Incest यह क्या हुआ - Page 8 - SexBaba
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Incest यह क्या हुआ

राजेश और उसके दोस्त पार्टी रुम मे खडे थे कि रोहन और उसके दोस्तों की नज़र उन पर पड़ी। एक ने रोहन से कहा, लो ये फटीचर लोग तो यहां भी आ गए।

यह बात जब भगत के कानो पर पड़ी, भगत ने उसका कालर पकड़ते हुए कहा, अबे फटीचर किसको बोला re, और उसे मुक्का मारने वाला था कि राजेश ने उसे रोक दिया,, भगत ये क्या कर रहा है? यहां पार्टी रुम मे नही,,

भगत _पर भाई, शाला हमको फटीचर बोल रहा है। साले की थोपड़ा तोड़ दूंगा।

राजेश _ये समय और स्थान लड़ने झगड़ने का नही।

रोहन और उसके दोस्त वहा से चले गए।

तभी राजेश ने सीमा को फोन लगाया, सीमा ने कॉल उठाया।

राजेश _सीमा जी, आप लोग है कहा हम कब से आपको लोगो को ढूंढ रहे हैं।

सीमा _राज, मै और निशा साथ ही है निशा तैयार हो रही है। बस अब हम पार्टी रुम मे आने ही वालीवाले है।

निशा _ गले में हार पहनते हुवे बोली, किसका फोन था?

सीमा _वो राज का, वह पूछ रहा था कि हम लोग कहा है? मैने कहा बस अब हम लोग आने ही वाले है।

निशा _देखो मै कैसे लग रही?

सीमा _बिल्कुल चांद की टुकड़ा। देखना सब की नजर तुम पर ही रहेगी। तुम्हारी खूबसूरती देखकर तो मुझे भी जलन होने लगी है।

निशा _वैसे तुम भी कुछ कम नहीं लग रही। चलो अब चलते हैं।

वे दोनो नीचे आने लगें, जब लोगो की नजर दोनो पर पड़ी, लोगो की नजर उन दोनो से हट ही नहीं रही थी।

भगत _भाई वो देखो निशा और सीमा आ रही है।निशा कितनी खूबसूरत लग रही है।

सभी लोग आंखे फाड़े, निशा को देखने लगे।

जब वे दोनो पार्टी रुम मे पहुंचे, कालेज की सभी सहेलियां उसे घेर लिए, वे उनके हुस्न की तारीफ करने लगें,, हाए, आज तो कयामत ढा रही हो।

रोहन और उसके दोस्त निशा के पास जाकर, हाय निशा, आज बहुंत खूबसूरत लग रही हो।

निशा _ओह, थैंक यू।

इधर सीमा और निशा की नजर किसी को ढूंढ रही थी।

सीमा _ये राजेश और उनके दोस्त कहा है?

राजेश और उनके दोस्त दूर खडे थे।

भगत _चलो भाई सीमा और निशा जी से मिलते हैं।

वे सभी निशा के पास जाने लगे।

भगत _हाय सीमा जी, हाय निशा जी। आप दोनो तो सच में बहुंत खूबसूरत लग रही हो।

सीमा _ओ सच में।

भगत _पूछ लो राजेश भाई से, क्यू भाई,,

राजेश _धीरे से बोला, हा भगत सही कह रहा है तुम दोनो ही,,,,,,,,,,

सीमा _हम दोनो ही क्या राज,,,,

राजेश और निशा की नजर मिली, निशा ने नजर झुका ली।

राजेश_दोनो की जितनी भीं तारीफ करे कम है।

सीमा हसने लगी और निशा शर्मा गई।

निशा _चलो आप सबको मैं अपनी मॉम डैड से मिलाती हू।

निशा अपनी सभी दोस्तों को मंच की ओर ले गए वहां जाकर सभी को एक एक करके अपने मॉम डैड से मिलाने लगी।

निशा _मॉम, ये मेरी कालेज की सहेलियां है।

सहेलियां _ फूलो की गुलदस्ता देते हुए।हैलो आंटी,,हैलो अंकल आप दोनो को शादी की सालगिरह की बहुत बहुत शुभकामनाएं हम सब की ओर से।

सुजाता _आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद, आप सभी मिलकर बड़ी खुशी हुई।

इसके बाद रोहन और उसके दोस्त सामने आएं।

रोहन _हेलो आंटी, हेलो अंकल।

निशा _मॉम इसे तो आप जानते हैं न,

सुजाता _तुम तो रीता का बेटा रोहन हो न।

रोहन _जी आंटी बिल्कुल सही पहचाना आपने।

हैप्पी एनिवर्सरी आंटी

सुजाता _थैंक्यू बेटा।

उसके बाद राजेश और उसके दोस्त सामने आए।

सीमा _आंटी इनसे मिलिए,,

सुजाता को हसी आ गई,,,

सुजाता _ये राजेश है और ये भगत,,

सीमा और निशा एक दुसरे को देखने लगी।

निशा _मॉम, आप इन लोगो को जानती हो।

सुजाता _हंसते हुए,, हूं।

निशा _पर कब से।

निशा _यही पार्टी में, ये लोग मुझे तुम हो समझ बैठे थे।

भगत _सॉरी, निशा जी हम लोग तो धोखा खा गए थे, आपकी और आंटी की सकल तो एकदम मिलती है। और आंटी तो लगती ही नहीं की आपकी मां होगी।

विशाल _भई इन बच्चों की गलती नही है, सुजाता को देखकर तो हर कोई धोखा खा जाता है। आख़िर मां बेटी एक दुसरे की कॉपी जो है।

और सभी हसने लगे।

राजेश, विशाल और सुजाता को फूलो की गुलदस्ता देते हुए बोला, हम दोस्तों की ओर से शादी की सालगिराह की ढेर सारी शुभकामनाएं। आप दोनो की जोड़ी सदा सलामत रहे।

सुजाता _थैंक यू राजेश।

विशाल राजेश से हाथ मिलाते हुवे थैंक्यू नौजवान।

सीमा दोस्तों से बोली,चलो अब हम पार्टी इंजॉय करते हैं।

वे सभी मंच से नीचे आ गए।

रीता रोहन को देखकर, अरे बेटा कहा चला गया था। रोहन _मॉम _मै दोस्तों के साथ था।

रीता _तुम सुजाता से मिलकर उन्हें बधाई दी की नही।

रोहन _हा, मां, मिला। मॉम तुम राजेश से मिलना चाहती थी न, देखो वो जो लड़का खडा है,,

रीता _कौन? वही जो काफी हैंडसम लग रहा है।

हा वही।

रीता _ओह तो ये है राजेश। इनसे तो मिलना पड़ेगा। जो हमारे मार्ग में कांटा बना huwa है।

रीता राजेश और भगत के पास जाती हैं।

रीता _हेलो हैंडसम।

राजेश और भगत रीता को देखने लगे।

रीता _तुम राजेश हो न। कालेज का बेस्ट स्टूडेंट।

राजेश _जी मैने आपको पहचाना नहीं।

रीता _मै रोहन की मां हू।

भगत _क्या आप रोहन की मां?, पर लगती नही।

रीता _क्यू?

भगत _आप तो उसकी बड़ी बहन लगती हो। आप की त्वचा से तो आपकी उम्र का पता ही नहीं चल रहा।

रीता _हंसते हुवे बोली, थैंक यू। तारीफ के लिए।

रीता _वैसे तुम दोनो भी काफी स्मार्ट हो।

राजेश _आंटी कुछ काम था क्या?

रीता _तुम्हारा,रोहन से काफी तारीफ सुनी थी ,इसलिए मिलने का मन किया।

राजेश _रोहन भी बड़ा अच्छा लड़का है। सुना है इस बार काफी मेहनत कर रहा है स्टुडेंट ऑफ द ईयर बनने के लिए।

मुझे लगता है कि इस बार वह जरुर सफल हो पाएगा।

रीता _वो तो है, पर पिछले बार तुमने बाजी मार ली थी,, और इस बार भी तुम ही चुनौति हो उसके सामने।

राजेश _मै उसके सामने चुनौती नही, अगर वह पुरी कोशिश करेगा तो मुझे लगता है की वह जरुर कामयाब होगा।

रीता _इस बार कोई कमी नहीं होगी क्यू की मैं हू कमी दूर करने,, और वह मुस्कराने लगी।

राजेश _जी मै समझ नही।

रीता _अच्छा आप लोग पार्टी इंजॉय करो,फिर मिलेंगे।

रीता वहा से चली गई।

भगत _भाई, जिसे हम सेक्सी फटाखा समझ रहे थे वो तो रोहन की मां निकली। क्या फिगर है साली की।

तभी सीमा राजेश के पास पहुंची, तो राज हो जाओ तैयार धमाल मचाने,, सभी दोस्तों ने अपना पोजिशन सम्हाला,,

तभी पार्टी रुम की लाइट गुल हो गई,,

अरे ये क्या huwa भाई देखो तो लाईट कैसी चली गई। कही फ्यूज तो नही उड़ गया।

तभी लोगो को गिटार की धुन सुनाई पड़ी,,

परदेसी मैने भी मोहब्बत कर ली,,कर ली,,,, परदेशी,,

परदेशी मैंने भी मोहब्बत कर ली ,,कर ली,,,, परदेशी,,

फिर फोकस एक शक्स पर पड़ा जो एक कुर्सी पर बैठकर गिटार बजा रहा था।

चारों तरफ शांति छा गया, लोग गिटार की मधुर धुन पर कही खो से गए,, सभी का ध्यान गिटार बजाते उस शख्स की ओर था।
 
गिटार की मधुर धुन सुनकर सभी कही खो गए थे। सभी का ध्यान गिटार बजाने वाले पर था, सभी उस shaks को पहचानने की कोशिश कर रहा था। जब गिटार से धुन बजना बंद huwa। हाल की सारी लाइट ऑन हो गई उसी के साथ मंच पर एक धमाका सा huwa कालेज से आई हुई लड़किया पहचान गई की ये राज है, राज टाईट जींस और टीशर्ट पहना huwa था आंखो पर चश्मा लगाया huwa tha shirt इतना पतला और चुस्त था की राजेश का गठीला शरीर साफ साफ दिखाई दे रहा था जिसे देखकर लड़किया आन्हे भरने लगे।



लडके सीटी बजाने एवम लड़किया राज,राज, राज, करके चिल्लाने लगी ।

हाल में एक ही नाम गूंजने लगा राज,राज,राज जो लोग नही जानते ।

राजेश ने हेडसेट माइक्रोफोन लगाया huwa था। वह भारी आवाज़ में बोला।

हेलो लेडीज एंड जेंटलमैन,आई एम राज मै आया हूं,इस महफिल में रंग जमाने क्या आप मेरे साथ देंगे।

लड़किया एवम लडके बोले ,हां

राजेश _जोर से बोला मैंने सुना नही, क्या आप लोग मेरा साथ देंगे।

लडके लड़कियों ने जोर से बोला,हां,,,,,,,,,,

राजेश _तो हो जाइए तैयार,आज हम सब मिस्टर विशाल और मिसिज सुजाता को शादी की सालगिराह की मुबारक देते है,,, ये पहला गीत उन दोनो के लिए,,,,,,

राजेश ने चुटकी बजाया,, म्यूजिक स्टार्ट हो गया, सीमा जो मंच के नीचे खड़ी थी वह राज का साथ देने फुर्ती के साथ उसके पास पहुंच गई।

राजेश और सीमा दोनो नाचने लगे पीछे उनके दोस्त भी उनके साथ दे रहे थे। राजेश ने गाना शुरू किया _

मुबारक ,मुबारक , मुबारक,,,

शादी की सालगिराह मुबारक,,,,,

गागर से लेकर सागर तक,,

प्यार से लेकर विश्वास तक,,

जीवन भर आपकी जोड़ी रहे सलामत,,

मुबारक,मुबारक,,, मुबारक,,,

शादी की सालगिरह, मुबारक,,

राजेश के साथ मंच के नीचे खडे, लडके लड़कियों राजेश का गाना दोहराते, एवम नाचते। बांकी लोग आंखें फाड़े मंत्र मुग्ध देखते रहे उसमे रीता, निशा, सुजाता भी थी।

निशा _ये सब इन लोगो का पहले ही प्लान था और सीमा की बच्ची इनमे शामिल थी, मुझे कुछ बताया ही नहीं, देखो तो कैसे क़मर मटका मटका के राज के साथ नाच रही है। निशा ने अपने मन में कहा,

और एक धमाका के साथ पहला गाना परफॉर्मेंस बंद हुवा,,,

लडके सिटी बजाने लगे ,लड़किया फिर राज, राज चिल्लाने लगी।

राजेश ने फिर अपने भारी आवाज़ से कहा,,

दोस्तों, आज मैं ये तुम लोगो को बताना चाहूंगा कि की राज पहली बार धोखा खा गया, जो सुजाता जी को निशा जी समझ बैठा। दोस्तों सुजाता जी की हुस्न की जितना तारीफ की जाए कम है, ये अगला गीत उन्ही के लिए है,

राजेश ने रीता की ओर इशारा करते हुवे बोला ओह मैम क्या तुम हमारा साथ देना चाहोगी।

रीता _कौन, मै,

राज _आ जाइए, तुम्हारी जरूरत है।

रीता _ओह क्यू नही।

राजेश _ लीजिए,अगला परफॉर्मेंस सुजाता जी के नाम।

राजेश ने चुटकी बजाया फिर मंच पर एक धमाका huwa और म्यूजिक शुरू हो गया।

रीता राज का साथ देने लगी। लोगो की तालियों से एक बार महफ़िल गूंज उठा। राजेश गीत गाना शुरू किया,,

ये जो तेरी सहेली है,,,

खुद में एक पहेली है,,

देख ले जो उसे, वो दीवाना हो जाए,,

ऐसी खुबसूरती देख के , चांद भी शर्मा जाए,,

ये जो तेरी सहेली है,,

खुद में एक पहेली है,,

क्या बोलूं तेरी तारीफ में ए हुस्न की मल्लिका,,

कुवा़ भी देखे तुम्हे तो, वो भी प्यासा हो जाएं,,

कजरारी आंखो से जब वो देखते हैं,,

हम भी अपने होश यूं खो बैठते है,,

कुछ अपना मन है कुछ मौसम रंगीन है,,

तारीफ करू या चुप रहूं जुर्म दोनो ही संगीन है,,

ये जो तेरी सहेली है,,

खुद में एक पहेली है,,

छुपा लूं मैं दिल में उनकी मूरत,,

आंखो में उतार लूं मै उनकी मूरत,,

जहा भी देखू फिर मैं बस वो ही नजर आएं,,

ये जो तेरी सहेली है,,

खुद में एक पहेली है,,

सुजाता अपनी हुस्न की तारीफ सुनकर शर्माने लगी।

सभी लोग गीत में झूम रहे थे और बीच बीच मे ताली बजा रहे थे।

और एक धमाका के साथ दूसरा परफार्मेंस भी समाप्त huwa

रीता को भी राजेश के साथ डांस कर खूब मजा आया।

लडके सीटी बजाने लगे और लड़किया फिर राज राज चिल्लाने लगी,,,

राजेश ने फिर भारी आवाज़ में कहा,,

दोस्तों अगली मेरे जैसे युवाओं के लिए,,

राजेश ने निशा की ओर देखकर कहा,,

निशा जी क्या आप हमारा हमारा साथ देना पसन्द करेगी,,

सभी लडके और लड़किया निशा, निशा चिल्लाने लगी।

जब निशा मंच पर पहुंची, महफ़िल तालियों की गड़गड़ाहट से गुंज उठी,,

राजेश _लीजिए अगली परफार्मेंस युवाओं के लिए,,

राजेश, निशा और सीमा दोनो राजेश का santh देने मंच पर थे,,

राजेश चुटकी बजाई,,

म्यूजिक चालू huwa राजेश के साथ निशा और सीमा भी नाचने लगी

राजेश ने गाना शुरू किया,,

मेरे उमर के नौजवानों ,,,,,

दिल न लगाना वो दीवानो,,,

मैने प्यार करके, नींद खोया चैन खोई,,,

तो बोलो ओम शान्ति ॐ,,,

शान्ति शान्ति ओम,

ओम शान्ति ओम,,

शान्ति शान्ति ओम,,,

मंच के नीचे,सभी लोग दोहराने लगे

झूमने नाचने लगे।

और इस प्रकार राजेश सीमा और निशा तीनो ने मिलकर एक से बढ़कर एक परफार्मेंस दिया। महफ़िल में राज राज ही गूंज रहा था,,

तभी सीमा ने राजेश के कानो में कुछ कहा।

राजेश ने फिर भारी आवाज़ में, लोगो से कहा,,

लेडीज एंड जेंटलमैन अभी अभी मुझे एक बात पता चला है। सुजाता जी भी एक बेस्ट डांसर हैं,कालेज के समय परफॉर्म कर हमेशा फर्स्ट आती थीं। आज हम सभी सुजाता जी से परफॉर्मके लिए रिक्वेस्ट करते हैं

ताकि आज ये महफ़िल उनकी परफॉर्म से यादगार बन जाए,,

सभी लोग सुजाता, सुजाता, सुजाता, सुजाता

करके चिल्लाने लगे,,

सुजाता विशाल की ओर देखने लगी,,,

विशाल _जाओ भई, अब बच्चे रिक्वेस्ट कर रहे हैं तो उनका दिल न तोड़ो हम भी आप भी आपकी कला देखने को मिलेगा, अभी तक तो सिर्फ सुना था।

सुजाता _नही जी, मुझ से नही हो पायेगा।

रीता_अब जाओ भी यार सभी डांस देखने लालायित हैं। आख़िर मै भी तो देखूं मेरी सहेली कैसे नाचती हैं।

महफ़िल मेंलड़के लड़कियां सुजाता सुजाता चिल्ला रहे थे,,

ना चाहते हुए भी सुजाता को मंच में जाना पड़ा।

मंच पर जाने के बाद वह माइक लेकर सभी को संबोधित की,,

सुजाता _ मेरे प्रिय जनों, हां एक समय था जब मैं कालेज के फंक्शन में अपनी नृत्य का प्रदर्शन करती थी। आज 22वर्ष बीत गए, मुझे परफॉर्म किए। समय के साथ स्थिति और परिस्थिति भी बदल जाती है,, आज मेरी बेटी निशा को नृत्य करते हुए देखती हू तो मुझे मेरे दिन याद आ जाते हैं। वैसे मेरी बेटी मेरी परछाई है,,

मेरी बेटी को देख लिए तो मुझे नृत्य करते देख लिए। इसलिए मैं आप लोगो से क्षमा प्रार्थी हूं।

राजेश,_प्लीज मैम।

सीमा _प्लीज आंटी।

निशा _मॉम सबका मन रखने के लिए, प्लीज परफार्म कीजिए,,

मंच के नीचे खड़ी लडके, लड़किया,महिलाए, सुजाता सुजाता करके चिल्लाने लगी,,,

तभी राजेश ने अपने दोस्त से ढोलक लेकर कुर्सी में बैठकर बजाने लगा सभी लोग शांत हो कर अपने अपने जगह पर जम गए।

सुजाता की पैर ढोलक की मधुर तान ,सुनकर थिरकने लगा। सुजाता अपनी साडी की पल्लू को अपने क़मर पर खोंच ली। और ढोलक की ताल में ताल मिलाकर नाचने लगी।

सभी लोग मंत्र मुग्ध हो कर देखने लगे, धीरे धीर राजेश ने ढोलक तेज बजाना शुरू किए। ढोलक के साथ ताल बैठाकर सुजाता अपनी नृत्य कला का प्रदर्शन करने लगी। लगातार ढोलक बजती रही और सुजाता नाचती रही लोगो की तालिया बजती रही तभी अचानक से ढोलक बजाना बंद huwa। निशा राजेश की ओर देखने लगी जैसे कह रही हो रुके क्यू अभी मुझे और नाचने है।

सभी लोग घटना को हैरानी से देखने लगे। तभी राजेश ने चुटकी बजाया ।

अब मंच में एक धमाका हुआ।

राजेश ने अपना एक हाथ सुजाता की ओर आगे बढ़ाया। सुजाता ने उसका हाथ पकड़ा।

उनके दोस्तो ने अपने पोजिशन सम्हाल लिया और सभी इंस्ट्रुमेंट बजाने लगे।

अब दोनो एक साथ युगल नृत्य का प्रदर्शन करने लगें चारों तरफ तालियों की गड़गड़ाहट सुनहाई पड़ने लगी राजेश और सुजाता अपना सुध भूत खोकर नृत्य का प्रदर्शन करने लगें सभी आंखें फाड़े देखने लगे और बीच बीच मे ताली बजाने लगे। अब दोनों थकने लगे सुजाता लड़खड़ा कर गिरने लगी तभी राजेश ने उसे उसे एक हांथ से उसके क़मर को पकड़ा सुजाता एक हाथ से राजेश के गले को पकड़ी थी और सुजाता का एक हांथ राजेश के हांथ में था जो ऊपर उठा huwa था। राजेश सुजाता के ऊपर झुका huwa था। म्यूजिक बंद कर दिया गया था। राजेश और सुजाता दोनो इसी अवस्था में एक दुसरे के आंखो में झांकते हुवे झुके हुए थे।

लडके सीटी बजाने लगे। लड़किया राज, सुजाता, राज सुजाता करके चिल्लाने लगी।

 
सुजाता को एक हांथ से सम्हाले उसके ऊपर झुके यू ही दोनो खडे रहे। वे एक दुसरे के आंखो में झांकते हुवे हांप रहे थे।



लोग तालिया बजा रहे थे। राज ,सुजाता , राज सुजाता की आवाज़ हाल में गूंज रहे थे।

तभी सीमा और निशा उन दोनो के पास पहुंचे, जब सीमा ने राज के कंधे पर हाथ रखा तब राज ओर सुजाता को होश आया।

सुजाता बहुंत लज्जित महसूस कर रही थी। स्थिति कुछ देर बाद नार्मल हुवा।

राजेश ने लोगो से कहा,,

दोस्तो जो हमने सुना था वो बिल्कुल सच पाया मिसिज सुजाता सच में एक कुशल नृत्यांगना है फिर से जोरदार ताली के साथ इनका सम्मान कीजिए।

लोगो ने फिर से सुजाता, सुजाता करके तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनको सम्मानित किया।

निशा ने माइक लिया और लोगो को संबोधित करने लगी,,,,,

सुजाता _मै तो नाचना भूल ही गई थी ये तो आप लोगो का प्यार ही था जो मुझे इस मंच तक खीच लाया और आप लोगो के प्यार को देखकर मेरे न चाहते हुवे भी मेरे पैर थिरकने लगे।

आज हमारे शादी के शालगिरह पर आप लोग हमारे निमंत्रण स्वीकार कर , आप यहां आए । आप लोगो का स्नेह आशिर्वाद और प्यार पाकर,हम गौरांवित महसूस कर रहे हैं। मै अपने परिवार की ओर से आप सभी का बहुत बहुत आभार व्यक्त करती हू।

मुझे आशा ही नहीं पूरा विश्वास है की आगे भी आप लोगो का प्यार और साथ हमे यू ही मिलता रहेगा।

सुजाता ने राजेश की ओर देखते हुए बोली,,

और स्पेशल थैंक्स टू राज, जिन्होंने आज की इस शाम को यादगार बनाया।

राजेश का नाम लेते ही,,

लडके एवम लड़किया राज के लिए सीटी एवम ताली बजाने लगे।

राजेश ने सुजाता की ओर देखते हुए अपना दोनो हांथ जोड़ कर अपना सिर मुसकुराते हुए नीचे हिलाया।

इधर रोहन ने अपनी मॉम रीता से बोला,, मॉम राजेश तो यहां भी बाजी मार लिया ।लगता है,हमारा सपना एक सपना ही बन कर रह जायेगा।

रीता _नही बेटे मै ऐसा होने नही दूंगी। मै आसानी से हार मानने वालो में से नही।

रीता सुजाता के पास जाकर बोली,, हाय तुम तो छुपी रुस्तम निकली। मुझे तो आज पता चला की तुम एक कुशल नृत्यांगना भी हो।

सुजाता _ओह शुक्रिया।

रीता _हाय ,राजेश के साथ तुम्हारी क्या जुगलबंदी थी ऐसा लग रहा था कि तुम दोनो प्रेमी प्रेमिका हो। और अंत में जब तुम राजेश की बाहों में थी ,बिल्कुल एक दुसरे में डूब ही गए थे। तुम लोग तो भुल ही गए थे तुम लोग कहा पे खडे हो।

सुजाता, रीता की बातो से लजा गई। सच ही था कि उसे उस समय पता नही क्या हो गया था वह राजेश की आंखों में कही खो सी गई थी।

रीता सुजाता को छेड़ते हुवे बोली।

रीता _अभी देखो तो कैसी शर्मा रही हैं उस समय तो शर्म हया सब भुल गई थी।

सुजाता _अब चुप कर बेशरम और मुझे कितना शर्मिंदा करेगी। तू भी तो खूब क़मर लचका लचका कर नाच रही थी राजेश के साथ।

रीता _पर राजेश ने तो मुझ उस तरह पकड़ा नही जैसे तुमको पकड़ा था। हाय क्या बॉडी है उसकी तुम्हारी तरह वह भी ब्रिलियंट है। सच कहती हू,क्या खूब जोड़ी तुम दोनो की।

मै तो कहती हूं की तुम उसे अपनी कंपनी मेंले लो, वह तुम्हारी कंपनी को और काफी आगे ले जायेगा। और साथ में तुम्हारा ख्याल भी रखेगा। रीता हंसते हुए बोली।

सुजाता _चुप कर बेशरम कुछ भी बोले जा रही है, मुझे किसी लडके की जरूरत नहीं।

और राजेश तुम्हे इतना पसन्द आ गया है तो तुम क्यू नही रख लेती उसे अपने कंपनी में अपना ख्याल रखवाने।

रीता _हाय अगर वो तैयार हो मेरे कंपनी को ज्वाइन करने तो अभी रख लूं।

सुजाता मुझे तुमसे एक बात करनी थी सिर्यसली,,,

सुजाता_बोलो,क्या बात है?

रीता_सुजाता, तुम तो जानती हो कि मेरा एक ही बेटा है रोहन और तुम्हारी भी एक ही लडकी है। दोनो साथ में पढ़ते हैं और एक दुसरे को जानते हैं ,क्यू न हम दोस्ती को रिश्तेदारी में बदल दे ।

क्यू क्या कहती हो,,

सुजाता _ये तो मेरे लिए खुशी की बात होगी।

रीता _ खुश होते हुए,मतलब तुम्हारी तरफ से हा है।

सुजाता _हा भई तुम तो मेरी दोस्त हो, मुझे यकीन है मेरी निशा तुम्हारे घर जायेगी तो वो खुश रहेगी।

मै निशा से इस बारे में बात करूंगी अगर उसकी ओर से हा हुई तो ,उसके जन्म दिन की पार्टी पर उन दोनो की शादी की अनाउंसमेंट कर देंगे ।

रीता _ओह थैंक यू सुजाता।

इधर राज ने अपने घड़ी में समय देखा तो 11बजने वाला था।

वह अपने दोस्तो से कहा यार राजेश तुम लोग इंजॉय करो मैं निकलता हू। मां राह देख रही होगी।

भगत _भाई तुमने तो कुछ खाया नही। चलो कुछ खा लो फिर साथ में निकलेंगे। नही यार मैं घर में खा लूंगा। पर सीमा और निशा जी से तो मिलके जाना।

राजेश _नही यार, अगर उन लोगो से मिलूंगा तो वे जाने नही देंगे। वो पूछेंगे तो तुम सम्हाल लेना।

भगत _ठीक है भाई, निखिल जाओ तुम भाई को घर छोड़ आओ।

निखिल _ठीक है भाई।

राजेश और निखिल वहा से निकल पड़े।

राजेश घर पहुंच कर दरवाजे की बेल बजाया।

सुनिता ने दरवाजा खोली वह राजेश का वेट कर रही थी।

राजेश गुनगुनाते हुए अदंर गया।

सुनिता _आ गया। काफी खुश लग रहा है।

राजेश _हा मां। आज पार्टी में खूब मजा आया।

राजेश अपना जूता निकालने लगा।

सुजाता _खाना खा कर आया होगा।

राजेश _अरे मां मै तो नाच गाने के चक्कर में खाना ही भूल गया। मां बड़ी जोर की भूख लगी है। खाना लगाओ ना।

सुजाता _अरे बेटा मैं तो समझी थी कि तुम पार्टी से खा कर आओगे मैने तुम्हारे लिए खाना बनाया ही नहीं।

राजेश _क्या? सच में।

सुजाता _मुस्कुराते हुवे, हा।

राजेश _अच्छा मां तुम मेरे लिए बादाम वाली दुध ही बना दो मै वही पीकर सो जाऊंगा।

सुजाता _पर बेटा आज तो दुध भी खत्म हो गया है। वह मन ही मन मुस्कुरा रही थी।

राजेश _ओह, तब तो मुझे आज भूखा ही सोना पड़ेगा। अच्छा मॉ गुड नाईट काफी थक गया हूं मुझे नींद आ रही हैं, मै सोने जा रहा हूं।

जब वह जाने लगा तब सुजाता बोली _अरे रूको तो मैं तो मज़ाक कर रही थी। अरे मैं तो मजाक कर रही थी। तुम हांथ मुंह धो कर डाइनिंग टेबल पर आ जाओ मैं खाना लगाती हू।

राजेश _अच्छा तो बेटे से मजाक कर रही थी।

सुजाता _हंसने लगी और बोली वैसे तुम्हारी सकल देखने लायक था। तुम्हारा चेहरा उतरा huwa लग रहा था। और वह फिर हसने लगीं।

राजेश को यह मजाक कुछ अच्छा नहीं लगा,,

वह डाइनिंग टेबल पर मुंह फूला कर बैठ गया।

सुजाता टेबल पर खाना लगा दी।

सुजाता _क्या huwa मुंह फूला कर क्यू बैठ गया।

चलो खाना खा लो।

राजेश _अब तो मैं खाना तभी खाऊंगा जब तुम अपने हाथों से खिलाओगी।

सुजाता _हस्ते हुवे बोली अब तुम बच्चे नही रहे बड़े हो गए हो, तुम अपने हाथों से ही खाना खाओ।

सुजाता _अब मेरे तरफ घूर के क्या देख रहे हो, चलो खाओ।

राजेश मुंह फुलाए ही खाना खाने लगा।

वह खाना खाते हुवे बोला,

राजेश _अब तुम बहुत बदल गई हो, मुझे प्यार नही करती। मुझे तो तुमने पराया ही बना दिया।

सुनिता _तुमने काम ही ऐसा किया है। सजा तो मिलेगी ही।

राजेश _इसमें मेरी अकेले का ही गलती तो नही थी। जो कुछ भी huwa है आपकी भी गलती है।

सुनिता _इसी लिए तो मैं तुमसे दूर रहती हू ताकि फिर से कोई गलती न हो जाए।

राजेश _पर मां तुम्हारा ये पराया पन अब मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लगता। मन तो कर रहा है कि मैं अपने लिए एक नई मां ले आऊ। जो मुझे प्यार करेगा।

सुजाता _हंसते हुवे, अच्छा जी, अब तुम नई मां लाओगे। एक बीवी का ख्याल तो तुम्हारे पिता जी रख नही पा रहे। दूसरा बीवी कितने दिन टिकेगी।

राजेश _पापा, न रख सकें तो क्या मैं हू न उसका ख्याल रखने।

सुजाता _अच्छा कैसे ख्याल रखेगा उसका।

राजेश _एक बेटे की तरह और एक,,,,

सुजाता _और एक क्या बोलो, रुक क्यू गए,,

राजेश _एक पति की तरह,,

सुजाता _हू, तो ये बात है तुम मां की प्यार के लिए नही मजे के लिए नई मां को लाना चाहता।

सुजाता _मुंह फुलाते हुवे बोली, तो जाओ ले आओ नई मां। जो तुम्हे गोद में बिठाकर खाना खिलाएगी, और जब तुम्हारा मन करे तुम उसे अपनी गोद में बिठा लेना,, और वह मुंह फूला कर बर्तन उठा कर कीचन की ओर जाने लगीं।

तभी राजेश उठ कर उसे पीछे से बाहों मे भर लिया। अरे मां तुम तो नाराज हो गई। मै तो मजाक कर रहा था।

तुमसे सुंदर और प्यारी मां भी मुझको मिल सकता है क्या?

सुजाता _छोड़ो मुझे अब मसका मत लगाओ।

राजेश _अरे मां सच कह रहा हूं, उस रात आपके साथ जो मजा आया था न वैसा मजा तो मुझे सुमन से भी नही मिला,,

सुनिता _छी बेशरम कही का कितनी गंदी बाते करता है अपनी मां से और वह राजेश को छुड़ाते हुए कीचन की ओर भाग गई।

उसका दिल जोरो से धड़कने लगा।

इधर राजेश अपने रुम मे चला गया। सुनिता भी बर्तन साफ कर अपने रुम मे सोने चली गई।

वह अपने बेड पर लेट कर सोने की कोशिश करने लगी। पर उसके कानो में राजेश के द्वारा कही गई बाते ही गूंज रही थी,,

मां आपके santh जो मज़ा आया न ऐसा मज़ा तो सुमन से भी नही मिला,,

उसे अपने क़मर के नीचे गीलापन महसूस huwa जब वह अपना हाथ वहा ले गई तो उसने पाया उसका पेंटी पूरा गीली हो चुकी थी।

सुनिता _मन में बोली हे भगवान मै फिर सी कमजोर नही पड़ सकती ये क्या हो रहा है मेरे साथ ।

 
रात में सुनिता राजेश के द्वारा कही गई बाते याद करने के कारण वह गर्म हो गई थी। उसके chut से पानी बहने लगा था। वह खुद को न रोक सकी और अपने उंगली से अपनी अपने chut की भगनासा रगड़ने लगी और कुछ ही पल में वह झड़ गई। तब उसे कुछ शांति मिली। और गहरी नींद में सो गई।



इधर देर रात तक पार्टी चली और जब वह अपने बिस्तर में सोने पहुंचीं रात के २बज चुके थे।सुजाता भी दिन भर के थकान के कारण गहरी नींद में सो गई। उसने एक सपना देखा आज खूब बारिश हो रही है। चारों तरफ बाड़ आ गया है। उसने देखा की उसके आस पास कोई नही, वह बाड़ में बाह रही है, वह मदद के लिए आवाज़ लगा रही है पर उसकी आवाज़ सुनने वाला कोई नहीं। तभी बहते बहते वह किसी मंदिर के, कलश जहा झण्डा बंधा था उसे दिखाई पड़ी वह उस तक हांथ पाव मारते हुवे किसी तरह पहुंची। और मंदिर के कलश को पकड़ ली। सिर इंतजार करने लगी की शायद कोई बचाने आए। तभी उसे एक हेलीकाप्टर आता दिखाई दिया। उसमे रस्सी की सीढ़ी से कोई फौजी लटका huwa था उसे लगा की उसके पिता जी यूज बचाने के लिए आया है, जब वह फौजी पास आया और उन्होंने मदद के लिए हाथ आगे बढाया तब उसने उस फौजी की सकल देखी। वह आश्चर्य से देखने लगी वह राजेश था। राजेश उसे हाथ पकड़ने के लिए कहा, सुजाता राजेश की ओर हांथ आगे बढ़ाया, राजेश ने सुजाता का हाथ पकड़ा और हेलीकाप्टर ऊपर उड़ गया। राजेश ने सुजाता को ऊपर खींचकर अपने बाहों मे जकड़ लिया है। और सुजाता आश्चर्य से राजेश के आंखों में ही देख रही थी। तभी उसकी आंखे खुल गई। वह जोर जोर से सांस ले रही थी।

अचानक से सुजाता का इस तरह उठने से विशाल भी उठ गया।

सुजाता ने अपने पति को पास देखकर समझ गई कि वह सपना देख रही थी।

विशाल _क्या huwa सुजाता? तुम्हारी तबियत तो ठीक है न।

सुजाता _मै ठीक हू जी।

विशाल _लगता है तुमने कोई सपना देखा।

सुजाता _हा ,जी

विशाल _सुजाता, कभी कभी मुझे तो लगता है कि मैंने तुम्हारे साथ नाइंसाफी किया है।

सुजाता _क्यू जी आप ऐसा क्यू सोंचते हो।

विशाल _हा, सुजाता तुम आज भी कितनी हसी और जवान हो। और मुझे देखो। बूढ़ा ओर बीमार।मुझे कभी कभी लगता है कि तुम खुश नहीं हो।

सुजाता _आप ऐसा क्यू सोंचते है जी, मैं बहुंत खुश हूं,आपके साथ । धन, दौलत, सम्मान, एक पहचान सब कुछ तो मिला है मुझे आपके साथ।

विशाल _ये तो तुम्हारा प्यार है सुजाता पर धन दौलत ही सब कुछ नही होता। पत्नी को पति से जिस सुख की उम्मीद होती है वो मै तुम्हे न दे सका। पता नही मै और कितने दिनों तक जीवित रहूंगा अगर मुझे कुछ हो गया तो, तुम अकेली हो जाओगी। तुम्हारी तो पुरी जिंदगी बांकी है।

सुजाता _नही जी, तुम्हे कुछ नही होगा। और तुम ऐसा विचार क्यू लाते हो। हमांरी बेटी है न निशा। हम उसकी शादी करेंगे फिर उसके बच्चे होंगे। उसके बच्चो के साथ खेलेंगे, अपनी बच्चो की तरह पालेंगे ,उम्र कट जायेगी।

तुम बेकार की चिंता न करो।

चलो अब सो जाओ, काफी रात हो हो चुकी है।

सुजाता लेटे हुए सोचने लगी ये मैने कैसा सपना देखा?

अगली सुबह जब राजेश और स्वीटी कालेज के लिए निकले।

राजेश _स्वीटी, मेरी बाईक तो निखिल के यहां ही छूटा हुआ है। हमे ऑटो या किसी से लिफ्ट लेकर ही कालेज जाना होगा।

स्वीटी _भइया, निशाऔरसीमा भी तो इसी रास्ते से होकर कालेज जाती है न, क्यू न हम उनसे लिफ्ट लेले।

राजेश _तुम ठीक कह रही हो।

राजेश ने सीमा को काल किया, सीमा ने काल उठाया

राजेश _सीमा जी,मेरी बाईक निखिल के यहां छूटा हुआ है क्या तुम लोग हमें लिफ्ट दोगी ।

सीमा _राज ये भी पूछने की बात है आप लोग कहा पर है। हम लोग अभी पहुंच रहे हैं।

राजेश _ओह थैंक्स सीमा जी।

राजेश और स्वीटी रास्ते पर सीमा और निशा का वेट करने लगें। कुछ समय बाद वे लोग वहां पहुंच गए।

सीमा कार का दरवाजा खोली ,स्वीटी पीछे बैठ गई। राज सामने बैठ गया।

निशा, सीमा और स्वीटी पीछे बैठी थी।

रास्ते में सीमा ने राजेश से कहा क्यू राज तुम कल पार्टी में हमसे बीना मिले ही चले गए। तुम्हारे दोस्तो ने बताया कि तुम खाना भी नहीं खाए।

हमे बुरा लगा।

राजेश_सॉरी निशा जी, रात काफी हो चुकी थी मां ने जल्दी आने को कहा था इसलिए मुझे जाना पड़ा।

सीमा_पर हमसे मिलकर तो जाते न राज।

राजेश _सारी सीमा जी, पर आप लोगो से मिलता तो क्या आप लोग मुझे बीना डिनर किए ऐसे ही जाने देते क्या?

सीमा _न।

राजेश _नही न, इसलिए मैं बीना मिले ही चला गया। इसके लिए मुझे क्षमा करे।

निशा को सीमा ने अपनी कोहनी मारी,कल के लिए राज को थैंक्स नही बोलेगी क्या?

निशा _कल के लिए थैंक्स राज आपके कारण पार्टी यादगार बन गई।

राजेश _थैंक्स मुझे नही, सीमा को कहिए निशा जी ये उसी की आइडिया थी।

निशा ने सीमा को घूरते हुए देखा।

सीमा _सॉरी यार तुम्हे बताया नही दरसल हम तुम्हे सरप्राइज़ देना चाहते थे। कैसा लगा सरप्राईज?

निशा ने अपना मुंह फूला ली।

सीमा _sorry मैम साब तुम तो नाराज हो गई, अब मैं तुमसे कुछ नहीं छुपाऊंगी। अब तो मुस्कुरा दो।

अब वे यू ही,बात चीत करते हुवे कालेज पहुंच गए।

कालेज में जब वे पहुंचे तो रोहन और उसके दोस्तों ने राजेश को निशा और सीमा के साथ देखा तो रोहन से बोला।

रोहन भाई मुझको तो लगता है निशा तुमको नही मिल पाएगी।

रोहन _अबे, राजेश चाहे जो भी करले, निशा मेरी होगी।

दोस्त _अगर ऐसा न huwa तो।

रोहन _अगर ऐसा नहीं huwa तो मैं राजेश की बहन को अपना बनाकर निशा को मुझसे छिनने का बदला लूंगा। वैसे क्या खूबसूरत और हॉट लगती है साली?

दोस्त _भाई क्या बोल रहा है, राजेश या उसके दोस्तो ने सुन लिया तो थोपडा तोड़ देगा?

रोहन _अबे मै डरता नहीं, राजेश या उसके दोस्तो से।

रात में जब शेखर, स्वीटी और राजेश डिनर कर रहे थे सुनिता खाना परोस रही थी। शेखर बोला,

शेखर _सुनिता, परसो से तीन दिन बैंक बन्द रहेगी। बच्चो का कालेज भी बंद रहेगी मैं सोच रहा हूं क्यू न हम कही घूमने चले।

सुनिता _क्या बात है जी आज बीवी बच्चों का कैसे ख्याल आ गया।

शेखर _हा, सुनिता मुझे लगता है कि तुम कुछ बोलती तो नही पर नाराज रहती हो मुझसे। क्या करू बैंक में काम इतना रहता है कि मैं तुम लोगो को समय नहीं दे पाता।

स्वीटी खुश होते हुए बोली।

सच पापा हम घूमने चलेंगे ओह बड़ा मजा आयेगा क्यू भइया?

राजेश _अपनी मां की ओर देखते हुए कहा, हा मुझे भी।

सुनिता _तो कहा चलने का सोचा है।

शेखर _अब ये तो तुम ही लोग बताओ कि कहा जाना है?

 
स्वीटी _क्यू न हम मनाली चले। वहा घूमते की काफी जगह है खूब मजा आएगा।



सुनीता _हमारे पास 3दिन है। क्या 3दिन में वहा घूम कर आ पाएंगे। एक दिन तो जाने और एक दिन आने में निकल जायेगा, फिर एक दिन में क्या देख पाएंगे वहा।

शेखर _राजेश तुम बताव आस पास कोई अच्छी जगह जहा 3दिनों में घूमकर आया जा सके।

राजेश_मुझे लगता है कि कहा जाना है इसका फैसला मां को करने दो, क्यू की मां तो हमेशा हम लोगो के बारे में ही सोंचती है। अपनी इच्छा को तो हमेशा दबाती है। मां ही बताएगी की घूमनेके लिए कहा चलना है।

सुनिता _क्या बात है बेटा, मां की इच्छा का बड़ा ख्याल आ रहा है।

शेखर _राजेश ठीक कह रहा है सुनिता, अब कहा चलना है इसका फैसला तुम्ही करो।

सुनिता _अच्छा तो ठीक है, हम भरतपुर चलेंगे।

स्वीटी_क्या भरतपुर, ये कहा है और वहा ऐसा क्या है जहां आप जाना चाहती हो।

सुनिता _यहां से 400 किलोमीटर दूर एक कस्बा है। सुना है की वहा किसी देवता की प्राचीन मंदिर है। लोग दूर दूर से वहा अपनी मनोकामना ले कर जाते हैऔर वहा जाने वाले सभी लोगो की मनोकमना पूर्ण होती हैऔर बताते है कि आस पास घूमने के लिए भी काफी स्थान है।

शेखर _लो अब तय हो गया कि हमें भरत पुर जाना है।

राजेश तुम नेट से सर्च करो की भरतपुर कहा है। वहा ठहरने के लिए कोई होटल धर्मशाला वगेरह है की नहीऔर वहा घूमने के लिए क्या क्या हैं?

राजेश _ठीक है पापा।

स्वीटी _भइया, ये हम कैसी जगह जा रहे हैं, जिसे हम जानते ही । अपना मुंह बनाते हुवे बोली।

राजेश _स्वीटी अगर तुम्हे वहा जाने की इच्छा नहीं है तो तुम घर में ही रहना और घर की रखवाली करना। राजेश हस्ते हुवे कहा।

शेखर और सुनिता राजेश की बातो पर हसने लगी।

स्वीटी उन लोगो को अपना मजाक उड़ाते देख मुंह फूला ली।

सुनिता _सुना है वहा घूमने के लिए और भी अच्छी अच्छी जगह है तुम्हे जरुर पसन्द आयेगी।

स्वीटी _देखते है क्या क्या हैं वहां।

अगले दिन कालेज में राजेश और भगत कैंटीन में बैठे थे।

भगत _राजेश भाई कल से कालेज में 3दिनों तक छूटी है। मै गांव जा रहा हूं। मै तो चाहता हूं की तुम भी मेरे साथ गांव चलो। चम्पा भाभी और कमला ताई की दोनो मिलकर ठुकाई करेंगे। बड़ा मज़ा आएगा। मेरे आने का इंतजार कर रही हैं दोनो।

राजेश _नही यार भगत, मै नही आ सकता फिर कभी चलेंगे। पिता जी ने बहुत दिनों बाद कही घूमने जाने का प्लान बनाया है।

दोनो बाते ही कर रहे थे कि सीमा और निशा भी वहां पहुंच गई।

सीमा _क्या बाते हो रही है दोस्तो में हमे भी तो पता चले?

भगत _अरे आइए, सीमा और निशा जी, आइए बैठिए। कालेज में कल से छूटी है न 3दिनों के लिए उसी के बारे में चर्चा कर रहे थे।

राजेश भाई का तो छुट्टी में अपने मां ओर पिता जी के साथ कही घूमने जाने का प्लान है । मै तो अपना गांव जा रहा हूं।

आप लोग बताइए, छुट्टी में क्या प्लान है?

सीमा _भई हम लोगो का तो कोई प्लान है नही, अगर आप लोग अपने प्लान में शामिल कर लो तो खुशी होगी।

राजेश _अगर ऐसा है तो चलिए आप लोग भी हमारे साथ घूमने मै मम्मी पापा से बात कर लेते।

सीमा_राज मै तो चलने तैयार हू। मेम साब से पूछो।

राजेश _ चलिए न निशा जी। राज ने धीरे से कहा।

निशा _ राज काश मै आपके साथ जा पाती। वह राज की आंखों में देखते हुए बोली।

राजेश _क्यू नही जा सकती।

सीमा _ये क्या बताएगी की क्यू नही जा सकती घूमने, मै बताती हूं। इसकी मॉम इसे जाने की इजाजत नहीं देगी। क्यू की इकलौती बेटी है । उसकी लाडली है। उसकी जान इसमें बसती है। डरती है की निशा को कही कुछ हो न जाए।

राजेश _हू, हर मां को मां को अपनी बेटी की चिंता होती है ,अगर बेटी कही बाहर जाए।

सीमा _निशा की मां को कुछ ज्यादा ही चिंता रहती है। कही कोई उसकी बेटी को किडनैप, न कर ले।

अब निशा नही जा सकती तो मैं कैसे जा सकती हू। क्यू की इसकी मॉम ने कहा है की मैं हमेशा निशा के साथ रहू।

निशा को तो वह भोली समझती है। जो कोई भी उसे भुला,फुसला और बहका ले। मैने भी आंटी से वादा किया है कि मैं निशा के साथ हमेशा साय की तरह रहुंगी।

भगत _पर ,सीमा जी, जब निशा जी की शादी होगी तब क्या करोगी? तब क्या तुम भीं निशा जी के साथ उसकी ससुराल जाओगी। भगत हंसते हुवे कहा।

सीमा _राजेश की आंखों में देखते हुए बोली, अगर निशा की दूल्हा मुझे ले जाने को तैयार हो तो मै जरुर चलूंगी।

अगली सुबह सुनिता जल्दी उठ गई और शेखर और स्वीटी को भी उठा दी। राजेश को उठाने के लिए स्वीटी को बोल दी।

सभी जल्दी उठकर नहा कर तैयार हो गए और आवश्यक सामान की पैकिंग करने लगें। सुनिता नाश्ता तैयार कर रही थी। नाश्ता तैयार होने के बाद सभी। ने नाश्ता किया उसके बाद,राजेश ने सारे बैग कार में रख दिए। सुनिता और स्वीटी कार के पीछे बैठ गए। शेखर ड्राइविंग सीट पर और राजेश बाजू वाली सीट पर बैठ गया। जब वे घर से निकले तो सुबह के आठ बज चुके थे।

करीब 6,_7 घंटे का सफर था।

करीब 4 घंटे का सफर पुरी करने के बाद,

सुनिता _सुनो जी कोई अच्छा सा ढाबा देखकर कार रोकना , फ्रेश होकरऔर काफी पीकर आगे निकलेंगे।

शेखर _ठीक है सुनिता। राजेश से कहा देखना बेटा कोई अच्छा सा ढाबा दिखे तो बताना।

राजेश _ठीक है पापा।

कुछ देर आगे चलने के बढ़ने के बाद।

राजेश _पापा मुझे ये ढाबा कुछ अच्छा लग रहा है । यहां रुकते हैं।

अच्छा शेखर ने ढाबा केसामने कार रोक दिया ।

वे सभी कार से उतरे,

शेखर _जाओ पहले बाथरूम में जाकर सब फ्रेस हो जाओ फिर कॉफी पीकर यहां से चलेंगे।

शेखर ने वेटर से पूछा अरे सुनो यहां का बाथरूम कहा है।

वेटर ने बताया बाथरूम का रास्ता बताया।

वे सभी फ्रेस होकर। काफी का आर्डर दिए। शेखर ने कहा अरे किसी को कुछ खाना है क्या?

सुनिता _नही जी, अभी तो सिर्फ 12बजा है, आगे कही सीधा लंच करेंगे। अभी सिर्फ कॉफी लेते है।

राजेश और स्वीटी ने भी अपनी मां की बातो पर हा कहा।

कॉफी लेने के बाद वे वहां से निकल पड़े।

राजेश ने कहा पापा आप थक गए होगे । कार मै ड्राइव करू।

शेखर _ठीक है बेटा पर सम्हल कर चलाना नई जगह है।

राजेश _ठीक है पापा। राजेश ड्राइविंग शीट पर बैठ गया।करीब एक घंटा सफर करने के बाद। आगे घांटी आया।

शेखर _सूचना बोर्ड पर पढा आगे घाटी है सम्हल कर चले।

राजेश ने शेखर से कहा _पापा आगे घांटी है। थोड़ा सम्हाल।

राजेश ने कार की स्पीड थोड़ी कम कर दी ।

यहां से वातावरण बदलने लगा। अब चारों तरफ़ पेड़ और पहाड़ दिखाई दे ने लगे।

कार अब पहाड़ पर चढ़ने लगा। स्वीटी तो रोमांचित हो गई। वह कार का शीशा नीचे गिरा कर बाहर का नज़ारा देखने लगी।

पहाड को काट काटकर रास्ता बनाया गया था। कार धीरे धीरे पहाड़ पर ऊपर चढ़ने लगा। रास्ते पर कई मोड़ आया। स्वीटी जब कार से बाहर देखी तो बोल पड़ीं,, मम्मी देखो तो कितना सुंदर नज़ारा है।

घांटीके नीचे नदी बह रही थी। जो चारो ओर पहाड़ से घिरी थी। घांटी मे सुंदर सुंदर फूल खिले हुवे थे जो जो लोगो को अपनी ओर आकर्षित कर रहे थे।

कुछ लोग रास्ते में खड़े हो कर फोटो ले रहे थे।

प्रकृति का यह मनोरम दृश्य देखकर स्वीटी ने कहा भइया कार रोको न मुझे फोटो लेना है।

राजेश _स्वीटी यहां कार रोकना खतरनाक है अभी तो हमें और ऊपर जाना है। सही जगह देखकर रोकूंगा।

सुनिता _तुम सही कह रहे हो बेटा। मुझे तो ये चढ़ाई देखकर डर लगने लगा है। ऊपर से बड़ी बड़ी बसे भी आ रही हैं। बेटा तुम सम्हल कर कार चलाओ।

राजेश _तुम चिन्ता न करो मां।

स्वीटी तो रोमांच का अनुभव कर रही थी। उसे यहां आना अब अच्छा लगने लगा था।

कई बार गोल गोल चक्कर लगाने के बाद जब कार ऊपर पहुंची तब सुनिता ने राहत महसूस की।

ऊपर चढ़ने के बाद राजेश ने जगह देखकर कार रोक दी। वे सभी कार से उतरे और प्रकृति के मनोरम दृश्य का आनंद लेने लगे। स्वीटी ने अपने मोबाइल से सबकी फोटो ली।

कुछ देर नज़ारा लेने के बाद वे सभी फिर कार से आगे निकल गए।

अब आगे रास्ते में पहाड़ और जंगल ही नजर आ रहे थे। स्वीटी को लगने लगा था कि यह सफर तो उनके लिए एक यादगार बनने जा रही है।

कुछ देर बाद आगेकोई शहरआया

स्वीटी ने कहा _मां मुझे भूख लगने लगी है।

सुनिता _सुनो जी किसी अच्छे से ढाबा या रेस्टोरेंट दिखाए पड़े तो कार रुकवाना। लंच करेंगे।

शेखर _ठीक है सुनिता।

राजेश ने एक अच्छा सा ढाबा देखकर कार रोक दिया वे वहां लंच करने लगे।

शेखर ने वेटर से पूछा अरे भई ये भरत पुर यहा से कितने दूर है।

वेटर _यहां से एक घंटे का सफर है साहब।

वे ढाबे में लंच करने के बाद फिर वहा से आगे निकल पड़े जब वे भरत पुर पहुंचे तो 4बजने वाला था।

शेखर _लो भाई आख़िर हम पहुंच गए भरत पुर। बेटा पहले हम कही ठहरने का व्यवस्था करते हैं, फिर सोचेंगे की हमे आगे क्या करना है।

 
4बजे भरतपुर पहुंचने के बाद, ठहरने के लिए कोई होटल या धर्मशाला की तलाश में शेखर ने राजेश से कार एक पान की दुकान के सामने रोकने कहा। बेटा जरा कार पान के दुकान के पास रोकना वहा पर कुछ लोग खडे है उनसे कोइ धर्मशाला या होटल का पता पूछते हैं। उन्हे पता होगा।



राजेश _ठीक है पापा।

राजेश ने कार पान ठेले के सामने रॉक दी शेखर कार से उतरकर पान की दुकान पर खडे लोगो के पास जाकर पूछा,, भाई यहां ठहरने के लिए कोई होटल या धर्मशाला मिलेगी।

वहा पर खडे एक व्यक्ति ने कहा की यहां पर तीन चार होटल एक धर्मशाला और एक गेस्ट हाउस है। वैसे तो अभी काफी भीड़ चल रही है। रुम खाली मिल पाएगी की नही कह नही सकता। यहां अभी प्रतिवर्ष की अनुसार 7दिवसीय मेला लगा huwa है जिसमे दूर दूर से लोग आते है। सभी होटल, गेस्ट हाउस एवम धर्मशाला में भिड़ चल रही है।

आप लोग पता कर लो कही कोई रुम खाली हो तो।

उस आदमी से होटल एवम धर्मशाला का पता पूछ कर शेखर कार में आकर बैठ गया।

सुनिता _क्या huwa जी , किसी होटल का पता चला।

शेखर _सुनिता, इन लोगो का कहना है कि अभी भरत पुर में सात दिनों का मेला लगा हुआ है। जिसके कारण धर्मशाला एवम होटल भीड़ चल रही है।

अब जाकर पता करना पड़ेगा। कोई रुम खाली है की नही।

अब वे लोग होटलों में जाकर पता किया वहा जाने पर पता चला की होटल के सारे रुम फूल हो चुके है।

सुनिता _सुनो जी हमने तो ये सोंचा ही नहीं था कि यहां ठहरने के लिए समस्या हो जायेगी। अब हम कहा जाएंगे।

शेखर _सुनिता, अब धर्मशाला चलते हैं लोगो ने बताए की ये धर्मशाला मंदिर के पास ही है। और मेला का मैदान भी वहा से पास है। अब वहा पता करते हैं शायद वहा कोई कमरा मिल जाय।

वे कार को धर्मशाला की ओर ले गए, लोगो से पूछते हुए वे धर्मशाला में पहुंच गए। धर्मशाला खाफी बड़ा था इसमें अलग अलग कैटगरी के सैकड़ों रुम थे। उसे देखकर शेखर को लगा की यहां बात बन जायेगी।

और धर्मशाला बुकिंग काउंटर पर जाकर पता किया। की कोई रुम खाली है क्या? मैनेजर ने सॉरी सर सॉरी सारे रुम बुक हो चुके हैं।

यह बात शेखर ने राजेश और सुनिता को बताया। तो सुनिता चिंतित हो गई।

सुनिता _अब क्या होगा जी, अब हम कहा ठहरेंगे। हमे पहले ही रुम बुक करा लेना था। पर प्लानिंग भी अचानक ही बनी।

राजेश _मां तुम चिन्ता न करो, कुछ न कुछ व्यवस्था हो जायेगा। मै यहां के मैनेजर से बात करता हूं।

सुनिता _ठीक है बेटा, तुम कोशिश करो। देखो कोई कमरा मिल जाए।

राजेश मैनेजर के पास जाकर बोला।

राजेश _सर हम लोग बड़ी दूर से यहां आए है अगर ठहरने के लिए कोई रुम न मिला तो बड़ी दिक्कत हो जायेगी। जेंट्स तो कही भी रात गुजार लेंगे, पर औरते। आप तो यहां के मैनेजर है आप चाहे तो कुछ न कुछ व्यवस्था कर ही सकते हैं। प्लीज सर।

मैनेजर ने कुछ सोचा फिर अपने असिस्टेंट से पूछा, रुम नंबर 24वाले तो आज रुम खाली करने वाले थे। जाओ पता करो तो फ़ोन लगाकर पूछो आज खाली कर रहे हैं की नही।

असिस्टेंट ने कहा, ठीक है सर।

पूछने पर पता चला की वे लोग जाने की तैयारी कर रहे हैं। बस एक घंटे में रुम खाली कर देंगे।

एसिसटेंट ने मैनेजर को इसकी जानकारी दी।

मेनेजर ने राजेश से कहा अच्छा सुनो क्या नाम है तुम्हारा।

राजेश_मेरा नाम राजेश है सर।

मेनेजर _हा राजेश, एक रुम है जो एक घंटे में खाली होने वाला है, तुम लोग कितने हो।

राजेश _ हम चार लोग है सर।

मेनेजर _पर उस रूम के बेड पर दो लोग ही आ सकते हैं। अगर तुम लोग एडजस्ट कर सको तो यह रूम एक घण्टे बाद मिल सकती है।

राजेश _ठीक है सर, मै मम्मी पापा से पूछ कर बतलाता हूं।

मेनेजर _ठीक है राजेश, तुम जल्दी बता देना।

राजेश सुनिता के पास जाकर बोला।

मां, मेनेजर ने कहा की एकरुम है, दो लोग की, अगर हम चार लोग एडजस्ट करने तैयार हो तो वह रूम हमे एक घंटे बाद मिल सकती है।

सुनिता _बेटा, हम कैसे भी करके एडजस्ट कर लेंगे। तुम उस रूम को तीन दिनों के लिए बुक कर लो।

शेखर _हां, बेटा सुनिता ठीक कह रही है।

राजेश _ठीक है पापा मैं उसे बुक करा लेता हू।

राजेश वह रूम बुक कर लिया।

Booking करा लेने के बाद, राजेश वापस आकर अपने पिता जी से कहा, पापा रूम की चाबी तो एक घंटे बाद ही मिल पाएगी।

मेनेजर ने पूछने पर बताया की यहां पास में ही एक रेस्टोरेंट है। चलो तब तक हम वहा फ्रेस होकर काफी लेते है और लोगो से यहां के बारे में जानकारी लेते है।

राजेश ने कार को वही धर्मशाला के पार्किंग स्थल में खड़ा कर दिया और बैग भी कार में रखकर चारो पैदल ही चलकर लोगो से पूछताछ करते हुवे रेस्टोरेंट को जाने लगे।

वहा पहुंचकर वे सभी फ्रेस हुवे रेस्टोरेंट में काफी भीड़ था। शेखर वहा पर बैठे लोगो से भरत पुर में क्या क्या दर्शनी स्थल है कि जानकारी लेने लगे।

देखते देखते एक घंटा कैसे बिता पता ही नहीं चला।

राजेश _पापा एक घंटा से ज्यादा हो गया , चलो अब हम धर्मशाला चलते हैं।

वे सभी वहा से धर्मशाला के लिए निकल पड़े।

वहा पहुंचने पर राजेश ने कहा।

आप लोग यही रूको मैं रूम की चाबी लेकर आता हू।

सुनिता _ठीक है बेटा।

राजेश मेनेजर के पास से रूम की चाबी लेकर आ गया। अब वे सभी कार से सामान लेकर रूम की ओर आगे बड़े।

रूम नंबर 24उन्हे जल्द ही मिल गया।

रूम का ताला खोलकर वे सभी अदंर गए।

12*12 का रूम था।रुम के अदंर 4*6का एक बेड था।एक आलमारी जिसमे सामान रखने के लिए पर्याप्त जगह थी। अटैच लेट बाथरूम जो काफी साफ़ सुथरा था । एक खिड़की, जिसे खोलने पर स्वच्छ हवा कमरे मे आ रही थी। सभी को कमरा पसन्द तो आया पर एक कमी थी।

सुनिता _कमरा तो काफी अच्छा है। पर बेड में केवल 2 लोग ही सो सकते हैं। मतलब दो लोगो को फर्श पर सोना पड़ेगा।

स्वीटी,_मै तो फर्श पर नही सो पाऊंगी, मै बेड पर सोऊंगी। ऐसा बोलते हुए स्वीटी बेड पर लेट गईं।

शेखर _राजेश बेटा क्या फर्श पर सोने के लिए गद्दे की व्यवस्था नहीं हो सकता।

राजेश _पापा मै, मैनेजर से बात करूंगा। मूझे लगता है उनके पास स्टॉक में गद्दा होगा, गद्दा और तकिया की व्यवस्था वह कर देगा।

शेखर _तब तो ठीक है, मै और राजेश नीचे गद्दा लगाकर सो जाएंगे और सुनिता और स्वीटी बेड पर।

राजेश _ठीक है पापा मैं, मैनेजर से मिलकर आता हूं। गद्दा और तकिया के लिए।

सुनिता बैग का सामान आलमारी में रखने लगी। राजेश, मेनेजर से बात करने चला गया।

मैनेजर राजेश को देखकर, कहो राजेश रूम पसन्द आया।

राजेश _सर, रूम तो बढ़िया है, पर बेड में तो सिर्फ दो लोग ही सो सकते हैं। 2लोगो को नीचे फर्श पर सोना पड़ेगा।

मैनेजर _हा, राजेश मैने तो पहले ही बताया था। वैसे कोई और रूम खाली होगा तो मैं तुम्हे बता दूंगा। फिरहाल तो अभी और कोई दूसरा रूम खाली नहीं है। तब तक आप लोगो को एकही उसीरूम में एडजस्ट करना पड़ेगा।

राजेश _ हम कर लेंगे सर, पर, सोने के लिए क्या गद्दे की व्यवस्था नहीं हो सकती। अगर हो जाता तो अच्छा रहता।

मेनेजर _राजेश ,गद्दा मिल जायेगा। मै अभी किसी वर्कर को गद्दा और तकिया लेकर रूम नंबर 24 में भिजवाता हू।

राजेश _धन्यवाद सर।

मैनेजर _ठीक है राजेश और कोई असुविधा हो तो बताना।

राजेश _ठीक है सर।

राजेश रूम में वापस आ गया।

कुछ समय के बाद एक वर्कर 4*6 का एक गद्दा और 2तकिया ले कर पहुंचा। जगह के हिसाब से केवल एक गद्दा ही आ सकता था।

बेड जो बीच में लगा था उसे कोने मे कर दिया गया और बेड के नीचे फर्श पर गद्दा बिछा दिया गया।

गद्दा का रुई थोड़ा पिचक गया था, गद्दा थोड़ा पतला हो गया था। जिसे देखकर राजेश ने वर्कर से कहा।

गद्दा तो पतला लग रहा है, इसका रुई दब गया है।नई गद्दा नही है क्या?

वर्कर _सभी गद्दा ऐसा ही है बाबू जी।

शेखर _बेटा, अब इससे ही काम चलाना पड़ेगा, क्या करे मजबूरी जो है।

अब वे सभी बाथरूम में फ्रेस होकर आराम करने लगे। और आगे क्या करना है, पर चर्चा करने लगें।

शेखर _मै तो कहता हूं की आज हम मन्दिर दर्शन कर लेते हैऔर लोग बता रहे हैं की मेला लगा हुआ है, तो मेला घूम लेंगे। वहा से रात्रि भोजन कर वापस धर्मशाला में रात में आराम करेंगे।फिर कल सुबह नहाकर एवम नाश्ता करके,आस पास के पर्यटन स्थलों को घूमने चलेंगे। आप लोगो का क्या विचार है?

सुनिता _ठीक है जी आप ने जो सोचा है वैसा ही करेंगे।

एक घंटा रेस्ट करने के बाद वे सभी तैयार होकर मंदिर को निकले।

मन्दिर और मेला स्थल पास ही था। तो वे पैदल ही निकल पड़े। जैसे जैसे वे मन्दिर के पास जाने लगे लोगो की भीड़ बढ़ती जा रही थी। और वे सभी मेला में पहुंच गए।

मेला में काफी भीड़ थी। मेला में तरह तरह के दुकान लगे थे। मेले में कई रास्ते बने थे जिनके दोनो किनारे दुकान लगी थी। मेले में लोगो की काफी शोर शराबा था। मेले में मनोरंजन के लिए छोटा सर्कस, मीना बाजार, जादूगर, मौत का कुआं। खाने पीने की कई प्रकार के व्यंजन, कपड़े जूते, घरेलू सामानों की दुकानें लगी थी तो एक तरफ़ बच्चो के खिलौने की दुकानें sacजो माइक द्वारा लोगो को अपनी दुकान में आने के लिए आमन्त्रित कर रहे थे।

स्वीटी _भइया यहां नई नई चीजे देखने को मिल रही है।

राजेश _हा, स्वीटी, मेले में तो खूब मजा आने वाला है।

शेखर _चलो बेटा पहले मन्दिर चलते है वहा दर्शन करने के बाद मेला घूमेंगे।

शेखर ने एक व्यक्ति से पूछा, सुनो भाई, ये मन्दिर जाने कहा पर है।

व्यक्ति _साप इस रास्ते पर सीधे चले जाइए, ये रास्ता सीधा मन्दिर ही पहुंचता है। पास ही है नदी के किनारे पर मन्दिर।

राजेश _ओह, धन्यवाद।

वे सभी व्यक्ति द्वारा बताए रास्ते पर आगे चलने लगें। कुछ दूर चलने के बाद उन्हें मन्दिर दिखाए दिया।

शेखर _लो भई, सामने मन्दिर दिखाई देने लगी है।

पर जैसे जैसे वे मन्दिर के नजदीक जाने लगे लोगो की भीड़ भी बढ़ती जा रही थी।

सुनिता _यहां तो काफी भीड़ लगी है जी। मन्दिर में हमे दर्शन के लिए लाइन में लगना होगा।

दर्शन करने वाले लोगो की बडी भीड़ लगी थी। जिसकी व्यवस्था में बहुत से पुलिस वाले तैनात थे ताकि मन्दिर में भगदड़ न मचे।

शेखर _इतने दूर से आए है तो दर्शन करके ही जाएंगे।

मन्दिर के आसपास पूजा सामग्री, नारियल अगरबत्ती फूल बेचने वालो का दुकान लगा हुआ था, जहा दर्शन के लिए जाने वाले लोग पूजा सामग्री खरीद रहे थे।

शेखर और उनके फैमली को देखकर दुकान वाले उन्हें बुलाने लगे, आइए बाबू जी नारियल फूल खरीद लीजिए। जूते चप्पल यही पर रख दीजिए। सुरक्षित रहेगा।

वे उस दुकान वाले से पूजा सामग्री खरीद लिए और अपना जूता चप्पल वही छोड़ दिए, और लोग भी अपना जूता चप्पल वहा छोड़े थे।

फिर वे सभी दर्शन के लिए लोगो के साथ कतार में खडे हो गए। करीब एक घंटे तक कतार में लगने के बाद वे देवता का दर्शन कर सके। लोगो को केवल देवता का केवल एक झलक ही देखने को मिल रहा था। प्रणाम करने के बाद उन्हें पुलिस वाले आगे बड़ने बोल रहे थे।

सुनिता जब मूर्ति के सामने चौखट पर पहुंची, वह पूजा सामग्री पंडित को देकर देवता को प्रणाम की और प्रसाद ली, वह वहा रुक कर अच्छे से पूजा पाठ करना चाहती थी। पर पुलिस वालो ने उन्हे आगे बड़ने को कह दिया और सुनिता निराश होकर आगे बड़ गई।

जब सभी दर्शन कर पुनः उस दुकान पर पहुंचे जहा अपना जूता चप्पल छोड़े थे। सुनिता शेखर जी बोली,

सुनिता _क्या जी कितने दूर से हम यहां मन्दिर देवता का दर्शन करने आए है, पर ठीक से दर्शन नही कर पाए। मै तो ठीक से प्रार्थना भी नहीं कर सकी।

तभी यह बात दुकानदार ने सुन ली।

दुकानदार ने कहा _माता जी, इस समय तो काफी भीड़ रहती है। । सुबह 6बजे मन्दिर खुल जाती है उस समय लोगो की भीड़ काफी कम रहती हैं पुलिस वाले भी नही रहते। आप अच्छे से दर्शन और पूजा करना चाहती हैं तो सुबह आना होगा।

सुनिता _क्यू जी सुबह आयेंगे क्या? वह शेखर से बोली।

शेखर _ठीक है, सुनिता अगर तुम्हारी इच्छा है तो आ जायेंगे।

स्वीटी _भइया चली न ,अब मीना बाजार चलते हैं, मुझे आकाश झूला पर झूलना है। बड़ा मजा आयेगा।

अब वे सभी मीना बाजार ki ओर चले गए। वहा लोगो की काफी भीड़ थी पुलिस वाले अलाउंस कर रहे थे। कृपया पॉकेट मारो से सावधान रहिए। मेले में कोई बच्ची खो गई थी जो पुलिस वालो को मिली थी वे अलाउंस कर रहे थे कि हमें छोटी बच्ची मिली है जो लगभग, 3साल की है। लडकी अपना नाम पिंकी बता रही है। जिसका भी बच्चा गुमा है यहां आकर संपर्क करें।

मीना बाजार पहुंचने के बाद शेखर ने कहा ,लो भई मीना बाजार पहुंच गए। कौन कौन चढ़ेगाआकाश झूला पे ।

सुनिता _स्वीटी और राजेश के लिए दो टिकट कटा लो।

स्वीटी _चलो न मां हम आप भी हमारे साथ।

सुनिता _न, बाबा न मुझे तो इसकी ऊंचाई देखकर ही डर लग रही है।इस पर चडूंगी तो मेरे तो प्राण ही उड़ जाएंगे। मुझे नही चढ़ना इसपर।

स्वीटी _मतलब तुम केवल घर में ही शेरनी बनती हो। हम पर हुक्म चलाने। स्वीटी अपनी मां की मजाक उड़ाने लगी।

शेखर और राजेश हसने लगे।

सुनिता _स्वीटी की कान मरोड़ते हुवे बोली, स्वीटी की बच्ची, मां की मजाक उड़ाती है।

स्वीटी _मां छोड़ो न, दुखता है, मै तो मजाक कर रही थी। चलो भइया हम लोग झूले पर बैठते हैं।

राजेश और स्वीटी दोनो झूले पर बैठ गई। जब झूला चलना शुरु huwa तो स्वीटी और राजेश रोमांच का अनुभव करने लगें जब वे ऊपर से नीचे जाते तो सीटी रोमांच से या,,,,,हू ,,,,, करके चिल्लाने लगती।

इधर सुनिता दोनो को देखकर डर रही थी की कुछ हो न जाए।

झूला झूलने के बाद जब स्वीटी ने कहा मुझे तो भुख लगने लगी है चलो न पापा कुछ खाते हैं। मीना बाजार में खाने पीने की कई सारी दुकानें लगी थी।

शेखर _सुनिता चलो भई , बच्चो का,कुछ खाने का मन है। दुकान में पहुंचकर,बताओ भई किसको क्या खाना है?

सुनिता _मै तो भेलपुरी खाऊंगी जी।

स्वीटी _पापा मुझे चाट और पानीपुरी खानी है।

राजेश तुम क्या खाओगे?

राजेश _मै तो काफी पिऊंगा,।

शेखर ने सभी के फार्माइस को ध्यान में रखकर ऑर्डर कर दिया। और खुद के लिए भी एक काफी ऑर्डर कर दिया।

फिर वे वहां 1घंटा और घूमे और मेले का आनंद उठाया। स्वीटी तो खाफी खुश थी।

रात्रि के 9बज जाने पर शेखर ने कहा चलो भई अब चलते हैं। रिस्टोरेंट में डिनर करेंगे फिर वहा से सीधे रूम में जाकर आराम करेंगे। कल सुबह जल्दी उठ कर मन्दिर आनी है फिर अन्य जगह घूमने भी जाना है।

वे मेले से निकलकर रेस्टोरेंट पहुंच गए। वहा वे डिनर किए। फिर वे वहां से सीधे धर्मशाला पहुंचे।

वे अपने रूम में पहुंच कर सोने की तैयारी करने लगे। सुनिता और स्वीटी बाथरूम में जाकर अपना ड्रेस चेंज कर ली। सुनिता नाईटी और स्वीटी टॉप और पायजामा पहन ली।राजेश और शेखर भी बनियान और लोवर पहन लिया।

शेखर और राजेश नीचे गद्दा पे, स्वीटी और सुनिता दोनो बेड पर लेट गईं।

सुनिता घर से दो कंबल लाई थी। एक को स्वीटी और सुनिता ओढ ली और एक को राजेश और शेखरको दे दी।

शेखर ने राजेश से कहा बेटा लाईट ऑफ कर दो। और तुम भी जल्दी सो जाओ कल सुबह जल्दी उठना है।

राजेश _ठीक है पापा।

राजेश ने रूम की लाईट ऑफ कर दिया और वह भी सो गया। पहाड़ी इलाका था तो वहा थोड़ी ठंडी थी। वे कंबल ओढ़ कर सो ने लगे।

वे सभी सफर और मेला घूमने से काफी थक चुके थे।

शीघ्र ही सभी गहरी नींद में सो गए।

सुनिता सुबह 5बजे उठ गई और बाथरूम में फ्रेस होकर, नहाकर नई साड़ी पहन ली।

बांकी लोगो को उठाने लगी। उठो जी 5: 300बज गए। मन्दिर नही चलनी है क्या?

सुनिता की आवाज़ सुनकर राजेश उठ शेखर उठ गया।

शेखर _अरे तुम तैयार हो गई क्या? इतनी सुबह

सुनिता _5:30 बज चुके हैं हमें 6: 00बजे मन्दिर पहुंचनी है।

शेखर _ओह, चलो भई राजेश तुम भी उठ जाओ।

शेखर जैसे ही बिस्तर से उठने की कोशिश किया। वह दर्द से कराह उठी।

सुनिता _क्या huwa जी ।

शेखर _सुनिता मेरी क़मर,लगता है मेरी क़मर पकड़ लिया। बहुँत दर्द कर रहा हैं।

राजेश भी उठ कर बैठ गया। और अपने पिता जी से बोला क्या huwa पापा।

शेखर _बेटा लगता है मेरी क़मर पकड़ लिया। मै उठ नही पा रहा।

सुनिता _नीचे सोने की आदत नही न, ये गद्दा का रूई भी काफी सिकुड़ गई है। राजेश और सुनिता दोनो ने सहारा देकर शेखर को उठाया। और बेड पर बिठाया।

सुनिता _सुनो जी। मै क़मर पर मूव लगाकर मालिश कर देती हूं। आपको दर्द से राहत मिलेगा।

शेखर _ठीक है सुनिता।

स्वीटी की नींद भी खुल गई , क्या huwa पापा को?

सुनिता _सुनो जी, आप बेड पर लेट जाइए। शेखर पेट के बल लेट गया सुनिता उसके क़मर पर मूव लगाकर मालिश करने लगी। अच्छे से मालिश करने के बाद पूछी, कुछ आराम मिला जी

शेखर _हा सुनिता, तुम्हारे हाथों में तो जादू है। दर्द काफी कम हो गया।

सुनिता _आप यू ही बेड पर लेट कर आराम कीजिए मै और राजेश मंदिर चले जाते है। स्वीटी भी यहां रुकेगी किसी चीज की जरूरत हो तो।

शेखर _ सुनिता मैठीक हो गया हू, मै भी चलता हू न

राजेश _ नहीं पापा मां ठीक कह रही है। तुम आराम करो।मैं और मां मन्दिर से हो आते हैं।

सुनिता _राजेश तुम जल्दी से नहाकर तैयार हो जाओ। लेट हो रहे हैं।

राजेश फटाफट नहा कर तैयार हो गया और नई टी शर्ट और फूल लोवर पहन लिया। जो वह जिम जाते समय पहनता था।

राजेश _चलो मां।

सुनिता _स्वीटी तुम अपनी पापा का ख्याल रखना।

स्वीटी _ओके मम्मी।

राजेश और सुनिता दोनो मन्दिर के लिए निकल पड़े।

वे दुकान से पूजा समान लेकर मन्दिर के अदंर चले गए। इस समय भीड़ बहुंट कम थी। पुलिस वाले भी नही थे। मन्दिर पे जा कर उसने अच्छे से पूजा पाठ की और देवता से प्रार्थना की घर में हमेशा कुशलमंगल रहे। और राजेश को हमेशा सफलता प्राप्त हो।

पूजा पाठ कर लेने के बाद सुनिता ने देखा कि पुजारी आरती की तैयारी कर रहा हैं। उसने राजेश से कहा की बेटा क्यू न हम आरती में शामिल होकर यहां से जाए।

राजेश _आप जैसे चाहे मां।

वे वही रुक कर आरती होने का इंतजार करने लगे।

पर ये क्या मन्दिर में धीरे धीरे लोगो की भीड़ बड़ने लगी। पुलिस वाले भी नही थे जो भीड़ को कंट्रोल करें। लोग आरती में शामिल होने के लिए आने लगें देखते देखते मंदिर का मंडप पुरी तरह भर गया। पैर रखने तक की जगह नहीं बची थी।

मन्दिर में पीछे खडे लोग आगे आने के लिए धक्का मुक्की करने लगें। धक्का लगने से सुनिता आगे गिरने को हुई तो राजेश ने उसे थाम लिया।

सुनिता पीछे मुड़कर देखी उसके पीछे एक अधेड उम्र के पुरुष खड़ा था।

सुनिता वहा से खिसककर राज के सामने आ गया।

भिड़ काफी होने के कारण लोगो के शरीर एक दुसरे के शरीर से चिपक गए थे।

पिछे से फिर एक धक्का लगा, राजेश सुनिता के ऊपर गिरने को huwa वह दोनो हाथो से सुनीता को पेट से पकड़ लिया। ताकि सुनिता न गिर जाए

राजेश और सुनिता का शरीर एक दुसरे से एकदम चिपक गए। लोगो के सर ही दिखाई पड़ रहे थे। निचे का हिस्सा किसी का नजर ही नहीं आ रहा था।



सुनिता _बेटा यहां तो काफी भीड़ हो गई है। यहां तो खड़ा हो पाना भी मुश्किल है। तुम मुझे अच्छे से पकड़े रहना।

राजेश _मां तुम चिन्ता न करो। मै हू न।

वे दोनो वैसे ही खडे रहे। उनका शरीर एक दुसरे से एकदम चिपक गया था। राजेश अपने दोनो हाथो से अपने मां की कमर और पेट को पकड़े हुए था। ताकि वह आगे न गिरे पिछे से धक्का लगने पर राजेश अपनी मां को अपनी ओर पकड़ कर और कस लेता था ताकि वह आगे न गिरे। आरती अभी शुरू नहीं huwa था वे बाहर भी नही निकल सकते।

सुनिता मां के साथ एक औरत भी थी और राजेश एक बेटा होने के साथ एक मर्द जो सुनिता को एक बार भोग चुका था।

सुनिता नहाकर आई थी उसकी मादक खुश्बू राजेश के नाक पर पड़ी और एक जनाना शरीर को स्वयं से चिपका पाया तो उसका शरीर गरमाने लगा। और न चाहते हुए भी राजेश का land में तनाव आने लगा।

लोगो का धक्का लगने पर दोनो के शरीर एकदम से चिपक जाते थे और राजेश सुनिता को और कस लेता था। जिससे ये असर huwa की राजेश का land तनकर पुरी तरह खड़ा हो गया।

राजेश का land सुनिता को चुभने लगा। जिससे सुनिता समझ गई की राजेश उत्तेजित हो गया है।

राजेश को भी नही सूझ रहा था की वे क्या करें।

सुनिता का नितम्ब राजेश के जागो में एकदम से सटा huwa था और राजेश का लेंड सुनिता के गाड़ के छेद को चुभ रहा था।

सुनिता _मन में हे भगवान ये कैसी परीक्षा है?

सुनिता काशरीर भी राजेश के land का एहसास पाकर गरमाने लगा।

पीछे से फिर एक धक्का लगा और राजेश का land उसके लोवर के साथ ही सुनीता के गाड़ पे धस गया जिससे सुनिता सिसक उठी।

पर स्थिति ऐसी थी की वे दोनो

 
दोनो इसी अवस्था में खड़े रहे, परिस्थिति ही ऐसी थी। वहा इधर उधर हिलने के लिए भी जगह नहीं थी। राजेश का तना land सुनिता के गाड़ के दरार में धस गया था। जब पीछे के लोग धक्का लगाते थे तो राजेश अपनी मां को अपनी ओर और कस लेता था। जिससे राजेश का land Sunita के गाड़ के दरार में और धस जाता था। जिससे सुनिता सिसक उठती थी। सुनिता का नितम्ब राजेश के जांघो से सटा huwa



सुनिता के शरीर का मादक गंध राजेश को और उत्तेजित कर रहा था। उसका land ना चाहते हुए भी लोहे की रॉड की तरह कड़ा हो गया था।

एक मर्द के शरीर से इस प्रकार जकड़े रहने से सुनिता भी गर्म हो गई थी। आख़िर वह भी एक औरत थी।

कुछ समय बाद आरती सुरू हुई। आरती शुरू होने पर लोगो का धक्का मुक्की बंद huwa जो जहा पर थे वही खडा होकर ताली बजाने लगे।

राजेश और सुनिता के बीच जगह बिल्कुल नही थी। अतः राजेश सुनिता को अपने दोनो हाथों से पीछे से बाहों भरकर ताली बजाने लगा।

जिससे दोनो का शरीर और एकदम से चिपक गया।

आरती खतम होने के बाद लोगो का भीड़ धीरे धीरे कम होने लगी तब सुनिता ने राहत की सांस ली।

और राजेश ने सुनिता को छोड़ दिया।

लेकीन राजेश का land अभी भी उसके लोवर के अदंर अकड़ा हु़वा था। राजेश और सुनिता दोनो ही लज्जित महसूस कर रहे थे।

जब दोनो मंदिर से बाहर निकल रहे थे तब सुनिता की नजर राजेश की लोवर पर गया। जो सामने से काफी उठा हूवा था। जिसे देखकर सुनिता मुस्कुरा भी रही थी।और शर्मा भी रही थी।

राजेश समझ गया की मां क्यू मुस्कुरा और शर्मा रही है। वह काफी लज्जित महसूस करने लगा।

राजेश अपने हाथ को अपने land के उभार के सामने रख कर उसे छिपाने की कोशिश करने लगा। जिसे देखकर सुनिता की तो हसी ही छुट गई।

जिससे राजेश और लज्जित महसूस करने लगा।

जब वे दोनो मंदिर से बाहर निकलकर पूजा सामग्री की दुकान के पास आय जहां पर अपना जूता चप्पल छोड़े थे।चप्पल लेने के बाद सुनिता ने देखा कि अभी भी राजेश के लोवर में बड़ा सा उभार बना huwa है वह राजेश से बोली।

बेटा अगर ऐसे ही धर्मशाला पहुंचेंगे तो तुम्हारी यह हालत देखकर तुम्हारा पापा और बहन क्या सोचेंगे।

राजेश _सॉरी मां, पता नही ये सब कैसे हो गया। वह बहुंत लज्जित महसूस करने लगा।

सुनिता _बेटा, चलो किसी होटल पे बैठकर चाय पीते है फिर चलेंगे।

राजेश _ठीक है मां।

मंदिर के पास होटल भी लगा था वे वहा जाकर बैठ गए। सुबह होटल में भीड़ नही थी। राजेश ने दो चाय का ऑर्डर कर दिया।

सुनिता _मतलब तू सुधरा नही है। तू अपने मन पर नियंत्रण नहीं रख सका।

राजेश _मां मैने जान बुझ कर तो नही किया। हमेशा मुझे ही दोष देती हो। राजेश नाराज होते हुए बोला।

सुनिता _ठीक है परिस्थिति ही ऐसी थी। पर अब तक तो नार्मल हो जाना चहिए था।

राजेश फिर शर्मिंदा हो गया।

राजेश _मां मुझे और शर्मिंदा न करो।

दुकान वाले ने चाय लगा दी।

सुनिता _लो चाय पी लो।

राजेश _मुझे नही पीना चाय नाराजgi दिखाते हुए बोला।

सुनिता _ठीक है बाबा, इसमें तुम्हारी कोई गलती नही, सब मेरी गलती है। मै ही तुम्हारे सामने जो खड़ी हो गई। अब चलो चाय पियो।

सुनिता _अब पियो भी, अब मैं तुम्हारा मजाक नहीं उड़ाऊंगी बस।

राजेश चाय का कप उठाकर पीने लगा। सुनिता राजेश को चाय पीता देख मुस्कराने लगी।

दोनो ने चाय पी ली उसके बाद सुनिता बोली।

अब तो नार्मल हो गया होगा, तो चले।

राजेश ने हा में सिर हिलाया।

सुनिता फिर अपना मुंह बन्द कर हसने लगीं।

अब वे जब जाने को हुवे तब सुनिता ने अपनी नज़र फिर राजेश के लोवर पर डाली। उसने देखा उभार कम जरुर हो गया था पर पुरी तरह नार्मल नही लग रहा था।

सुनिता और राजेश दोनो धर्मशाला की ओर चलने लगें।

सुनिता _मुझे लगता है कि तुम अभी तक पुरी तरह नार्मल नही हुवे हो। वह मुसकुराते हुवे बोली।

राजेश _अब पूरी तरह नार्मल होने में समय तो लगेगा ही ना मां।

राजेश _वैसे आप भी तो सिसक रही थी।

सुनिता राजेश की बात सुनकर लज्जित महसूस करने लगी।

सुनिता _अब तुम एक मर्द की तरह जकड़े रहोगे तो मेरे मुंह से सिसक तो निकलेगा ही। आख़िर मै भी तो एक औरत हूं।

राजेश _फिर मुझे ही दोष क्यू देती हो।

सुनिता _अच्छा बाबा इसमें हम दोनो की कोई गलती नही बस। अब तुमको कुछ नहीं बोलूंगी। ये सब परिस्थिति के कारण huwa वह मुस्कराने लगी।

लो हम धर्मशाला भी पहुंच गए।

दोनो जब रूम में पहुंचे। स्वीटी नहाकर तैयार हो चुकी थी। शेखर आराम कर रहा था।

शेखर _आ गए आप दोनो, मंदिर में ठीक से दर्शन huwa

सुनिता _हा जी, अच्छे से पूजा पाठ करनेको मिला। मैने देवता से हमारी कुशलमंगल के लिए प्रार्थना की। अब आपकी क़मर दर्द कैसी है?

शेखर _दर्द तो बिल्कुल कम हो गया है। अब मैं उठ बैठ भी पा रहा हूं।

सुनिता _भगवान की कृपा है आप ठीक हो गए। अब चलिए आप भी स्नान कर लीजिए। फिर नाश्ता करने चलेंगे।

शेखर _ठीक है सुनिता।

शेखर के स्नान करने एवम सभी लोग तैयार हो जाने के बाद वे नाश्ता करने रेस्टोरेंट चले गए। वहा बैठकर आगे का प्लान बनाने लगे।

शेखर _लोगो ने बताया है कि यहां से 20km दूर एक जल प्रपात है। यहां से आधे घंटे का रास्ता है। हम पहले वहा चलेंगे। वहा से हम गुफ़ा देखने चलेंगे ,लोगोका कहना है की यहां आदिमानव समय का प्राचीन गुफा है लोग दूर दूर से देखने आते हैं। वह वाटर फाल से पास ही है,फिर हम वहा से वापस लौटेंगे।

सुनिता _ठीक है जी आप जैसी उचित समझे।

स्वीटी _पापा, हम वाटर फाल देखने जा रहे हैं पहले बताना था मैं वहीं नहाती कितना मज़ा आता। क्यू भइया?

राजेश _हा, पापा, झरने में नहाने का अलग ही मजा है।

शेखर _ओह, पहले मैं भी सोचा था,पर हमे आज मंदिर जाना था न,इसलिए नहाने का प्लान छोड़ दिया। वैसे कपड़ा रख लेना तुम लोगो की नहाने की इच्छा हो तो नहा लेना।

स्वीटी बहुंत खुश हो गई, थैंक यू पापा। भइया अब झरने में बहुत मजा आने वाला है।

नाश्ता कर लेने के बाद शेखर बोला राजेश और स्वीटी तुम दोनो जाओ रूम में वहा से अपने और अपनी मां के लिए भी कपड़े रख लो शायद इनका मन भी हो जाए नहाने का।

सुनिता _न जी मुझे नही नहाना झरने में।

शेखर _मन नही huwa तो मत नहाना, कपड़े तो रख लो।

राजेश और स्वीटी रूम में जाकर कपड़े और कुछ आवश्यक सामान ले आए फिर वे वहां से कार में सवार होकर वाटर फाल के लिए निकल गए।

वे रास्ते में लोगो से पूछताछ करते हुवे वाटर फाल की ओर आगे बढ़ने लगे। रास्ते के दोनो तरफ पहाड़ नजर आ रहे थे। तभी शेखर की नजर सुचना बोर्ड पर पड़ी उसमे लिखा था की वाटर फाल जाने का मार्ग। दूरी 4km

शेखर ने राजेश को कार रोकने कहा।

बेटा कार रोको वाटर फाल जाने के लिए हमे इस मार्ग में जाना होगा। सुचना बोर्ड में लिखा huwa है।

राजेश ने कार रोक कर उस मार्ग की ओर कार मोड़ दी।

सुनिता _ये तो कच्ची मार्ग है जी, ये तो जंगल के अदंर की ओर जा रही है। रास्ता काफी सुनसान भी लग रहा है। बेटा थोड़ा सम्हाल कर चला न।

राजेश _ठीक है मां।

जैसे जैसे वो आगे बढ़ रहे थे झरने की आवाज उसे सुनाई देने लगे।

स्वीटी _लगता है मां ये जो आवाजे आ रही हैं वो झरने की है।

रास्ते के दोनो तरफ घने पेड़ लगे हुवे थे। जैसे जैसे वे झरने नजदीक पहुंचने लगे झरने का आवाज भी बढ़ता गया। जब वे पहुंचे तो कई मोटर साइकिल और कारे एवम अन्य वाहन खडे दिखाए दिए।

शेखर _बेटा लगता है हम पहुंच गए। कार यही खडा करना पड़ेगा। यही पर जगह देखकर कार खड़ी कर दो।

राजेश _ठीक है पापा।

राजेश ने जहा अन्य कार खडे थे वहा जगह देखकर कार को पार्किंग कर दिया।

शेखर _वहा पर खडे लोगो से पूछा , भई ये झरने कहा पर है।

लोगो ने बताया की आगे पैदल जाने पर झरना है।

अब वे पैदल चलने लगें रास्ते पर अब लोगो की भीड़ नजर आने लगी रास्ते के आजू बाजू खाने पीने की दुकान लगे थे। कुछ लोग तो वहा पिकनिक मनाने आय थे वे वहीं खाना बना रहे थे।

जब वे झरने के पास पहुंचे तो वहां का नजारा देखते ही बनता था। सामने एक बड़ा सा कुंड था। जिसमे लडके लडकियां महिलाएं पुरुष एवम बच्चे नहा रहे थे जल क्रीड़ा कर रहे थे। शोर मचा रहे थे। कुंड स्विमिंग पूल की तरह बना दिया गया था। कुंड के सामने एक ऊंचा पहाड़ा जहां से पानी झड़ झर की तेज आवाज के साथ निचे गिर रहा था।

कुंड के उस पार जाने के लिए पूल बना था। जिस पर कुछ युवक चढ़कर कुंड में छलांग लगा रहे थे। पहाड़ पर चढ़ने के लिए सीढ़ी भी बनी थी। कुछ लोग सीढ़ी से चड़कर पहाड़ के ऊपर जा रहे थे। पहाड़ा के ऊपर एक मंदिर भी बना था जहा लोगो की भीड़ दिख रही थी।

स्वीटी ने जब यह नज़ारा देखा तो वह राजेश से बोली।

वाउ, भइया, क्या नज़ारा है। देखो लोग नहाने का कितना मज़ा ले रहे हैं। झरने को देखो प्रकृति का कितना मनोरम दृश्य है। यहां तो बड़ा मजा आयेगा।

सुनिता, शेखर और राजेश भी वहा का दृश्य देखकर आनंदित हो गए।

शेखर _यह तो बड़ी अच्छी जगह है, क्यू सुनिता।

सुनिता _हा जी, पर लोग तो यहां देखो कैसे बेशर्रमो की तरह नहा रहे हैं, स्त्री और पुरषों के बीच कोई परदा ही नहीं। देखो कैसे पकड़ा पकड़ी खेल रहे हैं।

स्वीटी _मां, ये इंज्वॉय कर रहे हैं और हम भी यहां इंज्वॉय करेंगे। क्यू भइया?

राजेश _हा, नहाने में बड़ा मज़ा आएगा।

शेखर _अरे भाई, पहले थोडा घूम लो जगह का अवलोकन कर लो उसके बाद नहाने का मज़ा लेना।

देखो कुछ लोग पहाड़ पर चढ़ रहे हैं चलो हम भी ऊपर जाकर देखते है वहा से नज़ारा कैसे दिखता है।

अब वे पूल पार करके कुंड के उस पार चले गए जहां सीढ़ी बनी थी। वे सीढ़ी से पहाड़ के ऊपर जाने लगे जब वे ऊपर पहुंचे तो निचे का नज़ारा देखकर मंत्रमुग्ध हो गए।

पहाड़ के चारो तरफ अन्य पहाड़ नजर आ रहे थे। पानी ऊपर से बहते हुए पहाड़ के नीचे गिर रही थी। ऊपर भी काफी लोग मौजूद थे। ऊपर बहते पानी में कुछ युवक एवम युवतियां नहाने का मज़ा ले रहे थे। कुछ लोग खडा होकर उन्हें नहाते देख रहे थे।

कुछ लोग वहा बैठकर अपने साथ लाए टिफिन का मज़ा ले रहे थे।

शेखर _यहां का नज़ारा तो अदभुत है भई।

सुनिता _देखो वहा एक छोटा मंदिर भी है चलो पहले दर्शन कर लेते है। वे मंदिर जाकर दर्शन करआए।

स्वीटी _भैया चलो अब हम भी नहाने का मज़ा लेते है।

सुनिता _मै तो कहता हूं की तुम लोग ऊपर ही नहा लो। यहां भीड़ कम है। नीचे तो बहुन्त भीड़ है।

ऊपर पानी भी चट्टानों से उछल कूद करते हुए बह रहा था। पानी उथला था। सीडी नुमा पहाड़ से पानी उछल कूद कर बह कर पहाड़ के निचे गिर रहा था।

राजेश _ठीक है मां हम ऊपर ही नहाएंगे पर आपको भी नहाना पड़ेगा।

स्वीटी _हा मां, भइया ठीक कह रहा है। ऊपर भी तो देखो कुछ महिलाएं नहा रही है।

शेखर _बच्चे चाह रहे हैं तो जाओ भाई, उसे निराश न करो।

सुनिता _पर जी, मुझे शर्म आयेगी।

सुनिता _मां, यहां तो सभी मजे ले रहे हैं। इसमें शर्माने की क्या बात है।

स्वीटी _पापा आप भी नहाओ न हमारे साथ।

शेखर _बेटा मेरी क़मर में अभी भी थोड़ा, दर्द है। नही तो मैं भी तुम लोगो के साथ नहाने का मज़ा लेता।

शेखर _राजेश बेटा जाओ तुम कार से कपड़े और अन्य सामान लेकर आ जाओ।

राजेश _ठीक है पापा।

दोनो इसी अवस्था में खड़े रहे, परिस्थिति ही ऐसी थी। वहा इधर उधर हिलने के लिए भी जगह नहीं थी। राजेश का तना land सुनिता के गाड़ के दरार में धस गया था। जब पीछे के लोग धक्का लगाते थे तो राजेश अपनी मां को अपनी ओर और कस लेता था। जिससे राजेश का land Sunita के गाड़ के दरार में और धस जाता था। जिससे सुनिता सिसक उठती थी। सुनिता का नितम्ब राजेश के जांघो से सटा huwa

सुनिता के शरीर का मादक गंध राजेश को और उत्तेजित कर रहा था। उसका land ना चाहते हुए भी लोहे की रॉड की तरह कड़ा हो गया था।

एक मर्द के शरीर से इस प्रकार जकड़े रहने से सुनिता भी गर्म हो गई थी। आख़िर वह भी एक औरत थी।

कुछ समय बाद आरती सुरू हुई। आरती शुरू होने पर लोगो का धक्का मुक्की बंद huwa जो जहा पर थे वही खडा होकर ताली बजाने लगे।

राजेश और सुनिता के बीच जगह बिल्कुल नही थी। अतः राजेश सुनिता को अपने दोनो हाथों से पीछे से बाहों भरकर ताली बजाने लगा।

जिससे दोनो का शरीर और एकदम से चिपक गया।

आरती खतम होने के बाद लोगो का भीड़ धीरे धीरे कम होने लगी तब सुनिता ने राहत की सांस ली।

और राजेश ने सुनिता को छोड़ दिया।

लेकीन राजेश का land अभी भी उसके लोवर के अदंर अकड़ा हु़वा था। राजेश और सुनिता दोनो ही लज्जित महसूस कर रहे थे।

जब दोनो मंदिर से बाहर निकल रहे थे तब सुनिता की नजर राजेश की लोवर पर गया। जो सामने से काफी उठा हूवा था। जिसे देखकर सुनिता मुस्कुरा भी रही थी।और शर्मा भी रही थी।

राजेश समझ गया की मां क्यू मुस्कुरा और शर्मा रही है। वह काफी लज्जित महसूस करने लगा।

राजेश अपने हाथ को अपने land के उभार के सामने रख कर उसे छिपाने की कोशिश करने लगा। जिसे देखकर सुनिता की तो हसी ही छुट गई।

जिससे राजेश और लज्जित महसूस करने लगा।

जब वे दोनो मंदिर से बाहर निकलकर पूजा सामग्री की दुकान के पास आय जहां पर अपना जूता चप्पल छोड़े थे।चप्पल लेने के बाद सुनिता ने देखा कि अभी भी राजेश के लोवर में बड़ा सा उभार बना huwa है वह राजेश से बोली।

बेटा अगर ऐसे ही धर्मशाला पहुंचेंगे तो तुम्हारी यह हालत देखकर तुम्हारा पापा और बहन क्या सोचेंगे।

राजेश _सॉरी मां, पता नही ये सब कैसे हो गया। वह बहुंत लज्जित महसूस करने लगा।

सुनिता _बेटा, चलो किसी होटल पे बैठकर चाय पीते है फिर चलेंगे।

राजेश _ठीक है मां।

मंदिर के पास होटल भी लगा था वे वहा जाकर बैठ गए। सुबह होटल में भीड़ नही थी। राजेश ने दो चाय का ऑर्डर कर दिया।

सुनिता _मतलब तू सुधरा नही है। तू अपने मन पर नियंत्रण नहीं रख सका।

राजेश _मां मैने जान बुझ कर तो नही किया। हमेशा मुझे ही दोष देती हो। राजेश नाराज होते हुए बोला।

सुनिता _ठीक है परिस्थिति ही ऐसी थी। पर अब तक तो नार्मल हो जाना चहिए था।

राजेश फिर शर्मिंदा हो गया।

राजेश _मां मुझे और शर्मिंदा न करो।

दुकान वाले ने चाय लगा दी।

सुनिता _लो चाय पी लो।

राजेश _मुझे नही पीना चाय नाराजgi दिखाते हुए बोला।

सुनिता _ठीक है बाबा, इसमें तुम्हारी कोई गलती नही, सब मेरी गलती है। मै ही तुम्हारे सामने जो खड़ी हो गई। अब चलो चाय पियो।

सुनिता _अब पियो भी, अब मैं तुम्हारा मजाक नहीं उड़ाऊंगी बस।

राजेश चाय का कप उठाकर पीने लगा। सुनिता राजेश को चाय पीता देख मुस्कराने लगी।

दोनो ने चाय पी ली उसके बाद सुनिता बोली।

अब तो नार्मल हो गया होगा, तो चले।

राजेश ने हा में सिर हिलाया।

सुनिता फिर अपना मुंह बन्द कर हसने लगीं।

अब वे जब जाने को हुवे तब सुनिता ने अपनी नज़र फिर राजेश के लोवर पर डाली। उसने देखा उभार कम जरुर हो गया था पर पुरी तरह नार्मल नही लग रहा था।

सुनिता और राजेश दोनो धर्मशाला की ओर चलने लगें।

सुनिता _मुझे लगता है कि तुम अभी तक पुरी तरह नार्मल नही हुवे हो। वह मुसकुराते हुवे बोली।

राजेश _अब पूरी तरह नार्मल होने में समय तो लगेगा ही ना मां।

राजेश _वैसे आप भी तो सिसक रही थी।

सुनिता राजेश की बात सुनकर लज्जित महसूस करने लगी।

सुनिता _अब तुम एक मर्द की तरह जकड़े रहोगे तो मेरे मुंह से सिसक तो निकलेगा ही। आख़िर मै भी तो एक औरत हूं।

राजेश _फिर मुझे ही दोष क्यू देती हो।

सुनिता _अच्छा बाबा इसमें हम दोनो की कोई गलती नही बस। अब तुमको कुछ नहीं बोलूंगी। ये सब परिस्थिति के कारण huwa वह मुस्कराने लगी।

लो हम धर्मशाला भी पहुंच गए।

दोनो जब रूम में पहुंचे। स्वीटी नहाकर तैयार हो चुकी थी। शेखर आराम कर रहा था।

शेखर _आ गए आप दोनो, मंदिर में ठीक से दर्शन huwa

सुनिता _हा जी, अच्छे से पूजा पाठ करनेको मिला। मैने देवता से हमारी कुशलमंगल के लिए प्रार्थना की। अब आपकी क़मर दर्द कैसी है?

शेखर _दर्द तो बिल्कुल कम हो गया है। अब मैं उठ बैठ भी पा रहा हूं।

सुनिता _भगवान की कृपा है आप ठीक हो गए। अब चलिए आप भी स्नान कर लीजिए। फिर नाश्ता करने चलेंगे।

शेखर _ठीक है सुनिता।

शेखर के स्नान करने एवम सभी लोग तैयार हो जाने के बाद वे नाश्ता करने रेस्टोरेंट चले गए। वहा बैठकर आगे का प्लान बनाने लगे।

शेखर _लोगो ने बताया है कि यहां से 20km दूर एक जल प्रपात है। यहां से आधे घंटे का रास्ता है। हम पहले वहा चलेंगे। वहा से हम गुफ़ा देखने चलेंगे ,लोगोका कहना है की यहां आदिमानव समय का प्राचीन गुफा है लोग दूर दूर से देखने आते हैं। वह वाटर फाल से पास ही है,फिर हम वहा से वापस लौटेंगे।

सुनिता _ठीक है जी आप जैसी उचित समझे।

स्वीटी _पापा, हम वाटर फाल देखने जा रहे हैं पहले बताना था मैं वहीं नहाती कितना मज़ा आता। क्यू भइया?

राजेश _हा, पापा, झरने में नहाने का अलग ही मजा है।

शेखर _ओह, पहले मैं भी सोचा था,पर हमे आज मंदिर जाना था न,इसलिए नहाने का प्लान छोड़ दिया। वैसे कपड़ा रख लेना तुम लोगो की नहाने की इच्छा हो तो नहा लेना।

स्वीटी बहुंत खुश हो गई, थैंक यू पापा। भइया अब झरने में बहुत मजा आने वाला है।

नाश्ता कर लेने के बाद शेखर बोला राजेश और स्वीटी तुम दोनो जाओ रूम में वहा से अपने और अपनी मां के लिए भी कपड़े रख लो शायद इनका मन भी हो जाए नहाने का।

सुनिता _न जी मुझे नही नहाना झरने में।

शेखर _मन नही huwa तो मत नहाना, कपड़े तो रख लो।

राजेश और स्वीटी रूम में जाकर कपड़े और कुछ आवश्यक सामान ले आए फिर वे वहां से कार में सवार होकर वाटर फाल के लिए निकल गए।

वे रास्ते में लोगो से पूछताछ करते हुवे वाटर फाल की ओर आगे बढ़ने लगे। रास्ते के दोनो तरफ पहाड़ नजर आ रहे थे। तभी शेखर की नजर सुचना बोर्ड पर पड़ी उसमे लिखा था की वाटर फाल जाने का मार्ग। दूरी 4km

शेखर ने राजेश को कार रोकने कहा।

बेटा कार रोको वाटर फाल जाने के लिए हमे इस मार्ग में जाना होगा। सुचना बोर्ड में लिखा huwa है।

राजेश ने कार रोक कर उस मार्ग की ओर कार मोड़ दी।

सुनिता _ये तो कच्ची मार्ग है जी, ये तो जंगल के अदंर की ओर जा रही है। रास्ता काफी सुनसान भी लग रहा है। बेटा थोड़ा सम्हाल कर चला न।

राजेश _ठीक है मां।

जैसे जैसे वो आगे बढ़ रहे थे झरने की आवाज उसे सुनाई देने लगे।

स्वीटी _लगता है मां ये जो आवाजे आ रही हैं वो झरने की है।

रास्ते के दोनो तरफ घने पेड़ लगे हुवे थे। जैसे जैसे वे झरने नजदीक पहुंचने लगे झरने का आवाज भी बढ़ता गया। जब वे पहुंचे तो कई मोटर साइकिल और कारे एवम अन्य वाहन खडे दिखाए दिए।

शेखर _बेटा लगता है हम पहुंच गए। कार यही खडा करना पड़ेगा। यही पर जगह देखकर कार खड़ी कर दो।

राजेश _ठीक है पापा।

राजेश ने जहा अन्य कार खडे थे वहा जगह देखकर कार को पार्किंग कर दिया।

शेखर _वहा पर खडे लोगो से पूछा , भई ये झरने कहा पर है।

लोगो ने बताया की आगे पैदल जाने पर झरना है।

अब वे पैदल चलने लगें रास्ते पर अब लोगो की भीड़ नजर आने लगी रास्ते के आजू बाजू खाने पीने की दुकान लगे थे। कुछ लोग तो वहा पिकनिक मनाने आय थे वे वहीं खाना बना रहे थे।

जब वे झरने के पास पहुंचे तो वहां का नजारा देखते ही बनता था। सामने एक बड़ा सा कुंड था। जिसमे लडके लडकियां महिलाएं पुरुष एवम बच्चे नहा रहे थे जल क्रीड़ा कर रहे थे। शोर मचा रहे थे। कुंड स्विमिंग पूल की तरह बना दिया गया था। कुंड के सामने एक ऊंचा पहाड़ा जहां से पानी झड़ झर की तेज आवाज के साथ निचे गिर रहा था।

कुंड के उस पार जाने के लिए पूल बना था। जिस पर कुछ युवक चढ़कर कुंड में छलांग लगा रहे थे। पहाड़ पर चढ़ने के लिए सीढ़ी भी बनी थी। कुछ लोग सीढ़ी से चड़कर पहाड़ के ऊपर जा रहे थे। पहाड़ा के ऊपर एक मंदिर भी बना था जहा लोगो की भीड़ दिख रही थी।

स्वीटी ने जब यह नज़ारा देखा तो वह राजेश से बोली।

वाउ, भइया, क्या नज़ारा है। देखो लोग नहाने का कितना मज़ा ले रहे हैं। झरने को देखो प्रकृति का कितना मनोरम दृश्य है। यहां तो बड़ा मजा आयेगा।

सुनिता, शेखर और राजेश भी वहा का दृश्य देखकर आनंदित हो गए।

शेखर _यह तो बड़ी अच्छी जगह है, क्यू सुनिता।

सुनिता _हा जी, पर लोग तो यहां देखो कैसे बेशर्रमो की तरह नहा रहे हैं, स्त्री और पुरषों के बीच कोई परदा ही नहीं। देखो कैसे पकड़ा पकड़ी खेल रहे हैं।

स्वीटी _मां, ये इंज्वॉय कर रहे हैं और हम भी यहां इंज्वॉय करेंगे। क्यू भइया?

राजेश _हा, नहाने में बड़ा मज़ा आएगा।

शेखर _अरे भाई, पहले थोडा घूम लो जगह का अवलोकन कर लो उसके बाद नहाने का मज़ा लेना।

देखो कुछ लोग पहाड़ पर चढ़ रहे हैं चलो हम भी ऊपर जाकर देखते है वहा से नज़ारा कैसे दिखता है।

अब वे पूल पार करके कुंड के उस पार चले गए जहां सीढ़ी बनी थी। वे सीढ़ी से पहाड़ के ऊपर जाने लगे जब वे ऊपर पहुंचे तो निचे का नज़ारा देखकर मंत्रमुग्ध हो गए।

पहाड़ के चारो तरफ अन्य पहाड़ नजर आ रहे थे। पानी ऊपर से बहते हुए पहाड़ के नीचे गिर रही थी। ऊपर भी काफी लोग मौजूद थे। ऊपर बहते पानी में कुछ युवक एवम युवतियां नहाने का मज़ा ले रहे थे। कुछ लोग खडा होकर उन्हें नहाते देख रहे थे।

कुछ लोग वहा बैठकर अपने साथ लाए टिफिन का मज़ा ले रहे थे।

शेखर _यहां का नज़ारा तो अदभुत है भई।

सुनिता _देखो वहा एक छोटा मंदिर भी है चलो पहले दर्शन कर लेते है। वे मंदिर जाकर दर्शन करआए।

स्वीटी _भैया चलो अब हम भी नहाने का मज़ा लेते है।

सुनिता _मै तो कहता हूं की तुम लोग ऊपर ही नहा लो। यहां भीड़ कम है। नीचे तो बहुन्त भीड़ है।

ऊपर पानी भी चट्टानों से उछल कूद करते हुए बह रहा था। पानी उथला था। सीडी नुमा पहाड़ से पानी उछल कूद कर बह कर पहाड़ के निचे गिर रहा था।

राजेश _ठीक है मां हम ऊपर ही नहाएंगे पर आपको भी नहाना पड़ेगा।

स्वीटी _हा मां, भइया ठीक कह रहा है। ऊपर भी तो देखो कुछ महिलाएं नहा रही है।

शेखर _बच्चे चाह रहे हैं तो जाओ भाई, उसे निराश न करो।

सुनिता _पर जी, मुझे शर्म आयेगी।

सुनिता _मां, यहां तो सभी मजे ले रहे हैं। इसमें शर्माने की क्या बात है।

स्वीटी _पापा आप भी नहाओ न हमारे साथ।

शेखर _बेटा मेरी क़मर में अभी भी थोड़ा, दर्द है। नही तो मैं भी तुम लोगो के साथ नहाने का मज़ा लेता।

शेखर _राजेश बेटा जाओ तुम कार से कपड़े और अन्य सामान लेकर आ जाओ।

राजेश _ठीक है पापा।

राजेश कार से सामान ले आया।

शेखर _नहाने के लिए ड्रेस चेंज कर लो, वहा झाड़ी के पास चलते हैं वहा कोई नही तुम लोग वहा पर ड्रेस चेंज कर लेना।

वहा पर जाकर, स्वीटी पायजामा और टी शर्ट पहन ली, राजेश ने लोवर और टी शर्ट, सुनिता गाउन पहन ली।

वहा पर नहाने वाली अधिकतर महिलाएं गाउन या साड़ी में ही नहा रही थी।

वे तीनों ड्रेस चेंज करने के बाद पहाड़ के ऊपर जो जल की धारा बहकर आ रही थी, जिसमे कई लडके लड़किया एवम महिलाएं नहा रही थी, वे भी बहते पानी में उतर गए। पानी एकदम स्वच्छ था। न ठंडी थी न गरम। स्वीटी तो घुटने भर पानी वाली जगह पर जाकर डुबकी लगाने लगी।

और राजेश, सुनिता को आने के लिए आवाज देने लगी।

मम्मी यहां पर आओ। यहां पर नहाने के लिए अच्छी जगह है। यहां पर नदी की कम है।

राजेश और सुनिता भी स्वीटी के पास पहुंच गए और दोनो पानी में बैठ गए। बैठने पर पानी छाती तक आ रही थी।

कुछ लोग बहती धारा के काफी आगे वहा से पानी में बहते बहते। निचे की ओर आने का मज़ा ले रहे थे।

स्वीटी _भइया चलो न हम भी ऊपर जाकर पानी में बहते बहते नीचे आयेंगे बड़ा मज़ा आएगा।

राजेश _चलो मां तुम भी।

सुनिता _नही बेटा मैं यही ठीक हूं।

और सुनिता वही पानी में लेटकर, नहाने का मज़ा लेने लगी।

सुनिता _तुम लोग सम्हल कर जाना बड़े बड़े पत्थर है। कही चोट न लग जाए। ठीक है मां।

र स्वीटी राजेश का हांथ पकड़ लिया और दोनो बहते पानी के आगे जाकर वे पानी में पीठ के बल लेट गए अपने सिर को ऊपर कर आकाश की ओर देखते हुए, पानी के साथ बहते बहते नीचे आने लगे, फिर पानी के साथ दोनो लुढ़कते, बहते हुवे सुनिता जहां पानी में लेटी थी। वहा पहुंच गए।

स्वीटी _मां, बड़ा मजा आया, चलो न तुम भी।

सुनिता _न बाबा, मुझे तो यही पर मजा आ रहा है।

शेखर तो वहीं पर बैठ कर जहा पर समान रखे थे, लोगो को जलक्रीड़ा करते हुवे देख रहा था।

स्वीटी ने देखा कुछ लडके लड़किया थोड़ा गहरे पानी में पकड़ा पकड़ी खेल रहे थे,वे जा चुके हैं तो वह बोली।

स्वीटी _चलो, हम भी वहा जाकर पकड़ा पकड़ी खेलेंगे वे लडके लड़किया जा चुके हैं।

राजेश _चलो मां वहा पर ज्यादा मज़ा आएगा।

सुनिता भी जाने तैयार हो गई।

वे सभी उस जगह पहुंच गए, वहा पर पेट तक आ रहा था। वे तीनों वहा जाकर पानी में तैरने लगें।

स्वीटी _भइया तुम भागो मां और मैं तुम्हे पकड़ेंगे।

राजेश _अच्छा चलो मुझे पकड़ के बताओ। आ जाओ।

जब स्वीटी राजेश की ओर आती थी तो राजेश पानी में डूब कर अदंर ही अदंर तैर कर दूर निकल जाता था।

सुनिता हसने लगी, बेटी राजेश को पकड़ना तुम्हारे बस की बात नही।

स्वीटी _अच्छा तो आप पकड़ के दिखाओ।

राजेश _आप दोनो कोशिश करो।

वे दोनो कोशिश करने लगे पर राजेशको पकड़ न सके।

सुनिता _मै तो थक गई।

वे दोनो हार मान लिए।

तभी सुनिता आस पास देखने लगी।

स्वीटी _मम्मी इधर उधर क्या देख रही हो।

सुनिता _बेटी, मुझे सुसु लगी है।

स्वीटी _मां, यही पानी में करलो किसी को पता नही चलेगा। मैंने तो पानी में ही कर ली।

सुनिता _क्या? तू कितनी गंदी हो गई है। छी, तुमने पूरा पानी ही गंदा कर दी।

स्वीटी _मुझे तो पानी मे ही मूतने में ही मज़ा आया।

सुनिता _छी, बेशरम कही की। मै तो कहती हूं तुम भी कर लो।

सुनिता _मै तुम्हारी तरह बेशरम नही, और कितने लोग यहां पानी में नहा रहे हैं।

स्वीटी _फिर तो आपको किसी झाड़ी के पीछे ही जाना पड़ेगा।

सुनिता _पर यहां तो आज पास लोग मौजूद है।

राजेश _क्या बात है मां?

स्वीटी _भइया मां को पेशाब लगी है। हंसते हुए बोली।

सुनिता _चुप,बेशरम कही की। सुनिता राजेश के सामने लज्जित महसूस करने लगी।

राजेश _मां यहां पर तो लोगो की चहल पहल है।

स्वीटी _मम्मी, चलो हम, आगे ऊपर की ओर चलते हैं, लोग उधर लोग नही है। वहीं जगह देखकर पेशाब कर लेना किसी झाड़ी के पीछे।

राजेश _मां, स्वीटी ठीक कह रही है।

फिर वे तीनों एक दुसरे के हांथ पकड़कर, पत्थरों पर सम्हलकर चलते हुए पानी जिधर से बहकर आ रहा था, उधर जाने लगे। कुछ दूर जाने पर,,

स्वीटी _मां यहां कोई नही है। जाओ पानी किनारे वह झाड़ी दिख रही है उसके पीछे जा कर कर लो।

सुनिता _यहां तो घने जंगल है बेटा, कोई जानवर आ गया तो मैं अकेले नहीं जा पाऊंगी।

स्वीटी _मां भईया है न, वो पास में खड़े रहेंगे। तुम कर लेना।

यहां पर पानी कितनी अच्छी है मै यही पर थोड़ा मज़ा ले लूं, आप लोग जाओ।

सुनिता _चलो बेटा।

राजेश और सुनिता बहते पानी से निकलकर छोटे छोटे पत्थरपर ,एक दूसरे के हांथ पकड़कर सम्हल कर चलते हुवे, झाड़ी की ओर जाने लगा। झाड़ी के पास जाकर वे पेशाब करने के लिए उचित स्थान देखने लगा।

तभी सुनिता के कानो में किसी की सिसकने एवम बोलने की आवाज सुनाई दी।

सुनिता _लगता है बेटा यहां पर आस पास कोई है।

राजेश _मां यहां पर कौन होगा ?

सुनिता _अभी मुझे किसी की आवाज सुनाई दी।

राजेश _मां ये तुम्हारा वहम होगा।

तभी फिर से सिसकने और बोलने की आवाज सुनाई दी। यह आवाज राजेश ने भी सुनी।

राजेश _मां शायदआप ठीक कह रही है।

मै देखता हूं कौन है।

राजेश जंगल में कुछ कदम आगे बड़ा। आगे का नज़ारा देखकर दंग रह गया। एक 35_40वर्ष की महिला पेड़ को पकड़ कर झुकी थी और एक युवक पीछे से दनादन चोद रहा था। महिला के मुख से कामुक सिसकारी निकल रही थी।

राजेश यह नज़ारा देखकर दंग रह गया।

युवक उस औरत के क़मर को पकड़कर जोर जोर से धक्का लगा रहा था। महिला chudai के आनंद में सिसक रही थी ऊ, आ,, उई,,, आह,,, ऊं,,,आई,,, ईई

इधर सुनिता ने देखा की राजेश वहा खड़ा होकर कुछ देख रहा है। यह जानने की वह क्या देख रहा है। वह भी वहा पहुंच गई।

जब सुनिता ने वह नज़ारा देखा तो वह भी दंग रह गई। की किस तरह इस सुनसान जगह पर एक अपने से काफी बड़ी उम्र की महिला को एक लड़का पीछे से चोद रहा है। और औरत मजे में सिसक रही है।

वह भी आश्चर्य से देखने लगी। राजेश को तो पता ही नहीं था की उसकी मां पीछे खड़ी होकर यह नजारा देख रही है।

तभी उस महिला ने कहा,, राजू जल्दी करो, घर वाले हमे ढूंढ रहे होंगे।

वह लड़का _चाची क्या मस्त मॉल है तू,बड़े दिनों बाद तुमको चोदने का मौका मिला है। मैने तो यहां घूमने आने का प्लान इसी लिए बनाया था की मौका देखकर तुम्हे चोद सकू।

ऐसा बोलकर वह लड़का और जोर जोर से चोदने लगी, ले मेरी रानी ले,, ले मेरे land का मज़ा ले,,

औरत _हाय, मै भी तेरा land लेने के लिए तरस रही थी। जब से तुमने मुझे चोदा था, तुम्हारे चाचा जी के साथ तो मजा ही नही आता।

इन दोनो की chudai को देखकर राजेश का land तनकर खड़ा हो गया।

सुनिता भी गर्म हो गई।

कुछ देर बाद लगा की उसके पिछे कोई खड़ा है। उसने देखा की उसकी मां पिछे खड़ी है और नज़ारा देख रही है।

सुनिता _चलो बेटा यहां से।

राजेश और सुनिता वहा से दूसरीजगह जाने लगे,,

राजेश काफी गर्म हो गया था।

राजेश _मां, यहां तो चाची और भतीजा मजे ले रहे हैं।

सुनिता का दिल जोड़ो से धड़क रहा था।

सुनिता _छी कितने बेशरम लोग है। यहां घरवालों से छुपकर, रिश्ते को कलंकित कर रहे है।

सुनिता _तू तो आंखे फाड़े देख रहा था,,,

तू भी बेशरम हो गया है।

राजेश _मां तुम तो हमेशा मुझे ही दोष देती हो।

_मां आप भी तो पता नही कब से देख रही थी

वैसे मां मज़ा आ रहा था देखने में,,

चुप बेशरम कही का,,,

राजेश _मां आपको तो पेशाब करनी थी न यही पर कर लो।

सुनिता _ठीक है तुम थोड़ा दूर जाओ।

राजेश वहा से थोड़ा दूर चला गया।

सुनिता अब अपना गाउन ऊठा कर अपनी पेंटी नीचे सरका दी और मूतने बैठ गई। उसे जोरो की मूत लगी थी। जैसे ही थोड़ा दबाव लगाई मूत की तेज धार उसके chut से निकलकर पेड़ की निचे पड़ी पत्ते पर पड़ी .

जिससे चर्र,,,,,,,, की आवाज आने लगी यह आवाज जब राजेश के कानो पर पड़ी तो, उसका land और तन गया, उसके शरीर में खून दोगुने गति से दौड़ने लगा।

राजेश से रहा न गया वह अपना land लोवर से बाहर निकालकर सहलाने लगा।

और मूतने की कोशिश करने लगा।land खड़ा होने के कारण वह रूक रूक कर पेशाब बाहर आ रहा था।

इधर सुनिता पेसाब कर ली थी और जैसी ही राजेश के पास पहुंची। वह देखकर दंग रह गई।

राजेश अपना खड़ा land पकड़कर हिला हिला कर मूतने की कोशिश कर रहा था।

सुनिता _बेशराम अपने मां के सामने ही मूत रहा है।

राजेश _ क्या करू मां जोरो की मूत लगी थी।मां मूत तो लगी है पर बाहर नहीं आ रहा।

सुनिता _अब ये ऐसा खड़ा रहेगा तो मूत कैसी निकलेगी।

।,

 
राजेश अपने खड़े land को हाथ में पकड़कर मूतने की कोशिश करने लगा, पर मूत बाहर नहीं आ रहा था।

सुनिता _बेटा, जल्दी करो न, कही ऐसा न हो की स्वीटी हमे ढूंढती हुई यहां आ जाए।

राजेश _मां कोशिश तो कर रहा हूं, पर मूत बाहर ही नहीं आ रहा, देखो। राजेश सुनिता के सामने होकर अपना land दिखाते बोला।

सुनिता _मैने कहा न, तुम्हारा ये जब तक अकड़ा रहेगा पेशाब बाहर नहीं आएगी।

राजेश _तो ठीक है मां, मै बिना पेशाब किए चलता हूं और वह अपना लोअर ऊपर कर लिया।

सुनिता _हंसते हुवे बोली, बेटा अपने लोवर को तो देखो, स्वीटी तुम्हे ऐसे हालात में देखेगी तो क्या समझेगी।

राजेश _

राजेश अपने खड़े land को हाथ में पकड़कर मूतने की कोशिश करने लगा, पर मूत बाहर नहीं आ रहा था।

सुनिता _बेटा, जल्दी करो न, कही ऐसा न हो की स्वीटी हमे ढूंढती हुई यहां आ जाए।

राजेश _मां कोशिश तो कर रहा हूं, पर मूत बाहर ही नहीं आ रहा, देखो। राजेश सुनिता के सामने होकर अपना land दिखाते बोला।

सुनिता _मैने कहा न, तुम्हारा ये जब तक अकड़ा रहेगा पेशाब बाहर नहीं आएगी।

राजेश _तो ठीक है मां, मै बिना पेशाब किए चलता हूं और वह अपना लोअर ऊपर कर लिया।

सुनिता _हंसते हुवे बोली, बेटा अपने लोवर को तो देखो, स्वीटी तुम्हे ऐसे हालात में देखेगी तो क्या समझेगी।

राजेश _मां तो क्या करें?

सुनिता _बेटा, मै और स्वीटी दोनो जा रहे हैं, तुम जब नार्मल हो जाओ तो थोड़ी देर में आ जाना।

राजेश _हां, मां ये ठीक रहेगा।

सुनिता वहा से चले गई।

स्वीटी _मां आप अकेले आ रही है। भईया कहा है?

सुनिता _बेटी, राजेश का पेट थोड़ा गड़बड़ लग रहा था, तो वह फ्रेस होकर आएगा। चलो हम लोग चलते हैं।

स्वीटी और सुनिता वहा से चली गईं।

इधर राजेश का land बैठने का नाम नहीं ले रहा था। तभी उसने कुछ सोचा, और वह उस ओर जाने लगा जिधर वह औरत और युवक छुड़ाई chudai कर रहे थे।

राजेश ने देखा वह औरत का land चूस रही थी। शायद उसका एक राउंड हो चुका था और दूसरा राउंड के लिए लडके को तैयार कर रही थी।

राजेश ने कड़क आवाज में कहा, अबे क्या हो रहा है वहा,,

राजेश की आवाज सुनकर वे दोनो हड़बड़ा गए, और औरत ने उस लडके का land चूसना छोड़ दिया।

और सहमे हुवे खड़े हो गए।

राजेश उनके पास जाकर बोला, ये क्या कर रहे हों तुम दोनो, तुम्हारे घर वाले उधर तुम्हे ढूंढ रहे हैं और तुम लोग यहां रंगरेली मना रहे हो, अभी जाकर उन्हें बताता हूं की तुम लोग यहां क्या कर रहे थे।

लडका _चाची ये लडका है और इसने अगर मम्मी पापा को बता दिया तो, क्या होगा।

औरत _तुम कौन हो, हम कुछ भी करे तुम्हे क्या मतलब?

राजेश _अच्छा, तो ठीक है मैं जा रहा हूं तुम्हारे परिवार वालों को तुम लोगो की रासलीला के बारे में बताने।

राजू _चाची कही सच में घर वालों को बता दिया तो,,

औरत _देखो तुम ऐसा मत करो अगर तुमने ऐसा किया तो घर वालों को हम अपना मुंह नही दिखा सकेंगे।

राजेश _अब आई न लाइन पर।

ठीक है नही बताउंगा।

पर मुझे क्या मिलेगा।

औरत _तुम क्या चाहते हो।

राजेश _देखो तुम दोनो को देखकर मैं भी गर्म हो गया हूं। मुझे भी आप के साथ मजा करना है।


वह लडका तो पतला दुबला और राजेश से उम्र में भी छोटा था। जबकि राजेश का शरीर गठीला, और तानकत वर था।

औरत, राजू की ओर देखते हुए बोली, राजू अब क्या करें।

राजू _चाची मुझे लगता है की हमे इनका कहना मान लेना चाहिए ।

राजेश _दोनो, फुसफुसा रहे हो, तुम लोग राजी हो या जाऊ।

औरत _देखो, हम तैयार है, तुम हमारे घर वालों को कुछ मत बताना।

राजेश _ये हुई न बात।

राजेश अपना लोअर निकाल दिया जिससे उसका तना land उन दोनो के सामने आ गया।

राजू और वह औरत राजेश के land को आंख फाड़े देखने लगे। ऐसा land तो उसने chudai वीडियो में देखा था। अब वह हकीकत में देख रहे थे।

राजेश के लंबा और मोटा लण्ङ देखकर उस औरत के शरीर में एक अलग रोमांच भर गया।

राजू से एक बार chudne के बाद भी उसकी प्यास नहीं बुझी थी और वह राजू को फिर से तैयार करने के लिए land चूस रही थी पर राजू का land ढीला ही था।

औरत ने राजेश से कहा _तुम्हारा लन्ड तो काफी बड़ा और मोटा है।

राजेश _क्यू पसन्द आया, चल चूस साली इसको।

राजू _हा भाई, चाची ठीक कह रही है आपका land तो मेरे से दोगुना है।

राजेश _अभी तू बच्चा है। तुम सीखो मुझसे औरत को कैसे संतुष्ट करते हैं।

राजेश औरत से बोला,अब तुम देखती रहोगी या चूसना शुरु करोगी।

औरत राजेश के टांगों के नीचे बैठ गई। और राजेश के land को पकड़कर राजेश के आंखो में देखने लगी।

राजेश _औरत को देखकर बोला, चूस मेरी जान।

औरत ने राजेश के land को अपने हांथ में लेकर थोड़ा हिलाया फिर उसे अपने अपने मुंह में भर लिया। और फिर चूसना शुरु कर दिया।

राजेश उसका सिर अपने हाथों से पकड़कर लिया चूस मेरी जान आह मजा आ रहा है, हा ऐसे ही, तू बड़ी मस्त चूस रही है। हा और अदंर ले हा,,

राजेश तो स्वर्ग में पहुंच गया।

वैसे क्या नाम है तुम्हारा,।

औरत ने कहा, शशि।

राजेश _बड़ा प्यारा नाम है।

चूस मेरी रानी और जोर जोर से चूस, बड़ा मज़ा आ रहा है।

शशि भी राजेश का land देखकर उत्तेजित हो गई थी। ऐसा land वह पहले नही देखा था। उसका पति का land भी राजेश के land से काफी छोटा था। जैसे land से chudne की वह कल्पना करती थी, आज उसके आंखो के सामने थी।

इधर राजू अपने चाची को राजेश का land चूसते हुवे देख रहा था। वह अपने ढीले पड़ चुके land को अपने हाथों से हिलाकर खड़ा करने का प्रयास कर रहा था।

राजेश _अरे यार राजू, तू खडा क्या देख रहा है चांट अपनी चाची की chut

राजेश ने, शशि के चूतड को अपने हाथो से ऊपर उठाकर उसके साड़ी और पेटीकोट को ऊपर कर दिया ताकी राजू उसके chut चांट सके।

अब राजू निचे बैठ गया और अपनी चाकी के chut को चाटने लगा ।

राजू द्वारा छूट चाटने से शशि और ज्यादा उत्तेजित हो गई। और चूसना छोड़कर मुंह से सिसकारी निकालने लगी।

राजेश _अरे चूसना क्यू रोक दी मेरी रानी, चूस बड़ा मजा आ रहा है। और अपने land को उसके मुंह में ठूंस दिया।

शशि फिर land चुसने लगी।

राजू के द्धारा chut चुसाई से अत्यंत कामोत्तीज होकर शशि अपने chut से पानी बहाने लगी, अपनी चाची की chut का पानी चाटने में राजू को भी मज़ा आने लगा। वह उसके chut के पानी को चांट चांट कर पीने लगा।

राजेश _अब बस कर राजू, नही तो तुम्हारी चाची ऐसी ही झड़ जायेगी।

चल मेरी जान अब निचे लेट जा। अब तुम्हे मै जन्नत की सैर कराता हूं।

शशि जमीन पर लेट गईं।

राजेश उसके टांगो के बीच आ गया।

राजेश _अरे मेरी रानी अपने संतरे का तो दर्शन कराओ, मै भी तो देखू उसमे कितना रस भरा है।

राजेश, शशि के ब्लाउज का हुक खोलने लगा पर हुक, नही खुल रहा था। तब शशि ने स्वयं अपना ब्लाउज का हुक खोलने लगी, जब ब्लाउज का हुक खुला तो, राजेश ने उसकी ब्रा को नीचे खिसका कर उसके चूची को आजाद कर दिया।

उसके चूची देखकर राजेश का जोश और बढ़ गया। हाय सच में राजू तेरी चाची के संतरे तो काफी बड़े बड़े और सुडौल है बे,,

लगता है तुम्हारा चाचा संतरे को मसलकर इसका रस नही निकलता।

राजेश शशि के चूची को अपने हाथों में लेकर मसलने लगा।

राजेश का मर्दाना एवम अनुभवी हाथ जब शशि के चूची को मसलना शुरु किया तो उसे लगा कि पहली बार किसी मर्द से उसका सामना हुआ है।

अब राजेश, शशि के चूची को मुंह में भरकर चुसने लगा। शशि तो आनद में सिसकने लगी। उसके chut की ओर रक्त का प्रवाह और तेज गति से होने लगा।

राजेश _सच में राजू तेरी चाची तो क्या हॉट मॉल है?

अब राजेश शशी की खूबसूरत होंटो को अपने मुंह में भरकर चुसने लगा।

शशि को राजेश की इन यौन क्रियाओं से गजब का आनद मिला रहा था। वह भी राजेश के ओंठ को अपने मुंह में भरकर कर जोर जोर से चुसने लगी।

इधर राजू उन दोनो की यौन क्रियाओं को देखकर मजा ले रहा था और अपना land हिला रहा था।

अब राजेश शशि की टांगो को फैला दिया और अपने land को अपने हाथो में पकड़कर शशि की chut में पीटने लगा।

राजेश _हाय, यार राजू क्या मस्त chut है तेरी चाची की पाव रोटी की तरह फूली हुई,, एकदम चिकनी, लगता है आज ही बाल साफ़ की है चुदाने के लिए। हाय इसे बजाने में बड़ा मज़ा आएगा।

अब राजेश land के टोपे को शशि के बुर के छेद पर रख कर दिया।

शशि का को डर लग रहा था की पता नही इतना बड़ा land वह कैसे ले पाएगी। अभी तक उसके chut में उसके पति और राजू का land गया था जो राजेश के land से आधा ही था।

राजेश ने एक हल्का धक्का मारा। शशि की chut तो एकदम गीली हो चुकी थी,land का टोपा आसानी से chut में चला गया। शशि सिसक उठी।

अब राजेश एक जोर का धक्का मारा,land का आधा से ज्यादा भाग शशि के chut को चीरता हुआ अंदर चला गया। शशि के मुख से चीख निकल गई।

राजेश _क्या huwa जानेमन चीख क्यू रही है। दर्द हो रहा है क्या।

शशि _तुम्हारा काफी बड़ा है आराम से करो।

अब राजेश, शशि के स्तन को अपने हाथो में लेकर उसको मसलने एवम चुसने लगा।

जिससे शशि के chut की ओर खून फिर तेज गति से बहने लगा। उसके मुंह से सिसकारी निकलने लगी।

अब राजेश उकड़ू बैठकर शशि के चूची को मसलते हुए land को धीरे धीरे chut में अदंर बाहर करने लगा।

अब शशि को दर्द के बजाए मजा आना सुरू हो गया। अब राजेश अपना गति बड़ाना शुरू कर दिया। land शशि के chut से पुरी तरह जकड़ा huwa अदंर बाहर होने लगा।

राजेश _राजू बड़ी टाइट है तेरी चाची की chut देखो land कितना कसा कसा अदंर बाहर हो रहा है। लगता है तुम्हारी चाची की chut को किसी ने अच्छे से रगड़ा नही है। हाय बड़ा मज़ा आ रहा है chut मारने में।

अब राजेश जोर जोर से धक्का लगाकर शशि की बुर को चोदने लगा। पूरा land जड़ तक शशि के बुर में धस कस अदंर बाहर हो रहा था।

इधर शशि को यकीन ही नहीं हो रहा था की उसकी बुर ने इतना बड़ा land को पुरी तरह निगल गया है।

Land शशि की बुर की दीवारों को अच्छी तरह रगड़ता हवा गपागप अंदर बाहर होने लगा।

शशि और राजेश दोनो को बहुत मजा आ रहा था।

राजेश का land मोटा होने के कारण chut को पुरी तरह फाड़ दिया था जिससे chut का भगनसा land से अच्छी तरह रगड़ खा रहा था। जिससे शशि बहुंत ज्यादा उत्तेजित होकर मादक सिसकारी निकालने लगी। वह राजेश के क़मर का अपने हाथों से पकड़कर अपनी क़मर उचकाकर राजेश का सहयोग करने लगी।उसके chut से पानी झरने की तरह बह रही थी, जिससे लैंड बीना किसी रुकावट के आसानी से गपागप अन्दर बाहर हो रहा था।

हर धक्के के साथ शशि की चूड़ियां भी खनक रही थी। Chut से पानी बहने के कारण land फच फ्च, गैच गाच करते हुए अदंर बाहर हो रहा था।

शशि तो जैसे जन्नत में पहुंच गई थी। वह हवस में अपनी मुंह से सिसकारी निकालने के साथ साथ बड़बड़ाने लगी। उई मां ई। आई,,,, ऊ ओ,,,, आह ,,, उन,,,, और जोर जोर से चोदो में raa,,,,jja,,, आई,, ऊ,, उई मां,, मै मर गईं

_क्या मस्त चोदता है re तू, कहा था अभी तक, तू मुझे पहले क्यू नही,,,,,मिला,,,, उई,,,,मां ,,आ,, ई,,,

और जोर जोर से चोदो,, और जोर से,,,,,,

राजेश भी,, ले शाली रण्डी ले,,, ले और ले, तू भी क्या याद रखेगी,, किस मर्द से पाला पड़ा है,,, हाय क्या मस्त chut है तेरी,,,, ले,, ले, एक और ले,,, ले शाली,, आज तेरी chut की सारी प्यास बुझा दूंगा,,,

शशि _हा ऐसे ही मेरे राजा और जोर से आह मर गई मैं,, उई, ई ई। मां,, आह, उई,,, मै गई re,, मै गई,,,,,,,,,,

और शशि राजेश के क़मर को अपने टांगो से जोर से जकड़ लिया, अपने हाथो से उसके पीठ को पकड़कर बीच लिया, और कपकपाते हुए झड़ने लगी, झड़ते हुवे आनंद के मारे बेहोश सी हो गई।

राजेश chudai रोक दिया वह भी थोड़ा सुस्ताने लगा।

इधर राजू भी दोनो की धमाकेदार chudai देखकर बहुत उत्तेजित होकर अपने land को तेजी से हिलाते हुए आह आह करके झड़ गया।

कुछ देर बाद शशि को होश आया , तो वह शर्माने लगी पता नही जोश में आकर वह पराया मर्द को क्या क्या कह रही थी।

राजेश _कैसा लगा मेरी जान,

शशी _तुम्मे तो बहुत ताकत है।

मुझे थका दी।

राजेश _अभी मेरी ताकत कहा देखी हो मेरी जान।

अभी तो मेरा huwa ही नही है।

वह अपने land को शशी को दिखाते हुए बोला देखो अभी भी कैसे खड़ा ठुमक रहा है।

राजेश का land शशि के chut का रस पीकर और लंबा और मोटा हो गया था जिसे देखकर शशी दंग रह गई।

बाप re ये तो और लंबा मोटा हो गया है। अपने छूत की ओर देखी उसका बुर तो बुरी तरह फट गया था। उसका द्वार फेल गया था। हे भगवान इसने तो मेरी chut ही फाड़ दिया।

शशी _क्या नाम है तुम्हारा,

राजेश _वैसे तो मेरा नाम राजेश है पर लड़किया प्यार से राज कहती है।

राज _तुम तो कमाल के हो, तुम्हारा एक बार नही huwa है और मेरी प्यास बुझा दी। देखो मेरी chut की क्या हालात हो गई है।

राजू कुछ सीखा राज से औरत को कैसे खुश करते हैं।

राजू _हा चाची, राज भाई का जवाब नहीं है गजब की ताक़त है इनमे।

शशी _राज अब बस करो अब मैं और नही chud पाऊंगी। वैसे भी काफी लेट हो गई है घर वाले परेशान हो रहे होंगे।

शशि और राजू अपने कपड़े ठीक करने लगें। इधर राजेश ज्यादा जोर जबरदस्ती भी नहीं कर सकता था। उसे मन मारकर रहना पड़ा।

शशी _चलो, राजू चलते हैं, काफी लेट हो गई है।

वे दोनो जंगलसे बहते पानी की धारा की ओर जाने लगे। जब वे बहते पानी के पास पहुंचे राजू की नजर किनारे की दूसरी ओर पानी पी रहे , तेंदुए पर पड़ा। वह रुक गया,राजू थर थर कापने लगा।

शशी _क्या huwa re, रुक क्यू गया

राजू _चाची सामने देखो। तेंदुवा।

शशि ने जब तेंदुए को देखा, डर के मारे उसकी हालात खराब होने लगी।

तभी तेंदुए की नजर उन दोनो पर पड़ी वह

तेंदुवा उन दोनो को देखकर गुर्राने लगा। राजू और शशि को लगा की यहां से भागने में ही भलाई है। पर पानी में भाग नही सकती इसलिए,,

शशि _राजू ये तेंदुवा, तो हमे देखकर गुर्रा रहा है। भागो यहां से नही तो ये हम पर हमला कर देगा।

वे वापस भागने लगे।

राजू आगे निकल गया शशी साड़ी पहनी थी वह पीछे रह गई, उन दोनो को भागता देखकर तेंदुवा पानी पार करके उन दोनो पर हमला करने के लिए दौड़ा,,

इधर राजेश ने जब राजू को देखा,,,

राजेश _क्या huwa राजू क्यू भागता huwa वापस आ गया। चाची कहा है।

राजू हांफते हुवे कहा, राज भैया वो तेंदुआ, पीछे,,,,,

हमारे पीछे पड़ा है,,,

राजेश_क्या?

तभी उन दोनो ने देखा चाची उनके ओर भागते हुए आ रही हैं, और तेंदुवा उसके पीछे उस पर हमला करने दौड़ रहा है?

राजेश तेजी से शशि की ओर दौड़ा,,

इधर तेंदुवा ने शशि पर छलांग लगा दिया,,

राज ने उस तेंदुए पर छलांग लगा दिया।

तेंदुवा दूर जा गिरा, राज भी दूर कर तेजी से अपने को सम्हाला और खड़ा हो गया।

तेंदुवा पुरी तरह गुस्से में आ गया, उसने राज की ओर गुस्से में देखकर गुर्राने लगा।

राजेश भी पुरी तरह हमले का सामना करने तैयार होकर तेंदुए के आंखो में देखने लगा।

दोनो एक दूसरे की आंखों में गुस्से से देखने लगे, राजेश अपनी दांतो को भींच कर बडी बडी आंखो से तेंदुए को ललकारने लगा।

इधर राजू और शशि दोनो गहरी सांस लेते हुए, भयभीत होकर,तेंदुए और राजेश की की ओर देख रहे थे।

कुछ देर तक तेंदुवा और राजेश यू ही, एक दुसरे पर गुस्से से हमला के पोजिशन पर खड़े रहे, पर राजेश का साहस तेंदुवा पर भारी पड़ा और तेंदुवा वहा से भाग गया।

तेंदुवा के भागते ही शशी और राजू के जान में जान आया।

शशि तेजी से भागते हुए राजेश के पास गई।

शशी _राज तुम ठीक तो हो न।

राज तुम नही होते तो पता नही तेंदुवा मेरा क्या हाल करता।

राज तुम ताकत वर होने के साथ साहसी भी हो।

राजू _हा राज भईया, तुम तो बिल्कुल नही डरे तेंदुए से बल्की तेंदुआ को ही भागना पड़ा।

शशि _राज मुझे माफ़ कर देना मैने तुम्हे अधूरे में ही छोड़ कर जा रही थी। तुम चाहो तो मुझे फिर से भोग सकते हो।

राजेश _नही चाची जी, माफी तो मुझे मांगनी चाहिए, मैने हवस में आकर आप लोगो को ब्लैक मेल किया, मुझे माफ़ कर दीजिए।

शशि _पहले तो मुझे बुरा लगा था, लेकीन मै अब बहुंत खुश हूं कि मैं तो किस्मत वाली हूं जो आपका सानिध्य पाया।

और राजेश को शशि अपने बाहों में भर ली।

और बोली, चलो राज मै तुम्हे अपने परिवार वालों से मिलाती हू,,,

इसे तो तुम जानते हो ये राजू है मेरा जेठ का लडका।

अब वे तीनों वापस अपने परिवार वालों के पास जाने के लिए निकल पड़े आपस मे बात चित करते हुए।

राजेश _वैसे तो आप लोग बड़े अच्छे घर के लग रहे हो,फिर यहां इस सुनसान जगह पर ये सब,,,

शशि _राज हम भरत पुर से है, हमारे कपड़े और ज्वेलरी का व्यापार है।

मेरा पति जल्दी झड़ जाते है, मुझे संतुष्ट नहीं कर पाते। एक रात राजू और मैं घर में अकेले थे तो मैं बहक गई और हम दोनो में सम्बंध बन गए। तब से हम दोनो को जब मौका मिलता हम सम्बंध बनाते। काफी दिन हो गए थे हमे सम्बंध बनाए। हम आज यहां परिवार वालों के साथ पिकनिक मनाने आए थे।

तभी हम लोग मौका का फायदा उठाने परिवार वालों से पेट खराब होने का बहाना बनाकर इधर चले आए।

वैसे तुम कहा से हो क्या यहां अकेले आए हो।

राजेश _मै अकेला नहीं हू साथ में मेरे पापा, मम्मी और मेरी बहन भी है, हम राजधानी के रहने वाले है। यहां छुट्टी मनाने भरत पुर आए हैं।

इधर सुनिता राजेश का ही राह देख रही थी। शशि और राजू के परिवार वाले भी वही पर मौजूद थे जहां सुनिता और स्वीटी बहते पानी में नहाने का आनंद लें रहे थे।

जब सुनिता ने राजेश को शशि और राजू के साथ आते हुवे देखा, मन में सोचने लगी।

ये औरत और लडका तो वहीं है जो chudai कर रहे थे। राजेश इन लोगो के साथ क्यू आ रहा है,, उसे कुछ अच्छा नहीं लगा,,
 
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