बड़ी बड़ी गोरी गोरी चूचिया चमकने लगती है…

सारिका- ाअररमममम से bteeeeeeeeeee बहगी नहीं जा आरही हु …. हुआ क्या है तुझे??? एक डैम पागल हो गया है आज….

कारन फिर सारिका क उठता है और उसका मुँह दीवार की तरफ कर के उसे खड़ा कर देता है और उसके कमर में हाथ दाल कैग एंड बहार को खींच लेता है… फिर वो निचे बेथ के अलका के छूट को कहते लगता है…









सारिका- aaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh

कारन और जोर जोर से चेतना जारी रखता है… कारन के जीभ का छुवन सारिका के छूट पे पड़ते hi वो अपनी गांड कुछ ज्यादा hi बहार निकल लेती है और अपनी टंगे भी पहले से ज्यादा खोल लेती है जिस से की कारन को अलका के छूट को चाटने में कोई परेशानी न हो…

कारन भी पुरे जोश में सारिका के छूट को गीली कर रहा था जिस से की अपनी माँ के छूट में अपना लुंड पेल सके…

इसी तरह काफी देर छूट चाटने के बाद कारन उसे वही दीवार के सहारे घोड़ी बना देता है और पीछे से ालना लुंड सरिएक के गीली छूट में पेल देता है…









सारिका- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh आराम से कारन…

सरिएक और अलका में यही फ़र्क़ था.. सारिका जो बेशक bête से चुदाई करवा रही है लेकिन वो गन्दी बाटे नहीं बोल पति और अगर इसी के जगह अलका होती तो वो अब तक गलियों की बारिश कर देती…

और कुछ वैसा hi कारन भी था जिसे चुदाई का मतलब सिर्फ छूट में लुंड प्लेन और पानी निकल के शांत हो जाना मालूम था.. वो विशाल की तरह इस मामले में एक्सपर्ट नहीं था… और होता भी कैसे विशाल के पास अलका है जो चुदाई में बिलकुल बेशरम ह जाती है और खुल के चुदाई करवाना पसंद करती है…. तो वही सारिका को भी खुल के छोड़ना पसंद तो है पर वो पहल नहीं कर पाती.. अभी कारन की जगह विशाल होता तो वो सारिका के छूट के साथ सारिका को भी खोल deta…khair अभी कारन को बहुत कुछ सीखना बाकि है..

कारन- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhh माँ क्या मस्त छूट है tumhari….ek डैम माखन.

सारिका- aaaaaaaaaaaaaahhhhhhh ऐसे hi धक्के लगा तेज़ तेज़ uuuuuuuuuuuffffffffffffff

कारन के हर धक्के के साथ सारिका आगे बढ़ के दीवार से टकरा जाती थी जिस से उसके चुचिओ की लचक भी क़ाफीज्यादा देखने को मिलता है… कारन छूट में लुंड पेलने के साथ साथ सारिका के चुचिओ को भी मसलने लगता है…

दीवार के सहारे खड़े खड़े सारिका थक जाती है.. फिर वो वैसे hi घोड़ी बने आगे बढ़ने लगती है.. विशाल भी अलका के साथ सके कमर पकडे आगे बढ़ता जाता है…

दो कदम के बाद hi सारिका झुक के सीढ़ियों को पकड़ लेती है जिस से उसे झुकने में आसानी तो मिलता hi है उसकी गांड भी कुछ ज्यादा ऊपर को हो जाती है









अब विशाल सरीके के चूतड़ वाले भाग को पकड़ के धक्को की राफ्तेर बढ़ने लगता है… सारिका हर हमले पे हिल जाती है वो अपने पैरो की ेडिया उठा उठा के कारन को सुप्पोर करती है और कारन भी पुरे जोश में सारिका की छूट चोदे जा रहा था….

सारिका- aaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh कारन अब और नहीं झुक पाऊँगी मेरे पेरो में दर्द होने लगा है bête…

करना- कोई बात नहीं माँ तू मेरे ऊपर आजा …

इतना कह के विशाल सीढ़ियों पे लेट जाता है और सारिका को अपने ऊपर आने का इशारा करता है…









सारिका कारन का इशारा पा कर फ़ौरन उसके तरफ बढ़ जाती है और अपनी पेअर कारन के दोनों साइड कर के उसके लुंड को पकड़ के उसपे बैठने लगती hai…karana का लुंड किसी टावर की तरह खड़ा था… सारिका के बैठते hi उसे ज्यादा जोर न लगाना पड़ा लुंड की सख्ती अपने आप उसके छूट में अपनी जगह बनती चला गया…

सारिका के मुँह से एक सीकरी फुट पड़ती है…

सारिका- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh maaaaaaaaaaaaa …. और फिर सारिका कारन के ऊपर कूदने लगती है… और निचे से कारन भी सरिकाके छूट में धक्के लगाने लगता हैई….

चुदाई का सिलसिला काफी देर से चल रहा था और दोनों माँ bête अब मंजिल के बिलकुल करीब थे….

कारन- माँ मैं गया मेरा होने वाला है…

सारिका- तेज़ तेज़ मार मेरा भी होने वाला है…

और एक तेज़ चीख के साथ दोनों माँ bête झाड़ गए…

सारिका कारन के ऊपर निढाल जो के गिर पड़ती है.. दोनों की तेज़ सांसो की आवाज़ पुरे घर इ गूंज रही thi…karan का लुंड अभी भी सारिका के छूट में hi था..

अलका थोड़ी देर यूँ hi कारन के कर पड़ी पड़ी हाफति रहती है और थोड़े देर बाद जब वो उठती है तो कारन का लुंड भी सारिका के छूट से निकल जाता है… और लुंड के साथ ढेर सारा पानी जो कारन और अलका के छूट का मिलाजुला शरबत था ो सारिका के छूट से बहने लगता है…









कारन जो शाम से hi सारिका को देख के भरा हुआ था वो अपनी माँ सारिका के छूट में अपना पानी भर के शांत हो जाता है….

चुदाई से मिली शांति के बाद दोनों माँ bête डिनर कर के सो जाते है… तो वही इस रात अलका के घर पे विशाल अलका की गांड मरने की तयारी लगा हुआ था….

नेक्स्ट डे अलका के घर

रात भर अलका की चुदाई करने के बाद विशाल अलका को उसके रूम में सुला देता है.. सुबह करीब 10 बजे जब अशोक की नींद खुलती हैतो वो एकक तेज़ अंगड़ाई से अपने बिस्तर के दूसरे तरफ देखता है तो पता है की उसकी बीवी अलका अभी भी गहरी नींद में सो रही है…









अशोक अलका की तरफ देखता है तो पता है की अलका बिलकुल बेहोशी की हालत म सो रही hai…Safed चादर के बहार उसका एक हाथ निकला हुआ था और चादर उसके छाती से उसे ढके हुवे thi…alka अलका क अगोरा गोरा हाथ चादर के बहार था और उसका गोरा बदन चादर के अंदर था अपनी बीवी के स्थति का जायजा लेते hi उसे इस बात के अंदाज़े लगते देर न हुई की अलका चादर के अंदर बिल्कल नंगी सोई है… अशोक को रात के बारे में कुछ याद नहीं रहता .. क्या हुआ वो कब सोया उसे कुछ भी याद न था… जब वो फ्रेश होने के लिए वाशरूम की तरफ बढ़ने लके लिए चादर से निकलता है तो पता हैकि वो हुड भी बिलकुल नंगा है… उसे तब इतना याद आता है की वो अलका को रात में छोड़ रहा था… इसका मतलब वो छोडेचोड़ते सो गया और इसी वजह से अलका अभी तक ो रही है…

वो अपने मन में यही ख़याली पुलाव बनाते हुवे खुश हो जाता है और फ्रेश हो के अपने डेली के काम में लग जाता है…

देखते देखते दिन ढल गया था पर अलका जागना तो दूर उसने करवट भी नहीं लिया था.. हालाँकि विशाल जग चुक्का tha…aur किसी काम से बहार अपने दोस्तों के पास गया हुआ था…

शाम के 7 बजने को था अँधेरा भी गहराने लगता है लेकिन अलका अभी भी ो hi रही थी.. अशोक फिर शाम की चाय लेके अलका को जगाने जाता है…

अशोक- अलका बेबी कितना सोगी चलो उठाओ चाय पि लो.. क्या हो क्या गया है तुम्हे घोडा बेच के सो रही हो… इतना तो तुम नहीं सोती …

अशोक के आवाज़ से अलका जग जाती है.. और रात भर हुई दर्दनाक चुदाई के बाद भी बैदेही प्यारी समयले के साथ अपने पति अशोक के तरफ करवट लेते हुवे उसे को गुड मॉर्निंग विश करती है…









चादर के अंदर नंगी होने के वजह से उसकी चूचिया किसी पहाड़ की तरह लग रही thi…jise देख के ाशो का मन ललचाने लगता है..

अशोक- गुड मॉर्निंग?? तुमने रात कितनी पि थी??? अभी 7 बजे रहे है एक घंटे बाद फिर से रात हो जाएगी.. तुम कल रात से सो रही हो..

अलका- रात से नहीं बेबी सुबह सोई हु..

अशोक- सुबह सोई हो….? पर तुम कर क्या रही थी रात भर??

अलका को अपने कहे गलती का पता चलता है तो तुरंत बात को घूमते हुवे कहती है..

अलका- क्या कर रही थी का क्या मतलब…? तुमने सोने खान दिया रात भर… शराब के नशे में पागल hi हो गए थे… कल फिर से तुमने वियाग्रा लिया था या कोई नयी दवाई तो नहीं दूध ली तुमने??

अशोक- ये क्या बोले जा रही हो मई अब वो दवाइया नहीं लेता… क्यों क्या हुआ???

अलका अशोक को बेवकूफ बनाते हुवे रात की साडी बात बता देती है बस हीरो मेंविशाल की जगह अशोक को खड़ा कर देती है..

अशोक- मैं नहीं मंटा ऐसा कुछ होता तो मुझे याद होता.. और तुम गांड तो हाथ भी नहीं लगाने देती मरने क्या घंटा डौगी….

अलका- हाँ सही खा और मैं कल भी तुम्हे रोक रही थी लेकिन तुमने मेरे साथ जबरदस्ती ki..aur तुम्हारा डोमिनेशन मुझे भी इतना ाचा लगा और दूसरी बात हम इतने दिनों बाद कर रहे थे तो मैं भी बहक गयी…

अशोक- फिर मुझे कुछ याद क्यों नहीं…

अलका- ने शराब की वो खली बोतल अशोक को दिखते हुवे खा की ये पूरी बॉटते पि गए थे अब कुछ याद खान से रहेगा (ये वही बोतल है जो अलका विशाल से छोड़ने से पहले पि थी और वही फर्श पे नशे की हालत में फेंक दिया था)

अशोक- अभी भी सनका में था

अलका- तुम्हे अब भी यकीं नहीं हो रहा है??

अशोक- नहीं … तुम मेरे साथ प्रैंक कर रही .. तुम ज्यादा देर तक सोती थी और बी मैं कुछ बोलू उस से बचने का ये सब ड्रामा कर रही हो.. नाउ ी गोत यो…

अलका- रुको फिर तुम्हे दिखा तुन तभ मानोगे…

और फिर अलका चादर से निकल जाती है.. वो बिलकुल नंगी थी उसके शरीर पे अभी भी रात के उसके बदन पे हुवे अत्याचार के निशान थे.. छूट के पास पानी के सुच जाने से सफेदी फैली थी..

चादर के बहार आते hi अलका अपनी दोनों टंगे उठा के अशोक के अपनी गांड दिखते हुवे पूछती है









अलका- ये देखो क्या कितना बड़ा होल था मेरे गांड का….? देखो क्या हाल कर दिया है रात भर में तुमने मेरा…

अशोक अलका के गांड में बने छेद को देख के बिलकुल हैरान हो जाता है.. सच में उसकी गांड फैट गयी थी.. अभी भी उसका गांड पूरा खुला हुआ tha…ashok को अपने हैवानियत पे यकीं नहीं होता.. फिर भी वो बड़े भरी मन से कहता है..

अशोक- सॉरी बेबी पता नहीं ये मुझसे कैसे हो गया.. मैं तुम्हारे साथ जबरदस्ती कैसे कर सकता हु.. इस शराब के नशे में क्या हो गया मेरे से….

अलका- कोई बात नहीं अशोक तुम गीत फील न करो जो होना था हो gaya..abhi तुम देखो तुम्हारे लुंड में कितना डैम है बीमारी के बाद भी तुमने मेरी गांड फाड़ दी… अगर तुम ठीक होते तो क्या हाल करते mera(guilt फील करवाने के बाद अलका उसे ाचा फील करवाने की कोशिश करती है..)









चलो एक फोटो ले के दिखाओ तो क्या हाल है मेरे अस्स का मैं तो देख नहीं पा रह hi पर दर्द बहुत हो रहा hai…itna कह के अलका घोड़ी बन जाती है और अपनी गांड को पूरा फैला लेती है…

फोटो लेने के बाद अलका फ्रेश होने के लिए बीएड से जैसे उठती है वो धड़ाम से गिर जाती है… सोये सोये तो उसे कुछ पता नहीं चला और बहुत हिम्मत दिखते हुवे उसने बाते किट hi पर जब बीएड से उतरने की बारी आती है तब उसे पता चलता है उसकी असली हालत का…









वो बहुत जोर से चीखती है और वही फर्श पे गिर जाती है…

अलका- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh अशोक मर गयी…

अशोक भगा भगा आता है तो देखता है अलका गिरी पड़ी है वो उसे सहारा देता है और फ्रेश करता tha…fir अशोक अलका को कुछ पेनकिलर देता है और सिकाई वगैरह कर के उसे आराम देने की कोशिश करता है…

अजीब हालत था बेचारे का बीवी किसी की छोड़ा कोई और और ये बेचारा सेवा कर रहा था और करता भी क्यों न अलका से प्यार hi इतना करता था…



अगले कुछ दिन तक यही सब चलता रहा न अलका किसी को हाथ लगाने देती है न hi अशोक की हिम्मत होती है उसे और दर्द देने की….

लेकिन ये खेल जो अलका ने शुरू किया था उसका अंत नहीं था ये तो मात्रा एक ब्रेक है छोटा सा... अपनी सरे छेद तो खुलवा hi लिए है अलका ने वो भी पति यानि अशोक के मौजूदगी में लेकिन इसकी कितनी बड़ी कीमत चुकानी पद सकती है ये तो वक़्त hi बताएगा,.... उसके साथ हवस में अंधी हो के अलका ने कारन के अंदर भी खुद के लिए एक चिंगारी जगा दी है जिसका खामियाजा उसकी माँ सारिका क भुगतना पड़ा था.. लेकिन आखिर कब तक कारन अलका के नाम से सारिका को छोड़ता रहेगा.. अब उसके अंदर भी अलका को पाने की एक ललक जाग चुकी है जिसे वो अंजाम देने के लिए प्लानिंग भी करना शुरू कर चूका है...

तो देखते है अब अगला क्या कारनामा करती है अपनी अलका...
 
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