Incest यह क्या हुआ - Page 20 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Incest यह क्या हुआ

पदमा ने गांव में बीती घटना के बारे में राजेश को बताने लगी।

पदमा _बेटा तुम्हारे दादा मानव प्रसाद और ठाकुर के पिता, महेंद्र सिंह बहुत अच्छे दोस्त थे।

ठाकुर महेंद्र सिंह एक भले इन्सान थे।

ठाकुर महेंद्र सिंह तुम्हारे दादा को बहुत मानते थे।

तुम्हारे दादा का आस पास के गांव में बहुत मान सम्मान था।

ठाकुर महेंद्र सिंह, हर छोटे बड़े कार्यों में तुम्हारे दादा जी से सलाह लिया करते थे।

दोनो के घर में एक दूसरे का आना जाना लगा रहता था।

बात आज से तुम्हारे जन्म के पहले की है।

तुम्हारे पापा, शेखर पढ़ाई में बहुत तेज़ था। हमेशा क्लास में अव्वल आता था।

कालेज की पढ़ाई के बाद शेखर की बैंक में नौकरी लग गई।

नौकरी लगने के बाद तुम्हारे दादा जी शेखर के लिए एक अच्छी लडकी की तलाश करने लगे।

एक दिन ठाकुर महेंद्र सिंह के साथ तुम्हारे दादा जी दूर किसी कार्यक्रम में गए हुए थे।

वहा पर सुनीता तुम्हारी मां अपनें पिता जी के साथ आए हुवे थे। जब तुम्हारे दादा जी की नजर सुनीता पर पड़ी तो उसे शेखर के लिए सुनीता पसन्द आया।

वह उसके पिता जी से मिला और सुनीता के पिता को अपना इरादा बताया।

उस समय तुम्हारे दादा का बड़ा मान सम्मान था। सुनीता के पिता जी ने रिश्ता के लिए हामी भर दी।

इस प्रकार तुम्हारी मां इस घर में बिहा के आई।

नई बहु को आशीर्वाद देने ठाकुर महेंद्र सिंह घर आए। साथ में अपनें बेटे बलेंद्र सिंह को भी लेकर आए थे।

ठाकुर बालेंद्र सिंह एक नंबर का अय्याश था। उसकी शादी हो चुकी थी, वह दो लडकियों के पिता भी बन चूके थे।

लेकिन गांव के खुबसूरत बहु बेटियो पर वह बुरी नजर रखता था।

ठाकुर बालेंद्र सिंह की नजर जब तुम्हारी मां पर पड़ी टू वह सुनीता की खूबसूरती का दीवाना हो गया।

उस दिन के बाद बालेंद्र सिंह सुनीता को पाने के लिए बेचैन रहने लगा।

उसने गांव में एक जासूस लगा रखा था।

शेखर को ड्यूटी के लिए धरमपुर जाना पड़ता था। वह रोज घर से आना जाना नही कर सकता था। क्यू की साधन नही था अतः वह सप्ताह में एक दिन घर आता था।

तुम्हारे चाचा भी कालेज की पढ़ाई धरमपुर कालेज से कर रहे थे वह भी शेखर के साथ ही आना जाना कर रहा था।

तुम्हारे ताऊ और मैं खेत चले जाते थे।

ज्योति उस समय 4वर्ष की और भुवन 2वर्ष का था, मैं उन दोनो को घर में सुनीता के पास ही छोड़ देती थी।

तुम्हारे दादा जी, ठाकुर महेंद्र सिंह के साथ इधर उधर के कार्यक्रमों में चले जाते थे। सुनीता और बच्चे ही घर में रह जाते थे।

जब सुनीता घर में अकेली होती इस बात की जानकारी बालेंद्र सिंह को उसके जासूस से हो जाता था।

बालेंद्र सिंह सुनीता को रिझाने के लिए घर आ जाता था।

बालेंद्र सिंह दरवाजा खटखटाया,,

सुनीता इस वक्त कौन हो सकता है?

सुनीता दरवाजा खोली,,,

सामने बालेंद्र सिंह था।

सुनीता _अरे छोटे ठाकुर जी, आप।

बालेंद्र _ यहां से गुजर रहा था, प्यास लगी थी, सोंचा पानी पी लेता हूं।सुनीता, अंदर आने के लिए नही कहोगी।

सुनीता _माफ करना, छोटे ठाकुर अभी घर में कोइ नही है।

बालेंद्र _सुनीता, हम पराय थोड़े ही है, हमारे और आपके घर में तो एक दूसरे परिवारों का आना जाना लगा रहता है। हमारे पिता जी और तुम्हारे ससुर जिगरी दोस्त है। इस नाते

हम तुम्हारे जेठ है।

पानी पिला दो,,

सुनीता _आइए बैठिये, मैं अभी पानी लेकर आई।

सुनीता गिलास में पानी लेकर आई,,

बालेंद्र सिंह की ओर गिलास आगे बढ़ाई,,

बालेंद्र सिंह ने गिलास के साथ सुनीता का हाथ भी पकड़ लिया।

सुनीता अपना हाथ छुड़ाई,,

सुनीता_छोटे ठाकुर, ये आप क्या कर रहे हैं?

बालेंद्र सिंह _सुनीता तुम बहुत सुन्दर हो, सच में जब से तुम्हे देखा है, मैं ठीक से सो नहीं पा रहा हूं।

सुनीता _छोटे ठाकुर, ये आप क्या कह रहे हैं। में किसी और की अमानत हूं। आपको ऐसा नहीं सोचना चाहिए।

बालेंद्र सिंह _सुनीता, जब से तुम्हे देखा है तुम मेरे दिल में उतर गई हो। मुझे तुमसे प्यार हो गया है?

सुनीता _छोटे ठाकुर, आप यहां से चले जाइए।

मै किसी और की अमानत हूं। आपको मेरे बारे में ऐसा नहीं सोचना चाहिए।

बालेंद्र सिंह _मैं तो अपनी दिल की बात बताने आया था। अभी मैं जा रहा हूं। तुम मेरे बारे मे सोचना।

बालेंद्र सिंह चला गया।

सुनीता डर गई थी।

दो दिन बाद ठाकुर सुनीता को घर में अकेली पाकर फिर आ गया।

सुनीता _छोटे ठाकुर आप फिर आ गए।

बालेंद्र सिंह _क्या करू सुनीता, दिल मानता नहीं है? देखो मैं तुम्हारे लिए क्या लाया हूं?

ठाकुर सोने की कंगन लेके आया था।

देखो येतकंगन लाखो की है तुम्हारे हाथो में खुब जचेगी।

आओ मैं अपनें हाथो से पहना दू।

सुनीता _छोटे ठाकुर, कृपया आप यहां से चले जाइए।मैने कहा न मैं किसी और की पत्नि हूं। आपको ये सब शोभा नहीं देता।

घर में आपके बीवी और बच्चे हैं उनका तो ख्याल करो।

बालेंद्र सिंह _घर में बीवी है तो क्या हुआ? तुम एक बार मेरी बन जाओ, मै तुम्हे रानी बना कर रखूंगा।

शेखर तुम्हे क्या दे पायेगा।

मेरी बनकर रहोगी, तो यहां की रानी कहलाओगी । मैं तो कहता हूं तुम शेखर को छोड़ दो।

सुनीता _छोटे ठाकुर, मुझे नहीं बनना है, रानी, मै अपनें पति के साथ बहुत खुश हूं।

और कृपया करके आप यहां से चले जाइए।

बालेंद्र सिंह _ठीक है, सुनीता मैं अभी जा रहा हूं, फिर आऊंगा। कोइ जल्दी नही है, अच्छे से सोच लो।

बालेंद्र सिंह वहा से चला गया।

सुनीता ने जब, शेखर घर आया तो इस बात की जानकारी उसको दी की छोटे ठाकुर उस पर बुरी नियत रखता है। और अकेली पाकर घर आकार मुझे रिझाने की कोशिश करता है।

शेखर _देखो सुनीता, तुम हो ही इतनी खुबसूरत, गांव के सारे मर्द देखकर तुम्हे आहे भरते हैं।

छोटे ठाकुर भी, तुम्हारा दीवाना हो गया है, यह सुनकर मेरा सीना गर्व से चौड़ा हो गया है। इतनी सुन्दर जो बीवी पाया है।

वैसे तुम समझदार हो मुझे तुम पर पूरा भरोसा है।

थोडा समझदारी से काम लो, ठाकुर परिवार और हमारे परिवार के बीच अच्छे संबंध है, गलत कदम से रिश्ते खराब न हो जाए।

सुनीता _यहीं सोंचकर तो अब तक सह रही हूं जी, नही तो उसका प्यार का भूत कब का उतार चुकी होती।

पदमा _इस तरह बेटा, ठाकुर बालेंद्र सिंह, घर में जब सुनीता अकेली होती, वह सुनीता को रिझाने का प्रयास करता।

और एक दिन तो हद हो गई।

बालेंद्र सिंह ने सुनीता को अपनी बाहों में जकड़ लिया।

सुनीता गुस्से में आकर बालेंद्र सिंह के गालों पर कई थप्पड़ जड़ दिया।

सुनीता _छोटे ठाकुर, बर्दास्त की भी एक सीमा होती हैं। मैने कहा न मैं अपनें पति के अलावा किसी और के बारे में सोंच नही सकती।

तुम यहां से चले जाओ, और आज के बाद तुम इस घर में कभी मत आना।

छोटे ठाकुर _सुनीता, ये तुमने अच्छा नही किया? मैं जिसे चाहता हूं उसे पाकर रहता हूं।

ये थप्पड़ मैं याद रखूंगा।

मैं तुम्हे प्यार से पाना चाहता था। लेकिन तुम नही मानी।

मैं इस अपमान का बदला जरूर लूंगा।

पदमा _बेटा इस घटना के बाद, ठाकुर ख़ुद को अपमानित महसूस करने लगा, वह अपनें अपमान का बदला लेने मौके के तलाश में रहने लगा।

एक दिन घर में कोइ नही था सिर्फ सुनीता अकेली थी।

बालेंद्र सिंह अपनें साथियों के साथ, घर आ पहुंचा।

सुनीता _छोटे ठाकुर, उस दिन थप्पड़ खाने के बाद भी तुम नही सुधरे।

बालेंद्र सिंह _साली, उसी अपमान का बदला लेने ही तो आया हूं। बहुत गुमान है न तुम्हे अपनी खूबसूरती पर।

आज मैं तुम्हे किसी को अपना मूंह दिखाने लायक नही छोडूंगा।

उठा लो साली को।

पदमा _बेटा तुम्हारी मां को बालेंद्र सिंह के साथी, उसका मूंह बंद कर, घर से दूर खेत में बने झोपड़े की ओर ले जाने लगा,,

तभी, शेखर का दोस्त सुनीता को बचाने आ गया। बालेंद्र सिंह के साथी और शेखर के दोस्त के बीच लड़ाई huwa,

बालेंद्र सिंह के साथी अधिक थे। उनके सामने ज्यादा देर तक टिक न सका। वह बुरी तरह घायल हो गया।

बालेंद्र सिंह के साथी सुनीता को झोपड़े में ले गए।

वहा झोपड़े में ले जाकर बंद कर दिया।

कुछ देर बाद झोपड़े में बालेंद्र सिंह पहुंचा।

सुनीता _छोटे ठाकुर ये तुम ठिक नही कर रहे हो। कृपया मुझे जाने दो, मैं किसी और की पत्नि हूं।

बालेंद्र _साली, मैने तुम्हे प्यार से समझाया, मनाया, तुम नही मानी।

ठाकुर बालेंद्र सिंह जिसे चाहता है उसे पाकर रहता है। साली दो टके की औरत मुझे थप्पड़ मारा।

आज मैं तुम्हे किसी को मुंह दिखाने लायक नही छोडूंगा।

बालेंद्र सिंह ने सुनीता की साड़ी खींचने लगा, सुनीता उसे रोकने की बहुत कोशिश की पर वह ठाकुर को रोक न सकी।

बालेंद्र सिंह ने साड़ी खींचकर अलग कर दिया।

बालनेद्र सिंह _बांध दो साली की हाथ पैर खाट पे।

बालेंद्र सिंह के साथियों ने सुनीता को खाट पे लेटा कर उसकी हाथ पैर खाट से बांध दिया।

सुनीता चीखने चिल्लाने लगी।

बालेंद्र सिंह _साली और चीख यहां कोइ नही आने वाला तुम्हे बचाने।

इधर शेखर का दोस्त लखन, किसी तरह तुम्हारे दादा जी के पास पहुंचा जो पास के गांव में ठाकुर महेंद्र सिंह के साथ किसी कार्यक्रम में गया।

तुम्हारे दादा ने यह बात ठाकुर को बताया , दोनो जीप से लखन और अपने साथी को लेकर उस झोपड़े की ओर पहुंचे ।

इधर इस बात से बेखबर, ठाकुर सुनीता की आबरू लूटने के लिए उसकी ब्लाउज को फाड़ने ही वाला था की ठाकुर और तुम्हारे दादा वहा पहुंच गए।

बालेंद्र सिंह को गंदी हरकत करता देखकर ठाकुर बहुत क्रोधित हो गया।

इधर तुम्हारे दादा ने सुनीता की हाथ पैर जो खाट पे बंधा था को खोला।

सुनीता अपनी साड़ी पकड़ कर ख़ुद को छिपाते हुवे रोने लगी।

इधर ठाकुर ने अपने बेटे के गालों पे कई थप्पड़ जड़े।

ठाकुर _नालायक, तुमने मुझे किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं छोड़ा। ऐसी गंदी हरकत करते हुवे तुम्हे शर्म नही आई। तुमने खानदान की इज्जत मिट्टी में मिला दिया। दूर हो जा मेरी नजरो से।

ठाकुर _मानव, ये तुम्हारा गुनाह गार है इसे कड़ी से कड़ी सजा दो।

पदमा _गांव वाले भी इकट्ठा हो चूके थे।

कुछ लोगो ने कहा की इसे कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। गांव के नियम के अनुसार किसी औरत की इज़्ज़त पर हाथ डालने वाले को सर मुड़वाकर गधे में बिठाकर प्यार गांव में घुमाया जाता है, इसे भी यहीं सजा मिलनी चाहिए।

सभी गांव वालो ने कहा की इनको भी यहीं सजा मिलनी चाहिए।

बालेंद्र सिंह का सिर मुड़वा दिया गया और उसे गधे में बिठाकर पूरे गांव में घुमाया गया।

इस घटना के कुछ दिन बाद तुम्हारे दादा और ठाकुर मंदिर के स्थापना कार्यक्रम में गए हुवे थे, कुछ नकाब पोशो ने बंदूक से गोली मारकर दोनो की हत्या कर दिया।

कुछ लोगो ने कहा की वे नकाब पोश नक्सली थे।

तुम्हारे दादा और ठाकुर लोगो को नक्सली बनने से रोकते थे, इससे नाराज होकर नक्सलियों ने दोनो की हत्या कर दी।

कुछ लोग इसमें बालेंद्र सिंह का आदमियों का हाथ मानते है ।

ठाकुर के चले जाने के बाद।

बालेंद्र सिंह _लोगो पर जुर्म करने लगा।

पदमा _बेटा, तुम्हारे दादा जी के चले जाने के बाद, सुनीता बहुत डर गई, वह शेखर से कहा की अपना ट्रांसफर कहीं दूर सहर में करवाले।

तुम्हारे पापा ने अपना ट्रांसफर दूर करवा लिया।

सुनीता और शेखर गांव को छोडकर हमेशा के लिए चले गए।

इधर बालेंद्र सिंह गांव के लोगो को अपना दुश्मन मानता है और यहां के लोगो को मौका मिलने पर प्रताड़ित करता है।

बेटा जब ठाकुर को पता चलेगा तुम सुनीता के बेटे हो, वो तुम्हे नुकसान पहुंचा सकता है।

इसलिए तुम उसके हवेली में मत जाना।

राजेश को गांव की घटना के बारे में पता चलने के बाद, उसका शरीर अत्यंत गुस्से से भर गया। वाह दांत भींचते हुए कहा,,

राजेश _अब तो मैं हवेली जरूर जाऊंगा ताई, मेरी मां का अपमान करने वाले को हिसाब तो चुकाना पड़ेगा।

मेरे मां की आंसुओ का हिसाब उससे ले के रहुंगा।

 
दोपहर होने के बाद, पदमा भुवनऔर अपने पति के लिए भोजन लेकर खेत चली गईं। वह चिंतित थी, कि राजेश के हवेली जाने पर ठाकुर उसे कोइ नुकसान न पहुंचा दे।

इधर राजेश भी पलंग पर लेट कर सोच रहा था कि मां के साथ गांव में ये सब गुजरी है इसका जिक्र कभी किया नहीं।

ठाकुर ने जो किया है उसका हिसाब तो उससे लेना पड़ेगा, और दादा जी की हास्य में किसका हाथ था, उसका भी पता लगाना होगा।

राजेश के कमरे मे पुनम पहुंची।

पुनम _क्या कर रहे हो, देवर जी।

राजेश _कुछ नही भौजी, आराम कर रहा था। कुछ काम था क्या?

पुनम _देवर जी, मां जी बता रही थी की आज हवेली में पार्टी रखा है जिसमे ठाकुर ने तुम्हे बुलाया है।

क्या ये सच है?

राजेश _हा, भौजी।

पुनम _पर देवर जी, ठाकुर साहब तो सुरज पूर वालो को अपना दुश्मन समझता है, फिर तूमको कैसे बुलाया है? मां जी कह रही थी की ठाकुर की बेटी के कहने पर बुलाया है?

राजेश _हो सकता है भौजी, ठाकुर की बेटी दिव्या के कहने पर मुझे पार्टी में बुलाया गया हो।

पुनम _देवर जी कहीं ठाकुर की बेटी के साथ तुम्हारा कोइ चक्कर तो नही है।

राजेश _अरे, नही भौजी ऐसी कोई बात नही।

जब मैं ट्रैन से गांव आ रहा था तो दिव्या जी भी उसी ट्रैन से अपने गांव आ रही थी, कुछ बदमाश उससे बदतमीजी कर रही थी।

मैने उसकी मदद की, तभी से उससे जान पहचान huwa

पुनम _ओह मैं तो समझ रही थी कि ठाकुर की बेटी तुम्हारी गर्लफ्रेंड तो नही।

राजेश हसने लगा।

राजेश _भौजी आप भी न।

पुनम _वैसे देवर जी, तुम बताने वाले थे की तुम्हारी गर्लफ्रेंड के साथ आखिर किस बात को लेकर झगड़ा huwa, आखिर वह तुम्हे क्यो छोड़ कर चली गईं।

राजेश _रहनी दो भौजी, वह बात आपको बताने लायक नही है?

पुनम _देवर जी ऐसे क्या बात है, जो अपनी भौजी को नही बता सकते?

राजेश _भौजी, मेरी गलतियों की वजह से ही वह से ही उसने मुझे छोड़ दिया।

पुनम _मैं भी तो जानू की आखिर मेरे देवर से क्या इतनी बड़ी गलती हो गई जो, छोड़ कर चली गईं।

राजेश _मैं आपको बता नही सकता भौजी।

पुनम _ठिक है देवर जी, आप बताना नही चाहते हो अपने भौजी को तो, कोइ बात नही।

वैसे तुम तो बड़े स्मार्ट हो, कोइ भी अच्छी लडकी मिल जाएगी।

जो तुम्हे छोड़ कर चली गई उसे भुल जाओ।

और कोइ नई देखो।

पुनम _वैसे तुम्हे कैसी लडकी चाहिए?

राजेश ने मजाक में कहा,

राजेश _बिलकुल आप ही की तरह?

पुनम _धत बदमाश?

ऐसी क्या खास बात है मुझमें?

राजेश _कोइ एक बात हो तो बताऊं।

पुनम _मैं भी तो जानू, मेरी देवर को मुझमें क्या खास दिखाई देता है।

राजेश _रहने दो आप बुरा मान जाएंगी।

पुनम _अरे नही मानूंगी, बता तो सही।

राजेश _ये लंबी लंबीबाल, ये गोरे गोरे गाल, ये कजरारी आंखे , ये रस भरी गुलाबी ओंठ,

पतली क़मर, गहरी नाभी, और,,,

पुनम _और क्या देवर जी,,,

राजेश _और बड़े बड़े दूध से भरे चूची,,,

पुनम शर्मा गई,,

पुनम _धत, तुम तो बड़े बदमाश निकले, लगता है अपनी भौजी पे बुरी नियत रखते हो,,

राजेश _अरे भौजी, मैने तो कहा था कि आप बुरा मान जाएंगी,,,

पुनम _मुझे क्या पता था कि तुम मेरे स्तन के बारे में ऐसे बोलेंगे।

मतलब तुम्हारी नजर मेरी स्तनों पर रहती हैं।

राजेश _ जवान हूं न क्या करू, नजर फिसल जाती है,माफ कर देना भौजी गलती हो गई, अब नही देखूंगा?

पुनम _क्या नही देखोगे?

राजेश ने उसकी चूचियों के तरफ इशारे करते हुए कहा?

इसकी ओर,,

पुनम शर्मा गई,,

पुनम _छी देवर जी आप सच में न बड़े बदमाश है?

लगता, है तुम्हारी लैला ने तुम्हे किसी और के साथ देख लिया था, और तुमसे नाराज होकर, तुम्हें छोड़ कर चली गई।

राजेश _वाह भौजी आप तो अंतर्यामी है।

पुनम _मतलब मैने जो कहा वो सच है।

राजेश _हूं।

पुनम _मतलब तुम भी अपनें भईया के जैसे शादी के पहले ही इधर उधर मुंह मार चूके हो।

राजेश _मतलब, भुवन भईया भी शादी से पहले ही सब सीख लिया था।

पुनम _हा,

भुवन _यह बात आपको कैसे पता चला।

पुनम _शादी के कुछ दिनो के बाद ही, उसने ख़ुद ही मुझ बता दिया।

राजेश _तो आपको बुरा नही लगा।

पुनम _बुरा तो लगा, पर कर भी क्या सकती थी? यहां के सभी लड़को का लगभग यहीं हाल है।

शादी के पहले ही, सब इधर उधर मुंह मारते फिरते है।

राजेश _कहीं आप भी तो शादी के पहले,,,

पुनम _छी देवर जी, मैं आपको ऐसी लगती हूं क्या?

शादी के पहले कई लड़के मुझसे अपनी हसरते पूरी करना चाहते थे, मैने उसे ऐसा सबक सिखाया की वे आज भी मुझे देख कर डरते हैं हा।

राजेश _अरे भौजी, यह जानकर तो अब मुझ भी आपसे डर लगने लगा।

कहीं आप मुझे भी सबक न सीखा दे।

पुनम _मतलब तू, सच में मुझपे बुरी नजर रखता है।

राजेश _कहा तो था, जवान हूं कभी कभी नजर फिसल जाती है।

पुनम _तूमको मूझसे डरने की जरूरत नही।

राजेश _क्यू भौजी, मूझसे भी तो कोइ खता हो सकती है?

पुनम _तुम मेरे देवर हो मैं तुम्हे प्यार से समझा दूंगी कि जो तुम चाह रहे हो वो गलत है।

राजेश _वाह भई, ये तो अच्छी बात है, मतलब हम आपसे मजाक कर सकते है?

पुनम _हूं।

राजेश _भौजी, दूध पीने ने का मन कर रहा है। अगर दूध बचा हो तो पिला देती, अपने देवर को।

पुनम समझ गई राजेश किस दूध की बात कर रहा है?

पुनम नाराज होते हुईं,,

दूध तो बहुत है,,

अभी लाती हूं लोटा भरकर,,,

राजेश _अरे नही भौजी मैं तो मजाक कर रहा था।

पुनम _मैं भी मजाक कर रही हूं,,

दोनो हसने लगे,,,

इधर ग्राम पंचायत भवन में पंच और सरपंच की बैठक रखा गया था।

गांव के लोगो ने सरकार के आवास योजना के तहत आवेदन लगाया था।

गांव के क़रीब 600परिवारों ने आवास के लिए आवेदन पंचायत में दिया था, जिसका पंच सरपंच द्वारा प्रस्ताव पारित कर, पंचायत विभाग के पास भेजा जाना था।

पिछले कई सालो से ग्राम पंचायत के द्वारा प्रस्ताव बनाकर विभाग को भेजा गया था, परंतु आज तक गांव के किसी भी गरीब परिवार को इसका लाभ नहीं मिल पाया था।

सचिव _सरपंच जी, पिछले साल भी हमने इन लोगो का आवास हेतु प्रस्ताव बनाकर विभाग को भेजा था।

पर विधयक जी, इस गांव के लोगो को योजना का लाभ होने से रोक देते हैं।

इस बार हमें विधायक जी से बात करनी चाहिए, ताकि गांव के गरीब लोगो को भी सरकार की आवास योजना का लाभ मिल सके।

सभी पंचों ने भी सचिव की बातो का समर्थन किया।

सरपंच _लगता है गरीब लोगो की भलाई के लिए, न चाहते हुवे भी विधायक जी से मिलना पड़ेगा। हम सब कल उससे मिलने उसके लक्षमण पुर कार्यालय चलेंगे

इधर शाम होते ही पदमा और भुवन खेत से घर आ जाते है।

भुवन राजेश के कमरे मे पहुंचता है।

राजेश _भुवन भाई आ गए खेत से।

भुवन _हा, राजेश।

राजेश मां बता रही थी कि तुम्हे हवेली की किसी पार्टी में बुलाया गया है, इस बात को लेकर मां चिंतित है।

राजेश _ताई तो फालतू ही चिन्ता कर रही है।

भुवन _राजेश चिंतित तो मैं भी हूं, ठाकुर सुरज पूर वालो से नफरत करता है फिर तुम्हे बुलाया क्यू है?

तभी पदमा भी वहां पहुंच गई।

पदमा _राजेश बेटा मैं तुम्हे हवेली में अकेले जाने नही दूंगी। अगर तुम्हे कुछ हो गया तो सुनीता को क्या जवाब दुंगी? क्यू भेजा मेरे बेटे को,,

बेटा तुम अकेले नहीं भुवन भी तुम्हारे साथ जायेगा।

भुवन _हा राजेश तुम वहां अकेले नहीं जाओगे, मैं भी चलूंगा तुम्हारे साथ।

राजेश _ठीक है भईया , दोनो साथ चलेंगे।

पदमा की चिन्ता थोडा कम हुई।

भुवन घर में फ्रेश huwa

थोड़ी देर बाद पुनम चाय लेकर राजेश और भुवन को चाय दी।

भुवन _राजेश कितने बजे चलना है पार्टी में।

राजेश _भईया, 7बजे निकलेंगे।

राजेश और भुवन दोनो आंगन में बैठे बात चीत कर रहे थे तभी आरती वहा पहुंची।

आरती _भईया, आप लोग पार्टी में जा रहे हैं। ठाकुर की बेटी ने आपको अपनी पार्टी में बुलाया है, उसके लिए क्या लें जाओगे।

भुवन _हां राजेश खाली हाथ जाना ठीक रहेगा क्या?

चलो लक्षमण पुर से कोइ गिफ्ट खरीद लाते है।

पुनम _इतने बड़े लोग है उनके सामने हमारी कोई औकात नही,उन्हे गिफ्ट में देगें क्या?

राजेश _हम दिव्या जी को फूल भेंट करेंगे। एक खुबसूरत राजकुमारी के लिए खुबसूरत फूल।

आरती _भईया, हमारे बाड़ी में तो बहुंत सारे खुबसूरत और खुशबू दार फूल खिले हुवे है, मैं उन फूलो से गुलदस्ता बना देती हूं। दिव्या जी खुश हो जाएगी।

पदमा _चुप कर, करमजली मैं राजेश को ठाकुर की बेटियो से दूर रहने कह रही तुम उसे खुश करने की बात कर रही। बेटा उन्हे कोई फूल वूल देने की जरूरत नही, उन्हे बधाई दे देना वही काफी है।

पुनम _मां जी आप भी न, ऐसे ही खाली हाथ थोड़े ही जायेंगे। आरती तुम गुलदस्ता बना दो, बधाई के साथ गुलदस्ता दे देना।

राजेश _ताई भौजी ठीक कह रही है, हम बधाई के साथ गुलदस्ता भेंट करेंगे।

आरती बाड़ी में जाकर गुलदस्ता के लिए फूल तोड़ने लगती है।

7बजे राजेश और भुवन पार्टी में जाने के लिए तैयार हो जाते है।

आरती के द्वारा बनाए गुलदस्ता ले कर वे दोनो भान गढ़ के लिए निकल पड़ते हैं।

इधर हवेली में पार्टी की सारी तैयारी हो चुकी है।

मेहमान भी आने लगे थे।

पार्टी में शामिल होने राजधानी से खेल मंत्री भी पहुंच रहे थे। वे अपने साथ अपनी पत्नी और बेटा विक्की को भी ला रहा था।

विक्की _डैड, ये आप मुझे कहा ला रहे है, मुझे ये इलाका बहुत पिछड़ा हुआ लग रहा है।

मंत्री _चुप कर नालायक, तुम किसी काम के तो हो नही। मैने उद्योगपति के इकलौती बेटी रिया को अपनी प्रेम जाल में फसाने को कहा था, ताकि उसकी करोड़ों की संपत्ति तुम्हे मिले। वह काम तो ठीक से कर नही सका।

मेरा तुम दोनो को यहां लाने के पीछे एक उद्देश्य है। ठाकुर की दो बेटी है बड़ी बेटी तो राजनीति करना चाहती है, वह शादी करना नहीं चाहती। छोटे लडकी के लिए तुमसे शादी की बात ठाकुर से करना चाहता हूं। वे इस क्षेत्र के जमीदार है। उनके पूर्वज इस क्षेत्र के राजा थे। अरबों की संपत्ति है उसके पास। अगर तुम्हारी शादी उसकी बेटी से तय हो गया तो उसकी सारी संपत्ति हमारी हो जाएगी।

विक्की _ओह डैड ये बात है आप पहले क्यू नही बताए।

मंत्री _देखो बेटा तुम वहां कोइ उल्टी सीधी हरकत न करना, जिससे मामला बिगड़ जाए। ठाकुर और उसके परिवार वालों के बीच एक संस्कारी लडका की तरह पेश आना।

मंत्री _ठीक है डैड, इस बार कोइ गलती नहीं होगी।

मंत्री अपनी बीवी से कहता है। तुम भी रागनी ठाकुर साहब थोड़े रंगीले स्वभाव के है।

अगर ठाकुर तुमसे कोइ मजाक करे तो तुम भी हस के जवाब देना।

रागिनी _ठीक है जी।

मंत्री _तुम दोनो को किसी भी तरह से ठाकुर साहब और उसकी बेटी का दिल जीतना है । वे इस रिश्ते के लिए तैयार हो जाए।

कुछ देर में वे हवेली पहुंच जाते है।

ठाकुर _आइए मंत्री जी आइए, मुझे पूरा भरोसा था की आप जरूर आयेंगे।

मंत्री _ठाकुर साहब, हम अच्छे दोस्त हैं, आप बुलाए और हम न आए ऐसा हो सकता है क्या भला? देखो मैं अपने साथ किसको लाया हूं।

ये हैं मेरा बेटा विक्की।

बेटा पैर छुओ ठाकुर साहब का।

विक्की _प्रणाम अंकल।

ठाकुर _अरे जीते रहो बेटा।

मंत्री _और इनसे मिलो ये है मेरी पत्नि रागिनी।

रागनी _नमस्ते भाई साहब।

ठाकुर _नमस्ते भाभी जी। आप से मिलकर बड़ी खुशी हुईं।

मंत्री जी भाभी जी बहुत सुंदर है।

भाभी जी के आने से पार्टी की रौनक में चांद चांद लग गया।

रागिनी _शुक्रिया भाई साहब तारीफ के लिए।

मंत्री जी _अरे यार आपके बेटियां और भाभी कहा हैं।

ठाकुर _आओ मैं तुम्हे अपनी पत्नि और बेटी से मिलाता हूं।

ठाकुर मंत्री, रागनी और विक्की को अपने पत्नि और बेटियो से मिलाने ले जाता हैं। जो इसी पार्टी हाल में थी।

ठाकुर _अरे रत्ना।

ठकुराइन _क्या है जी?

ठाकुर _इनसे मिलो, मंत्री जी और भाभी जी और उनका बेटा विक्की इतने दूर से हमारे बुलावे पर दिव्या को बधाई देने आए है।

रत्ना _नमस्ते भाई साहब, नमस्ते दीदी। बड़ी खुशी हुईं आप लोग यहाँ आए।

रागिनी _मैं तो बहुत पहले से ही आप लोगो से मिलना चाहती थी, आज मौका मिला, तो चले आए। कैसी है आप दीदी। आपसे मिलकर बड़ी खुशी हुईं।

रत्ना_मुझे भी बड़ी खुशी हो रही है।

मंत्री _विक्की बेटा पैर छुओ भाभी जी का।

विक्की _नमस्ते आंटी।

रत्ना _हमेशा खुश रहो बेटा।

ठाकुर _मंत्री ये है मेरी बड़ी बेटी गीता।

गीता ने मंत्री और उसकी पत्नि का पैर छूकर आशीर्वाद लिया।

ठाकुर _और ये है मेरी छोटी बेटी दिव्या।

दिव्या ने भी दोनो का पैर छूकर प्रणाम किया।

मंत्री और उसकी पत्नि ने दिव्या को डाक्टर बनने पर बधाई दिया।

मंत्री _ठाकुर साहब आपके दोनो बेटियां तो होनहार के साथ काफी सुन्दर भी है।

विक्की बेटा तुम भी दिव्या को बधाई दो।

विक्की _बहुत बहुत बधाई दिव्या जी, आपको डाक्टर बनने पर। आपसे मिलकर बड़ी खुशी हुईं।

दिव्या _जी शुक्रिया।

मंत्री _ठाकुर साहब बच्चो को आपस में मिलजुल लेने दो, चलो हम लोग उधर चलकर बात करते हैं।

ठाकुर _अरे क्यू नही मंत्री जी, आइए।

लगभग सारे मेहमान आ चूके थे जो दिव्या को डाक्टर बनने पर बधाई दे रहे थे। विक्की दिव्या और गीता के साथ बात चीत कर उसे अपने प्रभाव में लाने की कोशिश कर रहा था।

रत्ना और रागिनी अन्य महिलाओं के साथ

के साथ बात चीत में लगे थे।

पर दिव्या का मन किसी का राह देख रहा था।

इधर भुवन और राजेश हवेली के मेन गेट पर पहुंचे।

ठाकुर के आदमी को दरवाज़े पर खड़े थे।

ठाकुर का आदमी भुवन को देखकर पहचान गया की यह सुरज पूर का रहने वाला है।

ठाकुर का आदमी _अरे तुम तो सूरजपुर के रहने वाले हो, तुम यहां क्या करने आए हो, चले जाओ यहां से।

भुवन _देखो हमें भी पार्टी में बुलाया गया है, हम ऐसे ही नहीं आए है।

ठाकुर का आदमी हसने लगा,

तूमको मालिक ने बुलाया है, क्यू पिटना चाहते हो अपनी खैरियत चाहते हो तो यहां से चले जाओ।

भुवन_नही, हम सच कह रहे है।

ठाकुर के आदमी और भुवन के बीच बहस होने लगा।

उनके बीच बहस होता देख, ठाकुर का खास आदमी, माखन वहा आया,

माखन ने कहा _क्या बात है तुम लोग बहस क्यू कर रहे।

ठाकुर का आदमी _ये सुरज पूर के रहने वाले हैं इनका कहना है की ठाकुर ने इन्हे पार्टी में।

भुवन _भईया हम ठीक कह रहे हैं, ठाकुर ने हमें बुलाया है।

राजेश _आपको यकीन नहीं है तो ठाकुर साहब से पुछ लो, उनसे कहना कि सुरज पूर से राजेश नाम का लडका आया है।

माखन _ठीक है, तुम लोग यहीं रुको, मैं मलिक से पुछ कर आता हूं।

माखन _पहरेदार इनपर कड़ी नजर रखना।

पहरेदार _ठीक है माखन भईया।

माखन पार्टी हाल में गया, वहा ठाकुर के पास गया,,

ठाकुर _क्या बात है माखन

माखन _मालिक, सुरज पूर से कोइ राजेश नाम का लडका आया है। कह रहा है की पार्टी में आपने उसे बुलाया है। क्या ये सच है?

ठाकुर _वे कहा है?

माखन _हमने उसे दरवाज़े पर रोक रखा है।

ठाकुर _उसे अंदर आने दो।

माखन _ठीक है मालिक।

माखन ने पहरेदार को कहा की उन्हे अंदर आने दो।

भुवन और राजेश दोनो पार्टी हाल में गए।

अभी लोग अपने में मस्त थे।

राजेश दिव्या को ढूंढने लगा।

दिव्या ने दूर से ही राजेश को देख लिया,,,

दिव्या के चेहरे पर मुस्कान आ गया।

भुवन _राजेश दिव्या जी कौन है?

राजेश _भईया,वो वहा खड़ी है आओ चलते है।

राजेश और भुवन दोनो दिव्या के पास पहुंचे।

राजेश _दिव्या जी, आपको बहुत बहुत बधाई डाक्टर बनने के लिए, ये लीजिए खुबसूरत से राजकुमारी के लिए, खुबसूरत सा फूल।

दिव्या _थैंक यू, राजेश, वाह बहुत अच्छी खुशबू आ रही है फूलो से । तुम इतने लेट क्यू हो गए? मैं तुम्हारा वेट कर रहा था।

भुवन _क्या करे दिव्या जी आपके पहरेदार हमें आने नही दे रहे थे।

दिव्या जी _क्या, पर क्यू?

राजेश _अरे छोड़िए न दिव्या जी इन बातो को, ये मेरे भुवन भईया है।

भुवन _नमस्ते जी।

दिव्या _नमस्ते भुवन भईया।

राजेश आओ मैं तुम्हे अपनी मां से मिलाता हूं।

दिव्या राजेश को रत्ना के पास ले गया।

दिव्या _मां इनसे मिलो ये वही राजेश है जिसने ट्रैन पे मैरी मदद किया था।

राजेश _नमस्ते मां जी।

रत्ना _जी ता रह बेटा। बेटा हम तुम्हारा अहसान जिंदगी भर नही भूलेंगे। बड़ी इच्छा थी तुमसे मिलने की अच्छा हुवा जो पार्टी में आए।

दिव्या _राजेश ये मैरी दीदी है इनसे तो कल मिल चूके थे।

राजेश _नमस्ते गीता दी।

गीता _नमस्ते राजेश कैसे हो, बड़ी खुशी हुईं तुम यहां आए।

तभी वहा पर विक्की पहुंचा।

विक्की _तुम राजेश हो न।

राजेश _और तुम विक्की।

विक्की _तुम यहां गांव में क्या कर रहे हो?

राजेश _यहीं सवाल मैं आपसे पूछूं तो।

विक्की _मेरे डैड तो दिव्या जी के पिता जी के अच्छे दोस्त हैं। तो हम पार्टी में आए है।

गीता _क्या तुम एक दूसरे को जानते हो।

विक्की _हम लोग एक ही कालेज में पढ़ते थे।

राजेश तुमने बताया नही तुम यहां कैसे?

राजेश _मैं अपने दादा जी का गांव आया huwa हूं।

विक्की _ओह तो तुम्हारे पिता जी इस क्षेत्र के रहने वाले हैं।

वैसे राजेश, मुझे पता चला है की निशा तुम्हे छोड़ कर हमेशा के लिए लंदन चली गईं, क्या ये सच है?

गीता _ये निशा कौन है?

विक्की _निशा राजेश की गर्लफ्रेंड, कहो या प्यार। क्यू राजेश।

राजेश चुप रहा,,,

विक्की _राजेश, लगता है तूम बुरा मान गए। अरे चलो छोड़ो उस बात को।

विक्की _यार राजेश अब तुम यहां आए हो तो कुछ गाने वाने का प्रोग्राम हो जाए। तुम तो बढ़िया गाते हो।

दिव्या _राजेश , क्या सच में तुम गाते हो?

अगर ऐसा है तो प्लीज गांव न।

राजेश _दिव्या जी, गाने के लिए गुनगुनाने का मन भी होना चाहिए।

दिव्या _राजेश, मुझे भी इस पार्टी में खास मजा नही आ रहा है। मेरे लिए एक गाना सुनादो। प्लीज।

तभी विक्की ने माइक पर अलाउंस कर दिया।

लेडिस एंड जेंटल मैन, पार्टी में आप लोगो के मनोरंजन के लिए, मिस्टर राजेश आप लोगो को गाना सुनाने जा रहे हैं कृपया ताली बजाकर उनका स्वागत कीजिए।

वहा मौजूद लोग ताली बजाने लगते है।

ठाकुर और मुनीम एक दूसरे की ओर देखने लगते हैं।

दिव्या _राजेश, प्लीज।

दिव्या के रिक्वेस्ट करने पर राजेश गाना शुरू करता है।

राजेश _दिल की तन्हाई को,,,,,

दिल की तन्हाई को आवाज़ बना लेते हैं,,

दर्द जब हद से गुजरता है तो गा लेते है?
 
राजेश के गीत पर वहा पर मौजूद सभी लोगो ने जमकर ताली बजाया।

राजेश के गीत गाने के बाद,,

ठाकुर _अरे माइक वाले कहा है, कोई अच्छे से म्यूजिक लगाव, सब डांस करेंगे।

माइक वाला _जी ठाकुर साहब।

माइक वाले ने डांस म्यूजिक लगाया।

मंत्री _अरे विक्की बेटा, जाओ दिव्या बेटी के साथ डांस करो।

वहा मौजूद लोग,अपने अपने पार्टनर के साथ डांस करने लगे।

ठाकुर ने मंत्री जी की बीवी से कहा _भाभी जी, आइए न डांस करते हैं।

रागनी ने मंत्री जी की ओर देखा,

मंत्री _जाओ भाग्यवान, मेरे तरफ क्या देख रही हो,, पार्टी में, नाच गाना तो चलता ही है।

रागनी ठाकुर के साथ डांस करने लगी।

ठाकुर, रागिनी के की एक हाथ से क़मर और एक हाथ से उसकी हाथ पकड़ कर डांस करने लगा।

इधर विक्की और दिव्या भी डांस करने लगे। सभी लोग डांस करने में मस्त हो गए।

राजेश, सभी लोगो को डांस करता देख, डाइनिंग टेबल पर बैठ, निशा को याद करने लगा।

भुवन _राजेश क्या huwa, चलो हम लोग भी डांस करते हैं।

राजेश _नही भईया, मेरा मन नही आप जाओ।

डांस करते हुए, ठाकुर ने रागिनी से कहा ,,

ठाकुर _भाभी जी सच में आप कमाल की लग रही है। मंत्री जी की किस्मत पे मुझे जलन हो रही है।

रागिनी _ठाकुर साहब, आखिर मुझमें ऐसी क्या खास बात आपको नजर आया।

ठाकुर _भाभी से सर से पांव तक, आप कयामत लग रही है। एकदम गजाला।

मंत्री जी और मैं मैं एक दूसरे को तो काफी अरसे से जानते है, लेकिन आपसे पहली बार मुलाकात हो रही है। मुझे पता नही था की मंत्री जी की बीबी इतनी सुन्दर है।

रागिनी _अगर पहले ही जान जाते तो क्या करते?

ठाकुर साहब _आपसे दोस्ती कर लेता।

रागिनी _ठाकुर साहब, दोस्ती तो अब हो जाएगी। मैं तो उससे आगे की सोच रही हूं। अगर आप तैयार हो तो।

ठाकुर _अरे भाभी जी, आपके मन में क्या है मैं भी तो जानू, कहिए न।

रागिनी _ठाकुर साहब _क्यू न हम रिश्तेदार बन जाए। फिर दोस्ती हो ही जाएगी।

ठाकुर _मैं कुछ समझा नही भाभी जी, कुछ खुलकर बताइए।

रागिनी _ भाई साहब,विक्की हमारा इकलौता बेटा है। विक्की और दिव्या की शादी हो जाए तो, कैसा रहेगा? हम रिश्तेदार बन जायेंगे। कहिए आपका क्या विचार हैं?

ठाकुर _अरे भाभी जी, ये तो बड़ी खुशी की बात है? मैरी बेटी को एक अच्छा परिवार मिल जायेगा, और मुझे एक खुबसूरत समधन।

रागिनी _ठाकुर साहब आप भी ना, एकदम रंगीले है।

ठाकुर _भाभी जी, आप जैसी खुबसूरत औरत पास हो तो मन मचलेगा ही।

मैं कह रहा था की रिश्तेदार बनने से पहले क्यू ना हम एक दूसरे को अच्छी तरह से जान लें।

मंत्री जी को तो अरसे से जानते है। हम तो आपसे पहली बार मिल रहे हैं। मैं चाहता हूं की रिश्ता तय करने से पहले क्यू ना हम एकदूसरे को अच्छे से जान लें।

रागिनी _कहिए, क्या जानना चाहते हैं आप मेरे बारे में।

ठाकुर _भई ऐसे भीड़ भाड़ में तो हम एक दूसरे को जान नही पाएंगे, एक दूसरे को अच्छे से जानने के लिए, तो कुछ समय हमे अकेले में बिताना पड़ेगा।

रागिनी _भाई साहब आपके इरादे कुछ ठीक नहीं लग रहे,

रागिनी मुस्कुराते हुए बोली।

ठाकुर ने रागिनी को अपनी ओर खीच कर चिपका लिया, और डांस करने लगा।

रागिनी _भाई साहब ये आप क्या कर रहे हैं, लोगो की नजर हम पर है।

ठाकुर _हाय, मन तो कर रहा है एक चुम्मा ले लू। अगर आप इजाज़त दे।

रागिनी _अच्छा जी, इतने लोगो के बीच ऐसा कर पाएंगे आप।

ठाकुर _आप इजाज़त तो दीजिए।

रागिनी _अच्छा जी, लो आपको इजाज़त दिया, मैं भी तो देखूं आप लोगो के बीच किस कैसे करते हैं?

ठाकुर _अभी देख लो।

तभी ठाकुर ने अपने आदमी को इशारा किया।

ठाकुर का आदमी घर में लगे ट्रांसफार्मर का फ्यूज निकाल दिया। बिजली चली गईं।

बिजली के जाते ही ठाकुर ने रागिनी की ओंठ को अपने मूंह में भर कर चूसने लगा।

ठाकुर के आदमी ने एक मिनट बाद फिर फ्यूज लगा दिया।

बिजली फिर आ गई।

तब तक ठाकुर अपना काम कर चुका था।

ठाकुर _क्यू मान गए न हमें?

रागिनी _आप में तो काफी जोश भरा है।

ठाकुर _मौका तो देकर देखिए। जन्नत की सैर न करा दिया तो कहना।

रागनी _मंत्री जी, का क्या होगा?

ठाकुर _आप उसकी चिन्ता न करें। उसका भी समाधान है मेरे पास।

रागिनी _अच्छा तो ठीक है , मैं भी देखना चाहूंगी आप कहा तक ले जाते है हमें।

इधर दिव्या ने जब देखा राजेश अकेला बैठा है, वह

विक्की से बोली,,

दिव्या _एक मिनट मैं अभी आई।

विक्की _ओके।

दिव्या, राजेश के पास पहुंची, जो कोने में बैठा था।

दिव्या _राजेश, तुम यहां अकेले क्यू बैठो हो, कोइ बात है क्या?

राजेश चुप रहा,,

दिव्या _ने राजेश की मोबाइल पर निशा की फोटो देख कर बोली।

दिव्या _तुम निशा को मिस कर रहे हो।

राजेश _निशा मेरी बहुत अच्छी दोस्त थी, मैंने अपनी गलती की वजह से उसे खो दिया।

दिव्या _राजेश, अगर तुम्हारा प्यार सच्चा होगा तो वह एक दिन जरूर वापस आयेगी।

राजेश _नही, दिव्या जी, अब वह कभी वापस नहीं आएगी। मैं उसकी नजरो में गीर चुका हूं।

इधर ठाकुर ने सभी लोगो को भोजन करने के निवेदन किया।

दिव्या _राजेश, चलो कुछ खा लो।

तभी भुवन वहा पहुंचा _राजेश, दिव्या जी ठिक कह रही है, यहां बहुत सारे व्यंजन बना huwa है। चलो भोजन का आनंद लेते है।

इधर सभी लोग, डिनर का मजा लेने लगते है।

राजेश _भुवन भईया जाओ आप भोजन कर लो।

दिव्या _राजेश चलो तुम भी,,

राजेश _दिव्या जी मेरा मन नही कर रहा,,,

दिव्या ने नौकरों को बुलाया और कई प्रकार के व्यंजनों का प्लेट टेबल पर लगाने को कहा।

कुछ ही देर में

नौकरों ने कई प्रकार के व्यंजनों का प्लेट टेबल लगा दिया।

तभी वहा विक्की पहुंच गया।

विक्की _दिव्या जी, हमें तो आपने खाने के लिए पूछा ही नहीं।

दिव्या _आओ तुम भी बैठो।

विक्की _वाउ बहुत अच्छी खुशबू आ रही है, भोजन की। मेरा मन पसन्द का डिस है सारे।

विक्की खाना एक प्लेट से निकाल कर खाना शुरू कर देता है।

दिव्या _भुवन भईया, आप भी खाइए।

भुवन _जी, दिव्या जी।

दिव्या ने एक प्लेट में कुछ व्यंजन निकाला और राजेश की ओर बढ़ाया।

दिव्या _लो राजेश इसे टेस्ट करो।

राजेश _दिव्या जी आप लीजिए, आप भी लीजिए।

दिव्या _मैं बाद में लूंगी।

राजेश _थोडा सा तो लीजिए, हमारे साथ।

विक्की _हा दिव्या जी आप भी लीजिए।

दिव्या ने भी थोडा भोजन अपने लिए निकाला।

चारो भोजन करने लगे।

विक्की को राजेश और भुवन के साथ दिव्या का इस तरह भोजन करना अच्छा तो नही लग रहा था, पर उसे एक संस्कारी लडका की तरह वर्ताव करना था।

इस लिए वह किसी प्रकार का टिप्पणी नहीं किया।

सभी मेहमान भोजन कर लेने के बाद, ठाकुर से इजाज़त लेकर घर जाने लगे।

राजेश _दिव्या जी, आपके पार्टी में आकार हमें बहुत अच्छा लगा, अब हम भी घर के लिए निकलते है रात काफी हो चुकी है।

दिव्या _ठीक है राजेश।

और पार्टी में आने के लिए शुक्रिया।

राजेश _धन्यवाद तो हमें कहना चाहिए दिव्या जी हमें पार्टी में बुलाया। इतने बड़े बड़े लोगो के बीच।

इतना सम्मान दिया।

दिव्या _ये सब खुशियां तो तुम्हारे वजह से ही है राजेश, अगर तुम ट्रैन में मेरे साथ नही होते तो, पता नहीं क्या होता?

तभी वहा गीता पहुंची,,

गीता _दिव्या, तु यहां है? उधर मां तुम्हे ढूंढ रही हैं, चलो।

दिव्या _जी दी।

राजेश _अच्छा दिव्या जी हम चलते हैं।

दिव्या _ठीक राजेश।

राजेश _गीता दी हम निकल रहे है।

हाथ जोड़ कर राजेश ने कहा।

गीता _ठिक है राजेश। वैसे तुम बहुत अच्छा गाते हो।

राजेश _शुक्रिया दी।

राजेश और भुवन दोनो अपने बाइक से घर के लिए निकल पड़े, रात काफी हो चुकी थी।

दोनो घर पहुंच कर दरवाजा खटखटाया।

पदमा दरवाजा खोली।

पदमा _आ गए बेटे।

भुवन _हा मां। मां आप अभी तक जग रही है।

पदमा _बेटा, मुझे तो तुम दोनो की चिन्ता थी। वहा सब ठीक होगा की नही।

राजेश _ताई, सब ठीक रहा, आप बेकार ही चिन्ता कर रही थी।

भुवन _हा मां राजेश ठीक कह रहा है।

पदमा _बेटा तुम लोग खाना तो खाए हो न।

भुवन _मां वहा तो बहुत सारा व्यंजन बनाया गया था, बड़े बड़े लोग आए थे। मुझे तो बहुत अच्छा लगा वहा। ऐसा भोजन तो मैने पहली बार करने को मिला। मजा आ गया।

पदमा _बस बस ज्यादा तारीफ मत करो। उन लोगों से दूर रहने में ही भलाई है। कब अपना रंग बदल दे। रात बहुत हो चुकी है, जाओ दोनो अपने कमरे में जाकर सो जाओ।

भुवन _जी मां।

राजेश और भुवान दोनो अपने कमरे में चले गए।

जब भुवन कमरे मे पहुंचा।

पुनम _आ गए आप।

भुवन _अरे तुम अभी तक जग रही हो।

पुनम _जब पति और देवर दुश्मन के घर गया हो तो निंद किसे आयेगी। वैसे कैसा रहा पार्टी?

भुवन _मत पूछो। बहुत मजा आया।

जानती हो राजेश ने पार्टी में गीत गाया। सभी लोगो ने खुब ताली बजाई।

पुनम _अच्छा, तो देवर जी को गाना भी गाने आता है।

अच्छा उस गुलदस्ते को ठाकुर की बेटी को दिए की नही।

भुवन _हा, ठाकुर की बेटी दिव्या गुलदस्ता की बड़ी तारीफ की।

उसे बहुत पसंद आया। उसने राजेश भाई का बहुत ध्यान रखा।

पुनम _, क्या? दिव्या जी, राजेश का ध्यान रखा।

भुवन _हा।

पुनम _दिखने में कैसी है ठाकुर की बेटी। बड़ी बेटी को तो मैं देख चुकी हु। जिला पंचायत अध्यक्ष जो है।चुनाव प्रचार में जो आई थी। बड़ी सुन्दर है अपनी मां ठकुराइन की तरह। छोटी बेटी दिव्या दिखने में कैसी है।

भुवन _दिव्या जी भी बहुत सुंदर है। वह दिखने में डाक्टर नही कोइ हिरोइन लगती है।

पुनम _अच्छा।

भुवन _हां।

सब कुछ तो ठीक था पर शहर से एक लडका आया था, मंत्री जी का बेटा। मेरा जी कर रहा था की उस का मुंह तोड़ दू साले की।

पुनम _क्यू जी क्या किया उसने।

भुवन _वह राजेश को ठाकुर की बेटियो के सामने नीचा दिखाने की कोशिश कर रहा था। वह कह रहा था की निशा नाम की कोइ राजेश की गर्लफ्रेंड थी जो राजेश को छोड़ कर चली गईं। उसकी बातो से राजेश उदास हो गया। मेरा तो मन कर रहा था कि साले की थोपड़ा तोड़ दू।

पुनम _हूं, राजेश ने मुझे भी बताया था कि वह जिस लडकी को चाहता था वह उसे छोड़ कर चली गईं।

भुवन _देखो, तुम भी राजेश को समझाना जो लड़की उसे छोड़ कर चली गईं उसे लेकर वह दुखी न रहे।

यहां गांव में भी एक से बड़ कर एक लडकिया है, उनमे से किसी को पसंद करले। जो huwa है उसे भुल जाए।

पुनम _हूं, कल बात करुंगी उससे।

चलो अब सो जाओ रात काफी हो चुकी है।

भुवन _अरे मेरी रानी, कितने दिनो के बाद तो आज रात में साथ में सोने का मौका मिला है, और तुम ऐसे ही सो जाने बोल रही हो।

पुनम _नही जी आज मेरा मूड नहीं।

भुवन _अरे अभी तुम्हारा मूड बना देते है।

पुनम _तुम भी न बीना लिए मानोगे नही।

भुवन _पुनम के ऊपर आ गया, उसकी ब्लाउज खोल कर, उसकी चूचियों से खेलने लगा।

फिर वह नीचे गया और उसकी चड्डी उतार कर उसकी बुर चाटने लगा।

पुनम गर्म हो गई उसकी बुर से पानी बहने लगा।

उसके मूंह से सिसकारी निकलने लगी।

भुवन, अपना खड़ा land पुनम की मस्त फूली हुई चिकनी बुर में डाल कर चोदना शुरू कर दिया।

इधर हवेली में सारे मेहमान चले गए। मंत्री और उसका परिवार रह गया।

ठाकुर _रत्ना, आज मंत्रीजी और उसका परिवार यहीं रुकेंगे, तुम मेरे बाजू वाले कमरे में मंत्री जी की सोने की व्यवस्था करवा दो। विक्की के लिए कोइ अच्छा सा कमरा बता दो।

रत्ना _ठीक है जी।

रत्ना, रागिनी को लेकर उसे कमरे में छोड़ आई। इधर ठाकुर मंत्री को अपनें कमरे में लेकर चला गया।

ठाकुर अकेला ही सोता था।

कमरे में जाने के बाद।

ठाकुर _आइए मंत्री जी, बैठिए। काफी दिन हो गए साथ में बैठ कर पिए हुए।

ठाकुर ने अपने नौकर से अपनी खास सेविका, तारा बाई को बुलाने कहा।

कुछ देर में तारा बाई वहा पहुंची।

तारा बाई _ठाकुर साहब आपने मुझे बुलाया।

ठाकुर _आओ तारा।

मंत्री जी ये हमारी खास सेविका है तारा बाई।

मंत्री तारा बाई को गौर से देखने लगा।

तारा बाई काफी सुन्दर थी।

ठाकुर _तारा हम दोनों के लिए पैग बनाओ।

तारा बाई _जी ठाकुर साहब।

मंत्री _ठाकुर साहब मुझे आपसे कुछ बाते करनी है।

ठाकुर साहब _अरे मंत्री जी पहले एक एक पैग तो हो जाए, फिर बार करेंगे।

तारा ने दोनो के लिए पैग बनाया।

और दोनो की ओर रम का प्याला बढ़ाया।

तारा _लीजिए मंत्री जी।

मंत्री ने प्याला उठाते हुए कहा _बड़ी सुंदर हो तुम।

ठाकुर _मंत्री जी लगता है, तारा तुमको पसन्द आया।

तारा जाओ मंत्री जी के गोद में बैठ कर उसे पिलाओ।

तारा मंत्री की गोद में बैठ गया। और शराब पिलाने लगा।

मंत्री _ठाकुर साहब आप भी तो लीजिए।

ठाकुर भी एक पैग शराब पी लिया।

इधर तारा बाई ने मंत्री को अपने हाथो से शराब पिलाया।

ठाकुर _बोलो मंत्री जी आप कुछ बोलने वाले थे मुझसे।

मंत्री _ठाकुर साहब, मैं सोच रहा था कि क्यू ना हम अपनी दोस्ती को रिश्तेदारी में बदल दे। अपनी बेटी दिव्या का हाथ मेरे बेटे विक्की के हाथ में देकर। कहिए क्या ख्याल है आपका।

ठाकुर _अरे मंत्री जी, ये तो बड़ी खुशी की बात है की मेरी बेटी आपके घर बहु बनकर जाएगी।

मंत्री _तो क्या आपको ये रिश्ता मंजूर है?

ठाकुर _यार, तुमको कभी न बोला है। तुम भी तो राज घराने परिवार से हो, हमारे अच्छे दोस्त हो। दिव्या के लिए इससे अच्छा रिश्ता मिलेगा कहां।

मंत्री _यार तुमने शादी के लिए हा कह कर मेरा दिल जीत लिया।

मंत्री जी जी आज बड़ी खुशी का दिन है, जी भर कर पीजिए। तारा और पैग बनाओ मंत्री जी के लिए।

मंत्री _ठाकुर साहब आप भी तो लीजिए।

ठाकुर _हा हा मैं भी ले रहा हूं।

मंत्री को तारा बाई ने अपने हाथो से कई पैग बना कर पिलाया।

मंत्री जी नसे में वही लुड़क गए।

ठाकुर _तारा तुम मंत्री जी का ख्याल रखो, मैं उसकी बीबी का ख्याल रखने जा रहा हूं।

तारा मुस्कुराते हुए बोली,,

जी ठाकुर साहब,,

ठाकुर साहब मोंगरे की माला को सूंघते हुए रागिनी के कमरे में पहुंचा।

रागिनी एक खुबसूरत सी नाइटी पहनी हुई थी।

ठाकुर साहब आप, मंत्री जी कहा है।

ठाकुर _मंत्री जी रिश्तेदार बनने की खुशी में कुछ ज्यादा ही पी ली है वह हमारे कमरे मे आराम कर रहे हैं। अब वह सुबह ही उठ पाएंगे। हमारी खास सेविका तारा बाई उसकी देखभाल कर रही है।

मुझे लगा की नई जगह है आपको डर न लगे इसलिए आपका ख्याल रखने आया हूं।

क्यू ना हम रिश्तेदार बनने से पहले एक दूसरे को अच्छे से जान लें।

रागिनी _हूं, क्या जानना है मेरे बारे में।मुस्कुराते हुवे बोली।

ठाकुर _अरे भाभी जी आप हमें बैठने नही बोलोगी।

सच में इस नाइटी में कयामत लग रही हो।

ठाकुर ने रागिनी को पीछे से अपने बाहों भर लिया।

रागिनी _अरे ठाकुर जी बड़े उतावले लग रहे हो पहले दरवाजा तो बंद कर लेने दो।

ठाकुर _जब से आई हो तुम्हे पाने को बेचैन हूं, मेरी जान। अब रहा नही जा रहा।

ठाकुर ने रागिनी को अपनी बाहों में उठाकर बेड तक लाया और उसे बेड पर पटक दिया।

और उसके ऊपर आ गया।

ठाकुर ने रागिनी के ओंठो को जी भर कर चूसा।

फिर उसे अपने ऊपर ले लिया।

ठाकुर _आज तो तुम्हे मैं जन्नत की सैर कराऊंगा।

रागिनी _अच्छा देखते हैं कहा तक टिकते हो।

ठाकुर अपना पजामा ओर चड्डी उतार कर नीचे से नंगा हो गया।

ठाकुर का land खड़ा था।

ठाकुर _लो चूसो मेरी जान।

रागिनी ने ठाकुर की land की ओर देखा। उसका land मंत्री जी के land से बड़ा था।

रागिनी _वैसे तो आपका हथियार अच्छा है, देखते हैं इसमें कितना दम है।

रागिनी ने ठाकुर का land चूसना शुरू कर दिया।

ठाकुर का land एकदम कड़क हो गया।

ठाकुर _उतार दो मेरी जान अपनी सारे कपड़े।

रागिनी _एक एक कर अपनी सारे कपड़े उतार कर नंगी हो गई।

ठाकुर _वाह सच में क्या मॉल हो तुम।

ठाकुर ने रागिनी को बेड पर लिटा दिया खुद उसके ऊपर आ गया।

ठाकुर _हाय क्या मस्त चूचे है तेरी।

ठाकुर, रागनी के चूचों पर टूट पड़ा। जी भर कर मसल मसल चूसा।

फिर पूरे बदन को चाटते हुए उसकी बुर तक पहुंचा।

ठाकुर _हाय क्या मस्त चूत है तेरी,

चूत चाटने लगा। रागिनी के मुंह से मादक सिसकारी निकलने लगी।

ठाकुर की हरकतों से रागनी बहुत उत्तेजित हो गई।

रागिनी _ठाकुर साहब कब तक चांटते रहोगे, अब बर्दास्त नही हो रहा, डाल दो अंदर।

ठाकुर रागनी के दोनो टांगे फैला दिया और उसके टांगो के बीच उकड़ू बैठ गया। अपना land को रागिनी की बुर में रखकर गच से पेल दिया।land एक ही धक्के में सरसराता huwa बुर के अंदर चला गया।

उसके बाद ठाकुर रागनी की चूची पकड़ कर दनादन चोदना शुरु कर दिया।

कमरे मे रागिनी की मादक सिसकारी, फैच फच गच गच की आवाज़ गूंजने लगा।

आसन बदल बदल कर ठाकुर ने रागिनी को जमकर चोदा और उसे जन्नत की सैर कराया।

आधे घण्टे चोदने के बाद अपना पानी रागिनी की बुर में छोड़ कर उसके बाजू में लुड़क गया।

कुछ देर दोनो सुस्ताया।

रागिनी _सच में ठाकुर साहब आपमें तो अभी भी जवानों की तरह मर्दानगी है। थका दिया मुझे।

ठाकुर _अभी मेरी मर्दानगी देखि कहा है मेरी जान। अभी तो पूरी रात बाकी है।

वे एक दूसरे से बात चीत करते रहे, तारीफ करते रहे।

ठाकुर का फिर से खड़ा हो गया।

वह रागिनी को फिर से जमकर चोदा।

इस बार क़रीब घंटा भर चोदने के बाद उसका पानी गिरा।

दोनो थक गए थे। एक दूसरे के बाहों में सो गए।

रागिनी का नींद खुला तो देखा सुबह के 6बजने वाले हैं।

उसने ठाकुर को उठाया।

रागिनी _ठाकुर साहब अब आप जल्दी से जाइए यहां से कहीं मंत्री जी आ गए तो मुसीबात हो जाएगी।

ठाकुर _हाय तुमने मेरा दिल खुश कर दिया, क्या मस्त मॉल है तु, तेरी लेने में बड़ा मज़ा आया। चलो एक और करते हैं।

रागिनी _न बाबा, अभी नही कोई भी आ सकता है। वैसे भी अब हम रिश्तेदार बनने वाले हैं। अब तो कई मौके मिलेंगे हमे मिलने के।

ठाकुर _हाय तब तो जल्दी शादी करानी पड़ेगी बच्चो की, ताकि तुम्हे और भोगने का मौका मिल सके।
 
200.gif


सभी मित्रो को होली की हार्दिक शुभकामनाएं
 
अगले दिन सुबह उठते ही अखाड़ा, चला गया, वहा अखाड़े पे लड़के कबड्डी प्रतियोगिता की तैयारी कर रहे थे।

बिरजू _अरे राजेश, आओ।

राजेश _अरे बिरजू भईया, लगता है कबड्डी प्रतियोगिता की तैयारी बड़े जोरों से चल रही है।

बिरजू _हा राजेश, इस बार लड़के बड़ी मेहनत कर रहे हैं। इस बार हर हाल में यह प्रतियोगिता जितना है।

हर बार भानगढ़ वाले ही यह प्रतियोगिता जीतता आया है।

पर इस बार हम उन्हे कड़ी टक्कर देना चाहते हैं।

राजेश, मुझे तुमसे एक बात कहनी थी।

राजेश _बोलो बिरजू भईया क्या बात है?

बिरजू _क्यू न तुम भी हमारी कबड्डी टीम में शामिल हो जाओ।

मुझे लगता है हमारी टीम अभी परफेक्ट नही है। तुम्हारा शरीर एकदम फिट है।

राजेश_पर बिरजू भईया मैने तो कभी कबड्डी खेली नही है।

बिरजू _राजेश, कबड्डी ताकत और दिमाक दोनो का खेल है और मुझे लगता है ये दोनो तुम्हारे पास है।

अभी कबड्डी प्रतियोगिता में थोड़ा समय है तब तक तुम अच्छे से सीख जाओगे।

राजेश _बिरजू भईया, आप कह रहे हो तो मैं टीम में शामिल होने तैयार हूं, लेकिन सभी सदस्यों की सहमति होनी चाहिए। किसी ने मना किया तो मैं शामिल नहीं होऊंगा।

बिरजू के दोस्त _राजेश, तुम भी कबड्डी की प्रैक्टिस करो, अगर तुम्हारा खेल अच्छा लगा तो कोइ तुम्हारे टीम में शामिल होने से नाराज नहीं होंगे।

बिरजू _हा, ये ठीक रहेगा।

राजेश _ठीक है।

बिरजू _तो ठीक है, चलो आज से ही प्रैक्टिस शुरू कर दो।

राजेश भी उन लोगों के साथ प्रैक्टिस करने लगा।

इधर हवेली में मंत्री और उसके परिवार घर जाने के लिए तैयार हो गए।

मंत्री _अच्छा ठाकुर साहब अब हमें इजाज़त दीजिए।

ठाकुर _अरे यार, नाश्ता तैयार हो चूका है। नाश्ता करके निकलना, मैं तो कह रहा था कि भाभी जी और विक्की को कुछ दिनो के लिए यहीं छोड़ दो। अब हम रिश्तेदार बनने वाले हैं। हमारे परिवार एक दूसरे को अच्छे से जान लेंगे।

मंत्री जी _ठाकुर साहब, इन लोगो को यहीं कुछ दिनो के लिए छोड़ तो देता, पर कुछ काम है, कुछ मेहमान भी घर में आने वाले हैं इसलिए जाना जरूरी है।

कुछ दिनो बाद विक्की को भेज दूंगा, दिव्या और विक्की एक दूसरे को अच्छे से जान और समझ लेंगे।

ठाकुर _ठीक है ठाकुर साहब जैसी आपकी ईच्छा। आइए नाश्ता करते है।

मंत्री और ठाकुर के परिवार सभी डाइनिंग हॉल में एक साथ बैठ कर भोजन करने लगते है।

ठाकुर अपने बीबी रत्ना से कहा,,

ठाकुर _रत्ना, मंत्री जी अपने बेटे विक्की के लिए दिव्या का हाथ मांग रहे हैं।

मैंने तो कहा ये हमारे लिए बड़ी खुशी की बात है। तुम्हारा क्या विचार है।

रत्ना _जैसे आप उचित समझे, पर एक बार दिव्या को पुछ लेते तो,,,

ठाकुर _दिव्या हमारी लाडली बेटी है, हम जो भी फ़ैसला लेंगे उसकी भलाई के लिए लेंगे। वैसे तुम कह रही हो तो अभी पुछ लेते हैं।

बेटी दिव्या, विक्की के साथ शादी होने से तुम्हे कोइ एतराज तो नही। मैने तो हा कह दिया है, फिर भी अगर तुम्हे कोइ आपत्ति हो तो कह सकती हो,,

दिव्या ने अपनी मां की ओर देखा,,

वह क्या कहे कुछ समझ नहीं आ रहा था।

दिव्या _पिता जी, इतनी जल्दी शादी, अभी तो मुझे बड़ा सा हॉस्पिटल खोलकर लोगो की सेवा करनी है। मैं डाक्टर ही इसलिए बनी हूं की हमारा क्षेत्र काफी पिछड़ा है यहां के लोगो को इलाज के लिए दूर जाना पड़ता है, मैं शादी करके यहां से चली गई तो, मेरा डाक्टर बनने का उद्देश्य कैसे पूरा होगा?

मंत्री _अरे बेटा, तुम चिन्ता मत करो, तुम चाहो तो शादी के बाद यहीं रहना, विक्की, आना जाना करता रहेगा।

ठाकुर _लो, बेटी अब तो तुम्हारा डाक्टर बनने का उद्देश्य भी पूरा हो जाएगा और शादी भी।

अब तो कोइ समस्या नहीं न,,

दिव्या _जी पापा,,

दिव्या और कुछ बोल नहीं पाई।

ठाकुर _लो मंत्री जी, मिठाई खाओ, अब तो सभी तैयार है शादी के लिए।

ठाकुर ने रागनी के पैर को अपनें पैर से सहलाया और आंखे मारी।

रागिनी मुस्कुराने लगी।

भाभी जी क्यू न आप कुछ दिन यहीं रुक जाती, यहां पहाड़, झरने घांटी, और भी बहुत कुछ है देखने के लिए। आपको कुछ दिन स्वर्ग की सैर करा देते।

रागिनी _भाई साहब मेरी भी बड़ी ईच्छा थी स्वर्ग की सैर करने की पर क्या करे मजबूरी है जाना पड़ेगा।

ठाकुर _कोइ बात नहीं भाभी जी अब तो हम रिश्तेदार बनने वाले हैं। जन्नत की सैर जब आवोगी तब करा देगें।

रागिनी की पैर को अपनें पैर से सहलाते हुए कहा।

नाश्ता कर लेने के बाद, मंत्री और उसके परिवार ठाकुर परिवार से इजाज़त लेकर घर चले गए।

इधर ठाकुर कुछ समय के बाद लक्षमण पुर कार्यालय चले गए जहा लोगो की समस्या सुनते थे।

इधर राजेश जब आखाड़ा से आया।

भुवन _अरे राजेश, आ गया अखाड़े से।

राजेश _हां, भईया।

भुवन _जाओ नहाकर तैयार हो जाओ फिर नाश्ता करते हैं। मुझे बापू के लिए नाश्ता लेकर खेत भी जाना है।

राजेश _ठीक है भईया।

राजेश पीछे बाड़ी में जाकर फ्रेश होकर नहाने लगा।

तभी वहा पुनम नाश्ता बनाने के बाद बर्तन धोने के लिए बर्तन धोने पहुंची।

पुनम _क्यू देवर जी कैसा रहा कल की पार्टी?

राजेश _भुवन भईया ने तो बताया होगा ही भौजी!

पुनम _तुम्हारे भईया तो बता रहा था कि तुमने पार्टी में गाना गया। तुमने कभी बताया नही की तुम गाना भी गाते हो।

राजेश _आपने तो कभी पूछा नही भौजी।

पुनम _अच्छा ये बताओ अपनी भौजी को कब गाना सुनाओगे?

राजेश _आप जब कहो, पर गाना सुनाने के बदले दोगी क्या?

पुनम _क्या चाहिए तूमको?

राजेश _जो मांगूंगा वो दोगी, बोलो?

पुनम _मुझे पता है तुम क्या मांगोगे?

राजेश _अच्छा, ये मैं भी तो जानू, मैं क्या मांगने वाला हूं?

पुनम _मां का दूध।

दोनो खिलखिलकर हसने लगे।

राजेश _वाह भौजी तुम तो अंतर्यामी हो? बिना बताए ही जान जाती हो।

पुनम _बच्चू मुझे सब पता है तुम्हारे इरादे क्या है?

पुनम बर्तन धो रही थी, और राजेश अपने बदन में साबुन लगा रहा था।

राजेश _क्या इरादे है भौजी, मैं भी तो जानू?

पुनम _यहीं कि तुम्हारे इरादे नेक नही है।

राजेश _वो कैसे?

पुनम _तुम्हारे उम्र के लड़के दूध पीता कम है और दूध के गुब्बारे से खेलता ज्यादा है।

राजेश _हूं, मतलब तुम मुझे उन्ही लड़को में से एक समझती हो। मैं वैसा नही हूं? मैं उससे खेलूंगा नही सिर्फ पियूंगा।

पुनम _न बाबा, तुम्हारे उम्र के लड़को का कोइ भरोसा नहीं। मैं तुम्हारे झांसे में नहीं आने वाली।

राजेश _ठीक है फिर मैं भी गाना तभी सुनाऊंगा, जब दोगी?

पुनम _ मतलब तुम मतलबी हो।

पुनम नाराज होते हुए बोली?

राजेश _अरे भौजी, लगता है तुम नाराज हो गई। मैं तो मजाक कर रहा था। हम फ्री में सुना देगें अपनी भौजी को गाना। पर सही समय आने पर।

पुनम _प्रोमिस।

राजेश _प्रोमिस।

पुनम बर्तन धो कर चली।

राजेश भी नहाकर चला गया।

नाश्ता करने के बाद भुवन खेत चला गया और राजेश आईएएस की तैयारी करने लगा।

इधर सरपंच, सचिव और पंचगण विधायक जी से मिलने के लिए उसके लक्ष्मण पुर कार्यालय पहुंचे।

कार्यलय के सामने विधायक जी से मिलने लोगो की भीड़ थी। विधायक के पी ए से लोग अपने आने का प्रयोजन बता रहे थे।

एक एक करके विधायक का पीए विधायक से मिलने के लिए अंदर भेज रहे थे।

पीए _विधायक जी, सुरज पूर के सरपंच सविता जी अपने को लेकर आए हैं आपसे मिलने।

ठाकुर _क्या? सुरज पूर की सरपंच आई है?

वे लोग क्यू आए हैं? उन्हे पता है हम उनसे मिलना नही चाहते फिर भी। क्या समस्या लेकर आए है?

पीए _आवास योजना से संबंधित है।

ठाकुर _हा हा हा, आखिर मेरे चौखट पे आने मजबूर हो ही गए।

पीए _क्या करना है विधायक जी। उन्हे अंदर भेजूं।

ठाकुर _आने दो, मैं भी तो जानू, देखू क्या फरियाद करते हैं, पर सिर्फ सरपंच को ही अंदर भेजना।

पीए _ठीक है विधायक जी।

पीए ने बाहर जाकर सविता से कहा सिर्फ सरपंच ही अंदर जा सकता है?

सविता ने सभी लोगो से कहा की तुम लोग यहीं रुको मैं विधायक जी से मिलकर आती हूं।

सविता अंदर गई।

ठाकुर _आइए सविता जी, कहिए क्या फरियाद लेकर आई है आप।

सविता _नमस्ते विधायक जी।

ठाकुर _नमस्ते, आइए बैठिए।

विधायक _कहिए क्या सेवा कर सकता हूं मैं।

विधायक ने अपने अपने सेवक से कहा।

सविता जी पहली बार हमारे कार्यालय में आई है। इनके लिए चाय वगैरा लाओ।

सविता _नही विधायक जी इसकी कोइ आवश्यकता नहीं।

ठाकुर _अरे, सरपंच साहिबा, पहली बार आई हो हमारे कार्यालय, चाय वगैरा तो लीजिए।

कहिए क्या सेवा कर सकता हूं आपका।

सविता _विधायक जी, जानती हूं की आप सुरज पूर वालो को पसन्द नही करते फिर भी मैं मजबूर हो कर आपके पास आई हूं।

ठाकुर _कहिए ऐसी क्या मजबूरी हो गई की हमारे पास आपको आना पड़ा, मैं भी तो जानू, हा हा हा,,,

सविता _विधायक जी, हमारे गांव के गरीब लोगो को आवास योजना का लाभ अब तक नही मिल पाया है। हम हर साल प्रस्ताव बनाकर विभाग को भेजते हैं लेकिनसुरज पूर के किसी भी गरीब परिवार का, आवास पास नही होता।

गांव के गरीब लोग बहुत दुखी हैं।

ठाकुर _सविता जी, इसमें मैं क्या कर सकता हूं। पंचायत मंत्री ही आपके समस्या का समाधान कर सकते है । उनसे मिलिए।

सविता _पिछले वर्ष उनके पास गई थी, आश्वासन दिया था लेकिन किसी का भी आवास स्वीकृत नहीं huwa,

अगर मंत्री जी से आप बात करते तो, आखिर आप हमारे विधायक है।

ठाकुर _सुरज पूर वालो ने हमें बहुत दुख पहुंचाया है। हम उनका अनुसंसा क्यू करेंगे सविता जी।

आप हमसे बेकार ही उम्मीद कर रहे हैं।

अगर आपकी पर्सनल कोइ सेवा हो तो बताइए, उस पर विचार कर सकता हूं।

सविता _विधायक जी, मेरी पर्सनल कोइ समस्या है नही, गांव के गरीब लोगो के लिए ही आई थी। अगर हो सके तो उनके भलाई के लिए आवास स्वीकृत करा दीजिए। बड़ी मेहरबानी होगी आपकी।

ठाकुर_सविता जी कहा न मैं गांव वालो की कोइ मदद नहीं कर सकता, आप जा सकती है।

सविता निराश होकर, वापस जाने लगी।

तभी ठाकुर ने कहा,,,

देखिए सविता जी, आपको निराश होकर इस तरह हमारे कार्यालय से जाता देख बिल्कुल अच्छा नही लग रहा है।

अगर तुम चाहो तो, सुरज पूर वालो की आवास के लिए मंत्री जी से अनुसांसा कर सकता हूं, पर इससे हमें क्या मिलेगा?

सविता _विधायक जी मैं कुछ समझी नहीं।

ठाकुर _यहीं तो दिक्कत है न अगर समझ जाती तो निराश होकर जाना नही पड़ता। हमें अपने दुश्मनों की मदद करने के बदले

क्या मिलेगा?

सविता _विधायक जी मैं आपको विश्वास दिलाती हूं इस बार चुनाव में गांव के सारे वोट आपको ही मिलेंगे।

ठाकुर _सविता जी मुझे सुरज पूर वालो का वोट नही चाहिए। हम तो चुनाव ऐसे ही जीत जायेंगे।

सविता _तो विधायक जी, आप क्या चाहते हैं?

विधायक _सविता जी हमें तो बस आपका साथ चाहिए।

सविता _विधायक जी, मैं कुछ समझी नहीं।

ठाकुर _सविता जी, हम चाहते है की कुछ समय हमारे साथ बिताओ।

सविता _विधायक जी, ये आप क्या कह रहे हैं? मुझे आपसे ये उम्मीद बिलकुल नहीं थी।

विधायक _देखिए सविता जी अगर गांव के लोगो का आवास पास हो गया, तो आप पर लोगो का भरोसा बड़ेगा । नही तो लोग तो यहीं कहेंगे की एक भी योजना का लाभ दिला नही पाई, इन्हे सरपंच बनाने का क्या फायदा?

सविता _विधायक जी, मैं अपनी सरपंच पद बनाए रखने के लिए, अपनी इज़्ज़त नही बेच सकती।

आपका बहुत बहुत धन्यवाद जो इतना समय दिया।

विधायक _ठीक है, सविता जी जाइए? कोइ जबरदस्ती तो है नही, फिर भी विचार बदल जाए तो आ जाना।

सविता वहा से चली गई, लोगो ने बाहर जाने पर पूछा की क्या huwa

सविता ने कहा, विधायक जी ने आवास योजना की स्वीकृत हेतु अनुसंसा करने से इंकार कर दिया।

लोग निराश होकर गांव लौट गए।

घर जाने के बाद सविता ने काफी विचार किया और अन्त में यह निष्कर्ष निकाला की वह गांव के लोगो को उनका हक दिला पाने में असमर्थ है इसलिए वह अपने पद से इस्तीफा दे देगी।

अगले दिन सविता ने ग्राम सभा का आयोजन रखा।

लोगो को पता चल चुका था कि आज सविता जी सरपंच पद से इस्तीफा देना चाहती है।

यह बात पुरे गांव में फैल गया।

इस बात की जिक्र जब भुवन और राजेश नाश्ता करने बैठे थे। पदमा ने छेड़ा।

पदमा _बेटा भुवन आज तुम खेत मत जाओ। आज प्रात: दस बजे तुम्हारी चाची ने ग्राम सभा रखा है। लोगो से पता चला है कि तुम्हारी चाची सरपंच पद से इस्तीफा देना चाहती है।

राजेश _ताई ये आप क्या कह रही है?

पुनम _हां मैने भी यहीं सुना है?

राजेश _पर चाची ऐसा क्यू कर रही है?

पदमा _यह तो ग्राम सभा में ही सविता बताएगी आखिर वह सरपंच पद से इस्तीफा क्यू दे रही है।

भुवन बेटा तुम ग्राम सभा में चले जाना, पता तो चले कि आखिर बात क्या है?

भुवन _ठीक है मां।

प्रातः 10बजे, भुवन ने पदमा से कहा,,,

मां मैं ग्राम पंचायत कार्यालय जा रहा हूं। ग्राम सभा में,,

पदमा _ठीक है बेटा,,

भुवन जा रहा था तभी,,

राजेश _रुको, भुवन भईया, मैं भी जाना चाहता हूं आपके साथ।

भुवन _अरे राजेश, तुम वहां जा कर क्या करोगे?

राजेश _मैं भी देखना चाहता हूं की गांव में ग्राम सभा कैसे होता है?

भुवन _ठीक है, राजेश तुम्हारी ईच्छा है तो तुम भी चलो।

राजेश और भुवन दोनो ग्राम सभा में शामिल होने ग्राम पंचायत भवन के लिए निकल पड़े।

उधर ग्राम पंचायत के सभा हाल में गांव के लोग एकत्रित हो चूके थे।

सरपंच, सचिव और पंच गण, अपने स्थान पर बैठ चूके थे।

तभी राजेश और भुवन भी वहां पहुंचे।

ग्राम सभा की कार्यवाही शुरू हुई।

सरपंच ने अपन बाते लोगो के बीच रखी।

सविता _आप सभी ग्राम वासी, यह जानने के उत्सुक होंगे की अचानक से यह ग्राम सभा क्यू रखा गया है?

मैने बहुत प्रयास किया की शासन द्वारा चलाए जा रहे योजनाओं का लाभ हमारे ग्रामवासी को भी मिले लेकिन मैं यह कार्य करने में असमर्थ रही। कल मैने और पंचों ने आवास योजना का लाभ हमारे गांव के गरीब लोगो को मिल सके जो झोपड़ी में रहने मजबूर हैं, उनके आवास को स्वीकृत कराने विधायक जी के कार्यालय गए थे।

लेकिन मैं यह कार्य करा पाने में असमर्थ रही।

मुझे लगता है कि मेरी जगह कोइ और सरपंच हो तो शायद वह यह कार्य स्वीकृत करा पाए।

चूंकि मैं शासन के किसी भी योजना का लाभ गांव के लोगो को दिला पा रही अतः मुझे पद पर बने रहने का कोइ अधिकार नहीं। इसलिए मैने सरपंच पद से इस्तीफा देने का फ़ैसला किया है।

मेरी जगह किसी अन्य पंच को यह जिम्मेदारी दिया जाए जो गांव के लोगो को शासन के योजनाओं का लाभ दिला सके।

आप सभी से निवेदन है कि मेरी बातो पर विचार करते हुए, किसी अन्य व्यक्ति को सरपंच के पद के लिए अपना सहमति बनाए।

सभी अपन विचार रखेंगे।

वहा पर मौजूद एक पंच ने कहा _सरपंच जी, विधायक जी तो सुरज पूर वालो को अपना दुश्मन समझते हैं। वह नही चाहते की सरकार की किसी भी योजना का लाभ हमारे गांव के लोगो को हो, इस बात से हम सभी अवगत है। ऐसे में मुझे नही लगता की कोइ यह कार्य करा पायेगा।

आप अपना स्तीफा देने का विचार त्याग दीजिए। फिर भी किसी को लगता है कि वह यह कार्य करा सकता है तो वह सामने आए। अपनी बात रखे।

लोग आपस में चर्चा करने लगे। काफी समय हो गया कोई व्यक्ति सामने नहीं आया जो यह कह सके की मैं लोगो को शासन की योजना का लाभ दिला सकता हूं। मैं सरपंच बनने इच्छुक हूं।

काफी समय हो जाने के बाद,,

गांव के एक व्यक्ति ने कहा _सरपंच जी, गांव में ऐसा कोई भी नही है जो विधायक जी के नाराजगी के चलते, लोगो को शासन की योजनाओं का लाभ दिला सके।

गांव वालो का नसीब ही खराब है, पता नही कब तक हमे सुविधाओ से वंचित होना पड़ेगा।

सरपंच जी आपके स्तीफा देने से कोइ लाभ नहीं इसलिए, आप सरपंच पद से इस्तीफा देने का ख्याल छोड़ दीजिए।

क्यों भाईयो,,

सभी लोगो ने उस व्यक्ति की बातो में अपनी सहमति दिया।

सचिव _आगे हमें क्या करना चाहिए , इस पर आप लोग अपना विचार दीजिए।

कोइ भी लोग सामने नही आए की आगे क्या करना चाहिए।

राजेश वहा मौजूद था अब तक सभी की बातो को सुन रहा था और चुप था।

वह अपने स्थान से खड़ा होकर कहा,,

राजेश _अगर आप लोग मुझे अनुमति दे तो मैं आप लोगों के सामने अपना विचार रखना चाहता हूं।

सभा में मौजूद सभी लोग राजेश की ओर देखने लगे।

सचिव _आप अपना विचार देने के लिए मंच के सामने आइए और पहले अपना परिचय दीजिए।

राजेश मंच के सामने गया।

राजेश _मेरा नाम राजेश है। मेरे पिता जी का नाम शेखर है, और मानव प्रसाद मेरे दादा जी थे उसके दूसरे बेटे का मै पुत्र हूं। मैं कुछ दिन पहले ही यहां गांव आया हूं।

सचिव _कहिए आपके विचार से आगे हमें क्या करना चाहिए?

राजेश _देखिए, मुझे लगता है विधायक जी से पुनः मिलना चाहिए। उससे बाते करनी चाहिए। आखिर वह हमारे भी विधायक है। अपनी क्षेत्र के लोगो को शासन की सुविधा का लाभ पहुंचाना उनका फर्ज है।

बिना किसी भेदभाव के सभी की निःस्वर्थ भाव से सेवा करने की उसने विधनसभा में सपथ ली है। हमें उसे उस सपथ की याद दिलानी चाहिए।

गांव वाले राजेश की बातो को सुन कर आपस में चर्चा करने लगे।

सरपंच ने कहा _हमने काफी प्रयास किया, विधायक जी हमारी बात नहीं मानने वाले। उसके पास फिर से जाने से कोइ फायदा नहीं।

राजेश _सरपंच जी मुझे लगता है हमे एक कोशिश और करनी चाहिए। मुझे लगता है विधायक जी हमारी बात जरूर मानेंगे।

तभी एक पंच ने कहा _अगर तुम्हे लगता है की विधायक जी जरूर कहना मानेंगे तो तुम ही क्यू नही चले जाते विधायक जी के पास, हमारा प्रतिनिधि बनकर।

दूसरे पंच ने कहा _अगर तुमने गांव वालो को आवास योजना का लाभ दिला दिया, तो गांव वाले तुम्हे अपना सरपंच घोषित कर देगें। और गांव वाले वही करेंगे जो तुम कहोगे,क्यो भाईयो?

सभी लोगो ने हा कहा,,,

राजेश _अगर आप लोग ये चाहते है की मैं विधायक जी के पास आप लोगो का प्रतिनिधि बनकर जाऊ तो ठीक है, पर मेरी एक शर्त है।

एक पंच _कैसी शर्त?

राजेश _मैं सरपंच पद के लिए नही जाऊंगा, मैं गांव वालो के भलाई के लिए ही जाऊंगा इसलिए, चाची जी ही सरपंच बनी रहेगी। और यह गांव उनके निर्देशो पर ही सब की सहमति से चलेगी।

पंच गण _ठीक है हम सबको मंजूर है? हम सब भी देखना चाहते हैं तुम क्या कर सकते हो?

राजेश _ठीक है मैं आप लोगों का प्रतिनिधि बनकर कल विधायक जी से मिलूंगा।

ग्राम सभा का समापन पश्चात भुवन और राजेश घर पहुंचे।

इधर गांव वालों में चर्चा का विषय बना हुआ था कि राजेश गांव का प्रतिनिधि बन कर विधायक जी से मिलने जायेगा। पर सभी को यहीं लग रहा था की कुछ होने वाला नहीं है ऊपर से ठाकुर का आदमी राजेश की पिटाई न कर दे।

यह बात जब पदमा को पता चली।

रात में भोजन करते समय,,,

पदमा _राजेश बेटा ये मैं क्या सुन रही हूं, तुम गांव वालो का प्रतिनिधि बनकर, ठाकुर से मिलने जा रहे हो।

राजेश _हा ताई ये सच है।

पदमा _बेटा तुम्हे, फालतू में आफत मोल लेने की क्या जरूरत थी? यह जानते हुए भी की ठाकुर सुरज पूर वालो की भलाई कभी नहीं चाहेगा।

राजेश _ताई, मुझे गांव वालो की भलाई के लिए ठाकुर से मिलने जाना ही होगा।

पदमा _पर बेटा, ये ठाकुर सही आदमी नही है, उसके आदमी तुम्हे नुकसान पहुंचा सकता है।

राजेश _ताई, आप बेकार ही चिन्ता कर रही है। ऐसा कुछ नहीं होगा।

भुवन _मां, तुम चिन्ता न करो, राजेश के साथ मैं भी चला जाऊंगा।

राजेश _नही भुवन भईया, इस बार मुझे अकेले ही जाना होगा।

राजेश के इस फैसले से घर वाले सभी चिंतित हो गए।

अगले दिन सुबह राजेश आखाड़ा गया, वहा पर बिरजू और उसके दोस्तो ने कहा,, राजेश अगर तुम चाहो तो हम सब तुम्हारे साथ चलेंगे।

राजेश _नही, दोस्तो यह काम मेरे अकेले जाने से ही हो पाएगा।

बिरजू _ठीक है राजेश , अगर किसी प्रकार की मदद की जरूरत हो तो बताना।

राजेश _ठीक है बिरजू भाई।

राजेश घर गया और नहाकर तैयार हो गया।

राजेश _ताई, मुझे आज्ञा दीजिए मैं ठाकुर से मिलने जा रहा हूं।

ताई _बेटा, तुम्हे भेजने का तो मेरा मन नही है लेकिन तु जाना ही चाहता है तो मैं भगवान से प्रार्थना करुंगी तुम कामयाब होकर घर लौटा।

राजेश _अच्छा भुवन भईया मैं चलता हूं।

भुवन _राजेश, को गले लगाकर कहा, राजेश मुझे पूरा भरोसा है कि तुम जरूर कामयाब होकर लौटोगे।

राजेश भुवन का बाइक लेकर भानगढ़ निकल गया।

वह ठाकुर के हवेली पर पहुंचा।

ठाकुर के आदमी ने उन्हे अंदर जाने से रोका।

पहरेदार _तुम फिर आ गए। इस बार क्यू आए हो।

राजेश _मुझे ठाकुर साहब से मिलना है।

पहरेदार _तुम यहीं ठहरो, ठाकुर साहब तुमसे मिलना चाहते हैं कि नही, पता करने दो।

पहरेदार ने एक आदमी को ठाकुर के पास भेजा, जाओ ठाकुर साहब को बता कर आओ की, सुरज पूर से राजेश आया है वह आपसे मिलना चाहता है।

वह आदमी हवेली के अंदर गया। इस समय ठाकुर साहब हवेली में अपने परिवार के साथ डाइनिंग हॉल में नाश्ता कर रहा था।

आदमी _मालिक, सुरज पूर से कोइ राजेश नाम का लडका आया है वह आपसे मिलना चाहता है।

ठाकुर _वह यहां क्यू आया है? उनसे कहो कोइ काम है तो मुझसे लक्षमण पुर कार्यालय में मिले।

रत्ना _ये आप क्या कह रहे हैं जी, राजेश ने हमारी बेटी की जान बचाई है और आप उससे घर में भी नही मिल सकते।

दिव्या _हा पापा, उनसे अन्य लोगो की तरह ऐसा व्यवहार करना उचित नहीं।

रत्ना, ने उस आदमी से कहा जाओ राजेश को अंदर लेकर आओ।

ठाकुर _अपने बेटियो वालो के बीच अच्छा बनकर रहना चाहता था। इस लिए उनका विरोध नही कर सका, वह सोचने लगा की आखिर साला यहां करने क्या आया है?

वह आदमी चला गया और राजेश को अंदर लेकर आया।

राजेश _नमस्ते ठाकुर साहब, नमस्ते मां जी।

रत्ना _नमस्ते राजेश। कैसे हो।

राजेश _अच्छा हूं मां जी।

रत्ना _बेटा कैसे आए हो? कुछ काम था क्या?

राजेश _, हा मां जी। ठाकुर साहब से कुछ काम था।

ठाकुर _बोलो क्या काम है?

राजेश _ठाकुर साहब, आप उस दिन मुझे, दिव्या जी की मदद करने के बदले इनाम देने वाले थे, उस दिन तो मुझे ईनाम की आवश्यकता नहीं थी इसलिए लिया नही। आज मुझे ईनाम की जरूरत है।

ठाकुर _ओह तो तुम ईनाम लेने के लिए यहां आए हो।

ठाकुर ने अपने आदमी से कहा मुनीम जी से कहो राजेश को 2लाख रुपए दे दे।

राजेश _ये क्या ठाकुर साहब, एक राजा की बेटी की जान की कीमत सिर्फ 2लाख,

ठाकुर ने अपने आदमी से कहा की मुनीम जी से कहना की इसको 5लाख रुपए दे दे।

राजेश _सिर्फ 5लाख, ठाकुर साहब मैं तो बड़ी उम्मीद लेकर आपके पास आया था।

रत्ना _राजेश क्या चाहिए तुम्हे, तुम ही बताओ।

ठाकुर _बोलो कितनी रकम चाहिए तुम्हे।

राजेश _ठाकुर साहब मुझे पैसा नही चाहिए।

ठाकुर _अगर पैसा नही चाहिए तो क्या चाहिए तुम्हे?

राजेश _मैं चाहता हूं की आप अपना फर्ज पूरा करे।

ठाकुर _कैसा फर्ज?

राजेश _वही जब आपने, विधायक बनने के बाद, विधनसभा में सपथ ली थी कि आप बिना किसी भेद भाव के निःस्वार्थ भाव से सभी लोगो को समान समझते हुए लोगो की सेवा करेंगे।

ठाकुर _आखिर तुम कहना क्या चाहते हो, घुमा फिरा कर बात क्यू कर रहे हो। बोलो क्या चाहिए तुम्हे।

राजेश _ठाकुर साहब गांव के गरीब लोग, जो आज भी झोपड़ी में रहने मजबूर हैं। शासन की योजनाओं का लाभ उन्हे नही मिल पा रहा है। गांव के पंचायत द्वारा उनका आवास का प्रस्ताव बनाकर विभाग को भेजा है, आप उन्हे स्वीकृत करा दीजिए। यहीं मेरा ईनाम होगा।

ठाकुर _मैं इसमें क्या कर सकता हूं? ये तो पंचायत मंत्री का काम है?

राजेश _ठाकुर साहब, आप चाहे तो सब हो सकता है? पर लगता है कि आप मेरा ईनाम देने के इच्छुक नहीं है?

ठीक है ठाकुर साहब मैं जा रहा हूं। मैं गलत था जो आपसे उम्मीद लेकर यहां चला आया।

राजेश जाने लगा।

रत्ना _रुको राजेश।

अजी, ये आप क्या कर रहे हैं? जिस लड़के ने आपके घर की इज़्ज़त की रक्षा की, आप उसके लिए एक छोटा सा काम नही कर सकते।

गीता _हा पिता जी मां ठीक कह रही है, आपके लिए तो ये छोटा सा काम है। फिर आप राजेश को मना क्यू कर रहे हैं? कुछ समझ नहीं आया।

दिव्या _पिता जी, मुझे आपसे ये उम्मीद बिलकुल नहीं है। आप इस क्षेत्र के विधायक भी है, गांव के लोगो की मदद करनी चाहिए।

ठाकुर बुरी तरह फस चुका था।

वह अपनी बेटियो की नजर में गिरना नही चाहता था।

दिव्या _राजेश पिता जी तुम्हारी मदद जरूर करेंगे।

पिता जी आप अभी मंत्री जी को फोन लगाइए।

गीता _हा पापा, आप मंत्री जी से बात कीजिए, वो आपका कहना जरूर मानेंगे।

ठाकुर मजबूर हो गया, वह अपनी बेटियो की नजर में अच्छा बना रहना चाहता था।

ठाकुर _ठीक भाई अगर तुम सब यहीं चाहते हो तो मैं बात करता हूं।

ठाकुर ने मंत्री को काल किया।

पंचायत मंत्री _अरे ठाकुर साहब बोलो कैसे याद किया हमें।

ठाकुर _मंत्री जी बस आपकी मदद चाइए था।

मंत्री _कैसी मदद, हम ने कभी कोइ बात टाली है आपकी कहिए क्या सेवा करनी है?

ठाकुर _सुरज पूर वालो का आवास का प्रस्ताव का फाइल आपके कार्यालय पहुंची होगी। आप उसको स्वीकृत कर दीजिए।

मंत्री _पर ठाकुर साहब आप तो पहले सुरज पूर वालो का कोइ भी कार्य को स्वीकृत करने से मना किया था। फिर आज,,

ठाकुर _अब बात क्या हो वो आपको बाद में बताऊंगा मंत्री जी, फिर हाल तो आप मेरा यह काम कर दीजिए।

मंत्री जी _ठीक है ठाकुर साहब आपका यह काम हो जायेगा।

आप निश्चिंत रहिए।

ठाकुर _शुक्रिया मंत्री जी।

ठाकुर ने फोन रख दिया।

अपनी बेटियो से कहा,

लो भई तुम लोगो के कहने पर मैंने मंत्री जी से बात कर ली। अब तो तुम लोग खुश हो।

दिव्या अपने पिता के गले लग गई। थैंक क्यू पापा मुझे आपसे यहीं उम्मीद थी। वह खुश होकर बोली।

ठाकुर _मुझे लक्षमण पुर कार्यालय जाना है भाई मेरा नाश्ता हो गया।

ठाकुर साहब डाइनिंग हॉल से निकल कर अपने कमरे में आ गया।

ठाकुर अपने आप बड़बड़ाने लगा,,

ये शाला राजेश सच में बड़ा चालाक निकला, जो काम मैं कभी नही करना चाहता था, मुझे मेरी बेटियो के बीच फसा कर,वह काम मुझसे करवा लिया।

इस साले की इलाज कराना जरूरी है।

पर अभी कुछ करना ठीक नहीं, मुझे मौका ढूंढना होगा।

इधर राजेश ने दिव्या, रत्ना और गीता जी को सहयोग करने के लिए धन्यवाद् दिया,,

गीता भी धरम पुर जाने की बात कह कर अपने कमरे मे चली गईं।

राजेश _अच्छा मां जी अब मैं चलता हूं।

रत्ना _अरे बेटा, तुम नाश्ता करके जाना।

दिव्या _हां राजेश, मां ठीक कह रही है आओ बैठो।

राजेश _नही दिव्या जी, आप लोगो ने मेरी मदद की यहीं बहुत है मेरे लिए।

रत्ना _और तुमने हमारी मदद की वह क्या कम है, अब चुप चाप बैठो और नाश्ता करो।

राजेश कुर्सी पर बैठ गया। रत्ना ने उसे नाश्ता परोसी।

रत्ना _बेटा तेरा दादा जी मेरे ससुर जी के साथ अक्सर हवेली आया करते थे। वे मेरे ससुर जी के साथ भोजन किया करते थे।

वे मेरे हाथो से बने भोजन की बड़ी तारीफ किया करते थे।

पर उस घटना के बाद मैं भोजन बना ना ही बंद कर दी।

दिव्या _राजेश, मुझे तो जब तुमने कहा की मदद के बदले ईनाम लेने आए हो तो बड़ा अजीब लगा। पर जब तुमने बताया कि अपने लिए नहीं गांव के गरीब लोगो के लिए आए हो तो तुम्हारे लिए मेरे मन में इज्जत और बड़ गया।

रत्ना _बेटा, सच में तुम अपने दादा पर गए हो, जो हमेशा गांव वालो की भलाई के बारे में ही सोचता था।

नाश्ता कर लेने के बाद राजेश रत्ना और दिव्या से इजाजत लेकर अपना गांव लौट गया।

घर जाने के बाद घर वालो, दोस्तो और गांव वालो ने पूछा, की बात बनी की नही।

राजेश ने कहा की, बात तो किया है, पर काम huwa की नही बाद में पता चलेगा।

लोग तो राजेश का मजाक उड़ा रहे थे।

राजेश लोगो को बिना कोइ जवाब दिए खामोश रहता था।

आई ए एस का प्री एग्जाम पास आ रहा था राजेश तैयारी में लग गया।

बीच बीच मे पुनम से हसी मजाक कर लिया करता था।

क़रीब दो सप्ताह बाद सचिव को विभाग से फोन आया की तुम्हारे गांव के सभी लोगो का आवास स्वीकृत हो गया है। एक सप्ताह के अंदर सभी पात्र लोगो का बैंक खाता नंबर जमा कर दे, ताकि आवास की राशि उसके खाते में जमा किया जा सके।

इस बात की जानकारी सरपंच पंच और गांव वालो को huwa तो वे आश्चर्य में पड़ गए। एक लड़के ने ये असंभव काम को कैसे संभव कर लिया।

गांव वाले खुशी के मारे झूम उठे वे सभी भुवन के घर की ओर दौड़े।

दरवाजा खटखटाया।

पदमा ने दरवाजा खोला,,

गांव वाले _राजेश घर में है क्या चाची?

पदमा _क्यू क्या काम है उनसे, तुम लोग यहां क्यू भीड़ लगा रखे हो।

चाची _राजेश ने कमाल कर दिया। हम सब का आवास स्वीकृत हो गया है, हे भगवान हमें तो यकीन नही हो रहा है।

पदमा _बहुत खुश हो गई,

गांव वाले _राजेश बाबू को बुलाओ न चाची,

पदमा ₹रुको मैं अभी बुलाती हूं।

पदमा राजेश के रूम में गई,,

बेटा राजेश गांव वाले तुमसे मिलने आए है।

राजेश _ताई क्या बात है?

पदमा _वे कह रहे हैं की उनका आवास पास हो गया है, तुम्हे धन्यवाद देना चाहते हैं।

राजेश _अच्छा, गांव के लोगो का आवास पास हो गया ये तो बड़ी खुशी की बात है?

राजेश घर से बाहर आया, लोगो ने नारा लगाना शुरू कर दिया,, राजेश बाबू जिंदा बाद,, राजेश बाबू जिंदा बाद।

गांव वालो ने राजेश को अपने कंधे पर बिठा लिया।

और बाजे गाजे के साथ गांव में घूमाने लगा। सभी खुशियां मनाने लगे।

आखिर राजेश ने वह काम कर दिया था जिसके बारे में गांव के लोगो ने सोचा नहीं था।

मंदिर के पुजारी को जन इस बात का पता चला तो लोगो से कहा की मैने तो पहले ही कहा था की राजेश फरिश्ता बनकर यहां आया है।

उस दिन सभी गांव वाले जम कर नाच गाना किए। और राजेश की तारीफ किया।

राजेश गांव वालो की नजरो में काफी ऊंचा उठ गया था। अब उनकी नजरो में वह साधारण लडका नही रह गया था।

रात में लोगो के खुशियों में शामिल होने के बाद।

जब वह घर पहुंचा तो पदमा ने उसकी आरती उतारी, मेरे बेटे को किसी की नजर न लगे आज तुमने हमारे परिवार का नाम रोशन कर दिया।

राजेश दिनभर लोगो के बीच रह कर थक चुका था।

पदमा _बेटा थक गए होगे जाओ आराम करो।

राजेश अपने कमरे में सोने चला गया।

कुछ देर बाद, पुनम कमरे में पहुंची,,

देवर जी सोने से पहले दूध तो पी लो,,

राजेश बेड से उठा और गिलास लेकर दूध पीने लगा।

राजेश को दूध पीता देख पुनम मुस्कुराने लगी,,,

राजेश _भौजी, आज दूध का स्वाद कुछ दूसरा है!

पुनम _क्यू देवर जी दूध आपको अच्छा नही लगा क्या?

राजेश _नही ऐसी बात नहीं है दूध तो काफी स्वादिष्ट और मीठा था।

ये किसी और गाय का दूध थी क्या?

पुनम शर्मा ते हुई बोली _हा देवर जी। ये किसी और गाय की दूध थी। तुम जिद करते थे न की मां की दूध मिल जाता तो मजा आ जाता।

तो मैंने आज एक मां की दूध पिलाया है आपको, अपने चहरे को अपनी हाथो से छिपा ली।

राजेश _कहीं आप अपनी दूध तो नहीं,,,

पुनम शर्म से पानी पानी होते हुए बोली, इस घर में और किसके दूध आते है,,

राजेश _धन्यवाद भौजी, मेरी ईच्छा पूरी करने के लिए, पर,,

पुनम _पर क्या देवर जी,,,

राजेश _अगर मूंह से पिला देती तो और मजा आ जाता,,

पुनम _धत देवर जी तुम भी न,,,

वह शर्म के मारे पानी पानी होती हुई अपने कमरे में भाग गई,,,,
 
राजेश सुबह उठकर अखाडे पे चला गया।

बिरजू _अरे राजेश, तुमने तो कमाल ही कर दिया। चारो तरफ तुम्हारा ही चर्चा है।

भई तुम साधारण लडका नही हो, सभी युवाओं ने राजेश को उसके कामयाबी के लिए बधाई दिया।

बिरजू _राजेश, तुम हमारे अखाड़े के सदस्य हो यह हमारे लिए गर्व की बात है।

राजेश ने सभी को शुक्रिया कहा।

राजेश ने अखाड़े पर अभ्यास किया साथ ही कबड्डी के नियमो को भी जाना और साथियों के साथ कबड्डी खेला।

अखाड़े पर अभ्यास के बाद जब वह घर जा रहा था।

घर जाते समय जब वह अपने चाचा जी के दुकान के पास से गुजर रहा था।

उसका चाचा माधव, दुकान खोल रहा था।

राजेश _नमस्ते चाचा जी।

माधव _अरे राजेश बेटा, तुम्हे ही याद कर रहा था, आओ। आजकल कम दिखाई देते हो। वैसे तुमने तो हमारे खानदान का नाम रोशन कर दिया।

राजेश _चाचा जी, सब आपका आशीर्वाद का फल है। अभी एक्जाम की तैयारी के कारण घर में ही रहता हूं। इसलिए दिखाई नही देता।

माधव _बेटा तुम्हारी चाची पुछ रही थी, तुम्हारे बारे में, कह रही थी अब राजेश नही आता क्या?

तुम रुको, मैं तुम्हारी चाची को खबर करता हूं।

माधव अंदर गया।

माधव _सविता, कहा हो।

सविता कीचन में काम कर रही थी।

सविता _क्या huwa जी?

माधव _वो राजेश आया है। वह अखाड़े से घर जा रहा था, तो मैंने कहा तुम्हारी चाची तुम्हारे बारे में पुछ रही थी।

सविता _कहा है।

माधव _दुकान में।

सविता _उसे घर में क्यू नही लाया? जाओ उसे अंदर ले आओ।

माधव राजेश के पास गया और कहा,

माधव _राजेश, तुम्हारी चाची अंदर बुला रही है।

राजेश अंदर गया।

राजेश _नमस्ते चाची।

सविता _नमस्ते, राजेश, आओ बैठो।

राजेश सोफे पर बैठ गया।

माधव _लगता है दुकान पर कोइ ग्राहक आया है, मैं आता हूं।

माधव, दुकान पर चला गया।

सविता ने राजेश के लिए गिलासमें पानी लाया।

राजेश ने पानी का गिलास उठाकर पीने लगा।

राजेश _चाची, चाची जी कह रहे थे कि आप मेरे बारे मे पुछ रहे थे कुछ काम था क्या?

सविता _हा राजेश, जब तुम पहली बार घर आए थे, तो मैंने तुम्हारे साथ अच्छा बरताव नही किया था। तुम्हे बुरा लगा होगा।

राजेश _नही, चाची, मुझे बुरा नही लगा।

सविता _मैं उस वाकिये को लेकर सरमिंदगी महसूस कर रही हूं।

राजेश _चाची, मुझे बुरा नही लगा, आपको सरमिंदगी महसूस करने की आवश्यकता नहीं है।

सविता _रुको, मैं तुम्हारे लिए चाय बनाती हूं।

सविता, राजेश के लिए चाय बनाने लगी, राजेश घर का मुआयना करने लगा।

घर को आधुनिक तरीके से बनाया गया था।

यह गांव का सबसे अच्छा घर था।

सविता, चाय बना कर लाई।

सविता _लो राजेश।

राजेश ने चाय का कप उठाया ,

राजेश _चाची आप नही लेंगी।

सविता _मैने कुछ देर पहले ही, पी है।

शुक्रिया, राजेश गांव वालो की मदद करने के लिए।

राजेश _चाची इसमें शुक्रिया कैसी गांव के लोगो का मदद करना मेरा फर्ज है।

सविता _राजेश, वह ठाकुर तो बड़ा कमिना है।सुरज पूर वालो को अपना दुश्मन समझता है फिर वह गांव वालो की आवास को स्वीकृत कराने तैयार कैसे हो गया?

राजेश _चाची, मैने उसकी बेटी दिव्या की इज़्ज़त बचाई थी, जिस ट्रैन से मैं गांव आ रहा था, उसी ट्रैन से दिव्या जी भी आ रही थी।

रात में कुछ बदमाशो ने उसके साथ बुरा करना चाहा, मैने उसकी मदद की।

सविता _ओह तो ये बात है?

राजेश _हा चाची, पर ठाकुर को इस बात के लिए मनाना इतना आसान नहीं था इसलिए मुझे बात मनवाने के लिए ठकुराइन और उसकी बेटियो का सहारा लेना पड़ा।

सविता _वो कैसे?

राजेश _चाची, ठाकुर कमिना जरूर है, लेकिन वह अपने बेटियो से बहुत प्यार करता है। अगर मैं ठाकुर से अकेले में मिलकर मदद की बात की होती तो वह जरूर, मदद करने से इंकार कर देता, इसलिए मैने उनके परिवार वालो के सामने यह बात कहीं, परिवार वालो ने मेरा सपोर्ट किया और ठाकुर उनका कहना मानना पड़ा।

सविता _मतलब तुमने चालाकी से काम लिया।

राजेश _जी चाची।

सविता _राजेश मैने आवास स्वीकृति के लिए ठाकुर के कार्यालय गया था, जानते हो उसने क्या कहा?

राजेश _, क्या कहा चाची, उस साले ने।

सविता _उस कमीने ने, आवास स्वीकृति के बदले अपने साथ मुझे रात गुजारने के लिए कहा।

मैने इंकार कर दिया था।

राजेश _उस साले ने ऐसा कहा? उस साले ने गांव वालो को बहुत रुलाया है, अब रोने की पारी उसकी आने वाली है। चाची तुम चिन्ता न करो गांव का जितना भी काम रुका हुआ है, एक एक कर सारे काम अब पूरे होंगे।

राजेश _अच्छा चाची अब मैं चलता हूं।

सविता _ठीक है राजेश, तुम घर आते रहना, और हा आज से रात का खाना तुम यहीं खाया करना।

राजेश _चाची, खाने के बारे में तो आपको ताई जी से बोलना पड़ेगा, अगर मैं ऐसे ही चला आया तो वह बुरा मान जाएंगी।

सविता _राजेश, पदमा दीदी और मेरे बीच कुछ मन मुटाव है। मैं कैसे पूछूंगी, उनसे।

राजेश _चाची, आखिर आप लोगो के बीच किस बात को लेकर मन मुटाव है?

सविता _वह बात बताने लायक नही है राजेश अभि तक तो मैने तुम्हारे चाचा जी को भी नही बताया है?

राजेश _ओह लगता है कोइ खास वजह है।

ठीक है चाची मैं रोज का तो नही कह सकता पर आज रात यहां भोजन करने आ जाऊंगा।

सविता _ठीक है राजेश।

राजेश जब घर पहुंचा,,,

भुवन _यार राजेश आज बड़ी देर कर दी, अखाड़े से आने में,

राजेश _भुवन भाई घर आ ही रहा था कि चाचा जी मिल गए। उसने कहा कि चाची जी तुम्हारे बारे में पुछ रही थी, तो मैं चाचा जी के घर चला गया।

भुवन _ओह चल जल्दी से नहा कर फ्रेस हो जाओ फिर नाश्ता करेंगे।

राजेश _ठीक है भुवन भईया।

राजेश जल्दी से नहाकर आया।

भुवन और राजेश दोनो नाश्ता करने बैठ गए।

पदमा वही पर थी।

राजेश _ताई, चाची कह रही थी कि रात का भोजन हमारे यहां करना।

पदमा_क्या कहा तुमने

राजेश _मैने कहा, ताई से पूछना पड़ेगा,,,

पदमा _इतने दिन हो गए आए तुमको गांव, आज याद आ रही है तुम्हारी।

अब तो तुम्हे पूरे गांव भर के लोग अपने यहां, भोजन करने बुलाएंगे।

राजेश _ताई क्या करू जाऊ कि नही।

पदमा _देखो बेटा मन मुटाव हमारे साथ huwa था, तुम तो पहली बार गांव आए थे। इतने दिनो तक तो भोजन के लिए बुलाई नही। उसका फर्ज था, तुम्हे घर बुलाकर भोजन कराना, मान सम्मान करना, आखिर तुम उसके भी भतीजे हो।

पर उसे तो अपने पे बहुत घमंड है।

अगर तुम नही गए तो मुझे ही दोष देगी, इसलिए चले जाना, रात में भोजन करने।

राजेश _ठीक है ताई।

नाश्ता करने के बाद, भुवन खेत चला गया और राजेश अपने कमरे में पढ़ाई करने लगा।

उधर हवेली में नाश्ता करते समय,,

ठाकुर _दिव्या बेटा, लक्षमण पुर में अपने हॉस्पिटल के लिए जगह देख लो।

फिर इंजीनियर से मिलकर नक्शा बनवा लेना।

दिव्या _पिता जी, हॉस्पिटल बनने में तो बहुत समय लगेगा। तब तक मुझे अस्थाई रूप से कोइ कोइ मकान देखकर अपन क्लिनिक चलाना चाहती हूं।

गीता _दिव्या, लक्षमण पुर, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मेंचिकित्सा अधिकारी का पद खाली है।

ये पिछड़ा क्षेत्र होने के कारण, कोइ एमबीबीएस डाक्टर यहां आना नही चाहता। क्यू ना तुम जब तक हॉस्पिटल तैयार नहीं हो जाता। चिकित्सा अधिकारी के रूप में काम करो।

(प्रत्येक विकासखण्ड में सरकार ने एक प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र खोला है, जहां एक चिकित्सा अधिकारी ,और अधिनस्थ पैरामेडिकल स्टाफ होते हैं।

चिकित्सा अधिकारी के पास एम बी बी एस की डिग्री होना आवश्यक होता है।

इस स्वास्थ्य केंद्र में विकास खंड के रहने वाले लोग अपन इलाज कराने आते हैं।

रोगियों के लिए 6,_10बिस्तर होते है।)

दिव्या _हा, दीदी ये ठीक रहेगा।

मैं आज ही अप्लाई कर दूंगी, चिकित्सा विभाग में अपना आवेदन।

ठाकुर _मैं चिकित्सा मंत्री से बाट कर लूंगा बेटी, वह एक दो दिन में ही तुम्हारा नियुक्ति आदेश निकलवा देगा।

इधर खेत में भुवन मजदूरों के साथ, काम कर रहा था। वह खेत में मूंगफली लगाया था। मजदूरों के साथ मूंगफली के पौधे के जड़ खोद कर मूंगफली निकाल रहा था।

उसके पास में ही एक मजदूरन,,, भी फल्ली निकाल रही थी। अन्य औरतें थोड़ी दूर थी।

भुवन _कम्मो भौजी आज तो बड़ी मस्त लग रही हो।

कम्मो _देवर जी लगता है आज तुम्हारी नियत ठीक नही है। जब से आई हूं मेरे चुचियों को ही घूर रहे हो। वे फुसफुसाते हुवे बात चीत कर रहे थे, ताकि कोइ दूसरी औरत सुन न ले।

भुवन _आज तेरे मम्मे बड़े प्यारे लग रहे है?

आज मेरा बड़ा मन कर रहा है। आज रात में आ जाना खेत में मजे करेंगे।

कम्मो _नही देवर जी, नही आ सकती, रात को मैं!

भुवन _क्यू?

कम्मो _मेरी सास मुझ पर शक करती हैं। मेरी पहरेदारी करती हैं चुड़ैल कहीं की।

भुवन _अरे कोइ बहाना करके आ जाना, तेरे मम्मे का दूध पीने का बड़ा मन कर रहा है।

कम्मो _देवर जी, मैने कहा न मैं नही आ सकती, रात में।

भुवन _ठीक है, रात में नही आ सकती तो अभी दे दो। मेरा घोड़ा फड़फड़ा रहा है तुम्हारे कुवे का पानी पीने।

कम्मो _हाय दईया, यहां इतनी औरतें है किसी ने देख लिया तो, मेरे सास को बता देगी। मुझे यहां काम में भेजना बंद कर देगी।

भुवन _अरे, किसी को पता नही चलेगा।

भुवन ने अपने बापू को आवाज़ लगाया,,

बापू ओ बापू,,

केशव _क्या huwa बेटा,,

भुवन _मैने आज गन्ने के पेड़ में कुछ कीड़े देखे, पौधो में दवाई डालना पड़ेगा, नही तो पूरे खेत में फैल जायेंगे।

केशव _अरे बेटा ऐसी बात है तो जाओ डाल दो गन्ने के पौधो में दवाई। उस दिन जो दवाई लाया था वो बचा huwa है, झोपड़ी में रखा है।

भुवन _ठीक है बापू।

भुवन वहा से जाने लगा,,

जाते समय वह जोर से बोला,

अरे कम्मो भौजी चलो तुम भी मेरे साथ मेरी मदद करना।

केशव _हा कम्मो तुम भी चले जाओ, भुवन की मदद कर देना।

कम्मो _ठीक है चाचा जी, मुस्कुराने लगी,,

भुवन आगे आगे और कम्मो पीछे पीछे चलने लगी।

अन्य औरतें उन्हे जाते हुए देख रही थी, सरला काकी को कुछ शक huwa

भुवन झोपड़ी में पहुंचा, कम्मो भी पीछे पीछे पहुंच गई।

जाते ही भुवन ने कम्मो को अपनी बाहों में भर लिया और उसकी चूचियों को मसलने लगा।

कम्मो_अरे देवर जी आज तो बड़े उतावले लग रहे हों, कोइ आ जाएगा छोड़ो न।

भुवन _मेरी जान, मेरा घोड़ा को बड़ी प्यास लगी है, जरा पानी तो पिला दो।

कम्मो _यहां नही, कोइ भी आ सकता है, चलो गन्ने के खेत में चलते है।

भुवन झोपड़ी में रखे दवाई डालने का यंत्र स्पियर को लेकर गन्ने के खेत की ओर जाने लगा कम्मो उसके पीछे पीछे चली गईं। दोनो,

गन्ने के खेत के अंदर चले गए, और अंदर थोडी जगह देखकर दोनो वहा बैठ गए।

गन्ने के पेड़ ऊंचे ऊंचे होने के कारण बाहर के लोगो को दोनो दिखाई नही दे रहे थे।

भुवन _ये जगह ठीक है भौजी, यहां तुम लेट भी सकती हो।

भुवन _हाय मेरी जान अपनी ब्लाउज तो खोलो, जरा दूध पी लू।

कम्मो ने अपनी ब्लाउज के बटन खोल दिए। उसके बड़े बड़े दूध से भरे मम्मे भुवन के आंखो के सामने आ गया।

भुवन का land चुचियों को देख कर टनटना गया ।

भुवन चुचियों पर टूट पड़ा, वह उसे मसल मसल कर पीने लगा।

कम्मो सिसकने लगी,, आह उन आई,,

देवर जी जरा धीरे,,,

भुवन कुछ देर दूदू पीने के बाद अपन लूंगी खोल दिया।

उसका खड़ा land देख कर कम्मो मुस्कुराने लगी।

उसे अपने हाथो से सहलाने लगी।

भुवन _देख क्या रही हो, मेरी दिलरुबा, चूसो इसे।

कम्मो ने भुवन का land मूंह में लेकर चूसने लगी।

भुवन _आह, थोडा और अंदर, आह बड़ा मज़ा आ रहा है मेरी जान,, और चूसो,, थोडा तेज़ तेज़,,,

आह, उह,,

कुछ देर land चुसाने के बाद,,

भुवन _अब लेट जाओ, मेरी रानी, अब मेरा घोड़ा तेरे कूवे का पानी पिएगा।

कम्मो भुवन का लूंगी बिछाकर लेट गया।

भुवन ने कम्मो की चड्डी उतार दिया और उसकी मस्त फुली हुई गुलाबी चिकनी चूत चाटने लगा।

कम्मो मादक सिसकारी निकालने लगी।

आह उई मां आह, उन,,,,

देवर जी अब बर्दास्त नही हो रहा उतार दो अपने घोड़े को मेरे बावड़ी में।

भुवन _कम्मो की टांगे फैला कर उसके बीच आ गया।

अपन land का टोपा कम्मो की योनि के मुख पर रख कर एक जोर का धक्का लगाया।

लौड़ा, बुर को फाड़कर सरसराता huwa अंदर चला गया।

कम्मो के मुंह से हल्की चीख निकल पड़ी।

बुर एकदम गीली होने के कारण,land आराम से बुर के अंदर चला गया।

भुवन ने अपने दोनो हाथो से कम्मो की चुचियों को मसल मसल कर land को बुर में पेलना शुरू कर दिया ।

कम्मो के मुंह से लगातार कामुक सिसकारी निकलने लगी।

उधर भुवन ने कम्मो को दनादन चोदना शुरु कर दिया।

दोनो को chudai में बड़ा मजा आने लगा।

कम्मो अपनी क़मर उठा उठा कर भुवन का सहयोग करने लगी।

कम्मो की बुर से पानी झरने की तरह बहने लगी,land फच फच करता huwa अंदर बाहर हो रहा था।

भुवन बीना रूके गपागप चोदे जा रहा था।

कुछ देर में ही कम्मो के बुर ने अपना पानी छोड़ दिया।

वह भुवन को जकड़ कर झड़ने लगी।

कुछ देर सुस्ताने के बाद भुवन ने कम्मो की योनि को फिर से चाटने लगा, जिससे कम्मो धीरे धीरे फिर गर्म होने लगी।

जब वह पूरी तरह गर्म हो गई।

भुवन कम्मो को घोड़ी बना दिया और पीछे से land को उसकी बुर में डाल कर गच गच चोदने लगा,

फिर से दोनो जन्नत की सैर करने लगे।

कुछ देर घोड़ी बना कर कम्मो के जमकर चोदा, उसके बाद भुवन नीचे लेट गया।

और कम्मो को land पर बैठने कहा।

कम्मो लौड़ा को अपने हाथ में पकड़ कर अपनी बुर में सेट कर नीचे बैठ गया।land उसकी योनि में घुस गया।

अब वह भुवन की लौड़े में उछल, उछल कर चुदने लगी।

एक बार फिर से दोनो को संभोग का आपार आनंद मिलने लगा।

भुवन कम्मो की क़मर पकड़ कर अपने land पर पटक पटक कर चोदने लगा,,

कम्मो के मुंह से आह उह, उई मां आह मार डाला रि,, आह मैं आने वाली हु,,, आह,,

कम्मो चीखते हुई फिर झड़ने लगी, भुवन भी ख़ुद को न रोक सका और एक जोर का धक्का लगाते हुवे,, आह आह करते हुए कम्मो की बुर में झड़ने लगा।

दोनो कुछ देर सुस्ताने के बाद, अपने कपड़े पहने और गन्ने के खेत से बाहर निकले।

फिर दोनो, अन्य मजदूरों के साथ मूंगफली निकालने लगे,,

केशव _डाल दिया बेटा, गन्ने के खेत में दवाई।

भुवन _हा बापू, अब डरने की कोइ बात नही, मैने अच्छे से दवाई डाल दी है।

इधर सरला काकी दोनो को घूरते हुए अपने मन में बोली,,

मुआ कहीं का, झूठ बोल रहा है, ये गन्ने के खेत में दवाई डालने नही बल्कि कम्मो की खेत की जुताई और अपने हैंडपंप से सिंचाई करके आया है।

कम्मो की चाल ही बता रहा है की भुवन ने इसकी बुर को खुब चोदा है।

शाम के समय भुवन, राजेश, रवि और विमल टहलने के लिए नदी की ओर निकले,,

लोग राजेश को, नमस्ते राजेश बाबू,,, कह रहे थे,,

रवि _यार राजेश तुमने तो असंभव काम को संभव कर दिखाया, सभी लोग तुम्हारी तारीफ कर रहे हैं तुम तो गांव के हीरो बन गए हो अब तो,,

विमल _हा राजेश, तुम्हारे साथ चलने में हमें गर्व महसूस हो रहा है।

भुवन _हमारा राजेश कोइ साधारण लडका नही है, देखना एक दिन बहुत बड़ा आदमी बनेगा।

विमल _राजेश, कलेक्टर बनने के बाद कहीं तुम हमें भुल तो नही जाओगे।

राजेश _विमल भईया ये आप कैसी बात कर रहे हैं, मैं कैसे भुल जाऊंगा आप लोगो को।

रवि _वैसे सुना है कल गांव में ग्राम सभा रखा जाएगा,जिसमें तुमको गांव वाले सम्मानित करेंगे और कोइ नया पद देगें।

भुवन _भाई राजेश ने काम ही ऐसा किया है? सम्मान तो मिलेगा ही, और बड़ा पद का हकदार भी है।

जब वे घर जा रहे थे, तभी दुकान से उसके चाचा माधव ने आवाज़ लगाया।

माधव _अरे राजेश बेटा, जरा आना।

राजेश और भुवन दुकान पर गए।

राजेश _जी चाचा जी, आपने बुलाया।

माधव _अरे बेटा, तुम्हारी चाची बोली है की आज रात का भोजन हमारे घर में करने के लिए। तुम समय पर आ जाना। तुम्हारी चाची भोजन की तैयारी में लगी है।

राजेश _जी चाचा जी, आ जाऊंगा समय पर।

माधव _ठीक है बेटा।

राजेश और भुवन दोनो घर जाने लगे,,

राजेश _भुवन भईया, चाची ने तुमको क्यू नही बुलाया भोजन करने

भुवन _क्यू की चाची मुझसे नाराज हैं।

राजेश _ऐसा क्या हो गया जो तुम से नाराज हो गई है। मुझे चाची के यहां अकेला भोजन करने जाना कुछ अच्छा नही लग रहा।

भुवन _चाची, मुझे आवरा समझती है, और ज्यादा तुम्हे बता नही सकता राजेश, तुम अकेले चले जाना भोजन करने नही तो उन्हे अच्छा नही लगेगा।

दोनो घर पहुंचे, पुनम ने दोनो को चाय दिया, घर के आंगन में बैठकर सभी बातचीत करने लगे।

कुछ समय बाद,,

घर में माधव का नौकर आया,,

नौकर _चाची, ओ चाची,

पदमा, बाहर आई,,

क्या है रि मंगलू, क्यो आवाज़ दे रहा है?

मंगलू _चाची सरपंच जी ने राजेश बाबू को घर बुलाया है भोजन के लिए।

पदमा _ठीक, भेज रही हूं, तुम जाओ।

मंगलू _ठीक है चाची।

पदमा धर में आई।

भुवन _कौन था मां?

पदमा _तुम्हारे चाचा का नौकर था, राजेश को बुलाने भेजा था।

राजेश बेटा जाओ अपने चाची के यहां भोजन करने।

भोजन करके आ जाना जल्दी।

राजेश _ठीक है ताई ।

पदमा _भुवन बेटा तु भी भोजन करके, खेत जाना है तुम्हे।

भुवन _ठीक है मां।

राजेश अपने चाची के घर के लिए निकल पड़ा।

वह दुकान में पहुंचा।

माधव _अरे राजेश, आ गया जाओ घर के अन्दर जाओ तुम्हारी चाची तुम्हारा ही राह देख रही है।

राजेश _जी चाचा जी।

राजेश अंदर गया।

सविता, भोजन की तैयारी कर रही थी।

जब राजेश को देखा।

सविता _आओ राजेश बैठो।

राजेश जी चाची।

राजेश ने दीवाल पर दो लडकियों की फोटो देखा।

राजेश _चाची, ये बच्चे कौन है?

सविता _ये दोनो तुम्हारी छोटी बहने है।

दोनो अपने मामा के घर रहकर पढ़ाई कर रहे हैं।

राजेश सरकारी स्कूलों में शिक्षको की कमी के कारण ठीक से पढ़ाई नही हो पाती इसलिए मैने उसके मामा जी के घर भेज दिया है, है एक आठवी कक्षा में है और एक छटवी कक्षा में।

राजेश _ओह।

राजेश _चाची आपके मायका कहा है?

सविता _यहीं धरम पुर में।

राजेश चलो हाथ मुंह धो लो, भोजन करना।

राजेश _चाची, चाचा जी भोजन नही करेंगे?

सविता _राजेश, तुम्हारे चाचा जी दुकान बंद करने के बाद ही भोजन करते हैं अभी तो काफी समय है तुम करलो। तुम्हारे चाचा जी बाद में करेंगे।

जाओ हाथ मुंह धोकर आ जाओ।

राजेश घर में वाश बेसिन पर हाथ मुंह धोकर, आया, सविता ने डायनिंग टेबल पर बैठने कहा।

राजेश _आओ टेबल पर बैठो।

राजेश ड्याइनिंग टेबल पर बैठ गया।

सविता ने राजेश के लिए कई प्रकार के व्यंजन बनाई थी। सारे व्यंजन टेबल पर सजाने लगी।

राजेश _चाची इतने सारे व्यंजन बनाने की क्या आवश्यकता थी।

रोटी और सब्ज़ी ही बना देती।

तभी वहा पर माधव आ गया।

माधव _क्या बाते हो रही है चाची और भतीजा के बीच।

राजेश _चाचा जी मैं चाची से कह रहा था कि इतने सारे व्यंजन बनाने की क्या आवश्यकता थी?

माधव _राजेश तुम नही जानते तुम्हारी चाची पाक कला में निपुण हैं, पाक कला की कोर्स की है। खा कर देखो कितना स्वादिष्ट खाना बनाती हैं तुम्हारी चाची।

राजेश _चाचा जी आप भी बैठिए न भोजन करने।

माधव _, नही राजेश मैं बाद में करूंगा तुम करो।

अभी दुकान में ग्राहक है।

माधव वहा से चला गया।

सविता ने राजेश के लिए प्लेट में भोजन परोशनी लगी।

राजेश _बस बस चाची, इतना नही खा पाऊंगा।

सविता _अरे तुमने तो खाना शुरू ही नहीं किया बस बस करने लगे। चलो शुरू करो।

राजेश ने खाना शुरू किया?

सविता _बताओ कैसा बना है भोजन?

राजेश _वाह चाची सच में भोजन बहुंट स्वादिष्ट बना है।

तभी चाचा जी आपके हाथ का भोजन खा खा कर मोटे हो गए हैं।

सविता हसने लगी,,,

सविता, व्यंजन परोसने के लिए जैसे ही झुकी उसकी साड़ी की पल्लू नीचे गिर गया।

उसकी बड़ी बड़ी मस्त चूचे राजेश के आंखो के सामने आ गया।

राजेश की नजर उसकी चूचों पर गया।

सविता ने देखा की राजेश उसकी चूचों को देख रहा है। वह तुरंत अपनी पल्लू ठीक की, वह सरमिंदगी महसूस करने लगी।

राजेश भी असहज महसूस करने लगा।

राजेश _बस बस चाची, इतना नही खा पाऊंगा।

अरे थोडा और लो।

भोजन परोस कर जब कुछ लाने सविता कीचन में गई।

राजेश उसे पीछे से देखा,,

मन में कहा चाची कितनी सुंदर है?

सविता के पास पुरुषो को आकर्षित करने वाली सभी चीजे थी।

पतली कमर, कजररी आंखे, गोरे गाल, बड़ी बड़ी चूचियां, लंबी बाल, गहरी नाभी, उठे हुवे चूतड। जो किसी भी मर्द को अपनी ओर आकर्षित करने में सक्षम था। अभी वह 37 वर्ष की थी।

सविता अपनी साड़ी की पल्लू को अच्छे से अपनी क़मर में खोच ली ताकि वह फिर से न गिर जाए और उसे सरमिंदगी न उठाना पड़े।

सविता जब कीचन से लौटी, उसकी हाथो में रसमलाई थी।

सविता _लो इसे टेस्ट करो।

राजेश _वाउ रसमलाई।

राजेश ने रसमलाई टेस्ट किया।

उसे बहुत पसंद आया।

सविता _कैसा है?

राजेश ने अपनी उंगली से इशारा कर कहा बड़ा स्वादिष्ट।

भोजन करने के बाद राजेश ने कहा,,

वाह चाची आपके हाथो में तो जादू है सच में भोजन बड़ा स्वादिष्ट बना था, मजा आ गया।

सविता _मैं तो कह रही थी कि तुम रात का भोजन रोज यहीं कर लिया करना।

राजेश _चाची कहीं मैं भी चाचा जी की तरह मोटा हो गया तो,,

सविता _अरे तुम तो अखाड़े पे जाते हो न अभ्यास करने, फिर मोटे कैसे हो जाओगे?

राजेश _अखाड़े पर मुझे डबल मेहनत करना पड़ेगा।

सविता _, कर लेना।

राजेश _शुक्रिया चाची, भोजन के लिए, अब मैं चलता हूं। ताई जी बोली थी जल्दी आ जाना।

सविता _लगता है तुम अपने ताई के बड़े आज्ञाकारी हो।

राजेश _ताई है ही इतनी अच्छी, उसका कहना मानना पड़ेगा ही।

सविता _और मैं बुरी हूं।

राजेश _आप भी बहुत अच्छी है।

अच्छा चाची अब मुझे इजाजत दो।

सविता _ठीक है राजेश, पर घर आते जाते रहना, जब भी मन करे आ जाना।

राजेश _ठीक है चाची।

राजेश घर से निकल कर दुकान पर गया।

माधव _अरे बेटा, भोजन हो गया।

राजेश _हा चाचा जी। चाचा जी आपने बिलकुल सही कहा चाची बहुत अच्छा भोजन बनाती हैं। मैने कुछ ज्यादा ही खा लिया, ठीक से चला नही जा रहा।

माधव हसने लगा।

अरे भाई, थोड़ी देर टहल लो। पच जायेगा।

राजेश _अच्छा चाचा जी अब मैं चलता हूं ।

माधव _ठीक है बेटा।

राजेश घर पहुंचा,

पदमा ने दरवाजा खोला,

पदमा _आ गया बेटा, अपने चाची के यहां से।

राजेश _हा ताई।

ताई _जाओ बेटा अपने कमरे में जाकर आराम करो।

राजेश अपने कमरे में चला गया।

घर में सभी लोग भोजन कर लिए थे। पुनम बर्तन साफ़ कर रही थी।

बर्तन धोने के बाद पुनम राजेश के कमरे में दूध लेकर पहुंची।

पुनम _देवर जी सो गए क्या?

राजेश _नही भौजी, आ जाओ।

पुनम कमरे के अन्दर गई।

पुनम _लो देवर जी दूध पी लो।

राजेश _भौजी आज तो खाना कुछ ज्यादा हो गया है दूध पीने का मन नही कर रहा।

पुनम _लगता है चाची ने बड़ा स्वादिष्ट खाना बनाया था ।

राजेश _हा, चाची बड़ा स्वादिष्ट खाना बनाती है!

पुनम _मतलब मैं अच्छा नही बनाती।

राजेश _आप भी बहुत अच्छा बनाती हो।

ओ क्या है न की चाची ने जबरदस्ती ठूस ठूस कर खिला दिया।

पुनम _लो दूध पी लो भोजन को पचाएगा ये दूध।

राजेश _पेट में तो बिलकुल भी जगह नहीं है।

पुनम _अच्छा, बाद में पी लेना मैं रख देती हूं।

राजेश _भौजी, वैसे दूध किसकी है? गाय की या,,

पुनम शर्मा गई।

पुनम _देवर जी, कल खुशी में एक मां की दूध पिला दी थी।अब रोज रोज नही मिल सकता मां की दूध।

राजेश _पर अब हमें केवल मां कि ही दूध पीना है,,,

गाय की नही।

पुनम _तुम भी न देवर जी दिन ब दिन बिगड़ते जा रहे हो।

राजेश _भौजी, जब मां का दूध उपलब्ध हो तो, बच्चे को गाय का दूध नहीं पिलाना चाहिए।

पुनम _मतलब तु छोटा बच्चा है।

राजेश _हां मैं तुम्हारा, छोटा मुन्ना हूं।

पुनम _ठीक है, लाती हूं, पर ये बात किसी से कहोगे तो नही।

राजेश _नही भौजी ऐसी बात भी किसी को बताई जाती है क्या?

पुनम कमरे से जाने लगी,,

राजेश _अरे भौजी कहा चली?

पुनम _दूध लाने, तुम्ही ने तो कहा मां की दूध ही पीऊंगा, वही लाने जा रही, पुनम शर्मा ते हुए बोली।

राजेश _अरे भौजी, मुझे अपना छोटा मुन्ना समझ कर मुंह से पिला दो।

पुनम _हाय दईया, ये मुझसे नही हो पाएगा।

राजेश _क्यू? मैं अपनी आंखे बंद कर के पीऊंगा। कुछ नही देखूंगा।

पुनम _नही, मुझे तुम पर भरोसा नहीं कहीं आंखे खोल दिया तो,,

राजेश _अगर मूझपे भरोसा नहीं तो मेरी आंखों में पट्टी बांध दो।

पुनम _कोइ सरारत तो नही करोगे।

राजेश _नही करूंगा भौजी, कसम से।

पुनम _ठीक है, अपना रुमाल दो मैं बांध देती हूं तुम्हारी आंखों में।

राजेश ने रुमाल दे दिया।

पुनम ने रुमाल से राजेश की आंखो में पट्टी बांध दिया। ताकि वह कुछ देख न सके।

उसके बाद कमरे का दरवाजा बंद कर दिया कोइ आ न जाए।

अपन ब्लाउज का बटन खोल दिया।

उसके बड़े बड़े स्तन जो दूध से भरा था आज़ाद हो गया। पर राजेश के मुंह में पट्टी बंधे होने के कारण देख नही पा रहा था।

पुनम ने अपना एक चुचक राजेश के मुंह में डाल दिया, राजेश उसकी चुचक को मुंह में भर कर चूसने लगा।

पुनम अपना स्तन दबाती, दूध फौवारे के साथ बाहर निकलकर सीधे राजेश के पेट में जाने लगा। राजेश दूध गटक गटक कर पीने लगा।
 
राजेश की आंखो पे पट्टी बांध कर दूध पिलाते समय, पुनम अपनी शरीर में उत्तेजना महसूस करने लगी। राजेश अपनी ओंठ पे पुनम की चूचक को दबाकर दूध खींचने लगा। जिससे पुनम गर्म होने लगी।

उसकी शरीर कपकापने लगा, उसकी बुर में पानी भरने लगा।

वह किसी तरह अपने अपने मुंह से कामुक सिसकारी को रोके रखी। पर ज्यादा देर तक रोक पाना मुस्कील था उसने राजेश के मुंह से अपनी चूची को छुड़ाया और अपने कमरे में भाग गई।

कमरे में जाकर तेज़ तेज़ सांस लेने लगी।

उसकी चड्डी बुर की पानी से गीली हो चुकी थी।

उधर पुनम के जाने के बाद, राजेश ने अपनी पट्टी खोल कर देखा, पुनम उसे कहीं दिखाई नही दी।

राजेश मुस्कुराने लगा।

उधर पुनम रात में ठीक से सो नहीं पाई उसे चुदाने की बड़ी ईच्छा हो रही थी।

वह अपनी बुर में उंगली डाल कर, अपनी पानी निकाल कर ख़ुद को शांत की।

अगली दिन सुबह राजेश अखाड़ा पे चला गया वहा अभ्यास के साथ कबड्डी की भी तैयारी की। बिरजू राजेश के खेल से प्रभावित huwa उसे लगने लगा की अगर प्रतियोगिता जितनी है तो राजेश का टीम में होना जरूरी है।

प्रातः 11बजे गांव में ग्राम सभा रखा गयाथा।

पंचायत में लोगो की काफी भीड़ थी।

सचिव ने सभा में बताया की जितने लोगो ने आवास के लिए आवेदन लगाया था सभी का आवास स्वीकृत हो गया है। सचिव ने लोगो का नाम पढ़के सुनाया जिनका आवास स्वीकृत huwa था, उन लोगो को जल्द से जल्द अपना बैंक का खाता नंबर जमा करने कहा, ताकि आवास की राशि विभाग द्वारा खाता में भेजा जा सके।

सरपंच ने कहा की यह सब राजेश की वजह से हो सका हेम उसे ग्राम पंचायत की ओर से सम्मानित किया जाना चाहिए।

लोगो ने राजेश को बुलाने के लिए किसी को पदमा के घर भेजा।

राजेश उस समय पढ़ाई कर रहा था।

पदमा को बताया गया की राजेश बाबू को ग्राम पंचायत की ओर से सम्मानित करने के लिए बुलाया है, पदमा इस बात की जानकारी राजेश को दी।

राजेश उस आदमी के साथ ग्राम पंचायत भवन के लिए निकल गया।

वहा पहुंचने पर सभी लोग राजेश बाबू जिंदा बाद की नारे लगाने लगे।

सरपंच _आओ राजेश यहां बैठो, अपनी बाजू वाली कुर्सी पर राजेश को बैठने कहा।

राजेश ने सभी गांव वाले को प्रणाम किया फिर कुर्सी पर बैठ गया।

सरपंच _राजेश, तुमने असंभव काम को संभव कर दिखाया। तुम नही जानते की तुमने गांव वालो के लिए कितना बड़ा कार्य किया है। हम तुम्हे सम्मानित करना चाहते है।

सरपंच ने राजेश को फूलो का माला पहनाया और एक प्रतीक चिन्ह भेट की, गांव वालो की ओर से उसके कार्य के लिए धन्यवाद कहा।

एक बार फिर से गांव वालो। ने राजेश बाबू जिंदा बाद का नारा लगाने लगे।

सरपंच ने उन्हे शांत कराया।

एक पंच ने खड़ा होकर कहा, राजेश को सिर्फ सम्मान ही नही बल्कि उसे एक पद भी दिया जाना चाहिए, ताकि गांव के लोगो को उसके सुझबुझ का लाभ मिलता रहे। सभी लोगो ने उस पंच का समर्थन किया।

लोगो से राय लेकर सरपंच ने राजेश को गांव का सलाहकार नियुक्त किया।

सरपंच _आज से राजेश गांव का सलाहकार नियुक्त किया जाता है, गांव का कोई भी कार्य, राजेश की सलाह से ही किया जाएगा।

सभी लोगो ने खुब तालिया बजाई।

सचिव ने राजेश को सभा को संबोधित करने के लिए आमन्त्रित किया।

राजेश ने कहा _गांव की लोगो की मदद करना तो मेरा कर्तव्य है। इसके लिए कोइ पद की आवश्यकता नहीं थी। फिर भी आप सभी की भावनाओ को समझते हुवे मैं यह पद स्वीकार करता हूं।

आप लोगो ने जो मुझपर विश्वास जताया है उसके लिए आप सभी का शुक्रिया। मैं आप लोगो को विश्वास दिलाना चाहता हूं कि मैं पूरे निःस्वार्थ भाव से गांव की भलाई के लिए कार्य करूंगा। वही करूंगा जो गांव के हित में हो।

हमारे गांव के लोगो को काफी समय से असुविधा में जीवन यापन करने मजबूर हैं। मैं आप लोगों को विश्वास दिलाना चाहता हूं की गांव की सारी समस्या का समाधान अब दूर नहीं है।

यह गांव आगे चलकर पूरे जिले में माडल बनकर उभरे गा। यह मैं आप लोगो को वचन देता हूं।

सुरज पुर की चर्चा राजधानी में भी होगी। पर इसके लिए आप सभी का एक जुट रहकर साथ चलना जरूरी है।

सभी लोगो ने राजेश के भाषण पर खुब तालिया बजाई और राजेश बाबू जिंदाबाद के नारे लगाए।

सभा समाप्त होने के बाद सभी लोग राजेश से व्यक्तिगत मिले और उसे अपने घर आने के लिए आमन्त्रित किया।

ग्राम सभा से आने के बाद राजेश, फिर से तैयारी में लग गया, आई ए एस की प्रारंभिक परीक्षा पास थी।

कुछ दिन राजेश अपने पढ़ाई पर ही फोकस किया।

इधर पुनम राजेश को फिर से अपनी चूची पिलाने की हिम्मत न कर सकी।

जब पदमा, पुनम को राजेश को दूध दे आने को बोलती, पुनम बहाना बना देती, पदमा ही राजेश के रूम में दूध लेकर जाती।

एग्जाम पास होने के कारण राजेश भी अपनी भौजी से छेड़ छाड़ बंद कर सिर्फ पढ़ाई में ही फोकस कर रहा था।

आई ए एस परीक्षा केंद्र राज्य में सिर्फ दो जगह ही बनाया गया था। एक राजधानी और दूसरा बड़ा शहर, राजेश को कल शहर जाना था एग्जाम देने।

उसको शेखर का फोन आया।

शेखर _कैसे हो बेटे?

राजेश _मैं ठीक हु पापा, आप लोग कैसे है?

शेखर _हम भी, अच्छे है बेटे। तुम्हारा आई ए एस की तैयारी कैसी चल रही है? परसो तुम्हारा प्रारंभिक परीक्षा है न?

राजेश _हा पापा बस उसी की तैयारी में लगा हूं।

कल शहर के लिए निकलना है। परसो एग्जाम जो है?

एक दिन पहले ही पहुंचना होगा?

शेखर _बेटे तुम्हे पैसों की आवश्यकता होगी, मैने तुम्हारे अकाउंट में फोट पे से पैसा ट्रांसफर कर दिया है?

राजेश _शुक्रिया पापा।

शेखर _हा बेटा, और तुम हम लोगो की बिल्कुल चिन्ता न करना और अपनी पढ़ाई में फोकस करना, तुम्हारी मां को तुमसे बहुत उम्मीद है बेटा।

राजेश _जानता हु पापा। मैं आप लोगो को निराश नहीं करूंगा।

शेखर _गुड बेटा, अच्छा अब मैं अपना फोन रखता हूं।

राजेश _ठीक है पापा।

रात में भोजन करते समय, राजेश ने भुवन और पदमा को बताया की वह परीक्षा हेतु कल ट्रैन से शहर निकलेगा, क्यू की शहर यहां से काफी दूर है इसलिए एक दिन पहले ही पहुंचना होगा।

भुवन _राजेश, मैं भी तुम्हारे साथ चलता हूं।

राजेश _भुवन भईया, आप क्या करेंगे वहा? मैं चला जाऊंगा वैसे भी मैने सिर्फ अपने लिए ही टिकट बूक करा रखी है।

पदमा _बेटा वापस कब आएगा।

राजेश _एग्जाम के दूसरे दिन सुबह आ जाऊंगा, ताई।

दूसरे दिन सुबह राजेश नहाधोकर तैयार होता है। पुनम उसके लिए भोजन तैयार की थी। राजेश और भुवन दोनो भोजन करते हैं।

भोजन करने के बाद, राजेश शहर जाने के लिए अपना बैग निकाल लेता है सभी जरूरी चीजे रख लेता है?

जाते समय वह पदमा से आशीर्वाद लेता है।

पदमा _खुश रह बेटा, भगवान तुम्हे कामयाब करे।

ये रख लो बेटा, तुम्हारे काम आयेगी

पदमा ने राजेश को पैसे दिए।

राजेश _ताई इसकी आवश्यकता नहीं है पापा ने पैसे भेजे है?

पदमा _फिर भी रख लो काम आएगा।

भुवन _हा राजेश रख लो।

राजेश मना न कर सका।

राजेश को लक्षमण पुर स्टेशन छोड़ने के लिए भुवन अपनी बाइक लेकर साथगया।

रास्ते में जब जा रहा था तब, दिव्या अपनी कार से लक्षमण पुर जा रही थी।

दिव्या _अरे राजेश तुम लोग कहा जा रहे हो?

राजेश _अरे दिव्या जी आप मै लक्षमण पुर जा रहा हूं, स्टेशन। वहा ट्रैन से शहर निकलूंगा।कल मेरा आई ए एस का एग्जाम है न,

दिव्या _ओह, मैं भी लक्षमण पुर जा रही हूं। मैं तुम्हे कार में छोड़ दूंगी आओ कार में बैठो।

राजेश _दिव्या जी भुवन भईया छोड़ने जा रहे है न, आप क्यू तकलीफ,,,

दिव्या _अरे इसमें तकलीफ की क्या बात, मैं भी तो लक्षमण पुर जा रही तो स्टेशन छोड़ दूंगी।

भुवन भईया, मैं क्या गलत कह रही हूं?

भुवन _राजेश, दिव्या जी ठिक कह रही है? चले जाओ साथ में।

भुवन ने अपना बाइक रोक दिया।

दिव्या ने ड्राइवर से कार रोकने कहा।

राजेश बाइक से उतर कर, कार में बैठ गया।

भुवन _अच्छा राजेश, मैं घर निकलता हूं। परसो सुबह फोन कर देना, मैं तुम्हे लेने स्टेशन पहुंच जाऊंगा।

राजेश _ठीक है भईया।

भुवन वापस चला गया।

दिव्या ने ड्राइवर से चलने को कहा।

राजेश _दिव्या जी आप लक्षमण पुर किसी काम से जा रही है क्या?

दिव्या _मैं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जा रही हूं। वहा चिकित्सा अधिकारी का पद खाली था तो मैंने ज्वाइनिंग कर लिया।

राजेश _ओह, बधाई हो दिव्या जी, अब तो पूरे विकासखंड की स्वास्थ्य की जिम्मेदारी आपके कंधो पर है !

दिव्या _हा राजेश, पता नही मैं यह जिम्मेदारी अच्छे से निभा पाऊंगी की नही।

राजेश _दिव्या जी, मुझे पूरा यकीन है आप यह जिम्मेदारी बहुत अच्छे से निभा पाएंगी। एक डाक्टर का जैसा व्यवहार होना चाहिए आपमें वो सब कुछ है।

दिव्या _अच्छा ऐसा क्या देखा मुझमें ?

राजेश _आपका ह्रदय, कितना सरल और संवेदन सिल है, आप यहां की राज कुमारी है। फिर भी आप लोगो की भावनाओ को समझती हो। सबसे प्रेम पूर्वक व्यवहार करती हो। आपके व्यवहार में झलकता ही नहीं है कि आप एक राज परिवार से हैं।

दिव्या _बस बस कुछ ज्यादा ही हो गया।

इतनी भी अच्छी नहीं हूं मैं।

वैसे तुम इतने दिनो तक कहा थे। बहुत दिनो से हवेली आए ही नहीं।

राजेश _हवेली में आने के लिए परमिशन लेना पड़ता है दिव्या जी और वैसे भी बिना काम के किसी को हवेली में घुसने भी नही दिया जाता, तो तुम ही बताओ मैं कैसे आ सकता हूं?

दिव्या जी _हूं, तुम्हारा भी कहना सही है। वैसे तुम्हारी निसा का क्या huwa, फोन वागेरा आया था उसका।

राजेश _नही, दिव्या जी, वो मुझे भुल चुकी है।

दिव्या _वो नही की तो तुम ही कर लेते।

राजेश _मुझमें उससे बात करने की हिम्मत नहीं है दिव्या जी।

दिव्या _अरे तुम्हारे सामने तो बड़े बड़े गुंडे, भी टिक नही सकते और एक लडकी से बात करने की हिम्मत नहीं। हु ,,,दिल का मामला है, इसलिए।

ड्राइवर गाड़ी को स्टेशन की ओर ले जाना।

ड्राइवर ने गाड़ी को रेलवे स्टेशन की ओर ले गया।

दिव्या _लो आपका स्टेशन आ गया।

वैसे वापसी कब हो रही है।

राजेश _परसो सुबह आ जाऊंगा।

दिव्या _वैसे राजेश तुम्हे कोइ काम हो तो हवेली की जगह मुझसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भी मिल सकते हो। मेरा मोबाइल नंबर रख लो, जब आओगे तो काल कर लेना।

राजेश _ठीक है दिव्या जी।

राजेश को बाई करके दिव्या, स्वास्थ्य केंद्र निकल गया।

कुछ देर में राजेश का ट्रैन भी आ गया, जिसमे बैठ कर वह शहर के लिए निकल पड़ा।

शहर पहुंचते उसे 8घण्टे का समय लग गया। वह शहर में एक लाज किराए पर लिया। दूसरे दिन 10बजे से एग्जाम था, समय पर परिक्षा केंद्र पहुंच गया।

3घण्टे परिक्षा दिलाने में निकल गया, वहा से निकल कर एक ढाबे में भोजन किया, फिर अपने लाज में आकार आराम किया। शाम को वह शहर में थोडा टहला फिर स्टेशन के लिए निकल गया।

रात में 8बजे वह फिर स्टेशन के पास स्थित ढाबे में भोजन किया फिर वह अपने ट्रैन का इन्तजार करने लगा।

रात को 10बजे उसका ट्रैन निकला, ट्रैन जब लक्ष्मण पुर स्टेशन पहुंचा तो सुबह का 6बज चुका था।

भुवन राजेश को लेने पहुंच गया था।

भुवन _अरे राजेश मैं यहां हूं। कैसा गया एग्जाम।

राजेश _बहुत अच्छा गया भईया।

भुवन _चलो चलते है।

राजेश और भुवन दोनो घर के लिए निकल पड़े।घर पहुंचने के बाद

राजेश ने पदमा का पैर छूकर प्रणाम किया।

पदमा,_आ गया बेटा, कैसा बना तुम्हारा पेपर।

राजेश _बहुत अच्छा ताई, आपके आशीर्वाद से।

पदमा _बेटा तुम्हारी मेहनत और लगन को देख कर कह सकती हूं की तुम कलेक्टर जरूर बनोगे।

जाओ बेटा अब नहा धोकर तैयार हो जाओ, फिर नाश्ता करना। बहु नाश्ता बना रही है।

राजेश _ठीक है ताई।

पदमा _भुवन बेटा तु भी नहाया नही है जा नहाकर तु भी तैयार हो जा, तुम्हे खेत जाना है ।

भुवन _ठीक है मां।

भुवन और राजेश दोनो नहाने के लिए घर के पीछे बाड़ी में चले गए।

दोनो बार चालू कर नहाने लगे।

भुवन _राजेश, बिरजू कह रहा था की तू भी कबड्डी की प्रैक्टिस कर रहा है, वे लोग तुम्हारे खेल से बहुत प्रभावित है, कह रहे थे की तुम्हे टिम में शामिल करेंगे।

राजेश _ये तो उन लोगो का बड़प्पन है, भुवन भईया।

भुवन _वैसे तुमने बहुत अच्छी बॉडी बनाई है गांव में ऐसा बॉडी किसी के पास नही, बिरजू का है पर वह भी तुम्हारे सामने नही टिकता।

भुवन _वैसे राजेश तुम इस गांव के सलाहकार हो। टिम का चयन भी तुम्हारे सलाह से होगा।

पदमा _अरे बहु, भुवन ने अपना टावेल यहीं भुल गया, जाओ उसे टावेल दे आओ।

पुनम _जी मां जी।

पुनम टावेल लेकर बाड़ी में गया।

पुनम _अजी तुम तो अपना टावेल घर में ही भुल आए,।

भुवन और राजेश दोनो साबुन लगा रहे थे।

भुवन _अरे पुनम अब आई हो तो एक काम कर दो, मेरे पीठ पर थोडा साबुन मल दो, बड़ी खुजली हो रही है लगता है मैल जम गया है।

पुनम _साबुन अपनी साड़ी की पल्लू क़मर पर खोंच ली और भुवन की पीठ पर साबुन लगाने लगी।

भुवन _अरे सुनो, राजेश का भी पीठ पर साबुन लगा दो, अब उसके पीठ पर तो साबुन लगाने वाला है नही कोइ। पता नही कब का मैल जमा होगा।

राजेश _अरे नही भुवन भईया, भौजी को क्यों तकलीफ दे रहे हो।

कपड़ा है न मेरे पास रगड़ लूंगा।

भुवन _अरे भई तुम शर्मा क्यू रहे हो, तुम्हारी भौजी है इतनी सेवा नही करेगी अपने देवर की।

पुनम ने भुवन की पीठ पर साबुन लगाने के बाद, राजेश की पीठ पर साबुन लगाने लगी।

भुवन _वैसे राजेश तुम्हारी भौजी बड़ी अच्छी मालिश करती है।

अगर कभी थकान लगे तो, पुनम से मालिश करा लिया करो।

राजेश _भुवन भईया, मैं तो मेहनत का काम करता नही, फिर मालिश की आवश्यकता मुझे क्यू होगी?

भुवन _अरे सुबह अखाड़े पे जाता है, कबड्डी की तैयारी भी करता है।

शरीर पे थकान तो आता ही होगा।

राजेश _भईया, मालिश की आवश्यकता तो नही है पर हा ताकत बनाए रखने के लिए दूध मिल जाता तो,,

भुवन _अरे हमारे घर दूध की कमी थोड़ी है जितना चाहे दूध पिया करो।

क्यू भई पुनम, तुम राजेश को पीने के लिए दूध नहीं देती क्या?

पुनम शर्म से पानी पानी हो गई।

पुनम _अजी देवर जी को पीने के लिए एकदम ताजा दूध चाहिए।

अब रात को ताजा दूध कहा से लाऊंगी।

पुनम _हा भाई राजेश, अब रात में ताजा दूध कहा से मिलेगा।

तुम्हे शाम के समय का दूध से ही काम चलाना पड़ेगा। ग्वाला शाम को ही आता है दूध निकालने।

वैसे सुमन अगर ताजा दूध का जुगाड कर सकती हो तो कर दिया करो, तुम्हे तो दूध निकलना आता ही है।

पुनम _अगर आप कह रहे हैं तो सोंचूंगी जी।

पुनम,राजेश की ओर देखकर मुस्कुराने लगी। अपनी क़मर मटकाते वहा से चली गई।

राजेश और भुवन दोनो नहाने के बाद नाश्ता किए। नाश्ता करने के बाद जब भुवन खेत जाने लगा तो राजेश ने कहा,,,

राजेश _भुवन भईया, मैं भी आपके साथ खेत चलूंगा। एग्जाम की तैयारी के कारण मैं भी काफी दिनो से कहीं घूमने नही गया। आपके साथ जाऊंगा तो मेरा भी माइंड फ्रेश हो जायेगा।

भुवन _ठीक है राजेश, चलो।

दोनो खेत चले गए।

खेत में जाने के बाद,,,

भुवन _राजेश तुम झोपड़ी के खाट पर आराम करो, मैं मजदूरों के साथ, कर रहा हु।

राजेश _अरे भुवन भईया, मुझे भी कोई काम बता दो, यहां बैठा, बैठा बोर हो जाऊंगा।

अच्छा चलो तुम भी वही पर बैठा रहना,

राजेश को खेत के मेड पर लगा पेड़ के छाव में बिठा कर ,

भुवन मजदूरों के साथ गन्ने की कटाई करने लगा।

वहा पर मौजूद मजदूरन राजेश से बात चीत करने लगे,,

मजदूरन _राजेश बाबू, आप ने हमारा आवास पास करा कर हम गांव वालो पर बहुत उपकार किया है। हम आपका एहसान कैसे चुकाएंगे?

राजेश _अरे काकी, इसमें एहसान की क्या बात है ये तो मेरा फर्ज है।

सरला काकी _ये तो तुम्हारा बड़प्पन है बेटा।

वैसे तुम यहां खेत काहे चले आए।

राजेश _अरे काकी काफी दिन हो गए खेत आए, इसलिए घूमने चला आया।

भुवन _अरे राजेश लो गन्ना खाओ, खा कर देखो हमारे खेत का गन्ना कितना मीठा और रसीला है।

गन्ने का एक टुकड़ा करके राजेश को देते हुए कहा।

राजेश ने गन्ना अपने दातों से छीलकर उसे खा कर देखा।

राजेश _वाह भुवन भईया, गन्ना गन्ना बहुत रसीला और मीठा है।

कुछ देर बाद, भुवन भईया लाओ ये गन्ना काटने का औजार मुझे दो, मुझे भी गन्ना काटना है।

केशव _अरे राजेश बेटा तुम काहे तकलीफ उठा रहा है कहीं हाथ वगैरा कट गया तो। जाओ झोपड़े में जाकर आराम करो।

भुवन _हा राजेश, बापू ठीक कह रहा है।

राजेश _भुवन भईया, मुझे भी सिखाओ गन्ना काटना।

भुवन _अच्छा, लो तुम भी अपना ईच्छा पूरा कर लो भाई।

राजेश भी उन लोगों के साथ गन्ना काटने लगा।

दोपहर में पदमा खाना ले कर आई।

वह खेत में राजेश को गन्ना काटते देखी।

पदमा _अजी, ये क्या तुमने राजेश को क्यू काम में लगा दिया।

केशव _अरे भाग्यवान मैने तो राजेश को मना किया था पर उसने कहा की उसे भी गन्ना काटना सीखना है।

पदमा _अरे राजेश बेटा, ये गन्ना काटना छोड़ो चलो भोजन कर लो भूख लगी होगी।

राजेश _अरे ताई, गन्ना काटने में मजा आ रहा है थोडा और काट लेने दो।

भुवन _राजेश, चलो भोजन का समय हो गया है। पहले भोजन कर लो। मजदूरों को भी भोजन करने कहा,,

भुवन, राजेश और केशव पदमा के साथ झोपड़ी में आ गए। वहा भोजन किए। कुछ देर आराम किए, आधा घंटा आराम किए फिर सभी गन्ना काटने लगे।

शाम के समय सभी मजदूर अपने घर चले गए, राजेश और भुवन और पदमा भी अपने घर चले गए।

केवल केशव ही खेत की रखवाली करने, खेत पर रह गया था।

रात में भोजन करते समय,

भुवन _मां कल गन्ने को बेचने के लिए शक्कर कारखाना ले जाना है।

पदमा _पर बेटा कल तो मजदूरों की छुट्टी है न। ट्रैक्टर में गन्ने को डालने के लिए मजदूरों की जरूरत पड़ेगी।

भुवन _हां वो तो है मां।

राजेश _ताई, मैं कल भी खेत चला जाऊंगा, भुवन भईया की मदद करने।

और ताऊ जी तो रहेंगे ही।

भुवन _तब तो काम बन जायेगा मां, राजेश के मदद करने से।

अगले दिन सुबह नाश्ता करने के बाद राजेश और भुवन ट्रैक्टर लेकर खेत निकल गए, वहा केशव, राजेश और भुवन तीनो मिलकर गन्ने को ट्रैक्टर की ट्राली में जितना आ सकता था डालकर रस्सी से बांध दिया।

इधर पदमा पड़ोसी के यहां, बच्चे का जन्मोत्सव कार्यक्रम था तो वे वही चली गई।

वहा पर केशव का दोस्त का नातीका जन्मदिन था।

केशव का दोस्त पदमा से कहा _अरे भौजी, केशव कहा है? आया नही।

पदमा _जेठ जी वो तो खेत गया है।

केशव का दोस्त _भौजी, अपने दोस्त के यहां कार्यक्रम है और आज खेत चला गया, ये क्या बात हुई। क्या यहीं दोस्ती है।

पदमा _अरे जेठ जी, आप नाराज न हो मैं अभी खेत जाऊंगी तो तुम्हारे दोस्त को भेज दूंगी।

केशव का दोस्त _भौजी, केशव से कह देना अगर वह नही आया तो हमारी दोस्ती खत्म।

पदमा _जेठ जी मैं उनको भेज दूंगी, वो जरूर आयेंगे आप नाराज न हो।

इधर, भुवन गन्ने को लेकर शक्कर कारखाना लेकर चला गया।

राजेश और केशव खेत में पानी पलाने लगे।

कुछ देर बाद पदमा खेत पहुंची।

पदमा _अजी तुम्हारे दोस्त ने तुम्हे बुलाया है अभी तुरंत, उसके घर उसके नाती का जन्म उत्सव का कार्यक्रम है न, तो वह तुम्हारे न आने से बड़ा नाराज है, तुम उसके घर हो आओ।

केशव _ठीक है भुवन की मां, मैं हो आता हूं। न जाने पर उनका नाराज होना लाजिमी है।

भुवन अपने दोस्त के घर के लिए निकल गया।

पदमा _अरे राजेश बेटा चलो तुम भोजन कर लो।

राजेश भोजन करने लगा।

भोजन कर कुछ देर आराम करने के बाद।

पदमा और राजेश दोनो, खेत में कुछ काम करने लगे। घर जाने का समय होने वाला था कि

पदमा _अरे राजेश बेटा तुम्हारे ताऊ जी अभी तक आया क्यू नही है जरा तुम्हारी भौजी को फोन कर पूछो।

राजेश _जी ताई

राजेश ने पुनम को फोन लगाया।

राजेश _भौजी लो ताई से बात करो।

पदमा ने पुनम से बात की,

पदमा _बहु, तुम्हारे ससुर जी अपने दोस्त के घर जन्मुत्सव कार्यक्रम में गया था। अभी तक आया नही है जरा पता करो,,

पुनम _मां जी, ससुर जी तो अपने कमरे में सो रहे है।

पदमा _क्यू, क्या huwa उसको?

पुनम _अरे मां जी ससुर जी कह रहे थे की उसके दोस्त ने उसको ज्यादा पिला दिया, वो ठीक से चल नहीं पा रहे है, वह घर में आकार सो गया है।

पदमा _क्या? लो जिसका डर था वही huwa

राजेश _, क्या huwa ताई?

पदमा _बेटा तुम्हारी भौजी कह रही थी की तुम्हारे ताऊ जी, नसे में है वह अपने कमरे सो गया है? लगता है उसके दोस्त ने उसे शराब पिला दी है।

राजेश _अरे ताई आप चिन्ता न करे नशा उतरने पर ताऊ जी खेत आ जायेंगे।

अभी तो समय है।

इधर अचानक से मौसम में बदलाव आया, तेज़ हवा चलने लगी, चारो तरफ काली घटाएं छाने लगी।

पदमा _अरे बेटा, मौसम अचानक से बिगड़ रहा है। लगता है बारिश होने वाली है।

बारीश शुरू हो जाए उससे पहले जो मूंगफली सूखने के लिए फैलाया गया है। वह बारिस में बह जाएगा। उसे इकट्ठा कर बोरी में भर कर रखना पड़ेगा।

राजेश और पदमा दोनो मूंगफली इकट्ठा करने लगे।

वे मूंगफली इकट्ठा कर पाते उससे पहले ही बारिश शुरू हो गई और जब मूंगफली इकट्ठा कर बोरी में भरकर रखते वे पूरी तरह भीग चूके थे।

तेज़ हवाएं चल रही थी। बिजली कड़क रही थी और तेज़ बारिश होने लगी।

पदमा और राजेश दोनो झोपड़ी के अंदर खड़े होकर बारिश के बंद होने का इन्तजार का इन्तजार करने लगे।

ताकि बारिश रुकने पर वे घर जा सके।

पर बारिश था की रुकने के बजाए और तेज़ हो रहा था। ठंडी ठंडी तेज़ हवाएं चलने लगी और जोर जोर से बादल गरज रहा था। ऐसा लग रहा था की बिजली झोपड़े में ही न गीर जाए।

ऐसे में घर जाना काफी जोखिम था।

पदमा _बेटा, काफी ठंडी ठंडी हवाएं चल रही है, शरीर कपकपाने लगा है झोपड़ी का दरवाजा बंद कर दे। और रोशनी के लिए कंडिल जला दे।

राजेश _जी ताई।

राजेश ने झोपड़ी का दरवाजा बंद कर दिया और कंडील जला दिया।

उन्हे कपकपी से राहत मिली।

इधर बारिश था की रुकने का नाम ही नही ले रहा था।

उन्हे बारिश के रुकने का इन्तजार करते करते रात के 8बज गए। वे पूरी तरह भीग चूके थे। बाहर ठंडी ठंडी तेज़ हवाएं चल रही थी, जिससे झोपड़ी के अंदर भी ठंडकता बड़ने लगी।

पदमा _राजेश बेटा, लगता है ये बारिश नही रुकने वाली, ये तो रुकने के बजाए और बड़ रही है।

लगता है हमे आज रात झोपड़ी में ही गुजारनी होगी।

अब तो भूख भी लगने लगी है।

कुछ देर और इंतजार करने के बाद जब लगा की अब तो रात भी हो चुकी ऐसे मौसम में घर जाना अब खतरे से खाली नहीं,,

पदमा _राजेश बेटा, अब तो घर जा पाना मुश्किल लग रही है। तुम एक काम करो तुम्हारा कपड़ा भीग गया है। उसे उतारकर, उस थैले में तुम्हारे ताऊ जी का कपड़ा होगा उसे पहन लो।

राजेश ने थैला चेक किया उसमे केशव का धोती और कुर्ता था ।

राजेश _ताई इसमें तो ताऊ जी का धोती और कुर्ता है।

पदमा _बेटा, तुम अपना गीले कपड़े उतार कर ये कपड़े पहन लो।

गीले कपड़ों में ज्यादा देर तक रहोगी तो तुम बीमार पड़ जाओगे।

राजेश _ताई, तुम भी तो पूरी तरह भीग चुकी हो, ये कपड़े तुम पहन लो, मुझे कुछ नहीं होगा।

पदमा _अरे बेटा क्यू जिद कर रहा है? अपने ताई का कहना नही मानोगे।

राजेश _ताई तुम भी देखो ठंड से कांप रही हो, अगर गीले कपड़े नही उतारी तो रात भर में तुम्हारी तबियत खराब हो जाएगी। इसलिए मुझसे ज्यादा आपको इन कपड़ो की जरूरत है।

पदमा _अरे बेटा जिद न कर मेरा कहना मान ले।

राजेश _ठीक है ताई, मैं ये धोती पहन लेता हु तुम कुर्ता पहन लो।

पदमा _छी बेटा, मैं तुम्हारे सामने कुर्ता में,,,

राजेश _ताई, अब अब जान बचानी है तो शर्म छोड़ना पड़ेगा ही।

यहां ओढ़ने के लिए एक कंबल है तुम उसे ओड लेना।

पदमा _कुछ देर सोचने के बाद, ठीक है बेटा।

राजेश ने एक एक कर अपना सारा कपड़ा निकाल दिया, सिर्फ चड्डी में रह गया।

चड्डी भी भीग गया था।

उसने धोती को क़मर में लपेट कर चड्डी भी उतार दिया।

अब वह सिर्फ धोती में था।

पदमा _बेटा, मुझे बड़ा शर्म आ रही है, तुम्हारे सामने कैसे कपड़े बदलू।

राजेश _ताई मैं अपनी आंखे बंद कर देता हूं। जब तुम बोलोगे तभी खोलूंगा।

पदमा _ठीक है बेटा।

राजेश ने अपनी आंखे बंद कर लिया।

लो ताई अब कपड़े बदल लो।

पदमा ने एक एक करके अपनी सारे कपड़े उतार कर केशव का कुर्ता पहन लिया, जो उसकी जांघों तक आ रहा था। उसने खाट पर रखे कंबल ओढ़ लिया।

पदमा _बेटा अब तुम अपनी आंखे खोल दो।
 
पदमा, कुर्ता पहनकर, जो सिर्फ उसकी टांगो तक आ रहा था, को पहनकर ऊपर से खाट पे रखा कंबल लपेट लिया और खाट के एक किनारे पे बैठ गया।

इधर राजेश सिर्फ धोती में था। वह भी खाट के दूसरे किनारे पे बैठ गया।

कुछ देर बाद,,,,

पदमा _बेटा अब तो जोरो की भूख लगने लगी है।

राजेश _हा ताई मुझे भी।

पदमा _बेटा अब यहां मूंगफली के सिवा खाने के लिए कुछ है नही। बोरी से मूंगफली निकाल कर ले आओ, आज उसी से काम चलाना पड़ेगा।

राजेश _जी ताई।

झोपड़ी के बाहर अभी भी तेज़ हवाएं चल रही थी। बारिश हो रही थी और बिजली कड़क एवम बादल गरज रहा था।

राजेश ने बोरी से एक बांस के बने टोकरी में मूंगफली निकाला और उसे ले आया, खाट पे दोनो के बीच रख दिया।

पदमा और राजेश दोनो मुगफली खाने लगे।

पदमा _बेटा घर वाले भी हमारी चिन्ता कर रहे होंगे। पता नही भुवन भी घर पहुंचा है की नही।

उन्हे फोन लगा कर पता तो करो।

राजेश _जी ताई।

राजेश ने भुवन को काल करने की कोशिश की लेकिन मौसम खराब होने की वजह से काल लगा ही नहीं, उसने पुनम के पास भी लगाया,, उनसे भी बात नही हो पाई।

राजेश _ताई, मौसम खराब होने की वजह से मोबाइल भी काम नही कर रहा है।

दोनो ने पेट भर मूंगफली खाया।

फिर मटके में रखे पानी पी कर खाट में बैठ गए।

पदमा _बेटा ये बारिश तो रुकने का नाम ही नही ले रही है, लगता है रात भर ऐसे ही गुजारना पड़ेगा।

राजेश _ताई आप खाट पे लेट जाओ।

पदमा _बेटा और तुम।

राजेश _ताई मुझे तो पढ़ाई करते हुए रात में जगने की आदत है।

पदमा _आप सो जाइए।

पदमा खाट पे लेट गया।

खाट छोटा था। एक तकिया था। खाट पे एक पतला गद्दा बिछा था।

पदमा खाट पे लेट गया और कंबल को ओढ़ लिया।

राजेश खाट के किनारे थोड़ी जगह थी वहा बैठ गया।

इधर झोपड़ी पर ठंडकता बढ़ती ही जा रही थी।

राजेश सिर्फ धोती ही पहना था, उसका बदन ऊपर से नंगा था।

राजेश को भी ठंडकता महसूस होने लगी। वह अपने दोनो हाथों को रगड़ने लगा।

जिसे पदमा को पता चला की राजेश को ठंड लग रहा है।

पदमा _बेटा ठंडी बहुत बड़ गई है, रात भर ऐसे ही खुले बदन रहोगे तो तुम बीमार पड़ सकते हो, तुम भी आ जाओ खाट पे लेट जाओ। और कंबल ओढ़ लो।

राजेश _ ताई कंबल तो बड़ा है पर खाट पे तो जगह बहुत कम है।

पदमा _बेटा, किसी तरह दोनो एडजेस्ट हो जायेंगे। मुझे बिल्कुल अच्छा नही लग रहा है तुम्हे ठंड से ठिठुरते देख कर ।

राजेश _ठीक है ताई।

राजेश खाट के किनारे से उठा।

पदमा दूसरे तरफ थोडा खिसकी, राजेश ने कंबल थोडा हटाया और वह खाट पे लेट गया। दोनो एक दूसरे की और पीठ करके करवट लेकर लेट गए औरकंबल को ओढ़ लिए।

दोनो का पीठ एक दूसरे से चिपका huwa था।

कुछ देर बाद,,,

पदमा _बेटा अब तुम्हे ठंड तो नही लग रही है

राजेश _नही ताई, अब तो बिलकुल ठंड नही लग रही है।

तभी राजेश के फोन पे पुनम का काल आया ।

पुनम _ राजेश तुम लोग कहा हो?

राजेश _भौजी हम लोग तो खेत के झोपड़े में ही है, बाहर का मौसम बहुत खराब है हम घर नही आ पा रहे। मैने कई बार फोन लगाया पर मौसम खराब होने के कारण लग ही नहीं पा रहा था ।

पुनम _हा राजेश मैं भी कब से, ट्राई कर रही थी, पर लग नही पा रहा था।

तुम लोग कैसे हो? हम लोगो को बड़ी चिन्ता हो रही थी।

राजेश _भौजी हम लोगो बिलकुल ठीक है, तुम लोग हमारी चिन्ता मत करो ।

तभी,, पदमा ने कहा,,

पदमा_बेटा किसका फोन है?

पुनम _ताई, भौजी बात कर रही है। कह रही है वो हम लोगो को लेकर चिंतित है।

पदमा _अच्छा बेटा दिखाओ फोन को मुझे बात करने दो,,

पदमा राजेश की ओर घूम गई।

राजेश _भौजी लो, ताई से बात करो, कहते हुवे वह भी, पदमा की ओर घूम गया।

राजेश _लो ताई भौजी से बात करो।

दोनो पेट एक एक दूसरे से चिपक गए। पदमा की छातियां राजेश की सीने से एकदम से सट गया।

इस पर ध्यान न देते हुए पदमा, पुनम से बात करने लगी।

पदमा _अरे बहु, घर में सब ठीक तो है न।

पुनम _हा, मां जी हम सब ठीक है।

पदमा _भुवन घर आया है की नही।

पुनम _नही मां जी वह भी बारिश में फसा है, उनसे बात हुई है वह अब सुबह ही आयेंगे। वह शहर में कहीं ठहरा हुआ है।

पदमा _और तुम्हारे ससुर जी का नशा उतरा है की नही।

पुनम _उतर चुका है मां जी, उसे भी आप लोगो की चिन्ता हो रही थी।

लो बापू जी से बात करो।

केशव _अरे पदमा तुम लोग ठीक तो हो न।

पदमा _हा जी हम लोग ठीक तो है पर मौसम बहुत खराब है लगता है हमे रात भर झोपड़े में ही रहना पड़ेगा।

केशव _अरे पदमा ऐसे मौसम में रात में घर आना ठीक नही है। तुम लोग कल सुबह ही घर आना। किसी तरह आज की रात झोपड़े में ही कांट लो।

पदमा _ठीक है जी।

उधर पदमा, बात चीत में लगी थी।

उसका शरीर राजेश के सीने से एकदम से चिपका हुआ था, उसका एहसास भी नहीं था।

इधर राजेश की नाक में एक जनाना बदन की खुशबू नाक पे, पहुंचते ही उसका बदन गर्माने लगा। राजेश को पदमा की बड़ी बड़ी चूचियां जो उसके सीने में दबा huwa था।

राजेश का बेचैनी बढ़ाने लगा।

जो मूंगफली उसने खाया था वह भी असर दिखाने लगा

राजेश का land धीरे धीरे टन टनाने लगा।

दोनो के बदन कंबल से ढका हुआ था, केवल सिर ही बाहर निकले हुवे थे।

पदमा बातचीत में लगी हुई थी, इधर राजेश का land धोती के अंदर तन चुका था।

वैसे भी राजेश ने काफी दिनो से किसी औरत को भोगा नही था, उसका भी असर था।

जो उसके शरीर में जोश भर रहा था। आखिर राजेश भी एक मर्द था एक जनाना उसके शरीर से इस तरह चिपका huwa हो, ऊपर से मूंगफली की गर्मी, उम्र का प्रभाव, लंबे समय तक संभोग न करना, ये सब कारण से राजेश के न चाहने पर भी उसके land पर उसका नियंत्रण न रहा और राजेश का land तनकर लंबा और मोटा हो गया।

मोबाइल पर बात चीत बंद होने के बाद।

राजेश _ताऊ जी क्या बोल रहे थे ताई?

पदमा _राजेश बेटा तुम्हारे ताऊ जी कह रहे थे मौसम बड़ा खराब है, झोपड़े से बाहर मत निकलना, कल सुबह ही घर आना। आज रात किसी तरह झोपड़े में ही कांटने को बोले।

राजेश _हा ताई इसके अलावा और कोइ चारा तो है नही।

दोनो आंखे बंद कर सोने की कोशिश करने लगे।

कुछ देर बाद पदमा को अहसास huwa की उसके पेट में कुछ चुभ रहा है।

उसे पता चल गया कि राजेश उत्तेजित हो गया है। उसे बहुत ही लज्जित महसूस होने लगी।

वह करवट लेकर लेट गई।

राजेश वैसा ही लेटा रहा।

राजेश का land अब पदमा के गाड़ को चुभने लगा।

पदमा की हालत खराब होने लगी।

केशव पदमा की माह में एकात बार ही चोदता था।

वह भी पदमा के पहल करने पर, कभी कभी जब पदमा की बहुत अधिक ईच्छा होती थी तो ख़ुद ही पहल करती थी ।

इधर पदमा एक तरफ लज्जित महसूस कर रही थी तो दूसरे तरफ एक मोटे land के अहसास से उसका शरीर गर्माने लगा।

वह राजेश को इस विषय में कुछ कह भी नहीं सकता था।

इधर राजेश ने एक हाथ पे अपना सिर रखा huwa था तो दूसरा हाथ पदमा के पेट पे रख दिया जिससे पदमा सिहर उठी।

पदमा सिर्फ कुर्ता पहनी थी और कुछ नही।

पदमा एकदम खामोश थी, वह बहुत ही अजीब परिस्थिति में फस गई थी। वह बिल्कुल खामोश थी।

कुछ देर दोनो ऐसे ही लेटे रहे।

फिर राजेश सीधा होकर पीठ के बल लेट गया।

उसका land एकदम तनकर सीधा खड़ा huwa था।

वह उठ कर बैठ गया।

पदमा _क्या huwa बेटा नींद नहीं आ रही क्या?

राजेश _ताई, मुझे पेसाब लगी है?

पदमा _बेटा, जरा झोपड़ी का दरवाजा खोल कर देखो।

बारिश कम हुई क्या?

राजेश ने दरवाजा खोल कर देखा तो बारिश अभी भी हो रही थी और तेज़ हवा भी चल रही थी।

राजेश _ताई बारिश तो अभी भी हो रही है।

ताई छतरी तो है, इसे लेकर चला जाता हूं।

पदमा _अरे बेटा इस छतरी में दम नहीं है, पुरानी हो चुकी है, तेज़ हवा में छतरी पलट जाएगी।

राजेश _ ओह, लगता है बारिश रुकने का इन्तजार करना पड़ेगा।

पदमा _जोरो की लगी है क्या?

चलो मैं तुम्हारे साथ चलती हूं मैं छतरी सम्हालूंगी , तुम पेसब कर लेना।

राजेश _पर ताई आपके सामने, मुझे शर्म आयेगी।

पदमा _अरे बेटा मैं मै मुंह दूसरी ओर कर लूंगा।

राजेश _ठीक है ताई,,

पदमा भी कंबल से बाहर निकल आई और सिर्फ कुर्ता पहने राजेश के साथ छतरी में झोपड़ी से बाहर निकली।

पदमा _बेटा बाहर तो एकदम अंधेरा है कुछ दिख ही नहीं रहा है।

राजेश _ताई, मैं अपने मोबाइल का टार्च ऑन करता हूं।

राजेश ने मोबाइल का टार्च ऑन किया।

पदमा _बेटा झोपड़ी से ज्यादा दूर जाने की जरूरत नही यहीं कर लो।

दो छतरी को मुझे दो।

पदमा ने छतरी को अच्छे से पकड़े रखा ताकि हवा से छतरी उल्टे मत।

पदमा ने अपना मुंह दूसरी ओर करते हुए कहा।

लो बेटा अब जल्दी करो नही तो हम भीग जायेंगे।

राजेश _ठीक है ताई।

राजेश ने अपना धोती से land बाहर निकाला जो एक दम खड़ा huwa था। उसने मूतने की कोशिश की, लेकिन land खड़ा होने के कारण मूत ठीक से बाहर नहीं आ पा रहा था।

पदमा _क्या huwa बेटा जल्दी करो?

राजेश _जी ताई।

राजेश ने अपने land को अपने हाथो से पकड़ कर हिलाने लगा, थोड़ी देर बाद रुक रुक कर पेशाब आ ने लगी।

पेशाब, पेड़ के पत्ते पर पड़ने से चर चर की रुक रुक कर आवाज़ आता, जिसे सुनकर पदमा की शरीर में एक अजीब सी हलचल होने लगी।

जब आवाज़ आना बंद huwa।

पदमा _हो गया क्या बेटा?

राजेश _हा ताई।

चलो अब चलते है, नही तो भीग जायेंगे।

पदमा _बेटा थोडा रुको।

राजेश _क्या huwa ताई?

पदमा _बेटा पेशाब तो मुझे भी लगी है?

राजेश _तो आप भी कर लीजिए, दो छतरी को मुझे दो।

पदमा _पर बेटा मुझे बड़ी शर्म आ रही है, तुम्हारे सामने,

राजेश _जैसे मैने आपके सामने किया वैसे ही तुम भी कर लो, यह हम दोनो के सिवा कोई तीसरा तो है नही। लो मैं अपना मुंह दूसरी ओर कर लिया आप जल्दी से कर लो।

पदमा _ठीक है बेटा।

पदमा नीचे उकडु बैठ गई और कुर्ता को थोडा उठा दी।

फिर मूतना शुरू कर दी। पेशाब की तेज़ धार पेड़ के पत्ते पर पड़ने से चर,,,,,,,,,,, की आवाज़ आने लगी। यह आवाज सुनकर राजेश का land फिर से तनकर खड़ा हो गया।

इधर पेशाब करने के बाद लज्जित महसूस करते हुए पदमा बोली,,

बेटा अब चलो जल्दी झोपड़ी में, नही तो भीग जायेंगे। बाहर की ठंडी हवाओं से दोनो के शरीर कपकपाने लगे थे।

दोनो झोपड़ी के अंदर आए।

राजेश ने झोपड़ी का दरवाजा अच्छे से बंद कर दिया।

इधर पदमा खाट जाकर लेट गई और कंबल ओढ़ लिया।

पदमा _बेटा तुम भी आ जाओ, बाहर बहुत ठंडी है

राजेश भी खाट के एक किनारे लेट गया और कंबल ओढ़ लिया।

पदमा ने राजेश की ओर पीठ करके करवट लेकर लेट गई।

राजेश सीधा लेट कर लेट गया, था।

राजेश land तना हुआ था। वह एक हाथ से अपना land सहलाने लगा।

उसे chudai करने की बड़ी ईच्छा हो रही थी।

उसे एक जनाना के शरीर से चिपकने का मन कर रहा था।

वह पदमा की ओर करवट लेकर लेट गया।

जिससे उसका land पदमा की गाड़ में चुभने लगा।

पदमा को जब मोटे land का फिर से अहसास huwa तो उसका शरीर फिर से गर्माने लगा।

इधर राजेश तो उत्तेजित था ही उसे चोदने के लिए बुर चाहिए था।

उसने अपना एक हाथ पदमा के पेट पर रख दिया। जिससे पदमा का पूरा शरीर कपकपा गया।

वह राजेश से कुछ कह भी नहीं सकती थी।

इधर राजेश को जानना शरीर से चिपकने का बड़ा मन कर रहा था वह पदमा के शहरी से एकदम से सट गया।

जिससे उसका land धोती के ऊपर से ही पदमा की बुर पे दस्तक देने लगा। पदमा का शरीर सिहर उठा।

वह खामोश ही रही जैसे कुछ हुआ ही नहीं।

इधर राजेश का हिम्मत बढ़ने लगा, वह पदमा का पेट कुर्ता के ऊपर से ही सहलाने लगा।

पदमा के सरीर में सिहरन डी दौड़ने लगी।

उधर राजेश अपने land ka दबाव हल्के हल्के पदमा के बुर पर बढ़ाने लगा।

राजेश की हरकतों से पदमा की बुर पानी छोड़ने लगी।

इधर राजेश हल्का हल्का अपना क़मर हिला हिला अपना land कपड़े के ऊपर से ही बुर मे ढकलने लगा, जैसे वह बुर चोद रहा हो।

पदमा भी उत्तेजित हो चुकी थी।वह खामोश रही।

जिससे राजेश का हौसला और बढ़ गया। वह अपने हाथ को पेट से हटा कर ऊपर उसकी चूचियों पर रख दिया।

चुचियों पर हाथ रखते ही, पदमा ने राजेश का हाथ पकड़ लिया।

वैसे ही कुछ देर दोनो रुके रहे।

फिर राजेश ने उसकी चुचियों को कुर्ते के ऊपर से ही मसलना सुरू किया।

पदमा के मुंह से हल्की हल्की मादक सिसकारी, निकलने लगी।

राजेश ने अपना land धोती से बाहर निकाल लिया और पदमा की कुर्ता को थोडा ऊपर उठा कर land को उसकी टांगो के बीच घुसा दिया।

और हल्के हल्के धक्के लगाने लगा।

Land बुर को बाहर से रगड़ने लगा, जिससे बुर से पानी रिसने लगा।

एक हाथ से पदमा की बड़ी बड़ी चूचियां को मसलने का काम जारी रखा। राजेश के इन हरकतों से पदमा अत्यंत गर्म हो गई।

राजेश को इस बात का जब अहसास हुआ की पदमा अब कोइ विरोध करने की स्थिति में नहीं है। वह उसकी एक टांग को थोडा ऊपर उठा या और अपना land उसकी बुर में डालने की कोशिश करने लगा।

राजेश काफी देर तक प्रयास करता रहा, और एक समय आया जब land का टोपा बुर में घुस गया।

पदमा सिसक उठी।

उसके बाद राजेश ने पदमा की टांग को थोडा और उठा कर एक जोर का धक्का मारा land सरसराता huwa आधा अंदर घुस गया।

पदमा चिहुक उठी।

राजेश ने अपना land पदमा की बुर में अंदर बाहर करना शुरू कर दिया।

पदमा की बुर पूरी तरह गीली हों चुकी थी,land बुर में आसानी से अंदर बाहर होने लगा जिससे दोनो को बहुत मजा आने लगा।

राजेश धीरे धीरे अपना गति बढ़ाने लगा।

अब land पदमा की बुर में फच फच की आवाज़ करता huwa अंदर बाहर होने लगा।

पदमा अपने मुंह से मादक सिसकारी रोकने की असफल कोशिश करती रही लेकिन रोक न सकी।

पदमा की मादक सिसकारी झोपड़ी में गूंजने लगी।

कुछ देर तक इसी पोजीशन में पदमा को कामसुख देने के बाद राजेश ने chudai रोक दिया।

अपना land पदमा की बुर से बाहर निकाल लिया और पदमा की बाहों को खींचकर सीधा लिटा लिया और ख़ुद उसके ऊपर लेट गया।

पदमा अपनी आंखे बंद कर ली थी वह राजेश से आंखे नही मिला सकती थी।

राजेश और पदमा दोनो कंबल के अंदर थे केवल उसका सिर बाहर निकला huwa था।

राजेश जोश में पदमा की गालों को ओंठो को चुनने चाटने लगा।

अपना land उसकी बुर में डालकर अपनी क़मर हिला हिला कर चोदने लगा।

पदमा की बुर की भगनाशा से land अच्छी तरह रगड़ खाने से पदमा को संभोग का परम आनद मिलने लगा।

वह ख़ुद को ज्यादा समय तक रोक न सकी और राजेश को जोर से जकड़ कर झड़ने लगी।

राजेश ने क़मर हिलाना बंद कर दिया।

पदमा की आंखो की पुतलियां पलट चुकी थी उसे chudai में ऐसा आनद पहले कभी नही मिला था।

कुछ देर तक दोनो ऐसे ही लेटे रहे।

कुछ देर बाद राजेश ने अपनी क़मरफिर से धीरे धीरे हिलाना शुरू किया।

धीरे धीरे पदमा फिर गरम होने लगी।

दोनो के शरीर बहुत गर्मा गया था।

राजेश अब उठ कर बैठ गया। और उसकी टांगों को फैला कर उसके बीच उकडू बैठ गया।

अब राजेश अपना land पदमा की बुर पे रख कर एक जोर का धक्का मारा land सरसराटा huwa एक ही बार में आधे से ज्यादा अंदर घुस गया।

अब राजेश ने पदमा की चुचियों को हाथो में थाम लिया और उसे मसल मसलकर कमर हिला हिला कर गच गच चोदना शुरु कर दिया।

पदमा के मुंह से सिसकारी निकल कर झोपड़ी में गूंजने लगी।

Land बुर में गपागप अंदर बाहर हो रहा था जिससे दोनो को संभोग का परम सुख प्राप्त होने लगा।

कमरे में कई तरह की आवाजे गूंजने लगी।

पदमा की मादक सिसकारी, उन,, ई, माई,,,,,

खाट की बजने की चर चर चर,,,,

पदमा की चूड़ियों की झांकने की,,, खन खन,,,, खन,,

Land का बुर में जाने की फच फ्च,,,,

बाहर बादल गरज रहा, बिजली कड़क avm चमक रही थी।

वातावरण पूरी तरह काममय था।

दोनो जन्नत की सैर कर रहे थे।

पदमा को संभोग का ऐसा सुख पहली बार मिल रहा था।

Land काफी मोटा होने के कारण बुर की दीवार और भग्नाशा को अच्छी तरह रगड़ रहा था, जिससे पदमा को परम सुख मिल रहा था,land लंबा होने से गहराई तक जा रहा था,land का टोपा गर्भाशय मुख से टकराने से, पदमा के शरीर में अलग ही तरंग पैदा कर रहा था।

पदमा राजेश की कमर पकड़ कर अपनी कमर नीचे से हिला हिला कर राजेश का सहयोग करने लगी।

राजेश पदमा की बड़ी बड़ी चूचियां को मसल मसल कर कंबल के नीचे ही चोद रहा था।

पदमा की तो आंखे बंद थी राजेश पदमो को देख देख कर उसकी गालों को कभी चूमता तो कभी उसकी ओंठो का रस चूसता huea चोदना जारी रखा, पदमा दूसरी बार झड़ चुकी थी।

केशव तो बड़ी मुस्किल से एक बार हो झाड़ पाता तो बहुत था।

वह राजेश की मर्दानगी देख कर दंग थी।

राजेश पदमा के झड़ने के बाद कुछ देर रुक जाता जिससे उसे खोया huea ताकत फिर से मिल जाता। कुछ देर बाद राजेश फिर से पदमा की चोदना शुरू कर देता और उसे जन्नत की सैर कराने लगता।

और अन्त में राजेश भी कराहते हुवे, आह मां आह,,,

पदमा की योनि में अपन बीज छोड़ दिया।

राजेश के पानी से बुर पूरी तरह भर कर पदमा की टांगो में बहने लगा।

गर्म गर्म वीर्य की पिचकारी अपनी बुर में महसूस कर पदमा एक बार और झड़ गई।

दोनो काफी थक चूके थे।

एक दूसरे से चिपक कार सो गए। जब नींद खुली तो पदमा देखा की बारिश रुक चुकी है।

वह अपनी हालात देखि। वह शर्म से लज्जित होने लगी।

वह खाट से उठी, राजेश के शरीर पर कंबल डाल दिया। और अपने कपड़े जो कुछ कुछ सुख चुका था को पहनने लगी, कपड़े पहनने के बाद वह वहा से घर चली गई।

जब राजेश का नींद खुला तो पदमा वहा नही थी। वह उठकर खेत में इधर उधर देखा कहीं नहीं दिखी।

राजेश को लगा ताई घर चली गईं है।

कल रात में जोश में उसने ताई के साथ जो किया उसके बाद पता नही ताई उसके साथ कैसा व्यवहार करेगी। वह चिंतित होने लगा।

कुछ देर बाद केशव खेत पहुंचा।

केशव _अरे राजेश बेटा, खेत में सब ठीक तो है न।

राजेश _हा ताऊ जी कुछ जानवर खेत में घुसने की कोशिश कर रहा था मैने उसे भगा दिया।

केशव _माफ करना बेटा कल मैं शाम को खेत आ न सका और तुमको सारी रात खेत में ही रुकना पड़ा।

राजेश _ताऊ जी यह खेत मेरा भी है मेरा भी कुछ फर्ज बनता है । इसमें माफी मांगने की क्या बात?

केशव _अच्छा बेटा अब तुम घर जाओ। यहां की जिम्मेदारी मैं सम्हालता हु।

राजेश _ठीक है ताऊ जी।

राजेश खेत से घर पहुंचा।

भुवन भी घर पहुंच गया था।

उधर पदमा घर में जाने के बाद, नहा ली थी। राजेश ने उसकी जमकर chudai किया था उसकी बुर सूज गई थी। वह अपनी बुर की हालात देखी और लज्जित महसूस करने लगी थी।

इधर राजेश ने जब भुवन को देखा,,

राजेश _अरे भुवन भईया, तुम कब घर पहुंचे।

भुवन _बस अभी ही। पुनम बता रही थी की, मां और तुम बारिश में ही फस गए थे पूरी रात खेत में ही गुजारनी पड़ी।

सब ठीक तो हैं न ।

राजेश _हा भईया सब ठीक है।

भुवन _अच्छा चलो अब नहाते है।

दोनो बाड़ी में नहाने चले गए।

नहाकर आए और पुनम ने उन दोनो के लिए नाश्ता लगाया

इधर पदमा राजेश के सामने आने से बचने लगी।

उसकी राजेश से बातचीत करने की उसकी हिम्मत नही हो रही थी बहुत ही शर्मिंदगी महसूस कर रही थी।

भुवन खेत चला गया। राजेश अपने कमरे में जाकर आराम करने लगा।

फिर अपनी पढ़ाई भी करने लगा।

दोपहर में भी पुनम ने राजेश को भोजन के लिए बुलाया। उसने पुनम से पूछा की ताई कहा है तो पुनम ने कहा की मां जी तो तुम्हे भोजन दे देने कह कर खेत चली गईं।

खेत से आने के बाद भी पदमा ने राजेश से कोइ बात नहि की न ही उसके सामने आई ।

इधर राजेश को बहुत बुरा लग रहा था कि ताई मुझसे नाराज हो गई है।

मैने बड़ी गलती कर दी है, मुझे उससे माफी मांगनी होगी।

रात में पुनम दूध का गिलास लेकर कमरे में पहुंची।

पुनम _देवर जी दूध पी लीजिए।

राजेश, ने गिलास लेकर दूध पी लिया। धन्यवाद भौजी।

पुनम _अरे देवर जी आज तो आप बिना कुछ बोले ही गाय का दूध पी लिया। तुम तो अपने भईया से ताजे दूध की मांग कर रहे थे ।

राजेश _सारी भौजी, मुझे आपसे ऐसी मांग नही करनी चाहिए थी।

मुझे माफ कर दीजिए।

पुनम _अरे देवर जी, भौजी और देवर में तो ये हसी मजाक तो चलता रहता है कोइ बात है क्या?

राजेश _नही भौजी कोइ बात नहीं है? मैं अपनी हद भुल गया था मुझे माफ कर दीजिए।

पुनम _देवर जी पता नहीं तुम्हे क्या हो गया है? ठीक है मैं चलती हूं।

पुनम वहा से चली गई।

अगले दिन भी पदमा उसके सामने नही आई और राजेश से बातचीत नही की।

राजेश को बिल्कुल अच्छा नही लग रहा था। वह पदमा से माफी मांगना चाहता था लेकिन उसे मौका नही मिल रहा था।

इधर पुनम को भी राजेश का व्यवहार में काफी बदलाव महसूस करने लगी। पहले तो उससे हसी मजाक और छेड़ छाड़ करता था। पर उसने ये सब अचानक बंद कर दिया। लगता है देवर जी मुझसे नाराज हो गए हैं।

रात में जब, वह राजेश के कमरे में गई।

राजेश _भौजी आज दूध नही लाई।

पुनम _देवर जी, मैं सोच रही थी कि आज तुम्हे ताजा दूध पिला दू।

राजेश _भौजी मैं समझा नही।

पुनम ने अपनी साड़ी की पल्लू हटा दिया। लो देवर जी अपनी ईच्छा पूरी कर लो। पी लो ताजा दूध।

राजेश _भौजी ये आप क्या कर हो?

किसी ने देख लिया तो आप कृपया चली जाइए प्लीज।

पुनम _देवर जी आखिर बात क्या है? जरूर कोइ बात है जो मुझसे छुपा रहे हो। मुझसे नाराज हो क्या?

राजेश _भौजी, मैं आपसे नाराज नहीं हूं।

पुनम_फिर दूध पीने से मना क्यू कर रहे हो? उस दिन तो बड़े मजे से पिए थे।

राजेश _भौजी कहा न मैं अपना हद भुल गया था। उसके लिए मैं शर्मिंदा हूं। मुझे माफ कर दीजिए।

पुनम _ठीक है देवर जी जैसी आपकी इच्छा।

पुनम वहा से चली गईं।

इधर राजेश पदमा के व्यवहार से दुखी था वह माफी मांगने के लिए मौका ढूंढ रहा था।

एक दिन आरती अपने सहेली के घर गई थी और पुनम अपने कमरे में मुन्ने को सुला रही थी।

पदमा कीचन में थी।

राजेश कीचन में गया।

राजेश _ताई, मुझे माफ कर दीजिए। उस दिन आपके साथ मैने अच्छा नही किया।

मैं जानता हूं कि उस दिन से आप मुझसे नाराज हैं। मैं यहां से चला जाऊंगा।

पदमा _नही, राजेश तुम्हे कहीं जाने की जरूरत नही।

उस दिन जो भी huwa उसके लिए मैं भी जिम्मेदार हू। मैं चाहती तो तुम्हे रोक सकती थी। मैं भी हवस में तुम्हे रोक न सकी।

और कुछ ऐसी परिस्थितियां भी निर्मित हो गई थी तुम जवान हो, इस उम्र मैं ऐसा हो जाता हैं।

राजेश _फिर आप मुझसे बात चीत क्यू नही करती और सामने आने से भी कतराती हो।

पदमा _बेटा मैं तुम्हारे सामने आनी से लज्जित महसूस करती हूं।

राजेश _ताई जो huwa उसे भुल जाओ। और आप मुझसे पहले जैसा व्यवहार कीजिए प्लीज नही तो मैं अपने आप को माफ नहीं कर सकूंगा।

पदमा _राजेश बेटा शायद तुम ठीक कह रहे हो मुझे ऐसा व्यवहार नही करना चाहिए।

बेटा, इस घटना के बारे मे किसी को कुछ बताया तो नही।

राजेश _नही ताई, ऐसी बाते किसी से थोड़े कहूंगा।

पदमा _बेटा ये किसी को मत बताना नही तो बड़ी बदनामी हो जाएगी।

राजेश _नही ताई ये बात मैं किसी से नहीं कहूंगा। आप मूझपर भरोसा कीजिए।

पदमा _ठीक है बेटा, अब तुम अपने कमरे में जाओ।

राजेश वहा से चला गया।

उस दिन के बाद पदमा और राजेश के बीच सब नार्मल होने लगा। पदमा राजेश के साथ पहले जैसा बरताव करने लगी।

इधर अब राजेश भी खुश था।

पदमा को अब रात में राजेश के साथ जो संभोग सुख मिला था वह याद आने लगा, जिससे वह गर्म हो जाती।

उस रात राजेश ने उसे संभोग का जो सुख दिया था। ऐसा सुख उसके पति से कभी नहीं मिला था।

एक दिन वह रात में उन पलों को याद कर बहुत गर्म हो गई।

रात में केशव से,,

पदमा _क्या जी आपको तो मेरी जरा भी चिन्ता नहीं खाना खाने के बारे घोड़ा बेचकर सोने लगते हो।

केशव _बोलो मेरी जान क्या सेवा करू?

पदमा _आज बड़ा मन कर रहा है, प्यार कीजिए ना।

केशव _ अरे क्या करू मेरी जान, खेत में काम कर के थक जाता हूं। सारी।

आओ आज तुम्हारी इच्छा पूरी कर दू।

पहले इसे तैयार तो करो।

केशव ने अपना सिकुड़ा हुआ land बाहर निकाल कर कहा। पदमा ने केशव का land हाथ में लेकर सहलाने लगा।

Land में थोडा तनाव आने लगा।

केशव, पदमा की चूची दबाने लगा।

केशव _चलो तैयार हो जाओ।

पदमा बेड पर लेट गई,

अपनी साड़ी और पेटिकोट ऊपर उठा दी।

उसकी मस्त फूली हुईं गोरी चूत केशव के सामने आ गया।

केशव _वाह मेरी जान तुम तो एकदम चिकनी हो गई हो, आज बुर मारने में बड़ा मज़ा आएगा।

केशव ने पदमा की बुर में उंगली डाल कर पहले अंदर बाहर किया।

पदमा पहले से ही गर्म थी उसकी बुर पानी से लबालब हो चुका था।

केशव की उंगली बुर की पानी से गीला हो गया।

केशव ने देर न करते हुए, पदमा की बुर के छेद में अपना land सेट कर एक जोर का धक्का मारा एक ही बार में land सरसराकर पूरा अंदर चला गया।

केशव ने पदमा की चूची को मसल मसल कर land को अंदर बाहर करना शुरू कर दिया।

पर ये क्या? केवल पांच मिनट में ही उसका पानी छूट गया।

केशव बेड के एक और लुड़क गया।

इधर पदमा तो केवल मजा आना शुरू ही हुआ था। और खेल खतम हो गया।

उसे अपने पति पर बहुत गुस्सा आ रहा था। उसकी चूत की प्यास बुझाने के बजाय और बड़ा दिया था।

पर वह कर भी क्या सकती थी।

वह बेड से उठी और आंगन में जाकर अपनी बुर को पानी से अच्छे से धोई।

फिर अपने कमरे में आकर लेट गई।

वह बहुत गर्म थी, उसे नींद नहीं आ रही थी उसने अपने पति की ओर देखा जो घोड़े बेच कर सो रहा था।

उसने अपनी चूत की प्यास बुझाने के लिए अपनी उंगली को बुर में डालकर अंदर बाहर करने लगी।

पर उसकी चूत की प्यास बुझने की बजाए और बड़ गई।

उससे बर्दास्त करना मुस्किल हो गया।

उस राजेश के साथ बिताए वह पल याद आने लगा कैसे राजेश ने उसे एक ही रात में कई बार झा डा था, उसकी बुर सूजा दी थी। उस पल को याद कर वह संभोग के लिए तड़प उठी।

वह अपने बेड से उठी और न चाहते हुवे भी उसकी कदम राजेश के कमरे की ओर जाने लगी, जाते समय वह सरसो का तेल अपने साथ ले गई।

राजेश इस समय सोया नही था, पढ़ाई कर रहा था।

पदमा ने दरवाजा खटखटाया, राजेश ने दरवाजा खोला।

राजेश _ताई आप, कुछ काम था क्या?

पदमा _बेटा, मेरे पीठ और कमर दर्द कर रहा है मैं सो नहीं पा रही। तुम्हारे ताऊ जी तो सो चूके है मैं उसे उठाना उचित नहीं समझी? क्या तुम मेरी कमर और पीठ की मालिश कर दोगे, मुझे राहत मिल जाएगी।

राजेश _ताई जी, अंदर आइए न।

पदमा कमरे में रखे पलंग पर जाकर बैठ गई।

राजेश _बोलो ताई, क्या करना है?

पदमा _बेटा पहले मेरे पीठ की तेल से मालिश कर दो, दर्द कर रहा है।

राजेश _ठीक है ताई, आप पेट के बल लेट जाइए।

पदमा पीठ के बल पलंग पर लेट गई।

राजेश ने तेल अपने हाथ में लेकर ब्लाउज के नीचे भाग पर मालिश करने लगा।

पदमा _बेटा दर्द थोडा ऊपर है! रुको मैं अपनी ब्लाउज निकाल देती हूं।

पदमा ने अपनी साड़ी की पल्लू को दांत से दबाकर अपनी ब्लाउज निकाल दी और पीठ के बल लेट गई।

राजेश ने पदमा की खुली पीठ पर तेल लगा कर मालिश करने लगा।

राजेश _ताई कुछ राहत मिला।

पदमा _हा,re तु तो बड़ा अच्छा मालिश कर रहा है दर्द से राहत मिल रही है। थोडा और मालिश करो बेटा।

राजेश _जी ताई, मैं आपको दर्द से पूरा राहत पहुंचा दूंगा।

इधर राजेश के मालिश करने से पदमा और गर्म होने लगी।

पदमा _बेटा उस दिन की घटना को किसी को बताया तो नही।

राजेश _नही ताई, ऐसी बात मैं कैसे किसी से कहूंगा।

पदमा _अच्छा किया बेटा जो किसी को नहीं बताया नही तो बड़ी बदनामी हो जाती। तुमसे एक बात पूछूं।

राजेश _हा ताई पूछो।

पदमा _मैं तो तुम्हे बड़ा भोला समझ रही थी तु तो बड़ा खिलाड़ी निकला।

मुझे लगता है पहले भी कई महिलाओं के साथ कर चुका है। बताओ मैं सच कह रही ना।

राजेश _ताई आप भी न,,,

पदमा _अरे शर्मा क्यू रहा है बताता क्यू नही?

राजेश _हां ताई, मैंने पहले भी ये सब किया है।

पदमा _तेरा होने वाला बीवी बड़ी किस्मत वाली होगी।

राजेश _ताई ऐसा क्यू?

पदमा _उसे ऐसा मर्द जो मिलेगा, जो उसे भरपूर सुख देगा।

राजेश _वैसे ताई एक बात पूछूं आप बुरा तो नही मानोगी।

पदमा _अरे पूछो, नही मानूंगी बुरा।

राजेश _आपको मजा आया की नही।

पदमा _पदमा शर्म से पानी पानी हो गई।

राजेश _ताई बताओ न, मजा आया की नही।

पदमा _हूं,,,

पदमा _और तुम्हे।

राजेश _मुझे भी बहुत मजा आया।

पदमा _चल झूठा। मैं तो अब बूढ़ी हो चुकी हु मैं क्या मजा दूंगी।

राजेश _टाई ये आप क्या कह रही है आप और बूढ़ी। अभी तो आप काफी जवान और खुबसूरत है बदन पूरा कसा हुआ है।

पदमा _चल झूठा कहीं का।

राजेश _कसम से ताई मैं सच कह रहा हूं।

तुम्हारा बदन बहुत खुबसूरत है जवान लडकियों की तरह एकदम कसा हुआ।

पदमा _हसने लगा।

पदमा _वैसे तुम्हारा हथियार भी बड़ा दमदार है। गुफा के अंतिम छोर तक पहुंच जाता है।

राजेश _क्यू ताऊ जी का नही पहुंचता क्या अंतिम छोर तक।

पदमा _अरे उसका तो आधे तक नही पहुंच पाता।

थोड़े ही देर में फूस हो जाता है।

राजेश _ओह तब तो आप प्यासी रह जाती होगी।

पदमा _अब क्या कर सकते हैं?

राजेश _ताई कमर पे भी मालिश कर दू।

पदमा _हा re, रुको मैं पेटीकोट का नाडा खोल दू।

पदमा ने हाथ नीचे ले जाकर पेटी कोट का नाडा खोल दिया। और अपना साड़ी भी निकाल दिया ताकि उसमें तेल न लगे अब वह पेटीकोट में थी।

राजेश ने तेल से उसकी कमर पर मालिश करना सुरु कर दिया।

पदमा बहुत गर्म हो चुकी थी।

पदमा _वैसे तु कितनी महिलाओं का ले चुका है।

राजेश _बताया न बहुतों का।

पदमा _मेरी लेगा।

राजेश _ताई , आप मजाक कर रही है।

पदमा _अरे मैं मजाक नही कर रही, सच कह रही। आज तेरे ताऊ ने मुझे प्यासा ही छोड़ दिया।

अगर मेरी प्यास नही बुझी तो लगता है मैं मर न जाऊ।

राजेश _ओ तो ये बात है।

ठीक है, पर मैं जो कहूंगा वो करना पड़ेगा।

राजेश _क्या करवाएगा अपने ताई से।

राजेश _वही जिसमे दोनो को बहुत मजा आएगा।

पदमा _अच्छा बोलो क्या करना है।

राजेश _पहले आओ मेरी गोद में बैठो और अपनी दूदू पिलाओ।

पदमा _मुझे शर्म आयेगी, वह हसने लगी,,,,
 
पदमा पलंग पर पेट के बल लेटी थी। वह सिर्फ पेटीकोट में थी। राजेश उसकी पीठ को चूमने सहलाने लगा। पदमा सिसकने लगी।

उसके बाद राजेश ने पदमा की पलटकर, पीठ के बल लिटा दिया। पदमा अपने दोनो हाथों से चुचियों को ढक ली।

राजेश _ताई छिपा क्यू रही हो, दिखाओ न।

पदमा _मुझे शर्म आ रही।

राजेश _शर्माओगी तो मजा कैसे लोगी? जरा मैं भी तो देखूं तुम्हारे मम्मे कैसे है? उस दिन तो देख नही पाया था।

राजेश ने पदमा की हाथो को हटाने के लिए उसके हाथो को पकड़ा। और हटाने की कोशिश किया।

पदमा ज्यादा विरोध नही की वह अपनी चूची पर से हाथ हटा कर अपने चहरे को छुपा ली।

हाथ हटते ही, उसकी मस्त चूचियां राजेश के आंखो के सामने आ गया।

राजेश _वाउ, क्या मस्त नजारे है।

राजेश ने बड़ी बड़ी मस्त सुडौल चुचियों को अपने दोनो हाथों में थाम लिया।

और मसल मसल कर चूसने लगा।

पदमा _आह उन,,,

सिसकने लगी,,,

राजेश बेड से उठा और अपने सारे कपड़े उतार दिया सिर्फ चड्डी में रह गया।

राजेश ने पदमा को दोनो हाथो से खीच कर उठाया और अपने गोद में बिठा लिया।

और बुरी तरह अपनी बाहों में जकड़ लिया। उसकी पीठ चूमने लगा।

पदमा ने भी राजेश को जकड़ लिया।

राजेश ने पदमा की चूची को मसलने लगा चूसने लगा पदमा सिसकने लगी।

राजेश ने पदमा को फिर से पीठ के बल लिटा दिया।

फिर उसकी पेटी कोट का नाडा खीच दिया।

पदमा पूरी तरह नंगी हो गई। वह अपनी बुर को अपने हाथो से छिपाने लगी।

राजेश _ताई, दिखाओ न अपनी बुर, छिपा क्यू रही हो उस दिन देख नही पाया था।

पदमा _मुझे बड़ी शर्म आ रही है।

राजेश _ताई, अब शर्माओगी तो मजा कैसे लोगी?

राजेश ने पदमा की हाथो को जोर लगा कर हटाया। पदमा अपनी हाथो से शर्म के मारे मुंह छिपाने लगी।

राजेश ने पदमा की मस्त फूली हुई चिकनी चूत को देखा।

राजेश _वाउ क्या बुर है?

एकदम चिकनी और पाव रोटी की तरह फूली हुई।

लगता है आज ही जंगल की सफाई की हो। उस दिन तो गुफा की चारो ओर घना जंगल था।

राजेश ने झुक कर पदमा की बुर को चूसना और चाटना शुरू कर दिया।

ताई _आह, बेटा क्या कर रहा है? वहा नही गंदा होता है?

पदमा की बुर पहली बार कोइ चाट रहा था उसे अजीब लगा।

पर राजेश रुका नहीं और चाटता रहा।

पदमा को बहुत मजा आने लगा उसके मुंह से मादक सिसकारी निकलने लगी।

उसकी बुर से पानी झरने की तरह बहने लगी।

आह उन, आई मां,,आ,,,

बेटा अब बस कर,, मुझसे बर्दास्त नही हो रहा, मैं मर न जाऊ,,,,

राजेश ने चूसना बंद कर दिया।

वह बेड से उठा और अपना चड्डी उतार दिया।

उसका मोटा लंबा land हवा में लहराने लगा, ठुमकने लगा।

पदमा ने जब राजेश के लंद को देखा तो दंग रह गई। वह पहली बार इतना मोटा लंबा लंद देख रही थी।

राजेश ने पदमा को खीच कर पलंग से उठा दिया।

राजेश _ताई अब देख क्या रही हो , चलो अब चूसना शुरू करो।

पदमा _बेटा, मैने अब तक कभी चूसा नही है, मुझसे नही होगा।

राजेश _ठीक है फिर मैं भी तुम्हारी chudai नही करूंगा।

पदमा _ओह बेटा तुम तो नाराज हो गए। कोशिश करती हूं।

पदमा राजेश के लंद के नीचे बैठ गई।

और उसके ठुमकते land को हाथो में लेकर सहलाने लगी

पदमा _बेटा तुम्हारा हथियार तो बहुत बड़ा है, इसी लिए उस दिन मेरा हालात खराब हो गई थी। ये तो रंडियों का भी हालात खराब कर देगा।

राजेश _ताई, अब मुंह में डाल कर चूसो।

पदमा ने लंद का टोपा मुंह में लेकर चूसने लगी।

राजेश _हूं, ये हुई न बात, थोडा अंदर लेकर चूसो।

पदमा जितना मुंह अंदर ले सकती थी अंदर लेकर चूसने लगी।

राजेश _आह ताई, बहुत जल्दी सीख गई तुम, बहुत मजा आ रहा है? हा ऐसे ही चूसती रहो।

राजेश ने पदमा की बालो को हाथ से पकड़ कर अपने लंद को उसके मुंह में ठेलने लगा।

पदमा _घो घो करने लगी।

राजेश ने पदमा को ऊपर उठाया, और पलग को पकड़ा कर झुका दिया।

पीछे जाकर उसकी टांगो के बीच आ गया उसकी बुर को फिर चूसा उसके बाद अपना लंद उसकी बुर की छेद में रख कर, गच से पेल दिया।

लंद सरासरता huwa बुर चिर कर एक ही बार में आधा से ज्यादा अंदर घुस गया।

पदमा चीख उठी।

राजेश _ताई चीखोगि तो पूर घर वाले दरवाजा के पास खड़े हो जाएंगे, अंदर क्या चल क्या रहा है पता करने।

लो मुंह में मेरा चड्डी ठूस लो।

पदमा _तुम्हारा इतना बड़ा है, एक ही बार में घुसा दिया, मार डालेगा क्या?आराम से नही नही कर सकता ।

राजेश _सारी ताई तुम्हारी मस्त बुर देख कर जोश कुछ ज्यादा बड़ गया था, अब आराम से करूंगा।

राजेश पदमा की जमकर chudai करने लगा।

वह अलग अलग आसनों में पदमा को जमकर चोदा और उसे जन्नत की सैर कराया।

क़रीब दो घण्टे तक, कामसुख प्रदान करने के बाद राजेश उसकी योनि में ही अपना सारा वीर्य छोड़ कर बेड पर लुड़क गया।

पदमा भी थक चुकी थी। उसकी बुर की सारी प्यास बुझ चुकी थी। बेड पर लेट कर सुस्ताने लगी।

क़रीब आधा घंटा बाद , पदमा जब होश में आई वह अपनी हालात देख शर्मिंदगी महसूस करने लगी। क्यू की उसकी सारी प्यास बुझ चुकी थी।

वह बेड से उठी और अपनी पेटीकोट पहनी, ब्लाउज, फिर साड़ी पहनने लगी। राजेश उसे पहनते देख रहा था। और अपना लौड़ा सहला रहा था।

जबपदमा राजेश की ओर देखी, वह शर्मा गई।

पदमा _क्यू, इतना करने के बाद तुम्हारा मन नही भरा है क्या?

राजेश _न आओ ना एक बार और करते हैं?

पदमा _न बाबा, एक ही बार में मेरी बुर, को सूजा दिया तुमने। और किया तो पता नही क्या होगा?

पदमा वहा से अपनी गाड़ मतकाते हुई चली गई।

राजेश पदमा के जाने के बाद, गहरी नींद के आगोश मे , चला गया।

अगले दिन राजेश सुबह उठा और अखाड़े पे चला गया, वहा शारीरिक अभ्यास के साथ साथ कबड्डी प्रतियोगिता की भी तैयारी किया।

जब वह घर लौटा, भुवन खेत से घर आ चुका था,।

दोनो नहाए फिर पुनम ने दोनो के लिए नाश्ता लगाया।

पदमा वहा मौजूद थी, वह राजेश से पहले जैसे बात चीत नही कर पा रही थी, उसे शर्म आ रही है।

राजेश ने तो बातो ही बातो में एक आंख ही मार दी। पदमा शर्म से पानी पानी हो गई। लेकिन यह सब उसे अच्छा लग रहा था।

राजेश ने मजा लेते हुए पूछा,,

राजेश _ताई आप लंगड़ा कर क्यू चल रही हो? कुछ huwa है क्या?

भुवन _हा मां, कुछ समस्या है क्या?

पदमा _अरे बेटा मैं सुबह, बाड़ी के तरफ गई थी वहा स्नानागार में पैर फिसल गई।

थोडा कमर पकड़ लिया है?

पुनम _मां जी मैं सरसो की तेल से आपकी कमर की अच्छे से मालिश कर दूंगी। आपका कमर दर्द ठीक हो जायेगा।

पदमा _अरे बहु, तुम क्यू तकलीफ करोगी?, दर्द इतना ज्यादा भी नहीं है, मैं ठीक हो जाऊंगी।

राजेश _ताई आप कहे तो मैं मालिश कर दूंगा।

पदमा _न बाबा, अगर मैं तुमसे मालिश कराई तो दर्द कम होने के बजाए और बड़ जायेगा।

किसी को कुछ करने की आवश्यकता नहीं, मैं ठीक हो जाऊंगी।

नाश्ता करने के बाद भुवन खेत चला गया। राजेश अपने कमरे में पढ़ाई करने लगा।

दोपहर में भगत ने राजेश को काल किया।

भगत _भाई कैसे है आप?

राजेश _मैं ठीक हूं भगत, तुम बताओ कैसे है वहा सब।

भगत_, यहां सब ठीक है भाई, बस तुम्हारी कमी खलती है।

राजेश _कहो, अचानक कैसे याद किया?

भगत _तुम्हे बधाई देने के लिए भाई, आज यूनिवर्सिटी ने रिजल्ट जारी कर दिया है भाई, आपने पूरे यूनिवर्सिटी में टॉप किया है?

राजेश _और तुम्हारा क्या huwa?

भगत _भाई मैं भी पास हो गया भाई।

राजेश _बाकी लोगो का क्या है रिजल्ट।

भगत _भाई switi भी प्रथम वर्ष की परीक्षा में मेरिट में आई है। सीमा और निशा जी द्वितीय वर्ष की परीक्षा में मेरिट में आई है।

राजेश _ओह, ये तो तुमने बहुत अच्छी खबर दी।

भगत _भाई अगर तुम यहा होते तो सेलिब्रेट करते? सभी दोस्त तुम्हे मिस कर रहे है।

राजेश _हा यार, मैं भी तुम लोगो को बहुत मिस कर रहा हूं।

और सुना तुम्हारे पार्टी का काम काज कैसा चल रहा है।

भगत _बहुत बढ़िया भाई, हर रोज नए नए लोग हमारी पार्टी से जुड़ रहे हैं।

राजेश _भगत, देखना तुम्हारी पार्टी इस बार चुनाव में बेहतरीन प्रदर्शन करेगी।

भगत _भाई चुनाव के समय मुझे आपकी जरूरत होगी। आपके मार्गदर्शन बिना अच्छा परिणाम मुस्किल होगा।

राजेश _अरे यार मैं हमेशा तेरे साथ हूं। तुम्हारे पार्टी का जितना राज्य के विकास के लिए जरूरी है। मुझसे जो हो सकेगा, मैं करूंगा।

भगत _धन्यवाद भाई।

उधर घर में जब स्वीटी ने अपनी मां को यूनिवर्सिटी के परीक्षा परिणाम के बारे में जानकारी दिया, और बताया की भईया ने पूरे यूनिवर्सिटी में टॉप किया है?

सुनीताकी खुशी का ठिकाना न रहा, उसका मन किया की वह राजेश को फोन कर बधाई दे।

पर उसके कहने पर ही राजेश घर छोड़कर गांव चला गया था, वह राजेश को काल न कर पाई।

जब शेखर घर आया तो साथ मिठाई का डिब्बा ले आया।

शेखर _देखा न सुनीता, मुझे मेरे बेटे पर पूरा भरोसा था, वह हमे निराश नहीं करेगा। लो मिठाई खाओ भी आज बड़ी खुशी का दिन है। बेटे ने पूरा यूनिवर्सिटी में टॉप किया है।

स्वीटी बेटा राजेश को काल तो करो, उसे बधाई दे दे।

स्वीटी _जी पापा।

स्वीटी ने राजेश को काल किया।

स्वीटी_भईया, कैसे है आप? बधाई हो आप ने पूरे यूनिवर्सिटी में टॉप किया है।

राजेश _स्वीटी, मैं भी आज बहुत खुश हु की तुम मेरिट में आई हो, तुमने मां, पापा का मान बढ़ाया।

तुमको भी बहुत बहुत बधाई।

स्वीटी _शुक्रिया भईया।

लो पापा से बात करो।

शेखर _राजेश बेटा, आज हम बहुत खुश है? आखिर तुम हमारी उमिदो पर खरा उतरे।

राजेश _शुक्रिया पापा।

आप लोग वहा ठीक तो है न।

शेखर _हम लोग यहां बिलकुल ठीक है बेटा।

हमारी चिन्ता बिलकुल मत करना।

तुम्हे वहा कोइ समस्या तो नही।

अगर कोइ समस्या हो तो तुम घर आ जाओ।

राजेश _पापा यहां कोइ समस्या नही है? मैं अपनी आईएएस की तैयारी भी अच्छे से कर पा रहा हूं।

मैं यहां बिलकुल ठीक हूं, तुम लोग अपना ख्याल रखना।

शेखर _ठीक है बेटा।

उधर लंदन में,,,

निशा और सीमा जो इस समय अपने फूफा जी के ऑफिस में थी।

सीमा और निशा अपने कैबिन में बैठी थी।

सीमा फोन पर किसी से बात कर रही थी।

निशा _सीमा, किससे बात कर रही है?

सीमा _कालेज की सहेली का काल था, बता रही थी की आज यूनिवर्सिटी का रिजल्ट जारी हो गया है।

हम दोनों मेरिट में आए है।

निशा _ये तो बड़ी खुशी की बात है। और बांकी दोस्तो का क्या रिपोर्ट है?

सीमा _पहले की तरह इस बार भी,राजेश ने स्नातक की अंतिम वर्ष की परीक्षा में पूरे यूनिवर्सिटी में टॉप किया है।

निशा, यह सुनकर किसी विचार में खो गई।

सीमा _निशा, कहा खो गई।

निशा _कुछ नही,,,

अब रिजल्ट तो जारी हो गया है। अब हमे यहां के किसी अच्छे से कालेज में दाखिला लेना होगा, ताकि आगे की पढ़ाई पूरी कर सके।

सीमा _हां यार।

कल चलते है कालेज, प्रवेश फार्म लाने।

ठीक है।

सीमा _निशा, सहेली बता रही थी की अगले सोमवार को आरके कालेज में एक सम्मान समारोह का आयोजन रखा गया है, जिसमे इस साल के अच्छे प्रदर्शन करने वाले को सम्मानित किया जाएगा, और स्टूडेंट ऑफ द इयर की घोषणा भी।

जाना है क्या? समारोह में।

निशा, सोचने लगी।

सीमा _ यार तुम कुछ बोलती क्यू नही?क्या सोचने लगी?

निशा _कुछ नही।

सीमा तुम जाना चाहती हो तो चले जाओ। मैं नही जाऊंगी।

सीमा _यार, ये क्या बोल रही हो? मैं तुम्हारे बिना कैसे जाउंगी।

निशा _सारी सीमा मेरे कारण तुमको अपनी अपनी अरमानों का त्याग करना पड़ रहा है।

सीमा _निसा ये तुम कैसी बाते कर हो? मैं तुम्हे अपनी सहेली नही, अपनी बहन मानती हूं।

तुम जहां रहोगी? मैं तुम्हारी साया बनकर रहूंगी हमेशा।

निशा ने सीमा को गले लगाकर भावुक हो गईं।

इधर गांव में रात में भोजन करते समय,,,

पदमा _बेटा कल गांव में काम काज बंद रखा गया है।

कल मंदिर का स्थापना दिवस है न। मंदिर में पूजा पाठ रखा गया है। सभी लोगो को वही जाना है।

तुम लोगो को तो पता ही है कल तुम्हारे दादा जी का पुण्य तिथि भी है।

भुवन _हां मां।

पदमा _गांव वाले उस दिन तुम्हारे दादा जी को याद कर उसकी फोटो पर श्रद्धा के फूल चढ़ाते हैं।

हम सबको कल मन्दिर चलना है।

राजेश _ठीक है ताई।

इधर रात में निशा और सीमा अपने कमरे में सोई थी।

सीमा का नींद रात में अचानक से खुल गया।

उसने निशा की ओर देखा, वह करवट लेकर लेटी थी।

मोबाइल पर कुछ देख रही थी।

सीमा ने चुपके से देखा कि इतनी रात को निशा मोबाइल पर क्या देख रही है?

निशा, मोबाइल पर राजेश का फोटो देख रही थी।

सीमा, फिर से लेट गई, और निशा से बोली ।

सीमा _निशा, तुम अभी तक जग रही हो। सोई नहीं।

निशा हड़बड़ा कर मोबाइल बंद कर दी।

निशा _आज नींद नहीं आ रही थी।

सीमा _किसी को मिस कर रही हो क्या?

निशा _नही तो, मैं भला किसे मिस करुंगी?

सीमा _राज को।

निशा _सीमा तुम मेरे सामने उस आवारा का नाम मत लिया करो? मैं भुल चुकी हूं।

सीमा _सॉरी यार, मुझे लगा कि तुम राज को मिस कर रही हो। शायद तुम अपने मॉम डैड को मिस कर रही थी।

निशा _हां, मैं अपने मॉम डैड को मिस कर रही थी।

सीमा_अच्छा, ठीक है, अब मुझसे नाराज मत हो, रात बहुत हो चुकी है, अब सो जाओ।

सीमा, अपने मन में बोली।

सीमा _पगली, अपने सहेली से छिपा रही हैं, सच बात तो ये है कि तुम राज को भूली नही हो। राज तुम्हारे अंदर अभी भी रचा बसा है।

हे भगवान, तु चाहे जितना भी इम्तिहान ले ले पर अन्त में इसे इसके प्यार से मिला देना।

अगले दिन गांव में मंदिर का स्थापना दिवस था। गांव में काम काज बंद रखा गया था।

मंदिर का संचालक समिति ने सारी तैयारियां की थी। सुबह पूजा पाठ, फिर गांव के भजन मंडली द्वारा भजन, फिर दोपहर में भंडारा।

सुबह होते ही, गांव के लोग नहा धोकर तैयार होकर मंदिर की ओर जाने लगे।

महिलाए सुंदर वस्त्र धारण कर हाथो में पूजा की थाली लेकर मंदिर की ओर जा रहे थे।

इधर पदमा भी तैयार होकर पुनम और आरती को लेकर मंदिर की ओर निकल पड़े।

आज खेत को राम भरोसा छोड़ दिया गया था। केशव, राजेश और भुवन भी मंदिर की ओर चल पड़े।

रास्ते में,,

राजेश _अरे चाचा जी आप नही जा रहे क्या मंदिर?

माधव _अरे राजेश बेटा तुम्हारी चाची तैयार हो रही है? तुम लोग चलो हम लोग अभी पहुंच रहे हैं।

राजेश _ठीक है चाचा जी।

कुछ देर में ही वे मंदिर पहुंच गए।

आज मंदिर को बहुत अच्छे ढंग से सजाया गया था।

मंदिर के गर्भ गृह के दरवाज़े के बाजू, चेयर में ठाकुर महेंद्र सिंह और मानव प्रसाद का फोटो रखा गया था।

भगवान शिव की पूजा करने के बाद, लोग दोनो के फोटो पर माला पहना रहे थे।

पूजा पाठ करने के बाद लोग गर्भ गृह के सामने।

बैठ रहे थे सामने भजन कीर्तन करने वाले बैठे थे।

राजेश भी भगवान शिव के दर्शन करने के बाद ठाकुर महेंद्र सिंह और मानव प्रसाद के फोटो पर माला पहना कर प्रणाम किया।

भजन कीर्तन करने के लिए सामने बैठे, भजन मंडली ने राजेश और भुवन को अपने साथ बैठने के लिए बुलाया।

राजेश और भुवन दोनो भजन मंडली के साथ बैठ गए।

पदमा, आरती और पुनम तीनो गांव के अन्य महिलाओं के साथ बैठ गई।

कुछ देर बाद गांव की सरपंच और उसके पति माधव प्रसाद, पहुंचे।

उसने भी शिव जी का पूजन किया, ठाकुर महेंद्र सिंह, और मानव प्रसाद के फोटो पर माल्यार्पण करके प्रणाम कर निर्धारित स्थान पर बैठ गए।

उसके बाद हवेली की ठकुराइन अपने दोनो बेटियो गीता और दिव्या के साथ पहुंची।

सभी का ध्यान दिव्या और गीता की सुंदरता की ओर गया।

ठकुराइन प्रति वर्ष मंदिर स्थापना के दिन मंदिर आती है आज अपने दोनो बेटियो के साथ मंदिर पहुंची।

तीनो ने शिव जी का पूजा अर्चना किया फिर ठाकुर महेंद्र सिंह और मानव प्रसाद के फोटो पर माल्यार्पण कर। महिलाओं के के कतार में सामने बैठ गए।

उसके बाद पुजारी द्वारा हवन का कार्यक्रम सम्पन्न कराया। फिर शिव जी का आरती किया गया।

पूजा पाठ समाप्त होने के बाद।

भजन मंडली द्वारा भजन गाने लगे। सभी लोग अपनी जगह पर बैठ कर भजन मंडली का साथ देने लगे।

भुवन _राजेश तुम तो बहुत अच्छा गाते हो, आज तुम भी कोइ भजन सुनाओ।

दिव्या _हा राजेश, तुम भी कोइ भजन सुनाओ।

पुनम _दिव्या की सुंदरता और राजेश से भजन के लिए निवेदन करते हुए देख, महसूस कर रही थी की, दिव्या राजेश से कितनी शालीनता से बात कर रही है। कितनी सुंदर है दिव्या?

गांव की सरपंच सविता जी ने भी राजेश से कहा, भजन सुनाने के लिए।

सभी के निवेदन पर भजन गाना शुरू किया ,,

भजन सुनकर लोग मंत्र मुग्ध हो गए।

भजन कीर्तन के बाद दोपहर में भंडारा कार्यक्रम रखा गया था।

सबसे पहले महिलाओं को भोजन परोसा गया।

राजेश, भुवन और उसके दोस्त, अखाड़ा दल वाले भी भोजन बाटने के कार्य में लगे थे।

गीता दिव्या और ठकुराइन तो शिव जी का प्रसाद लेकर ही घर जा रहे थे पर राजेश के निवेदन पर वे भी अन्य महिलाओं के साथ बैठकर भोजन किया।

भोजन करने के बाद।

दिव्या _अच्छा राजेश अब हम जा रहे हैं।

राजेश _ठीक है दिव्या जी।

रत्नावती _राजेश बेटा, कभी हवेली भी आया करो,।

राजेश _अब बिना कोइ काम के हवेली जाना अच्छा नही लगता मां जी।

कोइ काम आए तो जरूर आऊंगा मां जी।

रत्नावति _ठीक है बेटा।

गीता _राजेश सच में तुम और लड़को से हट के हो।

तुमने बहुत अच्छा भजन सुनाया।

राजेश _शुक्रिया गीता दी।

ठकुराइन अपने बेटियो को लेकर घर चली गईं।

महिलाओं के जाने के बाद सभी पुरुषो को भोजन कराया गया।

और अन्त में राजेश और उसके दोस्तो ने भोजन किया।

मंदिर का सारा काम निपटाते, शाम ढल गया।

राजेश और उसके दोस्त भी अपने अपने घर के लिए निकल गए।

जब राजेश भुवन घर पहुंचे।

पुनम ने दोनो के लिए चाय लाई।

दोनो चाय पी कर आंगन में ही खाट लगाकर आराम करने लगे।

और आज दिन भर हुवे, घटना क्रम के बारे में बातचीत करने लगे।

पुनम, भोजन तैयार कर लेने के बाद दोनो के लिए थाली लगाई।

भोजन करने के बाद भुवन खेत चला गया।

रात में पुनम दूध लेकर राजेश के कमरे में आई।

पुनम _लो राजेश दूध पी लो। इस समय राजेश पढ़ाई कर रहा था।

राजेश ने पुनम की हाथो से गिलास लेकर दूध पिया और धन्यवाद, भाभी कहा।

पुनम _राजेश, सच में तुम बहुत अच्छा गाते हो, गांव के सभी लोग तुम्हारी बड़ी तारीफ कर रहे थे।

राजेश _ये सब आप लोगो का प्यार है भौजी।

पुनम _राजेश, ठाकुर की बेटी दिव्या सच में बहुत सुंदर है।

गांव की महिलाओ की नजर तुम पर टिकी थी तो पुरुषो की नजर दिव्या और गीता पर।

राजेश _पर मेरी नजर तो आप पर टिका था भाभी।

पुनम _चल झूठा कहीं का, एक बार भी मेरे तरफ नही देखा। और कह रहा है की मेरी नजर तो तुम पर ही टिका था।

राजेश _भौजी सच कह रहा हूं आज तुम नई साड़ी में कमाल की लग रही थी।

पुनम _बस बस, इतना भी मत फेको की मैं शर्म से मर जाऊ।

पुनम _राजेश तुमसे एक बात बोलूं।

राजेश _बोलो भौजी।

पुनम _ये दिव्या तुम्हारी ओर बार बार देख रही थी।

राजेश _भौजी अभी तो कह रही थी की गांव की सभी महिलाए मेरे तरफ देख रही थी। तो दिव्या जी भी देख रही थी, इसमें अलग क्या है?

पुनम _अरे नही re, तु नही समझेगा।

वो ऐसे नजरो से तुम्हे देख रही थी जब लडकी को किसी से प्यार हो जाता है, तब अपने यार को प्यार भरी नजरो से देखती है।

राजेश _अरे भौजी, तुम्हे धोखा huwa है? ऐसा कुछ नही है। दिव्या जी मुझे सम्मान देती है, मैने उसकी इज्जत बचाया है न इसलिए। तुम्हे गलत फहमी हुई है।

वैसे उसे पता है की मैं निशा से प्यार करता हूं।

पुनम _क्या उसे पता है की तुम निशा से प्यार करते हो। फिर उसे यह भी पता होगा की निशा तुम्हे छोड़ कर जा चुकी है।

राजेश _हा, तो।

पुनम _बुद्ध, कभी कभी न चाहते हुवे भी प्यार हो जाता है।

राजेश _भौजी ऐसा कुछ नहीं है? तुम्हे गलतफहमी huwa है।

वैसे हम तो निशा के बाद आपसे प्यार करते हैं। पुनम को अपने हाथो के घेरे में लेते हुए कहा।

पुनम _चल झूठा कहीं का , तुम्हे बेवकूफ बनाने के लिए मैं ही मिली हु।

अब छोड़ मुझे जाने दे।

राजेश _भौजी तुम तो उस दिन मुझे ताजा दूध पिलाने वाली थी, आज पिला दो।

पुनम _उस दिन तो बड़ा भाव खा रहा था, कह रहा था कि मैं अपना हद भुल गया था। फिर आज क्या हो गया?

राजेश _क्यू की आज तुम बहुत प्यारी लग रही हो।

पुनम _अच्छा जी, अगर दूध न पिलाई तो,,

राजेश _अब कर भी क्या सकते हैं? जोर जबरदस्ती तो नही कर सकते न।

पुनम _मुझे पता है न पिलाई तो फिर से नाराज हो जायेगा। और तु नाराज रहता है तो मुझे अच्छा नही लगता।

लो पी लो अपनी भौजी की दूध।

पुनम ने अपनी साड़ी का पल्लू हटा दिया, और अपनी ब्लाउज का बटन खोल दिया।

उसकी मस्त बड़ी बड़ी सुडौल चुचिया जो दूध से भरा था, राजेश के आंखो के सामने आ गया।

राजेश ने पहले उनके उरोजो को प्यार से सहलाया और फिर चूस चूस कर दूध पीना शुरू कर दिया।


पुनम राजेश को दूध पीता huwa देख प्यार से उसके बालो को सहलाने लगी।
 
राजेश, पुनम की चुचियों को चूस चूस कर दूध पीता रहा । पुनम उसकी बालो को प्यार से सहला रही थी।

कुछ देर तक दूध पिलाने के बाद,,

पुनम _देवर जीऔर कितने देर तक पियोगे? कुछ मुन्ने के लिए भी बचा कर रखो।

राजेश _माफ करना भौजी, दूध इतना स्वादिष्ट है कि छोड़ने का मन नही कर रहा। दूध पीने में बहुत मजा आ रहा है।

पुनम _अगर मुन्ने को भूख लगी तो उसे क्या पिलाऊंगी, थोड़ा मुन्ने के लिए भी छोड़ो।

राजेश ने दूध पीना बंद कर दिया।

पुनम मुस्कुराने लगी और अपनी ब्लाउज की बटन बंद करने लगी,,

पुनम _शुक्रिया देवर जी।

राजेश _किस बात के लिए शुक्रिया भौजी? शुक्रिया तो मुझे कहना चाहिए, दूध पिलाने के लिए।

पुनम _मैं तो तुम्हे शुक्रिया इसलिए बोली की मुन्ने के लिए दूध बचाया।

राजेश _क्यू नही बचाऊंगा भौजी, आखिर दूध पर पहला हक तो मुन्ने का ही है।

पुनम _अब मैं चलूं, रात बहुत हो चुकी है अब तुम भी सो जाओ।

राजेश _ठीक है भौजी? पर यह तो बता दो कल पीने को मिलेगा कि नही।

पुनम _मुस्कुराते हुवे बोली,, सोचूंगी।

पुनम अपनी कमर मटकाते हुवे वहा से चली गई।

राजेश अपना लंद सहलाते हुए उसे मटकती गाड़ को देखता रहा।

अगले दिन राजेश का समय पूर्व दिनो की तरह ही बीता लेकिन आज हवेली में कुछ खास होने वाला था, आइए जानते हैं हवेली में आज क्या होने वाला है?

राजेश, पुनम की चुचियों को चूस चूस कर दूध पीता रहा । पुनम उसकी बालो को प्यार से सहला रही थी।

कुछ देर तक दूध पिलाने के बाद,,

पुनम _देवर जीऔर कितने देर तक पियोगे? कुछ मुन्ने के लिए भी बचा कर रखो।

राजेश _माफ करना भौजी, दूध इतना स्वादिष्ट है कि छोड़ने का मन नही कर रहा। दूध पीने में बहुत मजा आ रहा है।

पुनम _अगर मुन्ने को भूख लगी तो उसे क्या पिलाऊंगी, थोड़ा मुन्ने के लिए भी छोड़ो।

राजेश ने दूध पीना बंद कर दिया।

पुनम मुस्कुराने लगी और अपनी ब्लाउज की बटन बंद करने लगी,,

पुनम _शुक्रिया देवर जी।

राजेश _किस बात के लिए शुक्रिया भौजी? शुक्रिया तो मुझे कहना चाहिए, दूध पिलाने के लिए।

पुनम _मैं तो तुम्हे शुक्रिया इसलिए बोली की मुन्ने के लिए दूध बचाया।

राजेश _क्यू नही बचाऊंगा भौजी, आखिर दूध पर पहला हक तो मुन्ने का ही है।

पुनम _अब मैं चलूं, रात बहुत हो चुकी है अब तुम भी सो जाओ।

राजेश _ठीक है भौजी? पर यह तो बता दो कल पीने को मिलेगा कि नही।

पुनम _मुस्कुराते हुवे बोली,, सोचूंगी।

पुनम अपनी कमर मटकाते हुवे वहा से चली गई।

राजेश अपना लंद सहलाते हुए उसे मटकती गाड़ को देखता रहा।

अगले दिन राजेश का समय पूर्व दिनो की तरह ही बीता लेकिन आज हवेली में कुछ खास होने वाला था, आइए जानते हैं हवेली में आज क्या होने वाला है?

आजादी के पहले इस क्षेत्र के आस पास की अधिकांश जमीन, भानगढ़ के राजा का ही था। जब देश आज़ाद हुडा तो केंद्र सरकार के दबाव में महेंद्र सिंह के पिता जी ने अपने राज्य का अधिकांस जमीन गांव में रहने वाले अपने विश्वास पात्र किसानों के नाम कर दी। बदले में उसने किसानों से उन्हे दिए गए जमीन के बदले, उसमें प्रतिवर्ष होने वाले उपज का 25% राजा को लगान के रूप में देने का अनुबध पत्र पर दस्तखत करा लिया गया था।

किसान प्रतिवर्ष अपने जमीन पर उपजे फसल का 25% राजा को देता था।

महेंद्र सिंह के पिता जी ने यह परंपरा भी बनाया कि वे किसान को हमे लगान देते है वह हमारे परिवार के सदस्य है।

जब कभी भी इन किसान परिवारों मे बेटे की शादी होता। तो किसान अपनी बहु को बीहा कर लाने के बाद अपने घर न ले जाकर सीधा राजा के हवेली में आशीर्वाद के लिए ले कर आता।

हवेली में राजा और राजमाता के द्वारा नई दूल्हे और दुल्हन के भव्य स्वागत किया जाता उन्हे भेट दिया जाता। उन्हे राज परिवार के साथ रात्रि भोज कराया जाता, एक रात हवेली में ही गुजारने के बाद, दूल्हा और दुल्हन को हवेली से अगले दिन बिदा किया जाता।

यह परंपरा ठाकुर महेंद्र सिंह के समय तक बहुँत ही अच्छे से चलता रहा लेकिन जब उसकी मृत्यु हो गई।

तब ठाकुर बालेंद्र सिंह इस परंपरा के फायदा उठाने लगा।

ठाकुर बालेंद्र सिंह अय्याश किस्म का था, जवान और खुबसूरत स्त्री को देखकर उसका मन मचलने लगता था।

जब किसान परिवार परंपरा के अनुसार अपनी नई बहू को ठाकुर और ठकुराइन का आशीर्वाद लेने उसे हवेली लाते।

खुबसूरत दुल्हन को देखकर ठाकुर बालेंद्र सिंह के नियत खराब हो जाता। नई दुल्हन को किसी तरह भरोसा में लेकर उसका सिल तोड़ता। इस काम में उसका साथ देती ठाकुर की खास सेविका तारा बाई।

यह राज सिर्फ तीन लॉग ही जानते थे एक तारा बाई, दूसरा ठाकुर बालेंद्र सिंह और तीसरा वह नई दुल्हन।

ठाकुर उस दुल्हन को धमकाता भी अगर यह बात किसी को भी बताई तो तुम्हारे पति के परिवार वालों का पूरा जमीन हड़प लेंगे। और तुम्हे बदनाम भी कर देगें। तुम्हारी भलाई इसी में है की हवेली का यह राज तुम किसी को भी न बताना, अपने पति को भी नही।

नई दुल्हन डर जाती और वह ठाकुर के द्वारा सिल तोड़ने की बात किसी को भी नही बताती।

न जाने कितने नाई दुल्हनों का सील ठाकुर बालेंद्र ने तोड़ा था, उसका राज अभी तक गुप्त था।

आज एक किसान परिवार अपने नई बहू को आशीर्वाद दिलाने हवेली ला रहे थे।

नई दूल्हे और दुल्हन को शाम को ही आशीर्वाद के लिए हवेली लाया जाता। हवेली में पहले ही खबर दे दिया जाता कि आज नई दुल्हन और दूल्हा ठाकुर और ठकुराइन का आशीर्वाद लेने हवेली आयेंगे।

हवेली में रात्रि भोज का आयोजन किया जाता।

दूल्हे दुल्हन को हवेली लेकर दूल्हे के पिता लाते और ठाकुर से मिलकर चले जाते अगले दिन दूल्हे दुल्हन को लें जाने के लिए दूल्हे के पिता फिर आता। ठाकुर से आज्ञा लेकर दूल्हे दुल्हन को घर ले जाता।

आज मोहनलाल किसान ने अपने बेटे के लिए बहु को बिहा के लाने के बाद शाम को दोनो को लेकर हवेली पहुंचा।

मोहनलाल _प्रणाम मालिक ।

बालनेंद्र सिंह _अरे आओ मोहनलाल। बहुत बहुत बधाई बेटे की शादी की।

मोहन लाल _शुक्रिया मालिक।

परंपरा के मुताबिक मैं अपने बेटे और उसकी नई दुल्हन को आपसे आशीर्वाद लेने के लिए हवेली लाया हूं।

मेरे बेटे और बहू को आशीर्वाद दीजिए।

देखो मोहनलाल जी, हमारे पूर्वज अपने अधीनस्थ किसानों को अपने परिवार की तरह मानते है अतः परंपरा के अनुसार जब भी किसी किसान के घर नई बहू आती हैं तो हवेली में उसका स्वागत किया जाता है। हम तुमसे खुश हुवे कि तुमने इस परंपरा का पालन किया।

पहले इन दोनो को ठकुराइन आशीर्वाद देगी, उसके बाद हम आशीर्वाद देगें।

ताराबाई, तुम दूल्हा और दुल्हन को ठकुराइन के पास ले जाओ।

तारा बाई _जी ठाकुर साहब।

तारा बाई दूल्हा और दुल्हन जो घूंघट डाल रखी थी को लेकर ठकुराइन के पास ले गई।

मोहनलाल _अच्छा मालिक अब मुझे आज्ञा दीजिए।

ठाकुर _ठीक है मोहनलाल अब तुम जाओ कल अपने बहु और बेटे को ले जाना।

मोहनलाल _ठीक है मालिक।

मोहनलाल चला गया।

इधर तारा बाई ने दूल्हा और दुल्हन को ठकुराइन रत्नवती के पास लेकर गई।

तारा बाई _ मालकिन, ये नई दुल्हन और दूल्हा आपसे आशीर्वाद लेने आए है। इन्हे आशीर्वाद दीजिए।

दूल्हा दुल्हन दोनो ने ठकुराइन का पैर छूकर आशीर्वाद लिया।

ठकुराइन _जीते रहो, तुम दोनो को शादी की ढेर सारी शुभकामनाएं।

रत्नवती _बहु अपनी घूंघट उठाकर चेहरा तो दिखाओ।

तारा बाई _मालकिन दुल्हन की घूंघट तो आप ही उठाती है, और बदले में तोफा देती है।

रत्नावती _हां re जानती हूं।

रत्नवती ने दुल्हन का घूंघट उठाया।

रत्नवती _दुल्हन तो बहुत सुंदर है क्या नाम है तुम्हारा?

दुल्हन _शरमाते हुवे बोली, जी रूपा।

रत्नावती _नाम के अनुरूप, रूपवती हो।

लो मेरी तरफ से ये मुंहदिखाई,

रत्नावती ने सोने की हार,दूल्हा दुल्हन को पहनाया।

दुल्हन बड़ी खुश हुई।

रत्नावती _तारा जाओ दुल्हन और दूल्हे थक गए होगे . उनके आराम के लिए कमरे तैयार करो। रात में शाही भोजन की तैयारी करो।

ताराबाई _दूल्हा और दुल्हन के ठहरने के लिए कमरा को सजा दिया गया है, मालकिन और रसोइया शाही भोजन की तैयारी में लग गए हैं।

रत्नावती _रूपा जाओ तुम लोग अपने कमरे में आराम करो। अब शाही भोज के लिए भोजन कक्ष में मिलेंगे।

ताराबाई ने दूल्हा और दुल्हन को उनके कमरे में ले गए।

दोनो को अलग अलग कमरे ठहरने के लिए दिया गया था। यह भी परंपरा का हिस्सा ही था। दूल्हे और दुल्हन के सुहाग रात अपने घर में जाकर ही मनाना था। अगर उन्हे एक ही कमरे में ठहरा देते तो, हो सकता है की दोनो यही सुहागरात मना लेते।

दोनो के कमरे को अच्छे से सजाया गया था।

दुल्हन की सेज को फूलो से सजाया गया था जैसे की उनकी सुहागरात हो।

ताराबाई, ठाकुर के पास पहुंचा।

ताराबाई _ठाकुर साहब, दुल्हन तो बहुत सुंदर है। अपने हथियार की धार तेज़ कर लीजिए, आपको फिर शील तोड़ने को मिलने वाली है।

ठाकुर _सच तारा।

वैद्य जी ने जो दवाई दिया है न हॉर्स पावर वाली, उसको तैयार रखना, रात में भोजन के बाद, उसे लेकर अपना घोड़े की पावर बढ़ाऊंगा। और नई दुल्हन को अपने घोड़े पर बिठाकर जन्नत की सैर कराने ले जाऊंगा।

ताराबाई _आपकी दवाई पहले ही तैयार है ठाकुर साहब।

ठाकुर _ये हुई न बात, तारा तुम मेरी कितनी खयाल रखती हो। आज तो मजा ही आ जाएगा।

तारा _ठाकुर साहब आपके सिवा मेरा है ही कौन?

टरात में 8बजते ही दूल्हा और दुल्हन को शाही भोज के लिए भोजन कक्ष में बुलाया गया।

ठाकुर परिवार के सभी लोग, एवम ठाकुर के खास लोगो को भी आमन्त्रित किया गया।

विभिन्न प्रकार के व्यंजन बनाए गए थे। सभी ने शाही भोजन का जमकर लुफ्त उठाया।

भोजन के बाद, दूल्हे और दुल्हन को उनके कक्ष में ले जाया गया। सभी मेहमान भी घर चले गए।

इधर ठाकुर और तारा बाई रात की योजना बनाने लगे।

ठाकुर _तारा, जाओ देखो घर के सभी सदस्य सो गए हैं कि नही।

ताराबाई _हा ठाकुर साहब मैं समझती हूं आपके घोड़े की बेकरारी, पहले ये दवाई तो खा लीजिए, हॉर्स पावर वाली।

ठाकुर ने वह दवाई खा ली।

ताराबाई _ठाकुर साहब अब मैं देख कर आती हूं, मालकिन और बिटिया लोग सोए है कि नही।

ठाकुर _जाओ जल्दी जाओ।

तारा बाई, हवेली के सभी कमरों का जायजा लिया।

फिर ठाकुर के कमरे में पहुंची।

ताराबाई _ठाकुर साहब रास्ता एकदम क्लियर है।

ठाकुर _तुम दुल्हन के कमरे में जाओ और हमारे आने की जानकारी दो।

ताराबाई _ठीक है ठाकुर साहब।

ताराबाई दुल्हन के कमरे में गई।

ताराबाई _अरी, दुल्हन तुम सो गई क्या?

रूपा की नींद लग गई थी।

उसे तारा बाई ने उठाया।

रूपा _काकी आप।

तारा _अरे अभी तो एक रस्म और बाकी है? और तुम सो गई।

रूपा _कैसी रस्म काकी।

तारा _अरे अभी तो ठाकुर ने तुम्हारा चेहरा देखा ही नहीं है। वह तुम्हारा घूंघट उठाने आएगा। चलो जाओ तुम बाथरुम में जल्दी फ्रेस हो जाओ, और अपने कपड़े व्यवस्थित कर घूंघट डालकर सेज पर बैठ जाओ।

रूपा _पर काकी, ठाकुर साहब इतनी रात को घूंघट उठाने क्यू आयेंगे वे पहले ही घूंघट उठा सकते थे।

तारा _अरे ये एक परंपरा है। ठाकुर साहब रात में ही नई दुल्हन का घूंघट उठाते हैं और उसे महंगे तोहफा देते है।

ठाकुर साहब तुम्हे कुछ सिखाएंगे भी, जिससे तुम अपनी मर्द को अपने काबू में रख सकोगी। और तुम्हारा दांपत्य जीवन सुखमय रहेगा।

हा ठाकुर साहब, तुम्हे जो भी सिखाएंगे उसे अच्छे से सीखना। उसे नाराज मत करना। अगर वो तुमसे खुश हुवे तो वे तुम्हे गहने और पैसे भी भेट करेंगे।

समझी की नही।

रूपा _जी काकी।

ताराबाई _और देखो तुम घबराना नहीं, मैं दरवाज़े के बाहर ही रहूंगी।

ठाकुर साहब बहुत अच्छे हैं वह जो बोले वह करना।

उसे नाराज मत करना नहीं तो तोहफा की जगह तुम्हे दंड भी दे सकते है।

रूपा डर गई,,

तारा बाई _अब मैं चलती हु, कुछ ही समय में ठाकुर साहब तुम्हारे कमरे में आएंगे, तुम तैयार होकर बैठ जाओ।

रूपा, हां में सिर हिलाया।

ताराबाई ठाकुर के कमरे में पहुंची।

ठाकुर _जाइए ठाकुर साहब दुल्हन तुम्हारा इन्तजार कर रही है।

ठाकुर अपने हाथ में पहने मोंगरे की माला को सूंघते हुए जाने लगा,,

ताराबाई _ठाकुर साहब थोड़ा रुकिए, पहले तुम्हारे घोड़े को तैयार तो कर दू।

ठाकुर दूल्हे के ड्रेस में था। सेरवानी और पजामा पहना था। अपने पजामा का नाडा खोल दिया और लंद बाहर निकाल दिया, उसका लंद पहले से ही तना हुआ था।

ताराबाई _, अरे आप तो पहले से ही तैयार है।

ताराबाई ने ठाकुर का लंद मुंह में ले कर चूसने लगी।

जिससे उसका लंद और मोटा और कड़क हो गया।

ठाकुर अपने पजामा का नाडा बांध लिया और दुल्हन की कमरे में जाने लगा।

इधर दुल्हन डरी हुई थी पता नही क्या होने वाला है?

ठाकुर दुल्हन के कमरे में पहुंचा।

और मोंगरे की माला सूंघने लगा।

दुल्हन घूंघट डाल कर सेज पर बैठी थी।

ठाकुर उसके पास जाकर बैठ गया।

ठाकुर _तारा कह रही थी कि तुम बहुंत सुंदर हो।

हम तुम्हारा मुंह देखने आए है।

अपना घूंघट तो उठाओ।

दुल्हन बैठी रही।

तब ठाकुर ने खुद ही अपने हाथ से घूंघट धीरे धीरे उठाने लगा।

दुल्हन का दिल जोरो से धड़कने लगा। वह अपनी आंखे बंद कर दी।

घूंघट उठने के बाद।

ठाकुर _सच में तुम बहुत सुंदर हो।

अरे अपनी आंखे बंद क्यू कर दी।

हमारे तरफ देखो, शरमाओ मत।

दुल्हन ने आंखे खोली।

ठाकुर _दिखाओ अपनी हाथ को।

ठाकुर ने दुल्हन की हाथ को पकड़ कर उसमें सोने की कंगन पहनाने लगा।

ये तुम्हारी मुंह दिखाई का तोहफा है ये तुम्हारी हाथो में खुब जचेगी।

ठाकुर ने दुल्हन की दोनो हाथो को चूम लिया।

दुल्हन सिहर उठी। अपनी हाथो को अपनी ओर खींची।

ठाकुर _अरे क्या huwa तुम्हे कंगन पसंद नहीं आए।

देखो तो कितनी प्यारी लग रही है तुम्हारे हाथो मे।

ठाकुर ने उनकी हाथो को फिर से चूम लिया।

क्या नाम है तुम्हारा?

दुल्हन _जी रूपा,,

ठाकुर _बहुत प्यारा नाम है।

अच्छा कल तुम्हारी सुहागरात होगी, ये बताओ सुहागरात में क्या होता है ये तो तुम्हे पता है ना।

रूपा शर्मा गई।

ठाकुर _अरे शर्मा क्यू रही हो?

मुझसे शरमाने की जरूरत नही।

बताओ सुहागरात कैसे मनाते हैं तुम्हे पता है कि नही।

रूपा _जी नही,, शरमाते हुवे बोली।

ठाकुर _तुम्हारी सहेलियों ने तो कुछ बताया होगा।

रूपा शर्मा गई,,

ठाकुर _देखो रूपा, आज की रात हम तुम्हे सिखाएंगे की पति को कैसे खुश किया जाता है। ताकि तुम अपनी पति को खुश रख सको। और तुम्हारा दांपत्य जीवन सुखमय रहे।

यह भी एक परंपरा ही है, यहां आने वाली दुल्हनों को यह परंपरा निभानी पड़ती है। हां और इस परंपरा के बारे में सिर्फ तुमको, मुझे और तारा को की पता रहेगी। किसी अन्य को पता नही होगा?

इसके बारे में तुम अपने पति को भी नही बताओगी।

रूपा खामोश रही।

ठाकुर _तारा अंदर आ जाओ।

तारा बाई अंदर प्रवेश की।

ठाकुर _तारा, दुल्हन को सिखाओ की मर्द को कैसे खुश किया जाता है? ताकि वह अपने पति को खुश रख सके।

ताराबाई _जी ठाकुर साहब, रूपा तुम देखना और सीखना, मर्द को कैसे खुश किया जाता है?

तारा बाई ने ठाकुर के कपड़े एक एक करके उतरना शुरू कर दिया।

ठाकुर सिर्फ कच्छे में रह गया।

उसके बाद ठाकुर ने तारा बाई के साड़ी उतारने लगा। वह सिर्फ पेटीकोट और में थी।

ठाकुर ने फिर तारा बाई की ब्लाउज खोल उसकी ब्रा भी उतार दिया।

उसकी मस्त चूचियां ठाकुर के आंखो सामने आ गया।

ठाकुर ने उसकी चूचियों को मसल मसल कर पीने लगा।

रूपा उनकी हरकतों को देखने लगी। उसे बड़ी शर्म आ रही थी।

उधर तारा बाई सिसकने लगी।

फिर ठाकुर ने उसकी पेटीकोट को भी उतार दिया।

वह सिर्फ पेंटी में रह गई।

तारा बाई बेड पर लेट गई।

ठाकुर उसके पूरे बदन को चूमने चाटने लगा।

उसके बाद तारा बाई उठी और ठाकुर साहब का कच्छा भी उतार दिया।

उसका मोटा तना लंद रूपा की आंखो के सामने आ गया। उसका दिल जोरो से धड़क रहा था।

वह पहली बार किसी पुरुष के खड़े लंद को देख रही थी।

तारा _रूपा देखो, पुरुष का लंद कैसे होता है?

इसके पहले तुमने लंद देखी है?

रूपा शर्मा गई,,

तारा _अरे शर्मा क्यू रही, नंगे तो हम है और शर्मा तुम रही हो। बोलो देखी हो?

रूपा न में सिर हिलाया।

तारा _देखो अच्छे से इसे टोपा कहते हैं, इसमें ये छेद को देखो, इसी से पेशाब बाहर आता है, और पुरुष का बीज भी जिससे बीज बाहर निकल कर औरत के गर्भ में जाता है और वो मां बनती है।

इसे अंडकोष कहते है इसमें पुरुष का शुक्र भरा होता है।

अरे दूर से काहे देख रही पकड़ के देखो,,

रूपा _काकी मुझे शर्म आ रही,,

तारा _अरे शर्माएगी तो सीखेगी कैसे?

चलो पकड़ो।

रूपा ने कपकपाते हाथो से लंद को पकड़ने की कोशिश की।

तभी तारा ने उसकी हाथ पकड़ कर लंद पर रख दिया। ठीक से पकड़ो।

तारा _पुरुष के लंद को पहले अच्छे से सहलाना चाहिए। देखो,,

अब तुम भी सहलाओ,,

रूपा शरमाने लगी,,

तारा _अरे शर्माओगी तो सीखेगी कैसे?

रूपा अपनी हाथ से ठाकुर का लंद सहलाने लगी।

तारा _अब लंद को थोड़ा दबाकर आगे पीछे करो।

अरे ऐसे नही re देखो कैसे करना है।

तारा ने मूठ मारकर दिखाया।

तारा _अब तुम करो।

रूपा ने तारा के बताए अनुसार मूठ मारने लगी।

तारा _हा ऐसे ही। इसे मूठ मारना कहते है।

जब किसी पुरुष को बुर नही मिलता तब मूठ मारकर अपना वीर्य निकालकर अपना लंद शांत करते हैं।

कभी कभी जब लंद ढीला हो तो उसे खड़ा करने के लिए दूसरा तरीका अपनाते है। जिससे पुरुषो को बड़ा मजा आता है और उसका ढीला लंद खड़ा हो जाता है!

अभी तो ठाकुर का लंद खड़ा है फिर भी तुम्हे सीखा देती हूं। क्या पता तुम्हारा पति का लंद खड़ा हो या न हो। इस लिए अच्छे से सीख लो तुम्हारा काम आएगा।

तारा ने ठाकुर का लंद मुंह में लेकर चूसना शुरु कर दी।

ठाकुर _आह बड़ा मजा आ रहा है और चूसो।

तारा _देखा न लंद चूसने से पुरुषो को कितना मजा आता है । अब तुम चूसो।

रूपा _नही काकी मुझे शर्म आती है।

तारा अरे शर्मायेगी तो सीखेगी कैसे? चलो चूसो।

रूपा ने लंद चूसना शुरू कर दिया।

तारा _थोड़ा और अंदर लो और दबाओ बनाकर चूसो । हा ऐसे ही।

ठाकुर _आह रूपा तुम बहुत अच्छा चूस रही हो आह बड़ा मजा आ रहा है।

तभी लंद का कुछ नमकीन पानी रूपा के मुंह में गई। वह लंद निकाल दी।

तारा _अरे निकाल क्यू दी क्या huwa?

रूपा _काकी इससे कुछ निकला।

तारा _नमकीन लगा क्या?

रूपा हां में सिर हिलाई।

तारा _अरे ये वीर्य है चूसने से थोड़ा निकलता रहता है। इसे अंदर घुटक लो।

अच्छा लगेगा।

रूपा _हूं, ताई मुझसे नही होगा?

तारा _अच्छा जाओ बाथरुम में थूककर आओ।

रूपा बाथरुम में थूकने चली गईं।

उसके बाद ठाकुर ने तारा को बेड पे लिटा दिया। और उसकी पेंटी निकाल दिया। तारा बिलकुल नंगी हो गई।

ठाकुर तारा की बुर को चाटने और चूसने लगा।

तारा सिसकने लगी।

आई उन उई मां आई,,,

रूपा हैरानी से देखती रही।

कुछ देर चूसने के बाद ठाकुर ने कहा,,,

रूपा अब तुम भी लेट जाओ। तुमको भी पता चले बुर चुसवाने में कैसा लगता है।

रूपा शर्मा गई।

तारा _अरे लेट जा न।

रूपा _काकी, मुझे बड़ी शर्म आयेगी।

तारा _अरे एक बार चुसवा कर तो देखो कितना मजा आता है।

तारा ने रूपा को जबरदस्ती लिटा दिया।

रूपा, घाघरा, चोली और चुनरी पहनी थी।

ठाकुर ने घाघरा ऊपर उठा कर उसकी कच्छी जबरदस्ती उतार दी।

रूपा शर्म से अपनी हाथो से बुर छिपाने लगीं।

ठाकुर ने अपने हाथ से रूपा की हाथ को उसके बुर से हटाया और उसकी बुर में अपना मुंह घुसा दिया। फिर उसकी बुर चाटने लगी।

रूपा का यह पहला अनुभव था। उसके हाथ पैर कपकपाने लगे उत्तेजना के मार उसकी बुर पानी छोड़ने लगी। उसकी मुंह से कामुक सिसकारी निकलने लगी।

ठाकुर ने जब उसकी बुर की भगनासा को चूसना शुरू किया।

रूपा के पूरे शरीर में करंट दौड़ने लगी। उसका शरीर थरथराने लगा।

उसका शरीर उत्तेजना की मारे ठाकुर की के लिएसर को अपने हाथो से पकड़ लिया।

और झड़ने लगी।

वह स्वर्ग की अनुभूति करने लगी।

ठाकुर ने चूसना बंद कर दिया।

तारा _कैसा लगा? आया ना मजा।

रूपा शर्मा गई।

ठाकुर ने रूपा की चोली खोल कर ब्रा भी निकाल दिया। और उसकी चूचक को मुंह में भर कर चूसने लगा।

यह रूपा के लिए पहला अनुभव था।

उसके शरीर में उत्तेजना फिर से भरने लगा।

ठाकुर रूपा को मस्त चुचियों को दबा दबा कर पीने लगा।

रूपा के मुंह से फिर से कामुक सिसकारी निकलने लगी।

तारा _क्यू re कैसा लग रहा है चूची चूसने से।

अब ठाकुर रूपा की बुर फिर से चाटने लगा।

रूपा जन्नत में उड़ने लगी।

तभी तारा ने ठाकुर को इसारा किया।

तारा ने एक कपड़ा लाया और रूपा के कमर के नीचे बिछा दिया। ताकि रूपा की बुर का शील टूटने पर निकलने वाला खून से बेड खराब न हो।

तारा रूपा के बाजू लेट गई।

ठाकुर तारा के टांगो के बीच आई और उसकी बुर पे अपना लंद रख कर गच से पेल दिया। और गपागप चोदना शुरू कर दिया।

तारा ठाकुर की कमर को पकड़ कर सहयोग करने लगी।

इधर ठाकुर अपनी एक उंगली से रूपा के बुर की भगनासा को छेड़ने लगा। जिससे रूपा सिसकने लागी। इधर तारा की chudai जारी रखा।

कुछ देर तारा को चोदने के बाद वह रूपा की टांगो के बीच आ गया और अपना लंद रूपा की बुर के छेद पर रख दिया।

तारा ने रूपा के मुंह में उसकी पेंटी ठूस दिया।

अब ठाकुर देर न करते हुवे एक जोर का धक्का मारा। लंद एक ही बार में बुर फाड़ दियारूपा चीखना चाही पर मुंह में पेंटी की वजह से चीख न पाई। उसकी बुर की झिल्ली फट चुकी थीउसकी योनि से खून निकल कर बहने लगा।

रूपा की आंखो में आंसू भर आए।

ठाकुर कुछ देर रुका रहा।

तारा प्यार से रूपा की बालो को सहलाने लगी।

उसके बाद ठाकुर रूपा की चूची को चूसने लगा। और हल्के हल्के धक्का मारने लगा।

लंद बुर में धीरे धीरे अंदर बाहर होने लगा। रूपा का दर्द धीरे धीरे कम होने लगा।

अब ठाकुर अपना स्पीड बढ़ाने लगा। रूपा को धीरे धीरे अब मजा आने लगा उसकी बुर में पानी भरने लगा।

अब लंद रूपा की बुर की गहराई में उतर चुका था।

ठाकुर पूरे जोश में चोदने लगा।

रूपा को chudai में अब मजा आने लगा। उसकी मुंह से सिसकारी निकलने लगा।

ठाकुर का लंद रूपा की बुर में कसा कसा अंदर बाहर हो रहा था जिससे उसे कुंवारी चूत चोदने में बहुत मजा आ रहा था।

ठाकुर ने रूपा को उठाकर घोड़ी बना दिया और पीछे से लंद डालकर चोदना शुरू कर दिया।

रूपा तो जैसे जन्नत में पहुंच गई थी।

ठाकुर रूपा की कमर को पकड़ कर गाच गच चोदने लगा।

रूपा के मुंह से मादक सिसकारी निकलने लगी। उसकी चूड़ियां खन खन खनकने लगी।

कुछ देर में रूपा फिर से झड़ गई। और ठाकुर भी उसकी बुर में ही झड़ गया।

कुछ देर तीनो सुस्ताने लगे।

तारा ने रूपा को उठाया और बाथरुम जाकर उसकी बुर को अच्छे से धोया।

कपड़े जिसपर खून गिरा था को हटाया।

ठाकुर ने भी अपना लंद धोया।

और तीनो फिर से बेड पर आ गए।

उसके बाद तारा ने फिर से ठाकुर का लंद चूसना शुरू कर दी। जिससे ठाकुर कस लंद फिर से खड़ा हो गया।

ठाकुर बेड पर लेट गया। तारा ठाकुर के लंद को हाथ से पकड़ कार अपनी बुर पे सेट कर बैठ गई। फिर उछल उछल कर चुदने लगी।

रूपा तारा को चुद्ते देख फिर गर्म जो गई वह अपनी बुर सहलाने लगी।

इधर तारा लंद की ऊपर उछल उछल कर chud रही थी कुछ देर में झड़ गई।

अब ठाकुर रूपा की बुर चाटने लगा। रूपा सिसकने लगी

ठाकुर लेट गया।

तारा _रूपा क्या देख रही है चल बैठ जा लंद पे।

रूपा लंद को पकड़ कर अपनी बुर के छेद में रख कर धीरे धीरे बैठ गई। और धीरे धीरे कमर ऊपर नीचे करने लगी।

धीरे धीरे रूपा अपनी स्पीड बढ़ाने लगी। ठाकुर भी रूपा की दोनो कमर पकड़ कर नीचे से धक्का लगाने लगा।

फिर से रूपा जन्नत में पहुंच गई। वह लंद पर उछल उछल कर चुदने लगी।

कुछ देर में रूपा फिर से झड़ गई।

ठाकुर ने कभी तारा तो कभी रूपा की रातभर जमकर chudai किया। और तीनो सो गए।

जब रूपा का नींद खुली तो रोने लगी।

तारा _अरे दुल्हन रो क्यों रही है।

रूपा _काकी मेरी शील तो टूट चुकी है। अब मेरे पति को पता चल जाएगा।

और मेरे बुर में सूजन भी आ गई है कल सुहागरात कैसे मनाऊंगी।

तारा _अरे तु चिन्ता मत कर। मैं तुम्हे एक क्रीम दूंगी उसे अपनी बुर पे लगाना, सूजन कम हो जाएगी और बुर टाइट हो जाएगी।

ठाकुर साहब, पंडित से कहला देगा की अभी सुहागरात की मुरहुत चारदीन बाद है। तब तक तुम्हारी बुर ठीक हो जाएगी।

हा तुम यह बात किसी को बताना मत, नही तो तुम्हारा पति तुम्हे घर से निकाल देगा। समझी।

ठाकुर _अरे रूपा तुमने मुझे बहुत मज़ा दिया है। तुम्हें मजा आया की नही।

रूपा शर्मा गई।

ठाकुर _रूपा तुम चिन्ता मत करो। किसी में हिम्मत नही कोइ मेरा खिलाफ जा सके। बस तुम रात में जो huwa उसे किसी को मत बताना।

रूपा ने हा में सिर हिलाया।
 
Back
Top