Incest यह क्या हुआ - Page 6 - SexBaba
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Incest यह क्या हुआ

Rajesh भगत से बोला अबे एक और सिगरेट दे।

भगत _भाई कितना सिगरेट पियेगा। ज्यादा सेहत के लिए हानि कारक है।

राजेश _अबे ज्यादा ज्ञान मत बांट मै जो कह रहा हूं ओ कर।

भगत_भईया तुम भी न बडा मुड्डी हो।

भगत एक और सिगरेट सुलगाकर भगत की ओर बढ़ाया।

भगत सिगरेट लेकर कस लगाते हुवे कहा।

हा तो अब अपनी कहानी आगे सुना तू बताने वाला था कि चन्दन और उसकी मां कमला के बीच आखिर शारीरिक संबंध कैसे बना?

भगत _चंदा ने अपनी सास के कहने पर मुझे अपना घर बुलाया, मैने चंदा से पूछा कि घर में सब कैसा है?

सब ठीक तो है न।

चंदा बोली, डरने की कोई बात नहीं, सब ठीक है, मां जी को तुमसे कुछ जरूरी बात करनी है इसलिए तुम घर आ जाओ।

मै सुबह करीब 10 बजे चन्दन भैया का घर पहुंचा।

उस समय चन्दन भैया अपने किराना दुकान पर था। मै घर का दरवाजा खटखटाया, चन्दन भैया की नज़र मुझपर पड़ा, मेरी आने की बात उसने अपनी मां को बताई।

कमला ताई ने दरवाजा खोला।

मुझे देखकर ताई ने कहा आओ बेटा अंदर आओ।

मैंने ताई से कहा, मां जी आपने मुझे बुलाया था।

कमला ताई _हा बेटा, मुझे तुमसे कुछ बाते करनी है।

मै घर के बरामदे में रखी कुर्सी पर बैठ रहा था कि ताई ने कहा बेटा एक काम करो। तुम चन्दन के कमरे मे बैठो मैं आती हूं।

ताई ने चांद भौजी से कहा जाओ बहु तुम भगत को अपने कमरे मे ले जाओ मैं आती हूं।

चंदा भौजी मुझे अपने कमरे मे ले गई मैं वहा बेड में बैठ गया। मै सोचने लगा कि आखिर ताई को मुझसे क्या काम होगा, उसे मुझसे क्या बाते करनी होगी। मैने चंदा भौजी से पूछा।

चंदा भौजी ने कहा कि तुम इतने दिनो सेउसकी घर की इज़्ज़त लूट रहेहो, उसी की खबर लेने तुम्हे बुलाया है और ओ मुस्कुराने लगी।

मैने कहा पर भौजी तुमने तो कहा था कि सब ठीक है।

भौजी क्यों डर लग रहा है क्या?

मैने कहा भौजी आपके रहते मुझे काहेका डर।

भौजी_अरे मै तो मजाक कर रही थी। तुम्हे डरने की जरूरत नहीं।

तभी कमरे में कमला ताई पहुंची वह बोली, अरे बहु तुम एक काम करो, तुम कीचन में जाकर भगत के लिऐ कुछ कुछ नाश्ता बना दो।

चंदा भौजी _ठीक है मां जी।

भौजी के चले जाने के बाद मैने कमला ताई से कहा बताओ माजी आपको मुझसे क्या बाते करनी है।

कमला _बेटे कल रात से मैं काफ़ी चिंतित हू। तुम तो जानते हो कल की बाते। मेरे और चन्दन के बीच जो संबंध की बाते है अगर गांव वालो को पता चल गया तो हम किसी को मुंह दिखाने के लायक नहीं रहेंगे।

इसलिए बेटा मैं तुम्हारा पैर पड़ती हू। तुम यह बात किसी को मत बताना। मै यह अहसान जिंदगी भर नही भूलूगी।

भगत _नही मां जी,आप तो मेरे मां जैसी हो आप मेरे पैर छूकर मुझे शर्मिन्दा न करे।

कमला _नही बेटा हमसे जो गलती हुई है उसका प्रायश्चित तो करना ही पड़ेगा।

भगत _ मां जी मैं आपको वचन देता हू की मैं यह बात गांव वालो को नही बताऊंगा। मेरे तरफ से बेफिक्र रहिए। आपको चिंता करने की जरूरत नहीं।

कमला _मुझे तुमसे यही उम्मीद थी बेटा मैं तुम्हारा यह अहसान जिंदगी भर नही भूलूंगी।

भगत _मां जी मैं यह जानना चाहता हूं कि आखिर चन्दन और आपके बीच ये huwa कैसे।

अगर आप बता सके तो मैं जानना चाहूंगा।

कमला ताई _क्या बताऊं बेटे परिस्थिति ही ऐसी बन गई की हमारे बीच मां बेटा के पवित्र रिश्ता के अलावा एक और रिश्ता बन गया।

मै भी पहले एकसंस्कारी, धार्मिक, कर्तव्य परायण, पतिव्रता स्त्री थी।

और कमला भगत को आप बीती सुनाने लगी,,,, जो आप लोगो को मैं अगले अपडेट में बताउंगा।

तब तक के लिए good night
 
चन्दन की मां कमला, भगत को अपनी आप बीती सुना ने लगी कि किस तरह वह अपने बेटे से शारीरिक संबंध बनाने मजबूर हो गई। उसने को भी बताया वृत्तांत निम्नानुसार हैं __

बात आज से चार साल पहले की है, हमारे परिवार में पांच सदस्य हैं। उस समय मेरा पति श्यामलाल 48वर्ष, मै कमला 44 वर्ष, मेरी बड़ी बेटी चंपा 25वर्ष, छोटी बेटी चंचल 22वर्ष और सबसे छोटा चन्दन जिसकी उम्र उस समय 18वर्ष की थी।

बड़ा खुशहाल परिवार था हमारा घर में किसी प्रकार की कोई कमी नहीं थी। मेरा पति गांव में किराना दुकान चलाता था। जिससे अच्छी आमदनी होती थी।मेरी दोनो बेटियों की शादी हो चुकी थी वे अपने ससुराल में रहते थे, बड़ी बेटी चम्पा की 3वर्ष की एक बच्ची भी थी।

घर में अब हम पति पत्नी और मेरा बेटा चन्दन ही रह रहे थे। चन्दन 12 वी कक्षा पास कर लेने के बाद पढ़ाई बंद कर ,किराना दूकान में अपने पिता का हांथ बटाने लगा था। सब कुछ कुशल मंगल पूर्वक चल रहा था कि तभी किसी की बुरी नजर हमारे परिवार पर लगी।

मेरे पति अक्सर दूकान में समान खतम हो जाने पर,अपने मोटर साइकिल से ,पास के शहर जाकर किराना सामान लाता था।एक दिनमेरा पति किराना सामान लाने अपने मोटर साइकिल से पास के शहर गया था।

वह सामान मोटरसाइकल में लादकर गांव आ रहा था। सामान ओवरलोड हो गया था। रास्ते ट्रक गुजरने पर वह मोटर साइकिल को कंट्रोल नही कर पाया और वह मोटर साइकिल से सामान सहित गिर पड़ा।उसके सिर पर चोट लगी, वह उठ नही पाया।

गांव का एक पड़ोसी शहर जा रहा था। उसने मेरे पति को पहचान लिया ।उसनेफोन द्वारा हादसे की जानकारी मेरे बेटे को दिया।

हम लोग चन्दन के बापू को,लोगो की मदद से पास के शहर के हॉस्पिटल में इलाज के लिए ले गए।

डॉक्टरों द्वारा चेकअप से पता चला की मेरे पति के सिर पर अंदरूनी चोंट लगी है जिसके कारण उसका एक हांथ और पैर काम नही कर पा रहा।

डॉक्टरों ने अपने ओर से पुरी कोशिश की परंतु। मेरे पति के स्थिति में कोई सुधार नहीं आया तब डॉक्टरों ने उसे बड़े हॉस्पिटल ले जाने की सलाह दी।

डॉक्टरों के सलाह के अनुसार हम उसे बड़े शहर में डॉक्टरों द्वारा बताए हॉस्पिटल में एडमिट करा दिए।चन्दन के पिता करीब एक माह तक उस हॉस्पिटल में एडमिट रहा।

उसके हांथ एवम पैर में थोडा मूवमेंट जरुर आया लेकिन अभी भी स्वयं खड़ा हो पाने की स्थिति में नही आया था। डॉक्टरों ने कहा कि आप इन्हे घर ले जाए इनके लिए दवाई लिख रहे हैं जो नियमित रूप से खिलाते रहना होगा जिससे इनकी स्थिति में सुधार होता जाएगा।

इस प्रकार हम लोग चन्दन के पिता जी को घर ले आये एवम डॉक्टर के द्वारा दिए गए दवाई को नियमित रूप से खिलाते रहे।मेरे पति के स्थिति में कुछ सुधार भी huwa,अब वह उठकर बैठ सकता था। उसके पैर में काफ़ी सुधार huwa था पर हांथ कि स्थिति में ज्यादा सुधार नहीं huwa था।

इस तरह10माह गुजर गए।इसी बीच मेरी बड़ी बेटी चम्पा जो इस समय 8माह की पेट से थी। वह dilwari के लिए अपनी मायका चली आई क्यू की उनकेससुराल में कोई नही था, जो चम्पा की देखभाल कर सकें

।दामाद जी ड्यूटी पर चला जाता था। चम्पा घर में अकेली रह जाती थी इसलिए dilvari बच्चे को जन्म देनेके लिए वह अपने मायका हमारे पास चली आई। अपने 3वर्ष की बेटी को लेकर ।

अब हम धीरेधीरे इस दुख से बाहर निकल रहे थे। बेटा चन्दन पूरी तरह से अब दूकान की जिम्मेदारी संभाल लिया था। मैं घर का काम और पति की सेवा में अपना समय बिताने लगी।

चम्पा भी अब हमारी कुछ मदद कर देती थीं।सब कुछ सामान्य होने लगा था तभी एक कि दिन मेरी ननंद जो दूर एक गांव में बिहा कर गई है ,मेरे पति अपने भाई को देखने घर आई थी।

उसने बताया की वह एक नामी बाबा के बारे में सुनी है जो लोगो का दुवा और दवा दोनो से उपचार करता है। लोगो का कहना है की उसने हजारों लकवा पीड़ित मरीज का उपचार किया है।आप लोग भईया को एक बार बाबा को दिखा लाते।

मैने कहा अगर ऐसी बात है तो हम जरुर एक बार उस बाबा जी के आश्रम जाकर चंदन के बापू को दिखा लायेंगे।हमने उस बाबा के बारे में सारी जानकारी पूछ लियाऔर यह भी निर्धारित कर लिया की उसे कब लेकर जाना है।

बहुंत जल्द वह दिन भी आ गया जब हमे चंदन के बापू को बाबा के आश्रम ले जाना था।

एक निजी वाहन किराए पर लेकर मैं और चन्दन मेरे पति को लेकर आश्रम के लिए निकल पड़े।

निर्धारित समय पर हम आश्रम पहुंच गए। वहा जाकर देखा की लोगो की काफ़ी भीड़ लगी है।

काफ़ी दूर दूर से लोग अपनी समस्या लेकर आश्रम पहुंचे थे। बाबा का एक शिष्य आश्रम में आने वाले लोगों का नाम पता और यहां आने का प्रयोजन पूछ रहे थे।

हमने भी अपना आने का प्रयोजन नोट कराया और आश्रम में एक बडा सा हाल बना था जहा सभी लोग बैठे अपने नाम पुकारने के इंतजार कर रहे थे।

नाम पुकारे जाने पर लोग कमरे के अंदर जाते जहा बाबा बैठा लोगो को उनकी परेशानी पूछकर इलाज कर रहा था।

हम भी हमारे नाम पुकारे जाने का इंतजार करने लगे।

वहा पर मौजूद लोग में कै लोग ऐसे थे जो पहली बार यहां आए थे कुछ लोग कई बार यहां पहले भी आ चुके थे। लोग आपस मे चर्चा कर रहे थे।

बाबा जी के इलाज से हमारी पीड़ा दूर हुई कई उसकी महिमा का बखान कर रहे थे। जिसे यहाँ पहली बार आने वाले लोगों के मन में एक उम्मीद दिखाई पड़ रहा था कि वे सही जगह आए है। जहा उनके समस्या का समाधान हो जाएगा।

जब कोई रोगी व्यक्ति बाबा के इलाज से ठीक होने की जानकारी हाल में बैठे लोगों को देते थे तब बाबा के भक्त लोगो द्वारा बाबा की जयकारा लगाया जा रहा था।

कुछ समय बाद बाबा के शिष्य द्वारा मेरे चंदन के बापू का नाम पुकारा गया, हम चंदन के बापू को लेकर कमरे में प्रवेश किए।

कमरे मे बाबा जो काले धोती और कुर्ता धारण किया huwa था। लंबी दाढ़ी जो आधा पक गया था बाल भी कुछ काले एवम सफ़ेद थे उनकी उम्र 60से 65के बीच रही होगी, वह हमे अंदर आता देखकर वहा बिछी चटाई पर बैठने का इशारा किया।

हम लोग चंदन के बापू को बाबा के सामने बिठाकर वहा कोने पर baith गए। बाबा ने मुझसे यहां आने का प्रयोजन और सारी घटना के बारे में पूछा।

मैने बाबा जी को सारी बाते विस्तार से बताया। मैने बाबा से हाथ जोड़कर रोते हुवे कहा बाबा जी मेरे पति को ठीक कर दीजिए। बड़ी उम्मीद लेकर हम यहां आए है।

बाबा जी ने कहा बेटी तुम बिल्कुल ठीक जगह पर आए हो। बाबा के बाजू में पत्थर की एक देवी की मूर्ति थी। उसे देखते हुवे कहा देवी मां के शरण में आने वाला कभी निराश नहीं होता तुम्हारा पति मां की कृपा से जल्दी ठीक हो जायेगा।

इसके लिऐ जो उपाय एवम नियम यहां बताया जाएगा उनका तुम्हे अच्छे से पालन करना होगा।

कमला _बाबा जी आप जो उपाय एवम नियम बताएंगे मैं उसका पालन करूंगी मेरे पति को एक बार ठीक कर दीजिए।

बाबा _बेटी यहां पर दुआ और दवा दोनो से इलाज किया जाता है। मै तुम्हे दुर्लभ जड़ी बूटी एवम भस्म से बना औषधि दूंगा जिसे तुम सुबह शाम एक गिलास दुध में थोडा उबालकर अपने पति को नियमित खिलाना होगा। यह तो है दवा की बात।

अब दुवा के लिए तुम्हे अपने घर में देवी मां की मूर्ति स्थापित करना होगा और मैं एक मंत्र दूंगा जिसे तुम्हे हर रोज सुबह 101बार जाप करना होगा। तुम्हे हर रोज जाप करना होगा। किसी भी कारण से इसे बीच में छोड़ना नही, नही तो परिणाम बुरा भी हो सकता है। क्या तुम कर सकोगी?

आगे अगले अपडेट मे,,,,,
 
कमला ने बाबा से कहा बाबा जी आप जो उपाय एवम नियम बताएंगे उसे मैं पूरे सिद्दत एवम ईमानदारी से पूरी करूंगी बस किसी भी तरह मेरे पति को ठीक कर दीजिए।

बाबा ने अपने शिष्य को आवाज़ लगाया और उनको कुछ कहा। शिष्य ने कुछ देर बाद कुछ सामग्री लेकर आया।

बाबा ने ये लो बेटी इस पैकेट में वह दुर्लब जड़ी बूटियों से बनी औषधि है जिसे तुम्हे रोज अपने पति को दूध में उबालकर देनी है और एक कागज की पर्ची है जिसमे पूजन सामग्री लिखी है जिसकी व्यवस्था तुम्हें करके रखनी होगी, मेरा एक शिष्य तुम्हारा घर जायेगा। वह तुम्हारे घर में मूर्ति स्थापित करेगा। आगे पूजा पाठ की विधि भी तुम्हें मेरा शिष्य बता देगा।

अब आप लोग जाइए देवी मां की कृपा से सब ठीक हो जायेगा।

उसके बाद हम लोग बाबा से आशीर्वाद प्राप्तकर चंदन के बापू को आश्रम से घर ले आए।

घर आने के बाद चम्पा के पूछने पर आश्रम में क्या क्या huwa उसकी जानकारी मैने उसे दे दी। और चन्दन को बाबा द्वारा दी गई पर्ची में लिखी पूजन सामग्री शहर जाकर लाने को कह दिया।

चंदन पूजन सामग्री लेकर आ गया। अगले दिन बाबा का शिष्य शाम को घर पहुंच गया।

उसने कहा कि आप लोग पूजन सामग्री की व्यवस्था कर लिऐ है ना। मैने बाबा जी के शिष्य को हा कहा।

शिष्य ने बताया की मूर्ति की स्थापना हमे कल सुबह पांच बजे करनी होगी। आपके पूजन कछ कहा पर है मैं देख लू।

शिष्य पूजन कक्ष का मुआयना करने लगा, और पूजन कक्ष की साफ सफाई करने और कुछ आवश्यक बदलाव करने का निर्देश दिया मैने उनके निर्देशों का पालन किया।

बाबा के शिष्य ने कहा की आप को कल सुबह 4बजे उठ जाना है और शरीर की अच्छे से सफाई कर नहाकर जो पीला साड़ी पूजन सामग्री में लिखा है उसे पहनना है उस साड़ी के अलावा तुम्हें और कोई वस्त्र नही पहनने है।

आगे क्या करने है, कल सुबह बताऊंगा।

हमने एक कमरे में बाबा के शिष्य के लिए आराम करने की व्यवस्था कर दी।

अगली सुबह हम सब 4बजे उठ गए। घर के पीछे बाड़ी में कुआ थावहा जाकर मैने शरीर की अच्छे से सफाई की और स्नान कर ली मेरे बाद बारी बारी चंदनऔर चंपा भी स्नान कर नए कपड़े धारण कर लिए। मैने उनके कहे अनुसार वह पीली साड़ी धारण कर ली उसके अलावा ओर कोई वस्त्र नही पहने। बाबा तो पहले ही उठकर स्नान कर लिऐ थे।

मुझे थोडा सबके सामने जाने में थोडा शर्म जरुर महसूस हो रही थीं।लेकिन मुझे उनके निर्देशों का पालन करना था तो मैं तैयार होकर पूजा रूम मे चली गई।

बाबा का शिष्य पहले ही तैयारी कर वहा बैठा था।

बाबा जी का शिष्य एक मूर्ति लेकर आया था जो पत्थर का बना लग रहा था मूर्ति ज्यादा बड़ी नही थी।

मूर्ति किसकी थी मैं नही जानती लेकिन बाबा नेके आश्रम में जो मूर्ति थी यह उससे मेल खा रहि थी।

शिष्य ने उस मूर्ति को लकड़ी के पाट पर एक लाल कपड़ा बिछा कर उसके ऊपर स्थापित कर दिया।

मूर्ति के सामने एक लोटे के उपर बड़ी सी मिट्टी की दिया जला दिया।

मूर्ति की ओर मुंह करके बैठने का निर्देश दिया। और बाल खुला छोड़ने को कहा। मैने उनके निर्देशों का पालन किया।

चंदन और चंपा भी स्नान कर पूजा रूम मे आकर मेरे पीछे बैठ सारी गतिविधियां देख रहें थे।

लाए हुवे पूजन सामग्री से मूर्ती कि पूजा कराते हुए।मुझे समझाने लगा और याद रखने के लिऐ कहा कि आगे तुम्हें हर रोज अकेले ही पूजन कर मंत्र जाप करना होगा।

पूजा खत्म होने के बाद उसने एक मंत्र का उच्चारण किया और मुझे दोहराने के लिए कहा। मैने उनके निर्देशों का पालन किया।

अब उसने कहा की इस मंत्र का जाप तुम्हें तुम्हें हर रोज सुबह इसी समय पीली साड़ी धारण कर 101बार करनी होगी। पूजामें किसी प्रकार विघ्न नही आनी चाहिए। किसी भी हालत में पूजा पाठ और मंत्र जाप रुकना नहीं चाहिए। नही तो देवी मां नाराज भी हो सकती है।

अच्छे के बजाए बुरे परिणाम भुगतने पड़ सकते है।

मैने उनसे कहा की आपके निर्देशों का सह अक्षर पालन करूंगी। मै पुरी कोशिश करूंगी की किसी प्रकार की कोई चूक न हो।

बाबा के शिष्य ने कहा की अगर कोई समस्या आए तो मुझे फ़ोन पर काल करना। उसका समाधान बाबा जी से पूछ लेना।

कमला _जी बाबा जी,,,,,,,

आगे अगले अपडेट पर ___
 
जब कमला भगत को अपना आपबिती सुना रही थी तब चंदा ट्रे पर चाय नाश्ता लेकर कमरे मे प्रवेश की।

कमला ने कहा बेटा पहले चाय नाश्ता कर लो उसके बाद आगे की बाते बताऊंगी। चंदा नाश्ते का प्लेट भगत को देने के बाद।

अपने सास को चाय देने के लिए कप आगे बढ़ाई, कमला ने चाय का कप ठीक से पकड़ी नही और वह नीचे फर्श पर गिर गया।

कमला _ओ हो पूरा फर्श खराब हो गया मैं कप ठीक से पकड़ नही पाई।

चंदा _कोई बात नही मां जी मैं दूसरी चाय ले आती हूं और फर्श साफ कर देती हू।

तभी चंदन ने अपने मां को आवाज़ लगाया जिसे सुनकर कमला ने कहा _बहू लगता है दुकान में ग्राहक ज्यादा है जरा चंदन की मदद कर देना। मै सफाई कर दूंगी।

चंदा _ठीक है मां जी।

भगत नाश्ता करने लगा।

चंदा चंदन के पास दुकान पर चली गई।

कमला फर्श पर पोछा लगाने गीला कपड़ा लाने चली गई।

कुछ देर बाद गीला कपड़ा लेकर कमरे मे कमला पहुंची। और नीचे उकडु बैठकर फर्श पर पोछा लगाने लगी l

भगत का ध्यान कमला पर गया, नजारा देखकर भगत के शरीर में खून तेज गति से बहने लगा।

जब कमला फर्श पर पोछा लगाने उखडू बैठी तब उसका साड़ी का पल्लू नीचे गिर गया था। और अपने साड़ी को ठीक किए बिना ही वह फर्श पर पोछा लगाने लगी, इस समय उसके दोनो मम्मे के आधे से ज्यादा हिस्सा साफ दिखाई दे रहे थे।

जिसे देख कर भगत का land तन गया।

। भगत खूबसूरत नजारा देखकर मन में कहा आ ह हा क्या नज़ारा है। शाली क्या मॉल है। कितनी बड़ी बड़ी और सुडौल चूचियां है ताई की।

वह उन चूचियों को एक टक देख ने लगा और नजारे का मजा लेने लगा।

भगत मन में सोचने लगा _क्या मम्मे है ताई के मसलने को मिले तो मजा आ जाए।

अब समझ में आया क्यू चंदन भैया अपने जवान खूबसूरत बीबी मेहरारू को छोड़कर अपने मां के भोसड़े के पीछे लगा रहता है।

जब कमला फर्श का पोछा लगाकर उठी तब भगत उसके बदन का मुआयना करने लगा।

भगत _हाय क्या गदराया huwa बदन है साली के। इस उम्र में ऐसा गठीला बदन विश्वास नहीं हो रहा। चंदन भईया तो बड़ा किस्मत वाला निकला क्या गजब की दो दो मॉल को भोग रहा।

जब कमला कमरे से जाने बाहर निकली तो उसका कमला की पिछवाड़ा देखकर भगत से रहा न गया और अपने land को सहलाते हुए कहा। कितना भरा huwa एवम चौड़ी पिछवाड़ा है साली के। इसकी सवारी करके जन्नत में जाने का अपना अलग ही मजा होगा।

कुछ समय बाद कमला फिर कमरे मे पहुंची, भगत चाय नाश्ता कर उन्ही के आने का इंतजार कर रहा था।

भगत ने कमला से कहा _ताई जी आगे क्या huwa आप बताने वाली थीं।

कमल _हा बेटा , पूजा पाठ की सारी गतिविधियां समझाने के बाद बाबा का शिष्य आश्रम चला गया। और जाते हुवे एक मोबाइल नम्बर दे दिया ओर कहा ये बाबा जी का मोबाइल नम्बर है कोइ समस्या हो तो कॉल कर बाबा जी सी समाधान पूछ लेना।

उसके बाड़ मैं हर रोज सुबह 4बजे उठकर नहा कर पीली साड़ी पहनकर बाबा के शिष्य द्वारा बताए तरीको से देवी मैं की मूर्ति की पूजा कर मंत्र जाप करने लगी।

नियमित रूप से सुबह शाम बाबा द्वारा दी गई औषधी को दूध में उबालकर चंदन के बापू को देने लगी।

हमने देखा की चन्दन के बापू की हालत में दिन ब दिन सुधार हो रहा है। अब वह लाठी के सहारे खड़ा हो पा रहा था। उसके हाथों में भी काफ़ी सुधार हो रहा था। वह अपने हाथ की उंगलियों को बंद एवम खोल पा रहा था।

यह देखकर हम बहुत खुश हुए और बाबा जी के प्रति हमारी श्रद्धा बड़ गई।

सब कुछ अच्छा चल रहा था मूर्ति की पूजा हमे 30दिन करने के बाद उसे तालाब में विसर्जित करना था। 23दिन सब कुछ अच्छे तरीके से संपन्न huwa lकेवल 7रोज ही बचे थे की तभी पूजा पाठ में एक विघ्न आ गया।

मेरी माहवारी शुरू हो गई।

मासिक धर्म के समय महिलाओं का पूजा रूम मे घुसना वर्जित होता है। महिलाओं का शरीर अपवित्र माना जाता है।

मै चिंता में पड़ गई अब क्या होगा। बाबा ने कहा था कि पूजा पाठ नियमित रूप से करना होगा। बीच में रुकना नहीं चाहिए नही तो अपशकुन होगा।

मैने यह बात चंपा को बताई और कहा बेटी अब क्या होगा पूजाबिच में रुकने से कही कोई अनर्थ न हो जाए अब क्या करे?

चम्पा _मां बाबा के शिष्य ने हमें बाबा का मोबाइल नंबर दिया है और कहा है की कोई समस्या हो तो कॉल करना। बाबा आपके समस्या का हल जरूर निकलेगा। क्यू न हम बाबा जी को काल कर समस्या बताए। उनके पास इस समस्या का कोई हल जरुर होगा।

कमला _बेटी तुम सही कह रही। बाबा जी को काल लगाओ।

चम्पा बाबा जी को काल लगाई। और मोबाइल कमला को पकड़ा दी।

बाबा ने काल उठाया।

कमला _हैलो बाबा जी।

बाबा जी _कौन बोल रही हो बेटी मै बाबा जी ही बोल रहा हूं।

कमला _बाबा जी मैं कमला बोल रही है। श्यामलाल की पत्नी जिनका इलाज कराने आपके आश्रम आए थे।

बाबा _हा बेटी कमला बोलो आपके बीच के तबियत ठीक तो है ना?

सब कुशल मंगल तो है न। कही कोई समस्या तो नही।

कमला _बाबा जी अब तक तो सब कुछ अच्छा चल रहा था। चंदन के बापू की तबीयत में भी काफ़ी सुधार आया है। पर एक बड़ी समस्या आ गई है।

बाबा _कैसी समस्या बेटी मुझे खुलकर बताओ।

कमला _बाबा मेरी माहवारी शुरू हो गई है अब मैं देवी मां की पूजा पाठ एवम मंत्र जप कैसे करू। कोई उपाय बताइए।

बाबा _बेटी, ये तो बड़ी विकट समस्या आ गया। तुम अभी पूजा रूम में जाने योग्य नहीं हो। लेकीन पूजा बिच में रुकने से कहीं अपशकुन न हो जाए।

देवी मां नाराज भी हो सकती है जिससे घर में नई विपत्ति आ सकती है?

कमला _बाबा जी अब क्या होगा कोई उपाय होगा तो बताइए।

बाबा _बेटी उपाय तो है पर उसे तुम कर सको तो।

कमला _बाबा जी मैं वह उपाय जरुर करूंगी आप करना क्या होगा बताए।

बाबा _बेटी ध्यान से सुनो, मासिक धर्म के समय महीला का शरीर अपवित्र हो जाति है। तुम गंगा जल से स्नान कर अपने बाह्य तन को तो शुद्ध कर सकती हो लेकीन गंगा जल से तुम्हारे गर्भाशय का शुद्धिकरण नही हो सकता उसके लिए तुम्हें दुसरे उपाय करने होंगे।

कमला _बाबा जी आप बताइए की मेरे शरीर के अंदर का शुद्धिकरण कैसे होगा?

बाबा _बेटी महिलाओं के गर्भाशय के लिए कोई सबसे पवित्र चीज है तो वह पुरुषों का वीर्य है।

समय पर गर्भाशय को पुरुषों का वीर्य न मिल पाने के कारण ही महिलाओं को माहवारी शुरू हो जाती है। और समय पर वीर्य मिल जाए तो महीला गर्भ धारन कर सुंदर शिशु को जन्म देती है।

अतः महिलाओं के गर्भासय के लिऐ वीर्य से बडा पवित्र चीज और कोई नहीं है।

अतः गर्भसाय का सुद्धिकरण के लिए तुम्हें अपने गर्भाशय को वीर्य से नहलाना होगा।

कमला_पर ये कैसे होगा बाबा जी।

बाबा _ये एक ही उपाय है बेटी तुम्हें सुबह उठकर पहले किसी पुरुष से संभोग करना होगा। पुरुष अपने वीर्य से तुम्हारे गर्भाशय को सीचेगा ।

उसके बाद गंगा जल से नहाना होगा तब तुम पूर्ण रूप से सुध हो सकोगी और पूजा पाठ कर सकोगी।

कमला _पर बाबा जी चंदन के बापू तो इस स्थिति में नही है की ओ मुझसे संबंध बना सकें।

बाबा _देखो बेटी, तुम्हारे पूछने पर मैने उपाय बताएं अब आप की मर्जी है तुम उपाय करती हो की नही। यह जरूरी नहीं है कि तुम अपने ही पति से संभोग कर सुद्धीकरण करो पराया पुरुष की भी मदद ले सकती हो। अब आगे आपकी मर्जी।

और बाबा ने यह कहते हुए की देवी मां की कृपा तुम पर बनी रहें काल रख दिया।

अब कमला चिंतित हो गई अब वह क्या करे उसे कुछ समझ नहि आ रहा था। वह एक पतिव्रता नारी थी जो अभी तक किसी पराया मर्द के santh सम्बंध बनाना तो दूर ऐसा करने के बारे में भी सपने में भी नही सोची थी।

मां को चितित देख कर चम्पा अपनी मां से पूछी बताओ मां बाबा जी ने तुम्हें क्या उपाय बताया तुम बहुत चिंतित लग रही हो।

चम्पा के बार बार पूछने पर कमला ने अपनी बेटी चम्पा को बाबा द्वारा कही गई सारी बाते बता दी।

चम्पा भी सुनकर चिंता में पड़ गई।

कुछ समय बाद चम्पा बोली _मां अगर तुम चाहो तो एक पुरुष है जो तुम्हारी मदद कर सकता है?

और किसी को पता भी नही चलेगा।

कमला _चम्पा ये तुम क्या कह रही हो बेटी और कौन है जो हमारी मदद कर सकता है और किसी को कुछ पता भी नही चलेगा।

चंपा _मां चंदन हमारी मदद करेगा।

कमला _चंपा, अपनी मुंह बंद रख, आखिर तुम इतना गंदा सोच कैसे रख सकती हो। चंदन मेरा बेटा है।

चम्पा _जानती हू मां की चन्दन तुम्हारा बेटा है, मैने सोच समझकर ही ये बातें तुमसे कही है।

इसके अलावा और कोई चारा है तुम्हारे पास तो बताओ।

अगर तुमबिच में हीपूजा बंद कर दी तो घर में कोई फिर से अनिष्ट न हो जाय। और तुम कहीं बाहर के पुरुष से मदद ली तो वह पूरे गांव वाले को बता सकता है जिससे हमारी बदनामी होगी।

तुम इस बारे में अच्छे से सोच कर देखो।

कमला, चंपा के द्वारा कही बातो को ध्यान से सुनने के बाद गहन सोच विचार में डूब गई।

काफ़ी देर सोचने के बाद वह चम्पा से बोली।

कमला_बेटी पर चंदन तो अभी छोटा है और इन सब के बारे में उसे कुछ जानकारी भी नही होगा। फिर ये सब कैसे होगा?

चम्पा _मां चंदन अब इतना बच्चा भीनहीं रहा वह 19 वर्ष का हो चुका है इस उम्र में तो पहले गांव के लोग बाप बन जाते थे।

और तुम्हें चिंता करने की कोई बात नही मै चंदन को सब समझा दूंगी।

कमला _पर बेटी अगर चंदन तैयार भी हो गया तो मेरे में इतना हिम्मत नहीं की उसके नीचे जाकर लेट सकू।

चम्पा, _मां मैने तुमसे कहा ना की तुम्हें चिंता करने की कोई जरूरत नहीं मै सब सम्हाल लूंगी। बस मै जैसे कहूंगी वैसी करती जाना।

और चम्पा मुस्कुराने लगी।

जिसे देखकर कमला ने कहा धत बदमाश कही की मैं शर्म से मरी जा रही, मेरी जान निकले जा रही और तुम मुस्कुरा रही हो।

आगे अगले अपडेट मे,,,,
 
चम्पा, चंदन के कमरे का दरवाज़ा खटखटाया। चंदन इस समय सोया नहीं था। वह मन में सोंचा _इस समय कौन हो सकता है। वह दरवाज़ा खोला, सामने अपनी दीदी को देखकर _दीदी कुछ काम था क्या?

चंपा _हा रे तुमसे जरूरी बाते करनी है। चलो अंदर बैठकर बातें करते हैं।

दोनो रूम के अन्दर जाकर बेड के किनारे बैठ गए।

चन्दन _बोलो दीदी क्या बात है?

चंपा _चंदन सब कुछ गडबड हो गया।

चंदन _क्या गडबड हो गया दीदी?

चंपा _मां के पूजा पाठ में विघ्न आ गया। अगर इसका समाधान नहीं किया तो, अनर्थ हो सकता है।

चंदन _सुबह तक तो सब ठीक था, फिर अचानक से क्या हो गया? और अचानक से पूजा पाठ में बाधा कैसे आ गया।

चंपा _मां की माहवारी शुरू हो गई है। अब ऐसे में वो पूजा नही कर सकती।

चंदन _दीदी मै कुछ समझा नही। ये माहवारी क्या है? जिसके कारण मां पूजा नही कर सकती?

चंपा _क्या तुम महिलाओं की माहवारी के बारे में नही जानते?

चंदन _नही दीदी मुझे इसके बारे में कोई जानकारी नहीं।

चंपा _मां सही कहती थीं तू अभी भोला है। तुमको सारी बातें बतानी होगी।

चंदन _दीदी बात क्या? मुझे अच्छे से बताओ।

चंपा _लड़किया जब 13वर्ष की होती है तब उसके गर्भ में अंडा बनना शुरू होता है । अर्थात लड़किया मां बन सकती है। ये अंडा हर माह बनती है और जब औरते किसी पुरुष से संबंध बनाती है तो यही अंडा नौ माह बाद बच्चा बन जाता है। और औरते बच्चे को जन्म देती है । अगर महिलाए पुरुषो से संबंध नहीं बनाती तो यह अंडा टूट जाती है और टूटकर खून खून बनकर महिलाओं के पेशाब के रास्ते से बाहर आ जाती है। इसे ही माहवारी कहते है जो हर माह महिलाओं को निर्धारित समय पर आती है। महिलाओं के गुप्तांग से 3_7दिनो तक खून का स्राव होता रहता है। इस दौरान महिलाओं को अपवित्र माना जाता है। कोई भी धार्मिक कार्य में भाग लेने की मनाही होती है।

चंदन _दीदी ये तो ये तो अनर्थ हो गया। बाबा जी ने कहा था की पूजा बीच में बंद नहीं करना है। अब क्या करेंगे?

चंपा _हा re मैं यही बताने तुम्हारे पास आई थी।

बाबा जी से पूछने पर उसने इसका समाधान बताया है।

चंदन _दीदी बाबा जी ने इसका क्या समाधान बताया है?

चंपा _बाबा जी ने कहा है की मां के गर्भाशय का शुद्धिकरण करना होगा तभी वह पूजा में बैठ पाएगी।

चंदन _ये तो अच्छी बात है की बाबा जी ने इसका समाधान बताया है। फिर परेशानी कैसी?

चम्पा _बाबा ने कहा है कि मां का ऐसी अवस्था में औरतों का suddhikaran कोई पुरुष ही कर सकता है।

चंदन _दीदी मै कुछ समझा नही। खुलकर बताओ की सुद्धीकरण कैसे हो सकता है।

चंपा _बाबा ने कहा है कि मां को किसी पुरुष के santh शारीरिक संबंध बनाना होगा। तभी मां की गर्भाशय का शुद्धिकरण हो सकता है, और वह पूजा पाठ कर सकती है। अब तुम तो जानते हो पिता जी की हालत वह मां के santh

शारीरिक संबंध नहीं बना सकता।

चंदन _हा दीदी ये तो बड़ी समस्या है।

चम्पा _पर बाबा ने कहा है कि सुद्धिकरण के लिऐ महिलाएं शारीरिक सम्बन्ध दूसरे पुरूषों के साथ भी बना सकती है। अगर मां घर के बाहर दुसरे पुरुष से सम्बंध बनाएगी और किसी को पता चल गया तो हमारी बहुत बदनामी होगी।

चंदन _दीदी अब हम क्या करेंगे?

चंपा _चंदन मै चाहती हू की तुम मां के साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाकर उनका शुद्धिकरण करो। बाहर वालो को भी पता नहीं चलेगा। कोई बदनामी भी नही होगी।

चंदन _पर दीदी ये शारीरिक सम्बंध बनाते कैसे है?

चम्पा _क्या तुम्हें इसके बारे में नही पता या अपने दीदी से नाटक कर रहा है?

चंदन _नही दीदी मुझे सच में नही पता।

चम्पा _ये जो मैं मटके जैसा पेट लेके घूम रहीं हू न ये शारीरिक संबंध का ही परिणाम है। तुम्हारे जीजा जी ने मेरे साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाए उसी का ये फल है।

चंदन _पर दीदी दोस्तो ने तो कुछ और ही बताया है।

चंपा _तुम्हारे दोस्तो ने तुम्हें क्या बताया है।

चंदन _यही दीदी की,,,,,,,,, छोड़ो दीदी मुझे शर्म आती है।

चंपा _अरे शरमाओ नही मुझे खुल के बताओ की तुम्हारे दोस्तो ने तुम्हें क्या बताया है?

चंदन _नही दीदी मुझे शर्म आती है मैं नहीं बता सकता।

चम्पा _अच्छा किस बारे में तुम्हारे दोस्तो ने तुम्हें बताया है।

चंदन _यही, बच्चा,,,,,,,, पैदा,,,,,,,, करने के बारे में।

चम्पा मुस्कुराते हुए बोली

चम्पा _अच्छा मै भी तो जानू तुम्हारे दोस्तो ने तुम्हें क्या बताया है? अब अपने दीदी से शरमाओ नही और ठीक से बताओ।

चम्पा के बार बार जिद करने पर चंदन लड़खड़ाते जुबान से कहा।

चंदन _यही की बच्चा चू,,,,, दा,,,,, ई करने से पैदा होता है?

यह बोलकर चंदन ने शर्म से अपना सिर नीचे कर लिया।

चंपा हंसने लगी।

चंदन _दीदी क्या दोस्तो ने झूठ कहा?

चंपा मुंह बन्द कर हसने लगी।

अपना सिर हिलाकर नही।

चंपा _तुम्हारे दोस्तो ने बिल्कुल ठीक कहा।

चंदन _क्या ठीक कहा दीदी ?

चंपा मुंह बन्द कर थोडा लजाते एवम मुस्कुराते हुवे बोली। यही की चू,,,,da,,,,, ई से बच्चा पैदा होता है।

चंदन _दीदी तुम तो कह रही थी की तुम्हारा मटके जैसा पेट जीजा जी के शारीरिक सम्बन्ध बनाने से huwa है। क्या दोनो एक ही है?

चंपा _हा।

चंदन _तो दीदी मै मां के साथ शारीरिक संबंध कैसे बना सकती हू। मै उसका सगा बेटा हूं। क्या मां इसके लिए तैयार है?

चंपा _हमारे पास इसके अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है। इसलिए मेरे कहने पर मां तैयार हो गई तुमसे अपना सुद्धिकरण करवाने।

तुम हमारी मदद करोगे न।

अब सब तुम्हारे ही हाथों में है।

चंदन _पर दीदी मै मां के साथ सब कैसे कर पाऊंगा, और मैने तो अब तक किसी के साथ भी कुछ किया नहीं है।

चंपा _मै हू न तुम्हें घबराने की जरूरत नहीं है। मै जैसे कहूंगा तुम वैसे करना।

चंपा मुस्कुराते हुए बोली _वैसे तुम्हारा खड़ा होता है ना।

चंदन _दीदी तुम भी न क्या क्या पूछती हो।

चंपा _अब तुम तैयार हो ही गए हो तो तुम्हें मेरे सामने ही सब करना है तो शर्माओगे तो कैसे कर पाओगे।

अगर तुम्हारा समय पर खडा न huwa तो सब गड़बड़ हो जायेगा मैं इसलिए पूछ रही थी।

चंदन _दीदी कभी कभी खड़ा हो जाता है।

चंपा _अच्छा मै भी तो जानू तुम्हारा कब खड़ा होता है।

चंदन _छी दीदी तुम क्या क्या पूछती हो।

चंपा मुस्कुराते हुवे _अरे बुद्धु मै तो इसलिए पूछ रही थी कि अनवक्त पर कुछ गडबड हो गया तो मैं तुम्हारी कुछ मदद कर सकू। बताओ तुम्हारा कब खड़ा होता है।

चंदन _ दीदी जब किसी औरतों की दुद्दू पर नज़र पढ़ती है तो मेरा खड़ा हो जाता है।

चंपा _अच्छा जी ऐसी बात है। मेरा भाई भी औरतों की चूंची देखकर मजा लेता है। मै भी तो जानू किसका देखकर खड़ा लेता है।

चंदन _छी दीदी कितनागन्दा बोल्ती हो,वो तो कभी कभार दुकान में किराना सामान लेने वाली महिलाओं पर नज़र चला जाता है।

चंपा _पर मां के सामने तुम्हारा खड़ा तो होगा न।

चंदन _दीदी मुझे क्या मालूम?

चंपा _ कुछ सोचते हुए बोली।क्यू न इसकी जांच कर ले?

चंदन _कैसे दीदी।

चंपा _तू मेरा दुद्दू देख ले और बता तुम्हारा खड़ा होता है ना।

चंदन _दीदी ये क्या कह रही हो आपके दूदू।

चंपा _ हंसते हुवेबोली।अब शर्माना छोड़ो भी ऐसे शर्मावोगे तो कल मां का शुद्धिकरण कैसे करोगे , तुम्हें तो मां के सामने नंगा होना पड़ेगा।

चंदन _छी दीदी मै ये कैसे कर पाऊंगा, मुझसे ये सब नहीं हो पाएगा।

चंपा _अरे बुद्धू मै हू न सब हो जायेगा बस मै जो कह रही वो करो और मुझसे शर्माना बंद करो।

चंपा _लो मेरे दूदू को देख और बता तुम्हारा खड़ा हुआ की नही।

यह बोलते हुए चंपा अपने ब्लाउज का बटन खोलने लगी।

चंदन की नज़र चंपा के ब्लाउज पर जम गया।

जैसे ही चंपा ने अपना ब्लाउज का बटन खोला। चंदन का land चंपा के बड़े बड़े दूध से भरे सुडौल स्तन को देखकर तनकर खड़ा हो गया। चंदन वैसे भी चम्पा के साथ अब तक हुई वार्तालाप से गर्म हो गया था। उसके बड़े बड़े मम्मे को देखकर एक मर्द के land का खड़ा होना स्वाभाविक था ,भले ही सामने वाली महिला उसकी सगी बहन हो।

चम्पा _लो देख लो अपनी बहन की दूदू और बताओ तुम्हारा खड़ा हुआ की नही।

चंदन _गौर से अपने दीदी के मम्मे देखने लगा। वह बहुत गरम हो गया उसके शरीर में खून दोगुने गति से बहने लगा।

चंदन इस समय धोती और बनियान पहना था।land खड़ा होने से धोती का सामने वाला हिस्सा उपर उठ गया। जिस पर चंपा की नज़र जाते ही वह मुस्कुराने लगी।

चंपा _लगता है तुम्हरा खड़ा हो गया है।

चंदन _लजाते हुवे कहा , हा दीदी!

आगे की कहानी अगले अपडेट मे तब तक इंतजार कीजिए,,,,,,,

चंपा
 
चम्पा _लगता है तुम्हारा हथियार काफ़ी बड़ा है। जरा मै भी तो देखूं कितना बड़ा है तुम्हारा।

चंदन _दीदी, ये क्या कह रही हो? मुझे शर्म आयेगी।

चम्पा _अरे अब मुझसे क्या शर्माना, मैने भी तो अपना ब्लाउज खोलकर तुम्हें अपना दुद्दू दिखाया ना।

चलो अब तुम भी अपनी धोती से अपना नुनु बाहर निकालो मैं भी तो देखूं तुम्हारा हथियार कैसा है?

चंदन _नही दीदी मुझे शर्म आयेगी। रहने दो ना।

चम्पा जी_अरे अभी तो सिर्फ मैं हू सुबह तो तुम्हें मां और मैं दोनो के सामने नंगा होना पड़ेगा तब क्या करेगा? अभी दिखा देगा तो कल सुबह तुम्हे दिक्कत नहीं होगी। चलो खोलो।

चंदन _दीदी, तुम भी ना।

अब चंदन शर्माते हुवे अपना धोती अपनी क़मर से निकाल फेका अब वह अंडर वियर और बनियान में था। अंडर वियर के सामने का हिस्सा काफ़ी उपर उठा हुआ था जिसपर चम्पा की नज़र पड़ते ही समझ गई कि चन्दन का हथियार काफ़ी बड़ा है। चंदन शर्मा रहा था वह अंडर वियर को कमर से नीचे सरका नही रहा था।

चंपा समझ गई कि चन्दन खुद नही उतारे गा अपना अंडरवियर तो उसने खुद ही अपना हाथ आगे बढाया और चंदन के अंडर वियर को अपने दोनो हाथो से पकड़ कर क़मर से नीचे खींच दिया।

अंडर वियर के नीचे खिसकते ही चंदन का land नाग की तरह फुफकार मारते हुवे चंपा के सामने हवा में लहराने लगा जैसे वह चंपा को डसने के लिए तैयार हो।

चंपा _हाय दईया कितना बडा है रि तेरा।

चन्दर शर्माकर अपने दोनो हाथो से अपने land ko छिपाने लगा।

चम्पा हसने लगी।

चंपा _अरे अब काहे शर्माना, अब तो तुम्हारा नुनु देख ही लिया, तुम्हारा नुनु तो land बन चुका है। कितना लंबा और मोटा है?

चंदन _छी दीदी तुम कितनी गंदी बातें करती हो। मुझे बहुत शर्म आ रहा। क्या जीजा जी का इससे छोटा है?

चम्पा _अरे, तुम्हारा जीजा जी का इतना लंबा तो है पर तुम्हारा उससे कुछ ज्यादा मोटा है।

चंदन _दीदी आपके दूदू भी काफ़ी अच्छे और बड़े बड़े है।

चम्पा _ क्या तुम्हे पसंद आया मेरा दूदू?

चंदन _हा, दीदी बड़े मस्त है आपके दूदू।

चम्पा _अच्छा,सुन कभी किसी औरत या लड़की के साथ कुछ किया है कि नही।

चंदन शर्माते हुवे _नही,दीदी।

चम्पा _अपनी दीदी से झूठ तो नही बोल रहा न।

चंदन _दीदी मै सच कह रहा हूं। मुझे तुम्हारी कसम।

चंपा _अच्छा ठीक है, पर मूठ तो मारता होगा न।

चंदन _ दीदी मै समझा नही।

चंपा मुस्कुराते हुवे _अरे बुद्धू, अपने नुनु को हिलाकर अपना पानी तो निकलता होगा न, जब ये खड़ा होता होगा।

चंदन _छी दीदी तुम कैसी बाते करती हो,,

चंपा _अरे कब तक शर्माएगा, अपना हाथ हटा मै भी तो देखूं छूकर इसे।

और चम्पा चंदन का हाथ land पर से हटाकर उसे अपने हाथो में लेकर सहलाने लगी, जिससे चंदन के मुंह से सिसक निकल गया।

चंदन_दीदी ये क्या कर रही हो छोड़ो न, मुझे शर्म आ रही।

चंपा_शर्माना छोड़ और बता मुझे,अपना land तो हिलाता है की नही।

चंदन _ओ दीदी कभी कभार हिला लेता हू जब ये ज्यादा परेशान करता है।

चंपा _अच्छा सुन आज इसे हिलाकर अपना पानी मत निकालना कल सुबह तुम्हे मां की सुद्धिकरण करना है। नही तो पता चला की तुम्हारा नुनु खड़ा ही न huwa

तो सब गड़बड़ हो जायेगी।

चंदन _ठीक है दीदी।

चंपा _अच्छा मै अब चलती हू। कल सुबह मैं और मां तुम्हारे कमरे मे आयेंगे तुम दरवाजा खुला ही रखना।

चंपा अपना ब्लाउज पहन ली, चंदन भी अपना धोती पहन लिया।

चंपा, चंदन के रुम से चली गई। कमला चंपा के रूम में उसके आने का इंतजार कर रही थी। जब चम्पा अपने कमरे में पहुंची तब कमला ने चंपा से कहा _

कमला _क्या जुड़ा हुआ बेटी, चंदन तैयार हुवा की नही।

चंपा मुस्कुराते हुवे बोली _हा मां मैने चंदन को सारी बातें अच्छे समझाया तो ओ तैयार हो गया। पर मां

कमला _पर, क्या बेटी? कोई समस्या है क्या?

चंपा _मां, चंदन तो अभी तक किसी लडकी या महिला के साथ कुछ किया नहीं है।

कमला _बेटी मुझे मालूम था मेरा बेटा अभी भोला है। अब क्या करेंगे। मै उसके सामने जाकर नंगी नही हो पाऊंगी। यह सोचकर ही मै शर्म से गड़ी जा रही। ये सब मुझसे नही हो पायेगा।

चंपा _मां तुम चिंता न करो मैं रहूंगी न साथ में चंदन भी अकेला कुछ कर नहीं पाएगा मुझे ही बताना होगा कि क्या करना है।

कमला _बेटी तुम्हे ही सब संभालना होगा।

चम्पा मुस्कुराते हुवे बोली _मां तुम चिंता न करो सब अच्छे से हो जायेगा।

कमला _अच्छा बेटी, अब मैं चलती हू तुम भी कल सुबह 4बजे उठ जाना।

चंपा _ठीक है मां, मै दरवाज़ा खुला ही रखूंगी, तुम पहले मेरे रूम में आना फिर हम चंदन के कमरे मे जायेंगे।

तभी चंपा कि छोटी बच्ची जो बेड पर सो रही थी, उठ गई और रोने लगी। चंपा उसे प्यार से दुलारते हुए। अपना ब्लाउज खोलकर उसे दूध पिलाने लगी।

चंपा _अरे मेरे प्यारी गुड़िया उठ गई लो दूदू पी लो।

कमला मुस्कुराते हुए अपने कमरे में चली गई।

कमला की आंखों में आज नींद नहीं आ रही थी। वह सारी रात यही सोचती रही की पता नही कल वह चंदन के साथ अपने सगे बेटे के सामने नंगी कैसे हो पाएगी। उसका पति श्यामलाल इन सब बातो से बेखबर, सो रहा था।

और सोचते सोचते कमला को पता नही चला की कब उसकी आंख लगी।

सुबह जब नींद खुली तो देखा की भोर हो चुका है सुबह का 4बज चुका है। वह अपने बेड से उठी। अपने कपड़े ठीक की और चंपा के कमरे में चली गई।

चंपा उठी नही थी।

कमला ने चंपा को आवाज़ लगाई, बेटी चम्पा उठो भोर हो गई है।

चंपा मैं की आवाज़ सुनकर उठ गई उसने देखा उसकी मां उसके सामने ही खड़ी थीं। चंपा अपनी बच्ची को दूध पिलाते पिलाते ही सो गई थी। उसने अपना ब्लाउज का बटन लगाया।

चंपा बोली मां मै पेशाब करके आती हू तुम रुको फिर चंदन के कमरे मे चलते हैं।

कमला _ठीक हैं बेटी।

कुछ देर बाद चम्पा अपने कमरे मे लौटी फिर अपने मां से बोली चलो मां चंदन के कमरे मे तुम्हारा सुद्धीकरण के लिए और वह हसने लगी।

कमला _चुप बेशरम कही की यहां मेरी जान पे पड़ी है और तुम मेरी मजाक उड़ा रही हू।

चम्पा मुंह बन्द कर हसने लगी।

दोनो चंदन के कमरे मे पहुंच गए।

चंदन भी उन दोनो के आने का इंतजार कर रहा था। चंपा ने आवाज़ लगाई, चंदन उठो भाई भोर हो गया है।

अपने दीदी की आवाज़ सुनकर वह बेड से उठ गया।

चंपा _चंदन तुम्हे पता है न आज क्या करना है फिर भी बेखबर होकर सो रहा था।

चंदन _नही दीदी मै तो काफ़ी पहले ही उठ गया था आपके आने का ही इंतजार कर रहा था।

चंपा _अच्छा ठीक है जाओ तुम्हे फ्रेस वगेरा होना हो तो जल्दी हो आओ।

चंदन _न दीदी मै तो पहले ही फ्रेस हो चुका हूं।

चंपा मुस्कुराते हुए बोली मतलब तुम पहले ही तैयार होकर बैठा है। बड़ा उतावला लग रहा है मां का शुद्धिकरण करने, वह हसने लगी।

चंदन अपने मां के सामने शर्मिन्दा हो गया।

चंपा_अब देखो कैसे शर्मा रहा है? चल अब तू बेड से उठ और मां को लेटने दे।

चंपा अपनी मां कमला से बोली , मां तुम बेड के किनारे लेट जाओ। कमला शर्म से गड़ी जा रही थी वह बिना कुछ बोले बेड के किनारे पीठ के बल लेट गईं उसके दोनो पैर फर्श पर थे।

चंपा _चंदन अब तुम्हे पता है न क्या करना है? चलो अपना धोती उतारो।

चंदन अपने मां के सामने शर्म महसूस कर रहा था, वह घबराया हुवा था। वह मुंह से कुछ न बोलते हुए अपने दीदी के कहे अनुसार अपना धोती बाहर निकाल दिया अब वह बनियान और अंडरवियर में था।

चंपा _अब देख क्या रहा है? चल अपनी चड्डी भी उतार।

चंदन अपनी मां के सामने नंगा होने में शर्मा एवम घबरा रहा था।

चंपा समझ गई वह मुस्कुराते हुवे बोली, हू, मां के सामने शर्मा रहा है। चल मै ही उतार देती हू तेरा चड्डी।

चंपा अपने दोनो हाथो को आगे बढ़ा कर चंदन का अंडर वियर पकड़ा और नीच खीच दी।

इस समय चन्दन अपने मां के सामने होने से घबराया हुवा था। उसका land खड़ा होने के बजाए लटका हुवा था।

चंपा _ये क्या री? तुम्हारा तो लटका हुवा है। तुमने इसे रात में हिलाकर इसका पानी तो नही निकाल दिया।

चंदन _नही दीदी मैने कुछ नही किया। चंपा _फिर ये लटका हुवा क्यू है।

कमला _मन में सोचने लगी हे भगवान अब क्या होगा चंदन का तो खडा ही नहीं है। अब सुद्धिकरण कैसे होगा। वह निराश होने लगी।

चम्पा _ मां लगता है चंदन तुम्हारे पास होने से घबरा गया है,मुझे ही कुछ करना पड़ेगा।

चंपा _चंदन के land जो इस समय लुल्ली बना था को अपने हाथो मे लेकर सहलाने लगी।

कुछ देर तक सहलाने से भी बात न बनी तब वह बोली _हाय दईया ये तो अभी तक लुल्ली का लुल्ली है।

मुझे कुछ और करना पड़ेगा।

कमला लेटे लेटे चंपा की हरकतों को देख रहि थी वह भी निराश होने लगी थी।

इधर चंपा अब अपने ब्लाउज के बटन को खोल कर अपने चूंची बाहर निकाल कर चंदन को दिखाते हुवे बोली। देखो मेरे दूदू, तुम बोल रहे थे तुम्हे पसंद है।

लो इसे छू कर देखो। और वह चंदन के हाथों को अपने मम्मे पर रखकर चंदन के लुल्ली को सहलाने लगी।

चंदन का हाथ में चंपा का चूची पड़ते ही उसका शरीर गर्म होना शुरू हो गया।

चंदन का शरीर में खून का रफ्तार बड़ने लगा। इधर चंपा अपने हाथो से land को सहला रहा था और चंदन चंपा की चूंची को सहलाने लगा।

चंदन पहली बार किसी औरत की चूची को पकड़ा था। दूध से भरा सुडौल एवम बड़े बड़े चूची को देखकर उसके शरीर में जोश भरने लगा। अब वह भूलने लगा की कमरे में कौन है। जिसका परिणाम ये हुआ की कुछ ही पल में चंदन का लुल्ली लौड़ा बनकर तनकर खड़ा हो गयाऔर चम्पा के हाथों में झटके मारने लगा।

चंपा मुस्कुराने लगी।

चंपा _मुझे पता था तुम्हारा नुनु मेरे दूदू देखकर जरुर खड़ा होगा। लो मां चंदन तो तैयार हो गया तुम्हारा सुद्धीकरण करने के लिए। और वह हसने लगी।

कमला जो अभी तक मूक दर्शक बनी थीं वह बोली।

कमला _चुप बेशरम कही की और चंपा के पीठ पर हल्का सा चिकोटी कांट दी।

चंपा अपना मुंह बन्द कर हसने लगी। इधर चंदन जोश में आ गया था वह चंपा की चुचियों को मसलने का मजा ले रहा था।

चंपा _चंदन लगता है तुम्हारी दीदी के दूदू तुम्हे कुछ ज्यादा ही पसंद है अब इसे छोड़ो मां के सुद्धिकरण में ध्यान दो इससे बाद में खेल लेना। मै कही भागी तो नही जा रही। चंपा की बात सुनकर चंदन शर्मा गया।

चंपा अपनी मां से बोली।

चंपा _मां अब तुम अपना पैर उपर कर अपना साड़ी और पेटिकोट अपने टांगो तक चढ़ा दो।

कमला _शर्म से पानी पानी होने लगी।

चंपा _मां अब शर्माना छोड़ो सुद्धीकरण कराना है की नही चंदन से।

कमला अब अपने पैर को ऊपर उठाकर, उसे मोड़कर बेड किनारे पीठ के बल लेट गई।और अपना साड़ी और पेटिकोट थोडा टांगो तक उठा दी अभी उसका boor दिखाई नही दे रहा था।

चंदन और चंपा की नज़र उसके टांगो पर टिक गया।

इधर कमला शर्म के मारे अपनी आंखें बंद कर चुपचाप लेटी रही।

चंपा _मां पेटी कोट थोडा और उपर करो तभी तो चंदन शुद्धिकरण की प्रक्रिया कर पाएगा।

कमला _चल हट बेशरम मुझसे नही होगा। इधर चंदन का land हवा में लहरा रहा था। अपनी मां के गोरे गोरे टांगो और चंपा के बड़े बड़े चूचे,उसके आंखो के सामने थे। वह पुरी तरह जोश में आ गया था।

अब चंपा समझ गई की उसकी मां अपना पेटिकोट और आगे नही उठाएगी, तब वह खुद ही अपने हाथो से अपने मां ki साड़ी और पेटिकोट कमला के टांगों से उपर उठा कर उसके पेट पर रख दी । जिससे कमला की boor चंपा और चंदन के सामने नंगी हो गई।

कमला शर्म के मारे अपनी आंखें बन्द कर चुप छाप अपने हाथो से मुंह छिपाकर लेटी रही।

इधर चंपा की नज़र कमला के दोनो टांगो के बीच गई तो उसने देखा की उसकी मां का boor तो दिखाई ही नहीं दे रहा है। सिर्फ झांटे ही झांटे दिखाई दे रहे थे।boor को बालो ने पुरी तरह ढक दिया था।

जिसे देख कर चम्पा कमला से बोली।

चंपा _ये क्या मां तुम तो पुरा जंगल उगा रखी हो। तुम्हारा गुफा का द्वार तो दिखाई ही नहीं दे रहा है। पता नही कितने दिनों से अपने झांटे नही बनाई हो।

तुम्हे अपने झांटों को साफ रखना था।

कमला _चुप होजा बेहया कही की। नही तो मर खायेगी।

कमला पहले से ही काफ़ी लज्जित महसूस कर रही थी। चंपा की बातो से वह और शर्म से पानी पानी होने लगी।

चम्पा _मां आजकल के लडको को चिकनी boor पसंद होती है। तुम्हे अपने झांटे बना लेनी थीं। अब चंदन का ये पहलीबार है वो तो इन जंगलों में खो जायेगा। और तुम्हारे गुफा का द्वार ढूंढता ही रह जायेगा। किस रास्ते पर जाना है उसे क्या मालूम।

मां सुद्धिकरण के बाद तुम नहाने से पहले अपना झांटे बना लेना अगर तुमसे नही होगा तो मैं बना दूंगी।

चंपा मुंह बन्द कर हसने लगी।

कमला शर्म के मारे गड़ी जा रही थी उसने सोचा नहीं था की बेटे के सामने ये सब बातें चंपा करेगी।

कमला _अब बस भी कर बेशरम, कितना गंदी गंदी बाते करती है तू पूरा बिगड़ गई है। और अपने भाई को भी बिगाड़ेगी । निर्लज कही की।

चंपा मुस्कुराने लगीऔर कमला से बोली।

चंपा _मां मैंने क्या गलत कह दिया जो मुझ पर इतना नाराज हो रही। अब देखो चंदन का लुल्ली तुम्हारे झांटों में फसकर कही कट गया तो इसका जवाबदार कौन होगा।

कमला _मन में सोचने लगी, चंपा ठीक कह रही है मुझे chut की सफाई कर लेनी चाहिए थी। पर अब क्या कर सकते हैं।

कमला _बेटी समय निकला जा रहा है अब जल्दी करो। इन बालों को बाद में देख लेंगे।

चंपा _ठीक है मां आज का शुद्धीकरण ऐसे ही कर लेते है पर कल ये साफ़ होना चाहिए।

अब चंपा अपने हाथो से अपनी मां के chut ke baal को हटाते उसके छेद को ढूंढने लगी। जब उसका छेद मिल गया तो वह अपना अपने उंगलियों से उसके chut के द्वार को चौड़ी कर दी और चंदन से बोली।

चंपा _चंदन लाओ अपना लुल्ली यहां रखो।

चंदन अपने land ko एक हाथ से पकड़ कर अपने मां के टांगों के बीच आ गया।

कमला तो शर्म के मारे आंखें बन्द कर चुपचाप लेटी रही।

इधर चंपा एक हाथ से चंदन के land को पकड़कर एक हाथ की उंगलियों से अपनी मां के boor ke द्वार को चौड़ी कर दी थीं। वह चंदन के land को कमला के chut के द्वार पर रख दी और चंदन से कहा।

चम्पा _चंदन अब हल्के से धक्का लगा और अपना लुल्ली अंदर डाल।

इस समय चंपा कमला के chut के फांकों को अपने उंगली से फैलाकर रखी थी और एक हाथ से चंदन के land ko पकड़कर chut के फांकों के बिच रखी थी।

अब चंदन हल्का सा दबाव डालकर chut के अंदर डालने की कोशिश किया जिससे land का टोपा chut के अंदर चला गया। अब चंपा ने थोडा ज़ोर का धक्का लगाने को कहा, चंदन ने एक जोर का धक्का लगाया, उसका chut को चीरता हुआ आधा land chut me समा गया। कमला के मुंह से दर्द में चीख निकल गई।

चंपा यह देखकर हसने लगी।

चंपा ने कुछ देर चंदन को ऐसे ही रुकने कहा फिर एक जोर का धक्का लगाने बोला।

चंदन ने एक जोर का प्रहार अपने land se कमला के boor में किया। चंदन का land गप की आवाज़ के साथ पूरा boor में समा गया। कमला के मुंह से फिर चीख निकल गई।

चंपा ने चंदन को कुछ देर ऐसे ही रहने को कहा फिरफिर land को आधा बाहर खींचने बोला।

चंदन ने वैसा ही किया, वह अपने land को boor से आधा बाहर निकाल लिया। फिर चंपा के बताएं अनुसार फिर उसे धीरे से अंदर कर दिया। अब चंपा ने चंदन को land को boor में धीरे धीरे अन्दर बाहर करने के कहा।

चंदन अब अपने land ko dhire dhire अंदर बाहर करने लगा। कमला पता नही कब की chudi थी उसे अपने पति से चूदे हुवे एक अरसे बीत गए थे।

Land boor me अन्दर बाहर होते ही कमला भी न चाहते हुवे गर्म होने लगी और उसके chut se पानी रिसने लगी जिससे land ab आसानी से chut के अंदर बाहर होने लगा।

चंदन का ये पहली बार था। उसे खूब मजा आने लगा। उसकी नज़र बाजू में बैठी अपने दीदी के चूची पर पढ़ी उसके बड़े बड़े मम्मे देखकर उससे रहा न गया और अपने एक हाथ ले जाकर चंपा के चूची को पकड़कर मसलने लगा।

चंपा भी चंदन और कमला की chudai देखकर गर्म हो गई। उपर से चंदन द्वारा उसका मम्मे मसलने से और ज्यादा गर्म होने लगी।

उसके chut se भी पानी बहने लगा।

इधर चंदन पूरा जोश में आ गया और वह जोर जोर से धक्का मारते हुवे अपने land से कमला की boor chodne लगा। चूंकि कमला की माहवारी चल रही थीं। उसने चंदन के कमरे मे आने से पहले chut ki अच्छे से सफाई जरुर की थी।

पर land का chut में जाने और उसके दीवारों को रगड़ने से रक्त स्राव बड़ गया जिससे चन्दन के land par चारो और खून की लालिमा दिखाई देने लगी।

इधर कमला को भी chudai में मजा आने लगा था। वह बरसों बाद chud रही थी। वह झडने के करीब पहुंचने लगी।

इधर चंदन का land कमला के bur में गपा गप अंदर बाहर होने लगा। चंदन तो जन्नत में पहुंच गया।

इस

इधर चंपा का भी हालत खराब हो गया था मां बेटे की chudai देखकर उसके chut से लगातार पानी बह रहा था वह साड़ी के उपर से ही अपने boor के भगनसे को अपने उंगलियों से रगड़ने लगी जिससे वह भी झड़ने की स्थिति में आ गई थी।

इधर कमला को भी बहुंत मजा आने लगा अब उससे रहा न गया और वह अपने दोनो हाथों से चंदन के क़मर को पकड़कर उसका सहयोग करने लगी। अब वह ज्यादा देर तक बर्दास्त ना कर सकी और चंदन के क़मर को जोर से जकड़ कर झड़ने लगी।

इधर चंदन भी जोर जोर से चोदने लगा पुरे कमरे में फ़च फाच गच गछ की आवाज़ गूंजने लगी। चंदन भी अब ज्यादा देर तक टिका न रह सका यह उसका पहली बार था और वह भी आह आह करके कराहते हुवे झडने लगा। वीर्य की लंबी लम्बी पिचकारी कमला के गर्भाशय में छोड़ने लगा।

चांपा भी मां बेटे को झड़ते देख अपने को न रोक सकी और अपने bhagnase को जोर जोर से रगड़ते हुए झड़ने लगी। कुछ समय के बाद तीनों को जब होस आया तो तीनो ही शर्म के मारे कुछ बोल नहीं पा रहे थे और तीनो अपने अपने कपड़े ठीक करने लगे।

कमला तो शर्म के मारे किसी से आंख नही मिला पाई और चुपचाप कमरे से बाहर चली गई।

चंपा _चंदन कैसा लगा रि, मां का शुद्धिकरण करने में मजा आया की नही।ये तो तुम्हारा पहली बार था। बडा जोश में आकर मा की ले रहा था। और वह हसने लगी।

चंदन_शर्म के मारे चुप ही रहा।

चंपा _अच्छा मां के नहाने के बाद तुम भी नहा लेना और अपने लुल्ली को अच्छे से धो कर सफाई करना लेना, इसमें मां के माहवारी का खून लगा लगा huwa होगा।

इधर कमला बाथरूम में जाकर बाबा के कहे अनुसार बाल्टी के पानी में गंगा जल डालकर नहाने लगी। और अपने शरीर की अच्छे से सफाई करने लगी।

फिर पीली साड़ी पहनकर पूजा पाठ करने लगी।

मां के नहा लेने के बाद चंदन भी नहाकर शरीर की अच्छे से सफाई कर वह भी पूजा रूम में जाकर पूजा में शामिल हो गया।

आगे की कहानी अगले अपडेट मे, कहानी कैसा लगा जरुर कमेंट्स कीजिएगा,,,,,,,,,,,
 
आपने लोगों ने पढ़ा राजेश का आज कालेज में मन नहीं लगा तो वह भगत के साथ उसके घर चला गया वहां भगत ने अपनी और चंदा की मिलन की कहानी राजेश को सुनाने लगा और राजेश को पता चला की चंदा का पति चंदन अपनी ही मां के साथ रिलेशनशिप मेंहै, चूंकि राजेशभी अपनी जिंदगी में इसी परिस्थितिसे गुजर रहा था। अतः वह यह जानने उत्सुक था की वह अकेला तो नही जो यह पाप कर डाला है। जब राजेश को भगत ने बताया की चंदा का पति चंदन और उसकी मां कमला के बीच भी नाजायज संबंध है। तो वह यह जानने को उत्सुक था कि आखिर चन्दन और उसकी मां के बीच शारिरिक संबंध बने कैसे?

राजेश का अंतर मन यह निर्णय नहीं कर पा रहा था कि कल रात उसके और उसके मां के बीच जो huwa वह अच्छा huwa की बहुत गलत। उसकी मां सुनिता ने तो कलरात जो भी huwa उसके लिए सारा दोष उसी पर लगा दिया था। इसलिए वह काफ़ी दुखी था और उसे लगने लगा था की उसने सचमुच बहुत बडी गलती कर दी है। वह चाहता तो अपने मां के साथ हुए घटना को रोक सकता था। और वह स्वयं को दोषी स्वीकार लिया था।

पर कमला और चंदन की कहानी से उसके मन को थोड़ा सकून मिलने लगा था कि ऐसा पाप करने वाला वह अकेला नहीं है दुनिया में और भी है।

इधर कालेज में जब सुमन क्लास लेने पहुंची तो उसकी आंखे राजेश को ढूंढने लगी। उसने देखा राजेश क्लास में है नही। उसने राजेश को कॉल किया। राजेश ने अपना मोबाइल स्विच ऑफ कर दिया था।

सुमन ने जब देखा की राजेश का मोबाइल स्विच ऑफ बता रहा है। उसके मन में कई प्रश्न उठने लगे। राजेश कहा होगा?

उससे रहा न गया उसने सुनिता को कॉल की, सुनिता ने कॉल रिसीव कि,

सुमन_ चरणस्पर्श मां जी,

सुनिता _जीते रहो, पुत्र वती भव बहु।

सुमन_आज राजेश कालेज नही आया क्या?

सुनिता _ राजेश तो कालेज गया है सुमन। क्या वो कालेज में नही है?

सुमन_ नही मां जी, वह क्लास में नही है। उसका मोबाइल भी स्वीच ऑफ बता रहा।

सुनिता मन में सोचने लगी कि कल रात की घटना के बाद शायद राजेश भी नार्मल नही होगा, हो सकता है उसका कालेज में मन न लगा हो और चला गया हो।

सुनिता _सुमन क्या? भगत वहा है?

सुमन _नही मां जी वह भी क्लास में नही है।

सुनिता _देखो सुमन तुम चिंता न करो वह भगत के santh कही गया होगा।

सुमन _वो तो ठीक है मां जी पर उसे मोबाइल बंद करके नही रखना था।

सुनिता _तुम्हारा कहना भी सही है, पर तुम चिंता मत करो।

सुमन _मां जी घर में कल की घटना के बाद कुछ huwa तो नही न, सब सामान्य तो है ना। मेरी और राजेश की शादी फिर जो कुछ huwa उसको लेकर।

सुनिता _नही बहु तुम ख।मोखा परेशान हो रही हो सब नार्मल है। राजेश अपने दोस्तो के साथ कही गया होगा। तुम चिंता न करो।

सुमन _ठीक है मां जी, राजेश का कॉल आए तो मुझे खबर करना।

सुनिता _ठीक है सुमन, मैं तुम्हे खबर करूंगी।

काल रखने के बाद सुनीता सोचने लगी आखिर राजेश गया कहा होगा जरुर कल रात मेरे और उनके बीच,जो घटना huwa है, उसे लेकर परेशान होगा। कही कल की घटना का जिक्र किसी से कर दिया तो।

हे भगवान अगर ऐसा huwa तो अनर्थ हो जायेगा। वैसे तो मुझे उस पर पूरा भरोसा है कि वह ऐसा नहीं करेगा, फिर भी मुझे राजेश से इस सम्बंध में बात करनी होगी? अगर कल रात वाली बात भूलकर भी किसी को पता चल गया तो अनर्थ हो जायेगा।

पर कल रात में हुई घटना के बाद उससे बात करने की हिम्मत अभी मुझमें नहीं है। मै कितनी ग्लानि महसूस कर रही हूं। मै उसका सामना करूंगी कैसे। उससे बात करूंगी कैसे?

फिर सोचने लगी, नही मुझे इस सम्बंध में राजेश से बात करना ही होगा चाहे मै कितनी ही लज्जित महसूस करू। नही तो अनर्थ हो सकता है। जब वह घर आएगा तो मुझे उससे बात करना होगा।

उधर राजेश बेड पर लेटकर सिगरेट का कश लगाते हुए। भगत से कहा, अबे कमला के सुध्धिकरण के बाद क्या huwa आगे बता।

क्या शुद्धिकरण के बाद भी दोनो मां बेटे शारीरिक सम्बंध बनाते रहे?

भगत _भाई असली कहानी तो शुद्धिकरण की बाद शुरू होती है?

कमला ने आगे जो आपबीती भगत को बताया उसे भगत ने राजेश को सुनना फिर से शुरू किया।

भगत ने बताया की सुबह पूजा पाठ कर लेने के बाद। कमला अन्य दिनों की तरह अपने काम में लग गई। पर चंदन दुकान में जब ग्राहक नही होता तोआज सुबह मां के शुद्धिकरण करने में जो मजा उसको मिला था।

वह उसे महसूस करने लगा। वह उस पल को याद करने लगा। जिससे उसका शरीर गर्म हो जाता था और उसके land में तनाव आ जाता था।

न चाहते हुवे भी उस पल को याद करने लगता था कि तरह उसका land उसकी मां की योनि में गपागप आ जा रहा था। और जब उसके लिंग से पानी निकला तो जैसे वह स्वर्ग में पहुंच गया था।

इन बातो को याद कर उसका land land तनकर खड़ा हो जाता था।

उधर कमला सुबह की घटना को याद करके बहुंत शर्मिंदगी महसूस करने लगती थी। वह चंदन के आस पास जाने से बच रही थी। वह यह सोचकर कि कैसे शुद्धिकरण के समय वह भी गर्म हो गई थी और जोश में आकर चंदन का सहयोग करने लगी थी। छी और कैसे न चाहते हुवे भी झड़ गई। इन सब बातो को याद कर वह बहुत हि लज्जित महसूस करने लगी। चंदन न जाने मेरे बारे में क्या सोच रहा होगा?

सुनिता _कीचन का काम कर रही थी तभी चंपा उसके पास आया और अपने मां से मुस्कुराते हुए बोली।

चम्पा _मां मैने सुबह तुमसे जो करने बोली थी वो की कि नही।

कमला _क्या बोली थी री? मै समझी नहीं।

चंपा _मां के कानो में धीरे से बोली! अपनी झांटों की सफ़ाई,,,,,,,

और वह हसने लगी।

कमला यह सुनकर लज्जित होकर बोली,,,,

चुप बेशरम कही की अपनी मां की मजाक बनाती है।तू सुधरेगी नही अपनी मां से ऐसी बाते करती है।

चंपा _मां मै तो चंदन के भलाई के लिऐ कह रहा था।

कमला _ओ कैसे?

चंपा _मां सोंचो तुम्हारे इतनी घनी और लंबी लम्बी झांटे है सुध्धीकरण करते करते कही चंदन का नुनु कट गया तो, लेने के देने पड़ जायेंगे। मै तो कह रही हूं उसे साफ़ कर लो अभी तो 5दिन और करने है सुध्धिकरण जब तक तुम्हारे गर्भाशय से रक्त स्राव पुरी तरह बंद नहीं हो जाता ।

कमलासोचने लगी चंपा ठीक कह रही है उसे झांटे साफ़ कर लेनी चाहिए।j

झांटे बनाए उसे पता नहीं कितने दिन हो गए थे।

चंपा _मां क्या सोचने लगी, तुम कहो तो मैं तुम्हारी मदद कर दूंगी।

कमला _चुप निर्लज कही की। मां की झांटे झांटे बनाएगी। मै इतनी बेहया नही जो अपनी ही बेटी से अपनी झांटे बनवाऊ। मै खुद बना लूंगी।

चम्पा हसने लगी,,,
 
रात में जब चंदन दुकान बन्द करने वाला था। तभी कमला दुकान में पहुंची, और दुकान में कुछ ढूंढने लगी। चंदन ने अपने मां से पूछा मां क्या ढूंढ रही हो?

कमला को चंदन के सामने जाने उनसे बात चीत करने में शर्म तो महसूस हो रही थी फिर भी किसी तरह वह चंदन से बोली, बेटा रेजर कहा है? दिख नही रहा।

रेजर शब्द सुनते ही चंदन के शरीर में एक करेंट सा लगा। वह जान रहा था कि उसकी मां रेजर का क्या करेगी? उसके शरीर के नशों में खून का रफ्तार बड़ गया।

वह अपने मां से बोला रेजर वहा पर रखा हैं मां।

चंदन खुद ही रेजर निकालकर अपनी मां को देने लगा। कमला इस समय शर्म से गड़ी जा रही थी वह अपने सिर को नीचे झुका ली थी।

जैसे ही कमला जाने को हुई तो चंदन ने अपने मां से कहा, मां मां बालो की सफाई के लिए आजकल महिलाएं रेजर का उपयोग नहीं करती कई प्रकार की क्रीम आती है जिससे आजकल महिलाएं उपयोग करती है। हमारे गांव की कई महिलाएं दुकान से क्रीम ले जाती है। रेजर से कटने का डर रहता है।

चंदन दूकान से क्रीम निकालकर अपनी मां को देते हुए कहा मां, इसका उपयोग करके देखो एक बार। कमला शर्म से गड़ी जा रही थी। वह किसी तरह चंदन के हाथों से क्रीम ली और तेजी से वहा से वापस चली गईं।

रात मे खाना खा लेने के बाद जब सभी सोने चले गए तब कमला क्रीम लेकर चंपा के रुम में पहुंच गई।

अपनी मां को अपने कमरे मे देखकर चंपा बोली। मां कुछ काम था क्या?

कमला _ कमला शर्माते हुवे बोली।बेटी मुझे कुछ पूछना था।

चंपा _मां मुझसे क्या शर्माना पूछो क्या पूछना है?

कमला _बेटी मै चंदन से ये रेजर लेने गई थी तो उसने मुझे ये क्रीम थमा दिया और बोला की आजकल की महिलाएं क्रीम से बाल साफ़ करती हैं। मैने तो कभी इसका उपयोग किया नहीं इसलिए तुमसे पूछने चली आई की इसका उपयोग कैसे करना है? वह शर्म से पानी पानी हो रही थी।

चम्पा _ ये हुई ना बात। पर चंदन दुकान में ऐसा क्रीम भी रखता है मुझे तो पता ही नहीं था।

कमला _अरे मुझे भी कहा मालूम था की इस क्रीम का उपयोग बाल साफ़ करने के लिए करते हैं मैं तो इसे चेहरे पर लगाने वाला क्रीम समझती थी।

कमला लजाते हुवे बोली।

चंपा _मां इसे उपयोग करना बहुत आसान है।

चंपा ने अपनी मां को अच्छेसे समझा दिया की क्रीम का उपयोग कैसे करना है? और अपने मां से बोली मां तुम लगा लोगी तो मुझे भी देना। और हसने लगी।

कमला _क्यू तू लगा कर किसको दिखाएगी। दामाद जी तो है नही। मुझे तो तुम पर भरोसा नहीं है कही अपने ही भाई से अपना मुंह काला न करा बैठो। कलमुही कही की।

चंपा _ऐसा हो भी सकता है, जब तुम दिखा सकती हो तो मैं क्यू नही। और चंपा हसने लगी।

कमला _छी कितनी बिगड़ गई है तू। अपने छोटे भाई को अपना boor दिखाएगी निर्लज। देखा था सुबह कैसे अपने भाई से अपनी चूची मसलवा रही थी।

चंपा _वो तो मैं तुम्हारी मदद के लिए कर रही थी। चंपा यह बोलकर हसने लगी।

कमला _अब मै जा रही हूं। और तुम भी सुबह जल्दी उठ जाना।

चंपा _क्यू मां अभी भी मेरी जरूरत नहीं है।

कमला _मै तुम्हारी तरह बेशरम नही कि अपने बेटे के रुम में जाकर बोलूं बेटा मेरा सुद्धिकरण का समय हो गया है। तुम उठ जाना सुबह जल्दी।

चम्पा _ठीक है मां।

अगले दिन सुबह कमला जल्दी उठ गई और बाथरूम में जाकर क्रीम से अपने झांटों की सफाई कर ली। अपने चमकते फुली हुई चिकनी chut को देखकर खुद ही शर्मा गई। पता नही चंदन देखने के बाद क्या रिएक्ट करेगा।

उसके बाद वह चम्पा के रुम में गई और उसे उठा कर दोनो चंदन के रुम मे पहुंच गए।

चंदन तो रात भर ठीक से सोया नहीं था उसे बार बार शुद्धिकरण करने में मिलने वाले मजा याद आ रहा था जिससे उसके धोती में land तना हुवा था।

जब कमला और चंपा दोनो रुम में पहुंचीं तो चंदन का दिल का धड़कन बढ़ गया।

चंपा _चंदन को छेड़ते हुवे कहा अरे चंदनतू तो पहलेसे जगा huwa है । लगता है तू रात भर सोया है कि नही मां का शुद्धिकरण करने बडा उतावला लग रहा है। और वह हसने लगी।

चंदन _ शर्माते हुवे,, नही दीदी ऐसी कोई बात नहीं।

चम्पा _हू, मै सब समझती हूं,,,,, और वह हसने लगी।

फिर बोली मां तुम बेड के किनारे लेट जाओ।

कमला बेड के किनारे पीठ के बल लेट गई।

चंपा _अब देख क्या रहा है चंदन, निकाल अपना धोती और लंगोट। चम्पा मुस्कुराते हुए बोली।

चंपा के कहने पर चंदन अपना धोती और लंगोट निकालने लगा। आज चंदन कल जैसा घबराया हुवा नही था। बल्की आज वह पहले से ही बड़े जोश में था यह सोचकर की कल सुबह की तरह आज भी उसे खूब मजा मिलने वाला है। उसका land फूलकर पहले ही लंबा और मोटा हो गया था। जोश के कारण शर्म भी गायब हो गया था वह सीधा धोती और लंगोट निकालकर नंगा हो गया। उसका land हवा में लहराने लगा।

चंपा _हाय दिया, आज तेरा तो पहले से ही खडा है re, मुझे तो आज अपनी दूदू दिखाने की ज़रूरत ही नहीं। देखो तो कैसा हवा में ठुमक रहा है। आज तो तू पहले ही तैयार है। मैने कहा था न कि तू आज मां का शुद्धिकरण करने उतावला लग रहा। चंपा हसने लगी,,,,

चंपा_मां आज चंदन तो पहले से ही तैयार है। चलो अब तुम भी अपनी साड़ी और पेटिकोट ऊपर करके अपनी टांगे चौड़ी करो। चंदन से रहा नहीं जा रहा। और वह हसने लगी,,

कमला _चुप बेशर्म कही की। कुछ भी बोलती है।

कमला अपनी साड़ी और पेटिकोट ऊपर करके अपनी टांगे खोल कर शर्म से अपनी आंखें बंद कर ली।

चम्पा _कमला की चिकनी boor देखकर बोली, हाय दईया, अम्मा तुम्हारी बुरिया तो आज कितनी चिकनी और फुल्ली हुई लग रही है। आज तो चंदन को खूब

मजा आने वाला है शुद्धिकरण में।

कमला शर्म से गड़ी जा रही थी।

इधर चंदन ने अपनी मां की फुली हुई चिकनी chut देखा तोबावरा सा हो गया। उसका land लोहे की रॉड की तरह हो गया। जिसे देखकर चंपा बोली। हाय दईया

देखो तो कैसे बिल को देखकर साप फुपकारी मार रहा है । अब देख क्या रहा है शुरू कर अपना काम।

चंदन अब अपने मां के टांगों के बीच आ गया और अपने land को पकड़कर अपनी मां के boor के छेद में रख दिया।

तभी चंपा ने अपने हाथो के उंगलियों से chut की फांकों को फ़ैला दी और बोली लगा धका।

चंदन ने एक जोर का धक्का boor पे मारा land boor को चीरता हुआ आधा से ज्यादा अंदर चला गया। कमला के मुंह से एक दबी हुई चीख निकल गई।

चंपा मुस्कुराते हुए बोली अब अंदर बाहर कर।

चंदन land को धीरे धीरे अन्दर बाहर करना शुरू किया।

Land boor में अंदर बाहर होने से कमला धीरे धीरे गर्म होने लगी और उसके boor से पानी निकलने लगी जिससे land चिकना हो गया और पूरा land boor me समा गया।

तभी चंदन ने अपनी दीदी के ब्लाउज की ओर देखा उसके कबूतर आज पिंजरे मे कैद था। वह ब्लाउज के उपर से ही चंपा की चूची को मसलने लगा। चंपा भी गर्म हो गई थी। वह अपने ब्लाउज को खोल कर चूची बाहर निकाल ली।

चंपा की सुडौल दूध से भरे बड़ी बड़ी चूची देखकर चंदन और जोश में आ गया और land को तेजी से chut में अंदर बाहर करने लगा।

चंदन चंपा की चूची को चुसने एवम मसलते हुवे land को कमला के boor me गपागप अन्दर बाहर करने लगा। जिससे कमला को स्वर्गीय आनंद आने लगा और वह अपने हाथो से भगत के क़मर को पकड़कर उसका सहयोग करने लगी।

चंपा भी बहुत गर्म हो गई थी। चंपा भी अपने उंगलियों से साड़ी के उपर से ही अपने boor को रगड़ने लगी।

इधर कमला न चाहते हुवे भी झड़ने की स्थिति में आ गई। वह जन्नत में पहुंच गई थी। इधर चंदन भी पूरे जोश में कमला का chut मारने लगा उसका land कमला के boor ras से पुरी तरह भीग गया था। और फैच फच्च की आवाज़ करता huwa land boor me अंदर बाहर हो रहा था। कमरे में मां बेटी की कामुक सितकारे गूंज रही थी।

कमला से बर्दास्त करना muskil हो गया और वह चंदन को को जकड़ कर झड़ने लगी।

इधर चंदन chudai थोड़ा बन्द कर अपने बहन चंपा के ओंठो को चूसना सुरू कर दिया, चंपा को इसकी उम्मीद नहीं थी अचानक से हुवे इस हमले से वह शर्मा गई। एक हाथ से अपने चूची मसलते हुए। चंदन चंपा की कभी ओंठ तो कभी उसके दुदू चुसने लगा जिससे चंपा का शरीर कपकापने लगा।

चंदन काफ़ी जोश में था अब फिर वह कमला के chut me धीरे धीरे land अंदर बाहर करने लगा। और फिर अपना स्पीड बड़ाने लगा जिससे कमला फिर गर्म होने लगी। अब चंदन पूरे जोश में आकर कमला की chudai करने लगा। कमला फिर जन्नत में पहुंच गई उसका chut se रस बहकर चंदन के अंडकोष से टपकने लगा अब चंदन अपने को रोक पाने में असमर्थ था और वह कमला के दोनो कमर को अपने हाथो से पकड़ कर जोर जोर से चोदने लगा और अपने क़मर से सटाकर आह आह आह कर के कराहते हुवे झरने लगा।

उसके land से वीर्य की लंबी लम्बी पिचकारी निकलकर कमला के गर्भाशय का शुद्धिकरण करने लगा। गर्भाशय पर वीर्य का अहसास पाते ही कमला खुद को न रोक सकी और चंदन को जकड़ कर फिर एक बार झड़ गई इधर चंपा भी झड़ चुकी थी।

हवस का तूफान जाने के बाद तीनों बेड पर लेट कर कुछ समय सुस्ताने लगे।
 
तीसरे दिन सुबह कमला चंदन के कमरे मे अकेले ही जानें का फैसला किया उसके पिछे कारण था कि वह शुद्धिकरण के समय न चाहते हुए भी काफ़ी उत्तेजित हो जाती थीं और उसके मुंह से सिसकारी निकलने लगती थीं। जिसके कारण बाद में वह बेटी के सामने लज्जित महसूस करने लगी थी।

चंदा भी अपने मां को छेड़ने में कोई मौका नहीं छोड़ती थी। और मजा लेती थी। कमला शर्म से पानी पानी हो जाती थी। अतः उसने उसने अब चंदन के कमरे मे अकेले ही जानें का मन बनाया।

तीसरे दिन सुबह वह अकेले ही चंदन के कमरे में पहुंचीं। इधर चंदन अपनी मां और दीदी का बेसब्री से इंतज़ार कर रहा था। उससे रहा न जा रहा था। उसे अपनी मां का शुद्धिकरण करने में जो मजा आ रहा था उसे मजे को फिर से प्राप्त करने के अहसास से ही उसका land उसके धोती में ही तनकर खड़ा हुआ था।

उसने अपने मां को अकेले देखकर पूछा।

चंदन _मां दीदी नही आई।

कमला _बेटा चंदा सो रही है उसे क्या रोज रोज परेशान करना।

कमला पलंग पर बैठ गई। और बोली चंदा का होना जरूरी है क्या? बोलो तो बुला लाऊं।

चंदन _नही मां ऐसी कोई बात नही।

कमला अब पलंग पर पीठ के बल लेट गई, और चंदन से बोली बेटा पूजा का समय हो हो गया है बेटा जल्दी करो।

चंदन _ठीक है मां।

चंदन तो पहले से ही तैयार था जोश के कारण उसका शर्म भी कम हो गया था। वह अब अपना धोती और चड्डी क़मर से अलग कर दिया जिससे उसका land हवा में लहराने लगा। वह अपने land को अपने हाथो में लेकर सहलाने लगा।

कमला की नज़र जब चंदन के land पर पड़ी तो वह शर्मा गई। अब वह अपने साड़ी और पेटिकोट को उपर उठाकर अपना टांगे फैला दी।

चंदन समझ गया कि उसे क्या करना है? वह अपने मां के टांगों के बीच आ गया। कमला की नज़र उसके land पर ही टिकी थी। उसका दिल की धड़कन बढ़ गया था कि फिर से वह अपने बेटे से chudne वाली हैं।

चंदन अपनी मां की फुली हुई चिकनी गोरी chut को देखा तो उससे रहा न गया वह उसे अपने हाथो से सहलाने लगा। चंदन का हाथ उसके chut पर लगते ही कमला का शरीर सिहर उठी।

कुछ देर तक सहलाने के बाद चंदन अपने ऊंगली से अपने मां के भगनाश को रगड़ा जिससे कमला सिसकने लगी उससे बर्दास्त ना हुवा तो वह चंदन से बोली बेटा जल्दी करो समय हो चुका है।

अब चंदन अपने land के टोपे को अपने मां के योनी के छेद में रख कर थोडा दबाव डाला जिससे उसका land का टोपा boor के अंदर चला गया। फिर एक जोर का धक्का मारा जिससे land boor को चीर कर आधा से ज्यादा अंदर चला गया।

कमला के मुख से आह निकल गई थीं।

अब चंदन अपने land ko धीरे से बाहर खींचा और फिर योनी के अंदर ठेल दिया। अब धीरे धीरे अन्दर बाहर करना शुरू किया। जिससे कमला उत्तेजित होने लगी। कमला के योनी से सफेद चिपचिपा रस निकालने लगा। जिससे योनि कीअंदर की दीवार चिकना हो गया अब land बड़ी आसानी से योनी में अंदर बाहर होने लगा।

Land अब पुरी तरह कमला के योनी में समा गया था। और गपागप अंदर बाहर होने लगा। कमला आंखें बन्द कर संभोग सुख का आनंद लेने लगी।

चंदन को भी बहुत मजा आने लगा। चंदन की नज़र उसके मां की चूचों पर पड़ी उसे चूचों से खेलने का मन huwa। वह ब्लाउज के उपर से ही चूचों को मसलने लगा। चंदन जोश में होने के कारण शर्म को काफ़ी पीछे छोड़ दिया था। उसे chut चोदने में बड़ा मजा आ रहा था।

चंदन के चूची मसलने से कमला की उत्तेजना और बड़ गई। इधर चंदन भी जोश में था उसने अपने मां की चूची का दीदार करने के लिए उसके ब्लाउज का बटन खोलने का प्रयास किया। वह सफल न हो सका तो वह अपनी मां से बोला।

चंदन _मां खोलो ना।

कमला शर्मा गई पर वह भी काफ़ी उत्तेजित थी। वह ना चाहते हुए भी अपने ब्लाउज का बटन खुद खोलने लगी कुछ ही देर, में कमला के चूचे ब्लाउज से आजाद होकर चंदन के सामने आ गया।

चंदन अपनेमां कीबड़े बड़े बड़े मम्मे देखकर बोला

चंदन _मां तुम्हारी दुदू तो बड़े मस्त है।

चंदन के मुंह से यह शब्द सुनते ही कमला शर्मा गई। और शर्म से अपनी आंखें बन्द कर ली।

इधर चंदन से रहा न गया और मम्मो को अपने हाथो से लेकरउससे खेलने लगा उसे दबाने लगा। जब उसके चुचक को मुंह में लेकर चूसा तो कमला अपने आंखें पलटने लगी।

उसके मूंह से सिसकारी निकलने लगी। इधर चंदन समझ गया था कि ऐसा करने से उसके मां को भी मज़ा आ रहा है। वह अपने मां की निप्पल को चूसते हुए जोर जोर से चोदने लगा।

जिससे कमरे मे fach fach gach gach की आवाज़ गूंजने लगा मां बेटा दोनो ही जन्नत में पहुंच गया।

चंदन ने देखा की उसकी मां अपनी आंखें बन्द कर chudai ka मजा ले रही है वह निप्पल चूसना बंद कर दिए और अपने मां के होन्टो को अपने मुंह में भर कर चूसने लगा।

कमला ने अपने आंखें खोली और बोली बेटा ये क्या कर रहा है? मै तुम्हारी मां हू बीवी नही।

चंदन _मां बहुत मजा आ रहा है। चुसने दो ना।

और वह अपने मां के ओंठ और गाल उसके गर्दन को चूमने लगा।

कमला भी काफ़ी उत्तेजित थी। वह चंदन का विरोध करने की स्थिति में नही थी। क्यों की चंदन की इन हरकतों से उसे भी बहुत मज़ा आ रहा था।

इधर चंदन अपने मां के honto को चूसते हुए land को योनी में अंदर बाहर कर रहा था।

कमला अब झड़ने की स्थिति में पहुंच गई थी। वह अपने क़मर हिलाकर चंदन का सहयोग करने लगी। अब चंदन अपने मां की चूची को जोर जोर से मसलते हुए।land se योनी की दनादन chudai करने लगा। मां बेटे दोनो संभोग की असीम सुख को पा रहे थे।

कमला को ऐसा सुख अपने पति से कभी नही मिला था। लगातार उसके मुंह से सिसकारी निकल रही थी। कमला से बर्दास्त नहीं huwa और वह झड़ने लगी इधर चंदन भी जोर जोर से धक्का लगाते हुए कहराते हुवे अपने मां के योनी में झड़ने लगा।

उसके land se वीर्य के लंबी लम्बी पिचकारी कमला के कोख में छोड़ने लगा। और अपने मां के ऊपर ढेर हो गया। कमला चंदन के पीठ को सहलाने लगी।

चंदन अपने मां के उपर वैसे ही पड़ा रहा जब दोनो होश में आए। तब कमला को बहुंत शर्मिंदगी महसूस होने लगी। वह चंदन से बोली।

कमला _उठो बेटे।

चंदन अपने मां के उपर से उठकर पलग पे लुड़क गया और पीठ के बल वैसे ही नंगा लेटा रहा।

इधर कमला शर्मीदगी महसूस करते हुवे पलंग से उठ कर अपने साड़ी और पेटिकोट ठीक की और अपने ब्लाउज का बटन लगाने लगी। उसे अपने बेटे से नज़र मिलाने की हिम्मत नहीं थी जबकि चंदन अपने मां को ही देख रहा था।

इधर चंदन मुस्कुरा रहा था। उसने आज फिर से उसने संभोग का परम सुख जो पाया था। वह अपने land को सहलाने लगा।

इधर कमला जब कमरे से बाहर निकलने वाला थी तो एक नज़र चंदन की ओर देखी चंदन को मुस्कुराते एवम land सहलाते देख वह शर्म से पानी पानी होने लगी और शर्माते हुवे बिना कुछ बोले वहा से निकल गई।
 
इधर चंदा अपनी मां की आने का इंतजार कर रही थी जब कमला उसके कमरे मे नही आई तब वह खुद ही अपने कमरे से बाहर निकलकर अपने मां को ढूंढने लगी। उसकी मां जब कही नही नज़र आई तब वह चंदन के कमरे की ओर गई कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था तो वह दरवाजे पर कान लगाकर सुनने की कोशिश करने लगी।

उसे उसके मैं की सिसकने की आवाज़ सुनाई पड़ी तो वह समझ गया की मां आज चंदन के कमरे में अकेली ही गई है और चंदन से chud रही है। उसकी मां की सिसकारी सुनकर वह भी काफ़ी गर्म हो गई और अपने उंगली से अपनी chut सहलाने लगी जब अंदर सिसकारी आना बन्द huwa तब वह समझ गई की चंदन झड़ गया है। अब मैं कभी भी बाहर आ सकती है अतः वह अपने कमरे मे जाकर अपने मां का बाहर आने का इंतजार करने लगी।

जब कमला कमरे से निकलकर कर नहाने बाथरूम में चली गईं। तब चंदा चंदन के कमरे में चली गई।

चंदा _क्यू रि आज तो अपनी बहन के बगैर ही मां का शुद्धिकरण करण कर लिया। अब तुम्हे अपनी दीदी की j जरूरत नहीं है क्या?

चंदन _नही दीदी ऐसी बात नहीं है मां कह रही थी तुम सो रही थी। तो तुम्हे रोज रोज उन्हें परेशान करना उचित नहीं लगा।

चंदा _हा भई, मां की chut मिलते ही बहन की दुदू भूल गए।

चंदन _दीदी मै तुम्हारे दुदू कैसे भुल सकता हूं। कितने मस्त है आपके दूदू इसमें तो दूध भी भरा huwa hai इसे पीकर chut मारने का अलग ही मजा है।

और चंदन चंदा की दुदू को ब्लाउज के उपर से ही मसलने लगा। इस समय चन्दन नंगा ही बेड पर लेटा था और चंदा उसके पास बैठी थी।

चंदा _बस कर, अब मुझे और न बना। लगता है तुम आज मां के दुदू से खेलो हो।

चंदन मुस्कुराने लगा।

चंदा अपने ब्लाउज के बटन को खोल कर चूची बाहर निकाल दिया।

चंदा _क्या मां के चूची मेरे ज्यादा अच्छे है जो इसे भूल गया।

चंदन अपनी दीदी के मम्मे को मसलते हुवे कहा। नही दीदी तुम्हारे दुदू में तो दुध भरा है न मां के में नही तो तुम्हारा मसलकर चुसने में ज्यादा मज़ा आता है।

ऐसा कहते हुवे चंदन, चंदा की दुदू को मसलकर पीने लगा। दीदी कितना मीठा है आपका दूध।

चंदा की बड़ी बड़ी दूध से भरी चूची को मसलने awam चुसने से चंदा गर्म हो गई और चंदन भी जोश में आ गया और उसका land तनकर फिर से खड़ा हो गया।

चंदा _हाय दईया तुम्हारा तो फिर से खड़ा हो गया रि, क्या मां का शुद्धिकरण करने से तुम्हरा मन नहीं भरा है।

ऐसा बोलकर चंदा, चंदन के land को अपने हाथो में लेकर सहलाने लगा।

चंदा _दीदी ये तो तुम्हारे दूध से भरे दुदू का कमाल है।

चंदा _ क्या तुम्हे फिर से करने का मन कर रहा है क्या?

चंदा _दीदी मां फिर से थोड़े ही देगी।

चंदा _मुझे चोदेगा?

चंदन _दीदी ये क्या कह रही हो? तुम तो अभी पेट से हो, बच्चे को कुछ हो गया तो।

चंदा _अरे नही re थोड़ा सावधानी से करे तो कुछ नहीं होगा। मैने और तुम्हारे जीजा ने पहला बच्चा के समय बच्चा पैदा करने तक मजे लिए।

चंदन _सच दीदी मै तोअब तककुछ करनेसे डररहा था। तुम्हारा पेट इतना बड़ा हो गया है।कुछ करने से कही बच्चा को नुकसान न हो जाए।

चंदन से रहा न गया और वह चंदा के ओंठ चुसने लगा।

चंदाभी चंदन का सहयोग करने लगी और एक हाथ से उसके land सहला रही थी ।

चंदन का land तनकर लोहे के रॉड की तरह हो गया। उसके land का सुपारा खाफी फूल गया था क्योंकि कुछ देर पहले ही वह कमला boor पर डुबकी लगा या था अब उसकी बड़ी बहन चंदा के chut में डुबकी लगाने के अहसास में ही और लंबा और मोटा हो गया।

चंदन _दीदी अब खोलो न बर्दास्त नही हो रहा

चंदा _तू तो बडा उतावला हो गया re अपनी दीदी का लेने। और वह हसने लगी।

इधर चंदा भी काफ़ी दिनो से प्यासी थी और जब से वह चंदन का land देखी थीं वह भी चंदन से chudna चाहती थी।

अब चंदा पीठ के बल लेट गई और अपना चड्डी निकालकर अपने पेटीकोट और साड़ी ऊपर उठा दी जिससे उसका चिकनी chut चंदन के सामने आ गया।

चंदन_दीदी तुम्हारी chut तो एकदम चिकनी है।

चंदा _हा re मै इसे हमेशा चिकना ही रखती हूं।

चंदन एक हाथ से अपने land पकड़ कर दुसरे हाथ से चंदा के chut के को सहलाने लगा।

चंदा सिसकने लगी। चंदा अपने हाथ से चंदन के land को पकड़कर कर हिलाने लगी फिर उसे अपने chut के छेद में रख दी और बोली।

चंदा _चल अब देर न कर डाल दे।

चंदन land ko पकड़कर boor के छेद पर रखा चंदा अपने दोनो हाथो की उंगलियों से उसके फांकों को फ़ैला दी ।

चंदन ने एक हल्का धक्का मारा land का सुपाड़ा योनि के अंदर चला गया। फिर चंदन चंदा के चूची चुसने लगा।

कुछ देर बाद फिर एक जोर का धक्का मारा land boor को चीरकर आधा अंदर घुस गया।

चंदा के मुंह से आह निकल गया।

चंदा _बहुंत बडा है तेरा re आराम से डाल।

चंदन अब चंदा के चूची को मसलते हुए। धीरे धीरे अन्दर बाहर करने लगा।

चंदा तो पहले से ही काफ़ी गर्म थी उसका chut का पानी बाहर निकलना शुरू हो गई। जिससे चंदन का land गीला हो गया अब land फुच फुच की आवाज़ करता huwa चंदा के योनी के गहराई में उतरने लगा।

चंदन, चंदा के पेट पर दबाव न पड़े इस बात को ध्यान में रखकर अपने हाथो से चंदा के क़मर को पकड़कर land को तेजी से अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया

कई माह बाद चंदा chud रही थी काफ़ी दिनो से प्यासी थी उसे खाने को एक नया land मिला था जो उसके पति से बडा और मोटा था वह बहुत जल्द ही जन्नत में पहुंच गई।

इधर चंदन को भी एक गर्भवती इस्त्री को चोदने का एक नया सुख मिल रहा था। वह भी जोश में आकर चंदा को humach हमच कर चोदने लगा

चंदा को अलग अलग आसान में चुदाने का शौंक था इसलिए वह आसन बदलना चाहती थी। इसलिए वह चंदन से रुकने बोली

चंदन _क्या हुआ दीदी मजा नही आ रहा है क्या?

चंदा _मै जैसे कह रही वैसे करो और ज्यादा मजा आयेगा। पहले तुम हठो और मुझे उठने दो।

चंदन अपने land ko पकड़कर कर बाहर निकाल दिया और अलग खडा हो गया।

चंदा पलंग से उठी और पलंग पर चढ गई और घोड़ी बन गई। और अपना साड़ी पेटिकोट ऊपर करके चूतड को चंदन के सामने खोल दी।

चंदा _चंदन तुम मेरे पीछे आओ। और पिछे से डालो।

चंदन _समझ गया की ऐसा तो कुत्ता kutiya को चोदता है। वह पलंग पर चढ गया और और घुटने के बल चंदा के पिछे खड़ा हो गया और उसके chut ka छेद देखने लगा। चंदा के गोरे गोरे भरे हुवे चूतड देखकर चंदन का land ठुमकने लगा।

चंदा _अब देख क्या रहा है डाल न।

चंदन land ko चंदा के योनी में डालने का कोशिश करने लगा पर land अंदर नही जा पा रहा था।

तब चंपा एक हाथ पिछे ले जाकर चंदन के land को पकड़ लिया और उसे अपने chut के छेद में सेट कर दी।

चंदा _अब डालो।

चंदन अब हल्का सा धक्का मारा टोपा योनि के अंदर घुस गया। फिर एक जोर का dhakaa मारा land boor ko फाड़कर सरसराता huwa अंदर घुस गया।

अब चंदन, चंदा के क़मर को अपने हाथो से पकड़ कर अंदर बाहर करना शुरू किया land अब पूरा योनि में समाकर अंदर बाहर होने लगा।

चंदा के गोरे गोरे चूतड को हाथो से सहलाता huwa जोर जोर से धक्का देकर चंदा को चोदने लगा। चूतड का का चंदन के शरीर से टकराने लगा जिससे थप थप थप की आवाज़ गूंजने लगा।

पहले पोजिशन से इस पोजिशन में चोदने में चंदन को ज्यादा मजा आने लागा।

चंदा _क्यू re कैसा लग रहा है?

चंदन _मत पूछो दीदी, क्या गजब का मज़ा आ रहा है? दीदी तुम्हारे चूतड काफ़ी खूबसूरत है।

चंदन काफ़ी जोश में आ गया और वह gach gach करके दनादन चंदा को चोदने लगा चंदा भी स्वर्ग में पहुंच गई थी काफ़ी दिनो बाद उसकी chut की प्यास बुझ रही थी वह भी अपना क़मर हिलाकर चंदन का सहयोग करने लगी ।

चंदन को भी ऐसा मजा पहली बार मिल रहा था। वह भी स्वर्ग में पहुंच गया। और अपना सुध बुध खोकर गचगच चंदा को चोदने लगा चंदा भी सिसकारी निकाल रही थी।

अब चंदन को बर्दास्त ना हुवा और वह जोर जोर से चोदते हुए जोर से अपने दोनो हाथो से अपने चंदा की चूतड को अपने land से सटा लिया और आह आह करके कराहते हुवे झड़ने लगा। वीर्य की पिचकारी उसके land से निकलकर उसके योनि में भरने लगा।

कई दिनों बाद अपने योनि में गर्म गर्म वीर्य का अहसास पाकर चंदा भी खुद को न रोक सकी और झड़ने लगी।

कुछ देर तक दोनो झड़ने का आनंद लेंने लगे। चंदा को भी झड़ने में ऐसा आनद पहली बार मिला था। जो सुख चंदन से मिला था उसकी कल्पना भी उसने नही की थी।

चंदन को भी एक 8माह की गर्भवती स्त्री को इस तरह भोगने का सुख मिला था। ऐसा परमसुख पाकर वह सपने को धन्य समझ रहा था।

आज उसको दो दो स्त्रियों को भोगने का सुख मिला था और दो दो स्त्रियों को सुख दे पाया था । वह गर्व महसूस कर रहा था।

कुछ देर वे दोनो बिस्तर पर लेटे रहे फिर चंदा बोली चलो री अब नहाकर jaldi पूजा रुम मे चलो नहीतो मां पूछेगी अब तक क्या कर रहे थे।
 
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