Incest यह क्या हुआ - Page 9 - SexBaba
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Incest यह क्या हुआ

जब राजेश, शशी और राजू अपने परिवार वालो के पास राजू वापस लौट रहा था। तभी अचानक राजेश के पीठ पर पड़ी, वहा से खून रिसता huwa दिखाई दिया। टी शर्ट के ऊपर खून दिखाई दिया,

शशी _रूको राज ये तुम्हारे पीठ पर खून,,,

राज क्या तुम्हे चोंट लगी है? तुमने हमे बताया नही।

राजेश_अपने हाथ की पीछे ले जाकर बहते खून को ऊंगली से लगाकर, अपने आंखो के पास उंगली लाकर देखा।

राजेश _लगता है तेंदुए का पंजा पीठ पर लगा है, जिसके कारण यह खून बह रहा। पर मैं बिल्कुल ठीक हू। घबराने कि कोई बात नही। मुझ कुछ नहीं huwa

शशि _राज दिखाओ मुझे,

राजेश _चाची जी, मुझे कुछ नहीं huwa

शशि _नही, दिखाओ मुझे,,, और वह राजेश के पीछे खड़ी होकर टी शर्ट ऊपर की, राजेश के पीठ पर तेंदुवे के पंजा लगा था, तेंदुवे के नाखून से खरोच के कारण पीठ से खून बह रहा था।

शशि _राज, तेंदुवे के पंजा पीठ पर लगा है जिससे पीठ पर नाखून से खरोच होने के कारण खून रिस रहा है। राज तुमने मेरे लिए अपनी जान की परवाह नहीं की। रूको मैं इसे पानी से साफ़ कर देती हूं।

तुम पानी में बैठो।

राज पानी में बैठ गया, उसके पीठ और और टी शर्ट पर लगे खून को अच्छे से साफ़ की।

राजेश_चाची जी, मेरे घर वालों को चोंट के बारे में बिल्कुल मत बताना। उन लोगो के घूमने आने का मज़ा खराब हो जायेगा।

शशी _पर राज।

राजेश _प्लीज चाची।

शशि _ठीक है, राज। वैसे जख्म ज्यादा गहरी नही है जल्दी ठीक हो जायेगा। मैने अच्छे से टी शर्ट साफ़ कर दी है, किसी को पता नही चलेगा।

इधर सुनिता शशि की हरकतों को दूर से देख रही थी।

सुनिता _ये, औरत राज के टी शर्ट के साथ क्या कर रही है।


राजेश, राजू और शशि अपने परिवार वालो के पास पहुंच कर राजेश को अपने परिवार वालो से मिलाया और बताया की कैसे राज ने अपनी जान की परवाह न करते हुए तेंदुए से उनकी जान बचाया। सभी ने राजेश को धन्यवाद दिया।

राजेश _अच्छा चाची जी, अब मैं चलता हूं, मां परेशान हो रही होगी।

शशि _ठीक है राज, पर क्या हमे अपने परिवार वालो से नही मिलाओगे।

राजेश _क्यू नही? थोड़ी देर बाद।

राजेश जब, सुनिता और स्वीटी के पास पहुंचा। स्वीटी तो जलक्रीड़ा का मज़ा ले रही थी।

सुनिता _क्यू re, ये तो वहीं औरत है लडका है न जो रंगरेलिया मना रहे थे, तुम उसके साथ क्या कर रहे थे और वह महिला तुम्हारे कपडे के साथ क्या कर रही थी।

राजेश _मां, तुम भी न जल क्रीड़ा का मज़ा लो फालतू किन बातों में पड़ रही हो।

सुनिता _नही, मुझे सच सच बताओ क्या बात है।

राजेश _मां, जब मैं आ रहा था तो ये दोनो भी वहा से आ रहे थे तभी अचानक से एक तेंदुआ आ गया और तेंदुआ इन पर हमला करने वाला था, तो मैंने तेंदुवे को भगाकर उनकी मदद की बस, तेंदुआ फिर से पीछे न आ जाए, हम साथ में ही आए।

सुनिता_हे भगवान, किसी को कुछ huwa तो नही।

राजेश _नही मां, किसी को कुछ नहीं हवा। वह तेदुवा, तुम्हारे बेटे को सामने देखकर भाग गया।

सुनिता _पर वो औरत तुम्हारे कपड़े के साथ कुछ कर रही थी। सच बताओ।तुम्हारे कपड़े के साथ क्या कर रही थी।

राजेश खामोश रहा,,,

सुनिता _तुम खामोश क्यू हो,,, दिखाओ मुझे, वह तुम्हारे पीठ को क्यू देख रही थी।

सुनिता राजेश के टी शर्ट ऊपर उठा कर देखी,

हे भगवान,,, सुनिता कुछ और बोलने वाली थी की राजेश ने अपना हाथ उसके मुंह पर रख दिया।

राजेश _मां, मुझे कुछ नहीं हुआ है, तुम घबराओ मत, स्वीटी और पापा को पता चलेगा तो, घूमने आने का सब मजा उनका खराब हो जायेगा, इसलिए उन दोनो को कुछ मत बताना।

सुनिता के आंखो में आंसू आ गए, पर बेटा तुम्हारे पीठ पर तो तेंदुवे के पंजे के नाखून से खरोच लगा लग गया है जिससे खून जम गया है।

राजेश _मां, मै बिल्कुल ठीक हू, हल्का फुल्का खरोच है 2_4दिनों में ठीक हो जायेगा। अब रोने मत लग जाना, नही तो स्वीटी और पापा को सब पता लग जाएगा।

सुनिता _पर बेटे तुम्हे बहुत दर्द हो रहा होगा,

राजेश _मां मै मर्द हू, और मर्द को दर्द नही होता।

तभी स्वीटी उनके पास आ गई

स्वीटी _भईया, आप इतने समय तक कहा रह गए थे, चलो नीचे चलते हैं झड़ने में नहाएंगे, मज़ा आएगा। मै कब से इंतजार कर रही थी।

सुनिता _स्वीटी, बस करो,अब चलो, काफी देर हो गई, पानी में जलक्रीड़ा करते, अब चलते हैं।

राजेश _मां, थोड़ी देर और रुकते हैं फिर चलेंगे। स्वीटी की झरने में नहाने की इच्छा है उसे भी पुरी कर देते है।

सुनिता _पार बेटा,,,,, कुछ डर सोंचने के बाद,,, अच्छा ठीक है तुम दोनो जाओ। मै तुम्हारे पीटा जी के पास जाती हूं। पर तुम लोग जल्दी आना।

स्वीटी _थैंक्स मां।

राकेश और स्वीटी पहाड़ से निचे आकार झरने में नहाने का मज़ा लेने लगे।

इधरसुनिता पानी से बहार निकलकर शेखर के पास आ गई ,जो समान के पास बैठ कर दूर से सब देख रहा था।

शेखर _अरे, हो गया आप लोगो का जल क्रीड़ा, मज़ा आया की नही। और बच्चे कहा है।

सुनिता_बच्चे झरने में नहाने गए है।

शेखर _सुनिता, तुमको भी चला जाना था बच्चो के साथ थोड़ा और मजा ले ले लेती।

सुनिता _अरे, नही जी काफी देर हो गई, और कितना मज़ा लेंगे, हमे गुफा देखने लिए भी तो जाना है।

मैने उन दोनो को जल्दी आने को कहा है।

इधर राजेश और स्वीटी कुछ देर झरने में नहाने का मज़ा लेने के बाद वहा से वे भी वापस आ गए।

शेखर _अरे आ गए तुम दोनो, झरने में नहाने का मज़ा आया की नही।

स्वीटी _पापा, वहा बहुत मजा आया, मां तुम को भी जाना चाहिए था, कितना मजा आया वहा।

सुनिता _चलो ठीक है तुम लोग मजा किए वहीं काफी है, अब तुम लोग अपने गीले कपड़े जल्दी चेंज करके तैयार हो जाओ हमे यहां से जल्द निकलना है।

स्वीटी और राजू कपड़े चेंज कर जल्दी तैयार हो गए।सुनिता तो पहले ही तैयार थी।

अब वे सभी पहाड़ से नीचे आ गए और अपने कार की ओर जाने लगे। जाते जाते सुनिता की नजर निचे कुंड और झरने में नहाने वालो पर गई, जहा नहाने वालो की खूब भीड़ थी। महिला पुरुष बच्चे युवक युवतियां सब बिना किसी लाज लज्जा के नहाने का मज़ा ले रहे थे।

सुनिता अपने मन में बोली,, छी यहां तो सब बेशरम बन कर नहा रहे हैं। लोगो को शर्म नाम की कोई चीज ही नहीं। क्या जमाना आ गया है। ऊपर चाची भतीजा रंगरेलिया मना रहे, नीचे खुल्लम खुल्ला नहा रहे।

अब वे सभी जब कार की ओर जाने लगे रास्ते में होटल एवम खाने पीने का ठेला लगा huwa था।

शेखर _सुनो सुनिता अगर भुख लगी हो तो कुछ खा ले क्या?

स्वीटी _हा पापा, नहाने के बाद शरीर में थकावट और भुख लगी है, चलो न कुछ खाते है।

सुनिता _मुझे तो खाने पीने में कुछ क्वालिटी दिखाआई नही दे रही है जी। यहां खाना उचित नहीं लग रहा। कुछ फल फूल खरीद लो वही खाकर काम चला लेते है। आगे देखेंगे कोई अच्छी जगह, जहा कुछ खाने मिल जाए।

शेखर _जाओ बेटा कुछ फल खरीद कर रख लो रास्ते में खाते हुवे चलेंगे।

राजेश _ठीक है पापा।

राजेश कुछ फल खरीद कर रख लिया।

उसके बाद चारो प्राचीन गुफा के लिए निकल पड़े, लोगो से पूछने पर पता चला की यहां से 16km की दूरी पर गुफा है, वहा पहुंचने पर आधा घंटा का समय लगा। गुफा देखने दूर दूर से लोग आए हुवे थे।

कार से उतरकर वे अब कुछ दूर पैदल चलने लगे, स्वीटी उत्साहित थी वह अपने पिता के साथ आगे आगे चल रही थी जबकि सुनिता और राजेश दोनो पीछे साथ साथ चलने लगे।

सुनिता _बेटा, तुम्हारा जख्म कैसा है? दर्द कर रहा है क्या?

राजेश _मां तुम खा मो खा चिन्ता कर रहि हो मामूली सा खरोच है जल्दी ठीक हो जायेगा।

सुनिता _बेटा, तुम्हे क्या जरूरत थी, उन लोगो की मदद करने की, देखे नही कैसे वे अपने परिवार वालो से छुपकर पाप का खेल खेल रहे थे।

राजेश _मां, तुमने ही तो सिखाया है, अगर हम किसी किसी मुसीबत में फंसे लोगो की मदद कर सके तो हमे पीछे नहीं हटना चाहिए।

सुनिता _मैंने, इंसानों के लिए ऐसा कहा, पाप करने वालो के लिए नही।

राजेश_मां वो भी तो इंसान हैं। लोगो की अपनी जरूरत होती है। हर कोई आपकी तरह तो नही हो सकते जो अपनी इच्छाओं को दबाकर जीवन गुजारे।

सुनिता _नाराज होते हुए बोली, राजेश आख़िर तुम कहना क्या चाहते हो।

राजेश _मां, उस महिला ने मुझे बताया की उसका पति उसे संतुष्ट नहीं कर पाता इसलिए मजबूरी में अपने भतीजे के साथ सम्बंध बनाती है।

सुनिता _नाराज होते हुए बोली,, अच्छा तो तुम ये चाहते हो की मैं भी अपनी इच्छा पुरी करने तुम्हारे सामने अपनी टांगे खोल के लेट जाऊं,,, बोलो चुप क्यो हो गया,, तू तो यही चाहता है, तभी उन लोगो की तरफ दारी कर रहा हैं। जवाब क्यू नही देते,,,तुम भी तो यही चाहते हो न कि मैं भी अपनी प्यास बुझाने तुम्हारे साथ सोऊं।

राजेश कुछ न बोला और अपना मुंह फुलाकर चलने लगा,,

शेखर _क्या बात हो रही है मां बेटे में, जरा मै भी तो सूनू।

सुनिता _कुछ नही जी, राजेश बड़ा हो गया है अपने ही मां को क्या अच्छा है क्या बुरा है, सीखा रहा है।

शेखर _भई, वो तो है, राजेश तो है समझदार।

वे गुफा के पास पहुंच गए।

स्वीटी _पापा ये गुफा का द्वार तो एकदम सकरी है। हम इसके अदंर कैसे जा पाएंगे। मुझे तो अदंर जाने में डर लग रहा।

गुफा का द्वार इतना छोटा था की एक व्यक्ति बडी मुस्कील से अदंर प्रवेश कर पा रहा था।

शेखर _बेटी डरो मत यहां और भी लोग है, चलो हम भी अदंर चलते हैं।

शेखर पहले अदंर प्रवेश किया, फिर स्वीटी उसके बाद सुनिता और आखिरी में राज। द्वार से जैसे ही पांच मीटर अदंर गए अदंर का नज़ारा देख दंग रह गए। अदंर काफी बड़ा जगह जिसमे 100लोग आसानी से समा सकते, अदंर पानी भी बह रहा था। अदंर रोशनी भी आ रही थी। अदंर की दीवारों पर आदिमानव द्वारा भित्ती चित्र उकेरे गए थे। लोग उन चित्रों को देख रहे थे।

स्वीटी तो इन दृश्यों को देखकर रोमांचित हो उठी, भईया यहां देखो पानी में छोटी छोटी मछलियां भी तैर रही है।

वहा आस पास एक दो गुफा और भी था। वे उनके अदंर प्रवेश कर, गुफा के बारे में लोगो से जानकारी प्राप्त किए। पुराने समय में लोग किस तरह गुफाओं में रहते थे।

शेखर _चलो बच्चों अब हम वापस चलते हैं। यहां पर एक रेस्टोरेंट है चलो देखते हैं की कुछ खाने को मिल जाए फिर वहा से सीधा धर्मशाला निकलेंगे।

वे सभी रेस्टोरेंट में पहुंच गए,

शेखर _बोलो भाई किसको क्या क्या खाना है? मेनू चार्ट देख कर बताओ।

स्वीटी अपनी पसन्द की चीजों के बारे में बताई।

शेखर _राजेश बेटा तुम चुप क्यू बैठो हो, तुम क्या खाओगे।

राजेश _पापा मुझे भुख नही है, मै कुछ नहीं खाऊंगा।

सुनिता राजेश की ओर देखने लगी।

शेखर _बेटा, सुबह का नाश्ता किए हो 3बजने वाला है, कुछ खा लो।

राजेश _नही पापा। मुझे भुख नही है।

शेखर _अच्छा ठीक है। सुनिता तुम बताओ क्या खाओगी।

सुनिता _मुझे भी भुख नही है जी, आप और और switi खा लीजिए।

शेखर _तुम दोनो मां बेटो के बीच कुछ खटपट हो गई है क्या?

सुनिता _नही जी, ऐसी कोई बात नहीं है, मुझे भुख नही है।

शेखर _भाई आप दोनो को भुख नही है, तो फिर मैं भी नही खाऊंगा।

स्वीटी के लिए आर्डर कर देता हूं।

राजेश _नही पापा, आप लीजिए न। आप क्यू भूखा रहेंगे, आपको तो भुख लगी थी।

शेखर _लगी तो थी बेटे पर तुम लोग नही खा रहे हो तो मेरी भी भुख चली गई।

राजेश _ओह, पापा आप भी ना, मेरे लिए भी आर्डर कर दो जो आपको पसन्द हो।

शेखर _ये हुईं न बात, सुनिता ,तुम्हारे लिए भी आर्डर कर रहा हूं।

सुनिता _ठीक है जी अब आप इतना ही जिद कर रहे हैं तो मैं भी थोड़ा खा लूंगी।

वे भोजन करने के बाद, वहा से सीधे धर्मशाला पहुंच गए।

वहा जाकर वे आराम करने लगे।करीब शाम 6बजे,,

स्वीटी _चलो, भैय्या मेला चलते हैं वहा झूले का मज़ा लेंगे। पापा चलो न।

शेखर _चलो भई सुनिता, बच्चो का शौक पूरा करते हैं।

अब वे मेले में जाकर फिर मेले का आनंद उठाए। फिर वो वहा रात 9बजे तक घूमते रहे। फिर वहा से वापस आते समय रेस्टोरेंट में डिनर किए। वहा पास में ही मेडिकल था,,,

सुनिता _सुनो जी मुझे, मुझे मेडिकल में कुछ लेना था।

शेखर _क्या लेना है, मै खरीद लाता हूं।

सुनिता _मेरा पैर के नीचे दर्द कर रहा है लगता है पैदल चलचल कर पैर छिल गया है , चलने की ज्यादा आदत नही है न।कोई मलहम ले आना।

शेखर _ठीक है सुनिता

शेखर मेडिकल से मलहम ले आया।

अब वे सभी अपने रूम में पहुंच गए और सोने की तैयारी करने लगे। सुनिता की गाउन गीली थी तो वह साड़ी ही पहन रखी थी।

सुनिता _सुनो जी तुम आज ऊपर ही सो जाओ, कल तुम्हारा क़मर पकड़ लिया था। कही फिर से क़मर न पकड़ ले। मै और राजेश नीचे सो जाते हैं।

शेखर _पर सुनिता, तुम्हे क्या निचे नींद आयेगी।

सुनिता _जी, आदत तो नही है, पर कोई चारा भी नहीं है।

सुनिता मलहम को अपने तकिए के पास रख लीऔर राजेश से बोली,,

बेटा _लाईट को ऑफ कर दे, लाईट में नींद नहीं आतीऔर आकर सोजा।

राजेश _कमरे का लाईट ऑफ कर दिया। अब वे एकदूसरे को देख नही पा रहे, थे। केवल सुन पा रहे थे।
 
लाईट ऑफ करने के बाद राजेश गद्दे पर अपने मां के बगल में उसकी ओर पीठ करके लेट गया। बेड पर स्वीटी और शेखर लेटे थे और अपने ऊपर एक कंबल डाल लिए थे।

स्वीटी और शेखर आज दिनभर हुई घटनाक्रम पर चर्चा करने लगे। इधर सुनिता ने राज की ओर करवट लेकर उनके कानो में फुसफुसाते हुए राजेश से कहा ,,

सुनिता _क्यू re नाराज है क्या अपनी मां से,,

राजेश ने कोई जवाब नहीं दिया,,

सुनीता _क्यू, कुछ बोलता क्यू नही,,,

सुनिता ने राज के पीठ पर हाथ रखा,, राजेश दर्द से कराह उठा।

शेखर _बेटा क्या huwa?

राजेश _कुछ नही पापा, शायद मच्छर ने काटा।

सुनिता _बेटा, दर्द कर रहा है क्या? फुसफुसाते हुए पूछी।

राजेश कुछ जवाब नहीं दिया।

सुनिता _बेटा कुछ बोलता क्यू नही? अपनी मां से इतना नाराज हैं। आओ मैं तुम्हारे पीठ पर मलहम लगा देती हू। जख्म जल्दी ठीक हो जायेगा।

राजेश कुछ नहीं बोला।

सुनिता _अच्छा बाबा, मुझे माफ़ कर दो अब मैं तुम्हे नही डांटूंगी। तू तो मेरा प्यारा बेटा है। मुझे तुम पर गर्व है जो अपनी जान की परवाह न करते हुवे दूसरो की मदद किए।

सुनिता ने राजेश के गालों को चूम कर उसके उसके सिर को प्यार से सहलाने लगी।

सुनिता _बेटा अपना टी शर्ट ऊपर कर दो मै जख्म पर मलहम लगा देती हूं, जख्म जल्दी ठीक हो जायेगा।

सुनिता राजेश के टी शर्ट को ऊपर कर दी और तकिया के पास रखी मलहम की ट्यूब से उंगलियों में दवा निकालकर राजेश के पीठ पर हल्के हाथों से लगाने लगी।

इधर स्वीटी अपने पापा से,,

पापा क्या जादूगर अंडे से सच में कबूतर बना देता है।

मेले में उन लोगो ने जादू देखें थे।

शेखर _नही बेटा, वो तो एक कला है जादूगर सच में अंडे से कबूतर नही बना सकता।

इधर सुनिता राजेश से फुसफुसाते हुवे,,

मेरा बेटा कितना बहादुर है? वह राजेश के पीठ पर मलहम लगाते हुए बोल रही थी। लो बेटा मलहम लगा दी है अब जख्म जल्दी ठीक हो जाएगा।

इधर मुंह करो मेरी ओर, क्या अभी तक नाराज़ है अपनी मां से।

राजेश अब पीठ के बल लेट गया।

राजेश _तुम तो हमेशा मुझे ही गलत समझती हो, सुनिता से फुसफुसाते हुवे बोला।

अब सुनिता राजेश के कंधे पर अपना सर रख कर , अच्छा बाबा अब मैं तुम्हे कुछ नहीं बोलूंगी। मेरा प्यारा बेटा,,

अब राजेश को सुनिता अपने सीने से लगा लिया, और एक हांथ से उसके पीठ को सहलाने लगा।

अब सुनिता ने अपने और राजेश के ऊपर कम्बल

डाल लिया ताकि उनकी बातों को स्वीटी और शेखर न सुन सके,

राजेश ने भी एक हांथ से अपने मां को अपने बाहों में भर लिया और धीरे से उसके कानो में बोला, I Love you मम्मी

सुनिता _आई लव यू टू बेटा।

राजेश _मम्मी मै यहां आकर बहुत खुश हू, तुम्हारे बाहों में मुझे सोने का मौका जो मिला पता नही कितने दिन हो गए तुम्हारे साथ सोए।

मै छोटा था तब तो हमेशा अपने पास ही सुलाती थी।

सुनिता _ हू, तुम छोटे थे तो पास ही सुलाती थी। अब तु बड़ा हो गया है। और जब बेटा बड़ा हो जाए तो उसे मां के साथ नही सोना चाहिए।

राजेश,_क्यू मां, बेटा जब बड़ा हो जाए तो उसे मां के साथ क्यू नही सोना चाहिए।

सुनिता _बड़ा होने के बाद मर्दों को मां के साथ नही अपने बीवी के साथ सोना चाहिए।

राजेश _मां, मै तो अभी बच्चा हूं न, और अभी तक मेरी शादी भी नही हुई है, तो मुझे अपने साथ सुलाया करो न।

सुनिता _न बाबा तू अब बच्चा नहीं रहा, कितना बड़ा हो गया है। सुबह मंदिर में कैसे अपनी मां को परेशान कर दीया था। अगर साथ में सुलाने लगी तो तुम तो मुझे सोने ही नहीं दोगे।

राजेश _मां, मैने जान बुझ कर थोड़े ही किया, पता नहीं वो कैसे,,,

सुनिता _वो क्या बेटे बोलो बोलो,, रुक क्यू गए,,

राजेश _पता नही मां वो अपनेआप ही बड़ा हो जाता है,, वो,, वो,, मेरा, नुनु,

सुनीता _हसने लगी,,,, क्यू की तू बड़ा हो गया है इसलिए।

राजेश _मां आज तो मैं तुम्हे ऐसे ही बाहों मे लेकर सोऊंगा। भले ही मेरा नुनु बड़ा हो जाए।

सुनिता _ना बाबा, डर लगता है मुझे, तुम्हारे नुनु से, ये तो भुल ही जाता है कि मैं तेरी मां हूं।

तभी दोनो की इस वार्तालाप और एक जनाना अंग के बाहों में होने के एहसास से राजेश का land तनकर खड़ा हो जाता है। जो सुनिता के पेट में चुभता है तो उसे भी इसका एहसास हो जाता है की राजेश का land फिर खड़ा हो गया।

सुनिता _राजेश अब छोड़ो मुझे, अब सो जाओ।

राजेश _क्यू मां क्या हुवा।

सुनिता _तू बदमाश हो गया है।

राजेश _क्यू मां ऐसा क्यू बोल रही हो, अब मैंने क्या किया। बोलो।

सुनिता _बदमाश, तूने फिर अपना नुनु बड़ा कर ली न। तू नही सुधरेगा।

राजेश _मां, अब क्या करू, ये मेरा कहना कहा मानता है, सुबह से परेशान कर रखा है।

सुनिता _इसीलिए कह रही हू की अब छोड़ो मुझे, अगर ऐसे ही तुमसे चिपकी रही तो रात भर तुम्हे परेशान करेगा और तुम सो नही पाओगे।

सुनिता _मां शायद तुम ठीक कह रही, पर तुम्हे छोड़ने का मन नहीं कर रहा, क्या करू?

और राजेश अपनी मां को और जोरो से अपनी बाहों में भर लिया।

सुनिता _बेटा ये क्या कर रहा, छोड़ो मुझे, अब बहुत हो गई। अब सुनिता थोड़ा जोर लगाकर राजेश से अलग हो गई। और राजेश की ओर पीठ कर का

लाईट ऑफ करने के बाद राजेश गद्दे पर अपने मां के बगल में उसकी ओर पीठ करके लेट गया। बेड पर स्वीटी और शेखर लेटे थे और अपने ऊपर एक कंबल डाल लिए थे।

स्वीटी और शेखर आज दिनभर हुई घटनाक्रम पर चर्चा करने लगे। इधर सुनिता ने राज की ओर करवट लेकर उनके कानो में फुसफुसाते हुए राजेश से कहा ,,

सुनिता _क्यू re नाराज है क्या अपनी मां से,,

राजेश ने कोई जवाब नहीं दिया,,

सुनीता _क्यू, कुछ बोलता क्यू नही,,,

सुनिता ने राज के पीठ पर हाथ रखा,, राजेश दर्द से कराह उठा।

शेखर _बेटा क्या huwa?

राजेश _कुछ नही पापा, शायद मच्छर ने काटा।

सुनिता _बेटा, दर्द कर रहा है क्या? फुसफुसाते हुए पूछी।

राजेश कुछ जवाब नहीं दिया।

सुनिता _बेटा कुछ बोलता क्यू नही? अपनी मां से इतना नाराज हैं। आओ मैं तुम्हारे पीठ पर मलहम लगा देती हू। जख्म जल्दी ठीक हो जायेगा।

राजेश कुछ नहीं बोला।

सुनिता _अच्छा बाबा, मुझे माफ़ कर दो अब मैं तुम्हे नही डांटूंगी। तू तो मेरा प्यारा बेटा है। मुझे तुम पर गर्व है जो अपनी जान की परवाह न करते हुवे दूसरो की मदद किए।

सुनिता ने राजेश के गालों को चूम कर उसके उसके सिर को प्यार से सहलाने लगी।

सुनिता _बेटा अपना टी शर्ट ऊपर कर दो मै जख्म पर मलहम लगा देती हूं, जख्म जल्दी ठीक हो जायेगा।

सुनिता राजेश के टी शर्ट को ऊपर कर दी और तकिया के पास रखी मलहम की ट्यूब से उंगलियों में दवा निकालकर राजेश के पीठ पर हल्के हाथों से लगाने लगी।

इधर स्वीटी अपने पापा से,,

पापा क्या जादूगर अंडे से सच में कबूतर बना देता है।

मेले में उन लोगो ने जादू देखें थे।

शेखर _नही बेटा, वो तो एक कला है जादूगर सच में अंडे से कबूतर नही बना सकता।

इधर सुनिता राजेश से फुसफुसाते हुवे,,

मेरा बेटा कितना बहादुर है? वह राजेश के पीठ पर मलहम लगाते हुए बोल रही थी। लो बेटा मलहम लगा दी है अब जख्म जल्दी ठीक हो जाएगा।

इधर मुंह करो मेरी ओर, क्या अभी तक नाराज़ है अपनी मां से।

राजेश अब पीठ के बल लेट गया।

राजेश _तुम तो हमेशा मुझे ही गलत समझती हो, सुनिता से फुसफुसाते हुवे बोला।

अब सुनिता राजेश के कंधे पर अपना सर रख कर , अच्छा बाबा अब मैं तुम्हे कुछ नहीं बोलूंगी। मेरा प्यारा बेटा,,

अब राजेश को सुनिता अपने सीने से लगा लिया, और एक हांथ से उसके पीठ को सहलाने लगा।

अब सुनिता ने अपने और राजेश के ऊपर कम्बल

डाल लिया ताकि उनकी बातों को स्वीटी और शेखर न सुन सके,

राजेश ने भी एक हांथ से अपने मां को अपने बाहों में भर लिया और धीरे से उसके कानो में बोला, I Love you मम्मी

सुनिता _आई लव यू टू बेटा।

राजेश _मम्मी मै यहां आकर बहुत खुश हू, तुम्हारे बाहों में मुझे सोने का मौका जो मिला पता नही कितने दिन हो गए तुम्हारे साथ सोए।

मै छोटा था तब तो हमेशा अपने पास ही सुलाती थी।

सुनिता _ हू, तुम छोटे थे तो पास ही सुलाती थी। अब तु बड़ा हो गया है। और जब बेटा बड़ा हो जाए तो उसे मां के साथ नही सोना चाहिए।

राजेश,_क्यू मां, बेटा जब बड़ा हो जाए तो उसे मां के साथ क्यू नही सोना चाहिए।

सुनिता _बड़ा होने के बाद मर्दों को मां के साथ नही अपने बीवी के साथ सोना चाहिए।

राजेश _मां, मै तो अभी बच्चा हूं न, और अभी तक मेरी शादी भी नही हुई है, तो मुझे अपने साथ सुलाया करो न।

सुनिता _न बाबा तू अब बच्चा नहीं रहा, कितना बड़ा हो गया है। सुबह मंदिर में कैसे अपनी मां को परेशान कर दीया था। अगर साथ में सुलाने लगी तो तुम तो मुझे सोने ही नहीं दोगे।

राजेश _मां, मैने जान बुझ कर थोड़े ही किया, पता नहीं वो कैसे,,,

सुनिता _वो क्या बेटे बोलो बोलो,, रुक क्यू गए,,

राजेश _पता नही मां वो अपनेआप ही बड़ा हो जाता है,, वो,, वो,, मेरा, नुनु,

सुनीता _हसने लगी,,,, क्यू की तू बड़ा हो गया है इसलिए।

राजेश _मां आज तो मैं तुम्हे ऐसे ही बाहों मे लेकर सोऊंगा। भले ही मेरा नुनु बड़ा हो जाए।

सुनिता _ना बाबा, डर लगता है मुझे, तुम्हारे नुनु से, ये तो भुल ही जाता है कि मैं तेरी मां हूं।

तभी दोनो की इस वार्तालाप और एक जनाना अंग के बाहों में होने के एहसास से राजेश का land तनकर खड़ा हो जाता है। जो सुनिता के पेट में चुभता है तो उसे भी इसका एहसास हो जाता है की राजेश का land फिर खड़ा हो गया।

सुनिता _राजेश अब छोड़ो मुझे, अब सो जाओ।

राजेश _क्यू मां क्या हुवा।

सुनिता _तू बदमाश हो गया है।

राजेश _क्यू मां ऐसा क्यू बोल रही हो, अब मैंने क्या किया। बोलो।

सुनिता _बदमाश, तूने फिर अपना नुनु बड़ा कर ली न। तू नही सुधरेगा।

राजेश _मां, अब क्या करू, ये मेरा कहना कहा मानता है, सुबह से परेशान कर रखा है।

सुनिता _इसीलिए कह रही हू की अब छोड़ो मुझे, अगर ऐसे ही तुमसे चिपकी रही तो रात भर तुम्हे परेशान करेगा और तुम सो नही पाओगे।

सुनिता _मां शायद तुम ठीक कह रही, पर तुम्हे छोड़ने का मन नहीं कर रहा, क्या करू?

और राजेश अपनी मां को और जोरो से अपनी बाहों में भर लिया।

सुनिता _बेटा ये क्या कर रहा, छोड़ो मुझे, अब बहुत हो गई। अब सुनिता थोड़ा जोर लगाकर राजेश से अलग हो गई। और राजेश की ओर पीठ कर करवट लेकर लेट गईं।

राजेश अपने land को सुनिता के गांड़ में धंसाते हुवे एक हाथ उसके पेट में रख कर अपने शरीर से सटा लिया।

सुनिता _बेटा छोड़ा ने ये ठीक नहीं।

तभी शेखर ने दोनो की फुसफुसाहट सुन लिया।

शेखर _अरे तुम दोनो मां बेटे आपस में ही फुसफुसाते रहोगे की हम लोगो से भी बाते शेयर करोगे, भई।

सुनिता _राज कह रहा है जी की बड़े दिनों बाद मां के साथ सोने का मौका मिल रहा है।

शेखर हंसते हुवे,

अरे ऐसी बात है तो बेटा जब भी मन करे अपनी मां के साथ सो जाया कर आख़िर रोका किसने तुम्हे।

राजेश _जी पापा। मेरा तो मां के साथ सोने का कब से मन था लो आज यह भी इच्छा पुरी हो रही है।

शेखर _भई, सुनिता देखो अगर बच्चों का मन तुम्हारे सांथ सोने का करता है तो कभी कभी सो जाया करो उनके santh ,आखिर तुम उनकी मां हो।

सुनिता _ठीक है जी।

राजेश _मां, आज सुबह से ही बहुत, परेशान कर रखा है, प्लीज कुछ करो न इसका। तभी मैं चैन से सो पाऊंगा। अपने land का दबाव सुनिता के नितंब पर डालते हुए कहा।

सुनिता _चल हट बदमाश मां हूं तेरी बीवी नही।

इतना ही परेशान कर रखा है तो जा बाथरूम में,, सुनिता फुसफुसाते हुए बोली।

राजेश _पर मां पहले भी तो मेरी मदद की थी न। सुनिता के कान में फुसफुसाते हुए कहा।

सुनिता _पहले मजबूरी थी, तुम्हारे हाथ फ्रैक्चर जो थे। एबी तू बदमाश हो गया है।

राजेश _पापा, मां हमे अब पहले जैसे प्यार ही नही करती, कहती है कि अब तुम बड़े हो चुके हो अपना काम, स्वयं करो। मां से बोलो न की हमे पहले जैसे ही प्यार करे।

शेखर _राजेश, बेटा ये तुम क्या कह रहे हो, सुनिता तो तुम लोगो से बहुत प्यार करती है। फिर तुम ऐसा क्यू बोल रहे हों?

राजेश _ पापा देखो ना मेरे पीठ के नीचे खुजली हो रही है, मै मां से कह रहा हूं, खुजा दो तो कह रही है कि तुम स्वयं खुजा लो।

शेखर _सुनीता, ये मै क्या सुन रहा हूं? तुम राजेश की मदद क्यू नही कर रही।

स्वीटी _भईया, लगता है मां का भाव आजकल कुछ ज्यादा ही बड़ा huwa, भैया मैं तुम्हारे पास आऊ क्या, तुम जहा कहोगे मैं खुजा दूंगी।

स्वीटी _लगता है, यही सही रहेगा, तुम आजाओ, मां बेड पर सो जायेगी। तुम नीचे आ जाओ मेरी मदद कर दो। क्यू मां ठीक है न।

Switi _ठीक है भइया मैं आती हूं।

सुनिता _नही नही तुम नीचे मत आओ, मै राजेश की मदद कर देती हूं।

राजेश से फुसफुसाते हुवे बोली,, तू बहुत चालाक हो गया,, बदमाश कही का, निकाल अपना नुनु,,,

राजेश, हंसते हुवे, अब आई न लाइन में।

राजेश अब पीठ के बल लेट गया और अपना लोअर नीचे खिसकाकर,land को आजाद कर दिया,land हवा में लहराने लगा।

सुनिता राजेश की ओर करवट लेकर लेट गई। और राजेश के land को अपनेहाथ से पकड़कर गुस्से में जोर जोर से हिलाने लगी।

राजेश के मुंह से आह निकल गया।

शेखर _क्या huwa बेटे।

राजेश _पापा देखो ना, मां गुस्से में कितना जोर जोर से खुजा रही मुझे दर्द हो रहा।

सुनिता _ये क्या कर रही हो, प्यार से खुजाओ धीरे धीर राजेश को अच्छा लगेगा।

सुनिता _ठीक है जी।

तू अपनी मनमानी करवा के ही मानेगा, बेशरम कही का वह राजेश के कान में फुसफुसाते हुए बोली,, और land को धीरे धीरे हिलाने लगी।

राजेश _आख़िर बेटा किसका हू। आह बड़ा मजा आ रहा है मां, ऐसे ही,, आज सुबह से ही परेशान कर रखा है,,, और चाची भतीजा का खेल देखकर तो बैठने का नाम ही नही ले रहा था। तुमने तो देखी थी न।

सुनिता _हा, देखी थी, की तुम ठीक से मूत भी नहीं पा रहे थे। और वह हसने लगी।

शेखर _बेटे अब कुछ राहत मिला।

राजेश _हां, पापा मां अब अच्छे से धीरे धीर प्यार से खुजा रही है, जिससे खाफी राहत मिल रही है। चलो ठीक है।

सुनिता राजेश के कंधे पर अपना सिर रख दिया और एक हाथ से उसके land को पकड़कर हिलाने लगी, उसके अंड कोश को सहलाने लगी,

राजेश एक हाथ से सुनीता के पीठ को सहलाते हुवे कहा, आह बड़ा अच्छा लग रहा है मां।

सुनिता _चुप बदमाश कही का, अपना मुंह बन्द रख, कही तुम्हारे पापा को पता चल गया न की तुम मुझसे कंबल के अदंर क्या करवा रहा है तो सारा मजा, सजा में बदल जायेगा। फुसफुसाते हुवे बोलकर हसने लगी,,,

शेखर _क्या huwa सुनिता हस क्यू रही हो?

सुनिता _कुछ नही जी इसकी खुजली तो मिट ही नहीं रही, कहता है इसकी खुजली तो और बढ़ती जा रही।

शेखर _सुनिता, जब तक राजेश का मन करे खुजा दो उसे राहत मिलेगी नही तो वह सो नही पाएगा।

सुनिता _ठीक है जी।

अब राजेश धीरे धीरे जोश में आने लगा, वह सुनिता को अपने से चिपका कर उसके गालों को चूम लिया।

सुनिता _बेटा, छोड़ मुझे ये क्या कर रहा है, मां हू तेरी बीवी नही।

राजेश _अच्छा तुम मां, हो न तो दो अपने बेटे को उसका हक,

सुनिता _कैसा हक।

राजेश ने सुनिता के चूची को अपने हाथ से पकड़कर मसलते हुए, कहा ये चाहिए।

सुनिता _ये तू क्या कह रहा है?

राजेश _मां के दुध पे बेटे का हक होता है न, तो दो मेरा हक, मुझे दुदू पिलाओ। मुझे दुदू पीना है।

ऐसा बोलकर, वह सुनिता के दुदू को ब्लाउज के उपर से ही मसलने लगा।

सुनिता _बेटा ये क्या कर रहा है, ऐसा मत कर मां हू तेरी।

राजेश _मां खोलो ना मुझे दुदू पीना है।

सुनिता _नही बेटा, अब तू बड़ा हो गया है। और जब बच्चा बड़ा हो जाता तो वह दूध कम पीता है और दुदू के साथ खेलता ज्यादा है इसलिए मां बच्चे को दुध पिलाना बंद कर देती है।

राजेश _मां, इस पर तो बेटे का हक है न तो बेटे का मन इससे खेले या दूध पिए। वो वही करेगा जिसमे उसको मजा आयेगा।

सुनिता _तू बड़ा बदमाश हो गया है?

राजेश अब सुनिता को पीठ के बल लिटा दिया। और खुद उसके ऊपर आ गया।

सुनिता _बेटा ये क्या कर रहा है मै मां हू तेरी।

राजेश _इसीलिए तो अपना हक मांग रहा हू। मुझे दुदू पिलाओ।

अब राजेश सुनिता के ब्लाउज का बटन खोलने लगा पर बटन टाईट था खोल नही पाया, सुनिता हसने लगी।

सुनिता _बड़ा मर्द बनता फिरता है ब्लाउज का एक बटन नही खोल पाया,

राजेश को अच्छा न लगा और सुनिता को छोड़ कर उससे दूर हो गया।

सुनिता राजेश की ओर करवट लेकर, क्या huwa?

दुदू नही चहिए।

सुनिता अब अपने हाथो से ब्लाउज का बटन खोलकर अपनी चूची आजाद कर दी,

सुनिता _ले पी ले अपनी मां के दुदू, बुझा ले अपनी प्यास।

और राजेश के सिर को पकड़ कर अपने चूची पर दबा दिया।

राजेश फिर अपने मां के ऊपर आ गया,,,
 
स्वीटी और शेखर आपस में आज दिन भर हुई घटनाक्रम पर बात चीत कर रहे थे, इधर मां बेटे दोनो कंबल के अदंर जवानी का खेल शुरु कर दिए थे।



सुनिता ने अपनी ब्लाउज का बटन खोलकर अपनी चूची आजाद कर दी, और राजेश को खींचकर अपने उसके सिर को अपने दुदू से दबा दिया और बोली, ले पी ले अपनी मां की दूदू।

राजेश अपने मां के ऊपर आ गया, और उसके चूची को हाथो से पहले मसला फिर बारी बारी से मुंह में भरकर चुसने लगा।

राजेश की इस हरकत से सुनिता की अदंर की मां कही खोने लगी और अदंर छुपी औरत जागने लगी।

लगातार चूची चुसने एवम मसलने से सुनिता के शरीर में उत्तेजना भरने लगा, और अब वह भूलने लगी की जो पुरुष उसकी चूची पी रहा है वह उसका बेटा है, अब उसे लगने लगा की कोइ मर्द उसके चूची चूस रहा है। वह धीरे धीरे गर्म होने लगी और उसके मुंह से मादक सिसकारी निकलने लगी।

अब राजेश को भी पता चल गया था की उसकी मां गर्म हो चुकी है। अब वह एक हाथ से चूची मसलते हुए उसके पेट पर चुम्मन लेते हुए नीचे की ओर जाने लगा।

जिससे सुनिता के शरीर में खून दोगुने गति से दौड़ने लगी, राजेश अब सुनिता के नाभी को अपने जीभ से चाटने लगा। जिससे सुनिता को अजीब सी गुदगुदी होने लगी वह एक हांथ से राजेश के सिर पकड़ कर दुसरे हाथ से गद्दे को ज़ोर से मुठ्ठी में भर कर एक पैर को दुसरे पैर से रगड़ते हुए, अपनी आंखो की पुतलियों को पलटते हुवे सिसकने लगी।

राजेश अब नाभी से नीचे बढ़ना चाहा पर पेटी कोट और साड़ी बीच में बाधा बन गया।

अब राजेश ऊपर आया और सुनिता की होंठो को मुंह में भरकर चुसने लगा और एक हांथ नीचे ले जाकर साड़ी के ऊपर से ही सुनिता की boor को सहलाने लगा।

सुनिता _सिसकते हुवे बोली, नही बेटा वहा नही,,,,, नही मेरा लाल मै तेरी मां हूं।

पर राजेश नही रूका और अपनी मां की chut को तेजी से सहलाने लगा। जिससे सुनिता की chut से पानी नदी की तरह बहने लगा।

जिससे उसकी पेटिकोट गीली हो गई क्यू की उसने पेंटी पहनी नही थी। उसे बाथरूम में सुखा दी थी। उसके दोनो पेंटी गीली हो चुकी थी। झरने में नहाने का जो अचानक प्लान बना था।

अब राजेश ,सुनिता के चूची चूसते हुवे एक हांथ से उसके chut को रगड़ने लगा। जिससे सुनिता बहुत ज्यादा उत्तेजित हो गई। अब उसके ऊपर हवस हावी हो गई।

अब सुनिता एक हाथ से राजेश के land को पकड़कर सहलाने लगा। कुछ देर दोनो के बीच यह खेल चलता रहा।

फिर राजेश सुनिता को अपनी ओर पीठ करके लिटा दिया और स्वयं अपने land को उसके गाड़ में धसाकर उसके गर्दन को चूमने लगा।

अपने land से गाड़ पर साड़ी के ऊपर से ही धक्का देने लगा जैसे वह chudai कर रहा हो।

अब दोनो ही बहुत उत्तेजित हो गए थे।

राजेश सुनिता के साड़ी और पेटीकोट को एक साथ पकड़कर उसके पैरो से ऊपर की ओर चढ़ाने लगा।

सुनिता राजेश को रोकने की दिखावा कोशिश करने लगी नही बेटा, ऐसा मत करो।

राजेश कहा सुनने वाला था, वह सुनीता के साड़ी और पेटीकोट को क़मर तक चढ़ा कर उसके नितम्ब को नंगा कर दिया। और अपने खड़े land को पकड़कर उसके चूतड पर पीटने लगा।

सुनिता सिसकने लगी।

अब राजेश सुनिता का एक पैर मोड़कर थोड़ा ऊपर उठा दियाऔर उसके क़मर को अपनी ओर खींच कर नितम्ब को उभार दिया।

अब राजेश अपने land को सुनिता के बुर में डालने का असफल प्रयास किया।

तब सुनिता स्वयं land को अपनी एक हांथ से पकड़कर उसे अपनी बुर के छेद पर सेट कर दिया।

राजेश ने सुनिताके chut पर land का एक हल्का सा धक्का मारा,land का टोपा बुर में घुस गया। सुनिता के मुख से हल्की सिसक निकल गई फिर राजेश ने एक जोर का धक्का मारा बुर गीली होने के कारण,land बुर को चीरकर आदि अदंर घुस गया।

सुनिता के मुख से चीख निकल गई,,,

शेखर _क्या huwa सुनिता चीखी क्यू?

सुनिता _डर गई,,,, फिर सम्हलते हुवे बोली,, कुछ नही जी लगता है कंबल के अदंर कोई मच्छर घुस गया है जिसने मुझे काटा,,

शेखर _ओह, मै तो डर ही गया था।

सुनिता _राजेश से फुसफुसाते हुवे बोली,, बेटा थोड़ा धीरे,, नहीतो तुम्हारे पापा को पता चल जायेगा की कंबल के अदंर क्या चल रहा हैं।

राजेश _मां, तुम चिन्ता न करो, मै धीरे धीरे करूंगा।

अब राजेश, सुनिता के चूची को एक हांथ से पकड़कर क़मर को हिला हिला कर land को बुर में धीरे धीरे अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया।

Land का आधा से कुछ ज्यादा भाग ही बुर में अदंर बाहर हो रहा था। राजेश और सुनिता दोनो को ही बहुत मजा आने लगा।

स्वीटी _पापा, यहा आकर तो सच में बड़ा आनद आ रहा है। मै तो सोच रही थी कि 3दिन कैसे काटूंगी।

शेखर _हा, स्वीटी तुम तुम ठीक कह रही हो, यह जगह तो अपेक्षा से ज्यादा अच्छी है।

स्वीटी _भईया, तुमने बताया नही की तुम्हे आकर कैसा लग रहा है।

राजेश , सुनिता के बुर में दनादन land पेलते हुवे कहा।

हा, स्वीटी, मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा है, मैने तो सोचा ही नहीं था की यहां इतना मजा आयेगा।

राजेश, सुनिता को और थोड़ा जोर से चोदते हुए कहा,,,,,, मुझे तो ऐसा लग रहा है , जैसे मै जन्नत में पहुंच गया हूं।

राजेश का land, सुनिता के बुर में सर सर अदंर बाहर हो रहा था, दोनो स्वर्ग का मज़ा ले रहे थे।

राजेश _पापा सच में मुझे खूब मजा आ रहा है।

स्वीटी _मां, तुम भी बताओ, तुम यहां इंज्वॉय कर रही हो की नही।

सुनिता इस समय आनंद में सिसक रही थी, वह चुप थी।

राजेश बुर में land को और तेजी से अदंर बाहर करते हुए कहा,,

राजेश _मां, स्वीटी तुमसे पूछ रही है की तुम्हे मजा आ रहा है की नही।

शेखर _सुनिता, चुप क्यो हो सो गई क्या, बताओ तुम्हे यहां मजा आ रहा है कि नही।

सुनिता _सिसकते हुवे बोली,, हा जी मुझे भी बड़ा मजा आ रहा है।

राजेश सुनिता के कानो में फुसफुसाते हुए कहा,, सच मां,, ले और ले ले और मजा ले, बोलते हुए land को सुनिता के बुर में पेलने लगा,,

सुनिता,,, नही बेटा तेज नही,, धीरे धीरे करो बेटा,, नही तो तुम्हारे पापा को शक हो जायेगा।

अब राजेश सुनिता को पेट के बल लिटा दिया और खुद उसके ऊपर चढ़ कर लेट गया सुनिता के दोनो चूची गद्दे पर दब गए।

सुनीता अपनी हाथ को दोनो ओर फैला दी, राजेश सुनिता के हाथ पर अपना हाथ रखकर उसके हथेलियों को अपने हथेली पे लेकर अपना क़मर हिला हिला कर सुनिता के नितम्ब पर उछलने लगा जिससे उसका land सुनिता के बुर में अंदर बाहर होने लगा।

इस तरह की chudai से दोनो को एक नया मजा आने लगा। पर इस तरह चोदने से land boor में पूरा अदंर नही का रहा था पर नितम्ब का अहसास, राजेश को पागल बना रहा था। वह नितम्ब के ऊपर उछल उछल कर सुनिता की chudai कर रहा था।

कुछ देर ऐसे ही chudai का मज़ा लेने के बाद,राजेश सुनिता को पलट दिया और उसे पीठ के बल लिटा दिया।

वह उसके ओंठो को जी भर के चुसने लगा, उसकी चूची मसलने एवम पीने लगा। सुनिता की मुंह से लगातर मादक सिसकारी निकल रही थी।

अब राजेश सुनिता के ऊपर छा गया। वह अपने लौड़े को फिर से सुनिता के बुर में डाला और उसके ऊपर लेट गया। उसके होंठों का रस पीते हुए अपने क़मर हिला हिला कर, अपना land सुनिता के बुर में डालने लगा।

इस आसन में राजेश के सीना से सुनिता की चूची पुरी तरह दबा huwa था। राजेश सुनिता के मुंह को चूसते हुए अपना land सुनिता के बुर में अदंर बाहर करने लगा।

इस आसन में chudai करने से सुनिता बहुत ज्यादा उत्तेजित हो गई और वह चरम अवस्था में पहुंच गई। वह राजेश को बुरी तरह जकड़ ली। अपने दोनो टांगे सटा ली अब राजेश land को बुर में नही ठेल पा रहा था। सुनिता के मुंह से,, आह मां,,,,,आ,,, ह,, मां,,,,,,, आह,,, उन,,,,,,,,

वह ऑर्गेज्म को प्राप्त कर रही थी। राजेश समझ गया की मां झड़ रहि है। वह भी अपने मां को जकड़ कर land बुर में पेलने लगा। सुनिता तो जैसे किसी दूसरी दुनियां में थी।

उसके मुंह से,, आह,,,,, मां,,,,,, आ,,,, ह,,,, ऊं,,,,,

और वह झड़ने लगी राजेश बुर में land डालना बंद कर इसके ओंठ चुसने लगा। कुछ देर दोनो ऐसे ही लेटे रहे।

फिर सुनिता होस में आई यूज बहुत शर्म आने लगी।

सुनिता _बेटे अब बस करो, बहुत हो गया,,, प्लीज, हटो,, ओर राजेश को अपने ऊपर से हटा दी।

राकेश का land अभी भी अकड़ा huwa था, वह झड़ा नहीं था। पार वह कर भी क्या सकता था वह अपनेमां के साथ जबरदस्ती नहीं करना चाहता था। इसलिए वह सुनिता के बाजू में पीठ के बल लेट गया। साला फिर अधूरा रह गया।

मुझे मां को फिर तैयार करना पड़ेगा पर मुझे थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा। मां को नार्मल होने दो।

इधर स्वीटी और शेखर आपस में बातचीत कर रहे थे इस बात से बेखबर की नीचे मां बेटे के बीच कौन सा खेल चल रहा है।

इधर सुनिता बहुत सरमिंदगी महसूस कर रही थी। हे भगवान आज फिर मैं हवस में आकर बेटे से chud गई। आज फिर पाप कर बैठी। शेखर और स्वीटी आपस में बात चीत कर रहे थे उनसे सुनिता बोली।

सुनिता _रात बहुत हो गई है। स्वीटी अब सो जाओ बाते कल कर लेना।

शेखर _सुनिता ठीक कह रही है, चलो अब सो जाओ, कल जल्दी उठना है।

इधर राजेश अपने खडे land को अपने हाथो से सहलाने लगा, सुनिता, राजेश की ओर पीठ करके करवट ले कर सोने लगी।

कुछ देर बाद, स्वीटी और शेखर की नींद लग गई, शेखर नींद में खर्राटे भरने लगा।

राजेश का land तो अभी भी तना था, उसे नींद कहा से आयेगी। वह सुनिता से चिपक कर अपना एक हाथ उसके पेट में लेकर सहलाने लगा।

सुनिता _तू अभी तक सोया नही है।

राजेश _मां मुझे नींद नहीं आ रही, मां मेरा अभी huwa नही है। तुम तो खुद किनारे पर पहुंच गई और मुझे बीच मझधार में ही छोड़ दी। फिर नींद कैसे आएगी।

सुनिता _तो क्या करू, मै जानती हू, जब तक तुम अपनी नाव की चप्पू जोर जोर से नही चलाओगे तुम किनारे नही लगोगे।

और यदि तुम अपनी चप्पू जोर जोर से चलाने लगे, तो तुम्हारे पापा को पता चल जायगा की मां बेटे किस नाव की सवारी कर रहे है। वह नाव सहित दोनो को पानी में डूबो देंगे। इसलिए भलाई इसी में है कि अपने मन पर काबू रखो और चुपचाप सो जाओ। फुसफुसाते हुवे बोली।

राजेश _मां एक उपाय है जिससे मैं जल्दी किनारे लग जाऊंगा। और शोर भी नहीं होगा।

सुनिता _क्या?

राजेश _मेरा चप्पू अपने मुंह में ले लो, पहले भी तो ले चुकी हो। जल्दी हो जायेगा। मां प्लीज।

सुनिता _कुछ देर सोचने के बाद अच्छा ठीकहै, नही तो न तू सोएगा और न मुझे सोने दोगे।

अब सुनिता उठी और राजेश के टांगों के बीच आ गया गई। और कंबल ऊपर डाल दी।

सुनिता राजेश के land को पकड़ कर पहले चांटी फिर उसे अपने मुंह में भर ली राजेश तो जैसे फिर जन्नत में पहुंच गया। सुनिता अब land को अपने मुंह में लेकर चूसने लगी।

राजेश के मुंह से सिसकारी निकलने लगा, आह मां,,, आह,, बड़ा मजा आ रहा है,,,

सुनिता अपना एक हाथ राजेश के मुंह में रख दिया ताकि उसके मुंह से आवाज न निकले। राजेश अपने दोनो हाथों से सुनिता के सर को पकड़ कर अपना land सुनिता के मुंह में ठेलने लगा।

सुनिता भी land को जितना निगल सकती थी निगल कर land को मुंह में अदंर बाहर करने लगी। राजेश तो किसी दूसरी दुनियां मे पहुंच गया था।

सुनिता को लगा राजेश मेरे मुंह में ही झड़ जायेगा। वह चूसना रोक दिया।

राजेश _क्या huwa मां, रुक क्यू गई, मेरा होने वाला था।

सुनीता _न, तुम मेरे मुंह में ही झड़ जाओगे।

राजेश _तो, फिर।

सुनिता _चलो बाथरूम में,, जब तुम आने वाले होगे तो मेरे मुंह से अपना चप्पू निकाल देना।

राजेश _ठीक है मां, चलो बाथरूम मे चलते हैं।

इधर शेखर और स्वीटी दोनो गहरे नींद में थे। शेखर का तो नाक बजने लगा था।

अब राजेश और सुनिता दोनो बाथरूम मे चले गए। राजेश ने अपना मोबाइल का टार्च ऑन कर दिया।

सुनिता बाथरूम का दरवाजा बंद कर दिया।

राजेश अपना लोअर नीचे खिसका दिया । उसका land हवा में लहरा रहा था। अत्यंत कठोर होकर ठुमक रहा था।

सुनिता राजेश के पैरो के नीचे उकडू बैठ गई और राजेश की आंखों में देखते हुए उसके land को पहले कुछ देर मुठ मारी फिर उसके सुपाड़े को मुंह में भर ली।

राजेश के मुंह से फिर से आह निकल गया।

सुनिता, राजेश के अंडकोष को एक हांथ से सहलाते हुवे, दुसरे हाथ से land को पकड़कर कर चुसने लगी। राजेश फिर से जन्नत में पहुंच गया।

राजेश, सुनिता का सिर हाथो से पकड़ कर अपने land में दबाव बनाकर,अपने क़मर हिलाकर अंदर बाहर करने लगा। जैसे वह सुनिता का मुंह चोद रहा हो।

राजेश की नजर अपनी मां के मुंह पर था, किस तरह उसका land उसकी मां के मुंह में अंदर बाहर हो रहा था। वह यह देखकर और उत्तेजित हो रहा था।

तभी सुनिता की साड़ी का पल्लू नीचे गिर गया जिससे उसके बड़े बड़े मम्मे राजेश को स्पष्ट नजर आने लगा। राजेश से रहा न गया वहा नीचे झुककर सुनिता का मम्मे एक हाथ से पकड़ कर उसे मसलने लगा।

सुनिता तो राजेश के land को अपने मुंह में भरकर अंदर बाहर करने में लगी थी।

राजेश _मां आपके दुदू कितने मस्त है।

राजेश और जोश में आ गया। जोश में आकर अपनी मां से बोला।

मां ब्लाउज खोलो ना, मुझे इससे खेलना है।

सुनिता _नही, बेटा ऐसे ही ऊपर से खेल लो। स्वीटी या तुम्हारे पापा जग गया तो गड़बड़ हो जायेगा।

राजेश _मां प्लीज,खोलो ना, वे लोग चैन के नींद सो रहे हैं, नही उठने वाले।

सुनिता _तू नही मानने वाला,,,

सुनिता अब चूसना छोड़ कर अपना ब्लाउज खोलने लगी। ब्लाउज के बटन खुलते ही गोल गोल बड़े बड़े सुडौल स्तन देखकर, राजेश का land और कड़क हो गया और सुनिता के मुंह के सामने ठुमकने लगा।

सुनिता, मुसकुराते हुए बोली, लगता है तेरे नुन्नू को मां का दूदू बहुत पसन्द आ गया, देखो तो कैसे मस्ती से ठुमक रहा है।

राजेश _हा मां, तुमने सही कहा। देखना अब ये कैसे जल्दी,अपना पानी छोड़ेगा।

राजेश झुककर अपने मां के चूची को एक हांथ से पकड़कर बारी बारी से मसलने लगा।

और सुनिता एक बार फिर राजेश के land को मुंह में लेकर चूसने लगी।

राजेश के द्वारा मम्मे मसलने से, सुनिता गर्म होने लगी,फिर से उसका बुर पनियाने लगी।

राजेश और झुककर, एक हाथ से उसके चूची पकड़कर उसके चुचक को ऊपर की ओर उठाया और अपने मुंह में भरकर चुसने लगा।

सुनिता सिसक उठी। उसके शरीर में वासना की लहर दौड़ना शुरू हो गया। उसके बुर से पानी की बूंद टपक़ने लगा।

राजेश, ने सुनिता को खींचकर ऊपर उठाया। सुनिता खड़ी हो गई।

सुनिता_क्या huwa,?

राजेश ने सुनिता के दोनो मम्मे अपने हांथ में लेकर उसे मसलते हुए उसे बारी बारी से चुसने लगा।

सुनिता सिसकने लगी, उसका शरीर उत्तेजना के मारे कपकपाने लगा।

फिर राजेश, सुनिता के ओंठ चूसना शुरू कर दिया, फिर गर्दन को चाटते चूमते नीचे की ओर बढ़ता गया ,

वह नाभी तक पहुंच गया।

सुनीता के मुख से लगातर सिसकारी निकल रही थी। फिर से उसके शरीर में हवस जाग चुकी थी।

राजेश, सुनिता के नाभी को जीव से छेड़ने एवम चाटने लगा।

जिससे सुनिता और उत्तेजित हो गई। वह राजेश के सिर को अपने हाथों से पकड़कर सहलाने लगाऔर आंख बंद कर,मुंह से सिसकारी निकालने लगी।

आह,,,, ऊं,,,,, आह,,,,,, मां,,,,,

अब राजेश एक हाथ से , नीचे से सुनिता के पेटिकोट के अंदर डालकर उसके chut को सहलाने लगा। जिससे सुनिता बावरी, हो गया।

सुनिता _आई,,, बेट,,, टा,,,ये,,, क्या,, कर,,, रह,, हा,,, ऊं,,, बेटा उन नई,,,,

राजेश ने एक उंगली अपने मां के बुर में डालकर अंदर बाहर करने लगा।

सुनिता, का शरीर उत्तेजना से कपकपाने लगा। उसके बुर का पानी से राजेश की ऊंगली भीग गया।

अब राजेश ने अपनी मां को घुमा दिया और उसे सामने की ओर झुका दिया।

सुनिता _सामने कमोड को पकड़कर कर झुक गई।

राजेश सुनिता की साड़ी और पेटीकोट को ऊपर उठाकर क़मर पर रख दिया। जिससे सुनिता का बुर राजेश के आंखो के सामने आ गया।

राजेश नीचे बैठा , और अपनी मां की बुर का अच्छे से मुआयना किया, और अपने जीव बाहर निकालकर, उसके भग्नासा को चाटने लगा।

सुनिता,,, नही बेटा वहा गंदा है,,,, न ऐसा मत कर,,, छी वहा गन्दा है,,,, नई,,,,

पर राजेश नही माना और उसके बुर के भगनासा को चाटने लगा। सुनिता का chut पहली बार कोई चांट रहा था। राजेश भी पहली बार किसी औरत का chut चांट रहा था। वैसे राजेश को chut चाटना पसंद नहीं था, पर यह औरत उसकी मां थी, वह अपनी मां को यह सुख भी देना चाहा, और वह नापसंद होते हुए भी, सुनिता का chut चांटने लगा।

सुनीता _का शरीर उत्तेजना से थर थर कापने लगा। उससे ठीक से खडा नही हुवे जा रहा था, उसके chut का पानी झरने की तरह बहने लगा।

ऐसा आनद सुनिता को पहले खभी नही मिला था।

सुनिता _बेटा बस कर,, आह,,,, मां,, मर,,, गई,,,, उन,,,

मै मर जाऊंगी बेटा,,,, आह,, बस कर,,,,

अब राजेश,chut चांटना बंद किया, सुनिता ने राहत की सांस ली।

अब राजेश ने अपना land पकड़ा जो तनकर ठुमक रहा था। वह उसके सुपाड़े को सुनिता के chut के छेद पर सेट किया और एक हल्का धक्का मारा।

Land ka सुपाड़ा बुर के अंदर चला गया।

सुनिता के मुंह से सिसक निकल गया।

राजेश अपनी मां की स्तन को हाथो से पकड़ मसलने लगा, फिर दोनो क़मर को पकड़कर एक जोर का धक्का मारा। land बुर को फाड़कर आधा से ज्यादा अंदर घुस गया।

सुनिता चीख उठी।

राजेश _मां चीखों मत मां चीखों मत,switi उठ जायेगी।

और इधर सच में सुनिता की चीख सुनकर स्वीटी की आंखे खुल गई।

स्वीटी _ये किसकी चीख थी, मन में कहा।

फिर इधर उधर देखा। अंधेला होने के कारण कुछ दिखा नही। पर उसने अपना मोबाइल का टार्च ऑन किया तो देखा की उसका भाई और मां दोनो बिस्तर पर नही है।

उसने बाथरूम की ओर देखा, उसे दरवाजे के नीचे कुछ उजाला नजर आया।

स्वीटी _कही, मां और भाई बाथरूम के अंदर तो नही है। पर इतनी रात को ये दोनो बाथरूम के अंदर क्या कर रहे हैं।

वह बाथरूम के पास गया, और अपनी कान दरवाजे से लगाकर सुनने की कोशिश करने लगी।

इधर राजेश, सुनिता को अपने दोनो हाथों से सुनिता की क़मर पकड़कर जोर जोर से चोदना शुरू कर दिया था।

सुनिता _आह,,, उई,,, इन,, आह,, उई मां।

राजेश पूरे जोश में था वह सुनीता को हुमच हुमाच कर चोदने लगा। बाथरूम में फाच फ़च गच गछ की आवाज गूंजने लगा। राजेश का land सुनिता के बुर में तेजी से अदंर बाहर हो रहा था।land का सुपाड़ा योनि के हर हिस्से को रगड़कर अंदर बहार हों रहा था। दोनो अपना सुध बुध खोकर उनका ध्यान केवल chudai का सुख लेने पर केंद्रित हो गया था।

राजेश _मां, बहुत मजा आ रहा है मां। तुम्हे चोदने का मजा ही अलग है। ऐसा मजा किसी और को चोदने में नही आता।

मां तुम भी तो कुछ बोलो तुम्हे कैसा लग रहा है।

सुनिता _सिसकते हुवे बोली, बेटे जल्दी करो कही तुम्हारे पापा उठ गए तो सारा मजा, सजा में बदल जायेगा।

राजेश _और जोर जोर से चोदते हुए बोला,,

मां पापा उठता है तो उठ जाने दो,, वह भी देखगा की औरत को कैसे चोदना चाहिए। औरत को कैसे खुश किया जाता है। औरत को कैसे संतुष्ट किया जाता है।

इधर स्वीटी जब सुनिता की सिसकने, राजेश की बड़बड़ाने एवम फाच फाच गच गच की आवाज सुनी तो , उसे समझते देर न लगी की अंदर क्या हो रहा है।

स्वीटी _हे भगवान क्या मां सच में भैया से chudwa रही है ।

यह सोचकर, इसके शरीर में उत्तेजना भरने लगी , उसका दिल जोरो से धड़कने लगी।

वह अपने पापा की ओर देखि जो अभी भी नींद में खर्राटे ले रहा था। स्वीटी एक हांथ अपने चूची पर रख कर, एक हांथ अपने chut पर रख कर मसलने लगी।

अपनी नजरे पापा की ओर ताकि वह उठ न जाए और कान को बाथरूम की दरवाजे पर सटा कर अंदर मां बेटे के बीच चल रही हवस का खेल से उत्पन्न मादक सिसकारियां एवम आनद में कराहने की आवाज को सुनने का प्रयास करने लगी, और इस मादक सिसकरियो को सुनकर स्वयं बहुत उत्तेजित हो गई थी।

स्वीटी डर भी रही थी की उसके पापा उठ न जाए। इसलिए अपनी नजरो को उस ओर गड़ाए रखी। वह यह जानकर की मां, और भैय्या अन्दर chudai कर रहे हैं। उसके बुर ने भी पानी बहाना सुरु कर दिया था। ओर वह भी सिसकते हूर एक हाथ से अपने चूची मसलने एवम एक हाथ अपने पेंटी के अंदर डालकर ऊंगली से बुर को रगड़ते लगी।

इधर राजेश और सुनिता किसी दूसरी दुनियां में थे। दोनो हवस के खेल में भुल गए थे,की बाहर शेखर और स्वीटी सोए हुए है, वे जोश में क्या क्या बडबडा रहे थे।

सुनिता को डर थी की उसका पति और बेटी बाहर सोए है जो उनकी आवाज सुनकर उठ सकते है। पर उन दोनो पर हवस हावी हो गया था अतः दोनो न चाहते हुवे भी मादक सिसकारियां निकालने एवम बड़बड़ाने लगे।

राजेश, सुनिता को गपागप चोद रहा था। सुनिता को बहुंत मजा आ रहा था। उसके chut का रस नदी की तरह बहकर राजेश के land से अंडकोष तक पहुंचकर फर्श पर टपक रहा था।

राजेश_सुनिता को दनादन चोदते हुए कहा? मां एक बात पूछूं।

सुनिता _सिसकतेहुवे बोली, क्या बेटे,,,,

राजेश _तुम कितनी दिनों की पानी अपने अंदर जमा करके रखी थी। कितनी पानी छोड़ रहि हो तुम। बताओ, क्या तुम्हे पापा नही चोदते?

सुनिता _सिसकते हुवे, बेटा तुम्हारे पापा को तो अपने काम से फुर्सत ही नहीं मिलता और घर आते हैं तो थक गया हूं करके,सो जाते है।

राजेश _मां, मुझे पता था की पापा तुम्हे नही चोदते। मां तुम्हारी जब भी चुदाने का मन करे, मेरे कमरे में आ जाना, मै तुम्हारी प्यास बुझा दूंगा।

सुनिता _सिसकते हुवे बोली,, नही बेटा मैं तुम्हारी मां हूं, बीबी नही मैं बार बार यह पाप नही कर सकती।

राजेश _पर मां, अपनी इच्छा दबाकर, घुट घुट के जीने से अच्छा है पाप करके जीवन का परम सुख भोगों। आह मां सच में बता नहीं सकता तुम्हे चोदने में कितना मजा आ रहा है?

सुनिता _बहुत ज्यादा उत्तेजित हो गई थी, वह अब झड़ने वाली थी।

सुनिता _बेटा मै झड़ने वाली हूं, और तेज चोदो बेटे और तेज,,,,,

राजेश _ले मां, ले, और ले,, ले अपने बेटे के land से चुदाने का मजा,,, ले मेरी जान, क्या मस्त मॉल है तू,,,,,, तुम्हे चोदने से बड़ा सुख तो और कुछ है ही नही मेरी रानी,,,

मन करता है सुबह से शाम तक बस तुम्हे चोदता रहूं।

ले, और मजा ले अपने बेटे के land का,,,

और राजेश, सुनिता को और जोर जोर से चोदने लगा उसका land सुनिता के गर्भाशय के मुख को ठोकने लगा जिससे सुनिता जन्नत में चली गईं

आ मां,,, आह,, ऊं,, मै गए,,,, गई re,, आह, मैं गईं,,,

सुनिता झरने लगी।

इधर राजेश भी चरमावस्था में पहुंच गया था। वह रुका नहीं और जोर जोर से धक्का लगाने लगा, और कराहत्ते हुए,, आह, आह,, आह मां,, मै गया,, करके झरने लगा उसके land से वीर्य की लम्बी लम्बी पिचकारी निकलकर सुनिता के chut को भरने लगा। राजेश सुनिता के कूल्हे को जोर से अपने land से सटा रखा था।

इधर switi को पता चल गया की भाई झड़ गया है वह भी अपनी chut को तेजी से रगड़ते हुए झड़ने लगी।

स्वीटी को लगा की अब भाई और मां कभी भी बाथरूम से बाहर आ सकते हैं। वह अपने बिस्तर पर जाकर लेट गई और सोने का नाटक करने लगी।

इधर सुनिता और राजेश कुछ देर ऐसे ही एक दूसरे से चिपक कर झड़ने का मजा ले ते रहे, कुछ देर बाद दोनो जब नार्मल हुए, राजेश ने अपना land सुनिता के बुर से बाहर निकाला।land फुक की आवाज करता बाहर आया। साथ ही उसका वीर्य भी सुनिता के chut से बाहर टपकने लगा जिसे देखकर राजेध मुस्कराने लगा।

सुनिता _बेटे अब जाओ तुम, बाथरूम से, कही स्वीटी और शेखर उठ न जाए अनर्थ हो जायेगा। मै आती हूं।

राजेश बाथरूम से बाहर निकला उसने देखा उसके पापा और स्वीटी सो रहे हैं, वह राहत का सांस लिया।


राजेश, अपने बिस्तर पर जाकर लेट गया।
 
बाथरूम में सुनिता ने अपनी chut की हाल देखकर मुस्कराने लगी, बदमाश ने क्या हाल कर दिया मेरी chut ki, इसकी हालत तो ऐसे हो गई है जब वो इस बुर से बाहर निकला था तब huwa था।

उसने देखा की उसकी बुर से राजेश का वीर्य निकलकर उसके जांघों तक बह रहा है। उसने कहा, कितना वीर्य छोड़ा है बदमाश ने बुर को पुरी तरह भर दिया है।

उसने वीर्य को बुर में ऊंगली डालकर अच्छे से साफ़ किया और पानी में chut को धोकर बाहर आकार बिस्तर पर लेट गई।

राजेश और सुनिता दोनो थक गए थे। कुछ समय में ही दोनो की नींद लग गई।

इधर स्वीटी की नींद उड़ चुकी थी। वह मन में सोचने लगी।

घर में कितनी संस्कार की पाठ पढ़ाती रहती है उसकी संस्कारी मां, और देखो कैसे अपने ही बेटे से chud रही है। पता नही कब से ये भाई से चुदवा रही है। मुझे तो अभी भी यकीन नही हो रहा की मां ऐसी कर सकती है।

मां के तो मजे है भाई के लंबे land से चुदवा जो रही है, मुंह से कितनी चीख एवम सिसक रही थी।

इधर मैं हूं जो रात भर भईया के land को याद कर ऊंगली से काम चलाती हूं। पर अब मैं भी भैया से जरुर चुदंगी। जब मां chud सकती है तो बहन क्यू नही। मै भी भैया से एक दिन जरुर चुदूंगी।

और वो भी मां के सामने।

यह सोचकर स्वीटी मन ही मन मुस्कराने लगी। कुछ समय बाद सोचते सोचते स्वीटी का भी नींद लग गई।

सुबह सभी नहाकर तैयार हुवे थे की किसी ने दरवाजा खटखटाया , सुनिता ने राजेश से कहा देखो बेटा कौन है।

राजेश ने दरवाजा खोला, उसने देखा की शशी का पति और राजू आया है।

राजेश _अरे चाचा जी , राजू आप लोग यहां।

राजू के चाचा का नाम मोहनलाल था।

मोहनलाल _हा, राजेश, हमे शशि ने भेजा है। तुम लोगो को घर लेके आने के लिए।

शेखर _कौन है बेटा।

राजेश _चाचा आप लोग अंदर आइए।

मोहनलाल _नमस्ते भाई साहब।

शेखर _माफ कीजिए मैने आप लोगो को पहचाना नहीं।

मोहनलाल _जी आप, हमे पहचानेंगे कैसे? हम पहली बार जो मिल रहे हैं।

शेखर _क्या आप लोग राजेश को जानते हो।

मोहन लाल _हा भाई साहब, क्या राजेश ने आप लोगो को कुछ बताया नही है?

शेखर _राजेश, आख़िर बात क्या है?

इधर सुनिता ने जब राजू को देखा, तो समझपहचान गई, ये तो वहीं लडका है जो कल अपनी चाची के साथ रंगरेलिया मना रहा था। ये लोग यहां क्यू आए है।

राजेश _पापा ये, मोहन चाचा है और ये इनका भतीजा, राजू है। ये लोग यही भरत पुर के रहने वाले है दरअसल जब हम जल प्रपात देखने गए थे तब ये लोग भी परिवार सहित पिकनिक मनाने वहा गए थे। राजू और इनकी चाची पर एक तेंदुआ ने हमला कर दिया था। मै वहा मौजूद था तो तेंदुवे से इनकी और चाची की जान बचाई थी। तो ये हमसे मिलने आए हैं।

शेखर _सुनिता, ये क्या भई इतना कुछ हो गया और हमे किसी ने कुछ बताता नही। क्या तूमको इस बात की जानकारी थी।

सुनिता _हा, जी, पर राज ने आपको बताने से मना किया था। कही आप लोग घबरा न जाएऔर यहां आने का मज़ा खराब न हो जाए। मुझे माफ़ कर दीजिए।

मोहन लाल _भाई साहब, शशि और राजू ने हमे बताया की किस तरह राज ने अपनी जान की परवाह न करते हुवे, इन लोगो की तेंदुवे से जान बचाई। अगर राजेश नही होता तो पता नही तेंदुआ शशि और राजू के साथ क्या करता।

राजेश के कारण ही आज हमारे घर में खुशी है। राजेश ने शशि को बताया था की आप लोग यहां घूमने आए हो और धर्मशाला में ठहरे हो, परिवार वालो की ईच्छा है की आप लोग एक दिन हमारे साथ गुजारे और हमे सेवा का मौका दे। ताकि राजेश न जो उपकार किया है? उसका अहसान तो हम जिंदगी भर नही चुका सकते। पर आप लोगो की सेवा का मौका मिले तो हम लोगो को बडी खुशी मिलेगी।

सुनिता _भाई साब इसकी आवश्यकता नहीं है, मुसीबत के समय, किसी की मदद करना तो हर इंसान का फर्ज है।

मोहनलाल _भाभी जी ये तो आप लोगो का बड़प्पन है। यदि साप लोग मुसीबत में पड़े लोगो की मदद करना अपना फर्ज समझते हैं तो हमे भी आप लोगो की सेवा करके हमारी फर्ज पुरी करने दीजिए।

चलिए आप सभी हमारे यहां, अब आप लोग वही ठहरिए।

सुनिता _पर भाई साब हम लॉग तो आज यहां राष्ट्रीय उद्यान देखकर दोपहर बाद यहां से घर निकल जाएंगे।

मोहन लाल _कोइ बात नहीं भाभी जी आज का नाश्ता और दोपहर का भोजन आप लोग हमारे साथ ही कीजिए। फिर वहा से घर निकल जाइएगा।

भाईसाब आप ही समझाइए न भाभी जी को, और हमे सेवा का मौका दीजिए, हमे बडी खुशी होगी।

शेखर _सुनिता, ये लोग इतना जिद कर रहे हैं तो इनकी बात रख लेते है। इनके घर नाश्ता करके राष्ट्रीय उद्यान निकल जाएंगे फिर वहा से आकर लंच करके वापस घर निकल जाएंगे।

सुनिता _ठीक है जी जैसे आप उचित समझे।

शेखर _ठीक है, मोहनलाल जी, हम लोग सामान समेटकर आप के घर चलते हैं।

मोहन लाल _शुक्रिया, भाई साहब, राजू आप लोगो को ले आएगा, मै घर चलता हू, घर वालो को यह खुशखबरी देता हूं। ताकि वे सभी खाने पीने की तैयारी अच्छे से कर सकें, मुझे इजाजत दीजिए।

शेखर _ठीक है मोहनलाल जी, आप चलिए कुछ देर बाद हम पहुंचते हैं आपके घर।

मोहनलाल _जी, शुक्रिया।

शेखर _चलो भई, सारा सामान पैक करो।

सभी लोग सामान पैक करने लगे।

राजेश _लो पापा सारा सामान पैक हो गया। अब चले।

ठीक है भई, चलो चलते।

राजेश _पापा मै मैनेजर को कमरे का चाबी देकर आता हू। आप लोग कार के पास चलो।

राजेश और राजू दोनो मैनेजर के पास चाबी छोड़ आए। इधर शेखर, सुनिता और स्वीटी ने सारा सामान गाड़ी में रख दिया।

चाबी देकर राजेश और राजू दोनो कार के पास पहुंच गए।

राजेश _पापा, मै कार चलाता हूं। राजू सामने बैठ कर घर का रास्ता बताएगा, आप लोग एडजेस्ट कर पीछे बैठ जाओ।

शेखर _ठीक है बेटा। चलो सुनिता, और स्वीटी कार में बैठो।

शेखर,स्वीटी और सुनिता पिछे बैठ गए।

राजू सामने बैठ गया। राजेश कार चलाने लगा

राजेश _अच्छा राजू किधर से चलना है बताना।

राजू _ठीक है भैया, यहां से राइट ले लो।

शेखर _और कितना दूर बचा है राजू।

राजू _बस पहुंचने वाले है अंकल।

कुछ देर बाद, लो हम पहुंच गए। वो जो सामने दो मंजिला मकान दिख रहा है, वही है।

सभी लोग मकान देखने लगे।

शेखर _भई, ये मकान नही ये तो बंगला लग रहा है। काफी बड़ा और खूबसूरत लग रहा है, तुम्हारा घर राजू ।

कार जब घर के पास पहुंचा, राजू ने चौकीदार से गेट खोलने कहा। चौकीदार ने गेट खोला। राजू ने राजेश को कार अंदर ले जाने को कहा।

राजेश ने कार अन्दर ले गया। सभी लोग कार से उतरे। राजेश ने कार साइड पर लगाया।

मकान काफी बड़ा था। चारो ओर गार्डन ,कई प्रकार के पेड़ पौधे लगे हुवे थे। बीच में मकान बना huwa था जो किसी बंगला से कम नहीं था।

इधर राजू के परिवार वाले बेशब्री से आने का इंतजार कर रहे थे। जब उन्हें पता चला की वे पहुंच गए तो दरवाजे पर खड़े होकर देखने लगे।

मोहनलाल _आइए जी, आप लोगो का गरीब खाने में स्वागत है। सभी लोग हाथ जोड़कर अभिवादन करने लगे।

शेखर _मोहन लाल जी, क्यों हमे शर्मिंदा कर रहे। आपका घर तो किसी महल से कम नहीं।

सभी लोग घर के अंदर गए। अंदर बहुत बड़ा हाल था।

मोहनलाल _आइए जी बैठिए आप लोग।

सभी लोग सोफे पर बैठ गए।

मोहनलाल _पहले,आप लोगो को अपने परिवार वालो से परिचय करा दू ।

ये है मेरे बड़े भाई मदन लाल,

मदन लाल _नमस्ते भाई साहब, नमस्ते भाभी जी। आप लोग यहां आए, इसके लिए धन्यवाद जी।

मदन लाल _ये मेरी पत्नी उर्मिला और राजू को तो जानते हो। मेरा बेटा है, और ये मेरी बेटी सोनी है।

उर्मिला _नमस्ते भाई साहब, नमस्ते दादी।

सोनी _नमस्ते अंकल, नमस्ते आंटी।

सुनिता _नमस्ते बेटा, कौन सी क्लास में पढ़ती है।

सोनी_, जी,11वी।

मोहन लाल _इनसे मिलिए जी। ये है मेरी पत्नी शशि।

सुनिता _मन में सोचने लगी, तो ये शशि है, राजू की चाची जो कल राजू से chud रही थी। देखो तो कितनी भोली लग रही है।

शशी _नमस्ते भाई साहब, नमस्ते दीदी।

सुनिता _नमस्ते जी।

मोहन लाल _ये दोनो मेरी बेटी है चंचल जो 10वो में पढ़ती है। और ये घर की सबसे छोटी पायल क्लास 8में है।

चंचल, पायल_नमस्तेअंकल ,नमस्ते आंटी।

शेखर, सुनिता _नमस्ते बेटा।

शेखर _भाई, मै राजेश का पिता जी हू। ये राजेश की मां, सुनिता है। और ये मेरी बेटी स्वीटी। मेरे बेटे से तो आप लोग कल से परिचित हो।

मदनलाल _भाई साहब, राजेश के कारण ही हम सब यहां बैठें है। अगर कल राजेश तेंदुवे से शशि और राजू की जान नही बचाई होती तो आज हमारे घर में मातम छाया होता। बड़ा बहादुर बेटा है आपका जो खुद अपनी जान की परवाह न कर दूसरो के लिए तेंदुए से भीड़ गया।

शशि और राजू ने बताया की किस तरह राजेश का साहस देखकर तेंदुआ को भागना पड़ा।

आप लोग हमारे घर आए, हमे सेवा करने का मौका दिया इससे हम लोगो को बहुत खुशी हुई।

शेखर _भई आप लोगो की आग्रह को हम ठुकरा नही सके।

मदनलाल _राजेश, बेटाशशि कह रहि थी की तुम्हारे पीठ पर तेंदुए का पंजा लगा। जख्म ज्यादा गहरा तो नही है। उस पर दवाई लगाई की नही।

शेखर _जख्म ज्यादा गहरा नही है अंकल। कल मां ने दवाई लगा दी थी 2, 4दिनों में ठीक हो जायेगा।

शेखर _क्यू भाई सुनिता, जख्म के बारे में तो मुझे कुछ बताया नही। अच्छा कल रात जो मलहम लिऐ थे वो राजेश के लिए था अब समझा।

सुनिता _राजेश ने मना किया था जी, कुछ बताने को,खामोखा आप परेशान हो जाते।

मदनलाल _भाई कोई भी बहादुर बच्चा नहीं चाहेगा की उसके माता पिता उसकी वजह से परेशान हो।

शशि _राजेश मेरे पास एक अच्छी दवाई है, जिससे जख्म जल्दी ठीक हो जायेगा। चलो मै लगा देती हू।

मोहनलाल _हा, शशि, जाओ राजेश को रूम में ले जाकर दवाई लगा दो।

राजेश _नही चाचा जी, इसकी जरूरत नहीं है। बस थोड़ा सा खरोच आया था, ठीक हो जायेगा वैसे मां ने दवाई लगाई थी।

शेखर _बेटा जाओ, दवाई लगवा लो, कही जख्म बड़ गया तो।

राजू, राज को मेरे कमरे में ले चलो मैं आती हूं।

राजू _चलो राजेश भाई।

सुनिता _, शशी को लेकर मन में सोचने लगी, बात चित तो ऐसे कर रही है जैसे संस्कारी हो , कैसे अपने परिवार वालो को धोखा दे रही है।

फिर सोँचने लगी, मै भी तो राजेश से 2बार chud गई। मै भी तो संस्कारी होने का ढोंग कर रही और अपने पति के साथ धोखा कर रही। फिर शशि को बुरा क्यूं समझ रही मैं।

राजू, राजेश को शशि के कमरे में ले गया।

कमरे में जाकर बेड पर बैठ गया।

कुछ देर बाद शशि आई।

शशि को आते देख राज खड़ा हो गया।

शशि आते ही राजेश को पीछे से बाहों में भर लिया।

शशि _राज, पता नही तुमने मुझ पर क्या जादू कर दिया है, पता है कल रात मैं सो नहीं पाई, तुम्हारे ही यादों में खोई रही। तुम कल बीना बताएं ही वहा से चले गए।

राजेश _ये क्या कर रही हो चाची, कोई देख लिया तो क्या कहेगा?

शशि _मै सच कह रही हू re कल रात मैं ठीक से सो नही पाई। चलो निकालो अपना शर्ट मै दवाई लगा देती हू।
 
राजेश अपना शर्ट उतार दिया। शशि आलमारी में रखी दवाई, निकाल कर ले आई। शशि, राजेश के पीठ पर दवाई लगाने लगी। दवाई लगाने लगी।

शशि _दर्द कर रहा है क्या राजेश?

राजेश _दर्द तो कल से एकदम कम हो गया है चाची। मां ने भी कल दवाई लगाईं थी।

शशि _लगता है दो तीन दिनों में जख्म बिल्कुल ठीक हो जायेगा।

ओह राज तुमने मेरे लिए अपने जान की बाजी लगा दी, शशि राज को पीछे से जकड़ कर उसके पीठ पर चुम्बन लेते हुवे बोली।

आई लव यू राज।

राजेश _चाची क्या कर रही हो, कोई आ जाएगा।

तभी उर्मिला दरवाजे को खटखाते हुवे अंदर आई। अरे भई अभी तक दवाई नही लगाई हो क्या? सभी लोग नाश्ते के लिए डाइनिंग टेबल पर ,तुम दोनो का इंतजार कर रहे है।

शशि _अरे दीदी तुम, आओ बैठो न, मैंने दवाई लगा दिया है।

उर्मिला _अगर लगा दी है तो चलो राजेश कपड़ा पहन लो, नास्ते के लिए सब इन्तजार कर रहे हैं।

राजेश _जी चाची जी।

राजेश अपना शर्ट पहने लगा। उर्मिला और शशि उसे शर्ट पहनते हुवे देखने लगी।

उर्मिला _वैसे काफी फिट बाडी, बनाई राजेश,तुमने लगता है रोज कसरत करते हो।

राजेश _जी चाची जी, मै रोज सुबह जिम जाता हू।

राजू _मै, तो राजू को कहता हू, कसरत वगैरा किया कर, पर वो तो ध्यान ही नहीं देता। राजेश तुम्ही राजू को कुछ टिप्स देना ताकि उसकी भी बॉडी तुम्हारी तरह फिट हो सके।

वैसे शशि कल तुम्हारी बडी तारीफ़ कर रही थी। लगता है शशि को अपनी ताकत बहुत अच्छे से दिखाया।

शशि और उर्मिला दोनो मुस्कराने लगी।

राजेश _चाची जी, मुझे तो तेंदुवे ने अपना ताकत दिखाने का मौका ही नही दिया, ताकत दिखाने से पहले ही भाग निकला।

उर्मिला _कोई बात नही राजेश, अगर आज मौका मिले तो हमे भी दिखा देना अपनी ताकत।

शशि और उर्मिला दोनो एक दूसरे को देख मुस्कुरा रहे थे।

राजेश _मै कुछ समझा नही चाची।

उर्मिला _राजेश मै ये कहना चाहती थी कि नाश्ता करने के बाद ,हम राष्ट्रीय उद्यान तो जा रहे हैं न वहा तो कई जंगली जानवर होंगे, क्या पता वहा पर मौका मिल जाए, तुम्हे हमे अपनी ताकत दिखाने का।

शशि और उर्मिला मुंह बन्द कर हसने लगी।

राजेश _लगता है आप दोनो मेरी मजाक उड़ा रहे हों।

शशि _अरे, नही राज हम मजाक नहीं कर रहे, दरअसल मैने दीदी को बताया था तुम्हारे ताकत के बारे में। तो दीदी को भी इच्छा हो गई है तुम्हारा ताकत देखने की। शशि मुसकुराते हुए बोली।

राजेश_पर बार बार तो मौका नहीं मिलता।

उर्मिला _मौका बनाया भी तो जा सकता है राजेश।

शशि और उर्मिला एक दुसरे को देखते हुवे मुस्कराने लगी।

राजेश _मुझे तो कुछ समझ नहीं आ रहा है की आप लोग कहना क्या चाह रहे।

शशि _राजेश अब छोड़ो इन बातों को धीरे से सब समझ जाओगे, हम क्या कह रहे हैं। चलो अब चलते हैं,सब लोग हमारा नाश्ता के लिए इन्तजार कर रहे है।

अब तीनो नाश्ता टेबल पर पहुंच गए बांकी सभी लोग पहले से ही वहा, टेबल पर बैठ चुके थे।

मोहन लाल _शशि, तुमने राज के पीठ पर दवाई अच्छे से लगा दी न।

शशि _हा जी, दवाई अच्छे से लगा दी है जख्म 1_2दिनों में जल्दी ठीक हो जाएंगे।

मदनलाल,_अब सभी लोग आ चुके है भाई, अब देर क्यू लगा रहे टेबल पर नाश्ता लगाओ।

उनके यहां काम करने वाले नौकरानी, नास्ता टेबल पर सजाने लगी।

Naste में ढेर सारी चीजे बनी थी, इडली, ढोकला, डोसा, पकौड़ा, जलेबी, आमलेट, उबला अंडा, भीगा huwa चना, मूंगफली, मूंग, और भी बहुंत साड़ी चीजे थी।

शेखर _मदनलाल जी, इतनी सारी चीजे बनाने की क्या जरूरत थी।

मदनलाल_भाई साब, आप लोगो का खिदमत का मौका बार बार थोड़े ही मिलेगा।

सभी लोग नाश्ता करने लगे।

शेखर _वाह भई नाश्ता तो बहुत अच्छा बना है। सभी चीजे स्वादिष्ट बना है। क्यों सुनिता।

सुनिता _बिल्कुल सही कहा जी। वैसे ये सब बनाया किसने है।

मदनलाल _भई घर की रसोई की जिम्मेदारी तो शशि और उर्मिला सम्हालती है। इन्ही के मार्गदर्शन में सब बनाया गया है।

सुनिता _शशि और उर्मिला दोनो ही पाककला में माहिर लगती है। सच में सभी चीजे बहुत अछी बनी है।

शशि और उर्मिला _थैंक्यू दीदी तारीफ के लिए।

सभी ने जमकर नाश्ता का लुफ्त उठाया।

शेखर _लो भाई नाश्ता तो हो गया, सुनिता अब चलो तैयार हो जाओ हमे राष्ट्रीय उद्यान देखने चलना है।

मदनलाल जी मैं तो कहता हू आप लोग भी चलिए हम लोगो के साथ। साथ में चलेंगे तो और ज्यादा मजा। क्यू सुनिता तुम क्या कहती हो?

सुनिता _हा, शशि और उर्मिला चलो तुम लोग भी हम लोगो के साथ।

चंचल, पायल, सोनी _चलो न, मां हम लोग भी चलते हैं काफी दिन हो गए, हमे वहा गए।

सुनीता _लो बच्चों का भी मन है अब तो आप लोगो को चलाना ही पड़ेगा।

मदनलाल _उर्मिला तुम लोग भी चले जाओ, बच्चों के साथ।

मोहनलाल _ भैय्या। साप भी चले जाओ। भाई साहब को कंपनी मिल जायेगा। मै दुकान सम्हाल लूंगा।

मदन लाल _ठीक है भई।

चलिए सभी जल्दी तैयार हो जाइए जल्दी।

सभी लोग तैयार होने ,अपने कमरे मे चले गए।

कुछ समय बाद सभी तैयार होकर आ गए। शशि काफी खूबसूरत लग रही थी।

सोनी _चाची तुम तो इस साड़ी में बहुत खूबसूरत लग रही हो।

शशि राजेश की ओर देखने लगी। राजेश ने ऊंगली रिंग बनाकर इशारा किया की वह खाफी खूबसूरत लग रही है।

शशि शरमा गई।

मदनलाल _अरे, राजू बेटा देखो तो तुम्हारी मां अभी तक क्या कर रही है? उसे और कितना समय लगेगा तैयार होने में?

राजू _ठीक है पापा।

राजू अपनी मां के कमरे में गया।

राजू _मां और कितना,,,,,

राजू पूरा बोल नही पाया,,,, वह अपनी मां को देखता ही रह गया।

उर्मिला पारदर्शी साड़ी पहनी हुई थी। ब्लाउज पिछे से पूरा खुला huwa था। सामने से भी चूचियां ब्लाउज से बाहर निकलने के लिए। बेताब दिखाई दे रहे थे। साड़ी और पेटीकोट नाभी के नीचे बांध रखी थी। बदन की खूबसूरती देखते ही बन रहा था।

इस उम्र में भी इसके शरीर में गजब का कसावट था।

वह काफी खूबसूरत और सेक्सी लग रही थी।

राजू जब अपनी मां को इस रूप मे देखा तो देखता रह गया। राजू ने अपनी मां को ऐसे कपड़ो में पहली बार देखा था।

राजू उर्मिला के पीछे गया और उसे अपनी बाहों में भर लिया।

राजू _मां तुम तो खाफी खूबसूरत और हॉट लग रही हो। मेरा तो खड़ा हो गया।

उर्मिला _अच्छा, तुम्हारा तो हमेशा खड़ा ही रहता है, अपनी मां और चाची को देखकर,

राजू _, नही, मां आज तो सच में तुम कहर ढा रही हो। चलो न एक राउंड हो जाए।

उर्मिला _ क्यू कल अपनी चाची का लेकर मन नहीं भरा है क्या?चल हट बदमाश कही का,कही तुम्हारे पापा या बहन आ गई न ,तो मां बेटा और चाची के बीच जो चोरी छिपे खेल चल रहा हैं । सब भांडा फुट जायेगा। चल छोड़ मुझे।

राजू _मां, मै जानता हू, ये सब राजेश भाई को रिझाने के लिए है न। लगता है राजेश भाई का मोटा और लंबा हथियार लेने का मन है तुम्हारा।

शशि _तुम्ही ने बिगाड़ा है मुझे गंदी गंदी विडियो दिखाकर।

राजू _मां चलो न इक राउंड हो जाए, सच में गजब की सेक्सी लग रही हो।

उर्मिला _अच्छा, मै इतनी सेक्सी लग रही हू, ये तो राजेश के देखने के बाद पता चलेगा।

राजू _मां, तुम्हे इस रूप में देखकर तो नामर्द का भी खड़ा हो जाए, राजेश भैय्या तो कामदेव है। देखना तुम्हे देखकर ,तुम्हारी लेने के लिए तड़प उठेगा।

उर्मिला _अच्छा, देखते हैं। वैसे जब से शशि ने राजेश के बारे मे बताया है मै भी बेचैन हू उसकी ताकत देखने।

राजू _मां, आज तुम उन लोगो को घर जाने से रोक लो। फिर देखना मै राज भाई को सेट करके कैसे तुम्हारी इच्छा पुरी करता हू।

राजेश भाई, मै, चाची और तुम रात भर मजे करेंगे।

चलो अब सभी बाहर आपका इन्तजार कर रहे हैं।

जब उर्मिला रूम से बाहर निकली तो सभी उसको देखते रह गए। शशि तो मुस्कुराने लगी।

मदनलाल _भई आज तो तुम कहर ही ढा रही हो, किसी पर बिजली गिराने का इरादा है क्या?

उर्मिला _छी जी ये कैसी बाते कर रहे हो, क्या मैं पहले खूबसूरत नही थी।

मदनलाल _खूबसूरत तो तुम हमेशा थी, मेरी उर्मी, पर आज कुछ अलग ही लग रही।

शेखर _मदनलाल जी _आप दोनो भाई तो बड़े किस्मत वाले हो, जो इतनी खूबसूरत बीवियां मिली है।

मदनलाल _ये तो सच है भई।

राजेश भी उर्मिला को इस रूप में देखकर चकित था। अब तक उर्मिला अपने हुस्न को कपड़ो में छिपा कर रखी थी। आज वह अपने खूबसूरत जिस्म को उनके सामने परोस रही थी।

उनके इस रूप को देखकर राजेश का शरीर गर्माने लगा।

वैसे तो यहां पर मौजूद सभी औरते और लड़किया किसी अप्सरा से कम नहीं थी। पर उर्मिला का यह हॉट लुक, आग में घी का काम किया। राजेश को लगने लगा की सच में वह स्वर्ग में अप्सराओं के बीच में है। उर्मिला को देखकर उसके अंदर एक अलग ही मस्ती चढ़ने लगा।

राजेश उर्मिला के उफनते जिस्म को चोर नजरो से देखने लगा। जिसे राजू भाप गया।

राजू _क्या देख रहो हो भईया?

राजेश _कुछ भी तो नही।

शेखर _चलो भई अब कार में बैठो। लेट हो रहे हैं।

 
सभी लोग दो अलग अलग कारो में बैठकर राष्ट्रीय उद्यान के लिए निकल पड़े करीब एक घंटे के सफ़र के बाद वे वहां पहुंच भी गए। वहा पर जाने के बाद पता चला की यहां तो टिकट के लिए लंबी कतार लगी हुई है।



शेखर _राजेश, जाओ बेटा सभी के लिए टिकट कटा कर ले आओ।

मोहन लाल _भाई साब , यहां का कर्मचारी मेरे परिचय का है, मैने पहले ही उनसे टिकट के लिए बोल दिया है। वो आता ही होगा टिकट लेकर।

शेखर _मोहनलाल जी, ये आपने अछा किया नही तो टिकट लेने में ही काफी समय निकल जाता।

कुछ समय बाद वह व्यक्ति टिकट लेकर आ गया।

शेखर _चलो भई सब अंदर चलते हैं।

गेट पर टिकट की जांच हो रही थी। टिकट दिखाकर वे सभी अंदर चले गए।

उद्यान में विभिन्न प्रकार के जंगली जानवर, पक्षियां, रखे गए थे। जिन्हे सभी आश्चर्य से बारी बारी से देख रहे थे।

राजेश तो चोरी छिपे उर्मिला के हुस्न का रसपान कर रहा था। न चाहते हुवे भी उसकी नजर उर्मिला की ओर चला जाता। चोर नजरो से राजेश उर्मिला के सेक्सी बदन का मुआयना कर रहा था।

राजेश _मन में, हाय क्या मॉल है साली, न चाहते हुवे भी, मेरी नजर उसकी ओर चली जाती हैं। कही कोई मेरी नजरो को पकड़ न ले।

उर्मिला का भी ध्यान जानवरो पर कम और राजेश पर ज्यादा था, वह राजेश की नजरो को ताड़ रही थी कि उसके हुस्न का असर राजेश पर हो रहा है कि नही।

जब राजेश और उर्मिला की नजर मिलती तो उर्मिला मुस्कुरा कर अपनी नजर झुका लेती।

राजू ने राजेश की नजरो को भाप लिया।

राजू _राजेश भाई, लगता है आपका ध्यान जानवरो पर नही, कही और है। हमे भी तो बताओ आख़िर बात क्या है?

राजेश _राजू तुम बुरा मत मानना, पर सच में तुम्हारी मां, उर्मिला चाची, गजब की लग रही है।

राजू _भैया, मै जानता था की तुम मां को ही ताड़ रहे हो और उसके हुस्न का अपनी नजरो से रसपान कर रहे हो। मां लग ही रही हैं इतनी हॉट और सेक्सी।

राजेश _राजू क्या तुम्हे बुरा नही लगा, यह जानकर की मेरी नजरे तुम्हारी मां पर गड़ी है।

राजू _नही भईया, मुझे बिल्कुल भी बुरा नही लगा। कोई अप्सरा सामने हो तो मर्द उसे ही देखेगा न की जानवरो को।

राजेश _वैसे राजू, तेरे और शशि चाची के बीच सम्बंध कैसे बना? कुछ तो वजह रही होगी।

राजू _भईया, इसकी वजह भी मां है?

राजेश चौंकते हुवे क्या? तुम्हारी मां की वजह से।

राजू _हा, भाई।

उद्यान में घूमते हुवे उन्हें २घंटे से ज्यादा का समय हो चुका था। वे सभी घूमते घूमते थक गए थे।

सुनिता _अपने पति से बोली, सुनो जी हम सब थक गए हैं। चलो थोड़ा कही बैठकर आराम कर ले।

मोहनलाल_यहां बाजू में ही बड़ा सा गार्डन है चलो भाभी जी वहा जाकर आराम करेंगे।

सभी लोग गार्डन पहुंच गए जो उद्यान के अंदर ही था।

स्वीटी _अरे यहां तो झूला भी है,चलो सोनी, चंचल झूला झूलते हैं।

सभी लड़किया झूला झूलने लगे।

मोहनलाल और शेखर आपस मे चर्चा करने लगे।

इधर तीनो औरते भी गार्डन में बैठ कर सुस्ताने लगे। आपस में बातचीत करने लगे।

राजू और राजेश दोनो पेड़ के नीचे घास में लेट कर आराम करने लगे।

राजेश _राजू, तुम कह रहे थे कि तुम्हारी मां की वजह से शशि चाची और तुम्हारे बीच संबंध बना, पर ये हुवा कैसे?

राजू _भैया सुनकर आपको अजीब लग सकता है पर ये सच है? अब आप तो मेरे और चाची के बीच जो चल रहा है उसके बारे में जानते ही हो, मै एक राज और बताना चाहूंगा।

राजू जानता था की उसे राजेश को उनके और मां के बीच जो चल रहा है उसके बारे में भी बताना होगा। तभी हम चारो आज रात मिलकर मजा ले सकते है। और मां की भी इच्छा पुरी हो पाएगी।

राजू _राजेश भईया, मां और मेरे बीच भी शारिरिक सम्बंध है।

राजेश _राजू, ये क्या कह रहा है?

राजू _हा भैया, सुनने में आपको अजीब लग रहा होगा पर ये सच है।

राजेश _राजू पर ये सब शुरू huwa कैसे?

राजू _ये एक साल पहले की बात है।

जब करोना से पूरे विश्व में हाहाकार मचा huwa था। मै लापरवाह था। मां के मना करने के बाद दोस्तो के साथ खेलने चला जाता था।

एक दिन मेरे गले में खराश आया, और शाम तक मुझे बुखार लग गया।

घर वाले भयभीत हो गए। उन्होंने हमारे निजी डॉक्टर को इसकी जानकारी दी। डॉक्टर घर आकार मेरा सामान्य जांच किया। लक्षण देखकर वह समझ गया की मुझे करोना है।

घर वाले काफी डर गए अब क्या होगा?

डॉक्टर ने कहा देखो घबराने की जरूरत नहीं है। राजू को किसी कमरे में 14 दिनों के क्वार्नटाइन में रखना होगा। मै दवाई दे देता हूं, उसे नियमित रूप से खिलाना साथ ही इसके खाने पीने का विशेष ध्यान रखना होगा।

आप सभी घर में भी मास्क का उपयोग करें। राजू के कमरे में कोई प्रवेश न करे बाहर से ही दवाई और भोजन उसके दरवाजे पर रख देना वह खुद ले लेगा।

ऐसा कमरा हो जहां किसी का आना जाना न हो। तो अच्छा रहेगा।

मदन लाल _राजू को ऊपर के कमरे में क्वारेंटाइन कर देते है। ऊपर के सारे कमरे खाली है। कमरे की साफ़ सफाई कर दो मै मैकेनिक को फ़ोन कर देता हूं कमरे में टीवी लगा दे, ताकि अकेला बोर न हो।

उर्मिला _ठीक है जी।

अब मै नीचे के कमरे से निकलकर ऊपर के कमरे में सिफ्ट हो गया। मुझे दोस्तो से बुरी लत लग गई थी। पोर्न विडियो देखने और मुठ मारने की। जब तक मैं पोर्न विडियो देखकर मुठ नहीं मार लेता, मुझे नींद नहीं आती।

मै ऊपर दिन भर पढ़ाई ,टीवी देखने, पोर्न देखकर अपना समय काटने लगा आख़िर 14दिन कमरे से बाहर नहीं निकलना था।

मां मुझे दवाई और खाना देने ऊपर आती थी और मेरी तबियत के बारे में जानकारी लेती,दरवाजे के बाहर दवाई और भोजन रख कर चली जाती।

पर 2दिन बाद, मां भी करोना पॉजिटिव हो गई।

डॉक्टर ने उन्हे भी क्वारेंटाइन में रहने की हिदायत दिया।

डॉक्टर ने कहा की दोनो मां बेटे एक ही रूम में क्वारेंटाइन हो जाओ, एक दुसरे का देखभाल भी कर सकोगे। सभी लोगो को यह बात उचित लगा।

मां जब मेरे रूम में अपनी कपड़े एवम समान लेकर पहुंची। मुझे पता चला की मां भी करोना पॉजिटिव हो गई है। अब वह 14दिनों तक हम साथ ही एक ही रहेंगे।

उर्मिला _तुम्हारी तबियत अब कैसी है बेटा?

राजू _कल से बेहतर हू मां।

मां क्या आप भी करोना पॉजिटिव है।

उर्मिला _हा बेटा, अब हम दोनो को इसी रूम में क्वारेंटाइन में रहना है।

राजू _ओह मां ये सब मेरे कारण huwa है? अगर मै आपका कहना माना होता और दोस्तो के साथ बाहर नही घूमता तो आज यह दिन नही देखना पड़ता।

उर्मिला _बेटा अब जो होना था हो गया। अब हमे 14दिनों तक इसी कमरे में रहना है ताकि घर के अन्य सदस्यों को करोना न हो।

दिनभर मां टीवी देखकर, मै भी कभी टीवी देखता कभी पढ़ाई करता, निर्धारित समय पर चाची आकर दरवाज़े पर भोजन रख देती। मां और मैं साथ में भोजन करते।मां समय समय पर दवाई स्वयं खाती और मुझे भी खिलाती, इस तरह पहला दिन कट गया। रात में भोजन करने के बाद मां और मैं सोने की कोशिश करने लगे। हम दोनो अलग अलग चादर ओढ़ रखे थे।

मां को तो कुछ समय बाद नींद आ गई, लेकिन मुझे नींद नहीं आ रही थी क्यू की जब तक मैं मोबाइल पर पोर्न विडियो देखकर मूठ नही मार लेता मुझे नींद नहीं आती थी। मुझे बुरी लत लग चुका था।

मैने मां की ओर देखा मां दूसरी ओर करवट लेकर चादर ओढ़ कर सो चुकी थी।

तब मैंने मोबाइल पर पोर्न विडियो चलाया ,इयर फ़ोन कानो लगाया और विडियो देखकर मूठ मारी। जब मेरा पानी झड़ा तब मैने राहत की सांस ली।

इस तरह मेरा रोज का काम हो गया। मां के सोने के बाद मैं रोज मोबाइल पर पोर्न विडियो देखकर, अपना land हिलाता और जब मेरा पानी निकलता मै चैन की नींद सो जाता।

एक दिन मैं इयर फ़ोन कान में ही लगाया ,पानी झड़ने के बाद मैं विडियो देखता रहा, मेरा नींद कब लग गया पता नही चला।

मां की नींद खुली उसने देखा मोबाइल चल रहा हैं, मेरे कानो पर इयर फ़ोन लगा huwa है। मां ने मेरे कानो से इयर फ़ोन निकाली और moble को ऑफ करने को हुई तभी उसकी नज़र मोबाइल पर चल रही विडियो पर गई।

वह विडियो देखकर दंग रह गई। छी कितना गन्दा विडियो है। विडियो में महिला और पुरुष नग्न होकर chudai कर रहे थे। महिला चीख रही थी।

ऐसा विडियो शायद मां ने पहली बार देखी थी। वह विडियो देखकर दंग रह गई थी। हे भगवान ये मै क्या देख रहा हूं। छी कितना गन्दा विडियो है।

क्या राजू हर रोज यह गंदा विडियो देखता है। छी कितना बिगड़ गया है राजू। वह पहले दफा ऐसा विडियो देख रही थी। किसी पुरुष का औरत का chut चाटना, महीला द्वारा पुरुष का land चूसना। वह कुछ समय तक विडियो आंखे फाड़े देखती रही। उस विडियो में उसने देखा किस तरह पुरुष कई आसनों में chudai करता है उसने मोबाइल अपने कानो पर लगाकर आवाज सुनी, उसे महिला की सिसकने, आनद में चीखने, पुरुष का आनंद से कराहने की आवाज सुनाई दी। वह विडियो देखकर हतप्रभ थी, दुनियां में ये सब भी होता है।chudai video शुरू में तो उसे गंदा लगा पर धीरे धीरे उसे जिज्ञासा वस,विडियो को और देखने की इच्छा हुईं, और विडियो देखकर वह बहुत गर्म हो गई।

अंत में जब वह पुरुष झड़ने वाला था तो वह पुरुष महिला के chut से land निकलकर कराहते हुवे औरत के मुंह में झड़ गया। महिला सारा वीर्य मजे से पी गई।

उर्मिला _छी कितना गन्दा है विडियो, राजू रोज देखता है। अब समझ आया रोज उसके चड्डी पर सफेद धब्बा कहा से आता है।

छी कितना बिगड़ गया है।

इसकी अभी खबर लेती हूं। जैसे ही वह राजू को उठाने को हुई। वह सोंची। अभी ये सो रहा है इसे जगाना ठीक नही। कल सुबह इसकी खबर लेती हूं।

पता नही ये सब कहा से सीखा है।

इधर मोबाइल पर उर्मिला जिज्ञासा वस दो चार और वीडियो देखी, वह बहुत अधिक उत्तेजित हो गई उससे रहा ना गया और अपनी बुर पे ऊंगली डालकर उसे रगड़ने लगी, अपनी ऊंगली को बुर में अंदर बाहर करने लगी। और कुछ समय बाद जब वह झड़ी तब उसने राहत की सांस ली।
 
उर्मिला जब सुबह उठी तो, राजू अभी भी सोया huwa था। उर्मिला का मन तो कर रहा था कि वह राजू को उठाकर पूछे की ये गंदी विडियो देखते हुए तुम्हे शर्म नही आई, जबकि तुम्हारी मां तुम्हारे बाजू में ही लेटी हुई थी।



पर उसे लगा की जगाकर उसे यह बाते कहना ठीक नहीं, हो सकता है वह यह वीडियो पहली बार देखा हो और उसका नींद लग गया हो।

इसलिए अभी उसको कुछ कहना ठीक नहीं आज रात देखती हू ये क्या करता है?

उर्मिला बेड से उठी और बाथरूम में जाकर फ्रेस होकर स्नान कर ली।

जब राजू उठा तो उर्मिला प्रतिदिन की तरह उसके साथ सामान्य व्यवहार किया। लेकिन मन में या बात आने लगी की इसकोमैं बच्चा ,भोला और मासूम समझता था? पर ये तो बिगड़ चुका है, कितना गन्दा फिल्म देखता है?

राजू इस बात से बेखबर ही था कि उसकी मां जान चुकी वह पोर्न देखता है।

राजू दिनभर पढ़ाई, करने, टीवी देखने और मां के साथ इधर उधर की बाते करने में गुजार दिया। शशि समय समय पर नाश्ता भोजन लाकर दरवाज़े पर रख देती और मोबाइल से काल कर उर्मिला को बता देती की भोजन रख दिया है लेलो।

उर्मिला दरवाजा खोल के भोजन ले लेती और दोनो मां बेटे साथ में भोजन करते, उर्मिला समय पर स्वयं दवाई लेती और राजू को भी देती, जिससे दोनो के स्थिति में तेजी से सुधार होने लगा था।

रात में उर्मिला जानना चाहती थी कि आख़िर राजू मेरे सोने के बाद करता क्या है? वह राजू की ओर पीठ कर करवट लेकर लेट गई। और सोने का नाटक करने लगी।

राजू को लगा की उसकी मां सो गई है। वह मोबाइल पर पोर्न ऑन कर देखने लगा। कानो पर इयर फोन लगा लिया। अपने दाया हाथ अपने चड्डी के अंदर डालकर अपना land हिलाने लगा।

सुनिता को इसका अहसास हो गया कि राजू कुछ हिला रहा हैं। वह अचानक से राजू की ओर करवट लेकर लेट गई। उसने देखा राजू चादर के अंदर कुछ हिला रहा हैं?

उर्मिला _क्या कर रहा है तू?

राजू डर गया, वह land हिलाना बंद कर दिया और मोबाइल को भी देखना बंद कर दिया।

राजू _क्या huwa मां?

उर्मिला _मैने कहा क्या कर रहा था तू?

राजू _डरते हुवे, कुछ भी तो नहीं।

उर्मिला _कुछ भी नही, दिखा अपना मोबाइल क्या देख रहा है जरा मै भी तो देखू?

उर्मिला राजू के हाथ से मोबाइल छिनने लगी। राजू अपनी मां को मोबाइल नही दिखाना चाहता था।

पर उर्मिला उससे मोबाइल छीनने में सफल हो गई।

उसने देखा मोबाइल, पर पोर्न वीडियो चल रहा था जिसमे एक पुरुष औरत को kutiya बनाकर चोद रहा था।

उर्मिला राजू को वीडियो दिखाते हुवे बोली, ये क्या है? रात में मेरे सोने के बाद यही सब गंदा विडियो देखता है तू। और हिला हिला कर अपना पानी निकलता है?

छी कितना बिगड़ गया है तू?

मुझे बता ये सब किसने सिखाया तुझे, कब से कर रहा ये सब तू।

नही तो तेरे पापा को फ़ोन कर बताती हूं की तू कितना बिगड़ गया है? बोल चुप क्यू है?

राजू डर गया।

राजू _मां मुझे माफ़ कर दो, ये सब पापा को मत बताना प्लीज?

उर्मिला _किसने सिखाया, तुझे ये गंदा काम?

राजू _मां, वो दोस्तो ने, वो सब भी ऐसी करते हैं।

उर्मिला _मै तो पहले से ही जानती थी कि तेरे दोस्त लोग ठीक नही है। मै उन लोगो के साथ घूमते फिरने के लिए मना करती थी। तू मानता नही था। यही सब सीखने के लिए जाता था तू इनके साथ बोलो।

राजू _मां, मुझे माफ़ कर दो, मै उन लोगो के साथ अब नही जाऊंगा। ओर ऐसी गंदी हरकत नही करूंगा। मां तुम पापा को कुछ नही बताओगी न।

उर्मिला _अगर तू सुधर गया तो नही बताऊंगी। फिर से गंदी हरकत की तो, तेरे पापा को जरूर बताऊंगी।

राजू _नही मां, अब से ये गंदी हरकत नही करूंगा।

उर्मिला _ठीक है, अब सो जा,।

राजू _सोने की कोशिश करने, लगापर वो ठीक से सो न पाया। उसे पॉर्न देखकर अपना पानी निकालकर सोने की आदत पड़ चुकी थी। दुसरे दिन भी वह ठीक से सो नहीं पाया। तीसरे दिन उससे रहा नही गया?

उसे लगा की उसकी मां सो गई है, और वह मोबाइल पर पोर्न देखकर फिर land हिलाने लगा।

इधर उर्मिला को फिर अहसास हो गया कि राजू फिर अपना land हिला रहा है।

वह राजू की ओर मुंह करके बोली, तू फिर शुरू हो गया, मेरे मना करने के बावजूद।

राजू _मां, मै दो दिनों से ठीक से सो नहीं पाया हूं। मुझे आज नींद नहीं आ रही। इसकी आदत जो पड़ चुकी हैं। प्लीज मां आज करने दो न।

उर्मिला _मै जानती हूं, ये गंदी लत इतनी आसानी से छूटने वाली नही है।

कुछ देर सोचने के बाद बोली ठीक है आज कर ले पर कल मत करना।

राजू _ठीक है मां, थैंक यू।

राजू अब अपने land को पोर्न देखते हुए हिलाने लगा। इधर उर्मिला राजू की ओर पीठ किए लेटी थी।

काफी देर land हिलाने के बाद भी जब उसका land का पानी नहीं निकला।

उर्मिला _बेटा और कितने देर तक हिलाएगा? अभी तक नही huwa क्या?

राजू _मां, बस अब होने वाला है?

उर्मिला भी गर्म हो चुकी थी की उसका बेटा, उसके बाजू में लेटकर अपना land हिला रहा है। उसे भी नींद कहा आने वाली थी।

उर्मिला अब राजू की ओर मुंह करके राजू को land हिलाते हुए देखने लगी। राजू की नजर गंदी विडियो पर था और वह चादर के अंदर से अपना हाथ अपने चड्डी पर डालकर तेजी से हिला रहा था।

उर्मिला भी काफी गर्म हो चुकी थी।

उर्मिला _इधर दिखा मुझे, क्या देख रहा है मै भी तो देखूं?

राजू _मां, ये गंदा विडियो है, तुम मत देखो।

उर्मिला _गंदा है तो तू क्यू देख रहा है? दिखा मुझे भी।

उर्मिला राजू के कंधे पर अपना सिर रखकर लेट गई। अब राजू और उर्मिला दोनो एक साथ पोर्न देखने लगे।

उर्मिला _छी कितनी गंदी फिल्म बनाते हैं लोग।

राजू _मां, लोग देखते है, इसलिए ऐसी वीडियो बनाते है।

उर्मिला _ऐसा भी कोई करता है क्या जैसा इसमें दिखाते हैं।

राजू _मां करते होंगे, तभी तो दिखाते हैं।

उर्मिला _कितना बड़ा है इसका।

राजू _किसी किसी का होता होगा,इतना बड़ा तभी तो ये पोर्न हीरो है।

वीडियो में अब पुरुष महिला का chut चाटने लगता है।

उर्मिला _छी, देखो तो कैसे चांट रहा है, इनको घिन नही आती क्या।

राजू _मां इन दोनो को बहुत मजा आ रहा है। देखो औरत कैसे सिसक रही है?

क्या पापा आपकी वो नही चाटता?

उर्मिला _क्या ये भी कोई चाटने का चीज है।

राजू _मां मेरे दोस्त तो कहते हैं की औरत को चटवाने में बड़ा मज़ा आता है।

कभी पापा से तुम भी चटवा कर देखना।

चुप बदमाश कही का तू गंदी फिल्म देखकर बिगड़ गया है।

वीडियो में अब पुरुष औरत को चोदने लगता है।

राजू _मां, सेक्स करने में तो बड़ा मजा आता होगा न। जब देखने में इतना मजा आता है तो करने पर कितना मजा आता होगा।

राजू ने एक हाथ से अपना land हिलाते हुए कहा।

मां सच बताओ न बड़ा मज़ा आता है क्या?

चुप बदमाश मां से कितनी गंदी बातें पूछता है।

उर्मिला भी राजू की बातो एवम वीडियो देखकर बहुत ज्यादा उत्तेजित हो गई थी।

उर्मिला _इतने देर तक हो गया हिलाते अभी तक निकला नही है तेरा।

राजू _मां अब होने वाला है?

उर्मिला _वैसे तू रुमाल का उपयोग क्यू नही करता, अपनी चड्डी में ही निकालता है और ऐसी ही सो जाता है। इन्फेक्शन हो सकता है।

राजू _अच्छा तो दो अपना रुमाल।

उर्मिला _बदमाश कही का अब रुमाल मैं लाकर दू।

उर्मिला बेड से उठी और एक रुमाल लाकर राजू को थमा दी, ले बेशरम कही का।

राजू अब अपना चादर और चड्डी दोनो नीचे कर दीया और अपना land उर्मिला के सामने ही बाहर निकालकर हिलाने लगा। राजू अपनी मां की ओर देखकर मुस्कुरा रहा था।

उर्मिला _तू पूरा बेशरम हो गया है।

उर्मिला राजू के land को देखने लगी।

राजू मुसकुराते हुवे अपनी मां को देखते हुए मुठ मारने लगा।

कुछ ही देर बाद आह आह करके कराहते हुवे अपना सारा मॉल रुमाल में ही छोड़ दिया।

राजू _लो मां अपना रुमाल।

उर्मिला _छी, ये गंदा रुमाल मुझे क्यू दे रहा है। फेक उसको।

राजू _अब फेकूंगा तो सारा मॉल फर्श पर गिर जायेगा। बोलो फेक दू क्या?

उर्मिला _ठीक है, दे इधर, मै बाथरूम मे रख देती हू।

राजू ने वह रुमाल उर्मिला को दे दिया। उर्मिला _छीकरके, ऊंगली से रुमाल पकड़कर उसे बाथरूम में ले गई।

उर्मिला बाथरूम में जाकर,,

उर्मिला _कितना सारा पानी छोड़ा है, बदमाश ने पूरा रुमाल भीगा दिया। वह रुमाल को सूंघकर देखी।

छी ये मै क्या कर रहा हूं।

वह रुमाल को बाथरूम मे ही छोड़कर बेड पर आ गई।

उर्मिला _अब हो गया न तुम्हारा, अब बंद कर मोबाइल और सो जा।

राजू _मां तुम्हारे सामने निकालने में मुझे आज बहुत मजा आया।

उर्मिला _चुप कर बदमाश कही का।

राजू _मां आओ न और पोर्न देखते हैं।

अब बंद कर बोली न, अब सो जा।

राजू मोबाइल बंद कर सोने की कोशिश करने लगा।

इधर उर्मिला बहुत अधिक गर्म हो चुकी थी, उसे नींद नहीं आ रही थी। उसे लगा की राजू सो गया। वह अपनी ऊंगली अपने बुर में डालकर अन्दर बाहर करने लगी।

राजू सोया नहीं था, उसे पता चल गया की उसकी मां मास्टरबेट कर रही है।

राजू अपनी मां को चादर के उपर से ही जकड़ लिया।

मां, क्या कर रही हो?

तुम्हे भी नींद नहीं आ रही क्या?

उर्मिला _तू अभी तक सोया नही।

राजू_पहले बताओ तुम क्या कर रही थी?

उर्मिला मै कया कर रही हूं, कुछ भी तो नही।

राजू _अच्छा, झूठ क्यू बोल रही हो।

राजू चादर के उपर से ही अपनी मां के बुर को सहलाते हुवे कहा, तुम यहां पर कुछ कर रही थी।

उर्मिला _सिसकते हुवे बोली, छोड़ वहा, ऐसा मत कर।

पर राजू नही माना अपनी मां की बुर को चादर के उपर से रगड़ने लगा।

उर्मिला सिसक रही थी और राजू को रोकने की कोशिश भी कर रही थी।

राजू, अब अपना एक हाथ चादर के अंदर डाल दिया और अपने मां के बुर को नाईटी के ऊपर से रगड़ने लगा।

उर्मिला रोकने की कोशिश भी कर रही थी और सिसक भी रही थी।

उर्मिला _आह, नही बेटा, ये क्या कर रहा है, मै मां हू तेरी, ऐसा मत कर।

पर राजू नही माना और लगातर नाइटी के ऊपर से उर्मिला के बुर को रगड़ता रहा।

उर्मिला बहुत ज्यादा गर्म हो गई। अब उसके मुंह से सिसकारी निकलने लगी। वह राजू का विरोध करना बन्द कर दिया।

राजू उर्मिला के बुर को लगातर रगड़ता रहा गिर वह आगे बड़ा और अपने हांथ से हाथ से उसके नाइटी को उपर उठाकर उसकी पेंटी के अंदर हाथ डालकर उसकी बुर को सहलाने लगा।

उर्मिला _के शरीर में खून दोगुने गति से दौड़ने लगा, वह उसके शरीर कपकापने लगा, उसकी आंखों की पुतलियां पलटने लगी।

अब राजू अपनी मां के बुर के छेद में अपना ऊंगली घुसाया, उसका ऊंगली गिला हो गया।

क्यू की उर्मिला अपनी बुर से लगातर पानी छोड़ रही थी।

राजू अब अपनी मां के बुर में ऊंगली को अंदर बाहर करने लगा।

उर्मिला को बहुत मजा आ रहा था।

कुछ देर तक उंगली को अन्दर बाहर करने के बाद, राजू उठ कर बैठ गया।

उर्मिला को राजू पर गुस्सा आ रहा था। वह राजू की ओर देखने लगी की राजू रुक क्यू गया।

राजू उठा और चादर को खींचकर फेक दिया और अपने मां के पैरो के पास जाकर बैठ गया।

और अपने मां के बुर को नाइटी के ऊपर से सहलाया, उर्मिला फिर सिसकने लगी।

अब राजू अपने दोनो हाथों को उर्मिला के नाईटी के अंदर डालकर उसकी पेंटी को खींचकर निकाल दिया।

उर्मिला उसकी हरकतों को देखती रही वह बहुत उत्तेजित थी राजू का विरोध करना उसके बस से बाहर थी।

अब राजू उर्मिला के नाईटी को ऊपर कर उसके बुर को देखने लगा।

राजू _मां क्या मस्त फुली हुई चिकनी और गोरी chut है तेरी। इतनी खूबसूरत chut तो मैने वीडियो में भी नही देखा है।

उर्मिला राजू की बात सुनकर शर्मा गई। अब राजू अपनी मां के बुर पर झुका और अपना जीभ निकालकर उर्मिला की बुर को चाटने लगा।

उर्मिला सिसकते हुवे बोली, बेटा ये क्या कर रहा है। नही बेटा,, आह मम्मी, मर गई। आनद में अपनी आंखे बंद कर ली।

राजू अपनी मां की chut लगातर चाटने लगा।

उर्मिला लगातर अपनी बुर से पानी बहाने लगी।

वह उत्तेजना में पागल सी हो गई।

काफी देर तक chut चाटने के बाद, राजू अपनी मां की बुर देखकर बहुत ज्यादा उत्तेजित हो गया उससे रहा ना गया वह बेड से उतरा और नंगा हो गया।

नंगा होकर फिर बेड पर अपने मां के पैरो के पास बैठ गया। ओर फिर उसके बुर चाटने लगा।

उर्मिला के मुख से लगातर सिसकारी निकल रही थीं।

अब राजू अपनी मां के टांगों को फैला कर उकडू बैठ गया और अपना land अपने हाथ से पकड़ कर अपने मां के बुर पर पीटने लगा।

उर्मिला राजू के इस हरकत से और उत्तेजित हो गई। अब राजू अपने land को अपने मां के बुर पर डालने की कोशिश करने लगा। पर यह उसका पहली बार था।लैंड बुर के छेद में जा नही रहा था।

तब उर्मिला एक हाथ नीचे ले जाकर राजू के land को अपने पकड़कर अपनी बुर कोकी छेद पर रख दिया।

राजू अब जोर का धक्का लगाया,land एक ही बार में बुर को चीरता हुआ आधा से ज्यादा अंदर घुस गया।

उर्मिला के मुंह से सिसकारी निकल पड़ी।

राजू बहुत जोश में था। वह फिर जोर का धक्का मारा land उर्मिला के बुर में पूरा अंदर चला गया।

उर्मिला फिर से सिसक उठी।

अब राजू अपने land को धीरे धीरे अन्दर बाहर करना शुरू किया।

उर्मिला को बहुत मजा आने लगी। इधर राजू अपने गति बड़ाने लगा वह पहली बार chudai कर रहा था। उसको chudai करने में बहुत मजा आने लगा।

वह बावरा हो गया, और अपनी मां की chut को जोर जोर से चोदने लगा। राजु और उर्मिला दोनो जन्नत में पहुंच गए थे।

राजू का land सुनिता के बुर में गच गच अंदर बाहर होने लगा। उसका land उर्मिला के बुर का पानी पीकर और लंबा, मोटा हो गया।

Land बुर में दनादन अंदर बाहर हो रहा था। कमरे में उर्मिला की मादक सिसकारी और land का बुर में जाने की आवाज गुज रही थी।

राजू तो स्वर्ग में पहुंच चुका था। वह अपनी मां की पेंटी को ऊपर उठा दिया और उसकी ब्रा में कैद चूची को बाहर निकाल कर खेलने लगा, उसे मसल मसल कर चूस चूस कर land को बुर में पेलने लगा।

उर्मिला तो जन्नत में पहुंच चुकी थी। वह भी क़मर उठा उठा कर राजू का सहयोग करने लगी। दोनो जमकर chudai करने लगे।

उर्मिला को chudawane में इतना मजा आने लगा की उससे रहा ना गया और वह राजू को जोर से पकड़ कर झड़ने लगी। इधर राजु भी अपने पर काबू न रख सका और जोर जोर से चोदते हुए अपनी मां की क़मर को पकड़कर आह आह करते हुवे उसके बुर के अंदर झड़ने लगा।

 
उर्मिला सुबह उठकर प्रतिदिन की तरह नहाकर तैयार हो गई। राजू देर तक सोया रहा।

उर्मिला _बेटा कितने देर तक सोता रहेगा। नाश्ता करके दवाई भी लेनी है। चलो उठो।

राजू _मां, सोने दो न।

उर्मिला _न, चलो जल्दी, उठो और बाथरूम में जाकर फ्रेस होकर नहालो। नाश्ता ठंडा हो जायेगा।

उर्मिला राजू को उठाने लगी।

राजू, जब उठा तो वह बीना चड्डी पहने ही सो गया था। उसका land अभी भी खडा huwa था, जिसे देखकर उर्मिला मुस्कुराने लगी।

राजू बाथरूम में चला गया। जब राजू काफी देर तक बाहर न निकला,,,

उर्मिला _अरे कितना देर तक नहाता रहेगा। जल्दी करो नाश्ता ठंडी हो रही है।

राजू बाथरूम से बाहर नंगा ही निकल आया। उसका land अभी भी खडा huwa था।

उर्मिला राजू को देखकर मुसकुराते हुवे। तू पूरा बेशरम हो गया है। क्या कर रहा था इतने देर तक बाथरूम में, कही फिर से हिलाने तो नही लग गया।

राजू चड्डी पहनते हुवे कहा, मां अब हिलाने का वक्त गया।

उर्मिला _अच्छा, अब सुधर गया क्या?

राजू _अब पानी निकालने वाली जो मिल गई है।

उर्मिला _क्या कहा, कौन मिल गई।

राजू _अब तो, मेरा पानी तुम निकालोगी, फिर हिलाने की क्या जरूरत।

राजू अपने मां को अपने बाहों में भर कर बोला।

उर्मिला _न, बाबा मैं तुम्हारी मां हूं, बीबी नही। मुझसे रोज नही होगा।

राजू _मां, अगर तुम नही निकालोगी तो ठीक है। अब देखो मैं क्या करता हूं।

राजू उर्मिला को छोड़कर खड़ा हो गया और अपना चड्डी नीचे खिसकाकर अपना land अपने हाथो में लेकर मूठ मारना शुरू कर दिया।

राजू _अगर तुम नही निकलोगी, तो मैं तेरे सामने ही बार बार मूठ मारकर झडूंगा बोलो।

राजू अब अपना लन्ड अपने मां को दिखाते हुवे मुठ मारने लगा।

उर्मिला _राजू ये क्या कर रहा है। तू बहुत बिगड़ गया है। मुठ मरना बंद कर।

राजू _पहले बोलो, तुम मुझे करने दोगी।

उर्मिला _ठीक है बाबा, ले लेना, पहले मूठ मारना बंद कर। चल नाश्ता कर ले, दवाई भी खानी है।

राजू _ये हुईं न बात।

राजू मूठ मारना band कर दिया।

और अपनी मां को फिर से बाहों में भर लिया।

मां कल रात बहुत मजा आया था। चलो न एक राउंड और हो जाए।

उर्मिला _चल छोड़ो मुझे। जब मेरा मूड होगा तभी दूंगी।

चल नाश्ता कर।

राजू और उर्मिला नाश्ता कर दवाई भी खा लिए।

अब राजू बेड पर लेट गया।

राजू _मां आओ न, एक बार और करते हैं। बड़ा मन कर रहा है।

उर्मिला _न, अभी मेरा मन नहीं।

राजू उठा और अपने आलमारी पे रखा पेन ड्राइव निकाल लिया, उसमे ढेर सारी पोर्न विडियो लोड कराया huwa था। उसने टीवी पे पेन ड्राइव कनेक्ट कर video चालू कर दिया।

उर्मिला जब TV के बड़े स्क्रीन पर पोर्न चलते हुवे देखी, तो वह आश्चर्य से देखने लगी।

वीडियो में मर्द औरत के kutiya बनाकर chudai कर रहा था। और चीख एवम सिसक रही थी। पूरे कमरे मे औरत की सिसकने की आवाज़ गूंजने लगी।

राजू _अपना land बाहर निकलकर उसे सहलाने लगा। वह पूरा नंगा हो गया।

राजू _मां आओ न,

उर्मिला _चल हट बदमाश कही का।

राजू उर्मिला को बाहों में भर कर अपने गोद में बिठा लिया, और उसकी चूची नाइटी के ऊपर से ही मसलने लगा।

उर्मिला फिर से गर्म हो गई। राजू ने उर्मिला को बेड पे लिटा दिया। और उसकी पेंटी खींचकर निकाल दिया।

सुनिता पोर्न देखकर गर्म हो गई थी। अब उसे भी चुदाने का मन करने लगा था।

राजू ने अब फिर से ऊर्मिला की chut चाटना शुरू किया। ऊर्मिला सिसकने लगी। वह बहुत अधिक गर्म हो गई।

ऊर्मिला _बेटा अब बस कर, अब मुझसे बर्दास्त नही हो रहा।

राजू अब ऊर्मिला को खींचकर बिठा दिया। और अपनी मां से कहा।

मां मेरा land अपने मुंह में लो न। देखो न वीडियो में कैसे वो महिला land चूस रही है।

राजू एक हाथ से अपनी मां की चूचीमसलते हुए कहा।

ऊर्मिला इससे पहले कभी land नही चूसी थी। पर वीडियो देखने के बाद उसका भी मन land चुसने का कर रहा था। वह राजु के land को मुंह में लेकर चूसने लगी।

राजू पहली बार land चूसा रहा था। उसे बहुत मजा आने लगा।

राजू _आह मां बड़ा मज़ा आ रहा है। सच में ऐसे चूसो आह पूरा अंदर ले के चूसो आह हा ऐसे ही, आह बहुत अच्छा लग रहा है।

कुछ देर बाद राजू को लगा की अगर ऐसे ही अपना land चुसवाता रहा तो वह बीना चोदे ही झड़ जायेगा। वह अपने मां से बोली। मां अब बस करो नही तो झड़ जाऊंगा।

ऊर्मिला चूसना बंद कर दी।

अब राजू अपने मां के चूची को मुंह में लेकर चूसने लगा। दोनो हाथो से मसलकर उसके चूची पीने लगा। ऊर्मिला फिर से बहुंत उत्तेजित हो गई।

अब राजू ऊर्मिला से कहा, मां देखो वीडियो में वह पुरुष औरत को कैसे चोद रहा है। हम भी वैसे ही करेंगे। तुम घोड़ी बन जाओ।

ऊर्मिला बेड पर घोड़ी बन गई। राजू नाइटी को उपर चढ़ा दिया।राजू जब अपनी मां की नितम्बो को देखा तो वह बावरा हो गया।

राजू _वाह मां क्या, नितम्ब है तेरी। राजू का land अपनी मां के नितंब देखकर,एकदम कड़ा हो गया। वह हवा में लहराने लगा।

राजू थोड़ा झुका और फिर से अपनी मां की chut चाटने लगा।

उर्मिला सिसकते हुए बोली,, बेटा अब बस कर, अब डाल दे।

राजू अपने land को अपनी मां के बुर के छेद पर रख कर, गच से पेल दिया।

Land बुर को चीरते हुए आधे से ज्यादा अंदर चला गया। बुर एकदम गीली हो गई थी।land आसानी से बुर में चला गया।

ऊर्मिला के मुंह से सिसक निकल गई।

अब राजू एक जोर का धक्का फिर से मारा, पूरा land बुर में जड़ तक समा गया।

अब राजू अपने दोनो हाथो से सुनीता केकी क़मर को पकड़ कर चोदना शुरु किया।

राजू को इस आसन में चोदने में एक अलग ही मजा आने लगा।

ऊर्मिला भी काफी गर्म हो गई थी। उसके बुर से पानी झरने लगी। वह अपने कमर को हिलाकर राजु का सहयोग करने लगी।

राजू तो फिर से स्वर्ग में पहुंच गया। वह अब ऊर्मिला की जमकर chudai करने लगा। कमरे में फिर से गच गच फैच फुच की आवाज़ गूंजने लगी, सुनिता तो आनद में मादक सिसकारियां निकाल रही थी।

आ,, उन,,, उई,,, मां,,, आई,,, और जोर से। बेटा आई और जोर से चोद अपनी मां को,,,, आई बड़ा मज़ा,,,,आ,,,, आई, उन,,,,

राजू ऊर्मिला को, और जोर जोर से चोदने लगा। ले शाली chud अपने बेटे से, अब तो रोज ही चोदूंगा तुम्हे। बोल साली चुदेगी न मुझसे, बोल

ऊर्मिला _आई,, उन,,,, आह,,, उई मां,, आह जमकर चोद मुझे,,, अब तो रोज चूदूंगी तुमसे। तेरा बाप तो अब बूढ़ा हो गया है। कभी कभार ही चोदता है। वो भी मुझे प्यासा छोड़ देता है।

राजू _तेरी प्यास तो अब मै ही बुझाऊंगा, बोल साली चुदेगी न मुझसे रोज ।

ऊर्मिला _आह, मां, ऊं,,,,, अब तो रोज चूदूंगी,, आह बड़ा मजा आ रहा है।

राजू अब अपनी मां के नाइटी को निकाल कर फेक दिया मां बेटे दोनो पूरे नंगे थे।

और अपनी मां की चूची को मसलते हुए chudai करने लगा।

उसे अपनी मां को नंगी करके चोदने में और ज्यादा मजा आने लगा।

उर्मिला भी अब बीना लाज शर्म के राजु से chuda रही थी।

उसके ऊपर हवस हावी हो चुकी थी।

कुछ देर तक दोनो इसी तरह जमकर chudai का मजा लूटे फिर राजू से बर्दास्त न huwa और वह एक जोर का धक्का मारा और उर्मिला की क़मर को अपने land se जोर से चिपका कर वीर्य की लम्बी लम्बी पिचकारी उसके गर्भाशय में छोड़ने लगा।

उर्मिला को जब गर्म गर्म वीर्य का गर्भाशय में अनुभव huwa तो वह भी झड़ने लगी।

दोनो झड़ने के बाद थककर बेड पर लेट गए।

इसके बाद दोनो जब भी इच्छा होता,chudai करने लगते। रात में दोनो नंगे सोते। दोनो नंगे नहाते। पॉर्न देखकर उसमे दिखाएं गए आसनों में chudai करते।

एक दिन दोपहरमें दोनो chudai कर रहे थे। उर्मिला घोड़ी बनी थीं। राजू उस पर सवारी करता huwa दनादन chudai कर रहा था। दोनो जन्नत की सैर कर रहे थे।

राजू _आह, मां chut मारने में कितना मजा आता है, बता नहीं सकता। सच में chudai से बड़ा सुख तो और किसी में नहीं।

उर्मिला भी chudai ka भरपूर मजा ले रही थी। उसके मुंह से मादक सिसकारियां लगातर निकल रही थीं।

तभी उर्मिला का मोबाइल बजा। किसी का काल आया था।

राजू _ये शाला कौन डिस्टर्ब कर रहा है?

उर्मिला ने मोबाइल देखी, उसका पति मदनलाल का कॉल था।

राजू, उर्मिला को गपागप पेलते हुवे कहा।

राजू _कौन बहनचोद का कॉल है? बताती क्यू नही?

शाला chudai ka मजा खराब कर रहा है।

उर्मिला मुसकुराते हुवे बोली, तेरे पापा का कॉल है।

उठा लूं क्या?

राजू अपनी मां की चूची मसलते हुए एक जोर का धक्का मारते हुए कहा।

राजू _पापा को भी इसी वक्त कॉल करना था।

कॉल उठा और बता उसको, उसकी बीवी का ठुकाई हो रहा है। डिस्टर्ब न करें।

उर्मिला _अच्छा बता दू, तेरे पापा को की तुम उसकी बीबी को चोद रहे हो।

राजू _बता दे मेरी रानी, यह भी बता दे की अब तो रोज ही chudwayegi मूझसे।land को बुर में जोर जोर से पेलते हुए कहा।

उर्मिला ने काल रिसीव की।

उर्मिला _बोलो जी कैसे काल किए थे।

मदनलाल_उर्मिला तुम लोगो की तबियत कैसी है?

उर्मिला_हम लोग तो बिल्कुल ठीक हो गए हैं जी।

मदन लाल _ये तो बडी अच्छी बात है। राजु अभी क्या कर रहा है?


उर्मिला_दिन भर कमरे में रहकर बोर हो जाते हैं न तो समय बिताने के लिए रोज नए नए खेल खेलते हैंजी, आज तो राजु ने मुझे बहुत परेशान किया?

तभी राजू ने एक जोर का धक्का chut पर मारा जिससे उर्मिला के मुंह से उई मां निकल गया।

मदनलाल _क्या huwa उर्मिला चीखी क्यू?

उर्मिला _राजु ने चिकोटी काटी जी मैं तुमसे उनका शिकायत कर रहा हूं न इसलिए। इसने तो आज मुझे परेशान ही कर दिया। जिद कर रहा था की चलो बचपन वाला खेल खेलते हैं। घोड़ा घोड़ी वाला। पहले तुम घोड़ी बनो और मैं आपका सवारी करूंगा। फिर मैं घोड़ा बनूंगा, तुम सवारी करना।

वह बहुत जिद्दी हो गया है कहना नही मानता। मजबूरी में मुझे घोड़ी बनना पड़ा और वह मेरी सवारी कर रहा है।

मदनलाल हंसते हुवे कहा लगता है, लगता है राजु का बचपना अभी तक गया नही।

उर्मिला _हा जी, ये तो शरारती भी हो गया है।

जरा राजु से बात कराना।

उर्मिला ने मोबाइल का स्पीकर ऑन कर दिया।

लो जी बात करो अपने लाडले से।

मदनलाल _तबियत कैसी है तुम्हारी।

राजु _मै तो एक दम मस्त हू पापा। तबियत बिल्कुल ठीक हो गई है। मां जो अच्छे से देखभाल कर रही है।

मदनलाल _सुनकर खुशी हुई बेटा। तुम्हारी मां बता रही थी की तुम अपनी मां को घोड़ी बनाकर उसकी सवारी कर रहे हों।

राजु _हा पापा, बड़ा मजा आ रहा है मां की सवारी करने में।

मदनलाल _हंसते हुवे, वो तो ठीकहै, बेटा पर तुम अब बड़े हो गए हो, कही तुम्हारी मां की क़मर न पकड़ ले।

राजु _मां , मेरी सवारी करने से तुम्हारी क़मर दर्द तो नहीं कर रहा है न। बुर में land पेलते हुए कहा।

उर्मिला _नही जी, मुझे भी मजा आ रहा है, खेल में।

राजु _पापा अब तो हम लोग बिल्कुल ठीक हो गए हैं। क्या कल से हम कमरे से बाहर आ जाए।

मदन लाल _बेटा बस ३रोज की ही बात है। फिर डॉक्टर के कहे अनुसार14दिन पूरे हो जाएंगे।

तब तक तुम अपनी मां की घुड़ सवारी करोऔर मजा करो।

वह हंसने लगा।

राजु _पापा मै तो 14दिन तो क्या उम्र भर, इसी कमरे में गुजारने तैयार हूं, अगर मां साथ हो तो।

उर्मिला की बुर में land पेलते हुए कहा।

मदनलाल _ठीक है बेटा तुम लोग नए नए खेल का मजा लो, और एक दुसरे का देखभाल करो।अब मैं कॉल रखता हूं।

ओके बाय पापा, लव यू।

मदनलाल _लव यू बेटा, अपना मां का ख्याल रखना।

राजू _मां अब तो पापा ने भी इजाजत दे दी है, नए नए खेल खेलकर मजा लेने की। अब तो खुलकर करेंगे।

उर्मिला _इतना कर रहे हैं वो क्या कम है।

अब राजू अपनी मां को जोर जोर से चोदता huwa झड़ने लगा। और उसके साथ उर्मिला भी झड़ने लगी।

इस तरह दोनो उस रूम में जब तक साथ रहे।chudai का मजा लेते रहे।

क्वारेंटाइन खत्म होने के बाद राजू ऊपर के ही रूम में रहने लगा। उर्मिला अपने रूम में चली गईं।

अब उर्मिला का जब भी chudne का मन करता। वह अपने पति के सो जाने के बाद रात में ऊपर राजू के कमरे में चला जाता। और दोनो पोर्न विडियो देखकर chudai का खूब मजा लेते।

राजू ने राजेश से कहा, तो भईया ये मेरे और मां के बीच शारिरिक संबंध बनने की घटना थी।

एक रात मां को शशि चाची ऊपर के रूम में जाते हुवे देख ली, और मां के पीछे पीछे वह ऊपर आ गई।

मां मेरे कमरे में आ गई, और दरवाजा बन्द कर दी। काफी देर तक मां के कमरे के अंदर रहने से, चाची को कुछ शक huwa।

अब वह हम पर नजर रखने लगी। एक दिन मैं, मां और चाची ही घर में थे। तब चाची बहाना बनाकर कुछ सामान खरीदने बाजार जा रही हूं। करके बाहर निकल गई। पर वो बाहर नहीं गई अंदर ही छिप गई।

मै और मां घर में अकेले होने का फायदा उठाकर दोनो कीचन में ही chudai करने लगे।

तभी शशि कीचन में आ गई।

शशि _तो, ये सब होता है तुम मां बेटो के बीच।

मां और मै घबरा गए।

उर्मिला _मां रोते हुए बोली, शशि हम बहक गए थे। हमसे गलती हो गई। प्लीज ये बात किसी से मत बताना, नही तो हम किसी को अपना मुंह दिखाने लायक नहीं रहेंगे।

मां ने शशी चाची के पैर पकड़ लिए।

शशि _घबराओ मत, मैं किसी को कुछ नहीं बताऊंगी। पर मेरी एक शर्त है।

उर्मिला _कैसी शर्त?

राजू को मेरे साथ, भी वही करना पड़ेगा। जो तुम्हारे साथ जो करता है?

उर्मिला _शशि ये तुम क्या कह रही हो।

शशी _हा, मै ठीक कह रही हू। तुम्हारे देवर से तो कुछ होता ही नही, बहुत जल्दी छुट जाता है उनका, और मै प्यासी रह जाती हू।

बोलो मेरी शर्त मंजूर है की नही।

राजू _राजेश भाई हमारे पास चाची की बात मानने के अलावा कोई और चारा था नही।

अब चाची भी मेरे कमरे में आने लगी जब उसकी इच्छा होती।

चाची भी गजब की मॉल थी, मै भी मां और चाची का दीवाना हो गया। अब जब भी मन करता कभी चाची तो कभी मां की chudai करता।

कल की घटना की जानकारी मां को चाची ने दी, चाची ने तुम्हारे ताकत और बड़ा और मोटा लण्ङ की बात बताई तो मां का भी मन, तुमसे chudai कराने का हो गया। अब वह भी तुमसे chudna चाहती है।

राजेश _अच्छा तो ये बात है, तो वह मुझे रिझाने के लिए ही ऐसा हॉट साड़ी पहनी हुई है।

वैसे प्यासी औरत की प्यास बुझाने में मुझे भी बड़ा मजा आता है।

जब वह land पर बैठ कर उछलती है तो मत पूछो उस समय कैसा महसूस होता है।

अब तो तुम्हारी मां की इच्छा पुरी करनी ही पड़ेगी।
 
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