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आजकल अेक घर बहुतही खुस था.. वोथा बनवारीलालका घर.. उनके बेटेने अपनी बहुको बहुतही तगडी रकम देकर डीवोर्स देदीयाथा.. तो आज कल वो ओर उनकी बहु दोनो ही बीन्दास होकर अब अेक पती पत्नीकी तराह रहेने लगे थे.. ओर अबतो आस पडोसके लोगोको भी दोनो अेक दुसरेकी पती पत्नीकी पहेचान देने लगेथे.. तो गांवके लोगोका भी मुह बंध होने लगा.. ओर सबने उनकी बाते करनाभी बंध कर दीयाथा.. तो दोनोही बहुत खुस होने लगे..
तो आज राजीवके घरपे भी सब देर तक सोते रहे.. सबसे पहेले नीर्मला जाग गइ.. ओर देखातो राजीव अबभी गहेरी नींद सो रहाथा.. नीर्मलाको पताही नही थाकी राजीव कल रात उनकी चुदाइ करके बेहोस हो गयाथा.. वो बाथरुममे जाकर नहाने लगी.. ओर फीर तैयार होकर कंपलीट होगइ.. फीर राजीवके पास आकर उनको प्यार भरी नजरोसे देखती रही.. ओर उनके सरपे चुमी लेकर कीचनमे चली गइ..
तो कुछही देरमे चंदा ओर मंजुभी तैयार होकर कीचनमे आगइ.. ओर नीर्मलाके काममे हाथ बटाने लगी.. भावना अपनी बच्चीको दुध पीलाकर तैयार हो रहीथी.. तो कुछ देरके बाद वोभी कीचनमे चली गइ.. ओर सबके साथ काममे हाथ बटाने लगी.. जैसेही नीर्मला कीचनसे बहार चली गइ.. तो तीनोही अेक दुसरेके सामने कल रात तीनोके बीच लेस्बीयन खेलकी बातको लेकर जोरोसे हसने लगी..
भावना : (सरमाते हसते) मौसी.. मेतो समजती थी सीर्फ दीदी ही अैसी हे.. लेकीन पता नही थाकी आपभी उनके साथ रहेकर अैसी होगइ हे.. हें..हें..हें..
चंदा : (सरमाते मंजुकी पीठमे अेक मुका मारते हसते) हां.. ये सब तेरी बहेनका ही सीखाया हुआ हे.. कमीनीने मुजेभी ठरकी बना दीया.. देखा नही कैसे उछल उछलके अेक मर्दकी तराह कर रही थी.. हें..हें..हें..
मंजुला : (हसते) रहेने दीजीये दीदी.. मेरी सादीसे पहेले भी ये खेल आप मेरे साथ कइ बार खेल चुकी हो..
चंदा : (हसते) कमीनी रहेने दे.. तुम तो चुपही रहेना.. तब मेभी क्या करती..? अपनी आग बुजानेका सीर्फ अेक हीतो जरीया था.. ये सब उस कमीनी.. तेरी सहेली सीखाकर गइ हे.. दीखनेमे तो कीतनी भोली भाली लगती हे.. लेकीन हे बहुत ठरकी..
भावना : (हसते आस्चर्यसे देखते) मौसी.. आप कीसकी बात कर रही हे..?
चंदा : (हसते) अरे वो सृती.. जो अब हमारी भी सौतन होगइ हे.. हें..हें..हें..
मंजुला : अरे दीदी.. जरा बुआकोभी तो जगादो.. अभीतक सो रही हे.. अच्छा हे सो रही हे.. वरना अपनी बेटीकी बात सुनकर उनको बुरा लगता.. भावु.. जा जगादे उनको.. सायद आज सृती ओर पुनोभी सामको यहा आयेगी.. देखते हे देवु कब उनको छोडने आता हे..
जैसेही भावना भुमीको जगाने उनके रुममे जानेके लीये कीचनसे बहार नीकली.. तो देखा भुमीका ओर नीर्मला दोनोही धीरेसे कल रातके बारेमे सरमाती हस हसके बाते कर रहीथी.. तो भावना उनकी ओर देखते ही हसने लगी.. ओर उनके साथ जाकर बैठ गइ.. तो भुमीका प्यारसे उनके सरको सहेलाने लगी.. तो नीर्मलाभी भावनाकी ओर प्यार भरी नजरोसे देखते मुस्कुराती रही.. तभी भुमीने पुछही लीया..
तो आज राजीवके घरपे भी सब देर तक सोते रहे.. सबसे पहेले नीर्मला जाग गइ.. ओर देखातो राजीव अबभी गहेरी नींद सो रहाथा.. नीर्मलाको पताही नही थाकी राजीव कल रात उनकी चुदाइ करके बेहोस हो गयाथा.. वो बाथरुममे जाकर नहाने लगी.. ओर फीर तैयार होकर कंपलीट होगइ.. फीर राजीवके पास आकर उनको प्यार भरी नजरोसे देखती रही.. ओर उनके सरपे चुमी लेकर कीचनमे चली गइ..
तो कुछही देरमे चंदा ओर मंजुभी तैयार होकर कीचनमे आगइ.. ओर नीर्मलाके काममे हाथ बटाने लगी.. भावना अपनी बच्चीको दुध पीलाकर तैयार हो रहीथी.. तो कुछ देरके बाद वोभी कीचनमे चली गइ.. ओर सबके साथ काममे हाथ बटाने लगी.. जैसेही नीर्मला कीचनसे बहार चली गइ.. तो तीनोही अेक दुसरेके सामने कल रात तीनोके बीच लेस्बीयन खेलकी बातको लेकर जोरोसे हसने लगी..
भावना : (सरमाते हसते) मौसी.. मेतो समजती थी सीर्फ दीदी ही अैसी हे.. लेकीन पता नही थाकी आपभी उनके साथ रहेकर अैसी होगइ हे.. हें..हें..हें..
चंदा : (सरमाते मंजुकी पीठमे अेक मुका मारते हसते) हां.. ये सब तेरी बहेनका ही सीखाया हुआ हे.. कमीनीने मुजेभी ठरकी बना दीया.. देखा नही कैसे उछल उछलके अेक मर्दकी तराह कर रही थी.. हें..हें..हें..
मंजुला : (हसते) रहेने दीजीये दीदी.. मेरी सादीसे पहेले भी ये खेल आप मेरे साथ कइ बार खेल चुकी हो..
चंदा : (हसते) कमीनी रहेने दे.. तुम तो चुपही रहेना.. तब मेभी क्या करती..? अपनी आग बुजानेका सीर्फ अेक हीतो जरीया था.. ये सब उस कमीनी.. तेरी सहेली सीखाकर गइ हे.. दीखनेमे तो कीतनी भोली भाली लगती हे.. लेकीन हे बहुत ठरकी..
भावना : (हसते आस्चर्यसे देखते) मौसी.. आप कीसकी बात कर रही हे..?
चंदा : (हसते) अरे वो सृती.. जो अब हमारी भी सौतन होगइ हे.. हें..हें..हें..
मंजुला : अरे दीदी.. जरा बुआकोभी तो जगादो.. अभीतक सो रही हे.. अच्छा हे सो रही हे.. वरना अपनी बेटीकी बात सुनकर उनको बुरा लगता.. भावु.. जा जगादे उनको.. सायद आज सृती ओर पुनोभी सामको यहा आयेगी.. देखते हे देवु कब उनको छोडने आता हे..
जैसेही भावना भुमीको जगाने उनके रुममे जानेके लीये कीचनसे बहार नीकली.. तो देखा भुमीका ओर नीर्मला दोनोही धीरेसे कल रातके बारेमे सरमाती हस हसके बाते कर रहीथी.. तो भावना उनकी ओर देखते ही हसने लगी.. ओर उनके साथ जाकर बैठ गइ.. तो भुमीका प्यारसे उनके सरको सहेलाने लगी.. तो नीर्मलाभी भावनाकी ओर प्यार भरी नजरोसे देखते मुस्कुराती रही.. तभी भुमीने पुछही लीया..