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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - १६०
धिरेनने वही नीलमको अपनी गोदमे बीठाकर बाहोमे भीचलीया.. तो नीलमने खुद धिरेनके होठोको चुमते अपनी जीभ धिरेनके मुहमे डालदी.. तो धिरेनने नीलमका परदर्सी स्कर्ट उचा करते उनके दोनो संतरे जैसे गोरे गोरे बुब्सको अपने पंजोमे थाम लीया.. ओर नीलमकी जीभको बडेही कामुक तरीकेसे चुसने लगा.. ओर दोनोही प्यारकी आगोसमे चले गये.. ओर आपसमे बाते करते प्यारके खेलको खेलने लगे.. कलसे धिरेनसे तीन बार चुदवाकर अब नीलम उनसे काफी खुल चुकी थी.. ओर उनकी ठरकभी काफी बढ गइथी....अब आगे
तो दुसरी ओर देवायत चारु ओर नीशा तीनोही आधे पोने घंटेकी ड्राइव करके गांवकी बाते करते अपनी तैय मंजीलपे पहोंच गये.. तो चारु ओर नीशा दोनोही जंगलमे वीरानसी जगह चारो ओर देखते थोडीसी गभराने लगी.. ये वोही आदीवासीओकी जगाह थी जहा अेक मंदिर था.. यही मंदिरमे देवायतने चंदा ओर भुमीकासे सादी कीथी.. तब कीसीको नही पताथाकी यही मंदिरके साथ देवायतके खानदानके सारे रहस्य जुडे हे..
चारु : (कारसे उतरतेही चाहो ओर देखते) देवु.. ये कौनसी जगाहपे आप हमे लेकर आये..? मेने तो इसे कभी नही देखा..? मे तो सोच रहीथी की हम आश्रमपे जा रहे हे.. ये कौनसी जगाह हे..?
देवरजी : (नीशा पास आते) हां देवरजी.. मेनेभी नही देखा.. कीतनी डरावनी जगाह हे.. लगता हे यहा कोइ नही आता होगा..
देवायत : (मुस्कुराते) अरे दोनो डरो मत.. यहीतो हमारे आराध्य देवकी जगाह हे.. जहा मेने अपनी चंदासे गांधर्व सादी कीथी.. दोनो आओ अंदर.. मेरे पीछे पीछे चली आओ.. कुछ नही होगा..
कहेते देवायत अंदरकी ओर जाने लगा.. तो चारुने जटसे उनका हाथ पकड लीया.. तो दुसरी ओर नीशानेभी देवायतका दुसरा हाथ बाजुसे पकलीया.. ओर दोनो चारो ओर देखते उनके साथ चलने लगी.. अंदर परीसरमे गये तो पुरे परीसरमे वोही सुखे पते पडे हुअे थे.. दोनोको अंदर अेक बडा मंदिर दीखा.. तब देवायत उन मंदिरकी ओर जाने लगा.. तो दोनोभी यंत्रवत उनके साथ चारो ओर देखते चलने लगी.. ओर तीनो मंदिरमे आगये..
तो देखा वहा बहुत बडा शीवलींग था.. ओर लींगके उपर अभी अेक बहुत बडा सांप अपनी फन फैलाये बैठाथा.. जीसे देखकर चारु ओर नीशा दोनोही डर गइ.. ओर वही खडी रेह गइ.. लेकीन जैसे देवायतके मनमे तो कोइ डरही नहीथा.. वो आगे बढकर वही लींगके पास घुटनोके बल बैठ गया.. ओर हाथ जोडते सीस नमाकर दर्शन करने लगा.. तो सांप अपनी फेन थोडी पीछे करते देवायतकी ओर देखताही रहा..
जैसे उनको पहेचानता हो.. ओर वो अेकही पलमे लींगसे सरकते हट गया.. ओर पीछे अेक मंदिरके कोनेमे बील जैसा था.. तो वो बीलमे चला गया.. तब देवायतने दोनोकी ओर देखकर स्माइल कीया.. ओर दोनोकोहाथके इसारेसे अंदर आनेके लीये कहा.. तो चारु ओर नीशा थोडासा डरते अंदरकी ओर आगइ.. ओर हाथ जोडके दर्शन करने लगी.. तब देवायतने अपने हाथोसे वहा सब जगाह सफाइ करदी..
वहा अेक डोलमे पानी पडा हुआ था.. तो तीनोने बारी बारी लींगका अभीषेक कीया.. ओर हाथ जोडकर दर्शन कीये.. तब जाकर नीशा ओर चारुके मनमे डर खतम हुआ.. दोनो अबभी कुछ नही बोल रहीथी.. वो सीर्फ बीलकी ओर देख रहीथी.. तब जाकर देवायतने चारुकी ओर मुस्कुराते देखा.. तो चारु ओर नीशा दोनोमे थोडी हींमत आगइ.. ओर दोनोही देवायतके पास आकर खडी होगइ..
देवायत : (मुस्कुराते) चारु मे यहा अक्सर आते रहेता हु.. पता नही इस जगाहसे मुजे बहुत लगाव हे.. अभी अभी तुम दोनोने जो सांपको देखानां.. वोही इस जगाहकी रक्षा करता हे.. बस कभी कभी इनके दर्शन होजाते हे.. जो आज फीरसे होगये.. मे इनको कइ बार देख चुका हु.. जैसे वोभी मुजे पहेचानने लगा हे..
चारु : देवु.. लेकीन येतो कीतना बडा था.. क्या आपको डर नही लगता..? ओर ये मंदिरमे कोन आता हे..? देखो यहा बाल्टीमे पानी भी भरा हुआ हे.. लगता हे यहा कोइ आता होगा..
देवायत : चारु.. ये यहाके कबीले वालोका मंदिर हे.. मे वहा उन सबको पहेचानता हु.. हमारे खेतोमे जो वो हरीया ओर मालती हेनां..? जो पुनोकी सादीमे काम कर रहेथे.. वो दोनो यही पासके कबीलेके हे.. बस.. यहा सीर्फ वो कबीले वाले लोगही आते हे..
नीशा : (हसते) क्या..? मालती यहीकी हे.. आइमीन आदीवासी कबीलेकी..? वो अैसे दिखती तो नही..?
देवायत : (हसते) हां अब उसेभी सहेरकी हवा लग गइ हे.. सीर्फ मालती ही नही अबतो कबीलेमे कइ ओर लडकीयोको सहेरकी हवा लग चुकी हे.. कइ कइ तो अैसी दीखती हे की सहेरकी लडकीयाभी उनके आगे पानी भरे.. बस.. वो इसीलीये यहा बहार वालोको ज्यादा आने नही देते.. ताकी उनकी लडकी बहार वालोसे सादी ना करले..
चारु : (सरारतसे हसते) तो फीर वो आपको यहा क्यु आने देते हे.. हें..हें..हें.. कोइ खास वजह..?
देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. क्युकी वो सब मुजे आजभी अपना राजा मानते हे.. ओर यहा मेरी अेक रानीभी हे.. जो इस बात मंजु पुनोके अलावा कीसीको नही पता.. चंदाकोभी नही हे.. तो तुम दोनोभी इस बातको भुल जाना.. समजी..? जमीला नाम हे उनका.. ओर आगे जाकर मेरा जो पोता होगानां..? उनका भी इसी जगाहपे कुछ कनेक्शन हे.. बस बाबाने मुजे इतना ही बताया हे.. वो मुजे खुलकर नही बताते..
चारु : (हसते) देवु.. जो भी हो.. लेकीन हमे जानकर बहुत खुसी हुइ.. की आप यहाके राजा हो.. आप फीकर मत करना हमने कुछ नही सुना.. हें..हें..हें.. तो अब क्या करे..? मे हमारा सामान नीकालु..?
देवायत : (हसते) तो क्या हम यहा भजीया तलने आये हे..? चल नीकाल.. नीशा तुमभी इधर आजा..
नीशा : (सरमाते आस्चर्यसे) मे..? लेकीन मे यहा खडी हुनां.. आप दोनो अपना नीपटालो.. कहोतो मे आप दोनोकी कुछ मदद करदु.. हें..हें..हें..
चारु : (सामान नीकालते) मददकी बच्ची.. सीर्फ मेरे लीये नही.. मे तेरे लीये भी सामान लाइ हु.. हम दोनोके लीये हे चल.. आजा इधर.. पहेले मे नीपटालु.. फीर तेरी बारी.. मेने कहाथानां.. आज तेरे लीये सरप्राइझ हे..
नीशा : (आगे आते सरमाते हसते) भाभी कैसी बारी.. कैसी सरप्राइझ..? ओर करना क्या हे..? येतो बताइअे..
चारु : (दो हार लेकर आते) देखो..? जैसे कमीनीको कुछ मालुमही नही.. अरे पगली आज हम दोनोकी देवुके साथ सादी हे.. देवु हमसे गांधर्व विवाह कर रहा हे.. चल.. आजा..
नीशा : (आस्चर्यसे देखते) क्या..? सादी..? लेकीन वोतो सीर्फ आपके साथ.. तो फीर मे..?
चारु : (गाल सहेलाते मुस्कुराते) हां नीशा.. अब हम दोनोही आजसे रश्मी भाभीकी तराह देवुकी सीक्रेट बीवीया होजायेगी.. हमे कहा दुनीयाके सामने ढंढोरा पीटना हे.. आजसे सही मायनोमे हमारा पहेला पती देवु होजायेगा.. अब हमे असली सुख हमारे देवुसे ही मीलेगा.. तुमतो हमारे पतीको जानती हो.. चल आजा.. वैसेभी अब सुधीर भैया भी तो वही चाहते हे.. चल.. बाकीकी बाते हम बादमे देवुको बतायेगे..
कहतो नीशाकी आंखसे खुसीके मारे दो बुंद आंसु टपक गये.. ओर वो मुस्कुराते आगे आकर खडी होगइ.. तब चारुने थाली मे रखा सामान नीशाके हाथोमे थमा दीया.. ओर दो हारमेसे अेक हार देवुके हाथोमे देदीया.. फीर सरमाते अपना हार देवुके गलेमे डाल दीया.. तो देवायतनेभी अपना हार चारुके गलेमे पहेना दिया.. फीर देवायतने थालीमे पडे कुमकुमसे अेक चुटकी सींदुर लेलीया.. तब चारुने अपनी आंख बंध करदी..
ओर देवायतने उनकी मांग भरदी.. तब चारुकी आंखोसे आंसुओकी धारा बहेने लगी.. तब देवायतने थालीमेसे अेक मंगलसुत्रभी उठालीया ओर चारुके गलेमे डाल दीया.. तब चारुके सब्रका बांध टुट गया.. ओर वो देवायतकी बाहोमे आकर फुटफुटकर रोने लगी.. तब नीशाकी आंखसेभी आंसु नीकलने लगे.. फीर नीशा ओर देवायतने चारुके आंसु पोछते उनको सांत कीया.. ओर चारु नीशाके हाथसे थाली लेकर साइड होगइ..
तब नीशा सरमाते देवायतके पास आकर खडी होगइ.. तो चारुने अेक हार नीशाको ओर दुसरा देवायतके हाथोमे थमा दीया.. तब नीशानेभी अपना हार देवायतके गलेमे डालदीया.. ओर देवायतने अपना हार नीशाके गलेमे पहेना दीया.. ओर वही दोहराया जो चारुके साथ कीया.. देवायतने नीशाकी मांग भरदी.. ओर दुसरा मंगलसुत्र उनके गलेमे डाल दीया.. तब नीशाकीभी वोही हालत होगइ..
वो चारुके गले लग गइ.. ओर वोभी रोते आंसु बहाने लगी.. तब चारुनेभी नीशाके आंसु पोछे.. फीर दोनोही देवायतके पांव छुकर उनकी अगल बगलमे पास आकर खडी होगइ.. ओर तीनो हाथ जोडकर खडे रहे.. तब देवायतने दोनोके साथ सादीकी सारी कसमे खाइ.. जो पंडीत सादीमे वर कन्याको सप्तपदीमे खीलाते हे.. जब सब कसमे पुरी होगइ.. दोनोने देवायतको अपना पती स्वीकार करलीया..
अध्याय - १६०
धिरेनने वही नीलमको अपनी गोदमे बीठाकर बाहोमे भीचलीया.. तो नीलमने खुद धिरेनके होठोको चुमते अपनी जीभ धिरेनके मुहमे डालदी.. तो धिरेनने नीलमका परदर्सी स्कर्ट उचा करते उनके दोनो संतरे जैसे गोरे गोरे बुब्सको अपने पंजोमे थाम लीया.. ओर नीलमकी जीभको बडेही कामुक तरीकेसे चुसने लगा.. ओर दोनोही प्यारकी आगोसमे चले गये.. ओर आपसमे बाते करते प्यारके खेलको खेलने लगे.. कलसे धिरेनसे तीन बार चुदवाकर अब नीलम उनसे काफी खुल चुकी थी.. ओर उनकी ठरकभी काफी बढ गइथी....अब आगे
तो दुसरी ओर देवायत चारु ओर नीशा तीनोही आधे पोने घंटेकी ड्राइव करके गांवकी बाते करते अपनी तैय मंजीलपे पहोंच गये.. तो चारु ओर नीशा दोनोही जंगलमे वीरानसी जगह चारो ओर देखते थोडीसी गभराने लगी.. ये वोही आदीवासीओकी जगाह थी जहा अेक मंदिर था.. यही मंदिरमे देवायतने चंदा ओर भुमीकासे सादी कीथी.. तब कीसीको नही पताथाकी यही मंदिरके साथ देवायतके खानदानके सारे रहस्य जुडे हे..
चारु : (कारसे उतरतेही चाहो ओर देखते) देवु.. ये कौनसी जगाहपे आप हमे लेकर आये..? मेने तो इसे कभी नही देखा..? मे तो सोच रहीथी की हम आश्रमपे जा रहे हे.. ये कौनसी जगाह हे..?
देवरजी : (नीशा पास आते) हां देवरजी.. मेनेभी नही देखा.. कीतनी डरावनी जगाह हे.. लगता हे यहा कोइ नही आता होगा..
देवायत : (मुस्कुराते) अरे दोनो डरो मत.. यहीतो हमारे आराध्य देवकी जगाह हे.. जहा मेने अपनी चंदासे गांधर्व सादी कीथी.. दोनो आओ अंदर.. मेरे पीछे पीछे चली आओ.. कुछ नही होगा..
कहेते देवायत अंदरकी ओर जाने लगा.. तो चारुने जटसे उनका हाथ पकड लीया.. तो दुसरी ओर नीशानेभी देवायतका दुसरा हाथ बाजुसे पकलीया.. ओर दोनो चारो ओर देखते उनके साथ चलने लगी.. अंदर परीसरमे गये तो पुरे परीसरमे वोही सुखे पते पडे हुअे थे.. दोनोको अंदर अेक बडा मंदिर दीखा.. तब देवायत उन मंदिरकी ओर जाने लगा.. तो दोनोभी यंत्रवत उनके साथ चारो ओर देखते चलने लगी.. ओर तीनो मंदिरमे आगये..
तो देखा वहा बहुत बडा शीवलींग था.. ओर लींगके उपर अभी अेक बहुत बडा सांप अपनी फन फैलाये बैठाथा.. जीसे देखकर चारु ओर नीशा दोनोही डर गइ.. ओर वही खडी रेह गइ.. लेकीन जैसे देवायतके मनमे तो कोइ डरही नहीथा.. वो आगे बढकर वही लींगके पास घुटनोके बल बैठ गया.. ओर हाथ जोडते सीस नमाकर दर्शन करने लगा.. तो सांप अपनी फेन थोडी पीछे करते देवायतकी ओर देखताही रहा..
जैसे उनको पहेचानता हो.. ओर वो अेकही पलमे लींगसे सरकते हट गया.. ओर पीछे अेक मंदिरके कोनेमे बील जैसा था.. तो वो बीलमे चला गया.. तब देवायतने दोनोकी ओर देखकर स्माइल कीया.. ओर दोनोकोहाथके इसारेसे अंदर आनेके लीये कहा.. तो चारु ओर नीशा थोडासा डरते अंदरकी ओर आगइ.. ओर हाथ जोडके दर्शन करने लगी.. तब देवायतने अपने हाथोसे वहा सब जगाह सफाइ करदी..
वहा अेक डोलमे पानी पडा हुआ था.. तो तीनोने बारी बारी लींगका अभीषेक कीया.. ओर हाथ जोडकर दर्शन कीये.. तब जाकर नीशा ओर चारुके मनमे डर खतम हुआ.. दोनो अबभी कुछ नही बोल रहीथी.. वो सीर्फ बीलकी ओर देख रहीथी.. तब जाकर देवायतने चारुकी ओर मुस्कुराते देखा.. तो चारु ओर नीशा दोनोमे थोडी हींमत आगइ.. ओर दोनोही देवायतके पास आकर खडी होगइ..
देवायत : (मुस्कुराते) चारु मे यहा अक्सर आते रहेता हु.. पता नही इस जगाहसे मुजे बहुत लगाव हे.. अभी अभी तुम दोनोने जो सांपको देखानां.. वोही इस जगाहकी रक्षा करता हे.. बस कभी कभी इनके दर्शन होजाते हे.. जो आज फीरसे होगये.. मे इनको कइ बार देख चुका हु.. जैसे वोभी मुजे पहेचानने लगा हे..
चारु : देवु.. लेकीन येतो कीतना बडा था.. क्या आपको डर नही लगता..? ओर ये मंदिरमे कोन आता हे..? देखो यहा बाल्टीमे पानी भी भरा हुआ हे.. लगता हे यहा कोइ आता होगा..
देवायत : चारु.. ये यहाके कबीले वालोका मंदिर हे.. मे वहा उन सबको पहेचानता हु.. हमारे खेतोमे जो वो हरीया ओर मालती हेनां..? जो पुनोकी सादीमे काम कर रहेथे.. वो दोनो यही पासके कबीलेके हे.. बस.. यहा सीर्फ वो कबीले वाले लोगही आते हे..
नीशा : (हसते) क्या..? मालती यहीकी हे.. आइमीन आदीवासी कबीलेकी..? वो अैसे दिखती तो नही..?
देवायत : (हसते) हां अब उसेभी सहेरकी हवा लग गइ हे.. सीर्फ मालती ही नही अबतो कबीलेमे कइ ओर लडकीयोको सहेरकी हवा लग चुकी हे.. कइ कइ तो अैसी दीखती हे की सहेरकी लडकीयाभी उनके आगे पानी भरे.. बस.. वो इसीलीये यहा बहार वालोको ज्यादा आने नही देते.. ताकी उनकी लडकी बहार वालोसे सादी ना करले..
चारु : (सरारतसे हसते) तो फीर वो आपको यहा क्यु आने देते हे.. हें..हें..हें.. कोइ खास वजह..?
देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. क्युकी वो सब मुजे आजभी अपना राजा मानते हे.. ओर यहा मेरी अेक रानीभी हे.. जो इस बात मंजु पुनोके अलावा कीसीको नही पता.. चंदाकोभी नही हे.. तो तुम दोनोभी इस बातको भुल जाना.. समजी..? जमीला नाम हे उनका.. ओर आगे जाकर मेरा जो पोता होगानां..? उनका भी इसी जगाहपे कुछ कनेक्शन हे.. बस बाबाने मुजे इतना ही बताया हे.. वो मुजे खुलकर नही बताते..
चारु : (हसते) देवु.. जो भी हो.. लेकीन हमे जानकर बहुत खुसी हुइ.. की आप यहाके राजा हो.. आप फीकर मत करना हमने कुछ नही सुना.. हें..हें..हें.. तो अब क्या करे..? मे हमारा सामान नीकालु..?
देवायत : (हसते) तो क्या हम यहा भजीया तलने आये हे..? चल नीकाल.. नीशा तुमभी इधर आजा..
नीशा : (सरमाते आस्चर्यसे) मे..? लेकीन मे यहा खडी हुनां.. आप दोनो अपना नीपटालो.. कहोतो मे आप दोनोकी कुछ मदद करदु.. हें..हें..हें..
चारु : (सामान नीकालते) मददकी बच्ची.. सीर्फ मेरे लीये नही.. मे तेरे लीये भी सामान लाइ हु.. हम दोनोके लीये हे चल.. आजा इधर.. पहेले मे नीपटालु.. फीर तेरी बारी.. मेने कहाथानां.. आज तेरे लीये सरप्राइझ हे..
नीशा : (आगे आते सरमाते हसते) भाभी कैसी बारी.. कैसी सरप्राइझ..? ओर करना क्या हे..? येतो बताइअे..
चारु : (दो हार लेकर आते) देखो..? जैसे कमीनीको कुछ मालुमही नही.. अरे पगली आज हम दोनोकी देवुके साथ सादी हे.. देवु हमसे गांधर्व विवाह कर रहा हे.. चल.. आजा..
नीशा : (आस्चर्यसे देखते) क्या..? सादी..? लेकीन वोतो सीर्फ आपके साथ.. तो फीर मे..?
चारु : (गाल सहेलाते मुस्कुराते) हां नीशा.. अब हम दोनोही आजसे रश्मी भाभीकी तराह देवुकी सीक्रेट बीवीया होजायेगी.. हमे कहा दुनीयाके सामने ढंढोरा पीटना हे.. आजसे सही मायनोमे हमारा पहेला पती देवु होजायेगा.. अब हमे असली सुख हमारे देवुसे ही मीलेगा.. तुमतो हमारे पतीको जानती हो.. चल आजा.. वैसेभी अब सुधीर भैया भी तो वही चाहते हे.. चल.. बाकीकी बाते हम बादमे देवुको बतायेगे..
कहतो नीशाकी आंखसे खुसीके मारे दो बुंद आंसु टपक गये.. ओर वो मुस्कुराते आगे आकर खडी होगइ.. तब चारुने थाली मे रखा सामान नीशाके हाथोमे थमा दीया.. ओर दो हारमेसे अेक हार देवुके हाथोमे देदीया.. फीर सरमाते अपना हार देवुके गलेमे डाल दीया.. तो देवायतनेभी अपना हार चारुके गलेमे पहेना दिया.. फीर देवायतने थालीमे पडे कुमकुमसे अेक चुटकी सींदुर लेलीया.. तब चारुने अपनी आंख बंध करदी..
ओर देवायतने उनकी मांग भरदी.. तब चारुकी आंखोसे आंसुओकी धारा बहेने लगी.. तब देवायतने थालीमेसे अेक मंगलसुत्रभी उठालीया ओर चारुके गलेमे डाल दीया.. तब चारुके सब्रका बांध टुट गया.. ओर वो देवायतकी बाहोमे आकर फुटफुटकर रोने लगी.. तब नीशाकी आंखसेभी आंसु नीकलने लगे.. फीर नीशा ओर देवायतने चारुके आंसु पोछते उनको सांत कीया.. ओर चारु नीशाके हाथसे थाली लेकर साइड होगइ..
तब नीशा सरमाते देवायतके पास आकर खडी होगइ.. तो चारुने अेक हार नीशाको ओर दुसरा देवायतके हाथोमे थमा दीया.. तब नीशानेभी अपना हार देवायतके गलेमे डालदीया.. ओर देवायतने अपना हार नीशाके गलेमे पहेना दीया.. ओर वही दोहराया जो चारुके साथ कीया.. देवायतने नीशाकी मांग भरदी.. ओर दुसरा मंगलसुत्र उनके गलेमे डाल दीया.. तब नीशाकीभी वोही हालत होगइ..
वो चारुके गले लग गइ.. ओर वोभी रोते आंसु बहाने लगी.. तब चारुनेभी नीशाके आंसु पोछे.. फीर दोनोही देवायतके पांव छुकर उनकी अगल बगलमे पास आकर खडी होगइ.. ओर तीनो हाथ जोडकर खडे रहे.. तब देवायतने दोनोके साथ सादीकी सारी कसमे खाइ.. जो पंडीत सादीमे वर कन्याको सप्तपदीमे खीलाते हे.. जब सब कसमे पुरी होगइ.. दोनोने देवायतको अपना पती स्वीकार करलीया..