Incest यह क्या हुआ - Page 12 - SexBaba
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Incest यह क्या हुआ

राजेश ने अपना land चुसने के लिए मालती को इशारे किया। मालती राजेश के land के नीचे फर्श पर बैठ गई। पहले land को पकड़कर अच्छे से उसका मुआइना किया।land ki मोटाई लंबाई और उसकी टोपा देखकर हथप्रभ थी।

राजेश_क्या देख रही हो, चलो चूसना शुरू करो।

मालती ने वह land को हाथ में लेकर पहले हिलाई।

फिर land का टोपा मुंह में भरकर चुसने लगी।

राजेश _पुरा अंदर लो, पहले नही चूसी हो क्या?

मालती _नई, पहली बार चूस रही।

राजेश _पुरा मुंह में लेकर चूसो, तब ज्यादा अच्छा महसूस होता है।

मालती जितना मुंह में ले सकती थी land मुंह में लेकर चूसने लगी।

राजेश उसके बालो से खेलने लगा।

अन्य सभी औरतों की नज़र मालती के मुंह पर थी कि वह किस प्रकार land को चूस रही है।

राजेश की उत्तेजना और बड़ने लगा वह अपना शर्ट और बनियान को उतार कर मादर जात नंगा हो गया।

सभी औरतों की नज़र राजेश के गठीला बदन पर गया।

ऐसा गठीला शरीर और अलौकिक land देखकर सभी राजेश पर मोहित सी हो गई। शादी के पहले लड़कियां जैसे दूल्हा की कल्पना करती है, राजेश वैसा ही था। राजेश के शरीर में एक अलग ही आकर्षण था जो औरतों को अपनी ओर खींच रही थी।

इधर राजेश, मालती के चूचो को ब्लाउज के ऊपर से मसलना शुरु कर दिया।

राजेश _सुनो सभी अपनी ब्लाउज निकाल दो तुम लोगो की मम्मे देखकर मेरा जोश और बड़ जाए गा जिससे मेरा स्खलन में मदद मिलेगी।

सभी औरते अपनी ब्लाउज को उतार कर अपनी मम्मे बाहर कर ली। उनकी सुडौल बड़ेबड़े मम्मे देखकर राजेश का जोश और बड़ गया।

राजेश ने सभी को अपने पास बारी बारी से बुलाया और मम्मे मसल मसल कर पीने लगा, जिसकी मम्मे वह पीता उससे अपना land चुसने के लिए कहता औरते अपना मम्मे चुसाने के बाद राजेश का land चुसने लगती।

सभी औरतों से land चूसा लेने के बाद। राजेश ने मालती को बेड किनारे लेट जाने को कहा, मालती बेड किनारे लेट गई। राजेश ने मालती के टांग उठा दिया और उसकी पेंटी पकड़कर खींचकर टांगों से अलग कर दिया। सभी औरतों को पेंटी निकालने कह दिया।

अब राजेश मालती की चिकनी और खूबसूरत फुली हुई बुर को ऊंगली डाल कर पहले अच्छे से रगड़ा उसने देखा बुर पूरी तरह गीली हो चुकी है।

राजेश ने अपना land का टोपा बुर के छेद पर रख और एक हल्का धक्का मारा land का टोपा सरककर बुर में चला गया।

अब हल्का हल्का धक्का मारते हुए land को धीरे धीरे बुर में धकेलने लगा।land धीरे धीरे बुर के अंदर पुरा समा गया। अब राजेश बुर पर जोर जोर से धक्का लगा कर चोदना शुरू किया।land बुर के हर हिस्से को अच्छे से रगड़ रहा था। उसका टोपा बच्चे दानी को ठोकने लगा। जिससे मालती बहुंत ज्यादा उत्तेजित हो गई। उसके मुंह से लगातार कामुक सिसकारी निकल रही थी।chudai में ऐसा आनंद आज से पहले कभी नहीं मिला था। वह शीघ्र ही चरमोत्कर्ष अवस्था में पहुंच गई। राजेश का land दनादन फ़च फाच आवाज़ करता बुर चोदे जा रहा था। लंड बुर में सर सर अंदर बाहर हो रहा था। मालती दोनो की chudai देखकर सभी औरते उत्तेजित हो गई उनकी बुर से पानी निकलकर उनकी जांघो तक बहने लगी। वे सभी औरते एक हाथ से अपनी चूची मसलने एवम एक हाथ से अपनी बुर खुजाने लगी।

इधर मालती तो जैसे जन्नत में पहुंच गई थी।

उसकी बुर से पानी झरने की तरह बह रही थी। जिससे लंड बुर का पानी पीकर और लंबा मोटा हो गया।

मालती लंड का प्रहार और बर्दास्त न कर सकी। और जोर से राजेश सको अपने से चिपका लिया। वह झड़ने लगी। कुछ देर बाद राजेश ने एक दूसरी औरत को बेड पकड़ा कर घोड़ी बना दिया। बुर तो पहले से ही पानी से भरा था। लंड को बुर के छेद पर रखकर एक जोर का धक्का मारा लंड बुर को चीरकर एक ही बार में आधा से ज्यादा अंदर घुस गया।

राजेश ने औरत के क़मर के कूल्हे को दोनो हाथो से पकड़ कर गच गच chudai करना शुरू कर दिया। औरत के मुंह से कामुक सिसकारी निकल कर कमरे मे गूंजने लगी।

Chudai देखकर बाकी सभी महिलाओं की हालत बहुंत खराब हो गई वे बहुंत ज्यादा उत्तेजित हो गई वे अपनी बारी आने का बेसब्री से इंतज़ार करने लगें।

इधर राजेश सभी औरतों को बारी बारी से जन्नत की सैर कराने लगा। वे किसी को घोड़ी बना कर चोदता तो किसी को अपने लंड पर बिठा कर, तो किसी को सुला कर अलग अलग आसनों में सभी महिलाओं की जमकर chudai करने लगा। सभीऔरतों को 2_२बार झाड़ने के बाद राजेश आहआह करकेजोर जोर से कराहते हुवे ने मालती के बुर में अपना पानी छोड़ दीया, जिसका एहसास पाकर मालती तीसरी बार झड़ गई। कुछ देर बेड पर लेट कर सुस्ताने के बाद। राजेश ने सभी औरतों को अपनी अपनी कपडे ठीक करने बोल दिया।

सभी औरते अपनी अपनी पेंटी,ब्लाउज पहन ली और अपनी साडी ठीक की आईने के सामने जाकर खुद को संवारने लगी।

राजेश _आप लोगो ने देखा न कितनी मुस्किल से मैं स्खलित हो पाता हूं। डाक्टर ने कहा है की कुछ दिनों ताक ऐसे ही सेक्स करने से सब नॉर्मल हो जायेगा। इसी तरह तुम लोगो को मेरा कुछ दिनों तक इलाज करना पड़ेगा।

कुछ दिन तक तुम्हारे लड़को को अभी थाने में ही रहने दो। ताकि उसे अपनी गलती का एहसास हो फिर मैं थानेदार को उन सभी को छोड़ने बोल दूंगा।

अब तुम लोग जाओ कल फिर इसी समय आ जाना।

सभी औरते अपनी घर चली गई।

इधर भगत और कौशल्या औरतों के जाने के बाद रूम में आई।

भगत _लगता है आपने उन औरतों को कस के रगड़ा है सभी लंगड़ा के चल रही थी।

राजेश मुस्कुराने लगा।

कौशिल्या _तुम तो पुरे सांड हो अकेले ही 6औरतों को झाड़ दिया।

भगत _राजेश भाई मेरा भी तो ख्याल रखो। मुझे भी लेना है इन औरतों की।

राजेश _अबे ले लेना, मैने मना थोड़े ही किया है। पहले उन औरतों को मेरा land ka गुलाम बन जाने दे। फिर मैं जो कहूंगा वे करेंगी।

घर जानें के बाद वे राजेश से chudwane में मिले सुख को ही याद कर गर्म हो रहे थे।chudai से ऐसा मज़ा उन्हें पहले कभी नहीं मिला था। उपर से जवान एवम गठीला शरीर का का मालिक, नवयुवक लड़के से चुदने का सौभाग्य, वे सभी कल का बेशब्री से इंतजार करने लगी। ताकि फिर से राजेश के साथ चुदवाने का आनद ले सके।

अगले दिन फिर से सभी औरते निर्धारित समय पर पहूंच गई। राजेश ने फिर से उन सबको जमकर चोदा और जन्नत का सैर कराया।

सभी महिलाये राजेश की दीवानी हो गई। उन तीनों की बुर की लगातर पांच दिनों तक धज्जियां उड़ाने के बाद। 6वा दिन उन महिलाओं को भगत से चुदवाने के लिए राजी करा लिया। अब राजेश और भगत दोनो मिलकर, उन औरतों की बुर और गाड़ दोनो की बैंड बजाने लगे। कौशिल्या भी इस खेल में शामिल हो गई।

राजेश _देखो हर रोज़ यह खेल खेलने से बाहर वालो को शक हो जायेगा। अब हमें यह खेल रोज न खेलकर सप्ताह में एक बार ही खेलेंगे।

मालती _पर राजेश हम एक सप्ताह तक कैसे रहेंगे? हमारे लिऐ बडी मुस्किल होगी।

कौशिल्या _बदनामी से बचना है तो राजेश का कहना मानना ही पड़ेगा।

राजेश _मै कल थाना जाकर अपना केस वापस ले लूंगा, तुम्हारे लड़के बाहर आ जाएंगे।

अगले दिन राजेश और भगत थाने चला गया।

थानेदार _आओ राजेश, बोलो क्या करना है इन लडको का।

राजेश _मै जरा इनसे बात कर लू फिर बताता हू क्या करना है।

थानेदार ने उन लडको से राजेश को मिलवाया।

राजेश _क्यू बे या रहा है न मज़ा थाने में, तुम लोगो को सात साल की सजा होने वाली है।

सड़ते रहने अब जेल में।

लड़के _भैया हमे एक बार माफ़ कर दो, हमे जेल मत भेजो।

राजेश _छोड़ने के बाद तम लोग फिर वहीं गुंडा गर्दी शुरु कर दोगे।

लड़के _नही भैया, अब से हम ऐसा कुछ भी नहीं करेंगे।

राजेश _ठीक है सोचता हु मै।

कुछ देर बाद बोला, मै तुम लोगो को छुड़वा तो देता हूं। लेकिन केशअभी वापस नहीं लूंगा, 2माह तक देखता हूं।अगर तुम लोग सुधर गए तो ठीक नही तो थानेदार को चार्ज सीट कोर्ट में दाखिल करने बोल दूंगा।

लड़के _ठीक है भैय्या।

भगत _और ध्यान से सुन लो राजेश भाई को अगर कोइ काम पड़ गया तुम लोगो से तो वह तुम लोगो को करना होगा। बोलो मंजूर है।

लड़के _हा भाई हमे मंजूर है।

भगत _ये भीमा तो कुछ बोल ही नही रहा है। क्या तुम्हे जेल जाना है?

लड़के _भीमा भाई हा राजेश भाई का कहना मान लो।

भीमा _ठीक है भैय्या,,, कुछ देर सोचने के बाद कहा।

राजेश के कहने पर थानेदार ने सभी लड़को को जमानत पर छोड़ दिया।
 
राजेश जब घर पहुंचा, उसकी मां सुनिता किचन में काम कर रही थी। जैसे ही राजेश अपने कमरे मे जाने को huwa सुनिता ने राजेश आवाज़ दी।

सुनिता _आज कल तुम कुछ दिनो से कालेज से देर से घर आते हो आख़िर रहते कहा हो।

मैने सुमन को काल करके भी पूछी। वह बता रही थी की कई दिन हो गए। उनके घर आए, वह बता रही थीकहा रहते हो तुम।

राजेश _ओ मां मै दोस्तो के साथ रहता हूं।

सुनिता _जान सकती हूं कि आख़िर रोज रोज दोस्तो से क्या काम रहता है।

राजेश क्या बोले उसको कुछ समझ नहीं आ रहा था।

ओ मां कुछ दिनों बाद खेल प्रतियोगिता होने वाली है न तो कालेज से छुट्टी के बाद हम प्रेक्टिस करते है।

सुनिता _तुम सच कह रहे हो न।

राजेश _लो अब तो तुमको मेरी बातो पर भरोसा ही नही रहा।

सुनिता _तुम पहले जैसे भोला भी तो नहीं रहे। मां की आज्ञाकारी। अब तो अपनी मनमर्जी करने लगें हो।

राजेश _मां अब इंसान हूं, और इंसान से गलती हो जाती हैं। अब उसके लिए बार बार ताना देना मुझे अच्छा नहीं लगता।

सुनिता _तो ठीक है मेरा भरोसा फिर से प्राप्त करना चाहते हो तो, इस बार तुम्हे फिर से अव्वल आना है कालेज में तुम्हे।

राजेश _ठीक है मां।

राजेश अपने कमरे में जाकर पढ़ाई करने लगा।

तभी सुमन का काल आया। राजेश ने काल उठाया।

सुमन _आज कल कहा रहते हो पतिदेव जी। तुम तो अपनी बीवी को भूल ही गए। मां जी पूछ रही थी की कुछ दिनों से तुम घर लेट से जा रहे हो। कही कोई नई मिल गई क्या?

राजेश _हा, बीबी जी,अब रोज रोज तो तुम देती नही इसलिए कोई नया तो देखना पड़ेगा न!

सुमन _बिना लिए एक दिन भी नहीं रह सकते क्या?

राजेश _तुमने ही लत लगाया है।

सुमन _अच्छा जी, मुझे दोष दे रहे।

अच्छा सुनो कल कालेज से छुट्टी के बाद घर आना।

राजेश _क्यू?

सुमन _बात चीत करेंगे और क्या?

राजेश _सिर्फ बात चीत, और कुछ नही।

सुमन _और क्या करना चाहते हो? मेरे सैया।

राजेश _एक मर्द अपनी लुगाई से क्या चाहेगा, मेरी गुलबदन।

अच्छा सुनो कल कालेज एक अच्छी सी हॉट ड्रेस पहन कर आना ताकि देखते ही मूड बन जाए।

सुमन _अच्छा जी, और हॉट ड्रेस में देखकर लड़के मुझे गंदी नजरो से देखेंगे तो तुम्हारा जी नही जलेगा।

सुमन _इसमें जलने की क्या बात है मेरी जान मुझे तो गर्व होगा कि जिसे देखकर लडके अपना हिलाकर पानी छोड़ते हैं, वह हॉट मॉल मेरीहै।

सुमन _अच्छा जी, तो बताओ कौन जी कलर की साड़ी कल पहन कर आऊं।

राजेश _कल यलो कलर की साड़ी पहनना।

सुमन _अच्छा ठीक है जी। अब रखू।

राजेश _एक चुम्मा तो देदो।

सुमन _जो करना है कल, बाय जानू,,,,,

सुमन ने काल रख दिया।

अगले दिन राजेश और भगत दोनो कैंटीन में बैठे थे।

अरे भाई राजेश लडको से पता लगवाने पर पता चला है की एक प्रमोद नाम का व्यक्ति है जो आजकल चाय की दुकान चलाता है। पहले वह बाबा चरमानंद के आश्रम में सेवादार था। सुना है पहले वह बाबा का खास huwa करता था, लेकिन उसकी किसी गलती की वजह से बाबा ने अपने आश्रम से निकाल दिया। वह बाबा का बहुत सा राज जानता होगा। क्यू न हम उससे कुछ मदद ले। जिससे बाबा की कमजोरी पता चल सके। उसे नियंत्रण में लेने का कोई रास्ता मिले।

राजेश _उस सेवादार की दुकान में जाकर चाय पीना पड़ेगा। कल सन्डे है कल चलते हैं उसके पास।

भगत _ठीक है भाई।

क्लास की घंटी बजने के बाद दोनो क्लास रूम में पहुंचे।

क्लास लेने सुमन क्लास में पहुंचीं।

सुमन एक पीले रंग की खूबसूरत पारदर्शी साड़ी पहन रखी थी, जिससे उसके खूबसूरत बदन और कहर ढा रहा था। जिसे देखकर लडको की शरीर में रक्त प्रवाह बड़ गया।

भगत _ भाई मैम को तो देखो, सच में आज तो बहुत हॉट लग रही है। देखो सभी लड़के कैसे आंखे फाड़े देख रहे हैं।

राजेश ने सुमन की ओर देखा, सच में आज तो गजब की हॉट लग रही थी। ठीक इसी समय सुमन ने भी राजेश की ओर देखा। दोनो की नजरे मिली तो सुमन शर्मा कर नजरे झुका ली।

और टॉपिक पर आ गई। लडको का ध्यान पढ़ाई पर कम और सुमन के बदन पर ज्यादा था। वहा पर बैठी लड़किया जलन महसूस करने लगी।

कालेज की छुट्टी होने के बाद। सुमन ने राजेश को काल की।

सुमन _तो, आ रहे है न आज घर।

राजेश _आ रहा हूं, जान। वैसे आज तो गजब की हॉट लग रही थी। सभी लड़को की हालत खराब कर दी तुमने।

सुमन _अच्छा, और तुम्हारा हाल कैसा है?

राजेश _मेरा हाल तो ठीक है पर तुम्हारा छोटे पतिदेव का हाल खराब है? वो तुमसे मिलने के लिए बेचैन है। उसकी बेकरारी तो तुमसे मिलकर ही दूर होगी।

सुमन _किसकी, कौन छोटे पतिदेव।

राजेश _वही जो तुम्हे बच्चा देगा।

सुमन _धत बदमाश,,,,

राजेश _मै कुछ देर में पहुंच रहा हूं। हा तुम साड़ी चेंज मत करना।

सुमन _क्यू, अपने हाथो से उतारने का इरादा है क्या?

राजेश _बडी समझदार है मेरी बीवी।

सुमन _जल्दी आना, मै इंतजार करूंगी?

राजेश की गतिविधि किसी जासूस की नजरे थी।

वह जासूस भी राजेश के पीछे पीछे जाने लगा।

कुछ समय के बाद राजेश सुमन के घर पहुंच गया। सुमन ने कामवाली को छुट्टी दे दी थी।

सुमन दरवाज़ा खोली , दरवाजा खुलते ही राजेश अंदर आया।

सुमन ने अपनी बाहें राजेश के गले में डालते हुए कहा, आ गए मेरे सैंया जी।

राजेश ने सुमन को अपनी बाहों मे उठा लिया। उठा कर सीधा बेडरूम में ले गया। बेडरूम में ले जाकर उसे bed में लिटा दिया और खुद उसके उपर आ गया।

सुमन _ये क्या तुम तो आते ही शुरु हो गए। जैसे बरसो से प्यासे हो। चलो छोड़ो मुझे।

राजेश ने सुमन की ओंठ अपने मुंह भर कर चूसने लगा। कुछ देर ओंठ चुसने के बाद। वह बेड से उतरा और अपना पैंट उतार कर नीचे से नंगा हो गया।

राजेश का लंड खडा हो गया था। वह उसे चुसने के लिए सुमन को इशारा किया।

सुमन बेड से उठी वह बेड रूम से भागने लगी।

राजेश _क्या huwa मूड क्यू खराब कर रही। वह सुमन को पकड़ने उसके पीछे भागने लगा। सुमन अपनी जीब बाहर निकाल कर चिड़ाते हुवे आगे भागने लगी। तभी उसकी साडी की पल्लू राजेश के पकड़ में आ गया। वह पल्लू पकड़कर साड़ी को खींचने लगा। सुमन गोल गोल घूमने लगी। राजेश ने साड़ी खींचकर। फर्श पर फेक दिया । सुमन अब ब्लाउज और पेटीकोट में रह गई , उसकी गहरी नाभि पर जब राजेश की नज़र पड़ा तो वह और उत्तेजित हो गया, वह तेजी से सुमन की ओर लपका। सुमन अपने को बचाते हुवे। अपनी जीब बाहर निकाल कर चिड़ाते हुवे कीचन में घुस गया और दरवाजा बन्द कर दिया। राजेश दरवाजा पीटने लगा।

राजेश _, डार्लिंग, दरवाजा खोलो मुझे क्यू तड़पा रही हो।

सुमन खिलखिला कर हंसने लगी।

सुमन _मिया जी पहले कुछ खा पी तो लो फिर कर लेना मै कही भागी थोड़ी जा रही हू।

राजेश_ना मुझे पहले करना है ।

सुमन _देखो तुम बच्चों की तरह जिद न करो। मै तुम्हारी केमेस्ट्री टीचर हूं। मेरा कहना मानो। तुम जबरदस्ती नहीं कर सकते। बताओ तुम्हारे लिए क्या बनाऊं।

राजेश _देखो मै तुम्हारा पति हू, तुम मुझे मना नही कर सकती। दरवाजा खोलो,मुझे करने दो।

सुमन ने दरवाजा खोल दी। एक दुसरे को देखने लगें।

राजेश आगे बड़ा और उसके ओंठ को अपने मुंह में भरकर चुसने लगा, फिर नीचे बैठ कर उसके नाभि को चूमने लगा। सुमन सिसकने लगी।

अब राजेश खडा हो गया।सुमन नीचे बैठ गईं और राजेश का लंड मुंह में लेकर चूसने लगी।

राजेश ने सुमन के बालो को पकड़कर अपनी आँखें बंद कर लंड चूसवाने का मज़ा लेने लगा।

फिर राजेश ने सुमन को खडा किया और सुमन को पीछे कर झुक दिया। सुमन किचन के प्लेटफार्म पकड़कर झुक गई। राजेश ने सुमन का पेटिकोट ऊपर उठा कर पेंटी नीचे खींच लिया।

जिससे सुमन की चिकनी बुर राजेश के आंखों के सामने आ गया।

राजेश ने सुमन के बुर में अपना इक उंगली डालकर अन्दर बाहर करने लगा। जिससे सुमन के मुंह से कामुक सिसकारी निकलने लगी।

अब राजेश ने अपना लंड पकड़ा और सुमन के बुर में रखकर एक जोर का धक्का लगाया। लंड बुर के चिर कर एक ही बार में आधा घूस गया। सुमन चीख पड़ी।

उई मां,, मार डालोगे क्या?

एक ही बार में पेल दिया। राजेश ने सुमन की चूची को पकड़ा उसे मसलने लगा फिर लंड को खींचकर फिर जोर का धक्का लगा दिया जिससे लंड जड़ तक अंदर घुस गया। सुमन के मुंह से फिर सी चीख निकल पड़ी। आह मां,, तुमने तो मेरी बुर ही फाड़ दी, अपनी बीबी को ऐसे चोदता है क्या कोई।

राजेश _ये मुझे तड़पाने की सजा है।

अब राजेश सुमन की क़मर को पकड़ कर लंड को बुर में तेजी से अंदर बाहर करने लगा।

सुमन के बुर से पानी की बाड़ सी आ गई। लंड बुर में गपागप अंदर बाहर होने लगा। सुमन जन्नत में पहुंच गई। उसके मुंह से कामुक सिसकारी निकलने लगी। कीचन में फच फ्च, गछ गैच की आवाज़ गूंजने लगी। राजेश और सुमन दोनो स्वर्ग का सुख भोग रहे थे।

राजेश _क्या मस्त मॉल तू, तुम्हे चोदने का मज़ा ही कुछ और है। क्या रसीली बुर है तेरी। राजेश ने जोर जोर से धक्का लगाते हुए कहा।

सुमन _झूठे कही के इतने दिन तक कहा थे, सुमन ने सिसकते हुवे बोली।

राजेश _क्या करू मां ने रोज आने से मना किया था।

सुमन _सिर्फ मां का कहना मानोगे बीबी की नही। मादक सिसकारी निकालते हुए बोली।

आह,, उई मां आह री,,, ई,,, आह उन,,

मेरा आने वाला है और जोर से चोदो,,,

राजेश और दोगने गति से बुर चोदने लगा,,,

कुछ ही देर में सुमन चीखते हुए झड़ने लगी।

राजेश ने chudai बंद कर उसके पीठ को सहलाने, चूमने लगा।

कुछ देर बाद वह अपना लंड बाहर निकाल लिया। लंड सुमन की बुर का पानी पीकर और मोटा लग रहा था। वह हवा में लहरा रहा था।

सुमन _देखो मेरा हो गया। अब बस करो।

राजेश _पर मेरा तो अभी नही huwa hai

राजेश ने सुमन के ब्लाउज का बटन खोलने लगा। ब्लाउज खोल कर उसकी ब्रा भी निकाल दिया। उसकी मस्त सुडौल बड़ी बड़ी चूचियों को पकड़ कर उसे मुंह में लेकर चूसने एवम मसले लगा जिससे सुमन फिर से गर्म हो गई और उसके मुंह से सिसकारी निकलने लगी।

राजेश ने सुमन को गोद में उठा लिया ओर सोफे पे लिटा दिया।

फिर दोनो टांगे फैला कर अपने लंड को बुर के छेद में रखकर जोर का धक्का लगाया लंड बुर को फाड़कर एक ही बार में पुरा अंदर घूस गया।

राजेश ने सुमन की फिर से दनादन chudai शुरू कर दिया। सुमन के मुंह से कामुक सिसकारी फिर से निकलने लगी। जो हाल में गूंजने लगी।

कुछ देर इसी आसान में चोदने के बाद। राजेश सोफे पर बैठ गया। और सुमन को अपने लंड पर बिठा लिया।

सुमन राजेश की ओर पीठ करके लंड पर बैठ गई, और लंड पर उछल उछल कर चुदने लगी।

राजेश ने सुमन के कूल्हे को अपने दोनो हाथो से पकड़, अपने लंड पर पटक पटक कर चोदने लगा। दोनो एक बार फिर जन्नत में पहुंच गए। राजेश को इस आसन में चोदने में बहुत मज़ा आ रहा था।

इधर लंड का टोपा सुमन के बच्चे दानी के मुख को ठोक रहा था। जिससे उसे अलौकिक आनद मिलने लगी।

वह फिर से झड़ने लगी।

राजेश ने chudai बंद कर दिया और सुमन केपीठ प्यार से सहलाने लगा।

सुमन _अब बस करो जी, मै थक गई।

राजेश _मेरा तो अभी huwa नही, मेरी बेगम।

सुमन _लाओ इसे चूस कर झाड़ देती हूं।

सुमन राजेश के लंड को चुसने लगी।

इधर राजेश ने अपना शर्ट बनियान उतार कर पुरा नंगा हो गया। और सुमन की पेटिकोट का नाडा खींचकर उसे भी नंगी कर दिया।

राजेश सुमन की चूची मसलने लगा इधर सुमन राजेश के लंड को चूस रही थी।

सुमन _कितना देर लगेगा झड़ने में।

अब बस करो मेरा हाथ दुख लगी है।

सुनो आमलेट खाओगे क्या? तुम्हे पसंद है न। मै बना देती हूं।

राजेश _ठीक है।

सुमन कीचन में चली गई। और आमलेट बनाने लगी।

इधर राजेश भीं कीचन में आ गया। और सुमन को पीछे से बाहों मे भर लिया और चूमने चाटने लगा।

राजेश_तुम आमलेट बनाओ तब तक मैं अपना काम करता हूं।

राजेश ने सुमन को थोडा झुका कर लंड बुर में पेल दिया और चोदना शुरू कर दिया।

इधर सुमन आमलेट बना रही थी राजेश पीछे से बुर मार रहा था। सुमन के मुंह से सिसकारी निकल रही थी। धीरे धीरे करो न, जोर जोर से मारोगे तो काम कैसे करूंगी।

आमलेट भी बन गया। प्लेट में आमलेट निकाल कर सोफे की ओर जाने लगी। सुमन को लंड में उठा कर राजेश सोफे तक ले गया।

राजेश सोफे पर बैठ गया। सुमन को लंड पर बिठा रखा था। सुमन राजेश की ओर मुंह करके बैठ गई। और उसे आमलेट खिलाने लगी।

राजेश सुमन के बुर में लंड पेलते हुए आमलेट खाने लगा।

आमलेट खा लेने के बाद। राजेश सुमन को उठा कर बेडरूम में ले गया और बेड पर लेट गया। सुमन उसके लंड पर बैठ गई और उछल उछल कर चुदने लगी। राजेश अब झड़ने की स्थिति में आ गया था।

वह सुमन की क़मर को दोनो हाथों से पकड़ कर ज़ोर ज़ोर से अपने लंड पर पटक पटक कर चोद ने लगा और कुछ देर बाद जोर का धक्का मार कर आह बेबी आह मेरी जान मैं गया ,आह,,, करके झड़ने लगा।

इधर सुमन ने जब गर्म वीर्य अपने कोख में जाते महसूस किया वह भीचरमसुख प्राप्त करती हुईं झड़ने लगी।

दोनो बेड में काफी देर तक लेटे रहे।

फिर उठकर अपने अपने कपडे पहनने लगे। कपडे पहन लेने के बाद।

सुमन _काफी थक गए हो, मै तेरे लिए बादाम वाली दूध ले आती हूं। बादाम वाली दूध पीने के बाद, राजेश सुमन को प्यार दुलार कर वहा से अपना घर आ गया।

अगले दिन सन्डे था।

राजेश सुबह अपने बाइक से भगत के पास गया, फिर दोनो एक ही बाइक में उस चाय वाले की दुकान की ओर निकल पड़े जो बाबा परमानंद का सेवादार था।
 


राजेश और भगत दोनो बाइक पे जा रहें थे।

भगत _भाई रूको, आ गए ,वो रहा प्रमोद की चाय की दुकान,जो बाबा चरमानंद का खास सेवादार था।

भगत ने दुकान के सामने बाइक रोक दिया।

प्रमोद उस समय दुकान पर ही था। उसने एक नौकर भी काम पार रखा था। जो ग्राहक को चाय देता था।

राजेश और भगत दोनो चाय की दुकान में लगी कुर्सी पर बैठ गया।

भगत _चाचा दो चाय लगाना।

प्रमोद _छोटू बाबुओं को चाय देना।

तभी राजेश की नज़र दुकान पर लगी तस्वीर पर गया।

राजेश _अबे, देखो उधर ये तो बाबा चरमानंद की फोटो है न।

भगत_हा भाई, ये फोटो तो बाबा चरमानंद की है।

राजेश _पर तू तो कह रहा था की बाबा ने प्रमोद को आश्रम से निकाल दिया है। फिर उसकी तस्वीर क्यू लगा रखी है।

भगत _हां भाई मुझे भी कुछ समझ नहीं आया।

राजेश ने प्रमोद से कहा _चाचा ,ये तो बाबा चरमानंद की तस्वीर है न। लगता है आप बाबा के बड़े भक्त है।

प्रमोद _हा बेटा, ये बाबा चरमानंद की ही फोटो है बड़े ज्ञानी है बाबा जी।

राजेश भगतसेकहा _अबे चाचा तो बाबा की तारीफ कर रहा है।

भगत _पर चाचा हमने तो बाबा के बारे में कुछ और ही सुन रखा है। कुछ लोग कहते है कि बाबा पूजा पाठ की आड़ में औरतों के साथ रंगरेली मनाता है।

प्रमोद _बेटे, लोग तो कुछ भी बोलते है? दस मुंह दस प्रकार की बाते। बाबा तो लोगो की समस्या का समाधान करते हैं। लोगो को समाधान के उपाय बताते हैं। किसी के साथ जबरदस्ती नहीं करते।

कुछ लोग इनके विरोधी है जो उनके बारे दुष्प्रचार कर रहे हैं।

राजेश _पर चाचा आप बाबा के बारे में इतना विश्वास के साथ कैसे कह सकते है की वह ढोंगी नही है।

प्रमोद _क्यू की मैं बाबा का खास सेवादार रह चुका हूं।

भगत _ये आप क्या कह रहे है चाचा, अगर आप उनके खास सेवादार थे तो यहां चाय की दुकान क्यू?

प्रमोद _क्यू की मुझे आश्रम से निकाल दिया गया।

राजेश _आपको आश्रम से निकाला गया फिर भी, आप बाबा की गुणगान कर रहे है। कुछ समझ नहीं आया।

प्रमोद _बेटा, मुझे आश्रम से निकाला गया क्यू की मैने गलती की थी। आश्रम का नियम है जो गलती करेगा। उसे आश्रम छोड़कर जाना पड़ेगा। बाबा गलत नही है। वो तो लोगो की समस्या का समाधान करते हैं।

आज हजारों लोग उनकी बताए उपाय कर अपनी समस्या से मुक्त होकर खुश हाल जीवन जी रहे हैं। अगर मेरी बातो पर तुम लोगो को यकीन नहीं हो रहा हो तो बाबा से एक बार खुद ही मिलकर देख लो।

राजेश _पर चाचा आपसे ऐसी क्या गलती हो गई थी की आपको आश्रम से निकलना पड़ा।

प्रमोद _देखो बेटा आश्रम के कुछ नियम कायदे है, जिसका पालन सबको करना होता है। मैने नियम तोड़ा। जिसके कारण मुझे आश्रम छोड़ना पड़ा। आश्रम जाने से लोगो को लाभ ही huwa है नुकसान नहीं।

चाय पी लेने के लिए राजेश _वाह,चाय तो जायकेदार था,पीकर तो मजा ही आ गया। अब हम चलते हैं चाचा जी। मौका मिले तो जरुर दोबारा आयेंगे चाय पीने आपकी दुकान में।

प्रमोद _बिलकुल आइए बेटा इसे अपना ही दुकान समझिए। और हां अगर कोइ समस्या हो तो एक बार बाबा जी से जरुर मिलिए, बाबा से कहना की प्रमोद चाचा ने भेजा है।

राजेश _जरुर चाचा जी।

राजेश और भगत दोनो बाइक से निकल पड़े।

भगत _भाई यहां तो हम बाबा के राज जानने आए थे। ये तो बाबा की तारीफ कर रहा था। अब क्या करे।

राजेश _प्रमोद चाचा की बात सुनकर मुझे तो बाबा से मिलने की इच्छा होने लगी है।

भगत _अगर ऐसी बात है तो क्यू न आज ही चले बाबा के आश्रम, यहां से ज्यादा दूर नहीं है, आश्रम।

राजेश _ठीक है चलो ,देखते हैं आख़िर बाबा लोगो की समस्या का समाधान कैसे करता है?

आश्रम पहुंचने के बाद। प्रवेश द्वार पर गेट कीपर के द्वारा आने वाले लोगो का एड्रेस और कारण, लिखाना होता था। भगत ने गेटकीपर से रजिस्टर पर नाम, पता और आने का कारण दर्ज कराया, फिर दोनो आश्रम में प्रवेश किए।

अंदर जाकर देखा, आश्रम काफी बड़ा था वहां सैकड़ों सेवक सेविकाएंअपनेअपने कार्य कर रहे थे।

आश्रम के बीच में एक बड़ा सा भवन जिसमे एक एक बड़ा हाल जहां बैठे कर लोग,बाबा से मिलने अपने बारी आने का इंतजार कर रहे थे।

बाबा से मिलने के लिए सेविका अपनी रजिस्टर पर आने वाले का नाम एवम मिलने का कारण दर्ज करती थी।सेविका रजिस्टर पर लिखे नाम के क्रम से लोगो को बाबा से मिलने के लिए उनके कमरे मे भेजती थी।

भगत ने अपना और राजेश का नाम रजिस्टर पर दर्ज कराया। ।

वे दोनो अपनी बारी आने का इंतजार करने लगे। भगत की नज़र वहा पर कार्य करने वाली सेविकाओ पर पड़ी।

भगत _भाई, ये आश्रम नही, ये तो जन्नत लग रहा है मुझे।

राजेश _क्यू बे।

भगत _यहा की सेविकाओं को देखो, एक से बढ़कर एक हॉट मॉल है सब। बाबा के तो मजे है। मेरा तो मन कर रहा है कि मैं यही रह जाऊ।

राजेश _अबे तू फिर सुरू हो गया। बन्द कर अपनी बकवास।

भगत _क्या करू भाई, गदराया बदन देखकर कुछ कुछ होने लगता है।

काफी देर इंतजार करने के बाद।

सेविका ने बाबा चरमानंद से कहा बाबा दो युवक आपसे मिलना चाहते है।

बाबा _क्या करते हैं वे और आने का प्रयोजन क्या बताया।

सेविका _वे कालेज स्टूडेंट है, और आपसे मार्गदर्शन और सलाह लेने आए हैं। क्या उन्हे अंदर भेजू।

बाबा _ठीक है, उन्हें अंदर भेजो।

सेविका _ठीक है बाबा , भेजती हूं।

सेविका ने कमरे से बाहर जाकर राजेश और भगत का नाम पुकारा और कहा आप लोग बाबा से मिल सकते है।

राजेश और भगत दोनो कमरे में प्रवेश किए। उन लोगो ने देखा बाबा ध्यान मुद्रा में बैठा है। उसके पीछे देवी देवताओं और उसके गुरू का फोटो लगा huwa था।

वे दोनो कमरे के अंदर जाकर खड़े थे, तभी बाबा ने आंखे खोला।

बाबा _तुम दोनो खड़े क्यू हो आओ बैठो मेरे सामने।

राजेश और भगत दोनो बाबा जी को हांथ जोड़कर प्रणाम किया।

बाबा _सदा खुश रहो।

सेविका बता रही थी की तुम लोग कालेज स्टूडेंट हो, कहो मुझसे मिलने कैसे आए।

राजेश _बाबा जी हमने आपके बारे में काफी सुना है की लोगो की समस्याओं का समाधान करते है। लोगो को अपनी लक्ष्य तक पहुंचने के लिए उपाय बताते हैं। उनका मार्गदर्शन करते है।

मैं राजेश हू और ये मेरा मित्र भगत हम दोनों कालेज का स्टूडेंट्स है। यह साल कालेज का हमारा अंतिम वर्ष है। सभी युवकों का एक लक्ष्य होता है की आगे चलकर उसे क्या करना है, क्या बनना है।

क्या हम अपनी लक्ष्य को प्राप्त कर पाएंगे।

बाबा _देखो राजेश, जीवन में कोई भी कार्य असंभव नहीं है। कोई ऐसा लक्ष्य नही जिस तक पहुंचा न जा सके। पर ये तुम पर निर्भर है की तुमने उस दिशा में कितना प्रयास किया।

अपना दांया हाथ दिखाओ।

राजेश ने अपना दांया हाथ सामने किया। कुछ देर हांथ देखने के बाद बाबा ने कहा।

बेटे लाखो लोगो में किसी किसी की हाथो में ही ऐसी रेखाएं होती है।

तुम तो किस्मत की धनी हो। तुम्हे वो सब कुछ मिलेगा जो तुम चाहोगे। धन, मान सम्मान औरत का सुख।

बाबा ने राजेश की चहरे की ओर देखा और कहा। तुम्हारे चहरे पर एक अलग ही ओज है।

पर तुम्हारे मार्ग पर कुछ लोग कांटे बिछाने का कार्य भी करेंगे, पर वे सफल नहीं होंगे।

भगत _बाबा, राजेश भाई तो प्रतिभा के धनी है हर क्षेत्र में अव्वल ही रहता है।

भगत _बाबा मेरा हांथ देखिए।

बाबा ने भगत का हांथ देखा।

बाबा _तुम्हारी भी भाग्य बहुंत अच्छी है, तुम भी अपना लक्ष्य प्राप्त करोगे। पर तुम्हे जीवन में आगे बड़ने के लिए हमेशा किसी का साथ की जरूरत पड़ेगा, जो तुम्हारा मार्गदर्शन करेगा।

राजेश_बाबा अब तो हम आपके शरण में आए है आप ही हमारा मार्गदर्शन कीजिए।

बाबा _ राजेश मुझे लगता है कि तुम लोग किसी दुसरे उद्देश्य से यहा आए हो। बताओ यहां आने की असली वजह क्या है?

राजेश _बाबा आपने सही कहा,,

दरअसल बाहर कुछ लोग कहते है की इस आश्रम मे महिलाओ का शारिरिक शोसन होता है। हम सच्चाई जानना चाहते थे।

बाबा _राजेश, यहां पर लोग अपनी समस्या लेकर आते है जैसे उसकी समस्या होती हैवैसीही उसका समाधान बताया जाता है।

वैसे तो समस्या का समाधान हमारे हाथों में ही होता है लेकीन समाज ने लोगो को पुण्य पाप का चश्मा पहना रखा है, इस लिए लोग जानकर भी समस्या का समाधान नहीं कर पाते। मेरा काम है लोगो की दुविधा दूर करना।

अब कोई महिला यहां बच्चा की उम्मीद लेकर आती है। जब उसका पति सक्षम न हो तो वो महिला मां कैसे बनेगी?

क्या कोई मंत्र जाप करने से वह मां बन जायेगी।

उसका तो सिर्फ़ एक ही उपाय है वह दुसरे पुरुष के वीर्य से मां बने या फिर मां बनने की इच्छा ही त्याग दे।

हर औरत का अधिकार है की वह मां बनने का सौभाग्य प्राप्त करे। कुछ महिलाए यह उपाय स्वयं कर लेती हैं। टू कुछ इधर उधर भटकती रहती है अपना धन और समय दोनो बर्बाद करती है। ऐसे में उनकी दुविधा दूर करने का कार्य ही उसकी समस्या का समाधान होता है, और इस आश्रम में यही होता है। यहां किसी के साथ जबरदस्ती नहीं होता। यहां जो भी लोग आते हैं अपनी मर्जी से आते हैं और जो भी लोग रहते हैं अपनी मर्जी से रहते हैं।

पर हा यहां रहने के लिए नियम एवम कायदे है जिसका सभी को पालन करना पड़ता है।

कुछ लोगो को ये सब गलत लगता है जो आश्रम के बारे में दुष्प्रचार करते है।

वैसे तुम क्या सोच रखते हो इस विषय के बारे में।

राजेश _बाबा मै आपसे सहमत हूं, जैसी समस्या होगी समाधान भी वैसा ही होगा। उसका उपाय भी वैसा ही होगा। अच्छा बुरा सोचने से समस्या का समाधान नहीं हो सकता।

बाबा आपसे मिलने के पहले तो आपके बारे में मन में कई विचार चल रहे थे।

पर आपसे मिलने के बाद, सारी धारणाएं बदल गई है।

भगत _मेरा तो मन कर रहा है की आपका शिष्य बनकर इसी आश्रम में रह जाऊ।

बाबा _अगर आप दोनो मेरे शिष्य बनने की इच्छा रखते हो तो ये मेरे लिए गर्व की बात होगी। तुम दोनो असाधारण हो।

पर मेरे शिष्य बनकर यहां आश्रम में रहने से क्या तुम अपना लक्ष्य प्राप्त कर सकोगे। तुम्हे अपनी पढ़ाई पूरी करनी है। फिर अपनी लक्ष्य के लिए संघर्ष एवम मेहनत करना है।

बाबा हंसते हुए कहा,, यहां रहोगे तो यहाँ की सेविकाए तुम दोनो की मन भी भटका सकता है।

इसलिये तुम दोनो का इस आश्रम में रहना तुम दोनो के लिए अभी उचित नहीं है।

राजेश _बाबा आप सही कह रहे हैं। आपका शिष्य

बनकर जरूरी नहीं हम आश्रम में ही रहे। आपके विचारो एवम मार्गदर्शन पर चलकर भी हम आपके शिष्य बने रह सकते हैं। चाहे हम कही भी रहे।

बाबा आज से हम आपके शिष्य है। हमे दीक्षा दीजिए



तभी सेविका आई बाबा से बोली _बाबा भोजन का समय हो गया है। अभी आपका इन्तजार कर रहे है।

बाबा _तुम दोनो भी चलो मेरे साथ भोजन करने।

राजेश _हा, आज से तुम दोनो मेरे शिष्य हो, चलो तुम लोग भी साथ भोजन करने।

राजेश _ठीक है बाबा।

बाबा सेविका से बोली _जाओ, दो थाली और लगाने बोलना, हम अभी पहुंच रहे हैं।

सेविका _ठीक है बाबा।

राजेशऔर भगत दोनो कुछ देर बाद बाबा के साथ भोजन करने के लिए भोजन कक्ष की ओर जाने लगें।

वहा पहुंचने पर राजेश और भगत ने देखा की आश्रम के सभी सेवक सेविका भोजन के लिए बैठ चुके थे। सभी बाबा के आने का इंतजार कर रहे थे।

बाबा आश्रम के सभी सेवक सेविकाओं को अपना परिवार समझते थे और सभी लोग बाबा के साथ ही भोजन करते थे।

बाबा के साथ साथ राजेश और भगत के लिए भी थाली लगा दिया गया था।

बाबा ने राजेश और भगत का सभी से परिचय कराया।

बाबा _ये राजेश और भगत है, ये दोनो आज से मेरे शिष्य है। ये दोनो आश्रम में कभी भी आ और जा सकते हैं।

भोजन कर लेने के बाद राजेशऔर भगत को बाबा आश्रम घुमाने लगे।

फिर एक बड़े बरगद के छाव पर लगी कुर्सी पर तीनो बैठ गए।

बाबा _बोलो राजेश क्या तुम्हे आश्रम पसंद आया।

राजेश _आश्रम तो बहुंत अच्छा है बाबा।

पर यहां रहने वाले सेवक सेविकाय कई युवक युविकाएं है कई अधेड़ उम्र के इन सब को अनुशासित रखना काफी मुस्किल होता होगा।

बाबा _मै समझ सकता हूं की तुम क्या कहना चाहते हों।

सेक्स तो प्राकृतिक है इसे दबाया नहीं जा सकता। इस लिऐ यहां कुछ नियम बनाया गया है। जिसका पालन करना होता है, जो नियम तोड़ता है। उसे यहां से जाना पड़ता है।

भगत _सेक्स तो शरीर की जरूरत है। एक जगह इतनी सारी महीला और पुरुष एक साथ रहते हो तो उनके बीच आकर्षण पैदा होना स्वाभाविक है। ऐसे में उनके बीच यौन संबंध बनना भी स्वभाविक है।

बाबा _हा, भगत तुम बिलकुल सही कह रहे हो।

आप दोनो ने सुना होगा के कुछ आश्रम में सेवादारों को भोजन में कुछ ऐसी चीजे दिया जाता है जिससे उनके अंदर सेक्स की इच्छा ही न पैदा हो। कही कही तो सेवादारों को नामर्द भी बना दिया जाता है।

पर मैंने अपने आश्रम में छूट दे रखी है।

यहां रहने वाले कोई भी युवक और युवती आपसी सहमति से सेक्स कर सकते हैं।

कोई भी सेवक सेविका किसी के साथ जबरदस्ती नहीं कर सकता। अगर ऐसा कोई करने की कोशिश करता है तो उसे आश्रम से बाहर कर दिया जाता है।

यही यहां का नियम है।

राजेश _बाबा, अगर कोइ सेविका गर्भवती हो गई तो,,

बाबा _अगर कोई सेविका गर्भवती हो गई तो उसके होने वाले बच्चे के बाप के साथ उसकी शादी करा दी जाती है, और उसे आश्रम से उन दोनो की बिदाई कर दिया जाता है।

वे आश्रम में सेवा दे सकते हैं लेकीन ठहर नहीं सकते। उन्हें गृहस्थ जीवन जीना होता है।

भगत _बाबा सच में आश्रम को चलाना भी एक चुनौती है।

विरोधी लोग तो ऐसे भी आश्रम को बदनाम करने के लिए तत्पर रहते हैं।

राजेश _बाबा मेरे मन में एक प्रश्न उठ रहा है, पर मुझे ऐसा प्रश्न पूछना चाहिए कि नही,,

बाबा _राजेश तुम निःसंकोच किसी भी विषय पर बातचीत कर सकते हो।

राजेश _कुछ लोग अपनी करीबी रिश्तों में भी शारिरिक संबंध बना लेते है क्या ये उचित है?

बाबा _रिश्ते नाते से पहले हम एक इंसान है। रिश्ते नाते तो बाद मे बनाया गया। रही बात पाप पुण्य की तो किसी को दुख पहुंचाना गलत है पाप है और किसी को खुशी देना पुण्य है।

इसलिए सेक्स तो एक शरीर की जरूरत है। अगर सेक्स करने से दोनो को खुशी और संतुष्टि मिलती हो तो चाहे कितनी ही करीबी रिश्ता क्यू न हो उनके बीच सेक्स को मै गलत नही समझता।

भगत _बाबा आश्रम में तो तरह तरह के लोग अपनी समस्या लेकर आते होंगे।

बाबा _हा, यहां व्यापारी, नेता, अफसर, अभिनेता खिलाड़ी सभी प्रकार के लोग अपनी समस्या लेकर आते है। उनकी समस्या का समाधान बताया जाता है। जिनकी समस्या का समाधान हो जाता है वह स्वेच्छा से ही आश्रम को दान करता है। जिससे आश्रम का खर्च चलता है।

तभी सेवक आया _बाबा आज अनुष्ठान के लिए जिसे समय दिए थे वे लोग पहुंच चुके है।

बाबा _ठीक है मैं कुछ देर बाद आता हूं तब तक तुम लोग तैयारी करो।

राजेश _बाबा, हमे भी आए काफी समय हो गया। पता ही नहीं चला समय कैसे बीता। हमे आपसे अभी बहुत कुछ सीखना है।

बाबा _राजेश, तुम लोग कभी भी आश्रम आ सकते हो, मुझसे मिलने। अब मुझे भी जाना है।

राजेश _बाबा अब हमें भी जाने कीआज्ञा दीजिए । समय निकालकर हम फिर आपसे मिलने आयेंगे।

बाबा को प्रणाम कर राजेश और भगत दोनो आश्रम से चले गए।

रात को भोजन करने के बाद राजेश अपने कमरे में पढ़ाई कर रहा था।

इधर स्वीटी भी सोने की कोशिश कर रही थी। तभी उसे भरत पुर की घटना याद आने लगी किस तरह रात में भैया और मां बाथरूम में chudai कर रहे थे। फिर अगले दिन भैया किस तरह तीनो लड़कियों की सील तोडी। उन घटनाओं को याद कर वह बहुत अधिक उत्तेजित हो गई । उससे रहा न गया और बहुत ही सेक्सी नाइटी पहनकर पुस्तक लेकर राजेश के कमरे की ओर चली गईं।

राजेश की कमरे को खटखटाया ,राजेश ने दरवाजा खोला।

राजेश _switi तुम इस वक्त कुछ काम था क्या?

स्वीटी _भईया, मुझे कुछ टापिक समझ नही आ रही,मुझे समझा दो।

राजेश _अरे आज रात हो गई है कल समझ लेना।

स्वीटी_नही, भैय्या मुझे अभी समझना है।

राजेश _तू मानेगी नही, बडी जिद्दी हो गई है। बोलो समझना है।

दोनो बेड पर आ गए।

स्वीटी_ने एक पुस्तक खोलकर एक टॉपिक निकाला ।इस टॉपिक को समझाओ।

इस समय स्वीटी बहुंत ही सेक्सी नाईटी पहन रखी थी जिससे उसकी चूची साफ साफ दिखाई पड़ रहे थे।

वह राजेश के सामने झुक गई ताकि राजेश की नज़र उसकी चूची पर पड़े।

राजेश की नज़र उसकी चूची पर गया। उसे ध्यान से देखा नही। इग्नोर किया।

जिससे स्वीटी चिड़ने लगी।

उसका मन तो कर रहा था की वह राजेश को बतादे की भरत पुर में किस तरह तुम और मां chudai कर रहे थे मुझे सब पता है।

पर वह बोल न सकी।

इधर सुनिता घर का सारा काम निपटा लेंने के बाद वह सोने से पहले चेक करने आई की बच्चे ठीक तो है न।

वह राजेश के कमरे के पास आई उसे राजेश के कमरे में बातचीत करने की आवाज़ सुनाई पड़ी। सुनीता _इस वक्त राजेश किसके साथ बातचीत कर रहा है।

वह स्वीटी के कमरे में जाकर देखी स्वीटी कमरे में नही थी।

वह राजेश के कमरे का दरवाज़ा खटखटाने लगी।

राजेश ने दरवाज़ा खोला

राजेश_मां तुम इस वक्त।

सुनिता_बेटा मै तो चेक करने आई थी की तुम लोग ठीक तो हो न। मैने स्वीटी के कमरे में देखा वह वहा नही थी क्या वह तुम्हारे कमरे मे है?

राजेश_हा मां वो कुछ टापिक को समझने मेरे कमरे मे आई है आओ न अंदर। सुनिता अंदर गई।

वह देखी स्वीटी पुस्तक लेकर बेड पर बैठो थी।सुनिता _स्वीटी तुम इतनी रात को राजेश के कमरे में क्या कर रही हो। स्वीटी _मां मै भईया से कुछ समझने आई थी। पर इतनी रात को, चलो जाओ अपने कमरे मे, जो भी समझना है कल समझना।

स्वीटी _चुपचाप उठकर अपने कमरे मे जाने लगी।

सुनिता भी उसके पीछे पीछे गई और बोली

सुनिता _रूको, ये कैसी ड्रेस पहन रखी हो, तुम्हे शर्म नही आती इतनी गंदी ड्रेस पहनकर भाई के कमरे मे जाती हो, वो भी इतनी रात को।

स्वीटी को बहुंत गुस्सा आ रहा था, उसका मन तो कर रहा था की कह दे की तुम्हे भाई से चुदने में शर्म नही आती। कैसे, भरत पुर में धर्मशाला के बाथरूम में मजे लेकर chud रही थी। पर वह बोल न सकी, वह सुनिता से बोली _मां नई खरीदी है, तो पहन ली, माफ़ कर दो अब से ऐसी ड्रेस में भाई के पास नही जाऊंगी। सुनिता _ठीक है आगे से ख्याल रखना। स्वीटी _ठीक है मम्मी। सुनिता अपने मन में, मुझे तो इस लड़की के लक्षण ठीक नही लग रही, इस पर नज़र रखना पड़ेगा।

_

 
कुछ दिन ऐसे ही बीत गए। इस दौरान राजेश और भगत एक दो बार फिर बाबा चरमानंद के आश्रम जाकर उनसे मुलाकात किया और उनसे मन में उठे सवालो के जवाब पूछ कर अपना जिज्ञासा शांत किया।



एक दिन शाम को जब राजेश सुमन से मिलने उसका घर गया।

राजेश _बोलो जान ,आज तुम फ़ोन पर बता रही थी की मुझे तुम्हे कुछ बताना है। बताओ क्या बताना चाहती थी? राजेश अपने सिर सुमन के गोद पर रख कर सोफे पर लेटा huwa था।

सुमन _राजेशके के सिर के बाल को सवारते हुवे बोली। मेरे स्वामी जी तुम बाप बनने वाले हो।

राजेश _क्या, क्या कहा तुमने?

सुनिता _यही की तुम बाप बनने वाले हो।

सुनिता मुसकुराते हुवे बोली।

राजेश _वाव, ये तो बड़ी खुशी की बात है।

तुम खुश तो हो न।

सुनिता _बहुत, राजेश तुमने मेरी इच्छा पुरी किया। तुमने मुझे मां बनने का सौभाग्य दिया।बाजपन से मुक्ति दिलाया। मै तुम्हारे इस अहसान का बदला कैसे चुकाऊंगी?

राजेश _हम दोनो तो पति पत्नी है न, भले ही लोगो की नजरो में हम कुछ और हो। पर मां भी तो तुम्हे बहु मानती है। एक पति का फर्ज होता है की अपनी पत्नि को मां बनने का सुख प्रदान करे, फिर अहसान की बात क्यू कर रही हो? मतलब तुम मुझे अपना पति नही मानती। बार दिखावा करती हो। राजेश ने गुस्सा जताते हुए कहा।

सुमन _गलती हो गई बाबा, अब अहसान की बात नही करूंगी। मुझेमां बनाना तो तुम्हारा फर्ज़ था।

राजेश _सौरभ सर को बताया की नही।

सुमन _हां, वो बहुंत खुश है।

राजेश _क्यू न यह बात हम मां को बताएं। वो बडी खुश होगी। आखिर वह तुम्हे हमेशा पुत्रवती होने का आशीर्वाद जो देती है। उसका आशीर्वाद आज फलित हो गया।

राजेश ने सुनिता को काल किया।

सुनिता _बोलो बेटा, कहां हो तुम, कैसे काल किए थे?

राजेश _मां मै सुमन के घर हू, इसने मुझे खुशखबरी सुनाने के लिए बुलाया था।

सुनिता _कैसी खुशखबरी बेटे?

राजेश _मां सुमन मां बनने वाली हैं।तुम दादी बनने वाली हो।

सुनिता_क्या?

राजेश _हा मां। तुम दादी बनने वाली हो।

सुनिता _ये तो बडी खुशी की बात है।

सुमन से बात कराओ।

राजेश _लो मां सुमन से बात करो।

सुमन _चरण स्पर्श मां जी।

सुनिता _खुश रहो बहु। क्या, राजेश जो कह रहा था वो सही है।

सुमन _हा मां जी।

सुनिता _ये तो बडी ही खुशी की बात है बहु आख़िर भगवान ने तुम्हारी गोद भर ही दी। भगवान का लाख लाख शुक्र है। अब तुम अपना और होने वाले बच्चे का अच्छे से ख्याल रखना।

सुमन _जी, मां जी।

राजेश _कब आयेगा मेरा बच्चा बाहर, राजेश ने सुमन का पेट सहलाते हुए कहा।

सुमन _हंसते हुवे बोली 9माह बाद।

राजेश _आज बड़ा खुशी का दिन है,। होने वाले बच्चे के बाप को जी भर कर खुश करो। राजेश ने सुमन की चूची सहलाते हुए कहा।

सुमन _पहले कुछ खा लो,, बोलो क्या बनाऊं।

राजेश ने एक बार फिर सुमन की जमकर chudai किया। फिर अपना घर आ गया।

दो तीन दिन और निकल गए।

सुनिता चिंतित थी, उसका मासिक धर्म हर माह समय पर आ जाता था इसी समय तीन दिन लेट हो गया है।

सुनिता को अंजान भय सताने लगा।

उसने राजेश के साथ असुरक्षित शारिरिक संबंध बनाता था । कही गर्भ ठहर गया तो, क्या होगा। हे भगवान,, अनर्थ हो जायेगा।

वह दोपहर में घर का सारा काम निपटा लेने के बाद। मेडिकल स्टोर्स चली गईं और वहा से प्रेग्नेंसी टेस्ट कीट खरीद लाई।

रात में उसे नींद नहीं आ रही थी। वह रात भर सोचती रही, कही गड़बड़ हो गया तो क्या होगा?

किसी तरह रात गुजारी फिर वह सुबह उठते ही मेडिकल से लाई हुई प्रेग्नेंसी टेस्ट कीट लेकर बाथरूम में चली गई। वहा जाकर अपनी पेशाब टेस्ट कीट में लेकर जांच की।

रिजल्ट देखकर उसे चक्कर आने लगा। क्यू की उसे गर्भ ठहर गया था। टेस्ट पॉजिटिव आया था।

उसके हाथ पैर कापने लगें, अब क्या होगा।

अब वह दिन भर इसी सोच में डूबी रहती की अब क्या होगा? उसका एक मन कहता की चिंतित क्यू हो रही हो, किसी डाक्टर के पास जाकर बच्चा गिरा देना। अभी तो शुरुआती दिन है। दवाई लेने से ही गर्भ गिर जायेगा।

दूसरा मन कुछ और ही सोचने लगता। वह बार बार अपने पेट को सहलाने लगती। मेरे पेट में राजेश का अंश पल रहा है। अपने ही हाथों से अपने ही बेटे के अंश को खत्म कर दू। यह महापाप मुझसे कैसे होगा?

हे भगवान मै क्या करू मुझे तो कुछ समझ ही नहीं आ रहा। मुझे राह दिखाओ प्रभू।

अंत में वह किसी फैसले पर पहुंचे उसके पहले वह डाक्टर से मिलना चाहती थी।

पर डाक्टर विश्वास और भरोसे का होना चाहिए। जो इस बात को गुप्त रखे।

तभी उसने फैसला किया की वह डॉक्टर प्रिया के पास जायेगी।

अब जानते हैं कि डाक्टर प्रिया कौन है,,,,,

डाक्टर प्रिया कोई और नहीं बल्कि उसकी भतीजी है।

सुनिता की बड़े भाई की लड़की।

सुनिता के दो भाई है। बड़े भाई का नाम है, सत्जन सिंग और उससे छोटे भाई का नाम है सतपालसिंग। सतजन सिंग अपने गांव का एक प्रतिष्ठित व्यक्ति है।

वह अपने समाज का मुखिया है गांव में उसका बड़ा इज़्जत मान सम्मान है।

सत्जन सिंग की दो बेटी है प्रियाऔर सुप्रिया। जबकी सतपाल सिंग की कोई सन्तान नहीं है।

प्रिया पढ़ाई लिखाई में बहुत ही तेज थी। वह हमेशा बोर्ड एक्जाम में टॉप करती थी।

सुनिता जब भी अपनी मायका सूरजपुर जाती थी। अपने साथ स्वीटी और राजेश को भी ले जाती। रक्षाबंधन के दिन जब अपने भाइयों को राखी बांधने जाती तो इस दीन का प्रिया सुप्रिया को बेसब्री से इंतजार रहता। प्रिया राजेश को बहुत प्यार करती थी क्यू की उनका कोई भाई नहीं था। वह राजेश को गोलू कहकर बुलाती थी। जब राजेश अपने मां के साथ गांव जाता। प्रिया राजेश को अपने कंधे में बिठाकर पुरे गांव में घुमाता लोगो से कहती,मेरा गोलू भाई आया है।

राजेश भी जब मां के साथ गांव जाता दिनभर प्रिया के साथ ही रहता, साथ सोता, भोजन करता।

प्रिया और राजेश की उम्र में 11वर्ष का अंतर था।

जब राजेश 2वर्ष का था तब प्रिय 13और सुप्रिया 11की थी।

इधर प्रिया की चाची शादी के बाद कई वर्ष हो जाने के बाद जब वह मां नही बन पाई तो दुखी रहने लगी। वह प्रिया और सुप्रिया को अपने बच्चों की तरह प्यार करने लगी। प्रिया भी अपनी चाची से अपनी मां से ज्यादा प्यार करने लगी।

जब लोग उनकी चाची को मां न बन पाने पर ताना मारती तो उसे बहुत बुरा लगता।

और प्रिया ने ये निश्चय कर लिया की वह आगे चलकर डाक्टर बनेगी और अपनी चाची की तकलीफ दूर करेगी।

वह 12कक्षा पास करने के बाद पी एम टी की परीक्षा पास की वह उत्तीर्ण भी हो गई लेकीन वह निःसंतान महिलाओ को संतान सुख देने के लिए चिकित्सा की नई पद्धति आई वी एफ की पढ़ाई करना चाहतीं थी। जो देश में नही थी। अतः उसने विदेश जाने का फैसला की।

पर उसके पिता जी सत्जन सिंग उसको विदेश नही भेजना चाहता था। वह अकेली लड़की को विदेश भेजने के पक्ष में नहीं था।

लेकिन प्रिया के जिद के आगे उसे झुकना पड़ा। और इस शर्त पर की वह ऐसा कोई भी कार्य नही करेगी जिससे उसके इज्जत मान सम्मान को ठेस पहुंचे उसे विदेश जाने की अनुमति दे दिया।

अब प्रिया डॉक्टरी पढ़ाई के लिए रूस चली गई।

वहा पढ़ाई के दौरान उसकी मुलाकात समीर से huwa समीर के माता पिता डाक्टर थे अतः वह भी डाक्टर की पढ़ाई करने रुस गया था।

एक ही देश के होने के कारण समीर प्रिया की जरूरत पड़ने पर मदद करने लगा। धीरे धीरे वे एक दुसरे से प्यार करने लगें। और वे दोनो शादी करने का फैसला कर लिया।

इधर सत्जन सिंग प्रिया की पढ़ाई पूरी होने के बाद उनकी शादी अपने ही समाज के किसी अच्छे परिवार में करना चाहते थे।

एम बी बी एस की पढ़ाई पूरी होने के बाद प्रिया रूस से वापस लौटी।

शहर में समीर के पिता जी और मां का हॉस्पिटल था। समीर वहा अपनी सेवा देने लगा। समीर की मां महिला रोग विशेषज्ञ थी वह निःसंतान महिलाओ का भी उपचार करती थी। समीर के कहने पर प्रिया कुछ दिन गांव में रहने के बाद, समीर के माता पिता के हॉस्पिटल में सेवा देने लगी।

इधर सत्जन सिंग प्रिया की शादी के लिए योग्य लड़के की तलाश करने लगे।

उन्ही के जाती का एक अच्छा परिवार जब प्रिया का हांथ मांगने आया, लड़का इंजीनियर था। सत्जन सिंग ने प्रिया से बिना पूछे उसकी शादी तय कर दी।

सत्जन सिंग कड़े मिजाज के व्यक्ति थे। प्रिया अपनी मन की बता अपने पिता को नही बता सकी ,उसके खानदान में आजतक किसी ने प्रेम विवाह नही किया था। उसका पिता प्रेम विवाह के सख्त खिलाफ थे।

इधर शादी को दो दिन ही बचे थे की प्रिया को पता चला की वह समीर की बच्चे की मां बनने वाली है।

उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था की वह क्या करे यह बात उसने अपनी चाची को बताई। पर उसकी चाची में इतना साहस नहीं थी की वह परिवार के मान सम्मान और सत्जन सिंह के खिलाफ कोई कदम उठाने वह प्रिया को कोई सलाह दे सके।

दो दिन बाद घर में बारात भी आ गई। सुनिता शादी के मंडप में बैठने के लिए प्रिया को तैयार कर रही थी। तभी सुनिता ने प्रिया की बाल संवारते समय आईने में प्रिया की आंखों से आंसू निकलते देखा।

सुनिता _प्रिया तुम रो रही हो, ये तो खुशी का समय है। हर लङकी को इस दिन का बेसब्री से इंतजार रहता है।

प्रिया की आंखों से आंसू की धार और तेज हो गई।

सुनिता _ये क्या, तुम तो रोई जा रही हो। तुम इस शादी से खुश तो हो न ,बोलो !

प्रिया सुनिता से लिपट कर दहाड़मारकर रोने लगी।

सुनिता _प्रिया क्या बात है बताओ मुझे।

प्रिया ने रोते हुए सारी बातें अपनी बुआ सुनिता को बता दी।

सुनिता _तुमने यह बात किसी को बताई क्यू नही?

प्रिया _मैने यह बात चाची को बताई। मां और बाबू जी को बताने कि हिम्मत मुझमें नहीं थी। आप तो जानते हो की बाबू जी को अपनी इज्जत मान सम्मान कितना प्यारा है।

प्रिया _ बुआ कुछ करो। प्रिया रोते हुए बोली।

कुछ देर सोँचने के बाद सुनिता ने प्रिया से बोली।

सुनिता _प्रिया अब तो, सिर्फ एक ही रास्ता बचा है।

प्रिया _क्या बुआ?

सुनिता _तुम यहां से भाग जाओ।

प्रिया _ये क्या कह रही हो बुवा?

सुनिता _हां, तुम यहां से भाग जाओ। बस यही रास्ता बचा है अब।

प्रिया _पर यहां, बाबू जी को पता चलेगा तब,,

सुनिता _तुम यहां की चिन्ता मत करो मैं सम्हाल लूंगी। तुम एक चिट्ठी में यह बाते लिखकर छोड़ दो कि तुम किसी और से प्यार करती हो इसलिए मैं घर छोड़कर जा रही हूं।

प्रिया _पर मै यहां से निकलूंगी कैसे?

सुनिता _मै सब व्यवस्था कर दूंगी। तुम अपने कपडे चेंज कर लो।

सुनिता कमरे से चली गईं। कुछ देर बाद आई और प्रिया को समझादी की किस तरह उसे घर से बाहर निकलना है।

इधर मंडप पर पंडित ने जैसे ही कन्या को बुलाने के लिए कहा।

सत्जन सिंह ने प्रिया की मां को बेटी को लाने कहा।

जब प्रिया की मां कमरे में गई तो प्रिया नही थी उसके कपडे बेड में पड़े थे। एक चिट्ठी भी वहा पड़ी थी। जिसे उठाकर प्रिया की मां पढ़ने लगी।

इधर जब कन्या को लाने के लिए पंडित जी ने फिर से कहा तो सत्जन सिंह खुद ही कमरे की ओर गया वहा जाकर देखा घर की सभी महिला अपनी माथा पकड़कर बैठी है उसकी पत्नी रो रही है।

सत्जन सिंह _क्या huwa यहां सब लोग इकट्ठा क्यू हो उधर पंडित जी प्रिया को मंडप पे लाने कह रहा है। तुम लोगो को बाते समझ नहीं आ रही।

सत्जन सिंह के आने के बाद प्रिया की मां और जोर से रोने लगी।

सुप्रिया ने सत्जन सिंह को बताया की बाबू जी दीदी घर से भाग गई।

सत्जन _क्या बकती हो, अत्यंत क्रोधित होते हुए कहा।

सुप्रिया ने प्रिया की लिखी हुई चिट्ठी को सत्जन सिंह को दिखाया।

सत्जन सिंह ने उस चिट्ठी को पढा, और लड़खड़ाते हुए बेड पर बैठ गया।

सुनिता ने सत्जन सिंह को सम्हाला।

सत्जन _प्रिया ने घर की इज्जत मान सम्मान सब कुछ मिट्टी में मिला दी। अब मै बाहर जाकर क्या बोलूंगा? कि मेरी बेटी घर से भाग गई। इतनी बेज्जती सहने से तो अच्छा मेरा मर जाना ही ठीक होगा?

सुनिता _भैया ये आप कह रहे हैं? हमारे पास एक रास्ता है अपनी इज़्जत बचाने का। हम प्रिया के जगह सुप्रिया को मंडप पर बिठा देते है। सुप्रिया भी 21की हो गई है। मै लड़के (दूल्हे)से बात कर मना लूंगी आप चिन्ता न करे।

सत्जन सिंह _अगर ऐसा न huwa तो सब कुछ खत्म हो जायेगा?

सुनिता _भईया, मै हूं न सब कुछ ठीक कर दूंगी।

आप सुप्रिया से पूछ लो की वह तैयार है की नही।

सत्जन सिंह _हाथ जोड़कर सुप्रिया से बोला, बेटी अब घर की इज्जत तुम्हारे हाथों है।

सुप्रिया _ये आप क्या कह रहे हैं पिता जी, मेरे सामने हांथ जोड़कर आप मुझे शर्मिंदा न करे।

आप जैसा कहेंगे मै वैसा ही करूंगी।

सुनिता _मै दूल्हे से बात करके आती हूं।

सुनिता वहा से चली गईं। कुछ देर बाद वह कमरे मे पहुंची।

सुनिता ने बताया की दूल्हा रमेश काफी समझदार है। वह सुप्रिया से शादी के लिए मान गया।

इस तरह रमेश से सुप्रिया की शादी कर दिया गया। और घर की इज्जत, मान सम्मान को बचाया।

शादी हो जाने के बाद जब सभी मेहमान चले गए तब घर के सभी सदस्यों से सत्जन सिंह ने कहा,, आज से प्रिया इस घर के लिए मर चुकी है। आज के बाद कोई भी उससे मिलने की कोशिश भी किया तो तुम लोग मेरे सामने अपना मुंह मत दिखाना।

इधर समीर और प्रिया ने कोर्ट में शादी कर लिया।

2वर्ष बाद प्रिया की सास चल बसी। प्रिया ने हॉस्पिटल को अपनी सास के नाम पर यशोदा टेस्ट ट्यूब बेबी सेंटर का नाम दिया।

उधर समीर ने भी अपने लिए एक अलग haspital खोल लिया। वह किडनी रोग विशेषज्ञ था। उसके hospital में किडनी रोग का उपचार किया जाता था।

इधर प्रिया आज शहर की टेस्ट ट्यूब तकनीकी की जानी मानी मशहूर डाक्टर बन चुकी है। उसका हॉस्पिटल बहुंत बड़ा हो गया है। जिसमे सिकड़ो डाक्टर नर्स एवम अन्य कर्मचारी काम करती है। निःसंतान महिलाए विदेशों से भी उसके आई वी एफ सेंटर में इलाज के लिए आती है।

सुनिता के मन में इच्छा थी की वह प्रिया से मिले। लेकिन अपने बड़े भाई के द्वारा रिश्ता तोड़ देने की धमकी ने उसे रोके रखा।

कितने बार राजेश ने प्रिया के बारे में पूछा की प्रिया दीदी कहा है। पर उसने उसे यही कहा की वह विदेश में रहती है। जबकि वह इसी शहर में रहती है।

इधर प्रिया इतनी सफलता पाकर भी खुश नहीं है। वह अपने मां बाबू जी , चाची और गोलू उर्फ राजेश को बहुंत मिस करती है। वह उस पल का इंतजार कर रही है जब उसके बाबू जी उसे माफ़ कर दे और सब से मिल पाए।

सुनिता ने निश्चय किया की कल वह प्रिया से मिलेगी ।

वह जरुर इस समस्या का समाधान करेगी।


उसके पास जरुर कोई उपाय होगा जिससे उसके पेट में पलने वाला राजेश का अंश भी बच जाए और उसे इस मुसीबत से भी छुटकारा मिल जाए।
 
अगले दिन दोपहर में सुनिता ऑटो से यशोदा टेस्ट ट्यूब सेंटर पहुंच गई। वहां जाकर देखा निहसंतान दंपतियों की काफी भीड़ थी। बड़ा सा हाल जहा पर लोग बैठकर डॉक्टर से मिलने की प्रतीक्षा में थे।

सामने रिसेप्शनिस्ट के काउंटर पर जाकर उनसे जानकारी लिया।

रिसेप्शनिस्ट ने सुनीता का नाम रजिस्टर में एंट्री किया और सुनिता को हाल में बैठकर प्रतीक्षा करने को कहा।

रिसेप्शनिस्ट ने कहा की आपका नाम पुकारा जायेगा, फिर आप प्रिया मैडम से मिल सकती है तब तक आप इतंजार कीजिए।

सुनीता हाल पर लगे चेयर पर बैठ कर अपना नाम पुकारने की इंतजार करने लगी।

हाल लोगो से काफी भरा हुआ था। पता नहीं उसकी बारी कब आए।

डाक्टर प्रिया के केबिन के दरवाजे के पास एक लड़की फाइल लेकर खड़ी थी जो बारी बारी से लोगो को उनका नाम पुकार कर डॉक्टर प्रिया की केबिन में भेज रही थी।

सुनीता ने हॉस्पिटल काअवलोकन किया। हॉस्पिटल बहुंत बड़ा था। बहु मंजिला इमारत जिसमें सैकड़ों नर्स एवं डाक्टर तथा अन्य कर्मचारी काम कर रहे थे। हॉस्पिटल में सभी प्रकार की सुविधाएं थी।

हाल के सामने ही डाक्टर प्रिया की केबिन था। पहली बार आने वाले मरीज सबसे पहले डॉक्टर प्रिया से ही मिलते थे उसके बाद केस को जूनियर डॉक्टर ही सम्हालते थे। डॉक्टर प्रिया जूनियर डॉक्टरों की मार्गदर्शन करती थी।

लगभग 2घंटे के बाद सुनिता का नाम पुकारा गया।

सुनीता ने डॉक्टर प्रिया के केबिन में प्रवेश की। जैसे ही प्रिया की नजर सुनिता पर पड़ी, प्रिया अपने चेयर से उठ खड़ी हो गई।

प्रिया_बुवा आप।

सुनीता अपने जगह पर ही खड़ी रही, प्रिया उसके पास आई।

उसके आंखों से आंसू बहने लगी।

सुनीता _कैसी है तू री।

प्रिया सुनिता के पैर छू ली। फिर बोली बुआ इतने दिनो बाद मेरी याद आई।

मैं आप लोगो को कितनी मिस करती हूं। मां बाबू जी का तो समझ में आता है। आपने भी मुझसे मिलना मुनासिब न समझा।

प्रिया , सुनिता से लिपटकर रोने लगी।

सुनीता _कैसे मिलते,मै मजबूर थी re भैया ने सब से कहा है की जो कोई तुमसे मेल जोल करेगा उनसे भी हमेशा के लिए रिश्ता खत्म कर लेगा।

आज में तुम्हारे पास तुम्हारी बुआ नहीं एक पेशेंट बनकर आई हूं।

प्रिया _बुआ ये तुम क्या कह रही?

सुनीता _हा बेटी मैं ठीक कह रही।

खैर छोड़ो तुम बताओ, तुम खुश तो हो न। तुमने तो इन दस वर्षो में काफी तरक्की कर ली।

प्रिया _ये सब आपके उपकार के कारण ही हो पाया। अगर उस दिन तुम मेरी मदद न करती तो पता नहीं मैं कहा होती।

घर में सब कैसे है बुआ। मेरा गोलू भाई कैसा है? वो तो अब बड़ा हो गया होगा। क्या वह मुझे मिस नहीं करता?

सुनीता _राजेश, अब काफी बड़ा हो गया है, वह कालेज के अंतिम वर्ष में है। वह तुम्हारे बारे में पूछता रहता है। प्रिया दीदी कहा रहती है?मैने उनसे झूठ बोला की तुम विदेश में रहती हो।

प्रिया _क्या तुम अकेली आई हो, फूफा जी नहीं आए है।

सुनीता _नहीं,प्रिया मैने किसी को बताया नहीं की मैं कहा जा रही हू।

राजेश और स्वीटी तो कालेज गए है और तुम्हारे फूफा जी अपने ऑफिस।

वैसे तुम जब घर से आई तो प्रेग्नेंट थी।

Priya_हा बुआ, मैंने एक लड़की को जन्म दिया । अब तो वह दस वर्ष की होने को है।

सुनीता _और दामाद जी कैसे है?

बुआ _समीर तो बहुत अच्छे हैं। वो मुझे बहुत चाहते है। हमेशा मेरा सपोर्ट करते हैं।

सुनीता _बेटी तुम्हारी कामयाबी देखकर मुझे यकीन है भैया तुम्हे जरुर माफ कर देंगे।

पता है तुमसे मिलने के लिए लोगो को कई घंटे इंतजार करना पड़ता है, यह देखकर मुझे काफी गर्व महसूस हुआ।

Priya _ये सब आप लोगो का आशीर्वाद है बुआ जी।

बुआ जी, आज मुझे आपको देखकर कितनी खुशी हो रही है मैं बता नहीं सकती।

आओ बैठो मेरे चेयर पे।

प्रिया _नहीं re मै तो पेशेंट बनकर आई हूं तेरे पास। पेशेंट का चेयर ही ठीक है मेरे लिए। तू बैठ अपनी चेयर पे।

सुनीता ने प्रिया को उनकी चेयर पर बिठाया।

और खुद सामने वाली चेयर पर जाकर बैठ गया।

प्रिया _बुआ, बताओ क्या प्रॉब्लम है?

सुनीता _अब क्या बताऊं बेटी मुझे तो बताने में ही शर्मिंदगी महसूस हो रही है।

प्रिया _कैसी शर्मिंदगी, बुआ?

बताओ मुझे। मुझसे कैसी शर्मिंदगी? मैं तो तुम्हारी भतीजी हूं न।

सुनीता _बेटी, मै मां बनने वाली हूं?

प्रिया _बुआ इसमें शर्मिंदगी कैसी? ये तो नार्मल है । इस उम्र में अनचाहा गर्भ ठहरना आम बात है।कई औरते तो यहां 50के उम्र के बाद भी बच्चे को जन्म दे चुकी है।

सुनीता _पर Priya, मेरा जवान बेटा और बेटी भी है। लोगो को पता चलेगा तो वो हसेंगे।

प्रिया _तो बच्चा गिराना चाहती हो।

सुनीता _नहीं, री मै ऐसा नहीं करना चाहती तभी तो मैं तुम्हारे पास आई हूं। तुम तो इस बारे मे काफी पड़ी लिखी हो

तुम्हारे पास कोई तरीका तो होगा कि यह बच्चा भी जीवित रहे और मुझे इस मुसीबत से छुटकारा भी मिल जाए।

प्रिया _गर्भ कितने दिनों का है बुवा।

सुनीता _लगभग एक माह।

प्रिया _एक माह का भ्रूण हम गर्भ से निकालकर किसी दुसरे के गर्भ में प्रतिष्थापित कर सकते है।

तुम बिलकुल सही समय पर आई हो बुआ। लेकिन हम कोशिश कर सकते हैं।100 प्रतिशत सफलता का भरोसा नहीं दे सकती।

सुनीता _तुम कोशिश करो priya, आगे भगवान की मर्जी।

प्रिया _फूफा जी को इसके बारे में पता तो है न।

सुनीता _नहीं प्रिया, उसे इसके बारे मे पता नहीं।

प्रिया _पर बुआ, तुम्हे फूफा जी को इसके बारे में बता देना था।

सुनीता _नहीं Priya मैं उसे इस बारे में नहीं बता सकती।

प्रिया _पर क्यू बुआ।

सुनीता _इस बारे में न पूछो तो ही बेहतर है।

प्रिया _बुआ, ऐसा तो नहीं की यह बच्चा किसी और का,,,

सुनीता खामोशी रही,,,,

प्रिया _मतलब, यह बच्चा किसी और का है। बुआ अगर यह बच्चा किसी और का है तो इसे बचाना क्यू चाहती, मैं समझी नहीं। मतलब तुम उस शख्स को बहुंत चाहती हो तभी उसके निशानी को तुम जीवित रखना चाहती हो।

सुनीता _हा कुछ ऐसा ही समझ लो।

प्रिया _क्या उस शख्स को पता है की तुम उसकी बच्चे की मां बनने वाली हो और उस बच्चे को जीवित रखना चाहती हो।

सुनीता _नहीं अभी तक तो नहीं बताई, पर मैं उसे बता दूंगी।

प्रिया _पर बुआ अगर उस शख्स को पता चले कि उसका बच्चा जिंदा है तो वह उस बच्चे पर दावा कर सकता है, जिससे तुमबaाद में मुसीबत में आ सकती हो।

सुनीता _नहीं वह ऐसा नहीं करेगा।

प्रिया _पर बुआ तुम उस पर इतना भरोसा कैसे कर सकती हो। क्या तुम बता सकती हो की आखिर वो शख्स कौन है? मुझ पर भरोसा करो यह बात सिर्फ मुझ तक ही रहेगी।

सुनीता खामोश अपने मन में बोली,बेटी यह बात मैं तुम्हे कैसे बताऊं, वो शख्स कौन है? किसका बीज मेरे गर्भ में पल रहा है।

प्रिया _बुआ, संकोच न करो, मैं तुम्हारी इस मामले में हेल्प करूंगी। आखिर तुमने भी मेरी मदद की है जब में मुसीबत में थी।

सुनीता काफी देर सोचने के बाद,,,

आंखे बंद कर बोली,,

बेटी वह शक्स कोई और नहीं तुम्हारा गोलू राजेश है।

प्रिया _क्या? चौंकते हुवे।

बुआ ये आप क्या कह रही है।

सुनीता _हा बेटी हमसे भूल हो गई। उसी का ये फल है।

प्रिया _पर बुआ आखिर ये सब हुआ कैसे?

सुनीता ने प्रिया को सारी बातें बताई किस तरह कुछ लडको ने राजेश पर हमला किया जिससे उसके दोनों हाथ फ्रैक्चर हो गए। जिससे राजेश का सारा काम उन्हीं को करना पड़ता और धीरे धीरे इस भूल की ओर कैसे आगे बड़े।

प्रिया _बुआ, जो हुआ सो हुआ आपको लज्जित होने की जरूरत नहीं है।

मैं पूरी कोशिश करूंगी कि बच्चा जीवित रहे। आखिर मेरा गोलू का खून है। Priya मुस्कुराने लगी। सुनिता शर्मा गई।

सुनीता _पर बेटी, भ्रूण को तुम किसकी गर्भ में डालोगी।

प्रिया _यहां कई पेशेंट है जो अंडे सही ढंग से न बन पाने के कारण अपने कोख में भ्रूण डलवाना चाहती है। या फिर हम किसी हमारे हॉस्पिटल में सरोगेसी मदर की भी सुविधा है, हम उसकी सहायता ले सके।

सुनीता _बेटी क्या ऐसा नहीं हो सकता की बच्चा हमारे करीब ही रहे।

प्रिया _बुआ, उसके लिए तो बच्चा किसी अपने की कोख में डालना होगा। अब कौन है अपना जो आपके भ्रूण को अपने कोख में pale

सुनीता _मेरी छोटी भाभी और तुम्हारी चाची की कोख में क्या ये भ्रूण नहीं पल सकता।

प्रिया _मैने तो डॉक्टर बनने का फैसला भी इसी लिए लिया था कि मैं चाची का दुख दुर कर सकू। पर चाची के लिए कुछ कर पाता मुझे घर छोड़ना पड़ा। चाची को हॉस्पिटल आना होगा उसकी जांच की जाएगी। देखना होगा कि भ्रूण को प्रतिस्थापित करने के लिए उसका गर्भाशय के लिए सही समय है कि नही।

क्या चाची हॉस्पिटल आएगी?

सुनीता _भाभी से मैं बात करूंगी। मुझे यकीन है वह हॉस्पिटल जरूर आएगी।

तुम्हारे चाचा भले अपने भतीजी से न मिले लेकिन मुझे यकीन है वह डॉक्टर प्रिया से जरूर मिलेगा।

प्रिया _अगर ऐसा हो गया बुआ हम सबका सपना भी पूरा हो जायेगा। चाची को मां बनते देखने का।

सुनीता _हा, प्रिया।

प्रिया _बुआ, चलो मेरे साथ कुछ चेक अप करना है देखना है भ्रूण की स्थिति क्या है?

प्रिया सुनिता को चेक अप रूम में ले गई जहां विभिन्न उपकरणों के माध्यम से सुनिता का जांच किया गया और भ्रूण की स्थिति साइज मापा गया।

प्रिया _बुआ आज चाची को फोन कर कल हॉस्पिटल आने के लिए जरूर मना लेना।

सुनीता _प्रिया तुम निश्चिंत रहो भाभी कल जरूर आएगी।

प्रिया _बुआ कल जब यहां आओगी तो मेरा गोलू भाई को भी साथ ले के आना, मैं भी तो देखू कैसा दिखता है बड़ा होकर।

सुनीता,_ठीक है Priya, अब मैं चलती हूं कुछ समय बाद बच्चों के आने का समय हो जायेगा।

प्रिया _ठीक है बुआ।

सुनीता हॉस्पिटल से घर आ गई।

घर आने के बाद वह अपनी छोटी भाभी, सुमित्रा को काल की।

सुमित्रा ने काल उठाया।

सुनीता ने सुमित्रा से कहा भाभी कैसी हो। घर में सब कैसे है?

सुमित्रा _घर में सब ठीक है सुनीता , अब मेरी पीड़ा को तो तुम जानती ही हो।तुम लोग कैसे हो?

सुनीता _यहां सब ठीक है भाभी। भाभी किसी डॉक्टर या वैद से इलाज करा रही हो की नहीं।

सुमित्रा _कई डॉक्टरों और वैद्य को दिखा लिया सुनिता, पर मेरी किस्मत में ही शायद संतान सुख नहीं लिखा है।

सुनीता _भाभी उमीद मत छोड़ो। मेरी मुलाकात आज एक बहुंत ही अच्छे डाक्टर से हुई। वह हजारों निसंतान औरतों को संतान सुख प्रदान की है। मैने उनसे आपके बारे में बात की। उसने तुम्हे कल आने को कहा है।

देखो भाभी आपने इतनी इलाज करा कर देख ली एक बार इस डॉक्टर से भी मिल लो। बहुंत अच्छी डॉक्टर है देश विदेश से लोग इनके पास आते है।

सुमित्रा _ठीक है सुनीता मैं बात करुंगी तुम्हारे भैया से फिर बताऊंगी।

सुनीता _ठीक है भाभी अब मैं फोन रखती हूं।

सुमित्रा का पति सतपाल सिंह जब शाम को घर आया तो सुमित्रा ने सुनीता के द्वारा कही बातो के बारे मे बताया।

सतपाल सिंह ने कहा, तुम क्या चाहती हो?

सुमित्रा _देखो जी इतनी डॉक्टरों को दिखा चुके है अंतिम बार और कोशिश कर लेते हैं।

सतपाल सिंह _ठीक है सुमित्रा कल हम सुनीता के घर चलेंगे।

सुमित्रा इस बात की जानकारी सुनिता को दी की कल हम आ रहे हैं।

सुनीता खुश हो गई।

रात में जब सभी लोग खाना खाकर सोने लगे।

इधर सुनिता को नींद नहीं आ रही थी। वह छत पर टहलने चली गई।

उसने सोचा कि राजेश को इन सब के बारे मे बता देना चाहिए।

उसने राजेश को काल किया। राजेश ने देखा मां की काल है, इतनी रात को, उसने काल उठाया।

राजेश _मां कैसे काल किए, इतनी रात को।

सुनीता _हा, बेटा मुझे तुम्हे कुछ बतानी है तुम छत पर आओ, मै छत पर हु।

राजेश _ठीक है मां मै अभी आता हूं।

राजेश बेड से उठा और छत की ओर चला गया।

वहां पहुंचने पर,

सुनीता _आ गया।

राजेश _मां क्या बताना चाहती थी मुझको?

सुनीता _बेटा, मै पेट सी हूं।

राजेश _मां ये क्या कह रही हो?

सुनीता _हा,बेटा, ये सच है मैं तुम्हारे बच्चे की मां बनने वाली हूं।

राजेश _मां , तुम चिंता न करो मैं कल किसी अच्छे डॉक्टर के पास ले जाऊंगा।

सुनीता _बेटा मै आज डॉक्टर के पास गई थी। मै इस बच्चे को गिराना नहीं चाहती। बल्कि इसे जीवित देखना चाहती हु।

मैं तुम्हारे बच्चे को गिराने के बारे में सोच भी नहीं सकती।

राजेश _पर मां ये कैसे संभव है।

सुनीता _बेटा क्या तुम यशोदा टेस्ट ट्यूब सैंटर के बारे मे जानते हो।

राजेश _वह तो एक बहुत बड़ा नामी hospital है मां।

सुनीता _क्या तुम यह जानते हो उस हॉस्पिटल की संचालिका कौन है?

राजेश _नहीं मां, क्या आप जानती है उनको?

सुनीता _उस hospital की संचालिका तुम्हारी प्रिया दीदी है।

राजेश _क्या? चौकते हुए कहा

पर मां आप तो जब भी मैं उसके बारे मे पूछता तुम कहती की वह विदेश में रहती है।

सुनीता _मै झूठ कहती थी तुमसे। अगर तुमको सच बता देता तो तुम उनसे मिलने की जिद करते। जो मैं नहीं चाहती थी। मै आज उनसे मिली। और सब कुछ सच बता दी।

राजेश _मां ये क्या कह रही हो? क्या यह भी बता दी कि यह बच्चा किसका है?

सुनीता _हा।

राजेश _मां, प्रिया दीदी क्या सोच रही होग, हमारे बारे मे।

सुनीता _मै भी बताने के पहले सोच रही थी, की वह क्या सोचेंगी? पर वह काफी सुलझी हुई समझदार निकली। वह परिस्थिति को समझी।

वह मदद करने के लिए तैयार हो गई। वह मेरे गर्भ में पल रहे भ्रूण को मेरे गर्भ से निकालकर तुम्हारे मामी के गर्भ में प्रतिस्थापित करेगी? तुम तो जानते ही हो की तुम्हारे छोटी मामी का अभी तक कोई बच्चा नहीं है।

राजेश _हा मां अगर ऐसा हो गया तो हम सब के लिए खुशी की बात होगी।

सुनीता _हा, मैने भाभी को यहां आने के लिए कह दिया है। कल तुम्हारे मामा मामी घर आ रहे हैं। यहां से फिर हॉस्पिटल चलेंगे। कल तुम भी चलना हॉस्पिटल।

राजेश _हा मां मै प्रिया दीदी से मिलना चाहता हूं। कितनी दिन हो गए उनसे मिले।


सुनीता _हा हा मिल लेना अपनी प्रिया दीदी से, वह भी देखना चाहती है तुमको, कि कितना बड़ा और बदमाश हो गया है। सुनिता मुसकुराते हुए बोली।
 
सुनीता को जब पता चला की वह प्रेग्नेंट हो गई है, तो वह बहुत चिंतित हो गई थी लेकिन प्रिया ने उसकी सारी चिंता दूर कर दी थी। अब सुनिता को अपने प्रेगनेंट होने से एक खुशी का एहसास होने लगा।



रात में जब छत पर राजेश और सुनिता इस मुद्दे पर बात कर रहे थे तो राजेश को भी लगा की उसकी मां खुश हैं।

राजेश ने अपनी मां को पीछे से बाहों मे भर लिया।

सुनीता _राजेश छोड़ो मुझे ये क्या कर रहा है?

राजेश _धीरे से अपनी मां के कानो में कहा, मां आज तो बडी खुशी की बात है न सुमन और आप दोनों मेरे बच्चे की मां बनने वाली हो। मुझे आप पर प्यार आ रहा है।

राजेश ने सुनिता को अपने बाहों मे कस लिया।

मां क्या तुम्हे मेरे बच्चे की मां बनने में खुशी नही हो रही सच बताओ।

सुनीता _खुश हूं तो।

राजेश उत्तेजित हो गया, वह अपना लंड का दबाव सुनिता के गाड़ में बढ़ाते हुवे कहा,

राजेश _क्या मै अपने होने वाले बच्चे की मां से प्यार कर सकता हूं?

सुनीता _न न तू बिगड़ चुका है। और मेरे पीछे क्या चुभ रहा है? सम्हालो इसे। मै तेरी मां हू बीबी नही की कभी भी शूरू हो जायेगा।

राजेश _छोटा पप्पू यह सुनकर की वह बाप बनने वाला है गर्व से लंबा और मोटा हो गया है, वह तुम्हे फिर से प्यार करना चाहता है।

सुनीता _न बाबा न इसने तो मुझे मुसीबत में ही डाल दिया था। मुझे इनसे दूर ही रहना है। चलो छोड़ो मुझे।

राजेश _मां आओ न इस खुशी के पल को इंजॉय करते हैं।

राजेश ऐसा कहकरएकहाथ से अपनी मां की चूची को और एक हाथ से उसके पेट को सहलाने लगा।

सुनीता _क्या कर रहा है छोड़ मुझे किसी ने देख लिया तो मैं किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रहूंगी। चलो छोड़ो मुझे जाने दो।

राजेश _मां यहां तो कोई भी नही है देखने वाला, प्लीज चलो न एक बार फिर से करते हैं? आज बडी खुशी का दिन है?

सुनीता _न बाबा मै तेरी चिकनी चुपड़ी बातो में नही आने वाली। छोड़ो मुझे जाने दो।

इधर राजेश ने एक हाथ से सुनिता की गाउन के उपर से ही उसकी बुर सहलाने लगा।

सुनीता सिसक उठी।

सुनीता _नही बेटा ये क्या कर रहा है? छोड़ मुझे कोई आ जाएगा?

राजेश ने अपनी मां की बातो पर ध्यान नहीं दिया और उसके बुर को सहलाने लगा उसकी चूची को एक हाथ से मसलने लगा और उसकी गरदन पर किस करने लगा।

राजेश की इस हरकत se सुनिता उत्तेजित होने लगी और वह सिसकने लगी।

सुनीता _बेटा छोड़ो न कोई आ जाएगा तू सच में बड़ा बदमाश हो गया है, सिसकते हुवे बोली।

राजेश ने एक सुनिता की एक चूची गाउन से बाहर निकाल दिया और उसकी चूची पीने एवम बुर मसलने लगा।

सुनिता के मुंह से लगातार सिसकारी निकलने लगी। वह राजेश के बाल को सहलाने लगी।

राजेश _मां सच में क्या मस्त चूची है तेरी? और राजेश चूची पीना और एक हाथ से बुर मसलना जारी रखा।

जिससे सुनिता बहुंत उत्तेजित हो गई।

अब राजेश ने सुनिता को झुका दिया। छत की बाउंड्री को पकड़ कर सुनिता झुक गई।

राजेश ने सुनिता की गाउन को उपर किया और पेंटी को नीचे खींच दिया जिससे सुनिता कूल्हे उजागर हो गई।

राजेश ने सुनिता के कूल्हे को हाथो से सहलाया और उसे चूमा।

फिर अपने लोवर को चड्डी सहित नीचे खींचकर अपना लंबा और मोटा लंड बाहर निकाल लिया।

राजेश ने अपने हाथ से सुनिता की बुर को सहलाया और एक उंगली बुर के छेद में डाल दिया।

उसका उंगली सुनिता के बुर रस से गीला हो गया।

राजेश को पता चल गया कि मां भी गर्म हो गई है। उसकी योनी पूरी तरह गीली हो गई है।

राजेश ने देर न लगाते हुवे अपना लंड का सुपाड़ा सुनिता के बुर के छेद पर रखा और एक जोर का धक्का लगाया।

लंड बुर को चीरकर अंदर घूस गया।

सुनीता सिसक उठी। उसकी मुंह से हल्की चीख निकल पड़ी।

अब राजेश सुनिता के कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर अंदर बाहर करना शुरू कर दिया।

पहले धीरे धीरे फिर अपना गति बड़ाने लगा।

लंड सुनिता के बुर में सर सर अंदर बाहर होने लगा।

लंड बुर रस से पूरी तरह गीली हो जाने के कारण बडी आसानी से अंदर बाहर होने लगा। जिससे फ्च फच की आवाज़ आने लगा।

सुनीता के मुंह से सिसकारी निकल कर छत में गूंजने लगी। लंड को राजेश अब तेज गति से अंदर बाहर करना शुरू कर दिया।

सुनीता के बुर से पानी निकलकर उसकी टांगो में टपकने लगी।

राजेश अब सुनिता को दनादन चोदना शुरू कर दिया। सुनिता और राजेश दोनों को बहुत मज़ा आने लगा। दोनो स्वर्ग का सुख भोगने लगे।

राजेश _मां तेरीसच में तुम्हे चोदने में जो मजा आता है, ऐसा मज़ा दुसरो में नही।

जिस chut से बाहर आए हो उसे चोदने का मज़ा ही कुछ और है।

मां को मां बनाने में जो मजा है वो किसी और में नही। राजेश ऐसा बोलते हुए सुनिता की जोर जोर से chudai करने लगा।

राजेश _ले मां ले,, एक और ले, ले, सच में खुब मजा आ रहा है, ले और ले मज़ा ले।

कैसा लग रहा है मां तुम भी तो कुछ बोलो अपने बेटे से चुदने में,, ले, ले एक और ले, ऐसा बोलते हुए सुनिता की जमकर chudai किया लगा।

सुनीता तो जन्नत में थी। उसके मुंह से लगातार सिसकारी निकलने लगी। उसे राजेश से चुदाने में बड़ा मजा आ रहा था। वह अपना क़मर हिला हिला कर राजेश का लंड लेने लगी।

सुनीता अपने को ज्यादा देर तक न रोक सकी और अपने दोनों टांगो को जोड़ ली। उसकी आंखों के पुतलिया पलटने लगी उसके पैर कपकपाने लगे, क्यू कि वह झड़ गई थी।

राजेश को पता चलगया कि उसकी मां झड़ चुकी है।

वह chudai बंद कर दिया। कुछ देर बाद सुनिता खड़ी हो गई। जिससे राजेश का लंड बाहर आ गया।

वह अभी झड़ा नहीं था।

उसका लंड सुनिता की बुर के पानी पीकर ओर मोटा और लंबा हो गया।

सुनिता जब होश में आई तो वह फिर से लज्जित महसूस करने लगी।

वह छत से भागने की कोशिश करने लगी। तभी राजेश ने फुर्ती दिखाते हुवे फिर से बाहों मे भर लिया।

सुनीता _बेटा छोड़ो न, अब हो गया, और कितना करोगे? मुझे जाने दो।

राजेश _मां मेरा अभी huwa नही है?

पहले मुझे ठंडा करो।

सुनीता _नही अब बस करो, यहां कोई आ जाएगा, मै किसी मुसीबत में और नही फसना चाहती। प्लीज छोड़ो मुझे।

राजेश _मां , मेरा अभी बड़ा मन है और करने का मै सो नही पाऊंगा प्लीज करने दो न।

सुनीता _तू बड़ा जिद्दी हों गया है। छोड़ मुझे और वह राजेश को धक्का देकर दूर हो गया और छत से नीचे भाग कर अपने कमरे मे चली गई।

राजेश देखता रह गया।

इधर सुनिता अपने कमरे मे जाकर देखी उसके पति गहरी नींद में सो रहा था। वह राहत की सांस ली।

इधर राजेश बेचैन था उसे सेक्स करने की प्रबल इच्छा हो रही थी। वह सुनिता के कमरे के पास जाकर उसका दरवाज़ा खटखटाने लगा।

सुनीता घबरा गई उसका पति दरवाजे पर हो रही आवाज़ सुनकर उठ गया।

शेखर _सुनिता देखो तो दरवाज़ा कोई खटखटा रहा है।

सुनीता सोने की नाटक कर रही थी।

सुनीता _क्या huwa जी?

शेखर _दरवाजे पर कोई है देखो कौन है?

सुनीता _ठीक है जी,?

सुनीता घबरा गई, राजेश कोई उल्टी सीधी हरकत ना कर दे।

वह उठकर दरवाज़ा खोली?

सुनीता राजेश से बोली _क्या है? दरवाज़ा क्यू पीट रहा है?

राजेश _मेरा बड़ा मन है। मुझे अभी और करना है?

सुनीता _तू बड़ा जिद्दी हो गया है? तुम्हारा पिता तुम्हारी हरकत से जाग गया है। अब कुछ नहीं होगा जाओ सो जाओ।

शेखर _कौन है सुनिता?

राजेश _पापा मै हू,।

शेखर अपने बेड पर बैठ गया।, ओर बोला, अरे बेटा इतनी रात को क्या बात है?

राजेश _पापा, मेरा सिर दर्द कर रहा है? मां के पास कोई बॉम वागेरा होगा तो लेने आया था।

शेखर _सुनिता देखो तुम्हारे पास बॉम होगा तो राजेश को दे दो।

सुनिता _ठीक है जी।

सुनीता ने बॉम ढूंढी पर बॉम खत्म हो चुका था।

शेखर _क्या huwa सुनिता बॉम नही है क्या?

सुनीता _बॉम तो मिला पर खत्म हो गया है जी।

शेखर _सुनिता तुम एक काम करो कोई तेल होगा तो देखो और राजेश के सिर का अच्छे से मालिश कर दो उसे कुछ राहत मिलेगी।

सुनीता _ठीक है जी, राजेश तुम अपने कमरे में जाओ जाओ मैं सरसो तेल गर्म करके लाती हूं।

राजेश अपने कमरे मे चला गया।

और वहा जाकर अपने बेड पर लेट कर अपना लंड निकालकर उसे सहलाने लगा। वह अपनी मां की आने का इंतजार करने लगा।

इधर सुनिता तेल लेकर कमरे में आई उसने देखा राजेश पूरा नंगा हो गया है और उसका लंड हवा में लहरा रहा है।

वह दरवाज़ा बंद कर दी।

और बेड पर आ गई।

सुनीता _तू बड़ा बेशर्म हो गया है, पूरा नंगा हो गया है अपनी मां के सामने।

राजेश _क्यू जब मैं पैदा huwa था तो क्या कपड़ा पहना था क्या? उस समय तो बड़ा प्यार से मुझे नंगा ही दुदू पिलाई होगी।

सुनिता _चुप बदमाश कही का, उस समय तू छोटा था। अब तू अपनी मां को ही मां बनाने में लगा है।

मुसकुराते हुवे बोली।

सुनीता _अब जल्दी करो जो भी करना है? तुम्हारे पापा जागे हुए हैं।

राजेश _अब मुझे क्या करना है जो भी करना है तुम ही करो?

सुनीता _अच्छा तुम ही बताओ, तुम्हारा पानी कैसे जल्दी निकलेगा?

राजेश _ये हुई न बात, मै जैसा कहूंगा वैसी करोगी तो बहुंत जल्दी काम हो जायेगा?

लो पहले इसे अच्छे से चूसो।

सुनिता ने राजेश का लंड मुंह में भरकर चुसने लगी उसका अंड कोश सहलाने लगी। राजेश जन्नत में पहुंच गया।

राजेश _आह मां बहुत मजा आ रहा है, ऐसी ही चूसती रहो।

राजेश अपनी मां के सिर के बाल को पकड़ रखा था।

आह आह करके कराह रहा था। और चूसो मेरी रानी मस्त चूस रही हो।

राजेश _अब चलो अपनी गाउन उतारो और इस पर बैठ जाओ।

सुनीता _न मै नंगी नही होऊंगी।

राजेश _गाउन नही उतारोगी। तो तुम्हारा दुदू कैसे पीऊंगा।

सुनीता _तू नही मानेगा,

सुनीता ने अपना गाउन उतार दिया और ब्रा भी खोल दी।

राजेश _आह मां क्या मस्त चूची है। जवान लड़कियों की चूची तुम्हारे सामने कुछ नहीं, राजेश ने अपनी मां की चूची को मुंह में भरकर चुसने लगा। उसे मसल मसल कर पीने लगा।

सुनीता गर्म होने लगी।

उसकी बुर फिर पनियाने लगी।

राजेश एक उंगली से अपनी मां की बुर को पेंटी के उपर से रगड़ने लगा जिससे सुनिता सिसकने लगी।

कुछ देर तक राजेश की इन हरकतों से सुनिता फिर से उत्तेजित हो गई। उसकी पेंटी chut रस से भीग गई।

राजेश समझ गया की उसकी मां पूरी तरह गर्म हो गई है।

राजेश _मां अब बैठ जाओ मेरे लंड पर।

सुनीता _नही बेटा मुझे शर्म आएगी तुम करो।

राजेश _मां समय कम है पापा जाग रहे हैं जल्दी खेल खत्म करना है तो जैसा कह रहा हूं करो।

सुनीता खड़ी होकर अपनी पेंटी उतार दी और राजेश के लंड को पकड़ कर अपने बुर के छेद पर रख कर उसके उपर बैठ गई। एक बार फिर लंड बुर को चीर कर पुरा अंदर तक समा गया।

अब राजेश ने सुनिता की चूची मसलते हुएसुनिता को लंड पर उछलने का इशारा किया।

सुनीता लंड पर धीरे धीरे उछलना शुरू की।

अब राजेश सुनिता की क़मर को पकड़ लिया और वह भी नीचे से लंड बुर में पेलने लगा।

लंड बुर में गच गच अंदर बाहर होने लगा। सुनिता को चुदने में बड़ा मजा आने लगा।

सुनीता ने अपनी आंखे बन्द कर लंड पर जोर जोर से उछलकर चुदने लगी।

राजेश सुनिता की क़मर को पकड़ कर अपने लंड से नीचे से धक्का लगा कर सहयोग करने लगा।

कुछ देर उछलने के बाद सुनिता रुक गई और वह राजेश के उपर झुक गई।

बेटा मैं थक गई, अब तुम करो।

राजेश सुनिता के पीठ को दोनों हाथों में पकड़कर बेड पर बैठ गया। सुनिता उसकी लंड पर बैठी थी।

कुछ देर तक राजेश, सुनिता को अपनी बाहों में भर कर उसके ओंठ चुसने लगा।

फिर सुनिता के कूल्हे के नीचे तकिया लगा दिया अब सुनिता और राजेश दोनों अपने हाथ पीछे से बेड को थाम कर दोनों सामने धक्का लगाने लगे इस समय लंड बुर में सर सर अंदर बाहर हो रहा था। जिसे राजेश और सुनिता लंड को बुर में अंदर बाहर होते हुवे अच्छे से देख सकते थे।

राजेश _धक्का लगाते हुवे,, मां देखो ना लंड बुर में कैसे अंदर बाहर हो रहा है।

सुनीता अपनी बुर की ओर देखी, राजेश का लंड कैसे उसकी बुर को फाड़कर अंदर बाहर हो रहा था। जिसे देखकर सुनिता शर्मा गई और अपने हाथ से बुर छिपाने लगी।

राजेश _मां हाथ हटाओ न देखने दो, राजेश और जोर जोर से चोदने लगा।

सुनीता शर्म से पानी पानी हो रही थी।

सुनीता _राजेश अब जल्दी करो तुम्हारा पापा जग रहा है।

राजेश अब फिर से बेड पर लेट गया। और अपनी मां को अपनी तरफ पीठ करके लंड पर बैठने को कहा।

सुनीता पीछे मुड़कर लंड को अपने हाथों से पकड़ कर अपने बुर में डाल कर उसके उपर बैठ गई।

एबी राजेश सुनीता के क़मर के आगे पीछे कर उसे चोदना सुरू किया। इस आसन में राजेश लंड को बुर में जाता huwa अच्छे से देख पा रहा था।

वह जोश में आ गया और सुनिता की क़मर को पकड़ कर अपने लंड में पटक पटक कर चोदना शुरु कर दिया, दोनों फिर से जन्नत में पहुंच गए।

सुनीता की सिसकारी पूरे कमरे मे गूंजने लगी।

लंड का बुर में जाने की आवाज़ गच गच fuk fuk की मधुर ध्वनि उत्पन होने लगी।

राजेश और सुनिता दोनो अपना सुध बुध खो कर chudai का मज़ा लेने लगे राजेश सुनिता को अपने लंड पर पटक पटक कर चोद रहा था और सुनीता लंड पर उछल उछल कर chud रही थी।

अब राजेश को अपने को रोक पाना मुस्किल था। वह सुनिता की कूल्हे को अपनी क़मर से सटा लिया और आह मां आह, आह, करके कराहते हुवे झड़ने लगा। गर्म गर्म वीर्य को अपने गर्भ में जाति हुई महसूस कर सुनिता फिर से झड़ गई ।

कुछ देर तक लंड में ऐसी ही बैठी रही फिर लंड से वह उठ खड़ी हुई। लंड बुर से फूक की आवाज़ करता बाहर आया सुनिता अपनी हाथ से अपनी chut को पकड़ ली ताकि लंड का पानी नीचे न गिरे, वह सीधे बाथरूम में जाकर बुर को पानी से धोने लगी।

उसके बुर से राजेश का वीर्य टपक रहा था। जिसे उंगली डालकर अच्छी तरह पानी से धोने लगी। उसने अपनी बुर की हालात देखी, उसकी छेद फैल गया था। बुर सूज गया था। वह मुसकुराते हुवे बोली। बुर की क्या हालत कर दिया बदमाश ने?

बुर को धोने के बाद बाथरूम से बाहर आई राजेश की ओर देखी राजेश अपनी मां की नंगा जिस्म देख कर मुस्कुरा रहा था। सुनिता शर्मा गई।

सुनीता _चल हट बदमाद क्या देख रहा है?

राजेश _सच में मॉम तुम बहुत खूबसूरत हो।

सुनीता ने जल्दी से अपना पेंटी ब्रा और गाउन पहन कर अपने कमरे में आ गई।

शेखर _राजेश का दर्द कम हुआ।

सुनीता _हा जी, उसका अच्छे से मालिश की तो उसे बडी राहत मिली अब वह चैन से सो पाएगा।

शेखर _चलो अच्छी बात है।

सुनीता _रात काफी हो गई है अब आप भी सो जाइए।
 
अगले दिन जब सुबह सभी नाश्ता कर रहे थे। सुनिता ने शेखर को बताया की कल भैया भाभी घर आ रहे हैं। इलाज के सिलसिले में।

शेखर _मुझे पहले बता देती मै ऑफिस से छुट्टी ले लेता।

सुनिता _नही जी आपको ऑफिस से छुट्टी लेने की कोई जरूरत नही है।

वे इलाज के सिलसिले में आ रहे हैं, आप क्या करोगे? राजेश आज कालेज से छुट्टी ले लेगा! मै और राजेश चले जाएंगे, उनके साथ।

स्वीटी _मम्मी, मै भी छुट्टी ले लेती हूं कालेज से कितने दिन हो गए मामा मामी से मिले।

सुनीता _नही तुम कालेज से छुट्टी नही लोगी, कालेज से आने के बाद मिल लेना अभी तो उन लोग रुकेंगे।

शेखर _अच्छा सुनिता उनके ठहरने का इंतजाम की हो की नहीं।

सुनीता _हा जी गेस्ट रूम की सफाई कर दी है।

नाश्ता करने के बाद शेखर अपना ऑफिस चला गया और स्वीटी कालेज।

राजेश और सुनिता महमानो के आने का इंतजार करने लगे।

राजेश _मां, मामा जी को फोन तो करो कहा पहुंचे है अभी।

सुनिता ने अपनी भाभी को फोन लगाया।

सुमित्रा ने काल रिसीव किया।

सुनिता _भाभी कहा पहुंचे हो आप लोग?

सुमित्रा _बस सुनिता हम पहुंचने वाले है। यहां की सड़के में काफी भीड़ भाड़ है। तुम्हारे भैया को ज्यादा भीड़ भाड़ में गाड़ी चलाने की आदत नहीं है न तो सम्हाल कर चला रहे हैं।

सुनिता _भैया से कहना आराम से गाड़ी चलाए कोई जल्दबाजी न करे।अच्छा भाभी आपलोग आइए, हम लोग आप लोगो का वेट कर रहे हैं।

कुछ देर बाद कार घर के सामने आकर खड़ी हुई।

राजेश _मां लगता है , मामा मामी आ गए।

दोनों घर से बाहर निकले।

सतपाल सिंह और सुमित्रा कार से उतरे।

राजेश प्रणाम मामा जी पैर छूते हुए कहा,

सतपाल सिंह _जीता रह भांजे, तू तो हट्टा कट्टा पूरा जवान हो गया है।

राजेश ने फिर अपनी मामी का पैर छूकर, प्रणाम मामी जी कैसी हैं आप।

सुमित्रा _मै तो ठीक हू बेटा तु कैसा हैं re, तू क्या बॉडी बना लिया है? लगता है खुब कसरत करता है।

राजेश _मामी जी लाओ बैग मुझे दो आप थक गई होंगी।

सुनीता _कैसे हैं भैया भाभी आप दोनों? आने में परेशानी तो नहीं हुई।

सतपाल _हम दोनों तो ठीक है छुटकी, शहर की सड़के तो काफी भीड़ रहती है। आराम से आना पड़ा। तु कैसी है?

सुनीता _मै भी ठीक हु भैया, बस आपका आशीर्वाद हैं। आइए अंदर चलते हैं? बेटा राजेश तुम सारा सामान गेस्ट रूम में रख दो।

कुछ देर आपस में बात चीत करने के बाद।

सुनीता _भईया आप लोग थक गए होंगे, जाओ आप लोग फ्रेस हो जाओ फिर मैं खाना लगाती हूं। आप लोगो को भुख लगी होगी।

सतपाल सिंह और सुमित्रा दोनों अपने कमरे में जाकर फ्रेस हो गए दोनों को भुख लगी थी भोजन करने के बाद वे आगे की योजना बनाने लगे।

सुनीता _भाभी आप लोग थोडा आराम कर लो फिर हम हॉस्पिटल के लिए निकलेंगे।


भोजन करने के बाद सभी थोड़ी देर अपने कमरे में आराम कर फिर हॉस्पिटल के लिए निकल पड़े।

राजेश _मामा जी कार मै चलाऊंगा? आप सामने बैठिए।

सतपाल _ठीक है भांजे कार तुम ही चलाओ यहां की रास्ते का तो मुझे पता नही। यहां की सड़को पर काफी भीड़ रहती हैं।

वे सभी कार से यशोदा टेस्ट ट्यूब सेंटर के लिए निकल पड़े।

राजेश तो अपने प्रिया दी से मिलने के लिए काफी उत्साहित था। जबकि सुमित्रा और सतपाल सिंह को पता नहीं था की जिस डॉक्टर के पास वो जा रहे हैं वह इन्फर्टिलिटी इस्पेशलिष्ट कौन है?

वे कुछ देर में हॉस्पिटल पहुंच गए।

वेटिंग हाल में लोगो की काफी भीड़ थी। हाल पूरा भरा हुआ था सैकड़ों लोग डॉक्टर प्रिया से मिलने के लिए वेटिंग में थे।

सुमित्रा _सुनीता, यहां तो काफी भीड़ है। डॉक्टर से मिलने के लिए तो काफी समय लगेगा।

वे सभी हाल में बैठ कर इंतजार करने लगे।

सुनीता _भईया आप लोग यहां बैठिये मै रिसेपसिनिस्ट से मिलकर आती हूं।

राजेश _मां, मै भी चलूं।

सुनीता _नही बेटा तुम यहीं रुको। मै अभी आती हूं।

सुनीता डॉक्टर प्रिया के केबिन के दरवाजे के सामने खड़ी लड़की के पास गई, जो लोगो को एक एक करके डॉक्टर प्रिया के केबिन में उससे मिले भेज रही थी।

सुनीता उस लड़की से बोली की डॉक्टर प्रिया से कहना की उसकी बुवा और चाची मिलने आई है।

लड़की अंदर जाकर यह बात डॉक्टर प्रिया को बताई।

प्रिया खुश हो गई वह अपनी सहायक से बोली तुम उन लोगो को तुरंत अंदर भेजो।

अपनी सामने बैठे क्लाइंट को संतुष्ट कर एवम आवश्यक निर्देश देकर केबिन से बाहर भेज दिया।

इधर वेटिंग हाल लगे डॉक्टर प्रिया के पोस्टर जिसमे टेस्ट ट्यूब के द्वारा जन्मे बच्चों एवम उसके माताओं के साथ फोटो खींचा गया था, चारो ओर लगे हुए थे जिस पर सुमित्रा और सतपाल सिंह की नजर पड़ी।

सुमित्रा _सुनो जी उधर देखो डॉक्टर की सकल तो हमारी प्रिया से काफी मिलती है न।

सतपाल _हा, सुमित्रा पोस्टर पर जिस डॉक्टर की तस्वीर है वो तो प्रिया जैसी दिख रही है।

सुमित्रा _कही ये डॉक्टर हमारी प्रिया तो नही।

तभी सुनीता उन लोगो के पास पहुंची और बोली,

चलो डॉक्टर ने हमें अंदर बुलाया है।

सुमित्रा _सुनीता देखो तो उस पोस्टर को उस में जो डॉक्टर है उसकी सकल प्रिया से काफी मिलती है।

सुनीता _हा भाभी ये अपनी प्रिया ही है?

सुमित्रा _क्या? ये बात हमसे छुपाई क्यू?

सुनीता _अगर सच बता देती तो भैया यहां आने को राजी होते क्या?

फिर भी अगर आपत्ति है तो अपनी भतीजी से नही डॉक्टर समझकर मिल लेना।

इस शहर की सबसे बड़ी इंफरलिटी एस्पेशलिस्ट है लाखो निःसंतान दंपतियों को उन्होंने संतान सुख प्रदान किया है। क्या तुम लोगो को गर्व महसूस नहीं हो रहा।

सुमित्रा _वो तो ठीक है, पर तुम्हारे भईया उनसे मिलने तैयार होंगे।

इधर राजेश प्रिया से मिलने उसके केबिन में चला गया।

अंदर जाने पर प्रिया,, जी सुनाइए कैसे आए हैं आप।

राजेश _जी मै अपने प्रिया दी से मिलने आया हूं।

प्रिया _जी मैने आपको पहचाना नहीं।

राजेश _मै उसका छोटा भाई गोलू हूं।

प्रिया _क्या? तुम गोलू हो? वह अपनी चेयर से खड़ी हो गईं।

राजेश_हां, मै वही गोलू हू जिसे कभी आप अपनी कंधे में बिठाकर पुरे गांव में घुमाती थी।

प्रिया अपने चेयर से उठ कर राजेश के पास आ गई, ओह मेरे गोलू भाई तू तो पुरा बदल गया है re, छोटा था तो कितना गोल मटोल था अब तो कितना स्मार्ट हो गया है। आ अपनी दीदी के गले लग जा,,

राजेश _रहने दो, मुझे तुम्हारे गले नही लगने। बेकार की प्यार दिखा रही हो। इतने दिनो तक तुम्हे अपनी भाई की याद नही आई।

आपको मालूम हैं मैं तुम्हे कितना मिस करता था।

प्रिया _तू अपनी दीदी से नाराज़ हैं।

राजेश _हा, मुझे आपसे बात नही करनी।

प्रिया _ओहो, सारी मै भी तुम्हे बहूंत मिस करती थी। कितने दिन बाद मिले हो मुझे रूठो मत आओ मेरे गले लग जाओ।

राजेश से भी रहा न गया और प्रिया को बाहों मे भर लिया दोनों के आंखों में आसूं आ गए।

दी मै सच में तुम्हे बहुत मिस करता था, मां से पूछने पर कहती थी की तुम विदेश में रहती हो।

प्रिया _मेरे भाई मुझे माफ कर दो मै सब किस्मत का खेल है। पर लगता है अब सब ठीक हो जायेगा। मेरा भाई जो मिल गया।

पर तू तो बिलकुल बदल गया है re मै तो पहचान ही नही पाई।

राजेश _दी बदल तो आप भी गई हो पहले आप भी दुबली पतली थी पर अब,,,,

प्रिया _पर अब क्या?

राजेश _छोड़ो रहने दो,,, मामा और मामी आए हैं आपसे इलाज कराने।

प्रिया _जानती हू, मैने ही बुवा से कहकर उन्हेंअगले दिन जब जब सुबह सभी नाश्ता कर रहे थे। सुनिता ने शेखर को बताया की कल भैया भाभी घर आ रहे हैं। इलाज के सिलसिले में। शेखर _मुझे पहले बता देती मै ऑफिस से छुट्टी ले लेता। सुनिता _नही जी आपको ऑफिस से छुट्टी लेने की कोई जरूरत नही है। वे इलाज के सिलसिले में आ रहे हैं, आप क्या करोगे? राजेश आज कालेज से छुट्टी ले लेगा! मै और राजेश चले जाएंगे, उनके साथ। स्वीटी _मम्मी, मै भी छुट्टी ले लेती हूं कालेज से कितने दिन हो गए मामा मामी से मिले। सुनीता _नही तुम कालेज से छुट्टी नही लोगी, कालेज से आने के बाद मिल लेना अभी तो उन लोग रुकेंगे। शेखर _अच्छा सुनिता उनके ठहरने का इंतजाम की हो की नहीं। सुनीता _हा जी गेस्ट रूम की सफाई कर दी है। नाश्ता करने के बाद शेखर अपना ऑफिस चला गया और स्वीटी कालेज। राजेश और सुनिता महमानो के आने का इंतजार करने लगे। राजेश _मां, मामा जी को फोन तो करो कहा पहुंचे है अभी। सुनिता ने अपनी भाभी को फोन लगाया। सुमित्रा ने काल रिसीव किया। सुनिता _भाभी कहा पहुंचे हो आप लोग? सुमित्रा _बस सुनिता हम पहुंचने वाले है। यहां की सड़के में काफी भीड़ भाड़ है। तुम्हारे भैया को ज्यादा भीड़ भाड़ में गाड़ी चलाने की आदत नहीं है न तो सम्हाल कर चला रहे हैं। सुनिता _भैया से कहना आराम से गाड़ी चलाए कोई जल्दबाजी न करे।अच्छा भाभी आपलोग आइए, हम लोग आप लोगो का वेट कर रहे हैं। कुछ देर बाद कार घर के सामने आकर खड़ी हुई। राजेश _मां लगता है , मामा मामी आ गए। दोनों घर से बाहर निकले। सतपाल सिंह और सुमित्रा कार से उतरे। राजेश प्रणाम मामा जी पैर छूते हुए कहा, सतपाल सिंह _जीता रह भांजे, तू तो हट्टा कट्टा पूरा जवान हो गया है। राजेश ने फिर अपनी मामी का पैर छूकर, प्रणाम मामी जी कैसी हैं आप। सुमित्रा _मै तो ठीक हू बेटा तु कैसा हैं re, तू क्या बॉडी बना लिया है? लगता है खुब कसरत करता है। राजेश _मामी जी लाओ बैग मुझे दो आप थक गई होंगी। सुनीता _कैसे हैं भैया भाभी आप दोनों? आने में परेशानी तो नहीं हुई। सतपाल _हम दोनों तो ठीक है छुटकी, शहर की सड़के तो काफी भीड़ रहती है। आराम से आना पड़ा। तु कैसी है? सुनीता _मै भी ठीक हु भैया, बस आपका आशीर्वाद हैं। आइए अंदर चलते हैं? बेटा राजेश तुम सारा सामान गेस्ट रूम में रख दो। कुछ देर आपस में बात चीत करने के बाद। सुनीता _भईया आप लोग थक गए होंगे, जाओ आप लोग फ्रेस हो जाओ फिर मैं खाना लगाती हूं। आप लोगो को भुख लगी होगी। सतपाल सिंह और सुमित्रा दोनों अपने कमरे में जाकर फ्रेस हो गए दोनों को भुख लगी थी भोजन करने के बाद वे आगे की योजना बनाने लगे। सुनीता _भाभी आप लोग थोडा आराम कर लो फिर हम हॉस्पिटल के लिए निकलेंगे। भोजन करने के बाद सभी थोड़ी देर अपने कमरे में आराम कर फिर हॉस्पिटल के लिए निकल पड़े। राजेश _मामा जी कार मै चलाऊंगा? आप सामने बैठिए। सतपाल _ठीक है भांजे कार तुम ही चलाओ यहां की रास्ते का तो मुझे पता नही। यहां की सड़को पर काफी भीड़ रहती हैं। वे सभी कार से यशोदा टेस्ट ट्यूब सेंटर के लिए निकल पड़े। राजेश तो अपने प्रिया दी से मिलने के लिए काफी उत्साहित था। जबकि सुमित्रा और सतपाल सिंह को पता नहीं था की जिस डॉक्टर के पास वो जा रहे हैं वह इन्फर्टिलिटी इस्पेशलिष्ट कौन है? वे कुछ देर में हॉस्पिटल पहुंच गए। वेटिंग हाल में लोगो की काफी भीड़ थी। हाल पूरा भरा हुआ था सैकड़ों लोग डॉक्टर प्रिया से मिलने के लिए वेटिंग में थे। सुमित्रा _सुनीता, यहां तो काफी भीड़ है। डॉक्टर से मिलने के लिए तो काफी समय लगेगा। वे सभी हाल में बैठ कर इंतजार करने लगे। सुनीता _भईया आप लोग यहां बैठिये मै रिसेपसिनिस्ट से मिलकर आती हूं। राजेश _मां, मै भी चलूं। सुनीता _नही बेटा तुम यहीं रुको। मै अभी आती हूं। सुनीता डॉक्टर प्रिया के केबिन के दरवाजे के सामने खड़ी लड़की के पास गई, जो लोगो को एक एक करके डॉक्टर प्रिया के केबिन में उससे मिले भेज रही थी। सुनीता उस लड़की से बोली की डॉक्टर प्रिया से कहना की उसकी बुवा और चाची मिलने आई है। लड़की अंदर जाकर यह बात डॉक्टर प्रिया को बताई। प्रिया खुश हो गई वह अपनी सहायक से बोली तुम उन लोगो को तुरंत अंदर भेजो। अपनी सामने बैठे क्लाइंट को संतुष्ट कर एवम आवश्यक निर्देश देकर केबिन से बाहर भेज दिया। इधर वेटिंग हाल लगे डॉक्टर प्रिया के पोस्टर जिसमे टेस्ट ट्यूब के द्वारा जन्मे बच्चों एवम उसके माताओं के साथ फोटो खींचा गया था, चारो ओर लगे हुए थे जिस पर सुमित्रा और सतपाल सिंह की नजर पड़ी। सुमित्रा _सुनो जी उधर देखो डॉक्टर की सकल तो हमारी प्रिया से काफी मिलती है न। सतपाल _हा, सुमित्रा पोस्टर पर जिस डॉक्टर की तस्वीर है वो तो प्रिया जैसी दिख रही है। सुमित्रा _कही ये डॉक्टर हमारी प्रिया तो नही। तभी सुनीता उन लोगो के पास पहुंची और बोली, चलो डॉक्टर ने हमें अंदर बुलाया है। सुमित्रा _सुनीता देखो तो उस पोस्टर को उस में जो डॉक्टर है उसकी सकल प्रिया से काफी मिलती है। सुनीता _हा भाभी ये अपनी प्रिया ही है? सुमित्रा _क्या? ये बात हमसे छुपाई क्यू? सुनीता _अगर सच बता देती तो भैया यहां आने को राजी होते क्या? फिर भी अगर आपत्ति है तो अपनी भतीजी से नही डॉक्टर समझकर मिल लेना। इस शहर की सबसे बड़ी इंफरलिटी एस्पेशलिस्ट है लाखो निःसंतान दंपतियों को उन्होंने संतान सुख प्रदान किया है। क्या तुम लोगो को गर्व महसूस नहीं हो रहा। सुमित्रा _वो तो ठीक है, पर तुम्हारे भईया उनसे मिलने तैयार होंगे। इधर राजेश प्रिया से मिलने उसके केबिन में चला गया। अंदर जाने पर प्रिया,, जी सुनाइए कैसे आए हैं आप। राजेश _जी मै अपने प्रिया दी से मिलने आया हूं। प्रिया _जी मैने आपको पहचाना नहीं। राजेश _मै उसका छोटा भाई गोलू हूं। प्रिया _क्या? तुम गोलू हो? वह अपनी चेयर से खड़ी हो गईं। राजेश_हां, मै वही गोलू हू जिसे कभी आप अपनी कंधे में बिठाकर पुरे गांव में घुमाती थी। प्रिया अपने चेयर से उठ कर राजेश के पास आ गई, ओह मेरे गोलू भाई तू तो पुरा बदल गया है re, छोटा था तो कितना गोल मटोल था अब तो कितना स्मार्ट हो गया है। आ अपनी दीदी के गले लग जा,, राजेश _रहने दो, मुझे तुम्हारे गले नही लगने। बेकार की प्यार दिखा रही हो। इतने दिनो तक तुम्हे अपनी भाई की याद नही आई। आपको मालूम हैं मैं तुम्हे कितना मिस करता था। प्रिया _तू अपनी दीदी से नाराज़ हैं। राजेश _हा, मुझे आपसे बात नही करनी। प्रिया _ओहो, सारी मै भी तुम्हे बहूंत मिस करती थी। कितने दिन बाद मिले हो मुझे रूठो मत आओ मेरे गले लग जाओ। राजेश से भी रहा न गया और प्रिया को बाहों मे भर लिया दोनों के आंखों में आसूं आ गए। दी मै सच में तुम्हे बहुत मिस करता था, मां से पूछने पर कहती थी की तुम विदेश में रहती हो। प्रिया _मेरे भाई मुझे माफ कर दो मै सब किस्मत का खेल है। पर लगता है अब सब ठीक हो जायेगा। मेरा भाई जो मिल गया। पर तू तो बिलकुल बदल गया है re मै तो पहचान ही नही पाई। राजेश _दी बदल तो आप भी गई हो पहले आप भी दुबली पतली थी पर अब,,,, प्रिया _पर अब क्या? राजेश _छोड़ो रहने दो,,, मामा और मामी आए हैं आपसे इलाज कराने।

प्रिया _जानती हू, मैने ही बुवा से कहकर उन्हें गांव से यहां बुलाया था। मै डॉक्टर ही इसलिए बनी थी की चाची का दुख दुर कर सकू।

उधर सुमित्रा ने अपने पति से प्रिया से मिलने को चलने के लिए कहा पर,

सतपाल सिंह _सुमित्रा, मै प्रिया से नही मिल सकता, तुम जो सुनीता के साथ मैं यही इंतजार करुंगा।

सुनीता और सुमित्रा दोनों प्रिया के केबिन में पहुंचीं।

दोनों को एक दुसरे के बाहों में लपटे देख सुनीता बोली _बड़ा प्यार हो रहा है भाई बहन के बीच, प्रिया देखो तो कौन आया है तुमसे मिलने,

प्रिया ने अपनी चाची को देखा _प्रिया अपनी चाची के गले लग कर बोली, चाची!

सुमित्रा _ओह प्रिया मेरी बच्ची कैसी है तू।

प्रिया _चाची किया तुम्हे अपनी प्रिया की कभी याद नही आई।

सुमित्रा _बेटी ये तू क्या कह रही ऐसा एक भी दिन नही गया होगा, की मैने तुम्हे याद न किया हो।

प्रिया और सुमित्रा दोनों के आंखों से आंसू बहने लगे।

सुमित्रा _मैं बहुत खुश हूं की मेरी प्रिया इतनी बड़ी डॉक्टर बन गई है की लोग उनसे मिलने घंटो लाइन में लगे हुए हैं।

जो भी होता है अच्छे के लिए ही होता है बेटी ,अंत भला तो सब भला ।

प्रिया _चाचा जी नहीं आए! वो अब भी मुझसे नाराज़ हैं।

सुनीता_तुम्हारे चाचा बाहर ही बैठे है।

प्रिया _मुझे चाचा जी से मिलना है , उनसे माफी मांगनी है।

राजेश _दी आप चिंता न करो मै हू न, मै मामा जी को लेकर आता हू।

राजेश केबिन से बाहर चला गया, और अपने मामा के पास गया।

सतपाल सिंह _मिल लिया अपनी प्रिया दी से।

राजेश _हा मिल लिया, मामा जी मै आपसे नाराज हू।

सतपाल सिंह _क्यू क्या हुवा?

राजेश _आप लोगो के कारण दी से मुझे इतना दिन दूर रहना पड़ा। और इतने दिन दूर रह कर भी आप उनसे मिलना नही चाहते।

सतपाल सिंह _क्या करू राजेश मै मजबूर हूं। भैय्या ने कहा है की जो भी प्रिया से मिलेगा वह मेरे सामने कभी मत आना।

राजेश _ठीक है तुम अपनी भतीजी से न मिलो पर एक डॉक्टर से तो मिल सकते हो। प्रिया दी तुमसे मिलना चाहती है, वह बहुत दुखी हैं।

आपको चलना ही होगा नही तो मै आपसे कभी बात नही करुंगा।

राजेश के जिद के आगे सतपाल सिंह हार मानते हुवे उसके साथ चला गया केबिन में अंदर जाते ही सतपाल सिंह दरवाजे के पास ही खडा हो गया।

राजेश _प्रिया दी देखो तो कौन आया है।

प्रिया ने जब देखा चाचाजी आए हैं वह उसके पास गई और उसके चरणों पे गिर कर,,

प्रिया _चाचा जी अभी तक मुझसे नाराज़ हैं। मुझे माफ़ कर दो चाचा जी मै मजबूर थी, वरना आप लोगो का दिल कभी नहीं दुखाता।

प्रिया को देखते ही सतपाल सिंह का भी आंख नम हो गया।

वह उसके सिर पर हाथ रख कर बोला,

उठो प्रिया गलती हमारी भी है तुमसे बिना पूछे तुम्हारी शादी हमने तय कर दी। जो huwa उसे अब भूलने में ही हम सब की भलाई है।

मै तुम्हारी कामयाबी देखकर बहुत खुश हूं।

सच चाचा जी आपने मुझे माफ कर दिया। ओह मैं आज कितनी खुश हूं मैं बता नहीं सकती।

आपस में कुछ देर सभी बात चीत करने के बाद।

प्रिया ने नर्स को बुलाया और एक पर्ची पर कुछ लिखकर उसे टेस्ट के लिए अपने चाचा को नर्स के साथ पैथा लाजी रूम में ले जाने को कहा।

सतपाल सिंह नर्स के साथ चला गया।

लैब में जाने के बाद उसे एक छोटा प्लास्टिक का डिब्बा दिया गया और उस वीर्य कलेक्ट कर लाने को कहा, उसे वीर्य कलेक्ट करने के लिए एक अलग से बने कमरे मे जाने को कहा।

सतपाल सिंह पहले भी पैथलाजी में वीर्य जांच करा चुका था, तो उसे किसी प्रकार का संकोच न huwa,वह कमरे में जाकर मुठ मारा और अपना वीर्य डिब्बे में इकट्ठा कर लैब में जांच के लिए दे दिया।

रिपोर्ट के लिए एक घंटे का समय लगना था। तो वह वेटिंग हाल में बैठकर वेट करने लगा।

इधर प्रिया अपनी चाची और बुआ को अपने साथ गर्भाशय की जांच हेतु अपने साथ ले गया।

राजेश भी वेटिंग रूम में जाकर वेट करने लगा।

उधर आधुनिक उपकरणों के द्वारा प्रिया ने अपनी चाची की अच्छे से जांच किया। फिर उसके ब्लड का सैंपल लेकर भी कई प्रकार के टेस्ट करवाया।

रिपोर्ट आने में समय लगना था। इसलिए प्रिया ने सब को अपने साथ घर चलने को कहा।

तब सुनीता ने कहा _बेटी अभी तो तुम्हारे क्लाइंट तुमसे मिलने के लिए वेट कर रहे हैं।

डॉक्टर होने के नाते पहले अपना फर्ज पूरा करो। हम तुम्हारे घर बाद में आयेंगे।

वैसे तुम घर पर कितना समय जाती हो।

प्रिया _क्लाइंट को निपटाकर घर शाम को 7बजे के बाद ही पहुंच पाती हू। हां सुबह 10बजे तक घर में ही रहती हू।

वैसे तो अलग अलग विभाग में कई जूनियर डॉक्टर्श है जो मेरे अनुपस्थिति में भी सारा काम सम्हाल लेते हैं। बहुत जरूरी होने पर ही मुझे हॉस्पिटल आना पड़ता है।

सुनीता _अच्छा प्रिया अब हम चलते है।

प्रिया _आज रात आप सभी हमारे घर आइए न डिनर करने समीर और मेरी बेटी पिंकी से भी मुलाकात हो जायेगी, मै भी स्वीटी और फूफा जी से मिल लूंगा।

सुनीता _ठीक है प्रिया हम लोग रात को डिनर के लिए पहुंच जाएंगे।

इसके बाद वे सभी घर पहुंच गए। स्वीटी कालेज से आ चुकी थी। अपने मामा मामी से मिलकर वह भी काफी खुश हो गई।

सुनीता के कहने पर शेखर भी बैंक से जल्दी घर आ गया।

रात को 8 बजे वे सभी प्रिया के घर पहुंचे। प्रिया का घर आलीशान बंगला था।

इधर प्रिया ने समीर को भी हॉस्पिटल से जल्द घर आने को कहा की घर में मेहमान आने वाले है।

समीर भी खुश था की पहली बार उसके ससुराल पक्ष से उनके घर आ रहे हैं, अपनी नाराजगी दूर कर।

घर में कई प्रकार के व्यंजन बनाया जा रहा था।

जब मेहमान पहुंचे तो समीर को अपने पूरे मायका पक्ष के लोगो से मिलवाया। सभी लोग समीर और पिंकी से मिलकर बहुत खुश हुए।

सुनीता _बेटी इतना आलीशान बंगला है, पर रहते सिर्फ तीन, एकात और बच्चा का प्लानिंग क्यू नही कर लेती।

प्रिया _बुवा हम कोशिश कर रहे हैं।

सुनीता _चलो अच्छी बात है घर में एक और सदस्य आ जायेगा तो कुछ भरा भरा लगेगा।

फिर सभी डिनर करने लगे। भोजन की सभी ने तारीफ किए।

डिनर करते समय समीर ने राजेश से पूछा,

समीर _अच्छा साले साहब यह तो बताओ, कालेज के बाद क्या करने का इरादा है। बॉडी तो एक दम मस्त बनाया है तुमने, कही फिल्मों में काम करना तो नही चाहते।

राजेश _नही जीजा जी, मुझे फिल्मों में जाने का कोई इरादा नहीं, मुझे तो आई ए एस अफसर बनना है। मां और पिता जी भी यही चाहते है की आगे चलकर मै बड़ा अफसर बनू।

समीर _अगर किसी प्रकार की कोई मदद कर सकू तो मुझे बताना, मुझे बडी खुशी होगी।

राजेश _जरूर जीजा जी।

पिंकी हमेशा पूछती रहती थी की मेरा कोई मामा नही है क्या? मेरा नाना नानी कहा है?

लो बेटा अब अपने मामा मौसी नाना नानी से मिल लिए अब तो तुम खुश हो न।

पिंकी _हां मम्मी, स्वीटी मौसी और राजेश मामा तो बड़े अच्छे हैं।

सुनीता _और तुम्हारे नाना नानी,

पिंकी _आप लोग भी बड़े अच्छे हो।

सभी लोग आपस में बात चीत करते हुए डिनर करने लगे। डिनर कर कुछ देर और आपस मे बातचीत किए, फिर

घर जानेकी अनुमति मांगने पर ,प्रिया ने कहा कि रात काफी हो गई है आप लोग आज रात यही क्यू नही रुक जाते? सुबह चली जाना।

सुनीता _नही बेटा, सुबह उठकर तैयारी करनी होती है। अब तो हम घर आते जाते रहेंगे न, इसलिए हमें इजाजत दो।

प्रिया _चाचा जी आप लोग क्यू नही रुक जाते जब तक चाची का इलाज पूरा नहीं हो जाता आप लोग यही रहिए हमारे साथ।

सतपाल _नही बेटी, बेटी के घर ज्यादा समय तक रुकना हमारे समाज में लोग अच्छा नहीं समझते।

इसलिए अब हमें इजाजत दो।

प्रिया _ठीक है बुआ, फिर आप लोग आते जाते रहना, फिर मुझे भूल मत जाना।

सुनीता _नही बेटी अब हम मिल गए हैं तो अब फिर से दूर नहीं होंगे।

इजाजत लेकर फिर वे घर चले गए।

अगले दिन जब प्रिया हॉस्पिटल पहुंची, उसने नर्स से अपने चाचा चाची का रिपोर्ट मंगवाया।

रिपोर्ट देखकर वह काफी निराश huwa , उसे समझ नही आ रहा था की वह क्या करे।

क्यू की रिपोर्ट में सुमित्रा का गर्भ अभी भ्रूण प्रतिस्थापित करने के लिए उपुक्त स्थिति में नहीं था।

चाचा जी का सीमेन काउंट, एवम सुक्राणु की गतिशीलता भी मानक से कम आया था।

प्रिया काफी सोच विचार करने लगी की अब क्या किया जाए।

फिर उसने अपना टेस्ट कराया। उनका गर्भ भ्रूण प्रतिस्थपन के लिए उपयुक्त पाया।

उसने निश्चय किया की बुवा की भ्रूण को अपने गर्भ में प्रतिस्थापित करेगी।

और चाची के लिए कोई दूसरा उपाय करेगी।

इधर दोपहर मे जब सतपाल और सुमित्रा गेस्ट रूम में आराम कर रहे थे। स्वीटी और राजेश कालेज शेखर ऑफिस चला गया था तब सुनीता ने रिपोर्ट जानने के लिए प्रिया को काल किया।

सुनीता _बेटी, भैया और भाभी का रिपोर्ट देखी क्या? सब ठीक तो है न।

प्रिया _बुवा, मै कैसे बताऊं की सब ठीक नही है।

सुनीता _क्यू? क्या हुवा बेटी।

प्रिया _बुवा जी, चाची की गर्भाशय अभी भ्रूण प्रतिस्थापन कि स्थिति में नहीं है?

उसके इलाज के लिए दूसरा तरीका अपनाया पड़ेगा। उसके लिए थोडा समय लगेगा। माह, डेढ माह।

सुनीता _ओह अब क्या कर सकते हैं बेटी भगवान को शायद यह मंजूर न था की मेरा भ्रूण भभि के गर्भ में प्रतिष्ठापित हो।

प्रिया _बुवा मैने एक फैसला लिया है।

सुनीता _कैसी फैसला बेटी?

प्रिया _यही की आपका भ्रूण मै अपने गर्भ में प्रतिस्थापित करूंगी।

सुनीता _बेटी तुम ये क्या कह रही हो। दामाद जी को पता चला तो।

प्रिया _मै और समीर दुसरे बच्चे के लिए 3__4सालो से ट्राई कर रहे हैं की नार्मल हो जाए। पर सफल नहीं ही पा रहे हम आईवीएफ अपनाने के बारे मे सोच रहे थे।इसलीय मै समीर को इसके लिए मना लूंगा। पर उसे यह नहीं बताऊंगा की यह बच्चा आपका और राजेश का है।

सुनीता _ओह बेटी मै तुम्हारे इस अहसान को नही भुला पाऊंगी। शायद भगवान को यही मंजूर हो।

और भाभी के लिए क्या सोचा है तुमने।

प्रिया _उसके लिए मैने सोच लिया है की अपने अंडे निकाल कर उसे फ्रिज करूंगी।

एफआईआर जब चाची का गर्भ भ्रूण प्रतिस्थापन के लिए ठीक हो अपना अंडा को आईवीएफ द्वारा भ्रूण में बदलकर उसे चाची के गर्भ में डालूंगी।

सुनीता _पर तुम तो कह रही थी की तुम्हारे चाचा जी की शुक्राणु कि गतिशीलता कम है फिर किसका वीर्य आईवीएफ के लिए प्रयोग करोगी।

प्रिया _मै सोच रही हूं की राजेश का शुक्राणु इस्तमाल करू।

सुनीता _बेटी ये क्या कह रही हो, इसका मतलब तुम्हारा और राजेश का बच्चा भाभी अपने गर्भ में पालेगी।

प्रिया _इसके अलावा मुझे और कोई रास्ता नहीं सूझ रही।

सुनीता _भाभी का गर्भाशय भ्रूण को एक्सेप्ट कर पाएगा न।

प्रिया _मै अपनी ओर से पूरी कोशिश करूंगी आगे भगवान की इच्छा वो क्या चाहते हैं?

आपको 3 दिन बाद हॉस्पिटल आना होगा उस दिन मैं अपना अंडा बाहर निकाल कर आपका भ्रूण अपने गर्भाशय में प्रतिस्थापित करवाऊंगी।

हा कल चाची को लेकर हॉस्पिटल आना ,कुछ दवाई दूंगी चाची का इलाज कल से शुरू हो जायेगा।

अगले दिन सुनीता, सुमित्रा और सतपाल सिंह फिर से हॉस्पिटल पहुंचे।

प्रिया ने सतपाल सिंह और सुमित्रा को दवाई दिया।

सतपाल सिंह को दवाई इसलिए दिया की उसकी शुक्राणु की गतिशीलता बड़ सके, और सुमित्रा को दवाई और इंजेक्शन माहवारी आने के बाद से देना था। ताकि अंडा अच्छा बन सके ताकि सब ठीक रहे तो चाचा चाची के अंडा शुक्राणु का उपयोग कर आईवीएफ कर सके और सफल न हो पाए तब वह अपना अंडा और राजेश का शुक्राणु वाला ऑप्शन अपनाए।

सतपाल सिंह _प्रिया बेटी इलाज में कितना समय लगेगा।

प्रिया _चाचा जी एक डेढ़ माह लग सकते है।

चाचा _क्या हमे यही रुकना होगा।

प्रिया _चाचा जी चाहे तो आप गांव जा सकते है आपको जरूरत के समय बुलाया जायेगा।

पर चाची को बीच बीच मे चेक अप के लिए आना होगा तो वह यही रुक जाए तो उसके लिए ठीक रहेगा।

सुनीता _अच्छा बेटी अब हम चलते हैं।

घर जाते समय सुनीता को प्रिया ने कहा की कालेज से छुट्टी के बाद राजेश को हॉस्पिटल भेज देना ताकि आईवीएफ के पहले उनके वीर्य की गुणवक्ता की जांच किया जा सके।

सुनीता ने हा में उत्तर दिया।

वे हॉस्पिटल से घर चले गए।

घर पहुंचकर सुनीता ने राजेश को काल कर बता दिया की तुम्हे कलेज से छुट्टी के बाद हॉस्पिटल जाना है। प्रिया ने तुम्हे बुलाया है तुम्हारे कुछ टेस्ट करने है।

राजेश _मां, मेरा टेस्ट, मुझे क्या huwa है।

सुनीता _अरे बाबा मै फोन पर ही सारी बातें नही बता सकती अपनी प्रिया दीदी से ही पूछ लेना।

राजेश _, ठीक है मां।

राजेश कालेज से छुट्टी के बादअपनेबाइक से सीधा हॉस्पियल चला गया।

प्रिया के केबिन में जाकर उसके सामने क्लाइंट वाली सीट पर बैठ गया।

राजेश _दी आपने मुझे बुलाया था, मां कह रही थी की आप मेरा कुछ टेस्ट करेंगी। दी मुझे क्या हुवा है, और क्या टेस्ट करोगी?

प्रिया _मुसकुराते हुवे।

अगर चाचा जी का बीज आई वी एफ के लिए उपयुक्त न हो तो तुम्हारे बीज का उपयोग कर चाची आईवीएफ के द्वारा मां बेनेगी इसलिए तुम्हारा वीर्य की गुणवक्ता जांचनी है।

राजेश _दी मां को ये पता है?

प्रिया _हां

राजेश _और चाची को।

प्रिया _उसे अभी बताया नही पर समय आने पर बता देंगे।

राजेश _दी टेस्ट के लिए मुझे क्या करना होगा।

प्रिया _मुसकुराते हुवे,,, मेरा भोलू भाई,अपना वीर्य टेस्ट के लिए देना होगा और क्या?

राजेश _पर वीर्य बाहर निकलेगा कैसे?

प्रिया _तू भोला बन रहा है, हू तुम्हे पता नही क्या वीर्य कैसे बाहर निकलता है। पोर्न तो देखता होगा। वैसे भी मां को मां दिया है और पूछ रहा है वीर्य कैसे निकलेगा। बदमाश कहीं का। प्रिया झूठा नाराजगी जताते हुए कहा।

राजेश _वो दीदी हाथ से हिलाने पर निकलता है न पर मैने तो अब तक ऐसा किया नही अपने ही हाथों से कभी।

प्रिया _तू झूठ बोल रहा है? तुम्हारे उम्र के लड़के तो रोज ही मूठ मारते है।

राजेश _नही दी मै झूठ नही बोल रहा। मैंने कभी मूठ नही मारी।

प्रिया _अच्छा, तो तू काम कैसे चलाता है?

क्या तू बुआ की रोज लेता है?

राजेश _न बाबा वो तो मुझे सिर्फ 3 बार ही करने दी है।

प्रिया _मतलब तू किसी और का भी लेता है।

कोई गर्लफ्रेंड है क्या?

राजेश _अब छोड़ो ना दीदी इस बात को।

प्रिया _अच्छा ठीक है। तुम्हारा वीर्य तो निकालना होगा। अच्छा किसी नर्स को बोलूं वह तुम्हारी मदद कर देगी।

राजेश _ठीक है दीदी।

कैसी नर्स को बोलूं कुंवारी या शादी सुदा?

प्रिया _दी, दिखने मे हॉट हो ताकि शरीर मे उत्तेजना पैदा हो, और वीर्य निकलने मे आसानी हो।

प्रिया ने अपनी असिस्टेंट से किसी नर्स को बुलाने कहा।

कुछ देर में एक नर्स आई जो शादी शुदा थी काफी खूबसूरत और हॉट लग रही थी।

प्रिया ने राजेश की तरफ देखकर कहा ये चलेगी।

राजेश ने हा में सिर हिलाया।

नर्स _मैम आपने मुझे बुलाया।

प्रिया _हा इनसे मिलो ये मेरा छोटा भाई राजेश है। इनका वीर्य जांच करना है। पर इसने कभी अपनी हाथो का इस्तमाल कर वीर्य निकाला नही, मै चाहती हूं की तुम इसकी मदद करो। ईद कार्य के लिए तुम्हे सेलरी से राशि बढ़ा कर दी जाएगी।

तुम तैयार हो न,

नर्स राजेश की ओर देखी फिर बोली,, मैम आपका भाई है इसलिए आपके कहने पर इसकी मदद कर दूंगी, आप तो जानती हो की मै ये काम नही करती।

प्रिया _जानती हू, फिर भी मैंने तुम्हे इस काम के लिए कहा, वैसे कोई जबरदस्ती नहीं है, तुम मना भी कर सकती हो।

नर्स _मैम आपके भाई के लिए कर देती हूं, पर किसी और के लिए न कहना।

प्रिया _ठीक है नही बोलूंगी। जाओ इसे कोइ अच्छे से कमरे में ले जाओ और इसका वीर्य कलेक्ट कर लैब में दे दो।

गोलू तुम घबराना नहीं सब अच्छे से हो जाएगा। अब तुम जाओ नर्स के साथ।

राजेश _ठीक है दी।

नर्स राजेश को एक कमरे में ले गया। जहां सारी सुविधाएं थी।

नर्स _चलो उतारो अपना पैंट।

राजेश _लगता है आपका मन नहीं है यह काम करने का।

नर्स _मुझे ये काम पसंद नहीं, इन कामों के लिए दुसरे नर्स है।

राजेश _क्या इस काम के लिए भी नर्स रखा गया है।

नर्स _विशेष परिस्थिति के लिए नर्स है जो यह कार्य एक पेशे के तौर पर करती है।

राजेश _पर तुम क्यू तैयार हो गई, इस कार्य के लिए।

नर्स_पता नही तुम्हारी ओर देखा तो क्यू मैं मना नही कर पाई। तुम्हारे चहरे पर एक अलग ही आकर्षण है।

चलो अब अपना लिंग बाहर निकालो।

राजेश ने अपना पेंट और चड्डी नीचे खींच कर लिंग बाहर निकाल लिया।

नर्स राजेश के लंड को गौर से देखी जो बिना खड़े भी काफी लम्बा मोटा लग रहा था।

नर्स निचे बैठकर राजेश के लंड को मूठ मारने लगी।

राजेश _वैसे आपका नाम क्या है?

नर्स _रेखा

राजेश तुम्हारी शादी हो गई है।

रेखा _मेरे दो बच्चे है एक 5वर्ष और एक 2वर्ष का है।

राजेश,_आपका पति करता क्या है?

रेखा _वह एक कम्पनी में सुपरवाइजर है।

रेखा _तुम्हारा लिंग तो खडा ही नहीं हो रहा मेरा पति का तो इतनी देर में पानी निकल जाता।

राजेश _ये इतने आसानी से अपना पानी छोड़ने वाला नही है। जब तक इसे अपना जलवा नही दिखाओगी अपना तेवर नही दिखाएगा।

रेखा _मै समझी नहीं तुम क्या कहना चाहते हों।

राजेश _थोडा अपना चूची दिखाओ ना तब ये जागेगा।

रेखा _ये तुम क्या कह रहे हो, क्या मैं कोई रण्डी हूं।

राजेश _मैने तो लिंग खडा करने का उपाय बताया था अब आगे क्या करना है ये आपकी मर्जी। हिलाते रहो इसे मुझे क्या? दीदी जब पूछेगी की इतनी देर कैसे हो गई तो मैं बोल दूंगा की नर्स ने सपोर्ट ही नहीं किया।

रेखा _नही, तुम मैम से ऐसा मत कहना, वह मुझसे नाराज़ हो जायेगी।

राजेश _अच्छा फिर दिखाओ अपनी दुदू। उसमे तो खुब दूध भरा होगा तुम्हारा बच्चा दूध पीता होगा न।

रेखा _हां, यहां से घर जाते ही दुध पर टूट पड़ता है।

रेखा साड़ी के उपर नर्स वाली सफेद पोशाक पहनी हुई थी उसके नीचे साड़ी पहन रखी थी। वह सफेद पोशाक निकाल दी और अपनी ब्लाउज खोल कर अपनी ब्रा उपर कर दी जिससे उसके दूध से भरी बड़ी बड़ी सुडौल चूचियां राजेश के आंखों के सामने आ गया।

बडी बडी मस्त दुदू को देखकर राजेश के शरीर मे उत्तेजना भरने लगा। उससे रहा न गया और एक हाथ से उसकी एक चूची पकड़ कर मसल दिया। जिससे दूध की एक धार फुहारे की तरह निकल पड़ी जिसे देखकर राजेश का लंड तन कर खड़ा हो गया।

राजेश _सच मे कितनी हॉट हो तुम तुम्हारा पति तो किस्मत वाला है। रोज दूध पीता होगा तुम्हारा।

रेखा _न उसे दूध पसंद नहीं।

राजेश _तब जरूर जल्दी झड़ जाता होगा साला।

मै तो जब तक इससे जी भर के न खेलू मेरा पानी निकलता ही नहीं।

सुनो मेरा तुम्हारा दुदू पीने का मन कर रहा है पीलू क्या।

इधर रेखा राजेश का लंड देखकर हैरान थी जो खडा होने के बाद पहले से दोगुना बड़ा और मोटा हो गया था।

राजेश _क्यू क्या सोच रही, मेरा लंड तुम्हे पसंद नहीं आया क्या?

रेखा _तुम्हारा लंड बहुत बड़ा है।

राजेश झुककर रेखा की एक चूची को पकड़कर उसके चूचक को मुंह में भरकर उसे मसल मसल कर दूध को गटक गटक कर पीने लगा।

रेखा के मुंह से सिसकारी निकलने लगी। वह राजेश के सिर के बालो को सहलाने लगा। धीरे धीरे उसके शरीर मे उत्तेजना भरने लगा। उसकी शरीर कपकपाने लगा।

इधर राजेश उसकी दोनों चूची बारी बारी से मसल मसल कर उसके दूध गटक गटक कर पीने लगा। उसका लंड लोहे की तरह शख्त हो गया था।


इधर राजेश की हरकतों एवम विशाल लंड देखकर रेखा का बुर पानी छोड़ने लगा।
 
राजेश रेखा की चुचियों को तब तक निचोड़ निचोड़ कर उसका दुध पीता रहा जब तक दुध पूरा खाली नही हो गया।

राजेश _आह, सच में यार दुध पीकर मजा ही आ गया। तुम्हारी दुध स्वादिष्ट था।

इधर राजेश की हरकतों से रेखा बहुंत ज्यादा गरम हो चुकी थी।

उसे चुदवाने की बडी इच्छा हो रही थी।

वाह राजेश से लिपट गई और उसके होंठ को चुसने लगी।

राजेश समझ गया की रेखा गर्म हो गई है इसे सेक्स चाहिए।

राजेश भी रेखा के ओंठ चूसने लगा।

रेखा नीचे बैठ गईं और राजेश के लंड मुंह में भरकर गप गप चुसने लगी।

राजेश तो जन्नत में पहुंच गया।

राजेश रेखा के सिर के बाल पकड़कर लंड को उसके मुंह में ठेलने लगा।

कुछ देर बाद लंड चुसने के बाद रेखा खड़ी हुई ओर अपनी पेंटी निकालकर बेड के किनारे लेट गई, राजेश के हाथ को पकड़कर अपने और खींची।

राजेश रेखा के उपर लेट गया और कुछ देर रेखा के मुंह हाल गर्दन चूची नाभी को चूमने चाटने लगा। रेखा आनद में सिसकने लगी।

रेखा की बुर का बुरा हाल था। उसमे तेज खुजली हो रही थी।

रेखा ने अपनी घुटने मोड़ कर टांगें फैला दी। और साड़ी पेटी कोट को ऊपर खींच दिया जिससे उसकी मस्त फुली हुई रस से भरी बुर राजेश के आंखों के सामने आ गया जिससे जिसे देखकर राजेश का लंड झटके मारने लगा।

राजेश ने बुर एक हाथ से बुर को और एक हाथ से अपने लंड को सहलाया फिर बुर के छेद मे लंड का टोपा रखकर एक जोर का धक्का मारा। लंड बुर को चीरकर अंदर घूस गया।

रेखा के मुंह से चीख निकल गई।l

रेखा _मार डालेगा क्या, इतना बड़ा खंभा एक ही बार में घुसा दिया।

राजेश _क्या करू मेरी जान तुम्हारी मस्त फुली हुई रस भरी बुर देखकर कुछज्यादा ही जोश में आ गया।

तेरा पति सच मे बड़ा किस्मत वाला है क्या मस्त chut है तेरी।

राजेश ने अपना लंड थोडा बाहर खींचा और फिर गच से अंदर पेल दिया इस बार लंड का टोपा सीधा रेखा के बच्चे दानी से टकराया।

रेखा, _आह मां,, लगता है तू मुझे मारकर ही रहेगा।

राजेश अब लंड को धीरे धीरे अन्दर बाहर करना शुरू किया। लंड धीरे धीरे बुर में अपनी जगह बना लिया।

अब बिना किसी रुकावट के गपागप अंदर बाहर होने लगा।

रेखा तो जैसे स्वर्ग में पहुंच गई। ऐसा अद्भुत आनंद उसे मिल रहा था की सेक्स मै ऐसा आनंद उसे पहली बार मिल रहा था।

वह अपनी दोनों हाथों से बेड पकड़ ली और आनद में अपनी ओंठ को अपनी अपनी दांतो से काटने लगी।

इधर राजेश ने रेखा की टांगों का अपनी कंधे पर रख दिया और गपागप बुर में सपना लंड डालने लगा।

लंड का टोपा बच्चे दानी को ठोकने लगा जिससे रेखा को चरम सुख मिलने लगा वह ज्यादा देर तक खुद को न रोक पाई और राजेश को जकड़ कर झड़ने लगी।

राजेश समझ गया की रेखा झड़ चुकी है। वह उसके ऊपर लेट गया। उसके होंठ चूसने लगा।

कुछ देर बाद रेखा होश में आई। तब तक राजेश ने उसकी चूची मसलकर फिर से दूधपान करना सुरु कर दिया। रेखा राजेश के बालो को सहलाने लगी।

कुछ ही देर में रेखा फिर से गर्म हो गई।

अब राजेश ने रेखा को उठा कर बेड नीचे खडा किया फिर रेखा को आगे झुका दिया, रेखा बेड को पकड़कर झुक गई। राजेश उसके पीछे आ गया और अपना खडा लंड जो रेखा के बुर का पानी पीकर और लंबा मोटा हो गया था को हाथ से पकड़ के बुर के छेद में रखकर फिर से एक जोर का धक्का मारा लंड बुर को फाड़कर एक ही बार में पूरा अंदर घुस गया।

रेखा _उई मां,,,, तू आज मार ही डालेगा re।

अब राजेश रेखा की क़मर को पकड़ कर लंड को बुर में अंदर बाहर करना शुरू कर दिया। धीरे धीरे दोनों फिर से जन्नत में पहुंच गए।

राजेश अब लंड को बुर में दनादन अंदर बाहर करते हुए रेखा को चोदना शुरू कर दिया।

लंड फच फच गच gach गच की आवाज़ करता हूवा बुर में बड़ा तेज़ी से अंदर बाहर होने लगा।

रेखा के मुंह से निकलने वाली मादक सिसकारी पुरे कमरे में गूंजने लगा।

राजेश _कैसा लग रहा है मेरी जान मज़ा आ रहा है कि नही,,, ले एक हाथ ले ले मेरी जान जवानी का मज़ा ले,,,,,

रेखा _आह मां आह राजेश मैं बता नही सकती कितना मज़ा आ रहा है आज, माई आह क्या मस्त चोदता है re,,, आह मां गई मैं,,,,,, अब तक कहा थे मेरे राजा,,,, मार और जोर से मार मै आने वाली हू re,,,, आह मम्मी,,,,,, आह मां ऐसा मज़ा आ रहा मै क्या बताऊं। जोर जोर से चोद मुझे शाले फाड़ दे मेरी।

राजेश_ले शाली ले,, ले साली रण्डी कही की,, बड़ी सराफत दिखा रही थी, अब कैसे chud रही है रण्डी की तरह ले और ले मेरे से,, आज एक मर्द से chudkar ले जवानी का मज़ा। राजेश ने लंड को जोर जोर से बुर में ठोकते हुए बोला।

रेखा _अपनी क़मर हिलाकर बुर को लंड में ठेलने लगी। ऐसा लंड तो पहली बार देखा है,, क्या लंड है तेरा कास तू मेरा मर्द होता रोज ही chudti तुझसे।

आह मां गई re मै फिर से गई,,,,,

रेखा फिर झड़ गई।

और वह बेड पर लेट गई,,, राजेश भी बाजू में लेट गया। और सुस्ताने लगा। कुछ देर राहत लेने के बाद रेखा देखी राजेश अभी तक नही झड़ा है।

वाह आश्चर्य में पड़ गई।

इधर राजेश अभी भी जोश में था वह रेखा की चूची में फिर से टूट पड़ा। राजेश रेखा की चूची को फिर से मसल मसल कर पीने लगा।

एक उंगली डे रेखा की भगनसा को घिसने लगा जिससे रेखा कुछ देर में फिर सिसकने लगी।

अब राजेश ने रेखा की साड़ी को खींचकर अलग कर दिया और पेटिकोट ब्लाउज सब निकाल कर पूरी तरह रेखा को नंगी कर दिया और खुद भी नंगा हो गया।

राजेश ने रेखा को बाहों मे भरकर फिर से उसके नंगे जिस्म को जी भर कर चूमा चांटा, रेखा फिर से बहुत गर्म हो गई।

अब राजेश बेड पर लेट गया उसका लंड हवा में लहरा रहा था।

रेखा के लंड पर बैठने का इशारा किया।

रेखा वे के उपर चढ़ गई और राजेश के कमर के दोनों ओर पैर कर ली और लंड के सीध मे आकर बैठ ने लगी लंड को एक हाथ से पकड़ का सपने बुर के छेड़ में रख कर बैठ गई लंड बुर चीरकर उसके अंदर समा गया।

अब रेखा राजेश के सीने में हाथ रख कर लंड पर उछल उछल कर चुदने लगी।

राजेश ने रेखा के क़मर को अपने हाथ में पकड़ कर अपने लंड पर पटक पटक कर रेखा को चोदना शुरू कर दिया।

Rajesh फिर से रेखा को जन्नत की सैर कराने लगा।

रेखा लंड पर उछल उछल कर chud रही थी। उसके मुंह से मादक सिसकारी निकल रही थी। यूज अपने पति से ऐसा सुख कभी मिला।

कुछ देर मे ही रेखा थक गई। अब राजेश ने ने रेखा को सीधा लिटा दिया और उसके टांगो को फैला कर खुद उसके बीच उकड़ू बैठ गया और लंड बुर में तेजी से अंदर बाहर करने लगा।

कमरे मे फिर फच फाच गच गच की आवाज़ गूंजने लगी।

रेखा _आह,, राजेश तू,, कितना मस्त चोदता है,, आह आज से मैं तेरी रखैल आह मां,,,

इधर प्रिया ने राजेश को काल किया,,,

राजेश chudai में लगा था उठाया नही।

प्रिया _ये राजेश काल क्यू नही उठा रहा है।

दो बार और काल की पर राजेश ने काल उठाया नही। वह झड़ना चाहता था।

इसलिए chudai बंद नही किया।

इधर प्रिया ने अपनी आसिस्टेंट रूबी को भेजा, जाओ रेखा राजेश को लेकर रूम गई थी वीर्य सैंपल लेने देखो तो वहा सब ठीक तो है।

रूबी कमरे के पास गई उसने देखा दरवाज़ा अंदर से बंद है उसने दरवाजे पर कान लगाकर सुनने की कोशिश की। उसे रेखा की सिसकने की आवाज़ सुनाई दी वह समझ गई कि अन्दर क्या चल रहा है।

रूबी ने यह बात प्रिया को बताई।

प्रिया _ मन मे,उन्हें रोकना होगा। नही तो राजेश रेखा के अंदर झड़ जायेगा। और वीर्य टेस्ट करने के लायक नहीं रहेगा।

वह तुरंत रूबी को लेकर उस कमरे की ओर गई।

प्रिया ने दरवाज़ा खटखटाया ,

इधर राजेश और रेखा किसी दूसरी दुनिया में चले गए थे। दोनों के मुंह से आह उई आह उई,,,, ऊं की आवाज़ निकल रहें थे।

प्रिया _जाओ टू इस रूम की चाबी लेके आओ।

रूबी _चाभी लेकर आई।

दरवाज़ा खुलते ही अंदर का नजारा कुछ ऐसा था।

रेखा बेड पर घोड़ी बनी थी। राजेश पीछे से लंड दनादन अंदर बाहर करने में लगा हुआ था। रेखा आंखे बन्द कर सिसक रही थी।

प्रिया _जोर से चिल्लाते हुए,,,, रेखा, ये क्या कर रही हो,,,

रेखा और राजेश दोनो होश में आए।

राजेश _दी अप यहां ।

रेखा _, मैम आप।

प्रिया _तुम ये क्या कर रही हो, तुमको वीर्य कलेक्ट करने यहां भेजा था और यहां आकर चुदवाने लगी।

तुम्हे पता नही बुर का रस वीर्य में मिल गया तो वह टेस्ट करने लायक नहीं रहेगा।

राजेश और रेखा दोनो अलग हुवे लंड बुर से बाहर निकल गया उस पर रेखा की बुर के सफेद रस लगा huwa था।

दोनो बेड के नीचे आ गए।

रेखा शर्म के मारे अपने शरीर को अपनी साड़ी से ढक ली।

इधर राजेश का लंड अभी भी खडा था।

राजेश के लम्बा और मोटा लण्ङ पर प्रिया और रूबी की नजर पड़ी दोनो आश्चर्य से देखने लगे।

रेखा _मैम मुझे माफ़ कर दीजिए, मै बहक गई।

प्रिया _क्या तुम्हे पता नही बुर का पानी अगर वीर्य में मिल गया तो वह जांच करने योग्य नहीं रहेगा। और तुम राजेश बुआ सही बताई थी, तुम बहुत बदमाश हो गए हो,

राजेश _दी, आम सॉरी, हम बहक गए थे।

प्रिया ने राजेश के लंड को देखा,,,

प्रिया _तुमारे पेनिश में ये रेखा के पानी, इसे साफ करो।

रूबी जाओ इसे बाथरूम में ले जाकर अच्छे से धो दो।

रूबी _जी मैम।

रूबी राजेश के को बाथरूम में ले गया।

और राजेश के लंड को हाथ में पकड़ लिया , उसे नल के नीचे लाकर नाल चालू कर लंड को अच्छे से साबुन लगा कर धोने लगी।

रूबी _काफी लम्बा है तेरा राजेश, खुब मोटा भू है।

लंड को अच्छी तरह धोने के बाद तौलिए से अच्छी तरह पोंछ दी।

राजेश और रूबी दोनो बाथरूम से बाहर निकल कर प्रिया के पास आ गए।

इधर रेखा अपनी कपडे पहन चुकी थी।

राजेश _दी मै कपडे पहन लू। मुझे शर्म आ रही। वह अपने लंड छिपाने लगा।

प्रिया _अब कपडे पहने से पहले वीर्य कलेक्ट करने दो।

रूबी वो डिब्बा दे मुझे।

रूबी ने प्लास्टिक का डिब्बा प्रिया को लाकर दिया। को बेड पर पड़ा था।

प्रिया ने एक हाथ से डिब्बा पकड़ लिया और एक हाथ से राजेश के लंड को पकड़ कर उसे मूठ मारने लगी।

प्रिया _रूबी तुम इसके गोटे सहलाओ, इसे झड़ने में आसानी होगी।

रूबी राजेश के अंडकोष सहलाने लगी।

इधर प्रिया लंड के टोपा पर अंगूठे के दबाव बनाकर लंड के मूठ मारना जारी रखी।

कुछ ही देर में राजेश झरने की स्थिति में आ गया।

राजेश _आह, आह, दी थोडा और तेज,, दीदी और तेज,, मै आने वाला हू।

प्रिया ने डिब्बे को लंड के टोपे के पास रख कर और तेजी से मूठ मारने लगी।

राजेश _आह,, आए दी आह,, आई एम कमिंग दी आह,,,, ह ह ह

राजेशअपने लंड से वीर्य से की पिचकारी मरने लगा जो सीधे डिब्बे में भरने लगा।

राजेश आनंद में कराहने लगा,, और वीर्य से डिब्बे को भरने लगा। राजेश स्खलन के समय प्रिया को जकड़ लिया था।

जन स्खलन रुका तब प्रिया आश्चर्य चकित थी पूरा डिब्बा वीर्य से भर गया था।

उसने राजेश को अपने सीने से लगा लिया और उसके सिर सहलाने लगा।

बस होगया मेरा गोलू भाई,,,, अब तुम्हे राहत मिली।

तुम बेड में बैठकर कुछ देर आराम कर लो।

प्रिया ने राजेश को बेड बिठा दिया। और उसके पीठ सहलाने लगा।

राजेश ने प्रिया के सीने में अपना सर रख उसके पीठ को दोनों हाथों से जकड़ लिया था।

प्रिया ने रूबी से कहा की जाओ ये सीमेन लैब में जांच के लिए देदो और रिपोर्ट को मेरे केबिन में भेजने बोलना।

रुबी _जी मैम।

रेखा _मैम, मुझे माफ़ कर दीजिए।

प्रिया _ठीक है, पर अब के बाद ऐसा गलती मत करना।

रेखा _थैंक्यू में, अब मैं ऐसी गलती नही करूंगी।

प्रिया _अब तुम जाओ अपने ड्यूटी देखो।

रेखा वहा से चली गई।

प्रिया _ राजेश के हालात पर हसने लगी।चलो अब कपडे पहनो।

राजेश कपड़े पहनने लगा। प्रिया उसे कपड़े पहनते हुए देखने लगी।

प्रिया _वैसे काफी बड़ा है तेरा। लेने वाली कि तो चीखे ही निकल दे।

राजेश _दी,, शर्माने लगा। दोनो कमरे से बाहर निकल गए।

प्रिया _राजेश तुम हाल में बैठकर आराम करो मैं एक चक्कर लगा कर आती हूं। सभी अपने काम अच्छे से कर रहे हैं की नही।

क्या तुम देखना चाहोगे यहां काम कैसे होता है?

राजेश _हा दी।

रहा को प्रिया एक कमरे में ले गया । और सफेद कोट और मास्क पहनने को दे दिया।

लो इसे पहन लो

राजेश रेखा की चुचियों को तब तक निचोड़ निचोड़ कर उसका दुध पीता रहा जब तक दुध पूरा खाली नही हो गया।

राजेश _आह, सच में यार दुध पीकर मजा ही आ गया। तुम्हारी दुध स्वादिष्ट था।

इधर राजेश की हरकतों से रेखा बहुंत ज्यादा गरम हो चुकी थी।

उसे चुदवाने की बडी इच्छा हो रही थी।

वाह राजेश से लिपट गई और उसके होंठ को चुसने लगी।

राजेश समझ गया की रेखा गर्म हो गई है इसे सेक्स चाहिए।

राजेश भी रेखा के ओंठ चूसने लगा।

रेखा नीचे बैठ गईं और राजेश के लंड मुंह में भरकर गप गप चुसने लगी।

राजेश तो जन्नत में पहुंच गया।

राजेश रेखा के सिर के बाल पकड़कर लंड को उसके मुंह में ठेलने लगा।

कुछ देर बाद लंड चुसने के बाद रेखा खड़ी हुई ओर अपनी पेंटी निकालकर बेड के किनारे लेट गई, राजेश के हाथ को पकड़कर अपने और खींची।

राजेश रेखा के उपर लेट गया और कुछ देर रेखा के मुंह हाल गर्दन चूची नाभी को चूमने चाटने लगा। रेखा आनद में सिसकने लगी।

रेखा की बुर का बुरा हाल था। उसमे तेज खुजली हो रही थी।

रेखा ने अपनी घुटने मोड़ कर टांगें फैला दी। और साड़ी पेटी कोट को ऊपर खींच दिया जिससे उसकी मस्त फुली हुई रस से भरी बुर राजेश के आंखों के सामने आ गया जिससे जिसे देखकर राजेश का लंड झटके मारने लगा।

राजेश ने बुर एक हाथ से बुर को और एक हाथ से अपने लंड को सहलाया फिर बुर के छेद मे लंड का टोपा रखकर एक जोर का धक्का मारा। लंड बुर को चीरकर अंदर घूस गया।

रेखा के मुंह से चीख निकल गई।l

रेखा _मार डालेगा क्या, इतना बड़ा खंभा एक ही बार में घुसा दिया।

राजेश _क्या करू मेरी जान तुम्हारी मस्त फुली हुई रस भरी बुर देखकर कुछज्यादा ही जोश में आ गया।

तेरा पति सच मे बड़ा किस्मत वाला है क्या मस्त chut है तेरी।

राजेश ने अपना लंड थोडा बाहर खींचा और फिर गच से अंदर पेल दिया इस बार लंड का टोपा सीधा रेखा के बच्चे दानी से टकराया।

रेखा, _आह मां,, लगता है तू मुझे मारकर ही रहेगा।

राजेश अब लंड को धीरे धीरे अन्दर बाहर करना शुरू किया। लंड धीरे धीरे बुर में अपनी जगह बना लिया।

अब बिना किसी रुकावट के गपागप अंदर बाहर होने लगा।

रेखा तो जैसे स्वर्ग में पहुंच गई। ऐसा अद्भुत आनंद उसे मिल रहा था की सेक्स मै ऐसा आनंद उसे पहली बार मिल रहा था।

वह अपनी दोनों हाथों से बेड पकड़ ली और आनद में अपनी ओंठ को अपनी अपनी दांतो से काटने लगी।

इधर राजेश ने रेखा की टांगों का अपनी कंधे पर रख दिया और गपागप बुर में सपना लंड डालने लगा।

लंड का टोपा बच्चे दानी को ठोकने लगा जिससे रेखा को चरम सुख मिलने लगा वह ज्यादा देर तक खुद को न रोक पाई और राजेश को जकड़ कर झड़ने लगी।

राजेश समझ गया की रेखा झड़ चुकी है। वह उसके ऊपर लेट गया। उसके होंठ चूसने लगा।

कुछ देर बाद रेखा होश में आई। तब तक राजेश ने उसकी चूची मसलकर फिर से दूधपान करना सुरु कर दिया। रेखा राजेश के बालो को सहलाने लगी।

कुछ ही देर में रेखा फिर से गर्म हो गई।

अब राजेश ने रेखा को उठा कर बेड नीचे खडा किया फिर रेखा को आगे झुका दिया, रेखा बेड को पकड़कर झुक गई। राजेश उसके पीछे आ गया और अपना खडा लंड जो रेखा के बुर का पानी पीकर और लंबा मोटा हो गया था को हाथ से पकड़ के बुर के छेद में रखकर फिर से एक जोर का धक्का मारा लंड बुर को फाड़कर एक ही बार में पूरा अंदर घुस गया।

रेखा _उई मां,,,, तू आज मार ही डालेगा re।

अब राजेश रेखा की क़मर को पकड़ कर लंड को बुर में अंदर बाहर करना शुरू कर दिया। धीरे धीरे दोनों फिर से जन्नत में पहुंच गए।

राजेश अब लंड को बुर में दनादन अंदर बाहर करते हुए रेखा को चोदना शुरू कर दिया।

लंड फच फच गच gach गच की आवाज़ करता हूवा बुर में बड़ा तेज़ी से अंदर बाहर होने लगा।

रेखा के मुंह से निकलने वाली मादक सिसकारी पुरे कमरे में गूंजने लगा।

राजेश _कैसा लग रहा है मेरी जान मज़ा आ रहा है कि नही,,, ले एक हाथ ले ले मेरी जान जवानी का मज़ा ले,,,,,

रेखा _आह मां आह राजेश मैं बता नही सकती कितना मज़ा आ रहा है आज, माई आह क्या मस्त चोदता है re,,, आह मां गई मैं,,,,,, अब तक कहा थे मेरे राजा,,,, मार और जोर से मार मै आने वाली हू re,,,, आह मम्मी,,,,,, आह मां ऐसा मज़ा आ रहा मै क्या बताऊं। जोर जोर से चोद मुझे शाले फाड़ दे मेरी।

राजेश_ले शाली ले,, ले साली रण्डी कही की,, बड़ी सराफत दिखा रही थी, अब कैसे chud रही है रण्डी की तरह ले और ले मेरे से,, आज एक मर्द से chudkar ले जवानी का मज़ा। राजेश ने लंड को जोर जोर से बुर में ठोकते हुए बोला।

रेखा _अपनी क़मर हिलाकर बुर को लंड में ठेलने लगी। ऐसा लंड तो पहली बार देखा है,, क्या लंड है तेरा कास तू मेरा मर्द होता रोज ही chudti तुझसे।

आह मां गई re मै फिर से गई,,,,,

रेखा फिर झड़ गई।

और वह बेड पर लेट गई,,, राजेश भी बाजू में लेट गया। और सुस्ताने लगा। कुछ देर राहत लेने के बाद रेखा देखी राजेश अभी तक नही झड़ा है।

वाह आश्चर्य में पड़ गई।

इधर राजेश अभी भी जोश में था वह रेखा की चूची में फिर से टूट पड़ा। राजेश रेखा की चूची को फिर से मसल मसल कर पीने लगा।

एक उंगली डे रेखा की भगनसा को घिसने लगा जिससे रेखा कुछ देर में फिर सिसकने लगी।

अब राजेश ने रेखा की साड़ी को खींचकर अलग कर दिया और पेटिकोट ब्लाउज सब निकाल कर पूरी तरह रेखा को नंगी कर दिया और खुद भी नंगा हो गया।

राजेश ने रेखा को बाहों मे भरकर फिर से उसके नंगे जिस्म को जी भर कर चूमा चांटा, रेखा फिर से बहुत गर्म हो गई।

अब राजेश बेड पर लेट गया उसका लंड हवा में लहरा रहा था।

रेखा के लंड पर बैठने का इशारा किया।

रेखा वे के उपर चढ़ गई और राजेश के कमर के दोनों ओर पैर कर ली और लंड के सीध मे आकर बैठ ने लगी लंड को एक हाथ से पकड़ का सपने बुर के छेड़ में रख कर बैठ गई लंड बुर चीरकर उसके अंदर समा गया।

अब रेखा राजेश के सीने में हाथ रख कर लंड पर उछल उछल कर चुदने लगी।

राजेश ने रेखा के क़मर को अपने हाथ में पकड़ कर अपने लंड पर पटक पटक कर रेखा को चोदना शुरू कर दिया।

Rajesh फिर से रेखा को जन्नत की सैर कराने लगा।

रेखा लंड पर उछल उछल कर chud रही थी। उसके मुंह से मादक सिसकारी निकल रही थी। यूज अपने पति से ऐसा सुख कभी मिला।

कुछ देर मे ही रेखा थक गई। अब राजेश ने ने रेखा को सीधा लिटा दिया और उसके टांगो को फैला कर खुद उसके बीच उकड़ू बैठ गया और लंड बुर में तेजी से अंदर बाहर करने लगा।

कमरे मे फिर फच फाच गच गच की आवाज़ गूंजने लगी।

रेखा _आह,, राजेश तू,, कितना मस्त चोदता है,, आह आज से मैं तेरी रखैल आह मां,,,

इधर प्रिया ने राजेश को काल किया,,,

राजेश chudai में लगा था उठाया नही।

प्रिया _ये राजेश काल क्यू नही उठा रहा है।

दो बार और काल की पर राजेश ने काल उठाया नही। वह झड़ना चाहता था।

इसलिए chudai बंद नही किया।

इधर प्रिया ने अपनी आसिस्टेंट रूबी को भेजा, जाओ रेखा राजेश को लेकर रूम गई थी वीर्य सैंपल लेने देखो तो वहा सब ठीक तो है।

रूबी कमरे के पास गई उसने देखा दरवाज़ा अंदर से बंद है उसने दरवाजे पर कान लगाकर सुनने की कोशिश की। उसे रेखा की सिसकने की आवाज़ सुनाई दी वह समझ गई कि अन्दर क्या चल रहा है।

रूबी ने यह बात प्रिया को बताई।

प्रिया _ मन मे,उन्हें रोकना होगा। नही तो राजेश रेखा के अंदर झड़ जायेगा। और वीर्य टेस्ट करने के लायक नहीं रहेगा।

वह तुरंत रूबी को लेकर उस कमरे की ओर गई।

प्रिया ने दरवाज़ा खटखटाया ,

इधर राजेश और रेखा किसी दूसरी दुनिया में चले गए थे। दोनों के मुंह से आह उई आह उई,,,, ऊं की आवाज़ निकल रहें थे।

प्रिया _जाओ टू इस रूम की चाबी लेके आओ।

रूबी _चाभी लेकर आई।

दरवाज़ा खुलते ही अंदर का नजारा कुछ ऐसा था।

रेखा बेड पर घोड़ी बनी थी। राजेश पीछे से लंड दनादन अंदर बाहर करने में लगा हुआ था। रेखा आंखे बन्द कर सिसक रही थी।

प्रिया _जोर से चिल्लाते हुए,,,, रेखा, ये क्या कर रही हो,,,

रेखा और राजेश दोनो होश में आए।

राजेश _दी अप यहां ।

रेखा _, मैम आप।

प्रिया _तुम ये क्या कर रही हो, तुमको वीर्य कलेक्ट करने यहां भेजा था और यहां आकर चुदवाने लगी।

तुम्हे पता नही बुर का रस वीर्य में मिल गया तो वह टेस्ट करने लायक नहीं रहेगा।

राजेश और रेखा दोनो अलग हुवे लंड बुर से बाहर निकल गया उस पर रेखा की बुर के सफेद रस लगा huwa था।

दोनो बेड के नीचे आ गए।

रेखा शर्म के मारे अपने शरीर को अपनी साड़ी से ढक ली।

इधर राजेश का लंड अभी भी खडा था।

राजेश के लम्बा और मोटा लण्ङ पर प्रिया और रूबी की नजर पड़ी दोनो आश्चर्य से देखने लगे।

रेखा _मैम मुझे माफ़ कर दीजिए, मै बहक गई।

प्रिया _क्या तुम्हे पता नही बुर का पानी अगर वीर्य में मिल गया तो वह जांच करने योग्य नहीं रहेगा। और तुम राजेश बुआ सही बताई थी, तुम बहुत बदमाश हो गए हो,

राजेश _दी, आम सॉरी, हम बहक गए थे।

प्रिया ने राजेश के लंड को देखा,,,

प्रिया _तुमारे पेनिश में ये रेखा के पानी, इसे साफ करो।

रूबी जाओ इसे बाथरूम में ले जाकर अच्छे से धो दो।

रूबी _जी मैम।

रूबी राजेश के को बाथरूम में ले गया।

और राजेश के लंड को हाथ में पकड़ लिया , उसे नल के नीचे लाकर नाल चालू कर लंड को अच्छे से साबुन लगा कर धोने लगी।

रूबी _काफी लम्बा है तेरा राजेश, खुब मोटा भू है।

लंड को अच्छी तरह धोने के बाद तौलिए से अच्छी तरह पोंछ दी।

राजेश और रूबी दोनो बाथरूम से बाहर निकल कर प्रिया के पास आ गए।

इधर रेखा अपनी कपडे पहन चुकी थी।

राजेश _दी मै कपडे पहन लू। मुझे शर्म आ रही। वह अपने लंड छिपाने लगा।

प्रिया _अब कपडे पहने से पहले वीर्य कलेक्ट करने दो।

रूबी वो डिब्बा दे मुझे।

रूबी ने प्लास्टिक का डिब्बा प्रिया को लाकर दिया। को बेड पर पड़ा था।

प्रिया ने एक हाथ से डिब्बा पकड़ लिया और एक हाथ से राजेश के लंड को पकड़ कर उसे मूठ मारने लगी।

प्रिया _रूबी तुम इसके गोटे सहलाओ, इसे झड़ने में आसानी होगी।

रूबी राजेश के अंडकोष सहलाने लगी।

इधर प्रिया लंड के टोपा पर अंगूठे के दबाव बनाकर लंड के मूठ मारना जारी रखी।

कुछ ही देर में राजेश झरने की स्थिति में आ गया।

राजेश _आह, आह, दी थोडा और तेज,, दीदी और तेज,, मै आने वाला हू।

प्रिया ने डिब्बे को लंड के टोपे के पास रख कर और तेजी से मूठ मारने लगी।

राजेश _आह,, आए दी आह,, आई एम कमिंग दी आह,,,, ह ह ह

राजेशअपने लंड से वीर्य से की पिचकारी मरने लगा जो सीधे डिब्बे में भरने लगा।

राजेश आनंद में कराहने लगा,, और वीर्य से डिब्बे को भरने लगा। राजेश स्खलन के समय प्रिया को जकड़ लिया था।

जन स्खलन रुका तब प्रिया आश्चर्य चकित थी पूरा डिब्बा वीर्य से भर गया था।

उसने राजेश को अपने सीने से लगा लिया और उसके सिर सहलाने लगा।

बस होगया मेरा गोलू भाई,,,, अब तुम्हे राहत मिली।

तुम बेड में बैठकर कुछ देर आराम कर लो।

प्रिया ने राजेश को बेड बिठा दिया। और उसके पीठ सहलाने लगा।

राजेश ने प्रिया के सीने में अपना सर रख उसके पीठ को दोनों हाथों से जकड़ लिया था।

प्रिया ने रूबी से कहा की जाओ ये सीमेन लैब में जांच के लिए देदो और रिपोर्ट को मेरे केबिन में भेजने बोलना।

रुबी _जी मैम।

रेखा _मैम, मुझे माफ़ कर दीजिए।

प्रिया _ठीक है, पर अब के बाद ऐसा गलती मत करना।

रेखा _थैंक्यू में, अब मैं ऐसी गलती नही करूंगी।

प्रिया _अब तुम जाओ अपने ड्यूटी देखो।

रेखा वहा से चली गई।

प्रिया _ राजेश के हालात पर हसने लगी।चलो अब कपडे पहनो।

राजेश कपड़े पहनने लगा। प्रिया उसे कपड़े पहनते हुए देखने लगी।

प्रिया _वैसे काफी बड़ा है तेरा। लेने वाली कि तो चीखे ही निकल दे।

राजेश _दी,, शर्माने लगा। दोनो कमरे से बाहर निकल गए।

प्रिया _राजेश तुम हाल में बैठकर आराम करो मैं एक चक्कर लगा कर आती हूं। सभी अपने काम अच्छे से कर रहे हैं की नही।

क्या तुम देखना चाहोगे यहां काम कैसे होता है?

राजेश _हा दी।

रहा को प्रिया एक कमरे में ले गया । और सफेद कोट और मास्क पहनने को दे दिया।

लो इसे पहन लो

राजेश ने सफेद कोट और मास्क पहन लियाऔर प्रिया के पीछे पीछे जाने लगा।

एक रूम के बाहर कुछ लड़के बैठे थे,,,

राजेश _दी ये लडके यहां कैसे बैठे है?

प्रिया _ये वीर्य डोनेट करने आए हैं।

राजेश _क्या?

प्रिया _हा, वीर्य डोनेट करने के बदले इन्हे पैसे मिलते हैं। हम पहले इनकी वीर्य की जांच करते है, जिनकी वीर्य क्वालिटी अच्छी होती है उसके वीर्य को लेकर आईवीएफ के लिए उपयोग में लाया जाता है।

ये मेडिकल और इंजीनियरिंग कालेज के स्टूडेंट है। इनकी वीर्य की डिमांड ज्यादा होती है।

तभी राजेश को एक अन्य कमरे मे लेकर गई।

अंदर जाते ही जूनियर डाक्टर और वहा की नर्सों से प्रिया ने पूछा,,

प्रिया _काम कैसा चल रहा है, सब ठीक तो है न।

इस रूम में जूनियर डाक्टर द्वारा एक महिला की अंडे निकाल रही थी।

आधुनिक उपकरणों का प्रयोग कर। महिला की योनी में एक लंबी सी पतली नली डालकर आधुनिक मसीन के स्क्रीन पर देखकर डाक्टर द्वारा अंडे निकाला जा रहा था।

महिला का योनी वाला हिस्सा ही दिख रहा था। बांकी हिस्सा कपड़े से ढका था।

राजेश _दी क्या हो रहा है यहां।

प्रिया _यहां पर महिला का अंडे निकाला जा रहा है।

वहा से निकलकर वह दुसरे रूम में चले गए।

प्रिया _राजेश, यहां अंडे और सीमेन को फ्रिज करके रखते हैं।

इक दुसरे रूम में जाने के बाद बताया कि यहां ट्यूब में सीमेन और अंडे को लेकर निषेचन कराया जाता हैऔर उसकी निगरानी की जाती है। जब भ्रूण तैयार हो जाता है महिला की गर्भ में प्रतिस्थापित कर दिया जाता है।

एक बड़ा हाल नुमा रूम था। वहा पर जाने के बाद प्रिया ने बताया,

यहां पर डीलवरी , होने के बाद जच्चा और बच्चा दोनो को रखा जाता है। वहा सैकड़ों औरते अपने शिशुओं के साथ लेटी हुई थी। कई नर्स उनकी देखभाल में लगी हुई थी। सभी ने प्रिया को देखकर उनका अभिवादन किया।

वहा से निकलकर एक अन्य रूम में पहुंचे।

राजेश यह ऑपरेशन रूम है यहां पर जिन महिलाओं का नार्मल तरीके से डीलवरी नही होता उनका यहां ऑपरेशन द्वारा डील वरी कराया जाता है।

आगे जाने पर एक बड़ा रूम आया वहा पर कुछ महिलाए चीख रही थी।

राजेश _दीदी यहां क्या हो रहा है?

प्रिया _ये डीलवरी रूम है यहां पर नार्मल तरीके से गर्भवती महिलाओ की डील वरी कराई जाती है।

यहां बहुंत सी महिलाए थी जिनका डील वरी होना था। उनकी टांगों को ऊपर लटका दिया गया था। सभी की chut काफी फुली हुई दिखाई पड़ रही थी वहा पर कई नर्स और जूनियर डॉक्टर सेवा में लगे हुए थे।

एक महीला कुछ ज्यादा ही चीख रही थी।

प्रिया _क्या हुआ कोई प्राब्लम है क्या?

जूनियर डाक्टर _मैम लगता है बच्चा कुछ ज्यादा ही बड़ा है बाहर आने में तकलीफ हो रही है।

महीला की बुर एकदम फैल गया था बच्चे का सिर बाहर आता दिखाई दिया।

प्रिया _ने महीला की हिम्मत बढ़ाते हुए जरा जोर लगाने को कहा।

प्रिया _उस महिला का नाम लेकर कहा, तुम कर सकती हो,,,, लगाओ जोर,,, थोडा और ताकत लगाओ।

बच्चे का सिर बुर से बाहर आ गया।

प्रिया _गुड, और जोर लगाओ, तुम कर सकती हो। जोर से कहा।

और उस अपनी पूरी ताकत से अपने बुर पर दबाओ दिया। बच्चा बुर से बाहर आ गया।

राजेश अपनी आंखे फाड़े आश्चर्य से देखता रहा। वह पहिली बार किसी बच्चे को जन्म देते हुवे देख रहा था।

जब प्रिया और राजेश उस रूम से निकले,,,

प्रिया _क्या सोच रहा है राजेश,,

राजेश _यही दी की इतना बड़ा बच्चा कैसे बाहर आ गया।

प्रिया हंसते हुवे बोली,,,

प्रिया _स्त्री की योनी में फैलने सिकुड़ने की अधभूत क्षमता होती है।

राजेश _दी उस महिला की योनी तो एक दम फैल गई है क्या ये ऐसी ही रहेगी।

प्रिया _नही re दो माह में योनि अपने नार्मल पोजीशन में आ जाएगी। हां कुंवारी लड़की की तरह टाइट नही रहेगी। कुछ तो फर्क पड़ता है। फिर वे दुसरे रूम में पहुंचे जहां बहुंत से शिशुओं को डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया था।

प्रिया _यह आई सी यू रूम है यहां कमजोर बच्चों को विशेष निगरानी में रखा जाता है।

उस रूम से निकलकर वे आगे बड़े राजेश ने देखा रूम के बाहर महिलाए बैठी हुईं हैं।

राजेश _दी ये महिलाए यहां क्यू बैठी है?

यहां बैठ कर महिलाए अपनी बारी का इंतजार कर रही है यहां पर महिलाओ की गर्भाशय का आंतरिक जांच होता है।

जब दोनो अंदर पहुंचे वहा पर सेवा दे रहें डाक्टर और नर्सो ने प्रिया का अभिवादन किया।

राजेश ने देखा की डाक्टर और नर्स एक महीला के योनी में उपकरण डालकर आधुनिक यंत्र द्वारा गर्भाशय की जांच कर रहे थे।

प्रिया ने वहा के स्टाफ से पूछा काम कैसा चल रहा है,,, उनके कार्यों का जायजा लिया।

कुछ आवश्यक टीप देकर प्रिया वहां से निकल गई।

राजेश _दी नर्स एवम पुरुष डाक्टर साथ काम करते हैं किसी को शर्म नही लगती क्या?

प्रिया हंसते हुवे बोली, ये हमलोगो का पेशा है। हम लोगो के लिए सामान्य है। हा नई नई आने वाले नर्स को शुरु शुरु में कुछ शर्म आती है फिर सभी को सामान्य लगने लगता है।

वे कुछ देर तक कुछ अन्य रूम को भी घूमे फिर वे अपने केबिन में आ गए।

उन्हे हॉस्पिटल का अवलोकन करते घंटे भर से जुड़ा हो गया।

प्रिया ने अपनी असिस्टेंट को बुलाई, रूबी केबिन में आई।

प्रिया _रूबी, तुम लैब में जाओ और राजेश का सीमेन टेस्ट का रिपोर्ट बन गया होगा उसे लेकर आओ।

रूबी _ओके मैम।

कुछ देर बाद रूबी रिपोर्ट लेकर आई।

जब प्रिया ने राजेश का सीमेन टेस्ट का रिर्पोट देखी,

प्रिया _ओह माई गॉड

राजेश & क्या huwa दी रिपोर्ट सही नही है क्या?

प्रिया _ऐसा रिपोर्ट तो मैं पहली बार देख रही हूं।

सिमेन की गुणवकता बहुत ही उच्च क्वालिटी का है।

लाखो में किसी एक का होता होगा, मै तो पहली बार ऐसा रिपोर्ट देख रही।

तुम्हारे वीर्य के 100%शुक्राणु गतिशील पाया गया। ऐसे शुक्राणु की निषेचन क्षमता काफी उच्च होता है। होने वाला बच्चा काफी हस्ट पुष्ट इंटेलिजेंट और रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी उच्च होता है।

राजेश खुश हो गया,, सच दीदी।

प्रिया _हा, ऐसे वीर्य के लिए लोग लाखो देने को तैयार बैठे है। मेडिकल लाइन में बडी डिमांड है,तुम चाहो तो अपना वीर्य डोनेट कर हर सप्ताह लाखो कमा सकते हो।

राजेश _दी ये आप क्या कह रही हो? क्या आप चाहती हो की आपका छोटा भाई वीर्य डोनेट करे!

प्रिया _न, मै नही चाहती की मेरा भाई पैसे के लिए डोनर बनकर रह जाए।

राजेश _तुमअति आवश्यक लगेतो बता देना ,मैं फ्री में डोनेट कर दूंगा।

प्रिया _ठीक है, कभी ऐसा लगे तो बताऊंगी।

राजेश _दी अब मेरा काम हो गया हो तो घर निकलू।

चलो अब मेरा भी घर जाने का समय हो गया है। तुम एक काम करो तुम बाइक से मुझे भी घर छोड़ दो उधर से चाय पी कर घर निकल जाना।

राजेश _दी आपके पास कार है। फिर मेरे साथ बाइक में।

प्रिया _अरे, ड्राइवर कार ले आएगा। काफी दिन हो गए मुझे बाइक में घूमे।

राजेश _ठीक है दी फिर चलो चलते हैं


जाते समय रास्ते पर आइस्क्रीम बार आया ,

प्रिया _राजेश गाड़ी रोकना चलो आइस क्रीम खाते है फिर निकलेंगे।

राजेश _, थक है दी।

वे दोनो आइसक्रीम का मज़ा लेने के बाद,

वे दोनो बाइक से घूमते घुमाते घर पहुंचे वहां से चाय पी कर राजेश अपना घर निकल गया।
 
रात के समय जब सभी डिनर कर रहे थे।

सुमित्रा ने सुनीता से कहा, सुनिता सुना है यहां कोई ज्ञानी बाबा रहता है, जो लोगो की समस्याओं का समाधान करता है।

सुनीता _भाभी मुझे तो मालुम नही है।

सतपाल सिंह _कोई चरमानंद नाम से ज्ञानी बाबा है लोग उनकी बडी तारीफ करते है।

राजेश _चरमानंद बाबा को तो मैं अच्छे से जानता हूं।

मै उससे मिल चुका हूं, वह हाथ देखकर ही सब बता देता है। और लोगो की समस्यओ का समाधान हेतु उपाय भी बताता है। उसके आश्रम में तो लोगो की रोज ही भीड़ लगती है।

सुनीता _तुमने मुझे बताया नही तू कब चला गया बाबा के पास।

राजेश _ मां मै दोस्तो के साथ गया था वहां।

सुमित्रा _सुनिता कई लोगो ने हमसे कहा है की एक बार बाबा के पास जाने को। कहते है निःसंतान दंपत्तियों को बाबा के आशीर्वाद से संतान सुख मिला है ,तो मैं सोच रही थी की जब हम यहां आए ही है तो क्यू न हम बाबा से एक बार मिल ले।

सुनीता _अगर ऐसा है तो कल चले जाएंगे उनके आश्रम। राजेश तुम बाबा को जानते हो तो तुम भू कल हमारे साथ कल सुबह आश्रम चलना, वहा से तुम सीधे कालेज निकल जाना।

राजेश _ठीक है मां, लेकिन हमें सुबह जल्दी पहुंचना होगा,देर से जाएंगे तो वहा भीड़ हो जाती है फिर बाबा से मिलने में लेट होगा !

शेखर _मै भी चलूं आप लोगो के साथ।

सुनीता _नही जी आप क्या करेंगे वहा जाकर, राजेश तो जा ही रहा है, वह बाबा को जानता भी है। इसलिए आप अपनी ड्यूटी को देखिए।

स्वीटी _मम्मी मै भी चलूं।

सुनीता _न, तुम क्या करोगी वहा जाकर?

अगली सुबह राजेश बाइक से और सुनिता सतपाल सिंह और सुमित्रा तीनो कार से आश्रम के लिए निकल पड़े।

वे सुबह 8:30 को ही आश्रम पहुंच गए। वहा पहले से ही कुछ लोग पहुंच चुके थे।

वहा जाकर , सेविका जो बाबा से मिलने के लिए एक एक कर बाबा के पास भेजती है।

राजेश उसके पास गया।

सेविका ने राजेश को पहचान लिया।

सेविका _अरे राजेश कुछ काम है क्या?

राजेश _बाबा से मिलना है।

सेविका _तुम तो बाबा के खास भक्त हो, तुम्हे नामांकन की क्या जरूरत। बाबा अभी पूजा कर रहें हैं जन आसान में बठेंगे तुम जाकर मिल लेना।

राजेश _मेरे साथ मेरी मां, मामी और मामा जी भी आए हैं, कुछ समस्या का समाधान हेतु।

सेविका _ठीक है मैं नाम एंट्री कर देती हूं। मै सबसे पहले तुम लोगो को ही अंदर भेज दूंगी।

जब बाबा जी ने पूजापाठ कर लिया तब बाबा ने सेविका को उनसे मिलने आए लोगो को अंदर भेजने के कहां।

सेविका ने राजेश से कहा आप अपनी मां और मामा मामी के साथ बाबा जी से मिल सकते हो।

राजेश अपनी मा और मामा मामी को साथ लेकर कमर में प्रवेश किया।

अंदर जाते ही राजेश ने बाबा के प्रणाम किया।

बाबा _अरे राजेश तुम तो मुझसे कभी भी किसी समय मिल सकते हो फिर इंतजार करने की क्या जरूरत थी।

राजेश _, बाबा जी, सेविका ने बताया नहीं आप पुजा पाठ कर रहें थे, इसलिए आपको डिस्टर्ब करना उचित नहीं समझा।

बाबा _अच्छा ठीक है, कुछ खास काम से आए हो क्या?

राजेश _बाबा ये मेरी मां सुनिता है।

सुनिता _, प्रणाम बाबा जी।

बाबा _जीती रहो बेटी।

तुम बडी भाग्य वान हो जो राजेश जैसा बेटा मिला है।

राजेश _बाबा की ये मेरे मामा मामी है ये आप से मिलने के लिए आए हैं।

सुमित्रा और सतपाल सिंह ने बाबा को प्रणाम किया।

बाबा जी ने उन्हे आशीर्वाद देकर बैठ जाने को कहा।

सुनीता को सामने बैठने को कहा,,

बाबा _मैने राजेश का हाथ देखा है। आगे चलकर इनका बड़ा नाम होगा। बेटी तुम बडी किस्मत वाली हो जो राजेश जैसा लड़का को जन्म दी हो।

बेटी क्या तुम्हे मुझसे कुछ पूछना है। सुनीता से कहा,

सुनिता _बाबा जी मुझे तो राजेश की ही चिंता रहती है की आगे इसका भविष्य क्या होगा? आपकी बाते सुनकर मेरी चिंता भी दूर हो गई, और मुझे कुछ नहीं चाहिए।

बेटी _तुम अपना बाया हाथ आगे करो।

सुनीता ने अपना हाथ आगे किया ।

बाबा ने सुनिता के हांथ देखा,,

बाबा ने सुनिता का हाथ देखकर आश्चर्य में पड़ गया।

सुनिता _क्या हुआ बाबा जी कुछ बात है क्या?

बाबा _नही बेटी ऐसी कोई बडी बात तोनही, जो भी समस्या है वो प्रभु की इच्छा से सब ठीक हो जायेगा।

सुनीता _बाबा जी आशिर्वाद दीजिए की मेरे परिवार में सब कुशल मंगल रहे।

बाबा _ऐसा ही होगा बेटी, प्रभु की कृपा सदा तुम और तुम्हारे परिवार पर बनी रहेगी।

उसके बाद बाबा ने सतपाल और सुमित्रा को सामने बैठने कहा।

दोनो का हाथ देखकर कहा, तुम लोग संतान सुख से अभी तक वंचित हो,

सुमित्रा _हा बाबा जी आपने बिल्कुल सही कहा। हम सन्तान के लिए तरस रहे हैं।

बाबा _बेटी तुम दोनो को संतान सुख तो मिलेगा पर तुम उस बच्चे के असली मां बाप नही होगे। बच्चा तुम्हारे कोख से जरूर जन्म लेगा लेकिन वह तुम दोनो का खून नही होगा?

सतपाल सिंह _बाबा जी ये आप क्या कह रहे हैं?

बाबा _बेटा मै, जो आपके किस्मत में लिखा है वहीं बता रहा हूं।

बाबा _पर तुम दोनो को निराश होने की जरूरत नहीं है। जो बच्चा तुम्हारे कोख से जन्म लेगा वह भी तुम्हारे किसी अपने का ही खून होगा। और होने वाला बच्चा तुम्हारे परिवार में खुशियां लायेगा।

सुमित्रा _पर बच्चा होगा किसका बाबा?

बाबा _मैने कहा न की तुम्हारा अपनो का ही खून होगा।

सुमित्रा _बाबा जी ये कैसे संभव है।

बाबा _बेटी आजकल सब संभव है। और जो भी होता है प्रभू की इच्छा से होता है।

सुनीता _भाभी बाबा जी बिलकुल सत्य कह रहें हैं।

दरअसल प्रिया तुम्हारा आईवीएफ पद्धति से इलाज कर रही है पहले वह आप दोनो के खून से भ्रूण बनाने की कोशिश करेगी अगर सफल न huwa तो,,

सुमित्रा _अगर सफल न huwa तो,, क्या दीदी।

सुनीता _प्रिया बोल रही थी मैं अपने और राजेश के खून से भ्रूण बनाकर तुम्हारे कोख में स्थापित करूंगी।

सुमित्रा _सुनिता, तुमने इतनी बडी बात को मुझे बताई नही ।

सुनीता _भाभी सही समय आने पर बताने को बोली थी प्रिया ने।

बाबा _देखो बेटा भगवान के इच्छा के बिना कुछ नही होता। जो होता है ईश्वर के मर्जी से होता है। इसलिए तुम लोगो को खुश होना चाहिए की तुम्हारी कोख से जो बच्चा जन्म लेगा वह तुम्हारा अपना ही है पराया नही। इसलिए इधर उधर की सोचना बंद करो और घर में जो खुशियां आने वाली है उसका स्वागत करो।

सतपाल सिंह _बाबा भगवान ने हमारे किस्मत में अगर यही लिखा है तो हम उसे स्वीकार करते हैं। सुमित्रा को मां बनने का सुख तो मिलेगा। बस हमें और क्या चाहिए? और जो बच्चा होगा वह राजेश और प्रिया का होगा ये तो हमारे लिए और भी खुशी की बात है।

बाबा _बेटी, यह काम भी इतना आसान नहीं है। तुम्हारे अंदर जो बाधाए है। वह तुम्हारे गर्भ में भ्रूण को बढ़ने से रोकने का प्रयास करेगी। उस बाधा को पहले दूर करना होगा तभी तुम्हारे अंदर बच्चे का विकास होगा।

सुमित्रा _यह बाधा कैसे दूर होगी बाबा।

बाबा _उसके लिऐ अनुष्ठान करने होंगे।

सुमित्रा _बाबा आप मुझ पर कृपा कीजिए, किसी तरह उस बाधा को दूर कर मुझे मां बनने का सौभाग्य प्रदान कीजिए।

बाबा _आज से चार दिन बाद शुक्रवार है उसी दिन अनुष्ठान के लिए उचित रहेगा। मै कुछ समान लिख कर दे दूंगा आप लोग सामान ले आना। दोपहर 3बजे।

सतपाल सिंह _बाबा जी अनुष्ठान में क्या मेरा होना आवश्यक है। मुझे कुछ आवश्यक कार्य से घर जाना होगा।

बाबा _नही बेटा, तुम्हारा होना आवश्यक नही है, तुम घर जा सकते हो। पर मै तुमको एक मंत्र दूंगा। जिसे सुबह इंसान कर 21बार मंत्र का जाप करना।

इस मंत्र से तुम्हारे घर में खुशियां आयेंगी। दुखो का अंत होगा।

सतपाल सिंह _ठीक है बाबा जी।

बाबा ने सतपाल सिंह को मंत्र दिया और कागज पर अनुष्ठान के लिए आवश्यक सामग्री भी लिख कर राजेश को दिया और राजेश से कहा की ये अनुष्ठान के दिन लेकर आना।

राजेश _ठीक है बाबा।

वे सभी बाबा से आज्ञा लेकर जाने लगे तभी बाबा ने सुनिता को थोडा रूकने कहा। सुनिता रुक गई।

सुनीता _बाबा जी कुछ कहना था,,,

बाबा _बेटी मैने तुम्हारा हाथ देखा, मैने सबके सामने में बताना उचित नहीं समझा।

तुम्हारी हाथ की रेखा बताती है कि तुम एक और बच्चे की मां बनोगी।

लेकिन वह तुम्हारे पास नही कही दूसरी जगह पलेगा।

सुनिता _आपने सच कहा बाबा, आप सच में ज्ञानी है। पर यह बात आप किसी से कहिएगा नही।

बाबा _बेटी तुम चिंता न करो जो भी होगा अच्छा ही होगा। जाओ प्रभू की कृपा सदा तुम पर बनी रहें।

सुनिता बाबा से आशिर्वाद लेकर चली गई।

वहा से राजेश सीधा कालेज चला गया।

सुनीता, सतपाल और सुमित्रा तीनों घर पहुंचे।

दोपहर का भोजन करने के बाद सतपाल सिंह अपना गांव चला गया।

अगले दिन प्रिया पिंकी और समीर सुबह नाश्ता कर रहे थे।

पिंकी _पापा आज शाम को मुझे फिल्म दिखाने ले चलो। एक नई फ़िल्म लगी है बच्चों वाली।

मेरे सभी दोस्तो ने फिल्म देख लिए। प्लीज पापा।

प्रिया _पिंकी ठीक कह रही है जी,,

कितने दिन हो गए हम लोगो को बाहर घूमने गए। कम से कम पिंकी की इच्छा ही पूरी कर दो।

समीर _डार्लिंग, मैने कभी मना किया है क्या तुम लोगो को घुमाने फिराने से, पर क्या करू जवाबदारी सेवा पर हू। समय निकाल नही पाता। तुम भी तो डाक्टर हो और मेरी मजबूरी समझ सकती हो।

प्रिया _मै तो अपने मन को समझा लेती हूं पर बच्ची को, बड़ा मुस्किल होता है।

समीर _ठीक है आज हम शाम को फिल्म देखने चलते हैं मै टिकट बुक करा देता हूं।

पिंकी _सच पापा,, आप कितने अच्छे हैं? पिंकी खुश हो गई,, वह नौकरानी को बताने लगी हे आज हम फिल्म देखने जाएंगे।

पिंकी स्कूल चली गई।प्रिया और समीर अपने अपने हॉस्पिटल।

प्रिया और पिंकी दोनो उत्साहित थे की आज वे फिल्म देखने जाने वाले है।

पर शाम के 6: बजे समीर ने प्रिया को फ़ोन किया,,

समीर _प्रिया, सारी यार एक क्रिटी कल केश आया है। मेरा हॉस्पिटल में रहना बहुँत जरूरी है। मै तुम लोगो को फिल्म दिखाने नही जा पाऊंगा। प्लीज मेरी मजबूरी समझो,,

प्रिया _वही huwa जिसका मुझे डर था।

मै तो समझा लूंगी अपने आप को पर पिंकी उसका दिल टूट जायेगा।

समीर _प्रिया, मैने उसका भी उपाय सोंचा है।

प्रिया _कैसा उपाय?

समीर _मैने राजेश को फ़ोन कर सब बता दिया है वह तुम लोगो को फिल्म दिखा कर ले आएगा।

राजेश _हूं तो अपनी जिम्मेदारी तुम राजेश पर डाल रहे हों।

समीर _भई राजेश तुम्हारा भाई है जरूरत पड़ने पर भाई काम नहीं आएगा तो और कौन काम आयेगा।उनका भी फर्ज बनता है।

प्रिया _राजेश ने क्या कहा?

समीर _उसने कहा कि जीजू बस आप आज्ञा कीजिए बंदा हाजिर हो जायेगा जीजू और दीदी की सेवा में। वो तुमको काल करेगा।

तभी प्रिया के मोबाइल पर राजेश का काल आया,,,

प्रिया _समीर मै काल रखती हूं, राजेश का काल आ रहा है।

समीर _ओके डार्लिंग बाई।

प्रिया ने राजेश का काल उठाया।

प्रिया _हा, राजेश, बोलो,,

राजेश _दी , जीजू ने काल कर बताया की वह आप लोगो को आज शाम फिल्म दिखाने ले जाने वाले थे पर kritikal केस आ जाने के कारण वह नही जा पा रहें है, उसने मुझे आप लोगो को मुझे फिल्म दिखाने ले जाने को कहा है,,

प्रिया_हां राजेशअब डॉक्टरों का पेशा तो आप जानते ही हो, परिवार के लिए समय निकाल पाना काफी मुश्किल होता है। मै टू समझ सकती हूं पर पिंकी मायूस हो जाती है।

राजेश _जी दी मै समझ सकता हूं,पर आपको निराश होने की आवश्यकता नहीं है। मै हूं न, बस आप बता दिया करना की कहा चलना है।

प्रिया _, थैंक्यू राजेश मुझे तुमसे यही उम्मीद थी।

राजेश _दी बताओ मैं आपके घर कितना समय पहुंचु।

प्रिया _, राजेश मै भी अब हॉस्पिटल से बस निकलने वाली हूं तुम 6:,30 बजे तक घर पहुंच जाना।

राजेश _ओके दीदी बाय।

प्रिया _ओके राजेश तुम समय पर पहुंच जाना।

राजेश अपनी मां सुनिता को इसकी जानकारी दिया और अपनी मां की इजाजत लेकर निकल पड़ा घर से प्रिया की घर के लिए।

वह 6: 30को प्रिया के घर पहुंच गया।

वहा गेट पर गार्ड था वह राजेश को देखकर गेट खोला।

अंदर जाने पर दरवाजे की बेल बजाया। कामवाली ने दरवाज़ा खोला।

राजेश ने कामवाली से कहा की दीदी कहा है।

कामवाली ने बताया की वह अपने कमरे में है ,।

राजेश _और पिंकी कहा है?

कामवाली _वह ट्यूशन गई है।

आपके लिए कुछ लाऊ।

राजेश _न।

कामवाली कुछ चाहिए हो तो बता देना, मै किचन मे काम कर रही।

राजेश _तुम जाओ और अपना काम करो।

राजेश ने प्रिया को काल किया।

प्रिया ने काल उठाया,,

राजेश _, दी आप कहा है मैं आ गया है। हाल पर बैठ कर आपका इंतजार कर रहा हूं।

प्रिया _राजेश, मै अपने रूम में तैयार हो रही हूं। वहा बैठे बैठे बोर हो जाओगे, तुम एक काम करो मेरे कमरे में आ जाए, हम बात चित कर लेंगे और मैं तैयार भी हो जाऊंगी।

राजेश _, ठीक है दी।

राजेश प्रिया के रूम में जाने लगा जब वह पहुंचा दरवाज़ा अंदर से बंद नही था। थोडा धक्का दिया तो वह खुल गया।

राजेश ने देखा रूम में कोई नजर नहीं आया।

राजेश _दी तुम कहा हो?

प्रिया _राजेश मै बाथरूम में हूं। नहा रही।

राजेश _दी तुम इस समय नहा रही।

राजेश वही बेड पर बैठ गया।

प्रिया _हा राजेश हम डॉक्टरों को अपनी शरीर की साफ़ सफाई पर विशेष ध्यान देना पड़ता है इसलिए मैं हॉस्पिटल से आने के बाद पहले नहाती हू।

राजेश _ओह, ये तो अच्छी बात है।

प्रिया _राजेश बेड पर टावेल रखा है उसको देना।

राजेश ने टावेल लेकर दरवाजे के पास गया,,

राजेश _लो दी टावेल।

प्रिया ने बाथरूम का दरवाज़ा थोडा खोला और अपना हाथ बाहर निकाला।

राजेश ने टावेल उसके हाथ में थमा दिया।

राजेश टावेल देने के बाद बेड में बैठ गया।

कुछ देर बाद प्रिया अपनी बदन पर शिर्फ टावेल लपेटकर बाहर निकली,,

राजेश को प्रिया को सिर्फ टावेल में देखकर कुछ असहज महसूस करने लगा।

राजेश _दी पिंकी कहा है?

प्रिया _वह ट्यूशन गई है, कुछ देर में वह आ जायेगी।

इधर प्रिया ने अपने आलमारी से पिंक कलर की ब्रा और पैंटी निकाली।

और बेड पर रख दी।

प्रिया _राजेश, मै कया पहनु? शूट या साड़ी।

राजेश _दी आप कुछ भी पहन सकती हो, जो आपको पसंद हो।

प्रिया _अब तुम्हारे साथ जा रही हूं तो तुम्हारी पसंद पूछना पढ़ेगा न।

राजेश _दी तब तो आप साड़ी ही पहनो।

प्रिया _वो क्यू?

राजेश _क्यू की साड़ी में ही औरते ज्यादा खूबसूरत लगती है।

प्रिया _ओह।

प्रिया ने आलमारी से कुछ साड़ी निकाल कर राजेश को दिखाते हुए बोली बताओ इसमें से कौन सा पहनू।

राजेश ने उसमे से एक पिंक कलर की साड़ी चूस किया।

प्रिया _अच्छा ये बताओ तुमने पिंक कलर की ही साड़ी क्यू चूज किया।

राजेश _दी आप जो ब्रा और पैंटी निकाली हो वह भी तो पिंक है न।

प्रिया _चल हट बदमाश तू बड़ा बेशरम हो गया है।

प्रिया ने पिंक कलर का एक ब्लाउज और पेटीकोट भी निकाल लिया।

प्रिया इस समय सिर्फ टावेल में थी।

वह पेंटी को उठाया और उसमे अपनी टांगें डालकर पेंटी को उपर खिसकाते हुए पहनने लगी।

राजेश गौर से प्रिया को पेंटी पहनते हुए देख रहा था।

फिर प्रिय ने ब्रा उठाया और उसे पहनने लगी ब्रा का हुक लगाते समय वह राजेश की ओर पीठ करके खड़ी हो गईं। उसका टायर उसके नाभी तक नीचे खिसक गया।

यह दृश्य देखकर राजेश के शरीर में उत्तेजना भरने लगा।

ब्रा पहनने के बाद प्रिया ने टावेल निकाल दिया।

अब प्रिया केवल ब्रा और पैंटी में ही थी।

प्रिया को सिर्फ ब्रा पेंटी में अपने आंखों के सामने देख कर उसका लंड तनकर खडा हो गया।

प्रिया ने राजेश की ओर देखा,,,,

प्रिया _क्या देख रहा है re ?

राजेश _दी एक बात बोलूं?

प्रिया _, क्या है बोलो?

राजेश _, दी आप नाराज तो नही होंगी न।

प्रिया _अरे नही re मै भला तुमसे क्यू नाराज होने लगी।

राजेश _दी आप बहुत खूबसूरत ओर हॉट है। दीपिका पादुकोण से भी ज्यादा हॉट लग रही हो।

प्रिया _अच्छा ऐसा क्या है मुझमें जो दीपिका पादुकोण से ज्यादा हॉट लग रही हूं।

प्रिया_रहने दो आप बुरा मान जायेंगी।

राजेश_दी आपके ओ काफी बड़े बड़े है।

प्रिया _चल हट बदमाश अपनी दीदी पर गंदी नजर डालता है।

हां मैं तो भूल ही गई थी जब मां को मां बना सकता है तो मैं तो दीदी हूं,, यह बोलकर प्रिया हसने लगी।

राजेश _दी,, मुझे आपसे बात नही करनी मै जा रहा हूं।

प्रिया _अरे मै तो मजाक कर रही थी। तू तो सच में नाराज हो गया।

अच्छा अब नही बोलूंगी बस।

प्रिया ने अब पेटिकोट को पहनी और नाभि के काफी नीचे बांध ली।

जब राजेश ने उसके खूबसूरत बदन को देखा तो उसका धैर्य जवान दे गया।

जब प्रिया खुद को आईने में निहारने लगी। राजेश उसके पीछे जाकर उसे बाहों मे भर लिया।

प्रिया _अरे बदमाश क्या कर रहा है छोड़ मुझे।

राजेश _दी सच में तुम बहुत हॉट लग रही हो।

प्रिया को और जोर से कस लिया जिससे उसका खड़ा लंड प्रिया के गाड़ के दरार में घुस गया।

प्रिया _तेरा घोड़ा तो खड़ा हो गया है re।

राजेश _दी घोड़े को प्यास लगी है।

प्रिया _उस दिन तुम्हारे घोड़े ने रेखा के कुएं की खुब पानी पिया फिर भी प्यास नही बुझा है क्या?

राजेश _दी घोड़ा अभी अभी जवान हुआ है इसको रोज प्यास लगती है।

राजेश ने अपना लंड का दबाव प्रिया के गाड़ में बड़ा कर एक हाथ से बदन को पकड़ कर एक हाथ से उसकी चूची को मसलने लगा।

प्रिया सिसक उठी।

प्रिया _क्या कर रहा है?

राजेश _अपने दी को प्यार।

प्रिया _सुन दरवाज़ा खुला है पिंकी आती होगी।

राजेश _आने दो बोल देना मेरा छोटा भाई मुझे प्यार कर रहा था।

राजेश प्रिया के कंधे को चूमने लगा।

एक हाथ से उसकी बुर सहलाने लगा।

प्रिया भी गर्म होने लगी उसकी बुर में पानी भरने लगा।

प्रिया _आह,, उन,, छोड़ न कोई आ जाएगा दरवाजा खुला है।

राजेश ने प्रिया को अपनी ओर घुमा दिया और उसके ओंठ चुसने लगा। फिर उसको ब्रा खिसका कर उसकी चूची बाहर कर उसके निपल मुंह में भरकर चुसने लगा।

प्रिया सिसकने लगी उसकी बुर से पानी बहना सुरू हो गया। राजेश नीचे बैठ गया और उसकी पेट चूमने लगा।

प्रिया उसकी बाल सहलाने लगी।

राजेश ने प्रिया को बेड के किनारे लिटा दिया और उसकी चूची पीने लगा।

प्रिया _उन, आह कोई आ जायेगा दरवाज़ा तो बंद कर ले।

राजेश उठा और दरवाज़ा बंद कर दिया।

और फिर प्रिया के पास जाकर उसकी ओंठ चुसने लगा।

प्रिया भी उसका साथ देने लगी।

राजेश ने प्रिया की पेटिकोट को ऊपर कर उसकी पेंटी को बाहर निकाल दिया।

प्रिया की chut राजेश के आंखों के सामने आ गया।

राजेश ने झुक कर प्रिया की छूत को अपने मुंह में भरकर चूसना सुरू कर दिया।

तभी किसी ने दरवाज़ा खटखटाया।

प्रिया होश में आई लगता है पिंकी आ गई।

राजेश भी होश में आया।

दी अब क्या करे।

प्रिया _तुम बाथरूम में जाओ मैं देखती हूं।

 
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