Incest Dil ka raja ( incest magic adultery ) - Page 36 - SexBaba
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Incest Dil ka raja ( incest magic adultery )

अपडेट 290

स्पेशल अपडेट फॉर देवयानी जी ..........}


अब आगे ........... रात के घने अंधकार में असुरगुरु शुक्राचार्य के आश्रम से कोई चोरी छुपे ऊपर से निचे तक काळा कपड़ो से देखा कोई साक्ष बहार निकला बड़ी हे सावधानी से आश्रम से निकल पूर्व की आवर तेजी से भाड़ रहा था

कुछ आगे जाने पे एक पेड़ के निचे कला घोडा बंधा हुआ था वो काळा लबादे में देखा सकाश उस काळा घोड़े की उस पेड़ से बंदी राशि को खोल उसपे सवार हो जाता है

आवर तेजी से उस अंधकार से भरी रात में घोड़े को पूरी तेजी से दौड़ा देता है

उस से कुछ दुरी पे ुशी फरहा के भेष में कुछ लोग उसका पीछा कर रहे थे ऊपर से निचे पूरी तरह से खुद को उस अँधेरे भरे वातावरण में छुपाये हुए

पैर सायद इनकी किस्मत कहे या उनका दुर्भाग्य कुछ दूर जाने के बाद अचानक उनकी आँखों से वो घोडा जैसे पूरी तरह से हवा में गायब हो गया

नकाबपोश 1 ...... ये क्या हुआ वो कहा गया सभी लोग डंडो उसे वो हमारी आँखों से ओझल नहीं हो सकता

कुछ देर उदार उदार देखते रहने के बाद भी उसे कुछ नहीं मिला उदार ये लोग उस घुड़सवार को डंडो रहे थे ठीक ुशी समय

आश्रम से एक साक्ष आवर निकला जो दिखने में बिलकुल पहले घुड़सवार के जैसा हे प्रतीत हो रहा था बस फरक इतना था की इस घुड़सवार की आँखे साफ साफ देखि जा सकती थी

आश्रम से कुछ दुरी पे उसे ुशी तरह के वस्त्रो में कुछ लोग आवर मिले

चारो तरफ अच्छे से देखने के बाद घुड़ सवार इंसान उन सभी के पास जाता है

जिसे देख बाकि सभी उसके सामने आदाब से अपना सर जुखा लेते है

तभी आश्रम से काफी दूर दूसरी आवर से एक रौशनी आकाश में एक दमके की आवाज के साथ ब्लास्ट होती है

जिसे देख उस घुड़सवार की खूबसूरत आँखे चमक उठी

आवर उसने अपने चेहरे से वो कला लबादा हटा दिया उस लबादे के पीछे जिस साक्ष का चेहरा था वो कोई आवर नहीं असुरगुरु शुक्राचार्य पुत्री राजकुमारी देवयानी जी थी

देवयानी जी ......... तुम सब ने बहुत अच्छा काम किया सेविकाओं अभी तुम कड़ी हो सकती हो

सेविका ...... शुक्रिया राजकुमारी जी आपने हमें सेवा का मौका दिया

देवयानी जी ....... हमने जो सामान आपको लेन को कहा था क्या वो आप ले आये

सेविका ....... जी राजकुमारी जी जैसा आपका आदेश था हमने ुशी के अनुकूल सब व्यवस्था की है राजकुमारी जी

देवयानी जी ....... ठीक है अब तुम लोग जा सकती हो आवर आश्रम की हर गति विधि पे दूर से नजर बनाये रखना अगर तुम लोगो को लगे की मेरे लिया कोई आवशयक सुचना है तब मेनका तुम मुझसे सम्पर्क कर सकती हो अगर मुझसे सम्पर्क न हो तो फ़ौरन व्योमासुर को इस्थिति से अवगत करवा देना

मेनका ( जो सभी दसियो में सबसे खूबसूरत आवर सायद देवयानी जी पिरया दासी थी ) ..... जी राजकुमारी जी जैसा आप कहे हम वैसा हे करेंगे

देवयानी जी ....... क्या हुआ मेनका कुछ आवर कहना चाहती हो

मेनका .....जी जी वो राजकुमारी जी वो क्या आप पहले से जानती थी की कोई आश्रम पे नजर रखे हुए है आवर इतने बहु मूल्य उपहार किस इंसान को भेंट करने की आपको क्या आव्सय्कता ाँ पड़ी

देवयानी जी ........ है माहे पूर्व से हे संदेह था की कोई हमारे बिच रह कर हमारी सुचना किसी को भेज रहा है पुर रही बात इन बहुमल्य उपहारों की तो न तो ये हमारे लिया बहु मूल्य है आवर न उसके लिया जिसे हम ये भेंट स्वरुप दे रहे है अब तुम सभी जाओ आवर हमने जो आदेश दिया है उसे बिना किसी चूक के पूरा करो

मेनका ..... .... जी जी राजकुमारी जी

मेनका अपना साथ आये 4.5 दसियो को ले वह से हवा की तरह गायब हो गई आवर देवयानी अपनी मंत्र सकती का प्रयोग कर वह से मेनका द्वारा लाये संदूक को ले कर गायब हो गई ......

उदार सूर्यगढ़ से बहुत दूर एक विशाल जंगल जो की पूर्ण चांदनी रात के बावजूद भी घने विशाल पढ़ो के चलते चाँद की रौशनी जंगल में बहुत काम मात्रा में जमीं को स्पर्श कर प् रही थी चारो तरफ जानवरो जिव जन्तुओ की डरावनी आवाज इस घने जंगल के संत वातवर को आवर भी डरावना बना रहे थे सामान्य इंसान तो इन आवाजों को सुन हृद्यगत से हे अपने प्राण त्याग दे

अनछनाक वह कुछ अजीब होता है जहा पहले जंगल बुरी तरह अँधेरे में दुभा हुआ था वह अचानक से हलकी लाल सफ़ेद रौशनी होने लगती है देखते हे देखते रौशनी काफी भाड़ जाती कुछ देर यही रौशनी का आवरण बना रहने के बाद अचानक पूरी रौशनी गायब हो जाती है आवर वह एक बेहद खूबसूरत लड़की नजर आती है जो महज 24 ,25 साल की लग रही थी

बेहद गोरा रंग जैसे अभी अभी चाँद की सफ़ेद शीतल रौशनी में नाहा कर सवरग से कोई दिव्या सौन्दर्य की देवी धरती लोक भ्रमण को उत्तरी हो

उसका वो चन्द्रमा सामान दमकता खूबसूरत चेहरा उसकी वो झील से गहरी लम्भी पलकों के बिच छुपी काली आँखे हलकी उठी हुई स
ुत्व नाक जिसमे पहनी खूबसूरत हिरे की नाथ जिसपे पड़ती चाँद की रौशनी से भरपूर किरणे उसकी चमक आवर बढ़ा रही

वो पतले पतले गुलाबी होंठ जो मनो अभी अभी तजा खिले गुलाब की पंखुडिया हो होंटो के बिच कभी कभी चमकते मोतियों सामान सफ़ेद दन्त वो पतली सुराहीदार गर्दन किसी योगी महापुरुष का तप भांग करने के लिया पर्याप्त थे गर्दन से निचे का विधा अभी भी काळा कपडे से छुपाये गया था जो गले बंदी दूर से उस खूबसूरत हुसैन मलिका के यौवन को छुपाने में सक्षम नहीं था

वो खूबसूरत यौवना चारो आवर अपनी खूबसूरत आँखों से नजर डालती है

लड़की ........ ये कोनसा स्थान है क्या हम उचित स्थान पे आये है

कही भूल वश किसी गलत स्थान पे तो नहीं आ गए है

तभी वो अपने खूबसूरत होंटो से कुछ बुदबुदाती है अगले हे पल उसके हाथ में हलकी रौशनी होती है आवर महज 5 सेकंड बाद गायब हो जाती पैर अब उस खूबसूरत हाथ की उंगलियों ने कुछ चमकती हुई चीज़ को थामे हुए थी

ये कुछ आवर नहीं था ये एक मोबाईल था जैसे हे उस लड़की ने अपनी उंगलिया उस मोबाइल पे फिरै उसकी स्क्रीन लाइट से जगमगा उठी

तभी उस लड़की से करीब 2 कम दूर एक बड़ी से पहाड़ी पे किसी इंसान का आगमन हुआ उसकी बेहद तेज आँखे खुद से 2 कम दूर उस विशाल डरावने जंगल बिच में कड़ी उस बेहद खूबसूरत लड़की पे हे थी

उस इंसान ने अपनी आँखे बंद की अच्चानक से उसका पूरा शरीर बदलने लगा उसके सीने पे अलग हे तरह के वस्त्रो दिखाई देने लगे जो देखते हे देखते उसके पुरे शरीर को कवर कर लेता है उसके सर पे हुदी नुमा टोपी से आ गई साथ हे उसके हाथ में एक चमकती हुई तलवार जिसे उसने फ़ौरन गायब कर इस लड़की की आवर देखते हुए आसमान की आवर छलांग लगा दी

अगले 10 सेकंड में वो उस खूबसूरत लड़की के सामने खड़ा था

अचानक से अपने सामने बिना किसी आवाज के किसी के आ जाने पे वो खूबसूरत लड़की हड़बड़ा कर पीछे हाथ जाती है आवर अगले हे सेकंड में उसके खूबसूरत हाथो में चमचमति तलवार आ जाती है वो लड़की डरने की बजाय किसी वीर वीरांगना की भाटी अपने हाथ में पकड़ी तलवार को अपने सामने खड़े साक्ष के सीने सहज 2 इंच की दुरी पे बिलकुल हृद्या के स्थान पे अपना निशाना लिया कड़ी थी पैर जैसे हे लड़की का ध्यान उस साक्ष के चेहरे पे गया उसने फ़ौरन अपनी तलवार पीछे कर ली

लड़की ........ निर्भयासुर आप यहाँ पैर

निर्भया ......... जी देवी देवयानी जी मुझे माफ कीजिये सायद मैंने आपके सामने इस तरह से आ कर आपको डरा दिया था मुझे पहले सचेत करना चाइये था न की इस तरह अच्चानक से आपके सामने आना चाइये था

ये दोनों कोई आवर नहीं सूर्य आवर देवयानी जी हे थे जो दोनों अलग अलग भेष में थे जहा सूर्य निर्भयासुर के भेष में था वही देवयानी जी किसी आवर रूप में वो अपने वास्तविक रूप में नहीं थी

देवयानी जी ....... कोई बात नहीं पर आपने हमें इतनी जल्दी डुंडा कैसे हम तो यहाँ अभी अभी आये है क्या आपको पहले से पता था की हम यही आने वाले है

निर्भया ........ आपके हाथ में जो यन्त्र है वो मोबाइल है आपके पार्थवी लोक में कदम रखते हे मुझे आपके यहाँ होने की जानकारी मिल गई थी इस लिया बिना समय व्यर्थ किया मैं आपसे मिलने चला आया

देवयानी जी ......... क्या ये मोबाइल नुमा यन्त्र किसी भी स्थान का पता बता देता है

निर्भया ......... हाहाहा है ऐसा हे कुछ समझ लीजिये इसके बहुत से प्रयोग है खेर अभी हमें यहाँ से चलना चाइये हम किसी आवर स्थान पे आराम से बात करेंगे ये स्थान उचित नहीं है आपके लिया वैसे आप इस रूप में इन वस्त्रो में बेहद खूबसूरत लग रही है देवयानी जी मनो देव लोक से अप्सरा से देव अप्सरा डर्टी लोक में आ गई हो

( अब स्त्री कोई भी क्यों न हो किसी भी लोक की अपनी खूबसूरती की तारीफ सुन्ना सभी को पसंद आता है आवर वो बस यही चाहती है की सामने वाला उसकी खूबसूरती की जी भर के तारीफ करे )

ऐसा हे हाल कुछ कुछ देवयानी जी का भी था निर्भया के मुँह से अपनी खूबसूरती की तुलना देव अप्सरा के सामान सुन देवयानी के खूबसूरत होंटो पे दिलकश मुस्कान तैर गई एक पल तो निर्भया भी उनकी मुस्कान से मंत्र मुग्धा हो उठा पैर जल्दी हे संभल गया

देवयानी जी ........ सूर्य कहा है क्या वो हमसे मिलने नहीं आये

निर्भया अपनी आँखे बंद कर देवयानी जी को आवर आस पास के इलाके को सन करता है सब कुछ ठीक होने पैर सूर्य ने अपना वास्तविक रूप दर्जन कर लिया किन्तु देवयानी के अलावा अगर कोई भी चुप कर सूर्य को देखता है तब उसे सूर्य के स्थान पे निर्भया हे नजर आता

सूर्य देवयानी जी को साथ लिया ुशी पहाड़ी की आवर चल दिया जल्दी हे दोनों वह पहुंचने गए

देवयानी जी ने पहाड़ पैर से जंगल को देखा जहा का पूरा नजारा साफ साफ नजर आ रहा था वो जहा प्रकट हुई थी वो स्थान भी

सूर्य ने अपने हाथ के इशारे से एक स्थान पे बैठने आवर कुछ आग का पर बंद कर दिया साथ हे अपनी ऊर्जा का प्रयोग कर दोनों के आस पास का स्थान पूरी तरह से सुरक्षा घेरे से सुरक्षित कर दिया था

घेरे के बहार से देखने पर न तो वह सूर्य नजर आ रहा था न देवयानी जी जैसे वह पहाड़ के अलावा कुछ भी नहीं हो

सूर्य ........ देवयानी जी अब आप आपके यहाँ आने के विषय में निश्चिन्त हो कर बात कर सकती है यहाँ किसी को भी हमारे होने का पता नहीं चल सकता चाहे फिर कोई भी क्यों न आये

देवयानी जी ........ क्या हम तुमसे मिलने बिना किसी कार्य के अपनी इच्छा से नहीं आ सकते है क्या सूर्य

सूर्य ........... हमारा वो मतलब नहीं था देवयानी जी आप जब चाहे तब आप हमसे मिलने आ सकती है आखिर आप बाबा ( व्योमासुर जी ) की गुरु बहन है इस नाते आपका आवर मेरा एक अलग रिस्ता है

देवयानी जी .......... मैं असुर कुल से हूँ तुम जानते हो न जहा रिश्ते नाते केवल अपने लाभ के लिया होते है

कही मुझसे रिस्ता जोड़ कर बाद में तुम्हे पछतावा न हो

सूर्य ....... भविष्य में क्या होगा किसी को कुछ नहीं मालूम अगर नियति ने ऐसा कुछ मेरे भविष्य में लिखा होगा तो उसे बदलने वाला मैं कोण आवर अगर ऐसा कुछ नहीं तो फिर कोई कितनी कोशिश कर ले नियति के समक्ष उसे जखन हे होगा

देवयानी जी सूर्य की बात सुन कुछ देर चुप रही वो एक तक सूर्य को देखती रही जैसे वो सूर्य के भीतर झाँख कर देखना चाहती हो की क्या सूर्य जो बोल रहा है वो सच या झूट

देवयानी जी .......... सूर्य पहले तो मैं तुमसे क्षमा मांगती हूँ जो कुछ भी तुम्हारे विवाह के समय पारी लोक में हुआ उसके लिया किन्तु साथ हे मैं ये भी कहना चाहती हूँ की जो भी तुम्हारे विवाह में हुआ उसके पीछे मैं या व्योमासुर में से किसी का कोई सडयंत्र नहीं था

सूर्य .........आपको माफी मांगने की जरुरत नहीं है देवयानी जी मैं जनता हूँ की इस घटना के पीछे आप या बाबा में से कोई भी नहीं है सम्भवता बाबा आवर सुक्रलोक का इस सडयंत्र में शतरंज के एक मोरे के रूप में प्रयोग किया गया है


देवयानी जी .......... ये तुम कैसे कह सकते हो सूर्य क्या तुम इस घटना के पीछे छुपे सूत्रधार तक पहुंच चुके हो

सूर्य ....... हम्म्म कुछ कुछ ऐसा हे समाज लीजिये आप फ़िलहाल मेरे पास इसका कोई साक्ष्य नहीं है जिस से मैं मेरे अनुमान को सत्य साबित कर सकू

देवयानी जी ........ मैं जानती हूँ ये सब सूर्य इस घटना का मुख्या सूत्रधार असुर लोक असुर महल से जुड़ा हुआ है किन्तु .......

देवयानी जी अपनी बात कहते हुए सूर्य के चेहरे को पढ़ने की कोशिश भी रही थी साथ साथ में पैर असुर लोक असुर महल का नाम सुनने के बाद भी सूर्य ने कोई पर्तिकिर्या नहीं दी तो देवयानी जी बोलते बोलते रुक कर सूर्य के कुछ कहने का इन्तजार करने लगी

सूर्य ....... किन्तु यही न की आपके पास भी कोई साक्ष्य नहीं है जो असुर महल को इस घटना का जिम्मेदार ठहरा सके आवर आप ये भी जानती है की क्यों इसमें सुक्रलोक आवर बाबा को शतरंज के मोरे के रूप में प्रयोग किया गया है

देवयानी जी ....... क्या मतलब मैं कुछ समझी नहीं सूर्य आप कहना क्या चाहते है

सूर्य ......... वैसे आप सब जानने के बाद भी अच्छा अभिनय कर लेती है देवयानी जी खेर जब आप मेरे मुँह से सब सुन्ना चाहती है तो मैं हे बता देता हूँ की क्यों बाबा आवर सुक्रलोक का किसी मोरे की तरह इस षड़यंत्र में उपयोग किया गया है

देवयानी जी चुप चाप सूर्य को देख रही थी सूर्य ने एक पल देवयानी को देखा आवर फिर बोलना सुरु किया

सूर्य ........ आप ये तो अच्छे से जानती होगी हे की जिस तरह से आपके गुप्तचर असुर लोक में फैले हुए है ुशी तरह असुर महल के गुप्तचर भी सुक्रलोक में आवर सायद आपके आश्रम में भज फैले होंगे जब मैं अपनी दोनों पत्नियों के साथ गुरुदेव शुक्राचार्य जी के निमंतरण पे सुक्रलोक आया तब निर्भयासुर द्वारा नरकासुर के असुर सैनिक निर्भया के हाथो मरे गए तो उसने इसकी जाँच भी करवाई होगी गुप्त रूप में या किसी के माध्यम से उसे हमारा सुक्रलोक आने का पता चल गया तब उसने अपने गुप्तचर आश्रम पे नजर रखने के लिया लगाए होंगे आवर जब मेरे आवर परिधि के विवाह की बात बाबा ने आपके आश्रम में चलाई होगी तो असुरमहल के गुप्तचरों तक बात पहुंचने में ज्यादा समय नहीं लगा आवर इसकी खबर असुर महल पहुंच गई

वही से इस सडयंत्र की रचना हुई आवर यक्षिणी की बाबा के पीछे लगा दिया. जिसका अनुमान बाबा को भी समय रहते पता नहीं चला इस से अंदाजा लगाया जा सकता की इस खेल का खिलाडी कोई मामूली असुर नहीं है बल्कि बेहद चालक आवर तंत्र मंत्र में महारथ हासिल किया हुआ है

उसने एक तीर से दो जिसने लगाने की कोशिश की

देवयानी जी ....... मतलब

सूर्य ....... मतलब ये की उसने बहुत हे चालाकी से यक्षिणी का प्रयोग कर सुक्रलोक आवर परीलोक के साथ साथ मेरे आवर बाबा के बिच भी दुश्मनी की दिवार कड़ी करने की कोशिश की ताकि हम एक दूसरे से उलझे रहे आवर वो अपने उद्देश्य में कामयाब हो जाये जब इस सब में सुक्रलोक का नाम जुड़ जाता तब आपका ध्यान भी असुर लोक से कुछ समय के लिया हैट जाता

साथ हे अगर यक्षिणी वह से बच कर निकलने में सफल हो जाती तो उसके माध्यम से उसे जो चाइये था वो प्राप्त हो जाता

देवयानी जी ....... आपने बिलकुल उचित कहा हमें भी असुर महल सड़ जोड़े लोगो पे संदेह है हमने अपने गुप्तचर लगा रखे है जो जल्दी हे किसी न किसी जानकारी को हम तक जरूर भेजेंगे

सूर्य ....... ये अच्छा है तब तक मैं भी विवाह कार्य से फ्री हो जाऊंगा

देवयानी जी ....... क्या हमें अपने परिवार के विवाह में शामिल होने के लिया आमंत्रित नहीं करेंगे

सूर्य ....... अगर ऐसा नहीं होता तो भला मैं यहाँ क्यों आता आपको लेने ये बाते तो मैं सन्देश के माध्यम से भी बता देता आपको

सूर्य की बात सुन देवयानी मुस्कुरा देती है

सूर्य ....... रात काफी हो चुकी है अब हमें चलने चाइये ताकि थोड़ा विश्राम किया जा सके कल विवाह है बाकि बाते हम विवाह के बाद करेंगे

सूर्य अपनी आँखे बंद कर कुछ मंत्र बुदबुदाती है सूर्य के माथे से एक रौशनी निकल देवयानी जी के सर में समाहित हो जाती है

देवयानी जी की आँखे बंद हो जाती है आवर उसकी बंद आँखों के सामने बहुत कुछ चलने लगता है करीब 10 मिनट्स बाद देवयानी जी ने आँखे खोली

देवयानी जी ...... थैंक यू सूर्य

सूर्य ...... हाहाहा आप तो बहुत जल्दी सब शिख गई अच्छा है अभ सब आपको पार्थवी वाशी हे समझेंगे

देवयानी जी ...... अब मैं भी यहाँ खुल कर एन्जॉय करूंगी सदी में

सूर्य ....... जी बिलकुल अब हमें चलना चाइये पैर आपको ध्यान रखना है की आप अपनी सकती यो का इस्तेमाल नहीं करेंगी बिलकुल भी

देवयानी जी ...... Don't वोर्री सूर्य मैं पहले भी पार्थवी लोक बहुत बार आ चुकी हूँ मैं जानती हूँ पार्थवी लोक में मैजिक का प्रयोग नहीं होता


सूर्य अपने वाइट ड्रैगन का आह्वान करता है जो उनसे कुछ दुरी पे जगा पेड़ बहुत काम था वह उतरना है

देवयानी जी ने ड्रैगन पहले भी देखा था इस लिया वो जानती थी की ये ड्रैगन सूर्य का हो सकता है ( इस से पहले मानसी के ड्रैगन से देवयानी जी मिल चुकी थी )

सूर्य ........ आपको कोई एतराज तो नहीं होगा न देवयानी जी मेरे पिरया वहां की सवारी करने पैर आप जैसे खूबसूरत अप्सरा अगर मेरे साथ मेरे वहां की सवारी करेंगी तो मुझे बहुत ख़ुशी होगी

देवयानी जी ......... ( मुस्कुराते हुए ) हमें आपके साथ आपके ड्रैगन की सवारी कर पर्शान्ता होगी सूर्य

सूर्य अपना हाथ देवयानी जी की आवर भाड़ा देता है देवयानी जी थोड़ी झिझक के साथ

सूर्य का हाथ थम लेती है

सूर्य को अपने हाथ में कोमल सा अहसास हुआ पैर सूर्य ने बिना अपने भाव प्रकार किये बिना किसी पर्तिकिर्या के देवयानी जी का हाथ थम एक हलके से जम्प के साथ वाइट ड्रैगन पे आ खड़ा हुआ

सूर्य ने पहले हे दोनों के बैठने के लिया ड्रैगन पे ासननुमा आराम दायक स्थान बनाया हुआ था

देवयानी जी आगे आवर सूर्य उनकी बगल में ठीक दोनों पंक के बिच के स्थान पे बेथ चूका था सूर्य के बैठने के तुरंत बाद ड्रैगन वह से उड़न भर लेता है

आवर करीब आधे घंटे बाद ड्रैगन सूर्य आवर देवयानी जी को सूर्यगढ़ के पास वाले जंगल में पहुँचता है सूर्य ड्रैगन को वापिस अपने अंदर ले लेता है


देवयानी जी ....... ये कोनसा जहा है सूर्य

सूर्य ........... ये सूर्यगढ़ है देवयानी जी आवर आप वडा कीजिये आप किसी को भी यहाँ या फिर मेरे घर या परिवार की बारे में किसी को भी नहीं बताएंगी

देवयानी जी ...... चिंता न करो मैं तुम्हारी परेशानी समझती हूँ मैं तुम्हे वचन देती हूँ तुमसे जुडी कोई भी बात मेरी जुबान पे नहीं आएगी हमेशा मेरे सीने में दफ़न रहेगी

सीने में दफ़न रहने वाली बात सुनते हे सूर्य की नजर be-khayali में देवयानी जी की समथिंग 36 साइज के सीने पे जा रुकी

देवयानी जी ने भी ये देख लिया था उसे अजीब भज लग रहा था आवर सरम भी आ रही थी

देवयानी जी ..... हुन्न हुन्न देख लिया हो तो चले अब

सूर्य ....... है है सॉरी वो मैं ी ऍम रियली सॉरी पता नहीं कैसे

देवयानी जी ......कोई बात नहीं आगे से ध्यान रखना

सूर्य देवयानी जी को ले कर सीधा हवेली की छठ पे पंहुचा आवर मानसी को छठ पे बुलाता है

मानसी जो शार्ट निघ्त्य में सोये हए थे वो ुशी तरह उठ कर सूर्य आवर देवयानी की सामने आ कड़ी हुई

मानसी ...... ( नींद में हे ) आपने मुझे बुलाया कुंवर जी

कहते हुए सूर्य की बाजु पकड़ कंडे पर सर रख फिर से खड़े खड़े आँखे बंद कर ली

सूर्य ......... मनु अपनी आँखे खोलो आवर देखो तो हमसे मिलने देवयानी जी आई है सुक्रलोक से

सूर्य की बात सुनते हे मानसी की आँखे फ़ौरन खुल जाती है

मानसी ...... आप आप इस समय यहाँ

सूर्य ...... अब आप आप क्या कर रही हो इन हे रूम में ले जाओ बुआ है तुम्हारी

मानसी देवयानी ........ क्या मतलब बुआ

सूर्य ....... मेरा मतलब देवयानी जी बाबा की गुरु बहन है न तो रिश्ते में तुम्हारी बुआ हे हुई न अब किसी न किसी रिश्ते से सुबह इनका परिचित सभी से कर वह होगा न

मानसी ....... है ये तो है

सूर्य ...... ठीक है इन हे अपने रूम में ले जाओ आवर आराम करो अभी टाइम है थोड़ा सुबह होने में

मानसी सूर्य के गाल चुम कर गुड नाईट बोल देवयानी जी का हाथ थामे निचे चल देती है

सूर्य वह से जीनत के रूम में जाता है आवर उसे बहो में भर कर लेट जाता है पैर नींद जैसे सूर्य की आँखों से गायब हो चुकी थी

वही देवयानी जज भी अपने अंदर एक अलग हे बदलाव मह्सुश कर रही थी जब से उसने वाइट ड्रैगन पे बेथ कर सूर्य के साथ उसकी सवारी की तब से .................

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स .............

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ......................
 
अपडेट. 291

सूर्य ....... मेरा मतलब देवयानी जी बाबा की गुरु बहन है न तो रिश्ते में तुम्हारी बुआ हे हुई न अब किसी न किसी रिश्ते से सुबह इनका परिचित सभी से कर वह होगा न

मानसी ....... है ये तो है

सूर्य ...... ठीक है इन हे अपने रूम में ले जाओ आवर आराम करो अभी टाइम है थोड़ा सुबह होने में

मानसी सूर्य के गाल चुम कर गुड नाईट बोल देवयानी जी का हाथ थामे निचे चल देती है

सूर्य वह से जीनत के रूम में जाता है आवर उसे बहो में भर कर लेट जाता है पैर नींद जैसे सूर्य की आँखों से गायब हो चुकी थी

वही देवयानी जज भी अपने अंदर एक अलग हे बदलाव मह्सुश कर रही थी जब से उसने वाइट ड्रैगन पे बेथ कर सूर्य के साथ उसकी सवारी की तब से .................

अब आगे ...........

सूर्य .......... ये आप क्या कर रही है मुझे ड्राइव करने दीजिये इस तरह मैं ठीक से ड्राइव नहीं कर प् रहा हूँ

दीप्ती ........ मैंने क्या किया है मैंने कब तुम्हे ड्राइव करने से रोका है तुम अपना काम करो मैं अपना करती हूँ

दीप्ती सूर्य की बात को नजर अंदाज कर सूर्य के बेल्ट खोल अपना हाथ सूर्य की पेण्ट में डालती है आवर सूर्य का 9 इंची अर्ध विकसित लैंड पेण्ट से बहार निकल लेती है

सूर्य जो इस समय कार ड्राइव करते हुए दीप्ती की इन हरकतों का मज़ा ले रहा था

दीप्ती जो उसकी बगल वाली सीट पे बैठे हुए सूर्य के लैंड को अपने कोमल हाथ से सहला रही थी

सूर्य .......... मुझे पहले हे समाज जाना चाइये था की जरूर दाल में कुछ कला है

दीप्ती ......... हेहेहे दाल में कुछ कला नहीं है मेरी जान यहाँ पूरी दाल हे काली है क्यों तुम्हे अच्छा नहीं लग रहा क्या

दीप्ती मुस्कुराते हुए सूर्य के होंटो पे एक छोटा सा चुम्बन जड़ देती है

फिर सीट पे पीछे की आवर खिसक कर सूर्य की जंगो के बिच जूख्ट हुए सूर्य के गुलाबी सुपडे पैर अपने रीड लिपस्टिक से पुते होंठ रख किस कर सूर्य के दहकते हुए सुपडे को मुँह में ले कर चूसने लगती है

सूर्य एक हाथ से कार के स्टीयरिंग को संभाले दूसरे हाथ से दीप्ती के सर को अब तक पूरी तरह से खड़े हो चुके लैंड पे दबा देता है

सूर्य का तक़रीबन आधा लैंड दीप्ती के मुँह में चला जाता है पैर दीप्ती बिना कोई परेशानी के लैंड को लॉलीपॉप के जैसे बड़े हे मज़े से चूसना जारी रखती है

सुनसान सड़क पे सूर्य कार को सरपट दौड़ाये जा रहा

कुछ देर तक सूर्य के लैंड को अच्छे से चूसने के बाद दीप्ती ने अपना गुथनो तक पहना
स्कर्ट उठाया आवर उसमे हाथ दाल अपनी वाइट पेंटी निकल कर साइड रख दी

सूर्य ......... तुम्हारे इरादे मुझे बिलकुल ठीक नहीं लग रहे है

दीप्ती ........ उम्म्म्मः मेरी जान अब इतना अच्छा मौका हाथ लगा है तो ऐसे तो जाने दूंगी नहीं

अब तो इस नागराज को अपने बिल में ले कर इसका जहर उतर कर हे रहूंगी तुम थोड़ा कार को साइड में रोको

सूर्य .......... सोच लो तुम्हारे मां जी का परिवार हमारा इन्तजार कर रहा होगा आवर तुम्हे तो पता है मुझे एक बार सुरु हुआ तो काफी टाइम निकल जायेगा

(दरशल दीप्ती आवर सूर्य इस समय जैसलमेर जा रहे थे दीप्ती के मां जी की फॅमिली को रेसवे करने जो की मेर्री जी के विवाह में उसके मां की तरफ से शामिल हो रहे थे )

दीप्ती ....... अभी उनने यहाँ पहुंचने में टाइम है मैंने तुम से झूट कहा था की वो लोग आधे घंटे में सहर पहुंचने जायेंगे

सूर्य ........ अच्छा तो सब पहले से प्लान कर रखा है

सूर्य ने आस पास नजर डाली तो उसे उजड़ा हुआ कुलधरा गांव दिखाई दिया

अब जब सूर्य के पास टाइम भी था आवर एक खूबसूरत लड़की उसका लैंड लेने के लिया इतना प्लान कर चुकी थी तो फिर भला उसे क्यों इंकार होगा

सूर्य ने फ़ौरन रस्ते से कार दूसरी तरफ़ा एक खण्डार के पास एक पेड़ के निचे लगा दी जहा से आसानी से किसी की नजर नहीं पड़ती

सूर्य ने कार का दूर खोल बहार निकल आया दीप्ती भी चारो तरफ नजर दाल निचे उतर आई कार से

सूर्य ने अपनी पेण्ट उतर कार में सीट पे रख दी जहा दीप्ती की पेंटी पड़ी थी दीप्ती को अपनी आवर खींच सूर्य उसे खुले में किश करने लगता है

दीप्ती अपनी स्कर्ट के ऊपर से अपनी छूट पे सूर्य के लैंड को मह्सुश कर उठा अपने हाथ में पकड़ आगे पीछे करने लगती है

सूर्य दीप्ती को किश करते हुए उसका टॉप ऊपर कर उसके ठोस बूब्स को दबाते हुए दीप्ती की जुबान चूसने लगा

कुछ देर दोनों किस करते रहे फिर दीप्ती ने अपने टॉप में हाथ दाल बिना पति वाली ब्रा को निकल कार के बोनट पे रख दिया

सूर्य ने दीप्ती का टॉप ऊपर कर उसके 34 डी साइज के नंगा कर दिया आवर एक बूब्स को दबाते हुए दीप्ती के दूसरे बूब्स के पिंकस निप्पल्स को मुँह में भर कर चूसने लगा

दिपतु जो काफी गरम हो चुकी थी उसे अपनी छूट में जनजनहत होने लगी जैसे एक साथ हजारो चीटिया उसकी छूट में दौड़ रही हो

सूर्य बुरी तरह से दीप्ती को बूब्स को चूस आवर चाट रहा था जिस से दीप्ती को हलके दर्द के साथ अलग में मज़ा आ रहा था सूर्य के साथ खुले आसमान के निचे इस तरह अपनी बूब्स चुसवाने में

सूर्य ने समय को ध्यान में रखते हुआ दीप्ती की स्कर्ट से उसकी गांठ को be-parda करते हुए कार की बोनट पे लिटा कर दीप्ती की चिकनी छूट पे मुँह रख देता है

पैर सूर्य को आज दीप्ती की छूट के सोंधी सोंधी महक अलग लग रही थी

सूर्य ....... मेरी जान दीप्ती आज तुम्हारी छूट की खुशबु बहुत मस्त लग रही है पैर पहले तो ऐसी नहीं थी

दीप्ती ......... उम्म्म्म अहहहजहहहहहह तुम्हे पसंद नहीं आई क्या उम्म्म मैंने इस्पे परफ्यूम स्प्रे किया था

( दरशल दीप्ती जब रेडी हुई तब उसकी परफ्यूम ख़तम हो गई आवर तभी उसे याद आया की माया भी यही परफ्यूम उसे करती है

जब दीप्ती माया के मेकउप किट से परफ्यूम निकल रही थी तभी उसे एक आवर परफ्यूम दिखा जो उसे बड़ा हे अजीब लगा उसपे नुदे गर्ल्स की पिछ बानी हुई थी जो अपनी योनि पे परफ्यूम स्प्रे कर रही थी तो दीप्ती को माजरा समझते देर नहीं लगी आवर उसने अपनी पेंटी आवर छूट पे ये स्प्रे कर लिया )

सूर्य के दिमाग में जैसे जैसे दीप्ती की छूट से उठ रही खुशबु सूर्य को उत्तेजित कर रही थी

इस बिच दीप्ती एक बार झाड़ भी चुकी थी पैर सूर्य फिर भी उसके बूब्स को be-rahmi से मसलते हुए छूट चुशे जा रहा था

दीप्ती ...... अह्ह्ह्हहब सूर्य उम्म्म्म. अब आवर बर्दाश्त नहीं हो रहा जल्दी से छोड़ो मुझे मेरी छूट में बहुत खारिश हो रही है

सूर्य दीप्ती पे कोई ध्यान नहीं देता वो ुशी तरह चुस्त रहा जब सूर्य को लगा की दीप्ती फिर से झड़ने वाली है तो वो अपना मुँह हटा लेता है

आवर दीप्ती को बोनट से उठा कार के दूर के पास खड़ा कर आगे की आवर जुखा देता है दीप्ती अब ड्राइविंग सीट पे अपने हाथ टिकाये अपनी गांड बहार निखले मुखी हुई थी

सूर्य ने अपने लैंड को दीप्ती की गीली रास तपती छूट पे रगड़ा आवर दीप्ती की छूट में डाबर बनाने लगा एक हलकी से पक की आवाज से लैंड का टोपा दीप्ती की छूट को फैलते हुए अंदर जा गुस्सा

दर्द की एक हलकी से कसक दीप्ती के चेहरे पे उभरी पैर अगले हे पल उसकी आँखे छोड़ी हो गई जब सूर्य ने बिना कोई चेतावनी के पुरे जोश के साथ 1/3 हिस्सा दीप्ती की गरम गीली छूट में उतर दिया

दीप्ती ........ अह्ह्ह्हह्हह जालिम आराम में ये छूट है मेरी किसी पोर्नस्टार का बॉदा नहीं

सूर्य ....... उम्म्म.... अह्ह्ह्हहब अब तुमने हे इस नागराज को गुस्सा दिला कर गरम किया है तो झेलना भी तुम्हे गए पड़ेगा न मेरी रैंड दीप्ती वैसे तुम्हारी ये चिकनी गांड बड़ी मस्त लग रही है

दीप्ती को सूर्य के मुँह से अपने लिया रैंड सुन कर आवर अपनी गांड के छेद पैर सूर्य की ऊँगली से कुरेदे जाने पे बड़ा अजीब लगा पैर उन सबदो ने आवर उसकी ऊँगली अपने गांड के छेद पे महसूस कर उसकी छूट में अजीब से सुरसुराहट होने लगी एक अलग हे मज़ा मह्सुश कर दीप्ती आवर जयादा गरम होने लगी

दीप्ती ....... आह्ह्ह्हह तो छोड़ न मेरी जान अपनी रैंड की छूट पुर गांड दोनों तुम्हारी है मेरी जान अब जल्दी से अपनी रैंड कज जैम कर चुदाई कर तुम्हारे घोड़े की याद में मुझे बहुत परेशान करती है दिन भर मेर्री पेंटी में खुजली होती रहती है

सूर्य बिना रुके दीप्ती की चिकनी छूट को रोंधने लगा हुआ था

साथ हे साथ दीप्ती की लाल हो चुकी चूचियों को मसलने में लगा था

अगले 2 मिनट्स में दीप्ती की टंगे करने लगी उसे लगा जैसे उसकी छूट से अभी पे सब निकल आएगा पैर सूर्य के देखो ने जैसे उसका पिसाब भी रुक जायेगा

सूर्य दीप्ती के कण की लौ को हल्का हल्का कत्थे हुए देखे लगाने में ध्यान दे रहा था

दीप्ती की झड़ने हे सूर्य अपना लैंड निकल लेता है

सूर्य दीप्ती की छूट से लैंड बहार निकलता है तो देखता है की उसके लैंड आवर दीप्ती की छूट से पानी के दाग़े से बन रहे है

सूर्य कार की सीट पे ले जाता है अपने पेअर बहार रखे हुए दीप्ती सूर्य की कमर के दोनों साइड अपने पेअर कर सूर्य के लैंड पे अभी अभी झड़ी अपनी छूट के होंठ खोल कर सूर्य के लैंड को रास्ता दिखते हुए 2 हे बार में पूरा अंदर ले लेती है

ऊपर से दीप्ती आवर निचे से सूर्य दोनों एक साथ कमर हिला रहे थे दबाते भरे इस कुलधरा गांव में दोनों की आहे सिसकारियां गूंज उठी ताआप टॉप अह्ह्ह्हह्हह उफ्फ्फफ्फ्फ़ पूछ पुच्छ की आवाज एक अलग माहौल बना रही थी

सूर्य दीप्ती को अपने ऊपर जुखाते हुए उसे किश करने लगता है

सूर्य को अपने अंडकोष पे दीप्ती की छूट से निकल रहा रास मह्सुश हो रहा था जो उसके अंडकोष से होता हुआ सूर्य की गांड की आवर भाड़ रहा था

पता नहीं सूर्य को क्या हुआ की उसने अपने अपने ऊँगली को अपनी लैंड के साथ दीप्ती की पनियाई छूट में गुस्सा दिया

दीप्ती ........ आआह्ह्ह्हह ये क्या कर रहे हो सूर्य पहले हे मेरी छूट तुम्हारे लैंड से बुरी तरह फैट रही है

सूर्य ने गीली ऊँगली को छूट से निकला आवर दीप्ती की गांड के छेद में दबा दिया गीली ऊँगली का अगला हिस्सा फ़ौरन दीप्ती की अनछुई गांड में गुस्सा गई दीप्ती ने फ़ौरन अपनी कमर चलना रोक दिया आवर अपनी गांड को टाइट कर सूर्य को देखने लगी

दीप्ती ........... अह्ह्ह्हहजह तुम पागल हो गए हो क्या पता भी है तुम क्या कर रहे हो सूर्य अपनी ऊँगली वह क्यों डाली निकालो वह से

सूर्य ....... क्या हुआ अच्छा नहीं लग रहा है क्या

दीप्ती ....... अच्छा मुझे तो उल्टा दर्द हो रहा है प्लीज निकल लो न वह से नहीं तो सदी में मेरी बदली हुई चल से सबको लगेगा की मैं कही से छूट मरवा कर आ रही हूँ

सूर्य ........ हाहाहाहा उम्म्म्मममहः मेरी जान वही तो करवा रही हो तुम अभी

डेरी डेरी सूर्य फिर स चुदाई करने लगता आवर अपनी ऊँगली भी अंदर बहार करने लगता है जल्दी हे दीप्ती की गांड में मीठी मीठी खुजली होने लगती जय जो जल्दी हे मज़े में बदल जाती है

ुशी फरहा सूर्य दीप्ती को लगातार 15 मिनट्स तक जैम कर छोड़ता है दीप्ती को झड़ते हुए अपनी छूट में सूर्य के लैंड की नशे उबार कर मोती होती हुई मह्सुश होती है

दीप्ती फ़ौरन निचे उतर जाती है सूर्य भी सीट पे बेथ जाता है

दीप्ती अपनी छूट के कमरष से भीगा हुआ लैंड अपने मुँह में भर कर चूसने लगती है 30,40 सेकंड बाद हे दीप्ती के मुँह में सूर्य का लैंड झटका कहते हुए एक के बाद एक करके वीर्य की 7,8 पिचकारी छोड़ने लगता है

दीप्ती के सर को सूर्य ने अपने लैंड पे दबा रखा था जिस से मजबूरन दीप्ती को सूर्य का वीर्य पीना पड़ा

दीप्ती खासते हुए सूर्य से दूर हटी उसके होंटो की साइड से कुछ वीर्य की बुँदे निकल आई थी जिन्हे अपने हाथ से पूछ कर सूर्य को गुस्से से देखने लगी

सूर्य ........ सॉरी दीप्ती पता नहीं मुझे अचानक से क्या हो गया था आज से पहले ऐसा मैंने कभी नहीं किया

सूर्य वाकई में शर्मिंदा था अपने किये पे

दीप्ती ....... हहहहए वैसे कुछ भी कहो पैर मज़ा बहुत आया एक बार तो लगा उलटी होने वाली है पैर टेस्ट इतना भी बुरा नहीं था पहली बार के लिया

( दीप्ती अपने होंटो पे अपनी जुबान फिर कर मुस्कुराते हुए सूर्य को आँख मर देती है )

दीप्ती अपनी पेंटी से अपनी छूट को साफ करती है जहा उसकी छूट से निकला पानी लगा हुआ था

दीप्ती ........ देखो तो मेरी छूट की क्या हालत कर दी तुम्हारे घोड़े ने बिलकुल लाल हो गई मेरी मुनिया

दीप्ती एक बार आवर सूर्य के लैंड को चुस्ती है जिस से बचा कुछ वीर्य भी साफ हो गया

सूर्य ...... अब हमें चलना चाइये जल्दी ने यहाँ से

दीप्ती ....... ऐसे नंगे हे जाने का इरादा है क्या मुझे भी ठीक होने दो नहीं तो सभी को पता चल जायेगा

दीप्ती अपनी पेंटी वही फेंक देती है आवर अपनी ब्रा पहन कर टॉप ठीक कर कार में बेथ जाती है आवर खुद को बैक मिरर में देखते हुए ठीक करने लगती है

सूर्य भी अपनी पेण्ट पहन कार को फुल स्पीड में सहर की आवर दौड़ा देता है

अच्चानक से उसे कुछ मह्सुश होता है जिस से सूर्य की आँखे बंद हो जाती है आवर पेअर अचानक बरअक्स पे लग जाते है जिस से कार के त्येर रोड की कंक्रीट को उखड़ते हुए रुक जाती है

दीप्ती ........ ( गबराते हुए ) पागल हो गए हो सूर्य तुम्हारा ध्यान किदार है कोई ऐसे ब्रेक लगता है अभी एक्सीडेंट हो जाता हमारा

पैर सूर्य तो अभी भी आँखे बंद किये हुए था

दीप्ती ने जब देखा की सूर्य अभी भी चुप हो कर आँखे बंद किये बैठा है तो फिर से बोल उठी

दीप्ती ..... क्या हुआ सूर्य तुम चुप क्यों हो

दीप्ती ने सूर्य को पकड़ कर हिलाया

सूर्य ........ है क्या हुआ

दीप्ती ...... वही तो मैं पूछ रही हूँ क्या हुआ तुमने इतनी जोर से बरअक्स क्यों लगा तुम्हारा ध्यान खा है

सूर्य चारो तरफ देखता है कार अभी भी रोड के बिच बंद कड़ी थी

सूर्य ........ सॉरी मेरा ध्यान नहीं अचानक से कुछ याद आ गया था

दीप्ती ...... पैर ऐसे ....

सूर्य ........ सॉरी न यार सच में ध्यान नहीं रहा

सूर्य कार स्टार्ट कर फिर से चल देता है ....

ीदार हवेली में मेर्री जी की सदी के मंगल गीत गए जा रहे थे वही कुछ हम उम्र महिलाये अपनी बातो में मसगुल थी

तभी हवेली से कुछ दूर सकती कुछ लड़कियों ( परियो ) को अपने साथ लिया प्रकट होता है

सकती ........ आप सभी को पता है न की आपको क्या कर न है राजकुमारी जी ने आपको पहले हे सब समझा दिया था इस बारे में

लड़किया ...... जी हमें पता है जैसा राजकुमारी जी ने कहा हम वैसा हे करेंगी उनकी आज्ञा अनुसार

सकती ...... ठीक है फिर आपको भी सामान चाइये वो ले लीजिये आवर इस कार में बेथ जाइये हम लोग पहुंचने गए है

सकती उन 4 लड़कियों को कार की आवर इशारा करते हुए कहता है

चारो लड़किया अपना रूप बदल लेती है जो अब मॉडर्न ड्रेस में बहुत खूबसूरत लग रही थी चारो अपने हाथ में कुछ बॉक्स पकड़ रखे थे जिनमे कुछ सामान था

सकती सभी को ले कर हवेली पहुंचने जहा सकती ने उनका परिचित ब्यूटिशियन के रूप में दिया ये कहते हुए की ये ब्यूटी पारलर की आवर से आई है मेर्री जी की मंडी लगाने सजाने आदि के लिया

परिधि ......... तुम्हे पता है न क्या कर न है

लड़की 1 ....... जी मैडम हमें पता है जैसा आपने कहा वैसे हे होगा

परिधि ........ ठीक है तुम दोनों जा कर दुल्हन को त्यार करो आवर तुम दोनों मेरे साथ आओ

परिधि दो लड़कियों को ले कर किरण के पास पहुंची

परिधि ....... दीदी ये लड़किया ब्यूटी पारलर से आओ है आप इन हे बता दीजिये क्या करना है

किरण दोनों लड़कियों को देखते हे पहचान लेती है की ये लड़किया पारी है

किरण ...... ( मंद तो मंद ) परिधि इनकी क्या जरुरत थी हम यहाँ से भी तो लड़कियों को बुला सकते थे वह से बुलाने की क्या जरुरत थी

परिधि ........ दीदी हम बाकियो के लिया यहाँ से बुला लेते है हमारी बाकि बाँहों को ये त्यार कर देंगी

किरण ....... नहीं परिधि बाकि लड़किया भी हमारे हे परिवार का हिस्सा है वो सभी हमारी खुशियों में शामिल हुई है उनके साथ ऐसा करना गलत है हमारे पास सकतिया है तो इसका मतलब ये नहीं की हम उनसे ऊपर है या वो हमसे निचे किसी के साथ भी दोहरा व्यव्हार करना अनुचित है

परिधि ........ सॉरी मैं समाज गई दीदी मैं सभी के लिया आवर सेविकाओं को बुला लेती हूँ वो सभी को त्यार कर देंगी

किरण........ यही ठीक रहेगा परिधि अभी दोपहर होने में कुछ टाइम है तो अभी बुला लो ताकि टाइम से पहले सभी अपनी मर्ज़ी से त्यार हो जाये

परिधि ने सकती को इस बारे में बता दिया ताकि वो आवर परियो को यहाँ ले आये

उदार दोनों लड़किया मेर्री के रूम में पहुंची जहा अलीना राधिका मेनका जी मेर्री जी बैठी हुए कुछ बाते कर रही थी

राधिका ....... आप दोनों कोण है

लड़की 1 ...... जी हम ब्यूटी पारलर से है हमें दुल्हन को सदी के लिया त्यार करने को कहा गया है

मेनका जी ....... पैर अभी तो उसमे काफी टाइम है सदी तो रात में है न

लड़की 1 ....... जी पैर उस से पहले दुल्हन की पूरी बॉडी को शेप ी मैं अच्छे स त्यार करना होगा जिसमे हमें टाइम लगेगा

राधिका जी ....... जी ठीक है आप अपना काम कर सकती है

लड़की 2 ....... आपके सामने हे

राधिका जी ....... क्यों क्या हुआ हमारे यहाँ रहने से कोई प्रॉब्लम होगी क्या

लड़की 1 ....... जी वो हमें इनकी पूरी बॉडी की अच्छे सफाई करनी होगी उसके लिया इन्हे नुदे होना होगा

मेनका जी ....... हेहेहे अच्छा है मेर्री अच्छे से सफाई करवाना ताकि विजय तुम्हे अच्छे से निहार सके आवर तुम्हारे सिवा किसी आवर की तरफ नजर उठा कर भी न देखे

मेनका जी ......... वो तो वैसे भी दीवाने है मेरे मुझे नहीं लगता की वो मेरे अलावा किसी आवर को देखेंगे भी

राधिका ......... हहहहए बुआ जी आप भी इनसे से एक बार फुल बॉडी मस्सगे ले लीजिये ताकि फूफा जी आपके आगे पीछे हे रहे

मेनका जी ....... बीटा अब बुढ़ापे में तुम्हारे फूफा जी वैसे भी किसी आवर को देखने लायक नहीं रहे है तुम्हे जरूर इनसे स्पेशल ट्रीटमेंट लेना चाइये अपनी बॉडी के लिया

राधिका जी ......... बुआ जी मेरे वाले तो अपनी ड्यूटी पे है मैं किसके लिया खुद को त्यार कृ

अलीना ....... आप दोनों हे रहने दो मैं करवा लेती है

मेनका जी ....... तुम्हे किसके लिया करवाना है कही कोई बर्फ तो नहीं बना लिया है

अलीना ........ हेहेहे बुआ सा वो तो पहले से हे है न आपका लाडला

मेनका जी ....... ठीक है फिर तुम लोग कराओ अपनी मालिश मैं चलती हूँ

अलीना ...... भाबी आप दीदी के साथ रुकिए मैं कोमल के पास जा रही हूँ

मेनका जी आवर अलीना के जाते हे राधिका ने रूम लॉक कर दिया

लड़की 1 ....... आप दोनों त्यार है

राधिका ....... मैं नहीं आप दोनों दुल्हन को त्यार कीजिये

मेर्री जी ....... राधिका तुम भी करवालो अच्छा लगेगा आवर वैसे भी सदी है तो सदी में खूबसूरत भी लग्न चाइये न

लड़की 2 ....... आप लोग अपने अपने कपडे उतर दीजिये हम त्यार करते है

दोनों लड़किया अपने अपने बॉक्स में से कुछ लिक्विड से भरी ऐसी या निकलती है आवर बाथटब में पानी भर कर उसमे मिक्स करने लगती है देखते हे देखते पानी का रंग सुन हटा हो जाता है

लड़की 2 बीएड पे एक प्लास्टिक बिछा देती है

मेर्री जी तो जल्दी हे बिना किसी आराम के पूरी नंगी हो जाती है

राधीना अभी भी शर्मा रही थी पैर जब मेर्री को फुल नुदे देखा तो वो भी कपडे उतरने लगी

राधिका की नजर बार बार राधिका की फुल्ली हुई गोरी गुलाबी छूट आवर 36 की सफ़ेद चूचियों पे जा रही थी


मेर्री ....... हेहेहे ऐसे क्या देख रही हो राधिका मेरी पुसी या बूब्स तुम्हारी पुसी या बूब्स से अलग तो नहीं

राधिका ...... नहीं नहीं वो बस ऐसे हे नजर पद गई ( राधिका ...... क्या मेर्री जी पहले से हे चुद चुकी है इनकी छूट को देख कर तो यही लगता है क्या मैं पुछु इनसे )

मेर्री जी अपने खुले मटका कर चलते हुए बाथटब में उतर जाती है सिर्फ नाक नक् बहार रहा उनका

करीब 5 मिनट्स बाद मेर्री जी को बाथटब से बहार निकला जिनके शरीर पे सुनहरी परत से बन गई थी लड़की 1 ने उनने बीएड पे प्लास्टिक सीट पे लिया दिया

राधिका ने भी वैसे हे किया कुछ देर बाद वो भी मेर्री जी की बगल में लेती हुई थी

खुले में रहने से जल्दी हे दोनों की बॉडी से सुनहरी परत गायब हो जाती है

दोनों के शरीर पे पसीना आने लगा पैर जल्दी हे पसीना हेक काळा रंग की परत में उनके शरीर पे जमने लगा

दोनों लड़किया कपडे को किसी लिक्विड से भोगी कर पूरी बॉडी को साफ कर दिया

जब दोनों लड़कियों ने राधिका आवर मेर्री के पैरो को ओपन किया तो छूट से ढेर सारा कला हरा लिक्विड दोनों की छूट से निकल कर प्लास्टिक सीट पे फ़ैल गई

दोनों लड़कियों ने अच्छे से साफ कर पूरी बॉडी पे क्रीम लगी आवर 5 मिनट्स बाद साफ कर दिया दोनी कक बॉडी से हेयर बिलकुल साफ हो गए अब दोनों का बॉडी रंग बहुत फेयर हो चूका था दोनों की बॉडी स्किन पहले से कही गुना ज्यादा सॉफ्ट स्मूथ हो चुकी थी

राधिका ........ वाओ मेर्री बॉडी बिलकुल हलकी आवर सॉफ्ट हो गई जैसे मैं बिलकुल हलकी हो कर हवा में उड़ रही हूँ

ऐसा हे मेर्री जी को फील हो रहा था

करीब आधे घंटे से भी ज्यादा दोनों लड़किया उनकी नुदे बॉडी पे अलग अलग लिक्विड आवर क्रीम की मालिश करती है इस भींच दोनों उत्तेजित हो कर 2 बार पानी भी छोड़ दिया था पैर लड़कियों ने इस बारे में कुछ भी नहीं कहा जैसे की ये आम बात थी

ऐसा हे हाल अलग अलग रूम में था मानसी जीनत किरण सोफिया परिधि देवयानी आदि को छोड़ कर

सबसे बुरा हाल तो माया आवर सानिया का था जैसे दोनों का बॉडी ट्रीटमेंट सुरु हुआ दोनों हे उत्तेजित हो कर बे- थषा पानी छोड़ने लगी दोनों ने खुद को बड़ी मुश्किल से रोका हुआ था

दोनों लड़कियों की हालत देख मालिश कर रही लड़कियों मन हे मन हाशि आ रही थी दोनों ने देख लिया था की ये दोनों लेस्बियन है एक दूसरे की सम्भोग पार्टनर भी पैर इस समय दोनों हे बेबश थी एक दूसरे के सामने

सूर्य भी अब तक दीप्ती के मां जी के परिवार को ले कर आ चूका था दीप्ती सिदा अपने रूम की आवर निकल गई

वही सूर्य कुछ काम फिनिश कर मानसी के रूम की आवर भाड़ गया

थक थक की आवाज सुन मानसी ने अपने रूम का दूर खोला सामने मानसी कड़ी थी

सूर्य की नजरे मानसी की आँखों में हे टिक कर रह गई वो बहुत खूबसूरत लग रही थी पैर सूर्य तो उसकी आँखों में देख रहा था

मानसी ने फ़ौरन अपनी नजरे जुखा ली

सूर्य रूम में आ कर रूम को लॉक कर मानसी को गले लगा लेता है

सूर्य ........ तुम्हे पता है न मनु तुम मुझसे कुछ छुपा नहीं सकती अब बताओ मुझे ऐसा क्या हुआ की आज मेरी जान की आँखों में आंसू आ गए थे

सूर्य की बात सुन मानसी की पलके फिर से भीगने लगी जिसका अंदाजा होती हे सूर्य का दिल जलने लगा

सूर्य मानसी को अपनी गौड़ में उठा बीएड पे ले आता है

मानसी अभी भी किसी मासूम से छोटी बची की तरह सूर्य के गले लगी हुई थी

सूर्य ........ बोलो न मनु क्या हुआ तुम्हे किसी ने कुछ कहा क्या तुम्हे अब अगर तुमने मुझे सब कुछ नहीं बता या तो मैं कभी भी तुमसे बात नहीं करूँगा

मानसी ........ नहीं ऐसा मत बोलिये कुंवर जी आपके बिना मैं जीने की सोच भी नहीं सकती

सूर्य ........ संत हो जाओ आवर बताओ मुझे आज मेरे यहाँ से जाने के बाद ऐसा क्या हुआ की तुम्हारी आँखों में आंसू आ गए

मानसी ......... वो देवयानी बुआ ने कहा की ...

कुछ घंटे पहले मानसी का रूम ..........

सुबह जब सूर्य ने अपने परिवार को देवयानी जी के बारे में बताया तब शालिनी जी उनसे मिलने मानसी के रूम में गई क्यों की देवयानी जी मानसी के रूम में उसके साथ रुकी थी

इस लिया शालिनी जी मानसी के रूम में आ पहुंची

मानसी ......... माँ आप यहाँ मुझे बुला लिया होता मैं आ जाती आपके पास

शालिनी जी ....... क्यों मैं क्या इतनी बूढी हो गई जो कुछ सिडिया चढ़ कर अपनी बेटी से मिलने भी नहीं आ सकती

मानसी ....... नहीं माँ ऐसा कुछ नहीं है आप तो अभी भी काफी खूबसूरत आवर जवान है जैसे मेरी बड़ी बहन हो हहहहए

शालिनी जी ........ हहहहए पागल कही की मैं तेरी सास हूँ बड़ी बहन नहीं मैं तो यहाँ तुम्हारी बुआ देवयानी जी से मिलने आई हूँ

शालिनी जी को ऊपर से निचे तक देखती है देवयानी जी किसी देव अप्सरा सामान खूबसूरत थी

शालिनी जी ....... Hi देवयानी जी आपको यहाँ हमारे परिवार हमारी खुशियों में शामिल होती देख बहुत अच्छा लगा बहुत सुना था आपके बारे में

देवयानी जी ......... हमें भी आपसे मिल कर बहुत अच्छा लगा आप सूर्य की माँ है न मानसी की सास

मानसी शालिनी जी के गले लगते हुए

मानसी ........बुआ ये मेरी सास नहीं माँ है मेरी क्यों माँ सही कहा न मैंने

शालिनी जी ......... बिलकुल तू तो मेरी पहाड़ी बच्ची मनु है

शालिनी जी प्यार से मानसी के माथे पे किस कर देती है

शालिनी जी ......... वैसे आपको सूर्य ने पहले हे बता दिया होगा यहाँ के बारे में

देवयानी जी ........ जी बिलकुल आप निश्चिन्त रहे मैं अपनी वास्तविक सचाई किसी के भी सामने नहीं आने दूंगी

शालिनी जी ........ जी धन्यवाद आप समझ सकती है इसके के कारन को

देवयानी जी ........ मुझे सूर्य ने पहले हे पृथ्वीलोक की जानकारी दे दी है तो आप निश्चित रहे

शालिनी जी ........ ठीक है अब आप त्यार हो कर निचे आ जैसे सभी से आपका परिचय भी हो जायेगा आवर सब साथ में चाय नास्ता भी कर लेते है सदी का टाइम है तो अभी मैं चलती हूँ काफी काम है निचे ये आपका अपना परिवार है तो किसी बात को ले कर कोई संकोच न करना

देवयानी जी ....... जी जरूर मुझे भी आपके परिवार में शामिल हो कर ख़ुशी होगी

शालिनी जी निचे चली जाती है आवर देवयानी जी आवर मानसी बारे बारे से बाथरूम से नाहा कर त्यार हो जाती है

देवयानी जी ........... मानसी एक बात बताओ क्या शालिनी जी एक पारी है

मानसी ....... नहीं तो बुआ क्यों क्या हुआ

देवयानी जी ......... फिर उनसे मुझे जिस ऊर्जा का आभाष हुआ वो परियो की ऊर्जा जैसी क्यों है

मानसी ....... इस बारे में मुझे नहीं पता बुआ पारी तो पारिजात है अभी कुछ दिन पहले हे कुंवर जी से उनकी सदी हुई थी

देवयानी ........ वैसे शालिनी जी बहुत अच्छी महिला है जो तुम्हे बहुत प्यार करती है जैसे तुम उनकी बहु न हो कर बेटी हो

मानसी .......... माँ अपनी चारो बहुओं से एक जैसा हे प्रेम करती है जैसे हम चारो बहन न हो के उनकी कोख से जन्मो बेटी हो

देवयानी जी ........क्या चार बहु पैर मुझे तो लगा सूर्य की तीन पत्निया है तुम किरण आवर परीलोक की राजकुमारी पारिजात

मानसी ........ आप जीनत दीदी को भूल गई उनसे आवर पारिजात से कुंवर जी ने एक हे दिन तो सदी की थी

देवयानी जी ....... ये जीनत कोण है मानसी

मानसी ......... बुआ जीनत प्रेतलोक की राजकुमारी है प्रेतराज जी की एकलौती पुत्री जब निचे चलेंगे तो आप उनसे मिलना वो बहुत खूबसूरत है

देवयानी जी ......... सूर्य ने इतनी जल्दी 4 सादिया कर ली तुम्हे बुरा नहीं लगता क्या मानसी क्या तुम्हे नहीं लगता की सूर्य ने तुम्हारे पत्नी होने के आदिकारो का बटवारा कर दिया हो

मानसी .......ये आप कैसे नात करती है बुआ आप जानती हे कितना है कुंवर जी को कुंवर जी की पहली पत्नी है स्वीटी दीदी जिनसे वो सबसे ज्यादा प्यार करते है फिर भी उन्होंने कभी मुझे दूसरी पत्नी होने का ागसष नहीं होने दिया न दीदी ने कभी ऐसा आभाष होने दिया इतना अच्छा परिवार मिला जहा ससुर के रूप में पिता मिले सास के रूप में एक नहीं उनके माँ मिली जो अपनी सही बेटियों से भाड़ कर बहु को बेटी का मान सम्मान प्रेम आदर दिया सभी को एक सम्मान प्रेम करने वाला पति मिला जबकि मैं तो एक असुर कन्या हूँ फिर भी सभी ने सम्मान बड़ी कर आवर प्रेम दिया वर्ण मैंने तो जीवन भर दुःख दर्द हे भोगा है सायद कोई ऐसा करम किया होगा जो कुंवर जी जैसे दिव्या आत्मा की पत्नी बनने का सौभाग्य मुझे मिला

बोलते बोलते मानसी की आँखे नाम हो गई

यही वो समय था जब सूर्य को बैचेनी होने लगी थी आवर अचानक से उसकी आँखों के सामने मानसी का आंसुओ से भीगा हुआ चेहरा उसकी बंद आँखों के सामने आ गया आवर उसने ब्रेक मर्द दिए अनजाने में हे

देवयानी जी ........ सॉरी मानसी मुझे माफ कर दे मेरा ऐसा इरादा नहीं था की मैं तुम्हारा दिल दुखों या तुम्हे ठेश पहुंचे

मानसी ........ मैं जानती हूँ बुआ पैर आज एक बार फिर मेरा बिता हुआ कल मेरा अकेलापन मेरी वो पुराणी दर्द भरी यादे ताज़ा हो गई जिन्हे मैंने कुंवर जी के प्यार से भुला दिया था

देवयानी जी ......... सच में सूर्य किस्मत वाला है जो तुम्हारे जैसे पत्नी उसे मिली

मानसी. ....... आप फिर गलत हो बुआ किस्मत वाली तो मैं हूँ सायद ये ईश्वर की मुझे कारण रही उनका आशीर्वाद रहा जो मैं उनके चरणों में स्थान बना पाई

तभी बहार से किसी के दूर कटखने की आवाज हुई

मानसी ने फ़ौरन अपने आंसू पोंछे आवर रूम को खोला तो सामने किरण कड़ी थी जीनत के साथ में

किरण ........ मनु क्या हुआ मेरी बहन तुम्हारा चेहरा क्यों उदाश है आज फिर से तुम रोइ हो न

मानसी किरण से झूट नहीं बोलना चाहती थी आवर सच बताने की हिमत उसकी हुई नहीं

मानसी ........ सॉरी दीदी

किरण मानसी को गले से लगा लेती है जीनत भी उसका सर सहलाने लगती है

किरण ......... देख मनु मैंने पहले भी तुमसे कहा था की तुम्हारी आँखों में कभी भी आंसू नहीं आने चाइये तुमने मुझसे वडा किया था आज तुमने वो तोड़ दिया न क्या इतना हे प्यार करती है मुझसे

मानसी ......... माफ कर दो दीदी फिर से ऐसा नहीं होगा कभी भी पिंकी प्रॉमिस

किरण ....... चुप कर बड़ी आई पिंकी प्रॉमिस वाली आगे से ऐसा दुबारा किया न तो देख मैं पिटाई कर दूंगी तुम्हे तो पता है न की मैंने कैसे कोमल की पिटाई की थी

मानसी आँखे नाचते हुए किरण को हस्ते हुए देखती है

मानसी .......... क्या सच में आप कोमल दीदी की तरह मेरी पिटाई
करेंगी

किरण .......... है अगर फिर से तेरी आँखों में आंसू आये तो जीनत इनसे मिल ये देवयानी जी है गुरुदेव शुक्राचार्य जी की पुत्री आवर मानसी की गुरु बुआ

जीनत देवयानी जी से गले लाक मुक्ति है ........

प्रेजेंट्स टाइम ........

सूर्य ......... ठीक है पैर ऐसा दुबारा नहीं होना चाइये मनु वर्ण मैं भी तुम्हारी पिटाई स्वीटी के हाथो होने से नहीं रोक पाउँगा

सूर्य मानसी को अपने साथ अपने सीने पे लिया लेट जाता है

दोनों कुछ देर बात करते जिस से मानसी का मन हल्का हो जाता हाउ आवर उसे नींद आ जाती है

सूर्य कुछ देर बाद मानसी के साथ वक़्त बिता सूर्य जिनिशा के पास पहुँचता है जो जूलिया आवर कोमल से बात कर रही थी सुबह से सूर्य को ठीक से इतना टाइम भी नहीं मिला की वो जूलिया या निनिशा से ठीक से मिल पाए

सूर्य के आने पैर कोमल कुछ देर बाद निचे चली जाती है

अब ऊपर जिलिया जिनिशा आवर सूर्य हे बचा था ...............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ...............

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ..........................
 
अपडेट. 292 ( ा )

सूर्य मानसी को अपने साथ अपने सीने पे लिया लेट जाता है

दोनों कुछ देर बात करते जिस से मानसी का मन हल्का हो जाता हाउ आवर उसे नींद आ जाती है

सूर्य कुछ देर बाद मानसी के साथ वक़्त बिता सूर्य जिनिशा के पास पहुँचता है जो जूलिया आवर कोमल से बात कर रही थी सुबह से सूर्य को ठीक से इतना टाइम भी नहीं मिला की वो जूलिया या निनिशा से ठीक से मिल पाए

सूर्य के आने पैर कोमल कुछ देर बाद निचे चली जाती है

अब ऊपर जिलिया जिनिशा आवर सूर्य हे बचा था ...............

अब आगे ...........

सूर्य जिनिशा आवर जूलिया के साथ कुछ वक़्त बिता कर उनने त्यार होने का बोल निचे आ गया

दादी जी ........ बीटा सूर्य तुम्हे तुम्हारे बाउजी दंड रहे है

सूर्य ........ क्या हुआ माँ सा कुछ काम था क्या

दादी जी ....... पता नहीं बीटा वो बैठक में है गुरु दे के साथ

सूर्य ....... ठीक है माँ सा मैं अभी उनसे मिल लेता हूँ

दादी जी ....... ठीक है बीटा आवर जरा तुम्हारे मां जी को फ़ोन कर पता करो की बारात निकली या नहीं वह से

सूर्य ....... जी माँ सा अभी करता हूँ

सूर्य वही खड़े खड़े अपने बड़े मां जी को कॉल करता है पैर उन्होंने उठाया नहीं तो उसने फिर से कॉल किया इस बार किसी ने कॉल उठाया

ये सूर्य की बड़ी ममी पिरया जी थी सूर्य उनकी बाद दादी जी से करवा देता है कुछ देर बात कर दादी जी कॉल कट कर देती है

सूर्य ....... क्या हुआ माँ सा वो लोग निकले या नहीं

दादी जी ..... नहीं बीटा उनने कुछ टाइम आवर लगेगा

सूर्य ....... वैसे भी अभी 5 हे बजे है माँ सा काफी टाइम है अभी

दादी जी ......... है पैर टाइम पे सब काम हो जाये तो ज्यादा अच्छा रहता है बीटा ठीक है तुम जाओ

सूर्य वह से बैठक की आवर चल देता है जहा वीरभान जी सूर्यकांत जी सुखदेव जी ( दीप्ती के मां ) गोविन्द जी सोहेल के अब्बू दादा जी गुरुदेव के साथ साथ ऋषि दूर्वा आवर सूर्यगढ़ के कुछ बुजुर्ग भी बैठे हुए थे

सूर्य रूम में आते हे सभी को हाथ जोड़ नमस्ते करता है आवर गुरुदेव आवर ऋषि दूर्वा के चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लेता है

गुरुदेव ...... आ गए पुत्र सूर्य कहे थे अब तक तुम

सूर्य ...... जी वो मैं कुछ काम कर रहा था गुरुदेव

ऋषि दूर्वा ....... पुत्र इतना आदिक भी समय को गति न दो हर कार्य करने का एक उचित समय होता है हाहाहा

ऋषि दूर्वा जैसे जानते थे की सूर्य कहा क्या कर रहा था

सूर्य ....... जी ऋषिवर आगे से ध्यान रखूँगा

कुछ देर बात करने के बाद सूर्य ने गुरुदेव से एकांत में मिलने को कहा

गुरुदेव ........ पुत्र परताप हम कुछ समय पुत्र सूर्य से एकांत में बात करना चाहते है

दादा जी ...... जी गुरुदेव आप लोग बात कीजिये हम चलते है

वीरभान जी ..........बीटा सूर्यकांत सुखदेव ...भात... की तयारी करो कुछ समय बाद तो बारात भी आणि है उस से पहले हे सभी काम कर लेने चाइये

( भात .... ये एक तरह की रसम है जो विवाह के समय दूल्हा दुल्हन के ननिहाल की तरफ से निभाई जाती है क्युकी सूर्यकांत जी मेर्री जी का कन्यादान कर रहे थे तो ये रसम दीप्ती के ननिहाल की आवर से की जा रही थी )

सुखदेव जी ....... जी पापा जी जैसा आप ठीक समझे

वीरभान जी ........ आप क्या कहते है ठाकुर जी

( सरदार जी वीरभान सिंह शेरगिल उर्फ़ बड़े प्रधान जी दीप्ती के नाना जी

1 ..... सुखदेव सिंह ..... दीप्ती के बड़े मां जी

2 ........ कमलजीत सिंह कौर ..... दीप्ती की बड़ी ममी

3 ........ जससजित सिंह ....... दीप्ती के मां का लड़का

4 ........ मनप्रीत सिंह ( जससजित की बीबी )

5 ...... जसलीन सिंह ( सुखदेव की बेटी )

6 ....... करमजीत सिंह ( दीप्ती के छोटे मां जी

7 ........ अमनजोत सिंह कौर ( छोटी ममी )

8 ....... बलवीर सिंह ( छोटे मां का लड़का )

9 ....... सिमरन सिंह ( करमजीत की बेटी )

ये दीप्ती के नाना जी का परिवार है पंजाब के एक खूबसूरत सहर लुधिअना से जहा से सूर्यकांत जी भी बिलोंग करते है )

दादा जी ....... अरे भाई वीरभान जी ठाकुर साहब हम बहार के लोगो के लिया है आप से तो अब रिस्ता जुड़ चूका है हाहाहा आप तो अब हमारे संधि भी है आवर दोस्त भी

वीरभान जी ........ हमें भी आप जैसा संदी आवर दोस्त प् कर ख़ुशी हुई हाहाहा चलिए फिर बहार चल हमारे हिस्से का करम कर लिया जाये

दादा जी वीरभान जी के जाते हे बाकि लोग भी उनके पीछे पीछे बैठक से निकल गए

सूर्य ने बैठक का दूर अंदर से बंद कर दिया आवर गुरुदेव वह ऋषि दूर्वा से बात करने लगा

बहार हवेली के लोने में भात से जुड़े रीती रिवाज पुरे किये जा रहे थे

करीब एक घंटे बाद सूर्य गुरुदेव ऋषि दूर्वा तीनो बैठक से बहार निकले तब तक भट की पर्किर्या पूरी हो चुकी थी

सूर्य की नजर अजय पे पड़ी जो बड़ी तेजी से बहार जा रहा था कुछ वेटर्स को लिए

सूर्य ....... क्या हुआ अजय इतनी हड़बड़ी में कहा जा रहे हो

अजय ...... भाई वो बारात किसी भी समय आ सकती है मैं बारात विश्राम घर जा रहा हूँ इनको ले कर सोहेल भाई वह अकेले है

सूर्य ....... ठीक है रुको मैं किसी आवर को भी तुम्हारी मदद को भेजता हूँ

सूर्य ने चारो तरफ नजर दौड़ाई तो वह कुछ जान पहचान के सूर्यार्ध के लड़के दिखाई दिए

सूर्य ने उन सभी को अजय के साथ जा कर उसकी मदद करने को कहा

सभी लड़के फ़ौरन त्यार हो गए अजय उन्हें ले कर बारात के जलपान की वयस्था सु निश्चित करने चला गया

अभी सूर्य वही खड़ा था कक तभी किसी ने उसके कंधे पे पीछे से हाथ रखा

सूर्य ने जब पलट कर देखा तो पीछे मानव खड़ा था

( मानव कोमल के मां जी का लड़का अपडेट 195 में इंट्रो है उसकी फॅमिली का )

सूर्य ....... अरे मानव भाई आप आप कब आये

मानव ....... बा भाई कुछ देर हुई है आये हुए

सूर्य ....... आप लोगो ने इतना लेट क्यों किया भाई मां जी ममी जी कहा मुझे उनसे बात करनी है

मानव ....... भाई मम्मी की कल अचानक से तबियत ख़राब हो गई थी वो तो बुआ सा ने जिद कर ली नहीं तो मैं आवर मानवी हे सदी में आने वाले थे

सूर्य ...... क्या हुआ ममी जी को चलो मुझे उनके पास ले चलो

मानव ....... मम्मी बुआ सा के रूम में आराम कर रही है तुम मिल लो मैं जरा बड़े फूफा सा से मिल लेता हूँ फिर बाद में बेथ कर आराम से बात करते है

सूर्य ...... ठीक है भाई बाद में मिलता हूँ

सूर्य वह से सीधा बड़ी मम्मी रेखा जी के रूम में पहुंचा जहा पूनम ममी जी बीएड पे लेती हुई थी वाकई वो बीमार लग रही थी रेखा जी मानवी मेनका जी मधु आंटी पूनम ममी जी के पास बैठी थी

सूर्य मेनका जी को हटा कर खुद पूनम ममी जी के पास बेथ जाता आवर उनका हाथ पकड़ लेता है

पूनम ममी जी अपनी आँखे बंद किये लेती थी उन्होंने अपनी आँखे खोली आवर मुस्कुरा कर सूर्य को देखा ममी जी अपनी मुस्कराहट में अपना दर्द छुपा रही थी पैर सूर्य उनकी मुस्कराहट के पीछे छुपे दर्द उनकी तकलीफ को भट चूका था

पूनम जी ....... कैसा है मेरा बच्चा

सूर्य ......... ममी सा ये आपने अपनी क्या हालत बना राखी है मैं तो यहाँ आपको डांटने आया था की सदी में इतना लेट क्यों आये आप लोग पैर आप तो .......

पूनम जी .......... मुझे कुछ नहीं हुआ है बीटा कुछ दिन में मैं बिलकुल ठीक हो जाउंगी फिर जितना चाहे दन्त लेना अपनी ममी सा को

सूर्य ........ ठीक तो होना हे होगा आपको ममी सा तभी तो आप मेरे आवर मानवी दीदी के साथ डांस करेंगी क्यों मानवी दीदी करेंगी न ममी सा आवर मेरे साथ डांस

मानवी की आँखे भर आई क्युकी मानवी सबसे ज्यादा प्यार अपनी मम्मी से करती है माँ बेटी दोनों एक दूसरे के बहुत करीब है

रेखा जी ....... ऐसा कभी हो सकता है तू कहे आवर तेरी ममी सा अपने एकलौते भांजे की बात न मने

सूर्य ........बड़ी मम्मी मैं अभी आया तब तक आप ममी सा का ख्याल रखे

सूर्य वह से किचन की आवर चला जाता है वह से वो मानसिक सन्देश से गुरुदेव से सम्पर्क कर उनसे कुछ बात करता है

कुछ हे देर में सूर्य के सामने अलग अलग जड़ी बुटिया राखी हुई थी सूर्य ढूढ गरम कर उसने वो सभी जड़ी बुटिया दाल देता है

आवर अच्छे से गरम कर उसे साफ कपडे से एक गिलास में छान कर गिलास लिए रूम में आ गया

रेखा जी ...... इसमें क्या ले कर आया है बीटा

सूर्य .......... इसमें ममी सा के लिया स्पेशल ढूढ है मम्मी बस आप देखती जाओ कैसे ममी सा की तबियत ठीक करता हूँ मैं

रेखा जी मेनका जी सूर्य की वास्तविकता जानते थी

उन्हें पता था की सूर्य ने अगर कहा है की पूनम जी ठीक हो जाएँगी तो जरूर होंगी

पूनम जी ....... बीटा मेरा इलाज़ इस ढूढ से नहीं होगा डॉक्टर ने मुझे दवाई दी है मैं जल्दी हे ठीक हो जाउंगी

सूर्य ...... मुझे पता है डॉक्टर ने आपको जरूर दवा दी होगी पैर आप इस ढूढ से जल्दी ठीक हो जाएँगी इसमें देसी जड़ी बुटिया है

पूनम जी ...... जड़ी बुटिया उस से क्या मैं ठीक हो जाउंगी जब इतने बड़े बड़े डॉक्टर हे ठीक नहीं कर पाए है मुझे तो इनसे क्या होगा

सूर्य ...... ममी सा आप पि कर तो देखिये फिर देखो मेरा कमल

रेखा जी ...... भाबी सा मेरा बीटा सही कह रहा है इस हे जड़ी बूटियों की बहुत अच्छी जानकारी है

रेखा जी आवर मेनका जी दोनों मिल कर पूनम जी को बीएड पे पिलो लगा कर सहारा दे कर बैठा देती है

सूर्य उन्हें आराम से घूंट घूंट कर ढूढ पिलाता है

पूनम जी को ढूढ का सवाद बड़ा हे अजीब बकबका सा लग रहा था

उन्होंने एक दो बार न मुकुट भी की पैर सूर्य आवर रेखा जी ने उन्हें प्यार से दन्त कर पूरा ढूढ पीला दिया

आवर उन्हें वापिस बीएड पे लिटा दिया पूनम जी को अपने शरीर में बहुत गर्मी मह्सुश होने लगी उनके माथे से गर्दन से be-thasha पसीना भने लगा

मानवी ....... ( गबराते हुए ) ये मम्मी को क्या हो रहा है बुआ सा

सूर्य ...... दीदी गैब्रो नहीं जड़ी बुटिया उनके शरीर को हील कर रही है बस कुछ देर आवर इन्तजार करो सब ठीक है

कुछ हे देर में बीएड पे नीची चादर पूनम ममी सा के शरीर से निकले पसीने की वह से आस पास से पूरी गीली हो चुकी थी

करीब 10 मिनट्स बाद डेरी डेरी ममी सा का शरीर नार्मल होने लगा उन्होंने आँखे खोली तो वो हलकी हलकी लाल हो चुकी थी उनके चेहरे पे ख़ुशी आवर सरम दोनों मिक्स भाव नजर आ रहे थे पूनम ममी जी अचानक से बीएड से उठी आवर तेजी से चलते हुए बाथरूम में गेस गई

सभज मुँह फाडे उन्हें देख रहे थे

मानवी ...... ये ये कैसे हो सकता ी मैं ये कैसे मुमकिन हो सकता है मम्मी इतनी जल्दी

रेखा जी ........ बीटा क्या अब भाबी सा पूरी तरह से ठीक है वैसे उन्हें बीमारी क्या थी

सूर्य ...... मम्मी अभी वो पूरी तरह से ठीक है एक दो बार आवर मेरे हाथ से ढूढ पियेंगी तो बिलकुल ठीक हो जाएँगी मैं उनसे बाद में मिलता हम उनसे कहे की कहा कर कपडे चेंग कर ले

रेखा जी ....... पैर उन्हें बीमारी क्या थी बीटा जो इतनी जल्दी ठीक हो गई वो तो कबसे दवा ले रही थी फिर भी

सूर्य .......... ज्यादा कुछ नहीं मम्मी उनकी नदिया बहुत कमजोर हो गई थी ज्यादातर नदिया ब्लॉक हो गई थी जिस कारन उनका ब्लड ठीक से बॉडी में बन नहीं रहा था इसी कारन उनकी बॉडी में जो ब्लड था वो भी ख़राब होने लगा था इसमें कुछ गलती मां जी की भी है मैं उनसे बात कर लूंगा

रेखा जी ........ भाई सा की क्या गलती है बीटा

सूर्य ....... कुछ नहीं आप ये सब छोड़िये आवर उन्हें त्यार होने में मदद कीजिये

मानवी विस्मय से सूर्य को घूरे जा रही थी

ये सूर्य आवर रेखा जी ने भी देख लिया था

सूर्य ........ दीदी इतना ज्यादा न सोचिये मेरे बारे में नहीं तो सपनो में रोज आपको सताने आ जाऊंगा

इतना बोल सूर्य झपटी हुई मानसी के गाल को चुम बहार निकल गया

बाथरूम में गुस्ते ममी सा अपना लहंगा ऊपर कर पिसाब करने के लिया कोड पे बेथ जाती है पैर उन्हें जो पिसाब लग रहा था वो काफी टाइम से पति से दूर रहने के कारन उनकी शारीरक जरुरत पूरी न होने कारन उनकी बॉडी में अंबलाने हार्मोंस बन गए थे जो उनकी बॉडी में स्लो पोईसिओं का काम कर रहे थी

सूर्य ने जब उनका हाथ पकड़ा तब उनकी शरीर की पूरी जानकारी सूर्य को मिल गई तब उसने इस जहर को बहार निकलने आवर उनकी बंद नदिया को खोल कर साफ करने के लिया गुरुदेव की सहायता आवर मार्गदर्शन से उचित जड़ी बुटिया उन्ही पिल्लई आवर इसका एस्सार भी बहुत अच्छा हुआ

उदार बारात घर में बारात आ चुकी थी

महेंद्र जी शिव गोविन्द जी अजय सोहेल मानव सभी बारातियो का स्वागत सत्कार उन्हें जलपान करवा कर जल्दी हे लौट आये थे

सूर्य ने अजय के हाथो सोहेल मानव आवर खुद अजय के लिया एक जैसी शेरवानी साफा भिजवा दिया था ताकि वो सभी जल्दी हे त्यार हो जाये सदी के लिया

सूर्य अपने रूम में नाना कर बहार निकला तो सामने किरण जीनत पारिजात तीनो कड़ी थी

सूर्य तीनो को देख उनकी खूबसूरती में पूरी तरह से खो गया था

उसका एक हाथ जो उसके गीले बालो में था वो वही रुक गया आवर मुँह खोले कमर पे टॉवल लपेटे वो तीनो में खोया हुआ था

किरण ....... अब अपनी तीनो बीबियो को अच्छे से निहार लिया हो तो वह जा कर बेथ जाइये

सूर्य ....... है है पैर वह क्यों

जीनत .......... क्यों आपको सदी के लिया त्यार नहीं होना है क्या हम आपको त्यार करने वाली है वैसे आपको हम तीनो की ड्रेस में से कोनसी पसंद आई

सूर्य बीएड पे देखता है जहा 4 ड्रेस सेट रखे हुए थे एक जो सूर्य ने अपने लिया पसंद किया था बाकि तीन किरण जीनत पारिजात ने

अब सूर्य असमंजश की इस्थिति में आ चूका था की अगर एक की ड्रेस पहनूंगा तो दूसरी दोनों नाराज हो जाएँगी

ीदार सूर्य को सोच में डूबने देख किरण जीनत पारिजात मन हे मन हैश रही थी

बस ये सब उन्होंने सूर्य को परेशान करने के लिया हे किया था

सूर्य आस भरी नजरो से किरण को देखता है

किरण ...... बीटा ये न कुंवर जी आपको हम तीनो की पसंद में से कोमसि ड्रेस पसंद आई

किरण सूर्य को आवर परेशान करने के लिया याचना भरी सूर्य की विनती भी दरकिनार कर देती है

सूर्य ......... पैर मैं तो पहले हे वो ड्रेस पसंद कर चूका हूँ अपने लिया ( एक तरफ जहा वो ड्रेस पड़ी थी जो नहाने से पहले सूर्य ने निकली थी )

जीनत ....... इसका मतलब आपको हमारे ल

पसंद की हुई ड्रेस अच्छी नहीं लगी हमने कितने प्यार से आपके लिया अपनी पसंद की ड्रेस त्यार करवाई थी

पारिजात ....... हमारी तो पूरी म्हणत बेकार हो गई कुंवर जी को तो कपडे पसंद हे नहीं आये

सूर्य परेशान हो चूका था उसे कुछ समाज नहीं आ रहा था की वो इस समय ऐसा कोनसा फैसला के जिस से तीनो की खुश रहे

पारिजात ने मौका देख किरण आवर जीनत की आवर इशारा किया

पारिजात का इशारा समाज किरण आवर जीनत ने मायुशि में अपना मुँह लटका लेती है

सूर्य ....... प्लेसेस देखो तुम लोग उदाश न हो मैं कुछ करता हूँ ( आज तो अच्छा फशा बीटा सूर्य बीबियो के हैजो आवर कर एक से ज्यादा सादिया एक बीबी से तो तेरा कुछ होता नहीं न अब गांड पे टेल लगा कर मरवाने को त्यार हो जा तीन यहस है एक बची वो भी आती होगी )

किरण अंदर हे अंदर सूर्य की सोच को सुन के जोर जोर से हैश रही थी

जीनत ....... आप क्या करेंगे अब

सूर्य ....... देखो बात ऐसे है अभी तो सभी की ड्रेस पहन पाना बहुत मुश्किल है

जीनत ....... क्या मतलब फिर कब पहनोगे

सूर्य ..........जब हम तीनो हनीमून पे जायेंगे तब जीनत पारिजात तुम दोनों की पसंद की हुई ये ड्रेस पहनूंगा

किरण ........ आवर मेरी लायी हुई ड्रेस का क्या

सूर्य ....... जब फिर से हम दोनों हनीमून पे जायेंगे तब पहन लूंगा अब मेरी बिबिया इतनी खूबसूरत है तो काम से काम साल में दो बार हनीमून पे जाना तो बनता है हर वक के साथ

किरण ....... हहहहए मैं कही नहीं जा रही आपके साथ बड़े आये हनीमून पे जाने वाले जल्दी से अपनी पसंद की ड्रेस पहनो फिर आपको त्यार कर हमें भी जाना है चाचा जी की बारात में डांस करने

सूर्य तो जैसे बचने की जिगर सीधा रहा था

उसने फ़ौरन बीएड से अपनी वाली ड्रेस उठाई आवर पहन ने लगा सूर्य को इस तरह जल्दबाज़ी करते देख तीनो की हाशि चुत जाती है

जीनत ....... आराम से पहन लीजिये कोई जल्दी नहीं हम बस आपके साथ मजाक कर रहे थे हमें पहले से पता था की आपने अपने लिया पहले हे रानी माँ की आवर से भेजी ड्रेस पसंद कर ली है

सूर्य ....... मतलब तुम तीनो जानबुज कर मेरी बेंड बाज़ा रही थी अच्छा है जल्दी हे मेरा भी मौका आने वाला है फिर देखना मैं तुम तीनो की क्या क्या बजता हूँ

किरण ....... हेहेहे तीनो की नहीं जीनत आवर पारिजात की बजाना अच्छे से

किरण की बात सुन आवर उसका मतलब समाज जीनत आवर पारिजात का चेहरा जो पहले से हे गुलाब की तर खिला हुआ था वप आवर भी ज्यादा गुलाबी हो गया

कुछ देर बाद तीनो ने मिल कर त्यार कर दिया जैसे सूर्य अपनी पांचवी बीबी को लेन जा रहा हो

किरण ने अपनी आँखों से काजल निकल सूर्य के कान के पीछे टिका किया

किरण ........ बच कर रहना बहार बहुत सी दीवानी गम रही है आपकी

सूर्य तीनो के होंटो पे प्यार से किस करता है आवर मानसी को रूम में आने को कहता है

कुछ पल बाद मानसी आवर देवयानी जी सूर्य के रूम में कड़ी थी

मानसी भी बेहद खूबसूरत लग रही थी वही देवयानी जी को देख सूर्य की हालत भी ख़राब होने लगी

फाक सफ़ेद गोरा रंग वो लम्बे बालो का सर पे बना जुड़ा सुराही दार गर्दन में बेसकीमती हीरो का चमचमाता हार कानो में लम्बे झुमके होंटो पे पिंक लिपिस्टिक लाल ब्लूज ब्लाउज़ में आधी झक्ति 36 की खूबसूरत चूचिया वो मोरनी सी बलखाती पतली कमर देवयानी जी का रूप सोंढ़रिया इस समय साक्षात् कामदेवी के सामान लग रहा था

देवयानी की आँखे भी सूर्य पे अर्की हुई थी जो इस समय उनकी नजरो में देवपुरुष से काम नहीं था

किरण ने सूर्य की कमर में चुटकी काट देवयानी के कामदेवी स्वरुप के मोहजाल से सूर्य को बहार निकलती है

सूर्य भी अपनी हरकत से झेप जाता है आवर नजरे फिर लेता है

मानसी ...... आपने बुलाया कुंवर जी

कुछ काम था क्या

सूर्य ...... नहीं वो बस ऐसे हे

किरण ........ हेहेहे मानसी ये अपनी छोटी बीबी को देखना चाहते इस लिया हे बुलाया है

चलो अब निचे चलना चाइये हम लोगो को

किरण सूर्य की हाथ में हाथ दाल गेट की पुर भाड़ जाती है जीनत भी उसके बराबर में चलने लगती है

उसके पीछे देवयानी जी मानसी पारिजात भी सीढ़ियों से निचे उतरने लगती है

हॉल में मौजूद लोगो की नजर जब इनसे पड़ी तो जैसे इनपे हे अटक कर रह गई

सूर्य इन पांच खूबसूरत बालाओ के बिच किसी रियासत का राजकुमार सा किरण पुर जीनत का हाथ थामे मुस्कुराते हुए उतर रहा था किरण आवर जीनत की नजरे भी अपनी आवर देख रहे लोगो की तरफ हे थी

रेखा जी ........ देख शालू मेरे बेटे को लग रहा है किसी रियासत का राजकुमार

शालिनी जी ....... मेरी चारो बेतिया क्या आपके राजकुमार से काम है दीदी सभी सवरग से उत्तरी अप्सराये लग रही है

रेखा जी आगे भाड़ सूर्य की नजर उतर उसको काजल का टिका करती है

शालिनी जी कहा पीछे रहने वाली थी उन्होंने भी किरण जीनत पारिजात मानसी के साथ साथ देवयानी जी को काजल का टिका लगा दिया बुरी नजर से बचने के लिया

शालिनी जी ........ बीटा सदी तेरे मां की है तेरी नहीं जो इतना साज़ डज़ के आया है

सूर्य ...... माँ ये सब आपकी बहुओं ने किया है

शालिनी जी ........वो बहु नहीं बेतिया है बदमाश

डेरी डेरी सूर्य की दिवानिया भी वही आ गई आवर उसे घेर के अपने साथ फोटो खिचवाने लगी किरण ने घर की बाकि महिलाओ को भी बिच में खींच लिया आधे घाटे में सूर्य की हालत ख़राब हो गई

वो तो अच्छा हुआ की हवेली के द्वार पे बारात आ गई जिस से सूर्य को इनके बिच से निकलने का मौका मिल गया आवर सूर्य वह से पतली गली पकड़ कर निकल गया ................

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ..............

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ..........................
 
अपडेट. 292 .... { बी }

शालिनी जी ........ बीटा सदी तेरे मां की है तेरी नहीं जो इतना साज़ डज़ के आया है

सूर्य ...... माँ ये सब आपकी बहुओं ने किया है

शालिनी जी ........वो बहु नहीं बेतिया है बदमाश

डेरी डेरी सूर्य की दिवानिया भी वही आ गई आवर उसे घेर के अपने साथ फोटो खिचवाने लगी किरण ने घर की बाकि महिलाओ को भी बिच में खींच लिया आधे घाटे में सूर्य की हालत ख़राब हो गई

वो तो अच्छा हुआ की हवेली के द्वार पे बारात आ गई जिस से सूर्य को इनके बिच से निकलने का मौका मिल गया आवर सूर्य वह से पतली गली पकड़ कर निकल गया ................

अब आगे .............

हल्का अँधेरा होते होती पूरी हवेली दुलहाल की तरह रंग बिरंगी रौशनी से जगमगाती उठी

ढेरो आतिशबाज़ी एक साथ जब आकाश में विश्पोट करती तो जो खूबसूरत नजारा सामने आ रहा था वो हर किसी की आँखे छोंड़िया देता

ऐसा लग रहा था मनो जैसे आज सूर्यगढ़ के आकाश में लाखो की संख्या में अनगिनत टारे अपनी चमक से मेर्री आवर विजय के एक होने की ख़ुशी अपनी चमक से जाहिर कर रहे हो

विजय मां जी की बारात हवेली के नजदीक आ चुकी थी आगे आगे d.j चल रहा था उसके पीछे बारात में शामिल सूरजगढ़ के नौजवान लड़के अपनी ख़ुशी को जाहिर करने के लिया d.j की दूँ पे नाचते गेट हवेली की आवर भाड़ रहे थे

विजय जी खूबसूरत सफ़ेद घोड़ी पे खूबसूरत सफ़ेद सुनहरी शेरवानी पहने अपने हाथो में तलवार थामे सर पे लाल पगड़ी नुमा सहरा बंधे किसी सजीले राजकुमार जैसे लग रहे थे

विजय जी के चेहरे पे एक दिलकश मुस्कान थी

जैसे उपरवाले ने आज उनकी सभी बड़ी दिली ख्वाहिशें पूरी करने का वक़्त मुकद्दर किया हो

विजय ने जो अपनी आवर मेर्री जी की पहली मुलाकात में जो खुली आँखों स सपने सजाये थे आज इस्वर की अनुकम्पा से पुरे होने जा रहे थे

आज उनके दिल पे राज करने वाली उनकी ड्रीम गर्ल मेर्री जी उनकी जीवन संगिनी बनने वाली थी

मुख्या दवार पे सूर्य की दादी जी के साथ घर परिवार की बहुत सी महिलाएं विजय के स्वागत तिलक के लिया तिलक थाल लिया विजय का द्वार पे इन्तजार कर रही थी

जिनमे दादी जी गीता ठाकुर रुक्मणि जी सूर्य के परिवार की कुछ रिश्ते में छोटी दादी ताई जी आदि भी शामिल थी

आंटी जी (दीप्ती माँ ) अपने हाथो में स्वागत थल लिया बे- सबरी से बारात की आवर देख रही थी उनका साथ दे रही थी उनकी दोनों भाबिया मधु जी मेनका जी शालिनी जी आवर घर की लड़किया

किरण ........ माँ ( शालिनी जी ). क्या हम भी चाचा जी की बारात में डांस कर सकती है

शालिनी के कुछ बोलने से पहले हे दादी जी बोल पड़ी

दादी जी ...... क्यों नहीं बीटा जाओ आवर बाकियो को भी ले जाओ ऐसे ख़ुशी के मोके पे भी पूछने की जरुरत है क्या तुम बच्चियों को

किरण ....... थैंक यू माँ सा ( इतना बोल कर किरण दादी के गाल चुम लेती है )

दादी जी ....... हेहेहे तुम भी सूर्य की तरह शरारती होती जा रही हो सूर्य से याद आया बेटी वो है कहा दिख नहीं रहा

कोमल ...... वो देखिए माँ सा वो उदार हे आ रहे है सोहेल भाई आवर मानव भाई के साथ

सूर्य सोहेल अजय मानव आवर दीप्ती के छोटे मां के बेटे बलवीर को अपने साथ लिए उदार हे आ रहा था

किरण ...... कहा थे आप कुंवर जी देखिये बारात आ गई है

सूर्य ...... अरे तो इसमें मेरा क्या काम दूल्हे के स्वागत तिलक के लिया तो यहाँ सभी मौजूद है

दादी जी ...... बीटा वो रिश्ते में शालिनी का भाई आवर तेरा
मां भी तुम्हे भी बारात में शामिल होना चाइये मां की सदी में भांजा भी तो होना चाइये अपने मां की ख़ुशी में नाचने गाने के लिया

प्रीती ....... चलो न सूर्य हम सभी को भी मां जी की बारात में नाचना है

कोमल ...... पैर वह तो बहुत ज्यादा भीड़ है

सूर्य ........ ठीक है फिर चलो सब लोग

सूर्य अपनी माँ आवर किरण का हाथ पकड़ बारात की आवर चल देता है

सूर्य के साथ सोहेल मानव अजय पायल प्रीती कोमल सानिया माया विधि गायत्री मानवी जसप्रीत (दीप्ती की भाबी ) जसलीन सिमरन जिनिशा जीनत देवयानी मानसी दीप्ती सलमा

जब इतनी खूबसूरत लड़कियों को बारात की आवर आते हुए देखा तो कुछ मनचले मजनुओं के मुँह में लार टपकने लगी पैर जब सभी ने सूर्य को उनके साथ देखा तो अपने मंसूबो पे पानी फिरता नजर आया

सूर्य सीधा अपने विजय मां जी के पास पंहुचा जो घोड़ी पे बेटे हुए सभी को देख रागे थे उनकी हे साइड में सपना अपनी कुछ सखी सहेलियों के साथ कड़ी नाच गण देख रही थी

सूर्य आवर बाकि सभी को देख किरण फ़ौरन सूर्य की आवर बड़ी सूर्य ने भी किरण को गले लगने के लिया अपनी बहे खोली पैर यहाँ सपना सूर्य से मिलने की बजाय सीधा शालिनी जी से आवर बाकि सभी से जा कर मिलने लगी सूर्य का तो जैसे सबके सामने कलपद जैसा मामला हो गया

( सूर्य ....... हम्म्म लगता है मेरी जान सपना कुछ ज्यादा हे नाराज है अब उसे भी मानना पड़ेगा खेर अभी तो सबके साथ डांस करता हूँ सपना को बाद में अकेले में मनाता हूँ )

सूर्य अपने विजय मां जी आवर दोनों मां मामियो से मिल कर शालिनी जी आवर अपनी दोनों मामियो का हाथ पकड़ उन्हें नचवाने लगा जहा शालिनी जी बिना किसी सरम के गुमर ( राजस्थानी लोक गीत पे किया जाने वाला नृत्य ) डालने लगी वही दोनों ममिया सरम से सूर्य से हाथ छुड़ाना चाहती थी

सूर्य ....... क्या हुआ ममी जी आप दोनों को मां जी की बारात में नाचना नहीं है क्या अगर आप अपने छोटे देवर की बारात में नहीं नाचेंगी तो कब नाचेंगी

प्रिय जी ....... बीटा हम सब के सामने कैसे नाच सकती है सबके सामने ठीक नहीं लगता

सूर्य ...... ये क्या बात हुई भला देखिये न मां जी अब आप हे उन्हें समजाओ न

जोरावर जी. ........ प्रिय अपने देवर की बारात में तुम्हे तो नाचना चाइये फिर हमारा भांजा आवर जमाई सा भी कह रहे है तो उसकी बात तो मन लो

सूर्य ...... मां जी अब तो आप हे नचाओ ममी जी को अपने साथ

किरण आगे भाड़ अपने बड़े पापा आवर बड़ी मम्मी को अपने साथ नाचने लगता है

सभी लड़कियों को नाचते देख डेरी डेरी बाकि सभी बाराती पीछे हैट गए बस कुछ 2 ,4 हे अभी भी हूँ रहे थे जो वास्तव में ज्यादा सरब पे लेने के चलते बिना सुर ताल के हे नाचे जा रहे थे

सूर्य तो जैसे गोपियों के बिच कृष्ण कन्या बना हुआ था

कुछ 2,4 को छोड़ कर बाकि सभी सूर्य की प्रेम दीवानी थी ऐसे में हर कोई उसके साथ डांस करना चाहेगा हे

ीदार देवयानी के लिया भी अपनी लाइफ का ऐसा पहला एक्सपीरियंस जिसमे वो ऐसे किसी की सदी में नाच रही थी तो पूरी तरह से उसे ऐसे नाच गाने में डालने में टाइम तो लग्न हे था ऊपर से देवयानी जी जब अपनी जन्मऋ कमर लचकती तो उनका मदमस्त जन्मऋ गदराया यौवन से भरपूर चूचियों में जो थिरकन उत्पन्न हो रही थी उस से बहुत से

जवान लड़को के साथ साथ बुधो के भी होर्मोर क्टिवे होने लगे पैर देवयानी जी पैर देवयानी जी इन सब से बे- खबर बस अपनी हे दूँ में डांस का मज़ा ले रही थी


सूर्य ने जब इसमें गौर किया तो बहुत से लड़के देवयानी जी के गदराये हुसैन का अपनी आँखों से हे भोग कर रहे थे करना तो वो बहुत कुछ चाहते थे पैर इस समय उनके बस में कुछ नहीं था सिवाय देवयानी जी के यौवन सागर का दूर से हे अपनी आँखे से रसपान करने के अलावा

सूर्य समाज चूका था की कभी भी कुछ भी गलत हो सकता है

अगर किसी ने गलती से भी देवयानी जी के साथ कोई गलत हरकत की तो उनका गुस्सा फुट पड़ेगा आवर वो गुस्से में कुछ गलत न कर दे

ऊपर से वो सूर्य की मेहमान थी दूसरी तरफ से भी इस समय सभी मेहमान थे

सूर्य ने सोहेल अजय मानव बलवीर को संजय की सभी को लड़कियों से दूर रखे पैर किसी के साथ कोई हटा पायी नहीं हो आवर खुद भी सभी तरफ नजर रखने लगा

इस बिच एक दो बार सूर्य लड़कियों के कहने पे नाच भी रहा था पैर उसका ध्यान सब तरफ था

महेंद्र जी ....... क्या हुआ सूर्य सब ठीक तो है न बीटा तुम नाच क्यों नहीं रहे कोई प्रॉब्लम है

सूर्य ..... नहीं मां जी ऐसा कुछ नहु है सब ठीक है

अचानक सूर्य की नजर एक 25,26 साल के लड़के पे पड़ी जो दिखने में तो अच्छा खाशा था पैर वो बार बार नशे में जुटे नाचते हुए वह नाच रही लड़कियों में गशने की कोशिश कर रहा था उसे एक दो बार अजय ने दूर भी किया पैर वो फिर से गम फिर कर वही हरकत करता जिसे देख सूर्य को उसपे गुस्सा आ रहा था पैर वो खुद को रोक रहा था


सूर्य के चेहरे के बदलते भाव देख जोरावर जी ने भी उस तरफ देखा जहा अजय उस लड़के समझा कर दूर कर रहा था

सूर्य ........ मां जी कोण है ये लड़का इसको समझ नहीं आ रहा है क्या ठीक से

जोरावर जी ....... बीटा तुम चिंता मत करो मैं देखता हूँ उसे

जिरवार जी उसे वह से पकड़ कर साइड में ले जाते है आवर बिना कुछ बोले एक जोरदार थपड उस लड़के के कान पे रसीद कर देते है

लड़के की आँखों से आंसू बहे लगते है एक हे थपड में उसका पूरा नशा उतर गया उसके गालो पे जोरावर जी का पूरा हाथ चाप चूका था

जोरावर जी कुछ देर उसे समजा कर तपिश सूर्य के पास लौट आते है

अब तब तक नाना जी भी सभी को द्वार पूजा के लिया चलने को बोल देते है क्युकी अब तक करीब साढ़े 8 बज चुके थे आगे भी रश्मो में टाइम लग्न था

सूर्य ने भी सभी को चलने का इशारा किया तो लड़किया भी सब अंदर की आवर भाड़ गई

क्युकी मेर्री जी के विवाह की सभी रसम सूर्यकांत जी निभा रहे थे एक पिता के स्थान पैर इस लिया आंटी जी ( दीप्ती माँ ) हे विजय मां जी का स्वागत तिलक करने वाली थी पैर समस्या ये थी की दूल्हे को अब घोड़ी से उसका सेल को हे उतरना था

जब सूर्यकांत जी को इसका पता चला तो उन्हें याद आया रोहन तो यहाँ है नहीं ऐसे में सूर्यकांत जी के बड़े सेल सुखदेव जी ने अपने आवर आने भाई के बेटे को इस रसम को पूरा करने को कहा

जहा जससजित आवर बलवीर ने मिल कर विजय जी को घोड़ी से पति पे उतरने की रसम की पुष्पश वर्षा आवर मंगल गीतों के बिच आंटी जी ने विजय का तिलक कर रसम पूरी की बलवीर जससजित विजय जी को सर मां स्टेज पे ले आये आवर उसे एक सिंघासन नुमा चेयर पे बैठा दिया

ज्यादातर लड़किया महिलाओ के साथ हवेली में लौट चुकी थी बस कुछ हे लड़किया यहाँ रुकी हुई थी जिनमे किरण सपना माया सानिया दीप्ती भी मौजूद थी वो विजय मां जी को घेरे कड़ी थी

कुछ बाराती मेहमान हवेली के पीछे की आवर जा चुके थे वही कुछ लोग सरब के नशे में पुर जवानी के जिस में अभी भी d.j पे बज रहे गांव पे नाच गए रहे थे

कुछ लोग दूल्हे के साथ वरमाला स्टेज पे तो कुछ निचे की कुर्शियो पे बेटे दूल्हे दुल्हन की वरमाला का इन्तजार कर रहे थे

सूर्य मानव को अपने साथ लिया स्टेज अपने मां जी के सामने आ खड़ा हुआ

सूर्य को देखते हे विजय मां जी उठ खड़े हुए

सूर्य ....... अरे मां क्या कर रहे है आराम से बैठो अभी मेर्री जी आई नहीं है उन्हें यहाँ आने में टाइम लगेगा तब तक हमसे भी थोड़ा बहुत बतला लीजिये

विजय ........ भांजे अभी भी मेरी हे तंग खींच रहा यार मां हूँ तेरा कुछ तो रहम कर

सूर्य ....... हाहाहा मां जी अब इस से ज्यादा क्या रहम करूँगा आपके बिन कहे आपकी ड्रीम गर्ल को आपकी जीवन संगिनी बना दिया अब क्या अपने भांजे की जान लोगे

विजय जी सूर्य को अपने गले से लगा लेते है उनकी आँखे हलकी नाम हो चुकी थी जिस सूर्य ने अपने हे रुमाल से साफ कर उन्हें फिर से बैठा दिया

वेटर को इशारा कर अपने पास बुलाया आवर इसमें से जूस उठा कर अपने मां जी को दिया

सूर्य ....... क्या मां जी आज भी आपकी आँखे नाम है आज तो आपके लाइफ की एक नयी सुरुहत होने जा रही है ऐसे ख़ुशी के मोके पैर ये बे- रुत बरसात क्यों ऐसे बहुत काम लोग होते है मां जी जिन्हे प्यार होता है उनके प्रेम को एक होने का अवसर मिलता है आप बहुत शौभाग्यशाली है मां जी उन्ही बहुत काम लोगो में से एक खुशनसीब आप है बस ऐसे हे उनका हर कदम पे साथ देना मैं जनता हूँ इतने लोग आपकी ख़ुशी में शामिल हुई है सब अपने हे है पैर जिनकी कमी आपको सबसे ज्यादा मह्सुश हो रही है आज वो भी ऊपर सवरग से आपकी नई लाइफ के लिया ढेरो आसिष दे रहे होंगे

सूर्य की बात सुन फिर से विजय जी की आँखे छलकने हे वाली थी की किसी की आवाज सुन विजय ने फ़ौरन अपने भीगी पालंके पांच ली

ये कोई आवर नहीं सूर्य के दादी जी आवर नाना जी थे जो पंडित जी को अपने साथ लिया ऊपर हे आ रहे थे

दादा जी .......... ( सूर्य का कण खींच ये हुए ) तू बड़ा समझदार हो गया है जो अपने मां को हे सीख्शा देने लगा अब अगर तेरी शिक्षा पुराण हो गई तो हम कुछ रश्मि कर ले

सूर्य ......... आअह्ह्ह्ह बाउजी मैंने क्या किया है कान खींचना हे है तो मां जी के खिचिये ऐसे ख़ुशी के मोके पैर भी इनकी आँखे नाम थी

नाना जी ....... बीटा अक्सर ऐसे अवसर पे अपनों की याद में आँखे नाम हो हे जाती है पैर बीटा क्या हम तुम्हारे अपने नहीं है क्या हमारे प्रेम में कोई कमी रह गई

दादा जी ....... अरे यार अब तू कैसे बात कर रहा तुम्हारे प्रेम में भले हे कोई कमी न रही हो पैर जनम देने वाले से सम्बन्ध कोख में हे जुड़ जाता है जो अटूट होता है

पंडित जी ......... यजमान क्या हम रेशम सुरु करे बचो की

दादा जी ..... जी जी पंडित जी आप रश्मि सुरु कीजिये सूर्यकांत बीटा यहाँ आगे आ कर पंडित जी के कहे अनुसार रसम पूरी करो

सूर्यकांत जी ......जी बाउजी

पंडित मंत्री उच्चारण के साथ सूर्यकांत जी से कुछ रश्मि पूरी कर आते है

जिसमे लगभग आधे घंटा लग जाता है

पंडित जी ........ वरमाला की रश्मि पूरी हो गई है ठाकुर जी अब कन्या को वरमाला के लिया बुलाया जाया

दादा जी ......... सूर्य जाओ बीटा मेर्री बेटी को पालकी में यहाँ ले आओ

विजय जी ...... पैर बाउजी सूर्य कैसे वो मेरा भांजा है

सूर्यकांत जी ....... बाउजी विजय सही कह रहा है जससजित आवर बलवीर है न

दादा जी ...... ठीक है बीटा जाओ सूर्य उनसे कह दो

सूर्य वह से निकल कर मेर्री जी के रूम में पंहुचा है जो की पूरी तरह स चाचा खींच भर पड़ा था लड़कियों आवर औरतो से

सूर्य ....... चलिए दुल्हन साहिबा आपका बुलावा आ गया

मेनका जी ...... क्या दुल्हन की पालकी तुम उठाने वाले हो सूर्य

सूर्य कुछ बोलता उस से पहले हे मेर्री जी ने न में सर हिला कर बता दिया की वो ऐसा नहीं चाहती

आवर मेर्री जी ने मेनका जी के कान में कुछ कहा जिसे सुन कर मेनका जी मुस्कुरा दी

मेनका जी ..... सूर्य तुम पालकी नहीं उठा सकते इसके लिया मेर्री के भाई हे ये रसम करेंगे

सूर्य ......... मुझे पता है वह मां जी ने पहले हे बाउजी को इसके लिया मन कर दिया था बुआ सा

सूर्य साइड में हुआ तो गेट के बहार सिल्वर कलर की खूबसूरत पालकी राखी हुई थी जो पूरी पुस्पृशो से सजाये हुई थी

जिसके पास में जससजित बलवीर सोहेल खड़ा था तभी अजय भी वह आ पंहुचा पुर उसके साथ मानव भी था

अजय ........ अगर किसी को कोई इतराज न हो तो मैं भी हाथ लगा सकता हूँ क्या इस रसम में

अजय ने ये सब दादी जी को देख कर कहा था वही अजय की बात सुन रुक्मणि जी के साथ साथ गीता ठाकुर का भी चेहरे पे मुस्कान आ गई

पिछले कुछ 3,4 दिनों में उन्होंने एक नए अजय को देखा था जैसे उसके पश्चाताप ने उसके मन मस्तिष्क की मलिनता हे दूर नहीं की थी बल्कि उसकी आत्मा तक को प्रायश्चित की जवाला ने पवित्र कर दिया था

दादी जी ....... अगर तुम्हारी यही इच्छा है बीटा अजय तो हमें कोई एतराज नहीं क्या कहती हो बीटा गीता रुक्मणि

गीता जी ...... माँ सा आपके फैसले पे हम सवाल उठाने वाली कोण होती है ये भी तो आपका हे पोता है

राधिका भाबी आवर जसप्रीत भाबी ने संभल कर मेर्री जी को पालकी में बिठाया अजय सोहेल जससजित बलवीर चारो पालकी लिया वरमाला स्टेज की आवर भाड़ गए

उनके पीछे पीछे बाकि लोग भी चल दिया क्युकी सभी लोगो को वरमाला देखनी थी खाश कर महिलाएं आवर लड़कियों को इन सब को देखना कुछ ज्यादा हे अच्छा लगया है

पालकी को स्टेज के सामने नीच हे उतर लिया दीप्ती आवर अलीना ने अपना हाथ दे कर मेर्री जी को बहार निकला

मेर्री जी पे नजर पड़ते हे विजय मां जी के दिल की धड़कन अच्चानक से हे भाड़ गई वो विदेशी गुड़िया देसी परिवेश में क़यामत लग रही थी

खूबसूरत गोरा रख वो हलकी नीली आँखे पतले पतले लाल होंठ हाथो पे ऊँगली से ले कर कंधे तक लगी खूबसूरत मेंढी कलाई में सोने की कंगन हथफूल

सुराहीदार गर्दन जिसमे कीमती सोने में हिरे जड़ित हार

इस समय मेर्री जी माँ की गुड़िया लग रही थी जिसे मनो किसी ने खूबसूरत लाल जोड़ा पहना कर विजय जी के सामने खड़ा कर दिया हो

सपना जो विजय के पास कड़ी थी उसने डेरी से विजय से बोलै

सपना ....... चाचा जी अपना मुँह बंद कर लीजिये वर्ण कोई देख लेगा या कोई मचार गुस्सा जायेगा हेहेहे अभी वो आपकी हुई नहीं है

विजय सपना की बात सुन झेप जाता है पैर नजरे अभी भी अपने सपने को अपनी आँखे के सामने हकीकत होता देख रहा था

अलीना कोमल सोफिया दीप्ती चारो मेर्री जी को लिया स्टेज पे पंहुचा जहा पंडित जी कुछ मिनट्स मंत्रो उच्चारण कर एक दूसरे को वरमाला डालने को कहते है

सूर्य भी स्टेज पे आ चूका था उसने वरमाला मेर्री जी को दे दी सपना ने विजय जी को

सूर्य ने देखा की मां जी का कोई भी दोस्त स्टेज पे नहीं आया है मस्ती मज़ाक करने तो उसने भी कोई मस्ती नहीं आवर विजय ने भी आराम से मेर्री जी को वरमाला पहना दी मेर्री जी ने एक बार सूर्य को देखा जैसे कुछ कहना चाहती हो

सूर्य ने अपना हाथ उनकी पीठ पे रख दिया फिर मेर्री जी ने विजय को वरमाला पहना दी सभज लोग खड़े हो कर गुलाब की पंखुड़ियों की वर्षा करने लगते है

दोनों को चेयर पे बैठा दिया जाता है पुर बड़े बुजुर्ग अपना आशीर्वाद आवर उपहार उन्हें देने लगते है

जल्दी हे बड़े बुजुर्ग आशीर्वाद आवर उपहार दे कर तस्वीर बनवा कर मंडप की आवर चल देते है क्युकी उनके जिमे आवर भी बहुत से कार्य थे

ीदार बुजुर्ग मंडली के जाते हे बाकि सभी भी आशीर्वाद आवर उपहार दे कर दूल्हा दुल्हन के साथ तस्वीरें निकलवाने लगते काफी देर तक आशीर्वाद देना उपहार भेंट कर्जा यही कार्यक्रम चलता रहा

वैसे तो सभी लोग बहुत खुश थे आवर हो भी क्यों नहीं ये अवसर हे ख़ुशी का था

पैर अलीना सबसे ज्यादा खुश थी अपनी बहन की सदी को ले कर के भले हे दोनों एक माँ की संतान नहीं थी

पैर मेर्री ने हमेशा एक बड़ी बहन के होने के साथ साथ अलीना पे माँ का प्रेम भी लुटाया था

अलीना विजय आवर मेर्री के बिच दोनों चेयर पे ने थी थी जहा मेर्री जी ने उसका हाथ अपने हाथ में थम रखा था

सूर्य अपनी बिबिया अपनी प्रेमिका के साथ तस्वीर बनवाने के बाद वह से हवेली की आवर निकल जाता उसे पता था की यहाँ अगर वो रहा तो आवर भी टाइम लगने वाला है

सूर्य अभी ऊपर जा रहा था की तभी उसकी पीछे किसी ने आवाज दी सूर्य ने पीछे देखा तो वह राधिका भाबी आवर उनके साथ उनकी देवरानी मनप्रीत भाबी पे पड़ी jo.uske पीछे पीछे हवेली में पहुंची थी मनप्रीत थोड़ी एशेज लग रही थी जैसे कोई परेशानी हो उसे

सूर्य ....... क्या हुआ राधिका ी मैं क्या हुआ भाबी जी कोई प्रॉब्लम है क्या ( सूर्य का इशारा मनप्रीत की आवर था )

राधिका. ......... कुछ नहीं देवर जी बस आपको इनसे मिलवाना था ये है मनप्रीत मेरी देवरानी आपके रोहन भाई के बड़े मां जी के बेटे जससजित की बीबी

( मनप्रीत एक 22 .23 साल की खूबसूरत 5.6 इंच हिघ्त फेयर कलर की भरी पूरी महिला काम लड़की ज्यादा थी ठीक हे नयन नकाश ऊपर से पंजाबी सूट सलवार में उनका यौवन से भरपूर मसल बदन अपने हर अंग का कटाव सूट के बहार से भी नजारा जा सकता था )

सूर्य ........ Hello मनप्रीत भाबी जी

मनप्रीत. ...... Hi देवर जी बहुत सुना है आपके बारे में दीदी आवर बड़ी दीदी (दीप्ती )से

सूर्य राधिका आवर आवर मनप्रीत से बात करते करते अपने रूम तक पहुंच गया था

राधिका ......... क्या हम तुम्हारा रूम उसे कर सकती है

सूर्य ....... बेसक भाबी जी इसमें पूछने वाली बात क्या है

सूर्य रूम को खोल अंदर दोनों को अंदर आने देता है

राधिका ......... मनप्रीत वो रहा बाथरूम जाओ अच्छे से उसे कर लो

मनप्रीत हलकी सरम के साथ बाथरूम में गुस्स जाती है आवर बाथरूम को अंदर से लॉक कर लेती है

जैसे हे मनप्रीत अपनी सलवार उतर अपनी पेंटी को देखती है तो उसका चेहरा थोड़ा मायुश हो जाता है

क्युकी उसकी पेंटी पे छूट के ऊपर हिसस पे ब्लड लगा हुआ था सायद मनप्रीत के पीरियड स्टार्ट हो गए थे जिस से उसकी पेंटी ब्लड से ख़राब हो चुकी थी

वो कोड के पास लगे टॉयलेट पेप्पेर्स से अपनी छूट को साफ कर पे सब करती है अब प्रॉब्लम ये थी की ख़राब हो चुकी पेंटी को फिर से कैसे पहने आवर अगर पहना तो आवर ज्यादा प्रॉब्लम होगी नहीं पहना तो उसकी सलवार ख़राब हो सकती है

उसने एक दो बार राधिका को दीदी .दीदी कह कर हलकी आवाज दी पैर राधिका ने कोई जबाब नहीं दिया

ीदार राधिका मौका के फायदा उठा सूर्य के होंटो का रसपान करने में लगी हुई थी इस लिया उसे मनप्रीत की कोई आवाज सुनाई नहीं दी

जब मनप्रीत को कोई जवाब नहीं मिला तो उसने डेरी से हल्का दूर खोल कर देखा तो उसका मुँह खुला का खुला रह गया सामने का नजारा हे कुछ ऐसा था जहा दोनों एक दूसरे को किश कर रहे थे वही सूर्य का हाथ राधिका के कूल्हों पैर था वही राधिका का हाथ सूर्य की शेरवानी के निचे से उसके लैंड पे

सूर्य को जब अहसास हुआ की कोई देख रहा था तो उसने राधिका को अलग किया आवर आँखों के इशारे स उसे मनप्रीत की आवर इशारा किया राधिका ने जब चोर नजरो से बाथरूम की आवर देखा तो उसे 2 इंच की झिरी से मनप्रीत का खुला हुआ मुँह दिखाई दिया उसकी सलवार उसके गुथनो में थी

मनप्रीत ने फ़ौरन दूर बंद कर दिया

सूर्य ....... मैंने कहा था न की गड़बड़ हो सकती है अब सम्भालो अपनी देवरानी को जाइये

राधिका एक लम्बी साँस ले कर बाथरूम की आवर भाड़ गई

आवर बाथरूम लॉक कर लिया करीब 5 मिनट्स बाद राधिका बहार निकली

राधिका ....... एक प्रॉब्लम है वो मनप्रीत को पीरियड स्टार्ट हो गए है मेरे पास भी सन्तरी पेड़ नहीं है क्या किरण के पड़े है

सूर्य ....... है उस दूर में मिल जायेंगे जो आपको चाइये वैसे उन्होंने क्या कहा

राधिका ..... उसे मैं संभल लुंगी एक आवर प्रॉब्लम है

सूर्य ...... अब क्या हुआ

राधिका ...... उसके कपडे भी ख़राब हो चुके है

सूर्य अलमारी खोल उसने से एक पैकेट निकल राधिका को देता है

सूर्य ...... ये लीजिये इसमें सब सामान है उनकी जरुरत का अब मैं चलता हूँ अगर उन्हें कोई मेडिसिन चाइये तो उस दूर में मेडिसिन किट राखी है

सूर्य वह से निचे चल देता है बहार हवेली के पीछे बहुत से बाराती खाना खा चुके थे आवर अभी कुछ ड्रिंक करने में बिजी थे

डेरी डेरी समय बीतता गया आवर करीब 1 बजे तक बाराती जो खाना पीना कर चुके थे वो अब वापिस लौटने लगे थे अब बस 40 ,50 बाराती hi बचे थे जो थोड़े उम्र दर्ज आवर बुजुर्ग थे जो दूल्हे की विदाई के साथ हे सायद सूरजगढ़ लौटने वाले थे खाने पिने मौज मस्ती के लिया जो आये थे वो लोक निकल चुके थे

ीदार पंडित जी विवाह बेदी त्यार कर चुके थे फैरो के लिया

दादा जी नाना जी कुछ सूर्यगढ़ सकती पुर सूरजगढ़ के अपने हम उम्र लोगो के बिच बेटे उनसे बाते कर रहे थे

वही एक दूसरे रूम में कुछ आवर हे चल रहा था वह सोहेल सलमा को घोड़ी बनाये उसके ऊपर चढ़ा हुआ था

सलमा ........... अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह सोहेल जल्दी करो न आवर कितना टाइम लगाओ गए तुम जल्दी ख़तम करो निकाह का घर है कभी भी कोई भी आ सकता है यहाँ

सोहेल ....... अह्ह्ह्हह्हह बस मेरी जान कुछ देर आवर मेरा होने वाला है बस दो मिनट्स आवर रुक जा

सोहेल सलमा का लगेगा उठाये उसकी कमर को थामे पूरी ताकत से सलमा की छूट की कुटाई करने में लगा हुआ था पात पात पुच्छ पूछ की आवाज सलमा की कमुख सिसकारियों में गायब हो रही थी

अगले दो मिनट्स में सोहेल किसी जानवर की तरह बुकर भरता हुआ अपनी म्हणत का पसीना सलमा की फुलिय हुई छूट में भरने लगा

जैसे हे सोहेल ने अपना 7 इंची कला लैंड सलमा की छूट से निकला कुछ तरल सलमा की छूट से निकल उसकी जंगो से होता हुआ निचे पैरों की आवर भढने लगा सोहेल सलमा की पेंटी से अपना लैंड साफ कर उसे पेण्ट के अंदर कर लेता है

सलमा अभी अपने पेंटी से अपनी अभी अभी चूड़ी छूट को साफ कर रही थी किसी ने दूर को नॉक किया

सोहेल आवर सलमा दोनों की गांड फैट कर चार हो गई दोनों के चेहरे पे हवइया उड़ने लगी

सलमा ( फुसफुसाते हुए ) ....... मैंने तुमसे कहा था न की थोड़ा सबर कर लो पैर तुम्हे तो चुदाई का शोख चढ़ा था अब देखो फास गए न हम दोनों

सोहेल ....... तुम बाथरूम में जाओ मैं देखती हूँ

सलमा ...... पागल हो क्या पता नहीं बहार कोण है आवर ये रूम मेरा है तुम्हे इस समय यहाँ देख कर आवर ज्यादा शक हो जायेगा

तुम बाथरूम में चलो मैं देखती हूँ

सलमा दूर को ओपन करती है तो सामने उसकी पुर सोहेल की एमी कड़ी थी

फातिमा ...... क्या हुआ सलमा दूर खोलने में इतना टाइम क्यों लगा दिया

सलमा ......... अम्मी जान वो हम बाथरूम में थे इस लिया टाइम लग गया सॉरी

फातिमा ..... कोई बात नहीं बीटा

ीदार सलमा की एमी सीधा बाथरूम में जा गुसशि इस से पहले की सलमा उन्हें रूक पति वो बाथरूम में जा चुकी थी

सलमा की अभी अभी फटी छूट के साथ उसकी गांड भज फैट गई थी ऐसा हे हॉल अंदर कुछ कुछ सोहेल का था जो दूर खुलता देख बाथरूम आवर टॉयलेट के बिच के परदे के पीछे साँस रोके खड़ा था

इस सब से अनजान सलमा की अम्मी अपनी सलवार उतर साइड में तंग देती है आवर अपने हाथो से अपनी 36 ,37 के कूल्हों को सह लेट हुए पेंटी निचे कर कर कोड पे बेथ जाती है

सोहेल की नजर तो अपनी होने वाली सास की मोती गोरी चिकनी गांड देख कर हे हालत ख़राब हो गई थी

अब तो उनकी फुल्ली हुई हलके बालो वाली छूट के मोठे मोठे होंठ देख सोहेल का अभी अभी झाड़ा नाग फिर से सर उठाने लगा छूट से पिसाब के साथ निकलती सिटी ने आग में घी का काम किया

कब सोहेल अनजाने में हे अपने हाथ से अपने लैंड को सहलाने लगा

सलमा की अम्मी पिसाब करने के बाद अपनी मोती गोरी चिकनी भरी जांघों को फैला कर हेंड शावर से अपनी मस्त फुल्ली हुई छूट को पानी से दोती है फिर न जाना क्या सोच कर अपनी छूट के दोनों पाव रोटी जैसे लिप्स खो अपनी छूट के एंड ऋणी गुलाबी हिस्से को देखती है हल्का मुस्कुराते हुआ अपने हाथ से सलमा की अम्मी एक दो बार अपनी छूट पे थपकी देती है आवर टॉयलेट पेप्पेर्स से छूट को साफ कर कड़ी हो कर सलवार डालने लगी तभी उनकी नजर साइड लगे मिरर में पड़ी जहा उन्हें सोहेल परदे के पीछे खड़ा अपने लैंड को सहलाते हुए नजर आया उसकी नजर को अपने मोठे मोठे खुल्हो पे देख हलके से मुस्कुरा दिया आवर थोड़ी गांड को नहर निकलते हुए कुछ ज्यादा हे खुश कर सलवार पहने ने लगी फातिमा का ख्याल दिमाग में आते हे सलवार बंद चुपचाप जैसे उन्होंने कुछ देखा हे नहीं आवर बहार निकल गई

सोहेल अभी चैन की साँस लेता की फिर से दूर खुला आवर इस बार फातिमा अंदर आई

( सोहेल ........ अह्ह्ह्हज्ज अभी फूफी को देखने के बाद लैंड ठीक से संत भी नहीं हुआ की अब ये अम्मी आ गई क्या आज मेरे घर की औरतो को नंगा देखने का दिन है क्या )

ीदार फातिमा ने भी वही किया पैर ये थोड़ा जल्दी हो गया फिर भी सोहेल ने अपनी अम्मी की लाल पेंटी में कशी गांड को अच्छे से देखा आवर लम्भी लम्भी जनता के बिच छुपी अपनी अम्मी की मुनिया की भी कलाई ले हे ली सायद फातिमा थोड़ा जल्दी में थी इस लिया छूट को पानी से दो कर फ़ौरन सलवार पहन बहार निकल गई अब जा कर कही सोहेल को चैन आया पैर उसका लैंड तो बुरी तरह फाड् फाड़ा रहा था अपने पुरे आकर में

सलमा की अम्मी ने जान सोहेल को अंदर देखा तो वो बहार आते हे फर्श पे पड़ी कुछ बूंदो को देख माजरा समाज चुकी थी अब खेली खाई औरत से भला कुछ छुपा रह सकता है क्या

उसकी अम्मी ने सलमा को पहले हे भेज दिया था

फिर बाद में फातिमा को भी बहाना कर भेज दिया अब रूम में सोहेल आवर सलमा की एमी हे मौजूद थे सोहेल बाथरूम में आवर सलमा की अम्मी रूम में


उदार पंडित जी आवर ऋषि दूर्वा मेर्री जी आवर विजय जी के विवाह की रश्मि सुरु कर चुके थे

सूर्यकांत सर आवर आंटी जी ने मिल कर मेर्री जी का कन्यादान किया आवर माता पिता की पूरी जिम्मेदारी उन्होंने निभाई

ऋषि दूर्वा विजय आवर मेर्री के फेरे पुरे करवा उन्हें बड़ो से आशीर्वाद लेने को कहा

अब विजय आवर मेर्री जी पति पत्नी बन चुके थे वो एक दूसरे के जीवन साथी बन चुके थे

आज से उनके जीवन की एक नयी सुरुहत एक नया सफर आरम्भ हो चूका था जहा दोनों एक दूसरे के हमसफ़र थे एक दूसरे की मंजिल थे

फेरे पुरे होते होते तक़रीबन सुबह के 3 बजने को आये

सभी बड़े बुजुर्गो से आशीर्वाद लेने के बाद दादी जी ने नवविवाहित दूल्हा दुल्हन को हवेली के अंदर बने पूजा कक्ष में ले गई जहा उन्हें कुलदेवी से आशीर्वाद प्राप्त हुआ

4 बजते बजते विदाई का समय भी आ गया हवेली के लोने के पास एक नई ब्रांड कार फुल्लो से सजी डेज़ी कड़ी थी ये सूर्य ने खुद त्यार की थी यही सूर्य की आवर से मेर्री जी को तोहफा था उनके नई लाइफ के लिया

जैसे जैसे मेर्री जी का विदाई का समय हुआ सभी के चेहरे जो कुछ देर पहले ख़ुशी से चमक रहे थे अब सभी के चेहरों पे ुदशी थी

ये ऐसा वक़्त था जिसका पता सभी को था की एक न एक दिन हर लड़की की जिंदगी में आने वाला होता है

हर लड़की इस दिन का बड़ी बे- सबरी से इन्तजार करती है न जाने इस पल के लिया कितने हे जप तप व्रत आदि किये कितनी हे राते जागते हुए अपने सपनो के राजकुमार का इन्तजार किया करती है

पैर जब ये वक़्त आता है तो जहा एक आवर अपने सपनो को हकीकत में पूरा होने की ख़ुशी होती है

तो वही अपने से दूर होने का दुःख होता है जहा हर लड़की का बचपन बिता अपने पिता की ऊँगली पकड़ कर चलना शिखा माँ के ाचल में खुद को दुनिया जहा से सुरक्षित पाया आज उसे अपने बचपन का अपना प्यारा सा सवरग छोड़ सबसे दूर जाना पद रहा था किसी आवर के घर को सवरग बनाने आज मेर्री जी के लाइफ का ये वही दिन था

मेर्री जी भीगी हुई आँखों से सभी से गले मि रही थी

वही अलीना इस समर रेखा जी के गले लगे सुबक रही थी आज उसकी वो बहन किसी आवर की अमानत हो गई थी जिसने बहन के साथ साथ उसे माँ का प्यार दिया उसकी हर खवाहिश पूरी की इस बे- रहम दुनिया में सर उठा कर जीना सिखाया वो साया आज उस से दूर होता जा रहा था

दादी जी ......... बीटा ये दिन तो हर लड़की की जीवन में एक न एक दिन आता हे यही नियति है बेटी ऐसे होती नहीं है भले हे तुम्हारी सदी हो गई है पैर तू सदा इस घर की बेटी रहेगी मेरी बेटी रहेगी फिर सूरजगढ़ दूर हे कितना है घडी से मुश्किल से 20 मिनट्स लगते है जब दिल करे फ़ोन कर देता सूर्य तुम्हे लेने आ जायेगा आवर बीटा विजय तुम भी कान खोल कर सुन लो मेरी बेटी को ज्यादा तंग किया तो देख लेना तुम्हारी ये माँ सा तुम्हारे कान खींचने में देर नहीं लगाएगी

विजय ....... माँ सा वो मेरी जीवन संगिनी बाद में है पहले वो आपकी बेटी है यकीं रखिये आपका ये बीटा आपको कभी शिकायत का मौका नहीं देगा

नाना जी ........ मेर्री बेटी विक्रम सींग राणा के घर बहु नहीं बेटी बन कर जा रही है भाबी सा जो अदिकार जो प्यार शालिनी प्रिय आवर सन्ति बेटी को मिलता है उतना हे प्रेम आवर सम्मान मेरी इस बेटी को मिलेगा मेरी ये बेटी पहले है मेरे लिया विजय उसके बाद ऐसे नौबत आई तो आपसे पहले मैं न इसकी टंगे तोड़ दूंगा

ीदार ये लोग बात कर रहे थे उदार मेर्री जी सभी से गले मिलने के बाद अपनी बहन अलीमा आवर सूर्य के गले लग फुट फुट कर रोने लगती है

मेर्री जी बसाक सभी से प्यार करती थी पैर यही दो लोग मेर्री की लाइफ के सबसे इम्पोर्टेन्ट लोग थे जहा सूर्य की बदौलत उसे इतना बड़े परिवार का प्यार मिला अदिकार मिला वही अलीना उसके पिता की आखरी निसानी थी जिसके पास होने पे उसे आभाष होता की आज भी उसके पिता उसके साथ है

सूर्य ....... क्या हुआ मेर्री देखो ऐसे होती नहीं सब लोग हमें हे देख रहे है

मेर्री जी ....... मुझे खुद से दूर मत करो मुझे नहीं जाना वह tum.sab से दूर

सूर्य ....... किसने कहा की आप हमसे दूर हो रही है या हमसे दूर जा रही आवर फिर सूरजगढ़ दूर हे कितना है वैसे भी कुछ दिन बाद हम सभी एक साथ होंगे दिल्ली वाले घर पे समझ लो ये एक छोटी सी ट्रिप है जहा आप गुमने जा रही है बस कुछ दिनों की बात है

मेर्री जी ....... मुझे कुछ नहीं पता मैं नहीं जा रही

शालिनी जी ........ मेर्री ऐसे जिद नहीं करते है हर लड़की को सदी के बाद अपने पति के साथ जाना हे पड़ता है दुनिया की यही ृत है हम सबने भी तो अपना घर संसार अपने पति के घर संसार को बसने के लिया छोड़ा है एक न एक दिन सभी को इस रस्ते चलना हे पड़ता है

शालिनी जी अलीना सूर्य मेर्री जी को कार की तरफ ले चलते है

बाकि महिलाएं भीगी हुई पलकों के साथ मेर्री जी के विदाई के गीत गेट हुए पीछे पीछे चल रही थी

कार के पास पहुते हे मेर्री जी दादा जी के सीने से लिपट कर रोने लगती है

मेर्री जी ....... पापा अपनी इस बेटी को भूल तो नहीं जायेंगे न आप मुझे खुद से कभी दूर तो नहीं करेंगे न आप

दादा जी को हमेशा मेर्री जी बाउजी कहती थी पैर जब पापा कह कर दादा जी के सीने से लग कर फुट फुट कर रोई तो दादा जी के सीने में एक हुक सी उठी आवर उनकी आँखों से बे- थषा आंसू बहाने लगे उनने लगा जैसे उनकी आत्मा का कोई बहुत अनमोल हिस्सा उनसे दूर जा रहा है

दादा जी ......... नहीं मेरी बच्ची तुमने मुझे आज वो सम्मान दिया जिसे पा कर मैं चहु तब भी तुम्हे बुला नहीं सकता बेटी ये घर ये परिवार हमेषामेरिस बेटी के साथ खड़ा रहेगा तू मेरी बेटी है पुर हमेशा रहेगी

दादी जी ........ है बेटी तुम इस घर की बेटी है फिर भला तुम्हे भूल जाये ये कैसे हो सकता है चलो अब बैठो शालिनी बेटी तुम भी जाओ मेर्री बेटी के साथ

शालिनी जी ....... जी माँ सा

मेर्री ....... माँ सा सूर्य

दादा जी ........ जा बीटा मेरी बेटी के साथ तू भी जा आवर इसे आने साथ हे ले कर आना मेरी बेटी को कोई तक्लिप नहीं होनी चाइये

सूर्य ....... जी बाउजी

सूर्य अलीना का हाथ थामे किरण को इशारा कर कार का दूर खोल अलीना आवर शालिनी जी को अंदर बैठा देता है

जससजित आवर बलवीर पीछे का दूर खोल मेर्री आवर विजय को चार में बैठा देते है

सूर्य कार स्टार्ट करता है तो जससजित आवर बलवीर कार को देखा देने की रसम पूरी कर मुख्या द्वार तक पीछे आते है

सूर्य की कार जल्दी हे सभी की नजरो से ओझल हो चुकी थी

मेर्री जी आवर विजय की सदी हो चुकी थी एक नए सूर्यौदय के साथ मेर्री आवर विजय की एक नई लाइफ की सुरुहत हो चुकी थी एक सुनहरा भविष्य दोनों का बहे फैलाये इन्तजार कर रहा tha.wahi जो हवेली कुछ देर पहले तक ख़ुशी भरे माहौल में दमक रही थी उगती सूरज के साथी उसकी दमक में भी बदलाव आ रहा था हर सूर्यौदय है किसी की जिंदगी में हर दिन कुछ न कुछ बदलाव अवश्य लता है ....................

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अपडेट 293

सूर्य अलीना का हाथ थामे किरण को इशारा कर कार का दूर खोल अलीना आवर शालिनी जी को अंदर बैठा देता है

जससजित आवर बलवीर पीछे का दूर खोल मेर्री आवर विजय को चार में बैठा देते है

सूर्य कार स्टार्ट करता है तो जससजित आवर बलवीर कार को देखा देने की रसम पूरी कर मुख्या द्वार तक पीछे आते है

सूर्य की कार जल्दी हे सभी की नजरो से ओझल हो चुकी थी

मेर्री जी आवर विजय की सदी हो चुकी थी एक नए सूर्यौदय के साथ मेर्री आवर विजय की एक नई लाइफ की सुरुहत हो चुकी थी एक सुनहरा भविष्य दोनों का बहे फैलाये इन्तजार कर रहा tha.wahi जो हवेली कुछ देर पहले तक ख़ुशी भरे माहौल में दमक रही थी उगती सूरज के साथी उसकी दमक में भी बदलाव आ रहा था हर सूर्यौदय है किसी की जिंदगी में हर दिन कुछ न कुछ बदलाव अवश्य लता है ....................

अब आगे ............

सूर्य जब दूल्हा दुल्हन को लिया सूरजगढ़ पंहुचा तो सूर्यौदय की सुनहरी लालिमा ने अपना रंग दिखाना सुरु कर दिया था

प्रिय ममी जी सन्ति ममी जी नानी जी सदी में आई कुछ रिश्ते की महिलाये के साथ दूल्हा दुल्हन का स्वागत करने के लिया पूजा थाल लिया पहले से हे इन्तजार कर रही थी

सूर्य ने कार ठीक हवेली सामने हवेली के गेट पे रोक दी

प्रिय ममी जी आगे भाड़ कार का पीछे का दूर खोल
टी है आवर दुल्हन सुहाग जोड़े में सजी खूबसूरत माँ की गुड़िया मेर्री जी के मेहँदी सेल हाथो को थम कार से निचे उतर तू है जहा एक कालीन बिछी थी आवर कुछ गुलाब की पंखुड़ी या भी बिछाई हुई थी

मेर्री जी के पीछे पीछे हे विजय जी भी निचे उतर आते है

सूर्य निचे उतर शालिनी जी आवर अलीना के लिया दूर खोलता है

दोनों निचे उतर आती है आवर मेर्री जी के अगल बगल कड़ी हो जाती है

सूर्य कार लिया हवेली के अंदर चल देता है अभी यहाँ उसका कोई काम नहीं थी मेर्री जी के साथ अलीना आवर शालिनी जी थी हे

सूर्य कार खड़ा कर सीधा ऊपरी मांजी पे जहा सपना पुर किरण का रूम था जा पंहुचा रूम अंदर से लॉक नहीं था तो सूर्य बिना कोई आवाज किया रूम में आ पंहुचा है आवर बिना लॉक किया दूर भिड़ा दिया

सामने बीएड पे सपना अपने गले तक हलकी चादर अपने ऊपर लिए सोये हुए थी सायद उसे सोये ज्यादा टाइम भी नहीं हुआ या सायद वो नाटक कर रही थी सोने का

जैसे हे सूर्य सपना के बगल में जा कर लेता सपना ने फ़ौरन अपनी आँखे खोल दी

सूर्य को देखते हे गुस्से में मुँह फुला कर दूसरी आवर गुमा लिया चुकी सूर्य ने रूम बंद कर दिया था तो बहार से थोड़ी बहुत गीत संगीत की आवाज अभी भी आ रही थी

सूर्य ....... तो मेरी जान मेरी बीबी अभी भी मुझसे नाराज है

सपना ...... कोण है यहाँ पैर आपकी जान आपकी बीबी मैं न तो आपकी जान हूँ आवर न आपकी बीबी हुण्णं

सूर्य सपना के जूते गुस्से को देख मन हे मन उसे आवर सताने का इरादा करता है

सूर्य ...... ऐसे बात है तो फिर मैं तो गलत रूम में आ गया मेरा यहाँ क्या काम मैं चलता हूँ

सूर्य अभी नाटक करते हुए उठा हे था की सपना ने फ़ौरन चादर अपने ऊपर से हटा सूर्य के सीने पे चढ़ भेटि

सूर्य ....... अरे सपना ये क्या कर रही हो देखो मुझे जाने दो प्लेसेस मेरी

इज्जत मत लूटना वर्ण मेरी बीबियो को क्या मुँह दिखाऊंगा

सपना ....... अब बंद भी कीजिये ये नाटक आपको पता है ऐसा मैं छह कर भी नहीं कर सकती आप से मैं नाराज थी मुझे मानाने की बजाय आप उल्टा मुझे हे परेशान कर रहे है क्या यही आपका प्यार है

सपना ने भले हे आखरी लाइन बिना सोचे समझे कही थी पैर उस लाइन ने सूर्य को कुछ पल सोच में दाल दिया

आखिर सपना ने कुछ गलत भी तो नहीं कहा था

वो उस से प्यार करती है प्यार तो वो भी करता है पैर क्या वो उन्हें उतना टाइम दे पता है जितना उनका हक़ हो उन्हें जरुरत हो भले हे उनके बिच जिस्मानी सम्बन्ध नहीं बन सकते अभी पैर कुछ वक़्त प्यार भरे लम्हे बिताने का हक़ भी नहीं है क्या उनके साथ बिताने क्या

सूर्य ....... सॉरी मेर्री जान मुझे माफ कर दो तुमने सच कहा मैंने अपने प्यार को तकलीफ पहुंचे है तुम्हारा नाराज होना जायज है सपना तुम जो सजा देना चाहो मुझे स्वीकार है

सपना ........ इस्स्स्सस्श्ठ आप ऐसा सोच भी कैसे सकते है की मैं आपसे नाराज हूँ या आपको कोई सजा दूंगी पैर मेरी भी कुछ खवाहिश है मेरी हे नहीं हम सबकी कुछ छोटी छोटी खवाहिशे है हम सब ज्यादा कुछ नहीं मांगती बस आपका थोड़ा सा प्यार आवर थोड़ा सा वक़्त जहा हम सब आपका प्यार आवर साथ प् सके

सूर्य ने सपना को अपने सीने से लगा लिया

सूर्य को सच में पछतावा था की वो सभी को एकांत में कुछ पल भी नहीं दे पता है

सूर्य ....... सपना आगे से तुम्हे या तुम्हारी किसी भी बहन को कोई शिकायत का मौका नहीं दूंगा मेरी जान मैं खुद सामने से सभी को वक़्त दूंगा उम्मंहहहह अब तो मुस्कुरा दे मेरी जान

सपना जो सूर्य के सीने पे लेती हुई थी उसने खुद से सूर्य के चेहरे को थम उसपे चुम्बनों की बारिश कर दी

कुछ देर चुम्बन चलने के बाद सपना सूर्य की आँखों में देखने लगी

सूर्य .......... ऐसे क्या देख रही हो मेरी जान जैसे मुझे आज पहली बार देख रही हो

सपना ...... क्या अभी आप मुझे प्यार करेंगे .....

सूर्य ....... क्या कहा अभी तुमने तुम्हे पता है न हम ऐसा नहीं कर सकते सदी से पहले

सपना ...... हुण्णं मैं जानती हूँ पैर एक गफ बर्फ जितना तो कर सकते है न

पूरा नहीं तो थोड़ा बहुत तो कर सकते है न

सूर्य ......... तुम मुझसे बेहतर जानती हूँ सपना इसके बाद क्या होगा अगर एक बार हमने ये किया तो फिर शरीर की उत्तेजना आवर बढ़ेगी जो तभी ठंडी होगी जब पूर्ण प्रेम मिलान होगा

सपना ...... बस ऊपर ऊपर से मुझे आपको दिल करना है

सूर्य ....... ठीक है फिर जैसी तुम्हारी इच्छा मेरी जान

सूर्य दोनों के कपडे गायब कर देता है अब सपना के बदन से निघ्त्य गायब थी अब वह केवल पिंक हाफ कप ब्रा आवर ग स्ट्रिप पेंटी थी जो सपना के कूल्हों के बिच राशि हुई थी दोनों खाश जहा को छुपाये

वही सूर्य अब केवल एक वाइट शार्ट अंडरवियर में सपना किए निचे लेता हुआ था

सूर्य के अंग को अपनी नाम मात्रा की पेंटी के ऊपर से मह्सुश कर सपना की दिल की धड़कन भढने लगी थी वही सूर्य के मरदाना हाथ कमर को सहलाते सहलाते सपना के 34 के माखन जैसे सॉफ्ट चिकने खुल्हो तक पहुंच रहे थे

सपना सूर्य के होंटो पे टूट पड़ी थी जैसे काफी टाइम से भूखी बिली ढूढ देख उसपे टूट पड़ती है

सूर्य सपना की जुबान से अपनी जुबान लड़ते हुए सपना के कूल्हों को मसल रहा था साथ हे हलकी हलकी अपनी कमर चला रहा था ताकि जल्दी हे सपना तीन तरफ़ा हमले से जल्दी डिस्चार्ज हो जाये

न सूर्य ने सपना के किसी अंग को बे- पर्दा करने की कोशिश की आवर न सपना ने ऐसा जताया की उसे सूर्य के अंग को देखना हो

सपना किश करते करते अपनी कमर को एक ले ताल में सूर्य के आकद चुके लैंड पे रगड़ने लगती हज जो अब सपना की गीली पेंटी के ऊपर रगड़ करते हुए सपना की कुंवारी अनछुई छूट की जिसे कर सपना को चरम सुख की आवर ले जा रहा था

सूर्य ने सपना की पेंटी के अंदर से पीछे से खुल्हो को थम थोड़ा तेजी से सपना कज जुबान चूसते हुए सपना की गरम गीली छूट को अपने लैंड पे लगातार रगड़ रहा था

सपना ये सं पहली बार कर रही थी वो आवर ज्यादा इसे बर्दाश्त नहीं कर पति है आवर ुंखड़ि हुई सांसो के साथ का मोठे हुए सूर्य के सीने पे निढाल हो जाती है

सूर्य को अपने अंडरवियर के अंदर ताल सपना की छूट से निकला वो गरम काम रह मह्सुश हो रहा था सूर्य आवर सपना के चेहरे पे एक सुकून भरा भाव था सपना के काम राश की ख़ुशी उसके रूम में भी फ़ैल चुकी थी

सूर्य ने चुटकी बजा कर सपना आवर खुद के कपडे बदल लिए आवर पहले की तरह पुरे कपड़ो में दोनों एक दूसरे की बहो में सुकून से लेते हुए डेरी डेरी दोनों हे सो गए

निचे अभी भी रश्मि आदि चल रही थी अब दिन पूरी तरह से उग चूक था तो घर में आवर भी आस पास की महिलाएं आ गई थी

दोपहर तक शालिनी जी ने अपनी बड़ी भाबी से बोल कर मेर्री जी आवर अलीना के लिया रूम त्यार करवा दिया ताकि दोनों कुछ देर आराम कर सके जो जरुरी रश्मि थी वो पूरी हो चुकी थी कुछ अभी भी बाकि थी जो कभी भी पूरी की जा सकती है

ऊपर से सपना आवर सूर्य भी निचे आ चुके थे क्युकी अब दोपहर हो चुकी थी तो सभी को भूख भी लग आई थी

विजय आवर मेर्री जी दूल्हा दुल्हन थे इस लिया सबसे पहले उनका हे थाल लगाया गया विजय जिद कर अलीना आवर सूर्य को भी अपने साथ एक हे थल में खाना खाने को त्यार कर लिया

मेर्री जी की तो जैसे मन मांगी मुराद हे पूरी हो गई थी अलीना भी काफी खुश थी

सबका खाना होने के बाद अलीना आवर मेर्री जी को एक रूम जो बड़ी ममी ने तैयार करवाया था उसमे आराम करने दिया विजय मां जी भज थके हुए थे इस लिया वो भी एक रूम में आराम करने चल दिए .........

उदार सूर्यगढ़ में भी रत की थकी हरी लड़किया अपने अपने रूम में आराम कर रही थी

बाकि घर के मेहमान अभी भी रिस्तेदारो आदि में चर्चा में लगे हुए थे

कुछ मेहमान अभी से निकलने के तयारी कर रहे थे

राधिका ........ क्या हुआ मनप्रीत अभी भी तकलीफ हो रही है क्या तुम्हे

राधिका अभी अभी एक झीनी सी गाउन तयप निघ्त्य पहने भीगी हुए बल्लो को तोलिये से पोंछती हुई बहार निकली थी

अपने बीएड पे लेती मनप्रीत को एक तक छठ को घूरता देख अभी अभी नाहा कर बाथरूम से निकली राधिका ये सवाल किये बिमा रह नहीं पायी

मनप्रीत ...... नहीं दीदी अभी पहले से काफी बेहतर है अभी दर्द भी काम है वह

राधिका ....... अच्छी बात है अगर कोई प्रॉब्लम हो तो बता माँ सा से बोल कर डॉक्टर बुलावा दूंगी

मनप्रीत ........ नहीं दीदी आपको तो पता हे है पहले दिन थोड़ा ज्यादा प्रॉब्लम होती है वैसे भी हम लड़कियों को इसकी आदत पद जाती है ये इतना भी सीरियस मामला नहीं है

राधिका ....... कोई आवर बात है क्या मनप्रीत जो तुम्हे परेशान कर रही है

( राधिका खुद चाहती थी की मनप्रीत उस से खुल कर बात करे क्युकी की अभी तक मनप्रीत ने सूर्य के रूम में सूर्य आवर राधिका के बिच जो नजारा देखा था उसके बारे में कुछ भी नहीं कहा था राधिका से उसकी छुपी राधिका को कही न कही खाल रही थी )

मनप्रीत नजरे उठा राधिका की आवर देखती है

जो की मिरर के सामने कड़ी अपनी बॉडी पे बॉडी लोशन लगा रही थी उसका हल्का उभरा हुआ पेट थोड़ा थोड़ा नजर आ रहा था राधिका की भी नजरे मिरर से मनप्रीत पे हे तिकी हुई थी

मनप्रीत ....... कुछ नहीं दीदी बस ऐसे हे कुछ सोच रही थी वैसे आप अब माँ बनने वाली है तो आपको कैसा मह्सुश हो रहा है

राधिका ........... मनप्रीत मेरी बहन मैं जानती हूँ की तुम अभी क्या सोच रही हो पैर जो तुम सोच रही हो वो सरम के कारन कह नहीं प् रही हो क्यों यही बात है न तुमने मुझे आवर सूर्य को किश करते हुए देखा था वह रूम में

मनप्रीत ....... वो है दीदी पैर आप कैसे किसी आवर के साथ

राधिका ............ प्यार आवर मज़बूरी किसी से कुछ भी करवा सकती है मेरी बहन

राधिका अब तक मिरर के सामने से हाथ कर मनप्रीत के पास आ चुकी थी अभी भी उसके हाथ में लोशन की बोतल थी

मनप्रीत ........ मैं कुछ समाज नहीं आपकी ऐसी क्या मज़बूरी थी जिस कारन आप सदी सुधा हो कर भी अपने पति की देखा दे रही ी मैं आप समाज रही है न

राधिका हलकी नकली मुस्कान के साथ मनप्रीत का हाथ पकड़ मनप्रीत के चेहरे को देखती है

राधिका ........ तू मेरे लिया मेरी बहन जैसे है जैसे दीप्ती दीदी पैर तुम्हे वडा करना होगा की तुम कभी भी किसी के सामने इस बात का जिक्र नहीं करो गई जो मैं तुम्हे बताउंगी

मनप्रीत ........ दीदी मैं भी समझती हूँ सब अब मैं कोई बच्ची तो हूँ नहीं जो ऐसे बात किसी को बता ऊँगली मैं वडा करती हूँ हमारे बिच जो भी बात होगी वो हम तक हे रहेगी वाये **** दी शोगान्ड उठती हूँ

राधिका ........ थैंक मेरी बहन मुझे तुमसद यही उम्मीद थी वैस्ड तुम्हारी सदी को कितना टाइम हो गया है मनप्रीत

मनप्रीत ............ यही करीब 15 से 16 महीने पैर इस से मेरी सदी का क्या लेना देना

राधिका ............ तुम्हे पता है मेरी सदी को 4.5 साल हो गए है मैं आवर रोहन कॉलेज टाइम से एक दूसरे को प्यार करते थे आवर आज भी एक दूसरे से प्यार करते है.........

मनप्रीत ......... जब आप आवर रोहन भाई एक दूसरे से इतना प्यार करते है तो फिर आपने ऐसा क्यों किया आपको नहीं लगता की सदी सुधा होने के बावजूद आपका किसी आवर से ऐसा सम्बन्ध रखना आपके साथ साथ बुआ जी आवर सूर्य के परिवार के लिया कितनी बड़ी बदनामी का कारन बन सकता है अगर आपका सम्बन्ध किसी के सामने उजागर हुआ तो

राधिका .......... मैं जानती हूँ तुम जो कुछ भी कह रही हो उसमे मेरे लिया तुम चिंतित हो पैर मेरी अपनी भी कुछ मजबूरिया थी आवर कुछ मेरा स्वार्थ तुम मुझे तुम बेसक मुझे लालची या स्वार्थी औरत समझ सकती हो मेरी बहन

मनप्रीत ......... नहीं दीदी मैं ऐसा कुछ नहीं सोच रही न हे मेरे मन में आपके लिया ऐसी कोई सोच है पैर ये जरूर जानना चाहती हूँ की ऐसी क्या मज़बूरी थी आपकी जो ऐसा कदम उठाना पड़ा

राधिका .......... तुम्हारे भाई साहब रोहन आज भी मुझे उतना हे प्यार करते है जितना की सदी से पहले पैर एक हादसे ( दुर्घटना ) ने हम दोनों की लाइफ बर्बाद कर के रख दी सदी के बाद हम दोनों ने फैसला किया की हम अभी कोई बच्चा प्लान नहीं करेंगे कही के चलते हमने सेफ्टी उसे की पैर हमारी बुरी किस्मत कुछ टाइम बाद एक दुर्घटना में रोहन ने अपनी मरदाना ताकत खो दी उस हादसे के चलते उनका स्पर्म काउंट बहुत काम हो गया बहुत से डॉक्टर से जाँच करवाई पैर कोई समादन नहीं हुआ जब मुझे इस बारे में पता चला तो मेरी हस्ती खेलती दुनिया हे उजाड़ चुकी थी

ऐसे हे टाइम निकलता रहा हो हमारी सदी को 4 साल बिट गए पैर मैं माँ नहीं बन पायी इस बिच जहा हमें उम्मीद की किरण नजर आई हमने वह वह इलाज करवाया पैर कोई फायदा नहीं हुआ

माँ जी बहुत अच्छी है जिन्होंने अपनी दिल की बात दिल में छुपा कर राखी उन्होंने कभी मुझे बचे के लिया फाॅर्स नहीं किया न कभी बचे को ले कर ऐसी कोई बात कही जिस से मुझे या उन्हें तकलीफ हो पैर जब भी वो किसी बचे को देखती तो उनकी आँखों में मैंने वो दर्द वो तड़प वो उम्मीद देखि जो उन्हें मुझसे आवर रोहन से थी

कहते कहते राधिका की आँखों से आंसू बहते हुए उस खूबसूरत चेहरे को भिगोते हुए गालो से निचे टपकने लगे

मनप्रीत ने मज़बूरी से राधिका का हाथ थम लिया जैसे वो उनकी हिमायत बढ़ा रही थी

मनप्रीत ........ इसका मतलब आपके पेट में जो....

राधिका ......... है मेरे पेट में जो अंश है वो मेरे आवर सूर्य के प्यार की निशानी है भले हे समाज आवर दुनिया की नजरो में ये नाजायज है पैर मेरी लिया ये इस्वर का वो आशीर्वाद है जिसके होने से मैं खुद को पूर्ण मानती हूँ

मनप्रीत .......... वैसे आपकी सूर्य से मुलाकात कैसे हुई थी मैंने देखा बड़ी दीदी बुआ जी फूफा जी सभी सूर्य को बहुत मानते है जैसे वो उनका अपना सागा बीटा हो

राधिका ......... ये तू मेरी अच्छी किस्मत कह ले या फिर उस ऊपर वाले को मुज दुखियारी पे तराश आ गया था जो सूर्य मेरी जिंदगी में आया जब पहली बार सूर्य को मैंने देखा तो न जाने कैसे मैं उसकी आवर खींची चली गई वो पापा से मिलने आया था घर उस से पहले हमने सिर्फ उसके बारे में सुना हे था पापा उसे रोहन जितना हे प्यार करते है सायद उस से ज्यादा क्युकी सूर्य आर्मी से है तभी उनकी मुलाकात पापा से हुई पुर डेरी डेरी हमारी मुलाकात होने लगी पैर सूर्य ने कभी मुझे उस नजर से देखा हे नहीं आवर न मैं हिमत कर प् रही थी पैर दिल हे दिल मैं सूर्य प्यार करने लगी थी काफी टाइम हमारे बिच केवल देवर भाबी का हसी मज़ाक वाला रिस्ता हे रहा फिर हमने सूर्य की सदी की खबर सुनी हम सब लोग सदी में शामिल हुए थे तभी मेरे आवर सूर्य के बिच इस रिश्ते की सुरुहत हुई मैं आवर रोहन भी सूर्य के साथ हनीमून पे गए थे वही हमारे बिच रिस्ता कायम हुआ जिसका फल आज मेरे पेट में है

मनप्रीत ......... इसका मतलब रोहन भाई को भी पता है आपके आवर सूर्य के बारे में

राधिका ....... है उन्हें पता है सब कुछ हम दोनों की सहमति के बाद हे मैंने ये कदम उनकी इच्छा से बढ़ाया था अब तुम समाज सकती हो मेरी बहन की उस वक़्त कितना कुछ झेला होगा उन्होंने

मनप्रीत ......... सच कहा दीदी आपने कितना कुछ सहा होगा रोहन भाई ने इस बच्चे के लिया जबकि उन्हें पता था की उनकी बीबी उनके प्यार को इस बच्चे के लिया किसी आवर की बहो में किसी आवर के बिस्तर पे घेर मर्द के साथ सोना होगा आज के टाइम में तो मर्द अपने एक शक के चलते अपनी पत्नी तक की जान ले लेते है सच में आप दोनों ने बहुत कुछ सहा है दीदी वैसे क्या अभी भी आप सूर्य के साथ

राधिका .......... जब तुम्हारे पेट में जससजित का अंश आएगा तब समझ आएगा तुझे

मनप्रीत ............ क्या मतलब दीदी भले हे मैं अभी माँ नहीं नानी हम पैर बुद्धू नहीं हुई जो समझ नहीं पाऊँगी बताओ न प्लेसेस

अब जैसे मनप्रीत को भी इन सब बस तो से मज़ा आ रहा था या वो आवर ज्यादा जानना चाहती थी

राधिका बीएड उठ कर अपनी निघ्त्य निकल देती है जिसके निचे उन्होंने हलकी गुलाबी ब्रा पेंटी दाल राखी थी गोर गोर भरे पुरे खुल्हो के बिच उनकी पेंटी का पिछले हईशा लैब भाग कूल्हों की खाई को हे छुपा प् रहा था

मनप्रीत ऐसा बोल्ड रूप देख एक पल के लिया तो हार्टपरट रह गई थी

राधिका ...... ऐसे क्या देख रही हो मनप्रीत जो मेरे पास है वही तुम्हारे पास है उल्टा मेरे वाले से भरी है पंजाब का पानी कुछ ज्यादा हे असर कर रहा है तुम पे हहहहए

मनप्रीत .......... दीदी अब आप बात को पलट रही है

राधिका अलमारी से मैचिंग ब्लाउज साड़ी ब्लाउज पेटीकोट आदि निकलती है आवर बिना कोई सरम के मनप्रीत के सामने हे पहन ने लगती है

राधिका ........ मैं बात को ताल नहीं रही हूँ जब तुम्हे अपनी लाइफ ला सबसे बड़ा राज़ हे बता दिया तो बाकि कुछ क्यों छुपाउंगी मेरी बहन आवर तुम्हे वडा भी तो किया है


मनप्रीत ......... मुझे मेरी उठाई शोगान्ड याद है दीदी अगर शोगान्ड न भी उठती तब भी ये बाते किसी आवर को बताने वाली नहीं आपने मुझे विश्वाश कर अपने दिल की बात बताई मेरे लिया यही काफी है

राधिका .......... मेरा आवर सूर्य का रिस्ता अभी भी कायम है मैं सूर्य से प्यार करती हूँ एक तो यही वह की मैं आगे भी ये रिस्ता रखूंगी आवर दूसरा कारन है मेरा बच्चा मैं अपने बच्चे को उसके पिता से दूर कैसे कर सकती हूँ भले हे दुनिया की नजरो में रोहन इस बचे का बाप है पैर सच तो कुछ आवर हे है न आवर फिर जब बच्चा पेट में होता है तब मिलान करने की ज्यादा हे इच्छा होती है शरीर में अलग से उत्तेजना रहने लगती है

मनप्रीत ........ आपका मतलब है जब बच्चा पेट में हो तब चुदाई की ज्यादा इच्छा रहती है हहहहए

राधिका ........ तू तो बड़ी बेसरम है मनप्रीत

मनप्रीत ........ आहहहा क्या बात है दीदी आप चुदाई कर सकती है आवर हम चुदाई सबद बोलने भर से बेसरम हो गए

राधिका ......... है सही कहा तूने प्रेगनेंसी के टाइम सेक्स करने की बहुत इच्छा रहती है किसी भी लड़की में आवर एक स्वस्थ सेहतमंद बच्चे के लिया एक लिमिट तक सेक्स करना भी चाइये मनप्रीत तो तुम समाज सकती हो की मेरा आवर सूर्य का रिस्ता अभी भी है पुर आगे भी रहेगा

मनप्रीत ....... रोहन भाई तो वैसे भी इसमें शामिल है नहीं तो अब तो आपके लादले देवर को हे पूरी फसल त्यार करनी होगी अब तो रिजल्ट आने पैर हे पता चलेगा की जो बीज उन्होंने आपके अंदर डाला है उसकी फसल कैसी त्यार होती है

राधिका .......... पहली बात तो तुम्हारे भाई साहब इस काबिल नहीं आवर दूसरी बात वो अगर इस काबिल होती तब भी मैं उनके साथ बेबी होने से पहले सम्बन्ध नहीं भरी मैं अपने बच्चे में किसी भी तरह की मिलावट नहीं चाहती फिर चाहे वो रोहन मेरा पीटीआई हे क्यों न हो रही बात फसल की तो बाप का कुछ तो असर होगा हे अपने अंश पे उनका 1 % भी मेरे बेटे में हुआ तो भी बहुत है

मनप्रीत .......... वैसे दीदी आपके देवर पे नजर बहुतो की है संभल कर रखना चारो तरफ गोपिया हे गोपिया है आवर वो उनके बिच एक अकेला कृष्ण कन्हैया हहहहए

राधिका अब तक लगभग त्यार हो चुकी थी वो मिरर के सामने अपने फेस पे कुछ लगा रही थी

राधिका ........ कही उन गोपियों में तुम भी तो शामिल नहीं हो मनप्रीत अगर ऐसा है तो सवरग आवर नरक दोनों का एक साथ अनुभव होने वाला है तुम्हे

मनप्रीत ....... मैं तो नहीं हूँ दीदी पैर हमारी दोनों ननदो का कुछ कह नहीं सकती कुछ तो चल रहा है उनके मन में वैसे आपने ये क्यों कहा की सवरग आवर नरक का अनुभव एक साथ होगा

राधिका ....... जब तुम उन गोपियों में शामिल हे नहीं तो फिर तुम्हे बता ने का क्या फायदा

( राधिका .....जानती हूँ तुम्हारे दिल में क्या है मनप्रीत सूर्य के आकर्षण से तुम बच नहीं सकती उल्टा अच्छा हे है अगर तुम भी सूर्य के निचे आ गई तो उसे भी एक गरम मस्त छूट मिल जाएगी आवर तुम्हारा भी मुँह बंद हो जायेगा )

मनप्रीत ....... बताओ न दीदी आपने ऐसा क्यों कहा

राधिका ........ क्युकी सूर्य को बिस्तर पे झेल पाना तुम्हारे बस का नहीं है इस लिया नहीं बता रही

मनप्रीत ........ ये क्या बात हुई दीदी मैं कोई कुंवारी लड़की तो हूँ नहीं आवर आप भूल रही है मेरी सदी को लगभग डेड साल हो गए है

राधिका ...... मैं जानती की तुम कुंवारी नहीं हो अब चलो निचे चलते है

मनप्रीत ........ अब बता भी दो दीदी क्यों बात को गुमा रही हो

राधिका ....... तो सुनो अगर तुम गलती से भी सूर्य के निचे आ गई तो तुम्हारी फटी हुई मुनिया भी फाड् जाएगी मेरी बहन सूर्य के हरियार को झेल पाना आसान नहीं फिर चाहे लड़की कितनी हे चूड़ी हुई क्यों न हो जब वो 9 इंच का गोरा चिट्टा मुसल तुम्हारी फटी हुई छूट में जायेगा तब पता चलेगा अब समाज गई

( राधिका ....... अब देखती हूँ तुम क्या करती हो अब तुम खुद कल्पना में सूर्य के हरियार की तस्वीर बनाओगी आवर लेना चाहो हो हेहेहे )

राधिका ...... अरे अब इतना क्या सोच रही है चल निचे चलते है सूर्य भी आता हे होगा साम होने को आई है

मनप्रीत ...... है चलिए दीदी वैसे दीप्ती दीदी भी तो

राधिका ........ मैं समझ रही हम तुम क्या कहना चाहती हो पैर मुझे नहीं लगता ऐसा कुछ है आज तक तो उनको किसी लड़के के आस पास भी नहीं देखा मैंने आवर फिर सूर्य उनके लिया भाई जैसा है

मनप्रीत ...... वैसे तो सूर्य भी किरण का भाई लगता है फिर भी दोनों ने सदी की न जबकि किरण तो सूर्य के सेज मां की लड़की है

राधिका ....... है पैर उनका रिस्ता गुरुदेव ने तय किया था सूर्य आवर किरण के बिच एक अलग हे रिस्ता है अब चलो निचे

साम करीब 7 बजे सूर्य शालिनी जी विजय मेर्री जी अलीना नाना जी बड़े मां जी के साथ कुछ आवर लोगो को लिए हवेली लौट आया था

इसके साथ हे विजय की पग फेरे के रसम भी हो जनक थी आवर कुलदेवी की पूजा के बाद विजय आवर मेर्री जी अपने हनीमून पे भी निकल जायेंगे विजय को आर्मी से केवल 1 मंथ की हे चुटी मिली थी जिसमे 8,10 दिन तो वैसे हे निकल चुके थे बचे हुए दिन विजय अपनी पत्नी के साथ बिताना चाहता था इस लिया वो जल्दी हे रश्मि पूरी कर मेर्री जी के साथ एकांत में समय बिताना चाहता था

रात में सभी ने मिल कर खाना खाया मानव आवर उसके पिता जी राजेंद्र शेखावत जी पूनम आवर मानवी को यही छोड़ कर बाकि परिवार के साथ साम को लौट चुके थे

सुनिधि माया भी अपने माँ डैड के साथ दिल्ली लौट चुके थे दादी जी ने ढेरो उपहार आवर सुभकामनाओ के साथ उन्हें विदा किया

अभी हवेली में कुछ रिस्तेदारो के साथ सोहेल का परिवार गोविन्द जी मधु जी सूर्यकांत अंकल का परिवार हे बचा था

दादा जी के आग्रह पे वीरभान सींग जी का परिवार भी रुक गया था हलाकि काम का हवाला दे कर उनके दोनों बेटे वापिस जा चुके थे अब यहाँ दीप्ती के नाना जी दोनों ममिया उसके दोनों भाई बहाने आवर भाबी बचे थे

दादा जी नाना जी वीरभान जी सूर्यकांत जी गोविन्द जी महेंद्र शिव जोरावर वह कुछ आवर लोगो ने अपनी अलग अलग महफ़िल सजा राखी थी जहा बाते के साथ साथ सरब का लुत्फ़ भी लिया जा रहा था

सूर्य ........ अब कैसे तबियत है आपकी ममी जी ( पूनम )

पूनम जी ......... तुम्हारे हाथो में कोई जादू है बीटा देखो मैं बिलकुल ठीक हो गई हूँ पहले पता होता की मेरा भांजा इतना अच्छा वेद है तो मैं क्यों किसी डॉक्टर के यहाँ चादर लगती

सूर्य ....... ये तो अच्छी बात है न ममी जी की अब आप पहले से काफी ठीक हो गई है ये सब देसी जड़ी बूटियों का कमल है नाकि की मेरे हाथो का पैर अभी आपको 2 खुराक आवर लेनी है तभी आप पूरी तरह से ठीक हो पाएंगी

मानवी ....... सच कहा भाई तुमने पहले मुझे इन जड़ी बूटियों या देसी इलाज पे यकीं नहीं था मुझे तो लगा की अब सायद माँ कभी ठीक नहीं हो पाएंगी इनकी गिरती हेल्थ को देख हमें दर था की कही हम मम्मी को खो न दे

सूर्य मानवी की भीगी हुई आँखे पूछ उसे गले से लगा लेता है आवर उसकी पीठ प्यार से सहलाने लगता है

सूर्य ........ हम सब है न दीदी आवर फिर ममी जी तो अभी भी काफी जवान है बिलकुल आपकी बड़ी बहन जैसे इतनी खूबसूरत हॉट ममी को भला मैं कैसे कुछ होने देता मेरी जड़ी बूटियों का ज्ञान फिर कब काम आता है

सूर्य की बात सुन पूनम ममी मजाक में सूर्य का कण पकड़ लेती है वही मानवी सूर्य के सीने को आवर कस्ते हुए उसकी पीठ पे अपने कोमल हाथो से 2.3 मुक्के लगा देती है

मानवी ........ देख रही हो बुआ सा ये सूर्य मम्मी को क्या बोल रहा है

रेखा जी ....... तो गलत क्या कहा मेरे बेटे ने अब तुम्हारी मम्मी इतनी खूबसूरत है तो इसमें मेरे बेटे की क्या गलती बस भाबी थोड़ा अपने शरीर को मेंशन रखे तो तुम्हारी बड़ी बहन हे लगेगी हहहहए

सूर्य ...... वैसे ममी जी मैं बड़ी मम्मी से सहमत हूँ आपको थोड़ा इस आवर भी ध्यान देना चाइये सुबह सुबह जॉगिंग आवर योग करना चाइये ताकि आपकी हेल्थ अच्छी रहे वैसे दीदी भी इसमें आपकी हेल्प कर सकती है क्यों दीदी आपको तो योग के बहुत से आसान आते है

मानवी ....... तुम्हे कैसे पता मैंने तो कभी इस बारे में मम्मी तक को नहीं बताया

सूर्य ....... वो आपकी बॉडी बहुत हेअल्थी आवर फिट है न इस लिया कहा

मानवी ....... वैसे तुम अभी तक एक बार भी हमारे यहाँ क्यों नहीं आये तुम्हे इतने दिन हो गए यहाँ इंडिया आये हुए

सूर्य ....... क्या कृ दीदी टाइम हे नहीं मिलता अभी न तो ड्यूटी पे हूँ आवर न कॉलेज में कॉलेज स्टार्ट होने के बाद एक भी कदम कॉलेज में रखा है फिर भी जल्दी हे आपसे मिलने आने की कोशिश करूँगा

मानवी ....... कोई कोशिश वशिष्ठ नहीं कोई बहाना नहीं चलेगा तुम्हारा पापा आवर मानव पहले हे जा चुके है अब तुम हे हमें घर छोड़ने जाओगे हमारे साथ समझ आई बात बुआ सा मैं पहले बता देती हूँ आपको ये सूर्य हमारे साथ नहीं गया न तो मैं फिर कभी आपके पास नहीं आउंगी

रेखा जी ........ अरे अरे मेरी गुड़िया रानी तो नाराज हो गई ठीक है बाबा इस बार तुम्हे तुम्हारा भाई हे घर छोड़ने जायेगा अब तो खुश पैर बीटा ये ज्यादा दिन रुक नहीं पायेगा वह तुम तो जानती हो इसकी पड़े आवर नौकरी दोनों

मानवी ...... ठीक है अभी के लिया इतना काफी है अगली बार का अगली बार देखूंगी क्यों मर .सूर्य शिव ठाकुर

सूर्य ......... वैसे दीदी मैंने कुछ सुना है आपके बारे में क्या वो सच है

मानवी .......... अब तुमने क्या सुना है मेरे बारे में मुझे क्या पता

सूर्य ....... मैंने सुना है दीदी जब आप छोटी थी तब आपको आवर मानव भाई को अलग सुलाती थी बाद में भी जब आप थोड़ी बड़ी हो गई तब भी

पूनम जी ........ हेहेहे तुम्हे कैसे पता बीटा इस बारे में

सूर्य ...... इसका मतलब सब बाटे सच हे है .है न ममी जी क्यों दीदी क्या आप अभी भी .......

सूर्य अपनी बात अधूरी चढ़ तेजी से हस्ता हुआ रूम से निकल जाता है

सूर्य को ऐसे हस्ता हुआ रूम से जाता देख मानवी कन्फ्यूज्ड थी वही पूनम ममी जी आवर रेखा जी दोनों अपने मुँह को हाथ से देख कर जोर जोर से हसने लगी

मानवी ........ इसने मेरे बारे में क्या सुना आवर ये इस तथा हस्ता हुआ क्यों चला गया आवर आप दोनों इस तरह से हैश क्यों रही है

रेखा जी ....... हहहहए बीटा तुम्हे पता है तुम्हे आवर मानव को अलग अलग क्यों सुलाया जाता था बाद में जब तुम बड़ी हो गई तब मानव तुम्हारी मम्मी या पापा दादा जी दादी जी किसी के साथ भी सो जाता था पैर तुम्हे कोई क्यों अपने साथ नहीं सुलाता था

मानवी ........ अब मुझे क्या पता बौ सा सायद नीड में मैं अपने हाथ पेअर मरती रही हूँगी बचपन में

पूनम जी ....... नहीं बीटा दरशल तुम हर रात बिस्तर गिला कर देती थी बाद में जो तुम्हे अपने साथ सुलाता उल्टा ुशी का नाम लगा देती जबकि होता उसके उलट था तुम बिस्तर में हे सुसु कर देती थी

मानवी ........ क्या ....... पैर ये सूर्य को कैसे पता चला लगने दो उस हे मेरे हाथ मैं बताती हूँ उसने तो उसकी बड़ी दीदी हूँ वो ऐसे कैसे मेरा मजाक बना सकता है मम्मी जरूर आपने हे उसे बताया है या फिर आपने बुआ सा

दोनों ने न में गर्दन हिला दी मानवी की बात सुन

पूनम जी ......... बीटा वो बस मजाक में तुझे छेद रहा था आवर कुछ नहीं

मानवी अंदर हे अंदर सोच रही थी की क्या सच में मैं बिस्तर में सुसु कर देती थी अगर ऐसा है भी तो उस से सूर्य को क्या फरक पड़ता है ओह्ह्ह्ह तेरी तो उसने ऐसा लगता है की कही मैं अब भी बिस्तर गिला तो नहीं करती हूँ मतलब मम्मी आवर बुआ सा ुशी बात को ले कर हैश रही थी

मानवी ....... बुआ सा अब मैं आपके इस लादले को नहीं बक्शने वाली बता देती हूँ साथ हे आपके लादले को भी मम्मी

पूनम ....... अरे अब मेरे लादले ने क्या किया

मानवी ....... ये आग आपके लादले की हे लगाई हुई है

मानवी हलके गुस्से में रूम से निकल सीधा कोमल के रूम की आवर भाड़ गई क्यों की सूर्य को कोमल के रूम में जाते हुए देख लिया था मानवी ने

मानवी ने जैसे हे रूम का दूर खोल अंदर झाँका तो उसकी आँखे फटी की फटी रह गई

कुछ पल सामने का नजारा देख फ़ौरन दूर को बंद कर चुपचाप तपिश लौट गई पैर अब मानवी के चेहरे पे ढेरो उलझन थी

कुछ 20 मिनट्स बाद सूर्य सुपर अपने रूम की आवर चल दिया

सूर्य जब अपने रूम में पहुंचा तो वह पहले से हे किरण जीनत राधिका सिमरन मनप्रीत जूलिया बैठी हुई थी

सूर्य सभी को .hi. बोल अलमारी से टॉवल ले बाथरूम में गेस गया नहाने के लिया

किरण बीएड से उठी आवर अलमारी खोल उसमे से सूर्य के नाईट में पहन ने वाले कपडे निकलने लगी

मनप्रीत आवर सिमरन ध्यान से किरण को देख रही थी

किरण अपने हाथ में सूर्य का शार्ट टॉवल आवर पतली t-shirts निकल उसने गौड़ में लिया सूर्य का इन्तजार करने लगी

सिमरन ........ मुझे इन मर्दो की यही बात बुरी लगती है वो हम लड़कियों की कोई इजात हे नहीं करते जैसे हम उनकी खरीदी हुई गुलाम हो

किरण ........ तुम्हे ऐसा क्यों लगता है सिमरन की हर मर्द ऐसा है बल्कि तुम्हारी तो अभी सदी भी नहीं हुई

सिमरन ........ आवर नहीं तो क्या यार बुरा न मन्ना मेरी बात का तुम मैं जो मन में होता है साफ साफ कहना पसंद करती हूँ अभी जब सूर्य अपना टॉवल अलमारी से निकला तब वो ये बाकि कपडे भी तो निकल सकता था न तुम्हे इसके लिया परेशान करने की क्या जरुरत थी

राधिका ........ सॉरी सिमरन पैर यहाँ तुम्हारी सोच बिलकुल गलत है मानती हूँ की कुछ मर्द ऐसे होती है जो अपनी पत्नियों के साथ ऐसा ट्रीट करते है पैर जैसे सब उँगलियाँ एक सामान बराबर नहीं होती वैसे हे हर इंसान एक जैसा नहीं होता है

किरण .......... सच कहा भाबी आपने गलत तुम भी नहीं हो पूरी तरह से सिमरन जब रिस्तो में प्रेम हो तब जो काम तुम्हे अभी परेशानी लग रहा था वही हम पत्नियों के लिया ख़ुशी भरा पल होता है या यूँ कहूं की पत्नी को पति के इन छोटे छोटे कामो से जो ख़ुशी जो अपनापन मह्सुश होता है वो अनमोल होता हटा है ये सब तुम तब मह्सुश करोगी जब तुम्हे सच्चे दिल से चाहने वाला मिलेगा आवर तुम्हारी सदी उस से होगी तब तुम्हे यही छोटे छोटे काम उनके लिया करने में जो ख़ुशी मह्सुश होगी वो अनमोल होगी

सिमरन ......... सायद आप ठीक कह रही है सॉरी यार पैर मेरी यही बुरी आदत है जो मेरे मन में होता है मैं वो बोलने से खुद को रोक नहीं पति हूँ

किरण ....... ये तो अच्छी बात है यार सिमरन सच बोलने में कैसी सरम कैसी जीजाक यार

तभी बाथरूम के दूर पे नॉक हुआ किरण सूर्य के कपडे आवर टॉवल हलके खुले दूर से सूर्य को अंदर पकड़ा देती है

किरण वापिस अपनी जगह पे आ कर बेथ जाती है

किरण ........ वैसे मां जी ने कोई लड़का देखा रखा है या तुमने हे अपने लिया पसंद कर लिया है

सिमरन ....... यार अभी मेरी उम्र हे क्या है कॉलेज कर रही हूँ अभी तो एन्जॉय करना है बस बाकि सब बाद में देखूंगी

इतने सूर्य भी शार्ट t-shirts पहन छोटे टॉवल से सर पूछते हुए बाथरूम से निकला आवर मिरर के सामने खड़ा हो बालो में आयल लगा कर कंगी करता है

सूर्य ....... स्वीटी मैं छठ पे जा रहा हूँ सोने के लिया तुम जुली को अपने साथ सुला लेना

किरण ....... ठीक है कुंवर जी आप मेरी चिंता न करे

सूर्य ...... ठीक है ज्यादा लेट तक जागते न रहना गुड नाईट गुड नाईट एवरीवन

मनप्रीत बार बार सूर्य को चोर नजरो से निहार रही थी राधिका ने उसके दिमाग में सूर्य को ले कर क्यूरोसिटी जो भर दी थी

सूर्य सभी को गुड नाईट बोल ऊपर जा चूका था वही किरण सूर्य द्वारा सर पूछा गया टॉवल गौड़ में लिए बैठी थी

सिमरन ........ वैसे मैंने सुना है आप आवर सूर्य की सदी
लव मैरिड हुई है जबकि आप तो उसके सघे मां की लड़की है फिर तो आप उसकी बहन हुई न

जूलिया ........ वैसे स्वीटी दीदी मुझे भी आपकी आवर कुंवर जी की लव स्टोरी जननी है आज बता हे दीजिये न हम सब को की कैसे आपकी मुलाकात हुई कैसे आप एक दूसरे के नजदीक आये प्लेसेस दीदी

देवयानी जी ...... अरे भाई ये तो हमें भी जानना है ( देवयानी ने ये रूम में इंटर करते हुए कहा था )

किरण ....... अरे ऐसी कुछ खाश नहीं है हमारी लव स्टोरी ( बोलते हुए किरण के चेहरे पे एक बड़ी सी मुस्कान थी )

देवयानी जी ......... फिर जैसी है वैसे हे बता दो

किरण .......... तो सुनो फिर ..... कुछ खाश इंसान दुनिया में ऐसे भी होती है जिनका सम्बन्ध ईश्वर पहले हे निर्धारित कर देता है उनमे से सायद मैं भी एक थी बचपन से हे मुझे एक लड़के के सपने आते थे वो कोई आवर नहीं कुंवर जी हे थे पैर ये बात तब मुझे पता नहीं थी जब तक मैंने इन्हें देखा नहीं

जैसे जैसे मैं बड़ी होती गई सपने में दिखने वाला लड़का भी बड़ा होता गया आवर मैं हर रात जो भी सपने में देखती दूसरे दिन उसकी तरविर बना लेती ये सिलसिला लगभग मेरी 15 ,16 साल की उम्र तक चला मम्मी पापा दादा जी दादी जी सब मुझे पागल कह कर छेड़ते थे गलती उनकी भी नहीं थी पैर मेरी सपना दी बड़े पापा बड़ी मम्मी हमेशा मेरा हौसला बढ़ाते थे डेरी डेरी न जाने कब मुझे उस चेहरे से प्यार हो गया जो मैं सपनो में देख हक़ीक़त की तरविर बनती थी हर उस घटना की तस्वीर मैंने बनाई थी जो असल लिएफ में उस समय कुंवर जी के साथ घाटी थी अमेरिका में उनका रोना हसना खेलना गुस्सा होना सब तरह के इमोशंस को तरविर में उकेरा था फिर एक दिन वो मेरी तपश्या पूरी हुई जब कुंवर जी माँ डैड के साथ इंडिया लौटे तब बड़े पापा को सबसे पहले खबर मिली उनके आने की बड़े पापा महेंद्र जी से उन्होंने कुंवर जी माँ डैड की तस्वीर बड़े पापा को भेजी थी तब दोनों खानदानी में झगड़ा था दुश्मनी थी क्यों की माँ से पापा ने भगा कर सदी की थी ( फिर सक्तिपुर का थोड़ा बहुत किस्सा बताया )

जब बड़े पापा ने कुंवर जी की तस्वीर देखि जो महेंद्र पापा ने भेजी थी उन्होंने जैसे हे कुंवर जी को देखा वो पहचान गए की ये वही लड़का है जिसके सपने देखते देखते मैंने बचपन से जवानी तक का सफर किया है उनने पहले से पता था की मैं आवर सपना दीदी दोनों उन तर्विरो में कुंवर जी को देखते देखते प्यार करने लगी तब बड़े पापा ने हमें मां जी के यहाँ भेज दिया पढ़ने के लिया ताकि हमारी कुंवर जी से मुलाकात न हो पायेगा डेरी डेरी बाटे साफ हुई आवर दोनों परिवार ने माँ डैड को स्वीकार कर लिया कुछ टाइम बाद कुलदेवी पूजा उत्सव था जिसपे कुंवर जी ने सक्तिपुर के ठाकुरो को बलि चुनती दी

तब पहली बार मैंने आवर सपना पूजा में कुंवर जी को अपने सामने देखा वो हमारी पहली मुलाकात थी उस से पहले मैंने सपनो में देखा था वो राजकुमार अब हक़ीक़त में मेरी आँखों के सामने था पहली बार जब उन्होंने मुझे देखा तब यही कहा था .... मेरी स्वीटी ... शालिनी मम्मी को पहले से ....स्वीटी .. नाम से परिचित थी सायद उन्हें समझते देर नहीं लगी फिर बड़े पापा ने हमें सपोर्ट किया आवर कुछ ऐसी घटनाये हुए जहा हमारा प्यार अभी ने सीकर कर लिया इस तरह से हम रिश्ते में भाई बहन होने के बाद भी पति पत्नी बने

मनप्रीत ........ यकीं नहीं होता की ऐसा सच में भी हो सकता है जो सपने में देखा वही हक़ीक़त में सामने आ खड़ा हो वैसे मैंने सुना है इसमें सूर्य के गुरुदेव भी शामिल थे

किरण ....... है गुरुदेव ने हे बाकि परिवार को इस विवाह के लिया त्यार किया था वो ऐसा कुछ जानते होंगे जो सायद हम नहीं जानते तभी उन्होंने जोर दे कर हमारे विवाह के लिया सभी को त्यार किया यही छोटी सी लव स्टोरी है हमारी

( किरण ने बहुत कुछ ऐसा भी था जो बताना ठीक नहीं समझा नहीं तो बहुत से सवाल खड़े हो सकते थे )

सिमरन ....... काश मेरी लाइफ में भी कोई ऐसा ड्रीम बॉय हो जैसा तुम्हारा सूर्य

राधिका .......... सूर्य ऐसा ओने पैसा हे है डर्टी पे चाहो तो तरय कर लो हहहहए

सिमरन ........ पहले पता होता तो तरय भी कर लेती पैर अब तो वो स्वीटी के कुंवर जी है हहहहए

किरण ........ मुझे कोई एतराज नहीं सिमरन मेरी तरफ से पूरी चुत है बाकि तुम जानो झेल पति हो या नहीं उन्हें हहहहए

मनप्रीत ........... हेहेहे सही कहा किरण तुमने वैसे देख के तो लगता है झेल हे जाएगी पूरी पंजाबन पटोला है भरी पूरी गदराई पताका क्या सिमरन रानी

सिमरन ........ आपको बड़ा पता है भाबी की मैं झेल पाऊँगी या नहीं कहि आपका भी दिल तो नहीं आ गया है

मनप्रीत ......... आपका भी मतलब कही सच में तो नहीं आ गया है दिल संभल कर बनो रानी कही झेलते झेलते चल हे न बदल जाये आपकी एक तो वैसे हे आगे पीछे से पूरी पताका हो आप

सिमरन ............ बच के रहियो भाबी कही ये पताका आप पे न फुट पड़े

कहते हुए मनप्रीत की 36 की चूचियों को थोड़ा काश कर दबा देती है

मनप्रीत ......... िस्स्सस्स अह्ह्ह्हह क्या करती हो सिमरन मैं उस तयप की नहीं हूँ

सिमरन ........ तो बन जाये न आपकी बड़ी बड़ी ढूढ की मटकी देख मेरा तो मन कर रहा है अभी आपको अपने निचे पटक लूँ हहहहए

किरण ........ हेहेहे ऐसा कुछ इरादा है तो अपने रूम में जाओ यहाँ इस रूम में ऐसा कुछ नहीं करना पहले बता देती हूँ मैं

देवयानी इन सभी को हसी मज़ाक करते देख रही थी पैर बिच बिच में उसकी नजर जूलिया पे भी पद रही थी अब किरण की शार्प आँखों से भला ये सब कैसे बच सकता था पैर किरण ने इस बात को ले कुछ भी कहना ठीक नहीं समझा आवर चुप हे रही रात 12 बजते बजते सभी लोग सोने जा चुके थे अब किरण आवर जूलिया हे रूम में बचे थे

किरण ........ जूलिया अब हमें भी आराम करना चाइये

जूलिया ...... जी दीदी मैं कपडे बदल कर अभी आई

जुली किरण की नाईट ड्रेस ले बाथरूम में चेंज कर किरण के बगल में आ कर लेट जाती है

जूलिया किरण की निघ्त्य को थोड़ा हटा कर किरण का पेट नंगा कर देती है किरण को थोड़ा अजीब लगा आवर उसने निघ्त्य से फिर से पेट को कवर कर लिया पैर जूलिया ने फिर से पेट नंगा कर दिया

किरण ........ क्या हुआ जूलिया तुम ऐसा क्यों कर रही हो

जूलिया ......... कुछ नहीं दीदी मैं हमारे बेटे को मह्सुश कर्मा चाहती हूँ आवर कुछ नहीं

बोलते हुए जो लिया किरण के पेट पैर अपना कोमल हाथ फिरने लगती है किरण भी जूलिया की मासूमियत देख मुस्कुराने लगी

जूलिया ......... दीदी अब तो आपका पेट भी भढने लगा है जल्दी हे आप माँ बन जाएँगी

किरण ........ हेहेहे पागल अब बचा पेट में बढ़ेगा तो पेट तो बड़ा होगा हे आवर जल्दी कुछ नहीं होने वाला सब अपने टाइम पे हे होगा वैसे तुम ठीक हो न जुली

जूलिया ......... दीदी मम्मी से बात करो न मुझे वह नहीं रहना मेरा मन नहीं करता वह रहने के मुझे यहाँ आप सब के साथ रहना है

किरण ........ बिलकुल नहीं जुली मैं जानती हूँ तुम्हारा वह मन नहीं लगता पैर कल को तुम्हे सब संभालना है वह का तो तुम्हे सब सीखना समझना तो पड़ेगा हे आवर वो तुम तभी शिख समझ पाओगे जब तुम वह रहोगी यहाँ रह कर तो तुम वो सब समझ नहीं सकती न

जूलिया ....... मुझे कुछ नहीं चाइये दीदी न दरोगों लोक का राजसिंहासन आवर न हे महारानी का पढ़ मुझे आप सब के साथ रहना है कुंवर जी की पत्नी बन कर न की ड्रैगन लोक की महारानी बन कर

किरण ........ मेरी बहन ऐसा नहीं होता क्या तुम अपनी मम्मी अपने नाना जी की सभी क़ुर्बानियों को जाया कर डौगी तुम ये भूल गई क्या की तुम्हे वह तक पहुंचने के लिया तुम्हारे जनम से पहले कितनो अपनी जान की क़ुरबानी दी है पुरे मारुतः वंश की क़ुरबानी उनके त्याग है कोई जबाब तुम्हारे पास

जूलिया ......... दीदी उनके बलिदान का क़र्ज़ तो मैं अपनी जान हज़ारो बार उनके लिया दे कर भी नहीं चूका सकती हूँ

किरण .......... जब तुम उनके त्याग आवर बलिदान को हे नहीं समझ प् रही हो तो उनके जीवन का क़र्ज़ क्या चूका पाओगी तुम सच में उनके त्याग आवर बलिदान का क़र्ज़ चुकाना चाहती हो तो इस काबिल बनो की तुम्हारी काबिलियत देख उनकी आत्मा को सन्ति मिले उन्हें लगे की जिस उद्देश्य के लिया उन्होंने बलिदान दिया वो निरर्थक नहीं गया उन्हें तुमसे जो उम्मीद है उनने पूरा करो मेरी बहन

जूलिया ......... ( रोटी हुए ) सॉरी दीदी मुझे माफ कर दो मैं स्वार्थी हो गई थी आप सब के प्यार के लिया मैं अपनों की हे अपेक्षा कर बैठी अपने लळलच में

किरण ......... चुप हो जा मेरी बहन मैं हूँ न तुम्हारे साथ बस कुछ दिन की बात है फिर हम सब साथ होंगे चल आ ीदार मेरे पास

किरण जूलिया को अपने सीने लगा कर सर सहलाते हुए छोटे बचे की तरह सुलाने लगती है

छठ पे लेता सूर्य आँखे बंद किये सब सुन आवर देख रहा था उसकी आँखों के किनारे से हलकी पानी की बुँदे चमक रही थी वो आंसू थे जो सूर्य की आँखों से बहे थे

सूर्य ........ इसी लिया तुम मेरी आत्मा हो स्वीटी तुम्हारे दिल में सभी के लिया be-hentha प्यार भरा है खुद से पहले सबका सोचती हो

सायद इतने अच्छे से तो मैं भी जूलिया को उसके कर्त्तव्य का बोध नहीं करवा सकता था जिस तरह तुमने इतने प्यार से जूलिया को संजय .......

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ............

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ................
 
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किरण ......... चुप हो जा मेरी बहन मैं हूँ न तुम्हारे साथ बस कुछ दिन की बात है फिर हम सब साथ होंगे चल आ ीदार मेरे पास

किरण जूलिया को अपने सीने लगा कर सर सहलाते हुए छोटे बचे की तरह सुलाने लगती है

छठ पे लेता सूर्य आँखे बंद किये सब सुन आवर देख रहा था उसकी आँखों के किनारे से हलकी पानी की बुँदे चमक रही थी वो आंसू थे जो सूर्य की आँखों से बहे थे

सूर्य ........ इसी लिया तुम मेरी आत्मा हो स्वीटी तुम्हारे दिल में सभी के लिया be-hentha प्यार भरा है खुद से पहले सबका सोचती हो

सायद इतने अच्छे से तो मैं भी जूलिया को उसके कर्त्तव्य का बोध नहीं करवा सकता था जिस तरह तुमने इतने प्यार से जूलिया को संजय .............

अब आगे ............

अभी दोपहर का समय था सभी लोग विजय जी आवर मेर्री जी के विवाह की कुलदेवी मंदिर से पूजा करके लौटे हे थे

बड़े बुजुर्ग दादा जी के का कह में बैठे हुए आपस में बाते कर रहे थे इन में नाना जी भी शामिल थे क्यों की कुलदेवी की पूजा में उनका भी पूरा परिवार शामिल हुआ था वीरभान जी सूर्यकांत जी सोहेल के अब्बू गोविन्द जी आदि लोग

वही महेंद्र जी विजय फूफा जी विजय मां जी जोरावर जी संजय मां जी शिव आदि लोग एक अलग हे रूम में बैठे थे

सूर्य जो अपने रूम में किरण आवर जूलिया के साथ बीएड पे लेता आराम से उनसे बात कर रहा था कल रात की बात जब किरण ने सूर्य के सामने राखी तो जूलिया का चेहरा उतार गया इस हे लगा कही सूर्य भी किरण की तरह उसने दन्त न दे पैर सूर्य ने ऐसा कुछ भी नहीं कहा जैसा जूलिया ने अंदाजा लगाया था

सूर्य ........वैसे मैं जुली से सहमत हूँ स्वीटी पैर बात तुम्हारी भी जायज है
अगर जूलिया भविष्य के लिया अभी से म्हणत नहीं करेगी तो जो बलिदान सब ने ड्रैगन लोक के उज्जवल भविष्य की लिए किया है वो सभी निरर्थक साबित होंगे

किरण ...... वही तो मैं कह रही हूँ अब आप हे अपनी इस न समझ प्रेमिका को समझाओ

सूर्य ....... हाहाहा न समझ तो है ये पैर इतनी भी नासमझ नहीं जितनी तुम समझती हो मैं अपनी जुली को जनता हूँ वो बहुत सुलझी आवर समझदार है बस कभी कभी भावनाओ में बाह कर गलत कदम उठा लेती है

जूलिया ....... हुण्णनं आप लोग मेरी तारीफ कर रहे है या मुझे बेवकूफ कह रहे है

किरण ........ सम्भालो अपनी जूलिया को मैं निचे जा रही हूँ माँ के पास

किरण मुस्कुराते हुए जूलिया के गालो को खींच कर निचे चली जाती है अब रूम में सूर्य आवर जूलिया हे बचे थे

मौका देख जूलिया करवट ले सूर्य के सीने पे लेट जाती है

जूलिया ....... ऐसा नहीं है की मैं अपनी जिम्मेदारिया नहीं उठाना चाहती हूँ या फिर मैं अपनी जिमेदारियो से पीछा चूर्ण कर भागना चाहती हूँ सच में वह मेरा मन नहीं लगता आप सब से दूर रहना नहीं रहना चाहती हूँ मैं

सूर्य ........ मैं जनता हूँ जुली आवर तुम्हारे मन की भावनाओ को भी समानता हूँ पैर फ़िलहाल तुम्हे कुछ वक़्त वह बिताना होगा अपने दायित्व को समझना होगा ड्रैगन लोक का भविष्य तुम्हारे भीतर पल रहा है कल को उसका जनम होगा तब तुम हमारे बचे को कैसा भविष्य देना चाहती हो उसकी नजरो में उसके मन में क्या तुम अपनी ऐसी छवि बनाना चाहती हो जिसमे तुम अपनी भावनाओ के चलते अपने हे कर्त्तव्य अपनी जिमेदारियो से भगति रही हो

अचानक से सूर्य को अपने सीने पे कुछ गीलापन मह्सुश होता है तब उसने पता चलता है की जूलिया रो रही है

सूर्य जूलिया का चेहरा ऊपर उठा उसकी भीगी हुई आँखों को चुम लेता है आवर उसे संत करने की कोशिश करता है

सूर्य ....... अरे पागल तुम रो क्यों रही हो मैं तुम्हे दन्त थोड़े हे रहा हूँ अच्छा सुनो तुम यही चाहती हो न की तुम हमारे साथ रहो हम सब के बिच ऐसा हो सकता है पैर उसके लिया तुम्हे म्हणत करनी होगी आवर अपनी सभी जिम्मेदारिया उठानी होगी

जूलिया कन्फ्यूज्ड हो कर सूर्य को देखती है जैसे जानना चाहती हो की आखिर आप कहना क्या चाहते है

सूर्य ........ देखो मैं ज्यादा कुछ तो नहीं कर सकता हूँ पैर इतना जरूर कर सकता हूँ की हर रात तुम हम सबके साथ हमारे बिच वक़्त बिता सको पैर ......

जूलिया खुश होती हुए सूर्य को देखती है आवर सूर्य का आगे बोलने का इन्तजार करने लगती है सूर्य भी जूलिया की आँखों में झांक कर देखता है

जूलिया ........ पैर क्या आवर मुझे इसके लिया क्या कर न होगा

सूर्य ....... ज्यादा कुछ नहीं तुम्हे ड्रैगन लोक की सभी जिम्मेदारिया उठानी होगी जो भविष्य में तुम्हे उठानी होगी हे साथ हे साथ ज्यादा से ज्यादा समय ध्यान में लगाना होगा ताकि तुम्हारी ऊर्जा का स्तर भाड़ सके

जूलिया ....... मुझे मंजूर है आप जैसे कहेंगे मैं वैसा हे करुँगी

सूर्य ...... ठीक है तो फिर कल सुबह 4 बजे त्यार रहना तुम

जूलिया ...... तो क्या आप कल से हे सुरु करने वाले है

सूर्य ..... है क्यों कोई प्रॉब्लम है क्या तुम्हे

जूलिया ...... नहीं मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं आपका साथ चाहे जिस रूप में मिले मैं हमेशा त्यार हूँ

इतना बोल जूलिया सूर्य के होंठ चूसने लगती है जिसमे सूर्य भी जुली का पूरा साथ देता है कभी सूर्य जुली की जुबान चुस्त तो कभी जुली सूर्य की जुबान चुस्ती किस करते करते सूर्य का लैंड भी आ करने लगता है जिसका आभाष अपनी छूट के ऊपरी हिस्से होने लगता है जुली भी अपने पैरों को फैला सूर्य को कमर के इर्द गिर्द कर अपनी कमर को लगभग सूर्य की कमर पे रगड़ते हुए सूर्य के लैंड पे अपनी छूट को घुसने लगती है जल्दी हे सूर्य को अपनी लैंड पे हल्का गीलापन मह्सुश होता है आवर वप भी तेजी से जूलिया की छूट पे अपना लैंड घुसने लगा नतीजा ये हुआ की जल्दी हे जुली की छूट से सुनामी निकली आवर सूर्य के मुसल को भिगोने लगी

सूर्य के चेहरे पे एक कुटिल मुस्कान तैर गई वही जूलिया अपने चरम आवर सरम के कारन सूर्य के सीने में मुँह छुपा खुद को संत करने लगी

सूर्य ....... क्या बात है जुली तुम्हारी गरीबी कुछ ज्यादा हे भाड़ गई है मुझे लगा नहीं था की इतनी जल्दी तुम किनारे पे पहुंच जाओगी

अभी जूलिया कुछ बोलती उस से पहले हे सूर्य का फ़ोन बज उठा

सूर्य ने हाथ बढ़ा कर फ़ोन उठाया तो इसमें सोहेल का कॉल आ रहा था

सूर्य ....... Hello है सोहेल भाई

सोहेल ...... कहा है भाई मैंने तुम्हे निचे सब जगह दंड लिया है

सूर्य ...... भाई मैं तो अपने रूम में हूँ क्या हुआ कुछ काम था क्या

सोहेल ...... है भाई मैं आता हूँ ऊपर

सूर्य ...... ठीक है भाई आ जाओ

सूर्य कॉल कट कर देता है

जूलिया ...... आप लोग बात करो मैं फ्रेश हो कर निचे जा रही हम बाकियो के पास

सूर्य ...... ठीक है जुली बाकि बाटे बाद में करते है

जूलिया सूर्य को एक छोटा सा किश कर बीएड से उठ जाती है तभी उसकी नजर सूर्य के शार्ट पे पादरी है जो उसकी योनि राश से थोड़ा बहुत गया था

जूलिया ..... आप इस हे बदल लीजिये सोहेल भाई देखेंगे तो क्या सोचेंगे

सूर्य मुस्कुराते हुए जादू से अपने आवर जूलिया दोनों के कपडे चेंज कर देता है

जूलिया रूम से जा चुकी थी सूर्य अपने फ़ोन में कुछ करने लगता है तभी दूर पे दस्तक होती है

सूर्य ...... खुला है सोहेल अंदर आ जाओ

सोहेल अंदर आ कर खड़ा हो जाता है

सूर्य ...... क्या हुआ भाई थोड़े उदाश लग रहे हो कोई प्रॉब्लम है क्या

सोहेल ...... नहीं यार वो अभी अभी सलमा के अब्बू का कॉल आया था वो दुबई से आज सैम की फ्लाइट से आ रहे है हमारे निकाह के लिया हमें अब निकलना होगा ताकि टाइम स्व दिल्ली से पुणे की फ्लाइट ले सके

सूर्य ...... बात तो तुम्हारी ठीक है भाई पैर दिल्ली की फ्लाइट तो यहाँ से साम को 5 बजे की है अभी तो 01 37 पं हुआ है इतनी जल्दी क्या है

सोहेल ...... यार फिर तो काफी लेट हो जाना है घर पहुंचते पहुंचते हे

सूर्य ...... एक रास्ता है जिस से तुम लोग टाइम से पुणे पहुंच सकते हो

इस दौरान सूर्य अपने मोबाइल पे जयपुर के लिया आवर जयपुर से पुणे की फ्लाइट टाइम देख रहा था

सोहेल ...... मैं भी जनता हूँ भाई तुम जो कह रहे हो वो पैर सानिया आवर सोफिया को उनके कॉलेज हॉस्टल भी तो ड्राप करना है अगर जयपुर से फ्लाइट लेता हु. तो ये मुमकिन नहीं

सूर्य ...... उनकी तुम चिंता न कर यार एक दो दिन में हम सब दिल्ली जा रहे है तब वो हम सभी के साथ चली जाएँगी आवर अगर ज्यादा जरुरी है तो मई. कल सूर्यकांत सर के साथ की उनकी टिकट करवा दूंगा भाई

सोहेल ......अब अगर तुम दिल्ली जा रहे हो तो फिर मुझे कोई चिंता नहीं है उनकी ठीक है फिर मैं अम्मी अबू को त्यार होने का बोलता हूँ

सूर्य ..... ठीक है भाई

सोहेल निचे जा कर अपने एमी अब्बू को सलमा आवर उसकी अम्मी को त्यार होने का बोल देता है

सूर्य निचे जा कर अपनी माँ आवर माँ सा को सोहेल आवर उनकी अम्मी अबू की जाने की बात बताता है

दादी जी ..... पैर वो सब लोग तो कल जाने वाले थे न

सूर्य ...... माँ सा वो सलमा के पापा दुबई से आ रहे है न काफी टाइम बाद कुछ दिन बाद सलमा की सोहेल की सदी है न अचानक से उनके आने की खबर के चलते ये लोग आज हे जा रहे है वैसे सानिया आवर सोफिया हमारे साथ हे दिल्ली जाने वाली है वो इनके साथ नहीं जा रही है

माँ सा ...... ठीक है कोई बात नहीं तुम्हारे पापा को बोल कर उनके गिफ्ट त्यार करवा दो चल रहने दे मई. हे देखती हूँ

दादी जी रूम से निकली आवर सलमा उसकी अम्मी सोहेल फातिमा जी सोहेल के पापा के लिया उपहार निकल देती है

कुछ हे देर में सब लोग जाने को त्यार हो गए थे वीरभान जी भी अब पंजाब लौटना चाहते थे कुछ देर बाद दादा जी ने उन्हें जाने की इजाजत देती वीरभान जी ने भी उनसे वडा लिया की वो जल्दी हे उन्हें यहाँ आये

दादा जी ने भी खुश क ख़ुशी उनका निवेदन स्वीकार कर लिया

वीरभान जी का पूरा परिवार भी त्यार हो गया था पैर राधिका ने आंटी जी से बोल कर जसलीन आवर सिमरन को कुछ दिन के लिया रुका लिया

सूर्य ने बड़ी वाली कार निकल ली थे सोहेल उसके अम्मी अबू सलमा उसकी अम्मी आवर सानिया सभी 6 लोग कार में बेथ गए ( सानिया केवल उन्हें एयरपोर्ट हे छोड़ने जा रही थी )

दुअरी कार वयोम ने निकल ली थी जिस से वीरभान जी का पूरा परिवार एयरपोर्ट जाने वाला था

वयोम आवर सूर्य दोनों एयरपोर्ट के लिया निकल गए करीब 45 मिनट्स बाद सब एयरपोर्ट पे थे अभी जयपुर की फ्लाइट का उड़न भरने में आधा घंटा बाकि था

सूर्य ने वयोम की हेल्प से सभी की जयपुर की आवर फिर आगे की टिकट पहले हे बुक कर दी थी

कुछ देर बात चित करने के बाद फ्लाइट का टाइम हो चूका था तो सूर्य ने सभी को उनकी टिकट दी सबने मन किया पैर सूर्य की जिद के आगे आखिर सब मन

अब वयोम सूर्य आवर सानिया हे बचे थे

सानिया ....... सूर्य हम कुछ देर बाद चले मुझे ये जगह देखनी है प्लेसेस

सूर्य ....... ठीक है सानिया वयोम भाई आप चलिए हम लोग बाद में आते है

वयोम मुस्कुरा कर दोनों को bye बोल वह से निकल गया

सूर्य ....... सानिया अब बताओ कहा चलना पसंद करोगी

सानिया ....... जहा हम दोनों के अल्वा कोई दूसरा नहीं हो

सूर्य ....... तुम्हारे इरादे नेक नहीं लग रहे मुझे

सानिया ....... तुम जो चाहे संजो अब मैं पीछे नहीं हटने वाली ऐसा मौका बार बार नहीं मिलता

सानिया ने अपने इरादे जाहिर कर दिए थे सूर्य का भी सुबह से हल कुछ ज्यादा ठीक नहीं था

( सूर्य ....... चलो आज इसकी इच्छा भी पूरी कर देता हूँ बहुत इन्तजार करवा दिया इसे एक न एक दिन तो सब करना हे है )

सूर्य ...... सोच लो एक बार फिर से अभी भी मौका तुम्हारे हाथ में तुम जानती हो न की मैं तुम्हारा हाथ नहीं थम सकता हमेशा के लिया आवर न तुम्हारी जिंदगी ख़राब करना चाहता हूँ इस लिया सोच समाज कर फैसला करो

सानिया ...... मैं जानती हूँ हम हमेशा साथ नहीं रह सकते है पैर हम हमेशा अच्छे फ्रेंड्स तो रह हे सकते है आवर इतना तो फ्रेंड्स विथ बेनिफिट होना हे चाइये बहुत लम्बा इन्तजार मैं पहले हे कर चुकी हूँ आवर अभी अम्मी बता रही थी की स्टडी के बाद मेरा निकल होना तय है तो फिर अभी जितना टाइम तुम्हारे साथ बिता सकती हूँ उतना काम है

सूर्य ...... ठीक है फिर जैसी तुम्हारी मर्ज़ी अब तुमने अपनी फड़वाने की सोच हे ली है तो मैं भला क्यों पीछे हटूंगा

इतना बोल सूर्य सानिया की कमर में हाथ दाल उसे अपनी गौड़ में बैठा लेता है

कार अब तक जैसलमेर के बहार निकल चुकी थी

सूर्य कार को सूर्यगढ़ की आवर ले जाने की बजाय सिटी 1 की आवर गुमा दिया

सानिया तो सूर्य की गौड़ में बैठे बैठे अपने अरमानो को पूरा होती खुली आँखों से देख रही थी

सानिया सूर्य के चेहरे को थम उसके पुरे चेहरे को चूमने लगती है

इसी तरह चूमने चाटने में न जाने कब कार सिटी 1 को पार कर गीता ठाकुर के फार्महाउसे के सामने आ रुकी थी

सूर्य ..... सानिया हम लोग पहुंच गए है

सूर्य की बात सुन सानिया होश की दुनिया में आई आवर चारो तरफ देखा तो कार एक बड़े से फार्महाउस के गेट पे कड़ी थी

सूर्य ने गेट खोल कार को अंदर किया आवर सानिया को गौड़ में उठा कर कर फार्महाउसे के अंदर चल दिया

यहाँ उन्हें देखने वाला कोई भी नहीं था सो सूर्य बिंदास सानिया को लिया फार्महाउसे के अंदर आ गया आवर सानिया को लिया हुए हे हॉल में पड़े सोफे पे बेथ गया

सानिया ........ ये किसका फार्महाउसे है यहाँ कोई आवर तो नहीं आएगा न

सूर्य ......... ये अजय का फार्महाउसे है पैर यहाँ कोई नहीं है न कोई यहाँ आने वाला है इस लिया बे- फ़िक्र रहो तुम वैसे तुम दोनों की लेस्बियन लाइफ कैसी चल रही है

सानिया ......... हहहहए तो तुम्हे ये सब भी पता है

वैसे ये सब तुम्हारी वजह से हे हुआ है अगर तुम पहले हे मन जाते तो मैं आवर माया इतना आगे नहीं बढ़ते

सूर्य ....... अरे यार इसमें मेरी क्या गलती है वैसे ये अच्छा भी है तुम दोनों एक दूसरे की जरुरत अच्छे से पूरी कर लेती हो जिस से तुम लोगो को ज्यादा प्रॉब्लम भी नहीं होती है साथ हे किसी गलत इंसान हाथो गलत फायदा उठाये जाने से भी बच गयी

सानिया ....... अब भी तुम बाटे हे करते रहोगे क्या

सूर्य ....... तुम स्टार्ट तो करो मेरी जान आज तुम्हारी शील भांग जरूर होगी इस फार्महाउसे से तभी जाओगी जब तुम लड़की से औरत बन जाओगी

सानिया सूर्य के होंटो पे वीलडली किश करने लगती है साथ हे सूर्य के शर्ट के बटन खोल उसे सीने पे अपने कोमल कोमल हाथ फिरने लगती है

सूर्य भी अपने हाथ सानिया के इलास्टिक सलवार में दाल गौड़ में बैठा ये सानिया के 34 की मस्त मटकी जैसे गुदाज गांड की फंखो को अपने हाथो में ले सख्ती से मसलने लगता है

सानिया तो जैसे अभी से आसमान में उड़ने लगती है

उसे अपने शरीर पे मरदाना हाथ की जो चुहान मह्सुश हो रही थी वो माया के उसके नंगे शरीर पे मह्सुश होने वाले टच सड़ बिलकुल अलग थी

जैसे सूर्य का टच उसके शरीर में एक अलग हे आग भर रहा हो उसके शरीर में एक अजीब सा उन्माद उठने लगा जिसका प्रयोग वो सूर्य के होंटो पे कर रही थी

आज सानिया को एक मर्द आवर लड़की के टच का डिफरेंस पता चल रहा था

सानिया के पुरे शरीर में जुरजूरी सी उठ रही थी

सानिया ने किश करते हुए सूर्य के शर्ट के पुरे बटन खोल दिया अब सूर्य का ऊपरी हईशा सामने से पूरी तरह नंगा था

सानिया सूर्य के होंटो को चूमना चढ़ सूर्य की गर्दन कण को चूमते चूमते हुए सूर्य के नंगे छोड़े सीने पे अपने होंटो से कलाकारी दिखने लगी माया के साथ लेस्बियन सेक्स का पूरा ज्ञान वो सूर्य पे आजमा रही थी

सानिया कभी सूर्य के सीने को अपनी गरम जुबान से चाट थी तो कभी वो सूर्य के दोनों निप्पल्स को होंटो में भर कर चुस्ती

सूर्य ...... उम्मम्मम्म अह्हह्ह्ह्ह सानिया तुम वाकई बहुत गरम हो यार

सानिया. ...... उम्म्म्म आज तुम्हे हे साडी गर्मी निकलने है मेरी जान अपने इस डंडे से

बोलते हुए सानिया सूर्य की पेण्ट के ऊपर से सूर्य का पूरी तरह आकद चुके मुसल लैंड को थम लेती है

सूर्य ....... इसके लिया जिसे तुमने अपने हाथो में थम रखा उसने त्यार करो ताकि वो अच्छे से तुम्हारी मुनिया की गर्मी संत कर ठंडा कर सके

सूर्य खुद से अपनी पेण्ट निचे करता है सानिया की आँखों में चमक आ जाती है जब सूर्य की ब्लैक अंडरवियर में सूर्य के नाग को फुल हार्ड हो कर फुफकारते हुए देखा

सूर्य ने भी मोके की नजाकत को समझते हुए सानिया की सलवार सूट उतर देता है

अब सानिया हलके काळा रंग की ब्रा पेंटी में थी वही सूर्य अब पूरी तरह नंगा था

सानिया सूर्य के सीने पे हल्का जोर दाल सूर्य कक सोफे पे लिटा देती है

सूर्य ....... अब इस हे अच्छे से प्यार करो ताकि तुम्हारी छूट को बिना ज्यादा तकलीफ के खोल पाए

सानिया ....... ये ये पहले स काफी बड़ा है क्या मैं इसे अंदर ले पाऊँगी सूर्य मेरी छूट बहुत छोटी है

सूर्य सानिया का हाथ अपने लैंड के रख देता है

सानिया कांपते हुई उंगलियों सूर्य के लैंड को पकड़ती है

सानिया ....... अह्ह्ह्हह्हह ये बहुत गरम आवर हार्ड है सूर्य

सूर्य के लैंड को टच करने मात्रा से सानिया की छूट में चींटिया रेंगने जैसे मीठी मीठी खुजली सी होने लगी थी

सानिया सूर्य के सुपडे पे उभरी परइ कम की बून्द को ललचाई नजरो से देख रही थी

भले हे सानिया ने अभी तक किसी मर्द स शारीरिक सम्बंद नहीं बनाया था पैर मेडिकल स्टूडेंट आवर ऊपर से माया जैसी सेक्स पार्टनर्स के होने से वो सेक्स ज्ञान में पारंगत हो गई थी आज वो उस ज्ञान को सूर्य पे प्रक्टिकली उसे करने वाली थी

सानिया डेरी डेरी सूर्य के लैंड पे जुखति है आवर अपनी जुबान से सूर्य के लैंड पे लगे परइ कम को लीक करती है

बड़ी हे तीखी पैर मीठा मीठा स्वाद सानिया के मुँह में गुलने लगा

सूर्य ...... कैसे लगा टेस्ट

सानिया ....... उम्म्म्म टेस्टो है मीठा मीठा थोड़ा त्रिखा सा आवर खुसबी भी बहुत अच्छी है

सानिया इस बार अपने मुँह को खोलते हुए सूर्य के लाल टमाटर जैसे सुपडे को लीक करते हुए अपने मुँह में भर लेती है आवर अपनी जुबान स चाटने लगती है

सूर्य अपना हाथ बढ़ा सानिया के सर पे रख उसके खुले रेशमी बालो को सहलाने लगता है

सानिया मंत्रमुग्द हो सीडट से सूर्य के लैंड के 1/ 3 हिस्से को चूसने तरलीन हो चुकी थी

करीब 4 से 5 मिनट्स बाद सानिया ने लम्बी लम्बी सांसे भरते हुए सूर्य के लैंड को मुँह से बहार निकला आवर अपनी काळा रंग की ब्रा पेंटी अपने अनमोल खजाने से हटा देती है

सूर्य सानिया के गोवन से भरपूर अधखिली जवानी को देख रहा था सानिया फिर से सूर्य की गौड़ में बेथ- थे हुए अपना 34 का बूब्स जिसके निप्पल्स माया के चूसने जाने से थोड़े ज्यादा हे मोठे लग रहे थे ( कुंवारी लड़की के मुकाबले )

उन्हें सूर्य के मुँह से लगा देती है सूर्य भी बिना कुछ कहे अपना मुँह खोल सानिया की निप्पल्स की मुँह में भर लेता है

सानिया ....... उम्म्म.. अह्ह्ह्हह्हह... सूर्य खा जाओ इन्हे उम्म्म्म.... इस पल के लिया बहुत तदपि हूँ बहुत बार अह्हह्ह्ह्ह थोड़ा डेरी दर्द होता है मेरी जान

सूर्य बिना सानिया की किसी बात का जबाब दिए सानिया के बूब्स को चूसने आवर काटने में लगा हुआ था वही दूसरे बूब्स को अपने हाथ से आते की तरह गुथने में लगा हुआ था

सानिया को दर्द आवर मज़ा एक साथ मह्सुश हो रहा था

वही सूर्य का कामदण्ड बार बार गौड़ में बैठी सानिया की मुनिया पे चुम्बन कर रहा था

सानिया अपना हाथ अच्छे बढ़ा सूर्य के लैंड को पकड़ लेती है फिर डेरी डेरी अपनी छूट के हलके मोठे खुले होंटो पे रगड़ने लगती है

जब जब सूर्य का गरम सूपड़ा सानिया के छूट के डेन पे रगड़ खता सानिया के पुरे शरीर में जनजाणत होती

अब तक सूर्य एक चुकी को चूस कर लाल कर चूका था अब वो दूसरी चुकी पे टूट पड़ा था

सानिया की हालत ख़राब हो चुकी थी तप तप कर सानिया की छूट से ोंश की बुँदे तप जाती हुई सूर्य के लैंड को भिगो रही थी

सानिया अब किसी भी पल अपनी छूट में ज्ञान रही नाड़ी का बांड गौड़ सकती थी

सूर्य लैंड के अगले 2,3 पत्थर काफी थे सानिया की सीमा को गौड़ एक अलग दुनिया में पहुंचने के लिया सानिया अपने चरम सुख में इतना खो गई थी की सूर्य होंटो को चूमते चूसते उस से निकले हलके खून तक का पता नहीं चला

कुछ पल सानिया को संत होने का इन्तजार कर सूर्य ने उसे सोफे पे अच्छे से लिटाया आवर सानिया की दो दिन पहले क्लीन की छूट से सानिया के कमरष को चाटने लगा हलके कहते लिसलिसे कमरष को सूर्य ने बड़े चाव से चाट चाट कर साफ कर दिया

सानिया की छूट के होंठ हलके फुल्ली हुए थे सूर्य ने जब अपनी ऊँगली डाली तो वो आराम से छूट में प्रवेश कर गई सानिया आवर माया के लेस्बियन सेक्स के टाइम माया ने अपनी ऊँगली कफ्फू बार अंदर की थी जिस से हलकी हलकी छूट खुल चुकी थी

सूर्य ने चारो तरफ नजर दौड़ाई सायद किसी लोशन्स या कोई ऐसी चीज़ की तलाश में जिस से सानिया की छूट आवर उसके लैंड को उप युक्त चिकनाई मिल सके

सानिया ...... अब आवर न तड़पाओ सूर्य मेरी छूट में बहुत खुजली हो रही है

सूर्य ........ मेरी जान यहाँ कोई क्रीम या लोशन्स नहीं है तुम्हे तोडा दर्द बर्दाश्त करना होगा

सानिया ......... मुझे पता है अब जल्दी करो मेरी छूट अंदर से जल रही है

सूर्य ने अच्छे से अपने लैंड को अपने थूक से चूमना किया आवर सानिया की गरम भाटी जैसी ताप्ती छूट पे लैंड को घिसने लगा

हर रगड़ के साथ सानिया मचल रही थी इस वक़्त सानिया अलग हे दुनिया में थी वो बार बार अपनी कमर उठा सूर्य के मुसल को किसी भी कीमत में बस अंदर लेना चाहती थी आज उसे बस अपनी छूट खुलवाने के आगे जैसे कुछ नजर हे नहीं आ रहा था

सानिया ....... आआह्ह्ह्हह सूर्य अब छोड़ो मुझे मैं पागल हो रही हु.

सानिया के होंठ बुरी तरह से थरथरा रहे थे जैसे किसी ने कड़ाके की सर्दी में नंगा उसे बर्फ पे लिटाया हो

सूर्य ने एक हाथ से सानिया के कंधे को पकड़ा आवर दूसरे हाथ से अपने मुसल को सानिया के छूट पे लगाया आवर थोड़ा जोर से झटका सिया ुशी वक़्त चुदाई को उतावली सानिया ने जोर से अपनी कमर ऊपर को उचका दी

नतीजन सानिया की एक जोरदार चीख पुरे फार्महाउस में गूंज उठी

सानिया ......... Ahhhhhhhhhh अम्म्मम्मि मीटीरी चुउत्त्त अह्ह्ह्हह सूर्य प्लेसेस मेरी छूट फैट गई अह्ह्ह्हह प्लेसेस बहार निकालो मुझे नहीं छुड़वाना

सूर्य थोड़ा निचे जुखता है ताकि वो सानिया के बूब्स चूस सके ताकि सानिया को नार्मल किया जा सके पैर यहाँ सूर्य का लैंड 1 इंच के करीब आवर गजरे से सानिया की छूट को खोल देता

एक चुटी चुटी चीख फिर से निकलती है

सूर्य ...... बस बस मेरी जान जो होना था हो गया अब आवर तकलीफ नहीं होने दूंगा

सानिया की आँखों से be-thasha आंसू बाह रहे थे ज उसे सूर्य ने प्यार से चाट लिया आवर सानिया की चूचियों को चूसने लगा जिस से सानिया का ठंडा पद चूका शरीर फिर से गरम होने लगा

सूर्य को अपने लैंड पे सानिया की छूट से निकला गरम खून मह्सुश हो रहा था सूर्य ने यहाँ थोड़ा अपनी सकती का प्रयोग किया आवर सानिया की छूट के दर्द को काम करने के साथ साथ सानिया की छूट में उप युक्त चिकनाई की

3,4 मिनट्स चूचिया चूसने मसलने पैर सानिया थोड़ी सामान्य हो गयी आवर फिर से उसके शरीर में उत्तेजना भढने लगी

सूर्य लैंड पे सानिया की छूट की कसावट हलकी काम हुई सूर्य एक एक इंच लैंड अंदर बहार कर सानिया को चरम की आवर ले जाने की कोशिश करने लगा

अभी भी सूर्य का करीब 4 इंच लैंड सानिया की छूट स बहार था

सूर्य डेरी डेरी सानिया को किश करते हुए चुदाई में लगा हुआ था जब उसे लगा की अब सानिया हलके तेज देखे बर्दाश्त कर सकती है तो सूर्य ने थोड़ी स्पीड बधाई

सानिया ...... अह्ह्ह्हह उम्म्म्म अब अच्छा लग रहा है सूर्य मुझे तो लगा आज मैं जिन्दा नहीं रहूंगी तुम्हारे लैंड के आगे

सूर्य ....... उम्.. अह्ह्ह्हह तुम्हारी छूट बहुत टाइट है सानिया ऊपर से पर्याप्त चिकनाई भी नहीं थी वैसे चुदाई से कोई मर्या नहीं ये तो तुम भी जानती हो इतना तो पता होगा हे तुम्हे

सानिया ....... अह्ह्ह्हह थोड़ा आवर तेज छोड़ो सूर्य उम्म्म्म उफ्फ्फ्फ़ मेरी छूट तो बुरी तरह फ़ैल चुकी है

सानिया ने अपने हाथ से अपनी छूट को चूहा तो उसे आभाष हुआ की सूर्य का लैंड बांस के खूंटे की तरह सानिया की छूट में आगे पीछे हो रहा था

सानिया ........ अह्ह्ह्हह अम्मम्मि मुझे ऐसा मज़ा पहले कभी नहीं आया ...अह्हह्ह्ह्ह सूर्य में झड़ने वाली हूँ आवर जोर से छोड़ो फाड् डालो मेरी छूट अह्ह्ह्हह छोड़ चढ़ के बोशदा बना दो अह्ह्ह्हह उफ्फफ्फ्फ़ मैं गाएआईई मेरी जाहां... अह्हह्ह्ह्हहब अम्मी बचा ले मुझे

जैसे हे सानिया की छूट ने गरम पानी छोड़ा थी सूर्य न्र पूरी ताकत से बचे हुए लैंड को एक हे झटके में सानिया की छूट में ढक्कन से फिट कर दिया

सानिया को तो समझ हे नहीं आ रहा था की वो रोये या हांसे जहा उसे अपनी पहली चुदाई का पहला चरमसुख का मज़ा आ रहा था वही उस पल सूर्य के झटके ने उसे सवरग से जहनुम के सर सब करवा दिए अगले हे पल

सानिया ...... अह्ह्ह्हह अब आवर भी कुछ बाकि है तो दाल दो जिन्दा मत जाने देना मुझे कहा फर्श गई लैंड के चाकर में अह्ह्ह्हह अम्मी रुक जाओ थोड़ी देर

सूर्य ....... बबस मेरी बिलकुल तुम्हारी छूट ने अब तो पूरा मुसल ले लिया अपने अंदर अब बस मज़े ले मेरी जान फिर कभी तुम्हे इस दर्द से गुजरना नहीं होगा

सानिया को अभी भी लग रहा था जैसे किसी ने उसकी छूट में गरम लोहे का मुसल दाल दिया हो

5 मिनट्स बाद सूर्य ने थोड़ा थोड़ा अंदर बहार करते हुए फिर से चुदाई सूरी की ान सानिया को भी इसमें थोड़ा थोड़ा मज़ा आने लगा आवर उसने डेरी डेरी अपनी कमर ऊपर उठा सूर्य का चुदाई में साथ देने लगी

अगली बार झड़ने के बाद सूर्य ने उसे सोफे के शेयर सानिया को जुखाते हुए पीछे स्व 3 झटको में दाल सानिया की छूट जो अब हलकी हलकी सूज चुकी थी पीछे चिपकते हुए पुरे लैंड को अंदर बहार कर तेजी से छोड़ने लगा

पुरे हॉल में दोनों की चुदाई की कामसख सिसकारियों के साथ थाआप थाप की पूछ पुच्छ की आवाजे गूंज रही थी

इसी तरह लगातार 20 मिनट्स छोड़ने के बाद सानिया की जब पूरी टंकी खली हो चुकी थी उसकी टंगे जबाब देने लगी तक सूर्य ने भी अपना वीर्य सानिया की मटकी में भरना सुरु कर दिया अपनी छूट में गरम लावे को मह्सुश कर सानिया न चाहते हुए भी फिर स्व झाड़ गई

जैसे सूर्य ने अपना लैंड बहार निकला एक पूउक की आवाज के साथ ढेर सारा मिला जुला वीर्य सोफे पे आ गिरा सानिया की छूट आवर सोफे के बिच बार बार लार सी टपक रही थी

सूर्य ....... अब कैसा लग रहा सानिया अब तो तुम्हारी इच्छा पूरी हो गई मुझसे विर्जिनिटी तुड़वा कर अब तुम लड़की से औरत बन चुकी हो

सानिया गम कर सोफे पे बेथ जाती है तभी छूट में दर्द के लहार ी उठी जो ठीक स बैठे से पहले हे सानिया को अपनी गांड उठाने पे मजबूर कर दिया .

सानिया. ...... इस्स्स्सस्स अह्ह्ह्हह्हह मेरी छूट अह्हह्ह्ह्ह मुझे नहीं पता था औरत बनने की इतनी बड़ी कीमत चुकानी होगी उफ्फ्फफ्फ्फ़ दर्द से छूट पूरी सूज गई है मेरी अब सबको पता चल जायेगा उफ्फफ्फ्फ़

सूर्य ....... क्या कहती हो एक राउंड आवर हो जाये

सानिया ....... अगर तुम्हारी यही इच्छा है तो मैं त्यार हूँ जहा इतना दर्द सहा है वह थोड़ा आवर सही

सूर्य ...... नहीं उसकी जरुरत नहीं है तुमने है कह दिया उतना हे काफी है

सूर्य अपनी जेब से 2 टेबलेट सानिया को देता है आवर किचन से पानी का गिलाश भर के उसे देता है

सानिया बिना कुछ पूछे टेबलेट ले लेती है उसे इतना तो पता था की ये दोनों टेबलेट किस लिया है पैर उसे ये पता नहीं था की वो केवल उन जैसी दिखती हे नहीं बल्कि उन दर्द आवर गरब नीरोदक गोली से 100 ×ज्यादा असरदार है

सूर्य ....... सानिया देखो अब तुम्हे रियल सेक्स का मज़ा मिल चूका है तो इन सबके चलते पदक पे बिलकुल भी फरक नहीं पड़ना चाइये

सानिया. ...... मैं जानती हूँ पैर तुम भी ये बात जानते हो न की अब मुझे पहले से ज्यादा तुम्हारे साथ की जरुरत होगी

सूर्य ...... मुझे पता है पैर तुम्हे खुद को कण्ट्रोल करना होगा बाकि मैं टाइम टाइम पे तुम्हे संत करता रहूँगा पैर अगर इस वजह से तुम्हारी स्टडी पे रति भर भी फरक आया तो मैं कोई हेल्प नहीं करूँगा अब जाओ आवर खुद को साफ कर लो हम निकलते है यहाँ आये 1 हर स्व ऊपर हो गया

सानिया डरते डरते कड़ी होती है पैर जब उसे दर्द का आभाष नहीं हुआ तो उसने अपनी छूट को छू कर देखा वो अभी भी बुरी तरह से सूजी हुए थी पैर दर्द का जैसे नमो नीसाण तक न हो

सूर्य ...... अब जाओ फटाफट

सानिया ....... पैर ये कैसे हुआ

सूर्य ...... गोलिया हाई पावर थी यार अब जाओ

सानिया अपने कपडे ले बाथरूम में जाती है आवर 5,6 मिनट्स में एक डैम त्यार हो कर बहार आती है

सानिया के चेहरे की चमक भाड़ चुकी थी ख़ुशी के कारन

सूर्य फार्महाउस को बंद कर सानिया को कार में बैठा वह से निकल जाता है

सानिया को रह रह कर अपनी छूट में मीठी मीठी खारिश सी हो रही थी

पैर उसने सब इग्नोर कर बस एक तक सूर्य को देखती रही

सूर्य . .... अब ऐसे क्या देख रही हो कुछ लगा है क्या मेरे चेहरे पैर

सानिया ....... नहीं कुछ नहीं लगा बस ऐसे हे देख रही हूँ

सूर्य ...... वैसे इस सब के बारे में माया आवर सुनिधि को सोफिया को पता न चले

सानिया. ...... हहहहए माया आवर सुनिधि भी तुम्हारे पीछे है पैर सानिया की चाहत कुछ अलग है जो मैं समझ नहीं प् रही हूँ

सूर्य ....... वो खुद हे बता देगी आवर माया आवर सुनिधि का भी पता है खेर उनका भी टाइम आएगा

आधे घंटे बाद सूर्य की कार हवेली में थी

दादा जी नाना जी सूर्यकांत अंकल गोविन्द जी लोने में बैठे टिया कॉफ़ी पे रहे थे

सूर्य भी उनके पास जा कर बेथ गया सानिया एक छोटा सा बेग लिया अंदर चली गई

किरण उसे देखते हे समझ गई की इसने अपनी छूट सूर्य से कुलवाली है

पैर किरण ने कुछ कहा नहीं इस बारे में

कुछ देर बात कर वो सूर्य की कॉफ़ी लिया बहार चली गई

जहा दादा जी सूर्य से बात कर रहे थे

दादा जी ....... बीटा अब सदी भी हो गई है आवर तुम्हारे अंकल भी बोल रहे है की अब तुम्हे ड्यूटी पे लौटना होगा

सूर्य ....... है बाउजी अंकल ठीक कह रहे है वैसे भी दीपावली आने वाली है आवर नया घर भी त्यार हो चूका है तो दीपावली से पहले ग्रहपरवेश भी कर लेते है इस बार की दीपावली नए घर में पुरे परिवार के साथ मानते है क्यों नाना जी आप क्या कहते है

नाना जी ....... अरे बीटा अब तुमने सब सोच हे लिया है तो फिर ठीक है वैसे भी कल विजय आवर मेर्री दोनों बहार जा रहे है दीपावली तक वो भी लौट आएंगे तो सब एक साथ त्यौहार मानते है

किरण ........ ये लीजिये आपकी कॉफ़ी

सूर्य मुस्कुरा कर किरण से कॉफ़ी लेता है

तभी उसका मुँह खुला का खुला रहा जाता है अपने मंद में किरण की बात सुन कर

( किरण ........ तो आपने सानिया का उद्घाटन कर हे दिया यहाँ आपकी दो बिबिया अभी भी आपके इन्तजार में अपना कौमार्य संभाले हुए है आवर आप बहार किसी आवर के साथ लगे पड़े हो )

सूर्य जनता था की किरण उसे छेद रही है पैर सूर्य का सर सरम से झुख गया

किरण जाते जाते मुस्कुरा कर सूर्य के कंधे पे टपकी मर गई जिस इ सूर्य को रहत मिली

वही चारो सूर्य को देख हाशे बिना रह नहीं पाए

सूर्यकांत जी ........ शेर बहार कितना भी दहाड़ ले हुकूमत कर ले पैर मंद में गुस्ते हे शेरनी के सामने चूहा बन हे जाता है

उनकी बात सुन चारो के हंशी का ठहाका गूंज उठा वही सूर्य भी मंद मंद मुस्कुराने लगा

गोविन्द जी ...... वैसे बीटा तुमने मधु के साथ मिल कर कोई बिज़नेस प्रपोजल डिस्क्सेस किया था उसके बारे में क्या सोचा है तुमने

सूर्य ...... अभी तो कुछ नहीं सोचा है अंकल अब थोड़ा फ्री हो कर सोचूंगा इस बारे में वैसे आप कब इंडिया सिफत हो रहे है

गोविंद जी ........ नेक्स्ट मंथ बीटा जी कुछ मीटिंग जो पहले से तय है उसे फिनिश करने के बाद हे इंडिया सिफत होना ठीक रहेगा

सूर्य. ....... वैसे आपने क्या सोचा है अंकल रिटायरमेंट के बाद का

सूर्यकांत जी ........ बीटा रिटायरमेंट के बाद मैं अपने पोता पोती के साथ वक़्त बिताऊंगा उनके साथ फिर से अपना बचपन जीऊंगा उस से बेहतर क्या हो सकता मेरे लिया रिटायरमेंट प्लान क्यों बौ जी आप क्या कहते है इस बारे में

नाना जी ....... भाई हमारा भी हल कुछ ऐसा हे है 8 ,10 नाती पोते हो आवर दिन भर हम भी उनके साथ बचे बने रहे

गोविन्द जी ...... क्या कहा 8,10 नाती पोते आपको नहीं लगता की ये कुछ ज्यादा बचे नहीं है


सूर्यकांत जी ........ है बौ जी बचे ज्यादा से ज्यादा 2 हे बहुत है

( दादा जी ....... अगर हर बहु से 2 भी हुए तो 2 दर्जन से भी ज्यादा हो जायेंगे )

दादा जी ...... अरे बीटा मैं तो मज़ाक कर रहा था हाहाहा

हस्ते हुए नाना जी को देखते है जो उनकी तरफ हे देख रहे थे

थोड़ा आवर वक़्त दादा जी नाना जी सूर्यकांत जी आवर गोविन्द जी के साथ बिता कर सूर्य अपने रूम की तरफ भाड़ जाता है ..............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ..........

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ................
 
अपडेट. 295

नाना जी ....... भाई हमारा भी हल कुछ ऐसा हे है 8 ,10 नाती पोते हो आवर दिन भर हम भी उनके साथ बचे बने रहे

गोविन्द जी ...... क्या कहा 8,10 नाती पोते आपको नहीं लगता की ये कुछ ज्यादा बचे नहीं है

सूर्यकांत जी ........ है बौ जी बचे ज्यादा से ज्यादा 2 हे बहुत है

( दादा जी ....... अगर हर बहु से 2 भी हुए तो 2 दर्जन से भी ज्यादा हो जायेंगे )

दादा जी ...... अरे बीटा मैं तो मज़ाक कर रहा था हाहाहा

हस्ते हुए नाना जी को देखते है जो उनकी तरफ हे देख रहे थे

थोड़ा आवर वक़्त दादा जी नाना जी सूर्यकांत जी आवर गोविन्द जी के साथ बिता कर सूर्य अपने रूम की तरफ भाड़ जाता है ..............

अब आगे ...........

रात में सबके साथ खाना खा कर सूर्य शालिनी जी के रूम में जाता है

शालिनी जी जो अभी अभी शावर ले कर अपने रूम में आई थी वो सूर्य को वह देख थोड़ा चौंक जाती है

शालिनी जी ...... क्या हुआ कुछ काम था क्या सूर्य

सूर्य ..... नहीं माँ बस आपके साथ कुछ दिन से ठीक से टाइम स्पेंड नहीं किया था न तो सोचा आज आपके साथ थोड़ा वक़्त बिता लूँ

शालिनी जी अपने रूम का दूर लॉक कर अपनी अलमारी से निघ्त्य निकलती आवर सूर्य के सामने हे पहले वाली निघ्त्य निकल देती है

सूर्य बीएड पे बैठे बैठे शालिनी जी के खूबसूरत सौन्दर्य से परिपूर्ण गदराये हुए यौवन को अपनी आँखों में कैद करने लगा

शालिनी जी बड़ी हे खूबसूरत ऐडा से दूसरी वाली निघ्त्य पहन लेती है

ये जो दूसरी निघ्त्य थी वो पहले वाली से कही ज्यादा छोटी आवर पारदर्शी थी जिस से शालिनी जी के खूबसूरत कमुख बदन का हर एक हईशा नुमाया हो रहा था

शालिनी जी की इस हरकत से सूर्य के शार्ट में पहले से हे नागराज नींद से पूरी तरह से जग उठा था

रही सही कसार शालिनी जी ने सूर्य की तरफ पीठ करके जुख कर पूरी कर दी थी

शालिनी जी की वाइट पेंटी जो मुश्किल से उनके गुप्तांग को छुपा प् रही थी वो उनके निचे जखने पैर उनके राश गागर छलकती उनकी योनि की बिच आ फाशी

अनजाने हे सूर्य का हाथ कब उसके शार्ट के ऊपर जहा एक बड़ा सा तम्बू बना हुआ था उस स्थान को पकड़ कर सहलाने लगा

शालिनी जी ने जब सूर्य के हाथ को देखा तो शालिनी के होंटो पे जो रहस्मयी मुस्कान थी उसे केवल वही समझ सकती थी

कुछ देर बाद शालिनी जी सूर्य की बगल में आ कर लेट जाती है

सूर्य अभी भी उन्हें देखे जा रहा था जैसे चकोर अपने चाँद को निहारती है पैर यहाँ सब उल्टा था यहाँ चाँद अपनी चकोर को निहार रहा था मंत्र मुग्ध हो कर

शालिनी जी ....... ऐसे क्या देख रहे हो जैसे की मुझे पहली बार देखा हो

सूर्य ......... आप बहुत खूबसूरत लग रही है

शालिनी जी ...... हहहहए खूबसूरत या हॉट तारीफ करनी है तो दिल खोल कर कर न

सूर्य थोड़ा झेपते हुए मुस्कुरा उठा जैसे शालिनी जी ने उसके मन का कह दिया हो

सूर्य ....... अब माँ को तो हॉट बोल नहीं सकता न

शालिनी जी ...... सो ( 100 ) चूहे खा कर बिली थिरत पे चली हेहेहे

सूर्य शालिनी जी की बात सुन हस्ते हुए उनका हाथ पकड़ अपनी आवर खींच लेता है

शालिनी को जैसे इसी पल का इन्तजार था शालिनी खुद सूर्य के सीने से अम्बरबैल जैसे लिपट गई

कुछ देर शालिनी सूर्य की आँखों में देखती है आवर फिर खुद से सूर्य के होंटो से अपने नाजुक होंठ चूहा देती है

सूर्य अपने होंटो में शालिनी जी के राश भरे होंटो को ले कर चूसने लगता है

दोनों 6.से 7 मिनट्स एक दूसरे को किस करते है एक दूसरे की जुबान चूसते है

सूर्य तो जैसे पागल हे हो गया था शालिनी जी को किश करते हुए कब सूर्य अपने हाथो में शालिनी जी के गोल गोल मटकी जैसे मखमली मुलायम कूल्हों को बेदर्दी से मसलने लगा

शालिनी जी को सूर्य के आग़ोश में तब होश आया जब उनकी वाइट पेंटी उनके हे अमृत से भीग चुकी थी

शालिनी जी ....... ये तुमने क्या किया देखो अब मुझे फिर नहाना होगा

सूर्य ...... उसकी कोई जरुरत नहीं शालू ुम्म्हा मैं हूँ न

सूर्य अपने जादू से शालिनी जी की पेंटी चंग कर देता है

शालिनी जी ....... तुम भूल रहे हो अब मैं भी एक पारी हूँ ये सब मैं खुद से भी कर सकती हूँ वैसे आज सानिया बड़ी खुश थी ऐसा क्या खजाना दे दिया तुमने

सूर्य ....... आपने तो सब देखा था न शालू ........

शालिनी ...... आप नहीं तुम जब हम अकेले हो ऐसे पल में मुझे आप नहीं तुम कहा करो या शालू

सूर्य ....... हम्म्म वैसे आपको ी मैं तुम्हे बुरा नहीं लगा सानिया आवर मुझे वैसे देख कर

शालिनी जी ........ तुम्हारा मतलब है की जब तुम सानिया को नंगा किये अपने इस घोड़े ( लैंड को पकड़ कर ) की सवारी करवा रहे थे वो सब देख कर सच कहूं तो मुझे बुरा भी लगा आवर अच्छा भी

सूर्य ....... मतलब

शालिनी जी ......... तुम्हे सानिया के साथ वो सब करते देख बुरा तो लगा था पैर जब सानिया के दिल का हल पता चला तो तुमने उसे जो प्यार दिया वो देख कर अच्छा भी लगा था उसने काफी लम्बा इन्तजार किया था तुम्हारे साथ उस लम्हे को मह्सुश करने के लिया तुमने बहुत अच्छा किया जो उसे वो प्यार दिया जिसकी वो हक़दार थी उसे आगे भी टाइम देना किस रूप में किस तरह वो तुम जानो वैसे अब बाकियो के बारे में क्या सोचा है वो सब भी ुशी लाइन में है जिनमे सानिया थी

सूर्य .......... मैं चयन तो उनके दिल दिमाग से सब मिटा दूँ पैर ये मेरी सक्तियो का गलत उपयोग होगा आवर उनके प्यार का भी अपमान होगा बेसक उन्हें मैं आने जीवन साथी के रूप में अपना नहीं सकता पैर उनकी भावनाओ के साथ खेलने का अधिकार नहीं है मुझे या किसी आवर को

शालिनी जी ....... आवर सोफिया के बारे में क्या ख्याल है

सूर्य ....... वो अलग है आवर बहुत खाश भी शालू वो जैसी दिखती है वैसे है नहीं

शालिनी जी ...... क्या मतलब मुझे वो बहुत पसंद है उसकी सीरत आवर सूरत दोनों हे नेक आवर खूबसूरत है उसके अलावा तो कुछ भी खाश नहीं लगा

सूर्य ....... नहीं शालू सोफिया बहुत खाश जीनत जिनिशा परिधि रिद्धि कोमल की तरह हे है पैर अभी वो खुद भी अपनी असलियत नहीं जानती जब समय आएगा तो आप आवर सोफिया खुद समझ जाएँगी

सूर्य शालिनी से बात करते करते शालिनी के यौवन का भरपूर आनंद ले रहा था

शालिनी जी खुद से सूर्य के शरीर से एक एक कर सभी कपडे अलग कर देती है

शालिनी मोर्चा अपने हाथ में ले डेरी डेरी सूर्य की सवारी करने लगती

सूर्य शालिनी जी का पूरा साथ देते हुए दोनों उस मंजिल की आवर भाड़ चले जिसका अंत बेहद हे सुखद होता बिन पंखो के एक अलग हे दुनिया के सफर पे निकल चुके थे करीब एक घाटे तक चले इस प्रेम भरे मिलान के बाद सूर्य ने अपनी म्हणत का फल शालिनी जी की मटकी में भर दोनों एक दूसरे को
बहो में भर दोनों संत हो गए

सुबह सूर्य जब उठा तो रात में दोनों जिस तरह से सोये थे ुशी तरह अभी भी लेते हुए थे

सूर्य शालिनी जी को गौड़ में लिए उठा आवर शावर ों कर दोनों ने एक दूसरे को अच्छे से नहलाया

सुबह सुबह इस हलकी छुवन आवर मस्ती से दोनों के शरीर में मस्ती भरने लगी सूर्य ने मौका देख शालिनी जी की गरम राश भरी छूट पे अपने गरम प्यासे होंठ लगा शालिनी जी की छूट से तप तप कर गिरती अमृत बूंदो से अपनी प्यास भुजने लगा

सुबह सुबह शालिनी जी को अपनी छूट पे सूर्य के गरम तपते होंटो की ये छुवन बहुत ज्यादा उत्तेजित कर रही थी जल्दी हे शालिनी जी पानी के निचे कड़ी पानी पानी हो गई

सूर्य का अपने छूट राश से भीगा हुआ चेहरा देख शालिनी जी ने सूर्य के होंठ आवर चेहरा दोनों चाट चाट कर साफ कर दिए

सूर्य ...... कैसे लगा आपको अपना हे अमृत टेस्ट कर के

शालिनी जी ....... हैट बेशरम कुछ भी बोलता है अब तुम जाओ यहाँ से तुम्हे बाकि काम भी होंगे मुझे भी त्यार होना है

शालिनी जी के मन में तो कुछ आवर हे था पैर वो सूर्य से कह नहीं पाया उनने भी सूर्य का साथ जो भ रहा था

सूर्य ने एक बार उनके होंटो को चुम कर टॉवल लिया बाथरूम से निकल गया

ीदार ऊपर राधिका के रूम में अचानक से गबराते हुए राधिका उठी उसका चेहरा पसीने से भीगा हुआ था उसकी सांसे बहुत तेज चल रही थी पास में सोई दीप्ती भी इस हड़बड़ाहट से उठ गई

दीप्ती ....... संत हो जाओ आवर लो पहले पानी पियो आवर मुझे बताओ की क्या हुआ तुम्हे तुम इस तथा घबरा क्यों रही हो कोई बुरा सपना देखा क्या तुमने ( दीप्ती साथ में उसके चेहरे पे आये पसीने को भी साफ कर रही थी )

राधिका को दीप्ती के पास होने से हिमत मिली आवर वो थोड़ी संत होने लगी

राधिका ......... अब मैं ठीक हूँ दीदी

दीप्ती ...... पैर तुम्हे हुआ क्या था तुम इतना घबरा क्यों गई थी

राधिका ........ कुछ नहीं दीदी वो मैंने बुरा सपना देख लिया था इसी लिया मैं घबरा गई थी मैंने आपकी नींद भी करब कर दी

दीप्ती ....... चुप कर पागल तूने तो मुझे भी डरा दिया था चल पहले तू फ्रेश हो जा ताकि तुम्हारा मूड ठीक हो जाये या तुम कहो तो मैं हे नहला दूँ वैसे तुम मुझे नहला न मैं तुम्हे नहला दूंगी हेहेहे

राधिका ....... हेहेहे आज कल आपके सानिया आवर माया का असर हो रहा है रात में भी आपने मेरे सीने को दबा रही थी

दीप्ती ....... अरे मेरी भोली बेगम चूचिया बोलने में सरम आती है क्या हेहेहे वैसे ये सच भी है राधिका तुम्हारी साइज पहले से भाड़ गई है सूर्य ने जो म्हणत दिन पे की वो सफल हुई

दीप्ती राधिका से ऐसे बाटे कर उसका मूड ठीक कर रही थी ताकि वो उस सपने को दिमाग से निकल दे जिसने उसे इतना डरा दिया था

राधिका . ......... साइज तो आपकी भी भाड़ गई है दीदी अब आपको भी सदी कर लेनी चाइये

दीप्ती ......... अभी मैं इस बारे में कुछ नहीं सोचना चाहती हूँ बाकि देखते है आगे क्या लिखा है नसीब में जाओ तुम फ्रेश हो जाओ

राधिका भी अपने कपडे ले बाथरूम में चली गई

दीप्ती मिरर के सामने कड़ी हो अपनी चूचियों को देखती है जो पहले से ज्यादा बड़ी आवर सॉफ्ट हो गई थी

दीप्ती बीएड के पिलो के निचे से अपनी ब्रा निकली जो उसने रात में सोने से पहले वह निकल कर राखी थी

दीप्ती ......... यार ये तो सच में पहले से बड़ी हो गई है अब तो मेरी यूनिफार्म भी यहाँ से कुछ ज्यादा हे टाइट रहने लगी है ऑफिस में सबकी नजर यही रहती है जैसे अभी इन पे टूट पड़ेंगे

दीप्ती खुद को मिरर में देख खुद से काफी दी बाते कर मुस्कुराती रही

जब राधिका नाहा कर बहार निकली तब उसका ध्यान टुटा आवर वो अपने कपडे ले कर बाथरूम में चली गई फ्रेश होने

सभी लोग हाशि मज़ाक करते हुए नास्ते का लुत्फ़ उठा रहे थे पैर शालिनी जी किरण आवर सूर्य का ध्यान राधिका पैर हे था

राधिका यहाँ सभी के साथ होने के बावजूद भी यहाँ नहीं थी

शालिनी जी ......... राधिका बेटी क्या बात है तुम नास्ता क्यों नहीं कर रही हो सब ठीक तो है न बीटा

राधिका ....... जी मम्मी मैं ठीक हूँ ी मैं आंटी जी मैं ठीक हूँ बस नास्ता करने का दिल नहीं है मेरा

शालिनी जी ........ ( मुस्कुराते हुए ) कोई बात नहीं बीटा तुम मुझे मम्मी कह सकती हो आवर अगर नास्ता पसंद नहीं है तो मैं तुम्हारे लिया कुछ स्पेशल बना देती हूँ

राधिका ....... थैंक यू मम्मी पैर सच में मेरा दिल नहीं है कुछ भी खाने का

दादी जी ....... बीटा इस टाइम में ऐसा होता है पैर तुम्हे इस बात का भी ध्यान रखना चाइये की अगर तुम ठीक से खाना नहीं खाओगी तो इसका असर बचे पर भी होगा उसे तो पोषण तुम से हे मिलता है न इस लिया एक बार में न सही पैर बार बार थोड़ा थोड़ा करके हे सही पैर शरीर को उसकी जरुरी खुराक मिलनी हे चाइये

आंटी जी ....... है बेटी माँ जी सही कह रही है अभी थोड़ा नास्ता कर लो फिर जब तुम्हारा मन हो तब आवर कर लेना

शालिनी जी ....... माँ सा आप स्वीटी आवर राधिका के लिया निब्बु का अचार बना दीजिये न

दादी जी ........ माफ करना ये बात मेरे दिमाग से निकल गई थी मैं आज हे बना दूंगी दोनों के लिया सूर्य तुम जरा हमारे फार्महाउस के बगीचे से निब्बु ले आना मार्किट में तो सब दवा से त्यार किये हुए मिलेंगे

सूर्य ...... जी माँ सा जैसा आप कहे

दादी जी ....... बेटी राधिका अभी तुम रात में दीप्ती के साथ सोया करो या तुम्हारी सास के साथ में क्यों की अभी जो ये टाइम चल रहा है इसमें मन में बेचैनी रहती है आवर तुम भी स्वीटी

अब तक बाकि लोगो का भी नास्ता हो चूका था मल्टी आवर सुमन ने वह की सफाई कर जूते बर्तन वह से हटा दिए थे

महेंद्र आवर जोरावर जी अपने काम से निकल गए थे विजय फूफा जी को साथ लिए सूर्य वह से किचन में गया आवर ढूढ त्यार कर रेखा जी के रूम की आवर भाड़ गया

सूर्य ....... ममी सा ये लीजिये आपकी दवा ये आखरी खुराक है इसके बाद आप पूरी तरह से ठीक हो जाएँगी फिर से आपको कभी इस बीमारी का इस प्रॉब्लम का सामना नहीं करना होगा

पूनम जी ने भी बिना किसी न कुकुर के सूर्य के हाथो ढूढ पि लिया थोड़े टाइम उनकी बॉडी में हीट बानी पर पहले के मुकाबला 100/10 % फिर भी उन्हें फिर से नहाना जाना पड़ा

मानवी ....... क्या मम्मी सच में अब ठीक हो गई है

सूर्य ....... आपको क्यों लगता है दीदी की मैं आपसे या किसी से जूथ बोलूंगा

मानवी ...... नहीं नहीं मेरा वो मतलब नहीं था सूर्य मैंने बस ऐसे हे कन्फर्म करने के लिया पूछ लिया था तुम तो जानते हो मैं पापा या भाई से ज्यादा मम्मी के नजदीक रही हूँ

सूर्य ...... दीदी आप बिलकुल चिंता न करो ममी सा बिलकुल ठीक है वैसे आप बुरा न मने तो एक बात पूछना था प्लेसेस मुझे गलत मत समझना मानवी

मानवी ....... क्या कहा मानवी

सूर्य . ....... है अब वो सब दीदी से तो पूछ नहीं सकता न आवर आप तो मेरी गफ भी तो है हाहाहा

मानवी ...... मैं तुम्हारी कोई गफ नहीं हूँ समझे

सूर्य ....... क्या सच में आप मुझे अपना दोस्त नहीं मानती है

मानवी ....... दोस्त मानती हूँ पैर गफ थोड़े न हूँ वो तो कोई आवर है ( वो तो कोमल है राधा है न )

सूर्य ....... हाहाहा अरे दीदी मैं तो आपसे मजाक कर रहा था मेरा आपको गफ कहने का मतलब था आप गर्ल है आवर मेरी अच्छी दीदी काम फ्रेंड ज्यादा तो अब हुई न आप मेरी गफ हाहाहा

मानवी ........ यू इडियट तुम्हे तो मैं छोड़ूंगी नहीं रुको अभी तुम

सूर्य ....... क्या सच में मैं इतना पसंद आ गया आपको की आप अभी से मुझे छोड़ना नहीं चाहती

मानवी सूर्य की आवर लपकती है उसे पकड़ने के लिया पैर सूर्य उसका हाथ पकड़ लेता है आवर उसकी आँखों में देखता है

( मानवी ...... पता नहीं इसकी आँखों में ऐसा क्या है जो मैंने पहले किसी आवर की आँखों में नहीं देखा क्यों मुझे इसका साथ अच्छा लगता है )

सूर्य मानवी की आँखों में जो भाव थे उसे देख फ़ौरन उसका हाथ छोड़ थोड़ा पीछे हैट जाता है

सूर्य ....... मानवी मुझे कुछ पूछना था आपसे

मानवी ........ ( खुद को संभल कर ) है बोलो क्या पूछना था तुम्हे

सूर्य ........ देखो मैं पहले हे बता देता हूँ की मेरी किसी भी बात का बुरा नहीं मन्ना ये सब मैं ममी जी के लिया पूछ रहा हूँ

मानवी ...... हम्म्म बोलो

सूर्य ....... मां जी आवर ममी जी के बिच रिलेशनशिप कैसा है ी मैं उनके बिच कोई प्रॉब्लम तो नहीं है न आप समझ रही है न

मानवी ....... तुम ये कुछ पूछ रहे हो कोई प्रॉब्लम है क्या सूर्य

वैसे पापा अब घर बहुत काम रहते है बिज़नेस के चलते ज्यादातर टाइम वो घर से बहार हे रहते है ज्यादा से ज्यादा महीने में 7 से 8 दिन हे घर आते है

सूर्य ........ हम्म्म ठीक है मैं चलता हूँ बाद में मिलता हूँ


( सूर्य आवर भी कुछ पूछना चाहता था पैर जब से उसने मानवी की आँखे पड़ी थी तभी से उसने ज्यादा कुछ पूछना ठीक नहीं समझा )

मानवी ...... बस इतना हे पूछना था क्या तुम्हे

सूर्य ........ है बस इतना हे

सूर्य को पता था पूनम ममी जी बाथरूम से सूर्य आवर मानवी की बाते सुन रही थी

सूर्य के जाते हे ममी जी भी बहार निकल आई उनके चेहरे पे सरम आवर कुछ अनसुलझे भाव थे

पूनम जी ....... सूर्य कहा गया बेटी मानवी

मानवी .......... मम्मी उसे कुछ काम था इस लिया वो चला गया वो बाद में मिल लेगा आपसे

ीदार सूर्य मानसी आवर देवयानी जी दोनों को ले कर फार्महाउस की आवर निकल गया

करीब 20 मिनट्स बाद सूर्य की कार फार्महाउस में थी

8 से 10 कमरों का ये फार्महाउस बहुत हे खूबसूरत था चारो तरफ हरे भरे अशोक के पैदा के साथ साथ अलग अलग छायादार फलदार पैदा से घिरा था

मानसी ........ यहाँ तो काफी पेड है आम के पेड आवर अंगूर की बैले भी काफी लगी हुई है

सूर्य ........ है ये सभी पेड पौदे बड़े मां जी आवर बड़े पापा के लगाए हुए है वो अपना बचपन ज्यादातर यही बिताते थे बौ जी या नाना जी के साथ ऐसा हे फार्महाउस नाना जी का भी है

अभी ये तीनो लोग फार्महाउस के बहार खड़े चारो तरफ देख रहे थे तभी उन्हें एक 40 ,45 की आगे की महिला आवर उनके साथ 50 की उम्र का आदमी अपनी आवर आता हुआ नजर आया यही दोनों पति पत्नी फार्महाउस की देखभाल करते है मजदूरों से काम करवा ये है


आदमी ...... छोटे ठाकुर आप यहाँ पैर मुझे बुला लिया होता फ़ोन करके

सूर्य ........ कोई बात नहीं रतन चाचा हम बस यहाँ थोड़ा तुमने फिरने आये है नमस्ते चची जी

कमला ......... राम राम छोटे मालिक

सूर्य ......... चची जी मैं कोई आपका मालिक नहीं हूँ न मुझे फिर से छोटे मालिक कहना अगर बीटा कहने में आपको परेशानी होती है तो आप भी चाचा जी की तरह छोटे ठाकुर कह सकती है

कमला ...... जी छोटे ठाकुर चलिए आप सब लोग अंदर चलिए

सूर्य ........ जी नहीं चची जी चाचा जी आप थोड़े अच्छे निब्बु तोड़ लाएंगे माँ सा ने मंगवाया है हम वही लेने आये है तब तक हम थोड़ा गम फिर लेते है

रतन ....... जी छोटे ठाकुर

रतन अपनी पत्नी कमला के साथ निम्बू के बगीचे की आवर चल देता है निम्बू तोड़ने वाली टोकरी ले कर के

सूर्य मानसी आवर देवयानी जी के साथ दूसरी तरफ निकल गया जहा अभी 2.3 दिन पहले हे जमीं को अगली फसल बोन के लिया त्यार किया था

देवयानी जी .......... सूर्य तुम्हारा परिवार जमींदार फॅमिली से है क्या काफी जमीं जायदाद है बाकियो के मुकाबले

सूर्य ....... है मेरे पूर्वज जमींदार थे एक वक़्त उनका राज था फिर डेरी डेरी समय बदला समाज में बदलाव हुए तो वो जमीदारो वाला समय भी पीछे चुत गया

देवयानी जी ....... अब तो तुम फ्री हो चुके हो मेर्री की सदी भी हो गई है अब आगे क्या सोचा है

सूर्य ...... इसमें सोचना जैसा क्या है देवयानी जी अपनी फॅमिली के साथ वक़्त बिताऊंगा अपनी ड्यूटी ज्वाइन करूँगा

देवयानी जी ........ मेरा मतलब की असुरो को ले कर क्या विचार है क्या योजना है उन्हें ले कर

सूर्य ........ आपको ऐसा क्यों लगता है की असुर को ले कर मुझे कुछ सोचना चाइये जब तक वो अपनी सीमा में अपने दायरे में रहेंगे वो सुरक्षित रहेंगे उन्होंने पार्थवी पे या किसी अन्य लोक में कुछ भी करने की कोशिश करेंगे तो उन्हें उचित उत्तर भी मिलेगा

मानसी .......... कुंवर जी आपको इतना निश्चित नहीं रहना चाइये असुरो को ले कर के वो दो मुँह वाले नाग है जो सामने स नहीं पीठ पीछे से वॉर करते है उनको ले कर बुआ ी मैं देवयानी जी जो कह राहु है वो बिलकुल ठीक कह रही है


देवयानी जी ......... तुम मुझे बुआ हे कहा करो ये पृथ्वीलोक के दूसरे भी अच्छे लगते है हेहेहे

सूर्य ........ अच्छा देवयानी जी आपके पिता जी ी मैं गुरुदेव अपनी एकांत साधना पूरी कर आश्रम कब वापिस लौटने वाले है

देवयानी जी ........ हमें इस बारे में कुछ भी ठीक से ज्ञात नहीं है हम खुद नहीं जानते की पिता श्री कोनसे एकांत स्थान पे है आवर कोनसी साधना पूर्ण कर रहे है किन्तु आप किस लिया जानना चाहते है क्या आपको पिता श्री की सहायता की आव्सय्कता है

सूर्य ........ नहीं ऐसा कुछ नहीं है देवयानी जी

मानसी ........ आप लोग आपस में बात कीजिये मैं अभी आती हूँ

मानसी वह से कुछ दूर लगे निब्बु के पौधे के पास चली जाती है दोनों को छोड़ कर

देवयानी जी ........ सूर्य मेरी बात ध्यान से सुनो भले हे मैं असुरो के गुरु असुरगुरु शुक्राचार्य की पुत्री हूँ पैर मेरे पिता असुरगुरु शुक्राचार्य असुर हितेषी है आवर देवो के घोर सत्रु आवर इसका उचित कारन भी है मेरे पिता के पास

सूर्य ........ मैं ये सब जनता हूँ देवयानी जी आवर इसके पीछे का कारन भी आवर कही न कही वो अपनी जगह कुछ हद तक सही भी है पैर आप मुझे ये सब क्यों बता राहु है

देवयानी जी ........ तुम जब सुक्रलोक आये तब मैंने पिता श्री के कहने पैर हे तुम्हे सुक्रलोक भर्मण (गुमने ) करने ले कर गई थी उन्हें तुम्हे ले कर कुछ संदेह है वो तुम्हारी वास्तविकता जानना चाहते थे मेरे माध्यम से ( देवयानी कुछ पल मून हो कर सूर्य को देखती है फिर आगे बोलना सुरु करती है )

देवतानी जी ........ तुम्हे कोई आचार्य नहु हुआ इसका मतलब तुम पहले से इस बारे में जानते थे

खेर बात ये नहीं है मैं बस यही तुम्हे संजना चाहती हूँ की तुम किसी भी असुरलोक से जुड़े व्यक्ति पे इतनी सिगरा विश्वाश न करो आँखे बंद करके फिर चाहे वो मेरे पिता हो या फिर तुम्हारे ससुर आवर मेरे गुरु भरता व्योमासुर हे क्यों न हो असुरो में रिस्तो के कोई मायने नहीं होते रिश्ते उनके लिया अवसरवादी होते जिनका वो अपने लाभ के लिया कभी भी उपयोग आवर दूर उपयोग कर सकते असुर केवल वचन से बंधे जा सकते है इस लिया किसी पे भी आँख बंद कर भरोषा नहीं करना फिर चाहे वो मैं हे क्यों न हो

( सूर्य ......... वाइट ड्रैगन का आप पे अच्छा असर हुआ है आपके मन की मलिनता काम हुई है आपका इंसान को देखने आवर समझने का नजरिया पहले से बदल गया है गुरुदेव ने मुझे पहले हे असुरो को ले कर इन सत्यो से अवगत करवा चुके थे मुझसे जुड़े असुरो का कब आवर कैसे उचित प्रयोग या उनकी उचित चाहता लेनी हाउ मैं अच्छे से जनता हूँ पैर आपको ये सब बता नहीं सकता देवयानी जी )

सूर्य ....... मुझे सचेत आवर सावधान करने के लिया आपका बहुत बहुत धन्यवाद् देवयानी जी

देवयानी जी ....... मुझे धन्यवाद् कहने की आव्सय्कता नहु सूर्य अगर मैं तुम्हारे परिवार में शामिल न हुई होती तो सायद मैं तुम्हे सचेत नहीं करती पैर तुम्हारे परिवार ने जो मन सम्मान आवर प्रेम मुझे दिया है अपने परिवार में शामिल कर के उसे मैं लौटा तो नहीं सकती पैर उस पुरे परिवार की ख़ुशी तुमसे जुडी है सूर्य तुम्हे कुछ हुआ तो सायद वो परिवार भिखारी जायेगा इस लिया मैंने तुम्हे अपने पिता आवर असुरो से सावधान रहने को कहा है मैंने अपना दायित्व पूरा किया बाकि निर्णय तुम्हारा सवयं का है क्या उचित क्या अनुचित

सूर्य ........ आप निश्चित रहे .......

अभी सूर्य बोल हे रहा था की उसकी नजर मानसी पे पड़ी जो कुछ दुरी पे पेड पे हाथ लगाए जुख़ी हुई वोमिट करने की कोशिश कर रही थी

सूर्य जल्दी से मानसी के पास पहुंचा आवर उसे कंधे से पकड़ा

सूर्य ........ क्या हुआ मनु तुम ठीक तो हो न

मानसी ...... मैं ठीक हूँ बस थोड़ा सर गम रहा है आवर ऐसा लग रहा है की अभी उल्टिया होने वाली है

अब तक देवयानी भी वह आ पहुंची थी

देवयानी जी ........ ऐसा कैसे हो सकता है मानसी तुम कोई इंसान नहीं हो बल्कि एक सक्तिसाली असुर महिला हो जरा मुझे देखने दो

देवयानी जी मानसी के माथे पे हाथ रख कर देखती है फिर उसकी नबज चेक करती है

देवयानी जी ....... सूर्य मानसी को अंदर ले कर चलो मुझे कुछ जाँच करनी है मानसी की

सूर्य मानसी को गौड़ में उठा फार्महाउस की में ले आता है आवर वही एक रूम में लिटा देता है

देवयानी जी मानसी को अच्छे से चेक करती है पैर उसे ज्यादा कुछ समझ नहीं आता है

तभी वह गुरुदेव आवर रानी पारी दोनों एक साथ प्रकट होते है

सूर्य मानसी ...... परनाम गुरुदेव परनाम रानू माँ

गुरुदेव ........ साधा सौभाग्यवती भाव पुत्री यसस्वी भाव पुत्र

रानी पारी ....... जरा मुझे देखने दो मानसी को

सूर्य ....... गुरुदेव आप आवर रानी माँ इस समय यहाँ पैर

गुरुदेव सूर्य को संत रहने का इशारा करते है

रानी पारी अपनी मैजिक स्टिक से मानसी की जाँच करती है पैर उनकी ऊर्जा किसी अदृश्य कवच से टकरा कर रुक रही थी

गुरुदेव ....... पुत्र सूर्य पुत्री मानसी को अपने ऊर्जा कवच से मुक्त करो

सूर्य गुरुदेव की बात सुन मानसी की सुरक्षा में लगाया अपनी ऊर्जा का सुरक्षा कवच वापिस ले लेता है

फिर से रानी पारी एक बार आवर अपनी मैजिक स्टिक का इस्तेमाल करती है इस बार जो दृश्य चारो के सामने था उसे देख सबके चेहरे ख़ुशी से हूँ उठे

रंज पारी ........ बधाई आवर पुत्र सूर्य पुत्री मानसी हमारी खुशियों को भढने एक आवर नन्हा मेहमान आने वाला है

सूर्य ........ मनु तुम माँ बनने वाली हो हमारे प्रेम की निसानी तुम्हारे पेट में पल रहा है तुम नहीं जंतु मनु तुमने आज मुझे कितनी बड़ी खुशु दी है

सूर्य बिना किसी के परवाह किये मानसी को अपने सीने से लगा लेता है सूर्य की बात सुन आवर ऐसे सूर्य को खुश होते देख मानसी के भी ख़ुशी के आंसू निकल रहे थे

भले हे मानसी अभी तक अपने पेट में बचे को मह्सुश कर पाने में असमर्थ थी पैर जो ख़ुशी उसने सूर्य के चेहरे पे देखि आवर उसके पीछे की वजह उसका आवर सूर्य का अंश था मानसी के लिया इतना हे कफ्फू था ख़ुशी के आंसू बहाने के लिया

अब तक रानी पारी ने ये खबर शालिनी जी किरण माँ सा आदि लोगो को दे दी थी

जैसे हे किरण आवर शालिनी जी को पता चला किरण फ़ौरन शालिनी जी रेखा जी मेनका जी आवर माँ सा का क्लोन वह छोड़ उन सबको ले कर फार्महाउस पहुंच गई

जहा सूर्य आवर मानसी अभी भी एक दूसरे के गले से लगे हुए थे

किरण ........ हुन्न हुण्णं हम सब भी यहाँ लाइन में लगे है कुंवर जी

किरण की आवाज सुन सूर्य मानसी से अलग होता है तो वह माँ सा माँ बड़ी माँ बुआ सा को खड़ा देखता है

सूर्य ........ माँ सा मैं पापा बनने वाला हूँ आप फिर से दादी बनने वाली है

रेखा जी. ........ ये तो फिर से बाप बनने की ख़ुशी में लगता है पागल हे हो गया है माँ सा

सूर्य को अब जा कर आभाष हुआ की वो ख़ुशी ख़ुशी में पापा बनने की खबर उसने खुद हे सबको दी ऐसे अक्सर खबर लड़की खुद देती या उसकी माँ या सास

सबसे पहले किरण मानसी के गले लग कर उसने माँ बनने की शुभकामनाये आवर प्यार देती है

किरण मानसी के पेट पे हाथ रख जैसे उसने मह्सुश करती है

किरण ........ बाबू मैं तुम्हारी मसि माँ हूँ

मानसी ........ मसि माँ नहीं दीदी आप उसकी माँ है (किरण का हाथ पकड़ कर ) दीदी मैं चाहती हूँ की जब भी ये इस दुनिया में आये वो अपनी आँखे खोले सबसे पहले वो आपको देखे आपकी गौड़ में वो अपनी आँखे खोले

किरण ......... पैर मैं कैसे ये हक़ तो कुंवर जी का है न आप हे इसे समजाओ न कुंवर जी

सूर्य ......... नहीं स्वीटी मैं भी चाहता हूँ तुम मानसी की इच्छा पूरी करो वो कोई गलत मांग नहीं कर रही है उसके दिल में तुम्हारा जो स्थान है वो बहुत ऊपर है

रेखा जी ........ मानसी बीटा जैसा तुम चाहती हो वैसा हे होगा मैं देखती हूँ इस स्वीटी को की कैसे ये मन करती है हहहहए

दादी जी ....... ( मानसी का सर सहलाते हुए ) बेटी जैसा तुम चाहती हो वैसा हे होगा बस तुम अपना ख्याल रखना

दादी जी के बाद रेखा जी शालिनी जी मेनका जी रानी पारी देवयानी सभी मानसी को ढेरो शुभकामनाये आवर प्रेम लुटाते है

सूर्य की नजर जब गुरुदेव पे पड़ी तो वो थोड़े विचलित लगे सूर्य को पैर सूर्य ने अभी कुछ भी पूछना उचित नहीं समझा सबके सामने

रेखा जी ......... माँ सा अभी घर पे सब लोगो को ये बात बताना ठीक रहेगा क्या

शालिनी जी ....... क्या हुआ दीदी

रेखा जी ...... मेरा मतलब घर पे आवर लोग भी तो मौजूद है न

रानी पारी ........ रेखा जी आप चिंता न करो मैंने सभी के दिमाग में पुत्र सूर्य आवर पुत्री मानसी की विवाह की यादें दाल दी है उनकी नजरो में पुत्री मानसी किरण जीनत पारिजात चारो पुत्र सूर्य की पत्नी होने की यादें दाल दी है किसी को कोई भी प्रॉब्लम नहीं होगी न कोई इस बात को ले कर कोई सवाल करेगा उनके दिमाग में मैंने मैजिक से ऐसे यादें दाल दी है की उन्हें लगेगा की वो सब सूर्य के विवाह में शामिल थी

सूर्य रानी पारी की बात सुन गुरुदेव की आवर देखता है

( गुरुदेव ........ पुत्र रानी पारी ने जो किया वो उचित किया है इस लिया तुम चिंता न करो

सूर्य ......अगर ऐसा था तो मैं खुद भी गुरुदेव ये कार्य कर सकता था न

गुरुदेव ........ नहीं पुत्र तुम्हारी सकतिया इन कार्यो के लिया नहीं है तुम इनका इस तरह से प्रयोग नहीं कर सकते तुमपे कुछ पाबंदिया है पैर रानी पारी पे नहीं वो एक माँ है उन्होंने ये अपनी पुत्री आवर तुम सब के लिया किया है

सूर्य ....... जी गुरुदेव जैसा आप उचित समझे )

शालिनी जी रेखा जी को छोड़ बाकि सभी लोग किरण के साथ घर लौट गए

रेखा जी शालिनी जी सूर्य आवर मानसी चारो कार से घर की आवर निकल गए अब तक दोपहर हो चुकी थी

जैसे हे घर में मानसी के माँ बनने की खबर मिली सभी ख़ुशी से झूम उठे लड़कियों ने तो मानसी को चारो तरफ से घेर लिया था

सूर्य ने ये खबर रकत सन्देश के माध्यम से व्योमासुर जी को भी भेज दी थी पैर वो इस समय अपनी पुत्री से भेंट करने नहीं आ सकते थे क्यों की सुक्रलोक की पूरी जिम्मेदारिया उनपे आवर प्रमुख शिष्य पे थी ऐसे में वो यहाँ आने में असमर्थ थे

इस बारे में सूर्य ने देवयानी जी से बात की तो उन्होंने रात में सुक्रलोक लौटने की बात कही

सानिया दीप्ती सिमरन मानवी चारो सूर्य से पार्टी की जिद करने लगी

मानसी के प्रेग्नेंट होने की ख़ुशी के चलते सूर्यकांत जी का दिल्ली जाने का प्रोग्राम एक दिन के लिया आवर ताल गया था

सूर्य ने सभी को दिल्ली में बड़ी पार्टी देने का वडा किया तब जा कर सब लड़कियों ने सूर्य का पीछा छोड़ा तब कही जा कर सूर्य को रहत मिली

दादा जी भी बहुत खुश थे आवर उन्होंने नाना जी को खबर कर रात में पारी लोक की नादिरा से मदिरा पार्टी करने का एलान कर दिया जिसमे सूर्यकांत जी गोविन्द जी भी शामिल होने वाले थे ............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ...........

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ..................

आगे की स्टोरी सेकंड part में सुरु होगी फ्रेंड्स ...........
 
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इन्सेस्ट - दिल का राजा part 2 (इन्सेस्ट मैजिक अडुल्टेरी

hello फ्रेंड्स ये मेरी स्टोरी दिल का राजा स्टोरी का सेकंड part है एक बार फिर से मुझे आप सभी का सहयोग आवर साथ चाइये उम्मीद है आप सभी का प्यार आवर सहयोग पहले की तरह हे इस part को भी मिलेगा https://xforum.live/threads/dil-ka-raja-incest-magic-adultery.28356/post-2217031...

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