Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 30 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १६२

कहातो लता बहुतही सर्मसार होगइ.. ओर लखनकी ओर तीरछी नजरोसे देखते हसती रही.. लेकीन उनको पता नही चला.. की डबल मींनींग बातो ही बातोमे दोनोके बीच क्या बाते होगइ.. रमाने बडीही सीफततासे लखनका प्यार कबुल करनेकी बात लखनको कहेदी थी.. तो इस बातसे लखनभी बहुत खुस होगया.. बस अब उनको इन्तजार था तो सीर्फ रमाके फोनका.. ओर सब लोग खाना खाते रहे.. तभी....अब आगे

तब लखन रमाकी ओर मुस्कुराते आंखोके इसारेसे उसे फोन करनेको कहेता हे.. तो रमाभी आंखोके इसारोसे उसे हां कहेती हे.. दोनोही खाना खाते आंखोकी भासामे बाते करते रहे.. आज रमा बहुत खुस हो रहीथी.. जैसे उनकी बरसोकी रइस होनेकी मनकी मुराद पुरी होते नजर आइ हो.. फीर सबने खाना खालीया तो लता उनकी बेग लेने रुममे चली गइ ओर बेग लेकर फटाफट बहार आगइ..

तभी लखन लता सबके पैर छुने लगे.. तब लता आगे थी.. तो लखन उनके पीछे पीछे पैर छुते आगे बढता गया.. जब लखन रमाके पास आया तो उनकी ओर कातील नजरोसे मुस्कुराते उनके पैर छुनेके लीये जुक गया.. तो रमाने लखनको अपने पैर छुने नही दीया.. ओर जटसे लखनको कंधेसे पकडकर खडा करते उनको हग करलीया.. ओर धीरेसे कानमे केह दीया..

रमा : (धीरेसे कानमे) लखनजी.. अब आपकी जगाह मेरे पैरोमे नही हे.. कही ओर हे.. हें..हें..हें..

लखन : (धीरेसे) जी भाभी.. मुजे आपके फोनका इन्तजार रहेगा..

कहेते लखन लताके हाथसे बेग लेकर आगे नीकल गया.. तो रमा सरला भानु सबलोग लताको दरवाजे तक छोडने आगये.. जब दोनो कारमे बैठ गये तबभी रमा लखनकी ओर देखते मुस्कुरा रही थी.. ओर हाथ हीलाते लखनको बाय करने लगी.. ओर लखन कार लेकर नीकल गया.. तो भानु रमा ओर सरला तीनो घरके अंदर चले गये.. तब लता ओर लखन बाते करते अपने घरकी ओर जा रहेथे..

लता : (थोडे गुस्सेसे) जानु.. ये भाभी भीनां.. समजती ही नही थी.. उनको अभी खानेके लीये जीद करनेकी क्या जरुरत थी..? ओर हम उसे मनाभी तो नही कर सकते.. उसे क्या कहेती..? की तुम्हाली लाडली धिरेनके घर क्या गुल खीला रही हे.. लखन आप कारको सीधे वही धिरेनके घर जानेदो.. इस बारेमे मेरी भाइसे बात होगइ हे.. हमे नीलुको लेकर सीधे हमारे घरपे ही आना हे..

लखन : (मनमे खुस होते) लता.. क्या सचमे भाइसे बात होगइ..? तो फीर हमे जल्दीसे धिरेनके घर जाना होगा.. नीलु कलसे उनके साथ हे.. पता नही कमीनेने नीलुके साथ क्या क्या कीया होगा.. लता.. भाइने अभी दोनोको कुछ भी कहेनेको मना कीया हे.. तो तुम अभी नीलु या धिरेनको गुस्सेमे कुछभी मत कहेना.. अब हम नीलुको हमारे साथ ही रखेगे.. उनको स्कुलमेभी हम दोनोमेसे कोइ अ‍ेक छोडने लेने जायेगे..

लता : (सरमाते) ठीक हे जानु.. मुजेतो उनको छोडने लेने पैदलही जाना पडेगा.. क्या उनका स्कुल पास ही हेनां..? मेने नही देखा..

लखन : (तेजीसे कार चलाते) हां लता.. हम वहा जातेही अ‍ेक स्कुटर लेलेगे.. तुम सीख लेना.. तो नीलुको उसीमे छोडने लेने जाना.. ओर अब सहेरमे जा रहे हे.. तो हर वक्त तो मे तेरे साथ नही आ सकता.. इसीलीये तुम स्कुटर सीखले.. पुनोदीदीको आता हे.. वो या फीर मे तुजे सीखा देगे..

लता : (सरमाते हसते) ठीक हे.. जानु.. आपही सीखा देना.. देखनां.. मे गीरुगीतो नही..? वरना कही पैर बैर टुट गयातो आपको ही मेरी सेवा करनी पडेगी.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते) अरे कुछ नही होगा.. मे हुनां..? तु क्यु चीन्ता करती हे..? जबतक तुजे स्कुटर चलाना नही आजाता.. तबतक मे नीलुको छोडने ओर लेने जाउगा.. फीरतो कोइ दिकत नही हेनां..?

लता : (सरमाते गाल चुमते) नही.. हें..हें..हें..

दोनोही अ‍ैसी बाते करते धिरेनके गांवकी ओर जा रहेथे.. तब वहा धिरेनभी सुबह चाइ नास्ता करके नीलमको लेकर सोफेपे उनके साथ मस्तीया करते प्यार कर रहाथा.. नीलमने सीर्फ ट्रान्सर्फन्ट टोपही पहेना था.. वो नीचेसे बीलकुल नंगी थी.. दोनोही बीना डरके बीन्दास्त अ‍ेक दुसरेके पार्टके साथ खेलते प्यार कर रहेथे.. नीलमभी अब बीना सरम धिरेनके लंडको पकडते सहेलाने लगती.. ओर उनपे जुकते कीस करती..

तो धिरेनभी कभी नीलुके संतरे जैसे बुब्स चुमता.. तो कभी उनके होठोको चुमते अ‍ेक हाथसे उनकी चुतको सहेलाता.. तब नीलम मदहोस होते सीसकारीया करती.. ओर धिरेनके बालोको सहेलाती.. धीरे धीरे करते दोनोके उपर कामवासना हावी होने लगी.. तभी धिरेनने नीलमको सोफेके कोनेपे बीठा दीया.. ओर खुदभी सोफेपे उल्टा लेटकर नीलमकी चुतपे मुह लगा देता हे..

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ओर नीलमकी चुतको चाटते अ‍ेक हाथसे टोपको नीचा करके उनके बुब्सको थामलेता हे.. तब नीलम मदहोस होते सीसकारीया करने लगी.. धिरेन नीलमकी चुतको चाटते चाटते अपनी जीभ नीकालकर चुतमे घुसा देता हे.. ओर नीलमके चुतके दानेको अपनी जीभसे खरोदने लगता हे.. तब नीलम सातवे आसमानपे चली गइ.. उसे धिरेनकी इस हरकतने पुरी तराह पागल ओर मदहोस कर दीया..

वो धिरेनके सरको सहेलाते अपना मुह इधर उधर करते छटपटाने लगी.. वो आधी आंख चडाते पुरी तराह वासनाके नसेमे कमरको उछालने लगी.. उनकी चुतसे लगातार तरल पदार्थका रीसाव होने लगा.. तो धिरेन उसे चाट चाटके साफ करदेता था.. उनको नीलमकी चुतका स्वाद बहुतही अच्छा लगता था.. तभी नीलम धिरेनकी ओर वासना भरी नजरोसे देखने लगी.. ओर धिरेनके सरके बालोको खीचते अपने उपर चडाने लगी..
 
तब धिरेन समज गयाकी अब नीलम पुरी तराह मदहोस होचुकी हे.. ओर चुदवानेके लीये रेडी हे.. तब धिरेन सोफेसे उतर गया ओर अपने कपडे फटाफट नीकालने लगा.. तब नीलमभी समज गइ.. ओर वो धिरेनके खडे ओर सख्त लंडकी ओर वासना भरी नजरोसे देखते मुस्कुराते हुअ‍े सोफेपे अपना पैर फैलाकर पीठके बल लेट गइ.. तभी धिरेन उनके दोनो पैरको बीच सोफेपे घुटनोके बल बैठ गया.. ओर अपना लंड मुठीमे पकडकर सहेलाते नीलमकी चुतपे रगडने लगा..

धिरेन : (लंडको चुतपे घीसते धीरेसे) नीलु.. क्या डालदु अंदर..? हंम..?

नीलम : (सरमाते धीरेसे) हंम.. जानु.. थोडा धीरेसे.. जल्दी डालदो.. नही रहा जाता.. बहुत मन कर रहा हे..

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कहेते नीलमने अपना हाथ नीचे लेगइ.. तब धिरेन लंडको चुतपे घीस रहाथा.. तो नीलमने धिरेनके लंडको हाथ लगाकर अपनी चुतके लव होलमे पुस करते सपोर्ट कीया.. ओर धिरेनका छोटा लंड नीलमकी चुतमे घुस गया.. तब नीलम आंधी आंख चडाते मदहोस होगइ.. जैसे लंडको चुतमे लेकर उसे बडा सुकुन मीला हो.. वो आंख बंध करते राहतकी सांस लेते धीरे धीरे अपनी कमरको आगे पीछे करने लगी..

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तो धिरेनभी पैरोके बीच घुटनोके बल बैठकर धीरे धीरे नीलमके बालोको सही करते चोदने लगा.. इस बार नीलम धिरेनको चुदवानेमे पुरा साथ दे रहीथी.. नीलम धिरेनसे अ‍ैसे चुदवाने लगी जैसे उनकी बीवी हो.. अब उसे धिरेनसे कोइ सरम नही आ रहीथी.. वो धीरेनकी ओर लगातार कामुक नजरोसे देखते धिरेनके हर सोटसे अपनी कमर तालमेलमे हीलाने लगी.. तब बीच बीचमे धिरेनभी जुकते उनके होठोको चुम लेताथा..

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धिरेनने चोदते चोदते अपने दोनो हाथ नीलमके बुब्सपे रखते उनको थाम लेता हे.. तब नीलम ओर कामुक हो गइ.. ओर वासनाभरी नजरोसे धिरेनकी ओर देखते उनके नीतंबको पीछेसे पकड लेती हे.. ओर अपनी चुतकी ओर दबाव बनाते धिरेनको ओर जोरोसे चोदनेके लीये कहेती हे.. तब धिरेनभी जोरोसे नीलमको चोदने लगा तब नीलम छटपटाते अपना मुह इधर उधर करने लगी..

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तब कुछही देरमे दोनोके बीच धुआधार चुदाइ होने लगी.. थोडीही देरकी चुदाइके बाद नीलमका सरीर अकडने लगा.. ओर वो धिरेनको खीचते अपने उपर जुका देती हे.. ओर उनके साथ होठ मीलाते लीपलोक करलेती हे.. तब धिरेनभी अपनी मंजीलके बहुत करीब था.. ओर वोभी लीपलोक करते जोरोसे अपनी कमरको हीलाने लगा.. तब कुछही देरमे धिरेनके लंडसे उनका लावा फुट पडा.. ओर नीलमकी चुतको भरने लगा..

तब नीलमभी धिरेनका विर्य अपनी चुतमे महेसुस करते कांपने लगी.. ओर धिरेनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचते अपनी कमरको जटके देने लगी.. ओर जडते धिरेनके लंडको भीगोने लगी.. धिरेनको अपने लंडपे नीलम गरम कामरस महेसुस हुआ.. ओर वो जोरोसे नीलमके बुब्सको मसलते नीलमके होठोको चुसने लगा.. तो कुछ देरके लीयेतो नीलमकोभी अपने होठपे जलन होने लगी..

ओर उसने अपना मुह घुमाते धिरेनके होठोसे अपना होठ छुडा लीया.. ओर धिरेनकी पीठ सहेलाती रही.. धिरेन नीलमके सीनेपे बुब्सपे सर रखके ढेर होगया.. ओर नीलमके बुब्सकी नीपलको अपने मुहमे लेकर चुमने लगा.. तो नीलम बहुतही सरमाइ.. ओर धिरेनके बालोको सहेलाने लगी.. दोनोही अ‍ेक दुसरसे संतुस्ट हो चुके थे.. कुछही देरमे धिरेन नीलमके उपरसे खडा होगया.. तो दोनोका कामरस नीलमकी चुतसे सोफेपे टपकने लगा..

तो नीलम जटसे सोफेपे बैठ गइ.. ओर साइडमे पहेलेसेही रखे अपनी नीकरसे चुतको साफ करने लगी.. तब धिरेनभी मुस्कुराते उनके सामने खडा होगया तो नीलम समज गइ.. ओर बहुतही सर्मसार होते मुस्कुराकर धिरेनके लंडको भी साफ करने लगी.. तो धिरेन हसने लगा.. ओर नीलमके गले ओर कमरमे हाथ डालकर नीलमको अपनी गोदमे उठालीया.. ओर सीडीया चडते उपरकी मंजीलपे बाते करते अपने रुममे चला गया..

धिरेन : (मुस्कुराते) नीलु.. सच बताना.. क्या तुजे मजा आ रहा हे..?

नीलम : (सरमाते सीनेमे सीनेमे सर छुपाते मुस्कुराकर) हंम.. बहुत.. जानु सचमे बहुत मजा आ रहा हे..

धिरेन : (हसते) नीलु.. अबतो हप्तेमे दो दिन यही होने वाला हे.. मे तुजे हर सेटरडे सन्डेको हमारे घर लेजाउगा..

नीलम : (सरमाते मुस्कुराते) जानु.. लेकीन महीनेमे अ‍ेक बार मुजे मम्मी पापाके पासभी जाना होगा.. वरना उनको मुजपे सक होजायेगा.. खास करके लतादीदी ओर भावना मम्मीको..

धिरेन : (बेडपे सुलाते) नीलु.. अब घर मीलतेही मे तुमसे जल्दसे जल्द सादी करना चाहता हु.. अब मे तेरे बीना नही रेह सकता.. क्या तुम सादीके लीये रेडीतो होनां..?

नीलम : (सरमाते धीरेसे) हंम.. जानु.. लेकीन हम सादी करेगे कहा..? आपने कुछ तैय कीया हे..?

धिरेन : (नीलुके पास लेटते) नीलु.. तैयतो नही कीया.. लेकीन बहुतही जल्द मे सब तैयारीया करलुगा.. अब तुम अ‍ेक बार घरपे जाओतो अपना सब डोक्युमेन्ट लेकर आना.. कहेना वहा स्कुलमे जरुरत हे..

नीलम : (सरमाते धीरेसे) जानु.. वो मेरे पासही हे.. मेने होस्टेलमे आनेसे पहेलेही सब लेलीयाथा.. मुजे पताथा इनकी हमे कभीभी जरुरत पड सकती हे.. तो लेलीयाथा..

धिरेन : (हसते) हंम.. वेरी स्मार्ट.. चलो अच्छा हे.. अब देखते हे भैया कब मकानका सौदा करते हे..

दोनोही बाते करते अ‍ेक दुसरेको अपनी बाहोमे भरलेते हे.. ओर बाते करते रहेते हे.. तब बीच बीचमे धिरेन नीलमके होठोको चुम लेता.. तो कभी नीलमभी सामनेसे धिरेनके होठोको चुम लेती.. अब वो बीलकुल धिरेनकी बीवीकी तराह धिरेनके साथ बीहेव कर रहीथी.. जैसे उनकी धिरेनके साथ नइ नइ सादी हुइ हो.. इधर नीलम धिरेनके साथ घर बसानेका सपना देख रहीथी..
 
तो दुसरी ओर उनकी मां रमा नीलमके बारेमे कुछ ओर ही सोच रहीथी.. ओर वो वैसेभी लखनको मनही मन चाहने लगीथी.. क्युकी जीस तराह भानु अब वापस भावनाकी ओर ढल रहाथा.. ओर उसे पहेलेकी तराह भानु संतुस्टभी नही करपा रहाथा.. जीस वजहसे रमा अब खुलकर लखनकी ओर ढलने लगीथी.. क्युकी अब अ‍ेक लखनही था.. जो उसे हासील करके वो अपनी अ‍ैसो आरामकी जींदगी जी सकती थी..

जीसके लीये रमाके दिमागमे घोडेकी तराह नये नये प्लान दोड रहेथे.. ओर आखीर अ‍ेक प्लान उनके दिमागमे बस गया.. ओर उसी प्लानके हिसाबसे आगे बढनेकी ठानली.. वो नीलमकी सादी लखनके साथ करवाके नीलमके जरीये वो हवेलीकी बहुत सारी जमीन जायदाद हासील करके अ‍ेक रइजकी तराह अपनी जींदगी बीताना चाहती थी.. जीसके लीये वो कीसीभी हद तक जानेका मन बना चुकीथी..

तो इधर धिरेनके घरपे जीस वक्त दोनो चुदाइ करके बाते कर रहेथे उसी वक्त गांवमे लखन पुनमके साथ बाते करते पुनको भाभी भाभी करते उनकी मस्तीया कर रहाथा.. फीर वो जागृतीके पास चला गया ओर वहा उनकी जमकर चुदाइ करता हे.. फीर वो अपने खेतोपे चला जाता हे.. इसी बीच दो घंटेका वक्त बीत चुकाथा.. तब वहा अ‍ेक बार फीर धिरेन ओर नीलम बाते ओर अ‍ेक दुसरेके साथ छेडखानी करते गरम होते उतेजीत होगये थे..

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धिरेन बेडके बीच बैठ गया ओर उसने नीलमको भी अपनी गोदमे बीठालीया.. तो नीलम धिरेनकी कमरके दोनो ओर पैर रखके बैठ गइ.. ओर दोनो हाथ धिरेनके गलेमे रखते उनके तनसे चीपक गइ.. ओर अपने दोनो उरोज धिरेनके सीनेपे रगडने लगी.. तब धिरेनका लंड अ‍ेक बार फीरसे तनके खडा होगया था.. ओर नीलमकी चुतपे अंदर जानेके लीये दस्तक देने लगा.. तब नीलमने थोडीसी अपनी कमर उची करली..

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ओर धिरेनके लंडको अपनी चुतमे जानेके लीये रास्ता देने लगी.. फीरभी लंडको चुतमे जानेका रास्ता नही मीला.. तो नीलम सरमाते लंडको अपनी चुतपे अ‍ेडजेस्ट कर देती हे.. ओर धीरेसे वापस धिरेनकी गोदमे बैठ जाती हे.. तो धिरेनका पुरा लंड नीलमकी चुतकी गीरफ्तमे आगया.. ओर धिरेनने नीलमको अपने तनसे चीपका लीया ओर दोनो अ‍ेक दुसरेके होठोको चुमने लगे.. तब धिरेन नीलमके बुब्सको दबाने लगा..

तो नीलम बहुतही उतेजीत हो चुकीथी.. ओर वो अपनी कमरको आगे पीछे करते हीलाने लगी.. कल सामसे अबतक धिरेनने नीलमको पांच बार चोद लीयाथा.. तो नीलम इस मामलेके काफी कुछ सीख चुकीथी.. वो अब धिरेनके साथ अ‍ैसे चुदाइ कर रहीथी जैसे अपना हनीमुन मनाने आइ हो.. दोनोही अ‍ेक दुसरेको आंलींगन करते चुदाइमे मसगुल होगये थे.. नीलम बहुतही कामुक तरीकेसे धिरनसे चुदाइ कर रहीथी..

धिरेन : (मदहोसीमे होंठ चुमते) नीलु.. मजा आ रहा हे..? हंम.. आइ लव यु..

नीलम : (गालको चुमते कामुक्तासे) हंम.. लव यु टु.. जानु.. आप तो मुजे जनतकी सेर करवा रहे हो.. बहुत मजा आ रहा हे.. कास आपकी सादीसे पहेले ही हम मील जाते.. तो मे आपको पुनोददीसे सादी ही नही करने देती..

धिरेन : (मदहोसीमे बुब्स चुमते) नीलु.. हम मील ही गयेथे.. लेकीन अ‍ेन्ट वक्तपे भावनादीदीने आकर कबाडा करदीया.. हमारा सारा खेल बीगाड दीया.. वरना उसी दिन हम दोनो अ‍ेक होजाते..

नीलम : (मदहोसीमे) सीसससस.. आइ.. जानु थोडा धीरेसे दबाओना.. दर्द होता हे..

धिरेन : (अपनी कमर हीलाते चोदते) नीलु.. तेरे दुधु क्या मस्त हे.. जीतो चाहता हे इसमे मे दुध नीकालु.. तुजे पता हेनां.. इनमे कैसे दुध नीकलता हे..? हंम..

नीलम : (सरमके मारे गलेमे मुह डालते) हंम.. मुजे पता हे सब.. लेकीन जोभी करना हे हमारी सादीके बाद.. हंम..? फीर आप जोभी चाहो करलेना.. मे मना नही करुगी.. क्या आपका बहुत मन कर रहा हे..? हंम..?

धिरेन : (गलेको चुमते कमर हीलाते) हां नीलु.. मे चाहता हु हमारा भी अ‍ेक बच्चा हो.. क्या इसके लीये तुम रेडी होनां..?

नीलम : (बहुतही सर्मसार होते धीरेसे) हंम.. लेकीन अब हमारी सादीके बाद.. जानु.. मे अब बैठे बैठे थक गइ हु.. क्या मे लेट जाउ..? हंम.. आप मेरे उपर आके करलेना..

धिरेन : (नीलमको बेडपे लीटाते) चल आजा.. मेरी रानी.. आज तो मजा आगया..

कहेते धिरेन नीलमकल अ‍ैसेही पीठके बल लीटा देता हे.. ओर खुद उनके उपर चड जाता हे तो नीलमने फीरसे लंडको चुतका रास्ता दीखाते पुस करदीया.. तभी धिरेनने अपनी कमरको पुस करते पुरा लंड चुतमे घुसा दीया ओर नीलमके होठोको अपनी गीरफ्तमे लेते कमर हीलाते नीलमको चोदने लगा.. तब उनको पता नही थाकी लखन ओर लता उनके दरवाजे तक आगये हे.. ओर दरवाजा खटखटा रहे हे.. दोनोही उपरकी मंजीलपे कमरेके अंदर चुदाइमे मसगुल थे..

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तब उनको दरवाजेके दस्तककी आवाज नही सुनाइ दे रहीथी.. तब लता थोडी परेसान होगइ.. ओर लखनकी ओर देखने लगी.. तो लखन तीन कदम पीछे हटकर घरकी ओर देखने लगा.. ओर लताको दो मीनीट ठहेरनेका इसारा करते घरके पीछे चला गया.. तो वहा उसे विन्डोके छजे दिखाइ दिये.. ओर लखनके चहेरेपे कातील स्माइल आगइ.. वो धीरेसे विन्डोके छजेपे चडने लगा.. ओर अ‍ेक अ‍ेक छजा चडते उपरकी मंजीलकी विन्डो तक पहोंच गया..

अ‍ेक दो खीडकीमे जाकते जैसेही धिरेनके रुमकी खीडकीके पास पहोंचा ओर अंदर जांकते देखने लगा.. तो देखतेही उनके होंस उड गये.. अंदर धिरेन नीलमके उपर चडके उनकी चुदाइ कर रहाथा.. उनको धिरेनपे बहुत खुनस आने लगा.. लेकीन वो संयमसे काम लेना चाहता था.. तभी उनके दिमागमे अ‍ेक आइडीया आया.. तो लखन कातील मुस्कान करने लगा.. ओर उसने फटाफट अपना मोबाइल नीकाल लीया..

लखन चुपकेसे धिरेन ओर नीलमकी चुदाइकी विडीयो क्लीप बनाने लगा.. तब अंदरकी ओर धिरेन ओर नीलमके बीच घमासान चुदाइका युध्ध चल रहाथा दोनोही अपनी मंजीलके करीब थे.. धिरेनने अपना लंड नीलमकी चुतमे जडतक घुसा दीया.. ओर होले होले अपनी कमरको जटके देते नीलमकी चुतको भरने लगा.. तब नीलमभी साथमे जडते मदहोसीमे धिरेनको लीपलोक करते उनकी पीठको सहेलाती रही..
 
जब दोनो सांत होगये.. तब लखन फोन बंध करके वहासे नीचे उतरने लगा.. वो इस विडोयोके जरीये बहुत कुछ हासील कर सकता था.. ओर उसने ये विडीयो लताकोभी नही दीखानेका फैसला करलीया.. ओर वो धीरे धीरे उतरके नीचे आगया.. ओर आगेकी ओर लताके पास पहोंच गया.. तब लता उनकी ओर उत्सुक्तासे सवालीया नजरोसे देखने लगी.. तो लखनने जुठ मुठका थोडा परेसानी वाला मुह बनालीया.. तो..

लता : (परेसान होते) लखन.. क्या हुआ..? प्लीज.. बताइअ‍ेना.. क्या वो अंदर हे..? जल्दी बताइअ‍ेनां..

लखन : (थोडी चीन्तासे परेसान होते) हां लता.. दोनोही उपरकी मंजीलपे धिरेनके कमरेमे हे..

लता : (परेसान होते उत्सुक्तासे) लखन.. वहा दोनो क्या कर रहे हे..? बताइअ‍ेनां..

लखन : (धीरेसे) लता.. हमे जीस बातका डर था.. वोही.. दोनोही अपने कमरेमे चुदाइ कर रहे हे..

लता : (परेसान होते दरवाजेकी ओर जाते) मुजे पताथा.. ठरकी कहीका कमीना.. अपनी बीवीको मायके भेजकर इसी लीये तो नीलुको इधर लेके आया हे.. कमीनेको छोडुगी नही.. ओर वो कुतीको भी देख लुगी.. ठरकी कहीकी..

कहेते लता जोर जोरसे दरवाजेको ठोकने लगी.. तब उपरकी मंजीलपे धिरेनभी नीलमके उपर सांत होकर पडाथा.. ओर नीलमभी सांत होकर धिरेनके बालोको सहेला रहीथी.. तब धिरेनको अ‍ैसा लगाकी नीचे कोइ उनके दरवाजेको खटखटा रहा हे.. तो वो गभराके जटसे खडा होगया.. ओर नीलमकी ओर देखने लगा.. तब नीलमनेभी दरवाजेकी दस्तककी आवाज सुनली.. ओर वोभी गभराते फटाफट बेडसे उतर गइ.. तब..

धिरेन : नीलु.. लगता हे कोइ आया हे.. तुक फटाफट बाथरुममे चली जाओ ओर अपने कपडे पहेनलो..

नीलम : (परेसान होते) जानु.. इस वक्त कौन होगा..? आप नीचे जाइअ‍ेनां.. अगर कोइ हे.. तो उनको नीचेसे ही वीदा करदो.. मे कपडे पहेन लेती हु.. आपभी कपडे पहेनलो.. फीर नीचे जाना.. जाइअ‍े..

कहेते नीलम अपने कपडे लेकर दोडकर बाथरुममे घुस गइ.. ओर फटाफट अपनी चुतको साफ करके कपडे पहेनने लगी.. तबतक धिरेनने भी फटाफट अपने कपडे पहेन लीये.. वो सीर्फ सोट्र्स ओर टीसर्ट पहेनकर अपने रुमका दरवाजा बंध करके नीचे चला गया.. तबभी लता जोरोसे दरवाजा खटखटाये जा रहीथी.. तो धिरेन दोड पडा.. ओर फटाफट दरवाजा खोल देता हे.. तो बहार लता ओर लखनको देखतेही धिरेनकी सीटीबीटी गुल होगइ..

लता : (धिरेनको धका देते अंदर आतेही जोरोसे चीलाते) नीलु.. नीलु.. कहा हो तुम.. बहार नीकलो.. (धिरेनकी ओर देखते) धिरेन.. कहा हे नीलु.. बोलो.. वरना अभी भावना भाभीको फोन करती हु..

इतना सुनतेही धिरेनकी गांड फटने लगी.. ओर वो गभराते उंगलीसे उपरकी मंजीलकी ओर इसारा करते लताको मुह फाडते देखता ही रेह गया.. तब लता फटाफट लगभग दोडते उपरकी मंजीलपे चली गइ.. तब धिरेन अबभी उनको मुह फाडके देख रहाथा.. तो लखन धिरेनकी हालत देखकर मनमे हसने लगा.. अब तो लखनभी इस मामलेमे सातीर दिमाग वाला हो गयाथा.. धिरेन आस्चर्यसे देखते मुडकर लखनकी ओर देखने लगा.. तो..

लखन : (मुस्कुराते जुठ बोलते धीरेसे) जीजु.. मुजे कुछ नही मालुम.. येतो रमाभाभी नीलमको लेकर थोडी परेसान थी.. वो उनसे बात करना चाहती थी तो भावना भाभीने होस्टेलमे फोन कीयाथा.. तो पता चला वो आपके साथ इधर आइ हे.. तो लताभी उधर ही थी.. उसने मुजे फोन करके बुलाया.. ओर हम इधर आगये..

धिरेन : (थोडा गीडगीडाते) लखनभैया.. प्लीज.. इस बारेमे पुनम या कीसी ओरको कुछ मत बताना.. वरना मेरा घर टुट जायेगा.. प्लीज.. ओर लताभाभीको भी आप समजा देना.. अभी बहुत गुस्सेमे लग रही हे..

लखन : (मुस्कुराते कंधेपे हाथ रखते) जीजु.. चीन्ता मत करो.. ये सबतो होता रहेता हे.. अ‍ैसी बातेभी कोइ बताइ जाती हे..? मे हुनां..? सब सम्हाल लुगा.. ये सब तो चलता ही रहेता हे.. आप फीकर मत करो.. इसेही मोज मस्ती कहेते हे.. वैसे कैसी लगी मेरी मेरी साली.. हें..हें..हें..

धिरेन : (सरमाते मुस्कुराते थोडी राहतकी सांस लेते) क्या लखन भैया आपभी..? वैसे थेन्क्स लखन भैया.. पता नही अब भावना दीदी.. मेरा क्या हसर करेगी..? कही वो मम्मीको ना बतादे.. बस उन्ही बातोका डर हे.. प्लीज.. अभी आप लताभाभीको सम्हाल लेना.. देखना कही वो कुछ गडबड ना करदे..

लखन : (मुस्कुराते) अरे जीजु मेने कहाना कुछ नही होगा.. बस आप चुप रहीयेगा.. मेरी हां मे हां मीलाते रहीये.. मे कुछ जुगाड करता हु.. चलो उपर..

कहातो धिरेनने राहकी सांसली.. तब उपरकी मंजीलपे लताने जातेही जटसे धिरेनके रुमका दरवाजा खोल दीया.. तब नीलम बाथरुममे कपडे पहेनकर अपने आपको ठीक कर रहीथी.. उसने जोरोसे रुमके दरवाजा खुलनेकी आवाज सुनी.. तो उनकी गांड फटने लगी.. ओर वो बहारकी ओर डरते आने लगी.. तब लता रुममे खडी रहेकर बेडकी ओर देख रही थी.. तो वहा पुरा बेड अस्त व्यस्त था..

लता बेडके नजदीक चली गइ.. ओर गौरसे देखने लगी.. तो बेडके बीच धिरेन ओर नीलम दोनोके कामरसकी नीशानीया मौजुद थी.. वहा बडे बडे गीले धब्बे दीख रहेथे.. तब नीलम बाथरुमका दरवाजा खोलके दरवाजेके पास खडी रहेके गभराते हुअ‍े लताकी ओर देखते उनकी हरकते देख रहीथी.. उनको समजमे आगया की लतादीदीको सब पता चल गया हे.. तभी दरवाजा खुलनेकी आवाज सुनके लताने दरवाजेकी ओर देखा..

तो वहा नीलम डरके मारे कांप रहीथी.. ओर लताकी ओर देखते आंसु बहाने लगी.. तब अचानक लता जटसे नीलमके पास चली गइ.. ओर बीना कुछ बोलेही अ‍ेक जोरोका तमाचा नीलमके गालपे जड दीया.. स..टा..क.. तो नीलम अपने गालपे हाथ रखते जोरोसे रोने लगी.. ओर लताके पेरमे गीरते गीड गीडाने लगी.. लताने उसे पैरसे धका मारते हटाया.. फीरभी नीलम उनके पेर पकडके रो रही थी.. वो अ‍ैसे जोरोसे रो रहीथी की अ‍ेक बारतो लताका दिल भी पीगल गया..
 
नीलमके रोनेकी आवाज नीचे तक सुनाइ देने लगी.. तो लखन ओर धिरेन दोडकर उपर चले गये.. देखातो नीलम लताके पैर पकडते गीडगीडाते उसे माफ करनेकी मनते कर रहीथी.. तब लखन मौकेका फायदा उठाकर नीलमके पास चला गया.. ओर उनका हाथ पकडकर बेडके पास लेगया.. फीर बेडपे बीठाकर खुदभी उनके साथ सटकर बैठ गया.. ओर नीलमके सरको अपने सीनेसे लगाते हाथसे सहेलाते उसे सांत करनेकी कोसीस करने लगा.. तभी..

लखन : (थोडा गुस्सेसे) लता.. क्या कर रही हो..? तुजे मना कीया थानां..?

लता : (गुस्सेसे) लखन.. आप छोड दीजीये इस कमीनीको.. आज इसने हमारी नाक कटवादी.. कमीनीको कीतना समजाया था..?

लखन : (सांत लहेजेमे धीरेसे) अरे चुप रहो.. तुजे इसे कुछ ना कहेनेको मना कीयाथानां..? इनसे गलती होगइ.. तो क्या बच्चीकी जान लेगी..? इतना जोरोसे कोइ मारता हे क्या..? (जीलमकी ओर देखते) नीलु.. कहाहे तेरे कपडे..? चल जा सब पेक करले.. तुजे अभीके अभी हमारे साथ चलना हे..

नीलम : (जोरोसे रोते) जीजु.. मुजे माफ करदो..मुजसे गलती होगइ.. बस मे बहेक गइ थी..

लखन : (सरको सहेलाते) बस.. बस.. अब चुप होजा.. तुने अपनी गलती मानलीनां..? बस अब चुप होजा ओर चल.. लता इनका सामान लेले..

लता : (अबभी नीलमकी ओर गुसेसे देख रहीथी) लखन.. आप इनकी ज्यादा तरफदारी मत करो.. आपको पता हेना इस कमीनीने क्या कीया हे..? कुतीने हमारी नाक कटवादी.. तुजे कहाथानां अ‍ेक दो साल अच्छेसे पढाइ करले.. फीर हम तेरी सादी करवा देगे.. तो तुजे इतनी ज्लदी क्या थी..? हंम..?

लखन : (सांत लहेजेमे) लता.. अभी कुछ भी नही.. मेने तुजे आते वक्त रास्तेमे क्या कहाथा..? तु घर चल.. फीर आरामसे इनसे बाते करते रहेना.. ओर सुनो.. अभी घरपे इस बारेमे कीसीको कुछ भी कहेनेकी जरुरत नही हे.. समजी..?

लता : (धिरेनकी ओर गुस्सेसे देखते) धिरेन.. तुम कीतने कमीने हो.. इस मासुमसी बच्चीके साथ भी.. छीं.. तुजे पता हे इस बारेमे पुनोदीदीको पता चलेगा तो क्या होगा..? हंम..?

धिरेन : (पैरमे पडते) नही भाभी.. प्लीज.. उसे कुछ भी मत कहेना.. वरना मेरा घर टुट जायेगा..

लता : (गुस्सेसे पैर छुडाते) छोड मुजे.. अगर घर टुटनेकी इतनीही फीकरथी तो फीर क्यु कीया ये सब..?

धिरेन : भाभी गलती होगइ.. अब आपसे क्या कहु..? कुछ बाते हे जो मे आपको नही बता सकता.. आप नीलुको पुछ लेना उनको सब पता हे.. अगर आप कहोतो मे नीलुसेभी सादी करनेको तैयार हु..

लता : (गुस्सेसे) देखो लखन.. कीतना कमीना इन्सान हे.. अभी इनकी सादीको कुछ चंद दिनभी नही हुअ‍े.. ओर इनको दुसरी सादी करनी हे.. नीलु.. तुम चलो अपना सामान लेलो.. इस आदमीसे बात करना ही बेकार हे.. इसे अब भावनाभाभी ही नीपड लेगी.. (जोरोसे) चलो..

कहेते लता नीचेकी ओर चली गइ.. तो नीलम अपने कपडे बेगमे डालने लगी.. तब लखनने धिरेनकी ओर मुस्कुराते अ‍ेक आंख मारदी.. तो धिरेनभी समज गया की लखनभैया उनकी साइड हे.. ओर वोभी मुस्कुराने लगा.. तभी नीचेसे लताने फीरसे जोरोकी आवाज देते लखन ओर नीलमको बुला लीया.. तो नीलम सर नीचे करते अपना सामान लेके फटाफट नीचे चलने लगी..

तो लखनभी उनके पीछे धिरेनकी ओर थम्सअपकी साइन देते चला गया.. तब धिरेनके चहेरेपे भी हसी नीकल गइ.. धिरेन समज रहा होगाकी आज लखनने उसे लताके गुस्सेसे बचा लीया.. लेकीन हमारे लखनके दिमागमे कुछ ओरही प्लान चल रहाथा.. वो धिरेनके साथ अपना रीस्ता खराब करना नही चाहता था.. ताकी भविस्यमे उनके घर आने जानेमे आसानी रहे.. ओर तीनो नीचे आकर कारमे बैठ गये.. ओर लखनने कारको जानेदी.. तब..

लता : (धीरेसे) लखन.. अभी आप इस बारेमे घरपे कीसीको कुछ मत कहेना.. खास करके पुनोदीदीको.. उन बेचारीको पताही नही होगाकी उनकी पीठ पीछे उनका कमीना पती इस कमीनीके साथ क्या गुलछडे उडा रहा हे.. उनको सुनकर बुरा लगेगा.. अगर नीलुकी बात बहार फैल गइ तो हमे उनकी सादी करनेमे मुस्कील आयेगी.. ओर हमारी बदनामी होगी वो अलग..

लखन : हां लता.. तुम फीकर मत करो.. आजसे नीलुकी सब जीम्वेवारी हमारी हे.. अब हम इसे हमारे साथही रखेगे.. अब हमे जल्दसे जल्द सहेरमे जाना होगा.. वरना इनकी पढाइभी डीस्टर्ब होजायेगी..

लता : (पीछे नीलुकी ओर देखते) देखा नही आपने.. ये पढ तो रही हे.. काफी कुछ सीख गइ हे.. कमीनी..

लखन : (लताकी ओर देखते) लता.. अभी रहेने दे.. इसे यहा कुछभी मत कहेना.. जोभी बात करनी हो घर जाके आरामसे करना.. बच्ची हे.. गलती होजाती हे.. यही उमर हे इनकी.. जो हमे इसे सम्हालना हे..

लता : (नीलमकी ओर देखते) आप इनकी ज्यादा तरफदारी मत करो.. ये कोइ बच्ची नही हे.. अठाराह पार कर चुकी हे.. तभी तो इनके पंख नीकल आये हे.. ओर इनको ये सब सुज रहा हे.. तु कब इनके साथ आइ थी..?

नीलम : (नजरे जुकाते) कल.. कल सामको..

लता : अभीतो तो तुम घर चल.. मुजे घर जाके तुमसे बहुत सारी बाते करनी हे.. अ‍ेक तेरी मां हे.. जो तेरी यादमे वहा आंसु बहाती रहेती हे.. उनकोतो यही लगता होगा की मेरी नीलुतो सहेरमे पढ रही हे.. लेकीन बेचारीको पताही नही होगा की यहा उनकी लाडली क्या क्या गुल खीला रही हे.. बेचारीको पता चलेगा तो उनका तो दिलही टुट जायेगा..

नीलम : (धीरेसे) दीदी.. प्लीज.. आप मम्मीको कुछ मत कहेना.. अब मे अ‍ैसी गलती कभी नही करुगी..

लता : लखन आप कलही इनकी होस्टेलपे जाकर इनका सामान लेआओ.. अब इनको वहा अकेला नही छोडना हे.. वरना वो कमीना.. वहा इनको फीरसे मीलने आयेगा..

नीलम : (गीडगीडाते) दीदी.. प्लीज.. मेने कहानां.. अब मे उसे कभी नही मीलुगी.. मुजे वहा रहेने दीजीये..

लता : (थोडी सख्तीसे) कोइ जरुरत नही हे.. अब तु हमारे साथही हमारे घरपे ही रहेगी. ओर वहीसे तेरी पढाइ होगी.. अब हम ओर कोइ रीस्क लेना नही चाहते.. अगर ज्यादा चपड बपड की तो हमे तेरे मम्मी पापाको मजबुरन सब कुछ बताना पडेगा.. फीर तुम जानो ओर तुम्हारे मम्मी पापा..

कहतो नीलम चुप होगइ.. उनके सारे सपने जो धिरेनके साथ मीलकर सजाये थे.. वो बीखरते नजर आये.. लेकीन उन्होने फीरभी अपनी आस नही छोडी.. क्युकी लताकी बातोसे उनको अ‍ेक तसली मील गइकी वो अबभी सहेरमे पढाइ कर सकेगी.. तो वो स्कुलसेभी बंक मारके धिरेनको मील सकती हे.. नीलमका दिमाग धिरेनको फीरसे मीलनेके लीये चलने लगा..

आज जीस तराह लखनने उनका साथ दीया.. ओर उन्होने नीलमको कुछभी नही कहा.. बजाये डांटनेसे उनको प्यारसे समजा रहेथे.. तो उनको अपनी लतादीदीसे बजाये अपने लखन जीजाजी अच्छे लगने लगे.. ओर उन्होने ही नीलमको अपने साथ रखनेकी बातकी.. तब ना नीलमको पताथा ओर नाही लताको पता था.. की लखनने नीलम ओर उनकी मां रमाको पानेकी राह आसान करदी हे.. ओर आज लखनके साथ बात करके उनकी मां रमा भी लखनकी ओर पुरी तराह ढल चुकी थी....

कन्टीन्यु
 
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जागृती ओर जयश्री कुछ इस तराह दीखती हे..
 
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ब्रीन्दा ओर वृन्दा कुछ इसी तराह दीखती हे..
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १६३

आज जीस तराह लखनने उनका साथ दीया.. ओर उन्होने नीलमको कुछभी नही कहा.. बजाये डांटनेसे उनको प्यारसे समजा रहेथे.. तो उनको अपनी लतादीदीसे बजाये अपने लखन जीजाजी अच्छे लगने लगे.. ओर उन्होने ही नीलमको अपने साथ रखनेकी बातकी.. तब ना नीलमको पताथा ओर नाही लताको पता था.. की लखनने नीलम ओर उनकी मां रमाको पानेकी राह आसान करदी हे.. ओर आज लखनके साथ बात करके उनकी मां रमा भी लखनकी ओर पुरी तराह ढल चुकी थी....अब आगे

तीनोही हवेलीपे पहोंच गये.. तब उनको लगाकी सब लोग खाना खाकर आराम कर रहे हे.. लेकीन उनको पता नही थाकी इस वक्त देवायतके रुममे सृती ओर पुनमकी जबरदस्त धमाकेदार चुदाइ हो रही हे.. दोनोही सामको मंजुके पास चली जाने वालीथी.. तो पुनम ओर सृतीने देवायतको दोपहोरको खाना खानेके बादही दबोच लीयाथा.. देवायतने सृतीकी दो बार जमकर चुदाइ करली थी.. उनका पुरा सरीर तोडके रख दीयाथा..

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तो वो अ‍ेक साइडमे दर्दके मारे कणसते अपनी चुतपे हाथ रखके सो रहीथी.. तब देवायत उछल उछलके पुनमकी जबरदस्त चुदाइ कर रहाथा.. अभी तक वो पुनमकी चुतको भी अ‍ेक बार भर चुकाथा.. फीरभी बीना लंड बहार नीकाले वो अभीभी पुनमको चोद रहाथा.. तब कुछही देरमे वो पुनमकी चुतमे दुबारा जड गया.. तब साथमे पुनमभी जडने लगी.. ओर जडते देवायतको जोरोसे बाहोमे भीचलीया.. पुनम अबतक पांच बार जड चुकीथी.. तब पुनमको लगाकी अब देवायत उनको छोड देगा..

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लेकीन फीरभी देवायतने पुनमको चोदना जारी रखा.. तब पुनम उसे प्यारसे छोडनेकी मनते करने लगी.. आज देवायतने पुनमको चोद चोदके उनकी अ‍ेक अ‍ेक नब्सको ढीली करदी.. इतना तो वो अपने भाइके साथ अपनी पहेली सुहागरात मे चुदी थी.. ओर दुसरी बार जब वो उनके भाइसे प्रेगनेन्ट हुइ तब चुदीथी.. ओर आज फीर अ‍ेक बार देवायत उनको जबरदस्त तरीकेसे चोद रहाथा.. पुनम पुरी तराह टुट चुकीथी..

तो पुनम देवायतका तीसरी बार जडनेका बेसब्रीसे इन्तजार कर रहीथी.. चुदाइ जारीथी तब उनके लंड ओर चुतके बीच रास्ता बनाते उनका कामरस बहारकी ओर बेह रहा था.. पुनमकी पुरी चुत देवायतके पानीसे भरी हुइ थी.. ओर वो बेसुध्ध जैसी हालतमे पडी देवायतसे चुद रहीथी.. पुरे रुममे सनाटा छाया हुआ था.. ओर सीर्फ फच..फच..फच..की आवाज आ रही थी.. ओर आखीर देवायत अ‍ेक बार फीर जड गया.. ओर जडतेही जोरोसे अपने लंडको पुनमकी चुतसे खीचलीया.. तब पुनम दर्दसे कांपते हील गइ..

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तो बहारकी ओर लखन लता ओर नीलमके आतेही नीलमने अपना सामान लेलीया.. ओर लताके पीछे चलने लगी.. तब लखनभी उन दोनोके पीछे उपर चला गया.. लताने नीलमको उपरही अपने बगलमे अ‍ेक अलग कमरेमे ठहेराया.. ओर उसे आराम करनेको कहेकर वो अपने रुममे लखनके पास चली गइ.. तब लखनने उसे दबोच लीया.. तो लता सरमाकर उनसे छुटनेकी कोसीस करने लगी.. तब..

लता : (हसते दबी आवाजमे) जानु.. प्लीज.. अभी कुछभी नही.. इस कमीनीने मुड ही खराब कर दीया.. आप रात होनेका इन्तजार कीजीये.. आजमे आपको सोने नही दुगी.. ये तीन दिन आपसे दुर रही तो अ‍ैसा लगाकी मे तीन साल आपसे दुर रही हु.. हें..हें..हें..

लखन : लता.. अब वो इधरतो आगइ हे.. बस.. सीर्फ अ‍ेक बार.. कीतने दिन होगये हम नही मीले.. फीर हम रातमे आरामसे करेगे..

लता : (सरमाते हसते) आपभीनां.. मानोगे नही.. चलीये.. लेकीन अभी सीर्फ अ‍ेकही बार.. समजे..?

लखन : (हसते) अरे हां बाबा.. सीर्फ अ‍ेकही बार.. फीर चल मुजे तुमसे कुछ जरुरी बातभी करनी हे..

लता : (लखनकी बाहोमे उनके सीनेको सहेलाते) जानु.. कीस बारेमे बात करनी हे..?

लखन : (गोदमे उठाते बेडकी ओर चलते) हमारी पुनोदीदीके बारेमे.. चल पहेले प्यार.. फीर बाते.. हें..हें..हें..

लता : (आस्चर्यसे मुस्कुराते) पुनोदीदीके बारेमे..? लेकीन क्या..? क्या कुछ जरुरी बाते हे..?

लखन : (बेडपे लीटाते) अरे हां भाइ.. अब चुपचाप लेटी रहो.. कुछ भी मत बोलना.. पहेले मुजे जटसे अंदर डालनेदे..

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लता : (सारीको कमर तक उची करते पैर फैलाते) बहुत कमीने हो आप.. अगर मेरे बीना रहे नही सकते तो फीर मुजे वहा रुकनेको क्यु केह रहेथे..? लो करलो..

लता बीना कपडे नीकाले अ‍ैसेही कमर तक सरीको उची करते लेट गइ तो लखननेभी सीर्फ पेन्ट नीचेकी ओर सरकादी.. ओर लताके उपर चड गया.. लताकी चुततो पहेलेसे ही गीली थी.. उसने लखनका लंड पकडकर अपनी चुतका रास्ता दीखा दीया.. तब लखनने अ‍ेकही जटकेमे पुरा लंड लताकी चुतमे उतार दीया.. तब कुछही देरमे दोनोको बीच घमासान चुदाइ होने लगी.. लता अपनी कमर उछाल उछालके लखनकी ओर कामुक नजरोसे देखते चुदवाती रही..

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तब कुछही देरकी घमासन चुदाइके बाद दोनोही अकडने लगे.. ओर अ‍ेक दुसरेको अपनी बाहोमे भीचते जडने लगे.. लखन जडकर लताके सीनेपे सर रखके सांत होगया.. तब लता उनकी पीठ ओर सरको सहेलाती रही.. लखनका लंड अबभी लताकी चुतमे था.. फीर कुछ देरके बाद दोनो बाथरुममे चले गये.. ओर नहाकर फीरसे कपडे पहेनलीये ओर बेडपे आकर दोनो अ‍ेक दुसरोको चीपककर लेट गये तब..
 
लता : (बाहोमे भीचते मुस्कुराते) हां जानु.. अब कहो.. आपको पुनमदीदीके बारेमे क्या बात करनी थी..?

लखन : (गालको चुमते) लता.. आज मुजे दीदीने उनके बारेमे सबकुछ बतादीया.. उनकी सभी सचाइ बतादी.. मे आज बहुत खुस हु.. क्युकी दीदी ओर भाइने भी हमारे खानदानकी परंपरा आपसमे सादी करके नीभाइ..

लता : (आस्चर्यसे हसते) क्या..? दीदीने आपको सबकुछ बता दीया..? सुनके आपको बुरा नही लगा..?

लखन : (मुस्कुराते गालको सहेलाते) नही लता.. बल्की मुजेतो बहुत खुसी हुइ.. मुजे अ‍ेक प्यारीसी भाभी मील गइ.. ओर तुजे अपनी जेठानी.. इस कमीनेके साथ सादीसे तो अच्छाथा वो भाइकी सुहागन बनके इधर ही रहेती.. समजमे नही आता पुनमदीदीने भाइसे सादी करली थी तो फीर इस कमीने धिरेनके साथ सादी करनेकी क्या जरुरत थी..? दीदीकी अ‍ैसी कोनसी मजबुरी थी..? जो उनको धिरेनसे सादी करनी पडी..

लता : (मुस्कुराते) तो क्या आपने दीदीको उनकी धिरेनके साथ सादीकी मजबुरीके बारेमे नही पुछा..? हें..हें..हें..

लखन : (प्यारसे गाल सहेलाते) हां.. पुछाथा.. तो कहाकी मे आपको नही बता पाउगी.. लता मेरे बारेमे सबकुछ जानती हे.. आप उन्हीसे पुछकर सबकुछ जान लेना.. लता मुजे दीदीके बारेमे सबकुछ जानना हे.. बतानां..

लता : (मुस्कुराते) लखन.. अगर दीदीने नही कहा होता तो मे ये बात आपको सायद कभी नही बताती.. सुनो.. दीदीको भाइसे सादी करनेके लीये खुद बाबाने कहा था.. ताकी उनकी कोखसे जो बच्ची होगी.. उनकी बच्ची वो हमारे खानदामे पैदा होने वाले राजाकी रानी होगी..

ओर बाबाने येभी कहाथा की इसके लीये हमारे खानदानके अंससे ही बच्ची होनी चाहीये.. इसीलीये जब दीदीकी सादी धिरेनसे हुइ तब वो सादीसे पहेलेही ओल रेडी भाइसे पे्रगनेन्ट हो चुकीथी.. तो इसलीये उनकी बच्चीको बापका नाम देनेके लीये धिरेनके साथ सादी जरुरी थी..

लखन : (खुसीसे मुस्कुराते) क्या..? दीदी इस वक्त प्रेगनेन्ट हे..? तो मे मामा ओर तुम मामी होजाओगी.. हें..हें..हें.. लता.. तो इसमे दीदीको धिरेनके साथ सादी करनेकी क्या जरुरत थी.. इस बच्चीको भाइ खुद अपना नाम दे सकते थे.. इनमे कीसीसे डरनेकी क्या जरुरत थी..?

लता : (प्यारसे गाल सहेलाते) नही लखन.. आप समजते नही.. क्या आप नही जानते पीछली तीन पीढीसे हमारे खानदाके साथ कीसीभी गांवके लोगोने रीस्ता क्यु नही रखाथा..? इसीलीये क्युकी हमारे खानदानमे सभीने अपनी बहेनोसे सादी करली थी.. तो सभी गांववाले अ‍ैसे रीस्तोके खीलाफ थे..

अगर भाइ ओर पुनोदीदी भी वोही करते तो क्या होता..? आजभी गांवके साथ हमारा रीस्ता नही होता.. आज सबलोग भाइको ओर हमारे खानदानको कीतनी इजत देते हे.. वो सबलोग आजभी भाइको अपना राजा मानते हे.. इसीलीये भाइ ओर दीदीने मीलकर ये कदम उठाया..

लखन : (मुस्कुराते होंठ चुमते) लता.. बाततो तेरी सही हे.. लेकीन इस चकरमे भाइ ओर दीदीतो अलग हो गयेनां..? देखोना तुम सीर्फ तीन दिनके लीये मायके गइ.. तो ना मे तेरे बीना रेह सका ओर नाही तुम.. तो फीर सोचो भाइ ओर दीदी अलग रहेते हे.. तो उनपे क्या बीतती होगी..? इस बारेमे कभी सोचा हे..?

लता : (मुस्कुराते प्यारसे गाल सहेलाते) लखन.. मुजे खुसी हुइ आप भाइ ओर दीदीके बारेमे इतना सोचते हे.. लेकीन आप फीकर मत करो.. दीदीने मुजे बस इतनाही कहा हे.. की बच्चीको जन्म देतेही वो हमेसाके लीये यहा भाइके साथ रहेने आजायेगी.. बस दीदीने मुजे सीर्फ इतना ही कहा हे..

लखन : (मुस्कुराते) दीदीभीनां.. कभी कभी वो मुजे रहस्यमय लगती हे.. मेरी प्यारीसी भाभी.. हें..हें..हें..

लता : (हसते गालपे चपत मारते) क्या कहा..? अगर दीदीने सुनलीया तो आपकी खुब पीटाइ करेगी.. हें..हें..हें.. लखन.. प्लीज आपको अ‍ेक रीक्वेस्ट हे.. अब आप इस बारेमे दीदीको ओर कुछ मत पुछना.. वो सर्मीन्दा होजायेगी.. मेरी ननंद ओर जेठानीसे ज्यादा वोभी भावना भाभीकी तराह मेरी बेस्ट सहेली हे..

लखन : (मुस्कुराते) हंम.. चल ठीक हे.. अब कोइ सवाल नही पुछुगा. बस..? मेरी प्यारी दीदी.. हें..हें..हें..

दोनोही प्यारभरी बाते कर रहेथे.. तब उनको पता नही थाकी नीलुके पास धिरेनने दिया हुआ मोबाइल फोनभी हे.. नीलम जैसेही रुमके अंदर चली गइ.. दरवाजा बंध करके सीधाही फोन नीकालकर बेडपे बैठ गइ ओर धिरेनको फोन लगाकर सब कुछ बता दीयाकी कारमे तीनोके बीच क्या बाते हुइ.. उसने धिरेनको बता दीयाकी अब लतादीदी उनको होस्टेल छुडवा रही हे.. ओर उनको अपने घरपे उनके साथ रखेगी..

वो अब घरसे ही स्कुल आती जाती रहेगी.. सुनके धिरेनने थोडी राहतकी सांसली.. उनको लगाकी वो स्कुल टाइममे नीलमको मील सकता हे.. ओर उसने कुछ सोचते नीलमको अ‍ेक बार फीर उनके सब डोक्युमेन्टकी याद दीलवाइ.. क्युकी धिरेन अब जल्दसे जल्द मकान लेकर नीलमके साथ सादी करलेना चाहता था.. तबतक दोनो इसी तराह फोनसे ही कोन्टेक मे रहेगे.. कहेते धिरेनसे बात करली..
 
तो सहेरमे दोपहोरको जब बंसी लखनकी जीप लेकर सहेरपे उनके बंगलोपे पहोंचा तब श्रीधर ओर जयश्री दोनोही उधर थे.. श्रीधर बंसीको देखतेही खुस होगया ओर उनको गले लगा लीया.. तो बंसीको देखकर जयश्री बहुतही सर्मसार होगइ.. उसने सलवार कुर्ता पहेनाथा.. मांगमे सींदुर ओर गलेमे मंगलसुत्र था.. ओर उसने सरमाते हुअ‍े बंसीको नमस्ते कीया.. ओर जागृतीके बारेमे खबर पुछली..

जयश्री : (मुस्कुराते) कहो बंसीभैया.. क्या कर रहीहे.. जागु..?

बंसी : (हसते) बस भाभी.. वो घरपेही थी.. आपको याद कर रहीथी.. जब मेने उनको कहाकी मे तेरी सहेलीको लेने जा रहा हु.. तो सुनके बहुत खुस होगइ.. कहेतीथी उनको सीधे यही लेकर आना.. हें..हें..हें..

जयश्री : (सर्मसार होते धीरेसे) बंसीभैया.. मे जागुको अपनी बहेन मानती हु.. तो इस नाते आपभी मेरे भाइ हुअ‍े.. तो मुजे भाभी क्यु कहे रहे हो..? वो लखन भैयाभी मुजे भाभी भाभी कहेकर छेडते हे.. हें.. हें.. हें..

श्रीधर : (हसते) जयश्री.. मेरे सभी फ्रेन्ड मेरे भाइ भीतो हे.. तो तुजे भाभी ही कहेगे.. हें..हें..हें..

जयश्री (सरमाते हसते) सबके सब कमीने हो.. चलो ठीक हे.. वैसे बंसी भैया.. क्या आपकी जागुसे कोइ बात हुइ..? आइ..मीन.. क्या उसने आपको कुछ कहा..?

बंसी : (सब समज गया फीरभी अनजान बनते) नही भाभी.. अभीतो कुछ बात नही हुइ.. लेकीन लगता हे अ‍ेक दो दिनमे हमारी बात होजायेगी.. हें..हें..हें.. भाभी.. आपकोतो उनके बारेमे सब पता होगा.. तो फीर आपही कहीयेनां वो मुजसे क्या कहेने वाली थी.. हें..हें..हें..

जयश्री : (सरमाते हसते) नही.. तो फीर वोही आपको बतायेगी.. छोडीये सब.. पहेले ये बताइअ‍े हमारे घरमे अभी कैसा माहोल हे..? क्या सचमे हमारे मम्मी पापा मान गये..?

बंसी : (मुस्कुराते) हां भाभी.. लखनभैया ने उनके बडेभाइको आपके घर आपके मम्मी पापाको समजाने भेजाथा.. तो आपके मम्मी पापा मान गये.. इतना ही नही वो आप दोनोकी सादीभी वहा धुमधामसे करवाना चाहते हे.. इसीलीये तो मे आप दोनोको लेने आया हु..

श्रीधर : (हसते) आइ कान्ट बीलीव.. ये लखनभैया ओर बडे भैयाभी कमालके हे.. हें..हें..हें.. पता नही उसने बडे पापा ओर मौसीको कैसे मनवा लीया..

जयश्री : (सरमाते हसते) भाइ.. जोभी हो.. वो मान गये यही हमारे लीये बहुत हे.. हें..हें..हें..

श्रीधर : (हसते) बंसी.. हमारी बात छोड.. ये बता.. वो हमारे मुनाका क्या हुआ..? बात कुछ आगे बढी..?

बंसी : (हसते) भाइ.. मेने आज सुबह ही उनको देखा.. वो उनकी मम्मी ओर बरखा भाभीको लेकर कही बसने जा रहा था.. भाइ लगता हे.. वो कीसी मंदिरमे सादी करने गये होगे.. हें..हें..हें..

जयश्री : (हसते) लेकीन बंसीभैया.. उनकी मम्मी इतनी आसानीसे मान कैसे गइ..? क्या उनके बापुको अभी इस बारेमे कुछ नही पतानां..?

बंसी : (हसते) हां भाभी.. उनके बापुको अभी कुछ नही पता.. लेकीन उनकी मम्मी उन दोनोकी सादी जल्दी करदेना चाहती हे.. उनका केसभी आप दोनोकी तराह हे.. हें.. हें..हें..हें.. ये सब छोडो.. पहेले ये बताओ.. क्या आपने अपना सब पेपर कंपलीट करलीया हे..?

श्रीधर : (मुस्कुराते) भाइ.. आतेही हमने अ‍ेक वकील रखलीया था.. तो दुसरे दिन सुबह हम दोनो उनके साथ अ‍ेक गांवमे चले गये थे.. वहा उन्होने गांवके मंत्रीको बुलाकर मंदिरमे हमारी सादी करवादी.. ओर वहीसे हमे अ‍ेक सादीका दाखला मील गया.. तो उसी दिन वकीलने मेरेज सर्टीके लीये कोर्टमे अ‍ेप्लीकेशन देदी थी.. तो अभी हमे वही लेने जाना हे..

बंसी : (हसते) भाइ तो आप टाइम वेस्ट मत करो.. अपना बोरीया बीस्तरा समेटलो.. ओर हम वहीसे सर्टी लेकर गांव चले जायेगे.. आपको पहेले हवेलीपे चलना हे.. वहा बडेभैया आपके मम्मी पापाको बुला लेगे.. भाइने कहा हे वो आप दोनोको कोइ सवाल नही करेगे.. अब चलीये..

जयश्री : (मनमे खुस होते) भैया.. प्लीज.. थोडी देर बैठो मे चाइ बनाकर लेआती हु.. फीर चलते हे.. (श्रीधरकी ओर देखते) भाइ.. हम जाते समय आश्रम होकर जायेगे.. हमे वहा बाबाका आशीर्वाद लेना हे..

बंसी : (जोरोसे हसते) ठीक हे भाभी.. आप अपनी सादीका मुह मीठा करवा दीजीये.. हें..हें..हें..

कहा तो जयश्री जुठा गुस्सा करते बंसीकी पीठमे अ‍ेक मुका मारते हसते हुअ‍े कीचनमे चली गइ.. वैसे बंसी उनको भाभी भाभी कहेते बात करता तो जयश्रीको बहुतही अच्छा लगता था.. फीर जयश्रीने तीनोके लीये चाइ बनादी.. फीर तीनोही चाइ पीकर अपना सामान लेकर कोर्ट पहोंच गये.. श्रीधरने सादी होतेही वकीलके जरीये कोर्टमे अ‍ेप्लीकेशन देदीथी.. तो जातेही वकीलने उनको मेरेज सर्टी दीलवा दीया..

फीर श्रीधरने वकीलको उनकी फीस देदी.. श्रीधर जयश्रीने खाना नही खायाथा.. तो तीनोही अ‍ेक बडीया होटेलमे खाना खाने चले गये.. वहा खाना खाते गांवकी बाते करते रहे.. फीर तीनोही आश्रमकी ओर चले गये.. तब उनको पता नही थाकी मुना बरखा ओर उनकी मां बसंती इधरही आश्रममे सादी करने आये हे.. वहा सुबह ही बाबाने मुना ओर बरखाकी सादी करवादी थी.. तो तीनोही खाना खाकर कुछ देर वही आराम कर रहेथे..

ओर बंसीभी श्रीधर ओर जयश्रीको लेकर वहा पहोंच गया.. तब बाबा आराम करने उनके रुममे चले गयेथे.. तो तीनो मंदिरमे दर्शन करके होलमे आगये.. ओर बाबाका इन्तजार करते वही बैठ गये.. तभी श्रीधरको मुना बरखा ओर उनकी मम्मी आराम करते दीख गये.. तो श्रीधर उनको देखतेही खुस होगया.. तब मुनाका ध्यानभी इन तीनोकी ओर गया.. तो बंसी जयश्री ओर श्रीधर उनके पास चले गये.. तो बसंती भी इनको देखकर खुस होगइ..

श्रीधर ओर जयश्री उनके पास जातेही बसंतीके पैर छुने लगे.. तब बसंतीने जयश्रीकी मांगमे सींदुर देखते उनको अखंड सौभाग्यके आशीर्वाद दीये.. तो जयश्री खुब सरमाइ.. फीर वो बरखाके पास चली गइ.. तो उनकी मांगमेभी सींदुर ओर गलेमे मंगलसुत्र था.. तो दोनोही सरमाकर अ‍ेक दुसरेके गले लग गइ.. ओर सबसे थोडी दुर जाकर अ‍ेक दुसरेके बारेमे हस हसके बाते करने लगी.. तो मुनाभी सबको गले मीला..

बसंती : (हसते) कहो बेटा.. करली दोनोने सादी..? देखो मेनेभी इन दोनोकी सादी इधर करवादी.. हें..हें..हें..

श्रीधर : (सरमाते हसते) हां काकी.. हमे मेरेज सर्टीभी मील गया.. अब कोइ दीकत नही.. क्या मुनाके बापु मान गये..?

बसंती : (जटसे) अरे नही नही.. उनकोतो पताभी नही हे की हम इधर आये हे.. तो आप लोगभी ध्यान रखना.. अभी कीसीको इस बातका पता ना चले.. जब सही वक्त आयेगा. तब हम इनकी सादी बडी धुम धामसे करवा देगे.. तुम लोग आजकलके बच्चे तो मानते नही.. सादीसे पहेलेही अपना संसार अ‍ेक पती पत्नीकी तराह चलाने लगे हो.. तो मुजे इनकी सादी जल्दीसे करवानी पडी.. क्या तुम्हारे मम्मी पापा मान गये..?

श्रीधर : (सरमाते हसते) हां काकी.. वो हमारे बडे ठाकुरने उनको मनालीया हे.. तो हमे बंसी लेने आया हे.. तो सोचा बाबाका आशीर्वाद लेकरही घर जाये.. तो इधर आगये..

बंसी : (हसते) काकी.. अब आप तीनो हमारे साथही चलना.. हमभी तो गांव जा रहे हे.. क्यु मुना..?

मुना : (हसते) हां मम्मी.. हम इनके साथही चले जायेगे.. अब कीसका डर.. हें..हें..हें..

बसंती : (हसते) चलो ठीक हे.. जैसे आपकी मरजी..

कहेते बसंती मुनाकी ओर कातील नजरोसे देखते मुस्कुराती रही.. तब मुनाने उनको आंखोके इसारेसे बंसी ओर श्रीधरकी ओर इसारा कीया.. तो बसंती सरमाते जयश्री ओर बरखाके पास चली गइ.. इधर आतेही तीनोने अपने कपडे बदल लीयेथे.. बरखा अ‍ेक दुल्हनकी तराह सजी हुइथी.. तो मुनानेभी दुल्हेका लीबास पहेना हुआथा.. तो बसंतीभी ओल मोस्ट दुल्हकी तराह सजधजके मुनाके साथ ही घुम रही थी..

अ‍ेक घंटेके बाद जब बाबा बहार आकर बैठ गये तो सबलोग उनके पास जाकर आशीर्वाद लेकर बैठ गये.. तब बाबा श्रीधर ओर जयश्रीको देखकरभी बहुत खुस होगये.. इन दोनो कपलको देखकर उनको लगाकी देवायतने मंजु ओर पुनमने वहा ज्यादा महेनत की हे.. तो उनको अब कोइ समजानेमे मुस्कील नही आयेगी.. यही सब सोचकर बाबाने उन सब लोगोको गांवके बदलावके बारेमे बहुत सारी बाते करली..

फीर सबलोग जानेके लीये खडे होगये.. ओर बाबाको दक्षीणा देने लगे.. तब बसंती मुना ओर बरखाने वही अपना लीबास चेन्च करलीया.. ओर वही कपडे पहेनलीये जीसे वो पहनकर आये थे.. फीर सबलोग लखनकी जीपमे अ‍ेडजेस्ट करके बैठ गये.. ओर गांवकी ओर चले गये.. तब गांवके बहारही बसंती मुना ओर बरखा उतर गये.. ओर बंसी श्रीधर जयश्रीको लेकर हवेलीपे पहोंच गया..
 
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