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अपडेट. 62
विजय ने मिशंस की पूरी जानकारी अपनी पाण्ड्य सर तक पंहुचा दी उनको करीम खान के मरे जाने पे थोड़ी निराशा तो हुए पैर वो खुश भी था की एक आतंकी संगठन का सरगना मारा गया
विजय को कुछ दिन सूरजगढ़ में चूतिया बिताना का कह कर बाकि टीम को बापिस बुला लिया कुछ आर्मी जवान भी घायल हुए थे इस बिच करीम खान के हमले से ........
अब आगे .........
सुबह सूर्य जल्दी उठा आवर अपने दादा जी को सूचित कर
जंगल की तरफ निकल गया अपने रूटीन के अनुसार साध्वी जी से 2 हर ध्यान योग करने के बाद वयोम आवर सकती के साथ अभ्यास करने लगा
समय के साथ साथ सूर्य की शारीरिक आवर मानसिक ताकत बढ़ने लगी साथ हे साध्वी जी सूर्य को वेदो का ज्ञान भी देने लगी
सूर्य कोमल के साथ यही सूर्यगढ़ में स्कूल में एडमिशन करवा चूका था सूर्य के तेज दीमक के बदौलत यहाँ कोमल जो की सूर्य से एक क्लास आगे थी उसके साथ हे सूर्य का एडमिशन कर दिया
इस बिच कुछ वक़्त दुर्जन सिंह अपने सब काळा डंडे बंद कर दिए थे क्युकी आर्मी की उसपे नज़र पद चुकी थी
विजय को गुप्त रूप से अलग हे मिशन दिया गया था जिसके चलते विजय को ार्यं छोड़ ने का नाटक कर सूरजगढ़ में हे रह कर दुर्जन सिंह के खिलाफ साबुत जुटाने का काम करने लगा
इस बिच 6 मंथ का समय बिट गया
एक साम जब सूर्य अपनी ट्रेनिंग पूरी कर जंगल से लौट रहा था तभी कुछ लोगो को किसी का पीछा करते हुए देखता है
सूर्य ......ये कोण लोग है आवर उसका पीछा क्यों कर रहे है
सूर्य भी उनके पीछे लग गया 15 मिंट बाद उन लोगो ने उस लड़के को चारो तरफ से घेर लिया
सूर्य दूर से ये सब देख रहा था कुछ हे देर में जो 6,7 लोग थे वो उस लड़के पे टूट पड़े
सूर्य तेजी से आगे बढ़ कर उसक लड़के को एक आवर कर के उस लड़के आवर उन आदमियों के बिच खड़ा hi जाता है है
सूर्य ......कोण हो तुम आवर क्यों इसको मार रहे हो
आदमी 1....बच्चे चुप चाप निकल जाओ क्यों बे मतलब मरना चाहते हो
सूर्य ......वो सब बाद की बात तुम यहाँ के तो नहीं लगते हो क्यों इसको मरना चाहते हो
आदमी 2 .....भाई क्यों इसकी बकवाश सुन रहे है हम उसके साथ में इसको भी ख़तम कर चलते है यहाँ से
आदमी 1 जो सायद इनका लीडर था
आदमी 1 .....देख बच्चे अभी भी वक़्त है निकल ले यहाँ से
सूर्य आदमी 1 की बात सुनते बिना उस बगल लड़के के पास जाता है
सूर्य .....कोण हो तुम आवर ये लोग तुम्हे क्यों करना चाहते है
लड़का .....मेरा नाम विजय सिंह है ये सरे मुझसे वो फाइल लेना चाहते है जिसमे मैंने इनके बॉस की काली करतुते साबुत के साथ अपने पास राखी है
सूर्य .......विजय सिंह आप किसके लिया काम करते हो
विजय सिंह ....मैं इंडियन आर्मी के लिया काम करता हूँ
सूर्य उन आदमियों की तरफ गुरते हुए
सूर्य .....मैं नहीं जनता तुम लोग किसके लिया आवर क्या काम करते हो पैर सूर्यगढ़ है यहाँ पे तुम्हे नहीं आना चाइये था
सूर्य की बकवाश सुन लीडर अपनी साथियो को बोल्ट्स है उसके साथ साथ उसे भी ख़तम कर दो
सूर्य ....आवो हरामियों बहुत टाइम से तुम जैसे के लिया हे तयारी कर रहा हूँ
देखते हे देखते सूर्य को चारो तरफ से घेर लिया जाता है पैर ये उन सब की सबसे बड़ी गलती थी जिसने वो सब एक बच्चा समाज कर मरने चले थे वो उनका कल था
सूर्य के सामने जो बहुत आता पल भर में जमीं चाटने लगता
किसी की पसलिया टूटी तो किसी की हाथ की हड़िया टूटी
सूर्य ध्यान योग से अपने गुस्से पे लगभग कण्ट्रोल कर चूका था नहीं तो अब तक उन सबकी लाशे बिछा देता
2,4 मिंट बाद सब जब जमीं पे तड़प रहे थे तो सूर्य उनके लीडर आदमी 1 के पास जाता है
सूर्य .....अगर जिन्दा रहना चाहते हो तो सब कुछ सच सच बोलना तुम सब किसके लिया काम करते हो आवर कोण कोण से काम करते हो
आदमी 1 .......हम नहीं बता सकते वार्न्स वो हमें जान से मार डालेगा
विजय .....मैं बताता हूँ ये सब यहाँ के नहीं है सायद आवर इनको दुर्जन सिंह ने बहार से हिलाया होगा मुझे पकड़ने के लिया सायद उसको पता चल गया होगा की मैं उसके खिलाफ साबुत जूता रहा हूँ
सूर्य .......ठीक है तुम सब जा सकते हो पैर याद रहे दुबारा सूर्यगढ़ या सूरजगढ़ के आसपास भी दिखे तो वो दिन तुम सबकी जिंदगी का आखिर दिन होगा
गुंडे लोग गिरते पड़ते वह ने अपनी जान बच्चा कर भाग निकले
विजय सिंह .....क्या मैं अपनी जान बच्चन वाले का नाम जान सकता हूँ
सूर्य .....सूर्य शिव ठाकुर आपको तो बहुत चोट लगी है चलिए मेरा साथ
विजय के मना करने के बाद भी सूर्य विजय को ले कर साध्वी जी के पास पंहुचा
साध्वी जी ....सूर्य क्या हुआ आप वापिस कैसे आ गए आवर आपके साथ में ये कोण है इन्हे जल्दी से अंदर ले चलिए काफी चोट लगी है
सूर्य .....साध्वी जी कुछ लोग इनको मरने के लिया पीछे पड़े हुए थे मैंने देखा तो इनको बच्चा कर यहाँ ले आया
वयोम .....ये तुमने बहुत अच्छा किया सकती जरा साध्वी जी की मदद करना
विजय चारो तरफ देख रहा था
वयोम .....क्या देख रहे हो ऐसे
विजय ........क्या आप किसी तरह के स्कूल चलते हो क्या यहाँ जो इतने अस्त्राय सस्त्र रखे हुए है जैसे कोई पुराने ज़माने का गुरुकुल हो
साध्वी जी .....ऐसा हे कुछ समाज सकते है
कुछ देर बात विजय के सरीर पे ॉडी का लेप लगा कर पट्टी वगेरा करके दर्द के लिया कुछ पिने को दिया
साध्वी जी .....सुबह तक बिलकुल ठीक हो जाओगे तुम
विजय ....जी मेरा नाम विजय है आप सबका बहुत बहुत शुक्रिया
सकती ......सूर्य तुम इन्हे हवेली ले जाओ इनको आराम की सकता जरूरत है कल एक बार आवर अपने साथ ले आना ताकि एक बार आवर ॉडी लगवा लेंगे
सूर्य ......जी जरूर आया दे आज बहुत लेट जो गया हूँ घर के लिया
साध्वी वयोम आवर सकती से विदा ले सूर्य आवर विजय सूर्यगढ़ हवेली की तरफ निकल गए
vijay.........tum उन्हें कैसे जानते हो सूर्य आवर तुमने ऐसे लड़ना कहा से सीखा मैं खुद उनका मुकाबला नहीं कर प् रहा था जबकि तुम इतने आराम से सब की हड़िया तोड़ दी
सूर्य ..........क्युकी मैं ज्यातर उनके साथ हे रहता हूँ बाकि आप कल देख लेना
ऐसे हे बाते करते हुए सूर्य हवेली पहुंच जाता है जहा दादा जी सूर्य की प्रतीक्षा कर रहे थे
दादा जी ......बीटा आज लेट कैसे जो गए आवर ये तुम्हारे साथ में कोण है कुछ जाना पहचाना लग रहा है
विजय आगे बढ़ दादा जी के पेअर छूटा है
विजय ......ठाकुर साहब मैं आपके दोस्त सूरजगढ़ के राणा जी विक्रम सिंह के दोस्त का लड़का हूँ
दादा जी ......तुम मनोहर सिंह के बेटे तो नहीं हो क्या नाम था हम्म याद आया विजय सिंह यही नाम है न तुम्हारा
विजय .....जी ठाकुर साहब
सूर्य .....दादा जी अंदर चले इनको चोट लगी है इनको आराम करना है
दादा जी .....है है चलो
सूर्य जब अंदर पंहुचा तो सब उसकी हे रह देख रहे थे
शालिनी को देखते हे विजय के मुँह से दीदी निकल गया
शालिनी .....कोण हो तुम जो मुझे दीदी कह रहे हो
विजय सिंह शालिनी के पेअर छू कर
विजय .....दीदी मैं आपके मनोहर सिंह चाचा का बीटा विजय हूँ आपने बहुत साल बाद देखा है मुझे तो पहचाना नहीं होगा
शालिनी ......तुम विजु हो क्या अब तो काफी बड़े हो गए पैर तुम्हे ये चोट कैसे लगी आवर सूर्य कहा मिल गया तुम्हे
विजय .....कुछ नहीं दीदी कुछ लोगो से जगदे में चोट लग गई
शालिनी .....सूर्य बीटा ये तुम्हारे छोटे मां है विजय
सूर्य .....जी माँ
सूर्य विजय के पेअर चूसने लगा तो विजय ने सूर्य को गले से लगा लिया
सूर्य आप लोग बाते करो मैं नाना कर अभी आता हूँ
दादी जी .... बीटा तुम नाना लो मैं रुक्मणि को तुम्हारी मालिश के लिया भेजती हूँ
सूर्य .....जी दादी जी
सूर्य वह से चला जाता है
नहाने के लिया
पीछे से हॉल में
विजय ......दीदी सूर्य कितने साल का है
शालिनी ......क्यों क्या हुआ जो तुम सूर्य की उम्र पूछ रहे हो वैसे सूर्य को अभी क्सक्सक्स व साल लगा है
विजय .....क्या सिर्फ क्सक्सक्स साल का सूर्य को देख कर तो नहीं लगता की ये क्सक्सक्स साल का है
शिव .....ऐसा क्या कर दिया अब मेरे शेर ने सेल साहब जो आप चौंक रहे है
विजय शिव की बात सुन समाज जाता है की यही शालिनी के पति है महेंद्र को वो पहले जनता था
विजय .....परनाम जीजा श्री ....ऐसा कुछ नहीं है बस क्सक्सक्स साल का लगता नहीं है न इस लिया
दादा जी ......बीटा जी बात को गुमओ नहीं जो पूछना है साफ साफ पूछो
विजय .......वो सूर्य ने कही से ट्रेनिंग ले है क्या फाइट करने की
दादा जी ......तो तुमने भी देख लिया उसका तांडव कही उसने हे तो तुम्हारे ये हालत नहीं की है
विजय ......नहीं ठाकुर साहब सूर्य ने तो मेरी जान बच्चा है उन लोगो से अगर वक़्त रहते वो बिच में नहीं आया होता तो सायद अब तक मैं मर चूका होता वही जंगल में किसी जानवर का भोजन बन चूका होता मैं अब तक तो
दादा जी .....ऐसा नहीं लगते है बीटा अच्छे इंसान की मदद वो ऊपर वाला किसी न किसी रूप में कर हे देता है
शिव .....सच कहा आपने पापा
मुझे लगता है अब सूर्य खुद पे कभी करना शिख गया है
दादा जी ......ऐसा तुम्हे लगता है बीटा पैर मुझे नहीं है वो अपने गुस्से को दिशा देना जरूर शिख चूका है जिस से वो अपना नियंतरण नहीं खोता है
दादी जी .....बस भी कीजिये आप सब आपने अबले मशीन होने वाली माँ महाकाली पूजा उत्सव के बारे में क्या सोचा है मुझे लगता है वो कमीना कुछ न कुछ जरूर करेगा इस उत्सव में
दादा जी ......जनता हूँ मैं वो क्या करने वाला है वो सूर्य को बलि के लिया चुनौती देगा
सूरजगढ़ से तो सूर्य के बलि देने पे कोई परेशानी नहीं है पर सक्तिपुर से दुर्जन सिंह इस मोके का फायदा उठाएगा
क्युकी वो जनता है बलि के लिया दी गयी चुनौती सामने वाला असवीकार नहीं कर सकता है
पिछले बार जोरावर ने ये बलि दी पैर इस बार उसने साफ मना कर दिया है
शिव .......पापा सूर्य अभी बच्चा है सूर्यगढ़ की तरफ से मैं बलि चुनौती सवीकार कर लूंगा अगर जरूरत पड़ी तो
( विजय ....सूर्य इनको बच्चा लगता है जबकि वो बाड़े बाड़े बच्चो की पेण्ट गीली होने तक मरता है )
दादा जी ......नहीं तुम ऐसा बिलकुल भी नहीं करोगे
तुम क्या कोई भी सूर्यगढ़ से सूर्य के सिवाय बलि चुनौती सवीकार नहीं करेगा
शालिनी .....पैर पापा सूर्य कैसे ये सब कर पायेगा
दादा जी ........बेटी मैं जनता हूँ तुम एक माँ हो कोई भी माँ अपने बच्चे को खतरे में नहीं देख सकती पैर तुम जानती हो सूर्य को आवर फिर वो पिछले 6 मोनथस से तयारी कर रहा है
कुछ देर बाद सूर्य भी मालिश वगेरा करवा कर निचे आ जाता है
सब मिल कर डिनर करते है सूर्य अपनी माँ के साथ सोने चला जाता है क्युकी सुबह उसे फिर 5 बजे जंगल पंहुचा होता है रोज
दुर्जन को जब अपने भाड़े के आदमियों की नाकामी का पता चला
तो भोखला गया
आदमी 1 ......ठाकुर साहब हम उस को मर कर फाइल छीनने वाले हे थे की पता नहीं कहा से एक लड़का आ गया बिच में आवर हम सब की ये हालत कर दी
दुर्जन सिंह .....कोण लड़का था वो कुछ नाम पता है उसका
आदमी 1.....ठाकुर साहब नाम तो नहीं पता पैर वो सूर्यगढ़ से था उसने कहा भी था की तुम सबको यहाँ सूर्यगढ़ में नहीं आना चाइये था
दुर्जन सिंह .....हो न hi ये परताप ठाकुर का पिता हे होगा
कितने साल का था वो
आदमी 1 .....18 ,19. साल का था ठाकुर साहब बहुत हे ताकतवर आवर बहुत तेज
( दुर्जन सिंह .....अपने मन में ....अगर ये परताप ठाकुर का पिता न हुआ तो इसको मजबूर करके अपने दुसमन के पोते को मारा जा सकता है बलि चुनौती दे कर के मुझे उसका पता करवा न चाइये )
दुर्जन सिंह ... ....तुम्हारे जो आदमी ठीक है कुछ दिन आराम करके उस लड़के की पूरी खबर मुझे लेक दो या फिर उस लड़के को मेरे पास ले कर आवो मुँह मांगी कीमत दूंगा तुम्हे
आदमी 1 खुश होते हुए
आदमी 1......जी ठाकुर साहब हम किसी भी तरह आपके सामने उसको ले आएंगे
दुर्जन सिंह वह से निकल गया अपनी हवेली की आवर अभी जो जगह दुर्जन सिंह अपने काम में ले रहा था वो सक्तिपुर के गुस्से में जो जंगल आता है वह दुर्जन सिंह अपने फार्महाउस को हे अपने गोडाउन के रूप में काम में ले रहा था .........
अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ........
रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ............
विजय ने मिशंस की पूरी जानकारी अपनी पाण्ड्य सर तक पंहुचा दी उनको करीम खान के मरे जाने पे थोड़ी निराशा तो हुए पैर वो खुश भी था की एक आतंकी संगठन का सरगना मारा गया
विजय को कुछ दिन सूरजगढ़ में चूतिया बिताना का कह कर बाकि टीम को बापिस बुला लिया कुछ आर्मी जवान भी घायल हुए थे इस बिच करीम खान के हमले से ........
अब आगे .........
सुबह सूर्य जल्दी उठा आवर अपने दादा जी को सूचित कर
जंगल की तरफ निकल गया अपने रूटीन के अनुसार साध्वी जी से 2 हर ध्यान योग करने के बाद वयोम आवर सकती के साथ अभ्यास करने लगा
समय के साथ साथ सूर्य की शारीरिक आवर मानसिक ताकत बढ़ने लगी साथ हे साध्वी जी सूर्य को वेदो का ज्ञान भी देने लगी
सूर्य कोमल के साथ यही सूर्यगढ़ में स्कूल में एडमिशन करवा चूका था सूर्य के तेज दीमक के बदौलत यहाँ कोमल जो की सूर्य से एक क्लास आगे थी उसके साथ हे सूर्य का एडमिशन कर दिया
इस बिच कुछ वक़्त दुर्जन सिंह अपने सब काळा डंडे बंद कर दिए थे क्युकी आर्मी की उसपे नज़र पद चुकी थी
विजय को गुप्त रूप से अलग हे मिशन दिया गया था जिसके चलते विजय को ार्यं छोड़ ने का नाटक कर सूरजगढ़ में हे रह कर दुर्जन सिंह के खिलाफ साबुत जुटाने का काम करने लगा
इस बिच 6 मंथ का समय बिट गया
एक साम जब सूर्य अपनी ट्रेनिंग पूरी कर जंगल से लौट रहा था तभी कुछ लोगो को किसी का पीछा करते हुए देखता है
सूर्य ......ये कोण लोग है आवर उसका पीछा क्यों कर रहे है
सूर्य भी उनके पीछे लग गया 15 मिंट बाद उन लोगो ने उस लड़के को चारो तरफ से घेर लिया
सूर्य दूर से ये सब देख रहा था कुछ हे देर में जो 6,7 लोग थे वो उस लड़के पे टूट पड़े
सूर्य तेजी से आगे बढ़ कर उसक लड़के को एक आवर कर के उस लड़के आवर उन आदमियों के बिच खड़ा hi जाता है है
सूर्य ......कोण हो तुम आवर क्यों इसको मार रहे हो
आदमी 1....बच्चे चुप चाप निकल जाओ क्यों बे मतलब मरना चाहते हो
सूर्य ......वो सब बाद की बात तुम यहाँ के तो नहीं लगते हो क्यों इसको मरना चाहते हो
आदमी 2 .....भाई क्यों इसकी बकवाश सुन रहे है हम उसके साथ में इसको भी ख़तम कर चलते है यहाँ से
आदमी 1 जो सायद इनका लीडर था
आदमी 1 .....देख बच्चे अभी भी वक़्त है निकल ले यहाँ से
सूर्य आदमी 1 की बात सुनते बिना उस बगल लड़के के पास जाता है
सूर्य .....कोण हो तुम आवर ये लोग तुम्हे क्यों करना चाहते है
लड़का .....मेरा नाम विजय सिंह है ये सरे मुझसे वो फाइल लेना चाहते है जिसमे मैंने इनके बॉस की काली करतुते साबुत के साथ अपने पास राखी है
सूर्य .......विजय सिंह आप किसके लिया काम करते हो
विजय सिंह ....मैं इंडियन आर्मी के लिया काम करता हूँ
सूर्य उन आदमियों की तरफ गुरते हुए
सूर्य .....मैं नहीं जनता तुम लोग किसके लिया आवर क्या काम करते हो पैर सूर्यगढ़ है यहाँ पे तुम्हे नहीं आना चाइये था
सूर्य की बकवाश सुन लीडर अपनी साथियो को बोल्ट्स है उसके साथ साथ उसे भी ख़तम कर दो
सूर्य ....आवो हरामियों बहुत टाइम से तुम जैसे के लिया हे तयारी कर रहा हूँ
देखते हे देखते सूर्य को चारो तरफ से घेर लिया जाता है पैर ये उन सब की सबसे बड़ी गलती थी जिसने वो सब एक बच्चा समाज कर मरने चले थे वो उनका कल था
सूर्य के सामने जो बहुत आता पल भर में जमीं चाटने लगता
किसी की पसलिया टूटी तो किसी की हाथ की हड़िया टूटी
सूर्य ध्यान योग से अपने गुस्से पे लगभग कण्ट्रोल कर चूका था नहीं तो अब तक उन सबकी लाशे बिछा देता
2,4 मिंट बाद सब जब जमीं पे तड़प रहे थे तो सूर्य उनके लीडर आदमी 1 के पास जाता है
सूर्य .....अगर जिन्दा रहना चाहते हो तो सब कुछ सच सच बोलना तुम सब किसके लिया काम करते हो आवर कोण कोण से काम करते हो
आदमी 1 .......हम नहीं बता सकते वार्न्स वो हमें जान से मार डालेगा
विजय .....मैं बताता हूँ ये सब यहाँ के नहीं है सायद आवर इनको दुर्जन सिंह ने बहार से हिलाया होगा मुझे पकड़ने के लिया सायद उसको पता चल गया होगा की मैं उसके खिलाफ साबुत जूता रहा हूँ
सूर्य .......ठीक है तुम सब जा सकते हो पैर याद रहे दुबारा सूर्यगढ़ या सूरजगढ़ के आसपास भी दिखे तो वो दिन तुम सबकी जिंदगी का आखिर दिन होगा
गुंडे लोग गिरते पड़ते वह ने अपनी जान बच्चा कर भाग निकले
विजय सिंह .....क्या मैं अपनी जान बच्चन वाले का नाम जान सकता हूँ
सूर्य .....सूर्य शिव ठाकुर आपको तो बहुत चोट लगी है चलिए मेरा साथ
विजय के मना करने के बाद भी सूर्य विजय को ले कर साध्वी जी के पास पंहुचा
साध्वी जी ....सूर्य क्या हुआ आप वापिस कैसे आ गए आवर आपके साथ में ये कोण है इन्हे जल्दी से अंदर ले चलिए काफी चोट लगी है
सूर्य .....साध्वी जी कुछ लोग इनको मरने के लिया पीछे पड़े हुए थे मैंने देखा तो इनको बच्चा कर यहाँ ले आया
वयोम .....ये तुमने बहुत अच्छा किया सकती जरा साध्वी जी की मदद करना
विजय चारो तरफ देख रहा था
वयोम .....क्या देख रहे हो ऐसे
विजय ........क्या आप किसी तरह के स्कूल चलते हो क्या यहाँ जो इतने अस्त्राय सस्त्र रखे हुए है जैसे कोई पुराने ज़माने का गुरुकुल हो
साध्वी जी .....ऐसा हे कुछ समाज सकते है
कुछ देर बात विजय के सरीर पे ॉडी का लेप लगा कर पट्टी वगेरा करके दर्द के लिया कुछ पिने को दिया
साध्वी जी .....सुबह तक बिलकुल ठीक हो जाओगे तुम
विजय ....जी मेरा नाम विजय है आप सबका बहुत बहुत शुक्रिया
सकती ......सूर्य तुम इन्हे हवेली ले जाओ इनको आराम की सकता जरूरत है कल एक बार आवर अपने साथ ले आना ताकि एक बार आवर ॉडी लगवा लेंगे
सूर्य ......जी जरूर आया दे आज बहुत लेट जो गया हूँ घर के लिया
साध्वी वयोम आवर सकती से विदा ले सूर्य आवर विजय सूर्यगढ़ हवेली की तरफ निकल गए
vijay.........tum उन्हें कैसे जानते हो सूर्य आवर तुमने ऐसे लड़ना कहा से सीखा मैं खुद उनका मुकाबला नहीं कर प् रहा था जबकि तुम इतने आराम से सब की हड़िया तोड़ दी
सूर्य ..........क्युकी मैं ज्यातर उनके साथ हे रहता हूँ बाकि आप कल देख लेना
ऐसे हे बाते करते हुए सूर्य हवेली पहुंच जाता है जहा दादा जी सूर्य की प्रतीक्षा कर रहे थे
दादा जी ......बीटा आज लेट कैसे जो गए आवर ये तुम्हारे साथ में कोण है कुछ जाना पहचाना लग रहा है
विजय आगे बढ़ दादा जी के पेअर छूटा है
विजय ......ठाकुर साहब मैं आपके दोस्त सूरजगढ़ के राणा जी विक्रम सिंह के दोस्त का लड़का हूँ
दादा जी ......तुम मनोहर सिंह के बेटे तो नहीं हो क्या नाम था हम्म याद आया विजय सिंह यही नाम है न तुम्हारा
विजय .....जी ठाकुर साहब
सूर्य .....दादा जी अंदर चले इनको चोट लगी है इनको आराम करना है
दादा जी .....है है चलो
सूर्य जब अंदर पंहुचा तो सब उसकी हे रह देख रहे थे
शालिनी को देखते हे विजय के मुँह से दीदी निकल गया
शालिनी .....कोण हो तुम जो मुझे दीदी कह रहे हो
विजय सिंह शालिनी के पेअर छू कर
विजय .....दीदी मैं आपके मनोहर सिंह चाचा का बीटा विजय हूँ आपने बहुत साल बाद देखा है मुझे तो पहचाना नहीं होगा
शालिनी ......तुम विजु हो क्या अब तो काफी बड़े हो गए पैर तुम्हे ये चोट कैसे लगी आवर सूर्य कहा मिल गया तुम्हे
विजय .....कुछ नहीं दीदी कुछ लोगो से जगदे में चोट लग गई
शालिनी .....सूर्य बीटा ये तुम्हारे छोटे मां है विजय
सूर्य .....जी माँ
सूर्य विजय के पेअर चूसने लगा तो विजय ने सूर्य को गले से लगा लिया
सूर्य आप लोग बाते करो मैं नाना कर अभी आता हूँ
दादी जी .... बीटा तुम नाना लो मैं रुक्मणि को तुम्हारी मालिश के लिया भेजती हूँ
सूर्य .....जी दादी जी
सूर्य वह से चला जाता है
नहाने के लिया
पीछे से हॉल में
विजय ......दीदी सूर्य कितने साल का है
शालिनी ......क्यों क्या हुआ जो तुम सूर्य की उम्र पूछ रहे हो वैसे सूर्य को अभी क्सक्सक्स व साल लगा है
विजय .....क्या सिर्फ क्सक्सक्स साल का सूर्य को देख कर तो नहीं लगता की ये क्सक्सक्स साल का है
शिव .....ऐसा क्या कर दिया अब मेरे शेर ने सेल साहब जो आप चौंक रहे है
विजय शिव की बात सुन समाज जाता है की यही शालिनी के पति है महेंद्र को वो पहले जनता था
विजय .....परनाम जीजा श्री ....ऐसा कुछ नहीं है बस क्सक्सक्स साल का लगता नहीं है न इस लिया
दादा जी ......बीटा जी बात को गुमओ नहीं जो पूछना है साफ साफ पूछो
विजय .......वो सूर्य ने कही से ट्रेनिंग ले है क्या फाइट करने की
दादा जी ......तो तुमने भी देख लिया उसका तांडव कही उसने हे तो तुम्हारे ये हालत नहीं की है
विजय ......नहीं ठाकुर साहब सूर्य ने तो मेरी जान बच्चा है उन लोगो से अगर वक़्त रहते वो बिच में नहीं आया होता तो सायद अब तक मैं मर चूका होता वही जंगल में किसी जानवर का भोजन बन चूका होता मैं अब तक तो
दादा जी .....ऐसा नहीं लगते है बीटा अच्छे इंसान की मदद वो ऊपर वाला किसी न किसी रूप में कर हे देता है
शिव .....सच कहा आपने पापा
मुझे लगता है अब सूर्य खुद पे कभी करना शिख गया है
दादा जी ......ऐसा तुम्हे लगता है बीटा पैर मुझे नहीं है वो अपने गुस्से को दिशा देना जरूर शिख चूका है जिस से वो अपना नियंतरण नहीं खोता है
दादी जी .....बस भी कीजिये आप सब आपने अबले मशीन होने वाली माँ महाकाली पूजा उत्सव के बारे में क्या सोचा है मुझे लगता है वो कमीना कुछ न कुछ जरूर करेगा इस उत्सव में
दादा जी ......जनता हूँ मैं वो क्या करने वाला है वो सूर्य को बलि के लिया चुनौती देगा
सूरजगढ़ से तो सूर्य के बलि देने पे कोई परेशानी नहीं है पर सक्तिपुर से दुर्जन सिंह इस मोके का फायदा उठाएगा
क्युकी वो जनता है बलि के लिया दी गयी चुनौती सामने वाला असवीकार नहीं कर सकता है
पिछले बार जोरावर ने ये बलि दी पैर इस बार उसने साफ मना कर दिया है
शिव .......पापा सूर्य अभी बच्चा है सूर्यगढ़ की तरफ से मैं बलि चुनौती सवीकार कर लूंगा अगर जरूरत पड़ी तो
( विजय ....सूर्य इनको बच्चा लगता है जबकि वो बाड़े बाड़े बच्चो की पेण्ट गीली होने तक मरता है )
दादा जी ......नहीं तुम ऐसा बिलकुल भी नहीं करोगे
तुम क्या कोई भी सूर्यगढ़ से सूर्य के सिवाय बलि चुनौती सवीकार नहीं करेगा
शालिनी .....पैर पापा सूर्य कैसे ये सब कर पायेगा
दादा जी ........बेटी मैं जनता हूँ तुम एक माँ हो कोई भी माँ अपने बच्चे को खतरे में नहीं देख सकती पैर तुम जानती हो सूर्य को आवर फिर वो पिछले 6 मोनथस से तयारी कर रहा है
कुछ देर बाद सूर्य भी मालिश वगेरा करवा कर निचे आ जाता है
सब मिल कर डिनर करते है सूर्य अपनी माँ के साथ सोने चला जाता है क्युकी सुबह उसे फिर 5 बजे जंगल पंहुचा होता है रोज
दुर्जन को जब अपने भाड़े के आदमियों की नाकामी का पता चला
तो भोखला गया
आदमी 1 ......ठाकुर साहब हम उस को मर कर फाइल छीनने वाले हे थे की पता नहीं कहा से एक लड़का आ गया बिच में आवर हम सब की ये हालत कर दी
दुर्जन सिंह .....कोण लड़का था वो कुछ नाम पता है उसका
आदमी 1.....ठाकुर साहब नाम तो नहीं पता पैर वो सूर्यगढ़ से था उसने कहा भी था की तुम सबको यहाँ सूर्यगढ़ में नहीं आना चाइये था
दुर्जन सिंह .....हो न hi ये परताप ठाकुर का पिता हे होगा
कितने साल का था वो
आदमी 1 .....18 ,19. साल का था ठाकुर साहब बहुत हे ताकतवर आवर बहुत तेज
( दुर्जन सिंह .....अपने मन में ....अगर ये परताप ठाकुर का पिता न हुआ तो इसको मजबूर करके अपने दुसमन के पोते को मारा जा सकता है बलि चुनौती दे कर के मुझे उसका पता करवा न चाइये )
दुर्जन सिंह ... ....तुम्हारे जो आदमी ठीक है कुछ दिन आराम करके उस लड़के की पूरी खबर मुझे लेक दो या फिर उस लड़के को मेरे पास ले कर आवो मुँह मांगी कीमत दूंगा तुम्हे
आदमी 1 खुश होते हुए
आदमी 1......जी ठाकुर साहब हम किसी भी तरह आपके सामने उसको ले आएंगे
दुर्जन सिंह वह से निकल गया अपनी हवेली की आवर अभी जो जगह दुर्जन सिंह अपने काम में ले रहा था वो सक्तिपुर के गुस्से में जो जंगल आता है वह दुर्जन सिंह अपने फार्महाउस को हे अपने गोडाउन के रूप में काम में ले रहा था .........
अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ........
रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ............








