अपडेट 88
जिब्रान की आँख खुली, सूरज की पहली किरण परदे की झिर्री से अंदर झाँक रही थी, उसके चेहरे पर हलकी सी गर्मी फैलती हुई.
उसने करवट बदली, हाथ टटोल कर फ़ोन उठाया. स्क्रीन पर चमकती हुई घडी ने सुबह के ग्यारह बजने का इशारा दिया.
आज कुछ अलग था, कुछ बेचैनी सी थी.
उसके बगल में, कोमल गहरी नींद में थी.
सार्ड हवा का एक झोंका खिड़की से अंदर आया, और उसके जिस्म से चादर थोड़ी सरक गयी. जिब्रान की नज़र उस पर पड़ी. उसकी बहिन, कोमल, एक मासूमियत से सो रही थी.
उसके दिल में एक अनोखा एहसास जाएगा, एक ऐसी हिफाज़त की ख्वाहिश जो उसने पहले कभी इतनी शिद्दत से महसूस नहीं की थी.
एक पल के लिए, वह बस उसको देखता रहा. फिर धीरे से, उसने अपना हाथ बढ़ाया और कोमल के जिस्म से सरकती हुई चादर को पूरी तरह हटा दिया.
कोमल अब बिलकुल नंगी, गहरी नींद में, उसके बगल में सो रही थी. उसका दिल एक तेज़ धरकन के साथ धड़का.
माहौल में एक अजीब सी गर्माहट फैल गयी, जैसे कमरे की हवा में कोई अनोखी खुशबू घुल गयी हो.
जिब्रान ने अपने पड़ोस में निगाह डाली.
उसका लोढ़ा, जो अब तक खामोश था, अब धीरे धीरे सर उठाने लगा.
एक हल्का सा दबाव, एक मीठा सा दर्द उसकी नस नस में फैल गया.
उसने अपने लोडे को हलके से सहलाया, जैसे किसी प्यारे जानवर को दुलार रहा हो.
"मिलेगा मेरे शेर को भी खून मिलेगा," उसने अपने आप से सरगोशी की, उसकी आवाज़ में एक अजीब सी ख्वाहिश थी. "लेकिन अभी वक़्त बाकी है, सब्र कर मेरे शेर."
वह आँखें बंद करके लेता रहा, उसके दिमाग में हज़ारों ख्याल दौड़ रहे थे.
"मुझे पता है," उसने सोचा, "इस शेर को एक बार ये लज़ीज़ खून का ज़ाइक़ा मिल गया, फिर ये बिलकुल नहीं छोड़ेगा."
उसका दिल उसके सीने में ज़ोरों से धड़क रहा था, हर धरकन के साथ एक नया एहसास उभर रहा था.
"उफ़, कैसा वक़्त बदलता है," उसने अपने आप से कहा, उसकी आवाज़ में एक हैरानी थी. "मैंने सोचा भी नहीं था."
पहले उसकी ज़िन्दगी सिर्फ कहानियों, मूवीज, और पोर्न तक महदूद थी. लेकिन अब यह हकीकत थी. उसकी आँखों के सामने, उसके दिल में, उसकी रूह में.
"मेरा प्यार," उसने महसूस किया, "मेरी दीवानगी, मेरा जूनून, और सच्ची मोहब्बत का फल है यह."
उसकी प्यारी सी छोटी, क्यूट बहिन, कोमल. बचपन से उसके साथ थी.
लेकिन कुछ आरसे पहले तक वह कैसी थी? और आज कैसे उसके बगल में लेती थी?
"जब घर पे होती थी," उसने याद किया, "कितने डेन्ट कपडे पहनती थी. ज़िन्दगी में कभी उसके फिगर को फील नहीं कर पाया था, की कैसी गांड होगी, कैसी चूचियां होंगी, क्या शेप होगा."
सिर्फ उसके हाथ, पाऊँ, चेहरे के रंग से उसने इमेजिन किया था की उसकी रानी का जिस्म भी गुलाबी होगा.
"और गुलाबी क्या," उसने मुस्कुरा कर सोचा, "यह तोह मक्खन का कारखाना निकली. बस chaat-te जाओ, चूमते जाओ. ज़िन्दगी भर न थकूं मैं."
तमीज़ से dheele-dhaale कपडे, सर पर दुपट्टा घर में. बहार निकलती तोह स्कार्फ़, बुर्का, नक़ाब. बहार की दुनिया से तोह चेहरा तक छुपा के रखा था.
"लेकिन मेरे साथ," उसने धीरे से कहा, "सब शराफत छोड़ दी. सब तमीज भुला दी."
वह भूल गयी थी शर्म ो हाय, सही ो गलत. उसके लिए दुपट्टा छोड़ दिया.
दुपट्टा क्या, कपडे hi छोड़ दिए थे.
"मेरी मोहब्बत में नागिन हो गयी है," जिब्रान ने आँखें खोली और कोमल को देखा. उसके चेहरे पर एक मुस्कराहट फैल गयी.
"मेरी कोमल, मैं हमेशा खुश रखूंगा तुम्हे. कभी दुखी नहीं होने दूंगा."
अभी तक उसके पास कोई रास्ता नहीं था, लेकिन अब वह अपनी जी जान लगा देगा. वह चाहता था की वह दोनों इस दुनिया के रूल्स और रेगुलेशंस के हिसाब से हमेशा के लिए एक हो जाएँ.
"फिर hi मैं सील खोलूँगा तुम्हारी," उसने अपने आप से वडा किया.
उस दिन कोमल झूम उठेगी, जब उसके भाई का लोढ़ा उसकी सील तोड़ता हुआ अंदर, उस गरम छूट की गहराईयों तक जाएगा.
और उन दोनों के प्यार की निशानी को दुनिया में लाने के लिए, उसकी बच्चेदानी तक झटके देकर अमृत उसके पेट में भर देगा.
"ी लव यू, कोमल," उसने सरगोशी की.
क्या सुनहरे बाल थे उसके, चमकदार, रेशम से मुलायम.
चिकना जिस्म, हर जगह से चमकता हुआ. वह कलरबोने, इतनी खूबसूरत.
उफ़, वह मम्मी, उन पर प्यारी सी गुलाबी निप्पल्स, हलकी सी उभरी हुई, उसको अपनी तरफ बुलाती हुई. वह प्यारा सा स्लिम पेट, और उसके नीचे, पाऊँ के बीच छुपा हुआ असल खज़ाना.
"ी लव माय सिस्टर," उसने अपने दिल की गहराईयों से कहा. "थैंक्स तो बे इन माय लाइफ."
वह कोमल के और करीब हुआ.
उसने अपना हाथ उसकी कमर पर रखा, उसकी नंगी, मुलायम जिल्द उसकी उँगलियों को छू रही थी.
एक हल्का सा सरसराहट, एक करंट सा उसके जिस्म में दौड़ गया.
उसने कोमल को हलके से अपनी तरफ खींच लिया, और उसके गले लग गया.
कोमल की सांसें उसके कान के पास गर्म हवा छोड़ रही थी, उसके जिस्म की खुशबू जिब्रान के नाक में उतर रही थी, उसको और भी बेचैन कर रही थी.
वह वापिस चादर दोनों पर दाल लेता है, सोने के लिए, लेकिन नींद उसकी आँखों से कोसो दूर थी.
कोमल ने एक हलकी सी करवट ली, उसकी नंगी कमर जिब्रान के सीने से टकराई. जिब्रान ने आँखें बंद कर ली, उसकी सांसें तेज़ हो गयी. उसके लोडे में एक तेज़ धरकन उठी, जैसे कोई शिकारी अपने शिकार को महसूस कर रहा हो.
उसने कोमल को और क़रीब खींच लिया, उसकी उँगलियाँ कोमल की कमर पर धीरे धीरे फिरने लगी. कोमल के जिस्म की गर्मी जिब्रान के जिस्म में समां रही थी, उसको एक अनोखा सुकून दे रही थी, और साथ hi एक अनोखी आग भी जला रही थी
"कोमल," उसने अपने आप से सरगोशी की, उसकी आवाज़ में एक गहराई थी, एक तड़प थी. "तुम्हे नहीं पता तुम मेरे लिए क्या हो."
उसने कोमल के बालों में अपना चेहरा छुपा लिया, उनकी खुशबू उसके दिमाग को नशीला बना रही थी. वह उसके बालों को चूमता रहा, धीरे धीरे उसके कान के पीछे, उसकी गर्दन पर.
कोमल ने एक हलकी सी सिसकारी भरी, जैसे नींद में कोई मीठा सपना देख रही हो.
जिब्रान का हाथ धीरे धीरे कोमल की कमर से नीचे सरक गया, उसकी नंगी गांड पर. उसकी उँगलियाँ उसकी मुलायम जिल्द पर फिरने लगी, एक हल्का सा दबाव.
कोमल ने फिर से करवट ली, और अब उसकी गांड जिब्रान के लोडे पर हलकी सी रगड़ खा गयी. जिब्रान के जिस्म में एक तेज़ करंट दौड़ गया.
उसका लोढ़ा अब पूरी तरह तन चूका था, एक तेज़ दर्द और ख़ुशी का एहसास एक साथ.
"कोमल," उसने फिर सरगोशी की, उसकी आवाज़ में एक गहराई थी, एक तड़प थी. "तुम्हे नहीं पता तुम मेरे लिए क्या हो."
उसने कोमल के बालों में अपना चेहरा छुपा लिया, उनकी खुशबू उसके दिमाग को नशीला बना रही थी. वह उसके बालों को चूमता रहा, धीरे धीरे उसके कान के पीछे, उसकी गर्दन पर.
कोमल ने एक हलकी सी सिसकारी भरी, जैसे नींद में कोई मीठा सपना देख रही हो.
जिब्रान का हाथ धीरे धीरे कोमल की कमर से नीचे सरक गया, उसकी नंगी गांड पर. उसकी उँगलियाँ उसकी मुलायम जिल्द पर फिरने लगी, एक हल्का सा दबाव.
कोमल ने फिर से करवट ली, और अब उसकी गांड जिब्रान के लोडे पर हलकी सी रगड़ खा गयी. जिब्रान के जिस्म में एक तेज़ करंट दौड़ गया.
उसका लोढ़ा अब पूरी तरह तन चूका था, एक तेज़ दर्द और ख़ुशी का एहसास एक साथ.
उसने कोमल को और क़रीब खींच लिया, उसके होठ कोमल की गर्दन पर जा ठहरे. वह धीरे धीरे उसकी गर्दन को चूमने लगा, एक हल्का सा गहरा चूमा.
कोमल ने फिर से सिसकारी भरी, उसकी सांसें और तेज़ हो गयी.
जिब्रान का हाथ धीरे धीरे कोमल की गांड पर और नीचे सरक गया, उसकी उँगलियाँ उसकी छूट के किनारों को छू रही थी.
एक हल्का सा गिला एहसास, उसकी उँगलियों पर. कोमल गीली हो रही थी.
जिब्रान का दिल ज़ोरों से धड़क रहा था. उसने कोमल को और ज़ोर से अपनी तरफ खींच लिया, उसके लोडे का दबाव कोमल की गांड पर और बढ़ गया. उसने कोमल के कान में सरगोशी की.
"कोमल, मेरी जान," उसने कहा, उसकी आवाज़ में एक तड़प थी, एक ख्वाहिश थी. "तुम्हे पता है मैं तुमसे कितना प्यार करता हूँ?"
कोमल ने नींद में hi एक हलकी सी मुस्कान दी, जैसे वह उसकी बातें सुन रही हो. जिब्रान का हाथ कोमल की छूट पर फिरने लगा, उसकी उँगलियाँ उसकी गीली छूट के अंदर जा रही थी, एक हल्का सा दबाव. कोमल ने एक तेज़ सिसकारी भरी, और उसकी आँखें खुली.
"भाई?" कोमल ने नींद में hi कहा, उसकी आवाज़ में एक मासूमियत थी. "क्या हुआ?"
जिब्रान का दिल एक पल के लिए रुक सा गया. उसने जल्दी से अपना हाथ कोमल की छूट से हटा लिया, और उसको धीरे से अपनी बाहों में भर लिया.
"कुछ नहीं, मेरी जान," उसने कहा, उसकी आवाज़ में एक घबराहट थी. "बस तुम्हे गले लगा रहा था."
कोमल ने अपनी आँखें फिर से बंद कर ली, और जिब्रान की बाहों में सिमट गयी. जिब्रान ने उसके माथे को चूमा, और फिर से अपनी आँखें बंद कर ली.
उसका लोढ़ा अब भी पूरी तरह तन चूका था, लेकिन अब उसमें एक दर्द था, एक तड़प थी, जो पहले नहीं थी.
वह कोमल को अपनी बाहों में लिए लेता रहा, उसके दिल में हज़ारों ख्याल दौड़ रहे थे. वह जनता था की यह गलत था, लेकिन वह अपने आप को रोक नहीं प् रहा था.
उसका प्यार कोमल के लिए इतना गहरा था की वह उसको किसी भी हद तक ले जा सकता था.
"मैं तुम्हे कभी दुखी नहीं होने दूंगा, कोमल," उसने अपने आप से वडा किया. "मैं तुम्हे हमेशा खुश रखूंगा."