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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - १६२
कहातो लता बहुतही सर्मसार होगइ.. ओर लखनकी ओर तीरछी नजरोसे देखते हसती रही.. लेकीन उनको पता नही चला.. की डबल मींनींग बातो ही बातोमे दोनोके बीच क्या बाते होगइ.. रमाने बडीही सीफततासे लखनका प्यार कबुल करनेकी बात लखनको कहेदी थी.. तो इस बातसे लखनभी बहुत खुस होगया.. बस अब उनको इन्तजार था तो सीर्फ रमाके फोनका.. ओर सब लोग खाना खाते रहे.. तभी....अब आगे
तब लखन रमाकी ओर मुस्कुराते आंखोके इसारेसे उसे फोन करनेको कहेता हे.. तो रमाभी आंखोके इसारोसे उसे हां कहेती हे.. दोनोही खाना खाते आंखोकी भासामे बाते करते रहे.. आज रमा बहुत खुस हो रहीथी.. जैसे उनकी बरसोकी रइस होनेकी मनकी मुराद पुरी होते नजर आइ हो.. फीर सबने खाना खालीया तो लता उनकी बेग लेने रुममे चली गइ ओर बेग लेकर फटाफट बहार आगइ..
तभी लखन लता सबके पैर छुने लगे.. तब लता आगे थी.. तो लखन उनके पीछे पीछे पैर छुते आगे बढता गया.. जब लखन रमाके पास आया तो उनकी ओर कातील नजरोसे मुस्कुराते उनके पैर छुनेके लीये जुक गया.. तो रमाने लखनको अपने पैर छुने नही दीया.. ओर जटसे लखनको कंधेसे पकडकर खडा करते उनको हग करलीया.. ओर धीरेसे कानमे केह दीया..
रमा : (धीरेसे कानमे) लखनजी.. अब आपकी जगाह मेरे पैरोमे नही हे.. कही ओर हे.. हें..हें..हें..
लखन : (धीरेसे) जी भाभी.. मुजे आपके फोनका इन्तजार रहेगा..
कहेते लखन लताके हाथसे बेग लेकर आगे नीकल गया.. तो रमा सरला भानु सबलोग लताको दरवाजे तक छोडने आगये.. जब दोनो कारमे बैठ गये तबभी रमा लखनकी ओर देखते मुस्कुरा रही थी.. ओर हाथ हीलाते लखनको बाय करने लगी.. ओर लखन कार लेकर नीकल गया.. तो भानु रमा ओर सरला तीनो घरके अंदर चले गये.. तब लता ओर लखन बाते करते अपने घरकी ओर जा रहेथे..
लता : (थोडे गुस्सेसे) जानु.. ये भाभी भीनां.. समजती ही नही थी.. उनको अभी खानेके लीये जीद करनेकी क्या जरुरत थी..? ओर हम उसे मनाभी तो नही कर सकते.. उसे क्या कहेती..? की तुम्हाली लाडली धिरेनके घर क्या गुल खीला रही हे.. लखन आप कारको सीधे वही धिरेनके घर जानेदो.. इस बारेमे मेरी भाइसे बात होगइ हे.. हमे नीलुको लेकर सीधे हमारे घरपे ही आना हे..
लखन : (मनमे खुस होते) लता.. क्या सचमे भाइसे बात होगइ..? तो फीर हमे जल्दीसे धिरेनके घर जाना होगा.. नीलु कलसे उनके साथ हे.. पता नही कमीनेने नीलुके साथ क्या क्या कीया होगा.. लता.. भाइने अभी दोनोको कुछ भी कहेनेको मना कीया हे.. तो तुम अभी नीलु या धिरेनको गुस्सेमे कुछभी मत कहेना.. अब हम नीलुको हमारे साथ ही रखेगे.. उनको स्कुलमेभी हम दोनोमेसे कोइ अेक छोडने लेने जायेगे..
लता : (सरमाते) ठीक हे जानु.. मुजेतो उनको छोडने लेने पैदलही जाना पडेगा.. क्या उनका स्कुल पास ही हेनां..? मेने नही देखा..
लखन : (तेजीसे कार चलाते) हां लता.. हम वहा जातेही अेक स्कुटर लेलेगे.. तुम सीख लेना.. तो नीलुको उसीमे छोडने लेने जाना.. ओर अब सहेरमे जा रहे हे.. तो हर वक्त तो मे तेरे साथ नही आ सकता.. इसीलीये तुम स्कुटर सीखले.. पुनोदीदीको आता हे.. वो या फीर मे तुजे सीखा देगे..
लता : (सरमाते हसते) ठीक हे.. जानु.. आपही सीखा देना.. देखनां.. मे गीरुगीतो नही..? वरना कही पैर बैर टुट गयातो आपको ही मेरी सेवा करनी पडेगी.. हें..हें..हें..
लखन : (हसते) अरे कुछ नही होगा.. मे हुनां..? तु क्यु चीन्ता करती हे..? जबतक तुजे स्कुटर चलाना नही आजाता.. तबतक मे नीलुको छोडने ओर लेने जाउगा.. फीरतो कोइ दिकत नही हेनां..?
लता : (सरमाते गाल चुमते) नही.. हें..हें..हें..
दोनोही अैसी बाते करते धिरेनके गांवकी ओर जा रहेथे.. तब वहा धिरेनभी सुबह चाइ नास्ता करके नीलमको लेकर सोफेपे उनके साथ मस्तीया करते प्यार कर रहाथा.. नीलमने सीर्फ ट्रान्सर्फन्ट टोपही पहेना था.. वो नीचेसे बीलकुल नंगी थी.. दोनोही बीना डरके बीन्दास्त अेक दुसरेके पार्टके साथ खेलते प्यार कर रहेथे.. नीलमभी अब बीना सरम धिरेनके लंडको पकडते सहेलाने लगती.. ओर उनपे जुकते कीस करती..
तो धिरेनभी कभी नीलुके संतरे जैसे बुब्स चुमता.. तो कभी उनके होठोको चुमते अेक हाथसे उनकी चुतको सहेलाता.. तब नीलम मदहोस होते सीसकारीया करती.. ओर धिरेनके बालोको सहेलाती.. धीरे धीरे करते दोनोके उपर कामवासना हावी होने लगी.. तभी धिरेनने नीलमको सोफेके कोनेपे बीठा दीया.. ओर खुदभी सोफेपे उल्टा लेटकर नीलमकी चुतपे मुह लगा देता हे..
ओर नीलमकी चुतको चाटते अेक हाथसे टोपको नीचा करके उनके बुब्सको थामलेता हे.. तब नीलम मदहोस होते सीसकारीया करने लगी.. धिरेन नीलमकी चुतको चाटते चाटते अपनी जीभ नीकालकर चुतमे घुसा देता हे.. ओर नीलमके चुतके दानेको अपनी जीभसे खरोदने लगता हे.. तब नीलम सातवे आसमानपे चली गइ.. उसे धिरेनकी इस हरकतने पुरी तराह पागल ओर मदहोस कर दीया..
वो धिरेनके सरको सहेलाते अपना मुह इधर उधर करते छटपटाने लगी.. वो आधी आंख चडाते पुरी तराह वासनाके नसेमे कमरको उछालने लगी.. उनकी चुतसे लगातार तरल पदार्थका रीसाव होने लगा.. तो धिरेन उसे चाट चाटके साफ करदेता था.. उनको नीलमकी चुतका स्वाद बहुतही अच्छा लगता था.. तभी नीलम धिरेनकी ओर वासना भरी नजरोसे देखने लगी.. ओर धिरेनके सरके बालोको खीचते अपने उपर चडाने लगी..
अध्याय - १६२
कहातो लता बहुतही सर्मसार होगइ.. ओर लखनकी ओर तीरछी नजरोसे देखते हसती रही.. लेकीन उनको पता नही चला.. की डबल मींनींग बातो ही बातोमे दोनोके बीच क्या बाते होगइ.. रमाने बडीही सीफततासे लखनका प्यार कबुल करनेकी बात लखनको कहेदी थी.. तो इस बातसे लखनभी बहुत खुस होगया.. बस अब उनको इन्तजार था तो सीर्फ रमाके फोनका.. ओर सब लोग खाना खाते रहे.. तभी....अब आगे
तब लखन रमाकी ओर मुस्कुराते आंखोके इसारेसे उसे फोन करनेको कहेता हे.. तो रमाभी आंखोके इसारोसे उसे हां कहेती हे.. दोनोही खाना खाते आंखोकी भासामे बाते करते रहे.. आज रमा बहुत खुस हो रहीथी.. जैसे उनकी बरसोकी रइस होनेकी मनकी मुराद पुरी होते नजर आइ हो.. फीर सबने खाना खालीया तो लता उनकी बेग लेने रुममे चली गइ ओर बेग लेकर फटाफट बहार आगइ..
तभी लखन लता सबके पैर छुने लगे.. तब लता आगे थी.. तो लखन उनके पीछे पीछे पैर छुते आगे बढता गया.. जब लखन रमाके पास आया तो उनकी ओर कातील नजरोसे मुस्कुराते उनके पैर छुनेके लीये जुक गया.. तो रमाने लखनको अपने पैर छुने नही दीया.. ओर जटसे लखनको कंधेसे पकडकर खडा करते उनको हग करलीया.. ओर धीरेसे कानमे केह दीया..
रमा : (धीरेसे कानमे) लखनजी.. अब आपकी जगाह मेरे पैरोमे नही हे.. कही ओर हे.. हें..हें..हें..
लखन : (धीरेसे) जी भाभी.. मुजे आपके फोनका इन्तजार रहेगा..
कहेते लखन लताके हाथसे बेग लेकर आगे नीकल गया.. तो रमा सरला भानु सबलोग लताको दरवाजे तक छोडने आगये.. जब दोनो कारमे बैठ गये तबभी रमा लखनकी ओर देखते मुस्कुरा रही थी.. ओर हाथ हीलाते लखनको बाय करने लगी.. ओर लखन कार लेकर नीकल गया.. तो भानु रमा ओर सरला तीनो घरके अंदर चले गये.. तब लता ओर लखन बाते करते अपने घरकी ओर जा रहेथे..
लता : (थोडे गुस्सेसे) जानु.. ये भाभी भीनां.. समजती ही नही थी.. उनको अभी खानेके लीये जीद करनेकी क्या जरुरत थी..? ओर हम उसे मनाभी तो नही कर सकते.. उसे क्या कहेती..? की तुम्हाली लाडली धिरेनके घर क्या गुल खीला रही हे.. लखन आप कारको सीधे वही धिरेनके घर जानेदो.. इस बारेमे मेरी भाइसे बात होगइ हे.. हमे नीलुको लेकर सीधे हमारे घरपे ही आना हे..
लखन : (मनमे खुस होते) लता.. क्या सचमे भाइसे बात होगइ..? तो फीर हमे जल्दीसे धिरेनके घर जाना होगा.. नीलु कलसे उनके साथ हे.. पता नही कमीनेने नीलुके साथ क्या क्या कीया होगा.. लता.. भाइने अभी दोनोको कुछ भी कहेनेको मना कीया हे.. तो तुम अभी नीलु या धिरेनको गुस्सेमे कुछभी मत कहेना.. अब हम नीलुको हमारे साथ ही रखेगे.. उनको स्कुलमेभी हम दोनोमेसे कोइ अेक छोडने लेने जायेगे..
लता : (सरमाते) ठीक हे जानु.. मुजेतो उनको छोडने लेने पैदलही जाना पडेगा.. क्या उनका स्कुल पास ही हेनां..? मेने नही देखा..
लखन : (तेजीसे कार चलाते) हां लता.. हम वहा जातेही अेक स्कुटर लेलेगे.. तुम सीख लेना.. तो नीलुको उसीमे छोडने लेने जाना.. ओर अब सहेरमे जा रहे हे.. तो हर वक्त तो मे तेरे साथ नही आ सकता.. इसीलीये तुम स्कुटर सीखले.. पुनोदीदीको आता हे.. वो या फीर मे तुजे सीखा देगे..
लता : (सरमाते हसते) ठीक हे.. जानु.. आपही सीखा देना.. देखनां.. मे गीरुगीतो नही..? वरना कही पैर बैर टुट गयातो आपको ही मेरी सेवा करनी पडेगी.. हें..हें..हें..
लखन : (हसते) अरे कुछ नही होगा.. मे हुनां..? तु क्यु चीन्ता करती हे..? जबतक तुजे स्कुटर चलाना नही आजाता.. तबतक मे नीलुको छोडने ओर लेने जाउगा.. फीरतो कोइ दिकत नही हेनां..?
लता : (सरमाते गाल चुमते) नही.. हें..हें..हें..
दोनोही अैसी बाते करते धिरेनके गांवकी ओर जा रहेथे.. तब वहा धिरेनभी सुबह चाइ नास्ता करके नीलमको लेकर सोफेपे उनके साथ मस्तीया करते प्यार कर रहाथा.. नीलमने सीर्फ ट्रान्सर्फन्ट टोपही पहेना था.. वो नीचेसे बीलकुल नंगी थी.. दोनोही बीना डरके बीन्दास्त अेक दुसरेके पार्टके साथ खेलते प्यार कर रहेथे.. नीलमभी अब बीना सरम धिरेनके लंडको पकडते सहेलाने लगती.. ओर उनपे जुकते कीस करती..
तो धिरेनभी कभी नीलुके संतरे जैसे बुब्स चुमता.. तो कभी उनके होठोको चुमते अेक हाथसे उनकी चुतको सहेलाता.. तब नीलम मदहोस होते सीसकारीया करती.. ओर धिरेनके बालोको सहेलाती.. धीरे धीरे करते दोनोके उपर कामवासना हावी होने लगी.. तभी धिरेनने नीलमको सोफेके कोनेपे बीठा दीया.. ओर खुदभी सोफेपे उल्टा लेटकर नीलमकी चुतपे मुह लगा देता हे..
ओर नीलमकी चुतको चाटते अेक हाथसे टोपको नीचा करके उनके बुब्सको थामलेता हे.. तब नीलम मदहोस होते सीसकारीया करने लगी.. धिरेन नीलमकी चुतको चाटते चाटते अपनी जीभ नीकालकर चुतमे घुसा देता हे.. ओर नीलमके चुतके दानेको अपनी जीभसे खरोदने लगता हे.. तब नीलम सातवे आसमानपे चली गइ.. उसे धिरेनकी इस हरकतने पुरी तराह पागल ओर मदहोस कर दीया..
वो धिरेनके सरको सहेलाते अपना मुह इधर उधर करते छटपटाने लगी.. वो आधी आंख चडाते पुरी तराह वासनाके नसेमे कमरको उछालने लगी.. उनकी चुतसे लगातार तरल पदार्थका रीसाव होने लगा.. तो धिरेन उसे चाट चाटके साफ करदेता था.. उनको नीलमकी चुतका स्वाद बहुतही अच्छा लगता था.. तभी नीलम धिरेनकी ओर वासना भरी नजरोसे देखने लगी.. ओर धिरेनके सरके बालोको खीचते अपने उपर चडाने लगी..